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व कायालय

ारा

तुत मािसक ई-प का

NON PROFIT PUBLICATION

दस बर- 2010

गु

FREE
E CIRCULAR
योितष प का दस बर 2010

िचंतन जोशी

संपादक

गु

गु

संपक

योितष वभाग

व कायालय

92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA

फोन

91+9338213418, 91+9238328785,

ईमेल

gurutva.karyalay@gmail.com,
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प का
फोटो

तुित

िचंतन जोशी,

व तक.ऎन.जोशी

ाफ स

िचंतन जोशी,

व तक आट

हमारे मु य सहयोगी

व तक.ऎन.जोशी

( व तक सो टे क इ डया िल)

 या आपको उ च अिधकार से परे शानी ह?
 या आपक अपने सहकमचार से अनबन होती ह?
 या आपके अिधन थ कमचार आपक बात नह मानते?
य द आपको अपने उ च अिधकार , सहकमचार , अिधन थ कमचार से परे शानी ह। आपके अनूकुल काय नह ं करते या
आपको करने नह ं दे त?े वह आपक बात नह ं मानत? बना वजह आपको परे शान करते ह? अन आव यक काय आपसे
करवाते ह। आपका मोशन

कवादे ते ह। उिचत काय करने पर भी आपके काय म नु श िनकालते ह? य द आप इसी

तरह क कसी सम या से

त ह तो आप उन अिधकार , सहकम , अिधन थकम या अ य कसी य

से गु

व कायालत ारा शा ो

विध- वधान से मं िस

ाण- ित त पूण चैत य यु

वशेष के नाम

वशीकरण कवच एवं

एस.एन. ड बी बनवाले एवं उसे अपने घर-ओ फस म था पत कर अ प पूजा, विध- वधान से आप वशेष लाभ ा कर
सकते ह। य द आप मं िस वशीकरण कवच एवं एस.एन. ड बी बनवाना चाहते ह, तो संपक कर।

GURUTVA KARYALAY

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दस बर 2010

3

वशेष लेख
ज म कुंडली से जाने ववा हत-अ ववा हत योग
ववाह के बाद भा योदय

6

कुंडली म कह ं यिभचार जीवनसाथी

12

िमलने के योग तो नह ?ं
8

कुंडली से जाने ववाह का सह समय

14

आपक बहू-बेट क कुंडली म वषक या योग तो नह ं

9

ेम ववाह योग

17

क या क कुंडली म वधवा बनाने वाले योग।

11

ववाह से संबंिधत व न

21

दस बर -2010 मािसक त-पव- यौहार

53

ह?

अनु म
संपादक य

5

शा

23

के अनुसार ववाह के कार

ववाह से पूव कुंडली िमलान म अ पायु-द धायु योग भी
दे ख ल।
योितष से जाने जीवनसाथी क दशा?

ह चलन दस बर -2010

55

नव बर-२०१०- वशेष योग

56

25

29

दै िनक शुभ एवं अशुभ समय

ान तािलका

56

रािश से जािनये उ म जीवन साथी

30

दन-रात के चौघ डये

57

आपका जीवन साथी कह ं नशे का आद तो नह ?ं

31

दन-रात क होरा

58

सात फेरे और सात वचन

32

मािसक रािश फल

59

िसफ कुंडली िमलान सफल ववाह क गारं ट नह ं होती?

34

वा तु परामश

61

ववाह हे तु उिचत माह कौन सा होता ह?

36

योितष परामश

62

मंगली दोष वाले जातक थोड़े गु सैल व िचड़िचड़े होते ह?

37

सूचना

70

दांप य जीवन म मंगल, गु एवं शु

40

हमारा उ े य

72

का भाव

योितष और ववाह योग
ववाह समय िनधारण
ववाह के कुछ शा ो

42
43

िनयम

45

वा तु दोष से बढते ह अवैध संबंध

47

शी मनोनुकूल पित-प ी ाि के उपाय

48

दस बर 2010 मािसक पंचांग

51

दस बर 2010

4

लघु कथाएं

भाव

20

हमारे उ पाद
ई-ज म प का/ E-Horoscope

4

मं िस

सव काय िस

10

वा तु दोष िनवारक यं

मं िस

कवच

फ टक ी यं

ाण ित त दगा
ु बीसा यं

यापार वृ

कवच

13

ादश महा यं

20

या आप कसी सम या से

46
47
48
त ह?

24

गणेश ल मी यं

50
52

भा य ल मी द बी

26

मंगल यं से ऋण मु

52

पित-प ी म कलह िनवारण हे तु

28

तं र ा कवच

52

Full Astrological Analysis Report

35

धन वृ

54

36

मं िस

मंगल यं

37

सव रोगनाशक यं /कवच

63

मं िस मंगल गणेश

41

65

कुबेर यं

44

मं िस कवच
YANTRA LIST

कनकधारा यं

45

GEM STONE
BOOK PHONE/ CHAT
CONSULTATION

68
69

ादश महा यं

या आपके ब चे कुसंगती के िशकार ह?

नवर

ज ड़त

ी यं

46

अ ल मी कवच

60

66

46

ई- ज म प का
अ याधुिनक
उ कृ

ड बी

योितष प ित

E HOROSCOPE
ारा Create By Advanced Astrology

भ व यवाणी के साथ

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दस बर 2010

5

संपादक य
य आ मय
बंधु/ ब हन
जय गु दे व
मानव स यता म हं द ू स यता पूरातन स यताओं म से एक ह। हमार

सं कार कये जाते ह।

के गृ ह थ जीवन म

हं द ू सं कृ ित म

के सोलाह

वेश के िलए आव यक होता ह ववाह सं कार। ववाह सं कारको

ंथ म सं कार क सं ा द गई ह जसका मु य उ े य वर-क या अपने जीवन को संयिमत बनाकर संतानो प
करके जीवन के सभी ऋण से उऋण होकर मो
के एक प व

के िलये

यास कर। ववाह का ता पय होता ह क

र ते म बांधा जाय। हमारे सामाज म ववाह को प व

ी-पु ष को जीवनभर

बंधन माना जाता ह।

यादातर माता- पता अपने पु -क या केके माता- पता को यह िचंता सताती रहती ह। क उनके बेट -बेटे का
ववाह ज द से ज द यो य पा

से कैसे हो जाय। जब लडके-लडक के िलये र ते ह न आये तो अिधक परे शानी का

सामना करना पडता ह। य द र ते आते ह पर बात ना बने तो भी परे शानी। य द एक से
कौन सा पा

सह रहे गा और कोन सा नह ं इसका पता कैसे लगाया जाये?

इन सब सम याओं का हल ह
ववाह हे तु आने वाला पा
यद

योितष के पास। ववाह म होने वाले वलंब एवं उसके िनवारण के उपाय और

यो य ह या नह ं यह तो कोई कूशल

ववाह हो गया ह, और बेटे-बेट को कोई

पा रवार क जीवन दखमय
हो जाता ह।

तनाव से

यादा र ते आते हो, तो

योितष बता सकता ह।

ितकूल

वभाव वाला जीवन साथी िमल जाए तो उसका

यो कं दांप य जीवन म उिचत तालमेल म कमी होने पर पित-प ी दोनो

त रहते ह। दोन म छोट -छोट बातो पर ववाद इ याद

म और पार प रक संबंधो के दौरान पूण संतु
ववाह तो हो गया ह। एसे म अब

नह ं हो पाती। तो भी माता- पता को िचंता सताती रहती ह।

या कर? या तो तलाक िलया जाय या जीवन क गाड जैस-े तैसे करके खचा

जाय? कभी-कभी सम याएं छोट होती ह परं तु य
जाती ह और एक वराट

लेश होते रहते ह ज से उनके दांप य जीवन

अपने अहं कार को लकर चलते ह जसके फल व प वह बड बन

प धारण कर लेती ह।

एसी छोट -छोट सम याओं के िनराकरण हे तु कसी जानकार
योगो के मा यम से भी

को जीवन म पूण सफलता

से सलाह अव य करले। छोटे उपायो या

होती ह।

जीवन म कभी-भी कड़वी बात नह ं बोलनी चा हए। कसी भी बात को मधुरता से एवं अपने दय का ेम उसम िमलाकर
मृ दु ता से कहना चा हये।

को जीवन म कठोर वाणी का सवथा याग कर दे ना चा हए। वा ण के

भलीभांित परिचत ह। वाणी का यह दोष य

भाव से आप सभी

के जीवन को पितत करवाता ह। इस िलये अपनी वाणी पर पूण िनयं ण

रख। पित-प ी दोनो को अपने वाथ के िलये दसरे
को क

दे ना न प ी के िलए ठ क होता है न पित के िलए ठ क होता ह।

िचंतन जोशी

दस बर 2010

6

ज म कुंडली से जाने ववा हत-अ ववा हत योग

 िचंतन जोशी
ववाह योग

स म भाव का वामी शुभ
स म म ह

ह हो या अशुभ

थत हो या कसी अ य म

ह य द वह अपने भाव

थत होकर अपने भाव

को दे ख रहा हो और स म भाव पर कसी पाप

ह का भाव या

ी नह तो जातक का ववाह अव य होता ह।

स म भाव म कोई पाप

थत नह ं हो और नाह ं

हो, तो ववाह अव य होता ह।

स म भाव म सम रािश हो या स मेश और शु
रािश म

भी सम

थत ह या स मेश बली हो, तो ववाह होता

ह।

स म भाव म कोई

ह नह , न कसी पाप

ह क

हो व स मेश बली होतो ववाह अव य होता ह।

य द दसरे
ू , सातव और बारहव भाव के वामी के
कोण म ह ,और गु

से

या

हो, तो ववाह अव य

होता ह।

कुंडली म स मेश से दसरे
ू , सातव और यारवे भाव म
सौ य

थत हो तो

ी सुख अव य िमलता ह।

शु

वभाव रािश म होने पर ववाह अव य होता

ह।

ववाह बाधा योग योग

स म म बुध और शु

दोनो हो, तो ववाह के

आते रहते ह पर ववाह अधेड उ

शु

ताव

म होता ह।

एवं मंगल दोनो पंचम या नव भाव म ह , तो ववाह

बाधा योग होता ह।

स म भाव म मंगल ह उस पर शिन क

ी ह , तो ववाह

बाधा योग होता ह।

स मेश अशुभ होकर 6,8,12 वे भाव म अ त या नीच का हो कर
थत हो, तो ववाह बाधा योग होता ह।

स म भाव म शिन या गु

थत हो, तो शाद दे र से करवाते ह।

दस बर 2010

7

स म भाव पर शिन क

ी ववाह म वलंब करवाती ह।

थत हो, तो शाद दे र से करवाता ह।

कक ल न म स म म गु

स म म 6,8,12 वे भाव का वामी

मा से स म म गु

थत हो, तो शाद दे र से करवाता ह।
थत ह उस पर कसी शुभ ह क

क या क कु डली म स मेश के साथ शिन

सूय, मंगल, बुध लगन म

लगन, स म, बारहव तीनो भाव म पाप

ी या युित नहो शाद दे र से करवाते ह।

थत होने से ववाह अिधक आयु म होता ह।

थत हो और गु बारहव भाव म बैठा हो तो ववाह बड आयु म होता ह।

थत ह तथा पंचम भाव म च

मा कमजोर हो, तो ववाह नह होता य द

होता ह तो संतान क संभावना कम होती ह।

राहु क महादशा या अंतदशा म ववाह हो, या राहु स म भाव को द ू षत कर रहा हो, तो दमागी
ू जाती ह या साथी से अलगाव होता ह।
होकर टट

म के कारण शाद

अ ववा हत योग

ज म कुंडली म स मेश अशुभ थान 6,8,12 वे भाव पर

थत ह और स मेश पर एक से अिधक पाप

हो का भाव हो

तो जातक अ ववा हत रहता ह।

लगन या चतुथ भाव म मंगल

स मेश छ: आठ या बारहव थान पर अ त या नीच रािश का होकर बैठा हो, तो जातक अ ववा हत रहता ह।

स मेश बारहव भाव म हो और लगनेश या रािश का वामी स म म बैठा हो, तो जातक अ ववा हत रहता ह।

शु

साथ

थत हो, स म मभाव म शिन

थत हो तो क या क

थत ह , उ से स म थान पर मंगल और शिन

िच शाद म नह होती ह।

थत हो अथात चं और शु

क युित से स न भाव

म मंगल शिन क युित हो, तो जातक अ ववा हत रहता ह।

शु

शु

और मंगल दोन स म म हो, तो जातक अ ववा हत रहता ह।
कसी पाप

ह के साथ पंचम या स म या नवम भाव म युित हो, तो जातक अ ववा हत रहता ह। और य द हो जाये

तो जातक जीवन साथी के वयोग से पी डत रहता ह।

स म और बारहवे भाव म दो या दो से अिधक पाप

थत हो और पंचम भाव म चं

थत हो, तो जातक का

ववाह नह ं होता

ज म कुंडली म शु , बुध, शिन तीनो

ह नीच ह , तो जातक का ववाह नह ं होता।

सूय प और स म प बराबर का होने पर भी जातक का ववाह नह ं होता।

संपूण ज म कुंडली परामश
ज म कुंडली म उप थत अ छे -बुरे योग तथा दोष के बारे म संपूण जानकार
लाभ-हािन के बारे म जानकार
संपक कर।

ा कर इन योग अथवा दोष से होने वाले

कर उन दोष के िनवारण के उपाय से संबंिधत व तृ त जानकार

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करने हे तु

दस बर 2010

8

ववाह के बाद भा योदय

 िचंतन जोशी
हमारे जीवन मे घटने वाली तमात छोट -बड
घटनाए ज म समय पर

होक

थती के अनु प िन

हो जाती ह। अतः मनु य से ज म के समय पर ह
उसका भा य केसा रहे गा वह िन

त होता ह, य

ह।

योितष मे वषेष मह व दया जाता

यो क नवम भाव से

का भा य केसा रहे गा

इसका अ दाजा लगायाजा सकता ह।
ववाह के पूव एवं

के

मुख

थित के बलवान

का भा योदय ववाह के प यात

जस

क कुंडली म शु , स मेश नवमांश

आयु, भाई, बहन, माता, पता क

जस

क कुंडली म स मेश उ चरािशगत,

वारािशगत या मूल

ुितमान ् गुण ः।

भा यवान होता ह वह कुलीन, सुव ा,

कोण रािश म हो, स म

भाव को कोई शुभ ह दे खते ह
तर क

ववाह के बाद िन

तो

त है ।

कुंडली म स म भाव का कारक शु

बलवान, शुभ

थित म हो एवं ष वग म बलवान हो, स मेश
गु

अथवा शु

के साथ शुभ हो। शु

ल न,

पंचम, नवम, एकादश भाव म हो तो ववाह के बाद
थित

आज के भौितकता भरे युग म भा य बना संसार म कुछ
भी संभव नह ं ह।
संसार म कुछ य

ह, एवं स मेश क

ह।

य ात।्

इ या द का अंदाजा इस भा य भाव से कया जाता ह।

क कुंडली म स म भाव, स म भाव

के साथ हो तो भी ववाह के बाद भा योदय होता

हवा
ु ह वह भा य के हसाब से िमला ह।

साथ हो अथवा दशमेश या ल नमेश या चतुथश

व ान एवं सव गुण संप न होता ह, यो क उसे यह जो

ववाह के बाद भा यवान बनाते

म बली हो। स मेश नवम भाव म नवमेश के

ए एव व ा स च दशनीयो भा या वत: सवगुण पेतः॥

होता ह।

ंथो म से एक

य या त भा यं स नर: कुलीन: स प डत: स

सब

जस

होने पर

माता च पता च ब धुभा या वतेनैव भ व त ध याः॥

तो कुछ

का कारक

ववाह के बाद मे पित-प

वहाय सव गणकै विच यो भा यालय: केवलम

अथात: जो

ारा भा यवान बनाते

योग

'मानसागर ’ के अनुशार
आयु

अपने कम

योितष और ववाह के प यात भा योदय कारक

दोन क ज म कुंडली को दे खने पर जो योग बनता ह,

योितष शा

ह।

उसके अनु प भा य का आंकलन कया जासकता ह।

तो कुछ
ह।

ज म कुंडली म नवम भाव को भा य भाव कहा जाता ह,
एवं भा य भाव को

भा योदय होता ह।
* केवल उपरो

योग के होने से भा योदय संभव नह ं ह

योितष म अ य योग अपना मह व रखते ह, उसे भी
दे खना आव यक होता ह।

ज म से भा यवान होते ह।

* ववाह के प यात भा योदय कारक योग और भी ह।

दस बर 2010

9

आपक बहू-बेट

क कुंडली म वषक या योग तो नह ं ह?

व तक.ऎन.जोशी

भारतीय सं कृ ित म दांप य जीवन को सुखमयशांितमय एवं मंगलमय बनाने के िलए वर-वधू क ज म
कुंडली म गुण का िमलान कया जाता ह।
भारतीय

योितषशा

के अनुसार कसी क या

क ज म कुंडली म वष क या योग होने पर जीवन म
दांप य सुख का अभाव होता ह। अथात पित-प ी के
आपसी संबंध
रहती ह।

म अिधक मधुरता एवं धिन ता नह ं

कसी

अनुशार कुंडली म

वशेष

- थितय

वष क या दोष अिधक

के

भावशाली

नह ं होता ह।
व ानो के मत से वष क या योग वचार ज म
कुंडली, नवमांश और चं

कुंडली से कया जाना चा हये।

वष क या योग कैसे बनता ह।

पंचम भाव म सूय एवं नवम भाव म मंगल हो ने से

य द क या का ज म वषक या जेसे अशुभ योग म
होता ह तो उस योग के भाव से वह जीवन भर दःखी
रहती

ह। एसा दे खा गया ह, क वष क या योग के भाव वाली
लड़क का

वषक या योग बनता ह।

भारतीय

योितष शा

क या योग अशुभ ितिथय ,

के अनुसार वष

ुर न

अशुभ ितिथय , एवं पाप

एवं

योग बनता ह।
हो के

यवहार

कुशल नह ं होती इनम क णा-दया-माया इ याद भावनाओं
क कमी होती ह।

कसी लड़ क का ज म शिनवार को कृ ितका न

स मी ितिथ के संयोग म हवा
ु हो, तो उससे वष क या

वभाव क होती ह।

वष क या योग म ज म लेने वाली लड़ कयां

एवं

योग बनता ह।

भावके कारण ज द ह गु सा होने वाली कसी क बात न
मानने वाली अ यािधक ज , हं सक

कसी लड़ क का ज म र ववार को वशाखा न

ादशी ितिथ के संयोग म हवा
ु हो, तो उससे वष क या

वष क या योग म उ प न लड़क का वभाव:
ज म समय के उ

एवं

क या योग बनता ह।

एवं पाप

ह के दन म ज म लेने से बनता है ।

कसी लड़ क का ज म र ववार को अ ेषा न

तीया ितिथ के संयोग म हवा
हो, तो उससे वष

वयं का दभा
ु य उसके पित के अ छे भा य

अथात सौभा य को दभा
ु य म बदल दे ता ह।

कसी लड़ क क कुंडली म ल न ( थम भाव) म शिन,

कसी लड़ क का ज म मंगलवार को शतिभषा न
एवं

ादशी ितिथ के संयोग म हवा
ु हो, तो उससे वष

क या योग बनता ह।

शी

ववाह कर कवच

शाद म आने वाले व न-बाधाओं के िनवारण हे तु

मू य मा : 640/-

दस बर 2010

10

सव काय िस
जस

म िस

को लाख
(लाभ)

कवच के

और प र म करने के बादभी उसे मनोवांिछत सफलताये एवं कये गये काय

ा नह ं होती, उस य

मुख लाभ: सव काय िस

शांत कर धारण करता य
उ नित ाि

कवच अव य धारण करना चा हये।

ारा सुख समृ

और नव

के जीवन से सव कार के द:ु ख-दा र
कार के शुभ काय िस

यवसाय करता होतो कारोबार मे वृ

ह के नकारा मक भाव को

का नाश हो कर सुख-सौभा य एवं

होते ह। जसे धारण करने से य

यद

होित ह और य द नौकर करता होतो उसमे उ नित होती ह।

कवच के साथ म सवजन वशीकरण कवच के िमले होने क वजह से धारण करता

क बात का दसरे

 सव काय िस

को सव काय िस

कवच के

होकर जीवन मे सिभ

 सव काय िस

कवच

ओ पर

भाव बना रहता ह।

कवच के साथ म अ ल मी कवच के िमले होने क वजह से य

सदा ल मी क कृ पा एवं आशीवाद बना रहता ह। ज से मां ल मी के अ

पर मां महा
प (१)-आ द

ल मी, (२)-धा य ल मी, (३)-धैर य ल मी, (४)-गज ल मी, (५)-संतान ल मी, (६)- वजय
ल मी, (७)- व ा ल मी और (८)-धन ल मी इन सभी
 सव काय िस

कवच के साथ म तं

होती ह, साथ ह नकार मन श
कवच के

होता ह।

यो का कोइ कु भाव धारण कता

ारा होने वाले द ु

पर नह ं होता। इस

भावो से र ाहोती ह।

कवच के साथ म श ु वजय कवच के िमले होने क वजह से श ु से संबंिधत

सम त परे शािनओ से

र ा कवच के िमले होने क वजह से तां क बाधाए दरू

भाव से इषा- े ष रखने वाले य

 सव काय िस

पो का अशीवाद


वतः ह छटकारा
िमल जाता ह। कवच के

का चाहकर कुछ नह

भाव से श ु धारण कता

बगड सकते।

अ य कवच के बारे मे अिधक जानकार के िलये कायालय म संपक करे :
कसी य

वशेष को सव काय िस

कवच दे ने नह दे ना का अंितम िनणय हमारे पास सुर

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त ह।

दस बर 2010

11

क या क कुंडली म वधवा बनाने वाले योग।

 िचंतन जोशी

कसी लड़ क का ज म र ववार या शिनवार को अ ेषा

एवं

तीया ितिथ के संयोग म हवा
ु हो, तो उससे

वै य योग बनता ह।

वधवा होने क संभावना बनी रहती ह। इस िलये नाड़
दोष का भी अव य

कसी लड़ क का ज म शिनवार को कृ ितका न

एवं

कसी लड़ क का ज म मंगलवार को शतिभषा न

अथात दोन

एवं

स मी या ादशी ितिथ के संयोग म हवा
ु हो, तो उससे
कसी लड़ क का ज म र ववार को वशाखा न

इसके अलावा लड़का या लड़क

कसी क भी कुंडली म

दन भरणी न

दन मूल न

, नवमी ितिथ के

दशमी ितिथ के दन अ ेषा न
के

दन मघा न

दन रो हणी न

,

एवं एकादशी ितिथ

म ज म लेने वाले

वालामुखी योग से यु

दन

होने के कारण दांप य जीवन

सुखमय नह ं होता ह।

य द वर-क या के न

क उ

व णत
ववाह

थतीयां बन रह ह

चा हये।

उपाय

भगवान िशव पावती का पूजन करने से अशुभता म
कमी आती ह।

महामृ युंजय मं

का जप अनु ान कसी यो य

ा ण से संप न करवाय।

ववाह हे तु कुंडली िमलान करवाते समय नाड़ दोष को
भी अव य दे खले

क कुंडली म

तो उ से डरने के बजाय उसके िनवारण के उपाय करने

, पंचमी

, अ मी ितिथ के

क कुंडली म

व जत है ।
य द कसी क या क कुंडली म एसी

ितपदा (एकम) ितिथ के

बल संभावना

तीन म कोई भी एक समान ना ड़यां हो, तो

योग बल होते ह।

कृ ितका न

कुंडली िमलाने म क या और वर दोन

नोट: कुंडली िमलाने म वर-क या दोन

कसी भी कारण से उनका ववाह संबध व छे द हो जाने के

ितिथ के

कुंडली िमलाने म क या और वर दोन

का जीवन द:ु खमय यितत होता ह।

जीवन साथी से िनराशा होती ह।

अं य नाड़ हो, तो उनका ववाह हो जाने पर दोन

स म थान पर य द सूय, राहु, मंगल, शिन, हो तो उसे

म अलगाव हो ने

क मृ यु हो सकती ह।

बनता ह।

के

म य नाड़ हो, तो उनका ववाह हो जाने पर दोन

एवं

ादशी ितिथ के संयोग म हवा
ु हो, तो उससे वै य योग

ववाह होजाने पर दोन

बनती ह।

वै य योग बनता ह।

ह , तो उनका

क आद

वैवा हक संबंध अिधक दन तक सुखमय नह ं रहता

बनता ह।

कुंडली िमलाने म य द क या और वर दोन
नाड़

स मी ितिथ के संयोग म हवा
ु हो, तो उससे वै य योग

यान रख।

यो क

योितष

व ानो के अनुशार

म नज़द कयां ह , तो ववाह के

एक वष के भीतर क या क मृ यु हो सकती ह अथवा
तीन वष के अंदर उसके पित क मृ यु होने से क या


कु भ ववाह करने से भी अशुभ
कसी दे वी

भाव दरू होते ह।

ितमा से िसंदरु लेकर रोज अपने ललाट पर

लगाने से अशुभता म कमी आती ह।

अपने माता- पता एवं बडे बुजुग का आिशवाद ल।

अपना च र

साफ रख एवं अनौितक कम से बच।

ेम ववाह करने से बच।

दस बर 2010

12

कुंडली म कह ं यिभचार जीवनसाथी िमलने के योग तो नह ?

 िचंतन जोशी,
गुण िमलान एवं कुंडली िमलान के उपरांत जानकार
योितषी से यह भी अव य

ात करवाले क कह ं लडका

या लड़क ं क कुंडलीम अ य

ी-पु ष से नाजायज संबंध

के

कये क कार

ादश भाव म मंगल शै या सुख, भोग, म बाधक होता
ह इस दोष के कारण पित प ी के स ब ध म

पित-प ी के झगड़े तो आम बात बनगये ह। पितप ी म सामा य न क-झ क से तो

ेम और बढ़ता ह।

ह का शुभ

भाव नह ं ह , तो

दोष और गु

वाले झगड़े दोनो के बच म गाली गलोचच कर

एवं

कोट

तलाक,

कचेर

के

साथी

को

िमलता

नाजायज
अपने

जीवनसाथी को घातक नुकसान
भी कर सकता ह।

आ मह या,

य द ज म कुंडली म स म भाव
म शु

अपने

ह जससे ववाहे र स ब ध

के

कारण

बनने

विभ न

को

योितष शा
ात

म सूय हो, तो अ य

ेम

वाला
ज म

उ च का होने पर

संगहो सकते ह, जो क ववाह के

तो

बाद भी जार रहते ह।

मारपीट करने वाला कई

ी-पु ष से नाजायज संबंध

रखने वाला जीवनसाथी िमलने के योग होने पर उ ह
मं -यं -तं , र

ी-पु ष के

ववाहे र संबंध भी बनाता है । संतान

कुंड़ली मे

िमलता है ।

श ु रािश म

मंगल या शिन हो, अथवा

ू र रािश

थत होकर स म भाव म

थत हो,

ू र, मारपीट करने वाले जीवनसाथी क

ज म कुंड़ली मे स म भाव म च
क युित होने पर

इ या द उपाय करके ऐसे योग का

स म भाव म मंगल चा र क दोष उ प न करता ह

जीवनसाथी

ाि

होती

ह।

मा के साथ शिन

अपने जीवनसाथी के

ेम नह ं रखता एवं कसी अ य से

भाव कम कया जा सकता ह।

ी-

पु ष से नाजायज संबंध बनाने

कया

को कैसा पित-प ी िमलेगी ?
के कई

होता ह।

ज म कुंड़ली मे स म भाव

के

बल

ज से वैवा हक

जीवन का सुख न

सम याओं

ज म कुंडली म शु

क संभावना

रहती ह।

जा सकता ह। लडका या लड़क

को

जो

मूल िस ांतो से

अ याअिधक कामुक बनाता

तरह क यातनाएं दे ता है ।

भारतीय

थत

जीवन

पित-प ी को

एसी

म चा र क

ऐसा

ह,

संबंध

रोग उ प न कर सकता ह।

क ल तक पहंु च जाती ह। कई
लडके-लड़क

ेम

एवं सामंज य का अभाव रहता ह। य द मंगल पर

ले कन नाजायज संबंध के कारण उ प न होने
अलगाव,

होता ह। मंगल के अशुभ

भाव के कारण पित-प ी म द ू रयां बढ़ती ह।

बनने के योग तो नह ं ह।

मारपीट,

व तक.ऎन.जोशी

ित

ेम कर अवैध

संबंध रखता है ।

ज म

कुंड़ली

मे

स म

भाव

जीवनसाथी धोखा दे ने वाला कई

राहु

होने

पर

ी-पु ष से संबंध

दस बर 2010

13
रखने वाला यिभचार होता ह व ववाह के बाद अवैध
संबंध बनाता है ।

ह दोष के कारणा ऐसा जीवनसाथी िमलता ह

जसके कई

ऐसे अशुभ

इस योग के कारणा पित-प ी एक दसरे
से अलग भी हो

या अ य कसी बड़े

भाव से पित-प ी द नो के

क भावनाओं का स मान करते हवे

अपने अंदर समपण क भावना रखनी चा हए।

फ़लदयी यं है । जो न केवल दसरे
ू य

िस

का अनादर ब कुल ना

फ टक ी यं

शाली यं है । " ी यं " को यं राज कहा जाता है

यो क यह अ य त शुभ

ो से अिधक से अिधक लाभ दे ने मे समथ है एवं संसार के हर य
" ी यं " जस य

के िलए

के घर मे होता है उसके िलये

" ी यं " अ य त फ़लदायी िस होता है उसके दशन मा से अन-िगनत लाभ एवं सुख क
यश

त रख।

प र मा कर।

फायदे मंद सा बत होता है । पूण ाण- ित त एवं पूण चैत य यु
समाई अ ितय एवं अ

कर।

 मं दर म गु दान द।
 हनुमान चालीसा एवं बजरं ग बाण का पाठ कर।
 ित दन पीपल के वृ को जल चढ़ाएं और सात

क कुंडली म म इस तरह का योग बनरहा ह

" ी यं " सबसे मह वपूण एवं श

पूजन

कर।

ववाहे र संबंध बन सकते ह। इस िलये जन पु ष और

मं

का

 सोमवार का त रख।
 मोती क अंगुठ धारण कर।
 माता- पता का दय कभी ना दखाएं
और उनका

म ह , तो यह पित-प ी के म य मतभेद पैदा होता ह।

उ ह एक दसरे

िशव-पावतीजी

पूरे विध- वधान से ह रतािलकातीज का

ज म कुंड़ली मे स मेश य द अ म या ष म भाव

क या

ित दन

ित अ यंत लापरवाह होते ह।

सकते ह। इस योग के

भाव कम करने के

िलए लड़ कयां यह उपाय कर:

ी-पु ष के साथ अवैध संबंध होते ह। जो

अपने दांप य जीवन के

ह योग का

ाि होित है । " ी यं " मे

मनु य क सम त शुभ इ छाओं को पूरा करने मे समथ होित है । ज से उसका

जीवन से हताशा और िनराशा दरू होकर वह मनु य असफ़लता से सफ़लता क और िनर तर गित करने लगता है एवं
उसे जीवन मे सम त भौितक सुखो क ाि होित है । " ी यं " मनु य जीवन म उ प न होने वाली सम या-बाधा एवं
नकारा मक उजा को दरू कर सकार मक उजा का िनमाण करने मे समथ है । " ी यं " क

थापन से घर या यापार के

थान पर था पत करने से वा तु दोष य वा तु से स ब धत परे शािन मे युनता आित है व सुख-समृ , शांित एवं

ऐ य क ि होती है ।

गु

व कायालय मे " ी यं " 12 ाम से 75 ाम तक क साइज मे उ ल ध है

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दस बर 2010

14

कुंडली से जाने ववाह का सह समय

 िचंतन जोशी
अ सर ब च के बड़े होते ह माता- पता को उनक शाद के िलए िचंता होने लगती ह। क उनके
ब च क शाद कब होगी। इ र ारा िनिमत इस सृ ी म य
पर होते ह। इसी कार य

के हर काय अपने िन

त समय

क शाद कब होगी, होगी भी या नह ं यह ई र ने पहले से िलख

कर रखा होता ह। इस इ र

ारा िलखे इस समय को य द

चाहे तो कसी जानकार

योितषी से अपनी ज म कुंडली दखवाकर ववाह के समय के बारे म जान सकता ह। य द
ज म कुंडली ववाह से संबंिधत भाव म शुभ
म अ छे योग हो तो शी

ह कअ छ

थती या

ह , ज म कुंडली

ववाह के योग बनते ह। ज म कुंडली म ववाह से संबंिधत भाव म

अशुभ ह का भाव हो, तो शाद वलंब से होती ह।

य द कसी य

क कुंडली म गु स म भाव म

संबंध बना कर स म भावम उ च का ह , तो य

थत ह कर कसी शुभ ह से ्

का ववाह 21 वष क आयु म होने क

अिधक संभावनाएं बनती ह।

कुंडली म स म भाव म वगृ ह शु
ह य

हो और

तीय भाव म ल न ारा

ह , तो कशोर अव था या युवान अव था म

का ववाह होने के योग बनने लगते ह।

य द कसी य

क कुंडली म शुभ

का थान प रवतन या

ह से ल नेश व स मेश का आपस म थान प रवतन या

हो, वशेष कर गु

संबंध होने से क या का ववाह योग 18 से 20 वष के म य होने क संभावना बनाता ह एवं

पु ष का ववाह योग 21 से 23 वष के म य होने क संभावना बनाता ह।

य द कसी य

क कुंडली म स मेश और ल नेश दोन जब िनकट भाव म

थत ह तो य

का ववाह योग 21 व

वष म होने क संभावना बनाता ह।

य द कसी य

क कुंडली म ल नेश बलशाली हो और ल नेश

तीय भाव म

थत हो तो य

का ववाह शी होने

के योग बनाता ह।

य द कसी क या क कुंडली म च

उ च अंश का

थत होने से क या व उसके जीवनसाथी क आयु म अिधक अंतर

होने क संभावना बनती ह।

य द स मेश व
स मेश के व

यदच

हो एवं मंगल ष

भाव म

थोत होने से य

का ववाह वल ब से होने क संभावना बनती ह।

होने से वैवा हक जीवन सुखी नह ं होता ह।

स म भाव म अकेला तथा शुभ

ह से

ह तो य

का जीवनसाथी सुंदर होता ह। स म च

वैवा हक

जीवन म आनेवाली अशुभता म कमी करता ह।

य द ल न, स म भाव, ल नेश और शु
वल ब से होने के योग बनता ह।

चर रािश म

थत ह एवं च

मा चर रािश म

थत ह तो य

का ववाह

दस बर 2010

15

य द स मेश छठे , आठव और बारहव भाव, ल न भाव या स म भाव म

थत ह तो य

का ववाह दे र से होने के

योग बनते ह।

य द शिन और शु

ल न से चतुथ भाव म

थत ह एवं च

मा छठे , आठव या बारहव भाव म

थत ह तो य

का

ववाह तीस वष के बाद होने क संभावना बनती ह।

य द कुंडली म राहु और शु

थम भाव (ल न) म

थत ह एवं मंगल स म भाव म

थत ह तो य

का ववाह 28

से 30 वष क आयु म होने क संभावनाएं बनाता ह।

य द शु

कक, वृ

क या मकर रािश का होकर स म भाव म

स म या एकादश भाव म ह तो य

थत ह एवं च

मा व शिन क युित ल न,

तीय,

का ववाह 32 वष के बाद होने क संभावना बनती ह।

य द कुंडली म स मेश बलह न हो एवं शिन और मंगल एक साथ थम,

तीय, स म या एकादश म

थत ह तो य

का ववाह 30 वष क आयु के बाद होने के योग बनता ह।

य द कुंडली म मंगल और शु

एक साथ पंचम या स म भाव म

थत हो एवं द नो के पर गु

ह , तो य

का

ववाह वय क आयु म होने क संभावना बनती ह।

य द ज म कुंड़ली म शिन छठे भाव म हो एवं सूय भाव म और स मेश कमज़ोर अथवा पाप

ह से पी ड़त होता हो

उनक शाद म भी काफ बाधाएं आती ह।


य द ज म कुंड़ली म शिन और राहु क युित स म भाव म होती ह तो ववाह सामा य से अिधक आयु म होता ह।
य द ज म कुंड़ली म शिन और राहु क युित ल न म होती है और स म भाव पर
ज मप ी म शिन और राहु क युित कसी भी भाव म ह स मेश एवं शु

डालते ववाह वलंब से होता ह।

य द कमज़ोर ह , तो भी ववाह अित वल ब

से होता ह।

ववाह के िलये स म भाव, स मेश और शु

का वचार कया जाता ह। स म भाव, स मेश और शु

शुभ

थित म ह तो

ववाह शी होता है तथा वैवा हक जीवन भी सुखमय रहने क अिधक संभावनाएं होती ह।
इसके वपर त य द स म भाव, स मेश और शु

तीन कसी भी कार के पाप

ह के भाव म ह तो ववाह म वल ब

होने क संभावना बनती ह। ववाह के समय का िनधारण करने के िलये कुंडली म बन रहे योग वशेष भूिमका िनभाते ह।
कसी य

को जीवन म कतना वैवा हक सुख िमलेगा यह सब कुंडली म बन रहे योग पर िनभर करता ह। य द शुभ

शुभ भाव के वामी होकर जब शुभ भाव म
भाव म

थत ह तो य

थत ह ता हो, और अशुभ

ह,

ह िनबल होकर अशुभ भाव के वामी होकर, अशुभ

को अनुकुल फल दे ते ह।

कुंडली के योग ववाह समय को कस कार भा वत करते ह।

य द ज म कुंडली म अ मेश पंचम भाव म ह तो य

य द ज म कुंडली म सूय एवं च

य द स म भाव का वामी सूय या च

य द ज म कुंडली म शु

के

का शिन से पूण

का ववाह वल ब से होने क संभावना बनती ह।
संबंध रखते ह तो य

का ववाह दे र से होने के योग बनते ह।

दोन म से कोई हो तभी इस कार क संभावना वशेष बनती ह।
थत ह और शु

से स म भाव म शिन

थत ह तो य

का ववाह वय क आयु

म वेश के बाद ह होने क संभावना बनती ह।

य द ज म कुंडली म शिन स मेश होकर एकादश भाव म
ववाह 21 से 23 वष म होने क संभावना बनती ह।

थत ह और एकादशेश दशम भाव म

थत ह तो य

का

दस बर 2010

16

य द ज म कुंडली म शु

से स म भाव म च

य द ज म कुंडली म स मेश और शुभ

त ह तो भी य

का ववाह शी होने क संभावना बनती ह।

तीय भाव म ह तो य

का ववाह 21 वष म हो होने क संभावना बनती

ह।

य द ज म कुंडली म शुभ

ह थम,

तीय या स म भाव म ह तब य

का ववाह 21-22 वष के आसपास होने के

योग बनते ह।

य द ज म कुंडली म बुध से स म भाव म च

थत ह और अ मेश पंचम भाव म

थत ह तो य

का ववाह 22

व वष म होने क संभावना बनती ह।

य द शु

तीय भाव म

थत ह और मंगल अ मेश के साथ ह तो य

संभावना बनती ह।

शु

से स म म और ल नेश शु

एकादश भाव म

थत ह तो य

22 से स27 वष क आयु म ववाह होने क
का ववाह 27 व वष म होने क संभावनाएं

बनती ह।

य द कुंडली म स मेश नवम भाव म

थत ह , शु

तीसरे भाव म

थत ह तो य

का ववाह 27 से 30 के म य क

थत ह तो य

का ववाह वल ब से होने क

आयु म होने के योग बनाता ह।

य द अ मेश

व-रािश म

थत ह और ल नेश शु

के साथ

संभावना बढ़ जाती ह।

य द स मेश

कोण भाव म ू र

ह के साथ ह और शु

भी पाप

ह से पी ड़त होकर

तीय भाव म

थत ह तो

30 वष के बाद ववाह होने क संभावना बनती ह।

य द ल नेश या स मेश वरािश म
संभावना बनती ह।

थत होकर पंचम या छठे भाव से दरू

थत हो तो य

क शाद दे र से होने क

स म भाव के वामी ह के अनुसार ववाह समय का िनणय:1. स म भाव का वामी सूय ह तो य
2. च

स मेश होने पर य

का ववाह 24 से 26 वष के म य होने क संभावना होती ह।

का ववाह 21 से 22 व वष के म य होने क संभावना होती ह।

3. मंगल स मेश हो तो 24 से 27 के म य क आयु म ववाह होने क संभावना होती ह।
4. बुध स मेश होने पर 28 से 30 क आयु म ववाह होने क संभावना होती ह।
5. जस य
6. शु

क कुंडली म गु स मेश हो उस य

का ववाह 22 से 24 वष क आयु म होने क संभावना होती ह।

के स मेश होने पर 21 से 23 वष क आयु म ववाह होने क संभावना होती ह।

7. शिन स मेश होने पर 30 वष के प ात ववाह होने क संभावना होती ह।
इन योग म

ह क

एवं

थित अपना वशेष मह व रखती ह इस िलये उपरो

योग होते हवे
ु भी अ य योगो के भाव के

कारण ववाह समय म प रवतन हो सकता ह। अगर स मेश उ च हो, बलवान हो, शुभ
भाव से मु

हो तो ववाह क आयु म प रवतन होना संभव ह।

सवजन वशीकरण कवच
मू य मा : Rs.1050

ह के

भाव म हो एवं अशुभ

दस बर 2010

17

ेम ववाह योग

 िचंतन जोशी
योितष शा

के अनुसार

लड़के और लड़क के बीच
सू

ेम को

थती एवं

य द ज म कुंड़ली म पंचम भाव का स म भाव

ववाह के प र णत

से स ब ध होता ह, त

बांधने म अहम भूिमका िनभाते ह।

सू

जब कसी लड़के और लड़क के बीच

ेम होता ह

और वे दोन एक साथ अपना जीवन बीताने के

व न

दे खते ह और ववाह करना चाहते ह। इसी िलये

ेम म

कोई व
सफल

या

ज म कुंड़ली म नवम भाव और ल न का शुभ

स ब ध होने से
सू

अपने

शाद

उ से

होगी या नह ं।

अपने

योितष

के जानकार इसके िलए

ह माना गया ह।

को

ेम का

ह और

ेमी

वैवा हक सू

वैवा हक सू

म बंधते ह। नवम भाव से पंचम का शुभ

स ब ध होने पर भी दो
जीवन का सुख

ेमी पित प ी बनकर दांप य

करते ह।

य द ज म कुंड़ली म शु
अथात

ेम ववाह क

वगृ ह ह , तो

अगर अपने घर म

ेम ववाह का योग बनता

ह।

ह और स म भाव ववाह का भाव होता ह। पंचम भाव
ेमी

थत ह , तो

वामी और शु

बल संभावनाएं बनती ह।

ेम का भाव होता

का स ब ध जब स म भाव से होता है तब दो

म बंध कर सफल हो

ज म कुंड़ली म पंचम भाव का
य द स म भाव म

वभाव का होना एक अलग बात

के अनुसार पंचम भाव

ेम

सकता ह।

का

ेम का ववाह म प रणत होना दसर
बात ह।

योितष शा

य द कसी क कुंडली म यह

थित के होने से भी आपका

वभाव का होता ह।
का

ववाह

योग नह ं होने पर अ य योगो क

भाव ल न, पंचम, स म तथा एकादश भाव पर होने पर
ेमी

ेम

का

समजना चा हये।

व ानो के मत से ज म कुंडली म शु

का

सफल होगा एसा नह ं

ज मेदार मानते ह।

कारक

केवल

ह योग को

योितष म शु

योग

व ा

वै दक

इन

कुंडली म होने से

कामयाब होगा नाकामयाब ?
थतीओं म

यास

करता ह।

ेम को ववाह के बंधन म
एसी

ेम को वैवा हक

म बंध कर सफल बनाये रखने का

असफल

अथात उसक

ेम वैवा हक

म बंधता ह।

अपनी मं जल पाने म
होगा

का

य द ज म कुंड़ली म शु

शु

से शु

ल न म

से नवम भाव म

बनता ह। (शु

पंचम हो, तो
एवं चं

थत ह और
थत हो अथात

ेम ववाह का योग

का नवम पंचम योग ह )

दस बर 2010

18
थत ह , तो

ेम ववाह को नवमांश कुंडली से भी दे खा जाता
ह।


य द ज म कुंडली

नवमांश कुंडली म स मेश और नवमेश क युित
होती ह , तो

य द ज म कुंड़ली म शु
साथ म

थत तो

ल न म ल नेश के

ेम ववाह के योग

शा

म शिन और केतु

युित का स ब ध होने पर

ेम

या

होने से

युित अथवा द नो का
ववाह का

स म भाव का

अपने

संभावना

ेम

वामी स मेश अपने घर म
ेम ववाह के योग बनते ह।

एकादश भाव शुभ

ह के

ववाह करने

बल बनती ह। उ से

के अपने संबंध

ह के

वपर त य द

योग हो एवं मंगल नवम या

कोण भाव म

बना

सहमित

के अपने

ववाह

ज म कुंडली म स म भाव के

ज म कुंडली म

करने

वामी एवं शु
हो, तो

पंचम भाव के

राहु या केतु क युित ह , य

के

वामी के साथा
के

ेम ववाह के

योग बनते ह।

ज म कुंडली म मंगल या च
वामी के साथ पंचम भाव म ह

पंचम भाव के
थत ह , तो

ेम ववाह के योग बनते ह।

वामी का रािश प रवतन

ेम ववाह करने क संभावना होती ह।

ेमी के साथ ववाह बंधन तक

स मेश व एकादशेश के

ह माना जाता

कार से स म भाव,

पर शिन अथवा राहु क

भाव म ह , तो य

नह ं पह च पाते।

ह का कसी भी

संभावना होती ह।

भाव म ह , तो के

ेमी के साथ

एकादश भाव पापी

प रवार

बल योग बनता है ।

थत होने से

संबंध होने से

ेम ववाह

म मंगल, शिन एवं राहु तीन

स मेश से संबंध होता ह, तो

ेम ववाह का योग बनता है ।
मा क

योितष शा
ह इस

मा क युित

स म भाव म स मेश के साथ म च

संब ध या युित ह , तो

को सबसे अिधक अशुभ व पापी

ववाह के योग

ल न भाव म ल नेश के साथ म च

ज म कुंडली म मंगल का शिन से या मंगल का
क संभावना बनती ह।

बल होता है ।

पा रवा रक

होता ह अथवा पा रवार क अवहे लना कर

राहु से

नवमांश कुंडली एवं ज म कुंडली म से कसी म
भी पंचमेश और स मेश का कसी कार

कार से य द राहु का

अपने यार को अिधक मह व दे ता ह।

ह।

ेम ववाह होने क

बल होती ह।

ज म कुंडली म कसी भी

उता

ेिमय के िलए शुभ संकेत मानाजाता

ह , तो

रत रवाजो को ताक पर रखकर ववाह करने पर

माना जाता ह। पर स म भाव म शिन और केतु
क युितको

थत और स म

संब ध स म भाव से होने पर य

बल होते

क युितको पाप

ज म कुंडली म राहु ल न म
संभावना

ह।

ेम ववाह सफल होने का बनता ह।

भाव पर गु

ेम ववाह क संभावना अ यािधक

बल होती ह।

ादशेश तथा पंचमेश के म य रािश प रवतन योग
होने से

ेम ववाह योग नह ं ह और

ेम ववाह सफल बनता ह।

ज म कुंडली म मंगल या च
वामी के साथ स म भाव म ह
ेम ववाह के योग

बल बनते ह।

स म भाव के
थत ह , तो

दस बर 2010

19

ज म कुंडली म शु

पंचम भाव या नवम भाव म

थत ह अथवा शु
थत ह , तो

चं

कुंडली म पंचम भाव

ेम ववाह के योग बनते ह।

ज म कुंडली म पंचम भाव म मंगल

योितष शा
थत ह

होता ह।

ज म कुंडली म पंचमेश एवं एकादशेश क युित
ेम ववाह

कुंडली के कसी भी भाव म ह , तो

ज म कुंडली म सूय, बुध और शु
अलग भाव म

ेम ववाह

थत होने से

मशः अलग-

ेम होता ह ले कन

ववाह नह ं होता।

ज म कुंडली म सूय, बुध और शु

होने के योग होते ह।

क ठनाईय के बाद म

ेम ववाह होने क

ज म कुंडली म स म भाव म शिन एवं केतु क

संभावना होती ह।

का

ेम

ेम ववाह

ववाह करने

तीनो

के साथ म अ य एक

ज म कुंडली म ल नेश एवं पंचमेश क युित ह

ेम

संबंध ह , तो

ेम

ज म कुंडली म अशुभ भाव का
ेम

ज म कुंडली म सूय, बुध, गु

क युित स म भाव

म ह , और राहु क महादशा हो तो पु ष अपने से
बड उ

ी से

ेम

क या अपने से दोगुनी उ

ववाह होने के योग

स मेश म नवमेश क महादशा या अ तरदशा का पंचमेश

घर वालो

या क दायी रहता ह।

वामी होकर

बनते ह।

थत हो और

करता ह। उनका वैवा हक जीवन या तो असफल

शिन का मंगल, स म भाव या स मेश से युित या
संब ध होने से

स म भाव म

से िछपाकर या घर से भागकर भागकर शाद

ादश भाव म ल नेश और

ेम ववाह होने के योग होते ह।

ज म कुंडली म शु

ेमी से धोखा िमलता ह।

राहु क महादशा चल रह हो तो य

ववाह

स मेश क युित ह एवं भा येश क इस पर
ह , तो

के साथी के साथ होता ह।
ेम नह ं िमलता या

करने क संभावना रहती ह।
ज म कुंडली म

का ववाह अपने से अिधक

ज म कुंडली म सूय-बुध कमजोर होने पर स चा

ववाह

ज म कुंडली म ल नेश एवं नवमेश क युित ह

थत ह तो बड

ज म कुंडली म सूय, बुध क स म भाव म युित
बन रह ह , तो य

संबंध ह , तो

ह म

क युित बन रह ह एवं दोनो

संभावना होती ह।

अथवा द नो का

तीनो क युित ह , तो

कुंडली के कसी भी भाव म ह , तो

ेम

के ेम ववाह होने क संभावना अिधक होती ह।

करने क संभावना बढ़ती ह।

को कसी से

से कसी दो

अथवा द नो का

ह के कारण ह कोई य

ज म कुंडली म स मेश एवं एकादशेश क युित

युित ह , तो

क युित

होने के योग बनते ह।

होते ह। एसा माना जाता ह

ज म कुंडली म सूय, बुध और शु

ज म कुंडली म पंचमेश एवं स मेश

के अनुसार ेम ववाह से संबंिधत तीन

ह सूय, बुध और शु

योग ह , तो

होने के योग होते ह।

कारक
इन तीन

ेम ववाह के योग बनते ह।

म ववाह होने क

संभावना अिधक होती ह।

और पंचमेश एवं एकादशेश का रािश प रवतन

कुंडली के कसी भी भाव म ह , तो

के साथ संबंध ह , तो इस योग म

ववाह करता ह और

के पु ष के साथ

ेम

सूय स म ह , तो ेम ववाह होने से भी िन

ववाह करती है ।

तलाक होता ह।

दस बर 2010

20

भाव

 िचंतन जोशी
कसी गांव म एक कु हार भगवान का क तन करते थे। क तन करते-करते अपनी सुध-बुध भूल गये। िम ट र दतेर दते िम ट के साथ उनका बालक भी र दा गया। उ ह पता नह ं चला। उनक प ी क नजर पड़ ।
प ी बोल उठ ः आज से आप मुझे पश मत करना।
कु हार बोले: अ छा ठ क ह...।
भगवान म भ

भाव था इस कारण से प ी नाराज हो गई, फर भी उसके दल को ठे स नह ं पहँु ची। प ी का

पश

नह ं करना... तो नह ं करगे। इस पर प ी को बड़ा प ाताप हआ
क गलती हो गई। अब आगे वंश कैसे चलेगा ? अपने पता को

मनाकर अपनी बहन क शाद अपने पित से करवाई। सब विध स प न करके जब वह-वधू वदा हो रहे थे, तब पता ने अपने
दामाद कु हार से कहाः
आपने मेर पहली बेट को जैसे रखा है , ऐसे ह इसको भी रखना।
कु हार बोले: हाँ ठक ह जो आ ा।
भगवान के

ित जसक जसका भ

भाव से दे खने लगे। दोन प
ले कन कु हार का भ

भाव है , वह तो सरलता से सब

वीकार कर लेगा। कु हार दोन प

य को समान

याँ दःखी
होने लगीं। अब इनको कैसे समझाएँ ? तक वतक दे कर पित को संसार म लाना चाहती थीं

भाव भगवान म जुड़ चुका था।

आ खर दोन बहन ने एक रा

को अपने पित का हाथ पकड़कर जबरद ती अपने शर र तक लाया। कु हार ने सोचा क मेरा हाथ

अप व हो गया। कु हार ने अपने हाथ को सजा कर द ।
भगवान ने भ

भाव होना चा हए। भ

भाव माने जैसे पित ता

ी और कसी पु ष को पित भाव से नह ं दे खती, ऐसे ह भ

या साधक भी और कसी साधना से अपना क याण होगा और कसी य

ाण
शा ो

मत के अनुशार दगा
ु बीसा यं

गया ह। दगा
बीसा यं

ारा

के बल से अपना मो

होगा, ऐसा नह ं सोचता।

ित त दगा
ु बीसा यं
दभा
ु य को दरू कर य

के सोये हवे
ु भा य को जगाने वाला माना

को जीवन म धन से संबंिधत सं याओं म लाभ

आिथक सम यासे परे शान ह , वह य

य द नवरा

ाण

होता ह। जो

ित त कया गया दगा
ु बीसा यं

को

थाि

कर

लेता ह, तो उसक धन, रोजगार एवं यवसाय से संबंधी सभी सम य का शी ह अंत होने लगता ह। नवरा

के दनो

ाण

ह,

ित त दगा
ु बीसा यं
शी ह अपने

पूण चैत य दगा
ु बीसा यं
ह।

को अपने घर-दकान
-ओ फस-फै टर म

था पत करने से वशेष लाभ

को शुभ मुहू त म अपने घर-दकान
-ओ फस म

था पत करने से वशेष लाभ

यापार म वृ

एवं अपनी आिथक

थती म सुधार होता दे खगे। संपूण

ाण

होता

ित त एवं

होता

मू य: Rs.550 से Rs.8200 तक

दस बर 2010

21

ववाह से संबंिधत

व न

 िचंतन जोशी
कुछ

कार के

व न एक वशेष

आपके माग दशन के िलये
दांप य जीवन एवं

कार का फल दे ते ह।

योितष के

ंथो म उ ले खत

ेम- संग से स बंिधत

व न फल का

व न शा

के अनुसार नींद म दखाई दे ने वाले

सपन से भी

ेम ववाह होने या ना होने के संकेत

ा होते ह।

लड़क का

व न म

वयं को ब तर पर च र

बछाते हए
ु दे खना कसी से ज द

ेम होने का या

अपना ेम ववाह होने का संकेत ह

व न म वयं को संगीत सुनते हए
ु दे खना ेम संबंध

म सफलता ाि का संकेत ह।

व न म सकस जेसी कलाबाजी दे खना उसके ेम म
कोई तीसरा य

व न म

णय

दखल दे ने का संकेत ह।
य दे खना


े संबंध म परे शािन

आने के संकेत ह।

व न म ह रे -जवाहरात या ह रे के आभूषण उपहार


प रवार म

ववाह होने का संकेत ह।

व न म बाजार म घुमते दे खे दे खना मनपसंद जीवन

साथी ा होने का संकेत ह।

व न म शव दे खना गृ ह थ जीवन म संकट के आने
का संकेत ह।

व न म वयं को सुरंग म दे खना ेम संबंध अथवा
वैवा हक जीवन परे शािनयां आसकती ह।

होने का संकेत ह।

ी क साड़ दे खना अपने ेम पा से

व न म सुंदर लड़क से म ती करते दे खना और
लड़क को हं सते दे खना भोग वलास

होने का

संकेत ह।

सपने म कपड़े खोलते दे खना

ेम और

ी सुख

सुख ा होने का संकेत ह।

व न म वयं को शहद का सेवन करते दे खना शी
ह ववाह होने का संकेत ह।

व न म

वयं को हवाई जहाज चलाते हए
ु दे खना

ववाह होने का संकेत ह।

व न म

वयं को केला खाते दे खना

ेम एवं

वैवा हक जीवन के िलये अशुभ संकेत ह।

व न म

वयं को कंगन पहनने दे खना शी

वैवा हक बंधन म बंधने का संकेत ह।

होते दे खना दांप य जीवन म परे शािनयां

व न म सोने के आभूषण दे खना समृ

व न म सुंदर

ववाह होने का

शी िमलने का संकेत ह।

व न म

वयं को मं दर अथवा पूजा

पूजा-अचना करते दे खना

आसकती ह।

व न म वयं को नाचते दे खना शी
और वैवा हक सुख म वृ

लडक का व न म कसी िच डय़ा को चहचहाती हई

दे खना ेम ववाह होने का संकेत ह।

दे खना सुंदर और

सुशील जीवन साथी ा होने का संकेत ह।

वचार यहा दशाएं गएं ह।

व न म सुंदर कलाकार वाले व

थान पर

ेम ववाह म सफल होने

का संकेत ह।


व न म अपनो से संबंध टटते
दे खना शी

ह ववाह

होने का संकेत ह।

व न म कसी भवन या महल से बाहर आते दे खना

ू ने का संकेत हो सकता ह।
सगाई टट

व न म अपने ेमी, पित-प ी को अ य के साथ म
अनैितक संबंध बनाते दे खना अ छे च र
साथी ा होने का संकेत ह।

के जीवन

दस बर 2010

22

व न म अपने

ेमी के साथ म फूल के बगीच म

घूमते- फरते दे खना शी

ह ववाह एवं गृ ह थ सुख म वृ

ववाह होने का और

सुखी दांप य जीवन का संकेत ह।


व न म हरन दे खना शी

कमती आभूषण खोते दे खना दांप य

व न म नु कले हिथयार दे खना पा रवा रक जीवन

व न म कमती म अंगूठ उपहारे म

होते

व न म चमकते कपडे दे खना मान स मान म वृ

व न म कर खाते दे खना वधवा या वधुर से ववाह

व न म गु डे -गु डया दे खना शी

ह ववाह होने का

व न म खरगोश पर बैठते दे खना शी

ह ववाह का

व न म नवयौवना दे खना शी

ह ववाह का संकेत

व न म उडती िततली पास आते दे खना ेम ववाह

व न म नीलकंठ दे खना ववाह होने का संकेत ह।

व न म कसी को ेम

ह ववाह का संकेत

व न म मछली दे खना शी ह ववाह का संकेत ह।

व न म नवजात िशशु दे खना शी

ववाह का

व न म वयं कसी को ना रयल दे ते दे खना शी ह
ववाह का संकेत ह।

वलंब होने का संकेत ह।
ेम

व न म गुलाबी रं गक चीज दे खना शी

ह ववाह

का संकेत ह।

ववाह म सफलता का संकेत ह।

दांप य सुख वृ
सुखी वैवा हक जीवन के िलये दांप य सुख वृ

व न म बफ दे खना दे खना शी

संकेत ह।

ताव रखते दे खना शाद म

व न म रं गबी-रं गे फूल से भरा बगीचा दे खना

ह ववाह

ह।

व न म उडती िततली दरू जाते दे खना वैवा हक

व न म वयं को पान खाते दे खना शी
का संकेत ह।

जीवन म परे शानी संकेत ह।

होने का

ह।

म सफलता का संकेत ह।

ेम संबंधो म क

संकेत ह।

संकेत ह।

व न म कोयला दे खना
संकेत ह।

होने का संकेत ह।

व न म मोर का जोडा दे खना दांप य सुख म वृ
होने का संकेत ह।

एवं शी ह ववाह होने का संकेत ह।

व न म केतली के फूल दे खना दांप य जीवन सुख-

शांित का संकेत ह।

दे खना शी ह ववाह होने का संकेत ह।

ववाह एवं धन लाभ का

संकेत ह।

म लेश होने का संकेत ह।

ह ववाह का

ह ववाह

जीवन म परे शानी आने का संकेत ह।

व न म रसीले फल खाते दे खना शी

व न म सुपार दे खना शी ह ववाह का संकेत ह।

व न म कसी का ववाह होते दे खना शी
व न म

ह ववाह का

होने का संकेत ह।

व न म जलती मोमब ी दे खना शी

संकेत ह।

व न म केवल बडे भवन अथवा ब ली को दे खना
ेम संबंधो म परे शानी आने का संकेत ह।

का संकेत ह।

संकेत ह।

व न म बैल को पानी पीता दे खना दांप य जीवन म
सफलता का संकेत ह।

व न म अपने शर र पर भ म लगाते दे खना शी

ड बी

ड बी, ज से रोजान पित-प ी म छोट -छोट बातो म होने वाले

झगडे , मतभेद इ याद दरू हो कर दांप य सुख म वृ

होकर आपसी ताल-मेल एवं र ते म सुधार होता ह।

दस बर 2010

23

शा

के अनुसार ववाह के

कार


सभी धम म ववाह क अलग-अलग विधयां होती ह।
ववाह का ता पय होता ह क
पव

ी-पु ष को जीवनभर के एक

र ते म बांधा जाय। हं द ू शा

के अनुसार ववाह क

मुख आठ विधय का वणन कया गया ह। इन आठ विधय
म 4 विधय को

े और नैितक माना गया ह। और अ य 4

विधय को पूण तः अनैितक माना गया ह।
शा

ववाह, दे व ववाह, आश ववाह और

और पशाच ववाह को अनैितक मानागया ह।

ववाह कराये जाते ह।

े और नैितक विधय से ह

लोक य और

ित त ववाह का

ववाह दोनो प

ववाह) आदश, सबसे
व प माना जाता ह

क सहमित से कया जाता ह।

ववाह म क या का पता अपनी क या के िलए व वान,
साम यवान एवं उ म च र

वाला सबसे सुयो य वर को

अपनी क या से ववाह के िलए आमं त कर अपनी पु ी का
क यादान करता ह।

ववाह आजकल सामा जक ववाह

या क यादान ववाह कहा जाता ह।

के अनुशार दे व ववाह के अंतगत क या का पता

अपनी सुपु ी का ववाह य

( वशेषतः धािमक अनु ान)

कराने वाले पुरो हत को सेवा काय के मू य के

प अपनी

क या को दान म दे दे ता था। दे व ववाह को ािचन काल म
एक आदश ववाह माना जाता था। आजकल दे व ववाह आज
लु हो गया है ।

वीकृ ती दजाती थी। आश ववाह के अंतगत

स यािस या ऋ ष अपनी पस द क क या के पता को गाय
वाल को क या का मू य दे कर (गौदान करके) ववाह

ताव

था, तो वह गाय और बैल के जोडे क भट वीकार कर लेता
मंजूर नह ं होने पर गाय और बैल के जोडे क भट सादर लौटा
द जाती थी।

के अनुशार

जाप य ववाह

व तृ त, संशोिधत

ववाह का एक कम

प था। दोन म मूल अंतर स प ड

ब ह ववाह के िनयम तक सीिमत था।

ववाह म पता

क तरफ से सात एवं माता क तरफ से पांच पी ढ़य तक जुड़े
लोग से ववाह संबंध िनषेध होता था। ले कन

जाप य

ववाह म पता क तरफ से पांच एवं माता क तरफ से तीन
पी ढ़य के स प ड म ह ववाह िनषेध होता था।

जाप य

ववाह म पता अपनी क या क सहमित के बना उसका
ववाह अिभजा य वग के वर से कर दे ना ' जाप य ववाह'
कहलाता था।

दे व ववाह :
शा

ववाह क

जाप य ववाह :

ववाह ( ा

ाचीन काल म स यािसय

तथा ऋ षय म गृ ह थ बनने क इ छा जागृ त होने पर उ ह

शा

ह द ु समाज म

के अनुशार आश ववाह

था और अपनी सुपु ी का ववाह कर दे ता था। ले कन र ता

ववाह :

यो क

शा

रखे जाते थे। य द क या के पता को यह र ता मंजूर होता

म असुर ववाह, गंधव ववाह, रा स ववाह

भारतीय समाज म

आश ववाह :

और बैल का एक जोड़ा भट व प दे ता था अथात क या-प

ाजा य ववाह को े मानागया ह।
शा

वजय ठाकुर

आसुर ववाह :
शा

के अनुशार आसुर ववाह

ववाह से वपर त क या

के पता को दान या क या का मू य दे ख उसे खर दा जाता
था या ववाह म क या के भाई और वर क बहन क अदलाबदली क जाती थी।
के पता के िलए िन ष

ववाह म क या मू य लेना क या
होता था।

ववाह म क या के

दस बर 2010

24
भाई और वर क बहन का ववाह (अदला-बदली) भी िन ष द
होता है ।

के अनुशार गंधव ववाह को आधुिनक युग के

ेम

ववाह का पारं प रक प था। पौरा णक काल म गंधव ववाह
के अंतगत अपने प रवार वाल क सहमित के बना वर और
क या का बना कसी र ित- रवाज के आपस म ववाह कर लेते
थे। उस काल म गंधव ववाह क कुछ वशेष प र थितय एवं
वशेष वग म वीकृ ित थी पर तु परं परा म इसे आदश ववाह
नह ं माना जाता था।

ववाह म

ी को यु द म जीत के

बनाया जाता था। यह

था चलायी थी। रा स
तीक के

प म प ी

वीकृ त था परं तु आदश नह ं माना

जाता था।
पैशाच ववाह :
शा

के अनुशार पैशाच ववाह को ववाह का िनकृ तम

के अनुशार रा स ववाह को पौरा णक काल म क या

क सहमित के बना उसका अपहरण करके जबरद ती ववाह
कर लेना जो लोक य हरण ववाह के प म चलन म रहा

माना गया ह। जस के अंतगत क या क मदहोशी, गहन
िन ा, मानिसक दबलता
इ या द का लाभ उठा कर जबरद ती

के अिधकार क र ा के िलए अंितम वक प के
ववाह

प म

प म उसे

वीकार कया जाता था। इस ववाह से

उ प न संतान को वैध संतान के सारे अिधकार ा होते थे।

ादश महा यं
यं

को अित

ािचन एवं दलभ
यं ो के संकलन से हमारे वष के अनुसंधान

ारा बनाया गया ह।

 परम दल
ु भ वशीकरण यं ,

 सह ा ी ल मी आब यं

 मनोवांिछत काय िस

 पूण पौ ष ाि कामदे व यं

 भा योदय यं

 रा य बाधा िनवृ

.

यं

 आक मक धन ाि यं

यं

 रोग िनवृ

यं

 गृ ह थ सुख यं

 साधना िस

 शी

 श ु दमन यं

उपरो

ववाह संप न गौर अनंग यं

सभी यं ो को ादश महा यं के प म शा ो

कये जाते ह। जसे

से शीलहरण कर उससे शार रक स बंध बना लेना और लड़क

रा स ववाह :
शा

यु द म हारे राजा तथा सरदार ने मै ी संबंध बनाने के उ े य
से उनक पु य से ववाह करने क

गंधव ववाह :
शा

था। पौरा णक काल म राजाओं और दवािस कबील ने

विध- वधान से मं

िस

यं

पूण

थापीत कर बना कसी पूजा अचना- विध वधान वशेष लाभ

ाण ित त एवं चैत य यु

कर सकते ह।

GURUTVA KARYALAY
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दस बर 2010

25

ववाह से पूव कुंडली िमलान म अ पायु-द धायु योग भी दे ख ल।

 िचंतन जोशी,

व तक.ऎन.जोशी

अ पायु योग
योितष से जाने कतना जीएँगा आपका साथी जीवन-मृ यु ई र क ह इ छानुसार होती ह। परं तु एक कुशल योितष मनु य
के अ पायु-द धायु योग से उसक आयु क जानकार दे सकता ह। योग के आधार पर आयु से संबंिधत जानकार दे ने का उ े य
केवल सचेतना एवं पूव सूचना मा होता ह। य द अ प आयु के योग बन रह हो तो उ से बचाव के इ आराधना आराधना के
उपाय करने चा हये जससे द धायु क ा ी हो सके।
क नौबत आजाती ह। यो क मृ यु तो िन

यो क अ पायु योग के कारणा वर को वदरु और क या को वधवा होने

त होती ह उसे कोई नह ं टाल सकता क तु य द कुंडली िमलान म वर या वधु क

कुंडली म एसे योग पाये जाये तो सोच समझ कर ह ववाह करना उिचत होता ह।
योितष िस ांतो के आधार पर केवल य

के जीवन पर उसक ज म कुंडली का ह नह ,ं उसके संबंिधय क ज म कुंडली के

योग का भी असर अव य पड़ता ह। जैसे कसी य

क कुंडली म कोई वष वशेष मारक हो परं तु उसके प ी क कुंडली म

पित का योग बलवान हो, तो उपाय इ याद करने पर यह मारक योग केवल वा

य क , अक मात दधट
ु ना म छोट -मोट

चोट इ या द का योग मा बन जाता ह। अतः आयु िनधारण हे तु इन सब बात का यान अव य रखना चा हये। हमारे व ानो
ने आयु िनधारण के द धायु, म यमायु, अ पायु के कुछ सामा य िनयम बताते ह।

अ पायु योग

आयु िनधारण हे तु ज म कुंडली म ल न के वामी क
ादश भाव म

थत ह , तो जातक वा

थती का अिधक मह व मान गया ह। य द ल नेश ष म, अ म या

य से संबंिधत परे शानी से

त होता ह। जातक अपने जीवन म वा

विभ न सम या, आक मक दघटना
इ या से से अिधक समय स मुखीन होता ह। य

य से संबंिधत

को अपने ल नेश को अनुकूल बनाने

हे तु उपाय करना चा हये।

कुंडली म सभी पाप
ह , तो आयु प

ह शिन, राहू, सूय, मंगल, केतु और चं मा क सूय से यु

होकर तृ तीय, ष म,

ादश भाव म

थत

कमजोर होता ह।

कुंडली म ल नेश और सूय ल न भाव म

थत हो और उस पर पाप

कुंडली म अ मेश ष म या ादश भाव म पाप

कुंडली म ल नेश िनबल हो और सभी पाप

ह के साथ या पाप

हक म

ह क

हो तो आयु योग कमजोर होता ह।

ह के भाव म हो, तो आयु प

थत हो, और उस पर शुभ

कमजोर होता ह।

न हो अशुभ ह क

हो तो आयु

योग कमजोर होता ह।

कुंडली म ल नेश कमजोर हो एवं धन ( तीय) और यय ( ादश) भाव म पाप

कुंडली म गुर एवं शु

कक ल न क कुंडली म च

कुंडली म ल नेश और अ मेश दोन
आयु प

क युित ह और मंगल पंचम भाव म

कमजोर होता ह।

मा अ त हो, नीच का हो या
थर रािश म

थत हो तो आयु कम होती ह।

थत हो तो आयु कमजोर होती ह।

हण योग बन रहा हो, तो आयु प

कमजोर होता ह।

थत हो अथवा एक चर रािश म और दसरा

वभाव रािश म हो तो

दस बर 2010

26

कुंडली म ल न और च

दोन

थर रािश म

थत हो अथवा एक चर रािश म और दसरा

अ पायु योग बनता ह।

कुंडली म ल न और होरा ल न दोन

थर रािश म

अ पायु योग बनता ह।

कुंडली म ल नेश और शुभ

ह अपो लम भाव म

वभाव रािश म हो तो

थत हो अथवा एक चर रािश म और दसरा

वभाव रािश म हो तो

थत हो, या अ मेश और पाप ह अपो लम भाव म

थत हो, तो

अ पायु योग बनता ह।

कुंडली म ल नेश दबल
और अ मेश के

थत हो तो अ पायु योग बनता ह।

कुंडली म ल नेश दबल
और अ मेश िनबल हो और अ म भाव पापी

हो से पी ड़त हो तो अ पायु योग बनता ह।

कुंडली म पंचम भाव, अ म भाव और अ मेश पी ड़त हो तो अ पायु योग बनता ह।

कुंडली म गु (बृ ह पित) मेष या वृ

क रािश का होकर अ म भाव म

कुंडली म बृ ह पित या शु

थत ह और पंचम भाव म पाप

कुंडली म च

थत हो और च

, मंगल और शिन से

हो तो

अ पायु योग बनता ह।

बनता ह।

ल नम

दबल
हो और ल नेश दबल
होकर अपो लम भाव म

थत हो तो अ पायु योग बनता ह।
थत ह और पाप ह से

कुंडली म सूय ल न म

कुंडली म के

कुंडली म ादश भाव म च

कुंडली म तृ तीयेश और मंगल अ त, पाप

कुंडली म अ मेश और शिन अ त या पाप

कुंडली म अ मेश केतु से युत होकर ल न म

अ पायु योग के भाव से जातक पर 30-32 वष म आयु संकट रहता ह।

ह तो अ पायु योग

थत ह और पाप ह के भाव म हो, तो अ पायु योग बनता ह।

म अशुभ ह

थत ह और अ म भाव म शुभ ह

थत ह तो अ पायु योग बनता ह।

थत हो और ष म भाव म पाप

थत ह तो अ पायु योग बनता ह।

ह से पी ड़त ह तो अ पायु योग बनता ह।
ह से पी ड़त ह तो अ पायु योग बनता ह।
थत हो तो अ पायु योग बनता ह।

वशेष : कुंडली िमलान करते समय इनम से कोई एक योग कुंडली म ह , तो वशेष यान रखना चा हए। एसे जातक को सभी

तरह के बुरे काय एवं यसन से बचना चा हए। अपने इ मं का िनयिमत जप, यान और उिचत य

को दान करते रहना

चा हए। यो य गु क शरण लेनी चा हए और ल नेश ह को बलवान करने के उपाय करते रहना चा हए।

भा य ल मी द बी
सुख-शा त-समृ

ाि के िलये भा य ल मी द बी :- ज से धन ि , ववाह योग, यापार

वृ , वशीकरण, कोट कचेर के काय, भूत ेत बाधा, मारण, स मोहन, ता
चोर भय जेसी अनेक परे शािनयो से र ा होित है और घर मे सुख समृ

क बाधा, श ु भय,

क ाि होित है , भा य

ल मी द बी मे लघु

ी फ़ल, ह तजोड (हाथा जोड ), िसयार िस गी, ब ल नाल, शंख, काली-

सफ़ेद-लाल गुंजा, इ

जाल, माय जाल, पाताल तुमड जेसी अनेक दलभ
साम ी होती है ।

मू य:- Rs. 910 से Rs. 8200 तक उ ल

गु

व कायालय संपक : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785

दस बर 2010

27

कुंडली से जान द घायु योग
कुंडली म कुछ योग ऐसे होते है जो मनु य को द घायु बनाते है ।

योितष शा

के अनुशार कुंडली म अ म थान आयु का होता ह और अ म से अ म अथात तीसरा थान भी आयु का

माना जाता ह।

द घायु योग उन जातको क कुंडली मे होते ह जनका ल नेश अथात ल न का वामी ह का बलाबल होना एवं शुभ
ह के भाव म होना अित आव य होता ह।

कुंडली म ल नेश बल बलवान ह एवं अ य सभी

कुंडली म पंचम भाव म चं मा, नवम भाव म गु , दशम भाव म मंगल

कुंडली म ल नेश, अ मेश और दशम थान का वामी शिन के साथ क म

कुंडली म गु कक, धनु या मीन रािश का होकर क म
सूय एकादश भाव म


कुंडली म अ म भाव म वगृ ह शिन

कुंडली म ल नेश बलवान ह और सभी

थत हो, कोई शुभ ह बली होकर क म

थत हो, या गु के अलावा अ य कोई
ह वषम रािशय म

कुंडली म ल न भाव शुभ हो के भाव म हो, और चं मा पर शुभ ह क

थत ह , त द घायु योग होता ह।
ह क

कुंडली म ल नेश और अ मेश दोन चर रािश म
कुंडली म ल न और च

दोन चर रािश म

थत ह , या एक

थत ह , या एक

कुंडली म ल न और होरा ल न दोन चर रािश म

वभाव रािश म दसरा

वभाव रािश म दसरा

थत ह , या एक

द धायु योग होता ह।
कुंडली म ल नेश और शुभ ह पणफर भाव म
योग होता ह।

हो, तो द घायु योग बनता ह।

मा वरािश का हो, त द घायु योग होता ह।

योग होता ह।

थत ह अथवा सभी ह अपनी वरािश या िम

योग होता ह।

थत हो और िलए

थत ह , त द घायु योग होता ह।

पूणायु योग

थत हो, तो द घायु योग बनता ह।

थत हो कर अ य शुभ ह के भाव म ह , त द घायु योग होता ह।

कुंडली म ल नेश बलवान ह और नवम भाव म च

थत होने पर द घायु योग होता ह।

थत हो, त द घायु योग होता ह।

कुंडली म राहू तृ ितय, ष म या एकादश भाव म

रािश म

ह बलवान हो, तो जातक द घायु होता ह।

कुंडली म अ मेश उ च का होकर के

थत ह , या

कुंडली म ल नेश ल न म

कुंडली म ल नेश, पंचमेश और अ मेश बली हो और वरािश म

थर रािश म ह तो द धायु

वभाव रािश म दसरा

थत ह , या अ मेश और सभी पाप

थर रािश म ह तो द धायु

थर रािश म ह तो

ह पणफर भाव म ह तो द धायु

कोण म शुभ ह से युत हो तो द धायु योग होता ह।

थत ह , और अ मेश अ म भाव म

थत ह , तो द धायु योग होता ह।
थत ह ,

वयं के नवमांश म ह , या िम ा भाव म ह

तो द धायु योग होता ह।

कुंडली म ष मेश या ादशेश ल न, ष म या ादश भाव म

कुंडली म ल नेश उ च का हो च

एकादश भाव म

थत ह और बृ ह पित अ म भाव म

होता ह।

थत ह , तो द धायु योग होता ह।

कुंडली म शिन अ म भाव म हो तो द धायु योग होता ह।

थत ह , तो द धायु योग

दस बर 2010

28

महाद घायु योग

कुंडली म सूय, बृ ह पित और मंगल नवम भाव म

थत ह , वग म म ह , मकर या कुंभ रािश म ह जब क च

बली

होकर ल न म ह तो यह योग होता है ।

कुंडली म शिन और बृ ह पित ल न से दशम अथवा नवम भाव म
ह एवं सूय ल न म

ल न म कक रािश हो च

थत ह और नवमांश म भी ऎसा ह हो, शुभ ह से

थत हो तो महाद घायु योग बनता ह।
या बृ ह पित ल न म

थत ह और शु

और बुध के

म ह और शेष ह एकादश, ष म

और तृ तीय भाव म ह तो महाद घायु योग बनता ह।

कुंडली म

कोण म कोई पाप

ह न हो के

भी शुभ ह से वह न हो और अ म भाव म पाप

ह ह तो महाद घायु

योग बनता ह।

कुंडली म ल न से

ह का

कुंडली म बृ ह पित और शु

म म शिन सबसे पहले और मंगल सबसे बाद म हो तो महाद घायु योग बनता ह।
मीन रािश म

थत ह या च

वृ ष रािश म और वृ ष रािश के नवमांश म हो या मंगल

उ चका हो तो महाद घायु योग बनता ह।

कुंडली म धनु ल न हो, एवं ल न म बृ ह पित

थत हो तथा मेष रािश म नवमांश उ दत ह रहा हो जब क शु

भाव म

थत तो महाद घायु योग बनता ह।

थत हो तथा च

क या रािश म हो

वशेष : कुंडली िमलान करते समय इनम से कोई एक योग कुंडली म ह , तो जातक पूण आयु

स म

करता ह एसा

योितष

व ानो का कथन ह। पूण आयु के योग बनने पर भी सावधानी आव य होती ह। यो क अनउिचत यवहार एवं सोच के कारण

यसन या गलत खान-पान के चलते उ का शर र बीमा रय का घर बन सकता ह। गलत कम से आयु योग

ीण हो

जाता ह। आक मक घटनाओं को भी अव य यान म रखते हवे
ु आयु िनधारण कर। अतः कोई भी भ व यव ा इस बारे म
घोषणा न कर ऐसा गु ओं का िनदश होता है । हाँ, खतरे क द जा सकती है । कए जा सके।

पित-प ी म कलह िनवारण हे तु
य द प रवार म सुख-सु वधा के सम त साधान होते हए
ु भी छोट -छोट बातो म पित-प ी के बच मे
कलह होता रहता ह, तो घर के जतने सद य हो उन सबके नाम से गु
विध- वधान से मं

िस

ाण- ित त पूण चैत य यु

व कायालत

ारा शा ो

वशीकरण कवच एवं गृ ह कलह नाशक

ड बी बनवाले एवं उसे अपने घर म बना कसी पूजा, विध- वधान से आप वशेष लाभ
सकते ह। य द आप मं

िस

कर

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बनवाना चाहते ह, तो संपक आप कर सकते ह।

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दस बर 2010

29

योितष से जाने जीवनसाथी क दशा?

 िचंतन जोशी
ज म कुंडली म जीवनसाथी से संबंिधत जानकार दे ने वाला मुख थान स म भाव होता ह । स म भाव क बल और
िनबल होने के आधार पर जातक का ववा हत और अ ववा हत रहना। वैवा हक जीवन म सफलता या असफलता के बारे म
जाना जाता ह।

ज म कुंडली म स म भाव से जीवन साथी क
ज म कुंडली म स म भाव म
या भाव म अ छ

थत

थित म होने से इस

दशा और

थान का अंतर िनधा रत कया जाता ह।

ह और स म भाव के वामी अथात स मेश क बलता या शुभ हो के साथ म

ह क रािश क दशा के अनुसार जीवन साथी के िमलने क दशा के बारे म पता

लगाया जा सकता ह।
इसके उपरांत स म भाव म

थत

ह के बल और भाव का भी अवलोकन कर।

य द ज म कुंडली म स म भाव म
अिधक बलवान हो, तो इस

थत

ह स मेश के वामी से

ह क दशा के अनुसार साथी क

दशा माननी चा हये।

य द ज म कुंडली म स म भाव म

थत

समान प से भावशाली होने पर दोन

ह और स मेश दोनो
हो के म य क दशा

जाननी चा हए।

य द ज म कुंडली म

ह कमजोर हो, और स मेश बलशाली ह , तो

स मेश के अनुशार ह जीवनसाथी क दशा मानना चा हए।
यहां विभ न

ह क दशा द जा रह है :-

सूय : पूव दशा

: वाय य दशा

मंगल : द

ण दशा

बुध : ईशान दशा

गु
शु

: उ र दशा

शिन : प

: आ नेय दशा

म दशा

राहू-केतु : नैऋ य दशा

कतनी दरू होगा लडके-लड़क का ससूराल?

ज म कुंडली म स म भाव म वृ ष रािश, कुंभ रािश अथवा वृ

क रािश का

भाव हो, तो उसके घर या पैत ृ क

िनवास से जीवनसाथी के घर या पैत ृ क िनवास क दरू 0-90 कलोमीटर के कर ब हो सकती है ।

ज म कुंडली म स म भाव म िमथुन रािश, क या रािश, धनु रािश अथवा मीन रािश का

भाव हो,

तो उसके

घर या पैत ृ क िनवास से जीवनसाथी के घर या पैत ृ क िनवास क दर
ू 90-190 कलोमीटर के कर ब हो सकती
है ।

ज म कुंडली म स म भाव म मेष रािश, कक रािश, तुला रािश अथवा मकर रािश का

भाव हो,

तो उसके घर

या पैत ृ क िनवास से जीवनसाथी के घर या पैत ृ क िनवास क दर
ू 190 या उ से से अिधक कलोमीटर क दरू
पर हो सकता है ।

दस बर 2010

30

रािश से जािनये उ म जीवन साथी

 आलोक शमा
योितष के व ानो के अनुशार अलग-अलग रािशय का ेम जीवन और उनक
शार रक आव यकताऎ भी अलग-अलग होती ह।
य द जीवन म कोई

ितकूल

वभाव वाला जीवन साथी िमल जाए तो

उसका पा रवार क जीवन दखमय
हो जाता ह। यो कं दांप य जीवन म उिचत

तालमेल म कमी होने पर पित-प ी दोनो तनाव से
छोट -छोट बातो पर ववाद इ याद

त रहते ह। दोन म

लेश होते रहते ह ज से उनके दांप य

जीवन म और पार प रक संबंधो के दौरान पूण संतु

नह ं हो पाती।

ज से उनका जीवन अिधक भा वत होता ह। सुखमय जीवन के िलये आपक
रािश के के अनुशार कोनसी रािश का जीवनसाथी साथी आपके िलये उपयु
रहे गा।

मेष रािश: मेष रािश के य

वृ षभ रािश: वृ षभ रािश के य

िमथुन रािश: िमथुन रािश के य

कक रािश: कक रािश के य

के िलये मेष, वृ षभ, कक, क या, तुला और मकर रािश के जीवन साथी उपयु

िसंह रािश: िसंह रािश के य

के िलये िमथुन, िसंह, तुला, वृ

क या रािश: क या रािश के य

तुला रािश: तुला रािश के य

वृ

क रािश: वृ

के िलये मेष, कक, िमथुन, तुला, मकर और कु भ रािश के जीवन साथी उपयु
के िलये वृ षभ, कक, िसंह, वृ

क, कु भ और मीन रािश के जीवन साथी उपयु

रहते ह।

के िलये मेष, िमथुन, िसंह, क या, धनु और मीन रािश के जीवन साथी उपयु

रहते ह।

रहते ह।

क और कु भ रािश के जीवन साथी उपयु

के िलये िमथुन, कक, क या, वृ
के िलये वृ षभ, िसंह, क या, वृ

रहते ह।

क और धनु रािश के जीवन साथी उपयु

के िलये मेष, कक, िसंह, तुला, धनु और मकर रािश के जीवन साथी उपयु

क रािश के य

रहते ह।

रहते ह।

रहते ह।

क, मकर और कु भ रािश के जीवन साथी उपयु

रहते

ह।

धनु रािश: धनु रािश के य

के िलये िमथुन, क या, तुला, धनु, कु भ और मीन रािश के जीवन साथी उपयु

मकर रािश: मकर रािश के य

कुंभ रािश: कुंभ रािश के य

के िलये मेष, वृ षभ, िसंह, वृ

मीन रािश: मीन रािश के य

के िलये वृ षभ, िमथुन, क या, धन, मकर रािश के जीवन साथी उपयु

के िलये मेष, कक, तुला, वृ

कुंडली िमलान म वर-वधु के
आयु,

वा

रहते ह।

क, मकर और मीन रािश के जीवन साथी उपयु
क, धनु, कुंभ रािश के जीवन साथी उपयु

ह का िमलान करने का त पय उनके

रहते ह।

रहते ह।
रहते ह।

वभाव, वचार, भा य, संतान,

य आ द का ह िमलान होता ह ज से दोनो का आपसी तालमेल एवं जीवन केसा रहे गा

इसका पूवानुमान लगाया जाता ह।

दस बर 2010

31

आपका जीवन साथी कह ं नशे का आद तो नह ?

 िचंतन जोशी,
भारतीय समाज म नशेको खराब माना गया ह।

व तक.ऎन.जोशी

यो क नशे क लत या बूर आदत के कारण य

धन, प रवार सब कुछ दाँव पर लगा दे ने से पीछे नह ं हटता। आज

यादातर

तन, मन,

कसी न कसी नशे क लत का

कया गया नशे का अ यास समय के साथ-साथ य

को लत का िशकार बना दे ता ह।

िशकार होता ह।
शौ खया तौर पर शु

ज से उसका आने वाला उ जवल भ व य नशे के कारण भ व य के गत अंधेरे क और अ
नशे के आ द होने का एक बड़ा कारणा उसके आस-पास का माहौल होता ह।

यो क

त कर दे ता ह। य

के

अपने आसपास म जो

महौल दे खता ह उसी महौल के अनु प वह ढलने लगता ह।
ज म कुंडली म

थती के अनुशार जातक क

जातक कस तरह का नशा करे गा। इसका पूवानुमान

िच नशा करने म रहे गी या नह ं। य द रहे गी तो

योितषी संकेतो के आधार पर सरलता से जान सकते ह। य द

उिचत मागदशन और उिचत उपायो से कोई भी माता- पता या अ य कोई

अपने

वजनो को नशेक लत म

पडने से पहले बचा सकता ह।

ज म कुंडली म ल न म पाप

थत हो तो य

ज म कुंडली म ल नेश कमजोर हो कर पाप

ज म कुंडली म ल नेश नीच का हो, श ु रािश म

कसी ना कसी नशे का िशकार रखता ह।

ह के

भाव म हो, तो य
थत ह और चं

नशे का आ द होता ह।

भी कमजोर हो तो य

नशे का आ द

होता ह।

ज म कुंडली म ल नेश पर मंगल का

ज म कुंडली म

ज म कुंडली म बृ ह पित कसी भी भाव म नीच का हो, तो य

ज म कुंडली म शु -राहु या शु -केतु के साथ
हो, तो य

भाव हो तो य

ादश ( यय) भाव पर पाप

क यसन म

क यसन म

ह हो, तो य

िच रहती ह।

यसन म धन यय कराता है ।
क यसन म

थत हो और ल नेश और चं

िच रहती है ।

कमजोर हो या पाप

भाव म

िच होती ह।

ज म कुंडली म ल न म शिन हो, शु

अ म भाव म

थत होकर शिन से

होने से य

अ यािधक नशे

का आ द होता ह।

ज म कुंडली म ल न पर कसी भी

कार से सूय क

होने पर य

को माँस-म दरा का आ द होता ह।

ज म कुंडली म ल न पर कसी भी

कार से शिन क

होने पर य

को िसगरे ट-गांजा आ द धुंवे वाले

ज म कुंडली म ल न पर कसी भी

कार से मंगल क

यसनो का आ द होता ह।

होने पर य

को शराब जेसे जलीय नशे का

ज म कुंडली म य द पतृ दोष लग रहा हो, तो उसक शांित अव य करले

यो कं पतृ दोष के कारण घर-

आ द बनाती ह।

प रवार के सद यो के बच म नशे के कारण अ यािधक अशांित बनी रहती ह।

नोट : संबंिधत

ह क शांित कराने व उपाय करने से क

कम हो जाते ह।

दस बर 2010

32

सात फेरे और सात वचन


हं द ु सं कृ ित म ववाह के समय वर-वधू प व

अ न के सम

आने वाले सात ज म तक दोनो को एक साथ इसी प व

सात फेरे के साथ म सात वचन लेते ह जसे

र ते म बंधे रहने का तीक माना जाता ह। इस ववाह

वशेष अंक के साथ हम आपको इन सातो वचनो से अवगत करने का
ववाह म 4,5 और 7

व तक.ऎन.जोशी, राकेश पंडा

याश कर रह ह। विभ न हं द ू स यता म

फेरे िलये जाते ह। इस स यता के अनु प वचनो म उयोग म लाये जाने वाले मं ो म भी

िभ नता पाई जाती ह।
ववाह के समय फेर इ या द आव यक काय संप म हो जाने पर भी ववाह संप न नह ं मानाजाता जब तक
क या वर के वाम (बाऎ ं)

भाग म नह ं आती। जबतक क या वर के वाम (बाऎ ं)

भाग म नह ं आती तब उसे कुमार

ह मानाजाता ह। एसे म ववाह को विध वधान से संप न करने के िलये क या को वर से सात वचन माँगने का
वधान बताया गया ह। जससे क या के भावी जीवन क सुख, सुर ा, मान-स मान, ग रमा-गौरव तथा अ मता क
पूण ता से र ा हो सके। वर

ारा सात वचन को

वीकारने के प ात हं क या िन

करती ह अथातः ववाह को संप न मानाजाता ह। साधारण

ंत होकर भावी जीवन का ार भ

प से सात वचन को स पद

प जानाजाता ह।

ाचीनकाल से सात वचन का भारतीय समाज म अिधक मह व रहा ह। इस सात वचन का ता पय वर-वधू को
और सुखी दांप य जीवन क ओर

े रत करना होता ह।

अपनी क या का ववाह करते समय हर माता- पता के मन म यह आशंका अव य रहती ह, क ववाह प ात
उनक पु ी का दांप य जीवन कैसा

यतीत होगा? ससुराल म सुख से रह पायेगी या नह ं? क या के माता- पता क

इसी आशंका को दरू करने के िलए ह हजारो पूव हमारे व ान ऋ ष-मुिनय
फल व प क या को ववाह प ात कसी क

ारा सात वचन को रखा गया था। जसके

का सामना न करना पडे इस िलये क या अपने पित के वामांग (बाऎ ं) म

आने से पूव उससे सात वचन मांगती ह।
ववाह के प यात प

क सम त आव यकताओं को पूरा करने के साथ उसक अ मता तथा ग रमा क र ा

करने का दािय व भी पित का ह होता ह। दांप य स बंध म भी मधुरता, ेम, अनुराग, याग, समपण आ द क भावना
हो इसी उ े य से इन वचनो को

वीकार करना ह ं नह ं उसे िनभाना भी अित आव यक होता ह।

भा य ल मी द बी
सुख-शा त-समृ

ाि के िलये भा य ल मी द बी :- ज से धन ि , ववाह योग, यापार

वृ , वशीकरण, कोट कचेर के काय, भूत ेत बाधा, मारण, स मोहन, ता
चोर भय जेसी अनेक परे शािनयो से र ा होित है और घर मे सुख समृ

क बाधा, श ु भय,

क ाि होित है , भा य

ल मी द बी मे लघु

ी फ़ल, ह तजोड (हाथा जोड ), िसयार िस गी, ब ल नाल, शंख, काली-

सफ़ेद-लाल गुंजा, इ

जाल, माय जाल, पाताल तुमड जेसी अनेक दलभ
साम ी होती है ।

मू य:- Rs. 910 से Rs. 8200 तक उ ल

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दस बर 2010

33

हं द ु सं कृ ित म वरवधू प व अ न के सात फेरे लेते है । फेरे लेते समय वधू वर से सात वचन और वर वधू से पांच वचन मांगता ह।
क या


ारा वर से िलये जाने वाले सात वचन इस
थम वचनः य द य ं कुया

कार ह।

म मम स मितं गृ हणीयात

अथातः य ा द शुभ काय मेर स मित से ह करगे।


तीय वचनः य द दानं कुया

म न प मम स मित गृ ह णयात

दाना द मेर स मित से ह करगे।

 तृ तीय वचनः अव था ये मम पालनां कुयात

अथातः युवा, ौढ़ और वृ

तीन अव थाओं म मेरा पालन करगे।

 चतुथ वचनः धना दगोपने मम स मितं गृ हणीयात
अथातः गु

प से धना द संचय मेर स मित से ह करगे।

 पंचम वचनः गवा द पशु

य- व ये मम स मितं गृ हणीयात।

अथातः गाय, बैल, घोडा आ द पशुओं (वतमान म वाहना द) के

य व य म

भी मेर स मित लगे।
 ष म वचनः बस ता द षटऋतुषु मम पालनं कुयात
अथातः वस त, ी म, वषा, शरद, हे म त, िशिशर इन छह ऋतुओं म मेरा पालन
करगे।


 स म वचनः सखी य मम हा यं कटवा
यम न वदे त न कुयात! त हं भवतां वामांग आग छािम

अथातः मेरे साथ क सखी सहे िलय के सामने मेर हँ सीं न उडाएं और न ह कठोर कटु वचन का
इन वचनो म क या कहती ह य द आप उपरो

वर

योग कर।

सात वचन का पालन करगे तो ह म आपके वामांग म आ सकती हँू ।

ारा क या से िलये जाने वाले वचन इस

कार ह।

उ ाने म पाने च पतागृ हगमनेन च
आ ा भंगो न कत यं वरवा यचतु यकम!!
अथातः िनजन

थान, उ ान, वना द म न जाए, म

(शराब) पीने वाले मनु य के सामने न जाए, अपने पता के घर भी

मेर आ ा के बना न जाए, धम शा ोिचत कभी भी मेर आ ा भंग न करे तो ह तुम मेरे वामांग म थान

हण कर

सकती हो।

शाद संबंिधत सम या
या आपके लडके-लडक

क आपक शाद म अनाव यक प से वल ब हो रहा ह या उनके वैवा हक जीवन म खुिशयां कम

होती जारह ह और सम या अिधक बढती जारह ह। एसी

थती होने पर अपने लडके-लडक

क कुंडली का अ ययन

अव य करवाले और उनके वैवा हक सुख को कम करने वाले दोष के िनवारण के उपायो के बार म व तार से जनकार

कर।

दस बर 2010

34

िसफ कुंडली िमलान सफल ववाह क गारं ट नह ं होती?

 िचंतन जोशी
ववाह से पूव कुंडली िमलान करवाना एक सामा य चलन ह।
ले कन केवल 36 गुण के आधार पर कया गया कुंडली िमलना सफल ववाह क गारं ट नह ं होता ह। वै दक

योितष

अनुसार 36 गुण के अलावा अ य बहत
ु सारे कारण होते ह जो लडके-लडक के वैवा हक जीवन को सफल या असफल
बनाने म अपना

भाव रखते ह।

भारतीय समाज म लडके-लडक क शाद के िलये दोनो क ज म कु डिलयो का
िमलान कया जाता ह।

जसमे

िमलान और मंगलीक दोष

ज म राशी और न

के आधार पर 36 गुणो का

मुख माने जाते ह। दोनो क ज म कु डिलयो के िमलान म

18 या उ से अिधक गुण िमलने पर दोनो क कुंडली ववाह के िलए उपयु
ह। जो

योितष शा

यास मा

मान ली जाती

के जानकार और व ानो के मत से अनौिचत और िनथक

होता ह।

यो क क हमने

वयं हमारे हमारे वष के अनुभवो से पाया ह। लडके-लडक

ज म कुंडली म ३० से अिधक गुण िमलने पर भी दोनो का जीवन तनाव पूण होता ह जबक दसर
और ज म कुंडली

म १८ से कम गुण िमलने पर जीवन सुखमय और आनंदमय होता ह।

ऎसा

य होता ह?
इसका मु या कारण होता ह आज आधुिनकता का कुछ एसा दौर चला ह, जहा

योितष से संबंिधत पु तके प -प काए उप
योितष से संबंिधत उिचत जानकार एवं यो य

ध हो जाती ह,

ायः हर गली महो ले म

जसे एक दो पार आिध-अधूर पढे ना पढे

योितषी िश ण के अभाव के कारण

वयं को

योितष का बहोत बडा

जानकार और व ान मान लेता ह।
आजकल
व ान

ायः हर छोटे -बडे शहरो म

योितष व ानो के

योितष से संबंिधत िश ा के िलये

ारा चलाये जाते ह तो कुछ धन लोभ के कारण आधे-अधूरे िश ण से दसरो
को

का पाठ पढाने लगते ह। आधे-अधूरे िश क से
प रिचत ह, एसे म
कुछ य

योितष िश ा क मोट
व ान

योितष व ा

फस दे कर य

योितष के पास िश ण

को

होन ह ं सकती इ से तो हर
योितष म अमुक अमक ड ीया

करने के उपरांत भी

कर केवल धनोपाजन के ल य को साधने म लग जाते ह जहा उनका पूण
सफलता

लास खूलने लगे ह जसमे कुछ

नह ं हो पाती जो एक कूशल

यादातर मामलो म असफल हो जाता ह।

योितष को


योितष

भली भाती
हो जाती ह।

योितष व ा के समपण भाव नह ं रख
ान

होनी चा हये। एसी

करने के उपरांत भी उ हे वह

थती म कया गया कुंडली िमलान

दस बर 2010

35

दसरा
कारण

यादातर लडके-लडक के माता- पता शाद म हजारो लाखो

पये खच कर दे ते ह परं तु व ान एवं कूशल

योितष के पास न जाकर उसका उिचत पा र िमक न दे कर पैसे बचाने के च कर म या तो कम जानकार य
कुंडली िमलान करवा लेते ह या

वयं अपने कं युटर पर लडके-लडक

क ज म दनांक, समय एवं

कर के 18 या उ से अिधक गुण दे ख कर ववाह कर दे ते ह। एसी
क मय और दःख
मय हो सकता ह।

यो क कम जानकार
ल न,

होक

ी एवं

से

थान दे कर िमलान

थतीओं म लडके-लडक का वैवा हक जीवन

यो क केवल 18 या उ से अिधक गुण िमलने पर ह ववाह सफल नह ं होता।

योितष का स पूण यान न

पर ह के

त होता ह। जानकार के अभाव म वहं ज म

थती इ याद क पूण प से अवहे लना करता ह। है .

कं युटर पर कुंडली िमलान करने पर उसम केवल वण, योिन, नाड इ या द गुणो के आधार ह िमलान होता ह।
यो कं कुंडली िमलान न

ो क बजाए हो क

थित के आधार पर करना उिचत होता ह

और मनु य पर सबसे अिधक भाव नव हो का होता ह। जसे कं युटर या कम जानकार

यो क न

तो एक ह ह सा ह

योितष बताने म असमथ होते

ह जसके आधार पर ववाह सफल नह ं हो पाते ह और कभी कभी गुण िमलने पर भी असफल हो जाते ह।

तीसरा कारण
कुछ लडके-लडक के माता- पता अ छा प रवार म र ता या धनी प रवार दे ख कर अथवा अपने लडके-लडक
क उ

अिधक हो जाने पर अपने पु -पु ी क ज म कुंडली गलत बनवा दे ते ह ताक

संप न हो जाये परं तु अ ानता के कारण उ ह कहा

कसी भी

कार से ववाह

ात होता ह क वह जो बड गलती से ववाह को संप न करना

चाहते ह वह अनौिचत मेल को उिचत म बदलने के उपरांत भी दोनो का वैवा हक जीवन क मय या दःखमय
रहे गा।

ऎसी

थतीओं म भी वैवा हक जीवन सुखमय नह ं होता फर दोषका सारा ठकरा मढ दया जाता ह

योितष पर क

उिचत मेल होने पर भी हमारे लडके-लडक का ववाह क जीवन सुखी नह ं हवा।

गु

योितष के ववाह

पेशयल अंक म हमने कुंडली िमलान के अलावा

ववाह से संबंिधत अ य बहोत से पहलू से आपका मागदशन करने का

यास कया ह।

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दस बर 2010

36

ववाह हे तु उिचत माह कौन सा होता ह?

 िचंतन जोशी
नह ं ह।

भारतीय सामाज म ववाह को प व
योितष शा

म ववाह सं कार हे तु

बंधन माना जाता ह। इस िलये हं द ू सं कृ ित म तलाक जैसे श द का कोई
मुख चार माह िनधा रत कये ह। इस िलये एसा मानाजाता ह क इन

चार माह म ववाह होने पर भावी ववा हत द पित का जीवन खुिशय भरा रहता ह।
व ानो के मत से इन चार माह म ववाह होने पर अलग-अलग फल
कस माह म ववाह

शा

होते ह।

या फल दे ते ह?

के अनुसार

माघे धनवती क या, फा गुने शुभगा भवेत,
वैशाखे तथा

ये े पित उ य तव लभा।

मागिशष म प छती, अ यये मासा

व जता।।

अथातः जस क या का ववाह माघ मास म होता ह, वह अित धनवान होती ह, फा गुन मास म ववाह होने पर क या
सौभा यवती होती ह। वैशाख और

ये

मास म ववाह होने पर क या पित को अिधक

यार होती ह। अक मात

प र थतीओं म अित आव यक होने पर ह मागिशष मास म ववाह कर सकते है । अ य सभी माह ववाह हे तु व जत
होते ह।
इसके अलावा मलमास या अिधमास होने पर, सूय धनु एवं मीन रािश म

थत होने पर, गु

या शु

तारा

अ त होने पर ववाह िनषेध माना गया ह।

या आपके ब चे कुसंगती के िशकार ह?

या आपके ब चे आपका कहना नह ं मान रहे ह?

या आपके ब चे घर म अशांित पैदा कर रहे ह?

घर प रवार म शांित एवं ब चे को कुसंगती से छुडाने हे तु ब चे के नाम से गु
वधान से मं

िस

ाण- ित त पूण चैत य यु
िस

ारा शा ो

विध-

वशीकरण कवच एवं एस.एन. ड बी बनवाले एवं उसे अपने घर

था पत कर अ प पूजा, विध- वधान से आप वशेष लाभ

य द आप तो आप मं

व कायालत

कर सकते ह।

वशीकरण कवच एवं एस.एन. ड बी बनवाना चाहते ह, तो संपक इस कर सकते ह।

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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दस बर 2010

37

मंगली दोष वाले जातक थोड़े गु सैल व िचड़िचड़े होते ह?

 िचंतन जोशी
ज म कुंडली म मंगली होना अथवा मंगल दोष होना कसी जातक के िलये अमंगलकार नह ं ह। मंगली होना कोई दोष

नह ं ह यह एक वशेष योग होता ह जो कुछ वषेश ज म कुंडली म पायेजाते ह। मंगली जातक कुछ वशेष गुण िलये हवे

संप न होते ह। हमारा उ े य यहा मंगल दोष के

भाव को नकारना नह ं ह, उ से जुडे

िनयमो से आपको प रिचत करना और उसके िनवारण के उपाय बताना ह।

मंगली-दोष वचार कैसे कया जाता ह। इ से जुडे शा ो
अग

िनयम इस

ितभा

म को दरू कर, उ से जुडे शा ीय

कार ह।

य सं हता के अनुसार:
धने यये च पाताले जािम े चा मे कुजे।
भाया भतु वनाशाय भतु

ी वनाशनम्॥

मानसागर के अनुसार:
धने यये च पाताले जािम े चा मे कुजे।
क या भतु वनाशाय भतु ः क या वन यित॥
बृ हत् योितषसार के अनुसार:
ल ने यये चतुथ च स मे वा अ मे कुजः।
भतारं नाशये

भाया भताभाया वना येत॥

भावद पका के अनुसार:
ल ने यये च पाताले जािम े चा मे कुजे।
ीणां भतु वनाशः

यात ् पुंसां भाया वन यित॥

बृ हत् पाराशर होरा के अनुसार:

ल ने यये सुखे वा प स मे वा अ मे कुजे।

शुभ
उपरो

ग ् योग ह ने च पितं ह त न संशयम॥्
ोक का भावाथ है क ज म ल न से

थम,

तीय, चतुथ, स म, अ म या

थत होने पर मंगल दोष या कुज दोष बनता ह। कुछ आचाय के अनुसार ल न के अित र
शु

या स मेश से इ ह ं

( कोण) मंगल यं

को ऋण मु

थानो म मंगल

ादश

थान मे मंगल

मंगली दोष च

ल न,

थत होने पर भी होता ह।

मंगल यं

को जमीन-जायदाद के ववादो को हल करने के काम म लाभ दे ता ह, इस के अित र
हे तु मंगल साधना से अित शी

क याण के िलए मंगल यं

क पूजा करने से वशेष लाभ

लाभ

होता ह। ववाह आ द म मंगली जातक के

होता ह।

मू य मा

Rs- 550

दस बर 2010

38

मंगली दोष का फल
मंगली दोष वैवा हक जीवन को विभ न

कार से भा वत करता है - ववाह मे व न, वल ब, यवधान या धोखा,

ववाहोपरा त द पित मे से कसी एक अथवा दोनाको शार रक, मानिसक अथवा आिथक क , पार प रक मन-मुटाव, वादववाद तथा ववाह- व छे द। अगर दोष अ यिधक बल हआ
ु तो दोना अथवा कसी एक क मृ यु भी हो सकती है ।
कुंडली म य द मंगली दोष हो तो उ से भयभीत या आतं कत नह ं होना चा हये।

यास यह करना चा हये क मंगली

जातक का ववाह मंगली जातक से ह हो या क मंगल-दोष सा य होने से वह भावह न हो जाता ह तथा दोनासुखी रहते ह।

द प योज मकाले ययधन हबुके स मे ल नर

ल ना च

ा च शु ाद प भवित यदा भूिमपु ो

त सा या पु िम

ाहर
ु ा मु याः॥

अथातः य द वर और क या के ज मांग मे मंगल
स म अथवा अ म भाव मे ल न, चं मा अथवा शु
हो तो समता का मंगल दोष होने के कारण वह
ह।

योव॥

चुरधनपतां दं पती द घ-काला।

जीवेतामेकहा न भवित म त रित

पर पर सुख, धनधा य, संतित,

े।

वा

तीय,

ादश, चतुथ,

से समभाव मे

थत

भावह न हो जाता है ।

य एवं िम ा द क उपल ध होती

कुज दोष व ी दे या कुजदोषवते कल।

ना त दोषो न चािन ं द प यो सुखवधनम॥्

अथातः मंगल दोष वाली क या का ववाह मंगल दोष वाले वर के साथ
करने से मंगल का अिन

दोष नह ं होता तथा वर-वधू के म य दांप य-

सुख बढ़ता है ।

मंगल के
वाभाव, सम याओं से लडऩे क श

वशेष

प से

भाव वाले जाताक आकषक, तेज वी, िचड़िचड़े
भावमान होता ह। वकट से वकट सम याओं

म िघरे होने के बावजूद जातक अपना धैय नह ं छोड़ते ह। योितष
बताया गया ह, मंगल केवल अमंगलकार

थो म मंगल को भले ह

ूर

ह नह ं ह यह मंगलकार भी होता ह।

मंगल क उ प ी कैसे हइ
ु ?
शा

म मंगल

ह क उ प

िशव से मानी गई ह। मंगल को पृ वी का पु

माना गया ह। मंगल क उ प

भारत के म य दे श के उ जैन म मानी गई ह।

जेसे मंगल का रं ग लाल या िसंदरू के रं गके समान ह।, इस िलये भगवान गणेश को भी िसंदरू चढाया जाता ह। इस
िलये गणेशजी को मंगलनाथ या मंगलमूित भी कहाजाता ह।

दस बर 2010

39
मंगल कुमार को गणेशजी न मंगलवार के दन दशन दे कर उनहे मंगल

ह होने का वरदान दया था इसी के

कारण ह भगवान गणेश को मंगल मूित कहा जाता ह और मंगलवार के दन मंगलमूित गणेश का पूजन कया
जाता ह।
व ानो ने दे वी महाकाली जी का पूजन भी मंगलवार को

योितष शा

के अनुसार मंगल का

जातक थोड़े गु सैल और िचड़िचड़े

भाव मनु य के र

फल दे ने वाला माना ह।
और म जा पर होता है । इसी से मंगली कुंडली वाले

वभाव के होते ह।

मंगली होने के लाभ
मंगली कुंडली वाले जातक म अपनी ज मेदार को पूण िन ा से िनभाने का वशेष गुण होता ह। मंगली य
यादातर क ठन से क ठन काय को समय से पूव ह कर लेने समथ होते ह। एसे
ज मजात पाई जाती ह। एसे

जब िम
एसे

वभाव म

सह ं को सह ं और गलत को गलत कहने म नह ं हच कचाते।

होती ह। य

योितष शा

वप रत िलंग के

कसी गलत के आगे झुकते

यादा रास नाह ं आता। मंगली जातक

यवसायी, उ च पद आसीत, राजनीित, डॉ टर, इं जीिनयर, अिभभाषक, तं

ोध पाया जाता ह। एसे

मा करने वाले तथा मानवतावाद होते ह।

नह ं और खुद भी गलत नह ं करते। कसी क खुशामत करना इ ह
यो यता

मता

यास अव य करते ह।

अ यािधक मह वाकां ी होने के कारण इनके

वभाव के होने पर भी वह बहत
ु दयालु, शी
एसे

म नेत ृ व करने क

ज द कसी से िम ता नह ं करते और ज द कसी से घुलते-िमलते नह ं ह। एसे

या या संबंध बनाते ह तो पूण त: िनभा ने का

का जानकार और सभी

ायः

म इ ह वशेष

ित वशेष संवेदनशील होते ह उनक और वशेष झुकाव रखते ह।

के अनुशार मंगली लडके-लडक अपने जीवन साथी से वशेष अपे ाएं रखते ह और अपने जीवन

साथी के मामले म अिधक संवेदनशील होते ह। इस कारण शा

म मंगली का ववाह मंगली से ह करने पर जोर दया

गया ह। कुछ व ानो का मत ह क लड़के क कुंडली म मंगल हो और लड़क क कुंडली म 1, 4, 7, 8, 12 थान म
शिन

थत हो अथवा मंगल के साथ गु

थत हो तब मंगल का

भाव समा

माना जाता ह। एसा माना जाता ह

क मंगली जातक का ववाह वलंब से होता ह और अ छ जगह होता ह।
इसी िलये मंगली कुंडली वाले य

का ववाह मंगली से करना शुभ माना जाता ह।

योितष मह व: योितष म मंगल ऋण, भूिम, भवन, मकान, झगड़ा, पेट क बीमार ,

ोध, मुकदमे बाजी और भाई का

कारक होता ह। मंगल हम साहस, स ह णुता, धैय, क ठन, प र थितय एवं सम याओं को हल करने क यो यता
करता ह और खतर से सामना करने क श

दान

दे ता ह।

मंगल के शांित के उपाय:
भगवान िशव और गणेश क उपासना कर। तांबा, सोना, गेहूं , लाल व , लाल चंदन, लाल फूल, केसर, क तुर , लाल बैल,
मसूर क दाल, भूिम आ द का दान कर और

योितष क सलाह पर मूंगा र

धारण कर।

दस बर 2010

40

दांप य जीवन म मंगल, गु

एवं शु

का

भाव

 िचंतन जोशी
कसी भी कुंडली से दांप य का वचार करने के िलये मंगल, गु

एवं शु

इन तीन

थित और

भाव को दे खना आव य ह।

वैवा हक जीवन म गु

भाव

सुखी दांप य जीवन के िलये वर-वधू दोन क कुंडली म गु शुभ भाव यु
स म भाव पर
बनती ह।

का

ह तो वैवा हक जीवन परे शािनय व द कत के उपरांत भी दोन म अलगाव जेसी

गु का शुभ भाव वर-वधू को एक साथ एवं उनके वैवा हक जीवन को सुखमय बनाये रखती ह। गु
जीवन क बाधाओं को दरू करने के साथ-साथ, संतान का कारक

होना चा हये। माना जाता ह गु

य द कसी य

कशुभ

थित नह ं

क शु भता दांप य

ह माना जाता ह।

क कुंडली म गु पी डत ह तो सबसे पहले तो जातक के ववाह म वल ब होता ह। य द ववाह हो

गया तो संतान ाि म परे शािनयां होती ह।

यद लडके-लडक कसी क भी कुंडली म गु
गु

पर पाप

भाव ह या गु

पापी

कसी पाप

ह क रािश म

ह के भाव म ह तो संतान ाि
थत ह तो िन

म बाधाएं आती ह। यद

त प से दांप य जीवन म अनेक कार क

परे शािनयां आती ह।

वैवा हक जीवन म शु

पूण वैवा हक सुख क

ाि

का

भाव

के िलये ववाह और वैवा हक संब ध का कारक

ह शु

ज म कुंडली म शुभ भाव म

होना अित आव यक माना जाता ह।

वर-वधू दोन क कुंडली म शु

शुभ भाव यु

होने पर दांप य जीवन म सुखो क ाि

होती ह। इसके िलये शु

का

पूण बली एवं होना भी आव यक होता ह।

वर-वधू दोन क कुंडली म शु

का कसी भी कार से अशुभ

थित म होना पित-प ी म से कसी के अपने साथी के

अलावा अ य अवैध संब ध क ओर झुकाव होने के युग बनाता ह। इसिलये दांप य जीवन म सुख ाि हे तु शु
शुभ

थित आव यक होती ह।

कुंडली म शु

य द वयं बली ह, व रािश या उ च रािश म

कुंडली म शु

कुंडली म शु

य द के

कुंडली म शु

य द अ त अथवा कसी पापी ह से ् अथवा पापी

कमी आती ह।

शु

यद

या

थत तो दांप य जीवन म सुख क ाि होती ह।

कोण म ह तो दांप य जीवन म सुख क ाि होती ह।

क भाव, नीच का अथवा श ु भाव म बैठा ह तो जीवन म दांप य सुख म कमी आती ह।

के अशुभ होने पर पित-प ी के अलगाव क

ह के साथ म बैठा ह तो जीवन म दांप य सुख म

थित भी उ प न हो सकती ह।

दस बर 2010

41

वैवा हक जीवन म मंगल का

भाव

ववाह के िलये वर-वधू दोन क कुंडली िमलन करते समय सबसे पहले मंगल क

थती दे खी जाती ह। दे खा जाता ह

क कह ं जातक मंगली तो नह ं ह। मंगल कस भाव म

ह से

मंगल क कस

थत ह और मंगल कस

संब ध बना रहा ह।

ह से युित ह। इन सभी बात का सू म अ ययन आव यक होता ह।

मंगल के कारण ज म कुंडली म मांगिलक योग का िनमाण होता ह।

सभी लडके-लडक

ववाह के बाद सुखी दांप य जीवन क कामना करते ह। य द लडके या लडक

कसी एक क

मांगिलक योग होने से वैवा हक सुख म कमी आती ह।

जब मंगल कुं डली के ल न,

तीय, चतुथ, स म, अ म व

होता ह। ले कन मंगल अ य भाव म

ादश भाव म

थत होता ह तो जातक मांगिलक

थत होने परभी वैवा हक जीवन के सुख म कमी आने क अनेक

संभावनाये होती ह।

कुछ वशेष प र थती म कुंडली म मांगिलक योग बनने पर भी इस योग क अशुभता म कमी हो जाती ह।
ऎसे म अधूर जानकार के कारण वर-वधू अपने मन म मांगिलक योग से
भयभीत होते रहते ह और मंगली दोष को लेकर अनेक

कार के

होने वाले अशुभ फलो के कारण

म अपने मन म पाल कर रखते ह।

वशेष: कृ या मंगल से संबंिधत योग एवं उसके िनवारण के उपायो का व तृ त वणन इसी अंक म पृ नंबर पर आप
पढ सकते ह।

मं िस
मूंगा गणेश को व ने र और िस

मंगल गणेश
वनायक के प म जाना जाता ह। इस िलये मूंगा गणेश पूजन के िलए

अ यंत लाभकार ह। गणेश जो व न नाश एवं शी फल क ाि हे तु वशेष लाभदायी ह।
मूंगा गणेश घर एवं यवसाय म पूजन हे तु था पत करने से गणेशजी का आशीवाद शी

ा होता ह। यो क

लाल रं ग और लाल मूंगे को प व माना गया ह। लाल मूंगा शार रक और मानिसक श

य का वकास करने

हे तु वशेष सहायक ह। हं सक वृ

और गु से को िनयं त करने हे तु भी मूंगा गणेश क पूजा लाभ द ह। एसी

लोकमा यता ह क मंगल गणेश को था पत करने से भगवान गणेश क कृ पा श

चोर , लूट, आग, अक मात

से वशेष सुर ा ा होती ह, ज से घर म या दकान
म उ नती एवं सुर ा हे तु मूंगा गणेश था पत कया

जासकता ह। ाण ित त मूंगा गणेश क थापना से भा योदय, शर र म खून क कमी, गभपात से बचाव, बुखार, चेचक, पागलपन,
सूजन और घाव, यौन श

म वृ , श ु वजय, तं मं के द ु

भा, भूत- ेत भय, वाहन दघटनाओं
, हमला, चोर, तूफान, आग, बजली

से बचाव होता ह। एवं ज म कुंडली म मंगल ह के पी ड़त होने पर िमलने वाले हािनकर भाव से मु

िमलती ह।जो य

उपरो

लाभ ा करना चाहते ह उनके िलये मं िस मूंगा गणेश अ यिधक फायदे मंद ह। मूंगा गणेश क िनयिमत प से पूजा करने से यह
अ यिधक भावशाली होता ह एवं इसके शुभ भाव से सुख सौभा य क ाि होकर जीवन के सारे संकटो का वतः िनवारण होता ह।

Rs.550 से Rs.8200 तक

GURUTVA KARYALAY
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दस बर 2010

42

योितष और ववाह योग

 िचंतन जोशी
कुंडली

ारा य

एकादश भाव म कौन से

का ववाह कब होगा इस
ह उप थत ह, उसी

का वचार करने के िलये कुंडली म

ह क

तीय, स म और

थती से ववाह का वचार कया जाता ह।

योितष म ववाह का वचार स म भाव के साथ-साथ कुंडली म

तीय भाव और एकादश भाव से भी वचार

कया जाता ह। स म भाव जीवनसाथी एवं साझेदार का भाव होता ह। अत: ववाह से संबंिधत
भाव से कया जाता ह। भारतीय
इस भाव के न
वामी एवं उन

का वचार इस

योितष म वैवा हक स ब ध म शुभता का वचाह एकादश भाव से कया जाता ह।

कौन सा न

ह के म य

थत ह, इस भाव के

वामी के न

म ह क

और युित स ब ध को भी दे खा जाता ह।

थती एवं इस भावो के

योितष म सबसे अिधक मह व न

को दया जाता ह।

योितष ारा ववाह के िलए शुभ योग
योितष म ववाह का कारक

ह पु ष क कुंडली म शु

से ववाह का वचार करते समय पु ष क कुंडली म च
म सूय और मंगल क
एवं बुध क

हो तो ववाह शी

कोण

भाव म

थती को दे खा जाता ह और क या क कुंडली
थत ह और च

मा पर गु , सूय

थती उ म होती ह।

थान अथवा के

थान अथात

थम, चतुथ, स म एवं दशम भाव शुभ

भाव म

थत हो अथवा ल न और नवम भाव म

ी रािश हो या च

एवं शु

इन

थत होकर एक दसरे
को दे खते ह , तो ववाह योग बनते ह।

कुंडली म ल नेश एवं चं

योितष

होने के योग बनते ह।

कुंडली के ल न म यद

मा तृ तीय, पंचम, ष म, स म और एकादश भाव म

ी होतो ववाह क

कुंडली के अनुशार

और शु

होता ह।

थती को दे खा जाता ह।

कुंडली के अनुशार च

और क या क कुंडली मे गु

या शु

स म भाव म

थत हो और स मेश ल न म

थत हो, तो शी

ववाह

योग होते ह।
कुंडली के ल न म गु


शु

तीय भाव म

ेम ववाह से
कुंडली म च
और गु

क शुभ

और स म भाव म बुध

थत हो अथवा चं मा

वागृ ह हो, सूय दशम भाव म और

थत हो, तो ज द ववाय के योग बनते ह।

कुंडली का वचार
मा तृ तीय, ष म, स म, दशम या एकादश भाव म शुभ
ी ह , तो

ेम ववाह म सफलता के योग

मा पर सूय, बुध

बल होते ह।

कुंडली म ल नेश और स मेश रािश प रवतन कर रहे हो, तो

कुंडली म ल नेश और

ादश रािश प रवतन कर रहे हो, तो

थित म हो और च

ेम ववाह के िलये शुभ संकेत ह।
ेम ववाह के िलये शुभ संकेत हो सकता ह।

दस बर 2010

43

ववाह समय िनधारण

 िचंतन जोशी
ववाह का समय िनधारण करने से पहले कुंडली म ववाह योग उप थत है या
नह ं यह दे खा जाता ह। ववाह संबंिधत योग, ववाह म बाधा, अ ववा हत योगो
का वणन आपके मागदशन के िलये इस अंक म दया गया ह।
ज म कुंडली म स म भाव, स मेश एवं शु

जतने अिधक शुभ

ह के

भाव म हो उतना ह शुभ होता ह। ज म कुंडली म स म भाव, स मेश एवं शु
तीनो पर अशुभ ह का

भाव जतना कम हो या नह ं हो, उतना शुभ ववाह का

समय पर होने म रहता ह।

यो क एसा मानाजाता ह, अशुभ/ पापी

ज म कुंडली म स म भाव, स मेश एवं शु
को

तीन को या इन

भाव

म से कसी एक

भा वत करते हो, तो ववाह क अविध म वलंब होता ह।
ज म कुंडली म योग के आधार पर ववाह क आयु िनधा रत हो जाने पर

ववाह के कारक

ह शु

एवं

ववाह के मु य भावईवं सहायक भाव

महादशा- अ तदशा म ववाह होने क संभावनाये अिधक बनती ह।

स मेश क महादशा-अ तदशा म ववाह योग
ज म कुंडली म

बल योग ववाह क संभावनाएं बना रहे ह , तथा य

त इस दशा म ववाह हो सकता ह। इसके अलावा जब स मेश जब
उस

जातक क

ह दशा म संब ध बना रहे ह

ज म कुंडली म स मेश व नवमेश का

ेम ववाह होने क संभावनाये होती ह।

थत हो, स मेश शुभ

ह होकर शुभ भाव म

थत ह , तो य

अथवा स म भाव म

ज म कुंडली म

वयं स मेश स म भाव म

थत

ह या स मेश जब शुभ

ह होकर अशुभ भाव या अशुभ

ह क

थत ह या कोई अशुभ

ह बली होकर स म भाव म

थत ह , तो

ह क दशा के अ तम भाग म ववाह क संभावनाये बनाता ह।

ज म कुंडली म ववाह कारक

ह शु

नैसिगक

प से शुभ ह , शुभ रािश, शुभ

ह से यु

या

ह , गोचर म

से संब ध बनाने पर अपनी महादशा-अ तदशा म ववाह क संभावनाये बनाता ह।

जातक क ववाह यो य आयु होगई हो, ज म कुंडली म महादशा का वामी स मेश का िम
और महादशा का वामी

ह स मेश या शु

से स म भाव म

ह ह , शुभ

ह ह

थत ह , तो इस महादशा म ववाह होने के योग

बनते ह।

का

थत हो, तो अपनी महादशा-अ तदशा के म य भाग म ववाह क संभावनाये बनाता ह।

शिन अथवा गु

से संब ध हो

ह दशा के आर भ होने के समय म ववाह होने क संभावनाये बनाती ह।

ज म कुंडली म शु

इस

ह दशा म

ज म कुंडली म स म भाव म शुभ

रािश म

तीयेश के साथ

ह दशा का संब ध जब स मेश व नवमेश का हो रहा ह और

ववाह संब धत

ह दशा म स मेश का शु

थित म भी ववाह होने के योग बनते ह।
पंचमेश से भी संब ध ह , तो इस

जातक क ल नेश क महादशा म स मेश क अ तदशा चलरह हो, तो ववाह होने क संभावनाये बनती ह।

दस बर 2010

44

ज म कुंडली म स म भाव या स मेश से कोई बली

संब ध बनात हो, तो उस

ह क दशा अविध म

ववाह क संभावनाये बनती ह।

जातक क कुंडली म जब शु
अ तदशा या

कुंडली म शु

शुभ

ह क रािश अथवा के

,

क ण, शुभ भाव म

थत ह , तो शु

का संब ध

य तर दशा से हो रहा हो, तो इस दशाम जातक का ववाह हो सकता ह।
पर जतना शुभ

भाव म हो, ववाह उतना शी

होने के योग बनाता ह और शु

जतना पाप

भाव म हो उतना ववाह म वलंब होता ह।

कुंडली म शु

के साथ

ह , उन सभी

ह क दशा- अ तदशा म ववाह होने क संभावनाये बनती ह।

ज म कुंडली म शु

थत

जस

ह, स मेश का िम

ह के न

ह या कोई बली

थत ह , उस

ह का कसी के साथ

संब ध बना रहा

ह क दशा अविध म ववाह होने क संभावनाये अिधक

बनती ह।

कुबेर यं
कुबेर यं

के पूजन से

वण लाभ, र

लाभ, पैत ृ क स प ी एवं गड़े हए
ु धन से लाभ ाि

के िलये कुबेर यं अ य त सफलता दायक होता ह। एसा शा ो
धन का ा

ता

वचन ह। कुबेर यं

क कामना करने वाले य
के पूजन से एकािधक

होकर धन संचय होता ह।

पर सुवण पोलीस
(Gold Plated)

साईज
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

ता

पर रजत पोलीस

ता प पर
(Copper)

(Silver Plated)

मू य
640
1250
1850
2700
4600
8200

साईज
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

मू य
460
820
1250
2100
3700
6400

साईज
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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मू य
370
550
820
1450
2450
4600

से

दस बर 2010

45

ववाह के कुछ शा ो

िनयम


के गृ ह थ जीवन म

वेश के िलए आव यक होता ह ववाह सं कार। ववाह सं कारको

सं ा द गई ह जसका मु य उ े य वर-क या अपने जीवन को संयिमत बनाकर संतानो प
ऋण से उऋण होकर मो

के िलये

वजय ठाकुर

ंथ म सं कार क
करके जीवन के सभी

यास कर। इसिलए ववाह व जतकरने के िलये भी हमार ऋ ष-मुिनओं ने कुछ

आव यक िनयम िनधा रत कये ह।

य द वर-क या दोन सगो ीय अथात द नो एक गो

क या का गो

दो सगे भाइय से का ववाह दो सगी बहन से करना व जत ह।

दो सगे भाइय या दो सगी बहन अथवा दो सगे भाई-बहन का ववाह 6 मास के िभतर करना शा

एवं वर के निनहाल प

का गो

के नह ं होने चा हए। एसा हो, तो ववाह व जत ह।

एक नह ं होने चा हए। एसा हो, तो ववाह व जत ह।
म व जत

माना गया ह।

अपने कुल म ववाह के 6 माह के भीतर मुंडन, य ोपवीत (जनेऊ सं कार) चूड़ा आ द मांगिलक काय व जत
माने गये ह।(य द 6 मास के भीतर संव सर हं द ू वष बदल जाता है तो काय कए जा सकते ह)

ववाह जेसे अ य मांगिलक काय

के म य म

आ द अशुभ काय करना भी शा

म व जत है ।

वर-क या के ववाह के िलए गणेश जी का पूजन हो जाने के प ात य द दोन म से कसी के भी कुल म कसी क
मृ यु हो जाती ह, तो वर, क या तथा उनके माता- पता को सूतक नह ं लगता और तय कगई ितिथ पर ववाह काय
कया जा सकता है ।

कनकधारा यं
आज के युग म हर

बैठकर कनकधारा तो
और द र ता से शी
ी आ द शंकराचाय

अितशी

समृ

बनना चाहता ह। धन

का पाठ करने से वशेष लाभ
मु

िमलती ह।

ारा कनकधारा

ाि

हे तु

होता ह। इस कनकधारा यं

यापार म उ नित होती ह, बेरोजगार को रोजगार
तो

क रचना कुछ इस

कार क ह, जसके

पास के वायुमंडल म वशेष अलौ कक द य उजा उ प न होती ह। ठक उसी
यं ो म से एक यं

ह जसे मां ल मी क

कनकधारा यं को व ानो ने
दर

वयंिस

ा ण के घर कनकधारा तो

कनकधारा मं :- ॐ वं

ीं वं ऐं

ाण- ित त कनकधारा यं

ाि

हेतु अचूक

तथा सभी
के पाठ से

के सामने

क पूजा अचना करने से ऋण
ाि

होती ह।

वण एवं पठन करने से आस-

कार से कनकधारा यं अ यंत दलभ

भावा शाली माना गया ह।

कार के ऐ य दान करने म समथ माना ह। जग ु

वण वषा कराने का उ लेख

ं- ीं लीं कनक धारयै

शंकराचाय ने

ंथ शंकर द वजय म िमलता ह।

वाहा'
मू य: Rs.550 से Rs.8200 तक

गु

व कायालय संपक :

91+ 9338213418, 91+ 9238328785
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दस बर 2010

46

नवर
शा

वचन के अनुसार शु

ज ड़त

ी यं

सुवण या रजत म िनिमत

कहलाता ह। सभी र ो को उसके िन

अनंत ए य एवं ल मी क
ी यं

ाि

के साथ लगाने से

कारण यं

ज ड़त

पव

औषिध नह ,ं उसी

के चार और य द नवर

थान पर जड़ कर लॉकेट के

जड़वा ने पर यह नवर

प म धारण करने से य

को

को एसा आभास होता ह जैसे मां ल मी उसके साथ ह। नव ह को

ह क अशुभ दशा का धारण करने वाले

रहता ह एवं

जल के समान प व
कार के नवर

होती ह।

ी यं

ी यं

नान करते समय इस यं

पर

पर

भाव नह ं होता ह। गले म होने के

पश कर जो जल बंद ु शर र को लगते ह, वह गंगा

होता ह। इस िलये इसे सबसे तेज वी एवं फलदािय कहजाता ह। जैसे अमृ त से उ म कोई
कार ल मी

ज ड़त

ी यं

ाि
गु

के िलये

ी यं

व कायालय

से उ म कोई यं

ारा शुभ मुहू त म

संसार म नह ं ह एसा शा ो

ाण

वचन ह। इस

ित त करके बनावाए जाते ह।

अ ल मी कवच
अ ल मी कवच को धारण करने से य
ह। ज से मां ल मी के अ

पर सदा मां महा ल मी क कृ पा एवं आशीवाद बना रहता

प (१)-आ द ल मी, (२)-धा य ल मी, (३)-धैर य ल मी, (४)-गज

ल मी, (५)-संतान ल मी, (६)- वजय ल मी, (७)- व ा ल मी और (८)-धन ल मी इन सभी
वतः अशीवाद

होता ह।

मू य मा : Rs-1050

मं
यापार वृ

कवच

बार हािन हो रह ह।
चैत य यु

यापार के शी
कसी

यापात वृ

िस

यापार वृ

कवच

उ नित के िलए उ म ह। चाह कोई भी यापार हो अगर उसम लाभ के

कार से यापार म बार-बार बांधा उ प न हो रह हो! तो संपूण
यं को

पो का

यपार

थान या घर म था पत करने से शी ह

ाण

यापार वृ

थान पर बार-

ित त मं

िस

पूण

एवं िनत तर लाभ ा

मू य मा : Rs.370 & 730

होता ह।

मंगल यं
( कोण) मंगल यं

को जमीन-जायदाद के ववादो को हल करने के काम म लाभ दे ता ह, इस के अित र

ऋण मु

हे तु मंगल साधना से अित शी

लाभ ा

मंगल यं

क पूजा करने से वशेष लाभ

होता ह।

को

होता ह। ववाह आ द म मंगली जातक के क याण के िलए

मू य मा

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Rs- 550

दस बर 2010

47

वा तु दोष से बढते ह अवैध संबंध

 िचंतन जोशी
दांप य जीवन म य द हर दन झगड़े हो तो इसका कारण िसफ आपसी मतभेद ह नह ं वा तु दोष भी हो सकता ह।

भवन के नैऋ य कोण(प
प ी के संबंध अ य
िलये

म-द

ण) अथवा वाय य कोण (उ र-प

ी-पु ष होने क संभावनाएं बढाता ह और

म) के िनमाण म य द दोष हो, तो पितय

एक से अिधक अवैध संबंध बनाने के

यास रत रहता ह। ज से प रवार म लड़ाई-झगड़े होते ह। य द उिचत परामश

कर दया जाए तो पित-प ी के अ य म हलाओं से संबंध सवतः ह समा

नव ववा हत द प

के भवन के वाय य कोण(उ र-प

आती ह ज से पित-प ी के संबंध अ य

कशोर उ

कर इन दोष को दर

हो जाते ह।

म) के कमरे म सोने से दांप य जीवन म नीरसता

ी-पु ष से अवैध संबंध हो सकते ह।

के ब चो का कमरा भवन के वाय य कोण (उ र-प

म) म होने से ब चे क च उ

च कर इ या द के मोह म बंध जाने क संभावनाएं बनती ह एवं ब चे एक से अिधक संपक रखने का
भी कर सकते ह। वाय य कोण म अ यािधक नकारा मक

ेम
यास

भाव होने पर ब चे घर से भाग जाना या भाग कर

ववाह करने क संभावनाएं बनी रहती ह।

भवन के आ नेय कोण म द प

का बेड

म हो, तो दोनो का गु सा सातव आसमान पर रहता ह ज से दोनो

के बच म आपसी ताल-मेल का अभाव रहता ह। इससे मानिसक अशांित रहती ह।

भवन के

ण म मु य

ार हो और प

ईशान म रसोई एवं शौचालय ह तो गृह

आईने म सोते समय दं प

क रसोई हो तो उस घर म आपसी मतभेद रहते ह।

लेश रहे गा।

का बेड या शर र दखता हो, तो दोनो के बच म कसी का या दोनो का कसी

अ य से अवैध बनने क संभावनाएं बढजाती ह।
वा तु अनुसार कुछ उपाय कर पित-प ी के बीच हर दन होने वाले झगड़े दरू कए जा सकते ह।

नोट:- केवल ववाह यो य ब चो का कमरा ह वाय य कोण म रखना उिचत रहता ह कशोर उ
वाय य कोण म उपयु
य द आपके घर म एसी

के ब चो का कमरा

नह ं होता ह।
थतीयां बन रह ह तो उ से डरने के बजाय उसके िनवारण के उपाय करने चा हये।

संबंध बनने के और भी बहोत सारे कारण हो सकते ह। दं प
क दोनो या दोनो म से एक

अवैध

का कमरा वाय य कोण म होने का मतलब यह नह ं ह

यिभचार ह कसी वशेष प र थती के कारण य द ऎसा नह ं ह तो ऎसा होने क

संभावना बन सकती ह। इस िलये अ ीम जानकार

कर सचेत रहना उिचत होता ह।

वा तु दोष िनवारक यं
भवन छोटा होया बडा य द भवन म कसी कारण से िनमाण म वा तु दोष लगरहा हो, तो शा

म उसके िनवारण हे तु

वा तु दे वता को स न एवं स तु करने के िलए अनेक उपाय का उ लेख िमलता ह। उ ह ं उपायो म से एक ह वा तु यं

थापना जसे घर-दकान
-ओ फस-फै टर म

दोष का िनवारण होजाता ह एवं भवन म सुख समृ

था पत करने से संबंिधत सम त परे शानीओं का शमन होकर वा तु
का आगमन होता ह।

मू य मा

Rs : 550

दस बर 2010

48

शी

मनोनुकूल पित-प ी

ाि

के उपाय

 िचंतन जोशी
यादातर क या और उसके माता- पता को यह िचंता सताती रहती ह।
बेट -बेटे का ववाह ज द से ज द यो य पा से कैसे हो जाय। और ववाह के
प यात बेट -बेटे का ससुराल और पित-प ी कैसी होगी। यह सब हर
माता- पता के मन-म त क मे साधारण से उठने वाले

ह? इस

कार

क परे शानी दरू करने के िलये और यो य समय पर उ म ववाह के िलए

कौनसा उपाय करने से लाभ ा होता ह।

ादश महा यं
यं

को अित

ािचन एवं दलभ
यं ो के

संकलन से हमारे वष के अनुसंधान
बनाया गया ह।

ववाह यो य लडक सोमवार को पान एवं सुपार से िशविलंग का पूजन

परम दल
ु भ वशीकरण यं

कर एवं जल चढ़ाने से शुभ फल ा होते ह।

भा योदय यं

क या के गु वार का त करने से शुभ फल ा होते ह।

मनोवांिछत काय िस

सोने क अंगूठ म िनद ष पुखराज र

रा य बाधा िनवृ

कराएं एवं लड़ क के बाएं हाथ म धारण कराने से ववाह योग शी

गृ ह थ सुख यं

बनते ह।

शी

क या को िशव-पावती का िनयमीत पूजन करना चा हये।

सह ा ी ल मी आब यं

क या ारा ित गु वार गाय को चने क दाल खलाने से ववाह बाधाएं

आक मक धन ाि यं

दरू होती ह।

पूण पौ ष ाि कामदे व यं

क या ारा भगवान नारायण क उपासना से लाभ होता ह।

रोग िनवृ


नहाने का पानी म सोने का टकडा
डालकर रख फर उस जल से नान

साधना िस

करने क या का ववाह शी हो जाता ह।

श ु दमन यं



लड़के के दाएं हाथ म धारण

पानी म एक चूटक ह द िमलाकर नान करने से ववाह शी हो जाता
ह।

भोजन म केसर का सेवन करने से शी

ववाह होने के योग बनते

ह।

गु वार को कसी गर ब को, ा ण को या कसी सुहािगन
ह से संबंिधत साम ी दान म दे ने से क या का ववाह शी

ी को गु
हो जाता

ह।

27 गु वार तक िनरं तर दे वी मं दर म गाय के घी का द पक जलाने से
ववाह योग बनता ह।

ित गु वार चमेली के 9-9 पु प बहते पानी म वा हत करने से क या
का ववाह शी हो जाता ह।

अ ववा हत क या को

ित दन पीले रं ग के भोजन का अिधक

योग

ारा

उपरो

यं

यं

ववाह संप न गौर अनंग यं

यं
यं

सभी यं ो को ादश महा यं के प म

शा ो

विध- वधान से मं

िस

ाण ित त एवं चैत य यु
ह।

जसे

थापीत कर

पूण

कये जाते

बना कसी पूजा

अचना- विध वधान वशेष लाभ

कर

सकते ह।

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दस बर 2010

49
करने से ववाह शी हो जाता ह।

अ ववा हत क या को अपने पास हमेशा पीला माल रखना चा हये

गु वार को पीले व

धारण करने से अ ववा हत य

का ववाह शी हो जाता ह

ित दन केशर या ह द का ितलक लगाने से क या का ववाह शी हो जाता ह


मं दर म तुवर(अरह) या चने क दाल का दान करने से क या का ववाह शी हो जाता ह

क या को मकान के वाय य दशा म सोने से ववाह योग समय पर बनजाते ह।

लड़क के पता जब जब लड़के वालो के यहाँ ववाह क बात करने के िलए जाय तो लड़क बाल खूले रखे। जब तक पता
लौटकर घर न आ जाए तब तक बाल बाधने नह ं चा हये।

गु वार को साबूत ह द क गांठ पीले व

पीपल क जड़ म लगातार 13 दन जल चढ़ाए ने से लडके-लडक के ववाह म आरहे व न-बाधा दरू हो जाती ह।


म लपेट कर अपने त कये के नीचे रख कर सोने से क या का ववाह शी होता ह।

गौ सेवा और गौदान करने से लडके-लडक के ववाह शी होते ह।
गु वार को सूया त के समय सवा मीटर पीले व

म सवा कलो चने क दाल थोडा सोना, इन सबको िमलाके मं दर म या

यो य ा ण को दान करदे ।

अ ववा हत लड़ कयां बाएं हाथ क अनािमका म मा ण य र

के साथ ए कामेर न र

क अंगूठ धारण करने से शी

ववाह के योग बनने लगते ह।

अ ववा हत लड़के दाएं हाथ क अनािमका म मा ण य र

के साथ ए कामेर न र

क अंगूठ धारण करने से शी

ववाह

के योग बनने लगते ह।
ाण ित त चार मुखी

सोमवार को

मुहू त म वशष पूजा-अचना करके धारण करने से लडके का ववाह शी हो

जाता ह।

पाँच सोमवार का

त कर,

ित सोमवार एक

और एक ब बप

िशविलंग पर भेट करने से ववाह योग

ज द बनते ह।



दगा
ु यं के स मुख ‘प ी मनोरमां दे ह’- मं का १०, ००० पाठ करने से लडके का ववाह शी होता ह।
ल मी यं
ीयं

के स मुख कनकधारा तो

के स मुख

ी सू

का १०८ पाठ करने से लडके का ववाह शी

का १६०० पाठ करने से लडके का ववाह शी

होता ह।

होता ह।

स दय लहर के २१ पाठ िनयिमत ३० दनो तक करने से ववाह योग बनने लगते ह।

अ य अनुभूत

योग

योग 1
बृ ह पित के वेदो
केले के वृ

मं

का 76000 जप और 7600 मं

म जल अपण कर केले के वृ

क सु वधा नहो तो िनयम के अनुशार

से दशांश हवन करने से ववाह योग शी

के नीचे वेदो

ित दन िन

मं

बनते ह।

क 108 माला कर। य द एक साथ 108 माला करने

त सं या म जप करके 3,7,11 दनो म जप पूरा कर सकते ह।

दस बर 2010

50

योग 2
कसी भी गु वार क रा

था पत कर व ह पर

नाना द से िनवृ त होकर एक बाजोट पर

ी रखकर

ववाह बाधा िनवारण मं

ाण- ित त ववाह बाधा िनवारण व ह

फ टक माला से ववाह बाधा िनवारण मं

: ॐ ऐं ऐ ववाह बाधा िनवारणाय

का 108 जप कर।

ंॐफ ।

नोट: ववाह बाधा िनवारण व ह के िलये पीले रंग के अक क(हक क) को ववाह बाधा िनवारण मं

से कसी जानकार

से अिभमं त करवाल।

योग 3

ववाह म आने वाली

कावटो को दरू करने के िलये एक पीले रे शमी

माल म तीन कोनो म साबूत ह द

गाठ बाधके अपने पास रख ल। क या को शु ल प के गु वार और लडके को शु ल प के शु वार को
योग करते व

कसी तरह का यवधान या

कावट न हो इसका खास

यान रख। इस

योग से शाद

क एक-एक

योग कर। यह
क बात

धीरे -धीरे आगे बढने लगेगी।
(इस

योग को अिधक मास, मल मास म करना फल

िनयम:

द नह ं होता ह इस िलये इस समय अविध म

कसी भी उपाय को करते समय, य
के मन म यह वचार होना चा हए, क वह जो भी उपाय कर रहा ह उसे
करने से वह ई र य कृ पा से अव य ह शुभ फल ा होगा।

सभी उपाय पूण त: सा वक ह तथा इसे करने से कसी के

उपाय से संब धत जानकार पूण तः गोपनीय रखनी चा हये।

को सतत य ह

ितकूल प रणाम

ा व व ास रखना चा हये क उसक कामनाये शी

क या को मािसक धम के समय कोई भी उपाय नह ं करना चा हये।

उपाय के दौरान सा वक भोजन

उपाय के दौरान संयम का पालन कर।

ह? अब आप अपनी सम याओं से बीना

यु

कसी

वशेष पूजा-अचना,

कर सके एवं आपको अपने जीवन के सम त सुखो को

व कायालत

ारा हमारा उ े य शा ो

विभ न कार के य

नह ं होते है ।

पूण होगी।

त ह?

आपके पास अपनी सम याओं से छुटकारा पाने हे तु पूजा-अचना, साधना, मं
सफलता

हण कर। मांस म दरा इ याद से परहे ज कर।

या आप कसी सम या से

गु

योग टालद।)

जाप इ या द करने का समय नह ं

विध- वधान के आपको अपने काय म

करने का माग

विध- वधान से विश तेज वी मं ो ारा िस

ाण- ित त पूण चैत य

- कवच एवं शुभ फलदायी ह र एवं उपर आपके घर तक पहोचाने का है ।

गु

हो सके इस िलये

व कायालय:

Bhubaneswar- 751 018, (ORISSA) INDIA,
Call Us : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785,
E-mail Us:- gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,

दस बर 2010

51

दस बर 2010 मािसक पंचांग
द वार

माह

1

बुध

मागशीष कृ ण

2

गु

मागशीष कृ ण

3

शु

ितिथ
दशमी-

समाि

समाि

योग

समाि

आयु मान 24:54:17

करण

चं
रािश

समाि

08:33:39

ह त

22:54:17

ादशी

28:04:26

िच ा

21:23:11

सौभा य

21:53:11

कौलव

मागशीष कृ ण

योदशी

26:05:11

वाती

20:00:30

शोभन

19:00:30

गर

08:30:35

तुला

4

शिन मागशीष कृ ण

चतुदशी

24:22:49

वशाखा

18:53:45

अितगंड

16:19:04

15:58:30

तुला

5

रव

मागशीष कृ ण अमाव या 23:05:45

अनुराधा

18:09:30

सुकमा

13:55:27

चतु पद 13:02:04 वृ

6

सोम मागशीष शु ल

22:20:34

जे ा

17:55:15

धृ ित

11:55:15

क तु न 10:21:33 वृ

क 17:55:00

7

मंगल मागशीष शु ल

तीया

22:10:02

मूल

18:14:44

शूल

10:22:14

बालव

08:06:22

धनु

एकादशी

एकम

समाि

14:02:53 क या
11:24:14 क या

8

बुध

मागशीष शु ल

तृतीया

22:39:49

पूवाषाढ़

19:11:42

गंड

09:16:23

तैितल

17:50:15

धनु

9

गु

मागशीष शु ल

चतुथ

23:47:06

उ राषाढ़

20:46:09

वृ

08:42:24

व णज

17:13:31

मकर

10 शु

मागशीष शु ल

पंचमी

25:31:51

वण

22:56:14

ुव

08:37:29

बव

17:23:40

मकर

ष ी

27:43:47

धिन ा

25:32:32

याघात

08:57:51

कौलव

18:20:41

मकर

मागशीष शु ल

स मी

30:12:35

शतिभषा

28:26:39

हषण

09:36:02

गर

07:05:31

कुंभ

13 सोम मागशीष शु ल

अ मी

32:44:11

पूवाभा पद

31:24:30

10:24:30

09:01:37

कुंभ

14 मंगल मागशीष शु ल

नवमी

08:44:50

पूवाभा पद

07:24:12

िस

11:13:53

बव

11:22:05

मीन

उ राभा पद 10:11:42

कौलव

13:53:49

मीन

11 शिन मागशीष शु ल
12

रव

15

बुध

मागशीष शु ल

नवमी

11:05:09

16

गु

मागशीष शु ल

दशमी

13:02:00

17 शु

मागशीष शु ल

एकादशी

14:26:59

18 शिन मागशीष शु ल

रे वित

नी

यितपात 11:53:54

12:36:42

व रयान

12:16:04

गर

16:22:44

मीन

14:31:40

पर ह

12:13:51

18:36:39

मेष

ादशी

15:13:30

भरणी

15:49:07

िशव

11:42:33

बालव

07:35:34

मेष

मागशीष शु ल

योदशी

15:19:41

कृ ितका

16:30:00

िस

10:41:15

तैितल

09:11:03

वृष

20 सोम मागशीष शु ल

चतुदशी

14:48:21

रो ह ण

16:32:25

सा य

09:10:51

व णज

10:16:32

वृष

21 मंगल मागशीष शु ल

पू णमा

13:44:11

मृगिशरा

16:03:52

शुभ

07:13:15

बव

10:52:01 िमथुन

एकम

12:11:52

आ ा

15:08:07

26:10:00

कौलव

10:57:30 िमथुन

19

22

रव

बुध

पौष

कृ ण

10:08:00

13:09:00

25:32:00

12:12:00

24:40:00

12:37:00

22:03:00

28:22:00

दस बर 2010

52
गु

पौष

कृ ण

तीया

10:17:03

पुनवसु

13:51:44

24 शु

पौष

कृ ण

तृतीया

08:07:12

पु य

12:21:16

25 शिन

पौष

कृ ण

चतुथ -

27:25:27

अ े षा

रव

पौष

कृ ण

ष ी

25:06:11

मघा

27 सोम

पौष

कृ ण

स मी

22:52:31

28 मंगल

पौष

कृ ण

अ मी

20:48:13

ह त

28:36:01

सौभा य

07:50:05

बालव

15:07:53 क या

िच ा

27:30:45

अितगंड

26:20:26

तैितल

13:03:02 क या

23

26

पंचमी

23:16:07

गर

10:37:40 िमथुन

वैध ृ ित

20:12:49

09:54:24

कक

10:43:16

वषकुंभ

17:03:53

कौलव

08:50:30

कक

09:03:22

ीित

13:54:56

गर

07:31:37

िसंह

17:03:20

िसंह

पूवाफा गुनी 07:25:20 आयु मान 10:49:43

29

बुध

पौष

कृ ण

नवमी

18:57:00

30

गु

पौष

कृ ण

दशमी

17:20:46

वाती

26:40:27

सुकमा

23:53:35

31 शु

पौष

कृ ण

एकादशी

16:03:16

वशाखा

26:08:53

धृ ित

21:40:46

10:50:42

बालव

08:12:00

10:43:00

13:02:00

16:01:00

तुला
तुला

गणेश ल मी यं
ाण- ित त गणेश ल मी यं
करने यापार म वशेष लाभ

को अपने घर-दकान
-ओ फस-फै टर म पूजन

होता ह। यं

के

भाव से भा य म उ नित, मान- ित ा एवं

एवं आिथक

थम सुधार होता ह। गणेश ल मी यं

आशीवाद

होता ह।

थान, ग ला या अलमार म

को

यापर म वृ

था पत
होती ह

था पत करने से भगवान गणेश और दे वी ल मी का संयु

Rs.550 से Rs.8200 तक

मंगल यं से ऋण मु
मंगल यं
को ऋण मु

हे तु मंगल साधना से अित शी

िलए मंगल यं
ाण

को जमीन-जायदाद के ववादो को हल करने के काम म लाभ दे ता ह, इस के अित र
क पूजा करने से वशेष लाभ

ित त मंगल यं

पागलपन, सूजन और घाव, यौन श

लाभ

होता ह।

होता ह।

म वृ , श ु वजय, तं मं के द ु

तं
कता

र ा कवच को धारण करने से

पर कसी भी

वाले सभी लोगो

र ा कवच

भा, भूत- ेत भय, वाहन दघटनाओं
, हमला, चोर

मू य मा

Rs- 550

के उपर कगई सम त तां क बाधाएं दरू होती ह, उसी के साथ ह धारण

कार क नकार मन श

ारा होने वाले द ु

ववाह आ द म मंगली जातक के क याण के

के पूजन से भा योदय, शर र म खून क कमी, गभपात से बचाव, बुखार, चेचक,

इ याद से बचाव होता ह।

तं

यो का कु भाव नह ं होता। इस कवच के

भावो से र ाहोती ह।

भाव से इषा- े ष रखने

मू य मा : Rs.730

दस बर 2010

53

दस बर -2010 मािसक त-पव- यौहार

वार

माह

1

बुध

मागशीष

कृ ण

2

गु

मागशीष

कृ ण

3

शु

मागशीष

4

शिन

5

ितिथ
दशमी-

समाि

मुख

त- योहार

08:33:39

उ प ना एकादशी, वैतरणी एकादशी,

ादशी

28:04:26

उ प ना एकादशी (वै णव)

कृ ण

योदशी

26:05:11

मागशीष

कृ ण

चतुदशी

24:22:49

रव

मागशीष

कृ ण

अमाव या

23:05:45

6

सोम

मागशीष

शु ल

एकम

22:20:34

ध य त, मात ड (म ला र) भैरव ष ा

7

मंगल मागशीष

शु ल

तीया

22:10:02

नवीन चं दशन, यितपात महापात दन 1.40 से रा

एकादशी

दोष त., संत

ाने र समािध उ सव,

िशव चतुदशी, मािसक िशवरा

नान-दान- ा हे तु उ म अमाव या, बकुला अमावस,
गौर तपो त

8

बुध

मागशीष

शु ल

तृ तीया

22:39:49

9

गु

मागशीष

शु ल

चतुथ

23:47:06

वनायक चतुथ

10

शु

मागशीष

शु ल

पंचमी

25:31:51

ववाह पंचमी, ी पंचमी,

11

शिन

मागशीष

शु ल

ष ी

27:43:47

12

रव

मागशीष

शु ल

स मी

30:12:35

13

सोम

मागशीष

शु ल

अ मी

32:44:11

14

मंगल मागशीष

शु ल

नवमी

08:44:50

15

बुध

मागशीष

शु ल

नवमी

11:05:09

16

गु

मागशीष

शु ल

दशमी

13:02:00

17

शु

मागशीष

शु ल

एकादशी

14:26:59

त, ित पित बालाजी उ सव,

च पा ष ी, मा
सु

ारं भ,

त,
2.04 तक

त (चं.रा.8.45)
ीसीता-राम ववाहो सव,

ड भैरव उ थापन, मूलक पणी ष ी,

यम ष ी, क द (कुमार) ष ी त, पंचक ारं भ (12.2),

भानु-स मी, िम स मी, सूय-पूजन, व णु-न दा-भ ा स मी,
का यायनी महापूजा ारं भ, नरिसंह मेहता जयंती,

ीदगा
मी त, ीअ नपूणा मी त, कुमा रका-पूजन

न दनी नवमी, का यायनी महापूजा पूण,
दशा द य त, धनु-सं ा त ात: 7.59 बजे, पु यकाल दन
2.23 तक, धनु (खर) मास ारं भ,
मो दा एकादशी

त, बैकु ठ एकादशी,

ीम गव ता जयंती,

दस बर 2010

54

18

शिन

मागशीष

शु ल

ादशी

15:13:30

19

रव

मागशीष

शु ल

योदशी

15:19:41

20

सोम

मागशीष

शु ल

चतुदशी

14:48:21

दोष त, शिन दोष त (पु

ाि

ादशी, केशव ादशी, यंजन ादशी, धरणी त,

पशाच मोचन

ा चतुदशी, पू णमा त, द ा ेय जयंती,

ीस यनारायण पूजा-कथा,
नान-दान हे तु उ म मृ गिशरा न
ब ीसी पूनम,

21

मंगल मागशीष

शु ल

पू णमा

13:44:11

हे तु उ म), अख ड

यु

अ हायणी पू णमा,

पुरभैरवी महा व ा जयंती, अ नपूणा जयंती,

छ पन भोग, का यायनी पूजा पूण, सूय सायन मकर म शेष रा
5.08 बजे, अयन-पु यकाल आगामी दन, वैध ृ ित महापात ात:
8.20 से दे र रात 2.05 तक

22

बुध

पौष

कृ ण

एकम

23

गु

पौष

कृ ण

तीया

10:17:03

24

शु

पौष

कृ ण

तृ तीया

08:07:12

25

शिन

पौष

कृ ण

चतुथ -

27:25:27

26

रव

पौष

कृ ण

ष ी

25:06:11

27

सोम

पौष

कृ ण

स मी

22:52:31

28

मंगल

पौष

कृ ण

अ मी

20:48:13

29

बुध

पौष

कृ ण

नवमी

18:57:00

30

गु

पौष

कृ ण

दशमी

17:20:46

31

शु

पौष

कृ ण

एकादशी

16:03:16

पंचमी

मातृ का पूजा, सायन मतानुसार सूय उ रायन, अयन-पु यकाल

12:11:52

दन भर, क र दन, सौर िशिशर ऋतु ारं भ
कसान दवस, गौना उ सव
संक ी

गुंजा, र

गुंजा, काली गुंजा, इं

अिभमं त कय जाता ह।

त (चं.रा.8.43)

शारदा माता जयंती,
काला मी त, अ का

ा ,

मणी अ मी त, ीहनुमान

अ मी,
अ व का

सफला एकादशी, सु पा ादशी, यितपात महापात रा

ड बी को अपनी अलमार , कैश बो स, पूजा

सफेद ल मी कारक हक क (अक क), ल मी कारक

त, सौभा य सुंदर

समस डे

धन वृ
धन वृ

ीगणेश चतुथ

10.42

ड बी
थान म रखने से धन वृ

होती ह जसम लाल- पीला-

फ टक र , 3 पीली कौड , 3 सफेद कौड , गोमती च , सफेद

जाल, माया जाल, इ याद दलभ
व तुओं को शुभ महत

ु म तेज वी मं
मू य मा

ारा

Rs-550

दस बर 2010

55

ह चलन दस बर -2010

1

07:14:39

05:12:58

08:00:43

08:05:58

10:29:44

06:06:23

05:20:32

08:08:57

02:08:57

11:02:40

10:02:03

08:10:13

2

07:15:40

05:27:15

08:01:28

08:07:00

10:29:47

06:06:50

05:20:38

08:08:54

02:08:54

11:02:39

10:02:04

08:10:15

3

07:16:41

06:11:28

08:02:13

08:07:58

10:29:49

06:07:18

05:20:43

08:08:50

02:08:50

11:02:39

10:02:05

08:10:17

4

07:17:42

06:25:33

08:02:58

08:08:51

10:29:52

06:07:48

05:20:48

08:08:47

02:08:47

11:02:39

10:02:06

08:10:19

5

07:18:42

07:09:26

08:03:43

08:09:39

10:29:56

06:08:20

05:20:53

08:08:44

02:08:44

11:02:39

10:02:07

08:10:21

6

07:19:43

07:23:04

08:04:28

08:10:21

10:29:59

06:08:53

05:20:58

08:08:43

02:08:43

11:02:39

10:02:08

08:10:23

7

07:20:44

08:06:23

08:05:14

08:10:56

11:00:03

06:09:27

05:21:03

08:08:42

02:08:42

11:02:39

10:02:09

08:10:25

8

07:21:45

08:19:23

08:05:59

08:11:24

11:00:06

06:10:03

05:21:08

08:08:42

02:08:42

11:02:39

10:02:10

08:10:27

9

07:22:46

09:02:04

08:06:44

08:11:43

11:00:10

06:10:41

05:21:13

08:08:43

02:08:43

11:02:39

10:02:11

08:10:29

10

07:23:47

09:14:28

08:07:30

08:11:53

11:00:15

06:11:19

05:21:17

08:08:45

02:08:45

11:02:39

10:02:12

08:10:31

11

07:24:48

09:26:38

08:08:15

08:11:53

11:00:19

06:11:59

05:21:22

08:08:46

02:08:46

11:02:40

10:02:13

08:10:33

12

07:25:49

10:08:38

08:09:01

08:11:43

11:00:23

06:12:40

05:21:26

08:08:47

02:08:47

11:02:40

10:02:14

08:10:36

13

07:26:50

10:20:31

08:09:46

08:11:21

11:00:28

06:13:22

05:21:31

08:08:48

02:08:48

11:02:40

10:02:15

08:10:38

14

07:27:51

11:02:23

08:10:32

08:10:47

11:00:33

06:14:05

05:21:35

08:08:48

02:08:48

11:02:41

10:02:16

08:10:40

15

07:28:52

11:14:19

08:11:18

08:10:02

11:00:38

06:14:50

05:21:39

08:08:47

02:08:47

11:02:41

10:02:17

08:10:42

16

07:29:53

11:26:23

08:12:03

08:09:06

11:00:44

06:15:35

05:21:44

08:08:47

02:08:47

11:02:41

10:02:19

08:10:44

17

08:00:54

00:08:39

08:12:49

08:08:01

11:00:49

06:16:21

05:21:48

08:08:45

02:08:45

11:02:42

10:02:20

08:10:46

18

08:01:55

00:21:11

08:13:35

08:06:47

11:00:55

06:17:09

05:21:52

08:08:44

02:08:44

11:02:43

10:02:21

08:10:48

19

08:02:56

01:04:01

08:14:21

08:05:28

11:01:01

06:17:57

05:21:56

08:08:44

02:08:44

11:02:43

10:02:23

08:10:50

20

08:03:57

01:17:10

08:15:07

08:04:06

11:01:07

06:18:46

05:21:59

08:08:43

02:08:43

11:02:44

10:02:24

08:10:53

21

08:04:58

02:00:38

08:15:53

08:02:43

11:01:13

06:19:36

05:22:03

08:08:43

02:08:43

11:02:45

10:02:25

08:10:55

22

08:06:00

02:14:24

08:16:39

08:01:23

11:01:19

06:20:27

05:22:07

08:08:43

02:08:43

11:02:45

10:02:27

08:10:57

23

08:07:01

02:28:24

08:17:25

08:00:07

11:01:26

06:21:18

05:22:10

08:08:43

02:08:43

11:02:46

10:02:28

08:10:59

24

08:08:02

03:12:35

08:18:11

07:28:59

11:01:32

06:22:10

05:22:14

08:08:43

02:08:43

11:02:47

10:02:30

08:11:01

25

08:09:03

03:26:53

08:18:57

07:27:59

11:01:39

06:23:03

05:22:17

08:08:43

02:08:43

11:02:48

10:02:31

08:11:03

26

08:10:04

04:11:13

08:19:43

07:27:10

11:01:46

06:23:57

05:22:20

08:08:43

02:08:43

11:02:49

10:02:33

08:11:05

27

08:11:05

04:25:31

08:20:29

07:26:31

11:01:53

06:24:51

05:22:24

08:08:43

02:08:43

11:02:50

10:02:34

08:11:08

28

08:12:06

05:09:45

08:21:15

07:26:02

11:02:01

06:25:46

05:22:27

08:08:43

02:08:43

11:02:51

10:02:36

08:11:10

29

08:13:07

05:23:51

08:22:02

07:25:44

11:02:08

06:26:42

05:22:30

08:08:43

02:08:43

11:02:52

10:02:38

08:11:12

30

08:14:08

06:07:49

08:22:48

07:25:36

11:02:16

06:27:38

05:22:33

08:08:43

02:08:43

11:02:54

10:02:39

08:11:14

31

08:15:10

06:21:37

08:23:34

07:25:38

11:02:24

06:28:35

05:22:35

08:08:44

02:08:44

11:02:55

10:02:41

08:11:16

Sun

Mon

Ma

Me

Jup

Ven

Sat

Rah

Ket

Ua

Nep

Plu

दस बर 2010

56

दस बर -२०१०- वशेष योग
काय िस

योग

दनांक

योग अविध

गु -पु यामृ त योग

1

सूय दय से रा

10:54 तक

10

सूय दय से रा

10:55 तक

दनांक

दोपहर 1:50 से रातभर

23

पु कर योग

ात: 7:24 से रातभर

14

योग अविध

16

स पूण दन-रात

13

17

सूय दय से दोपहर 2:30 तक

सवदोषनाशक र व योग

20

स पूण दन-रात

8

सं या 7:11 से 9 तो रा

23

स पूण दन-रात

10

रा

31/1 जनवर

रा

14

ात: 7:23 से 17 दोपहर 2:30 तक

19

सं या 4:28 से 20 सं या 4:32 तक

2:08 से सूय दय तक

अमृ त योग
20

सं या 4:32 से रातभर

23

दोपहर 1:50 से रातभर

ात: 4:25 से सूय दय तक

10:55 से 11/12 रा

ात: 9:02 से 27

26

8:46 तक
1:32 तक

ात: 7:24 तक

योग फल :
काय िस

योग मे कये गये शुभ काय मे िन

त सफलता ा होती ह, एसा शा ो

पु कर योग म कये गये शुभ काय का लाभ दोगुना होता ह। एसा शा ो

वचन ह।

पु कर योग म कये गये शुभ काय का लाभ तीन गुना होता ह। एसा शा ो

दै िनक शुभ एवं अशुभ समय

वचन ह।

वचन ह

ान तािलका

गुिलक काल

यम काल

(शुभ)

(अशुभ)

समय अविध

समय अविध

समय अविध

र ववार

03:00 से 04:30

12:00 से 01:30

04:30 से 06:00

सोमवार

01:30 से 03:00

10:30 से 12:00

07:30 से 09:00

मंगलवार

12:00 से 01:30

09:00 से 10:30

03:00 से 04:30

बुधवार

10:30 से 12:00

07:30 से 09:00

12:00 से 01:30

गु वार

09:00 से 10:30

06:00 से 07:30

01:30 से 03:00

शु वार

07:30 से 09:00

03:00 से 04:30

10:30 से 12:00

शिनवार

06:00 से 07:30

01:30 से 03:00

09:00 से 10:30

वार

राहु काल
(अशुभ)

दस बर 2010

57

दन के चौघ डये
समय

र ववार

सोमवार

मंगलवार बुधवार गु वार

शु वार

शिनवार

06:00 से 07:30

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

07:30 से 09:00

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

09:00 से 10:30

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

10:30 से 12:00

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

12:00 से 01:30

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

01:30 से 03:00

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

03:00 से 04:30

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

04:30 से 06:00

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

रात के चौघ डये

शा ो

समय

र ववार

सोमवार

मंगलवार

बुधवार गु वार

शु वार

शिनवार

06:00 से 07:30

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

07:30 से 09:00

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

09:00 से 10:30

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

10:30 से 12:00

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

12:00 से 01:30

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

01:30 से 03:00

लाभ

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

03:00 से 04:30

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

शुभ

चल

काल

04:30 से 06:00

शुभ

चल

काल

उ ेग

अमृ त

रोग

लाभ

मत के अनुशार य द कसी भी काय का ारं भ शुभ मुहू त या शुभ समय पर कया जाये तो काय म सफलता

ा होने क संभावना यादा बल हो जाती ह। इस िलये दै िनक शुभ समय चौघ ड़या दे खकर ा
नोट: ायः दन और रा

के चौघ ड़ये क िगनती

मशः सूय दय और सूया त से क जाती ह।

कया जा सकता ह।

येक चौघ ड़ये क अविध 1

घंटा 30 िमिनट अथात डे ढ़ घंटा होती ह। समय के अनुसार चौघ ड़ये को शुभाशुभ तीन भाग म बांटा जाता ह, जो

मशः शुभ,

म यम और अशुभ ह।

चौघ डये के

वामी

* हर काय के िलये शुभ/अमृ त/लाभ का

शुभ चौघ डया

म यम चौघ डया

अशुभ चौघ ड़या

चौघ डया

चौघ डया

चौघ डया

वामी ह

शुभ

गु

अमृ त
लाभ

चर

वामी ह
शु

वामी ह

उ ेग

सूय

चं मा

काल

शिन

बुध

रोग

मंगल

चौघ ड़या उ म माना जाता ह।
* हर काय के िलये चल/काल/रोग/उ े ग
का चौघ ड़या उिचत नह ं माना जाता।

दस बर 2010

58

दन क होरा - सूय दय से सूया त तक
वार

1.घं

2.घं

3.घं

4.घं

5.घं

6.घं

7.घं

8.घं

9.घं

र ववार

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

सोमवार

चं

शिन

गु

मंगल सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

मंगलवार

मंगल

सूय

शु

बुध

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

बुधवार

बुध

चं

शिन

गु

मंगल सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

गु वार

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

शु वार

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

शिनवार

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

चं

10.घं 11.घं 12.घं

रात क होरा – सूया त से सूय दय तक
र ववार

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

सोमवार

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगलवार

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुधवार

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु वार

चं

शिन

गु

मंगल सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

सूय

शु वार

मंगल

सूय

शु

बुध

शिन

गु

मंगल

सूय

शु

बुध

चं

शिनवार

बुध

चं

शिन

गु

मंगल सूय

शु

बुध

चं

शिन

गु

मंगल

होरा मुहू त को काय िस
को समय से पूव

के िलए पूण फलदायक एवं अचूक माना जाता ह, दन-रात के २४ घंट म शुभ-अशुभ समय

ात कर अपने काय िस

व ानो के मत से इ छत काय िस

चं

के िलए

के िलए

योग करना चा हये।

ह से संबंिधत होरा का चुनाव करने से वशेष लाभ

होता ह।
 सूय क होरा सरकार काय के िलये उ म होती ह।
 चं मा क होरा सभी काय के िलये उ म होती ह।
 मंगल क होरा कोट-कचेर के काय के िलये उ म होती ह।
 बुध क होरा व ा-बु

अथात पढाई के िलये उ म होती ह।

 गु

क होरा धािमक काय एवं ववाह के िलये उ म होती ह।

 शु

क होरा या ा के िलये उ म होती ह।

 शिन क होरा धन-

य संबंिधत काय के िलये उ म होती ह।

दस बर 2010

59

मािसक रािश फल

 िचंतन जोशी
मेष

: इस माह

मानिसक अशांित

एवं

शार रक

अ व थता अनुभव करे ग। अिधक प र म म कमी रहे गी
ज से अिधक लाभ

काय को पूरा करने का

नह ं होगा,पूण प र म से

यास कर। नौकर

के हवे
ु काय म सफल ह गे। िम

म वृ

होगी।

वा

यवसाय म

एवं पा रवा रक सुख

य संबंधी िचंता समय पर रख।

वृ ष : इस माह म भाग-दौड क अिधकता एवं

वप रत

प र थितओं के कारण मानिसक अशांित रहे गा। प र म
के बाद भी उिचत लाभ

ाि

का अनुभव नह

कर

ह। इस माह
वृ

वा

य उ म रहे गा। पा रवा रक सुख म

एवं धन सं ह के अवसर

होग।

िसंह : पुरानी सम याओं और परे शािनय से छुटकारा
िमलेगा। आिथक
पदौ नती एवं

थित म सुधार होगा। नौकर

यापार म उ नित के अवसय

भूिम-भवन-वाहन के सुखो म वृ
वरोिध एवं श ु प

होग।

होने के योग ह।

से परे शानी हो सकती ह सावधान

रह। भौितक सुख साधनो
िनयं ण रखने का

ाि

होगी। खच पर

यास कर।

पायेग। मह व पूण धन से संबंिधत लेन-दे न म परे शानी
हो सकती ह।

वा

ित सचेत रहने से

य कमजोर रहे गा एवं
वा

य सुख म वृ

वा

होगी।

य के
प रवार

के सद य के बच म मदभेद रहे गा।

क या : इस माह

य िचंताजनक रहे गा।


रह सकती ह। खच पर िनय

ण रखने का

भूिम-भवन-वाहन के सुखो म वृ
ह गे। िम
म लाभ

यय क अिधकता
होने के योग ह।

एवं पा रवार क सहयोग से नौकर

होगा।

िनयं ण रखने का

वभाव म

यास करे ।
यवसाय

ोध एवं उतेजना पर

यास कर अ यथा बने बनाये काम

बगड़ सकते ह। वप रत प र थितओं के चलते आपको
मानिसक परे शानी का सामना करना पडे गा।
कक : इस माह आपके

उ साह

फुित मे वृ

पूरानी परे शानीओं से छुटकारा पाने म सफल ह गे। िम
एवं पा रवार क सहयोग से नौकर

थित

शार रक

पर

वभाव म उ ता एवं उतेजना

िनयं ण

रखने

अनआव यक खच बढगा। श ु प

का

यास

कर।

से परे शानी संभव ह।

मह व पूण धन से संबंिधत लेन-दे न म अित र
सावधानी बरते अ यथा परे शानी हो सकती ह।
तुला : इस माह आपके उ साह
नौकर

यवसाय म

फुित मे वृ

होगी।

के हवे
ु काय म सफल ह गे। पूरानी

परे शानीओं से छुटकारा पाने म सफल ह गे। िम

एवं

पा रवार क सहयोग से नौकर

होगा।
होगी।

एवं

अ व थता अनुभव करे ग। प रवार के सद यो का
वा

िमथुन : इस माह आय क तुलना म

मानिसक अशांित

वा

यवसाय म लाभ

य उ म रहे गा। पा रवा रक सुख म वृ

एवं धन सं ह के अवसर

होग। भूिम-भवन इ याद

म पूं ज िनवेश करने से बचे।

यवसाय म लाभ

होगा। श ु एवं वरोधी पर आपका दब-दबा रहे गा।

दसर
पर िनभर रहकर काय करना नुकशान दे सकता

वृ

क : पूण प र म से कये गये काय म सफलता
होगी। नौकर म पदौ नती एवं

के अवसय

होग। िम

यापार म उ नित

एवं प रवार क के सद यो के

दस बर 2010

60
सहयोग से आिथक लाभ
को

होगा। साझेदार के काय

थिगत कर। श ु एवं वरोिध प

बनाने म आप सफलता

पर अपना

थती रहे गी।

भाव

नौकर - यवसाय म श ु प

संभव ह सावधान रहे ।

करे ग। पूराने ऋण का

भुगतान करना पड सकता ह।

कुंभ : पा रवा रक सुख म वृ

धनु : इस माह आ म व ार एवं उ साह फुित मे वृ

योग ह। थोडे से प र म से नौकर

के काय म

म सुधार होगा।

होगी। आिथक

थित म सुधार होगा। नौकर

यवसाय

म भौितक सुख -साधनो म वृ

करगे। प रवार

संभव ह अित र

मकर : इस माह सभी मह व पूण काय म अित र

साधनो

यास

ा -Rs- 1250,2800 छह मुखी

दो मुखी

ा -Rs- 100,151

बन रहे ह।

वग के बच म तनाव क

एकमुखी

थती

कमजोर रहे गा। भाग-दौड

यवसाय के काय म परे शानी

सावधानी बत।

ाि

कसी भी

वा

कार के

यास कर। भौितक सुख

होगी। खच पर िनयं ण रखने का

यास कर। म हला वग से अिधक लाभ

थिगत करने का

मं

गित

वप रत प र थितओं के कारण

वाद- ववाद से बचने का

सावधानी बरते अ यथा परे शानी हो सकती ह। ऋण लेने

यास कर। प रवार एवं िम

यवसाय म

के योग ह। आिथक

य प

मीन : इस माह नौकर

वरोधी पर आपका दब-दबा रहे गा।

कर। मह व पूण योजनाओंन को

ाि

होने के

मानिसक अशांित रह सकती ह।

फल व प प रवार म खुशी का माहौल रहे गा। श ु एवं

से बचे, अ यािधक खच पर िनयं ण करने का

वा

क अिधकता एवं

हो सकती ह ज स के

एवं धन सं ह के अवसर

होग। भूिम-भवन-वाहन के सुखो म वृ

होगी। आक मक धन

गित होगी। मह व पूण धन से संबंिधत

लेन-दे न के काय म भी सफलता

से क

ाि

के योग

वभाव म ती ता एवं उ ता रह सकती ह।

य सामा य रहे गा।

िस

ा -Rs- 55,100

यारहमुखी

ा -Rs- 2800

सात मुखी

ा -Rs- 120,190

बारह मुखी

ा -Rs- 3600

ा -Rs- 820,1250 तेरह मुखी

ा -Rs- 6400

तीन मुखी

ा -Rs- 100,151

आठ मुखी

चार मुखी

ा -Rs- 55,100

नौ मुखी

ा -Rs- 820,1250

चौदह मुखी

पंच मुखी

ा -Rs- 28,55

दसमुखी

ा -Rs- ........

गौर षंकर

ा -Rs- 19000
ा -Rs-

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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दस बर 2010

61

वा तु परामश
गु

योितष प का के पाठको के सुझाव एवं अनुरोध पर गु

संबंिधत िनःशु क सेवा

व कायालय

ारं भ क जारह ह।

य द आपका घर, दकान
, कायालय, उ ोग इ या द

आप शार रक, मानिसक एवं आिथक सम याओं से परे शान ह।

आपको उिचत महे नत करने पर भी उिचत फल क
हो, आप बार-बार लाभ के

थान य द वा तु दोष यु

ाि

नह ं हो रह

थान पर हानीं उठा रह हो,

तो संभ वत

आपका भवन वा तु दोष से यु

ह,

ह।

वा तु दोष के बार मे जानने और उसके समाधान के िलये गु

ारा दस बर-2010 से वा तु से

योितष प का के मा यम से आप हमारे कुशल एवं अनुभवी वा तु
वशेष

से िनःशु क परामश

िनिमत भवन क

कर सकते ह।

थित उसक बाहर एवं भीतर सजावट आपके अनुकूल ह या नह ं। जससे आप भवन म

बना तोड-फोड कये इनके सरल उपायो से केवल फेर-बदल कर के वशेष लाभ

कर सकते ह। वा तु

परामश हे तु फाम भर।
नोट: जो

उठाने का क

ई मेल से िनजी
कर। गु

अ यथा आपको गु

प म परामश

करना चाहते ह वह कृ या हमार भुगतान परामश सेवा का लाभ

व कायालय म फोन से संपक करने पर आपको ई मेल से िनजी

व कायालय लोग के मा यम से परामश

प म परामश

होगा। कृ या य द आप कसी सम या से

होगा।

त हो,

तो इस िनःशु क परामश सेवा का लाभ उठाये। नये भवन के िनमाण एवं बना कसी सम या के परामश नह ं दया
जायेगा।

गु

योितष वा तु परामश

नाम:
पता:
ई-मेल पता
फोन नंबर
सम या:

* साथ म भवन का दशा िलखा कर न शा भेजे ।

वा तु परामश फम इस पत पर भेजे या ई-मेल कर या हमारे

लोग

http://gurutvajyotish.blogspot.com/ पर

जाकर ओनलाईन फाम जमा करवा सकते ह। भवन का न शा इस ई-मेल पर भेज:े Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com,

गु

व कायालय

ारा नये भवन के िनमाण एवं संपूण वा तु परामश सु वधा उ ल ध ह।

दस बर 2010

62

योितष परामश
योितष से संबंिधत कसी भी
िन:शु क उ र एवं समाधान

कार क सम यओ का गु

व कायालय

लोग के मा यम से आप अपने

का

कर सकते ह।

नोट: जो बंधु केवल अपना भ व य, वषफल या रािशफल इ या द जानना चाहते ह। जो य
नह ं ह, वह कृ या भुगतान कर हमार

वशेष सेवाये

करने का क

कसी सम या से

कर।

योितष परामश
नाम:
पता का नाम
माता का नाम
पता:
ई-मेल पता:
फोन नंबर:
ज म दनांक:
ज म समय:
ज म

थान( जला):

एक

/सम या:

योितष परामश फम इस पत पर भेजे या ई-मेल कर या हमारे

लोग

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सूचना :
गु व कायालय से जुडे बंधुगण हो, िनयिमत पाठक हो या जो य
आिथक
से धन दे कर
सेवा ा करने म असमथ हो एसे य
चाहे वह कायालय म आते हो, फ़ोन पर हो, ई-मेल ारा
हो या ऑन लाइन हो, उन बंधु के िलये हमार यादातर सेवा िन:शु क ह।
िन:शु क सेवा दान करने का अथ यह कतई नह ं ह क हमारे पास कोई काय नह ं ह। इस िलये
वयं का एवं हमार समय न करने के बजाय िनःशु क सेवा का लाभ उ ह ा करने का मौका
द, जो य
वा तव म परे शान ह । यो क बना सम या के िन:शु क सेवा का लाभ उठाने के
कारण अ य लोग को सेवा ा करने म वलंब होता ह। तो कृ या अपना सहयोग बनाये रखे।

दस बर 2010

63

सव रोगनाशक यं /कवच
मनु य अपने जीवन के विभ न समय पर कसी ना कसी सा य या असा य रोग से
उिचत उपचार से

यादातर सा य रोगो से तो मु

होजाते ह, या कोइ असा य रोग से
पाता। डॉ टर
िलये य

िमल जाती ह, ले कन कभी-कभी सा य रोग होकर भी असा या

िसत होजाते ह। हजारो लाखो

एवं तं

उ लेख अपने

को विभ न रोग से

मं

एवं तं

को कम करने का

ाि

संसार काल के अधीन ह। एवं मृ यु िन
थती म य

रोग दरू करने का

के कुशल जानकार से यो य मागदशन लेकर य

के
यं ,

यास हजारो वष पूव कया था।
हण करता ह, एसे य

िसत होने क संभावना कम होती ह। ले कन आज के बदलते युग म एसे य

और कोई टाल नह ं सकता, ले कन रोग होने क
इस िलये यं

दान करने का साथक

जीवनभर अपनी दनचया पर िनयम, संयम रख कर आहार
यो क सम

नह ं हो

ताप से रोग शांित हे तु विभ न आयुवर औषधो के अित र

ंथो म कर मानव जीवन को लाभ

त होते दख जाते ह।

थती म लाभा

एक डॉ टर से दसरे
डॉ टर के च कर लगाने को बा य हो जाता ह।

बु जीवो के मत से जो य
से

पये खच करने पर भी अिधक लाभ

ारा दजाने वाली दवाईया अ प समय के िलये कारगर सा बत होती ह, एिस

भारतीय ऋषीयोने अपने योग साधना के
मं

त होता ह।

भी भयंकर रोग

त ह जसे वधाता के अलावा
यास तो अव य कर सकता ह।

रोगो से मु

पाने का या उसके

भावो

यास भी अव य कर सकता ह।

योितष व ा के कुशल जानकर भी काल पु षक गणना कर अनेक रोगो के अनेको रह य को उजागर कर
सकते ह। योितष शा

के मा यम से रोग के मूलको पकडने मे सहयोग िमलता ह, जहा आधुिनक िच क सा शा

अ म होजाता ह वहा

योितष शा

उपायोगी िस

ारा रोग के मूल(जड़) को पकड कर उसका िनदान करना लाभदायक एवं

होता ह।

हर य

म लाल रं गक कोिशकाए पाइ जाती ह, जसका िनयमीत वकास

जब इन कोिशकाओ के

म म प रवतन होता है या वखं डन होता ह तब य

उ प न होते ह। एवं इन कोिशकाओ का संबंध नव
ज मांग से दशा-महादशा एवं

हो क गोचर म

थती से

वाकषण बल
भाव से य

भावीत कता ह

के मा यम से

ठक उसी

को सकारा मक उजा

वा

य संबंधी वकारो

के

होता ह।

के ज मांग म

भाव को कम करने का काय सरलता पूव क कया जासकता ह। जेसे हर य

पृ वी का गु
सकारा मक

के शर र म

तर के से होता रहता ह।

हो के साथ होता ह। ज से रोगो के होने के कारणा

सव रोग िनवारण कवच एवं महामृ युंजय यं
हो के अशुभ

म ब

कार कवच एवं यं

होती ह ज से रोग के

थत कमजोर एवं पी डत
को

के मा यम से

ांड क उजा एवं
ांड

भाव को कम कर रोग मु

क उजा के
करने हे तु

सहायता िमलती ह।
रोग िनवारण हे तु महामृ युंजय मं
महामृ युंजय मं

से प रिचत ह।

एवं यं

का बडा मह व ह। ज से ह द ू सं कृ ित का

ायः हर

दस बर 2010

64
कवच के लाभ :

एसा शा ो

वचन ह जस घर म महामृ युंजय यं

था पत होता ह वहा िनवास कता हो नाना

कार क

आिध- यािध-उपािध से र ा होती ह।

पूण

ाण

ित त एवं पूण चैत य यु

सव रोग िनवारण कवच कसी भी उ

एवं जाित धम के लोग चाहे

ी हो या पु ष धारण कर सकते ह।

ज मांगम अनेक कारके खराब योगो और खराब

कुछ रोग सं मण से होते ह एवं कुछ रोग खान-पान क अिनयिमतता और अशु तासे उ प न होते ह। कवच
एवं यं

ारा एसे अनेक कार के खराब योगो को न

सव रोगनाशक कवच एवं यं

हो क

ितकूलता से रोग उतप न होते ह।

कर, वा

य लाभ और शार रक र ण

करने हे तु

सव उपयोगी होता ह।

आज के भौितकता वाद आधुिनक युगमे अनेक एसे रोग होते ह, जसका उपचार ओपरे शन और दवासे भी
क ठन हो जाता ह। कुछ रोग एसे होते ह जसे बताने म लोग हच कचाते ह शरम अनुभव करते ह एसे रोगो
को रोकने हे तु एवं उसके उपचार हे तु सव रोगनाशक कवच एवं यं

येक य

थती म उपचार हे तु सवरोगनाशक कवच एवं यं

जस घर म पता-पु , माता-पु , माता-पु ी, या दो भाई एक ह न
अिधक क दायक

जस य

थती होती ह। उपचार हे तु महामृ युंजय यं

ाण

से संपक कर।

ित त एवं पूण चैत य यु

फल द होता ह।

मे ज म लेते ह, तब उसक माता के िलये

फल द होता ह।

का ज म प रिध योगमे होता ह उ हे होने वाले मृ यु तु य क

उपचार हे तु सव रोगनाशक कवच एवं यं
नोट:- पूण

होता ह।

क जेसे-जेसे आयु बढती ह वैसे-वसै उसके शर र क ऊजा होती जाती ह। जसके साथ अनेक

कार के वकार पैदा होने लगते ह एसी

लाभादािय िस

एवं होने वाले रोग, िचंता म

शुभ फल द होता ह।
सव रोग िनवारण कवच एवं यं

के बारे म अिधक जानकार हे तु हम

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 Our ability lies in having learned to read the subtle spiritual energy, Yantra, mantra and promptings
of the natural and spiritual world.
 Our skill lies in communicating clearly and honestly with each client.
 Our all kawach, yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy, our
Article dose not produce any bad energy.

Our Goal
 Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants
prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All
types of Yantra, Kavach, Rudraksh, preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your door
step.

दस बर 2010

65

मं िस कवच

मं िस कवच को वशेष योजन म उपयोग के िलए और शी
भाव शाली बनाने के िलए तेज वी मं ो ारा
.
शुभ महत
ू म शुभ दन को तैयार कये जाते है अलग अलग कवच तैयार करने केिलए अलग अलग तरह के
.
मं ो का योग कया जाता है .

य चुने मं िस कवच?

 उपयोग म आसान कोई ितब ध नह ं
 कोई वशेष िनित-िनयम नह ं
 कोई बुरा भाव नह ं
 कवच के बारे म अिधक जानकार हे तु
सव काय िस

कवच - 3700-/

ऋण मु

कवच सूिच

कवच – 730/-

सवजन वशीकरण कवच – 1050/-*

नव ह शांित कवच – 730/-

अ ल मी कवच – 1050/-

तं र ा कवच – 730/-

आक मक धन ाि कवच – 910/-

श ु वजय कवच – 640/-*

भूिम लाभ कवच – 910/-

पद उ नित कवच – 640/-

संतान ाि कवच – 910/-

धन ाि कवच – 640/-

काय िस

कवच – 910/-

ववाह बाधा िनवारण कवच – 640/-

काम दे व कवच – 820/-

म त क पृ

जगत मोहन कवच -730/-*

कामना पूित कवच – 550/-

पे - यापार वृ

*कवच मा

कवच – 730/-

वधक कवच – 640/-

व न बाधा िनवारण कवच – 550/-

वरोध नाशक कवचा– 550/-

वशीकरण कवच- 460/-* (2-3 य

के िलए)

प ी वशीकरण कवच – 460/-*
नज़र र ा कवच – 460/यापर वृ

कवच- 370-/

पित वशीकरण कवच – 370/-*
दभा
ु य नाशक कवच – 370/सर वती कवक – 370/- क ा+ 10 के िलए
सर वती कवक -280 / - क ा 10 तक के िलए
वशीकरण कवच – 280/-* 1 य

शुभ काय या उ े य के िलये

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के िलए

66
YANTRA LIST
Our Splecial Yantra
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10

12 – YANTRA SET
VYAPAR VRUDDHI YANTRA
BHOOMI LABHA YANTRA
TANTRA RAKSHA YANTRA
AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA
PADOUNNATI YANTRA
RATNE SHWARI YANTRA
BHUMI PRAPTI YANTRA
GRUH PRAPTI YANTRA
KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA

दस बर 2010
EFFECTS
For all Family Troubles
For Business Development
For Farming Benefits
For Protection Evil Sprite
For Unexpected Wealth Benefits
For Getting Promotion
For Benefits of Gems & Jewellery
For Land Obtained
For Ready Made House
-

Shastrokt Yantra
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42

AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA
BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL)
BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL)
BHAGYA VARDHAK YANTRA
BHAY NASHAK YANTRA
CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta)
CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA
DARIDRA VINASHAK YANTRA
DHANDA POOJAN YANTRA
DHANDA YAKSHANI YANTRA
GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra)
GARBHA STAMBHAN YANTRA
GAYATRI BISHA YANTRA
HANUMAN YANTRA
JWAR NIVARAN YANTRA
JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA
YANTRA
KALI YANTRA
KALPVRUKSHA YANTRA
KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA)
KANAK DHARA YANTRA
KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA
KARYA SHIDDHI YANTRA
 SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA
KRISHNA BISHA YANTRA
KUBER YANTRA
LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA
LAKSHAMI GANESH YANTRA
MAHA MRUTYUNJAY YANTRA
MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA
MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA)
MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA
NAVDURGA YANTRA

Blessing of Durga
Win over Enemies
Blessing of Bagala Mukhi
For Good Luck
For Fear Ending
Blessing of Chamunda & Navgraha
Blessing of Chhinnamasta
For Poverty Ending
For Good Wealth
For Good Wealth
Blessing of Lord Ganesh
For Pregnancy Protection
Blessing of Gayatri
Blessing of Lord Hanuman
For Fewer Ending
For Astrology & Spritual Knowlage
Blessing of Kali
For Fullfill your all Ambition
Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga
Blessing of Maha Lakshami
For Successes in work
For Successes in all work
Blessing of Lord Krishna
Blessing of Kuber (Good wealth)
For Obstaele Of marriage
Blessing of Lakshami & Ganesh
For Good Health
Blessing of Shiva
For Fullfill your all Ambition
For Marriage with choice able Girl
Blessing of Durga

67

YANTRA LIST

43
44
45
46
47
48
49
50
51
52
53
54
55
56
57
58
59
60
61
62
63
64

दस बर 2010

EFFECTS

NAVGRAHA SHANTI YANTRA
NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA
 SURYA YANTRA
 CHANDRA YANTRA
 MANGAL YANTRA
 BUDHA YANTRA
 GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA)
 SUKRA YANTRA
 SHANI YANTRA (COPER & STEEL)
 RAHU YANTRA
 KETU YANTRA
PITRU DOSH NIVARAN YANTRA
PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA
RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA
RAM YANTRA
RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA
ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA
SANKAT MOCHAN YANTRA
SANTAN GOPAL YANTRA
SANTAN PRAPTI YANTRA
SARASWATI YANTRA
SHIV YANTRA

For good effect of 9 Planets
For good effect of 9 Planets
Good effect of Sun
Good effect of Moon
Good effect of Mars
Good effect of Mercury
Good effect of Jyupiter
Good effect of Venus
Good effect of Saturn
Good effect of Rahu
Good effect of Ketu
For Ancestor Fault Ending
For Pregnancy Pain Ending
For Benefits of State & Central Gov
Blessing of Ram
Blessing of Riddhi-Siddhi
For Disease- Pain- Poverty Ending
For Trouble Ending
Blessing Lorg Krishana For child acquisition
For child acquisition
Blessing of Sawaswati (For Study & Education)
Blessing of Shiv
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth &
65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA)
Peace
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth
66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA
For Bad Dreams Ending
67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA
VAHAN
DURGHATNA
NASHAK
YANTRA
For Vehicle Accident Ending
68
VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All
69 MAHALAKSHAMI YANTRA)
Successes
For Bulding Defect Ending
70 VASTU YANTRA
VIDHYA
YASH
VIBHUTI
RAJ
SAMMAN
PRAD
BISHA
YANTRA
For Education- Fame- state Award Winning
71
Blessing of Lord Vishnu (Narayan)
72 VISHNU BISHA YANTRA
Attraction For office Purpose
73 VASI KARAN YANTRA
Attraction For Female
 MOHINI VASI KARAN YANTRA
74
Attraction For Husband
 PATI VASI KARAN YANTRA
75
Attraction For Wife
 PATNI VASI KARAN YANTRA
76
Attraction For Marriage Purpose
 VIVAH VASHI KARAN YANTRA
77
Yantra Available @:- Rs- 190, 280, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above…..

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(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)

दस बर 2010

68

GURUTVA KARYALAY
NAME OF GEM STONE

Emerald
(प ना)
Yellow Sapphire
(पुखराज)
Blue Sapphire
(नीलम)
White Sapphire
(सफ़ेद पुखराज)
Bangkok Black Blue(बकोक नीलम)
Ruby
(मा णक)
Ruby Berma
(बमा मा णक)
Speenal
(नरम मा णक/लालड )
Pearl
(मोित)
Red Coral (4 jrh rd)
(लाल मूंगा)
Red Coral (4 jrh ls mij) (लाल मूंगा)
White Coral
(सफ़ेद मूंगा)
Cat’s Eye
(लहसुिनया)
Cat’s Eye Orissa (उ डसा लहसुिनया)
Gomed
(गोमेद)
Gomed CLN
(िसलोनी गोमेद)
Zarakan
(जरकन)
Aquamarine
(बे ज)
Lolite
(नीली)
Turquoise
( फ़रोजा)
Golden Topaz
(सुनहला)
Real Topaz (उ डसा पुखराज/टोपज)
Blue Topaz
(नीला टोपज)
White Topaz
(सफ़ेद टोपज)
Amethyst
(कटे ला)
Opal
(उपल)
Garnet
(गारनेट)
Tourmaline
(तुमलीन)
Star Ruby
(सुय का त म ण)
Black Star
(काला टार)
Green Onyx
(ओने स)
Real Onyx
(ओने स)
Lapis
(लाजवत)
Moon Stone
(च का त म ण)
Rock Crystal
( फ़ टक)
Kidney Stone
(दाना फ़रं गी)
Tiger Eye
(टाइगर टोन)
Jade
(मरगच)
Sun Stone
(सन िसतारा)
Diamond
(ह रा)
(.05 to .20 Cent )

GENERAL

MEDIUM FINE

100.00
370.00
370.00
370.00
80.00
55.00
2800.00
300.00
30.00
55.00
90.00
15.00
18.00
210.00
15.00
300.00
150.00
190.00
50.00
15.00
15.00
60.00
60.00
50.00
15.00
30.00
30.00
120.00
45.00
10.00
09.00
60.00
15.00
12.00
09.00
09.00
03.00
12.00
12.00
50.00

500.00
900.00
900.00
900.00
150.00
190.00
3700.00
600.00
60.00
75.00
120.00
24.00
27.00
410.00
27.00
410.00
230.00
280.00
120.00
20.00
20.00
90.00
90.00
90.00
20.00
45.00
45.00
140.00
75.00
20.00
12.00
90.00
25.00
21.00
12.00
11.00
05.00
19.00
19.00
100.00

(Per Cent )

(Per Cent )

FINE

SUPER FINE

1200.00 1900.00
1500.00 2800.00
1500.00 2800.00
1500.00 2400.00
200.00
500.00
370.00
730.00
4500.00 10000.00
1200.00 2100.00
90.00
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90.00
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140.00
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(PerCent )

(Per Cent)

SPECIAL

2800.00 & above
4600.00 & above
4600.00 & above
4600.00 & above
1000.00 & above
1900.00 & above
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460.00 & above
(Per Cent )

Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus
*** Super fine & Special Quality Not Available Easily. We can try only after getting order
fortunately one or two pieces may be available if possible you can tack corres pondence about

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दस बर 2010

BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION
We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and Spiritual
Science in the modern context, across the world.
Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.
exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts

BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION
Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birth
details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate the
area of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mention
in the special comment box . We shall confirm before we set the appointment. Please choose from :

PHONE/ CHAT CONSULTATION
Consultation 30 Min.:
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Consultation 60 Min.:

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*While booking the appointment in Addvance

How Does it work Phone/Chat Consultation
This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized
discussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is of
consideration.
Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with a
confirmation whether the time is available for consultation or not.
 We send you a Phone Number at the designated time of the appointment
 We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment
 You would need to refer your Booking number before the chat is initiated
 Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.
 Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications
 We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is
sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.
 For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat
is recommended
 Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neck
In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for
properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate.
All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T.
Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can be
answered right away.
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GURUTVA KARYALAY
Call Us:- 91+9338213418, 91+9238328785.
Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com, chintan_n_joshi@yahoo.co.in,

दस बर 2010

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सूचना
 प का म कािशत सभी लेख प का के अिधकार के साथ ह आर

त ह।

 लेख कािशत होना का मतलब यह कतई नह ं क कायालय या संपादक भी इन वचारो से सहमत ह ।
 ना तक/ अ व ासु य
 प का म

मा पठन साम ी समझ सकते ह।

कािशत कसी भी नाम, थान या घटना का उ लेख यहां कसी भी य

वशेष या कसी भी थान या

घटना से कोई संबंध नह ं ह।

कािशत लेख

योितष, अंक

योितष, वा तु, मं , यं , तं , आ या मक

ान पर आधा रत होने के कारण

य द कसी के लेख, कसी भी नाम, थान या घटना का कसी के वा त वक जीवन से मेल होता ह तो यह मा
एक संयोग ह।

कािशत सभी लेख भारितय आ या मक शा
स यता अथवा

 अ य लेखको

ामा णकता पर कसी भी
ारा

से

े रत होकर िलये जाते ह। इस कारण इन वषयो क

कार क ज मेदार कायालय या संपादक क नह ं ह।

दान कये गये लेख/ योग क

ामा णकता एवं

भाव क ज मेदार कायालय या संपादक

क नह ं ह। और नाह ं लेखक के पते ठकाने के बारे म जानकार दे ने हे तु कायालय या संपादक कसी भी
कार से बा य ह।

योितष, अंक

योितष, वा तु, मं , यं , तं , आ या मक

व ास होना आव यक ह। कसी भी य
का अंितम िनणय
 पाठक

वशेष को कसी भी

ान पर आधा रत लेखो म पाठक का अपना
कार से इन वषयो म व ास करने ना करने

वयं का होगा।

ारा कसी भी

कार क आप ी

वीकाय नह ं होगी।

 हमारे ारा पो ट कये गये सभी लेख हमारे वष के अनुभव एवं अनुशंधान के आधार पर िलखे होते ह। हम कसी भी य
वशेष ारा योग कये जाने वाले मं - यं या अ य योग या उपायोक ज मेदार न हं लेते ह।
 यह ज मेदार मं -यं या अ य योग या उपायोको करने वाले य
मानदं ड , सामा जक , कानूनी िनयम के खलाफ कोई

क वयं क होगी। यो क इन वषयो म नैितक

य द नीजी

वाथ पूित हे तु

योग कता ह अथवा

योग के करने मे ु ट होने पर ितकूल प रणाम संभव ह।
 हमारे ारा पो ट कये गये सभी मं -यं या उपाय हमने सैकडोबार वयं पर एवं अ य हमारे बंधुगण पर योग कये ह
ज से हमे हर योग या मं -यं या उपायो ारा िन
 पाठक

क मांग पर एक ह लेखका पूनः

काशन से लाभ

त सफलता ा हई
ु ह।

काशन करने का अिधकार रखता ह। पाठक को एक लेख के पूनः

हो सकता ह।

 अिधक जानकार हे तु आप कायालय म संपक कर सकते ह।
(सभी ववादो केिलये केवल भुवने र यायालय ह मा य होगा।)

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गु

दस बर 2010

FREE
E CIRCULAR
योितष प का दस बर -2010

संपादक

िचंतन जोशी
संपक
गु

गु

योितष वभाग

व कायालय

92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
INDIA
फोन

91+9338213418, 91+9238328785
ईमेल
gurutva.karyalay@gmail.com,
gurutva_karyalay@yahoo.in,

वेब
http://gk.yolasite.com/
http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/

दस बर 2010

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हमारा उ े य
य आ मय
बंध/ु ब हन
जय गु दे व
जहाँ आधुिनक व ान समा हो जाता है । वहां आ या मक

ान ारं भ हो जाता है , भौितकता का आवरण ओढे य

जीवन म हताशा और िनराशा म बंध जाता है , और उसे अपने जीवन म गितशील होने के िलए माग ा नह ं हो पाता यो क
भावनाए ह भवसागर है , जसमे मनु य क सफलता और असफलता िन हत है । उसे पाने और समजने का साथक यास ह

े कर

सफलता है । सफलता को ा करना आप का भा य ह नह ं अिधकार है । ईसी िलये हमार शुभ कामना सदै व आप के साथ है । आप
अपने काय-उ े य एवं अनुकूलता हे तु यं ,

हर

एवं उपर

और दलभ
मं श

योग करे जो १००% फलदायक हो। ईसी िलये हमारा उ े य यह ं हे क शा ो
ाण- ित त पूण चैत य यु

सभी कार के य

सूय क

से पूण ाण- ित त िचज व तु का हमशा
विध- वधान से विश तेज वी मं ो ारा िस

- कवच एवं शुभ फलदायी ह र एवं उपर आपके घर तक पहोचाने का है ।

करणे उस घर म वेश करापाती है ।

जीस घर के खड़क दरवाजे खुले ह ।

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
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(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)

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