गुर जी को पणाम ...और सभी अनतवासना के पाठको को नमसकार !

मेरा नाम कमलेश है, मै रहने वाला रायपुर छतीसगढ का हूँ, मेरी पढाई भोपाल मे हुई है।
मैने अनतवासना अभी अभी पढना शुर िकया है मुझे भी लगा की मुझे भी अपनी कहानी िलखनी चािहए !
यह उस वकत की कहानी है जब मेरी पढाई खतम हो गई थी और उसके बाद मै रायपुर वापस आ रहा था, यह मेरी
िजंदगी की सचची घटना है।
मै भोपाल से टेन मे बैठकर नागपुर आया, वहा मुझे कुछ काम था। नागपुर से रायपुर के िलए रात मे टेन थी, उसी
मे मुझे आना था।
मै जलदी ही काम खतम करके सटेशन पहुँच गया था, बहुत कम ही लोग सटेशन पर थे, मै समय काटने के िलए
सटेशन पर घूमने लगा।
कुछ दूर एक 30-32 साल की एक आंटी बैठी थी जो अकेली ही थी, रंग गोरा था, 34-32-36 का िफगर था,
क़यामत लग रही थी।
मेरी नजर बार बार उनको ही देख रही थी।
अचानक उनहोने मुझसे टेन का समय पूछा।
मैने कहा- टेन आधा घंटा देरी से चल रही है।
मैने देरी न करते हएु उनसे पूछा- आप कहा जा रही है?
उनहोने कहा- रायपुर !
मै बहुत खुश हो गया, मैने भी बताया उनहे िक मै भी रायपुर जा रहा हूँ।
ऐसे हमारी बात होने लगी, उनहोने बताया िक वो अपनी बहन के यहा जा रही है, नागपुर मे ही उनका घर है, रायपुर
अकसर जाती रहती है।
मैने अपने बारे मे बताया- मेरी पढाई खतम हो गई है ओर मै अपने घर वापस जा रहा हूँ। वहा जाकर कोई जॉब
करँगा !
बातो बातो मे टेन आ गई, हम एक ही डबबे मे चढ गए।
रात का सफर था, टेन मे भीड़ भी बहुत थी। बैठने की जगह नही थी।
एक जगह िमली तो मैने आंटी को बैठने को कह िदया और मै खड़े हो गया।
कुछ देर बाद टेन कुछ खाली हुई, आंटी ने अपने बगल मे बैठने को कहा तो मै चुपचाप बैठ गया।

हम घर पिरवार की बाते करने लगे। रात का एक बज गया था, सभी सो रहे थे, आंटी को भी नीद आ रही थी, वो
भी थोड़ी देर मे सो गई !
मुझे नीद नही आ रही थी। इतनी सेकसी आंटी बगल मे बैठी हो तो नीद कैसे आ सकती थी।
सोते-सोते उनका सर मेरे कंधो पर आ गया था, मै उनके वक को देखे जा रहा था, उनके बलाउज से थोड़ा-थोड़ा
िदख रहा था।
अचानक उनका एक हाथ मेरे जाघो पर आ िगरा, िफर सरकते-सरकते मेरी िजप के पास चला गया।
मेरा लंड उनके हाथ के एहसास से खड़ा हो गया था, मुझे बहुत अचछा लग रहा था तो मैने वैसे ही रहने िदया
उनका हाथ।
िफर थोड़ी देर बाद आंटी मेरे लंड को सहलाने लगी।
मुझसे रहा नही गया, मै बेचैन होने लगा। लंड पैट फाड़ कर बाहर आने को तो तैयार था !
मैने आंटी के कान मे कहा- चलो, बाथरम मे चलते है।
वो तैयार हो गई।
पहले वो चली गई, बाद मे मै गया।
सब सो रहे थे िकसी ने हमे नही देखा।
अब बस आंटी और मै बाथरम मे थे।
आंटी ने झट से मेरे लंड को बाहर िनकाला और चूसने लगी !
मै पागल हो रहा था, मै तो जनत मे पहुँच गया था !
मै आंटी के सतन दबा रहा था। कया सतन थे साली के ! मजा आ गया था !
अब मुझसे रहा नही गया और मैने आंटी की साड़ी ऊपर उठा दी और उनकी पैटी उतार दी, उनको घोड़ी बना कर
चोदने लगा।
उनको भी बड़ा मजा आ रहा था, मेरा भरपूर साथ दे रही थी। वो दो बार झड़ गई थी, िफर मै भी झड़ गया, सारा
माल उनकी चूत मे ही िनकल िदया मैने !
िफर हम अपने आप को ठीक करके बारी-बारी से बाहर आ गए !
कया सेकसी सफर था मेरा ! मजा आ गया !

मेरा नाम राहुल है, बीस साल का हँू, मै महाराषट मे कोलापुर मे रहता हँू और सागली के कॉलेज मे पढता हँू। मै
अनतवासना का बहुत बड़ा पशंसक हूँ। मै इसे िपछले एक साल से पढ रहा हूँ और जो कहानी मै अब आपके सामने ला रहा
हँू वो एक सचची कहानी है और कुछ िदन पहले की ही है।
यह मेरा पहला यौन अनुभव है िजसे मुझे आप सबके साथ बाटने मे खुशी होगी। हमारे घर का ऊपर का माला हमने
िकराये पर िदया है िजसमे एक खूबसरत आंटी और उसका पित रहता है, उनकी शादी को कुछ 2-3 साल हुए है
पर अभी तक उनहे कोई बचचा नही है। आंटी बहुत खूबसूरत और सेकसी है।
वो जबसे हमारे यहा रहने आये थे तब से ही मुझे उस आंटी के साथ सेकस करने की खवािहश थी और मेरी हरकतो
से वो यह जान गई थी। उसका बदन ही ऐसा है िक कोई भी उस पर िफदा हो जाये, गोरा बदन, लमबे बाल बड़े-बड़े
भरे हुए सतन, वो जब चलती है तो उसकी गाड कया मसत िदखती है ! उसका आकार होगा 38"...
जब भी मौका िमलता, मै उसके बदन को छू ता और वो कुछ नही कहती थी। ऐसा बहुत िदन तक चलता रहा। अब
मैने उसके साथ सेकस करने की योजना बनाई।
एक िदन मेरे घर वाले एक शादी मे जाने वाले थे। तब मैने "मेरी तबीयत खराब है !" यह कह कर जाने को टाल
िदया...

जब सब चले गए तो मै उस आंटी के कमरे मे चला गया। उसका पित भी दफ्तर गया हुआ था और रात को आठ
बजे के बाद आने वाला था। अब पूरे घर मे हम अकेले ही थे। मैने पहले तो उससे यहा-वहा की बाते शुर की,
िफर उसके काम मे हाथ बंटाने लगा और इसी बहाने उसे बार-बार छू ने लगा और जब मुझे पूरा यकीन हो गया िक
उसे कोई एतराज नही है तो मैने अचानक उसका हाथ पकड़ िलया।
उसने कहा- यह कया कर रहे हो?
मै डर गया लेिकन और थोड़ी िहममत कर के मैने कहा- आज कुछ मत बोलो !
और उसे अपनी तरफ खीच िलया। तब वो मुझसे अलग होने की झूठी कोिशश करने लगी, िफर मैने उसके होठो पर
अपने होठ रख िदए और उसे चूमने लगा। कुछ देर बाद वो भी गमर होने लगी और मेरा साथ देने लगी।
िफर मैने उसकी चुनरी हटा दी और उसके पूरे शरीर पर हाथ िफराने लगा। मैने उसकी कमीज़ की िज़प खोल दी
और अनदर हाथ डालकर उसकी पीठ पर हाथ घुमाने लगा। िफर मै उसके गले पर, उसकी पीठ पर चूमता रहा।
िफर मैने उसकी कमीज़ पूरी उतार दी, िजससे उसका गोरा बदन, उसकी गुलाबी रंग की बा मेरे सामने आ गई। यह
सब देख कर मेरा लंड फटा जा रहा था। िफर मैने उसके सतनो को बा के ऊपर से ही चूसना शुर िकया और अपने
हाथो से उसकी बा खोल दी। जैसे ही मैने बा खोली, वो दो बड़े-बड़े सतन छलाग लगा कर मेरे सामने आ गए। मैने
हलके से उनहे अपने हाथो मे पकड़ा और जोर से दबा िदया और साथ मै अपने दातो से उसके चुचूको को काटने
लगा, िजसकी वजह से उसकी मुँह से आह की जोर से आवाज िनकली...
िफर बहुत देर तक मै उसके सतन चूसता रहा...
िफर मैने उसकी सलवार िनकाल दी, उसने गुलाबी रंग की पैटी पहनी थी जो अब आगे से भीग चुकी थी। मै उसे
िबसतर पर ले गया और अपनी टी-शटर और जीस उतारकर उसके ऊपर आ गया। मैने उसे बहुत चूमा उसके सतनो
को बहुत चूसा और नीचे की तरफ बढा...
पहले तो मैने उसकी पैटी के आसपास अपनी जीभ घुमाई और िफर पैटी के ऊपर जीभ घुमाने लगा। उसे बहुत
अचछा लग रहा था और वो मुँह से आह उम् ऊहह की आवाजे िनकाल रही थी।
िफर मैने अपने दातो से पकड़ कर उसकी पैटी िनकाल दी और उसकी गीली गोरी चूत को देख कर पागल हो गया,
मैने अपनी जीभ जैसे ही उसकी चूत पर लगाई उसने मेरे बालो को खीच कर मुझे अपनी चूत के ऊपर दबा िदया
और मुँह से सेकसी आवाजे िनकालने लगी।
मैने बहुत बार बलू िफलम मे चूत को चाटते हुए देखा है लेिकन तब पहली बार ऐसा िकया ... मै उसकी चूत को बहुत
देर तक चूसता रहा। मैने अपनी जीभ उसकी चूत मे भी डाली और वो सेकसी आवाजे िनकालती गई...
िफर वो उठ गई और मेरा लंड बाहर िनकाला और िबना हाथ लगाये सीधे मुँह मे ले िलया। इतना अचछा मुझे कभी
नही लगा था...
वो मेरे लणड को मुँह मे लेकर वो अपने मुँह को ऊपर नीचे करने लगी .... यह मेरा पहला ही सेकस अनुभव था
इसिलए दो िमनट मे मैने उसका मुँह अपने माल से भर िदया और वो उसे ऐसे पी गई जैसे पानी हो...
गजब की बात तो मुझे यह लगी िक मेरा माल िनकलने के बाद भी मेरा लंड खड़ा का खड़ा था और वो उसे चूसे जा
रही थी। िफर हम 69 की पोजीशन मे आ गए और मै उसकी चूत और वो मेरा लंड चूसने लगी और दूसरी बार मेरा
माल उसने अपने मुँह मे भर िलया।

उसने कहा- अब मुझसे और सहा नही जा रहा, जलदी से मेरी चूत मे अपना लंड डाल दो !
और यह कहते हुए वो िबसतर पर लेट गई और अपने पैर फैला िदए। उसकी चूत को देख कर मै उसके ऊपर आ
गया और उसने अपने हाथो से मेरा लंड अपनी चूत पर रख िलया। िफर मै अपना लंड उसकी चूत पर थोड़ी देर
रगड़ता रहा और अचानक ही उसकी चूत मे घुसा िदया िजससे वो चीख उठी, मेरा अभी आधा लंड ही उसकी चूत मे
था, मैने और जोर लगाया और उसकी चूत मे पूरा घुसा िदया, जैसे ही पूरा अनदर गया उसने मेरी पीठ पर अपने
नाखून गड़ा िदए.. िफर मै उसे उस अवसथा मे तब तक चोदता रहा जब तक मेरा माल नही िनकल गया।
उस बीच मैने उसके होठो को बहुत चूसा और उसे भी यह बहुत अचछा लगता था तो वो मेरा पूरा साथ दे रही थी।
चोदते-चोदते मै उसके सतन और चुचूक भी जोर से दबा रहा था लेिकन चुमबन की वजह से वो चीख भी नही पा रही
थी बस मुँह मे ही आवाज िनकाल रही थी। कुछ देर बाद वो मुझे जोर से चोदने को कहने लगी तो मुझे पता चल
गया िक वो पानी छोड़ने वाली है।
मै उसे जोर से चोदता रहा और उसने अपनी सास रोक कर पानी छोड़ िदया, कुछ देर बाद मैने भी अपना माल
िनकाल िदया।
िफर थोड़ी देर बाद मैने उसे घोड़ी बनने को कहा और पीछे से उसकी चूत चाटने लगा। पीछे से उसकी गाड कया
खूब लग रही थी, कुछ देर चूत चाटने के बाद मै उसकी गाड भी चाटने लग गया और उसकी गाड गीली कर दी।
िफर मैने अपनी एक ऊँगली उसके मुँह मे चाटने के िलए दी और उसकी गाड मे घुसा दी। उसकी गाड कुँवारी थी
तो उसे ददर होने लगा और वो िनकालने के िलए बोलने लगी। िफर दो िमनट बाद मैने उंगली िनकाल ली और अपना
लंड उसकी गाड के ऊपर रख िदया।
वो मुझे कहने लगी- गाड मत मारो !
लेिकन मैने उसकी एक नही सुनी, कब से मै उसकी गाड को देख-देख कर मुठ मारता था और आज मौका िमला तो
कैसे जाने देता...
िफर मैने अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी गाड मे डालने की कोिशश की, लेिकन नही गया। िफर मैने अपने
दोनो हाथो से उसकी गाड को बाहर की तरफ खीच िदया और िफर बहुत जोर से अपने लंड को धका िदया। तब
िसफर आगे का िहससा ही अनदर गया और वो- आह मर गई इसे बाहर िनकालो...आह .... करके चीखने लगी ...
लेिकन मैने और एक धका िदया तब आधा अनदर गया और जब तीसरी बार कोिशश की तो पूरा का पूरा उसकी गाड
मे िफट बैठ गया... वो बहुत चीख रही थी, उसे बहुत ददर भी हो रहा था... िफर मै थोड़ी देर ऐसे ही चुप रहा और
नीचे से मैने उसकी चूत मे ऊँगली डाल दी और िहलाने लगा। तब उसे थोड़ा अचछा लगने लगा।
िफर धीरे धीरे मै अपने लंड को अनदर-बाहर करने लगा और उसकी चूत मे भी ऊँगली डालता रहा। कुछ देर बाद
उसे भी मजा आने लगा और मै जोर से उसकी गाड मारने लगा...
मै जब उसकी गाड मार रहा था तो उसके सतन बहुत जोर जोर से िहल रहे थे...
कुछ देर बाद मेरा माल िनकलने वाला था तो मैने अपनी गित बढा दी तो उसे ददर होने लगा और वो मुँह से सेकसी
आवाजे िनकालने लगी। िजससे मुझे और अचछा लग रहा था।

शाम के गहरे धुंधलके मे आस-पास कोई नही था। शाम गहरा गई थी. यह मेरा पहला सेकस अनुभव है आपको मेरी कहानी कैसी लगी. मेरा दाना कड़ा होने लगा था। मैने अपना कुता ऊपर कर िलया था और झाटो को हटा कर चूत खोल कर उसे धीरे धीरे सहला रही थी. पुरानी यादे तो साथ रहती ही है। मै छुिटयो मे गाव मे दादादादी के पास आ गई थी। वो दोनो मुझे बहुत पयार करते थे। मेरे आने से उन दोनो का अकेलापन भी दूर हो जाता था। पड़ोसी का जवान लड़का भूरा भी मेरी नीद उड़ाये रखता था। ऐसा नही था िक मैने अपनी िजनदगी मे वो पहला लड़का देखा था। मैने तो बहुतो के लणड का आननद पाया था। पर ये भूरा लाल.. दबा रही थी। मेरी आंखे मसती से बनद हो रही थी। अचानक भूरा आया और मेरी टागो के पास बैठ गया। उसने मेरे दोनो हाथ हटाये और अपने दोनो हाथो की अंगुिलयो से मेरी चूत के पट खोल िदये। मुझे एक मीठी सी झुरझुरी आ गई। उसकी लमबी जीभ ने मेरी चूत को नीचे से ऊपर तक चाट िलया। िफर मेरी झाटे खीच कर अपने मुख को योिन दार से िचपका िलया। मेरी जाघो मे कंपकंपी सी आने लगी। पर उसकी जीभ मेरी चूत मे लणड की तरह घुस गई। मेरे मुख से आह िनकल पड़ी। वो मेरी झाटे खीच खीच कर मेरी चूत पीने लगा। मैने भूरा के बाल पकड़ कर हटाने की कोिशश की पर बहुत अिधक गुदगुदी के कारण मेरे मुख से चीख िनकल गई। तभी मेरी तनदा जैसे टू ट गई। मेरे हाथो मे उसके सर बाल की जगह मेरी झाटे थी। मैने जलदी से इधर उधर देखा. ओह कैसा अनुभव था ! मै अपने पर मुसकरा उठी और आशसत हो कर बैठ गई। .. अंधेरा बढ गया था। मै पास पड़ी पलािसटक की कुसी पर बैठ गई और हौले हौले अपनी योिन को सहलाने लगी.. वो मुझे जरा भी िलफ्ट नही देता था। आज शाम को िफजा मे थोड़ी ठणडक हो गई। मै अपना छोटा सा कुता पहन कर छत पर आ गई। ऊपर ही मैने बा और चडडी दोनो उतार दी और एक तरफ रख दी। मेरी टागो के बीच ठणडी हवा के झोके टकराने लगे। जैसे ही हवा ने मेरी चूत को सहलाया मुझे आननद सा आने लगा। मेरा हाथ सवतः ही चूत पर आ गया और अपनी बड़ी बड़ी झाटो के मधय अपनी चूत को सहलाने लगी। कभी कभी जोश मे झाटो को खीच भी देती थी। मैने सतकरता से यहा-वहा देखा.और दो िमनट बाद मैने अपना सारा माल उसकी गाड मे िनकाल िदया। जैसे ही मैने लंड बाहर िनकाला. यह जरर बताइए. अकेलापन भी िकतना अजीब होता है। कोई साथ हो ना हो. मेरा माल उसकी गाड के बाहर आने लगा। उसके बाद हमने आराम िकया और कुछ देर बाद मैने उसकी चूत और गाड िफर से मारी.

यह हुई ना बात।" मेरा मुख बरबस ही अपने आप खुल गया। . बेशरम … ऐसे भी कोई लणड को मुख आगे िहलाता है।" मैने उसे दूर करते हुये कहा। "पलीज. अपना योिन जैसा मुख खोलो ना… आह … हा.चूत मे मची हलचल के कारण मेरा शरीर बल सा खाने लगा। मेरी झाटे मेरे चूत के रस से गीली हो गई थी। मैने अपने उरोजो पर नजर डाली और उसकी घुिणडयो को मल िदया। मेरी चूत मे एक मीठी सी टीस उठी। मै जलदी से उठी और झट के एक दीवार की ओट मे नीचे उकड़ू बैठ गई और अपनी टागे चीर कर अपनी योिन को सहलाने लगी। िफर अपने सखत होते दाने को सहला कर अपनी एक अंगुली धीरे से चूत के अनदर सरका ली। "दीदी . अब हंसना बनद करो और मेरा ये लणड अपने मुख मे लॉलीपॉप की तरह चूस डालो।" भूरा मुझे घूर घूर कर देख रहा था। उसका मोटा लणड उसके हाथो मे िहला रहा था। "चल हट. मुझे भी हसत मैथुन करने मे अिधक मजा आने लगा। भूरा तो मेरी चूत देख देख कर जोर-जोर से हाथ चलाने लगा। तभी उसके लणड से एक तेज िपचकारी उछल पड़ी और उसका वीयर हवा मे लहरा उठा। मेरे शरीर ने भी थोड़ा सा बल खाया और मेरा पानी भी िनकल पड़ा। "भूरा … भूरा … आह मै तो गई … साली चूत ने रस िनकाल िदया।" मै आह भरती झड़ने लगी। मैने अपनी आंखे खोल कर भूरा को िनहारा … पर वहा अंधेरे के अलावा कुछ भी नही था। मै अपनी सोच पर िफर से झेप कर मुसकरा पड़ी। मै झड़ कर उठ खड़ी हुई। िफर से एक बार कुसी पर बैठ गई। तभी दादी ने मुझे पुकारा। मेरे िवचारो की शृंखला भंग हो गई। मैने फुती से अपनी बा और चडडी ली और नीचे भाग आई। दादी ने मेरे हाथ बा और चडडी देखी तो मुसकरा पड़ी। िफर दादी भोजन की थाली रख कर सोने चली गई थी। मै भी भोजन करके अपने कमरे मे आ गई। रात को लेटे लेटे मुझे िफर भूरा के खयालो ने आ घेरा। मेरी चुदाई को काफी महीने गुजर गये थे सो पल पल मे मेरी योिन मे कुलबुलाहट होने लगती थी। कैसा होता यिद भूरा मेरे पास होता और अपना लणड मेरे मुख मे डाल कर मुझे चुसाता। ऊह ! साले लड़के तो मुख ही चोद डालते है। वो िवनोद ! मैने उसे कया िलफ्ट दे दी िक मेरी गाणड से िचपक कर कुते की तरह कमर चलाने लगा। सोच सोच कर मुझे हंसी आने लगी। "दीदी. आपके पास मुठ मारने मे तो बहुत मजा आयेगा … आप भी मेरे लणड परदो हाथ मार देना।" उसने अपने पजामे मे से अपना लौड़ा िहलाते हुये कहा। "चल आजा … िनकाल अपना लौड़ा …यूं इसे िहला कया रहा है?" मैने मुसकराते हुये कहा। भूरा अपना पजामा उतार कर मेरे पास ही बैठ गया और लणड को हाथ मे लेकर िहला-िहला कर मुठ मारने लगा। उसे देख कर मुझे अित संवेदना होने लगी. मजा आ रहा है ना…" भूरा पास मे खड़ा हंस रहा था। "तू … ओह … कब आया … देख िकसी को कहना मत…" मै एकाएक बौखला उठी। "यह भी कोई कहने की चीज है … मुठ मारने मे बहुत मजा आता है ना?" वो शरारत से बोला। "तुझे मालूम है तो पूछता कयूँ है … तुझे मुठ मारना है तो यही बैठ जा।" मैने उसे पोतसािहत िकया। "सच दीदी.

उसके मुख से आह िनकल गई। मेरे मुख मे उसका मोटा लणड इधर उधर घूम रहा था। तभी मैने उसके लौड़े की चमड़ी खोल कर पीछे खीच दी. भूरे को एक बार यहा बुला दो …" मैने दादी को टोकते हुये कहा। . सारा रस तो तेरे चूतड़ो की गोलाईयो मे ही तो है … मेरा मन इनहे मटकते देख कर मचल जाता है और लगता है िक बस अब तेरी गाणड चोद दूं।" उसकी सारी आसिकत मेरे चूतड़ो की सुनदरता पर थी. वो तो अब… सपने तो सपने ही होते है ना !" दादी मेरे पास बैठ गई और अपने जवानी के िकससे बताने लगी। पर मेरा धयान कही ओर ही था। भूरा घर के अनदर से कुछ सामान ले जा रहा था। "दादी. आह … लाल सुखर सुपारा ! मेरा मन मचल गया … उसके छलले को मैने कस कस कर चूस िलया। "दीदी. कोई सुनदर सपना देख रही थी ना?" मै चौक गई और मैने चादर देखते ही समझ िलया िक दादी ने मेरा नंगापन देख िलया है। "दादी मा. जयादा नही. िजसे देख कर उसका लणड फड़क उठता था। मै हंस पड़ी … " भूरा. मसती से चोद दे … मुझे भी मजा आ रहा है…" मेरी गाणड चोदते चोदते उसने अब मेरी चूत को सहला कर धीरे से उसमे लणड घुसा िदया। मेरी चूत जैसे सुलग उठी। उसके भारी हाथ मेरी छाितयो को मरोड़ने लगे। मै उसके चोदने से मसत होने लगी। वो अब मेरे ऊपर लेट गया और अपने दोनो हाथो पर शरीर का भार ले कर ऊपर उठ गया। अब उसके शरीर का बोझ मेरे ऊपर नही था। वो और मै िबलकुल फ़ी थे। मुझे भी अपनी चूत उछालने का पूरा मौका िमल रहा था। वो बार बार चूम कर मेरी चूत पर जोर से लौड़ा मार रहा था। मेरा शरीर जैसे वासना के मारे उफन रहा था। अधखुली आंखो से मै उसके रप का सवाद ले रही थी. िनकल जायेगा …" वो आननद से मचलता हुआ बोला। "इतना मसत सुपारा … चल मेरी चूत मे इसे घुसेड़ कर मुझे मसत कर दे।" मेरी चूत अब रितरस से सराबोर होने लगी थी। उसने तुरनत मेरी टागो के बीच मे आकर उनहे ऊपर उठा िदया। इतना ऊपर िक मेरी गाणड की गोलाईया तक भी ऊपर उठ गई। तभी आशा के िवपरीत उसने मेरी गाणड मे लणड घुसा डाला। लणड िबना िकसी तकलीफ के असीम आननद देता हुआ सरसराता हुआ गाणड मे घुस गया। "ओह … भूरा… मार दी मेरी गाणड … अचछा चल … शुर हो जा !" मै आननद से लबरेज हो कर मचल पड़ी। "दीदी सच कहूँ. उसके चेहरे के चोदने वाले भाव देख रही थी। मेरी उतेजना चरमसीमा पर थी। तभी मै चीख पड़ी और मेरा रज छू ट गया। तभी भूरा ने अपना लणड िनकाला और और मेरे मुख मे पूरा घुसेड़ िदया। तभी उसका वीयर मेरे मुख मे िनकल पड़ा और हलक मे उतरता चला गया। मेरा रज िनकलता जा रहा था और मै पसत हो कर अंधेरे मे खोती जा रही थी। सवेरे जब आँख खुली तो मेरा कुता ऊपर था और दादी मा मुसकरा कर मुझे चादर ओढा रही थी। "िबिटया रानी.

मुझे तो सखत लौड़े की आवशयकता थी जो चूत के या गाणड के भीतर तक जाकर मेरी यौन कुधा तृपत कर सके ! . जो मुझे देख कर जा रहे हो …" "दीदी."आजकल की लड़िकया ! मेरी बात तो सुन ही नही रही है … सारा धयान जवान लड़को पर रहता है। अरे भूरे … यहा तो आ !" भूरा ने अनदर आते ही मुझे देखा और मुड़ कर वापस जाने लगा। "ऐसा कया है भूरा. मुझे काम याद आ गया है …" और वो दो छंलागो मे कमरे से बाहर भाग गया। मै उसकी बेरखी पर तड़प उठी। सारी छुिटया अब कया मुझे सपनो मे जीना होगा। उह ! यहा तो कोई चोदने वाला भी नही िमलता। छुिटयो मे शहर से सभी लड़के अपने अपने घर चले गये थे … कौन था भला मुझे चोदने वाला … िकससे अपनी चूत की पयास बुझाऊँ…? मुझे लगा िक अब यहा से जलदी ही पसथान करना चािहये। कब तक भला अकेली ही पड़ी िवचारो का मैथुन करती रहूँ.

मै गयारहवी कका मे था.बात उन िदनो की है जब मैने जवानी की दहलीज पर पहला कदम ही रखा था और मुझे खुद पता नही था िक मै इतना िकसमत वाला हूँ िक मुझे चोदने का अवसर इतनी जलदी िमल जायेगा... मैडम ने कहा. मै जाती हूँ ! इतना कहकर वो जैसे ही खड़ी हुई बरसात और जोर से चालू हो गई और मैडम झललाने लगी और मन ही मन बरसात को कोसने लगी। बाहर से कका मे पानी जयादा आ रहा था इसिलए उनहोने खुद आगे आकर दरवाजा बंद कर िदया और मुझसे बाते करने लगी। करीब 10 िमनट इधर-उधर की बाते करने के बाद उनहोने अपने बाल खोल िलए और अपना दुपटा सामने मेज़ पर रख िदया कयोिक वो दोनो गीले हो गए थे। यकीन कर पाना मुिशकल था िक वो बाल खोलने के बाद इतनी सेकसी लगेगी। कुछ समय तो मुझे खुद अपनी आँखो पर भरोसा नही हुआ। मै गुपचुप तरीके से उनहे देख रहा था और इस वजह से मेरा लणड तन कर खड़ा हो गया था। मै लाख कोिशश कर रहा था िक िकसी तरह लणड को छुपा लूं और मैडम से बात करँ तािक मै उनहे देखता रहूँ। पर मै उनके तुनक-िमजाज से वािकफ था। हालािक इसी दौरान मै देख रहा था िक मैडम की ितरछी नजर मेज़ के नीचे से मेरे लणड पर जा रही थी। . रतबा इतना था िक अगर सकूल पिरसर मे एक पलािसटक की थैली या कागज का टुकड़ा भी िदख जाये तो चपरासी की खैर नही ! पढाती वो इंिगलश थी। हमारे सकूल मे आये हुए एक साल ही हुआ था उनहे ! मुझे आज भी वो िदन याद है िसतमबर 11.. रतलाम से ३५ िकलोमीटर दूर मेरा गाव था और मेरे गाव से 8 िकलोमीटर दूर मेरा सकूल...ठीक है. मेरी कका मे केवल मै अकेला और पूरे सकूल मे कुल 20-25 छातो के साथ तीन अधयापक और दो अधयािपकाएँ आई थी। जब रिशम मैडम का पीिरयड आया तो वो हमारी कका मे आई और मै अकेला कका मे बैठा इितहास पढ रहा था। वो आकर बैठ गई और कहने लगी. जहा पर गयारहवी कका मे कुल जमा 11 सािथयो मे 3 लड़िकया और बाकी 8 हम मुसटणडे। रिशम नाम की 27 साल की एकदम तुनक िमजाज मैडम.? मैने कहा.जैसी आपकी इचछा मैडम..आज तुम अकेले कया पढाई करोगे. 2003 को दोपहर मे काफी तेज बािरश हो रही थी. पर उसके साथ कुछ फलसफा भी ! बरसात के िदन थे..

िफर मेरे मन ने कहा. गाव मे िकसी ताितक से बनवाई है। िफर मैने भी शरारत भरी िनगाहो से पूछ िलया. यिद ऐसा हुआ तो मै गाव मे जाकर आपके िलए िबसतर ले आऊँगा। तो इस बात पर वो हंसने लगी और कहने लगी..मैडम. यह आप सभी को पता है। अचानक मैडम खड़ी हुई और कका मे इधर उधर घूमने लगी और मुझसे पूछा..लड़के अपनी कापी-िकताबे कैसे रखते है? िकतने बेकार तरीके से िलखते हो ! और वही तुनक-िमजाजी चालू. अचानक उनहोने कहा.कया तुमहे सदी नही लग रही? तो मैने जवाब िदया.. आपको कैसे मालूम िक लड़के इतने बेकार कापी-िकताब रखते है? तो एक पल तो वो गुमसुम सी गई लेिकन उनके चेहरे से लग रहा था िक वो कही िकसी को याद कर रही है कयोिक उनकी जवा््न नन ी भी िहललोरे ले रही थी और यौवन भी नही टू टा था। धीरे-धीरे बात करते-करते जैसा हमेशा होता है...आपके गले मे जो माला है.. मैने कहा.. उनहोने मुझे छू ना चालू कर िदया। मैने पहले अनाकानी की.पता नही था िक बरसात इतनी तेज आ जायगी। नही तो मै अपने साधन अपने साथ लाती। हालािक मेरे मन मे तब तक मैडम के पित कोई गलत भावना पैदा नही हुई थी पर एकाएक उनहोने सवाल दागासोचो िक यिद आज पानी ऐसा ही आता रहे और हमे इसी कमरे मे रात गुजारनी पड़े तो कया होगा? मै सकपका रह गया और इधर उधर देखने लगा िक अब कया कहूँ? यिद मैने ऐसा-वैसा कुछ कहा तो िपटाई पकी ! उनहोने 2-3 बार पूछा...हा मैडम ! लग तो रही है। िफर मैडम ने कहा. मैने बीच मे टोकते हुए पूछ िलया. तुम पूरे बेवकूफ हो ! मैने उनहे पहली बार हँसते हुए देखा था। एक-आध बार कही सटाफ-रम मे जरर देखा होगा पर कका मे कभी नही। वो मेरे पास आकर बैठ गई और मेरी िकताबे और कािपया देखने लगी और कहने लगी.. यह कया सर ने दी है? . मौका मत छोड़ना.तुमहारे गले मे यह माला िकसकी है? मैने कहा.चाहते हुए भी मै इसे िछपा नही सकता था कयोिक आज से सात साल पहले कपड़े िकस ढंग के पहने जाते थे..दोसत िशकार खुद तेरे पास आया है.मेरे मममी ने दी है.आिदतय.मैडम.

.कया है इसमे? मैने कहा.कया कभी िकसी लड़की को अपना दोसत बनाया है? मैने मना कर िदया और पूछा.नही. दरवाजे और िखड़की बनद कर दो। पानी बहुत तेज आ रहा है। पूरे कमरे मे पानी भर जाएगा। मैने आगे कुछ पूछने की जररत नही समझी...नही. िफर उनहोने राहत भरी मुसकान के साथ कहा.आपने कभी िकसी लड़के को अपना दोसत बनाया है? उनहोने कहा.आिदतय. मेरी िघगगी बंध गई. आिखर वो गुर जो थी। उनहोने अचानक अपना हाथ मेरी पैट की जेब पर रखा और पूछा... यह मैने बनवाई है। और इस लोकेट मेरे मममी-पापा के फोटो है। उनहोने आगे होकर लोकेट मे से मुझे फोटो िदखलाई। जब मै लोकेट मे फोटो देख रहा था तो मेरा धयान फोटो मे कम और 38-26-36 के बदन पर जयादा था। उनहोने इसे भाप िलया. उनहोने मुझे बैठने को कहा तो मै। बैठ गया। उनहोने पूछा...कैस? े ? .कुछ नही मैडम ! बस ऐसे ही ! मेरी पैट की जेब मे तमबाकू का गुटखा था जो मेरे सीिनयर ने मुझे िदया था। मैडम ने पैट मे हाथ डाला तो उनके हाथ मे गुटखा नही. मेरा लणड आ गया जो वो खुद चाहती थी। जब उनहोने लणड को पकड़ा तो ततकाल अपना हाथ बाहर िनकाला और कहा.वो एकदम सकपका गई ! मै डर गया. मै उनके इशारो को भाप गया था और उठ कर िखड़की और दरवाजे बनद कर िदए और मैडम के पास आकर खड़ा हो गया. डर के मारे मेरे हाथ-पाव कापने लगे। मै मैडम से नजर नही िमला पा रहा था और ना ही मैडम मुझसे ! दो िमनट ऐसे ही गुजर जाने के बाद मैने अपने हाथो पर कुछ महसूस िकया तो देखा िक मैडम का हाथ मेरे हाथ के ऊपर था और वो उसे बड़े पयार से सहला रही थी। मै हाथ हटाने की कोिशश कर रहा था पर न चाहते हुए भी हाथ वही पर अटका हुआ था। िफर उनहोने बड़े पयार से कहा. आज पहली बार ऐसा मौका िमलेगा ! मैने शरारत भरी िनगाहो से पूछा.यह कया है? मै घबरा गया.

.बहुत शैतान हो. आपने मेरा सामान भी हाथ मे ले िलया तो गुर-िशषय वाली बात तो कब से खतम हो गई... मेरे हाथ और होठो के सपशर से वो अजीब सी आवाजे िनकालने लगी थी। .. िफर मैने नंगी मैडम के िजसम को दबोच िलया। वो कराहने लगी। मैने अपने होठो को उनके रसीले होठो पर रख िदया और जी भर के उसका रस पान करने लगा। एक हाथ से चूिचयो को दबाता...उईई ईई . बातो के दौर मे कब उनहोने मेरे हाथ को पकड़ कर मुझे अपनी बाहो मे ले िलया मुझे पता ही नही चला.जैसी आपकी इचछा मैडम ! पर िफर मैने तकर िदया िक जब इतना कुछ हो गया है..जग गगग .. लेिकन अब सब कुछ सामानय हो गया था। हम दोनो की सासे तेज होने लगी। मैने जम कर मैडम के पूरे बदन को बेतहाशा चूमा ... धीरे . दूसरे हाथ से उनके िजसम को पूरा कस के अपने िजसम से िचपकाया। हम दोनो हाथ-पाव मारने लगे। इस बीच उनके मुंह मे जीभ डाल कर मैने उसे बुरी तरह चूमा। उनके मुँह से आहहह उफ. मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैडम मेरे सर पर हाथ फेरते हुए लाड कर रही थी.. मै मैडम के बड़े बड़े दोनो सतनो को बारी बारी चूस रहा था. धीरे धीरे ठणड के सरर के साथ दोनो के शरीर मे कंपकंपी चालू हो गई.. मसलता रहा.. और इसमे बुरा कया है? कुछ देर सोचने के बाद मैडम ने मुझे चूमना शुर कर िदया.... िपलजज़ . यह गलत है .... पर मै पूरी तरह से उनकी भरी भरी चूिचयो को दबाता रहा उनके चुचूको को उंगिलयो के बीच लेकर मसलने लगा। मैडम अब िससकािरया भरने लगी. यह ठीक नही है.आिदतय...नही ... एकदम गोरा और िचकना बदन था। वो दोनो जाघो को िसकोड़े हुए थी... मेरे होठ उसके बदन पर िफसलने लगे .कया हुआ मैडम? उनहोने कहा. यह गुर-िशषय की परमपरा के िखलाफ है ! और रोने लगी। मैने कहा... थोड़ी देर बाद मेरे और मैडम के तन पर कपड़े नही थे. छोड़ दो मुझे . मै तुमहारी मैडम हूँ ..आिद ऊउऊ .की आवाज िनकलने लगी. िफर उनहोने दो डेसक साथ लगा ली और उसके ऊपर बैठ कर मुझे अपनी बाहो मे ले िलया। मै भी भूखे शेर की तरह उनके ऊपर चढ गया। हालािक मैने इससे पहले केवल बलू िफलमो मे ऐसा देखा था। िफर एकाएक उनहोने मुझे अलग िकया और खड़ी हो गई। मैने कहा.तो वो हंसने लगी और कहने लगी.....

उनके लाल-लाल चुचूक उठ कर खड़े होकर तीर की तरह नुकीले लग रहे थे। तब मैडम ने मुझसे जोर से िलपट गई। दो बदन एक दूसरे से रगड़ने लगे मेरी सास फूलने लगी। हम दोनो तेजी से अपने मकसद की ओर आगे बढने लगे। दस िमनट तक हम दोनो ने एक दूसरे को पूरा चूमा-सहलाया। मैडम ने पहली बार शरमाते शरमाते मेरे लणड को पकड़ा तो बदन मे िबजली सी दौड़ गई। पहली बार मैने कहा.. िबना बाल की गोरी उभरी हुई। िदल कर रहा है इसे खा जाऊँ ! इतना कह कर मै उनकी चूत पर झुका और चूत के होठो को अपने होठो से चूमने लगा। मैडम तो जैसे उछल पड़ी। बाहर बरसात की आवाज़ और इधर पूरे कमरे मे बस िससकािरया गूंजने लगी. मैने वहा सहलाया तो उनहोने िसहर कर अपनी जाघे खोल दी और अब मेरी नजर उनकी चूत पर पड़ी। मै झूम उठा. गुलाबी रंग की चूत के बीच मे एक लाल रंग का होल िदखाई िदया। यह देख कर मुँह मे पानी आ गया। मैडम के िजसम को चूमने -सहलाने और दबाने के बाद मैडम का अंग-अंग महकने लगा. ओह मुझे अजीब सा लग रहा है। मै बड़े पयार से मैडम की चूत को चूसता.अब हट जाओ आदी ! अब सहन नही हो रहा ! पता नही यह सब कया हो रहा है? पर जो भी हो रहा है उसमे मुझे बहुत मजा आ रहा है ! मै मैडम के ऊपर आया तो मैडम ने िसर उठा कर मेरे लौड़े की तरफ देखा। मैने कहा. आहऽऽ मै मरी .मैडम. उसकी दोनो चूिचया कड़ी और बड़ी हो गई..... चूमता चाटता रहा। वो अपने होठो पर जीभ फेर रही थी और मचल रही थी िक अचानक िचललाई.इसे आप अपने मुँह मे लो ! उनहोने कहा.जोर से कहते हुए मेरा िसर अपनी जाघो मे दबा िलया और मेरे बाल खीचने लगी। मैडम ने आहे भरते हुए जलदी-जलदी तीन-चार झटके पूरे जोरो से अपने चूतड़ उठा कर मारे। मैने िफर भी उनको नही छोड़ा और अपनी जीभ से उनकी चूत से बहने वाले रस को चाट गया। वो कह रही थी. अऽऽऽ ये कया कर रहे हो. सच मे बहुत ही िचकनी है यह चूत.मैडम.आदी ! मै तो मर जाऊंगी इतने मोटे और लमबे से ! यह मेरे गले मे अटक जाएगा ! बमुिशकल उनहोने एक िमनट मुँह मे रखा होगा और उनहे िहचिकया आने लगी। . इसके साथ खेलो ! शरमाओ मत ! अब हम दोनो मे शमर कैसी? मेरा बदन बहुत ही गरमा चुका था। तब मैने मैडम को िलटा िदया और उनके ऊपर आकर जोर से चूिचयो को िफर से दबाया। पर जब मैने चूत की तरफ देखा तो चूत तो पूरी गीली थी. उसमे से रस िनकल रहा था। मैने मैडम के पावो को चौड़ा िकया तो उनकी फूली हुई गुलाबी चूत पूरी तरह िदखने लगी। मैडम की गुलाबी चूत को देख कर मैने कहा. एक भी बाल नही था....मेरी धयान अब उनके पेट से होते हुए गहरी नािभ पर गया...ओह आ आिद .आदी ऽऽ छोड़ मुझे.

..आऽऽह.... और कहा? मैने मैडम से पूछा। अचछा अब तुमहे बताना पड़ेगा? मैडम तड़फते हुए बोली। मैडम के मुँह से ऐसा सुन कर मै हैरान रह गया। तभी मैडम ने एक ऐसा झटका िदया ऊपर की तरफ अपने चूतड़ो को िक एक बार मे ही मेरा पूरा का पूरा लौड़ा मैडम की चूत की गहराई मे उतर गया। मैडम के मुख से िनकला... आऽऽह.. उनकी गीली चूत को थोड़ा और खोला और अपना लणड का िसर उस पूरे अनिखले गुलाब के फूल मे रख िदया। मैडम ने कहा. आऽऽह. हा....आऽऽह..आऽऽह.....मार डालेगा कया? ....आऽऽह...रक जरा ....आऽऽह.....आऽऽह.आऽऽह...मज़ा आ रहा है ! करते रहो ! चूसो ! मैडम की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी और मेरा लौड़ा बड़े आराम से अनदर बाहर आ जा रहा था। मैडम भी अपने चूतड़ उठा उठा कर सहयोग कर रही थी। वो मदहोश हुई जा रही थी। उनके आननद का कोई पारावार ना था। हालािक उनको उस दौरान रकत भी िनकल रहा था पर इस रिसक-आननद के दौरान उनहे कुछ पता नही चल रहा था और मै यह बात उनहे बताना लाजमी नही समझ रहा था। अब मै चरमोतकषर तक पहुँचने वाला था और मैने पूरे जोर से आिखरी धका िदया तो मेरा लणड मैडम के गभाशय तक पहुँच गया शायद और वो चीख पड़ी.धीरे..थोड़ा अनदर तो करो ! मैने कहा..हम. आऽऽह.आह हय ! मार िदया ! एक ददर िमिशत आननद भरी चीख ! अब मै मैडम के ऊपर िगर सा गया और उनको िहलने का मौका ना देकर उनके होट अपने होटो से बंद कर िदये और अपने चूतड़ ऊपर उठा कर एक जोर का धका मारा तो मैडम िफर तड़प गई। इसके बाद तो बस आऽऽह..िफर मै चोदने के आसन मे आ गया और मैने मैडम की टागे चौड़ी की..अभी करता हँू। यह कह कर मै अपना लौड़ा धीरे धीरे बाहर ही रगड़ने लगा। मैडम बेचैन हो उठी। वो अपने चूतड़ ऊपर को उठा-उठा कर लौड़े को अपनी चूत मे डलवाने की कोिशश कर रही थी। मै उनको तड़फाते हुए उनकी सारी कोिशशे नाकाम कर िदए जा रहा था। अब डालो ना ! मैडम बोली। कया डालूँ..आऽऽह..आऽऽह... हाऽऽअः हम दोनो की एक जैसी आवाजे िनकल रही थी। काफी देर ऐसे ही चलता रहा। बीच बीच मे मैडम बड़बड़ाती रही.आऽऽह...जोर से...आऽऽह..

मै कका के दरवाजे से उनको एकटक देख रहा था..मै कर लूँगी ! मुझे अपना रमाल दे दो ! इसी बीच उनहोने अपना खून िनकलते हुए देख िलया और िफर रोने लगी..... बाहर पानी की बूंदो के साथ मैडम के आँखो से िनरंतर पानी की धाराएँ चालू थी. कुछ दूर लंगड़ाने के बाद उनहोने अपने आपको संभाला और तेज बरसात मे आगे बढती रही। सटाफ रम मे अपने सामान को रखने के बाद वो उसी मंद-मंद चाल से बस सटैड की तरफ जाने लगी। एक मैडम ने उनहे आवाज दी िक इतनी तेज बािरश मे कहा जा रही हो मैडम? थोड़ा रक जाओ ! इस बात को अनसुना करते हुए वो अपने पाव िनरंतर बािरश की तेज धारा मे रखते हुए बस सटैड की तरफ जा रही थी. मैने मैडम की चूत साफ करने की कोिशश तो उनहोने हट जाने को कहा और कहा..मेरे मुँह से िनकला.. यह तो होना ही था ! आज नही तो कभी न कभी मेरा शील भंग होता ही . िफर उनहोने आँखे साफ की और सटाफ रम की तरफ जाने लगी..आदी.. रोते-रोते वो कहने लगी. उसके बाद उनहोने डेसक साफ िकए और मैने उनहे वािपस सही जगह रखने मे उनकी मदद की। िफर मै अपनी जगह और वो अपनी जगह बैठ गई और समझने लगी िक जो हुआ. इसके बारे मे हम कभी आगे से बात नही करेगे और न ही तुम कभी इसके बारे मे िकसी को बताओगे। दो िमनट हम दोनो ऐसे ही चुप रहे..आदी. मैने पूछा.? हालािक तब तक उनको खून बहने का अहसास नही था...कया हुआ मैडम? आप रो िकसिलए रहे हो..पर पता नही आज मुझे ऐसा कया हो गया ? और वो और जोर-जोर से फफक-फफक कर रोने लगी जैसे उनकी पूरी दुिनया ही लुट गई है ! सच मे इसके बाद मुझे खुद भी अचछा नही लग रहा था पर तब तक मै बेशमों की तरह अपने सारे कपड़े पहन चुका था...... . मैने कसम खा रखी थी िक मै सहवास सबसे पहले अपने पित से शादी की सुहागरात के िदन ही पापत करँगी उससे पहले कभी नही. उनकी आँखो मे जो पानी था उससे पता नही चल रहा था िक वो पानी है या आँसू.....बस हो गया ! मेरा लनड मैडम की चूत मे िपचकािरया मार रहा था। मैडम भी चरम सीमा पापत कर चुकी थी। िफर कुछ रक रक कर हलके हलके झटके मार कर मै मैडम के ऊपर ही लेटा रहा। हम दोनो अधरमूिछरत से पड़े रहे काफी देर। थोड़ी देर बाद उनके मुख पर असीम तृिपत का आभास हो रहा था। उनके लबो पर बहुत हलकी सी मुसकान भी िदख रही थी। मै धीरे से उठा और अपने आपको रमाल िनकाल कर साफ िकया। मैने मैडम की तरफ देखा तो वो अभी भी लेटी हुई थी और उनकी आँखो से आँसू बह रहे थे. उनहोने कहा.....

पर मुझे पता था िक मैडम ने ऐसा कयो िकया. उसके कुछ िवशेष अनदाज मेरे िदल को तड़पा जाते थे। वो बुद ू तो था ही..अगले दो िदनो तक वो सकूल नही आई. सटाफ मे पता िकया तो पता चला िक उनकी तबीयत ठीक नही है। तीसरे िदन वो सकूल आई तो वही तुनक िमजाज और मेरे साथ भी वही पुराना बताव जैसे बीते हुए इन तीन िदनो मे िकसी पकार की कोई हलचल नही हुई हो. गोरा रंग. मै आपसे पूछना चाहता हूँ िक कया मुझे मैडम से बात करना चािहए या नही? या िफर उनको अपनी दुिनया मे खुश रहने देना चािहए? कृपया मुझे कुछ सुझाव अवशय दे ! मेरा देवर मुझसे कोई दस साल छोटा है.. एक अचछी कमपनी मे नौकरी कर रहा हूँ. बीते िदनो मैडम मुझे खंडवा के बॉमबे बाजार मे िमल गई। मैने उनहे देखा. उस िदन से ठीक अटारहवे िदन मैडम ने अपना तबादला िजला मुखयालय पर करवा िलया. बाद मे कभी एकाध बार मैने मैडम को बस मे कही आते-जाते हुए देखा पर उनहोने कभी मुझसे बात नही की। मैने बारहवी की परीका पास की और सनातक की पढाई पताचार से की। इस दौरान मैने आज तक िपछले सात सालो मे िकसी लड़की को हाथ तक नही लगाया। मेरी पहली चुदाई इतनी जलदी और इतनी बिढया तरीके से हुई पर इसके बाद मे बस हाथ से िहलाता रह गया.. दोसतो... पता नही वो कया करना चाहती है.. पहचाना और उनका पीछा िकया तो पता चला वो यही पर एक सरकारी सकूल मे गयारहवी और बाहरवी कका को अंगेज़ी पढाती है.. उसकी मासूिमयत का मै नाजायज फायदा उठाती थी। .. सब अपने अपने मन के कयास लगाये जा रहे थे.... उसकी खूबसूरती. मुझे लगा शायद कुछ हुआ होगा। मै डरने लगा. जबिक उनके इस कृतय मे मै भी तो बराबर का िजमेदार हूँ। मैडम ! मै जानता हूँ िक आप यह अनतवासना वेबसाइट नही पढती होगी पर अगर िकसी तरह आप तक यह सनदेश पहुँच जाए िक अगर आप कोई पायिशत कर रही है तो इसमे मुझे भी बराबर का भागीदार बनाएँ ! और दोसतो. िकसी को कुछ पता नही चल रहा था..... हालािक मै बहुत खुश था.. हर कोई मैडम के इस फैसले से हैरान था. उनहोने अभी तक शादी नही की है. पर मुझे वो बहुत पयारा है। वो सीधा-साधा.... पर दुभागयावश मेरा पयार वासनामय था। सच पूछो तो उसका लमबा कद.. और कयो अपने आपको बुरा मानकर दोषी ठहरा रही है. शायद मेरे अचछे भिवषय के िलए या िफर बाद मे कभी आने वाली िकसी मुसीबत से बचने के िलए. पूरा सकूल सकते मे था. हंसमुख है। मेरा हर काम वो पलक झपकते ही कर देता है। वैसे वो भी मुझसे बहुत पयार करता है। शायद उसका पयार तो भाभी के िलये था.... आज मै खंडवा मे हूँ. भोला-भाला सा है...

पता नही वो जाने या िफर अनजाने मे ये कर रहा था। मेरी चूत मे मीठी सी गुदगुदी भरने लगी। मैने झुक कर उसके गालो पर चूम िलया। उसने भी अपने हाथ जाने कया करने के उठाये पर वो मेरे सतनो से जा टकराये. िफर मैने भी उसका सर अपने दोनो सतनो के बीच रख कर उसके बालो को सहलाते हएु सुला िदया था। पर उसने मेरी चूत मे एक मीठा सी कसक भर दी थी . पर इस बार वो गोदी मे अपना सर मेरी चूत पर दबा रहा था .. । वो बेचारा अनजान सा िबना चडडी पहने घर मे घूमता रहता था। बरसात मे नहाने पर उसका सफेद पजामा उसके कूलो से यो िचपक जाता था िक उसके दोनो पोनद नंगे से नजर आने लगते थे... मुझे नीद सी आ रही है . मसल डालूँ.. िजसकी नरमाई से वो तड़प सा गया। उसकी दोनो टागे कापने लगी। उसका लणड एक बार िफर से फड़क कर लहरा उठा। "भाभी." शायद यह वासना का पभाव था। ... मेरी सासे तेज हो उठी। मेरे िदल की धड़कन तेज हो उठी। मैने नीचे से चूत का दबाव उसके सर पर दे िदया . मुझे हमेशा की तरह उसका सपशर तन पर मोहक लग लग रहा था। उसके अिधक से अिधक सपशर को पाने के िलये अब मै अनदर बा और चडडी नही पहनती थी। आज मेरे उभरे हुए सतनो पर वो हाथ भी मार रहा था। मेरे शरीर मे वासना भरी गमाहट चढने लगी थी। पर पापा की आवाज ने मेरा धयान भंग कर िदया था। पापा को दफ्तर जाना था। मै रिव के कमरे से िनकल कर भाग कर नीचे आ गई। पापा का का भोजन िटिफन मे लगा कर उनहे दे िदया और वो रवाना हो गये। मैने घर का दरवाजा नीचे से लगा िदया और वािपस ऊपर रिव ले कमरे मे चली आई। रिव भी सुसताया हुआ सा था। मै उसके िबसतर पर आकर बैठ गई। बस मुझे देखते ही उसमे िफर से मसती आ गई। मुझे लगा िक जैसे वो मेरे पयार मे खोने लगा था। मेरी गोदी मे उसने सर रख िदया और मुझे िनहारने लगा। मै भी उसके बालो मे हाथ फेरने लगी..कभी सर ददर का बहाना करके सर दबवाती थी और उसका सपशर पाकर मुझे आनतिरक सुख िमलता था। कभी कभी तो मै उससे अपने पाव की मािलश करवाती थी.. मुझे झुरझुरी सी आ गई। तभी मेरी नजर उसके पजामे पर गई.. तो जैसे मेरे िदल के तार झनझना जाते थे। मन करता था िक िकसी भी तरीके से उसके साथ चुदाई कर लूँ. मल-मल कर उसका माल िनकाल डालूँ. उसके सोये हुए लणड की भी तसवीर िदख जाती थी। पर वो अनजाना बेसुध हो कर वषा का आननद लेता रहता था. उसके पजामे को ऊपर उठा िदया था। शायद उसकी वासना जागने लगी थी। मुझे लगा िक उसके लणड को मै भीच लूँ. । मैने अपने दोनो हाथो से उसकी जाघे पकड़ ली और उनहे सहलाते हुए लणड के पास तक आ गई। मेरे दोनो सतन उसके मुख पर जोर से दब गये. उसका लणड अनजाने मे सीधा खड़ा हो गया था. उसका मेरी जाघो तक का सपशर मुझे बेहाल कर देता था। कभी कभी तो उसके साथ मै उसी के िबसतर पर लेट जाती थी. और हंसी मजाक करने के दौरान उसका हाथ मेरे नाजुक अंगो को सपशर कर जाता था.. इस बात से अनजान िक कोई अनय भी उसके महकते जवान िजसम को िनहार कर अपने मन मे और भी वासना की भावना को पजविलत कर रहा है। एक बार तो िबसतर पर लेटे हुए मजाक करते समय उसने मसती मे उसने मेरे दोनो सतनो के मधय अपना चेहरा घुसा िलया था और मेरे सतनो की नरमाई का आननद लेने लगा था। जब मैने उसे दूर िकया तो उसकी आँखो मे नीद सी भरी हईु थी। वो कया जाने उसने मेरे िदल मे कैसी काम पीड़ा जागृत कर दी थी? पर वो तो लाड़ के मारे नीद मे हो गया था. । आज भी हम दोनो िबसतर पर लेटे हुए ऐसे ही मसती कर रहे थे। वो मेरे बदन मे गुदगुदी कर रहा था.

... ऐसा लगता है िक आपसे ऐसे ही िलपटा रहूँ. मेरा पेटीकोट भी ऊपर उठा दे ."तो सो जा मेरी गोदी मे !" मैने उसकी ओर झुकते हुए कहा। वो उठ कर िबसतर पर ठीक से लेट गया और मेरी गले मे बाहे डाल कर मुझे भी लेटाने की कोिशश करने लगा। मै िबना िकसी बहाने के लेट गई और वो मुझसे िलपट कर सोने का उपकम करने लगा। उसकी टागे मेरी कमर के ऊपर आ गई और वो एक छोटे बचचे की तरह मुझसे िलपट कर आँखे बनद करके सोने का पयास करने लगा। मेरे सतन जैसे फूलने लगे. िदल तेजी से धड़कने लगा था। .... !! मेरे ईशर !! मेरा सब टू टा जा रहा था। मेरा हाथ नीचे बढ कर उसके लणड पर चला गया और दूसरे ही पल उसका लणड मेरे हाथो मे दबा हुआ था। रिव ने एक िससकारी भरी। वो जैसे तड़प सा उठा। हम दोनो वासना से भरे हुए एक दूसरे को जैसे खीचने लगे। तभी रिव ने भी मुझे एक झटका िदया और मेरे ऊपर आ गया। "भाभी मुझे यह कया हो रहा है ? मेरा मन आपसे िलपट कर कुछ करने को होने लगा है।" उसका बड़ा सा लणड पजामे मे उभर कर बुरी तरह से फड़फड़ा रहा था। "रिव.. यह तो पयार है बस.. पर आगे बढने के िलये कुछ तो करना ही पड़ेगा ना। "हा भाभी.." मेरी सासे उखड़ रही थी... ऐसा तो जवानी मे सभी को ऐसा लगता है. चुचूक भी कठोर हो गये। मेरा बलाऊज जैसे तंग होने लगा. आपके होठो पर पयार करँ .. कभी मन करता है िक तुझे मै अपने मे समा लूँ !" उसे मैने अपनी ओर खीच िलया। उसका बिलष लणड मेरी चूत मे घुसने के िलये जोर मारने लगा। इसका मतलब था िक वो समभोग के िलये एकदम तैयार है। "नही भाभी." वो िननदासा सा होकर बोलने लगा। "कुछ नही रिव. फंसने सा लगा था। लगा िक वो जैसे फट जायेगा। मैने अपनी आँखे वासना के नशे मे बंद कर ली और अपने सतन उसके चेहरे पर दबा िदए। उसके लणड का कड़ापन मेरे कूले के इदर-िगदर चुभने लगा। मुझे अपना सपना साकार होता नजर आने लगा। मैने धीरे से उसके चूतड़ो पर हाथ रख कर अपनी ओर जकड़ िलया। उसका लणड मेरी चूत के आस पास गड़ने लगा। "भाभी.. वो अपना मुख उठा कर चूमने की मुदा मे मुख बनाने लगा। िफर उसने िबना िकसी िहचक के मेरे होठ चूम िलये। मैने मौके का फायदा उठाया और उसके होठो को अपने होठो से दबा िलया। मैने जोश मे उसे एक पलटी मार कर अपने नीचे दबा दबा िलया। उसका लणड अब मेरी टागो के ठीक बीचो-बीच चूत पर दब रहा था। मेरी चूत एकाएक लणड लेने के तड़पने लगी। रिव भी अपने होश खो बैठा और उसने मेरे मममे दबा िदये। आहहह . िफर सब अपने आप हो जायेगा. मुझे तो लगता है िक मै आपके शरीर मे समा जाऊँ !" उसने िफर अपने लणड का जोर नीचे लगा िदया। मुझे लगा िक अब मैने अपने पेटीकोट को ऊपर नही िकया तो वो या तो झड़ ही जायेगा या मेरे पेटीकोट समेत ही लणड को चूत मे घुसा देगा। "बस दो िमनट ... कड़े होने लगे. कुछ अजीब सा लग रहा है . तुझे पयार करना है ना." मै अपने अधरो को उसके समीप ले गई. मुझे कुछ हो रहा है...." मैने उसे पयार करने का नयौता दे डाला। ऐसा कहने मे मुझे शमर सी आ रही थी.. अपना पजामा उतार दे ...

. मजा आ रहा है ना.आहहह... तभी तो वो ददर को सह रहा था। पर उससे मुझे कया लेना था... हा .."सच भाभी .. मुझे तो बस अपनी गाणड मरवानी थी सो मै तो वही मजे ले रही थी। उसके धके मुझे असीम आननद दे रहे थे। मेरी चूत की खुजली भी तेज होती जा रही थी। वो अपने हाथ मेरे सीने पर डाल कर उभारो को मसले जा रहा था। मेरी िससिकया बढती जा रही थी..." "देख तेरा नीचे ये लणड कैसा फूल रहा है . उसका लणड तेजी से अनदर घुसने लगा। मैने िससकते हुए इस आननद भरे कण को महसूस िकया और उसे अपने से जोर से िचपका िलया। मेरे मुख से एक हलकी सी चीख िनकल गई। उसका लणड पूरा जड़ से टकरा गया था। "रिव. इसे बाहर िनकाल और हवा लगने दे।" मैने अपना पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर िदया। उसने जलदी से अपना पजामा उतार िदया. मेरी चूत भीग कर पानी छोड़ रही थी। गाणड मराने से जब मेरी चूत मे उतेजना बहुत बढ गई तो मैने उसे हटा िदया और सीधे लेट गई और उसे अपनी टागो के बीच मे बैठा िदया... िफर उसे अपने ऊपर खीच िलया। जैसे ही वो मुझ पर झुका."रिव.. िजतना जोर से लणड मार सकता है .. मैने उसका गीला लणड बाहर िनकाला और रिव से कहा. उसे और भी लणड घुसाने मे भरपूर सहायता की। लणड के गाणड मे घुसते ही मीठी सी गुदगुदी हुई। मैने अपनी आंखे बंद कर ली। उसका लणड सरकता हुआ पूरा अनदर चला गया। मैने भी अपनी गाणड िहला कर उसे ठीक से पूरा घुसा िलया। उसके मुख से कुछ ददर भरी आवाजे आने लगी थी। शायद उसे पता नही था िक उसके लणड की तवचा सुपाड़े के नीचे से िचर चुकी है और सुपारा खुल कर पूरा बाहर आ चुका था। उसके लणड के डणडे पर चमड़ी उलट कर सुपारा पूरा सवतनत हो गया था। वो धीरे धीरे आह भरता हुआ लणड आगे पीछे करने लगा था। उसे आननद अिधक आ रहा था......" ." उसका तन चुदाई की सी िकया करने लगा था। "मेरे पोनद को सहला कर मसल दे जरा.. मार दे ." अरे मुझे भी तो मजा आना चािहये . अचछा तुझे िफर एक नई चीज़ भी बताऊंगी।" मैने तड़प कर उसे लालच िदया। वो मेरी छाती पर से हट गया और मैने तुरनत अपनी पीठ उसकी तरफ कर ली। उसने मेरा पेटीकोट नीचे खीच िलया। मेरे सुनदर उभरे हुए चूतड़ देख कर उसका मन मचल गया। उसने मेरे नरम पर कसे हुए चूतड़ो को बुरी तरह से दबाना चालू कर िदया। अनत वही हुआ जो मै चाहती थी। उसका तनाया हुआ लणड मेरी चूतड़ो की दरार मे घुस गया। मैने अपने गाणड के छेद को ढीला कर िदया। उसके लणड पर मेरा थूक लगा हुआ था सो छेद पर जोर लगते ही अनदर घुस गया। मैने अपनी गाणड का छेद थोड़ा ढीला िकया और उसे अनदर जाने िदया." मै खुशी के मारे चहक उठी। "हा भाभी.... मेरा मुख अपने आप खुल गया और उसे मैने खीच कर अपने मुख मे ले िलया। रिव पागल सा होकर अपनी चूतड़ो को जोर जोर से िहलाने लगा था। उसका लणड मेरे मुख मे आगे पीछे चलने लगा था। मेरा मन चंचल हो उठा गाणड चुदवाने के िलये .. उसका कड़कता लणड मैने अपनी चूत पर रख िदया और थोड़ा सा अनदर सरका िलया.. उसका लणड हवा मे लहरा उठा। मैने पयार से उसे काबू मे िकया और उसका सुपारा खोल िदया। वीयर की महक सी आई। मै उसे देख कर िविसमत सी हो गई। लाल सुनदर सा सुपारा.!" मुझे लगा िक यह भी तो कुछ करे। "नही भाभी.?" "हा भाभी बहुत जोर का मजा आ रहा है.. मुझे तो ऐसे ही मजा आ रहा है.... ये लो... बहुत मजा आयेगा.

.. उसकी जोरदार चुदाई से मेरा शरीर िफर से एक बार और काप उठा और मैने िफर से अपना काम रस छोड़ िदया। तभी वो भी झड़ने को होने लगा। उसका वीयर मुझे चािहये था सो मैने उसका लणड बाहर िनकाल कर उसे मुख के पास आने का इशारा िकया। उसने अपना लणड मेरे मुख मे घुसेड़ िदया। मैने उसके डणडे को पकड़ कर बस दो तीन बार दबा कर ही मुठ मारा और उसका वीयर िनकल पड़ा। उसने एक हलकी सी िससकारी भरते हुए वीयर छोड़ िदया. चेहरे पर पसीना छलक आया था। पर वो बहुत ही मन लगा कर चुदाई कर रहा था। उसकी तेज चुदाई से मै तो िफर से चरमसीमा पर पहंुचने लगी . मेरे िबना वो बेचैन हो उठता था ..उसके ताकतवर झटके ने मुझे िफर से आननद से चीखने पर मजबूर कर िदया। बहुत ही पयारे झटके से चोद रहा था. और िफर से मेरी उतेजना बढ गई थी। वो अब हाफने लगा था... उसकी रफ्तार भी बढ गई . तो कभी उसके गाल काट लेती थी। दो तीन धके उसने ओर लगाये और मै तो जैसे आननद के समुंदर मे डू ब गई। मेरा काम रस िनकल पड़ा. िफर उसके अनाड़ीपन का भी मुझे आननद आने लगा था। वो बार बार जोर से मेरे मममे मचकाने लगा था। उसके होठ मेरे चेहरे को चूम चूम कर गीला कर चुके थे. उसकी सासे तेज हो उठी थी.. पर उसने चोदना जारी रखा। कुछ ही देर मे मै चुदते हुए िफर से तैयार हो चुकी थी. मै झड़ने लगी। मै शािनत से झड़ती रही. बड़ी तेजी से वीयर मेरे मुख मे िपचकारी मारता हुआ छोड़ने लगा। उसका वीयर तो िनकलता ही गया. इतना वीयर तो मेरे पित का भी कभी नही िनकला था। शायद वो एक जवान लणड था सो बहुत सा वीयर िनकला। मै बड़े चाव से सारा वीयर सवाद ले ले कर िनगलती गई। मुझे लगा िक वासतव मे चुदाई का भरपूर सुख तो मैने आज ही िलया है। शायद मन का मीत मेरी इचछा के अनुसार ही िमला था इसिलये मैने यह सुख महसूस िकया था। मेरा और मेरे देवर का इस घटना के बाद पयार और बढ गया था। जब भी घर खाली होता तो वो बस पागल सा हो जाता था और मुझे चोद डालता था। बस एक बार मैने उसे यह लत लगा दी थी और मेरी वासना अपने आप ही रिव शानत कर देता था। नई नई जवानी चढी थी भला कभी रक सकती थी कया. कुछ ही िदनो मे मै उसकी जररत बन गई थी. मै कभी अपनी जीभ उसके मुख मे डाल देती थी....

कम उमर से ही मेरी सहेली ने मुझे यौन िशका मे पवीण कर िदया था। मै चूत. लणड."अनदर आजा यशोदा. सुपारा बाहर िनकला हुआ. चूिचयो के बारे मे सब जानने लग गई थी। उसके कमपयूटर पर अकसर चुदाई के सीन भी देखती रहती थी। मोमबती से मजा लेना मेरी सहेली ने मुझे िसखा िदया था। उनही िदनो दीदी को देखने एक लड़का हिरयाणा से आया हुआ था। बड़ा ही सुनदर और बेहतरीन िजसम का मािलक था वो। वो तो मेरी दीदी को देखते ही उस पर िफदा हो गया था। मै भी दीदी की तरह ही सुनदर िदखती थी। उसकी नजर मुझ पर भी पड़ी। उसकी टेढी नजर मै तुरनत पहचान गई। पापा ने उसे हमारे गेसट-रम मे ठहराया था। होने वाले जीजू को खाना देना. वही रख दे !" जीजू की आवाज ही मुझे सेकसी लगने लगी थी। मै अनदर आ गई और जीजू के बाहर िनकलने का इनतज़ार करती रही। मेरे मन मे तो बस उनका लणड ही बस गया था। मैने अपनी आँखे बनद कर के अपनी चूत दबा ली। "कया हो गया यशोदा? बड़ी बेताब लग रही हो?" जीजू ने मुझे चूत दबाते देख िलया था। "बस जीजू. नीचे खड़ा हुआ झूम रहा था। उसका िजसम गोरा और मासल था। कसरती लगते थे वो ! आह ! िकतना पयारा लणड था !!! मैने िजनदगी मे वासतिवक लणड पहली बार रबर देखा था। अचानक मेरी तनदा टू टी और मैने अपने कदम बाहर खीच िलये। अब बाहर से मैने दरवाजा खटखटाया। अनदर बाथरम का दरवाजा बनद होने की आवाज आई। "नाशता लाई हूँ !" जीजू की आवाज आई. कुछ देख िलया था और अब उसे लेने की इचछा होने लगी है।" मैने सोचा िक उस समझ मे नही आयेगा। पर वो तेज था. नाशता देना मेरा ही काम था। मुझे छोटी जान कर वो कभी कभी मुझे अपनी तरफ खीच कर पयार भी कर लेता था। उसके इस वयवहार से मुझे बहुत आननद आता था। एक बार सवेरे जब मै जीजू को नाशता देने गई तो मेरा िदल धक से रह गया। जीजू सनान घर का दरवाजा खोले शावर मे सनान कर रहे थे। वो िबलकुल नंगे थे। उनका मोटा और लमबा लणड. उसे कया पता था िक मै तो इस मामले मे दीदी से भी आगे हूँ। .

माना िक जीजा साली का िरशता ऐसा ही होता है. तुम िकतनी शरीर हो. बस वही चािहये !" मैने वासना से भर कर कहा। मैने उनका लणड ऊपर-नीचे कर के मुठ सा मारा। "देख यशोदा. मैने आपका लणड देख िलया था."हमे बताओ. वो तो दीदी के िलये आया है. मै यह कया करने लगी थी। मुझे बड़ी शिमरनदगी सी हुई। मै अपना चेहरा छुपा कर कमरे से भाग आई। बाहर आते ही देखा िक दीदी कालेज जाने को सकूटी के पास खड़ी थी। मुझे देख कर वो गेसट रम मे आ गई। मुझे उसने देखा. मजाक नही करना. पर बस मजाक को मजाक ही रहने दे।" मेरे नासमझ िदमाग को एक झटका सा लगा। सही तो कह रहा है. संजय का खयाल रखना. मैने वहा से जाने का बहाना िकया। वो कमरे मे चली गई। मै झट से वापस आई और झाक कर देखा। जीजू दीदी को चूम रहे थे। शायद दीदी के मममे भी दबा रहे थे। मेरे िदल मे एक मीठी सी टीस उठ गई। मै दौड़ कर अनदर कमरे मे आ गई और लमबी लमबी सासे लेने लगी. िदल धाड़-धाड़ कर के धड़क रहा था। लगता था िक िदल गले मे आकर अटक गया है। मै जा कर िबसतर पर औंधे मुह लेट गई। तभी पापा और मममी भी अपने काम पर जाने लगे। "यशोदा. हम दो बजे तक आ जायेगे।" मै चौक गई। अब घर मे कोई नही था। मेरे िदल मे तरह तरह के खयाल आते रहे। िदल वासना से भर उठा। मेरा नासमझ िदल जीजू के साथ के िलये तड़प उठा। घर मे भी कोई नही था। उसका लणड मेरे िदलो-िदमाग पर छाता गया। मेरी चूत गीली होने लगी। मै मन से िववश हो गई। मेरे कदम सवतः ही गेसट रम की ओर बढ गये। . उनहोने तो अपने होठ मेरे होठो से ही िचपका िदये। मै तो अपने होश ही खो बैठी। मुझे एक सुनहरा अवसर िमल रहा था। मैने मौका हाथ से जाने नही िदया। इस पार या उस पार ! बस मेरा ननहा सा नासमझ िदमाग यही सोच पाया। मैने उनके पजामे मे हाथ डाल िदया. मैने मौके का फायदा उठाया। मैने उनके होठो पर चूम िलया। भला वो कहा पीछे रहते. िकतनी मसत हो !" जीजू के सवर मे वासना का पुट था। उनका हाथ मेरी छोटी छोटी छाितयो के उभार पर आ गया। मैने भी अपने नीमबू सामने की ओर उभार िदये। मेरी चूिचया उनहोने धीरे से सहला दी। मेरे मुख से एक िससकारी िनकल पड़ी। "जीजू. हमारी साली को कया चािहये? हम देगे !" "बस जीजू आप ही दे सकते हो !" और मैने एक रहसमयी मुसकान से उसे देखा। वो शायद अनदर चडडी नही पहने थे। उसका पाजामा लणड की जगह से उभरा हुआ था। मै पकड़ी गई उसके लणड को िनहारते हुये। सच पूछो तो वो मुझे ही िनहार रहे थे। वो मेरे से िचपक कर बैठ गये। मैने भी कसर नही छोड़ी ! उसकी जाघो से सट कर उसके िलये चाय िनकालने लगी। तभी उनकी एक बाह हमेशा की तरह मेरी कमर से िलपट गई और वो मुझे पयार करने लगे। मेरी नजरे तो अब बदल चुकी थी. कड़क लणड को मैने पकड़ िलया। वो हतपभ से रह गए। उनहे भी शायद लणड पर एक मीठा सा सुखद अहसास हुआ होगा। "यशोदा.

उसे जीजू की अंगुिलया हौले-हौले मसल रही थी। तेज मीठी गुदगुदी के कारण मेरी चूत मे जैसे आग लग गई। "यशोदा. कुछ नही. अपना मदर मेरी मुिनया मे िपरो दो. मेरे हावभाव से िसफर वासना के ही भाव छलके जा रहे थे। वो भी कोई िदल के इतने पके नही थे िक सामने खड़ी नंगी लड़की को यूँ ही छोड़ दे। उनहोने मुझे उठाया और अपने िबसतर पर पटक िदया। अपने बालो पर लगाने वाला तेल िनकाला और मेरी गाणड पर चुपड़ िदया। दूसरे ही कण वो मेरी पीठ पर सवार थे। मेरी तेल से सनी हुई गाणड मे उनका लणड पवेश करने लगा था। दूसरे ही पल उसका सखत लणड मेरी गाणड मे पूरा उतर गया था। . सब भूल जाओगे !" मेरे बोलो से. मुझे मार डालो बस. जीजू. उसमे पयार की भूखी योिन से अपना बाहर िनकलता हुआ रस िदखाया. मेरे चेहरे से. अब आई हो तो मुझे भी मसती लेने दो।" मेरी गाणड मे जीजू का लणड जैसे अनदर ही घुसा रहा था। मेर िचकना सफेद पजामा लणड के साथ मेरी गाणड मे घुसा जा रहा था। उसका हाथ अब मेरे सफेद कुरते मे घुस गया और कमर को सहलाते हुये मेरी छाितयो की ओर बढने लगा। मै िकसी मदर के पहले सपशर से पूरी ही काप गई। एक मधुर सा. तुम मानोगी नही ! बोलो.मेरे िदल मे चोर था. उसने अपना मुख दूसरी तरफ कर िलया। "ये सब कया छोटे है जीजू. इसिलये मेरी एकदम से िहममत नही हुई कमरे मे कदम रखने की। बस िदल जोर जोर से धड़क रहा था। शायद पहली बार ऐसा ही होता होगा। मैने दरवाजा खटखटाया। जीजू एक लुनगी मे सामने थे। मै अपना सर झुकाये अनदर आ गई। जीजू ने कमरा बनद कर िदया और िचटखनी लगा दी। मेरा िदल एक बार िफर धड़क उठा। तभी जीजू ने पीछे से आकर मेरी कमर थाम ली और अपने से िचपका िलया। आह ! उनहोने अनदर चडडी नही पहनी थी शायद ! उनका ताकतवर लणड मेरी गाणड मे चुभने लगा था। "तो यशोदा. अब नही रहा जाता है।" मेरे मुख से अचानक यह सब जाने कैसे िनकल पड़ा। चुदाने की चाह मुझे अंधा िकये दे रही थी। "पर यशोदा तू तो छोटी है. मुझसे कया चाहती हो?" "जीजू. बस यूँ ही मुझे थामे रहो !" मै िससक उठी। "पर तुम िसफर थामे रहने के िलये तो नही आई हो ना. योिन के दार को खोल कर िदखाया। मेरी बेशमी पर एक बार तो जीजू का सर भी झुक गया. अभी नही !" मैने जलदी से अपना पजामा उतार िदया और अपनी चूत उसके सामने कर दी. एक बार अपने डणडे को पास तो लाओ. कया इरादा है ?" उसकी गरम सासे मेरे गले से टकरा रही थी। "जीजू. गुदगुदी भरा मीठा सा अनमोल अहसास ! मै िनहाल हो गई। मेरे सतनो की नरम घुणडी जो अब कड़ी हो गई थी.

"मै तो कब से यही सोच रहा था िक कचची कली को कली ही रहने दूँ. " अब उनका लणड मेरी चूत मे बड़ी तेजी से चलने लगा। मै अपनी िजनदगी का पहला लणड खा रही थी। मुझे आज मोमबती और लणड मे फकर नजर आ गया था। वो कहा पतथर जैसी..आधी नही पूरी घर वाली... मेरे अंग-अंग की मािलश सी कर दी। यह सब मोमबती मे कहा। मदर की चुदाई तो बनी ही लड़िकयो के िलये है। वो हमे भचाभच करके जब चोद देता है तो िफर से चुदाने की इचछा होने लग जाती है। मै उस िदन जीजू से दो बार चुदी और एक बार मसत गाणड भी उनहे भेट चढाई। अब जीजू तो मुझसे िजद करने लगे िक शादी करंगा तो मेरे से ही। मै उनहे समझाती रही िक मेरी दीदी तो मुझसे भी मसत है। उसकी ताजी सील आपको तोड़ने को िमलेगी। िफर मै तो आपकी गोदी मे हूँ ही. " मै तो दूसरी दुिनया की सैर कर रही थी। "ओह. अनदर से पतथर जैसा कड़क और गमर. पर तू तो . मेरे जीजू.. भई वाह.. सुपारा चोदते समय दाने को मसत रगड़ मारता था। िफर जीजू ने मेरी छाती को मसल िदया. यूँ कया. आप पूरी मान लेना। जीजू के िलये तो मेरी बाते मज़ाक सी हो गई. मसत चोदो ना !" मेरी बेताबी बहुत बढ गई थी। "अरे िझलली फट जायेगी तो बहुत ददर होगा !" "िझलली. ऊपर से नमर. उनके अणड भी खूब चाटे। जीजू ने भी मेरी छोटी सी चूत का चूस चूस कर खूब आननद िलया। मेरे नीमबुओं का भी रस खूब चूसा। जब वो िफर से मसत हो उठे तो मैने अपनी पयासी चूत उनके सामने नयौछावर कर दी। उनका मोटा लणड मेरी नमर और गीली.. वो तो कभी की मोमबती की भेट चढ चुकी है ! अब तबीयत से मारो !" मैने बेशरमी से उसे लणड पेलने को कहा। जीजू तो हंस िदये. जब चाहे चोद लेना ! वैसे भी साली तो आधी घर वाली होती है. मेरी मा ! इतना पयारा. िदन भर वो मुझे चुटकी ले कर कहते ही रहे. गोदी मे बैठेगी। मै तो शरमा कर बस भाग जाती। . पयार के रस से भरी हुई चूत के अनदर सरक गया। उनहोने बड़ी सावधानी से लणड को धीरे धीरे अनदर ठेला। "जीजू.."यशोदा तकलीफ तो नही हुई?" जीजू संभल कर गाणड चोद रहे थे। "नही. िफर ठीक है।" जीजू ने मेरी गाणड चोदना आरमभ कर िदया था। मै आननद से मसत हुई जा रही थी। मेरी कसी हुई गाणड ने उनका रस जलदी िनकाल िदया था। अब दौर शुर हुआ लणड चुसाई का ! िफलमो की तरह मैने रिणडयो के सटाईल मे उसका लणड खूब चूसा.. इधर उधर लग भी जाती थी और यह लणड. मजा आ रहा है. मै तो मोमबती से.

मामा. घूमने चलते है ! और हम दोनो घूमने चले गये। वहा पर मौसी मुझे मामी के बारे मे बताती रही और मै भी बीच बीच मे पूछता रहा। कोई एक घंटा घूमकर हम वापस आये। अभी शाम होने मे देर थी तो वो अपनी सहेली से िमलने चली गई। मैने नानी से पूछा.इसे देखो ! तो कई बार कहने पर वो उसे देखने लगी। मैने नानी से कहा.मै मामी से जाकर बात करता हूँ.मामा कहा है? तो वो कहने लगी.चलो. मामी चाय बनाकर ले आई और सबको देने लगी। मुझको चाय देते हुए अपनी उंगिलयो को मेरी उंगिलयो से छुआ और मुस‍कुराई। और यह मौसी ने देख िलया लेिकन उसने कहा कुछ भी नही और अंजान बनी बैठी रही। चाय पीने के बाद मैने मौसी से कहा. क‍योिक पहली वाली बीवी खत‍म हो गई थी। यह तो हुआ पिरचय। अब आप लोगो को ज‍यादा बोर न करते हुए कहानी पर आता हूं। तो मामी चाय बनाने चली गई और मै वही डाइंगरम मे बैठकर नानी और मौसी से बात करने लगा। मेरी मौसी भी कोई कम मस‍त नही है वो तो इतनी मस‍त है िक क‍या कहने ! उसकी गाणड कोई देख ले तो हाय हाय लंड पूरा खड़ा हो जाए और चूिचया बेशक अभी छोटी ही है लेिकन इतनी कड़ी िक हाय टॉप पूरा तन जाता ! मानो िकसी को आमंितत कर रही हो ! लेिकन अभी तक मैने उसको फंसाने के िलए कोई भी तरीका इस‍तेमाल नही िकया था। खैर. कारण मामा काफी शराब पीते थे। जो मेरी मामी थी वो गरीब पिरवार से थी जबिक मामा अमीर पिरवार से इसिलए उनकी शादी जोड़तोड़ करके कर दी गई। जबिक मेरी मौसी मेरे नाना की दूसरी पत‍नी से पैदा हुई.पहले मैने एक कहानी िलखी थी मामी की बुर के मोटे होठ वो कहानी अपने आप मे पूणर है.वो कही शराब पीकर पड़ा होगा ! और वो सुबकने लगी तो मैने उनको मनाने के िलए िसर पर हाथ रखा तो वो और जोर से रोने लगी। वो िकसी भी तरह से चुप नही हो रही थी। इतने मे मामी वहा पर आ गई तो मै उठा और टीवी चला िदया और उस पर भजनकीतरन लगा िदया। िफर मैने नानी से कहा. नाना. तुम टीवी देखो ! . अब जो मै कहानी बताने जा रहा हूँ यह उसके आगे की है और यह कहानी भी अपने आप मे पूणर है। इस बार जब मै मामी के यहा गया तो िफर वो मुझको देखकर काफी खुश हो गई। वे मेरी तरफ मुस‍कुराकर देखने लगी तो मैने मामी को आंख मार दी। तो बदले मे मामी ने भी पितिकया दी और मेरी तरफ मुस‍कुराकर आंख मारी। तो मै उनकी तरफ देखकर मुस‍कुराने लगा। तभी नानी ने कहा.चाय बना लाओ ! और मामी चाय बनाने चली गई। मेरी मामी के यहा मामी. नानी और मेरी आंटी की छोटी बहन रहती थी। आंटी की छोटी बहन की उम यही कोई 18-19 साल की होगी। और मामी की उम कोई 20 साल की थी जबिक मामा की उम कोई 40 साल। आप आश‍चयर कर रहे होगे की ऐसा कैसे हो सकता है। लेिकन ऐसा था क‍योिक मामा का पहली वाइफ से तलाक हो चुका था.

देखूँ मामी ! तुम‍हारे पेट मे मेरा बच‍चा आ गया है या नही ! और यह कहते हुए मैने मामी की साड़ी को ऊपर खीच िदया। मामी बोली.मामी कोई बात नही ! मै इस बार जब जाऊंगा तो तुम‍हारे पेट मे अपना बच‍चा डालकर जाऊंगा। अब ठीक है अब खुश हो जाओ। तो मामी मुस‍कुरा पड़ी क‍योिक मै जानता था िक मामा की इतनी कमता नही है िक वो मामी को बच‍चा दे सके। . उन‍होने भी मेरे होठो को अपने होठो मे भर िलया और चूसने लगी। िफर कुछ देर बाद मामी मुझसे अलग हुई और मुझसे कहा.और मै मामी को लेकर दूसरे कमरे मे आ गया। अब तक मामी भी सुबकने लगी थी.तुम ऊपर वाली मंिजल पर चलो.क‍यो ? तो उन‍होने कहा. मै जैसे ही दूसरे कमरे मे आया तो मामी मेरे से जोर से िलपट गई और सुबकने लगी। मै मामी को चुप कराने की कोिशश करने लगा और उनके चूतड़ो को साड़ी के ऊपर से ही दबाने लगा। मै पहले धीरे-धीरे िफर जोर जोर से मामी के चूतड़ो को साड़ी के ऊपर से रगड़ रहा था। मुझे यह जानकर थोड़ा आश‍चयर हुआ िक मामी ने पैटी नही पहनी थी। मुझे लगता है िक मामी ने मुझे देखकर अपनी पैटी उतार दी होगी तािक चुदवाने मे परेशानी न हो। मैने मामी की साड़ी को ऊपर उठाया और उनके नंगे चूतड़ो को दबाने और रगड़ने लगा। उफ्फ ! गाणड िकतनी िचकनी और मस‍त चूतड़ थे मामी के। जहा पर भी हाथ रखता वहा से हाथ िफसल जाता ! मै अपनी एक उंगली उनकी चूत के पास ले गया और दोनो होठो के बीच डालकर सहलाने लगा। सहलाते-सहलाते मै अपनी उंगली उनकी चूत के दाने पर ले गया और जोर से रगड़ िदया। इससे मामी जोरो से िचहंक ू उठी और मुझे और भी जोरो से जकड़ िलया। अब मैने मामी से कहा.अभी बच‍चा नही आया है। मैने पूछा.अपना िसर ऊपर उठाओ ! जब मामी ने अपना िसर ऊपर उठाया तो मैने अपने होठ मामी के होठो पर रखे और उनके होठो को पहले धीरे धीरे चूमने लगा िफर तेजी के साथ चाटने लगा। अब भला मामी कैसे पीछे रहती.िपछली बार तुम चोद कर तो गये थे लेिकन जब तुमने चोदा था तो उसके दो िदन पहले ही माहवारी आई थी इसिलए पेट मे बच‍चा नही ठहरा है। मैने कहा. मै भी अभी आती हूँ। मैने मामी की चूिचयो को हल‍के से सहलाया और ब‍लाउज को ऊपर िकया तथा दोनो चूिचयो पर अपनी जीभ िफराई और िबना कुछ बोले ऊपर चला गया। मै इंतजार कर रहा था िक मामी आयेगी तो मै उनको िकस तरह से चोदूंगा। करीब आधे घंटे बाद मामी आई और मुझसे िलपट गई। मै मामी को धीरे धीरे सहलाने लगा और उनकी साड़ी ऊपर कर दी और उनके नंगे िचकने चूतड़ो को हथेिलयो मे भर िलया और दबाने लगा। मामी के मुंह से वासनायुक‍त हल‍की-हल‍की िससकािरया िनकल रही थी। मैने मामी को पीठ के बल िलटा िदया और क‍हा.

अब मैने मामी की टागो को चौड़ा िकया और उनकी दोनो टागो के बीच मे लेटकर अपना िसर मामी के नंगे पेट पर रख िदया और अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी चूत के होठो को सहलाने लगा। मामी धीरे धीरे तड़प रही थी और िससकािरया भर रही थी। जब मामी को सब नही हुआ तो उन‍होने खुद ही कहा.लंड िफर बाद मे चूस लेना.यहा पर चाटो। मै मुस‍कुराकर वहा पर चाटने लगा और अब मै पूरी दकता से चाट रहा था। मामी बुरी तरह से िबस‍तर पर िहल रही थी और मेरे िसर को पकड़कर दबा रही थी। मैने मामी की चूत के दाने को अपने होठो मे दबाया और जीभ से जोर से रगड़ िदया। मामी ने एक दबी हुई जोर से चीख मारी और शात हो गई। मामी झड़ चुकी थी। अब मामी ने मेरे िसर को ऊपर उठाया तो मेरा मुंह उनके चूत-रस से सना हुआ था। मामी ने मुझको अपने ऊपर खीचा और मेरे मुँह को चाटने लगी। जब वो सब कुछ चाट चुकी तो मैने मामी की साड़ी और पेटीकोट को िनकाल िदया और उनके पेट पर बैठ गया। मै मामी की एक चूची को हाथ से पकड़कर धीरे धीरे सहलाने लगा और धीरे से एक नीचे वाला बटन खोल िदया। अब मै मामी की चूची को दोनो हाथो से ब‍लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा और साथ ही धीरे धीरे एक एक करके बटन भी खोलता जा रहा था। िफर जब मैने सारे बटन खोल िदये तो मामी ने खुद ही अपना ब‍लाउज उतार िदया। मैने मामी की खूबसूरत गोरी गोरी चूिचयो को हाथो मे भर िलया और अपने होठो को चुचूक पर लगा कर चूसने लगा। उनमे अभी दूध तो नही आ रहा था िकन‍तु मै जानता था िक जल‍दी ही मेरा बच‍चा पैदा होगा तो आने लगेगा ही लगेगा। मामी स‍नेह से मेरे बालो मे हाथ िफर रही थी और ऐसे अपने दूधो को दबा दबा कर िपला रही थी जैसे िक मै उनका बच‍चा हूँ। अब मामी ने मुझे उठाया और पीठ के बल िलटा िदया। इतनी देर तक मजे के दौरान कब मेरे कपड़े मामी ने िनकाल िदये मुझे पता ही नही चला। अब मामी मेरे लंड को अपनी गोरी गोरी नेलपािलश से सजी उंगिलयो से सहला रही थी। लगता था िक उनका लंड चूसने का इरादा था और हुआ भी यही। मामी ने धीरे से अपने िलिपिसटक रचे होठो को लंड के पास लाई और उसका टोपा अपने मुँह मे भर िलया और चूसने लगी। िकन‍तु इस समय मेरा इरादा लंड चुसाने का नही हो रहा था क‍योिक मै इतना उत‍तेिजत हो चुका था अब खुद के संभाले नही संभल पा रहा था। कोई एक िमनट बाद ही मैने मामी का िसर उठाया और उनको पकड़कर अपने ऊपर खीच िलया। मेरे इस तरह खीचने से मामी को ऐसा लगा मानो मामी प‍यासी रह गई हो। मैने मामी से कहा. अभी मै तुम‍हे चोदना चाहता हूँ। मामी मान गई और मुस‍कुरा पड़ी। अब मामी ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत का िनशाना बनाया और उस पर बैठती चली गई। आह िकतना शानदार अहसास था वह ! इतना मजा आया िक इसे शब‍दो मे बयान नही िकया जा सकता। मानो मै जन‍नत मे पहंुच गया होऊँ। उधर मामी की हालत भी मुझसे जुदा नही थी। वो तो आँखे बंद िकये अपने होठो को खोले मानो स‍वगर मे तैर रही हो। मैने मामी को अपने ऊपर िलटा िलया और उनके होठो को अपने मुँह मे भरकर चूसने लगा। मामी धीरे धीरे .अब और न तड़पाओ और जल‍दी से चूत चाटो। मैने अपना िसर उठाया और मामी की चूत के पास ले गया और मामी की बुर के मोटे होठो को चाटने लगा। अब तो मामी की बुर के होठ पहले से भी ज‍यादा मोटे लग रहे थे शायद मेरे चोदने के कारण होठो पर रगड़ लगी और वे और भी ज‍यादा मोटे हो गये। अब मै मामी की चूत के होठो को मुँह मे भर भर कर चूसने लगा। मामी को सब नही हो रहा था और वे मेरा िसर पकड़कर अपनी चूत पर दबा रही थी। शायद मामी चाहती थी िक मै उनके दाने को कसकर चाटू ं लेिकन मै ऐसा कर नही रहा था तो उन‍होने मेरा िसर पीछे िकया और अपनी उंगिलयो से अपनी चूत को खोला और कहा.

ऊपर से झटके लगा रही थी तो मै भी कहा पीछे रहने वाला था। मै भी मामी को बाहो मे भरकर पहले धीरे-धीरे िफर तेज-तेज जोरदार झटके लगाने लगा। मै अपने हाथो को मामी के चूतड़ो पर ले गया। वाह ! िकतने अच‍छे और मजा देने वाले थे मामी के चूतड़ ! हर एक झटके मे जब वो ऊपर को उठती तो उनके चूतड़ भी ऊपर को उठते और मेरे हाथ पीछे हो जाते और जब वो मेरे लंड पर बैठती तो मेरे हाथ उनके चूतडो पर कस जाते। वाह क‍या मजा आ रहा था। काश मामी की शादी मुझसे हुई होती ! लेिकन अब भला ऐसा कहा सम‍भव था। कुछ समय बाद मैने मामी को ऊपर उठाया और दूसरी तरफ मुँह करके बैठने को कहा। मामी मेरे लंड पर बैठे ही बैठे दूसरी तरफ घूम गई। मैने मामी के दूध पकड़े और दबा दबा कर मामी को चोदने लगा। इससे मामी को काफी मजा आया। अब मामी की िससकािरया तेज हो गई थी. और पूरी ताकत से मामी के दूधो को पकड़ा और जोर से धक‍का मारा। मेरा वीयर िनकल रहा था और मै उनके दूधो को पकड़े जोरजोर से धक‍के मारता ही जा रहा था। दस बारह धक‍को मे जब मेरा वीयर पूरा िनकल गया तो मै मामी के ऊपर ही लेट गया और मामी ने मुझको जोरो से जकड़ िलया। अब मै इस चुदाई लीला को ज‍यादा क‍या िलखूं ? हमेशा से ऐसा होता आया है और सभी लोग जानते है िक चुदाई कैसे की जाती है। संकेप मे इतना जान लीिजए िक हम दोनो ने ऐसी चुदाई की िक दोनो पूरी तरह से संतुिष की कगार पर पहुँच गये। मामी मेरे बालो मे अपनी उंगिलया िफरा रही थी और मै आराम से लंबी दूरी के घोड़े जैसी दौड़ लगाकर उनके ऊपर लेटा हुआ था। िफर मामी ने मुझसे अपने ऊपर से उठने को कहा तो मुझे होश आया और मै उनके ऊपर से उठा। मामी ने मुझसे कहा. लग रहा था िक वो झड़ने वाली थी। मैने मामी को अपने ऊपर से उतारा और नीचे िबस‍तर पर िलटा िदया और अपना लंड डालकर जोर जोर से चोदने लगा। मैने मामी से कहा.काश ! तुम मुझे पहले िमले होते तो मै तुम‍ही से शादी करती। .मै तुम‍हारा ही बच‍चा पैदा करने के िलए ही तो तुमसे चुदवा रही हूँ ! वरना क‍या कोई और नही है चोदने के िलए ! मै तुम‍हारा ही बच‍चा पैदा करंगी। अब मै मामी को जोर-जोर से चोद रहा था और मामी की िससिकया िनकल रही थी। मामी ने एक जोर से िहचकी ली और झड़ने लगी। मुझे लगा िक अब मेरा भी िनकलने वाला है तो मैने मामी को आगाह िकया िक मेरा िनकलने वाला है.मेरा बच‍चा पैदा करोगी? तो उन‍होने कहा.

अब काफी देर हो गई है अब नीचे चला जाए। मैने घड़ी देखी तो डेढ घंटे से भी ज‍यादा हो गया था। मैने मामी के पास जाकर उनकी जोर से पप‍पी ली और कहाअब तो तुम‍हे बच‍चा हो जायेगा ! तो उन‍होने कहा.मैने मामी से कहा.चाहता तो मै भी हूं िक तुम‍हारे साथ रहूँ. तुमको भी फरक पड़ेगा ! तो वो बोली. कंधो पर सहलाना शुर कर िदया। उसकी सासे तेज हो गई पर वो अपने आप को सामानय ही िदखाती रही। िफर मै उसके पीछे गया और उसके बालो को सहलाने लगा। उसके बालो के नीचे गदरन पर अपनी गरम सासे छोड़ने लगा तो वो बुरी तरह गरम हो गई. ऐसे परेशान ना हो और खुश रहना सीखो। मै जब उसका हाथ सहला रहा था । वो बोली िक मुझे पता है िक तुम कया करने की कोिशश कर रहे हो? मैने कहा.ठीक है। मैने उसके हाथो पर. उसकी सासे और तेज हो गई और उसकी मोटी मोटी चूिचया . िकन‍तु अब भला कैसे हो सकता है। अब ऐसे ही जैसे चल रहा है वैसे ही ठीक समझो। मामी ने मुझे चूमा और अपने कपड़े पहनते हुए कहने लगी.कया ? तो बोली िक कुछ नही पर मुझे इससे कुछ फरक नही पड़ता । यह तो मुझे अपनी बेइजजती लगी तो मैने कहा एक मौका दो. लेिकन तुम अभी घर न जाना और मुझे कुछ िदनो तक चोदो। मै मान गया और कई िदनो तक मामी को चोदता रहा। आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे मेल करे ! हेललो दोसतो ! मै जीत शमा िदलवाला एक बार िफर हािजर हूँ अपनी सचची दासता ले कर। मेरी िपछली कहानी को पढ कर मुझे काफी सराहना िमली मै उसके िलए धनयवाद करता हँू । आज मै आपको अपनी िजनदगी की एक और सचची घटना बताने जा रहा हूँ । आज से २ साल पहले मेरे ऑिफस मे अंजिल काम करने आई। ऑिफस मे मेरे अलावा िसफर एक चपरासी मै और मेरे बॉस होते है। लिकन जब बॉस टू र पर जाते तो हम अकेले होते है। अब अंजिल भी आ गई तो अचछा लगा। एक तो वो बहुत सुंदर और भरे हुई बदन की मिलका थी और दूसरा वो तलाकशुदा थी। िजस िदन वो पहली बार ऑिफस मे आई तो िबना िकसी से जयादा बात िकये िसफर सामानय बात की उसने। उन िदनो बॉस टू र पर थे तो ऑिफस इंचाजर मै था। अगले िदन वो आई तो लाइट नही थी। ऑिफस मे हम लोग बात करने लगे तो वो अचानक अपनी कहानी बताने लगी िक कैसे उसका पित उसको मारता था और उसको परेशान करता था। मैने भी रिच िदखाई सुनने मे। मै सुनता रहा िफर वो रो पड़ी मैने उसको चुप िकया तो वो चुप हो गई। िफर मैने पूछा िक कया तुमहारी कोई संतान भी है? तो वो मुसकुरा कर बोली िक नही। तो मैने पूछा िक कयो? हुई नही या की नही ? तो वो बोली चुप कर गई। िफर एक िदन बॉस जब टू र पर गए तो उनके जाने के बाद हम लोग जररी काम करके बात करने लगे । िफर वो और बाते बताने लगी अपनी बारे मे । इस बीच मे मेरा हाथ उसके हाथ से लग गया मुझे जैसे करंट लगा पर मैने हाथ हटाया नही और धीरे धीरे सहलाने लगा। वो अपनी बात बताती रही। मैने धीरे से उसका हाथ अपनी हाथ मे ले िलया और बोला िक देखो िजनदगी बहुत लमबी है.हा ! हो तो जायेगा.

लमबे लंड से चुदने मे जो मजा तुमको आएगा वो कही नही आएगा। वो बोली. जरा धीरे करो ना । मैने कहा.आराम से ! . जलदी से डाल दो। मैने एक धका िदया तो वो िचललाने लगी. वो ऑिफस के फशर पर लेट गई और मै उसकी चूत चाटने लगा। वो मेरा लंड चूसने लगी ६९ की पोिजशन मे। तभी उसने मेरा लंड छोड़ कर मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा िदया और आआआआआअहहहहहहहहहस हहहहहहहहहहा आआआआऊऊउईईईईइ मममममममममममा करने लगी और जोर से झड़ गई। मैने उसका पूरा पानी साफ कर िदया चाट चाट कर । िफर मैने उससे कहा िक अपना सूट उतार दो तो उसने उतार िदया और मैने उसकी चूची चूसनी शुर कर दी। वो िफर से गरम होने लगी और आआआआआआअहहहहहहह ममममममममाआअ करने लगी और अपनी चूत रगड़ने लगी। मैने उसके मुंह मे अपना लंड डाला और उसने उसको चूसा तो उसका थूक उस पर लग गया तो मै उसकी टागो के बीच मे आ गया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो बोली िक अब मत तड़पाओ. दूसरा मुझे चुदवाये हुए ३ साल हो गए. पर मेरी हालत खराब हो रही है ! तो बोली िक जीतू आज ३ साल बाद िफर से िकसी ने मुझे इतना गरम िकया है ऐसे छोड़ कर मत जाओ. िफर भी ऐसे िचलला रही हो जैसे पहली बार चुदवा रही हो ! तो बोली िक एक तो तुमहारा मोटा है. मुझे माफ कर दो मेरी पयास बुझा दो। मैने कहा िक लो मेरा लणड चूसो ! तो वो फट से तैयार हो गई और मेरा 6.तो जलदी से चोद दो ना ! और मेरा लंड जलदी जलदी चूसने लगी। मैने उसके सलवार का नाड़ा खोल िदया और उसकी सलवार िनकाल कर उसकी पैटी भी उतार दी और उसकी चूत मे ऊँगली डाल दी। मै ऊँगली से चोदने लगा.िनकालो ! मै मरी ! मैने कहा िक तुमहारे पित ने तुमको चोदा हुआ है.5" इंच लमबा लंड िनकाल कर बोली.ठीक है ! तो िफर मै िफर से धका लगाने लगा और उसकी चूची चूसने लगा। उसने कहा.ऊपर नीचे होने लगी। उसकी सासो के साथ मै उसके सामने आ गया और िफर उसके गले पर ऊँगली से सहलाने लगा तो उसकी आंखे लाल हो गई थी और उसके िनपपल इतनी टाइट हो गए िक उसके सूट के ऊपर से भी नजर आने लगे तो मैने उसको छोड़ िदया। वो बोली.कया हुआ ? तो मैने कहा. मेरे पित का तो छोटा सा ही था। मैने कहा.तुमहारा तो बहुत लमबा है और मोटा है.तुमको तो कुछ होता ही नही है.

अगर तुम पेगनेट हो जाती तो ? वो बोली िक मै िपल ले लेती. पर तुमने अपना माल बाहर कयो िनकाला ? मैने कहा.तुम जानवर हो ! मुझे छोड़ दो ! मेरी चूत फट गई ! मेरी जान िनकल रही है. अगली बार जरर तुमहारी कोख मे अपना बीज डालूँगा। िफर हमने जलदी से कपड़े पहने। (यहा मे यह बताना भूल गया िक िजस िदन यह सब हुआ. बाहर िनकालो। मैने झटके लगाने शुर कर िदए तो वो और िचललाने को हुई तो मैने उसके मुंह पर हाथ रख िदया और जोर जोर से चोदने लगा। 5 िमनट बाद उसको मजा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी और िफर शुर हुआ असली चुदाई का मजा । मै िजतनी तेज ऊपर से झटके मारता वो नीचे से उतनी ही तेजी से जवाब देती। सच दोसतो कया बताऊँ कया क़यामत चुदाई चल रही थी िक तभी वो मुझसे िचपक गई और मेरे कंधे पर काटने लगी और उसने अपने नाखून मेरी पीठ मे चुभा िदए। वो आआआआआ आआआआहहहहहहहहहहह करती हुई झड़ गई । िफर कहने लगी जलदी करं अब सहन नही हो रहा है। मैने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगा और अपनी सपीड बढा दी। 15-20 झटके लगाने के बाद मैने अपना माल उसकी पीठ पर िनकाल िदया। वो सीधी हो कर लेट गई और बोली िक जीतू आज तुमने मेरी सालो की पयास एक बार मे ही बुझा दी. ना रोज हेड ऑिफस मे कोई काम होता था। आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी मुझे जरर मेल करना ! .कोई बात नही.तो मैने सोचा िक इसको अगर आराम से चोदा तो यह चोदने नही देगी तो मैने उसके मुंह पर अपना मुंह लगा कर िकस करने लगा। िफर एक जोर से धका िदया तो लंड पूरा उसकी चूत मे घुस गया पर वो बुरी तरह मचलने लगी । उसकी आंखे बुरी तरह खुल गई और वो रोने लगी । मै थोड़ी देर रक गया और उसकी चूची चूसने लगा। वो बोली. उस िदन ऑिफस के चपरासी को ऑिफस के िकसी काम से हेड ऑिफस भेजा था तो ऑिफस मे मै और अंजिल ही थे)। उसके बाद मैने अंजिल के साथ दो और बार सेकस िकया कयूंिक ना तो रोज बॉस बाहर जाते थे. पर तुमहारा माल मेरे अंदर जाता तो और मजा आता। मैने कहा.

दीदी के घर चली जा ! . तू ऐसा कर िक िजतने िदन फी है.मै अभी बारहवी कका मे हूँ मुझे अनतवासना से जुड़े िसफर सात महीने हुए है. ऊँगली से मेरे दाने को छेड़ छेड़ कर मुझे सखिलत करवा िदया। उसके बाद मै रोज़ घर मे बैठ अनतवासना पर कहािनया पढती। जैसे मैने ऊपर िलखा िक िकस तरह अपनी सहेली के साथ मै लेिसबयन सेकस का मजा ले लेती थी पर मुझे लड़को से चकर चलाने से संकोच सा था इसिलए जब दाना कूदने लगता तो मै वाशरम मे जाकर सलवार का नाड़ा खोल इंिगलश सीट पर टागे चौड़ी करके बैठती और ऊँगली गीली कर करके दाने को रगड़ खुद को शात कर लेती। ऊँगली करते वक़्त मै आँखो के सामने लड़को के लौड़े की कलपना करती। बोडर के पेपर थे और पेपर करवाने के िलए मेरी सहेली ने तो सेटर के सुपरवाइज़र से बाहर ही बाहर ही िखचड़ी पका ली थी और दोनो ने पेपर अचछे िदए। उसके बाद हम फी थी। तभी मुझे मा ने कहा. जब उसने मुझे अनतवासना डॉट कॉम पर कहानी पढवाई तो कहानी पढ कर मै मचल उठी अपनी चूत फड़वाने को ! हम दोनो उसके घर बैठी थी उसने मुझे अपनी बाहो मे लेकर मेरे होठ चूमे और िफर मेरे मममे दबाने लगी। उस वक़्त मेरी चूत कु ंवारी थी लेिकन उसकी नही कयूंिक उसने तो नौवी कका मे ही लौड़े का सवाद चख िलया था। उसने मुझे चूमा-चाटा. उधर समधन जी की घुटनो की तकलीफ बढ रही है. बेचारी अकेली कया-कया करेगी. यह साइट मुझे मेरी सबसे पकी सहेली वषा ने बताई थी। हम दोनो एक दूसरी की हमराज़ है मुझे सब पता रहता है िक आजकल उसका िकतने लड़को से चकर है िकस िकस से चुदवाती है और उसको मेरा सब कुछ पता रहता है। हम दोनो दूसरी कका से एक साथ पढती आ रही है. तो दोसतो.तेरी दीदी पेट से है और अब उसकी तारीख भी नज़दीक आती जा रही है.

वही से खाना पैक करवा लेगे ! दीदी बोली. मैने वहा मन भी लगा िलया। जीजू के साथ काफी मै घुलिमल गई थी। मेरी छाती उम के िहसाब से काफी बड़ी.मै पहले भी कभी-कभी वहा रक लेती थी लेिकन अब मै उस सटेज मे थी जहा अब मुझे जाना थोड़ा अजीब सा लगता था। लेिकन मुझे जाना पड़ा.चलो आज घूम कर आते है. जीजू बाहर वाले दरवाज़े से कमरे मे आये और बोले.चल न जान ! नया के.ऍफ.नही अिखलेश ! मै िरसक नही लेना चाहती ! बहुत नाजुक समय है। जीजू बोले.तुमहारी छाती ! गोरा बदन ! जाओ आप ! अब मै कपड़े बदल लूँ ! रहने दो ना ! ऐसे ही चलो ! हटो ! दीदी ने सुन-देख िलया तो खैर नही होगी मेरी और आपकी ! .नही दीदी ! आपके िबना ? आज न जाने जीजू का धयान मेरी छाती पर था कयूंिक मेरा कमीज गहरे गले का था और थोड़ा जालीदार भी था और नीचे काली बा साफ िदख रही थी। नही तुम जाओ ! दीदी बोली.सी खुला है ! सुना है बगरर और िपज़ा बहुत कमाल का िमलता है ! दीदी बोली.इसमे से तेरी जवानी साफ साफ िदखती है ! कैसी जवानी? मेरी तरफ से सामानय बताव देख जीजू बोले. गोल और आकषरक थी। मै भी घर के काम मे मदद करने लगी। एक रोज़ दीदी की सास-ससुर अपने जदी गाव मे ज़मीन के चकर मे गए और वही रक गए। उस िदन जीजू घर आए और हमे बोले. तुम चली जाओ ! मै बोली.कािमनी.रहने दो ना ! इसमे कौन सी कम लग रही हो ! अचछा जी कया खास है इसमे ? जीजू बोले.तब तक मै बैठ कर पाठ करँगी ! आने वाले बचचे के िलए अचछा होता है ! अचछा मै अभी कपड़े बदल कर आई ! ठीक है ! मै कार िनकाल लूँ ! मै कमरे मे चली गई.

उनका लौड़ा खड़ा होने लगा था। मै झटके से उनकी बाहो से िनकली. तेरे बदलाव देख कर रोक नही पा रहा हँू अपने आप को ! अब जाओ जीजू ! इस वक़्त समय और जगह सही नही है ! जीजू ने िबना कहे मेरी कमीज़ उतार दी और बा के ऊपर से मेरे मममे दबाने लगे। मेरी आग बढने लगी। मै उनसे िलपटने लगी. पीछे से मुझे अपनी बाहो मे लेकर मेरी गदरन पर अपने होठ रख िदए। (यह लड़की को गमर करने की सबसे महततवपूणर जगह होती है) यह सब कया जीजू ? कया करँ ! तुम तो दया करो इस गरीब पर ! तेरी दीदी का आजकल रेड िसगनल है ! ऊपर से िजस िदन से आई हो इस बार. जब जीजा का िदल आ गया है तो मेरा भी कुछ फज़र है ! यह कहानी आप अनतवासना डॉट कॉम पर पढ रहे है। हाय मेरी जान ! जीजू ने कार िसटी के बजाये बाई पास की ओर मोड़ ली। जीजू कहा जा रहे है ? सवीट हाटर ! फामर हाउस जा रहे है ! जीजू वहा कयूँ ? बेशमों की तरह बोले.ओह साली सािहबा ! बदल लो कपड़े ! आप जाओ ! मेरे सामने कर लो ना ! कयूँ शमाती हो ? अपने बॉय फेड के सामने नही उतारती हो कया ? हटो जीजू ! आप भी ना ! तेरी सारी खबर रखता हँू ! कया खबर है मेरी ? चलो बदल लो ना ! जीजू मेरे पास आए. कपड़े उठाए और बाथरम मे घुस कर कुणडी लगा ली। जीजू अब बाहर इनतज़ार कर रहे थे। बहुत खूबसूरत बन कर आई हो साली सािहबा ? हा.तेरी जवानी मसलने ! तुझे अपनी बनाने के िलए ! लेिकन खाना ? .

बफर मेज़ पर थी. उनकी शटर उतारी. कड़ाही पनीर. सास अटक गई। आँखो मे आंसू थे.बोले.बृजवासी कॉनरर से बोल रहे हो ? पलीज़ एक दाल मखनी. जीजू ने वही बैठे बैठे ही मुझे उठा िलया बाहो मे और आलीशान बेडरम मे ले गए। खुशबूदार कमरा था. एक लड़का आया और कार का दरवाज़ा खोला। हम कमरे मे पहंुचे। उसी वक़्त दो मग. ठंडी बीयर. कया यह सब ठीक है ? हम दोनो जवानी के नशे मे दीदी को भूल रहे है ! दोनो धोखा दे रहे है दीदी को ! कया करँ? बहुत पयासा हँू ! मै तेरे ऊपर पहले से िफदा था ! इतने मे हम फामर हाऊस पहुँच गए। चौकीदार ने सलयूट मारा. मेरी िहचकी िनकल गई. जीजू ने पहले मेरा टॉप उतारा. बटर-नान ठीक एक घंटे बाद तैयार करवाना ! अभी नही ! लो बेगम सािहबा ! आपका खाना ! जीजू ने मेरा हाथ पकड़ िलया.आओ बीयर लो ! नही जीजू ! कभी नही पी ! जान थोड़ी सी पी ! पूरा मग िपलवा िदया. आवाज़ िनकल नही रही थी। एक और झटका लगा और पूरा लौड़ा मेरी चूत की तंग दीवारो मे फंस चुका था। . िजसमे उनका लौड़ा काफी बड़ा लग रहा था। यह कहानी आप अनतवासना डॉट कॉम पर पढ रहे है। सहलाओ ना ! वकत कम है ना ! उनहोने सीधे 69 पर आते हुए अपना लौड़ा चुसवाया और मेरी चूत चाटी। मुझे बहुत मजा आया। उनहोने मेरी टागे फैलाई और बीच मे आकर बैठ गए और अपना लौड़ा चूत पर िटका कर बोले.इसको ज़रा सही जगह पकड़ कर रखना ! उनहोने मुझे पूरा जकड़ िलया। जैसे ही चोट मारी. खुद इतने मे दो-तीन मग खीच गए। मुझे उतना काफी था. मेरा हाथ पकड़ अपने लौड़े पर रख िदया। मेरा हाथ खुद-ब-खुद चलने लगा। अब आई ना लाइन पर साली सािहबा ! जीजू. िमकस वेजी टेबल.रको ! उनहोने मोबाइल लगाया. सहलाने लगे और एकदम से शैतानी से मेरा एक चूची दबा दी. िफर मेरी जीस उतारी। साथ साथ मेरे होठ भी चूमते रहे। मै नशे मे थी. िफर उनकी जीस का बटन खोला और नीचे सरका दी। बहुत सेकसी फेची पहनी थी जीजू ने . इतने मे उनहोने मुझे एक मग बीयर और िपला िदया। मै खुद जीजू से िलपटने लगी. साथ मे कुरकुरे का पैकट था। जीजू बोले.

बहुत मजा िदया है तूने ! मुझे भी अचछा लगा जीजू ! उसके बाद मै वहा एक महीना रकी और जब मौका िमलता हम एक हो जाते। तो दोसतो. यह अगली बार बताऊँगी। . बोले.छोड़ दो जीजू ! बोले. िससकी की आवाजे थी। जीजू मुझे चूमने लगे.मानो सवगर िमला ! होश खोये ! िदल कर रहा था िक जीजू कभी बाहर न िनकाले ! जीजू मजा आ रहा है ! और करो ना ! जीजू ने मेरे मममो को पीते हुए तेज़ धके मारे और िफर कुछ देर के तूफान के बाद कमरे मे सनाटा छ गया. जीजू ने मेरी सील तोड़ दी। जब मै वापस आई तो मैने लड़को को हा कहनी शुर की। दूसरा िकसका डलवाया. िसफर सासे थी.बस बस ! जीजू ने पूरा लौड़ा बाहर िनकाल िलया। उनके लौड़े को खून से भीगा देख कर मै रोने लगी। उनहोने साफ िकया और िफर से अनदर धकेल िदया। इस बार ददर कम था लेिकन पहली बार की टीसे िनकल रही थी। लेिकन ददर कुछ कम था। िफर तो आराम से दीवारो को रगड़ता हुआ अनदर बाहर होने लगा। एकदम से मुझे सुख िमला.

दीदी जा चुकी थी अपनी सहेली घर ! मैने जलदी से घर का दरवाजा खोला डुपलीकेट चाभी से जो घर के बाहर गमले के नीचे रखी रहती है। जलदी जलदी मै घर मे घुसा और मैने चैन की सास ली िक शुक है घर तो पहंुचा। िफर मै फेश होने लगा और फेश होकर टीवी देखने के िलए बैठ गया। घर पर तो कोई था ही नही तो मैने सोचा िक कयो न आज बलू िफलम देखी जाये। और मै टीवी-डीवीडी चला कर देखने लगा और अपने िलंग को सहलाने लगा। जैसे िक मैने पहले बताया िक मेरी मा और मेरी दीदी दोनो ही काफी सेकसी है तो मुझे जयादातर इनसेसट मूवी देखना जयादा पसंद है। मै बैठ कर मूवी देख रहा था और धीरे धीरे अपने िलंग को सहला रहा था िक इतने मे दरवाजे पर घणटी बजी। मै एकदम से िहल गया। . बािरश का आना तो पका ही था। और वही हुआ जो मै सोच रहा था.जलदी आ जाना ! मुझे पढने के िलए अपनी सहेली के घर जाना है ! मै जलदी की वजह से कह गया. मममी-पापा को शादी मे िकसी दूसरे शहर मे जाना पड़ा। मै और मेरी दीदी घर पर अकेले ही रह गए। जाते वक़्त मममी ने दीदी से कहा िक मेरा खयाल रखे। मॉम और डैड के जाने के बाद मुझे तो खुली छू ट िमल गई िक जो मन मे आयेगा वो करँगा। मै अपने दोसतो से साथ िमलकर घूमने चला गया और दीदी से कह गया िक मै रात को देर से आऊंगा। दीदी ने कहा.हा ! मै आ जाऊंगा। मै घर से िनकला ही था िक मौसम ने अपना रंग िदखाना चालू कर िदया। पर इतने िदनो बाद तो मौका िमला था तो मै उसे बेकार कैसे जाने देता। पर दोसतो के साथ समय का पता ही नही चला और घर आने के िलए मुझे देर हो गई। तभी मुझे दीदी की कही बात याद आई िक उनहे तो काम की वजह से बाहर जाना था। मैने तभी दोसतो को अलिवदा कहा और घर के िलए िनकल गया। पर मौसम ने अपना तेवर िदखाना शुर कर िदया.मेरा नाम राज है। मै 21 साल का लड़का हूं। कहानी शुर करने से पहले मै बता दूं िक यह अनतवासना पर मेरी पहली कहानी है। मै आप सब लोगो से िवनती करँगा िक मुझे कोई गलत नाम से ईमेल ना करे। इससे पहले मैने िकसी लड़की के साथ सेकस नही िकया था। पर मुझे कया मालूम था िक मुझे पहला पयार खुद मेरे घर मे िमलेगा। मेरी मा िकसी हूर से कम नही ! आज भी िकसी मॉडिलंग शो मे िहससा ले तो वही पथम आयेगी। अब मै आपको अपनी दीदी के बारे मे बताता हूँ। मेरी एक पयारी सी दीदी है नेहा ! वो मुझसे एक साल बड़ी है। उनकी उम 22 साल है। वो भी देखने मे िकसी मॉडल से कम नही लगती। वो मुझे काफी अचछी लगती है पर उनहे ऐसे गनदी नजरो से नही देखा था। हम दोनो एक दूसरे से बहुत पयार करते है पर भाई-बहन की तरह। एक िदन की बात है.

ओह सॉरी दीदी ! वो जाने लगी.मेरे कमरे मे देख ! वही िमल जायेगे ! मैने कपड़े लाकर उनहे िदए और टीवी देखने लगा। तभी दीदी बोली. मेरे कपड़े देना ! मै लेना भूल गई ! मैने पूछा.. कोई नही ! मै फेश होने के िलए जा रही हूँ ! और यह कहते हुए वो बाथरम मे घुस गई। मै बैठ कर उनके मोटे मोटे सतन और गाड के बारे मे सोचने लगा िक तभी आवाज़ आई.तुझे घर आने मे इतनी देर कयो हो गई? मै एकदम से घबरा गया कयोिक मै उस समय उनके मोटे मोटे चूतड़ देख रहा था। वो मुझे घूरने लगी और कहने लगी..काश मै उनको चोद सकता ! पर आिखर वो मेरी दीदी थी ना ! मै यह सोच ही रहा था िक तभी दीदी ने पलट कर मुझसे पूछा...मै भूल गया ! तो उनहोने कहा.. मेरी बा तो इसमे नही है ! ....राज. मै बाहर खड़ी भीग रही थी..कहा है? उनहोने कहा...कुछ नही दीदी.कया देख रहे हो राज? मैने कहा... मुझे एक जोरदार चाटा लगा। दीदी पूरी तरह भीग चुकी थी और वो कह रही थी िक जलदी नही खोल सकता था? मै कुछ नही कह सका पर दीदी को जलदी ही अपनी गलती का एहसास हुआ और उनहोने कहा.. तुझे थोड़ा भी खयाल नही है। मैने भी दीदी को सॉरी कहा और उनहोने मुझे अपने गले से लगा िलया। बािरश की वजह से उनका पूरा बदन भीग चुका था और ऊपर से उनहोने कसे हुए कपड़े पहने हुए थे। वो देखने मे काफी सेकसी लग रही थी। मै भी उनसे िचपक गया और और मधुर सपनो मे खो गया िक तभी दीदी नही कहा.!!!!! दीदी ने कहा..राज ! दरवाजा खोल ! मै भीग रही हूँ ! मैने जलदी-जलदी अपने आप को ठीक िकया और डीवीडी बंद करके दरवाजा खोलने के िलए चला गया। पर मैने जैसे ही दरवाज़ा खोला.तभी बाहर से आवाज़ आई....! मैने अपने आप को संभाला और कह िदया..... जाते समय वो पीछे से इतनी सेकसी लग रही थी िक कोई 70 साल का बूढा भी देख ले तो िबना िवयागा के ही उसका लंड खड़ा हो जाये। मेरे भी मन मे मेरा सोया हुआ शैतान जागने लगा और सोचने लगा.दोसतो के साथ समय का पता नही नही चला ! दीदी सॉरी .राज बस यार ! अब हट ! मुझे कपड़े बदलने है। मैने कहा.राज.कम से कम एक फोन ही कर देता ! मैने कहा.सॉरी यार ! पर तूने भी तो इतनी देर लगा दी थी.चल.

बहुत अचछी ! तो वो बोली.दीदी वो मै......... मै सब समझती हूँ ! चल अचछा एक बात बता िक मै तुझे कैसे लगती हूँ ! मै हैरान रह गया िक दीदी आज कैसे बात कर रही है ..नही दीदी और एकदम से मै उनसे िचपक गया और कहा... मैने कहा.तू अपनी दीदी को चोदेगा? मै सर नीचे कर के खड़ा हो गया ! मेरे तो मन की बात कह रही थी पर वो मेरी दीदी थी तो मै कुछ ना बोला ! वो कहने लगी..और मुझे आज मौका भी िमला और मै कुछ ना कर सका !!!! .सॉरी दीदी.कुछ नही ! तो दीदी बोली... आज के बाद कभी ऐसे नही देखूंगा ! वो बोली.....तो मैने कहा....तू मेरी गाड देख रहा था ना? मैने कहा.......तू ही बता िक कया देख रहा था? मैने कहा.......अचछी या बहुत अचछी? मैने कहा. !! और मै चुप हो गया! तो दीदी बोली.अचछी लगती हो ! दीदी बोली.खुद ही ले लो ! और मै गुससे मे बा लेने चला गया और देने के िलए जाने लगा। बाथरम के पास जाकर उनहे बा देने लगा िक तभी दीदी नै मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अनदर खीच िलया और कहने लगी.न ..वो मै .ना .मै सब जानती हँू िक तू कया देख रहा था ! मैने कहा..चल ठीक है ! रहने दे ! लगता है िक तू बुरा मान गया ! और मै बाहर आ गया ! पर रह रह कर मुझे दीदी का गीला बदन याद आ रहा था .कया ! वो बोली.....चल पगले.बहुत बदमाश हो गया है तू ? कया देख रहा था तू तब ? मैने कहा.ना..

.दीदी कुछ नही ! यह तो ऐसा ही है ! वो बोली.हे राम ! इतना मोटा ? साले तू कया करता है? मैने कहा.मै अपने कमरे मे आ गया और दीदी के बारे मे सोचने लगा और अचानक खड़ा हो कर बाथरम की तरफ जाने लगा। मैने सोचा िक जब उनहे खुद ही कोई पॉबलम नही है तो मै कयो पीछे हटू ँ ! और मै बाथरम मे पहुँच गया। मै जब बाथरम मे पहुँचा तो दीदी अपने कपड़े उतारने ही जा रही थी.िकसी को नही .... मै भी खुश हो गया और धीरे धीरे उनके कपड़े उतारने लगा और साथ ही उनके होठो पर चूमने लगा... मैने कहा..साले. पलीज़ ! िकसी से कहना मत ! ... िफर कया आज एक भाई अपनी बहन को चोदने वाला था ! मैने जैसा ही अपना लणड िनकाला..दीदी.अरे पगले.. उनका मुँह दूसरी तरफ था। मैने पीछे से जाकर उनहे पकड़ िलया और चूमने लगा! मेरा लणड उनकी गाड की दरार मे घुसने लगा। वो बोली.... तो देर िकस बात की ! .कया हुआ? मैने कहा.. तूने आज तक िकतनी लड़िकयो को चोदा है? मैने कहा... इतने बड़े बड़े सतन है आपके ! मै उनको हाथ मे लेकर चूसने लगा और दबाने लगा। दीदी भी जोश मे आ चुकी थी और मुझसे िचपक गई थी। मेरा तो सपना साकार हो गया था। मैने दीदी को धीरे धीरे पूणर नगन कर िदया और खुद भी नंगा हो गया.दीदी..चल आज अपनी बहन को चोद ! और खुद भी मजा ले और मुझे भी मजा दे ! मैने कहा...सॉरी ! और इतने मे दीदी ने अपना सूट उतार िदया। मै तो देख कर बेहोश होने वाला था िक दीदी ने मुझे संभाला और कहा....जानवर है कया? आराम से कर ! आज तो मै तेरी हूँ .. कयोिक यह मेरा पहला सेकस था तो दीदी ने मुझे धका िदया और कहा... मैँ िकसी से कयो कहँूगी ... दीदी बोली.आ गया ना ! मैने कहा..दीदी.और उनहे चूमने लगा। दीदी बोली.... वो बोली.

.. दीदी कहने लगी.. और पूरी रात उससे चोदता रहा ! रात को पता नही कब नीद आई और मै सो गया। सुबह उठ कर देखा तो दीदी घर का काम कर रही थी। मैने दीदी को पीछे जाकर िफर से पकड़ िलया और एक िटप िफर से ली और कॉलेज़ चला गया। मेरी कहानी कैसे लगी? अगली बार अपनी मा की कहानी लेकर हािज़र हूँगा ! पलीज़ मुझे मेल करे ! ! यह तब की कहानी है जब मै २४ साल का था। घर वालो ने मेरी शादी एक शहर की लड़की से तय की िजस शहर मे मै काम कर रहा था। लड़की के िपता साठ साल के थे और वो बीमार थे...................अब पता चला िक मै िकतना दूध पीता हूँ..हा हा ! कयो नही ! नेकी और पूछ पूछ !..और उस रात मैने अपनी बहन को पाच बार चोदा ...जब उसे मजा आने लगा तो वो भी उचकने लगी। बीस िमनट तक मै उसे चोदता रहा और अलग अलग ढंग से चोदा ! 20-25 िमनट बाद जब मेरी छू ट होने को आई तो मैने लंड बाहर कर उसके मुँह पर िपचकारी मारी और उसने मेरा लंड अपने मुँह मे ले िलया और सारा वीयर चाट गई ! और िफर मै उससे िचपक गया ! हम दोनो एक दूसरे के साथ देर तक िचपके रहे। इतने मे मेरा लंड िफर से खड़ा हो गया और मैने कहा.....मै उनहे चूमने लगा. माता सैतालीस साल की थी और काफी सेहदमंद ..बहन के लौड़े ! थोड़ा धीरे ! ओई मा...... और वो घोड़ी बन गई.... साली रंडी.भैया दूध नही पीता? थोड़ा तेज नही चोद सकते ? और मैने झटके तेज कर िदए और चोदने लगा .......नए नए सटाइल मे ...साले केवल चूसेगा ही या खायेगा भी ? मैने दीदी से बोला.अचछा भैया ऐसे बात है तो लो.. उनहोने मेरा लंड हाथ मे ले िलया और आगे पीछे करने लगी। मुझे काफी मजा आ रहा था। मै उनके बोबे दबा रहा था और होठ चूस रहा था। वो बोली............. बड़ी जलदी है तुझे ? चल घोड़ी बन जा साली राड ! जलदी कर ! मुझे तो तुजसे जयादा जलदी है ! रंडी..और उसे भी मजा आने लगा. मै उसे पेलने लगा। वो बोली........ कब से सोच रहा था िक कब तुझे चोदूँ ! वो बोली.....अज मेरे भैया राजा फाड़ दे अपनी बहन की चूत ! बना ले अपनी .. उसकी चूत पर बहुत सा थूक लगा कर जोर जोर से चोदने लगा। अब वो मजे से चुदने लगी ....दीदी एक बार और हो जाये ! वो बोली......... तेरी गाड का तो आज मै बुरा हाल बना कर छोड़ूंगा ! वो भी कहने लगी......हा कुते ! कर ना ! और मेरा साथ देने लगी.मर गई साले ! थोड़ा धीरे ! मैने कहा.....साली..

उसके पित गाव मे अधयापक थे और वो महीने मे तीन या चार िदन ही आते थे। मेरे साथ वो घुल िमल के रहती थी लेिकन कुछ पूछने पर नही बताती थी। एक िदन दोपहर मै घर पे अकेला था तो मैने िखड़की से देखा िक माया सकूल से घर आ रही थी. इसीिलए यह हालत हुई है। तो उसने हंसते हुए कहा.कौन है वो जो सपने मे इस सुनदर चीज से खेल रही थी? तो मैने उससे कहा.माफ करना. सपना देख रहा था.थी. कयोिक घर मे कोई जवान पुरष नही था और िपताजी की देख-भाल के िलए वहा होना जररी था। बड़ी साली माया िदखने मे काफी सुनदर थी लेिकन हमेशा चुपचाप रहती थी.बुरा नही मानना लेिकन वो तुमही हो जो सपने मे मुझे सताती हो ! . उसे देखते ही मुझे एक कलपना सूझी और मैने उसे पटाने की तरकीब िनकाली। मैने अपनी चडडी िनकाल के िसफर लुग ं ी पहनी जोिक सामने से खोल सकते थे. बड़ी बहन माया सताइस साल की शादीशुदा थी. वो भी सकूल टीचर थी. और बेडरम मे सो गया। उसके िवचार से मेरा लणड तन के दस इंच का हो गया था और लुग ं ी मे खडा हुआ था। थोड़ी देर मे माया ताला खोल कर अनदर आई और मुझे अनदर उस िसथित मे देखकर मुसकुराई। वो बड़े पयार से मेरे तने हुए िलंग को देख रही थी। शायद उसने पहली बार इतना बड़ा हिथयार देखा था। अब उसने अपने कपड़े उतारने शुर िकये। उसने अपनी साड़ी उतार कर बाजू मे रखी और िफर बलाऊज़ िनकाला। वो मुझे सोया हुआ समझकर िबंदास अपने कपड़े बदल रही थी या सब कुछ जानते हएु अनजान बन रही थी। िफर उसने पेटीकोट उठाकर अंदर से अपनी चडडी िनकाल कर बाजू मे रखी। उसी कारण मुझे उसके बड़े बड़े गोरे कूले नजर आये और मेरा लंड और तन गया। िफर उसने अपनी बा भी िनकाली और वो घर मे पहनने के कपड़े लेने के िलए मुड़ी तब मैने उसके बड़े-बड़े गोरे आम जैसे सतनो के दशरन िकये। उसका पेटीकोट आगे से थोड़ा फटा हुआ था इसिलए पेट के नीचे के बाल भी साफ नजर आ रहे थे। अब मैने आिहसते से अपनी लुग ं ी सरका दी तािक मेरा पूरा का पूरा लंड उसको िदखे। जब उसने मेरा दस इंच का लंड खुला देखा तो उसके होश उड़ गए। लगता है उसको नजदीक से देखने की उसको लालसा हुई और वो थोड़ा नीचे झुक गई। मै उसी वक़्त उठकर खड़ा हुआ जैसे िक मुझे बाथरम जाना है। सामने ही उसे देखकर मैने आशयर से उसे पूछा िक वो कब आई। लेिकन वो िबना कुछ बोले अपनी छाती पर हाथ रखकर खड़ी थी और मेरे नीचे वाले को देखकर मुसकरा रही थी। मैने नीचे देखा और उसे कहा. उसकी शादी को तीन साल हुए थे लेिकन अभी उसकी कोई संतान नही थी और सबसे छोटी बहन अटारह साल की थी जो पढ रही थी। शादी के बाद मै उनही लोगो के साथ रहने लगा.

आिहसते मै लंड को अनदर बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी। दस िमनट बाद उसने मुझे जोर से पकड़ िलया मै समझ गया िक उसने अपना पानी छोड़ िदया है। लेिकन मै कहा मानने वाला था और 15 िमनट तक लगातार धके मारने के बाद मेरा लावा िगरने को आया तो मैने उसको पूछा िक वो कया चाहती है.ऐसा कहते हएु मैने उसको अपनी तरफ खीचा और उसके मुख को चूमा और उसके सतन अपने हाथ मे लेकर कुचलने लगा। लेिकन उसने मुझे जोर का धका देकर दूर धकेला और बेड पर बैठकर रोने लगी और कहने लगीनही. उनकी चूत से बहता हुआ पानी मुझे बहुत अचछा लगता है। दस िमनट तक एक दूसरे की चाटने के बाद मै उसकी टागो के बीच मे आया और उसकी एक टाग अपने कंधे पर लेकर अपना लंड का सुपारा उसकी चूत की दरार पे िटका िदया. यह पाप मै नही कर सकती। थोड़ी देर उसको रोने देने का बाद मैने उसे कहा. मुझे माफ करो लेिकन मै ये सब तुमहारे साथ नही कर सकती. और एक जोर का धका िदया। वो जोर से िचललाई तो मैने अपने हाथ से उसका मुँह बंद िकया। वो रोने लगी और मैने नीचे देखा तो उसकी चूत मे से खून बह रहा था। मै जान गया िक उसकी चूत की िझलली मैने तोड़ दी है। शादी के तीन साल बाद भी वो कु ंवारी ही थी। मैने उसके पित को मन ही मन धनयवाद िदया िक उसका सील तोड़ने का सौभागय मुझे पापत हुआ। थोड़ी देर रकने के बाद मैने दूसरा जोर का धका िदया और इस बार मेरा पूरा दस इंच लमबा और ढाई इंच मोटा लंड उसकी चूत मे घुस गया। िफर आिहसते. मेरी नजर मे अपार करणा थी. यह पाप है.कया महाभारत मे िकतनी औरतो के दो या पाच पित नही थे? िकतनी औरतो ने दूसरे पुरष से संतान नही पाई थी? यहा तो मै तुमहारे घर का पुरष हूँ और अगर तुमहारा पित तुमहे यह सुख और सनतान नही दे पाता तो सबसे पहले ये मेरा अिधकार और कतरवय है िक मै तुमहे यह सुख और संतान दे दूँ ! अब यह तुमहारे हाथ मे है िक हम सब दुखी रहे या तुम मेरी पती बन के यह सुख भोगो और मुझसे संतान पापत करो ! इस कारण मै छाया को भी जयादा परेशान नही करं गा और वो भी सुखी रहेगी। कया तुम नही चाहती िक तुम. मैने उसे कहा. मै. तुमहारी बहन और संतान पाकर तुमहारे पित सब खुश हो और घर ही घर मे तुमहे यह सुख िमले? उसको चुपचाप खड़ी पाकर मै समझ गया और उसको अपनी ओर खीचकर उसके चुमबन लेने लगा और उसके बड़े बड़े आम जैसे उरोज कुचलने लगा। अब वो मेरी बदन से िचपक गई। मैने िबना समय गँवाए उसको बेड पे डाला और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उसे दूर फेक िदया। अब वो पूरी नंगी मेरे नीचे थी और मै उसके पूरे बदन को चूम रहा था। िफर मैने 69 की पोजीशन ली और अपना लंड उसके मुँह मे डाल िदया और मै उसकी चूत को अनदर जीभ डालकर चूसने लगा। मुझे औरतो की चूत चूसना बहुत पसंद है. मै मेरा वीयर उसकी चूत मे िगराऊं या वो उसे अपने मुँह मे लेना पसंद करेगी? .कैसा पाप ? तुम तो मेरी साली हो और साली तो आधी घरवाली होती है और कया मुझे मालूम नही िक शादी को तीन साल होने के बाद भी तुमहारी संतान नही है कयोिक तुमहारा पित तुमहे यह सुख नही दे पाता। कया तुम नही चाहती िक तुम मेरे इस लंड की मालिकन बनो और इसका मजा लूटो ! कया तुम मुझसे संतान होना पसंद नही करोगी? अगर मेरी शादी छाया (मेरी पती) के बजाए तुम से हो जाती तो िकतना अचछा होता ! तुमहे पता है िक मेरा ये दस इंच का हिथयार छाया नही पेल पाती और वो मुझे संतुष नही कर पाती। वो मेरी तरफ देखने लगी. तुम मेरे बहन के पित हो.

मेरी अगली कहानी का इंतजार किरए। तब तक के िलए नमसकार ! dabbu1@live.वैसे मै अपने वीयर को बहुत कीमती मानता हँू और उसे जमीन पे िगराना मुझे पसंद नही है। लेिकन उसने कहा िक वो मेरे वीयर को पिवत मानती है और वो उसे अपनी चूत मे लेना चाहती है तािक उसे संतान पापत हो। वो चाहती है िक छाया की बड़ी बहन होने के नाते वो उससे पहले मा बनना चाहती है। मैने भी उसे कहा िक मै उसे अब मेरी बड़ी पती के रप मे देखता हँू और मेरे बचचे की मा बनना उसका ही पहला अिधकार है और मै उसे पूरा करँगा। ऐसा कहकर मैने 10-12 िपचकारी वीयर उसकी चूत मे छोड़ा और िफर हम दोनो उसी पोजीशन मे दस िमनट तक पड़े रहे। िफर बाथरम जाकर हमने एक दूसरे को साफ िकया और भगवान की तसवीर के सामने खड़े होकर मैने उसके साथ गनधवर िववाह िकया। िजंदगी भर मैने उसे पती मानने की कसम खाई और उसे बचचे देने का अिधकार पापत िकया। उसके दो िदन बाद मेरे जीवन मे कया तूफान आया ये आप सोच भी नही सकते ! वो सब अगली कहानी मे बताऊंगा.com .

सासू मा और मै दोनो अकेली होती है। अनतवासना की कहािनया तो मै पहले से पढती आई हूँ.सभी अनतवासना पढने वालो और अंतवासना के पूरे सटाफ को उवरशी का पयार भरा नमसकार आदाब. भेजना हो वो सब कुछ ले जाते है! सभी शगुन लगाने चले गए.ऐसा मत कहो ! मै आती रहूंगी मायके ! िमलकर जाया करँगी ! उसके बाद मैने सलवार खोल दी और उसने वही फशर पर मुझे ढेर कर िलया और अपना लौड़ा चूत मे डाल रफ्तार पकड़ी। एक साथ ही हम शात हुए और उसने मुँह मे ठूंस िदया। अगले िदन शगुन की रसम होनी थी। हमारे इधर सुबह पहले लड़की वाले लड़के को शगुन लगाने जाते है और साथ मे दहेज़ का जो भी सामान देना. वो मुझसे शादी करना चाहता था लेिकन हम मजबूर थे कयोिक एक गाव मे शादी मुिशकल काम था। शादी से तीन रात पहले उसने मुझे रात को कॉल कर छत पर बुलाया। उस वकत रात के दो बजे थे। िमलते ही उसने मुझे दबोच िलया और मेरे होठ चूसने लगा. शादी के ठीक गयारवे महीने मैने लड़का जना है। आजकल घर मे रहती हँू. गहने . आज आिखरी बार इतने गोल मोल मममे चूसने है ! मैने कहा.ए पहले साल मे थी जब मा-बापू ने लड़का ढू ंढ कर मेरी शादी पकी कर दी। हमारे समाज मे छोटी उम मे शािदया होती है। शादी से पहले मेरे ३ लड़को के साथ चकर रहे थे और तीनो के साथ मेरे शारीरक संबध ं बने और मुझे चुदाई का पूरा पूरा चसका लगा। पहली चुदाई पेम नाम के लड़के के साथ हुई जब मै अठरा साल की थी। उसके बाद दो और एफेअर चले। मुझे लड़के की फोटो िदखाई गई थी। शादी से बीस िदन पहले मेरा घर से आना जाना बंद हो गया था और चुदाई भी ! हालािक एक चकर मेरा पड़ोसी के साथ था.जान. साथ मे उसने अपना हाथ मेरी सलवार मे डाल मेरी चूत को मसलना चालू कर िदया। मै पूरी गमर हो गई और उसके लौड़े को मसलने लगी। उसने अपना लौड़ा बाहर िनकाल िदया और मैने मुँह मे ले िलया और चूसने लगी। वो बोला. मेरा नाम उवरशी है और मै जयपुर. एक बचचे की मा हँू. उनहोने इधर उधर देख मुझे आंख मारी. भािभया और उनके पित लड़की को शगुन की चुनी. सत शी अकाल ! दोसतो. कुती उठा लो. पीछे मै और दादी मा थी। उसके बाद शाम को लड़के की बहने. शादी से पहले भी ! पूरा िदन बोर होती रहती हूँ. मै होठ से चबाते हएु मुसकुरा दी। . राजसथान की रहने वाली हूँ। मेरी उम इकीस साल है. तो सोचा िक अनतवासना का मज़ा िलया जाए। एक साल पहले मे बी. िसंगार के सामान साथ मेहदी लगाने आई। उनमे से मेरी नज़र बार बार एक मदर पर िटकने लगी वो भी मुझे देख वासना की ठंडी आहे भर रहे थे। शगुन डालते वकत फोटो होने लगी तो मालूम चला वो मेरे एक नंदोई सा है। कया मदर था ! मै मर िमटी थी ! वो भी जानते थे.

कमरा बंद िकया पर अपने कमरे से बाथरम की कुणडी लगाना भूल गई। मैने जलदी से कुती उतारी और लहंगा खोला। दरवाज़े की तरफ मेरी पीठ थी। जैसे ही मै िसफर बा-पैटी मे रह गई तो एक आवाज़ आई. लहंगा भारी था. मेरी चूत मचल उठी और मैने उनके लौड़े को पकड़ िलया। जब वो मेरा दाना मसल देते तो मै मचल उठती ! थोड़ी देर मे खुद ही वो अलग हो गए बोले. िमलनी की रसम के बाद नाशता हुआ। िफर सटेज पर जयमाला हुई। काफी देर वहीँ बैठे। सबने शगुन वगैरा डाला. फोटो िखंचवाई। ऊपर मंडप तैयार था। आज नंदोई सा बहुत जयादा हैणडसम लग रहे थे। बहुत बिढया डी. ससुरजी और नंदोई सा तो उनको ही समभाल रहे थे। रात हुई. बोले.पहले गमर करती हो ! िफर मना करती हो? वो दोनो हाथो से मेरे मममे दबाने लगे. भाभी.जे कायरकम का पबनध िकया था पापा ने ! एक तरफ दार भी चलवा दी तािक िजसको मूड बनाना हो बना ले ! वैसे भी मेरे ससुराल मे सभी शादी-िबयाह मे पीते ही थे। खैर मंडप पर मुझे दीदी. बोले.बाथरम मेरे कमरे के साथ जुड़ा है। उसका एक दरवाज़ा लॉबी मे भी खुलता है। मैने कमरे मे नंदोई सा को देख झट से तौिलये से खुद को छुपाया। वो मेरी ओर बढे.मै अपने कमरे मे कपड़े बदलने चली गई. दीदी बोली. सहेिलया लेकर गई और फेरो के बाद मंगल सूत पहनाया गया। दूले के बराबर नंदोई सा उसकी हर रसम मे मदद कर रहे थे तािक उसको कोई घबराहट न हो ! इधर मुझे भाभी सब बताये जा रही थी। नंदोई सा मेरी भाभी पर भी लाइन मार लेते। शाम पाच बजे तक सब खतम हुआ. आिखर मे बेड पर िगर गई। वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे तपते होठो से अपने होठ िमला िदए। उनहोने िडंक की हुई थी। पलीज़ ! मुझे सबके बीच वापस लौटना है ! बाद मे कभी ! बोले. मै पीछे हटी.एक सरपाईज़ बाकी है ! कुछ पल के िलए पितदेव पास आये. उसके बाद मेरी डोली उठी और मै गुलाबो से सजी कार मे बैठ ससुराल आ गई। माजी ने पानी वारने की रसम पूरी की। मुझे भाभी और इधर वाली दीदी अलग कमरे मे ले गई। मुझे कहा िक कपड़े बदल कर फेश हो जाओ। बाहर लॉन मे सब नशे मे धुत हो नाच-गा रहे थे। शगुन मागने वालो की लाइन लगी पड़ी थी.बहुत आग लग रही हो ! .भाभी कल सही ! अगले िदन मै दुलन बनी। पालरर से दुलन बनकर पहंुची पैलेस ! पापा ने शहर का सबसे महंगा पैलेस बुक िकया था। हमारे इधर शादी िदन मे होती है। बारह बजे बारात आई. मुझे कुछ होने लगा.कया हुसन पाया है ! क़यामत ! मुड़ कर देखा तो सामने नंदोई जी थे.

िफर कुती की डोरी खीची और अलग कर दी. इनको िहलाया. उन दोनो ने िलए मोटे पिटयाला पैग ! दो पैग के बाद पितदेव लुढक गए। मै कुछ-कुछ समझ गई। बस किरए न आप ! िकतनी िपओगे ? भाभी जान ! आज ही तो पीने का िदन है ! खाना खाया.उनहोने पी रखी थी.कैसी हो जान ? मुझे मालूम है िक कया हो रहा होगा ! ऐसा करो. नंदोई सा ने मुझे कमरे की चाभी िगफट की और रम सिवरस वाला मुझे कमरे तक लेकर गया। कमरा खोलते वकत देखा. इन कमरो मे कम लोग ही आते है ! मै उठी. कमरा लॉक िकया और नंदोई सा के कमरे मे चली गई। वाह भाभी ! कया खूबसूरती है ! मदहोश कर देने वाली ! यह आपने कया िकया? इनको इतनी िपला दी? . दीदी ने नंदोई सा को उनहे और िपलाने से रोका। कार मे बैठ कर भी उनको काफी नशा था। नंदोई सा हमे छोड़ने आये। पहले नीचे पूरा डाइिनंग हॉल हम तीनो के िलए बुक था। मेरे िलए तब तक कोलड िडंक आडरर की. नशा काफी था.४०५ और ४०७ वो दोनो भी आ गए ! जाओ भाई अपनी दुलन के पास ! सुहागरात मनाओ ! इनको बहुत जयादा िपला दी गई थी। कमरे तक आते वकत तक दार हाथ मे थी। उतनी ही नंदोई सा ने पी लेिकन वो हटे-कटे थे। ये तो िबसतर पर लेटते सो गए। मै वाशरम गई। पहली रात के िलए सबसे महंगी नाइटी खरीदी थी. सोचा िक इस से नशा कम होगा। शटर उतार दी लेिकन इनहे कोई होश न था। तभी मुझे मोबाइल पर कॉल आई. उसी रंग की बा और पैटी ! बदल कर वापस आई ! लाल गुलाबो वाले िबसतर पर मे इनके साथ िलपटने लगी. होठ चूसने लगे। बोले. पीठ पर चूम िलया। मै िसकुड़ सी गई। अब दोनो आओ भी ! गाने की रसम पूरी करनी है ! पित ने मेरे मममे दबाये और मैने भी सूट पहन िलया और बाहर गए। वहा पंरात मे कचची लससी मे िसका िगरा कर ढू ंढने की रसम हुई। उसके बाद दीदी बोली.बदल लो कपड़े ! उनहोने मेरा लाचा खोला.तेरे नंदोई सा ने तुम दोनो के िलए फाइव सटार मे सवीट बुक िकया है ! पितदेव को काफी नशा हो चुका था.हाथ मे दो चािभया थी. हाउस-कीपर ने दो चाभी दी थी ना ! इसकी सुबह से पहले नही उतरेगी। बाहर से लॉक करो और इधर आ जाओ ! लेिकन मै नाइटी मे हूँ ! कोई बात नही ! रात के बारह बज चुके है.

वो उठे. कसम से तेरे जैसी जवानी वाली लड़की नही चोदी ! दीदी भी सुनदर है ! है. इसिलए उनहे कुछ बताये िबना मै अपने दोसत के साथ नीचे बार मे हूँ.कोई बात नही ! सही िकया आपने ! खुद मत पीना ! और फोन साइलेट पर लगा िदया मेरी दोनो टागे खोल मेरी चूत जो िक सुबह ही शेव करवाई थी.कया करता कल से तूने होठ चबा और बाद मे कमरे मे जवानी िदखाई ! आप बहुत खराब हो ! मेज़ पर शेमपेन और िबयर पड़ी थी. लेिकन मेरे इस चाद के सामने उसका रंग भी फीका है ! बाते करते हुए मैने उनको िनवरसत कर िदया. मैने पाव से उनके लौड़े को मसल िदया। इतने मे दीदी की कॉल आई नंदोई सा को ! उस वकत मै उनकी गोदी मे अधनंगी बैठी थी। कहा रह गए आप? सब ठीक तो है? हा. मुझे बाहो मे लेते हुए बोले. उन दोनो को भेज िदया जान कमरे मे ! इसने जयादा पी ली है ! सहारा देकर छोड़ कर नीचे आया हूँ ! बेचारी उवरशी घबरा गई है. मुझे कह कुहा कर िबयर िपला दी उसके बाद अपनी मज़ी से मग भर िपया। वो मुझे सोफा पर िबठा बीच मे बैठ मेरे सतनपान करने लगे। िससिकया फूटने लगी. उसपे होठ रख िदए। मै भड़क उठी। सोफे पर कोहिनयो के सहारे उठ कर चूत चुसवाने लगी। अह उह सी ! मेरी जान कया चूत है तेरी ! कया जवानी है ! बाग लगा है माली भी ज़रर रखे होगे ! मै शरमा सी गई ! उठा मुझे िबसतर पर िलटा िदया ! मेरे मममो पर िबयर डाल डाल कर चाटने लगे। वाह नंदोई सा ! और चाटो ! मसलो इनको ! भाभी. उनको बेड पर धकेलते हएु उनके कचछे को उतार उनके लौड़े पर एख िदए अपने कापते होठ ! इतना लमबा लौड़ा नंदोई सा? . कही साला सािहब कोई गलती ना कर दे ! दीदी बोली.

साथ मे मेरे दाने को चुटकी से मसल रहे थे। एक साथ मे मेरा मममा पकड़ रखा था। िफर चूत मे डाल िलया और तेज़ होने लगे। . कया चूत है तेरी साली ! िकतनी िचकनी है ! तू देख तेरा नंदोई बिहन की लोड़ी आज रेल बनाता है तेरी ! आह ! रगड़ो ! और रगड़ो ! फाड़ दो मेरी ! हाय ! मेरे कुते चोद अपनी कुितया को ! मेरे मुँह से यह सुन उनमे जोश भर गया. वो बीच मे आये और मैने अपने हाथ से पकड़ लौड़ा िठकाने पर रख िदया। उनहोने जोर लगाया और उसका सर अनदर घुस गया। काफी मोटा था लेिकन बेडशीट को जोर से पकड़े मैने उनका सारा अनदर डलवा िलया। ओह भाभी ! वाह. िदलबर ! कस के चूस इसको ! मै नशे मे थी. कुछ भी बके जा रही थी. िजससे पूरा लौड़ा जाकर बचचेदानी से रगड़ खाता तो मुझे सवगर िदखता ! उसके बाद मुझे घोड़ी बना िलया और ज़बरदसत झटके लगने लगे। और तेज़ तेज़ ! साथ मे खाली िबयर की बोतल मेरी गाड मे घुसाने लगे। हाय साले ! यह कया करने लगा है ! चल साली कुितया ! मेरे बाल खीच ! गाड पर थपपड़ मारा और बोतल एक तरफ रख दी। एक पल मे लौड़ा चूत से िनकाला और गाड मे डाल िदया ! ओह हा और और ! बहुत बिढया ! मेरी गाड मारने लगे.बहनचोद ! देखती जा साली राड कही की ! यह ले मादरचोद ! यह ले ! उई उई ई ई तू ही असली मदर है कमीने ! तेरा लौड़ा ही सबसे अचछा है ! कुछ देर उसी आसन के बाद दोनो टागे कनधो पर रखी.मैने भी कसम से अभी तक इतना मोटा और लमबा नही उतरवाया चूत मे ! ओह मेरी रानी. मैने ६९ मे लेटते हुए उनके लौड़े को चूसा और अपनी चूत को खूब चुसवाया। नंदोई सा ! अब रका नही जा रहा ! आओ अपनी भाभी के पास और उतर जाओ गहराई मे ! ओह बेबी ! मैने टागे खोल ली.

सो गई। सुबह के सात बजे अपने ऊपर िकसी को पाया. घर मे थे. मुझे चकर आये. उनहोने पयार से मुझे उठाया. पित भी नंदोई सा ने बुआ की तरफ से मेरे बेटे को चार तोले सोने की चैन. झड़ने के समय बाहर खीच मेरे मुँह मे डाल िदया ! दोसतो. मै चुपचाप बाथरम गई रठने की एिकटंग करते हुए ! जान कया हुआ? इतनी पी ली थी? कयूँ सोचा नही था िक मेरी बीवी के साथ पहली रात है ! नशे मे रौद िदया आपने मुझे ! अंग अंग िहला िदया !सॉरी ! आगे से ऐसा नही होगा ! आपने िबना पोटेकशन के मेरे साथ सब कर िदया ! अभी हमने एनजॉय करना है अगर अभी गभरवती हो गई तो? कल से हम बाहर िनकाल िलया करेगे.मै झड़ने वाली हूँ ! अह अह ऽऽ ले साली ! साली ले ! कहते कहते उनहोने मेरी चूत मे अपना पानी िनकाल िदया. शॉवर िलया.पितदेव थे ! मै सोने की एिकटंग करने लगी. कड़ा. डायमंड का लाकेट डाला ! .देख िलया उस रात का नतीजा ? लेिकन चल छोड़ कोई बात ना ! िकस चीज़ की कमी है हमे ! यह गभर नंदोई सा के कारण ठहरा था। पहली ही रात तीन बार अपना माल मेरी बचचेएदानी के पास छोड़ा था ! था भी इतना लमबा िक मानो अनदर घुसकर बचचा डाल आये ! उनको मैने फोन पर बताया िक इनका पानी मैने कभी अनदर नही डलवाया. िसफर पैटी छोड़ कर ! पित को जाते वकत ही मैने अंडरिवयर छोड़ िनवरसत कर िदया था। उनके पास लेट गई. आज िकसमत पर छोड़ दो ! उसके बाद अगली रात पितदेव ने चोदा। आज कम पी रखी थी. मैने कपड़े डाले और अपने कमरे मे आई. उनकी बाजू अपने ऊपर डाल दी. डॉकटर ने खुशखबरी सुना दी। रात को मैने पित से ऊपर से खफा होते कहा. हमेशा गाड मे या मममो पर ! िसफर आपका पानी अनदर डलवाया था। नशे मे वो बहुत खुश हएु । अब जब मैने लड़का जना है. मेरी बचचेदानी के पास गरम पानी छोड़ा. यह थी मेरी मसत चुदाई जो हर पल मेरी आँखो मे रहती है ! उसके बाद मौका देखा एक बार और नंदोई सा ने चोदा ! शादी के अगले महीने ही मेरी माहवारी रक गई. िजससे मुझे अता आनंद आया। बाकी का मैने मुँह मे डाल साफ कर िदया। साढे तीन के करीब दोनो बाथरम गए. सासु मा बहुत खुश है. पूरे िबसतर पर सलवटे डाल दी और गुलाबो को िबखेर िदया। सारे कपड़े उतार िदए.

वो भी देख रहे थे। मै उनको देख कर मुसकरा दी और िबसतर पर चली गई.सो कैसी लगी मेरी आप बीती ? िलखना ज़रर ! िफर बताऊँगी आगे लाइफ मे कया हुआ ! मै उस समय लगभग अटारह साल की थी. तब का यह िकससा है। मेरे माता-िपता िकसी की शादी मे बाहर गए हुए थे। उस िदन मै एक सेकसी पोगाम टीवी पर देख रही थी। उसमे एक लड़का लेटा था तथा एक लड़की उसके पास बैठ कर उसके बदन से मसती कर रही थी। िफर लड़की ने अपना कुरता खोल िदया. अब वो बा मे थी। िफर लड़के से उसने अपनी बा का हुक खुलवा िलया। िफर लड़की ने लड़के के कमीज के सारे बटन खोल िदए। अब लड़का उसके सतनो से खेलने लगा। लड़की को बड़ा मजा आ रहा था. लड़के का लंड भी उठ गया था तथा वो ऊपर को तन गया था। लड़के ने लड़की की सलवार का नाड़ा खोल िदया और उसकी पैटी मे हाथ डाल िदया। अब लड़की ने भी लड़के की पैट के बटन खोल कर उसकी चडडी मे हाथ डाल िदया। मै यह सब देख रही थी तथा बहुत मजा आ रहा था। मेरी भी चूत अभी गीली हो रही थी। मैने अपनी चूत मे अंगुली डाली तो बड़ा मजा आया। मैने सोचा िक िबसतर पर लेट कर मजा लूँगी लेिकन इसी वकत मुझे लगा िक मरे पीछे भी कोई टीवी देख रहा है। मैने जलदी से टीवी बंद िकया और पीछे देखा। मेरे अंकल जो फौज मे काम करते थे. मै नीद का बहाना करने लगी। आधे घंटे बाद मुझे लगा िक मेरे साथ कोई सोया हुआ है। मुझे समझते देर नही लगी िक यह फौजी अंकल ही होगे। उनहोने अपने शरीर को मेरे शरीर से छुआ िदया। मैने नीद का बहाना जारी रखा। धीरे धीरे उनहोने अपना हाथ मेरे वक पर रखा। िफर थोड़ी देर के बाद वो अपने हाथ को िफराने लगे। एक चूची से दूसरी चूची तक धीरे धीरे हाथ िफराते रहे। मुझे बहुत मजा आ रहा था लेिकन मैने नीद का बहाना जारी रखा। धीरे धीरे वो अपने हाथ को मेरी कमर पर ले गए और िफर वो अपना हाथ मेरी टागो के बीच मे ले गए। उनहोने मेरी चूत पर अपना हाथ फेरा। मुझे बहुत मजा आ रहा था लेिकन मैने नीद का बहाना जारी रखा। अब वो मेरी कुती के अनदर हाथ डालने की कोिशश करने लगे। वो अपने हाथ मेरी कमर के नीचे डाल कर मेरी कुती की िज़प तक पहुँचाना चाहते थे लेिकन कर नही पाए। मै धीरे से टेढी हो गई। इसका फायदा उनहोने उठाया और जलदी से मेरी कुती की िज़प खोल दी। इसके बाद उनहोने मेरी कुती को भी उतार िदया। मैने िफर भी नीद का बहाना जारी रखा। .

इसिलए जररी है। इससे मेरा लंड तुमहारी चूत मे आराम से घुस जायेगा। मेरी चूत तथा अपने लंड पर वैसलीन लगा कर वो मेरा चुममा लेने लगे तथा जोर जोर से मेरे वक की मािलश करने लगे। उनहोने कहा.अब मेरी कमर पे िसफर बा थी। अंकल मेरी बा मे हाथ डाल कर मेरी चूची को दबाने लगे। अब मुझसे भी रहा नही जा रहा था.यह तुमको अचछा लग रहा था? मैने कहा. जाघ से तथा मेरे हाथ से छू रहा था। अंकल कभी मेरी बा मे हाथ डालते तो कभी मेरी पैटी मे ! मै अब तरपने लगी थी। अब अंकल ने अपने होट मेरे होठो पर रख िदए और मुझे चूमने लगे। अब मैने भी अपनी आँखे खोल दी और उनको चूमने लगी। अंकल ने पूछा.तुम पहली बार चुदवा रही हो.यह कयो चािहए? तब उनहोने बताया. मेरे बदन पर चूमने लगे। अब उनका हाथ मेरी सलवार तक पहुँच गया और वो मेरा नाड़ा खोलने की कोिशश करने लगे। उनसे नाड़ा खुला नही और उलटा उलझ गया। अब मै सोचने लगी िक कया िकया जाए ! िकस तरह नीद मे रह कर नाड़े को खोला जाए? मैने नीद मे ही कहा.अब मै जो करँगा वो तुमहे बहुत जयादा मजा देगा। उनहोने मेरी बा और पैटी उतार दी। िफर अपनी लुग ं ी भी खोल दी। उनका लंड एक दम कड़ा और लमबा था। िफर उनहोने मुझे पूछा. मेरे तन-बदन मे आग लग रही थी। इसी बीच मेरे हाथ के पास एक कड़क चीज थी. मैने जलदी से अपना नाड़ा खोल कर इस तरह थोड़ा सा बाध िदया िक आसानी से खुल सके। अंकल दरवाज़ा बंद करके आये। थोड़ी देर बाद हाथ िफरा का मेरा नाड़ा भी खोल िदया। अभी सलवार उतारने के िलए मुझे िफर अंकल की मदद करनी जररी थी। अंकल ने मेरी सलवार को नीचे िखसकाना चालू िकया तो मै थोड़ा सा ऊपर हो गई तािक मेरी सलवार आसानी से उतर सके। अब मै िसफर बा और पैटी मे थी। अंकल का लंड भी बहुत बड़ा और कड़ा हो गया था जो िक मेरे बदन. यह अंकल का लंड था। अंकल अपना हाथ मेरे नंगे बदन पर घुमाने लगे.अब तुम अपने दोनो पाव फैला लो ! मैने दोनो पाव फैला िलए। .दरवाजा खुला न रहे ! नही तो िबलली आकर सब दूध पी लेगी।अंकल जलदी से उठ कर दरवाजा बंद करने चले गए.वैसलीन या घी कहा रखा है? मैने उनको पूछा.बहुत अचछा लग रहा था। उनहोने बोला.

उनहोने अपना लंड मेरी चूत पर रख िदया. मै तो पूरा लंड लेना चाहती थी। थोड़ी सी देर मे उनहोने पूरा लंड मेरी चूत मे डाल िदया। मुझे भी ददर हुआ तथा खून भी िनकला लेिकन इतना मजा आया िक पूछो मत। अब अंकल ऊपर-नीचे होने लगे और मै भी अपनी चूत को ऊपर-नीचे करने लगी। बहुत जयादा मजा आ रहा था.घबराओ नही ! पहली बार ददर होता है लेिकन इतना मजा आता है िक पूछो मत ! सही था. कुछ िमनट तक ऊपर-नीचे करने के बाद अंकल एकदम अकड़ से गए और इसी बीच मेरे चूत के अनदर भी जूस िनकल गया। इसके बाद तो अंकल मुझे एक जगह लेकर गए. वहा हमने चुदाई का बहुत मजा िलया। लेिकन यह सब अगली कहानी मे िलखूंगी। .. िफर धीरे धीरे उसे दबाने लगे। मुझे बहुत अचछा भी लग रहा था तथा ददर भी हो रहा था। िफर उनहोने थोड़ा सा लंड और दबा िदया। अंकल बोले..

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