तत

ु पीडीएफ़ ई-बुक - रचनाकार http://rachanakar.blogspot.com क तु त.
पाठ का वचा लत फ़ॉट पांतर कया गया है , अत: वतनी ुटयाँ संभावत ह

एहसास
(

लघक
ु था संह)

नदलाल भारती

एहसास
लधुकथा सह

लेखक

नदलाल भारती
तकनीक सहयोग

आजादकुमार भारती
सवाधकार-लेखकाधीन
ई-सं
करण काशन वष-2010 

चकार-कु.शश भारती 

काशक
मनोरमा साह
य सेवा
आजाद दप, 15- एम, वीणा नगर
इंदौर। मय दे श। 452010
दरू भाष-071-057553 चलतवाता-09753081066
Email- nlbharatiauthor@gmail.com

1-ममता
मां से मल
ु ाकात हुई ?
नहं। बहुत को शश के बाद भी।
दो दन क याा जो थी।
याद है । 
या..?
जब पहल बार रोजगार क तलाश म घर छोड़ा तब मां कई
हते रोयी थी। म शहर आकर मन ह मन कसम खा लया
क पक नौकर पा जाने के बाद घर जाउं गा। नहं मल।
चार साल के बाद गांव गया। मां मझ
ु े पकड़ कर इतना रोयी
क मेर अ#ता$%मा नहा उठ(। वह मां आंख+ मे◌े सपने लये
आंखे मद
ूं ल हमेशा के लये। म अभागा मां के आंसू का भार
कम नहं कर पाया।

माँ का कज$ कोई नहं उतार पाया है आज तक...
न#दलाल भारती 18.07.09

2- भूत
प.चीस तारख क संगो1ठ( का म2
ु यवता आपको सं3था
बनाने क इ.छुक है । आप सहम7त 8दान कर दे तो सद3य+
का स:ू चत कर दं ।ू
डायर दे खकर बताउं गा... 
या...
हां... आजकल बहुत <य3त चल रहा हूं सा हि%यक काय$>म+
क वजह से। कल बता दं ग
ू ा।
ठ(क है । डायर दे खकर बता दिजयेगा।
मन ना मान रहा था जनाब क <य3तता सन
ु कर। शहर म
रोज सा हि%यक मह फले सजती है पर ददार नहं होते। ऐसे
कौन से सा हि%यक जलसे म <य3त रहते है।
जनाब का फोन-एक तारख के बाद रख लिजये। 
या....?
हां.... 
य+....
डायर खाल नहं है ।
डायर खाल है या नहं पर Aे1ठता का भत
ू खाल नहं है
जनाब। न#दलाल भारती 18.07.09

3-समझदार
अशोक-च#Cे श बाबू कैसे आये हो ?
च#Cे श-3कूटर से और कैसे ?
अशोक-बाहर तD
ु हार गाड़ी तो है ह नहं ?
च#Cे श-नहं है ना।

अशोक-कोई मंगनी ले गया या ?बहुत महंगा पेEोल है । मत
दया करो कसी को। हम महं गा पड़ रहा है गाड़ी से चलना।
तम
ु से तीन गन
ु ी अ:धक पगार मलती है । कौन ले गया है ?
च#दे रश-बां
स....

अशोक-बहुत ले जाते है और कसी क नहं मलती या ?
च#Cे श-म मेरा हक और मेरे सामान क तो वह दशा है जैसे
कमजोर आदमी क दध
ू दे ने वाल भस।
अशोक-समझ म नहं आयी तD
ु हार बात।
च#Cे श-सर जी कमजोर आदमी क भस ज#न गयी है । खबर
तेजी से फैलती है उतनी ह तेजी से दबंग लोग+ के बत$न भी
7नब$ल के घर क ओर दौड़ पड़ते है फोकट म दध
ू लेने के
लये।
अशोक-ओ आई सी ....बांस है । अपने सामान को हाथ नहं
लगाते। सरकार पKरसDप7तय+ का उपभोग खद
ु का हक
मानकर करते है । नीचे वाल+ का हक चट करने म त7नक भी
कोतहाई नहं बरतते। चौबीस घLटे सरकार गाड़ी का उपभोग।
सरकार गाड़ी म दकत आ जाये तो तम
ु जैसे भस वाल+ का
उपभोग। सरकार उपभोग क व3तओ
ु ं को इतना दरू करके
रखते है जैसे तम
ु हो अछूत।
च#Cे श-मझ
ु अदने क या औकात आप तो अ:धक समझते
है सर जी। न#दलाल भारती 17.07.09

4-ववास
तोता पाल लया...... ?
नहं है आ गया है अ7त:थ क तरह।
Oपजर मे तो रखा है ? पंछ( को कैद करना अ#याय है
आजाद के 87त।

डरा-सहमा दरवाजे पर दो दन बैठा रहा। PबQल खा जाती
इस लये नया Oपजड़ा मंगवा कर उसके सामने रख दया। खद

जाकर बैठा है । खल
ु ा छोडने पर भी नहं जाता। दे खो Oपजड़े का
दरवाजा खुला है ना। सीट मारता है । नाचता है । गाता है ।
धम$प%नी के हाथ से दाल-चावल खाता है । जब घर के लोग
नहं दखते तो मीठु-मीठु बल
ु ाता है । अ#याय है या #याय,छल
या कोई मेरा 3वाथ$।
OवRवास....न#दलाल भारती 18.07.09

5-रोट
आजी रोट खा रह है ?
हां बी टया।
दोपहर क है या रात क ?
जो मान लो। बहु-बेटो का राज है ।
बस रोट दाल सSजी कुछ नहं ?
है ना ... 
या....?
थोड़ा नमक और पानी.....
खाने म ।
हां और सू के अंचार भी।
बाप रे ऐसा अ#याय बूढ मां के साथ
कहां ले जा रह हो ?
जमाने को दखाना है । नकाब हटाना है भलमानुष का मख
ु ौटा
लगाये चहर+ से। मां बाप धरती के भगवान है । बहू-बेट+ को
बताना है ता क मले सकून क रोट बूढे मां-बाप को।
न#दलाल भारती 18.07.09

6-वरासत 
य+ अ#याय कर रहे हो ?

घर बनाना अ#याय है ?
दस
ू रे के पुरख+ क Oवरासत पर उ#हं का बांस-काठ 7छन कर
अ#याय नहं तो और या है ?
अ#याय कहते हो।
मान जाओ ना हड़प+ कसी के परु ख+ क 7नशानी ?
हड़प लया तो ?
Oवलास नहं कर पाओगे।
दे खता हूं कौन Oवलास रोकता है ।
आह.....
हो गया कSजा। बझ
गया दया। WखलWखलाती रह गयी

जमीन ?न#दलाल भारती18.07.09

7-बबल
ू क छांव
डा.ब%तीसा सDबY
ु ान है ।
ृ द रचनाकार है ,कृ7त%व पर गम
उ#ह अ भमान है ।
समतQ
ु य+ से जलन है । नवो दत+ क राह के कांटे है ।


उ#हे छाती पर बैठने का शौक है । रचनाध म$ता पर छोटे -बडेां
को नाज है
कZ म पांव लटकाये हुए खद
ु क तरक के लये जोड़तोड़।
हDमतबाबू ये वKर1ठता है या बबूल ह छांव। न#दलाल भारती
20.07.09

8-आशीवाद
ब ढया मठाई मलती है यहां।
कुछ ले लो। 
या लंू ?
काज,ू अजवाईन, Oप3ता और भी ढे र+ 3वाद म तो मठाई है ।

भइया$ अजवाईन के 3वाद वाल दे दो।
लिजये।
कतना हुआ।
प.चासी [पये।
लिजये हम दोन+ का काट लिजये।
नहं पैसा म दं ग
ू ा।
आप बज
ु ग
ु $ और Kरटायर है ।
तो या हूं। म दं ग
ू ा।उपर वाला दे ता है :च#ता क ज[रत
नहं। Pबल तो म ह दं ग
ू ा। मठाई नहं आशीवा$द समझ+।
7न[%तर इंकार ना कर सका। आशीवा$द को माथे चढा लया।
न#दलाल भारती 20.07.09

10-#नगाह
कौन थी वो....
सामने मेनगेट के बीच खड़ी मोट औरत क बहू।
बहू तो नहं नौकरानी लगती है ।
वैसे ह रखते है ।
Oवधाता ने कैसा घर बेचार क तकदर म लख दया है ।
पढ लखी नौकरानी होकर रह गयी है । 
या मांग रह थी ?
पानी.....
बोKरंग चालू हो गयी पहल बरसात से ह।
नहं।
कहां से पानी दोगी।
खरदा हुआ टे ◌क
ै र का पानी।
तम
ु कहां से लाओगी।
हम तो हर हफ् ते खरदते ह है ।
तो दान य+ ?

प%थर पसीजाने के लये। 
या........?
हां......... प%थर दल है पूरा पKरवार पर बहू को छोड़कर।
वो कैसे .......?
परू े साल बोKरंग चल है, एक :गलास पानी कसी को नहं दये
है । पानी का अकाल पड़ा हुआ है परू े शहर म । रोज कहते थे
बोKरंग पानी नहं दे रह है । कल चालू नहं हुई तो आज बहू
को पानी मांगने के लये भेज द। जानती है हम मना नहं
करे गे पानी के लये दर-दर भटकने के बाद भी।
कैसा :गYद पKरवार है िजनक 7नगाहे बस मतलब साधने म
लगी रहती है ?न#दलाल भारती 24.07.09

11-पानी रोको।
Kरचािज\ग करवा लया।
तम
ु ने।
हां।
आप भी करवा लो।
नहं करवाना। 
य+......?
कोई गारLट तो नहं क पानी हम मलेगा ?
सम3या क नाक म नकेल तो लगेगी।
नहं लगाना ऐसी नकल।
सम3या का
24.07.09

समाधान है ,पानी

रोको।

न#दलाल भारती

12- समय क बबाद
कOव महोदय ने मा सक संगो1ठ( के अ#त$गत ् आयोिजत
का<यपाठ म ]ान-Yयान,रा1E एवं मानवता को समOप$त
रचनाओं का स3वर पाठ कर Aोताओं का मन मोह लया।

काय$>म के अ#त म राजभोग और चाय का ब#दोब3त था।
राजभोग के 3वाद म उपि3थत जन डूबे हुए थे। इसी बीच
एक व^
ु ाव बस नाराजगी जताते
ृ सा ह%यकार आपसी मनमट
हुए अYय` एवं स:चव से बोले भOव1य म नये Oवचार+ को
संगो1ठ( म शा मल कर । का<यपाठ के नाम पर परु ान+ बात+
पर समय क बबा$द ठ(क नहं। रचनाओं म नये Oवचार होने
चा हये। सा ह%यकार महोदय के सझ
ु ाव से राजभोग का 3वाद
खारा हो गया और लोग थ-ू थू करने लगे थे।
न#दलाल भारती 28.07.09

13-चोर
बाई कल aज पर प.चास [पया पड़ा था। चोर चला गया।
चोर मैने क है । 
य+...........?
ब.चे क दवाई के लये।
चोर दवाई के लये ?
कोई उपाय नहं सझ
ू ा।
चोर एकमा उपाय नहं। OवRवास तोड़ने वाले नजरो से :गर
जाते है ।
पांव पकड़ती हूं नहं होगी ऐसी गलती।
थामो प.चास [पये। ब.चे क दवाई ले लेना.....
चोर का ईनाम है ।
नहं दLड। न#दलाल भारती 28.07.09

14-ो
साहन
मश
ुं ीजी कOवता छSबीस जनवर के लये ठ(क रहे गी ?
हरलाल मश
ुं ी -बहुत ब ढया कOवता है ।
8काश- म लखा हूं।
मश
ुं ीजी-तम
ु कOवता भी लखते हो।

8काश-पहल बार लखा हूं छSबीस जनवर के जलसे के लये।
मश
ुं ीजी-तD
ु हार कOवता नाटक म गीत क तरह गायी जायेगी
तो बहुत अ.छ( लगेगी। 8काश लखते रहना। कलम रोकना
नहं।
8काश-जी मश
ंु ी और 8काश एक मशहूर लेखक बन गया
मश
ंु ीजी के 8ो%साहन से।
न#दलाल भारती 28.07.09

15-बेट
कसक बेट है ।
Aी नयन क। 
या कर रह हो शहर म ?
पढ रह हूं।
माँ-बाप का नाम रोश करोगी ?
अवRय...
मां-बाप को बेटे का सख
ु दे पाओगी ?
नहं..... 
य+...
बेट हूं। बेटा नहं बनना है । बेट बने रहकर मां-बाप को हर
सख
ु दे ना मेरा सपना है ।
ठ(क कह रह हो मेरे भी दो बेटे है रोअन रोट हो गयी है ।
काश तD
ु हार जैसी मेर भी एक बेट होती न#दलाल भारती
29.07.09

16- मुसीबत
छोटे कम$चार स#तलाल को 7नशाना साधते हुए दो अ:धकार
उपहास कये जा रहे थे। वे अपने पद,दौलत और उं ची
पहचान का बखान कर थक नहं रहे थे। गरब कम$चार

चुपचाप सब सन
ु रहा था। इसी बीच कम$चार का दो3त
रामलाल आ गया। स#तलाल से पूछा मां कैसी है ?
स#तलाल-बीमार तो है पर पोते-पोती के साथ खश
ु है ।
रामलाल-मां बाप ह भगवान है । सेवा सA
ु ुषा करते रहना।
स#तलाल-हां..
रामलाल क बात कुछ दन पहले अपनी मस
ु ीबत बेरोजगार
भाई के सर पर डालकर आये बडे पद और बेशम
ु ार दौलत के
मा लक के कान म गरम शीशा जैसे डालती द हो। वे
बौखलाकर स#तलाल से बोले काम भी करोगे या बात करते
रहोगे ? न#दलाल भारती 29.07.09

17- अ'तर
अ:धकार और कम$चार म या अ#तर महसस
ू करते हो।
अ:धकार के पास अ:धकार होता है,कम$चार के पास नहं।
और
जब चाहे काम पर आ सकता है जब चाहे जा सकता
है ।कम$चार को समय से पहले आना होता है और दे र से
जाना।
और
अ:धकार कम$चार के हक को 7छन सकता है कम$चार नहं।
और
कम$चार अ.छे कपड़े पहन लया तो अ:धकार को खज
ु ल
होने लगती है ।
और भी अ#तर
सरकार पKरसDप7तयां◌े का मनमाना उपभोग और भी बहुत
कुछ ..........
समझ गया लोभ क जड़ बहुत गहरे तक पहुंच चक
ु  है।
न#दलाल भारती 29.07.09

18- इंतजार
कब तक काम करना पड़ा।
आठ बजे तक।
तैयार हो गयी Kरपcट।
रात म ह और बाइिLडग भी हो गयी।
Kरपcट तो बास के टे बल पर पड़ी है ।
छाती पर चढकर बनवाये। चाहे टे बल पर रखे या टोकर म।
मझ
ु छोटे कम$चार के लये तो दद$ पीना तकदर है ।
जो काम तम
ु से रात आठ बजे तक करवाया गया वह भी Pबना
कसी ओवरटाइम के। वह तो महज इंतजार करने का बहाना
था।
कसका ?
मैडम का, जानते नहं बांस अपनी ज[रत अनस
ु ार उपभोग
और तम
ु जैसे छोटे कम$चार को◌े आंसू दे ते रहते है । 
या.....?
हां। न#दलाल भारती 30.07.09

19-झलक
कोई दरवाजे पर खड़ा है ।
अ#दर बल
ु ाओे।
बल
ु ा रहे हे , जाइये।
आप है अ#दर आइये। बाहर य+ खड़े है ।
जQद म हूं।
ऐसी या जQद है । KरटायरमेLट के बाद भी जQद। बै ठये।
वत नहं है । मझ
ु े तीन सौ [पया दे सकते है । 10 तारख
को बेटा क तन2वाह मलेगी दे जाउं गा।
तीन सौ...
हां बस तीन सौ अ:धक नहं।

लिजये।
ध#यवाद। चलता हूं।
आग#तक
ु के पग बढाते ह झलक पड़ा तंगी का दद$ ।
न#दलाल भारती 31.07.09

20-को(चंग
बहुत जQद म हो। कहां से आ रह हो।
को:चंग से।
को:चंग पढाने लगी या ?
अरे नहं रे म या पढाउं गी।
बेटा को छोड़कर आ रह हूं।
कौन सी को:चंग बेटा को दे रह हो।
इंिdलश क।
इंिdलश क ह य+।
इंिdलश जानने से कैKरअर ब ढया बनता है ना। तम
ु भी ब.चो
को:चंग दो।
पैसा कहा है इतना। म तो घर म ह दे ती हूं सं3कार क
को:चंग। न#दलाल भारती 31.07.09

21-दआ

तीरथ के बाबू बहू रानी का बख
ु ार तो उतरने का नाम नहं ले
रहा है । आंखो से बेचार के झरझर आंसू झर रहे है ।शरर तप
रहा है बख
ु ार से।
अरे बाप रे दवाई असर नहं कर रह है या ?
सन
ु ा नहं डाटर या बोले ? 
या बोले ?
बुखार उतरने म समय लगेगा।
तू बेबी को चप
ु करा मै ठLडे पानी क पeट रखता हूं। बुखार
जQद उतर जायेगा।

ठ(क है ।
बी टया सर सीधा कर म पeट रखता हूं।
नहं बाबूजी म ठ(क हूं।
बी टया तू तप रह है बुखार से मझ
े े पeट रखने दो। बहूरानी
ु ◌
तD
ु हारा दख
ु समझता हूं। तम
ु बहू ह नहं बेट भी हो हमार।
बाबज
ू ी दे खो बख
ु ार कम हो गया।
ये कैसा चम%कार ?
बाबज
ू ी आपक दआ
ु ।आप और सासम
ू ां हमारे लये धरती के
भगवान है । न#दलाल भारती 07.08.09

22-स)मान 
या पस$ना लट है उस साहब क ?
कैौन ऐसे साहब है ।
नाम है हKरबाब।ू Oवचार म नाम जैसी उचाई। मन खश
ु हो
गया।संयोगबस आज मेरा अ.छा दन था।
ज[र उ.च शf`त,सं3कारवान और आदश$वाद होगे तभी तो
उचे ओहदे पर पहुंचे है ।
उं चे पद और दौलत के मा लक तो कम पढे लखे Aे1ठता के
बदौलत भी बन जाते है । दल+ म जगह नहं बना पाते। बस
अपना मतलब साधना अ.द तरह जानते है ऐसे लोग।
ऐसे लोग+ म अ.छ( वा लट नहं होती। हां अ भमान का
8द$ शन और अपने से अ:धक योdय+ को दहRत म रख सकते
है तD
ु हारे साहब जैसे। हKरबाबू जैसे जन हत-रा1E हत म काम
करते है और मातहतो को मान भी दे ना जानते है
सह कह रहे है ।
तभी तो हा द$क सDमान पा रहे ह हKरबाबू और उन जैसे और
दस
ू रे हा द$ क अपमान।
न#दलाल भारती 11.08.09

23-बेट का बाप
कई बार नो Kरgलाई के बाद एक बार मोबाईल बजा।
कसका फोन था।
लड़के के बाप का।
बात हुई ......
आदे श मला आवाज नहं आ रह है । इसी नDबर पर काल
करो।
काल कया ?
हां...
बात हुई।
लDबी बात। बेट के बारे म मा.-बाप और पKरवार के बारे म
तहककात फर लड़के के बाप ने अपना,लड़के का और अपने
पKरवार का बढा-चढाकर पKरचय दया।
जबाब या मला ?
म#ालय के काम म अभी <य3त हूं। बाद म फोन करना।
मत लगाना अब। 
य+.......?
बेट के बाप हो गन
ु हगार नहं। न#दलाल भारती 18.08.09

24-गु+
तD
ु हे पढा।
मझ
ु े ...
हां भई तD
ु हार रचनाये मतलब तD
ु ह । सच जन और रा1E हत
म अ.छ( है ।तD
ु हार लेखनी के तेवर मन को सकून दे ते है ।
ध#यवाद Aीमानजी.......

एक बात पूछूं इजाजत हो तो।
कैसी बात कर रहे है । हक है आपको पूछने का।
ग[
ु कौन है तD
ु हारे बताओगे या ? 

य+ नहं ,सच बताउूं ।
हाँ सच ह तो पूछ रहा हं ◌ू।

मेर मां...........न#दलाल भारती 19.08.09

25- भव-य
मेरा भी बताओ बाबा।
दख
ु ी हो सताये हुए भी। आठ घLठे साथ रहने वाल+ क आंख+
को फूट आंख नहं भाते हो। 
या...........?
सच ............. 
य+ ?
छोटा पद बड़ी योdयता मल
ू कारण है ।
कोई गन
ु ाह तो नहं ?
नह.......ले कन दिDभय+ के लये तो है ।
कोई उपाय।
हDमत नहं हारना। आज क1टदायी है दिDभय+ के कारण पर
:च#ता ना करो भOव1य अ.छा है । उDमीद बनाये रहो।
आंसू पीकर भी उDमीद म तो जी रहा हूं।
बहुत ब ढया। बनाये रहो।
ध#यवाद बाबा। न#दलाल भारती 19.08.09

26-राज
अ:धकार के पद पर काय$रत ् <यंगदास और बांस गgप म
मशगल
ू थे। काया$लय का समय ख%म होने के प#Cह मनट
बाद शरणच#C घर जाने के लये दफतर से 7नकलने लगा।
शरणच#C को जाते हुए दे खकर <यंगदास पासा बदलते हुए
बांस से बोले सर ये शरणच#C आ फस राइट टाइम$ पर आता
है और दे र से जाता भी है । काम भी आप खब
ू लेते है ।

बाबूगीर से चपरासीगीर तक करवा लेते है । <यवहार भी ठ(क
नहं करते है । इसका राज या है ?
बास-मानती हूं iयादा पढा लखा है शणच#C,है तो मरे
अधीन3थ छोट कम$चार ह ना। दबदबा बनाये रखने के
लये,छोटा कम$चार है इसका उसे एहसास बना रहे ,छोटे -बड़े के
गैप को मेनटे न करने के लये ज[र है म3टर <यंगदास।
बांस क बात+ से <यंगदास क आंखे चमक उठ( थी। न#दलाल
भारती 20.08.09

27- ग.
ु सा
मेरा जमाकर कर लिजये बीस मनट से खड़ा हूं स.चे#C
बोला।
स.चे#C के पीछे खड <यित ने भी अुनरोध कया।
बगल म य◌
ंू ं लगी है जाओ खड़े हो जाओ मोट मछ
ू  और
उूं ची कद-काठ( वाला कै शयर बोला।
स.चे#C अनुरोध के 3वर म बोला सबसे पीछे हां◌े जाउं गा।
मेरा नDबर है जमाकर लिजये।
एन.एन.एस.एस. के काउLटर पर तैनात मोट मछ
ू  ◌ा और उूं ची
कद-काठ( वाला कै शयर द%ु कारते हुए बोला Pबजल का Pबल
जमा करना है तो बगल वाल लाइन म खड़ा होना होगा।
आWखर तारख है जमा कर लो स.चे#C अनुरोध कया।
मोट मूछ और उूं ची कद-काठ( वाला कै शयर गरु ा$ते हुए दहाड़ा
नहं जमाकता$ या कर लोगो। जा रहे हो तम
ु दोन+ क म
उठूं।
कै शयर क बात से बगल क लाईन म लगे कुछ लोग+ के
चेहरे पर ग3
ु सा के बादल गरज उठे ।
नसीहत दे ते हुए स..चे#C बोले-इतना ग3
ु सा नहं अ.छा।
नौकर कर रहे हो गL
ु डागीर नहं। शराफत नहं सीख तो एक

दन हाथ धो बैठेागे।दर दर क ठोकरे खाओगे। कुसj क
दादागीर के द1ु कम$ का दद$ उभरे गा ,तब बहुत रोयेगा हठ(ले।
न#दलाल भारती 20.08.09

28-बवाल
हाि3पटल से त7नक दरू चौराहे पर खड़े पु लस जवान+ के
सामने से एक मोटरसाइ कल तीन हeठे -कटठे सवार नवजवान
तीkग7त और लापरवाहपक
ू$ लहराते चल रहे थे। चलते-चलते
एकदम [क गये पीछे आ रहे अधेड़ मोटर साइ कल चालक
बाल बाल बच तो गये पर मोटर साइ कल मोटर भीड़ भर
सड़क पर तफर कर रहे नवजवान+ क मोटर साइ कल से
छुआ गयी।
अधेड़ <यित भाई ये सड़क तफर के लये नहं है ।
मोटरसाइ कल सवार- य+ नहं है ।
दस
ू रा-सवार तम
ु दे खकर य+ नहं चलते ?
तीसरा सवार-एक तो गलती करती है दस
ू रे नसीहत दे ता है।
समझाने का ठे का तेरे पास है या ?
मोटरसाइ कल सवार हवा म हाथ लहराते हुए बोला जा जQद
भाग जा यहां से नहं तो बवाल मच जायेगा
वाद-Oववाद सन
ु रहे थम पांव म एकदम ग7त आ गयी। अधेड़
<यित कभी पु लस को कभी तमाशा दे ख रहे लोग+ के
एकदम भागने वाल+ को कोसते हुए लहू के घूट पीते हुए आगे
बढ गये।
न#दलाल भारती 20.08.09

29-वचार
कलOु षत और द1ु ट Oवचारधारा के लोग खब
ू फलफूल रहे है ।
हां .............

अधीन3थ कम$चार क आवाज कान तक पहुंची नहं क
कालबेल पर बैठे।
ऐसे लोग उठकर भी आदत नहं बदलते नीचे :गरते जाते है
7नगाह+ म ।
हां -सच लोमड़ी खाल बदलती है आदत नहं।
वफादार हो सं3था, समाज और दे श के 87त।
चोट मलती है । दल रोता है नेक और सDमानजनक काम
करने के बाद भी।
कंस और हरणाकुश जैसे लोग आज भी है । कहानी ख%म नहं
हुई है । कलुOषत Oवचारधारा और द1ु ट 8कृ7त के लोग खद
ु को
Aे1ठ साPबत करने के लये अ#याय कये है और कर रहे ह।
याद रहे अ#त डरावना होता है ।
हां............ सह है ।
सदाचार और परमाथ$ काल के गाल पर अमरता के lयोतक
है । कंस और हरणाकुश क कहानी पुरानी है और जीOवत भी।
न#दलाल भारती 25.08.09

30 वद/वाला (ग0
कतने ढठ हो गये है ये वदm वाले :ग^। 
या कह रहे हो यार ?
सच कह रहा हूं। मेरे बूढे Oपताजी गांव जा रहे थे। Eे न
gलेटफाम$ पर खड़ी थी। पा क\ग दरू थी। वहां तक जाने म Eे न
छूट सकती थी। म अपना 3कूटर 3टे शन से लगी PबिQडंग के
सहारे खड़ा कर Eे न पकडवाने़ के लये भागा। वापस आया तो
दे खा। 
या दे खा ?
वदmवाला :ग^ 3कूटर पर बैठा हुआ है एक कौअे के साथ।
उतKरये जनाब जाना है मैने कहां।

कौआ -यो।
मझ
ु े जाना है ।
वदmवाला :ग^-पा क\ग म खड़ा है या ?
कौआ एक तो पा क\ग म खड़ा नहं है दस
ू रे साहब आधे घLटे
से रखवाल कर रहे है ।
वदmवाला :ग^ चालान बना दं ू या ?
बना दिजये
सोच लो......
सोच लया.....
कौआ-दे खने म शरफ लगते हो। य+ कानूनी लफड़े म फंसने
जा रहे हो ?
कोई 7नयम नहं तोड़ा हूं।
वदmवाला :ग^ वो तो म बताउूं गा। 7नकालो सौ [पये
लिजये अरै रसीद दिजये .........
कैसी रसीद वदmवाला :ग^ और कौआ एक सरु म बोले और
जQद -जQद कदम बढाकर एक गांव वाले मजदरू ो के दल को
रोके और उनक गठKरय+ क तलाशी लेने लगे।
ठगा रह गया जन सेवा और रा1E सेवा क कसम खाने वाले
:ग^ क करतत
ू दे खकर।
न#दलाल भारती 25.08.09

31-रवजन 
य+

Pबहोरजी अपना g◌ो-रOवजन तो हो गया ना 7नहोर ने

पूछा।
हां....... हो तो गया। बोड$ क 3वीकृ7त भी हो गयी है सन
ु ा
है ।कई महन+ तक अटका रहा।
7नहोर-अ:धकाKरय+ का तो एक झटके म हो गया।एKरयर भी
मल गया। साथ नई तन2वाह भी मल रह है ।

Pबहोर करता धोती वाला है खाता टोपी वाला है । भाई हम
कम$चाKरय+ क भी तो वह हाल है ।
दरू खड़े अ:धकार महोदय को यह बात चभ
ु गयी वे बोले भले
ह कतन+ पढे लखे हो,अ.छे खा पहन रहे हो, आWखरकार हो
तो कम$चार ह।
7नहोर-ठ(क कह रहे हो साहब हम तो दया पर जीने वाले लोग
है । हमारे काम और पसीने क कोई कमत नह,अपने फायदे
के लये तो Oवधायक /सांसद क तरह मेज थपथपा ले◌ेते है ।
अहं कार का दावानल अ.छा नहं है ।
Pबहोर- कम$चाKरय+ को भी हक भी मलना चा हये क
नह............न#दलाल भारती 25.08.09

32-लड़ाई 
या हरो बनकर आया है, लगता है इसी क शाद है ।
Pबग बांस के बेटे क शाद म आया है ।
चपरासी से बाबू बनते ह खद
ु का बड़ा मैनेजर समझने लगा
है ।
शकायत का दौर चला रहा है जाम क थाप पर।
लो एक और आ गया। 
या साफ सथ
ु रे कपड़े पहनना मसOवहे व है ।
औकात को भी दे खना चा हये।
मांग कर तो नहं पहनकर आया है ◌ै पेLट-शट$ ,जत
ू ा मोजा
और अगं◌ूठ(।
नीचे वाल+ को इतना दखावा शोभा नहं दे ता।
दखावा या है । अ.छे कपडे पहनना दखावा है ।
कल का चपरासी आज बाबू बन गया तो या बड़ा साहब हो
गया ?

साहब पद-दौलत का अ भमान कब तक टकेगा। साठ साल के
बाद पद के अ भमान को परख लेना। अ भमान क लड़ाई
ठ(क नहं।सlभावना पव
ू $क दे श और समाज के हत म काम
किजये। िजतना हो सके कद को संवाKरये।
दांत खटटे
26.08.09

कर दये इस nाइवर ने। न#दलाल भारती

33-कजा
तीन महना हो गया । मेरा पांच सौ [पया तो वापस कर दो।
दे ख रहे हो भख
ू े मरने क नौबत है ।तीन महना तन2वाह नहं
मल रह है। तम
ु तो दो3त हो सब जानते भी हो।
दफ् तर का दो3त हूं। सब जानता भी हूं। 
या खास जानते हो कुछ बताओ
तD
ु हे नौकर से 7नकाल दया गया है ।
हां ......तभी तो तन2वाह नहं मल रह है । तम
ु पांच सौ
[पये के लये तगादा कर रहे हो दो3त होकर। 
या म अपनी मेहनत के [पये डूबने दं ू ?
नहं। मेरे बाक पेमLट होने वाले है । कजा$ उतार कर शहर से
जाउूं गा यार।तD
ु हारा पांच सौ [पया लेकर नहं भागग
ूं ा।
मझ
ु े जQद चा हये। तD
ु हारे ससरु दQल म बडे पदा:धकर है
जाकर उनसे [पये लाओ और मेरा कजा$ चुकाओ।
कैसे दो3त हो मस
ु ीबत म ढकेल रहे हो ? कजा$ जQद चुका
दं ग
ू ा। मैने अपना समझकर तD
ु हारे सामने हाथ फैलाया पर
तम
ु बेगाना समझ रहे हो।
तकरर मत दो। [पया वापस करने क सोचो।
जQद हो जायेगा।
वादा.......
पका..........

जQद बोनस का [का हुआ पैसा मल गया। सबसे पहले कजा$
उतारा। नौकर भी मल गयी पर दो3त का दया हुआ घाव
नहं भरा। न#दलाल भारती 28.08.09

34-घड़
ु क
रामबरन,का भग
ु तान महन बाद भी नहं हो रहा था कभी
बजट नहं है तो कभी एकाLट आ फसर नहं है का बहाना
बनाकर साहब लोग पQला झाड़ लेते। बेचारा रामबरन अपने
घर -पKरवार के खानखच$ क कटौती कर दफतर के चाय-पानी
आ द क <यव3था कर रहा था यो क ये <यव3था चपरासी
के िजDमे थी। इसी बीच oो के बडे अ:धकार आ गये
काया$लय 8मख
के आदे शानुसार चपरासी रामबरन ने चाय

नाRते क Sयव3था क पर वह 3कूटर म पेEोल नहं भरवा
सका। कुछ दे र बाद छोटे दजp के अ:धकार OवCोह साहब
रामबरन से बीस [पया पान के लये झटक लये खQ
ु ले नहं
होने का बहाना करके। रामबरन क पीड़ा जबान पर आ गयी
वह बोला सचमुच कुछ साहब लोग पद और दौलत क
ब#नरघुड़क छोटे कम$चाKरय+ पर रौब जमाने के लये दखाते
है ।। न#दलाल भारती 28.08.09

35- ध'यवाद
भाई साहब बहुत बहुत ध#यवाद।
कस बात के लये ?
रोट अपने साथ Pबठाकर Wखलाया था जो।
कब.......?

प.चीस साल पहले। जब मझ
ु े नौकर से 7नकाल दया गया
था । दो3त दरू  बना चुके थे। ऐसे बरु े वत क रोट का
3वाद कैसे भल
ू सकता हूं।
प.चीस साल से एक शहर से दस
ू रे शहर तक ध#यवाद का
भार ढो रहे हो वह भी एक वत क रोट का।
हां भाई साहब। मेरा ध#यवाद कबूल करो।
यार ध#यवाद के पा तो तम
ु हो एक रोट खाकर आज तक
भल
ू े नहं। ध#यवाद..........
न#दलाल भारती 28.08.09

36-घोड़ा
घोड़े वाल :गफट आ फस वाल+ को नहं मलेगी या ?
वो तो अ#तःसेवा 8 श`णा:थयc के लये थी। 
या बात कर रहे हो साहब ?
सच तो कह रहा हूं।
झठ
ू कह रहे है ।
कैसे ? 
या आपको नहं मल ?
मल ना।
साहब के दरू -दरू के KरRतेदारो को द जा रह है हम य+
नहं ? हम तो कDपनी के कम$चार है । दे र रात-रात तक काम
कया उसका या ? या :गफट के भी हकदार नहं ?
इस दफतर के कम$चाKरय+ के लये अ#तःसेवा 8 श`ण नहं
था।
दरू -दरू के KरRतेदारो के लये था।
ट.वी.काय$>म जीजाजी नहं दे खा या ?
मतलब अंधेरपुर नगर कनवा राजा.........न#दलाल भारती
02.09.09

37-बेट
बडे खश
ु लग रहे हो।
हां।
दहे ज क फसल दे खकर।
नहं। वत$मान म दहे ज पाप हो गया है । 
या....?
हां.......
िज#दगी भर असOु वधाओं के बोझ तले दबा बेट+ क पढाई लखाई, सख
ु -सOु वधा पर जो रन- कज$ कर खच$ कया उसका 
या ?
बेट का बाप नहं करता है या ?
फर इतनी खश
ु ी य+ ?
सपनो म चार चांद लग गया।
वो कैसे ?
बेट ने टापकर दया। 
या.........?
हां......
अरे वाह मब
ु ारक हो। न#दलाल भारती 02.09.09

38-मुकाबला
नई कार कैसी चल रह है
बहुत ब ढया।
आपक एवरे ज ठ(क दे रह है ना ?
हां तीसर सOव$स के बाद एवरे ज बढ गया है ।
अरे ये नई बा्रउन कलर क मोटरसाइ कल कसक है ?
टाइOप3ट है ना उसी क है ।
छोटे लोग+ क पस#द ऐसे ह होती है । बड़े लोग+ क पस#द
भी बड़ी होती है ।

बड़े लोग+ का मक
ु ाबला छोटे लोग कभी नहं कर सकते।
सफेद और काले रं ग क प#नी चढ कार, बडा पद और अ:धक
दौलत होने से आदमी बड़ा नहं बनता है साहब जी.........
कैसे बनता है ? तू ह बता दे ,अब तो तम
ु छोटे लोग+ से ह
सीखना पड़ेगा।
बड़ा बनने के लये सहानभ
ु 7ू त,सlभावना और आद मयत का
भाव भी होना चा हये।
अमत
ृ वचन दोन+ के कान म पड़ते ह दोन+ नाक तक जमीन
म गड़ गये। न#दलाल भारती 07.09.09

39-वकास
बहुत शोर हो रहा है । कुछ सन
ु ायी नहं पड़ रहा है ।
लोहा काटने क मशीन का शोर लगता है ।
हां कहं लोहा कट रहा है।
सामने कुछ ना कुछ कटता रहता है भाई साहब। 
या कह रहे है ?
ठ(क कह रहा हूं। लोहा है तो चीख सन
ु ाई पड़ रह है वरना
चीख तक नहं 7नकलती और टुकड़े-टुकड़े कट भी जाते है । 
या...?
हां। Oवकास 8ा:धकरण के इंजी7नयर साहब का बंगला सामने
है ।
मतलब........
साफ है

कसी ना कसी तरह का Oवकास काय$। न#दलाल

भारती 13.09.09

40-तकदर
घनRयाम पानी म बदबू आ रह है ।

नहं। कसी को नहं आ रह है तो तम
ु को कैसे आ रह है।
अकुवागाड$ से पानी साफ हो रहा। पानी म दवाई भी तो डाल
जा रह है ।
म कह रहा हूं तो मानता य+ नहं ?
आंख ना दखाओ भाई। पानी भरना मेर डयट
ू  नहं है । 
य+ नहं है ?
नहं है । म अटे LडेLट तो नहं ?
तD
ु हार डयट
ू  है अटे LडेLट हो या अफसर ?
अगर हमार है तो तD
ु हार य+ नहं ?
हमार य+ ?
nाइवर हो। तD
ु हार डयूट साढे नौ बजे से श[
ु होती है आते
हो बारह बजे दन भर फोन का Pबल बढाते रहते हो। कम से
कम खद
ु के लये साफ पानी भरवा लया करो।
आड$र फालो करना तD
ु हार मजबरू  है और अघोOषत सOु वधाओं
का उपभोग मेर तकदर।
न#दलाल भारती 13.09.09

41-वैभव
साहब है ।
साहब कारखाने गये है ।
कहां से आये है ।
दQल से।
Oव]ापन क 87त लेकर दQल से मेरठ आये है ।
और भी काम है मेरठ शहर म।
सम
ु न बाई चीQड वाटर लाना,जेLटलमैन gयासे लग रहे है ।
आप कौन है ।
rेजय
ु ेट, सेQस Kर8जे#टे टव हूं। ला3ट मंथ ह मC
ु ण पKरवार से
जड़
ु ा हूं। 

वा ल फकेशन,डेिजनेशन नह,का3ट पूछ रह हूं। कभी-कभी
लोवर का3ट के पढे - लखे,हे Lडसम,अपटूडेट आ जाते है पता ह
नहं चलता।
येस मैडम आई ऐम आलसो द सेम।
sवाट.....
येस मैडम। ये वैभव लोवर लास क छाती पर टका है िजस
दन लोवर का3ट करवट ले लेगा शोषक समाज क जड़े
उखड़ जायेगी। न#दलाल भारती 15.09.09

42-खच
टे लफोन क घनघनाहट सन
ु कर ज7तन लपका।
हे लो ज7तन।
हां बड़े पापा।
तD
ु हारे पापा खड़कच#द को मरे साल भर हो गये है पहला
AाYद है ।
हां पापा। कुछ करना है या ? 
य+ नहं। AाYद म Oपतर+ क मिु त के लये जो पज
ू ापाठ,भोज आ द का काय$>म होता है Oव:ध Oवधान से करवा
दे ना। मेर तो इ.छा थी क सब कुछ सामने करवाता पर
3वा3थ इजाजत नहं दे रहा है।
ज7तन-करवा दं ग
ू ा।
Aीमती खड़कच#द- कौन था ज7तन।
ज7तन-बड़े पापा मDमी।
Aीमती खड़कच#द-या कह रहे थे।
ज7तन-पापा का AाYद Oव:ध Oवधान से करवाने को कह रहे
थे।
Aीमतीखड़कच#द-नहं करना है फालतू का खच$। न#दलाल
भारती 15.09.09

43-संकप दवस
फर रावणदहन ?
दे ख नहं रहे हो ?
कब तक पुतला जलाने का 3वांग होगा ? 
या रावण दहन 3वांग है ।
नहं। अ.छाई क जीत और बरु ाई क हार का 8तीक है ।
तब 3वांग कैसे हुआ।
वत पुतला जलाने का नहं है अब।
और या करने का है ?
अपने भीतर का रावण जलाने का है । हनम
ु ान क तरह अपनी
शितय+ को पहचानने का है । ]ान क iयो7त जलाने का है।
गरबी

के Wखलाफ

उठ

खड़ा होने

का

है । रा1Eय

एकता,सामािजक समानता और सlभावना का संकQप लेने
का है ।
अगले साल से संकQप दवस मनायगे। न#दलाल भारती
15.09.09

44-पहचान
बधाई हो भाई OवRव ह#द दवस के मौके पर फजी म
तD
ु हार कOवताय पढ गयी।
वहां जय-जयकार यहां अं:धयारे का राज।
अरे यार अं:धयारा कैसा ?
जय जगत ् जय जगत ् क ह#द भाषा का उिजयारा तो है ।
हां मातभ
ृ ाषा क छांव, वह पहचान है ।
उसी छांव और पहचान क बधाई कबूल करो यार।
ध#यवाद जनाब। न#दलाल भारती 15.09.09

45-भ डारा
कहां से आ रह है तीनो पीढ एक साथ ?

भLडारे का भोजन कर। 
या भLडारे का भोजन ?
आRचय$ कैसा ? तम
ु कहा जा रहे हो अकेले कटोर लेकर ?
भLडारे का 8साद लेने।
खाने य+ नहं ?
गरब,मजदरू मेहनत मजदरू  करते है,चटनी रोट से काम
चलाते है । एक दन 3वा द1ट भोजन उ#हे मल ये इस लये।
भLडारा गरब+ के लये होता है हम य+ लट
ू े । न#दलाल
भारती 16.09.09

46-वारसनामा 
य+जी मा◌ा7न$ग वाक् से आ रहे है ?
हां........
उदासी य+ ?
बाप को दे खकर।
कसके बाप मल गये।
सDप#न बेटे के। दे खने म तो ऐसा ह लग रहा था।
सDप#न बेटे के बाप को दे खकर उदासी ?
ले कन बाप तो Oवप#न लाचार और अंधा है । :गeट,प%थर,ढे ले
वाल जमीन Pबछौना है ।ओढना के नाम पर गज भर मैलाकुचैला कपड़ा झलक रहा था। घर तो क.चा है पर घर के
सामने आलशान कार,बाइक$ खड़ी है । आधु7नक सOु वधा से
क.चा घर लदा पड़ा है । वैभव क नुमाइस$ चलती राह झलकती
है और बाप का दख
ु भी।
आधु7नक वैभव क नुमाइस$ बाप के लये ख टया Pबछौना तक
नहं।

यह उदासी का कारण है । औलादे आधु7नकता क रफतार म
इतनी आगे 7नकल गयी है क अपने फज$ को भल
ू रह है । ये
कैसा वैभव है । कैसे उ#हे फज$ याद आऐगा।
मां-बा का याद दलाना होगा।
वो कैसे ?
वाKरसनामे से बेदखल कर। न#दलाल भारती 17.09.09

47-बड़े लोग
श मयाने वाल भइया$ त7नक इधर आना।
क हये साहब कहां श मयाना लगाना है ?
हम तो दरू शहर से आये है श मयाना कहां लगवायेगे। एक
बात पूछने चाह रहा हूं।
पछ
ू ो साहब।
कल से दे ख रहा कोQडtnक,चाय, मठाई,नाRता और खाने क
हर चीज पर :गYद क तरह :गर रहे हो बाप बेटे पर पानी
नहं पी रहे हो ऐसा य+ ?
आप नहं जानते या ये लोग कौन है?
कौन लोग है ?
छोट जा7त के लोग है । इनका पानी बडे लोग कैसे पी सकते
है ।
खा सकते है पर पानी नहं पी सकते। अ.छा बताओ तम
ु बड़े
कैसे हो गये ?
जा7त से ?
नहं बड़े तो ये लोग है । इनम आद मयत है , मान-सDमान है ।
बड़ा बात तो ये है क ये लोग दस
ू र+ का मान रखना अ.छ(
तरह से जानते है । आदमी सlकम$ से बड़ा बनता है । जा7त से
कोई

बड़ा नहं बनता श मयाने

भारती18.09.09

वाले भइया$।

न#दलाल

48-झूठ का जहाज
कालबेल बजते ह चपरासी हाथ पीछे सर नीचे कर खड़ा हो
गया। अ:धकार बोले रहस बक मनेजर कुरे शी साहब आ रहे
है ।चाय नाRते का अ.छा इंतजाम कर लेना।
रहस- हमार कालोनी म तो रहते है कुरे शी साहब। सर नाRते
का इ#तजाम तो कर दं ग
ू ा ले कन सव$ नहं कर पाउूं गा।
अ:धकार-यो।
रहस-सर कुरे शी जानते है म अ:धकार हूं।
अ:धकार-या ?
रहस-हां सर टोले म [आब बनाने के लये।
अ:धकार-तम
ु नहं तो कौन करे गा ? दस
ू रा चपरासी कहां से
आयेगा।
Pबहारलाल-सर मै कर दं ग
ू ा।
अ:धकार-ओ.के.
कुरे शी साहब आये। Pबहार चाय नाRता बड़े सDमान के साथ
चाय नाRता सव$ कया। दोनेां अ:धकार दे र तक Oवचार Oवमश$
कये।कुरे शी साहब जाने लगे तब अ:धकार महोदय बोले
Pबहारलाल इधर आना।
Pबहारबाब-ू येस सर।
अ:धकार- साहब ये Pबहारलाल है। काफ पढे लखे है अभी
बाबू के पद पर है । आज चपरासी बने है ?
कुरे शी साहब-आपके दफ् तर म चपरासी नहं है या ?
अ:धकार-है ना। उसी का [तबा बढाने के लये बने है ।
कुरे शी-चपरासी का नहं Pबहारलाल का [तबा बढा है मेर
नजर म। झठ
ू के जहाज पर उड़ान भरने वाला रहस चपरासी
है ना यहां। Pबहारलाल सलाम करता है आपके सेवाभाव को।
न#दलाल भारती...... 19.09.09

49-अहमयत
कौन है ?
KरRतेदार है ।
पहले तो कभी नहं दे खा ?
कैसे दे खेगे म भी पहल बार दे ख रहा हूं ?
कैसे KरRतेदार है ?
बुरे वत म तो बहुत दरू के थे पर अब सगे बन रहे है ।
मतलब 3वाथ$ ..........
हां। बीस दन के लये मां-बाप ने भेजा है खास काम के
लये महगाई के दौर म। अरहर क दाल नSबे [पया कलो
है । बाइस$ साल पहले बीस [पया कलो थी। इनके बाप के
अ.छे दन थे मेरे फांके के। 2◌ौर अब तो इनके बाप बड़े
अ:धकार होगे। बरु े वत म मेर मदद तो नहं कये घाव
ज[र दये थे◌े।
तम
ु य+ लट
ू ा रहे हो ?
वत क अह मयत का एहसास कराने के लये। न#दलाल
भारती...30.09.09

50-कूपन
कर दया ना इ8ेस बांस को ?
कैसे ?
कूपन दे कर।
महोदय,दवाल के कूपन कDपनी ने दये है । बांस का कूपन दे
दया तो इसम बुरा लगने क या बात है ?
छोटे कम$चाKरय+◌े◌ं को मuके कहां मलते है? अ.छा इD8ेस
कया ? न#दलाल भारती...30.09.09

51-(च'ता।

खौफ म य+◌े ?
खौफ नहं :च#ता।
कैसी ?
पि%न सपने म कोई मेरे साथ कोई अनहोनी दे खकर चीख
उठती है ।
यह तो समप$ण है ।
:च#ता नहं OवRवास करो।
कैसा OवRवास।
KरRते पर ..... न#दलाल भारती...05.10.09

52-नाक क उूं चाई।
िजद ना कर+।
िजद नहं कैKरयर और कल के 87त सजगता है । 
या ? नाक कटवा कर।
#हं नाक उं ची कर।
छोट जा7त के वर के साथ फेरे लेकर ?
हां। जातीय Aे1ठता दे खने का नहं योdयता दे खने का समय
है ।
तेर िजद ज[र कुल क नाक उं ची करे गी बेट। न#दलाल
भारती...07.10.09

53-कसम
कहां जा रह हो बहू ?
अ3पताल।
कल पैथालोजी गयी थी ना ?
हां।
आज अ3पताल य+।
अgवाLटमेLट है आज का। 

य+ खन
ू करवाने के लये ? बहू मेरे जीते जी ऐसा नहं
सकता। बेट दो खानदानो क :चराग होती है ,नया उजास
आने दो। मेर कसम है बहू चौखट से बाहर पांव ना
रखना........न#दलाल भारती...07.10.09

54- उद5ड
अरे ये पो3टकाड$ कहां ले जा रहे हो ?
कड़ा कार ग#द कर रहा है,फकने के लये ले नहं।
:चटठ( से ?
म दे ख रहा हूं :चeठ( है फकंू गा नहं।
समझदार है या बेवकूफ ?
का समझते हो समझदार का ठे का तD
ु हरे पास है ।
OवOपन दहाड़ी उदLड हो, बेवकूफ हो और सं3कारहन भी।
न#दलाल भारती...19.11.09

55-कहानीपाठ
हे लो लालाDबर साहब कैसे है ?
ठ(क हूं आप कैसे है ?
लालाDबर साहब 28 नवDबर को महने का आWखर श7नवार
है ।
स हि%यक संगो1ठ( समझ गया। क् या काय$>म है ?
कहानीपाठ रखा है इस बार।
कसका ?
क#है या का।
rप
ु का नहं है क#हैया। नहं आ सकंू गा योगेRवर बाबू।
राजनी7त] अखाड़ा

मत बनाओ

सा हि%यक सं3था

को।

लालाDबर साहब मत आना कहते हुए योगेRवरबाबू ने फोन
रख दया। न#दलाल भारती...04.12.09

56-दोयम दज7 का 8यवहार
कालबेल सन
ु कर अटे LडेLट हािजर हुआ।
बांस -गDभीर को भेज दो।
गDभीर-सर आपने बल
ु ाया है ।
बांस-हां। आ फस जQद आया करो।
गDभीर-दे र से तो नहं आया हूं। मेरे अलावा और कोई आता
है या समय पर? सर मेरे साथ अ#याय य+ ?
बांस-कैसा अ#याय ?
गDभीर-उ.च और सजातीय+ को मनमानी सOु वधाये और मेरे
साथ दोयम दजp का <यवहार अ#याय नहं तो और या है
सर? न#दलाल भारती...04.12.09

57- कसम
बहू तू कह रह थी ना मझ
ु े राखी बांधने जाना चा हये। तू कह
तो इस र`ाब#धन पर म अपने भाई को पहल बार राखी बांध
आउ।
अDमा-साठ साल क उv म पहल बार राखी बांधने का मन
हुआ है । दे र ना करो अDमा अभी 83थान कर+। म बाद म
चल जाउं गी।
तू कह रह है तो जा रह हूं।
अDमा आ गयी।
हां।
मामाजी तो बहुत खश
ु हुए होगे।
नहं रे मझ
ु को दे खकर भाई भौजाई के उपर से पहाड़ :गर
पड़ा। मेरा मन नहं हो रहा था पर तD
ु हारा कहना मानना था
राखी बांधकर बैरंग लौट आयी। अब ना जाउूं गी कभी बहू।
ऐसी कसम ना लो अDमा। न#दलाल भारती 5.12.09

58-सपना
बहू दफ् तर जाओगी ना ?
हां सासम
ु ां ।
चेक द3त2त करके छोड़ जाना। 
य+ ?
काम है ।
कौन सा काम आ गया।
सवाल जबाब नहं। हर बात बताना ज[र तो नहं।
ब.चे के भOव1य और सपने के घर के लये जोड़ ररह हूं। ऐसे
कैसे दे दं ।ू
दे ना तो होगा।
नहं द तो ?
दरू जाना होगा ।
लिजये।
बेट का सपना पूरा हो जायेगा।
मेरा उजाड़कर। न#दलाल भारती 5.12.09

59-एफ.आई.आर.
इं3पेटर साहब एफ.आई.आर. लख लिजये।
कौन गन
ु हगार है ।
मेर सास। 
या गन
ु ाह है ?
S◌ोट को घट
ु ने के उपर वाल जी#स Pबना बाह वाले टापस ्
पहनने को मेर सास दे ती है और मझ
ु े घघ
ु ट म रखने का
गन
ु ाह कर रह है । सर से पQलू हटते ह मेर मां को खर
खोट सन
ु ाती है ।बदा$Rत नहं होता इं3पेटर साहब रोज का
उ%पीड़न।
मतलब-बेट बहू म भेद।

ठ(क है लख एफ.आई.आर.। घर पहुं:चये पु लस कुछ दे र म
पहुंच जायेगी।
कोई घर म है ।
कौन ?
प ु लस।
प ु लस का या काम ?
बहू के उ%पीड़न का केस दज$ हुआ है :गरफतार करने आये है ।
अधेड़ सास Pबलखती हुई बोल बहू ये कैसा केस है ।
इं3पेटर साहब :गरफतार के बाद बता दे गे सासज
ु ी।
बहू माफ करे दे फर ना होगा ऐसा भेद।
ले लू एफ.आई.आर.वापस ?
हां ...बेट-बहू को एक नजर से दे खग
ू ी अब ना क[ंगी ऐसा

गन
ु ाह क तझ
ु े एफ.आई.आर. लखाना पडे।
न#दलाल भारती 5.12.09

60-दाद मां
एक सवाल पछ
ू ूं।
सवाल य+ उपज रहा है ।
बोलो तो पूछूं।
उपज गया है तो पूछ लो।
तD
ु हार तरक का राज या है ?
दाद मां। 
या....?
यह सह है । दाद मां ने िजस पके इरादे और दरू wि1ट के
साथ पापा और बआ
क परवKरश करते हुए <यापार का न#हा

पौधा रोपा वह पौधा वटव`
ृ है । िजसक छांव म गरब+ और
असहाय+ को भी आAय मला हुआ है ।

सच म हला दरू wि1टता फश$ से अश$ तक पहुंचाने क कुबत
रखती है । दादमां जीव#त उदाहरण है ।
न#दलाल भारती 5.12.09

61-वरदान
बी टया वरदान बन गयी।
वो कैसे ?
िजस दन पैदा हुई थी उसी दन कारोबार नींव पड़ी थी।
वी टया iयो-iय+ बढ रह है कारोबार भी बढ रहा है । बी टया
दे वी लगती है ।
लगती नहं। होती है घर क लoमी बे टयां।
OवRवास मजबूत हो गया है । न#दलाल भारती 5.12.09

62-घर
बहुत ब ढया घर बनाये हो।
प%नी के कारण बना है ।
मैडम क नेमgलेट जो लगायी है ।
समझ लिजये। इसके अलावा और भी कुछ है ।
और या ?
पKरAम,%याग, समप$ण और आ3था भी
कसक ?
प%नी क।
मान गया। 
या ?
नार का सDमान घर को मं दर और 2या7त म वOृ ^ करता है ।
न#दलाल भारती 5.12.09

63-मतलब
बहुत लखते हो। कहां-कहां से रायQट मल है ?

कहं से नहं।
फर या लखने का मतलब इस महं गाई के युग म?
है ना। 
या ?
जन-रा1E 3◌ोवा का पL
ु य और
और या ?
बढता रहता है 7नर#तर मां-बाप का आशीवा$द।
बस...दौलत तो मल नहं।
पहचान,मान,सDमान दौलत से खरद सकते है ? न#दलाल
भारती 7.12.09

64- मां
घर तो बड़ा बना लया है । नेमgलेट नहं लगाये हो।
आने म दकत हुई ?
नहं पर नेमgलेट तो होनी चा हये।
आपने दे खा नहं नDबर gलेट पर उपर मां लखा है ।
मां लखने भर से पहचान हो जाएगी या ?
और या मां ह तो हमार पहचान है ।
आंख खल
ु गयी मां के 87त A^ा दे खकर। न#दलाल भारती
7.12.09

65- दरकार।
बेट का Sयाह मब
ु ारक हो।
ध#यवाद बहन जी।
दमाद पढा- लखा रं ग-[प से अ.छा है । कमासत
ू भी होगा ?
हां है ना।
बुरा नहं मानना। अ#त$जातीय Sयाह करके अ.छा नहं कया।
Pबरादर म या लड़को का टोटा पडा है । 

या बात कर रह हो भागवान भेद क दवार को तोड़ने और
3वधमj मजबूती के आज क दरकार है । न#दलाल भारती
7.12.09

66-भखार
Eै फकजवान आटो Kरशा को बत से ठ+कते हुए बोला 7नकल
दस का नोट और बढ आगे।
चालक-अभी बोहनी नहं हुई।
जवान सब
ु ह से दस Eे न आ चक
ु  और तD
ु हार बोहनी नहं
हुई।
चालक-नहं।
जवान -अभी आगे बढ। आकर दे दे ना।
चालक-एक दन तो ब2श दे ते।
आटो कुछ दरू बढा तो आटो म बैठे पहल बार शहर आये
दादाजी पौी से बोले बी टया शहर म भीखार वदm म भीख
मांगते है या ?
पौी-नहं दादाजी कैसी बात करते हो।
इतने म चालक बोला वदmवाला भीखार नहं लट
ू े रा है ।
दादाजी-अ.छा समझा भीखार नहं घूसखोर है ।
चालक-काश घूसखोर के वायरस+ का सफाया हो जाता तो
अपना दे श फर से सोने क :चtड़या बन जाता। न#दलाल
भारती 30.12.09

67- बैड डे
कैसी Pबती छुeट ?
ब ढया। आप बताइयp या कुछ नया हुआ दफतर म?

कुछ नहं तम
ु उधर छुeट पर गये इधर बांस ने कDपनी डे
मनवा दया। बहुत मजा आया। सभी सपKरवार शा मल हुए। 
या ?
चौक य+

रहे हो ?

म छुeट पर था। मेरा पKरवार तो नहं।
फोन नहं लगा।
आ फस कार है ,nाइवर है , अटे LडेLट है । कसी को भेजकर मेरे
पKरवार को खबर तो द जा सकती थी।
तम
ु जैसे छोटे लोग+ क योdयताओं, हत+ और हक+ क तो
यहां :चता जलती है या तम
ु को मालम
ू नह?
हां Oपछले कुछ सालां◌े से तो कDपनी डे मेरे◌े और मेरे
पKरवार के लये बैड डे बन गया है ।
न#दलाल भारती 30.12.09

68- या:ी
कLडटर साहब आपके समप$ण भाव को सलाम।
कैसा समप$ण Aीमान ् ?
मानवता और कत$<य7न1ठा के 87त।
इस लायक कब हो गया ?
मानवतावाद और कत$<य7न1ठ महापु[ष सबको नहं दखाई
पड़ते।
आपको कैसे दख गया ?
याी बूढ मां का टकट आपने जो खरदा ?
त7नक सी मदद और इतना उं चा 3थान ?
कत$<यपालन के साथ मानवसेवा आदमी का दजा$ बढा दे ती है
कLडटर साहब।
सड़क पर भागते-भागते बेसहारा और गरब लोग+ का दद$
महसस
ू करने क मदद क आदत हो गयी है

कLडक् टर साहब अपना नाम बतायेग?
राजेशकुमार।
नमन करता हूं आपको और आपक आदत को भी। ये आदत
नर से नारायण बना दे गी।
आप कौन है ?
एक याी। न#दलाल भारती 01.01.2010

69- आ.था
साहब पु1पग.
ु छ 3वीकार किजये।
कस खश
ु ी म रोहन ?
आपके ज#म दन क खश
ु ी म।
बेटा शुभकामना

शSद बोल

दे ता, तD
ु हारे अ#त$मन

क

शभ
ु कामना मझ
ु े मल जाती। पैसा खचा$ करने क या
ज[रत थी ? दै 7नकवेतनभोगी हो। तंगी से गज
ु र रहे हो।
जानता हूं गरब हूं पर आ3था से नहं। 3वीकार किजये
साहब।
तD
ु हार आ3था के सामने नतम3तक हूं रोहन।
साहब ये पु1पग.
ु छ 3वीकार किजये।
मझ
ु म अ3वीकार करने का सामxय$ कहां। आ गले से लग जा
रोहन। न#दलाल भारती 01.01.2010

70- कामयाबी
राहुल तम
ु पढाई पर Yयान नहं दे रहे हो। मालम
ू है तD
ु हार
पढाई पर कतने का खचा$ आ रहा है ।
हां पापा।
मालम
ू है तम
ु से कतनी उDमीदे है ।
हां पापा सब मालम
ू है ।
इसके बाद भी पढाई पर Yयान नहं।
पापा रटू तोता नहं बनना है ।

फर या बनना चाहते हो ?
काPबल पापा।
कामयाब हो जाओगे।
रटू तोता बनकर तो नहं। 
या ?
हां पापा। मन-मा फक काPबलयत हा सल

कर

लेने दो।

कामयाबी मेरे पीछे पीछे चले◌ेगी।
न#दलाल भारती 15.01.2010

71-वंश
मDमी सध
ु ार भइया$ के नाना तD
ु हारे सामने य+ रो रहे थे।
वंश के गम म। तीन-तीन बे टयां है । बेटा एक भी नहं। 
या ?
हां।
मDमी तD
ु हे और पापा को :च#ता नहं ?
नहं।
सध
ु ार भइया$ के नाना को य+ ?
मWण$कWण$का कौन ले जायेगा ?
मDमी बे टयां भी तो मWण$कWण$का ले जा सकती है ना ?
हां बेट य+ नहं। बे टयां भी तो हमार वंश है । न#दलाल
भारती 15.01.2010

72-टोपी
पापा काश अपना घर भी ऐसा होता।
बेटा मेहनतकश ऐसा घर कैसे बना पायेगा। ऐसी सख
ु सOु वधा
कैसे जट
ु ा सकेगा ?
कसका घर है ।
सफेदटोपी वाले का।
म भी टोपी वाला बनग
ूं ा पापा।

नहं बेटा। 
य+ पापा।
जनता का खन
ू चस
ू ने वाला। नोट खाने वाला, चारा खाने वाले।
ताबत
ू लट
ू ने वाला कोई मेरे बेटा को कहे मुझे पस#द नहं ऐसी
तरक। इससे बेहतर तो मर जाना होगा मेरे लये बेटा।
पापा ना खन
ंू ा। ना नोट खाने वाला बनंग
ू चस
ू ग
ू ा। ना कोई
दस
ू रे तरह का y1Eाचार क[ंगा और ना सफेट टोपी पर
का लख पोतग
ंू ा। जन-दे श सेवा का काम क[ंगा और तD
ु हार
इमा$नदार को आगे बढाउूं गा। OवRवास करो पापा।
जग
ु -जग
ु जीओ मेरे लाल। न#दलाल भारती 15.01.2010

73-'यज

कैसा पेपर लेकर खड़े हो ?
#यज
ू है सर।
कैसी #यज
ू है ?
मझ
ु े परु 3कार मल रहा है । 
या ............?
येस सर। इ#टरनेट पर 8साKरत #यूज है ।
इ#टरनेट से O8Lट लया है ?
हां।
इतना सन
ु ते ह सर क छाती पर जैसे पहाड़ :गर पड़ा। वे
बोले रख दो पढ लूंगा। बाद म दे खने म आया O8Lट कचरे के
tडSबे से गह
ु ार लगा रहा था। न#दलाल भारती 19.01.2010

74-कामधेनु
साहब है ?
नहं है साहब। आपतो बै ठये सर। अरे रोशन साहब के लये
चाय पानी लाना।
साहब कब मलेग।

लोकल गये है ।
साहब के अलावा और कोई है या ?
है ना सर और अ:धकार।
है या कोई ?
अभी तो कोई नहं है।
यार जब आता हूं तम
ु ह मलते हो काम के बोझ से दबे हुए। 
या तD
ु हारे पास <यितगत काम नहं होता और+ क तरह
?
साहब आ फस टाइम है ।
और+ के लये नह
म अपना फज$ पूरा कर रहा हूं। बेइमा$नी मेर 7नय7त नहं।
यार तम
ु तो कामधेनु हो पर कसाई के खट
ूं े से बध गये हो।
न#दलाल भारती 20.01.2010

75-टे बल कले5डर 
या तD
ु हार टे बल पर कलेLडर नहं ह।
दवाल पर :चपका रखा हूं।
टे बल पर होना चा हये क नहं ?
दवाल पर तो है ।
टे बल पर होना चा हये।
नहं ह। 
य+ ? अ:धकार लोग तो खब
ू बांट रहे है । तD
ु हारे पास टे बल
पर रखने के लये नहं है ।
Aीमानजी् म अ:धकार नहं अदना सा कम$चार हूं। न#दलाल
भारती 27.01.2010

76-पहुंच

तD
ु हार तकदर नहं बदल इस कDपनी म । दे खो लोग कहां
से कहां पंहुच गये िजनको नहं चहुंचना चा हये था। अ.छे पढे
लखे होकर हारमो7नयम बजाते रह गये। 
या ?
अरे यह टाइपमशीन।
तकदर कैद हो गयी है [ ढवाद क कैद म । हाड़फोड मेहनत
का 87तफल नहं मल पा रहा है । इस टाइOप3ट क नौकर
पर भी दबंग लोग एहसान जताते है । सोचते है उनक कृपा से
मल है । पढाई लखाई मजाक बन चक
ु  है । 
य+ ?
Aे1ठ पहुंच कहां ? होती तो कब क बदल गयी होती पर
.......
पर या ? 
मजोर तो स दय+ से ल7तया जा रहा है । म कैसे बच सकता
हूं दबंग+ के बीच। 
या ? न#दलाल भारती 27.01.2010

77-#नर=ण
7नर`ण स म7त के सद3य+ क बैठक म कतने लोग बैठेगे
?
प#Cह।
कौन-कौन।
मामल
ू  सा कलक$ लालबाबू य+ ?
हम ना और नहं Aे1ठता बिQक काPब लयत बैठा रह है हाई
कमेट के साथ।
न#दलाल भारती 27.01.2010

78-भाषा@ोह

ह#द गंगा है वकत<य सन
ु कर एक Aोता 87त >या 3व[प
बोला बकवास है । पीछे बैठे <यित से रहा नहं गया वह
उ%तेिजत 3वर म बोला अरे चुप रह भाषाCोह। न#दलाल
भारती 18.02.2010

79-बोहनी
पैसे#जर-ट.ट से -सर ए-टू कDपाट$ मेLट म भी सीट है यह
चेक कर दे ◌ेगे।
ट.ट.सीट एडजे3ट करवा दया यह भी कर दे ता हूं।
पैसे#जर ट.ट. को टकट थमाकर बैठ गया।
ट.ट. बोला शाद म जा रहे है या ?
पैसे#जर-हां।
ट.ट.- बोहनी करवाइयp। न#दलाल भारती 20.02.2010

80-शकार
सब
ु ह नौ बजे से रात आठ-आठ बजे तक काम ले रहा है ,इसके
बाद भी गलती 7नकाल कर गरु ा$ता है । आदमी बीमार क
हालत म भी काम कर रहा है जब क आराम क स2त
ज[रत है । 8ो%साहन के बदले दLड कैसा 7नद$ यी है ?
हां राम-ू उं ची योdयता के बावजद
ू पद-द लत का दख
ु भोग रहा
हू◌ू◌ं।
राम-ू दख
ु ीबाबू मWु खया को मख
ु क भां7त होना चा हये पर ये
तो◌े शकार हो गया है ।
न#दलाल भारती 24.02.2010

81-Aडनर पाट/
आ गये। वत के बड़े पाब#द हो छोटा कम$चार होकर भी।
फज$ है । कम$ भी तो पूजा है ना।
tडनर पाटm म य+ नहं आये ?

छोटा कम$चार तो काम के लये होता है ।लोग आंसू दे कर
काम करवाना जानते है । वैसे कौन पूछता है मझ
ु जैसा छोटा
आदमी तो आंसू पीने के लये पैदा हुए है ।
शोषण और आंसू दे ने वाले लोग :गरे हुए होते है । न#दलाल
भारती 26.02.2010

82- Bवणकुमार
पापा दादाजी खफा य+ रहते है । 
य+ खफा होगे ?
मDमी इतनी खा7तरदार करते है ।दादाजी क जैसी सेवा हो रह
है वैसी तो कम लोग+ क होती है । हम भाई -बहन एक पांव
पर खड़े रहते है। इसके बाद भी कुढते रहते है ।
परु ाने 2यालात के है ना। तम
ु लोग य+ दख
ु ी होते हो ?
पापा हम नहं दादाजी दख
ु ी है । 
य+ दख
ु ी होगे ? 
य+ क उनक मजj का नहं कर रहे हो।
कैसी मजj ?
शहर म अकेले रहते। गांव म बडी कोठ( बनवाते। ढे र सार
जमीन लखवाते। परू  तन2वाह गांव भेजते तब दादाजी के
लये कलयुग के Aवणकुमार होते भले हम ना पढ लख
पाते।
नहं बनना
28.02.2010

ऐसा Aवणकुमार बेटा।

न#दलाल भारती

83-दद
कैसी रह होल ?
ठ(क ह समWझये जनाब। 
या ठ(क समझं◌ू? होल का रं ग तो चढा ह नहं है तम

पर।

Q◌ू◌ाट नसीब पर कौन रं ग चढे गा ? 
या कह रहे हो ?
:च#ता और भय के अलावा लट
ू  नसीब वाले के माथे पर
और कोई रं ग दे खा है या ?
ठ(क कह रहे हो उजाड़ी नसीब का यह दद$ है । न#दलाल
भारती 02.03.2010

84- सावन-भादC
पा.........पापा........... 
य+ 7घ7घया रहे हो साफ-साफ तो बोलो।
ये लो चाभी पापा। 
य+ ?
दादाजी के टांके कटवा लाओ।
तम
ु जा रहे थे ना बेटा।
जा रहा था पर अब नहं। ऐसी या बात हो गयी ?
दादाजी को ना जाने य+ ग3
ु सा आ रहा है । गा लयां दे रहे
है । अब आप सDभालो।
ठ(क है । मझ
ु े तो सDभाल लोगे ना?


बेटे क आंखे म सावन-भाद+ उमड पडे। न#दलाल भारती
05.03.2010

85- Dबछोह
बाबज
ू ी सामने दे खकर बताओ दखाई पड़ रहा है ।
जी डाटर साहब बहुत ब ढया दखायी पड़ रहा है आपरे शन के
बाद।
प.चा◌ीस हजार खच$ कर दये है आपके बेटे ने। आजकल
धनासेठ औलाद तो मां -बाप को अनाथ-आAम भेज रह है।
बड़े नसीब वाल+ हो बाबूजी। म हने भर बाद चRमा बनेगा
जाओ घर आराम करो।

जQद बना दो ना डांटर। 
य+ ?
गांव जाना है । अ.छा नहं लग रहा है यहां।
तकलफ दे रहे है बेटा बहू या ?
नहं।
जानती हूं। 3वग$ का सख
ु भोग रहे हो फर भी गांव जाने क
िजद।
हां डाटर ?
गांव म कोई बड़ी सDप7त छोड आये है या ?
कुछ है ह नहं।
जैसा सख
ु भोग रहे वैसा तो बड़े-बड़े धनासेठ+ को नहं नसीब
होता। य+ 3वग$ के सख
ु पर लात मार रहे कैसा Pबछोह है
बाबूजी ? न#दलाल भारती 05.03.2010

86- फरे ब
मामल
ू  सी योdयता बड़े-बडे फरे ब+ के भरोसे तरक के शखर
पर पहुंचे म. हरश च#द मातहत+ को भय म रखते। कोई सर
उठाने क को शश करता तो उसे चुप करने के लये तानाशाह
हरश च#C धमकाते हुए कहते मेरा कोई कुछ नहं Pबगाड़
सकता िजससे अपनी ल ु टया डुबोनी हो शकायत करके दे ख
ले। वत पलटा, कुछ साल बाद बे ्र कंग #यूज आयी म. हरश
च#द कानून क चपेट म आ गये। फरे ब क नीव पर टक
तरक भरभरा कर :गर पड़ी,जो लोग भयभीत रहते थे वे
खल
ु ेआम मह
ुं
06.03.2010

पर

थ-ू थू कर

रहे

थे।

न#दलाल भारती

87- तरकब
रोज-रोज नीम,आम,केला क प%ती मांगने वाल+ से तंग
आकर म. दयाल ने घर के सामने सूचना बोड$ लगा दया

और उस पर लखवा दया- पहले एक पेड़ लगाने क कसम
खाये - फर गह
ु ार लगाये। म. दयाल क तरकब काम आयी
और लोग+ के घर-आंगन म पेड़ झम
ू ने लगे।
न#दलाल भारती 08.03.2010

88- सलाम
अभी [कना था। वाड$ Sवाय पेन लाना।
ये लिजये।
नहं सर आप रWखये।
लखकर वापस कर दिजयेगा।
समय के पु क कलम थामने का दहु साहस कैसे कर सकती
हूं।
डा.◌ं बहन ऐसा य+ ?
कलम का सDमान,समय के प
ु को सलाम करती हूं।
D◌ौ आपके सदभाव को। नन#दलाल भारती 07.03.2010

89- फैसला
एक दन Aे1ठता और योdयता म Oववाद हो गया। Aे1ठता के
अ भमान क Pबजल योdयता के उपर :गरने लगी।योdयता ने
नvता पव
ू $क कहा आग मत उगलो आओ फैसले के लये पंचपरमेRवर के पास चले। आना-कानी के बाद आWखरकार Aे1ठता
मान गयी। g◌
ं ाचो ने योdयता को सव$Aे1ठ माना। अ#ततः
Aे1ठता ने योdयता के मह%व को 3वीकार कर पRचाताप करने
लगी य+ क फैसला समझ म आ गया था। Aे1ठता को
पRचाताप क अिdन म जलते हुए दे खकर योdयता ने गले
लगा लया।
न#दलाल भारती 08.03.2010

90-भीख

एक [पया दे दो जोर क भख
ू लगी है कहते हुद भीखार ने
हाथ फैला दया।
पराठे खा लो भख
ू लगी है तो।
पराठे नहं। 
य+ म भी तो खा रहा हूं।
एक [पया दे दो।
खल
ु े नहं है ।
कंजस
ू भीख नहं दे सकते कहते हुए वह भीखार बालक आगे
चला गया। न#दलाल भारती 08.03.2010

91-दलाल
कहां जाना है साहब ? अवि#तका से जा रहे है या ? टकट
क#फम$ है ? 
य+ पछ
ू ताछ कर रहे हो भाई।
मस
ु ीबत म ना फंसेा इस लये।
कैसी मस
ु ीबत ?
दे Wखये इन साहब को दलाल से टकट लये है । Eे न आने के
समय पता चला है क टकट वे टंग म है । अपना टकट दे ख
लो साहब दो सौ [पये लगेगे क#फम$ करवा दं ग
ू ा।
मेरा क#फम$ है रा3ता नापो।
क#फम$ कैसे हो गया चार वे टंग है । टकट और दो सौ [पया
दो म क#फम$ टकट लाता हूं।
भाग रहा है या पु लस बुलाउ। इतना सन
ु ते ह वह ठग भीड
म गायब हो गया।
न#दलाल भारती 08.03.2010

92-जंग
म2
ु तार बाबा को मरे कुछ म हने Pबते थे क दोन+ बेटो ने
चल -अचल सDप7त को आपस म बराबर बांट लया। मां को

एक कमरा दे कर उसे भी प#Cह-प#Cह दन के लये बराबर
बांट लये। 31 दन का भी म हना होता है याद ह नहं रहा।
बंटवारा होते ह मां दाना-पानी के लये तरसने लगी। कुछ ह
महन+ म वह भख
ू से मर गयी। मां के मरते ह दोनेां बेट+ म
कमरे पर कSजा के लये जंग 7छड़ गयी।
न#दलाल भारती 08.03.2010

93-नशा
नR◌ो म धत
ु लड़खडाते हुए चव#नीदादा धड़ाम से ख टया पर
:गर पड़े। बाप क दशा को दे खकर बेटा पांव सीधा करते हुए
बोला बाब-ू बेटा-बहू, बेट-दमाद,नाती-पोते क कसम का असर
तम
ु पर नहं हुआ। कुछ तो लहाज कये होते। गांजे -दा[ के
नR◌ो से कौन सा 3वग$ का सख
ु मल रहा है जो बेटा-बहू,
बेट-दमाद,नाती-पोते के सख
ु से तD
ु हारे लये बड़ा हो गया है ।
चव#नीदादा गKरयाते हुए बोले- दो अ`र पढ या लया क
बाप बनने लगा है । अरे म तेरा बाप हूं या तू मेरा बाप है ।
नालायक बाप क सेवा नहं कर सकता। कोई मरे या जाये
मझ
ु े तो पीने से काम है बस। न#दलाल भारती 08.03.2010

94-भच
ू ाल
बाप रे लोग ऐसी दद
ु $शा?
कहां भच
ू ाल आ गया ?
आज का यग
ु 3ं◌ा3कृ7त,सा ह%य और कला के लये भच
ू ाल से
कम है या ?
ये दद$ कैसे उभरा भाई ?
कलाकार+ क दद
ु $ शा दे खकर।
समOप$त लोग ठोकरे खाकर भी कला को जीOवत रखे हुए है।
लाचार हो जायेगे तो या ?
पिRचम का षणय# सफल हो जायेगा और या ?

ऐसा नहं होना चा हये। 
या होना चा हये ?
सा ह%य और कला को सरकार सहयोग और जाग[क
नागKरक+ का समथ$न मलना चा हये।
न#दलाल भारती 09.03.2010

95- योगशाला
माना जाता है क धम$ के नाम पर दे श का बंटवारा हुआ।
अब या कौन बंटवा रहा है भाई?
कला, वह लोग।
कैसे ?
जैसे हुसैन अपनी माट से दरू हो◌े गये।
ये धम$ नहं। धम$ का काम तो मानव जीवन और दे श म सख
ु सDवOृ ^, अमन-शाि#त बनाये रखना है । दे श छुड़ाना, आतंक
फैलाना नहं।
सा ह%य और कला :च#तक के अ#त$रा%मा क 3व3थ अनभ
ु 7ू त
होती है । इस अनभ
ु 7ू त को धम$ क 8योगशाला म जांचनापरखना अ#याय है । आज धा म$क उ#माद अनभ
ु 7ू त पर लटक
हुई खंजर के समान हो गया है काश ये असरु  साये छं ट जाते
पर .....
पर या भाई ?
एम.एफ.हुसैन का इस तरह दे श छोड़ना दल का दद$ बन
गया। न#दलाल भारती 09.03.2010

96- अंवारा
धनजू न#हा सा तब उसक हर गल7तयां माफ कर द जाती
थी। कभी कभी उसक िजद पर पापा शराब क एक बंद
ू +
:गलास भर पानी म डालकर दे दे ते। बेटे क जीभ क चटपट
से पापा भी हं स पड़ते,मDमी भी बाप बेटे क हं सी म बराबर

क सरख बन जाती थी। यहं हं सी धीरे -धीरे दख
ु का करण
बन गयी बड़ा होकर धनजू का मन न पढाई म लगा न कह
और। नR◌ोtड़य+ क :गरोह म शा मल होकर शराब का आद
हो गया। वह मां बाप जो कभी हं सा करते आंख+ म आंसू
लये कहते ना जाने कस ज#म के अपराध क सजा मल
बेटा अंवारा हो गया। खद
ु का दोष धनजू के माथे मढकर
आंसू 7नचोड़ लेते। न#दलाल भारती 09.03.2010

97- दादाजी का सख

मDमी दादाजी वैसे तो रोनी सरू त बनाकर बैठे रहते है। बात
करो तो ऐसे लगता है जैसे काट खायेगे पर आज खश
ु लग
रहे है ।
पान खाकर आये है।
पान खाने से खश
ु ी मलती है ।
खश
ु ी मले चाहे ना मले पर परदा डालने का इं#तजाम तो
है ।
कैसा परदा ?
बदबू पर।
कैसी बदबू ?
िजससे तD
ु हारे पापा नफरत करते है ।
दा[ ?
हां।
दादाजी अपनी खश
ु ी के लये पKरवार का चैन 7छन रहे है।
न#दलाल भारती 09.03.2010

98-फजF बस टकट
सभी सवाKरय+ से कराया वसल
ू कर बस मा लक के आद मय+
ने बस को आगे जाने क इजाजत दे द। कुछ दरू चलने के
बाद बस दस
ू रे nाइवर के हवाले हो गयी। nाइवर सीट पर

बैठते जोरदार झटका दया िजससे कई सवाKरय+ को घाव भी
लगी। त7नक आगे बढते ह ठे लेवाला मरते-मरते बचा। nाइवर
क लापरवाह दे खकर सवार कहने◌े लगी भइया जान लेने पर 
य+ तल
ू े हो।
चप
ु चाप बैठे रहो नR◌ो म धत
ु nाइवर बोला।
सवार एक साथ बोल बस रोको।
nाइवर-आगे रोक दे ता हूं कहते हुए बस खाई म कूदा कर भाग
गया।
अ:धकतर सवार लहूलह
ु ान हुई। घLटे भर बाद पु लस आयी।
घायल अ3पताल पहुंचाये गये◌े और लावाKरस बस थाने।
टकट के आधार पर सवाKरय+ ने बस मा लक से सDपक$ कया
तो जबाब मला
10.03.2010

फजj

टकट

है।

न#दलाल भारती

99- आग
पड़ोसी के घर से रोने-:चQलाने क आवाज सन
ु कर आसपास
के लोग जमा हो गया।रोने- :चQलाने के अलावा घर म कुछ
अनहोनी जैसा नहं लग रहा था। पड़ो सय+ क सा#तवना क
बाद दध
ू ीबाई रोते हुए बोल भतीजी दहे ज क आग म भ3म हो
गयी। रोज- रोज नई-नई माँग रख रहे थे बेचारा भाई परू  कर
रहा था। एकदम से लाख+ क मांग रख दये। मांग ना पूर
होने के कारण दमाद और उसके KरRतेदार ढाठ( दे कर फूल
जैसी भतीजी को मारकर पेEोल 7छड़कर जला दये। इस आग
ने दल दहला दया। साOवP अबोध बी टया को आंचल म
7छपाते हुए [ंधे गले से बोल हे भगवान कौन बचायेगा इन
बे टय+ को दहे ज क आग से। न#दलाल भारती 10.03.2010

100- मांग

यतनबाबू खद
ु काफ पढे लखे सDमा7नत <यित थे,उनक
बी टया भी मां-बाप का नाम रोशन कर रह थी। बेट के Sयाह
क :च#ता उ#हे भी सताने लगी थी। सय
ु ोग वर का पता
लगते ह वे उची उड़ान भरने वाल श`ा के साथ सामािजक
सं3कार म भी तो महारथ करने वाल बेट क ज#म पी वर
प` क ओर भेजकर आRव3त हो गये। बेट के हाथ जQद
पीले करने के सपने बुनने लगे य+ क उनका मानना था क
कोई भी सzय-सं3कारवान सामािजक <यित बी टया को
खश
ु ी-खुशी बहूरानी बनाने को तैयार हो जायेगा पर या yम
टूट गया तीसरे दन इंकार हो गया। शायद बाप का ओहदा
दहे ज क मांग पूर करने लायक नहं लगा था। न#दलाल
भारती 10.03.2010

101-पता के नाम प:
8ातः3मरणीय Oपताजी सादर-चरण 3पश$, Oपताजी आपक
अ3व3थता हम भाइयc और उनके पKरवार का चैन 7छनती जा
रह है पर आप सबसे बेखबर पीये जा रहे है । आपक िजद
क वजह से दो बड़े आपरे शन भी हो चुके है याद होगा 
य+ क आपरे शन तो आपका हुआ है ना,िजस पर भार धन
भी खच$ हुआ है । आप बेट+ क आ:थ$क तंगी और उनक
भावना क त7नक परवाह नहं करते सब जान गये है । आप
यह भी जानते है क आपक बनायी ऐसी कोई Kरयासत भी
नहं है िजसक लालच म हम आपको सर पर Pबठा रहे है
Oपताजी हम फज$ पर कायम है । आप नह, आपतो बेटो,नातीपोत+ क कसम को दा[ के साथ पी और धुय के साथ उड़ा
चक
ु े है । Oपताजी भले ह आपको हमसे मोह नहं हो पर
पKरवार के सभी सद3य आपसे बहुत gयार करते है तभी तो
आपक अ3व3थता से :चि#तत रहते है। Oपताजी :च#ता के

कारण और 7नवारण से आप अन भ] नहं है ,या यह
सं3कार आगामी पीढ के लये ब ढया होगा। इकस साल
बाद लखे प के जबाब क 87त`ा म आपका बेटा।
न#दलाल भारती 10.03.2010

102-बेट के Gयाह सुख
सीता पढाई म िजतनी तेज थी उतनी ह घर-गह
ृ 3ती के काम
म 7नपुण भी। सांवल तो थी पर उसके नाक नRो ZमाLड क
स#
ु दKरय+ से कम ना थे। सोलह साल से कम उv म ह शहर
म पल पढ बढ सीता के लये मां बाप #◌ो गांव का प7त
खोज लया। पKरवार 7नयोजन पर भाषण दे ने वाल सीता छः
साल म पांच ब.चो क मां बनकर सख
ू ा ग#ना हो गयी। बरस+
बाद दरू क म हला KरRतेदार से अचानक सीता से मल
ु ाकात
हो गयी। सीता क दशा दे खकर वह है रान होकर सवाल कर
बैठ(। सीता सवाल के जबाब म बोल दद मां-बाप मझ

अभा:गन बेट का Sयाह कर 3वग$ का सख
भोग रहे है म

कामचोर हाड़ 7नचोड़ने वाले प7त के साथ जीवन का नरक।
न#दलाल भारती 11.03.2010

103-ओवर इ)पलाइज
कDपनी के सQवर जब
ु ल वष$ म 8वेश करने से पहले ह
मैनेजमेLट को ओवर इDपलाइज$ क सम3या खटकने लगी। वे
इस सम3या का हल शी{ ह ढूढ भी लये, वह यह क- नीचे
के कम$चाKरय+ के 8मोशन तरु #त 8भाव से रोक दये जाये
चाहे वे

कतनी भी उं ची R◌ौ`Wणक, <यावसा7यक tडrी

हा सल Oवषय OवR◌ोष] ह य+

न हो। अ:धकाKरय+ को

इससे दरू रखा जाये। इस फैसले पर हाई मैनेजमेLट ने आंख
ब#द कर मोहर लगा द। न#दलाल भारती 11.03.2010

104-मुखौटा
नये साहब डाटरे ट #यायO8य और मानवतावाद है । कम$चाKरय+
के भले के लये एक पांव पर खड़े रहते है । रामनाथ साहब के
सामने हािजर हुआ। रामनाथ को दे खते ह वे बोले कोई
परे शानी है ।
नहं सर Oवनती है ।
कैसी Oवनती ?
सर 8मोशन नहं हो रहा है ।
कहां तक पढे हो ?
पी.जी. हूं सर।
अरे वाह तम
ु तो हाइल वालफाइड$ हो। कस कटे गर म आते
हो।
सर एस.सी।
यहां तो आर`ण लागू नहं है । अफसर बनना है तो इस
कDपनी क नौकर छोड दो। सरकार नौकर iवाइन करो।
2◌ौर दे खता हूं हे ड आ फस बात करके या होता है ? तम

जा सकते हो
ठ(क है सर कहकर रामनाथ अ:धकार महोदय के क` से
बाहर 7नकला ह था क नये साहब सहायक अ:धकार से बोले
म.जानी ऐसे लोग+ दबाकर रखने म भलाई है आगे◌े 7नकल
गये तो सर पर बैठेगे फर भयावह ठहाका और इसी ठहाके
के साथ साहब के मुखौटे क अस लयत दरवाजे के बाहर नंगी
हो गयी थी । न#दलाल भारती 12.03.2010

105-#नशानी
सेठजी ये हंसल
ु  मेर बहू के बचपन के Sयाह क 7नशानी है।
:गरवी रख लो। 

या कर रहे हो।बहू के बचपन के Sयाह क 7नशानी :गरवी
रख रहे हो ?
S◌े◌ाटवा के परदे स गये चार महना हो गया एक पैसा नहं
दया। रन कज$ कर खाउुं गा। खद
ु भरे गा।
पहले -पहल

परदे स गया

है ।

जाते ह

म7नआड$र कर

दे गा।त7नक बेटवा क परे शानी के बारे म भी सोचे होते। 2◌ौर
छोडेा कतना [पया चा हये ?
हजार दे दो।
हजार नहं पांच सौ दे सकता हूं। वह भी तीन महना के
लये।
ठ(क है दे दो सेठ जी।
उधर शहर मे बेटवा बेरोजगार क चपेट मे आ गया और
हं सल
ु  सेठ क।
न#दलाल भारती 12.03.2010

106-म
ृ युदत

एसीडेLट से कमाई। बाप रे पैसे क हवश ने दे श और जनता
क सेवा करने वाल+ को म%ृ यद
ु त
ू बना दया।
र`क म%ृ यूदत
ू हो गये ?
हां मानव-सेवा के नाम पर कमीशन खाने लगे है ।
कससे ?
अ3पताल+ से। हाइवp पर एसीडेLट म ज2मी / मरणास#न
लोग+ को दरू के अ:धक से अ:धक कमीशन दे ने वाले
अ3पताल+ म पहुंचाकर। मरणास#न भले ह रा3ते म तड़पतड़प कर मर जाये।
बाप रे खौफ तो बढता ह जा रहा है । कहं ये म%ृ यद
ु त
ू राह
चलतेां को कुचलने का धंधा न बना ले।

नहं। सWु ख$य+ म आ गये है । फांसी के फंदे पर झल
ू गे ये
म%ृ युदत
ू ।
काश ऐसा हो जाता ? न#दलाल भारती 15.03.2010

107-जमीन 
या बात है रो हत सDमान पर सDमान,हजम नहं होता।
मामल
ू  से मल
ु ािजम का इतना सDमान। सन
ु ा है कई कताबे
भी लख डाले हो। कैसे ये सब कर लेते हो ? मझ
ु से कुछ
नहं होता जब क द7ु नया क हर सOु वधा मेरे पास है पद और
दौलत भी तो है ।
महाशय मेरे पास जो है वह दौलत के तराजू पर नहं तौला
जा सकता। आप और मझ
ु म सोच का बु7नयाद अ#तर है ।
वो कौन सा अ#तर होता है ?
महाशय आप हवा म उड़ते है म :च#तन से दबा जमीन पर।
इतना सन
ु ते ह पद और दौलत के अ भमान क जमीन
Wखसक गयी। न#दलाल भारती 17.03.2010

108-परसाद
आओ ब.च+ आरती कर ले। पूजा हो गयी।
चलो मां बुला रह है ।
आरती का समय हो गया या ?
हां बLट, बबल चलो। मां बल
ु ा रह है ना।
मां-बाप के साथ ब.च+ ने आरती

कया। मां ने ब.च+ को

चना-:चरौजी का परसाद दया। परसाद माथे चढाकर मह
ंु म
डालते हुए बLट बोला मां आरती के बाद परसाद ज[र होता
है या ?
हां-पूजा का परसाद जीवन के अ.छे सं3कार क तरह है बेटा।
बLट-मां म भी बाटूंगा ........ न#दलाल भारती 17.03.2010

लेखक परचय

नदलाल भारती
कव,कहानीकार,उपयासकार 

शा

- एम.ए.। समाजशा
। एल.एल.बी.। आनस ।
पोट ेजए
ु ट डलोमा इन यूमन रसस डेवलपमेट

(PGDHRD)

जम त"थ

एवजम 

थान- 

ाम-

01.01.1963

चौक'।(◌ौरा।पो.नरसंहपुर िजला-आजमगढ।उ.+। 

्राकाशत

उपयास-अमानत, नमाड

क'

माट1

मालवा

पुतक.

छाव।+ त न"ध का4य संह।

+ त न"ध लघक
ु था संह- काल1 मांट1 एवं क5वता कहानी

ु था संह।
प
ु तक............. लघक
उपयास-दमन,चांद1 क' हं सल
ु 1 एवं अभशाप

क'

कहानी संह -म9
ु ठ; भर आग,हं सते ज(म,
लघक
ु था संह-उखड़े पांव / कतरा-कतरा आंसू
का4यसंह -क5वतावल / का4यबोध/का4यांजल
आलेख संह- 5वमश एवं अय
स<मान 

वग वभा तारा रा य समान-2009
5व=व भारती +>ा स<मान,भोपल,म.+.,
5व=व ?हद1 सा?ह@य अलंकरण,इलाहाबाद।उ.+.।
A◌ोखक म
।मानद उपा"ध।दे हरादन
ू ।उ@तराखड।
भारती पुDप। मानद उपा"ध।इलाहाबाद,
भाषा र@न, पानीपत।
डां.अ<बेडकर फेलोशप स<मान,?दAल1,
का4य

साधना,भस
ु ावल,

महाराDH,Iयो तबा 

शा5वJ,इंदौर।म.+.।

डां.बाबा

अ<बेडकर 5व=◌ोष समाज सेवा,इंदौर
5वJयावाचप त,परयावां।उ.+.।
कलम कलाधर मानद उपा"ध ,उदयपुर।राज.।
सा?ह@यकला र@न।मानद उपा"ध। कुशीनगर।उ.+.।
सा?ह@य + तभा,इंदौर।म.+.।
सफ
ू ' सत महाक5व जायसी,रायबरे ल1।उ.+.।एवं अय

फुले
साहे ब

आकाशवाणी से

का4यपाठ का

+सारण।कहानी, लघु

कहानी,क5वता
और

आलेखL

का

दे श

के

समाचार

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एवं अय

ई-प

पM
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सदय

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सा?हि@यक

सांकृ तक

कला

संगम

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?हद1 परवार,इंदौर।मSय +दे श।
आशा

मेमोरयल 


लोक

पिTलक

प
ु तकालय,दे हरादन
ू ।उ@तराखड।
सा?ह@य जनमंच,गािजयाबाद।उ.+.।
म.+..लेखक संघ,म.◌्र+.भोपाल एवं अय
स<पक

आजाद द1प, 15-एम-वीणा नगर ,इंदौर।म.+.!

दरू भाष-0731-4057553
09753081066
Email-

चलतवाता -

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