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विषय सूची

आप यह दर्जाकैसेप््प्त कर सकतेहैंकक परमेश्वर सिजाशवतिम्न खुद आप सेपय्र करनेलगे?

९

नींद सेर्गनेकी सुन्नतें

१२
१२

ब्थरूम मेंप्िेश करन् और ब्हर वनकलन्

१३
१३

िुज़ूकी सुन्नतें

१४
१४

वमसि्क

१८
१८

रूते-चपपल पहननेकी सुन्नत

१९
१९

पोश्क की सुन्नतें

२०
२०

घर मेंप्िेश करनेऔर घर सेवनकलनेकी सुन्नत

२१
२१

मसवरद को र्नेकी सुन्नतें

२३
२३

अज़्न की सुन्नतें

२६
२६

इक़्मत की सुन्नतें

२९
२९

सुतर्(य् आड़) की ओर नम्ज़ पढ़न्

३१
३१

सुतर् य् आड़ केब्रेमेंकुछ विषय

३२
३२

ऐसी न्फल नम्ज़ेंरो कदन और र्त मेंपढ़ी र्ती हैं

३३
३३

वितर और उसकी सुन्नतें

३८वितर और उसकी सुन्नतें फज्र की सुन्नत ३९ नम्ज़

फज्र की सुन्नत

३९३८ फज्र की सुन्नत नम्ज़ केब्द बैठन् ४०

नम्ज़ केब्द बैठन्

४०
४०

नम्ज़ की श्व्दक सुन्नतें

४१
४१

नम्ज़ की अमली सुन्नतें

४५
४५

रुकूअ मेंकी र्नेि्ली सुन्नतें

४६
४६

सरदों मेंकी र्नेि्ली सुन्नतें

४७
४७

नम्ज़ केब्द की सुन्नतें

५०
५०

सुबह मेंपढ़ी र्नेि्ली सुन्नतें

५६
५६

लोगों सेभेंट करतेसमय की सुन्नतें

६५
६५

भोरन ख्नेकेसमय की सुन्नतें

६८
६८

पीनेकेसमय की सुन्नतें

७०
७०

न्फल नम्रेंघर मेंपढ़न्

७१
७१

बैठक मेंसेउठतेसमय की सुन्नतें

७२
७२

सोनेसेपहलेकी सुन्नतें

७४
७४

एक ही समय मेंएक सेअविक इब्दत कर लेन्

८०
८०

हर हर घड़ी अलल्ह को य्द करन्

८१घड़ी अलल्ह को य्द करन् अलल्ह केकृप्द्नों

अलल्ह केकृप्द्नों मेंसोच िीच्र करन्

८३
८३

हर महीनेमेंकुर्न पढ़न्

८५
८५

सम्वप्त

८६
८६
आप यह दर्जाकैसेप््प्त कर सकतेहैं कक परमेश्वर

आप यह दर्जाकैसेप््प्त कर सकतेहैं कक परमेश्वर सिजाशवतिम्न खुद आप से पय्र करनेलगे?

खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह
खुद आप से पय्र करनेलगे? स्री प्शंस् अलल्ह

स्री प्शंस् अलल्ह केवलए है, रो दय्लुबहुत म्फ करनेि्ल्, अतयंत उद्र सिजाशवतिम्न, कदलों और आंखों को रैस् च्हेबदलनेि्ल्, खुली और वछपी को र्ननेिल् है, मैंसद् और लग्त्र श्म और सुबह उसकी बड़्ई बोलत् हूँ, और मैंगि्ही देत् हूँकक वसि्य अलल्ह केऔर कोई पूरनीय नहीं है, अकेल् हैकोई उसक् स्झी नहीं, एक ऐसी गि्ही देत् हूँरो अपनेकहनेि्ले को नकजा की य्तन् सेमुति करदे, और मैंगि्ही देत् हूँकक हज़रत मुहममद-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-उसक् चुन् हुआ पैगंबर है, उनकेपररि्र पर और उनकी पवित्र पवनियों और उनकेसमम्न, और आदर केल्यक़ स्वथयो ूँ पर इश्वर की कृप् और सल्म हो, यह सल्म और दय् लग्त्र उस समय तक होतेरहेंरब तक र्त और कदन ब्क़ी हैं. प्शंस् और सल्म केब्द

र्नन् च्वहए कक एक मुसलम्न के वलए अपनेदैवनक रीिन मेंरो ब्त अविक सेअविक खय्ल रखनेकेयोगय और अतयंत महतिपूरजाहैिह यही हैकक चलते-कफरते, अपनेश्दों और अपनेकममों मेंहज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- की सुन्नत(य् म्गजा) पर चले, और सुबह सेलेकर श्म तक अपनी पूरी रीिन को हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-के तरीक़ेकेअनुस्र बन्ए.

ज़ुन-नून अल-वमस्ी नेकह्: अलल्ह सिजाशवतिम्न सेपय्र की वनश्नी यह है कक अपनेवप्य पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- क् अनुसरर करे, उनकी नैवतकत्, क्यमों, आदेश और तरीक़ों में. अलल्ह नेकह्:

َُّهللاَو ْمُكَبوُنُذ ْمُكَل ْرِفْغَيَو َُّهللا ُمُكْبِبْحُي يِنوُعِبَّهتاَف ََّهللا َنوُّبِحُت ْمُتْنُك ْنِإ ْلُق ) ]३१:نارمع لآ[ ( ٌميِحَر ٌروُفَغ कह दो: “यकद तुम अलल्ह सेप्ेम करतेहो तो मेर् अनुसरर करो, अलल्ह भी तुम सेप्ेम करेग् और तुमह्रेगुन्हों को क्षम् कर देग्.अलल्ह बड़् क्षम्शील, दय्ि्न है.( आले-इमर्न:३१)

९

और हसन अल-बसरी नेकह्: दरअसल अलल्ह सेपय्र उसके पैगंबर केअनुसरर करनेमेंवछप् है. एक मोवमन की वसथवत हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-के त्रीक़े के अनुसरर करनेके वहस्ब सेन्पी र्ती है, वरतन् अविक उनकेतरीक़ेपर चलनेि्ल् होग् उतन् ही अविक अलल्ह केप्स ऊूँच् और वज़य्द् समम्नि्ल् होग्.

यही क्रर हैकक मैंनेइस संवक्षप्त अधययन को इकठ्् ककय् है, और इसक् लक्य यह हैकक मुसलम्नों की दैवनक रीिन मेंहज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-केत्रीक़ेको रीवित ककय् र्ए, इब्दत, सोने-र्गने, ख्ने-पीनेउठने-बैठने, लोगों केस्थ बत्जाि करने, नह्ने-िोने, वनकलनेऔर प्िेश करनेमेंऔर पहनने-ओढ़नेमेंबवलक हर हर ब्त मेंउनकी सुन्नत को जरंद् ककय् र्ए. ज़र् सोचीयेकक यकद हम मेंसेककसी क् कुछ पैस् खो र्ए तो हम ककतन् उसक् खय्ल करेंगेऔर हम ककतन् दुखी होंगे, और उसको खोरनेकेवलए हम ककतन् प्य्स करेंगेबवलक खोरेवबन् हम स्ंस न लेंगे, ह्ल्ंकक हम्री रीिन मेंककतनी सुन्नत हम सेछूटती र्ती है, लेककन कय् हम उस केवलए कभी दुखी हुए? कय् हमनेउसेअपनी रीिन पर ल्गूकरनेक् प्य्स ककय्?

हम्री रीिन की सब सेबड़ी मुसीबत वरसको हमेंझेलन् पड़ रह् हैयही हैकक हम पैसेऔर िनदौलत को सुन्नत सेभी बढ़कर समम्न और महति देने लगे, यकद लोगों सेयह कह् र्ए कक रो सुन्नतों मेंककसी भी एक सुन्नत पर अमल करेग् तो उसेइतन् पैस् कदय् र्एग्, तो आप देखेंगेकक लोग अपनी रीिन केस्रेक्यमों मेंसुबह सेश्म तक सुन्नत को ल्गूकरनेकेवलए उतसुक हो र्एंगे, कयोंकक प्तयेक उन्नत पर कुछ पैसेकम्एंगे. लेककन कय् यह पैसेउस समय आपको कुछ ल्भ देसकेंगेरब आप क़ब्र मेंउत्रेर्एंगेऔर आप पर वमटटी ड्लेर्एंगे?

.]१६-१७:ىلعلأا[

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“ ىَقْب َ أَو ر يخَ ةُ رخِ لا و ا ينْدلاُّ

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“नहीं, बवलक तुम तो स्ंस्ररक रीिन को प््थवमकत् देतेहो, ह्ल्ंकक आवखरत अविक उत्तम और शेष रहनेि्ली है.“ ]अल-आल्:१६-१७[.

इस अधययन मेंउललेवखत सुन्नतों क् मतलब ऐसेतरीक़ेहैंवरनकेकरनेि्लेको

१०
१०
पुणय वमलत् है, लेककन छोड़नेि्लेको गुन्ह नहीं

पुणय वमलत् है, लेककन छोड़नेि्लेको गुन्ह नहीं होत् है, और रो कदन और र्त मेंब्र ब्र आतेरहतेहैं, और हम मेंसेप्तयेक आदमी उस पर अमल कर सकत् है.

मुझेइस अधियन केद््र् पत् चल् कक प्तयेक आदमी यकद दैवनक सुन्नत पर धय्न देतो रीिन केस्रेक्यमों सेसंबंवित कम सेकम एक हज़्र सुन्नत को ल्गूकर सकत् है, और इस पुवसतक् क् मक़सद यही हैकक इन दैवनक हज़्र सेअविक सुन्नतों को ल्गूकरनेक् आस्न सेआस्न तरीक़् बय्न कर कदय् र्ए.

यकद एक मुवसलम इन दैवनक और र्त-कदन की हज़्र सुन्नतों को ल्गूकरनेक् प्य्स करेतो एक महीन् मेंतीस हर्र सुन्नत हो र्एगी, इसवलए यकद आदमी इन सुन्नतों को नहीं र्नत् है, य् र्नत् हैलेककन उसपर अमल नहीं करत् है तो कफर सोवचए कक उसनेककतनेपुणयों और दरमों को गंि्ं कदय्, वनसंदेह ऐस् आदमी सही म्यनों मेंिंवचत है.

सुन्नत पर अमल करनेकेबहुत स्रेल्भ हैं: वरन मेंसेकुछ इस तरह हैं:

१ - परमेश्वर केप्ेम क् दर्जाप्न् यह्ूँतक कक परमेश्वर खुद अपनेमोवमन भति को च्हनेलगे. २ – फ़ज़जाइब्दतों मेंहुई कवमयों क् भुगत्न. ३ – सुन्नत केवखल्फ क्मों सेसुरक्ष् प््प्त होन्. ४ – सुन्नत पर अमल करन् दरअसल अलल्ह की वनश्वनयों क् समम्न करन् है.

हेइसल्म िमजाकी रनत्! अपनेपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- की सुन्नतों केविषय मेंपरमेश्वर सेडरो! परमेश्वर सेडरो! उनहेंअपनी रीिन की ि्सतविकत् मेंवरवित करो! तुम नहीं करोगेतो कफर कौन करेग्? यही तो हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- सेसच्ेऔर पक्ेप्ेम क् प्म्र है, यही तो हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- केसच्े अनुसरर की वनश्नी है.

११
११
नींद सेर्गनेकी सुन्नतें १- चेहरेपर

नींद सेर्गनेकी सुन्नतें

सेर्गनेकी सुन्नतें १- चेहरेपर सेसोनेकेअसर
सेर्गनेकी सुन्नतें १- चेहरेपर सेसोनेकेअसर

१- चेहरेपर सेसोनेकेअसर को ह्थ सेखतम करन्: इम्म नििी और इब्े-हरर नेइसेपसनदीद् ब्त बत्य् हैकयोंकक इस विषय मेंएक हदीस आई हैकक: अलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- नींद सेउठे और अपनेह्थ सेअपनेचेहरेपर सेनींद केवचनहों को पोछनेलगे. इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

– यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

( روشنلا هيلإو انتامأ امدعب انايحأ يذلا لل دمحلا ) (अल-हमदुलल्वहल लज़ी अहय्न् ब्दम् अम्तन् ि इलैवहन-नुशूर) परमेश्वर क् शुक्र है, कक उसनेहमेंमौत देनेकेब्द कफर सेरीवित ककय्, और उसी की ओर लौटन् है. इसेइम्म बुख्री नेउललेख ककय् है.

३- वमसि्क य् (द्तून) : (अलल्ह के पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-रब र्त मेंर्गतेथेतो वमसि्क सेअपनेद्ंत को घंसतेथे. इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं.

उस केक्रर:

१ – इसकी विशेषत्ओं मेंयह भी श्वमल हैकक चुसती और फुतती पैद् होती है.

२ - और मुंह क् गंि खतम होत् है.

पैद् होती है. २ - और मुंह क् गंि खतम होत् है. १२
१२
१२

ब्थरूम मेंप्िेश करन् और ब्हर वनकलन्

करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई
करन् और ब्हर वनकलन् इस सेसंबंवित भी कई

इस सेसंबंवित भी कई सुन्नतेंहैं:

भी कई सुन्नतेंहैं: १- प्िेश होतेसमय

१- प्िेश होतेसमय पहलेब्येंपैर को रखन् और वनकलतेसमय पहलेद्वहने पैर को ब्थरूम सेब्हर रखन् भी सुन्नत है. २ – प्िेश केसमय की दुआ यूूँहै:

] ثئابخلاو ثبخلا نم كب ذوعأ ينإ مهللا [ (अलल्हुमम् इन्नी अऊज़ुवबक् वमनल-खुबसेिल-खब्इस) “हेअलल्ह! मैंस्ती और पुरुष शैत्नों सेतेरेशरर मेंआत् हूँ.“

इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं.

३ -ब्हर नकलनेकेसमय

की दुआ:

(गुफ़र्नक)

] كنارفغ [

(तुझी सेम्फ़ी च्हत् हूँ) इम्म नस्ई को छोड़कर सभी “सुन्न“ वलखनेि्लों नेइसेउललेख ककय् है. एक व्यवति कदन और र्त मेंकई ब्र ब्थरूम मेंप्िेश करत् हैऔर ब्हर वनकलत् है. और ककतनी अचछी ब्त हैकक प्िेश करतेसमय और वनकलते समय इन सुन्नतों को ल्गूकरे, दो सुन्नत प्िेश करतेसमय और दो सुन्नत वनकलतेसमय.

प्िेश करतेसमय और दो सुन्नत वनकलतेसमय. १३
१३
१३

िुज़ूकी सुन्नतें

की सुन्नतें:

सुन्नतें की सुन्नतें: १ -

१ - वबवसमलल्वहर-रहम्वनर-रहीम(अलल्ह के न्म सेरो बड़् कृप्शील, अतयंत दय्ि्न है) पढ़न्. २ – िुज़ूकेशुरू मेंदोनों हथेवलयों को तीन ब्र िोन्.

३- चेहर् िोनेसेपहलेमुंह मेंप्नी लेकर कुलली करन् और न्क मेंप्नी खींच कर वछनकन्. ४ – ब्येंह्थ सेन्क वछनकन्, कयोंकक हदीस मेंहै:(तो उनहोंने-मतलब अलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- ने- अपनी हथेवलयों को तीन ब्र िोय्, उसके ब्द कुलली की, कफर न्क मेंप्नी चढ़्य् और वछनक्, कफर अपनेचेहरेको तीन ब्र िोय्.) इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं. ५ - मुंह और न्क मेंप्नी ड्ल कर अचछी तरह स्फ़ करन् यकद रोज़् मेंन हो. कयोंकक हदीस मेंहै:(और न्क मेंअचछी तरह प्नी चढ़्ओ यकद तुम रोज़े मेंन हो) इसेच्रों इम्मों: नस्ई, वतरवमज़ी, अबू-द्िूद और इब्े-म्र् ने उललेख ककय् है.

* मुंह मेंअचछी तरह प्नी लेकर कुलली करनेक् मतलब यह हैकक प्नी को पूरेमुंह मेंघुम्ए.

* और न्क मेंअचछी तरह प्नी चढ़्नेक् मतलब यह हैकक न्क की उपरी

भ्ग तक प्नी अचछी तरह खींच कर चढ़्एं और खूब स्फ़ करें. ६ - एक ही चुललूसेमुंह और न्क मेंप्नी लें, अलग अलग न करें, रैस् कक ह्कदस मेंहै:( इसके ब्द उनहोंनेउसमें(प्नी) मेंह्थ ड्ल् और कुलली की और न्क मेंप्नी चढ़्य् एक ही चुललूसे) इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं. ७ – वमसि्क क् प्योग करन्, और वमसि्क कुलली करतेसमय करन् च्वहए. कयोंकक हदीस मेंहै( यकद मैंअपनी रनत् पर करठन न सझत् तो मैंउनहेंप्तयेक िुज़ूके समय वमसि्क क् आदेश देदेत्) इम्म अहमद और नस्ई नेइसे उललेख ककय् है.

१४
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८ – चेहर् िोतेसमय द्ढ़ी के ब्लों के बीच मेंउंगुवलय्ं कफर्न्, यह उस के वलए हैवरसकी द्ढ़ी घनी हो. रैस् कक हदीस मेंहै:कक (हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-िुज़ूमेंद्ढ़ी मेंउंगवलय्ं कफर्तेथे. इसेइम्म वतरवमज़ी ने उललेख ककय् है.

९ – वसर केम्सह(य् पोछने) क् त्रीक़्:

वसर केमसह क् त्रीक़् यह हैकक वसर केस्मनेकेभ्ग सेह्थ फैरन् शुरू करेऔर वसर केपीछेगुद्ी की ओर ह्थ फैरतेहुए ल्ए और कफर दुब्र् स्मने की ओर ह्थ ल्ए. ज़रुरी मसह तो केिल इतन् ही हैकक पूरेवसर पर वरस तरह भी हो ह्थ फैर वलय् र्ए: रैस् कक हदीस मेंहैकक:( अलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेअपनेवसर क् मसह ककय्: अपनेदोनों ह्थों को आगेल्ए और कफर पीछेकी ओर लेग्ए.) इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं.

१० – ह्थ और पैर की उंगवलयों केबीच मेंउंगवलय्ं फैरन्:कयोंकक हदीस में है:कक अचछी तरह िुज़ूकरो, और उंगवलयों केबीच मेंउंगवलय्ं कफर्ओ) इसे च्रों इम्मों नस्ई, वतरवमज़ी, अबू-द्िूद और इब्े-म्र् नेउललेख ककय् है.

११ “तय्मुन“ मतलब ह्थों और पैरों मेंब्येंसेपहलेद्वहनेसेशुरू करन्:

कयोंकक हदीस मेंहैकक ( अलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म

हो-को रूतेपहनने

इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं. १२ - चेहर्, दोनों ह्थ और दोनों पैर केिोनेको एक सेबढ़्कर तीन तीन ब्र करन् भी सुन्नत है. १३ – िुज़ूकर चुकनेकेब्द गि्ही केदोनों श्दों को पढ़न्:

( هلوسرو هدبع اًدمحم نأ دهشأو ، هل كيرش لا هدحو للا لاإ هلإ لا نأ دهشأ) “अशहदुअलल्इल्ह् इलल्लल्हु िहदह ल् शरीक लहु, िह अशहदु अन्न मुहममदन अ्दुह ि रसूलुह.“ मतलब मैंगि्ही देत् हूँकक अलल्ह को छोड़ कर कोई पूरेर्नेकेयोगय नहीं है, अकेल् हैउसक् कोई स्झी नहीं और मुहममद अलल्ह केभति और उसकेपैगमबर हैं.“ इस क् फल यह होग् कक उसकेवलए सिगजाकेआठों दरि्ज़ेखोल कदए र्एंगे, वरस केद््र् च्हेप्िेश करे.) इम्म मुवसलम नेइसेउललेख ककय् है.

और

नह्ने-िोनेमेंद्वहनेओर सेशुरू करन् पसंद थ्.)

१५
१५

१४- घर सेिुज़ूकरकेवनकलन्: कयोंकक अलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्:(रो अपनेघर मेंही स्फ़ सुथर् और प्क होकर वनकले, और कफर परमेश्वर केभिनों मेंसेककसी भिन(य्नी मवसरद)को र्ए त्कक अलल् केफरमों मेंसे ककसी फ़ज़जाको अद् करेतो उसकेदोनों क़दम ऐसेहोंगेकक उनमेंसेएक तो प्प वमट्एग्, और दूसर् उसक् दर्जाबुलंद करेग्.) इसेइम्म मुवसलम ने उललेख ककय् है. १५- रगड़न्: मतलब प्नी केस्थ स्थ य् प्नी बह्नेकेब्द अंगों को ह्थ सेरगड़न्.

१६- प्नी को ज़रूरत भर ही खचजाकरन्: कयोंकक हदीस मेंहैकक : अलल्ह के पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- एक मुद (लभभग पौनेएक लीटर) प्नी सेिुज़ूकरतेथे. इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं. १७ च्रों अंगों को िोन्: दोनों ह्थ और दोनों पैरों को ज़रुरी सीम् सेबढ़कर िोन् कयोंकक हदीस मेंहैकक (हज़रत अबू-हुरैर् नेिुज़ूककय् तो अपनेह्थ को िोय् और पूरेब्ज़ूतक िोय्, और पैर को जपंडली तक िोय्, उसकेब्द उनहोंनेकह्: मैंनेअलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- को इसी तरह िुज़ूकरतेदेख्.) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय्.

१८- िुज़ूकेब्द दो रकअत नम्ज़ पढ़न्: कयोंकक अलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्: (रो भी इस तरह मेरेिुज़ूकरनेकी तरह िुज़ूकरेकफर दो रकअत नम्ज़ पढ़े, उन दोनों केबीच मेंअपनेआप सेब्त न करे(इिरउिर की सोच मेंन पड़े) तो उसकेवपछलेप्प क्षम् कर कदए गए.) इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् है, लेककन इम्म मुवसलम नेहज़रत उक़ब्-वबन-आवमर केबय्न को उललेख ककय् वरस मेंयह श्द है: “ तो उसके वलए सिगजावनवचित होगय्.

१९- पूरजारूप सेिुज़ूकरन्: इस क् मतलब यह हैकक प्तयेक अंग को रैस् िोन् हैउसतरह सही ढंग सेिोए, स्रेअंगों को पूर् पूर् और अचछी तरह िोए, कुछ कमी न रहनेदे. यह ब्त उललेखनीय हैकक एक मुवसलम अपनेकदन और र्त मेंकई ब्र िुज़ू करत् है, रबकक उनमेंसेकुछ लोग प्ंच ब्र िुज़ूकरतेहैं, और उनमेंसेकुछ तो

१६
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प्ंच ब्र सेभी अविक िुज़ूकरतेहैं, ख्सकर रब एक व्यवति ज़ुह् की नम्ज़(य्नी कदन चढ़नेकेसमय की नम्ज़) य् र्त की नम्ज़ पढ़त् है. इसवलए एक मुसलम्न रब रब भी िुज़ूकरेतो इन सुन्नतों पर अमल करेऔर ब्र ब्र इसक् खय्ल रखेतो बहुत बड़् पुणय प््प्त कर सकत् है.

िुज़ूमेंइन सुन्नतों पर अमल करनेकेफल:

इस म्धयम सेिह व्यवति हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- की इस खुशखबरी मेंश्वमल हो र्एग् वरसकेश्द यूूँहैं:“ वरसनेिुज़ूककय् और अचछी तरह िुज़ूककय् तो उसकेप्प उसकेपूरेशरीर सेवनकल र्तेहैं, यह्ं तक कक न्खूनों केनीचेसेभी (प्प) वनकल र्तेहैं.“ इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

र्तेहैं.“ इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है. १७
१७
१७

वमसि्क

वमसि्क वमसि्क करनेके बहुत स्रेअिसर हैं, और एक

वमसि्क करनेके बहुत स्रेअिसर हैं, और एक मुसलम्न कदन और र्त मेंकई ब्र वमसि्क क् प्योग करत् है.

हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो- नेकह्:( यकद मैंअपनी रनत् पर करठन न समझत् तो मैंउनहेंप्तयेक िुज़ूकेसमय वमसि्क क् आदेश देदेत्) इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय्.

र्त और कदन मेंएक मुसलम्न केवमसि्क करनेकी कुल संखय् बीस ब्र से कम नहीं होती है. कयोंकक प्ंच नम्ज़ों केवलए तो वमसि्क करत् हैइसी तरह वनवचित सुन्नतों केसमय, और ज़ुह् की नम्ज़ केवलए, और वितर नम्ज़ केवलए, और घर मेंप्िेश करतेसमय, कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-रब घर मेंप्िेश करतेथेतो सब सेपहल् क्म रो शुरू करतेथे िह यही थ् की वमसि्क करतेथे, रैस् कक हज़रत आइश्-अलल्ह उनसेखुश रहे-नेइसकी खबर दी है. और रैस् कक इम्म मुवसलम की “सहीह“ न्मक पुसतक मेंउललेवखत है. इसवलए रब भी आप घर मेंप्िेश करतेहैंतो वमसि्क सेही शुरू कीवरए त्कक आपक् अमल सुन्नत केअनुस्र होर्ए. और पवित्र कुर्न को पढ़तेसमय, और मुंह मेंगंि उठ र्नेकेसमय, और नींद सेउठनेके समय, और िुज़ूकरतेसमय भी वमसि्क क् प्योग ककय् करें, कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो- नेकह् कक:(वमसि्क मुंह को बहुत पवित्र करनेि्ल् और प्लनह्र को संतुष्ट करनेि्ल् है.) इम्म अहमद ने इसेउललेख ककय् है. इस सुन्नत पर अमल करनेकेपररर्म:

क) इस केम्धयम सेप्लनह्र सिजाशवतिम्न की संतुवष्ट प््प्त होती है.

ख) मुूँह को पवित्रत् वमलती है.

१८
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रूते-चपपलपहननेकी सुन्नत

सुन्नत हज़रत पैगंबर-उन पर
सुन्नत हज़रत पैगंबर-उन पर

हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्:(यकद तुम मेंसेकोई चपपल पहनेतो द्वहनेसेशुरू करे, और रब उत्रेतो ब्येंसेशुरू करे, और यकद पहनेतो दोनों को पहनेय् उसेउत्र ही दे.) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

एक मुवसलम को कदन और र्त मेंकई ब्र इस सुन्नत क् स्मन् होत् है, कयोंकक मसवरद को र्तेसमय और वनकलतेसमय, और ब्थरूम मेंप्िेश करते समय और वनकलतेसमय, और घर सेक्म को र्तेसमय, और िह्ूँसेआते समय, इस सुन्नत की ज़रूरत पड़ती है. इस तरह रूते-चपपल पहननेकी सुन्नत कदन-र्त मेंकई ब्र आती है, और यकद पहनने-उत्रनेमेंसुन्नत क् खय्ल रख् र्ए और कदल मेंवनयत भी उपवसथत रहेतो बहुत बड़ी भल्ई प््प्त हो सकती है, और एक मुसलम्न की आि्र्ही उसक् उठन-बैठन बवलक उसकेस्रेक्यजा सुन्नत केअनुस्र हो र् सकतेहैं.

१९
१९

पोश्क की सुन्नतें

पोश्क की सुन्नतें अविक्ंश लोगों केस्थ रो
पोश्क की सुन्नतें अविक्ंश लोगों केस्थ रो

अविक्ंश लोगों केस्थ रो ब्तेंर्त-कदन मेंब्र ब्र पेश आती रहती हैंउनहीं मेंिोनेकेवलए य् सोनेआकद केवलए कपड़ेको पहनन् और उत्रन् भी श्वमल है. कपड़ेको पहननेऔर उत्रनेकेवलए भी कुछ सुन्नत हैं:

१ -पहनने के समय और उत्रने के समय“वबवसमलल्वहर-रहम्वनर- रहीम“(अलल्ह केन्म सेरो बड़् कृप्शील, अतयंत दय्ि्न है) पढ़न् च्वहए. इम्म नििी नेकह् हैकक यह पढ़न् सभी क्मों केसमय एक अचछी ब्त है. २- हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- रब कोई पोश्क, य् कमीर पहनतेथे, य् कोई च्दर ओढ़तेथेय् पगड़ी ब्ंितेथेतो यह दुआ पढ़तेथे:

ام رشو هرش نم كب ذوعأو ، هل وه ام ريخو هريخ نم كلأسأ ينإ مهللا ) ( هل وه अलल्हुमम् इन्नी असअलुक् वमन खैरेही ि खैरेम् हुि् लह, ि अऊज़ुवबक् वमन शरररही ि शररर म् हुि् लह. हेअलल्ह!मैंतुझ सेम्ंगत् हूँइसकी भल्ई और रो रो भल्ई उसकेवलए है, और मैंतेरी शरर मेंआत् हूँउसकी बुर्ई सेऔर रो रो बुर्ई उसकेवलए है.) इसेअबू-द्ऊद, वतरवमज़ी नेउललेख ककय् है, और इसेइम्म अहमद नेभी उललेख ककय् हैऔर इब्े-वह्ब्न नेइसेविश्वसनीय बत्य् हैऔर ह्ककम ने भी इसेसही बत्य् और कह् कक यह हदीस इम्म मुवसलम की शतमों पर उतरती हैऔर इम्म ज़हबी भी उनकेइस विच्र मेंउनकेसहमत हैं.

३ – पहननेकेसमय भी द्वहनेसेशुरू करन्. कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- की हदीस मेंहै:रब तुम पहनो तो तुम अपने द्वहनेसेशुरू करो) इसेइम्म वतरवमज़ी, अबू-द्ऊद और इब्े-म्र् नेउललेख ककय् है, और यह हदीस विश्वसनीय है. ४ – और रब अपनेकपड़ेय् प्र्मेको उत्रेतो पहलेब्येंको उत्रे, कफर द्वहनेको उत्रे.

२०
२०

घर मेंप्िेश करनेऔर घर सेवनकलने की सुन्नत

घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ
घर सेवनकलने की सुन्नत इस सेसंबंवित भी कुछ

इस सेसंबंवित भी कुछ सुनतेंहैं. * इम्म नििी नेकह् हैकक “वबवसमलल्वहर-रहम्वनर-रहीम“(अलल्ह केन्म सेरो बड़् कृप्शील, अतयंत दय्ि्न है) पढ़न् मुसतह्ब य्नी पसंदीद् है, और उस समय अलल्ह सिजाशवतिम्न को अविक सेअविक य्द करेऔर कफर सल्म करे.

१- अलल्ह को य्द करे: कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- की हदीस मेंहै: ( रब आदमी अपनेघर मेंप्िेश करत् है, और प्िेश करतेसमय और ख्नेकेसमय अलल्ह को य्द करत् हैतो शैत्न कहत् है चलो चलो न तो तुमह्रेवलए यह्ूँकोई र्त गुज़्रनेकी रगह हैऔर न र्त क् भोरन है.) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

२ प्िेश होनेकेसमय की दुआ पढ़े– कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- की हदीस मेंयह दुआ आई है.

للا مسبو ، انجلو للا مسب ، جرخملا ريخو جلوملا ريخ كلأسأ ينإ مهللا ) ( هلهأ ىلع ملسي مث ، انلكوت انبر للا ىلعو ، انجرخ

अलल्हुमम् इन्नी असअलुक् खैरल-मौवलर ि खैरल-मखररर, वबवसमलल्वह िलरन्, ि वबवसमलल्वह खररन्, ि अललल्वह तिककलन्. (हेअलल्ह! तुझ सेमैंप्िेश होनेकी भल्ई और वनकलनेकी भल्ई म्ंगत् हूँ, हम अलल्ह क् न्म लेकर प्िेश ककये, और अलल्ह क् न्म लेकर वनकले, और अलल्ह हम्रे प्लनह्र पर ही हमनेभरोस् ककय्.) यह दुआ पढ़ेऔर कफर सल्म करे. इसे इम्म अबू-द्िूद नेउललेख ककय् है.

यकद घर मेंप्िेश करतेसमय और घर सेवनकलतेसमय एक व्यवति इश्वर पर भरोस् को महसूस करेग्, तो सद् अलल्ह सेसंबंि बन् रहेग्. ३- वमसि्क क् प्योग: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- रब अपनेघर मेंप्िेश करतेथेतो वमसि्क सेही शुरू करतेथे. इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

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४- सल्म करन्: कयोंकक अलल्ह सिजाशवतिम्न नेकह्

४- सल्म करन्: कयोंकक अलल्ह सिजाशवतिम्न नेकह् है:

َِّهللا ِدْنِع ْنِم ًةَّهيِحَت ْمُكِسُفْن َ أ ىَلَع اوُمِّلَسَف اًتوُيُب ْمُتْلَخَد اَذِإَف ) ]६१:رونلا[ ( ًةَبِّيَط ًةَكَراَبُم

अलबत्त् रब घरों मेंर्य् करो तो अपनेलोगों को सल्म ककय् करो, अवभि्दन अलल्ह की ओर सेवनयत ककय् हुआ, बरकति्ल् और अतयविक प्क. ]अन-नूर: ६१[

• और यकद हम म्न लेंकक एक मुसलम्न व्यवति प्तयेक फ़ज़जानम्ज़ को मसवरद

मेंअद् करत् हैऔर कफर घर मेंप्िेश करत् हैतो र्त-कदन मेंकेिल घर में प्िेश करनेकी सुन्नतों की संखय् वरन पर ब्र ब्र अमल होत् हैबीस हो र्ती हैं.

• और घर सेवनकलतेसमय यह दुआ पढ़े:

( للاب لاإ ةوق لاو لوح لاو ، للا ىلع تلكوت ، للا مسب ) !“वबवसमलल्वह, तिक्लतुअललल्वह िल् हौल् िल् क़ुवित् इलल् वबलल्ह“ (अलल्ह केन्म से, मैंनेअलल्ह पर ही भरोस् ककय्, और न कोई शवति है और न कोई बल हैमगर अलल्ह ही से.) यकद एक व्यवति यह दुआ पढ़ लेत् हैतो उसे(फररशतों की ओर से) कह् र्त् है, तुमह्रेक्म पूरेहोगए, और तुम बच् वलए गए, तुमहेंम्गजादेकदय् गय्, और शैत्न उस सेदूर हट र्त् है.

इसेवतरवमज़ी और अबू-द्ऊद नेउललेख ककय् है.

• गौरतलब हैकक एक मुसलम्न कदन-र्त मेंकई ब्र अपनेघर सेब्हर

वनकलत् है: मवसरद मेंनम्ज़ केवलए ब्हर वनकलत् है, और अपनेक्म के वलए घर सेब्हर वनकलत् है, घर केक्मों केवलए ब्हर वनकलत् है, यकद एक व्यवति रब रब भी अपनेघर सेवनकलत् है, और इस सुन्नत पर अमल करत् है तो बहुत बड़् पुणय और बहुत बड़ी भल्ई प््प्त कर सकत् है.

* घर सेब्हर वनकलतेसमय की इस सुन्नत पर अमल करनेकेपररर्म:

१: इस केद््र् एक आदमी सभी महतिपूरजास्ंस्ररक और आवखरत सेसंबंवित म्मलों मेंबेकफक्र हो र्त् है. २: इसी तरह आदमी हर प्क्र की बुर्ई और ह्वन, च्हेभूतप्ेत की ओर हो य् म्नित् की ओर से, सब सेबच र्त् है.

३:यह पढ़नेि्लेव्यवति को म्गजा वमल र्त् है:और र्सत् भटकनेसेबच र्त् है, और अलल्ह सिजाशवतिम्न आपको आपकेसभी ि्रमजाक और स्ंस्ररक क्मों मेंसही र्सत् कदख्त् र्त् है.

२२
२२
मसवरद को र्नेकी सुन्नतें १ – ज़र् रलदी मवसरद

मसवरद को र्नेकी सुन्नतें

को र्नेकी सुन्नतें १ – ज़र् रलदी मवसरद

१ – ज़र् रलदी मवसरद मेंपहुंच र्न् भी सुन्नत है, कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- नेकह्:( यकद लोगों को पत् चल र्ए कक अज़्न देनेऔर (मवसरद की) पहली ल्इन मेंककय् है, और कफर (वसक्् उछ्ल कर) चुन्ि करनेके वसि्य िेकोई च्र् न प्एं तो िे ज़रूर चुन्ि करें. और यकद उनको पत् हो र्ए कक पहलेपहल नम्ज़ केवलए र्नेमेंकय् हैतो िेइसकेवलए दौड़्-दौड़ी करें, और यकद उनहेंयह पत् चल र्ए कक इश्(र्त) की और सुबह की नम्ज़ मेंकय् हैतो िेउस मेंज़रूर आएं भलेही ह्थों और घुटनों केबल वघसटतेवघसटतेआन् पड़े.) इम्म बुख्री और मुवसलम इस हदीस पर सहमत हैं. * इस हदीस मेंअरबी भ्ष् क् एक श्द“ तहरीर“ “ريجهتلا“ आय् हैउसकेम्यनेमेंइम्म नििी नेकह् हैकक उसक् मतलब पहलेपहल मसवरद मेंर्न् है.

२ – मवसरद को र्नेकी दुआ:

يعمس يف يل لعجاو ، اًرون يناسل يفو ، اًرون يبلق يف لعجا مهللا ) ، اًرون يمامأ نمو اًرون يفلخ نم لعجاو ، اًرون يرصب يف لعجاو ،اًرون ( اًرون ينطعا مهللا ، اًرون يتحت نمو اًرون يقوف نم لعجاو (अलल्हुममर-अल फी क़लबी नूर्, ि फी वलस्नी नूर्, िरअल फी समई नूर्, िरअल फी बस्री नूर्, िरअल वमन खलफी नूर् ि वमन अम्मी नूर्, िरअल वमन फौक़ी नूर् ि वमन तहती नूर्, अलल्हुमम् अअवतनी नूर्) (हेअलल्ह! मेरेकदल मेंप्क्श ड्ल दे, और मेरी रुब्न मेंप्क्श रख दे, और मेरी क्न मेंप्क्श ड्ल दे, और मेरी आंख मेंप्क्श रख दे, और मेरेपीछे प्क्श रख दे, और मेरेआगेप्क्श रख दे, और मेरेऊपर सेप्क्श कर दे, और मेरेनीचेसेप्क्श कर दे, हेअलल्ह! तूमुझेप्क्श देदे.) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

३ – श्ंवत और श्लीनत् केस्थ चलन् च्वहए: कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्:(रब तुम इक़्मत सुनो तो नम्ज़ की ओर चल दो, और तुम श्ंवत और श्लीनत् को थ्मेरहो.) इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् है.

२३
२३
• इस हदीस मेंअरबी भ्ष् क् एक श्द:“अस-सकीनह“

• इस हदीस मेंअरबी भ्ष् क् एक श्द:“अस-सकीनह“ “ةنيكسلا“ आय् हैउसके म्यनेहैंआर्म सेर्न् और बेक्र ब्त और िड़पड़-िड़पड़ सेदूर रहन्.

• इसी तरह इस हदीस मेंअरबी क् एक श्द:“अल-िक़्र“ “راقولا“ आय् हैवरसक् अथजाहै, श्लीनत् केस्थ आंखों को नीची रखन्,और आि्ज़ को िीमी रखन् और इिरउिर त्क-झ्ंक न करन्. ४- विद््नों नेसपष्ट कह् हैकक मवसरद को र्तेसमय सुन्नत यही हैकक पैरों को िीरेिीरेऔर नज़दीक नज़दीक ही उठ्कर रख् र्ए, और रलदीब्ज़ी सेबच् र्ए त्कक मवसरद को र्नेि्लेकेपुणय की संखय् अविक सेअविक होसके, यह विच्र िरमजाक ग्ंथों केऐसेसबूतों केआि्र पर आि्ररत हैवरन सेयह ब्त सपष्ट होती हैकक मवसरदों की ओर चलनेमेंपैरों को उठ् कर रखनेकी संखय् वरतनी अविक होगी पुणय की संखय् भी उसी वहस्ब सेबढ़ती र्एगी. हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्:(कय् मैंतुमहेंऐसी ब्त न बत्ऊूँ वरसकेम्धयम सेअलल्ह प्पों को वमट् देत् है, और दरमों को

बुलंद कर देत् है? तो लोगों नेकह्: कयों नहीं, हेअलल्ह केपैगंबर! ज़रूर, तो उनहोंनेदूसरी ब्तों केस्थ इसेभी उललेख करतेहुए कह्:“ मवसरदों की ओर

अविक सेअविक क़दम

)

इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

५ – मवसरद मेंप्िेश करनेकेसमय की

दुआ: ( كتمحر باوبأ يل حتفا مهللا )

“अलल्हुममफ़ तह ली अअबि्ब् रहमवतक“ (हेअलल्ह! मेरेवलए तूअपनी दय् केदरि्ज़ों को खोल दे) इस विषय मेंएक हदीस हैकक :रब आप मेंसेकोई मवसरद मेंप्िेश करेतो हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-पर सल्म भेरेऔर यह दुआ पढ़े:

) كتمحر باوبأ يل حتفا مهللا (

“अलल्हुममफ़ तह ली अ्ि्ब् रहमवतक“ (हेअलल्ह! मेरेवलए तूअपनी दय् केदरि्ज़ों को खोल दे.) इसेइम्म नस्ई, इब्े-म्र्, इब्े-खुज़ैम् और इब्े-वह्ब्न नेउललेख ककय् है.

६ – मवसरद मेंप्िेश होतेसमय द्वहनेपैर को पहलेबढ़्न् च्वहए: कयोंकक हज़रत अनस इब्े-म्वलक-अलल्ह उनसेखुश रहे- नेकह् हैकक: सुन्नत यही है

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२४

कक रब आप मसवरद मेंप्िेश करतेहैंतो अपनेद्वहनेपैर से शुरू करेंऔर रब वनकलनेलगेंतो अपनेब्येंपैर सेशुरू करें. इसेह्ककम नेउललेख ककय् हैऔर बत्य् कक यह हदीस इम्म मुवसलम की शतमों पर उतरती हैऔर इम्म ज़हबी भी इस मेंउनके सहमत हैं. ७ – मसवरद मेंपहली ल्इन के वलए आगेरहन् च्वहए: कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्:( यकद लोगों को पत् चल र्ए कक अज़्न देनेऔर (मवसरद की) पहली ल्इन मेंककय् है, और कफर (वसक्् उछ्ल कर) चुन्ि करनेकेवसि्य िेकोई च्र् न प्एं, तो िेज़रूर चुन्ि करें. इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् है. ८ – मवसरद सेवनकलतेसमय की दुआ:

( كلضف نم كلأسأ ينإ مهللا)

(अलल्हुमम् इन्नी असअलुक् वमन फज़वलक्) “हेअलल्ह! मैंतुझ सेतेरी उद्रत् मेंसेम्ंगत् हूँ.“ इसेइम्म मुवसलम ने उललेख ककय् हैऔर इम्म नस्ई केप्स यह भी वज़य्द् हैकक मवसरद से वनकलतेसमय भी हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-पर सल्म भेरन् च्वहए.

९ – मवसरद सेवनकलतेसमय ब्येंपैर को पहलेवनक्लन् च्वहए: रैस् कक अभी अभी उपर हज़रत अनस इब्े-म्वलक-अलल्ह उनसेखुश रहे-की हदीस में गुज़री. १० – तवहययतुल-मवसरद य् मवसरद मेंप्िेश होनेकी नम्ज़ पढ़न् :कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्:(यकद आप मेंसे कोई मवसरद मेंप्िेश करेतो वबन् दो रकअत नम्ज़ पढ़ेन बैठे. इम्म बुख्री और मुवसलम इस हदीस पर सहमत हैं. * इम्म श्फई नेकह् हैकक तवहययतुल-मवसरद कभी भी पढ़ी र् सकती है, बवलक इसेतो ऐसेसमय मेंभी पढ़ सकतेहैंरब आम नम्ज़ पढ़न् र्एज़ नहीं है. (रैसेसूयजाउगतेऔर डूबतेसमय और रब सूयजावबलकुल बीच आक्श मेंहो.) • और ह्कफ़ज़ इब्े-हरर नेकह् हैकक: फति् देनेि्लेलोग इस ब्त पर सहमत हैंकक तवहययतुल-मवसरद सुन्नत है.

य्द रहेकक केिल उन सुन्नतों की संखय् पच्स है, रो प्ंच नम्ज़ों के वलए मवसरद को र्नेसेसंबंवित है, एक मुसलम्न र्त-कदन मेंमवसरद को र्ते समय इन पर अमल करनेक् प्य्स करत् है.

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२५

अज़्न की सुन्नतें

अज़्न की सुन्नतें अज़्न की सुन्नतेंप्ंच
अज़्न की सुन्नतें अज़्न की सुन्नतेंप्ंच

अज़्न की सुन्नतेंप्ंच हैंरैस् कक इब्े-क़वययम ने“ज़्दुल- मआद“ मेंउललेख ककय् है:

मआद“ मेंउललेख ककय् है: १ – सुननेि्लेको भी िही

१ – सुननेि्लेको भी िही श्द दुहर्न् हैरो आज़्न देनेि्ल् आज़्न में कहत् है. लेककन “हयय् अलस-सल्ह“(नम्ज़ की ओर आओ) और हयय् अलल- फल्ह“(सफलत् की ओर आओ) में“ल् हौल् िल् क़ुवित् इलल् वबलल्ह“ (न कोई शवति हैऔर न कोई बल हैमगर अलल्ह ही से.) पढ़न् च्वहए. इसे बुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् है.

* इस सुन्नत के फल: इस क् ल्भ यह हैकक

र्एग्, रैस् कक इम्म मुवसलम की “सहीह“ न्मक पुसतक मेंस्वबत है.

सिगजा आपके वलए वनवचित हो

२ –और आज़्न सुननेि्लेको यह पढ़न् च्वहए:

، اًبر للاب تيضر ، للا لوسر اًدمحم نأو ، للا لاإ هلإ لاأ دهشأ انأو) (ًلاوسر دمحمبو ، اًنيد ملاسلإابو :“ि अन् अशहदु अलल्इल्ह् इलललल्हु, िह अशहदु आन्न् मुहममदर रसूलुलल्ह, रज़ीतुवबलल्वह र्ब्, ि वबलइसल्वम दीन्, ि वबमुहमम्कदन रसूल्“ मतलब मैंगि्ही देत् हूँकक अलल्ह को छोड़ कर कोई पूरेर्ने के योगय नहीं हैऔर मुहममद अलल्ह के पैगमबर हैं, मैंसंतुष्ट हूँअलल्ह के प्लनह्र होनेसे, और इसल्म केिमजाहोनेसेऔर मुहममद केदूत होनेसे.) इसे इम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

* इस सुन्नत पर अमल केफल: इस सुन्नत पर अमल करनेसेप्प म्फ कर कदए

र्तेहैं. रैस् कक खुद इस हदीस मेंउललेवखत है. ३ – अज़्न क् रि्ब देनेकेब्द हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-पर सल्म भेरन् च्वहए, और सब सेअविक पूरजा सल्म तो“ इबर्हीमी दरूद“ ही है, इस सेअविक पूरजातो और कोई दरूद हैनहीं. • इसक् सबूत: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-क् यह फरम्न हैकक: रब तुम अज़्न देनेि्लेको सुनो तो िैस् ही कहो रैस् िह कहत् है, कफर मुझ पर दरूद भेरो, कयोंकक रो मुझ पर एक ब्र दरूद पढ़त् हैतो उसकेबदलेमेंअलल्ह उस पर दस दय् उत्रत् है. इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

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* इस सुन्नत पर अमल करनेकेफल: इसक् सब सेबड़् फल

तो यही हैकक खुद अलल्ह अपनेभति पर दस दरूद भेरत् है.

* अलल्ह केदरूद भेरनेक् मतलब: अलल्ह केदरूद भेरनेक्

मतलब यह हैकक िह फररशतों की दुवनय् मेंउसकी चच्जाकरत् है.

दरूदेइबर्हीमी केश्द यह हैं:

لآ ىلعو ميهاربإ ىلع تيلص امك دمحم لآ ىلعو دمحم ىلع لص مهللا) تكراب امك دمحم لآ ىلعو دمحم ىلع كراب مهللا ، ديجم ديمح كنإ ميهاربإ (.ديجم ديمح كنإ مـيهاربإ لآ ىلـعو ميهاربإ ىلع (अलल्हुमम् सवलल अल् मुहममद, ि अल् आवल मुहममद, कम् सललैत् अल् इबर्हीम् ि अल् आवल इबर्हीम् इन्नक् हवमदुम-मरीद, अलल्हुमम् ब्ररक अल् मुहममद, ि अल् आवल मुहममद, कम् ब्रकत् अल् इबर्हीम् ि अल् आवल इबर्हीम् इन्नक् हवमदुम-मरीद.) “ हेअलल्ह! मुहममद और उनकेब्लबच्ों पर दरूद और दय् उत्र, रैसेतूने हज़रत इबर्हीम और उनकेब्लबच्ों पर उत्र्, और तूमुहममद और उनके ब्लबच्ों पर बरकत उत्र रैसेतूनेहज़रत इबर्हीम और उनकेब्लबच्ों पर बरकत उत्री.“ इसेइम्म बुख्री नेउललेख ककय् है.

४ – उनपर दरूद पढ़ लेनेकेब्द यह दुआ पढ़े:

ةليضفلاو ةليسولا اًدمحم تآ ةمئاقلا ةلاصلاو ةماتلا ةوعدلا هذه بر مهللا) (هتدعو يذلا اًدومحم اًماقم هثعباو ، अलल्हुमम् र्ब् ह्वज़वहद- दअिवतत-त्ममवत िस-सल्वतल-क़्इम्, आवत मुहममदन अल-िसीलत् िल- फज़ील्, िबअसह मक़्मम-महमूदन अल-लज़ी .िअदतह हेअलल्ह! इस पूरजाबुल्िेऔर सथ्वपत नम्ज़ केम्वलक! हज़रत मुहममद को “िसील्“ नमक दर्जाऔर उद्रत् दे, और उनहें“मक़्मे-महमूद“(सर्हनीय दर्जा) दे.

* इस दुआ क् फल: वरसनेयह दुआ पढ़ी उसके वलए हज़रत पैगंबर-उन पर

इश्वर की कृप् और सल्म हो-की वसफ्ररश वनवचित हो गई. ५ - उसकेब्द अपनेवलए दुआ करे, और अलल्ह सेउसक् इन्म म्ंगे, कयोंकक उस समय दुआ सिीक्र होती है, हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- नेकह् है: अज़्न देनेि्लेरो कहतेहैंिही तुम भी कहो, और रब खतम कर लो, तो म्ंगो वमलेग्.

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इसेअबू-द्ऊद नेउललेख ककय् है, और हकफज़ इब्े-हरर

इसेअबू-द्ऊद नेउललेख ककय् है, और हकफज़ इब्े-हरर नेइसेविश्वसनीय बत्य्, और इब्े-वह्ब्न नेइसेसही कह् है. * उन सुन्नतों की संखय् कुल पचीस हैरो अज़्न सुननेसेसंबंवित हैं, और वरन पर अज़्न सुननेकेसमय अमल करन् च्वहए.

और वरन पर अज़्न सुननेकेसमय अमल करन् च्वहए. २८
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इक़्मत की सुन्नतें

इक़्मत की सुन्नतें आज़्न मेंउललेवखत पहली च्र
इक़्मत की सुन्नतें आज़्न मेंउललेवखत पहली च्र

आज़्न मेंउललेवखत पहली च्र सुन्नतेंइक़्मत मेंभी उसी तरह की र्एंगीं, रैस् कक “अल-लजनतुद-द्इम् लील-बुहस अल-इलवमयय् िल-इफ़त् के फति् मेंआय् है, इसतरह इक़्मत की सुन्नतेंबीस हो र्एंगी रो हर नम्ज़ केसमय अमल मेंआती हैं.

आज़्न और इक़्मत केसमय वनम्नवलवखत ब्तों को धय्न मेंरखन् अचछ् है, त्कक अलल्ह की अनुमवत सेउसकी आज््क्री हो और उसकी ओर सेपूर् पूर् इन्म वमल सके. क - आज़्न और इक़्मत केसमय क्अब् की ओर मुंह रखन् च्वहए.

ख – खड़् रहन् च्वहए . ग - आज़्न और इक़्मत दोनों मेंपवित्र रहन् च्वहए, यकद मरबूरी न हो, इक़्मत की शुद्धत् केवलए तो पवित्रत् ज़रुरी है. घ - आज़्न और इक़्मत केसमय ब्त न करन् विशेष रूप से, उन दोनों के बीच ि्लेसमय में. ड़ – इक़्मत केदौर्न वसथरत् बन्ए रखन्. च- समम्वनत श्द “अलल्ह“ को स्फ़ स्फ़ बोलन् च्वहए, विशेष रूप से “अलल्ह“ के“अ“ और “ह“ को, और आज़्न मेंरब रब भी यह श्द दुहर्य् र्त् हैिह्ूँइस पर धय्न देन् आिशयक है, लेककन इक़्मत मेंतो ज़र् तेज़ तेज़ और रलदी रलदी ही बोलन् च्वहए. छ - आज़्न केदौर्न दो उंगवलयों को क्नों मेंरखन् भी सुन्नत है.

र- आज़्न मेंआि्ज़ को ऊूँची रखनी च्वहए और जखंचन् च्वहए लेककन इक़्मत मेंएक हद तक कम करन् च्वहए. झ – आज़्न और इक़्मत केबीच थोड़् समय छोड़न् च्वहए, हदीसों मेंयह उललेवखत हैकक दोनों केबीच इतन् समय होन् च्वहए वरतनेमेंदो रकअत नम्ज़ पढ़ी र् सकेय् सरदेककयेर् सकें, य् तसबीह पढ़ी र् सके, य् बैठ सके य् ब्त कर सके, लेककन मगररब की नम्ज़ की आज़्न और इक़्मत केबीच केिल स्ंस लेनेभर समय ही क्फी है.

लेककन य्द रहेकक उन दोनों केबीच मेंब्त करन् मकरूह य् न-पसंद है, रैस् कक सुबह की नम्ज़ ि्ली हदीस मेंउललेवखत है. और कुछ विद््नों नेकह् है

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२९
कक एक क़दम चलनेभर समय भी क्फी है, य्द रहेकक इस

कक एक क़दम चलनेभर समय भी क्फी है, य्द रहेकक इस मेंकोई बुर्ई नहीं हैबवलक इस मेंतो रैस् भी हो ब्त बन र्ए गी. ञ - आज़्न और इक़्मत सुननेि्लेकेवलए पसंदीद् ब्त यह हैकक आज़्न में वरन श्दों को सुनत् हैउनहेंदुहर्त् र्ए, भलेही यह आज़्न कुछ खबर देने केवलए हो, य् नम्ज़ की आज़्न हो, लेककन रब इक़्मत में“क़द क़्मवतस- सल्“ (नम्ज़ खड़ी हो चुकी है) को सुनतेसमय यह कहन् च्वहए:“ल् हौल् िल् क़ुवित् इलल् वबलल्ह“ (न कोई शवति हैऔर न कोई बल हैमगर अलल्ह ही से.)

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सुतर्(य् आड़) की ओर नम्ज़ पढ़न् हज़रत पैगंबर-उन पर

सुतर्(य् आड़) की ओर नम्ज़ पढ़न्

आड़) की ओर नम्ज़ पढ़न् हज़रत पैगंबर-उन पर
आड़) की ओर नम्ज़ पढ़न् हज़रत पैगंबर-उन पर
आड़) की ओर नम्ज़ पढ़न् हज़रत पैगंबर-उन पर
आड़) की ओर नम्ज़ पढ़न् हज़रत पैगंबर-उन पर
आड़) की ओर नम्ज़ पढ़न् हज़रत पैगंबर-उन पर

हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्: तुम मेंसे रब कोई नम्ज़ पढ़ेतो ककसी आड़ की ओर नम्ज़ पढ़ेऔर उस केनज़दीक हो र्ए और अपनेआड़ और अपनेबीच सेककसी को भी गुज़रनेन दे. इसेअबू- द्ऊद, इब्े-म्र् और इब्े-खुज़ैम् नेउललेख ककय् है.

* यह एक स्म्नय हदीस हैवरस मेंनम्ज़ केसमय “सुतर्“ य् आड़ रखनेके

सुन्नत होनेक् प्म्र मौरूद है, च्हेमवसरद मेंहो य् घर में, इसी तरह स्ती और पुरुष इस मेंबर्बर हैं, लेककन कुछ नम्वज़यों नेअपनेआपको इस सुन्नत से िंवचत कर रख् है, इसवलए हम देखतेहैंकक िेवबन् आड़ रखेनम्ज़ पढ़तेहैं.

* यह सुन्नत एक मुसलम्न केस्थ कदन-र्त मेंकई ब्र आती है, रैसेवनवचित सुन्नत नम्रों में, और कदन चढ़नेकेसमय की नम्ज़ में, इसी तरह तवहययतुल- मवसरद य् मवसरद मेंप्िेश होनेकी नम्ज़ केसमय और वितर नम्ज़ केसमय, र्नन् च्वहए कक यह सुन्नत मवहल् केस्थ भी लगी हुई है, यकद िह घर में अकेलेफ़ज़जानम्ज़ पढ़ती है, लेककन समूह की नम्ज़ मेंइम्म ही अपनेपीछे नम्ज़ पढ़नेि्लों क् सुतर् होत् है.

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सुतर् य् आड़ केब्रेमेंकुछ विषय १ – कोई भी चीज़ रो

सुतर् य् आड़ केब्रेमेंकुछ विषय

सुतर् य् आड़ केब्रेमेंकुछ विषय
सुतर् य् आड़ केब्रेमेंकुछ विषय
सुतर् य् आड़ केब्रेमेंकुछ विषय

१ – कोई भी चीज़ रो नम्ज़ पढ़नेि्लेके स्मनेक्अब् की कदश् में खड़ी हो िह आड़ समझी र् सकती हैरैसेदीि्र, छड़ी य् खमभ्, सुतर् की मोट्ई केवलए कोई सीम् नहीं रखी गई है.

२ – लेककन सुतर् की ऊूँच्ई ऊं ट केऊपर रखेर्नेि्लेक्ठी केकर्िेके वपछलेभ्ग केबर्बर होनी च्वहए य्नी लगभग एक ब्वलशत.

३- सुतर् और नम्ज़ पढ़नेि्लेकेबीच की दूरी लगभग तीन गज़ होनी च्वहए य् इतनी दूरी होनी च्वहए कक उसकेबीच सरद् संभि हो.

४ – सुतर् तो इम्म और अकेलेनम्ज़ पढ़नेि्लेदोनों केवलए है, च्हेफ़ज़जा नम्ज़ हो य् न्फल.

५ - इम्म क् सुतर् ही उनके पीछेनम्ज़ पढ़नेि्लों के वलए भी आड़ है, इसवलए ररूरत पड़नेपर उनकेस्मनेसेगुज़रनेकी अनुमवत है.

सुतर् (य् आड़) की सुन्नत पर अमल करनेकेपररर्म:

क) यकद स्मनेसेनम्ज़ को तोड़नेि्ली य् उसमेंगड़बड़ी ड्लनेि्ली कोई चीज़ गुज़रेतो सुतर् नम्ज़ को टूटनेसेबच्त् है. ख) सुतर् नज़र को इिरउिर बहकनेऔर त्क-झ्ंक सेबच्त् है, कयोंकक सुतर् रखनेि्ल् अकसर अपनी नज़र को अपनेसुतरेकेभीतर ही रखत् है, और इस सेउसक् विच्र नम्ज़ सेसंबंवित ब्तों मेंही घूमत् है.

ग) सुतर् स्मनेसेगुज़रनेि्लों को स्मनेसेगुज़रनेक् अिसर उपल्ि करत् है, इसवलए वबलकुल उसकेस्मनेसेगुज़रनेकी ज़रूरत ब्क़ी नहीं रह र्ती है.

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३२

ऐसी

मेंपढ़ी र्ती हैं

न्फल नम्ज़ेंरो कदन और र्त

नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्
नम्ज़ेंरो कदन और र्त १ – वनवचित सुन्नतेंय्

१ – वनवचित सुन्नतेंय् सुन्नते-मुअक्द्: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्:रो भी मुसलम्न व्यवति अलल्ह सिजाशवतिम्न केवलए फ़ज़जाकेवसि्य ब्रह रकअत न्फल पढ़त् हैतो अलल्ह उसकेवलए सिगजामें एक घर क् वनम्जार कर देत् है,य् उसकेवलए सिगजामेंएक घर क् वनम्जार कर कदय् र्त् है.) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय्.

* यह सुन्नतेंइस तरह हैं: च्र रकअत ज़ुहर सेपहलेऔर दो रकअत उसकेब्द, और दो रकअत मगररब केब्द और दो रकअत इश् केब्द और दो रकअत फ़रर सेपहले.

* वप्य भ्ई! कय् आपको सिगजामेंएक घर प्नेकी इचछ् नहीं है? हज़रत

पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- केइस सल्ह क् खय्ल रखें, और फ़ज़जाकेइल्ि् ब्रह रकअत पढ़न् न भूलें.

ज़ुह् की नम्ज़ य् कदन चढ़नेकेसमय की नम्ज़ : ज़ुह् की नम्ज़ ३६० द्न केबर्बर है, कयोंकक म्नि शरीर में३६० हड्ी य् रोड़ हैं, और प्तयेक कदन हर हड्ी य् हर अंग केरोड़ केबदलेमेंएक द्न द्न करनेकी ज़रूरत है, त्कक इस उद्रत् केवलए िनयि्द हो सके, लेककन इन सब की ओर सेज़ुह् की दो रकअत नम्ज़ क्फी हो र्ती है.

इन दोनों रकअत केफल: रैस् कक इम्म मुवसलम की “सहीह“ न्मक पुसतक में उललेवखत है, हज़रत अबू-ज़रजासेसुनी गई हैकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेबत्य् कक: (तुम मेंसेककसी भी व्यवति पर प्तयेक अंग केरोड़ की ओर सेएक द्न करन् है, अलल्ह की पवित्रत् को बय्न करन् भी एक द्न है, और अचछी ब्त क् आदेश देन् भी एक द्न है, और ककसी बुर्ई सेरोकन् भी एक द्न है, और इन सब केवलए रो ज़ुह् की दो रकअत पढ़ेले तो यह क्फ़ी है. इस हदीस मेंएक अरबी श्द “सुल्म्“ “ىملاس“

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आय् हैउसक् अथजाहै: रोड़ य्नी म्नि शरीर के अंगों क् रोड़. और हज़रत अबू-हुरैर्-अलल्ह उनसेखुश रहे- केद््र् उललेख की गई कक उनहोंनेकह्: मुझेमेरेय्र -उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेप्तयेक महीनेमेंतीन कदन रोज़ेरखनेक्, और ज़ुह् की दो रकअत पढ़नेक् आदेश कदय्, और यह कक सोनेसेपहलेवितर की नम्ज़ पढूं. इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं. इस नम्ज़ क् समय: इस नम्ज़ क् समय सूयजाकेवनकलनेकेपंद्रहि जमंट के ब्द सेशुरू होत् हैऔर ज़ुहर की नम्ज़ क् समय आनेसेपंद्रहि जमंट पहले सम्प्त होत् है. इस नम्ज़ को पढ़नेक् सब सेअचछ् समय: सूरर की गमती केतेज़ होनेकेसमय इस को पढ़न् अविक अचछ् है. इस नम्ज़ की रकअतों की संखय्: कम सेकम उसकी संखय् दो रकअत है.

उसकेअविक्ंश की संखय्: अविक सेअविक उसकी रकअतों की संखय् आठ हैं, लेककन यह भी कह् गय् हैकक उसकेअविक्ंश की कोई सीम् नहीं है. २- ज़ुहर की सुन्नत: ज़ुहर सेपहलेपढ़ी र्नेि्ली वनवचित सुन्नत च्र रकअत है, रबकक ज़ुहर केब्द पढ़ी र्नेि्ली सुन्नत दो रकअत है, रो ज़ुहर केफ़ज़जा नम्ज़ केब्द पढ़ी र्ती है.

३ –असर की सुन्नत: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-ने कह्: (अलल्ह आदमी पर दय् करेरो असर सेपहलेच्र रकअत पढ़े) अबू- द्ऊद और वतरवमज़ी नेइसेउललेख ककय् है. ४ – मगररब की सुन्नत : हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-ने कह्: (मगररब सेपहलेनम्ज़ पढ़ो, तीसरी ब्र मेंउनहोंनेकह्: रो पढ़न् च्हे.) इसेबुख्री नेउललेख ककय्.

५ –इश् की सुन्नत: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-ने कह्: (प्तयेक दो आज़्न केबीच एक नम्ज़ है, प्तयेक दो आज़्न केबीच एक नम्ज़ है, प्तयेक दो आज़्न केबीच एक नम्ज़ है, और तीसरी ब्र मेंकह्: रो पढ़न् च्हे.) इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं. * इम्म नििी नेकह्: दो आज़्न क् मतलब आज़्न और इक़्मत है.

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तहज्ुद य् र्त की नम्ज़ की सुन्नतें

की नम्ज़ की सुन्नतें हज़रत पैगंबर-उन पर
की नम्ज़ की सुन्नतें हज़रत पैगंबर-उन पर
की नम्ज़ की सुन्नतें हज़रत पैगंबर-उन पर
की नम्ज़ की सुन्नतें हज़रत पैगंबर-उन पर
की नम्ज़ की सुन्नतें हज़रत पैगंबर-उन पर
की नम्ज़ की सुन्नतें हज़रत पैगंबर-उन पर

हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्:

(रमर्न केरोज़ेकेब्द सबसेअचछ् रोज़् अलल्ह केसमम्वनत महीने“मुहरजाम“ केरोज़ेहैं, और फ़ज़जानम्ज़ केब्द सबसेअचछी नम्ज़ र्त की नम्ज़ (तहज्ुद) की नम्ज़ है. इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

१ – तहज्ुद की नम्ज़ केवलए सब सेअचछी संखय् गय्रह य् तेरह रकअत है, विशेष रूप सेदेर देर तक खड़ेरह कर. कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- केविषय मेंएक हदीस मेंहैकक : (हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- गय्रह रकअत पढ़् करतेथे, यही उनकी नम्ज़ थी.) इसेबुख्री नेउललेख ककय् है. एक और बय्न मेंहैकक:(िह र्त मेंतेरह रकअत नम्ज़ पढ़् करतेथे.) इसेभी बुख्री नेउललेख ककय् है. २- और रब र्त की नम्ज़ केवलए उठेतो वमसि्क करन् सुन्नत है, इसी तरह यह भी सुन्नत हैकक सुरह आले-इमर्न की इस आयत को :

(ِباَبْل َ لأْا يِلو ُ لأِ ٍتايلَ ِراَهَّهنلاَو ِلْيَّهللا ِفلاِتْخاَو ِضْر َ لأْاَو ِتاَواَمَّهسلا ِقْلَخ يِف َّهنِإ) (१९० :نارمع لآ) वनससंदेह आक्शों और िरती की रचन् मेंऔर र्त और कदन केआगे-पीछे) (ब्री-ब्री आनेमेंबुवद्धम्नों केवलए वनश्वनय्ूँहैं.) (आले-इमर्न: १९० सेलेकर सूर् केअंत तक पढ़े.

३ – इसी तरह यह भी सुन्नत हैकक रो दुआएं हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-सेस्वबत हैंिेदुआएं पढ़ेवरन मेंयह दुआ भी श्वमल है:

تنأ دمحلا كلو ، نهيف نمو ضرلأاو تاومسلا ميق تنأ دمحلا كل مهللا) ، ضرلأاو تاومسلا كلم تنأ دمحلا كلو ، نهيف نمو ضرلأاو تاومسلا رون ةنجلاو ، قح كلوقو ، قح كؤاقلو ، قحلا كدعوو ، قحلا تنأ دمحلا كلو (قح نويبنلاو ، قح رانلاو ، قح अलल्हुमम् लकल हमद, अनत् क़ययेमुस-सम्ि्वत िल-अज़जाि मन कफ वहन्न्, ि लकल हमद अनत् नुरुस-सम्ि्वत िल-अज़जाि मन कफ वहन्न्, ि लकल हमद अनत् मवलकुस-सम्ि्वत िल-अज़जा, ि लकल हमद अनतल-हकक़, ि िअदुकल- हकक़, ि वलक़्उक् हकक़, िल-रन्नतुहकक़, ि क़ौलुक् हकक़, िल-रन्नतु-हकक़, िन-न्रू हकक़, िन-नवबययून् हकक़.

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(हेअलल्ह! स्री प्शंस् तेरेवलए है, तूआक्शों क् और पृथिी क् वसररनह्र और रखि्ल् हैऔर रो उनमेंहैं, स्री प्शंस् तेरेवलए है, तूप्क्श हैआक्शों क् और पृथिी क् और रो उनमें हैं, और स्री प्शंस् तेरेवलए है तूआक्शों क् और पृथिी क् म्वलक है, और स्री प्शंस् तेरेवलए हैतूहक़ है, और तेर् िचन हक़ है, और तुझ सेभेंट हक़ है, और तेरी ब्त हक़ है, और सिगजाहक़ है, और नरक हक़ है, और सब पैगंबर हक़ हैं.)

४ – सुन्नतों मेंयह भी श्वमल हैकक र्त की नम्रों को पहलेदो हलकी-फुलकी रकअतों सेशुरू की र्ए, यह इसवलए त्कक उन दोनों रकअतों केद््र् ब्द की नम्रों केवलए चुसत रह सके: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-नेकह्:(रब तुम मेंसेकोई र्त की नम्ज़ केवलए खड़् हो तो दो हलकी-फुलकी रकआतों सेशुरू करे.) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

५ – इसी तरह यह भी सुन्नत हैकक र्त की नम्ज़ को हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-सेस्वबत दुआ सेशुरू करे:वरन मेंसेएक दुआ यह है:

ملاع ، ضرلأاو تاومسلا رطاف ، ليفارسإو ليئاكيمو ليربج بر مهللا) امل يندهإ نوفلتخي هيف اوناك اميف كدابع نيب مكحت تنأ ، ةداهشلاو بيغلا (ميقتسم طارص ىلإ ءاشت نم يدهت كنإ كنذإب قحلا نم هيف فلتخا

(अलल्हुमम् र्ब् वरबरील् ि मीक्ईल् ि इसर्फील्, फ्वतरस-सम्ि्वत िल-अज़जा, आवलमल-गैवब िश-शह्द्, अनत् तहकुमुबैन् इब्कदक् फीम् क्नू फ़ीवह यखतवलफून, एहकदनी वलमख-तुवलफ् फीवह वमनल-हवकक़ वबइज़वनक् इन्नक् तहदी मन तश्उ इल् वसर्वतम-मुसत्क़ीम) (हेअललह! वरबरील और मीक्ईल और इसर्फील क् म्वलक! आक्शों और पृथिी क् रचवयत्, खुली और ढकी क् र्ननेि्ल्, तूअपनेभतिों केबीच ऐसी हकक़ ब्तों मेंफैसल् करत् हैवरन मेंविि्द ककय् गय्, तूमुझेअपनी दय् सेविि्द ि्लेहकक़ मेंम्गजादे, वनससंदेह तूवरसेच्हत् है, सीिेर्सते पर ल्त् है.) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

६ - र्त की नम्ज़ को लंबी करन् भी सुन्नत मेंश्वमल है, हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-सेप्श्न ककय् गय् कक कौन सी नम्ज़ अविक

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सर्हनीय है? तो उनहोंनेउत्तर कदय् “तूलुल-क़ुनूत“ य्नी देर तक नम्ज़ मेंठहरन्.) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय्. इस हदीस मेंरो: “तूलुल-क़ुनूत“ “تونقلا لوط“

हैउसक् अथजाहै: देर तक नम्ज़ मेंठहरेरहन्.

७ – रब सज़् सेसंबंवित क़ुर्न की आयत आए तो अलल्ह की पन्ह म्ूँगन्

भी सुन्नत है, उस समय यह

पढ़न् च्वहए:

] للا باذع نم للاب ذوعأ [

(अऊज़ुवबलल्वह वमन अज़्वबलल्वह) ]मैंअलल्ह की शरर मेंआत् हूँअलल्ह की सज़् से). और रब दय् सेसंबंवित आयत आए तो दय् म्ंगनी च्वहए और यह पढ़न् च्वहए:

] كلضف نم كلأسأ ينإ مهللا [

(अलल्हुमम् इन्नी असअलुक् वमन फज़वलक्) ]हेअलल्ह! मैंतुझ सेतेरी कृप् म्ंगत् हूँ[ और रब अलल्ह की पवित्रत् सेसंबंवित आयत आए तो अलल्ह की पवित्रत् व्यति करे.

आयत आए तो अलल्ह की पवित्रत् व्यति करे. ३७
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वितर और उसकी सुन्नतें १-रो व्यवति तीन रकअत

वितर और उसकी सुन्नतें

वितर और उसकी सुन्नतें १-रो व्यवति तीन रकअत
वितर और उसकी सुन्नतें १-रो व्यवति तीन रकअत
वितर और उसकी सुन्नतें १-रो व्यवति तीन रकअत
वितर और उसकी सुन्नतें १-रो व्यवति तीन रकअत

१-रो व्यवति तीन रकअत वितर पढ़ेतो उसकेवलए सुन्नत यह हैकक पहली रकअत मेंसूरे-फ्वतह् पढ़नेकेब्द सूरह “सव्बवहसम् रव्बकल अअल्“ पढ़े और दूसरी रकअत में“ क़ुल य् ऐययुहल-क्कफरून“ पढ़े, और तीसरी रकअत में“ क़ुल हु िलल्हु अहद “ पढ़े. रैस् कक अबू-द्ऊद, वतरवमज़ी, इब्े-म्र् और नस्ई नेउललेख ककय् है. २ – रब वितर की तीन रकअत पढ़कर सल्म फेर लेतो तीन ब्र यह पढ़े:

( سودقلا كلملا ناحبس )

(सुबह्नल-मवलककल-क़ुददुस) (पवित्रत् हो अतयंत पवित्र म्वलक केवलए) और तीसरी ब्र इसेज़र् ज़ोर से और खींच कर पढ़ेऔर उसकेस्थ इस श्द को बढ़्ए:

( حورلاو ةكئلاملا بر )

(र्बल-मल्इकतेिर-रूह) हेफररशतों और आतम् क् म्वलक!. इसेअरन्ऊत न्मक विद््न नेविश्वसनीय बत्य्, अबू-द्िूद और नस्ई नेइसेउललेख ककय् है.

बत्य्, अबू-द्िूद और नस्ई नेइसेउललेख ककय् है. ३८
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फज्र की सुन्नत

फज्र की सुन्नत इसकी कुछ विशेष सुन्नतेंहैं: १ –
फज्र की सुन्नत इसकी कुछ विशेष सुन्नतेंहैं: १ –
फज्र की सुन्नत इसकी कुछ विशेष सुन्नतेंहैं: १ –

इसकी कुछ विशेष सुन्नतेंहैं:

कुछ विशेष सुन्नतेंहैं: १ – इसेसंवक्षप्त रूप

१ – इसेसंवक्षप्त रूप सेपढ़न्: कयोंकक हज़रत आइश्-अलल्ह उनसेखुश रहे- नेकह्: हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- सुबह की नम्ज़ की आज़्न और इक़्मत केबीच दो संवक्षप्त रकअतेंपढ़तेथे. इम्म बुख्री और मुवसलम इस पर सहमत हैं. २ – इन दोनों रकअतों मेंकय् पढ़न् च्वहए? हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो-सुबह की नम्ज़ की पहली रकअत मेंसूरह अल-बक़र् की आयत नंबर १३६ पढ़तेथे, आयत क् शुरू इस तरह है:

(ةرقبلا)(اَنْيَلِإ َلِزْن ُ أ اَمَو َِّهللاِب انَمآَّه اوُلوُق१३६) कहो :“ हम ईम्न ल्ए अलल्ह पर और उस ब्त पर रो हम्री ओर उत्री गई.“ (अल-बक़र्:१३६) और एक बय्न केअनुस्र दूसरी रकअत मेंसूरह आले-इमर्न की आयत नंबर ५२ पढ़तेथे, आयत इस तरह है:

(نارمع لآ) ( َنوُمِلْسُم اَّهنَأِب ْدَهْشاَو َِّهللاِب انَمآَّه :५२( “हम अलल्ह पर ईम्न ल्ए और गि्ह रवहए कक हम मुवसलम हैं“(आले- इमर्न:५२) और उसकी दूसरी रकअत मेंयह आयत पढ़तेथे:

نارمع لآ) (مُكَنْيَبَو اَنَنْيَب ٍءاَوَس ٍةَمِلَك ىَلِإ اْوَلاَعَت ِباَتِكْلا َلْه َ أ اَي ْلُق:६४)) कहो:“ऐ ककत्बि्ले! आओ एक ऐसी ब्त की ओर वरसेहम्रेऔर तुमह्रे बीच सम्न म्नयंत् प््प्त है.“(आले-इमर्न:६४) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है. * एक अनय बय्न मेंहैकक फरर की दो रकअत में“ क़ुल य् ऐययुहल-क्कफरून“ और “ क़ुल हु िलल्हु अहद“ पढ़े. इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

३ – लेटन् : कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- रब फरर की दो रकअत पढ़ लेतेथेतो अपनेद्वहनेपहलूपर लेटतेथे. इसेइम्म बुख्री नेउललेख ककय् हैं. रब आप अपनेघर मेंफरर की दो रकअत पढ़ लेतेहैंतो उसकेब्द कुछ सेकंड केवलए ही सही लेटये, त्कक सुन्नत पर अमल होर्ए.

३९
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नम्ज़ केब्द बैठन्

नम्ज़ केब्द बैठन् नम्ज़ केब्द बैठन् भी सुन्नत है
नम्ज़ केब्द बैठन् नम्ज़ केब्द बैठन् भी सुन्नत है
नम्ज़ केब्द बैठन् नम्ज़ केब्द बैठन् भी सुन्नत है

नम्ज़ केब्द बैठन् भी सुन्नत है कयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो

हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो ४०
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नम्ज़ की श्व्दक सुन्नतें

की श्व्दक सुन्नतें १ – नम्ज़ केआरंभ की दुआ-
की श्व्दक सुन्नतें १ – नम्ज़ केआरंभ की दुआ-
की श्व्दक सुन्नतें १ – नम्ज़ केआरंभ की दुआ-

१ – नम्ज़ केआरंभ की दुआ- मतलब तकबीरेतहरीम् केब्द की दुआ और िह इस तरह है:

(كريـغ هـلإ لاو كدج ىلاعتو كمسا كرابتو كدمحبو مهللا كناحبس) (सुबह्नकल-ल्हुमम् ि वबहमकदक् ि तबर्कस-मुक् ि तआल् रददुक् ि ल् इल्ह् गैरुक्) «हेअलल्ह! तुझेपवित्रत् हो तेरी प्शंस् केस्थ, तेर् न्म बरकत ि्ल् है और तेर् पद बहुत ऊूँच् है, और तुझको छोड़कर और कोई पूरनीय नहीं है.» इसेच्रों इम्मों: न्स्ई, वतरवमज़ी, अबू-द्िूद और इब्े-म्र् नेउललेख ककय् है.

• इस सेसंबंवित एक दूसरी दुआ भी है, और िह कुछ इस तरह है:

مهللا ، برغملاو قرشملا نيب تدعاب امك ياياطخ نيبو ينيب دعاب مهللا) نم ينلسغا مهللا ، سندلا نم ضيبلأا بوثلا ىقني امك ياياطخ نم ينقن (دربلاو ءاملاو جلثلاب ياياطخ

«अलल्हुमम् ब्इद बैनी ि बैन् खत्य्य कम् ब्अदत् बैनल-मशररक़ िल- मगररब, अलल्हुमम् नवकक़नी वमन ख्त्य्य कम् युनकक़स-सौबुल-अबयज़ु वमनद-दनस, अलल्हुममग-वसलनी वमन खत्य्य वबस-सलवर- िल-म्इ िल- बरद»

(हेअलल्ह! मुझेऔर मेरेप्पों केबीच इतनी दूरी करदेवरतनी दूरी पूरब और पवचिम केबीच है, हेअलल्ह! मुझेमेरेप्पों सेऐस् सुथर् करदे, रैसेसफेद कपड़् मैल सेस्फ़ ककय् र्त् है, हेअलल्ह! मुझेमेरेप्पों सेिुल दे, बफजा से और प्नी सेऔर ओलेसे) इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् है.

य्द रहेकक नम्ज़ केआरंभ की रो दुआएं यह्ूँवलखी गई हैंउनमेंसेककसी को भी चुनकर पढ़ सकतेहैं. २ – पवित्र कुर्न को पढ़नेसेपहलेअलल्ह की शरर म्ंगतेहुए यह पढ़न् च्वहए:

(ميجرلا ناطيشلا نم للاب ذوعأ)

४१
४१

(अऊज़ुवबलल्वह वमनश-शैत्वनर-ररीम) ]मैंशैत्न श्वपत सेअलल्ह की शरर मेंआत् हूँ[ ३ – «वबवसमलल्ह» पढ़न् भी सुन्नत है: उसकेश्द यह हैं:

(ميحرلا نمحرلا للا مسب) «वबवसमलल्वहर-रहम्वनर-रहीम (अलल्ह के न्म से रो बड़् कृप्शील, अतयंत दय्ि्न है).

४ – सूरह फ्वतह् केब्द «आमीन» (सिीक्र करले) कहन्. ५ - सूरह फ्वतह् पढ़नेकेब्द एक और कोई सूरह उसकेस्थ पढ़न्, और यह वनयम फरर की दोनों रकअतों मेंऔर शुक्रि्र की नम्ज़ की दोनों रकअतों में, और मगररब की पहली दोनों रकअतों में, और च्र रकअत ि्ली ककसी भी नम्ज़ की पहली दोनों रकअतों मेंल्गूहोग्. इसी तरह तनह् नम्ज़ पढ़ने ि्ल् और स्री न्फल नम्रों मेंभी इसी वनयम पर चलन् च्वहए. लेककन ककसी इम्म के पीछेनम्ज़ पढ़नेि्ल् व्यवति आवहसत् ि्ली नम्ज़ मेंतो सूरह फ़्वतह् पढ़ेग् लेककन ज़ोर सेकुर्न पढ़नेकी नम्ज़ मेंसूरह फ़्वतह् नहीं पढ़ेग्.

६ – और यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

لهأ دعب ءيش نم تئش ام ءلمو ، امهنيب امو ضرلأا ءلمو تاومسلا ءلم) لاو تيطعأ امل عنام لا مهللا ، دبع كل انلكو، دبعلا لاق ام قحأ ، دجملاو ءانثلا (دجلا كنم دجلا اذ عفني لاو تعنم امل يطعم (वमलउस-समि्वत िल-अरज़जािम् बैन्हुम्, ि वमलआ म् वशअत् वमन शैए, बअद् अहवलस-सन्इ िल-मरद, अहकक़ु म् क़्लल-अ्द, ि कुललुन् लक् अ्द, अलल्हुमम् ल् म्वनआ वलम् अअतैत् िल् मुअवतय् वलम् मनअत् िल् यनफ़उ ज़ल-रकद् वमनकल-रद्.)

«हेअलल्ह!तेरेवलए प्शंस् हैआक्शों भर और पृथिी भर, और रो भी उन दोनों केबीच है, और प्शंस् करनेि्लेऔर समम्न ि्लेकेब्द वरस चीज़ को भी तूच्हेउस चीज़ केबर्बर तेरी प्शंस् हो, भति नेरो कह् हैउसक् तू ही वज़य्द् अविक्र है, और हम सब तेरेभति हैं, हेअलल्ह! रो तूदेउसक् कोई रोकनेि्ल् नहीं, और वरसको तूरोक देउसेकोई देनेि्ल् नहीं, तेरेप्स समम्न ि्लेक् समम्न कुछ क्म नहीं देत्.» इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

४२
४२

और रुकूअ सेउठनेकेब्द यह पढ़े:

(دمحلا كلو انبر)

«र्बन् ि लकल-हमद» (हेहम्र् प्लनह्र! और तेरेवलए ही स्री प्शंस् है.) ७ –सरद् और रुकूअ मेंरो भी «तसबीह» एक ब्र सेवज़य्द् होगी िह सुन्नत मेंश्वमल है. ८ – और दोनों सरदों केबीच «रव्बग-कफ़र ली» (हेमेर् प्लनह्र! मुझेम्फ करदे) यकद एक ब्र सेअविक पढ़त् हैतो िह भी सुन्नत मेंश्वमल होग्.

९- आवखरी तशहहुद केब्द यह दुआ पढ़े:

ايحملا ةنتف نمو ربقلا باذع نمو منهج باذع نم كب ذوعأ ينإ مهللا) (لاجدلا حيسملا ةنتف نمو تامملاو (अलल्हुमम् इन्नी अऊज़ुवबक् वमन अज़्वब रहन्नम ि वमन अज़्वबल –क़बरर ि वमन कफतनवतल-महय् िल-मम्त, ि वमन कफतनवतल-मसीवहद-दज््ल.) «हेअलल्ह! मैंतेरी पन्ह मेंआत् हूँनकजाकी तकलीफ़ से, और क़बर की तकलीफ़ सेऔर रीिन और मृतयुकेपरीक्षरों से, और मसीह दज््ल केपरीक्षर से.» इसे बुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् है.

• और बेहतर यह हैकक नम्ज़ पढ़नेि्ल् सरदों मेंकेिल «तसबीह» पर ही बस न करेबवलक इसकेअल्ि् रो दुआ करन् च्हेकरे, कयोंकक हदीस मेंहै:( एक भति अपनेप्लनह्र केसब सेअविक उसी समय नज़दीक होत् हैरब िह सरदेकी वसतवथ मेंहोत् है, तो उसमेंअविक सेअविक दुआ ककय् करो) इसे इम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है.

* इस वसलवसलेमेंऔर भी बहुत स्री दुआएं हैं, वरसेदेखन् हो िह «वहस्ुल- मुवसलम» न्मक पुसतक लेखक क़हत्नी को देख सकत् है.

*वरतनेभी श्व्दक सुन्नतेंहैंिेप्तयेक रकअत मेंपढ़ेर्तेहैंवसि्य नम्ज़ के शुरू की दुआ, और वसि्य उस दुआ केरो तशहहुद केब्द पढ़ी र्ती है.

* इस तरह केिल श्व्दक सुन्नतों की संखय् रो ्फज़जानम्ज़ मेंपढ़ी र्ती है १३६ सुन्नत हो र्एगी कयोंकक फ़ज़जारकअतों की संखय् १७ हैऔर ब्र ब्र आनेि्ली सुन्नतों की संखय् आठ है.

४३
४३

* और श्व्दक सुन्नतेंकी संखय् रो न्फल नम्ज़ मेंपढ़ी र्ती है

१७५ सुन्नत है, कयोंकक न्फल रकअतों की संखय् २७ हैरैस् कक हम नेर्त-कदन मेंपढ़ी र्नेि्ली सुन्नतों केविषय मेंउललेख ककय् है. य्द रहेकक न्फल नम्ज़ की रकअतों की संखय् और भी बढ़ सकती है, विशेष रूप सेरब र्त की नम्ज़ और ज़ुह् की नम्ज़ की रकअतों को बढ़्य् र्ए, उसी केअनुस्र इस सुन्नत केअमल मेंभी बढ़्ि् होग्.

और ऐसी श्व्दक सुन्नतेंरो नम्ज़ मेंकेिल एक ब्र पढ़ी र्ती हैं दोहर्ई नहीं र्ती हैंइस तरह हैं:

१- नम्ज़ शुरू करनेकी दुआ. २ – और तशहहुद केब्द की दुआ. इस तरह फ़ज़जानम्ज़ मेंइस सुन्नत की संखय् कुल दस होगी.

* और कदन-र्त मेंपढ़ी र्नेि्ली सुन्नत नम्रों मेंइस सुन्नत की संखय् २४ होगी, उललेखनीय हैकक इस की संखय् और भी बढ़ सकती है, यकद र्त की नम्ज़ और ज़ुह् की नम्ज़ और तवहययतुल-मवसरद य् मवसरद मेंप्िेश होने की नम्ज़ को भी बढ़्य् र्ए, तो उसी केवहस्ब सेइस सुन्नत केअमल में भी बढ़्ि् होग् भलेही यह सुन्नत एक नम्ज़ मेंएक ब्र सेअविक नहीं पढ़ी र्ती, और इस तरह पुणय भी बढ़ेग् और सुन्नत पर अमल भी आगेबढ़ेग्.

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४४

नम्ज़ की अमली सुन्नतें

नम्ज़ की अमली सुन्नतें १- इहर्म की तकबीर(य्नी
नम्ज़ की अमली सुन्नतें १- इहर्म की तकबीर(य्नी
नम्ज़ की अमली सुन्नतें १- इहर्म की तकबीर(य्नी

१- इहर्म की तकबीर(य्नी नम्ज़ शुरू करने) केस्थस्थ दोनों ह्थों को उठ्न् l २ – रुकूअ केवलए झुकतेसमय भी दोनों ह्थों को उठ्न् l ३ - रुकूअ सेउठतेसमय भी दोनों ह्थों को उठ्न् l ४ - तीसरी रकअत केवलए उठतेसमय दोनों ह्थों को उठ्न्, और यह उसी नम्ज़ मेंहोग् वरस मेंदो तशशहुद होतेहैंl ५ - ह्थ उठ्तेसमय और छोड़तेसमय उंगवलयों को एक दूसरेकेस्थ वमल्ए रखन् l ६ - उूँगवलयों को खुलेखुलेरखन् और हथेली को कक़बल्(पवित्र कअब्) की और रखन् l ७ - उूँगवलयोंको उठ्तेसमय दोनों कंिेकेबर्बर य् दोनों क्नों की लोलककयों केबर्बर रखन् l ८ – द्वहनेह्थ को ब्एं ह्थ पर रखन्, अथि् द्वहनेह्थ सेब्एं ह्थ की कल्ई की हड्ी को पकड़न् l ९ – नज़र को सरद् की रगह पर रखन् l १० – दोनों पैरों को थोड़् अलग अलग रखन् l ११ – पवित्र कुर्न को ठहर ठहर कर आर्म सेउसके अथजामेंसोच-विच्र करतेहुए पढ़न् l

आर्म सेउसके अथजामेंसोच-विच्र करतेहुए पढ़न् l ४५
४५
४५

रुकूअ मेंकी र्नेि्ली सुन्नतें

र्नेि्ली सुन्नतें १ – रुकूअ मेंअपनेकदनों
र्नेि्ली सुन्नतें १ – रुकूअ मेंअपनेकदनों

१ – रुकूअ मेंअपनेकदनों ह्थों सेदोनों घुटनों को पकड़न् और उंगवलयों को फैल्ए हुए रखन् l

२ -रुकूअ मेंअपनी पीठ को लंबी और बर्बर रखन् l ३ – नम्ज़ी को अपन् वसर अपनी पीठ केबर्बर रखन् च्वहए न उससेऊपर रखेऔर न उससेनीचेरखेl ४ – और अपनेब्रूओं को अपनी पहलूओं सेदूर दूर रखन् l

अपनेब्रूओं को अपनी पहलूओं सेदूर दूर रखन् l ४६
४६
४६

सरदों मेंकी र्नेि्ली सुन्नतें

र्नेि्ली सुन्नतें १ - और अपनेब्रूओं को

१ - और अपनेब्रूओं को अपनी पहलूओं सेदूर रखन् सुन्नत हैl २ - अपनेदोनों र्ंघों को अपनेपेट सेदूर रखन् भी सुन्नत हैl ३ –और अपनेर्ंघों को अपनी जपंडवलयों सेदूर रखन् भी सुन्नत मेंश्वमल हैl ४ –और सरदेमेंअपनेघुटनों केबीच दूरी रखन् भी एक सुन्नत हैl ५ –अपनेदोनों पैरों को खड़ेरखन् भी सुन्नतों मेंश्वमल हैl ६ - और अपनी उंगवलयों केपेटों को ज़मीन सेलग्ए रखन् भी सजदेकी सुन्नत हैl ७ –इसी तरह सजदों केदौर्न दोनों पैरों को रम्ए रखन् भी एक सुन्नत है l ८ - और अपनेदोनों ह्थों को अपनेदोनों कंिों अथि् क्नों के बर्बर में रखन् सुन्नत मेंश्वमल हैl ९ –दोनों ह्थों को खुल् खुल् रखन् भी सुन्नत हैl १० –इसी तरह उंगवलयों को एक दूसरेकेस्थ वमलेरखन् भी सुन्नत हैl ११ –इसी तरह उंगवलयों को कक़बल् की ओर रखन् सुन्नत हैl १२ –दोनों सजदों केबीच बैठन् भी सुन्नत है, और उसकेदो त्रीक़ेहैं:

क)

पर बैठन् l

«इक़आअ» मतलब दोनों पैरों को खड़ेरख कर दोनों तलिों के सह्रे

ख) –»इव्फतर्श» अथ्जात: द्वहनेपैर को खड़् रखन् और ब्एं पैर को वबछ् देन्, पहलेतशहहुद मेंब्एं पैर को मोड़ कर उसपर बैठन् और द्वहनेपैर को खड़् रखन्, और दूसरेतशहहुद मेंपैरों को रखनेकेतीन त्रीक़ेहैं:

क) द्वहनेपैर को खड़् रखेऔर ब्एं पैर को द्वहनेपैर की जपंडली केनीचेरखे और वपछि्ड़ेको ज़मीन सेलग् कर बैठेl

ख)

खड़् नहीं रखेग्, बवलक उसेभी ब्एं पैर की तरह ही रखेग् l

–यह बैठक भी पहलेकी तरह ही हैकेिल अंतर यह हैकक द्वहनेपैर को

ग)

मेंरखेग् l

–द्हीनेको खड़् रखेग् और ब्एं को द्वहनी जपंडली और र्न केबीच

४७
४७
१३- दोनों ह्थों को दोनों र्नों पर रखेग्,

१३- दोनों ह्थों को दोनों र्नों पर रखेग्, द्वहनेको द्वहने पर और ब्एंको ब्एंपर, और उंगवलयों को सीिी रखेग् लेककन एक दूसरेसेवमली हुई रखेग् l

१४ – अंगूठेसेपहलेि्ली ऊूँगली को तशहहुद मेंशुरू सेआवखर तक वहल्त् रहेग् l१५ –दोनों सल्म फेरतेसमय द्वहनेऔर ब्एं ओर मुंह फेरेग् l १६ –»वरलसतुल-इवसतर्ह्» अथि् आर्म की बैठक: यह वबलकुल संवक्षप्त बैठक होती हैवरस मेंकुछ नहीं पढ़् र्त् है, और उसकी रगह पहली और दूसरी रकअत मेंदूसरेसजदेकेब्द हैl

• य्द रहेकक कुल २५ अमली सुन्नतेंऐसी हैंरो प्तयेक रकअतमेंदोहर्ई र्ती हैं, तो कुल फ़ज़जानम्ज़ मेंइस सुन्नत की संखय् ४२५ हो र्एगी l

• और न्फल नम्ज़ो मेंवरनकी संखय् २५ रकअत है-रैस् कक हम र्त और

कदन मेंपढ़ी र्नेि्ली सुन्नतों केखणड मेंउललेख कर चुकेहैं- तो इस सुन्नत की संखय् ६२५ होर्एगी, यह उस समय होग् यकद एक व्यवति प्तयेक रकअत में इसअमली सुन्नत पर अमल करेग् l

• और यकद एक मुसलम्न व्यवति ज़ुह् की नम्ज़ और र्त की न्फल नम्ज़

की रकअतों को भी श्वमल कर लेत् हैतो कफर उसी केअनुस्र इस सुन्नत पर अमल भी बढ़ेग् l

• और अमली सुन्नतेंऐसी हैंरो नम्ज़ मेंकेिल एक ब्र य् दोब्र दुहर्ई र्ती हैंl

१ - इहर्म की तकबीर (अथि् नम्ज़ शुरू करने) केस्थस्थ दोनों ह्थों को उठ्न् भी अमली सुन्नत मेंश्वमल हैl २- तीसरी रकअत केवलए उठतेसमय दोनों ह्थों को उठ्न् भी सुन्नत है, और यह उसी नम्ज़ मेंहोग् वरस मेंदो तशहहुद होतेहैंl ३- अंगूठेसेपहलेि्ली ऊूँगली को तशहहुद मेंशुरू सेआवखर तक वहल्तेरहन् भी सुन्नत हैऔर यह दोनों तशहहुद की बैठक मेंहोग् l ४ - दोनों सल्म फेरतेसमय द्वहनेऔर ब्एं ओर मुंह फेरन् l ५ - «वरलसतुल-इसवतर्ह्» अथि् आर्म की बैठक: और यह च्र रकअत

४८
४८

ि्ली नम्ज़ मेंदो ब्र दोहर्ई र्ती है, और ब्क़ी नम्रों में एक ब्र आती है, च्हेफ़ज़जाहो य् न्फल l

६ –»तिरुजाक»: (य्नी द्वहनेपैर को खड़् रखन् और उसेब्एं पैर की जपंडली केनीचेरखन् और वपछि्ड़ेको ज़मीन सेलग् कर बैठन् भी सुन्नत है, य्द रहेकक यह उस नम्ज़ केदूसरेतशहहुद मेंकी र्ती हैवरस नम्ज़ मेंदो तशहहुद होतेहैंl

• इन सुन्नतों को आप नम्ज़ मेंकेिल एक ब्र करेंगे, लेककन तशहहुद मेंऊूँगली क् इश्र् फज्र को छोड़कर स्री फ़ज़जा नम्रों मेंदो ब्र आत् है, और «वरलसतुल-इसवतर्ह्» अथि् आर्म की बैठक च्र रकअत ि्ली नम्ज़ में दो ब्र आती हैlइसतरह इसकी कुल संखय् ३४ हो र्ती हैl

• और यह अमली सुन्नत –उन मेंसेदो पहली और आखरी को छोड़कर- प्तयेक नम्ज़ मेंदुहर्ई र्ती है, तो कफर कुल संखय् ४८ हो र्एगी l

• इसवलए मेरेशुभ भ्ई! धय्न मेंरवखए, और अपनी नम्ज़ को इन श्व्दक

और अमली सुन्नतों केद््र् सर्न् मत भूवलएग् lत्कक अलल्ह सिजाशवतिम्न केप्स आपक् इन्म बढ़ेऔर आपकी वसतवथ ऊूँची हो l

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नम्ज़ केब्द की सुन्नतें

नम्ज़ केब्द की सुन्नतें - तीन ब्र अलल्ह सेक्षम्
नम्ज़ केब्द की सुन्नतें - तीन ब्र अलल्ह सेक्षम्

- तीन ब्र अलल्ह सेक्षम् म्ंगन्, और यह दुआ पढ़न्:

«مارـكلإاو للاجلا اذ اي تكرابت ملاسلا كنمو ملاسلا تنأ مهللا»

«अलल्हुमम् अनतस्-सल्मुि् वमनकस्-सल्मु, तब्रति् य् ज़ल-रल्वल िल-इकर्म»

(हेअलल्ह तूही श्ंवत हैऔर तुझ ही सेश्ंवत है, तूबरकत ि्ल् हैहेमवहम् और समम्न ि्ल् l) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

२- और यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

ءيش لك ىلع وهو دمحلا هلو كلملا هل ، هل كيرش لا هدحو للا لاإ هلإ لا) كنم دجلا اذ عفني لاو تعنم امل يطعم لاو تيطعأ امل عنام لا مهللا ،ريدق (دجلا

«ल् इल्ह् इलललल्हु िहदहु ल् शरीक लहु, लहुल-मुलकुि लहुल-हमदुि हुि् अल् कुवलल शैइन क़दीर, अलल्हुमम् ल् म्वनआ वलम् अअतैत् िल् मुअवतय् वलम् मनअत् िल् यनफ़उ ज़ल-रकद् वमनकल-रद् l» (अलल्हको छोड़ कर कोईपूरेर्नेके योगय नहींहै, अकेल् हैउसक् कोई स्झी नहीं हे, उसी क् र्र हैऔर उसी केवलए स्री प्शंस् हैऔर िही सब चीज़ पर शवतिश्ली है, हेअलल्ह! रो तूदेउसेकोई रोकनेि्ल् नहीं, और वरसको तू रोक देउसेकोई देनेि्ल् नहीं, तेरेप्स समम्न ि्लेक् समम्न कुछ क्म नहीं देत् l) इसेइम्म बुख्री और इम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

३- और यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत मेंश्वमल है:

ءيش لك ىلع وهو دمحلا هلو كلملا هل ، هل كيرش لا هدحو للا لاإ هلإ لا ) ةمعنلا هل هايإ لاإ دبعن لاو للا لاإ هلإ لا ، للاب لاإ ةوق لاو لوح لا ، ريدق هرك ولو نيدلا هل نيصلخم للا لاإ هلإ لاو ، نسحلا ءانثلا هلو لضفلا هلو (نورفاكلا

«ल् इल्ह् इलललल्हु िहदहु ल् शरीक लहु, लहुल-मुलकुि लहुल-हमदुि

५०
५०
हुि् अल् कुवलल शैइन क़दीर,ल् हौल् िल् कुवित्

हुि् अल् कुवलल शैइन क़दीर,ल् हौल् िल् कुवित् इलल् वबलल्हल् इल्ह् इलललल्हु िल् नअबुदुइलल् इयय्हु लहुन्- वनअमतुि लहुल-फज़लुि लहुस्-सन्उल-हसन्, ि ल् इल्ह् इलललल्हु मुखवलसीन् लहुद-दीन् ि लौ कररहल-क्कफरून»

(अलल्हको छोड़ कर कोईपूरेर्नेकेयोगय नहींहै, अकेल् हैउसक् कोई स्झी नहीं हे, उसी क् र्र हैऔर उसी केवलए स्री प्शंस् हैऔर िही सब चीज़ पर शवतिश्ली है,और न कोई शवति हैऔर न कोई बल हैमगर अलल्ह ही से, अलल्हको छोड़ कर कोईपूरेर्नेकेयोगय नहींहैऔर हम उसेछोड़ कर ककसी और की पूर् नहीं करतेहैं, उसी केवलए उद्रत् हैऔर उसी केवलए बड़्ई हैऔर उसी केवलए अचछी प्शंस् है,अलल्हको छोड़ कर कोईपूरनीय नहींहै, हम स्फ़कदली सेउसी की फम्जाबरद्री करतेहैंयद्यवप क्कफ़रों को बुर् लगे) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl ४ इसी तरह तेंतीस (३३) ब्र यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

«ربكأ للاو ، لل دمحلاو ، للا ناحبس»

«सु्ह्नलल्ह, िल-हमदुवललल्ह, िलल्हु अकबर» (खूब पवित्रत् हैअलल्ह केवलए, और प्शंस् हैअलल्ह केवलए, और अलल्ह बहुत बड़् हैl)

स्थ ही यह दुआ पढ़े:

ءيش لك ىلع وهو دمحلا هلو كلملا هل ، هل كيرش لا هدحو للا لاإ هلإ لا» «ريدق

«ल् इल्ह् इलललल्हु िहदहु ल् शरीक लहु, लहुल-मुलकुि लहुल-हमदुि हुि् अल् कुवलल शैइन क़दीर l»

(अलल्हको छोड़ कर कोईपूरेर्नेकेयोगय नहींहै, अकेल् हैउसक् कोई स्झी नहीं हे, उसी क् र्र हैऔर उसी केवलए स्री प्शंस् हैऔर िही सब चीज़ पर शवतिश्ली हैl) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

५ –इसी प्क्र यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

५१
५१

«كتدابع نسحو ،كركشو ،كركذ ىلع ينعأ مهللا»

«अलल्हुमम् अइन्नी अल् वज़कक्रक् ि शुकक्रक् ि हुवस् इब्दवतक्»

(हेअलल्ह!मेरीमदद कर तुझेय्द करनेपर, और तेरेिनयि्द पर, और अचछी तरह सेतेरी पूर् करनेपर l) इसेअबू-द्ऊद और नस्ई ने उललेख ककय् हैl ६ – नम्ज़ केब्द यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत मेंश्वमल है:

ذوعأو ، رمعلا لذرأ ىلإ درأ نأ كب ذوعأو ، نبجلا نم كب ذوعأ ينإ مهللا» «ربقلا باذع نم كب ذوعأو ايندلا ةنتف نم كب

«अलल्हुमम् इन्नी अऊज़ुवबक् वमनल-रुवब्, ि अऊज़ुवबक् वमन्अन्उरद्् इल् अरज़्वलल-उमरर, ि अऊज़ुवबक् वमन कफतनवतद-दुनय्, ि अऊज़ुवबक् वमन अज़्वबल-क़ब्र» (हेअलल्ह!मैंतेरी शरर मेआत् हूँक्यरत् से, और मैं तेरी शरर मेआत् हूँअपम्नरनक बुढ़्पेमेंड्लेर्नेसे, और मैंतेरी शरर मेआत् हूँदुवनय् केपरीक्षर से, और मैंतेरी शरर मेआत् हूँक़ब्र की पीड़् से l) इसेइम्म बुख्री नेउललेख ककय् हैl

७- इसी तरह सुन्नत दुआओं मेंयह दुआ भी श्वमल है:

«كدابع ثعبت موي كباذع ينق بر»

«रव्ब कक़नी अज़्बक् यौम् तब्असुइब्दक्»

(हेमेरेप्लनह्र! तूमुझेउस कदन अपनी पीड़् सेबच् रब तूअपनेद्सों को उठ्एग्) कयोंकक हज़रत बर् केद््र् उललेवखत हैकक उनहोंनेकह्:रब हम अलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-केपीछेनम्ज़ पढ़तेथे, तो हम्री इचछ् यही होती थी कक हम उनकी दवहनी तरफ रहें, तो िह हम्री तरफ चेहर् करतेथे, तो मैंनेउनहेंयह पढ़तेसुन्:

«كدابع -عمجت - ثعبت موي كباذع ينق بر» «रव्ब कक़नी अज़्बक् यौम् तब्असु-तजमउ-इब्दक्»

(हेमेरेप्लनह्र! तूमुझेउस कदन अपनी पीड़् सेबच् रब तूअपनेबनदों को उठ्एग् य्नी रम् करेग्) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

५२
५२
८ –इनही सुन्नतों मेंसूरह « क़ुल हुिलल्हु अहद»

८ –इनही सुन्नतों मेंसूरह « क़ुल हुिलल्हु अहद» पढ़न् भी श्वमल है, इसी तरह क़ुल अऊज़ुवब-रव्बल- फलक़ « पढ़न्, और « क़ुल अऊज़ुवबरव्बन-न्स» पढ़न् भी सुन्नत हैlइसेअबू- द्ऊद , वतरवमज़ीऔर नस्ई नेउललेख ककय् हैl

• फरर और मगररब की नम्ज़ केब्द इन सूरों को तीन तीन ब्र दोहर्न्

च्वहए l ९ –»आयतल-कुसती» य्नी अलल्हु ल् इल्ह् इलल् हुिल- हययुल-क़ययूम, पढ़न् च्वहए lइसेइम्म नस्ई नेउललेख ककय् हैl

१० - और फरर और मगररब की नम्ज़ केब्द यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

ىلع وهو تيميو يحي دمحلا هلو كلملا هل ، هل كيرش لا هدحو للا لاإ هلإ لا» » ريدق ءيش لك

«ल् इल्ह् इलललल्हु िहदहु ल् शरीक लहु, लहुल-मुलकुि लहुल-हमदुयुहयी ि युमीत ि हुि् अल् कुवलल शैइन क़दीरl»

(अलल्हको छोड़ कर कोईपूरेर्नेकेयोगय नहींहै, अकेल् हैउसक् कोई स्झी नहीं हे, उसी क् र्र हैऔर उसी केवलए स्री प्शंस् है, िही जज़ंद् करत् है और मौत देत् है, और िही सब चीज़ पर शवतिश्ली हैl)इसेइम्म वतरवमज़ी नेउललेख ककय् हैl ११ –य्द रहेकक वज़क्र और तसबीह को ह्थ पर वगनन् भी सुन्नत है, और एक ररि्यत मेंतो हैकक द्वहनेह्थ पर वगनन् च्वहए लेककन उसमेविि्द है, भलेही दूसरेआम सबूतों सेइसी कीपुवष्ट होती हैl १२ –इन दुआओं को उसी सथ्न पर रह कर पढ़ेरह्ूँनम्ज़ पढ़ी हो, वबन् रगह को बदलेl

• इन सुन्नतों की कुल संखय् लगभग ५५ होती है, वरनको एक मुसलम्न व्यवति प्तयेक फ़ज़जानम्ज़ केब्द अद् करनेक् प्य्स करत् है, इस की संखय् फरर और मगररब की नम्ज़ मेंबढ़ भी सकती हैl

प्तयेक फ़ज़जानम्ज़ केब्द इस सुन्नत पर अमल करनेऔर उसकी प्बंदी करने केपररर्म:

५३
५३

क) यकद एक मुसलम्न व्यवति र्त-कदन की नम्रों के ब्द इन आर्िन्ओं और विनवतयों को प्बंदी सेपढ़ेग् तो उसके वलए ५०० द्न क् पुणय वलख् र्एग् lकयोंकक अलल्ह के पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-क् फ़रम्न है: « प्तयेक सु्ह्नलल्ह» पवित्रत् हैअलल्ह केवलए एक द्न है, और प्तयेक «अलल्हु अकबर»(अलल्ह बहुत बड़् है) एक द्न है, और प्तयेक «अलहमदुवललल्ह» (सभी प्शंस् अलल्ह केवलए है) एक द्न है, और प्तयेक «ल् इल्ह् इलल्ह» (अलल्ह को छोड़ कर कोई पूरनीय नहीं है) एक द्न है» lइसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

•इम्म नििी नेकह्: द्न होनेक् मतलब यह हैकक द्न देनेकेरैस् पुणय प््प्त होग् l ख) यकद एक मुसलम्न व्यवति र्त-कदन की नम्रों केब्द इन आर्िन्ओं और विनवतयों को पढ़नेक् प्य्स करेग् तो उसके वलए सिगजा में५०० पेड़ लग् कदए र्एंगे, कयोंकक अलल्ह केपैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-एक ब्र हज़रत अबू-हुरैर् के प्स सेगुज़रेरब िहएक पौि् लग् रहेथे तोउनहोंनेकह्: (हेअबू-हुरैर्! कय् मैंतुमहेंइस पौिेसेबेहतर पौिेकेविषय मेंन बत्ऊूँ? तो उनहोंनेकह्: कयों नहीं हेअलल्ह केपैगंबर! इस पर उनहोंने कह्: यह पढ़् करो:

«ربكأ للاو للا لاإ هلإ لاو لل دمحلاو للا ناحبس»

«सु्ह्न्लल्वह िल-हमदुवललल्वह, िल् इल्ह् इलललल्हु िलल्हु अकबर» (पवित्रत् हैअलल्ह केवलए, और स्री प्शंस् हैअलल्ह ही केवलए, अलल्ह को छोड़कर कोई पूरनीय नहीं है, और अलल्ह बहुत बड़् हैl) यकद यह पढ़ोगे तो प्तयेक केबदलेमेंतुमह्रेवलए सिगजामेंएक पेड़ लग् कदय् र्एग् lइसेइब्े- म्र् नेउललेख ककय् है, और अलब्नी नेइसेसहीह और विश्वसनीय बत्य् हैl

ग) यकद एक व्यवति इसेपढ़त् हैतो उसकेऔर सिगजाकेबीच मौत केवसि्य और कोई रुक्िट नहीं रहत् हैबस मरतेही सिगजामेंप्िेश कर र्एग्, यह उसके वलए हैरो प्तयेक नम्ज़ केब्द , आयतल-कुसती पढ़त् हैऔर उसक् खय्ल रखत् हैl

५४
५४

घ) रो इन दुआओं को लग्त्र पढ़त् हैतो उसकेप्पों को वमट् कदय् र्त् हैभलेही िेसमुद्र के झ्ग की तरह हों lरैस् कक इम्म मुवसलम की «सहीह» न्मक पुसतक मेंउललेवखत हैl ङ) रो भी प्तयेक नम्ज़ केब्द , इन दुआओं को पढ़त् हैऔर उसक् खय्ल रखत् हैतो िह न दुवनय् मेंऔर न ही आवखरत मेंअपम्न अथि् न्क्मी क् कभी मुंह देखेग्, कयोंकक शुभ हदीस मेंहै: िेउसकेवलए सुरक्ष् करनेि्लेबन र्तेहैं, और उनक् पढ़नेि्ल् कभी विफल नहीं होत् हैlइसे इम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

च) इस केद््र् फ़ज़जामेंहुई कमी-बैशी क् भुगत्न हो र्त् हैl

५५
५५

सुबह मेंपढ़ी र्नेि्ली सुन्नतें

र्नेि्ली सुन्नतें १ -सुबह में»आयतल-कुसती»
र्नेि्ली सुन्नतें १ -सुबह में»आयतल-कुसती»
र्नेि्ली सुन्नतें १ -सुबह में»आयतल-कुसती»

१ -सुबह में»आयतल-कुसती» य्नी (अलल्हु ल् इल्ह् इलल् हुिल- हययुल-क़ययूम) पढ़न् सुन्नत हैl उसक् फल िही हैरो शुभ हदीस मेंउललेवखत है:» वरसनेसुबह होतेसमय इसेपढ़् तो िह श्म होनेतक केवलए भूत-प्ेत सेमुति रहेग्, और वरसनेश्म होतेसमय इसेपढ़् तो िह सुबह होनेतक केवलए भूत-प्ेत सेमुति रहेग् l» इसे नस्ई नेउललेख ककय् है, और अलब्नी नेइसेविश्वसनीय बत्य् हैl २ –»अल-मुअविज़्त» पढ़न् य्नी : सूरह» क़ुल हुिलल्हु अहद» और क़ुल अऊज़ुवबरव्बल- फलक़ « और « क़ुल अऊज़ुवबरव्बन-न्स» पढ़न् l» इसे अबू- द्ऊद और वतरवमज़ी नेउललेख ककय् हैl

इसक् फल यह हैकक रो इनहेंतीन ब्र सुबह होतेऔर श्म होतेपढ़ेग् तो यह उसकेवलए सब चीज़ केवलए क्फी हैlरैस् कक इसी शुभ हदीस मेंआय् हैl ३ – और यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

هل ، هل كيرش لا هدحو للا لاإ هلإ لا ، لل دمحلاو لل كلملا حبصأو انحبصأ » مويلا اذه يف ام ريخ كلأسأ بر ريدق ءيش لك ىلع وهو دمحلا هلو كلملا ذوعأ بر ، هدعب ام رشو مويلا اذه يف ام رش نم كب ذوعأو ، هدعب ام ريخو «ربقلا باذعو رانلا باذع نم كب ذوعأ بر ، ربكلا ءوسو لسكلا نم كب

« असबहन् ि असबहल-मुलकुवललल्वह िल हमदुवललल्, ल् इल्ह् इलललल्हु िहदहु ल् शरीक लहु, लहुल-मुलकुि लहुल-हमदुि हुि् अल् कुवलल शैइन क़दीर, रव्ब अस्अलुक् खैर् म्फ़ी ह्ज़ल-यौम ि खैर् म् बअदहु, ि अऊज़ु वबक् वमन शररजा म् फी ह्ज़ल-यौम, ि शररजा म् बअदहु, रव्ब अऊज़ुवबक् वमनल-कसल, ि सूइल-ककबर, रव्ब अऊज़ु वबक् वमन अज़्वबन-न्रर ि अज़्वबल-क़ब्र»

(हम सुबह ककए और र्र और प्शंस् नेअललह केवलए सुबह ककय्, अलल्हको छोड़ कर कोईपूरेर्नेके योगय नहींहै, अकेल् हैउसक् कोई स्झी नहीं हे, उसी क् र्र हैऔर उसी केवलए स्री प्शंस् हैऔर िही सब चीज़ पर शवतिश्ली है, हेमेरेप्लनह्र! मैंतुझ सेम्ंगत् हूँरो इस कदन मेंभल्ई है, और रो उसकेब्द भल्ई है, और मैंतेरी शरर मेंआत् हूँउस बुर्ई से

५६
५६
रो इस कदन मेंहैरो बुर्ई उसकेब्द

रो इस कदन मेंहैरो बुर्ई उसकेब्द हैlहेमेरेप्लनह्र! मैं सुसती और बुढ्पेकी कठन्ई सेतेरी शरर मेंआत् हूँ हेमेरे प्लनह्र! और मैंतेरी शरर मेंआत् हूँनकजा की पीड़् और क़ब्र की पीड़् सेl) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

श्म को भी यही दुआ पढ़न् च्वहए लेककन रह्ूँ«असबहन्» «हम सुबह ककए» हैउसकेबदले«अमसैन्» हम श्म ककए» बोलन् च्वहए, इसी तरह रह्ं»रव्ब अस्अलुक् खैर् म्फ़ी ह्ज़ल-यौम» (हेमेरेप्लनह्र! मैंतुझ सेम्ंगत् हूँरो इस कदन मेंभल्ई है) हैउसकेबदले«रव्ब अस्अलुक् खैर् म्फ़ी ह्वज़वहल-लैलवत» (हेमेरेप्लनह्र! मैंतुझ सेम्ंगत् हूँरो इस र्त मेंभल्ई है) कहेl ४ –इसी तरह इनहीं सुन्नत दुआओं मेंयह दुआ भी श्वमल है:

«روشنلا كيلإو تومن كبو ايحن كبو ، انيسمأ كبو انحبصأ كب مهللا»

«अलल्हुमम् वबक् असबहन् ि वबक् अमसैन्, ि वबक् नहय् ि वबक् नमूतु

ि इलैकन-नुशूर» (हेअलल्ह! तुझी केद््र् हम सुबह ककए और तुझी केद््र्

श्म ककए, तुझी केद््र् रीतेहैंऔर तुझी केद््र् मरतेहैं, और तेरी ही ओर लौटन् हैl) इसेइम्म वतरवमज़ी नेउललेख ककय् हैl

श्म को भी यही दुआ पढ़ेग् लेककन, लेककन उसके श्द इस तरह होंगे

«अलल्हुमम् वबक् अमसैन् ि वबक् असबहन् ि वबक् नहय् ि वबक् नमूतु

ि इलैकल मसीर» (हेअलल्ह! हम तुझी केद््र् श्म ककए और तुझी केद््र्

हम सुबह ककए, तुझी केद््र् रीतेहैंऔर तुझी केद््र् मरतेहैं, और तेरी ही ओर ि्वपस आन् है» l

५ –इसी तरह यह दुआ भी पढ़न् सुन्नत है:

كدعوو كدهع ىلع انأو ، كدبع انأو ينتقلخ تنأ لاإ هلإ لا يبر تنأ مهللا» يبنذب ءوبأو ىلع كتمعنب كل ءوبأ تعنص ام رش نم كب ذوعأ تعطتسا ام «تنأ لاإ بونذلا رفغي لا هنأف يل رفغاف

अलल्हुमम् अनत् रव्ब ल् इल्ह् इलल् अनत् खलक़त्नी ि अन् अ्दुक्,

ि अन् अल् अहकदक् ि िअकदक् मसत्तअतुअऊज़ुवबक् वमन श्ररर-म्

सनअतुअबूउ वब वनअमवतक् अलैय् ि अबूउ वब ज़नबी फगकफ़र ली फइन्नहु ल्

५७
५७

यगकफ़रुज़-ज़ुनूब् इलल् अनत् l (हेअलल्ह तूमेर् प्लनह्र हैतूनेमुझेबन्य् है, और मैंतेर् द्स हूँऔर रह्ूँतक मुझ सेबन पड़ेमैंतेरेिचन और ि्देपर हूँ, मैंतेरी शरर मेंआत् हूँअपनेकरतूत की बुर्ई से, और रो मुझ पर तेर् कृप्हैउसेमैंम्नत् हूँतो तूमुझेक्षम् कर दे, कयोंकक तेरेवसि्य प्पों को कोई म्फ नहीं करत् हैl) इसेबुख्री नेउललेख ककय् l

इसक् फल यह हैकक रो इस पर विश्व्स करकेश्म होतेसमय इसेपढ़ेते है और यकद उस र्त मेंमर र्ए तो सिगजामेंप्िेश कर र्एग्, और यही फल सुबह होतेसमय भी पढ़नेक् हैlरैस् कक खुद इस

शुभ हदीस मेंउललेवखत हैl

६ - इसी तरह यह दुआ च्र ब्र पढ़न् भी सुन्नत है:

كقلخ عيمجو كتكئلامو ، كشرع ةلمح دهشأو كدهش ً أ تحبصأ ينإ مهللا» «كلوسرو كدبع اًدمحم نأو كل كيرش لا كدحو تنأ لاإ هلإ لا للا تنأ كنأ

«अलल्हुमम् इन्नी असबहतु उशवहदुक् ि उशवहदु हमलत् अरवशक्, ि मल्इकतक् ि रमीआ खलकक़क् अन्नक् अनत् िहद्क् ल् शरीक् लक् ि अन्न् मुहममदन अ्दुक् ि र्सूलुक्»

(हेअलल्ह!मैंनेसुबह की तुझेगि्ह बन्त् हूँ, और तेरे«अशजा» को उठ्नेि्ले फररशतों और तेरी स्री रचन् को गि्ह बन्त् हूँकक तूअलल्ह है, तुझेछोड़ कर और कोई पूरनीय नहीं है, तूअकेल् है, तेर् कोई स्झी नहीं है, और यह कक मुहममद तेरेद्स और दूत हैंlइसेअबू-द्ऊद नेऔर नस्ई ने«अमलुल-यौवम ि्ललैल्» (र्त और कदन मेंककए र्नेि्लेक्म) न्मक पुसतक मेंउललेख ककय् l

और इसक् फल यह हैकक रो भी इसेसुबह और श्म को च्र ब्र पढ़ेग् तो अलल्ह उसेनकजा सेमुति कर देग् l

· लेककन श्म की दुआ में«अलल्हुमम् इन्नी असबहतु»( हेअलल्ह मैंनेसुबह

की) की रगह पर»अलल्हुमम् इन्नी अमसैतु» (हेअलल्ह मैंनेश्म की) पढ़े:

५८
५८

كنمف كقلخ نم دحأب وأ ةمعن نم يب حبصأ ام مهللا) (ركشلا كل و دمحلا كلف كل كيرش لا كدحو

«अलल्हुमम् म् असबह् बी वमन वनअमवतन औ वब अह्कदन वमन खलकक़क् फवमनक् िहदक् ल् शरीक् लक् फलकल-हमदुिशशुकरु»

( हेअलल्ह ! रो भी कोई मेहरब्नी मुझ पर अथि् तेरी रचनों मेंसेककसी प््री पर सुबह तक रही तो िह तुझी सेहैतूअकेल् है, तेर् कोई स्झी नहीं है, तेरेही वलए प्शंस् हैऔर तेरेही वलए िनयि्द हैl इसेअबू-द्ऊद नेऔर नस्ई ने«अमलुल-यौवम िललैल्» (र्त और कदन मेंककए र्नेि्लेक्म) न्मक पुसतक मेंउललेख ककय् l इसक् फल यह हैकक रो भी इसेसुबह होतेसमय पढ़ेग्, तो उसनेउस कदन क् शुकक्रय् वनभ् कदय्, और रो श्म होतेसमय इसेपढ़ेग् तो उसनेउस र्त क् शुकक्रय् अद् कर कदय् lरैस् कक इसी शुभ हदीस मेंउललेवखत हैl

८- और तीन ब्र यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

يرصب يف ينفاع مهللا ، يعمس يف ينفاع مهللا ، يندب يف ينفاع مهللا) باذع نم كب ذوعأو رقفلاو ، رفكلا نم كب ذوعأ ينإ مهللا ، تنأ لاإ هلإ لا ، (تنأ لاإ هلإ لا ربقلا

«अलल्हुमम् आकफनी फी बदनी, अलल्हुमम् आकफनी फी सम्ई अलल्हुमम् आकफनी फी बसरी, ल् इल्ह् इलल् अनत्, अलल्हुमम् इन्नी अऊज़ुवबक् वमनल-कुफरर िल-फक़रर ि अऊज़ुवबक् वमन अज़्वबल-क़वब्र ल् इल्ह् इलल् अनत्» (हेअलल्ह!मेरेशरीर मेंसि्सथय दे, हेअलल्ह!मेरी क्न मेंसि्सथय दे, हे अलल्ह!मेरी आंख मेंसि्सथय दे, तुझेछोड़कर और कोई पूरनीय नहीं है, हे अलल्ह! मैंआप की शरर मेंआत् हूँअविश्व्स सेऔर गरीबी से, और तेरी शरर मेंआत् हूँक़ब्र की पीड़् से, तुझेछोड़कर और कोई पूरनीय नहीं हैl इसे अबू-द्ऊद और अहमद नेउललेख ककय् हैl

९ –इसी तरह स्त ब्र यह दुआ पढ़न् च्वहए:

(ميظعلا شرعلا بر وهو تلكوت هيلع وه لاإ هلإ لا للايبسح)

५९
५९

«हवसबयलल्हु ल् इल्ह् इलल् हुि् अलैवह तिक्लतु, ि हुि् र्बुल-अरशजाल-अज़ीम»

(अलल्ह मुझेक्फ़ी हैउसकेवसि्य कोई पूरनीय नहीं है, उसी पर मैंनेभरोस् ककय्, और िही बड़े«अशजा» क् म्वलक हैlइसेइब्े-सुन्नी नेहज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-केम्धयम सेउललेख ककय् है, और अबू-द्िूद ने«सह्बी»केम्धयम सेउललेख ककय् हैl उसक् फल यह हैकक वरसनेइसेसुबह और श्म होतेसमय स्त ब्र पढ़् तो अलल्ह उसेइस दुवनय् और आवखरत केवचनतनों सेमुति कर देग् lरैस् कक खुद इसी शुभ हदीस मेंउललेवखत हैl १० –और यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

كلأسأ ينإ مهللا ، ةرخلاو ايندلا يف ةيفاعلاو وفعلا كلأسأ ينإ مهللا» نمآو، يتاروع رتسا مهللا ، يلامو يلهأو يايندو ينيد يف ةيفاعلاو وفعلا يلامش نعو ينيمي نعو يفلخ نمو يدي نيب نم ينظفحا مهللا ، يتاعور «يتحت نم لاتغ ً أ نأ كتمظعب ذوعأو ، يقوف نمو

«अलल्हुमम् इन्नी अस्अलुकल-अफ़ि् िल-आकफयत् कफददुनय् िल-आवखरह्, अलल्हुमम् इन्नी अस्अलुकल-अफ़ि् िल-आकफयत् फी दीनी ि दुनय्य, ि अहली ि म्ली, अलल्हुममुसतुर अिर्ती ि आवमन रिआती, अलल्हुममहफज़नी वमन बैवन यदैयय् ि वमन खलफी ि अन यमीनी ि अन वशम्ली ि वमन फिक़ी ि अऊज़ुवब अज़मवतक् अन उगत्ल् वमन तहती» (हेअलल्ह!मैंतुझ सेदुवनय् और आवखरत मेंक्षम् और सि्सथय म्ंगत् हूँ, हेअलल्ह!मैंतुझ सेदुवनय् और आवखरत मेंमेरेपररि्र और िन मेंक्षम् और सि्सथय म्ंगत् हूँ, हेअलल्ह! तू मेरी कवमयों पर पद्जारख और मेरेडर को श्ंवत मेंबदल दे, हेअलल्ह! तूमुझे सुरक्ष् देमेरेस्मनेसेऔर मेरेपीछेसेऔर मेरेद्वहनेसेऔर मेरेब्एं सेऔर मेरेऊपर सेऔर मैंतेरी शरर मेंआत् हूँकक नीचेसेिोखेसेम्र् र्ऊं lइसे अबू- द्ऊद और इब्े-म्र् नेउललेख ककय्

हैl ११ –इसी तरह यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

ءيش لك َّبر ، ضرلأاو تاوامسلا رطاف ةداهشلاو بيغلا ملاع مهللا» ناطيشلا رش نمو يسفن رش نم كب ذوعأ ، تنأ لاإ هلإ لا نأ دهشأ ، هكيلمو «ملسم ىلإ هرجأ وأ اًءوس يسفن ىلع فرتقأ نأو ، هكرشو

६०
६०

«अलल्हुमम् आवलमल-गैवब िशशह्दवत फ्वतरस्-सम्ि्वत िल-अरवज़, र्ब् कुवलल शैइन ि मलीकहु, अशहदुअलल् इल्ह् इलल् अनत्, अऊज़ुवबक् वमन शररजान्फसी ि वमन शररजाशशैत्वन ि वशरककही ि अक़तररफ् अल् न्फसी सूअन औ अरुरजाह इल् मुवसलम»

(हेअलल्ह! देखी और अनदेखी को र्ननेिल्! आक्शों और पृथिी क् वनम्जात्!हर चीज़ क् प्लनह्र और म्वलक! मैंगि्ही देत् हूँकक तुझको छोड़कर कोई पूरनीय नहीं है, मैंतेरी शरर मेंआत् हूँअपनी आतम् की बुर्ई और शैत्न की बुर्ई और उसकी मूरतजापूर् से, और अपनी आतम् पर कोई बुर्ई करनेअथि् ककसी मुसलम्न पर बुर्ई ड्लनेसेतेरी शरर मेंआत् हूँlइसे इम्म वतरवमज़ी और अबू- द्ऊद नेउललेख ककय् हैl

१२ –यह दुआ तीन ब्र पढ़न् सुन्नत है:

وهو ءامسلا يف لاو ضرلأا يف ءيش همسا عم رضي لا يذلا للا مسب» «ميلعلا عيـمسلا

«वबसवमलल्वहल-लज़ी ल् यज़ुरुजामअसवमवह शैउन कफल-अरज़जाि ल् कफससम्इ ि हुिससमीउल-अलीम»

(अलल्ह के न्म सेशुरू वरसके न्म के स्थ कोई चीज़ न पृथिी पर न ही आक्श मेंकुछ नुक़स्न पहुंच् सकती हैऔर िही सुनत् र्नत् हैl इसेअबू- द्ऊद, वतरवमज़ी और इब्-म्र् और इम्म अहमद नेउललेख ककय् हैlइसक् फल यह हैकक रो भी इसेसुबह को तीन ब्र और श्म को भी तीन ब्र पढ़ेग् तो उसेकोई भी चीज़ चोट नहीं पहुंच् सकेगी lरैस् कक खुद इस शुभ हदीस में उललेवखत हैl १३ – इसी तरह सुन्नत दुआ मेंयह भी श्वमल हैकक इस दुआ को तीन ब्र पढ़े:

«ايبن -ملسو هيلع للا ىلص – دمحمبو اًنيد ملاسلإابو اًبر للاب تيضر»

«रज़ीतुवबलल्वह र्ब्, ि वबलइसल्वम दीन्, ि वबमुहमम्कदन - सलललल्हु अलैवह िसललम - रसूल् «( मैंसंतुष्ट हूँअलल्ह के प्लनह्र होनेसे, और इसल्म केिमजाहोनेसेऔर मुहममद-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-के

६१
६१

दूत होनेसेl)इसेअबू-द्ऊद , वतरवमज़ी, इब्े-म्र् औरनस्ई और अहमद नेउललेख ककय् हैlइसक् फल यह हैकक रो भी इसे सुबह और श्म केसमय तीन ब्र पढ़ेग् तो अलल्ह केस्मने उसक् अविक्र होग् कक कक़य्मत के कदन उसको प्सन्न कर दे lरैस् कक खुद इसी शुभ हदीसमेंउललेवखत हैl

१४ –इसी तरह यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

يسفن ىلإ ينلكت لاو هلك ينأش يل حلصأ ثيغتسأ كتمحرب مويق اي يح اي» «نيع ةفرط

«य् हययुय् क़ययूमुवब रहमवतक् असत्गीसु, असवलह ली शअनी कुललह िल् तककलनी इल् न्फसी तरफत् ऐन» (हेवरवित! हेसिंय ही बरक़र्ररहने ि्ल्, तेरी दय् क् सह्र् म्ंगत् हूँ, मेरेस्रेक्म को ठीक करदेऔर तूमुझे एक पलक वझपनेभर केवलए भी मेरेसिंय केहि्लेमत कर l) इसेह्ककम ने उललेख ककय् हैऔर इसेविश्वसनीय बत्य् और इम्म ज़हबी नेइस मेंउनक् समथजान ककय् हैl १५ –और यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत मेंश्वमल हैवरसकेश्द इस तरह हैं:

انيبأ ةلمو دمحم انيبن نيدو صلاخلإا ةملكو ملاسلإا ةرطف ىلع انحبصأ) ( نيكرشملا نم ناك امو املسم افينح ميهاربإ

«असबहन् अल् कफतरवतल इसल्वम ि कवलम्वतल-इखल्वस ि दीवन नवबवययन् मुहममद, ि वमललवत अबीन् इबर्हीम् ह्नीफन मुवसलमन ि म् क्न् वमनल- मुशररकीन»

(हम इसल्म के सिभ्ि, पवित्रत् के श्द और हम्रेपैगंबर मुहममद के िमजा और हम्रेवपत् इबर्हीम पंथ पर सुबह ककए, रो मूरतजापूर् सेअलग-थलग रहकर मुसलम्न थे, और मूरतजापूरकों मेंसेनहीं थेlइसेइम्म अहमद नेउललेख ककय् l

१६ –और यह श्द १०० ब्र पढ़े:

«هدمحبو للا ناحبس » «सु्ह्नलल्वह ि वबहवमदही» (प्शंस् केस्थ पवित्रत् हो अलल्ह केवलए) इसेईम्न मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

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इसक् फल यह कक रो भी इसेसुबह-श्म सौ १०० ब्र पढ़ेग् तो कक़य्मत केकदन िह उन सब मेंसब सेबेहतर होग् वरनके प्स कुछ (पुणय क् क्म) होग् वसि्य उसके वरसनेउसी की तरह अथि् उससेकुछ बढ़ कर पढ़् होग् lइस केइल्ि् उसक् फल यह भी हैकक उसकेस्रेप्पों को वमट् कदय् र्एग् भलेही समुद्र केझ्ग केबर्बर हों l १७ – और सुबह केसमय सौ १०० ब्र यह दुआ पढ़े:

ءيش لك ىلع وهو دمحلا هلو كلملا هل ، هل كيرش لا هدحو للا لاإ هلإ لا» «ريدق

«ल् इल्ह् इलललल्हु िहदहु ल् शरीक लहु, लहुल-मुलकुि लहुल-हमदुि हुि् अल् कुवलल शैइन क़दीर»

(अलल्हको छोड़ कर कोईपूरेर्नेकेयोगय नहींहै, अकेल् हैउसक् कोई स्झी नहीं हे, उसी क् र्र हैऔर उसी केवलए स्री प्शंस् हैऔर िही सब चीज़ पर शवतिश्ली हैl) इसेइम्म बुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

इसेपढ़नेकेफल वनम्नवलवखत हैं:

१) दस गुल्म आज़्द करनेक् पुणय वमलेग् l २) उसकेवलए सौ १०० पुणय वलख् र्एग् l ३) उसकेसौ १०० प्प वमट् कदए र्एूँगेl ४) उस कदन श्म होनेतक शैत्न सेसुरक्ष् हो र्एग् lरैस् कक खुद इस शुभ हदीस मेंउललेवखत हैl १८ –और कदन मेंसौ १०० ब्र यह दुआ पढ़न् भी सुन्नत है:

«هيلإ بوتأو للارفغتسأ» «असतगकफरुलल्ह् ि अतूबुइलैवह» (मैंअलल्ह सेक्षम् म्ंगत् हूँऔर उसकेवलए पचि्त्प करत् हूँl)इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् हैl १९ – और सुबह केसमय यह दुआ पढ़न् च्वहए:

«لابقتم ًلامعو اًبيط اًقزرو اًعفان اًملع كلأسأ ينإ مهللا»

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«अलल्हुमम् इन्नी अस्अलुक् इलमन न्कफआ, ि ररज़क़न

«अलल्हुमम् इन्नी अस्अलुक् इलमन न्कफआ, ि ररज़क़न तवययब् ि अमलन मुतक़्बल्» (हेअलल्ह!मैंतुझ सेल्भप्द ज््न और पवित्र रोज़ी और सिीक्यजाकमजाम्ंगत् हूँl)

२० –और तीन ब्र यह दुआ पढ़े:

«هتاملك دادمو هشرع ةنزو هسفن اضرو هقلخ ددع ، هدمحبو للا ناحبس»

«सु्ह्नलल्वह ि वबहवमदही अदद् खलकक़ही ि ररज़् नव्फसही ि वज़नत् अरशजावह ि वमद्द् कवलम्वतही»

(अलल्ह को पवित्रत् हैउसकी प्शंस् केस्थ, उसकी रचन् की संखय् भर, और उसकी आतम् की प्सन्नत् के बर्बर, और उसके «अशजा» के िज़न के बर्बर, और उसकेश्दों की सय्ही केबर्बर l) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

२१ –और श्म होतेसमय तीन ब्र यह दुआ पढ़े:

«قلخ ام رش نم تاماتلا للا تاملكب ذوعأ»

«अऊज़ुवब कवलम्वतलल्वहत-त्मम्वत वमन शररजाम् खलक़»

(अलल्ह केपूरजाश्दों केद््र् मैंशरर म्ंगत् हूँ, उस चीज़ की बुर्ई सेरो उसनेरच् हैl) इसेवतरवमज़ी, इब्े- म्र् और अहमद नेउललेख ककय् हैl

* य्द रहेकक रब रब भी इन दुआओं मेंसेककसी भी दुआ को पढ़ेग् तो एक

सुन्नत पर अमल होग्, इसवलए एक मुसलम्न को अपनेसुबह और श्म को इन दुआओं को पढ़नेक् प्य्स करन् च्वहए, त्कक अविक सेअविक सुन्नत पर अमल करनेक् पुणय प््प्त कर सकेl

* इसी तरह एक मुसलम्न को ईम्नद्री, विश्व्स, पवित्र हृदयकेस्थ इन

दुआओं को पढ़न् च्वहए और इनकेअथमों को कदल-कदम्ग मेंबस्न् च्वहए त्कक उसक् प्भ्ि उसकी रीिन, चररत्र और व्यिह्र पर भी नज़र आ सकेl

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लोगों सेभेंट करतेसमय की सुन्नतें १) सल्म करन्:

लोगों सेभेंट करतेसमय की सुन्नतें

करतेसमय की सुन्नतें १) सल्म करन्: कयोंकक
करतेसमय की सुन्नतें १) सल्म करन्: कयोंकक
करतेसमय की सुन्नतें १) सल्म करन्: कयोंकक
करतेसमय की सुन्नतें १) सल्म करन्: कयोंकक

१) सल्म करन्: कयोंकक हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-सेपूछ् गय् कक कौनस् इसल्म सब सेअचछ् है? तो उनहोंनेकह्: (आप भोरन वखल्एं औरसल्म करेंवरसको आप पहच्नें उसको भी और वरसको न पहच्नेंउसको भी l) इसेबुख्री और मुवसलम ने उललेख ककय् l

• एक आदमी हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-के प्स

आय् और कह् «अससल्मु-अलैकुम» (श्ंवत हो आप पर) तो उनहोंनेसल्म क्

रि्ब कदय्, कफर िह बैठ गय्, तो हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्: दस (१०)(य्नी दस पुणय)lउसके ब्द एक दूसर् आदमी आय् और कह्: «अससल्मु-अलेकुम ि रहमतुलल्वह» (श्ंवत और अलल्ह की दय् हो आप पर) तो उनहोंनेउसकेसल्म क् रि्ब कदय् और कफर िह बैठ गय्, तो हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्: बीस (२०) (य्नी बीस पुणय)lउसके ब्द एक और व्यवति आय् और उसनेकह्:

«अससल्मु-अलेकुम ि रहमतुलल्वह ि बर्क्तुह» (श्ंवत और अलल्ह की दय् और उसकी बकजातेंहो आप पर) तो उनहोंनेउसकेसल्म क् रि्ब कदय् और िह बैठ गय् तो हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-ने कह्: तीस (३०)(य्नी तीस पुणय)lइसेअबू-द्ऊद नेउललेख ककय् हैऔर वतरवमज़ी नेइसेविश्वसनीय बत्य् हैl

• अलल्ह आपको अचछ् रखे! देख् आपनेकक वरसनेपूर् सल्म न करकेकेिल

कुछ श्द पर ही बस कर कदय् तो उसनेककतनेपुणय सेअपनेआपको िंवचत

रख्, यकद िह पूर् सल्म करत् तो उसेतीस पुणय वमल र्तेथेlय्द रहेकक एक पुणय की कम सेकम क़ीमत दस पुणय केबर्बर होती हैlइस तरह उसे३०० (तीन सौ) पुणय वमल र्तेथेlऔर कभी कभी तो एक पुणय की क़ीमत अलल्ह केप्स क्ई कई गुनेहोतेहैंl

• इसवलए मेरेवप्य भ्ई! आप अपनी रीभ को इस ब्त की आदत लग्इए

और सल्म को सद् पूर् कह् करेंऔर «अससल्मु-अलेकुम ि रहमतुलल्वह ि बर्क्तुह» (श्ंवत और अलल्ह की दय् और उसकी बकजातेंहो आप पर) कह् करेंत्कक आपको यह स्र् पुणय प््प्त होसकेl

• ज््त हो कक एक मुसलम्न अपनेकदन और र्त मेंकई कई ब्र सल्म करत्

है, मवसरद मेंप्िेश करतेसमय और मवसरद सेवनकलतेसमय इसी तरह घर से

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वनकलतेसमय और घर मेंप्िेश करतेसमय भी सल्म करत् हैl • मेरेभ्ई! यह मत भूवलए कक रब एक व्यवति ककसी सेरुद् होत् हैतो सुन्नत हैकक पूर् पूर् सल्म के श्द बोलेकयोंकक शुभ हदीस मेंहै: रब तुम मेंसेकोई ककसी बैठक मेंपहुंचेतो सल्म करे, और रब रुद् हो तो भी सल्म करे, कयोंकक पहली दूसरी सेअविक

महतिपूरजानहीं हैl(य्नी दोनों वमलतेसमय और रुद् होतेसमय सल्म करन् महतिपूरजाहैं) इसेअबू-द्ऊद और वतरवमज़ी नेउललेख ककय् हैl

• यकद एक व्यवति इसकी प्बंदी करत् हैतो मसवरद सेघर और घर सेमसवरद

को आतेर्तेइस सुन्नत की कुल संखय् बीस २० ब्र हो र्ती है, और इसकी संखय् बढ़ भी सकती हैयकद घर सेक्म केवलए वनकलत् हैऔर र्सतेमेंलोगों सेभेंट होती है, अथि् रब ककसी सेफोन पर ब्त करत् हैऔर सल्म करत् हैl २– वमलतेसमय मुसकुर्न्: कयोंकक हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्:» पुणयों मेंसेककसी भी पुणय को हरवगज़ घरटय् मत समझो, भलेही अपनेभ्ई सेमुसकुर्कर वमलनेक् पुणय ही हो l» इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl ३– वमलतेसमय ह्थ वमल्न्: कयोंकक हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्: रब भी दो मुसलम्न वमलतेहैंऔर एक दूसरेसे ह्थ वमल्तेहैंतो दोनों केरुद् होनेसेपहलेउनहेंक्षम् देकदय् र्त् हैl

इसेअबू-द्ऊद, वतरवमज़ी और इब्े-म्र् नेउललेख ककय् हैl

इम्म नि्िी नेकह् है: ज््त होन् च्वहए कक प्तयेक भेंट के समय ह्थ वमल्न् पसंदीद् ब्त हैl

• तो समम्वनत भ्ई! खय्ल रवखए और वरस सेभी वमवलए तो सल्म कीवरए और उनसेमुसकुर् कर ह्थ वमल्इए, इस तरह आप एक ही समय मेंतीन सुन्नतों पर अमल करेंगेl ४– अलल्ह सिजाशवतिम्न नेकह्:

َناَطْيَّشلا َّنِإ ْمُهَنْيَب ُغَزْنَي َناَطْيَّشلا َّنِإ ُنَسْح َ أ َيِه يِتَّلا اوُلوُقَي يِداَبِعِل ْلُقَو

(५३:ءارسلإا) انيِبُم اًّوُدَع ِناَسْنِلِلْ

َناَك

«मेरेबनदों सेकह दो कक: ब्त िही कहेंरो उत्तम हो lशैत्न तो उनकेबीच उकस्कर फ़स्द ड्लत् रहत् हैlवनससंदेह शैत्न मनुषय क् प्तयक्ष शत्रुहै

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l]बनी-इसर्ईल: ५३[ • और हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की

l]बनी-इसर्ईल: ५३[

• और हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-ने

कह्:(अचछ् श्द एक द्न है) इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

• अचछ् श्द मेंकय् कय् ब्तेंश्वमल हैं?: इस मेंअलल्ह केवज़क्र

सवहत , दुआ, सल्म ककसी की उवचत प्शंस्, अचछेवशष्ट्च्र, नैवतकत्, भले बत्जाि और अचछेक्यजासभी श्वमल हैंl •अचछ् श्द क् असर: अचछ् श्द मनुषय पर र्दूक् क्म करत् है, मनुषय को आर्म देत् हैऔर उसकेकदल को श्ंवत सेभर देत् हैl

• अचछ्श्द के ल्भ: अचछ्श्द तो एक मोवमन के कदल मेंवछपेप्क्श, म्गजादशजान और सीिेर्सतेपर होनेकी वनश्नी हैl • तो मेरेसमम्वनत भ्ई! कय् आपनेइस विषय मेंकभी सोच् कक अपनी पूरी रीिन को सुबह सेलेकर श्म तक अचछेऔर पवित्र श्दसेआब्द रखेंगे, कयोंकक आपकी पनिी आपके बच्े, आपके पड़ोसी, आपके दोसत, आपके नौकर और वरस वरस के स्थ भी आप बत्जाि करतेहैंसब के सब अचछेश्द के ज़रूरतमंद और वपय्सेहैंl

के सब अचछेश्द के ज़रूरतमंद और वपय्सेहैंl ६७
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भोरन ख्नेकेसमय की सुन्नतें • भोरन
भोरन ख्नेकेसमय की सुन्नतें • भोरन

भोरन ख्नेकेसमय की सुन्नतें

ख्नेकेसमय की सुन्नतें • भोरन करनेकेदौर्न और

• भोरन करनेकेदौर्न और उसकेपहलेकी सुन्नतें:

१-भोरनशुरू करनेसेपहले«वबवसमलल्ह» पढ़न् सुन्नत है: उसकेश्द यह हैं:

(ميحرلا نمحرلا للا مسب) «वबवसमलल्वहर-रहम्वनर-रहीम (अलल्ह के न्म से रो बड़् कृप्शील,

अतयंत दय्ि्न हैl» २ - द्वहनेह्थ सेख्न् l

३– प्स केभोरन को ही ख्न् l यह स्री सुन्नतेंएक ही हदीस मेंरम् हैंवरस मेंआय् है:» हेलड़क्! अलल्ह क् न्म लेकर शुरू करो, और आपनेद्वहनेह्थसेख्ओ , और रो तुमह्रे नज़दीक हैिह ख्ओ l» इसेइम्म मुवसलन नेउललेख ककय् हैl ४– यकद लुक़म् (य् कौर) वगर र्ए तो उसेस्फ़ करके ख् लेन् च्वहए , कयोंकक शुभ हदीस मेंहै: «रब तुम मेंसेककसी क् लुक़म् (य् कौर) वगर र्ए तो उस मेंसेह्वनक्रक िसतुको वनक्ल देऔर कफर उसेख्लेl» इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl ५- तीन अंगुवलयों केद््र् ख्न्: शुभ हदीस मेंहैकक:» हज़रत पैगंबर- उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-तीन अंगुवलयों केद््र् ख्ते थे»l इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् है, अविकतर उनक् यही तरीक़् थ् और यही बेहतर भी हैlलेककन यकद मरबूरी हो तो कोई ब्त नहीं हैl

६- ख्नेकेवलए बैठनेक् तरीक़्: ख्नेकेवलए बैठनेक् तरीक़् यह हैकक अपने दोनों घुटनों और दोनों पैरों केतलिों पर बैठे, अथि् अपनेद्वहनेपैर को खड़् रखेऔर ब्एं पैर पर बैठे, और यही बेहतर तरीक़् हैlइसेह्कफज़ इब्े-हरर ने «फतहुल-ब्री» मेंउललेख ककय् हैl

• इसी तरह ख्नेकेब्द भी कुछ सुन्नतेंहैं:

१– ख्नेकी पलेट और उंगवलयों को च्टन्: कयोंकक -हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो- उंगवलयों और पलेट को च्टनेक् आदेश देतेथे और कहतेथे:कयोंकक तुम नहीं र्नतेहो कक बरकत ककस मेंहै? २- ख्नेकेब्द अल-हमदु-वललल्ह-(अलल्ह क् शुक्र है) कहन्:कयोंकक शुभ हदीस मेंहै: « वनससंदेह अलल्ह द्स सेप्सन्न होत् है, यकद िह ख्न् खत्

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हैऔर उसपर उसक् शुक्र अद् करत् हैl» इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैlहज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो- ख्नेकेब्द यह दुआ पढ़् करतेथे:

«ةوق لاو ينم لوح ريغ نم هينقزرو اذه ينمعطأ يذلا لل دمحلا»

«अल-हमदुवललल्वहल-लज़ी अतअमनी ह्ज़् ि रज़क़नीवह वमन गैरर हववलन वमन्नी ि ल् क़ुविह» (अलल्ह केवलए शुक्र हैवरसनेमुझे

बल केl»

इस दुआ को पढ़नेक् फल यह हैकक उसकेवपछलेस्रे

कदय् र्त् हैlइसेअबू-द्ऊद, वतरवमज़ी और इब्े- म्र् नेउललेख ककय् है, और ह्कफज़ इब्े-हरर और अलब्नी नेइसे सही बत्य् हैl

प्पों को क्षम् कर

यह वखल्य् और वरसनेमुझेयह रोज़ी दी हैवबन् मेरी शवति और

• य्द रहेकक उन सुन्नतों की कुल संखय् १५ (पंद्रह) होती हैंवरनहेंएक मुसलम्न व्यवति ख्नेकेसमय ल्गूकरनेक् प्य्स करत् है, यह ब्त उस आदत पर आि्ररत हैवरसमेंएक व्यवति र्त और कदन मेंतीन ब्र ख्त् है, रैस् की अविक्ंश लोगों की आदत है, लेककन इस सुन्नत की संखय् बढ़ भी सकती हैयकद इन तीनों ख्नों केबीच हलकेफुलकेन्शतों को भी श्वमल कर वलय् र्ए l

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पीनेकेसमय की सुन्नतें

पीनेकेसमय की सुन्नतें

१–पीनेसेपहले“वबवसमलल्ह“ पढ़न् सुन्नत है: उसकेश्द यह हैं:

(ميحرلا نمحرلا للا مسب) “वबवसमलल्वहर-रहम्वनर-रहीम (अलल्ह केन्म सेरो बड़् कृप्शील, अतयंत दय्ि्न है) l २ - द्वहनेह्थ सेपीन्: कयोंकक शुभ हदीस मेंआय् है:“ हेलड़क्! अलल्ह क् न्म लेकर शुरू करो, और आपनेद्वहनेह्थसेख्ओ l“ ३ - पीनेकेदौर्न बतजान केब्हर स्ंस लेन् : मतलब: तीन ब्र मेंवपए एक ही ब्र मेंन पी ड्लेlकयोंकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो- पीनेकेदौर्न तीन ब्र स्ंस लेतेथे( य्नी बतजान केब्हर) l इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl ४ – बैठकर पीन् : कयोंकक हदीस मेंआय् है:“ तुम मेंसेकोई भी हरवगज़ खड़् रहकर न वपए l“इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl ५ – पीनेकेब्द अल-हमदु-वललल्ह-(अलल्ह क् शुक्र है) कहन्: कयोंकक शुभ हदीस मेंहै:“ वनससंदेह अलल्ह द्स सेप्सन्न होत् है, यकद िह ख्न् खत् है और उसपर उसक् शुक्र अद् करत् हैऔर पीनेकी चीज़ पीत् हैतो उस पर उसक् शुक्र अद् करत् हैl“इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl और उन सुन्नतों की कुल संखय् २० (बीस) होती हैंवरनहेंएक मुसलम्न व्यवति पीनेकेसमय ल्गूकरनेक् प्य्स करत् हैlय्द रहेकक इस सुन्नत की संखय् बढ़ भी सकती हैयकद शरबत य् च्य य् दूसरी वपनेकी चीरों को भी इस में श्वमल कर वलय् र्ए lकयोंकक कुछ लोग इन चीरों को पीतेसमय इस पर धय्न नहीं देतेहैंइसवलए स्िि्न रहेंl

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७०

न्फल नम्रेंघर मेंपढ़न्

न्फल नम्रेंघर मेंपढ़न् १ – हज़रत पैगंबर-उन पर
न्फल नम्रेंघर मेंपढ़न् १ – हज़रत पैगंबर-उन पर
न्फल नम्रेंघर मेंपढ़न् १ – हज़रत पैगंबर-उन पर
न्फल नम्रेंघर मेंपढ़न् १ – हज़रत पैगंबर-उन पर
न्फल नम्रेंघर मेंपढ़न् १ – हज़रत पैगंबर-उन पर

१ – हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्: वनससंदेह आदमी की नम्ज़ अपनेघर मेंसब सेअचछी हैवसि्य फ़ज़जानम्ज़ केlबुख्री और मुवसलम दोनों इस पर सहमत हैंl २ - हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्: आदमी की न्फल नम्ज़ ऐसी रगह पर रह्ूँउसेलोग न देखेंलोगों की आंखों केस्मने उसकी नम्ज़ की तुलन् में२५ (पचीस) नम्ज़ों केबर्बर हैlइसेअबू-यअल् नेउललेख ककय् हैऔर अलब्नी नेइसेसही बत्य् हैl ३ -हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्:

अपने घर मेंआदमी की नम्ज़ की गुरित्त् उसकी तुलन् मेंर्ह्ं लोग देखतेहैंऐसी ही हैरैसेफज़जानम्ज़ कीगुरित्त्न्फल पर हैlइसेउसेअत-तबरीनी नेउललेख ककय् हैऔर अलब्नी नेइसेविश्वशनीय बत्य् l

• इस आि्र पर र्त और कदन मेंज़ुह् की नम्ज़ (य्नी कदन चढ़नेके समय की नम्ज़) और वितर नम्ज़ सवहत असीम सुन्नतों (य्नी गैर- मुअक्द् सुन्नतों) की संखय् बहुत होर्ती है, और यकद एक व्यवति उसेअपनेघर मेंपढ़नेक् प्य्स करत् हैतो उसेबड़् पुणय प््प्त होग् और सुन्नत पर भी अमल हो र्एग् l

इन सुन्नतों को घर मेंपढ़नेकेफल:

सुन्नतों को घर मेंपढ़नेसेयह ब्त सपष्ट होती हैकक श्रद्ध्लुकेिल अलल्ह हीकेवलए श्रद्ध् और भवति कर रह् है, इसकेद््र् व्यवति कदख्िेकेगुम्न से भी दूर रहत् हैl क) सुन्नतों को घर मेंपढ़नेसेघर मेंभी दय् उतरती है, और शैत्न घर से भ्ग र्त् हैl ख) इस केद््र् पुणय की संखय् मेंभी कई कई गुन् बढ़्ि् वमलत् हैरैसे फ़ज़जाको मवसरद मेंपढ़नेसेकई गुन् बढ़कर पुणय प््प्त होत् हैउसी तरह न्फल को घर मेंपढ़नेसेअविक पुणय प््प्त होत् हैl

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बैठक मेंसेउठतेसमय की सुन्नतें

की सुन्नतें ककसी भी बैठक
की सुन्नतें ककसी भी बैठक
की सुन्नतें ककसी भी बैठक
की सुन्नतें ककसी भी बैठक

ककसी भी बैठक मेंसेउठतेसमय “क््फफ्रतुल-मरवलस“ (य्नी बैठक क् क्षवतपूरर)पढ़न् सुन्नत है, और उसकेश्द कुछ इस तरह हैं:

“كيلإ بوتأو كرفغتسا ، تنأ لاإ هلإ لا نأ دهشأ كدمحبو مهللا كناحبس“

“सु्ह्नकलल्हुमम् ि वब-हवमदक्, अशहदु अलल् इल्ह् इलल् अनत्, असतगकफरुक् ि अतूबुइलैक्“ (हेअलल्ह! पवित्रत् हो तुझेऔर तेरी ही वलए प्शंस् है, मैंगि्ही देत् हूँकक तेरेवसि्य और कोई पूरनीय नहीं है, मैंतुझी सेम्फ़ी च्हत् हूँऔर तेरेप्स ही पचि्त्त्प करत् हूँl) इसे“सुनन“ केलेखकों नेउललेख ककय् हैl

• ज््त हो कक एक मुसलम्न व्यवति अपनेकदन और र्त मेंककतनी स्री बैठकों मेंबैठत्, वनससंदेह बहुत स्री बैठकेंहैं, उनहेंहम वनचेखोल खोल कर उललेख करतेहैं:

१) - तीन ब्र ख्न् ख्नेकी बैठक: इसमेंकोई शक नहीं हैकक आप वरसके स्थ भी बैठेंगेतो उनकेस्थ ब्त तो करेंगेही l

२- रब आप अपनेदोसतों य् अपनेपड़ोवसयों मेंसेककसी सेवमलतेहैंतो उस से ब्त करतेही हैं, भलेही खड़ेखड़ेसही l ३- सहयोवगयों और वमत्रों केस्थ बैठनेकेसमय अथि् रब आप क्य्जालय में होतेहैंय् सकूल केबेंच पर बैठेहोतेहैंl ४- रब आप अपनी पनिी और अपनेबच्ों केस्थ बैठतेहैंऔर आप उनसेब्त करतेहैंऔर िेआप सेब्त करतेहैंl ५- रब आप अपनेर्सतेमेंग्ड़ी मेंहोतेहैंऔर रो भी आपकेस्थ उस र्सते मेंहोत् है, पनिी य् दोसत उनकेस्थ ब्त करतेही हैंl

६-रब आप अपनेव्य्खय्न य् प्ठ केवलए र्तेहैंl

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• तो देखए -अलल्ह आपको अचछ् रखे- कक अपनेकदन और

र्त मेंआपनेककतनी ब्र इस दुआ को पढ़् है? त्कक लग्त्र आपक् लग्ि अलल्ह सेलग् रहे, ज़र् सोवचए कक आपनेककतनी ब्र अपनेप्लनह्र की पवित्रत् प्कट ककय्? और ककतनी ब्र उसकी मह्नत् को बय्न ककय्? और ककतनी ब्र आपनेउसकी प्शंस् की? और

ककतनी ब्र “सु्ह्न्कलल्हुमम् ि वब-हवमदक्“( हेअलल्ह! पवित्रत् हो तुझे और तेरी ही वलए प्शंस् है) केद््र् उसकी पवित्रत् को सपष्ट ककय् ?

• अपनेकदन और र्त मेंककतनी ब्र आपनेअपनेप्लनह्र केस्थ नए वसरे

सेम्फ़ी-तल्फ़ी और तौब्-वतलल् ककय्, उन बैठकों मेंआप सेहुई गलती-

भुलती से“सु्ह्न्कलल्हुमम् ि वब-हवमदक्“( हेअलल्ह! पवित्रत् हो तुझे और तेरी ही वलए प्शंस् है) केम्धयम सेम्फ़ी म्ंगी?

• ककतनी ब्र आपनेअलल्ह सिजाशवतिम्न के एकेश्वरि्द को बय्न ककय्,

और ककतनी ब्र प्लन करनेमेंउसकी एकत्, पूर् मेंउसकी एकत् और उसके न्म और उसकेगुर मेंउसकी एकत् को सपष्ट ककय्? और ककतनी ब्र “अशहदु

अलल् इल्ह् इलल् अनत्“ (मैंगि्ही देत् हूँकक तेरेवसि्य और कोई पूरनीय नहीं है) केद््र् उसकी एकत् क् गुरग्न ककय् ?

• यकद आप इस सुन्नत पर अमल करतेहैंतो आपकेकदन-र्त अलल्ह की एकत्

बय्न करनेऔर म्फ़ी म्ंगनेऔर आपसेसेहुई कवमयों सेतौब् मेंगुज़रेंगेl इस सुन्नत को ल्गूकरनेकेपररर्म:

इस सुन्नत पर अमल करनेसेउन बैठकों मेंहुए प्पों और गलवतयों के वलए पररह्र प््प्त होग् l

प्पों और गलवतयों के वलए पररह्र प््प्त होग् l ७३
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सोनेसेपहलेकी सुन्नतें

१- सोनेसेपहलेयह दुआ पढ़े:

सोनेसेपहलेयह दुआ पढ़े: “ايحأو تومأ مهللا كمساب“

“ايحأو تومأ مهللا كمساب“ “वबवसमकलल्हुमम् अमूतुि अहय्“ (हेअलल्ह! मैंतेरेही न्म पर मरत् हूँ और रीत् हूँlइसेइम्म बुख्री नेउललेख ककय् हैl २– अपनी दोनों हथेवलयों को इकठ्् करेऔर सूरह “ क़ुल हुिलल्हु अहद“ और क़ुल अऊज़ुवबरव्बल- फलक़ “ और “ क़ुल अऊज़ुवबरव्बन-न्स“ पढ़कर उसमें

फूंकेऔर चेहर्, वसर सवहत रह्ूँतक शरीर पर ह्थ पहुूँच सकेह्थ फेरे, इस तरह तीन ब्र करेlइसेइम्म बुख्री नेउललेख ककय् हैl ३- “आयतल-कुसती“ य्नी अलल्हु ल् इल्ह् इलल् हुिल- हययुल-क़ययूम पढ़े lइसेइम्म बुख्री नेउललेख ककय् हैl

• इस आयत को पढ़नेकेफल : रो भी इसेपढ़ेग् तो अलल्ह की ओर सेउस

पर लग्त्र एक रक्षक मुतययन रहेग् और शैत्न उसकेप्स फटकेग् भी नहीं lरैस् कक ऊपर की हदीस मेंहैl ४– और कफर यह दुआ पढ़े:

نإو اهمحراف يسفن تكسمأ نإ ، هعفرأ كبو يبنج تعضو يبركمساب“ “نيحلاـصلا كداـبع هـب ظفحت امب اـهظفحاف اهتلسرأ “वबवसमक् र्बी िज़अतुरंबी ि वबक् अफ़जाउह, इन अमसकत् न्फसी फहजामह् ि इन असजालतह् फहफज़ह् वबम् तहफज़ुवबही इब्दकस-स्वलहीन“ (हेमेरेप्लनह्र! मैंनेतेरेन्म सेअपनेपहलूको रख् और तेरेद््र् ही उसे उठ्ऊं ग्, यकद तूमेरी आतम् को रोक लेत् हैतो तूउस पर दय् कर, और यकद छोड़ देत् हैतो तूउसकेद््र् उसकी रक्ष् कर वरसकेद््र् अपनेविशेष द्सों की रक्ष् करत् हैlइसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् हैl ५– और कफर यह दुआ पढ़े:

اهتييحأ نإ اهايحمو اهتامم كل ، اهافوت تنأو يسفن تقلخ كنإ مهللا“ “ةيفاعلا كلأسأ ينإ مهللا ، اهل رفغاف اهتمأ نإو ، اهظفحاف (हेअलल्ह! तूनेमेरी आतम् को बन्य्, और तूही उसेवनिन देत् है, तेरेही वलए उसकी रीिन और उसक् वनिन है,यकद तूउसेरीिन देत् हैतो उसकी रक्ष् कर और यकद तूउसेमौत देत् हैतो उसेम्फ़ कर दे,हेअलल्ह! मैंतुझ से सि्सथय म्ंगत् हूँlइसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

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६- और तीन ब्र यह दुआ पढ़े:

“كدابع ثعبت موي كباذع ينق بر“ “रव्ब कक़नी अज़्बक् यौम् तबअसुइब्दक“ (हेमेरेप्लनह्र! तूमुझेउस कदन अपनी पीड़् सेबच् रब तूअपने द्सों को उठ्एग्) इसेअबू-द्ऊदऔर वतरवमज़ी नेउललेख ककय् हैlयह दुआ उस समय पढ़न् च्वहए रब अपनेद्वहनेह्थ अपनेग्ल केनीचेरखेl ७–इसी तरह तेंतीस (३३) ब्र( للا ناحبس ) “सु्ह्नलल्ह“(खूब पवित्रत् हैअलल्ह के वलए) और तेंतीस (३३) ब्र ((لل دمحلا(अल-हमदुवललल्ह) )प्शंस् है अलल्ह के वलए(और चौंतीस (३४) ब्र “ “ربكأ للا“अलल्हु अकबर“(अलल्ह बहुत बड़् है) पढ़ेlइसेइम्म बुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् हैl

८–और कफर यह पढ़े:

“يوأم لاو يفاك لا نمم مكف ، اناوآو انافكو اناقسو انمعطأ يذلا لل دمحلا“

“अल-हमदुवललल्वहल-लज़ी अतअमन्, ि सक़्न् ि कफ्न् ि आि्न्, फ कम वममम्न ल् क्कफय् ि ल् मअि्“ (स्री प्शंस् अलल्ह ही केवलए है, वरसनेहमेंवखल्य् और हमेंवपल्य्, और हम्रेवलए क्फ़ी हुआ और हमेंपन्ह कदय्, रबकक ककतनेऐसेहैंवरसक् न कोई क्फ़ी होनेि्ल् हैऔर न कोई पन्ह हैl) इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl ९- –इसी तरह यह दुआ पढ़न् च्वहए:

هكيلمو ءيش لك َّبر ، ضرلأاو تاوامسلا رطاف ةداهشلاو بيغلا ملاع مهللا“ هكرشو ناطيشلا رش نمو يسفن رش نم كب ذوعأ ، تنأ لاإ هلإ لا نأ دهشأ ، “ملسم ىلإ هرجأ وأ اًءوس يسفن ىلع فرتقأ نأو ،

“अलल्हुमम् आवलमल-गैवब िशशह्दवत फ्वतरस्-सम्ि्वत िल-अरवज़, र्ब् कुवलल शैइन ि मलीकहु, अशहदुअलल् इल्ह् इलल् अनत्, अऊज़ुवबक् वमन शररजान्फसी ि वमन शररजाशशैत्वन ि वशरककही ि अक़तररफ् अल् न्फसी सूअन औ अरुरजाह इल् मुवसलम“ (हेअलल्ह! देखी और अनदेखी को र्ननेिल्! आक्शों और पृथिी क् वनम्जात्!हर चीज़ क् प्लनह्र और म्वलक! मैंगि्ही देत् हूँकक तुझको छोड़कर कोई पूरनीय नहीं है, मैंतेरी शरर मेंआत् हूँअपनी आतम् की बुर्ई

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और शैत्न की बुर्ई और उसकी मूरतजापूर् से, और

और शैत्न की बुर्ई और उसकी मूरतजापूर् से, और अपनी आतम् पर कोई बुर्ई करनेअथि् ककसी मुसलम्न पर बुर्ई ड्लनेसेतेरी शरर मेंआत् हूँl) इसेअबू-द्ऊद और वतरवमज़ी नेउललेख ककय् हैl १० – और यह दुआ पढ़े:

، كيلإ يهجو تهجوو ، كيلإ يرمأ تضوفو ، كيلإ يسفن تملسأ مهللا“ كباتكب تنمآ ، كيلإ لاإ اجنم لاو أجلم لا كيلإ ةبهرو ةبغر ، كيلإ يرهظ تأجلأو “تلسرأ يذلا كيبنبو تلزنأ يذلا

“अलल्हुमम् असलमतुन्फसी इलैक्, ि फविज़तुअम्ी इलैक, ि िज्हतुिरही इलैक, ि अलरअतुज़हरी इलैक, रगबतन ि रहबतन इलैक, ल् मलरअ ि ल् मनर् इलल् इलैक, आमनतुवब ककत्वबकल-ल्ज़ी अनज़लत् ि वब नवबवययकल- ल्ज़ी अरसलत“ (हेअलल्ह! मैंनेअपनी आतम् को तेरेवहि्लेककय्, और मैंनेअपनेक्यजाको तेरे सुपुदजाककय्, और मैंनेअपनेचेहरेको तेरी ओर फेर कदय्, और मैंनेअपनी पीठ को तेरेहि्लेककय् , तुझ सेउममीद करकेऔर तुझ सेडरतेहुए, कोई शरर नहीं और कोई बचनेक् र्सत् नहीं हैमगर तेरेसह्रे, मैंनेतेरी उस पुसतक पर विश्व्स ककय् रो तूनेउत्री है, और तेरेउस दूत पर विश्व्स ककय् वरसे तूनेभेर् हैl) इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् l

११– और कफर यह दुआ पढ़े:

قلاف ءيش لك برو انبر ، ميظعلا شرعلا برو عبسلا تاوامسلا بر مهللا“ ءيش لك رش نم كب ذوعأ ، ناقرفلاو ليجنلإاو ةاروتلا لزنمو ، ىونلاو بحلا سيلف رخلا تنأو ، ءيش كلبق سيلف لولأا تنأ مهللا ، هتيصانب ذخآ تنأ كنود سيلف نطابلا تنأو ، ءيش كقوف سيلف رهاظلا تنأو ، ءيش كدعب “رقفلا نم اننغأو نيدلا انع ضقإ ، ءيش “अलल्हुमम् र्बस-सम्ि्वतस्-सबइ ि र्बल-अरशजाल-अज़ीम, र्ब्् ि र्ब् कुवलल शै, फ्वलक़ल-हव्ब िन्-नि्, ि मुवनज़लत-तौर्वत िल-इनरीवल िल- फुरक़्न, अऊज़ुवबक् वमन शररजा कुवलल शैइन अनत् आवखज़ुनवबन्वसवयतह, अलल्हुमम् अनतल-अविलु फलैस् क़्लक् शै, ि अनतल-आवखरु फलैस् बअदक् शै, ि अनतज़-ज़्वहरु फलैस् फवक़क् शै, ि अनतल-ब्वतनुफलैस् दूनक् शै, इक़वज़ अन्नद-दैन् ि अगवनन् वमनल-फक़र“ (हेअलल्ह! स्तों आक्शों क् म्वलक! और समम्वनत “अशजा“ के म्वलक! हेमेरेम्वलक और हर चीज़ के म्वलक! द्नों और गुठवलयों से(फल-फूल)

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वखल्ने ि्ल्! “तौर्त“ इंरील और फुरक़्न(कुर्न) को उत्रनेि्ल्! मैंहर उस चीज़ की बुर्ई सेतेरी शरर मेंआत् हूँवरसकी पेश्नी को तूपकड़ेहुए हैlहेअलल्ह! तूपहल् है, तो तुझ सेपहलेकोई चीज़ नहीं है, और तूही आवखर हैतो तेरेब्द कोई चीज़ नहीं है, और तूही प्तयक्षहैतो तेरेऊपर कोई चीज़ नहीं है,और तूही परोक्षहैतो तेरेसेनीचेकोई चीज़ नहीं है, हम्री ओर सेहम्रे कज़जाको चुक् दे, और हम्री गरीबी को दूर करकेहमेंम्ल्म्ल करदेl) इसे इम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl १२– इसी तरह सूरह “बक़र्“ की आवखरी दो आयत “ ِهْيَلِلإَ ِزْن ُ أ اَمِب ُلوُسَّرلا َنَمآ َنوُنِمْؤُمْلاَو ِهِّبَر ْنِم “ आमनर-रसूलुवबम् उनवज़ल् इलैही वमर्-रव्बही ि्ल- मुअवमनून“(रसूल उसपर रो कुछ उसकेरब की ओर सेउसकी ओर उतर् ईम्न ल्य् और ईम्नि्लेभी .) सेआवखर तक पढ़ेl कयोंकक सुभ हदीस मेंहै: रो भी इन दोनों को पढ़ेग् तो िह दोनों उसेक्फी होगी lइसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् हैl •: इस हदीस मेंरो अरबी श्द ((هاتفك“ कफत्ह“आय् हैउसके अथजा पर विद््नों केबीच मतभेद है, कुछ लोगों क् कहन् हैकक उसक् मतलब यह है कक िेदोनों र्त की नम्ज़ की रगह क्फी है, और कुछ लोगों क् कहन् हैंकक उसक् मतलब यह हैकक िेदोनों आयतेंहर प्क्र की बुर्ई, दुख और कठन्ई को दूर करनेकेवलए क्फी हैlलेककन दोनों अथजाएक ही स्थ सही होसकतेहैं lइस ब्त को इम्म नििी ने“अल-अज़क्र“ न्मक पुसतक मेंउललेख ककय् हैl १३– सोनेकेसमय पवित्र रहन् च्वहए कयोंकक शुभ हदीस मेंहै:“ रब वबसतर पर आतेहो तो पहलेिुज़ूकर लो l“

१४– द्वहनेपहलूपर सोन् च्वहए: कयोंकक शुभ हदीस मेंआय् है:“ कफर तुम अपनेद्वहनेपहलूपर सोओl“ इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् हैl १५- और अपनेदवहनेह्थ को द्वहनेग्ल केनीचेरखेlरैस् कक शुभ हदीस मेंहै: “रब तुम मेंसेकोई अपनेवबसतर पर आए तो अपनेवबसतर को झ्ड़ ले, कयोंकक उसेपत् नहीं हैकक उसकेब्द उसपर कय् आ पड़् है?“ इसेबुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् हैl १६– सोनेसेपहले “َنوُرِفاَكْلا اَهُّي َ أ اَي ْلُق“ ( क़ुल य् अययुहल-क्कफरून) पढ़न्:

और उसक् फल यह हैकक उसकेद््र् “वशकजा“ मूरतजापूर् सेमुति हो र्एग् lइसे अबू-द्ऊद, वतरवमज़ी और अहमद नेउललेख ककय् है, और इब्े-वह्ब्न और ह्ककम नेइसे“सहीह“ कह् हैऔर ज़हबी नेइसपर समथजान ककय्, और ह्कफ़ज़

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इब्े-हरर नेभी इसेविश्वशनीय बत्य् और अलब्वन नेइसे सही कह् हैl • सोनेसेपहलेकी सुन्नत केसंबंि मेंइम्म नििी नेकह्: कोई भी व्यवति इस खंड मेंिररजात सभी वनयमों पर एक स्थ अमल कर सकत् है, और यकद न हो सकेतो उनमेंसेरो रो अविक महतिपूरजाहै उस पर अमल कर लेl •य्द रहन् च्वहए ककखोर करनेसेहमेंपत् चलत् हैकक:जय्द्तर लोग कदन और र्त मेंदो ब्र तो सोतेही हैंऔर इस आि्र पर एक व्यवति कम सेकम दो ब्र इन स्री सुन्नतों अथि् उन मेंसेकुछ सुन्नत पर अमल कर सकत् है lकयोंकक यह सुन्नतेंकेिल र्त की नींद केवलए ही विशेष नहीं हैबवलक इस में कदन की नींद भी श्वमल हैlयह इसवलए कक सुभ हदीसों मेंर्त कदन ककसी को भी विशेष नहीं ककय् गय् हैl सोनेकेसमय इन वनयमों पर अमल करनेकेपररर्म:

१) यकद एक मुसलम्न सोनेसेपहलेबर्बर इन दुआओं को पढ़त् हैतो उसकेवलए सौ (१००) द्न वलख् र्एग्, कयोंकक शुभ हदीस मेंहै:“ प्तयेक सु्ह्नलल्ह“ (पवित्रत् हैअलल्ह केवलए) एक द्न है, और प्तयेक “अलल्हु अकबर“(अलल्ह बहुत बड़् है) एक द्न है, और प्तयेक “अलहमदुवललल्ह“ (सभी प्शंस् अलल्ह केवलए है) एक द्न है, और प्तयेक (ल् इल्ह् इलल्ह) (अलल्ह को छोड़ कर कोई पूरनीय नहीं है) एक द्न हैl“ इसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl * इम्म नििी नेकह्: इसक् मतलब यह हैकक एक द्न करनेक् बदल् और पुणय वमलेग् l २) यकद एक मुसलम्न सोनेसेपहलेलग्त्र इन दुआओं को पढ़त् हैतो उसके वलए सिगजामेंसौ (१००) पेड़ लग् कदए र्तेहैंlरैस् कक इब्े-म्र् के द््र् उललेवखत शुभ हदीस मेंआय् हैl ३– अलल्ह सिजाशवतिम्न अपनेद्स को उस र्त सुरवक्षत रखत् हैऔर शैत्न को उस सेदूर रखत् है, और बुर्इयों और कठन्ईयों सेउसेबच्त् हैl ४– इसके द््र् एक व्यवति अलल्ह की य्द , उसकी आज््, उसपर भरोस्, विश्व्स और उसकी एकत् पर ईम्न केस्थ अपनेकदन को सम्प्त करत् हैl

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प्तयेक क्मों केसमय इर्द् को शुद्ध रखन् च्वहए

प्तयेक क्मों केसमय इर्द् को शुद्ध रखन् च्वहए

को शुद्ध रखन् च्वहए ज््त हो!- अलल्ह आपको
को शुद्ध रखन् च्वहए ज््त हो!- अलल्ह आपको
को शुद्ध रखन् च्वहए ज््त हो!- अलल्ह आपको
को शुद्ध रखन् च्वहए ज््त हो!- अलल्ह आपको
को शुद्ध रखन् च्वहए ज््त हो!- अलल्ह आपको
को शुद्ध रखन् च्वहए ज््त हो!- अलल्ह आपको
को शुद्ध रखन् च्वहए ज््त हो!- अलल्ह आपको

ज््त हो!- अलल्ह आपको अचछ् रखे-कक स्रेिैि क्म रो आप करतेहैंरैसे:

सोन्, ख्न् और रोज़ी कम्नेक् प्य्स इतय्कद सब के सब को इब्दत, फम्जाबरद्री और पुणय क् क्म बन् सकतेहैं, वरनकेबदलेमेंआपको हज़्रों पुणय प््प्त होंगे, बस शतजायह हैकक एक व्यवति अपनेकदल मेंइन क्मों को करते समय अलल्ह की इब्दत क् इर्द् रखे, कयोंकक हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्: «क्मों की वनभजारत् तो इर्दों पर है, और आदमी केवलए तो िही हैवरसकी िह वनययत रखत् हैl» इसेइम्म बुख्री और मुवसलम नेउललेख ककय् l * उद्हरर: यकद एक मुसलम्न व्यवति इस इर्देसेरलदी सोत् हैकक र्त में नम्ज़ केवलए अथि् फ़रर की नम्ज़ केवलए र्ग र्ए तो उसक् सोन् भी इब्दत हो र्त् हैlइसी तरह अनय िैि क्मों को भी समझ लीवरए l

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एक ही समय मेंएक सेअविक इब्दत कर लेन्

सेअविक इब्दत कर लेन् एक ही समय मेंकई
सेअविक इब्दत कर लेन् एक ही समय मेंकई
सेअविक इब्दत कर लेन् एक ही समय मेंकई
सेअविक इब्दत कर लेन् एक ही समय मेंकई
सेअविक इब्दत कर लेन् एक ही समय मेंकई
सेअविक इब्दत कर लेन् एक ही समय मेंकई
सेअविक इब्दत कर लेन् एक ही समय मेंकई
सेअविक इब्दत कर लेन् एक ही समय मेंकई

एक ही समय मेंकई इब्दतों को प््प्त करनेक् गुर तो िही र्नतेहैंरो अपने समय को बच् बच् कर चलतेहैंl हम्री रीिन मेंइसक् प्योग कई तरह सेहो सकत् है:

१- यकद एक मुसलम्न पैदल मवसरद को र् रह् हो य् अपनी ग्ड़ी से र् रह् हो , तो यह र्न् भी एक अलग इब्दत हैऔर इस पर भी एक मुसलम्न को पुणय वमलत् है, लेककन इसी समय को अविक सेअविक अलल्ह को य्द करनेऔर पवित्र कुर्न को पढ़नेमेंभी लग्य् र् सकत् है, और इस तरह एक व्यवति एक ही समय मेंकई इब्दत कर सकत् हैl २ - यकद एक मुसलम्न ककसी श्दी केएक ऐसेभोर मेंर्त् हैरो बुर्इयों सेवबलकुल मुति और पवित्र हो तो उसक् इस भोर मेंर्न् भी एक इब्दत है, लेककन िह व्यवति भोर मेंअपनी उपवसथवतको कई इब्दतों मेंलग् सकत् है, रैसेअविक सेअविक अलल्ह को य्द करे, और लोगों को अलल्ह की ओर आमंत्ररकरेl

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हर हर घड़ी अलल्ह को य्द करन् १) ि्सति मेंअलल्ह की

हर हर घड़ी अलल्ह को य्द करन्

घड़ी अलल्ह को य्द करन् १) ि्सति मेंअलल्ह की
घड़ी अलल्ह को य्द करन् १) ि्सति मेंअलल्ह की
घड़ी अलल्ह को य्द करन् १) ि्सति मेंअलल्ह की
घड़ी अलल्ह को य्द करन् १) ि्सति मेंअलल्ह की
घड़ी अलल्ह को य्द करन् १) ि्सति मेंअलल्ह की
घड़ी अलल्ह को य्द करन् १) ि्सति मेंअलल्ह की
घड़ी अलल्ह को य्द करन् १) ि्सति मेंअलल्ह की

१) ि्सति मेंअलल्ह की य्द, अलल्ह की इब्दत और उसकी बंदगी की बुनय्द है, कयोंकक उसेसद् य्द रखन् एक द्स के अपनेसरजानह्र सेहर समय और हर घड़ी लग्ि की वनश्नी है: हज़रत आइश्-अलल्ह उनसे प्सन्न रहे- के द््र् उललेख हैकक हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो- अपनी हर घड़ी मेंअलल्ह को य्द ककय् करतेथेlइसेइम्म मुवसलम नेउललेख ककय् हैl * य्द रहेकक अलल्ह सेरुड़ेरहन् ि्सति मेंरीिन है, और उसकी शरर में आन् ही मुति है, उसकेनज़दीक होन् सफलत् और प्सन्नत् है, और उस सेदूर होन् गुमर्ही और क्षवत हैl २– अलल्ह को य्द करन् सच्ेमोवमनों (विश्व्वसयों) और प्खणडीयों केबीच विवशष्ट वचहनहै, प्खणडीयों की पहच्न ही यही हैकक िेअलल्ह को य्द नहीं करतेहैंमगर वबलकुल न्मको l ३- शैत्न मनुषय पर उसी समय चढ़ बैठत् हैरब िह अलल्ह की य्द को तय्ग देत् हैlि्सति मेंअलल्ह की य्द िह मज़बूत गढ़ हैरो मनुषय को शैत्न के र्लों सेबच्त् हैl * शैत्न तो च्हत् ही यही हैकक व्यवति को अलल्ह की य्द सेबहक् देl ४– अलल्ह की य्द ही प्सन्नत् क् र्सत् हैlअलल्ह सिजाशवतिम्न क् फ़रम्न

है: :دعرلا) «ُبوُلُقْلا ُّنِئَمْطَت َِّللا ِرْكِذِب لا َ أ َِّللا ِرْكِذِب ْمُهُبوُلُق ُّنِئَمْطَتَو اوُنَمآ َنيِذَّلا » (२८ «ऐसेही लोग हैंरो ईम्न ल्ए और वरनकेकदलों को अलल्ह केसमरर से आर्म और चैन वमलत् हैl» (अर-रअद: २८) ५– अलल्ह को सद् य्द करन् आिशयक है, कयोंकक सिगजाकेलोगों को ककसी भी ब्त पर कोई अफसोस और पछत्ि् नहीं होग्lयकद पछत्ि् होग् तो केिल उस घड़ी पर रो दुवनय् मेंवबन् अलल्ह सिजाशवतिम्न को य्द ककए गुज़र गई l(अलल्ह को य्द करनेक् मतलब ही यही हैकक अलल्ह सेलग्त्र लग्ि बन् रहेl इम्म नििी क् कहन् है: विद््नों क् इस ब्त पर समथजान हैकक अलल्ह को हर तरह य्द ककय् र् सकत् है, कदल से, रीभ से, वबन् िुज़ूककए, इसी तरह वबन् नह्ई और म्हि्री ि्ली स्ती और बच्् रनम देनेकेब्द खून सेपवित्र होनेसेपहलेभी स्ती अलल्ह को य्द कर सकती है, उन वसतवथयों मेंभी अलल्ह

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को य्द करन् िैि है, और िह «सु्ह्नलल्ह» (पवित्रत् है अलल्ह केवलए है) और «अलल्हु अकबर»(अलल्ह बहुत बड़् है) और «अलहमदुवललल्ह» (सभी प्शंस् अलल्ह के वलए है) और «ल् इल्ह् इलल्ह» (अलल्ह को छोड़ कर कोई पूरनीय नहीं है)पढ़ सकती है, इसी तरह हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-पर दुरूद ि सल्म पढ़न् भी िैि है, और दुआ करन् भी मन् नहीं है, ह्ूँपवित्र कुर्न को नहीं पढ़ेगी l ६ रो भी अपनेप्लनह्र को य्द करत् हैतो उसक् प्लनह्र भी उसेय्द करत् हैlअलल्ह सिजाशवतिम्न क् फरम्न है:

(१५२:ةرقبلا) «ِنوُرُفْكَت لاَو يِل اوُرُكْشاَو ْمُكْرُكْذ َ أ يِنوُرُكْذاَف »

अत:और तुम मुझेय्द रखो, मैंभी तुमहेंय्द रखूंग् lऔर मेर् आभ्र सिीक्र करतेरहन्, मेरेप्वत अकृतज्त्न कदखल्न् l ]अल-बक़र्: १५२[ ज््त हो कक रब एक व्यवति को यह पत् चलत् हैकक ककसी र्र् नेउसेअपने दरब्र मेंय्द ककय् तो िह बहुत प्सन्न हो र्त् है, तो कफर उस समय कय् वसतवथ होनी च्वहए यकद यह पत् चल गय् हैकक स्रेर्र्ओं क् र्र् उसे य्द करत् हैlऔर कफर उन र्र्ओं केदरब्र सेभी बेहतर और सब सेऊूँचे दरब्र मेंउसेय्द ककय् र् रह् हैl ७– इस य्द क् हरवगज़ यह मतलब नहीं हैकक आदमी ककसी विशेष श्द की रट लग्तेबैठे, और कदल अलल्ह केसमम्न और उसकी फरम्बरद्री सेदूर भटकत् कफरे, इसवलए ज़ुब्न सेय्द करनेके स्थ स्थ उन श्दों के अथजा और मतलब मेंसोच-िीच्र करेबवलक उनकेअथमों मेंडूब् रहन् भी ज़रूरी है lअलल्ह सिजाशवतिम्न क् फरम्न है:

ِلاَصلاَوْ ِّوُدُغْلاِب ِلْوَقْلا َنِم ِرْهَجْلا َنوُدَو ًةَفيِخَو اًعُّرَضَت َكِسْفَن يِف َكَّبَر ْرُكْذاَو » (२०५:فارعلأا) “َنيِلِفاَغْلا َنِم ْنُكَت لاَو

«अपनेरब को अपनेमन मेंप््त: और संधय् केसमयों मेंविनम्त्पूिजाक, डरते हुए और हलकी आि्ज़ केस्थ य्द ककय् करो lऔर उन लोगों मेंसेन हो रो गफ़लत मेंपड़ेहुए हैंl( अल-अअर्फ़: २०५ ) • इसवलए अलल्ह को य्द करनेि्लेव्यवति केवलए यह ज़रूरी हैकक उन श्दों को अचछी तरह समझेऔर मन मेंवबठ्ए और वरनको िह ज़ुब्न सेकह रह् है उनहेंअपनेकदल मेंभी उपवसथत रखेlत्कक ज़ुब्न की य्द केस्थ स्थ कदल की य्द भी इकठ्ी हो र्ए, और मनुषय ब्हर और अंदर दोनों केद््र् अलल्ह सेरुड़् रहेl

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अलल्ह केकृप्द्नों मेंसोच िीच्र करन् अलल्ह

अलल्ह केकृप्द्नों मेंसोच िीच्र करन्

मेंसोच िीच्र करन् अलल्ह केकृप्द्नों
मेंसोच िीच्र करन् अलल्ह केकृप्द्नों
मेंसोच िीच्र करन् अलल्ह केकृप्द्नों
मेंसोच िीच्र करन् अलल्ह केकृप्द्नों
मेंसोच िीच्र करन् अलल्ह केकृप्द्नों
मेंसोच िीच्र करन् अलल्ह केकृप्द्नों

अलल्ह केकृप्द्नों केब्रेमेंसोचो , और अलल्ह मेंमत सोचो lइसेतबर्नी ने“अवसत“ मेंऔर बैहक़ी ने“शुअब“ मेंउललेख ककय् हैऔर अलब्नी नेइसे विश्वशनीय बत्य् l और रो चीरेंएक मुसलम्न व्यवति के स्थ कदन-र्त मेंकई ब्र पेश आती हैंउनहेंमेंअलल्ह केकृप्द्नों क् एहस्स करन् भी श्वमल हैlकदन-र्त में ककतनेऐसेअिसर आतेहैंऔर ककतनी ऐसी घवड़य्ूँगुज़रती हैंवरनहेंमनुषय देखत् हैय् सुनत् है, और बहुत स्रेऐसेअिसर आतेरहतेहैंरो अलल्ह के कृप्द्नों मेंसोच-िीच्र और शुकक्रय् अद् करनेकी ओर आमंवत्रत करतेहैंl १– तो कय् मवसरद को र्तेसमय आपनेकभी यह महसुस ककय् कक आप पर अलल्ह की ककतनी बड़ी मेहरब्नी हैकक आप मसवरद को र् रहेहैंरबकक आपके आसप्स ही बहुत स्रेऐसेलोग रहतेहोंगेरो इस कृप् सेिंवचत हैं, विशेष रूप सेसुबह की नम्ज़ केवलए र्तेसमय आपको इस कृप् क् भरपूर एहस्स होन् च्वहए रब आप मुसलम्नों केघरों मेंदेखेंगेकक िेगहरी नींद में मुरदों की तरह पड़ेहैंl २- कय् आपनेअलल्ह की मेहरब्नी को अपनेआप पर महसूस ककय्? विशेष रूप सेरब आप ककसी दुघजाटन् को देखतेहैं, ककसी केस्थ ग्ड़ी की दुघजाटन् हो गई तो कोई शैत्न की आि्ज़(य्नी ग्नों) को ज़ोर ज़ोर सेलग्ए हुए हैआकदl ३– कय् आपनेउस समय अलल्ह की दय् को महसूस ककय् रब आप सुनतेहैं य् पढ़तेहैंकक दुवनय् मेंफुल्न् देश मेंभुकमरी टूट पड़ी है, य् ब्ढ़ मेंलोग मर रहेहैंय् फुल्नी रगह पर वबम्ररय्ूँफैली हुई हैंय् और कोई दुघजाटन् आई हुई है, य् फल्न् देश केलोग भूकंप सेदोच्र हैंय् युद्धों मेंवपस रहेहैं य् बेघर हो रहेहैं? * मैंकहन् च्हगं ् कक एक सफल व्यवति िही हैवरसके कदल और वरसकी भ्िन्ओं और वरसकेएहस्स सेअलल्ह की मेहरब्नी कभी ओझल नहीं होती है, और िह हर वसथवत मेंऔर हर मोड़ पर सद् अलल्ह क् शुकक्रय् और उसकी प्शंस् मेंलग् रहत् हैlऔर उस कृप् क् शुक्र अद् करत् हैरो उसेअलल्ह की ओर सेप््प्त हैरैसे: िमजा, िन-दौलत की बहत्यत, सि्सथय, सुरक्ष् इतय्कद की नेमत l

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शुभ हदीस मेंआय् है, हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की

शुभ हदीस मेंआय् है, हज़रत पैगंबर -उन पर इश्वर की कृप्और सल्म हो-नेकह्: रो ककसी मुसीबतज़द् को देखेतो िह यह दुआ पढ़े:

قلخ نمم ٍريثك ىلع ينلضفو هب كلاتبا امم ينافاع يذلا لل دمحلا“ “ ًلايضفت

“अल-हमदुवललल्वहल-लज़ी आफ्नी वमममब-तल्क् वबही, ि फ़जज़लनीअल् कवसररन वमममन खलक़् त््फज़ील्“ (अलल्ह केवलए शुकक्रय् हैवरसनेमुझे उस पीड़् सेमुति रख् वरस सेउसेपीवड़त ककय् और वरसनेमुझेऐसेबहुत स्रों पर प््थवमकत् कदय् वरसेउसनेबन्य् हैlयकद यह पढ़त् हैतो उस पीड़् सेकभी पीवड़त नहीं होग् lइम्म वतरवमज़ी नेइसेविश्वशनीय बत्य् l

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हर महीनेमेंकुर्न पढ़न्

हर महीनेमेंकुर्न पढ़न् हज़रत पैगंबर-उनपर इश्वर
हर महीनेमेंकुर्न पढ़न् हज़रत पैगंबर-उनपर इश्वर
हर महीनेमेंकुर्न पढ़न् हज़रत पैगंबर-उनपर इश्वर

हज़रत पैगंबर-उनपर इश्वर की कृप् और सल्म हो- नेकह्: “ हर महीनेमें कुर्न पढ़् करो “ इसेअबू–द्ऊद नेउललेख ककय् l हर महीनेमेंपूर् कुर्न पढ़नेक् त्रीक़्:

इस क् त्रीक़्यह हैकक आप प्तयेक फ़ज़जानम्ज़ सेलघभग १० (दस) वमनट पहलेमवसरद मेंपहुंचनेकी कोवशश करें, त्कक आप नम्ज़ शुरू होनेसेपहले दो पन्न् पढ़ सकें, य्नी दो पन्नेप्तयेक नम्ज़ सेपहले, इस तरह आप प्वतकदन दस पन्नेपढ़ लेंगेlमतलब एक प्र् lइस तरह आप प्तयेक महीनेमेंएक ब्र पूर् कुर्न आस्नी सेपढ़ लेंगेl

महीनेमेंएक ब्र पूर् कुर्न आस्नी सेपढ़ लेंगेl ८५
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सम्वप्त

सम्वप्त हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और
सम्वप्त हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और

हज़रत पैगंबर-उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- की दैवनक सुन्नतों मेंसे इतन् को मैंयह्ूँरम् कर सक्, और अलल्ह सेप््थजान् हैकक हज़रत पैगंबर- उन पर इश्वर की कृप् और सल्म हो- की सुन्नतों पर हमेंवरल्ए और उसी पर मौत देl ह्म्री आखरी ब्त यही हैकक स्री प्शंस् अलल्ह केवलए ही हैरो स्रेसंस्रों क् प्लनह्र हैl

ख्वलद अल-हुसैन्न l

क् प्लनह्र हैl ख्वलद अल-हुसैन्न l ८६
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