ूयात यं यकार शरद जोशी के कुछ यं य लेख

अनुबम
पानी क समःया
चुनाव गीितका:सरलाथ$
अथ ौी गणेशाय नम:
यह बंगला )फ+म
एक भूतपूव$ मंऽी से मुलाकात
शरद जोशी के कमलमुख से ‘आलोचना’
शरद जोशी के कमलमुख के कुछ पठनीय पऽ

पानी क समःया
वे लोग जो ट3वी दे खते ह4 , अ5छ6 तरह जानते ह4 )क हमारे ूधानमंऽी वाःत8वकता से
सीधा सा9ा:कार करते ह4 वे ःवयं उस जगह जाते ह4 और पूछकर, बातचीत कर पता
लगाते ह4 )क स5चाई >या है यह उनक काम करने क शैली है ज़ैसे कोई मुयमंऽी उनसे
कहे )क साहब, हमारे राAय मB गर3बी है , तो ूधानमंऽी उसक बात पर यC ह3 8वDास नह3ं
कर लेते वे वहां जाते ह4 , टे ली8वजन वालC को साथ लेकर जाते ह4 और गर3बC को पूछते ह4
: '' सुना, आपके गांव मB गर3बी है ?'' ''जी साब !'' '')कतने गर3ब ह4 गांव मB ?'' ''जी, सभी
गर3ब ह4 '' ''आपमB से Aयादा गर3ब )कतने है । ?'' गांव वाले एक -दसरे
का मुंह दे खने लगते

है ।, ''जी सभी Aयादा गर3ब है ,'' -एक सोशल वक$र कहता है '' उHहB जवाब दे ने द3Iजए, आप
बीच मB मत बोिलए'' ''इस गांव क पॉLयूलेशन >या है ? )कतने लोग रहते ह4 इस गांव मB
?'', ूधानमंऽी कले>टर से पूछते ह4 ? ''जी, कोई सMर फेिमलीज ह4 ,'' कले>टर कहता है ''आय
वांट ए>जे>ट )फगस$ '' ''िस>ःट3 नाइन पॉइं ट फाइव'' ''हंू ! ये पॉइं ट फाइव कैसे ?'' ''जी, एक
फैिमली मB वाइफ यह3ं है , हःबBड शहर चला गया है ,'' ''हंू !'' तो इस तरह हमारे ूधानमंऽी
ःवयं वहां जाते है ओर वाःत8वकता से सा9ा:कार करते ह4 अथा$त बातचीत से स5चाई का
पता लगाते ह4 जैसे एक गांव मB पानी क कमी है ूधानमंऽी ःवयं वहां जाएंगे और
स5चाई का पता लगाएंगे वाता$लाप कुछ इस ूकार का होगा : '' आप लोग पानी पीते ह4
?'' '' जी हां हजू
ु र, पीते ह4 '' ''इस गांव मB )कतने लोग पानी पीते ह4 ?'' '' जी, सब पीते ह4 Lयास
लगती है हजू
ु र, तो पीना पड़ता है '' '' कहां से िमलता है पानी ? लाते कहां से ह4 ?'' ''नद3 से
लाते ह4 !'' '' नल नह3ं है ?'' '' जी, नह3ं है '' '' हंू ! नद3 यहां से )कतनी दरू है ?'' ''थोड़3 दरू है ''
'' कैसे लाते ह4 पानी ?'' '' मटक मB भरकर लाते ह4 '' '' मटक घर से ले जाते ह4 या नद3 पर
िमल जाती है ?'' '' जी, घर से लेकर जाना पड़ता है '' ''आई सी! नद3 पर मट)कयC का कोई
इं तजाम नह3ं रहता तो आप जब मटक लेकर नद3 पर जाते ह4 तब नद3 मB पानी िमल
जाता है ? या मुIँकल पड़ती है ?'' ''पहले िमल जाता था, आजकल मुIँकल पड़ती है '' ''
>या मुIँकल पड़ती है ? एक नद3 मB )कतनी मटक पानी होता है ?'' ''काफ मटक होता
है '' ''आइ वांट टू सी ए मटक ! ए>जे>ट >या साइज होती है उसक ?,'' ूधानमंऽी ने कहा
फौरन एक गर3ब के घर से एक मटक लाकर ूधानमंऽी को )दखाई गई ''ये िमTट3 से
बनती है ?'' ''जी!'' '' हम िमTट3 इं पोट$ करते ह4 या यह3 क है ?'' ''जी, लोकल िमTट3 है '' ''
गुड उस एक मटक मB )कतने बकेट पानी आ जाता है ? इसमB )कतनी बा+ट3 पानी आ
जाता है ?'' ''कोई डे ढ़ बा+ट3 आता है '' '' आप बड़3 मटक लेकर >यC नह3ं जाते? Aयादा पानी
आ सकता है या सभी मट)कयां एक साइज क होती ह4 ?'' ''जी, बड़3 भी होती ह4 , मगर
उठाने मB भार3 पड़ती ह4 '' '' एक बार मB )कतनी मटक उठाते है । ?'' '' जी, एक उठाते ह4 !''

मगर उHहB इतना समझ आ रहा था )क ूधानमंऽी उनक पानी क समःया के हल को लेकर बहत ु िचंितत ह4 और वे अफसरC से इस बारे मB बात कर रहे ह4 ूधानमंऽी ने )फर गांव के लोगC से पूछा ''जब नद3 से पानी नह3ं िमलता तो आप वहां मटक लेकर >यC जाते ह4 ?'' ''हम कुएं पर जाते ह4 साब . गमV मB एटमॉःफेWरक टB परे चर बढ़ जाता है . सभी लगे रहते ह4 '' ''नद3 से चौबीसC घंटे पानी िमलता है या उसका )फ>स टाइम है . जो गांवC के पास मB बहती ह4 वी कैन सच$ आउट दोज ूॉ]लम एWरआज'' ''सर. ऐसा ह3 कुछ हो जाए'' '' नो सर. Iजससे छाया रहे ? पानी पर धूप न पड़े . इतने बजे से इतने बजे तक ?'' ''जब िमलता है . जो नद3 के ऊपर लगा दB .'' आईएएस क़ले>टर जवाब दे ता है ''कांट वी है व सम शेड ऑर समिथंग. उसमB ूैI>टकल )ड)फक+ट3ज ह4 '' '' >या )ड)फक+ट3ज ह4 ?'' '' >या है सर )क एक तो नद3 का पाट बहत ु चौड़ा होता है उसको कवर करना बहत ू . नद3 के आसपास क सॉइल ु मुIँकल है दसरे कंड3शन. खुद उठाते ह4 '' '' )कतने आदमी लगे ह4 इस काम पर ?'' ''जी. ूधानमंऽी ने पूछा ''जी. जहां से िमल जाए. जो इस अफसर के ूधानमंऽी से Aयादा ू बात कर लेने क वजह से परे शान हो गया था. वह3ं का अ5छा लगता है '' ''नद3 के पानी मB थोड़ा कचड़ा होता है साहब!'' '')फर आप >या करते ह4 ? नद3 को छान लेते ह4 ?'' ''पूर3 नद3 तो नह3ं छानते साब हम ज़ो पानी लेते है ।. '' ये नद3 सूख >यC जाती है ?'' '' ये सर.'' ूधानमंऽी ने अपनी बात को . रे ती और कचड़ के कारण ऐसी होती है )क उसमB 8पलस$ खड़े करना बड़ा )ड)फक+ट है '' ''आइ सी !'' तब दसरे अफसर ने. जब नद3 पर नह3ं होता ?'' ''जी!'' '' एक कुएं से )कतना पानी िमल जाता है ? पूरे गांव को िमल जाता है ?'' ''काफ िमल जाता है '' दसरे ने कहा '' आप लोगC को कौन-सा पानी अ5छा लगता है ? नद3 ू का पानी अ5छा लगता है या कुएं का ?''.''पानी से भर3 हई से उठवाते ह4 ू ु या खाली ?'' ''पानी से भर3 हई ु '' '' आप खुद उठाते या दसरे ?'' ''जी. तब )कतने घंटे िमलता है ?'' '' तब नह3ं िमलता'' ''एक -दो घंटे भी नह3ं ?'' '' नह3ं!'' ूधानमंऽी का चेहरा गंभीर हो जाता है वे सोचने लगते ह4 )फर कले>टर से पूछते ह4 . पर इसके अलावा और >या->या िमलता है ?. इट इज नॉट पॉिसबल!'' '' >यC ? वी कैन टॉक टू व+ड$ ब4क अबाउट इट सार3 न)दयC पर शेड लगा )दए जाएं ख़ासकर उन न)दयC पर. यह तो समझ नह3ं पा रहे थे. '' दसर3 यह है सर )क अगर हम नद3 को कवर कर दB गे तो बरसात मB जो पानी नद3 मB िगरता है . वो छान लेते ह4 '' ''बाक का छोड़ दे ते ह4 ?'' ''जी साहब !'' ''और नद3 से >या->या िमलता है पानी के अलावा ?'' सब एक-दसरे को दे खने लगे )क़सी को जवाब नह3ं सूझता ''नद3 से पानी ू िमलता है . तब चौबीसC घंटे िमलता है '' '' आजकल )कतने घंटे िमलता है ?'' ''आजकल नद3 सूख गई है '' '' जब सूख जाती है . और ःप^ करते हए ूॉ]लम ू ु कहा. उससे सूख जाती है . वह नह3ं िगर सकेगा'' ूधानमंऽी ने गद$ न )हलाई वे ूॉ]लम समझ गए थे सामने खड़े Lयासे गांव वाले उनमB >या बातB हो रह3 ह4 . नद3 पर नह3ं जाते !'' ''कुएं पर पानी िमल जाता है .

कोई बांध नह3ं है '' ''इज इज सरूाइIजंग आ`टर फोटa ईयस$ ऑफ ृडम. हम करB गे. सब हम पूर3 करB गे वो हमB बड़3 ज+द3 करना है हमB बताया गया )क यहां पर जो मट)कयां आप लोग उठाते ह4 वे िमTट3 क बनी होती ह4 उस बारे मB हमB कुछ करना है दे श मB पानी-ह3 -ह3 पानी कर दे ना है वो चाहे नद3 का हो या बरसात . '' हमने दे खा और हम दे खBगे )क आपके गांवC मB पानी क समःया है लोगC को. >यC)क उससे 8बजली नह3ं बनेगी'' ूधानमंऽी कुछ है क़ंLयूटर को फड करना पड़े गा )फ़र वे लोगC क तरफ सोचने लगे मामला उलझा हआ ु घूमB '')कतने कुएं ह4 आपके गांव मB ?'' ''जी. नद3 पर एक बांध नह3ं है !'' . कोई साधन नह3ं.दोहराते हए ु पूछा. एक 8वराट जनसभा को संबोिधत करते हए ु ूधानमंऽी ने कहा. ूधानमंऽी ने नद3 पर था'' मुयमंऽी ने कहा ‘म4 आपसे इस नद3 का पूछ रहा पूछा ''जी नह3ं. पैदल जाना पड़ता है '' ूधानमंऽी के चेहरे पर पीड़ा क रे खाएं उभर आई उHहCने अफसरC से पूछा )क >या इन दो गांवC के बीच हम बस स8व$स नह3ं ूोवाइड कर सकते. Iजसक िसफाWरशB अमाHय कर द3 गई म4ने कांमेस अिधवेशन मB भी यह सवाल उठाया था ौीमान'' ''कमीशन इस नद3 पर बांध बनाने के िलए था ?''. वह दसर3 ू हंू !'' ''Lलािनंग कमीशन कहता है )क Iजन न)दयC मB पूरे वष$ पानी नह3ं रहता. खासकर म)हलाओं को दसरे गांवC से पानी लाना पड़ता है . बस. इसिलए ु बांध बनाना )फजूल होगा'' ''हम इतना भी पानी अरB ज नह3ं कर सकते )क एक बांध बनाया जा सके ? ूधानमंऽी ने कहा अफसरC ने शरम से )फर िसर झुका िलया ूधानमंऽी ने मुयमंऽी क ओर दे खा.जैसे बस चलाने क या बांध क. जहां पानी नह3ं है हम दे खBगे )क आप लोगC को मटक नह3ं उठानी पड़े या तो गांव नद3 के पास ले जाएं या वे न)दयां गांव के पास लाई जाएं ज़ो भी जhर3 होगा. नह3ं िमलता'' ''बांध िमलता है नद3 पर ?'' ''जी. ूधानमंऽी ने अफसरC से कहा अफसरC ने शरम से िसर झुका िलया )फ़र एक अफसर ने )हdमत करके कहा. टै >सी?'' '' जी नह3ं. थोड़ा खांसे ओर )फर बोले. एक भी नह3ं है !'' '')फर आप मटक लेकर कहां जाते ह4 ?'' ''पास वाले गांव मB'' ''वहां कुआं है ?'' ''पानी िमल जाता है ?'' ''िमल जाता है . ''म4ने आपसे )द+ली मB भी िनवेदन )कया था ौीमान )क नद3 के पानी को लेकर अंतरा$Aयीय )डःLयूट है 1967 मB इस समःया पर एक हाई पावर कमीशन बैठा था. मगर भीड़ बहत ु पड़ती है '' ''वो गांव )कतनी दरू है ?'' '' दो मील दरू है '' '' लौटने पर भी दो मील पड़ता है ? ''जी. सरकार करे गी और भी समःया. उतना ह3 पड़ता है '' '' जाने के िलए कोई साधन है .मटक मB भारकर ू हमने दे खा )क पानी िसर पर उठाकर लाना पड़ता है हम चाहते ह4 )क हमारे दे श मB हर गांव के पास एक नद3 हो ख़ासकर उन गांवC के पास. जो साथ ह3 पीछे 'पीछे चल रहे थे मुयमंऽी ने अपनी टोपी ठ6क क. '' सर. वहां हम बांध बनाने को 8ूआWरट3 नह3ं दे सकते. िस>ःथ Lलान मB नद3 पर बांध बनाने का ूपोजल था'' '')फर >या हआ ?'' ''सवe करने पर पता चला )क नद3 मB पानी नह3ं है . पानी लाने के िलए उस )दन. ''पुल िमलता है नद3 पर ? '' जी.

करB हमB दे श को आगे ले जाना है इस पर एक युवक. िनंठु र पीएम से हमारा सुख दे खा न गया। उसने हमB समय बीतने से पहले ह3 िनगोड़3 जनता मB पठवा )दया। हाय! अभी तो ःवाथl के चकवा-चकवी जी-भर िमल नह3ं पाए थे। िनजी सुखC क कमल जोड़3 से ॅ^ पवन मधुर छे ड़छाड़ कर ह3 रहा था। अभी-अभी तो यह सेवाभावी तन डनलप-8पलो के मनोहर पाश मB िसमटा ह3 था )क समय के िनद$ यी मुगe ने बांग दे कर कहा )क चुनाव आ गए! क8व कहते ह4 )क एक और दलबदल करने क इ5छा नेता के nदय मB शेष ह3 थी )क हाय दे खो यह कैसी अघट घट3। बेचारे >या करB कुछ समझ नह3ं पड़ रहा। (2) अय सखी . जो अगले चुनाव मB कांमेस के )टकट का उdमीदवार था. वह चतुर नट Iजसने फुसलाकर हमारा वोट हर िलया। आज मुझे सुबह क वेला वह )फर )दखाई )दया। म4 नहाई हई ु आंगन मB थी। िनचोड़ने पर मेरे बालC से जलधारा यC झर रह3 थी मानो मोती झर रहे हC। वt भीगे हए ु थे। म4 .राजीव गांधी क जय इस पर सबने 'जय' कहा और ूधानमंऽी का कारवां दसरे गांव क समःया समझने ू के िलए आगे बढ़ गया . आज मुझे वह )फर )दखाई )दया जो 8पछली बेर गिलयC मB आकर भाषण दे गया ? मीठ6-मीठ6 बातC का धनी .का या समुि का हम चाहते ह4 और हम कोिशश करB गे )क आपके यहां बरसात ज+द3 आए या नद3 मB पानी ज+द3 आए या जैसा भी हो सके हम ब4कC से बात करB गे )क मट)कयC के सवाल पर Iजतना कर सकते ह4 . चुनाव गीितका:सरलाथ$ (1) इस बार चुनाव ज+द3 लग गए। >या करB . आज चहंु )दिश यह शोर कैसा ? बकुलC के समान Dेत पWरधान धारे काय$कता$ जनC क पांत कहां ूयाण कर रह3 है ? रिसक जन आज रिसकता छोड़ राजनीित ं ार अब रसराज नह3ं रहा ? फेWरयां लगाकर तpIणयC के क चचा$ मB काहे मगन ह4 ? >या ौृग सौHदय$ का अHदाज लगाने वाले वे ॅमरवृHद आज उHहB नॆ ःवरC मB ' बहनजी ' के आदरसूचक श]दC मB >यC सdबोिधत कर रहे ह4 ? सदा सहमत होने वाली ूौढ़ाएं भी आज मािननी मु धाओं के समान hठ6 हई ु >यC लग रह3 ह4 ? मेरा ूीतम आज इतनी सुबह मुझे सोता छोड़ नारC से मIrडत पोःटरC का बrडल बगल मB दाबे कहां चल )दया ? क8व कहते ह4 )क दे श मB अकःमात चुनाव आ जाने से पुर क सुHदWरयां परःपर Iजsासा कर वाःत8वकता जानने को बड़3 आकुल ह4 । (3) सुन सखी . जोर से िच+लाया.

भCगे गुंजायमान थे . अस:य >या है . यह इस चुनाव ने )फर िसv कर )दया . वह अ:यHत ' िनराला ' था : बांधो न नाव इस ठांव बHधु . चुनाव क यह3 शोभा है । नगर के गुrडे उस समय काय$कता$ बन गए थे . ूात: होने पर म4 चला जाऊंगा। ितस पर उस अफसर िमऽ ने असहमत होकर जो कहा .ु )ठठरती धूप मB बैठ6 हई ु थी। >या कहंू . गृहC . वनC . इसे भा य कहंू या दभा$ ु य )क चुनाव आया और उस शठ के )कए 8वगत श]दC क ःमृितयां मन मB )फर ताजा हो गy . पदऽाण िशरtाण हो रहे थे अथा$त जूते चल रहे थे। दे खो . चुनाव क बिलहार3 ह4 IजसमB िमऽ शऽु सम और शऽु िमऽ सम यवहार करने लग जाते ह4 । (6) उस )दन वह छिलया मेरे xार भी आया था। म4 तन को अंगराग लगा नाना आभूषणC से ःवयं को सजा रह3 थी। लdपट ने तभी कुrड3 खटखटाई। म4ने xार पर ह3 उससे वाता$ क। उस समय तेल से सनी हई ु उसक घुंघराली लटB तथा तdबाकू के बीड़े चबाते हए ु ँयाममुख मB दHत प8uयां अलग ह3 शोभा दे रह3 थीं। चुनाव को wयान मB रख उसने कुतe मB सूराख कर िलए थे और उन पर पैबंद लगा अपनी अजब सज-धज बनाई थी। उस )दन तो वह बड़े जनवाद3 ठाठ मB था। हे सखी . तभी उस िनल$Aज ने मुझे दे खा और म4ने उसे। वह ललचाए नेऽC से मुझे दे ख रहा था मानो मुझसे कुछ चाह रहा हो। क8व कहते ह4 )क कौन नह3ं जानता )क चुनाव क वेला मB सुHदWरयां वोट माऽ रह जाती ह4 । चतुर नट उनसे बस वह3 मांगता है । (4) नारC ने आकाश छू रखा था . इसका भेद करना गुनीजन के िलए भी क)ठन था। क8व कहते ह4 ऐसी गHदगी मB 8वचरण करना और सफल होना उसी छबीले का काम है जो हमारे गीतC का नायक है । चुनाव hपी पंक का वह3 पंकज मेरा आराwय है । (5) आज तो 8विचऽ ह3 ूसंग हआ। नेता ने अपने िमऽC को एक कpण कथा सुनाई। हआ ु ु यह है )क सकल )दवस चुनाव-ूसार मB यःत रहने के उपराHत चुनाव का वह उdमीदवार एक अफसर िमऽ के आवास पर पहंु चा और यह अनुनय करने लगा )क मुझे रा8ऽ मB अपने यहां 8वौाम करने दB . ःमगलरC का :याग अित सराहनीय था। चोर-बाजार के यापार3 ूजातHऽ के दािय:वC के ूित जागhक हो गए थे। य8u समाज का ह3 अंग है . चलते ह4 इधर चुनाव बंधु उसने नेता को xार से 8बना स:कार ह3 इनकार कर )दया। नेता ने यथा भरे ःवरC मB िमऽC को बताया )क यह वह3 अफसर था Iजसके ूमोशनाथ$ म4ने कै8बनेट पर जोर डाला और 8वगत वषl मB तीन बार Iजसके तबादले pकवाए। क8व कहते ह4 . जब लोगC ने अपनी जीपB तथा अHय वाहन राजनीितक दलC को दे )दए। बागC . IजHहB म4 सचमुच ह3 भुला चुक थी। . गिलयC और चौमुहानC पर खुलेआम झूठ बका जा रहा था। स:य >या है .

पर उसे पाने को उ:सुक ॅमर अनेक। उस )दन वह मुझे पोिलंग बूथ पर आने का संकेत कर गया था। मुझे वह अपना िच{ भी दे गया था . 8पछली बार भी तुम बहत ु 8वनय कर वोट ले गए थे। अनेक ूकार से मन को ूसHन करनेवाले वचन बोलने वाले तुम अवसर से ूेWरत िसvाHत रचने मB ूवीण हो अथा$त जैसा मौका दे खते हो वैसी बात करते हो। तुdहार3 शैली जनता को मो)हत करती है . तुम यहां से ज+द3 Iखसको। दया करो . कह रहा था )क तुम जाकर अपनी-अपनी जाित से मुझे वोट दे ने के िलए संपक$ साधो और ूचार करो )क म4 जाितवाद से ऊपर हंू । पद मB नेता के चWरऽ का 8वरोधाभास दशा$या गया है । शेष पं8uयां सरल ह4 । (10) अब वह अपनी बड़ा भूिम को छोड़ जा रहा है । वह चुनाव जीत गया है और यथ$ के मोहC से उसने मु8u ूा} कर ली है । उसने जनता से )कए अपने वादे यह3ं क गHद3 नािलयC मB फBक )दए ह4 । अपने नारC क ःमृित माऽ से वह ऊब जाता है । अब अपने पोःटरC क ओर वह हं सकर उपे9ा से अवलोकता है . Iजनके नाम शमा$-वमा$ थे . पर जहां तक मेरा ूz है . हमार3 कमलनयनC वाली नाियका ने तो उसी छली को वोट )दया Iजसका कुंज-गिलयC मB भार3 ूचार था। (9) रात-रात भर हई ु जगाई . अHय )दशा सदय अथा$त हे ःवाथV nदय वाले नेता . दहराओ रह-रह यह याित। ु ता:पय$ ःप^ है । चुनाव-काल मB रात-भर जगने से नेता क आंखB लाल हो गई ह4 अथा$त वह बोिधत है । उस )दन िमऽC के साथ बैठा यह3 सोच रहा था )क )कस भांित जनता को चुनाव हे तु फुसलाकर 8वजय ूा} कर ली जाए। वह काय$कता$ओं से . उसके घोषणा-पऽ माग$ मB 8बखरे हए ु ह4 IजHहB र~दता हआ वह राजधानी लौट रहा है । ु . अवसर-ूेWरत िसvाHत रचन ु तब तकनीक जनमोहन . सखा स)हत रत सोचन जाओ शमा$ .क8व कहते ह4 )क राजनीित के रिसया ने गिलयC मB ऐसी धूम मचाई थी )क पुर क विनताएं च)कत थीं अथा$त कुछ समझ नह3ं पा रह3ं थीं। (7) बहत ु -बहत ु कर अनुनय . शोधो अपनी-अपनी जाित म4 हंू जाितवाद से ऊपर . कह3ं और जाओ। (8) अर3 सखी . गमन करो स:वर इस बार . जाओ वमा$ . इस चुनाव ने मेरे ूेिमयC क संया बढ़ा द3। दे ख नह3ं रह3 थी उन )दनC गिलयC मB )कतने च>कर काट रहे थे। हर कोई आकर मुझसे मेरा वोट मांग रहा था। वोट hपी कमल एक था . Iजसे म4ने कलेजे मB िछपाकर रख िलया था। क8व कहता है )क चुनाव के लडै ़या )कतनी ह3 िचरौर3 करB . पहले भी ले गए थे वोट ओ ःवाथ$ nदय बह8वध चाटु वचन . लाल-लाल भये लोचन कैसे भरमाएं वोटर को .

जनता hपी नाियका के मन को Wरझाने मB ूवीण वह मेरे गीतC का नायक ह3 मेरा स5चा सुखदाता है . पर उन िनु र ने इस ओर तिनक भर न झांका। उसे मत दे ने के अितWरu पता नह3ं मुझे कौन-सा अपराध हआ जो मुझसे ु दरू हो गया। क8व कहते ह4 )क Iजसके कम$ दे ख लAजा ःवयं लIAजत हो . Iजसके xार अपने भuC और ु चमचC के िलए सदै व खुले रहते ह4 और जो सकल 8वरोिधयC को उHमूिलत करने का ूण िलए है . जो मंऽी बनते ह3 मेरे क^ हरे गा और मुझे ऊंचा पद )दलाएगा। राधा hपी जनता को 8बलखता छोड़ . वह िनद$ यी चला गया। इस बार भी लगता है मानो मुझे छला गया। मेरे हाथC पर लगा मतदान के समय का काल िच{ िमटा भी नह3ं था )क वोट के उस लोभी ने मुझे भुला )दया। वन कानन मB उसके सरस नारC क अनुगूंज अभी शेष नह3ं हई ु थी )क अनेक गािलयC के साथ ःमरण )कए जाने वाले नेता ने यह ःथल छोड़ )दया। आज म4 छAजे पर खड़3 उसक ूती9ा कर रह3 थी . आदश$वा)दयC मB परम आदश$ के hप मB शोिभत वह चतुर बहh8पया ह3 अब मेरे ताप हरे गा। उसी बहरंु गी नेता को . बात गणेश जी से शुh क जाए. सMा hपी मकरHद के परम लोभी .क8व कहते ह4 )क चुनाव तो चार )दन क चांदनी होता है . तू चमचC से िघरा रहने पर कह3ं यह न भूल जाना )क म4 सदा तेर3 ह3 मूरत wयान मB रख कलम उठाता हंू । अथ ौी गणेशाय नम: अथ ौी गणेशाय नम:. उसको ओ लाजवHती तू )कस 8विध लाएगी। (12) धूतl मB परम धूत$ . सMा hपी pI>मणी मB खोए हए ु ओ रमणीय . IजसमB जनता चाहे इतरा ले मगर बाद मB तो वह3 अHधकार होता है । (11) हाय सखी . वह धीरे -धीरे चूहे तक पहँु च जाएगी। या चूहे से आरं भ करB और वह ौी गणेश तक पहँु चे। या पढ़ने-िलखने क चचा$ . म4ने ःवयं को सम8प$त कर )दया है । क8व कहता है मुझ अबल मB इतनी साम$€य कहां )क म4 उस नेता को जनमो)हनी शोभा और फलदायी कमl का बखान कhं। मुझे तो केवल इतना sान है )क ऐसे चतुर राजनीितsC क वHदना ह3 क8व के जीवन को सुखी बनाती है । चुनाव hपी युv के 8वजेता .

तो लेखक िलखBगे )कस 8वषय पर? उHहB लगा. चूहा या ौी गणेश? भई. गणेश जी डाय)टं ग पर भरोसा नह3ं करते. खाने-पीने क बात मत )कया करो। भूखे रहना सीखो। बड़ा ऊँचा मज़ाक-बोध है ौी गणेश जी का (अ5छे लेखकC मB रहता है ) चूहा सुन मुःकुराता है । जानता है . अब िनरं तर बैठे िलखते रहने से शर3र मB भर3पन तो आ ह3 जाता है । चूहे को सा)ह:य से >या करना। उसे चा)हए अनाज के दाने। कुतरे .क जाए। ौी गणेश sान और बु8v के दे वता ह4 । इस कारण सदै व अ+पमत मB रहते हCगे. चूहC के कारण दे श का )कतना अनाज बरबाद होता है । चूहा शऽु है । दे श के गोदामC मB घुसा चोर है । हमारे उ:पादन का एक बड़ा ूितशत चूहC के पेट मB चला जाता है । चूहे से अनाज क र9ा हमार3 रा†ीय समःया है । कभी 8वचार )कया अपने इस पर? बड़े गणेश-भu बनते ह4 । . वे सा)ह:य मB बांित-बांित क उछाल भरते रहते ह4 । चूहा असल गणेश-भu है । रा†ीय ‡8^कोण से सोिचए। पता है आपको. बात वह3 होगी। ग़र3बी हटाने क बात करने वाले बातB कहते रहे . पेट भरने को हर गणेश-भu को चा)हए। भूखे भजन न होई गणेशा। या जो भी हो। सा)ह:य से पैसा कमाने का घनघोर 8वरोध वे ह3 करते ह4 . ये सा)ह:य वाले लोग 'ग़र3बी हटाओ' के Iख़लाफ़ ह4 । तो इस पर उतर आए )क चलो सा)ह:य हटाओ। वह नह3ं हट सकता। ौी गणेश से चालू हआ है । वे ह3 उसके आ)द दे वता ह4 । 'ऋ8v-िस8v' ु आसपास रहती ह4 . इस दे श मB कुल िमलाकर 8वषय एक ह3 होता है ग़र3बी। सारे 8वषय उसी से जHम लेते ह4 । क8वता कर लो या उपHयास. कुछ खाने को द3Iजए। गणेश जी सूँड पर हाथ फेर गंभीरता से कहते ह4 . Iजनक ले>चररिशप प>क हो गई और वेतन नए बढ़े हए ु मेड़ मB िमल रहा है । जो अफ़सर ह4 . िलखते ह4 . पर ह4 तो दे वता। सबसे पहले वे ह3 पूजे जाते ह4 । आIख़र मB वे ह3 पानी मB उतारे जाते ह4 । पढ़ने-िलखने क चचा$ को छोड़ आप ौी गणेश क कथा पर आ सकते ह4 । 8वषय >या है . खुश रहे । सामाHय जन क आवँयकता उसक आवँयकता है । खाने. कुतर खा। पर ऐसा ूाय: नह3ं होता। 'िनज क8वM' के फका न लगने का िनयम गणेश जी पर भी उतना ह3 लागू होता है । चूहा परे शान रहता है । महाराज. IजHहB पBशन क सु8वधा है . तबीयत से खाते ह4 . बीच मB लेखन का काम चलता है । चूहा पैरC के पास बैठा रहता है । रचना ख़राब हई ु )क गणेश जी महाराज उसे चूहे को दे दे ते ह4 । ले भई. लेखक के पWरवार के सदःय हो. पर यह न सोचा )क ग़र3बी हट गई.

बाक को छोड़ दB गे भूखा मरने को। उनके नाम ह3 नह3ं िलखBगे दानC पर। जैसे दानC पर नाम नह3ं. लगन और Hयाय क ज़hरत होती है । सा)ह:य वालC को यह काम स~प दो. दाने-दाने पर नाम िलखने का। बस. सब चूहे के। चूहा गोदामC मB घुसता है । Iजन दानC पर नाम नह3ं होते. पर घुड़क )दया गणेशजी ने। चुप रहो. लगाई जुबान ताल से और कह )दया। Hयाय ःथा8पत कIजए. इतने दानC पर नाम िलखना। यह काम कौन कर सकता है ? गणेश जी. तो दाना घर पहँु च जाएगा. हमारा भी wयान रखना ूभु. ज़रा सुिनए। आपको पता है . एयादा चू-ं चूं मत करो। नाम िलख-िलख ौी गणेश यC ह3 थके रहते ह4 . अनाज के छोटे -छोटे दाने को लेकर भी सह3 है । हर दाने पर नाम िलखा रहता है खाने वाले का। कुछ दे र पहले जो परांठा म4ने अचार से लगाकर खाया था. गणेश जी महाराज! दाने-दाने पर मानव का नाम िलखने का क^ तो आप कर ह3 रहे ह4 । थोड़3 कृ पा और करो। नेक घर का पता और डाल दो नाम के साथ. दानC पर नाम िलखना ता)क Iजसका जो दाना हो. उHहB कुतर कर खाता रहता है । गणेश-म)हमा। एक )दन चूहा कहने लगा. उसका नाम भूल गए। ‡ँय यC होता है । गणेश जी बैठे ह4 ऊपर। तेज़ी से दानC पर नाम िलखने मB लगे ह4 । अिधाता होने के कारण उHहB पता है . ऐसे जगह-जगह तो नह3ं भटकBगे। अपने जाने चूहा बड़3 समाजवाद3 बात कह रहा था. अपना नाम िलखा दाना तलाशते। भोपाल से बंबई और )द+ली तलक। घर का पता िलखा होगा. अपने यार-दोःतC के नाम िलखBगे. वह उस शउस को िमल जाए। काम जार3 है । चूहा नीचे बैठा है । बीच-बीच मB गुहार लगाता है . कहाँ >या उ:पHन होगा। उनका काम है . सा)ह:य का इितहास िलखना हो. ऐसा न हो )क चूहC को भूल जाओ। इस पर गणेश जी मन ह3 मन मुःकराते ह4 । उनके दाँत )दखाने के और ह4 . ऊपर से पता भी िलखने बैठो। चूहे का >या. मुःकराने के और। )फर कुछ दानC पर नाम िलखना छोड़ दे ते ह4 . तो बेचारC को इतनी परे शानी नह3ं उठानी पड़े गी। मारे -मारे )फरते ह4 .8वचार )कया। यC ह3 गणेश-भu नह3ं बन गए। समःया पर 8वचार करना हमारा पुराना मज़$ है । हा-हा-हा. दोनC का ठ6क-ठाक . उस पर जगह-जगह शरद जोशी िलखा हुआ था। छोटा-मोटा काम नह3ं है . और कौन? वे ह3 िलख सकते ह4 । और )कसी के बस का नह3ं है यह काम। पWरौम. या 8पछले दशक के लेखन का आकलन करना हो )क Iजससे असहमत थे. दाने-दाने पर खाने वाले का नाम िलखा रहता है । यह बात िसफ़$ अनार और पपीते को लेकर ह3 सह3 नह3ं है . भूल जाते ह4 । वे दाने Iजन पर )कसी का नाम नह3ं िलखा.

उनका >या होगा? वह3 हआ ना! बात ौी गणेश से शुh कIजए तो धीरे -धीरे चूहे तक पहँु च जाती है । >या ु कIजएगा? यह बंगला )फ+म लड़)कयाँ और 8वशेष hप से सुंदर लड़)कयाँ बी. तो हमारा गँवारापन 8वलीन हो गया और एक बंगला )फ़+म पूर3 गWरमा के साथ )दखाई जाने लगी। वह बंगला लेखक क बंगला कहानी पर बनी बंगाली )फ़+म थी Iजसे बंगाल के एक ूोŠयूसर ने बंगाली अिभनेता और अिभने8ऽयC क मदद से बंगाल मB ह3 बनाया था। कहानी बंगाल के एक छोटे से क़ःबे मB रहनेवाले बंगाली पWरवार क थी। यानी उसमB सबकुछ बंगाली था. Iजसे िसर मB खCस िलया जाए। चारC ओर चटजV.ए. जाने >यC. कुता$ पहने। और उनके सामने बैठे म4 और नरB ि दोनC गँवार लग रहे थे। हमB बंगला नह3ं आती। जब तक हाल मB अँधेरा नह3ं हआ यह3 हालत बनी रह3। हम चुपचाप िसर झुकाए बैठे रहे । अँधेरा हआ ु ु . हम अन)फट लग रहे थे। )फ़+म क 8वशेषता थी )क वह बंगला मB थी और हमार3 8वशेषता थी )क हम बंगला नह3ं जानते। रहा कलाूेमी होने का सवाल तो कलाूेमी कोई मोर का पंख नह3ं. धोती. तब चूहC का >या होगा? वे जो हर यवसाय मB अपने ूितशत कुतरते रहते ह4 . मुखजV और भTटाचाय$ )कःम के लोग बैठे थे. इसका हमB अनुमान न था। मगर बंगािलयC क बात ह3 अलग। >या कहने! उस िसनेमा हाल मB.पेट भर बँटवारा कIजए। नाम िलखने क भी ज़hरत नह3ं। गणेश जी कब तक बैठे-बैठे िलखते रहB गे? ूz यह है . वह भी बंगाली है । इतने सबके बावजूद हमने पूण$ कोिशश क )क िचऽ को समझा जाए। और हम बड़3 ज+द3 समझ गए )क )फ़+म सामाHय ूेमकथा नह3ं है । ह3रोइन (आह. नरB ि जो थोड़ा–बहुत संगीत समझता है . यह पुरानी और घर–घर क समःया है । इस समःया पर एक )फ़+म भी तानकर खड़3 क जा सकती है . करने क समःया है । पूरा . >या भर3–पूर3 ह3रोइन थी!) इं टर कर चुक है और उसके बी. बता रहा था )क पृभूिम मB जो संगीत बज रहा है . करB .ए.

करने से अभी तक िसफ़$ इसीिलए pका ु हआ है . छोड़ एम. करने के िसवा। .ए. जो ज़मींदार )कःम का शउस था और हाथ मB डं डा रखता था। वह भी चाहता था )क ह3रोइन मेAयुएट हो जाए। जब ह3रोइन अपने घर पर जल ूदाय क शाDत समःया का हल खोजने कमर मB घड़ा दाब झरने क तरफ़ जाती.ए. उसने उस भर3–पूर3 ह3रोइन का हाथ अपने हाथ मB लेकर कहा था. नह3ं करना चाहती तो न करे । इसमB खुद इतना परे शान होने या पI]लक को बोर करने क >या बात है ? और वह ह3रो िसफ़$ इतनी-सी बात के िलए उस ह3रोइन के पीछे >यC लगा रहता है ! दिनया मB ु और भी ग़म है बी. कोरबे ना कोरबे? ह3रो शायद उसी वष$ बी. कर ले.ए.ए. वह वाःतव.ए.ए. ह3रोइन से एक ह3 ूz घुमा–)फराकर करता. मगर ह3रो चाहता था )क )हरोइन बी. करना चाहता है ! इसी नज़ारे के ु आसपास इं टरवल हो गया और हम समोसC क )दशा मB लपके। हमB समझ नह3ं आ रहा था )क कमबउत ह3रोइन बी.ए. शुंदोर3! आमी तोमार शCगे बीए कोरबोई कोरबो! हमB आ‹य$ हआ )क यह मुछंदर 8वलेन बी. IजसमB काफ़ सारे बादल )दखाए गए थे और बड़ा सुर3ला बेकमाउrड dयूIज़क बज रहा था. मB बैठ रहा था और चाहता था )क ह3रोइन भी साथ ह3 बी. तोमार बीए होये गे छे ? ह3रोइन ने इस ूz पर कुछ उड़ता–उड़ता–सा जवाब )दया.ए.ताना–बाना इस छोट3–सी समःया को लेकर बुना गया था। ह3रो भी इसी समःया से मःत था। ह3रोइन से पहली मुलाकात मB ह3 पूछा. करने कै मूड मB नह3ं है . >यC)क यह ह3रोइन शुंदोर3 के साथ बी.ए. मगर चाहकर भी आगे पढ़ नह3ं पा रह3 है । 8प>चर मB एक अदद 8वलेन भी था.ए. आमार बीए कोरबार दोरकार नेई। हम समझ गए )क लड़क इं टर कर चुक है . >यC नह3ं कर लेती? इतने समय मB तो वह बी. बीए. कर सकती थी। और अगर वह बी. मB पढ़ना चाहती है . आमार शCगे बीए कोरबे? ह3रोइन लजा गई। हमB लगा. पर39ा मB बैठ जाए। झरने के पासवाले सीन मB. मगर )फलहाल बी. कर ले। वह जब िमलता.ए. 8वलेन पगडं ड3 काट खड़ा हो जाता और कहता.

करने से इनकार करती है । उHहCने शराब पी और ूz क गंभीरता को ु और फरसे चमकाकर यह कसम खाई )क उनके समझा। बाद मB उHहCने लपलपाते छरे होते यह संभव नह3ं होगा )क ह3रोइन बी. करB । युवक–युवती यह िनण$य नह3ं ले पा रहे ह4 )क वे बी. बंगाल क पWरIःथितयाँ हमारे मwयूदे श से 8ब+कुल िभHन ह4 । वहाँ 8पछले वषl िश9ा का तेज़ी से 8वकास हआ ु ह4 .ए. कर लेगी. करना ज़hर3 है या नह3ं? बंगाल क ‡8^ से यह एक गंभीर समःया है । म4ने नरB ि को समझाया। इं टरवल समा} हो चुका था। हम हाल के अंदर घुस गए और उसी गंभीरता से आगे दे खने लगे। समझ नह3ं आ रहा था )क ह3रोइन यूिनविस$ट3 )डमी लेने के मामले मB गंभीर है . जाती कहाँ है ' वाले अंदाज़ मB गरदन )हलाता. कपड़े सुखाती रहती है .. एम. डं डा घुमाता पगडं ड3 से चला गया। एक ‡ंय मB 8वलेन ने गाँव के कितपय ःनेह3 िमऽ टाइप के गुंडC को एकऽ )कया और शराब 8पलाकर यह शै9Iणक समःया सामने रखी थी )क ह3रोइन बी.ए. जेटा आमी भावी. म4 नह3ं समझता इसने कॉलेज क श>ल भी दे खी है । तुम समझते नह3ं.ए. म4 कर लूँगी!' . जो ज़hर3 भी है .ए.ए. मगर जब 8वलेन उससे कहता तो वह साफ़ इनकार कर दे ती। एक बार तो उसने 8वलेन को कसकर डाँट )दया. >यC नह3ं कर लेतीं। ह3रोइन ने कुछ कहा Iजसका अथ$ शायद था )क 'ठ6क है . Iजस तरह यह लड़क )दन–भर पानी भरती रहती है . शेटा आमी कोरबो। अथा$त मुझे जैसा जँचेगा वैसा कhँगी। 8वलेन 8बचक गया और उसने अपने िनI‹त 'दे ख लूँगा.ए.यार मुझे तो इस ह3रोइन के इं टरमी)डएट होने मB भी शक है । नरB ि बोला. नरB ि. हम अ5छ6 तरह जानते ह4 । )फ़+म इसी पृभूिम पर तैयार क गई है )क आज )कसी युवती के िलए बी. बोलो >या करB । गुंडC को आ‹य$ हआ )क 8वलेन के इतने आमह के बावजूद वह ु लड़क बी. करने को तैयार नह3ं.ए. करB या न करB । चारC तरफ़ बेकार3 और असंतोष है । बंगाल क आज जो हालत है .ए. गाँव–गाँव मB कालेज खुल गए ह4 और युवकC तथा युवितयC पर चारC तरफ़ से यह ूेशर आ रहा है )क वे बी.ए. अथवा नह3ं। वह ह3रो के सामने मान लेती )क वह बी. न करे । उHहCने 8वलेन को वचन )दया और पैर पटकते चले गए। एक और ‡ँय मB ह3रोइन क सहे ली ने ह3रोइन को इसी 8वषय मB समझाते हए ु कहा )क तुम बी. खाली बैठ6 रहती है .

मेरे ख़याल से मूलत: यह )फ़+म दो ूाइवेट कालेजC क लड़ाई पर बनी है । एक कालेज से ह3रो संबv है और दसरे से 8वलेन। ूितयोिगता इस बात क ू है )क वह सुंदर3 कहाँ से बी. कhँगी. अ5छा है ।' 'एंड समझ नह3ं आया. दादा!' '>या नह3ं समझा?' 'ह3रोइन ने मेजुएशन कर िलया )क नह3ं. का अwययन करना चाहे तो उसे कौन थाम सकता है ? िचऽ के अंत मB ह3रो ह3रोइन का हाथ पकड़ पI]लक और कैमरामैन क तरफ़ पीठ )कए एक ओर चला गया। शायद कालेज उसी ओर रहा होगा। बाहर आकर नरB ि ने कहा. दादा. दे खना चा)हए।' 'अ5छा है . करना नह3ं चाहती. इसक उdमीद नह3ं थी। ह3रोइन ने ह3रो क बाँह पर पTट3 बाँधी और कड़े श]दC मB अपने बाप से बी. मुझे कोई रोक नह3ं सकता।' . अ5छा )फ़+म है .ए. दादा?' 'कैसा मेजुएशन?' भTटाचाय$ आ‹य$ से बोले। 'ह3रोइन कहती थी ना )क म4 बी.ए.ए. क9ा मB बैठा )दखाकर 'द3 एंड' )कया जा सकता था.ए. करे गी। वह 8वलेन के कालेज से बी.ए. )फर भी हमने सोचा. >यC)क वहाँ गुंडागदa एयादा है . करने का ऐलान करते हए ु कहा. इसिलए वह अःवीकार कर दे ती है । ह3रो का 8वŒापीठ शायद बेहतर है । 'बंगालवाले भी कमाल कर रहे ह4 । )कतनी नई थीम उठाकर )फ़+मB बना रहे ह4 ।' म4ने कहा। पान क दकान पर भTटाचाय$ बाबू िमल गए। ु '>यC जोशी साहब.मेरे ख़याल से इसके बाद )फ़+म समा} हो जानी चा)हए थी। आIख़र3 सीन मB लड़क को बी.ए. मगर ऐसा नह3ं हआ। 8वलेन ु के ःनेह3 िमऽC ने ह3रो को डं डे से पीटा। जवाब मB ह3रो ने भी हाथ )दखाए। शै9Iणक ूz का अंतत: इस ःतर पर िनपटारा होगा. इधर कैसा आया?' ')फ़+म दे खने आया था. दादा. आमा के बीए कोरते केऊ थामाते पारबे ना। और सच भी है । इस ःवतंऽ भारत मB य)द कोई बी. बंगाली )फ़+म।' 'अरे तुमको बंगाली समझता?' 'समझता तो नह3ं.

भTटाचाय$ 'हो–हो' कर ज़ोर से हँ से और बोले. बीए मतलब बैचलर ऑफ आट$ स ् नह3ं। बीए यानी ]याह. हमार3 बराबर3 ये >या करB ग?े ' 'पर आपक नीितयाँ ग़लत थीं और इसिलए जनता आपके Iख़लाफ़ हो गई!' 'कांमेस से यह िशकायत कर ह3 नह3ं सकते आप। हमने जो भी नीितयाँ बनाy उनके Iख़लाफ़ काम )कया है । )फर )कस बात क िशकायत? जो उस नीित को पसंद करते थे. फ़ाइलB भी तो नह3ं जमा सकते ठ6क से। हम थे तो अफ़सरC को डाँट लगाते थे. 'कांमेस 8वरोधी दल हो ह3 नह3ं सकती। वह तो राज करे गी। अंमेज़ हमB राज स~प गए ह4 । बीस साल से चला रहे ह4 और सारे गुर जानते ह4 । 8वरोिधयC को >या आता है . जैसा चाहते थे करवा लेते थे। )हdमत से काम लेते थे। WरँतेदारC को नौकWरयाँ )दलवाy और अपनेवालC को ठे के )दलवाए। अफ़सरC क एक नह3ं चलने द3। करके )दखाए 8वरोधी दल! एक ज़माना था अफ़सर खुद WरDत लेते थे और खा जाते थे। हमने सवाल खड़ा )कया )क हमारा >या होगा. >यC)क हम . पाटa का >या होगा?' 'हमने अफ़सरC को WरDत लेने से रोका और खुद ली। कांमेस को चंदा )दलवाया. खूब समझा तुम लोग। अरे . 'जो आता है कांमेस को दोष दे ता है । आप भी >या 8वरोधी दल के ह4 ?' 'आजकल तो कांमेस ह3 8वरोधी दल है ।' वे चुप रहे । )फर बोले. मैरेज। – और वे )फर ज़ोर–ज़ोर से हँ सने लगे। एक भूतपूव$ मंऽी से मुलाकात मंऽी थे तब उनके दरवाज़े कार बँधी रहती थी। आजकल >वाट$ र मB रहते ह4 और दरवाज़े भ4स बँधी रहती है । म4 जब उनके यहाँ पहँु चा वे अपने लड़के को दध िसखा रहे थे ू दहना ु भी नह3ं आता। और अफ़सोस कर रहे थे )क कैसी नई पीढ़3 आ गई है Iजसे भ4सB दहना ु मुझे दे खा तो बोले – 'जले पर नमक िछड़कने आए हो!' 'नमक इतना सःता नह3ं है )क न^ )कया जाए। कांमेस राज मB नमक भी सःता नह3ं रहा।' 'कांमेस को >यC दोष दे ते हो! हमने तो नमक–आंदोलन चलाया।' – )फर बड़बड़ाने लगे. शाद3. वे हमारे समथ$क थे. और जो उस नीित के Iख़लाफ़ थे वे भी हमारे समथ$क थे.

उस नीित पर चलते ह3 नह3ं थे।' म4 िनpMर हो गया। 'आपको उdमीद है )क कांमेस )फर इस राAय मB 8वजयी होगी?' '>यC नह3ं? उdमीद पर तो हर पाटa कायम है । जब 8वरोधी दल असफल हCगे और बेकार सा8बत हCगे. एक िमनट खाली नह3ं बैठा. तो डे र3 खोलBगे और दध ू बेचBगे. अब भी लड़B गे। कांमेस )टकट नह3ं दे गी तो ःवतंऽ लड़B गे।' 'पर यह तो कांमेस के Iख़लाफ़ होगा।' 'हम कांमेस के ह4 और कांमेस हमार3 है । कांमेस ने हमB मंऽी बनने को कहा तो बने। सेवा क है । हमB )टकट दे ना पड़े गा। नह3ं दB गे तो इसका मतलब है कांमेस हमB अपना नह3ं मानती। न माने। पहले ूेम. ज़मीन. तब जो खुद का फ़ाम$ बनाया था. राजनीित मB भी रहB गे और ु 8बज़नेस भी करB गे। हम तो नेहh–गांधी के चेले ह4 ।' 'नेहh जी क तरह ठाठ से भी रह सकते ह4 और गांधी जी क तरह झCपड़3 मB भी रह सकते ह4 । ख़ैर. झCपड़3 का तो सवाल ह3 नह3ं उठता। दे श के भ8वंय क सोचते थे. जब दो ग़लत और असफल दलC मB से ह3 चुनाव करना होगा. बंगला सब कर िलया। )कराया आता है । लड़के को भैस दहना आ जाए. मंऽी थे तब भी )कया।' 'आप अगला चुनाव लड़B गे?' '>यC नह3ं लड़B गे। हमेशा लड़ते ह4 . अ)हं सा से काम लBगे. तो >या अपने भ8वंय क नह3ं सोचते! छोटे भाई को शक )दलवा )दया था। शक का नाम रखा है दे श–सेवक। पWरवहन क समःया हल करे गा।' 'कृ 8ष–मंऽी था. तो कांमेस >या बुर3? बस तब हम )फर 'पावर' मB आ जाएँगे। ये 8वरोधी दल उसी राःते पर जा रहे ह4 Iजस पर हम चले थे और इनका िनI‹त पतन होगा।' 'जैसे आपका हआ। ' ु '8ब+कुल।' 'जब से मंऽी पद छोड़ा आपके >या हाल ह4 ?' 'उसी तरह मःत ह4 . जाित–WरँतेवालC को बड़ा फ़ायदा पहँु चाया आपने।' 'उसका भी भैया इितहास है । जब हम कांमेस मB आए और हमारे बारे मB उड़ गई )क हम हWरजनC के साथ उठते–बैठते और थाली मB खाना खाते ह4 . नह3ं चला तो असहयोग आंदोलन चलाएँगे। दसर3 पाटa से खड़े हो जाएँगे।' ू 'जब आप मंऽी थे. इसी कारण आज सुखी और संतु^ हँू । हम तो कम$ मB 8वDास करते ह4 । धंधा कभी नह3ं छोड़ा. जैसे पहले थे। हम पर कोई फ़क$ नह3ं पड़ा। हमने पहले से ह3 िसलिसला जमा िलया था। मकान. अब अ5छ6 फसल दे ता है । जब तक मंऽी रहा. जाितवालC ने हमB अलग कर . पWरौम )कया.

तबादले pकवाने. करके आओ चाहे थड$ )डवीजन मB सह3. हम जाितवाद के Iख़लाफ़ ह4 । जब तक हम ु रहे हमेशा मं8ऽमंडल मB राजपूत और हWरजनC क संया नह3ं बढ़ने द3। हम जाितवाद से संघष$ करते रहे और इसी कारण अपनी जाित क हमेशा मेजॉWरट3 रह3।' लड़का भ4स दहु चुका था और अंदर जा रहा था। भूतपूव$ मंऽी महोदय ने उसके हाथ से दध ू क बा+ट3 ले ली। 'अभी दो )कलो दध ू और होगा जनाब। पूर3 दह3 ु नह3ं है तुमने। लाओ हम दहBु ।' – )फर मेर3 ओर दे खकर बोले. 8वxान ूायः भ~ड3 बेतुक बात कह बैठता है .ए. दसर3 ू दह3 ु नह3ं जा रह3ं। और जब तक आप अपने ॐोतC का पूर3 तरह दोहन नह3ं करते. लोन )दलवाने मB मदद करते और इस तरह जाित क उHनित और 8वकास मB योग दे ते। आज हमार3 जाित के लोग बड़े –बड़े पदC पर बैठे ह4 और हमारे आभार3 ह4 )क हमने उHहB दे श क सेवा का अवसर )दया। म4ने लड़कC से कह )दया )क एम. सबको लै>चरर बना दँ ग ू ा। अपनी जाित बु8vमान य8uयC क जाित होनी चा)हए। और भैया अपने चुनाव–9ेऽ मB जाित के घर सबसे एयादा ह4 । सब सॉिलड वोट ह4 । सो उसका wयान रखना पड़ता है । यC दिनया जानती है . दे श का 8वकास असंभव ह4 ।' वे अपने ॐोत का दोहन करने लगे। लड़का अंदर जाकर Wरकाड$ बजाने लगा और 'चा चा चा' का संगीत इस आदश$वाद3 वातावरण मB गूँजने लगा। म4ने नमःकार )कया और चला आया। शरद जोशी के कमलमुख से ‘आलोचना’ “लेखक 8वxान हो न हो. तो शुh–शुh मB हमने जाितवाद को कसकर गािलयाँ द3ं।' 'दरअसल हमने अपने पहलेवाले मं8ऽमंडल को जाितवाद के नाम से उखाड़ा था। सो शुh मB तो हम जाितवाद के Iख़लाफ़ रहे । पर बाद मB जब जाितवालC को अपनी ग़लती पता लगी तो वे हमारे बंगले के च>कर काटने लगे। जाित क सभा हई ु और हमको मानपऽ )दया गया और हमको जाित – कुलभूषण क उपािध द3। हमने सोचा )क चलो सुबह का भूला शाम को घर आया। जब जाित के लोग हमसे ूेम करते ह4 . एक तरफ़ तो दे श के ब5चC को दध ओर भ4सB पूर3 ू नह3ं िमल रहा. आलोचक सदै व 8वxान होता है .)दया और हमसे संबंध नह3ं रखे। हम भी जाितवाद के Iख़लाफ़ रहे और जब मंऽी बने. तो कुछ हमारा भी फज़$ हो जाता है । हम भी जाित के लड़कC को नौकWरयाँ )दलवाने. उस ःथापना क सड़ाँध से . ऐसी बातC से सा)ह:य मB ःथापनाएँ होती ह4 .

टे ढ़3 खीर इसिलए )क म4 कभी इसका ठ6क उMर नह3ं दे पाता. एक रा†क8व है . Iजसे वह करता नह3ं. म4ने कहा. आलोचना श]द लुच ् धातु से बना है Iजसका अथ$ है दे खना. वह इस च>कर मB रहता है )क अपने पWरिचतC और पंथ वालC का माल रहने दB . सो. “यह )कसी आलोचक से पूिछए. )फर सींग चलाने का काम उसका और यश बटोरने का काम कमलमुख का. बाक सबका )फंकवा दB . म4 मुःकराकर उन लड़)कयC को कनIखयC से दे खकर कह दे ता हँू . म4ने एक बार खपाने क कोिशश भी क थी. म4 तो कलाकार हँू . . एक सुूिसv आलोचक महोदय को सभा मB पWरिचत कराते समय 8पछली जनवर3 मB वातावरण बहत ु 8बगड़ा.” आज से आठ वष$ पूव$ आलोचना पर अपने िमऽC के समूह मB बोलते हए ु यह 8वचार म4ने ूकट )कए थे. म4 ु श]द वापस लेता हँू . िनराला और क8ववर कमलमुख मB कौन सव$ौ े है .” खैर. आलोचक आदमी काम का है . आलोचना के ूित अपनी ूाइवेट राय जा)हर करने के पूव$ म4 आपको यह बताऊं )क आलोचना है >या? यह ूz मुझसे अकसर पूछा जाता है .वातावरण बनता है IजसमB क8वताएँ पनपती ह4 . म4ने इस 8वषय मB सोचना और चचा$ करना बंद सा कर )दया. अःतु. मुझे पहली बार यह अनुभव हआ )क )हं द3 भाषा मB नया श]द दे ना )कतना खतरा मोल लेना है . वे प:थर क लकर ह4 . बात आई गई हो गई. सा)ह:यर‘ क छाऽाएँ चू)ं क आलोचना समझने को सबसे Aयादा उ:सुक )दखाई दे ती ह4 इसिलए यह मानना गलत न होगा )क आलोचना सा)ह:य क सबसे टे ढ़3 खीर है . जनता ने भी मुझे चारC ओर से घेर िलया. कोिशश करते रहना समी9क का धम$ है . यह शुभ ूवृ8M है और आज नह3ं तो कल इसके लाभ नजर आते ह4 . आलोचक के ःथान पर आलु5चा या िसफ$ लु5चा श]द )हHद3 मB खप सकता है . लेखक का सा)ह:य के 8वकास मB मह:व है या नह3ं है यह 8ववादाःपद 8वषय हो सकता है पर )कसी सा)हI:यक के 8वकास मB )कसी आलोचक का मह:व सव$ःवीकृ त है . पर यह गु:थी मन मB हमेशा बनी रह3 )क आलोचक का दािय:व >या है ? वाःतव मB सा)ह:य के 8वशाल गोदाम मB घुसकर बेकार माल क छं टाई करना और अ5छे माल को शो-केस मB रखवाना आलोचक का काम माना गया है . आलोचक महोदय ने कहा )क आप श]द वापस लीIजए. लुच ् धातु से ह3 बना है लु5चा. कुछ भी कहो. सा)ह:य क वैतरणी तरना हो तो )कसी आलोचक गैया क पूंछ पकड़ो. पर आप यह भूिलए नह3ं )क आलोचना श]द ‘लुच’ धातु से बना है . मुझे इस श]द के प9 मB भयंकर संघष$ करना पड़ा. 8वषय पर आ जाऊँ. जैसे )हHद3 मB अभी तक यह तय नह3ं हो पाया है )क मैिथलीशरण गु}.

ु म4ने अपने आलोचक जीवन के शैशव काल मB कितपय ूचिलत श]दावली. )हHद3 का मैदान उस समय तक सूना था जब तक आलोचना क इस खंजर ु श]दावली का जHम नह3ं हआ था. इस श]दावली के 8वशेषsC का ूकाशक क दकान पर ू ु बड़ा ःवागत होते दे खा है . ूकाशक आलोचक पालते ह4 और य)द इस 9ेऽ मB मेरा जरा भी नाम हआ तो 8वDास रIखए. कमलमुख क कलम चूम लेने को जी चाहता है . मुहावरावली और वा>यावली का अनूठा संकलन )कया था Iजसे आज भी जब-तब उपयोग करता रहता हँू .एक बहूशं ु िसत है और तीसरे से बड़3-बड़3 आशाएँ ह4 . मनोगुdफ़C क तहC मB इतना गहरा घुसने वाला कलाकार )हHद3 उपHयास ने दसरा पैदा ू नह3ं )कया. (दशक क ु ह3 चचा$ कर रहा हँू >यC)क मेरे आलोचक य8u:व का कंट3ला 8वकास भी इसी दशक मB हआ है ). )कसी ूकाशक से मेरा लाभ का िसलिसला जम जाएगा. समथ$न क बातB ु इस ‡8^ से रचना बेजोड़ है (‡8^ कोई भी हो). छपाई. समी9कC के इस उMरदािय:वह3न मूड के बावजूद 8पछला दशक )हHद3 आलोचना का ःवण$युग था. आपने ूेमचंद क परं परा को बढ़ाया है . Iजतनी पुःतकB ूकािशत नह3ं हy ु उनसे अिधक आलोचकC को सादर भBट ूा} हई ु ह4 . नई शैली का 8वकास 8पछले दशक मB हआ है . सफाई 8वशेष आकष$क है . समी9ा क नई भाषा. यह मेरे 8वषय मB यu राय दे ते हए ु संकोच उ:पHन हो रहा है परं तु उनके 8वशेष आमह को टाल भी तो नह3ं सकता). रचना मB छपा हआ िनंकलुष वा:स+य. )कसी पुःतक के समथ$न तथा 8वरोध मB )कस ूकार के वा>य िलखे जाने चा)हए. ु ू िनँछल अिभय8u मन को छती है . म4 य)द यह कहंू )क आप दसरे ूेमचंद ह4 तो ू गलती नह3ं करता. उससे क8व क श8u व संभावनाओं के ूित आःथा बनती है . hप और भावC के साथ जो 8वचारC के ूतीक उभरते ह4 . (दMू पानवाला क. उसके कितपय थड$ >लास नमूने उदाहरणाथ$ यहां दे रहा हँू . कुछ पुःतकC को संपूण$ संःकरण ह3 आलोचकC को सादर भBट करने मB समा} हो गया. . अ5छे उदाहरण इस कारण नह3ं दे रहा हँू )क हमारे अनेक समी9क उसका उपयोग शुh कर दB गे.

ःवयं लेखक क दिमत. बI+क कड़3 आलोचना करने से मौिलक लेखक से अिधक यश ूा} होता है . छपाई. पःत)हdमत. लेख कोस$ के िलए िलखा लगता है . भावांकन मB शूHयता है और भाषा 8बखर गई है . सफाई तथा ूूफ संबंधी इतनी भूलB खटकने वाली ह4 . लेखक 8ऽशंकु-सा लगता है – आबोशजHय 8ववेकशूHयता मB हाथ पैर मारता हआ ु . ूकाशन उससे अिधक अखरता है . िगराया जा सकता है . ःवयं पुःतक िलखकर नाम कमाइए अथवा दसरे क पुःतक पर 8वचार ू यu कर नाम कमाइए. 8वरोध क बातB क8वता न कहकर इसे असमथ$ गŒ कहना ठ6क होगा. सव$ऽ है . पूवम $ ह मिसत ‡8^कोण. ऐसी पुःतक का अभाव Iजतना खटकता था. ये वे सरल लटके-खटके ह4 Iजनसे )कसी पुःतक को उछाला जा सकता है . सामाIजकता से यह अनाःथा लेखक को कहाँ ले जाएगी. ूिस8v का पथ साफ खुला है . ूित)बयामःत क तड़पन व घृणा. पुःतक और उसका लेखक तो बहाना या माwयम माऽ है Iजसके सहारे आलोचक यश अIज$त करता है .कहानी मB संगीता:मकता के कारण उसी आनंद क मधुर सृ8^ होती है जो गीतC मB पऽकाWरता से हो सकती है . श]द चम:कार से कागज काला करने क िछछली श8u का थोथा ूदश$न ह3 होता है इन क8वताओं मB. रचना इस यशिसv लेखक के ूित हमB िनराश करती है . इस संदभ$ मB मुझे एक वाता$लाप याद आता है जो सा)ह:यर‘ क छाऽा और मेरे बीच हआ थाु रात के दस बजे/गहर3 ठं ड/पाक$ क बBच/वह और म4/तारC जड़ा आकाश/ घुLप एकांत . आलोचना से मह:वपूण$ ूz है आलोचक य8u:व का. जब)क मू+य अिधक है पुःतक का. कुं)ठत वासना क भCड3 अिभय8u यऽ तऽ ह3 नह3ं. संतुलन और संगठन के अभाव ने अ5छ6 भाषा के बावजूद रचना को घ)टया बना )दया है . इन िनंूाण रचनाओं मB क8व का िनरा ृःशे शन उभरकर आ गया है .

पऽC के संपादक तथा )हHद3 8वभाग के अwय9 आलोचना के पाऽ नह3ं होते. मेरे िमऽ. अपने ूकाशक ने य)द )कसी लेखक क पुःतक छापी हो तो उसक ूशंसा करनी होती है ता)क कुछ 8बक 8वक जाए.“आलोचना मेर3 समझ मB नह3ं आती सर.“उसक पुःतक” कुछ दे र चुLपी रह3. सबसे बड़ा यह3. सृजन क ूचुर श8u है . सुर9ा करता हँू .“सुलोचना! आलोचना का मापदं ड पWरIःथितयC के साथ बदलता है . मुIँकल से एक-दो पुःतक साल मB समी9ाथ$ मेरे पास आती है बस.“)कसी क आलोचना करने से आपको >या िमलता है ?” म4. और तीसरे वग$ क पुःतक 8बना पढ़े ह3..“आप आलोचना >यC करते ह4 ?” म4.. वह. शऽु क पुःतक के िलए छ6छालेदर क श]दावली लेकर िगरा दे ता हँू . Iजस प8ऽका मB आलोचना दे नी हो उसके गुट का खयाल करना पड़ता है .“और नह3ं तो >या कhं. महान लेखकC को आलोचना कभी समझ मB नह3ं आती.B आलोचना का मापदं ड >या है ? समी9क का उMरदािय:व आप कैसे िनभाते ह4 ?” उस रात सुलोचना के कोमल हाथ अपने हाथC मB ले पाए 8बना भी म4ने सच-सच कह )दया.” (सुलोचना ने बाद मB बताया उस रात मेर3 आँखC मB आंसू छलछला आए थे) . सच कहता हँू . रे )डयो के ूो“यूसर.“सच कहB सर. इसका अथ$ है तुझमB असीम ूितभा है . आपको मेरे गले क कसम. ूयोगवाद3 धारा का अदना-सा उdमीदवार हँू . मेरे शऽु और तीसरा वह भाग जो मेरे से अपWरिचत है .” वह. झूठ बोलB तो मेरा मरा मुंह दे ख.लुभावना. 8बना आलोचना के िनबटा दे ता हँू या कभी-कभी कुछ सफे पढ़ लेता हँू . य)द िमऽ क पुःतक हो तो उसके गुण गाने होते ह4 .“हाय सुलोचना. सुलोचना. तीसरा भाग है . )फर भी म4 कुछ नह3ं हँू . बस इतना ह3.” म4. वह. दसरे क आलोचना का पाऽ बनने से बेहतर है म4 ःवयं ू आलोचक बन जाऊँ” वह. समूचा )हHद3 जगत तीन भागC मB बंटा है . अतः हर ूगितशील बनने वाले लेखक के Iखलाफ िलखना धम$ समझता हँू .

रचना भेज रहा हँू . ‘सा)ह:य-धम$’ के अगले अंक मB मेरा गीत आ रहा है . बुलवाओगे ना? यC तुम से >या छपा है ? माग$ यय और ऊपर से कुछ िमल जाए काफ है . सच कहंू – कैसी लगी? )हHद3 मB प8ऽका का जो आदश$ hप मेर3 आंखC मB है वह पूरा हो गया. भाभी को ूणाम-बेबी को Lयार. )कतनी सुंदर सAजा. 8ववाह तो हो ह3 गया होगा ना! तुdहारा अपना कमलमुख *************-************ पऽ 2 8ूय भाई. बरसC बाद अ5छ6 कहानी पढ़ पाया. >या कहने ह4 . तुdहारा सदै व.शरद जोशी के कमलमुख के कुछ पठनीय पऽ पऽ 1 8ूय भाई. इस अिभनव प8ऽका के ूकाशन के िलए मेर3 लाख-लाख बधाइयाँ लो. पऽ डालना. >या ह3 अ5छे 8वचार. सुना है )दसंबर मB क8व सdमेलन आयोIजत करवा रहे हो अपने नगर मB. जरा wयान रखना. )हHद3 मB Iजसे नई कहानी कहते ह4 उसका सव$ौ े hप तुdहार3 रचना मB है . भई वाह! तुdहारा ह3 सदा कमलमुख पुन‹. बाक सब कुशल! आशा है ःवःथ हCगे. आsा िसर आँखC पर रख दौड़ा आऊंगा. हालां)क अभी तुdहारा पऽ इस संबंध मB आया नह3ं है पर म4 यथ$ क औपचाWरकताओं पर 8वDास नह3ं करता. कैसा लगा बताना. ‘धम$शाला’ मB तुdहार3 कहानी पढ़3. मेर3 ःवीकृ ित समझो. कैसा वःतु चयन. . तब तो िमलना ु हो सकेगा. *************-************ पऽ 3 8ूय भाई.

िमऽC से िमलने क बड़3 इ5छा है . पुःतक कब आ रह3 है छपकर. आपके ूकाशन को पांडुिल8प भेजे दस माह हो गए. बधाई लीIजए. दे ख रहा हंू काय$बम का ःतर िनरं तर उठ रहा है .पहली ूित म4 पढ़ंू गा. इस संबंध मB मेरा यह पांचवां पऽ है . ःवाः€य का wयान रIखए. दे खता हँू )क डा)कया कब कांशै>ट लाता है . भाभी को ूणाम. अभी तक ःवीकृ ित नह3ं िमली.कमु *************-************ पऽ 4 8ूय महोदय. बेबी को Lयार! आपका. उधर आना चाहता हँू . एक िशकायत भी है . शीय िलIखए. कब ूकािशत कर रहे ह4 . दो माह से कोई कांशै>ट नह3ं आया. जब से आप आकाशवाणी के ूो“यूसर बनकर आए ह4 . और सब ठ6क. ज+द3 जवाब दो. बड़ा ौम करते ह4 . कमलमुख *************-************ पऽ 5 जनाब. खेद है . कमलमुख . ब)ढ़या सी आलोचना िलखने को बेताब हंू .रे )डयो मुझे भूल सा गया है . भवद3य.

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