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ददेवननागररी ललिलपि कना ससंलक्षिप्त पिलरचय

ददेवननागररी एक ललिलपि हहै लजिसममें अनदेक भनारतरीय भनाषनाएएँ तथना कक छ लवददेशरी भनाषनाएसं ललिखरीसं जिनातरी हहैं। ससंस्कक त, पिनाललि, लहन्दरी, मरनाठरी, ककसंकणरी, लसन्धरी, कश्मरीररी,
नदेपिनालिरी, तनामनाङ भनाषना, गढ़वनालिरी, बकडक, असंलगकना, मगहरी, भकजिपिकररी, महैलथलिरी, ससंथनालिरी आलद भनाषनाएएँ ददेवननागररी ममें ललिखरी जिनातरी हहैं। इसकदे अलतलरक्त कक छ
लस्थलतयकसं ममें गकजिरनातरी, पिसंजिनाबरी, लबष्णकपिलक रयना मलणपिकररी, रकमनानरी और उदरर्दू भनाषनाएसं भरी ददेवननागररी ममें ललिखरी जिनातरी हहैं।
अलधतकतर भनाषनाओसं करी तरह ददेवननागररी भरी बनायमें सदे दनायमें ललिखरी जिनातरी हहै। पिपरत्यदेक शब्द कदे ऊपिर एक रदेखना लखसंचरी हकतरी हहै (कक छ वणर्णों कदे ऊपिर रदेखना नहरीसं
हकतरी हहै)इसदे लशरकरदेरे़खना कहतदे हहैं। इसकना लवकनास बपरनाहरी ललिलपि सदे हकआ हहै। यह एक ध्वन्यनात्मक ललिलपि हहै जिक पिपरचललित ललिलपियकसं (रकमन, अरबरी, चरीनरी आलद) ममें
सबसदे अलधक वहैजनालनक हहै। इससदे वहैजनालनक और व्यनापिक ललिलपि शनायद कदेवलि आइपिरीए ललिलपि हहै। भनारत करी कई ललिलपियनाएँ ददेवननागररी सदे बहक त अलधक लमलितरीजिकलितरी हहैं, जिहैसदे- बनासंग्लिना, गकजिरनातरी, गकरुमकखरी आलद। कम्प्यरटर पिपरकगपरनामकसं करी सहनायतना सदे भनारतरीय ललिलपियकसं कक पिरस्पिर पिलरवतर्दून बहक त आसनान हक गयना हहै।
भनारतरीय भनाषनाओसं कदे लकसरी भरी शब्द यना ध्वलन कक ददेवननागररी ललिलपि ममें ज्यकसं कना त्यकसं ललिखना जिना सकतना हहै और लफिर ललिखदे पिनाठ कक लिगभग ‘हर -ब-हर ’ उच्चनारण
लकयना जिना सकतना हहै , जिक लक रकमन ललिलपि और अन्य कई ललिलपियकसं ममें सम्भव नहरीसं हहै , जिब तक लक उनकना ककई खनास मनानकरीकरण न लकयना जिनायदे , जिहैसदे
आइटप रनासंस यना आइएएसटरी।
इसममें कक लि ५२ अक्षिर हहैं, लजिसममें १४ स्वर और ३८ व्यसंजिन हहैं। अक्षिरकसं करी कप रम व्यवस्थना (लवन्यनास) भरी बहक त हरी वहैजनालनक हहै। स्वर-व्यसंजिन, ककमलि-कठकर,
क नार ददेवनगर (कनाशरी) मदे पिपरचलिन कदे कनारण इसकना
अल्पिपिपरनाण-महनापिपरनाण, अनकननालसक्य-अन्तस्थ-उष्म इत्यनालद वगर्गीकरण भरी वहैजनालनक हहैं। एक मत कदे अनस
ननाम ददेवननागररी पिडना।
भनारत तथना एलशयना करी अनदेक ललिलपियकसं कदे ससंकदेत ददेवननागररी सदे अलिग हहैं (उदरर्दू कक छकडकर), पिर उच्चनारण व वणर्दू -कपरम आलद ददेवननागररी कदे हरी समनान हहैं —
क्यकसंलक वक सभरी बपरनाहरी ललिलपि सदे उत्पिन्न हक ई हहैं। इसललिए इन ललिलपियकसं कक पिरस्पिर आसनानरी सदे ललिप्यन्तलरत लकयना जिना सकतना हहै। ददेवननागररी लिदेखन करी दकलष्ट
सदे सरलि, ससौन्दयर्दू करी दकलष्ट सदे सकन्दर और वनाचन करी दकलष्ट सदे सकपिनाठ्य हहै।
१) वतर्दूमनान ममें ससंस्ककत ,पिनालिरी , लहन्दरी , मरनाठरी , ककसंकणरी , लसन्धरी, कनाश्मरीररी , नदेपिनालिरी , बकडक , महैलथलिरी आलद भनाषनाऒसं करी ललिलपि हहै ।
२) उदरर्दू कदे अनदेक सनालहत्यकनार भरी उदरर्दू ललिखनदे कदे ललिए अब ददेवननागररी ललिलपि कना पिपरयकग कर रहदे हहैं ।
३) इसकना लवकनास बपरनाम्हरी ललिलपि सदे हकआ हहै ।
४) यह एक ध्वन्यनात्मक ( फिकनदेलटक यना फिकनदेलमक ) ललिलपि हहै जिक पिपरचललित ललिलपियकसं ( रकमन , अरबरी , चरीनरी आलद ) ममें सबसदे अलधक वहैजनालनक हहै ।
५) इसमदे कक लि ५२ अक्षिर हहैं , लजिसममें १४ स्वर और ३८ व्यसंजिन हहैं ।
६) अक्षिरकसं करी कपरम व्यवस्थना ( लवन्यनास ) भरी बहकत हरी वहैजनालनक हहै । स्वर-व्यसंजिन , ककमलि-कठकर, अल्पिपिपरनाण-महनापिपरनाण , अनकननालसक्य-अन्तस्थ-उष्म
इत्यनालद वगर्गीकरण भरी वहैजनालनक हहैं ।
७) एक मत कदे अनकसनार ददेवनगर ( कनाशरी ) मदे पिपरचलिन कदे कनारण इसकना ननाम ददेवननागररी पिडना ।
८) इस ललिलपि ममें लवश्व करी समस्त भनाषनाओसं करी ध्वलनओसं कक व्यक्त करनदे करी क्षिमतना हहै । यहरी वह ललिलपि हहै लजिसमदे ससंसनार करी लकसरी भरी भनाषना कक रूपिनान्तलरत
लकयना जिना सकतना हहै ।
९) इसकरी वहैजनालनकतना आश्चयर्दूचलकत कर ददेतरी हहै ।
१०) भनारत तथना एलशयना करी अनदेक ललिलपियकसं कदे ससंकदेत ददेवननागररी सदे अलिग हहैं ( उदरर्दू कक छकडकर), पिर उच्चनारण व वणर्दू -कपरम आलद ददेवननागररी कदे हरी समनान हहै
। इसललिए इन ललिलपियकसं कक पिरस्पिर आसनानरी सदे ललिप्यन्तलरत लकयना जिना सकतना हहै ।
११) यह बनायमें सदे दनायमें करी तरफ़ ललिखरी जिनातरी हहै ।
१२) ददेवननागररी लिदेखन करी दकलष्ट सदे सरलि , ससौन्दयर्दू करी दकलष्ट सदे सकन्दर और वनाचन करी दकलष्ट सदे सकपिनाठ्य हहै ।
ददेवननागररी ललिलपि कदे अनन्य गकण
१) एक ध्वलन : एक सनासंकदेलतक लचन्ह
२) एक सनासंकदेलतक लचन्ह : एक ध्वलन
३) स्वर और व्यसंजिन ममें तकर्दूससंगत एवसं वहैजनालनक कपरम-लवन्यनास
४) वणर्णों करी पिरणर्दूतना एवसं सम्पिन्नतना ( ५२ वणर्दू , न बहकत अलधक न बहक त कम )
५) उच्चनार और लिदेखन ममें एकरुपितना
६) उच्चनारण स्पिष्टतना ( कहरीसं ककइ ससंदहदे नहरी )
७) लिदेखन और मकदरप ण मदे एकरूपितना ( रकमन , अरबरी और फ़नारसरी मदे हलसलिलखत और मकलदपरत रूपि अलिग-अलिग हहैं )
८) ददेवननागररी ललिलपि सवनार्दूलधक ध्वलन लचन्हकसं कक व्यक्त करतरी हहै ।
९) ललिलपि लचन्हकसं कदे ननाम और ध्वलन मदे ककई अन्तर नहरीसं ( जिहैसदे रकमन ममें अक्षिर कना ननाम “बरी” हहै और ध्वलन “ब” हहै )
१०) मनातपरनाओसं कना पिपरयकग
११) अधर्दू अक्षिर कदे रूपि करी सकगमतना

ददेवननागररी पिर महनापिकरुषकसं कदे लवचनार १) लहन्दकस्तनान करी एकतना कदे ललियदे लहन्दरी भनाषना लजितनना कनाम ददेगरी . लनयम तथना अलधलनयम ससंघ ककी रराजभराषरा नकीतत ———————— ससंघ करी रनाजिभनाषना लहसंदरी और ललिलपि ददेवननागररी हहै । ससंघ कदे शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग हकनदे वनालिदे असंककसं कना रूपि भनारतरीय असंककसं कना असंतरनाष्टप ररीय रूपि हहै {ससंलवधनान कना अनकच्छदे द 343 (1)} । पिरन्तक लहसंदरी कदे अलतलरक्त असंगरप देजिरी भनाषना कना पिपरयकग भरी सरकनाररी कनामकनाजि ममें लकयना जिना सकतना हहै (रनाजिभनाषना अलधलनयम करी धनारना 3) । ससंसद कना कनायर्दू लहसंदरी ममें यना असंगरप देजिरी ममें लकयना जिना सकतना हहै । पिरन्तक रनाज्यसभना कदे सभनापिलत महकदय यना लिककसभना कदे अध्यक्षि महकदय लवशदेष पिलरलस्थलत ममें सदन कदे लकसरी सदस्य कक अपिनरी मनातकभनाषना ममें सदन कक ससंबकलधत करनदे करी अनकमलत ददे सकतदे हहैं । {ससंलवधनान कना अनकच्छदे द 120} लकन पिपरयकजिनकसं कदे ललिए कदेवलि लहसंदरी कना पिपरयकग लकयना जिनानना हहै . गकह मसंतरप नालिय करी ओर सदे जिनाररी लकए गए लनददेशकसं दनारना लनधनार्दूलरत लकयना गयना हहै । . उससदे बहक त अलधक कनाम ददेवननागररी ललिलपि ददे सकतरी हहै । – आचनायर्दू लवनबना भनावदे २) ददेवननागररी लकसरी भरी ललिलपि करी तकलिनना ममें अलधक वहैजनालनक एवसं व्यवलस्थत ललिलपि हहै । – सर लवललियम जिकन्स ३) मनव मलस्तष्क सदे लनकलिरी हकई वणर्दूमनालिनाओसं ममें ननागररी सबसदे अलधक पिरणर्दू वणर्दूमनालिना हहै । – जिनान कपरनाइस्ट ४) उदरर्दू ललिखनदे कदे ललियदे ददेवननागररी अपिननानदे सदे उदरर्दू उत्कषर्दू कक पिपरनाप्त हकगरी । – खकशवन्त लससंह रनाजिभनाषना नरीलत. रनाजिभनाषना लनयम 1976 और उनकदे असंतगर्दूत समय समय पिर रनाजिभनाषना लवभनाग. लकन कदे ललिए लहसंदरी और असंगरप देजिरी दकनकसं भनाषनाओसं कना पिपरयकग आवश्यक हहै और लकन कनायर्णों कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना कना पिपरयकग लकयना जिनानना हहै . यह रनाजिभनाषना अलधलनयम 1963.

ससंघ कदे शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग हकनदे वनालिदे असंककसं कना रूपि भनारतरीय असंककसं कना असंतरनार्दूष्टप ररीय रूपि हकगना। (2) खसंड (1) ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. यना (ख) असंककसं कदे ददेवननागररी रूपि कना.सरासंतविधरातनक पपरराविधरान ——————— भनारत कदे ससंलवधनान ममें रनाजिभनाषना सदे ससंबलसं धत भनाग-17 अध्यनाय 1–ससंघ करी भनाषना अनकच्छदे द 120. अपिनरी मनातक-भनाषना ममें सदन कक ससंबकलधत करनदे करी अनकजना ददे सकदेगना । (2) जिब तक ससंसदप लवलध दनारना अन्यथना उपिबसंध न करदे तब तक इस ससंलवधनान कदे पिपरनारसंभ सदे पिसंदरप ह वषर्दू करी अवलध करी समनालप्त कदे पिश्चनातप यह अनकच्छदे द ऐसदे पिपरभनावरी हकगना मनानक “यना असंगरप देजिरी ममें” शब्दकसं कना उसममें सदे लिकपि कर लदयना गयना हक । अनकच्छदे द 210: लवधनान-मसंडलि ममें पिपरयकग करी जिनानदे वनालिरी भनाषना – (1) भनाग 17 ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी.क यथनालस्थलत. जिक लहसंदरी ममें यना असंगरप देजिरी ममें अपिनरी पियनार्दूप्त अलभव्यलक्त नहरीसं कर सकतना हहै . जिक पिरवकर्दूक्त भनाषनाओसं ममें सदे लकसरी भनाषना ममें अपिनरी पियनार्दूप्त अलभव्यलक्त नहरीसं कर सकतना हहै .क यथनालस्थलत. लकसंतक अनकच्छदे द 348 कदे उपिबसंधकसं कदे अधरीन रहतदे हकए. इस ससंलवधनान कदे पिपरनारसंभ सदे पिसंदरप ह वषर्दू करी अवलध तक ससंघ कदे उन सभरी शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना कना पिपरयकग लकयना जिनातना रहदेगना लजिनकदे ललिए उसकना ऐसदे पिपरनारसंभ सदे ठरीक पिहलिदे पिपरयकग लकयना जिना रहना थना : पिरन्तक रनाष्टप रपिलत उक्त अवलध कदे दसौरनान. ससंघ करी रनाजिभनाषना– (1) ससंघ करी रनाजिभनाषना लहसंदरी और ललिलपि ददेवननागररी हकगरी. लवलध दनारना (क) असंगरप देजिरी भनाषना कना. यह खसंड इस पिपरकनार पिपरभनावरी हकगना मनानक इसममें आनदे वनालिदे “पिसंदरप ह वषर्दू” शब्दकसं कदे स्थनान पिर “पिच्चरीस वषर्दू” शब्द रख लदए गए हकसं : पिरसंत क यह और लक अरूणनाचलि पिपरददेश. ऐसदे पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग उपिबसंलधत कर सकदेगरी जिक ऐसरी लवलध ममें लवलनलदर्दूष्ट लकए जिनाएसं। अनकच्छदे द 344. ससंसदप उक्त पिन्दपरह वषर्दू करी अवलध कदे पिश्चनातप. लवधनान सभना कना अध्यक्षि यना लवधनान पिलरषदप कना सभनापिलत अथवना उस रूपि ममें कनायर्दू करनदे वनालिना व्यलक्त लकसरी सदस्य कक. अपिनरी मनातकभनाषना ममें सदन कक ससंबकलधत करनदे करी अनकजना ददे सकदेगना । (2) जिब तक रनाज्य कना लवधनान-मसंडलि लवलध दनारना अन्यथना उपिबसंध न करदे तब तक इस ससंलवधनान कदे पिपरनारसंभ सदे पिसंदरप ह वषर्दू करी अवलध करी समनालप्त कदे पिश्चनातप यह अनकच्छदे द ऐसदे पिपरभनावरी हकगना मनानक ” यना असंगरप देजिरी ममें ” शब्दकसं कना उसममें सदे लिकपि कर लदयना गयना हक : पिरसंत क लहमनाचलि पिपरददेश. ससंसदप ममें कनायर्दू लहसंदरी ममें यना असंगरप देजिरी ममें लकयना जिनाएगना पिरसंत. ससंसदप ममें पिपरयकग करी जिनानदे वनालिरी भनाषना – (1) भनाग 17 ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. लकसंतक अनकच्छदे द 348 कदे उपिबसंधकसं कदे अधरीन रहतदे हकए. गकवना और लमजिकरम रनाज्यकसं कदे लवधनान-मसंडलिकसं कदे ससंबध सं ममें यह खसंड इस पिपरकनार पिपरभनावरी हकगना मनानक इसममें आनदे वनालिदे ” पिसंदरप ह वषर्दू ” शब्दकसं कदे स्थनान पिर ” चनालिरीस वषर्दू ” शब्द रख लदए गए हकसं । अनकच्छदे द 343. रनाज्य कदे लवधनान-मसंडलि ममें कनायर्दू रनाज्य करी रनाजिभनाषना यना रनाजिभनाषनाओसं ममें यना लहसंदरी ममें यना असंगरप देजिरी ममें लकयना जिनाएगना पिरसंत. आददेश दनारना. रनाज्य सभना कना सभनापिलत यना लिकक सभना कना अध्यक्षि अथवना उस रूपि ममें कनायर्दू करनदे वनालिना व्यलक्त लकसरी सदस्य कक. ससंघ कदे शनासकरीय पिपरयकजिनकसं ममें सदे लकसरी कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना कदे अलतलरक्त लहसंदरी भनाषना कना और भनारतरीय असंककसं कदे असंतरनार्दूष्टप ररीय रूपि कदे अलतलरक्त ददेवननागररी रूपि कना पिपरयकग पिपरनालधककत कर सकदेगना। (3) इस अनकच्छदे द ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. रनाजिभनाषना कदे ससंबध सं ममें आयकग और ससंसद करी सलमलत– . मदेघनालिय और लतपरपिकरना रनाज्यकसं कदे लवधनान-मसंडलिकसं कदे ससंबध सं ममें. मलणपिकर.

(घ) ससंघ कदे लकसरी एक यना अलधक लवलनलदर्दूष्ट पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग लकए जिनानदे वनालिदे असंककसं कदे रूपि. (ग) अनकच्छदे द 348 ममें उलल्लिलखत सभरी यना लकन्हरीसं पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग करी जिनानदे वनालिरी भनाषना. एक आयकग गलठत करदेगना जिक एक अध्यक्षि और आठवरीसं अनकसच भनाषनाओसं कना पिपरलतलनलधत्व करनदे वनालिदे ऐसदे अन्य सदस्यकसं सदे लमलिकर बनदेगना लजिनकक रनाष्टप रपिलत लनयकक्त करदे और आददेश ममें आयकग दनारना अनकसरण करी जिनानदे वनालिरी पिपरलकपरयना पिलरलनलश्चत करी जिनाएगरी। (2) आयकग कना यह कतर्दूव्य हकगना लक वह रनाष्टप रपिलत कक– (क) ससंघ कदे शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए लहसंदरी भनाषना कदे अलधकनालधक पिपरयकग.(1) रनाष्टप रपिलत. उस रनाज्य ममें पिपरयकग हकनदे वनालिरी भनाषनाओसं ममें सदे लकसरी एक यना अलधक भनाषनाओसं कक यना लहसंदरी कक उस रनाज्य कदे सभरी यना लकन्हरीसं शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग करी जिनानदे वनालिरी भनाषना यना भनाषनाओसं कदे रूपि ममें असंगरीकनार कर सकदेगनाशः पिरसंत क जिब तक रनाज्य कना लवधनान-मसंडलि. सनासंस्ककलतक और वहै जनालनक उन्नलत कना और लिकक सदेवनाओसं कदे ससंबध सं ममें अलहसंदरी भनाषरी क्षिदेतरप कसं कदे व्यलक्तयकसं कदे न्यनायससंगत दनावकसं और लहतकसं कना सम्यक ध्यनान रखदेगना। (4) एक सलमलत गलठत करी जिनाएगरी जिक तरीस सदस्यकसं सदे लमलिकर बनदेगरी लजिनममें सदे बरीस लिकक सभना कदे सदस्य हकसंगदे और दस रनाज्य सभना कदे सदस्य हकसंगदे जिक कपरमशशः लिकक सभना कदे सदस्यकसं और रनाज्य सभना कदे सदस्यकसं दनारना आनपिक नालतक पिपरलतलनलधत्व पिद्धलत कदे अनकसनार एकलि ससंकपरमणरीय मत दनारना लनवनार्दूलचत हकसंगदे। (5) सलमलत कना यह कतर्दूव्य हकगना लक वह खसंड (1)कदे अधरीन गलठत आयकग करी लसफिनालरशकसं करी पिररीक्षिना करदे और रनाष्टप रपिलत कक उन पिर अपिनरी रनाय कदे बनारदे ममें पिपरलतवदेदन ददे। (6) अनकच्छदे द 343 ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. लकसरी रनाज्य करी जिनससंख्यना कदे लकसरी अनकभनाग दनारना बकलिरी जिनानदे वनालिरी भनाषना कदे ससंबध सं ममें लवशदेष उपिबसंध– यलद इस लनलमत्त मनासंग लकए जिनानदे पिर रनाष्टप रपिलत कना यह समनाधनान हक जिनातना हहै लक लकसरी रनाज्य करी जिनससंख्यना कना पियनार्दूप्त भनाग यह चनाहतना हहै लक उसकदे दनारना बकलिरी जिनानदे वनालिरी भनाषना कक रनाज्य दनारना मनान्यतना दरी जिनाए तक वह लनददेश ददे सकदेगना लक ऐसरी भनाषना कक भरी उस रनाज्य ममें सवर्दू तरप यना उसकदे लकसरी भनाग ममें ऐसदे पिपरयकजिन कदे ललिए. आयकग भनारत करी औदकलगक. एक रनाज्य और दरसरदे रनाज्य कदे बरीच तथना लकसरी रनाज्य और ससंघ कदे बरीच पितपरनालद करी रनाजिभनाषना हकगरी : पिरसंत क यलद दक यना अलधक रनाज्य यह करनार करतदे हहैं लक उन रनाज्यकसं कदे बरीच पितपरनालद करी रनाजिभनाषना लहसंदरी भनाषना हकगरी तक ऐसदे पितपरनालद कदे ललिए उस भनाषना कना पिपरयकग लकयना जिना सकदेगना। अनकच्छदे द 347. रनाज्य करी रनाजिभनाषना यना रनाजिभनाषनाएसं– अनकच्छदे द 346 और अनकच्छदे द 347 कदे उपिबसंधकसं कदे अधरीन रहतदे हकए. इस ससंलवधनान कदे पिपरनारसंभ सदे पिनासंच वषर्दू करी समनालप्त पिर और तत्पिश्चनातप ऐसदे पिपरनारसंभ सदे दस वषर्दू करी र री ममें लवलनलदर्दूष्ट लवलभन्न समनालप्त पिर. (ख) ससंघ कदे सभरी यना लकन्हरीसं शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना कदे पिपरयकग पिर लनबर्बंधनकसं. जिक वह लवलनलदर्दूष्ट करदे. कदे बनारदे ममें लसफिनालरश करदे। (3) खसंड (2) कदे अधरीन अपिनरी लसफिनालरशमें करनदे ममें . लवलध दनारना. लकसरी रनाज्य कना लवधनान-मसंडलि. एक रनाज्य और दरसरदे रनाज्य कदे बरीच यना लकसरी रनाज्य और ससंघ कदे बरीच पितपरनालद करी रनाजिभनाषना– ससंघ ममें शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग लकए जिनानदे कदे ललिए तत्समय पिपरनालधककत भनाषना.पिपरनाददेलशक भनाषनाएसं अनकच्छदे द 345. अन्यथना उपिबसंध न करदे तब तक रनाज्य कदे भरीतर उन शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना कना पिपरयकग लकयना जिनातना रहदेगना लजिनकदे ललिए उसकना इस ससंलवधनान कदे पिपरनारसंभ सदे ठरीक पिहलिदे पिपरयकग लकयना जिना रहना थना। अनकच्छदे द 346. शनासकरीय मनान्यतना दरी जिनाए। . रनाष्टप रपिलत खसंड (5) ममें लनलदर्दूष्ट पिपरलतवदेदन पिर लवचनार करनदे कदे र र्दू पिपरलतवदेदन कदे यना उसकदे लकसरी भनाग कदे अनकसनार लनददेश ददे सकदेगना। पिश्चनातप उस ससंपिण अध्यनाय 2. आददेश दनारना. (ड) ससंघ करी रनाजिभनाषना तथना ससंघ और लकसरी रनाज्य कदे बरीच यना एक रनाज्य और दरसरदे रनाज्य कदे बरीच पितपरनालद करी भनाषना और उनकदे पिपरयकग कदे ससंबध सं ममें रनाष्टप रपिलत दनारना आयकग कक लनदर्देलशत लकए गए लकसरी अन्य लवषय. लवलध दनारना.

लनयम.और (iii) इस ससंलवधनान कदे अधरीन अथवना ससंसद यना लकसरी रनाज्य कदे लवधनान-मसंडलि दनारना बननाई गई लकसरी लवलध कदे अधरीन लनकनालिदे गए यना बननाए गए सभरी आददेशकसं. अनकच्छदे द 348 कदे खसंड (1) ममें उलल्लिलखत लकसरी पिपरयकजिन कदे ललिए पिपरयकग करी जिनानदे वनालिरी भनाषना कदे ललिए उपिबसंध करनदे वनालिना ककई लवधदेयक यना ससंशकधन ससंसद कदे लकसरी सदन ममें रनाष्टप रपिलत करी पिरवर्दू मसंजिरर री कदे लबनना पिकरशःस्थनालपित यना पिपरस्तनालवत नहरीसं लकयना जिनाएगना और रनाष्टप रपिलत लकसरी ऐसदे लवधदेयक कक पिकरशःस्थनालपित यना लकसरी ऐसदे ससंशकधन कक पिपरस्तनालवत लकए जिनानदे करी मसंजिरर री अनकच्छदे द 344 कदे खसंड (1) कदे अधरीन गलठत आयकग करी लसफिनालरशकसं पिर और उस अनकच्छदे द कदे खसंड (4) कदे अधरीन गलठत सलमलत कदे पिपरलतवदेदन पिर लवचनार करनदे कदे पिश्चनातप हरी ददेगना. लवधदेयककसं आलद कदे ललिए पिपरयकग करी जिनानदे वनालिरी भनाषना– (1) इस भनाग कदे पिरवर्दूगनामरी उपिबसंधकसं ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. भनाषना सदे ससंबलसं धत कक छ लवलधयनासं अलधलनयलमत करनदे कदे ललिए लवशदेष पिपरलकपरयना– इस ससंलवधनान कदे पिपरनारसंभ सदे पिसंदरप ह वषर्दू करी अवलध कदे दसौरनान. लवलनयमकसं और उपिलवलधयकसं कदे.उस लवधनान-मसंडलि ममें पिकरशःस्थनालपित लवधदेयककसं यना उसकदे दनारना पिनालरत अलधलनयमकसं ममें अथवना उस रनाज्य कदे रनाज्यपिनालि दनारना पिपरख्यनालपित अध्यनाददेशकसं ममें अथवना उस उपिखसंड कदे पिहैरना (iv) ममें लनलदर्दूष्ट लकसरी आददेश. लजिसकना मकख्य स्थनान उस रनाज्य ममें हहै . पिपरनालधककत पिनाठ असंगरप देजिरी भनाषना ममें हकसंगदे। (2) खसंड(1) कदे उपिखसंड (क) ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. उच्चतम न्यनायनालिय और उच्च न्यनायनालियकसं ममें और अलधलनयमकसं. ससंघ ममें यना रनाज्य ममें पिपरयकग हकनदे वनालिरी लकसरी भनाषना ममें अभ्यनावदेदन ददेनदे कना हकदनार हकगना। अनकच्छदे द 350 क. (ख) (i) ससंसदप कदे पिपरत्यदेक सदन यना लकसरी रनाज्य कदे लवधनान-मसंडलि कदे सदन यना पिपरत्यदेक सदन ममें पिकरशःस्थनालपित लकए जिनानदे वनालिदे सभरी लवधदेयककसं यना पिपरस्तनालवत लकए जिनानदे वनालिदे उनकदे ससंशकधनकसं कदे. (ii) ससंसद यना लकसरी रनाज्य कदे लवधनान-मसंडलि दनारना पिनालरत सभरी अलधलनयमकसं कदे और रनाष्टप रपिलत यना लकसरी रनाज्य कदे रनाज्यपिनालि दनारना पिपरख्यनालपित सभरी अध्यनाददेशकसं कदे . लनयमकसं. भनाषनाई अल्पिससंख्यक-वगर्णों कदे ललिए लवशदेष अलधकनाररी– (1) भनाषनाई अल्पिससंख्यक-वगर्णों कदे ललिए एक लवशदेष अलधकनाररी हकगना लजिसदे रनाष्टप रपिलत लनयकक्त करदेगना। . लहन्दरी भनाषना कना यना उस रनाज्य कदे शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग हकनदे वनालिरी लकसरी अन्य भनाषना कना पिपरयकग पिपरनालधककत कर सकदेगनाशः पिरसंत क इस खसंड करी ककई बनात ऐसदे उच्च न्यनायनालिय दनारना लदए गए लकसरी लनणर्दूय. यथनालस्थलत. अन्यथना नहरीसं। अध्यनाय 4– लवशदेष लनददेश अनकच्छदे द 350.अध्यनाय 3 – उच्चतम न्यनायनालिय. जिब तक ससंसदप लवलध दनारना अन्यथना उपिबसंध न करदे तब तक– (क) उच्चतम न्यनायनालिय और पिपरत्यदेक उच्च न्यनायनालिय ममें सभरी कनायर्दूवनालहयनासं असंगरप देजिरी भनाषना ममें हकसंगरी. जिहनासं लकसरी रनाज्य कदे लवधनान-मसंडलि नदे. लडकपररी यना आददेश कक लिनागर नहरीसं हकगरी। (3) खसंड (1) कदे उपिखसंड (ख) ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. लकसरी रनाज्य कना रनाज्यपिनालि रनाष्टप रपिलत करी पिरवर्दू सहमलत सदे उस उच्च न्यनायनालिय करी कनायर्दूवनालहयकसं ममें . उच्च न्यनायनालियकसं आलद करी भनाषना अनकच्छदे द 348. लवलनयम यना उपिलवलध ममें पिपरयकग कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना सदे लभन्न ककई भनाषना लवलहत करी हहै वहनासं उस रनाज्य कदे रनाजिपितपर ममें उस रनाज्य कदे रनाज्यपिनालि कदे पिपरनालधकनार सदे पिपरकनालशत असंगरप देजिरी भनाषना ममें उसकना अनकवनाद इस अनकच्छदे द कदे अधरीन उसकना असंगरप देजिरी भनाषना ममें पिपरनालधककत पिनाठ समझना जिनाएगना। अनकच्छदे द 349. व्यथना कदे लनवनारण कदे ललिए अभ्यनावदेदन ममें पिपरयकग करी जिनानदे वनालिरी भनाषना– पिपरत्यदेक व्यलक्त लकसरी व्यथना कदे लनवनारण कदे ललिए ससंघ यना रनाज्य कदे लकसरी अलधकनाररी यना पिपरनालधकनाररी कक. पिपरनाथलमक स्तर पिर मनातकभनाषना ममें लशक्षिना करी सकलवधनाएसं– पिपरत्यदेक रनाज्य और रनाज्य कदे भरीतर पिपरत्यदेक स्थनानरीय पिपरनालधकनाररी भनाषनाई अल्पिससंख्यक-वगर्णों कदे बनालिककसं कक लशक्षिना कदे पिपरनाथलमक स्तर पिर मनातकभनाषना ममें लशक्षिना करी पियनार्दूप्त सकलवधनाओसं करी व्यवस्थना करनदे कना पिपरयनास करदेगना और रनाष्टप रपिलत लकसरी रनाज्य कक ऐसदे लनददेश ददे सकदेगना जिक वह ऐसरी सकलवधनाओसं कना उपिबसंध सकलनलश्चत करनानदे कदे ललिए आवश्यक यना उलचत समझतना हहै। अनकच्छदे द 350 ख.

तथना (ख) ससंसद ममें कनायर्दू कदे ससंव्यवहनार कदे ललिए पिपरयकग ममें लिनाई जिनातरी रह सकदेगरी : पिरसंत क ससंघ और लकसरी ऐसदे रनाज्य कदे बरीच. वहनासं लहन्दरी ममें ऐसदे पितपरनालद कदे सनाथ-सनाथ उसकना अनकवनाद असंगरप देजिरी भनाषना ममें भदेजिना जिनाएगना : पिरन्तक यह और भरी लक इस उपिधनारना करी लकसरी भरी बनात कना यह अथर्दू नहरीसं लिगनायना जिनाएगना लक वह लकसरी ऐसदे रनाज्य कक. ससंसद ममें कनायर्दू कदे ससंव्यवहनार. लजिसनदे लहन्दरी कक अपिनरी रनाजिभनाषना कदे रूपि ममें नहरीसं अपिननायना हहै . 1963 कहना जिना सकदेगना। (2) धनारना 3. उसकरी सहमलत सदे. लहन्दरी कदे अलतलरक्त असंगरप देजिरी भनाषना. ससंलक्षिप्त ननाम और पिपरनारम्भ(1) यह अलधलनयम रनाजिभनाषना अलधलनयम. ससंघ कदे सनाथ यना लकसरी ऐसदे रनाज्य कदे सनाथ. लजिसनदे लहन्दरी कक अपिनरी रनाजिभनाषना कदे रूपि ममें अपिननायना हहै . लहसंदरी भनाषना कदे लवकनास कदे ललिए लनददेश– ससंघ कना यह कतर्दूव्य हकगना लक वह लहसंदरी भनाषना कना पिपरसनार बढ़नाए. पिलरभनाषनाएसं–इस अलधलनयम ममें जिब तक लक ससंदभर्दू सदे अन्यथना अपिदेलक्षित न हक. (ख) ‘लहन्दरी’ सदे वह लहन्दरी अलभपिपरदेत हहै लजिसकरी ललिलपि ददेवननागररी हहै। 3. 1963 ~~~~~~~~~~~~~~ उन भनाषनाओसं कना. शनासकरीय रनाजिपितपर ममें अलधसरचनना दनारना लनयत करदे और इस अलधलनयम कदे लवलभन्न उपिबन्धकसं कदे ललिए लवलभन्न तनाररीखमें लनयत करी जिना सकमेंगरी। 2. धनारना 3 कदे सम्बन्ध ममें. पितपरनालद कदे पिपरयकजिनकसं कदे ललिए लहन्दरी कक पिपरयकग ममें लिनानदे सदे लनवनालरत करतरी हहै . लनयत लदन सदे हरी. रनाष्टप रपिलत कक पिपरलतवदेदन ददे और रनाष्टप रपिलत ऐसदे सभरी पिपरलतवदेदनकसं कक ससंसदप कदे पिपरत्यदेक सदन कदे समक्षि रखवनाएगना और ससंबलसं धत रनाज्यकसं करी सरकनारकसं कक लभजिवनाएगना। अनकच्छदे द 351. 1965 कना 26 वनासं लदन अलभपिपरदेत हहै और इस अलधलनयम कदे लकसरी अन्य उपिबन्ध कदे सम्बन्ध ममें वह लदन अलभपिपरदेत हहै लजिस लदन कक वह उपिबन्ध पिपरवकत्त हकतना हहै. 1965 कदे 26 वमें लदन कक पिपरवकत्त हकगरी और इस अलधलनयम कदे शदेष उपिबन्ध उस तनाररीख कक पिपरवकत्त हकसंगदे लजिसदे कदेन्दपररीय सरकनार.उपिबन्ध करनदे कदे ललिए अलधलनयम । भनारत गणरनाज्य कदे चसौदहवमें वषर्दू ममें ससंसद दनारना लनम्नललिलखत रूपि ममें यह अलधलनयलमत हकशः1. कदेन्दपररीय और रनाज्य अलधलनयमकसं और उच्च न्यनायनालियकसं ममें कलतपिय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग ममें लिनाई जिना सकमेंगरी. शहैलिरी और पिदकसं कक आत्मसनात करतदे हकए और आठवरीसं अनकसच और जिहनासं आवश्यक यना वनासंछनरीय हक वहनासं उसकदे शब्द-भसंडनार कदे ललिए मकख्यतशः ससंस्ककत सदे और गसौणतशः अन्य भनाषनाओसं सदे शब्द गपरहण करतदे हकए उसकरी समकलद्ध सकलनलश्चत करदे। रराजभराषरा अतधतनयम.(2) लवशदेष अलधकनाररी कना यह कतर्दूव्य हकगना लक वह इस ससंलवधनान कदे अधरीन भनाषनाई अल्पिससंख्यक-वगर्णों कदे ललिए उपिबसंलधत रक्षिकपिनायकसं सदे ससंबलसं धत सभरी लवषयकसं कना अन्वदेषण करदे और उन लवषयकसं कदे ससंबध सं ममें ऐसदे असंतरनालिकसं पिर जिक रनाष्टप रपिलत लनलदर्दूष्ट करदे. पितपरनालद कदे पिपरयकजिनकसं कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना पिपरयकग ममें लिनाई जिनाएगरीशः पिरन्तक यह और लक जिहनासं लकसरी ऐसदे रनाज्य कदे. जिनवररी. यना लकसरी अन्य रनाज्य कदे सनाथ. और ऐसदे लकसरी मनामलिदे ममें उस रनाज्य कदे सनाथ पितपरनालद कदे पिपरयकजिनकसं कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना कना पिपरयकग बनाध्यकर न हकगना । . लजिसनदे लहन्दरी कक अपिनरी रनाजिभनाषना कदे रूपि ममें नहरीसं अपिननायना हहै . लजिसनदे लहन्दरी कक अपिनरी रनाजिभनाषना कदे रूपि ममें नहरीसं अपिननायना हहै . (क) ‘लनयत लदन’ सदे. बरीच पितपरनालद कदे पिपरयकजिनकसं कदे ललिए लहन्दरी कक पिपरयकग ममें लिनायना जिनातना हहै . (क) ससंघ कदे उन सब रनाजिकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए लजिनकदे ललिए वह उस लदन सदे ठरीक पिहलिदे पिपरयकग ममें लिनाई जिनातरी थरी . उसकना लवकनास करदे लजिससदे वह भनारत करी सनामनालसक ससंस्ककलत कदे सभरी तत्वकसं करी अलभव्यलक्त कना मनाध्यम बन सकदे और उसकरी पिपरककलत ममें हस्तक्षिदेपि लकए लबनना लहसंदस्क थनानरी ममें र री ममें लवलनलदर्दूष्ट भनारत करी अन्य भनाषनाओसं ममें पिपरयकक्त रूपि. ससंघ कदे रनाजिकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए और ससंसद ममें पिपरयकग कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना कना रहनना– (1) ससंलवधनान कदे पिपरनारम्भ सदे पिन्दपरह वषर्दू करी कनालिनावलध करी समनालप्त हक जिनानदे पिर भरी. जिक ससंघ कदे रनाजिकरीय पिपरयकजिनकसं. जिनवररी. लजिसनदे लहन्दरी कक अपिनरी रनाजिभनाषना कदे रूपि ममें अपिननायना हहै और लकसरी अन्य रनाज्य कदे.

यथनालस्थलत. ससंकल्पि पिनालरत नहरीसं कर लदए जिनातदे और जिब तक पिरवकर्दूक्त ससंकल्पिकसं पिर लवचनार कर लिदेनदे कदे पिश्चनातप ऐसरी समनालप्त कदे ललिए ससंसद कदे हर एक सदन दनारना ससंकल्पि पिनालरत नहरीसं कर लदयना जिनातना। 4 .(2) उपिधनारना (1) ममें अन्तलवर्दू ष्ट लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. अलधसरचननाओसं. सनाधनारण आददेशकसं. जिहनासं पितपरनालद कदे पिपरयकजिनकसं कदे ललिए लहन्दरी यना असंगरप देजिरी भनाषना– (i) कदेन्दपररीय सरकनार कदे एक मसंतरप नालिय यना लवभनाग यना कनायनार्दूलिय कदे और दरसरदे मसंतरप नालिय यना लवभनाग यना कनायनार्दूलिय कदे बरीच . पिपरयकग ममें लिनाई जिनातरी हहै वहनासं उस तनाररीख तक. जिक कपरमशशः लिकक सभना कदे सदस्यकसं तथना रनाज्य सभना कदे सदस्यकसं दनारना आन पिक नालतक पिपरलतलनलधत्व पिद्धलत कदे अनकसनार एकलि ससंकपरमणरीय मत दनारना लनवनार्दूलचत हकसंगदे। (3) इस सलमलत कना कतर्दूव्य हकगना लक वह ससंघ कदे रनाजिकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए लहन्दरी कदे पिपरयकग ममें करी गई पिपरगलत कना पिकनलवर्दू लिककन करमें और उस पिर लसफिनालरशमें करतदे हकए रनाष्टप रपिलत कक पिपरलतवदेदन करमें और रनाष्टप रपिलत उस पिपरलतवदेदन कक ससंसदप कदे हर एक सदन कदे समक्षि रखवनाएगना और सभरी रनाज्य सरकनारकसं कक लभजिवनाएगना । (4) रनाष्टप रपिलत उपिधनारना (3) ममें लनलदर्दूष्ट पिपरलतवदेदन पिर और उस पिर रनाज्य सरकनारकसं नदे यलद ककई मत अलभव्यक्त लकए . कनायनार्दूलिय यना लवभनाग यना कम्पिनरी कना कमर्दूचनाररीवकद लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान पिपरनाप्त नहरीसं कर लिदेतना. जिब तक पिरवकर्दूक्त ससंबलसं धत मसंतरप नालिय. उपिधनारना (3) और उपिधनारना (4). रनाजिभनाषना कदे सम्बन्ध ममें एक सलमलत. इस लवषय कना ससंकल्पि ससंसद कदे लकसरी भरी सदन ममें रनाष्टप रपिलत करी पिरवर्दू मसंजिरर री सदे पिपरस्तनालवत और दकनकसं सदनकसं दनारना पिनालरत लकए जिनानदे पिर. कदे उपिबन्ध तब तक पिपरवकत्त बनदे रहमेंगदे जिब तक उनममें वलणर्दूत पिपरयकजिनकसं कदे ललिए असंगरप देजिरी भनाषना कना पिपरयकग समनाप्त कर ददेनदे कदे ललिए ऐसदे सभरी रनाज्यकसं कदे लवधनान मण्डलिकसं दनारना. अनकभनाग यना कनायनार्दूलिय कना कनायर्दूकरण हहै. (ii) कदेन्दपररीय सरकनार कदे एक मसंतरप नालिय यना लवभनाग यना कनायनार्दूलिय कदे और कदेन्दपररीय सरकनार कदे स्वनालमत्व ममें कदे यना लनयसंतरप ण ममें कदे लकसरी लनगम यना कम्पिनरी यना उसकदे लकसरी कनायनार्दूलिय कदे बरीच . अनकजनापितपरकसं. (iii) कदेन्दपररीय सरकनार यना उसकदे लकसरी मसंतरप नालिय. लवभनाग. लवभनाग यना कनायनार्दूलिय दनारना यना कदेन्दपररीय सरकनार कदे स्वनालमत्व ममें कदे यना लनयसंतरप ण ममें कदे लकसरी लनगम यना कम्पिनरी दनारना यना ऐसदे लनगम यना कम्पिनरी कदे लकसरी कनायनार्दूलिय दनारना लनकनालिदे जिनातदे हहैं यना लकए जिनातदे हहैं . लनयमकसं. (iii) कदेन्दपररीय सरकनार कदे स्वनालमत्व ममें कदे यना लनयसंतरप ण ममें कदे लकसरी लनगम यना कम्पिनरी यना उसकदे लकसरी कनायनार्दूलिय कदे और लकसरी अन्य ऐसदे लनगम यना कम्पिनरी यना कनायनार्दूलिय कदे बरीच . लवभनाग. लवभनाग यना कनायनार्दूलिय दनारना यना उसकरी ओर सदे यना कदेन्दपररीय सरकनार कदे स्वनालमत्व ममें कदे यना लनयसंतरप ण ममें कदे लकसरी लनगम यना कम्पिनरी दनारना यना ऐसदे लनगम यना कम्पिनरी कदे लकसरी कनायनार्दूलिय दनारना लनष्पिनालदत ससंलवदनाओसं और करनारकसं कदे ललिए तथना लनकनालिरी गई अनकजप्तपलतनायकसं. सरचननाओसं और लनलवदना-पिपररूपिकसं कदे ललिए. जिक कदेन्दपररीय सरकनार दनारना यना उसकदे लकसरी मसंतरप नालिय. ऐसदे पितपरनालद कना अनकवनाद.रराजभराषरा कके सम्बन्ध मके सं सतमतत – (1) लजिस तनाररीख कक धनारना 3 पिपरवकत्त हकतरी हहै उससदे दस वषर्दू करी समनालप्त कदे पिश्चनात. पिपरयकग ममें लिनाई जिनाएगरी। (4) उपिधनारना (1)यना उपिधनारना (2) यना उपिधनारना (3) कदे उपिबन्धकसं पिर पिपरलतकरलि पिपरभनाव डनालिदे लबनना यह हहै लक कदेन्दपररीय सरकनार धनारना 8 कदे अधरीन बननाए गए लनयमकसं दनारना उस भनाषना यना उन भनाषनाओसं कना उपिबन्ध कर सकदेगरी लजिसदे यना लजिन्हमें ससंघ कदे रनाजिकरीय पिपरयकजिन कदे ललिए. गलठत करी जिनाएगरी। (2) इस सलमलत ममें तरीस सदस्य हकसंगदे लजिनममें सदे बरीस लिकक सभना कदे सदस्य हकसंगदे तथना दस रनाज्य सभना कदे सदस्य हकसंगदे . असंगरप देजिरी भनाषना यना लहन्दरी ममें भरी लदयना जिनाएगना। (3) उपिधनारना (1)ममें अन्तलवर्दू ष्ट लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी लहन्दरी और असंगरप देजिरी भनाषना दकनकसं हरी– (i) ससंकल्पिकसं. लजिन्हकसंनदे लहन्दरी कक अपिनरी रनाजिभनाषना कदे रूपि ममें नहरीसं अपिननायना हहै . लजिसकदे अन्तगर्दूत लकसरी मसंतरप नालिय. (ii) ससंसद कदे लकसरी सदन यना सदनकसं कदे समक्षि रखदे गए पिपरशनासलनक तथना अन्य पिपरलतवदेदनकसं और रनाजिकरीय कनागजिपितपरकसं कदे ललिए . पिपरयकग ममें लिनायना जिनानना हहै और ऐसदे लनयम बननानदे ममें रनाजिकरीय कनायर्दू कदे शरीघपरतना और दक्षितना कदे सनाथ लनपिटनारदे कना तथना जिन सनाधनारण कदे लहतकसं कना सम्यक ध्यनान रखना जिनाएगना और इस पिपरकनार बननाए गए लनयम लवलशष्टतयना यह सकलनलश्चत करमेंगदे लक जिक व्यलक्त ससंघ कदे कनायर्दूकलिनापि कदे सम्बन्ध ममें सदेवना कर रहदे हहैं और जिक यना तक लहन्दरी ममें यना असंगरप देजिरी भनाषना ममें पिपरवरीण हहैं वदे पिपरभनावरी रूपि सदे अपिनना कनाम कर सकमें और यह भरी लक कदेवलि इस आधनार पिर लक वदे दकनकसं हरी भनाषनाओसं ममें पिपरवरीण नहरीसं हहै उनकना ककई अलहत नहरीसं हकतना हहै। (5) उपिधनारना (1)कदे खसंड (क) कदे उपिबन्ध और उपिधनारना (2). पिपरशनासलनक यना अन्य पिपरलतवदेदनकसं यना पिपरदेस लवजलप्तयकसं कदे ललिए.

उस रनाज्य कदे रनाज्यपिनालि कदे पिपरनालधकनार सदे. कक लि तरीस लदन करी अवलध कदे ललिए रखना जिनाएगना। वह अवलध एक सतपर ममें .लन. ससंलवधनान कदे अनकच्छदे द 348 कदे खण्ड (3) दनारना अपिदेलक्षित असंगरप देजिरी भनाषना ममें उसकदे अनकवनाद कदे अलतलरक्त. जिक ससंसद कदे लकसरी भरी सदन ममें पिकरशःस्थनालपित लकए जिनानदे हकसं और उन सब ससंशकधनकसं कदे. जिब वह सतपर ममें हक. लडकपररी यना आददेश कदे पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरनालधककत कर सकदेगना और जिहनासं ककई लनणर्दूय . उस रनाज्य कदे उच्च न्यनायनालिय दनारना पिनालरत यना लदए गए लकसरी लनणर्दूय.1976 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ सना. कलतपिय उपिबन्धकसं कना जिम्मर-कश्मरीर कक लिनागर न हकननाधनारना 6 और धनारना 7 कदे उपिबन्ध जिम्मर-कश्मरीर रनाज्य कक लिनागर न हकसंगदे। रराजभराषरा (ससंघ कके शरासककीय पपरययोजनयोसं कके तलिए पपरययोग)तनयम. लनयम बननानदे करी शलक्त – (1) कदेन्दपररीय सरकनार इस अलधलनयम कदे पिपरयकजिनकसं कक कनायनार्दूलन्वत करनदे कदे ललिए लनयम. अथवना दक यना अलधक आनककपरलमक सतपरकसं ममें पिरररी हक सकदेगरी । यलद उस सतपर कदे यना पिरवकर्दूक्त आनककपरमलमक सतपरकसं कदे ठरीक बनाद कदे सतपर कदे अवसनान कदे पिरवर्दू दकनकसं सदन उस लनयम ममें ककई पिलरवतर्दून करनदे कदे ललिए सहमत हक जिनाएसं तक तत्पिश्चनात वह ऐसदे पिलरवलतर्दूत रुपि ममें हरी पिपरभनावरी हकगना । यलद उक्त अवसनान कदे पिरवर्दू दकनकसं सदन सहमत हक जिनाएसं लक वह लनयम नहरीसं बननायना जिनानना चनालहए तक तत्पिश्चनात यह लनस्पिपरभनाव हक जिनाएगना । लकन्तक लनयम कदे ऐसदे पिलरवलतर्दूत यना लनस्पिपरभनाव हकनदे सदे उसकदे अधरीन पिहलिदे करी गई लकसरी बनात करी लवलधमनान्यतना पिर पिपरलतकरलि पिपरभनाव नहरीसं पिडदेगना । 9 .हकसं तक उन पिर लवचनार करनदे कदे पिश्चनातप उस समस्त पिपरलतवदेदन कदे यना उसकदे लकसरी भनाग कदे अनकसनार लनददेश लनकनालि सकदेगना : पिरन्तक इस पिपरकनार लनकनालिदे गए लनददेश धनारना 3 कदे उपिबन्धकसं सदे अससंगत नहरीसं हकसंगदे । 5. असंगरप देजिरी भनाषना कदे पिपरनालधककत पिनाठ कदे सनाथ-सनाथ उनकना लहन्दरी ममें अनकवनाद भरी हकगना जिक ऐसरी ररीलत सदे पिपरनालधककत लकयना जिनाएगना. असंगरप देजिरी भनाषना कदे अलतलरक्त लहन्दरी यना उस रनाज्य करी रनाजिभनाषना कना पिपरयकग.उच्च न्यनायनालियकसं कदे लनणर्दूयकसं आलद ममें लहन्दरी यना अन्य रनाजिभनाषना कना वहै कलल्पिक पिपरयकगलनयत लदन सदे हरी यना तत्पिश्चनातप लकसरी भरी लदन सदे लकसरी रनाज्य कना रनाज्यपिनालि. जिक उनकदे समबन्ध ममें ससंसद कदे लकसरी भरी सदन ममें पिपरस्तनालवत लकए जिनानदे हकसं. ससंसद कदे हर एक सदन कदे समक्षि. शनासकरीय रनाजिपितपर ममें अलधसरचनना दनारना. जिक इस अलधलनयम कदे अधरीन बननाए गए लनयमकसं दनारना लवलहत करी जिनाए। 6. 1052 –रनाजिभनाषना अलधलनयम. रनाष्टप रपिलत करी पिरवर्दू सम्मलत सदे. कदेन्दपररीय अलधलनयमकसं आलद कना पिपरनालधककत लहन्दरी अनकवनाद(1) लनयत लदन कक और उसकदे पिश्चनातप शनासकरीय रनाजिपितपर ममें रनाष्टप रपिलत कदे पिपरनालधकनार सदे पिपरकनालशत– (क) लकसरी कदेन्दपररीय अलधलनयम कना यना रनाष्टप रपिलत दनारना पिपरख्यनालपित लकसरी अध्यनाददेश कना. लवलनयम यना उपिलवलध कना लहन्दरी ममें अनकवनाद उसकना लहन्दरी ममें पिपरनालधककत पिनाठ समझना जिनाएगना । (2) लनयत लदन सदे हरी उन सब लवधदेयककसं कदे . अथवना (ख) ससंलवधनान कदे अधरीन यना लकसरी कदेन्दपररीय अलधलनयम कदे अधरीन लनकनालिदे गए लकसरी आददेश . बनना सकदेगरी । (2) इस धनारना कदे अधरीन बननायना गयना हर लनयम. उसकना लहन्दरी ममें अनकवनाद उस रनाज्य कदे शनासकरीय रनाजिपितपर ममें. लनयम. 1963 (1963 कना 19) करी धनारना 3 करी उपिधनारना (4) कदे सनाथ पिलठत धनारना . लनयत लदन कक यना उसकदे पिश्चनातप पिपरकनालशत लकयना जिना सकदेगना और ऐसरी दशना ममें ऐसदे लकसरी अलधलनयम यना अध्यनाददेश कना लहन्दरी ममें अनकवनाद लहन्दरी भनाषना ममें उसकना पिपरनालधककत पिनाठ समझना जिनाएगना। 7 . कलतपिय दशनाओसं ममें रनाज्य अलधलनयमकसं कना पिपरनालधककत लहन्दरी अनकवनादजिहनासं लकसरी रनाज्य कदे लवधनानमण्डलि नदे उस रनाज्य कदे लवधनानमण्डलि दनारना पिनालरत अलधलनयमकसं ममें अथवना उस रनाज्य कदे रनाज्यपिनालि दनारना पिपरख्यनालपित अध्यनाददेशकसं ममें पिपरयकग कदे ललिए लहन्दरी सदे लभन्न ककई भनाषना लवलहत करी हहै वहनासं . लडकपररी यना आददेश (असंगरप देजिरी भनाषना सदे लभन्न) ऐसरी लकसरी भनाषना ममें पिनालरत लकयना यना लदयना जिनातना हहै वहनासं उसकदे सनाथ-सनाथ उच्च न्यनायनालिय कदे पिपरनालधकनार सदे लनकनालिना गयना असंगरप देजिरी भनाषना ममें उसकना अनकवनाद भरी हकगना। 8.कना. बननाए जिनानदे कदे पिश्चनातप यथनाशरीघपर.

लदल्लिरी ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप अलभपिपरदेत हहै. अथनार्दूतशः1. 1963 (1963 कना 19) अलभपिपरदेत हहै. तविस्तरार और पपररारम्भ– (क) इन लनयमकसं कना ससंलक्षिप्त ननाम रनाजिभनाषना (ससंघ कदे शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए पिपरयकग) लनयम. (ग) ‘कमर्दूचनाररी’ सदे कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलिय ममें लनयकलजित ककई व्यलक्त अलभपिपरदेत हहै. अलभपिपरदेत हहै. मध्य पिपरददेश. 1976 हहै। (ख) इनकना लवस्तनार. (ख) क्षिदेतरप ‘ख’ कदे लकसरी रनाज्य यना ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप ममें लकसरी व्यलक्त कक पितपरनालद लहन्दरी यना असंगरप देजिरी ममें भदेजिदे जिना सकतदे हहैं। (3) कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलिय सदे क्षिदेतरप ‘ग’ ममें लकसरी रनाज्य यना ससंघ रनाज्यक्षिदेतरप कक यना ऐसदे रनाज्य ममें लकसरी कनायनार्दूलिय (जिक कदेन्दपररीय सरकनार कना कनायनार्दूलिय न हक)यना व्यलक्त कक पितपरनालद असंगरप देजिरी ममें हकसंगदे। . (घ) ‘अलधसरलचत कनायनार्दूलिय’ सदे लनयम 10 कदे उपिलनयम (4) कदे अधरीन अलधसरलचत कनायनार्दूलिय. लवभनाग यना कनायनार्दूलिय. (ख) ‘कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलिय’ कदे अन्तगर्दूत लनम्नललिलखत भरी हहै . हलरयनाणना. सलमलत यना अलधकरण कना ककई कनायनार्दूलिय. पतरभराषराएसं– इन तनयमयोसं मके. (छ) ‘क्षिदेतरप ख’ सदे गकजिरनात. (च) ‘क्षिदेतरप क’ सदे लबहनार. ससं तक्षिप्त नराम.सं जब तक तक ससं दभर्भ सके अन्यथरा अपकेतक्षित न हयोह(क) ‘अलधलनयम’ सदे रनाजिभनाषना अलधलनयम. तलमलिननाडक रनाज्य कदे लसवनाय सम्पिरणर्दू भनारत पिर हहै। (ग) यदे रनाजिपितपर ममें पिपरकनाशन करी तनाररीख कक पिपरवकत्त हकसंगदे। 2. रनाजिस्थनान और उत्तर पिपरददेश रनाज्य तथना असंडमनान और लनककबनार दरीपि समरह. महनारनाष्टप र और पिसंजिनाब रनाज्य और चसंडरीगढ़ ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप अलभपिपरदेत हहै. (ख) कदेन्दपररीय सरकनार दनारना लनयकक्त लकसरी आयकग.8 दनारना पिपरदत्त शलक्तयकसं कना पिपरयकग करतदे हकए. (ड) ‘लहन्दरी ममें पिपरवरीणतना’ सदे लनयम 9 ममें वलणर्दूत पिपरवरीणतना अलभपिपरदेत हहै . (जि) ‘क्षिदेतरप ग’ सदे खसंड (च) और (छ) ममें लनलदर्दूष्ट रनाज्यकसं और ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप कसं सदे लभन्न रनाज्य तथना ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप अलभपिपरदेत हहै. अथनार्दूतशः(क) कदेन्दपररीय सरकनार कना ककई मसंतरप नालिय. लहमनाचलि पिपरददेश. (झ) ‘लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान’ सदे लनयम 10 ममें वलणर्दूत कनायर्दूसनाधक जनान अलभपिपरदेत हहै । 3. और (ग) कदेन्दपररीय सरकनार कदे स्वनालमत्व ममें यना लनयसंतरप ण कदे अधरीन लकसरी लनगम यना कम्पिनरी कना ककई कनायनार्दूलिय. रराज्ययोसं आतद और ककेन्दपरकीय सरकरार कके करायरार्भलिययोसं सके तभन्न करायरार्भलिययोसं कके सराथ पतपररातद(1) कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलिय सदे क्षिदेतरप ‘क’ ममें लकसरी रनाज्य यना ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप कक यना ऐसदे रनाज्य यना ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप ममें लकसरी कनायनार्दूलिय (जिक कदेन्दपररीय सरकनार कना कनायनार्दूलिय न हक) यना व्यलक्त कक पितपरनालद असनाधनारण दशनाओसं कक छकडकर लहन्दरी ममें हकसंगदे और यलद उनममें सदे लकसरी कक ककई पितपरनालद असंगरप देजिरी ममें भदेजिदे जिनातदे हहैं तक उनकदे सनाथ उनकना लहन्दरी अनकवनाद भरी भदेजिना जिनाएगना। (2) कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलिय सदे– (क) क्षिदेतरप ‘ख’ ममें लकसरी रनाज्य यना ससंघ रनाज्यक्षिदेतरप कक यना ऐसदे रनाज्य यना ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप ममें लकसरी कनायनार्दूलिय (जिक कदेन्दपररीय सरकनार कना कनायनार्दूलिय न हक) कक पितपरनालद सनामनान्यतयना लहन्दरी ममें हकसंगदे और यलद इनममें सदे लकसरी कक ककई पितपरनालद असंगरप देजिरी ममें भदेजिदे जिनातदे हहैं तक उनकदे सनाथ उनकना लहन्दरी अनकवनाद भरी भदेजिना जिनाएगनाशः पिरन्तक यलद ककई ऐसना रनाज्य यना ससंघ रनाज्य क्षिदेतरप यह चनाहतना हहै लक लकसरी लवलशष्ट वगर्दू यना पिपरवगर्दू कदे पितपरनालद यना उसकदे लकसरी कनायनार्दूलिय कदे ललिए आशलयत पितपरनालद ससंबद्ध रनाज्य यना ससंघ रनाज्यक्षिदेतरप करी सरकनार दनारना लवलनलदर्दूष्ट अवलध तक असंगरप देजिरी यना लहन्दरी ममें भदेजिदे जिनाएसं और उसकदे सनाथ दरसररी भनाषना ममें उसकना अनकवनाद भरी भदेजिना जिनाए तक ऐसदे पितपरनालद उसरी ररीलत सदे भदेजिदे जिनाएसंगदे . कदेन्दपररीय सरकनार लनम्नललिलखत लनयम बननातरी हहै .

पिरन्तक यदे पितपरनालद लहन्दरी ममें ऐसदे अनकपिनात ममें हकसंगदे जिक कदेन्दपररीय सरकनार ऐसदे कनायनार्दूलियकसं ममें लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान रखनदे वनालिदे व्यलक्तयकसं करी ससंख्यना. तहन्दकी मके सं पपरराप्त पतपररातद कके उत्तर– लनयम 3 और लनयम 4 ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. (ङ) क्षिदेतरप ‘ख’ यना ‘ग’ ममें लस्थत कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलियकसं कदे बरीच पितपरनालद लहन्दरी यना असंगरप देजिरी ममें हक सकतदे हहैं. पिरन्तक जिहनासं ऐसदे पितपरनालद– (i) क्षिदेतरप ‘क’ यना क्षिदेतरप ‘ख’ लकसरी कनायनार्दूलिय कक ससंबकलधत हहैं वहनासं यलद आवश्यक हक तक. (ख) कदेन्दपररीय सरकनार कदे एक मसंतरप नालिय यना लवभनाग और क्षिदेतरप ‘क’ ममें लस्थत ससंलिग्न यना अधरीनस्थ कनायनार्दूलियकसं कदे बरीच पितपरनालद लहन्दरी ममें हकसंगदे और ऐसदे अनकपिनात ममें हकसंगदे जिक कदेन्दपररीय सरकनार. लहन्दरी ममें पितपरनालद भदेजिनदे करी सकलवधनाओसं और उससदे आनकषलसं गक बनातकसं कक ध्यनान ममें रखतदे हकए समय-समय पिर अवधनालरत करदे . ऐसदे कनायनार्दूलियकसं ममें लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान रखनदे वनालिदे व्यलक्तयकसं करी ससंख्यना. (ग) क्षिदेतरप ‘क’ ममें लस्थत कदेन्दपररीय सरकनार कदे ऐसदे कनायनार्दूलियकसं कदे बरीच. (ii) क्षिदेतरप ‘ग’ ममें लकसरी कनायनार्दूलिय कक ससंबकलधत हहै वहनासं. जिक खण्ड (क) यना खण्ड (ख) ममें लवलनलदर्दूष्ट कनायनार्दूलियकसं सदे लभन्न हहैं . ककेन्दपरकीय सरकरार कके करायरार्भलिययोसं कके बकीच पतपररातद(क) कदेन्दपररीय सरकनार कदे लकसरी एक मसंतरप नालिय यना लवभनाग और लकसरी दरसरदे मसंतरप नालिय यना लवभनाग कदे बरीच पितपरनालद लहन्दरी यना असंगरप देजिरी ममें हक सकतदे हहैं. पितपरनालद पिपरनाप्त करनदे कदे स्थनान पिर लकयना जिनाएगना. समय-समय पिर अवधनालरत करदे. पितपरनालद लहन्दरी ममें हकसंगदे. अपिरीलि यना अभ्यनावदेदन लहन्दरी ममें लकयना गयना हक यना उस पिर लहन्दरी ममें हस्तनाक्षिर लकए गए हकसं. लहन्दरी ममें पितपरनालद कदे उत्तर कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलिय सदे लहन्दरी ममें लदए जिनाएसंगदे । 6. लहन्दरी ममें पितपरनालद भदेजिनदे करी सकलवधनाओसं और उससदे ससंबलसं धत आनकषलसं गक बनातकसं कक ध्यनान ममें रखतदे हकए. उनकना दरसररी भनाषना ममें अनकवनाद. तब उसकना उत्तर लहन्दरी ममें लदयना जिनाएगना। . तहन्दकी और असं गपरकेजकी दयोनयोसं करा पपरययोग– अलधलनयम करी धनारना 3 करी उपिधनारना (3) ममें लनलदर्दूष्ट सभरी दस्तनावदेजिकसं कदे ललिए लहन्दरी और असंगरप देजिरी दकनकसं कना पिपरयकग लकयना जिनाएगना और ऐसदे दस्तनावदेजिकसं पिर हस्तनाक्षिर करनदे वनालिदे व्यलक्तयकसं कना यह उत्तरदनालयत्व हकगना लक वदे यह स लक नलश्चत कर लिमें लक ऐसरी दस्तनावदेजिमें लहन्दरी और असंगरप देजिरी दकनकसं हरी ममें तहैयनार करी जिनातरी हहैं . उनकना दरसररी भनाषना ममें अनकवनाद. क्षिदेतरप ‘ग’ ममें कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलिय सदे क्षिदेतरप ‘क’यना’ख’ममें लकसरी रनाज्य यना ससंघ रनाज्यक्षिदेतरप कक यना ऐसदे रनाज्य ममें लकसरी कनायनार्दूलिय (जिक कदेन्दपररीय सरकनार कना कनायनार्दूलिय न हक) यना व्यलक्त कक पितपरनालद लहन्दरी यना असंगरप देजिरी ममें हक सकतदे हहैं । पिरन्तक लहन्दरी ममें पितपरनालद ऐसदे अनकपिनात ममें हकसंगदे जिक कदेन्दपररीय सरकनार ऐसदे कनायनार्दूलियकसं ममें लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान रखनदे वनालिदे व्यलक्तयकसं करी ससंख्यना. आविके दन.(4) उपि लनयम (1) और (2) ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. (घ) क्षिदेतरप ‘क’ ममें लस्थत कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलियकसं और क्षिदेतरप ‘ख’ यना ‘ग’ममें लस्थत कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलियकसं कदे बरीच पितपरनालद लहन्दरी यना असंगरप देजिरी ममें हक सकतदे हहैं. लहन्दरी ममें पितपरनालद भदेजिनदे करी सकलवधनाओसं और उससदे आनकषलसं गक बनातकसं कक ध्यनान ममें रखतदे हकए समय-समय पिर अवधनालरत करदे . पिरन्तक यह और लक यलद ककई पितपरनालद लकसरी अलधसरलचत कनायनार्दूलिय कक ससंबकलधत हहै तक दरसररी भनाषना ममें ऐसना अनकवनाद उपिलिब्ध करनानदे करी अपिदेक्षिना नहरीसं करी जिनाएगरी । 5. उनकदे सनाथ भदेजिना जिनाएगना. अपिरीलि यना अभ्यनावदेदन लहन्दरी यना असंगरप देजिरी ममें कर सकतना हहै। (2) जिब उपिलनयम (1) ममें लवलनलदर्दूष्ट ककई आवदेदन. लहन्दरी ममें पितपरनालद भदेजिनदे करी सकलवधनाओसं और उससदे आनकषलसं गक बनातकसं कक ध्यनान ममें रखतदे हकए समय-समय पिर अवधनालरत करदे। 4. अभ्यराविके दन आतद(1) ककई कमर्दूचनाररी आवदेदन. पिरन्तक यदे पितपरनालद लहन्दरी ममें ऐसदे अनकपिनात ममें हकसंगदे जिक कदेन्दपररीय सरकनार ऐसदे कनायनार्दूलियकसं ममें लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान रखनदे वनालिदे व्यलक्तयकसं करी ससंख्यना. लनष्पिनालदत करी जिनातरी हहैं और जिनाररी करी जिनातरी हहैं। 7.

आददेश दनारना ऐसदे अलधसरलचत कनायनार्दूलियकसं कक लवलनलदर्दूष्ट कर सकतरी हहै जिहनासं ऐसदे कमर्दूचनालरयकसं दनारना. पिपरनारूपिण और ऐसदे अन्य शनासकरीय पिपरयकजिनकसं कदे ललिए. तक उसकदे बनारदे ममें यह समझना जिनाएगना लक उसनदे लहन्दरी ममें पिपरवरीणतना पिपरनाप्त कर लिरी हहै । 10. तहन्दकी मके सं पपरविकीणतरायलद लकसरी कमर्दूचनाररी नदे(क) महैलटप रक पिररीक्षिना यना उसकरी समतकल्य यना उससदे उच्चतर ककई पिररीक्षिना लहन्दरी कदे मनाध्यम सदे उत्तरीणर्दू कर लिरी हहै . अन्यथना नहरीसं। (3) यलद यह पिपरश्न उठतना हहै लक ककई लवलशष्ट दस्तनावदेजि लवलधक यना तकनरीकरी पिपरककलत कना हहै यना नहरीसं तक लवभनाग यना कनायनार्दूलिय कना पिपरधनान उसकना लवलनश्चय करदेगना। (4) उपिलनयम (1) ममें लकसरी बनात कदे हकतदे हकए भरी. जिक लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान रखतना हहै . यथनालस्थलत. लहन्दरी यना असंगरप देजिरी ममें हकनरी चनालहए तक वह उसदे असम्यक लवलिम्ब कदे लबनना उसरी भनाषना ममें दरी जिनाएगरी। 8.लजिन्हमें लहन्दरी ममें पिपरवरीणतना पिपरनाप्त हहै . लहन्दरी ममें लकसरी दस्तनावदेजि कदे असंगरप देजिरी अनकवनाद करी मनासंग तभरी कर सकतना हहै . ककेन्दपरकीय सरकरार कके करायरार्भलिययोसं मके सं तटिप्पणयोसं करा तलिखरा जरानरा – क लहसंदरी यना असंगरप देजिरी ममें ललिख सकतना हहै और उससदे यह अपिदेक्षिना (1) ककई कमर्दूचनाररी लकसरी फिनाइलि पिर लटप्पिण यना कनायर्दूवत्त नहरीसं करी जिनाएगरी लक वह उसकना अनकवनाद दरसररी भनाषना ममें पिपरस्तकत करदे। (2) कदेन्दपररीय सरकनार कना ककई भरी कमर्दूचनाररी. लजिसकना कमर्दूचनाररी पिर तनामरीलि लकयना जिनानना अपिदेलक्षित हहै. तक उसकदे बनारदे ममें यह समझना जिनाएगना लक उसनदे लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान पिपरनाप्त कर ललियना हहै। (2) यलद कदेन्दपररीय सरकनार कदे लकसरी कनायनार्दूलिय ममें कनायर्दू करनदे वनालिदे कमर्दूचनालरयकसं ममें सदे अस्सरी पिपरलतशत नदे लहन्दरी कना ऐसना जनान पिपरनाप्त कर ललियना हहै तक उस कनायनार्दूलिय कदे कमर्दूचनालरयकसं कदे बनारदे ममें सनामनान्यतयना यह समझना जिनाएगना लक उन्हकसंनदे लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान पिपरनाप्त कर ललियना हहै। (3) कदेन्दपररीय सरकनार यना कदेन्दपररीय सरकनार दनारना इस लनलमत्त लवलनलदर्दूष्ट ककई अलधकनाररी यह अवधनालरत कर सकतना हहै लक कदेन्दपररीय सरकनार कदे लकसरी कनायनार्दूलिय कदे कमर्दूचनालरयकसं नदे लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान पिपरनाप्त कर ललियना हहै यना नहरीसं। . जिब वह दस्तनावदेजि लवलधक यना तकनरीकरी पिपरककलत कना हहै.यना (iii) कदेन्दपररीय सरकनार दनारना उस लनलमत्त लवलनलदर्दूष्ट ककई अन्य पिररीक्षिना उत्तरीणर्दू कर लिरी हहै.यना (ख) स्ननातक पिररीक्षिना ममें अथवना स्ननातक पिररीक्षिना करी समतकल्य यना उससदे उच्चतर लकसरी अन्य पिररीक्षिना ममें लहन्दरी कक एक वहै कलल्पिक लवषय कदे रूपि ममें ललियना हक. वह पिररीक्षिना उत्तरीणर्दू कर लिरी हहै. कदेवलि लहन्दरी कना पिपरयकग लकयना जिनाएगना । 9. लटप्पिण. जिक आददेश ममें लवलनलदर्दूष्ट लकए जिनाएसं. यना (ii) कदेन्दपररीय सरकनार करी लहन्दरी पिररीकनाना यकजिनना कदे अन्तगर्दूत आयकलजित पिपरनाज पिररीक्षिना यना यलद उस सरकनार दनारना लकसरी लवलशष्ट पिपरवगर्दू कदे पिदकसं कदे सम्बन्ध ममें उस यकजिनना कदे अन्तगर्दूत ककई लनम्नतर पिररीक्षिना लवलनलदर्दूष्ट हहै.(3) यलद ककई कमर्दूचनाररी यह चनाहतना हहै लक सदेवना ससंबध सं री लवषयकसं (लजिनकदे अन्तगर्दूत अनकशनासलनक कनायर्दूवनालहयनासं भरी हहैं ) सदे ससंबलसं धत ककई आददेश यना सरचनना. तहन्दकी करा करायर्भ सराधक ज्ञरान(1) (क) यलद लकसरी कमर्दूचनाररी नदे(i) महैलटप रक पिररीक्षिना यना उसकरी समतकल्य यना उससदे उच्चतर पिररीक्षिना लहन्दरी लवषय कदे सनाथ उत्तरीणर्दू कर लिरी हहै . यना (ग) यलद वह इन लनयमकसं सदे उपिनाबद्ध पिपररूपि ममें यह घकषणना करतना हहै लक उसदे लहन्दरी ममें पिपरवरीणतना पिपरनाप्त हहै. यना (ख) यलद वह इन लनयमकसं सदे उपिनाबद्ध पिपररूपि ममें यह घकषणना करतना हहै लक उसनदे ऐसना जनान पिपरनाप्त कर ललियना हहै. कदेन्दपररीय सरकनार.

पिरन्तक यलद कदेन्दपररीय सरकनार ऐसना करनना आवश्यक समझतरी हहै तक वह. तक वह रनाजिपितपर ममें अलधसरचनना दनारना घकलषत कर सकतरी हहै लक उक्त कनायनार्दूलिय उस तनाररीख सदे अलधसरलचत कनायनार्दूलिय नहरीसं रह जिनाएगना । 11. सरचनना पिट्ट. पितपरशरीषर्दू और ललिफिनाफिकसं पिर उत्करीणर्दू लिदेख तथना लिदेखन सनामगपररी करी अन्य मदमें लहन्दरी और असंगरप देजिरी ममें ललिखरी जिनाएसंगरी. लिकेखन सरामगपरकी आतद– क लि. पपरतकपरयरा ससं बसंधकी अन्य सरातहत्य. सनाधनारण यना लवशदेष आददेश दनारना.और (ii) इस पिपरयकजिन कदे ललिए उपियकक्त और पिपरभनावकनाररी जिनासंच कदे ललिए उपिनाय करदे । (2) कदेन्दपररीय सरकनार अलधलनयम और इन लनयमकसं कदे उपिबन्धकसं कदे सम्यक अनकपिनालिन कदे ललिए अपिनदे कमर्दूचनालरयकसं और कनायनार्दूलियकसं कक समय-समय पिर आवश्यक लनददेश जिनाररी कर सकतरी हहै । . ममैनअ न लि. पिरन्तक यलद कदेन्दपररीय सरकनार करी रनाय हहै लक लकसरी अलधसरलचत कनायनार्दूलिय ममें कनाम करनदे वनालिदे और लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान रखनदे वनालिदे कमर्दूचनालरयकसं कना पिपरलतशत लकसरी तनाररीख ममें सदे उपिलनयम (2) ममें लवलनलदर्दूष्ट पिपरलतशत सदे कम हक गयना हहै . कदेन्दपररीय सरकनार कदे लकसरी कनायनार्दूलिय कक इस लनयम कदे सभरी यना लकन्हरीसं उपिबन्धकसं सदे छर ट ददे सकतरी हहै। 12. लहन्दरी और असंगरप देजिरी ममें लदभनालषक रूपि ममें यथनालस्थलत.(4) कदेन्दपररीय सरकनार कदे लजिन कनायनार्दूलियकसं ममें कमर्दूचनालरयकसं नदे लहन्दरी कना कनायर्दूसनाधक जनान पिपरनाप्त कर ललियना हहै उन कनायनार्दूलियकसं कदे ननाम रनाजिपितपर ममें अलधसरलचत लकए जिनाएसंगदे. अननपरालिन करा उत्तरदरातयत्वि(1) कदेन्दपररीय सरकनार कदे पिपरत्यदेक कनायनार्दूलिय कदे पिपरशनासलनक पिपरधनान कना यह उत्तरदनालयत्व हकगना लक वह– (i) यह सकलनलश्चत करदे लक अलधलनयम और इन लनयमकसं कदे उपिबसंधकसं और उपिलनयम (2) कदे अधरीन जिनाररी लकए गए लनददेशकसं कना समकलचत रूपि सदे अनकपिनालिन हक रहना हहै. ससं तहतराएसं. मकलदपरत यना सनाइक्लिकस्टनाइलि लकयना जिनाएगना और पिपरकनालशत लकयना जिनाएगना। (2) कदेन्दपररीय सरकनार कदे लकसरी कनायनार्दूलिय ममें पिपरयकग लकए जिनानदे वनालिदे रलजिस्टरकसं कदे पिपररूपि और शरीषर्दूक लहन्दरी और असंगरप देजिरी ममें हकसंगदे। (3) कदेन्दपररीय सरकनार कदे लकसरी कनायनार्दूलिय ममें पिपरयकग कदे ललिए सभरी ननामपिट्ट. ससंलहतनाएसं और पिपरलकपरयना ससंबध (1) कदेन्दपररीय सरकनार कदे कनायनार्दूलियकसं सदे ससंबलसं धत सभरी महैनअ सं री अन्य सनालहत्य. मकलदपरत यना उत्करीणर्दू हकसंगरी.