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WEDNESDAY, JUNE 15, 2011

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'चौदहवीं का चाँद पर एक ' chaudhvin-ka-chand
"Light of Truth" नाम से आज इं लश म मशहर
ू कताब, कल
1908 म छपे एडशन म इसका नाम an English translation of
Satyarth Prakash िलखा है (1915 तक इस का नाम “Om Light
of Truth" रहा था) आनलाइन उपल)ध 1908 वाले एडशन के 33
वष, पूव , दयानंद सरःवती (The Luther of India?) ने सन ् 1875
म जबक आपक0 मातृभाषा गुजराती और संःकृ त थी, ह6द7 भाषा
का मामूली 8ान होते हए
ु 'स:याथ, ूकाश' नाम से यह म6थ तैयार 
कया था, 'लाइट आफ ?थ ' नाम मेर7 जानकार7 के अनुसार 1956
' के इं लश एडशन म ते पाया,
“The Light of Truth, English Translation of Swami Dayanand’s Satyarth Prakasha” by
Ganga Prahad Upadhyaya in 1956; the Kala Press, Allahabad. इसके ूचार से ऐसा लगता है यह
तीसरा नाम अब नह7ं बदला जायेगा।
सव, ूथम यह पुःतक ह6द7 म आयी, आय, वेबसाइटस से पंजाबी और उद, ू म इसका होना कसी को अब
बताया नह7ं जाता, आयC क0 बाइबल कह7 जानी वाली यह कताब वैदक भाषा म न िलखी जा सक0?
ःवामी जी क0 मृ:यू के बाद 1884 के दसरे
ू एडशन म 13 ईसाईयE से और 14 सFमुGलास इःलाम के
सFबनध म जोड दया गया, इसके िलए कई तरह के बहाने बनाये गये थे , ह6द7 म होने पर इसक0 परवाह
नह7ं क0 गयी लेकन आम लोगE क0 भाषा उद, ू म लगभग 23 वष, पँचात 1898 म ूकािशत हई
ु तब
मुसलमानE को इसका जवाब दे ना लाजम हो गया, तब मौलाना सनाउGलाह अIतसर7 ज6हE ने
मुनाजरE, मुबाहसE और कलम के Jारा आय, समाज को लगभग आधी सद7 यािन 1948 तक सफलता
पूवक
, टKKर द7 , उ6हEने इसके आखर7 कुरआन से सFब6धत चौदहव सFमुलास का जवाब उस समय
क0 ह6दः
ु तान-पाकःतान-बंलादे श क0 भाषा अथा,त उद, ू म 'हक ूकाश' नाम क0 पुःतक म दया, जो
चमुपित जी के समय म नागर7 म भी उपल)ध था, इसे सार7 इःलामी दिनया
म मकबूिलयत हािसल हई


और 14व सFमुGलास का लाजवाब उ:तर का दरजा ूाLत हआ
ु , वेसे आजाद7 के बाद रामनगर7 क0
'दलाइलुल कुरआन' को भी पसंद िगया है ,
26 साल बाद (सन 1900 ई.) म जवाब Kयूं दया? इस आरोप के जवाब म मौलाना ने िलखा है क
जो समय लगा वह नागर7 म लगा उद, ू म जलवा दखाया तो तुर6त कजा, उतारा गया, यािन उद, ू म
ूकािशत होने के फोरन बाद ह7 मौलाना ने इसका जवाब दे दया था, और कहा यह आरोप तो ः वामी जी
पर भी है कुरआन उतरे हए
ु 1300 साल हो गये उ6ह अब उनसे इतना बन पडा जो आगे आता है .... मुझ से
Maulana Sanaullah Amritsari (1868- 1948)मुलाकात हो गयी होती तो यह अNयाय िलखने क0 नौबत
न आती,,, यह7ं यह जानकार7 भी िमलती है क लगभग 25 वष, बाद तक यािन जु लाई 1924 तक हक
ूकाश के 5व एडशन तक भी मौलाना को जवाब का इ6तजार रहा, िलखते हO एक दो नFबरE पर ःवामी
दश,ना नंद ने िलखा फर वह दिनया
िसधार गये (दे ख हक ूकाश, ह6द7 पृंठ 18)

जब मुसलमान भाई इसे आय,-समाजयE क0 जानकार7 म लाते हO तो बजाये इसका अNययण करने के वो
ौी चमूपित क0 लगभग 35 वष, पँचात उद, ू ह7 म िलखी गयी पुःतक   ‫' دﮨﮟ‬चौदहवीं का चाँ द'
का नाम इसके ख6डन पुःतक के Tप म बताते हO , नेट म भाईयE के ूचार और ूसार के कारण यह
पुःतक केवल ह6द7 म आसानी से उपल)ध है ।

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हलाल
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▼ 2011 (1)
▼ June (1)
'चौदहवीं का चाँ द पर
एक '
chaudhvin-kachand

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इस पुःतक के सFपादक0य से 8ात होता है क मौलाना के
जवाब म लगभग 35 साल बाद यह पुःतक ूकािशत हई
ु थी
(दे ख 'चौदहवीं के चां द' के पृंठ 29 पर सF पादक0य---- ''ौी
पUडत चमूपित जी ने सन 1937 म दे ह:याग कया ''चौदहवीं
का चां द '' पुःतक उनके अ6तम वषC म िलखी गई एक उ:तम
पुःतक है '' ) 
ज6हEने इस कताब पर एक  डाली होगी वह यह बात आसानी
से समझ लगे क उKत पुः तक म केवल एक लेख ऐसा है जस
ख6डन या समीVा के Tप म माना जा सकता है , दो-तीन जगह 
कताब म इधर-उधर मौलाना का नाम घुसा कर , 'हक़ ूकाश पर
एक ' वषय से जो लेख है उसे हक ूकाश पर िलखा गया कह
सकते है , दसरा
इस से अगला लेख 'स:याथ,ूकाश' के ूमाणE क0

चम:काYरक शुZता' दयान6द जी के कुरआन के अनुवाद और
मोलाना के अनुवाद पर बहस है , जसको पाठक समझ ह7 नह7ं
सकता, Kयूंक उसमे यह नह7ं बताया गया क कतने नFबर क0
समीVा म दया जी ने यह अनुवाद कया है तो उसी नF बर पर मौलाना ने यह आप[ क0 है , बस इधरउधर से आधी-अधू र7 पं\यां उठाकर लेख तैयार कर दया गया है , जससे आप[, समीVा और आVे प म
उलझ कर कुछ समझ म नह7ं आता फर भी अनुवाद बारे म हम इतना तो जानते ह7 हO क ःवयं दया जी
मामूली अरबी भी नह7ं जानते और दभा,
ु य से उद, ू म कुरआन का शा)दक अथ, वाला कुरआन ह7 उपल)ध
था जसे ह6द7 म कराकर उस पर दया जी ने समीVाय क0 हO । आज क0 तरह लगभग 40 भाषाओं के
अलावा ह6द7 म कुरआन उपल)ध होता तो यह सFमुलास जो दया जी क0 कताब म बाद म जोडा गया
था, शायद िलखा ह7 नह7ं जाता।
35 वष, बाद उपरोKत एकमाऽ लेख को पुःतक 'हक ूकाश' का जवाब, कैसे कहा जा सकता है ? इःलाम
क0 मुखालफत म िलखे गये आट, कलE के बीच म एक लेख रख दया गया और मशहर
ू कर दया गया क
ऐसा जवाब दया क आज तक इःलामी दिनया
इसका
जवाब

दे
सक0।
यह
ॅम
तब
तक ह7 बना रहना

था जब तक इसे गौर से पढा न जाता, ज6हEने तीनE पुः तक अथा,त स: याथ, ूकाश और हक ूकाश
और 'चौदहवीं
चौदहवीं का चाँ द'
द पढ7 हO वह जानते हO क दयान6द जी क0 कुरआन पर 159 समीVाओं पर हक
ूकाश म 159 (160) ह7 जवाब दये गये हO बGक 1 सवाल अपनी तरफ से दे कर उसका भी जवाब दया
है , पUडत जी क0 कताब जवाब तो तब कहलाती जब फर ौी चमूपित जी 159 मौलाना के जवाब म
बम से किमयां िनकाल कर उ6ह गलत साबत करते। या फर कुछ नFबरE वाली समीVा म कमी
िनकालते, बना नFबर बताये इधर-उधर से चं द लाइन उठा लीं जनके आगे-पीछे का पाठक को पता नह7ं
होता , है रत क0 बात है । आज यह पुःतक उद, ू म उपल)ध होती तो एक नह7ं अनेक जवाब दए जा सकते
थे , ह6द7 क0 ओर इः लामी दिनया
ने अभी कम Nयान दया है , लेकन िचं ता क0 बात नह7ं , इस बहाने

हम मौका िमला तो एक  हम भी डालते हO , नतीजा आपके सामने है -सौभाय से आज यह तीनE पुःतक जन पर हमने नजर डालनी है ह6द7 म इ6टरनेट से Download क0
जा सकती हO , इनको पढने के बाद बमवार अपने वचार ूःतुत कर रहा हंू , 8ािनयE से आशा है क थोडा
Nयान से पढ गे और मेर7 खताओ क0 िनशा6दह7 कर गे
One
ौी चमूपित जी क0 पुःतक 'चौदहवीं का चाँ द' को मौलाना
सनाउG लाह अमृतसर7 क0 पुःतक 'हक ूकाशः बजवाब स:याथ,
ूकाश' का जवाब बताया जाता है , जबक पुःतक म यह िलखा
गया है
पंडत जी पृंठ 237 पर िलखते हO -

''हम ूस6नता है क 'हक ूकाश' का उ[र कसी
आय, समाजी ने नह7ं िलखा, िलखते तो फर
अहले इःलाम को िशकायत होती''

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यह पढने के बाद भी इस कताब को मौलाना क0 कताब का
ख6डन कहा जा सकता है ? बात मानने म संकोच है तो यह पढ http://haqprakash.blogspot.com/

ौीमान पUडत चमूपित जी Pt Chamupati 'हक़ ूकाश

''मौलाना क0 पुःतक का
खUडन इसिलए भी उिचत नह7ं समझा क मौलाना क0 लेखनी म मदरागृह
का िशंटाचार बरता गया है और हमारा लआय दाश,िनक ववाद म ह7 रहने का
है ।''

पर एक ' वषय के ब6तग,त पृंठ 244 पर िलखते हO -

मदरागृह का जवाब इसी कताब के एकमाऽ लेख क0 लाइनE से समझ ल, पृंठ 231 पर से dयूं का :यूं ◌ः
ःवामीजी! आपने बड7 गलती खाई क मैदाने मुनाजरा(शाःऽाथ,) को समाज म6दर समझ गए क जस
ूकार अनाप-शनाप समाज म कह दे ने पर कोई पूछ नह7ं सकता इसी भाँ ित मुनाजरा(शाःऽाथ,) म न
होगी मगर यह कभी न सूना था कसंभलकर पाँ व रखना मैकदे म सरःवती साहब
यहाँ पगड7 उछलती है इसे मैखाना कहते हO
शायर मौलाना ने इसम Kया गलत कह दया, कसी शायर से हम भी मालूम करते हO , पाठक भी कर ।
two
पूर7 कताब ऐसे वषयE पर िलखी गयी है जनका हजारE बार जवाब दया जा चु का जै से क ःवग,, नरक, 
जहाद, िशरक, फYरँते आद।
इस 'हक़ ूकाश पर एक ' वषय क0 तरफ िमयां भाईयE ने अगर Nयान दया तो इस पर उठे सवालE
का ह7 आय, समाज को जवाब दे ना मुँकल हो जायेगा, वँवास ने हो तो नमूना पेश है ऐसा सवाल, 
जसका जवाब भी हमारे पास है , आय, समाजी केवल चु प रह ग-े
'chaudhvin ka chand' book के पृंठ 229 पर िलखते हO ◌ः
......मौलाना ने ःथान-ःथान पर धाँ ध ली से इन श)दE का ूयोग महष, के सF मान म कर दया है , पृंठ 7
पर स:याथ, ूकाश का िनF न उZरण दे कर क-- इससे बढकर झूठा मत और कौन हो सकता है ।
ौी चमूजी जसे स:याथ, ूकाश का उZरण बता रहे हO , और अधू रा इधर दे रह हO , पूणT
, प म दे ख लो यह
'स:याथ, ूकाश' म है क या नह7ं ? हम जानते हO आप दे ख कर चु प रहोगे, Kयूंक नह7ं िमलेगा, Kयूं

नह7ं

िमलेगा इसका जवाब हम दे ते हO , यह स: याथ, ूकाश का पू र ा उZरण गायब कर दया गया है , लेकन 
फकर न करो 14 सF मुलास क0 73 समीVा म था यहां दे ख ◌ः हम पढवा दे ते हO , इस नFबर क0 urdu
hindi english म रामपाल जी ने पYरवत,न साबत कया है , पूरा उधर िमलेगा नह7ं इधर पढो फर शायद
खु द ह7 समझ लो Kयूं हटाया गया है ?
-----जो मज़हब दसरे
ू मज़हबE को क जनके हजारE करोडE आदमी मानने वाले हो झूटा बतलादे और
अपने को सgचा जाहर करे , उससे बढकर झूट ा और मज़हब कौन हो सकता है ? KयEक कसी मज़हब म
सब आदमी बुरे और भले नह7 हो सकते, एक तरफा डमी दे ना जाहलE का ह7 मज़हब है Chapter 1 4 of
comments No. 7 3 Saty arth Prakash

http://dayanandonved.blogspot.com/2010/12/blog-post.html
पाठक Nयान द तब दयान6द जी पुःतक िलख रहे थे तब भी करोडE कौन थे और आज अरबE क0 संhया म
कौन है , उनको बुरा कहने वालE से बढकर झूठा और मज़हब कौन हो सकता है ?
three
पृंठ 234 पर श)दE के बगाडने का आरोप लगाते हए
ु ऐसा समझाते हO क मौलाना ने एक जाित के पवऽ
धम,म6थ का वण,न करते हए
ु अ:यंत महापुTष के सFब6ध म नाराज़ को नाराज, महाराज को माराज
िलखा है जबक पUडत जी जानते हEगे क उद, ू म महाराज श)द म अगर छपाई म नीचे क0 लटकन जै सी 
ह6द7 म नीचे क0 र होती है अगर दखायी न दे तो माराज पढा जाता है Nयान द यह बगाड कर नह7ं
िलखे गये, छपायी क0 ऽु ट माऽ हO , और नाराज़ श)द ह6द7 या उद, ू म ब6द7 न दखायी दे ने पर नाराज हो
जायेगा, यह ूःतुत पुःतक कFपयूटर क0 फाइल से बनी है इसम छपायी वाली किमयां तो नह7ं है , लेकन
श)दE को बगाडने वाला आरोप इधर अिधक उपयुKत हो सकता है , उधर तो छोट7 से 'ह' क0 लटकन
गायब तो आपको बुरा लगा, और इधर पंडत जी क0 पुः तक म अ:यंत महापुTष नह7ं बGक सारे आलम
के मािलक ईँवर जसके मानने वाल 50 से अिधक दे शE म बहसं
ु hयक हO उसे अथा,त 'अG लाह' श)द को

बार-बार एनेक बार बगाड कर पेश कया गया है , पूर7 'ह' ह7 सार7 कताब म कई ःथान पर एक ह7 पृंठ
पर कह7ं है और कह7ं नह7ं है , भाषा का 8ान रखने वाले भिलभां ित जानते हO इससे अथ, कुछ का कुछ होगया
है 'िशरकः ूभु स[ा म िमलावट' लेख म िलखते हO 1-यद अG लािमयाँ के अितYरKत (पृंठ 111 नीचे से 11 लाइन)
2- अGलाहिमयाँ को उ:पादकE म उ[म (पृंठ 111 नीचे से 7वीं लाइन)
अगले ह7 पृंठ 112 पर
A अGलािमयाँ म सबसे पहले (पृंठ 112 म 16वीं लाइन)
B अG लाहिमयाँ का हो जाता है (पृंठ 111 नीचे से11वीं लाइन)
पृंठ 216 पर
1-अGलािमयाँ का घर (पृंठ 216 नीचे से तीसर7 लाइन)
2- अGलाहिमयाँ क0 हो रह7 है (पृंठ 216 नीचे 5वीं लाइन)
three-a
चे लE क0 चालाक0? 1979 तक हाथ से िलखी यािन कताबत से िलखी हक ूकाश म महाराज श)द ठiक
िलखा है , मगर 2003 ई. क0 कFपयूटराईdड उद, ू म ूूफ Yरडं ग क0 गलती के कारण 'माराज' िमलता है , 
फर यह7 एडशन ह6द7 म कF यूशाइdड आया तो उसम भी, नाराज िलखा िमलता है ,
इससे यह साबत होता है क यह लेख भी ःवगkय? चमुपित जी का नह7ं Kयूंक यह पछले 10-15 साल म
आई ूुफ ऽु ट है जसे आजके चे लE ने पढकर पंडत जी के नाम से एतराज जड दया, शम, तो आती ह7
नह7ं , अपनी अ8ानता को भी पंडत जी के नाम से पेश कर दया,
नोट- यह आप[ पुराना और नया छपा 'हक ूकाश' जवाब नFबर 23 और 100 से साबत होती है
Four
यह कैसा खUडन है
मौलाना को हं सी उडाने वाला साबत करने के िलए एक पैरामाफ से दो पं\यां उठाकर अलग-अलग ः थान
पर दे कर पाठकE को असल कहानी से दरू रखा है , (चौ. पृंठ 234 मौलाना को हं सी उडाने वाला साबत
करने के िलए एक लाइन नकल करते हO ''पढे न िलखे नाम मुहFमद फ़ा़जल।''
6 लाइन के पेरामाफ के बाद इसी पृंठ पर फर''अबk क0 श)दावली से सव,थ ा अ8ानी और कुरआन के खUडन का ठे का, आं ख चमगादड क0 और सूरज से
लडाई।''
पाठक इस यादगार7 ःवयं बताय इसम Kया अनुिचत है , असल ूरामाफ उसक0 कहानी के साथ हम दे ते हO आय, समाजी वJान पंडत लेख राम जी ने अपनी पुःतक 'तकजीब' म एक मुसलमान अथा,त 'बुरहान' के
सFपादक के बारे म िलखा था क ''संःकृ त से तो पYरिचत नह7ं और वेदE पर आलोचना करते हO ''
मौलाना क0 n म यह7 बात दयान6द जी पर लागू होती है , सभी जानते हO वो कुरआन क0 मूल भाषा
अरबी से पYरिचत नह7ं थे फर भी कुरआन पर आलोचना कर7।
मौलान ने उस पेरे म दो श)द को बदल के जो आय, ने मुसलमान संपादक को िलखा था वापस कर दया-

पढे न िलखे नाम मुहFमद फाजल अरबी क ख से भी पYरिचत नह7ं कोरा जाहल और
कुरआन के अNययन का ठे का, आख चमगादड क0 और सूरज से लडाई झगडा
फुटनोट म मौलाना ने िलखा- ''इस वाKय म हमने केवल दो श)दE म हे र-फेर कया है संःकृ त क0 बजाए
अरबी और वेद क0 बजाए कुरआन िलखा है '' इस वाKय म अगला वाKय जोड कर यादगार7 बना दया,
ऐसी ःथित म यािन जो मंथ क0 भाषा का 8ान न रखते हए
ु उस म6थ पर आलोचना करे , तब
'आप[क[ा, के बारे म यह बराबर कहा जाने लगा, सनाउGलाह अमृतसर7 जी पाठकE से चाहत हO क
आप[क[ा, के बारे म कहे गये इस वाKय पर ''पाठक नयाय के साथ हमार7 सराहना कर ''।
Five
उपरोKत पेरामाफ के ूकाश म पंडत जी के पुTः कार क0 घोषणा पर  डालते हO ।
यह वाKय ''हठधमk
हठधमk क0 बु  Z अ6 धकार म फं सकर नं ट हो जाती है ।''
। पृंठ 241 पर पंडत जी कहते
हO ''स:या,ूकाश क0 भूिमका म यह वाKय dयE का :यE दखा द तो मनमाना पुरः कार ूाLत कर ''
धयान दजए यह नह7ं कहा इस भाव अथवा मतलब का वाKय वहां नह7ं है । असल बात है इस वाKय को
मौलाना ने लगभग हर तीसरे पृंठ पर दया है , जससे पाठक को हदयात दे ना मकसद होता था क
ःवामी जी क0 िशVा पर अमल कर लो हठधमk न बनो। अगर यह बात आप[ करने क0 है तो फर हम भी

करते हO ,
पाठक उपरोKत लेखराम जी के बयान को दे ख , ौी चमूपित जी ने शुZ ह6द7 म िलखा

''अबk क0 श)दावली से सव,था अ8ानी और कुरआन के खUडन का ठे का''
हक ूकाश म यह उद, ू वालE के ह7 अ6दाज म ऐसे िमलता है -

''अरबी क ख से भी पYरिचत नह7ं कोरा जाहल'' इस वाKय को देकर हम भी कह सकते
हO क इस वाKय को dयE का :यE दखाओ और मनमाना पुTःकार ूाLत करो।
काबले अफसोस है क हम बार-बार करोडE-अरबE क0 मा6यता के अनुसार पंडत जी को ः वग,वासी
िलखना चाहता हंू मगर आय, समाज का ःवग, पर वँवास न होने के कारण ःवग,वासी नह7ं िलख पा रहा,
आयC क0 मा6यता अनुसार अब जहां चमूपित जी हO वह िलखना हम खु द कुबूल नह7ं ।
Six
'माँ के क़दमE के नीचे ज6नत' इः लाम क0 मशहर
भी तार7फ करते हO मगर ौी

ू िशVा है , जसक0 दशमन
चमूपित जी को इसक0 भी खबर नह7ं , दयान6द जी ने जो चौदहव सFमुGलास म कया है , यह अमिलखत
उसका नमूना है , 'कुरआन म नार7 का Tप' लेख म पृंठ 111, पर जो िलखते हO , हम तो समझे नह7ं इसम
वह Kया कमी िनकाल रह हO आप दे ख और बताएं फर हम उनक0 आप[ बताय
''और माँ ऐ दध
ु पलाय अपनी स6तानE को पूरे दो वष,। और यद वह (बाप) दध
ू पलाने क0
अविध पूरा कराना चाहे । और बाप पर (जTर7 है ) उनका खलाना, पलाना और कपडे ल:तE को (ूब6ध)''
इस पर िलखते हO 'Yरवाज के अनु स ार माँ का Yरँ ता इतना ह7 है औलाद से , इससे
बढकर उनक0 वह K या लगती है ?' पृंठ 111
पंडत जी के च6िमा ने कतना अ6धे रा कया है इस बात म असल बात क0 हवा भी नह7ं लगने द7,
कुरआन क0 हर बात क0 तरह यह भी आप बेशक0मती पायगेः
Quran - 2:232
और जब तुम pयE को तलाक़ दे दो और वे अपनी िनधा,Yरत अविध (इqत) को पहँु च जाएँ,
तो उ6ह अपने होने वाले दसरे
ू पितयE से ववाह करने से न रोको, जबक वे सामा6य िनयम
के अनुसार परःपर रज़ाम6द7 से मामला तय कर । यह नसीहत तुमम से उसको क0 जा रह7
है जो अGलाह और अ6तम दन पर ईमान रखता है । यह7 तुF हारे िलए एयादा बरकतवाला
और सुथ रा तर7क़ा है । और अGलाह जानता है , तुम नह7ं जानते॥
2:233
और जो कोई पूर7 अविध तक (बgचे को) दध
ू पलवाना चाहे , तो माएँ अपने बgचE को पूरे
दो वष, तक दध
ू पलाएँ। और वह जसका बgचा है , सामा6य िनयम के अनुसार उनके खाने
और उनके कपड़े का ज़Fमेदार है । कसी पर बस उसक0 अपनी समाई भर ह7 ज़Fमेदार7 है ,
न तो कोई माँ अपने बgचे के कारण (बgचे के बाप को) नुक़सान पहँु च ाए और न बाप अपने
बgचे के कारण (बgचे क0 माँ को) नुक़सान पहँु च ाए। और इसी ूकार क0 ज़Fमेदार7 उसके
वाYरस पर भी आती है । फर यद दोनE पारःपYरक ःवेgछा और परामश, से दध
ू छुड़ाना चाह
तो उनपर कोई गुनाह नह7ं । और यद तुम अपनी संतान को कसी अ6य pी से दध
ू 
पलवाना चाहो तो इसम भी तुम पर कोई गुनाह नह7ं , जबक तुमने जो कुछ बदले म दे ने
का वादा कया हो, सामा6य िनयम के अनुसार उसे चु का दो। और अGलाह का डर रखो और
भली-भाँ ित जान लो क जो कुछ तुम करते हो, अGलाह उसे दे ख रहा है

Mothers may breastfeed their children two complete years for whoever
wishes to complete the nursing [period]. Upon the father is the
mothers' provision and their clothing according to what is
acceptable. (Quran- 2:233)
यह तो दे ख िलया क बात कया थी उसे पंडत जी ने कैसे पेश कया, अब जTर7 हो गया क यह भी
बताया जाये क0 मां बाप बारे म इःलाम क0 कया िशVाय हO ताक आज के पढे -िलखे ॅिमत होने से बच ,
यह इसलामी िशVा तो अिधकतर जानते हO क मां के पैरE के नीचे ज6नत है , मगर यह कम जानते हO क
बाप को ःवग, यािन ज6नत का Jार भी बताया गया है , इस से हम यह िशVा िमलती है इनक0 सेवा ज6नत
म जाने के िलए अिनवाय, है ,
माता-पता हमारे िलए ईuर के एक अनुपम और अनूठे वरदान के समान है । यह हमारे िलए ईuर क0
सव,ौ ेn नेमत हO । मां -बाप के बारे म मुहFमद रसूलुGलाह (सGल.) ने बताया क ”अGलाह के बारे म

मुहFमद रसूलुG लाह (सGल.) ने बताया क ''अGलाह को सबसे अिधक महबूब समय पर नमाज़ पढ़ना 
फर अपने मां -बाप
बाप से अgछा wयवहार करना''
मां -बाप
बाप का अनादर
करना है ।'' आपका यह भी कथन है क ''मां
बड़े पापE म एक बड़ा पाप है ।''

मां -बाप ह7 नह7ं बGक मुहFमद रसूलुGलाह (सGल.)ने मां -बाप के दोःतE से भी सदwयवहार करने को कहा
है ।
आपने कहा, ”सव,ौ ेn वह है जो अपने मां -बाप के िमऽE से भी ूेम करे ।
कुरआन से, मां बाप के बारे म, बहत
ु -सो म से चं द हK
ु म यह हO
Quran - 17:23
तुF हारे रब ने फ़ैसला कर दया है क उसके िसवा कसी क0 ब6दगी न करो और माँ -बाप के साथ अgछा
wयवहार करो। यद उनम से कोई एक या दोनE ह7 तुFहारे सामने बुढ़ापे को पहँु च जाएँ तो उ6ह 'उँ ह' तक न
कहो और न उ6ह झझको, बGक उनसे िशंटापूवक
, बात करो
4:7
पुxषE का उस माल म एक हःसा है जो माँ -बाप और नातेद ारE ने छोड़ा हो; और pयE का भी उस माल म
एक हःसा है जो माल माँ -बाप और नातेद ारE ने छोड़ा हो - चाह वह थोड़ा हो या अिधक हो - यह हःसा
िनँचत कया हआ
ु है
2:180
जब तुमम से कसी क0 मृ:यु का समय आ जाए, यद वह कुछ माल छोड़ रहा हो, तो माँ -बाप और
नातेदारE को भलाई क0 वसीयत करना तुमपर अिनवाय, कया गया। यह हक़ है डर रखनेवालE पर॥
4:36
अGलाह क0 ब6दगी करो और उसके साथ कसी को साझी न बनाओ और अgछा wयवहार करो माँ -बाप के
साथ, नातेदारE, अनाथE और मुहताजE के साथ, नातेदार पड़ोिसयE के साथ और अपYरिचत पड़ोिसयE के
साथ और साथ रहनेवाले wय\ के साथ और मुसाफ़र के साथ और उनके साथ भी जो तुFहारे क़)ज़े म
हE। अGलाह ऐसे wय\ को पस6द नह7ं करता, जो इतराता और ड7ं ग मारता हो
6:151
कह दो, "आओ, मO तुFह सुनाऊँ क तुFहारे रब ने तुFहारे ऊपर Kया पाब6दयाँ लगाई है : यह क कसी
चीज़ को उसका साझीदार न ठहराओ और माँ -बाप के साथ सzwयवहार करो और िनध,नता के कारण
अपनी स6तान क0 ह:या न करो; हम तुFह भी रोज़ी दे ते है और उ6ह भी। और अँलील बातE के िनकट न
जाओ, चाहे वे खु ली हई
ु हE या िछपी हई
ु हो। और कसी जीव क0, जसे अGलाह ने आदरणीय ठहराया है ,
ह:या न करो। यह और बात है क हक़ के िलए ऐसा करना पड़े । ये बाते है , जनक0 ताक0द उसने तुF ह क0
है , शायद क तुम बुZ से काम लो।
14:41
हमारे रब! मुझे और मेरे माँ -बाप को और मोिमनE को उस दन Vमाकर दे ना, जस दन हसाब का
मामला पेश आएगा।"
Seven
पाठकE से धोका- मौलाना ने फYरशतE के सFब6ध म अलग-अलग तरह के सवालE के इतने सारे जवाब 
दऐ हO क उनक0 एक अलग पुः तक बन जाये, मगर ौी चमूपित को नजर आया तो फYरँतE के सFब6ध
म यह नजर आया- 'हक ूकाश पर एक  ह7 म िलखते हO --ऋष दयान6द का ूँन है खु दा ने शैतान KयE उ:प6न कया? मौलाना कहते हO --''जै िनयE को KयE
उ:प6न कया?'' (चौ. पृंठ 241)
पंडत जी ने अधू रा सवाल िलखकर, पाठकE यह ॅम दे ना चाहा क मौलाना ने यह एक पं\ जवाब म कह7
हो, असल सवाल यूं है स:याथ, ूकाश क0 आप[ - 14/11
इससे साबत हआ क खु द ा सव,8ाता नह7ं अथा,त, अतीत, वत,मान और भवंय क0 बात पूरे तौर पर नह7ं
जानता, जानता तो शैतान को पैद ा ह7 KयE कया?......आद
आप[ पर मौलाना का जवाबभोले पंडत जी! कस आयत से मालूम हआ
ु क खु दा को पता नह7ं । यद शैतान के पैदा करने से खु दा बे
इGम साबत होता है तो परमेँवर ने जै िनयE को KयE पैदा कया? जो आपके कथनानुसार मूित, पूजा को
आरं भ करने वाले हए
ु जनके बारे म स:याथ, ूकाश म आप िलखते हO --

''मूित,-पूजा का जतना झगडा चला है वह सब जैिनयE के घर से िनकला है
और पाख6डयE क0 जड़ यह7 जैन-धम, है (स:याथ, ूकाश ूथम, उद, ू

एडशन, पृंठ-544, अNयाय 12, नFबर 119)
और सुिनए-- ईँवर ने सुलतान महमूद ( गजनवी और गाजी महमूद धम,पाल) को KयE पैद ा कया जसने
आय,वरत क0 काया पलट द7 और बताइए ईँवर ने पुरानE के लेखकE को KयE पैदा कया ज6हEने (आपके
कथनानुसार) सारे पुराण गLपE से भरकर आय, वरत को गुमराह कर दया।
और सुिनए..... ईँवर ने मुसलमान Kयूं बनाए क वेदक धम, का सारा ताना-बाना ह7 बखर कर रह गया।
जब आप इन सवालE के जवब द ग तो हम भी बताऐंगे क शैतान को KयE पैदा कया?
असल बात यह है क शैतान कसी क0 गुमराह7 के िलए कोई तक, या कारण नह7ं है बGक वह केवल एक
बुरे सलाकार क0 तरह बुरे वचारE और कामE को सुझाव दे ने वाला और लुभाने वाला है अतएव उसका यह
बयान पूरे का पूरा कुरआन म मौजू द है तिनक Nयान से सुिनए।
जै सी दिनया
म और बहत

ु -सी बुर7 संगत होती हO ऐसे ह7 शैतान भी एक बुरा साथी है इससे अिधक कुछ
नह7ं । इस बुर7 संगत के ूभाव से बचने के िलए ईँवर ने एक इलाज बताया है बडा ह7 श\शाली जो
हक0कत म बडा ूभावी है वह है अGलाह का जब (गुण-गाण करना) अतएव कुरआन म इसका भी
उGलेख है -अथा,त ईँवर के भले ब6दE पर शैतान का कोई दाव नह7ं चल सकता। जो लोग अGलाह के जब म समय
गुजारते हO । और बुरे कामE से बचते हO शैतान उनका कुछ नह7ं बगाड सकता। हां जो लोग बेहु दा बकवास
और बुर7 संगत म समय नंट करते हO उ6ह7ं पर शैतान अपना जोर चला पाता है ।
(स:याथ, ूकाश, पृंठ 541 को जरा Nयान से पढ [[ 12/27 बौZ पर टLपण--''वेद और ईँवर न मानने के
कारण इनक0 ऐसी हालत हई
ु '' आद ]] )
अत- शैतान का उदाहरण बGकुल वष का सा समझो। जै सा क ईँवर ने वष पैद ा करके उसका इलाज
भी बता दया है । ऐसा ह7 शैतान पैदा करके उसका ूभाव बताकर इलाज (तौबा और रसूल का अनुसरण)
बता दया है । शैतान क0 वःतार से बहस क0 जानकार7 के िलए तफसीर स6नाई भाग1 हािशया
खतमुG लाह म दे ख ।
हां याद आया क दिनया
म इस समय करोडE मुसलमान, करोडE ईसाई, बौZ, यहद7

ू आद कौम ईँवर के
8ान (वेद) को नह7ं मानते बGक उसे मूित, का ॐोत जानते हO तो परमेँवर कैसा ववश है क इनको सीधा
नह7ं कर सकता। उसके तेज म कोई फक, तो है । आखर कस-कस से बगाडे और कस कस को पकडे ?
ःवामी जी! ''जीव आ:मा अपनी इgछा क0 मािलक है '' (दे खो स:याथ, ूकाश, अNयाय7, नFबर 48)
धािम,क मामलE म ईँवर ने छूट द7 हई
ु है जसका जी चाहे आ8ा पालक हो जो चाहे न हो,
सुनो! कुरआन मजीद बताता है -''जो चाहे ईमान लाए और जो चाहे काफर बने। (सूरह कहफ - 29)
Sarya samaj
Eight
चमूपित जी ने तो पुःतक का खUडन जTर7 नह7ं समझा, पर6तु आप मानते हो यह hak prakash
का यह पुःतक 14 वीं का चां द ख6डन है तो फर बताओ लाहौर गजट म छपी दया जी के बारे म राय का
जो पृंठ 328 पर है , खUडन क[ा, Kया जवाब िलखते हO ''आचरण म दयान6द के बराबर शायद ह7 कोई हआ
ु हो। एक िसरे से आपने
सब पर गािलयE क0 वषा, क0 है चे ले चां टे भी इसी राः ते पर लग गए हO । कोई
कैसी ह7 पाजी बदमाश आवारा KयE न हो आय, म दाखल हआ
ु और फYरँता
बना। बूढे से बूढ ऋष ह6द ू पंडत को गाली दे ने म भी इन लोगE को शम, नह7ं
आती।'' (Yरसाला, सनातन धम, गजट लाहौर अगःत 1897)
Nine
या फर हक ूकाश म म पृंठ 329 पर द7 गयी आय, समाज और दया जी के बारे म गां ध ी जी क0 टLपण
का Kया खUडन कया गया है ?
गां धी जी अपने अख़बार ‘यंग इं डया‘ म िलखते हO ‘‘मेरे दल म दयान6द सरःवती के िलए भार7 सFमान है । मO सोचा करता हंू क उ6हEने 
ह6दू धम, क0 भार7 सेवा क0 है । उनक0 बहादर7
ु म स6दे ह नह7ं लेकन उ6हEने अपने

धम, को तंग बना दया है । मOने आय, समाजयE क0 स:याथ, ूकाश को पढ़ा है , जब मO
यव,दा जेल म आराम कर रहा था। मेरे दोःतE ने इसक0 तीन कापयां मेरे पास भेजी
थीं । मOने इतने बड़े Yरफ़ाम,र क0 िलखी इससे अिधक िनराशाजनक कताब कोई नह7ं
पढ़7। ःवामी दयान6द ने स:य और केवल स:य पर खड़े होने का दावा कया है लेकन
उ6हEने न जानते हए
ु जैन धम,, इःलाम धम, और ईसाई धम, और ःवयं ह6दू धम, को
ग़लत Tप से ूःतुत कया है । जस wय\ को इन धमC का थोड़ा सा भी 8ान है वह
आसानी से इन ग़लितयE को मालूम कर सकता है , जनम इस उgच Yरफ़ाम,र को डाला
गया है । उ6हEने इस धरती पर अ:य6त उ[म और ःवतंऽ धमC म से एक को तंग
बनाने क0 चेा क0 है । यप मूित,पूजा के वTZ थे लेकन वे बड़7 बार7क0 के साथ मूित,
पूजा का बोलबाला करने म सफल हए
ु KयEक उ6हEने वेदE के श)दE क0 मूित, बना द7 है
और वेदE म हरे क 8ान को व8ान से साबत करने क0 चेा क0 है । मेर 7 राय म आय,
समाज स:याथ, ूकाश क0 िशVाओं क0 वशेषता के कारण ूगित नह7ं कर रहा है
बGक अपने संःथापक के उgच आचरण के कारण कर रहा है । आप जहां कह7ं भी
आय, समाजयE को पाएंगे वहां ह7 जीवन क0 सरगमk मौजूद होगी। तंग और लड़ाई क0
आदत के कारण वे या तो धमC के लोगE से लड़ते रहते हO और यद ऐसा न कर सक तो
एक दसरे
ू से लड़ते झगड़ते रहते हO । (अख़बार ूताप 4 जून 1924, अख़बार यंग
इं डया, अहमदाबाद 29 मई 1920)

उKत पुः तक म तो कोई खUडन नह7ं , लेकन हक ूकाश के 25 वष, बाद 1925 ई. म सारे इःलामी जगत
का तार7फ हािसल करने वाली मौलाना कताब ''मुकqस रसूल - बजवाब रं गीला रसूल'' म मौलाना िलखते
हO उसका ख6डन या समथ,न हम खु द ह7 करवा दे ते हO ,,,, गां ध ी जी ने गज़ब पर गज़ब यह कया क यह भी,
िलख दया कः
इःलाम छोटा नह7ं है । ह6दओं
ु को भुगती के साथ इसका मुताला करना चाहए। फर वह
इसके साथ मुह)बत कर गे। जस तरह मO करता हंू , (अनुवाद यंग इं डया दर पता,प, 4 जू न
1924)
खु दा ने आयC म एक मोतबर गवाह पैदा कर दया। जसने महा:मा गां ध ी जी क0 यानी पंजाब के बहत
ु बडे
लीडर लाला लाजपत राये जी ने सुइटज़ल€ड (युरोप) से एक मजमून अपने अखबर व6दे माऽम लाहोर म
शाये कराया जसका इKतबास यह है -''मO 1882 ई. के नF वबर म आय, समाज का मेFबर बना और 1920 ई. म मO ने अपना
ताGलुक एक गोना अलेहदा कर िलया, मO अपने 38 साल के अ6दTनी तजु ब से यह कह
सकता हंू क महा:मा गाँ ध ी ने आय, समाजयE पर जो नुKताचीनी क0 है वह उनक0 मुह)बत
पर दलालत करती है । इस म बहत
ु कुछ सgचाई है , आय, समाजयE पर वाजब है क बजाये
खफगी के रे जुलेशन पास करने के शा6त और ठं डे दल से इस पर गौर कर ''। (साभार, आय,
गज़ट लाहोर, 7 अगः त 1924)

Ten
या फर हक ूकाश म म पृंठ 328-329 पर आयC के कारण सनातन धिम,यE क0 बेबस हालत का
Kया

खUडन चोदहवीं के चां द म कया गया है ?
मुसलमानE म खु दा न करे यद ऐसा सFूदाय हो जो कुरआन को सर पर िलए फरे और
कहे क नमाज, रोज, हज, ज़कात सब के सब बेकार हO बGक इनके करने-कराने वाले सब
के सब जाहल है और ः वाथk हO और इस दावे पर कुरआनी आयतE को अपने कमC क0 तरह
िसयाह करे तो उस समय हमारे मुसलमान भाई और अ6य धमC वाले (आयC के कारण) 
ह6दओ
ु क0 बेबस हालत महसूस कर गे ।(अखबार आम, लाहौर ूकाँ ान 4 माच, 1897 ई.)

Eleven
पंडत जी कसमE के बारे पृंठ 224 पर गलत िलखते हO क ''कुरआन म कसम खाना िनषZ है -- कह क
कसम मत खाओ (सूरते नूर 53)
जब हम इस नF बर पर कुरआन क0 आयत को दे खते हO तो पता चलता है क जनके बारे म पहले से पता
है झूठे हO उनको कहने के िलए, अGलाह अपने स6दे ंटा को हदायत कर रहे हO न क आम लोगE को क़सम
से मना कर रहे हO -

और (ऐ रसूल) उन (मुनाफेक़0न) ने तुFहार7 इताअत क0 ख़ुदा क0 सhत से सhत
क़सम खाई क अगर तुम उ6ह हKम
दो तो बला उफ़ (घर बार छोड़कर) िनकल

खडे हE- तुम कह दो क क़सम न खाओ दःतूर के मुवाफक़ इताअत (इससे बे हतर)
और बे शक तुम जो कुछ करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है (Quran- 24:53)
कसम के बारे म अGलाह का हK
ु मः
तुFहार7 उन क़समE पर अGलाह तुF ह नह7ं पकड़ता जो यूँ ह7 असावधानी से ज़बान से
िनकल जाती है । पर6तु जो तुमने पKक0 क़सम खाई हE, उनपर वह तुFह पकड़े गा। तो
इसका ूायँचत दस मुहताजE को औसत दज€ का खाना खला दे ना है , जो तुम अपने बालबgचE को खलाते हो या फर उ6ह कपड़े पहनाना या एक ग़ुलाम आज़ाद करना होगा। और 
जसे इसक0 सामƒय, न हो, तो उसे तीन दन के रोज़े रखने हEगे। यह तुF हार7 क़समE का
ूायँचत है , जबक तुम क़सम खा बैठो। तुम अपनी क़समE क0 हफ़ाजत कया करो। इस
ूकार अGलाह अपनी आयत तुF हारे सामने खोल-खोलकर बयान करता है , ताक तुम
कृ त8ता दखलाओ (Quran-5:89)
क़सम खाना उस समय यािन आज से लगभग 1430 वष, पूव , भी अरब म बेहद पसंद कया जाता था,
कुरआन उस ः थान क0 भाषा म आ रहा था तो उनके Yरवाज का खयाल रखा गया, आज यह पूरे वँव का
Yरवाज, आदत बन चु क0 है , यहां तक क0 कोट, म क़सम खाये बगैर आपक0 बात नह7ं सुनी जायेगी, यक0ं
और वँवास को बढाने के िलए अपनी Lयार7 चीज क0 कसम खाना वँवास को बढा दे ता है ,

पंडत जी इस मशहर
ू नगमे के शअर को सुन लेते तो शायद इस पुःतक 'चौदहवीं का चाँ द' म कसमE का
चे Lटर शर7क न करते, जसम मुह)बत करने वाला अपनी मुह)बत को उसके खू बसूरती का यक0ं दलाने
के िलए कहता है चौदहवीं का चाँ द हो या आफताब हो,
जो भी हो तुम खु दा क0 क़सम लाजवाब हो
twelve

आज के चे लE का ऐितहािसक 8ान

इस िचऽ को बडा करके दे ख यह आज के चे लE क0 वेबसाइट पर चौदहवीं का चां द का जो पYरचय दया
गया है , उसका ः ब0नशाट है , जस म सबसे बडा झूठ स:याथ, ूकाश को 1883 क0 िलखी बताया गया है ,
जबक हम आज नेट से आसानी से जान सकते हO स:याथ, ूकाश 1875 म ूकािशत हइ
ु और इस वष,
1883
,
अथा,त
म तो दयान6द जी दसर7
योनी म चले गये थे दसरा
झूठ यह है क हक ूकाश के फोरन


बाद ह7 इस पुःतक को छपा बताया गया है , जो क इसी पुःतक से इस लेख म लगभग 35 वष, बाद छपा
होना साबत हो चु का है , वाह Kया 8ान है , बG कुल ः वामी जी जै सा, जसम कोई शक नह7ं रह जाता
Thirteen
मौलाना सनाउGलाह अIतसर7 Maulana Sanaullah ने
159 दयान6द जी क0 कताब पर हक ूकाश म 160 (1 अपनी तरफ से बढाकर )जवाब दये
4 कताब गाजी महमूद क0 जवाब म 4 कताब िलखीं

116 तक इःलाम के जवाब म गाजी महमूद धम,पाल को 116 उ[र 'तुक इसलाम' पुः तक म दए, जसे
उसने कुबूल कया और फर आयC को भट ःवTप अपनी पुः तक 'वेद और ःवामी दयान6द' ूःतुत क0 थी
रसूल पर िलखी आय, समाजी क0 कताब का मुकqस रसूल का जवाब दया गया, जसका वापस जवाब
आज तक नह7ं दया गया,
कादयािनयE ने जवाब और सवाल म कई कताब िलख रखी हO , कसी का भी खUडन नह7ं कया गया
लेकन एक लेख से पूर7 कताब का जवाब साबत कया जा रहा है , है रत क0 बात है 
फर भी जवाब पे जवाब आखर कब तक सवाल करते रहोगे, कभी जवाब दे ना भी सीखोगे, अगर दसरे

धमC वालE ने भी यह आदत डाल ली यािन सवाल-सवाल पे सवाल करने शुT कए तो Kया जवाब दोगे
िनयोगी भाईयE ज़रा सोचो, वैसे ताजा सवालE क0 शुTआत फर से हो चु क0, कुछ समय पूव , एक डाKटर
अनवर ने 40 कए, और सतीशचं द गुLता नामी महाशय बारे म तो लगता है आय, समाज को लाजवाब
कर द गे, या शायद कर दया है हमारा तो उ6ह पढकर मानना है क कर दया है । गुLता जी क0 पुःतक
''स:याथ, ूकाशः समीVा क0 समीVा'' यहां से Downloads क0 जा सकती है Cotn...Mk
इस व डयो और इसके साथ पूर7 स:याथ, ूकाश क0 सीर7ज को देख कर बहत
ु होता है, आपके Kया वचार ?
ु दख

0

Posted by Ram Pal Singh at 11:10 PM

Labels: chaand, chand, chaudhvin, chaudvin, chodhvin, चमूपित, चोदवीं , चोदहवीं , चौदहवीं ,
दयान6द

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