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Gurutva Jyotish Dec-2010

Gurutva Jyotish Dec-2010

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Published by CHINTAN JOSHI
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गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई पत्रीका ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु, रत्न, मंत्र, यंत्र, तंत्र, कवच इत्यादि प्राचिन गूढ सहस्यो एवं आध्यात्मिक ज्ञान से आपको परिचित कराती हैं।

जन्म कुंडली से जाने विवाहित-अविवाहित योग, विवाह के बाद भाग्योदय, आपकी बहू-बेटी कि कुंडली में विषकन्या योग तो नहीं हैं?, कन्या कि कुंडली में विधवा बनाने वाले योग।, कुंडली में कहीं व्यभिचारी जीवनसाथी मिलने के योग तो नहीं?, कुंडली से जाने विवाह का सही समय, प्रेम विवाह योग, विवाह से संबंधित स्वप्न, शास्त्रों के अनुसार विवाह के प्रकार, विवाह से पूर्व कुंडली मिलान में अल्पायु-दीर्धायु योग भी देख लें।, ज्योतिष से जाने जीवनसाथी कि दिशा?, राशि से जानिये उत्तम जीवन साथी, आपका जीवन साथी कहीं नशे का आदी तो नहीं?, सात फेरे और सात वचन, सिर्फ कुंडली मिलान सफल विवाह की गारंटी नहीं होती?, विवाह हेतु उचित माह कौन सा होता हैं?, मंगली दोष वाले जातक थोड़े गुस्सैल व चिड़चिड़े होते हैं?, दांपत्य जीवन में मंगल, गुरु एवं शुक्र का प्रभाव, प्रश्न ज्योतिष और विवाह योग, विवाह समय निर्धारण, विवाह के कुछ शास्त्रोक्त नियम, वास्तु दोष से बढते हैं अवैध संबंधों, शीघ्र मनोनुकूल पति-पत्नी प्राप्ति के उपाय, दिसम्बर 2010 मासिक पंचांग, दिसम्बर -2010 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार, ग्रह चलन दिसम्बर -2010, नवम्बर-२०१०-विशेष योग , दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका, दिन-रात के चौघडिये , दिन-रात कि होरा, मासिक राशि फल, वास्तु परामर्श, ज्योतिष परामर्श सूचना
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मासिक राशी फल, mashik rashi Phal, Masik rashi Fal, Masik Rashee Phal
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Published by: CHINTAN JOSHI on Dec 03, 2010
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11/07/2014

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िचंतन जोशी

कसी भी कुंडली से दांप य का वचार करने के िलये मंगल, गु एवं शु इन तीन ह क थित और

भाव को देखना आव य ह ।

वैवा हक जीवन म गु का भाव

सुखी दांप य जीवन के िलये वर-वधूदोन क कुंडली म गु शुभ भाव यु होना चा हये। माना जाता ह गु कशुभ
स म भाव पर ् ह तो वैवा हक जीवन परेशािनय व द कत के उपरांत भी दोन म अलगाव जेसी थित नह ं
बनती ह ।

गु का शुभ भाव वर-वधूको एक साथ एवं उनके वैवा हक जीवन को सुखमय बनाये रखती ह । गु क शुभता दांप य
जीवन क बाधाओं को दरू करने के साथ-साथ, संतान का कारक ह माना जाता ह ।
य द कसी य क कुंडली म गु पी डत ह तो सबसे पहले तो जातक के ववाह म वल ब होता ह । य द ववाह हो
गया तो संतान ाि म परेशािनयां होती ह ।
यद लडके-लडक कसी क भी कुंडली म गु कसी पाप ह के भाव म ह तो संतान ाि म बाधाएं आती ह । यद
गु पर पाप भाव ह या गु पापी ह क रािश म थत ह तो िन त प से दांप य जीवन म अनेक कार क
परेशािनयां आती ह ।

वैवा हक जीवन म शु का भाव

पूण वैवा हक सुख क ाि के िलये ववाह और वैवा हक संब ध का कारक ह शु ज म कुंडली म शुभ भाव म
होना अित आव यक माना जाता ह ।
वर-वधूदोन क कुंडली म शु शुभ भाव यु होने पर दांप य जीवन म सुखो क ाि होती ह । इसके िलये शु का
पूण बली एवं होना भी आव यक होता ह ।
वर-वधूदोन क कुंडली म शु का कसी भी कार से अशुभ थित म होना पित-प ी म से कसी के अपने साथी के
अलावा अ य अवैध संब ध क ओर झुकाव होने के युग बनाता ह । इसिलये दांप य जीवन म सुख ाि हेतु शु क
शुभ थित आव यक होती ह ।
कुंडली म शु य द वयं बली ह , व रािश या उ च रािश म थत तो दांप य जीवन म सुख क ाि होती ह ।
कुंडली म शु य द के या कोण म ह तो दांप य जीवन म सुख क ाि होती ह ।
कुंडली म शु य द क भाव, नीच का अथवा श ु भाव म बैठा ह तो जीवन म दांप य सुख म कमी आती ह ।
कुंडली म शु य द अ त अथवा कसी पापी ह से ् अथवा पापी ह के साथ म बैठा ह तो जीवन म दांप य सुख म

कमी आती ह ।
शु के अशुभ होने पर पित-प ी के अलगाव क थित भी उ प न हो सकती ह ।

41 दस बर 2010

वैवा हक जीवन म मंगल का भाव

ववाह के िलये वर-वधूदोन क कुंडली िमलन करते समय सबसे पहले मंगल क थती देखी जाती ह । देखा जाता ह
क कह ं जातक मंगली तो नह ं ह । मंगल कस भाव म थत ह और मंगल कस ह से संब ध बना रहा ह ।
मंगल क कस ह से युित ह । इन सभी बात का सू म अ ययन आव यक होता ह ।

मंगल के कारण ज म कुंडली म मांगिलक योग का िनमा ण होता ह ।

सभी लडके-लडक ववाह के बाद सुखी दांप य जीवन क कामना करते ह । य द लडके या लडक कसी एक क
मांगिलक योग होने से वैवा हक सुख म कमी आती ह ।
जब मंगल कुं डली के ल न, तीय, चतुथ , स म, अ म व ादश भाव म थत होता ह तो जातक मांगिलक
होता ह । ले कन मंगल अ य भाव म थत होने परभी वैवा हक जीवन के सुख म कमी आने क अनेक
संभावनाये होती ह ।
कुछ वशेष प र थती म कुंडली म मांगिलक योग बनने पर भी इस योग क अशुभता म कमी हो जाती ह ।
ऎसे म अधूर जानकार के कारण वर-वधू अपने मन म मांगिलक योग से ा होने वाले अशुभ फलो के कारण
भयभीत होते रहते ह और मंगली दोष को लेकर अनेक कार के म अपने मन म पाल कर रखते ह ।
वशेष: कृ या मंगल से संबंिधत योग एवं उसके िनवारण के उपायो का व तृत वण न इसी अंक म पृ नंबर पर आप
पढ सकते ह ।

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