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sundara veerraju

नॉएडा क एक घटना
घटनाएं िलखते-िलखते मु झे एक अ यंत िदलच प घटना का का मरण हो आया, तो मने सोचा इसी घटना का अब िववरण
िकया जाए! ये वष २०११ फरवरी क घटना है, मौसम म अभी भी ठ ड क खु मारी थी हालांिक फरवरी तक िद ली के मौसम
म, गम अपनी द तक देने लगती है, ले िकन सु बह-शाम ठ ड भी अपने मौजूद होने का एहसास देती रहती है,वो िदन २२
फरवरी का था, मै करीब दो ह से अपने ि या- थल पर ही िव ाम कर रहा था, िदन के कोई ४ बजे ह गे, मै और शमा जी
िकसी साधना के िवषय म वातालाप कर रहे थे, तभी मेरे एक प रिचत का नॉएडा से फ़ोन आया, वो हाल-चाल पूछने के बाद
फ़ौरन ही िवषय बदलते हए, एक सम या के बारे म बताने लगे, सम या बड़ी अजीबोगरीब सी लग रही थी, और असल बात ये
है िक मु झे फ़ोन पे उनक आधी बात समझ म आई और आधी नह , खैर मने उनक बात सु नी और जो समझ आया वो ये था
िक, उनके िकसी जानकार के बेटे क शादी हई थी अभी कोई ३ महीने पहले और घर म तब से सम या हो रही है, उनके िकसी
जानकार का लड़का काफ बीमार हो गया है और ह ते म एक बात तो अव य ही अ पताल जाना पड़ता है, इस से पहले
उसके साथ कभी ऐसा नह हआ,
बात तो सही थी, ले िकन होता या है, लोग आजकल, अगर एक डॉ टर क एक दवा न लगे तो दूसरे को और दूसरे क भी न
लगे तो तीसरे को िदखाते ह! और अगर तीसरे क भी न लगे तो िफर कोई ऊपरी च कर है, ऐसा समझने लगते ह!
ले िकन मेरे ये प रिचत, भारत सरकार म एक इंजीिनयर के पद पे थे, और वै ािनक ि के यि
जांच करनी थी और त य जु टाने के िलए उनसे स मु ख बात करना आव यक था...........

थे, मु झे उनके त य क

मने तब रात के समय अपने इन प रिचत को फ़ोन िकया, मने अब उनसे सारी सम या के बारे म कुछ पूछा, और ये कहा िक
आप अगले िदन थोडा समय िनकाल कर एक बार मेरे से िमल ल थो बिढ़या रहे गा, उ ह ने अगले िदन ४ बजे आने आने को
कहा, मु झे ४ बजे कोई काम नह था इिसलए मने उनको हाँ कह िदया,
और अगले िदन ४ बजे वो आ गए, नम कार, आिद से िनवृत हए तो मने उनसे उनके प रिचत के िवषय म पूछा, उ ह ने
बताना शु िकया,
" िजनके पु के बारे म मने कल आपको फ़ोन िकया था, वो दरअसल मेरे साड़ ह, सरकारी नौकरी से रटायड ह और नॉएडा
म ही रहते ह, कोई ३ महीने पहले उ ह ने अपने बड़े पु का िववाह िद ली म रहने वाले एक सु सं कृ त प रवार म िकया,
लड़क अ छी, कुशल और सं कारयु है, िजस लड़के से इसका याह हआ है उसका नाम मोिहत और लड़क का नाम
अि ता है, अि ता अपने घर म दूसरे नंबर पे है , उस से बड़ी एक बिहन है िजसका क याह ४ साल पहले जयपु र म हआ था,
वो वही ँ रहती है, ले िकन शादी के एक ह ते के बाद ही मोिहत ने अपना पे ट खराब रहने क बात कही, वो अपनी बीवी को
ले के िशमला गया था, वहाँ से वािपस आया तो पे ट खराब हो गया, दद हआ बहत यादा तो डॉ टर को िदखाया, डॉ टर ने
िवषा भोजन खाने क वजह से ऐसा हआ, ऐसा कहा, और २ िदन के िलए निसग होम म एडिमट कर िदया, डॉ टर ने फ़ू डपोइज़िनंग क आशंका जताई थी, वहाँ वो ३ िदन एडिमट रहा और अगले िदन अपने घर वािपस आ गया, ले िकन अगले ही
ह ते उसक तिबयत िफर से रात म अचानक खराब हो गयी, उलटी और द त के कारण वो प त हो गया था, उसको िफर से
दािखल िकया गया, ४ िदन के बाद वो िफर से वािपस घर आ गया, हाँ, बीच म २०-२२ िदन के िलए वो एक दम ठीक रहा,
ले िकन एक िदन घर म ही उसको च कर आया और नीचे िगर पड़ा, उसको िफर से अ पताल ले जाना पड़ा, इस बार डॉ टस
ने गहन-जांच क और कहा क उसके िदमाग म र - ाव हो रहा है, ले िकन एक बात समझ से परे है गु जी, शादी से पहले ,
वो लड़का कभी भी बीमार नह पड़ा, अ छा पोट् समेन था वो,हाँ बु खार और जु काम क बात तो मै नह कर रहा, ले िकन वो
कभी इतना बीमार नह पड़ा, मेरे साड़ और साली सािहबा को संदेह है क उस पर कोई तं - योग िकया गया है, आप या
कहते ह गु जी? मने उनको आपके बारे म बताया तो उ ह ने ही आपसे बात करने क सलाह दी, अब आप बताइये क
असली कहानी है या?"

1

"अब लड़का कहाँ है? मने पूछा,
"वो अभी घर पर ही है, उसका इलाज चल रहा है, ले िकन असर नह िदख रहा, कई बार तो पे ट और सर पकड़कर बु री तरह से
दद म तड़पता है"
मु झे भी कुछ समझ म नह आ रहा था, िक जो लड़का शादी से पहले ठीक था, शादी के बाद ऐसा या हो गया? िशमला म भी
खाना अगर खाया होगा तो अि ता ने भी खाया होगा, उसे ऐसा यूँ नह हआ? बात समझ से परे थी, ले िकन इसका हल
ढू ं ढना ज़ री था..........
मने अपने इन प रिचत को कहा िक मै कल आपके िनवास- थान पर ७ बजे तक आ जाऊँगा, वो भी अपने िनवास- थान पर
ही मु झे िमल और हो सके तो अपने साड़ को भी वही ँ बु ला ल, मु झे कुछ बात करनी थ उनसे, मेरे प रिचत बोले िक ठीक है मै
और मेरे साड़ आपको वही ँ िमलगे, काय म िनधा रत हआ और कल ७ बजे का समय िनि त हो गया,
अगले िदन शमा जी मेरे पास ६ बजे शाम को पहँच गए, और हम दोन वहाँ से नॉएडा के िलए चल पड़े , ७ बजे से थोडा अिधक
समय हो गया था हमको वहां पहँचते-पहँचते, ले िकन हम वहाँ पहँच गए, घंटी बजाई तो मेरे प रिचत बाहर आये और स कार
के साथ हमे अ दर ले गए, वहां हमे उनके साड़ और उनक प नी भी वही ँ िमल , चाय वगैरह आिद के बाद मने उसनके साड़
से बात क , उनका कहना भी वही था, जो िक मेरे प रिचत ने कहा था, हाँ उनक प नी ने एक नयी बात बतायी, उ ह ने
बताया िक जब वो अपनी प नी के साथ रात म सोता है तो उसक तिबयत खराब होने लगती है, ले िकन अगर वो दूर रहता है
तो उसको कोई परे शानी नह होती, मतलब िक ती ण-वेदना का एहसास नह होता, ये बात उनके बेटे ने उनको वयं ही
बतायी थी, ये बात अजीब तो थी ले िकन मेरे मन म एक संदेह घर कर गया, मने साड़ िक प नी से पूछा," या आपक बह
यवहार म आपके और आपके पित के िलए सही है?"
"हाँ हाँ, िबलकुल सही है, िबलकुल सगी बेटी िक तरह से यान रखती है हमारा'' वो बोल ,
इसक त दीक उनके पित ने भी क ,
ले िकन इस से मेरा संदेह और गहरा हो गया था, मने उनसे एक बात और पूछी, "बु रा न मान तो मै आपसे कुछ पूछ सकता हँ?
"हाँ, हाँ बेिझझक पूिछए आप!" उनके साड़ ने कहा,
" या आपने लड़क के प रवार के बारे म और खासकर अि ता के बारे म शादी से पहले पूरी जानकारी जु टाई थी? मने पूछा,
"जी जानकारी, देिखये ऐसा है िक इस लड़क के िपता मेरे द तर म ही कायरत थे, मेरा उनसे ने ह था, अ छी िम ता थी, और
ऐसे ही मै कई बार उनके घर पर भी जाया करता था, और वो भी मेरे घर आया करते थे, उनके घर पे जाते समय उनक बेटी
हमारे सामने आया करती थी, लड़क सु ंदर, पढ़ी-िलखी, ानवान और सु सं कृ त थी तो मने अपने िम से इस लड़क का
र ता अपने लड़के के िलए मांग िलया, उ ह मंजरू था तो इसीिलए शादी हो गयी"
मने िबना कोई िति या दे अपनी गदन हाँ म िहलाई और िफर बोला,
" या मै आपक बह से िमल सकता हँ?
" यूँ नह ,आप अभी चिलए" वो बोले ,
"अभी तो नह , हाँ मै परस आपके पास ८ बजे तक पहँच जाऊँगा, आप िमलगे वहाँ? मने सवाल िकया,
"ज़ र िमलूँगा, और आपक ती ा रहे गी"
2

इतना कहने के बाद थोड़ी देर म ही मै और शमा जी, वहाँ से िनकल पड़े ..
वापसी म शमा जी गाडी चला रहे थे और म उनके बगल वाली सीट पे बैठा था, हवा म ठं डक थो तो मने अपनी तरफ वाली
िखड़क बंद कर दी, शमा जी बड़े यान से कही सोच-िवचार म म न थे, मने उनक तरफ देखा तो भी वो सामने ही देखते
रहे , हाँ उनके च मे पे सामने से आती हई गािड़य क चमक ज़ र नज़र आ रही थी, आिखर मने ही चु पी तोड़ी, मने कहा,
"शमा जी, आपका या कहना है इस बारे म?
उ ह ने िबना मेरी तरफ देखे बोला, " गु जी, कुछ बात ह, जो समझ म नह आ रह , मै उ ही के िसरे जोड़ने क कोिशश कर
रहा था"
"कौन सी बात?" मने कहा,
वो बोले , "पहली तो ये क मोिहत अि ता को साथ ले के िशमला गया था, जब साथ ले के गया, रहा, तो खाना भी साथ ही साथ
खाया होगा, तो ये फ़ू ड-पोइज़िनंग मोिहत को ही यूँ हई? अि ता को नह ?"
"और दूसरी?" मने उ सु कता से पूछा!
"दूसरी ये , क वो लड़का शादी के पहले िफट-एं ड फाइन था, तो शादी के महज़ ३ महीनो के भीतर ऐसा या हो गया क वो
अब आधा ही रह गया?"
"और तीसरी?" मने िफर पूछा,
"तीसरी और सबसे बड़ी बात ये िक, मोिहत ने एक बात अपनी माँ से कही िक वो जब अि ता के साथ सोता है तो उसको
परे शानी यादा होती है, और जब दूर रहता है तो इतनी परे शानी नह होती? इसका या रह य है? ये मै नह समझ पा रहा!"
"आप समझ तो गए ह!" मने कहा!
"अगर इस कहानी म कोई सबसे बड़ा संिद ध है तो ये लड़क अि ता ही है, ले िकन उस से बात िकये िबना हम िकसी नतीजे
पे नह पहँच सकते, उस से िमलना बेहद ज़ री है" मने उनसे कहा,
इतना कह कर शमा जी ने अपनी गाडी एक जगह रोक , और एक रे तरां िक ओर बढ़ गए, थोड़ी देर म आये तो हाथ म एक
पैकेट था, और २-३ दोने , उ ह ने गाडी म घु स कर वो पैकेट खोला और खाने का सामान बाहर िनकाला, ये िनरािमष-भोजन
था, अथात तांि क-भोजन, आप समझ ही गए ह गे! उ ह ने गाडी म अपनी सीट के पीछे से १ बोतल शराब िनकाली और दो
िगलास! हमने बड़े -बड़े २-२ पे ग वही ँ ख च िलए! और िफर आगे बढ़ चले ..........
करीब १० बजे मै अपने िव ाम- थल पर शमा जी के साथ पहंचा, आते ही अलख-भोग िदया और अपने कमरे म आ गया, शमा
जी साथ ही थे, हम आराम से बैठे और शराब के मजे ले ते रहे , रह य इतना अजीब था िक हम डे ढ़ बोतल पी गए ले िकन रह य
के रोमांच ने केवल सु र ही सु र िकया था, नशा नह ! आज शमा जी यह कने वाले थे, और हम दोन देर रात तक इसी
िवषय पर बात करते रहे ! करीब २ बजे हम सोने चले गए!
सु बह यही कोई १० बजे शमा जी अपने िकसी काय से चले गए और चूँिक उनको शाम को आना था, तो मने उनसे नह पूछा
िक उनको या और कहाँ काम है, मै उनके जाने के बाद अपने अ य काय म लग गया, काफ य तता भरा जीवन होता है
मनु य का, जीवन भर य त!
शाम को ६ बजे शमा जी आ गए थे, उनके आते ही मै भी गाडी म बैठा और नॉएडा िक तरफ रवाना हो गए, एक सवा घंटे म हम
अपने प रचत के यहाँ पहंचे, उनको अपने साथ िलया और उनके साडू के घर िक तरफ चल पड़े, आधे घंटे म हम उनके यहाँ
3

पहँच गए थे, वो हमको बाहर ही िमल गए, अिभवादन हआ, और वो हमको अपने घर के अ दर ले गए, अपने ाइंग- म म
िबठाया, ाइंग- म अ छा-ख़ासा सजा था, धािमक-पिटं स लगी हई ं थ वहाँ! देखने से पता चलता था िक ये िकसी धािमकयि का ही आवास है, थोड़ी ही देर म उनक प नी भी वहाँ आ गय , नम कार िकया और वहाँ बैठ गय , इतने म ही एक
लड़क चाय ले के आ गयी, पता चला ये साडू साहब िक छोटी लड़क है, चाय के बाद मने मोिहत िक माँ से अि ता को बु लाने
के िलया कहा, उ ह ने २-३ आवाज िदन ले िकन अि ता नह आई, तब वो खु द उठ और उसको ले ने चली गय , करीब ६-७
िमनट के बाद वो वािपस आ गय और बोली िक अि ता शमा रही है, मने कहा िक कोई बात नह हम पहली बार जो आये ह
इसीिलए शमा रही होगी शायद, ले िकन अि ता के न िमलने के इस कारण ने मेरे मन म जो संदेह था पु ता िकया और
उसको और बल िमल गया, शमा जी ने एक रह यमय ि से मु झे देखा और मने यं या मक प से उनका आँख ही आँख
म समथन िकया.
वहाँ थोडा सा माहौल गंभीर हो गया, मेरे प रिचत और उनके साढ़ साहब के चे हरे से ये भाव देखा जा सकता था, ले िकन मने
िवषय बदला और उनके साढ़ से कहा, "कोई बात नह , अि ता से हम बाद म भी िमल लगे, आप मु झे एक बार बेटे से िमलवा
दीिजये "
वो फ़ौरन ही उठे और बोले , "जी हाँ, आइये , इस तरफ"
हम सभी साढ़ साहब के पीछे चल पड़े, वो आिखरी म बने एक कमरे िक तरफ इशारा करते हए बोले , "ये है, मोिहत का कमरा"
अभी हम, कमरे म घु सने ही वाले थे िक अि ता तेज़ी से कमरे से बाहर िनकली और इस तेज़ी म वो शमा जी के कंधे से टकरा
गयी, ले िकन न तो उसने 'सॉरी' ही कहा और न ही 'नम ते' चलो हमसे न सही तो कम से कम मेरे प रिचत भी वही थे, उनके
सु र भी वही ँ थे, उनसे तो कर ही सकती थी! ये बड़ी अ यािशत सी बात थी, ले िकन मने यान न देकर, अ दर जाना ही
उिचत समझा, हम अ दर गए, अ दर मोिहत, अपनी कमर के पीछे एक तिकया लगाए बैठा था, उसने नम कार िकया अपनी
गदन िहला के, हमने भी वैसे ही नम कार िकया, मने थोडा पास जाके मोिहत को देखा, मु झे देखते ही सर म झटका लगा! ये
बेचारा तो िकसी मारण-िव ा का िशकार हआ था!! ये मारण-तं - योग के पूव र समयाविध के बीच झूल रहा था! ले िकन
इसको कौन मारना चाहे गा? मै थोडा उसके काय और िम -वग के बारे म और अिधक जानना चाहता था, मने कमरे म आस पास देखा तो, हाथ से बनी एक अनगढ़ सी कोई ६ इंच के आकार वाली एक काली मूित पे मेरी िनगाह क गयी, मने उसको
उठा के देखा, इस मूित का पे ट अ दर से खाली था, मै अब समझ गया था! मै थोड़ी देर बाद मोिहत को ज दी ठीक हो जाने क
बात कह कर बाहर वािपस आ गया, जैसे ही हम बाहर िनकले , अि ता झट से अ दर घु स गयी! यािन िक वो दरवाज़े के बाहर
खड़े हो कर हमारी बात सु न रही थी! अब मेरा संदेह और मज़बूत हो गया! मै िफर से ाइंग- म म आके बैठ गया, मने साढ़
साहब िक प नी से एक पे न और एक कागज़ लाने को कहा, ज दी ही मु झे दोन िमल गए, मने कागज़ पर एक ज़ीका काढ़ा
और एक य बना िदया, ये य मने साढ़ साहब िक प नी को िदया और ये कहा िक ये कागज़ आप मोिहत के तिकये म
तब रख जब अि ता वहां न हो, उ ह ने धीरे से अपनी गदन िहलाई, और कागज़ अपने हाथ म रख िलया,
अब मेरा वहां ठहरने का कोई औिच य शेष नह था, हमने उनसे िवदा ली और वािपस चल िदए,
वापसी म मेरे प रिचत ने मु झसे पूछा, "कोई घबराने वाली बात तो नह है न गु जी?"
"नह अब नह है,ले िकन यिद आपने मु झसे संपक न िकया होता तो अव य ही होती, ले िकन अभी मै आपको नह बता
सकता"
"ठीक है आप जैसा उिचत समझ वैसा कर, आपको पूरा सहयोग ा होगा, हमने उनको उनके घर छोड़ा, उ ह ने अ दर आने
िक थोड़ी िज़द सी क , लिकन समय न होने के कारण उनसे िवदा ली,
और मै और शमा जी वापस मु ड चले अपने थान को ओर.........
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मै और शमा जी रात को कोई १० बजे वािपस अपने थान पर आ गए, हाथ-मु ंह धो कर पहले अलख-भोग िदया, और एक
बोतल और िनकाल ली, मने शमा जी को आज यह रोकना था अपने पास, काफ बात पर िवचार करना था, मने शमा जी से
पूछा," शमा जी, एक बात बताईये , कोई नव-िववािहता अपने पित को यूँ मरवाना चाहे गी?
वो थोड़ी देर चु प रहे और िफर बोले,"मने काफ सोचा-िवचारा, और मेरी समझ म तो ये आ रहा है िक हमे अि ता के बारे म कुछ
और मालूम करना चािहए, ले िकन अि ता हमसे बात करने के िलए तैयार ही नह है?"
"हाँ ये तो है" मने अपना पे ग ख़तम करते हए कहा,
"शमा जी, मने मोिहत के कमरे म एक अनगढ़ खाली पे ट वाली काले रं ग से पु ती जो मूित देखी है वो उ र-पि मी राज थानी
मारण-िव ा म योग होती है, िहमाचल म भी इसका योग होता है, अगर ऐसा कुछ है तो हमको अि ता को राज थान से
जोड़ना होगा!"
और ये कहते ही मै जैसे उछल सा पड़ा! मने कहा, "शमा जी, आपको याद होगा मेरे प रिचत के साढ़ ने बताया था िक अि ता
िक बड़ी बिहन जयपु र म याही है, याद है आपको?"
"हाँ! हाँ, बताया था!!" वो हैरत से बोले !
अब किड़याँ जु ड़ने लगी थ , अब तो अि ता के बारे म अिधक जानकारी जु टाने िक आव यकता थी, एक िसरा तो हमारे हाथ
म आ गया था, ले िकन दूसरा िसरा कहाँ बंधा है ये नह पता चल रहा था!
"चिलए शमा जी, ये भी पता चल जाएगा!" मने हंसके कहा!
और िफर देर रात तक हम बात करते रहे हो खा-पी के सो गए..
अगले िदन मने अपने परिचत को फ़ोन िकया, और कहा िक आप एक बार अपने साढ़ को मेरे यहाँ ले के आईये, कुछ अ यंत
आव यक बात करनी ह, उ ह ने कहा क कल इतवार है, वो िदन म कोई १२ बजे उनको ले ते आयगे, अब मै कल का इंतज़ार
करने लगा, शमा जी अभी भी वही ँ थे, वो अब अपने काम से िनकलने वाले थे,मने उनको कल के बारे म अवगत कराया और
उनको कल िदन म १२ बजे से पहले आने को कह िदया, और िफर वो चले गए,
करीब १ बजे मेरे पास मेरे प रिचत का फ़ोन आया, उ ह ने कहा िक कल हमारे जाने के बाद अि ता का यवहार बदल गया
था, वो िकसी से बात नह कर रही थी, और आज सु बह से ही उसने अपने मैके जाने क िजद पकड़ ली थी, और अभी थोड़ी देर
पहले ही वो अकेली ही अपने मैके चली गयी है, अब तो मेरा संदेह यक न म बदल गया! अब सारे त य से अपने प रिचत और
उनके साढ़ साहब को अवगत कराने म कोई िहचक नह थी, मने फ़ोन करके शमा जी को भी यही बता िदया!
अगले िदन वो लोग आधे घंटे पहले ही आ गए, मने उनको िबठाया, और कुछ बताने से पहले साढ़ साहब से कुछ
क सोची, मने पूछा, "एक बात बताइए, अि ता ने पढाई िकतनी क है?"
"उसने िद ली यूिनविसटी से बी.कॉम िकया है" वो बोले ,
"और कुछ?" मने पूछा,
"हाँ उसने एक कोस भी िकया था होटल-मैनेजमट का" वो बोले ,
मेरी आँख चमक गय ! मने पूछा, "कहाँ से?"

5

पूछने

"जयपु र से" वो बोले ,
"और इस बीच वो रही कहाँ?" मने सवाल िकया,
"अपनी बड़ी बिहन के यहाँ" वो बोले ,
"अ छा अ छा!" मै बोला!!!!
अब मेरे मन म जो सवाल थे वो मूत प ले ने लगे थे !!.
अब और कुछ कहने क बात नह बची थी, मने अपने संदेह साढ़ साहब के सामने ज़ािहर कर िदए, सु नके उनके भी होश उड़
गए, ले िकन मने अपनी बात तक के साथ रखी थी, थोड़े से िवचिलत होके उ ह ने कहा,
"अब या होगा गु जी? मेरे बेटे को बचाओ, कैसे भी, कैसे भी?" उनके आंसं ू छलक आये थे , शमा जी ने उनको िदलासा दी,
और आ ासन िदया क मोिहत को अब कुछ नह होगा,
"आप अभी अपने घर म फ़ोन क िजये , और अपनी प नी से बोिलए क मोिहत के कमरे म जो वो िम ी क मूित रखी है उसको
उठा के घर के बाहर फक दीिजये " मने साढ़ साहब से कहा,
उ ह ने तभी फ़ोन िकया और पता चला क वो मूित वहां कह भी नह है, इस बात से साढ़ साहब को अब प का यक न हो
गया िक उनके बेटे क इस हालत के पीछे कौन है!
वो बड़े भरी मन से बोले , "गु जी, मेरे बेटे को बचा लो, हमको तो कुछ पता ही नह है क हो या रहा है, अब आपका ही
सहारा है गु जी"
"आप िचंता न क िजये , जो कुछ बन पड़े गा मै अव य क ँ गा" मने उनका हाथ थाम के कहा,
थोड़ी देर और बात हई ं और वे लोग वहां से चले गए, मने शमा जी से कहा, शमा जी, आप साम ी इ यािद क यव था
क िजये , मै 'िकसी' को रवाना करना चाहता हँ, साड़ी हक क़त जानने के िलए, १ घंटे के बाद उ ह ने साड़ी यव था कर दी,
मै ि या म बैठा, और 'िकसी' को रवाना कर िदया, करीब आधे घंटे के बाद मु झे साड़ी हक क़त मालूम हो गयी, वो हक क़त
जो सच म ही बहत कडवी थी, इंसानी जूनन
ू क एक ऐसी हक क़त िजसमे िकसी भी दूसरे इंसान क िज़ दगी का कोई मोल
नह होता!
आइये मै आपको इस हक क़त से -ब- कराता हँ...
अि ता ने होटल-मैनेजमट के कोस के िलए आवेदन िकया था जयपु र म, वो मंजरू हआ, और उसको वहां दािखला िमल गया,
ठहरने क कोई परे शानी थी नह सो घरवाल को कोई आपि नह हई, रहना उसको अपनी बड़े बिहन के घर म ही था, और
ऐसा ही हआ, समय बीता, अि ता राज थान के लड़के के संपक म आई वहाँ, वो गंगानगर का रहने वाला था, समय के साथसाथ दोन म ेम हो गया, अथाह ेम, ले िकन अि ता ये ेम ज़ािहर न कर सक िकसी के भी साथ, वो लड़का भी अि ता के
िलए सब-कुछ करने को तैयार था, सब-कुछ! वो अि ता के िलए और अि ता उसके िलए ेम म आकंठ डू बे थे, ऐसे ही एक
बार जब अि ता ने अपने ेमी को बताया क घरवाले उसक शादी क तैयारी कर रहे ह तो उसके ेमी को दु ःख होना लाज़मी
था, उसने कहा क अि ता अपने घर म खु लके बात करे , ले िकन अि ता न साफ़ मन कर िदया, वो िकसी भी तरह अपने
िपता क अवमानना नह कर सकती थी, ये उसने अपने ेमी को बता िदया, उसके ेमी ने सोच-िवचार िकया, और इसी तरह
ये िदन अि ता और उसके ेमी के िलए पशोपे श म बीते, अि ता को सगाई के िलए िद ली जाना पड़ा, ले िकन सगाई के बाद
उसको जयपु र आना पड़ा, अपने कोस के समा होते ही, कोस-सिटिफकेट आिद के िलए, अि ता से उसका ेमी िमला, दोन
के बीच मु लाक़ात हई, कहते ह क ेम अँधा होता ह और यही हआ, यहाँ ेम म वो दोन अंधे हो चु के थे, उसका ेमी िकसी
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... मने अि ता का योग िवफल कर िदया था. िजसके योग हे तु वो अिभमंि त हई है. मने अपना धम िनभाया था.. इस का मु झे संतोष था. और ६ महीने म वो यि मृ यु का ास बन जाएगा! ये पंच था अि ता और और उसके ेमी अजय का!. तािक िकसी क पकड़ म वो आये नह और ये ही वजह थी क जब भी वो उसको योग नह करती थी मोिहत सही रहता था! और जब करती थी तो उसक तिबयत खराब हो जाती थी.तांि क से एक मारण-िव ा के िवषय म िमला और उस तांि क ने उसको वो िम ी क मूित दी. प रिचत से मालूम पड़ा है क उसक शादी क कह दु बारा बात चल िनकली है! 7 .. मने उको सलाह दी क आप एक बार अि ता से बात कर खु ल के.. ले िकन सब यास िवफल हो गए... पहले योग उसने िशमला म िकया था!... मोिहत िबलकुल ठीक हो गया था. वो धीरे -धीरे मृ यु के करीब होता जाएगा.. एक िदन... वो बात करने के िलए तैयार नह थी और मै मोिहत को मरने देने के िलए तैयार नह था! २ महीने बीते.. इसीिलए वो मूित वहां से ले गयी थी अपने साथ.. आज मोिहत साड़ी पु रानी बात छोड़ के अपने िबज़ने स म मशगूल है... जो क ये क शिनवार को एक ख़ास मा म िनकालने थे.... और न मै जानना चाहता था. जो मै कर सकता था वो िकया. कानूनी ि या से तलाक मंजरू हो गया! अि ता का या हआ? या उसने अपने ेमी से िववाह िकया या नह .. अि ता ने डाइवोस फाइल कर िदया था. मेरे पास उनके साढ़ का फ़ोन आया. उनके साढ़ और उनक प नी से बात क .. ये मु झे पता नह चला. जैसे ही उस मूित का पे ट खाली होगा.. ये बात अि ता कभी नह बताने वाली थी. मोिहत क जान बच गयी थी. मने दोबारा अपने प रिचत..... और इस तरह आपसी सहमती से. उसके पे ट म. अिभमंि त बीज थे बाजरे के.

ले िकन शमा जी को मेरे कायावली का अ सर पता ही होता है! िन ल अपने साथ हमेशा क तरह वही सब लाये थे. ये मु झे आज भी अ छी तरह से याद है! आज भी मै इस घटना को याद करता हँ! शमा जी के एक अिभ न िम ह िन ल जी! इलाहबाद के रहने वाले ह और अब िद ली म ही रहते ह. गरीब का मै स मान करता हँ. हंसमु ख ह! नॉएडा म ॉपट का काम करते ह ले िकन पैसे क उनको बू भी नह है! मु झे ज़मीन से जु ड़े यि बेहद पसंद आते ह. २ बोतल शराब और मसाले दार पनीर िनकाला. िफर िन ल ने ज़रा गंभीर होके एक बात कही. वो अभी अपने गाँव से लौटा है. तभी चंदर को उसके चाचा ने आवाज़ लगाई. उसने मु झे एक अजीब सी बात बतायी. और सच पूछो तो मै उसी िसलिसले म आपके पास यहाँ आया हँ. मेरे पास एक लड़का काम करता है. गाँव म अ सर सांप-िब छू 1 . आपने अभी तक जाम नह बनाया गु जी के िलए? िन ल ने शमा जी से कहा. वो एक बार काम पर लगे तो समझो िनबटा के ही फा रग ह गे! "अरे शमा जी. उ ह ने आने से पहले फ़ोन तो नह िकया था. ज़रा माल को साफ़ करके मे रने ट कर दूँ. िक िन ल जी को पाक-िव ा म बहत मज़ा आता है. "गु जी मै आज आपको साबु त म छी. कभी-कभार शमा जी के साथ मेरे पास आ जाया करते ह! उनको मांसाहारी खाना बनाने म महारत हािसल है! नए नए िक म का खाना बनाते रहते ह! जब भी कभी मेरे पास आते ह तो साथ म शराब और मांस अव य ही लाते ह! और यही बनाते ह! कुल िमला के आदमी बेहद िमलनसार. "हाथ का तो उ ताद है. िन ल ने अपना िपटारा खोला. आिखर ये 'ऊपरवाले ' उ ही क मेहनत का खाते ह और पीते ह! ऐसे ही एक बार शमा जी और िन ल जी मेरे पास आये .खु जा िजला बु लंदशहर क एक घटना ये घटना २२ नव बर २०११ िक है. और ठं डा पानी ले आये ! "आज या बना रहे हो िन ल भाई?" मने पूछा.ाई िखलाऊंगा!" िन ल ने गव से कहा! और िफर िन ल ने तीन िगलास म मिदरा डाली और सबके िगलास आगे बढ़ा िदए! मने और शमा जी न अपने -अपने िगलास उठाये और मसाले दार पनीर के साथ मिदरा-पान करते रहे ! इधर-उधर क बात चलती रह . इस बार वो मछली ले कर आये थे! आज काफ खु श थे. उसके चाचा ने उसे ज दी आने को कहा. "अब तू आएगा तो मै बनाऊंगा न. " या बात है आज! लगता है िन ल ने कह मोटा हाथ मारा है" शमा जी हँसे और कहने लगे. तो चंदर चाचा क तरफ चल पड़ा. वो सामान रखने अ दर गए तो मने शमा जी से पूछा. और मेज़ पे रखा. नाम है चंदर. मारा होगा आज भी कह ! मु झे फ़ोन िकया था इसने िक आज गु जी के पास जाना है. चंदर ने कहा िक जब वो गाँव गया हआ था तो अपने चाचा के साथ अपने खे त म रात को पानी लगा रहा था. तो उसके चाचा खे त के एक दूसरे छोर पे काम कर रहे थे . कह न कह मारता ही रहता है. ये मेरे पास आया तो मै इसको ले के आपके पास आ गया" "अरे िन ल जी आ जाओ अब बाहर" मने हंसकर कहा. "अभी आता हँ गु जी. "गु जी. िफर इ मीनान से बैठूँगा आपके साथ!" िन ल ने अ दर से ही जवाब िदया! जैसा िक मने आपको बताया था. तू तो आते ही घु स गया रसोई म काम करने!" शमा जी ने भी मु कुरा के कहा! "कम से कम इतना काम तो आप कर ही सकते थे" िन ल ने कहा. और िफर दौड़ लगा दी रसोई म! वहाँ से ३ िगलास. चंदर ने तेज़ क़दम से चलना शु िकया. वो यह खु जा का रहने वाला है.

"गु जी. क यहाँ एक पीतल का कलश है. अ दर हाथ डाला तो उसमे सोने क िगि नयां ही िगि नयां थ .. उसने जहां से कलश िनकाला था वहां क तरफ इशारा िकया. "िन ल जी. इसीिलए उसने सोचा िक शायद ऐसा ही कुछ हआ होगा.. फावड़े वगैरह मांगने आया होगा. इसका. सु बह दोन क न द खु ली.. कोई १०-१५ िमनट बाद िन ल आये रसोई से बाहर हाथ म ले ट िलए. ले िकन कलश नह था. चंदर वहां ६ िदन और रहा और अगले िदन मेरे पास आ गया. "अरे िन ल जी अब आ भी जाओ!" "बस गु जी अभी आया मै" िन ल वही ँ से बोले . इतने म ही दरवाज़े पर द तक हई. दु बारा खु दाई का याल मन से िनकाल िदया और अपने खे त के काम म लग गए. मु झ से उसने एक िदन िज़क़र िकया इस बारे म.. वो वही ँ पड़ा है. पूरा कमरा ढू ं ढ मारा ले िकन कलश नह िमला. दोन िकसी तरह िह मत जु टा कर पहंचे खे त पर. काफ देर बाद उ ह ने वो ढ कन हटाया. इसको बाहर ख चने म मदद कर. और वैसे भी िन ल आलतू-फ़ालतू बात पर यान नह देता. और िफर थोड़ी देर बाद िन ल रसोई से आये बाहर एक और ले ट िलए! 2 . कमरे म गए तो चारपाई वैसे ही पड़ी थी जैसे वो छोड़ के भागे थे.. कोई ३५-४० साल क एक औरत खड़ी थी. और बड़ी मेहनत के बाद उ ह ने वो कलश िनकाल िलया. सारा सामान रख लो और ये कह के उसने एक लड़के क सरकटी लाश उस झोले म से िनकाली और बोली. सु नके तो मु झे भी हैरत हई. सु बह दोन िमले और और ये तय हआ िक चलो खे त पर चला जाये . दोन ने एक दूसरे को हैरत से देखा. वो घबरा गए! वो बोली डरो मत. ले िकन वो लड़का कभी झूठ नह बोलता इसीिलए मने उस पर शक नह िकया और न ही कर सकता हँ गु जी!" िन ल ने अपनी बात ख़तम क ! इतना कह कर िन छल दौड़े रसोई क तरफ अपने काम क तरफ और इधर शमा जी ने उछाला. देर से जागे. जब वो अपने चाचा के पास पहंचा तो उसके चाचा ने अपने दोन हाथ खे त क िम ी म अपनी कोहनी तक धंसा रखे थे! चंदर को मामला समझ नह आया. उ ह ने ज दी-ज दी वो कलश उठाया और खे त म बने अपने टयूबवेल के पास बने कमरे म ले आये ! अब उ हने नह पता था क इसम है या.. इतना सु नते ही वो दोन सरपट भागे गाँव क तरफ. पूरी कहानी या है ये तो मालूम नह ले िकन अभी िन ल को आने दो." ये लीिजये गु जी! खाइए और बताइये कैसी बनी है?" और इतना कह के वो िफर से रसोई म दौड़ पड़े .. कुल वजन होगा ५० िकलो... अब चंदर और वो दोन उस कलश को ख चने लगे. िफर दोन पहंचे उस जगह जहाँ से वो कलश िनकाला था. ले िकन गत राि क घटना का िज नह िकया उ ह ने िकसी से भी घर म. मजा आ गया!" वो रसोई म से ही बोले . ऐसा होता है ये कोई ेता मा है. वो घबरा गए क इतनी रात को कौन आया? सोचा इधर-उधर के खे त वाला कोई होगा. बोले . िक सा तो वाकई म िदलच प है.आिद काटते ही रहते ह. आप या कहते हो गु जी?" "जो िन ल कह रहे है वो िबलकुल स य है. कोई दु खी ेता मा जो अपने लड़के का सर मांग रही है जो क वही ँ कह दबा पड़ा है. "थक यू! थक यू!" मै िफर जोर से बोला. उ ह ने कमरे का दरवाज़ा बंद िकया और गती से उस कलश का ढ कन उखाड़ने लगे. वा तव म बेहद लज़ीज़ बनाया था िन ल ने ! मने वही ँ से कहा. ले िकन वो चाचा से बोला क या हआ है? चाचा ने कहा. मने एक टु कड़ा उठाया और खाया. वहाँ गीली िम ी म उनके पाँव के िनशान तो थे ले िकन खु दाई का कोई िनशान नह था! अब वो दोन डर गए. िफर बात करते ह" मने अपना पे ग ख़तम करते हए कहा. कंधे पे एक थैला लटकाए हए थी. उ ह ने वो कलश वही ँ रख कर उस पर चारपाई िबछा दी. दरवाज़ा खोला तो सामने एक औरत कहदी थी. मेरे बेटे का सर लाके मु झे दे दो.

सो आराम से खाया और िपया. ले िकन हाथ चाचा ने डाला था. और चरण."लीिजये गु जी!" वो बोले . वो मेरी प रिचत थ उनमे से एक क छोटी बिहन क शादी थी. मने ढ कन खोला था. मने सवाल पूछना शु िकये. जब तु म खे त म पानी लगा रहे थे. "अ छा. आ जाइए. हाथ जब बाहर िनकाला था तो सोने क िगि नयां थ और तभी दरवाज़े पर द तक हई थी" 3 . मै उस से बात करना चाहता हँ पहले " "ठीक है गु जी" िन ल ने कहा और िफर हमारा खाने -पीने का दौर चलता रहा. खे त यादा दूर नह ह गाँव से . िफर हम वहां कुिसय पर बैठ गए. और तु हारे चाचा ने तु मको आवाज़ लगायी. "चंदर. अब आप इस से जो पूछना चाह पूछ ल" मने चंदर क ओर देखा और बोला. ठीक है?" "जी ठीक है" चंदर ने कहा. और कोई उसके १५-२० िमनट बाद वो औरत आई थी" चंदर ने िबना के ये बात बतायी. "अरे अब बैठ भी जा" शमा जी िन ल क कमीज़ पकड़ के बोले . "चंदर. चंदर क उ यही लगती थी कोई २७-२८ बरस. यूंिक चाचा मेरे पास जब आये थे जगाने तो मने घडी देिख थी. "अ छा. ये है चंदर. एक बात और बताओ. ले िकन िम ी लगी हई थी उस पर" चंदर बोला. "हाँ कल ले आइये उसको. इतने म ही मेरे पास दो औरत आय . फ़ोन िन ल का था. इसीके बार म मने आपको बताया था. खैर. ढ कन कैसे लगा हआ था?" मने पूछा. पीतल का था. तु म चाचा के पास गए और कलश िनकाला. काय म िनधा रत हो चु का था कल का. िन ल ने बताया क वो चंदर को ले कर २ बजे तक आ जाएगा.ले िकन जैसे वेि डंग होती है िबलकुल वैसा ही था" चंदर ने हाथ के इशारे से बताया. ये मसला आिखर है या?" िन ल बैठते हए बोले .वो िनमं ण देने आय थ . िन ल बोले . चंदर ने सबसे पहले नम कार िकया! आगे बढ़ा. मु झे िन ल जी ने जो बताया वो तो म सु न चु का हँ. मै तु मसे कुछ सवाल पूछूँगा. मै पूव छोर पर था और चाचा दि णी छोर पर. ले िकन उस से पहले चंदर से मु लाक़ात ज़ री है" मने कहा.पश हे तु आगे बाधा. अगर आप कह तो" िन ल ने कहा. कोई १०-१५ िमनट बाद मु झे चाचा क आवाज़ आई थी. "गु जी. कलश. "चंदर को मै कल ले आता हँ गु जी. उस व त समय या हआ होगा?" "जी यही कोई सवा ४ या साढ़े ४ बजे ह गे सु बह के. मने भी कहा ठीक है. गु जी. "हाँ. शमा जी और चंदर आ गए. कोई तीन बज कर १० िमनट हए थे. २ बजे िन ल. मने अपने पाँव पीछे ख चे और उसको उसके बाजु ओ ं से पकड़ कर उठाया. तु मने हाथ अ दर डाला" मेरी बात काटते हए चंदर बोला. मसला तो है. फावड़े ले के वहाँ पहँच गए थे. जाके टयूबवेल चालू िकया. "नह . कुछ सोचा आपने . और िफर देर रात मै सोने चला गया! सु बह १० बजे मेरे पास फ़ोन आया. कलश कैसा था? मने पूछा? "जी. "तु मने गती से उसका ढ कन खोला. "हाँ. कोई पं ह िमनट म हम कुदाल. "ढ कन जैसे िचपका हआ था उस पर. तु म उसके जवाब देना.

"तु म कमरे के अ दर थे. और वो औरत कमरे के बाहर. " मने खोला था. हमने सोचा िक ऐसा न हो िक हम वो कलश िनकाल ल और वो औरत हमारे घर पे ही न आ जाये . "झोला कैसा था उसका?" मने पूछा. "जी उसने पीले रं ग क साड़ी पहन रखी थी. मै थोडा सोच म डू बा और इधर शमा जी ने सवाल िकया चंदर से. या तु मने वो औरत देखी? "नह गु जी. उसने चाचा से ही पूछा था और उनको ही वो सरकटी लाश िदखाई थी" चंदर ने आँख खोलते हए कहा. तो तु म वहाँ से भागे कैसे? मने सवाल दागा. या पहना था. "उ िकतनी होगी? मने पूछा. "जब तु मने दरवाज़ा खोला तो वो औरत वहाँ खड़ी थी. झोला कैसा था उसका. यही िक साढ़े ५ फ ट. "ज़रा मु झे उस औरत के बारे म बताओ. हम तो बु री तरह डर गए थे गु जी" चंदर ने कहा "अ छा चंदर? एक बात और बताओ? मने सवाल िकया. जैसे कैसी थी. ले िकन ये बताओ उसने िकस से कहा िक माल सारा रख लो ले िकन मेरे बेटे का सर ला दो" मने पूछा. "गु जी वो झोला नह था. "अ छा. नह देखी" चंदर म कहा. "जी."दरवाज़ा िकसने खोला? मने पूछा. वो कोई सफ़ेद चादर लग रही थी. चे हरा कैसा था? "गु जी औरत कम से कम इतनी थी" चंदर खड़ा होके बोला. "तु म िदन म भी तो वहाँ खोद सकते थे? "नह गु जी. " या पहना था उसने ?" मने पोछा. या साफा होगा. "जी जब उसने इशारा िकया िक वो सर वहां दबा पड़ा है तो हमको मौका िमल गया था. िकतनी उ होगी. ले िकन थी मैली-कुचैली" चंदर ने कहा. हमने तो पीछे मु ड के भी नह देखा और सीधे गाँव म आके ही के!" चंदर ने कहा. "जी उसका चे हरा चाचा क तरफ था. था सफ़ेद" 4 . उसक ल बाई औसत ही रही होगी. िजसमे उसने वो लाश लपे ट रखी थी. "यही कोई ३८-४० के आस-पास तो होगी ही" चंदर ने कहा. ले िकन चाचा ने उस कलश के अ दर वािपस वो िगि नयां दाल िदन और कलश के ऊपर चारपाई डाल दी थी" चंदर ने कहा. जब तु म अगले िदन वहां गए और खे त पे काम िकया या उस िदन या िजतने िदन वहां काम िकया. ल बाई कैसी थी उसक . मै समझ गया. पूिछए गु जी" चंदर ने कहा.

. हमने अपने -अपने कप उठाये और चाय पीने लगे.चंदर ने कहा. उसका सर नह था" चंदर ने थोडा अटक के ये कहा. लाश के हाथ म बांसु री? ये कैसे हो सकता है? िन ल ने कहा.. वो उसके हाथ ने ही पकड़ रखी थी" चंदर ने बताया.. संभव है" मने िन ल से कहा. "ले िकन एक बात तो तय है. उसने कहा क सारा माल रख लो. "गु जी ये मामला या है? पहले कलश. "हाँ जी. "गु जी. लाश के हाथ म बांसु री?" "हाँ शमा जी. "अ छा. अब तक चाय आ चु क थी. उसका चे हरा कैसा था?" मने पूछा. सफ़ेद रं ग का" चंदर बोला. मेरे इस सवाल से िन ल और शमा जी एक दम से आगे आ गए! "हाँ जी. "लाश के कपडे कैसे थे? तु मने देखे थे? मने पूछा. उनको नॉएडा अपने द तर जाना था. िबंदी लगा रखी थी. "संभव है. शमा जी मेरे पास ही थे. कोई १० इंच क " चंदर ने कहा. उसने वो उस चादर म से िनकाली थी. "हाँ जी. मने देखी थी. वो चले गए. कोई बड़ा रह य" मने अंगडाई ले ते हए कहा. चाय पीने के बाद िन ल और चंदर ने िवदा ली. "वो बांसु री लाश के हाथ म थी. वो कोई बु री ेता मा नह है. जैसे क आधा घूंघट" चंदर ने कहा. "वो कैसे?" शमा जी बोले . 5 .. ये कोई रह य है. शमा जी अपने आँख खु जलाते हए बोले. खु द पकड़ रखी थी? मने सवाल िकया. "तु मने वो सरकटी लाश देखी थी? मने पूछा. उस लाश के हाथ म एक बांसु री जैसी कोई चीज़ थी. "जी चे हरा तो सही ही था. "उसे धन का कोई लोभ नह . िफर वो सरकटी लाश. साड़ी उसके सर पर भी थी. अगर बु री होती तो न तो कलश ही िनकालने देती और न उनको मारे िबना रहती" मने का. "जी लाश पर एक चु त कुरता पाजामा था. "और कोई चीज़?" मने पूछा.. "अब कहानी ये है क उसके चाचा को ये कैसे पता चला क वहां कोई कलश दबा हआ है?" मने पूछा. ले िकन उसके बेटे का सर ला दो वो वही ँ दबा पड़ा है" मने समझाया "हाँ. ये तो है" शमा जी बोले .

चंदर ने बताया क हमको खु जा से थोडा आगे. "ठीक है.. जेवर रोड पर कोई १५ िकलोमीटर चलना है. वो एक ितगड् डा है. उसने सबको नम ते क और चारपाई पर बैठ गया. वहाँ खे ती नह होती. आगे क बात आपको चंदर ने बता ही दी होगी" ये बोल के िकशन चु प हो गया."हाँ. उस रात जो हआ आपके साथ वो मु झे चंदर ने बता िदया. पूिछए" उसने गंभीर होके कहा "िकशन जी. तब चंदर आया और हमने वो कलश बाहर िनकाल िलया और उसको वही ँ बने एक कमरे म ले गए. और हम िसकंदराबाद होते हए खु जा जा पहंचे. उस रात भी मै वहां पानी काटने ही गया था. अभी साढ़े ११ ही हए थे. मने वीकृ ित दी और परस के िलए आव यक तैयारी म लग गया! आज वो िदन आ गया था. उसने बताया िक कम से कम ३०० साल पु राना तो है ही! और थोड़ी देर म ही हम चंदर के घर पहँच गए. और हम चंदर के गाँव पहँच गए.. तब तक चंदर अपने गाँव म खबर भी कर देगा. आप िन ल से बात करके मु झे फ़ोन क िजये. चंदर बाहर गया और थोड़ी देर म एक दर याने कद के आदमी को ले आया. मने चंदर से पूछा क ये िकतना पु राना गाँव है.. प रचय आिद हआ. िन ल सु बह मेरे पास आयगे शमा जी और चंदर के साथ. मै आज ही बात क ँ गा.. काय म बन गया था परस िनकलना था. और खु जा म थोडा चाय-पानी पीने के बाद हम चंदर के गाँव क तरफ चल पड़े. मने िकशन से पूछा. उनको खबर दे दी गयी थी तो उ ह ने ने भी खाना बना के रखा था! सबसे पहले गरम-गरम दूध िमला पीने को! आ मा तृ हो गयी चू हे पे ओटे दूध से ! थोड़ी देर बाद खाना आ गया! गाँव के खाने क बात ही अलग होती है! वो वाद शहर म नह िमलता! पे ट भर के खाया. प थर हटाया तो नीचे मु झे एक कलश िदखाई िदया. सारी बात बता द . तब मने चंदर को आवाज़ दी. ज दी का ही काय म बनाता हँ" इसके बाद शमा जी उठे और िवदा ली. मै अपने दूसरे खे त म पानी काट रहा था तो मेरा फावड़ा िकसी प थर से टकराया. वो आधे घंटे म मेरे पास आने वाले थे. मने सोचा िक कोई बड़ा प थर है तो मने कुदाल ले ली. ले िकन वहाँ पानी घु सने लगा था. गाँव थम या काफ पु राना और समृ जान पड़ा. राि समय शमा जी का फ़ोन आया. मै अभी से तैयारी करता हँ" "ठीक है मै आपको बात होते ही फ़ोन करता हँ" शमा जी ने कहा और वहां से चल िदए. ये बताओ सबसे पहले िक आपको ये िकसने बताया िक खे त म उस जगह कलश दबा हआ है? मने सीधे ही पूछा "गु जी जहां वो कलश दबा हआ है. दही. मने कहा. वही ँ गाँव है उसका. उनको अपने िकसी काय से कह जाना था.. उसको कैसे पता चला? शमा जी ने हैरत से कहा! "ये तो हमे उसके चाचा से ही पता चले गा. मै आपसे कुछ पूछना चाहता हँ " "हाँ गु जी. ल सी सब एक साथ! िन ल ने चंदर से कहा क अपने चाचा को बु लाओ. कोई १ फुट पर वो प थर था. मने प थर के आस-पास क जगह काटी और प थर बाहर िनकाल िलया. वो लोग आये और मै उनके साथ बैठा और चल िदए खु जा क ओर! खु जा िद ली से पूव िदशा म ९०-९१ िकलोमीटर पड़ता है. कोई दो घंटे का समय लग गया था. उसना नाम िकशन था. "िकशन जी. मने िकशन से पूछा.. "ठीक है.... "िकशन जी वो प थर कैसा था? 6 .. मै भी तैयार था. वो मेरे से िखंच नह सका... ले िकन वहाँ पानी इक ा करते ह और अपने खे त म काट देते ह. और इसके िलए हमे वहां जाना पड़े गा. मेरे पास शमा जी का फ़ोन आ गया था. मै उसको िनकालने लगा. आप एक काम करो िन ल से बात करो और ज दी ही वहाँ जाने का काय म बनाओ" मने शमा जी से कहा..

मै समझ गया! हमने दरवाज़ा बंद कर िदया. िकशन ने कल ही मना कर िदया था साथ आने को. ये मु झे उस प थर पर पानी डालकर िम ी छुड़ाने से ये िदखा था. अ दर झाँकने लग गयी! मने शमा जी को आवाज़ दी वो बाहर आये . अथात काितक मास क अ मी. १० िमनट तक कोई द तक नह हई. वो हमे वहाँ ले गया. मने उसको रोक िदया. बंजार का बीजक! अब मु झे कुछ कुछ समझ आने लगा था! मने चंदर से पूछा क यहाँ और कोई ऐसा बीजक है या? उसने मना कर िदया! मने वो प थर अ दर कमरे म रखवा िदया. "वो खे त म ही पड़ा है" वो बोला. खे त जाते व त मने वहां एक पु राना कुआँ. आगे बढे और िकशन ने वो प थर मु झे िदखाया. उसके हाथ म बांसु री नह एक पु राना भोथरा खंजर था. कुछ टू ट-े फू टे चबूतरे से देखे. और वाि तक . कमरे म लगा ब ब जलाया. ले िकन मेरे बेटे का सर ला के दे दो. िकशन और चंदर ने वो ज दबाजी म और गलत कोण से देखा था! 7 . यािन क िदवाली से ७ िदन पहले . पानी मंगवाया. चिलए" वो बोला हम सभी उठे और खे त क तरफ चल पड़े . इसका अथ िनकला क जहाँ चं ोदय हो रहे ह वो है अ मी. उनके खे त म उतर गए. इतना कहते ही उसने अपनी चादर म से एक सरकटी लाश िनकाली और िदखाने लगी! मने लाश देखी. आते ही िठठक गए. एक वाि तक और िव मी-संवत १९६८ खु दा हआ था. ले िकन चंदर िह मतवाला आदमी था! वो तैयार हो गया था चलने को! और हम लोग चल पड़े उनके खे त के तरफ! खे त पर पहंचे. सूय दि णायन. प थर पर एक च मा. मने सब को हाथ से चु प रहने को कहा और खु द आगे बढ़ा. वैसे ही जैसे पहले खोला था. वो जगह िदखाए. ले िकन अभी भी १० िमनट तक कोई द तक नह हई! अब मने हाथ डाला कलश के अ दर हाथ डाला! सोने क िगि नयां ही िगि नयां थी उसमे! और तभी!! तभी दरवाज़े पे द तक हई. हमने ढ कन नह खोला था उसका. मने िहसाब लगाया. "अब वो प थर कहाँ है? मने िफर पूछा. ढ कन िफर से लगा हआ था. जैसे क िकले म लगते ह और आकार म चौकोर २ २ फुट का होगा " वो बोला. क चड हई पड़ी थी वहां! मने उनसे कहा क ठीक है. िव मी-संवत १९६८ का अथ हआ सन १९१२-१३ यािन के ये प थर सन १९१२-१३ म यहाँ गाड़ा गया था! च मा क कलाएं कुछ रे खाओं म बंट थी. राि ३ बजे हम सभी उठ गए. "चलो मु झे वो प थर िदखाओ" मै उठते हए बोला. अथात. मने देखा वो एक ितगड् डा था. मने तब चंदर को कुदाल से ढ कन खोलने को कहा! चंदर ने ढ कन खोला. मने जैसे ही दरवाज़ा खोला. और मै. आज रात को हम िनकालगे ये कलश यहाँ से! और हम सभी लोग वहां से वािपस चंदर के घर आ गए! आके थोडा आराम िकया. "सारा माल ले लो. िन ल भाई चल पड़े कलश िनकालने ! चंदर ने खु दाई शु क . ये मामला मायावी था. ले िकन कुँए क िदवार देख के पता लग रहा था क कुआँ काफ पु राना था. हम आगे चलते रहे . चंदर और िन ल को ाण-र ा मं से बाँधा. चंदर ने कुदाल उठायी और शमा जी. मने अपनी तैयारी शु क . वि तक के सीधी तरफ सूय थे . वो वही ँ गड़ा हआ है" उसने वही ँ इशारा िकया उसी तरफ जहां से हमने कलश िनकाला था. शमा जी के सामने आके बोली. कुआँ अब योग नह होता था. ये तो बीजक था. शाम हई. आस-पास झाड-झंखाड़ उगे हए थे. तं -आभूषण धारण िकये और शमा जी. वो मेरे सामने खड़ी थी! लिकन वो बोली कुछ नह और पीछे हट गयी. और ले कर आ गए कमरे म. और साथ म थोडा सलाद और हम शु हो गए! खाना खा के हम सोने चले गए. िफर उसको बड़ी मु ि कल से िनकाला. िन ल ही अपना िपटारा खोने बैठ गए! शराब िनकाली. और िकशन से पूछा क वो प थर िजस जगह से िनकला था. "अभी िदखाता हँ गु जी. कोई २० िमनट के बाद कलश िदखाई दे गया."जी प थर लाल रं ग का था. एक सूरज.

मने उस से कहा, "तेरा नाम या है?"
"वो, वहाँ, वहाँ" वो िबना मु झे देखे हाथ उठाये उसी जगह क तरफ इशारा करती रही,
"सु न, तेरे बेटे का सर िमल जाएगा, मेरी बात सु न, मै इसीिलए यहाँ आया हँ" मने तेज़ कहा,
उसने मु झे ऊपर से नीचे तक देखा, िफर अपने बेटे क लाश मेरी तरफ कर दी, मने कहा,
"िचंता न कर, िमल जाएगा इसका सर" मने कहा
उसने लाश िफर से कपडे म ढक ली,
मने िफर पूछा, "नाम या है तेरा?"
"पावती" वो बोली,
"ये कौन है, िजसक ये देह है?" मने पूछा,
"मेरा लड़का" वो बोली,
"सर कैसा कटा इसका, िकसने कटा? मने पूछा,
"बाबा ने काटा" वो बोली,
""कौन बाबा?" मने पूछा,
"खैडल बाबा ने काटा" वो बोली,
" यूँ काटा?" मने पूछा,
अब वो रोना शु हो गयी, हालांिक, इनके आंसं ू नह होते , मने कहा "रो मत मु झे बता यूँ काटा?"
"बिल चढ़ा िदया खैडल ने " वो उसको अपने से िचपका के बोली,
मने कहा, "सारी बात बता, तू कौन है, कहाँ रहती थी?"
उसने जो बताया मै आपको बताता हँ-उसका नाम पावती था, ाम दनकौर म उसका मैका था, वो यहाँ याह के आई थी, पित उसका राजिगरी करता था, उसका
एक ही लड़का था, एक बार जब वो अपनी ससु राल से अपने मैके जा रही थी तो उसका लड़का बाहर खे ल रहा था, काफ देर
तक जब वो अ दर नह आया तो वो उसको ढू ँ ढने गयी, लड़का कह नह िमला, उसके पित ने भी बहत ढू ँ ढा ले िकन नह
िमला, उसके पित ने सारा दोष पावती पे डाल िदया, यूंिक लड़का इकलौता था, और इसी बात पे उसके पित ने उसक
जमकर िपटाई कर दी, इसी िपटाई म उसके सर पे लाठी का एक वार लगा और उसका सर फट गया, वो वही ँ ढे र हो गयी,
उसके पित ने उसी िदन उसको गाँव के ही िशवाने म जला िदया, और लड़के के बारे म--- वो लड़का जब खे ल रहा था कोई
बंजारा उसको बहला-फुसला के अपने िठकाने पे लाया, ये बंजारे लूट का माल ज़मीन म ही गाड़ा करते थे , नरबली देकर,
तािक उसक आ मा उस धन क र ा करते थे, और वहां एक बीजक गाद देते थे, इसी बीजक से वो ज़ रत पड़ने पर अपना
माल िनकाल िलया करते थे, खैडल उनका तांि क था, उसने उस लड़के को नरबली का िशकार बना िदया, सर एक घड़े म
डाल के वही ँ गाड़ िदया, जहां ये कलश िनकला था, और धड एक नहर म फक िदया, पावती क आ मा भटक रही थी, वो इस
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धड को ले के १०० साल तक भटकती रही िक कोई आये ये धन िनकाले और उसके लड़के का सर िमले और वो मु
जाएँ ......

हो

तो आज वो घडी आई थी! मने उस से कहा िक "इस लाश को ज़मीन पर रख दे, मै तु झे अभी सर देता हँ क"
उसने वो लाश नीचे रख दी, मने चंदर को बु लाया और कहा िक एक कलश और है नीचे उसको भी िनकाल दो, चंदर ने
कुदाल उठायी और वो कलश बाहर िनकाल िदया, मने वो कलश वही ँ खु लवाया, अ दर एक नरमु ंड था, एक जालीदार कपडे
म, मने वो कपडा हटाया, और वो नर मु ंड उसको दे िदया, उसने वो नर मु ंड उठाया और अपने बेटे के सर क जगह लगा िदया,
उसने िफर से लाश उठायी और उसने मु झे देखा, हाथ उठाया जैसे िक आशीवाद दे रही हो, उस माँ और उसके बेटे का िमलन हो
गया था! मु झे बेहद ख़ु शी हई! वो औरत सौ साल से अपने बेटे के िलए भटक रही थी और आज मु ि के कगार पे थी, मने
मं ोचारण िकया, और उनको हमेशा के िलए मु कर िदया! वो वही ँ लोप हो गए!
मै कमरे म आया, कमरे म कलश था, मने दु बारा हाथ डाला, सारी िगि नयां उसी म थ , ले िकन कुछ िगि नयां आपस म
िचपक गय थ , मतलब िक बाबा खडैल का ितिल म अभी भी काम कर रहा था, ये जानले वा िस हो सकता था, मने वो
कलश उठवाया और िफर से उसी गड् ढे म गड़वा िदया, और ऊपर से वो प थर ढकवा िदया, ले िकन अबक बार प थर मने
उ टा रखवाया था,
आज भी वो कलश वहां रखा है, अभी तक उसको लाने िक ज़ रत नह पड़ी, ले िकन कभी पड़े गी तो देखा जाएगा! हाँ, इसके
बाद जब हम वािपस आये िद ली तो चंदर वही ँ रह गया था, उसने अगले िदन फ़ोन काके बताया िक जहाँ कमरे म वो कलश
रखा था वहाँ २३ िगि नयां पड़ी हई थ , वो उसने अपने पास रख ली ह, मने उसको कहा िक आधे मोल का दान करना बाक
वो रख ले , उन पर उसी का हक था यूंिक वो खे त चंदर के िपताजी के थे जो २ साल पहले वग िसधार चु के थे! और उसी
ज़मीन िक वजह से वो आ माएं मु हई थ ! ये उन आ माओं का साद था जो चंदर को िमला था!

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अलवर राज थान क एक घटना
िम ो ये एक घटना है अलवर क जो क वष २००८ माच २१ को घटी थी, मने देखा क लालच म कैसे एक पूरा कुनबा कैसे
ख़तम हआ!
शमा जी के एक अिभ न िम ह, हाजी साहब, उ होगी उनक यही कोई ५०-५५ साल, आदमी बेहद इमानदार, शालीन और
खानदानी ह, मेरी मु लाक़ात शमा जी ने ही उनसे करवाई थी, एक रोज़ ईद का िदन था वो भी बकरीद का, मै अपने िव ामथान पर था, िदन म कोई ११ बजे शमा जी मेरे पास आये , और बोले , "गु जी, क काम तो नह है आज आपको?
मने कहा," या इरादा है, कोई काय म है या?"
"काय म या गु जी,मेरे एक िम ह, जब मै ईराक म था तो तब मेरी उनसे मु लाक़ात हई थी, आदमी बेहद इमानदार और
हलाल िक म के ह, आज िदन है ईद का, आज दावत का बु लावा है उनका, मने उनसे कहा था क भाई जान मेरे एक गु जी
ह, मै आऊंगा तो उनके साथ ही, तो वो बोले , अरे आपके गु जी तो हमारे भी गु जी, जब आप उनके पास जाओ तो ज़रा मेरी
उनसे बात करा देना, दावतनामा दे दूंगा, ये गु लोग ऐसे-वैसे नह आए और न कह जाते, तो मने कहा क ठीक है हाजी
साहब, मै उनसे आपक बात करा दूंगा "
इस से पहले क मै कुछ कहता, शमा जी न हाजी साहब का नंबर िमला िदया, फ़ोन हाजी साहब ने ही उठाया, शमा जी ने कुछ
हाजी साहब से कहा और फ़ोन मु झे पकड़ा िदया, मने कहा, "हे लो" हाजी साहब बोले , "हे लो जनाब!, ये शमा जी हमारे बड़े
ख़ास ह, इ होने आज आपका िज िकया तो मने कहा क भाई ज़रा हमारी भी मु लाक़ात करवा दो अपने गु जी से,
इसीिलए मने ये गु ताखी क है जनाब"
उनके बोलने का लहजा बेहद ह का और बेहद अदब वाला था, मने कहा, "अरे हाजी साहब, आप उ म मेरे से काफ बड़े ह,
ले िकन इस ज़रानवाज़ी के िलए आपका बेहद शु ि या!"
मेरे शु ि या बोलने से पहले ही हाजी साहब ने मेरी बात काटी और बोले, "जनाब आपके दीदार के लये मरे जा रहा हँ,
रहमोकरम क िजये और शमा जी के साथ मेरे गरीबखाने पर तशरीफ़ रिखये "
मै मन नह कर सका और मने कहा, "ठीक है हाजी साहब, मै आता हँ शमा जी के साथ"
और मने फ़ोन शमा जी को दे िदया, शमा जी ने दो चार बात और क और फ़ोन काट िदया, मै तैयार हआ और शमा जी क
गाड़ी म बैठ गया और हम हाजी साहब के घर क तरफ चल पड़े !
हाजी साहब के यहाँ पहंचे तो हाजी साहब खु द ही नीचे खड़े थे हम ले ने के िलए, नीचे तो जैसे मेला लगा हआ था! और हाजी
साहब जब हमसे नीचे िमले तो शमा जी के गले लगे, और मु झे सर झु का के नम कार िकया,मने भी नम कार वीकार
िकया, हाजी जी ने शमा जी क बाजू पकड़ी और मु झसे बोले, "आइये गु जी, आइये !"
मै उनके पीछे चला, वो एक मकान के सामने के, मु झे देखा, और अ दर घु स गए, मै भी उनके पीछे था, मै अ दर घु सा, आगे
ऊपर जाने क एक सीढ़ी थी, वो उस पर ही चढ़ रहे थे, मै भी ऊपर चढ़ा और िफर वो एक कमरे म घु स गए, मै भी वहां गया तो
हाजी साहब और शमा जी को अपना इंतज़ार करते पाया, अ दर कोई ६-७ लोग बैठे थे, हाजी साहब फरमाए, "साहे बान, ये है
हमारे अज़ीज़ शमा जी और ये ह हमारे बेहद अज़ीज़ गु जी" हम देखते ही मसनद पे ले टा हर आदमी खड़ा हो गया था, हम
अ दर आये और अपनी जगह बैठ गए, वहां बैठे लोग से शमा जी ने हाथ िमलाया और मने हाथ जोड़कर सबको नम कार
िकया, तभी हाजी जी आये और अपने साथ एक लड़का लाये थे, िजसने कई ले ट खाने क चीज़ थ , एक म िचकन- ाई, एक
म कबाब और ऐसे ही कई चीज़ थ , सारी चीज़ उस लड़के ने हमारे सामने रख द , खाना बेहद लज़ीज़ था, लखनवी जायके
वाला! हमने थोडा बहत खाया तभी हाजी साहब कमरे म दािखल हए, और बोले , "जनाब आइये मै अपने घर के लोग से
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िमलवा दूं आपको" हम उठे और उनके पीछे -पीछे चल िदए,
हाजी साहब मु ड़े और हम उनके साथ पीछे चल िदए, वो आगे सीढ़ी पर चढ़े तो हम भी चढ़ गए, ऊपर उनक रहाइश थी, वो
हमे अपने कमरे म ले गए और अपनी बेगम सािहबा को ले आये , उनसे मु लाक़ात करवाई और अपने दोन बड़े बेट और अपने
एक बेटी से मु लाक़ात करवाई, बिढ़या प रवार है उनका, खाते-पीते लोग ह, दर-असल िद ली के काफ पु राने रहने वाले ह वो
लोग, राजनीित म भी सि य ह और काफ दब-दबा है उनका, खे ती बेिहसाब और कई बाग़ ह उनके, यही से सारी कमाई
आती है उनक ! उ ह ने तभी अपने एक नौकर को बु लवाया और बेहतरीन खाना लाने को कहा, वो गया और थोड़ी देर बाद
खाना सजा के ले आया, खाना बड़ी टेबल पर रखा और हमने खाना शु कर िदया, हालांिक हम थोडा बहत नीचे भी खा
चु के थे, थोडा बहत और खाया और िफर उ ह ने एक लड़के से िकसी कािसम भाई को बु लवा भे जा, बोले , "गु जी, ये कािसम
भी मेरे सबसे बड़े साले साहब ह, अलवर म रहते ह, काफ अ छे -खासे रसूख वाले इंसान ह, कुछ परे शानी म ह आजकल, जब
आप आये हए ह ही तो मने सोचा क ज़रा मु लाक़ात करवा दूं," मने कहा "कोई बात नह , आने दीिजये "
थोड़ी देर बाद एक ल बे-चौड़े श स ने वेश िकया, हाजी साहब खड़े हए और उनका प रचय मु झसे करवाया, ये ही कािसम
साहब थे, कािसम साहब से मु लाक़ात हई तो हाजी जी ने कािसम से कहा, म आपक परे शानी वाली बात गु जी से कही थी,
बेहतर है क आप खु ल के बता दीिजये इ ह, काम आपका तस ली के साथ हो जाएगा" ये कहते हए उ ह ने कािसम के कंधे
को आराम से ठ का!
कािसम ने बोलना शु िकया, "गु जी हम ६ भाई ह, ५ शादी-शु दा ह ले िकन सबसे छोटे वाला नह याकूब नाम है उसका,
शादी नह क उसने , वो शादी के िलए मना करता है, काफ र ते आये उसके ले िकन उसने वािपस ही लौटा िदए, करीब एक
साल से, पागल जैसा हो रखा है, आधी-आधी रात म खे त म चला जाता ह, सु बह आता है, ह ते-ह ते नहाता नह , म त घूमता
रहता है, अगर कोई बोले तो गाली-गौज करता है, हम बड़े परे शान ह उस से, एक रात क बात है, घर के आँगन म रात को १
बजे जोर-जोर से नाच रहा था, कभी इधर िगरता कभी उधर, हमने उसको पकड़ना चाहा तो बोला, "अपनी खैर चाहता है तो
छोड़ दे मु झ,े छोड़ दे मु झ!े " हम तो दर गए, िफर जब वो थक के िगर गया तो बडबडाया "काली आई, काली आई!" हमने पूछा,
"कौन काली" तो वो बोला, "वो आसमान वाली काली, आसमान वाली काली!" हमने सोचा क शायद कोई असरात ह इसपे ,
हमने उसको पकड़ा तो वो झटके से उठा और भाग गया खे त म" उसके कोई ४ िदन तक वो नज़र नह आया" कािसम ने
अपनी जेब टटोलते हए कहा.
कािसम ने अपनी जेब से याकूब का फोटो िनकला और मेरी तरफ बढ़ा िदया, मने फोटो देखा, उ होगी कोई ३०-३५ के आसपास, देखने से से तो सामा य ही िदखाई देता था, इसके बाद मने वो फोटो कािसम को वािपस कर िदया, कािसम ने दोबारा
बोलना श िकया, "एक बार क बात है, कािसम एक शाम को खाना खा रहा था, एकदम से बोला, "रिज़या मर जाये गी
परस , रिज़या मर जाये गी परस " रिज़या मेरी प नी का नाम है, मै उठा और उस से बोला, "कौन मारे गा रिज़या को? तू?"
उसने कहा, "िदवार िगरे गी रिज़या मर जाये गी परस ", हमने सोचा ये पागल तो है ही, इसका या भरोसा करना और बात
आई-गयी हो गयी, ले िकन गु जी, वही हआ जो याकूब ने कहा था, वो खे त म थी, एक दम से आंधी-ध कड़ आया और और
एक पे ड़ टू ट कर उसके ऊपर िगर पड़ा, वो उसके नीचे दब गयी और मर गयी, हमको खबर िमली, हम दौड़े -दौड़े वहाँ गए,
रिज़या दम तोड़ चु क थी, तभी वहाँ याकूब आया, और बोला, "मने कहा था न, रिज़या मर जाये गी!" हमारे तो होश उड़ गए, ये
पागल तो सच म ही सही कह रहा था, िफर याकूब बोला "रिज़या तू अभी तक गयी नह यहाँ से? ठहर मै बताता हँ तु झ"े और
वो ऐसे ही कह के जंगल क तरफ भाग गया"
" या आपने मु ला-मौलवी नह बु लवाए उसके इलाज के िलए? मने हैरत से कहा,
"बु लवाए थे, ले िकन सब बेकार" वो उनको ही भगा देता था, िक या करने आये हो यहाँ? जाओ पाने काम पे लग जाओ,
दु बारा आये तो २ टु कड़े कर दूंगा, सभी डर के मारे भाग गए"

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"अब याकूब कहाँ है? मने िफर पूछा,
"पता नह , कहाँ गया है, कह रहा था अलीगढ जा रहा हँ, मेरा एक दो त है वहाँ" कािसम ने कहा,
"ये कब िक बात है? मै पूछा,
"ये ही कोई १२-१३ िदन हो गए" कािसम बोला,
" या अलीगढ म कोई र तेदारी वगैरह है आपक ? मने पूछा,
"नह हमारी र तेदारी ह रयाणा िद ली तक ही है, और कह नह " कािसम बोला,
मामला बेहद रोचक था, मेरी िदलच पी और बढ़ गयी..
"ठीक है कािसम साहब, मै मामला समझ गया हँ, मामला उलझा हआ है काफ , ले िकन आगे िक बात मै याकूब से िमलके ही
आपको बता सकता हँ" मने कहा,
"अबक बार जब याकूब घर पे आये तो तु म मु झे फ़ोन कर देना, मै गु जी से बात कर लूँगा, गु जी क कृ पा हई तो काम
िनबट जाएगा" इस बार कािसम से हाजी जी बोले ,
"ठीक है, मै हाजी जी को फ़ोन कर दूंगा" कािसम ने कहा,
और िफर हमने हाजी जी को शु ि या अदा िकया, दो-चार बात हई ं और िफर मै और शमा जी वहाँ से नकल पड़े,
रा ते म शमा जी से रहा नह गया, और बोले , "गु जी, ये काली आई, काली आई का या अथ हआ?
"मै भी यही सोच रहा हँ, कौन काली? मने जवाब िदया,
"हैरत-अंगेज़ बात है ये मेरे िलए तो" शमा जी ने एक िसगरे ट जलाते हए कहा,
"हाँ, काफ पे चीदा बात है" मने कहा,
"गु जी? ये रिज़या वाली बात तो बेहद खतरनाक है" शमा जी ने कहा,
"हाँ शमा जी, बेचारा याकूब!" मने कहा,
"बेचारा? कैसे गु जी? शमा जी ने कहा,
"कोई मु सीबत गले ले बैठा है, मेरा ये मतलब था" मने हँसते हए कहा,
"हाँ मु सीबत तो है ही" शमा जी ने भी मेरा समथन िकया,
"गु जी इस अलीगढ वाली बात म भी कहानी छुपी है, मु झे तो लगता है," शमा जी ने कहा,
"सारी कहानी वही ँ से शु हो रही है शमा जी" मने कहा,
"वो तो आपको मालूम!"
उ ह ने हाथ जोड़ते हए कहा, मने कहा, "कोई बात नह शमा जी, देखते है क आिखर कहानी है या"" मै बोला,
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इस तरह ९-१० िदन िनकल गए, एक रोज़ शमा जी ने मु झे फ़ोन िकया और बताया क हाजी जी जा फ़ोन आया था कह रहे थे
ही याकूब वािपस आ गया है, मने कहा क ठीक है, आप मेरे पास आ जाओ, वो कहने लगे िक वो आज तो नह , कल सु बह
पहँच जायगे मेरे पास,
अगले िदन सु बह १० बजे वो मेरे पास पहँच गए, मु झे पूरी बात बतायी, मने कहा िक ठीक है हाजी जी से बात करो हम अलवर
चलते ह, शमा जी ने तभी हाजी जी से बात क और कोई ५ िमनट बात करने का बाद, उ ह ने फ़ोन काटा, बोले , "हाजी जी
कह रहे ह क वो तैयार है जाने के िलए, बोलो कब गाडी भे जं?ू
"उनसे कहना क कल सु बह ८ बजे भे ज दो, और खु द भी गाडी म ही आय वो, हम यह से िनकल पड़गे" मने कहा,
"ठीक है, मै अभी कहे देता हँ," उ ह ने कहा और फ़ोन जेब से िनकाल कर हाजी जी को कॉल करने लगे, थोड़ी देर बात हई
और हमारा काय म कल सु बह का प का हो गया, मने शमा जी को कहा,"शमा जी, आज रात आप मेरे साथ अलख पर
बैठना, आपको तैयार करना है वहाँ के िलए, मामला ऐसा-वैसा नह , बेहद मज़बूत है"
"ठीक है गु जी, मै यह

क जाऊँगा आज रात" उ ह ने कहा,

रात करीब २ बजे मने ि या शु क और ३ बजे करीब शमा जी को तैयार िकया, उनके िलए तं -आभूषण तैयार िकये , ये
अ यंत आव यक था,
करीब ४ बजे हम दोन सोने चले गए, २ गहनते सोने के बाद, नानािद से िनवृत हए और चाय आिद का बंध िकया,
सु बह सवा ७ बजे हाजी जी अपनी गाडी ले के आ गए, गाडी बड़ी थी, आराम से सोकर जा सकते थे हम!
हम बैठे और अलवर के िलए रवाना हो गए...
हम धा -हे डा, नूह होते हए अलवर पहँच चु के थे, करीब ५ गहनते लग गए थे हमको भीड़-भाड़ बेहद थी, ले िकन मने और
शमा जी ने आराम कर िलया था, न द लग गयी थी, थकान िमट गयी थी! अलवर पहंचे तो पता चला क गाँव यहाँ से कोई २२
िकलोमीटर अ दर पड़ता है, अब जब िनकल ही आये तो घबराना या! मोड़ दी गाडी! और मान लो दो त , ये २२ िकलोमीटर
कैसे कटे, ये मै ही जानता हँ! रा ता ऐसा, क छित गाडी हो तो खु ल-खु ला के पहचानी ही न जाए! कम से कम २० बार उतरे
ह गे दोन लोग! सड़क से प थर हटाने म! रा ता ऐसा था िक हमे ये २२ िकलोमीटर पार करने म ३ घंटे लग गए!
अब यहाँ आये तो पता चला, िक गाँव यहाँ से बही ३ िकलोमीटर और दूर है ! चलो जब सर िदया ओखले म तो मूसल से या
डर! चल िदए आगे धीरे -धीरे ! करीब ५ बजे हम पहंचे गाँव! लाइट का नामो-िनशाँ नह ! लग रहा था १८ व शता दी के िकसी
गाँव म आ गए ह!
िकसी तरह से हम कािसम के घर पहंचे! आिखर पहँच ही गए! कािसम ने दौड़ लगाई ं, एक बा टी पानी ले आया, हाथ-मु ंह
धु लवाए, और अ दर एक कमरे िक तरफ ले गया! कमरा भी कोई १०० साल पु राना होगा, कम से कम १८-२० फ ट ऊंची होगी
छत! खािलस प थर और लोहे क किड़याँ!
थोड़ी देर बाद कािसम गरम-गरम दूध ले आया, दूध पीया, घर का बना ह खोवा खाया! मजा आ गया! कािसम ने देसी मु ग के
मांस भी बनवाया था हमारे िलए! कािसम ने कोई कमी नह छोड़ी थी! कािसम ने अपने प रवार के सभी लोगो से मु लाक़ात
करवाई, ले िकन याकूब नह आया, मने कािसम से पूछा, "कािसम भाई, याकूब कहाँ है?"
"वो तो गु जी रात के व त ही आएगा, पागल हआ पड़ा है, सर पे चोट मार रखी है, पूछो तो वो ही उलटे -सीधे जवाब!" कािसम
ने बताया,
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हम उठे और खे त तक चले गए. अभी तो कोई ज़ रत है नह . सच कहता हँ दो त . ये आम क रम थी. हमारे हाथ म पकडाय . कािसम दौड़ा-दौड़ा आया. और हमारा तो भाग है जो आप यहाँ आये हो" शमा जी ने कहा. एयर-फ़ोस से रटायर है. और एक बड़ी सी ले ट म मु गा लाया! मने कहा. यहाँ सब हमारा होगा. ये उनक थानीय भाषा थी! "तो िकंगे है माल?" हाजी जी बोले . "गु जी. आप मेहमान हो. उसने ही लाके दी ये !" शमा जी बोले . मने पूछा. यहाँ ऐसा कोई च कर न. यहाँ मेरा एक पंिडत यार है. कोई २५-३० िमनट के बाद कािसम आया. िदवाली पै अपने यार-दो तन के साथ लगा ले ते ह. वैसे कोई शौक़ न है!" कािसम बोला. रात गु जरी और सु बह आई. " हाजी जी. मोटी-मोटी चू हे क रोटी! मने और शमा जी तो टू ट पड़े! खाना खा पी के हाजी जी ने कहा. उस रात याकूब नह आया. कािसम ने लज़ीज़ ना ता करा िदया था. घर का म खन. खाना या लाजवाब था.. हम तो कभी ईद-आद पै. 5 . शमाना मत.. कहाँ से इंतजाम िकया इसका?" "गु जी. जो आप आये यहाँ!" वो एक ड गे म वो रखते हए बोला! खु शबू ऐसी िक पूछो मत. उस रात हम खाना वगैरह खाना खा के सोने चले गए. "एक और िजबह कर िदया! लगता है" "एक बात बताओ. घर है ये आपका. मने उस से कहा िक मेरे मेहमान आ रहे ह. कािसम भगा और २ बोतल ले आया.थोड़ी देर बाद कािसम ने खाना लगवा िदया. हम नहा-धो के अ दर बैठे हए थे. "गु जी. बोला. "मु गा है अभी या बचा हआ?" "आपने बड़ी िफ करी गु जी! मै अभी आया!" कािसम बोला. "हां जी" ''कािसम मने बोली न ही तु मसे क गु जी और शमा जी िपया कर काम सु पहले?" "हाँ जी बोली ही" कािसम बोला. मने शमा जी से कहा क ज़रा बाहर घूमा जाए. आपको ऐसा खाना कह भी नह िमले गा! देसी घी म पका हआ. "अरे . शमा जी उठे और हाजी साहब से बात करने लगे. खाने म या लाऊं ये बताओ आप?" मने कहा. वैसे बोतल मेरे बैग म पड़ी है" "अजी. "कािसम भाई.काफ इंतज़ार िलया ले िकन याकूब का कुछ पता नह चला. आप कोई रोज़-रोज़ आओ हो यहाँ? वो तो हमारे भाग जाग गए आज. मूड बनाना हो तो बता देना. हाँ अगर ज़ रत पड़ी तो मै बता दूंगा. हाजी ने कािसम से बात क और कािसम ने शमा जी को बताया क आप उनके खे त पर घूम आय वो वही ँ पास म ह. आपक बोतल यह िमले गी" हाजी ने बोले . " बेहद बिढ़या माल है ये कािसम भाई!" "जनाब. कािसम?????????? ओ कािसम?? हाजी खड़े होके बोले .

आप आिलम हो. मु झे बताओ ज़रा?" मने कहा. हम वहाँ तक गए. हम और आगे चले . आगे खे त दूर तक गए थे . ऊपर खु ला आसमान. मने वो उठाई और उसके साथ साथ चल िदया. याकूब ने हमे नम कार िकया. हमने नीचे झाँका तो नीचे खे त थे. "कैसी है तु हारी काली? मने कहा. "तु हे कैसे िमली ये काली. पहंचे हए आिलम" उसने हाथ जोड़ के कहा. मने कहा क कोई बात नह उसको पहले खाना खाने दो. "ये तो मु झे मालूम था क कल घर म को आिलम आया है" "तु हे कैसे पता क मै आिलम हँ? मने पूछा. वहाँ मने पे शाब िकया. "कौन काली. उसमे पक हई सध लगी थ . िछलके समेत ही हमने वो खाय ! काफ मीठी और वािद थ वो! हम आगे चले . काफ ऊंची नह ले िकन थी पहाड़ी ही. और एक दातु न बना ली और लगे चबाने. बड़े मीठे और बड़े -बड़े थे ये बेर! हमने काफ खाए! ११ बज चु के थे. हमने भी नम कार िकया. मेरा क़द वैसे ६ फ ट है ले िकन ये सरस तो मु झसे भी ल बी थी! हम एक मेढ़ पर चल िदए. "वो पहाड़ी पर रहती है. उ ह ने बताया क याकूब आ गया है और खाना खा रहा है. एक जगह मु झे सध िक बेल िदखाई थी. लगता था िक िकसी अनजान जगह आ गए ह. वो अपने आप मु झे बु लाती है. बड़ा अजीब सा चबूतरा था वो.करीब ३०० मीटर दूर ही उनके खे त ह गे . पास क एक पानी क नाली म उनको धोया और एक शमा जी को दी. पे ड़ तकरीबन ४ फ ट इसी चबूतरे म धंसा हआ था. "काले कपडे म रहती है. हमने वहाँ से एक क कर के पे ड़ िक डंडी तोड़ी. इतने म ही शमा जी का फ़ोन बजा और हाजी साहब लाइन पर थे. मने कहा क "ऊपर बैठो याकूब" "नह जी. खे त म सरस लगी थी. और खाते. हम वही ँ चल िदए. खे त म ८-१० पे ड़ थे बेर के. वहाँ एक पहाड़ी थी. हम आगे गए तो एक बरगद के पे ड़ के नीचे हमको कुछ इंसान का बनाया एक चबूतरा सा िमला. खाना खा रहा है. मै कभी भी कह भी होऊं तो" उसने कहा. काफ आगे आ गए थे. एक जगह मु झे साँप क बा बी िदखी. मै यह बैठूँगा नह तो काली मारे गी" वो बोला. हम एक दरार से नीचे उतरे और खे त म चल िदए. "मै एक िदन वहां गया था पहाड़ी पर. याकूब बोला. कब िमली?" मने पूछा. लोहे का घंटा पहनती है गले म. उसने इशारा करके कहा.मने २ तोड़ ली और बाक छोड़ द . कािसम ने कहा क याकूब अ दर है. िफर भी थोड़ी देर हम वही ँ के रहे और उस सु दर जगह को िनहारते रहे. मै चबूतरे पर चढ़ा तो महसूस हआ िक नीचे कोई ख़ाली जगह है. पे ड़ बेर से लदे पड़े थे. काफ पु रानी जो क कोई ४० मीटर म फै ली थी और साँप के रगने के ताज़े िनशाँ अभी तक थे वहां. इस से पहले क कािसम कुछ कहता. िनशान देख के पता चलता था क ये सांप भी काफ बड़े ह गे! बा बी को देख के हम आगे बढ़ गए. बड़े -बड़े पे ड़ और बड़े बड़े िमटटी के टीले . २०-२५ िमनट के बाद कािसम याकूब को ले आया. और वो वही ँ बैठ गया नीचे . "मै जानता हँ. बड़ा खूबसूरत नज़ारा था. हम एक तोड़ते. कह के हम अ दर बैठक म बैठ गए. अब पे ड़ ने चबूतरे को फाड़ के जगह बना ली थी. ये सरस काफ ल बी और ऊंची थी. हमने तभी दौड़ लगाई ं! थोड़ी देर म कािसम के पास पहंचे. भले ही रोज़ रोज़ न िमले ले िकन उस िदन का हमने लाभ उठा िलया था. प थर का बना हआ और मजबूती से ज़मीन म धंसा हआ. सोचा वािपस चला जाए. देसी क कर क दातु न बेहद फायदेमंद हआ करती है. खे त ऐसी जगह थे के मानो िकसी ने ज़मीन को चीर िदया हो बीच म से और कोई नदी बहती हो बीच म से. और दूसरा खाने लग जाते . हम वही ँ गए. उस पहाड़ी पर. वो तभी आ गयी और मु झे मेरे बाल से पकड़ कर मारने लगी" 6 .

"ठीक है. अगर कोई औरत. "काली ने कहा. " ओ आिलम. "तू जो कोई भी है. मै यहाँ अपना िब तरा साफ़ कर रही थी और तूने पे शाब कर िदया. " यूँ मारा उसने " मने पूछा. बोला. ओये . " सा**.उसने अपने बाल पकड़ के ये कहा. िह मत है तो नाम बता अपना" "तू या मेरा बाप लगता है जो नाम बताऊँ अपना? याकूब बोला "तू ऐसे नह माने गी तेरा काम करना पड़े गा मु झे. न ही कुछ और बस पहाड़ी पे आने को कह गयी. आजा आज रात पहाड़ी पर. इसीिलए मु झे मारा" "तूने कहा नह क इसम मेरी या गलती. मु झे िदखाई नह िदए तेरा िब तर. वो बोला. क जा" मने कहा. मेरे 'काम' क है! बहत काम आएगी मेरे! मने मन म ही कहा! याकूब उठा और चु पके से बाहर िखसक िलया. मु झे या मालूम?"मने कहा.. 7 . मै झटके से खड़ा हआ और नाचते याकूब को एक कस कर िदया झापड़! वो िठठक गया और िबना कुछ कहे मेरी तरफ देखता रहा! मने कहा. कािसम और हाजी ने बड़ी मु ि कल से उसको पकड़ा! "कहाँ भागती है ओ हरामन. तेरी तो औकात या! अपना नाम बदल के आ रही है यहाँ. तेरी जैसी मेरे मूत म बह जाती ह. मै आज रात जाऊँगा पहाड़ी पे ! ये जो कोई भी है. शि य का आ ान िकया और मेरी शि यां कट हो गय ! अब तक वहाँ घर के और बाहर ले लोग इक े हो गए थे. एक बात थी जो मै जानता था. तेरे जैसे कई आये मु झे पकड़ने ले िकन मै ३ को मार िदया और २ भाग गए" "वो मेरे जैसे नह थे कुितया" मने कहा याकूब के होश उड़ गए! वो वहाँ से भागने लगा. मै तेरा वागत क ँ गी" वो गु से से बोला! अब याकूब नीचे िगरा और वो जो कोई भी थी वहाँ से भाग गयी! उसने न तो नाम बताया. "ओये . मने मं पढने शु िकये. ये तु झे अब पता चले गा. कौन या है. सु न ले अब तू मेरे आ म क झाड़-बु हारी करे गी" मने याकूब का िगरे बान पकड़ के बोला. मने कािसम से कहा क पदा डाल दो. मेरा पीछा न करना. िह मत है तो यह क" मने एक और झापड़ िदया उसको! "मेरे से मत िभड तू.ह िकसी मद पे सवार हो. तू नह जानता मै या हँ " याकूब ने कहा. इतने म ही याकूब खड़ा हआ और नाचने लगा. और अपने िलए तैयार कर िलया. वािपस नह जाने दूँगी तु झको!" उसने मु झे ऊँगली िदखा के कहा. मने याकूब क खाल उतारनी है अब! क़ म ने फ़ौरन ही पदा डाल िदया! याकूब ने ने बंद परदे को देखा और मु झसे बोला. हाँ वहाँ खड़े लोग डर गए और उसका रा ता साफ़ हो गया! मने करीब ८ बजे शि -आ ान िकया. तो इसके २ ही कारण ह. उसका पीछा िकसी ने नह िकया.

चल िदए ऊपर क तरफ. हम िफर आगे बढे तो सामने प थर का एक छोटा सा कमरा िदखा. उनको मने वह छोड़ देना था. ले िकन वो बोले िक वो वही ँ इंतज़ार कर लगे ले िकन हमारे िबना वािपस नह जायगे! तब मने और शमा जी ने पहाड़ी को देखा. वो िसफ हमे पहाड़ी का रा ता बताने के िलए. यहाँ ये घर क कोई औरत नह थी. पीछे -पीछे . मने एक हाथ उसक गु ी पे िदया. हमारे आस-पास बड़े -बड़े सांप थे! छोटे-बड़े सभी िक म के! मने एक सांप पकड़ा और उ सको मं से फूं का. घु प अँधेरा. अब एक ही कारण शेष था. मने िफर भी काफ बिढ़या तैयारी क थी. िदन भर धूप सकता है और रात म िशकार के िलए बाहर िनकलता है. एक ज़ोरदार चमक उठी और इसके साथ ही वो सांप गायब हो गए! हम िफर आगे बढे . मने आवाज़ दी. रात के दस बजते ही मै उठा. कोई रौशनी नह . "याकूब?" याकूब?" ले िकन वो नह बोला कुछ. और शमा जी के साथ आगे बढ़ना था. काफ दूर थी वो पहाड़ी. बस इधर-उधर िहलता रहा. वो िगरा नीचे और दूर भाग गया! शमा जी ने टोच क रौशनी वहाँ डाली जहा वो गया था. वो था िसि म क गयी गलती. ऐसी ही िब छू ये भी रात को ही ि याशील होते ह! उनसे भी बचना था! आगे जाके महबूब और कािसम ठहर गए और हमको टोच पकड़ा दी. तैयारी क . मु झे कई साँप क फुफकार सु नाई दी. वो मु झे मारने क िफराक से आया था. "देख ३ तो मने यही मारके दफ़न कर िदए आज तु झे भी मार के यह गाड़ दूँगी!" मई कमरे म घु सा. कमरे म याकूब बैठा था! वो उठा और झपट के मेरे पास आया. मने घडी म देखा १० बजकर ४५ िमनट हए थे. ठहर जा! यहाँ तक तो आ गया तू. शमा जी को अिभमंि त माला दी और उनको ाण-र ा मं से बाँधा. वो एक कोने म नीचे बैठा हए था घु टने के बल. िजंदा रहना है तो यह से वािपस चले जा" मने यान नह िदया और आगे बढ़ गया कमरे क तरफ! िफर आवाज़ आई. रा ता पथरीला और झािड़य भरा था. मंझीर क आवाज़ इतनी तेज़ थी के जैसे कंधे पे बैठ के ही बोल रहे ह ! रा ता बड़ा ही तकलीफदेह था. मै बढ़ा याकूब क 8 . पहाड़ी काफ दूर थी. अपने घु टन म अपना सर िटकाये . हम आगे बढ़ते गए. मोटे-छोटे प थर से अटा पड़ा था. हमारा िवरोध तो शु हो ही गया था. कोई आधा िकलोमीटर चलने के बाद. मने उसको एक लात मारी उसके पे ट पर! वो नीचे िगरा और िफर खड़ा हो गया! अब क बार वो शमा जी पर झपटा. टोच वगैरह ली और अपने साथ शमा जी और कािसम और कािसम के बड़े लड़के महबूब को साथ ले जाना था. शमा जी ने कािसम से उसक बड़ी टोच ली और हम आगे बढ़ गए. मै रात १० बजे का इंतज़ार कर रहा था. ऐसी जगह रात को सांप-िब छू अपनी िदनचया शु करते ह! सांप ठ डे र का ाणी है. उ ह ने एक संकरी सी जगह िदखाई और बताया क ये ही पगड डी पहाड़ी तक जाती है. िमअने उनको वािपस जाने के िलए कह िदया. अब उनका कोई बाल भी बांका नह कर सकता था. कािसम ने हमको रा ता तो िदखा ही िदया था. मने तब वयं को और शमा जी को मं -कवच म ढक िलया! अब शु हई प थर क बरसात! ले िकन वो प ा हमारे पास आकर ग़ायब हो जाते थे! मने िशरा-मं पढ़ के वो माया ख़तम कर दी! दूसरा िवरोध भी उसका बेकार हो गया था. कािसम और महबूब आगे -आगे चले . "ठहर जा. मै और शमा जी. मने एक मं पढ़ा और अपने हाथ पर फूं क िदया. और उसको उन साँप के ऊपर फक िदया. वहाँ से एकदम आवाज़ आई.या तो वो घर क ही कोई औरत है या िफर िसि म क गयी गलती.

मने अपनी शि य से कहा क कुआली को पकड़ कर लाओ! १ िमनट म ही कुआली याकूब म पे श हो गयी! मने कहा." वो बोला. कुआँ गहरा था.तरफ. वो उठा और अ दर चला गया. "पता नह . मु झे गु सा आया और मै इसपे सवार हो गयी" उसने बताया. "मै खु द ही िगर गयी थी. "अगर ये खु द कह देगा तो छोड़ दूँगी" वो हंसा! "ये कैसे बोले गा? इस पर तो तू सवार रहती है?" मने कहा. "अब तू इसको छोड़े गी या नह ? मने पूछा. "और अगर मै तु झे कहँ तो? तब या करे गी? मै गरजा. "कुआली. मने और शमा जी ने उसको पकड़ िलया. याकूब उठ के खड़ा हो गया. "तो यहाँ कैसे आई तू? मने पूछा. १०० साल बीत गए. " या चािहए तु झ. "तेरी उ या है? कुआली" मने पूछा. "तू कैसे कुँए म िगरी. मै नूह क रहने वाली हँ . देख अब मै तु झसे आिखरी बार कह रहा हँ.े यूँ आया है यहाँ?" मने कहा. "एक बाबा ने मु झे १०० साल तक क़ैद िकया था. अब मै आज़ाद हँ" उसने बताया. और जब तक लोग आये मै मर चु क थी" वो बोला. "मु काबला क ँ गी मै" उसने कहा और उसके इतना कहते ही वहां काफ सारी ह आ गय ! ये कुआली ने ही पकड़ी थ ! मने कहा. "ये मेरी ससु राल है. जब मै कुँए म िगरी थी तो मेरे चार बड़े लड़क का याह हो चु का था. या िकसी ने िगरा िदया?" मने पूछा. मेरी आवाज़ िकसी ने भी न सु नी. "इसे नह छोडू ंगी मै. "अब तू भाग नह सकती यहाँ से. याकूब डर के मारे काँप रहा था! मने याकूब से कहा क जेक अ दर बैठ. "ये मेरे िब तरे पर पे शाब कर रहा था. "तू इस पहाड़ी पर कैसे आ गयी?" मने पूछा. तू इसको छोड़े गी या नह . अब मै जो कहता हँ वो 9 . "ओ काली तु झे अपने शमशान म झाड़ लगाने के काम पर रखूँगा मै" मै हंसा! "मेरा नाम काली नह कुआली है. िफर यहाँ छोड़ िदया. खु द िगरी. ३ अभी कुं वारे ही थे" वो बोली. नह तो मै तेरे साथ इन सब को भी ले जाऊँगा बाँध कर!" याकूब तेजी से उठा और बाहर भागा. खाना खाने को िमलता है मु झ!े " वो बोली." वो बोला. कहता. कुआली गायब हो गयी थी उस पर से! अब कुआली को हािज़र करना ज़ री था. "इसको यूँ पकड़ा तूने? मने पूछा.

करीब दो घटे के बाद भी कुआली नह मानी. "देख तूने मु झे मारा मै िकसे मा ं गी. हम अपने सामने उसको ध का देते हए नीचे ला रहे थे. वो मु ंह के बल नीचे िगरा. कािसम को बु लाया. एक काम करो. 10 . "सु न तू इसको अभी छोड़.सु न" मने कहा. िकसी को तंग नह करे गी. सम या समा हो गयी थी. मने कहा ठीक है. न ही क़ैद करो. मने समय देखा रात के १२ ४० हए थे. आिखर मने रिज़या को उसक क़ैद से आज़ाद कर िदया. मने कहा. मने उसको एक जगह एक ख बे से बाँध िदया. देख" याकूब ने आँख चढ़ाय और उसमे से एक औरत क आवाज़ आई. "तू नह रहे गी" मने कहा.े "तभी तू बेटे के पे शाब से गु सा हो गयी थी?" मने कहा "नह मै इसके साथ ही रहंगी अब" वो बोला.. मने याकूब को बु लाया. याकूब ठीक हो गया. याकूब को अपने सामने िबठाया और मने मं पढने शु िकये."एक काम करो. "अब बोल कुआली. कािसम के सारे भाई. नह तो तेरा प का इंतजाम कर दूंगा मै" "इसको नह छोडू ंगी मै" वो बोला. " यूँ?" ये मेरे बेटे जैसा लगता है मु झ. और हाँ ६ महीन के बाद उसके गले से वो काला धागा काट देना और जला देना. अब मु झे रिज़या को भी उसक क़ैद से आज़ाद करना था! मने कािसम को कहा क एक कमरा दो मु झे अभी. मु झे मत मारो. एक मु झे एक लोहे का स बल दो ज़रा. मने कािसम को कहा क अब याकूब िकसी को तंग नह करे गा.. और एक दो घे र क दीवार फांद कर अ दर आ गए थे. बोला. मने कुआली को उसीमे क़ैद का िदया था. अब तू इसको इसके घर ले चल. घर म हर कोई जाग गया था. घर लाके मने कािसम से कहा. उनके ब चे . ये कह के मने उसक कमर पर एक ज़ोरदार लात लगाई. अनाप-शनाप बकती रही. मै अब इसका इलाज करता हँ.. कािसम ने फ़ौरन महबूब को बोला और मै और शमा जी याकूब को ले के अ दर कमरे म आ गए. 'मा रयो मत. और बोली. नह हटा रहा तु झको. ये सारी बात मने हाजी और कािसम को बता द . वो उठा और चु पचाप चल पड़ा अपने घर क तरफ. रिज़या ने अपने ब च को बु लाया उनका नाम ले कर. मु झपे रहम करो. ले िकन एक वादे पर वो आज़ाद हई. क मै कुआली को ६ महीने और रहने दूंगा. कभी वािपस नह आना. मै दु िखयारी हँ. आज तेरी वो हालत क ँ गा क तू उसके बाद अपनी मौत ही मांगेगी" ये कहके मने स बल का एक वार उसक टांग पे िकया. ये कह के मने उसे बाहर ध का िदया. इन ६ महीन म वो उनक मदद करे गी. उनक बीिवआं. मा रयो मत" कहता रहा. तू यहाँ भी लोग को काली कह कह भरमा रही थी. ले िकन मने मना कर िदया. इसको मेरे से अलग न करो" वो हाथ जोड़ के बोला. कभी िकसी के सामने नह आएगी और ऐसा करने के बाद मने एक काला मज़बूत धागा उसके गले म बाँध िदया. इसको पाठ पढ़ाना है! याकूब ने हाथ जोड़े . "याकूब?" "जी आया मै" याकूब बोला. और िफर हम उसके घर पहँच गए. एक बार भी आनाकानी क तो ज़मीन म गाड़ दूंगा. वो धीमा होता तो मै लात मारता उसको. ये आवाज़ रिज़या क थी.

.. हाजी साहब से मु लाकात हो ही जाती थी महीने म एक-आद बार. उ ह ने उसको िस क के िलए मना कर िदया. ये िसलिसला चलता रहा.. कािसम और उसके भाई खे त जाने के िलए तैयार थे. पु िलस ने याकूब को पकड़ा और उसको जेल भे ज िदया..... शाम को जाते समय. भाइय ने सोचा क अगर याकूब नह रहा तो कमाई बंद हो जाये गी. ये कुआली ने नह करवाया था.... वो पड़ोस के गाँव म रहता है" वो बोला. कािसम के सर म वो दरांती धंस गयी.. "अ छा! और िफर इतने िदन कहाँ रहा? मने पूछा.वो हआ जो क मने कभी सोचा भी नह था..००० पये रख िदए... एक रोज़ शमा जी ने मु झे बताया क कािसम और उसके सारे भाइय क मौत एक साल म ही हो गयी! मने हैरत म पड़ गया! और जब मने 'मालूम' िकया तो पता चला.. करीबन साल से यादा व त हो गया. १२ बजे करीब खाना खाया.... हाजी जी ने कहा रख लो आप! मने पैसे िलए और कािसम क बड़ी लड़क अफशां को बु लाया. और शमा जी ने हाजी जी से..... उसको गु सा आया तो उसने एक दरांती से कािसम से सर पे वार कर िदया.... याकूब उनको बराबर बाँट देता था और अपना िस का भी कािसम को दे देता था रखने के िलए... कािसम को मौत हो गयी. "मेरे एक दो त क बारात थी. ये िसलिसला ६ महीन तक चला. पता चला हाजी साहब कह बाहर गए हए ह और ७ महीन से वही ँ पर ह..."एक बात बता तू अलीगढ या करने गया था? मने पूछा. हम सभी ने खाना खाया.. शाम का काय म बन गया.... सोचा थोडा सो िलया जाए! सोये तो िदन म ११ बजे न द खु ली.. लालच ने एक कुनबा ख़तम कर िदया! 11 ... उ ह ने लालच म याकूब का काला धागा नह काटा.. आज याकूब भी जा रहा था! मै और शमा जी काफ थक गए थे.. कािसम आया और मेरे हाथ म १०. खाना खाने के िलए. "मु झे याद नह क मै कहाँ रहा?" याकूब बोला. हम उठे और नहाने -धोने चले गए... मने हाजी जी को देखा.. और उसको वो पैसे दे िदए! उ ह ने बड़ी न-नु कुर क ले िकन मने पैसे नह िलए. उसके बाद... सु बह हो गयी थी. कुआली हर शु वार को ६ िस के देती थी याकूब को सोने के. िजंदा बचे भाइय ने कािसम के और याकूब के िस क पर अपना हक जताया और वो भी इसी कले श म इंतकाल फरमा गए.. हाजी साहब आये और खाने क कह गए. इसी बीच मने शमा जी से वािपस िद ली जाने क बात कही.... कुआली तो ६ महीन के बाद अपने वादे के अनु सार चली गयी थी! मने तभी हाजी को फ़ोन िमलवाया.. मने कहा क जब अफशां का याह करोगे तो बु लावा िभजवा देना! और हम तीन वहाँ से िद ली क ओर चल पड़े .. जेल म उसक मौत हो गयी. हालांिक उनको ये कहानी मालूम चल गयी थी. याकूब खे त से आया और उसके भाई भी. वो बांधे रहने िदया.. वो अब अपना मकान बनाएगा और कह शादी करे गा.. जब याकूब ने कहा क उसके िस के उसे दे दो.

बाहर एक गाडी कने क आवाज़ आई. या यूँ किहये क अभी न द से जागा है! धू-धू करके जलती िचताएं . तारक मु झे वही ँ ले गया. एक-आद टु कड़ा खाया मने और शमा जी ने भी! मने भूरे से पूछा. जैसे क कुछ कहने वाले ह अभी! हाथ-पांव क क अि थय क असंतु िलत ि थितयां! और कुछ ठहाक क आवाज! पास बनी कुिटया म पक रहा िनरािमष भोजन! एक िचता के चार ओर बैठे कुछ शमशान पु जारी! ये एक य है. ले िकन गाडी म और भी कोई बैठा था.. मेरे पीछे वो तीन भी आ गए. "तेरा गु कहाँ रह गया रे ?" "अभाल आयी" वो बोला अथात अभी आने वाले ह. िवजय शमा. और 1 . उनका प रचय तारक नाथ ने नह करवाया था. मने वो भी गटक िलया ले िकन शमा जी क िह मत नह ही! भूरा बोला. तारक क गाडी के पीछे एक और गाडी खड़ी थी. और वो जो वहाँ खड़े ह वो इनके छोटे भाई ह. तारक नाथ अ दर आया. इतना बोलते ही. हमे आते देख गाडी के सामने वाले दोन दरवाज़े खु ले.. "महाराज इनक एक सम या है. तारक नाथ आ गया था. ये भी इनके साथ ही यवसाय करते ह" मने िवजय को देखा ४५-५० क उ का मंझोले क़द का आदमी था वो. इसके बाद तारक मु झे बाहर ले गया. लोहे के यापारी ह. तारक ने कहना शु िकया. गाडी का नंबर ह रयाणा का था. खैर.. जलते मांस क गंध! िचताओं के म य से कपाल झांकते हए. दोन ने ही नम कार िकया. हाँ. अजय और िवजय और तारक नाथ. शमा जी के साथ! वहाँ मेरी मु लाक़ात एक औघड़ नाथ तारक बाबा से होनी थी! तारक अभी वहाँ पहंचा नह था! हाँ वहाँ उसके एक चे ले ने हमारा वागत िकया! इस चे ले का नाम भूरा था! शरीर और वण से वो भूरा नह था और न ही आँख से और न ही बाल से. "कौन खंडा? वो टनकपु र वाला? "हाँ जी" वो बोला. उसने एक यि क ओर इशारा िकया. तारक नाथ ने कहा. और साथ म िनरािमष भोजन के कुछ टु कड़े! ये उसका स कार था.सरधना िजला मेरठ वष २००७ पौष मॉस क कृ ण-प थम ितिथ! राि कालीन समय! म य राि ! घु प अँधेरा! आकाश म तार का झु ड! देह का र जमा देने वाली ठ ड और शीत लहर! इस बीच एक शमशान जीिवत है. "खंडा बाबा के चे रां" वो बोला. आते ही बोला. भूरे ने वो थैला रख िलया! मने शमा जी से तारक नाथ क मु लाक़ात करवाई. "आदेश!" मने कहा "आदेश" ये एक संबोधन है तं के एक ख़ास तबके का! बोल के उसने भूरे को एक थैला िदया. वािपस आया और शमा जी के साथ वो िगलास एक ही सांस म मं पढ़ते हए गटक गया! शमा जी ने भी दो घूँट म वो िगलास खाली कर िदया. उसमे से दो आदमी उतरे . करीब डे ढ़ वष पहले उस लड़के का िकसी अनाथालय म पली लड़क से ेम-स ब ध हआ. "ये ह अजय शमा. ये जो िवजय ह इनका एक लड़का है आशीष. " गलती माफ़ करी गु जी" और िफर िगलास म पानी बढ़ा िदया! "ये कौन लोग ह भूरे?" मने उसको इशारा करके बोला. उसक आँख क पलक अव य ही भूरी थ ! वो दौड़ के हमारे पास आया और कुिटया क तरफ ले गया! मने और शमा जी ने कुिटया म वेश िकया! भूरा अ दर आके २ टील के िगलास लाया और एक लोटा पानी. जब एक रात मै पहंचा एक शमशान. तीनो इक े हो के बात करने लगे तो मै वािपस कुिटया म चला गया. मने िगलास उठाया और बाहर जाके िचता पर कुछ छ टे डाले . उसक उ होगी कोई ५५ साल के आस-पास. उसने ये कहते हए हमारे खाली िगलास िफर से भर िदए और थोडा भोजन और डाल िदया. मै कुिटया म ही रहा.

उसको भी मरा समझ के छोड़ िदया" "तो अब या हआ?" मने कहा. काम पर भी नह जाता था. न जाने वो लड़क िकसका पाप हो. "जी नह . इस से पहले कोई बोलता मने अगला सवाल दागा. अब िवजय ने कहना शु िकया.. ले िकन पूरे प रवार ने एक अनाथालय म पली लड़क से याह करने को साफ़ मन कर िदया. से शादी करने िक बात कही. कहते जाइए" मने भूरे को एक और िगलास बनाने के िलए कहा. एक तो मेरा मन वैसे ही इन लोग से ख ा हो गया था िक. और या मानिसकता थी इन 'स य खानदान' के लोग क !! "आप सु नाइये. हमने तो उसको मरा समझ ही िलया था." महाराज. लड़का भी िजद पकड़ के बैठा था.. "वाह िवजय जी वाह!" मै हँसते हए बोला. "ये आशीष कौन से नंबर पर है?" मने कहा. "उ या होगी उसक ?" मने पूछा "यही कोई २५-२६" उसने बताया. तु मने कोई खोज-खबर िनकली उसक ? मने पूछा.... "इनको लड़का वािपस चािहए या? मने बोला. ये सोच के हमने मन कर िदया" वो बोला. एक अनाथालय पे पली िकसी लडक से शादी नह करनी. उसका नाम ही िनकाल िदया था प रवार से" वो बोला.. िकतनी घिटया तर क बात कही थी. उसने अपनी शादी का माण-प अपने घर भे ज िदया. डे ढ़ साल हो गया. इनके तो होश उड़ गए! इ होने भी प रवार िक सहमित के अनु सार." मने उनक बात काटी और बोला. माँ-बाप ने काफ बार द जाया. ले िकन वो नह माना. मेघना" "हाँ देखी थी.. "आप पूरी बात सु न ल पहले" अबके िवजय ने कहा. " या वो लड़क दूसरी लड़िकय से अलग थी? चार हाथ-पाँव थे उसके? या बीस-बीस उँ गिलयाँ थ उसके? या उसक आँख ४ थ ? अब दा अपना असर िदखाने लगी थी मु झ पर! "नह महाराज! हम खानदानी लोग ह. 2 . बु झाया. हमने उसको बेदखल कर िदया था.. "जी बीच का है" वो बोला. खानदान िक नाक कटती है इसम.. उसने िगलास बनाया और मने गटक िलया. उसने अपने माँ-बाप से उस लड़क . अपनी मन-मानी करता था... हमको ज़ ररत नह थी. आशीष उसको घर लाया था" वो बोला. या नाम है उसका??? हाँ.. एक िदन वो घर छोड़ के चला गया.. उं च--न च समझाई.ये ेम-स ब ध आगे बढ़ता गया. िजसका िक नाम मेघना था. " या आपने वो लड़क देखी थी. "आपके और िकतने ब चे ह?" "जी दो लड़के और ह" वो बोला. "एक बात बताओ. खानदान का वा ता िदया.

आँख बंद हो गय . "आप भी बोिलए" मने कहा. उ हने चाय के िलए पूछा तो मने मन कर िदया औउर कहा क बाद म िपयगे ."ओ तारक नाथ. सु िनए" अब अजय ने कहा. "तु मको वो लड़क कहाँ िदखी थी?' अजय ने बताया. भूरे के हाथ म रखा िगलास िलया और गटक िलया! शमा जी को बु लाया और कहा "गाडी टाट करो हम यहाँ से िनकल रहे ह!" शमा जी ने गाडी टाट क और हम वहाँ से िनकल पड़े. तारक नाथ भी हमको वही ँ िमला. उसक प नी को. और अजय-िवजय क पि नयाँ थ और २ नौकर भी थे. िवजय. "कब से? कब से बताया आपने ?" "जी २ महीन से" िवजय बोला अब. पता मेरठ का ही था. मै इनसे इनके घर पर ही िमलूँगा" "अव य महाराज अव य!" तारक नाथ ने कहा मै वहां से खड़ा हआ. अजय और िवजय ने अपने लड़के अपने यवसाियक थान पर भे ज िदए थे. मु झे झटका सा लगा. घर म सब उलट-पलट हो रहा है. 3 . वो मेघना ही थी?" "हाँ जी. मने पहले अजय से पूछा. उसने मु झे पता नोट करवाया. पहले मेरे प नी को िदखी. घर म अजय . हम बहत डरे हए ह.े िफर िवजय के बड़े बेटे को. न अजय से कोई बात कही और न िवजय से. हद से हद ६० िकलोमीटर. फ़ोन तो उसका पहले भी आया था ले िकन मेरे मन म ऐसे अद् ि य का काम करने क इ छा ही नह हो रही थी. हम उनके घर पहँच गए थे. दो िदन के बाद मेरे पास तारक नाथ का फ़ोन आया. "महाराज अब से कोई २ महीने से वो लड़क मेघना मेरे घर म िदखाई पड़ती है. "तो िफर िकस िलए बु लाया है मु झ?े " मु झे गु सा आया.. प का यक न है" उसने कहा. "नह महाराज नह " तारक नाथ बोला. "जी काले रं ग का गाउन सा था वो" "प का यक न है. घर काफ बड़ा था और िकसी चीज़ क कमी नह थी ऐसा लग रहा था. मै डर गया. िफर मु झ. जब दु बारा देखा तो वहाँ कोई नह था" "वो या पहने थी?" मने पूछा. मने कहा. "मै एक िदन अपने द तर से आके अपने बाथ म के बाहर के वाश-बेिसन म मु ंह धो रहा था. तो मने वो लड़क वहाँ जहां वो टेबल राखी है. इसीिलए हम आपसे िमलने आये ह" अजय ने कहा. "सु न तारक नाथ इनका अत-पता ले ले मु झे बता देना. मने तारक नाथ से कहा. मने सभी को एक कमरे म बु लाया. ले िकन मने िफर भी सोचा क चला जाए देखा जाए क आिखर माजरा है या! वो लोग मेरठ म ही रहते थे. मु झे या ये बकवास सु नवाने के िलए यहाँ बु लवाया है तून?े मने गु से से बोला. अजय क दो पु ि याँ. मेरठ िद ली से कोई अिधक दूर नह है . वहाँ देखी थी. मने भूरे से एक िगलास और माँगा! "महाराज.

आशीष को िफर कंपनी के काम से बाहर जाना पड़ा.. मै वहाँ नह गया" सभी को वो अलगअलग कपड़ म िदखी थी. पु िलस आशीष क कंपनी के पते परपहंची.कहानी जहाँ से शु 4 . िफर उनके एक नौकर ने कहा. "पीले रं ग का गाउन था वो" उसने बताया.. जब वो अपने काम से वािपस आ रहा था. िजस शाम आशीष का ए सीडट हआ. एक कमरा िकराए पे िलया.. जब मेघना ८ महीने क गभवती थी. न ही पित का और न संतान का! अब रही उसक संतान. मने कहािक ठीक है मै आज रात को इस गु थी को सु झाऊंगा..उस बेचारी को िकसी का सु ख नह िमला. पगार भी ठीक थी. व त रात का था. िफर ऐसे ही सभी से पूछा... इसीिलए मने एक खबीस को हािज़र िकया था. मु झे भी मामला गंभीर लगने लगा था अब. कह कोई अनहोनी न हो गयी हो? मै रात म अलख म बैठा. न घर पे कभी कोई ख़त भे जा न कोई और खबर. २ लोग क मौत हई. उसी शाम मेघना को दद उठा. िफर ऊपर देखा तो कोई नह था" वो डर के बोली.. वो एक लड़क थी. तब वो सामने के दरवाज़े के पास बैठ के रो रही थी. उसी रात िडलीवरी के समय मेघना क मौत हो गयी.. और वहाँ से वािपस हो गए हम. खबीस ने अपना भोग िलया और चल पड़ा. एक महीने बाद उसक कंपनी ने उसको सूरत भे ज िदया.वािभमानी यि था. खबीस ने जो बताया वो ये था--आशीष ने अपनी मज से शादी कर ली थी.. मु झे लगा क कही कोई गड़बड़ है. वो बाद आ म.. ले िकन का र दा जाए और वािपस आ जाए. उसने ऐसा सोच िलया था. िजंदा इंसान क खबर ला कर दे देता है. " या पहने थी वो?" मने पूछा. ऐसा ही मेघना के साथ हआ. मै दु बारा भे जं ू वो जाए तो िफर बैरंग वािपस आ जाए. मने मु ड कर देखा तो मेघना मेरे पीछे कड़ी थी. मै तो डर गया था. कंपनी म उसने अपना पता फज िलखवाया और वो आगरे का रहने वाला है ये बताया. एक घंटे के बाद खबीस आया और जो उसने बताया वो बेहद ददनाक दा तान थी. मने भी उसको देखा था रात को. मेरी चीख िनकल गयी. "मने देखा.. " या पहने हए थी वो?" मने िफर पोछा.जब मै नीचे आई तो लगा कोई और भी मेरे पीछे सीिढयां उतर रहा है. पढ़ा-िलखा तो था ही इसीिलए उसे नौकरी िमल गयी.. गु जरात म उसका एक दो त सािदक रह रहा था. न माँ का न बाप का. "गु जी. "जी साडी म थी वो नीले रं ग क " उसने जवाब िदया.. कंपनी ने उसका पता आगरे वाला उनको दे िदया. अजय क प नी बोली. पहचान न हो सक आिखर पु िलस ने अंितम-सं कार करा िदया."जी मने ... ले िकन आगरे का पता फज था. मै ऊपर छत पर थी. "िफर िकसने देखा?" मने पूछा... ले िकन िकसी ह क नह .. अब वो आिपस कभी नह जाएगा. जो क अब सूरत म एक अनाथालय म पल रही थी. मकानमालकन ने उसे एक अ पताल म भत कराया. सािदक ने ही उसको ये सलाह दी थी."उसके बाद िकसने देखा?" मने सभी को सरसरी नज़र से देखा. तो सूरत से कोई ३० िकलोमीटर पहले उसक जीप का ए सीडट हो गया. मै नीचे भागी. का रं द िकये -कराये क खबर ला देता है. उसमे से एक आशीष भी था. वो अपनी प नी को ले कर वहाँ से अहमदाबाद गु जरात आ गया था. मने का रं दे को वािपस िकया और एक खबीस को हािज़र िकया. उसने मु झे मेरे कंधे पर हाथ भी मारा था!" अब अजय क एक लड़क बोली. थोड़े िदन के बाद उसक बीवी मेघना गभवती हो गयी थी. का र दा हािज़र िकया.

िशना त हई.मेघना! 5 . मेरे हाथ क हथेिलय और पांव के तलव म सद के उस मौसम म भी पसीने आ गए...... कानूनी कायवाही हई. वो लोग डे ढ़ घंटे म आ गए. िफर अ पताल... अजय-िवजय क ची कार फू ट पड़ी. िशना त क गयी.हई वही ँ कहानी का अंत हआ. िशना त हई.. डी... शमा जी ने अ र : उनको स चाई बता दी. शमा जी और मै वहाँ के िलए रवाना हए. शमा जी ने फ़ौरन फ़ोन करके अजय-िवजय को अपने यहाँ बु लवा भे जा. ये मने शमा जी को कहा. कंपनी ने िहसाब-िकताब िकया और उस ब ची के नाम एक लाख का एक ऍफ़. इस बीच िफर कंपनी गए . पहले थाने गए वो लोग. िफर उस ब ची को वो लोग वािपस उसके िपता के घर मेरठ ले आये ! िवजय ने ायि त करने के िलए उस ब ची का नाम रखा. हम ४ िदन तक वही ँ के. वहाँ से कागज़ िलए और िफर अनाथालय. बना के िदया..

टांग से सही चला नह गया! ले िकन वेश-भूषा ऐसी िक िजसक दु कान पर खड़ा हो जाए तो डर के मारे अगर दस देने वाला हो तो ५० देके हाथ जोड़ ले ! उसने एक और बाबा िजले दार िक राह पकड़ी. "देखा आपने ! ये है साले कलंक तं के" नाचते नाचते दो बालाएं मेरी और शमा जी िक ओर आय . मु झे काम बता. वो दज म मेरे से कह नीचे था. वो वािपस मु ड़ और बाबा चंड नाथ िक गोदी म बैठ गय ! चंड नाथ ने अपना िचमटा खडखड़ाया! बोला. "ओ नाहर. नाहर भी आया. नह तो मै चला अभी" मने उठते हए कहा. आसन लगे हए थे. दूसरा वाला उसका चे ला था. वो एक 'असफल तांि क' था. उसको लाल बाबा ने इतना मारा था िक १ साल तक मु ंह से ज़बान नह िनकली. चोर उच के! खाने के िलए ' साद' जो बाबा चंड नाथ अपने 'भ ' को डरा धमका के मंगवा ले ता थावो यही खाते थे! खाने -कमाने िक या िचंता! चंड नाथ के चे ले जो ठहरे ! चंड नाथ को चे ले िमले !! मै चंड नाथ को काफ पहले से जानता था. इधर सु न!" नाहर िक त ा टू टी. उसने नम कार िकया! अभी मै नाहर से कुछ बोलने ही वाला था िक वहाँ ४ 'देव-बालाएं ' आ गय ! िम ो! आप इन 'देव-बालाओं' का अथ वयं ही समझ ले ना! ये सभी साि वयां थी! साि वयां कम 'िचलम' अिधक थ ! नाहर मु झे अ दर कमरे म ले गया. "अलख िनरं जन!" मने नाहर को आवाज़ दी. 1 . ५ दज बाद भाग आया था और िफर अपने आपको नाहर बाबा बु लवाने लगा था. चे ला बन गया उसका! बाबा मारा तो अपनी दबंगई से डे रे पे क ज़ा कर िलया! लोग आने लगे और चंड नाथ िक दु कानदारी चल िनकली! मु झे यहाँ पर पु र से आये हए दोन तांि क म से एक बाबा नाहर ने बु लाया था. भयावह रात! तपती भूिम और तपता माहौल! रात का १ बजे का समय! बाबा चंड नाथ का डे रा! शमशानपु जारी का उ सव! २ धान तांि क पु र से आये थे! चंड नाथ नशे म धु ! उसके चे ले गा रहे थे कूद रहे थे! ले िकन थे सब समाज से बिह कृ त लोग! अपराधी. पहले चंड नाथ िक दावत तो खा लो!"वो बोला! "दावत खा तू. शंकर बाबा! प-रं ग ऐसा िक िबलकुल अघो रय जैसा! अब साधारण आदमी या जाने इनके प-रं ग! मै वहाँ पहंचा! शंकर मेरे पास आया और आकर मेरे पाँव पड़े . "काम बता िकसिलए बु लाया है तूने?" 'अभी बताऊंगा गु देव. मने वही ँ से अपनी लात उठा के उनको िदखाई. "जी महाराज!" मने कहा. मै और शमा जी एक त त पर बैठ गए! चंड नाथ िक िनगाह मु झ पर पड़ी! उठ कर आया. आया बोला.वष २००८ आगरे क घटना काली याह. 'आओ महाराज आओ. मै बताता हँ" उसने मेरी बाजू पकड़ी और बाहर ले गया. बाबा नाहर को मै इलाहबाद से जानता था. गले िमला और बोला. ओ कमीन. "अलख िनरं जन!!" मने चंड नाथ को अपने से दूर िकया! और िम ो िफर शु हआ साि वय का नंगा नाच! न न प म नाच! सारे चे ले झूम उठे ! कोई दा डाले उनपर तो कोई उठ के उनके अंग को छुए! मने एक िनगाह नाहर और शंकर पर डाली! दोन उस नाच म म न थे! कमीने कह के! मने शमा जी को कहा.

. सु बह उ ह ने ना ता-पानी करवाया. शमा जी के कहे अनु सार. मोटा काम! एक लाला का काम" "साले और वो काम तेरे से नह हआ तो तूने मु झे बु ला िलया?" मने उसको िझड़क के कहा. बड़े अनमने मन से वो वहां से चला गया. और िमलने का सु बह व त मु क़रर कर िलया. हमने भी फ़ोन वगैरह िकये यक न कोई फायदा नह हआ.. वो लाला वहाँ नाहर को ले के आ गया.. मै और शमा जी उस रात अपने एक प रिचत के यहाँ ताजगंज म ठहरा. और नाहर को नीचे सड़क पर भे ज िदया. जैसे जीवन और मौत के बीच म झूल रहा हो! इतने मै शमा जी ने लाला को अपना और मेरा प रचय िदया. वहाँ से एक पु ष िक आवाज़ आई.. ले िकन शादी के कोई ४ महीनो के बाद दोन म खट-पट शु हो गयी. इस से पहले क लाला कुछ बोलता मने ही आपके बेटे का नाम या है?" "च दन" लाला बोला. मेरे गु देव आ गए ह! अब काम हो जाएगा" और ये कह के वो फ़ोन उसने मु झे िदया और मने शमा जी को. लाला ने कहना शु िकया. अब मै वहाँ िबना देर िकये शमा जी के साथ ठहरना नह चाहता था. उसने मु झे एक नंबर िदया और कहा िक ज़रा इस पर कॉल क िजये. मु झे नाहर का आना अ छा नह लगा. " या काम है? यूँ िकसी को लूट रहे हो तु म लोग?" मै बोला. कले श बढ़ता गया और बात बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ी क वो लड़क ७ महीने पहले यहाँ से अपने घर रायपु र चली गयी... "जी मेरा नाम लाला रोहताश चाँद है. हमको पसंद आया.. "और च दन क बीवी का?" मने पूछा.. नाहर बोला. मेरे साथ मेरी माता जी और मेरे दो छोटे भाई भी रहते ह. वो इसिलए आया था क कह उसक और चंड नाथ क कह पोल न खु ल जाए! लाला को मने अ दर बु लाया. कहे अनु सार लाला को शमा जी ने उस बार का पता बता िदया और उसको एक घंटे के बाद यहाँ आने को कह िदया. मने लाला को गौर से देखा. मै शमा जी के साथ अपने एक प रिचत के घर िक ओर िनकल पड़ा. उनका यवसाय बिढ़या था. ये मेरे ख़ास प रिचत ह. क अगर वो अपना अलग मकान और अलग यवसाय कर ले तो बात बन सकती है. मै धीरे धीरे करते मिदरा-आनंद ले ने लगा! मिदरा के सु र म काफ ताक़त वयं ही जागृत हो जाती ह! खैर.. 2 िकया. प रवार सही था. करीब २ साल पहले मेरे बेटे ने छ ीसगढ़ क एक लड़क से याह िकया था." लाला.. हमारा यहाँ गह और चावल का यवसाय है. मने मिदरा-भोग िकया! अपने एक ेत को भी िपलाई. आस-पास हाथ जोड़े घूम रहा था! शमा जी ने नह ली. ले िकन मने उसको मना कर िदया. हम नहाए-धोये और खाना खा के वहां से चल पड़े .. ५० लाख िक बात है गु देव!" उसने कहा. "लाला जी. मने उनको अपने आने का योजन बता िदया था. "गु देव मेरे पास एक काम है.बोला.... एक बार उस लड़क का फ़ोन आया मेरे बेटे के पास. मै बात क ँ गा. ले िकन मेरे बेटे ने ये ताव ठु करा िदया" ये कहते हए लाला ने पानी उठाया और मने अपना जाम! लाला ने अपना िगलास ख़तम िकया और मने अपना. शमा जी ने नंबर िमला िदया. लाला परे शान था काफ . शमा जी ने फ़ोन पे बात िक. "बहत कोिशश िक ले िकन काम चढ़ा नह . उसने िजद क िक वो वही ँ बाहर खड़ा हो जाएगा .. संयु प रवार है हमारा. हम वहाँ एक बार म ठहरे ये भी मेरे जानने वाल क ही बार है! वो हमको सबसे ऊपर बने एक कमरे म ले गए! थोड़ी देर बाद उ सने मिदरा और भोजन भे ज िदया! मने शमा जी से कहा क रात को जो नंबर आपने िलए था और आपक बात हई थी ज़रा उस पर कॉल कर लीिजये ! उ ह ने कॉल क वहां से लाला ने ही फ़ोन उठाया.. उसका मन नह था जाने का.

अब अगर आप १५ िदन के अ दर लड़क को पे श नह करते ह तो मजबूरन हमे आपके लड़के को पूछताछ के िलए िगर तार करना होगा. "जी एक लाख माँगा था. "िकतने िदन हए िदए हए और चंड नाथ को काम पर लगे हए?" मने कहा.. "तो अब या चाहते ह आप?" मने कहा. नामज़द आप भी ह. "लाला जी. उसी िदन िफर फ़ोन आया. और आपसे जब बात हई तो दूसरे िदन उ ह ने आपके िखलाफ रपोट दज करा दी है . मै अब आपसे आपके घर पे िमलूँगा" "मै ती ा क ँ गा गु जी" कह के नम कार िकया और लाला बाहर चला गया. सो दे िदया" लाला ने कहा. मै वािपस ताजगंज आया. उसने पूछा िक या छाया वहाँ पहँच गयी है? हमने मना कर िदया. " या बेटे ने कभी बताया क अनबन यूँ होती थी दोन के बीच?" मने कहा. वो मेरे कोई चे ले नह ह. अभी कोई १० िदन पहले हमारे पास छ ीसगढ़ पु िलस आई और हमसे पूछने लगी क या छाया यहाँ आई थी या? हमने मना िकया. आपको मौका दे रहे ह हम और ऐसा कह के वो चले गए. "और इसीिलए आप उस चंड नाथ के पास गए. एक बोतल और रखी और एक ढक हई ले ट. बेटा ये नह मानता था. बेटा बोला जो चाहे कर लो और कह के फ़ोन काट िदया. मालु म िकया ले िकन पता नह चल सका" लाला ने कहा. "जी ५ िदन हो गए ह" वो बोला. "जब छाया घर से गयी थी तो उसने वहाँ से एक-आद बार ही फ़ोन िकया था. "वही मै आपको बता रहा था" वो बोला. इसी बात पर कले श होता था" वो बोला."छाया" उसने बताया. और उसके बाद हमारी बात भी बंद हो गय थ .. "कुछ पता चला अभी तक? मने पूछा. रात ठहरा और सु बह लाला के घर के िलए शमा जी ने गाडी टाट कर दी. उनमे से एक नाहर जो आपके साथ आया था मेरे िकसी प रिचत बंध ू का साथी है. "छाया कहती थी क यवसाय अलग कर लो अपने िपता जी से और अलग काम करो. और हम पु िलस म इसक रपोट दज करायगे. "हाँ किहये " मने कहा. "ठीक है. उ ही के कहने पर मै यहाँ आया" मने कहा. यक न कोई २५-२६ िदन पहले छाया के बाप का फ़ोन आया था. वो कहने लगे िक हमने छाया को घायब कर िदया है. उसको पता िनकालने के िलए ५०लाख िक पे शकश क ! अभी तक िकतना िदया उनको? मने पूछा. "हँ" मने कहा. मने लाला से कहा. "जी उसने कहा िक वो अपने गु को बु ला रहे ह. इतना कहा और मेरे बार वाले प रिचत वहाँ आये . ले िकन पु िलस ने कहा िक वो घर से २७ िदन पहले घर से यहाँ के िलए िनकली थी. लाला ने हमको शाहगंज 3 . हमारे तो होश उड़ गए! हमने अपनी मातहत हर जगह ढू ँ ढा. तभी काम होगा" लाला बोला.

ये कमरा खाली था. हमेशा कहती थी क आप अपने माँ-बाप से अलग हो जाओ और अपना अलग काम करो" च दन ने कहा. "गु जी. उसके बाद भी ३-४ बार फ़ोन आया ले िकन मने फ़ोन उठाया नह " तो इस ण के बाद से उसका कोई अता-पता नह था. यादा अपे शानी हो तो तलाक ले लो. "हाँ. मने कहा. मै उस व त अपनी दु कान पे था. एक बोतल शराब और एक िकलो 'नॉन-वेज' चािहए. " या बात हई थी उस िदन तु हारी छाया से? मने पूछा उसने आस-पास देखा िफर अपने बाप को देखा. सारा सामान ले आये थे. "एक बात और िजस िदन वो रायपु र से चली थी उसने तु मको कॉल क थी? मने पूछा.थोडा पूछा-पाछा तो पता िमल गया. चाय-ना ता करवाया और घर के सभी सद य से िमलवाया. वो थोडा सकपकाया. वो अपने भाइय को भी यह सेटल करना चाहती थी. च दन सीधा-सादा सा लड़का था.का पता िदया था. "तु हारी और छाया क खटपट यूँ होती थी अ सर?" मने पूछा. तो उसने बताया क वो गाडी म बैठने वाली है. आप वही ँ सड़ो-मरो. तो आिखर गयी कहाँ? तब मने लाला से कहा िक अभी मु झे एक खाली कमरा. खबीस ने अपना भोग िलया और चल पड़ा पता ढू ँ ढने उसक ह 4 . वो आया और मेरे सामने बैठ गया. घर से दु कान और दु कान से घर. मै समझ गया िक छाया के साथ कोई हादसा हो गया है. "च दन. नह मंजरू था" च दन ने बोला. वो न तो घर वािपस गयी और न यहाँ पहंची. कारण था. वो अ सर अपने मैके के प म ही रहती थी. उसका मतलब था क उसके भाई मेरे साथ पाटनर बन जाएँ " च दन ने बोला. "अब बताओ?" लाला ने उस से कहा. "वो ऐसा यूँ कहती थी? कोई तो कारण होगा?" मने कहा. पीछा छोडो हमारा. "हाँ क थी" ये बात सु नकर लाला के चे हरे पे हवाइयां उड़ने लग . अब या करने आ रही हो? तु हारी िजद ख़तम हई या नह ?. अब मेरे पास खबीस को भे जने के अलावा कोई कोई चारा नह था. इतने म ही शमा जी वहाँ आ गए. मै सच ही कहँगा" च दन ने कहा. "ठीक है गु जी. "जी उसने जब मु झे फ़ोन िकया था. ये ही उसका टीन था. मै तु मसे जो भी पूछूंगा मु झे सच सच बताना. और कल तक पहँच जाये गी. अब काम बेहद मु ि कल था. ले िकन जब का र दा आधे घंटे बाद आया तो खाली हाथ. "च दन जब तक मै न कहँ. यहाँ मत आओ. लाला वही ँ खड़ा था. मने कहा. कोई इधर नह आना चािहए और हाँ मु झे एक फोटो छाया िक यहाँ ला के दे दो अभी " च दन ने कहा. मने कहा. मने उसके लड़के को बु लवाया. अगर नह तो कोई ज़ रत नह है आने क . मने ये कह के फ़ोन काट िदया. ठीक है? "जी गु जी. इसम शमा जी आपक मदद कर दगे. हम वही ँ चले गए. "और वो आपको मंजरू नह था?" मने कहा. और च दन मु झे एक कमरे म ले गया. लाला ने नम कार िकया और अ दर ले गया. "नह गु जी. शमा जी लाला को ले कर बाज़ार ले गए. और बोला. मने वहाँ तभी अपने का रं दे को हािज़र िकया. मै ऐसा िक कह दूंगा सभी को और फोटो मै अभी लाया" और िफर वो नीचे उतर गया.

मने लाला के कंधे पे हाथ रखा तो लाला क जान हलक म आ गयी! उसके मु ंह से आवाज़ गायब! मने कहा िक "डरो नह लाला!" "इसे पहचानती है? मने पूछा. मने पानी के छ टे मारे .का.. और कोई आधे घंटे बाद मै. मने उसको सारी बात बताई. उसका सर दूसरे क ै पर पड़ा और सामने से आती कोई गाडी उसको कुचलती हई चली गई. जीवन बेकार लगा. "लाला. " मै उठी और भागी िद ली क तरफ ले िकन मेरा रा ता 5 . लाला क गाडी से मु रेना क ओर रवाना हो गए! हम जब मु रेना पहंचे तो बा रश हो रही थी तेज़. मने नाहर को कहा क उसको 'आसन' म बैठना है. १२०० पये .. िमयां मोह मद से मु लाक़ात हई. मने पूछा. डबरा पहंचे. मने उसको आसन पर िबठाया.. छाया ने बताया िक जब वो रायपु र से चली थी तो िदन म उसक बात च दन से हई थी. िसफ एक बार. ये खबीस के िलए मंगवाई थी मने . उसके यहाँ गए तो पता चला. वो डबरा गया हआ है. एक घंटे के बाद नाहर वहाँ आया. थ जो तब गाडी के साथ अमृतसर पहँच चु क थ ! उसक लाश को वही ँ लावा रस घोिषत करके डाह सं कार कर िदया गया और पु िलस त तीश शु हो गयी. टी. हमने िमयां मोह मद का शु ि या अदा िकया! और हम लोग अब वािपस हो िलए आगरे क तरफ! जब हम आगरा आये तो मने आते ही लाला से कहा क वो फ़ौरन नाहर को बु लवाए. उसके अनु सार.. खबीस ने मु झे जो बताया वो और भी अजीब था! खबीस ने मु झे बताया िक छाया िक ह.. "कौन है तू?" "छाया" वो बोली. दो एक मालाएं . और मेरी ताक़त ने नाहर के अ दर छाया क ह वेश करा दी. च दन को साफ़ मना कर िदया अ दर आने से. उसमे एक साड़ी. िमयां मोह मद शरीफ िक म का इंसान था. और म से वो कमरा बांध िदया. वो बैग दरअसल सीट के नीचे रखा था. ले िकन उसने इस बार उसका फ़ोन नह उठाया. मिदरा शमा जी ने रा ते म ही ले ली थी.टी ने रे लवे पु िलस को ये बताया.. मने खबीस से और मालूमात िक उसने मु झे बताया और ये कह के खबीस ग़ायब हो गया! मने सारा वा य शमा जी को बताया और शमा जी ने लाला को. शमा जी. अब वो आलती-पालती मार के बैठ गया. मने लाला से कहा. ये घटना बेतल ू या घोडाड गरी टेशन के पास हई थी. इसी बीच उसके एक छोटे से बैग पर िकसी का यान नह गया. नाहर छटपटाया. सु बह न द खु ली. मने उसको अपनी ताक़त से उसको क़ैद िकया. २ कमरे िलए लाला नए. उसके पास मेरी बात मानने के अलावा कोई चारा नह था. मु रेना के िकसी िमयां मु ह मद के पास क़ैद है. "च दन'' उसने जवाब िदया. इतने म मने अपने ज़ री काम िनबटा िलए! उसी कमरे म एक साफ़ चादर िबछवाई. तब तक गाडी इटारसी आके क . ले िकन उसने उसी रात च दन को िफर एक बार फ़ोन िकया था. और सो गए. रात को खाना वगैरह खाया. लाला तो बेहोश होते होते बचा. मने शमा जी को इशारा िकया िक अब वो लाला को बाहर ले जाएँ ! िफर मु झे छाया ने ऐसी बात बताय िक मेरी कनपटी भी लाल हो गय . ये मेरे ससु र ह" वो बोली और गदन नीचे कर ली. अब हमको मु रेना जाना है. नाहर ने एक घंटे म आने को कह िदया. वो अपनी सीट से उठी. २ अंगिू ठयाँ . रात िघर गयी थी. नह तो गड़बड़ हो जाये गी! अब मने अपनी ताक़त को हािज़र िकया. जब तक याि य ने शोर मचाया. लाला और च दन. च दन िक डर के मारे हालत खराब थी. उसको ताव आया. उसने एक भयानक िनणय िलया. और तेज चली ेन से नीचे कूद गयी. उसने छाया क ह को आज़ाद िकया. नहाए-धोये चाय-पानी ले ने के बाद िमयां मोह मद के पास जाने को राजी हो गए..हमने गाडी घु माई अब डबरा क तरफ.. "तेरे पित का नाम या है?" मने पूछा. अब सु बह ही बाक काम हो सकता था. लाला ने एक काम-चलाऊ होटल ले िलया. "हाँ. छाया क ह को आज़ाद कराने " लाला क शमा जी ने िह मत बंधाई.

िकसी ने रोका और मु झे एक िम ी के घड़े म बंद कर िदया"
ये थी उसक कहानी!
मने सारी कहानी शमा जी को बतायी और शमा जी ने च दन और उसके बाप को! अब वो तो दोन ही रो िदए! "बचाओ गु
जी बचाओ, हमने तो सोचा था वो िजंदा है,ले िकन अब या होगा?"
मने उनको अवगत करा िदया था, अब मेरा काम ख़तम था, मेरा काम केवल छाया क आ मा को मु

करवाना था!

ले िकन लाला और च दन तो पांव पे पड़ गए थे, और िफर मने सोचा क इनक गलती भी नह है, लाला ने तो इसको नह
मारा और च दन ने भी उसको सीधे सीधे नह मारा, ले िकन मौत क वजह तो च दन का न फ़ोन उठाना था! मने लाला को
समझाया और कहा क च दन को ले जाके थाने म पे श कर दो, सारी कहानी बता दो, या हआ कैसे हआ? सब कुछ! और हाँ
इन साले नाहर और चंड नाथ को भगाओ यहाँ से, मने तब नाहर और चंड नाथ को संदेशा भे जा क लड़क नह िमली और
वो जेल जा रहे ह!
मै तब लाला और च दन से िवदा ले कर िद ली वािपस आ गया!
कोई १५ िदन के बाद मेरे पास एक फ़ोन आया, वो िकसी छ ीसगढ़ के िकसी पु िलस अिधकारी का फ़ोन था, वो िद ली आया
हआ था, उसने मु झसे िमलने क इ छा ज़ािहर क , म हाँ क और वो मेरे पास आ गया! आते ही उसने मु झे नम कार िकया,
बोला, "गु जी कोई माने या न माने, मने जब आगरे के लाला से ये सब सु ना तो मेरी बहत िज ासा हई आपसे िमलने क , मै
इसीिलए यहाँ आया"
मने पूछा, :च दन का या हआ?"
"च दन अभी जेल म है, पु िलस ने उसको शक के दायरे म रखते हए िगर तार िकया है, ले िकन उसका होगा कुछ नह ,
िनकल जाएगा!"
थोड़ी देर बात हई ं, और िफर वो मु झे रायपु र आमंि त कर गया!
एक महीने बाद च दन क जमानत हो गयी, वो मु झसे िमलने आये, और इसके ८ महीने के बाद, हाई-कोट म अज देकर
च दन ने सु नवाई क मांग क , केस चलता रहा और बाद म च दन सबूत के अभाव म बरी हो गया!

6

वष २००९, गािज़याबाद उ र देश क एक घटना
मिहना होगा वो कोई ये का, गम का कोहराम मचा था! पारा ४३-४४ के आस-पास था, मनु य तो या पशु-प ी, जानवर
भी इस भीषण गम से याकुल थे! मै शमा जी के साथ, लु ि बनी ने पाल से लौट रहा था, भारत क सीमा सोनौली पर पहँच
चु का था, पीछे ने पाल म भैरवाह चौक से एक जीप ले ली थी, उस िदन वहां बेहद स त चौकसी थी, ने पाल आम एक एक
वाहन क जांच कर रही थी, िकसी तरह मै २ घंटे बाद भारत सीमा म वेश कर चु का था, अब हम गोरखपु र के िलए रवाना
होने जा रहे थे, पहले थोडा पानी पीया, िफर गोरखपु र क बस म बैठ गए, ये दूरी वैसे तो ८०-८५ िकलोमीटर पड़ती है ले िकन
बस ने कते- काते ३ घंटे ले ही िलए थे, हम ४ बजे गोरखपु र पहंचे, और वहाँ हम दोन आराम करने के िलए अपने एक
जानकार के होटल पहँच गए, ये जानकार मु झे िद ली से ही जानते थे और गोरखपु र म अपना होटल चला रहे थे, हम वहाँ गए
तो वो बड़े खु श हए, िफर थोड़े गु सा भी, क एक तो आने से पहले सूिचत नह िकया, न तो िद ली से चलने से पहले और न
ने पाल से चलने से पहले ! उ ह ने आदर-स कार िकया! घर पर फ़ोन िकया क गु जी आये ह िद ली वाले, गरमा-गरम
खाना बनाओ और खु द चल पड़े मिदरा ले ने! थोड़ी देर म आये तो मिदरा क २ बोतल और साथ म कुछ िनरािमष-भोजन!
उ ह ने , इनका नाम मै आपको बता दूँ, इनका नाम है धरम िसंह, अपने छोटे भाई को बु लाया और कहा क मै अब गु जी के
यहाँ रहने तक य त रहँगा, तो वो ज़रा काम-धंधा संभाल ले , धरम सारा काम खु द ही कर रहे थे, उ म मु झसे काफ बड़े ह,
मु झे अजीब लगा तो बोले, "गु जी, छटे-छमाह तो र तेदार भी आ जाते ह ले िकन आप तो साल म भी एक बार नह आते, तो
मु झसे ये सेवा का अवसर न छीिनए!"
वो दौड़े -दौड़े गए, बरफ को २ े, काफ सारा सलाद और ३ िगलास ले आये , शमा जी के िलए सोडा भी ले आये ! आगे बढ़ कर
ऐ.सी और तेज़ िकया और लग गए जाम बनाने ! बोले ,
"गु जी, कैसे कहाँ से आ रहे हो आप?"
"ने पाल से, ने पाल गया था, पहले पशु पित नाथ गया था, वहाँ कुछ काम था, वो िनबटाया िफर िकसी के साथ लु ि बनी तक
आया, एक रात वही ँ रहा और िफर वािपस यहाँ आ गया, आपसे िमलने !" मने कहा
उ ह ने जाम बना िदए थे, एक मु झे थमाया, एक शमा जी को िदया और एक खु द ले िलया, बोले , "गु जी, बहत अ छा िकया,
मै िद ली आने ही वाला था आपके पास"
"िद ली? िकस काम से धरम? मै सवाल िकया!
वो बोले ,
"अब देखो गु जी, मने इ र से कहा क मै गु जी के पास जाऊँगा, और आप वयं यहाँ आ गए! गु जी मेरा एक छोटा भाई
है गािज़याबाद म, वो िद ली के पास वाला गािज़याबाद, मेरे भाई ने अभी कोई २ साल पहले अपने बड़े लड़के रोिहत का याह
िकया है, लड़क यह क रहने वाली है, गोरखपु र क ही, लड़क काफ अ छी है, रोिहत के कोई ४ महीने पहले एक संतान
हई, पु -संतान"
वो अभी कह ही रहे थे िक दरवाज़े पर द तक हई, उ ह ने जा के खोला, तो बाहर उनके सबसे छोटे भाई खड़े थे, वो सीधे
अ दर आये और हमारे चरण- पश िकया, धरम ने उस से िमलवाया, उसका नाम महे श था, आदमी बिढ़या और धम-भी था,
धरम जी उसको बाहर गैलरी म ले गए और कुछ बात िक िफर वािपस कमरे म आ गए!..
बात बात म धरम ने और भी कई बात बताय , एक बोतल ख़तम हो गयी थी, धरम ने घर फ़ोन िकया, खाना तैयार हो चु का
था, धरम बोले , " गु जी मै अभी आया १५ िमनट तक, अगर कोई और ज़ रत हो तो नीचे के िलए बैल दबा देना, छोटा भाई
वयं आ जाएगा!" ये कह के वो उठे और कमरे से बाहर चले गए,
1

"शमा जी, ये धरम बिढ़या आदमी है, आपको कैसा लगा ये आदमी?" मने पूछा,
"गु जी हम जब से आये ह तबसे हमारे ही साथ है, आदमी म सेवा है, कुल िमला के स जन पु ष है" शमा जी बोले ,
"हाँ शमा जी, सही कहा आपने " ये कह के मै िब तर पर िसरहाने क तरफ दो तिकये लगा के ले ट गया,
शमा जी भी लघु-शंका हे तु चले गए,
थोड़ी देर बाद धरम आये , उनके साथ उनका लड़का भी था, वो सारा सामान ले आये थे भोजन का, भोजन लगाया और हम
खाना खाने लगे, साथ क साथ बोतल भी खाली करते गए! जो बात मु झे उ ह ने िपछली रात बताय थ वो मै अगले भाग म
आपको बताऊंगा!
भोजन के बाद, हमने सोने के िलए अपने अपने िब तर लगाए, धरम सु बह आने के िलए कह गए थे, करीब १२ बजे हम सो
गए, सु बह उठे , िन य कम से फा रग हए तो धरम चाय ना ता ले आये थे, हमने खाया और मने कहा, ''अ छा धरम जी, हम
अब दोपहर म थान करगे"
"ठीक है ले िकन खाना खाने के बाद ही जाने दूंगा आपको! आप आते ही कहाँ हो! अब आये हो तो ठहर के जाते, हमे भी सेवा
का अवसर िमलता"
वो बोले ,
मने कहा क " ऐसी बात नह है धरम जी, हम यहाँ आते रहते है, अब जब भी आयगे तो आपको सूिचत कर दगे पहले से ही!"
"ठीक है गु जी, और हाँ गु जी मै भी ३-४ िदन म िदल आऊंगा, भाई के पास जाना है, तो िमलूँगा आपसे"
"ठीक है, आप आ जाइए वहाँ" मने कहा,
"ठीक है अब आपको मै खाना खाए बगैर तो जाने नह दूंगा, चाहे आप कुछ भी कह!" वो बोले ,
"चलो ऐसा ही सही" मने कहा,
हमने दोपहर म खाना खाया और उनसे िवदा ली, धरम ने फ़ौरन ही ेन के िटकेट करवा िदए, सेिटंग करके सीट भी आरि त
करवा द ! हम गोरखधाम ए स ेस से िद ली के िलए रवाना हो गए!
मु झे धरम ने बताया था िक उसके छोटे भाई के लड़के रोिहत क एक बिहन है, एक साल छोटी, नाम है रिवता, रिवता क शादी
के िलए वो लोग र ता देखने के िलए भागे िफर रहे थे, जब रोिहत का बेटा हआ तबसे रिवता म बड़ा बदलाव था, वो रोिहत के
बेटे के रोने को बदा त नह करती थी, और इसी बात पर उसक अपनी भाभी से अनबन हो जाया करती थी, अब इतना बु रा
हाल है क न द-भाभी एक दूसरे से बात भी नह करते , रोिहत क बीवी अपना ब चा वहाँ कभी अकेला नह छोडती, उसे डर
लगा रहता है क कही िकसी रोज़ रिवता उसके ब चे को कोई नु सान न पहंचा दे, अब कले श इतना बढ़ गया है क रिवता
अपने मामा के यहाँ चली गयी है और २ महीन से वो वही ँ है,इस कले श से घर म काफ कलह होती है, रोिहत क माँ भी रिवता
का प ले ती है और रोिहत क बीवी को पसंद नह करती, इन सभी कले श से तंग आ कर रोिहत अपने घर से अलग रह रहा
है, ये या सम या हो सकती है? मु झसे धरम ने इस सम या को ख़तम करवाने के िलए ही िमलने को कहा था, अब कले श
का कारण उनका अपना पा रवा रक मामला था, इस से उनको वयं िनबटना था, मेरा उस म या काम! खैर, ऐसा मने नह
कहा था और धरम को कह िदया था क कोई बात नह सम या का िनदान हो जाएगा!
हम िद ली पहंचे कोई सु बह ७ बजे, िफर अपने थान पर, उसी िदन एक काय म बन गया जयपु र जाने का, अगले िदन
2

जयपु र चले गए, ३ िदन वहाँ रहे , िफर वािपस आ गए!
एक िदन धरम का फ़ोन आया क वो गािज़याबाद आ गया है और कल मु लाक़ात करे गा, मने उसको कल िमलने का तय कर
िदया!
अगले िदन धरम अपने छोटे भाई के साथ आया, मु लाक़ात हई, धरम ने बताया क उसके छोटे भाई के यहाँ कले श और बढ़
गया है, रिवता वापस आ गयी है,बहत गु से म है,
मने पूछा, "रिवता कब आई?"
"जी आज सु बह" धरम बोले ,
"आज तो आँख चढ़ी हई ह इसक , एक दम लाल, ऐसे िच ला रही है क जैसे कोई पागल औरत िच लाती है" धरम के भाई ने
कहा,
" या कह रही है" मने पूछा,
"कुछ नह कह रही, एक श द भी नह , दरवाज़ा बंद कर रखा है, बस अ दर से िच ला रही है" छोटा भाई बोला,
"कोई बात नह , आप ये पानी ले जाओ, उसके दरवाज़े पर डाल दो, ठीक हो जाये गी" मने कहा,
मने उनको अिभमंि त पानी िदया और वो लोग चले गए,
अगले िदन धरम का फ़ोन आया, घबराया हआ था, बोला, "गु जी, गु जी बचाओ, बचाओ गु जी!"
" या हआ धरम? मने पूछा
"मै आ रहा हँ आपके पास गु जी, मु झे वही ँ िमलना आप, कह नह जाना, बचा लो गु जी" वो तेज़ िच लाया और फ़ोन काट
िदया.......
कोई पौने घंटे के बाद धरम वहां आये , बद-हवास और बोिझल, मने कहा, " या बात है धरम साहब? या सम या है? इतने
घबराए हए यूँ हो आप?" धरम ने एक ल बी सांस ली और कहना शु िकया," गु जी, जैसा क मने आपको बताया था क
वो लड़क रिवअता अपनी भाभी और उसके ब चे से तालमेल नह िबठा पायी, वो गु से म अपने मामा के यहाँ रहने चली गयी
थी, उसक माँ भी रिवता का ही साथ देती है, कले श बाधा तो वो लड़का रोिहत अलग रहने लगा, यूंिक रोिहत क बीवी को
डर था यूंिक उसको लगता था क कह रिवता उसके ब चे को नु सान न पहंचा दे, इस म बेचारा वो लड़का िपस रहा था,
इसीिलए वो पड़ोस म ही एक लैट ले के रहने लगा, अभी जब से रिवता वािपस आई है तबसे तो उसने धमाल मचा रखा है,
पागल क तरह से कभी हंसती है, कभी रोती है, अंट-शंट के नाम ले ती है, हमने सोचा क शायद तिबयत खराब है उसक
भाई ने डॉ टर बु लवाया, ले िकन रिवता ने डॉ टर को ही डरा िदया!"
मने कहा "कैसे? "
"रिवता ने अपना कमरा बंद कर रखा था, और जब डॉ टर को बु लवाया गया तो डॉ टर ने ही उसका दरवाज़ा खटखटाया,
तो अ दर से रिवता बोली, " अबे ओ दीप, जाके अपनी पागल बेटी का इलाज कर, मेरा इलाज करने आया है? आज तेरी बीवी
ने हा भी आने वाली है अपने मैके रामपु र से, उसका ले ने जा, इस से पहले क मै उसको वािपस भे ज दूँ!"
"हमे नह समझ आया कुछ भी" धरम ने कहा,
3

बड़ी हैरत वाली बात थी!
"डॉ टर ने या िकया? कुछ कहा? मने पूछा,
"डॉ टर तो ये सु नते ही भाग गया, यूंिक डॉ टर के नाम से वो प रिचत हो ये तो संभव है, ले िकन डॉ टर क बीवी का नाम,
मैके क जगह, वो वािपस आ रही है, बेटी मानिसक प से असंतु िलत है, ये बात तो िसफ डॉ टर ही जानता था! हम तो डर
गए ह गु जी!" उसने हाथ जोड़ कर बोला,
"डरो मत, मु झे ये बताओ क रिवता कहाँ गयी थी? तु मने बताया था क वो अपने मामा के पास गयी थी, मु झे बताओ उसका ये
किथत मामा कहाँ रहता है? मने कहा,
"जी िद ली म कह मंगोल पु री म रहता है, मामा क लड़क पूजा से रिवता क अ छी सांठ-गाँठ है" उसने बताया,
"अ छा, और ये रिवता वहाँ िकतने िदन रही? मने ये भी पूछा,
"यही कोई डे ढ़ दो मने तक" उसने बताया,
"एक बात और बताओ, या आपने िकसी ओझा, भगत वगैरह को बु लाया?"
"जी ओझा तो नह हाँ, वही ँ एक भगत है वो बाला जी का दरबार लगाता है, उसके पास हम लोग गए तो वो आ गया, उसने भी
कोिशश क क रिवता दरवाज़ा खोल दे, ले िकन रिवता ने उसको ग दी-ग दी गािलयाँ द और भगत वहाँ से जाते-जाते ये
कह गया िक इसको मेहंदीपु र ले जाओ, वही ँ इसका इलाज होगा"
"ठीक है, चिलए मै देकता हँ िक या िकया जा सकता है, आप ज़रा आराम से बैिठये " मने धरम को वहाँ िबठाया,
थोड़ी देर म धरम का फ़ोन बजा, धरम ने उठाया तो वहां से उठा और थोडा आगे गया, और हैरत म बोला, " या?
उसने फ़ोन बंद िकया और मेरे पास आया, बोला "गु जी. गु जी रोिहत के ब चे िक तिबयत खराब हो गयी है, सांस ले ने म
तकलीफ है, आप चिलए अब"
मने शमा जी िक तरफ देखा तो शमा जी ने इशारा िकया िक चलते ह, शमा जी ने अपनी गाडी िक चािबयाँ उठाय और हम
लोग उसमे बैठ के गािज़याबाद के िलए रवाना हो गए..
जब हम लोग गािज़याबाद पहंचे तो वहाँ अ छा-ख़ासा जलसा सा लगा था, थोड़े िज ासु और बाक तमाशबीन लोग वहाँ खड़े
थे, वहाँ हमारे पहँचते ही, धरम के छोटे भाई आये और सारी ि थित से अवगत करवाया, मने रोिहत के ब चे के बारे म पूछा,
पता चला रोिहत ने ब चे को एक निसग-होम म दािखल करवा िदया है, मै अ दर गया, मने रिवता के दरवाज़े पर
खटखटाया, कोई जवाब नह आया, मने िफर से खटखटाया, िफर कोई जवाब नह ! मने कहा, "रिवता अगर तूने दरवाज़ा
नह खोला तो ये दरवाज़ा मै तु डवा दूंगा"
"भाग जा, भाग जा यहाँ से!" अ दर से आवाज आई
"भाग जाऊँगा, ले िकन एक बार दरवाज़ा तो खोल, तु झे देख तो लू?ँ मने कहा,
"भाग जा, भाग जा, इस नीली कमीज़ वाले को बोल भाग जा यहाँ से, तेरे साथ आया शमा, उसको बोल भाग जा यहाँ से"
अ दर से आवाज़ आई,
अब मेरे गु से म उबाल आ गया, िकसी िक इतनी िह मत िक शमा जी का नाम ले ???? मने धरम और और उसके भाई से बोला,
4

"दरवाज़ा तोड़ दो"
तीन-चार तेज़ ध क म दरवाज़ा नीचे िगर पड़ा, मने बाक सभी को हाथ के इशारे से अ दर जाने को मना कर िदया था, मै
शमा जी के साथ अ दर गया, अ दर सारा सामान िबखरा पड़ा था, अ दर मल-मू िबखरा हआ था, बाल के गु छे पड़े थे,
और रिवता एक दम न न अव था म पलंग पर उकडू बैठे हए थी, मै समझ गया िक मामला बेहद गंभीर है, उसने हमको कु े
िक तरह से गदन िहला िहला के देखा! मने उस से आँख िमलाई ं!
उसने तभी एक पे परवेट फक के मारा, वो मेरे चे हरे के िबलकुल पास से िनकल कर सामने िखड़क पर लगा, मने आगे जाके
कस के एक झापड़ िदया, वो उछल पड़ी और आगे आके मेरे से िभड गयी! शमा जी ने उसके बाल पकड़ के नीचे फका, वो कु े
िक तरह से गु राई! मने तभी मं पढ़ा और उसके ऊपर फका, वो िच लाई बहत तेज़! कान-फाडू आवाज़! मने शमा जी से एक
डंडा और एक र सी लाने को कहा, वो बाहर गए और १ िमनट म ही ले आये , मने अब अपनी ताक़त हािज़र क , जैसे ही मने
ताक़त हािज़र क , वो एकदम से भड़क और शमा जी क तरफ भागी, मने उसे बीच म ही रोक कर एक लात उसक पसिलय
म मारी, वो दोहरी हो गयी, अब मेरी ताक़त ने उसको उठा के मारा दीवार म! २ बार-३बार! सर म झटका खाते ही वो बेहोश
हई, और मने और शमा जी ने उसक टांग और हाथ उसक कमर पे ले जाके बाँध िदए! हमने अपने कपडे संभाले , और बाहर
गए, मने धरम के भाई से कहा, "मामला काफ खतरनाक है, अभी वो बेहोश है , आप अपनी प नी से बोिलए, उसके ऊपर एक
चादर डाल द और कमरे िक साफ़-सफाई कर द"
उसने फ़ौरन ही अपनी प नी को ऐसा कहा और वो दो और औरत को ले के अ दर चले गय ...
करीब घंटे भर तक वो बेहोश रही, िफर उसको होश आ गया, अब वो रिवता ही थी! उसक माँ का रो रो के बु रा हाल था, मु झे
खबर लगी तो मै अ दर गया, अ दर आते ही उसने अपन माँ से कहा, "हट जा यहाँ से कुितया, मु झे आज इसका काम तमाम
करना है"
उसने मु झे बहत िचढ के देखा, ले िकन मने जो र सी बाँधी थी वो आतशी-मं से बंधी थी, िजतना वो छू टने क , छुडाने क
कोिशश करे गी, र सी उतना ही और कसती जाये गी! उसने कहा, " तू मु झे नही रोक सकता हराम " मै आज तु झे मार कर ही
दम लूंगी, मने तब एक महा ेत को हािज़र िकया, उसने बताया क इस पर शमशानी है! अब मै समझ गया!! मने रिवता से
कहा, "सु न कुितया, तू मेरा काम तमाम करने क बात कहती है, साली आज तेरा काम होगा तमाम! देखना चाहती है िक
कैसे? िदखाता हँ तु झ"े ये कह के मने उस के ऊपर सरस के तेल के छ टे डाले , वो कराहायी, िफर मने मु ंह म पानी भरा,
अिभमंि त िकया और उसके ऊपर कु ला कर िदया, अब वो ज़मीन म अपना सर मारने लगी! मने तभी उसको एक लात मारी
सर पे ! मने कहा, "अब बता ज़रा कौन िकसे मारे गा?"
वो गु राई और कसमसाई, मने कहा, "ओ शमशानी, मै देख अब तेरा गभाशय ब ध दूंगा लोहे क धधकती सलाख से "
"सु न ज़रा, सु न, मेरे बंधन खोल ज़रा, मै बताउं गी तेरे को" उसने आिखरी श द दांत बंद करके जोर से कहा!
"शमा जी, सभी को बाहर िनकाल दो यहाँ से, आप लॉ ग, ११ सु पारी, एक चाक़ू, ११ नी बू, २ पैकेट नमक, काला कोयला,
और नीम क दो डंिडयाँ ले आओ इनके साथ जाके! आज मै आपको इसका नाच िदखाऊंगा! ये नाचे गी आज, हा हा हा हा हा
हा"
मने अ हास िकया!
शमा जी उठे और सारा सामान ले ने चले गए, उनके जाते ही मने रिवता से कहा, "ओ रं डी शमशानी, तेरे खसम आने वाली ह
अभी यहाँ, मै बु लाने वाला हँ, आज तेरे नाच के बाद उनको खु श करवाऊंगा मै!"
इतना सु नते ही वो उठी, मु ंह खोला और मेरे ऊपर थूक िदया! थूक मु झ तक नह पहंचा, ले िकन इस से मै भड़क गया, मने
5

मने रिवता से कहा. वो लोग बेस ी से इंतज़ार कर रहे थे हमारा.. मै िफर से अ दर गया. अब अगर इसने कोई ३-५ क तो मै इसको ऐसा सजा दूंगा िक कभी दु बारा अपने सांस क आवाज़ भी नह करे गी!" शमा जी ने उसके बंधन खोलने शु िकया. इस बार धरम. "आप अभी ज दी से ज दी रिवता क माँ से किहये क वो रिवता को कपडे पहनाये . काम अभी आधा हआ है" धरम ने अपने भाई से कहा और उसके भाई ने तभी अपनी प नी से कहा. मने कहा. "रिवता?" "हाँ" वो बोली. मसान वीर कट हआ! उसने शमा जी के हाथ से शमशानी को ऐसे िनकाला क शमा जी के हाथ म एक भी बाल नह बचा! मसान वीर ने शमशानी क ऐसी मार लगाई. अब इस का मािलक आ रहा है!" शमा जी ने वैसा ही िकया. मने धरम से कहा. एक थाल मंगवाया और उसमे धूनी लगाई. मने ल ग और दूरी चीज़ उसमे डाली. धु आं उठते ही रिवता ऐसे तडपी जैसे कटे पे नमक िबखे र िदया हो! मने मं ोचारण आर भ िकया और मै एक एक ताक़त वहाँ हािज़र करता गया! रिवता के अ दर शमशानी को ये ताक़त सारी िदखनी लग ! वो शांत हो गयी! मै का और बोला. "अपनी आँख खोल" मने कहा. "कौन बाबा? मने पूछा. मने कहा "अपनी मु याँ खोल?" 6 . रहम कर दे. अब मने कहा "शमा जी अब इसके बंधन खोल दो. उसके बाल पकड़ के उसको ख चा और मेरे सामने डाल िदया.. ज़रा इसके बाल पकड़ लो.. अब वो झु लसी. मने पूछा. रहम करदे. मने कहा . वैसा ही पाया जैसा रिवता क माँ ने कहा था. "है एक बाबा" वो बोली."शमा जी इसके बाल न छोड़ना" और ये कह के मने अपने हाथ के हथेली पर चाक़ू से काटा और धूनी म ३-४ बूँद िगराय ! बूंदे िगरते ही. मेरी ताक़त वही ँ मौजूद थ .. और उसका भाई और दो चार लोग अनादर आ गए. " यूँ री िछनाल? पहचाना अपने खसम को?" उसने आस-पास ऊपर नीचे ... हमने उसको शांत रहने को कहा. "रहम कर दे. थोड़ी देर बाद रिवता क माँ बाहर आई. ह स ह स क आवाज़ करने लगी! २० िमनट के बाद शमा जी सारा सामान ले आये . वो अब शांत हो चु क थी. वो चु प रही. "कपडे पहना िदए उसको आपने ?" "हाँ जी पहना िदए. इसको यहाँ ख च के लाओ मेरे सामने . और कमरे से बाहर चलते बने . उसक प नी िफर से कमरे म गयी और इस बार उसने रिवता को कपडे पहना िदए. और हंसने लग ! मै भी हंसा और बोला. मै वैसा ही क ँ गी जैसा तू कहे गा.. अगल बगल सब जगह देखा.एक तामडा-मं मारा उस पर. रहम करदे. शमा जी. ले िकन उसने अपनी आँख बंद कर रख ह और अपनी दोन मु याँ भी बंद कर रखी ह" ये बड़ी अजीब सी बात थी.. बाबा ने मना िकया है. उसके बंधन खु ले. "कहाँ है वो बाबा?" मने पूछा. रहम कर दे" मसान वीर ने उसको छोड़ा. मने सारा सामान अपने िहसाब से लगाया. ऐसी मार लगाई क आिखर उसने हार मान ली! उसने मु झे देखा और कहा. मै आगे बढ़ा.. "नह खोलूंगी.

"तेरे दोन हाथ खु ल गए. "हाँ.. "मु झे बता नह तो तेरा वो हाल क ँ गा क तू और तेरा बाबा िबक जायगे ेत क हाट पे!" मने कहा. "नह मािलक. मेरे बाबा क जो है ये रबीता" वो बोली. हािज़र ताकत ने उसको बाल से पकड़ा और गु ड्डी पर िदया एक हाथ! आँख खु ल गय ! "इसके हाथ खोल" मने इशारा िकया. उसके हाथ हािज़र ताक़त ने पकडे मोड़े और ज़बरद ती उसके हाथ खोल िदए! मने कहा. मेरा बाबा है बैरागी. "ये बाबा कौन है? मने िफर पूछा. एक म गौरव क िजंदगी है और एक म गौरव क मौत. शकूर ब ती से या स ब ध है आपके प रवार का? "जी मेरे साले क प नी शकूर ब ती क है" धरम के भाई ने बोला. वो चु प रही. "रिवता!" "जी मािलक" वो बोली. ले िकन उसने न तो आँख खोली और न ही अपनी मु याँ! मै िफर से धूनी पर बैठा. अपनी हािज़र ताकत से कहा. शकूर ब ती म रहता है. किड़याँ जु ड़ने लग थी अब! उसके बाद मने उस से पूछा. "तो सु नो. "कौन सी खोलूं? कौन सी??" मने एक मं पढ़ा और उसको पानी पर पढ़ते हए रिवता पे दे मारा. अब तेरा कले जा खोलना बाक है. "जो ? मने कहा. वो नीचे िगर गयी. बोल वो भी खोलूं? मने कहा. ये खु द ही तो आई थी मेरे बाबा के पास!" मने धरम के भाई को बु लाया. आँख भी खु ल गय . कौन सी खोलूं?" वो बोली मै समझ गया क एक और मु सीबत आने वाली है. वो धीरे -धीरे बडबड़ाई. क वो उ क आँख खु लवाये. "तू कौन है?" "अपने बाबा क रखैल" "नाम या है तेरा? मने कहा 7 . बाबा मारे गा मु झे तु झ"े उसने जवाब िदया.. "देखो."कौन सी? दाय या बाय ?" वो बोली "दोन खोल!" मने उसके दोन हाथ को डंडे से छुआ के कहा. मने पूछा.

"चंडी" वो हंस के बोली,
मने एक झापड़ िदया उसको, वो सहम गयी, मने पूछा, "नाम बता अपने सही सही"
"मेरा नाम..............मेरा नाम.............च ो है" वो बोली,
"च ो? कहाँ क रहने वाली है तू?" मने पूछा,
"सोनीपत क " वो बोली,
मै जान गया, शमशानी के हटते ही उस बाबा ने ये नयी चाल चली है, मने अब अपने महा ेत से कहा क इसक सही िखदमत
करो और इसको पकड़ के ले जाओ, बाँध डालो इसको शमशान के बेरी के पे ड़ म, मै इसको बाद म देखंग
ू ा!
महा ेत ने ऐसा ही िकया, उसको िनकाला और ले गया!
रिवता ने झटका खाया और ठीक हो गयी! ले िकन बात ख़तम नह हई थी! मने अपना का र दा हािज़र िकया! मालूम िकया
और मै शमा जी, धरम और उसके भाई के साथ उस तरफ चला जहां मु झे मेरा का र दा ले जा रहा था, वो एक िनजन सी जगह
थी, वहाँ शहर क िबजली स लाई करने वाले एक बड़े से त भ क तरफ इशारा िकया! मै वहाँ गया! मने देखा क वहाँ कम
से कम २० ताक़त खड़ी थी! ये ही एक के बाद एक रिवता म आ रही थ ! मने सभी को क़ैद कर िदया! ले िकन एक ताक़त मेरे
यहाँ आते आते िफर से रिवता म घु स चु क थी! म वािपस गया रिवता के पास अब! वो िब तर पर बैठी, अनाप-शनाप बोले जा
रही थी..
मने जाते ही एक भयानक मं अब रिवता पे मारा, रिवता बौखलाई! मने पूछा, "कौन है बे तू?"
"सरदार ब ने खान" वो बोला,
"बाबा ने भे जा तेरे को भी? मने कहा,
"हाँ जी,ले िकन मु झे मारना मत, मै अपनी माँ को ढू ढ़ रहा था, मु झे बाबा ने पकड िलया, मु झे मेरी माँ से िमलवा दो मेरे मािलक,
िमलवा दो" वो बोला, मु झे दया आ गयी! मने कहा "अ छा नह मा ं गा तु झ,े एक काम कर इस बोतल म आ जा, जहां तेरी माँ
होगी मै तु झे वही ँ ले जा के छोड़ दूंगा!"
मै उसे वही ँ से भी छोड़ सकता था, िज न का ब चा था, कोई भी पकड़ सकता था उसको, इसीिलए मने उसको बोतल म आने
को कहा, वो खु श हआ और बोतल म आ गया! मने वो बोतल शमा जी को दे दी!
अब रिवता को होश आ गया, ले िकन बेचारी टू ट चु क थी, उसके ऊपर मन भारी बोझ था, उसने बहत कुछ बदा त िकया था,
मने कहा क इसको सु ला दो जब तक ये सोये, इसको उठाना नह !
मै भी थक गया था, मने धरम से कहा क चाय बनवा लो, थोडा आराम करते ह, िफर इस बाबा क खिटया उठाते ह!
चाय वगैरह पीने के बाद मने अपना एक मु तैद का र दा बु लाया, उसने मु झे सब-कुछ बताया और मै शमा जी, धरम और
उसके भाई को ले के बाबा क तरफ चल पड़ा, रा ते म मने जो ताक़त क़ैद क थ वो उठाय और उनको अपनी ताक़त से
बंधवा िदया वही ँ जहाँ मने च ो को भे जा था! रिवता को मै र ा-मं से बाँध आया था िनकलने से पहले ही!
हम अब बाबा क तलाश म चल पड़े शकूर-ब ती!
हम २ घंटे के बाद शकूर ब ती के उस इलाके म पहंचे जहां ये बाबा बैरागी था, मै अ दर गया तो पता चला बाबा १ घंटे पहले ही
8

वहाँ से चला गया था, मने िफर का र दा हािज़र िकया, वो आया और बताया क बाबा सोनीपत गया है! हमने गाडी सोनीपत
के िलए मोड़ दी!
काफ देर के बाद हम सोनीपत पहंचे, का रं दे ने एक शमशान क तरफ इशारा िकया, मै अ दर जाने लगा तो मु झे दो
आदिमय ने रोक िलया, ये बाबा के ही चे ले ह गे, मने कहा क बैरागी को यहाँ मेरे सामने ले आओ नह तो वो साला खु द ही
लह-लु हान यहाँ आएगा, वो डर गए! उ ह ने एक कमरे क तरफ इशारा िकया, मै सभी के साथ वहाँ घु स गया! वहाँ, नर-मु ंड,
हड् िडयां, मोर-पंख, शंख, आिद पड़े थे, और कोने म एक बूढा आदमी बैठा था उ होगी कोई ७० साल! ये ही था बाबा बैरागी!
मने उसको खड़े होने का इशारा िकया, वो खड़ा हआ! घबराया हआ! शमा जी से रहा नही गया, उ ह ने उसके िगरे बान से
पकड़ के उसको बाहर कमरे से िनकाल लाये ! और बोले , " िकतनी जो ह तेरी?"
वो कांपने लगा और रोने लगा! मने कहा क अगर तू बूढा न होता तो तेरा मै वो हाल करता क तू अभी देखने , सु नने और
चलने लायक भी नह रहता! उस से सार कहानी मालूम पड़ी! रिवता क मामी भी इसी बाबा क 'जो ' थी, एक बार रिवता
कोले के वो यहाँ उसका घर का कले श िमटवाने आई थी, इस बाबा का िदल आ गया उस पर और उसको भी अपनी 'जो '
बनाने क ठानी इसने ! बस रिवता पर इसने करवा दी सवा रयां! तािक उसको यह तो आना था इलाज के िलए! ले िकन मै
बीच म आ गया था! मने बाबा पर भंजन--मं मारा वो पछाड़ खा के िगरा, उसक हर चीज़ आज़ाद हो गयी थी, उसके ३० साल
क काली मेहनत आज ख़तम हो गयी थी!
हम उसको वही ँ छोड़ कर वािपस आ गए! रिवता ठीक हो गयी! घर का कले श ख़तम हो गया! रोिहत वािपस घर म आ गया!
न द-भाभी म ने ह हो गया! रोिहत क माँ भी खु श हो गयी थी!
४ महीन के बाद उसका याह हो गया! िजसमे मै और शमा जी भी आमंि त थे!

9

वष २००६ गु डगाँव क एक घटना
मु झे आज भी अ छी तरह से याद है, तब वष के पूवा के नवरा क नवमी थी उस िदन,नवमी िदन म ही समा हो चु क थी,
तं म नवरा क िवशेष िविधयाँ बतायी गय है, पर तु मै यहाँ आपको उस िवषय म नह बता सकता, ये मेरी िववशता भी है
और मै िनयम का उ लंघन भी नह कर सकता, ये िविधयाँ अ यंत ि ल और दु कर ह १०० म से मा २० ही स म ह गे
इन िविधय के पूण करने म, मने भी सम त िविधय का अनु पालन िकया था और उस िदन सं या-समय अपने एक प रिचत
के यहाँ माने सर आया हआ था, उ ह ने एक बड़ा भोज िकया था और अने क धम-गु ओं को आमंि त िकया था, हम अघोरपंथी ऐसे धम-गु ओं का, यिद वे स चे ह तो, उनका अव य ही आदर करते ह और वो हमारी भी, उनके बीच और हमारे बीच
एक खायी है, जो कभी नह पटती, उनक मा यताएं और हमारी मा यताएं पृथक पृथक ह! खैर छोिडये , मै वहाँ शमा जी के
साथ गया था, वैसे तो ये भोज २१ िदन तक का अखंड भोज था, पर तु,मु झे वहाँ २१ िदन तक तो नह कना था, इसी कारण
म वहाँ शािमल तो हो गया था, पर तु अने क ाथना के बाद भी मेरा वह कना औिच य पूण नह था, पर तु, जो धम-गु
यहाँ आये थे वो अपने २१ िदन के भोज हे तु त पर होक आये थे, उनके िव ाम का पूण बंध था, एक अलग पंडाल लगाया
गया था, कालीन िबछाए गए थे, फल,फू ल, साद आिद क यव था िदन और रात भर के िलए हमेशा तैयार थी! और ये धमगु अपना बो रया िब तर ऐसे बाँध के लाये थे जैसे थान प रवतन ही कर िलया हो! मथु रा, वृ दावन, काशी आिद जगह से
ये लोग आये हए थे! वहाँ िज ह ने इस अवसर पर िज ह ने हमको और इन धम-गु ओं को आमंि त िकया था, उनका नाम
दीवान िसंह था, वो भारत सरकार से उसी वष रटायड हए थे, ३ पु और एक पु ी थी, तीन पु अपना अपना अलग अलग
यवसाय करते थे और उनक पु ी ने अपनी पढाई इं लड म क थी, नाम था िनिव, कालांतर म उसने एक आय रश यु वक से
वही ँ िववाह कर िलया था और अब उसके उस से एक पु ी भी थी, इस अवसर पर वो भी अपने सम त प रवार के साथ यहाँ आई
हई थी, िनिव क एक न द थी, नाम था डे जी, उ होगी कोई २०-२१ वष, दीवान िसंह ने जब मेरा उनसे प रचय करवाया तो मै
सभी से िमला, धम-गु र से वे लोग िमल चु के थे, ले िकन जब ये लोग एक अघोरी से िमले तो उनके चे हरे पर एक िव मता का
भाव आ गया था! मेरी वेश-भूषा तो साम य ही थी, पर तु हाथ म और गले धारण अजीब सी मालाओं ने उनका यान ख चा!
दर-असल मै िकसी और धम-गु जैसा तो कतई नह लग रहा था! ले िकन िफर भी दीवान िसंह हमारी आवभगत करने म लगे
हए थे! उ ह हैरत तो तब हई जब दीवान िसंह ने मु झे अपने घर म अ दर आमंि त िकया था! मै अ दर गया, ४ बजे का समय
होगा, उनके तीन पु मेरे पास आये, नम कार िकया, उनक प नी आय और उ ह ने ने भी नम कार िकया! िनिव तो
अघो रय के बारे म जानती थी ले िकन उनके पित नील और उनक बिहन डे जी को ये बात िबलकुल अजीब और अलग लगी
थी, दीवान िसंह हमको अ दर ले गए, अ दर िबठाया, थोड़ी देर बाद उनका नौकर आया और एक े लाया इसी म हमारा 'महाभोज' था! दीवान िसंह अ दर आये , हाथ म एक आय रश ांड ि ह क ले के! उ ह ने अपने हाथ से हमारे पे ग बनाए और वही ँ
बैठ गए, मने े से एक टु कड़ा उठाया, और मं पढ़ा, ये आव यक होता है! हम लोग पहले अपने भोज को झूठा करते ह ऐसे ही
मिदरा को भी! जब मै ऐसा कर रहा था तो एक दम कमरे म डे जी का वेश हआ, वो भी वही ँ बैठ गयी, दीवान िसंह ने कहा,
मा क िजये , मै इनको अभी कहता हँ" मने इशारे से उनको मना िकया, मने कहा, "उसको जो बताया गया है मै उस से एक
दम उलट हँ, लड़क िज ासु है और अलग सं कृ ित क है, इसम कोई दोष नह है आप परे शान न ह !"
मने वहां अपना भोज समा िकया और हाथ धोने के िलए जैसे ही उठा, वैसे ही डे जी ने दीवान िसंह से पूछा, " या ये जा रह
ह?"
"नह , वो अपने हाथ धोने जा रहे ह" वो बोले ,
मै गया और हाथ धोकर वािपस वही ँ आके बैठ गया, मने दीवान िसंह से जाने क अनु मित मांगी तो शमा जी ने मु झसे कहा,
"गु जी, ये लड़क डे जी आपसे कुछ कहना चाहती है, पूछना चाहती है"
"पूछो डे जी" मने ये अं ेजी म कहा था, डे जी को हैरत हई क मै अं ेजी जानता हँ और उसको अब िकसी दु भािषये क
आव यकता नह है!
"मने देखा है यहाँ, जब मै आई तो मने गे ए व

वाले वो साधू देखे, मु झे उनके बारे म बताया गया, वो शराब नह पीते, मांस
1

नह खाते, िसगरे ट नह पीते, यहाँ तक िक याज आर लहसु न भी नह खाते और वो अपने आपको वै णव बु लवाते ह, ले िकन
आपु नके िबलकुल उलट हो, मै जानना चाहती हँ िक आप िकस तरह के साधू ह? उसने भोले पन और िज ासु होके कहा!
मने पूछा, "डे जी मु झे तु म ये बताओ िक तु म इस श द साधू से या अथ ले ती हो?"
"साधू मतलब वो यि

जो ई र िक खोज म िनकला है" डे जी ने कहा,

"गलत! डे जी ई र िक खोज म नह स चाई िक खोज म" मने जवाब िदया,
"मु झे समझ नह आया, कृ पया खु ल के समझाइये" उसने ाथना क ,
"बताता हँ" मने कहा,
"वो यि जो सब-कुछ छोड़-छाड़ कर स चाई ढू ँ ढने जाता है, भटकता है, वो साधू होता है! पर तु वो जो करता ऐसा ही है
ले िकन, माया, मोह आिद को भी साथ रखता है वो वाधू होता है! आपने जो बाहर देखे ह वो यह ह!"
"तो जैसे िक *******?" उसने कहा,
"हाँ! सटीक उ र िदया आपने !" मने कहा,
"और आप या ह? मु झे तो आप इनमे से कोई नह िदखाई देत?े " उसने कहा,
"हाँ कोई भी नह , इनमे से कोई भी नह " मने कहा,
"तो आप या हो? कौन से साधू हो?" वो और िज ासु हो गयी,
"मै साधू नह वरन............................. आप नह समझ सकत , आशा है िक ीमान दीवान िसंह आपके समझा दगे"
और मै वहाँ से उठा, िवदा ली, डे जी भी दौड़ी-दौड़ी आई हमारे साथ! और आके मेरे पाँव छू िलए! मै हत भ रह गया! मने उसके
सर पे हाथ रखा और कहा, "ए लन का साथ छोड़ दो, काफ हआ, आगे क िज़ दगी संवारो"
उसके होश उड़ गए! वो कुछ कहना चाहती थी ले िकन श द गले म अटक गए!
मै वहांसे गाडी म बैठ और वािपस अपने थान के िलए

थान कर गया!

मै और शमा जी वािपस अपने थान पर आ गए, सु बह कोई ११ बजे मेरे पास दीवान िसंह का फ़ोन आया, उ ह ने बताया क
डे जी ने उ नको सवाल पूछ पूछ कर त कर िदया है! सभी के पीछे पड़ी है, उसने एक ऐसे ही काशी के धम-गु से इस बारे
म बात क तो उ ह ने उसको कोई और ही पाठ पढ़ा िदया! अब वो िजद पकडे बैठे है क वो आपसे मु लाक़ात क आकां ी है,
और मु झसे िमलना चाहती है आज ही! अब या िकया जाए! मै जानता था क वो एक िज ासु लड़क है और बड़े सू म तरीके
से वो ये सब जानना चाहती है! िविच ि थित उ प न हो गयी थी! मने शमा जी को इस से अवगत करवाया तो उ ह ने
सलाह दी क मु लाक़ात म कोई िद कत नह है,और उसके मन म जो
उमड़-घु मड़ रहे ह उनको शांत िकया जाना ही
चािहए, नह तो वो वािपस चले जाये गी और उसके
यथावत उसके मि त क म कोलाहल मचाते रहगे! तब शमा जी ने
दीवान िसंह को फ़ोन िकया और कहा क ठीक है, आप डे जी को ३ बजे यहाँ ले आइये , मु लाक़ात हो जाये गी!
वो लोग ३ बजे से पहले ही आ गए! गाडी से उतारते ही डे जी भागी मेरी तरफ, आते ही झु क मेरे पाँव छू ने, मने छू ने नह िदए!
मने उसको उठाया, और कहा, "आपने दीवान िसंह को
पूछ पूछ के परे शान कर िदया है मने सु ना?" ये मने मजाक म
कहा था!
2

"उ ह ने तो मु झे कुछ बताया ही नह , मै रात भर नह सो सक " वो बोली,
"नह आई न द, पता नह यूँ?" उसने गदन झु का के कहा,
"गु जी" उसने मु झे ऐसा बोला!!! मै हंस पड़ा!
"आप गु का मतलब जानती हो डे जी? मने पूछा,
"हाँ एक यो य िश क!" उसने हँसते हए ले िकन गंभीर भाव म कहा,
"तु हारी उ

या है डे जी? मने पूछा,

"२४ साल गु जी" उसने बताया,
" या करती हो वहाँ? आयरलड म?
"अब मै इं लड म हँ, वहाँ एक बीमा कंपनी म काम करती हँ" उसने कहा,
"भारत देश के बारे म जानती हो? मने पूछा,
"हाँ छुटपन से ही मु झे भारत देश और इसक सं कृ ित म लगाव था, मु झे भारत से यार है गु जी" उसने चार तरफ देख कर
कहा!
मेरी और भी बात होती रही उस से! िफर उसने मु झसे कहा क मै आपसे अलग होके एक बात करना चाहती हँ, वो भी यहाँ
नह जहां कोई न हो, मै थोडा अचंिभत तो था पर तु मने कहा क ठीक है और मै उसको अपने कमरे म ले गया, वहां उसको
िबठाया, उसने पूछा, "आप यह रहते ह?
"नह ये मेरे काय या यूँ कहो क पूजन- थल है" मने कहा,
"अ छा, ठीक है" उसने वहां पड़ी व तु ओ ं को देखते हए का,
"गु जी, आपको ए लन के बारे म कैसे पता?" उसने पूछा,
"ये तु हारा िवषय नह डे जी" मने कहा,
"मु झे बताइये न?" उसने कहा
" या आप मु झे बता नह सकते गु जी" वो बोली,
"नह , नह बता सकता डे जी" मने बताया,
"ए लन मु झसे बड़ा है उ म १० साल, उसने ही मु झे नौकरी पर रखवाया था, मु झे पसंद करता है" वो बोली,
"और तु म? मने कहा,
"मै नह करती ले िकन मजबूरी है मेरी" उसने कहा,
"उसका पीछा छोड़ दो, एक तो वो आदमी गलत है और दूसरा वो शादी-शु दा भी है, और तु मको कहता है िक अगर तु म कहो तो
3

वो उसको तलाक भी दे सकता है, िजस से उसके ३ ब चे भी ह , २ जु ड़वां और एक लडक " मने कहा,
उसका मु ंह खु ला रह गया! मु झे घूरती रह गयी! थोडा संयत हई और बोली,
" या मै िकसी फ़ र ते से बात कर रही हँ? आप कौन हो? आपको ये कैसे पता? हे भगवान्?" उसने ये कह के अपने दोन
हाथ म अपना चे हरा छुपा िलया!
"डे जी, मै या हँ कौन हँ? ये रहने दो, मै आपक तरह एक इंसान हँ, िम ी से बना!" मने कहा!
"तो आपको कैसे पता ये सब? कैसे पता?" ये या है गु जी, मु झे बताइये, मै पागल हो जाउं गी?" वो बोली,
"गु जी, मने एक काशी के गु से भी बात िक थ , ले िकन मु झे कुछ भी समझ म नह आया, आप मु झे उनमे और अपने म
फक समझा दीिजये , कृ पा क रए गु जी" उसने कहा, मने देखा िक उसके आवाज़ ं ध गयी थी आिखरी श द कहते कहते,
"सु नो डे जी, मै और वो कोई अलग नह ! उनका गंत य भी वही है जो मेरा है! उनका ये य भी वही है जो मेरा है, बस हमारी
िविधयां अलग अलग ह! उनक पूजा शमशान पर समा होती है और मेरी शु ! मै शि का पु जारी हँ, शि जो िक इस
संसार के कण-कण म िव मान है! वो अपने आपको सकारा मक और हमे नकारा मक कहते ह! उनके िलए भूत- ेत बाधाएं
ह मेरे िलए संगी साथी! उनके िम , संगी-साथी झूठ बोलते ह, पर तु मेरे नह !, उनका माग सांसा रक है, और मेरा औघड़!
िचता-भ म मेरी वचा है, उनक च दन-भ म! सोना-चांदी उनके आभूषण ह, मेरे अि थयाँ! मंिदर उनके पूजा- थल ह, मेरा
शमशान, वो अपने आपको स पूण कहते ह मै अपूण ! वो क जाते ह मै िनरं तर आगे बढ़ता हँ! वो अँधेरे म डरते ह, मै अँधेरे म
काश देखता हँ! वो िदन म ि याशील रहते ह मै राि काल म! वो पु य संिचत करते ह मै संिचत पु य दान करता हँ! ये मूल
फक है डे जी! मने कहा!
डे जी उठी और बोली, "मै आपका माग अपनाना चाहती हँ, या मै अपना सकती हँ?"
मै भ च का रह गया!
मै अवाक रह गया था! मु झे समझ नह आया क मै इस अबोध लड़क को या कहँ! ऐसी ि थित से मै सदैव बचके रहना
चाहता हँ, मने कुछ सोचा और कहा,
"डे जी, तु हारे पास तु हारी भौितक सु ख से प रपूण िजंदगी है िनवाह करने हे तु, अभी आपने िजंदगी म कुछ देखा भी नह है,
और ऐसे िनणय पल म या िदन म या महीन म नह िलए जाते! ये अ यंत किठन, दु गम माग है, और जहां तक मेरा
है
इस म मै आपक िकसी भी तरीके कोई मदद न कर सकता न ही क ँ गा, मै बा य हँ"
ऐसा सु न के डे जी पर तो जैसे घड़ पानी िफर गया हो! वो शु य म ताकती रही, २ िमनट बीते और मने कहा, "डे जी, बाहर
ीमान दीवान िसंह आपका इंतज़ार कर रहे ह, आप अब जाइए और इस िवषय को यह याग दीिजये !"
वो हलके क़दम से उठी और धीरे -धीरे दीवान िसंह क तरफ बढ़ी, मने दीवान िसंह से कहा, आप इस लड़क का यान रिखये
ये अ यंत भावु क और अ नातु िलत वभाव क लड़क है, अगर ये दु बारा कहे यहाँ आने क तो इसे मना कर दीिजये!
डे जी गाडी म बैठी और गाडी आगे बढ़ी, ले िकन थोड़ी दूर जाते ही गाडी क और डे ज़ी वहाँ से भागती ही मेरे पास आई और
बोली' "आप अपना फ़ोन नंबर दे दीिजये मु झ,े मै आपसे बात करके ही अपने
का उ र ले िलया क ँ गी"
मने शमा जी को कहा और उनको अपना नंबर देने क सलाह दी, शमा जी ने अपना नंबर डे जी को दे िदया!
वो लोग वहां से चल िदए!
4

तभी मने शमा जी कहा िक वो दीवान िसंह से मेरी बात करवाएं ज़रा.अगले िदन शमा जी के फ़ोन पर डे जी का फ़ोन आया. "ये लोग यहाँ कब तक ह? "ये लोग परस जा रहे ह" वो बोले . मने पूछा. फ़ोन िमला. आप ही कोई तरीका बताओ तो कोई बात बने " "ठीक है. "वहाँ से कब वािपस आयगे आप?" उसने पूछा. "मु झे आपसे िमलना है. उ ह ने दीवान िसंह से मेरे बात करवाई. "अभी कोई आधे घंटे तक" मने कहा. मै एक दो िदन म यहाँ से जाने वाला हँ. आप मु झे बताइये िक आप कब तक फ़ोन कर दगे मु झ?े " उसने पूछा. "तब तो आज ही िमलूंगी मै आपसे . इ टरने ट खंगालती रहती है. आ ा द" मने उनको डे जी से हई सारी बात बता द . जैसे बेस ी से इंतज़ार कर रही हो! पहली 5 . मै बात करता हँ उस से" ये कह के मने फ़ोन काट िदया. डे जी ने फ़ोन उठाया. िकताब पढ़ती रहती है. "तो कोई बात नह . "ठीक है. "मै कह नह सकता. बोली. मै अभी आपको फ़ोन करता हँ. मने शमा जी से डे जी को फ़ोन िमलाने को कहा. शमा जी ने फ़ोन मु झे पकड़ा िदया. "ठीक है. उनके भाई ने भी समझाया ले िकन वो नह मानती. हो सकता है िक कह और आगे जाना पड़ जाए!" मने बताया. लगता है आपका जादू हो गया है उसे ! हर व त पूछती है. "गु जी मने कहा था िक आप मु झे केवल अपना ही नंबर देना ले िकन आपने मु झे अपना नंबर न िदया और शमा जी का नंबर दे िदया" "आप अपना योजन बोलो डे जी. तो या डे जी यहाँ आएगी आज?" मने पूछा. या बात करनी है आपने ?" मने कहा. उसने कहा. हम भी परे शान हो गए ह. न खाने का होश न पीने का. "जी गु जी. आज? संभव है?. मु झे िकसी िविश काय से गोरखपु र जाना है" मने बताया. िक मै आपसे कब िमल सकता हँ आज" "ठीक है फ़ोन मेरे ही पास है. "आज तो नह िमल सकता" मने कहा "िफर कब मु लाक़ात होगी गु जी?" उसने कहा. दीवान िसंह बोले . शमा जी ने बात क तो डे जी ने कहा िक उसने केवल गु जी से ही बात करनी है. "पता नह . "गु जी. "और अगर मै न िमला तो?" मने जांचा. ले िकन आपसे िमले बगैर नह जाउं गी मै" उसने कहा. मै आपका वही ँ इंतज़ार कर लूंगी. चाहे िक मेरे साथ आये या नह ?" उसने बोला.

ही घंटी म फ़ोन उठा िलया! बोली. अगर वो आये तो ठीक है. मने आज ही आना है" उसने कहा. " जी मै अभी आ जाऊं?" "अभी नह . ले िकन आओगे िकसके साथ? मने पूछा. मने शमा जी से कहा. शमा जी को हाथ जोड़ के नम कार िकया और मेरे िफर से पाँव छू ने क कोिशश क . "शमा जी ये कहाँ फँस गए हम!!!!" शमा जी बोले . आज क ही तो बात है. आप मु झे अपना पता दे दीिजये" उसने कहा. बदल गयी हँ!" "मु झसे िमलके नह . "नह अकेले नह . एक दम भारतीय मिहला!" बोली. देिखये आपसे िमलके म ३ िदन म कैसी बन गयी हँ. आप िकसी को साथ लाइए" मने सु झाव िदया. ले िकन मु झे खे द है िक मै आपको अिधक समय नह दे पाऊंगा" मने कहा. टै सी ले लूंगी. मै िकसके साथ आऊं?" "ठीक है. आप दीवान िसंह को बता दीिजये और आ जाइए. कल पैिकंग म व त कट जाएये गा इनका और आज इसको साफ़ साफ़ कह देना िक ये आिखरी बार िमल रहे ह हम" "ठीक है. मु झे लगता है क मेरा कोई पु राना स ब ध है भारत से. नह तो आप अपने भाई को ले आइये " मने कहा. आप िनिव से बात क िजये . बस मै िनकल रही हँ यहाँ से" उसने कह के फ़ोन काट िदया. "तो जब कोई आये तो आ जाना" मने कहा. आप म बदलाव आ गया" मने कहा. यहाँ क हर जगह मु झे जानीपहचानी सी लगती है. "मै अकेली ही आ जाउं गी. "ध यवाद गु जी. " मै कैसी लग रही हँ?" "बहत अ छी. न अंकल न िनिव के भाई. मु झे यहाँ अपनापन लगता है. मै सच कह रही हँ" उसने कहा! 6 . " आई लव इंिडया" उसने कहा!! "कहो डे जी कैसे आय आप यहाँ? मने पूछा. "कोई बात नह गु जी. "नह . मने उसको रोक िलया! उसने पूछा. हमारी भारतीय सं कृ ित से िमलके. ऐसा ही कहँगा मै" और िफर डे ढ़ घंटे के बाद डे ज़ी आ गयी! भारतीय वेश-भूषा म! बादामी रं ग का कुरता और सफेद रं ग क पजामी! और माथे पर एक िबंदी! मेरी हंसी छू ट गयी! वो मेरे पास भागते भागते आई. "ठीक है िफर. "गु जी. "कोई बात नह गु जी. "कोई नह आएगा" उसने बोला. "यहाँ कोई नह है.

.. "डे ज़ी अगर तु म ऐसा ही करोगी तो मेरा और तु हारा बात करने का कोई फायदा नह है" देज़े ने सर उठाया." उसक आवाज़ धीमे हो गयी "कोई बात नह डे ज़ी! आप वहाँ आराम से िजंदगी िबताओ. "कोई बात जो तु म कहना चाहती हो? मने पूछा.. "तो?" मने कहा. "डे ज़ी? डे ज़ी?" वो कुछ नह बोली."अ छा! ये तो बड़ी अ छी बात है डे जी. काजल बह कर आँख पर फ़ै ल गया था. एक महान देश!" 'चलो अ छा है. "मै वहाँ नह यहाँ रहना चाहती हँ" उसने कहा.. वो नीचे मु ंह िकये बैठे रही.. मु झे आपके अित र 7 और कोई नह िसखा . मु झे लगा िक वो यान से मेरी बात सु न रही है.. उजले धवल चे हरे पे आंसु ओ ं क धारा बह रही थी. एक डे ढ़ िमनट बीता. क आपको हमारा महान देश इतना अ छा लगा!" मने कहा. इसीिलए मने नह टोका. मने उसको उसका माल िदया.ले िकन उस से दूर रहना िजसके बारे म मने आपको बताया. डे ज़ी ने कुछ नह कहा. "तो ये बात आप दीवान िसंह से. ले िकन जब मने उसका एक आंसं ू उसके कुरते पे िगरता देखा तो मै थोडा परे शान सा हआ. उसने सर नह उठाया.. " या?" मने हैरत से कहा "ऐसा यूँ?" मने पूछा. तु म रो यूँ रही हो? या बात है? घर म िकसी ने रोका तु मको?" उसका कोई उ र नह आया.. मने उसको कहा. संवर जाए तो उसक मेहनत और िबगड़ जाए तो लानत नसीब पर और रिचयता पर! " मने कहा. "हम परस जा रहे ह गु जी" उसने िससक ले के कहा. मने कहा. आपसे सीखना चाहती हँ. "हाँ गु जी. मने िफर कहा. "मै नह जाना चाहती" उसने कहा. " यूँ" मने पूछा "मै यह रहना चाहती हँ" उसने कहा. "मु झे बताओ.. मने कहा. "डे ज़ी? डे ज़ी? तु म रो यूँ रही हो?" मने अपना सर नीचे करके कहा.. कुछ द और ठहर सकती हो तु म! इसम रोने क या बात? मने हंस के कहा.. या अपनी भाभी से कहो. इंसान अपनी िजंदगी वयं ही बनाता है और वयं ही िबगाड़ता है. "मै आपके माग का अनु सरण करना चाहती हँ. तु म जब वािपस जाओगी तो वहाँ के लोग को हमारे देश के बारे म बताओगी!" "सो सैड! हम परस जा रहे ह.

. उनक आ ा आव यक है. उसने मु झे बताया क वो जब से यहाँ आई है उसका मन नह लग रहा है! हर चीज़ उसको पराई लग रही है. आपक भाभी और आपके अंकल ऐसा करने को रजो ह तो मु झे मंजरू है" "ले िकन वो नह मानगे" वो एक और िससक ले के बोली. कोई २० िदन हो गए. मु झे वहाँ ११ िदन मातंगी-साधना करनी थी. मने उसे अ सर हमेशा िक तरह समझाया और बात ख़तम िक. मने शमा जी को िलया और काम या के िलए थान िकया.. अगर आपके माता िपता. ३ महीने बीत गए ह गे. एक रात को उसका फ़ोन आया. मै उसको हमेशा क तरह टाल िदया करता. काफ समय हो गया.. उसने मेरा समय उसके िलए बु क करवा िलया था! रात को कोई ११ बजे उसका फ़ोन आया. और थोड़े िदन म वो सामा य हो जाये गी. मने कहा. उसने मु झे बताया क उसने नौकरी छोड़ दी है और एक दूसरी जगह नौकरी कर ली है. दर-असल ये उसके मि त क पर दबाव था जो वो लगातार रखे जा रही थी. पहँचते ही उसने मु झे फ़ोन िकया क वो सु रि त वहाँ पहँच गए ह और अब रात को वो मु झसे बात करे गी. मने सोचा िक चलो अपनी दूसरी नौकरी म य त हो गयी होगी. ठीक हो जाओगी एक-आद िदन म. मने उसको समझाया क २-४ िदन थान-प रवतन के समय ऐसा ही महसूस होता है. "मै दु बारा आउं गी.सकता" उसने कहा. भाई बिहन..मै कभी उठाता कभी नह . मु झे अब अलकत होने लगी थी.. मै हंसा और कहा. समय बीता. कभी िदन म कभी रात म. ये ही हमारी सं कृ ित और मेरे माग का पहला िनयम है" िम ो! बड़ी मु ि कल से टालते हए मने डे ज़ी को वहा से जाने पर राजी िकया! पूरे दो घंटे तक मै उसको समझाता रहा! और दो गहनते तक बहस करने के बाद मने उसको स हा-बु झा कर शमा जी को कहा क वो उसको उसके घर गु डगाँव तक छोड़ द! शमा जी उसको ले गए वो बेचारी रोती रही और मेरे मि त क म िव फोट करती रही! आिखर शमा जी ने उसको वहाँ छोड़ िदया और िफर वहाँ से अपने घर के िलए थान कर गए! िजस िदन उसको जाना था. जो िक एक अ छी और सु कून वाली बात थी मेरे िलए कम से कम! मु झे उन िदन अपनी साधना हे तु एक बार िफर काम या जाना पड़ा.. िकसी दूसरी अनजान भूिम म उसको िनवास करना पड़ रहा है और उसका दम सा घु ट रहा है यहाँ . मै राि समय ि या म होता और िदन म शमा जी के साथ जंगल म घूमने जाया करता! एक रात िजस िदन मै नौव राि म बैठा था.. "ओह तो ये बात है!" मने कहा... मने उसको यह कह के बात कटवा दी क मु झे अब पूजन करने जाना है. उस िदन उसने मु झसे आधे घंटे बात क . लाइट म बैठने से पहले उसने मु झे दु बारा फ़ोन िकया. और वो नौकरी पर भी नह जा रही इसी वजह से. उसका फ़ोन रोज़ आता था. मातंगी8 . अब हम बाद म बात करगे! अ सर उसका फ़ोन रोज ही आता. और ए लन से हमेश के िलए नाता तोड़ िदया है! मने उस से कहा क अ छा िकया उसने ! अब वो दूसरी जगह नौकरी करे ! और िफर ऐसी ही १० िदन बीत गए एक िदन मु झे उस फ़ोन आया. कुल िमला के ये उसक बु िकंग-कॉल थी. उस िदन उसने मु झे सु बह से फ़ोन करने शु कर िदए! शमा जी को कसम िदला िदला कर उसने मेरा नंबर ले िलया! मु झे शमा जी न बता िदया था पहले से ही इस बारे म! उसने मु झे अपने जाने तक २१ बार फ़ोन िकया. हम काम या पहंचे और मने साधना आर भ िक. डे ज़ी का फ़ोन आता मै हाल-चाल पूछता और िफर बात ख़तम! एक बार उसका पूरे एक महीने फ़ोन नह आया. उसने बताया िक उसक तिबयत ठीक नह है. "ठीक है. "तब मै कुछ नह कर सकता डे ज़ी... मने अब बात टालने क कोिशश क . इस बार िबलकुल तैयार हो कर!" मेरे िदमाग म घंटी बज गयी! वो इं लड पहंची. और कहा.

सहोदा रयां कट हई ं.थल म आके ले ट गया! सु बह उठा. "आपके होते संभव है" उसने हठधिमता से ऐसा कहा.. "ये संभव नह " मने कहा. 'तु हे ऐसा यूँ लगता है?" मने पूछा. "मु झे तु हारी िफ इसिलए है िक तु म सबसे पहले एक िवदेशी हो यहाँ. अलख म सब कुछ वािपस िमलने वाला था! मने अलख जलाई और सारी ताक़त हांिसल क ! थोड़े समय प ात मु झे शमा जी ने बताया क डे ज़ी का फ़ोन आया था... कोई भी देखे तो ि को बाँध ले अपने आकषण म! उसने हमको वहां िबठाया.. अब मै ११ व िदन तक बाहर नह जा सकता था. िसवान िसंह ने अपनी बेटी को.११ िदन तक केवल पानी पी कर ही साधना क थी! कमजोरी थी ले िकन साधना के प ात. और काला ही दु प ा! बेहद सु ंदर लग रही थी वो. मने शमा जी को कहा क वो दीवान िसंह से मालूम कर िक वो कहाँ है? फ़ोन करने पर मालूम चला िक वो वहाँ आई ही नह ? तो कहाँ गयी? मने कहा िक उसका नंबर िमलाओ. मने उसको हमेशा िक तरह से पाँव नह छू ने िदए! उसने भारतीय पारं प रक कपडे पहने थे. बात तो उसने सही ही कह दी थी!. हम वहां पहंचे तो डे ज़ी हमको वही ँ िमल गयी! उसने शमा जी को नम कार िकया और मेरे पाँव पड़ने लगी. ले िकन कहाँ है अब वो? मने उसके फ़ोन का इंतज़ार करने का ही िवचार सही सोचा. और राि समय वहाँ से ेन पकड़ कर कोलकाता रवाना हो गए... वो कहाँ गयी कब गयी ये िकसी को नह मालूम! बस इतना िक वो भारत आ गयी थी. शमा जी जाग चु के थे. अपने थान पहंचा. "हाँ अ छी तरह से समझती हँ मै. उ ह ने मु झे संभाला. तीसरे इसिलए िक तु म ऐसी जगह हो जहाँ तु मको अ या म का ान बांटने वाले तु मको खु द ही बाँट खायगे. वो गोरखपु र पहँच गयी थी! उसने सोचा था िक मै केवल िद ली से गोरखपु र ही जाता हँ. पता और कमरा नंबर दे िदया था. साधना का उ राध आ पहंचा था! आिखरकार माँ मातंगी का आशीवाद िमला! मै बाहर आया! बाहर आके मने िव ाम िकया! राि काल था! मै वही ँ िव ाम. तु म ी हो. दूसरे . 9 . कोलकाता पहँचते ही उसका फ़ोन आया.. इसीिलए आपके पास आई हँ" उसने हँसते हए कहा. वो अपनी मज़ से वहाँ आई है! मेरी और शमा जी िक हंसी फू ट पड़ी! हमने उसको वही ँ कने को कहा. हम उस िदन रात तक कोलकात ही के और िफर रात को गोरखपु र को रवाना हो गए! डे ज़ी ने अपना होटल का नाम.. काले रं ग का सूट और काली सलवार. समझ तु म अब मेरा मतलब? मने कहा.. कुछ थोडा बहत खाया! िफर मने उसको वहाँ िबठाया और पूछा. िमलाया तो ि वच ऑफ! ये एक नयी मु सीबत गले पड़ गयी! मने दीवान िसंह को सारी बात बतायी. नौव राि को. पानी िपलाया और िफर म-सिवस को फ़ोन करके ३ कॉफ़ और साथ म कुछ और मंगवा िलया! वो तो यहाँ क ही हो गयी थी! हमने कॉफ़ वगैरह पी. उसी बेटी ने कहा िक डे ज़ी उनके साथ नह अलग रहती थी और उनके डे क के कानून के मु तािबक़ वो उसको नह रोक सकते. "आपको मेरी िफ न होती तो आप यहाँ नह आते गोरखपु र म!" उसने कहा. "इतना बड़ा कदम िकस िलए?" "मने सोच िलया िक मै आपके माग पर चलूंगी" उसने कहा. "अगर मै चाहँ तो तु म कल ही यहाँ से वािपस चली जाओगी. वो अपने िवचार से और वाय ता से वतं है! अथात.. जानती हो तु म?" मने थोडा गु से म कहा. और वो अब भारत आ गयी होगी. उसने वहां एक होटल म कमरा ले िलए था और ये भी कहा िक उसके बारे म िकसी भी 'तीसरे ' यि से बात न कर कृ पया करके. उसने िकसी को भी बताये िबना भारत के िलए लाइट पकड़ ली थी. दु बारा आने का कभी नाम नह लोगी.

अनु सरण बेहद मु ि कल है. मने उनसे बात क और बात करके मने फ़ोन शमा जी को पकड़ा िदया. सांसा रकता का याग करे . तु हारी सं कृ ित और मेरी सं कृ ित म ये एक मूल फक है!" "नह मै फक िमटाने आई हँ" उसने कहा. आप वहाँ जाके आराम कर.( मु झे कहना पड़ा ऐसा) िवदेशी ह. और िश य व तो कदािप नह !" मने कहा. " ान जहाँ तक मु झे है. और सबसे बड़ी बात ये िक वो आप पर िव ाश करके यहाँ आया है. वो हमे हमारे कमरे म ले गया. इनको एक अलग कमरा दे दो. िवचार करता हँ इस बारे म. आप एक काम करो. जब मै बात कर रहा था तो मु झे डे ज़ी एक अप रिचत िनगाह से देख रही थी. अनु सरण और िश य व" उसने प प से कहा. ठीक है?" "ठीक है गु जी" उसने कहा. आिखर म ये िनि त हआ िक वो मेरे साथ ही चले गी. कमरा अिधक दूर न हो. इसिलए" ये तक अकाट् य थे! मने मन ही मन कुछ सोचा और कहा. जैसा मै कहँ आपको ऐसा ही करना है. 10 ."प ाताप आपको ही होगा" उसने कहा. हम तीन ही उस कमरे म आ गए! मने रघु को बु लाया. मोह-माया का फांस कट जाए. ये मेरी िश या ह. आ म जहां मै ठहरने वाला था उस रात! हमने डे ज़ी से कहा िक वो होटल से चे क-आउट कर ले . थोड़ी देर बाद शहर से बाहर आने ही वाले थे िक मेरे फ़ोन पर एक फ़ोन आया. और हम उतर गए. आते ही रघु नाथ ने मेरे पाँव छुए और शमा जी के भी. "देखो. "कैसे होगा?" मने पूछा. िकसी जानकार का फ़ोन था कानपु र से. िफर उसने गाडी के दरवाज़े खोले और हम अ दर बैठ गए. "ठीक है. इसीिलए हम बाहर लॉबी म उनका इंतज़ार कर रहे थे. मै कल आपसे िमलूँगा दोपहर म" "नह गु जी अब आप या तो यह ठहरो या मु झे भी अपने साथ ले जाओ!" उसने कहा." डे ज़ी आपको आपका कमरा अभी िमल जाएगा. कोई इनको तंग न करे " रघु ने सर िहलाया और मने डे ज़ी से कहा. हाँ खाना साथ साथ ही खायगे!" "गु जी या मै इतने बड़े कमरे म नह रह सकती?" उसने कहा. वो अपनी गाडी ले कर वहाँ आने वाले थे. नह रह सकत आप. मने अपने जानने वाल को फ़ोन कर िदया था. कोई आधे घंटे बाद गाडी आ गयी. आज रात यह ठहरो. "अगर मै उिचत कार से अनु सरण क ँ गी तो आपको िश य व दान करना ही होगा!" उसने अ यंत िव ाश से ऐसा कहा! मने कहा "ठीक है. िफर वही बाल-हठ! मने समझाया. शायद उसके मन म िवचार उमड़-घु मड़ रहे ह गे! कोई एक घंटे के बाद गाडी एक आ म के सामने क . "ये जानते हए िक एक यि इतनी दूर से आपसे िमलने इसिलए यहाँ आया है िक उसको स यक ान िमले . वो ठीक है. "नह डे ज़ी. म से बताओ आप मु झसे या चाहती हो? " ान. "रघु. रघु ने दरवाज़े खोले.

डे ज़ी के कमरे म िभजवा दी. ज़रा रघु को बु लाइए. मने िफर शमा जी से कहा िक वो डे ज़ी को यहाँ बु ला ल. नहा धो के और भी खूबसूरत हो गयी थी. "डे ज़ी. और िब तर पर आराम से पाँव ऊपर करके ले ट गया. "नह गु जी. शमा जी ने रघु को बु लाया. खाना साथ ही खायगे. एक अपने िलए. तीन िगलास. और ' साद' भी ले ते आना" मने कहा. सलाद दे गया. रघु आ गया. मै अभी लगवाता हँ. बोला. "खाना आ रहा है. डे ज़ी और शमा जी आ गए. तीन थािलयाँ लगा दो. "जी गु जी. "न द आई तु मको? मने पूछा. मै उठ और नहाने िक तैयारी म लग गया. मने डे ज़ी को देखा. और साद का एक िगलास मं पढ़ के चढ़ा िदया. मेरे आते ही शमा जी भी नहाने चले गए! तब तक मने ३ कप चाय मंगा ली थी. थोड़ी देर बाद ठं डा पानी. आराम से खाना खाओ डे ज़ी!" "जी गु जी" उसने सर िहलाया. अ दर आते ही बोली" गु जी मु झे लगता है मै यहाँ पहले भी आ चु क हँ!" "अ छा!!!" मने कहा. मै बु ला के लाता हँ अभी. घरवाल क याद तो नह आ रही तु मको? मने कहा. मने पहले खाने म से एक टु कड़ा. "हाँ. कोई २ घंटे बाद मेरी न द खु ली. आई बहत अ छी न द!" उसने खु श होके कहा! "बहत अ छा!" मने कहा. और िफर खाना शु कर िदया! मने तीन िगलास बनाए ' साद' के.. एक शमा जी के िलए और एक डे ज़ी के िलए! 11 . खाना तो आप जानते ही है क या होगा! साथ म साद भी आ गया था! "मने रघु से खाना वही ँ रखने को कहा. मु झे यहाँ जाना पहचाना से लगता है" उसने कहा. मने कहा था उसको. "ठीक है गु जी. मै खाने के िलए आया था पहले ले िकन आप सो रहे थे तो मै वािपस चला गया" "कोई बात नही.." और वो चला गया. अ छा. एक लड़का आया और चाय दे गया. "डे ज़ी अपना सामान उठाइये आप और अपने कमरे म जाके आराम क िजये . मने डे ज़ी को कहा. कोई अखबार पढ़ रहे थे. खाना आ गया. मने कहा िक शमा जी. वो डे ज़ी को कमरा देने के िलए चािबयां ले के आया था. उसने खाना वही ँ रखा और बाक सामान ले ने िफर चला गया.थोड़ी देर म रघु आ गया. एक काम करो. नह आ रही मु झे याद" उसने हंस के कहा." और वो बाहर चले गए. शमा जी जाग गए थे. मने एक कम चाय.शमा जी आये और िफर हम दोन ने चाय पी और आराम करने के िलए ले ट गए. "हाँ गु जी. "ठीक है. नहाने गया और नहा कर वािपस आया. कुछ आवशयकता हो तो मु झे बता दीिजये या िफर शमा जी को" "ठीक है गु जी" उसने कहा और अपना सामान उठाया और रघु के पीछे चली गयी.

करीब ४ घंटे म हम वहाँ पहंचे! वहाँ इ का दु का इंसान ही आपको िदखाई दगे! िनतांत जंगल! अब पैदा-पैदल या ा करनी थी. डे ज़ी को यादा होने वाली है इसीिलए मने उसको मना कर िदया. हम सु बह म करीब ४ बजे काठु मांडू पहँच गए! वहां सु बह होने तक हम लोग एक रे टोरट म गए. और उसको ले टने को कहा! वोले ट गयी. भारत के अने क तीथ. मने दरवाज़ा खटखटाया. अपने जूते उतार कर अपनी एिडयाँ सहलाने लगी थी बेचारी! एिडयाँ लाल हो गय थी उसक ! करीब आधे घंटे के बाद मने उसको उठाया. "डे ज़ी तु म तैयार हो जाओ. वो बताती रही. मने रघु को बु लाया. व लभ नाथ के पास" ये िगरधर राज थान के एक सेठ ह. मने उस से पूछा. ये साधना ने पाल म होनी थी. मु झे आपके रहते कोई िचंता नह .टड पर ले आया. आज से तीन िदन बाद एक शव-साधना होनी थी. यहाँ आिखरी भारतीय भोज खाया! इसके बाद हम ने पाल म ह गे थोड़ी देर बाद! यहाँ डे ज़ी के कागज क जांच होनी थी और आवेदन भी करना था. और हम आगे बढ़ चले ! जंगली जानवर. पहाड़ी ही पहािड़यां. वो उठी और मेरे पाँव छू ने लगी. ने पाल म तं के िवशाल थल ह! ने पाल को आज अगर आप तं -भूिम कहो तो आज के स दभ म कहना गलत न होगा! व लभ नाथ ८० वष य अघोरी थे और वही ँ उनका एक आ म भी था. ये सब करने म पूरे दो घंटे लग गए! आिखर हम ने पाल म घु स ही गए 'िकसी' तरह! वहां से हम भैरवहाचौराहा पहंचे और काठु मांडू के िलए एक बस ले ली. और एक चादर िबछा दी. "रघु जब िगरधर आय तो उनको बोलना क मै ने पाल जा रहा हँ. दु गम पहािड़यां! पतली-पतली डगर! तु नक-िमजाज़ मौसम! एक िकलोमीटर क या ा कम से कम एक घंटे म होती है! वहाँ जाने के िलए ने पाल से जंगल के बाहरी छोर तक तो सवारी िमल जाती है ले िकन आगे का १२ िकलोमीटर का माग दु गम जंगल से होकर ही गु जरता है! मै सु बह उठा.थल पर इनक धमशालाएं ह. अटू ट िव ाश! थोड़ी बहत और बात हई और तरह से हम िफर अपने अपने कमरे म आराम करने चले गए! सौभा य से उसी रात मेरे पास मेरे दादा जी के एक िश य व लभ नाथ का फ़ोन आया. वहाँ से हमने एक वैन िकराए पर ली और सौनोली बॉडर क तरफ चल पड़े! हम सौनोली पहंचे. आमले ट खाया और अपनी कमर सीधी करने के िलए टेक लगा ली! करीब सु बह ६ बजे एक वैन िकराए पर ली और उसको कहाँ तक जाना है ये बता िदया. मने डे ज़ी के माता-िपता आिद के बारे म पूछा. ले िकन मने नह छू ने िदए! मने कहा. जंगली 12 . कभी उं चाई पर कभी ढलान पर! मै और शमा जी तो इसके आिद ह पर तु डे ज़ी नह ! एक िकलोमीटर के बाद ही उसक हालत प त हो गयी! मने उसको आराम करने क सलाह दी. िकसी क भी नह " वो बोली एक गैर-सं कृ ित क लड़क मु झ अनजान यि पर िव ाह िकये बैठे थी. इसीिलए वो यादा तंग नह करते! कुलका आिद क यव था रहती है वहां. और थोडा बहत ना ता भी िकया. शमा जी ने मदद क . जंगली झािड़याँ. काठु मांडू से ७० िकलोमीटर उ र म ये दु गम जगह पड़ती है. मने कहा.और खाना शु िकया! मने अपना िगलास ख़तम िकया! शमा जी ने भी और डे ज़ी ने भी! उस रात हमने अ छी तरह से खाना खाया. हमने वहाँ चाय पी. उनको पता होता है क ये लोग आराम करने के िलए यहाँ बैठे ह. मै अ सर यह ठहरा करता हँ. धमशालाएं चलाते ह. मने देखा वो भी जाग गयी है और िब तर पर ले ती हई है. गोरखपंथी ह. रघु आया. हम आज ही ने पाल जा रहे ह" "जी गु जी" उसने कहा और अपने कपडे आिद उठाने लगी! हमने चाय वगैरह इक े ही पी. हमारा बंध िवशेष होता है! आप समझ गए ह गे! रघु हमको गोरखपु र बस. और नहा धो के डे ज़ी के कमरे म पहंचा. बस आरामदेह थी और सफ़र भी ल बा था. उसक आँख चढ़ने लग थ . "डे ज़ी? तु म ठीक हो?" "हाँ गु जी.

"डे ज़ी? थक तो नह ? वो हंसी और बोली. मने वहाँ खड़े लोग को वहां से भगा िदया. गु जी यही तो है असली मानव-जीवन!" उसने मु कुरा के कहा! 13 . पसीने के मारे बु रा हाल था हमारा! ब ी आया और अपनी ही भाषा म बोला. ब ी तो नह आया. और या खु ले म ही नहाना है या?" मने कहा.काते आगे चलते गए. आधा रा ता ही पार िकया था! और ३ बज गए थे! रात से पहले पहले वहाँ पहंचना आव यक था! डे ज़ी क तो मानो जान ही िनकलने वाली थी! मने कहा. ब ी थोड़ी देर से आया. बस हम आ ही गए" और िफर कते. आपके रहते मै नह थकं ू गी" हम धीरे -धीरे आगे बढ़ते गए! ५ घंटे हो गए. वो चला गया ब ी को ले ने. गयी और वािपस आ गयी. " डे ज़ी अब तु म जाओ. मै पीछे खड़ा हँ" वो बोली. मै यह हँ. बढ़ते गए! िकसी तरह िह मत करके हम व लभ नाथ के पास पहँच गए! व लभ नाथ के यहाँ पहँचते पहँचते १० बज चु के थे! घु प अँधेरा! भयानक शाि त! बस वहाँ से आती िडिबया क रौशनी ही िदखाई दे रही थी. ने पाली देसी शराब पी रहे थे. "हाँ डे ज़ी. नहाओ अब" मने ये कह के अपना मु ंह घु मा िलया. अब मै वहाँ गया और नहाने चला गया. "बहत अ छा. ये ब ी बड़े काम का आदमी है. उनको मै भगाता हँ वहां से" मै उठा और और उसके साथ चल पड़ा. मने शमा जी से कहा िक वो जाएँ और नहा के आय. चलो मै चलता हँ. िटमिटमाती रौशनी! मै अ दर गया. मु झे देखते ही वो वहाँ से उठे और सर झु का के िनकल पड़े! मने एक चे ले से पूछा क व लभ नाथ कहा है? उसने बताया क वो पास के ही एक गाँव गया है. वो गए साबु न. नहा के आओ" वो उठी और अपना सामान िनकाला. " या हआ?" वो बोली. मने उससे कहा. उसने २० िमनट लगाए नहाने म! उसने कपडे पहने और मै उसको ले के वािपस झ पड़ी म आ गया. एक दूसरा चे ला आ गया. 'पहाड़ी के पार'.वातावरण! ये उसने पहली बार ही देखा था! मने डे ज़ी से कहा. मने अब डे ज़ी को कहा. िक खाने का बंध करो और ' साद' का भी! ब ी हंसा और नम ते के मु ा बना के चला गया! अब मै डे ज़ी िक तरफ घूमा! "डे ज़ी! कैसा लगा तु मको पहला िदन?" मने पूछा. व लभ नाथ के चे ल ने आदर-स कार िकया! अ दर एक झ पड़ी म ले गए! वहाँ २ चे ले और बैठे हए थे. मने कहा. पीछे िक तरफ नहाने का इंतजाम था. मु झे डर लग रहा है. "डे ज़ी अब नहा लो. मने उस से कहा क पानी का इंतजाम करो हमको नहाना है. कल सु बह आएगा! 'पहाड़ी के पार' का मै अथ समझ गया था! आइने कहा क ठीक है तु म जाओ और ब ी को यहाँ भे जो. आप यह खड़े रहो" "ठीक है. है तो गूंगा ले िकन व लभ के काम का और िव त आदमी है. " वहाँ कई लोग खड़े ह.. वगैरह िनकाला और चले गए. यहाँ आपको सु िवधाएं नह िमलगी. "गु जी आप मत जाइए. १५ िमनट के बाद आ गए. ब ी को भे ज दो यहाँ. "डे ज़ी िह मत न हारो. मने पूछा. अँधेरा है. नहाने के बाद आया तो मने ब ी को बु लवाया. "नह गु जी. मै समझ गया िक पानी का इंतजाम हो गया है. मने ब ी से कहा..

शमा जी खाना लगाइए. वो नीचे रख दे लकड़ी के एक फ े पर! और चला गया! मने शमा जी से कहा. म जानता था िक उसको कोई परे शानी हो गयी तो मु सीबत हो जाये गी! मने शमा जी को एक पानी का लोटा िदया और कहा िक आप डे ज़ी के हाथ धु लवा दीिजये! शमा जी उठे और डे ज़ी के हाथ धु लवाने बाहर चले गए. इसम भी वही सबकुछ था जो वो पहले लाया था! िफर थोड़ी देर बाद ब ी एक बोतल और दे गया! हम खाते रहे और पीते रहे . "देखो इस बेचारी को अपना घर-बार छोड़ के कहाँ जंगल म पड़ी है. क ड़े ह मकोड़े ह. ग े छोड़ के कहाँ घास म ले टी है" "ले िकन शमा जी. "डे ज़ी! आज रात यह रात िबतानी है हमको. शमा जी बोले . इसी एक िब तर पर! म छर ह. िडिबया िक रौशनी म उसके माथे पे आते पसीने मोती जैसे लग रहे थे! मने और शमा जी ने अपना काम ज़ारी रखा. मने िफर से एक बार देखा. एक चमचा और तीन कटोरे . मने िफर कहा. जानते हो यूँ?" "बताइये यूँ?" शमा जी बोले . वो भी आयगे रात को िब तर पर अपना थान घे रने !" मने कहा! "कोई बात नह . 14 . मु झे कोई डर नह . समझाना मेरा क य है मानना न मानना तु हारा िववेक" मने कहा. टमाटर और नमक रख के ले आया और नम ते करके बाहर चला गया! एक बार िफर आया और एक िडिबया और ले आया. और कहा. आप ह न मेरे साथ. मने डे ज़ी को उसका हाथ पकडवा के िलटा िदया. उसमे मछली थ . डे ज़ी के बाएं गाल से आती एक पसीने क धारा उसके ऊपरी ह ठ पर आ कर क गयी थी. "डे ज़ी अभी भी समय है वािपस जाने का! वािपस चले जाओ अपने संसार म!" "नह गु जी अब नह जाना मु झ"े उसने कहा! "जैसी तु हारी मज डे ज़ी. िकसी का भी!" उसने बड़े िन य के साथ कहा! आधे पौने घंटे के बाद ब ी एक भगोना लाया. मै जाते हए डे ज़ी को देख रहा था. मु झे मालूम है! मै इसको टू टने नह दूंगा. बेचारी डे ज़ी! शमा जी और डे ज़ी वािपस आये . मने अपना माल िलया और उसके इस पसीने को स ख िलया. मै जानता हँ तु म या कहने वाले हो!" "गु जी इस बेचारी क और परी ा मत लीिजये. चावल लाया और िफर दूसरा भगोना रख गया. साथ म चावल! पानी ठं डा तो था नह . डे ज़ी ने खाना खा िलया था और मने अब उसको और पीने को नह दी थी. और सांप-िब छू भी ह. घड़े का वािद पहाड़ी पानी था! ब ी बाहर गया और एक ले ट म थोड़े याज. ले टते ही वो सो गयी. ये बेचारी टू ट जाये गी" वो बोले ! "मु झे मालूम है शमा जी. इसने अभी तक हार नह मानी.मु झे थोड़ी हंसी आई. "डे ज़ी. आप िनि त रिहये !" मने कहा. "गु जी आपसे एक िवनती क ँ ?" मने कहा "बोलो. शमा जी उठे और भगोना खोला. शोरबे वाली! शमा जी ने वो तीन थािलय म डाल द चावल के साथ! इतने म िफर ब ी आया और एक बोतल और तीन िगलास दे गया! मने डे ज़ी को देखा. यहाँ कोई च मच नह िमले गी! हाथ से ही खाना होगा!" ये कहते हए मै हंसा ज़रा! डे ज़ी भी हंसी! मने तीन िगलास म शराब डाली और एक मं पढ़ कर गटक गया! मेरे बाद शमा जी और िफर डे ज़ी! रात गहराती गयी! हम खाना खा रहे थे! और पीते भी जा रहे थे! ब ी िफर से आया.

अपने सरं ण म! ी जगत-जननी है. डे ज़ी को िफर से ऐसी ही मदद देनी पड़ी जैसे क िपछली रात हआ था. अपने ज़माने म खूब नाम कमाया था. डे ज़ी अभी तक सो रही थी. जो क 15 . याद रखो जो ी का स मान नह करता वो इस पृ वी पर भौितक सु ख से वंिचत रहता है! इसीिलए शमा जी इसक परी ा ज़ारी रहने दो" खाना-पीना ख़तम हआ. मने एक व लभ के चे ले को बु लाया और उस से दोबारा पूछा क व लभ कब तक आएगा. मने उसको अने क जगली जड़ी-बूिटय के बारे म बताया. व लभ नाथ यहाँ पर तीन ि याएं करने आता था. बाहर मौसम बिढ़या था. और उसका एक बैग उसके िसरहाने रख िदया. मै याल म उलझा रहा और न द के आगोश म चला गया! सु बह ५ बजे न द खु ली मेरी. हालांिक मै शव-साधना स से पहले भी संपण ू कर चु का था और िनपु ण था. मने हाथ मु ंह धोये और िन य-कम से िनवृत होके आ गया. र ी-मा ु टी होने पर साधक भ मीभूत हो सकता है. दूसरा महामाया-तं और तीसरी ये शव-साधना. अगर . "हाँ इसको ये ही म है" शमा जी उसक तरफ देखते हए बोले ! "शमा जी. मने अपना हाथ उसके नीचे से आिह ता से िनकाला. एक तो कौला-तं . इस से तं क पराका ा बनी रहती है. मने ब ी को बु लाया और उसको पानी का इंतजाम करने को कहा. मेरे दादा ी का चे ला था और काफ मान करता था मेरे दादा ी का. इसका स मान शि का स मान है. मै देखा जाए तो यहाँ आता नह पर तु मु झे डे ज़ी को वािपस उसके संसार म पहंचाना था. मने . मै ऐसा सोच सोच के डे ज़ी को कई बार ऐसी क ि से देखता था. मने डे ज़ी को िदखाया! हम थोड़ी देर वहाँ बैठे. इसीिलए मु झे व लभ नाथ ने मु झे यहाँ बु लाया था. मने अपने हाथ से उसके बाल उसके चे हरे से हटाये . थोड़े देर म शमा जी भी सो गए! मै भी सोने क कोिशश कर रहा था. कपडे अ त. हम िफर से बाहर आ गए. ले िकन न द नह आ रही थी. ये मासूम सी लड़क आज वो सब देखने वाली थी."इसे ये लगता है क ये मेरे साथ हमेशा रहे गी. गु मनामी म ही मर जाती बेचारी! इसीिलए मने इसको अपने साथ रखा. तो ये िकसी अंडे-प डे के च कर म आ जाती.थली का मु आयना कर िलया जाए. हम नहा के. समझे आप?" मने कहा. उसको थोडा आगे सरका िदया. मीठे जंगली बेर िखलाये ! कुल िमला के वो बहत खु श थी! हम तीन एक शांत जगह जाके ठहर गए! दूर पहािड़य पर एक मंिदर बना था. शमा जी मेरे बगल म ले टे. वो मेरे से उ म काफ बड़ा साधक था. और मेरे हाथ म भी है! उसने उठाया और वयं देखा! हम आगे बढे . और अपने से उ म बड़े साधक का स मान तं म अित आव यक है. इसीिलए मै यहाँ आया था. वहाँ कोई १७-१८ छ पर वाली झ पिड़याँ थ . इसम गु क कायकुशलता ही सफलता का असली मूल मं है. कपडे पहन के िफर बाहर आ गए. इसका केवल शोषण होता! इसको कुछ नह िमलता. मने व लभ नाथ क इस गु ि या. मु झ पर बहत बड़ी िज मेवारी स प दी थी रिचयता ने ! थोड़ी देर बाद डे ज़ी पलटी मेरी तरफ और अपना सर मेरे बाजू पर रख िदया. शवसाधना अित-ती ण साधनाओं म से एक है. व लभ नाथ इलाहाबाद का औघड़ था. जैसे काशी वाले ने इसको बताया! या इसको कोई तांि क ले उड़ता. और िफर वािपस आ गए! वािपस आये तो बकरी का गरम-गरम दूध तैयार िमला! दूध पीकर हम अपनी झ पड़ी म चले गए. यिद गु स म है तो साधना पूण होगी अथवा साधक क मृ यु अव य भावी है. हमेशा.मै इसको नह िमलता अगर. मै डे ज़ी को लाकर िचंितत था. जैसे क मेरा हाथ उसने तिकये क तरह योग िकया हो! मै शांत ले टा रहा! उसके सु नहरी बाल उसके चे हरे पे आ गए थे. उसके अनु सार वो अपने िनजी सू से 'घाड़' का बंध करने गया है और आज दोपहर तक यहाँ आ जाएगा. मै डे ज़ी के साथ ले टा.य त थे. मेरे व लभ नाथ के साथ स ब ध सदैव ही मधु र रहे थे. उसने पानी का इंतजाम िकया अहम एक एक करके नहाने चले गए. उसके कपडे ठीक िकये और बाहर आया. सोचा इनको भी जगा ही िदया जाए! मने डे ज़ी और शमा जी को जगा िदया! वो उठ गए! मने उनसे कहा िन य-कम से फा रग होके चलो जंगल क तरफ! घूम कर आते ह! वो दोन फा रग हए तो हम जंगल क तरफ घूमने चल पड़े ! रा ते म एक पे ड़ मने डे ज़ी को िदखाया और बताया क ये ा का पे ड़ है! वही ा जो साधू-संत को वो पहने देखती है.

गु जी यिद इस अनु सरण म कह मेरी मृ यु भी हो जाए तो आप अपने म दोष का मम नह ले ना ये मेरा दोष होगा क मै आपके जैसे समथ गु के सरं ण के बाद भी इस िनयित पर पहंची. इसम म कोई मदद नह क ँ गा तु हारी. तो मने एक फक देखा. िकस वजह से. अपना ही िव है इनका िजसका िक ान बहत कम लोग को होता है. ले िकन मने ठान िलया था िक म आपके माग का अनु सरण क ँ गी चाहे कुछ भी हो जाए. मु झे ये बात अटपटी से लगी. वहाँ उनका अनु सरण क ँ . कोई एक आद ही िबरला होता है जो ये करने म समथ हो. मने डे ज़ी को देखा. कभी यहाँ. जब म पहली बार आपसे िमली थी. हाँ इतना समझ आया िक मै उनके पास काशी आऊं. और वो अगर कुछ करता भी है तो अपने भोगे भौितक सु ख के अभाव म वािपस हो जाता है. मु झे बताओ ज़रा?" मने पूछा. भि म लीन हो जाऊं. मु झे सब हैरत म डालने के िलए काफ था. मै आपक सदैव आभारी रहंगी. गु जी. अब यान से सु नो. उ नत शरीर और आधी कमर तक झूलते उसके सु नहरी केश! मै धीरे से आगे बाधा और डे ज़ी के पास पहंचा. तु म म कमठता है और ये एक ऐसा गु ण है तो सभी रह य िक कुं जी है!" "ध यवाद गु जी" "सु नो डे ज़ी. आगे कोई व त नह बचा है और मु झे अभी हाँ या न म उ र दो" 16 . वो मेरा होगा. कभी वहाँ! मने पूछा. मने िफर से उनसे पूछा. इन धम गु ओं िक तरह काशी आिद नह ? कोई िठकाना नह ? वो बोले हाँ.कई तं -साधक बीिसय वष क साधना के उपरा त भी नह देख पाते. ले िकन वो जोश और अपनी शान आिद के िलए आते ह. तु हारे आंस. आपने मु झे अपने साथ अपने सरं ण म िलया. ये संसार से लगा अपनी ही दु िनया म िवचरण करते ह. मै ये ान ले ना चाहती थी. मांसल बदन. मेरा िश य व ले ने से पहले तु मको अपना सव व मु झे स पना होगा. कोई िठकाना नह . यूंिक मेरे जैसे वहाँ और कई लोग ह. इसम वो सब था तो एक तांि क को सफल तांि क बना सकता है! मने कहा. बोलो डे ज़ी. वो चु प-चाप खड़े होकर दूर पहाड़ी पर बने एक छोटे से मंिदर पर नज़र गढ़ाए थी. वो भी मेरा होगा. िफर मने एक गे ए व -धारी धमगु से वातालाप िकया. ले िकन मेरी िजद के आए आपको झु कना पड़ा. "डे ज़ी मेरे पास बहत ी-पु ष आते ह. मने अंकल से आपसे दु बारा िमलवाने िक िजद िक. गु जी यिद मने आपका अपमान या आपके िव कोई काय िकया हो तो मै आपसे मा ाथ हँ" उसके इस वातालाप से मै भी स न रह गया. " या बात है डे ज़ी? िचंितत लग रही हो?" "नह तो गु जी. वो मेरी होगी. समझ लो. तु हारे दु ःख. तु मको वीकार है? सोच लो. ले िकन तु म म वो बात नह है. तु हारी यािधयां. गु जी. वो मेरा होगा. कुछ सोच रही थी मै" उसने कहा " या. ये आपक महानता है. तु हारा अि थ-िपंजर. मने ये िवचार अपने मन से िनकाले और मै डे ज़ी के पास गया. तु हारा र . आप तो शु से ही मना करते थे क नह . िचंितत नह . वो याज-लहसु न का भी सेवन नह करते. ले िकन उस िदन उ ह ने आपके िलए मांसाहार का भोजन बनवाया. ये गु जी कहाँ रहते ह? उ ह ने बताया कोई िठकाना नह . गु जी. खैर. चाहे ये क मृ यु तु य ही यूँ न ह . मु झे उसक कोई बात समझ नह आई. जो कुछ तु हारे पास रह जाएगा वो ये होगा. डे ज़ी क ल बाई कम से कम ५ फ ट ८ इच क तो होगी ही. तु हारा मांस. मै तो उसी िदन आपके पास रह जाना चाहती थी. वो मेरा होगा और तु हारा शरीर. वो राजी हो गए. मै ज़रा डे ज़ी क कद-काठी के बारे म आपको बताऊँ. मने देखा क एक तरफ तो १०० से अिधक गे ए व धारण िकये हए धम-गु ह और दूसरी तरफ आप. शराब मंगवाई. केवल अकेले ! और मेरे अंकल आपके साथ! वो बहत क र ह गु जी. मेरे दय म टीस उठने लगी. मेरी िज ासा और बढ़ गयी.ं ू तु हारे क . आपके जाने के बाद मने उनसे पूछा िक ये कौन थे जो सबसे अलग थे ? उ ह ने कहा िक ये हमारे गु जी थे. तु हारी सांस. ले िकन ये संभव न हो सका. साधक-सािधकाएँ बनने . "मै सोच रही थी. तु हारे रोग. और बोला.

ये कहते हए मने अपना बैग खोलते हए एक मानव-अि थय से बनी एक माला शमा जी के गले म पहना दी. ये आपके सु पु द है. शमा जी और डे ज़ी वही ँ झ पड़ी म बैठे हए थे िक तभी ब ी आया. "नह गु जी" उसने उ र िदया. "हाँ गु जी" उसने जवाब िदया! मने उसके सर पे हाथ रखा और उसको स क -बाधा से दूर रखने का मं अिभभूत कर िदया! "सु नो डे ज़ी. शमा जी ने मेरे पाँव छुए और मने उनके माथे पर िचता-भ म अलंकृत कर दी. "नह गु जी" उसने कहा.. मै. "डे ज़ी. हमने खाना श िकया."हाँ गु जी मेरा सव व आपका होगा. इसके िलए तैयार हो जाओ तु म. थोड़ी देर बाद ब ी २ शराब क बोतल दे गया. मु झे वीकार है" "ठीक है डे ज़ी आज रात एक शव-साधना है. अब तक कोई ११ बज चु के ह गे. मने उसको नम कार िकया और उसने भी. ' या तु मको योनी या गभाशय से स बंिधत कोई रोग तो नह ?" मने पूछा. "शमा जी आज ि या म मै आपको नह िबठाऊंगा.. "हाँ गु जी. डे ज़ी अगर ि या म कोई उं च-नीच हो तो तो कह मत भागना तु म सीधे शमा जी के पास ही जाना. आज जंगली खरगोश का मांस आया था. राि ९ बजे से ि या आर भ होगी. उसने इशारे से समझाया िक व लभ नाथ आ गया है. " या तु हारा कौमाय सु रि त है? मने पूछा. आपको डे ज़ी क सरपर ती करनी पड़े गी. शमा जी के आगे बढ़ा िदए! मने और शमा जी ने अपने िगलास ख़तम िकये . बाक काम मै कर दूंगा! मै वािपस अपनी झ पड़ी म आ गया. डे ज़ी ने भी ख़तम िकया. सु रि त है" " या भिव य म तु म मम व धारण करना चाहोगी? मने पूछा. त य म से यिद एक भी झूठ हआ तो मै तु हारा प र याग कर दूंगा. मने तब शमा जी को कहा. मने डे ज़ी से कहा. तु हारे वहाँ बैठने से पहले मै तु मको पहले कुछ बता दूँ डे ज़ी. अब तक ब ी खाना ला चु का था. मने शमा जी को कहा तो उ ह ने खाना तीन थािलय म दाल िदया. नज़र नह हटाना. मु झे बताओ या तु मको योनी. थोडा सलाद आिद भी दे गया था. " या यिद मै चाहँ तो तु मसे रमण कर सकता हँ? मने पूछा. मने तीन के िगलास म शराब डाली और मने तीन िगलास अिभमंि त िकये औए डे ज़ी. घड़े का पानी. मने उस से पूछा िक या 'घाड़' का बंध हो गया? उसने हाँ कहा और मने उसको समय बताया िक तु म उसको यहाँ रात ८ बजे तक मंगवा ले ना.ाव तो नह हो रहा? मने पूछा. तु म मु झे नह करोगी. "नह गु जी" उसने कहा. उपरो कैसे? मने कहा. और डे ज़ी से कहा. मेरी आँख म आँख गधा के बोलना. मै उठा और व लभ नाथ के पास उसक झ पड़ी म गया. ले िकन उसक 17 . आज मेरे साथ डे ज़ी बैठेगी. यूँ और "ठीक है गु जी: उसने कहा और मै उसको अपने साथ वािपस ले के उसी झ पड़ी म आ गया. यान से सु नना. इस तरह हम खाना ख़तम करते करते डे ढ़ बोतल ख़तम कर चु के थे.

मु ग क कले जी से माला बना कर उसको सु शोिभत िकया! और िफर उसको िबठा िदया! अब िफर से म का उ चारण आर भ हआ! हम एक एक मं उस 'घाड़' के आस पास नृ य िकये जा रहे थे! अव था म पढ़े जा रहे थे और अभी उसके १०१ ंग ृ ार बाक थे! हम हर एक प र मा पर उसका एक ंग ृ ार करते जा रहे थे! ये ि या उसमे दु बारा से ाणसृजन करने या फूं कने के िलए क जाती है! इसम हम उसको एक कड़ी बनाते ह जो दोन लोक म एक संदेशवाहक क तरह से काम करता है! हमे उसके पूण १०१ ंग ृ ार कर िदए! उसके नथु ने चौड़े होने लगे. फर मने शमा जी से कहा. लगोट धारण कर िलया था. ये प च-त व होता है. २१ काले मु ग आिद का बंध करवाओ. मने वहाँ आये 'घाड़' को देखा. आ ा क देर थी अब शेष! िफर मने और व लभ ने सारे मु ग बिल चढ़ाए और उनके र से 'घाड़' को ले प िकया. मं ाहती से उसका पूजन िकया. सप-दंश से मृ यु न हई हो. और हम र -पान कर गये ! िफर मने एक एक पा र का शमा जी और डे ज़ी को भी िदया.तैयारी हमे ७ बजे से करनी होगी" "जी गु जी" डे ज़ी ने कहा. ी का शव न हो. उनका र एक कु ड म एकि त करते जा रहे थे और देवी के ख पर म भी डालते जा रहे थे! एक एक करके हमने सभी क बिल चढ़ा दी! सभी मेढ़ क पहले पूजा क जाती है तािक वो हर कार के भय और रोग से दूर हो जाएँ ! चे ले उन मेढ़ का मांस ४ बड़े बड़े थाल म इक े िकये जा रहे थे! शमा जी और डे ज़ी वहाँ आये . उसनके चे ले एक एक मेढ़ा लाते जाते और मै और व लभ उसक बिल चढ़ा देते.ितमा के दशन हे तु गया. कण-िछ ण न हो. आँख डबराने लग ! थम चरण संपण ू हआ! मने वहाँ से र का एक याला भरा और अपने झ पड़े म पहंचा. कुपोिषत न हो. उ ह ने ने भी र -पान कर िलया! इसके बाद उस 'घाड़' को वहाँ लाया गया! अब उसका पूजन होना था! 'घाड़' को अ दर लाया गया! उसे मालाएं और र क छ ट से व छ िकया गया! िफर मने वहां से सभी को केवल व लभ नाथ के अित र जाने को कहा. उ ३५ से अिधक नह होगी. अँधा या काना न हो. मने उसके मु ंह म अपना थूक डाल के उसका मु ंह बंद कर िदया और म से सीिचत करना आर भ िकया. शरीर का अंग-भंग न हो. प च-त व पु नहजागृत करने पड़ते ह. य घंट योग समा है" शमा जी उठे और व लभ नाथ के झ पड़े म चले गए! शाम हई. मु ंह म संपण ू द त-माला हो. ये 'घाड़' अिधक वयो-वृ न हो. शमा जी के कहे अनु सार सारा बंध हो चु का था. वयं न न हआ और उसके सीने पे जा बैठा. मेरी ि या पूण हई! अब व लभ नाथ ने उस घाड़ को पे ट के बल िलटाया और न न हो कर उसक पीठ पर बैठ गया! उसने एक हथोडी और क ल से उसके कपाल म एक क ल ठ क और बहार िनकाल ली. 18 . अ -श से मृ यु न हई हो! इसम व लभ नाथ िनपु ण था! उसका लाया हआ 'घाड़' संपण ू था! अब साधना समय समीप था. दरअसल शव-साधना करने से पहले 'घाड़' का अवलोकन करना आव यक ही नह परम आव यक होता है. शमा जी और दजी को भी वही ँ बु ला िलया! मै और व लभ जलती अलख के सम मं पढ़ रहे थे. िफर उसने मु ंह लगा के उसमे अपना थूक िव करा िदया! उसको पूरे ४० िमनट लगे! हमने देवी-पूजा आर भ क . मने घाड़ के सारे कपडे बांध खोले . नपु ंसक न हो. मै व लभ नाथ के साथ देवी. िवकलांग न हो. मने और व लभ ने देवी के ख पर म से पहले र क एक एक बूंद से एक दूसरे को ितलक िकया और िफर मने एक एक बूँद से डे ज़ी और शमा जी को भी! िफर व लभ ने मु झे और मने व लभ को एक एक पा र का देवी के ख पर म से पान करने हे तु िदया. 'शमा जी व लभ नाथ से बोलो ११ मेढ़ का बंध करो. कोई सड़ता ज़ म न हो. मै अ दर मने शमा जी को कहा.

मने र से एक िनशान बना कर उसक कमर पर बना िदया. व लभ ने अपने चे ल को भी सीमा मे बाँध िदया था और मै अभी बाँधने वाला था डे ज़ी को! मने अपना िचमटा उठाया. मने उसका हाथ अपने घु टने से हटा िदया! 19 . उसने व उतारने आर भ िकये . ६ मेढ़ के सर और २ थाल मांस के भर के रखे थे! िचता हमारे सामने ५ फ ट दूर रखी थी. तेज-तेज सांस! वो छटपटाया! करवट बदलता रहा. "अपने बाल खोल दो" उसने बाल खोल िदए. "शी करो डे ज़ी" मने कहा. मने अि थ-मालाएं वयं भी पहनी और उसको भी पहना द ! "सु नो डे ज़ी. अब मने अपनी लंगोट खोली. "पीछे घूमो" मने कहा. कला-वणक कमर म धारण िकया. मने डे ज़ी से कहा.शमा जी आप व लभ के चे ल को िदशा-िनदश द क वो एक स ी-िचता बनाएं . उसने उतार और पूण न न हो गयी. मने उसको कहा. कान खु ले रखना. वो पीछे घूमी. अब मै और डे ज़ी ि या. और उस पर उस 'घाड़' को दि ण िदशा क तरफ सर ऊंचा करके जीिवत यि क तरह मु ंह करके उस पर िलटा द! शमा जी वहां से उठे और बाहर चले गए. मेरी ओर न देखना" ठीक है गु जी" उसने कहा. िचता के चार ओर र -सीमाबंध ख च जा चु का था. उसको शि ओं को समिपत कर मने डे ज़ी को दे िदया पीने िकये ! उसने याला िलया और पी गयी! व लभ नाथ ने और मने एक एक नी बू काट के आदान. ले िकन अभी अि न-कम नह हआ था. "अपने व उतारो" मने कहा. मने एक याले म अपना हाथ काट के थोडा र डाला और थोड़ी सी भ म डालकर. मने उस याले म िचता-भ म िमलाई और उसको उसके सारे शरीर म मल िदया.दान िकये और ि या आर भ हो गयी! मै और व लभ उठे और उस िचता के आसपास म का जाप करने लगे! हम च कर लगा-लगा के ये जाप करते जा रहे थे हम! जैसे जैसे जाप बढ़ते गय 'घाड़' म सांस चलती गयी. और भ म का ले प कर िदया. जैसे ही वो उठता मै अपना िचमटा उसके सर पे दे मारता! वो िफर नीचे िगर जाता! अगर वो पाने दोन पाँव हवा म उठाता तो व लभ उसको अपना िचमटा मारके नीचे कर देता! और जब वो हरकत नह करता तो मै उसके पे ट म अपना ि शूल घ पता! वो उठता तो मै िचमटा मारता! दर-असल उसको हमने तब तक नह बैठने देना था जब तक क हमारे मं पूण न हो जाएँ ! मं पूण होने से पहले यिद वो उठ गया तो साधना असफल और आपक मृ यु िनि त है! करीब आधा घंटा बीत गया! मं पूण हए! अब वो 'घाड़' उठ के बैठ गया! उसने सभीको देखा! डे ज़ी ने डर के मारे मेरे घटने पर हाथ रख िदया. दु बारा सु नने का अवसर नह िमले गा.थल के िलए चल पड़े ! जब मै ि या थल पर पहंचा तो व लभ नाथ ने साड़ी ि याएं िनबटा ली थ . मं पढ़ा और डे ज़ी को उस घे रे म बाँध िदया! मेरे सामने एक चाक़ू. उसमे पानी िमला कर. ११ नी बू. "डे ज़ी वो घडी आ गयी है िजसका तु मको इंतज़ार था! अब खड़ी हो जाओ" वो खड़ी हो गयी. जो आँख के सामने हो उस से नज़र न हटाना. व लब के २ चे ले उसके सीधे हाथ पर और डे ज़ी मेरे उलटे हाथ पर बैठी थी. जैसा मै कहँ वैसा ही करना.

शराब पीता जाता और रखता जाता! हम(मै और व लभ) उसक बची शराब उठाते और मु ंह लगा के पी जाते! वो हँसता और आँख बंद कर ले ता! उसने िफर दु बारा जैसे ही एक मेढ़े का सर उठाया तो मने उसका हाथ पकड़ िलया! मने पूछा. "डु कास" व बोला. अब म और व लभ उठे और उसको पकड़ के उठाया. वहां से भागने क कोिशश करी ले िकन प रसीमन से वो नह िनकल पाया! हमने उसको वही ँ छोड़ा और अपनी जगह आ गए. ेन-वाश स मा जी कर ही चु के थे! डे ज़ी 20 . तभी वो आया और उसने डे ज़ी का हाथ पकड़ा और ख च िलया! डे ज़ी बेहोश हो गयी! बेहद खतरनाक ि थित थी. वो अपने साथ डे ज़ी को भी ख च रहा था िचता म बैठने के िलए! मै उठा और अपना हाथ काटा. मं पढ़ा और र -रं िजत हाथ से उठायी एक जलती हई लकड़ी और उसके सर पे दे मारी! उसने उसे छोड़ा! उसके सारे शरीर म आग लग गयी! मने डे ज़ी को उठाया और अपने घे रे से बाहर फक िदया! इसीिलए मने शमा जी को कहा था. जो कोई भी गु नह बताता! िविधयां! मं ! अघोर िव ाएँ ! परम अघोर िव ाएँ ! वो बोलता हम कंट थ करते जाते! कोई ४ घंटे के बाद हमने उसक इह-लीला समा करने क सोची! और मं -जाप से हमने उसको हमेशा-हमेशा के िलए सु ला िदया! अब उसका पूण दाह-सं कार आव यक था! सो िकया! मै और व लभ वही ँ थक के िगर गए! २ घंटे मं जाप के उपरा त हम उठे ! गले िमले ! और िफर तांि क-अनु ान आर भ िकया! क चा-मांस और मिदरा भोग! ये समापन ि या थी! शव-साधना संपण ू हो चु क थी! तदोपरांत मने और व लभ ने चाक़ू से अपने हाथ काट के एक-दूसरे का र -पान िकया! ये इसका िनयम है! ये करना पड़ता है! ये दो अघो रय क संिध है! हम वािपस अपने अपने झ पड़े म आ गए! डे ज़ी को होश आ गया था! वो डर गयी थी. "िबजनाऊ" "क ले मरा?" मने पूछा. मु झे घूरा." ***// ***//** " वो मेरे सामने िटक गया! आलती-पालती मार के बैठा. और मांस उठाया और िफर खाने लगा.'घाड़' िचता से उतरा और धीरे धीरे चलता हआ व लभ के पास पहंचा. ज़मीन पर जो भे जा िगरता उसको वो चाट-चाट के खाता! उसने वहाँ रखे र के याल को भर-भर के पीया और शराब पी! िफर वो ज़मीन पर बैठे-बैठे ही मेरे पास आया. र िलया. वो उसको उठाता और खा जाता! अब मै और व लभ उठे और मं व िचमटे. वहां जाके िगर गया. " या नाम है रे तेरा?" वो बोला. ि शूल से मारते मारते िचता म िलटा िदया! और उस से वो पूछा. मने अपने िचमटा उठाया और बोला. शमा जी दौड़े और उ ह ने डे ज़ी को उठा. कंधे पर िटकाया और उसको वहाँ से ले गया! अब नाच नचाना था इस 'घाड़' को! वो हंसा और भागते हए शमा जी क तरफ अपना जलता हआ मांस उलीच-उलीच कर फकता रहा! ले िकन प रसीमन पर टकराते ही उसका मांस िगर जाता था. वो उठा और पीछे हट गया! व लभ और मने िचता म आग लगा दी! उसने पीछे देखा. व लभ ने उसके पाँव म िचमटा मारा! वो उठा और िफर पास रखा मांस िनगलता चला गया! उसने मेढ़ से सर के दो दो टु कड़े िकये जैसे क हम अम द को फोड़ते ह अपने हाथ से.

कोई १५ िमनट के बाद वो संयत हई! मने उसके चे हरे को दोन हाथ म िलया. और िफर िम ो. मेरे पाँव छुए अब क बार मने अपने पाँव नह हटाये! वो खड़ी हई और िफर फू ट-फू ट के रोने लगी! मने उसके आंसं ू अपने हाथ से साफ़ िकये ! उसने शमा जी के पाँव छुए और अपनी लाइट के िलए मु ड़ गयी! और िफर २ िदन के बाद उसका फ़ोन आया! वो ३ महीन के बाद दु बारा आएगी मेरे पास! और आती रहे गी हमेशा! केवल िमलने के िलए! 21 . बस िससिकयाँ ले ती रही. िफर मै और शमा जी उसको एयरपोट छोड़ने गए! सारा सफ़र वो रोती रही. इसीिलए मै शांत हो गया" त िकया व लभ ने डे ज़ी के सर पे हाथ फेरा और बोला. और बोला. बोलो? बोलो सब ख़तम. वो उठी. वो कुछ कहना चाहती थी. मने भी उसको नह रोका. "बोलो सब ख़तम डे ज़ी. ले िकन मु झे तु हारे गु जी ने आ था. डे ज़ी मेरे साथ वहाँ १० िदन रही. "डे ज़ी सब ख़तम. "हाँ गु जी सब ख़तम. "बेटी मै नह चाहता था क तु म वहाँ बैठो. वो डे ज़ी को कुछ नह होने दगे. इस काम के िलए वो वयं चयन करता है" 'जी गु जी". िफर अगले िदन िद ली के िलए गाडी पकड़ ली! हम िद ली पहंचे.उठी. अगले द हम वहाँ से गोरखपु र के िलए कूच कर गए! गोरखपु र पहंचे. बोलो डे ज़ी???????????" मने िच ला के बोला. ले िकन वो कह नह सकती थी! यूंिक अब ' यूँ' और 'कैसे' बेमायनी और अनौ यापूण थे ! डे ज़ी क लाइट का समय हआ. सब ख़तम" उसने जवाब नह िदया. िच ला के मेरे से िलपट गयी! दहाड़ मार-मार के रोने लगी! उसक मै चाहता था क उसका सारा अवसाद उसके मन से िनकल जाए! लाई बंद नह हो रही थी. एक रात ठहरे . उसने कहा. "बेटी ये संसार अनूठा है. सब ख़तम हो गया" वो ये कह के िफर से रो पड़ी! इतने म वहाँ व लभ आ गया. रिचयता क मज के िबना कुछ नह होता. बोला.

भागे इधर-उधर. वो ही ले गए थे. वो चंडीगढ़ म प रवार सिहत रहता है और कोई ८ िदन पहले उसका फ़ोन आया था अवधे श के पास. मने उनको देखा तो पूरे सीधे पाँव म प ी बंधी हई थी. उनका पूरा प रवार जमशेदपु र म रहता है मेरे उनके साथ अ छे स ब ध ह. टेबल पर रखा और काम शु हो गया! बात ही बात म उ ह ने एक िकसी नवीन शमा का िज िकया. िबहार. एक दो बार उनसे कोलकाता म भी मु लाक़ात हई है. "खैर छोिडये . मै सीधा उ ही के पास गया था और जो प रिचत मेरे साथ आये थे वो िपंड-दान करने गया जी मंिदर चले गए थे. "तो कोई बात नह . "बस हमारे यहाँ नह चढ़ता बकरा. एक जानकार थे. उ ह ने मु झे बताया िक नवीन का अपना वहाँ कपडे का यवसाय है. तब उ ह ने आवाज़ लगाई ं. रहने वाले वो वैसे झारख ड के ह ले िकन अब वो गया म ही रहते ह. काम होने के बाद वायदा याद नह रहा और झे लना पड़ा इनको! "यही होता है जब लोग अपना काम करा के भूल जाते ह. गया म मेरे एक और प रिचत कापािलक ह. काम होने के बाद कालीघाट कोलकाता म एक बकरा ले जाना. मु झे झे लना पड़ा!" " यूँ नह गए?" मने पूछा. " ये या हआ आपको?" "बस या बताएं आपको. उनके संगी-साथी ही उनक टहल कर रहे थे. लोग क दी हई मार है. उनक लड़क क एक टांग म एक ज़ म हो गया था. झे लना हमको पड़ता है!" वो बोले ! "ऐसा या काम था और या वायदा?" मने पूछा. अवधे श कुमार. 1 . आ गए इधर. आप कैसे इधर आज?" "िद ली से आये ह कुछ लोग िपंड-दान करने उनके साथ ही आया हँ" मने बताया. लोग काम तो करा ले ते ह ले िकन िफर वायदा पूरा नह करते . कोई काम िकया होगा िकसी का. साहब लोग ह" दीपू ने कूटी टाट क और चला गया! थोड़ी देर म 'सामान' आ गया! अवधे श साहब हमको अ दर ले गए अ दर ले जाके ि ज से बफ िनकाली. ज दी क रओ. उनका काम कर िदया. वो आये थे िकसी के साथ. रात हो जाये गी उनको" वो बोले . "जमशेदपु र के एक थे सु शील.वष २००८ चंडीगढ़ क एक घटना अग त के िदन चल रहे थे. बस उसी का नतीजा है ये सब!" मै समझ गया. मै जब अवधे श के पास पहँच तो उनक तिबयत काफ खराब थी. मने कहा था. सो मै और शमा जी वहां बैठ गए. उसने कुछ वायदा िकया होगा. मने उनसे पूछा. मेरी जब उनसे मु लाक़ात हई तो उस व त वो बैठे हए थे अपने बगीचे म. नह ले गए. "ओ दीपू? जा सामान ले आ. ऐसा बोले " वो बोले "आप पहले बता देते ना उनको" मने कहा. ले िकन कोई ६ महीन से उसका काम ठ प हो गया था. अवधे श ने उसको अपने न आने का कारण बताया और मेरा िज िकया था नवीन से. दीपू िगलास लाया और अवधे श साहब ने काम करना शु का िदया! उ ह ने 'सामान' का पैकेट खोला. गया हआ था. डॉ टस ने काटने क बात कही. मौिसम बा रश का हो रहा था! मै शमा जी के साथ उन िदन गया. आजकल तो भीड़ है वहाँ. उनको खबर िमली क िद ली से आये ह कोई तो उ ह ने फ़ौरन ही हमे बु लवाने के िलए अपने साथी भे ज िदए! वो हमे अ दर बगीचे म ले के गए! ३-४ कुिसयाँ लगी हई ं थ पहले से ही वहाँ.

तभी इ होने हाँ क है."हाँ साहब. जब वािपस आया तो चाय भी आ चु क थी!चाय पी और हम दोन बाहर बगीचे म आ गए! अवधे श वही ँ बैठे हए थे. िद ली वाले जब आये तो वो भी 'सामान' ले कर आये थे! मने उनका प रचय अवधे श से करवाया. दूसरी तरफ से फ़ोन क घंटी बजी और फ़ोन नवीन ने उठा िलया. "हाँ िमल गया. ७ बज गए थे! अवधे श ने कहा. गया जी मंिदर से फ़ोन आया िक वो रात ८ बजे तक िपंड-दान कर दगे. मेरी बात हो गयी थी मने फ़ोन अवधे श को पकड़ा िदया. आपको तो पता ही है. आज रात यह ठहरो और िव ाम करो. को ज़रा" ऐसा कह के उ ह ने फ़ोन मु झे थमा िदया.िपताजी क तिबयत खराब हो गयी थी और उनके इलाज म कोई १० लाख पये व लगा चु का था. अवधे श बोले . साल म एक बार ये दोन भाई यहाँ आते ह िमलने. एक वष और है अभी. मने भी नान करने के िलए अपना तौिलया उठाया और नान करने चला गया. एक एक कप चाय और मंगा दी और साथ म ना ता भी! मने अवधे श से कहा. वो भी यह ठहर जायगे. तब जाके पूण हो जाये गी!" मने कहा. अब या है क मै तो वहाँ जा नह सकता इसीिलए मने उसको आपके बारे म बताया था. िफर आपसे बात क ं गा." मु झे ऋिष ने बताया था क आपक काम या म ' ी कपालमोचन -साधना' पूण हो गयी है?" "हाँ. हाँ नवीन साहब. कुल िमला के प रवार म अचानक िवपि टू ट पड़ी थी. बोले . णाम" ऐसा कह के उ ह ने फ़ोन काट िदया और मु झे वो नंबर नोट करने को कहा. नवीन ने कहा क ठीक है. मु झ. मने बात क . " हे लो. (उसने णाम िकया) हाँ. रहाइश कम थी उस इलाके म. आदर स कार हआ और िफर एक दो जाम उनके साथ भी चले ! रात हई तो अवशेष साहब ने खाने का इंतजाम भी करा िलया था! उ ह ने पहले िद ली वाल से पूछ िलया था िक भोजन सािमष चले गा या िनरािमष. आने वाली होली पर संपण ू हो जाये गी!" मने kaha और इसके बाद हम खाते-रहे और पीते रहे . "सु नो नवीन. सु कून देती है" वो बोले . िद ली वाले अपने अपने कर म जाके िव ाम करने चले गए! सु बह मेरी न द खु ली तो शमा जी नान करके आ चु के थे. मु झे अभी इ होने आपके बारे म बताया है. उसक बीवी भी बीमार थी. वो तो हमारा और इनका आपसी मेल-जोल है.े इनक िखदमत म क कमी हई है. "अरे साहब! जब दावाज़ा िमल गया. तो ताला खोलने म या देर?" वो हंसके बोले ! "हाँ. मने शमा जी को कहा और शमा जी ने वो नंबर नोट कर िलया. नम कार हई और हम भी वही ँ जाकर बैठ गए. िक उनको भी यह बु ला लो. ऐसी कोई िशकायत नह िमलनी चािहए. कहाँ होटलवोटेल के च कर म पड़गे वोलोग! मने शमा जी से उनको फ़ोन करने को कह िदया और उनको भी यह आने क सलाह दी! रात करीब साढ़े ९ बजे िद ली वाले लाला लोग नही आ गए वही ँ! अवधे श का ये िनवास काफ बड़ा और ज़रा शहर क िच लप से दूर था. इतने म िद ली वाले भी आ गए. ये जो हमारे साहब ह ये िकसी के लाख कहने पर भी काम नह करते. दौर िफर से शु हो गया! अवधे श बोले . "ये जगह बड़ी खूबसूरत है. चाबी आपके हाथ म है. मने वो पूण कर ली है" मने कहा. ठीक है? हाँ. अवधे श ने कहा. "ये नवीन इमानदार आदमी है. बहत आपा-धापी कर ली 2 . पीछे क तरफ एक बड़ा सा तालाब था और सामने बाज़ार को जाती एक सड़क. " साद िमल गया?" उ ह ने पूछा." हाँ नवीन! णाम! ऐसा है मने तु मको अपने एक िद ली वाले साहब के बारे म बताया था. आज सौभा य से वो यह आये हए ह. उ ह ने िनरािमष ही कहा तो िनरािमष भोजन आ गया था! सभी ने िमल बैठ के खाया! देर रात तक बात होती रह और मै और शमा जी. ठीक है?" मने कहा. मै उसको अभी फ़ोन करता हँ ठह रये !" ये कह के पहले उ ह ने अपना िगलास खाली िकया और िफर नवीन को फ़ोन िमला िदया. मै तु हारी बात कराता हँ उनसे. मेरे संपक म कोई १० साल से है इनके बड़े भाई अ बाला म रहते ह वो भी इमानदार आदमी ह. मै कल या परस म िद ली पहँच जाऊँगा. जब मै िद ली पहँच जाऊं तो नवीन को फ़ोन कर दूँ.

अभी तो काफ काम बाक है!" मने कहा.िजस से कोई िववाद उ प न हो! तब मने नवीन को घर से एक रोटी बनवाके मेरे पास लाने के िलए कहा.एक साथ प रवार पर संकट आ गया है और ये उसक समझ से बाहर है. मानव जीवन है. नवीन ने रिववार को रोटी लाने को कह िदया. ये सब तीन महीन के अ दर ही हआ है. उ ह ने कहा क कल िदन म नवीन से बात करते ह क उसके साथ या सम या है. िजस िदन नवीन ने ऐसा कहा था उस िदन शु वार था! मु झे नवीन क कोई सम या इतनी बड़ी नह लगी थी. उसको डॉ टर को िदखाया गया तो डॉ टर ने बताया क काम क अिधकता से ऐसा हआ है. ऐसा मने सोच. ले िकन कोई फायदा नह हआ है.योग आिद का पता चल जाता है. रोटी मेरे हाथ म आई तो मने उसके २ टु कड़े िकये . तं . मामला अजीब सा लग रहा था. अब बहत हआ" वो बोले . काम चौपट हो चु का है.पता चल क नवीन क आिथक ि थित लगभग ३ महीन से डांवाडोल है और घर म उसके िपताजी क तबीयत काफ खराब रहने लगी है. प रवार का कोई िकसी से झगडा आिद नह था. उसको भी वही ँ सब ल ण ह जो क उसके िपताजी के थे. दोन को एक से ल ण ह! जबिक प रवार के इितहास म ऐसा कभी नह हआ! नवीन के प रवार के बारे म मने और अिधक जानकारी मांगी. और इस बहाने नवीन से भी मु लाक़ात हो जायगी. घरे लू सम याएं और हारी-बीमारी तो चलती रहती ह. रिववार कोई २ बजे नवीन अपने कहे अनु सार एक रोटी ले कर आ गया. िजसको या तो अिभमंि त िकया होता है या िफर कुछ अिभमंि त िमला िदया जाता है! शिनवार बीता और रिववार आया. "नह साहब.उनको अधरं ग हो गया है. इस से घर म िकसी भी कार के टोन-टोटके. बीच म खाना खाया और चल पड़े िफर से िद ली िक ओर! थके-थकाए िद ली पहंचे. ले िकन उनका नवीन के साथ स ब ध केवल तीज. इतने म ही ना ता आ गया और हमने ना ता कर िलया! थोड़ी देर बाद अवधे श जी से बात हई ं और वापी िक आ ा ली! हम करीब १० बजे वहाँ से िनकल पड़े थे! रा ते म. तो नवीन ने बताया क उसके २ भाई और ह. सद गम क तासीर तो झे लनी ही पड़ती है! शमा जी ने सु झाव िदया क कल सु बह नवीन से बात करगे! इसके बाद मने और शमा जी ने अलख को भोग िदया और सोने के िलए चल पड़े ! सु बह कोई ११ बजे शमा जी ने नवीन को फ़ोन िमलाया.िजंदगी म अब तो रटायरमट का समय आ गया है!" "अभी कहाँ रटायरमट अवधे श जी. सूंघ कर देखा तो लोहबान और गु लाब इतर क खु शबू आई! अथात ये कोई मु ि लम ताक़त थी! यही नवीन क आिथक और पा रवा रक संकट का कारण था! मने नवीन को नह कहा कुछ भी. या कभी-कभी यि को पता नह चलता और वो िकसी के िव ाश म आके कुछ खा-पी ले ता है.योहार तक ही स बंिधत है. इसी कारण उसके करीब १२ लाख पए लग चु के ह. प रवार म दो सद य अचानक बीमार हो जाते ह. काला तर म नवीन के िपता जी ने संपि का बंटवारा कर िदया था अपने जीते जी. लाला लोग ने हमको हमारे थान पर छोड़ा और उस रात शमा जी वही ँ ठहरे ! मने उनसे नवीन के बारे म बात क . वो अपने िपताजी को िद ली तक िदखा चु का है. कभी-कभार यि गलती से िकसी गलत जगह पाँव रख देता है. मु झे भी नवीन के बारे म ऐसा ही लगा था.शमा जी ने करीब १५ िमनट उस से बात क . िकसी और क िवपि याँ अपने घर म आमंि त कर ले ता है. उसक २ लड़िकयां है. अभी वो िपताजी का इलाज करा ही रहा था क उसक प नी को भी ऐसी ही परे शानी हो गयी है. बड़ी लड़क ने फ़ोन करके बताया िकवो एक िदन कॉले ज म बेहोश हो गयी थी. ले िकन दोन लड़िकयां ही घर म नह रहत वो पूना म कह पढाई कर रही ह. बस ये ही कहा क कोई 3 . नवीन ने फ़ोन उठाया.

इसम कोई संदेह नह क नवीन के घर पर कोई साया है!" "कैसा साया गु जी?" वो बोले ." नवीन बोल नह पा रहा था. "जी. ये बात तो है. "मै बताता हँ आपको नवीन जी.... एक मु सलमान लड़के से ेम करती है.बात नह . हआ था!" "िकस वजह से हआ था? शमा जी ने पूछा.आपने हमसे काफ -कुछ छुपाया. और मु झे कह से भी ये तेज-तरार नह लगा" शमा जी ने कहा. मने उनको सारी बात से अवगत करवाया! शमा जी भी अवाक रह गए! शमा जी ने कहा िक मै अभी फ़ोन करता हँ नवीन को! उ ह ने नवीन को फ़ोन िकया! फ़ोन नवीन ने ही उठाया.. "हाँ ये बात तो है शमा जी. तो उ ह ने रात को नह आने को कहा.. मै आपसे पूछना चाहँगा िक यूँ?" शमा जी ने पूछा. कह नवीन या उसके घर के िकसी सद य से ही कोई गलती न हई हो" मने बताया. लड़के का नाम रजवान है. नवीन थोड़ी देर का और बोला. कृ पया आप मु झे बताइये?" नवीन ने हैरत से पूछा..... मने वो रोटी के दोन टु कड़े उठाये और अ दर अलख के कमरे म रख िदए..... नम कार वगैरह हई और उसके बाद शमा जी ने असली बात कही! "नवीन जी. "मने या नह बताया. चिलए आज रात को देखते ह िक इसक वजह है या?" उस िदन शमा जी के घर म उनके कोई र तेदार आये हए थे. "कोई है घर पे सम या. "शमा जी. बोिलए. "जी मने कोई बात नह छुपायी? जो था मने आपको बता िदया था?" नवीन ने कहा. और अवलोकन शु कर िदया. मु झे देखना पड़े गा. आपक लड़क डॉली. २ लड़िकयां है इसक . "जी हाँ.. अब रात को ही इनका अवलोकन करना होगा! मै उसी रात अलख म बैठा. कोई मु ि लम ताक़त है.. मई देखते रहा और िवि मत होता रहा! नवीन ने बहत कुछ छुपाया था हमसे! यही होता है जब लोग छुपाते ह और सब सामने आता है तो रणनीित दु बारा से बनानी पड़ती है! एक चूक और आपका काम तमाम! मने शमा जी के आने का इंतज़ार िकया और िफर िव ाम करने चला गया! अगले िदन शमा जी आ गए..... पढाई के िलए इसने अपने ब च के िलए अपनी िज मेवारी बखूबी िनभायी है.अ.... है या नह ?" शमा जी ने पूछा. "डॉली के कारण आपके घर म कले श हआ िक नह ? आपये बताइये पहले " शमा जी ने पूछा. मने कहा िक ठीक है कोई बात नह आपके अगले िदन आ जाना. "मु झे तो ये आदमी शरीफ लगा गु जी. दोन ही पूना म पढाई कर रही ह. तब मने शमा जी से कहा.... इसका समाधान हो जाएगा! नवीन चला गया. इतनी बात होने के बाद शमा जी वहाँ से चले गए.. 4 . "ल आपने अपनी छोटी लड़क डॉली के बारे म हमको नह बताया?" शमा जी ने कहा...अ. पूजन िकया और उन दो रोटी के टु कड़ को िलया.

आपके साथ आपका काम-काज ठ प. ठीक है? शमा जी ने पूछा. उ ह ने कहा. "हाँ जी. और उसक भी तबीयत खराब होनी शु . "हाँ जी. नम कार" और ये कह के फ़ोन कट गया. उसने ये बात 5 . आना-जाना था उसका" नवीन बोला. "नवीन जी? या आपने कभी गौर िकया? आपके िपताजी के साथ सम या. मु झे आप आज रात कोई ८ बजे कॉल क िजये ."जी हाँ" नवीन ने बताया. आपको सारी बात बतानी चािहए थ हमको. "कले श यूँ हआ?" शमा जी ने पूछा. "जी एक बार मेरे बड़े बही के लड़के ने रजवान और डॉली को एक गाडन म आपि जनक ि थित म देखा था. अ छा जी. "नवीन जी. "अब हमने सब देख िलया है. वो यह रहते ह. तभी तो हम काम कर सकते ह? मान लीिजये हम वहाँ आ जाते िबना इसक तैयारी के तो रण-नीित बदलनी पड़ती हमको!" शमा जी ने समझाया. "ठीक है. "कोई बात नह " शमा जी ने कहा. डॉली के साथ ही पढ़ा करता था साथ म" नवीन ने कहा. "कोई बात नह . अब देखते ह क या िकया जा सकता है?" शमा जी ने कहा. ये जो आपके साथ हो रहा है वो ३ महीन से हो रहा है. आप पूिछए" नवीन ने कहा. आपक प नी के साथ सम या. मै आपसे कुछ शन पूछूँगा. रात सही ८ बजे नवीन का फ़ोन आ गया. इसीिलए मने अवधे श जी से बात क थी" नवीन ने बताया. आपक बड़ी लड़क पूजा. "जी मा क िजये गा. ले िकन डॉली को कुछ नह ? या आपने सोचा?" "हाँ! हाँ! मै कल ये ही सोच रहा था जो आप कह रहे ह!" नवीन ने कहा. "ये रजवान कौन है?" शमा जी ने पूछा "जी यह पास म रहता है. "नवीन जी. "जी हाँ. मै आपसे कुछ दीिजये गा. उनके िपता जी यहाँ वक ल ह" नवीन बोला. वो बेहोश हई कॉले ज म. "आपका एहसानमंद रहँगा िजंदगी भर" नवीन ने कहा. भूल हो गयी मु झसे" नवीन ने कहा. शमा जी ना फ़ोन पर उस से बात क . पूछूँगा. आप एक काम क िजये . है ना? शमा जी ने पूछा. आप उ र देने म संकोच नह करना और मु झे सही और प उ र देना" "ठीक है. "घर आता-जाता था?" शमा जी ने पूछा. आप उनका उ र "जी मै कॉल कर लूँगा आपको ८ बजे. " रजवान के माता िपता कहाँ ह? वही ँ रहते ह?" शमा जी ने पूछा.

"हाँ जी आते ह. आप िनि कहा. "देखो. "मने डॉली को मना िकया उस लड़के से िमलने के िलए" नवीन ने कहा. उनका बेटा रजवान वही ँ था. ले िकन वो नह मानी. इसका कारण है रजवान क नादानी!" मने कहा. मने इसको भी वहाँ दािखला िदला िदया. "जी कोई २ महीने पहले . अब आपक ये बेटी डॉली पूना म है." गु जी. "उ ह ने हमे आ ाशन िदया क आगे से ये ऐसा नह करे गा. कई बार मेरी प नी और मेरी बड़ी बेटी ने भी काफ समझाया. "हाँ. तो उसने भी यही कहा क वो डॉली को यार करता है और उसी से शादी करे गा. यहाँ तक तो सब ठीक है. ले िकन मेरे से बात नह करती बस अपनी माँ से ही एक-आद बार बात कर ले ती है" नवीन ने बताया थोड़ी देर और बात हई ं और िफर फ़ोन कट गया. नह मानी. और वो उसको समझा दगे. और जब मने डॉली से पूछा तो उसने मन कर िदया" नवीन ने कहा. ले िकन कोस अलग है" "अ छा नवीन जी. "नह . मै एक बार उनके घर गया था अपनी प नी के साथ" नवीन ने कहा. इसका पता और लगाइए ज़रा" "शमा जी. मने उनको इस सम या के बारे म बताया. "डॉली मान गयी?" शमा जी ने कहा. ले िकन वो नह मानी. गु से म मने उसको एक चांटा लगा िदया. उ ह ने रजवान को बु लाया और उस से इस बारे म पूछा. रजवान ये कह के घर से बहार िनकल गया था" नवीन ने कहा. रजवान के िपता को भी झटका लगा. " या आपने रजवान के िपता जी से बात क ?" शमा जी ने कहा. "और आपने या िकया िफर?" शमा जी ने पूछा. मेरी बड़ी बेटी वहाँ डिट ट क पढ़ाई कर रही है. यूंिक वो उस से वो यार करती है और वो र वानसे शादी करे गी. "वो लोग आपसे िकस यवहार से िमले ?" शमा जी ने िकया. "जी उ ह ने हमारी बहत खाितर क . ले िकन इनक हालत यूँ खराब है. उसने साफ़ कहा क वो उस से बात करना नह छोड़े गी. शमा जी बोले . मेरे तो होश उड़ गए. त रिहये " नवीन ने "ठीक है नवीन जी.ेम भड़क गया! उसके होते हए कोई डॉली को कोई कैसे हाथ लगा सकता है? एक तो ये 6 . रजवान से उसक बात करना ज़ारी रहा" नवीन ने दु ःख के साथ कहा. "िफर? िफर रजवान के िपता ने या कहा?" शमा जी ने कहा. ये बात मेरे िपता जी को पता चली तो उ ह ने ने भी डॉली को समझाया. "नादानी कैसे? वो बैठते हए बोले . काफ अ छे से िमले . इसको कब भे जा पूना?" शमा जी ने पूछा. उसने गु सा िकया और िफर मेरे से बात नह क . अब हम देखते ह क सम या है कहाँ? या डॉली के फ़ोन घर पर आते ह? ये और बताइये ?" शमा जी ने कहा.मु झे बतायी. जब रजवान को ये पता चला क डॉली के घर म उसको ले कर कले श हो गया है और डॉली को उसके बाप ने एक चांटा मार िदया है तो उसका जु नन ू ी.

"गु जी. ले िकन इनक पा रवा रक ि थित ये खु द ही संभालगे. आप एक काम क िजए. और मै अपने अ दर वाले थान पर चला गया. ये शमा जी का फ़ोन था. ले आओ" मने कहा. इसीिलए उसको अ पताल ले जाना पड़ा" शमा जी ने कहा. हम नह . "ठीक है मै आज ये पता लगाता हँ क वो गु िनया है कहाँ और या कर रहा है. आप एक िकलो 'सामान' ले आइये . आिखर ेम गु नाह नह !"मने कहा "हाँ वो हमारा काम नह " शमा जी बोले . मने का रं दे को उसका काम बताया और का र दा रवाना हो गया. "ठीक है" मने कहा और फ़ोन रखा िदया. का रं दे ने बताया क वो वहाँ घु स ना पा रहा है. और थोड़ी देर म ही का र दा हािज़र हो गया. वहां कुछ ज़ री सामान िनकल और एक बैग म रख िलया. "हे लो?" मने कहा. ये बड़ी हैरत वाली बात थी! एक गु िनया एक का रं दे को रोकने म स म है! यानी क गु िनया ट कर का आदमी है! मने अब दु बारा एक खबीस को हािज़र करवाया. ज़ रत पड़े गी और साथ म ' साद' भी! मने कहा. आप उस से संपक म रिहये . उसने अपनी सारी बात उसको बतायी. वो बेहोश हो गयी है और कुछ भी जवाब नह दे रही. "ठीक है. ले िकन वो नह समझा! अब वो ये जान चु का था क अब ना तो डॉली के माँ बाप और ना ही वयं उसके माँ बाप उसक और डॉली क शादी के प म ह. वो 'सामान' ले आये थे. तो अब िकया या जाए? वो इसी उधे ड़बु न म था क एक धमाका और हो गया! नवीन ने डॉली को ज़बरद ती पूना भे ज िदया तािक वहाँ जाके इस कहानी पर िवराम लगे ! ले िकन ऐसा हआ नह ! वहाँ भी डॉली से वो लगातार संपक म था! अब उस से और देरी बदा त नह हई और उसने एक गलत िनणय ले िलया! वो शर से बाहर क तरफ जाने वाले रा ते पर पड़ने वाले एक डे रे म गया. "हाँ. "ठीक है. मै संपक म हँ" उ ह ने कहा. और उसके बाद वही हआ जो हमको नवीन ने बताया! ये सब उस गु िनया का काम है शमा जी!" मने कहा "अ छा अ छा! अब मै समझा!ठीक ठीक" शमा जी ने कहा! "इसका मतलब अगर उस गु िनया को पकड़ कर लताड़ िदया जाए तो काम सु लझ जाएगा!" वो दु बारा बोले. "ठीक है गु जी. और मै अपने काम पर लग गया! उसी रात को मने शमा जी को अपने साथ रोका. कोई नै बात होते ही मु झे इि ला कर" मने कहा. खबीस ने 'सामान' िलया खाया और रवाना हो गया! पूरे एक घंटे के बाद खबीस आया! खबीस ने बताया क वो गु िनया िकसी बल सरं ण म है! और उसके खबीस ने 7 .वहाँ उसको एक गु िनया िमला. काम सु धर जाएगा. आधे घंटे के बाद का र दा आया. शमा जी ये कह के उठे और अपनी गाडी म जा के बैठ गए. मने अलख-भोग िदया. थोडा बना हआ भी ले आऊं?" वो बोले . नवीन का फ़ोन आया था अभी. वो अपनी बीवी को ले के अ पताल गया है.और दूसरा ये क डॉली के माता-िपता वयं रजवान के घर पर आ गए थे उसक िशकायत ले के! उस व त रजवान के िपता जी घर पर िमले थे और उ ह ने जब रजवान से पूछा तो उसने अपने बाप के और डॉली के माँ बाप के सामने ये कुबूल िकया क वो डॉली से यार करता है और वो उसी से शादी करे गा! जब रजवान के िपता जी ने ये बात अपनी प नी को बताय तो उ ह ने ने भी रजवान को बहत समझाया होगा. तभी मेरे फ़ोन पर घंटी बजी. "हाँ.

अ पताल म हो तो हमको अपताल का पता दे दे तािक हम वही ँ उस से िमल सक. "ठीक है. थोडा बहत म सीख िलया था.वाह भी है" शमा जी ने कहा. हाँ उनका यान ज़ र बंटाना चाहता था. मै सीधे सीधे उनसे नह लड़ सकता था. बि क काफ गहरी और मज़बूत है!" "अ छा गु जी" शमा जी ने कहा. इ ही मौलवी साहब का िपछले १० साल से चे ला था. आप पूरा पढ़ लो. "आज िदन म आपक बात हई थी? नवीन से? मने शमा जी से पूछा. इस बार कहानी टेढ़ी है." वो बोले . मने उस पर कुछ साम ी िलख दी जो कल नवीन को खरीद कर रखनी थ . मै सु बह होते ही नवीन को फ़ोन कर दूंगा" शमा जी बोले . कोई अपवाद नह " मने ये कागज़ िलख कर शमा जी को दे िदया. "अ छा. उनक सेवा करता था. देरी करने से सब कुछ ख़तम हो सकता है" "ठीक है गु जी. मने िजतना सीधा समझा था उ ती है नह .उसको अ दर नह जाने िदया! इसका मतलब था क सामने वाला अित बल और दमदार है! ले िकन एक बात और थी. वो हमको वही ँ िमले . एक बूँद भी नीचे नह िगरी! "सु नो.उनक बीवी को पे ट दद क और अितसार क िशकायत है. शमा जी ने जेब से पे न िनकाला और एक कागज़ दे िदया. मै कल मालूम कर लूँगा!" शमा जी ने कहा 8 . "हाँ जी हई थी. मने अपनी उस ताक़त को वािपस िकया और उसको उसका भोग दे िदया! "फट' क आवाज़ से उसने वो भोग फाड़ िदया. "कल िनकलने से पहले आप ये मालूम कर ल पहले " मने कहा. अितसार म र . और हाँ एक काम और करना. शादी नह क थी और िज़दगी भर अपने अमल ही इक े िकये थे! एक एकांत जगह पर ये रहा करते थे! ये गु िनया िजसका नाम उमेश था. शमा जी. "जी िपताजी के िवषय म क बात नह हई. यिद नह आ सकता हो. आप मु झे एक पे न और एक कागज़ दीिजये" मने कहा. उनको चु नौती भी मै नह देना चाहता था. अगर वो बल और दमदार है तो वो ऐसे ओछे काम यूँ करे गा? मने अब एक दूसरी ताक़त को हािज़र िकया! उसको बताया सारा माजरा और रवाना कर िदया! १० िमनट आ द वो हािज़र हई और उसने जो बताया वो एक दम सटीक था! ये गु िनया एक बु ज़ु ग मौलवी साहब का चे ला था! मौलवी साहब क उ करीब ८० साल के आस-पास थी. और कहना क अब देरी ना कर. और उनका यान इसी से बाँट सकता था जब मै इस चे ले उमेश क खाल उतार दूँ! मने शमा जी को कहा. "जी ठीक है. उसके नौकर भी दूकान ना खोल" मने कहा. उनका ख़याल रखता था. "ठीक है मै ऐसा कह दूंगा" शमा जी ने कहा. इसम कोई भी व तु घटे नह और बढे नह . और उनके िपताजी कैसे ह? मने पूछा. आप कल सु बह नवीन को फ़ोन करना क हम लोग चंडीगढ़ आ रहे ह. "शमा जी. मै नह चाहता था क िकसी तरह का कोई टकराव हो. उसको कहना क कल वो अपने काम िकछुि रहे . "शमा जी. "ये लो.

मै खड़ा हआ. शमा जी ने नवीन को सारी कागज़ पर िलखी साम ी िलखवा दी थी. "हाँ. "या िफर ये हो सकता है क जब का र दा और खबीस यहाँ से गए वो उमेश वही ँ मौलवी साहब के साथ हो?" शमा जी बोले . "गु जी? एक गु िनया ऐसा यूँ करे गा? मेरा मतलब वो का रं दे को कैसे रोक पाये गा? "का रं दे को उसने नह रोका. "वो इनका आपसी पा रवा रक मामला है. उसक सब-कुछ बताया होगा क मु झे इसी लड़क से शादी करनी है. काम-काज ठ प करवा रहा है!" मने कहा. क करवाएगा!" मने कहा. "और अगर गु जी हमने वो काम ठीक कर िदया तो िफर रजवान और डॉली का या होगा?" शमा जी ने च मे म से झांकते हए कहा. ये एक अ छी बात थी. लाजमी है. "हाँ. िफर मै और शमा जी अपना-अपना आव यक सामान ले कर गाडी म बैठे और वहाँ से चंडीगढ़ के िलए कूच कर गए! रा ते म शमा जी ने मु झे से पूछा. "हाँ! अगर शािमल ह तो!" मने कहा. पैसे का. वो नवीन को उलझाए जा रहा है मु सीबत म. "गु जी खबीस ने बताया था क . जो ये चाह कर! हम इस से कोई मतलब नह " मने कहा. "खैर छोडो हमको तो अपना काम करना है. "ये ही बात है शमा जी! वो उ ही के साथ था!" मने जवाब िदया. "जो लड़का ऐसा काम करवा सकता है वो बाद म भी कुछ ना कुछ तो करे गा ही ना?" शमा जी ने संदेह ज़ािहर िकया. देखते ह या होता है!" शमा जी ने कहा. ले िकन रजवान ने शादी होने के बाद भी कुछ वायदा िकया होगा. और नवीन ने कहा था क नवीन ये सारी साम ी आज ही खरीद ले गा. हाँ अब उनक प नी के वा य म अव य ही सु धार हआ था. "ऐसा हआ होगा गु जी. ये रजवान गया होगा उमेश के पास. 9 . उमेश ने कुछ पैसे हड़प िलए ह गे!" शमा जी ने अंदाज़ा लगाया. मौलवी साहब क ताक़त ने रोका शमा जी!" मने कहा." "हो भी सकता है और नह भी!" मने जवाब िदया "अगर मौलवी साहब इसम शािमल ह तो इसका मतलब इस बार ट कर ज़बरद त है!" वो बोले . इसीिलए ये उमेश ऐसा कर रहा है. खबीस ने बताया क वहाँ कई खबीस मौजूद ह!" मने जवाब िदया. और नवीन को हमारे आने क सूचना दे दी थी. उसको अ दर नह जाने िदया? िकसने रोका उसको जहाँ तक मु झे मालूम है खबीस को २ खबीस िमलके रोक सकते ह? " "हाँ शमा जी. "अगर उनक ताक़त ने रोका तो इसका मतलब वो अलीम मौलवी साहब भी इसम शािमल ह? शमा जी ने पूछा. वो हमको ले ने आ जाएगा. "हँ! तो ये बात है!" शमा जी ने गदन िहलाई. भ म का टीका शमा जी को लगाया और बोला "अलख िनरं जन!" "अलख िनरं जन!" करीब १० बजे मु झे शमा जी ने बताया क नवीन के िपताजी क तबीयत यथावत है और वो घर म ही ह.

आप मु झे अपनी इस बेटी डॉली का फोटो िदखाइये" मने कहा. एक अलग कमरे म उसके िपताजी ले टे हए थे. मु झे और शमा जी को वो बाथ म ले गया जहां हमने अपने हाथ-मु ंह धोये ! वािपस आ कर बैठे तो उसका नौकर चाय बना के ले आया! हमने िबना बात िकये चाय पी! शमा जी ने ही चु पी तोड़ी. चलगे भी और घूमगे भी!" मने कहा. "नह . "नवीन जी."हाँ वो ये जान" म समथन िकया. चिलए िमलवाता हँ" उसने कहा. बहत अ छे से िमला वो. मने ए बम िलया और फोटो देखा. ये पीली शट म जी है वो है डॉली और ये जो नीले टॉप म है. मै समझ गया!" ये कह के उ ह ने अपना पे ग ख़तम िकया और गाडी टाट करके दौड़ा दी! हम शाम तक चंडीगढ़ पहँच गए. उसने बताया. आपके िपताजी कहाँ ह?" "वो अ दर वाले एक कमरे म ह. हम दोन उठ के खड़े हए और उसके िपता जी को देखने चल पड़े . इलाका अ छा था और साफ़-सफाई थी. यही उसका घर था. नम कार आिद हई. उसने हमो वही िबठाया जहां हमने चाय पी थी. वहाँ हमको नवीन िमला. हालत खराब थी. "बोले . मल-मू क यव था वही ँ क गयी थी. बाद म िमल लगे हम" मने कहा. कोई १५ िमनट के बाद एक भूरे प थर से बने एक घर के आगे गाडी कवा दी. उसने आगे जाके घर का मेन-गेट खोला और गाडी अ दर पाक करवा दी! घर म घु सते ही तेज लोहबान और गु लाब क खु शबू मेरे नथु न म चढ़ गयी! अ दर लाकर उसने हमको िबठाया और अपने नौकर को ३ चाय बनवाने को कह िदया. आगे जाके शमा जी ने गाडी साइड म लगाई और 'सामान' खरीदने चले गए. आप ज़रा नवीन को कुरे दना क वो रजवान के बारे म या कहता है!" मने कहा. आप एक काम करना. आराम करने दीिजये . "आपक प नी कहाँ ह? शमा जी ने कहा. अधरं ग के िशकार हए थे. उठते थे. अभी ३ महीने पहले खूब चलते थे . घूमने जाते थे ले िकन अब िसफ िब तर पर ही िटक गए ह". थोड़ी देर बाद आये तो वही सामान था तो वो हमेशा खरीदते ह! उनको मेरा पता है! शमा जी ने गाडी थोडा और आगे लगाई ं और बना डाले मोटे मोटे २ पे ग! हमने साथ साथ कुछ खाया और पे ग पीते रहे ! "शमा जी. नवीन बाहर िनकला और हम भी. "कोई बात नह ! िफर उठगे. २ कमरे छोड़ कर. खु ली मानिसकता वाली िजसे क आजकल 10 . दोन ही लड़िकयां आधु िनक-प रवेश म थ . उसक बीवी क अ पताल से छु ी हो गयी थी और अब वो घर म ही थी. रहने दीिजये . "जी वो दु सरे कमरे म ह. बेचारे इस वृधाव था म कैसे क उठा रहे थे! "इनक उ या है? शमा जी ने पूछा. "८५ वष तो है ही. "ठीक है. आइये िमलवाता हँ" नवीन ने कहा. नवीन हमारे साथ बैठा और अपने घर क तरफ गाडी मु डवा di नवीन ने एक अ छी जगह मकान बना रखा था. ये है मेरी बड़ी बेटी पूजा" उसने वो ए बम हमको देते हए कहा. "ये देिखये .

क पीढ़ी िवकास क एक अहम् सीढ़ी मानती है!
मने वो ए बम शमा जी को दे दी, शमा जी ने देखा कुछ देर और वािपस वो ए बम नवीन को पकड़ा िदया,
"नवीन जी आप अपने यवसाय के बारे म बताइये " मने कहा,
"जी यही एक मािकट है, काफ चलती है, वही ँ मेरी एक दु कान है, ७ लोग और काम करते ह वहाँ" नवीन ने बताया,
"चिलए वो दु कान िदखाइये" मने कहा,
"जी आपके कहे अनु सार आज तो वो बंद है?" नवीन ने कहा,
"कोई बात नह , आपक बबादी वही ँ से आई है,वो जगह देख ल एक बार!" मने कहा,
"जी बबादी? वो हैरत से बोला?
"हाँ नवीन जी! बबादी!" मने कहा,
नवीन उठा और अपनी गाडी िनकालने लगा, मने कहा क चलो पैदल ही चलते ह, समय भी कट जाएगा! नवीन चला और
हम भी चले उसके साथ! बात करते करते उसक दु कान तक आये! दु कान या पूरा शो म था वो! काफ बड़ा था!
हम वहाँ से आिपस आ गए, रात को नहा-धोकर, खाना आिद खा पीकर हम अपने कमरे म चले गए, मने रत ही अपने कमरे
म जाकर सभी तैया रयां कर ली थ ! सामने वाला बल था, इसीिलए चूक करने क गु ंजाइश नह थी, या तो वो मु झे खाली
करे गा या िफर मै उसको! मने सारे ह त-बांध, कमर-बांध, कंठ-बाँध और तं ाभूषण क सही जांच क और सु बह आने क
तैयारी म रा ी नमन िकया! अब मु झे सु बह का इंतज़ार था!
सु बह-सु बह जब मै उठा तो सर म एक अजीब सा भारीपन था, यानी क कोई यहाँ आने क चे ा कर रहा था और मेरी ताक़त
ने उसको यहाँ नह घु सने िदया था! जैसे क मेरे साथ हआ था! अब मेरे सामने वाले के पास भी ये अवसर था क वो अपने
आपको साने वाले समय के िलए तैयार रखे !
मै और शमा जी नहा-धो के आये और नवीन का नौकर चाय ना ता ले आया, मने पूछा क नवीन या कर रहा है तो बताया
क पूजा करने म य त ह! हमने चाय ना ता िकया और िफर नवीन के पास आये , थोड़ी देर बात हई ं, मने शमा जी से कहा
क अब नवीन को सब कुछ बता दो आप, और शमा जी ने सब कुछ जो हआ था वो नवीन को बता िदया! नवीन क तो सु नके
पाँव तले ज़मीन िखसक गयी! उसको जैसे सांप सूंघ गया हो! शमा जी ने उसको िह मत बंधाई और कहा क अब वो वैसा ही
करे जैसा क हम कहते ह, उसने फ़ौरन हामी भर ली!
हमने नवीन को कहा क वो जाए और दु कान खोल कर वािपस आ जाए, जो दु कान संभालता हो उसको दु कान संभालने को
कह दो, आज आपक सारी सम या ख़तम करनी है!
नवीन ने ऐसा ही िकया, वो गया और कोई आधे घंटे म आ गया, शमा जी और नवीन नीचे बैठे और मै ऊपर वाले कमरे म, मने
ि या आर भ क , मने का र दा हािज़र िकया, और उसके उस गु िनये का पता करने भे जा, का र दा गया और ५ िमनट म
वािपस आ गया, मने का रं दे से पूछा उस गु िनये का अता-पता तो मु झे बताया क वो गु िनया अभी इस व त वो मेला- ाउं ड पर
िकसी से िमलने का इंतज़ार कर रहा है, और उसके साथ एक औरत भी है, मने फ़ौरन का रं दे को हािज़र ही रहने को कहा,
मने नीचे
भागा, मने शमा जी और नवीन से कहा क ज दी गाडी टाट कर और गाडी नवीन मेला ाउं ड क तरफ घु मा ल, नवीन ने
ऐसा ही या, आधे घंटे से काम म हम वहाँ पहँच गए, मेरे का रं दे ने उसक तरफ इशारा िकया और उसके पास खड़ा हो गया,
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आस-पास इ का-दु का लोग खड़े थे, मने शमा जी को इशारा िकया, शमा जी और नवीन गाडी से उतरे , शमा जी ने उसका
नाम पु कारा ,उस व त उसके साथ कोई औरत नह थी, अकेला था, उसने मु ड़ के देखा, बोला, "बोिलए? आप मेरा नाम कैसे
जानते ह?
शमा जी ने उसको कहा, "सु न बे उमेश, तू बहत बड़ा गु िनया बनता है? लोग क िजंदगी खराब करता है?
"ये या कह रहे ह आप? आपको ग़लतफ़हमी हई है, मै ऐसा कुछ नह करता" वो दरके बोला,
"साले ! तूने एक लड़के रजवान से १०००० पये िलए, क तू उसक शादी एक लड़क डॉली से करवा देगा?िलए या नह ,
बोल?
"हाँ तो? तु हारा मतलब?" उसने कहा,
शमा जी ने उसके एक िदया कान पर और उसको उसके िगरे बान से उठाया और बोले , 'माँ****** तेरे को भी देखंग
ू ा और तेरे
बड़े वजीर को भी"
अब वो डर गया, मने कहा क "इसको गाडी म िबठा लो", वो भीगी िब ली तरह गाडी म बैठ गया, मने नवीन को कहा क
"इसको घर ले चलो अपने , इसक खाल उता ं गा मै आज, इसको बनाऊंगा मै गु िनया!"
अब तो उसके होश उड़ गए, बोला "साहब वो लड़का आया था मेरे पास रोते रोते, मने उस से पूछा, उसने बताया क वो एक
लड़क से यार करता है और शादी करना चाहता है,अगर कोइ उसका काम कर दे तो वो ५०,०००० पये दे देगा, साहब हम
गरीब लोग ह, इतनी बड़ी रकम के िलए कुछ भी कर सकते ह, मै ऐसा ही िकया!"
"तू अभी देख हम तेरे साथ या करते ह!" शमा जी बोले
"साहब उस लड़क के प रवार से हो या आप लोग? उसने पूछा,
"हाँ हम सभी लोग!" मने कहा
वो चु प हो गया,गाड़ी आगे बढती रही और नवीन क गली म घु स गयी.
गाडी सीधे घर म ही क , नौकर ने दरवाज़ा खोल िदया था, शमा जी ने उका हाथ पकड़ा और उसको ओ पे र ख च कर ले
गए! शमा जी ने उसको एक और िदया ख च कर! वो डर के मारे बोल भी नह पा रहा था! मने उस से कहा, "उमेश, चल वहाँ
कुस पर बैठ जा"
वो िब तर से उठा और कुस पर बैठ गया,
"सु न उमेश, तूने जो कुछ भी या वो गलत िकया या नह ? ये बता?" मने पूछा,
"हाँ जी, मने गलत िकया, ले िकन मेरे पास और कोई दूसरा रा ता नह था" वो बोला,
"चल तूने जो िकया उसक सजा तो मै तु झे ज़ र ही दूंगा, खैर,ये बता तूने ये अपने बड़े वजीर क ताक़त का गलत इ तेमाल
करके िकया या नह ? मने पूछा,
"हाँ िकया" वो बोला,
"अब तू ये सोच रहा है क इतनी देर हो गयी बड़े वजीर तेरे को देख यूँ नह रहे , है ना?" मने कहा,
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वो चु प रहा,
"बता, तू ऐसा सोच रहा है क नह ?" मने दु बारा सवाल िकया,
"हाँ मै ये सोच रहा हँ" उसने कहा,
"सु न गु िनये! तेरा बड़ा वजीर तेरे को नह देख सकता! मेरी ताक़त तेरे वजीर क ताक़त को क़ैद कर रही है" मने कहा
अब वो हंसा! तेज हंसा और बोला, "मेरे बड़े वजीर उठ गए, अब देख या होता है!"
शमा जी उसको एक झापड़ मारने के िलए आगे बढे मने उनको रोक िलया!
"अ छा उमेश! िफर या होगा?" मने उसी से पूछा,
"तू तो बालक है उनके सामने , वो तो मािलक ह िहंदु तान के! अब तू रहम मांगेगा अपनी जान क !" उसने हँसते हए कहा!
ऐसा सु नके नवीन डर गया, मने नवीन को बाहर भे ज िदया, मै उठा, गु िनया के सामने गया, उसको उसके िगरबान से
उठाया, और उसके मु ंह पर थूक िदया! और बोला, "ये ले , तेरा वजीर तो यहाँ तक पहंचेगा नह , ले िकन मै तेरे को तेरे वजीर
तक ले के जाऊँगा!"
मने शमा जी से कहा, "शमा जी, इसे डालो गाडी म, इसके वजीर क ताक़त तो आनी बंद हो गय !"
शमा जी ने उसको एक लात मारके उठाया, "खड़ा हो बे अपनी बीवी के जंवाई!" शमा जी ने उसके बाल पकडे और खीच के
नीचे ले आये ! गाडी म िफर से एक लात मार के िबठाया! और बोले , "रा ता तू बताये गा या मै खु द ही ले चलूँ उधर?
इस बार तो उमेश क िघ घी बांध गयी! के अब के िमला शेर को सवा शेर!
मेरी ताक़त ने वजीर के ३ िज नात पकडे थे, वो ही हमको रा ता बता रहे थे, शहर क आबादी से दूर काफ दूर जाने के बाद ,
एक खाली रा ता िमला, यह थी उस बड़े वजीर क कायशाला! मने शमा जी से कहा, "शमा जी इसको िनकालो और इसके
बाल पकड़ के इसको ले ते चलो, आगे आगे मै चलूँगा, आप पीछे पीछे चलना!"
शमा जी ने उसको उसके बाल पकड़ के ही गाडी से उतारा, एक उलटे हाथ का झापड़ िदया और बोले , "सु न ओये, आ गया तेरी
ताजपोशी का समय!"
मै आगे बढ़ा! मेरी ताक़त ने सारी िजनात हटा िदए रा ते के! मै एक ऐसी ताक़त ले के आया था तो इन िज नात को िखलौन
के समान लात मार-मार के हटाती जा रही थी, कुछ तो वैसे ही उठ उठ के भाग रहे थे! मै आगे बढ़ा तो सामने अपने कमरे के
सामने बड़े वजीर ज़मीन पर बैठे हए मेरी ही तरफ देख रहे थे! वही ँ से बोले , "ठहर जा! आगे ना आना!"
मै का नह , आगे बढ़ता गया! वजीर साहब खड़े हए! खड़े होके वो हवा म कुछ िलखने लगे! मने मं अिभभूत िकया और
वजीर साहब पर फक िदया! वजीर साहब के हाथ खु ल गए! िगर पड़े ज़मीन पर!
वजीर साहब को िगरते देख उमेश क आँख फटी क फटी रह गय ! वजीर साहब बु ज़ु ग आदमी थे, ले िकन एक गलत आदमी
का साथ दे रहे थे, इसीिलए मु झे उनको जवाब देना पड़ रहा था! उनको उठने म व त लगा! अब उ ह ने धु िकया अपना
रहमानी इ म! मने फ़ौरन अपना, शमा जी और नवीन का नाम ले कर अिसतांग-मं योग िकया! इस मं क काट कह
नह ! वजीर साहब ने कुछ पढके वो इ म हम पर फूं का! आगे के शोले उठे हमारी तरफ आये ले िकन ५ फ ट तक आते आते
धु ंआ हो गए! वजीर साहब को तो यक न ही नह हआ!!! उ ह ने िफर इ म इ तेमाल िकया! अब क बार लोहे के कांटे आये
ले िकन वो भी धु ंआ हो गए! अब वजीर साहब बैठ गए! मने शमा जी से कहा, "इस साले गु िनये को इनके पास ले जाओ और
13

नवीन को भी, सारी बात बता दो, मै वजीर साहब पर नज़र रखूँगा!"
शमा जी गु िनये को बड़े वजीर के सामने ले गए और बोले, "सलाम आले कुम बड़े िमयां! आपने िबना जाने -पहचाने इसको
बचाया,ले िकन कुछ काम ना आया! आप जानते भी हो आपके इस मु रीद ने या िकया है?"
"सलाम आले कुम िमयाँ, मु झे आप बताएं इसने या जु म िकया है? वजीर साहब बोले ,
शमा जी ने शु से ले के आिखर तक का सारा िक सा सु ना िदया, वजीर साहब को गु सा आ गया! खड़े हए, अपनी जूती
उतारी और उतार के उमेश के सर पे दे मारी! बोले , "नामाकूल! कमीने , मने ये िसखाया था तु झ?े तु झे मने इंसािनयत का
वा ता िदया था, और मै साझा था तेरा कोई झगडा हो गया इन लोग से और ये कोई पढ़ाई िकये हए लोग ह!"
उ ह ने मु झे देखा और बोले, "आओ बेटे आओ! देखो इ म का सही इ तेमाल करते हो कह नह दबोगे! अगर मु झे ज़रा सा भी
इ म होता क इस बदतमीज़ ने ऐसा काम िकया है तो मै इसक आँख ब ध देता!"
उ ह ने दोन हाथ उठाये और एक इ म उमेश पर फूं का, उसक आँख ख़तम हो गय ! वो िच लाया तो बोले , "अब िच लाता है
कम आदमी? ये ले " उ ह ने एक और इ म फूं का उसको बोलती बंद हो गयी! अब वो हाथ से वजीर साहब के पांवो को ढू ढ़
रहा था! वजीर साहब ने अपने पाँव ऊपर कर िलए! बोले , "सर रगड़ ले तौबा कर ले ! तेरे सारे इ मात ख़तम आज से!"
उमेश मेरे पास आया, दोन हाथ जोड़ के रोने लगा, मेरे घु टन म सर रख िदया, सर मारने लगा! मने एक एक मं पढके
उसक आँख और जु बां दोन खोल िदए! अब वो दहाड़ मार के रोया! माफ़ मांगी! रोता रहा िगड़िगडाता रहा! वजीर साहब
बोले ,
"नवीन साहब, आप आराम से जाइए आपके वािलद और बीवी दोन ही ठीक हो जायगे आपके घर पहँचने तक!"
नवीन के आंसं ू फू ट पड़े ! िफर वजीर साहब बोले , "और उस लड़के रजवान को म समझा दूंगा! इ मीनान रिखये ! अब आपको
आपक बेटी को कोई परे शानी नह होगी!
हम वहाँ से चल िदए तो वजीर साहब क आवाज़ आई! "सु नो, सु नो, मेरी बात सु नो भाई!, ये लो" उ ह ने मु झे बंद मु ी करके
कुछ िदया और बोले " ये लो ये मेरा िसराजु िज न है, सरदार है! अब मेरी उ नह बची,इसको रख लो!" और ये कहते हए
उ ह ने मु झे वो िज न दे िदया!
हम नवीन के घर आये , सब ठीक हो चु का था! नवीन ने ध यवाद िकया! और ५०,००० पये िदए! मने काफ मना िकया!
ले िकन वो नह माने ! मने कहा, क मै आधे ले लूँगा, आधे आप अवधे श कुमार को िभजवा देना! नवीन ने ऐसा ही िकया! हम
उसी रात वापस आगये िद ली!
एक साल बाद पूजा क और अगले साल बाद डॉली क शादी हो गयी, रजवान दु बई चला गया था, डॉली उसके िलए और वो
डॉली के िलए मर चु के थे!

14

वष २००७ जयपु र राज थान क घटना
मौसम म बदलाव आने लगा था, सद क सु गबु गाहट महसूस होने लगी थी, तब म उन िदन केदारनाथ से शमा जी के साथ
वापसी कर रहा था, यहाँ आये मु झे कोई ११ िदन हो चु के थे, हमारे 'साि वक' भाइय ने हमारा हािदक अिभन दन और
स कार िकया था! िकसी भी कार क कैसी भी कोई कमी नह छोड़ी थी, वहाँ एक महंत थे उ ही के िकसी काय से मै वहाँ
गया था! यहाँ अ सर भीड़-भाड़ रहती है, दशनाथ लगातार आते रहते ह! ले िकन महंत साहब का ये आ म वहाँ से दूर और
शांत जगह था, वािपस जाने से दो िदन पहले मु झे महंत साहब का एक स देश िमला, उनका कोई भ था, वो जयपु र म
ज़मीन के खरीद-फरो त का काम िकया करता था, नाम था उसका अशोक, वो अपने सम त प रवार के साथ वहां आया
हआ था, उसके प रवार म उसक प नी, माँ, दो लड़िकयां आर एक लड़का था, लड़के क कोई सम या थी और अशोक उसको
ले के वही ँ आया हआ था! महंत साहब ने मु झे अशोक से िमलवाया, अशोक ने मु झे अपने लड़के नमन के बारे म बताया, बताया
क उनका लड़का िदन म तो सही रहता है, एक सामा य लड़के क तरह ले िकन रात म च क जाता है, डरता है, िच लाता है
और कभी कभार डर के मारे बेहोश हो जाता है! उसको कई बार डॉ टर को िदखाना पड़ा है, डॉ टर उसको दवा दे देते ह
ले िकन उसको कोई फक नह पड़ रहा और इसी वजह से वो काफ परे शान है और इसी वजह से वो यहाँ आया है, मने अशोक
से पूछा,
"ऐसा कब से हो रहा है?
"यही कोई ६ महीन से ऐसा हो रहा है गु जी" अशोक ने बताया,
"वो लड़का कहाँ है?" मने पूछा, यूंिक वो लड़का इस समय अशोक के पास नह था, अशोक बोला,
"गु जी वो कमरे म ही है, अभी सो रहा है, रात को भी उसने ऐसा िकया, रात भर सोता नह है, जागता रहता है, कहता है 'वो'
आ जायगे उसको मारने "
"वो आ जायगे? कौन आ जायगे? मने पूछा,
"पता नह गु जी, कौन ह वो? कभी नह बताया उसने , कहता है उ ह ने बताने के िलए मना िकया था, मै अगर बताऊंगा तो
वो सबको मार दगे" अशोक बोला,
मने महंत साहब को देखा और बोला, "महंत साहब! आपने या िकया इस लड़के का?"
"हमने झाड़ा लगा िदया है और हाथ म एक शि -सू बाँध िदया है, आशा है क अब नह होगा उसके साथ ऐसा और वो ये
धीरे -धीरे भूल जाएगा" महंत साहब ने बोला,
"ठीक है िफर" मने कहा,
"अशोक जी, वैसे तो अब सम या होनी नह चािहए, ले िकन िफर भी सम या यिद होती है तो आप मेरा नंबर ले लीिजये , मै
िद ली म ही रहता हँ, मै वयं आके उस लड़के को देख लूँगा" मने कहा,
"आपका बहत बहत ध यवाद गु जी" अशोक ने मेरे और महंत के पाँव छू िलए!
"एक काम करना, मै दो िदन बाद यहाँ से जा रहा हँ, आप मु झे एक बार उस लड़के से िमलवा देना, मै उसको देख लूँगा" मने
कहा,
"ठीक है गु जी, मै उसको यहाँ ले आऊंगा" ये कह के अशोक उठा और बाहर चला गया...
अगले िदन दोपहर म अशोक अपनी प नी और लड़के नमन के साथ आया, मै वहाँ नह था, िकसी कायवश िकसी के साथ
1

गया हआ था, वहाँ शमा जी उसको िमले , शमा जी ने कहा के गु जी तो वहाँ ह नह आप बाद म िमल लीिजये, ले िकन अशोक
तभी वहाँ से वािपस जयपु र जाने वाला था, मु लाक़ात नह हो पायी और अशोक अपने प रवार सिहत वािपस जयपु र चला
गया,
मेरे वहाँ आने पर शमा जी ने मु झे अशोक के बारे म बताया, और ये भी क अशोक जयपु र के िलए िनकल चु का है,
मै भी वहां उसी िदन वहां ठहरा और अगले िदन िद ली के िलए रवाना हो गया,
मै िद ली पहंचा तो दो िदन के बाद अशोक का फ़ोन आया, अशोक ने बताया क धागे से और झाडे से कोई फक नह पड़ा
बि क सम या और बढ़ गयी थी, अब वो िदन म भी डरने लगा था, बद-हवास सा सारे घर म िछपने क जगह ढू ँ ढा करता था,
इस कारण से घर क सु ख-शाि त भंग हो गयी थी, अशोक दो िदन से काम पर भी नह जा रहा था, और एक नयी चीज़ हई
थी, वो हमेशा अपने चे हरे को धोता रहता था! मने अशोक को अगले िदन फ़ोन करने को कहा और फ़ोन रख िदया,
मने शमा जी से कहा, "शमा जी, एक बार चलके देख ही िलया जाए?"
"मै भी यही कहने वाला था गु जी" शमा जी बोले ,
"ठीक है, आप अशोक को बोलो क हम आज रात उसके वहाँ पहँच जायगे, आप उसका पता ले लो"
मने कहा,
"ठीक है, मै पता ले ले ता हँ" शमा जी बोले ,
"अशोक को बोलो क हम रात तक वहाँ पहँच जायगे, वो हमे वही ँ िमले " मने कहा,
"ठीक है, मै कहे देता हँ ऐसा" शमा जी बोले और उ ह ने अशोक को फ़ोन िमला िदया, जैसा मने कहा था वैसा ही शमा जी ने
कह िदया,
मने शमा जी से तै यारी करने को कहा और मै अपने थान पर अपनी तैयारी करने चला गया,
मु झे कोई एक घंटा लगा, मै जब बाहर आया तो शमा जी फ़ोन पर िकसी से बात कर रहे थे, जब फ़ोन रखा तो मु झे शमा जी ने
बताया, "गु जी, अभी अशोक का फ़ोन आया था"
"दु बारा?" म पूछा,
"हाँ" वो बोले ,
" यूँ? या हआ?" मने पूछा,
"जब अशोक से हमारी बात ख़तम हई थी तो उसके लड़के नमन ने अपने बाप अशोक को गाली-गलौज द और कहा क अब
ये लड़का मरके रहे गा!!" शमा जी बोले ,
" या? नमन ने ?" म हैरत से पूछा,
"हाँ, और िफर वो बेहोश हो गया, अभी तक बेहोश है अशोक ने ये ही फ़ोन पर बताया"
"ठीक है, हम िनकलते ह अब" मने कहा,
2

"गु जी! आपको तो सब मालूम है. ये या हो रहा है. " या करने आये हो यहाँ तु म दोन ?" "तेरी हािजरी ले ने आया हँ यहाँ. मने झु क कर िकताब उठायी और एक तरफ रख दी. मेरे बेटे को बचा लो!" मै समझ गया क सम या गंभीर हो गयी है. एक कमरे म िबठाया और उसक बीवी पानी ले के आई. वहाँ जाने क हमारी िह मत नह होती. "अरे आप िचंता न क िजये . समझ म आई तेरे ज़लील!" "कौन िकसे नह पहचाने गा ये तो मै बताऊंगा तु झे. "ठीक है. साले िसपहसलार बु लाएं ह तूने?. न जाने कब या कर दे" अशोक बोला. िठठक कर वही ँ खड़ा हो गया. हमने पानी िपया. जमात म कई िदन से नज़र नह आया तू!" मने हंसके कहा! "तेरी िह मत क दाद देता हँ मै ओ (उसने मेरा नाम िलया यहाँ!) जो तू यहाँ तक आ गया. पांव म िगर पड़ा और बोला. कुछ नह होगा! आप घबराइये मत!" "हाँ.. "गु जी. मै अ दर गया. "सु न ओये नमकहराम ज़लील(यहाँ मने उसका नाम िलया) बदजात! तेरे को मै िसफ एक बार कह रहा हँ. अभी! नह तो तेरा वो हाल क ँ गा के तेरी रखैल भी तु झे पहचान नह पाएगी. वो उछला और पीछे जाके िगरा! 3 . शमा जी ने कहा. "जी अपने कमरे म ही है. मने उस से कहा. अब वो भी ये सब देखने लगे थे! वो थोडा आगे बढे मै भी आगे बढ़ा! मने मं पढ़ के अपनी शि का आ ान िकया! मेरी शि भयानक आवाज़ करती हई वहाँ कट हई! उसके शरीर से आग क लपट िनकल रही थ ! मेरी शि ज़मीन और छत के बीच म क हई थी! मै आगे बढ़ा और भ म फक के मारी नमन पर.िफर हमारे साथ ही ऐसा यूँ?" वो आंसं ू प छती हई बोली. अशोक आगे आगे चला और कमरे तक ले गया ले िकन अ दर नह गया. २. २०! पूरे बीस साथी उसके वहाँ आ गए! उसके आस-पास खड़े हो गए! सोचा क मै डर जाऊँगा! मने शमा जी का हाथ पकड़ा. और बोला. ६. "कहाँ है नमन?" मने पूछा. वो हमको अ दर ले गया. अशोक भी बेचारा िससिकयाँ ले रहा था. क!" ऐसा कह के वो आलती-पालती मार के बैठ गया! इसके बाद कमरे म आमद शु हई. अशोक को घर म खबर लगी तो वो दौड़ा-दौड़ा आया. तू यहाँ से जा. अशोक जी आप घबराइये मत" मने शमा जी का समथन िकया. नमन ने उसका गला पकड़ िलया और िच लाया ' साली तेरे को तो नंगा करके नचाऊंगा मै' मै वहाँ भागी तो उसने मु झे लात मारी तब अशोक वहाँ आये तो उ ह ने नमन के हाथ छुड़वाए. कोई वापस जाने का रा ता भी बाक छोड़ा है तूने?" वो बोला. अभी कोई आधे घंटे पहले मेरी बेटी नमन के कमरे से अपनी िकताब ले ने गयी थी. ४. अशोक के घर म २-४ लोग खड़े थे. उ ह ने वो भ म अपनी आँख म लगा ली. शमा जी आगे गए और अशोक के बारे म पूछा. बचा लो.. मेरे साथ आइये आप" मने कहा और शमा जी को अपने साथ िलया.. "बस? इतना ही? मै ये बोलके हंसा! शमा जी अ दर आये तो वो खड़ा हो गया. हमने तो आज तक िकसी का बु रा नह िकया. मै गाडी से उतरा तो वो लोग हमको देखने लगे. आने दे अब वो भी वािपस नह जायगे' गु जी. जब हम अशोक के घर पर पहंचे तो रात िघर चु क थी.जसे ही अ दर गया उसने मु झे देखते ही मेरे ऊपर एक मोती सी िकताब फक के मारी! िकताब मेरी छाती म लगी. शमा जी ने गाडी टाट क और हम लोग जयपु र के िलए िनकल गए . १०. मने पूछा. और उनके हाथ पर एक मं पढ़ा और थोडा सा भ म उनको िदया.मै गाडी म बैठा. हाथ छोड़ के बोला. " या हआ?" वो रोते रोते बोली.

बड़ी पहाड़ी वाली ने मना िकया है" "बड़ी पहाड़ी? ये या है?" मने उस से पूछा. मने िफर से नमन से कहा. वो उठ के बैठ गया. मै तो तेरे को यहाँ से िनकालने तेरी जगह छोड़ने आया हँ" उसने गदन िहलाई क नह नह ! अब मने अपनी शि को वािपस कर िदया था. "तु झे पता नह ये कौन है?" शेख गरजा! "मै यही तो इस से पूछ रहा था!" मने कहा. उसने नमन को देखा और वो बोला. इधर देख ज़रा" मने ऐसा कह के अपने १० खबीस वहाँ हािज़र कर िदए! वो घबराया! पीछे भागा और बोला. उसके पाँव ज़मीन से ऊपर थे.. "एक बात बता. ये भी इ मात के जानकार होते ह! और जैसे दो इंसानी तांि क आपस म लड़ा करते ह वैसे ये भी अपने इ म से दूसरे का इ म काटते ह! मै सारी तैयारी करके आया था. हाँ अब मै मैदान नह छोड़ सकता था! तभी नमन उठ के खड़ा हआ.. "देख मेरी तेरे से कोई दु मनी नह . "नह बता सकता मै. "तेरा तो बाप भी बताये गा. उसने िब तर म दोन हाथ मारे ! " यादा गु सा िदखाएगा तो तेरी टांग तु डवा दूंगा. तभी नमन के बदन म हरकत हई. "मै नह बता सकता. "शेख साहब! (उसने झु क कर सजदा िकया) शेख साहब मु झे बहत मारा इस इंसान ने! आप इसको सबक िसखा दो अब. मै घबराया नह . तेरी इस बु आ बड़ी पहाड़ी वाली का पता!" मने कहा "नह बता सकता मै!" वो िच लाया.. मेरी बदा त खतम हो गयी मने अपने २ खबीस को इशारा िकया और उ ह ने उसक िपटाई शु कर दी! उ ह ने उसको नमन म से िनकाला.उसके साथी भागे वहाँ से! म शमा जी को इशारा िकया! शमा जी आगे बढे और उसको ख च के मेरे सामने ले आये ! वो मेरी शि को ही देखे जा रहा था. अब वो हंस रहा था. अभी उसक िपटाई लग ही रही थी और नमन का शरीर िनढाल पड़ा था. " या ये आिदल सही कह रहा है ओ इंसान?" "हाँ! सही कह रहा है ये !" मने कहा... मेरे खबीस एक झटके म गायब हो गए! उ ह ने उस िज न को छोड़ िदया था. मेरे खबीस ने उसक जम के िपटाई लगाई! उछाल उछाल के मार उसको!.. 4 . अब ज दी बता बड़ी पहाड़ी या है? मने खड़े होके कहा. मने अपने जूते से उसके गाल पर एक चोट मारी. एक दम नंगा था वो. देर न करो! बड़ी पहाड़ी का पता मांग रहा था ये " ये शेख साहब काफ उ के और आिलम िज न होते ह.. "मै नह बता सकता बड़ी पहाड़ी वाली ने मना िकया है!" उसने कहा. या इस लड़के से कोई गलती हई या इसने कुछ जानबूझकर िकया?" उसने िफर नह म गदन िहलाई! "देख अगर तू जवाब नह देगा तो तेरी िपटाई शु करवा दूंगा. उसने फ़ौरन मु झे देखा और िफर मेरे जूते को देखने लगा घूर घूर के ! ल बी ल बी साँस ल उसने ! मने उस से पूछा. ये आिलम िज न ज़मीन पर अपने पाँव नह रखते! शेख साहब ने मु झे देखा और बोला.

"तेरी इतनी िह मत के तू इसको हाथ लगाए?" वो बोला! "तो तू लगा ले ! तू आ तो गया है यहाँ ! तू लगा के देख ले !" मने हंस के कहा! "तेरी जु बां ख च लूँगा मै" वो बोला और कोई अमल पढने लगा! मने भी का ी-मं पढ़ा अपने पर ठोका और शमा जी के सर को भी ठोका! अब मै उस आिलम िज न का सामना करने को तैयार था! शेख ने इ म ख़तम िकया और मु झ पर मारा! मेरे का ी-मं से वो बीच म ही का और ख़तम हो गया! शेख क आँख फटी रह गय ! आिदल डर के मारे शेख क आड़ ले के पीछे खड़ा हो गया! शेख ने दु बारा इ म िकया. "ये बड़ी पहाड़ी कहाँ है? मने पूछा. "तू हाड़ा के कुनबे से है या?" "नह वहाँ से नह हँ" मने कहा. इस लड़के को छोड़. अभयसार-मं पढ़ा और उसके इ म को उस से छीन िलया! शेख हैरत म पड़ गया! शेख ने तब एक और इ म िकया! पढ़ा और मु झ पर फका. "नह वहां से भी नह !" मने जवाब िदया! "शेख तू सु न. "सु न बे ओ शेख! तू मेरे सामने नह िटक सकता! तु झे अगर िकसी मदद इमदाद क ज़ रत हो तो चला जा. मु झे ह म िमला आिदल को बचाने के और मै यहाँ आ गया!" शेख ने कहा. "अब तू भी फँस गया शेख यहाँ ! अब तू कैसे िनकले गा?" मने कहा. "धना ी कुनबे से है या? उसने पूछा. "मु झे नह मालूम. मेरे अभयसार मं से वो अ भावी हो गया! मने शेख से कहा. उसका वो इ म हम तक आया और नीचे िगरते ही मरा हआ सांप बन गया! शेख को काटो तो खून नह ! उसने मु झे से पूछा. इसने तेरा या िबगाड़ा है?" मने पूछा. "इसने चोरी क है चोरी!" शेख बोला! "कैसी चोरी?" मने पूछा. मै तो उसका एक अदना सा नौकर हँ!" वो बोला. असहनीय दु ग ध उठी! जैसे क िकसी सड़े मांस म आग लगा दी गयी हो! मने तभी कौिलक-मं पढ़ा! और उसको शेख पर मारा! दु ग ध समा हई और शेख के सफ़ेद कपडे काले हो गए! राख िबखर गयी उसके कपड़ पर! शेख ने हैरत से देखा! उसने अपने कपड़ को देखा और इ म से िफर से हाथ फेर कर कपडे साफ़ कर िलए! शेख ने मु झे घूरा! उसने िफर से इ म पढ़ा और िफर से मेरी तरफ इशारा िकया. पढ़ा और मु झे पर फका. मेरी बात सु न. 5 . "बड़ी पहाड़ी वाली िनका ले गी. भयानक शोर हआ जैसे क कोई सैलाब आया हो! मने त काल ही. और ले आ! म यह बैठूंगा. हाँ उसक एवज म ये आिदल तु झे रखना पड़े गा मेरे साथ!" शेख िचढ़ा और िफर उसने एक और इ म पढ़ा! अब क उसने अपनी ताक़त काफ लगाई! और िफर फक के मेरे ऊपर फका! मै और शमा जी भवानी-पाश से सरं ि त थे.

वो अब ठीक है" मने ऐसा कहा और सब भागे कमरे म! रोना शु हो गया! मै और शमा जी हाथ-मु ंह धोने चले गए! जब उनका िमलना जु लना हो गया तो मने अशोक को बु लवाया. अशोक आया और मने उस से कहा. बड़ी पहाड़ी के बारे म" शेख ने कहा. मने एक मं से उसके अ दर चे तना फूं क दी! वो ऐसा उठा जैसे न द से जागा हो! उठते ही िच लाया. मै उठा शमा जी को साथ िलया और हाथ-मु ंह धोने चला गया! मने अशोक से कहा. "ठीक है नमन को बु लाओ" मने अशोक से कहा. "ठे क है हम अजमेर जायगे. 'ग ा' मतलब िव ा! मने कहा क नह शेख साहब दरी पर ही सो जायगे! शेख साहब क फूं क सरक गयी िडिबया देख के! मने कहा. मै अपने एक दो त के साथ गया था अजमेर" उसने कहा. मै बताता हँ. मने नमन से पूछा. बड़ी पहाड़ी वाली को!" मने ये कहा और शेख गायब हो गया! रह गया आिदल! म आिदल को क़ैद करवा िलया! अब नमन ठीक था. "जाओ िमल लो नमन से. ज़रा वो िडिबया देना. िकसी शादी म."मु झे नह मालूम" उसने कहा. "नह . जाके अपनी बु आ को बोल देना ये. इसीिलए वहाँ गया था" उसने बताया 6 . और हाँ अब इस लड़के पर कोई सम या न आने पाए. "शमा जी. रीित' मने उसको शांत करवाया और वही ँ बैठने को कहा. अशोक उठा और अपने साथ नमन को ले आया. 'डैडी. को. अभी लगाता हँ इनका आरामदेह िब तर! ग ा तो नह लगाना? शमा जी ने पूछा. िकसक शादी थी ये मु झे तो मालूम नह ? अशोक ने कहा. "नमन? या कभी तु म अजमेर गए थे ज दी म? "हाँ जी गया था मै. बताता हँ. तु हारा काम यही होगा वहां! िगनती करने का!" मने कहा! अब वो घबराए! मने शमा जी से कहा. इसको अलग रखो" शेख बोला "अजमेर जाओ. वहाँ पता करो. म मी. " नह नह !" "आते हो या लगवाऊं लात?" मने कहा. ये आिदल मेरे पास ही रहे गा. ि या. "ठीक है तो िफर मु झे तु म दोन को क़ैद करना पड़े गा! अपने शमशान वाले क कर के पे ड़ पर िबठाऊंगा तु म दोन को! वहां िकतने आये िकतने गए मु झे रोज बताना." लीिजये शेख साहब! ि सतारा तैयार है! आ जाइए! आपक खाितरदारी होगी काफ !" शेख डर गया! बोला. "िकसिलए गए थे अजमेर? मने पूछा. "जी मेरे दो त के बड़े भाई क शादी थी. "ये आपका लड़का कभी अजमेर गया था? "जी गया तो था. इसम इनको आने दो और आप इनका िब तर लगा दो वहाँ ज़रा! िब तर का अथ है क वहाँ थूक दाल दो और एक आद बांड पे शाब क ! "अभी करता हँ गु जी.

बात ये है क मेरे दो त के भाई क बारात रात को जानी थी. कोई २ िमनट के बाद वो ब चे अपने हाथ म सेब. "तु म वहाँ यूँ गए थे?" मने पूछा. वहाँ कोई नह था. तो मै पीता रहा. वो काफ आगे तक ले गया. "जी ये एक खाली जगह थी. "नमन. वो मेरे पास आया और मु झे मोटरसाइिकल पे बैठने को कहा. 7 . टोकरा नीचे रखा. मै तैयार हो जाऊँगा" नमन बोला. आप अशोक को ये बा दो" "ठीक है मै अभी बताता हँ" वो बोले . अिनल नाम है उसका. सोचा अगर िबयर के साथ म थोडा अम द या फल हो जाये तो अ छा रहे गा."कह और भी गए थे वहाँ?" मने पूछा. मेरा एक और दो त है जो वहां आया हआ था. तो हम दोन ऊपर एक छोटी से पहाड़ी थी. मै बैठ गया. उसने एक जगह मोटरसाइिकल खड़ी क और अिनल िबयर ले ने चला गया. मने उसको कहा क चलो कह अलग जगह जाके पीते ह. मै समझ गया क वो अपने िपता के सामने नह बता रहा. वो मोटर साइिकल ले ने नीचे चला गया. वहाँ एक क चा रा ता भी था. मै वही ँ गया था" उसने बताया. मने अपनी िबयर खोल ली थी. उसमे कोई अम द नह थे बि क छोटी-छोटी बिफयां थ ! मने अ मा को मना कर िदया ले ने से. तो अ मा ने अपना टोकरा उठा िलया और ब चे उसके पीछे पीछे चल पड़े . मने बु िढ़या को अ मा कहके रोका तो वो क गयी. शहर क आबादी कम होने लगी थी. पूछा क वो ये कहाँ से लाये ह? तो उ ह ने बताया क वो जो अ मा अभी गय थ उ ह ने ने ही िदए ह! कमाल था. उसने जवाब नह िदया. "जी ठीक है. करीब ५ िमनट के बाद मने वहाँ देखा क एक बु िढ़या अपने सर पे एक टोकरा ले के जा रही है. अम द ला रहे थे! मु झे हैरत हई! मने एक ब चे को रोका. "जी. जब उसने मना िकया तो वो भागने लगा. मने शोक को वहाँ से भे ज िदया और िफर नमन से पूछा" अब बताओ मु झ"े "हाँ जी मै गया था वहाँ एक जगह और" "कौन सी जगह?" मने पूछा. संतरे . मने सोचा क चलो वहाँ से वो एक और सेब ले ले गा! इतने म मेरा दो त आ गया! मने उसको सेब वाली कहानी बता दी! मेरा दो त अपने िलए नमक न ले आया था तो सेब मने ही खाया! हमने अपनी िबयर ख़तम क और वािपस शादी वाली जगह पर आ गए!" "अ छा! वो जगह तु म पहचान लोगे अगर तु मको वहाँ ले जाया जाए तो?" मने पूछा. हमे तड़के ही िनकलना है वहाँ" मने नमन से कहा. मेरे दो त ने सोचा क वो मोटरसाइिकल वही ले आये तो बिढ़या रहे गा. मने उस से पूछा क कहाँ ले जा रहा है वो? तो उसने बताया क िबयर पीके आते ह और वो वह ले जा रहा था. और कुछ ब चे उसके पीछे -पीछे लगे ह. ये ठे का काफ अलग-थलग जगह पर बना हआ था. ले िकन उस ब चे ने मना कर िदया! उसके पास कोई ३-४ सेब थे. कल सु बह होते ही हम लोग अजमेर िनकलगे. मने तो उसके टोकरे म छोटी-छोटी बिफयां देखी थ ! हो सकता है. मने सोचा शायद अम द बेचने वाली होगी! मै भी उसी बु िढ़या क तरफ चल पड़ा. वो चार िबयर ले के आया. " शमा जी. बिफय के नीचे कह फल ह ? मने एक ५ का िस का िनकाला और उस ब चे से उसका सेब माँगा. तु म भी तैयार हो जाना सु बह. वही ँ चल पड़े . "हाँ मै पहचान लूँगा" उसने कहा तब मने शमा जी से कहा. मने पीछा िकया और उसका एक सेब छीन िलया! वो ब चा उन सब ब च के उलट उसी तरफ भागा जहां वो अ मा गयी थी.

वहाँ से उसने रा ता पहचान िकये और हमको बताता रहा. वहाँ से वो रा ता बता देगा. म देखा वो पहाड़ी काफ ऊंची और िबयाबान थी! मेरे मु ंह से िनकला 'तो ये है बड़ी पहाड़ी!' अब आिदल आगे आगे और हम पीछे पीछे ! करीब ५ िकलोमीटर चले हम उस बंजर और ऊबड़-खाबड़ रा ते पर! जब हम आगे गए तो मु झे वहाँ एक तालाब िदखाई िदया! मने शमा जी को एक अंजन िदया लगाने को! उ ह ने अपनी आँख म वो लगाया! उनको भी अपनी आँख पर यक न नह हआ! मने तब शमा जी को कहा. "सु न भी आिदल. आपका िज नात के गाँव म वागत होने वाला है!" शमा जी मु कुराए! मने कहा "आज यह दावत उड़ायगे हम!" आगे पहंचे तो एक संकरा रा ता िमला. और वो जगह भी जहां उसने वो सेब उस ब चे से छीना था! मने नमन से कहा. काफ ऊपर आने के बाद नमन ने वो जगह िदखाई जहां उसने उस बु िढ़या को देखा था. "नमन वो बु िढ़या िकस िदशा म गयी थी?" उसने उ र िदशा क ओर इशारा िकया और ऊँगली के इशारे से बता िदया. "शमा जी. "शमा जी अब आप मेरे पीछे रहने और हाँ. सामने सड़क िकनारे एक ठे का था. हम वहा से आगे बढे ! आगे आये तो एक िकले के फाटक पर नज़र पड़ी. अब मने नमन से रा ता पूछा . तब मने दोन बाप-बेटे को वािपस भे ज िदया गाडी म! मने शमा जी से कहा. मने अपनी शि का आ ान िकया! शि कट हई. जैसे क कोई अनाज पीस रहा हो! 8 . उ ह ने हमको देखा और हमने उनको. हम करीब १० बजे वहाँ पहँच गए. िन य-कम से फा रग हए. वहाँ कुछ िज नात खड़े हए थे. जैसा आप कह!" शमा जी ने कहा. वो वहां गया और उसने वही ँ से खड़े हो कर वो जगह बता दी जहां वो अपने दो त के साथ गया था! हम ऊपर चढ़े . हमने ना ता िकया और अजमेर जाने के िलए तैयार हो गए. हम उसको वही ँ ले गए. और िफर हाथ से उसके पीछे आने का इशारा िकया! अब हम इस अजमत के पीछे हो िलए! अज़मत हमको एक बड़ी सी हवेली का पास ले गया! हवेली का दरवाज़ा खु ला! हम अ दर घु स!े अ दर कोई नह था. नहाए-धोये तब तक अशोक क प नी ने ना ता बना िदया था. वो ही ाइव कर रहा था. और हम चलते रहे ! एक जगह जाके नमन ने गाडी कवा ली. आप भूल कर भी मेरे बाएं नह आना" "ठीक है गु जी. बता वो तेरी बु आ है कहाँ? आिदल ने एक और दूसरी पहाड़ी क तरफ इशारा िकया. नमन ने कहा क पहले उसको वहां ले जाएँ जहां उसके दो त का घर है.उसके बाद मै वहाँ से उठा और नहाने चला गया! रात को खाना खा कर हम सोने चले गये ! अगली सु बह उठे . आिदल क िस ी-िप ी गम थी! आिदल ने फाटक खु लवाया! फाटक खु लते ही हम अ दर गए! वहां िज नात ही िज नात! मने वहाँ बैठे हए बु जु ग को सलाम कहा उ ह ने भी सलाम का जवाब िदया! आिदल ने एक आवाज़ लगायी "अजमत?" एक ल बा-चौड़ा िज न वहाँ आया! उसने मु झे और िफर शमा जी को देखा. "शमा जी. मै और शमा जी उसको आधा-आधा पी गए! मने सरमा जी से कहा. दो बड़ी च ान के बीच म से गया था ये रा ता. अब हम आ गए ह बड़ी पहाड़ी पर. म आिदल को वहां हािज़र िकया! आिदल हािज़र हआ! मने आिदल से कहा. गाडी अशोक ने अपनी ली थी. हाँ एक च क चलने क आवाज़ आ रही थी. सामान िनकािलए!" उ ह ने एक हाफ शराब का िनकल िलया.

बहत समझाया ले िकन समझा नह . तब इसक दादी ने आिदल को भे जा था उसको सजा देने के िलए!" वो बोले "जी मै समझ गया आपक बात. आप तब तक हमारे मेहमान ह!" उ ह ने कहा. उस लड़के को अगर ये पता होता तो वो ऐसा हरिगज़ नह करता. उसक चौखट कोई ३० फ ट क होगी! हमने अ दर वेश िकया! अ दर मसनद लगे थे! इ क बौछार हो रही थी! फू ल से हर चीज़ सजी थी! ताज़े ताज़े गु लाब के फू ल! वो भी सु तान गु लाब! अजमत ने हमको वहां िबछे ग े पर िबठाया और खु द बाहर चला गया! आिदल बाहर ही खड़ा था! थोड़ी देर म अजमत के साथ एक बु जु गवार आये! एक दम सफ़ेद दाढ़ी! हाथ म फिटक क माला. "देिखये इस मु ािलक आपको इसक दादी से ही राय-मशिवरा करना होगा. चमचमाती सफ़ेद शेरवानी! मजमु आ इ क भीनी-भीनी खु शबू! हमने उनको सलाम िकया! उ ह ने भी हमको सलाम कहा! बोले . "यही क वो लड़का ठीक हो जाए! और कुछ नह !" मने कहा. अभी तो वो यहाँ है नह . आप िजस िसलिसले म आये ह उस से मै बखूबी वािकफ हँ !" "जी हाँ. ले िकन हम आदमजात है. आप उनसे खु द ही बात कर लीिजये गा! हम शाम तक यहाँ नह 9 क सकते" मने . अब उसको बहत सजा िमल गयी. कनीज़ आय ! गु लाबी सलवार म! ऊपर नीले रं ग का ओढना! चे हरे नकाब से ढं के हए! दोन ने अपने हाथ से एक थाल पकड़ा हआ था! ये थाल भी सोने का था और उसमे रखे दोन िगलास भी सोने के थे! दोन िगलास इतने बड़े थे क एक एक िगलास म २-२ लीटर शरबत भरा हआ था! मने और शमा जी ने अपने अपने िगलास उठाये ! शरबत िपया! शरबत इतना गाढ़ा था जैसे शहद म िम ण डाला गया हो! िजतना पी सकते थे उतना िपया बाक वही ँ रख िदया! शरबत के बाद वो बु जु गवार बोले. "जब इस ब चे का सेब छीना गया तो ये बहत रोया. "हाँ. अब उसको छुडवा दीिजये " मने कहा. सच कहता हँ इंसान म ऐसी सु दरता और जलाल नह होता!. ये बात उसने मु झे बतायी थी" मने कहा. "जी फरमाएं . और उस गिलयारे म आिखर म एक बड़ा सा कमरा था.अजमत एक गिलयारे म ले गया. मै उसी िसलिसले म यहाँ आया हँ!" मने कहा.दादी का यारा लाडला है ये !" "अफ़सोस क बात है ये " मने कहा. "उस आदमजात ने हमारे एक पोते का सेब छीन िलया!" वो बोले . " या चाहते ह आप?" वो बोले . "िजस ब चे का वो सेब छीना गया उस ब चे का नाम है मौिमन. हर एक को बराबर नज़र से देखते ह. शाम तक आ जाये गी. "ले िकन आप हमारी मदद कर सकते ह. "जी नह " म जवाब िदया. "ह म! या आप जानते ह क उसने या िकया?" वो बोले . और आसमान सर पर उठा िलया. परे शान हआ. इस ब चे क माँ आजकल भोपाल म क़ैद है िकसी के पास और इसका बाप बालूिच तान म क़ैद है और अब इसक देखभाल इसक दादी करती है. "बैिठये !" हम बैठ गए! तभी वहां दो सु ंदर सी.

"ठीक है बरखु रदार. मै बात कर लूँगा. आप मु झे उनका नाम बता दीिजये" मने कहा. उस लड़के से बोिलए क ताज़े सेब एक मन रात को १ बजे उस जगह रखवा दीिजये जहां उसने वो सेब छीना था!" "ठीक है. आपने शेख क जो शामत क भाई मै उस से आपका मु रीद हो गया! मज़बूत इ म वाले हो आप!" वो बोले "जी शु ि या! मने कहा. "और ये मेरा पोता है. तो इसक दादी बेहद खु श होगी! "ठीक है. और इतने म ही एक ब चा वहाँ आया और उनक गोद म बैठ गया! वो बोले . ले िकन उसको पहनने क और वहाँ 'बड़ी पहाड़ी' गाँव म जाने का आज तक अवसर नह िमला! हाँ! दो िदन के बाद मने शाइ ता और िफ़रोज़ को आज़ाद करा िदया! वो दोन मु झे शु ि या फरमाने मेरे सामने हािज़र हए खु द अपनी मज़ से अपने ब चे के साथ! 10 . "माँ का नाम है शाइ ता और बाप का नाम है िफ़रोज़" वो बोले . "मै चाहता हँ क इस ब चे मौिमन को उसक माँ और बाप िमल जाएँ. आप एक काम क िजये गा. अगर सु नो तो मै बताऊँ?" उ ह ने कहा. मै करवा दूंगा.कहा. "मै आज़ाद करवा दूंगा. मै आज ही रखवा दूंगा!" मने कहा. "और हाँ. िफ़रोज़ मेरा बेटा!" "ओह!" मेरे मु ंह से िनकला! "ठीक है उस लड़के को माफ़ िकया गया. "आपसे एक इ तजा है. "ये ही है वो लड़का. ये एक कड़ा है रख लीिजये . िफर कभी मन करे तो आ जाइएगा! आपके िलए ये गरीबखाना हमेशा खु ला है! मने वो कड़ा अपनी जेब म रख िलया और वािपस हो गए! मने उसी रात अपने वायदे के अनु सार एक मन सेब वहाँ रखवा िदए और वािपस जयपु र रवाना हो गए! वो कड़ा आज भी मेरे पास है. आप मु तमईन हो जाइए!" वो बोले "ठीक है! आपका बेहद शु ि या! मै २ रोज़ बाद उनको आज़ाद करवा दूंगा!" मने कहा और खड़ा हो गया! जाते जाते वो बोले . "सु िनए. आप बेिफ रिहये !" मने कहा. "जी फरमाइए?" मने कहा. िजसका सेब छीना गया था!" "अ छा अ छा" मने कहा.

गया म मेरे एक और प रिचत कापािलक ह. ऐसा बोले " वो बोले "आप पहले बता देते ना उनको" मने कहा. "तो कोई बात नह . वो आये थे िकसी के साथ. मेरी जब उनसे मु लाक़ात हई तो उस व त वो बैठे हए थे अपने बगीचे म. गया हआ था. वो ही ले गए थे. उ ह ने मु झे बताया िक नवीन का अपना वहाँ कपडे का यवसाय है. आ गए इधर. " ये या हआ आपको?" "बस या बताएं आपको. लोग काम तो करा ले ते ह ले िकन िफर वायदा पूरा नह करते . तब उ ह ने आवाज़ लगाई ं. नह ले गए. एक जानकार थे. 1 . कोई काम िकया होगा िकसी का. उनको खबर िमली क िद ली से आये ह कोई तो उ ह ने फ़ौरन ही हमे बु लवाने के िलए अपने साथी भे ज िदए! वो हमे अ दर बगीचे म ले के गए! ३-४ कुिसयाँ लगी हई ं थ पहले से ही वहाँ. उनका काम कर िदया. "जमशेदपु र के एक थे सु शील. दीपू िगलास लाया और अवधे श साहब ने काम करना शु का िदया! उ ह ने 'सामान' का पैकेट खोला. सो मै और शमा जी वहां बैठ गए. बस उसी का नतीजा है ये सब!" मै समझ गया. ज दी क रओ. झे लना हमको पड़ता है!" वो बोले ! "ऐसा या काम था और या वायदा?" मने पूछा. मै जब अवधे श के पास पहँच तो उनक तिबयत काफ खराब थी. मौिसम बा रश का हो रहा था! मै शमा जी के साथ उन िदन गया. रहने वाले वो वैसे झारख ड के ह ले िकन अब वो गया म ही रहते ह. वो चंडीगढ़ म प रवार सिहत रहता है और कोई ८ िदन पहले उसका फ़ोन आया था अवधे श के पास. ले िकन कोई ६ महीन से उसका काम ठ प हो गया था. मने कहा था. टेबल पर रखा और काम शु हो गया! बात ही बात म उ ह ने एक िकसी नवीन शमा का िज िकया. रात हो जाये गी उनको" वो बोले . उनक लड़क क एक टांग म एक ज़ म हो गया था. काम होने के बाद वायदा याद नह रहा और झे लना पड़ा इनको! "यही होता है जब लोग अपना काम करा के भूल जाते ह. उसने कुछ वायदा िकया होगा. एक दो बार उनसे कोलकाता म भी मु लाक़ात हई है. मने उनको देखा तो पूरे सीधे पाँव म प ी बंधी हई थी. डॉ टस ने काटने क बात कही. अवधे श कुमार. "ओ दीपू? जा सामान ले आ. काम होने के बाद कालीघाट कोलकाता म एक बकरा ले जाना.वष २००८ चंडीगढ़ क एक घटना अग त के िदन चल रहे थे. मै सीधा उ ही के पास गया था और जो प रिचत मेरे साथ आये थे वो िपंड-दान करने गया जी मंिदर चले गए थे. अवधे श ने उसको अपने न आने का कारण बताया और मेरा िज िकया था नवीन से. आजकल तो भीड़ है वहाँ. उनके संगी-साथी ही उनक टहल कर रहे थे. उनका पूरा प रवार जमशेदपु र म रहता है मेरे उनके साथ अ छे स ब ध ह. "खैर छोिडये . आप कैसे इधर आज?" "िद ली से आये ह कुछ लोग िपंड-दान करने उनके साथ ही आया हँ" मने बताया. मु झे झे लना पड़ा!" " यूँ नह गए?" मने पूछा. मने उनसे पूछा. िबहार. लोग क दी हई मार है. भागे इधर-उधर. "बस हमारे यहाँ नह चढ़ता बकरा. साहब लोग ह" दीपू ने कूटी टाट क और चला गया! थोड़ी देर म 'सामान' आ गया! अवधे श साहब हमको अ दर ले गए अ दर ले जाके ि ज से बफ िनकाली.

साल म एक बार ये दोन भाई यहाँ आते ह िमलने. "अरे साहब! जब दावाज़ा िमल गया. जब मै िद ली पहँच जाऊं तो नवीन को फ़ोन कर दूँ. तो ताला खोलने म या देर?" वो हंसके बोले ! "हाँ. नम कार हई और हम भी वही ँ जाकर बैठ गए. नवीन ने कहा क ठीक है.े इनक िखदमत म क कमी हई है. मु झ. वो भी यह ठहर जायगे. आने वाली होली पर संपण ू हो जाये गी!" मने kaha और इसके बाद हम खाते-रहे और पीते रहे . कुल िमला के प रवार म अचानक िवपि टू ट पड़ी थी. दूसरी तरफ से फ़ोन क घंटी बजी और फ़ोन नवीन ने उठा िलया. णाम" ऐसा कह के उ ह ने फ़ोन काट िदया और मु झे वो नंबर नोट करने को कहा. उ ह ने िनरािमष ही कहा तो िनरािमष भोजन आ गया था! सभी ने िमल बैठ के खाया! देर रात तक बात होती रह और मै और शमा जी. मने बात क . "हाँ िमल गया. ७ बज गए थे! अवधे श ने कहा. मेरी बात हो गयी थी मने फ़ोन अवधे श को पकड़ा िदया. सु कून देती है" वो बोले . अब या है क मै तो वहाँ जा नह सकता इसीिलए मने उसको आपके बारे म बताया था. (उसने णाम िकया) हाँ. एक एक कप चाय और मंगा दी और साथ म ना ता भी! मने अवधे श से कहा. इतने म िद ली वाले भी आ गए. " हे लो. उसक बीवी भी बीमार थी. जब वािपस आया तो चाय भी आ चु क थी!चाय पी और हम दोन बाहर बगीचे म आ गए! अवधे श वही ँ बैठे हए थे. तभी इ होने हाँ क है. िफर आपसे बात क ं गा. ठीक है? हाँ. मने शमा जी को कहा और शमा जी ने वो नंबर नोट कर िलया." हाँ नवीन! णाम! ऐसा है मने तु मको अपने एक िद ली वाले साहब के बारे म बताया था. तब जाके पूण हो जाये गी!" मने कहा. हाँ नवीन साहब."हाँ साहब. बहत आपा-धापी कर ली 2 . "ये नवीन इमानदार आदमी है. आज सौभा य से वो यह आये हए ह. को ज़रा" ऐसा कह के उ ह ने फ़ोन मु झे थमा िदया. आदर स कार हआ और िफर एक दो जाम उनके साथ भी चले ! रात हई तो अवशेष साहब ने खाने का इंतजाम भी करा िलया था! उ ह ने पहले िद ली वाल से पूछ िलया था िक भोजन सािमष चले गा या िनरािमष. "सु नो नवीन. मने वो पूण कर ली है" मने कहा. मेरे संपक म कोई १० साल से है इनके बड़े भाई अ बाला म रहते ह वो भी इमानदार आदमी ह. आज रात यह ठहरो और िव ाम करो. "ये जगह बड़ी खूबसूरत है. वो तो हमारा और इनका आपसी मेल-जोल है.िपताजी क तिबयत खराब हो गयी थी और उनके इलाज म कोई १० लाख पये व लगा चु का था. गया जी मंिदर से फ़ोन आया िक वो रात ८ बजे तक िपंड-दान कर दगे. मने भी नान करने के िलए अपना तौिलया उठाया और नान करने चला गया. िद ली वाले जब आये तो वो भी 'सामान' ले कर आये थे! मने उनका प रचय अवधे श से करवाया. रहाइश कम थी उस इलाके म. अवधे श ने कहा. िक उनको भी यह बु ला लो. पीछे क तरफ एक बड़ा सा तालाब था और सामने बाज़ार को जाती एक सड़क. " साद िमल गया?" उ ह ने पूछा. मै तु हारी बात कराता हँ उनसे. चाबी आपके हाथ म है. ये जो हमारे साहब ह ये िकसी के लाख कहने पर भी काम नह करते." मु झे ऋिष ने बताया था क आपक काम या म ' ी कपालमोचन -साधना' पूण हो गयी है?" "हाँ. दौर िफर से शु हो गया! अवधे श बोले . अवधे श बोले . िद ली वाले अपने अपने कर म जाके िव ाम करने चले गए! सु बह मेरी न द खु ली तो शमा जी नान करके आ चु के थे. आपको तो पता ही है. ऐसी कोई िशकायत नह िमलनी चािहए. मै उसको अभी फ़ोन करता हँ ठह रये !" ये कह के पहले उ ह ने अपना िगलास खाली िकया और िफर नवीन को फ़ोन िमला िदया. मु झे अभी इ होने आपके बारे म बताया है. कहाँ होटलवोटेल के च कर म पड़गे वोलोग! मने शमा जी से उनको फ़ोन करने को कह िदया और उनको भी यह आने क सलाह दी! रात करीब साढ़े ९ बजे िद ली वाले लाला लोग नही आ गए वही ँ! अवधे श का ये िनवास काफ बड़ा और ज़रा शहर क िच लप से दूर था. बोले . ठीक है?" मने कहा. मै कल या परस म िद ली पहँच जाऊँगा. एक वष और है अभी.

नवीन ने फ़ोन उठाया. तो नवीन ने बताया क उसके २ भाई और ह. प रवार म दो सद य अचानक बीमार हो जाते ह.िजंदगी म अब तो रटायरमट का समय आ गया है!" "अभी कहाँ रटायरमट अवधे श जी.िजस से कोई िववाद उ प न हो! तब मने नवीन को घर से एक रोटी बनवाके मेरे पास लाने के िलए कहा. िजस िदन नवीन ने ऐसा कहा था उस िदन शु वार था! मु झे नवीन क कोई सम या इतनी बड़ी नह लगी थी. इस से घर म िकसी भी कार के टोन-टोटके. वो अपने िपताजी को िद ली तक िदखा चु का है.योग आिद का पता चल जाता है. ये सब तीन महीन के अ दर ही हआ है. ऐसा मने सोच. तं . ले िकन उनका नवीन के साथ स ब ध केवल तीज. ले िकन दोन लड़िकयां ही घर म नह रहत वो पूना म कह पढाई कर रही ह. अभी तो काफ काम बाक है!" मने कहा. रोटी मेरे हाथ म आई तो मने उसके २ टु कड़े िकये . कभी-कभार यि गलती से िकसी गलत जगह पाँव रख देता है.योहार तक ही स बंिधत है. बीच म खाना खाया और चल पड़े िफर से िद ली िक ओर! थके-थकाए िद ली पहंचे. मानव जीवन है.शमा जी ने करीब १५ िमनट उस से बात क . काम चौपट हो चु का है.एक साथ प रवार पर संकट आ गया है और ये उसक समझ से बाहर है. इसी कारण उसके करीब १२ लाख पए लग चु के ह. घरे लू सम याएं और हारी-बीमारी तो चलती रहती ह. अब बहत हआ" वो बोले . दोन को एक से ल ण ह! जबिक प रवार के इितहास म ऐसा कभी नह हआ! नवीन के प रवार के बारे म मने और अिधक जानकारी मांगी.पता चल क नवीन क आिथक ि थित लगभग ३ महीन से डांवाडोल है और घर म उसके िपताजी क तबीयत काफ खराब रहने लगी है. काला तर म नवीन के िपता जी ने संपि का बंटवारा कर िदया था अपने जीते जी. मामला अजीब सा लग रहा था. ले िकन कोई फायदा नह हआ है. और इस बहाने नवीन से भी मु लाक़ात हो जायगी. उसक २ लड़िकयां है. मु झे भी नवीन के बारे म ऐसा ही लगा था. उसको भी वही ँ सब ल ण ह जो क उसके िपताजी के थे.उनको अधरं ग हो गया है. प रवार का कोई िकसी से झगडा आिद नह था. सद गम क तासीर तो झे लनी ही पड़ती है! शमा जी ने सु झाव िदया क कल सु बह नवीन से बात करगे! इसके बाद मने और शमा जी ने अलख को भोग िदया और सोने के िलए चल पड़े ! सु बह कोई ११ बजे शमा जी ने नवीन को फ़ोन िमलाया. अभी वो िपताजी का इलाज करा ही रहा था क उसक प नी को भी ऐसी ही परे शानी हो गयी है. उसको डॉ टर को िदखाया गया तो डॉ टर ने बताया क काम क अिधकता से ऐसा हआ है. िजसको या तो अिभमंि त िकया होता है या िफर कुछ अिभमंि त िमला िदया जाता है! शिनवार बीता और रिववार आया. उ ह ने कहा क कल िदन म नवीन से बात करते ह क उसके साथ या सम या है. रिववार कोई २ बजे नवीन अपने कहे अनु सार एक रोटी ले कर आ गया. बड़ी लड़क ने फ़ोन करके बताया िकवो एक िदन कॉले ज म बेहोश हो गयी थी. "नह साहब. इतने म ही ना ता आ गया और हमने ना ता कर िलया! थोड़ी देर बाद अवधे श जी से बात हई ं और वापी िक आ ा ली! हम करीब १० बजे वहाँ से िनकल पड़े थे! रा ते म. लाला लोग ने हमको हमारे थान पर छोड़ा और उस रात शमा जी वही ँ ठहरे ! मने उनसे नवीन के बारे म बात क . बस ये ही कहा क कोई 3 . या कभी-कभी यि को पता नह चलता और वो िकसी के िव ाश म आके कुछ खा-पी ले ता है. नवीन ने रिववार को रोटी लाने को कह िदया. िकसी और क िवपि याँ अपने घर म आमंि त कर ले ता है. सूंघ कर देखा तो लोहबान और गु लाब इतर क खु शबू आई! अथात ये कोई मु ि लम ताक़त थी! यही नवीन क आिथक और पा रवा रक संकट का कारण था! मने नवीन को नह कहा कुछ भी.

. नवीन थोड़ी देर का और बोला.. तो उ ह ने रात को नह आने को कहा.अ. "मु झे तो ये आदमी शरीफ लगा गु जी.बात नह . मने उनको सारी बात से अवगत करवाया! शमा जी भी अवाक रह गए! शमा जी ने कहा िक मै अभी फ़ोन करता हँ नवीन को! उ ह ने नवीन को फ़ोन िकया! फ़ोन नवीन ने ही उठाया. 4 ... मु झे देखना पड़े गा. "मै बताता हँ आपको नवीन जी. मई देखते रहा और िवि मत होता रहा! नवीन ने बहत कुछ छुपाया था हमसे! यही होता है जब लोग छुपाते ह और सब सामने आता है तो रणनीित दु बारा से बनानी पड़ती है! एक चूक और आपका काम तमाम! मने शमा जी के आने का इंतज़ार िकया और िफर िव ाम करने चला गया! अगले िदन शमा जी आ गए.... "जी मने कोई बात नह छुपायी? जो था मने आपको बता िदया था?" नवीन ने कहा. "ल आपने अपनी छोटी लड़क डॉली के बारे म हमको नह बताया?" शमा जी ने कहा. कोई मु ि लम ताक़त है. तब मने शमा जी से कहा..आपने हमसे काफ -कुछ छुपाया.. हआ था!" "िकस वजह से हआ था? शमा जी ने पूछा. "डॉली के कारण आपके घर म कले श हआ िक नह ? आपये बताइये पहले " शमा जी ने पूछा. अब रात को ही इनका अवलोकन करना होगा! मै उसी रात अलख म बैठा.. मने कहा िक ठीक है कोई बात नह आपके अगले िदन आ जाना. "जी हाँ.. कृ पया आप मु झे बताइये?" नवीन ने हैरत से पूछा.. और मु झे कह से भी ये तेज-तरार नह लगा" शमा जी ने कहा.... ये बात तो है. लड़के का नाम रजवान है. चिलए आज रात को देखते ह िक इसक वजह है या?" उस िदन शमा जी के घर म उनके कोई र तेदार आये हए थे.. इसका समाधान हो जाएगा! नवीन चला गया. है या नह ?" शमा जी ने पूछा. २ लड़िकयां है इसक . आपक लड़क डॉली. "कोई है घर पे सम या.." नवीन बोल नह पा रहा था.. दोन ही पूना म पढाई कर रही ह. नम कार वगैरह हई और उसके बाद शमा जी ने असली बात कही! "नवीन जी. मै आपसे पूछना चाहँगा िक यूँ?" शमा जी ने पूछा...अ. एक मु सलमान लड़के से ेम करती है.. और अवलोकन शु कर िदया. मने वो रोटी के दोन टु कड़े उठाये और अ दर अलख के कमरे म रख िदए..... इतनी बात होने के बाद शमा जी वहाँ से चले गए. कह नवीन या उसके घर के िकसी सद य से ही कोई गलती न हई हो" मने बताया. "शमा जी.. बोिलए. इसम कोई संदेह नह क नवीन के घर पर कोई साया है!" "कैसा साया गु जी?" वो बोले . "मने या नह बताया. "जी. पूजन िकया और उन दो रोटी के टु कड़ को िलया. "हाँ ये बात तो है शमा जी. पढाई के िलए इसने अपने ब च के िलए अपनी िज मेवारी बखूबी िनभायी है...

ये जो आपके साथ हो रहा है वो ३ महीन से हो रहा है. "आपका एहसानमंद रहँगा िजंदगी भर" नवीन ने कहा. "जी मा क िजये गा. डॉली के साथ ही पढ़ा करता था साथ म" नवीन ने कहा. रात सही ८ बजे नवीन का फ़ोन आ गया. ठीक है? शमा जी ने पूछा. आपके साथ आपका काम-काज ठ प. मै आपसे कुछ दीिजये गा. "जी हाँ. "कोई बात नह " शमा जी ने कहा. शमा जी ना फ़ोन पर उस से बात क . उनके िपता जी यहाँ वक ल ह" नवीन बोला. है ना? शमा जी ने पूछा. वो यह रहते ह. आपको सारी बात बतानी चािहए थ हमको. "जी एक बार मेरे बड़े बही के लड़के ने रजवान और डॉली को एक गाडन म आपि जनक ि थित म देखा था. उसने ये बात 5 . मु झे आप आज रात कोई ८ बजे कॉल क िजये . आपक प नी के साथ सम या. वो बेहोश हई कॉले ज म. नम कार" और ये कह के फ़ोन कट गया. आप पूिछए" नवीन ने कहा."जी हाँ" नवीन ने बताया. "ये रजवान कौन है?" शमा जी ने पूछा "जी यह पास म रहता है. अब देखते ह क या िकया जा सकता है?" शमा जी ने कहा. "घर आता-जाता था?" शमा जी ने पूछा. "नवीन जी? या आपने कभी गौर िकया? आपके िपताजी के साथ सम या. आप एक काम क िजये . "अब हमने सब देख िलया है. ले िकन डॉली को कुछ नह ? या आपने सोचा?" "हाँ! हाँ! मै कल ये ही सोच रहा था जो आप कह रहे ह!" नवीन ने कहा. "नवीन जी. अ छा जी. "नवीन जी. "कोई बात नह . "कले श यूँ हआ?" शमा जी ने पूछा. इसीिलए मने अवधे श जी से बात क थी" नवीन ने बताया. "ठीक है. "हाँ जी. भूल हो गयी मु झसे" नवीन ने कहा. "हाँ जी. तभी तो हम काम कर सकते ह? मान लीिजये हम वहाँ आ जाते िबना इसक तैयारी के तो रण-नीित बदलनी पड़ती हमको!" शमा जी ने समझाया. पूछूँगा. और उसक भी तबीयत खराब होनी शु . " रजवान के माता िपता कहाँ ह? वही ँ रहते ह?" शमा जी ने पूछा. आप उ र देने म संकोच नह करना और मु झे सही और प उ र देना" "ठीक है. आना-जाना था उसका" नवीन बोला. आपक बड़ी लड़क पूजा. आप उनका उ र "जी मै कॉल कर लूँगा आपको ८ बजे. मै आपसे कुछ शन पूछूँगा. उ ह ने कहा.

जब रजवान को ये पता चला क डॉली के घर म उसको ले कर कले श हो गया है और डॉली को उसके बाप ने एक चांटा मार िदया है तो उसका जु नन ू ी. और वो उसको समझा दगे. "मने डॉली को मना िकया उस लड़के से िमलने के िलए" नवीन ने कहा. त रिहये " नवीन ने "ठीक है नवीन जी. ले िकन कोस अलग है" "अ छा नवीन जी. रजवान ये कह के घर से बहार िनकल गया था" नवीन ने कहा. यूंिक वो उस से वो यार करती है और वो र वानसे शादी करे गी. " या आपने रजवान के िपता जी से बात क ?" शमा जी ने कहा. "वो लोग आपसे िकस यवहार से िमले ?" शमा जी ने िकया. रजवान के िपता को भी झटका लगा. इसको कब भे जा पूना?" शमा जी ने पूछा. अब आपक ये बेटी डॉली पूना म है. नह मानी. मने उनको इस सम या के बारे म बताया." गु जी. इसका पता और लगाइए ज़रा" "शमा जी. अब हम देखते ह क सम या है कहाँ? या डॉली के फ़ोन घर पर आते ह? ये और बताइये ?" शमा जी ने कहा. "हाँ जी आते ह. मै एक बार उनके घर गया था अपनी प नी के साथ" नवीन ने कहा. ले िकन मेरे से बात नह करती बस अपनी माँ से ही एक-आद बार बात कर ले ती है" नवीन ने बताया थोड़ी देर और बात हई ं और िफर फ़ोन कट गया. उसने साफ़ कहा क वो उस से बात करना नह छोड़े गी. मने इसको भी वहाँ दािखला िदला िदया.मु झे बतायी. कई बार मेरी प नी और मेरी बड़ी बेटी ने भी काफ समझाया. रजवान से उसक बात करना ज़ारी रहा" नवीन ने दु ःख के साथ कहा. "जी उ ह ने हमारी बहत खाितर क . "और आपने या िकया िफर?" शमा जी ने पूछा. ये बात मेरे िपता जी को पता चली तो उ ह ने ने भी डॉली को समझाया. आप िनि कहा. तो उसने भी यही कहा क वो डॉली को यार करता है और उसी से शादी करे गा. शमा जी बोले . ले िकन इनक हालत यूँ खराब है. और जब मने डॉली से पूछा तो उसने मन कर िदया" नवीन ने कहा. मेरे तो होश उड़ गए. ले िकन वो नह मानी. "डॉली मान गयी?" शमा जी ने कहा. "नादानी कैसे? वो बैठते हए बोले . यहाँ तक तो सब ठीक है. ले िकन वो नह मानी. काफ अ छे से िमले . उसने गु सा िकया और िफर मेरे से बात नह क . "देखो. "जी कोई २ महीने पहले . उ ह ने रजवान को बु लाया और उस से इस बारे म पूछा. उनका बेटा रजवान वही ँ था. इसका कारण है रजवान क नादानी!" मने कहा. "हाँ. "नह . "उ ह ने हमे आ ाशन िदया क आगे से ये ऐसा नह करे गा. "िफर? िफर रजवान के िपता ने या कहा?" शमा जी ने कहा.ेम भड़क गया! उसके होते हए कोई डॉली को कोई कैसे हाथ लगा सकता है? एक तो ये 6 . मेरी बड़ी बेटी वहाँ डिट ट क पढ़ाई कर रही है. गु से म मने उसको एक चांटा लगा िदया.

और मै अपने काम पर लग गया! उसी रात को मने शमा जी को अपने साथ रोका. थोडा बना हआ भी ले आऊं?" वो बोले . वो अपनी बीवी को ले के अ पताल गया है. ले आओ" मने कहा. "हे लो?" मने कहा. ये बड़ी हैरत वाली बात थी! एक गु िनया एक का रं दे को रोकने म स म है! यानी क गु िनया ट कर का आदमी है! मने अब दु बारा एक खबीस को हािज़र करवाया. खबीस ने 'सामान' िलया खाया और रवाना हो गया! पूरे एक घंटे के बाद खबीस आया! खबीस ने बताया क वो गु िनया िकसी बल सरं ण म है! और उसके खबीस ने 7 . "ठीक है गु जी. वहां कुछ ज़ री सामान िनकल और एक बैग म रख िलया. "गु जी. मै संपक म हँ" उ ह ने कहा. काम सु धर जाएगा. आिखर ेम गु नाह नह !"मने कहा "हाँ वो हमारा काम नह " शमा जी बोले . उसने अपनी सारी बात उसको बतायी. "ठीक है. वो बेहोश हो गयी है और कुछ भी जवाब नह दे रही. नवीन का फ़ोन आया था अभी. आप एक काम क िजए. और मै अपने अ दर वाले थान पर चला गया. "हाँ. "ठीक है. का रं दे ने बताया क वो वहाँ घु स ना पा रहा है. आधे घंटे के बाद का र दा आया. तभी मेरे फ़ोन पर घंटी बजी. और उसके बाद वही हआ जो हमको नवीन ने बताया! ये सब उस गु िनया का काम है शमा जी!" मने कहा "अ छा अ छा! अब मै समझा!ठीक ठीक" शमा जी ने कहा! "इसका मतलब अगर उस गु िनया को पकड़ कर लताड़ िदया जाए तो काम सु लझ जाएगा!" वो दु बारा बोले.और दूसरा ये क डॉली के माता-िपता वयं रजवान के घर पर आ गए थे उसक िशकायत ले के! उस व त रजवान के िपता जी घर पर िमले थे और उ ह ने जब रजवान से पूछा तो उसने अपने बाप के और डॉली के माँ बाप के सामने ये कुबूल िकया क वो डॉली से यार करता है और वो उसी से शादी करे गा! जब रजवान के िपता जी ने ये बात अपनी प नी को बताय तो उ ह ने ने भी रजवान को बहत समझाया होगा. ज़ रत पड़े गी और साथ म ' साद' भी! मने कहा. "हाँ. इसीिलए उसको अ पताल ले जाना पड़ा" शमा जी ने कहा. मने का रं दे को उसका काम बताया और का र दा रवाना हो गया. और थोड़ी देर म ही का र दा हािज़र हो गया. आप उस से संपक म रिहये . आप एक िकलो 'सामान' ले आइये . ये शमा जी का फ़ोन था. शमा जी ये कह के उठे और अपनी गाडी म जा के बैठ गए. हम नह . मने अलख-भोग िदया. ले िकन वो नह समझा! अब वो ये जान चु का था क अब ना तो डॉली के माँ बाप और ना ही वयं उसके माँ बाप उसक और डॉली क शादी के प म ह. कोई नै बात होते ही मु झे इि ला कर" मने कहा. तो अब िकया या जाए? वो इसी उधे ड़बु न म था क एक धमाका और हो गया! नवीन ने डॉली को ज़बरद ती पूना भे ज िदया तािक वहाँ जाके इस कहानी पर िवराम लगे ! ले िकन ऐसा हआ नह ! वहाँ भी डॉली से वो लगातार संपक म था! अब उस से और देरी बदा त नह हई और उसने एक गलत िनणय ले िलया! वो शर से बाहर क तरफ जाने वाले रा ते पर पड़ने वाले एक डे रे म गया. "ठीक है" मने कहा और फ़ोन रखा िदया. "ठीक है मै आज ये पता लगाता हँ क वो गु िनया है कहाँ और या कर रहा है. ले िकन इनक पा रवा रक ि थित ये खु द ही संभालगे. वो 'सामान' ले आये थे.वहाँ उसको एक गु िनया िमला.

इसम कोई भी व तु घटे नह और बढे नह . और उनका यान इसी से बाँट सकता था जब मै इस चे ले उमेश क खाल उतार दूँ! मने शमा जी को कहा.उनक बीवी को पे ट दद क और अितसार क िशकायत है. इस बार कहानी टेढ़ी है. यिद नह आ सकता हो. आप कल सु बह नवीन को फ़ोन करना क हम लोग चंडीगढ़ आ रहे ह. मै सीधे सीधे उनसे नह लड़ सकता था. मने िजतना सीधा समझा था उ ती है नह . "जी िपताजी के िवषय म क बात नह हई. "शमा जी. उसको कहना क कल वो अपने काम िकछुि रहे . "आज िदन म आपक बात हई थी? नवीन से? मने शमा जी से पूछा. "ये लो.वाह भी है" शमा जी ने कहा. और उनके िपताजी कैसे ह? मने पूछा. अगर वो बल और दमदार है तो वो ऐसे ओछे काम यूँ करे गा? मने अब एक दूसरी ताक़त को हािज़र िकया! उसको बताया सारा माजरा और रवाना कर िदया! १० िमनट आ द वो हािज़र हई और उसने जो बताया वो एक दम सटीक था! ये गु िनया एक बु ज़ु ग मौलवी साहब का चे ला था! मौलवी साहब क उ करीब ८० साल के आस-पास थी.उसको अ दर नह जाने िदया! इसका मतलब था क सामने वाला अित बल और दमदार है! ले िकन एक बात और थी. एक बूँद भी नीचे नह िगरी! "सु नो. "ठीक है. कोई अपवाद नह " मने ये कागज़ िलख कर शमा जी को दे िदया. शमा जी. वो हमको वही ँ िमले . शादी नह क थी और िज़दगी भर अपने अमल ही इक े िकये थे! एक एकांत जगह पर ये रहा करते थे! ये गु िनया िजसका नाम उमेश था. अ पताल म हो तो हमको अपताल का पता दे दे तािक हम वही ँ उस से िमल सक. थोडा बहत म सीख िलया था. "अ छा. बि क काफ गहरी और मज़बूत है!" "अ छा गु जी" शमा जी ने कहा. और हाँ एक काम और करना. मै नह चाहता था क िकसी तरह का कोई टकराव हो. मने अपनी उस ताक़त को वािपस िकया और उसको उसका भोग दे िदया! "फट' क आवाज़ से उसने वो भोग फाड़ िदया. उनको चु नौती भी मै नह देना चाहता था. मै सु बह होते ही नवीन को फ़ोन कर दूंगा" शमा जी बोले . शमा जी ने जेब से पे न िनकाला और एक कागज़ दे िदया. उनक सेवा करता था. देरी करने से सब कुछ ख़तम हो सकता है" "ठीक है गु जी. हाँ उनका यान ज़ र बंटाना चाहता था. और कहना क अब देरी ना कर. मै कल मालूम कर लूँगा!" शमा जी ने कहा 8 . आप मु झे एक पे न और एक कागज़ दीिजये" मने कहा. उसके नौकर भी दूकान ना खोल" मने कहा. इ ही मौलवी साहब का िपछले १० साल से चे ला था. उनका ख़याल रखता था. "जी ठीक है. अितसार म र . "ठीक है मै ऐसा कह दूंगा" शमा जी ने कहा. मने उस पर कुछ साम ी िलख दी जो कल नवीन को खरीद कर रखनी थ ." वो बोले . "कल िनकलने से पहले आप ये मालूम कर ल पहले " मने कहा. "हाँ जी हई थी. आप पूरा पढ़ लो. "शमा जी.

इसीिलए ये उमेश ऐसा कर रहा है. उमेश ने कुछ पैसे हड़प िलए ह गे!" शमा जी ने अंदाज़ा लगाया. "ये ही बात है शमा जी! वो उ ही के साथ था!" मने जवाब िदया. मौलवी साहब क ताक़त ने रोका शमा जी!" मने कहा. "जो लड़का ऐसा काम करवा सकता है वो बाद म भी कुछ ना कुछ तो करे गा ही ना?" शमा जी ने संदेह ज़ािहर िकया. "अगर उनक ताक़त ने रोका तो इसका मतलब वो अलीम मौलवी साहब भी इसम शािमल ह? शमा जी ने पूछा. "और अगर गु जी हमने वो काम ठीक कर िदया तो िफर रजवान और डॉली का या होगा?" शमा जी ने च मे म से झांकते हए कहा. जो ये चाह कर! हम इस से कोई मतलब नह " मने कहा. पैसे का. क करवाएगा!" मने कहा. भ म का टीका शमा जी को लगाया और बोला "अलख िनरं जन!" "अलख िनरं जन!" करीब १० बजे मु झे शमा जी ने बताया क नवीन के िपताजी क तबीयत यथावत है और वो घर म ही ह. "ऐसा हआ होगा गु जी. "या िफर ये हो सकता है क जब का र दा और खबीस यहाँ से गए वो उमेश वही ँ मौलवी साहब के साथ हो?" शमा जी बोले . "गु जी खबीस ने बताया था क . िफर मै और शमा जी अपना-अपना आव यक सामान ले कर गाडी म बैठे और वहाँ से चंडीगढ़ के िलए कूच कर गए! रा ते म शमा जी ने मु झे से पूछा. शमा जी ने नवीन को सारी कागज़ पर िलखी साम ी िलखवा दी थी. 9 . "हँ! तो ये बात है!" शमा जी ने गदन िहलाई. देखते ह या होता है!" शमा जी ने कहा. "हाँ. और नवीन को हमारे आने क सूचना दे दी थी.मै खड़ा हआ. "खैर छोडो हमको तो अपना काम करना है. ये एक अ छी बात थी. उसक सब-कुछ बताया होगा क मु झे इसी लड़क से शादी करनी है. "वो इनका आपसी पा रवा रक मामला है. ये रजवान गया होगा उमेश के पास. हाँ अब उनक प नी के वा य म अव य ही सु धार हआ था. "हाँ! अगर शािमल ह तो!" मने कहा. खबीस ने बताया क वहाँ कई खबीस मौजूद ह!" मने जवाब िदया. लाजमी है. काम-काज ठ प करवा रहा है!" मने कहा. उसको अ दर नह जाने िदया? िकसने रोका उसको जहाँ तक मु झे मालूम है खबीस को २ खबीस िमलके रोक सकते ह? " "हाँ शमा जी. वो हमको ले ने आ जाएगा. वो नवीन को उलझाए जा रहा है मु सीबत म. "गु जी? एक गु िनया ऐसा यूँ करे गा? मेरा मतलब वो का रं दे को कैसे रोक पाये गा? "का रं दे को उसने नह रोका. "हाँ. ले िकन रजवान ने शादी होने के बाद भी कुछ वायदा िकया होगा." "हो भी सकता है और नह भी!" मने जवाब िदया "अगर मौलवी साहब इसम शािमल ह तो इसका मतलब इस बार ट कर ज़बरद त है!" वो बोले . और नवीन ने कहा था क नवीन ये सारी साम ी आज ही खरीद ले गा.

इलाका अ छा था और साफ़-सफाई थी. दोन ही लड़िकयां आधु िनक-प रवेश म थ . "ये देिखये . नम कार आिद हई. २ कमरे छोड़ कर. आइये िमलवाता हँ" नवीन ने कहा. अभी ३ महीने पहले खूब चलते थे . "नह . बहत अ छे से िमला वो. मल-मू क यव था वही ँ क गयी थी. आगे जाके शमा जी ने गाडी साइड म लगाई और 'सामान' खरीदने चले गए. ये पीली शट म जी है वो है डॉली और ये जो नीले टॉप म है. उठते थे. नवीन हमारे साथ बैठा और अपने घर क तरफ गाडी मु डवा di नवीन ने एक अ छी जगह मकान बना रखा था. बाद म िमल लगे हम" मने कहा. मु झे और शमा जी को वो बाथ म ले गया जहां हमने अपने हाथ-मु ंह धोये ! वािपस आ कर बैठे तो उसका नौकर चाय बना के ले आया! हमने िबना बात िकये चाय पी! शमा जी ने ही चु पी तोड़ी. हम दोन उठ के खड़े हए और उसके िपता जी को देखने चल पड़े . "ठीक है. रहने दीिजये . हालत खराब थी. चलगे भी और घूमगे भी!" मने कहा. मने ए बम िलया और फोटो देखा. ये है मेरी बड़ी बेटी पूजा" उसने वो ए बम हमको देते हए कहा. आराम करने दीिजये . उसने हमो वही िबठाया जहां हमने चाय पी थी. थोड़ी देर बाद आये तो वही सामान था तो वो हमेशा खरीदते ह! उनको मेरा पता है! शमा जी ने गाडी थोडा और आगे लगाई ं और बना डाले मोटे मोटे २ पे ग! हमने साथ साथ कुछ खाया और पे ग पीते रहे ! "शमा जी. नवीन बाहर िनकला और हम भी. मै समझ गया!" ये कह के उ ह ने अपना पे ग ख़तम िकया और गाडी टाट करके दौड़ा दी! हम शाम तक चंडीगढ़ पहँच गए. एक अलग कमरे म उसके िपताजी ले टे हए थे. यही उसका घर था. घूमने जाते थे ले िकन अब िसफ िब तर पर ही िटक गए ह". "जी वो दु सरे कमरे म ह. "आपक प नी कहाँ ह? शमा जी ने कहा. "८५ वष तो है ही. खु ली मानिसकता वाली िजसे क आजकल 10 . "नवीन जी. आप ज़रा नवीन को कुरे दना क वो रजवान के बारे म या कहता है!" मने कहा. "बोले . बेचारे इस वृधाव था म कैसे क उठा रहे थे! "इनक उ या है? शमा जी ने पूछा. कोई १५ िमनट के बाद एक भूरे प थर से बने एक घर के आगे गाडी कवा दी. उसने बताया."हाँ वो ये जान" म समथन िकया. आपके िपताजी कहाँ ह?" "वो अ दर वाले एक कमरे म ह. उसने आगे जाके घर का मेन-गेट खोला और गाडी अ दर पाक करवा दी! घर म घु सते ही तेज लोहबान और गु लाब क खु शबू मेरे नथु न म चढ़ गयी! अ दर लाकर उसने हमको िबठाया और अपने नौकर को ३ चाय बनवाने को कह िदया. आप मु झे अपनी इस बेटी डॉली का फोटो िदखाइये" मने कहा. अधरं ग के िशकार हए थे. उसक बीवी क अ पताल से छु ी हो गयी थी और अब वो घर म ही थी. आप एक काम करना. चिलए िमलवाता हँ" उसने कहा. "कोई बात नह ! िफर उठगे. वहाँ हमको नवीन िमला.

वो जगह देख ल एक बार!" मने कहा.क पीढ़ी िवकास क एक अहम् सीढ़ी मानती है! मने वो ए बम शमा जी को दे दी. रात को नहा-धोकर. मने फ़ौरन का रं दे को हािज़र ही रहने को कहा. और शमा जी ने सब कुछ जो हआ था वो नवीन को बता िदया! नवीन क तो सु नके पाँव तले ज़मीन िखसक गयी! उसको जैसे सांप सूंघ गया हो! शमा जी ने उसको िह मत बंधाई और कहा क अब वो वैसा ही करे जैसा क हम कहते ह. शमा जी ने देखा कुछ देर और वािपस वो ए बम नवीन को पकड़ा िदया. ७ लोग और काम करते ह वहाँ" नवीन ने बताया.ाउं ड पर िकसी से िमलने का इंतज़ार कर रहा है. मने का रं दे से पूछा उस गु िनये का अता-पता तो मु झे बताया क वो गु िनया अभी इस व त वो मेला. "जी बबादी? वो हैरत से बोला? "हाँ नवीन जी! बबादी!" मने कहा. आज आपक सारी सम या ख़तम करनी है! नवीन ने ऐसा ही िकया. 11 . "नवीन जी आप अपने यवसाय के बारे म बताइये " मने कहा. कमर-बांध. "जी यही एक मािकट है. मने रत ही अपने कमरे म जाकर सभी तैया रयां कर ली थ ! सामने वाला बल था. "जी आपके कहे अनु सार आज तो वो बंद है?" नवीन ने कहा. खाना आिद खा पीकर हम अपने कमरे म चले गए. वो गया और कोई आधे घंटे म आ गया. वही ँ मेरी एक दु कान है. मने कहा क चलो पैदल ही चलते ह. और उसके उस गु िनये का पता करने भे जा. शमा जी और नवीन नीचे बैठे और मै ऊपर वाले कमरे म. समय भी कट जाएगा! नवीन चला और हम भी चले उसके साथ! बात करते करते उसक दु कान तक आये! दु कान या पूरा शो म था वो! काफ बड़ा था! हम वहाँ से आिपस आ गए. उसने फ़ौरन हामी भर ली! हमने नवीन को कहा क वो जाए और दु कान खोल कर वािपस आ जाए. मने शमा जी और नवीन से कहा क ज दी गाडी टाट कर और गाडी नवीन मेला ाउं ड क तरफ घु मा ल. नवीन ने ऐसा ही या. मने पूछा क नवीन या कर रहा है तो बताया क पूजा करने म य त ह! हमने चाय ना ता िकया और िफर नवीन के पास आये . मने नीचे भागा. और उसके साथ एक औरत भी है. मने शमा जी से कहा क अब नवीन को सब कुछ बता दो आप. इसीिलए चूक करने क गु ंजाइश नह थी. आधे घंटे से काम म हम वहाँ पहँच गए. कंठ-बाँध और तं ाभूषण क सही जांच क और सु बह आने क तैयारी म रा ी नमन िकया! अब मु झे सु बह का इंतज़ार था! सु बह-सु बह जब मै उठा तो सर म एक अजीब सा भारीपन था. आपक बबादी वही ँ से आई है. यानी क कोई यहाँ आने क चे ा कर रहा था और मेरी ताक़त ने उसको यहाँ नह घु सने िदया था! जैसे क मेरे साथ हआ था! अब मेरे सामने वाले के पास भी ये अवसर था क वो अपने आपको साने वाले समय के िलए तैयार रखे ! मै और शमा जी नहा-धो के आये और नवीन का नौकर चाय ना ता ले आया. जो दु कान संभालता हो उसको दु कान संभालने को कह दो. "कोई बात नह . मने ि या आर भ क . थोड़ी देर बात हई ं. या तो वो मु झे खाली करे गा या िफर मै उसको! मने सारे ह त-बांध. काफ चलती है. मने का र दा हािज़र िकया. "चिलए वो दु कान िदखाइये" मने कहा. का र दा गया और ५ िमनट म वािपस आ गया. मेरे का रं दे ने उसक तरफ इशारा िकया और उसके पास खड़ा हो गया. नवीन उठा और अपनी गाडी िनकालने लगा.

साहब हम गरीब लोग ह.गाड़ी आगे बढती रही और नवीन क गली म घु स गयी. 12 . "सु न बे उमेश.आस-पास इ का-दु का लोग खड़े थे. शमा जी और नवीन गाडी से उतरे . "अब तू ये सोच रहा है क इतनी देर हो गयी बड़े वजीर तेरे को देख यूँ नह रहे . वो भीगी िब ली तरह गाडी म बैठ गया. "हाँ िकया" वो बोला. उसने मु ड़ के देखा. "हाँ जी. है ना?" मने कहा. 'माँ****** तेरे को भी देखंग ू ा और तेरे बड़े वजीर को भी" अब वो डर गया. अकेला था. शमा जी ने उका हाथ पकड़ा और उसको ओ पे र ख च कर ले गए! शमा जी ने उसको एक और िदया ख च कर! वो डर के मारे बोल भी नह पा रहा था! मने उस से कहा.अगर कोइ उसका काम कर दे तो वो ५०. बोला. तू बहत बड़ा गु िनया बनता है? लोग क िजंदगी खराब करता है? "ये या कह रहे ह आप? आपको ग़लतफ़हमी हई है. नौकर ने दरवाज़ा खोल िदया था. शमा जी ने उसका नाम पु कारा . "उमेश. बोला "साहब वो लड़का आया था मेरे पास रोते रोते. मै ऐसा ही िकया!" "तू अभी देख हम तेरे साथ या करते ह!" शमा जी बोले "साहब उस लड़क के प रवार से हो या आप लोग? उसने पूछा. इसक खाल उता ं गा मै आज. चल वहाँ कुस पर बैठ जा" वो िब तर से उठा और कुस पर बैठ गया. मने गलत िकया. मने उस से पूछा. गाडी सीधे घर म ही क . क तू उसक शादी एक लड़क डॉली से करवा देगा?िलए या नह . बोल? "हाँ तो? तु हारा मतलब?" उसने कहा. ले िकन मेरे पास और कोई दूसरा रा ता नह था" वो बोला.ये बता तूने ये अपने बड़े वजीर क ताक़त का गलत इ तेमाल करके िकया या नह ? मने पूछा. "सु न उमेश. "हाँ हम सभी लोग!" मने कहा वो चु प हो गया. "साले ! तूने एक लड़के रजवान से १०००० पये िलए.०००० पये दे देगा. मै ऐसा कुछ नह करता" वो दरके बोला. तूने जो कुछ भी या वो गलत िकया या नह ? ये बता?" मने पूछा. "बोिलए? आप मेरा नाम कैसे जानते ह? शमा जी ने उसको कहा. इसको बनाऊंगा मै गु िनया!" अब तो उसके होश उड़ गए. इतनी बड़ी रकम के िलए कुछ भी कर सकते ह. खैर. मने नवीन को कहा क "इसको घर ले चलो अपने . उसने बताया क वो एक लड़क से यार करता है और शादी करना चाहता है. शमा जी ने उसके एक िदया कान पर और उसको उसके िगरे बान से उठाया और बोले . मने शमा जी को इशारा िकया.उस व त उसके साथ कोई औरत नह थी. "चल तूने जो िकया उसक सजा तो मै तु झे ज़ र ही दूंगा. मने कहा क "इसको गाडी म िबठा लो".

वो ही हमको रा ता बता रहे थे. आगे बढ़ता गया! वजीर साहब खड़े हए! खड़े होके वो हवा म कुछ िलखने लगे! मने मं अिभभूत िकया और वजीर साहब पर फक िदया! वजीर साहब के हाथ खु ल गए! िगर पड़े ज़मीन पर! वजीर साहब को िगरते देख उमेश क आँख फटी क फटी रह गय ! वजीर साहब बु ज़ु ग आदमी थे. "तू तो बालक है उनके सामने . शहर क आबादी से दूर काफ दूर जाने के बाद . "खड़ा हो बे अपनी बीवी के जंवाई!" शमा जी ने उसके बाल पकडे और खीच के नीचे ले आये ! गाडी म िफर से एक लात मार के िबठाया! और बोले . "बता. ले िकन मै तेरे को तेरे वजीर तक ले के जाऊँगा!" मने शमा जी से कहा. "इस साले गु िनये को इनके पास ले जाओ और 13 . "हाँ मै ये सोच रहा हँ" उसने कहा. इसीिलए मु झे उनको जवाब देना पड़ रहा था! उनको उठने म व त लगा! अब उ ह ने धु िकया अपना रहमानी इ म! मने फ़ौरन अपना. एक खाली रा ता िमला. अब देख या होता है!" शमा जी उसको एक झापड़ मारने के िलए आगे बढे मने उनको रोक िलया! "अ छा उमेश! िफर या होगा?" मने उसी से पूछा. मने नवीन को बाहर भे ज िदया. आगे आगे मै चलूँगा. इसे डालो गाडी म. "ठहर जा! आगे ना आना!" मै का नह . कुछ तो वैसे ही उठ उठ के भाग रहे थे! मै आगे बढ़ा तो सामने अपने कमरे के सामने बड़े वजीर ज़मीन पर बैठे हए मेरी ही तरफ देख रहे थे! वही ँ से बोले . आप पीछे पीछे चलना!" शमा जी ने उसको उसके बाल पकड़ के ही गाडी से उतारा. ले िकन एक गलत आदमी का साथ दे रहे थे. यह थी उस बड़े वजीर क कायशाला! मने शमा जी से कहा. वो तो मािलक ह िहंदु तान के! अब तू रहम मांगेगा अपनी जान क !" उसने हँसते हए कहा! ऐसा सु नके नवीन डर गया. उसको उसके िगरबान से उठाया. मै उठा. आ गया तेरी ताजपोशी का समय!" मै आगे बढ़ा! मेरी ताक़त ने सारी िजनात हटा िदए रा ते के! मै एक ऐसी ताक़त ले के आया था तो इन िज नात को िखलौन के समान लात मार-मार के हटाती जा रही थी. और उसके मु ंह पर थूक िदया! और बोला. इसके वजीर क ताक़त तो आनी बंद हो गय !" शमा जी ने उसको एक लात मारके उठाया. गु िनया के सामने गया. तू ऐसा सोच रहा है क नह ?" मने दु बारा सवाल िकया. "ये ले . "रा ता तू बताये गा या मै खु द ही ले चलूँ उधर? इस बार तो उमेश क िघ घी बांध गयी! के अब के िमला शेर को सवा शेर! मेरी ताक़त ने वजीर के ३ िज नात पकडे थे. "मेरे बड़े वजीर उठ गए. शमा जी और नवीन का नाम ले कर अिसतांग-मं योग िकया! इस मं क काट कह नह ! वजीर साहब ने कुछ पढके वो इ म हम पर फूं का! आगे के शोले उठे हमारी तरफ आये ले िकन ५ फ ट तक आते आते धु ंआ हो गए! वजीर साहब को तो यक न ही नह हआ!!! उ ह ने िफर इ म इ तेमाल िकया! अब क बार लोहे के कांटे आये ले िकन वो भी धु ंआ हो गए! अब वजीर साहब बैठ गए! मने शमा जी से कहा. "सु न ओये.वो चु प रहा. तेरा वजीर तो यहाँ तक पहंचेगा नह . एक उलटे हाथ का झापड़ िदया और बोले . "शमा जी इसको िनकालो और इसके बाल पकड़ के इसको ले ते चलो. "शमा जी. "सु न गु िनये! तेरा बड़ा वजीर तेरे को नह देख सकता! मेरी ताक़त तेरे वजीर क ताक़त को क़ैद कर रही है" मने कहा अब वो हंसा! तेज हंसा और बोला.

डॉली उसके िलए और वो डॉली के िलए मर चु के थे! 14 . दोन हाथ जोड़ के रोने लगा. "और उस लड़के रजवान को म समझा दूंगा! इ मीनान रिखये ! अब आपको आपक बेटी को कोई परे शानी नह होगी! हम वहाँ से चल िदए तो वजीर साहब क आवाज़ आई! "सु नो. शमा जी ने शु से ले के आिखर तक का सारा िक सा सु ना िदया. रजवान दु बई चला गया था. अपनी जूती उतारी और उतार के उमेश के सर पे दे मारी! बोले . "नवीन साहब.००० पये िदए! मने काफ मना िकया! ले िकन वो नह माने ! मने कहा. और मै साझा था तेरा कोई झगडा हो गया इन लोग से और ये कोई पढ़ाई िकये हए लोग ह!" उ ह ने मु झे देखा और बोले. "सर रगड़ ले तौबा कर ले ! तेरे सारे इ मात ख़तम आज से!" उमेश मेरे पास आया. सर मारने लगा! मने एक एक मं पढके उसक आँख और जु बां दोन खोल िदए! अब वो दहाड़ मार के रोया! माफ़ मांगी! रोता रहा िगड़िगडाता रहा! वजीर साहब बोले . सु नो.नवीन को भी. सब ठीक हो चु का था! नवीन ने ध यवाद िकया! और ५०. वजीर साहब को गु सा आ गया! खड़े हए. ये लो" उ ह ने मु झे बंद मु ी करके कुछ िदया और बोले " ये लो ये मेरा िसराजु िज न है. "सलाम आले कुम बड़े िमयां! आपने िबना जाने -पहचाने इसको बचाया. सरदार है! अब मेरी उ नह बची. आप आराम से जाइए आपके वािलद और बीवी दोन ही ठीक हो जायगे आपके घर पहँचने तक!" नवीन के आंसं ू फू ट पड़े ! िफर वजीर साहब बोले . आधे आप अवधे श कुमार को िभजवा देना! नवीन ने ऐसा ही िकया! हम उसी रात वापस आगये िद ली! एक साल बाद पूजा क और अगले साल बाद डॉली क शादी हो गयी. क मै आधे ले लूँगा. "आओ बेटे आओ! देखो इ म का सही इ तेमाल करते हो कह नह दबोगे! अगर मु झे ज़रा सा भी इ म होता क इस बदतमीज़ ने ऐसा काम िकया है तो मै इसक आँख ब ध देता!" उ ह ने दोन हाथ उठाये और एक इ म उमेश पर फूं का. सारी बात बता दो.इसको रख लो!" और ये कहते हए उ ह ने मु झे वो िज न दे िदया! हम नवीन के घर आये . उसक आँख ख़तम हो गय ! वो िच लाया तो बोले . मै वजीर साहब पर नज़र रखूँगा!" शमा जी गु िनये को बड़े वजीर के सामने ले गए और बोले. मु झे आप बताएं इसने या जु म िकया है? वजीर साहब बोले . मेरे घु टन म सर रख िदया. मेरी बात सु नो भाई!. "नामाकूल! कमीने . मने ये िसखाया था तु झ?े तु झे मने इंसािनयत का वा ता िदया था.ले िकन कुछ काम ना आया! आप जानते भी हो आपके इस मु रीद ने या िकया है?" "सलाम आले कुम िमयाँ. "अब िच लाता है कम आदमी? ये ले " उ ह ने एक और इ म फूं का उसको बोलती बंद हो गयी! अब वो हाथ से वजीर साहब के पांवो को ढू ढ़ रहा था! वजीर साहब ने अपने पाँव ऊपर कर िलए! बोले .

लड़क ने अपने दोन हाथ से उस औरत का एक बाजू पकड़ रखा था! ले िकन इस लड़क का सर नह था. 1 . अब घर म सबसे छोटी लड़क रह गयी थी याहने लायक! उसी लड़क क शादी थी ये ! हम उसी लड़क िक शादी के िनमं ण म यहाँ आये थे! बाक सारी िज़ मेवा रय से फा रग हो चु के थे वो! थोड़ी देर म वो गरमागरम चाय ले आये ! हमने चाय पी! तभी ज़ोरदार िबजली कडक ! बाहर मेरी नज़र गयी! मने देखा था. सर पर एक गठरीनु मा पोटली सी िलए खड़ा था! औरत के हात वैसे ही थे जैसे क पहले थे. बोले . कपडे र -रं िजत थे! और औरत के हाथ भीख मांगने के अंदाज़ म मु ड़े थे! मने जो कुछ देखा.ि मं से शमा जी क आँख पर फूं क मारी! अगर अबके िबजली चमक तो वो िदखाई दगे! कोई ४५ िमनट बीते ह गे! िबजली क धी! इस बार वो औरत और लड़क तो िदखाई दी ही. और वो जो दूसरे सरकटे थे वो भी २०-२२ वष के रहे ह गे! मने घडी देखी तो पौने पांच का व त हो गया था! िफर एक बार िबजली क धी! ले िकन इस बार वहाँ कोई नह था! ये एक रह य था! हम दोन िफर वहाँ से अ दर आ गए. दीपक था. अगले वष रटायरमट थी उनक ! एक बेटी वो याह चु के थे. िकए मै देख के आता हँ" वो बोले और बाहर चले गए! दीपक एक सहकारी-मंडी म काय करते थे. साथ म ३ लोग और िदखाई िदए! दो के सरकटे थे और तीसरा उनके पीछे . "गु जी. पहंचना था रात १० बजे ले िकन पहंचे रात २ बजे! हमको ले ने आये हए स जन भी यह हमारा इंतज़ार कर रहे थे! बा रश के कारण वो भी फंस गए थे यहाँ! टेशन के बाहर सैलाब बन चु का था! और एक दो या ी भी उसक वेिटंग म म बैठे हए थे! बेहद शाि त थी यहाँ! कोई िकसी से बात नह कर रहा था! बस चमकती हई िबजली िक क ध कभी-कभार िखड़क से होती हई हम ५ लोग के चे हर से टकरा जाती थी! थोड़ी देर बाद जो स जन हमको ले ने आये थे. कोई कट-कटा गया होगा! आप तो समथ ह. मने दीपक को सारी बात बतायी! दीपक ने कहा. मने उनको हाथ के इशारे से वह िदखाया और सारी बात बता दी! मै और शमा जी. हाँ लड़क ने अपने दोन हाथ अबक बार सामने को उठाये हए थे! औरत होगी कोई ५० वष क और लड़क कोई २०-२२ वष क ! उसके बदन क कद-काठी से ऐसा ही लग रहा था! गठरी उठाये हए वो मद भी अधे ढ़ था. "कोई बात नह दीपक साहब. न दीपक को और न ही शमा जी को. "यहाँ तो कोई चाय-वगैरह िक यव था भी नह है. रे लवे क ै के परली पार एक औरत खड़ी थी! ये क ै डबल था. "हाँ. अब जब आ ही गए ह तो क भी लगे!" शमा जी बोले . मै वही ँ एकटक देखता रहा! कोई २० िमनट के बाद िफर िबजली क धी! मने िफर से वही देखा जो पहले देखा था! वही य! जैसे क कोई मूितयाँ खड़ी ह ! मै वहाँ से खड़ा हआ. एक लड़का याह िदया था. मने एक योम. ये तो रे लवे क ै है. एक पल के िलए. अभी तीन बजे ह! अब सु बह तक यह कना पड़े गा. लगता है!" दीपक बोला. "कमाल हो गया आज तो! इस से तेज बरसात इस मौसम म पहले कभी नह हई!" "हाँ आज तो बा रश ने कमाल कर रखा है!" शमा जी बोले . दीपक ने पूछा. उ ह ने चु पी तोड़ी. टकटक लगा के वहाँ देख रहे थे. अ दर बैठे ले िकन नज़र बराबर वही ँ िटक थी! " या है वहाँ गु जी? कुछ देख-दाख िलया या?. बाहर आया.वष २००८ िजला देहरादून क एक घटना मु झे वो राि आज भी याद है! ताबड़तोड़ बरसात हो रही थी! अँधेरा और साँय-साँय चलती तेज हवा! हम एक छोटे से रे लवे टेशन के वेिटंग म म बैठे थे! यहाँ इ का-दु का गािड़यां ही कती है. हमारी गाडी देर से पहंची थी. रटायरमट िक उ भी आ चु क थी उनके. और हमसे कोई ४०-५० मीटर होगी! उसके साथ एक लड़क भी खड़ी थी. उसका िववरण िकसी को नह िदया. िजनका नाम. मेरे पीछे शमा जी भी आ गए.

रा ते अभी भी खराब थे! िकसी तरह िफर से हम आगे बढे ! हम कोई आधा घंटे म टेशन पहँच गए. काफ बड़ा. मने और शमा जी ने एक दूसरे क तरफ देखा. " जी मै कुछ कहँ? शमा जी ने उसको देखा और कहा. वहाँ एक शेड थी. वो अपनी कुस िखसका के हमारे पास आ गए! उनमे से एक बोला. उसी िसलिसले म यहाँ आया था. मै भी उसी से उतरा था. एक गाडी आके क थी वहाँ. वो आदमी उठा. उ ह ने भी हामी भर ली! हम वहाँ से वािपस आये और दीपक से उसक जीप ली. हम भी बाहर आ गए! एक एक कप चाय और पी! पानी भर गया था हर जगह! ले िकन दीपक ने जहां अपनी जीप खड़ी क थी. और हम िफर से टेशन क तरफ चल पड़े . "ले िकन उसके साथ जो ह? वो कौन ह? उनको देखा है िकसी ने ?" शमा जी ने पूछा. हमने वहाँ थोडा आराम िकया और िफर नहाने -धोने का काय म बनाया! गरमगरम दूध िदया गया! दूध िपया और उसके बाद थोडा आराम करने चले गए! रात भर सोये नह थे. हम िफर भी अ दर चले गए! अ दर आये तो उसी जगह खड़े हए जहां हमको िपछली रात वे लोग िदखाई िदए थे! हमने वो रे लवे ै स पार िकये और दूसरी तरफ पहँच गए! दूसरी तरफ देखा तो वहाँ एक बड़ा सा तालाब था. हम अ दर आये . मने उसको देखा है कई बार!" उसने कहा. जब हम वहाँ गए तो टेशन सूना ही पड़ा था. घडी देखी तो ६ बज चु के थे. तो िफर शमा जी बोले . यूँ न टेशन जाकर वो रह य सु जाया जाए? मने शमा जी को कहा. "हाँ हाँ भाई साहब आप कह!" "आपको एक सरकटी लड़क िदखाई दी होगी?" उसने कहा. "आप या काम करते ह? शमा जी ने पूछा. "जी उसके साथ वाल को कभी नह देखा!" उसने बताया. इसीिलए टेशन पर तभी भीड़ होती थी जब वहाँ कोई गाडी वगैरह आती थी. मै ये कोई १५ साल से देख रहा हँ. िकसी को कुछ कहती नह बस यहाँ-वहाँ घूमती रहती है.आपको िदख गय वो आ माएं . या आपने भी देखी है वो? "हाँ भाई साहब. "जी मै पो ट ऑिफस म काम करता हँ. हाथ िमलाया और चल पड़ा गाडी क तरफ! बा रश भी अब धीमी हो चु क थी. थकावट हई पड़ी थी. अ सर वो बरसात क रात को यहाँ िदखाई देती है. कुछ बचाव हो गया था! हम नीचे आये और गाडी म बैठ गए! दीपक ने गाडी टाट क और वहाँ से िनकल पड़े ! क चड भरे रा त से लोहा ले कर आिखर हम दीपक के घर पहँच गए! वहाँ चहल-पहल थी! लोग आये हए थे! हमारा काफ स कार हआ वहाँ! अब बा रश क चु क थी. तभी मेरे िदमाग म एक ख़याल आया. हम तो कुछ पता नह !" पास बैठे जो दो लोग थे उ ह ने भी हमारी बात सु नी थ . िजस गाडी से आप उतरे थे. 2 . नह तो टेशन सूना पड़ा रहता था. मेरा यहाँ आना-जाना होता रहता है" उसने बताया. चहल-पहल शु हो गयी थी. ये क बा भी छोटा सा था. ले टफाम-िटकेट ले ने िखड़क पर गए तो कोई नह था. ले टते ही न द आ गयी! जब न द खु ली २ बज रहे थे! दीपक ने खाना खाने के िलए बु लाया था! हम वहाँ गए और खाना खाया! उसके बाद मै और शमा जी ज़रा खु ले म टहलने चले गए! बारात कल आनी थी. टेशन छोटा था. "हाँ जी.

"वो हरे कपडे म तेरी लड़क है?" मने कहा. इस से उनक ेता माएं वही ँ पानी के म य से कट हई. देखा तो वहाँ भी पानी पड़ा था. " या नाम है तेरा?" "कुं ती" वो बोली.ाकृ ितक तालाब! अथात वहाँ कोई मछली-पालन आिद वाली कोई बात नह थी. है न? मने पूछा. उतरे और तालाब के पास तक गए! तालाब के एक िकनारे पर मने खड़े हो कर जायज़ा िलया. मने ु भंगमं पढ़ा. और कराहते हए वर मदाना! मने तब वहाँ अपने एक ेत को कट िकया! उसको मने वहां क सारी जानकारी देने के िलए कहा. िजनके नाम दीप. वहाँ कुछ खे त से थे. "मु झ से या चाहते हो?" मने पूछा.उनको भी वही िदखाई िदए! ले िकन उनमे से केवल २ के सर िदखाई दे रहे थे. उसने बताया 'यहाँ पर ५ लोग ह. और िच लाने के! िच लाता हआ वर िकसी लड़क का था.मेघा. करीब १० िमनट के बाद वो वािपस आया. उस िदन. "िनकाल दो बाबू यहाँ से" उसने कहा. हम वैसे ही चले . रोने के. मने िगनती क तो पांच शव थे वहाँ! मने शमा जी क आँख पर मं पढ़ा. और रात क बा रश के बाद उसमे पानी और अिधक भर गया था! मै और शमा जी एक पतली सी डगर पर नीचे उतरे . आनन्-फानन म उस क ाईवर और उसके २ हे पर ने इनको उठा कर इस तालाब म फक िदया. वहाँ जाने का ख़याल छोड़ कर हम रे लवे ै स के साथ साथ आगे बढे . मने शमा जी को वािपस िलया. वष १९८० क एक रात को जब ये लोग पैदल-या ा कर रहे थे तो एक तेज आते क क चपे ट म आ जाने से ये ५ लोग मारे गए. कोई पौने घंटे के बाद हम उस सड़क पर आ गए! अब ये तालाब रे लवे ै स और सडक के बीच म था. "हाँ" उसने उ र िदया. अब आगे जाके मै उस जगह के समानांतर खड़ा हो गया! मने मं पढने शु िकये और अपनी आँख खोल द ! आँखे खु लते ही मेरे सामने तालाब म कुछ शव पड़े िदखाई िदए. उस तरफ कोई सड़क थी. ेत ने ३ च कर लगाए उस तालाब के.अतु ल और राहल ह. "हाँ" उसने कहा. इसका मतलब. कराहने के. िक वे लोग हमको कहाँ िमले थे. "कब से है यहाँ?" मने पूछा. "२८ बरस हो गए" उसने बोला. बा रश के रोज़. तू और तेरी लड़क . िफर उड़ चला. बाक के नह ! रह य गहराया! मने तभी एक और मं पढ़ा! और आँख बंद क ! मु झे कुछ वर सु नाई िदए. वहां से आगे देखा तो कोई आधा िकलोमीटर दूर मने गािड़याँ जाते देख . हमने अपनी गाडी अ दर मोड़ी. 3 . ये सभी तीथ-या ी थे. उसने जैसा बताया. वािपस टेशन पर आये और एक चाय वाले से उस सड़क तक गाडी सम त पहँचने का रा ता पूछा. मने ेत को वािपस भे ज िदया और इनको जगाने क सोची. कुं ती. और एक डगर भी थी. "तू मु झे िदखाई दी थी.ये सोच कर िक अगर लाश ही नह ह गी तो जांच भी नह होगी! इनमे से ३ एक ही प रवार के ह और दो लोग दूसरे प रवार के ! बड़ा ददनाक अंत था. हाँ अतु ल का िपचका सर उसके धड से िचपका था! ये सभी ेता माएं मेरी ओर बड़े गौर से देख रही थ ! मने उस औरत को अपने पास बु लाया और पूछा. तालाब का पानी भी खराब था. उस लड़क मेघा और अतु ल के सर नह थे.

वो आ मा मु हो जाती थी! मने सभी को मु कर िदया! मु झे इसीिलए यहाँ आना था! अगर वो बा रश न होती तो मै वहाँ नह ठहरता! अगर नह ठहरता तो मेरी नज़र इनपर नह पड़ती और न जाने िकतने साल तक ये यह भटकते रहते! आज भी यिद मै ेन से उस क ै पर जाता हँ तो बरबस मेरी िनगाह उसी तालाब पर िटक जाती है! 4 . बस अपने हाथ एक िभखारी क तरह फै ला िदए मेरे सामने ! मै समझ गया था. तु मको मु करने!" मने कहा. यूँ वो मु झे िपछली रात नज़र आये थे! मै पीछे पलटा और शमा जी को ले कर अपने साथ गाडी म बैठा. उसने कोई उ र नह िदया. मै कल आऊंगा तु हारे पास. और वो अवशेष एक एक करके वायु म िवलीन हो गए! िजसका अवशेष िवलीन होता था. ये महा-पु य का काय है. "गु जी. "५ लोग" उसने उ र िदया."िकतने लोग हो तु म? मने िफर पूछा. मने अपने एक ेत से उनके अवशेष का एक-एक टु कड़ा ले ने भे जा. "ठीक है. वो ले आया. इनको मु कर दीिजये आप!" मै अगले िदन वहाँ िफर आया. म उसपर ि या आर भ क . गाडी म मने शमा जी को सारी बात से अवगत करा िदया! वो बोले .

वो अपना धु आं छोड़ने म म त थे और मै इधर आस-पास के लोग को देखने म! सभी ठ ड के असर से मार खाए हए िदख रहे थे. आप पहँिचये " मने कहा. िववाह संपण ू हआ तो हमने वापसी क राह पकड़ी थी. मंद-मंद गित से गािड़याँ बढ़ रही थ . हम लोग उस समय कानपु र से िनकले थे उसी रात १० बजे! कानपु र म एक िववाह के अवसर पर मै यहाँ आया था. कुछ एक क और एक दो और पे ोल-टकस! मै गाडी से उतरा. गाडी को लॉक िकया और हम दोन ढाबे के अ दर चले गए! अ दर भी ठ ड असर मौजूद था. हम ९ बजे तक अपने थान पर आ चु के थे! जब हम वहाँ आये तो भी सूय-देव ने आँख-िमचौली खे लनी नह छोड़ी थी. वैसे कोई काम नह है आज" मने कहा. वही ं दन और वही तेज भागती इंसानी िजंदगी! सड़क पर भी एक दूसरे को पीछे छोड़ने क होड़! कािहर. घर जाऊँगा. मै एक दो काम िनबटा ले ता हँ. पर तु न द भी नह आ रही थी. िद ली अभी भी १०० िकलोमीटर से अिधक दूर थी. मै चलता हँ" वो बोले "ठीक है. लोग क बल िलए. आ ा द अब. वहाँ कुछ एक गािड़यां और खड़ी थ . हम दोन ने चाय पी और ह का-फु का ना ता िकया! ना ता कर ले ने के प ात शमा जी बोले . कभी आते कभी जाते! शमा जी चूंिक ाइिवंग करके आये थे तो थकावट उनके केवल चे हरे पर ही नह वरन शरीर से भी झलक रही थी! उ ह ने देर नह लगाई! फ़ौरन ही अपने गरम कपडे उतार के िब तर पर िगरे और रजाई तान कर सो गए! इतने म मै भी िन य-कम से फा रग होने चला गया! वािपस आया तो मै भी िब तर म घु स गया और रजाई म मु ंह ढांप कर सो गया! जब न द खु ली तो ढाई बज रहे थे. अगर कोई काम पड़ता है तो बु ला लीिजये गा" "ठीक है. और अपने -अपने तरीके से ठ ड से बचने म लगे थे! शमा जी ने िसगरे ट ख़तम क तो हम पैसे देकर िफर से गाडी म आ बैठे! गाडी म गम का एक एहसास था! मै इस बार पीछे क सीट से उठकर शमा जी के साथ वाली सीट पर आ बैठा! हम िफर से ल बी कतार म अपनी जगह बना कर. हमने चाय ख़तम क और इधर शमा जी ने एक िसगरे ट सु लगा ली. बाहर झाँका तो शमा जी ने सड़क िकनारे के एक ढाबे पर गाडी रोक थी. शमा जी ने २ चाय लाने के िलए कहा और हम वहाँ रखी कुिसओं पर बैठ गए! कुिसयां ओंस के मारे कड़ी हई पड़ी थ . कभी न द या झपक आती भी तो या तो एक दम कने से. या गाडी क िखड़क के अ दर आती सड़क िकनारे लगे हे लोजन के ख बो क तेज रौशनी बंद पलक के रि म आवरण का रं ग बदल देती थी! मु झे झपक लगी ही थी क गाडी कने क वजह से िफर से आँख खु ल गय . मने चाय का बंध करवाया. कतार म शािमल हो गए! और िफर धीरे -धीरे रगने लगे! करीब ४ घंटे के बाद हमने िद ली म वेश िकया! वही भीड़-भाड़. धु ंध ऐसे तीत हो रही थी िक जैसे बादल संघिनत होकर भूिम का आिलंगन कर रहे ह ! सव धु ंध ही धु ंध और नथु न म जाती उसक एक िविश गंध! गाडी क र तार को जैसे काठ मार गया हो! मै शमा जी के साथ िद ली क तरफ बढे चला जा रहा था. मने घडी पर नज़र दौड़ाई तो सु बह के ४ बजे थे. शमा जी भी उतरे . "ठीक है गु जी. खे स िलए बु कल मारे बैठे थे. पहले तो चाय के िगलास हाथ म आते ही हाथ को तपन का ए साह बेहद बिढ़या लगा! िफर हमने चाय पीना शु िकया. आज तो कह जाना है नह ? आप भी आराम क िजये . "गु जी.वष २०११ भोपाल म य देश क एक घटना शीत-ऋतु अपने पूण यौवन पर थी. 1 . लगता था जैसे क कोई एक बड़ी सी तार म कुछ योित-पु ंज िपरो िदए गए ह और उनको इस सड़क पर िबछा िदया गया हो! गािड़य िक र तार कुछ ऐसी थी िक आप हलके-हलके िकसी झूले का आनंद ले रहे ह ! मै इसी कारणवश शमा जी क सीट के साथ से उठकर पीछे वाली सीट पर आ गया था! आँख उिनंदा थ . अब जब िटक गए सो िटक गए! चाय आई.

ले िकन अब भोपाल जा बसे थे. देिखये गु जी. ये नया ज़माना है. ले िकन अब वो भी ४ महीन से अपनी सास से ये कह रही है िक जितन बदले -बदले से ह. 2 . कहना चाइये के पूरे भाव म. दोन ही काम संभालते ह अब वहां.. ले िकन जितन उसके भाव म था.. अभी ५ िदन पहले िक बात है. अब उसका या िकया जाए गु जी? उधर नीिलमा के िपता जी का भी फ़ोन आ रहा है िक जितन को समझाइये ! मै इसीिलए आया हँ आपके पास. काम चल िनकला था. आप ले आइये उनको. बड़ी अजीब सी बात है! और जब उसक बीवी ने उस से ये पूछा.. "और सु नाइये साह साहब.. गु जी. जितन पूरे िदन िदन तक रात को घर नह आया. ऐसा मने सोचा! सु बह कोई साढ़े १० बजे शमा जी राकेश साह को ले कर मेरे पास आ गए! नम कार वगैरह हई. आपको तो पता है. बराबर का हक है. सु बह मु लाक़ात हो जाये गी" ये राकेश साह हमारे एक बेहद करीबी और हंसमु ख यि थे. वहाँ उ ह ने अपने दोन लड़क को िबि डंग-मटे रयल का काम खु लवा िदया था. ये िकसी गु के च कर म आया था आज से २ साल पहले . हाँ दूकान पर आता है. ले िकन घर नह . उस पर यान नह देते और अपने म ही खोये -खोये रहते ह. जब मने उस से ये पूछा तो उसने कहा िक वो अपने गु के साथ कह िकसी पूजा म जाता है. .. कहता है बंगाल से आया हँ. कोई रा ता सु झाइए आप" इतना कह के साह साहब चु प हो गए. बड़ा िगरीश और छोटा जितन. उ ह ने बताया "भोपाल से राकेश साह का फ़ोन आया था. वो सच म ही उस पर यान नह देता.. हो सकता है िक िमलने ही आ रहे ह . "गु जी. ले िकन लगता है िक जितन को वो लड़क िबलकुल या तो पसंद नह है या िफर कोई ऐसी बात है. आपको कुछ बताने और कुछ पूछने आया हँ यहाँ!" "हाँ हाँ बताइए?" मने कहा. न कभी उसको कह घु माने-िफराने को कहता है. िपछली रात आया था ले िकन िफर सु बह ज दी चला गया..अब िफर से वो रात को घर नह आता. सु बह कोई १० बजे पहँच जाएगा.. जो जितन हमसे बताता नह . "अपने आपको औघड़ यामा कहता है वो..और िफर शमा जी वहाँ से िनकल गए! रात कोई १० बजे शमा जी का फ़ोन आया... रहने वाले बीना के थे. ले िकन जितन को इस से कोई असर नह पड़ा. मु झे भी पता चला है िक. न कह ले जाता. बि क उसने तो यहाँ तक कहा िक ठीक है वो अपने घर म ही रहे तो उसके िलए ठीक ही है. वो गु अपने आपको िस और बंगाल से आया हआ बताया करता था. या चल रहा है वहाँ? बेटे तो ठीक है?" साह थोडा चु प रहे िफर बोलना शु िकया. और मै उसको टेशन से ले कर आपके पास आ जाऊँगा" "ठीक है. यहाँ लडिकयां आजकल िकसी से कम नह .. मेरे दो लड़के ह. "जितन का वो किथत गु है कौन? मने पूछा. कभी-कभार साह साहब भी वहाँ देखभाल कर िलया करते थे! कुल िमला के उनको िजंदगी आराम से कट रही थी. हाल-चाल पूछा गया! साह साहब के िलए चाय आ गयी! हम तीन ने चाय पी और मने िफर साह से पूछा. आपसे िमलने आ रहा है वो. ये जो मेरा छोटा लड़का है. मै उसको अिधक तव जो नह देता था और न ही िगरीश. सबको पछाड़ने के बाद!" साह ने बताया. तो उसने डांट के ये कह िदया िक वो उस से दूर ही रहे तो अ छा है ! ये नीिलमा से बदा त नह हआ और वो गु से म अपने घर चली गयी है. उसक प नी नीिलमा काफ सु शील और सु कृ त प रवार से है. "गु जी. अभी १ साल पहले जितन िक शादी हई है. इसीिलए वो रात को घर नह आता.

ले िकन वो नह मानता. " या िकसी ने उसको रोका नह ? मेरा मतलब उसके बड़े भाई. मै देखता हँ या िकया जा सकता है" मने कहा. जितन के साथ आया था. दु कान क शु ि करने" साह बोले . वहाँ का पैसा भी ये अपने गु को दान कर रहा है" साह बोला. य ? कोई पैसा-वैसा ऐंठने का मामला तो नह है ये ?" "हो भी सकता है. अभी कोई ४ घंटे बचे थे. अब शमा जी ने मु झसे सवाल िकया? "गु जी. "उ या होगी इस औघड़ क ? मने सवाल िकया. तब ये यामा औघड़ इसको िमला था. "और रहता कहाँ है?" शमा जी ने पूछा. एक बंगाली चे ला है उसका. "यही कोई ५०-५५ साल तो होगी ही" साह ने जवाब िदया. वही ँ एक झु गी-झ पड़ी म रहता है. "ले िकन ये जितन उसके संपक म आया कैसे?" अब मने पूछा. "वहाँ भी गड़बड़ करता है. "कैसा दीखता है वो?" शमा जी ने पूछा. उसी के यहाँ रहता है" उ ह ने बताया. और उनके िलए खाना भी िभजवा िदया."अ छा! या आप िमले ह उस से?" शमा जी ने कौतु हल से पूछा. साह ने उसी िदन क रजवशन करा रखी थी. एक औघड़ यिद िकसी मिहला के साथ ऐसा करे तो यु ि पूण लगता भी है ले िकन वो इस जितन के पीछे पड़ा है. "ठीक ही. "तो िफर या वजह हो सकती है?" उ ह ने िफर सवाल िकया. आपक धमप नी आिद ने ?" मने पूछा. "हाँ एक बार िमला था उस से कोई ८-९ महीने पहले . और बाजू-बंद क तो िगनती ही नह !" वो बोले . "दो कारण हो सकते ह. 3 . "दु कान के िहसाब-िकताब म कैसा है?" शमा जी ने पूछा. पहला िक उस किथत औघड़ म जितन को कोई लालच िदया हो और दूसरा वो जितन को मोहरा बना कर अपना कोई काम िस कर रहा हो!" मने जवाब िदया. "जी गंजा रहता है. उसने जितन से कोई बात क और ये उसी िदन से उसका भ बन गया. मने साह को आराम करने क सलाह दी और अ दर भे ज िदया. ले िकन अगर पैसा ऐंठने क ही बात होती तो वो उसको रात को नह बु लाता शमा जी!" मने जवाब िदया. "कई बार मन िकया. समझ म नह आया. "एक बार जितन अपने िकसी दो त के िपता जी के अंितम सं कार म गया था. "अ छा" शमा जी ने कहा. कहता ही क घर छोड़ सकता है ले िकन अपने गु को नह छोड़े गा" साह ने बताया. वािपस भी जाना था. छाती तक मालाएं पहनता है. कोई डे ढ़ दो साल हो गए ह गे" साह ने बताया.

मने शमा जी को सारी ि थित से अवगत कराया! उनको भी इस पंच पर बड़ी हैरत हई! मने तभी कहा. एक मासूम एक औघड़ के ितशोध का िशकार होने वाला था और हमे उसको बचाना था हर क मत पर! हम टेशन पहंचे. वो आगे जाके सु न नह सका िक या हो रहा है वहां. इस म फ कड़ नाथ हार गया था. मने लाकह उठायी. ठीक रात एक बजे मै अलख म बैठा. उसने जितन और उसक बीवी म कलह करा दी थी. ले िकन उसने कसम खायी थी. वािपस यह आ जाऊँगा गु जी!" वो बोले . गाडी म शमा जी ने एक बात पूछी. तो िफर मै साह को छोड़ कर. "ठीक है शमा जी" मने जवाब िदया! कोई ४ घंटे बाद साह को हमने आ ासन िदया और शमा जी उसको छोड़ने टेशन चले गए शमा जी साह को छोड़कर आ गए थे. हम आज ही भोपाल आ रहे ह!" "मै कहे देता हँ गु जी" शमा जी ने कहा. नाम था बाबा फ कड़ नाथ! एक हठ-योगी कर ी का धान चे ला था. साह को खबर कर दी गयी थी! मने सारी तैयार करने के बाद एक अिभमंि त-खंजर शमा जी को िदया और उनको कुछ समझा िदया. तब शमा जी उठे और मै अपनी आव यक तैयारी करने म लग गया! मु झे तैयारी करते करते सु बह के ५ बज गए! िफर म सोने चला गया. कोई १० िमनट के बाद वो आिपस आई! उसने जो खबर दी वो अ यंत भयानक थी! उसके अनु सार-ये औघड़ दु गापु र का रहने वाला था. भोग िदया और िफर अपना एक का र दा हािज़र िकया! वो हािज़र हआ. और आज रात मै अलख म ये जानने का य न क ँ गा" मने कहा. वो सच म ही एक औघड़ है! ये बता के का र दा वािपस चला गया! जाने से पहले अपना भोग ले गया था! का र दा िजतना कर सकता था उतना उसने िकया था! आगे उसके बस क बात नह थी.वो समझ गए. "ठीक है. २७-२८ वष िक उ वाला. अतः उसको थान छोड़ना पड़ा. एक एक पल क मती था.खबर देना ही इनका काम है! अब मने उस औघड़ को जांचने क सोची! मने एक आसु रक-क या िनशंका कट करवाई. िजसका याह हए एक या सवा-वष ही हआ हो! इसीिलए इसने जितन को चु ना था! ये औघड़ अपने पंच म आधा तो सफल हो चु का था. अितकाम वाला. "शमा जी आप आज ही साह को फ़ोन कर दो. गाडी म बैठे और साह को ये बता िदया िक हम गाडी म बैठ चु के ह. उसको उसका उ े य बताया. गु क मृ यु के बाद वहाँ दो खंड हो गए थे. वो िचंघाड़ती हई उठी और एक दम फुर से उड़ चली. थोडा लालच देकर! वो बहत सही तरीके से और सटीक िनणय ले रहा था. ये औरत भी एक गु िनया है और जितन वहाँ ले ता हआ है. मने उसको बताया िक या जानकारी लानी है. ी का बंध उसने कर ही िलया था. उसने भी अपनी अलख उठा रखी है. "हाँ. वो उसको हराने वाले औघड़ बाबा बटु क को हराएगा और वहाँ अपना झंडा गाड़े गा! इस घटना को २ वष हो चु के थे. शमा जी ने िटकेट बु क करवा िदए थे. उसक शि यां भी वहाँ मौजूद ह. और वो इ ही ११ िदन म साधना करता था! जितन उसके वश म था ही. अभी तो उस औघड़ को पता नह है िक कोई उसको रोकने आ रहा है. उसने कुछ सोचा था. उसके बाद हम अपने सामान िक पैिकंग करने म जु ट गए. और नीिलमा को उसके घर भे ज िदया था! अब हमारे पास समय कम था. 'सामान' शमा जी ले आये थे. नहाया धोया."हाँ. वो गया और २ िमनट म आ गया! उसने बताया. ये संभव लगता है. िक वो औघड़ अभी एक नहर िकनारे जितन और एक औरत को ले कर बैठा है. आने वाली अमावस म ११ िदन शेष थे. "गु जी. ये बस खबरी होते ह. सोचा था िक वो व -घंटा यि णी को स न करना चाहता था! उसके िलए ऐसे िकसी पु ष का र और वीय चािहए था जो मजबूत देह वाला. इसका मतलब मामला गंभीर है" उ ह ने कहा. ले िकन जब उसे पता चले गा तो वो भी िति या 4 . सु बह १० बजे उठा. क वो इस हार का बदला ले गा.

महा ेत. रा ते म साह ने बताया िक जितन अब रात को नह आता. वो कह चूक न हो इसके िलए पहले से ही सावधान रहता है. िगरीश ने वो कमरा हमको दे िदया. उ ह ने खाने के िलए पूछा तो मने खाना बाद म काहने को कह िदया! अब मै कमरे म गया. जितन आज िफर नह आया था. िगरीश ने अपनी प नी को चाय के िलए कहा और थोड़ी देर बाद चाय आगई. अब हम आ गए ह. " साह साहब. तकरीबन पौने घंटे बाद हम साह के घर पहँच गए. िगरीश ने हमारा सामान उठा कर गाडी म रखा और हम वहाँ से साह के घर क तरफ चल पड़े. साह और उनका बड़ा बेटा िगरीश हमको ले ने टेशन पहँच गए थे. उनको जांचा-परखा! और चु न-चु न के उनका चु नाव िकया! मने शमा जी को भी अिभ-म ण से सश िकया. ११ बजे. अपना सामान िनकाला. और उनके साथ ४ पहरे दार तैनात कर िदए! पर तु उनका यान रखना भी मेरा थम उ े य था! रात गहराई. "तो इस से जितन पर या असर पड़े गा? यूंिक वो जितन को छोड़ना नह चाहता. िक जितन वयं अपने वश म भी नह है. वो वही सब कर रहा है जो उस से वो औघड़ करवा रहा है. उसका भे दन अ यंत मु ि कल होता है! यिद कोई भी औघड़ अपनी अलख के सामे िकसी से भी िभड़ जाए तो िवजय अव य ही ा करता है अब चाहे सामने कोई सी भी कैसी भी शि उसके सामने हो! और. मने अपनी शि य का आ ान िकया. नम कार आिद से अिभवादन हआ. वो भड़केगा. "हाँ ले िकन पहले मु झे जितन को उसक पहँच से िनकालना होगा. अपनी दूसरी शि य से वो वयं को घे रे रहता है . बस यही समय होगा उसको ठं डा करने का! मने जवाब िदया! हम भोपाल पहंचे. मै अब औघड़ क साधना म यवधान डालना चाहता था! मने एक आसु रक-शि का आ ान िकया! और उसे वहाँ रवाना कर िदया! उसने औघड़ के जब च कर लगाए तो उसने अपने ि शूल क न क उसको िदखाई! िव न पड़ गया था! औघड़ खड़ा हआ. ऐसा यूँ हो रहा है उसके साथ" "बस गु जी अब आपका ही सहारा है" साह ने हाथ जोड़ कर कहा. उसक ८१ िदन क साधना िवफल होगी. िदन म कभी-कभार आता है.करे गा!" "हाँ. मन-मज से घर आता है. देखते है िक या माजरा है. बड़े भाई से लड़-झगड़ कर पैसे ले जाता है. सारी िव ाएँ जानता था. र ासू म बंधा रहता है. ये मु काबला िकसी ेत. और नीिलमा के बारे म तो उसने अभी तक कुछ पूछा भी नह ! मै जानता था. मने साह से कहा. और हम जितन को छुडाने जा रहा ह!" उ ह ने कहाँ. ये औघड़ तो ितशोध िक अि न म झु लस रहा था! ये िकसी से भी िभड़ने को तैयार था! मु झे हर क़दम सावधानी से उठाना था. साह का घर काफ एकांत म था और लड़क िक शादी के बाद साह ने अपना पु राना मकान बेच कर ये नया मकान खरीदा था. चाय पीने के बाद मै नहाने गया िफर शमा जी. वो अव य करे गा!" मने हंस के कहा. िज न आिद का न होकर एक बल औघड़ से था. उसने अपने पा से र िनकाला और इस आसु रक-शि पर दे मारा! वो शि लोप हो गयी! ले िकन वो औघड़ अब भांप गया था!! वो ये जान गया था िक कोई है जो उसक इस साधना के िवषय म जान चु का है! औघड़ अब ोध म आ गया था!! उसने सोचा भी नह था क कोई उसका रा त रोकेगा! मै शमा जी के साथ उस कमरे म बैठा 5 . इसक साधना समय औघड़ को ये क पल अपनी जान जाने का भय रहता है. िफर िबना िकसी को बताये चला जाता है. जो औघड़ व -घंटा यिशनी को स न करना चाहता हो वो सच म ही एक बल औघड़ होने का सूचक था! व -घंटा यि णी अित-ती ण यि णी मानी जाती है. वो भी औघड़ था. मने साह को एक अलग कमरा देना को कहा.

वो बंध करा देगा. आप सु बह सु हड़ से बात कर ले ना" मने कहा. तो मने उनको िफर मना कर िदया" "ठीक है. "साह ने कहा क सारा सामान आ जाएगा. जहां मै अलख जला सकँ ू .बोलना क उसका लड़का िजंदगी और मौत के बीच फंसा हआ है. ले िकन इस बीच वो जितन के बंधन खोलने म सफल हो गया! जितन के बंधन खु लते ही.हार िकया! मं . ले िकन शमशान के िलए उनके पास कोई संपक नह है. मै समझ गया वो अमोघ-मारण ि या करने वाला है! िफर उस औघड़ ने उस गु ंथी हई िम ी को एक मानव-आकृ ित का प िदया! और अपना हाथ चीर कर उसके मु ख पैर र क धरा छोड़ दी! िफर उसने एक मं पढ़कर उस आकृ ित म अपना ि शूल घ प िदया! 'भड़ाम' क आवाज़ हई वहाँ और यहाँ मै और शमा जी इस आघात से एक दूसरे से पहले टकराए िफर कोई १० फ ट दूर जा िगरे ! उसने िफर से ि शूल िनकाला और एक बार िफर आघात िकया! इस बार िफर आवाज़ हई.लापी का आ ान िकया. आप ठह रये " बोलके शमा जी उठे और साह को बु ला कर बात करने लगे. उसने उसक भे जी शि को वापस िकया. अगर हम इस घर म रहे तो हमारी जान के साथ साथ यहाँ रहने वाल क भी जान को खतरा है. अलख म िगरते ही वो औघड़ जितन को छोड़ अपना ि शूल ले ने भागा! उसने ि शूल उठाया. और उसको कहो क अगर वो िकसी शमशान म बंध करा सकता है तो ठीक है. नह तो शमा जी. उसका एक कपडा ले आइये . अपना ि शूल िलया और एक चाक़ू से अपना अंगठू ा चीर कर उसके म य-खंड पर डाल िदया! अब औघड़ ने ि शूल िनकाला और िफर से मं पढ़कर हार िकया. आप ये सारी बात आज ही साह को बता दो. मने तभी महा. नीचे िगरते ही उठा और वो जितन क तरफ भागा! उसने जितन के ब ध खोलने शु िकये. अब क मै और शमा जी िफर से धडाम िगरे ! मने तभी उसके तीसरे हार को रोकने के िलए. र के छ टे हमारे पूरे कमरे म फ़ै ल गए! ये उस औघड़ क चे तावनी थी हमको! मने ित-भे दन मं का जाप कर अपने ि शूल को आकाश म ताना और मं . अब न वो कुछ कर रहा था न मै! उस रात हमने काफ मु काबला िकया था उस बल औघड़ का! मने तब शमा जी से कहा. मने उसक शि को रा ते म रोका तो मेरी शि उसके आगे ीण पड़ने लगी! जैसे मै उसको देख रहा था. अपने बाएं पटल क एक लट तोड़ी और अलख म फक दी! उसने उस शि को हमारे पास भे जा. का समय िमल जाता! वो औघड़ खड़ा हआ. बोले .लापी कट हई. मने िफर से एक बार िफर हार िकया! औघड़ का ि शूल हाथ से िगरा और र के थाल म िगरा और वो थाल अलख म िगरा. वैसे वो भी मु झ पर नज़र बनाए रख रहा था. जब मै उसक ि या का जवाब देता. आने वाली रात को ये औघड़ पूरी तैयारी से आएगा" "ठीक है मै अभी बताता हँ. आप साह के साथ नीचे जाइए. महा. उसने त कारी शि का योग िकया और वहाँ सब कुछ शांत हो गया. मने भी ितभे दन मं पढना शु िकया. उस औघड़ ने अब अपना ि शूल अि न म से िनकाल कर र के थाल म डाला और पूरब िदशा म िछड़क िदया! जब तक मै अपने ित-भे दन मं का जाप उर करता. और हाँ ये ज़ र समझाना क कल रात ११ बजे के बाद 6 ." शमा जी. उसने अपना ि शूल अि न म डाल कर मं पढने लगा! मै समझ गया क वो 'भे दन-ि या मं ' का जाप कर रहा है. हमे यहाँ से जाना होगा. तेरा मै सवनाश कर दूंगा!' और ये कह के वो मं -जाप म म न हो गया! मै समझ गया क अब ये अपना हार करे गा.ि याएं कर रहा था और वहाँ भी ि जमाये बैठा था. िफर अपना पे शाब ले कर उसने िम ी को आटे क तरह से गूंथा.हार होते ही र के छ टे कमरे से गायब हो गए! वहां औघड़ का ि शूल हाथ से छू ट गया! वो समझ गया क िकसी ने ित-भे दन का योग िकया है! औघड़ बौखला गया! उसने िफर से ि शूल उठाया. आज वो औघड़ भारी पड़ा हम पर यूंिक मेरे पास यहाँ साधन नह ह. मु झे वयं भी संभालना था और शमा जी को भी संभालना था! मने एक ढाल-मं का जाप करते हए. आप यहाँ भोपाल म सु हड़ बाबा को बोलना. कहना मने कहा है. अभी कुछ देर तक. भयानक ोध म उसने एक शि कट क . ले िकन अबक बार वो उछला और करीब ५ फ ट हवा म उछला और नीचे िगरा. उसने ज़मीन पे थूका तीन बार. "शमा जी. अपने और शमा जी के ऊपर एक ढाल ढँ क दी. उस औघड़ ने अपना चार तरफ देखा िफर आकाश म देखा. और ज़मीन पैर एक वृ ख चा और मं पढ़ते हए उसके अ दर कूद गया! और िच लाया ' तू जो भी है.

मने िफर अपने ि शूल से शमा जी के पूरे शरीर को र ा-आवरण से ढक िदया. एक बतन म िचता-भ म डाली. "एक काला बकरा. खून का फ वारा छू टा . िगरीश के लाये बकरे और मु ग को भी सु हड़ के सेवक ने अ दर िभजवा िदया. और िफर एक ही झटके म बकरे क बिल दे दी. हमारा इंतज़ार करता हआ. मने कहा. मु झे आज रात ि या करनी थी. शमा जी ने सु हड़ बाबा को बता िदया था क आज रात वो उनके िठकाने पर ि या करने आयगे! हम ठीक ८ बजे सु हड़ के पास पहँच गए. तीन रं ग के फू ल क २१ मालाएं .. और िफर मने भी अपना ि शूल िलया और वही ि या अपने ऊपर दोहराई. िफर मने दूसरा मु गा िलया और एक एक करके चार मु ग बिल चढ़ा िदए. सारी तैया रयां कर ल ! दोपहर तक सारा सामान आ गया. सवा िकलो साबु त उड़द क दाल. शि -वास कराके धारण क और बाक तीन अपनी अलख के तीन तरफ चढ़ा द ! अब मु ग के पंख छीले और साम ी के िलए वही ँ ढे री बना के रख िलए! उनका मान अलख के पास रखा. उ ह ने भी ऐसा ही िकया. िफर पूणतया न न हो गए. र िनकाल कर एक सकोरे म अपने आगे रख िलया! इसके बाद मने बकरे का पूजन िकया उसका एक कान का टु कड़ा काटा और अलख म डाल िदया. िसवाय बकरे और मु ग के. "शमा जी जो मै कहता हँ वो आप साह से कह के कल िदन म मंगा लीिजये " "बोिलए गु जी" वो बोले और पे न जेब से िनकाल कर कागज़ पर नोट करने लगे. ऐसा साह ने बताया. अलख भड़क और मने मं ाहती कर अलख को नम कार िकया! मु गे के कटे सर से ४ मालाएं और बनाय . मै अभी आता हँ" ये कह कर वो िफर चले गये . लाल िस दूर . ५ काले देसी मु ग. अब मने अलख तैयार क . मने कहा. शमा जी ने ये सामान िलखा और साह को बताने िफर चले गए. उसके र भ म म िमला कर ले ही क तरह िम ण बनाया गया. इसीिलए मने शमा जी के अित रक और िकसी को अ दर आने से मना कर िदया. वो एक एक करके मेरे ऊपर सवारी करने लग ! मै अपनी माला म िपरोये हई बकरे क जु बां को अपने र के सकोरे म डु बोता और उस शि का मं पढता जाता! कोई कोई शि मु झे इतने आवेग से आहत करती क मै नीचे िगर जाता तो शमा जी मु झे उठा ले त!े मु झमे शि संचार हो गया! मने वहाँ पड़े दो क चे मु ग अलख म सके और एक शमा जी 7 . साह को सारी बात बता कर शमा जी मेरे पास आ गए. नम ते वगैरह हई और मै शमा जी के साथ अ दर चला गया. ३ बोतल शराब! ये मु झे कल दोपहर तक िमल जानी चािहय! सारा सामान!" "जी ठीक है गु जी" शमा जी ने कहा. वो सीधे सु हड़ के िठकाने पर पहँच िदए जायगे. क ड़ा-काँटा-शूल भंजन िकया. क लन िकया. िफर मने और शमा जी ने अपने शरीर के हर अंग को इस से सु सि जत िकया! उस मु ग के कटे सर क दोन आँख म धागा िपरोकर एक माला तैयार क और उसमे एक शि का वास करा कर शमा जी के गले म डाल दी. वहाँ सारा सामान रखा.घर से कोई भी बाहर न िनकले . िफर हम नहाने गए. नहाने के बाद हमने अपने पूजा-. एक बड़ा चाक़ू या चापड़.. एक बड़ा थाल. सु हड़ वही ँ िमला... एक वयं. ५ काली चु ि नयाँ. सही से समझाना आप" "ठीक है. मेरी सम त शि य ने गडगड़ाहट क ! मने िफर कु हाड़े से उसके चार पाँव काट के अलख के आगे रख िदए! और उसक जु बां काट कर अपनी माला म िपरो ली! म अब मगन हआ अपनी शि य को जागृत करने के िलए. एक सकोरे म रखा. एक नया कु हाड़ा. मने सु बह ९ बजे तक ि या ज़ारी रखी. उनक कले जी िनकल कर एक माला बनायी और अपनी अिध ा ी का आ ान कर धारण कर ली! िफर मने एक चाक़ू ले कर अपनी दोन िपंडिलय का र िनकाला. मने िफर पूजा थल पर एक मं पढ़ कर एक मु ग क बिल दी. मै अ दर गया शमा जी के साथ.थल को साफ़ िकया. िफर शमा जी से ऐसा ही करने को कहा.

'जय चंड-मा े ! जय चंडमा े ' मै भी िच लाया. ले िकन अि न भट करने से पहले मने उसको मु ंह म रख के ११ बार अपने थूक से गीला िकया था! ये देख वो औघड़ ोध म आ गया! उसने एक शि कट क और मेरे पास भे जी! मने उस शि का स मान िकया उस शि ने मेरा नाम पूछा. बकरे के दो भाग िकये . मं पढ़े . यािन िक उसने मु झे ये बताया िक आज एक ही िजंदा रहे गा या तो वो या मै! उसने एक शराब क बोतल िनकाली. आधी गटक गया. िफर मने वो कले जा अपने ि शूल पर टांग िदया! िफर मने अपना मू एक खाली बोतल म डाला और अपने चार ओर एक घे रा बना िदया! औघड़ समझ गया िक आज मु काबला बराबर वाले से है! उसने एक समझदार औघड़ होने का प रचय िदया. उस औघड़ ने वो शि पकड़ ली! उसे नह छोड़ा! और उसको 8 . मने जवाब दे िदया और म उसको स मान सिहत भे ज िदया! उस औघड़ ने जब ये सु ना तो एक जोर का अ हास लगाया! अब मने अपनी शि वहाँ भे जी. आज वो अपने एक चे ले को भी लाया था.साद था शि य को खु श करने के िलए! जब हम िनबटे तो मने अपने सामान से एक कपाल िनकाला. ले िकन आज वहां जितन नह था! औघड़ आके बैठा! चे ले ने अलख उठा दी थी! उसने अलख म शु का एक मं पढ़ते ही अपने र िक बूँद टपका द ! ये मेरे िलए काम कर गया! ये औघड़ 'कौिलक-तं ' का औघड़ था! वाह! मै हंसा जैसे िक िकसी खजाने िक चाभी िमल गयी हो! उसको िदखाने के िलए मने अपनी जु बां को छे द के अलख म अपना र टपकाया! उस औघड़ िक भृकुिटयाँ तन गय ! वो भी समझ गया. उस पर थूका और िफर चाट िलया. ये उस औघड़ और मु झ औघड़ के बीच का यु नह ये कौिलक और कपालछे दन का यु था! उसने ज़मीन पर एक वग ख चा. िफर गौर से देखा और एक टु कड़ा उठाया. उसका चे ले ने बोरा खोला और उसमे से एक धाधलकछुआ िनकाला! िफर उसने उसको उ टा िकया और उस पर बैठ के शि -संचारण करने लगा! मै ये जानता था िक वो धाधल-कछुआ अव य ही िनकाले गा! यूंिक इन कौिलक औघड़ म शि -संचारण इसी के ारा होता है! वो उस पर से हटा और कछुए िक गदन अपने चाक़ू से काट दी! कटी गदन उसने अलख म डाल दी! और िफर उस कछुए का र एक बतन म इक ा िकआ और कछुए को भूनने लगा! तब मै खड़ा हआ. आधा फल मु झे भी िमले गा! मने तब अपना ि शूल उखाड़ा और उसको िफर दु बारा गाड़ िदया! इसका अथ था िक ताव मने ठु करा िदया! तब उसने अपनी एक लट तोड़ी और अि न-भट कर दी. उसने अपना ि शूल ज़मीन से उखाड़ कर उसके फाल ज़मीन म गाड़ िदए! इसका अथ था िक मै अगर चाहँ तो उसक इस व -घंटा साधना म शािमल हो सकता हँ. और उसमे मानव-अि थ के नौ टु कड़े डाले. ' जय -मा े ! भु वन -मा े ! वो औघड़ हंसा और हँसते हँसते खड़ा हआ! और िफर बैठ गया! उसने अपने चे ले को बु लाया और उस से बोरे म से कुछ लाने को कहा.को िदया और एक वयं खाने लगे! ये महा. मेरी उ पूछी. उसने मिदरा डाली और पी गया! शमा जी को भी ऐसा करना था. और बाक म अपना पे शाब भर िदया! मने अपनी एक बोतल िनकाली और मने आधी गटक और बाक म अपना हाथ काट के र िमला िदया! वो औघड़ िच लाया. मने उनको वो कपाल पकडाया और मिदरा भोग िलया उ ह ने भी! वहाँ वो औघड़ भी आज पूरी तैयारी के साथ आया था. मने भी ऐसा ही िकया. बकरे का कले जा िलया और उसका सारा र पी गया.

मने चंड.अपनी नािभ म थािपत कर िदया! मु झे ोध आया. "गु जी. इसका कोई जवाब नही था. -उ चाटन योग करो. ये ितिब ब-गंत य सदैव उसे स मु ख ही रहता है और उसको न िकये िबना वो कोई दूसरा अिभम ण नह वीकार करती! इस औघड़ िक मने ये भ मासु री उस से िवमु ख कर दी थी! इतने पर भी वो औघड़ घबराया नह ! हाँ. मने अलख क ठं डी राख ली.हार कर ९ कापािलक-क याएं उ प न क . पाँव. और उनको हमारे थान क ओर भे ज िदया! मने तब बकरे के वो चार पाँव अलख म डाले और उन जलते हए पांव क दु ग ध म एक अिभ-म ण िकया! मने ४ कुं चक-डािकिनय का आ ान िकया! अपने मु ंह चौडाये वो उ प न हई ं और मने उसको इशारे से वहाँ भे ज िदया! कापािलक-क याएं वािपस भाग ! औघड़ िवि मत हो गया! उसने अपने आसन पर अपना एकि त मू िछड़क िदया और अपने और अपने चे ले के ऊपर िबखे र 9 . ये मु झे आदमी खतरनाक लग रहा है!" मने कहा. और िफर से अपने आसन पर आके बैठ गया! उसने भु ना हआ कछुए का मांस िनकाला और उस मांस को अिभमंि त िकया! उसने महा-चंडािलनी का आ ान िकया और जोर जोर से अ हास िकया! जो औघड़ महा-चंडािलनी को कट कर सके उसका दज़ा तं म ऊंचा होता है. और वो औघड़ अ हास लगाए जा रहा था. उसक जब शि आई तो मने उसको स मान देकर वािपस भे ज िदया था. उनको अिभमंि त िकया और मने महा-चांडाल को कट िकया! उसके कट होते ही उस औघड़ के र गटे खड़े हो गए! दो रौ -शि यां भ ण हे तु त पर थ ! िजसक शि लोप हो जाये गी .पी सप क या कट िक और वहाँ भे ज दी. और उसक िचता क भ म भी! खड़े हो कर उनका अभी-म ण िकया! और औघड़ के थान हे तु फक मारी! औघड़ के पास. अपने र के सकोरे म डु बो कर. वो उठा और अपने मं से उसने उसको भी क़ैद कर िलया! मु झे काटो तो खून नह ! वो हंसा और अ हास िकया! मै नह चाहता था िक पहला वार मै क ँ . इस औघड़ ने उसको कट कराके मु झे ये िदखा िदया था! मने तब अपने यहाँ पड़े बकरे के अंडकोष चाक़ू से काटे. अभी-मंि त क . आँख. ये मेरे सामने भीख मांगेगा!" उस औघड़ ने एक माया-काया को उ प न िकया! उसके तन से दूध िपया! माया-काया ने उसको आशीवाद िदया और मदम होकर नाचने लगी! उसक माया-काया भयानक प म नृ य कर रही थी.पश कर महा-चांडाल को वािपस भे जा! तब उस औघड़ ने एक मानव-अि थ को अभी-मंि त िकया. एक चु टक बना कर आकाश म फक दी! मानवअंग लोप हो गए और उनसे टपकता मेद भी! ये देख औघड़ च का! मने तब अपने सामान से एक नपु ंसक मनु य िक हड् डी िनकाली. उसको अलख म ि शूल को न क पर फंसा कर शि -पात िकया! मु झे जबतक समझ आता तब तक मेरे पूजा थल पर मानव देह के कटे फटे अंग बरसात के प मे आके िगरे ! हाथ. चिकत अव य था! वो खड़ा हआ और नृ य-मु ा म अपने पाँव पटके उसने तब भूिम पर ि शूल. औघड़ समझ नह पाया और मेरी उस सप-क या ने उसको नीचे िगराया. " घबराओ मत! ये साले कौिलक दीखते बड़े ह ले िकन शमा जी.लापी ने औघड़ और उसके चे ले को एक ऐसा हार िकया िक दोन वहाँ से दूर जा िगरे ! औघड़ उठा और खु द को संभाला. वहाँ िचता िक जलती भ म क बा रश हो गयी! जले हए अंग वहां िगरने लगे! मने जानबूझकर नपु ंसक यि क हड् डी और िचता भ म ली थी इसक काट केवल इसी से संभव थी! ले िकन उस कौिलक-औघड़ ने भ मासु री-िव ा योग िकया और वो बरसात थम गई! मै इस औघड़ िक शि का लोहा मान गया! अगर इसके सामने कोई और होता तो ये उसके अनिगनत टु कड़े कर देता! उसने भ मासु री को हमारे ऊपर वार करने भे जा! मने शी ही का ी-िव ा का योग िकया! वो भ मासु री धू प म आकाश से मेरे सम कट हई! पूरी वहाँ क ज़मीन िहला दी! मेरी का ी िव ा ने उसक िदशा मोड़ी और भ मासु री सीधे आकाश क ओर रवाना हो गयी! का ी-िव ा से आने वाली मारण-शि को ितिब ब-गंत य िदखा िदया जाता है और वो अपने ल य िक ओर भयानक गजना करती ही बढती चली जाती है. ले िकन उसने ऐसा नह िकया! शमा जी तब बोले .लापी कट क और उसको भे ज िदया! उसने जाते ही माया-काया को भे द डाला! माया-काया लोप हो गयी! औघड़ का मु ंह खु ला रह गया! महा. आंत उनका मेद मेरे यहाँ आके भर गया! मु झे ोध आया.वो दूसरे के झोली म िगर जाये गी! ले िकन उस औघड़ ने महा-चंडािलनी को नह भे जा उसको हाथ जोड़ के वािपस भे ज िदया! मने भी हाथ जोड़ कर भूिम. गु द. मने महा. िजगर.

जितन ने मु झे देखा और मेरे पाँव पकड़ िलए! मने उसको समझाया िक गृह थिनवाह से बढ़कर कुछ नह और वो नीिलमा से मा मांगे! वो उसको मा कर देगी! साह प रवार म खु िशयाँ लौट आय ! जाने से पहले मै उस औघड़ से िमलना चाहता था. उनको सम त मांस के िलए हए टु कड़ पर िछड़का. वहां. ले िकन उस औघड़ ने बचाव का रा ता छोड़ रखा था! उसने अपने बचाव म कू मांडा-गिणका को कट कर रखा था! मेरी िवमोिचनी वहाँ से भाग खड़ी हई! कू मांडा-गिणका का जो औघड़ आ ान कर सकता है वो कुछ भी करने म समथ होता है! इस गिणका का ित-उ र एक गिणका से ही संभव था. मने ाथना क िक फ कड़ नाथ को मा कर दीिजये ! मेरे आंसं ू फू ट पड़े ! मने रोते-रोते मा ाथना क ! तब धूमावती-महािव ाला ने अ हास िकया. उ ह ने हमको रा ता िदया! औघड़ उठा. भूिम पर अपना योजन बता िदया! उ ह ने अपना ि शूल ऊपर िकया और अपने गंत य क ओरे थान कर गय ! धूमावती-महािव ाला को देख कू मांडा-गिणका लोप हो गयी! वो औघड़ और उसका चे ला आसन छोड़ के भागे. शमा जी और सु हड़ के सेवक ने मु झे उठाया और अ दर ले गए.वो कट हई तो औघड़ क शािकिनयाँ वहाँ से भाग .िदया! डािकिनय से भयानक अ हास िकया! औघड़ आँख फै ला के उनको देखता रहा. उसक आँख से अ -ु धारा फू टी ले िकन मु ंह से वर नह िनकला. औघड़ को देखा और उसक सम त शि य का नाश कर िदया! िफर जाते जाते उनक एक सहोदरी ने औघड़ के व पर लात मारी. ५-६ लोग वहाँ खड़े थे. और मु झ से ि िमलाई. जितन का स मोहन टू टा. वो प यां लपे टे ले टा हआ था. उसने अपने दोन हाथ मेरे सम फै ला िदए और अपने अंगठू े मोड़ कर मु झे नम कार िकया. मने उसके अंगठू को उसके हाथ से िनकाला और उसको नम ते करके बाहर आ गया! उसके अंगठू े मोड़ने का योजन उसको अपना िश य बनाना था. मने अंगठू े उसके बाहर िनकाल कर उसको अपना उ र दे िदया था! 'नह ये संभव नह ' 10 . उसने अपने गु क हालत देखी और फफक-फफक के रोने लगा! उसके गु ने ४० वष क औघड़-साधना ोधावेश और ितकारयु मिलनता से खो दी थी! जितन उसके थान पर ही था. उसक पसिलयाँ रीढ़ से अलग हो गय ! उ ह ने भयानक अ हास िकया और लोप हो गय ! सब ख़तम हो चु का था! मै जहाँ था वही ँ िक वही ँ िगर पड़ा. यिद वे बहते पानी म शरण ले ल तो बचाव संभव था अ यथा आज नाश अव य भावी है! औघड़ सीधे नहर क ओर भागा ले िकन बीच म ही धूमावती-महािब ाला ने उस पर आघात कर िदया! वो िचलाया ' मा िवकराला मा!' और दोन घु टन पर बैठ गया! धूमावती-महािव ाला उसका भ ण करने को आतु र थ . अपने दोन हाथ से एक ी-आकृ ित बनायी और अपना ि शूल उसक योिन. नह तो अब उनका नाश िनि त था! उसने तब एक चाक़ू ले कर ज़मीन पर तीन बार थूक कर एक और अिभ-म ण िकया! उसने अपनी झोली म से मृत िशशु क कले जी िनकाली. कोई दो घंटे के बाद उसके चे ले को होश आया. मने आज पहली बार अपने दादा ी द गिणका का योग करना था! या यूँ कह िक करना पड़ रहा था! मने अपने शरीर के ११ अंग का र -िलया. वो वहाँ से भाग के सीधा अपने घर आ गया! जितन का सारा स मोहन भंग हो चु का था! मै अगले िदन सु बह साह के पास आया. उसने अपने को और अपने चे ले को सु रि त कर िलए था! डािकिनयाँ वहाँ उनके ाण ले ने को डटी हई ं थ . मू सूखने से पहले उसको इनको भावहीन करना था. जहां वो औघड़ उसको रख के आया था. मै उसके थान पर गया.थल म िव करा िदया! भयानक आवाज़ हई! धूमावती-महािव ाला कट हई! उसक चमक के आगे हमारी आँख िमचिमचा गय ! मने उनको शा ांग-नम कार िकया और उनसे आँख न िमलाते हए. और उसको चाक़ू से काट कर ४ भाग िकये ! उसने एक एक भाग अपने माथे पर छू कर अलख म समिपत कर िदया! उसने ४ िवलोिचनी-शािकिनयाँ उ प न कर डाल ! अब िवि मत होने क बारी मेरी थी! उसने उनको अपने ि शूल से इशारा िकया और मेरी डािकिनय के पीछे दौड़ा िदया! मेरी डािकिनयाँ वहाँ से भाग ! और मेरे सम कट हो गय ! मने तभी िवमोिचनी-शािकनी का आ ान िकया.

आधु िनक. वे ह देव. असु र. हमारे तो होश उड़ गए गु जी. िबलकुल वैसा ही जैसा धवन के साथ हो रहा है! अब मेरा माथा ठनका. इसी से सम त सृि क रचना हई है! पर तु एक त व और है ये है सू म-त व! ये ही त व मनु य को देव . जये श. मने फ़ौरन ए बु लस बु लाई और उसको ले के अ पताल पहंचा. सु गंध और दु ग ध! पर तु गंध ४ कार क और ह! ये गहन िवषय है! त व इस संसार म ५ ह! वे ठोस ह.असु र. जीव. मेरे पास धवन के िपता सु नील का फ़ोन आया.य . डॉ टस ने कहा िक सु साइड का केस लग रहा है. सजीव. शैलेश और धवन! ये तीनो िम बगलोर के रहने वाले ह! इनमे से धवन के िपता मेरे प रिचत ह और काम या भी आते-जाते ह! एक बार क बात है. आज से ८ िदन पहले मेरे पु धवन िक तिबयत खराब हई. आप आ जाइए" मने कहा. वो एक अलग िचंतन-िवषय है! इस िवषय म कभी और वणन क ं गा! ये जो कहानी है ये ऐसे ही तीन आधु िनक िम क कहानी है! ये तीन िम आज भी िम ता के सू म बंधी ह! इनके नाम है. िफर मने उसने कहा. तो वहाँ मन कर देना. डॉ टस ने कहा. मै घबरा गया. उसके शरीर म. िजस िदन मेरे बेटे के साथ ऐसा हआ उसी िदन ऐसा ही इनके पु के साथ भी हआ है. गु जी.वष २००९ बगलोर क एक घटना िम गण ! आज का यु ग आधु िनक है! िव ान िनरं तर गित कर रहा है! पु रानी िवचारधाराएँ खंिडत हो रही ह! पर जानते हो? कौन खंिडत कर रहा है? िव ान तो कदािप नह ! केवल वे लोग िजनको इन िवचारधाराओ का मूल या तो पता नह . तब मने शमा जी को फ़ोन करके कल दोपहर म आने को कह िदया उ ह ने हामी भर ली! अगले िदन ढाई बजे धवन अपने २ और िम के साथ मेरे पास आ गए. ेत से दूर करता है ! आज का िव ान इस िवषय म चु प है. मने देखा उसके मु ंह से खून िनकला था. उनक बात का वाह देख कर लगता था िक कोई बड़ी ही सम या है. काम. पे ट म कह भी िकसी कार का ज़हर नह िमला! सु साइड क तो आशंका ही ख़तम हो गयी थी.भूत. गु ण. िनज व.रा स. इनका नाम. उ ह ने और टे ट िलखवा िदए और िकये . डॉ टस को खु द हैरत है! ले िकन गु जी. अधम िनरथक सृिजत नह िकये ! सभी क कह न कह उपयोिगता है! वाद ५ ह. मै कल िद ली पहँच रहा हँ. अगर कह और जाना हो. जागृत कहते ह पर तु ये सब िम याम है िजनके जाल म वो जकड़े हए ह! इस संसार म रिचयता ने कोई भी व तु. ले िकन उसको होश अगली रात को आया.ले िकन मै आपको फ़ोन पर नह बता सकता. बात ही कुछ ऐसी है. िक शायद िदमाग म खून के कतरे जमा हो गए ह. धम. और जब होश आया तो उसने िकसी को पहचाना नह . वैसे मु झे जाना कह नह है. इसी िक वजह से ऐसा हो रहा है. ोध. पर तु साधना से इनका बोध संभव है! गंध २ ह. दोष. ख ा. योम और ठोस! इनको मानव से दूर रखा गया है . कृ पा करना! मै कल आ रहा हँ िद ली!" उ ह ने कहा बड़ी ज दी ज दी! "ठीक है. बड़े घबराए हए थे वे! मने उनसे पहले हाल-चाल पूछे. और वो खून तिकये और िब तर पर िबखरा था. " या बात है सु नील जी? इतने घबराए हए यूँ ह आप?" "गु जी. मीठा. तीन के चे हरे देख कर पता चल रहा था िक कोई मु सीबत अव य ही है! सु नील बोले. बोध नह या िफर समझ नह आया! आज के यु ग वाले अपने आपको सु सं कृ त. जब वो सु बह सोके नह उठा तो मै उसको देखने गया. नमक न. ले िकन कोई अगले िदन म िफर से बेहोश हो गया और तब से वो २ घंटे होश म रहता है और िफर बेहोश हो जाता है. दया.गा धव. तभी आपको बाऊंगा."गु जी. गु जी. ये मेरे साथ आये मेरे पु धवन के िम के िपता जी ह. हरीश और िदलीप ह. मने इनके साथ 1 . कड़वा और फ का! पर तु ये वाद ए ियक ह! िज ह हमारी इि यां बताती ह! ४ वाद और ह. पर तु खंडन भी नह करता! एक त व अलौिकक है! ये त व ि मूित म ही समािहत है! खैर. इसीिलए उ ह ने पु िलस को भी बु ला िलया.

कौन है ये मु झे वहाँ जाके ही पता लग सकता था. शमा जी ने उनको समझाया. िजसक वजह से ऐसा हआ है. मने उनसे पूछा क वो या कह जा रहे ह तो उसने कहाँ वो कह नह जा रहे बस इसम उसका कोई ज़ री सामान है. अपना भोग ले के वो रवाना हो गया! १० िमनट बाद वो एक हैरतंगेज़ खबर लाया! उन तीनो दो त ने एक ले न-िचट बोड बनाया था! और वो उस बोड से रोजाना कोई अनजानी ह को बु लाया करते थे! ले िकन बार-बार करने पर भी कोई ह नह आई! तब जये श ने बताया क अगर शमशान ये क तान क िम ी बोड के ऊपर रख दी जाए तो कोई न कोई ह आ ही जाये गी! िजस िदन उ ह ने शमशान क िम ी उठायी उस िदन अमावस थी! बोड पे डाली. ले िकन एक िदन जये श के साथ ठीक ऐसा ही हआ जैसा धवन के साथ हआ था" इस कहानी से तो ऐसा कुछ पता नह चल पा रहा था. िनि त समय पर कोई रात १० बजे और िफर कभी वही ँ सो जाया करते ये दोन देर रात को जाया करते. मने उन दोन के घरवाल से पूछा तो उ ह ने भी वैसा ही बताया था. मु झे रात म अलख पर बैठना था. जो कुछ उ ह ने बताया था. उ ह ने हमसे िवदा ली और वो लोग वािपस चले गए. मने एक का र दा हािज़र िकया. 2 . कुछ क िजये गु देव" मु झे सु नके बड़ी हैरत हई! मने उन तीन को िह मत बंधाई और इस सम या से िनकालने क भी बात कही! उनक तब जान म जान आ गयी! मने उन तीन से कहा. जब धवन यहाँ आया था तब वो सीधे जये श के कमरे म चला गया था और िफर उसके पीछे ही शैलेश आ पहंचा था. मने सोच क कोई दो ताना मन-मु टाव हो गया है. मने उनको सु बह या देर रात म फ़ोन करने क बात कही.े िफर दु बारा मने उनको िह मत बंधाई. "हाँ एक बात मै बताता हँ आपको जो मने गौर क थी. िफर तकरीबन तीन िदन तक एक दु सरे से नह िमले. उनको कोई १५ िदन ऐसे हो गए थे. जये श के िपता जी क लाई फू ट पड़ी. मै िफर अपने कमरे म चला गया. इतने म जये श क माता जी का फ़ोन आया क जये श क तिबयत िबगड़ गयी है. का र दा आया और. ये तीन अ सर िमलते रहे .लगता था के तीन ही एक साथ चपे ट म आ गए ह कह . उसक नाक और कान से खून आ रहा था.मशिवरा िकया और मै यहाँ आ गया गु जी. एक िदन क बात है. थम ले िकन कहाँ चपे टे म आये . बस सारा िदन अपने कमर म बैठे रहते थे. ज़रा बताइये िक ये या माजरा है? हम बहत डरे हए ह. ज़रा देखते ह क मसला या है. शैलेश के पास एक बैग था. िफर मने कोई यादा गौर नह िकया. शमा जी तभी उ ठे और गाडी ले कर सामान ले ने चले गए. यूंिक मेरे मालूम करने से कई चे हरे आ-जा रहे थे! मने शमा जी से सलाह क . शमा जी सामान ला चु के थे. उ ह ने भी यही कहा क जाना ही उिचत है! काय म बना और बगलोर फ़ोन िकया गया. ये एक आम सी घटना लगी मु झ. अब खािमयाजा भु गतना पड़ रहा था! ले िकन इसके पीछे कौन था. अन इनको वहाँ वािपस जाना था. उनको इि ला दी गयी क हम वहाँ कल दोपहर म आ रहे ह! हम बगलोर पहंचे. क वो मु झे कोई ऐसी ख़ास बता सकती ह जो उनके रोज़मरा के यवहार से अलग हो और उ ह ने उस पर गौर िकया हो? तब जये श के िपताजी बोले . वहां धवन के िपता आये थे हमको ले ने के िलए. ले िकन उ ह ने शमशान क िम ी को लात मारी थी. ले िकन कुछ नह हआ! तीन ने बोड को लात मारी और सारी बात को अफवाह कहा और मजाक उड़ा िदया! ये थी सारी मु सीबत क जड़! अगर केवल बोड को ही मारते तो ठीक था. मने शमा जी से कहा क वो ज़रा 'सामान' का बंध कर आज रात के िलए. यूँ और कैसे? या तो ऐसा ही लगता था. हमने सीधे अ पताल ही जाने क सोची और वही ँ चल िदए.

. मने धवन से पूछा. "धवन? या तु मने ले न-िचट बोड इ तेमाल िकया था?" धवन के होश फा ता हो गए! वो घबरा गया! "बताओ धवन. अब आगे क रण-नीित बनानी थी.. मै तु मको इस सम या से िनकाल लूँगा.जी.. "जब शैलेश िम ी लाया तो या तु हे पता था.जी हाँ" वो बोला और अपनी नज़र मु झ से हटा ल .. या हआ? कोई ह आई वहाँ? द तक दी उसने ? मने पूछा....तीन अलग-अलग अ पताल म दािखल थे. "जी नह ... धवन क हालत काफ खराब थी. "जी कभी नह . धवन के िपता जी हमको सीधे धवन के पास पहंचे. अब मै और शमा जी और धवन ही थे वहाँ. ये तो िदख रहा था. मने शमा जी से सलाहमशिवरा िकया और िफर हम सीधे धवन के पास अ पताल चले गए! जब मै अ पताल पहंचा तो धवन को होश आ चु का था और वो अपने प रजन से बात कर रहा था. इस से कोई भी शय उस पर सवार नह हो सकती थी.. ले िकन चपे ट साफ़ िदखाई दे रही थी.. म तभी सभी प रजन को वहाँ से ज़रा अलग हटने को कहा.. "िजस िदन वो िम ी लाया उस िदन अमावस थी! या तु मको मालूम था?" मने पूछा. "ये ले न-िचट बोड खोलता कौन था? मेरा मतलब इसके िबलकुल ठीक सामने कौन बैठता था?" मने पूछा.कोई खून आिद क परे शानी नह हई और तीन से अपने प रजन को पहचान िलए!धवन के घरवाल क ख़ु शी का िठकाना न रहा! और साथ क सा सारे प रवारजन का! डॉ टस अवाक रह गए!! तीनो के िपता मेरे सामने आके ाथना करने लगे क आप इनको िबलकुल ठीक कर द! मने उनको बताया क मने अभी िसफ माग बंद िकया है.. िहंदी के महीने और ितिथयाँ ात नह हमको" उसने उ र िदया. "जी. यही कोई १३-१४ िदन तक" उसने बताया. 3 . "जी जये ष. वो ही खोलता था" उसने बताया.. नह मालूम था. "जी. "घबराओ मत. मु झे बताओ.. आगे का रा ता ये मु झे वयं बताएँ ग!े इसके बाद मै धवन के घर आया. "अ छा. मने अपनी जेब से एक धागा मं पढ़कर उसके हाथ म बाँध िदया.. डरो मत" मने उसे आ ासन िदया. "तो िफर शमशान क िम ी कौन लाया था?" मने िफर सवाल िकया. मेरा ये जानना बेहद ज़ री है. "िकतने िदन तु मने ले न-िचट बोड इ तेमाल िकया?" मने सवाल िकया. "शैलेश लाया था वो िम ी" उसने जवाब िदया. िफर मै बाक दूसर के पास भी गया और एक-एक करके धागा बाँध िदया! करे ब एक घंटे के बाद उनको होश आ गया.. िक वो िम ी ही है?" मने पूछा. उसके ऊपर अभी कोई शय नह थी. और अपनी और अपने दो त क सलामती के िलए अब बोलना शु करो" मने कहा. कोई ह नह आई वहाँ" उसने बोला. अब वो िफर चौका! बगल झांके लगा. मै उसके पास पहंचा... नहाया-धोया थोडा आराम िकया.... मने सबसे पहले धवन को देखना सही सोचा. वे लोग हट गए.

जये श ने नम कार िकया. मने पूछा. और कोई १५ िमनट के बाद एक छोटी सी पोटली दे दी. उस मु दा फूं कने वाले ने यही समझा होगा िक.. "ओह! तो ये बात है!" शमा जी के मु ंह से िनकला. िचता क राख थी. धवन क िपता जी हमारे साथ ही थे.. ले िकन िफर भी कोई ह कट नह हई. " शैलेश. उस आदमी ने उसको बाहर जाने को इंतज़ार करने को कहा.. उसके होश उड़ गए. ज़रा ये बताओ. मने उस से सीधे ही पूछा. ले िकन उसने िम ी नह उठायी. घबराओ मत!" 'हमे बचाइये सर. शैलेश के पास हमारी खबर थी. ज दी बता. थोड़ी देर म हम."लग तो िम ी िक तरह ही रही थी वो? अगर वो िम ी नह थी तो िफर या चीज़ थी सर? उसने मु झसे सवाल िकया. शैलेश क भी हालत अब सु धर गयी थी और वो बात करने क ि थित म था.?" "वही पोटली जो आप उस शमशान से लाये थे?" मने हंस के कहा.??? हाँ शैलेश. "आपको कैसे पता?" उसने हैरत से कहा. सभी लोग बाहर चले गए. "सु न लड़के! या नाम है तेरा. उस पोटली क बाक िम ी का आपने या िकया?" शैलेश अपनी जगह से उछल पड़ा! हालांिक उसको धवन के िपता जी और जये श के िपता जी ने हमारे बारे म उसको बता िदया था.. अब मु झे जये श के पास जाना था! अब मै शमा जी और धवन के िपता के साथ जये श से िमलने पहंचा. मु झे पता तो था क घर म शमशान क कोई व तु लानी नह चािहए. मने नम कार वीकार िकया और उसके पास जाके बैठा.. तो तु म लोग ने शमशान क िम ी का बंध िकया. अब ामा न कर. मु झे अब शैलेश के पास ले चलो. "शमशान म वो गया.तब उसने वहाँ मु दा फूं कने वाले को पैसे िदए. जये श के िपता जी और उनके प रवारजन को हमारे आपने क खबर लग चु क थी. शैलेश से िमलने चल पड़े अब हम शैलेश के पास पहंचे. मै शमा जी के साथ शैलेश के कमरे म घु सा. िचंता न करो तु म अब" मने िफर उसक िह मत बंधाई.. हमारे वहाँ जाते ही शैलेश के प रवारजन मेरे स मु ख आये और नम कार िकया.. आिखरी रात वहाँ या या हआ? मु झे िव तार से बताओ" 4 . इस पोटली म िम ी नह धवन.. िकसी ि या के िलए मंगवाई होगी! समझे ?" मने खु लासा िकया. " सर. वहाँ से सभी को बाहर भे जा.. मै अब आपसे कल िमलूंगा. अब शमा जी खड़े हए और बोले . "जये श? जब ले न-िचट बोड से कोई ह नह आई. रं ग पीला पड़ गया.कौन सी पोटली.. जब उसने मु झे वो िम ी दी तो मै उसको घर लाया. "डरो मत धवन! मै आ गया हँ.. उसने हमको नम कार िकया. सु न तेरी गलती से बेचारे वो दोन अब जान क बाजी लगा के बैठे ह. मै सीधा जये श के पास पहंचा. जो मै जानना चाहता था जान िलया" मने कहा और बाहर िनकल आया..हम तीन को" वो बोला. मने धवन के िपता जी से बोला. "मै बचाऊंगा तु म तीन को. िफर भी वो बोला.. बाक क िम ी का तूने िकया या?" "जी. यूंिक उसको कोई भा मन कर देता. डॉ टर अपने टीन चे क-अप के िलए आने वाला था! हम बाहर आ गए..... बाक सभी को शमा जी ने बाहर जाने को कहा. "सु नो.. ले िकन मै ले कर आया. इतने म एक नस आई और हमको वहाँ से जाने को कह िदया.... मने उसमे से ३-४ चु टक िम ी िनकाली और बाक टॉयले ट के लश म बहा दी" उसने बताया. मने नम कार का जवाब िदया और मै उसके करीब बैठ गया.

हम धवन के घर पहंचे. उस बोड को अपने जूते मार-मार के तोडा िदया! है न?" मने थोडा गंभीर होके कहा. "जी हाँ" उसने जवाब िदया.. अब मै धवन के घर जाकर इस भटकती ह से बात करता हँ क वो या चाहती ह? िफर मै तु मसे िमलने आऊंगा!" मै जैसे ही उठा. जये श ने घबरा के मेरी तरफ देखा. "कैसे तोडा?" मने पूछा. मेरे ऐसा कहते ही. है न?" मने पूछा..जी.. जब तक ये धागा तु हारे हाथ म बंधा है कोई ह तु हारा अिहत नह कर सकती. जो भटक रहा हो वो ही आ जाए!' और तु मने और तु हारे दो त ने..जब आिखरी बार भी कोई ह नयी आई तो हमने वो बोड बंद िकया. "वो िम ी अभी भी बोड के ऊपर ही थी.. धवन का कमरा खु लवाया गया. जो अभी भी यहाँ खड़ी है. उसको खोला तो उसमे टू टा हआ वो 5 . वो िकसी िचता क राख थी. और हम तीन अ दर घु स. िजसक मृ यु एक सड़क-दु घटना म हई थी. ये ही कहा था" उसने घबरा के कहा. वो भी राख उस इंसान क . तु हारे बोड से कोई ह नह आई. उसका हलक सूख गया! "और िफर तु मने कहा. तु म तीन ने.. तु मने जब उसको अपनी लात से तोडा?" मने सवाल िकया. मै थोड़ी देर शांत रहा िफर बोला.जी हाँ. उस िम ी का अपमान करने से ९ ह वहाँ आ गय . और इसको मनघडंत कहा" जये श ने बताया. "उसको ज़मीन म फक के मारा हमने " वो बोला.. दर-असल वो िम ी नह जये श. तु मने शमशान क लायी हई िम ी को लात मारी. "उसके बाद तु मने उसको लात मार मार के तोड़ िदया..हाँ" जये श ने बताया. ले िकन तु हारे लात मारने. अगर तु म केवल बोड को ही लात मारते तो कुछ नह होता. 'साला कोई तो आये . िक कब ये धागा तु हारे हाथ से खु ले और वो तु म तीन को भी अपने साथ शािमल कर!" मने उसको बताया. "जी हमने वो तोड़ िदया" वो बोला. "जये श तु म बैठ जाओ आराम से. "तु मने ये ही गलती क .. "जी.. वो िब तर से उठ खड़ा हआ! बद-हवास सा अपने चार ओर देखने लगा! मने उस से कहा. "जी. एक अकाल मृ यु!" मने उसको बताया.. िफर हमने धवन के िपता से कहा क वो हमको अपने घर. वो तो उसी के ऊपर थी" जये श सकपकाया. "यािन क तु मने बोड के साथ साथ उस िम ी को भी लात मारी?" मने पूछा. िजसका िक िज जये श के िपता जी ने िकया था. इस ती ा म.."सर.. वो घबरा गया. िजनसे यहाँ रहने वाले 'आधु िनक' यि क 'आधु िनकता' का प रचय िमल रहा था! वहाँ मेरी नज़र एक बैग पर पड़ी. "ले िकन उस बोड का तु मने या िकया?" मने पूछा. धवन के कमरे म ले जाएँ ! हम धवन के घर क तरफ चल पड़े . "हाँ जी.जी. वहाँ बेतरतीबी से िबखरी व तु एं पड़ी थ . मने उसको हाथ के इशारे से बैठने को कहा और शमा जी के साथ बाहर आ गया. मने वो बैग उठाया. "जये श... तु म तीन ने िमलके गाली-गलौज करके. आगे मै देख लूँगा.े मने सरसरी तौर पर.

बोलो?" अंिकत के साथ वो ह भी इस बात पर राजी हो गय . "१९ साल" उसने जवाब िदया. आप भी हमारी मदद करो" उसने कहा. इन तीन ने मेरी राख का अपमान िकया. उसक अि थयाँ और अवशेष अभी वािहत भी नह िकये गए थे और इन तीन ने अपमान िकया था. अनजाने म. उसको देखा. "हाँ. "तू ही इस सबको यहाँ लाया है? ये ८ और ह जो तेरे साथ?" मने सवाल िकया. तु म इनको मा कर दो. मने एक मं पढ़ा और उसके पढ़ते ही वो ९ ह उस के घे रे म फंस गय ! मने कहा. इनसे अनजाने म ऐसा कुछ हो गया" मने उस से कहा. और टेल म कुछ िम ी से! मने वो बोड बाहर िनकला. मै इनको नह छोडू ंगा. मै एक िदन और वहाँ ठहरा. बात उसक सोलह आने सच थी. उनसे पहले इ होने मु झे तािड़त िकया है. ये राख मै इन तीन से स मानपूवक वािहत करवा दूंगा. ले िकन अपमान तो अपमान है! "सु नो अंिकत. जब मै परे शान था तो इ होने मेरी मदद क . उसके बाद म शमा जी के साथ वािपस िद ली रवाना हो गया! 6 . आज ही. यहाँ जो तु हारे अवशेष ह. "तेरा नाम?" "अंिकत" उसने जवाब िदया. "तो मु झे तु मको िववशतावश क़ैद करना होगा अंिकत" मने कहा. "सड़क-हादसे म मेजेि टक पर" उसने जवाब िदया. इनको मा कर दो. अभी तो मेरे प रजन ने मेरे 'फू ल' वािहत भी नही िकये ह. मने उस से पूछा. ये बोड ही गलत बनाया गया था! मने वो राख िनकाली और सामने एक कागज़ पर रख दी! मने मं पढने शु िकये! पहले मने अपने खबीस कट िकये और उसके बाद मने वो ह जो इन तीन के जान ले ने पर आमादा थ ! सबसे पहले एक जवान लड़के क ह आई. भले ही ग़लतफ़हमी म. वो चली गय . "कैसे 'उठा'??" मने सवाल िकया. अब वो ये सु न के घबरा गया. उ ह ने मान िलया! उसके बाद सब ठीक हो गया. मने उनके बंधन खोले और उनको वहाँ से जाने को कहा.बोड पड़ा था. अवशेष उन तीन ने स मानपूवक वािहत कर िदए! उनक तिबयत एक दम ही ठीक हो गयी! मने उन तीन को भिव य म कभी भी ऐसा न दोहराने क सलाह दी. अब तु हारा संसार अलग है और इनका अलग. "नह ! मै इनको नह छोडू ंगा" उसने कहा. "उ ?" मने पूछा. "देखो अंिकत. वो मने उसी िदन करवा िदया. और िफर मने अपने खबीस भी वािपस भे ज िदए! उसके बाद जैसा मने अंिकत क ह से वायदा िकया था.

बि क एक फश के समान भूिमपर फ़ै ल जाते ह! ये एक घटी अ हास और एक घटी आलाप-िवलाप करता है! ये उ मु शि है! इस पर िकसी का जोर नह ! कोई भी मं इसको बाँध नह सकता! ये अगर स न होता है तो महा-िसि ा होती है और अगर ोिधत हो गया तो आपक सारी शि य को आज़ाद करा देता है. "भाई वाला! तु मसे ये भूल कैसे हो गयी?" "भाई. वाला नाथ. ले िकन उस बेताल ने सब-कुछ वहाँ तबाह कर िदया था! गलती उ ही से हो गयी थी. ले िकन गु महोदय ने अपने वग करण म उसको २५ म से १३ का दज़ा देकर मु कर िदया था. बु ि -हरण हो गया था. अंग-भंग कर देता है! तािक कभी दु बारा को िसि करने लायक ही न बचे कोई साधक! जैसे पशु ओ ं म सांड उ मु है ऐसे ही ये बेताल है इन पारलौिकक शि य म! जवाला नाथ ने इसी से मार खायी थी और उसक 'झोली' फाड़ दी थी! अब वालानाथ ये चाहता था क मै उस बेताल को स न क ँ और वाला नाथ क शि यां पु नः थािपत क ँ ! 1 . मारा उठा उठा कर वरन उनसे उनक शि यां भी छीन ल थ ! और बाक बची हई शि य को क ल िदया था! अब ये केवल नाम के ही वाला नाथ रह गए थे! ये बात केवल मु झे और उनक धमप नी को ही मालूम थी! पहले तो मै ये सु नके हंसा िफर मने उसने पूछा. थोड़ी देर बाद वाला और सरभंग मेरे पास आने वाले थे 'सामान' ले के और बाक बात वही ँ करनी थ हमे! ये घटना है असम क . तो उसक भी वही हालत हई जो मेरी" उ ह ने कहा! इसके बाद थोड़ी और बात हई और िफर मै शमा जी के साथ एक अलग बने कमरे म आ गया. ये कांटे वो अपने बचाव म योग करता है) का मांस नह चढ़ाया था! बेताल ने न केवल उनको पीटा. साढ़े सात घिटय तक. जब बेताल ने मारना शु िकया तो कुं दन वहां से भाग पड़ा. इस से आगे अगर वो साधना करते तो उनके वयं के ाण जाने क १०० ितशत संभावना थी! चूंिक. काठ मार गया था बु ि को मेरी! मने सब-कुछ इक ा कर िलया था ले िकन वो साही का मांस मेरे िदमाग से िनकल गया!" "आपके साथ और कौन था?"मने पूछा.वष २००९ होजई असम क एक घटना ये अ ल ै माह क बात होगी जहां तक मु झे याद है. एक घटी का मान २४ िमनट होता है. अथात तीन घंटे तक. उ ह ने मु झे बताया क उ ह ने एक बार माच म होिलका-दहन राि को बेताल-साधना करने क सोची थी. वो मेरे गु -भाई थे अतः उनके बु लाने पर मै उनका िनमं ण ठु करा नह सकता था. मै या बताऊँ. "िफर भी गलती हो गयी?" मने हैरत से पूछा! "हाँ भाई. अथात कृ ण-प और शु ल-प क राि को ि य पहर म. के पास आये हए कोई तीन िदन ही हए ह गे. मु झे अपने गु -भाई. ल बी थकाऊ या ा करने के बाद मै उनके डे रे पर पहंचा था! ये वाला नाथ मेरे साथ ही पढ़ाई करते थे तं क . उ ह ने साही( एक जानवर होता है िजसके शरीर पर कांटे होते ह. जंगल म ठू ं ठ पड़े सेमल वृ पर कट होता है! ये उस वृ पर दि ण क ओर उ टा लटका रहता है! इसके केश ल बे होते हए भी भूिम को पश नह करते . रह गया सरभंग. इसीिलए शमा जी को ले के यहाँ आया था! ये साधना थी बेताल-साधना! अ यंत ती ण! दु कर साधनाओं म से एक होती है! इसे ि ल तम और ाण-हरण साधनाओं म रखा गया है! ये है अिसतांग-बेताल-साधना! ये बेताल माह क दोन अ मी. "कुं दन और सरभंग नाथ" उसने जवाब िदया.

ले िकन उसको फक के मारा! वो िफर से उछल कर शाख पर चला गया! मने तब दु बारा से वो 'चटनी' थाल पर मली.ु धा का अथ है िक जैसे सोते हए को आप उसके कान म सीटी बजा के जगाएं! इस कक. कटु मा के डे रे म ये कोई नयी बात नह ह!" मने ये कह के अपना िगलास खाली िकया! "मै तो आपक सेवा के िलए कह रहा था. ले िकन हमको इस सम या से उबारो. "देिखये . "हाँ भाई. नह तो कह मु ंह िदखाने लायक भी नह ह अब तो हम!" और िफर वो हंस पड़ा! "भाई. उसने िफर थाल िलया और िफर से नीचे िगरा िदया. सरभंग ने मु झे देखा और बोला.ु धा तक कुछ नह बोलता. आप जैसा कहोगे हम वैसा कर दगे.ु धा म यंजन क सु गंध उस सीटी के समान ही है! "सरभंग? जब वाला उसको भोग दे रहा था. बस रोये जा रहा था" सरभंग बोला अब.ु धा योग क थी? मने पूछा. वो जो बेताल है न? वो कक. उसने अपने हाथ म थाल िलया. अपने साथ 'सामान' लाये थे वो. नह तो डे रे म एक जोगन है दीमा. उसने िफर थाल फक िदया! यही न?" मने वाला से पूछा. "अबे ओ सरभंग! ओ वाला! उसने २ बार थाल नीचे फका. भयानक अ हास करता है!" वाला बोला. तब तू या कर रहा था?" मने सरभंग से पूछा. आप को बु लाने का मकसद यही है िक आप उस बेताल को स न करो और हमको हमारा 'राज' िमले . और सामान रखा. जब बेताल ने अपना भोग वहाँ देखा तो वो सामने आया. भूनी हई मछली और देसी मिदरा! हमने खाना खाना शु िकया. इसीिलए उसने थाल फका. "नह वाला. "तु मने कक. और तु हे समझ म नह आया? वो तु मको दो बार चे तावनी दे गया!" मने वाला के सर पर एक थाप मारके कहा! "ओह! और मने सोचा िक उसको वो 'सामान' पसंद नह आया!" वाला ने कहा. सब कुछ िमल जाएगा आपको! आप कोई 'शौक़' तो रखते नह . अभी महीने भर पहले कटु मा बाबा के डे रे से यहाँ आई है! आप एक बार देख लीिजये .मै और शमा जी अ दर बैठे हए आपसी बात कर ही रहे थे िक वाला और सरभंग वहाँ आ गए. ले िकन भाई अभी भी तु म वैसे के वैसे ही हो! कोई 'पाली' अभी तक या नह ?" वाला ने पूछा. आज से २ िदन के बाद अ मी है. वही से पीछे कूदा और िफर शाख पर लटक गया! अब क उसने अ हास िकया!" सरभंग ने बताया. 2 . सही नह करते! उसको रहने दो वही ँ. हमारी ओर आया. न तो कोई 'पाली' आज तक और न कोई इरादा है!" मने जवाब िदया इतने म सरभंग उठा और बाहर गया. "अ छा!" मने गदन िहला के सहमित जताई! कक. वहाँ से एक बोतल और ले आया. क थी. दु बारा तु मने उसको बु लाया. "गु जी. थकावट उतार देगी आपक !" उसने एक कुिटल मु कान भर के ऐसा कहा! "नह भाई वाला. "अरे भाई उसने जब पहले थाल देखा तो उसमे साही का मांस नह था. वो भी खु ल गयी! "सु नो भाई. और तो वो कुछ सु न ही नह रहा था. ये तु म लोग जो हो न. आप मु झे बता देना िक या या चािहए. ले िकन इसके ख़तम होते ही पे ड़ से नीचे कूद जाता है. वो िफर नीचे कूड़ा.

मै सारा बंध करवा दूंगा" "ठीक है. अब देरी हई तो मै वहाँ नह जाऊँगा. िजसको हमने अपने माथे और गले पर लगाना था. उनके िलए मने िवशेष र ा-सू बनाए और उनको एक एक करके मने उनके दोन हाथ . "गु जी. ५ देसी ब ख. मेरे पीछे सरभंग भी आ गया. ले टते ही िनं ा-लोक म िवचरण करने लग गए हम दोन ! सु बह हमारी आँख ज़रा देर से खु ली. मै अभी िलखवाता हँ. कमर. चािहए होता है. देरी नह होगी. न द का आगोश था और थकावट भी काफ थी." भाई जो भी वा तु आपको चािहए. कुछ कम नह पड़ना चािहए था. ले िकन बाद म पता चला वो साही का मांस नह . आप भी यान रखना!" शमा जी बोले ."हाँ! हाँ! यही हआ" वाला ने अपनी गदन अजीब तरीके से िहला के कहा! "तो तु म साही का मांस ले जाना कैसे भूल गए?" मने ज़रा जोर से पूछा. वो वहाँ आया और मेरे और सरभंग के सर पर अपने बाल फै ला गया! सब ख़तम कर िदया उसने भाई! सारी मेहनत तबाह हो गयी हमारी! अब हम कुछ करते तो समय समा हो गया!" वाला बोला! अब हम लोग का बात करते करते 'सामान' भी ख़तम हो गया था! उन दोन को मने बाहर भे जा और शमा जी और मै भी ले ट गए. जो सामान नह था वो नोट कर िलया गया. बाजु ओ ं. िब जू का मांस था! यह मार खा गए हम!" वाला ने बताया. अब के उसने थाल नह पकड़ा. पांवो म बाँध िदया. िन य-कम से फा रग होके मै और शमा जी ज़रा टहलने के िलए बाहर आये . तु म आज ही साही का बंध करवा लो. वाला बोला. उसने थाल को देखा और मु झे उठा के साथ वाले खे त म फक िदया! ये सरभंग वहाँ से भागा तो इसको भी इसक कमर से पकड़ कर खे त म फक मारा! वहाँ क चड थी सो बच गए! जब तक हम उठे . काफ शाि त वाली जगह थी ये ! कृ ित का सौ दय अिभभूत करने वाला था! जंगली फू ल िखले हए थे. देरी नह करना ज़रा भी. मामला खतरनाक है. और िफर मने भी ऐसा िकया! हमको एक िवशेष टीका बनाना था. ५ देसी खरगोश और ५ सौली िजंदा मछिलयाँ. इसम साधक का र . ५ मु ग देसी लाल वाले. उसके बाद मने सरभंग को िलखवाया. वातावरण म वन पितय क गंध फै ली थी! पे ड़ क शाख पर प ी उछल-कूद रहे थे! उनक आवाज बेहद सु कून देने वाली थ ! उम थोडा और आगे बढे ! और आपस म बात करते करते चहलकदमी करते रहे ! टहलने के बाद वािपस वही ँ आ गए! वहाँ हमको चाय और थोडा पनीर खाने को िदया गया! चाय पीने के बाद हम वािपस अपने कमरे म आये . बाएं तन का. उसको िफर से थाल िदया. िछले हए. "भाई. आप िनि त रह! उसने कहा और बाहर चला गया. हमारे पास मांस तो आया था. और उसके बाद वाला भी. और अगली अ मी तक ती ा नह क ं गा. ये सब मु झे २ िदन के बाद यहाँ से िनकलने से पहले चािहए. वो इसको िलखवा दो. "तीसरी बार या हआ?" मने हंस के पूछा! "मत पूछो भाई मत पूछो! वो नीचे आया. मने उस टीके का 3 . ५ घड़े देसी शराब. मने अपना बैग देखा और जांचा िक या व तु कम है. उसके योग करने वाले का र और िकसी ी का दूध . और साही का ही कह के आया था. शमा जी को भी तैयार करना था. जो चािहए था अित र वो भी नोट कर िलया! और िफर ऐसे ही अ मी आ गयी! उस िदन मै सु बह ११ बजे से ४ बजे तक अलख म ही बैठा रहा. नह तो मु सीबत गले पड़ सकती थी. सबसे पहले िकलो भर साही का मांस चािहए. "सु नो सरभंग.मै अगले ही िदन यहाँ से चला जाऊँगा!" "नह . वाला दूध ले के आ गया था. "घबराओ नह शमा जी!" मने कहा! इसके बाद िफर मै और शमा जी अपने सामान को जांचने लगे. को ज़रा" मने कहा.

मु ग. मै वहाँ आया! शमा जी ने भी सा ांग नम कार िकया! िफर मने नीचे बैठते हए उसको साही का मांस परोसा! यही असली घडी थी. तं ाभूषण धारण िकये और उस टीके को अपने माथे और गले पर धारण कर िलया! ५ घड़े शराब वहाँ रख दी गयी. जब राि हई तो मै शमा जी. खरगोश. अब मने और शमा जी ने संपण ू व उतारे . उसका शरीर कोई १२ फ ट ऊंचा! गले म अि थ-माल! बाजु ओ ं म बाजू-बंध! व पर आवेध-आभूषण! उसने अ हास लगाया! कण-भे दी अ हास! उसने िफर मेरे चार ओर च कर लगाया और जैसे ही वो उड़ने लगा मने अपना ि शूल उसको िदखाया! उसका अ हास बंद हआ! वो शांत हआ और नीचे आ गया! मने उसको नम कार िकया! और मै पीछे पीछे बढ़ा जहां मेरी अलख जल रही थी. और वो ५ िजंदा सौली मछिलयाँ वही ँ हाथ भर क दूरी पर रख द . ि य हर आर भ होने म मा ८ िमनट बचे थे. मने घड़ी देिख. िचता-भ म मली. सारा आव यक सामान ले कर चल पड़े . यिद उसको पसंद आया तो ठीक नह तो मार खाने के िलए तैयार हो जाओ! उसने वो थाल पकड़ा. सरभंग और वाला. उसने उस थाल को अपने क ध तक रखा और िफर अपनी जीभ बाहर िनकाली! लाल-रि म जीभ कोई २ फ ट ल बी! उसने उस जीभ से उस मांस को छुआ और िफर एक अ हास लगाया! इसका अथ उसको मांस सही लगा था! ये मेरी पहली कामयाबी थी! उसने वो थाल अपने मु ंह पर लगाया और एक ही बार म सारा मांस अ दर ले गया! उसने िफर एक अ हास लगाया! मने एक शराब का घड़ा उठाया और उसको िदया! उसने िफर मु झे देखा और घड मु झ से छीन िलया! उसके इस घड़े को खाली करने से 4 . ये बतन मने वही ँ अलख के पास ही रखा. तार के काश से ज़मीन पर ओंस के ितिब ब मोती समान तीत हो रहे थे! ठू ं ठ-पे ड़ िक शाखाएं िकसी िवशाल जीव का िपंजर सामान तीत हो रहा था! मेरी अलख क रौशनी उसके ताने पर पड़ती हई अठखे िलयाँ कर रही थी! सहसा!! सेमल-वृ क दि णी ओर एक मोटी सी डाल पर एक मु दा कट हआ! करीब २ िमनट तक कोई हरक़त नह क उसने िफर एक दम से िहलने लगा! उसका आकार बढ़ने लगा! उसके केश ज़मीन िक तरफ बढ़ चले और याह केश ने पे ड़ के नीचे एक याह फश बना िदया! अब उसने अ हास लगाया! अ हास लगाने से ठू ं ठ पे ड़ क डाल भी चरमराने लग ! शहतीर तक िहल गया! मने मं पढने शु िकये! अब बेताल ने कण-भे दी िवलाप आर भ िकया! उसके िवलाप से मेरे यहाँ रखे बतन म भरा पानी भी िथरकने लगा! मै अलख िक एक लकड़ी ले के उसके ऊपर ब ख क कले जी लगा कर उठा! बेताल के समीप जाकर. ब ख. इनका काय सबसे अंत म था. मने वो लकड़ी ऊपर क तरफ कर दी! लटके हए बेताल क गदन नीचे घूमी! उसने मु झे अपनी श फाफ आँख से घूरा! िफर उसने अपनी गदन वापस घु मा ली और जोर से अ हास िकया! मने िफर से एक कले जी और लगाई ं और उसको ऊपर िकया! उसने िफर अपनी गदन नीचे झु काई और इस बार अपना शरीर बढ़ा कर मेरे शरीर तक कर िलया! मै ज़मीन पर था और वो ऊंची शाख पर लटका हआ! उसने मु झे िफर से अपनी आँख से घूरा.िम ण तैयार िकया और एक बतन म भर के रख िलया. इसक खु शबू से ही वो िखंचा चला आता है! मने वो मांस अपने आगे रखा और उसका पूजन आर भ िकया! सौली मछिलयाँ एक भगोने म तैर रह थी. काली-ह दी िक से गंध िलए हए! उसने नीचे छलांग लगाई ं. साधना समय सरभंग और वाला को वहाँ नह ठहरना था! इसीिलए मने उनको ६४ कदम दूर रहने को कहा. एकदम तपे हए. और वहाँ जंगल म सेमल के ठू ं ठ वृ के नीचे आये . मंझीर ने भी बोलना बंद कर िदया था. वातावरण म अजीब से शाि त हो गयी थी. वो वही ँ चले गए. िबलकुल शांत हो कर. शराब आिद का भोग अलख को िदया! अलख अब जोर पकड़ने लगी थी! राि का थम हर समा होने को था! सबसे पहले मने शमा जी को अपने दाय हाथ के पास िबठाया और उनसे एक ता बे के थाल म साही का मांस परोसवा िदया! िकसी भी बेताल को साही का मांस अ यंत पसंद होता है. अब मने अलख उठानी शु क ! मं ोचारण आर भ िकया! अलख भड़क तो मने मांस. यहाँ मने अपने थान हे तु सरभंग और वाला से साफ़-सफाई करवा दी. उसके केश मेरे सर से टकराए.

" ि यािदपंताओ ठं ठं हम् फ !" उसने मु झे नीचे छोड़ िदया! िफर एक भयानक अ हास लगाया! वो नीचे झु का और उसके हाथ म एक छोटा सा पा आया! उसने वो पा मु झे िदया और देकर वािपस वही ँ उड़ चला! जहां से वो नीचे कूदा था! साढ़े सात घटी समा होने म मा २ िमनट थे! मने आ -मं पढने चालू रखे ! २ िमनट के प ात वो बेताल जैसे अचानक आया था वैसे चला भी गया! मने वाला और सरभंग को आवाज़ देकर बु लाया! उनक ख़ु शी का कोई िठकाना नह था! वो दोन मेरे पाँव म पड़ गए! मने तब एक मछली ली और उसके मु ंह म बेताल के िदए पा क एक बूँद उसके मु ंह म डाली और उसे ज़मीने म गड् ढा खोद कर गाढ़ िदया! िफर मने उस य को चार मछिलय के मु ंह म डाल कर एक एक मछली सभी को बाँट दी! वो हम सभी को वहाँ." ख़म ख़म ठं ठं शंख-ि या वे?????????????????????" इसका अथ थे िक मै आगे का मं पूण क ँ ! मने कहा.पहले उसको दूसरा घड़ा िमल जाना चािहए अ यथा वो हमको गु से म कह भी फक सकता था! मने इसी तरह ज दी-ज दी ५ घड़े उसको दे िदए! उसने सारे घड़े खाली कर के वही ँ फक िदए! वो खु श हो गया था! उसको मने अब खरगोश का मांस िदया. उसने वो भी खा िलया! िफर मु ग और ब ख भी! वो म त हआ और ५ बार लगातार अ हास लगाया! अ हास लगाने के प ात. ि याथल पर िजंदा खानी थी. वािपस िद ली आ गए! हाँ! बेताल का िदया पा मने आते हए ी गंगा जी म बेताल-साधना मं पढके जल म वािहत कर िदया! 5 . िफर उसने गजन करने वाली आवाज़ म बोला. तीन टु कड़े से अिधक िकये तो फल नह िमले गा! हमने वो िजंदा मछिलयाँ खा ल ! वाला और सरभंग को खोया हआ 'राज' िमल गया! मु झे बेताल को स न कर वयं बेहद स नता हई! २ िदन के बाद मै और शमा जी. सम त भोग लगाने के प ात उसने मु झे मेरी कमर से उठाया और अपने चे हरे क तरफ ले गया.

वािपस आया तो साथ म उसके साथ बाक दोन भी आ गए. मेरे सामने वो आ खड़ी हई. मांस का नामो-िनशाँ नह था. और ये मेरी ही ती ा कर रहे थे. "जी कभी नह " वो बोली. " याह हए िकतने िदन हए?" मने सवाल िकया. "जाओ जा के उस लड़क को बु लाओ यहाँ िजसक कोख बंद है!" "जी अभी लाया बु ला के" वो उठा और वहाँ कड़ी कार तक चला गया. हाँ िपंजर क हड् िडयां यमान थ ! तभी बाबू नाथ ने उस िचता म से बाय टांग क एक हड् डी िनकाली. 1 . लाश पूरी तरह से जल चु क थी.वष २०१२ माच काशी उ र देश क एक घटना सद क वो कडकडाती रात! धु ंध का आवरण सम त शमशान पर पड़ा हआ था! ऊपर से चलती शीत-लहर! तेज बहती वायु का ं दन-राग! िचता से उठे अंगार और िचता के लकिड़य को कुरे दते ये अघोरी! िचताि न का ताप क सु कून दे रहा था! िचता के चार ओर बैठे अघोरी और उनके गु िनया लोग! साथ साथ चलती मिदरा और मांस! शमशान म बैठे कुते दम िहला रहे थे क कोई टु कड़ा उनक तरफ भी न जाने कब आ जाए! कुल िमला कर यहाँ ९ लोग थे. २ गु िनया लोग और २ ही सेवक! २ आधु िनक िलबास पहने २५-२६ वष क मिहलाय और एक अधे ढ़ उ का यि ! ये मिहलाय अपनी गाडी म बैठी थ और ाइिवंग सीट पर वो अधे ड़ यि ! ये शमशान है काशी का! वैसे काशी से कुछ दूर अलग! मु झे यहाँ राि २ बजे बु लाया गया था. जहां ये मु य अघोरी. मै थोडा देर से पहँच था. "रजनी" वो बोली. मने उनको पीछे ही रहने को कहा. "२७ साल" उसने कहा. "उ बताओ अपनी" मने कहा. २ मु य अघोरी. "डॉ टस से इलाज करवाया?" मने कहा. करीब आधा घंटा! हमेशा क तरह मेरे साथ शमा जी थे. उसको नदी म जा कर बु झाया और अपने सामने रख िलया! उस पर शराब और र के छ टे चढ़ाए! और उसका आधा रे त म गाड़ कर उस पर एक गदे क माला चढ़ा दी! जब मै वहां पहंचा तो दीना नाथ उठ के खड़ा हआ और मु झे णाम िकया! मने भी णाम िकया! बाबू नाथ ने भी बैठे बैठे णाम िकया! मने बाबू नाथ से कहा. "हरदर रावत" उसने बताया. दीना नाथ और बाबू नाथ बैठे थे . वहाँ ३ िचताएं जल रही थ . "नाम बताओ अपना?" मने पूछा. ये एक जवान पु ष क िचता थी. "पित का नाम बताओ" मै बोला. "७ साल" उसने जवाब िदया "कभी गभ ठहरा?" मने पूछा.

इसका आदमी नह आएगा. "पित कहाँ है तु हारा? वो नह आया?" मने पूछा. "जी रजनी को भी लाऊं?" उसने पूछा. "जी बोिलए?" मने कहा. आप अकेले ही आ जाइए" मने कहा हमारी बात समा हई ं और उसने और रजनी ने मु झे नम कार िकया. " आप लोग को मने कई बार कहा है. शमा जी भी मेरे साथ ही थे. " यूँ? उसका आना ज़ री है!" मने समझाया. मेरा नंबर ले लीिजये . यिद वो साथ ही रहती है तो. उसको ले कर आओ पहले " मने ये कह के वहां से िनकलना बेहतर समझा और मै दीना नाथ के पास आके बैठ गया वो मिहला रजनी पलटी और िफर जा के उस अधे ढ़ से बात करने लगी. इसी तरह मै ४ बजे तक वहां पहँच गया. मने उसको अपना नंबर उसको बता िदया उसे अपनी डायरी म वो नोट कर िलया. "सु िनए. "जी नह " वो बोली. िबना इसके पित के?" "जब या से बात करी तब बो या कै आदमी संग आवेगा. "नह इनक ज़ रत नह है. कोई लाभ नह हआ" उसने जवाब िदया. सु िनए ज़रा?" मै का और वो मेरे पास आया. "उ ह ने मना िकया" वो बोली. वो पहले ही मना कर चु का है इसके साथ अब और कह जाने को" उसने बताया."हाँ. खामखाँ िदमाग खराब करा िदया तु मने भी!" ये कह के मै वािपस चल पड़ा. कई बार. साढ़े ४ बजे रजनी के जीजा वहां पहँच गए. "अब और? मै समझा नह ?" "गु जी. ले िकन कोई फायदा नह हआ आज तक" उसने बताया. "देिखये आप एक काम क िजये . ठीक एक िदन बाद रजनी के जीजा का फ़ोन आ गया. ले िकन तु मने इसको ऐसे यूँ बु लाया. हमारा पु नःप रचय हआ और उ ह ने अपना नाम 2 . गु जी. और वहाँ मेरी प नी बैठी हई है. ले िकन जैसे ही मै उनक गाडी के पास से गु जरा तो उस अधे ड़ आदमी ने मु झे आवाज़ देकर कहा. मने एक नज़र रजनी पर डाली और िफर उस यि से कहना शु िकया. और परस जहां मै कहँ वहाँ आ जाइए आप" मने कहा. हम इसको ले के पता नह कहाँ-कहाँ नह गए. "जी ये रजनी मेरी साली है छोटी. हरामन क याई न!" बाबू नाथ ने कहा. मै भी वहाँ पहँचने िक तै यारी करने लगा. शादीशु दा औरत के साथ उसके पित का होना ज़ री है. " मा क िजये गा गु जी" वो बोला. इधर मै दीना नाथ और बाबू नाथ से बोला. गु जी. मने उसको शाम ४ बजे के बाद का समय एक आ म म िमलना का दे िदया. "अब मै चलता हँ. मने भी नम कार का उ र िदया! वो लोग वहाँ से िनकले तो मै भी शमा जी के साथ वहाँ से िनकल आया. वो आ म मेरे यहाँ से अिधक दूर नह था. "िफर मै कुछ नह कर सकता.

"िदने श जी आप कल रजनी को मेरे पास १ बजे ले आय" मने बताया. मै आ त हो गया ह. उस रात मै उसको अिधक नह देख पाया था. शमा जी िदने श को ले कर बाहर चले गए. "ठीक है. रजनी िक शादी आज से कोई ८ साल पहले यह के एक रहने वाले अिनल नामक यि से हई थी. इस रोग का कोई उपचार नह . यूंिक मु झे रजनी से कुछ यि गत करने थे. ऐसी ही िसलिसल म मै कई पंिडत . रजनी का इलाज करवाया. अब िक बार मने उनसे सारी सम या िव तार म जानने का आ ह िकया. मै कुछ संदेह दूर करना चाहता हँ उस से " "ठीक है गु जी." रजनी जी. "ठीक है. तक का रा ता बताया और उनको ऊपर अओने को कहा. रजनी ने लाल रं ग क साड़ी पहनी हई थी. आप उनका उ र िबना संकोच के और िबना घबराहट के और िबना झूठ बोले दगी" 3 . घने याह केश. ले िकन िकसी तरह से बात संभली और हमने . और अघोर म हर िक म का इलाज संभव है. उ नत देह. कई जगह िदखाया. "मेरा नाम िदने श है. पैसा पानी क तरह बहाया. बाबूनाथ ने मु झसे २५. एक तो. मने आपक सम या सु नी. कल िमलते ह हम" ये कह के मै उठा और िदने श के साथ बाहर आ गया. तो मने शमा जी से कहा क वो िदने श को ज़रा बाहर ले जाएँ . सबसे पहले आप ये िनि त कर ल िक जो मै आपसे पूछूंगा. उसके पित ने नह .पे यर-पाट् स का यवसाय करते थे वही ँ कशी म. दरअसल मेरा उसके साथ एक बेटी का तरह से स ब ध रहा है. रजनी भी मु झे अपने बड़े भाई या िपता समान का ही मान देती है. मने उसको वहाँ.००० पये िलए और उसने कहा िक एक गु जी आये हए ह िद ली से. मने रजनी से पूछा.उनको मने वहाँ िबठाया और पीने के िलए पानी मंगवाया. हमारे तो पाँव तले ज़मीन िनकल गयी. गु जी. म उसको सलाह दी िक वो वहाँ न जाकर.सभी को िचंता हई और आप तो जानते है है िक घर िक बु ज़ु ग ि याँ ताने वगैरह मारने से बाज नह आत . आप कल रजनी को ले कर आय मेरे पास. आज रजनी ी-सौ दय से दमदमा रही थी. ले िकन कोई लाभ नह हआ. मु झे आपको देख के न जाने यूँ लगता है क हमारी सम या का िनदान आपके ही हाथ म है" मु झे ये सम या अ यंत िवदारक एवं स य तीत हई. वो ऊपर आ गए. गौर-वण. ले िकन आज मने उसको देखा. कोई साली िक तरह नह . और िजंदगी खराब होगी रजनी क . आप एक काम कर. मने दु बारा गौर िकया तो मु झे लगा क इस सम या का िनवारण आव यक ही नह वरन परम-आव यक है! मने कहा.िदने श बताया. आिखर हम उसको ले के लखनऊ गए. जहां मै ठहरा था. वहाँ पता चला िक रजनी के गभाशय म कोई न ठीक होने वाला दोष है और वो संतानो पि नह कर सकती. तब मु झे बाबूनाथ के बारे म बताया गया. वो एक ऑटो. उसने बताया क वो रजनी को ले कर एक बजे वही ँ आ जाएगा. उसने हामी भरी और एक बजे िमलना िनि त हो गया! एक बजे करीब. हमने जब उनसे पूछा िक या रोग है तो उ ह ने कहा िक ये एक दु सा य रोग है." िदने श जी. भगत और कई तांि क से िमला. वहाँ आ जाए. बस गु जी. ये मेरे सौभा य क आपने मेरी बात सु न ली. उ ह ने बताया.ले िकन उस से पहले मु झे रजनी को देखना होगा. ले िकन कोई फायदा नह हआ.जैसा आप कहो" उसने कहा. और मै शमा जी के साथ अपनी गाडी म! अगले िदन िदने श का फ़ोन आया. वो मान जायगे तो आपका काम हो जाएगा. उसने फ़ोन िकया. ऐसा ही रजनी के साथ ह. उन लोग ने पानी पीया. आप मु झे बताइये कब आना है?" उसने कहा. जैसा आप कह. ओझा. मेरी साली से तो आप िमल ही चु के है. कई बार तो बात इतनी िबगड़ी िक स ब ध टू टने िक नौबत आ गई. ले िकन शादी के तीन साल बाद भी उसक कोई संतान नह हई. िदने श ने मेरा ध यवाद कहा और अपनी गाडी म बैठ गया. योितष जानकार से. यही बात अगर रजनी के ससु राल वाल को पता लग जाए तो वो उसका याग कर दगे. उसका भी अपना आटे-दाल का यवसाय है. उ नत मु ख-पटल. और आपके कत यबोध से अिभभूत हँ ! आप िनि त रिहये . आप कह भी चले जाइए. बताया िक वो अघोरी है. प रवार कुल िमला के अ छा लगा था हमे तो िववाह कर िदया गया था. जहाँ मै ठहरा हआ था. मै इसीिलए बाबूनाथ के यहाँ बीती परस रात वहाँ आया था.

"कभी िववाह से पूव कोई शारी रक स ब ध थे आपके िकसी से ?" मने िकया. "जी नह . वही ँ रहती थी वो.. "हाँ गु जी" "आपक सही उ ?" मने पूछा.. उनक हाँ म हाँ िमलाते ह. " या कभी इस दौरान कोई गभपात जैसी कोई बात हई?" मने कहा.. उसके साथ" उसने िफर से संकोचवश उ र िदया..रजनी ने मेरी आँख से आँख हटाय और नीचे कर ल . एक िववाह से पूव और एक आपके पित महोदय से.. एक बात और बताओ.. "हाँ.. " या बचपन म कभी गंभीर प से बीमार हई थ आप?" मने कहा. "वो शादीशु दा था?" मने पूछा. "उसक बीवी भी वही ँ थी? उसके साथ?" मने पूछा. और उनके साथ मु झे लगता है िक. एक बात और बताओ मु झ. 4 . ह" उसने जवाब िदया. "अ छा. कभी नह " उसने उ र िदया "इसका अथ ये हआ िक आपका शारी रक स ब ध अब तक दो पु ष से हआ है. करीब ५ साल से मेरे पित महोदय. "और कोई ऐसी िवशेष बात जो आप बताना चाहती ह ? अपने या अपनी पित महोदय के बारे म?" मने पूछा. "जी. "जी कभी नह " उसने जवाब िदया. कभी िकसी को नह " उसने जवाब िदया.. "जी नह . "जी हाँ.. "जी हाँ" उसने कहा... "हाँ.... और अपनी गदन सहमित म िहलाई और धीरे से बोली." वो ये बोल के चु प हो गय . है ना?" मने कहा. मेरी जेठानी के साथ ही सहमती जताते ह. वो थोडा सकपकाई और बोली... "अ छा. "जी गु जी" उसने िफर से संकोचवश कहा.. "जी २८ वष" उसने कहा. इस बारे म िकसी को कभी पता चला?" मने पूछा.े या आपके पित महोदय 'पूण पु ष' ह?" मने पूछा. हमारे िकराये दार के लड़के से स ब ध थे" " या उ होगी उसक और आपक उन िदन ?" मने िफर सवाल िकया "मेरी उ १८ वष थी और उसक कोई ३५ वष" उसने घबरा के जवाब िदया.

उसने थोडा िवि मत सा चे हरा बनाया और बाहर क तरफ झाँका. घबराओ नह " मने िह मत बंधाई उसक ... पूनम. समझ आप?" मने उसको समझाया. २ िमनट म नाहर वािपस आया और बोला. ले िकन कु डी नह लगाई. और मेरे समीप आओ" उसने अपनी साड़ी थोड़ी िखसकाई और अपनी नािभ िदखाई. मै अभी तु हारे गभाशय क जांच करता हँ" मने कहा. "जी मेरे बड़ी बहन ने . ज़रा खड़े हो जाओ" वो थोडा संकुचाई ले िकन खड़े हो गयी.. इसीिलए मै वहाँ आई थी" उसने बताया. आपको शमशान आने के िलए िकसने राजी िकया?" मने पूछा. मै तब उठा और जाके दरवाज़ा बंद कर िदया. "बंद बंद शूल बंद" इसका अथ ये था िक उसके गभाशय को बाँधा गया है! ले िकन िकसने ? 5 . उसका पंदन नह चल रहा" "अब या होगा गु जी?" उसने मासूिमयत से ये सवाल िकया."देिखये ये मेरा िवषय नह . वो ले ट गयी. िफर शांत हो गयी.जी नह " उसने जवाब िदया. "मै देखता हँ िक या िकया जा सकता है" मने उसको जवाब िदया. मु झे सारे त य मालूम होने चािहय तािक कह कोई ु टी ना रहे और कोई चूक ना हो जाए. "देखो रजनी. "जी" उसने िफर से गदन िहला के हाँ कहा.. उसके गभाशय म अव य ही गड़बड़ थी. "डॉ टस के अनु सार आप संतानो पि नह कर सकत ?" मने पूछा.. ना जाने या होगा" उसने इस बार मु झे देखते हए कहा. "ठीक है. सामने ले ट जाओ.. तु म एक काम करो. मने अपना अंगठू ा उसक नािभ म डाला और पंदन महसूस करने लगा. "जी. वो थोडा छटपटाई. मने कहा. "डरो नह आप. "मु झे अपनी नािभ िदखाओ. "हाँ गु जी. जो मै जानना चाहता था. मै पलता और िफर मने रजनी से कहा. " या आप जाना चाहती ह?" मने पूछा.. तब से मै और डर गयी हँ. "रजनी.. उसी से स बंिधत िवषय म यिद आप कुछ बताना चाह तो बताएं . मेरा ये आशय था" मने जवाब िदया. "एक बात और बताओ रजनी. समय पर या िफर आगे-पीछे ?" मने पूछा. "सही समय पर होती है गु जी" उसने जवाब िदया. " रजनी. मने उस से कहा िक. आपके गभाशय म अव य ही कोई गड़बड़ है. "आपको माहवारी सही होती है. उ ह ने ही मु झे वहाँ आने को कहा था. उस िदन वो आय थी ना? वो मेरी बड़ी बहन ह. ये मु झे पता चल गया. मने तब अपना नाहर ेत कट िकया और उसको उसके अ दर वेश करा िदया.

उसके बाद मने िदने श और शमा जी को अ दर बु लाया. संपण ू तैयारी क ! और अपने आस छलावे को मेरे पास दौड़ा िदया! मु झे हंसी आई! उसका छलावा जब आया तो उसक हालत ऐसी हई जैसे क शेर के 6 . और उसको रीसा क पूरे १० घंटे क जानकारी देने के िलए कहा. जो भी सािजश थी वो बाद म देखी जानी थी. तब शमा जी ने पूछा. " या गड़बड़ है इसके साथ गु जी?" "है. अलख-भोग िदया और िफर काय आर भ िकया. यानी िक इसको असहनीय पीड़ा होगी!" मने जवाब िदया! "ओह! तो अब गु जी?" उ ह ने पूछा. "रीसा क उ ४५ वष है. वो ये जानता है िक ये अपना इलाज करवाएगी. "अथात. ये एक औघड़ तैितल क बीवी है! ये औरत जब ७ साल पहले यहाँ आई थी तो इसक कोख बंधवा दी गयी थी! और इसक कोख बंधवाने वाला कोई और नह इसी का पित िकशन है! ये बात बड़ी हैरत म डालने वाली थी! भला एक पित अपनी प नी क कोख यूँ बंधवाये गा? इसके पीछे कोई सािजश अव य ही है. अपने पे ट को पकड़ा और कहा. िफलहाल म तो रजनी क कोख खोलनी थी! मने तब एक 'मु खिबर चु ड़ल ै ' को रीसा के पास भे जा. "अथात?" उ ह ने पूछा. नम कार िकया और सोने चला गया! करीब २ बजे ये 'मु खिबर चु ड़ल ै ' मेरे पास आई. ये औरत अब इ फाल म है. गड़बड़ है. ३ क या संतान ह उसके. मने सोचा! खैर. "गु जी. "मै आज रात अलख म ये पता क ँ गा िक आिखर ऐसा वो 'कारीगर' कौन है और इसका इलाज कैसे िकया जाए शमा जी!" मने जवाब िदया. ये 'मु खिबर चु ड़ल ै ' उड़ चली और पहँच गयी रीसा के पास! वहाँ एक गूलर के पे ड़ पर जा बैठी और रीसा क जानकारी एकि त करने लगी! मै भी अलख से उठा. मने तब जल को अिभमंि त करके उस पर छ टे िछड़क िदए. उसका पित तैितल औघड़ है. अपना का र दा हािज़र िकया और उसको भी उसका भोग िदया! का र दा उड़ा और चला गया! ५ िमनट के बाद हािज़र हआ! उसने बताया िक रजनी िक कोख एक औरत रीसा ने क है. वो वहाँ नह है िपछले ११ महीन से. बदले म उनसे अभय-िसि ा करती है! िपछली राि भी उसने अपने को एक 'छलावे' को योिन-भोग करवाया है और वो छलावा उस पर आस है!" इतना कह के मने उसको माि द य म पु नःधारण कर िलया! अब मु झे इस रीसा से िहसाब चु कता करना था! मु झे ना चाहते हए भी उसक मंझली लड़क को 'लपे ट' म लाना पड़ा! रीसा को जब ये पता चला तो उसने उस 'लपे ट' से बात क . 'लपे ट' ने िसलिसले वार सारी बात बता द और उसको छोड़ िदया! रीसा को जो मै कहना चाहता था वो कह िदया! रीसा घबराई नह ! वो अ दर अपने थान पर गयी. वो 'कारीगर' काफ खे ला-खाया है. रीसा कई महा ेत को अपना सवाग दान देती है. जब आव यकता होगी उनको फ़ोन करके बु ला लगे. िदने श से कहा िक वो रजनी को ले जाएँ .रजनी कड़ी हई. और भारी गड़बड़ है! इसका गभाशय बाँधा गया है और हैरत क बात ये क अगर कुछ िकया जाए तो ये तड़पती है!" मने कहा. िजसने भी ये िकया है. वो ने पाल म गया है अपने भाई के पास. वो थोड़ी देर म ही ठीक हो गयी. िजसक क उ ६२ वष है. और वहाँ से चले गए. मेरे पे ट म दद हो रहा है" और वो ऐसा कह के वही ँ बैठ गयी. िदने श ने णाम िकया और रजनी ने भी. उसने मु झे िव तार से बताया. गाहे बगाहे कोई हमारे जैसा भी िमले गा! और हम कुछ करगे तो ज़ र! अब करगे तो भु गतेगी ये. उसके बाद मै शमा जी के साथ बाहर चला गया और जाके फलाहार िकया! मै उस रात अलख म बैठा.

ा को िस करने के िलए ७ वष का समय लगता है! अब वो उसको दांव पर लगाने वाला था! मने यहाँ पर व -भंजिनका गा धव-गिणका का आ ान िकया! बेला 7 . पूणतया न न होकर. उडू पा-महा ेत को कट िकया! जंगाल के आते ही उडू पा ने उसको पकड़ा और अपनी चोटी म बाँध िलया! रीसा के होश उड़ गए! ले िकन उसने हार नह मानी! उसने अपनी योिन. अब मै िभड़ने के िलए तैयार हो गया! उस औघड़ ने अपना एकि त वीय-पा और र -पा अलख के स मु ख रखे और मं ोचारण आर भ िकया! उसने मानवअि थ. रीसा के कहे अनु सार मेरे पास आने के िलए रवाना हआ! मने तब जंगाल का सामना करने के िलए. ले कर अलख पर ११ बार र के छ टे िदए! भयानक आवाज़ हई! एक क या उ प न हई.वीय. कान म अि थयाँ िपरोये वो क या अब २० फ ट क हो गयी! ये परादंश-क याएं रा स और गा धव के मेल से उ प न होती ह! अब औघड़ ने भूिम पर अपने र से कुछ िलखा! परादंश-क या ने उसको चाटा और वहाँ से उड़ चली! मेरे पास परादंश-क या का जवाब था! तब मने सु ताश-अ ियका क या उ प न क ! ये क या मानव अि थय से सु सि जत. टांग वाली. वही ँ िगर पड़ी! औघड़ के होश उड़ गए! वो खड़ा हआ और अपने को मरघट-मं से सु रि त िकया! मेरी सु ताश-अ ियका वािपस आई और लोप हो गयी! औघड़ खड़ा हआ और मं पढने लगा! उसने अपना ि शूल अपनी अलख म डाला और िफर उसको अपने व पर दाग िलया! जले मांस को वहाँ से छील कर अलख म डाला और 'ढो -मं ोचारण' करने लगा! आशय प था! वो कपाल. िचता-भ म म नान िकया और योिन-पु ि करण करके एक महा ेत जंगाल कट िकया! जंगाल ने पहले रीसा से रमण िकया और अ हास करता हआ.बीच एक मेमने क होती है! मने उसको कहा. िक मै उसको मा ं गा नह .थान म दौड़ा दौड़ा गया! वहाँ अलख उठी हई थी. मानव र से लीपी हई होती है! केवल मानव का ही मांस भ ण करती है! वो भी ि य का ही केवल! सु ताश-अ ियका को मने र -पा िदया उसने उसका भोग िलया और दौड़ पड़ी परदंध-क या से िभड़ने ! परादंश-क या ने जब इसको देखा तो औघड़ के पास वािपस आई और क या बन. ना तो उसके आँख थ ना ही नाक! केवल मु ंह और बाहर लटकती पीली जीभ! और कद मा २ फ ट! ये परादंश-क या थी! इसको औघड़ ने िस िकया हआ था! उसने उस क या को वीय-पान कराया! उसका आकार बढ़ने लगा! चे हरे पर आँख और नाक आ गय थी अब! नाक म अि थयाँ िपरोये .ा यि णी का आ ान कर रहा था! उसने कपाल.ा को भी स न कर रखा था! वाह! कपाल. ि शूल आिद ले कर मु झसे िभड़ने के िलए तैयार हआ! उसने अलख उठायी और अपना पे शाब. मने शमा जी से कह के वहाँ से सम त सेवक हटवा िदए और साम ी का बैग ले कर. बस रीसा से कह के उस रजनी िक कोख का बंधन खोल दे! छलावे को जैसे नई जान िमली हो! वो दौड़ा और उसने जाके सारी बात रीसा को बतायी! रीसा कोई वो रजनी याद आ गयी! उसने अब अपने सम त व उतारे . ये रोिहतांगअ भु जाधारी क माँ होती है! रोिहतांग थम गया! तब मने उसको कपाल-वािहनी ारा क़ैद कर िलया! वहाँ रीसा ने इस बीच अपने पित औघड़ के पास इसक खबर करवा दी. मने शमा जी को वहाँ से हटा िदया और कहा क िव े र से कह के तीन तरह का मांस एक एक थाल आप मेरे पास ले आइये! वो भागे और थोड़ी देर बाद तीन थाल ले आये ! वो बाहर चले गए जैसा मने उनको कहा था! मने मानव-चम का बना आसन लगाया और उस पर बैठ गया! मनु य के कपाल. वो अपना कमंडल.मल और र ले कर अलख म भोग िदया! मै समझ गया िक ये शाशांग-औघड़ है! जब ये औघड़ ि या म िकसी मारण हे तु बैठते ह तो अ र-दमन करके ही रहते ह अ यथा मृ यु का वयं वरन करते ह! उसको अलख म बैठा देख मै भी वहाँ के गु .थूक.ाव के य से भूिम पर तीन ि भु ज बनाए! एक एक ि भु ज म भु ना मानव-मांस रखा! और िफर उसने अपने औघड़ पित से सीखे तं का योग िकया! उसने मं पढ़े और तब वहाँ 'रोिहतांग-अ भु जाधारी' कपाल-मसान को कट िकया! मने उसक शंसा क ! कपाल-मसान ने भी उस से रमण िकया और हो गया रवाना अपने ल य क तरफ! वो मेरे सम कट हआ! उसके आठ हाथ म श सु शोिभत थे! तब मने कपाल-वािहनी को कट िकया! कपाल-वािहनी एक अमोघ शि है. हाथ के जोड़ क अि थयाँ. भ मी-भूत होकर अलख भोग िदया. रीढ़ क हड् डी के ११ जोड़ और गले क हंसु ली-अि थयाँ बैग से बाहर िनकाल ल .

के फू ल क बरसात हई! ती ण-नयनी. अथात उसक वंश-लता का संपण ू नाश! वैशाख-मास क नवमी को िजस तालाब म गु लाबी कमल-पु प होते ह. हम उनसे अब वही ँ मु लाक़ात करगे. व -भंजिनका गिणका कट हई! यिद उसका व प कोई साधारण मनु य देख ले तो उसको शु क-वीय रोग उ प न हो जाता है. मानव-च -ु िब बमाला पहने वो अ यंत रौ प म थी! ले िकन मेरी व -भंजिनका के यमान होते ही लोप हो गयी! अब औघड़ समझ गया क सामने वाला भी कोई िवशेष औघड़ है! उसने अपनी अलख म अपने केश तोड़कर जलाए. कान और मु ंह से खून बह रहा था! महािपशाच पलटा और मेरे पास कट हआ! मने उसको उसका भोग िदया! और उस सेिवका से रमण िकया! िफर वो वािपस चला गया! औघड़ का खे ल समा हो चु का था! अब मने अपना यान रीसा िक तरफ िकया! रीसा क पाँव तले ज़मीन िखसक गयी! उसने फ़ौरन एक चाक़ू ले कर अपना हाथ काटा और र के छ टे भूिम पर िछडके! कोख-बंधन समा हो चु का था! मै काफ थक चु का था! वही ँ िगर गया! कोई ३ घंटे के बाद मै उठा! सेिवका वही ँ बैठी हई थी! मने उसे उसके व िदए और उसके कपडे पहनते ही वो बाहर चली गयी! मने व उठाये और पहने ! और मै बाहर आ गया! पहनने को शमा जी बेस ी से मेरा इंतज़ार कर रहे थे. उसको न न करके उसक छाती पर बैठ गया! अब उसने अपना ि शूल उठाया और एक अ हास िकया! उसके ऐसा करने का कारण प था! वो अब मरने -मारने पर आमादा था! मने शमा जी को बु लाया और उनसे एक ी को यहाँ भे जने को कहा! उ ह ने फ़ौरन वहाँ एक सेिवका को भे ज िदया. भ म बनायी और अपनी िज हा का र उसमे िमला कर भूिम पर फका! और मं ोचारण करने बैठ गया! यहाँ मने अपनी व भंजिनका को णय-मु ा म आिलंगन िकया और उसको वािपस भे ज िदया! उस औघड़ ने जब ये देखा क उसक शि यां भावहीन हो रही ह तो उसने वहाँ एक ी को बु लवाया! ी आई उसने उस ी पर मं पढ़े और उसको वही ँ िलटा िदया. असफल होने पर साधक क दय-गित कने से तु रंत मृ यु िनि त है! उधर. यहाँ मने भी इस सेिवका के साथ ऐसा ही िकया! तब वो औघड़ वहाँ से उठ कर अपने सामान क तरफ गया और वहाँ से एक ी का कटा हआ हाथ लाया! ये हाथ उसने अपने ि शूल पे लटकाया और ि शूल को ज़मीन पर मारता रहा! मै समझ गया िक वो कैराल-महािपशाच को कट करना चाहता है! मने तब इ ा -महािपशाच का आ ान िकया! वो कट हआ! ये महािपशाच अ यंत भयानक और भ शल वृित के होते ह! उधर उस औघड़ से सम कैराल-महािपशाच कट िकया! और मेरी तरफ इशारा कर िदया! वो ु त-गित से मेरे सम कट हआ! ले िकन उसके कंठ-माल टू ट कर िगरने लगे! इ ा -महािपशाच ने उसको पकड़ के अपनी कमर म बाँध िलया! ये देख उस औघड़ के होश फा ता हो गए! मने अपने महािपशाच को उस औघड़ के पास भे जा! वहाँ जाते ही उसने उस औघड़ को सर से उठाकर ऊपर फका! वो औघड़ करीब ३० फ ट ऊपर उछला छ पर फाड़ता हआ और छ पर फाड़ता हआ िफर अ दर िगरा! अब िक महािपशाच ने उसको उसक छाती म एक लात मारी! अब िक वो औघड़ झ पड़े क फू स-सरकंडे से बनी दीवार को फाड़ता हआ बाहर िगरा! उसको बाहर देख कर उसके जानकार वहाँ उसको देखते ही उसक तरफ दौड़े ! उसक हड् िडयां टू ट चु क थ ! नाक. मने शमा जी से कहा िक वो िदने श को फ़ोन करके कह द िक कल राि वो रजनी को ले कर उसी शमशान पहँच जाएँ . मने उसको शु करके वहा िलटाया और एक शि उसके अ दर िव करा दी. राि के तीसरे चरण म वहाँ ये अपनी सहोदा रय के साथ नान करने आती है! यही इनको स न करने का समय होता है! यिद काम. वो िनढाल हई और मने उसको न न करके उसके व पर बैठ गया! अब मै भी उस औघड़ को उसीके तरीके से प त करना चाहता था! उस औघड़ ने उस ी के केश पकडे और मं ो चारण आर भ िकये .ा कट हई और पलक झपकते ही मेरे सम कट हई! गले म १११ नर-मु ंड धारण िकये. न न.डा म आपने इसको खिलत िकया तो ये स न होती है. मु झे सकुशल देख वो मेरे गले लग गए! वो मु झे नान-कु ड तक ले गए! मने नान िकया और िफर अपने कमरे क तरफ बढ़ गया. कपाल. शमा जी ने फ़ोन कर िदया और कल रात का काय म िनधा रत हो गया! 8 .

तु म मु झे अपने पित और जेठानी का नाम बता दो" उसने मु झे नाम बता िदए! मने तब िदने श से कहा. शमा जी के साथ सि मिलत हआ! आज रजनी और उसका पित ेम-पूवक रह रहे ह! 9 . मै आपके िप वृत यवहार से . िकसने . देखकर अ यंत स न हँ! आपका ये ने ह शंसा यो य है! तब मने िदने श को सारी बात बता द . मने उसक नािभ िफर देिख.अगली राि को िदने श अपने साथ रजनी को ले आया. "रजनी. "िदने श जी. रजनी के िलए. और साथ क साथ रजनी के पित और उसक भाभी के बीच उ चाटन ि या भी कर दी! िफर उनसे िवदा ली! जाते जाते मेरे बहत मना करने पर भी मु झे २१. अब तु म संतानो पि करने म स म हो गयी हो!" मेरा ऐसा कहते ही वो िव मयकारी भाव से मेरी ओर पलती और मेरे पांव म िगर गयी! उसक आँख से अ -ु धारा फू ट पड़ी! िदने श क आँख म भी आंस ू भर आये ! वो भी मेरे पाँव छू ने के िलए बढ़ा तो मने उसको उठा िलया! मने कहा. "रजनी. " िदने श जी. नािभ म गभ का पंदन आ चु का था! मने तब रजनी से कहा. मने उसको ये सब रजनी को न बताने के िलए कहा! मने तब रजनी को बु लाया! और धीरे से पूछा.००० पये मेरे हाथ म थमा कर चले गए! मै काशी म एक ह ते और ठहरा और उसके बाद िद ली वापस आ गया! ३ महीन के बाद िदने श का मेरे पास फ़ोन आया क रजनी को गभ ठहर गया है! रजनी के पित ने नया मकान ले िलया है और उसका उसक भाभी के ित मोह-भंग हो गया है! रजनी को अब ेम करने लगा है! िफर उसके िनयत समय पर एक पु ज मा! और उस पु के नामकरण सं कार म मै. यूँ ऐसी शमनाक ि या करवाई थी! उसको भी ये सु नकर हैरत हई. आज से दस महीने बाद मु झे खु शखबरी दे देना!" इसके बाद मने रजनी के ऊपर सदा सु खी और गभ-सरं ण ि या कर के.

"पापा जी से बात नह हो सकती अभी. " कोई फ़ोन आया वहाँ से?" उ ह ने कंधे उचकाये और 'ना' म गदन िहला दी. तो वो उस िदन आिखरी िदन था.त ४ बजे समा हो गया. कई बार कोिशश क . क वो शमा जी को ही बता द. उ र देश क एक घटना ये घटना उन िदन क है जब मै असम से िवकराल-िसि कर के िद ली लौटा था. मने शमा जी को वो फ़ोन दे िदया. शमा जी से उ ह ने कहा क जीवन-मरण का सवाल है. यािन िक कोई फ़ोन नह आया था! उसके बाद मने शमा जी से वो 'सामान' लाने को कहा. फ़ोन पर न घंटी बजी और न ही कोई बात हई. जैसे ही उनक तिबयत ठीक होती है तो मेरी बात करवा देना. 1 . मै पूजन करने हे तु अपने कमरे म चला गया. मेरा मौन. अभी वही ँ दािखल ह" उनके बेटे ने बताया. उ ह ने िफर से सु तानपु र फ़ोन लगाया. पूजन आिद से िनवृत हआ तो एक घंटा बीत चु का था. मने फ़ोन उठा के देखा तो ये फ़ोन मेरे एक प रिचत का था जो सु तानपु र म रहते थे. हमने सोच क िफर दु बारा फ़ोन आ जाएगा. "मै िद ली से शमा बोल रहा हँ बेटा" शमा जी ने बताया. मै बाहर आया और शमा जी से पूछा. मै आपक बात करवा दूंगा िपता जी से " पवन बोला. शमा जी ही मेरा पूरा सहयोग करते थे . ढाई बज चु का था! तभी कोई ३ बजे मेरे फ़ोन क घंटी बजी. उ ह ने सारे काम आगे बढ़ा िदए थे और मेरे िचत-प रिचत लोग के फ़ोन आिद वही सु ना करते था. मै उनको िलख के बता देता था! िदन म ४ बजे ये मौन. "जी अभी तो ठीक ह. आप कहाँ से बोल रहे ह?" उसने पूछा. गु जी से बात करा दीिजये. ले िकन कोई बात न हो सक ! हमने सोचा क चलो िफर कभी या शाम तक फ़ोन आ ही जाएगा. "हाँ गु जी. "हे लो? ितवारी जी??" "जी ितवारी जी नह मै उनका बड़ा बेटा पवन बोल रहा हँ" वहां से जवाब आया. एक काम करना. ले िकन संपक टू ट जाने से बात आधी रह गयी थी. ले िकन बात नह कर पा रहे ह. वो सामान पहले से ही ले कर आये थे! मने तब अलख उठायी और उसको भोग िदया! अघोरी का िन य-कम आर भ हो गया था अब! मने छक कर खाया और मिदरापान िकया! ११ िदन के बाद भोग-आिद ले कर मै स न हआ और मेरा आवेग िफर से लौट आया! राि -समय शमा जी मेरे साथ ही ठहरे . ले िकन आधे घंटे तक फ़ोन नह आया. वो अ पताल म दािखल ह. अब िक फ़ोन िक घंटी बजी! शमा जी ने बात करनी आर भ क . ११ िदन का मौन-धारण करना था. जैसे ही तिबयत सु धरती है. "पवन बेटे. ज़रा ितवारी जी से बात करवाइए अभी?" शमा जी ने कहा. शमा जी ने उनको मेरे बात न करने का कारण बता िदया.२०१० सु तानपु र. कल उनको हाट-अटैक पड़ गया था. णाम!" पवन ने कहा. अभी वो बता ही रहे थे क संपक टू ट गया. " णाम बेटा. तब शमा जी ने ही उनका नंबर डायल कर िदया. " मा क िजये गु जी. "अ छा? अब कैसे ह वो?" शमा जी ने पूछा.त खोलना था. शमा जी ने कहा. उ ह ने अपनी बेटी के स दभ म बताना शु िकया था. ठीक है बेटे?" शमा जी ने पूछा.

"मै आपसे िमलना चाहँगा. हालांिक उ ह ने मु झे वहाँ आने का काय म मु झे बता िदया था. कोई ३ िदन के बाद सु तानपु र से कॉल आया क अब ि पाठी ठीक है और घर पर आ गए ह. ये उनके बेटे पवन क कॉल थी. शमा जी िदन म २ बार उनका हाल-चाल अव य ही मालूम िकया करते थे.उसी िदन मेरे पास मेरे दामाद मु ना का फ़ोन आया था. बोले . िफर ि पाठी जी असली काम पर आ गए. अब तबीयत कैसी है आपक ?" शमा जी ने पूछा. "गु जी. मु झे ये सु नके बड़ा ध का लगा गु जी. िचंताजनक है तो आप हमे बताइये . अब वो कह रहे ह क आप इसको वहाँ से ले जाओ. एक घंटे तक पहँच जाऊँगा. "ध यवाद शमा जी. सास-ससु र से उ टा सीधा बोलती है और हमेशा घर म कले श करती रहती है. ले िकन कई डॉ टस कह रहे ह िक वो मानिसक प से पागल हो गयी है. िफर मै आपक बात करा देता हँ" शमा जी ने कहा. वैसे गु जी कहाँ ह?" "मै उ ही के पास जा रहा हँ. अपने बेटे को फक देती है. आपको मालूम है िक मेरी एक लड़क कोमल हरदोई म याही है. ि पाठी जी बोले . नम कार इ यािद हई और िफर मने उनके िलए चाय मंगवा ली. हम उसका ऊपरी इलाज वगैरह करवाएं नह तो बेटी को सही होने तक हम अपने पास ही रख."ठीक है बेटा" शमा जी ने कहा और फ़ोन काट िदया इन सु तानपु र वाले प रिचत को हम ि पाठी जी बु लाया करते थे. यूंिक आस-पड़ोस म और र तेदारी म उनक जग-हंसाई हो रही है और अब बात बदा त से बाहर हो गयी है. ले िकन व त रहते मु ना ने उसको बचा िलया. आप भी आराम क िजये अब" शमा जी ने कहा. कोई सवा घंटे के बाद शमा जी मेरे पास आ गए और उ ह ने अपना और ि पाठी का वातालाप मु झे सु ना िदया. "ठीक है. यासा कुँए के पास आता है! मै एक दो िदन म पु नः संपक साधूँगा और अपने आने के िवषय म मै आपको बताऊंगा. उ ह ने उसका डॉ टस से भी इलाज करवाया है. हम आ जाते ह आपके पास?" शमा जी ने कहा. कहती है िक वो उसका बालक नह ह. "अगर कोई िवशेष बात है. मु झे ख़ु शी हई क अब वो ठीक ह! और कोई ३ िदन के बाद एक दोपहर को वो अपने साले साहब के साथ वहाँ मेरे पास आ गए. और उसका बालक मु ना के साथ ही रहे गा यूंिक वो पागल औरत उसको कभी भी मौका िमलते ही मार देगी. एक बार तो उसने अपने बालक को गला दबा के मारने क कोिशश क . मु ना ने बताया िक कोमल २ महीन से घर म उलटी-सीधी बात और हरक़त कर रही है. मै काबू नह रख सका और िदल का दौरा पड़ गया. कोई ३ साल हए ह उसको. िजस िदन मु झे िदल का दौरा पड़ा था. "नम कार ि पाठी जी" शमा जी ने जवाब िदया और फ़ोन कट गया. कभी-कभार उसको बाँध के भी रखना पड़ता है. कुआँ यासे का पास नह जाता. तब मै आपको िव तार से बताऊंगा शमा जी" वो बोले .पहले उनका हाल-चाल पूछा. अ छा नम कार" वो बोले . ज दी से ज दी. " नम कार शमा जी" "नम कार ि पाठी जी! कैसे ह आप. मने उनको िबठाया. "अब तो ठीक हँ. ले िकन न जाने कब तक" उ ह ने मायूसी से कहा. "नह नह ! आप उनको मेरा नम कार बोिलये गा! बाक मै जब वहा आऊंगा तो दशन कर लूँगा" वो बोले . 2 . "अरे नह शमा जी. दूध नह िपला रही. उसने ऐसा कहते हए फ़ोन ि पाठी जी को थमा िदया. " यूँ? या बात है? ज़रा बताइये तो?" शमा जी ने पूछा.

उसके बाद दो-चार बात हई ं और ि पाठी जी ने हमसे िवदा ली. मै अव य क ँ गा. इसी ध का-मु क म कोमल ने मु ना के सर पर एक कांच को बोतल फक के मार दी थी. आधे घंटे बाद ि पाठी जी ऊपर आये . घर अ छा-खासा है. "गु जी. जब वो जाग जाए तो मु झे बता देना. मने उनको िबठाया और पूछा. कुछ क िजये " उ ह ने कहा. िकसी को नह पहचानती. वो हांफ रहे थे. केवल गु राती है. हमने ि पाठी जी को बता िदया िक हम आज ही वहाँ के िलए िनकल जायगे! हम उसी रात सु तानपु र रवाना हो गए! अगली सु बह हम सु तानपु र पहंच. और कोमल को देख लूँगा. आप एक काम क िजये िक आप कोमल को घर ले आइये . वो वहाँ से जाना नह चाह रही थी. तब शमा जी ने पूछा. बोलती नह ! और जब बोलती है तो ये ही िक 'खा जाउं गी' बस यही कहती रहती है! पूरा प रवार सकते म है और हमारा वहाँ इंतज़ार िकया जा रहा है.े ि पाठी वयं हमको ले ने आये थे. िच लाती है. "आप देिखये गु जी. "अब कैसी है कोमल?" "अभी तो सो रही है. घर लाते व त उसने बहत िवरोध िकया था. एक बार मै भी ज़रा उसको देख लूँ. उसने छू टते ही ये पूछा िक छत पर आये वो २ लोग यहाँ यूँ आये ह? हम सभी घबरा गए ह गु जी" उ ह ने बताया. ले िकन जब उठे गी तो बहत ह ला काटेगी. ि पाठी जी आगे चल और मै. उसके जागते ही मै आपको बु ला लूँगा" ये कह के वो उठे और नीचे खाने के बंध करने के िलए चले गए.गु जी आप इस िवषय म गौर कर. कमरे म बस अकेली घूमती रहती है. जैसे ही उ ह ने कोमल के कमरे क ओर इशारा िकया कोमल ने झट से 3 . पानी से डरती है. "अ छा. वहाँ बैठने का मु क मल इंतजाम िकया गया था! मने ि पाठी से पूछा. मै वहाँ आ जाऊँगा. मेरी िवनती है आपसे" ऐसा कह के वो िफर से आहत हो गए. पांचव िदन ि पाठी जी का फ़ोन आया. "अरे ि पाठी जी! आप घबराते यूँ ह!" मने उनके कंधे पर हाथ फेरते हए ऐसा कहा. "चिलए िफर नीचे चलते है. मु झे मालूम पड़ जाएगा" मने कहा. " या बात है?" "गु जी अभी कोई ५ िमनट पहले कोमल जागी है. या हो सकता है ये ? कोई झपट या लाग-लपे ट तो नह ?" "देखते ह शमा जी. जाते ही हमको चाय वगैरह िपलाई गयी..कोई झपट या लाग-लपे ट है ये कुछ और" मने जवाब िदया. मकान िक छत पर चले गए. कई कमरे ह और २ मंिजली मकान है. जब ले आय तो मु झे सूिचत कर. वो कोमल को घर ले आये थे. हाँ. िचंता न क िजये आप!" मने उनको िह मत बंधाई. "हाँ. जब वो यादा तंग करती है तो उसको पानी िदखाकर ही चु प िकया जाता है" उ ह ने बताया. "हाँ गु जी. उसके बाद हम नहाए-धोये और िफर ि पाठी. तब से तो और भी यादा कोहराम मचा रखा है. शमा जी और मै. मने हाल-चाल पूछे और उ ह ने भी. एक काम करना. उसके बाद हम वहाँ से ि पाठी जी के घर के िलए चल पड़े ! हम कोई ४० िमनट के बाद उनके घर पहंचे. शमा जी उनके पीछे . मु ना का सर फट गया था! जब ि पाठी जी वहाँ उसको ले ने पहंचे तो वो उनको पहचानी नह ! अब जब से वो ि पाठी जी के घर म आई है. आइये " मने उठते हआ कहा.

"यहाँ आया है मु झ से बात करने! चल भाग यहाँ से!" उसने सोचा मै डर जाऊँगा. ले िकन इस से पहले क वो काटती मने अपने उलटे हाथ से उसको एक करारा झापड़ रसीद कर िदया! झापड़ खाते ही उसने एक दम से ताव िदखाया और ल बे-ल बे सांस ले के गु राने लगी! मै उसको उसके बाल से ही पकड़ कर उसके िब तर पर ले आया और एक ध का मार कर उसको वहाँ िबठा िदया! उसक बोलती बंद हो गयी! मने उस से पूछा. मने आवाज़ लगाई. वो हंसी और िच लाई. लाग-लपे ट का मामला है! मने ि पाठी और उनके बेटे को वहाँ से हटाया और खु द दरवाज़े पर चला गया. कमरा २० गु ना १५ तो होगा ही. नह तो तू सोच भी नह सकती मै तेरा या हाल क ँ गा!" मने शमा जी को अपने पास बु लाया और उनसे कहा क वो इसके पास खड़े हो जाएँ. ले िकन उसने दरवाज़ा नह खोला! तब शमा जी. मै खा जाउं गी" "ठीक है खा िलयो जो चाहे . वो बैठे हए मेरे घु टने तक ही आ रही थी. बस ये बोलती रही िक 'उनको पहले िनकालो यहाँ से. तो कोमल ने अपने हाथ म पकड़ा हआ एक लास मु झ पर फक के मारा. "जो मै कहँगा. मै आगे बढ़ा तो देखा क कमरे के आिखरी छोर पर एक अटैच टॉयले ट है. "तेरे को तो मै देख लूंगी" मने जा ये सु ना तो मने शमा जी से कहा. ले िकन वहाँ कोमल नह थी. ले िकन मै िफर उसक तरफ बढ़ा. जैसे ही वहाँ पहंचा. वो मेरे कोहनी ऊपर करते ही मेरी कोहनी से टकराया! कोहनी से टकराते ही वो हंसने लगी और बोली. जा यहाँ से" वो िफर िच लाई. उसका जवाब एक दम सही और ज दी िदयो. "कोमल?" "चले जाओ यहाँ से" वो िच लाई. उसको उठाओ और इसको जांघ तोड़ दो मार मार के!" 4 . ऐसा भाँजो क इसको अपना आगा-पीछा साफ़ िदखाई दे जाए! वो वहाँ जो लोहे का स बल रखा है. िफर या करे गी तू? मने अबिक गु से म कहा. दरवाज़ा खु ल गया! मने ि पाठी और पवन को वही ँ ठहरने को कहा और शमा जी के साथ अ दर चला गया! अ दर कोमल कह नह िदखी. अचानक वो वहाँ से झटका खा के टॉयले ट क तरफ बढ़ी! मने उसको उसके बाल से पकड़ िलया! उसने पलट के मेरे हाथ पर काटना चाह. ज़रा इसको देखन तो?" उ ह ने उसके सर पे एक मारा हाथ दबा के! उसका सर िब तर पर लगा! वो संभली और िफर शमा जी से बोली " साले तेरे को तो मै देख लूंगी आज ही!" मने िफर से शमा जीको इशारा िकया और कहा. अगर अब तूने दरवाज़ा नह खोला तो मै ये दरवाज़ा तु डवा ड गा. "पहले दरवाज़ा तो खोल?" मने कहा. जैसे जैसे मै उसक तरफ बढ़ता वो नीचे अपना शरीर झु काते जाती ले िकन अपनी नज़र मु झ पर ही िटकाये रखती! िफर वो नीचे बैठ गयी! मै उसके सामने चला गया. इसके चु प होते ही इसको इसको बु लवाने के िलए झापड़ मारने के िलए तैयार रह! कोमल ने ये सु नके घूर कर शमा जी को देखा और बोली. "खा जाउं गी. मै उस तरफ बढ़ा. "तू पहले दरवाज़ा खोल. मेरा दम घु ट रहा है' अब मु झे यक न हो गया िक ये झपट का मामला नह . "शमा जी. पहले तू जा यहाँ से. "नह . िनशाना सटीक था. "इसको इसके बेहोश होने तक ऐसा भाँजो. पवन ने िमलके दरवाजे क अंद नी सांकल तोड़ डाली. अब तू दरवाज़ा खोल" मने इस बार और तेज़ी से बोला.दरवाज़ा अ दर से बंद कर िदया! ि पाही और उनके लड़के ने काफ आवाज लगाय ले िकन उसने दरवाज़ा नह खोला.

मने कोमल को देखा. अब ज़रा यान से सु न. मै खे वड़ रानी हँ. खे वडी नाम है मेरा!" उसने अपने दोन हाथ उठा कर कहा! "अ छा खे वडी रानी! अब ठीक है?" मने कहा. तेरा मान रखा ले िकन तू बाज नह आई! अब तेरा इलाज करना पड़े गा शु !" मै अब खड़ा हो गया था और उसके पास पहंचा. "शमा जी. "अ छा. चु ड़ल ै . िपशािचनी कर सकती है. उठाओ स बल. "देख. १२ कोस तक मेरा राज है!" उसने कहा. तू जा के अपना काम कर. "तू खे वडी नह जानता?? हा! हा! हा!" उसने हंस के कहा. मने तु झको बहत इ ज़त क . " तू जानता है मु झे? नह जानता ना????" "तो यही तो तेरे से पूछ रहे ह तू है कौन??" मने कहा. "अगर तू बता देगी तो तेरी या नाक कट जाये गी? ह री? तू ही जो बता दे ?" मने कहा. "आपसी? मतलब? िकसका आपसी? इसके आदमी से आपसी या इस से आपसी?" मने पूछा. ये हमारा आपसी मामला है" उसने कहा. "२ महीन से इसके साथ हँ. "इसके बाप से पूछ. "मै खे वडी हँ. ये केवल एक ही है जो ऐसा बदलाव करने म स म है! ये ह. "िकसी से भी आपसी. "हाँ! अब ठीक है! अब पूछ या पूछेगा तू?" उसने अपने हाथ घु टने पर रख कर कहा! "तू कब से इसके साथ है?" मने पूछा. मसानी-मैया! "ओह हो! तो तू मसानी-मै या है!!! खे वड़ गाँव के िशवान क मसानी-मैया!" मने कहा! 5 .शमा जी उठे और वो स बल उठा लाये ! अब वो िब तर पर पीछे क तरफ हई और बोली. क खे वड़ रानी कौन होती है? जा पूछ ज़रा?" उसने अबिक ऐसा गु से म कहा. "कौन खे वडी?" मने पूछा. लगाओ इस खे वडी के सर पर!" मने कहा तब शमा जी ने लोहे का स बल उठाया और कोमल के चे हरे क तरफ वार करने के िलए आगे बढे ! कोमल डर गयी! मने कहा. ये खे वडी होता या है??" ये भी बता दे ज़रा. अचानक ही उसके बदन पर सफ़ेद सफ़ेद बड़े बड़े छाले उभर गए! मु झे थोड़ी हैरत हई! ये न तो कोई ेत. "कोमल. पहले इसका तो इलाज कर ले !" उसने कहा. तेरा या मतलब?" उसने आँख िदखाय ! "सु न खे वड़ रानी. "अ छा एक बात और बता. अब मई पूछूं कुछ?" "मेरा नाम कोमल नह है. मेरी सेवा करे गी अब ये !" उसने जोर से कहा. महा ेत.

आने वाला है तेरी हड् िडयां चबाने !" उसने गु से से कहा. " ओ मसानी-मै या! कोई और कसर भी बाक है तो कर ले !" "ठहर जा. अब मसानी-मै या ने रोना शु िकया! ऐसे जैसे क कोई प रवार मृ यु होने पर िवलाप करता है! 6 . मं ाघात होते ही. ले िकन िव ा का ढे र लग गया! तब मने एक और मं से उसका ये म भी हटा िदया! मसानी-मै या शांत हो गयी! उसने अपना सर ढक िलया! जोर जोर से आगे-पीछे झूमने लगी! म कहा. उसने अपनी आँख खोल उतनी िजतनी खोल सकती थी! िफर मु ंह से 'अ कर अ कर' क आवाज़ िनकाली! एक झटके से अपनी आँख बंद िकन और मु ंह खोल िदया. अभी ठहर जा! म लाह-ठाकुर को बु लाया है. "अ रया आजा! ह रया आजा! डोम डोम आजा! बाजीगर आया!" उसने ये कह कह के १० िमनट तक िब तर पर खड़े होकर गाया! १० िमनट के बाद वो शांत हो गयी! मेरी तरफ घूर के देखा! मै भी उसको देखता रहा! मु झे अपने बदन म आग जलती महसूस हई. बु ला ले! उसको भी बु ला ले!" मने कहा. इतना िक मु झे उसका काग भी िदखाई दे रहा था! अचानक उसके मु ंह म मु झे कुछ िहलता िदखाई िदया! एक नीली सी व तु! वो बाहर आई! ये एक बड़ा काला सांप था! उसने बाहर आते ही अपना फन चौड़ा िकया! और फुफकार मारी! फन इंतना बड़ा िक कोमल का चे हरा िदखना बंद हो गया! शमा जी भी थोडा पीछे हट गए! ये मसानी-मै या मेरे साथ खे लने के इरादे से खे ल िदखा रही थी! मने शमा जी को वहाँ से हटाया और मने ीर-मं का अनु स धान िकया! उसको त पर करके मने मसानी-मैया के ऊपर छोड़ िदया! 'भ क' क ज़ोरदार आवाज़ हई! कोमल नीचे िगरी और सांप धु आं हो गया! ले िकन िफर से कोमल उठी और मु झे घूर घूर के देखा! उसने छत को देखा और कोमल के बदन को आढ़ा-ितरछा िकया और िफर एकदम से धनु ष आकार म कर िलया! और िब तर म कलाबािजयां खाने लगी! कोमल का सारा शरीर नीला पड़ गया! उसके बदन पर कानखजूरे और िब छू रगने लगे! वो छटपटाने लगी! सारे कानखजूरे और िब छू िब तर से िनकल करा आस पास डोलने लगे! मने शमा जी को फ़ौरन एक कुस के ऊपर आने का इशारा िकया. सारे कानखजूरे और िब छू धु ंआ हो गए! अब तो मसानी-मैया को काटो तो खून नह !उसने कोमल को उसके पंज पर उठाया और खून क उि टयां लगवा द ! सारे िब तर पर खून ही खून ! मने तभी मं पढ़ा और कोमल पर मारा. पसीने छू टने लगे! मेरे हाथ म झु नझु नाहट होने लगी! मु झे लगा क जैसे मु झे िकसी सांप ने काट िलया हो! अ यंत िवषैले भु जंग ने! मने तब होम-मं का जाप िकया! और उसके अपने हाथ पर फूं क कर अपने सारे शरीर पर मल िदया! िवष समा हो गया! अब मने कोमल को देखा. वो ऊपर आये . 'कड़क' 'कड़क' क ज़ोरदार आवाज आय . उसका खून बंद हआ. मने तब भंजन-मं का योग िकया! उसको फूँ क कर हवा म उड़ा िदया."हाँ! अब पहचान गया न मु झे!" वो हंसी और हँसते-हँसते िब तर म ले ट गयी! "अब ज़रा खड़ी हो! इसका इलाज करता हँ म!" मने कहा! वो खड़ी हई और अपनी साड़ी घु टन से ऊपर कर ली और उसके पे टीकोट को ऊपर ख च के उसके अ दर सर छुपा के बैठ गयी और आगे-पीछे िहलने लगी! मने अपने गले म धारण एक माला को अपने गले से उतारा और अभी-मंि त िकया! और ३ बार उसको कोमल के सर पर छुआ िदया! उसने फ़ौरन ही पे टीकोट नीचे िकया और उसके सारे छाले ठीक हो गए! ये देख के उसको हैरत हई! वो खड़ी हई और नाच करने लगी! और िच लाई. "अ छा! म लाह-ठाकुर!! हाँ.

और मु झे दावत देने क बात कही थी. "जब इसके औलाद नह थी. अभी वो अपनी मौसी के घर पर है! ह न!!" अब मेरे स का पारा छोट गया! मै खड़ा हआ और बोला.े ले िकन मु झे इसके लड़के का कले जा खाना है. सहारनपु र के 'सूखे' शमशान म जाके क ल दूंगा! भूखे मरोगे वहाँ तु म दोन !" मने हंस के कहा! "आहा आहा! आज आया २०० साल म बछे ड़ा कोई!" उसने हंस के कहा! "बकवास छोड़ ओये म लाह-ठाकुर!" मने खड़े हो कर कहा! तब मने शमा जी को कहा. ले िकन औलाद होने के २ साल बाद तक भी इसको अपनी बात यात नह आई!" उसने कहा. और सु न अगर ये अमावस को नह आई तो तू बीच म नह आएगा! इस से मै अपना िहसाब अपने आप चु कता कर लूंगी!" उसने गु से 7 . " अबे ओ म लाह-ठाकुर? तेरी माँ क साले देख. बहत हो गया. संभाल इसको!" ये कह के मने अपने हाथ के अंगठू े को छे दा और र िनकाल. "ओ शमा! तेरे बेटे क वो हालत क ँ गा क तू उसके टु कड़े भी नह िगन पाये गा. मै चले जाउं गी! इस से अ छी संतान दूँगी. आप ज़रा इस म लाह-ठाकुर क सेवा कर दीिजये !" शमा जी आगे बढे तो वो बोला. तब इसने मु झको नहलाने क . "राजा साहब आये !" "आइये म लाह-ठाकुर साहब! आइये ज़रा मसानी-मै या को समझाइये . मै इस अमावस को वह रहंगी. ऐसी तड़पी िक जैसे उसके अि त व पर बन आई हो! मने अपना खंजर इस मं से अिभमंि त िकया और बढ़ा कोमल क तरफ! कोमल उठी और िब तर के कोने पर खड़ी हो गयी! मने कहा. "ओ हरामजादी मसानी-मैया? मरवाने के ठौर पे लायी है या?" वो ये कह के वहाँ से भागा! अब मसानी-मै या को पता लग िक आज तो फँस गयी वो! उसने कहा. ये मेरा वचन है!" "सु न! अब तू जाये गी! ज़ र जाये गी! ले िकन खाएगी कुछ नह ! कुछ नह !" मै िच लाया और एक महा-मं जागृत िकया! मने षोडशी-ि पु र-सु ंदरी-मं का महाजाप िकया! मेरे इस जाप के समय मसानी-मै या ऐसी तड़पी . देख तेरा बाप आया है. नह तो मै आज इस मसानी-मै या को तेरे साथ. कोमल का शरीर पीला पड़ गया! मै जान गया. िनकालते ही मने अ ी नाम क एक अ ु त शािकनी कट क ! म लाह-ठाकुर का मु ंह खु ला का खु ला रह गया! बोला. "सु न मै मान गयी तु झ. " ओ मसानी-मै या! चल तेरे ससु राल जाने का समय आ गया!" "नह नह ! ऐसा मत कर पु ! ऐसा मत कर!!" वो िच लाई! "सु न ज़रा अब तू यहाँ से दफा हो.थोड़ी देर बाद. मै वचन देता हँ!" मने कहा. वहां ले के आना इसको. "मै गाँव के बाहर चामड के मंिदर के गूलर के पे ड़ पर रहती हँ. मु झे वो िदला दे. "अगर ऐसा है तो तेरे को नहला देगी ये और तेरी दावत भी कर देगी. "शमा जी. म लाह-ठाकुर क आमद है ये ! ये म लाह-ठाकुर एक तरीके का मसान होता है! काफ ताक़तवर और ू र! कोमल के शरीर म से म लाह-ठाकुर ने कहा. "इसक कौन सी गलती? साफ़ साफ़ बोल??" मने ये कह के अपना खंजर नीचे िकया. मने मान िलया. अब तेरा काम तमाम!" मने अपने खंजर को उठा कर उसे ऐसे िदखाया क जैसे मै उसका क़ ल कर दूंगा! "इसक गलती क सजा मु झे यू?ँ " वो िच लाई.

वो दौड़ के अ दर आये ! मने शमा जी को िलया और बाहर आ गया. मै एक बार िकसी के कुआँ-पूजन पर गयी थी वहाँ . तभी मै इस से बात क ँ गा!" मने कहा. खड़ी हई और नाची! िफर कोमल धडाम से नीचे िगरी! मसानी-मैया चली गयी थी! मने दौड़ के कोमल को संभाला. हमको इसम आधा घंटा लग गया. मै फ़ौरन से अपने कपडे ले के नहाने चल गया और मेरे बाद शमा जी." ि पाठी जी. रात को िद ली के िलए रवाना हो गए! एक ह ते बाद ि पाठी जी अपने प रवार से साथ मु झसे िमलने आये! सब कुछ ठीक हो चु का था! 8 . जो भूल जाता है. अब मु झे नहाने जाना था. वो उनको दे दो! देखो. परस अमावस है. इस संसार म कई ऐसी शि यां हमारे आस पास मौजूद रहती ह. ि पाठी जी ने उनके सकुशल होने क बात कही! और िफर अमावस क राि क कोमल और उसके प रवार को ले कर मै चामड के मंिदर पहंचा. उसने अपने पित और बेटे के बारे म पूछा. अपनी प नी और बेटे को आवाज़ लगायी. देखो कोमल. उसके बाद मै िफर से कोमल के पास पहंचा. वो दौड़ के अ दर आये ! मने कहा. कह के मु कर जाता है! ले िकन ये शि यां कभी नह !" मने उसको बताया! मेरा ऐसा जवाब सु न कर वो रो पड़ी. अब वो थोडा संयत हो चु क थी. कोमल ने रो कर उनसे मा मांगी! वो उसको उसी िदन शाम को िवदा करके ले गए! एक प रवार िफर बस गया था! और उसी रात को मै और शमा जी. आपक धमप नी और पवन आकर इस से िमल लो! इसक िह मत बंधाओ. अपनी संतान होने से पहले ??" "हाँ िदया था. मै वही ँ एक कुस पर बैठा और बोला. "उस भूल क सजा सभी को िमली. "अ रया जा! ह रया जा! रानी जा!!!" उसने ऐसा कहा. या तो उनसे मांगो ही मत. मु झे इस से बात करनी है अभी!" ि पाठी ने मेरी बात सु नी. तब मने मन ही मन ऐसा कहा था. अपनी माँ को ले कर वहाँ आ गए! कोमल ठीक हो चु क थी. मै इसको ले आऊंगा! अब तू दफा हो यहाँ से. कोमल ने अपने आपको एक अप रिचत यि के हाथ म देखा तो वो डर गयी! मने तब आवाज़ देकर ि पाठी जी को बु लाया. कोमल ठीक हो गयी है! आप.से कहा! "ठीक है. अपने गाँव के बाहर चामड के मंिदर पर तु मने कभी कोई वचन िदया था. ये केवल इंसान है. और अगर मांगो तो जो कहा है. " कोमल. ि पाठी जी के रोकने के बाद भी. ले िकन मै बाद म भूल गयी" उसने कहा. वहाँ उनक िपंडी को कोमल ने क चे दूध से नहलाया और उनको भोग िदया! ंग ृ ार िकया! उसके बाद उस गूलर के पे ड़ क जड़ को नहलाया! भोग रखा और मा मांगी! कोमल ने अपना वचन पूरा िकया! अगले िदन कोमल के पित अपनी संतान को ले कर.

मने थोड़ी देर सोचा और िफर मै बोला. ले िकन दो िदन बीते वहां क पूव दीवार भी धसक गयी! अब वो डर गए ह! उ ह ने ये सब मेरे एक प रिचत को बताया और उ ह ने िफर मेरे से बात क . "संजय जी. तांि क भी लाये ले िकन कुछ न हआ! इसके बाद उ ह ने उस जगह को फू स क ढे रय से ढक कर. काफ िदन से ह हमारे पास" उ ह ने बताया. ले िकन अब वहाँ कोई नह जा रहा. आकाश क ओर उठता धु आ. एक िवशेष थान पर. ये और भी एक अलग िविच बात थी! िफर मने पूछा. "जी नह . िद कत-परे शानी नह थी" उ ह ने बताया. "वहाँ कह और. वो कुछ ओझे गु िनये. मै वो जगह वयं देखना चाहँगा" 1 . वे लोग वहाँ एक एक थानीय पंिडत जी को ले आये . कोई सम या. साल भर पहले वहाँ हमारे ढोर-डंगर चारा चार िलया करते थे. उनक सम या बड़ी अजीब सी थी.ं जैसे क य आिद म से उठता है.खलन िनरं तर होता रहा. मने संजय से पूछा. लगातार िम ी िखसके जा रही थी. इसीिलए मने संजय को अपने पास बु लाया था. "हाँ जी. "ये खे त कब से आपके पास ह?" "जी ये तो दादालाई ह. बकरी वगैरह भी नह . ये थान पि मी िसरे पर था. ये तो अभी एक साल से हो रही है!" उ ह ने जवाब िदया. २ बरगद के ह. "तो ऐसी कोई घटना कभी उनके साथ भी हई थी? जो आपके सं ान म हो?" मने पूछा.वष २००९ बादशाहपु र गु डगाँव क एक घटना ये जून के आस पास क बात है. "साल भर पहले सब कुछ ठीक ठाक था वहाँ? कोई सम या नह थी?" मने पूछा. "कोई पे ड़ वगैरह ह वहाँ?" "नह जी वहाँ तो नह ह. थोडा कोई ५०-६० फलाग पर ह जी ५ पे ड़. "और कोई ऐसी िवशेष बात जो आप बताना चाहते ह ?" मने पूछा. जब वहाँ ३ फ ट से अिधक िखसकाव हो गया तो उ ह ने वहाँ कई े टर. और बाक जामु न के" उ ह ने बताया. जो उ ह ने बतायी. ले िकन कोई ६ िदन के बाद िफर से एक गड् ढा हो गया था! वो अपने सेलफोन म उस जगह क एक-दो फोटो भी ख च के लाये थे. मने गौर से देखा तो मु झे वहाँ कुछ भी अजीब सा नह िदखाई िदया! हाँ एक बात और. "हाँ जी. उनके अनु सार उनके खे त म से एक खे त म. नाम था संजय. कह भी नह " उ ह ने बताया. एक बात है िवशेष. ये क एक बार उनक पु ी. उस से पहले मने ऐसा देखा नह था. पर तु भूिम. सब कुछ ठीक था. मेरे पास मेरे िकसी प रिचत के भे जे हए एक स जन आये . ु ित अपनी एक सहे ली के साथ जब िव ालय से वापस आ रही थी तो उ ह ने वहाँ धु आं देखा था. और वहाँ गंध भी वैसी हवन वाली थी! ले िकन जब वो उसके पास गय तो वहाँ कुछ भी नह था! दोन डर के मारे भागी वहाँ से और सब-कुछ अपने घर म बता िदया! घरवाल को भी हैरत हई! ले िकन िदन ितिदन वहाँ भूिम का िखसकना ज़ारी रहा! आिखर हारकर. "कभी नह हई गु जी.ाली िम ी क भरवा िदन. ई ंट से चहारदीवारी बनवा दी. पता नह या बात है?" उ ह ने बताया. वो वही ँ से वािपस मु ड जाते ह. िकसी और के खे त म ऐसा हआ है या?" मने िकया. उ ह ने वहाँ एक हवन िकया.

वहाँ िम ी धसक गयी थी और एक कुँए के समान वहाँ गड् ढा हआ पड़ा था! ये कुआँ सा काफ चौड़ा और डरावना लग रहा था. यहाँ पर एक काय म आयोिजत िकया था. "वहाँ लोग ने 'गंदगी' भी क होगी?" मने पूछा. ले िकन वो नह बोल पाया! इसका मतलब था वहाँ कोई भयानक और आ लावी शि या है! मने खबीस को कोई नु सान होने से पहले. इनक िनं ा भंग हो गयी!"""" अब मु झे कहानी समझ म आ गयी! मने उस थान को नम कार िकया और शि को वािपस िकया! मै वहां से हटा और संजय के पास पहंचा. मने तब शमा जी से कहा. 2 . भौगौिलक प से भी ये असंभव लग रहा था! तब मने वहाँ एक खबीस को हािज़र िकया."ज़ र गु जी. अब से ११व माह को वो सम त भू-मंडल का अवलोकन करगे. वो भी मेरे साथ आगे बढे . " या आपने वष भर पहले . गाँव का पता आिद नोट कर िलया! संजय उठे और हमसे िवदा ली! हमारा कल के िलए काय म िनशा रत हो गया! अगले िदन मै और शमा जी बादशाहपु र पहँच गए. तब मने एक शि हई! मेरे का उ र ऐसे िमला. "शमा जी. िजनक ये भूिम है. को साथ िलया और खे त क तरफ िनकल पड़े . और सारी गंदगी यहाँ एक गड् ढा करके दबा दी थी. इन लोग ने . खे त म स जी लगी थी. का आ ान िकया! शि कट """"नीचे करीब ३० फ ट. ी महामंगला-मंिदर है. आप इनका पता नोट कर लीिजये . उनका नाम देव ी है. अब िकस िकस को मना िकया जा सकता है" वो बोले . "हाँ जी. शमा जी को वही ँ खड़े रहने को कहा. िकया था. दीप. पता. खबीस ने उस जगह च कर लागाये और दौड़ के मेरे पास आगया ले िकन बोला कुछ नह ! मने उस से पूछा. "और सारी गंदगी का या िकया? यह दबा दी?" मने ये पूछा तो उनके चे हरे का रं ग बदल गया! "हाँ जी. थोड़ी देर मने उनको अपने उस खे त पर जाने के िलए कहा. मने उनसे पूछा. भराव वाली िम ी ऊपर ही पड़ी थी और उसके ऊपर दीवार क ई ंट िगरी हई थ ! मै पीछे हटा. संजय वही ँ अपने ये पु के साथ हमको िमल गए! नम कार इ यािद से फा रग होते ही हम उनके गाँव क ओर रवाना हो गए. ले िकन कुछ समझ नह आया. मने शमा जी को बु लाया. मानव-अविश से रसाव हआ और मंिदर के गभ-गृह म पहंचा . यही पास म ही दबा दी थी" उ ह ने कहा.थान है. वहाँ एक िस -पु ष का समािध. मने देखा. उसमे अविश पदाथ भी थे. इनका नंबर और कोई थानीय-िनशानी भी. कोई तक सफल नह जान पड़ा. मै थोडा और करीब गया. चार तरफ देखा. खड़ा हआ. जब भी आप कह" संजय ने कहा. यहाँ कोई काय म िकया था?" "हाँ जी. उनक गाडी आगे थी और हमारी पीछे ! कोई आधे घंटे के बाद हम गाँव म उनके घर पहँच गए! दूध से वागत हआ! उ ह ने घर के ये क सद य से िमलवाया और हमारा प रचय भी िदया. हम कल वहाँ पहँच जायगे िदन म कोई ११ बजे" शमा जी ने एक कागज़ पर उनका नाम. उ ह ने अपने बड़े लड़के. उन िस पु ष क अब िनं ा भंग हई है. उसको उठा िलया! और वहाँ से हट गया! मै वहाँ से थोडा दूर जाके . चु कंदर के पौध ने जैसे ज़मीन पर कालीन िबछा रखा था! हरे धिनये क सु गंध मनमोहक थी! जब हम आगे बढे तो मु झे दूर से ही वो चारदीवारी िदखाई दे गयी! एक तरफ क दीवार धसक गयी थी! ये े कोई २० गु णा ३० का होगा. कोई १००० वष पु राना. िस थान क या ा करगे. अपने सबसे बड़े लड़के के याह के बाद यहाँ पाट दी थी" उ ह ने बताया. उसको अपना बताया.

उनके होश उड़ गए! "अब या हो गु जी? बाबा गु से म आ गए ह.. "हाँ ये एक कारण अव य ही है" मने सहमित जताई....थल. जो मु झे उस िदन यािन अमावस को चािहए थी! और िफर ६ िदन के बाद अमावस आ गयी! मने शमा जी के साथ वहाँ ९ बजे तक पहँच गया था. जामु न के एक पे ड़ से एक बड़ी शाख 'कडाक' क आवाज़ के साथ टू टी और वहाँ िगर पड़ी! हमसे कोई १० फ ट दूर ! मामला गंभीर हो गया था." मने जैसे ही ऐसा कहा..... मने सारी साम ी जाँची. इस बार उ ह ने मु झे ोधवश देखा और बोले.. मने और सभी को वहाँ से हटाया और शमा जी के साथ वहाँ पहँच गया! मै तामिसक और वो साि वक! बात िबगड़ी तो मेरा नु सान होना तय था! हर कदम फूं क-फूं क के रखना था! मने उनका यान िकया! वयं को जागृत कर म यान म बैठ गया! तभी मने यानिचत अव था म एक वयोवृ साधू को देखा. बस यह पर मेरा और एक िस -पु ष का सामना हो गया था.."यही इसक वजह है.. सभी कुछ सही था! मने अपने आप को और शमा जी को र ा-म से बाँधा और गले म अपनी िस मालाएं धारण क .. मै वहाँ खड़ा हआ. बल-साि वक! इनसे झगड़ना अपने आप म एक घमंड करने के समान है.. ये इ ही साधू बाबा क समािध है! वो उस समािध को लांघ नह पायी थी! मेरे दो यास िवफल हो गए थे! अब मु झे उनको पीिड़त करना ही पड़े गा ऐसा मेरे मन म ख़याल आया! मै वहाँ से उठ गया और वािपस अपने थान पर आ गया! मने संजय को कह िदया था क मै अमावस वाली राि को वहाँ आऊंगा! मने संजय को साड़ी 'साम ी' िलखवा दी थी. वहाँ बीच म एक छोटा सा मंिदर है और उस मंिदर के सम एक समािध.. वरन उनका आशीवाद ा करना चाहता था! और इसके िलए मु झे सशि करण क आव यकता थी! मने तीन िदन तक वयं को सश बनाया और पूजन के प ात वहाँ के िलए चल पड़ा! मै और शमा जी ठीक और सीधे वही ँ पहंचे.. मने एक शि का आ ान िकया! शि कट हई! मने उस शि से कहा क वो िकसी भी कार से उन साधू बाबा को बाहर िनकालो! मेरी शि ने उस थान का मण िकया और अ दर वेश कर गयी! थोड़ी देर म वािपस आ गयी! उसको अ दर वेश के िलए एक ऐसी बंिदश से िभड़ना पड़ा था िजसको वो काट नह पायी थी! मने उसको वािपस िकया और दूसरी शि को कट िकया और उसको भे ज िदया! वो अ दर गयी और काफ देर बाद वहाँ से वािपस आई! उसने बताया क अ दर ३ क ह एक पूव-मु खी. एक दि ण-मु खी और एक पि म मु खी.. मु झे उनके स मान म वो थान छोड़ना उिचत समझा था और इसीिलए मै उनका आशीवाद ा करके वहाँ से वािपस आ गया था! ये िस -पु ष वयं-िस हआ करते ह.. वो शाख इसीिलए टू टी होगी!" उ ह ने घबरा के कहा. हम वहाँ से िनकले और उनके घर पर आ गए! उ ह ने खाना बनवा िलया था सो हमने खाना खाया! उसके बाद मने जस क तस सारी बात उनको बता द . ऐसा मेरे साथ एक बार पहले भी हआ था.... मै इनसे भी िभड़ना नह चाहता था.. " यहाँ आने क सोचना भी मत!" उ ह ने अपना --दंड िदखा कर ऐसा कहा था! आशय प था! उनको मेरा यहाँ आना वीकाय नह था! मै वहां से उठा और एक ऐसी जगह पर जा बैठा जहां मै ि या करने हे तु िकसी को िदखाई न दू!ँ ये कुछ बेरी के पे ड़ का झु रमु ट सा था.. अब मु झे कुछ न कुछ अव य ही इसका हल िनकालना था.. मै उनको आ ासन देकर वािपस आ गया! शमा जी से सलाह ली और िफर मने आगे क रण-नीित िनधा रत क . शमा जी को भी पहनाय और सारी साम ी ले के मै उस थान पर पहँच गया! संजय को मने कह िदया था िक कोई भी वहाँ मेरे आने तक वहाँ ना आये ! नह तो अिन हो जाएगा! संजय ने डर के हाँ क ! 3 . झाँसी से थोडा आगे एक जगह पड़ती है ब आ सागर. वो अपने झ पड़े के बाहर अपने कमंडल से पानी का िछडकाव कर रहे थे! उनक उ उनके सफ़ेद ल बे बाल और ल बी पे ट तक क दाढ़ी से मालूम पड़ती थी! कद-काठी भी सामा य से अिधक! बस! इसके बाद मेरा यान टू ट गया! मै िफर से यान अव था म बैठा.

मं से ाण-सृजन िकया और उन साँप म से एक म घु सेड िदया! सांप ने पलटी खायी. गु ड और ७ िमच थे! मने उनको वािपस रखा और पोटली को बाँध िदया! सहसा ही! गड् ढे म से एक य कट हआ! भयानक य ! एक हाथ म एक तलवार और दूसरे हाथ म एक खडग! ये ाि तवमन य था! मने अपनी अलख म. वो जगह धसकने वाली है! अब मने ि या करनी आर भ क ! पहले ज़मीन का िहलना बंद िकया! िफर वो भयानक ं दन! मने मांस के ३ टु कड़े िलए! उनको अपने ि शूल के ि -फल पर लगाया और अलख म झ क िदया और ेज तेज मं ो चारण आर भ िकया! मने अपने चाक़ू से अपना हाथ काटा और र क बूंद से गड् ढे तक एक िनशान बना िदया! गड् ढे म से धु आं िनकलना आर भ हआ! और हवन क गंध आनी शु हई! मने शराब क कुछ बूँद अलख म डाली! बहत तेज शोर हआ! गड् ढे म से काश पु ंज दैदी यमान हआ! गड् ढे म से एक थाल उ प न हआ और हमारी ओर आया! इस थाल म सोना-चांदी-हीरे -जवाहरात आिद आिद थे! वो थाल हमारे व . लगातार ३ साधनाओं के प ात ये कट होती है! साधना का पहला चरण ५३१ िदन का है! िस होने के प ात ये काम-िसि और अधािगनी क तरह जीवन-पयत सेवा करने वाली होती है! इसके साथ भोग करने से साधक को. मु कुरा रही थी! अथात मै 4 . मने ि शूल िनकाला और िफर घु सेड िदया! सांप दूसरे वार के बाद गायब हो गए! मने अपना ि शूल देखा. इसीिलए तं -अिभम ण करता जा रहा था! मने गड् ढे को देखा! उसमे से ताज़े नीले फू ल िनकले और गड् ढे के आसपास फ़ै ल गए! मने उनमे से एक फू ल उठाया! फू ल बफ से भी ठं डा! मने उस फू ल को अपनी अलख म डाला. और मांस के साथ एक काले धागे से बाँधा! उस पर शराब से अिभम ण िकया और फक िदया गड् ढे के अ दर! सारे िगरे हए फू ल गायब हो गए! मेरे फके हए फू ल ने एक बंिदश काट दी थी! अब मने अपनी एक शि को कट िकया! और इंिगत कर उसको गड् ढे के अ दर भे ज िदया! अ हास करती हई वो अ दर गयी और अ दर से एक पोटली उठा लायी! मने उसको वािपस िकया! मने वो पोटली खोली तो उसके अ दर २ रोिटयां. यश. क ित और यश दान करती है! ये क या जो कट हई थी. अपना आसन लगाया.थल तक आया! ता पय प था! िक हम वो रख ल और वहाँ से चले जाएँ! मने महा-अमोघ-मं से उस पर िमटटी पढ़ कर फक . अलख उठायी और अलख भोग िदया! जोर क हवा चली! भयानक ं दन हआ! ऐसा लगा िक हम जहां बैठे ह. धन. मेरा मं ो चारण घोर होता गया! मने ि शूल उठाया. वो गायब हो गया! हमने वो पे शकश ठु करा दी थी! मने िफर से अलख म मांस के टु कड़े डाल कर एक हड् डी पर अिभम ण िकया और उस हड् डी को गड् ढे म फक िदया! हड् डी बीच रा ते म ही सु लग उठी और जल के नीचे िगरी! मु झे अब िकसी भी ण कुछ न कुछ होने क आशंका होने लगी! मने िफर से अिभम ण िकया और अपनी आँख गड् ढे पर ही िटकाये रख ! वहाँ से ५ भयानक िवषधर िनकले ! बेहद भयानक! गले म सोने के आभूषण पहने ! उ ह ने मेरे और शमा जी के च कर लगाने शु िकये! ये क च कर म उनका और हमारे बीच का दायरा छोटा होने लगता था! अब जब वे इतना पास आगये िक हाथ भर क दूरी पर ही रह गए. बाहर िनकाला. अिभम ण और अिधक तेज कर िदया! तभी गड् ढे के अ दर से एक सु दर नव-यौवना गांधव कट हई! आभूषण से यु ! सु गंधी-पूण! ये कोमला ी गा धव क या थी! तांि क साधक इसक साधना करते ह. न तो र था और नह कोई और िनशान! अब मने िफर से एक हड् डी पर अिभम ण िकया और उसको िफर से गड् ढे म फका! इस बार हड् डी नीचे चली गयी! पर तु अगले ही ण वो बाहर आई और मेरी अलख म िगरी! ये इन िस -पु ष का साम य था! मै उनको पीिड़त करके सा ा कार करना चाहता था.मै उस गड् ढे के पास आया. अपनी एक लट तोड़ी और र म डु बोकर भ म होने के िलए छोड़ दी! एक यि णी का आ ान िकया! एक महा-यि णी कट हई! उसके एक हाथ म कटा हआ भसे का सर और दूसरे हाथ म इंसानी आत! वो हवे म कड़ी थी! अलख के ठीक ऊपर! ाि तवमन पीछे हटा! और वािपस जाके गड् ढे म घु स गया! मने अपनी महायि णी को लोप िकया और अगले ितघात क ती ा करते हए.

...... आप ऐसी सु दरता का िवक प इस सम त धरा पर नह ढू ं ढ सकते! अतु लनीय सु दरता क धिन होती है ये! मने तब अपनी अलख म र के छ टे डाले और वहाँ क भ म क एक चु टक अपने मु ंह म रखी और मं ो चारण िकया! एक अ ितम सु ंदरी कट हई! ये वा वी-यि णी क या थी! काले व म िलपटी.काश उ प न हआ! यम-सु ंदरी कट हई! कामातु री से भी अिधक मादक! न न. मधु मि खयाँ... जैसा पहले कभी न सु ना हो! िफर ये गु ंजन बढ़ता गया! 'भ न' क आवाज़ बढती गयी! अ दर से हज़ार भँवरे ....वाह रौ हो गया! मेरी अलख क लौ भटकने लगी! अब उन महा-िस पु ष क आमद होने वाली थी! ये मै समझ गया! कुछ ण प ात गड् ढे म से ४ कलश िनकले ! कलश उलटे हए! उनमे से उ म सु गंध वाले नीले फू ल नीचे िगरे ! और तभी.. सम त आभूषण-यु ..... आिद हमारी और झपटे! मने अपना ि शूल उठाया और ज़मीन थूका! उनके और अपने बीच एक रे खा ख च दी! वो सब इस रे खा से टकराते और िगरते जाते! वहाँ ढे र लग गया उनका! मने लु िपक-मं का योग िकया और ि शूल उनक ओर करके इंिगत कर िदया! सभी गड् ढे म वािपस धसक गए! थोड़ी देर शाि त रही! मने एक िगलास मिदरापान िकया और खड़ा हो गया! चार िदशाएँ क िलत कर . मंद-मंद मु कुराती थी! और णय-िनवेदन उसक देह के आव-भाव से फू ट रहा था! मने अपना ि शूल उठाया और भूिम पर उसके बड़े फाल का पश िकया! ेत.गड् ढे के म य से एक बड़ा.... उस गड् ढे म से एक अजीब गु ंजन हआ! एक अजीब सा गु ंजन. बर..यिद चाहँ तो ये मु झे ा हो सकती है! सच कहता हँ. हाथ म 5 ा धारण िकये ! गले म ... ओंस क कोमलता जैसा बदन और धवल-चांदनी जैसा मु ख! मने उसका आिलंगन िकया! ये देख कोमला ी गा धव क या लोप हो गयी! मने अपनी यि णी को भी वािपस भे ज िदया! दूसरी पे शकश भी मने ठु करा दी! तभी. काफ बड़ा! वण-ि शूल कट हआ! उसक चमक से मेरी और शमा जी क आँख चु ंिधया गय ! समय जैसे थम गया हो! कृ ित क जैसे हर व तु वही ँ देख रही हो! ेत-धू गड् ढे से िनकल रहा था! हवन-सु गंध से वातावरण सु गि धत हो गया! और तब! तब एक गौर-वण िस -पु ष कट हए! ल बे घु टन तक ेत केश! उ नत शरीर. भूिम और आकाश क िलत िकये और बैठ गया! अब गड् ढे म से एक काश उ प न हआ! उस काश म एक अि य सु ंदरी कट हई! ये कामातु री यि णी थी! इसके दशन मा से ही साधारण पु ष क देह का सम त वीय खिलत हो जाता है! कामातु री काम मु ा म ले टी हई आई थी! पूणतया नगन! सु गंिधपूण! च दन क भीनी भीनी सु गंध! इस सु गंध से ठू ं ठ वृ भी हरे -भरे हो जाते ह! वो उठ उठ कर काम-मु ाएँ बना रही थी... और मं ो चारण आर भ िकया! म उस त तरी वाले मांस को अिभमंि त करके गड् ढे पर फका! धमाका हआ! वायु. ेत-देह और काले चौड़े ने ! वो झु क कर मेरी गोद म बैठ गयी! िफर पलटी और अपनी पीठ मेरी और करते हए उसने कामातु री को देखा! कामातु री लोप हो गयी! यम-सु ंदरी से णय-वचन प ात उसको मने वािपस भे जा! तीसरी पे शकश भी मने ठु करा दी थी! अब मने एक मांस का टु कड़ा िलया! उसको आधा खाया और िफर मु ंह से िनकाल िलया! उसको एक त तरी पर रखा..

सही कहा तु मने पु ! अ ानतावश!" उ ह ने कहा! मै उनका उ र सु नकर उनके सम ले ट गया! मने अ ु प ू रत ने से उनको देखा! मने िफर कहा.... पर तु कैसे?" "उन पािपय ने यहाँ.. यहाँ ऐसा ही होगा" "उिचत है. ये काय चै मास म पूण करवाइए!" उ ह ने कहा! "अव य बाबा अव य!" मने कहा और मै िफर से भूिम.याग.. उनका दूिषत जल मंिदर के गभ.. "बाबा आप जैसा कहगे... मु ख-शोधन िकया. "बाबा! आपक त ा यहाँ के लोग ने भंग कर दी.ा -मालाएं नािभ तक धारण िकये हए! एक भु जा म कमंडल लटका हआ और दूसरे हाथ म वो वण-ि शूल थामे हए! मै और शमा जी खड़े हए और उनको दंडवत णाम िकया! उ ह ने मु झे ोध से देखा! मु झे लगा क जैसे मै सा ात काल क िनगाह म झाँक रहा हँ! मने अपने दोन हाथ जोड़े ! उ ह ने मेरी इस मु ा को देखा! मेरी अलख को देखा! िफर उ ह ने कहा. बड़ा साहस बटोरे के मेरे मु ंह से श द िनकले. उसमे पूव-मु खी महा-मंगला क मूित थािपत करवाइए..पर तु. पु यहाँ एक मंिदर का िनमाण करवाइए.. मने उनको िश -प रचय दे िदया! "िनसंदेह! तु हारा तं . " बाबा मै आपका प रचय जानने हे तु उ सु क हँ!" "पु ! मेरा नाम देव ी है! मेरे िपता ी सु वाज का आ म िच कूट म हआ करता था! मेरे िपता ी ने ये भूिम एक दान म ली थी. एक गड् ढे म अि श त पदाथ गाड़ िदए..थान म वेश कर गया. ये मु झे ात हआ.. इनसे ऐसा अ ानतावश हआ. मै उन सभी क ओर से मा ाथ हँ" मने ऐसा कह के उनको िफर से णाम िकया! "हाँ पाप िकया उ ह ने ! िनसंदेह पाक िकया अ य पाप.. और यहाँ महा-मंगला-मंिदर का िनमाण करवाया था. मॉल. मू .ान शंसनीय है पु !" मै भावािभभूत हो गया! मेरे ने से आंसं ू छलक पड़े ! मने मन ही मन अपने दादा ी को नम कार िकया! "मै तु हारे िववेक से भी स न हँ! तं संतु िलत-मि त क के िलए ही सृिजत हआ था!" उ ह ने कहा! मने अपने हाथ जोड़ के उनको णाम िकया! "मु झे यूँ बु लाया है पु ?" उ ह ने पूछा. " नाम या है तु हारा पु ? उनक आवाज़ ऐसी क जैसे वयं आकाश गजन कर रहा हो! मने उनको अपना नाम बता िदया! "िश का प रचय दो" उ ह ने कहा.पश मु ा म आ गया! 6 . मु झे यहाँ ही रहने का आदेश िदया! मने १४८ वष क आयु म यहाँ समािध ली! इस भोमी के नीचे वही मंिदर िव मान है और मेरा समािध थल!" उ ह ने अवगत कराया! मने उनके उ र देते ही उनको िफर स दंडवत णाम िकया! मने िफर उनसे पूछा. "िनसंदेह उ ह ने ऐसा िकया बाबा! पर तु ये भी धम-भी लोग ह... इसी कारण से मेरी त ा भंग हो गयी!" उ ह ने कहा.याग.

तब तक यहाँ कोई अिन नह होगा! कल च दन और हम-दंडी से यहाँ हवन करवा दो और इस गड् ढे को पाट दो!" उ ह ने ऐसा कहा और अंत यान हो गए! सब शांत हो गया! मै ध य हो गया उनका आशीवाद ा कर! मने संजय से सारी बात बता दी! उसने वहाँ मेरी उपि थित म हवन करवा िदया! हवन संपण ू होते ही."और बाबा एक अित-िविश अनु नय है आपसे!" मने कहा. चै मास म िकया काय पूण हो गया! जैसा उ ह ने आदेश िदया वैसा क िकया! ढोर-डंगर चरने वहाँ वािपस आ गए! मै आज भी जब वहाँ से िनकलता हँ तो अपना सर ा म झु का के ही िनकलता हँ! 7 . गड् ढा पाटने का काय आर भ हो गया! गड् ढा पट गया! मै उन अलौिकक बाबा को मन ही मन नमन करके वहाँ से वािपस आ गया! आज वहां उस खे त म मंिदर है. "आप अपना आशीवाद सदा बनाए रिखये !" मने ऐसा कहा और मेरी लाई फू ट पड़ी! उ ह ने अपना हाथ उठा अभय-मु ा म! और कमंडल से एक फू ल क डंडी से जल-िछ ण कर िदया! मने भाव-िवभोर होकर उनको णाम िकया! "चै मास क ि या से काय आर भ करना. "अव य पु ! अनु नय कैसा!" वो बोले .

कुं दन से िमले. रा ते म बड़ी परे शानी हई थी!! खैर. िजला संवाई माधोपु र से आया था. तब बात कर! शमा जी ने फ़ोन काटा और मु झे ये सब बताया. शमा जी ने उसको बताया िक हम लोग ३ िदन के बाद वािपस िद ली आयगे. उसने बताया िक उसक बेटी नसी अपने कॉले ज क लड़िकय सिहत जोधपु र गए थे घूमने . यहाँ मै अपने एक प रिचत से िमलने आया हआ था. चलो मु लाक़ात भी हो जाये गी और दो-चार िदन थोडा इस गम से भी िनजात िमल जाये गी! सो हम वहाँ पहँच चु के थे! वहाँ उनसे मु लाक़ात भी हो गयी थी! तभी एक िदन शाम को शमा जी के फ़ोन क घंटी बजी. ले िकन कोई १५ िदन के बाद उसक हालत िफर पहले जैसी हो गयी. "हाँ ये ही कहा मने उसको!" वो बोले . यहाँ का मौसम काफ सु हावना लग रहा था िद ली क बिन बत.यवसायी था और अजमेर और जयपु र म उसके एक-दो होटल थे. ये मेरे प रिचत पटना से आये थे! उ ह ने मु झे कहा िक पता नह अब कब िमलना हो पाये गा तो मै उनसे िमलने देहरादून पहंच!ू िद ली म वैसे भी भयानक गम का माहौल था. वो भी ४ िदन के िलए. इस बीच कुं दन के करीब ९ बार फ़ोन आये . कुं दन काफ घबराया हआ था. ये शमा जी के एक प रिचत कुं दन का था. ले िकन ४ िदन के बाद. उसने बताया िक उसक लड़क नसी अभी नहाते-नहाते िच लाई और बेहोश हो गयी. गम ने कोलाहल मचा रखा था! मै और शमा जी तब उ राखंड म देहरादून आये हए थे . वहाँ कुं दन वैसे ही आँख िबछाए बैठा था! हम वहाँ पहंचे.वष २०१० गंगापु र राज थान क एक घटना ये गिमय क बात है. ले िकन बड़े ही िव मयकारी तरीके से वो अगले िदन ठीक हो गयी! िकसी भी कार के रोग आिद का कोई ल ण नह िदख रहा था! ये कोई २ महीने पहले िक बात है. मने सोचा. कुं दन ने पाँव पड़े और ऐसे मु कुराया जैसे क उसक सम त सम या का अंत हो गया हो! मु झे कुं दन 1 . ले िकन मने उसको मना कर िदया. १०-१५ िदन के बाद िफर तिबयत खराब हो जाती है! कुं दन काफ परे शान था. कुं दन शमा जी का सहपाठी रह चु का था और कई बार मेरे पास भी आया था. ले िकन इस बार भी वो पहले िक तरह से अचानक ठीक हो गयी! बीमारी का कोई ल ण नह िदखा! ऐसा उसके साथ लगातार हो रहा है! एक रात अ पताल म रहती है. "शमा जी बात अजीब तो है. वहाँ डॉ टर को िदखाया तो डॉ टर ने उसको फ़ौरन अ पताल म दािख करने िक सलाह दी. ये फ़ोन गंगापु र. िफर बाद म बात करे " और शमा जी ने यही कहा! हम िद ली आये . ले िकन हई है!" "हाँ गु जी! अजीब सी बात है ये !" वो बोले . उसको िफर से भत कराया गया. उसक बेटी अ पताल जाते ही ठीक हो गयी थी! डॉ टस भी बड़े िवि मत थे! कुं दन के बार बार आ ह करने के प ात मने वहाँ जाने क वीकृ ित दे दी! कुं दन तो वयं हमको ले ने आने वाला था. वो लोग उसको हॉि पटल ले जा रहे ह. बड़ी मु ि कल से उसको कुं दन उसको जोधपु र से वािपस घर लाया था. सु न के मेरे को अजीब सी बात लगी ये! मने कहा. "चलो िद ली पहँच के बात करते ह कुं दन से!" मने कहा. ये फ़ोन कुं दन का ही था. वो कॉले ज जाने लगी. उसके बाद मै और शमा जी ज़रा टहलने के िलए बाहर चले गए! तभी िफर से फ़ोन बजा. मने कहा क हम वयं ही वहाँ आ जायगे! हम कोई ५व िदन गंगापु र पहँच गए. "कुं दन से कहो िक पहले उसको डॉ टर के पास ले जाएँ. उ ह ने उसको अ पताल म भत का िदया. आदमी िमलनसार और हंसमु ख था! होटल. ठीक हो जाती है. ज़रा गु जी ये पूछ ल िक ये या माजरा है? मने शमा जी से कहा. ले िकन पहँचने के दो िदन बाद ही नसी िक तिबयत अचानक खराब हो गयी.

उसके बाद मै और शमा जी नानािद हे तु चले गए! राि समय कुं दन आया. वैसे कभी जु काम भी नह !" उसने बताया. "ये ६ लड़िकयां थ जी. तो उसको बीमारी या थी?" मने पूछा. अपने साथ िनरािमष भोजन लाया और २ मिदरा क बोतल! शमा जी ने उसका थोडा उपहास उड़ाया! चूंिक दोन ही सहपाठी रहे थे तो बोलने का लहजा वही तू-तड़ाक था! पर तु दोन म ने ह बहत था! और इसी वजह से मै यहाँ आया था! कुं दन ने सारा भोजन एक ड गे म डाला उर त त रयां लगा द .का ये भाव अ यंत सौहादपूण और ने ही लगा! कुं दन ने फ़ौरन ही अपने घर म फ़ोन िकया क गु जी आ गए ह. 2 . एक बात बताओ. "नह गु जी. "अ छा! एक बात और बताओ. आधे घंटे म पहँच जायगे! और हम आधे घंटे से थोडा से िवल ब के बाद वहाँ पहंचे! कुं दन के दो क याय ही थ . एकदम िफट रही है वो. कल सु बह मु झको नसी से िमलवाना. "ह म! एक बात और! जब आप उसको यहाँ ले के आये . िफर. पु नह था उसका. बु खार भी साल म ही कभी हआ होगा. उसके साथ िकतनी लड़िकयां गय थ ?" मने सवाल िकया. "िकसी और लड़क के साथ ऐसा हआ?" मने पूछा. ऐसा ही!" वो बोला. "नह गु जी. मै उसको जांचना चाहता हँ" मने कहा. मने अपना िगलास उठा कर सम त शि य का ध यवाद िकया! और उसके बाद मै अपना िगलास गटक गया! िफर होनी शु हई ं हमारी बात! मने कुं दन से पूछा. तब से ही उसके साथ ऐसा हो रहा है. "अभी बु लवाऊं गु जी?" उसने कहा. ले िकन उसके िलए उसक ये दो क याएं ही लड़के से अिधक थ उसके िलए! मु झे ये बेहद अ छा लगता है! क या इस िृ क जिनका है! उसका स मान अित आव यक है!! हम घर पहंचे तो कुं दन ने घर म िमठाई आिद और तमाम ताम-झाम का बंध कर रखा था! हमने चाय पी और थोड़ी सी िमठाई खायी. उसने िगलास म मिदरा डाली. और उलटी का मन हआ और िफर नीचे िगर पड़ी.यही न?" "हाँ गु जी. "कभी पहले ऐसा हआ हो उसके साथ?" मने पूछा. कभी नह . ये नसी आपक बेटी िकतने वष क है?" "जी २१ वष क " उसने जवाब िदया "अ छा! तु मने बताया था क वो जब जोधपु र गयी थी. यह आस-पड़ोस क ही ह सारी" उसने बताया. और ये ही हो रहा है इसके साथ गु जी तबसे" उसने कहा! "एक काम करना कुं दन जी. िकसी के साथ नह हआ" उसने जवाब िदया. "उसने कहा क एक च कर आया. "कुं दन जी. बेहोश हो गयी.

कभी-कभी मेरी आँख के सामने अँधेरा आ जाता है. "जी हम वहां मेहरानगढ़ गए थे. वो बैठ गयी. नहाने के प ात जो पानी बचता है. शमा जी भी सो रहे थे. मने उनको जगाया. इस समय तो कतई नह " मने जवाब िदया. मै लाता हँ उसको अभी" उसने जवाब िदया और नसी को ले ने नीचे चला गया. आधु िनक प रवेश म! शरीर से थोड़ी भारी थी. उजला-वण और सामा य कद. मु झे पता चला िक तु म यहाँ भी कभी-कभी बीमार हो जाती हो? कैसा महसूस होता है?" मने िकया. बदन गरम होता है और बेहोशी आ जाती है. मने अपने साथ लायी एक टेबले ट खा ली थी. तु म एक काम करना. "हाँ गु जी. डॉ टस हैरान ह" उसने जवाब िदया. "जी हम मु झे िमलकर ६ लड़िकयां थ " उसने बताया. "तु हारी तिबयत वहां कब ख़राब हई नसी?" मने पूछा. "गु जी. "नह गु जी. ७ बज चु के थे. थोड़ी देर बाद नसी आई. "मेरी एक सहे ली के मामा जी का घर है वहाँ. ले िकन कोई फायदा नह हआ. रात होते-होते मेरी तिबयत और िबगड़ गयी. तो मने पूछने शु िकये. साथ म गरमा-गरम कचौिड़याँ! ना ता करने के बाद मने कुं दन से कहा. "ठीक है. मै देख लूँगा िक 3 . ले िकन चे हरे पर स दय िव मान था! उसने आते हमको णाम िकया! मने उस से कहा. वो उसी बा टी म रहने देना. कोई २ महीने पहले " उसने कहा. कोई १० बजे मु झे बेहोशी सी हई. वहाँ से जब वािपस आये रात को तो मेरा बदन बेहद गरम था."नह अभी नह . "अ छा नसी. "िकतने लोग थे तु म?" मने पूछा. और उसके बाद मेरी आँख यह गंगापु र म खु ली. "कुं दन जी? नसी कहाँ है?" "जी वो अभी नीचे ही है. "आओ नसी! कैसी हो?" "मै ठीक हँ गु जी" उसने आँख नीचे करते हए कहा. अब जो करना-देखना था वो सु बह ही देखना था! सु बह मेरी न द ज़रा देर से खु ली. मेरे सामने म मी और पापा खड़े थे" "अ छा नसी. तु म यहाँ बैठो ज़रा" मने उसको वहां एक कुस क ओर इशारा करते हए कहा. शमा जी और कुं दन को बाहर भे ज िदया. उसके बाद हम खाने -पीने म य त रहे . "कहाँ ठहरे थे वहाँ? मने पूछा. कह अभी जाना तो नह ?" मने िकया. १० बजे जाना है मु झ"े उसने बताया. "कोई बात नह नसी. उ ह भी देर से जागने म थोड़ी हैरत हई! उसके बाद िन य-कम से फा रग हए और तब कुं दन ने चाय का बंध िकया. "नसी? तु म जोधपु र गय थ ? मने पूछा. ले िकन अ पताल जाने तक मै वतः ही ठीक हो जाती हँ. इसीिलए हम वहाँ ठहरे थे" उसने बताया. उनको पहले ही सूिचत िकया गया था. समय हआ तो हम सोने चले गए. " मा क िजये गु जी" कुं दन ने हाथ जोड़कर कहा.

उसको अपने हाथ पर पढ़कर मै आगे बाधा. "नसी िकसी लपे ट का िशकार हो गयी है. मने पानी को एक अंजु ल म भर और िफर पानी पर अिभम ण िकया. उसक पाँव क छोटी ऊँगली फड़क रही थी. एक तरफ से िसक हई और दूसरी तरफ से क ची" मने कहा. "नसी अपनी एक सहे ली के साथ कुछ खरीदने गयी है. शमा जी थोड़ी देर बाद वािपस ऊपर आये और बोले . "नसी?" उसने कोई जवाब नह िदया. ले िकन उसने एक झटके से वो हाथ मु झसे छुड़ा िलया! अथात उसके ऊपर जो भी था वो नह चाहता था क मै उसको पश क ँ ! तब मने उसके माँ-बाप से कहा क इसके दोन हाथ पकड़ ल. ये नसी को दु बारा देखने से ही पता चले गा. मने उसका हाथ पकड़ा. पानी एक दम काला हो गया! इसका अथ था. कुं दन से पूछ िक नसी कब तक घर वािपस आएगी?" "ठीक है गु जी. ले िकन ये लपे ट कहाँ से लगी है. उसका चे हरा मु रझाया हआ था. मने वो ऊँगली पकड़ी तो नसी उठ के बैठ गयी! मने कहा. वो भी बता िदया! और कुं दन से मने कहा िक नसी के नहाने के बाद कोई और दूसरा वहाँ नहाने न जाए! आधे घंटे बाद मेरे पास कुं दन आया और बताया क नसी नहाने के बाद बचा हआ पानी एक बा टी म छोड़ गयी है. "अभी कह देता हँ" उ ह ने कहा और कुं दन को ऊपर बु ला कर वैसी एक रोटी तैयार करने को कह िदया. वो अपने घु टना खु जलाती रही. उसके बाद गु सलखाने म गया. डे ढ़-दो घंट म वािपस आ जाये गी गु जी" "ठीक है. मै उठा एक मं पढ़ा और अपनी आँख पर मला. मै अपनी तैया रय म लग गया. अब शमा जी और कुं दन वहाँ आये. उ ह ने ऐसा करना चाहा तो वो िब तर पर कड़ी हो गयी. "नसी?" उसने मेरी तरफ देखा. िच लाते हए! जैसे मने उसका हाथ मरोड़ िदया हो! 4 . मने कुं दन को नसी से क हई बात बता द और नहाने के बाद का पानी रखना है. ढाई घंटे बाद नसी आिपस आई. बस मु झ. मने उसका वो हाथ पकड़ िलया. और शमा जी को भी बु लाया. मु झ तक ऐसी खबर आई और मै नीचे आया नसी को देखने . तब तक हम कुछ तैयारी कर ले ते ह शमा जी.े शमा जी को और अपने माँ-बाप को अनजानी िनगाह से देखती रही और अपने सीधे हाथ से अपना घु टना खु जलाती रही! मने िफर कहा.या परे शानी है तु हारे साथ!" मने उसको कहा. उसक तिबयत िफर से खराब हो रही थी. आप एक काम कर. और शमा जी इसक टांग पकड़ ल. िकसने लगाई है. आप कुं दन से कह के एक रोटी बनवाएं. मै अभी पूछता हँ कुं दन से" वो बोले और नीचे चले गए. मने उसको गौर से देखा. मै वािपस ऊपर वाले कमरे म आया. वो नीचे बैठी. कुं दन को नह . िबना पलक मारे मु झे करीब ५ िमनट तक देखती रही. "ठीक है गु जी" उसने कहा और वािपस चली गयी. अपनी गदन उलटे कंधे पर रख ली और अपने सीधे हाथ क ऊँगली से 'ना-ना' करने के इशारे करने लगी! मने तब एक मं जागृत िकया. मै भी उसको घूर घूर के देखता रहा! मने िफर दु बारा कहा' "नसी?" नसी ने कोई जवाब नह िदया. नसी अपने कमरे म अपने िब तर पर बेसु ध पड़ी थी. क नसी िकसी हानी ताक़त का िशकार हो गयी है! ले िकन ये बात मने शमा जी को तो कही. मने शमा जी से कहा. मने अपने आव यक काम िक कुछ व तु एं अपने बैग से िनकाल कर बाहर रख ल तब तक.

हम ह राजा ठाकुर! हम जोधपु र के ह! सोजाती मंडी म रहाइश है हमारी!" उसने बताया और हंस पड़ा! "अ छा राजा साहब! ओह. उसक बीवी के आंस ू िनकल पड़े . "हाँ अब बता. मने उसका हाथ अभी भी थामे हआ था! "तू अपना नाम बता पहले ... िफर अ पताल जाकर ये ठीक हो जाती है. दम घु ट रहा है मेरा" उसने कहा. मने हाथ छोड़ िदया! और उस से बोला. कौन नसी? कोई नसी नह है यहाँ!" उसके गले से एक मदाना आवाज़ आई! ये आवाज़ सु नकर कुं दन और उसक बीवी डर गए. "अ छा. मेरा हाथ छोड़ पहले . अब ना कहना ऐसा दु बारा!" उसने मु झे थ पड़ िदखाते हए कहा! "अ छा! अ छा राजा साहब! नह कहँगा ऐसा दु बारा! मा कर दीिजये !" मने कहा! " मा कर िदया भाई हमने आपको! यार! आपसे बात करके िदलखु श हो गया हमारा तो!" उसने मेरे सर पर हाथ फेर कर कहा! "जी ध यवाद राजा साहब!" मने भी मजाक से कहा! "अ छा एक बात तो बताओ राजा साहब? इस लड़क को आप बीमार करते हो. ये लड़क मु झे भा गयी है!" उसने कहा! "अरे ! आप तो राजा साहब ह! और ये बेचारी गरीब-गु रबा लड़क ! ये कैसा िमलान?" मने भी चु टक ली! "चु प करो तु म! ये बात हमको नह पसंद! हाँ. एक काम कर. 5 . मने तब शमा जी से कह के उनको बाहर भे ज िदया और दरवाज़ा अ दर से बंद कर िलया! "तो िफर तू कौन है? ये तो बता?" मने हँसते हए पूछा. तू उसका जवाब तो दे ? िफर मै भी अपना प रचय दे दूंगा तु झे!" मने कहा. मु झसे ही सवाल कर रहा है. भला ये भी कोई बात है?" उसने कहा! उसका ऐसा जवाब सु नकर मेरी हंसी छू ट पड़ी! "अबे जो मै पूछ रहा हँ .राजा ठाकुर साहब! जोधपु र वाले. िफर मै बताऊंगा. कौन है तू? कहाँ से आया है? कौन सी मंडी?" "देखो जी. "नसी?" "कौन नसी.मने कहा. है ना?" मने कहा! उसने अपनी गदन ऊपर से नीचे तक िहलाई कई बार! "अ छा ठाकुर साहब! इस बेचारी लड़क को कैसे पकड़ िलया आपने ?" मने वही ँ िब तर पर बैठते हए पूछा! "ओ जी बात ये है. अपना नाम!" उसने कहा! "मेरा नाम सु नेगा तो गश आ जाएगा तु झ!े अब बता अपना नाम!" मने कहा.. "तेरे जैसे तो मै रोज देखता हँ मंडी म!" उसने हँसते हए कहा! "मंडी म? कौन सी मंडी म? चल ये ही बता!" मने पूछा "मै नह बताऊंगा! तूने तो कुछ बताया ही नह मु झे.

"यार बात ऐसी है. छोड़ना तो पड़े गा. मने शमा जी और कुं दन को अ दर बु ला िलया. ये ही बात है! ले िकन िकसी को बताना नह " उसने धीरे से कहा! "अ छा राजा साहब. "हाँ! हाँ! यार ज़ र पूिछए!" उसने हंस के कहा! "आप इस लड़क को कब छोड़गे?" मने कहा. यही ना? मै खड़ा हआ और ऐसा बोला! "हाँ यार.िबलकुल ठीक! वो कैसे?" मने पूछा वो थोडा चु प हआ और मु झे बोला.. ले िकन ये डॉ टर लोग मेरे मु ंह म ना जाने या या घु सेड़े जा रहे थे! मने देखा तो मु झे िबजली का करं ट याद आ गया! मै वहाँ से भाग गया! अब जब भी ये साले इसको वहाँ ले जाते ह तो मु झे डर लग जाता है... या फक पड़ता है इसको!" उसने एक आँख बंद करके कहा! ऐसा बोल के वो उठा और नसी का टॉप ऊपर कर िदया! और बोला. "अरे राजा साहब.वाह वाह! और तू कह रहा है इसको कब छोड़गे!" ऐसा कह के वो जोर से हंसा! "अ छा! तो आपका कहना है िक आप इसको नह छोड़गे. आँख और वो. मने दोन को हँसते हए बाहर भे ज िदया! "हाँ राजा साहब अब बताइये आप!" मने कहा. "ये देखा! आया ना मजा!" मने नसी के दोन हाथ पकडे और नीचे कर िदए! और मै बोला. प का छोड़ना पड़े गा!" मने कहा! "देख यार. "इसको नह छोडू ंगा मै अब! साली क काया तो देख! इसके ह ठ.. िक मेरी मौत िबजली के करं ट से हई थी. "भाई राजा साहब. और जब अ पताल म दािखल िकया गया था मु झे तो मै तो मर ही चु का था. एक बात पूछूं?" मने कहा.. "सबके सामने नह बताऊंगा! पहले इनको यहाँ से भे जो" उसने शमा जी और कुं दन क तरफ इशारे करके कहा.. तो िफर मने कहा. मै भाग जाता हँ! समझे आप?" उसने अपने दोन हाथ से ताल ठोक कर ऐसा कहा! "ओह! अ छा! तो ये बात है राजा साहब!" मने कहा! "हाँ जी. और वैसे भी ये आपको पसंद है! ऐसा अ छा थोड़े ही ना लगता है!" "हमारे साथ रहोगे तो ऐसे ही मजे करोगे भाई!" उसने हंसके कहा! "देखो राजा साहब! बस अब बहत हआ ये मजाक!" मने कहा. अब ज़बरद ती मत कर मेरे साथ. एक काम कर तू भी मजे ले ले इसके साथ. ये बात तो बाद िक ह. अब बार यूँ पूछता है?" उसने कहा. कब िवदाई ले गा यहाँ से?" 6 . "अबे हम मजाक कर रहे है?? " उसने गु से से कहा. "सु न ओ राजा! अब मै आिखरी बार पूछ रहा हँ .

तांकाझाँका! िफर िब तर पर बैठ गया! मने उस से कहा. लिकन तू अभी तक नह मान रहा है. सफ़ेद कमीज़ और काली पै ट! मै उसके सामने जा के बैठा! "मारोगे तो नह ना?" उसने कहा. मु झे जान से मार देगा. इसको भगा यहाँ से. "सु न राजा. भगा भाई!" उसने रोते रोते कहा और नीचे उतर के मु झसे िलपट गया! अब मने खबीस को वािपस भे ज िदया! और नसी को अपने से अलग िकया! उसने मु झसे हटते ही चार तरफ देखा. "मने इस लड़क के िपता को वचन िदया है. समझा?" मने कहा. आजा कर ले दो दो हाथ!" उसने अपने दोन हाथ को मल कर कहा! तब मने अपने एक खबीस को हािज़र िकया! खबीस को देखते ही उसको कंपकंपी छू ट गयी! दहाड़ मारके रोने लगा! "यार. "है नह थी. "और तु झे िकतनी भाय ह ऐसी लडिकयां?" मने हंस के पूछा! "अभी तो जी ये ही है" उसने कहा. "१३ साल हो गए जी" उसने बताया "िकतनी उ थी तब तेरी?" मने पूछा. उठा िलया! "तु झे या िमले गा मु झे यहाँ से भगा के यार?" उसने कहा. तू इस म से िनकल जा बाहर और इस कुस पर बैठ!" मने वहाँ एक कुस पर पड़ी िकताब हटाय और उसको इशारा िकया यहाँ आने का! उसने गदन िहलाई िक ठीक है! वो उसमे से िनकला और सामने पड़ी कुस पर बैठ गया! नसी ने एक झटका खाया और बेहोश हो गयी! राजा का दर याना क़द. " याह हआ था या?" मने पूछा. एक काम कर. ये मेरी हड् िडयां तोड़ देगा.अब मेरी मजबूरी है डंडा इ तेमाल करने क !" मने ऐसा कह के वहाँ रखा एक लकड़ी का कोई औज़ार सा था गिणत का. तु झे 'िनबटे' हए िदन िकतने हए?" मने पूछा. "२२ साल" वो बोला. इसिलए तेरे को भगाने क ठानी है!" मने कहा. "नह जी" उसने जवाब िदया. 7 ."ये या बदतमीजी है?" वो िच लाया! "तेरे को मने बहत व त दे िदया राजा जी! अब तेरी ऐसी भिजया बनाऊंगा िक तू इसको तो या िकसी को भी देखने लायक नह रहे गा" मने उस से कहा! "ये ही है दो ती का िसला?" उसने धीमे से कहा! "कैसी दो ती? मने तेरे को कहा िक तू जा अब यहाँ से. "चल थोडा बहत तो मै भी लड़ना जानता हँ. "नह मा ं गा! अ छा एक बात तो बता.

३ जोधपु र म ही थ !" उसने बताया! "िफर या हआ? मार भगाया तेरे को?" मने पूछा. एक जयपु र म थी. "यार. ले िकन हो कोई लड़क ही! काम िनकालो अपना-अपना!" उसने ठहाका लगाया! "मै ऐसे काम नह करता राजा यार!" मने जवाब िदया! "भाई मेरा काम करवा दे एक बार बस!" उसने कहा! "नह यार!" मने कहा. "इनको बाहर भे ज दे. "अगर मै तेरे को मु "कैसे मु कर दूँ तो??" मने कहा. तू ठहरा ठरक ! डरपोक!" मने कहा! "लड़ाई-वगैरह मु झे पसंद नह है यार! िकसी के ऊपर 'चढ़वाना' हो तो बता. 8 . "हाँ यार! एक बार! एक बार करा दे भाई! करा दे! मै तेरे पाँव पडू "ं उसने कहा और मेरे पाँव पकड़ िलए! मने उसको उठाया और िफर से कुस पर िबठा िदया! वो धीरे से आगे आया और मेरे कान म बोला. "वो मु झे पकड़ने वाले थे. और िफर ना जाने िकस िकस के हाथ म पड़े गा! समझा?" "हाँ. मजा आ जाएगा! तु झे भी और मु झे भी!" "तू मेरे िकसी काम नह है. "कहाँ जाऊँगा यार? पता नह कह वहाँ भी क ज़ा हो गया हो! मै तो बेघर हो गया यार!" उसने रोती सी सूरत बनायी! िफर एकदम तपाक से बोला. मु झे रख ले अपने साथ. "आजकल अपना डे रा जोधपु र मंडी म है!" उसने बताया! "और अब कहाँ जाएगा?" मने पूछा."लूट िलया आपने तो मेरा सब-कुछ. हम तो काम कर अपना-अपना! देख कैसी म त लग रही है कू डी!!" "सु न अबिक अगर तूने इसका िज भी िकया ना तो तु झे ऐसी जगह बांधंग ू ा िक तेरा स यानाश हो जाएगा!" "ओ ना यार! गु सा ना कर भाई!" उसने अपने हाथ जोड़कर कहा. भाई लूट िलया!" उसने अपने सर पर हाथ मारके कहा! "इस से पहले कौन कौन थ ? मने मजाक िकया! "यार. मै खु द ही भाग गया!" उसने हंस के कहा! "आजकल कहाँ भटक रहा है तू?" मने पूछा. समझ गया!" वो बोला. भाई? समझ ना आयो?" "तू कब तक इस ेत योनी म भटकता रहे गा? कभी िकसी गलत आदमी के हाथ पड़ गया तो पालतू कु ा बना ले गा तेरे को.

और नसी पर एक मं . और कहा िक थोडा िनरािमष भोजन का बंध करो और ऊपर कमरे म ले जाओ! िनरािमष भोजन रात को लाया गया था. "अब तू ही देख ले या करना है. और तू देख हम तेरी सेवा कर रहे ह!" "आपका शु ि या यार. ये भूतेत हमारी सेवा करते ह. िजलाता है िजला. "िकसी ने नह िखलाया यार आज तलक" उसने बताया! "चल मै तु झे खाना िखलाता हँ. वही ले के कुं दन ऊपर चला गया शमा जी के साथ! तब मने राजा को भी कहा िक वो ऊपर जाए. कबसे खाना नह खाया तूने?" मने पूछा."तो िफर या सोचा?" मने कहा.योग िकया! नसी को होश आ गया! मने उनसे कहा िक इसको ने हलवा दीिजये और उसके बाद मै ऊपर कमरे म आ गया! वहाँ शमा जी ने खाना एक थाली म रखा. राजा हवा म लटका हआ था. मारता है मार!" उसने कहा! "ठीक है. शराब पीता है?" मने पूछा! "हाँ! पीता हँ मै शराब! यार तेरा भला होगा!" उसने कहा! तब मने शमा जी और कुं दन को वहां से हटाया. मने उसको खूब भोजन कराया और मिदरापान कराया! िफर वो िनयत ितिथ आ गयी! मने राजा क ेता मा को शु िकया और करीब २ घंटे क कड़ी ि या के प ात मने राजा क भटकती ेता मा को मु कर िदया! अपनी िवदाई से पहले वो मेरे गले िमला. मने उसको नीचे का इशारा िकया! वो नीचे आया! मने एक मं से शमा जी िक आँख पर योग िकया! अब वो भी उस राजा को देख सकते थे! शमा जी ने कहा. और जब तक मै ना कहँ िकसी भी व तु को हाथ ना लगाये! उसने हाथ जोड़ के सहमित जताई! मने नसी के माँ-बाप को नसी के कमरे म बु लाया. णाम िकया और लोप हो गया! एक भटकती आ मा को मु ि िमल चु क थी! उसका ेत-योिन भोग समा हो गया था! मने इस धरा पर अपना काय संप न कर िदया था शेष रिचयता के हाथ म था! 9 . मै तो आज पे ट भर के खाऊंगा!" उसने कहा! मने उसको खाने का इशारा िकया! वो बेचारा एक भूखे ब चे क तरह खाने पर टू ट के पड़ा! तब शमा जी ने उसको एक िगलास शराब का भर कर िदया! उसने एक ही बार म सारा िगलास गटक िलया! और खाने म म त हो गया! नसी ठीक हो गयी थी! मै और शमा जी कुं दन से िवदा ले कर वािपस िद ली आ गए! मै राजा को भी अपने साथ ले आया था! वो मेरे साथ ११ िदन तक रहा. शमा जी से िमला. एक बात बता. "राजा यार.

उ ह ने उसको अ पताल म भत का िदया. ये फ़ोन गंगापु र. उसको िफर से भत कराया गया. चलो मु लाक़ात भी हो जाये गी और दो-चार िदन थोडा इस गम से भी िनजात िमल जाये गी! सो हम वहाँ पहँच चु के थे! वहाँ उनसे मु लाक़ात भी हो गयी थी! तभी एक िदन शाम को शमा जी के फ़ोन क घंटी बजी. रा ते म बड़ी परे शानी हई थी!! खैर. उसने बताया िक उसक बेटी नसी अपने कॉले ज क लड़िकय सिहत जोधपु र गए थे घूमने . ले िकन कोई १५ िदन के बाद उसक हालत िफर पहले जैसी हो गयी. ले िकन बड़े ही िव मयकारी तरीके से वो अगले िदन ठीक हो गयी! िकसी भी कार के रोग आिद का कोई ल ण नह िदख रहा था! ये कोई २ महीने पहले िक बात है. आदमी िमलनसार और हंसमु ख था! होटल. उसने बताया िक उसक लड़क नसी अभी नहाते-नहाते िच लाई और बेहोश हो गयी. १०-१५ िदन के बाद िफर तिबयत खराब हो जाती है! कुं दन काफ परे शान था. उसके बाद मै और शमा जी ज़रा टहलने के िलए बाहर चले गए! तभी िफर से फ़ोन बजा. ले िकन इस बार भी वो पहले िक तरह से अचानक ठीक हो गयी! बीमारी का कोई ल ण नह िदखा! ऐसा उसके साथ लगातार हो रहा है! एक रात अ पताल म रहती है. ले िकन पहँचने के दो िदन बाद ही नसी िक तिबयत अचानक खराब हो गयी. वहाँ डॉ टर को िदखाया तो डॉ टर ने उसको फ़ौरन अ पताल म दािख करने िक सलाह दी. ज़रा गु जी ये पूछ ल िक ये या माजरा है? मने शमा जी से कहा. इस बीच कुं दन के करीब ९ बार फ़ोन आये . शमा जी ने उसको बताया िक हम लोग ३ िदन के बाद वािपस िद ली आयगे. "चलो िद ली पहँच के बात करते ह कुं दन से!" मने कहा. ले िकन मने उसको मना कर िदया. वो भी ४ िदन के िलए. ले िकन हई है!" "हाँ गु जी! अजीब सी बात है ये !" वो बोले . यहाँ का मौसम काफ सु हावना लग रहा था िद ली क बिन बत. कुं दन ने पाँव पड़े और ऐसे मु कुराया जैसे क उसक सम त सम या का अंत हो गया हो! मु झे कुं दन 1 . ठीक हो जाती है. कुं दन काफ घबराया हआ था. ये फ़ोन कुं दन का ही था. ले िकन ४ िदन के बाद. "हाँ ये ही कहा मने उसको!" वो बोले . ये शमा जी के एक प रिचत कुं दन का था. "कुं दन से कहो िक पहले उसको डॉ टर के पास ले जाएँ. ये मेरे प रिचत पटना से आये थे! उ ह ने मु झे कहा िक पता नह अब कब िमलना हो पाये गा तो मै उनसे िमलने देहरादून पहंच!ू िद ली म वैसे भी भयानक गम का माहौल था. कुं दन शमा जी का सहपाठी रह चु का था और कई बार मेरे पास भी आया था.वष २०१० गंगापु र राज थान क एक घटना ये गिमय क बात है. वो कॉले ज जाने लगी. मने कहा क हम वयं ही वहाँ आ जायगे! हम कोई ५व िदन गंगापु र पहँच गए. यहाँ मै अपने एक प रिचत से िमलने आया हआ था. तब बात कर! शमा जी ने फ़ोन काटा और मु झे ये सब बताया. गम ने कोलाहल मचा रखा था! मै और शमा जी तब उ राखंड म देहरादून आये हए थे .यवसायी था और अजमेर और जयपु र म उसके एक-दो होटल थे. सु न के मेरे को अजीब सी बात लगी ये! मने कहा. बड़ी मु ि कल से उसको कुं दन उसको जोधपु र से वािपस घर लाया था. िजला संवाई माधोपु र से आया था. "शमा जी बात अजीब तो है. िफर बाद म बात करे " और शमा जी ने यही कहा! हम िद ली आये . उसक बेटी अ पताल जाते ही ठीक हो गयी थी! डॉ टस भी बड़े िवि मत थे! कुं दन के बार बार आ ह करने के प ात मने वहाँ जाने क वीकृ ित दे दी! कुं दन तो वयं हमको ले ने आने वाला था. मने सोचा. वो लोग उसको हॉि पटल ले जा रहे ह. वहाँ कुं दन वैसे ही आँख िबछाए बैठा था! हम वहाँ पहंचे. कुं दन से िमले.

यही न?" "हाँ गु जी. "िकसी और लड़क के साथ ऐसा हआ?" मने पूछा. कल सु बह मु झको नसी से िमलवाना. बु खार भी साल म ही कभी हआ होगा. "उसने कहा क एक च कर आया. उसने िगलास म मिदरा डाली. यह आस-पड़ोस क ही ह सारी" उसने बताया. तो उसको बीमारी या थी?" मने पूछा. तब से ही उसके साथ ऐसा हो रहा है. कभी नह . पु नह था उसका. और उलटी का मन हआ और िफर नीचे िगर पड़ी.का ये भाव अ यंत सौहादपूण और ने ही लगा! कुं दन ने फ़ौरन ही अपने घर म फ़ोन िकया क गु जी आ गए ह. "कुं दन जी. ऐसा ही!" वो बोला. बेहोश हो गयी. और ये ही हो रहा है इसके साथ गु जी तबसे" उसने कहा! "एक काम करना कुं दन जी. आधे घंटे म पहँच जायगे! और हम आधे घंटे से थोडा से िवल ब के बाद वहाँ पहंचे! कुं दन के दो क याय ही थ . मै उसको जांचना चाहता हँ" मने कहा. "अभी बु लवाऊं गु जी?" उसने कहा. "नह गु जी. अपने साथ िनरािमष भोजन लाया और २ मिदरा क बोतल! शमा जी ने उसका थोडा उपहास उड़ाया! चूंिक दोन ही सहपाठी रहे थे तो बोलने का लहजा वही तू-तड़ाक था! पर तु दोन म ने ह बहत था! और इसी वजह से मै यहाँ आया था! कुं दन ने सारा भोजन एक ड गे म डाला उर त त रयां लगा द . िफर. उसके बाद मै और शमा जी नानािद हे तु चले गए! राि समय कुं दन आया. 2 . "नह गु जी. "कभी पहले ऐसा हआ हो उसके साथ?" मने पूछा. उसके साथ िकतनी लड़िकयां गय थ ?" मने सवाल िकया. ले िकन उसके िलए उसक ये दो क याएं ही लड़के से अिधक थ उसके िलए! मु झे ये बेहद अ छा लगता है! क या इस िृ क जिनका है! उसका स मान अित आव यक है!! हम घर पहंचे तो कुं दन ने घर म िमठाई आिद और तमाम ताम-झाम का बंध कर रखा था! हमने चाय पी और थोड़ी सी िमठाई खायी. "अ छा! एक बात और बताओ. एकदम िफट रही है वो. "ये ६ लड़िकयां थ जी. मने अपना िगलास उठा कर सम त शि य का ध यवाद िकया! और उसके बाद मै अपना िगलास गटक गया! िफर होनी शु हई ं हमारी बात! मने कुं दन से पूछा. एक बात बताओ. ये नसी आपक बेटी िकतने वष क है?" "जी २१ वष क " उसने जवाब िदया "अ छा! तु मने बताया था क वो जब जोधपु र गयी थी. िकसी के साथ नह हआ" उसने जवाब िदया. "ह म! एक बात और! जब आप उसको यहाँ ले के आये . वैसे कभी जु काम भी नह !" उसने बताया.

"गु जी. कोई १० बजे मु झे बेहोशी सी हई. समय हआ तो हम सोने चले गए."नह अभी नह . १० बजे जाना है मु झ"े उसने बताया. "नह गु जी. वहाँ से जब वािपस आये रात को तो मेरा बदन बेहद गरम था. "हाँ गु जी. "जी हम वहां मेहरानगढ़ गए थे. और उसके बाद मेरी आँख यह गंगापु र म खु ली. बदन गरम होता है और बेहोशी आ जाती है. "कुं दन जी? नसी कहाँ है?" "जी वो अभी नीचे ही है. शमा जी और कुं दन को बाहर भे ज िदया. मै लाता हँ उसको अभी" उसने जवाब िदया और नसी को ले ने नीचे चला गया. रात होते-होते मेरी तिबयत और िबगड़ गयी. "नसी? तु म जोधपु र गय थ ? मने पूछा. ले िकन चे हरे पर स दय िव मान था! उसने आते हमको णाम िकया! मने उस से कहा. मने अपने साथ लायी एक टेबले ट खा ली थी. आधु िनक प रवेश म! शरीर से थोड़ी भारी थी. ले िकन कोई फायदा नह हआ. " मा क िजये गु जी" कुं दन ने हाथ जोड़कर कहा. "ठीक है. अब जो करना-देखना था वो सु बह ही देखना था! सु बह मेरी न द ज़रा देर से खु ली. कोई २ महीने पहले " उसने कहा. मेरे सामने म मी और पापा खड़े थे" "अ छा नसी. "कहाँ ठहरे थे वहाँ? मने पूछा. "आओ नसी! कैसी हो?" "मै ठीक हँ गु जी" उसने आँख नीचे करते हए कहा. "िकतने लोग थे तु म?" मने पूछा. डॉ टस हैरान ह" उसने जवाब िदया. इसीिलए हम वहाँ ठहरे थे" उसने बताया. वो बैठ गयी. थोड़ी देर बाद नसी आई. ले िकन अ पताल जाने तक मै वतः ही ठीक हो जाती हँ. इस समय तो कतई नह " मने जवाब िदया. कह अभी जाना तो नह ?" मने िकया. साथ म गरमा-गरम कचौिड़याँ! ना ता करने के बाद मने कुं दन से कहा. तु म यहाँ बैठो ज़रा" मने उसको वहां एक कुस क ओर इशारा करते हए कहा. उ ह भी देर से जागने म थोड़ी हैरत हई! उसके बाद िन य-कम से फा रग हए और तब कुं दन ने चाय का बंध िकया. वो उसी बा टी म रहने देना. "मेरी एक सहे ली के मामा जी का घर है वहाँ. मै देख लूँगा िक 3 . तु म एक काम करना. मने उनको जगाया. उसके बाद हम खाने -पीने म य त रहे . तो मने पूछने शु िकये. "कोई बात नह नसी. नहाने के प ात जो पानी बचता है. "अ छा नसी. उनको पहले ही सूिचत िकया गया था. शमा जी भी सो रहे थे. मु झे पता चला िक तु म यहाँ भी कभी-कभी बीमार हो जाती हो? कैसा महसूस होता है?" मने िकया. कभी-कभी मेरी आँख के सामने अँधेरा आ जाता है. ७ बज चु के थे. उजला-वण और सामा य कद. "तु हारी तिबयत वहां कब ख़राब हई नसी?" मने पूछा. "जी हम मु झे िमलकर ६ लड़िकयां थ " उसने बताया.

अपनी गदन उलटे कंधे पर रख ली और अपने सीधे हाथ क ऊँगली से 'ना-ना' करने के इशारे करने लगी! मने तब एक मं जागृत िकया. कुं दन से पूछ िक नसी कब तक घर वािपस आएगी?" "ठीक है गु जी. उसक पाँव क छोटी ऊँगली फड़क रही थी. ले िकन उसने एक झटके से वो हाथ मु झसे छुड़ा िलया! अथात उसके ऊपर जो भी था वो नह चाहता था क मै उसको पश क ँ ! तब मने उसके माँ-बाप से कहा क इसके दोन हाथ पकड़ ल. नसी अपने कमरे म अपने िब तर पर बेसु ध पड़ी थी. मने अपने आव यक काम िक कुछ व तु एं अपने बैग से िनकाल कर बाहर रख ल तब तक. आप कुं दन से कह के एक रोटी बनवाएं. अब शमा जी और कुं दन वहाँ आये. उसको अपने हाथ पर पढ़कर मै आगे बाधा. मने शमा जी से कहा. "अभी कह देता हँ" उ ह ने कहा और कुं दन को ऊपर बु ला कर वैसी एक रोटी तैयार करने को कह िदया. "ठीक है गु जी" उसने कहा और वािपस चली गयी. और शमा जी इसक टांग पकड़ ल.या परे शानी है तु हारे साथ!" मने उसको कहा. आप एक काम कर. वो नीचे बैठी. बस मु झ.े शमा जी को और अपने माँ-बाप को अनजानी िनगाह से देखती रही और अपने सीधे हाथ से अपना घु टना खु जलाती रही! मने िफर कहा. मने वो ऊँगली पकड़ी तो नसी उठ के बैठ गयी! मने कहा. डे ढ़-दो घंट म वािपस आ जाये गी गु जी" "ठीक है. िच लाते हए! जैसे मने उसका हाथ मरोड़ िदया हो! 4 . मने कुं दन को नसी से क हई बात बता द और नहाने के बाद का पानी रखना है. एक तरफ से िसक हई और दूसरी तरफ से क ची" मने कहा. ये नसी को दु बारा देखने से ही पता चले गा. मै वािपस ऊपर वाले कमरे म आया. मै भी उसको घूर घूर के देखता रहा! मने िफर दु बारा कहा' "नसी?" नसी ने कोई जवाब नह िदया. और शमा जी को भी बु लाया. मने उसका वो हाथ पकड़ िलया. उसक तिबयत िफर से खराब हो रही थी. उसका चे हरा मु रझाया हआ था. ले िकन ये लपे ट कहाँ से लगी है. "नसी अपनी एक सहे ली के साथ कुछ खरीदने गयी है. मै उठा एक मं पढ़ा और अपनी आँख पर मला. वो भी बता िदया! और कुं दन से मने कहा िक नसी के नहाने के बाद कोई और दूसरा वहाँ नहाने न जाए! आधे घंटे बाद मेरे पास कुं दन आया और बताया क नसी नहाने के बाद बचा हआ पानी एक बा टी म छोड़ गयी है. वो अपने घु टना खु जलाती रही. "नसी िकसी लपे ट का िशकार हो गयी है. मने उसको गौर से देखा. ढाई घंटे बाद नसी आिपस आई. उसके बाद गु सलखाने म गया. क नसी िकसी हानी ताक़त का िशकार हो गयी है! ले िकन ये बात मने शमा जी को तो कही. तब तक हम कुछ तैयारी कर ले ते ह शमा जी. कुं दन को नह . िकसने लगाई है. उ ह ने ऐसा करना चाहा तो वो िब तर पर कड़ी हो गयी. िबना पलक मारे मु झे करीब ५ िमनट तक देखती रही. मने पानी को एक अंजु ल म भर और िफर पानी पर अिभम ण िकया. "नसी?" उसने मेरी तरफ देखा. मु झ तक ऐसी खबर आई और मै नीचे आया नसी को देखने . "नसी?" उसने कोई जवाब नह िदया. मै अपनी तैया रय म लग गया. मने उसका हाथ पकड़ा. मै अभी पूछता हँ कुं दन से" वो बोले और नीचे चले गए. पानी एक दम काला हो गया! इसका अथ था. शमा जी थोड़ी देर बाद वािपस ऊपर आये और बोले .

ये लड़क मु झे भा गयी है!" उसने कहा! "अरे ! आप तो राजा साहब ह! और ये बेचारी गरीब-गु रबा लड़क ! ये कैसा िमलान?" मने भी चु टक ली! "चु प करो तु म! ये बात हमको नह पसंद! हाँ. िफर मै बताऊंगा. भला ये भी कोई बात है?" उसने कहा! उसका ऐसा जवाब सु नकर मेरी हंसी छू ट पड़ी! "अबे जो मै पूछ रहा हँ .मने कहा. 5 . मेरा हाथ छोड़ पहले . दम घु ट रहा है मेरा" उसने कहा. "नसी?" "कौन नसी.. अब ना कहना ऐसा दु बारा!" उसने मु झे थ पड़ िदखाते हए कहा! "अ छा! अ छा राजा साहब! नह कहँगा ऐसा दु बारा! मा कर दीिजये !" मने कहा! " मा कर िदया भाई हमने आपको! यार! आपसे बात करके िदलखु श हो गया हमारा तो!" उसने मेरे सर पर हाथ फेर कर कहा! "जी ध यवाद राजा साहब!" मने भी मजाक से कहा! "अ छा एक बात तो बताओ राजा साहब? इस लड़क को आप बीमार करते हो.राजा ठाकुर साहब! जोधपु र वाले. एक काम कर. "तेरे जैसे तो मै रोज देखता हँ मंडी म!" उसने हँसते हए कहा! "मंडी म? कौन सी मंडी म? चल ये ही बता!" मने पूछा "मै नह बताऊंगा! तूने तो कुछ बताया ही नह मु झे. "हाँ अब बता. मने हाथ छोड़ िदया! और उस से बोला. कौन है तू? कहाँ से आया है? कौन सी मंडी?" "देखो जी. है ना?" मने कहा! उसने अपनी गदन ऊपर से नीचे तक िहलाई कई बार! "अ छा ठाकुर साहब! इस बेचारी लड़क को कैसे पकड़ िलया आपने ?" मने वही ँ िब तर पर बैठते हए पूछा! "ओ जी बात ये है. तू उसका जवाब तो दे ? िफर मै भी अपना प रचय दे दूंगा तु झे!" मने कहा. िफर अ पताल जाकर ये ठीक हो जाती है.. उसक बीवी के आंस ू िनकल पड़े . "अ छा. मने उसका हाथ अभी भी थामे हआ था! "तू अपना नाम बता पहले .. कौन नसी? कोई नसी नह है यहाँ!" उसके गले से एक मदाना आवाज़ आई! ये आवाज़ सु नकर कुं दन और उसक बीवी डर गए. मु झसे ही सवाल कर रहा है. मने तब शमा जी से कह के उनको बाहर भे ज िदया और दरवाज़ा अ दर से बंद कर िलया! "तो िफर तू कौन है? ये तो बता?" मने हँसते हए पूछा. हम ह राजा ठाकुर! हम जोधपु र के ह! सोजाती मंडी म रहाइश है हमारी!" उसने बताया और हंस पड़ा! "अ छा राजा साहब! ओह. अपना नाम!" उसने कहा! "मेरा नाम सु नेगा तो गश आ जाएगा तु झ!े अब बता अपना नाम!" मने कहा.

"हाँ! हाँ! यार ज़ र पूिछए!" उसने हंस के कहा! "आप इस लड़क को कब छोड़गे?" मने कहा. मने दोन को हँसते हए बाहर भे ज िदया! "हाँ राजा साहब अब बताइये आप!" मने कहा. अब ज़बरद ती मत कर मेरे साथ. "अरे राजा साहब. प का छोड़ना पड़े गा!" मने कहा! "देख यार. "भाई राजा साहब. "ये देखा! आया ना मजा!" मने नसी के दोन हाथ पकडे और नीचे कर िदए! और मै बोला. कब िवदाई ले गा यहाँ से?" 6 . ये ही बात है! ले िकन िकसी को बताना नह " उसने धीरे से कहा! "अ छा राजा साहब. छोड़ना तो पड़े गा. "सु न ओ राजा! अब मै आिखरी बार पूछ रहा हँ . अब बार यूँ पूछता है?" उसने कहा.. ले िकन ये डॉ टर लोग मेरे मु ंह म ना जाने या या घु सेड़े जा रहे थे! मने देखा तो मु झे िबजली का करं ट याद आ गया! मै वहाँ से भाग गया! अब जब भी ये साले इसको वहाँ ले जाते ह तो मु झे डर लग जाता है. और जब अ पताल म दािखल िकया गया था मु झे तो मै तो मर ही चु का था. "सबके सामने नह बताऊंगा! पहले इनको यहाँ से भे जो" उसने शमा जी और कुं दन क तरफ इशारे करके कहा.. "अबे हम मजाक कर रहे है?? " उसने गु से से कहा.वाह वाह! और तू कह रहा है इसको कब छोड़गे!" ऐसा कह के वो जोर से हंसा! "अ छा! तो आपका कहना है िक आप इसको नह छोड़गे. मने शमा जी और कुं दन को अ दर बु ला िलया.. और वैसे भी ये आपको पसंद है! ऐसा अ छा थोड़े ही ना लगता है!" "हमारे साथ रहोगे तो ऐसे ही मजे करोगे भाई!" उसने हंसके कहा! "देखो राजा साहब! बस अब बहत हआ ये मजाक!" मने कहा. िक मेरी मौत िबजली के करं ट से हई थी. मै भाग जाता हँ! समझे आप?" उसने अपने दोन हाथ से ताल ठोक कर ऐसा कहा! "ओह! अ छा! तो ये बात है राजा साहब!" मने कहा! "हाँ जी. यही ना? मै खड़ा हआ और ऐसा बोला! "हाँ यार. "यार बात ऐसी है.. ये बात तो बाद िक ह.. आँख और वो. तो िफर मने कहा. "इसको नह छोडू ंगा मै अब! साली क काया तो देख! इसके ह ठ. या फक पड़ता है इसको!" उसने एक आँख बंद करके कहा! ऐसा बोल के वो उठा और नसी का टॉप ऊपर कर िदया! और बोला.िबलकुल ठीक! वो कैसे?" मने पूछा वो थोडा चु प हआ और मु झे बोला. एक बात पूछूं?" मने कहा.. एक काम कर तू भी मजे ले ले इसके साथ.

तांकाझाँका! िफर िब तर पर बैठ गया! मने उस से कहा. इसिलए तेरे को भगाने क ठानी है!" मने कहा. "है नह थी. ये मेरी हड् िडयां तोड़ देगा. "१३ साल हो गए जी" उसने बताया "िकतनी उ थी तब तेरी?" मने पूछा. 7 . आजा कर ले दो दो हाथ!" उसने अपने दोन हाथ को मल कर कहा! तब मने अपने एक खबीस को हािज़र िकया! खबीस को देखते ही उसको कंपकंपी छू ट गयी! दहाड़ मारके रोने लगा! "यार. " याह हआ था या?" मने पूछा."ये या बदतमीजी है?" वो िच लाया! "तेरे को मने बहत व त दे िदया राजा जी! अब तेरी ऐसी भिजया बनाऊंगा िक तू इसको तो या िकसी को भी देखने लायक नह रहे गा" मने उस से कहा! "ये ही है दो ती का िसला?" उसने धीमे से कहा! "कैसी दो ती? मने तेरे को कहा िक तू जा अब यहाँ से. समझा?" मने कहा. लिकन तू अभी तक नह मान रहा है. उठा िलया! "तु झे या िमले गा मु झे यहाँ से भगा के यार?" उसने कहा. "चल थोडा बहत तो मै भी लड़ना जानता हँ. "नह मा ं गा! अ छा एक बात तो बता. एक काम कर.अब मेरी मजबूरी है डंडा इ तेमाल करने क !" मने ऐसा कह के वहाँ रखा एक लकड़ी का कोई औज़ार सा था गिणत का. सफ़ेद कमीज़ और काली पै ट! मै उसके सामने जा के बैठा! "मारोगे तो नह ना?" उसने कहा. "और तु झे िकतनी भाय ह ऐसी लडिकयां?" मने हंस के पूछा! "अभी तो जी ये ही है" उसने कहा. मु झे जान से मार देगा. भगा भाई!" उसने रोते रोते कहा और नीचे उतर के मु झसे िलपट गया! अब मने खबीस को वािपस भे ज िदया! और नसी को अपने से अलग िकया! उसने मु झसे हटते ही चार तरफ देखा. तू इस म से िनकल जा बाहर और इस कुस पर बैठ!" मने वहाँ एक कुस पर पड़ी िकताब हटाय और उसको इशारा िकया यहाँ आने का! उसने गदन िहलाई िक ठीक है! वो उसमे से िनकला और सामने पड़ी कुस पर बैठ गया! नसी ने एक झटका खाया और बेहोश हो गयी! राजा का दर याना क़द. "२२ साल" वो बोला. "सु न राजा. इसको भगा यहाँ से. "नह जी" उसने जवाब िदया. "मने इस लड़क के िपता को वचन िदया है. तु झे 'िनबटे' हए िदन िकतने हए?" मने पूछा.

"हाँ यार! एक बार! एक बार करा दे भाई! करा दे! मै तेरे पाँव पडू "ं उसने कहा और मेरे पाँव पकड़ िलए! मने उसको उठाया और िफर से कुस पर िबठा िदया! वो धीरे से आगे आया और मेरे कान म बोला. "आजकल अपना डे रा जोधपु र मंडी म है!" उसने बताया! "और अब कहाँ जाएगा?" मने पूछा. "यार. "कहाँ जाऊँगा यार? पता नह कह वहाँ भी क ज़ा हो गया हो! मै तो बेघर हो गया यार!" उसने रोती सी सूरत बनायी! िफर एकदम तपाक से बोला. "इनको बाहर भे ज दे. मै खु द ही भाग गया!" उसने हंस के कहा! "आजकल कहाँ भटक रहा है तू?" मने पूछा. भाई? समझ ना आयो?" "तू कब तक इस ेत योनी म भटकता रहे गा? कभी िकसी गलत आदमी के हाथ पड़ गया तो पालतू कु ा बना ले गा तेरे को. मु झे रख ले अपने साथ. ३ जोधपु र म ही थ !" उसने बताया! "िफर या हआ? मार भगाया तेरे को?" मने पूछा. 8 . और िफर ना जाने िकस िकस के हाथ म पड़े गा! समझा?" "हाँ. "अगर मै तेरे को मु "कैसे मु कर दूँ तो??" मने कहा. मजा आ जाएगा! तु झे भी और मु झे भी!" "तू मेरे िकसी काम नह है. हम तो काम कर अपना-अपना! देख कैसी म त लग रही है कू डी!!" "सु न अबिक अगर तूने इसका िज भी िकया ना तो तु झे ऐसी जगह बांधंग ू ा िक तेरा स यानाश हो जाएगा!" "ओ ना यार! गु सा ना कर भाई!" उसने अपने हाथ जोड़कर कहा. समझ गया!" वो बोला. तू ठहरा ठरक ! डरपोक!" मने कहा! "लड़ाई-वगैरह मु झे पसंद नह है यार! िकसी के ऊपर 'चढ़वाना' हो तो बता. "वो मु झे पकड़ने वाले थे. एक जयपु र म थी. भाई लूट िलया!" उसने अपने सर पर हाथ मारके कहा! "इस से पहले कौन कौन थ ? मने मजाक िकया! "यार."लूट िलया आपने तो मेरा सब-कुछ. ले िकन हो कोई लड़क ही! काम िनकालो अपना-अपना!" उसने ठहाका लगाया! "मै ऐसे काम नह करता राजा यार!" मने जवाब िदया! "भाई मेरा काम करवा दे एक बार बस!" उसने कहा! "नह यार!" मने कहा.

और कहा िक थोडा िनरािमष भोजन का बंध करो और ऊपर कमरे म ले जाओ! िनरािमष भोजन रात को लाया गया था. एक बात बता. "अब तू ही देख ले या करना है. मै तो आज पे ट भर के खाऊंगा!" उसने कहा! मने उसको खाने का इशारा िकया! वो बेचारा एक भूखे ब चे क तरह खाने पर टू ट के पड़ा! तब शमा जी ने उसको एक िगलास शराब का भर कर िदया! उसने एक ही बार म सारा िगलास गटक िलया! और खाने म म त हो गया! नसी ठीक हो गयी थी! मै और शमा जी कुं दन से िवदा ले कर वािपस िद ली आ गए! मै राजा को भी अपने साथ ले आया था! वो मेरे साथ ११ िदन तक रहा. णाम िकया और लोप हो गया! एक भटकती आ मा को मु ि िमल चु क थी! उसका ेत-योिन भोग समा हो गया था! मने इस धरा पर अपना काय संप न कर िदया था शेष रिचयता के हाथ म था! 9 . कबसे खाना नह खाया तूने?" मने पूछा. िजलाता है िजला. मने उसको नीचे का इशारा िकया! वो नीचे आया! मने एक मं से शमा जी िक आँख पर योग िकया! अब वो भी उस राजा को देख सकते थे! शमा जी ने कहा. "राजा यार. शमा जी से िमला. "िकसी ने नह िखलाया यार आज तलक" उसने बताया! "चल मै तु झे खाना िखलाता हँ. मारता है मार!" उसने कहा! "ठीक है. मने उसको खूब भोजन कराया और मिदरापान कराया! िफर वो िनयत ितिथ आ गयी! मने राजा क ेता मा को शु िकया और करीब २ घंटे क कड़ी ि या के प ात मने राजा क भटकती ेता मा को मु कर िदया! अपनी िवदाई से पहले वो मेरे गले िमला.और नसी पर एक मं . और तू देख हम तेरी सेवा कर रहे ह!" "आपका शु ि या यार."तो िफर या सोचा?" मने कहा. शराब पीता है?" मने पूछा! "हाँ! पीता हँ मै शराब! यार तेरा भला होगा!" उसने कहा! तब मने शमा जी और कुं दन को वहां से हटाया. ये भूतेत हमारी सेवा करते ह. और जब तक मै ना कहँ िकसी भी व तु को हाथ ना लगाये! उसने हाथ जोड़ के सहमित जताई! मने नसी के माँ-बाप को नसी के कमरे म बु लाया. राजा हवा म लटका हआ था.योग िकया! नसी को होश आ गया! मने उनसे कहा िक इसको ने हलवा दीिजये और उसके बाद मै ऊपर कमरे म आ गया! वहाँ शमा जी ने खाना एक थाली म रखा. वही ले के कुं दन ऊपर चला गया शमा जी के साथ! तब मने राजा को भी कहा िक वो ऊपर जाए.

नम कार से वागत हआ तो मने वही ँ अ णा के बारे म पूछा.वष २०११ यमु ना नगर ह रयाणा क एक घटना मै इस भयावह शमशान म शमा जी के साथ आया था. अपने पित के साथ और एक अिववािहत अपने िपता समेत यहाँ आये थे. ये बदलाव प रवारजन ने भी महसूस िकए और उस से इस िवषय पर बात क . अ णा पढाई समा करके नौकरी कर रही थी और नौक रय के आवेदन भी कर रही थी. मने तब अ णा का कोई कपडा मंगवाया िद ली. भाई अभी पढाई कर रहा था. अ णा के प रवार वाल से अ णा का हर इलाज जो संभव था. िजसका िववाह २ वष पहले हो चु का था. उसका चु लबु ला वभाव अब गंभीर हो गया था. िफर छु ी होने के बाद घर पर आ गयी. अ णा को बचाना अ यंत आव यक था. ऊपरी इलाज भी करवाया ले िकन कोई फायदा नह हआ. उ ह ने बताया िक अभी तक कोई सु धार नह है उसमे और उसक हालत िदन-बािदन खराब होती जा रही है. बाल खु ले हए थे! और वो बहत तेज-तेज झटके खा रही थी! जन उसक माता जी ने उसको पकड़ना चाहा तो िकसी ने 1 . और मेरे साथ २ मिहलाय. करीब ५ िदन तक वो यह रही. और नंिदता ने भी उसको टेक लगा रखी थी. करवाया था."अरे ज़रा देखना अ णा या कर रही है अभी इसी समय? और जो जवाब आया उको सु न के अ णा के िपता. उसका वा य तो सु धर गया था. अ णा क उ कोई २३ वष होगी. २६ वष य ी नंिदता और उसका पित वीण. जब कायालय जाती थी तो ही बात करती थी. एक बार अ णा को कायालय के काम से सूरजकुं ड मेले म आना पड़ा. सम या इसी अ णा के साथ हई थी! अ णा का प रवार शांत और सु खी प रवार था. उसका इलाज कराया गया. उसने अपने दोन हाथ अपनी पीठ पर. उसके प रवार म माता-िपता. उसको अ पताल म दािखल करवाया गया. अ णा का भाई वो कपडा दे गया! मै जब राि -समय अलख म बैठा तो मु झे सारा रह य पता चल गया! अ णा बेहद खतरनाक ि थित म थी. अ णा अिववािहत थी और उसके िपता कमल. और ५ िदन के बाद वो वािपस अपने घर चली आई. ३ िदन क अथक मेहनत प ात ये अवसर आया था. राि २ बजे. उ ह ने मु झसे बात करवाई. कोई बदलाव नह आया. वो वहाँ एक ह ते रही. पर तु कोई लाभ नह हआ था. भाई यहाँ और माता जी वहाँ डर गए! अ णा अपने िब तर से उतर कर फश पर बैठी थी. मने तब शमा जी से कहा क वो अ णा क घर पर इ ला कर द िक हम आ रहे ह! हम अ ल ै माह म ११ तारीख को वहाँ पहँच गए! हमको ले ने अ णा के िपता और उनका पु आये थे. मै उनको उस शमशान म बने एक कमरे म ले आया. मु झे अ णा क सम या के बारे म मेरी एक प रिचत मिहला ने बताया था. और एक छोटा भाई था. खाना भी कम ही खाया करती थी. काम बिढ़या था तो प रवार म कोई भी कमी जैसी बात नह थी. रखे हए थे. अ णा को उसके िपता ने संभाल के पकड़ रखा था. डॉ टस को कोई बीमारी नह िमल पा रही है! मने तभी अ णा के िपता से कहा िक वो अभी अपने घर फ़ोन कर और ये पूछ िक अ णा या कर रही है? उ ह ने फ़ोन िकया और पूछा. वो कुल िमला के ४ लोग थे. ले िकन यवहार वैसा ही रहा. इसका िज अ णा क माता ने मेरी एक प रिचत मिहला से िकया. ले िकन उसने गोलमोल जवाब देकर उनके सवाल को टाल िदया! कोई २० िदन के बाद वो बीमार हो गयी. िपता क एक िमठाई क दु कान थी. ये बात मने शमा जी के अित र िकसी और को नह बताई. कंधे के ऊपर से ले जाकर. एक शादीशु दा. और उनको वहाँ िबठाया. िदन ित िदन वो मृ यु क ओर बढे जा रही थी. वो एक ह त-िश प से स बंिधत एक कायालय म नौकरी करती थी. एक बड़ी बहन. उसका झाड-फूं क का इलाज भी करवाया ले िकन वो भी असफल! अ णा का ये प रवार यमु ना नगर म रहता था. ले िकन जब वो आई तो काफ बदली बदली सी थी. और जब वािपस आती थी तो अपना दरवाज़ा बंद करके अ दर ही बैठी रहती थी.

वो वहाँ से अपने हाथ-पांव पर दौड़ीदौड़ी आई और मेरे ऊपर आ कर ले ट गयी. जब इनका फ़ोन आया. एक सरकारी अिधकारी थे यहाँ पर. "ये मकान आपने कब िलया था?" "कोई ८ साल पहले " वो बोले . वो वहां से उठ और उस कुस पर बैठ गय . मने उसको आवाज़ दी तो कई आवाज़ देने पर भी उसने दरवाज़ा नह खोला. उ ह ने नम कार िकया तो मने भी. "घबराइये मत. वो अपने पाँव ऐसे चला रही थी जैसे िक कोई उसको मार रहा हो और वो छोटने िक कोिशश कर रही हो. अ णा क माता जी वही ँ कमरे के बाहर बैठी हई ं थ . उ ह ने ने ही ये मकान बेचा था" 2 . अ णा के भाई ने गाडी दौड़ा दी! हम लोग ज दी ज दी अ णा के घर पहंचे! दरवाज़ा खु ला हआ था. वो मु झे बैठने को बोले तो मने उनको सीधे अ णा के कमरे म जाने क बात कही. और िनढाल हो गयी. हाँ िभड़ा ज़ र हआ था. और ऐसा लगा क उसके हाथ िकसी ने पीछे से पकड़ रख ह . मने उनको िह मत बधाई और मै शमा जी के साथ अ णा के कमरे म घु सा. मै पीछे िक तरफ िगरी. मने पूछा. लाल रं ग के. मने देखा क वो फश पर बैठी हई थी. मने अ णा के िपता से पूछा. सड़क के साथ ही एक बाउं ी बनही थी. मकान के दाय हाथ पर एक सड़क थी. "माता जी. ले िकन वो ज दी-ज दी कपडे पहन कर बाहर चली गयी" उ ह ने रोते रोते कहा. "हाँ. मै अ दर भागी. आपने या देखा. लोहे के ९ थाल पड़े थे. िजनमे र भरा हआ था! ऊपर छत पर क ड़े -मकोड़े रग रहे थे. मने जैसे ही फ़ोन उठाया. अ णा का घर काफ बड़ा था. कोई ३०० गज म. लात अड़ाई. वो मु झे फ़ौरन अ णा के कमरे म ले गए. बंजर सा मैदान! सारा नज़ारा उनके मकान क छत से देखा जा सकता था. सामने एक खु ला पाक जैसा. जो मेरे पे ट म लगी. यािन क वहाँ मकान क जो कतार थी उसमे ये आिखर म था. मने थोडा जोर लगाया तो दरवाज़ा खु ला. जब अ णा के िपताजी का फ़ोन आया तो आप उसको कमरे म देखने गय . िजनमे क ड़े रग रहे थे. दो तरफ से खु ला.याह आकृ ितयाँ! ये सभी एक दूसरे से टकरा रही थ ! ये आकृ ितयाँ न भूत थ . बाल खु ले हए थे.थान लग रह