आम िह=दःतानी


औरत, कभी कामकाजी हआ

करती थी िद~ली मे।
१९९९ तक। अब तो बेट| क| वजह से साल मे ६ मह|ने अमर| का मे वास ।
कÍवताओं का शौक पÍरवार क| दे न है । कÍवता मुझ जैसे आलसीय| के िलये
ह| है । कम से कम श¯द| मे अपनी बात कहने का आसान तर|का।
अपने बारे मे
• कÍवता का शौक
• कÍवता हमे घुçट| ् मे नह|ं तो चाय मे जFर Íपलाई गई थी।
• मुझे याद है गरमी क| छÍçटय| ु मे छत पर Íबःतर पर लेटे लेटे
अं ताHर| खेलना Íजसमे हम भाई बहन ह| नह|
• हमारे काका (Íपताजी) और ताई (माँ) भी शािमल होते थे, बशत िक
िफ~म| के गाने नह|ं गाये जायेगे ।
• के वल कÍवताओं का ह| ूयोग होगा । और 4यूंिक सबके साथ 7यादा
मजा़ आता हम भी खुशी खुशी तैयार हो जाते थे ।
• ताई और काका का संःकृ त का खजा़ना ूचंड था । हमे िहं द| और
मराठ| कÍवताओं का ह| सहारा होता था, अिनवाय़ संःकृ त के
• सहारे थोडे बहत

Hोक हमे भी बचा लेते थे। पर ये एक बडा कारण रहा
कÍवता के शौक का । मुझे याद है मुझसे बडा मेरा भाई अिनल तो िदन
भर कÍवता क| पुःतके लेकर बैठा रहता था और रातमे अं ताHर| खेलने
का ूःताव सबसे पहले हमेशा उसी के तरफ से आता।
• कÍवताएँ याद करना और उ=हे पसंद करना यह एक आदत सी बन गई
थी ।
• सबसे बडे दादा (डा4टर शरद काले) तो बचपन से कÍवताएँ िलखते थे
। रात का खाना सब एक साथ खाते और यह| वñ होता था दादा क|
नई ताजी कÍवता सुनने का । कब खाना खcम हआ

यह पता भी न
चलता । झूठे हाथ सूख जाते पर थाली से उठकर कोई हाथ धोने भी न
जाता । कÍवता और उसके रसमहण मे ह| हम सब डबे ू रहते ।

• मैने एक बार दादा को राखी पर एक कÍवता िलख भेजी । उसके जवाब मे जो कÍवता दादाने भेजी वह
मुझे हमेशा याद रहे गी।
• मानस हआ

ूफु Í~लत मेरा पाकर पऽ तु¹हारा आशा
• पऽ नह| वह थाल तु¹हारा ् नीरांजन थी उसक| भाषा
• उस भाषा के नीरांजन क| 7योित तु¹हार| सुंदर कÍवता
• Íजसक| अलंकार आभा से छप ु जाता कु ¹हलाकर सÍवता
• ये पहली चार पंÍñयाँ थीं। और अंितम चार थीं ,
• भाव भरे भैया के मुख सा भÍवंय मंगल बिहन तु¹हारा
• तुमसे झरती रहे हमेशा का¯य सुधा क| ÍरमÍझम धारा
• आिशवा द यह| दे ता हं

राखी के बदले मे आशा
• आशा है तुम भी न करोगी Íवफल कभी यह मेर| आशा
• हमार| ताई भी ूसंगानुसार कÍवता करती थीं । शाद| का मंगलाPक, नामकरण क| लोर| उनक|
Íवशेषता थी । पर मराठ| मे ।
• काका थे तो इं ͹लश के ूाºयापक परं तु िहं द|, मराठ| संःकृ त तथा इं ͹लश चार| भाषाओं पर उनका
अ{त

ूभुcव था
• गणेशोcसव कालेज के गेदÍरं ग, कÍव स¹मेलन, ¯याFयान, संगीत क| महिफल, कोई सांःकृ ितक
काय बम ऐसा न होता जहां हमारा पÍरवार न जाता हो । काका ने कभी कÍवताएं नह| िलखीं पर वे शीय
कÍव थे । एक बार वे तcकालीन भाषण ूितयोिगता के अºयH थे । Íवषय था Hड़ गया छकड़ा हमारा
उनक| मोटर कार से । सब के भाषण हए

, समारोप करते हए

काका ने समाँ बांध िदया । उ=ह|ने कहा
• ले¹प गुल, घंट| नदारद, ॄेक था चलता नह|
• लड गया छकडा़ हमारा उनक| मोटर कार से ।
• ये बात तबक| है जब 4या Íव²ाथ| 4या ूाºयापक सब साइकल से ह| आया जाया करते थे ।
• अ4का और मै भी यदा कदा कलम चला लेते थे । और तो और हमारे सबसे छोटे भैया िमिलंद ने दसर|

कHा मे ह| दो लाइन क|
• पेरोड| बना द| । तब मन मोरा बावरा गाना खूब चला था । इसने अपनी कHा मे सुनाया पेट मोरा
हावरा, िनस िदन खाये भÍजये
• बेसन के । हावरा का अथ मराठ| मे खाने का लालची होता है । तो ऐसे पनपा हमारा कÍवता का शौक


ूाथ ना
दे ह द|प जले मेरा, यह ूकाश का घेरा तेरे िलये ।
जीवन का यह सुमन चरण| मे अप ण बस तेरे ह| ।
तन-मन का यह चंदन, इससे ह| हो अच न ूभु तेरा ।
हाथ जुडे मेरे िनत, तेरे ह| वंदन मे ूभु मेरे ।
यह शीश झुके सदा चरण| मे तेरे ह| िनcय ूभू ।
और तेरा आिशव च बने मेरा कवच इस जग मे ।
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आज का Íवचार
मन क| बात मानो ।
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आज का ःवाः°य सुझाव
सुबह सुबह खुली हवा मे दस लंबी सांसे लो ।
हे राम
कहते ह वो िक कौन राम बतला दो
कहाँ है नाम इितहास मे ये िदखला दो
अब कै से समझाँये समझदार| को हम
है िह¹मत तो राम नाम को तुम झुटला दो
िसफ भारत मे नह| और दर

बाहर भी
गूँजता नाम Íजनका वे तो अपने राम ह| थे
तु¹हार| हःती Íजनके दम से है उ=ह| बापू के
िदल|-जबाँ पे जो बसते थे अपने राम ह| थे
ऐसे राम थे ह| नह| कै से कहा जाता है
Íज=हे कबसे आदश जाना जाता है
Íजनका आदश से कोई नाता नह|
उन के मुँह से ह| ये िनकल सकता है
Íबन िकये राम-राम Íजन का िदन नह| जाता
ऐसी जनता को अब कै से मुँह िदखाओगे
छ|न कर इनसे इनक| आःथा को
4या कभी मत बटोर पाओगे
राम िकसी इितहास के मोहताज नह|ं
वे तो करोड| िदल| के ःवामी ह
ज=म से अं त तक जो साथ रहे
वे राम ःवयं-िसºद नामी ह
आज का Íवचार
सोच कर बोलो कह|ं पछताना ना पडे ।
ःवाः°य सुझाव
गहरे रं ग क| सͯजयाँ व फल खाँये।
तुमने कहा था
तुमने कहा था तुम करोगी इं तजार
िफर 4या हआ

कै से टटा ू ये तार
Íजसने कभी गुनगु नाये थे तराने
िलखे थे गीत, सुनाये थे फसाने
वह| करने लगा िहसाब िकताब
कहाँ गुम हए

वे सारे Fवाब
Íजसे कÍवताओं मे श¯द| से सजाया
Íजसे अपने ॑दय मे बसाया
Íजस पर क| =योछावर हर सांस
जो था अपना ओर हम उसके खास
आज कै से आम हो गये
िकसके अब ऊँ चे दाम हो गये
ये रोशनी, ये सजावट, ये चमकार
िकसके िलये ह अब ये बाह| के हार
खडा हँ

मै तमाशाई बनकर
कोई और ले गया मेरा दाना चु नकर
तुमने कहा था तुम करोगी इं तजार
आज का Íवचार
खूब दे खो सपने, पर चुनो उ=हे जो ह तु¹हारे अपने ।
आज का ःवाः°य सुझाव
हर एक घंटे बाद आधा िगलास पानी पीये ।
सौगाते
खनकती आवाज| मे तुतली सी बाते
Íखल Íखल हँसी क| !यार| बरसाते
³ठ कर अकडने क|
Íजद मे मचलने क|
पाँव पटकने क|
गुःसे क| घाते
सजने सँवरनेक|
ठमक ु कर चलने क|
इठलाकर आँख| को
मटकाने क| बाते
पायल के छन ु छन ु क|
चूड| के खन खन क|
ÍरÍबन| क| Íबंिदय| क|
ह|~स क| बाते
बुलाने पर न आने क|
दर

दर

जाने क|
न दे खूँ तो चुपके से
आने क| बाते
गल-बिहय| क|
मनुहार| क|
िकतने दलार|

क|
पोितय| से दाद| को
िमलती सौगाते
आज का Íवचार
7यादा सोचो मत, कर डालो।
आज का ःवाः°य सुझाव
बंद नाक खोलने के िलये पंधरा बार नाक को ऊपर से नीचे
रगडो ।
बीत गया सावन
बीत गया सावन, साजन िफर भी नह| आये
मेरे इस उदास मन को अब कु छ भी ना भाये
ना चूड| ना Íबंिदया पायल ना कजरा ना गजरा
ना सतरं गी सोन चु नÍरया ना जयÍपर का घगरा
इन सब चीज| के माने 4या जब कोई दे खन ना आये ।
सूना सूना घर ना सोहे बाक| सब के रहते
Íजनसे मेर| लगन लगी है वे 4यूं यहाँ न रहते
िकसके िलये सजाऊँ काया जब कोई दे खन ना आये ।
सूखे के श आँख मे पानी, दिनया

जैसे हई

वीरानी
कडवी लगे सÍखय| क| बानी, Íबन राजा मै कै सी रानी
ना भाये अब मेले ठे ले जब मेरे साजन ना आये ।
आज का Íवचार
समय एक पÍर-क~पना है । तु¹हारा समय आज है और अभी।
आज का ःवाः°य सुझाव
थकान अनुभव करने पर ह~का ¯यायाम करे । रñ संचालन सुधरने से जाती
े ी
सपने
मेरे सपन| के गुलाब
Íखलते ह हरे आसमां क| नीली घास पर ।
सुबह के सूरज क| लाली और गीले बादल
भरते ह उनमे रं ग और सुगंध ।
एक लंबे सफर पे चल पड| हं


और मेरे साथ ह मेरे जैसे सपन| के द|वाने ।
मुझे इं तजार तो है पर कोई जलद| नह| है
तुम अपने समय से ह| आना
म खुश हं

अपने सपन| के साथ
यह| तो ह मेरे अपने मंÍजल के आने तक।
बुरे फँ से बेचारे
मौज और मःती
तब जो थी सःती
जोशे जवानी
सार| मनमानी
होटल िसनेमा
लंच िडनर खाना
!यार| !यार| बीवी
नया नया ट|वी
जब जो चाहा
वो ह| तो पाया
इससे ह| पनपा
!यार जो इनका
गुल Íखला !यारा
मु=ना हमारा
तब से है हाथ मे
और है साथ मे
दद
ू ू
क| बोतल
और पेसीफायर
बैग मे डाय़पर
और थोडे वायपर
थोडे से Íबब
और दो चार प|छे
कहाँ गये मःती के
िदन हम यूँ सोचे
नींद गई रातक|
चैन िदन का गया
यार इनका तो
हाल बुरा हो गया
कहाँ थे ये
और पहँचे

कहाँपर
छोडो जी इ=हे
इनके ह| हाल पर
आज का Íवचार
यH, यH, यH.........यश ।
ःवाः°य सुझाव
खाना ... िदन मे भरपेट रातमे आधा
पेट।
शामे
उदास उदास शामे और खाली प=न| से
िदन
कै से भरे गे तु¹हारे Íबन
हर पल आती तु¹हार| याद
हर घड| तु¹हे पाने क| साध
तु¹हारे न होने का अहसास
काश तुम अभी होते पास
तो पलक झपकते बीत जाते
साल, िफर 4या मह|ने, 4या ह9ते,
और 4या िदन ।
वो मुःकु राने का अं दाज़ तु¹हारा
वो हर गम को मज़ाक मे उडाना
तु¹हारा
जीने का अपना एक खास तर|का
हर कोई कै से हो तुम सर|खा
सब के बसका नह| है सहज रहना खुशी
मे और उसके भी Íबन ।
ये कै सी आहट ये कै सी आवाज़
ये कै से लगा बजने मनका साज़
4या सचमुच मैमे सुनी दःतक
या िफर है मेरा ह| शु बहो-शक
कया मेर| आंखे दे ख रह|ं है सपना या
सच मे तुम ह| हो िधक िधन।
खूबसूरत शामे और चहके चहके िदन
भर गये तुमसे ह| सबके Íबन
आज का Íवचार
जो भी करो मन से करो।
ःवाः°य सुझाव
आँखे थकने पर जोर से भींच कर खोले
। ऐसा पांच बार करे ।
हालात
ये िकसने हमारे आइने पे धूल Íबखरा
द|
िक इसमे अब चेहे रा हमे अपना नज़र
आता नह|।
हम इस कदर भटक गये ह अपनी
राह|से
इन अजनबीं राह| पे अपना कोई
नज़र आता नह|।
हर शFस सहमाया हआ

, हर सांस है
अटक| हई

हर दर पे ह पहरे लगे, रःता कह|ं
जाता नह|ं।
शक ने िकया है काम वो दँमन


कर पाया कोई
हआ

गैर सा अपना शहर पहचाना भी
जाता नह|।
कौन ह ये लोग, ह िकस मु~क से
आये हए

चेहे रा न कोई नाम है , घर-बार का भी
पता नह|।
िकसने बहा द| खून क| निदयाँ
मेरे इस दे श मे
है वान है , शै तान है इ=साँ तो हो
सकता नह|।
िह=द

था वो, मुÍःलम था वो,
ईसाइ था या िसख था वो
मासूम सा इ=साँ था वो, जो था
अभी पर अब नह|।
अ~लाह कहो, ई+र कहो,
वाहे गुF, ईसा कहो
सबका है वो भगवान जो हममे ह|
बसता है कह|ं।
मज़हब वो 4या मज़हब है जो
बांटे िदल| को नाम पर,
मज़हब तो वो मज़हब है जो हमे
राह िदखलाता सह|।
हक
हमे न आये कभी Fवाब वाब महल|
के
मगर हमे भी तो हक है िक छत तो सर
पर हो ।
न हमने चाहा कभी बादल| मे जा उडना
मगर अपने पाँव| के नीचे इक रह-गुजर
तो हो ।
तु¹हे मुबारक हो तु¹हारे मखमली
Íबःतर
मगर हम थककर जो लौटे कोई दर तो
हो ।
न क| थी आस कभी भी चमन के फू ल|
क|
मगर बहार का आँ ख| पे कु छ
असर तो हो ।
नसीब| वाले हो खा रहे हो
मालपुए
हमको रोट| ह| सह| मगर
पेट-भर तो हो ।
तु¹ह|ंने लूट िलये सारे चैन ओ
सुख मेरे
िकसी अदालत मे अब
फÍरयाद क| सहर तो हो ।
कु छ मेरे पास अब तो नह| रहा
बाक|
ले दे कर इक वोट बचा है , न
बे असर वो हो ।
आज का Íवचार
सलाह Íबन मांगे न दे ।

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