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एक ििन मेरे मै ने

झुंझला कर पुछा,
आििर तम
ु कयो िलिते हो कििता
आज जब पेट भरना ही एक ििराट पश है ,
तब जठरानल के सनमुि िनरर थक
र है तम
ु हारी कििता
बताओ कया िकसी का पेट भर पाई है तम
ु हारी कििता।
और तो और महज कल और आज मे कया,
कुछ भी पिरितन
र ला पायी है तम
ु हारी कििता।
कया बनिक
ु या परचम बन,
सरहि पर िशुमनो से जुझ पायी है तम
ु हारी कििता।
जब औकेषा के सामने ही कभी
नहीं िटक पाई तम
ु हारी कििता।
तब आज रीिमकस की चकाचौध मे
िबलकुल बेमानी हो चुकी है , तम
ु हारी कििता।
जब इन सबसे हो िािकफ़,
तो िफ़र आििरकार कयो िलिते हो कििता।
तभी मानस पर मेरे कौध गई कुरकेत की कििता
िजसने परचम बन अजुन
र को कात धमर का जान ििलाया,
और महाभारत को भी सततुय बना गई थी िही कििता।
िसफ़र आज और कल का पिरित
र न ही नहीं
आज के गणतनत की आधारििला मे भी थी
रसो और िालटे यर की कििता।
भारत मे आजािी की अनहि गूंज मे भी,
पितधििनत थी बिकंम चनद की ही एक कििता।
िबिो मे अगर सतय हो तो
िसफ़र एक इकाई ही नहीं
पूरे मानि जगत का पेट भर सकती है एक कििता।
िजस ितिमर के पथम पहर है Orchestra ि Remix,
उस ितिमर को भेिने िाली
उषा की पथम िकरण है कििता।
जब किि और कावय पात एकातम होते है ,
तब िबिो मे िचत, भाि एिं संगीत की ितिेणी बहती है
यह ितिेणी जब कागज पर उतरती है ,
तब िह होती है कििता।
आिि मे था िबि, और िबि मे था ईशर ।
इसीिलये ईशर सी सिि
र ििमान है कििता।
मैने, मेरे िेताल रपी मै को समझाया
हां इसी महाििि को साधने हे तू
िनरनतर मै िलिता हूं कििता।