करे।

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ििििििि ििििििि
शहर के सुपिसद, बड़े
-बड़े िवद्यालयों में मातृ-िपतृ पूजन कायरकम अवशय हो, इसका पूरा पर्यास

िवद् य
ालयों की संख्या आयोजकों की संख्या से अिधक होने पर यह आयोजन 14
फरवर ी स े कु छ िद न पू वर भी शुर िकया जा सकता ह ै । बड े एवं सु प िस द िवद ा ल य ो म े
कायरकम 14 फरवरी को न हो पाय े तो उसक े पू वर या दूस र े िद न भी कायर क म कर सकत े ह ै ।
जो साधक संलगन िविध-अनुसार भलीपकार कायरकम कराने मे सकम हो, उसे पूज-न
िवधइ कराने का
दाियतव दे। ऐसी कमता वाले एक से अिधक साधक हो तो उनहे अलग-अलग केतो हेतु िनयुकत करे। िवसतृत पूजन-िविध
संलगन है।
कायरकम-सथल पर समय से पूवर पहुँचकर भली पकार तैयारी करे।
कायरकम की समािपत के बाद कायरकम के फोटो एवं पेसनोट समाचार पतो को भेजे। पेसनोट का पारप संलगन
है।
समाचार पतो व चैनलो के पतकारो, समपादको को कायरकम के पूवर आमंतण दे। केत के सजजन, सुपितिषत
व्यिक्तयों, नगरसेवको, महाप ौ ,रिजलाधीश आिद को पधानाचायर की अनुमित लेकर आमंितत कर सकते है।
कायरकम के फोटो सहभािगयो से जरा दूर खडे होकर व टेबल आिद पर चढकर (ऊँचाई )से
इस पर्कार

खीचे की फोटो मे सभी सहभागी िदखे। हॉल मे फोटो खीचते समय सभी लाइटस चालूकरे। चुन हुए अचछे से अचछे 2-3
फोटो प े स न ो ट क े साथ द ै िन क समाचा र पत -पितकाओं को भेजे। समाचार पत-पितकाओं की किटंगज भी
मु ख या ल य जरर भ े ज े । स म भव हो तो फोटो व प े प र किटं ग ज सक े न करक े शीघ ई-म े ल
दारा भेज दे।
सभी जगह कायरकम-आयोजन पूणर होने के बाद पतयेक सिमित दारा कुल िकतने िवदालयो एवं कुल िकतने
िवद्यािथर्यों को कायर्कर्म में सहभागी बनाया गया तथा िकतने पेम्फलेट बाँटे गये,
इसकी िरपोटर् के आधार पर आयोजक सिमितयों की शर्ेणी-सूची मुखयालय मे बनायी जायेगी।
िििििििि िि ििििि िििििििि
पधानाचायर हेतु संलगन िकया हुआ पत आप अपने लेटर हेड पर उनहे दे। पधानाचायों से कायरकम की अनुमित
पापत करने मे कोई भी समसया आये तो अमदावाद मुखयालय से समपकर करके मागरदशरन पापत करे।
कायरकम से पूवर ही िवदालय/महािव द ा ल य क े नोिट स बोडर पर लगान े ह े त ु िव द ा िथर य ो
के िलए सूचना संलगन है। िवदालयीन पाथरना के समय वहा के आचायर िवदािथरयो को कायरकम एवं सामगी की जानकारी दे
सकते है। माता-िपता कुिसरयो अथवा कलास के बेचो पर बैठे, बच्चे नीचे चटाई आिद पर बैठें ऐसी
व्यवस्था बनायें। िवद्याथीर् घर से अपने साथ चद्दर आिद आसन ले आयें।
अिभभावको को कायरकम मे बुलाने हेतु पधानाचायर को आमंतण-पत छपवाकर दे। पारप संलगन है। यिद
आमंतण पत छपवाना आपके िलए समभव नही हो तो पधानाचायर/िशकक िवदािथरयो की नोटबुक मे यह आमंतण-पत
िलखवाये। धयान दे, इस कायर्कर्म में अिधक-से-अिधक माता-िपता की उपिसथित हो, तभी कायर क म साथर क
होगा। इसिलए माता-िपता की अिधकािधक उपिसथित को महततव दे।
िवद्यालयों के िक्
श षएकों वं कमर्चािरयों को भी अपने बच्चों को कायर्कर्म में
लाने हेतु पेिरत करे।
िजन बचचो के माता-िपता नही आ पायेगे, वे िवद्याथीर् भी पूजन-सामगी अवशय ले आये। उनके दारा मा
सरसवती का पूजन करवाया जायेगा।
नोटः 'मातृ -िपतृ पूजन िदवस' अपने बाल संसकार केनदो मे भी अवशय मनाये।
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
मातृ -िपतृ पूजन कायरकम की िवसतृत रपरेखा
िििििििििदीप पजजवलन (ििििि ििििििि ििि िििििि िििि
िििििििििििििििि। िििि ििििि ििि िििि िििि
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शी गणेश वंदना ( ि िि िििििि ििि, ििििििििििििििि
ििििििििििििििि । िििििििििि िििि िि ििि िििििििििििि
िििििििि)
हिर ॐ गुंजन (सात बार)
गुरू वंदना(ििििििििििििि ििििििििििििि.....)
मा सरस वत ी की वं द न ा (या ििििििििििििििििििििििि....)
ििििि िििििििपाचायर दारा उदबोधन (सवागत एवं कायरकम का उदेशय)
अितिथयो का फूलो दारा सवागत (चयिनत िवद्यािथर्यों द्वारा)
िििि-िििि िििि िििििसवरपथम सदगुरदेव के शीिचत का पुषप आिद से पूजन करे, िजनके पावन मागरदशरन से हमे यह कायरकम करने
की पेरणा िमली।
नीचे िदये कमानुसार िविध माइक से बताये जाये।
माता -िपता को सवचछ तथा ऊँचे आसन पर बैठाये।
िवद्याथीर् माता-िपता के माथे पर कु ंकुम का ितलक करे।
( ि ििििििि ि िििििििि ििििििििििि, ििििििि िि िििि
िििििििििि । ििििििि िििििििििििििििििििििििि,
ििििििि िि ििििििििििििििि। )
त त पश ा त ् माता -िपता के िसर पर पुषप अपरण करे तथा फूलमाला पहनाये।
माता -िपता भी िवदािथरयो के माथे पर ितलक करे एवं िसर पर पुषप रखे। िफर अपने गले की फूलमाला बचचो
को पहनाये।
िवद्याथीर् थाली में दीपक जलाकर माता-िपता की आरती करे। इस समय 'मात िप ता गुर
चरणों में....' भजन ('भजन दीपांजली' कैसेट से) चला सकते हैं। िवद्याथीर् अपने माता िपता
एवं गुर मे ईशरीय भाव जगाते हुए उनकी सेवा करने का दृढ संकलप करे।
िवद्याथीर् अपने माता-िपता के एवं माता-िपता िवदाथी के िसर पर अकत एवं पुषपो की वषा करे।
त त पश ा त ् िव द ा थ ी अपन े माता -िपता की सात बार पदिकणा करे।
(िििि िििि ि िििििि िििििििििि िििििि िि िििि
ििििििि िििििििि ििििििििि ििि-ििि)
िवद्याथीर् अपने माता-िपता को 'मातृ -िपतृ पूजन' बैनर में िदखाये अनुसार झुककर,
िविधवत पर्णाम करें। (अिभवादनशीलसय िनतय वृदोपसेिवनः। चतवािर तसय वधरनते आयुिवरदा यशो बलम्।।)
इस समय माता-िपता अपने बचचे पर सनेहाशीष बरसाये और गले से लगाये। पभु के नाते एक दूसरे को पेम करके
अपने िदल के परमेशर को छलकने दे। इस िदन बचचे-बिच्चयों से यह पिवतर् संकल्प करवायें- 'म ै
अपने माता-िपता व गुरजनो का आदर करँगा/करँगी। मेरे जीवन को महानता के रासते ले जाने वाली उनकी आजाओं का
पालन करना मेरा कतरवय है और मै उसे अवशय पूरा करँगा/करँगी।' माता -िपता से यह शुभ संकलप बुलवाये"तु म ह ा र े जीवन म े उद म , साहस, धैयर, बुिद्ध, शिकत व पराकम की वृिद हो। तुमहारा जीवन माता-िपता एवं
गुरू भिक्तसेमहकउठे।तुम्हारेकायर्
मेक
ं ुशलताआये।तुमितर्लोचनबनो– तुम्हारीबाहरकी आँखकेसाथ भीतरी
िववेक की कल्याणकारी आँख जागृत हो। तुम पुरष
ु ाथीर् बनो और हर क्षेतर् में सफलता
तु म ह ा र े चरण चू म े । "
िवद्याथीर् माता-िपता को 'मधु र प स ा द ' िखलाये एवं माता-िपता अपने बचचे को पसाद िखलाये।
त त पश ा त ् 'भारतीय संस्कृित में माता-िपता एवं गुरजनो की महता' पर िवदालय/महािव द ा ल य
के पधानाचायर/आचायर एवं जो िवदाथी/अिभभावक उतसुक हो वे समबोधन दे कायरकम कैसा लगा। इस पर भी अपना मत
अिभवयकत करे।
ििििििििििि पूणाहिु त मंत( ि िि िििििि.... ि िििििििि
ििििििििि....)ि

िििि इस पूजन िविध में िदये गये मंतर् के कायर्कर्म के सूतर्धार बोलते
जाये। िजन िवदािथरयो के अिभभावक उपिसथत न हो उनमे से कुछ िवदाथी िवदालय के पाचायर व िशकको का भी पूजन
कर सकते है।
अिधक जानकारी के िलए समपकर करेििि ििििििि ििििि,
िििि िििििि िििि ििि ििििििि िििि ििििि,
ििि िििि िििििििि ििििि, ििििििि, ििििििि-5
िििि 079.39877749, 27505010/11,
email: bskamd@gmail.com ashramindia@ashram.org
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मान व -जीवन के उतथान मे माता-िपता एवं गुरजनो के आदर का महततव जानने वाला यिद कोई देश है तो वह है
अपना भारत देश। इस देश की महान संसकृित ने इस िसदानत को अतयनत महततव देते हुए िवदाथी को आदेश िदया हैः
'मातृ द े व ो भव। िप तृ द े व ो भव। आचायर द े व ो भव।' अथात् माता, िपता और आचायर को देव (ईशर) मान न े
वाला हो। अपनी संस्कृित के इन पर्ाचीन संस्कारों को पुनस्थार्िपत करने के िलए 14
फरवर ी को 'वेलेन्टाईन डे' मनान े की जो पाश ा त य प थ ा हमार े द े श म े प ै र जमा रही
है, उसे उखाड़ फेंकने के िलए संत शर्ी आसाराम जी बापू की पावन पर्ेरणा से देशभर
म े मातृ -िपतृ पूजन कायरकम का आयोजन िकया जा रहा है। इसमे देश के हजारो िवदालय एवं महािवदालय से जुडे
गयेहैं।
संत शी आसारामजी बापू के िशषयो दारा यह कायरकम फरवरी महीने मे देश के िविभन िवदालयो, लाखो पिरवारो
तथा 18000 हजार बाल संसकार केनदो मे सामूिहक रप से मनाया जाता है। इसी शृंखला मे........... िवद्यालय में
िदनाक...... को मातृ-िपतृ पूजन कायरकम का आयोजन िकया गया।
आयोजको का कहना है 'मातृ द े व ो भव। िप तृ द े व ो भव। आचायर द े व ो भव।' इस महान वैिदक
संदेश को नजरअंदाज करने के घातक पिरणाम आज हम पतयक देख रहे है। आज छोटी-छोटी बात मे माता-िपता व
गुरज
ू नोंका अनादरतथाउनकेपर्ितउद्दण्डताबढ़तीजारहीहै।िस्थितयहाँतक पहुँचगयीहैिक अिधकाँशिवद्याथीर्
बड़े होकर अपने माता-िपता को वृदाशम मे रखने मे संकोच महसूस नही कर रहे है। इस पकार िनरंकुश होने से
बाल एवं युवा पीढ़ी का घोर चािरितर्क पतन हो रहा है। इस पिरपर्ेक्ष्य में यह कायर्कर्म
बच्चों के कोमल हृदय को सुसंस्कारीत करने के िलए वरदान सािबत होगा।'
उल्लेखनीय है िक िवश् ववंदनीयसंत शर्ी द्वारा चलाये गये िवद्याथीर्-उत्थान के
कायरकमो की केनदीय मंतालय एवं िविभन मंतालयो ने भूिर-भूिर पर्शंसा की है।
िदनाक..... को सथानीय..... िवद्यालय में.... बजे से 'मातृ -िपतृ पूजन िदवस' कायरकम बडे उतसाह के
साथ समपन हुआ।
(यहा पर कायरकम का िववरण अपने शबदो मे अिधकतम 10-12 पंिकतयो मे वयकत करे।)
इस अवसर पर शर्ी.........,.........,......... आिद गणमानय लोग उपिसथत थे। पधानाचायर शी ....... ने सभी
उपिस्थत अितिथयों एवं अिभभावकों को हािदर्क धन्यवाद िदया।
'वेलेन्टाईन डे' के सथान पर 'मातृ -िपतृ पूजन िदवस' का यह कायरकम अनय िवदालयो के िलए भी
अनुकरणीय है।
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ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

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आतमीय शी,

सपेम नमसकार !
भारतीय संस्कृित की 'मातृ -िपतृ भिकत' की भावना
को पोतसािहत करना हमारा नैितक दाियतव है। इसी महान उदेशय से
हमारे िवदालय मे 'मातृ -िपतृ पूजन कायरकम' का आयोजन िकया
गयाहै।उस िदनसभीिवद्याथीर्
'मातृ द े व ो भव। िप तृ द े व ो
भव।' की पावन भावना से माता-िपता का शदा एवं आदर सिहत
पूजन करेगे। उनके कोमल मन पर इस शुभ संसकार का ऐसा पभाव
पडेगा, जो भावी जीवन मे उनके उजजवल चिरत-िनमाण की

आधारिशला िसद होगा।
आपसे हमारा िवनम अनुरोध है िक यथासमय िवदालय मे पधारकर अपने बचचो मे शुभ संसकार िसंचन के इस
आयोजन को सफल बनाते हुए बचचो का उतसाह व मनोबल बढाये। आपकी अनुपिसथित से आपकी संतान मातृ-िपतृ पूजन
के इस िवलकण आनंद से वंिचत न रह जाय, इसिलए आपकी उपिस्थित अत्यंत आवश् यकहै।
ििििििििि िि ििििििि
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ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

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िििि-िििि िििि िििि
(14 ििििि)
आदरणीय आचायर,

शी......
ििििि िििििििि ििि 'िििि-िििि िििि ििििििििि' ििििि
िििि।
आतमीय शी,
आज के सपधातमक युग मे पतयेक शैकिणक संसथा एवं अिभभावक चाहते है िक उनके िवदाथी अचछे पितशत से
उत्तीणर् हों, अनुशािसत बने, माता -िपता एवं गुरजनो के पित कृतजता का भाव रखकर उनका आदर करे।
शैकिणक, सामािजक व खेल जगत आिद िविभन केतो मे जगमगाती हुई िसिदया पापत करके अपने िवदालय एवं माता-िपता
का नाम रोशन करे। परंतु पाशातय जीवन शैली का अंधानुकरण, टी.वी. चैनल, अशलील चलिचत, सािहतय, व्यसन,
अशुद आहार-िवहार व इंटरनेट पर िदये जा रहे नैितक रूप से घातक िवज्ञापनों की वजह से
िदन पितिदन िवदािथरयो का शारीिरक, मानिस क , बौिद्धक एवं नैितक पतन हो रहा है।
बचपन में सुसंस्कार-िसंचन के साथ चिरत-िनमाण ही मनुषय के भावी जीवन की आधारिशला है। अतः
बच्चों में सुसंस्कारों का िसंचन व भारतीय संस्कृित की 'मातृ -िपतृ भिकत' की भावना को पोतसािहत

करना हमारा नैितक दाियतव है। इसी महान उदेशय को लेकर आपके िवदालय मे 'मातृ -िपतृ पूजन कायरकम का आयोजन
करना चाहते है। उस िदन सभी िवदाथी 'मातृ द े व ो भव। िप तृ द े व ो भव ' की पावन भावना से माता-िपता का शदा एवं
आदर सिहत पूजन करेगे। उनके कोमल मन पर इस शुभ संसकार का ऐसा पभाव पडेगा, जो भावी जीवन मे उनके
उज्जवल चिरतर्-िनमाण की आधारिशला िसद होगा।
आपसे हमारा िवनम अनुरोध है िक इस िदन िवदालय मे बचचो के अिभभावको को आमंितत कर िवदािथरयो मे शुभ
संसकार िसंचन के इस आयोजन को सफल बनाते हुए उनका उतसाह व मनोबल बढाये। आपके सहयोग से समाज मे ऐसे
कायरकमो को पोतसाहन िमलेगा।
िििििििििििि
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