मममम-मममम

मममम
मममम मममममम मम मममममम, मममममममममममम,
ममममममम, मममममम, मममममममममम ममम ममममममममम
ममममम मममम ममममम मममम मम मम मममम ममममममम मम
ममममम मम ममम ममम ममममममम

ममममममम ममम ममममममम
ममममममम
मात िपता गुरु पर्भु चरणों में।
िनवेदन।
वेलेन्टाइन डे कैसे शुरु हुआ और आज....।
िवश् वमानवकी मंगलकामना से भरे पूज्य संत शर्ी आसारामजी बापू का परम िहतकारी
संदेश।
कैसे 'मनायें मातृ-िपतृ पूजन िदवस' ?
अ िभभावको ए वं ब ाल सं सकारके नदिशक कोके िलए िन वे दन।
मातृ-िपतृ-गुरु भिक्त।
माता-िपता-गुरु की सेवा का महत्त्व।

शासत-वचनामृत।
संत-वचनामृत।
माँ-बाप को भूलना नहीं।

ममम मममम मममम ममममम ममममम
ममम...............

मात िपता गुरू चरणों में पर्णवत बारम्बार।
हम पर िकया बडा उपकार। हम पर िकया बडा उपकार। ।।टेक।।
(1) माता ने जो कष्ट उठाया, वह ऋण कभी न जाए चुकाया।
अंगुली पकड कर चलना िसखाया, ममता की दी शीतल छाया।।
िजनकी गोदी मे पलकर हम कहलाते होिशयार,
हम पर िकया..... मात िपता...... ।।टेक।।
(2) िपता ने हमको योग्य बनाया, कमा कमा कर अन िखलाया।
पढ़ा िलखा गुणवान बनाया, जीवन पथ पर चलना िसखाया।।
जोड-जोड अपनी संपित का बना िदया हकदार।
हम पर िकया..... मात िपता...... ।।टेक।।
(3) तत्त्वज्ञान गुरू ने दरशाया, अंधकार सब दूर हटाया।
हृदय मे भिकतदीप जला कर, हिर दशरन का मागर बताया।
िबनु स्वारथ ही कृपा करें वे, िकतने बडे है उदार।
हम पर िकया..... मात िपता...... ।।टेक।।
(4) पर्भु िकरपा से नर तन पाया, संत िमलन का साज सजाया।
बल, बुिद्ध और िवद्या देकर सब जीवों में शर्ेष्ठ बनाया।
जो भी इनकी शरण मे आता, कर देते उदार।
हम पर िकया..... मात िपता...... ।।टेक।।
अनुकम
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मममममम

भारतभूिम ऋिष-मुिनयों, अवतारो की भूिम है। पहले लोग यहा िमलते तो राम राम कहकर एक दूसरे का
अिभवादन करते थे।
दो बार राम कहने के पीछे िकतना सुंदर अथर् छुपा है िक सामने वाला व्यिक्त तथा
मुझमें दोनों में उसी राम परमात्मा ईश् वरकी चेतना है, उसे पणाम हो! ऐ सीिदव य भावनाको प े म
कहते है। िनदोष, िनष्कपट, िनःस्वाथर्, िनवार्सिनक स्नेह को
पर्ेम कहते हैं। इस पर्कार एक दूसरे से िमलने पर भी
ईशर की याद ताजा हो जाती थी पर आज ऐसी भावना तो दूर की बात है,
पतन करने वाले आकषर्ण को ही पर्ेम माना जाने लगा
है।
14 फरवरीको प िश मीदे शोमे य वु क य वु ितयाए कदूसरे को ग ीिटं ग
काडरस, फूल आिद देकर वेलेनटाइन डे मनाते है। यौन जीवन संबध
ं ी
परम्परागत नैितक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की
चािरितर्क सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण ऐसे
वेलेन्टाइन डे हैं जो लोगों को अनैितक जीवन जीने
को पोतसािहत करते है। इससे उन देशो का अधःपतन हुआ है। इससे जो
समसयाएँ पैदा हुई, उनको िमटाने के िलए वहा की सरकारो को सकूलो मे
केवल संयम अिभयानो पर करोडो डालर खचर करने पर भी सफलता नही
िमलती। अब यह कुपर्था हमारे भारत में भी पैर जमा रही

है। हमे अपने परमपरागत नैितक मूलयो की रका करने के िलए ऐसे वेलेनटाइन डे का बिहषकार करना चािहए। इस संदभर मे
िवश् ववंदनीयपूज्य संत शर्ी आसारामजी बापू ने की की है एक नयी पहल – 'मातृ-िपतृ पूजन
िदवस'।

'मममममममममम मम' मममम मममम ममम ? मम
मम......
रोम के राजा क्लाउिडयस बर्ह्मचयर् की मिहमा से पिरिचत रहे होंगे, इसिलए उनहोने
अपने सैिनको को शादी करने के िलए मना िकया था, तािक वे शारीिरक बल और मानिसक दक्षता से युद्ध
में िवजय पर्ाप्त कर सकें। सैिनकों को शादी करने के िलए ज़बरदस्ती मना िकया गया
था, इसिलए संत वेलेनटाइन जो सवयं इसाई पादरी होने के कारण बहचयर के िवरोधी नही हो सकते थे, ने गुप्त ढंग
से उनकी शािदया कराई। राजा ने उनहे दोषी घोिषत िकया और उनहे फासी दे दी गयी। सन् 496 से पोप गैलेिसयस ने
उनकी याद मे वेलेनटाइन डे मनाना शुर िकया।
वेलेन्टाइन डे मनाने वाले लोग संत वेलेन्टाइन का ही अपमान करते हैं
कयोिक वे शादी के पहले ही अपने पेमासपद को वेलेनटाइन काडर भेजकर उनसे पणय-संबध
ं सथािपत करने का पयास करते
है। यिद संत वेलेनटाइन इससे सहमत होते तो वे शािदया कराते ही नही।
अतः भारत के युवान-युवितया शादी से पहले पेमिदवस के बहाने अपने ओज-तेज-वीयर् का नाश करके
सवरनाश न करे और मानवमात के परम िहतकारी पूजय बापू जी के मागरदशरन मे अपने यौवन-धन, सवासथय और बुिद की
सुरका करे। मातृ-िपतृ पूजन िदवस मनायें।
मम. मममम.मम. ममममममम
अनुकम

ममममममममम मम ममममममममम मम ममम
ममममम ममम मममम मममममममम मममम मम ममम
ममममममम ममममम
पर्ेम-िदवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर िवनाशकारी कामिवकार का िवकास हो रहा है, जो आगे
चलकर िचड़िचड़ापन, िडपेशन, खोखलापन, जलदी बुढापा और मौत लाने वाला सािबत होगा। अतः भारतवासी
इस अंधपरंपरा से सावधान हो !
'इनोसनटी िरपोटर काडर' के अनुसार 28 िवकिसत देशों में हर साल 13 से 19 वषर् की 12 लाख 50
हजार िकशोिरया गभरवती हो जाती है। उनमे से 5 लाख गभरपात कराती है और 7 लाख 50 हजार कुँवारी माता बन जाती
है। अमेिरका मे हर साल 4 लाख 94 हजार अनाथ बचचे जनम लेते है और 30 लाख िकशोर-िकशोिरया यौन रोगो के
िशकार होते है।
यौन संबनध करने वालो मे 25 % िकशोर-िकशोिरया यौन रोगो से पीिडत है। असुिरिकत यौन संबध
ं करने वालो
में 50 % को गोनोिरया, 33 % को जैिनटल हिपरस और एक पितशत के एडस का रोग होने की संभावना है। एडस के
नये रोिगयों में 25 % 22 वषर् से छोटी उमर् के होते हैं। आज अमेिरका के 33 % सकूलो
में यौन िक्
श षका े अंतगर्'त
केवल संयम' की िशका दी जाती है। इसके िलए अमेिरका ने 40 करोड से अिधक
डॉलर (20 अरब रपये) खचर् िकये हैं।
पर्ेम िदवस जरूर मनायें लेिकन पर्ेमिदवस में संयम और सच्चा िवकास लाना
चािहए। युवक युवती िमलेंगे तो िवनाश-िदवस बनेगा। इस िदन बच्चे-बिच्चयाँ माता-िपता
का पूजन करे और उनके िसर पर पुषष रखे, पर्णाम करें तथा माता-िपता अपनी संतानों को पर्ेम
करे। संतान अपने माता-िपता के गले लगे। इससे वास्तिवक पर्ेम का िवकास होगा। बेटेबेिटयाँ माता-िपता में ईश् वरीयअंश देखें और माता-िपता बच्चों में ईश् वरीयअंश
देखें।
तुम भारत के लाल और भारत की लािलयाँ (बेिटयाँ) हो। पेमिदवस मनाओ, अपने माता-िपता
का सममान करो और माता-िपता बच्चों को स्नेह करें। करोगे न बेटे ऐसा ! पाश् चात्यलोग

िवनाश की ओर जा रहे हैं। वे लोग ऐसे िदवस मनाकर यौन रोगों का घर बन रहे हैं,
अशआंित की आग मे तप रहे है। उनकी नकल तो नही करोगे ?
मेरे प्यारे युवक-युवितयो और उनके माता-िपता ! आप भारतवासी है। दूरदृिष के धनी ऋिषमुिनयों की संतान हैं। पर्ेमिदवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर बचचो, युवान-युवितयो के ओज-तेज
का नाश हो, ऐसे िदवस का तयाग करके माता-िपता और संतानों ! पर्भु के नाते एक-दूसरे को पर्ेम
करके अपने िदल के परमेशर को छलकने दे। काम िवकार नही, रामरस, पर्भुपर्ेम, पर्भुरस....
मममममममम

ममम
। मममममममम

ममममममममममममम ममम
ममममममममम ममम ममममममममम ममम
माता िपता का पूजन करने से काम राम में बदलेगा, अहंकार पेम मे बदलेगा, माता-िपता
के आशीवाद से बचचो का मंगल होगा।
पाश् चात्योंका अनुकरण आप क्यों करो ? आपका अनुकरण करके वे सदभागी हो जाये।
जो राषटभकत नागिरक यह राषटिहत का कायर करके भावी सुदृढ राषट िनमाण मे साझीदार हो रहे है वे धनभागी है
और जो होने वाले है उनका भी आवाहन िकया जाता है।
अनुकम

मममम मममममम 'मममम-मममम मममम मममम'?
माता-िपता को स्वच्छ तथा ऊँचे आसन पर बैठायें।
बच्चे-बिच्चयाँ माता-िपता के माथे पर कुंकुम का ितलक करें।
तत्पश् चात्माता-िपता के िसर पर पुष्प अपर्ण करें तथा फूलमाला पहनायें।
माता-िपता भी बच्चे-बिच्चयों के माथे पर ितलक करें एवं िसर पर पुष्प रखें।
िफर अपने गले की फूलमाला बचचो को पहनाये।
बच्चे-बिच्चयाँ थाली में दीपक जलाकर माता-िपता की
आरती करे और अपने माता-िपता एवं गुरू में ईश् वरीयभाव जगाते
हएु उनकी सेवा करने का दृढ संकलप करे।
बच्चे-बिच्चयाँ अपने माता-िपता के एवं माता-िपता
बच्चों के िसर पर अक्षत एवं पुष्पों की वषार् करें।
तत्पश् चात्बच्चे-बिच्चयाँ अपने माता-िपता की सात
बार पिरकर्मा करें।
बच्चे-बिच्चयाँ अपने माता-िपता को झुककर िविधवत
पर्णाम करें तथा माता-िपता अपनी संतान को पर्ेम से
सहलाये। संतान अपने माता-िपता के गले लगे। बेटे-बेिटयाँ
अपने माता-िपता में ईश् वरीयअंश देखें और माता-िपता बच्चों
से ईशरीय अंश देखे।
इस िदन बचचे-बिच्चयाँ पिवतर् संकल्प करें- "मैं अपने
माता-िपता व गुरुजनों का आदर करूँगा/करँगी। मेरे जीवन को महानता
के रासते ले जाने वाली उनकी आजाओं का पालन करना मेरा कतरवय है और मै उसे
अवशय पूरा करँगा/करँगी।"
इस समय माता-िपता अपने बच्चों पर स्नेहमय आशीष बरसाये एवं उनके मंगलमय
जीवन के िलए इस पकार शुभ संकलप करे- "तुम्हारे जीवन में उद्यम, साहस, धैयर, बुिद्ध, शिकत व पराकम
की वृिद हो। तुमहारा जीवन माता-िपता एवं गुरू की भिक्त से महक उठे। तुम्हारे कायोर्ं में
कुशलता आये। तुम मममममममम बनो – तुम्हारी बाहर की आँख के
साथ भीतरी िववेक की कलयाणकारी आँख जागृत हो। तुम पुरषाथी बनो और हर
केत मे सफलता तुमहारे चरण चूमे।"
बच्चे-बिच्चयाँ माता-िपता को 'मधुर-पर्साद' िखलायें
एवं माता-िपता अपने बच्चों को पर्साद िखलायें।

बालक गणेषजी की पृथ्वी-पिरकर्मा, भक्त पुण्डलीक की मातृ-िपतृ भिक्त – इन कथाओं
का पठन करे अथवा कोई एक वयिकत कथा सुनाये और अनय लोग शवण करे।
माता-िपता 'ममम-ममममममम', ममममम ममममममम-मममममम', 'मम ममममम
मममम ममम', 'मममम ममममममम' – इन पुसतको को अपनी कमतानुरप बाटे-बँटवायें तथा
पर्ितिदन थोड़ा-थोड़ास्वयंपढ़ने
का व बच्चोंसेपढ़ने
का संकल्पलें।
शी गणेश, पुण्डलीक, शवणकुमार आिद मातृ-िपतृ भक्तों की कथाओं को नाटक के रूप में
पर्स्तुत कर सकते हैं।
इन िदन सभी िमलकर 'मममम ममममममममम' ममम व आरती करके बच्चों को मधुर
पर्साद बाँटे।
नीचे िलखी पंिक्तयों जैसी मातृ-िपतृ भिक्त की कुछ पंिक्तयाँ गले पर िलखके
बोडर् बनाकर आयोजन स्थल पर लगायें।
मममम ममम मम ममम ममममम, मममम ममम मममम मममम ममममम
ममममम मममममममम ममम ममम, ममम ममममम ममम। ममममम मम ममममम
ममम, मममम ममममम मममम
मममममममम ममम मममममममम ममम मममममममममम ममम
मममम-मममम मम मममममममम मम ममम मममम मममम ममममममममम मम
मममम ममम
मममम मममम मम ममममममम
ममम ममममम मममम मम
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
अनुकम

ममममममममम ममम ममम ममममममम ममममममम
मममममममम मम ममम मममममम
मममममम 14 ममममम मम मममम-मममम मम ममम मममम ममममममम ममम
मम मममममममम ममम ममममम मम 'मममम-मममम मममम मममम' मममममम। ममम
ममममममम ममममममम मममममम मममम ममममममम ममम मममममम मम मममममममम मम मममममम ममममममम

ममममममममम मम मममम मममममममम मममम
ममम ममम मम ममम ममममममम ममममम मममम मम मममम ममममम मम (मम
मममम ममममम मम मम) मममम मम मममम ममममम

मम ममममममममममममम
ममममममम मम मममममम मममम ममम ममममम मममम मम ममममम मममममममम
मममममममम

मममम-मममम-मममम ममममम
अपनी भारतीय संसकृित बालको को छोटी उम मे ही बडी ऊँचाईयो पर ले जाना चाहती है। इसमे सरल छोटेछोटे सूतर्ों द्वारा ऊँचा, कलयाणकारी जान बचचो के हृदय मे बैठाने की सुनदर वयवसथा है।
मममममममम ममम मममममममम ममम मममममममममम ममम माता-िपता एवं
गुरू हमारे िहतैषी है, अतः हम उनका आदर तो करे ही, साथ ही साथ उनमे भगवान के दशरन कर उनहे पणाम
करे, उनका पूजन करे। आजापालन के िलए आदरभाव पयापत है परनतु उसमे पेम की िमठास लाने के िलए पूजयभाव
आवशयक है। पूजयभाव से आजापालन बंधनरप न बनकर पूजारप पिवत, रसमय एवं सहज कमर् हो जाएगा।
पानी को ऊपर चढ़ाना हो तो बल लगाना पड़ता है। िलफ्ट से कुछ ऊपर ले जाना हो तो
ऊजार् खचर् करनी पड़ती है। पानी को भाप बनकर ऊपर उठना हो तो ताप सहना पड़ता है।
गुल्ली को ऊपर उठने के िलए डंडा सहना पड़ता है। परन्तु प्यारे िवद्यािथर्यो! कैसी अनोखी
है अपनी भारतीय सनातन संसकृित िक िजसके ऋिषयो महापुरषो ने इस सूत दारा जीवन उनित को एक सहज,
आनंददायक खेल बना िदया।

इस सूत को िजनहोने भी अपना बना िलया वे खुद आदरणीय बन गये, पूजनीय बन गये। भगवान
शीरामजी ने माता-िपता व गुरू को देव मानकर उनके आदर पूजन की ऐसी मयार्दा स्थािपत की िक
आज भी मयादापुरषोतम शीरामजी की जय कह कर उनकी यशोगाथा गाय़ी जाती है। भगवान शी कृषण ने नंदनंदन,
यशोदानंदन बनकर नंद-घर में आनंद की वषार् की, उनकी पसनता पापत की तथा गुर सादीपनी के आशम मे
रहकर उनकी खूब पर्ेम एवं िनष्ठापूवर्क सेवा की। उन्होंने युिधिष्ठर महाराज के राजसूय
यज मे उपिसथत गुरजनो, संत-महापुरूषों एवं बर्ाह्मणों के चरण पखारने की सेवा भी अपने
िजममे ली थी। उनकी ऐसी कमर-कुशलता ने उनहे कमरयोगी भगवान शी कृषण के रप मे जन-जन के िदलो मे पूजनीय सथान
िदला िदया। मातृ-िपतृ एवं गुरू भिक्त की पावन माला में भगवान गणेष जी, िपतामह भीष्म,
शवणकुमार, पुण्डिलक, आरिण, उपमनयु, तोटकाचायर् आिद कई सुरिभत पुष्प हैं।
तोटक नाम का आद्य शंकराचायर् जी का िष्
षषष
श य , िजसे अनय िशषय अजानी, मूखर् कहते
थे, उसने आचायरदेवो भव सूत को दृढता से पकड िलया। पिरणाम सभी जानते है िक सदगुर की कृपा से उसे िबना पढे ही
सभी शासतो का जान हो गया और वे तोटकाचायर के रप मे िवखयात व सममािनत हुआ। वतरमान युग का एक बालक बचपन
में देर रात तक अपने िपताशर्ी के चरण दबाता था। उसके िपता जी उसे बार-बार कहते बेटा! अब सो जाओ। बहुत रात हो गयी है। िफर भी वह पेम पूवरक आगह करते हुए सेवा मे लगा रहता था। उसके
पूज्य िपता अपने पुतर् की अथक सेवा से पर्सन्न होकर उसे आशीवार्द देते ममममम मममममममम ममम ममम, ममम ममममम ममम। ममममम मम ममममम
ममम, मममम ममममम मममम
अपनी माताशी की भी उसने उनके जीवन के आिखरी कण तक खूब सेवा की।
य़ वु ावसथाप ापतहोने पर उस बालकभगवानश ीरामऔ र श ीकृष णकी भा ितग ुर के श ीचरणोमे खूब आ दर प े म
रखते हुए सेवा तपोमय जीवन िबताया। गुरूद्वार पर सहे वे कसौटी-दुःख उसके िलए आिखर
परम सुख के दाता सािबत हुए। आज वही बालक महान संत के रूप में िवश् ववंदनीयहोकर
करोडो-करोडो लोगो के दारा पूिजत हो रहा है। ये महापुरष अपने सतसंग मे यदा-कदा अपने गुरदार के जीवन पसंगो का
िजक करके कबीरजी का यह दोहा दोहराते है मममम मम मममममम मममम मम ममम ममममम ममममम मम मममम मम
मममम मम मममम ममममम ममममम
सदगुर जैसा परम िहतैषी संसार मे दूसरा कोई नही है। मममममममममम मम, यह शासत-वचन
मातर् वचन नहीं है। यह सभी महापुरष
ू ों का अपना अनुभव है।
मममममममम ममम मममममममम ममम मममममममममम ममम यह सूत इन महापुरष
के जीवन मे मूितरमान बनकर पकािशत हो रहा है और इसी की फलिसिद है िक इनकी पूजनीया माताशी व सदगुरदेव दोनों ने अंितम क्षणों में अपना शीश अपने िपर्य पुतर् व िष्
शयक ी गोद में रखना पसंद
िकया। खोजो तो उस बालक का नाम िजसने मातृ-िपतृ-गुरू भिक्त की ऐसी पावन िमसाल कायम की।
आज के बालको को इन उदाहरणो से मातृ-िपतृ-गुरूभिक्त की िक्
श षला ेकर माता
-िपता एवं गुरू की
पर्सन्नता पर्ाप्त करते हुए अपने जीवन को उन्नित के रास्ते ले जाना चािहए।
अनुकम

मममम-मममम-मममम मम मममम मम ममममममम
शासतो मे आता है िक िजसने माता-िपता तथा गुरू का आदर कर िलया उसके द्वारा संपूणर्
लोको का आदर हो गया और िजसने इनका अनादर कर िदया उसके संपूणर शुभ कमर िनषफल हो गये। वे बडे ही भागयशाली
है, िजनहोने माता-िपता और गुरू की सेवा के महत्त्व को समझा तथा उनकी सेवा में अपना जीवन
सफल िकया। ऐसा ही एक भागयशाली सपूत था - पुण्डिलक।
पुण्डिलक अपनी युवावस्था में तीथर्यातर्ा करने के िलए िनकला। यातर्ा करते-करते
काशी पहुँचा। काशी मे भगवान िवशनाथ के दशरन करने के बाद उसने लोगो से पूछाः कया यहा कोई पहुँचे हुए महातमा है,
िजनके दशरन करने से हृदय को शाित िमले और जान पापत हो?
लोगो ने कहाः हा है। गंगापर कुकुर मुिन का आशम है। वे पहुँचे हुए आतमजान संत है। वे सदा परोपकार मे लगे
रहते हैं। वे इतनी उँची कमाई के धनी हैं िक साक्षात माँ गंगा, माँ यमुना और माँ

सरसवती उनके आशम मे रसोईघर की सेवा के िलए पसतुत हो जाती है। पुणडिलक के मन मे कुकुर मुिन से िमलने की
िजजासा तीवर हो उठी। पता पूछते-पूछते वह पहुँच गया कुक्कुर मुिन के आशर्म में। मुिन के
देखकर पुण्डिलक ने मन ही मन पर्णाम िकया और सत्संग वचन सुने। इसके पश् चात
पुण्डिलक मौका पाकर एकांत में मुिन से िमलने गया। मुिन ने पूछाः वत्स! तुम कहाँ से आ
रहे हो?
पुण्डिलकः मैं पंढरपुर (महाराष्टर्) से आया हूँ।
तुम्हारे माता-िपता जीिवत हैं?
हा है।
तुम्हारे गुरू हैं?
हा, हमारे गुर बहजानी है।
कुकुर मुिन रष होकर बोलेः पुणडिलक! तू बड़ा मूखर् है। माता-िपता िवद्यमान हैं,
बर्ह्मज्ञानी गुरू हैं िफर भी तीथर् करने के िलए भटक रहा है? अरे पुणडिलक! मैंने जो
कथा सुनी थी उससे तो मेरा जीवन बदल गया। मै तुझे वही कथा सुनाता हँू। तू धयान से सुन।
एक बार भगवान शंकर के यहाँ उनके दोनों पुतर्ों में होड़ लगी िक, कौन बडा?
िनणर्य लेने के िलए दोनों गय़े िव
ष -पावर्ती के पास। िव


श -पावर्ती ने कहाः जो
संपूणर पृथवी की पिरकमा करके पहले पहुँचेगा, उसी का बडपपन माना जाएगा।
काितरकेय तुरनत अपने वाहन मयूर पर िनकल गये पृथवी की पिरकमा करने। गणपित जी चुपके-से एकात मे चले
गये। थोड़ी देर शांत होकर उपाय खोजा तो झट से उन्हें उपाय िमल गया। जो ध्यान करते
है, शात बैठते है उनहे अंतयामी परमातमा सतपेरणा देते है। अतः िकसी किठनाई के समय घबराना नही चािहए बिलक
भगवान का ध्यान करके थोड़ी देर शांत बैठो तो आपको जल्द ही उस समस्या का समाधान
िमल जायेगा।
िफर गणपित जी आये िशव-पावर्ती के पास। माता-िपता का हाथ पकड़ कर दोनों को ऊँचे
आसन पर िबठाया, पतर्-पुष्प से उनके शर्ीचरणों की पूजा की और पर्दिक्षणा करने लगे। एक
चक्कर पूरा हुआ तो पर्णाम िकया.... दूसरा चक्कर लगाकर पर्णाम िकया.... इस पकार माता-िपता
की सात पदिकणा कर ली।
िशव-पावर्ती ने पूछाः वत्स! ये पदिकणाएँ कयो की?
गणपितजीः मममममममममममम मममम... मममममममममम मममम... सारी पृथवी
की पदिकणा करने से जो पुणय होता है, वही पुण्य माता की पर्दिक्षणा करने से हो जाता है, यह
शासतवचन है। िपता का पूजन करने से सब देवताओं का पूजन हो जाता है। िपता देवसवरप है। अतः आपकी पिरकमा
करके मैने संपूणर पृथवी की सात पिरकमाएँ कर ली है। तब से गणपित जी पथम पूजय हो गये।
िशव-पुराण में आता हैः
ममममममममम ममममम मममममम मममममममममममम म ममममम ममम
मममम मम ममममममममममममम मममम ममममममममम
।।
ममममम मममम मम मम ममममम मममममममममममममम
मममम मममम ममम मममममममम मममम म मममममममममम
मममममममम म मममममममममम मममममममममममममममममम
मममममममममम मम मममम मम ममममम मममममममममममम मममममम
ममम मममममममम मममममम ममममम मममममममममम।
मममममममम म ममममममममममममम मममममम मममम मममममममममम
जो पुत माता-िपता की पूजा करके उनकी पर्दिक्षणा करता है, उसे पृथवी-पिरकर्माजिनत
फल सुलभ हो जाता है। जो माता-िपता को घर पर छोड़ कर तीथर्यातर्ा के िलए जाता है, वह मातािपता की हत्या से िमलने वाले पाप का भागी होता है क्योंिक पुतर् के िलए माता-िपता के
चरण-सरोज ही महान तीथर है। अनय तीथर तो दूर जाने पर पापत होते है परंतु धमर का साधनभूत यह तीथर तो पास मे ही
सुलभ है। पुत के िलए (माता-िपता) और सती के िलए (पित) सुंदर तीथर घर मे ही िवदमान है।
(ममम ममममम, ममममम मम.. मम मम.. - 20)

पुण्डिलक मैंने यह कथा सुनी और अपने माता-िपता की आज्ञा का पालन िकया। यिद
मेरे माता-िपता में कभी कोई कमी िदखती थी तो मैं उस कमी को अपने जीवन में नहीं
लाता था और अपनी शदा को भी कम नही होने देता था। मेरे माता-िपता पर्सन्न हुए। उनका आशीवार्द मुझ
पर बरसा। िफर मुझ पर मेरे गुरूदेव की कृपा बरसी इसीिलए मेरी बर्ह्मज्ञा में िस्थित हुई
और मुझे योग मे भी सफलता िमली। माता-िपता की सेवा के कारण मेरा हृदय भिक्तभाव से भरा है।
मुझे िकसी अन्य इष्टदेव की भिक्त करने की कोई मेहनत नहीं करनी पड़ी।
मममममममम ममम मममममममम ममम ममममममममम ममम
मंिदर में तो पत्थर की मूितर् में भगवान की कामना की जाती है जबिक माता-िपता
तथा गुरूदेव में तो सचमुच परमात्मदेव हैं, ऐसा मानकर मैने उनकी पसनता पापत की। िफर तो मुझे न
वषोर्ं तक तप करना पड़ा, न ही अन्य िविध-िवधानों की कोई मेहनत करनी पड़ी। तुझे भी पता
है िक यहा के रसोईघर मे सवयं गंगा-यमुना-सरसवती आती है। तीथर भी बहजानी के दार पर पावन होने के िलए आते है।
ऐसा बहजान माता-िपता की सेवा और बर्ह्मज्ञानी गुरू की कृपा से मुझे िमला है।
पुण्डिलक तेरे माता-िपता जीिवत हैं और तू तीथोर्ं में भटक रहा है?
पुण्डिलक को अपनी गल्ती का एहसास हुआ। उसने कुक्कुर मुिन को पर्णाम िकया और
पंढरपुर आकर माता-िपता की सेवा में लग गया।
माता-िपता की सेवा ही उसने पर्भु की सेवा मान ली। माता-िपता के पर्ित उसकी
सेवािनषा देखकर भगवान नारायण बडे पसन हुए और सवयं उसके समक पकट हुए। पुणडिलक उस समय माता-िपता
की सेवा मे वयसत था। उसने भगवान को बैठने के िलए एक ईट दी।
अभी भी पंढरपुर मे पुणडिलक की दी हुई ईट पर भगवान िवषणु खडे है और पुणडिलक की मातृ-िपतृभिक्त की
खबर दे रहा है पंढरपुर तीथर्।
यह भी देखा गया है िक िजनहोने अपने माता-िपता तथा बर्ह्मज्ञानी गुरू को िरझा िलया है, वे
भगवान के तुल्य पूजे जाते हैं। उनको िरझाने के िलए पूरी दुिनया लालाियत रहती है। वे
मातृ-िपतृभिक्त से और गुरूभिक्त से इतने महान हो जाते हैं।
अनुकम

ममममममम-ममममममम
मममममममममममम मममममम मममम मममममम मममम
म मममममममममम ममममम मममममम मममममम म मममममममममम
'माता और िपता पुतर् के पर्ित जो सवर्दा स्नेहपूणर् व्यवहार करते हैं, उपकार करते
है, उसका पतयुपकार सहज ही नही चुकाया जा सकता है।'
(मममममममम ममममममम 2.111.9)
मममम ममममममम ममममम मममम ममममममममममममममम
'माता का गौरव पृथ्वी से भी अिधक है और िपता आकाश से भी ऊँचे (शेष) है।'
(ममममममम, मममममममम, ममममममम ममममम 313.60)
ममममममममममममम मममममम ममममममममममममम।
ममममममम मममम मममममममम
।। ममममममममममम ममम मममममम
'जो माता-िपता और गुरुजनों को पर्णाम करता है और उनकी सेवा करता है, उसकी आयु,
िवद्या, यश और बल चारो बढते है।'
(मममममममममम 2.121)
मममममममममममममम मम मममम
। मममममम मममममममममममम ममममम
मममम ममममममममममममम मममममममम ममममममम
'जो पुत पितिदन माता और िपता के चरण पखारता है, उसका िनतयपित गंगा-सनान हो जाता है।'
(मममम ममममम, मममम मममम 62.74)
अनुकम

ममम-ममममममम
जो अपने माता-िपता का नहीं, वह अन्य िकसका होगा ! िजनके कषो और अशुओं की शिकत से
अिसततव पापत िकया, उनही के पित अनासथा रखने वाला वयिकत पती, पुतर्, भाई और समाज के पर्ित क्या
आसथा रखेगा ! ऐसे पाखणडी से दूर रहना ही शेयसकर है।
मममममम ममम
माता-िपता एवं गुरू का त्याग करने वाला, उनकी िनंदा करने वाला, उनहे पतािडत करने वाला मनुषय
समसत वेदो का जाता होने पर भी यजािद को करने का अिधकारी नही होता। ऐसे मूढ, अहंकारी और िनकृष पाणी को दान
देने वाला, भोजन कराने वाला या उसकी सेवा करने वाला भी नरकगामी होता है।
मममममम ममममममममममममम
माता-िपता के पर्ित अशर्द्धा रखकर उन्हें अपमािनत करने वाले और उनके पर्ित
िनंदा का भाव रखकर उन्हें दुःखी करने वाले व्यिक्त का वंश नष्ट हो जाता है। उसे िपतरों
का आशीवाद नही िमलता।
मममममममम ममम
माता-िपता और आचायर् – ये तीन व्यिक्त के अितगुरु (शेष गुर) कहलाते है। इसिलए उनकी
आजा का पालन करना, सेवा करना, उनके िलए िहतकारी कायर करना और उनको दुःखी न करना पतयेक वयिकत का
कतरवय है।
मममममम ममम
माता-िपता और गुरुजनों का आदर करने वाला िचरआदरणीय हो जाता है। आप भी मातािपता व गुरुजनों की आदर से सेवा करके उनके ऋण से उऋण बनें। आप आदर्शब ालक
बनें, संतो के आशीवाद आपके साथ है।
ममम ममममम मममम मम
अनुकम

ममम-ममम मम ममममम मममम
भूलो सभी को मगर, माँ-बाप को भूलना नहीं।
उपकार अगिणत है उनके, इस बात को भूलना नही।।
पत्थर पूजे कई तुम्हारे, जनम के खाितर अरे।
पत्थर बन माँ-बाप का, िदल कभी कुचलना नहीं।।
मुख का िनवाला दे अरे, िजनने तुमहे बडा िकया।
अमृत िपलाया तुमको जहर, उनको उगलना नही।।
िकतने लडाए लाड सब, अरमान भी पूरे िकये।
पूरे करो अरमान उनके, बात यह भूलना नहीं।।
लाखो कमाते हो भले, माँ-बाप से ज्यादा नहीं।
सेवा िबना सब राख है, मद में कभी फूलना नहीं।।
सनतान से सेवा चाहो, सनतान बन सेवा करो।
जैसी करनी वैसी भरनी, न्याय यह भूलना नहीं।।
सोकर सवयं गीले मे, सुलाया तुमहे सूखी जगह।
माँ की अमीमय आँखों को, भूलकर कभी िभगोना नहीं।।
िजसने िबछाये फूल थे, हर दम तुमहारी राहो मे।
उस राहबर के राह के, कंटक कभी बनना नही।।
धन तो िमल जायेगा मगर, माँ-बाप क्या िमल पायेंगे?
पल पल पावन उन चरण की, चाह कभी भूलना नहीं।।
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सथानीय संपकर

अनुकम
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