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सीने में जऱन, आॉखों में तूफ़ान सा क्यों है ?

इस शहर में हर शख्श परे शान सा क्यों है ?

ददल्री शहय को सयकाय "विश्ि-स्तयीम" फना यही है , औय उसके साथ साथ आभ नागरयक का ऩसीना छूट यहा है . चायों तयप
उजजमाया, औय ददर भें अॉधेया, कक कफ ककस ऩय गाज गगये गी. फस का ककयामा फढ़ गमा है , अनाज दध
ू सब्जी दार की कीभत
आसभान छू यही है , तेर औय गैस दोनों भहॊ गे हो गए हैं, बफजरी ऩानी मभरती बी है तो अच्छे दाभों भें , स्कूर हस्ऩतार भें दाखरा
ककसी साधायण ऩरयिाय के फस की फात नहीॊ है , औय ऊऩय से दस ददन के खेर के मरए घयों को फेददी के साथ उजाडा जा यहा है . इस
भर्ज़ की कोई दिा है बी?

दे श के नेता कहते हैं की हभ फडी तयक्की कय यहे हैं, ककसीको तो कीभत दे नी ऩडेगी. रेककन इसके फािजद
ू हुक्भयान ऩये शान हैं
कक भर्दयू ों की झुजगगमाॊ कभ नहीॊ हो यहीॊ हैं! 60 सार ऩहरे 200 फजस्तमाॊ थीॊ जजसभे 60,000 की आफादी यहती थी; 1971 भें 5 गुना
हो गमीॊ; कपय "इभयजेंसी" का बफगुर फजा औय 1100 फजस्तमाॊ उजाड दी गमीॊ, 1.5 राख ऩरयिायों को ऩुनिाज़मसत कय ददमा गमा;
रेककन 1981 तक कपय 300 फजस्तमाॊ फन गमीॊ थीॊ, औय 2010 भें कयीफ 30 राख रोग 900 फजस्तमों भें खचाखच बये हुए हैं. क्मा
िजह है कक सायी कोमशशों के फािजूद इनकी तादाद फढ़ती जाती है ?

आफादी फेदहसाफ फढ़ यही है , मह बी एक सफ़ेद झट


ू है . 1962 भें मोजना फनी थी कक 20 सारों भें ददल्री भें 50 राख रोग होंगे.
रेककन 1981 भें गगनती कयते सभम ऩामा गमा कक 62 राख (+24%) फस गए थे - िह बी इसमरए कक फीच भें एमशमाई खेरों का
आमोजन हुआ औय फडे ऩैभाने से भर्दयू ों को शहय भें रामा गमा. कपय अॊदार् रगामा कक 2001 तक जनसॉख्मा 128 राख हो
जाएगी, िह बी फढ़ कय 138 राख (+8%) हो गमी. तो क्मा फढ़ोत्तयी भें 24% से 8% तक घट जाने से सयकाय इतना घफयाती है ?

घय फनाने के मरए र्भीन की कभी है , इसभें ककतनी सच्चाई है ? 2001 तक सयकाय के ऩास 32,000 हे क्टे मय र्भीन घय के मरए थी,
2021 तक औय 22,000 हे क्टे मय की मोजना है , जफकक फजस्तमों का "कब्र्ा" केिर 400 हे क्टे मय ऩय है . क्मा कुर आफादी की एक-
चौथाई दहस्से के मरए हभाये मोजनाकायों के ऩास दसिाॊ दहस्सा र्भीन बी नहीॊ है ? 1962 भें दािा ककमा था कक 1981 तक 7.4 राख
घय फनामेंग,े रेककन फनामा 5.4 राख; 2001 का रक्ष्म था 16.2 राख, उऩरजब्ध थी 5.6 राख; औय अफ कह यहे हैं 2021 तक औय
24 राख फना डारेंग.े क्मा इन ऩय विश्िास कय सकते हैं?

आखखय झूट के उस ऩाय है क्मा? 1956 भें स्रभ अगधननमभ ऩारयत हुआ, जजसभे फजस्तमों को फेहतय फनाने औय उजाडने, दोनों के
मरए प्रािधान थे. 1958 भें सयकाय ने ऩुनिाज़स नीनत फनाई, औय 1960 औय 1975 के फीच 18 ऩुनिाज़स कारोनी नाॊगरोई, नजपगढ़
योड, भदनगीय, सीरभऩुय, िजीयऩुय, भादीऩुय इत्मादद भें फनामीॊ, जजसभे 21 िगज़ भीटय के 49,000 प्राट, 67 िगज़ भीटय के 4,000
प्राट, औय 4,500 दो-भॊजजर के भकान थे. कपय 1975 औय 1977 के फीच "इभयजेंसी" भें 26 औय ऩुनिाज़स कारोनी (दक्षऺणऩुयी,
ऩजश्चभऩयु ी, भॊगोरऩयु ी, नन्दनगयी, सीभाऩयु ी, कल्मानऩयु ी, इत्मादद) भें 1.5 राख ऩरयिायों को 21 भीटय के प्राट ऩय फसामा गमा.

"इभयजेंसी" के फाद इॊददया सयकाय की कयायी हाय को दे खते हुए 1979 भें सयकाय ने रु.8/भाह का राइसेंस हटा कय सबी को प्राट
आजीिन रीर् ऩय दे ददमा. 1980 भें ऩुनिाज़स को योक कय फजस्तमाॊ जहाॉ थीॊ िहीीँ ऩय सुधायने का काभ शुरू हुआ. औय 1990 भें हय
झगु गी का सिेऺण कयके उसको िी ऩी मसॊह का टोकन ददमा गमा. कहा गमा कक ऩहरे फजस्तमों भें न्मन
ू तभ सवु िधाएॊ दी जाएॉगी;
उसके फाद र्भीन भामरक की अनुभनत से प्राट काट कयके सुधाया जामेगा; औय आखखय भें , सािज़जननक दहत भें , फस्ती को 2
ककरोभीटय के अन्दय विस्थावऩत ककमा जामेगा, जजसके मरए प्रनत झुगगी र्भीन भामरक को रु.29,000, ददल्री सयकाय को
रु.10,000, औय ऩरयिाय को रु.7,000 "चॊदा" दे ना ऩडेगा.

रेककन सभम के साथ साथ याजनीनत बी किज़ट ऩरटती है . जहाॉ ऩहरे 600 फजस्तमों भें रु.4000/झुगगी से न्मूनतभ सुविधाएॊ
ननमभज़त हुमीॊ; औय 5,500 ऩरयिायों के घयों का रु.20,000/झगु गी भें सध
ु ाय हुआ; िहाॊ रु.46,000/झगु गी भें विस्थाऩन र्ोय ऩकडने
रगा. 1997 भें ददल्री उच्च न्मामरम के आदे श ऩय रीर् ननयस्त कयके िाऩस राइसेंस की स्कीभ रागू हो गमी. 2000 भें सयकाय
ने कट-ऑप की तायीख 1990 से 1998 तक फढ़ा कय प्राट को 18 से 12.5 भीटय घटा ददमा. नमी नीनत के तहत 2000 तक केिर
20,000 घय तोडे गए थे औय उन्हें ऩुनिाज़मसत ककमा गमा, रेककन 2010 तक कयीफ 2 राख ऩरयिाय फेघय हो गए हैं, जजसभे से केिर
एक-नतहाई को 40 ककरोभीटय दयू की कारोननमों (बरस्िा, फिाना, नये रा, साब्दा, िगैयह) भें ऩन
ु िाज़मसत ककमा गमा है .

एक-नतहाई ही क्मों? क्मोंकक ननमभों भें खखरिाड हुआ. 1990 की MCD नीनत भें र्भीन भामरक के आग्रह ऩय फस्ती का सॊमुक्त
सिे कयना ऩडता है जजसभे "मोगम" ऩरयिाय की ऩहचान याशन काडज़, िोटय काडज़, िी ऩी मसॊह टोकन, स्कूर सदटज़ कपकेट, औय
भत्ृ म/ु जन ्भ ऩत्री से हो सकता है . डी एस ऩची मभरती है जजसभे नए प्राट का नॊफय ददमा है . रेककन 2004 भें DDA की नमी नीनत
भें ऩहचान के मरए मसपज़ याशन काडज़, िोटय काडज़, औय िी ऩी मसॊह टोकन भान्म हैं. साथ भें कई औय शतज़ हैं - विस्थावऩत को बायत
का नागरयक होना है , उसका नाभ सिे भें होना चादहए, एक ऩरयिाय को एक ही प्राट मभरेगा, व्मिसानमक घय के मरए प्राट नहीॊ
मभरेगा, औय प्राट का आफॊटन तफ तक अस्थामी भाना जामेगा जफ तक सिोच्च न्मामरम (2002 के ओखरा-िजीयऩुय भाभरे
भें ) अऩना पैसरा नहीॊ सुना दे ती है .

2007 से एक औय नीनत उबय यही है . विस्थाऩन के वियोध को दे खते हुए सयकाय ने 2021 के भास्टय प्रान भें भाना कक दयू भें
12.5 भीटय का प्राट दे ना गरती थी, औय इसमरए अफ नर्दीक भें 25 भीटय का घय ददमा जामेगा. रेककन इस नीनत भें दो ऩें च हैं.
ऩहरा तो मह कक "घय" का भतरफ है फहुभॊर्री इभायत भें फ्रैट, जजसकी कीभत रौटाने भें शामद 30 सार रग जामे - अगय हय
भहीने रु.800 दे ने की ऺभता हो तो, औय जजसके भामसक यख-यखाि भें रु.400 से ज्मादा रग सकते हैं. औय दस
ू या है कक इभायत
फनाएगी कोई फडी कॊऩनी जजसे फस्ती की र्भीन का आधा दहस्सा मभरेगा भुनापा कभाने के मरए. माने कक साभने चभकता हुआ
भौर, औय ऩीछे सुरगता हुआ चौर.

तो क्मा इसका भतरफ है कक भेहनतकश फुरडोर्य के साभने कुछ बी नहीॊ कय सकते हैं? इनतहास से मह सफक मभरता है कक नीनत
को फदरने भें जन आन्दोरन का हाथ हभेशा यहता है . अगय एक र्भाने भें घय का हक़ था, फनु नमादी सवु िधाएॊ उऩरब्ध थीॊ, 70 औय
36 भीटय का प्रािधान था, र्भीन आजीिन रीर् ऩय मभरती थी, फस्ती को मथाित सुधायने की मोजना थी, औय सफके ऩहचान की
व्मिस्था थी, तो िह भाऩदॊ ड आज बी अऩनाए जा सकते हैं. उसके मरए केिर याजनैनतक सभझ औय सॊगदित ताकत की र्रुयत
है . अगय अन्ना नगय के ननिासी अदारत का हाथ ऩकड सकते हैं, गोविन्दऩयु ी के साथी चक्का जाभ कय सकते हैं, औय बाटी
भाइन्र् के भर्दयू फुरडोर्य को थाभ सकते हैं, तो फाकक ऩीछे क्मों हैं?

रेककन अगय याज नीनत को चन


ु ौती दे ने का साभर्थमज़ नहीॊ है , तो कभ से कभ कामज़ नीनत का तो ऩारन हो सकता है . फस्ती के हय घय
का सिे रोग खद
ु कयें , हय ऩरयिाय की ऩहचान भानी जामे, जजसके घय ऩय तारा रगा है उसको तीन ददन का नोदटस दे कय दफ
ु ाया
सिे कयामा जामे, सिे की सूची सािज़जननक स्थान ऩय गचऩकामा जामे, जजसको व्मिसानमक घोवित कय ददमा गमा है िह ददखा
सके की िह उस घय भें यहता है , सबी भान्म दस्तािेर् सयु क्षऺत यखे जामें, सफको डी एस ऩची मभरे, कोई अगधकायी मा दरार को
घूस खाने का अिसय न मभरे, औय ऩुनिाज़स कारोनी भें हय सुविधा हो. अगय फनुिार नगय औय अशोक विहाय, गौतभऩुयी औय
केरा गोदाभ, भॊडािरी औय मभुना ऩुश्ता के आभ रोग खद
ु मभरजुर कय ऐसा कय सकते हैं, तो फाकक फजस्तमों भें क्मा कभी है ?

जफ ऊऩय िारे खेर के जशन भें भगन हैं तो नीचे िारों को नहीॊ बूरना चादहए की हय खेर की फुननमाद र्भीन ऩय है .

हम भी खेऱेंगे!
अगधक जानकायी के मरए सॊऩकज़ कयें :

जुराई 2010