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NCSTC, Science Journalism Workshop at Auriya, Uttar Pradesh, Igniting Minds Through Science Writing 3

NCSTC, Science Journalism Workshop at Auriya, Uttar Pradesh, Igniting Minds Through Science Writing 3

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NCSTC, Science Journalism Workshop at Auriya, Uttar Pradesh, to encourage young writers of Uttar Pradesh in the field of Science & Technology through Association of Scientific Research & Development (A National Level Scientific & Technical Organisaiton) by Department of Science & Technology, Ministry of Science & Technology, New Delhi
NCSTC, Science Journalism Workshop at Auriya, Uttar Pradesh, to encourage young writers of Uttar Pradesh in the field of Science & Technology through Association of Scientific Research & Development (A National Level Scientific & Technical Organisaiton) by Department of Science & Technology, Ministry of Science & Technology, New Delhi

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01/13/2012

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Íव7ान संचार को समÍप त

\zÇ|à|Çz `|Çwá \zÇ|à|Çz `|Çwá \zÇ|à|Çz `|Çwá \zÇ|à|Çz `|Çwá

Xw|àxw uç cÜÉyA \AUAf|Çz{ Xw|àxw uç cÜÉyA \AUAf|Çz{ Xw|àxw uç cÜÉyA \AUAf|Çz{ Xw|àxw uç cÜÉyA \AUAf|Çz{



l(ni· ¬ªi·,¤¤¬ilºni ¤l’i·iºi ¬i¤ l(ni· ¬ªi·,¤¤¬ilºni ¤l’i·iºi ¬i¤ l(ni· ¬ªi·,¤¤¬ilºni ¤l’i·iºi ¬i¤ l(ni· ¬ªi·,¤¤¬ilºni ¤l’i·iºi ¬i¤ ’ii¬i ¬i ¬i¤i¬· ’ii¬i ¬i ¬i¤i¬· ’ii¬i ¬i ¬i¤i¬· ’ii¬i ¬i ¬i¤i¬·
औरै या, , , , ¬ ¬¬ ¬. .. .¤ ¤ ¤ ¤ . .. .









Association of Scientific Research & Development
Âexz|áàxÜxw âÇwxÜ fÉv|xà|xá exz|áàÜtà|ÉÇ TvàA Âexz|áàxÜxw âÇwxÜ fÉv|xà|xá exz|áàÜtà|ÉÇ TvàA Âexz|áàxÜxw âÇwxÜ fÉv|xà|xá exz|áàÜtà|ÉÇ TvàA Âexz|áàxÜxw âÇwxÜ fÉv|xà|xá exz|áàÜtà|ÉÇ TvàA XXI Éy Éy Éy Éy 1860Ê ÊÊ Ê
Media Department
(Print, Electronic Media & RTI Division)
C – 47 / Y – 4, Dilshad Garden, Delhi - 110095
Email : asrd_ngo@yahoo.com
Ph. +919899354425, +919818889400
This training workshop is Catalyzed and Supported by NCSTC,
Department of Science & Technology, Government of India, New Delhi











दो दो दो दो श«द श«द श«द श«द

Íव7ान संचार को समÍप त इस पͳका आपके हाथ| म दे ते हए

हष का अनभव ु हो रहा है , इसम सबसे अÎधक
9स7नता का कारण यह है , क| इस पͳका म एक और EयाÎतल«ध तथा Íव7ान संचारक| के Íवचार ह , तो
दसर| ू ओर नवांकर

रचनाकार| को भी 1थान Íदया गया है । अÎधसंEय रचनाकार नवांकर

िज7ह|ने “औरै या,
उôर 9दे श, म Íव7ान ले खन का 9ÎशHण 9ाB Íकया है ।
यह 9ÎशHण रा० Íव० 9ौ०सं०प०, नई Íद~ल|, के Îनदे शक डा० मनोज पटै Íरया के कशल

माग दशन म
राçीय Íव7ान एवम 9ौधौÎगक| संचार पÍरषq के §ारा नाÎमत Íवषय Íवशेष7| के मा²यम| से Íदया
गया िजनम सम1त 9Îतभागीओं ने लेखन Íव7ान सीखा और उसे ÍHयाcमक Fप भी Íदया ।
सबसे सखद ु यह रहा क| कछ

9ÎतभाÎगय| ने इस काय शालाओं के मा²यम से नाÇय आलेखन ट|० वी०/ रे Íडयो
हे तु आलेखन Íकया और सÍटंग ू करके सी० डी०,Îनमाण भी Íकया है , इस 9कार क| रचना धÎम ता क| Íवकास
के Îलए रा० Íव० 9ौ०सं०प०,नईÍद~ल|, उनके Îनदे शक डा० मनोज पटै Íरया । और अ7य Íवशेष Íवशेष7| जैसे
÷ी० आर० डी० Îतवार|, NCSTC §ारा नाÎमत Íव7ान संचारक, महोबा से, ÷ी० आर० पी० Îसं ह,
डायरे 4टर, तथा Íवषय Íवशेष7 ÍवÎध, मीÍडया इ7टरने ट व इले4çोÎनक तकÎनक|, डा० धम7दर 9ताप Îसं ह,
Íहं द| Íडपाट म ट हे ड, ÍदÍबयापर ु , राम के श शमा, डा० राम कमार|

गBा ु , हे ड Íहं द| Íडपाट म ट, औरै या, डा०
आर० पी० एस० कशवाह

, Í9ं Îसपल, ÷ी० अरÍव7द कमार

, Íड¯ट| डायरे 4टर (रे शम), औरै या
रे शम Íवभाग, उôर 9दे श सरकार, ÷ी० अजय श4ला ु , ÷ी० ओम नारायण चतवद| ु , ÷ी० 9²+न ु चतवद| ु ,
÷ी० गौरव ͳवेद|, राçीय सहारा, उôर 9दे श व अ7य लोग| भी बधाई के पा³ ह, िज7ह|ने अपने
अथक पÍर÷म से यह सपना साकार कर Íदया । अÎभन7दन उन रचनाकार| का भी िज7ह|ने समय
Íदया और वो कर Íदखाया िजसक| पÍरक~पना क| गई थी ।
आपका
9ो 9ो 9ो 9ो० ०० ० आई आई आई आई० ०० ० बी बी बी बी० ०० ० Îसं ह Îसं ह Îसं ह Îसं ह
वै7ाÎनक व महासÎचव
एसोÎसएशन आफ साइं ÍटÍफक Íरसच एंड डे वलपम ट, Íद~ल|



संचालक सं1था संचालक सं1था संचालक सं1था संचालक सं1था का संÎचB म पÍरचय का संÎचB म पÍरचय का संÎचB म पÍरचय का संÎचB म पÍरचय
ए एए एसोÎसएशन सोÎसएशन सोÎसएशन सोÎसएशन आफ आफ आफ आफ साइं ÍटÍफक साइं ÍटÍफक साइं ÍटÍफक साइं ÍटÍफक Íरसच Íरसच Íरसच Íरसच एंड एंड एंड एंड डेवलपम ट डेवलपम ट डेवलपम ट डेवलपम ट, Íद~ल| का गठन 2004 म Íकया गया था । हमार| सं 1था
के जो उ£े°य है , उनम Íव7ान संचार वै7ाÎनक जागFकता तथा समाज म वै7ाÎनक TÍ8कोण को जन जन
म जगाने का एक उ£ेश है ।
हमार| सं1था म वÍर8 वै7ाÎनक, इं िजनीअर, डा4टर, कÍष

वै7ाÎनक, Íफलो1फर, पानी के Íवशेष7|, पयावरण
वै7ाÎनक, क+पटर ू Íवशेष7, पयटन Íवशेष7, ÍवÎध Íवशेष7, तथा Íव7ान प³काÍरता एवं लेखन म दHता
9ाB है तथा इन Hे³| म हम ÍवÎभ7न Íवषय Íवशेष7| व दे श Íवदे श के ¯यÍñओं का सहयोग व समथ न 9ाB
है ।
हम यह बताते हए हष हो रहा है क| हमार| सं1था ने अपने ज7म काल से अब तक अÎत अ~प

समय म कछ महतवपण क|Îत मान हाÎसल Íकये ह ।
ु ू यह सव ÍवÍदत है क| हमारे दे श म घÍडयाल| क|
9जाÎत Íवलपता ु के कगार पर पहच

ँ गई है । इस संधब म म यह कहना चाहगा

ँ क| जब च+बल नद| के Îनकट
इटावा शहर, उôर 9दे श म 9दषण के 1तर ू म वÍ£ के कारण

घÍडयाल| क| मौत 9चर ु मा³ा होने लगी थी।
ऐसे अवसर पर हमार| सं1था ने एक राçीय 1तर का सेÎमनार का आयोजन कर उसम अंतर-राçीय
1तर के वै7ाÎनक| को आमंͳत कर सामा7य जन से सीधा संपक 1थाÍपत कर इस 9दषण के Íव³ ध ू
जन जागरण करवाया तथा घÍडयाल| के 9Îत मानवीय संवेदनाओं को जागत Íकया िजसक|

सरहाना
आगंतको ु व आमंͳत राçीय एवं अंतर-राçीय वै 7ाÎनक| ने क| तथा यह Îन*कष भी Îनकाला क|
ÎतलÍपया मछल| 9दÍषत जल ू को 1व¯छ करने 9यास कर सवैयम Íवषाñ हो गई और उसके खाने से
घÍडयाल| क| मौत का Îसलसला शF ु हो गया। इस Îन*कष के बाद यह आंकलन Íकया गया क| इटावा का
9दषण Îनयं³ण ू संयं³ सचाF ु Fप काय नह|ं कर रहा था । उसके Îलए हमार| सं1था ने यह 9यास Íकया
क| यह सयं³ सगमता पव क ु ू संचाÎलत Íकया जाए िजससे 9दषण का 1तर घटे गा ू और घÍडयाल| क| मौत
पर Íवराम लग सके और हमारा यह 9यास जन सहयोग के कारण सफल हआ।



यह काय शाला उन तमाम नवांकर

रचनाकार| के Îलए एक मील का पcथर साÍबत होगा जो अपनी
रचनाधÎम ता म Íव7ान समाÍहत कर अपने लेख को महक महकाएँगे और अपने लेखन §ारा समाज म
जन जागरण कर गे इसी आशा और Íव+ाश के साथ सम1त 9ÎतभाÎगय| तथा अÎथÎतय| का हम (दय से
1वागत करत ह ।
ध7यवाद।
आपका
9ो 9ो 9ो 9ो० ०० ० आई आई आई आई० ०० ० बी बी बी बी० ०० ० Îसं Îसं Îसं Îसं ह हह ह
वै7ाÎनक व महासÎचव
एसोÎसएशन आफ साइं ÍटÍफक Íरसच एंड डे वलपम ट, Íद~ल|


अनHमाÍणका अनHमाÍणका अनHमाÍणका अनHमाÍणका
ु ुु ु

Hम स Hम स Hम स Hम स० ०० ० Íववरण Íववरण Íववरण Íववरण पेज स पेज स पेज स पेज स० ०० ०
1.
ताÍक संचार मा²यम| म Íव7ान छा जाए

01 – 07
2.
दै Îनक जीवन म Íव7ान ÍवÎध

08 – 14
3.
आज मीÍडया के Hे³ म दH लोग| क| जFरत है

15 – 19
4.
ट|० वी० Íव7ान प³काÍरता म नये 9योग कै से कर

20 – 23
5.
डा० अ+बे डकर और Íव7ान एवं 9ौधोÎगक|

24 – 33
6.
ऊजा क| उजल| Íकरण

34 – 35
7.
Íव7ान लेखन के पव ू

36 – 39
8.
बाल Íव7ान साÍहcय लेखन, एक Íवचार

40 – 47
9.
बाल साÍहcय म Íव7ान कै से समाÍहत हो ?

48 – 52
10.
लोकÍ9य वै7ाÎनक लेख क| संरचना

53
11.
Íवषय का चनाव कै से कर ु

54
12.
सी०एस०आई०ओ० को çे Îनं ग क| िज+ मेदार|

55
13.
वै7ाÎनक| क| सामािजक भÎमका ू

56 – 58
14.
Íबजल| क| ¯यथा अपने 9दे श उôर 9दे श म ?

59 – 66
15.
मछल| पालन एक लाभदायक ¯यवसाय

67 – 71
16.
भारतीय कÍष और जल



72 – 76
17.
भारत म बढ़ता कपोषण का संकट

- एक यH 9÷, शीष 7यायपाÎलका..

77 – 79
18.
मशFम उगाओ, धन कमाओ

80 – 82
19.
म7ना ु भाई और क+¯यटर ू

83 – 87
20.
Íहं द| प³कार| क| पोज़ीशन

88 – 91
21.
Íव7ान और साÍहcय

92
22.
बाFद| के ढ़े र पर

93
23.
0ामीण अंचल| म 1वरोजगार का सशñ आधार रे शम उ²ोग

94 – 114
24.
काय शाला क| आEया

115 – 120
25.
काय शाला के कछ

Îच³

121 – 140
26.
समाचार प³| क| कछ

कÍटंग
141 – 146

Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 1






ताÍक संचार मा² य ताÍक संचार मा² य ताÍक संचार मा² य ताÍक संचार मा² यम| म Íव7ान छा जाए म| म Íव7ान छा जाए म| म Íव7ान छा जाए म| म Íव7ान छा जाए


ÍवÎभ7 न संचार मा² यम| के §ारा Íव7ान एवं 9ौ²ोÎगक| का 9चार, 9सार और लोकÍ9यकरण करना
Íव7ान संचार क| 9मख गÎतÍवÎधय| म से एक है । संचार मा² य ु म| म शाÎमल ह-समाचार प³,
पͳकाऍ ं , आकाशवाणी ,दरदश न ू ,लोक कला मा² यम और सीधे संपक मा² यम ,आÍद । Íव7ान संचार
के Îलए इन महc वपण Hमतावान संसाधन| का इ1 ते ू माल करते हए यह 9यास

रहा है । Íक ऐसे
उपाय खोजे जाये
ताÍक संचार मा² यम| म Íव7ान पर 7 यादा से 7 यादा साम0ी 9काÎशत/9साÍरत हो । Íवशेषकर
Hे³ीय भाषाओं म Íव7ान लेखक| क| संE या पया¯ त नह|ं कह| जा सकती । हालॉÍक ऐसा 9तीत

होता है Íक आज समाचार प³ पͳकाऍ ं Íव7ान और 9ौ²ोÎगक| के ÍवÎभ7 न पहलओं पर ÍवÍवधतापण ु ू
साHगी 9काÎशत करना चाहती है ,Íक7 तु ऐसे उपय4 त ु लेखक| क| वतमान म कमी को दे खते हए

यह संभव नह| लगता Íक समाचार प³ पͳकाओं क| इस मॉग को परा Íकया जा सके और ÎनयÎमत


Fप से 9माÍणक और गणवc ता ु क| TÍ8 से वॉÎछत साम0ी संचार मा² य

म| को उपल« ध करायी जा
सके ।

Hमतावान लेखक| को 9ोc सा Hमतावान लेखक| को 9ोc सा Hमतावान लेखक| को 9ोc सा Hमतावान लेखक| को 9ोc साहन हन हन हन
इन सब बात| को म£ेनजर रखते हए यह अनभव

ु Íकया गया है Íक हमारे दे श म हमार| अपनी
भाषाओं म अ¯ छे लेखक| क| कमी नह|ं है । दरअसल हमने पाया है Íक हमारे यहॉ 0ामीण और

दरदराज के इलाक| म ऐसे ¯ य ू Íñ ह िजनम ऐसी 9Îतभा और अÎभFÎच Íव²मान है िजसके §ारा वे
बÍढया कहाÎनयॉ ़

,नाटक ,कÍवताऍ ं ,आलेख आÍद कह|ं बे हतर ढग से तैयार कर सकते ह । ले Íकन ँ


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यह Íवडं बना ह| कह| जाएगी Íक इसके बावजद उपय4 त ू ु Íव7ान लेखक| क| मॉग पर| नह|ं हो पाई है


। इस कमी को पाटने के Îलए यह आव° यक समझा गया Íक ऐसे Hमतावान लेखक| को पहचान
कर उनको 9ोc साÍहत Íकया जाए और उनक| दHता को Íव7ान लेखन क| ओर ÍवकÎसत Íकया
जाए। इस 9कार सHम लेखक| को Íव7ान और 9ौ²ौÎगक| संचार के लए 9ÎशHण दे ना लाभकार| हो
सकता है । 4 य|Íक ऐसे लोग दे शभर म हर कह|ं ह । अंत :1थानीय 1तर पर संचार मा²यम|
से वै7ाÎनक जानकार| बढाने क| Îलए इस Íवशाल जनशÍñ का इ1 तेमाल करना उपय4 त ु रहे गा िजससे
Íक Íवशेष तौर पर सभी भारतीय भाषाओं म नये और आशावान Íव7ान ले खक ÍवकÎसत हो सक गे।

Îच³कार भी उतने ह| महc व Îच³कार भी उतने ह| महc व Îच³कार भी उतने ह| महc व Îच³कार भी उतने ह| महc वपण पण पण पण ू ूू ू
इसी 9कार ऐसे कलाकार/Îच³कार भी ह ,िजनम Îच³ांकन और कलाकार| क| ज7 मजात सी अÎभFÎच
और 9Îतभा Íव²मान होती है । चÍक Îच³ Íकसी अ¯ छे ू ँ Íव7ान लेख या वै7ाÎनक रचना का एक
महc वपण Íह1 सा ू होते ह ,अत :वै7ाÎनक Îच³ांकन का भी Íव7ान प³काÍरता कायHम के साथ
जोड़ना उपय4 त ु रहे गा । बÍढया समझ म आने वाले Îच ़ ³ Íवषय को अÎधक FÎचकर बनाते ह तथा
पण ता 9दान करते ह । िजस 9कार हर तरह के संचार मा² य ू म के Îलए आलेख साम0ी क|
आव° यकता होती है ,उसी 9कार Íवषय को पाठक| ,दशक| ,÷ोताओं के Îलए समझ म आने यो¹ य
बनाने के Îलए कछ Îच³| क| भी आव° य

कता पड़ती है ,चाह वह मÍ5त मा² य ु म हो या Íफर
इलै4 çाÎनक ,लोक या अ7 य कोई म² यमान । इन सब बात| को ² यान म रखते हए राÍव9ौसंप ने

संचार मा² यम| म वै7ाÎनक जानकाÍरय| क| तादाद और गणवc ता ु बढ़ाने के Îलए एक पÍरयोजना
तैयार क| ह ।






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मल Íवचार 4 या मल Íवचार 4 या मल Íवचार 4 या मल Íवचार 4 या ू ूू ू है है है है
संचार मा² यम| म Íव7ान का कवरे ज बढ़ाने क| इस पÍरयोजना का मूल Íवचार यह है Íक:

क कक क (1 थानीय 1 तर )िजला/मंडल/Hे³ (पर 1 थानीय लेखक| ,Îच³कार| ,वै7ाÎनक| और संचार मा² यम|
का एक साथ जोड़ना और उ7 हे संचार मा² याम| म Íव7ान क| ¯ याÎB बढ़ाने के Îलए उÎचत
माग दश न और 9ÎशHण 9दान करना ।

ख खख ख नये Íव7ान लेखक| और Îच³कार| को अनभवी Íव7ान लेखक| और Îच³कार| के साथ Íवचार ु
ÍवÎनमय का अवसर 9दान करना और अनभवी Íव7ान लेखक| और Îच³कार| §ारा समालोचनाc म ु क
और बौͧक Fप से नए रचनाकार| क| रचनाओं पर चचा का अवसर 9दान करना ।

ग गग ग कला ,आÎथ क मामले और राजनीÎत ,आÍद के अनभवी लेखक| और Îच³कार| को Íव7ान ले खन ु
क| ओर उ7 मु ख करना ।

घ घघ घ अनभवी Íव7ान लेखक| ु /कलाकर|/Îच³कार| के माग दश न और नेत* c व म वा1 तÍवक अ¹ यास और
9ायोÎगक काय के §ारा नये वै7ाÎनक लेखक|/Îच³कार| म मौÎलक Íव7ान लेखन Íव7ान ÍरपोÍट ग
और Íव7ान Îच³ांकन क| Hमताऍ ं ÍवकÎसत करना ।

÷ंखला 9ÍHया क| ओर ÷ंखला 9ÍHया क| ओर ÷ंखला 9ÍHया क| ओर ÷ंखला 9ÍHया क| ओर
ृ ृृ ृ

इस पÍरयोजन के अ7 तग त Hमतावान लेखक| ,Îच³कार| ,वै7ाÎनक| ,Íवशेष7| और संचार मा² यम|
म काय रत ¯ यÍñय| क| 1 थानीय 1 तर| पर िजला या मंडल 1 तर क| कायशालाऍ ं /स+ मेलन आयोिजत
Íकए जाते है । ये काय शालाऍ ं 3 - 5 Íदन क| होती है ,िजसक| अवÎध 9ÎशHणाÎथ य| क| Hमताओं व
अÎभFÎच पर Îनभ र करती ह । इस काय Hम म Íवशेष7| क| सलाह के अनसार और संसाधन ु

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¯ यÍñय| के माग दश न म लेखक|/Îच³कार| को Íव7ान संचार के Îलए 9े Íरत और संवÎध त Íकया जाता
है और काय शाला के दौरान कछ आले ख साम0ी भी तैयार करायी जाती ह । इस 9कार काय शाला के

दौरान 9Îतभागी तथा आकाशवाणी और दरदश न के 7 5| ू को इस अनरोध के साथ सlपी जाती है Íक ु
वे इनका इ1 ते माल अपने 9काशन|/9सारण| म कर सक । इस 9कार स+ भावना है Íक 1 थानीय
1 तर|-पर 1 थानीय लेखक ,समाचार प³ -पͳका तथा आकाशवाणी और दरदश न का एक 9ÎतÎनÎध ू -इन
सबको जोड़कर ऐसी ट|म ÍवकÎसत हो सके गी जो Íक आपस म Îमलकर संचार मा² यम| म Íव7ान
का कवरे ज बढ़ाने के Îलए 1 थानीय 1 तर पर काम कर सके । कछ समय बाद उपलि«धय| का

म~ या ू कं न Íकया जाये गा और चने हऐ ले खक| ु

,Îच³कार| को 1 थानीय/Hेͳय 1 तर के समाचार प³
पͳकाओं के साथ ह| रा7 य 1 तर|य संचार मा² यम| हे त Îलखने के Îलए 9ोc सा ु Íहत Íकया जाये गा ।
इसी तरह अगले वष| म रा7 य 1 तर|य Íव7ान लेखक| म से चने हए लेखक| को रा* ç| ु

य 1 तर के
संचार मा² यम| के साथ जोड़ा जा सके गा । इस 9कार एक दे श¯ यापी वै7ाÎनक संचार मा² यम
नेटवक के Íवकास का माग 9श1 त हो सके गा । इन Íव7ान प³काÍरता काय शालाओं के Îलए सभी
भारतीय भाषाओं से दो तीन संसाधन ¯ यÍñ चने गये है । जो Íक अपने Íवषय Hे³ के ÍवE या ु त
लेखक है और जो कायशाला का तकनीÍक पH दे खते ह । कायशाला हे त 1 था ु नीय 1 तर पर 25 - 30
ऐसे 9Îतभागी चने जाते है िजनक| 7 य ु ूनतम यो¹ यता कम से कम इÞ टरमीÍडयट )Íव7ान (हो और
साथ ह| िजनका Íकसी भी Íवषय पर एक लेख ,कहानी ,नाटक ,कÍवता ,Fपक Íकसी भी समाचार
पर-पͳका ,कॉलेज पͳका ,प1 त ु क ,संकलन म 9काÎशत अथवा आकाशवाणी/दरदश न से 9साÍरत हो ू
चका हो । ऐसी 9ÍHया ÍवकÎसत क| जा रह| है िजससे काय शाला स+ प ु 7 न होने के बाद 9Îतभागी ,
लगातार आयोजक| को संसाधन ¯ यÍñय| ,Íवषय Íवशेष7| और संचार मा² यम| के स+ पक म बने रह
सक ताÍक संचार मा² यम| को उपय4 त ु वै7ाÎनक रचनाओं क| आपÎत ÎनयÎमत Fप से सÎनि°त क| ू ु
जा सके । ले खक| क| Íवशेष7ता के आधार पर ÍवÎश* ट लेखकगण/समह Îनि° च ू त Íकये जा सके ग



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ताÍक Íवशेष7ता के अनसार रचनॉए तै यार हो सक । Íवशेष7ता ु

के Hे³ इस 9कार हो सक :

(1) वै7ाÎनक Íवषय| के आधार पर ,जैसे पयावरण 1 वा1 ³ य कÍष

,अंतÍरH ,परमाण ऊजा ु ,
जैव -9ौ²ोÎगक| ,आÍद,
(2) लेखन क| Íवधा के आधार पर ,जैसे Íक लेख ,साHाc कार ,पÍरचचा ,कथा ,कÍवता ,नाटक ,
सवHेण ,आÍद ,
(3) संचार मा² याम| के आधार पर ,जैसे Íक समाचार प³ ,पͳकाऍ ं ,दरदश न आकाशवाणी कला ू
मा² यम ,सीधे स+ पक मा² यम ,आÍद
(4) ÷ोताओं/दशक|/पाठक| के आधार पर ,जैसे Íक ब¯ च| ,9ौढ़ ,Íव²Îथ य| ,मÍहलाओं ,आम लोग| ,
Íकसान| ,आÍद के Îलए Íव7ान लेखन ।
आर+भ म Íव7ान - पͳकाÍरता काय शालाएं Íहं द| / अं0ेजी म चलाई गई, तcप°ात 9ÍHया हो जाने
के बाद उ7ह ÍवÎभ7न भारतीय भाषाओ म भी आयोिजत Íकया जा रहा है

चचा के Íब7 द चचा के Íब7 द चचा के Íब7 द चचा के Íब7 दु ु ु ु : :: : - -- -
1 प* ट तौर पर इन काय शलाओं का कोई औपचाÍरक पाçयHम नह|ं है । हांलाÍक काय शाला के दौरान ं
चचा के मE य ु Íवषय इस 9कार हो सकते है :
1. Íव7ान प³काÍरता और वै 7ाÎनक प@Îत का मल भाव । ू
2. Íव7ान प³काÍरता का पÍरचय और इÎतहास ।
3. समाज म संचार मा² यम| क| भÎमका । ू
4. लेखन/Îच³ांकन के Îलए Íवषय का चनाव । ु
5. वै7ाÎनक सचना का Pोत और उन Pोतो से साम0ी 9ा¯ त ू करना ।
6. लेखन ,पनलखन ु ,अनवाद और संपादन ु ,आÍद ।
7. Íव7ान लेखन क| प@Îत (खोजी प³काÍरता ,आलेख,समाचार,कथा,नाटक,आÍद)।


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8. ÍवÎभ7 न ÷ोता/पाठक समह| के Îलए Íव7ान लेखन । ू
9. ÍवÎभ7 न संचार मा² यम| के Îलए Íव7ान लेखन ।
10. Fपांकन ,Îच³ाकं न ,कलाकार| ,काट न ू ,आÍद तै यार करना ।
संभावनापण और Íवकासशील लेखक| तथा 1 था ू नीय समाचार प³ ,पͳकाओं के संपादक|/प³कार|
तथा 1 थानीय Íव²ालय| ,Íव° वÍव²ालय| ,अनसंधानशालाओं और 1 था ु नीय 1 तर पर ÍवÎभ7 न
सरकार| तथा Îनजी Hे³ के संचार काय कताओं को इन काय शालाओं म शाÎमल Íकया जाता है ।
आशा क| जा सकती है Íक यÍद यह 9ÍHया काम करती है और इसको दे श के ÍवÎभ7 न भाग| म
उÎचत तर|के से कायाि7वत Íकया जा सका तो Íवशेषकर कर भारतीय भाषाओं म Íव7ान लेखक|
के संवधÎन और Íवकास तथा फल1 वFप Íव7ान लेखन और संचार मा² यम| म वै7ाÎनक कवरे ज
क| अÎभवͧ म काफ| कछ 9गÎत हो सके गी । इस 9कार Íव7ान प³काÍरता के Hे³ म अनवरत
ृ ु
चलती रहने वाल| ÷खंला 9ÍHया आर+ भ

हो सकती है ।

इस कायHम के मा² यम से ऐसे Íव7ान लेखक उभर कर सामने आयगे जो Íव7ान को
9भावशाल| ढग से लोक मा² य ँ म| जैसे – 9हसन ,नाटक ,गीत ,लोकगीत ,कथाओं ,कÍवताओं म
ढाल कर 91 तुत करने क| Hमता रखते ह| । इन रचनाओं को उपय4 त ु सं शोधन/संपादन के बाद
9काशन| के Fप म भी पाठक| को उपल« ध कराया जा सके गा । इस पÍरयोजना क| Íवशेषता यह
है Íक इससे 1 थानीय 1 तर पर ऐसे समह ÍवकÎसत हो सक गे ू ,जो 1 थानीय Íव7ान प³काÍरता को
न के वल ज7म दे गे बि~क उसे प~ लÍवत और पि*पत भी कर सक गे । ु

Íव7ान लेखक सहकाÍरताऍ ं Íव7ान लेखक सहकाÍरताऍ ं Íव7ान लेखक सहकाÍरताऍ ं Íव7ान लेखक सहकाÍरताऍ ं
यÍद ÍवÎभ7 न 1 थान| पर Íव7ान प³काÍरता ट|म ÍवकÎसत हो जाएं तो उनको Íव7ान लेखक
सहकाÍरताओं के Fप म ÍवकÎसत Íकया जा सकता है और यÍद आव° यक हआ तो उनक| Íव7ान

लेखन के Îलए वत मान वै7ाÎनक साÍहc य तथा अ7 य आव° यक सÍवधाऍ ं शासन §ारा उपल« ध ु

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कराई जा सकती है ।

वा1 तव म संचार मा² यम| म Íव7ान क| जानका र| क| गणवc ता ु और ÍवÍवधता म सधार और ु
Íवकास करने के Îलए मल आव° य ू कता होती है -एक बÍढया Íव7ान संचारक क| ़ ,िजसे दो तर|क|
से ÍवकÎसत Íकया जा सकता है -एक तो शैÍHक सं1 थाओं /Íव° वÍव²ालय| ,आÍद म ÎनयÎमत/अ~ प
अवÎध के शैHÍणक पाçयHम| के मा² यम से और दसू रा-1 थानीय 1 तर पर उपल« ध 9ाकÎतक

Fप से 9Îतभाशाल| संचार क| पहचान करके ,उनको उपय4 त ु माग दश न और अवसर 9दान करके
। कछ Íव° व

Íव²ालय| /सं 1 थान| म Íव7ान संचार पर ÎनयÎमत शैHÍणक पाçयHम पहले ह|
चलाए जा रहे है ; जबÍक दसरे 9कार क| प§ ू Îत §ारा 9ाकÎतक 9Îतभा स+ प

7 न उभरते हए

Íव7ान लेखक| क| पहचान और उनका Íवकास करके नए Íव7ान संचारक तैयार करने के
काय Hम के Îलए यह नई पÍरयोजना तैयार क| गई है ।

इस पÍरयोजना का एक महc वपण लाभ यह भी होगा Íक अभी तक अÎधकांशत ू :हम समाचार
प³ -पͳकाओं म जो वै7ाÎनक रचनाऍ ं दे खने को Îमलती है ,वे 7 यादातर Íवदे शी अनसंधान| या ु
बड़ी-बड़ी अनसंधान पÍरयोजनाओं के बारे म होती है ु ,जबÍक 1 थानीय 1 तर पर संचार मा² यम|
म Íव7ान क| जानकार| बढाने क| इस पÍरयोजना के मा² यम से एक ओर गॉव

,दे हात के जीवन
से जड़ी ÍवÎभ7 न ु तकनीÍक और वै7ाÎनक| सम1 याओं को रा* ç|य 1 तर पर वै7ाÎनक| और नीÎत
Îनमाताओं तक पहचाने क| 9ÍHया ÍवकÎसत होगी

ँ ,वह|ं दसर| ओर 1 था ू नीय 1 तर पर लोग| के
रोजमरा के जीवन म काम आने वाल| वै7ाÎनक और तकनीक| जानकाÍरयॉ उ7ह

1 थानीय
समाचार प³-पͳकाओं के मा² यम से 9ा¯ त हो पाएंगीं ।

डा डा डा डा . .. .मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया
ु ु ु ु




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दै Îनक जीवन म Íव7ान ÍवÎध दै Îनक जीवन म Íव7ान ÍवÎध दै Îनक जीवन म Íव7ान ÍवÎध दै Îनक जीवन म Íव7ान ÍवÎध

रा* ç|य Íव7ान एवं 9ौ²ोÎगक| संचार पÍरषq का एक मE य ु उ£े ° य दे शवाÎसय| ,Íवशेषकर ब¯ च|
म Íव7ान और 9ौ²ोÎगक| क| लोकÍ9य बनाना और उनम वै7ाÎनक TÍ8कोण ÍवकÎसत करना है ।
इस उ£े° य क| 9ाि¯ त हे त ह| पÍरषq ने ु 1989म आकाशवाणी के साथ Îमलकर ‘Íव7ान ÍवÎध’
नामक एक रे Íडयो धारावाÍहक काय Hम 9साÍरत Íकया था । इस कायHम म कथानक के Fप म
‘Íव7ान ÍवÎध’ के ÍवÎभ7 न तc व| को ‘मानव के Íवकास’ क| कहानी से जड़े रोचक 9संग| म ु
ढाल कर 91 तुत Íकया गया था । अपनी तरह का यह पहला और एकमा³ रे Íडयो धारावाÍहक
था।

Íव7ान ÍवÎध 4 या Íव7ान ÍवÎध 4 या Íव7ान ÍवÎध 4 या Íव7ान ÍवÎध 4 या है है है है ? ?? ?
आज हमारा जीवन Íव7ान से 9भाÍवत होता है । हर चीज ,हर घटना ,हर बात Íव7ान से जड़ी ु
है । इसÎलए आव° यकता है हर ब¯ चे ,बड़े और बढ़े म वै7ाÎनक सोच लाने क| ू ,हर ि1थÎत को
Íव7ान क| TÍ8 से दे खने ,परखने और समझने क| Hमता ÍवकÎसत करने क| ,तथा अपने
आचार ,¯ यवहार और रोजमरा के जीवन म Íव7ान ÍवÎध को अपनाने क| । तक ,औÎचc य ,यÍñ ु
और त³ य| पर आधाÍरत सच क| खोज करना ,Íव7ान ÍवÎध क| पहल| सीढ| है । Íकसी भी चीज
को परखना ,समझना ,जानना और तब उसे 1 वीकार और अ1 वीकार करना भी Íव7ान क| ÍवÎध
का एक पहल है । Íकसी चीज के अवलोकन ू ,Îनर|Hण ,उससे संबंÎधत त³ य| का ऑं कड़| के Fप
म संकलन और Íफर उन पर आधाÍरत पÍरक~ पना क| TÍ8 के Îलए 9योग करके दे खना ,उसे
दोहराना और तब पर| बात 9माÍणत हो जाने पर तक के आधार पर Íकसी Îस@ांत का ू


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9Îतपादान करना ह| वै7ाÎनक प@Îत क| Hमवार सीढ़|यॉ ह । इस प@Îत से जॉ
ं ं
चा ,परखा और
1 वीकार Íकया गया 7ान ह| वा1 तÍवक सc य हो सकता है हालांÍक समय के साथ यह बदल भी
सकता है ।

वै7ाÎनक ÍवÎध या प@Îत अपनाने के Îलए आव° यकता होती है िज7ासा ,कौतहल ू ,9° न पछने ू ,
उôर खोजने ,जानने ,और समझने क| इ¯ छा क|; इन सबको मानवीय म~ य| ू ,तक ,Íवचारशीलता
और औÎचc यपण भावना से Îमलाकर बनी इस आधार Fपी मानवीय 9वÍô को ह| हम वै7ाÎनक ू ृ
TÍ8कोण क| जननी मानते ह । पंÍडत जवाहर लाल नेहF ने सबसे पहले दे श म वै7ाÎनक
TÍ8कोण तथा वै7ाÎनक 9वÍô क| भावना को जागत करने का
ृ ृ
नारा Íदया था । उनक| 9बल
इ¯ छा थी Íक हमारे दे श के छोटे और बड़े सभी ब¯ चे वै7ाÎनक TÍ8कोण रखने वाले नागÍरक
बन ।

अनोखा रे Íडयो धारावाÍहक अनोखा रे Íडयो धारावाÍहक अनोखा रे Íडयो धारावाÍहक अनोखा रे Íडयो धारावाÍहक
Íव7ान -ÍवÎध काय Hम मल Fप से Íह7 द| ू म तैयार Íकया गया । अलग -अलग भारतीय भाषाओं म
Fपा7 तÍरत कर इसे 1989म दे श के 84से भी अÎधक आकाशवाणी के 7 5| से 9साÍरत Íकया
गया । इसक| एक Íवशेषता यह थी Íक 9c ये क भाषा म Fपा7 तÍरत करते समय इस बात का
परा ² या ू न रखा गया Íक हर Fपांतर पÍरि1थÎतय| के अनFप हो और उसम 1 था ु नीय भाषा के
महावर| ु ,उदाहरण| ,और संगीत का यथासंभव 9योग हो; बस Íवषय -व1 तु और मल भाव एक ू
समान रह । इस रे Íडयो धारावाÍहक क| हर कड़ी मानव के Íवकास Hम से ल| गई महc वपण एवं ू
शीष घटनाओं ,मोड़| ,इc याÍद पर आधाÍरत थी । 13मE य ु कÍडय| के अÎतÍर4 त आर+ भ म एक
पÍरचय -कड़ी और अ7 त म एक समापन -कड़ी का 9सारण भी Íकया गया । यह काय Hम इतना
लोकÍ9य हआ Íक ब¯ च|

के साथ बड़| ने भी इसक| सराहना क|। इस कारण 1991म

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आकाशवाणी §ारा दोबारा भी इसका 9सारण Íकया गया । मल Íह7 द| ू आलेख ड़ा .हÍरक* ण


दे वसरे ने तैयार Íकया था ।

डे ढ़ लाख सम डे ढ़ लाख सम डे ढ़ लाख सम डे ढ़ लाख समÍप त ÷ोता ब¯ च Íप त ÷ोता ब¯ च Íप त ÷ोता ब¯ च Íप त ÷ोता ब¯ च
यह काय Hम एक Îनि° चत ÷ोता वग याÎन 10 - 14 वष क| आय के ब¯ च| ु के Îलए बनाया गया
था । ब¯ च| म कायHम के 9Îत FÎच और इसके 9भाव के अ² ययन के Îलए आव° यक था Íक
बहत से ब¯ चे

इसे ÎनयÎमत Fप से सन और इसक| सभी कÍडय| ु ़ को सन । अत ु :दे श भर म
लगभग 1लाख 40हजार ब¯ च| को समÍप त ÷ोताओं के Fप म पंजीकत Íकया गया । इसम

यह 9यास Íकया गया था Íक दे श क| पर| आबाद| म ÍवÎभ7 न ू भाषा -भाÍषय| का जो अनपात है ु ,
लगभग वह| अनपात पंजीकरण करते समय ÷ोताओं का भी बना रह । हॉ ु

,कछे क भाषाओं म

÷ोता अपेÍHत अनपात से कम रहे और कछ अ7 य ु ु
भाषाओं म ÷ोताओं क| संE या से अÎधक रह|
। पंजीकत ÷ोताओं को इसी काय Hम के Îलए Íवशेष Fप से तैयार Íकये गये कछ द|वार चाट
ृ ु
तथा Íकट Îन:श~ क ु दे ने का वायदा भी Íकया गया था । इस 9कार यह सÎनि° च ु त Íकया गया
Íक ये ÷ोतागण इस काय Hम को Îनि° चत Fप से सन ु ,ताÍक संयोजक| को अपने उ£े° य क|
पÎत के बारे म म~ यां ू ू कन करने का भी अवसर उपल« ध रहे । पंजीकत ब¯ च|

म 0ामीण ÷ोताओं
क| संE या शहर| ब¯ च| से कह|ं अÎधक थी ।

ताÍक ताÍक ताÍक ताÍक वै7ाÎनक TÍ8कोण आए वै7ाÎनक TÍ8कोण आए वै7ाÎनक TÍ8कोण आए वै7ाÎनक TÍ8कोण आए
इस कायHम का मE य ु उ£े° य ब¯ च| ,अÎभभावक| और ÎशHक| तथा आम लोग| को इस बात पर
पर| तरह आ° व ू 1 त करना था Íक Íव7ान ऐसा Íवषय नह|ं है िजसे हर कोई न समझ सक ।
साथ ह| ,इस अपव काय Hम से आशय यह था Íक ब¯ च| ू म अपने आस-पास क| चीज| को
अÎधक स+ म ू ता से दे खने ,परखने और जानने क| समझ ÍवकÎसत हो सक । ÍवÎभ7 न् मानवीय
पहलओं को वे एक तक पण पÍरपे+ य ु ू म दे ख सक और यह जान ल Íक Íव7ान जीवन का


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अÎभ7 न अंग है और Íकसी भी Íवषय पर हमारे Îनण य लेने क| Hमता ,हमारे दै Îनक जीवन ,
7ान ,आÎथ क पहलओं एवं मानवीय ¯ य ु वहार जैसी गÎतÍवÎधय| क| Íव1 त

त जानकार| और समझ
से 9भाÍवत होती है । ब¯ च| के मन म यह समझ ÍवकÎसत करना भी एक उ£े° य था Íक
Íव7ान ÍवÎध ह| Íव7ान तथा अ7 य Íवषय| के बारे म जानकार| 9ा¯ त करने का सHम एवं
सव|c तम मा² यम है ।

एक चनौती एक चनौती एक चनौती एक चनौती ु ु ु ु
ब¯ च| को Íव7ान क| जानकार| दे ना अपने आप म एक चनौतीपण काम है और जब बात रे Íडयो ु ू
मा² यम §ारा Íव7ान क| जानकार| उन तक पहचाने क| हो त| यह काय और भी कÍठन हो


जाता है । इसी मि° क ु ल को आसान करने के Îलए ब¯ च| क| इ¯ छा ,अÎभFÎच और उनक| Hमता
का ² यान म रखते हए सरल

,सहज ,और बोलचाल क| भाषा म रोचक नाटक| के Fप म रे Íडय| ़
आलेख तैयार Íकए गए थे । आकाशवाणी के के 7 5|य 9ोड4 शन दल ने कागज पर Îलखे आलेख|
को आवाज का Fप Íदया और उसम ÍवÎभ7 न धन| ु ,² वÎन 9भाव| को शाÎमल कर ÷ोताओं को
बॉधे रखने लायक काय Hम तैयार Íकया । ÍवÎभ7 न

कÍडय| को 9सारण हे त अि7तम Fप दे ने से ु
पहले बंगलौर ,अहमदाबाद ,रोहतक और म+ ब ु ई के 7 5| पर इनका पव पर|Hण Íकया गया । ू
9ायोÎगक तौर पर इस कायHम क| छ :कÍडय| को Íद~ ल| ,जयपर ु ,भोपाल ,पटना और लखनऊ
के 7 5| पर पव पर|Hण के Îलए सना ू ु या गया । यह स+ पू ण काय Hम (वाÍणि7यक सेवाओं को
छोड़कर) दे श क| सभी आकाशवाणी के 7 5| से संबंÎधत Hे³ीय भाषाओं म 9साÍरत Íकया गया ।

सनना सनना सनना सनना ु ु ु ु , ,, ,दे खना और करना दे खना और करना दे खना और करना दे खना और करना
9सारण के दौरान काय Hम को अÎधक FÎचकर ,9भावशाल| और उपयोगी बनाने के Îलए हर
पंजीकत बाल ÷ोता को ÍवÎभ7 न

चरण| म 4द|वार चाट और 2Íकट भेजे गये । 1 वाभाÍवक Fप
से ये चाट और Íकट उनक| अपनी Hे³ीय भाषाओं म कायHम के अनFप एवं परक जानकार| ु ू


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तथा कई 9कार क| गÎतÍवÎधय| हे त सझाव 9दान करने के Îलए द|वार चाट तैयार Íकए गए थे ु ु
। ऐसा इसÎलए Íकया गया 4 य|Íक रे Íडयो 9सारण क| अपनी कछ सीमाऍ ं होती ह

,िजनम एक
मE य ु यह है Íक इस मा² यम से ÷ोता को के वल सनकर ह| बात को समझना और महसस ु ू
करना पड़ता है ;वह दे ख नह|ं सकता । साथ ह| Íकट म ब¯ च| §ारा 1 वयं Íकये जा सकने वाले
काम/Íबना लागत के 9योग| ,FÎचकर खेल| ,आÍद को शाÎमल Íकया गया था । Îनि° चत Fप से
ब¯ च| पर इस काय Hम का बहत ह| सकाराc म

क 9भाव पड़ा । उ7 ह|ने न के वल इसे सना ु ,सराहा
और याद Íकया बि~क साथ म द| गई Íकट के मा² यम से नये-नये 9योग| को 1 वयं करके पैदा
होने वाले रोमांच का भी अनभव Íकया । 4 या ु पता यह 7ान ,यह रोमांचक अनभव हमारे दे श के ु
Îलए अनेक नये Hमतावान Íव7ानकम| ÍवकÎसत करने म सहायक बने ।

उc सा उc सा उc सा उc साहवध क 9भाव हवध क 9भाव हवध क 9भाव हवध क 9भाव
काय Hम के दौरान द| गई जानकार| के आधार पर काय Hम समापन पर ÷ोता-ब¯ च| के Îलए
9ÎतयोÎगता आयोिजत क| गई और सफल 9ÎतयोÎगय| को पर1 का ु र 9दान Íकए गए । इस
9ÎतयोÎगता म ब¯ च| ने उc साहपव क भाग Îलया । काय Hम के 9भाव का अ7 दा ू जा इसी बात से
लगया जा सकता है Íक ,जब काय Hम 9साÍरत हो रहा था और जब दोबारा 9साÍरत हआ

,
हजार| क| संE या म ÷ोताओं के प³ 9ा¯ त हए।


आकाशवाणी के ÷ोता अनसंधान एकांश §ारा कर|ब एक दज न से अÎधक 1 था ु न| पर 3चरण| म
‘Íव7ान -ÍवÎध’ के ÷ोताओं का सवHण Íकया गया । यह सवHण डाक §ारा और सीधे स+ प क
§ारा हआ । दोन| तर|क| म बराबर संE या

म ब¯ च| से सवाल पछे गये । पहले चरण म ू 4 – 1
कÍडय| म दसरे म ू 8 – 5, कÍडय| ,और तीसरे म 9 - 13 कÍडय| के बारे म 9° न पछे गये । मदरई ू ु
कामराज Íव° वÍव²ालय ने 1 वे¯ छा से इस धारावाÍहक के 9भाव का अ² ययन Íकया । कछ 9मख
ु ु
त³ य जो सामने आये ,इस 9कार है :


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1. लगभग 809Îतशत ÷ोताओं ने काय Hम सना ु : म+ ब ु ई म यह संE या 93 9Îतशत थी ।
2. महारा* ç म 909Îतशत ÷ोता रÍववार के Íदन दरद ू श न पर उसी समय आने वाले अ7 य
काय Hम| को छोडकर यह काय Hम सनना 7 या ु दा पस7 द करते थे ।
3. शहर| Hे³| क| अपे Hा 0ामीण ÷ोताओं ने काय Hम म 7 यादा FÎचत Íदखाई और सह| उc तर
Íदए ।
4. शत -9Îतशत 0ामीण और 909Îतशत शहर| ब¯ च| ने Íव7ान ÍवÎध कायHम को समझने म
आसान और FÎच को बनाये रखने वाला बताया ।
5. दे श भर से यह मॉग थी Íक काय Hम को

9Îत स¯ ताह कम से कम 30Îमनट तक ÎनयÎमÎत
Fप से 9साÍरत Íकया जाये ।
6. काय Hम के दौरान ÷ोताओं को द| गई Íकट और चाट ब¯ च| ने बहत पस7 द

Íकए और बताये
गये 9योग 1 वयं करके ‘Íव7ान ÍवÎध’ का आन7 द Îलया ।
7. यह काय Hम ब¯ च| से वै7ाÎनक जानकार| क| भावना और वै7ाÎनक TÍ8कोण को ÍवकÎसत
करने म सहायक Îस@ हआ । बहत से ÷ोताओं क| लगातार मॉग थी Íक इस काय Hम क|
ु ु

साम0ी को एक प1 त ु क के Fप म भी उपल« ध कराया जाये और आकाशवाणी §ारा Íकए गए
सवHण म भी यह मॉग दोहराई गई Íक 9सारण मा² य

म क| एक सीमा हे और रे Íडयो पर
9सारण के बाद इसका अि1तc व श7 य ू हो जाता है । अत :इसके मÍ5त Fप म आने पर इसे ु
संभाल:सहे ज कर रखा जा सकता है और आव° यकता पड़ने पर Íफर पढ़ा और पढ़ाया जा
सकता है । इन सब बात| का ² यान म रखते हए इस धारावाÍहक के Íह7 द|

म मल आलेख| ू
के आधार पर इसे एक ल+ बी कहानी के Fप म तैयार Íकया गया । कायHम के आधार पर
ऑÍडय| कै सेट भी तैयार Íकया गए । तथा इसे ‘ दे खा परखा सच ’ नामक Íकताब के Fप म
भी 9काÎशत Íकया गया । Íव7ान ÍवÎध और वै7ाÎनक TÍ8कोण को अपनाने क| भावना से
भरा यह धारावाÍहक न7 हे पाठक| को पस7 द आया । Íव7ान-ÍवÎध और वै 7ाÎनक Tि* टकोण

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के Íवचार को 7 यादा से 7 यादा लोग| तक पहचाने का मल उ£े° य

ँ ू यह| है Íक दे श के भावी
नागÍरक| क| वै7ाÎनक म~ य| ू के बारे म जानकार| बढ़े ,जागFकता आए और उनम हर चीज
को वै7ाÎनक TÍ8 से दे खने ,परखने ,समझने और करने क| Hमता और 9वÍô ÍवकÎसत हो


वे अपने जीवन म Íव7ान ÍवÎध को अपनाय ,4 य|Íक Íवकास ओर रोशनी का यह| एक
सश4 त एवं समझ मल मं³ है । ू


डा डा डा डा . .. .मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया
ु ुु ु
































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आज मीÍडया के Hे ³ म दH लोगो क| जFरत है । आज मीÍडया के Hे ³ म दH लोगो क| जFरत है । आज मीÍडया के Hे ³ म दH लोगो क| जFरत है । आज मीÍडया के Hे ³ म दH लोगो क| जFरत है ।

आजाद भारत के छह दशक बाद भी वै7ाÎनक साHरता/जागFकता अभी सोचनीय ि1थÎत म ह ।
9Îतवष लाल Íकले से दे श क| 9गÎत आE या के श« द अ7 तम न को झकझोरते रहते ह ,पर7 तु
आ1 था ,अ7 धÍव° वास के कई उदाहरण हमार| 9गÎत को अंगठा Íदखाते रह ह । मीÍडया भी इसे खब ू ू
महc व दे ती है । मानो आ1 था और तक का यह आÍखर| पड़ाव हो । यह दे श के Îलए ठ|क बात नह|
है Íक हम 2020तक महाशÍñ बनने का दावा कर रहे ह । समची दÎनया को हम अंतÍरH Íव7ान ू ु ,
अथ ¯ यव1 था म चनौती दे ने का दावा 91 त ु ुत कर रहे ह । वह|ं अभी Íपछले वष ह| म+ ब ु ई शहर के
माÍहम से ,बड़ोदरा के पीतल तट तक और बरे ल| से लेकर समचे उc त ू र भारत के लाग| का भार|
हजम सम5 के जल का मीठा कह

ू ु कर चमc कार मान रहे थे । हमारे दे वी दे वता भी कई बार अपने
भñ| ओर ÷§ालओं के हाथ| द¹ ध ू ु पान करते रहे ह । इन घटनाओं क| न तो 9ब§ समाज म ु
अनदे खी क| जा सकती है और न ह| उपहास । यह ग+ भीर Îचं तन और मनन का Íवषय है । आज
मीÍडया के Hे³ म ऐसे दH लोग| क| जFरत है ,जो नीर Hीर का Íववेचन कर समाचार| को सार
गÎभ त Fप म 91 तुत कर सक । बाजार म Îनत नए आ रहे जीन पÍरवÎत त फल| दै वीय आपदा म
हताहत हो रहे लोग| क| ¯ यथा ,इलाज के साथ ह| नई बीमाÍरय| का आगमन धम एवं मजहब के
अंधे रे व गहरे होते कं ए

,जनसंE या का तेजी से बढना जनसंE या Îनयं ³ण म हो रहे लगातार असफल
9यास| एवं रा* ç|य ट|काकरण जैसे सवाल| पर नए वै7ाÎनक TÍ8कोण अपनाने क| आव° यकता है ।
आज संचार के नाम पर जो कछ भी परोसा

जा रहा है । वह सबकछ 4 या

ठ|क है ? इस महान दे श
के ऊपर सां1 क

Îतक हमला शF को चका है । अब वै7ाÎनक TÍ8कोण के अभाव म सब कछ दॉव ु ु ु

पर है ।


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भारत क| बहसंE य

क आबाद| गांव म रहती है । अत :गांव के आमजन तक वै7ाÎनक जागFकता के
9सार के Îलए यह आव° यक है Íक समाज के चौथे 1 त+ भ अथात जन मा² यम| के मा² यम से
Íव7ान का संदे श जन -जन तक पहं चाया जाये जो Íक आज गांव क| चौपाल|

/दकान| तथा घर ु -घर
तक तेजी के साथ द1 तक दे रहे है । भारत क| मल Íव7ान नीÎत म सन ू ् 1958म भारत के पहले
9धानमं³ी पं .जवाहरलाल नेहF ने आम आदमी तक वै7ाÎनक मनोवÍô के 9सार क| परजोर
ृ ु
वकालत क| थी ,Íक7 तु आज भी भारतीय पÍर9े+ य म कोई उ~ लेखनीय बदलाव नह|ं आया है ।

वतमान समय म जन मा² यम (इले4 çॉÎनक एवं Í9ं ट मीÍडया) वै7ाÎनक जागFकता के नजÍरये से
अपने दाÎयc व| का Îनवाहन नह|ं कर रहे ह । दशक| पव जन मा² य ू म| म ल¯ त ु हो चक| अवै7ाÎनक ु
खबर आज मीÍडया क| सÍख य| म ह । भत9ेत ु ू ,शकन

,अपशकन

,« याह -शाÍदय| म कÞ ड

ल| Îमलान ,
रोग ¯ याÎधय| का दे वी दे वताओं से संबंध ,0ह नH³| के द* 9 ु भाव ,तांͳक| -मांͳक| का मायाजाल एवं
अ7 या7 य परातन अवै7ाÎनक धारणाएं आज इन जन मा² य ु म| के जÍरए अपनी पनवापसी कर रह| ु
ह। आज इले 4 टाÎनक मीÍडया म दे श के सवाÎधक 9ÎतÍ8त चैनल| पर जो Íक सबसे तेज होने का
दावा कर रहे ह ,वे ‘नाग-नाÎगन’ ,‘भतू -9ेत’ ,‘डाक बंगल| का रह1 य’ ,‘सय च7 5 ू 0हण’ ,को
अÎन* टकार| बताते हए या तमाम ऐसी अवै7ाÎनक खबर| को

24घÞ टे 9साÍरत करते है । िजनका
Íक सच से दर तक वा1 ता ू नह|ं होता । पर7 तु इन चैनल| के संवाददाता सीधे 9सारण म इस
Íव° वास के साथ बात करते है Íक कै से नाग के हc यारे क| फोटो नाÎगन क| आंख म च1 पा होती है ,
कै से सय ू -च7 50हण अमक नाम के राÎशवाले ¯ य ु Íñय| के Îलए घातक होगा या Íफर डायन भेष
बदलकर गांव म आ रह| ह एवं उससे बचने का 4 या उपाय है ? और भी बहत कछ । Îनि° च


त Fप
से Íव7ान ÍवÎध से अ9ÎशÍHत ये संवाददाता जाने अनजाने इस दे श को अंधे यग क| ओर ले जा ु
रहे ह । मीÍडया म अब तो अवै7ाÎनक खबर 91 तुत करने क| जैसे होड़ सी मची है । वह भी ऐसी


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खबर िजनका Íक कोई वै7ाÎनक सच नह|ं है । जैसे Íक ‘चीते क| खाल बरामद चार बंद|’ (यहां
उ~ लेखनीय है Íक चीता Íवल¯ त ु हो चका है ु ) ‘अÎन* टकांर| होगा सय 0हण ु ,’ ‘पÍव³ मÍरयम क| मÎत ू
से सगंÎधत इ³ Pाव ु ’ ,‘माÍहम म+ ब ु ई म चमc कार से मीठा हआ सम5 का पानी

ु ’ ,‘रांची म हनमान ु
क| मÎत ने आख तरे र|ं ू ’ ,‘गणेश जी ने पन ु :शF Íकया द¹ ध ु ु पान’ ,‘घर| पर जो ओम नह| Îलखेगा
डायन मार डालेगी’ ,‘तं³-मं³ो से इलाज कराइए ,एवं इ¯ छाधार| नाÎगन के पांच बार डसा’
आÍद-आÍद । ऐसी खबर समाज को Íकस और ले जा रह|ं ह यह गंभीर Îचं तन का Íवषय है । कब
तक हम ऐसे कc य|

से अपने आपको एवं परे समाज को मÍहमा मंÍडत करने का दावा कर परे रा* ç ू ू
को कलंÍकत करते रहे ग ।

21Îसत+ बर 2005को पहल| बार मीÍडया के इÎतहास म दे व 9Îतमाओं ने अपने भ4 तजन| के हाथ|
द¹ ध ु पान Íकया था । परे दे श क| तc का ू ल|न मीÍडया ने उसे खब 9चारÎत Íकया था । क7 या ू कमार|

से लेकर क° मीर तक के वल यह| खबर तै र रह| थी । दे श म हाई अलट क| ि1थÎत थी ,तब रा* ç|य
Íव7ान एवं 9ौ²ोÎगक| पÍरषद Íव7ान एवं Íव7ान एवं 9ौ²ोÎगक| Íवभाग भारत सरकार नई Íद~ ल|
के वै7ाÎनक ने इस चमc कार के सच को सामने रखा था । वै7ाÎनक दल का मानना था Íक वा1 तव
म 9c ये क 5व का अपना प* ठ

तनाव होता है ,जो Íक 5व के भीतर अणओं के आपसी आकष ण बल ु
पर Îनभ र करता है और इसका आकष ण बल उस ओरभी होता है ,िजस पदाथ के स+ पक म आता
है दे व 9Îतमाओं के दध पीने म ऐसा ह| हआ । जैसे ह| ू

दध संगमरमर पर सीम ट या अ7 य ू पदाथ
से बनी मÎत य| ू के संपक मे आया वह तरं त मÎत य| क| सतह पर ÍवसÍरत हो गया ु ू ,िजससे ÷§ालओं ु
को लगता है Íक सचमच से मÎत य| ने दध खींच Îलया है । जबÍक हक|कत म दध क| पतल| सी ु ू ू ू
धार नीचे से Îनकलती रहती है ,जो Íक धम आ1 था एवं Íव° वास के कारण दे ख नह|ं पाते । जब दध ू
म रं ग ,रोल| Îमलाकर दे खा जाए तो रं गी धार 1 प* ट Fप से Íदखाई दे गी । इस चमc कार म कोई



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वा1 तÍवकता नह| है ,यह वै7ाÎनक Îनयम| के अ7 तग त सामा7 य 9Íकया है िजसे आ7ानता के चलते
लोग चमc कार का नाम दे ने लगे ।

इसम सबसे दखद पहल यह है Íक इस बात को ु ू 1995से ह| बार बार बताया जा है पर7 तु हम अभी
भी भारतीय जनता तक इस वै7ाÎनक संदे श को नह| पहं चा पाए ह । दे श म Íव7ान 9सार के Îलए

एवं आम जनमानस म वै7ाÎनक सोच ÍवकÎसत करने के Îलए तमाम सरकार| गै र सरकार| गैर
सरकार| संगठन सÍHय ह परं त आ° च ु य Íक अभी भी हमार| भोल| भाल| जनता अ7ानता के
मोहपाश म जकड़ी है । Íपछले वष दे श म एक और चमc कार ने और 7 यादा शम सार Íकया है । पेय
जल का धंधा 1 वा1 थ से जड़ा है । म+ ब ु ु ई + यु Îनसल कारपोरे शन एवं अ7 य सरकार| संगठन| के §ारा
क| गई घोषणा के बाद क| माÍहम के सम5 तट पर तथाकÎथत मीठा जल 1 वा ु 1 ³ य Íक Îलए
हाÎनकारक है एवं उसे पीने से Íकडनी खराब हो सकती है ,लेÍकन लोग थे Íक मानते ह| नह|ं ।
चमc कार को ऐसा नम1 कार Íक लोग Íपये जा रहे थे । Îनि° चत Fप से यह चमc कार नह|ं है ।
वै7ाÎनक| ने इसक| पÍ8 कर द| Íक यह बाÍरश का पानी ह । संचार मा² य ु म| ने इसे खब 9साÍरत ू
भी Íकया परं त लोग पानी ले जा रह ह । पी भी रह ह । यह भÍñ ु ,÷§ा और आ1 था नह| बि~क
एक अ7धÍव+ाश है । सवाल यह है Íक हम दÎनया म अगल| पंÍñ के नायक इसी अ7ानता क| ु
बदौलत ह|गे । हमार| ÎशHा 9णाल| या Íफर ने तc व

दे ने वाल| सरकार| ,गैर-सरकार| संगठन ,कौन
इसका जवाब दे । महामÍहम पव रा* ç ू पÎत जी के 2020तक महाशÍñ बनने के E वाब को 4 या हम
ऐसे ह| परा कर गे ू ? जब तक Íवशाल आबाद| वाले इस महान दे श के जन-जन म वै7ाÎनक चेतना
का समावेश नह|ं होगा । तब तक महाशÍñ बनने का दावा करना Íकतना बेमानी लगता है और
जब हम आजाद| के छ :दशक बीत जाने के बाद भी तथा कÎथत आंकडे बाजी म फं से ह । भौÎतक
धरातल पर 7ान क| यह हालत है तो कै से हम भÍव* य म c वÍरत सधार क| उ+ मी ु द कर सकते ह ।
ऐस हालात म 7ान का 9सार करने वाल| सं1 थाओं से पछना होगा Íक बीते वरस| म 7ान के 9सार ू


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का उनका आं कड़ा महज कागजी तो नह|ं ह ? जो भी हो इस ि1थÎत म भÍव* य क| आहट बहत

भयावह है । यÍद हम दÎनया के दे श| क| कतार म आगे बैठना है तो हम 7ान क| शÍñ चाÍहए । ु
वै7ाÎनक जागFकता चाÍहए ,न Íक अंधÍव° वास या Íफर चमc कार । यहां मशहर कÍव द* यं

ु त कमार

क| ये पंÍñयां सट|क बैठती है -

कहां तो तय था Îचराग हरे क घर के Îलए कहां तो तय था Îचराग हरे क घर के Îलए कहां तो तय था Îचराग हरे क घर के Îलए कहां तो तय था Îचराग हरे क घर के Îलए, ,, ,
कहां कहां कहां कहां Îचराग मय1 स Îचराग मय1 स Îचराग मय1 स Îचराग मय1 सर नह|ं शहर के Îलए । र नह|ं शहर के Îलए । र नह|ं शहर के Îलए । र नह|ं शहर के Îलए ।

डा डा डा डा . .. .मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया मनोज कमार पटै Íरया
ु ुु ु

Îनदे शक
रा* ç|य Íव7ान एवं 9ौ²ोÎगक| संचार
पÍरषद ,नई Íद~ ल|


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ट| ट| ट| ट|. .. .वी वी वी वी . .. .Íव7ान प³काÍरता म नये 9योग कै से कर Íव7ान प³काÍरता म नये 9योग कै से कर Íव7ान प³काÍरता म नये 9योग कै से कर Íव7ान प³काÍरता म नये 9योग कै से कर

आज लगभग सभी ट|.वी .चैनल Íव7ान ,पयावरण ,1 वा1 ³ य ,कÍष एवं 9ाकÎतक घटनाओं व
ृ ृ
आपदाओं पर कवरे ज कर रह ह ,लेÍकन इस कवरे ज म महc व अÎधकतर मानवीय TÍ8कोण ,धाÎम क
आ1 थाओं एवं पर+ परओं को Íदया जाता है या Íकसी नई तकनीक स+ ब7 धी समाचार म उसतकनीक
पर के वल उपभो4 ता के TÍ8कोण से बात होती है । यह ठ|क है Íक घटना के सभी पहल कवर Íकये ू
जाऍ ं पर उससे जड़े Íव7ान के त³ य ु और जानकाÍरय| को उÎचत समय न दे ने से समाचार म पण ता ू
नह|ं आ पाती । यहॉ सम1 या

समय क| भी आती है Íक ट|.वी .7 यूज चैनल म साधारणत:एक
समाचार को 30सेके Þ ड से 50सेके Þ ड का समय Îमलता है ।
इस ि1थÎत म ट|वी Íव7ान समाचार म कछ नया खोजने के Îलये एक ट|

.वी .प³कार को आव° यक
है Íक Íव7ान के Íवषय क| जानकार| हो और उसे स+ बि7धत शोध ,उसके पÍरणाम और पेटे 7 ट अ ाÍद
क| अ¯ छ| जानकार| हो ।
• यह तय करना आव° यक है Íक एक 40सेके Þ ड के समाचार म Íव7ान क| बात पर दशक
गौर कर और उस समाचार के 9Îत लोग| म उc सु कता और िज7ासा का भाव पैदा हो ।
• यÍद Íकसी खगोल|य घटना का समाचार 91 तुत करना है ,तो यह तय करना आव° यक है Íक
Íकतने 9Îतशत का समय मा7 यताओं और आ1 थाओं को दे ना है और Íकतने 9Îतशत का
समय वै7ाÎनक त³ य| को । यहाँ घटना के वै7ाÎनक पH से समाचार को 9भावी बनाने के
Îलये खगोल|य घटना के इÎतहास से जड़े T° य ु ,उस घटना से जड़ी अÎधकतम जानकाÍरय| ु
को कम श« द| म Íपरोकर 91 तुत करना आव° यक होता है ।
• 9योगशाला म दबक| Íव7ान खबर| को बाहर लाना भी Íव7ान प³काÍरता को नए आयाम दे ु
सकता है ,4 य|Íक अÎधकांश भारतीय 9योगशालाओं और मीÍडया के म² य संवाद के वल तभी

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कायम होता है जब कोई सेÎमनार या गो* ठ| होती है । यहॉ भी उदघाटन क| खबर महc व

पण ू
होती है और Íव7ान Íवमश के वल आयोजक सं1 था म Îसमटा रहता है । ट|.वी .के प³कार
को आव° यक है Íक Íव7ान 9योगशालाओं क| शोध पर कै मरे क| नजर लगाऍ ं और Íव7ान
क| गो* ठ| के Îन* कष एवं Íवकास क| बात पर अपनी खबर बनाए ,उदघाटन के T° य कम भी
हो सकते है ।

यहॉ एक उदाहरण

दे ना चाहगा Íक एक बार जब लखनऊ के पो1 ट

ँ 0ेजएट मेÍडकल इं1 ट| ु Çयट म ू
गदा ु -9c यारोपण क| वष गांठ मनाई गई तो इस आयोजन का Îन* कष या पÍरणाम थे -वे ¯ यÍñ ,
िजन पर सफलतापव क गदा ू ु - 9cयारोÍपत Íकया गया था या िज7 होने अपना गदा दान Íकया था ु । इन
¯ यÍñय| के साHाc कार एवं इससे संबंÎधत वै7ाÎनक जानकार| ट|.वी .कै मरे म खबसरती से Íरकाड ू ू
Íकये गए । लेÍकन अफसोस जब खबर 9साÍरत हई तो समय कम होने के कारण के वल मE य


अÎतÎथ का भाषण 9साÍरत हआ । याÎन Íव7ान का गला घ|ट Íदया गया ।



ऐसे Íवषय| पर ² यान द जो थोक म Íबखारे पड़े है और िजन पर ट|.वी .का समाचार बि~लय|
उछाल सकता है जैसे भारत म श7 य ू क| खोज ,पाई का मान ,पाइथागोरस से पव उनके 9मे य का ू
शोध ,अनेक खगोÎलक| Íवषयक शोध ,स÷त संÍहता म जानवर| एवं पÍHय| क| मखाकÎत के ु ु ु ृ
औजार| से होते थे ऑपरे शन ,नीम ,ह~ द| ओर बा1 मती क| बात ,Íव7ान से जड़े लघ उ²ोग ु ु ,जैçोफा
क| खेती ,Íव° व का एकमा³ सनई या र1 सी अनसंधान के 7 5 ु भारत म है ,सी.एस.आई.आर ,के शोध
के 7 5| म 9योग| और शोध से जड़े T° य| ु का खजाना ह ,चनाव के ु समय नाखन म लगाई जान वाल| ू
अÎमट 1 याह| आज भारत से दÎनया के दे श| को आयात होती है ु ...! बहत कछ है


,बस आव° यकता
हे Íक ट|.वी .प³काÍरता राजनीÎत और अपराध के आगे भी सोचे ।




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T° य| के जÍरये दश क| म Íव7ान का Íरसाव सरलता से Íकया जा सकता हे । यÍद जैçोफा पर
समाचार बना रहे ह ,तो बंजर भÎम म सफलता से उगे जै çोफा के पौधे क शॉÇस Íकसान| म ू
c वÍरत उc साह पे दा करने म सHम ह । ट|.वी .का हर T° य मि1त* क म अÎमट छाप छोडता है ,
Íव7ान के कवरे ज म यÍद हरे क T° य को तौल -तौल कर 91तु त Íकया जाए तो वै7ाÎनक
TÍ8कोण 1 वत :पनपेगा ।
वै7ाÎनक शोध एवं वै7ाÎनक| क| बात| म ह| Íव7ान क| E चाबर Îछपी रहती ह । अ4 सर प³कार
जब बगै र Íकसी शोध जानकार| के वै7ाÎनक से उसके शोध पर बात करने पहचते है

ँ ,तो वे
उc साह के चलते बहत से ऐसे

सवाल कर बैठते ह ,िजनका उc तर दे ने म वै7ाÎनक संकोच करते
ह ,जो शायद अपनी बात के वल वै7ाÎनक ढं ग से रखते ह। जो प³कार| के समझ म नह| आ
पाती और Íव7ान क| खबर बनने से पहले ह| समा¯ त हो जाती है या taken for granted 9सारÎत
भी हो जाती है । ऐसे म ट|.वी .समाचार के 91 तुतीकरण म Íव7ान के Íरसाव का पैमाना Íफट
हो पाएगा ।
रोजमरा क| खबर| म Íव7ान के समाचार| को ढढ Îनकाले । जैसे झठ पकड़ने क| मशीन का ू ू ँ
Íव7ान ,डी.एन.ए .Íफं गर Í9ं Íटग का Íव7ान ,फॉरे ि7सक सांइंस के 9योग ,तमाम 9कार क|
बीमाÍरय| क| खबर| म के वल राजनीÎत न Íदखाकर बीमार| 4 य| ,कै से ,और उसके उपचार क|
Íव1 त

त जानकार| द ,9दषण के 1 त ू र क| खबर को Íव1 तार दे कर ÍवÎभ7 न गैस| के शर|र पर
पड़ने वाले 9भाव पर चचा दश क पस7 द कर गे ।
मौसम क| जानकार| हर ट|.वी .चैनल दे ता है पर यÍद ट|.वी .पर मौसम के पवानमान क| ू ु
ÍवÎधयॉ

,सपरक+ प ु ूटर ,वषामापी आÍद पर भी खबर बनाई जाऍ ं तो मौसम क| जानकार| दशक
दने उc सा ू ह से दे ख ।
Íव7ान समाचार क| भाषा ट|.वी .के Îलये कै सी हो ,यह Îनभ र करता है आपके T° य सं0ह पर
और समय पर । यÍद T° य म आपका संदे श 1 प* ट हो रहा है तो कम श« द| म अपनी बात

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कहने का 9यास कर । यÍद समय अÎधक हे और T° य कम तो श« द| का 9योग ि1थÎत के
अनसार हो सकता हे । अपने 91 त ु ुतीकरण म तकनीक| श« द| से बचने के बजाये तकनीक|
श« दावल| के सरलाथ को याÎन लगाकर उस श« द म जोड़ दे । कछ अं0ेजी श« द|

को याÎन
लगाकर एक छोटे वा4 य म समझाया जा सकता है जैसे ‘सोनार नैÍवगेशन’ याÎन नद| क|
डॉि~फन मछÎलय| क| ² वÎन च§ान| से टकराकर 9Íव² वÎन उc प7 न करती ह ।
अ7 धÍव° वास| से जड़ी अफवाह| ु के फै लने पर यÍद उनका कवरे ज करते ह तो Íव7ान के सc य
और त³ य से उस अ7 धÍव° वास का सफाया Íकया जा सकता ह । अ4 सर फल| के अंदर गणेश
जी Îनकल आते है ,ऊनी कपड़| या गे ह के बोर| म दै वीय 9कोप से आग लग जाती है

ँ ,कौई
¯ यÍñ दसरे 0ह पर जाकर उस 0 ू ह के ÎनवाÎसय| से Îमलकर लौट आता है । इन खबर| को
Íव7ान के त³ य| से Îनराधार साÍबत करना भी एक चनौती हे । ु
Íव7ान क| खबर ट|.वी.पर 9साÍरत होती है तो दश क उस खबर के T° य| से साHाc कार करता है ,
यहॉ दश क को संत* ट

ु करना भी आव° यक है । यÍद Íकसी फसल क| नई 9जाÎत पर ट|.वी .
Íरपोट 9साÍरत हो रह| है तो उसी समय दश क को यह भी बताना होगा Íक उस फसल से
उc पादन एवं उसक| गणतc ता ु म 4 या इजाफा होगा ,Íकसान को यह 9जाÎत कै से Îमल सकती है
और कÍष आÎथ क| म यह 9जाÎत पर 4 या

असर करे गी । इसी 9कार Íटश क~ च ू र पर Íरपोट
बनाते समय 9ला1 क या परखनल| म खबसरती के साथ छोटे ू ू -छोटे पौध के शॉÇस लेने के साथ
Íटश 9ÍHया 4 या ू है ? या कै सी होती है ? का « यौरा भी दे ना होगा और यÍद उससे संबÎधत
ऐÎतहाÎसक उपलि«ध दे श को Îमल| है ,तो उन द1 तावेज| के शॉÇस भी ट|.वी .समाचार क|
9माÍणता को बढ़ात ह ।
ÎनÎमष कपर ू
Íव7ान 9सार



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डा डा डा डा० ० ० ० अ+बेडकर और Íव7ान ए अ+बेडकर और Íव7ान ए अ+बेडकर और Íव7ान ए अ+बेडकर और Íव7ान एवं वं वं वं 9ौधोÎगक| 9ौधोÎगक| 9ौधोÎगक| 9ौधोÎगक|


Íव7ान एवं 9ौधोÎगक| का स+ब7ध औ²ोÎगक|करण से रहा है और आजकल भी हम 9ौधोÎगक| का
9योग उ²ोग तथा जीवन के हर Hे³ म पाते ह । इसी महcव को ²यान म रखते हए डा

० बी० आर०
अ+बे डकर ने 7/8 मई 1946 को मंबई ु म 1ट Íडं ग लेबर कमेट| क| बैठक म कहा था क| अकशल

और
कशल

कार|गर| क| भत| के Îलए रोजगार द9तर खोलने और कशल कार|गर| को तकनीक| ÎशHा दे ने

क| ¯यव1था और उपयñ काम Íदलवाने क| िज+मेदार| भारत सरकार ने अपने ऊपर ल| है ु । यह
उन सब के अथक 9यास का ह| फल है Íक आज भी काम Íदलाने क| िज+मेदार| रोजगार द9तर| के
मा²यम| से सरकार क| होती है ।

एक अथ शाUी होने के नाते वे यह भल| भांÎत से जानते थे Íक ÷Îमक| क| सम1याओं को सलझाने ु क| Îलए
Îमल माÎलक|, चाय बागान| क| माÎलक| क| उ²|ग| क| जांच करके उनक| कÍठनाइय| को दरू करने के
Îलए कान| पास कराएं । उ7ह|ने धनबाद म जाकर अcयाधÎनक ु मशीन| को दे खा तथा काय करने के
तर|क| क| पंछताछ ू क| और 400 फट ु गहर| कोयला खदान म जाकर मजदर| ू क| ि1थÎत को
जायजा Îलया वहां पर उ7ह|ने ए4सरे मशीन क| भी भल| भांÎत जांच क| तथा क8 रोग उ7मनन
ु ू
क 5 क| जांच क| तथा सझाव ु Íदया Íक दबले ु पतले ब¯च| के 1वा1³य Íक ओर Íवशेष ²यान Íदया जाए ।

रा1ते म उ7ह|ने स|ध परु म एक बहत

बड़ा झोला दे खा जो एक घंटे म 200 टन रे त,
खान को भरने के Îलए भीतर फ क सकता था। 29 अ9ैल 1944 को Íबहार के कोडरमा गाँव म अHक क|
खदान (मइका क| माइं स), क| पÍरषद कÎमट| अ²यHी भाषण म एक फं ड Îनमाण करने क| घोषणा क|
उसके बाद उ7ह|ने अHक क| लाद|यां बनाने , आकर दे ना उनके टकड़े काटना ु , चादर बनाने आÍद


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काय| क| घोषणा क|, तcप°यत उ7ह|ने ने अHक क| लाÍदओं के माल क| होने वाल| चोर| कम करने के
Îलए सरकार| आदे श 30 जनू 1944 को जार| Íकया उनक| सझू -बझ ू के कारण ह| काफ| हद तक,
मजदर| ू तथा उ²|ग| का सधर ु ह

आ ।

तकनीक| ÎशHा तकनीक| ÎशHा तकनीक| ÎशHा तकनीक| ÎशHा का का का का चलाना चलाना चलाना चलाना अÎनवाय डा अÎनवाय डा अÎनवाय डा अÎनवाय डा० ० ० ० बी बी बी बी० ० ० ० आर आर आर आर० ० ० ० अ+बे डकर अ+बे डकर अ+बे डकर अ+बे डकर
डा० अ+बे डकर ने जन ू 1945 के अंÎतम सBह म टाटा इंि1टÇयट ऑफ़ ू सोशल साइं स के Íव²ाÎथ य| को
स+भोÍदत करते हए

अपने भाषण म बताया क| अÎनवाय समझोता मजदर| के Îलए ू
Íहतकर है बाबा साहब ने आ+ाशन Íदया क| य@ काल ु म तकनीक| ÎशHा क| Îलए
खोले गए Íव²ालय भÍव*य म भी चलते रहे ग । उनके 9यास से ह| तकनीक| Íव²ालय चलते
रहे और आज दे श म तकनीक| ÎशHा का Íव1तार हआ अगर

वे इसके Îलए जोर न दे ते तो शायद दे श
म इं जीÎनÍरं ग काÎलजो का आभाव हो जाता और पयाB मा³ म इि7जनेयर और तकनीक| कार|गर न
Îमल पाते । वे हमेशा इं जेने Íरं ग और टे 4नीकल ÎशHा का महcव समझाते थे इसीÎलए उ7ह|ने
यÎनवÎस ट| ू रे फोम कÎमट| बॉ+बे 9ेÎसड सी के 9÷ न० 18 और 19 के उôर म कहा था
क| बॉ+बे Íव+ Íव²ालय म इं जीÎनÍरं ग, कÍष

, लÎलत कला, 9ौधोÎगक| और संगीत संकाय (feculty) को भी
होना चाÍहये तभी यह पण ू Íव+ Íव²ालय होगा ।

बाबा साहब ने तकनीक| ÎशHा क| çे Îनं ग तथा सÍवधाओं ु के संबंध म 29 अ4टबर ू 1942 को
गवन र जनरल अफ इं Íडया को एक मेमोर डम दे कर अनसÎचत ु ू जाÎत के Îलए तकनीक| ÎशHा क|
çे Îनं ग, ÎशHा तथा सÍवधाओं के बारे ु म ÍñÍटश सरकार का ²यान आकÍष त Íकया । इस मेमोर डम म
उ7ह|ने बताया क| सडयल ु का1ट (अनसÎचत ु ू जाÎत) क| आÎथ क दशा सधरने के ु Îलए टे 4नीकल ÎशHा
का जायदा महcव है न क| साÍहcय और कला का सामा7य 7ान अिज त करना उ7ह|ने यह भी कहा क|
टे 4नीकल ÎशHा इतनी मंहगी है क| वह उनके बस के बाहर है 4य|Íक यह लोग महं गी ÎशHा का
बोझ उठा नह|ं पाये गे। साथ ह| साथ यह भी बताया क| Íबना टे 4नीकल ÎशHा के उनक|

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आÎथक उ7नÎत नह|ं हो सकती है और Íह7दू सामािजक ¯यव1था के कारण भी अनसÎचत ु ू जात क|
आÎथक ि1थÎत अ¯छ| नह|ं हो सकती है , और Íह7द समाज ू म उ7ह आÎथ क Fप से बहत Îन+न

1तर
पर रखा है ।

उ7ह|ने गवनर जनरल का ²यान इस बात क| ओर खीचा क| जब धन धा7य और खशहाल| का समय ु
होता है । तब अनसÎचत जात को रोजगा ु ू र 9ाB करने का नं बर आÍखर| होता है और Íड9ेशन के
समय उनका नंबर नौकर| से Îनकलने म पहला होता है । यह सभी के वल Íह7द धम ू क| सामािजक बराई ु
का पÍरणाम है जो हमेशा से उनके Íखलाफ काम करते आ रह ह , लेÍकन दसर| ू तरफ एक और
कÍठनाई जो उनक| रा1ते म ³कावट डालती है वह है क| लोग 7यादातर अकशल

कार|गर है , और
उनक| टे 4नीकल ÎशHा नह|ं है अत :सरकार को कम से कम उनके Îलए टे 4नीकल ÎशHा 0हण करने के
Îलए एक अपर ÍटÎशप प@Îत को लागू कर दे ना चाÍहए तो उनके लड़के सरकार §ारा चाÎलत तथा
अंडर-टे Íकग सं1थान ं म टे 4नीकल çे Îनं ग सÍवधा उपल«ध ु कर सकते ह । इसी आधार पर आज
कल कारखान|, Îमल|, छपाई खान|, रे लवे के वक शॉप म अपर ÍटÎशप टे 4नीकल çे Îनं ग तथा उ¯च 1तर|य
वै7ाÎनक और तकनीक| ÎशHा बाबा साहब के अथक 9यास| के §ारा ह| अनसÎचत जात के ब¯च| को ु ू
भारत सरकार §ारा उपल«ध कराई जा रह| है ।

बाबा साहब ने अपने मेमोरं डम 29 अ4टबर ू 1942 म यह बात कह| क| भारत सरकार के
अधीन धनबाद म चल रहे इं Íडयन 1कल

आफ़ माइं स म उ¯च 1तर क| माइन इं जीÎनÍरं ग और
भगभ ू Íव7ान म ÎशHा 9दान क| जाती है । इस 1कल

म ÎशHण का उ£ेश दे श म ऐसे 9ÎशÍHत
¯यÍñ तैयार करना है , जो कोल माइÎनं ग उ²ोग और दसरे ु खÎनज उ²ोग| म काय कर सक । इस समय
इस 1कल म लगभग

97 Íव²ाथ| 9ÎशHण लेते ह । इस 1कल म भारत क| हर

Íह1से से
आये Íव²ाÎथ ओं के Îलए 9वेश खला है ु , और इस 1क

ल म एक भी छा³ अनसÎचत ु ू जात का नह|ं है


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अत: यह परम आव°यक हो गया है क| भारत सरकार अनसÎचत ु ू छा³| को दाÍखला दे ने का 9ावधान है
िजससे उ7ह भी 1कल म

ÎशHा 0हण करने का अवसर Îमल सके ।

इस उ£े श क| पÎत इस उ£े श क| पÎत इस उ£े श क| पÎत इस उ£े श क| पÎत ू ूू ू के Îलए नीचे Îलखे के Îलए नीचे Îलखे के Îलए नीचे Îलखे के Îलए नीचे Îलखे उपाए उपाए उपाए उपाए सझाये सझाये सझाये सझाये ु ु ु ु गए ह गए ह गए ह गए ह :-
(अ) अनसÎचत जात के Íव²ाÎथ ओं के Îलए कछ सीटे सरÍHत कर द| जाय ु ू ु ु
जो दाÍखले के Îलए कम
से कम आ¯य°यक ÎशHा का मान दं ड परा करते ह ू ।
(ब) उनको अनदान के Fप म Hा³वÎत Îम ु ृ
लनी चाÍहए।
(स) उनक| फ|स माफ़ क| ÎसफाÍरश हो।

मेर| राये म उÎचत होगा क| अनसÎचत जात के ु ू छा³| के Îलए कम से कम कम सीट| का एक बटा
दसवा Íह1सा सरÍHत कर दे ना चाÍहए ु , िजससे उ7ह दाÍखला Îमल सके । यह Íवषय ÷म Íवभाग के
अधीन आता ह लेÍकन यह मामला Íवत् Íवभाग क| राय का भी है , 4य|Íक छा³वÎत

और फ|स माफ़ क|
1वीकत

Íवत Íवभाग §ा ् रा क| जाती है । मे रे Íवचार से एक Íव²ाथ| पर 60 Fपये मह|ना का खच होगा।
अत: इसका 9ावधान Íकया जाये ।

Íव7ान और 9ो²ोगक| के Hे³ म उ¯च 1तर|य ÎशHा के Îलए सहायता क 5 सरकार §ारा दे नी चाÍहए
िजससे अनसÎचत ु ू जात के Íव²ाथ| भी इस Hे³ ÎशHा 0हण कर सक । डा० अ+बे डकर ने इसके Îलए
सरकार इस तरफ खीचने क| कोÎशश और कहा क| 3 लाख ³पया वाÍष क अनसÎचत जात के Íव²ाÎथ य| ु ू
पर खच होना चाÍहए जो Íवदे श म Íव7ान और 9ौधोÎगक| के Hे³ म उ¯च ÎशHा का अ²ययन कर
सक तथा दो लाख ³पया साल आना अनदान के ु Fप म Íव7ान और तकनीक| के Hे³ म Íव²ाÎथ य|
पर खच Íकया जाए। सरकार मि1लम ु और Íह7द समदाय ू ु के Íव²ाÎथ ओं पर हर वष तीन तीन लाख
³पया अनदान के ु Fप म मि1लम Íव+ Íव²ालय ु अल|गढ़ और Íह7द Íव+ Íव²ालय ू पर खच करती है ,
िजससे वह ÎशHा 9ाB करते ह। मझे ु कोई कारण नजर नह|ं आता क| क 5 सरकार अनसÎचत जात पर ु ू


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4य| नह|ं तीन लाख ³पय| क| राशी एक वष म खच करने को तैयार होती है ? िजस से उ7ह उ¯च
ÎशHा 9ाB करने का अवसर 9दान कर जो क| सरकार क| िज+मेदार| और कô ¯य है । यह| उÎचत
समय है क| क 5 सरकार अपने वाÍष क बजट म ÎशHा के मद म अनसÎचत ु ू जात के Îलए अलग से
9ावधान कर । बाबा साहब के अथक पÍर÷म से भारत सरकार §ारा अलग से 9ावधान 1वतं³ भारत
म उनक| ÎशHा के Îलए Íकया गया उ7ह| के 9यास से अनसÎचत जाÎत के Íव²ाÎथ ओं को Íव7ान ु ू
और टे 4नीकल के Hे³ म उ¯च ÎशHा के Îलए Íवदे श भेजा गया था।

पर7त अभी भी उनक| जनसEया के अनसार उनके ऊपर ÎशHा के मद म खच नह|ं हो रहा है ु ु ँ । मेरे
Íवचार से क 5 सरकार और रा7य सरकार| को स+पण ू ÎशHा के बजट का एक
चौथाई भाग 9Îतवष अनसÎचत जात और जनजाÎत ु ू के ऊपर उनक| जनसEया के Íहसाब ँ से खच करने
का 9ावधान बजट म करना चाÍहए तभी उनक| सह| Fप म उ7नÎत हो सके गी अ7यथा नह|ं, 4य|Íक
अभी ÎशHा के बजट का जायदा Íह1सा के वल 15 % क| आबाद| पर ह| खच हो रहा है , िजससे
Íवषमता क| ि1थÎत हो गई है । इसे िजतना ज~द| हो सके सरकार को दरू करना चाÍहए। समाज के
दÎलत और पीÍड़त वग के लोग| को Íव7ान और टे 4नीकल Hे³ म भागीदार| का अÎभ9ाय: यह नह|ं है
क| वे इस Hे³ म अनसंधान तथा Íवकास ु के Hे³ म काम करने तथा उ¯च पद| पर सHम नह|ं ह, यह
Íकतना खोकला अंध-Íव+ाश है , यह एक सामािजक Íवड+बना है , जो क| संसार के अ7य दे श| म नह|ं
पाई जाती है , Íक अमक वग को Íव7ान और तकनीक| के Hे³ म उ¯च पद| के अवसर अव³@ ह ु ।
यह संÍवधान Íक धारा 16(4), के मल भत ू ू अÎधकार| के Íव³@ है । अं0ेज| Íक सोच 1वतं ³ता से पव ू
सभी भारÎतय| के Îलए इन Hे³| म ऐसी ह| थी, िजससे अं 0े ज| का आÎधपcय इन Hे³| म बना रह ।
लाड कज न ने तो सभी भारÎतय| को सरकार| पद| के Îलए अयो¹य ह| घोÍषत कर Íदया था, िजसके
कारण दे श म 1व7³³ सं0ाम छे ड़ना पड़ा। वा1तव म Íव7ान एक मानने Íक प²Îत है िजससे 9य|ग|
§ारा Îन*कष ण, पÍरHण, Íवशलेषण के आधार पर Íकसी वग का ¯यÍñ उसका 9योग करने पर एक ह|


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पÍरणाम पर पहं चता

है । Íक Íव7ान Íकसी वग का इसम 9ÎतपाÍदत करने का अनमÎत ु 9दान
करता िजसका अथ है सभी वग का पण भागीदार| ू दे ना और वह के वल जनसEया के ँ आधार पर ह| हो
सकती है ।

Íव7ान का मEय ु उ£ेश 9माÍणक आधार पर त³य| का वण न करना है , जो Íक यथा-संभव वा1तÍवक
सरल एवम अथ पण है ू । Íव7ान और 9ो²ोगक| के Hे³ म ÍवÎभ7न योजनाय| के कल बज

त का 25%
भाग उनके Îलए बनाई गई योजनाओं पर खच करना चाÍहए Íव7ान और टे 4नीकल के उ¯च पद| पर
आरHण 9दान करना चाÍहए। िजसमे अनसÎचत जात ु ू और अनसÎचत जनजाÎत के ¯यÍñओं ु ू Íक
पद| उ7नÎत चाÍहए तो उ7ह भी सामािजक 7याय Îमलेगा और कछ लोग| का इस पर से एका

-
अÎधकार समाB होगा।

Íव7ान से माइका उ²ोग के Íव1तार क| संभावना पर बाबा साहब ने कहा था क| Íव+ म भारत
माइका (अHक), के उcपादन म सबसे आगे है , अHक क| चादर (शीट), के वल Íबहार 9ा7त के
हज़ार|बाग़ और गया िजले म पाई जाती ह तथा अHक राज1थान 9ा7त के ट|क, अजमेर तथा मारवार
म पाया जाता है । अHक के 80% भंडार Íबहार 9ा7त म पाए जाते ह, तथा 20% दे श के शेष भाग म ,
Íव+ के बाज़ार म बंगाल क| Fबी तथा Íबहार का अHक अपने गण §ारा पहचाना ु जाता है ।
िजसका ÷ेय यहाँ क| मलू Îनवासी िUय| को जाता है , जो इसको हं Îसया से काट कर टकड़| ु के Fप म
कर दे ती ह , िजसे Îनयात Íकया जाता है । अHक का 9योग सजावट के Fप म Íकया जाता है , Íव7ान
के Íवकास ने इस उ²ोग का महcव और भी बड़ा Íदया है । इसके गण| ु के कारण जनरे टर,
रे Íडयो, टे ल|वीजन, मोटर कार| म 9योग Íकया जाता है तथा इले4çोनो का 9भाव भी कं çोल कर
सकता है िजस से अHक का महcव बढ गया है ।




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बाबा साहब ने Íव+ य@ के बाद भारत म ु 9ौधोÎगक|करण के Íवकास पर बल दे ते हए

कहा था क|
जायदातर लोग भारत को कÍष 9धान

दे श के Fप म जानना चाहते ह , और अपनी सार|
शÍñ के वल कÍष Íवकास म ह| लगाना

चाहते, ना क| उ²ोग| के Íवकास पर हर आदमी जानता है ।
क| भारत कÍष

9धान दे श है , और भारत के वल कÍष पर ह| Îनभ र है

। बाबा साहब ने कहा Íक भारत
क| गर|बी का कारण के वल कÍष पर Îनभ रता

ह| है ।

भारत क| जनसEया ँ हर दस साल म गणाcमक ु ÷ेणी से बढ़ रह| है , और कÍष

भÎम ू इतने लोग| को अ7न नह|ं दे पाइगी भारत दोन| तरफ से फं सा हआ

है । एक ओर जनसंEया वÍ@

क|
सम1या तो दसर| ू ओर भÎम का [ास ू और कमी है । उनका मत था क| कÍष

को लाभदायक बनाने
के Îलए इसे उ²ोग से जोड़ा जाए िजससे कÍष पर Îनभ र जनसEया का दबाव

ँ कम हो जाएगा इस Îलए
औधोÎगक|करण भारत के Îलए आवय°क है बाबा साहब क| भÍव*यवाणी Íकतनी सcय Îनकल| Íक
भारत आज औधोÎगक|करण Íक Íदशा म Íदन 9Îत Íदन Íवकास कर रहा है ।

Íव²त के ु महcव को ²यान म रखते हए उ7ह|ने कई

हाइ]ो -लोिजकल (जल Pोत| का सवH )
करवाए थे प³7तु लड़ाई के कारण लोक-Íहत म 9काÎशत नह|ं Íकये गए सरकार को उ²ोग| के Îलए
Íबजल| के महcव क| अ¯छ| तरह से जानकार| होने के कारण इस दशा म कारगर कदम उठाये जा रहे थे
यह जानकार| डा० बी० आर० अ+बे डकर ने 5 अग1त 1943 को क 5 लेिज1लेÍटव असबल| म द| थी।
टे 4नीकल पॉवर बोड का गठन करने के Îलए बाबा साहब ने लेबर म बर होने के नाते पॉवर इंिजनीर| क|
एक सभा बलाई ु थी िजसके अq²H के Fप म 25 अ4टबर ू 1943 को उ7ह|ने कछ

आवय°क Îनदश दे ने
के साथ कछ महतवपण
ु ू 91ताव कराये थे। िजस से भारत म Íबजल| क| Hमता बढ सके इस सभा म
सभी इ7जीनर| ने 9शंशा करते हए कहा था क| यह

पहल| सभा है । िजसम दे श क| Íव²त सम1या के ु
बारे म Íवचार Íवमश Íकया ताÍक दे श म Íबजल| क| आपÎत ू कर काम जोर शोर से Íकया जा सके ।


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इस सभा का Í5तीय 91ताव था क| टे 4नीकल पॉवर बोड का गठन Íकया जाए इस 9कार 8 नव+बर
1944 को इस पॉवर बोड का गठन हआ बोड का उ£ेश क 5 तथा 9ा7त| के Îलए Íबिजल| Íवकास क|

योजना तैयार करना था । इस बोड को एक Íवशेष 9कार का सं1थान बनाना िजस से यह सव तथा
ÍHया7वन का काय ते जी से कर सक ।

आज के आधÎनक भारत म यातायात के आधÎनक साधन हवाई ज ु ु हाज के अने क अqडो का Îनमाण
डा० अ+बे डकर के समय म ह| करा गया था यह बात 1944 के जन के मह|ने म मंͳमंडल ू के
Íवदाई समाहर| पर वाइस राय तथा भारत के कमांडर इन चीफ ने आभार ¯यñ Íकया क| डा० बी०
आर० अ+बे डकर क| काय Hमता से ह| अनेक अqड| का Îनमाण काय हो सका । बाबा साहब क|
हाÍद क अÎभलाषा थी क| अरब सागर और बंगाल क| खाड़ी को जोड़ा जाए, लेÍकन उनक| यह महcव
कं शा पर| नह|ं हो सक| और भागीरथी क| तरह संजोए सपने को न कर सके और इस सपने ू
को अधरा छोड़ कर जाना पड़ा ू । डा० अ+बे डकर ने पÍरवार Îनयोजन और छोटा पÍरवार के बारे म
सबसे पहले दे श म बीड़ा उठाया था । डा० अ+बेडकर के 10 नव+बर 1938 के भाषण के आधार पर
महाराç Íवधान सभा ने पाÍरत Íकया क| वह छोटे पÍरवार को 9ोहcसाहन दे गी बाबा साहब के इस
भाषण को ÷ी पी० जे० ने Íवधान सभा म पढकर सनाया ु था 4य|Íक उस Íदन वे Íकसी कारण-
वश Íवधान सभा म ना जा सके थे बाबा साहब के इस भाषण पर ह| छोटा पÍरवार काय Hम को
9ोcसाहन दे ने का Îनण य Íकया था ।

दामोदर दामोदर दामोदर दामोदर घट| घट| घट| घट| क| योजना क| योजना क| योजना क| योजना । ।। ।
दामोदर नद| म 1856 से 12 बार भयंकर बाढ़ जनता ने दे खी थी इसी कारण इस नद| को Íबहार का
अÎभशाप कहते थे इसी नद| म 9ाय :हर चौथे वष बाद आ जाती थी और लोग| को बेघर कर दे ती थी ।
इससे अनÎगनत लोग| क| हाÎन होती थी 17 जलाई ु 1943 को तोइतनी भयंकर बाढ़ आ गई क| इसने
सारे Íरकॉड तोड़ Íदए लगभग 70 गाँव जल म¹न हो गए, लाख| लोग बे घर हो गए,18 हजार घर बह गए

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बाद ने बंगाल को सारे भारत से अलग कर Íदया और लोग| को खा² साम0ी पंहचाना भी

दभर ू हो गया
उस समय कलकôा पर जापानी सेना बमबार| कर रह| थी चारो ओर अ¯यव1था फै ल| हई

थी । बंगाल
म भीषण आकाल पड़ गया िजसे हालात और ख़राब हो गए लाख| लोग मौत के मंहु म चले गए । इसी
समय भारत म दामोदर नद| पर Îनयं³ण के Îलए 1थाई योजना बनाई डा० बी० आर० अ+बे डकर को
9तीत हआ

क| यह दामोदर योजना गर|ब| के क~याण के Îलए 1थाई योजना बन जाएगी ।

डा० अ+बे डकर जानते थे क| अमर|का क| टे नसी नद| योजना §ारा लोग| के क~याण के Îलए बनाई
वह उसी तरह यह दामोदर नद| के जल का उपयोग करना चाहते थे इस Íव+ास को मत ू Fप दे ने के
Îलए उ7ह|ने टे नसी नद| के कई 07थ मंगवाए तथा दे श के छोटे छोटे बां ध| का भी अ²ययन Íकया
लगभग तीस मह|नो (ढाई साल) तक दामोदर नद| योजना का शासन §ारा Íवचार मंथन चलता रहा
आÍखर म डा० के Tढ संक~प के कारण ह| सरकार ने इस योजना Íक 1वीकÎत

9दान क| और डा० बी०
आर० अ+बे डकर ने ह| दामोदर घट| योजना कायाि7वत क| इस योजना को परा करने ू के Îलए एक
अनभवी ु य7³ Íवशेष7 क| आव°यकता थी वाइस राय वेवेल का मत था क| Îम÷ के आसवान बांध का
Îनमाण करने वाले ÍñÍटश इंिजनीयर को यह काय सlपा जाए पर7तु बाबा साहब का मत था, क|
ÍñÍटश इं िजनीयर| को बड़े बड़े बांध बनाने का अनभव ु ना होने के कारण टे नसी वेल| ऑथोÍरट| म काय
कर रहे Çवीन नामक इं िजनीयर को इस योजना का काय भार ना सौपा जाए, बाबा साहब क| बात
मान ल| गई ।

1935 के कानन के अनसार जल माग 9ादे Îशक सरकार के अधीन थे पर7त ू ु ु बाबा साहब ने संÍवधान
बनाते समय इस Íवषय को क 5 क| सची म स+मÎलत Íकया इस ू योजना का काय समाB होते पर
यह काय सçल वाटर इÍरगेशन एंड नेवीगेशन के सपद Íकया गया था ु ु । इस काय को सचाF Fप से ु
चलने के Îलए उ7ह एक सयो¹य ु भारतीय अÎधकार| आव°यकता थी । इस काय के Îलए उ7ह|ने एक


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भारतीय चीफ इं िजनीयर ÷ी राय बहादर एन ु ० खोसला को काम पर लगाया और उ7ह बतया था क|
म आपको भारतीय होने के नाते इस पद पर Îनयñ कर रहा ह ु

ँ ।

वैसे म चाह तो

ँ , Íकसी भी अं0ेज इं िजनीयर को Îनयñ कर सकता ह ु

ँ, पर7त म ऐसा नह|ं कFगा ु ँ ।
बाबा साहब का दे श 9े म दे ख कर खोसला दं ग रह गए थे, उ7ह|ने अपनी 1वीकत

बाबा साहब को दे
द| थी । ऐसा था डा० का दे श 9ेम । दामोदर घट| योजना बाबा साहब डा० के Íदमाग क| उपज थी । वे
उसके ज7म दाता थे और उ7ह| ने ह| इस योजना को साकार Fप करवाया था । पर7त इस योजना ु
के पर| होने के पव ू ू ह| दे श का Íवभाजन हो गया ।

आजाद| के बाद ÷ी बी० एन० गाडगीळ से परा करवाया ू था । इसी संधब म सन० 1922 म जाज ड«लू०
वाÍरस ने इसी तरह क| 9ादे Îशक पÍरयोजन| क| नीवं यू०एस०ए० म रखी थी । उनके दे शवाÎसओं ने
उनक| 1मÎत

म एक बांध का नाम उनके नाम पर रखा था । लेÍकन 1वत7³ भारत म डा० बी० आर०
अ+बे डकर को इस स+मान से वंÎचत कर Íदया गया । िज7ह|ने दामोदर धाट| योजना के Îलए
अपना खन ू पसीना एक कर Íदया था, मसीबत ु झेल|, परे शाÎनयो का सामना Íकया और Íबहार, ओÍड़सा,
और बंगाल को बहार दे कर नए जीवन क| ओर अ0सर Íकया, उनक| हम याद भी नह|ं आती । उनके
9Îत स¯ची ÷दांजल| यह| होगी क| (दामोदर घाट| योजना) का नाम बदल कर डा० बी० आर०
अ+बे डकर घाट| योजना रखा जाये ।
§ारा
9ो 9ो 9ो 9ो० ०० ० आई आई आई आई० ०० ० बी बी बी बी० ०० ० Îसं ह Îसं ह Îसं ह Îसं ह
वै7ाÎनक "जी" व सलाहकार (से० Îन०),
Íव7ान और 9ौधोÎगक| मं ³ालय, भारत सरकार, नई Íद~ल|
मÍ5त ु
Íद~ल| 0ामीण टाइ+स ।
9 अग1त 1994


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ऊजा क| उजल| Íकरण ऊजा क| उजल| Íकरण ऊजा क| उजल| Íकरण ऊजा क| उजल| Íकरण

सÍ8 क| शFआत म जब मानव ने पहल| बार पc थ
ृ ु र मार कर आग पैदा क| तो उसे ऊजा का
अहसास हआ । तभी शायद पहल| बार पे ड|

पर पहला क~ हा

डा चला । यह|ं से शF हई 9गÎत के ु

पÍहए को गÎत दे ने के Îलए ऊजा 9ाÎB क| दौड़ । लकड़ी ,कोयला ,तेल गैस जैसे पारं पÍरक ऊजा
Pोत| को लगभग हजम करते हए मानव क| Îनगाह अब ऐसे अपारं पÍर

क ऊजा Pोत| पर गड़ रह| ह।
िजसका कभी अ7 त नह| होगा इसÎलए Íक 9गÎत का पÍहया चलता रह ।

लेÍकन भारत सÍहत कई दे श| म ऊजा के गहराते संकट ने इस बात के Îलए मजबर कर Íदया ह । ू
Íक ऊजा Íक अ7 य 9भावी Pोत तलाश जाएँ । तब मानव ने च~ ह ू म फकत गोबर से गैस बनाने के ू
मंसबे बनाए । तो सय दे वता को ू ू सचमच ऊजा दे वता बनाने क| सोची गई । मन* य ु ु ने बहती हई

हवा पकड़ या रोककर ,बहते हए पानी को बॉधकर उसने ऊजा के


अHय Pोत| का Îनमाण Íकया ।
Íबजल| के Fप म 9योग क| जाने वाल| कल ऊजा का लगभग

609Îतशत कोयले ओर Íबजल| घर|
से , 25 9Îतशत पनÍबजल| घर| से , 2 9Îतशत Íबजल| घर| से ओर 49Îतशत डीजल और गैस पर
आधाÍरत हे । पर7 तु दखद पहल यह है Íक हम एक 9Îतशत से भी कम ऊजा अपांरपÍर ु ू क Pोत| से
9ा¯ त करते ह। िजसम सौर ,पवन ,बायोगैस और लघु-पन Íबजल| घर ह ।

भारत म Íब~ ल| का रा1 ता काट जाना भले ह| अपशकन

मानकर घÍटत घटना का दोष Íब~ ल| के
मcथे मढ़ Íदया जाता ह । लेÍकन जम न वै7ाÎनक डॉ .Íक° चयन कोच और उनके साथी ने Íब~ ल| के
माथे डीजल क| धारा का Pोत ढढ़ Îनकाला ह । 4 य| ू Íक उ7 होन बताया Íक मत जीव| के शर|र से

हाइ]ोकाब न 9ा¯ त Íकया जा सकता है । आÍद कई उदाहरण हम दे खने को Îमल सकत ह । जैसे
Íक फसल कटाई के बाद खेत म पड़ा कड़ा अब बे कार क| व1 त
ू ु न होकर ऊजा का एक महc वपण ू

Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 35



1 ³ोत बन कर उभरा ह । 4 योÍक Íñटे न म हए शोध के अनसार वै7ाÎनक| ने ¯ य

ु थ कहे जाने वाले
पदाथ म इथेनॉल जो Íक ऊजा का एक महc वपण¯ ू P|त ह । क| खोज क| है । शFआत म ह| ु
म+ ब ु ई क| आई आई ट| के Íडपाट म ट ऑफ मैके Îनकल इं जीÎनयÍरं ग म इस व1 तुओं को लेकर
पर|Hण हए और इससे ऑ4 सी

जन Îनयंͳत गैस तैयार क| गई । काब न डाई और जलवा* प के
1 थान पर काब न मोनो ऑ4 साइड ओर हाइ]ोजन का 9योग Íव²त पैदा करने के Îलए इं जन म ु
Íकया गया ह । 9योगशाला से Îनकलकर धरातल पर आ गयी ह । इं ¹ लैÞ ड के हाई पॉवर 1 टे शन म
मÎग य| के ¯ य ु थ को 9योग करता एक संयं³ भी 1 थाÍपत कर Íदया गया हे 1इससे 12.7मेगावॉट
Íबजल| पैदा क| जा रह| ह । जो हर साल कम से कम 22,000घर| क| Íव²त आव° य ु कता पर| कर ू
रहा ह । आÍद कारण या कई ऐसी जानकाÍरयॉ हम 9ा¯ त

िजनके कारण हम उजा के बारे म जानते
या जान सकते ह । अथात हम अपने आस -पास क| ¯यथ क| व1 तुओं से उजा 9ा¯ त करना सीख
सकते हे ।

Íव Íव Íव Íव० ०० ० एन एन एन एन० ०० ०ͳपाठ| ͳपाठ| ͳपाठ| ͳपाठ|
उôर 9दे श

















Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 36



Íव7ान ले खन के पव Íव7ान ले खन के पव Íव7ान ले खन के पव Íव7ान ले खन के पव
ू ूू ू


आप Íव7ान लेखन करना चाहते ह ,शौक से क|िजए। Íव7ान लेखन म 4 या Íद4 कत है ? हॉ आप

Íव7ान लेखक हो सकते ह ,बशत आप लेखक ह| । बात बड़ी सीधी सी है । एक श«द है ‘ मोटर
साइÍकल ’ तो है ह| लेÍकन वह साइÍकल िजसम ‘ मोटर ’ लगा हो । इसी 9कार ‘ ऑटोÍर4 शा ’ म
वह ‘ Íर4 शा ’ जो 1 वचाÎलत ‘ ऑटो ’ है । आप सोच रहे ह|गे Íक Íव7ान लेखन म “मोटर
साइÍकल” और “ऑटोÍर4 शा” ये सब कहॉ से

आ गया ? बात समझने क| है इसी 9कार Íव7ान
लेखक या Íव7ान ले खन है अथात वह लेखक जो Íक Íव7ान Îलख रहा हो या वह लेखन िजसम ्
Íव7ान हो । इससे बात उभर कर यह आई Íक ‘ लेखन ’ मल है अथात यÍद आप लेखन कर ू
सकते ह तो आप Íव7ान लेखन भी कर सकते ह ।

लेखन के Îलए Íवचार आव° यक ह ,िज7 ह आप पाठक| तक पहचाना चाहते ह । इसका सीधा सा


अथ है Íक आपक| अÎभ¯ यÍñ सश4 त होनी चाÍहए लेÍकन अÎभ¯ यÍñ बोलकर भी ¯ य4 त क| जा
सकती है । यÍद आपने कछ बोलकर ¯ य

4 त Íकया हो आप व4 ता या 9व4 ता ह|गे और उसे ह|
Îलखकर ¯ य4 त Íकया तो आप लेखक ह|गे ।

सव 9थम आपके मन म भाव )Íवचार (आना चाÍहए । उसे वय4 त करके Îलखना चाÍहए । जब आप
लेखन करने के Îलए बैठ तो सव 9थम आपको यह सोचना है Íक हम इसका ‘ शीष क ’ चन और ु
Íफर Îलख । शीष क चनते समय यह ² या ु न रखना चाÍहए Íक वह छोटा हो ,आकष क हो तथा अपने
आप म कई भाव Îछपाये हो । पाठक मा³ शीष क से ह| आक* ट

हो जाये और आपके आलेख को
पढने के Îलए बा² य हो जाए। इसÎलए आलेख का शीष क स7दर ु चट|ला ओर Îचताकष क होना ु
चाÍहए।


Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 37



जब आपने शीष क Îनि°त कर Îलया तब Íफर आपको तदनF ु प Íवषयव1 तु उसम डालनी है ।
Íवषयव1 तु और शीष क म सम7 वय होना चाÍहए । अथात शीष क के अनFप आलेख म Íवषयव1 त ् ु ु
का समावेश Íकया गया हो । Íवषयव1 तु को लेखन का 1 वFप जब 9दान Íकया जाता है तो यह
² यान Íदया जाना चाÍहए Íक न तो वह अÎतसंÍH¯ त हो और न ह| Íव1 त

त हो । ‘ गागर म सागर ’
भरने क| Hमता को धीरे -धीरे ÍवकÎसत कर लेना चाÍहए । कल Îमलाकर उसे सारगÎभ त बनाने का

9यास करना चाÍहए ।

Íव7ान लेखन म यह ² यान दे ना अÎत आव° यक है Íक 91तÎत रोचक ढग से क| जाये ु ँ ,4 य|Íक
आम धारणा है Íक Íव7ान श* क ु Íवषय है ले Íकन Íव7ान लेखक| का यह दाÎयc व है Íक वे Íवषय
को रोचक ढं ग से 91तत कर । सरलता ु ,सहजता ,बोधग+ यता Íव7ान लेखन क आभषण ह। इ7 हे ू
अपनाने से आपके लेखन म चार चॉद लग जाऍ ं गे । वा4 य

छोटे ह| । सीधे ह| ,सरल ह| । आसानी
से समझ म आने वाले हो तथा सव 0ाH हो । यÍद ऐसा आप कर सके तो शीU ह| उc तम कोÍट के
लेखक बन सकते ह ।

आप लेखन के मा² यम से जो ¯य4 त करना चाहते ह ,उसम आपक| गहर| पकड़ आव° यक है ,िजसे
आप अ¯ छ| तरह से समझ चके ह|गे । उसे ह| आप दसरे को अ¯ छ| ु ू तरह से समझा सकते ह ।
इसÎलए Íवषय का अ² ययन आव° यक हे 1

जब Íव7ान लेखन के Íवषय म हम चचा करते ह ,तो एक बात और समझने क| है । वह ये Íक
हम Íकस वग समह के पाठक| के Îलए Îलख रह है । अगर बात समझ म नह| आयी है तो इसे ू
और सरल ढं ग से कह सकते ह Íक आप छा³| के Îलए Îलख रह ह या बेरोजगार| के माग दश न के
Îलए Îलख रह ह या Íकसान| के Îलए या अनपढ़ लोग| के Íव7ान समझाने के Îलए या कामकाजी
मÍहलाओं के Îलए या जन सामा7 य के Îलए या Íवशेष वग वै7ाÎनक के Îलए या शोध छा³| के Îलए

Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 38



। कहने का ताc पय यह है Íक ले खन Íकस वग समह के Îलए है ू ? यह Îनधार ण करने का दाÎयc व
लेखक का होता है । जब हम पाठक वग समह का Îनधारण ू कर लेते ह ,तब उ7 ह| क| बौÍ@क
Hमताओं के अनFप Íवषय व1 त ु ु ,श« द रचना तथा वा4 य Íव7 यास करके लेखन करते ह ।

लेखन Íकसी भी 9कार का हो ,यह लेखक|य दाÎयc व है Íक वह उ£े° यपरक हो । यह 4 य| Îलखा जा
रहा है ? यह ले खक के मन म 1 प* ट होना चाÍहए । उ£े° यपण लेखन ह| लेखन का 9ाण है अ7 य ू था
Îनरथ क लेखन सदै व Îन* 9ाण होता है । अत :Íव7ान लेखक| से यह अपे Hा क| जाती है Íक उनका
लेखन उ£े° यपण हो ू ,साथ क हो तथा पाठक समह के Îलए Íदशा दे ने वाला ओर दशा सधारने वाला ू ु
हो ।

Íव7ान लेखन म सबसे बडी सम1 या होती है Íवषयव1 तु के चयन क| । जै से ह| हम लेखन क| चचा
करते ह या Íव7ान ले खन के Îलये लेखनी उठाते ह ,हम सीधे चॉद म

दौड़ने लगते ह ,अंतÍरH क|
पत म झॉकने लगते ह । Íदमाग कह|ं वैमाÎनक उड़ाने भरता है

,तो कह|ं नाÎभ क|य गोते आने लगते
ह । कह| रसायन के स³ू ,तो कभी भैÎतक| के गढ़ रह1 य| ू म खो जाते ह । कहने का ताc पय यह है
Íक ये सभी Íवषय Íव7ान के Íवषय ह ,लेÍकन ये ह Îस@ह1 त लेखक| के Îलये । नामी Îगरामी
लेखन करने वाल| के Îलये ,उसम अभी थोड़ा Íवल+ ब है आपको ,इसÎलये Íव7ान के Íवषय| के चयन
करने म जहॉ आपक| अपनी लेखन कला म रोचकता लानी है

,सरलता और सहजता व बोधग+ यता
से लेखन करना है ,वहॉ इस बा

त क| सावधानी भी चाÍहए Íक Íवषय चयन धरातल से जड़ा है । ु
आप िजतने आस -पास होते जायगे ,उतने ह| Íवषय रोचक Îमलते जायगे । आप अपने आप को
आसपास ह| के ि75त क|िजए और Íफर Íव7ान का उसम पट द|िजए और दे Íखये Íक आप Íकतना ु
अ¯ छा Îलखते ह ।




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उदाहरण के Îलये आप अपना घर दे Íखये । अपना पडौस दे Íखये ,Íफर नगर दे Íखये ,Íफर अपनी
तहसील और िजला दे Íखये ,इतने म ह| इतने Íवषय तै रते Îमल जायगे ,जहॉ आप Îलखते हए


Îस@ह1 त Íव7ान लेखन क| दौड़ म शाÎमल हो सकते ह । आपको अपना ² यान आc म के ि75त कर
1 थानीय म£| क| और ु लेकर उसे साव जÎनक बनाने क| कला आनी चाÍहए । यह कला Îनर7 तर
लेखन करते -करते 1 वत :ÍवकÎसत हो जाती है ।

एक बात ,और जो परम आव° यक है ,यह ये Íक अगर आप लेखन के Hे³ म आकर पहचान बनाने
के Îलए तैयार ह या य| कह Íक छटपटा रहे ह ,तो आव° यक है Íक पहचान बनाने क| पण 9ÍHया ू
म आय । शायद नह|ं समझ तो समझ ल Íक आप कशल पाठक बन अथात जमकर पढ जो आप
ु ्
Îलखना चाहते ह । जैया आप Îलखना चाहते ह ,उसी Hे³ के पण लेखन क| जमकर पढ़ाई कर । ू
यह 9ÍHया आपके लेखन को पÍर* क

त करे गी ,इसÎलये Íव7ान लेखन के पव अ² य ू यन म आपक|
गहर| FÎच आव° यक है ।

- -- - ‘अजेय अजेय अजेय अजेय’ रामदc त रामदc त रामदc त रामदc त Îतवार| Îतवार| Îतवार| Îतवार|








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बाल बाल बाल बाल Íव7ान साÍहc य Íव7ान साÍहc य Íव7ान साÍहc य Íव7ान साÍहc य ले खन ले खन ले खन ले खन , ,, ,एक Íवचार एक Íवचार एक Íवचार एक Íवचार

आजाद| के बाद महाc मा गांधी ने कहां था ,‘राजनेता के वचन| और कम| म अ7 तर नह|ं होना
चाÍहए’। Íब~ क

ल यह| बात अÎभभावक| पर भी लाग होती है । हम कह सकते ह िजनके घर म ू
ब¯ चे उनके माता -Íपता ,दादा-दाद| आÍद को वचन| और कम| मे अ7 तर नह|ं रखना चाÍहए ,4 य|Íक
ब¯ चे अपनी माता Íपता क| काब न कॉपी होते ह । वे जैसा अपने माता -Íपता को कहते ,सनते ु ,
करते ,दे खते ह ,चाहे अनचाहे वैसा ह| अनकरण करते है । अ1 त ु ु हम Îन* कष Fप म कह सकते ह
Íक ब¯ च| के माता -Íपता मनसा ,वाचा ,कम णा म एकFपता लाय ताÍक वे अपने ब¯ च| के Îलये
1 वंय आदश बन । वा1 तव म माता-Íपता जैसा आचरण करते ह ,ब¯ चा उ7 ह अपना आदश मानता
है । अ1 तु हम बाल Íव7ान साÍहc य म ऐसा भी कछ गढ़ना होगा जो ब¯ च|

के माता -Íपता के
¯ यवहार| म सधार ला सके और उ7 ह ु दप ण Íदखा सके ।

जब हम वत मान दौर म बाल साÍहc य के गढने क| बात करते ह ,तो नव रचनाकार| को यह
बात भल|-भॉÎत अंगीकार कर ले

नी चाÍहए Íक यह Íव7ान ,तकनीक व 9ौ²ोÎगक का यग है अ1 त ु ु
बचपन म हम ऐसे सं1 कार उ7 ह साÍहc य के मा² यम से द ,िजससे उनम वै7ाÎनक सोच बढ़ सके ।
उनके अ7 दर वै7ाÎनक TÍ8कोण ÍवकÎसत हो सके ,व अÎधक सतक तका तक पण ढ़ं ग से काय| को ू
करने म FÎच Íदखाय । वा1 तव म इसके Îलये Îन+ न 9कार से अ7 तर 1 प* ट करने का 9यास Íकया
गया है -






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अतीत के बालक अतीत के बालक अतीत के बालक अतीत के बालक- -- -

1. अतीत के बालक दादा-दाद| व नाना -नानी क| गोद म बहत कछ सीख लेते थे जो जीवन म


बहत का

म आता था। Íवशेषकर मॉ लोÍरयॉ व नानी क| कहा
ं ं
Îनय| से बचपन ÍवकÎसत होकर
महकता था।
2. अतीत मे 0ामीण पÍरवेश मे तथा शहर| म भी 9ाकÎतक पÍरवेश बड़ा स7 द
ृ ु र रहता था तथा
9दषण कम था । फलत बचपन एकदम 1 व ू 1 थ रहता था ।
3. अतीत म सय4 त ु पÍरवार थे ,तो बालक को असीम 1 नेह व ¯ यार Îमलता था । पÍरवार मे
उc साह आÍद के माहौल से उसका सां1 क

Îतक पH भी मजबतू होता था ।
4. अतीत के बालक| के पास मनोरं जन के सीÎमत साधन थे । कभी-कभी रं गमंच या सां1 क

Îतक
पव ह| उनके मनोरं जन के आधार थे ।
5. अतीत म बालक पहले अÎधक खेलने के बाद Íव²ालय म 9वेश लेता था ,तब कह|ं अHर
7ान उसे Îमलता था । फलत बचपन म शर|र Íव कÎसत हो जाता था और पÍरप4 व Îचं तन
उसे Îमलता था ।
6. अतीत म लोक कथा ,का¯ य ,लोर| ,क|Îत न ,भÍñ गाथाओं से ह| 7ानाज न होता था । फलत
द|घ काÎलक 9भाव बचपन पर पड़ता था तथा सीÎमत श« द भÞ डार उनके पास रहता था ।
7. पहले सचनाऍ ं बहत कम तथा धीमी गÎत से आती जाती रहती थीं । फलत उसका अनभव ू ु

जगत सीÎमत जानकार| से य4 त ु था ।
8. अतीत म बालक 9कÎत के

साि7न² य म अÎधक रहता था ।
9. अतीत म Íव7ान व तकनीक धीरे -धीरे आ रह| थी । फलत उसका अनभव जगत सीÎमत था। ु
10. अतीत म बालक के पास मÍ5 ु त मा² यम ह| 7ान 9ाÎB का एकमा³ साधन था । फलत वह
श« द0ाह| 9वÎत का था ।




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11. अतीत म बालको को ऑं गन खेलने के Îलए Îमलता था िजससे उनका सम0 Íवकास होता था
तथा Îनरोग रहता था ।
12. अतीत के बालक| को श§ आहार Îमलता ु था । फलत काया Îनरोग रह|त थी ।
13. अतीत म बालक| को सोलह सं1 कार| से सं1 कारवान बनाया जाता था।
14. अतीत के बालक| के Îलए ÎशHा सरल ,सगम ु ,सबोध और कम खच|ल| थी । ु



आज के बालक आज के बालक आज के बालक आज के बालक- -- -

1. आज के आपाधापी म बालक को दाद|-नानी क| कहाÎनयॉ व मॉ क| लोÍरयॉ 9ा
ं ं ं
य :न के
बाराबर ह| Îमल पाती ह। अ1 तु उनका सवागीण Íवकास अवF@ होता है ।
2. आज का बचपन 9ार+ भ से ह| 9दÍषत वातावरण म ° वा ू स लेता है । फलत उसम रोग| से
लड़ने क| Hमता कम ह । और अÎधसंE य बचपन रोगी Îमलता है ।
3. आज का बचपन तो सह| अथ| म मॉ

-बाप का भी ¯ यार नह|ं पा रहा है ,कह|ं उसे हॉ1 टल म ,
तोकह|ं उसे पालना घर म पाला जा रहा है ।
4. आज के बालक| के पास उस अतीत क| तलना म अपे Hाकत इले 4 टॉ ु ृ
Îनक मीÍडया क| बदौलत
मनोरं जन के अÎधक साधन उपल« ध ह । फलत उसके पास अनभव| का भÞ डा ु र अÎधक है ,
Íक7 तु भटकाव अÎधक है ।
5. आज का बालाक कम आय से ह| Íव²ा ु लय क| चहारद|वार| म भेज Íदया जाता है । फलत
अHर 7ान तो उसे ज~ द| Îमलता है ले Íकन मन मि1त* क पर Îचं ताओं का बोझ डाल Íदया
जाता है ।

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6. आज के बचपन को जन संचार के ÍवÎभ7 न मा² यम उपल« ध ह । फलत: उनका 9भाव उनके
बचपन पर पड़ रहा है ,िजससे वे अÎधक चंचल तथा उनका श« द भÞ डार भी ¯ यापक हो रहा
है ।
7. यह सचना HांÎत का यग है । फलत ू ु : आज का बालक अतीत के बालक| क| तलना म ु
सचनाc म ू क TÍ8 से अÎधक स+ प7 न है ।
8. अब आज का बालक तो कं H|ट के जंगल| म जकड़ा हआ अनभव करता है ।


9. आज Íव7ान व तकनीक के सहयोग से Îनcय नई 9ौ²ोÎगक| का Íवकास हो रहा है । फलत:
आज के बालक के पास नये अनभव| के अनेक आभास उदघाÍटत हो रहे ह । फलत उसके ु
अनभव क| सीमा असीम होती ु जा रह| है ।
10. आज के बालक के पास T° यावÎलयॉ बहत ह । अ1 त


ु ,श« द| के 9Îत उसका आ0ह घट रहा
है ।
11. आज का बालक 9लैट म रहता है । उसे सह| ढं ग से सय क| रोशनी उपल« ध ू नह|ं हो पाती
है । फलत वह रोगी अÎधक रहता है ।
12. आज का बालक फा1 ट फड म अÎधक FÎच ले रह ह । फलत ू : दॉतो के रोग व मोटापे से

01 त होकर 9ाय :बीमार रहते ह ।
13. आज के लोग सोलह सं1 कारो का नाम भी भल गये ह । ू
14. आज के बालक| के Îलए ÎशHा महगी हो गयी है । अब पि«लक 1 क ँ

ल या का7 वे7 ट
अपेHाकत महगे ह ।



इस 9कार हम यह दे खते ह Íक आज का बचपन अÎधक चंचल व जगFक है तथा उसके पास
अÎधक साधन ह 7ानाज न करने के । इसके आधार पर हम ÍवÎभ7 न Íवधाओं म बाल साÍहc य ऐसा



Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 44



रच ,िजसम Íव7ान का भी पट हो । ु

वैसा तो अनेकानेक Íवधाऍ ं ह ,पर7 तु बालक| क| सवाÎधक FÎच कहाÎनय| म तथा छोट| -छोट|
तकबंद|नमा कÍवताओं म अÎधक होती है । चककल| के मा² य ु ु ु ु
म से भी हम उनका मनोरं जन कर
7ानाज न कराने म सहायक बन सकते ह ।

जब हम साÍहिcयक Íवधाओं क| बात करते ह ,तो सव 9थम हम Íवधा के अनFप रचना गढ़नी होगी ु
और यह तय करना होगा Íक हम ब¯ च| को 4 या दे ने चाहते ह और हमारा मा² यम 4 या ह| ?
कहानी या कÍवता आÍद । तब सव 9थम बात आती है हम Íवषयव1 तु का चयन कर ।

Íवषयव1 त Íवषयव1 त Íवषयव1 त Íवषयव1 तु ु ु ु
हम बलाक| को 4 या दे ने जा रहे ह ,उसक| Íवषयव1 तु सारगÎभ त होनी चाÍहए । उसका ढं ग
बड़ा रोचक होना चाÍहए । बाल 1 वभाव के अनFप हम 9कÎत ु ृ
,व7 य जीव ,जन -जीवन ,बाल सखाओं
को मा² यम बनाकर Íवषयव1 तु का चयन कर सकते ह । इसम उ£े° य भी सि7नÍहत होना चाÍहए
Íक हम रचना संदÎभ त Íवषयव1 तु क| 4 य| Îलख रहे ह ,यह पर| तरह से रचनाकार को समझ ले ना ु
चाÍहए । वा1 तव म Íवषयव1 तु का चयन लेखन के पव करना होता है ू ,इसी के साथ हम तय करते
ह शीष क ।

शीष क शीष क शीष क शीष क- -- -
सरल ,सबोध ु ,आकष क तथा छोटा और सारगÎभ त होना चाÍहए । ब¯ च| म कौतहल जागत ु ृ
करने वाला होना चाÍहए । शीष क पढ़कर या सनकर ह| मन मÍदत हो जाए । ब¯ च| ु ु का चेहरा Íखल
उठे और उनके मन मि1त* क म कछ भाव उठने लगे

,ऐसा शीष क सव|c तम माना जाता है ।



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भाषा भाषा भाषा भाषा- -- -
ब¯ च| के आले ख क| भाषा उनके आय वग के अनसार होनी चाÍहए । पांÍडc य ु ु पण व ू
अलंकारय4 त ु गÍह त भाषा का 9योग बाल Íव7ान साÍहc य म कदाÍप नह|ं करनी चाÍहए । बि~क
सह| बात यह है Íक भाषा सरल हो ,सहज हो ,9वाहय4 त ु हो ,बोधग+ य हो ,साधारणतया समझ म
आने वाल| हो । ऐसा दे खा गया है Íक कभी कभी अ¯ छ| Íवषयव1 तु भी उपय4 त ु भाषा के अभाव म
9भावह|न हो जाती है ।

शैल| शैल| शैल| शैल|- -- -
Îलखने क| शैल| सरल होनी चाÍहए । घमावदार शैल| न होकर सीधी सरल सपाट शैल| ब¯ च| ु को
9भाÍवत करती है । भाषा और शैल| का चोल|-दामन का साथ होता है । वा4 य छोटे -छोटे ह| ,एक
दसरे से तारत+ य ू सह| हो । रचना को साथ कता 9दान करने वाले होने चाÍहए ।

संवाद संवाद संवाद संवाद- -- -
संवाद भी सजीवता Îलए होना चाÍहए । ब¯ च| क| समझ म आना चाÍहए Íक Íकससे 4 या बात क|
जा रह| है ? ये बात 4 य| क| जा रह| है ? जब तक यह बात 1 प* ट न हो ,तब तक संवाद सजन

ह|
बेकार रहे गा । ब¯ च| को पर| तरह से 7ानवध न संवाद| के मा² य ू म से ह| करना है । इसÎलए बाल
Íव7ान साÍहc य म संवाद| का भी Íवशेष महc व है ।

चÍर³ चÍर³ चÍर³ चÍर³- -- -Îच³ण Îच³ण Îच³ण Îच³ण- -- -
यÍद रचना चÍर³ 9धान है ,तो Íवशेष ² यान दे ने क| आव° यकता है Íक नायक का चÍर³
अनुकरणीय हो । ब¯ चे रचना पढ़कर या सनकर नायक के चÍर³ का अनकरण का संक~ प ु ु ल । यÍद
खलनायक के चÍर³ को Îचͳत Íकया जाए ,तो उसम घणा1 प

द बात सामने आए ताÍक ब¯ च| म यह
भाव जा0त हो Íक वे कभी भी ऐसा नह|ं बन गे । यÍद नव रचनाकार इस बात को भल| -भॉÎत

समझ



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गये तो समÍझये Íक ÷े * ठ रचनाऍ ं दे सकने म भी समH हो जाएंगे ।

वातावरण Îच³ण वातावरण Îच³ण वातावरण Îच³ण वातावरण Îच³ण- -- -
संवाद Íकन पÍरि1थÎतय| म ,कै से वातावरण म हो रहे ह ,उनका 9कÎत Îच³ण बड़ा ह| सजीव

होना
चाÍहए ,िजससे ऐसा 9तीत हो Íक बाल पाठक या ÷ोता अपने आस -पास ह| घटना को घÍटत होते
दे ख रहा है । बाल पाठक या ÷ोता क| त7 मयता ह| रचना साफ~ य है ।

Îच³ां कन Îच³ां कन Îच³ां कन Îच³ां कन- -- -
यÍद कोई भी साÍहc य सÎच³ है ,तो वह Íवशेष म~ य ू वान होता है लेÍकन जब हम बाल Íव7ान
साÍहc य क| चचा करते ह ,तो यह कहते ह Íक सÎच³ बाल Íव7ान साÍहc य पर| तरह ू से 9ाणवान
है ,4 य|Íक बाल Íव7ान साÍहc य का सवाÎधक महc वपण पH उसका स+ य ू क Îच³ांकन ह । Îच³| म
हजार| श« द| को कहने क| Hमता होती है । ब¯ च| को Îच³ भी बहत Í9य होते ह

,इसÎलये साधारण
से साधारण रचना यÍद Îच³य4 त ु है ,तो वह ÷े* ठता क| ओर अ0सर होने लगती है । आजकल तो
Îच³कथाओं क| एक पथक Íवधा ÍवकÎसत हो चक| है और वह बहत 9भावी है तथा ब¯ च|
ृ ु


लोकÍ9य है ।

ÎशHा9द रचना आव° य ÎशHा9द रचना आव° य ÎशHा9द रचना आव° य ÎशHा9द रचना आव° यक है क है क है क है - -- -
बाल Íव7ान साÍहc य क| रचना पर| तरह से ÎशHा9द होनी चाÍहए । उसका ÎनÍहत उ£े° य ू ह| रचना
को साथ कता 9दान करता है अ7 यथा यÍद रचना ÎशHा9द नह|ं है ,तो वह अपने उ£े° य से भटक|
हई रचना होगी और समची रचना Íदशाह|न हो जाएगी। इसÎलए रचना को यÍद 9ाणवान बनाना है

ू ,
तो उसे पर| तरह से ÎशHा9द होना चाÍहए। ू






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बाल Íव7ान साÍहc य बाल Íव7ान साÍहc य बाल Íव7ान साÍहc य बाल Íव7ान साÍहc य क| Íवधाऍ ं क| Íवधाऍ ं क| Íवधाऍ ं क| Íवधाऍ ं - -- -
य²Íप अनेकानेक Íवधाऍ ं चलन म ह तथाÍप बालक| क| FÎच कहानी ,कÍवता और नाटक तथा
चटकल| म सवाÎधक है तथा Îच³ कथाऍ ं भी ब¯ च| ु ु
म बहत लोकÍ9य हो चक| है ।



बाल Íव7ान साÍहc य बाल Íव7ान साÍहc य बाल Íव7ान साÍहc य बाल Íव7ान साÍहc य लेखन के पव लेखन के पव लेखन के पव लेखन के पव ू ूू ू - -- -
नव रचनाकार| को चाÍहए Íक वे जब बाल Íव7ान साÍहc य रचना करने का मन बनॉए

,तो सव 9थम
वे बाल मनोवÍôय| का गहन अ² य

यन अव° य कर । बाल मन को टटोल । छोटे -छोटे ब¯ च| से लेकर
Íकशोर| के साथ खब वाताऍ ं कर । उनके साथ बालक बनकर रहे ू ,खेले और खॉए

,उनको बार|क| से
परख । जब आप इतना सब कछ कर ले

ग ,तब आपको 1 वयं ये पता लग जाये गा Íक बाल मन
4 या कह रहा है ? तदनFप आज जो रचना Îलख गे ु ,यक|न माÎनए ,वह रचना बाल Íव7ान साÍहc य
क| अनठ| रचना होगी ू ,हो सकता है Íक आप अमरc व को भी 9ा¯ त कर जाऍ ं ।

यहॉ यह उ~ ले

ख करना भी आव° यक है Íक जब आप बालक| के साथ घलÎमल रहे ह| ु ,तब आप
उसी दौरान बाल मनोÍव7ान का अ² ययन भी कर और यह तौल Íक बालक| म Íव7ान के 9ारि+भक
7ान क| शFआत कहॉ से कर ु

?

एक बात और जो कहनी है ,वह ये Íक यह ¯ यावसाÎयक यग है । आज जो कर रहे ह उसी से ु
आपको उदर पोषण भी करना है ,इसके Îलए सवाÎधक अ¯ छा उपाय है Íक बाल ‘बाल सम1 याओं ’ के
समाधान पर Íवशेष लेखन काय पÍरवार| व समाज तथा रा* ç पर एक बड़ा उपकार होगा और
आपको अथ|पाज न भी कराएगा ।

- - - -रामदc त रामदc त रामदc त रामदc त Îतवार| Îतवार| Îतवार| Îतवार| ‘अजेय अजेय अजेय अजेय’




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बाल बाल बाल बाल साÍहcय साÍहcय साÍहcय साÍहcय म Íव7ान कै से म Íव7ान कै से म Íव7ान कै से म Íव7ान कै से समाÍहत समाÍहत समाÍहत समाÍहत हो हो हो हो ?


दे श का भÍव*य नई पीढ़| पर Îनभ र होता है । आज के बालक और बाÎलकाएँ कल के
नागÍरक बने ग बचपन म जो सं1कार वे पायेग , उसी 9कार उनका मानÎसक Íवकास होगा िजस 9कार
उनके 1वा1थ क| दे खभाल होगी, उसी 9कार अपने दे श के भावी नागÍरक| का Íवकास होगा, तदानसार ु
राç का Îनमाण होगा यह एक साव भौÎमक सcय है ।

इसके Îलए यह आव°यक है , क| पÍरवार मजबत ू ह|, 4य|Íक शैशव से Íकशोराव1था तक ब¯चे क|
स+पण ू दे खभाल का दाÎयcव पÍरवार पर होता है । पÍरवार एक ऐसी इकाई होती है क| जहाँ ब¯च| क|
परवÍरश होती है , ब¯च| के अ7दर सु रHा क| भावना बनी रहती है सामािजक - म~य| ू , मा7यताओं, दे श
काल क| पÍरि1थÎतय| से तथा सं1कÎत से ब¯च| का पÍरचय होता है ब¯च| का सम0 Íवकास हो

,
इसके Îलए ऐसे पाÍरवाÍरक पÍरवेश क| आव°यकता है , जहाँ नौÎनहाल| को भरपर ¯यार Îमले ू , पर| ू
सरHा Îमले ु ,और वे अपने जीवन का शभार+भ नव उ~लास के साथ कर तथा 1वयं व ु पÍरवार तथा
राç को सरÍHत कर ु ।

लेÍकन व1त ि1थÎत कै सी है ु ? इससे भी पÍरÎचत होना अव°यक है आज आकड़ बताते है क| ब¯च|
क| असमय मौत या शार|Íरक Íवकास का अव³@ होना या मानÎसक Íवकलांगता का एक मा³ कारण
है । कपोषण दे श क| ढाई लाख 0ाम| म एक करोड़ तीस लाख

ब¯चे और उनक| माताएं आज
कपोषण का Îशकार ह 9सव के दौरान होने वाल| मcय दर
ु ृ ु अभी भी काफ| Îचं ता का Íवषय है एक
लाख ब¯च| के ज7म म 0ामीण Hे³| म लगभग पांच सौ मÍहलाओं क| मcय हो
ृ ु जाती है इसका
मEय कारण कपोषण ु ु
, अ1व1थकर वातावरण तथा क9थाएँ ह





Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 49





Íकसी भी 9कार क| गर|बी का स+ब7ध उस पÍरवार म जनम लेने वाले ब¯चे
के भÍव*य को 9भाÍवत करता है Íपता का नशेड़ी होना और जआु खेलने क| आदत का Îशकार होना, पÍरवार
क| आÎथ क ि1थÎत को द*9भाÍवत ु Íकये Íबना नह|ं रह सकता क~पना क|िजये िजन पÍरवार| क| आÎथ क
ि1थÎत ख़राब हो, वहां जआर| ु व नशोड़ी Íपता अपने ब¯च| के भÍव*य को सवार सकता है ँ ? उôर
होगा, नह|ं ! वह तो अपने ब¯च| के भÍव*य को अँधेर| सरं ग म डाल दे गा ु ।

यह एक सव मा7य सcय व त³य है Íक दे श को सवारने के Îलए आव°यक है दे श के ब¯च| को
सवारना ँ , लेÍकन ब¯च| को सं1कारवान बनाने म पÍरवार क| महतवपण भÎमका होती है ू ू । बाल मनो-
Íव7ाÎनय| का अभी मत है क| बचपन के सं1कार जीवन म Îचर1थाई होते ह । पÍरवार का जैसा
वातावरण होगा, उसका वैसा 9भाव ब¯च| पर अव°य पड़े गा ।

बात यह|ं समाB नह|ं होती बि~क यह तो 9ारि+भक चचा मा³ है । हम समता क| बात करते ह
और घर घर म बालक बाÎलकाओं के लालन पालन म भेद बरता जाता है । जो सम0 मातशÍñ के

अ7दर ह|नता क| भावना पैदा करता है यह भी हमारे सम0 राÍçय Íवकास म बहत बड़ी बाधा है


जब घर| के अ7दर मातशÍñ कमजोर होगी

, तब वह Íहं सा क| भी Îशकार होगी । आज रा8ीय व
अंतराçीय 1तर पर मÍहलाओं के Íव³@ Íहं सा पर जोरदार चचा चल रह| है लेÍकन दे हर| के भीतर जो
Íहं सा हो रह| है , उसे समाB करने के Îलए हम 9यास रत नह|ं ह इसीÎलए पÍरवार म ब¯चे व मÍहलाएँ
9ाय: Íहं सा का Îशकार होते ह ब¯च| पर Íहं सा का सीधा द*9भाव ु पड़ता है वे कं ठा

के Îशकार होते ह,
और बाल मनो वै7ाÎनक| क| माने , तो वे यह बताते ह क| ऐसी ि1थÎत म ब¯च| क| Íहं सक 9वाÍô यां
बढती ह ब¯च| म जब असरHा ु क| भावना पनपती है , तो वे अपराध जगत क| ओर मड जाते ु ह ।



Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 50



एक ओर गर|बी, तो दसर| ू ओर अ7धÍव+ाश, तो तीसर| ओर अÎशHा और चौथी ओर गंदगी (अ1व¯छ
वातावरण) से घर| का जीवन व बा~यकाल सभी कछ

सरÍH ु त है बात यह|ं पर समाB नह|ं होती बि~क
असÎलयत यह है क| आजकल समाज म मÍहलाओं व ब¯च| के Íव³@ Íहं सा बढ रह| है , हम
इस बढती हई

Íहं सा के Îलए िज+मेदार ह अशल|ल Íफ़~म तथा अंग 9दश न को लालाÎयता बालाएँ ,
कामकु Íव7ापन तथा Íवदे शी चैनल| §ारा 9साÍरत क| जाने वाल| Íफ़~म संÍवधान §ारा 9दô अÎभ¯यñ क|
1वं³ता क| आड़ म सव ³ फहड़ता ू व अशल|ल 9साÍरत क| जा रह| है । यÍद कहा जाए Íक
सौदागर बनकर जो सपने ट|० वी० के चैनल| और धारावाÍहक के मा²यम| से 9साÍरत Íकये जा रहे ह,
उनम अशल|ल नाच गान| को समाÍहत कर हम नई पीढ़| म जहर घोलते जा रह है मातशÍñ Íक गÍरमा

को लि7जत कर रहे ह ।

एक और अंÎतम म£े पर चचा करके मल Íवषय पर आना उपयñ होगा वह म£ा है मÍहला 1वतं³ता ु ू ु ु
आ7दोलन का जब हम मÍहला 1वतं ³ता आ7दोलन क| बात करते ह तो यह ²यान रखना होगा Íक
ÍवकÎसत दे श| और Íवकासशील दे श| म इन आंदोलन| के कारण तथा उ£े श पथक

-पथक ह लेÍकन

जब हम एÎतहाÎसक अवधारणा क| बात करते ह सामािजक Íवकास कै से हआ

? इस पर िq8पात
करना होगा सव मान त³य व सcय है Íक 9ारि+भक काल म शार|Íरक बल क| 9धानता थी ब¯चे को
ज7म दे ने से उसके लालन पालन व पोषण के Îलए माँ पर पर| िज+मेदार| डाल| गई ू , िजसक| वजह
से तमाम उcपादक काय| म मÍहलाओं क| भागीदार| घटती चल| गयी यह| वह वजह थी Íक समाज
म प³ष 9धानता कायम होती चल| गई Hमश ु :मÍहलाएँ प³ष| पर Îनभ र होते हो ु ते उनके अधीन हो
गयी ।

समय ने पलता खाया Íव7ान और 9ो²ोÎगक| का 9भाव बढ़ा अब शार|Íरक बल गौण हो गया अब
ब¯च| Íक परवÍरश के Îलए माँ को चौबीस घंटे दे ने क| आव°यकता नह|ं रह गई अब ÎशHा का
Íवकास के अवसर भी द1तक दे कर मÍहलाओं को जागFकता का पाठ पढ़ाने आने लगे ह इसीÎलए

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अब समानता और असमानताओं पर चचाएँ होने लगी ह इस 9कार मÍहला 1व7तं³ा आ7दोलन ने
आHामक Fप ले Îलया है और हम भी पि°म के रं ग म रं गते जा रहे ह फलत" :कै ट Îमलेट "तथा
"जम न Î0यर "जैसी मÍहलाओं के नेतcव

म मÍहला आ7दोलन को बौÍ@क जामा पहनाने क| कोÎशश तो
क| गयी है तथाÍप उसका 1व³प कटु और आHामक हो गया है फलत: ब¯चे उपे ÍHत हो रह दसरे ू ब¯च|
म कं ठा ¯याB

हो रह| है , िजसका पÍरणाम सामािजक Íहं सा तथा सामिजक ÍवकÎतय|

के Fप म
सामने आ रहा है ताcपय वह होना चाÍहए, िजससे Íक मÍहला 1वंतं ³ता आ7दोलन घर पÍरवार Íक
एकता को Îछ7न Îभ7न न कर पाये पाÍरवाÍरक एकता क| गÍरमा बनी रहे ताÍक बचपन क| बÎगया
Îनcय नई खशब ु ू Íबखेरे और उजड़ने से बचे ।

ये वे Íब+ब है , कछ Îच³

ह जो हमारे समाज म तेजी से फ़ै ल रह ह ये वे ÍवकÎतयाँ

ह जो हमारे घर
पÍरवार के ताने बान| को उजाड़ रह| है । ऐसी Íवषम पÍरि1थÎत म ,जब सब रा1 ते ब7 द नजर आ रहे
ह| या चार| ओर आग लगी हो ,तब उसे शांत करने उपाय साÍहc य के पास होते ह और साÍहc य म
यÍद वै7ाÎनकता का पट हो जाये तब सोने म सहागा हो जाता है । Íफ ु ु र वह साÍहc य जो बचपन का
महकाने क| Hमता रखता हो ,उसे भी वै7ाÎनकता से भरपर Íकया जाये ू ,तो Íफर कहना ह| 4 या है ।

इसÎलए अब Íवचार यह करना है Íक साÍहc य म Íव7ान समाÍहत Íकया जाये ,तो वह हमे 4 या दे ?
इसके Îलए हम यह Íवचार यह करना है Íक आज रा* ç को 4 या चाÍहए बात बड़ी सरल है ,हम
सीमा पर चौक7 ने जवान चाÍहऍ ं ,तो खेत म कशल Íकसान

,दे श मे 9खर उ²मी और उ7 नत
तकनीक| तथ सम7 न ु त 9ौ²ोÎगक| के जानकार चाÍहऍ ं ,हम चाÍहए कशल ÎचÍकc स

क तथा क+ ¯ यूटर
के Íवशेष7 । इसके Îलए हम सार Fप म यह कह सकते ह Íक बाल Íव7ान साÍहc य म Îन+ न तc व
व त³ य समाÍहत होना चाÍहये । जैसे Íक 9c ये क रचना-
1. रोचक हो ,ब¯ च| को 9भाÍवत करने वाल| हो तथा ÎशHा9द हो


Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 52


2. ब¯ च| म समझ पैदा करने वाल| हो ।
3. कम म Íव° वा स पैदा करने वाल| हो ।
4. ब¯ च| को भा¹ यवाद| बनने से रोकने वाल| हो ।
5. आ7ा पालन ,अनशासन

,वीरता तथा साहस भरने वाल| हो ।
6. आc मÍव° वास भरने म सहायक हो ।
7. ब¯ च| म 9° न पछने क| आदत ÍवकÎसत करने म सहायक हो ।

8. बाल सलभ िज7ासाय शांत करने क| Hमता समाÍहत हो । ु
9. ÎशHा9द हो तथा मनोरं जक हो ।
10. 9कÎत से तालमेल बनाने म सहायक हो व 1 व

¯ छता के 9Îत जागFक बनाए ।
11. भाषा के 1 तर पर बाल सलभ भाषा का 9योग करे ।


12. 9ारि+भक Íव7ान क| जानकाÍरयॉ सरल भाषा म दे ।


13. Íव° लेषण करने तथा परखने क| Hमता म वÍ@ करने वाल| हो ।



साथ ह| लेखन म इन Íवषय| को भी ल । ब¯ च| का लालन -पालन कै से Íकया जाये ? इस
Íवषय पर 9माÍणत जानकार| द| जाये । कै से ब¯ चे Îनरोग रह ? यह बाल Íव7ान लेखन का Íवषय
हो सकता है ।
- - - -रामदc त रामदc त रामदc त रामदc त Îतवार| Îतवार| Îतवार| Îतवार| ‘अजेय अजेय अजेय अजेय’







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लोक Í9य वै7ाÎनक ले ख क| सरं चना लोक Í9य वै7ाÎनक ले ख क| सरं चना लोक Í9य वै7ाÎनक ले ख क| सरं चना लोक Í9य वै7ाÎनक ले ख क| सरं चना

शीष क शीष क शीष क शीष क
- छोटा व 1प8
- आकष क
- Íवषय के अनFप ु
- 9काशन के 1तर के अनFप ु

आरं भ आरं भ आरं भ आरं भ
- चार से छह वा4य
- 1प8
- Íवषय के 9Îत उcसकता ु जगाता
- Íवषय को संHेप म जगाता

पÍरचय पÍरचय पÍरचय पÍरचय
- घटना
- चlकाने वाले आंकड़े
- उñ कÍवता
- आगे पढ़ने क| उcसकता जगाता ु
- भÍव*य का T°य

Íवषय व1त Íवषय व1त Íवषय व1त Íवषय व1तु ु ु ु
- छोटे पेरा0ाफ
- भल| भांÎत Hमब@ से ¯यवि1थत
- आंकड़े सÍहत
- ÷ोत का उ~लेख

उपसंहार उपसंहार उपसंहार उपसंहार
- भावी Íदशा
- संभावनाय
- 9भाव आÍद

इ इइ इ० ०० ०मो मो मो मो० ०० ०डी डी डी डी० ०० ०Îतवार| Îतवार| Îतवार| Îतवार|


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Íवषय का चनाव कै से कर Íवषय का चनाव कै से कर Íवषय का चनाव कै से कर Íवषय का चनाव कै से कर
ु ुु ु


ताc का ताc का ताc का ताc काÎलक महc व Îलक महc व Îलक महc व Îलक महc व का Íवषय का Íवषय का Íवषय का Íवषय
-घटनाऐं
-आपदाऐं
-तc परता आव° यक
-संपादक से संपक आव° यक
-डेडलाइन
मौसमी Íवषय मौसमी Íवषय मौसमी Íवषय मौसमी Íवषय
- -- -गम| ,सद| बरसात आÍद से संबंÎधत
-मौसम फल व सि«जयां
-मौसम उपयोग क| व1 तुऐं
चÎच त Íवषय चÎच त Íवषय चÎच त Íवषय चÎच त Íवषय
-पयावरण
-व7 य जीव संरHण
-इं फोमशन टे 4 नो लॉजी
-मोटर वाहन
-बायो टे 4 नोलॉजी
-अं तÍरH अ7 वे षण
-1 वा1 ³ य 9ौ²ोÎगक| रोग Îनदान
-आयवद

वष गां ठ वष गां ठ वष गां ठ वष गां ठ , ,, ,जयं Îतयॉ जयं Îतयॉ जयं Îतयॉ जयं Îतयॉ
ं ं ं ं
, ,, ,शताि«दयां शताि«दयां शताि«दयां शताि«दयां
- - - - घटनाऐं
-वै7ाÎनक
-समय सीमा
Íवशेष Íदवस Íवशेष Íदवस Íवशेष Íदवस Íवशेष Íदवस
-रा* ç|य
-अं तरा* ç|य
-समय सीमा

सदाबहार Íवषय सदाबहार Íवषय सदाबहार Íवषय सदाबहार Íवषय
-हमारा शर|र
-अनौखे पे ड़ पौधे
-ÍवÎच³ जीव ज7 तु
-घरे ल उपकरण व साजो सामान ू
-पदाथ
-धरती
-सौर मंडल आÍद
-आÍव* कार तथा आÍव* कारक

Íव7ान समाचार व झलÍकयां Íव7ान समाचार व झलÍकयां Íव7ान समाचार व झलÍकयां Íव7ान समाचार व झलÍकयां
- - - -रोचकता आव° यकता
-रा* ç|य व अं तरा* ç|य

सं1 था सं1 था सं1 था सं1 थान नन न , ,, ,9योगशालाएं आÍद वै7ाÎनक 9योगशालाएं आÍद वै7ाÎनक 9योगशालाएं आÍद वै7ाÎनक 9योगशालाएं आÍद वै7ाÎनक
महc व महc व महc व महc व के के 7 5 के के 7 5 के के 7 5 के के 7 5
- 9चीन
-आधÎनक ु
-सं0हालय


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CHANDIGARH BHASKAR OF THE DAINIK BHASKAR
NOVEMBER 12, 2002

सी सी सी सी० ०० ०एस एस एस एस० ०० ०आई आई आई आई० ०० ०ओ ओओ ओ० ०० ० को çे Îनं ग क| को çे Îनं ग क| को çे Îनं ग क| को çे Îनं ग क| िज+ मे िज+ मे िज+ मे िज+ मे दार| दार| दार| दार|

भा1 क भा1 क भा1 क भा1 कर समाचार सेवा र समाचार सेवा र समाचार सेवा र समाचार सेवा

चंडीगढ़ , 11 नव+ बर । दे श के हर िजले के अ1 पताल के 1 टाफ को वहां क| बायो-मेÍडकल
मशीन| क| सार-संभाल का 9ÎशHण दे ने के Îलए Íडपाट म ट ऑफ सा(स एंड टै 4 नोलॉजी
(डीoएसoट|o)ने क5|य वै 7ाÎनक उपकरण सं 1 थान को िज+ मेदार| सlपी है । दो से तीन साल
म परे होने वाले इस 9ो0ाम म सीएसआईओ के इं 1 Ç4 ट ू
स दे श के कोने-कोने म जाकर
9ÎशHण दगे ।

डीoएसoट|0 के डाये 4 टर डॉ० आई० बी० Îसं ह० ने बताया Íक इस 9ो0ाम से परे दे श के है ~ थ


के यर Îस1 टम को लाभ होगा । उ7 होने कहा Íक इं 1]मे टे शन न के वल बीमार| क| पहचान के
Îलए बि~क उसके Îनदान के Îलए भी जFर| हो गया है । अ4 सर दे खा गया है Íक मशीन|
को ठ|क करने के Îलए लोग| क| कमी होने के कारण ए4 स -रे ,अ~ çा साउं ड और ईसीजी
जै सी आम मशीन भी खराब पड़ी रहती है । डॉ .Îसं ह ने कहा Íक माच से शF हए इस


9ो0ाम म हर अ1 प ताल के 25लोग| को 9ÎशÍHत Íकया जाएगा । अब तक Íद~ ल| म तीन ,
गािजयाबाद मे एक ,Îशमला म एक और रोहतक म एक 9ो0ाम Íकया गया है । çे Îनं ग
9ो0ाम दो ह9ते का होता है । िजसम स4 श न मशीन ,1 पे 4 çोफोटोमीटर ,ईसीजी ,
ऑ¯ थे~ मो1 कोप ,माइHो1 कोप ,ए4 स -रे मशीन आÍद को ठ|क करना Îसखाया जाएगा ।
सीएसआईओ म ऐसे ह| एक çे Îनं ग 9ो0ाम का उदघाटन करते हए पीजीआई के 9ोफे सर

जे.डी.Íवग ने कहा Íक इस çे Îनं ग 9ो0ाम से अ1 पताल| के 1 टाफ को मशीन| पर काम करने
म आसानी रहे गी और इससे आगे चलकर उनका काम बहत आसान हो जाएगा । इससे

पहले सीएसआईओ के डायरे 4 टर डॉ .आर.पी.वाजपे यी ने çे Îनं ग 9ो0ाम म आए लोग| को
सीएसआईओ क| ÍवÎभ7 न गÎतÍवÎधय| क| जानकार| द| । उ7 ह|ने कहा Íक सीएसआईओ के
30साल के अनभव को दे खते हए ह| डीएसट| ने उसे इस çे Îनं ग 9ो0ाम क| िज+ मे


दार| सlपी
है । 9ो0ाम को ऑÍड नेटर मोहाना राममÎत ने 9ो0ाम क| जानकार| दे ते हए बताया Íक


9ैि4टकल çे Îनं ग के Îलए पांच-पांच के समह| म काम Íकया जाए
ू गा ।



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वै7ाÎनक| वै7ाÎनक| वै7ाÎनक| वै7ाÎनक| क| सामािजक भÎमका क| सामािजक भÎमका क| सामािजक भÎमका क| सामािजक भÎमका
ू ूू ू

§ारा
आई० बी० Îसं ह०


Íव7ान को एक अथ पण Fप म पÍरभाÍषत करना कÍठन है । Íव7ान का Íवशेषता सीधा संबंध ू
9ौ²ोÎगक Íवकास से है । Íव7ान जो हमारे चार| ओर Íदखाई दे ता है और हम जो कछ करते है

उसके बारे म सामा7 य ¯ यÍñ के मि1त* क म इसका कोई अÎधक महc व नह|ं है । अत :वै7ाÎनक|
से सदे व यह आशा क| जाती है Íक दे श के 9ौ²ोÎगक Íवकास के Îलए वह कायरत रहते ह ।
सामा7 F ¯ यÍñ के मन म यह धारणा Íव7ान के बारे म बनी हई है Íक यह Íवषय के वल ÍवÎश* ट


वग के लोग| के Îलए है , जो 9योगशालाओं म अनेक 9कार के जÍटल उपकरण| §ारा Íकसी वै7ाÎनक
Îस@ा7 त को 9ÎतपाÍदत करने उनके जांचने तथा Îनर|Hण| ,एवम पर|Hण| तथा इनका कारण तथा
हल खोजने म ¯ य1 त रखते ह । समाज के दÎलत तथा पीÍड़त वग के लाग| को इसम भागीदार| का
अÎभ9ाय नह|ं है ,4 य|Íक वह इस Hे³ म अनसं धान तथा Íवकास के Hे³ म काम करने म तथा ु
उ¯ च पद| पर आसीन होने म सHम नह|ं ह । यह Íकतना खोखला अंध Íव° वास है । यह एक
सामािजक Íवड+ बना है जो Íक संसार के अ7 य दे श| म नह|ं Îमलती है Íक अमक वग को Íव7ान ु
तथा तकनीक के Hे³ म उ¯ च पद| म अवसर अवF@ है । यह सÍवधान क| धारा ) 4 ( 16 के मलभत ू ू
अÎधकार| के भी ÍवF@ है । अं0ेज| क| सोच भारतीय| के Îलए इन Hे³| म ऐसी ह| थी िजससे
उनका अÎधपc य बना रह । वा1 तव म ,Íव7ान एक सोचने क| प@Îत है िजसम 9योग| §ारा
Îनर|Hण ,पर|Hण Íव° ले षण के आधार पर Íकसी भी Îस@ा7 त को सc याÍपत Íकया जाता है और यह
वै7ाÎनक Îस@ा7 त| §ारा Îस@ हो गया है Íक संसार म Íकसी भी वग का ¯ यÍñ उसका 9योग करने
पर एक ह| पÍरणाम पर पंहचेगा । Íव7ान Íकसी वग Íवशेष को इसे 9ÎतपाÍदत करने क| अनमÎत



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नह| 9दान करता है ,िजसका अथ है Íक सभी वग क| पण भागीदार| दे ना और यह यह के वल ू
जनसंE या के आधार पर ह| हो सकती है । Íव7ान का मE य ु उ£ेश 9माÍणत आधार पर त³ य| के
अनभव का वण न करना है जो Íक यथासंभव वा1 त ु Íवक ,सरल एवं स+ पूण है । Íव7ान तथा
वै7ाÎनक चीज| को सदै व परखकर ,दे खकर उसके पÍरणाम का आधार 9ा¯ त करके पर| तरह से ू
समझने के बाद ह| Íकसी Îस@ा7 त को 9ÎतपाÍदत करते है । इस 9कार Íव7ान को अपनाने पर कोई
भी ¯ यÍñ तक पण ू ,वै7ाÎनक सोच §ारा ¯ यवि1थत Fप से पÍरपण होता है तथा उसके 1 व ू भाव म
नHता ,सौ+यता ,ÍवनHता और ईमानदार| और स¯ चाई उजागर करने का संक~ प होता है । वह
कपोल - कि~पत कहाÎनयॉ तथा धम एवं समाज म ¯ या

¯ त अंध Íव° वास| पर Íव° वास नह|ं करता है ।
जब तक Íक वह Íकसी त³ य को वै7ाÎनक प@Îत §ारा उसे

9माÍणत नह|ं कर लेता है । संसार म अंधÍव° वास को ख़cम करके वै 7ाÎनक सोच व TÍ8कोण
महामानव गौतम ब@ ने 9ÎतपाÍदम Íकया Íकया था । ब@ ने कहा था Íक ु ु ‘Íकसी Îस@ा7 त पर
इसÎलए Íव° वास मत करो Íक त+ह ु वैसा बताया गया है ’ - Íक7 तु उÎचत पर|Hण और Íव° ले षण के
बाद जो क~ याणकार| लगे उस पर भरोसा करो और अटल रहो’ उस समय Íव7ान पर Íकसी एक
वग Íवशेष का अÎधपc य नह|ं था । आज भी िजन Hे³| म दÎलत| को उनक| भागीदार| उ¯ च पद|
पर Îमल| है । हम उस Hे³ म 1 वावल+ बी हो गए है । जैसे कÍष तथा खा² Hे³ उनम से एक है ।

Íव7ान के िजन Hे³| से उनको वंÎचत Íकया गया है उनमे अभी भी हम Íवदे शी तकनीक का
महताज है । ु

भारत म अंधÍव° वास 39कार से ¯ या¯ त है :-

1. धाÎम क अंधÍव° वास
2. सामािजक अंधÍव° वास, व

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3. वै7ाÎनक सोच और अंधÍव° वास ।

इनके §ारा दे श गलाम हआ । समाज के एक वग को वंÎचत Íकया और दे श क| 9गÎत म बाधा ु

आई ,वै7ाÎनक सोच के बावजद हम वषा के ू Îलए हवन ,प³ 9ाÎB के Îलए य7 ु ,वै7ाÎनक पर|Hण|
के Îलए नाÍरयल तोडना ,पजा अच ना करना ू ,उदघाटन के लए शभ घड़ी का इ7 त ु जार भी एक
वै7ाÎनक सोच का अं धÍव° वास का दास होना हा1 या9द लगता है ।वै7ाÎनक| को बाबाओं के
चमc कार ,जादू -टोना इc याÍद क| पोल खोलकर समाज म ¯ या¯ त अंधकार| को दर करना चा ू Íहए ।
वै7ाÎनक| §ारा वै7ाÎनक सोच के Îलए जागFकता ,9चार-9सार आव° यक है । तथा समाज के हर
वग क| भीगीदार| हर 1 तर पर आव° यक है ,यह| उनक| स¯ ची सामािजक भÎमका होगी । ू

9ो 9ो 9ो 9ो० ०० ० आई आई आई आई० ०० ० बी बी बी बी० ०० ० Îसं ह Îसं ह Îसं ह Îसं ह


आई० बी० Îसं ह० ,9धान वै7ाÎनक अÎधकार| ,Íव7ान और 9ौ²ोÎगक| Íवभाग ,टै 4 नालोजी भवन ,नया महरौल| माग ,नई
Íद~ ल| - 110016 (यहां पर ¯ य4 त Íकए गए Íवचार ¯ यÍñगत ह)























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Íबजल| Íबजल| Íबजल| Íबजल| क| क| क| क| ¯यथा ¯यथा ¯यथा ¯यथा
अपने अपने अपने अपने 9दे श 9दे श 9दे श 9दे श उôर उôर उôर उôर 9दे श 9दे श 9दे श 9दे श म मम म ?


इन Íदन| पि°म उôर 9दे श म सबसे 5यादा Íबजल| चोर| भी होती है , इन दोन| शहर| म हर घर म एक
कारखाना है , यह सार| Íबजल| तकर|बन चोर| करके जलाई जाती है . इन इलाको म कारखान| का आलम यह है
क| एक गल| म िजतने घर है उतने ह| कारखाने है और यह बि1तयां इतनी घनी आबाद| वाल| है के यहाँ पर
Íबजल| वाले जाने से घबराते है , उ7ह सब पता है क| कहाँ पर Íकतना लोड है और कहाँ 4या होता है लेÍकन वो
लोग कोई काय वाह| नह| करते ह ।

कानपर ु म तो बहत

बरा ु हाल है यहाँ पर लोगो ने 25 - 25 साल से Íबजल| का Íबल नह| Íदया है लोगो पर
Íबजल| Íवभाग का लाखो ³पया बकाया है , अभी कछ

मह|नो पहले क| बात है कानपर ु के अनवरगंज इलाके म
çां1फोमर फक ू गया था तो वहां के लोगो ने बहत

हं गामा Íकया जब जे.ई .आया तो उसने कहा क| इस इलाके के
Íकसी एक घर का Íपछले एक साल म जमा Íबजल| का Íबल आप मझे ु Íदखा दो म आज ह| यह çां1फोमर बदल
दगा ू ँ चाहे मेर| नौकर| खतरे म आ जाए तो वहां पर Íकसी के पास Íबल नह| Îनकला. आप लोग अंदाजा लगा
सकते है के रोज़ Íबजल| Íवभाग को Íकतने क| चपत लग रह| है ? इस चोर| को रोकने का कोई तर|का है ?

म आपको बताना चाहता ह

ँ क| मेरे एक दो1त ने घर के Îनमाण के समय हर जगह Íबजल| के ब~ब एवं
¯लग-साके ट लगवाये थे. यह सोच कर Íक हर जगह Íबजल|/रोशनी क| सÍवधा ु होनी चाÍहये इस कारण अके ले
बैठक म तीन Çयबलाईट ू एवं दो सीएफएल ह .सादा 9यज ू के बदले ÎमÎनचर सÍक ट ñेकर, और Íबजल| के
ल|के ज से बचाव के Îलये 5000 ³पये का ईएल बीसी भी लगवा रखा है । इ7वट र भी लगवा रखा है अत :आठ
दस घंटे Íबजल| न Îमले तो कोई फरक नह|ं पडता .Íपछले Íदन| सबह ु Íबजल| गई तो रात तक न आई .पावर


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कट तो चलता रहता है , पर कोई फरक नह|ं पडा, इ7वट र जो था .शाम को इ7वट र भी जवाब दे गया लेÍकन
“पावर -कट” खतम न हआ



लेÍकन जब रात को अडोस पडोस म बÍôयां जलने लगीं तब खटका हआ

Íक घर Íबजल| 4य| नह|ं है .घर के
अंदर के सारे ÎमÎनएचर सÍक ट-ñेकर एक एक करके जांचे गये . 9यज ू के बदले ये महं गे उपकरण इसÎलये
लगवाये गये थे Íक बार बार 9यज ू के तार न बदलना पडे । पर सब कछ

सह| था लेÍकन Íबजल| नह|ं थी, लगा
Íक अब Íबजल| Íडपाट म ट को फोन लगाना पडे गा .वे लोग तो अपनी मज| के माÎलक है , पता नह|ं कब आय ।
अचानक उसे याद आया क| बाहर मीटर के नीच एक 9यज ू है । Íबजल| क| वायÍरं ग म कल

Îमला कर एक
स1ता उपकरण था और वह था यह 9यज ू .दौड कर उसे दे खा तो तो सब कछ

सह| लगा .लेÍकन उसे Îनकाल
कर दे खा तो पता चला Íक तार जला हआ

है । हजार| ³पये क| वायÍरं ग, दस हजार| ³पये के सरHा ु उपकरण,
इतने का इ7वट र — लेÍकन महज एक पांच पैसे के तार के Íपघलने पर सब बेकार हो गया था उस Íदन ।

इस तरह क| गलÎतयाँ हम अपनी िज7दगी म भी करते रहते है 4य|Íक हमने Íव7ान को अपने से बहत

दरू कर
रखा है , बस उपभोñावाद| बन कर इ1तेमाल करते रहते ह, िजसक| वजह से हम परे शानी झेलनी पड़ती है ।
अकसर हम अपने जीवन क| बडी बडी बात| के कारण अपने आप को बडी तस~ल| दे ते ह । यह
भलू जाते ह Íक कई बार “असल| रस” बहत

छोट| सी बात| म छपा ु होता है । उदाहरण के Îलये , हम
म से कई लोग बहत

कछ

यो¹यता रखते ह , लेÍकन एक छोट| सी बात – अनशासन ु – क| कमी के
कारण बाक| सब कछ

(धन-धा7य,पढाई, ओहदा, सअवसर ु ( बेकार हो जाते ह । इसी तरह हमार| िजंदगी
सौ ि1वच| पर नह|ं Íटक| हई

है , Íबजल| गल ु हो जाती है , महज तार के एक बे कार से लगने वाले टकडे ु
के कारण उसी तरह हमारा जीवन भी बेकार है बगै र Íव7ान के । हम सभी लोग उôर 9दे श म Íबजल| को
Íदन-रात रोते रहते है , बलंदशहर ु म भी Íबजल| क| बर| ु हालत है और इस हालत के Îलए हम सभी खद ु
िज+मेदार ह , सी० ऍफ़० ल० का हम इ1तमाल नह|ं करते है , 4य|Íक वह महं गा होता है , एल०इ० डी० क|
तो बात ह| छोड़ो, आने वाले Íदनो म Íबजल| Íबल म जो बचत होगी उससे सी एफ एल खर|दने म जो अÎतÍरñ

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¯यय आप करे गे वह सहज ह| वसलू हो जाये गा , +े त , कल

रोशनी Îमलेगी , कमरे का तापमान नह| बढ़े गा ।
सीएफएल ब~ब परं परागत ब~ब क| तलना ु म पाँच गणा ु 9काश दे ता है ।सीएफएल सामा7य ब~ब से आठ गणा ु
अÎधक Íटकाउ होते है । यÍद हम 60 वाट के साधारण ब~ब के 1थान पर, 15वाट का कॉ+पै4ट 9लरे से7ट ू
लाइट ब~ब का उपयोग करते ह तो हम 9Îत घंटा 45 वाट ऊजा क| बचत कर सकते ह। इस 9कार, हम 9Îत
माह 11 यÎनट ू Íबजल| क| बचत कर सकते ह . हाँ एक बात ²यान रख ,जब भी सीएफएल खराब हो जाये तो
उसे जमीन म Íबना काँच तोड़े गड़ा द , 4योÍक इसम मरकर| होता है जो वातावरण व 1वा1³य के Îलये
द*9भावी ु होता है । इसी तरह 40 वाट क| Çयब ू लाइट क| जगह उसी ÍफÍटंग म 36 वाट क| Çयबराड ू लगा ल
4य|Íक बद ूँ बद से ूँ घड़ा भरता है ।

आज के Íबजल| Íवतरण पÍरT°य म अगले 15 – 20 वष| तक Íबजल| क| सम1या पर| ू तरह हल होती नह| Íदखती
सÍवधा ु हे तु लोग इनवट र , 1वयं के छोटे जनरे टर आÍद उपकरण लगाने को मजबरू ह Íबजल| के Hे³ म ,
9ÎतयोÎगcमक Íबजल| Íवतरण हे तु Îनिजकरण Íकया जा रहा है Íक7तु जब एकल 9दाता ह| सब जगह नह| पहं च


पाया है ,और मांग पर हर एक को तरत ु Íबजल| कने4शन व अनवरत Íबजल| सु लभ नह| करवा पा रहा है , तो यह
क~पना करना Íक Íबजल| Íवतरण का Hे³ मोनोपाल| एÞड Íरि1ç4टे ड çे ड 9ैि4टस ए4ट के अंतग त स¯चे 1वFप
म लाया जा सके गा , व उपभोñा को यह अÎधकार होगा Íक वह Íकससे Íबजल| खर|दे , सै@ांÎतक सोच मा³ लगती है
आज के पÍरT°य म , Íबजल| Íवतरण कं पÎनय| पर राजनेता 9ाÍफट कमाने के Îलये दबाव बना रहे ह , एवं Íबजल|
Íवतरण को को सामािजक Íवकास के Hे³ क| अवधारणा से अलग हटकर ¯यवसाÎयक Hे³ व Îनजीकरण के च°म
से दे खा जा रहा है . ऐसे समय म मेरा सझाव ु तो यह है Íक Íवतरण कं पÎनय| को Í9Îमयम Íबजल| Íवतरण 9णाल|
ÍवकÎसत करना चाÍहये जो 7यादा पैसा दे गा उसे अनवरत Íबजल| तो Îमलेगी . पीÍकग ं अवस म सHम लोग इस
Í9Îमयम Íबजल| Íवतरण 9णाल| से Íबजल| खर|द सक गे इससे Íबजल| चोर| पर Îनयं ³ण हो सके गा
हमार| ला परवाह| से दे श म Íबजल| के दाम बेÍहसाब बढ़ गे हमार| लापरवाह|
और Íफ़ज़लू खच| इस तरह है क| हमार| सोचने समझने के शÍñ ह| बंद हो गई है , cयोहार| के समय आपने


Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 62



नोÍटस Íकया ? 7यादातर पंडाल| म सजावट के नाम पर Íबजल| क| चकाचlध ह| है डीजे का शोर
है हर शहर क1बे गाँव म ढ़े र| उcसव आयोजन सÎमÎतयां है , खबू Íबजल| जल रह| है , पर इस
सजावट के Îलये अ1थाई Íव²तु कने4शन Íकतने Îलये गये ह ? मतलब साफ है Íबजल| चोर| को
हम सबने सामािजक मा7यता दे रखी है ?

पराना समय याद क|जीये ु , दादा जी या नाना जी से पÎछये ू , पहले जब इतनी Íबजल| क|
जगमगाहट नह| होती थी, तब भी तो मेले होते थे । तब कै से सजाये जाते थे पंडाल ? शायद तब पजा ू
के ÍवÎध Íवधान , ÷@ा आ1था अÎधक थी आम के पô| क| तोरण , पतंग के कागज से सजावट
होती थी । सां1कÎतक

आयोजन , कÍवस+मेलन , नcय

आÍद उcसव होते थे 4या आज Íबजल| क|
कमी को दे खते हये

4या हम हमारे समाज और सरकार को एक बार Íफर दगा ु पजा ू , मोहर म ,
ÍHसमस, 7यू इयर , गणे शोcसव आÍद आयोजन| म Íबजल| के Íफजलू उपयोग पर , तथा आयोजन
म सजावट व आयोजन के 1वFप पर Íवचार मंथन नह|ं करना चाÍहये ?

म आपको बता दे ना चाहता ह

ँ Íबजल| चोर| आने वाले समय म बीते कल क| बात हो जाएगी 4योÍक ज~द| ह|
Íवतरण क+पÎनयाँ नई Íदशाय| म काम कर रह|ं ह , और इस Íदशा म Íव7ान पर| ू तरह से सहायक है
इस Íदशा म , म आपको बताना चाहगा

ँ क| गगल ु ने 1माट Î0ड क| Íदशा म अपने कदम बड़ा Îलये ह और अब
ग द Íबजल| कं पÎनय| के पाले म है । िज7ह नह| मालमू उ7ह बता दू ँ Íक ये 1माट Î0ड कं ¯यटर ू क| नह| बि~क
Íबजल| के Îलये है । दरअसल बात एक ऐसी 1माट र इले4ç|Îसट| Î0ड बनाने क| हो रह| है िजसका हकअप


कं ¯यटर ू तकनीक के साथ Íकया जा सके । अभी अमेÍरका म Íफलहाल सभी Î0ड एनालॉग ह और िज7ह धीरे
धीरे 1माट Î0ड म बदलने का ¯लान है ।





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यह बताएगा क| Íकतनी लागत आई Íबजल| क| ट|० वी० को परा ू Íदन खला ु छोड़ने पर ? और


आप तलना ु कर सकते ह, अपने पडोसी से अपनी Íबजल| क| खपत को,
Íकतना फक पड़े गा अपने ए०सी० को एक Íड0ी अÎधक ठं डा करने पर ?
कौन से मह|ने म जायदा Íबजल| इ1तेमाल क| है – कौन जायदा
Íबजल| खाता है , Í9ज या कछ

और ?
गगल का मानना है Íक उसका सो9टवेयर ये सब इनफोमसन आपको ु
दे गा और Íफर आप Íडसाइड कर सकते ह कहाँ 4या च ज करना है ।



कई Íबजल| कं पÎनयाँ धीरे धीरे 1माट मीटर लगा रह| ह, अब आप लोग सोच रहे ह|गे इसम गगल ु
कहाँ से Íफट बैठता है । दरअसल गगल ने एक ऐसा सो9ट ु वेयर बनाया है जो इन 1माट मीटर से
डॉटा लेकर आपके कं ¯यटर तक पहचाये गा। ये बताये गा Íक आपके घर म उपयोग ू

ँ म आने वाले Íकस
9ोड4ट म Íकतनी Íबजल| खच हो रह| है । इससे उन उपकरण| का पता आसानी से चल जाये गा


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िजनका बे हतर Íवक~प उपल«ध है और िजनको बदलने क| जFरत है । यह| नह| Íबजल| कं पÎनयाँ भी
चाहती ह Íक उनके पास Íबजल| के उपयोग के Îलये Variable Rate चाज करने का आ¯शन हो।
याÎन Íक Íडमांड के Íहसाब से रे ट कम बाक| ह|गे , ऐसे म गगल का ये सो9टवेयर बता सकता है Íक ु
Íकस उपकरण को Íकस समय चलाने म कम खच आता है 4य|Íक ये सब Íरयल टाईम होगा
इसÎलये तरं त ये सब पता चल सकता है । जैसे Íडश ु -वाशर रात को चलाने म कम खचा आये गा जब
Íबजल| क| Íडमांड कम होने लगती है और इसÎलये रे ट भी कम ह|गे ।

गगल का पॉवर मीटर ु , 1माट Î0ड सो9टवेयर है जो उपभोñाओं को उनके घर म होने वाल| Íबजल|
क| खपत क| Íडटे ल जानकार| दे गा। पावरमीटर एक म9त म उपल«ध होने वाल ओपन सोस ु
सो¯टवेयर होगा, इस Íदशा म और भी कई कं पÎनयाँ काम कर रह| ह।

Íफलहाल तो गगल अपने इस पावरमीटर क| टे ि1टं ग अपने कम चाÍरय| के बीच कर रहा है ु , Îसफ
गगल ह| नह| बि~क आ ु इबीएम भी इस Íदशा म कायरत है । Íफलहाल तो ये 9ोटोटाईप 9ोजे4ट है
और बहत ज~द हक|कत भी बन जाये गा तब तक 7यादा जानकार| के Îलये आ

प गगल क| पावर ु
साईट पर दे ख सकते ह।

वैसे तो पावर कं ज+पसन Íडवाइस माकट म उपल«ध ह िजससे आप यह| सब पता लगा सकते हो
लेÍकन उसे Íडवाइस ट Íडवाइस लगा के दे खना होता है । जबÍक गगल पावरमीटर घर के सभी ू ु
उपकरण के कं ज+पसन क| Íडिजटल इनोफशन को हमारे डे 1कटॉप पर उपल«ध कराये गा 1माट Î0ड
क| मदद से। यह सब सोच कर मझे ु लगता है , क| हम अपनी िज़7दगी म Íबजल|
का महcव के वल Íव7ान के ह| जÍरये जान सकत ह , मझे ु लगता है , क| िजन लोग| को Íबजल| चोर| करने क|
आदत है , उन लोग| को म9त ु म Íबजल| के Îलए बैग - पैक लटकाना होगा। म बताना चाहगा

ँ क| अमर|क|
वै7ाÎनक| ने एक ऐसा पीठ पर टांगने वाला झोला यानी बैग -पैक बनाया है जो Íक उसको पहने हये




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¯यÍñ के चलने से 7.4वॉट तक ऊजा पैदा कर सकता है और इसका 9योग छोटे छोटे उपकरण| को
चाज करने म Íकया जा सकता है जैसे Íक मोबाइल फोन, जी पी आर एस उपकरण, कै मरा इcयाÍद।
इस काम को अंजाम Íदया है पेनÎस~वेÎनया Íव+Íव²ालय और सामÍ5क जैÍवक| 9योगशाला के ु
वै7ाÎनक| ने।

वै7ाÎनक| के अनसार चलते समय Îनत+ब कर|ब ु 6 - 7 सेमी ऊपर नीचे होते ह और इस काम को
करने म कर|ब 17 जल 9Îत कदम के Íहसाब से ऊजा खच होती है और लगभग यह| ऊजा एक ू 36
Íकलो के बैगपैक को उठाने म लगती है । इस यांͳक ऊजा को Íबजल| म बदला जाता है इस बैग-
पैक म लगी कछ चीज| §ारा। चलते समय बैग

-पैक का 9े म का तो ि1थर रहता है लेÍकन इससे
लगा हआ ि19ंग| से जड़ा हआ एक भार वाला ड«बा ऊपर नीचे होता रहता है और इसके ऊपर नीचे
ु ु

होने से इसके साथ जड़ा एक दांत| वाला रै क भी ऊपर नीचे होता है ु , जो Íक जेने रे टर म लगे हये

एक गीयर को चलाता है िजससे Íक Íव²ु त ऊजा उcप7न होती है ।


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उ+मीद करता ह

ँ, क| आप सब लोग Íबजल| के §ारा Íव7ान क| मÍहमा को समझेग और उसका भरपरू
उपयोग अपने जीवन संवारने म लगाएँगे, नह|ं तो जीवन से Íबजल| बहत

दरू चल| जाये गी, इसके
महcव को समझ, यह कोई कला या साÍहcय नह|ं है । यह एक पण ू Íव7ान है और इसम कभी भी दो
और दो पाँच नह|ं होते है , के वल चार होत ह । तो आओ आज
से ह| 9ण करे क| हम अपनी िज़7दगी म Íव7ान के इस अनठे ू उपहार का महcव समझेग और सावधानी
बरत गे तथा Íबजल| चोर| से तौबा कर गे और दसरे ु लोग| को भी इस बार म जाग³ñ कर गे तथा
Íव7ान का समाज म भरपर ू संचारण कर ग ।


इं िजÎनयर इं िजÎनयर इं िजÎनयर इं िजÎनयर अÎनल कमार अÎनल कमार अÎनल कमार अÎनल कमार
ु ु ु ु

वाइस 9ेÎसड ट, ए7फोस म ट, Íरलायंस पॉवर
ÎलÎमटे ड, बी०एस०ई०एस०, नई Íद~ल|













*यह Íवचार ले खक के Îनजी Íवचार है एवं इसका मं³ालय/Íवभाग से कोई संबंध नह| है ।



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मछल| पालन एक लाभदायक ¯ य मछल| पालन एक लाभदायक ¯ य मछल| पालन एक लाभदायक ¯ य मछल| पालन एक लाभदायक ¯ यवसाय वसाय वसाय वसाय
§ारा
आई.बी .Îसं ह
9धान वै7ाÎनक अÎधकार|
Íव7ान और 9ौ²ोÎगक| Íवभाग
नई Íद~ ल| - 110016

वै7ाÎनक तर|क| से यह Îस@ हो गया है Íक मछल| पालन फसल| क| खे ती क| तलना म कई गना ु ु
आय 9दान करती है । यह बात कई सवHण| §ारा 9माÍणत क| जा चक| है Íक एक है 4 ट ु यर जल
Hे³ के तालाब से 9Îतवष साढ़े सात से दस हजार Íकलो0ाम मछल| का उc पादन होता है ,जबÍक
पर+ परागत तर|क| §ारा बड़ तालाब म ओसतन मछल| उc पादन लगभग 625, Íकलो0ाम 9Îत है 4 टयर
तक आंका गया है । भारत म मछल| उc पादन 1950 – 51 म 7 . 52 लाख टन से बढ़कर 1990 – 91 म
38 . 36 लाख टन हो गया जो Íपछले 40वष| म मछल| उc पादन क| तलना म ु 5गना से अÎधक है ु ।

मछल| पालन क| लागत मछल| पालन क| लागत मछल| पालन क| लागत मछल| पालन क| लागत

सबसे पहले हम यह जान ल Íक मछल| पालन म Íकतनी लागत लगती है । इन सब बात| का पता
लगाने के Îलए ÍवÎभ7 न मद| का « यौरा इस 9कार Íदया है : -

(अ अअ अ) आर+ भ आर+ भ आर+ भ आर+ भ म लगने वाल| म लगने वाल| म लगने वाल| म लगने वाल| पजी पजी पजी पजी ू ूू ूँ ँँ ँ
हम सभी को मालम है Íक अÎधकतर गांवो म 0ाम समाज के तालाब| क| थोड़ी मर+ म ू त करके
सघन या संरÍHत मछल| पालन Íकया जाता है । इन तालाब| को सधारने का खच तथा मछÎलय| ु
के 9ाकÎतक भोजन पर भी कम खच करना पड़ता है । इसके अलावा

,कछ अ7 य

चीज जैसे टोकर| ,


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फावड़ा ,कदाल

,ओर जाल आÍद खर|दने क| आव° यकता पड़ती है । साधारणत :यह सामान 5साल
तक काम म लाया जा सकता है । मछल| उc पादन 9ार+ भ करने से पहले एक बार महआ क| खल|

का 9योग Íकया जाता है । पर7 तु यÍद आव° यकता पड़े तो 3या 4वष बाद भी इसका इ1 तेमाल
कर सकते है । एक हे 4 टे यर के तालाब पर लागत के Fप म खच 500Fपये 9Îतवष तक आता है ।

(ब बब ब) मc 1 य मc 1 य मc 1 य मc 1 य बीज बीज बीज बीज , ,, ,खाद तथा खाद तथा खाद तथा खाद तथा परक परक परक परक ू ूू ू आहार का खच आहार का खच आहार का खच आहार का खच - -- -: :: :
यÍद तालाब का Hे³फल एक हे 4 टयर है तो अंगÎलका संचय ु 5000से 6000हजार के बीच म Íकया
जाना चाÍहए । अंगÎलकाओं का म~ य ु ू पÍरवहन खच के साथ 65Fपये 9Îत हजार क| दर से सभी
मc 1 य बीज के 7 5| पर उपल« ध रहती ह । 3या 49जाÎतय| क| मछÎलय| को संÎचत करने से 6
9जाÎतय| का संव@न अÎधक उपयोगी होती है । इसम खच तो लगभग उतना ह| होता है पर7 तु
लाभ अÎधक होता है ।

(स सस स) खाद एवं उव रक ¯ य खाद एवं उव रक ¯ य खाद एवं उव रक ¯ य खाद एवं उव रक ¯ यय यय य
एक हे 4 टयर तालाब के Îलए लगभग 100ि4वंटल या 20उनलप गाड़ी गोबर क| खाद पया¯ त पायी
गई है । इसका खचा 100Fपये 9Îत गाड़ी क| दर से वष भर म 2000F¯ ये आता है । इसके
अÎतÍर4 त यÍरया सपर फा1 फे ू ु ट और पोटाश का Îम÷ण लगभग 740Íकलो0ाम 9Îतवष के Íहसाब
से इ1 ते माल Íकया जाता है । इसका ओसतन म~ य ू लगभग 1000Fपये होता है । अत :खाद और
उव क| पर लगभग 3000Fपये 9Îत हे 4 टयर क| लागत आती है ।

(द दद द) मजदर| मजदर| मजदर| मजदर| ू ूू ू
तालाब क| समय-समय पर सफाई ,पानी भरना ,खाद व उव रक दे ने ,दे खभाल और रखवाल| इc याÍद
के Îलए माÎसक आय पर एक या दो मजदर रख Îलए जाते ह। इसके अलावा जाल चलाने के Îलए ू

कम से कम 2मछे र| को रखना भी आव° यक ह । अ7 य कषक मज

दर आव° य ू कता पड़ने पर रखते
ह।

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(ध धध ध) एक हे 4 टे एक हे 4 टे एक हे 4 टे एक हे 4 टे यर तालाब म मछल| पालन का लागत ¯ य यर तालाब म मछल| पालन का लागत ¯ य यर तालाब म मछल| पालन का लागत ¯ य यर तालाब म मछल| पालन का लागत ¯ यय यय य
³पय| म
1.
तालाब का Íकराया या लगान
300.00
2.
पानी भरने के 9ब7 ध का ¯ यय
2000.00
3.
जल|य घास मछल| व क|ट| क| सफाई का ¯ यय
500.00
4.
चने के 9योग पर ू
250.00
5.
गोबर क| खाद
1000.00
6. उव रक
1000.00
7. मछल| के बीज और यातायात
600.00
8. परक आहार पर ¯ य ू य (4ि4वंटल 9Îतमाह)
9600.00
9. मछे रे व रखवाल (3¯ यÍñय|) पर 9Îत
¯ यÍñ क| दर से 540Fपये 9Îतमाह
19440.00
10. अ7 य खच
310.00
कल लागत ¯ य


35000.00


(ज जज ज) एक हे 4 टे एक हे 4 टे एक हे 4 टे एक हे 4 टे यर तालाब म उc पा यर तालाब म उc पा यर तालाब म उc पा यर तालाब म उc पाÍदत Íदत Íदत Íदत 5,000Íकलो0ाम Íकलो0ाम Íकलो0ाम Íकलो0ाम
मछल| का ÍवHय म~ य ू 75000.00
(दर 15 Fपये 9Îत Íकलो0ाम)

(झ झझ झ) श@ लाभ श@ लाभ श@ लाभ श@ लाभ ु ु ु ु 75,000 – 35,000

ÍवHय म~ य ÍवHय म~ य ÍवHय म~ य ÍवHय म~ य ू ूू ू - -- -लागत म~ य लागत म~ य लागत म~ य लागत म~ य ू ूू ू ( (( ( 40,000.00 Fपये 9Îत हे 4 ये Fपये 9Îत हे 4 ये Fपये 9Îत हे 4 ये Fपये 9Îत हे 4 ये टर टर टर टर मछल| पालन के उपय4 त ु लागत
¯ यय और आय क| तलना करके हम इस पÍरणाम पर पहं चते है Íक मछल| पालन कछ सीमा ु



तक फसल उc पादन क| तलना म अÎधक लाभदायक होता है । उपल« ध ु आं कड़ो से 7ात होता है Íक
गेहं

,धान और दसरे अनाज| क| ÎमÎ÷त खेती से औसतन ू 7 – 8, हजार Fपये 9Îत हे 4 टे यर 9Îतवष
क| दर से लाभ 9ा¯ त हो पाता है ,जबÍक मछल| पालन का लाभ 20 – 40, हजार Fपये 9Îत हे 4 टे यर
और 9Îत वष हो जाता है ।





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मछल| पालन क| वष भर मछल| पालन क| वष भर मछल| पालन क| वष भर मछल| पालन क| वष भर
क| तकनी क| तकनी क| तकनी क| तकनी क| ÍHयाएं क| ÍHयाएं क| ÍHयाएं क| ÍHयाएं


मछल| पालन म अÎधकतम उत् पादन के Îलए वष भर म िजन तकनीक| ÍHयाओं को करना ,Íवशेष7| ने सबसे
अÎधक उपयक ु ् त और लाभ9द बताया है ,उसका Íववरण इस 9कार है : -

1. अ9ैल ,मई और जनू म क| जाने वाल| ÍHयाएं ।
(i) नये तालाब के Îलए स् थल चयन
(ii) तालाब क| Îम§ी क| रासाÎयनक पर|Hण
(iii) पराने ु तालाब| का सधार ु या नए तलाब| का Îनमाण
(iv) तालाब| के Îलए पानी का 9बंध
(v) प् लवक उत् पÍô हे तु चना ू ,गोबर एवं उव रक का 9योग करना

2. जलाई ु अगस् त और Îसतम् बर म क| जाने वाल| ÍHयाएं ।
(i) मत् स् य बीजउत् पादन के Îलए उत् 9ेÍरत 9जनन
(ii) मत् स् य बीज का तालाब म संचय
(iii) तालाब| म प् लवक| क| मा³ाएं बनाए रखना
(iv) कͳम

भोजन दे ना
(v) मछल| के स् वास् थ् य एवं वÍ@

दर का Îनर|Hण



3. अक् तबर ू ,नवम् बर और Íदसम् बर म क| जाने वाल| ÍHयाएं ।
(i) मछल| वÍ@

दर का Îनर|Hण
(ii) परक ू आहार दे ना
(iii) जल|य पौध| और क|ट| का Îनर|Hण और Îनयं ³ण
(iv) प् लवक| क| आवश् यकता के अनसार ु ,तालाब म खाद और उव रक का 9योग









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4. जनवर| , फरवर| और माच म क| जाने वाल| ÍHयाएं
(i) कामन का9 का 9जनन एवं इनके खीजो बीज| का तालाब म संचय
(ii) मछÎलय| क| वÍ@

के अनसार ु Îनकासी और ÍबH|
(iii) खाल| तालाब का पनÎनमाण ु या मरम् मत


मछल| पालन के रा* ç|य काय Hम क| 9गÎत पर एक TÍ8 : -

भारत जैसे दे श म मछल| पालन के उ़²ोग म Îन+ नÎलÍखत 9गÎत हो चक| ु है :-

1. मछल| पालन Íवकास एजे ि7सओं क| 365 संEया ह जोÍक मc1य बीज|, ऋण, मc1य
आहार आÍद अपेÍHत आदान| क| ¯यव1था करती ह और 9ÍHHण भी दे ती ह ।
2. Íवकास एजसी तालाब तथा पोखर के सधर के Îलए Íपछले वष| म ु कल रा7य सहायता

5000
Fपये 9Îत हे 4टयर क| दर से उपल«ध कराती ह, िजसम से 4000 Fपये पोखर Íवकास और
1000 Fपये आदान| के Îलए होता है ।
3. अब तक लगभग 30,000 हे 4टये र जल Hे³ म वै7ाÎनक सघन मछल| आरं भ Íकया जा चका ु
है ।
4. अभी तक लगभग 246 लाख हे 4टये र म सघन मछल| आर+भ Íकया जा चका है ु ।
5. मछल| पालन Íवकास एजेि7सओं §ारा 30,000 लोग| को सघन मछल| पालन के Îलए
9ÎशHण Íदया जा चका है ु ।
6. दे श म लगभग 44 हे άयां उपल«ध ह जहाँ मc1य बीज उपल«ध है ।
7. दे श म मc1य बीज उcपादन क| वÍ@ तीdता से हो रह|

है । यह वष 1989 – 90 म मc1य
बीज| का उcपादन 12 करोड़ 9ाई के Íरकाड 1तर को 9ाB हो चका है ु 1990 – 91 के दौरान
बीज का उcपादन 1230 करोड़ 9ाई रहा ।


*यह Íवचार ले खक के Îनजी Íवचार है एवं इसका मं³ालय/Íवभाग से कोई संबंध नह| है ।


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भारतीय कÍष भारतीय कÍष भारतीय कÍष भारतीय कÍष
ृ ृृ ृ
और जल और जल और जल और जल


प³वी के लगभग तीन चौथाई Íह1से पर Íव^व के महासागर| का अÎधकार है । संयñ
ृ ु राç के
अनमान| के अनसार प³वी पर जल क| कल मा³ा लग ु ु ृ ु
ミग 1400 ÎमÎलयन घन Íकलोमीटर है जो Íक
प³वी पर

3000 मीटर गहर| परत Íबछा दे ने के Îलए काफ| है । तथाÍप जल क| इस Íवशाल मा³ा म
1व¯छ जल का अनपात बहत कम है । प³वी पर उपल«ध सम0 ु


जल म से लगभग 2.7 9Îतशत जल
1व¯छ है िजसम से लगभग 75.2 9Îतशत जल Hवीय

Hे³| म जमा रहता है और 22.6 9Îतशत
भजल के Fप म Íव²मान है । शेष जल ू झील|, नÍदय|, वायमÞडल ु , नमी, मदा और वन1पÎत म मौजद
ृ ू
है । जल क| जो मा³ा उपभोग और अ7य 9योग| के Îलए व1ततः उपल«ध है ु , वह नÍदय|, झील| और
भजल म ू उपल«ध मा³ा का छोटा-सा Íह1सा है । इसÎलए जल संसाधन Íवकास और 9ब7ध क| बाबत
संकट इसÎलए उcप7न होता है 4य|Íक अÎधकांश जल उपभोग के Îलए उपल«ध नह|ं हो पाता और
दसरे इसका Íवषमतापण 1थाÎनक Íवतरण इसक| एक अ7य ÍवÎश8ता है । फलतः जल का ू ू महcव
1वीकार Íकया गया है और इसके Íकफायती 9योग तथा 9ब7ध पर अÎधक बल Íदया गया है ।

प³वी पर उपल«ध जल जल

-वै7ाÎनक चH के मा²यम से चलायमान है । अÎधकांश उपभोñाओं
जैसे Íक मन*य| ु , पशओं अथवा ु पौध| के Îलए जल के संचलन क| जFरत होती है । जल संसाधन| क|
गÎतशील और नवीकरणीय 9कÎत और इसके 9योग क| बार+बार जFरत को

TÍ8गत रखते हए यह

जFर| है Íक जल संसाधन| को उनक| 9वाह दर| के अनसार मापा जाए। इस 9 ु कार जल संसाधन| के
दो पहल ह। अÎधकांश Íवकासाcमक जFरत| के Îलए 9वाह के Fप म माÍपत गÎतशील ू संसाधन
अÎधक 9ासंÎगक ह । आरÍHत भÞडार क| ि1थर अथवा Îनयत 9कÎत और साथ ह|

जल क| मा³ा




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तथा जल Îनकाय| के Hे³ क| ल+बाई व मc1यपालन, नौ संचालन आÍद जैसे कछे क ÍHयाकलाप| के

Îलए भी 9ासंÎगक है । इन दोन| पH| पर नीचे चचा क| गई है ।
Îसं चाई का संसार

Íव^व म दे श -वार भौगोÎलक Hे³, कÍष

-यो¹य भÎम और Îसं Îचत ू Hे³ का Íव^ले षण करने पर ऐसा
पता चलता है Íक महा§ीप| के बीच सवाÎधक Íवशाल भौगोÎलक Hे³ अ9|का म ि1थत है जो Íक
Íव^व के भौगोÎलक Hे³ का लगभग 23 9Îतशत बैठता है । तथाÍप मा³ 21% भौगोÎलक Hे³ वाले
एÎशया (यएसएसआर के भतपव ू ू ू दे श| को छोड़कर) म Íव^व क| लगभग 32 9Îतशत कÍष

-यो¹य भÎम ू
है िजसके बाद उôर के 75|य अमर|का का 1थान आता है िजसम लगभग 20 9Îतशत कÍष

-यो¹य भÎम ू
है । अ9|का म Íव^व क| के वल 12% कÍष

-यो¹य भÎम है । यह ू दे खा गया है Íक Íव^व म Îसं Îचत Hे³
1994 म कÍष

-योगय भÎम का लग ू ミग 18.5 9Îतशत है । 1989 म Íव^व का 63% Îसं Îचत Hे³ एÎशया
म था जबÍक 1994 म इस आशय का 9Îतशत बढ़कर 64 9Îतशत तक पहं च गया। साथ ह|

1994 म
एÎशया क| 37 9Îतशत कÍष

-यो¹य भÎम क| सवाÎधक Íवशाल मा³ा है जो Íक एÎशया क| ू कÍष

-भÎम ू
का लगभग 39 9Îतशत बैठती है । के वल संयñ रा7य अमर|का ु ऐसा दे श है जहां भारत क| तलना ु म
अÎधक कÍष

-यो¹य भÎम ू है ।

0ामीण भारत म कÍष

व उससे जड़ी ु सहायक गÎतÍवÎधयाँ आज़ीÍवका का एक 9मख साधन है । हम ु
जैसे ह| कÍष

Hाि7त के यग म ु 9वेश करते ह तो पाते ह Íक सभी Hे ³| म Íदन -9ÎतÍदन नई खोज़
और आÍव*कार हो रहा है । वा1तव म , कÍष

का कोई Íवक~प नह| है ।

उपज तो लहलहाई थी श³ म । उसको हमारे नैसÎगक खाद| से बड़ा न कर ु , रसायन| से बड़ा Íकया
गया था। उपज नाजक हो गयी। हमारा परं परागत कÍषधन ु ृ
-गोबर, गोम³ का खाद ू उपयोग करने वाले
कछ रा7य| के Íकसान| क| जमीन बची ह। ले Íकन रसायन|

से बढ़ाए धा7य क|ड़े न खाएं इसÎलए


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Íफर से और रसायन| के फ¯वारे , गोÎलयां उन पर, उनके मलू म डाल| ग(। पÍरणाम? घातक क|ड़े , जंत ु
श³ म मरे ु , Íफर इ+यन होकर ऐसे लौटे Íक ू 2 वष म Îलए हए अÎधक उcपाद| का कमाया धन

एक -एक क|ड़ा मारने म जाना लगा। अÎत -कÍष क| यह एक और बÎल। मÍôका
ृ ृ
, जल के साथ -साथ
धा7य, फल और फल इन सब म ू रसायन भर गए। उ7ह खाकर हमारे ब¯चे जवानी म 9मे ह, अंधcव,
नैरा°य आÍद इनके Îशकार होने लगे। जबÍक इन रसायन| का उcपादन करने वाल| Íवदे शी कं पÎनयां
और उ7ह भारत म लाने वाले राजक|य ने ता, अÎधकार| सम@ होते गए।



अब इतनी सार| उपज इतने कम समय म एक ह| खेती से लेना हो तो जल? भारत क| 80 9Îतशत
कÍष पज 7य जल पर चलती थी। इसका अथ यह नह|ं था Íक भारत म

80 9Îतशत समय बाÍरश
Îगरती रहती थी। हमार| नÍदयां , उनके अनेकानेक कोन| तक पहं चे

, जलPोत, झरने , जीवंत झरन| से
बने तालाब और कप

, बाद म अनेक राजाओं §ारा बनाए हए कÞड


इन सबसे भारत म नै सÎग क प@Îत
से पज 7यजल संधारण तथा समÍ@

(Rainwater Conservation & Harvesting) होती थी। नÍदय| म
खनन, गंदे नाले, रसायन कं पÎनय| के Íवष भरे उcसज न इन सबसे हमार| नÍदयां Îसकड़ती गयीं।



जंगल|, पवत| को काट-काट कर कारखाने, घर, मॉ~स बनाने म वषा के बादल कम होते गए, कप

,
तालाब, कÞड पाट Íदए गए और Íकसान| को मजबर Íकया गया Íक वे बोअर
ु ू बेल बनाए, उसके Îलए
कज ल । जमीन से धरती माता के सहे जे हए Pोत| से Hर

ू र|Îत से महाभयं कर 9माण म इतना जल
खींचा गया Íक, अब कई बार धरती ऐसी कांप उठती है Íक क¯छ से लेकर है ती तक जमीन Íहल
जाती है । इतना कर के भी Íकसान गर|ब होता गया, ÍबचौÎलए अमीर !नेता अमीर और Íवदे शी
कं पÎनयां भी अमीर।

ये के वल कछ कारण ह

। कÍष Íवशेष7 कई ऐसे कारण जानते ह। अब

UNO ने यह वष (Bio-
Diversity Year) जैÍवक ÍवÍवधता वष घोÍषत Íकया है , जो हमारे Íकसान यग| से ु करते थे।


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अलग-अलग 9कार क| उपज लेकर जमीन, मÍôका को आराम और जीवन सôव दे ते

थे, सÍ5य खेती
से मÍôका क| उपजाऊ

ÍHया Íटकाते भी थे, बढ़ाते भी थे, इनसे पानी कम लगता था 4य|Íक, गोमय
के खाद पानी संधाÍरत करके रखते थे , गोम³ का ू Îछड़काव करके क|ड़ी भगायी जाती थी। धा7य, फल,
फल अÎधक मा³ा म और श@ आते ू ु थे। जो हम यग| से करते आए ु , वह| सब आज, Íफरं ग Íव²ापीठ|
के वै7ाÎनक कÍठन श«द| म , रं ग -Íबरं गे 9े जे7टे शन म बताने लगे ह, वैि+क उ*मीकरण, Climate
Change जैसी बात ब¯चे भी बोल रहे ह।

भÎमगत जल 1तर तेजी से Îगरता जा ू रहा है । दे श को अनाज का आयात लगातार करना पड़ रहा है ।
Îनि°त तौर पर भारतीय कÍष 1व1³य नह|ं

है । पर7त पण Îनराशा भी अनÎचत है । Íपछले ु ू ु कछ वष|

क| कई सफलताएं भी Íदखती ह। हमार| सबसे बड़ी उपलि«ध भÎम सधार रह| है । ू ु

1965 म अमर|का म पाल आÎल क ने एक प1तक 9काÎशत क| थी। उस ु समय अमर|का भारत को
भखमर| से बचने के Îलये गेहं उपल«ध करा रहा था ु

। आÎल क ने सझाव Íदया था Íक अमर|का को ु
यह सहायता ब7द कर दे नी चाÍहये । चंÍक ू , भारत क| जनसंEया इतनी ते जी से बढ़ रह| है Íक उसको
बचा पाना असंभव है । भारत जैसे असंभव दे श| को उनके हाल पर छोड़ दे ना चाÍहये और अमर|का को
अपना ²यान अ7य 1व1थ दे श| पर के ि75त करना चाÍहये । इस द³ह ि1थÎत से हम बच कर Îनकल ु
आए ह । खा²ा7न उcपादन म लगातार वÍ@ हई ह। जनसंEया के दोगना से अÎधक बढ़ने के बावजद
ृ ु
ु ू
9Îत ¯यÍñ खा²ा7न का घरे ल उcपादन ू 437 0ाम 9ÎतÍदन से बढ़कर 480 0ाम 9Îत Íदन हो गया है ।
इस महान उपलि«ध का Íवशेष ÷ेय 7यनतम म~य समथ न काय Hम को Íदया जाना चाÍहये ू ू , िजसके
कारण Íकसान के लाभ सरÍHत रहे और वह अÎधकाÎधक उcपादन करने को उcसक रहे ु ु ।

बढते जल संकट Íक इस घडी म सम1या पर ¯यापक Fप से अ²ययन करने पर यह| Îन*कष
Îनकलता है Íक अब समय आ गया है Íक हम य@ 1तर पर जल सम1या के Îनराकरण म लग ु


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जाएँ अ7यथा दे श म कÍष ह| नह|ं पीने और घरे ल काय| के साथ ह| उ²ोग के Îलए भी जल सलभ
ृ ू ु
नह|ं हो सके गा िजससे हÍरत HांÎत का तो कह|ं अता पता नह|ं रह जाये गा और दे श म अकाल जैसी
ि1थÎत उcप7न हो जाएगी तथा हमार| स¹यता और सं1कÎत का

भी वह| हP होगा जो Íक पहले
Íव+ ÍवEयात भारतीय स¹यता हड़¯पा, पि°म एÎशया Íक मैसोपोटे Îमया, बेबीलोन, सीÍरया, परÎसया,
म²य अमेÍरक| स¹यता का हआ था




Íवशाल Îसं ह Íदनकर Íवशाल Îसं ह Íदनकर Íवशाल Îसं ह Íदनकर Íवशाल Îसं ह Íदनकर

जल Íवशेष7 व सलाकार
से० Îन० कÎमशनर, (का० ए० ड०)
जल संसाधन मं³ालय, भारत सरकार, नई Íद~ल|



















*यह Íवचार ले खक के Îनजी Íवचार है एवं इसका मं³ालय/Íवभाग से कोई संबंध नह| है ।



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“भारत म बढ़ता कपोषण का संकट भारत म बढ़ता कपोषण का संकट भारत म बढ़ता कपोषण का संकट भारत म बढ़ता कपोषण का संकट
ु ुु ु
- - - -एक यH 9÷ एक यH 9÷ एक यH 9÷ एक यH 9÷
शीष 7यायपाÎलका के ह1तHे प क| आव°यकता शीष 7यायपाÎलका के ह1तHे प क| आव°यकता शीष 7यायपाÎलका के ह1तHे प क| आव°यकता शीष 7यायपाÎलका के ह1तHे प क| आव°यकता”

एक ओर जहाँ जनसंEया Íव1फोट से ततीया Íव+ 0Îसत है वहाँ दसर| ओर पौÍ8क संतÎलत भोजन
ृ ू ु
व श@ पेय जल क| Íदन ु -9ÎतÍदन बढ़ती सम1या गंभीर होती जा रह| ह । भारत एक Íवकासशील
राç होने के नाते इन सभी सम1याओ क| बढ़ती सम1याओ क| बढ़ती चनौती से दो चार ह ु ।

भारत एक Íवकाशील राç होने के नाते इन सभी सम1य| क| चनौती से दो ु चार ह । राçीय पÍरवार
1व1³य सवHण -3 क| Íरपोट (2005-06), क| अनसार तीन ु साल से कम उH के 4-6 9Îतशत ब¯चे
कम वजन के ह, 33 फ|सीद| िUय| और 28 फ|सीद|,मद| म पोषण का 1तर Îगरा हआपाया

गया है
। एक 9Îतशत गैर सरकार| संगठन "फोसज " §ारा हाल ह| म Íकये गए सवHण म पाया गया है , Íक
1998 से 2005-06 के म²य कपोषण 01त

ब¯चो क| संEया का 19.1 से बढकर 15.5 9Îतशत हो
गया वह| पांच वष| से कम उH के ब¯च| म रñा~पता (एने Îमया) 74.2 फ|सीद| से बढकर 79.2
फ|सीद| पहच गई

ँ । मजे क| बात यह है क| इस अवÎध म ÍवÎभ7न बाल पोषण पÍरयोजनाय| आÍद
म सरकार| आबंटन 2003-04 क| तलना म ु 2008-09 भी ि1थÎत भयावह बनी हई है

, संयñ राç ु क|
भी Íव+ भोजन काय Hम क| नवीनतम Íरपोट म भी कहा गया है । Íक अÎधकाशत: 0ामीण लोग
कपोषण का Îशकार बन रहे ह

। भारत म भखे ू रहने वाले लोग| क| तादाद बढ़ रह| है ।

भारत म बढती कपोषण क| दर Íकसी भी 9कार से दे श Íहत म अ¯छा संके त

नह|ं ह। कपोषण के

कारण जन-1वा1थ पर 9Îतकल

9भाव पड़ना Îनि°त है । क

पोषण से जहाँ मानÎसक एव


Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 78



शार|Íरक Íवकास बाÎधत होता है वह| ¯यÍñ म भार| कमी आ जाती है । पौÍ8क भोजन के आभाव से
शर|र म कै लोर|ज क| कमी से कमजोर| और वजन कम होता है , साथ ह| स+म पौÍ8क तïव ू माइHो-
7यç|एनÇस ु तïव जैसे आयोडीन, मैि7¹नÎसयम, कै ि~शयम, आयरन, आÍद के कमी से
कई गंभी Íक1म क| बीमार| होने का खतरा बनता है ; ÍवटाÎमनो क| कमी से भी अनेक रोग ज7म
ले सकते ह । कल

Îमला कर भारत म कपोषण

-ज7य रोग| के बढने , मcय
ृ ु और Íवकलांगता दर म
तेजी आने और साथ म ब¯च| के मानÎसक एव शार|Íरक Íवकास म कमी होने क| 9cयाशा है । यह
चनोती दे श के नीÎत ु - Îनधारको और राजनेताओ हे तु चनोती होने के अÎतÍरñ ु दे श के स+मखु एक
बड़ा जन 1व1³य स+ब7धी संकट भी ह िजसे समय रहते दर Íकया ू जाना चाÍहए शीष 9ाथÎमकताओ म
होनी चाÍहए।

कपोषण का एक

अ7य द*प ु Íरणाम भी है । कपोषण से पीÍडत ब¯च| म ख़ास

तौर पर दे खा गया है
Íक संHामक रोग| से बचाव के ट|के का वांÎछत सेरो-क7वज न नह|ं हो पता।

अ4सर दे खा गया है Íक पोÎलओ क| दवा क| " "" "दो दो दो दो बद बद बद बदू ूू ूँ ँँ ँ िजंदगी िजंदगी िजंदगी िजंदगी" "" " वाल| अने क बंदे ू पीकर भी सैकड़ो ब¯च| म
पोÎलओ का 9भाव हआ

पाया गया । एक ओर तो भारत क| Íवड+बना है Íक यंहा स+पण ट|काकरण ू
का 9Îतशत एन० एफ़० एच० एस० सवHण - 3 के अनसार ु कभी 20.5 9Îतशत से ऊपर नह|ं बढ़ सका
। खसरे का ट|काकरण लगभग 35 9Îतशत पर अटका हआ है



इसका सीधा मतलब यह| है Íक दे श के शत-9Îतशत नह|ं , तो भी आधे ब¯चे ह|
सह| Íक7तु ये सब Íटकाकरण के दायरे से बाहर है और इनमे वे रोग होने क| संभावना छोड द| गई है
िज7ह Íटका लगाकर पर| तरह से इन रोग| ू के 9Îत मजबत बनाया जा सकता था ू । जानलेवा छ (6)
ÍबमाÍरय| के Îलए 9Îतरोधक Hमता का Íवकास ट|काकरण का मु Eय उ£ेश है । पोÎलओ ,काल|



Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 79



खांसी, खसरा, Íड¯थेÍरया, टे टनस, और ट|० बी० के कारगर रोकथाम म ट|काकरण क| आव°यकता
Íकतनी है इसे बताना आव°यक नह|ं ।

Íक7तु कपोषण

के चलते ट|काकरण का समÎचत ु 9Îतफत न Îमलना वतमान क| एक बड़ी जÍटल चनौती ु है ।
ÎशHा के अÎधकार क| तरह ¯यÍñ को पौÍ8क भोजन Îमलना भी उसका अÎधकार है । संÍवधान क|
जीवन का अÎधकार भी सि+मÎलत Íकया जाना चाÍहए । सव|¯च 7यायालय
§ारा इस Hे³ म पहल Íकये जाने का भारतीय जनमानस 7यायपाÎलका क| उदाô महानायक|य पहल
से ह| इस कपो

षण क|,नाÍक यता समाB हो सके गी अ7यथा काय पाÎलका और ÍवधाÎयका इस यH 9÷ के
स+मखु अपना बौनापन ह| 9दÎश त करती रह गी । राç को िजस गंभीरता और 1प8ता से ब¯च|
और ¯य1को म कपोषण जैसी

भयावह चनौती का सामना करना है ु , दे श के सव|¯च 7यायलय से ह|
इसके समाधान क| कछ आशा बनती Íदखती है

। भारत के संÍवधान के अ7नछे दो ु 21 एव 39 म
इनका समाधान अ7तÎन Íहत है । मे र| 9ाथ ना है क| माननीय सव|¯च 7यायलय के माननीय मEय ु
7यायाधीश महोदय इस जनÍहत क| Íवषय पर यथायो¹य पहल करे ग । कपोषण के बढ

ते संकट का
यH 9÷ शायद तब तक अनôÍरत ु ह| रहे गा ।

डा डा डा डा० ०० ० ताÍरक ताÍरक ताÍरक ताÍरक वल| वल| वल| वल|
एम०बी०बी०स०, डी०सी०एच०, एम०डी०,
फ०स०स०प०, एफ०आई०एस०पी०सी० (यू०एस०ए०)
फ|जीशयन व बाल Íवशेष7
अल|गढ, उôर 9दे श – 202002.
*यह Íवचार ले खक के Îनजी Íवचार है एवं इसका मं³ालय/Íवभाग से कोई संबंध नह| है ।



Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 80



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Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 83


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Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 87


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Íहं द| Íहं द| Íहं द| Íहं द| प³कार| क| प³कार| क| प³कार| क| प³कार| क| पोज़ीशन पोज़ीशन पोज़ीशन पोज़ीशन

आज भी प³काÍरता ’Îमशनर| प³काÍरता’ या ’लोकक~याणी’ प³काÍरता’ तो शायद नह|ं रह| है । गलाकाट
9Îत1पqधा, ¯यवसायीकरण, अखबार| पर उ²ोगपÎतय| का क«जा, प³काÍरता के पीछे के Îछपे ÎनÍहत
1वाथ , अखबार| व पͳकाओं को रोब गाÎलब करने , फायदा उठाने, आÎथ क संसाधन| क| तरह 9योग करने,
राजनीÎत क| Íदशा व राजनेताओं को मनमाÍफक तर|के से साधने -बांधने क| आकांHा रखने , अखबार को
मा²यम बनाकर अपने 0प ु के Îलए आÎथ क लाभ लेने, ठे के , आबकार|, खनन, Îमल जैसे लाइसस हाÎसल
करने जैसे कcय

अब आम हो चले ह ।

Íहं द| प³कार| क| पोज़ीशन उस आम आदमी क| तरह होती है , जो अपने घरे लू बजट के Îलए, 1वतः उcप7न
हई

महं गाई को दोष ना दे कर अपने पव ज7म ू के Íक7ह|ं पाप| को इसके Îलए िज़+मेदार ठहराते ह . Íहं द|-
प³काÍरता का इÎतहास बताता है Íक शFआती ु दौर म लोग| ने कै से अपने घर के बतन बेचकर अख4ार Îनकाले
थे और बाद म कै से वे एक बड़े बतन-Îनयातक बन गए ? वे लोग Íबना खाए तो रह सकते थे, मगर अख4ार
Íबना Îनकाले नह|ं। Íहं द| के अख4ार पढ़ना तब आज क| ह| तरह बैकवड होने क| पहचान थी और लोग अख4ार
खदु ना खर|दकर चने या मंगफÎलयां ू बेचने वाल| के सौज7य से पढ़ Îलया करते थे। खदु को Íव§ान् मानने वाले
कछ

Íव§ान् तो यहां तक मानते ह Íक Íहं द| के अखबार| म रखकर Íदए गए ये चने या मंगफÎलयां ू तब Íहं द|-
प³काÍरता को एक नयी Íदशा दे रहे थे। इनका यह योगदान आज भी 7य| का cय| बरकरार है और अभी भी
Îसफ़ नयी Íदशाएं ह| दे ने म लगा हआ

है ।

Íहं द| का पहला अख4ार ‘ उôंग मातड ‘ जब Îनकाला गया, तब लोग| ने यह सोचा भी नह|ं होगा Íक आगे
चलकर Íहं द|-प³काÍरता का ह÷ 4या होगा ? उ7ह|ने यह क~पना भी नह|ं क| होगी Íक इसक| आड़ म ‘ 9ेस-
काड ‘ भी धड़~ले से चल Îनकल गे और उन लोग| को ज़ार| करने के काम आयगे, जो उ7ह अपनी दवाओं के


Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 89

Íव7ापन दे रहे ह और समाचार Îलखना तो अलग, उनको पढ़ पाना भी वे सह| ढं ग से नह|ं जानते ह|गे. Íहं द|
अखबार| के Íरपोट र या एडीटर प³काÍरता के 1त+भ नह|ं माने जायगे , बि~क ये वे लोग ह|गे , जो मदाना
ताक़त क| दवाइय| के Íव7ापन दे कर दे श को भरपरू सखी ु और ताक़तवर बनाने म लगे ह। Íहं द|-प³काÍरता को
एक नयी Íदशा दे कर वे आज भी उसक| दशा सधार ु रहे ह और जब तक उनके पास ‘ 9ेस काड ‘ ह , वे अपनी
तरफ से पर| ू कोÎशश कर गे Íक Íहं द|-प³काÍरता क| जो दशा है , वो सधर| ु रहे ।

हमसे कल कहा गया Íक ‘Íहं द|-प³काÍरता‘ पर ‘ पोज़ीशन ऑफ Íहं द| जन Îल7म ‘ Íवषय पर बोलने के Îलए
इं ि¹लश म एक 1पीच तैयार कर ल|िजये गा और उसे कल एक भ¯य समारोह म पढ़ना है आपको, तो हम खदु
को Íबना अचंÎभत Íदखाए, अचंÎभत रह गए. हम समझ गए Íक ये लोग इं ि¹लश जन Îल1ट ह और Íहं द|
जनाÎल1म क| ख़राब हो चक| ु पोज़ीशन पर मातमपस| ु क| र1म अदा करना चाहते ह। Íहं द|-प³काÍरता म
चाटकाÍरता ु का बहत

महïव है और इसी क| माबदौलत बहत

से लोग तो उन 1थान| पर पहं च

जाते ह , जहां Íक
उ7ह नह|ं होना चाÍहए था और िज7ह वहाँ बैठना चाÍहए था, वे वहाँ बैठे होते ह ,
जहां कोई शर|फ आदमी बैठना पसंद नह|ं करे गा, लेÍकन 4या कर , मज़बर| ू है Íहं द| के अख4ार म
काम करना है तो इतना तो बदा°त करना ह| पड़े गा. Íहं द| के प³कार को पैदा होने से पव ू ह| यह 7ान Îमल
जाता है Íक बेटे , Íहं द| से ¯यार करना है तो इतना तो झेलना ह| पड़े गा।

Íहं द| के Íकसी प³कार को अगर आप ²यान से दे ख , तो ऐसा लगेगा जैसे उसके अ7दर कछ

ऐसे भाव चल रहे
ह| Íक ” म इस दÎनया ु म 4य| आया, या आ ह| गया तो इस आने का मकसद 4या है या ऐसा आÍख़र कब तक
चलता रहे गा ? ” यह एक कड़वा सच है िजस शोषण के Íख़लाफ अ4सर Íहं द| के अख4ार Îनकलने शF ु हए

,
वह| अख4ार 9Îतभाओं का आÎथ क शोषण करने लग जाता है और Íफर वे 9Îतभाएं अपनी वेब साइट बनाकर
अपने घर क| इनकम म इज़ाफा करती ह। 4या कर , Íहं द| को इस Íहं द1तान ु म पढ़ना ह| Íकतने लोग चाहते ह
? जो पढ़ना चाहते ह , उनक| वो पोज़ीशन नह|ं Íक वे पढ़ सक । इसÎलए Íहं द| क| दद शा ु के Îलए ऐसी बात नह|ं




Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 90



है Íक Îसफ़ Íहं द| ह| दोषी हो, Íव7ापन दे कर ‘ 9ेस काड ‘ हाÎसल करवाने वाल| से लेकर सब वे लोग दोषी ह ,
जो हम Íहं द|-प³काÍरता पर अं0ेजी म 1पीच दे ने के Îलए Îनमंͳत करने आये थे।

इस सब से आपको यह तो पता चल ह|गया होगा क| वा1तव म Íहं द| क| पोिजसन बहत

ख़राब हो चक| ु है , इस
म Íव7ान जैसे नीरस Íवषय को बगै र Íकसी çे Îनं ग के जनता से जोड़ना बहत ह|

खतरनाक होगा ।
इस Îलए बहत

ज³र| है , क| पहले Íहं द| म पकड़ बनाये Íव7ान तो हर चीज म है इस को सरल भाषा म
सीधे सादे तर|क| से लोग| को उनके Íहतकर बाते Íव7ान को समाÍहत कर के समझी जा सकती है । प³कार
होने के नाते हमारा 9यास होगा क| Íकसी तरह हम अपनी बात म Íव7ान को समाÍहत कर के भले ह|
अवै7ाÎनक तर|के से करे पर Íकसी तरह Íव7ान के मलू भतू तcव रोचक तर|के से लोग| तक पहचने

का
एक स¯चा 9यास होना चाÍहए। मझे Íकसी क| पंÍñयाँ याद आ र ु ह|ं है िजस म कछ ऐसा कहा गया

था :-
*"जय जय जय जय हो हो हो हो Íहं द| Íहं द| Íहं द| Íहं द| मैया मैया मैया मैया क| क| क| क|, िजसने िजसने िजसने िजसने सबको सबको सबको सबको शरण शरण शरण शरण दे दे दे दे रखी रखी रखी रखी है है है है , । ।। ।
यहां यहां यहां यहां मोती मोती मोती मोती भी भी भी भी ह हह ह और और और और घ|घे घ|घे घ|घे घ|घे भी भी भी भी, और और और और ’सट|फ़ाइड सट|फ़ाइड सट|फ़ाइड सट|फ़ाइड’ प|गे प|गे प|गे प|गे भी भी भी भी" "" "।। ।। ।। ।।

Íहं द| बहत महान है

, इसका उôर भारत म जन आधार बहत मजबत

ू है , चाहे आप घ|घे बनो या ’सट|फ़ाइड’
प|गे पर Íकसी कछ तो करो

, और एक Îनि°त सरोकार से Îच§ाकाÍरता संसार म आओ। आपका मकसद
कोई ताcकाÎलक लाभ -हाÎन और Îनजी लाभ का तो कतई नह|ं होना चाÍहए। 4य| ना हम
अपने आपको पण Fपेण ू Íव7ान संचार को समÍप त कर द । यह बात इस अÎभयान से जड़े ु लोग|, सभी सद1य|
को भी गाँठ बांध कर रखनी होगी Íक हम Íव7ान संचार के सं दभ म बहत

सावधानी और गंभीरता का पÍरचय
द । Íव7ान संचार कोई साधारण Íवषय नह|ं है , यह Hे³ बहत

ह| िज+मेदार| का है , और अभी तो यह एक
श³आती ु दौर है , और इसे पÍरप4व होने म , जाÍहर है , समय लगेगा।



Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 91


इस Íवषय म यह कहना चाहगा

ँ क| इं टरनेट के इ1तेमाल ने इस तरह क| फज| प³काÍरता को काफ| बढ़ावा
Íदया है । और अब तो यह दे खा जा रहा ह| क| परे ू परे ू Íरसच पेपर कट पे1ट से तैयार हो रहे ह। हालाँÍक इं टरने ट
और आधÎनक ु टे 4नोलोजी ने सचनाओ ू और जानकाÍरयो को ¯यापक फलक Íदया है , Íवचारो और त³यो क|
मौÎलकता का दावा करना वैसे ह| कÍठन हो गया है जैसे चोर| का आरोप, रचना और Íवचारो पर मौÎलकता क|
दावेदार| अब स+भव नह| है । जो दवेदार है वे भी Íकतने मौÎलक है ? Íवचारो, जानकाÍरयो और 7ान का
9वाह चल पडा है , गÎत तीd से तीdतर होती जा रह| है , सभी इसके भागीदार है , कछ

फायदे है तो कछ


नकसान ु भी, चलने Íदिजये इस 9वाह को, काहे क| चोर| और काहे क| नकल ! हर काम म लगती ह अकल।

इसको इ7टरने ट पर 7यू Îस4यÍरट| ू टे 4नोलोजी के §ारा रोका जा सकता है पर इसके Îलए जFर| है , क| िजस
वेबसाइट पर आÍट कल पो1ट है उस पर वो Îस4यÍरट| ू तकनीक होनी चाÍहए ताÍक कोई डाटा कॉपी ना कर सके
और इसको साइबर Hयम के तहत भी आइ० ट|० ए4ट को ²यान म रखना जFर| है जैसा का आपको
साइबर अपराध क़ानन के ू 7ाता और सं1था के डायरे 4टर ÷ी० आर० पी० Îसं ह ने आपको
सट|क जानकार| द| उ+मीद करता हम क|, आप Íव7ान संचारक क| कसौट| पर एक Íदन खरे उतरोगे,
Íफ़लहाल Íकसी तरह श³आत करो, मेर| शभ ु कामनाय आप के साथ हमेशा रह गी।

अजय अजय अजय अजय श4ला श4ला श4ला श4ला ु ु ु ु













*यह जानकार| ले खक ने इ7टरने ट §ारा व ÍवÎभ7न Pोत| से जन मानस म जागFकता के Îलए ल| गई है



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Íव7ान Íव7ान Íव7ान Íव7ान और और और और साÍहcय साÍहcय साÍहcय साÍहcय

Íव7ान और साÍहcय
दोन| महान उपलि«धयाँ ह आज क|,
मानव समाज क| ।
दोन| का योगदान
अपÍरÎमत असीÎमत मानव क~याण Íहत
Íव7ान -
यÍद करना है अ²यन जीवन का
तो साÍहcय उसे करता है FपाÎयत
9संग है मानस का
मानस पÍरपण है वै7ाÎनकता से ू ।
वै7ाÎनक शोध क 5 थे
महाऋÍषओं के आ÷म
अ7यथा कै से -
'तेल नाव भर =cप तन राखा ु '
÷ंगी ऋÍष पदô हÍव~यान


Íकवा पायस ं
औÍषÎध थी बं²यता Îनवारण क| ।
क+भज ऋÍष सवयं 9थम उधारहण ह


टे 1ट टयब बेबी के ू ।
जलवाय Íव7ा ु न पÍरपे H म
उ£त हो मेज Îनमाण 9Íक या
'सोई जल अनल अÎनल संधता ।
होई जलद जग जीवन दाता ।

कͳम वषा भी आज क| यग| पव
ृ ु ू
दशरथ रजा राम ने संभव क|
'मांगे वाÍरद दे Íह जल'
वै7ाÎनक| पÍरपे H म
प*पकाÍद ÍवÎभ7न ु यान
अपर जलयान भी ।
भौÎतक| शाUी भी थे
÷ी रामच75
अ7यथा
स7धनेध 9भ ू ु ÍवÎसcव कराला
का वाण भी
9ाण ³ाण पाने को
Íवहवल Íववश
कर दे ता है
अगम असीम Îस7धु को

वह ÍवÎश8 भी
जो अ7यन ू था
परमाणु बम से।

9भा 9भा 9भा 9भा चतवद| चतवद| चतवद| चतवद| ु ु ु ु । ।। ।
औरै या ।










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बाFद| के ढ़े र पर बाFद| के ढ़े र पर बाFद| के ढ़े र पर बाFद| के ढ़े र पर

हÎथयार| क| होड़ ले खोज राç महान ।
बाFद| के ढ़े र पर Íवशव शांÎत अÎभयान ।।

कब तक रोते रहोगे भोगा हआ यथाथ


वासदे व ह सारथी पाथ करो प³षाथ ु ु ।।

समय चH ऐसा चला पं छ| सब आजाद ।
अनपढ़ गंगा गढ़ रहा जीवन के संवाद ू ।।

बहती जहर|ल| हवा Îनि°त बारह मास ।
कोई आब कै से करे मधवन पर Íवशवास ु ।।

समय चH ऐसा चला पं छ| सब आजाद ।
अनपढ़ गंगा गढ़ रहा जीवन के संवाद ू ।।

बहती जहर|ल| हवा Îनि°त बारह मास ।
कोई आब कै से करे मधवन पर Íवशवास ु ।।

अ7धा दप ण हाथ ले पछ रहा हर गाँव ू ँ ।
कै सा मौसम आ गया िजसम धप न छॉव ू ।।
ओम नारा ओम नारा ओम नारा ओम नारायण चतवद| यण चतवद| यण चतवद| यण चतवद| ु ु ु ु “मंजल मंजल मंजल मंजलु ु ु ु ”
7या1कता एवम महासÎचव औरै या
Íहं द| 9ोcसाहन ÎनÎध



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0ामीण 0ामीण 0ामीण 0ामीण अंचल| अंचल| अंचल| अंचल| म मम म 1वरोजगार 1वरोजगार 1वरोजगार 1वरोजगार का का का का सशñ सशñ सशñ सशñ आधार आधार आधार आधार रे शम रे शम रे शम रे शम उ²ोग उ²ोग उ²ोग उ²ोग

आदमी हमेशा रे शम के उcपाद| के Îलए िज7ासु है . रे शम - वU क| भ¯यता व ÍवलाÎसता, लाÎलcय, वग और
आराम, अͧतीय है भ¯यता यह ÍझलÎमलाता फाइबर अÍदतीय है । यह अ7य 9ाकÎतक

और कͳम


फाइबरो से संरचना कÍठन है , इसम Hमता है , चनौÎतय| ु को झेलने क|, सÍदय| से यह कपड़ा ÎनÍव वाद
राजाओं के पÍरधान के Îलए बना रहा, उôम गण| ु 9ाकÎतक

रं ग| और जीवंत रं ग, उ¯च अ«सोब स, ह~के
वजन, लचीलापन और उcक8

कपड़ा के Îलए अंतÎन Íहत चमक आÍद जैसे रे शम क| है ,
वैसा कोई भी इसक| जगह नह|ं ले सकता है , दÎनया ु भर म , यह एक क|ड़े §ारा उcप7न रासायÎनक
ÍHया का उcपाद है जो क| उसके §ारा पेट| से उcप7न 5व 5वीय अव1था म PाÍवत (secreted) 9ोट|न से बना
है , इसका लोकÍ9य Fप कोकन

या रे शमक|ट जाना जाता है । चयÎनत खा² पौध| पर ये
Îस~4वो+स अपना भरण और पोषण करते ह और एक 9ाकÎतक

सरHा ु कवच' के Fप म
कोक7स

एक धागा बन ु लेत ह अपने इद Îगद अपने जीवन को बनाए रखने के Îलए । इस रे शमक|ट के अपने
जीवन चH म चार चरण ह अथात् ,
1. अंडे ,
2. कमला
3. कोष1थ क|ट और
4. क|ट .
आदमी इस के जीवन चH म ह1तHेप करके कोकन

चरण म रे शम, वाÍणि7यक महcव क| एक सतत रे शा,
कपड़े क| बनाई ु म उपयोग कर Îलया जाता है , िजससे रे शम का कपडा 9ाB होता है ।

रे शम रे शम रे शम रे शम - 4य| 4य| 4य| 4य|?
रे शम एक उ¯च लेÍकन दÎनया ु के कल

कपड़ा उcपादन का के वल 0.2% के Îलए कम मा³ा उcपाद लेखांकन
मान है । रे शम उcपादन एक दे श के Fप म यह एक ÷म गहन और उ¯च आय सजन

उ²ोग है ,
इसीÎलए इसको आÎथक Íवकास के Îलए एक महcवपण ू Pोत माना जाता है । Íवकासशील दे श| म रोजगार
सजन

के Îलए उस Îलए एक महतवपण ू Íवषय ह, 0ामीण Hे³ म Íवशेष Fप से और के Fप म भी एक तरह
से Íवदे शी म5ा ु अिज त होता है ।

रे शम रे शम रे शम रे शम - कहाँ कहाँ कहाँ कहाँ ?
भौगोÎलक, एÎशया दÎनया ु म रे शम का मEय ु उcपादक है और कल

वैि+क उcपादन का 95% से अÎधक
उcपादन करता है . हालांÍक वहाँ रे शम क| दÎनया ु के न4शे पर 40 से अÎधक दे श|, यह चीन और भारत,
जापान, ñाजील और कोÍरया के बाद म उcपादन Íकया है । चीनी अपने रे शम क| ÷े*ता और आपÎत ु




Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 95


के कारण दÎनया ु के शीष पर है , चीन का वाÍष क उcपादन 153942 (2006) । लाख टन है िजसम से
शहतत ू क¯चे रे शम उcपाद 115092 मीÍçक टन क| है ।

और और और और भारत भारत भारत भारत का का का का के वल के वल के वल के वल 18475 मीÍçक टन) 2006-07) पर Íफर भी दÎनया ु म रे शम का सबसे बड़ा उपभोñा के
साथ रे शम का दसरा ू सबसे बड़ा उcपादक है । इसका कारण हमार| रे शम के 9Îत मजबतू परं परा और
सं 1कÎत

रे शम के घरे लू बाजार ह| है । भारत म शहतत ू रे शम कनाटक, आंH 9दे श, तÎमलनाडु , ज+मू और
क°मीर, तथा पि°म बंगाल के रा7य| म मEय ु Fप से उcपादन Íकया है , जबÍक गै र शहतत ू रे शम
रा7य जैसे उôर 9दे श, झारखं ड, छôीसगढ़, उड़ीसा और पव|ôर ू रा7य| म उcपाÍदत कर रहे ह ।

रे शम रे शम रे शम रे शम का का का का इÎतहास इÎतहास इÎतहास इÎतहास:
27 वीं शता«द| ईसा पव ू के बाद से, चीनी उcपादन Íकया है और रे शमी कपड़े थे । वा1तव म , जटाने ु रे शम
क|ड़े चीन म पराने ु मÍहलाओं का बहत

काम का था / चीन से रे शम Îस~क Fट के मा²यम से Îनयात Íकया
गया था ।
चीनी कभी बाहर कै से रे शम उcपादन Íकया गया था का राज रखते थे । हालांÍक, बाद के वष| म , ईसाई
ÎभHुओं क| वजह से दसरे ू दे श| म रे शम Îनमाण के Fप म अ¯छ| तरह से शF हआ ु



रे शमी रे शमी रे शमी रे शमी कपड़े कपड़े कपड़े कपड़े का का का का बनाना बनाना बनाना बनाना:
रे शम बनाने क| 9ÍHया बेहद नाजकु है
पहले चरण को रे शम उcपादन कहा जाता है । यह रे शम के क|ड़े क| खेती है । शहतत ू रे शम 9ाB करने के
Îलए सबसे लोकÍ9य 9जाÎत बो+«य4स मोर| है । क|ड़े एक Îनयं ͳत वातावरण म उठाया जाता है और
शहतत ू के पô| को Íखलाया और क|ड़े उनके Îसर के ऊपर से एक 9ोट|न PाÍवत Íकया और खदु को चार| ओर
एक कोकन

के Fप म लपेट Îलया Íकसान| को इन कोक7स

को इ1तेमाल करना शF ु कर Íदया ।
पहले कदम म रं ग, आकार, आकार और बनावट के अनसार ु कोक7स

होते ह ।
Íफर, कोक7स

को गम और ठं डे पानी म डबोने ु क| एक गंभीर 9ÍHया के मा²यम से बने होते ह ।

भारतीय भारतीय भारतीय भारतीय Îस~क Îस~क Îस~क Îस~क कपड़ा कपड़ा कपड़ा कपड़ा:
भारत चीन के बाद रे शम और दÎनया ु म रे शम का सबसे बड़ा उपभोñा का दसरा ू सबसे बड़ा उcपादक है .
2001-02 के Íरकॉड के अनसार ु , भारत का 17550 मीÍçक टन रे शम का उcपादन Íकया गया ।

उôर 9दे श म रे शम का इÎतहास 1847 से 9ार+भ होता है । सव 9थम कै ¯टन हाÎलं ग नामक अं0ेज
सेना अÎधकार| के §ारा लखनऊ म रे शम क|टपालन का काय Íकया गया। कै ¯टन हाÎलं ग के बाद
रे शम क|ट| क| ओर Íकसी ने ²यान नह|ं Íदया। वष 1861 म ए0ो हाट|क~चर सोसाइट| ने डा०
वोनाÍवया §ारा लखनऊ बादशाह बाग म शहतत का वHारोपण कराया ू ृ
गया, िजस पर रे शम
क|टपालन काय Íकया गया। वष 1871 म दे हरादन का नाम रे शम उ²ोग म आया। ऐसा माना जाता ू



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है Íक इसके पव भी रे शम का ू काय यहां पर होता रहा था, पर7त इÎतहास म कह|ं पर वण ु न नह|ं
आता है ।
1872-1975 के म²य Íकये गये 9योग| से ÷ी एच०जी० रॉस, जो Íक दे हरादन Îनवासी थे ू , ने यह
Îस@ Íकया Íक यह Hे³ रे शम क|ट| के Îलए उôम है । 1894 म ÎशHा Íवभाग एवं 1897 म वन
Íवभाग ने रे शम क|टपान का काय Íकया, िजसम सफलता Îमल|। 1911-1916 म शाहजहाँपर के मंशी ु ु
अEतर मो० खान §ारा रे शम क|ट| पर ÍवÎभ7न 9योग Íकये गये । 1933-46 के म²य उ०यू०एस०
साEया, जो Íक कानपर कÍष Íव+Íव²ालय म ÎशHक थे ु ृ
, ने शहतती रे शम क|ट| के ू साथ-साथ अÞडी
क|ट| पर भी अनसंधान काय Íकया। ु
1948 म दे श क| आजाद| के प°ात यनाईटे ड ् ू 9ोÍवं स (उ०9०) म यह काय वन Íवभाग §ारा लगाये
गये वHारोपण के आधार पर

कट|र उ²ोग Îनदे शालय के अ7तग त एक 1क|म के Fप म आर+भ

Íकया गया। पहला रे शम उcपादन के 75, डोईवाला (दे हरादनू ) म वष 1948 म खेला गया। पन° ु
रे शम उ²ोग से स+बि7धत काय वष 1987 तक हथकरघा Îनदे शालय एवं हथकरघा Îनगम, कानपर के ु
अधीन था, पर7त 9दे श म रे शम ु उ²ोग क| स+भावनाओं को ²यान म रखते हए वष

1987 म 9दे श
सरकार §ारा एक अलग "रे शम Îनदे शालय "क| 1थापना का Îनण य Îलया गया। वष 1988 से रे शम
Îनदे शालय §ारा लखनऊ म ÍवÎधवत Fप से काय Íकया जा रहा है । कÍष पर आधाÍरत

कट|र उ²ोग

है ।


रे शम रे शम रे शम रे शम – 9कार 9कार 9कार 9कार

वहाँ वाÍणि7यक महcव का रे शम के पाँच 9मख ु 9कार, रे शम के क|ड़| के ÍवÎभ7न 9जाÎतय| से 9ाB कर रहे ह
जो खा² पौध| के एक नंबर पर बार| फ़|ड म ये ह :-


शहतत शहतत शहतत शहततू ूू ू : वाÍणि7यक दÎनया ु म उcपाÍदत रे शम क| थोक इसी Íक1म से आता है और अ4सर रे शम आम तौर
पर रे शम शहतत ू से आता है , इसका क|ड़ा (मोर| बो+«य4स एल) जो के वल शहतत ू पौधे क| पÍôय| को खाता
है । यह Îस~4वो+स पर| ू तरह से पालतू रहे ह और उनका पालन नस र| के अंदर Íकया जा सकता है ।
भारत म 9मख ु शहतत ू रे शम उcपादक रा7य| कनाटक, आंH 9दे श, पि°म बंगाल, तÎमलनाडु और ज+मू व
क°मीर जो एक साथ दे श के कल

शहतत ू क¯चे रे शम उcपादन का 92% के Îलए आते ह ।




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टसर टसर टसर टसर : :: : टसर कॉपÍरश रं ग, मोटे मEय ु Fप से समान और अंदFनी वU के Îलए 9योग Íकया जाता है रे शम /
यह शहतूत रे शम से चमकदार है , लेÍकन टसर रे शम रे शमक|ट §ारा ह| उcप7न होता है ,
अ7थेरे या +यल|ôा जो मEय ु Fप से खा² पौध| आसन और अज नु पर पनपते है ÍरअÍरं ¹स 9कÎत

म खले ु म
पेड़| पर आयोिजत क| जाती ह / भारत म , टसर रे शम मEय ु Fप से झारखंड, छôीसगढ़ और उड़ीसा,
महाराç के अलावा, पि°म बंगाल और आंH 9दे श रा7य| म उcपादन Íकया है
टसर सं1कÎत

कई भारत म आÍदवासी समदाय ु के Îलए मEय ु ¯यवसाय है


ओक ओक ओक ओक टसर टसर टसर टसर: :: : यह रे शमक|ट §ारा उcप7न टसर ki एक बेहतर Íक1म है , Antheraea 9ोएल| भारत म जे फ़|ड
जो ओक के 9ाकÎतक

खा² पौध|, भारत के उप Íहमालयी बे~ट म बहतायत

म पाया मÍणपर ु , Íहमाचल
9दे श, उôर 9दे श, असम, मेघालय और ज+मू और क°मीर के रा7य| को कवर करता है / चीन दÎनया ु म
ओक टसर का 9मखु उcपादक है और यह एक और रे शमक|ट जो Fप म जाना जाता है से आता है अ7थेरे या
(Antheraea) पेनयी



मगा मगा मगा मगा ू ूू ू : इस सनहरे ु पीले रं ग का रे शम भारत का ÍवशेषाÎधकार और असम रा7य का गौरव है .यह अ@ पालतू
म~ट|वोि~टने रे शमक|ट से 9ाB होता है , अ7थेरे या अ1सम Îसस सोम और सोअलू पौध| क| पÍôय| और
खशबदार ु ू पर ये Îस~4वो+स फ़|ड पे ड़| पर समान पाला जाता है Íक टसर क| मगा ू सं 1कÎत

असम रा7य और
परं परा का एक अÎभ7न Íह1सा है और उस रा7य क| सं 1कÎत

के Îलए ÍवÎश8 है मगा ू रे शम, एक उ¯च म~य ू
उcपाद उcपाद| म साÍड़य| क| तरह इ1तेमाल Íकया है , मखमल, चा£र| आÍद म ।










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एर| एर| एर| एर|: शहतत ू के अलावा, रे शम क| अ7य Íक1म| म आम तौर पर इसे गैर शहतत ू रे शम के Fप म जाना जाता
है । भारत रे शम के इन सभी वाÍणि7यक Íक1म| के उcपादन क| अͧतीय गौरव 9ाB है ।

एर| के अलावा यह एंडी या एर डी Fप म जाना, एक इर| म~ट| वोि~टने ओपन एंडे ड कोक7स

से काता रे शम
क| अ7य Íक1म| के Íवपर|त, रे शम है .इर| रे शम पालतू रे शमक|ट के उcपाद है , ÍफलोसÎमया र|सीनी Íक
अरं डी के पô| पर मEय ु Fप से Íखलाती है . एर| क~चर है एक घर गÎतÍवÎध 9ोट|न सम@

¯यपे ु , आÍदवासी के
Îलए एक व¯सयायके Îलए मEय ु Fप से अ¹यास Íकया पÍरणाम1वFप इर| कोक7स

बहतायत

है । रे शम
1वदे श तैयार करने के Îलए 9योग Íकया जाता है इनसे तैयार चा£र आÍदवाÎसय| §ारा अपने उपयोग के Îलए
(wraps) भारत म इस सं1कÎत

पव|ôर ू रा7य| और असम म मEय ु Fप से अ¹यास Íकया है .यह भी Íबहार,
पि°म बंगाल और उड़ीसा म पाया जाता है ।

रे शम उ²ोग 4य| रे शम उ²ोग 4य| रे शम उ²ोग 4य| रे शम उ²ोग 4य| और और और और कै से कै से कै से कै से
रे शम उ²ोग कÍष पर

आधाÍरत एक सहायक उ²ोग है कÍष से

स+बि7दत सम1त उ²ोग| म रे शम उ²ोग
का महcववपण ू 1थान है यह उ²ोग 0ामीण अं चल| म रोजगार का सअवसर 9दान करता है ु
0ामवाÎसयो क| आÎथ क ि1थÎत सधरने म यह उ²ोग बहत ह| सहायक है ु



रे शम उ²ो रे शम उ²ो रे शम उ²ो रे शम उ²ोग 4य| ग 4य| ग 4य| ग 4य| ?
1. कÍष पर आधाÍरत

कट|र उ²ोग है

उ²ोग का काय सरल ऐवं Íबना
Íकसी अवरोध के सगमतापव क ु ू Íकया जा सकता है ।
2. 0ाम वाÎसओं को अपने घर क| पास सÍवधानसार ु ु रोजगार 9ाB होता है , Íवशेषकर मÍहलाओं को
3. इस उ²ोग हे त न तो Íकसी Íवशेष पजी क| आव°यकता होती ु ू ँ है न ह| 1थान ¯यव1था पर
Íवशेष खच इसके §ारा अÎधक वयÍñओं को रोजगार Îमल सकता है ।
4. 0ामीण जनसEया का शहर| पलायन ँ रोकने म यह उ²ोग सहायक है ।
5. कम लागत म थोड़े ह| समय म उcपादन आर+भ हो जाता है ।
6. एक एकड़ शहतत ू वHारोपड़

से Fपया २०-२५००० क| आय हो सकती है ।
7. इस उ²ोग को लगाने के Îलए तकनीक| सहायता, 9ÎशHण एवं Íवपणन ¯यव1था रे शम Íवकास
Íवभाग §ारा 9दô कराई जाती है ।




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8. कÍष

पर बढती आबाद| का दबाव कम करने म सहायक है ।
9. 0ाम वाÎसओं म आपसी सहयोग, 1वाबलंबन एवं साहस क| भावना ÍवकÎसत करता है ।

रे शम उ²ोग म ÎनÍहत है रे शम उ²ोग म ÎनÍहत है रे शम उ²ोग म ÎनÍहत है रे शम उ²ोग म ÎनÍहत है :-
1. शहतत ू , अज न एवं अरÞडी क| खेती ु ।
2 .क|टपालन एवं कोय उcपादन।
3 .धागाकरण ।

9थम दो शाखाय कÍष से स+बंÎधत ह

, जब Íक धागाकरण कट|र उ²ोग Íक अं तग त आता

है
इसीÎलए इस उ²ोग को कÍष पर आधाÍरत कट|र उ²ोग कहा जाता है
ृ ु




शहतती शहतती शहतती शहतती ू ूू ू रे शम उ²ोग रे शम उ²ोग रे शम उ²ोग रे शम उ²ोग

शहतती शहतती शहतती शहतती ू ूू ू खेती खेती खेती खेती :
शहतत ू एक बहवष|य

तथा गहर| जड़ का पौधा है यह 9ाय :हर जलवायु म पैदा होता है
इसको वH

या झाड़ी के Fप म ÍवकÎसत Íकया जा सकता है शहतत ू के पौधे या झाड़ी के Fप म
ÍवकÎसत Íकया जा सकता है शहतत के पौधे आव°यक ू पानी मा³ा, धान एवं ग7ने Íक तलना ु म बहत

कम होती है इसके Îलए मÍटयार, दोमट अथवा बलईु दोमट Îमटट| अ¯छ| होती है । शहतत के बगीचे ू म
पानी का ठहराव नह|ं होना चाÍहए उôर 9दे श म शहतत ू Íक कÍटं ग या पौध जलाई ु -अग1त या
Íदसंबर जनवर| म लगे जाती है पौध Íक संEया 9Îत एकड़ लगभग ५००० होती है शहतत ू पौध को घर
Íक आस-पास तथा खेत क| मेड़| पर वH के Fप म

ÍवकÎसत Íकया जा सकता अÎधक ऊसर तथा
जल जमाव क| भÎमय| ू म शहतत ू क| खेती नह|ं करनी चाÍहए ।

क|ट क|ट क|ट क|ट पालन पालन पालन पालन एवं कोया उcपादन एवं कोया उcपादन एवं कोया उcपादन एवं कोया उcपादन: :: :
क|टाÞडो से 91फÍटत रे शम क|ट अcयंत स ु ू+म होते ह इसके Îलए इस अव1था म इनके पोषण म
बहत सावधानी बरतनी होती है क|ट क| इस 9ारि+भक अव1था म कोमल एवं छोटे आकार क|

शहतत ू क| पÍôयां पोषण हे त द| जाती ह पाÎलत रे शम कÎम ÍवÎभ7न अव1थाओं से गजरते हए ु ु ृ ु
२२
से २८ Íदन| क| जीÍवत अÍवÎध म वजन का १० हज़ार गना आकार बढ़ा लेता है एक क|ट §ारा ु
लगभग २५-३० 0ाम पôी कÎम अव1था म 0हण क| जाती है

, बीच बीच म पराने क चल ु ु , जो बढ़ते
शर|र के Îलए च1त ु पड़ जाते ह , शर|र से उतार कर Íफर से खाने म उ@त हो जाते ह इस
9कार रे शम कÎम अपनी

पôी खाने क| अव1था म चार बार क चल उतारते ु ह जब क|ट कोया बनाने क|
Îलए तै यार होता है , तो पôी खाना बंद कर दे ता है तथा इसका रं ग अ~प पारदश क हो जाता है ऐसे कÎम






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को छांट कर उÎचत 1थान पर कोया बनाने हे त रख ु Íदया जाना चाÍहए मौसम के अनसार ु ४८ से ७२ घंटे
म कोया Îनमाण परा ू हो जाता है ।

एक औं स क| औसत कोया उcपादन लगभग ३५-४० Íक 0ा० है पर7तु उÎचत तकनीÍक एवं ÍवÎभ7न
अव1थाओं के अनसार उÎचत शहतत पôी 9दान कर इस उcपादन को बढाया जा सकता है क|ट ु ू
पालन Íक Hमता 9Îत एकड़ शहतत Íक पôी के उcपादन पर Îनभ ू र करती है पôी के अÎधक
उcपादन हे त खाद एवं पानी Íक उÎचत मा³ा एवं एकड़ म 9cये क वष लगभग ु ८ औं स क|टाÞड का
क|टपालन ÍवÎभ7न फसल| म Íकया जा सकता है ।

िजससे लगभग ३०० कोया उcपादन वष म स+भाÍवत है , िजसका म~य वत मान कोया दर के अनसार ू ु
लगभग ³० २०००० से ³० २५००० तक होता है सम1त कोय| क| ÍबH| उÎचत दर| पर Íवभाग §ारा
कराई जाती है उÎचत मा³ा म कष ण काय खाद एवं पानी उपल«द कराकर 9Îत एकड़ पôी उcपादन
और बढाया जा सकता है फल1वFप कोया उcपादन म बढोतर| अव°यभावी है इसके अÎतÍरñ यÍद


षक अपने उcपाÍदत कोया से चखा §ारा धागाकारण 9ार+भ कर द , तो उनक| आय बढ़ जाये गी,
4य|Íक 9Îत ८-१० Íकलो कोया से लगभग एक Íकलो रे शम धागा 9ाB होता है , िजसका बाज़ार म~य ू
लगभग ³० १००० से १५०० ³पया 9Îत Íकलो है इस तारत+य म यÍद कषक अपने चख §ा

रा
उcपाÍदत धागा से कपड़ा बनाई तथा दे श क| Íवदे शी म5ा अज न म भी वÍ@ होगी ु ु ृ


Íवभाग §ारा 9दô सÍवधाय Íवभाग §ारा 9दô सÍवधाय Íवभाग §ारा 9दô सÍवधाय Íवभाग §ारा 9दô सÍवधाय ु ु ु ु
१ उ7नत 9जाÎत क| शहतत ू पौध क| 7यनतम म~य पर आपÎत ू ू ू ।
२. Îन :श~क ु 9ÎशHण एवं तकनीÍक जानकार|।
३ दस Íदन तक Íवभागीय दे ख-रे ख म पाÎलत रे शम क|ट का 7यनतम पर म~य ू ू पर Íवतरण
४. कोया Hय ÍवHय क| Íवभागीय ¯यव1था के अंतग त कोया बाज़ार के मा²यम से खल| ु बोल| क|
आधार
पर नीलामी 9ÍHया म ÍवHय कराकर क|ट -पालक| को यथाशीU भगतान ु ।
५ कै टाÎलÍटक रे शम Íवकास काय Hम क| अंतग त क|ट पालन भवन Îनमाण म सहायता तथा क|टपालन
उपरकरण| क| उपल«धता।
६ कोया एक³ करने के समय अनमाÎनत म~य का ु ू ८० %अÎ0म भगतान ु ।

1. रे शम क|ट उc पा रे शम क|ट उc पा रे शम क|ट उc पा रे शम क|ट उc पादन दन दन दन
a. खला ु अंडा Îनषेचन 9े म -खले अं ड| के Îनषेचन के दौरान इ* ट ु तम पयावरणीय दशाएं
उल« ध कराना, इससे 909Îतशत से अÎधक Îनषेचन हो जाता है ।


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b. रोटर| माउ7 टे ज -यह खराब ककन और लोमक के 9Îतशत को कम करता है और
ू ू
ककन क| गणवôा को सधारता है । इसके पÍरणाम1 व
ू ू ु ु Fप र|ल बनाने क| अÎधक
Hमता और अ¯ छे 0े ड ) 2 ए - 3 ए (का रे शम 9ा¯ त होता है । रोटर| माउं टे ज से 9ा¯ त
ककन से
ू ू
20 - 30 9Îत Íक.0ा रे शम 9ा¯ त होता है ।
c. ककन हाव1 ट
ू ू र -लकड़ी के इस हाव1 ट र से समय और ÷म क| बचत होती है 4 य|Íक
रोटर| माउ7 टे ज से ककन को अलग
ू ू
-अलग नह|ं Îनकालना पड़ता।
d. आदश पालन घर -ये पालन घर ÍवÎभ7 न कÍष जलवाय दशाओं और
ृ ु पालन ÍवÎधय|
के Îलए तैयार Íकए गए ह।
e. संपण ू )फाइटोएकडाई 1 ट|रायड जो Íक क|ट| क| समाकÎलत पÍरप4 वता के Îलए
सं 1 थान §ारा ÍवकÎसत ( - 5 वीं Íवकासाव1 था के रे शमक|ट म उc पाद क| सÍHय मा³ा
डालने से माउं Íटंग क| अवÎध 18 - 24 घंटे कम हो जाती है ।
f. 7 यू ç|ड )सं1 थान §ारा तैयार क| गई सेमी Îसं थेÍटक डाइट ( - यह डाइट यवा ु
रे शमक|ट| को संतÎलक पोषण 9दान करती है ु , पालन के दौरान 1 व¯ छता बनाए रखती
है और बड़े क|ट| के Íवकास म सहायक होता है ।

2. रे शमक|ट संरHा रे शमक|ट संरHा रे शमक|ट संरHा रे शमक|ट संरHा
a. अमत

-0ासर| और 9लेचर| को दबाने हे त पयावरणान ु ुकल वन1 प

Îत आधाÍरत
संरचना।
b. अंकश

-यह एक पयावरणानकल 4 या ु ू
र| क|टाणनाशक है जो सामा7 य ु रे शमक|ट
संबंधी रोग| को फै लने से रोकता है ।
c. Íवजेता -4 यार| क|टाणनाशक ु -एक 9भावी 4 यार| क|टाणनाशक Íवजे ता ÍवÎभ7 न ु
रे शमक|ट रोग| को फै लने से रोकता है ।
d. रे शमक|ट औषध -4 यार| क|टाणनाशक ु -यह एक अ7 य 4 यार| क|टाणनाशक है जो ु
ÍवÎभ7 न रे शमक|ट रोग| को फै लने से रोकता है ।
e. सैनीटे क -यह एक सHम और असंHरक क|टाणनाशक है । यह खले पालन गह| म ु ु ृ
अÎधक उपयोगी होता है जहां वरत Îनयं ͳत दशाएं संभव नह|ं ह।
f. यजी क|ट के 9बंध ू न हे त यजीçै प ु ू -यजी संHमण का ू 849Îतशत तक 9बंधन Íकया
जा सकता है । इससे उc पादन / 100 डीएफएलएस म 8Íक .0ा .क| वÍ@ होती है ।


g. रHा रे खा -यह एक क|टणनाशक चॉक है िजससे रे शमक|ट पालन के दौरान चीट|य| ु
और काHोच| पर Îनयं ³ण Íकया जा सकता है ।


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3. रे रे रे रे शम क|ट पालन तं³ शम क|ट पालन तं³ शम क|ट पालन तं³ शम क|ट पालन तं³
a. शहतश छटाई मशीन ू -यह मशीन 5घंटे म एक एकड़ शहतश के बाग क| छं टाई कर ू
सकती ह।
b. कÍटंग क| तैयार| हे त मशीन ु -इससे कÍटंग को तीdता से करने म सहायता है 1घंटे
म लगभग 2000कÍटंग।
c. ककन को लोमकरÍहत करने क| मशीन
ू ू
-यह मशीन एक घंटे म 50 - 60 Íक.0ा ककन
ू ू
को लोमक रÍहत कर सकती है ।
d. तना पे राई मशीन -यह यं ³ एक घंटे म 250 - 300 Íक.0ा .तन| क| कटाई और पे राई
म सHम है ।
e. पाउडर ड1 टर -इससे बहाव म नकसान Íकए बगैर आरके ओ और Íवजेता जैसे ु
रासायÎनक ड1 ट को रे शमक|ट के ऊपर लगाने म सहायता Îमलती है ।
f. कड़ा अलग करने वाला यं³

)Îलटर सेपरे टर ( - यह मशीन बची हई पÍôय| और कड़े


को अलग करने म 9भावी है ताÍक बायोगैस बनाने के Îलए बायोगै स संयं³ म इनका
उपयोग Íकया जा सके । बायोगैस का उपयोग र|Îलं ग तथा घरे ल उपयोग के Îलए ू
Íकया जाता है ।
g. शहतश क| पÍôय| को ू बार|क काटने हे त मशीन ु -यह मोटर से चलने वाल| मशीन
लगभग 40Íक.0ा पÍôयां 9Îत घंटे काटती ह।
h. इलेि4çक 1 9े यर -1 ट|ल पंप और 15मीटर लंबी होज वाला यह 1 9े यर एक घं टे म
लगभग 250ल|टर क|टाणनाशक का 1 9े ु करता है ।
i. लोमक हटाने हे त हाथ क| मशीन ु )ह ड Íड9लाÎसं ग मशीन ( - यह 15Íक0ा .ककन
ू ू
9Îत घं टे क| दर से लोमक हटाती है ।
j. पÍरप4 व रे शमक|ट अलग करने वाल| मशीन -इस मोटर य4 त ु मशीन §ारा दो घंटे
म लगभग 35000पÍरप4 व रे शम क|ट| को अलग Íकया जा सकता है ।
k. ¯ लाि1टक माउं टे ज हे त 9े म ु -इसे c वÍरत माउं Íटं ग म सहायता Îमलती है । यह यं³
¯ लाि1टक माउं टे ज क| आकÎत और आकार को बनाए रखने म उपयोगी है । इससे

Íकसान| को माउं टे ज को उÎचत हवा के Îलए टांगने म मदद Îमलती है ।
l. ¯ लाि1टक माउं टे ज को पकड़ने और पैक करने के Îलए यं³ -ककनीकरण के प° चा
ू ू

¯ लाि1टक माउं टे ज क| आकÎत और आकार को बनाए रखने म सहायता Îमलती है ।


m. ककन कÍटं ग मशीन
ू ू
-इस मोटर य4 त ु मशीन से 0ेनेज| म नर -मादा अलग करने म
सहायता Îमलती है । यह एक घंटे म 6000ककन से अÎधक काट सकती है ।
ू ू



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क|टपालन एवं कोया उcपादन क|टपालन एवं कोया उcपादन क|टपालन एवं कोया उcपादन क|टपालन एवं कोया उcपादन -
टसर क|टपालन काय जनू /जु लाई माह म मानसन वषा 9ार+भ होते ह| शF हो जाता ू ु है । पहल|
फसल बीज फसल कहलाती है िजसम ू 35-40 Íदन म कोया
तैयार हो जाता है तथा ͧतीय फसल Îसत+बर/अ4टबर माह ू
म 9ार+भ हो जाती है । यह ¯यावसाÎयक फसल कहलाती है
तथा इसम 55-60 Íदन का समय लगता है । Íवभागीय
1थाÍपत बीजागार| से उपरोñ फसल| के क|टाÞड 9ाB कर
91फÍटत क|ट| को खा² वH| क| मलायम ु ु ृ
पÍôय| पर चढा
Íदया जाता है । क|ट क| दे ख-रे ख एवं सरHा ÎनयÎमत Fप से ु
करने पर पेड| पर ह| कोया तैयार हो जाने के प°ात जब क|ट
¯यपा म पÍरवÎत ू त हो जाये अथात कोया Îनमाण के एक सBाह प°ात कोय| को खा² वH| क|

पतल| टहÎनय| सÍहत वH से काटकर अलग कर लेना चाÍहए। इनम से कोया को अलग कर 0े ड के

अनसार ु छांटकर कोया बाजार म नीलामी कर नगद भगतान एवं तर7त भगतान के आधार पर ु ु ु
ÍवHय कर Íदया जाता है ।
क|टपालन एवं आव°यक सझाव क|टपालन एवं आव°यक सझाव क|टपालन एवं आव°यक सझाव क|टपालन एवं आव°यक सझाव ु ु ु ु - -- -
1. खा² वH| का चनाव
ृ ु , सफाई एवं छं टाई क|टपालन से लगभग 10 Íदन पव कर लेनी चाÍहए। ू
2. जल जमाव वाले 1थल| का चनाव ु क|टपालन हे त न Íकया जाये । ु
3. बीजागार से 91फटन से पव ु ू क|टाÞड 9ाB कर नमी वाले साफ व 1व¯छ 1थान पर घर| म
रखना चाÍहए। िजससे अÞडे के अ7दर ÍवकÎसत होने वाले Hण का उÎचत Íवकास होता रहे । ू
9ाय: क|टपालन के दौरान उÎचत आ5ता एवं तापHम यñ वातावरण रहता है । यÍद इसम ु
कमी या अÎधकता महसस हो तो 9यास कर अपेÍHत 1थान पर रखा जाये ू
4. क|टाÞड 91फटन के प°ा ु त क|टपालन, घर/झोपडी के अ7दर (इनडोर) घडे अथवा बोतल म
खा² वH| क| टहÎनयां

लगाकर 72 घÞटे तक Íकये जाने से 9रि+भक HÎत को रोका जा
सकता है । इससे औसत उcपादन म बढौôर| होती है ।
5. Îशश क|ट| का आहार वH पर ु ृ
मौसम क| अनकलता को दे खते हए 1थाना7त ु ू

Íरत Íकया जाये
अ7यथा तेज वषा, कडी धप ू , तेज हवा/आंधी §ारा क|ट फसल को ¯यापक HÎत हो सकती
है ।
6. क|ट क| 9थम अव1था से ततीय

अव1था तक ÍवÎभ7न क|डे-मकोड| जैसे Îचपर|
(कै 7थीकोना), बर (वा1प) चीÍटय| आÍद के §ारा अÎधक हाÎन होती है , िजसे रोकने के Îलए
उपयñ उँ चाई के वH| का चनाव ु ु ृ
तथा क|टपालन से पव ऐसे क|ट| के 1थान| को न8 करना ू
आव°यक होता है ।

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04


7. 1व1थ क|ट के Íवकास हे तु आव°यक है Íक Îशश क|टपालन 1थल के वH| पर क|टपालन से ु ृ
पव ू 2 9Îतशत फाम ल|न घोल का Îछडकाव Íकया जाये तथा वH| के तन|

के चारो ओर गम
राख तथा बी०एच०सी० चार| ओर डाल| जाये ।
8. यथा संभव 9थम एवं ͧतीय अव1था म Îशश क|ट| का 1थाना7तरण एक वH से दसरे वH ु ू ृ ृ
के उँ पर न Íकया जाय। 1थाना7तरण करने के Îलए 9Îनं ग सीजस अथवा हं सए से पतल| ू ु
टहÎनय| को पôी सÍहत काटकर 1थाना7तÍरत Íकया जाये । क|ट| को हाथ से कम से कम
छआ जाये । ु
9. क|टपालन म 1व1थ वातावरण एवं सफाई का Íवशेष महcव है । क|टपालन 1थल साफ एवं
1व¯छ रखा जाये व क|ट 1थाना7तरण से पव एवं प°ात ू 2 9Îतशत फाम ल|न घोल से हाथ
अव°य धोया जाय तथा इस घोल से भरे Îमटट| के पा³ को 9cये क क|टपालन 1थल के
पास रहना आव°यक है ।
10. टसर क|ट अपनी पांच अव1थाओं तथा चार मो~ट के §ारा अपना कÎमकाल

(लारवल
पीÍरएड) पण करता है । इस दौरान Îनम|चन ू (मो~ट) के क|ट 1थाना7तरण विज त है ।
11. मत

/रोग 01त क|ट को पेड से उतार कर क|ट पालन 1थल से बाहर लगभग एक फट गहरे ु
गडडे म दबाया जाना Îनता7त आव°यक है । इससे अ7य क|ट| म बीमार| फै लने से रोका जा
सकता है ।
12. क|ट पालन Hे³ म चना तथा ू «ल|Îचं ग पाउडर का उपयोग समय-समय पर Íकया जाना
लाभ9द होता है ।
13. ततीय से पंचम अव1था के दौरान

पÍHय|, नेवल|, सप आÍद से सरHा हे त क|टपालक को ु ु
कडी चौकसी रखनी आव°यक होती है ।
14. खा² वH पर

10 9Îतशत पôी अवशेष रहते ह| दसरे खा² वH पर 1थाना7तरण कर दे ना ू ृ
चाÍहए िजससे क|ट| के भखे रहने क| संभावना न रहे । ू
15. कोया Îनमाण के Îलए क|ट दो-तीन पÍôयां इकटठा कर है मक (आधार) को Îनमाण करता
है । अत: यह आव°यक है Íक अि7तम अव1था म क|ट| को पयाB पôी वाले पेड| पर खा
जाये ।
16. टसर क|ट लगभग 80 9Îतशत पôी का उपयोग पाचवी एवं अि7तम अव1था म करता है ।
अत: यह आव°यक है Íक एक वH पर कम

क|डे रखे जाय िजससे उनका बार-बार
1थाना7तरण न करना पडे एवं इससे होने वाल| HÎत को रोका जा सके ।
17. कोया Îनमाण 9ार+भ होते ह| एक सBाह बाद उसे खा² वH| क| पतल| टहÎनय| सÍहत

काटकर अलग करना चाÍहए। क¯चे एवं अÍवकÎसत कोय| को तोडने से क|टपालक को ह|
HÎत होती है । अत: ¯यपा ू Îनमाण होने के प°ात कोय| को खा² क| टहनी से अलग Íकया
जाये ।


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18. कटे हए कोय| को डाल| से अलग

कर 0ेड के अनसार छांट कर र|Îलं ग ु /बीजू, कट एवं
Íफ~मजी ÷े णी म अलग-अलग रखना चाÍहए।


रे शम उ²ोग म रे शम उ²ोग म रे शम उ²ोग म रे शम उ²ोग म सÎमÎत सÎमÎत सÎमÎत सÎमÎत/ // /1वैि¯छक संगठन| का योगदान 1वैि¯छक संगठन| का योगदान 1वैि¯छक संगठन| का योगदान 1वैि¯छक संगठन| का योगदान - -- -
कोई भी उ²ोग Íबना ¯यÍñगत Hे³ म काय Hम को फै लाये ÍवकÎसत नह| हो सकता है तथा इसे
जन आ7दोलन का Fप दे ने के Îलए रे शम उ²ोग म सÎमÎतय| एवं 1वैि¯छक संगठन| क| महcवपू ण
भÎमका है । रे शम Îनदे शालय §ारा क|टपालकां◌ं व धागाकरण करने वाल| सÎमÎतय| का गठन Íकया
गया है । िजनको पंजीकत कर पब7धक|य सहायकता आÍद क| सÍवधा है
ृ ु तथा यह सÎमÎतयां रे शम
उ²ोग ÍवÎभ7न काय| को 1वतं³ Fप से स+पाÍदत कर सकती है । इसी 9कार 1वैि¯छक संगठन
रे शम उ²ोग के 9चार-9सार, 9ÎशHण, वHारोपण

, क|टपालन, धागाकरण एवं बनाई काय| को ु
अपनाकर रे शम उ²ोग के Íवकास म अपनी महcवपण भÎमका Îनभा सकते ह। इस Íदशा म ू
ÍवÎभ7न 1वैि¯छक संगठन| का सहयोग 9ाB Íकया जा रहा है ।

Íवभागीय Íवभागीय Íवभागीय Íवभागीय 9दô सÍवधा 9दô सÍवधा 9दô सÍवधा 9दô सÍवधा ु ु ु ु य य य य -
1. अज न पौध क| आपÎत ¯यव1था ु ू करना।
2. Îन:श~क 9ÎशHण एवं तकनीक| ु जानकार|।
3. टसर क|ट बीज का 7यनतम म~य ू ू पर Íवतरण।
4. कोया-ÍवHय क| तर7त भगतान ु ु एवं ÍवHय ¯यव1था।
5. धागाकरण हे त कै टाÎलÍटक Íवकास ु योजना म Íवôीय सहायता।
6. सघन अज न वHारोपण पर ु ृ
क|टपालक| को क|टपालन उपयोग क| अनमÎत। ु

क|टपालन गह क|टपालन गह क|टपालन गह क|टपालन गह
ृ ृृ ृ

रे शम क|टपालन हे त एक अलग गह क| आव°यकता ु ृ
होती है । क|टपालन गह म समÎचत 1थान|
ृ ु


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पर Íखड़Íकयाँ भी आव°यक ह, िजसके कH म पयाB मा³ा म हवा का आवागमन हो सके । साथ
ह| यह भी आव°यक है Íक क|टपालन गह को Íवश@ीकरण हे त एयरटाइट Íकया जा सके ।
ृ ु ु

फसल चH फसल चH फसल चH फसल चH

9थम वष म 1थाÍपत शहतत वHारोपण म ू ृ
समÎचत दे खभाल म ͧतीय वष म शहतत पôी का ु ू
उcपादन समÎचत मा³ा म हो ु जाता है । 9दे श म ÍवÎभ7न 1थान|/9Hे³| म तापमान आ5 ता को
²यान म रखते हए रे शम क|टपालन वष म चार पाँच बार ह| Íकया जा सकता है । एक बार का


क|टपालन एक फसल कहलाता है । पण वष म क|टपालन फसल हे त Îन+न फसल चH ू ु ÎनधाÍरत
Íकया गया है ।
H HH H० ०० ०स सस स० ०० ० फसल का नाम फसल का नाम फसल का नाम फसल का नाम क|टपालन फसल अवÎध क|टपालन फसल अवÎध क|टपालन फसल अवÎध क|टपालन फसल अवÎध क|ट 9जाÎत क|ट 9जाÎत क|ट 9जाÎत क|ट 9जाÎत
· · · ·
20 फरवर| से 20 माच तक बस7त फसल बाईबो~ट|न ¹बाईबो~ट|न
z z z z
01 अ9ैल से 25 अ9ैल तक 0ी*म फसल म~ट|¹बाई
s s s s
20 अग1त से 15 Îसत+बर तक मानसन फसल ू म~ट|¹बाई
« « « «
01 अ4टबर से ू 30 अ4टबर तक ू पतझड़ फसल म~ट|¹बाई
नोट नोट नोट नोट - शहतत क| पc ती ू क| उपल«धता एवं तापHम तथा आ5 ता के अनFप ु उपरोñ फसल चH म पÍरवत न स+भव है ।

क|टपालन क| तैयार| क|टपालन क| तैयार| क|टपालन क| तैयार| क|टपालन क| तैयार| ( (( (Íवश@ीकरण Íवश@ीकरण Íवश@ीकरण Íवश@ीकरण ु ु ु ु ) )) )
9cये क क|टपालन फसल से पव सभी क|टपलन ू उपकरण एवं क|टपालन गह क| अ¯छ| तरह

सफाई धलाई करते हए फाम ल|न से Íवश@ीकरण ु ु

Íकया
जाता है । फम ल|न के 2: अथवा 3: घोल का उपकरण|/गह

के द|वाल, छत, फश आÍद म Îछड़काव Íकया जाना चाÍहए,
िजससे बीमाÍरय| के जीवाण न8 हो जाय। क|टपालन गह ु ृ
को फाम ल|न Îछड़काव के उपरा7त 24 घÞटे तक हवारोक
(एयरटाइट) ब7द Íकया जाना चाÍहए। लगभग 7 से 8
ल|टर 2 : फाम ल|न घे ल से लगभग 100 वगमीटर Hे³ म Íवश@ी ु करण Íकया जाता है । इसके
अÎतÍरñ क|टपालन उपकरण| को «ल|Îचं ग पाउडर का 9योग क|टपालन गह के आस

-पास शहतत ू
वHारोपण म Íवश@ीकरण के Fप म भी Íकया जाता है ।
ृ ु



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रे शम क|टाÞड| का सेवन रे शम क|टाÞड| का सेवन रे शम क|टाÞड| का सेवन रे शम क|टाÞड| का सेवन ( (( (इ74यबेशन इ74यबेशन इ74यबेशन इ74यबेशन ू ूू ू ) )) )
रोगरÍहत रे शम क|टाÞड| को क|टपालन गह म çे म एक पत

ल| तह के Fप म रखा जाता है । गह

म तापमान 25 Íड0ी सेÞट|0ेट एवं आ5 ता लगभग 80-90 सÎनि°त क| जाती है । आ5 ता सÎनि°त ु ु
करते हए पै राÍफन पेपर एवं फोम पैड

का 9योग Íकया जाता है । क|टाÞड| म जब 'Íपन हे ड 1टे ज'
आती है , तो क|टाÞड| को अंधेरे म रखा जाता है । 91फटन क| स+भाÍवत ÎतÎथ को 9ात ु : काल म
क|टाÞड| को 9काश म रखा जाता है । िजसम लखभग 90-95 : क|टाÞड| म 91फटन हो ु जाता है ।
ñÎशग ñÎशग ñÎशग ñÎशगं ं ं ं
क|टाÞड| म 91फÍटत लाव| को अÎधक समय तक भखा नह|ं रखा जाना चाÍहए। लावा को शहतत ु ू ू
क| मलायम पÍôयां छोटे आकार ु (0.5 स ट|मीटर से लेकर 1 सट|मीटर तक) क| काटकर डाल| जाती
है । सभी लावा पÍôय| पर चढ़ जाते ह। 10-15 Îमनट के प°ात रे शम क|ट| को एक मलायम पं ख ु
से धीरे धीरे क|टपालन çे म पÍôय| के साथ झाड़ दे ते ह एवं क|टपालन बेड तैयार कर लेते ह।
पÍôय| को सखने से बचाने के Îलए एवं क|टपालन बेड ू म आव°यक आ5 ता सÎनि°त करने हे त ु ु
फोम पैड लगाते हए क|टपालन çे को

पैराफ|न पेपर से ढक Íदया जाता है ।
रे शम क|टपालन शैशव अव1था रे शम क|टपालन शैशव अव1था रे शम क|टपालन शैशव अव1था रे शम क|टपालन शैशव अव1था
रे शम क|ट| क| 9थम एवं ͧतीय अव1था को शैशव अव1था कहा जाता है । शैशव अव1था म
तापHम एवं आ5 ता एवं क|ट| का फै लाव हे त Îन+न मापदÞड ु होते है :-
वेट अव1था वेट अव1था वेट अव1था वेट अव1था Íदवस Íदवस Íदवस Íदवस

तापHम आ5 ता तापHम आ5 ता तापHम आ5 ता तापHम आ5 ता (9Îतशत 9Îतशत 9Îतशत 9Îतशत)क|टपालन बे ड का क|टपालन बे ड का क|टपालन बे ड का क|टपालन बे ड का
आकार आकार आकार आकार
फ|Íडं ग फ|Íडं ग फ|Íडं ग फ|Íडं ग बे ड क| सफाई बे ड क| सफाई बे ड क| सफाई बे ड क| सफाई
9थम अव1था
1 9" x12" 4 --------
3 18" x 12" 4 --------
3 8" x 16" 4 -------
4
27 Íड0ी से० 0े० 90
9" x 12" 4
01 मो~ट
ͧतीय अव1था
1
उपय ñानसार ु ु
24" x 24" 4 01
2
उपय ñानसार ु ु
30" x 24" 4
शहतत क| पÍôय| का चनाव एवं गणवôा शहतत क| पÍôय| का चनाव एवं गणवôा शहतत क| पÍôय| का चनाव एवं गणवôा शहतत क| पÍôय| का चनाव एवं गणवôा ू ु ु ू ु ु ू ु ु ू ु ु
ñÎशगं (91फटन ु ) से ͧतीय अव1था क| समाÎB तक रे शम क|ट| को मलायम पÍôयां Íखलाई ु
जाती ह। ऊपर क| 9थम चमकदार बड़ी पôी से नीचे तीसरे अथवा चौथी पôी का चनाव ु करते

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हए तोड़ना चाÍहए। उनके नीचे क|

5 से 7 पÍôय| को ͧतीय अव1था तक Íदया जाता है । 9थम
अव1था म पôी का आकार 0.5 से 1 से० मी० वग आकार क| काटकर Íखलाई जाती है ।

शहतत क| पôी का रख शहतत क| पôी का रख शहतत क| पôी का रख शहतत क| पôी का रख ू ूू ू - -- -रखाव रखाव रखाव रखाव
पौÍ8कता एवं नमी से भरपर ू उ¯च गणवôा क| पÍôय| के भोजन से रे शम क|ट| म सव|ôम ु
Íवकास होता है । शहतत पÍôय| से जो रे शम क|ट| का एकमा³ भोज है ू , को सह| ढं ग से सरÍHत ु
रखा जाना आव°यक है , िजससे इसक| नमी म Îगरावट न आये । शहतत पÍôय| को भोगे गनी ू
4लाथ म ढककर रखा जाता है । उñ हे त ल|फ चै+बर का भी 9योग Íकया जाता ु है ।
सफाई सफाई सफाई सफाई
रे शम क|टपालन के समय क|टपालन बेड क| सफाई आव°यक है , 4य|Íक उसम रे शम, क|ट| का
मल एवं परानी बची हई पÍôयां होती ु

ह 9थम अव1था म मो~ट से एक Íदन पव मा³ एक ू
सफाई क| जाती हे । ͧतीय अव1था म दो सफाई क| जाती है । पहल| मो~ट खलने के बाद ु
फ|Íडं ग दे ने के बाद एवं दसर| ͧतीय ू मो~ट से एक Íदन पव सफाई क| जाती है । ͧतीय अव1था ू
म दो सफाई क| जाती है । 0.5x0.5 आकार वाल| ने टको क|टपालन बे ड के ऊपर डालते हए ताजी

शहतत क| पÍôयाँ नेट ू के ऊपर डाल| जाती है । रे शम क|ट नेट के Îछ5| से र गकर ताजी पÍôय|
के ऊपर चढ़ जाते ह । कर|ब आधा घÞटे बाद नेट को क|ट| सÍहत दसरे ू क|टपालन çे म
1थानांतÍरत कर Íदया जाता है , एवं बची हई

पÍôय| एवं रे शम क|ट के मल
(ए4सH|टा) को खेत मे गqढ बनाकर दबा Íदया जाता है ।
मो~ट मो~ट मो~ट मो~ट
मो~ट एक ऐसी 9ÍHया है , िजसम रे शम क|ट अपने शर|र क| cवचा को बदलते ह। इस 9ÍHया म
रे शम क|ट पôी नह|ं खाते ह। रे शम क|ट| म लावा क| 5 अव1था म 4 मो~ट होते ह। जब रे शम
क|ट मो~ट म जाने क| तैयार| करते ह, तो क|टपालन बे ड से फोम पे ड एवं पैराÍफन पे पर हटा
Íदया जाता है । इस अव1था म क| ट| को छोट| आकार क| पÍôयां द| जाती ह। मो~ट के 9ार+भ
से लेकर मो~ट क| समाÎB तक सावधानी से सभी रे शमक|ट| म समान Íवकास होता हे । मो~ट के
समय क|टपालन बे ड पतला एवं सखा होना चाÍहए एवं गह म हवा का ू ृ
आवागमन सचाF होना ु
चाÍहए। मो~ट क| अव1था म अÎधक आ5 ता रे शम क|ट हे तु न4सानदायक होती है । ु
उôराव1था रे शम क|टपालन उôराव1था रे शम क|टपालन उôराव1था रे शम क|टपालन उôराव1था रे शम क|टपालन
रे शम क|ट| क| ततीय

, चतथ ु एवं पंचम अव1था को उôराव1था क|टपालन कहा जाता है । तापHम
एवं आ5 ता क| आव°यकता बढ़ती अव1था के साथ होती जाती है । ततीय एवं चतथ अव1था म
ृ ु
कछ बड़ी

पÍôयां एवं पंचम अव1था म पण पÍôयां रे शमक|ट को द| जानी चाÍहए। अÎधक ू परानी ु
एवं पील| पÍôयां रे शम क|ट| को नह|ं Íखलाई जानी चाÍहए। उôराव1था के ÍवÎभ7न अव1थाओं म
तापHम एवं आ5 ता क| आव°यकता Îन+नवत् है :-

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ततीय अव1था ततीय अव1था ततीय अव1था ततीय अव1था
ृ ृृ ृ
चतथ अव1था चतथ अव1था चतथ अव1था चतथ अव1था ु ु ु ु पंचम अव1था पंचम अव1था पंचम अव1था पंचम अव1था
तापHम तापHम तापHम तापHम (0 स स स स ० ० ० ० 0े 0े 0े 0े ० ०० ०)
26 25 24
आ5 ता आ5 ता आ5 ता आ5 ता (9Îतशत 9Îतशत 9Îतशत 9Îतशत)
80 70-75 70
मा मा मा माउिÞटं ग उिÞटं ग उिÞटं ग उिÞटं ग
अि7तम अव1था म जब रे शम क|ट पण Fप से ÍवकÎसत हो जाते ह ू , तो
वे पôी खाना ब7द कर दे ते ह। ये क|ट रे शम कोया Îनमाण हे त तैयार ु
होते ह। इस अव1था म रे शम क|ट| का शर|र थोड़ा पारदश| हो जाता है
एवं क|ट अपने Îसर को ऊपर कर 1थान क| तलाश करता है । इस
अव1था म रे शम क|ट| को चनकर माउÞटे ज ु (च75ाक| म )रखा जाता है ।
पÍरप4व रे शम क|ट| को माउÞटे ज म 1थानांतÍरत करने म Íवल+ब से
रे शम क|ट रे शम क| HÎत कर दे ते ह। माउÞटे ज म क|ट| को 40-45 क|ट
9Îत वग फट क| दर से रखा जाना चाÍहए। ु इस 9कार 6x4 के आकार क|
च75ाक| म लगभग 1000 क|ट माउÞट Íकये जा सकते ह।
रे शम कोय को तोड़ना रे शम कोय को तोड़ना रे शम कोय को तोड़ना रे शम कोय को तोड़ना( (( (हावि1टं ग हावि1टं ग हावि1टं ग हावि1टं ग ) )) )
माउÞटे ज म क|ट रखने के प°ात 48 से 72 घÞटे म रे शमक|ट कोया
Îनमाण कर लेते ह, पर7त इस अव1था म कोय| को नह|ं तोड़ना ु
चाÍहए, 4य|Íक क|ट अcय7त नाजक एवं ु मलायम होते ह । कोय| को ु
माउÞट करने क| ÎतÎथ से पाँचवे/छठव Íदन तोड़ा जाना चाÍहए, जब
रे शम कोय| के अ7दर ¯यपा का Îनमाण हो जाये ।माउÞटे ज ू (च75ाक|)
म रे शम कोय| को तोड़ने से पव मरे हए क|ट| ू

, खराब कोय| को पहले
Îनकाल दे ते ह एवं अ¯छे कोय| को 0ेडकर छांट ले ते ह
रे शम कोय| क| 0ेÍडं ग रे शम कोय| क| 0ेÍडं ग रे शम कोय| क| 0ेÍडं ग रे शम कोय| क| 0ेÍडं ग
कोय| को तोड़ने के उपरा7त कोय| म 0ेड के अनसार छटाई ु आव°यक है । ि9लमजी/डे मे7ड/एवं डबर
कोय| को छांटकर अलग Íकया जाता है । िजससे अवशेष मा³ र|Îलं ग यो¹य कोये रह कर र|Îलं ग
यो¹य कोय| को 'अ','ब','स' ÷ेणी म बॉट Îलया जाता है तcप°ात ÷े णीवार कोय| का Íवपणन Íकया
जाता है । कोय| क| 0ेÍडं ग Íकया जाना इसÎलए भी आव°यक है Íक कषक को उÎचत म~य 9ाB हो
ृ ू
सके । उदाहरण के Îलए यÍद कोई कषक उcपाÍदत

10 Íक० 0ा० कोया क| 0े Íडं ग नह|ं करता है , तो

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उसे मा³ 'स' ÷ेणी क| दर ह| 9ापत हो पाती है । यÍद उसी कोये को ÷ेणीवार Íवपणन Íकया जाए, तो
कषक को ÷ेणीवार कोया म~य 9ाB होता है
ृ ू , जो पहले से 7यादा म~य का होता ू है
रे शम कोय| का Íवपणन रे शम कोय| का Íवपणन रे शम कोय| का Íवपणन रे शम कोय| का Íवपणन
कोया तोड़ने (हावि1टं ग ) के उपरा7त रे शम कोया Íवपणन हे त रे श ु म Íवभाग के ÍवÎभ7न के 75 पर
एक³ Íकया जाता है , जहां से कोये को कोया बाजार| म 9ेÍषत Íकया जाता है । बाजार म 9Îत1पधा के
आधार पर अÎधकतम दर पर कोया का ÍवHय Íकया जाता है एवं रे शम कोय| का भगतान कषक को ु ृ
उपल«ध कराया जाता है ,
रे शम धागाकरण रे शम धागाकरण रे शम धागाकरण रे शम धागाकरण (कोया से धागा Îनकालने क| 9ÍHया) क| 9चÎलत प@Îतय| के अ7तग त (अ) चरखा
र|Îलं ग (ब) कोटे जबेÎसन (स) म~ट|इ7डमशीन| §ारा र|Îलं ग क| जाती है ।
चरखा र|Îलं ग चरखा र|Îलं ग चरखा र|Îलं ग चरखा र|Îलं ग :-इस प@Îत §ारा इनफ|Íरयर 0ेड के रे शम कोयो र|Îलं ग क| जाती है । 9Îत 8 घंटे म 3
Íक० 0ा० सखे कोयो ू से 700 से 800 0ाम तक धागा उcपादन स+भाÍवत है । चरख पर सामा7यत:
म~ट|-वो~ट|न 9जाÎत के कोया का धागाकरण हो पाता है ।
कोटे ज बे Îसन कोटे ज बे Îसन कोटे ज बे Îसन कोटे ज बे Îसन
इस मा²यम से एक बेÎसन के साथ 10 र|ल संचाÎलत होती है , िजसम एक र|लर 8 घÞटे के अ7तग त
लगभग 5 Íक० 0ा० सखा कोया र|ल करके ल ू गभग 1250 0ा० धागा उcपादन कर सकता है ।यह
मशीन ह1त एवं पावर चाÎलत होती है िजस पर म~ट| वो~ट|न कोये का धागाकरण Íकया जाना
उÎचत रहता है ।



म~ट|इ7ड र|Îलं ग क| मशीन म~ट|इ7ड र|Îलं ग क| मशीन म~ट|इ7ड र|Îलं ग क| मशीन म~ट|इ7ड र|Îलं ग क| मशीन
धागाकरण क| ÍवकÎसत प@Îत के अनतग त यह मशीन Íव²त ु
चाÎलत जेट बोट सÍवधायñ है । इससे बा ु ु इबो~ट|न कोय| क| र|Îलं ग
गणवôापण तर|के से स+भाÍवत है ।इस मशीन के एक बे Îसन पर ु ू 8
घÞटे म 5 Íक० 0ा० कोया से 1500 0ाम तक रे शम धागा उcपादन
स+भाÍवत है । यÍद कषक

/कषक समह §ारा उcपाÍदत
ृ ू कोया का ÍवHय


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न करके उसका धागाकरण कर रे शम धागे का ÍवHय Íकया जाये तो आय म और वÍ@

(वै~यएडीशन ू )
हो जाती है ।
1. दे श म एवं उôर 9दे श म रे शम धागे क| मांग म उôरोôर वÍ@ हो रह| है । उôर 9दे श रे शमी

वU| के उcपादन म अ0णी है ,जबÍक रे शम धागे का उcपादन मांग क| तलना म अपे Hाकत ु ृ
काफ| कम है ।
2. 9दे श क| जलवायु,सामािजक एवं आÎथ क पÍरवे श म रे शम धागे के उcपादन क| 9बल
स+भावनाय ÎनÍहत ह।
3. Íहमालय क| तलहट| Hे³ एवं दे हरादन से सटे ू सहारनपर ु /Íबजनौर Hे³ म उ¯चकोÍट के
बाईवो~ट|न 9जाÎत का कोया उcपादन कर अ7तराçीय 1तर के रे श धागे का उcपादन Íकया
जा सकता है ।
4. 9दे श म उ¯चकोÍट के रे शम धागे के उcपादन से न के वल 1थानीय मांग क| पÎत क| जा ू
सकती है , वरन भारत के बढते Îनया त म भी ् योगदान Íदया जा सकता है ।
5. पर+परागत खेती के साथ-साथ शहतत क| खेती भी ू अपनाने से कषक| को अपने घर पर ह|


रे शम उ²ोग से रोजगार 9ाB होता है ।
Íवभागीय 9ाथÎमकताय Íवभागीय 9ाथÎमकताय Íवभागीय 9ाथÎमकताय Íवभागीय 9ाथÎमकताय
1. उ7नत 9जाÎत के शहतत स+पदा का Íवकास ू ।
2. रे शम बीज संगठन का सTÍढ़करण। ु
3. 9Îत1पधाcमक एवं अÎधक कोया क|मत पर क|टपालाक| को cवÍरत भगतान। ु
4. राजक|य रे शम फाम| का सTढ़|करण एवं ु पनग ठन। ु
5. Íवभागीय काय| क| गणवôा म सधार हे त ु ु ु Íवभागीय गÎतÍवÎधय| का माÎसक भौÎतक
सcयापन।
6. रे शम बनकर| के मा²यम से उ7नत 9जाÎत का ु शहतत वHारोपण ू ृ
,रे शम कोया एवं धागा
उcपादन।
7. उcपादकता एवं गणवôा म सधार। ु ु
8. रे शम Íवकास काय| म मÍहलाओं क| सहभाÎगता।
9. धागाकरण इकाईय| का Íवकास।
10. Îनजीकरण को बढ़ावा दे ना।
11. बाई9ोड4Çस का बेहतर उपयोग।
12. रे शम Íवकास काय| म सहकार| सÎमÎतय| क| सहभाÎगता सÎनि°त करने हे त उ7ह उ¯चीकत ु ु ृ
करना।

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Íवभाग क| रणनीÎतयाँ Íवभाग क| रणनीÎतयाँ Íवभाग क| रणनीÎतयाँ Íवभाग क| रणनीÎतयाँ
1. रे शम उ²ोग म ÍवकÎसत नवीन तकनीÍकय| का Hमब@ काया 7वय।
2. रे शम उ²ोग म जड़े ु लाभाÎथ य|, Íवभागीय काÎम क| एवं 1वैि¯छक संगठन| के 9ÎतÎनÎधय| को रे शम
उ²ोग म वहत

9ÎशHण का काय Hम।
3. रे शम उc पादन के 9चार-9सार एवं 9भावी अन÷वण ु पर Íवशेष बल।
4. रे शम उ²ोग के ÍवÎभ7न काय Hम| को Îनजी Hे³ म ÍवकÎसत करना।
5. 0ा+य पंचायत से लेकर ÍवकासखÞड, िजला 9शासन, 0ामीण Íवकास, वन Íवभाग, हथकरघा Íवभाग,
खाद|, नहर/Îसं चाई Íवभाग, उ²ान Íवभाग, सी-मैप, के 75|य रे शम बोड इcयाÍद के सहयोग से रे शम
उ²ोग को बढ़ावा Íदया जाना।
6. राजक|य 9Hे³ क| खाल| पड़ी भÎम ू पर एवं 15 से 20 वष पराने ु अनcपादक ु शहतत ू पौध| को हटाकर
उनके 1थान पर नव ÍवकÎसत उ7नत Íक1म के शहतत ू पौध (जैसे एस-146, एस-1, वी-1 इcयाÍद) का
रोपण कर रे शम कोया उcपादन म वÍ@।


7. तराई एवं मैदानी Hे³ (च+बल घाट| से लगे Hे ³ जैसे इटावा/औरै या) म "सेर|टै 4नालॉजी फाम " क|
1थापना जहाँ Íकसान अथवा उ²मी रे शम उ²ोग के सम1त काय Hम|, जो आधÎनकतम ु तकनीÍक पर
आधाÍरत होगा, को दे खकर Íवभागीय गÎतÍवÎधय| को समझ सके ।
Íवभाग के 9यास Íवभाग के 9यास Íवभाग के 9यास Íवभाग के 9यास
1. 9दे श म के वल उ7नत Íक1म के शहतत ू पौध उcपादन एवं उ¯च उcपादकता वाले रोग रÍहत
रे शम क|टबीज उcपादन म आcम Îनभ र होना।
2. कोया उcपादक| )क|टपालक| (को उनके उcपाद )ककन

( का आकष क म~य 9ा¯ त ू करने एवं
cवÍरत भगतान हे त कोया Íवपणन 9णाल| म ु ु सधार । ु
3. रे शम उcपादन काय Hम को सहकाÍरता एवं समह| के मा²यम से ू संचाÎलत करना।
4. 9दे श के क|टपालाक|, रे शम धागाकारक| (र|लस ) एवं बनकर| को एक ¯लेटफाम पर लाकर ु
रे शम धागे क| 1थानीय आव°यकताओं के अनसार कोया एवं धागा उcपादन। ु
5. रे शम उ²ोग के अ7तग त उcप7न होने वाले "बाई9ोड4Çस" का समÎचत उपयोग। ु
6. Íवभागीय कायHम|/गÎतÍवÎधय| म पारदÎश ता बनाये रखने के Îलए "दप ण योजना" लाग ू
करना।
7. राजक|य रे शम धागाकरण इकाईय| के 9ब7धन/संचालन म इ¯छक कषक ु ृ
/मÍहला समह| ू ,
सहकार| सÎमÎतय| एवं 1वैि¯छक संगठन| क| सहभाÎगता।
8. काय| क| गणवôा म सधार हे त ु ु ु Íवभागीय गÎतÍवÎधय| का माÎसक अन÷वण एवं 1थल|य ु
सcयापन।

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9. 9दे श म गैर शहतती रे शम Íवकास पर ू बल।
10. काÎम क| के 9cये क 1तर पर उôरदाÎयcव| का Îनधारण कर उनक| जवाबदे ह| सÎनि°त करना। ु
मÍहलाओं क| मÍहलाओं क| मÍहलाओं क| मÍहलाओं क| सहभाÎगता सहभाÎगता सहभाÎगता सहभाÎगता
जनसंEया क| TÍ8 से लगभग आधा Íह1सा मÍहलाओं का है और वे उcपादन तथा अथ ¯यव1था क|
सामािजक 9ÍHयाओं के Îलए अÎत महcवपण ू है । पÍरवार के साथ-साथ आÎथ क Íवकास एवं
सामािजक पÍरवत न म मÍहलाओं का योगदान एवं भÎमका मEय है । अ7य योजनाओं क| भांÎत रे शम ू ु
उ²ोग म भी मÍहलाओं का योगदान बहत अÎधक है पर7त इस उ²ो

ु ग के 9ब7धन एवं Îनण लेने क|
9ÍHया म उनक| भागीदार| सÎनि°त करने हे त अभी तक बहत कम काय Íकया गया है ु ु


सामािजक एवं आÎथ क पÍरवत न सं 1थान, बंगलौर के अनसार क|ट| के क|टपालन म मÍहलाओं क| ु
सहभाÎगता 61 9Îतशत है तथा रे शम उ²ोग के ÍवÎभ7न ÍHया-कलाप| म उनका ÷मांश 53 9Îतशत
है । इससे यह 1प8 है Íक रे शम उ²ोग म मÍहलाओं क| सहभाÎगता बहत अÎधक है िजसका कारण

है -
1. रे शम उ²ोग का काय घर पर ह| Íकया जा सकता है इससे उ7ह उन कÍठनाइय| का सामना
नह|ं करना पड़ता जो उ7ह Íकसी फै 4ç| म काय करने से होती है ।
2. रे शम धागाकरण का काय करने वाल| मÍहलाएं अपने इस काय के साथ- साथ अ7य दाÎयcव|
क| भी पÎत आसानी से कर सकती ह। ू
3. कोया उcपादन एवं Íवपणन म मÍहलाओं क| भागीदार| होने से आय पर अ¯छा Îनयं ³ण
रहता है ।
4. रे शम उ²ोग क| आय लगातार सÎनि°त रहती ु है ।
5. रे शम उ²ोग म संल¹न होने से मÍहलाओं के ¯यÍñcव म Íवकास होता है तथा उनके आcम
Íव+ास म वÍ@ होती है 4य|Íक उ7 ह

इस उ²ोग के काय| के स+पादन म अपने घर, समाज
एवं यहां तक Íक 0ाम के बाहर के भी ¯यÍñय| से वाता करनी पड़ती है ।


उôर 9दे श रे शम उôर 9दे श रे शम उôर 9दे श रे शम उôर 9दे श रे शम Íवभाग Íवभाग Íवभाग Íवभाग का का का का 9यास 9यास 9यास 9यास होता होता होता होता है है है है क| क| क| क| 0ाम 1तर| पर मÍहलाओं का समह 0ाम 1तर| पर मÍहलाओं का समह 0ाम 1तर| पर मÍहलाओं का समह 0ाम 1तर| पर मÍहलाओं का समहू ूू ू / // /सहकार| सÎमÎत सहकार| सÎमÎत सहकार| सÎमÎत सहकार| सÎमÎत
का गठन करते हए रे शम उ²ोग के ÍवÎभ7न काय| का दाÎयcव उ7ह Íदया जाना चाÍहए जैसे का गठन करते हए रे शम उ²ोग के ÍवÎभ7न काय| का दाÎयcव उ7ह Íदया जाना चाÍहए जैसे का गठन करते हए रे शम उ²ोग के ÍवÎभ7न काय| का दाÎयcव उ7ह Íदया जाना चाÍहए जैसे का गठन करते हए रे शम उ²ोग के ÍवÎभ7न काय| का दाÎयcव उ7ह Íदया जाना चाÍहए जैसे
ु ु ु ु
: :: :- -- -
1. 0ाम समाज/सामदाÎयक भÎम म शहतत वHरोपरण कराते हए रे शम ु ू ू ृ

क|टपालन आÍद काय|
का दाÎयcव मÍहला समह| को Íदया जा सकता है । ू


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2. मÍहला समह| म आपसी सामंज1य 1थाÍपत कराते हए काय| का संचालन ू

इस 9कार Íकया
जा सकता है Íक कछ मÍहला समह नस र| 1थाÍपत करते हए शहतत के
ु ू ू

पौधे तैयार कर
ÍवHय कर तथा कछ मÍहला समह अपनी Îनजी भÎमय|
ु ू ू म शहतत रे शम का ू उcपादन एवं
Íवपणन काय कर । पÍरणाम| ने यह Îस@ Íकया है Íक रे शम उ²ोग अब एक अÎतÍरñ आय
का साधन नह|ं रह गया है वरन यह उ²ोग 0ामीण अंचल| क| अथ ¯यव1 था को सTए करने ु
हे त एक महcवपण उ²ोग है । मÍहला समह| §ारा रे शम उ²ो ु ू ू ग के काय| के साथ-साथ अपने
0ाम-Hे³ म अ7य Íवकास काय| म भी भागीदार| सÎनि°त क| जा सकती है िजससे ु
अ7तत: उनके 0ाम/Hे ³ का सामािजक एवं आÎथ क Íवकास होगा।
अंत अंत अंत अंत म म म म म म म म यह यह यह यह कहना कहना कहना कहना चाहगा चाहगा चाहगा चाहगा
ू ूू ू
ँ ँँ ँ :-
उôर 9दे श भारतवष का सबसे बड़ा 9दे श है जहाँ कÍष

एवं कÍष

पर आधाÍरत उ²ोग| को बढ़ावा दे ने
पर उ०9० सरकार कत

संक~प है । यहाँ क| जनता । Íकसान अपने पर+परागत काय| के अÎतÍरñ
ऐसे कायHम| म Íवशेष FÎच रखता है िजससे जीÍवकोपाज न हे तु अÎतÍरñ आय क| स+भावना 9बल
हो सके । पर7तु जन सामा7य क| Íकसी Íवभाग । उपHम से 4या अपेHाय है , यह सरकार| Íवभाग|
को जानना आव°यक रहता है । कभी-कभी ऐसे उदाहरण सामने आते रहते है Íक ÍवÎभ7न Íवभाग| के
ÍHयाकलप| क| जानकार| जन-जन तक न होने पर लोग| को जनाकर| 9ाB करने के Îलए परे शान
होना पड़ता है । अत: इस पÍर9े +य म रे शम Íवकास Íवभाग ने 9दे श क| जनता के Îलए "नगÍरक
चाट र" को ÍवकÎसत करने का 9यास Íकया है ।
उôर 9दे श, जहाँ 9Îतवष लगभग 4000 मी० टन रे शम धागे क| आव°यकता होती है , क| जलवायु
रे शम उcपादन के Îलए सव था उपयñ ु पायी गयी है । 9दे श म एक रे शम Îनदे शालय क| 1थापना इस
उ£े°य से क| गयी है Íक वह Hे³ Íवशेष म रे शम उcपादन क| संभावनाओं का पता लगाकर वहाँ के
Îलए Íवशेष योजनाओं । पÍरयोजनाओं क| संरचना कर उसे ÍHयाि7वत करे िजससे 9दे श म रे शम
उcपादन म वÍ@

के साथ-साथ रोजगार के अवसर सिजत

ह|। इस संधब म इ¯छक ु ¯यÍñ Hे³
के रे शम Íवभाग म संपक साध सकते है और हमार| वै7ाÎनक तकनीÍकय| से लाभाि7वत हो सकत
ह ।
अरÍवं द अरÍवं द अरÍवं द अरÍवं द कमार कमार कमार कमार
ु ु ु ु

उप Îनदे शक औरै या
पÍरHे³
उôर 9दे श




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काय शाला क| काय शाला क| काय शाला क| काय शाला क| आEया आEया आEया आEया
Íव7ान Íव7ान Íव7ान Íव7ान ले खन ले खन ले खन ले खन काय शाला काय शाला काय शाला काय शाला 2010


Íव7ान ले ख, Íव7ान कहानी, Íव7ान कÍवता, Íव7ान प³काÍरता, मÍ5त ु मा²यम| एवम इले4çोÎनक मा²यम| हे तु संपाÍदत,
एसोÎसएशन आफ साइंÍटÍफक Íरसच एंड डे वलपम ट, Íद~ल| ।

नवांकर ु रचनाकार िज7ह|ने Íदनांक 16 अग1त 2010, से 19 अग1त 2010 तक अपे4स कं ¯यटर ू इंि1टÇयट ू , “औरै या, उôर
9दे श, म Íव7ान लेखन का 9ÎशHण 9ाB Íकया है । राçीय Íव7ान एवम 9ौधोÎगक| संचार पÍरषq (रा० Íव० 9ौ०सं०प०),
Íव7ान एवम Íवभाग, नई Íद~ल| §ारा उc9ेÍरत एवम एसोÎसएशन आफ सइंÍटÍफक Íरसच एंड डे वलपम ट, Íद~ल|
§ारा आयोिजत काय Hम, Íदनांक 16 अग1त 2010, से 19 अग1त 2010 तक अपे4स कं ¯यटर ू इंि1टÇयट ू , औरै या,
उôर 9दे श म आयोिजत Íकया गया । िजसक| संÎचB आEया Íदनांक वार इस 9कार है ।


Íदनां क Íदनां क Íदनां क Íदनां क 16 अग1त अग1त अग1त अग1त 2010 2010 2010 2010

Íदनांक 16 अग1त 2010, को 9ातः 8 बजे से 9ÎतभाÎगय| का आगमन उनका पंजीकरण Íकट Íवतरण तथा चाय / काफ| काय Hम
10 बजे पवाहन ू तक जार| रहा 9ात: 10 बजे 1व: अ~पाहार चाय / काफ| के साथ 9ÎतभाÎगय| §ारा आपसी Íवचार Íवमश 10
बज कर 50 Îमनट तक चला तcप°यत उदघाटन समाहरोह के Îलए 9Îतभागी सभागार म एकͳत हए


9ातः 11बजे सभागार म 9Îतभागी गन पहं च

गये ।Íफर उदघाटन स³ हे तु अÎथÎतय| एवं मEय ु अÎथÎथ महोदय सभागार म पहं चे


और मंचासीन हए

इस काय Hम के मEय ु अÎथÎत डा० आर० पी० एस० कशवाह ु , Í9ं Îसपल थे तथा काय Hम क| अद²यHता
÷ी० राम दô Îतवार| ने क|, काय Hम म मांचासीन अÎतÎथओं म डा० आर० पी० एस० कशवाह ु , डा० राम के श शमा , ÷ी०
राम दô Îतवार|, ÷ी० ओम नारायण चतवद| ु , ÷ी० 9²+न ु चतवद| ु , काय Hम का संजोयन Íकया
तथा संचालन करता एसोÎसएशन आफ साइंÍटÍफक Íरसच एंड डे वलपम ट, के डायरे 4टर ÷ी० आर० पी० Îसं ह ने
सभी अÎथÎथय| क| अगवानी क| और उ7ह मंच तक ले गये । सव 9थम डा० आर० पी० एस० कशवाह ु , Í9ं Îसपल कानपरु ,
और Íवषय Íवशे ष7| तथा अ7य ÍवÎश8 अÎथÎथय| ने सभागार म 7ान द|प 9जवÎलत Íकया तो सभागार ताÎलय|
क| गढ़-गढ़ाहट से गजू ँ गया। तदनपरांत ु मंचासीन अÎथÎतय| को प*प ु ग¯छ ु 9दान Íकया गया और Íफर Íव7ान वंदना
क| 91तÎत ु हई

, सं1थान के महा-सÎचव 9ो० आई० बी० Îसं ह जो Íक खदु एक वÍर8 वै7ाÎनक ह , और भारत सरकार के
सलाहकार रह चके है , तथा वै7ाÎनक “जी” के पद से, Íव7ान और 9ौधोÎगक| Íवभाग से सेवा Îनवतृ
वÍर8 वै7ाÎनक §ारा सभी का 1वागत Íकया गया और उ7ह|ने सबसे पहले अपनी सं1था का पÍरचय Íदया तथा Íहं द| म Íव7ान ले ख
न क| काय शालाओं के औÎचcय और महcव पर 9काश डाला, Íवशे ष Íवशे ष7| के §ारा काय Hम म सार -गभÍहत
उधबोधन Íकया गया Íव7ान ले खन काय शालाय| के महcव एवम उसक| आव°यकताओं तथा उपयोगाÎगता पर
Íव1तार से 9काश डाला गया । Íवशे ष अÎथÎतय| के उधबोधन के प°यात काय Hम के मEय ु डा० आर० पी० एस० कशवाह ु
का सार गÎभ त उधबोधन हआ।

िजसम उ7ह|ने Íव7ान संचार के महcव को रे खांÍकत करते हए

भारतीय
कÍष

तथा Íकसान| क| दयनीय ि1थÎत का Îच³ण करते हए

कहा क| Íव7ान संचार उनके हालत को बदल सकता है , खेत खÎलयान
और Íकसान क| त1वीर बदलते ह| दे श क| त1वीर बदल जायेगी, आव°यकता है क| हम जापान से
सीख जो क| Í5cय य@ु के Íवनाश के बाद बावजदू Íव7ान के मा²यम से इतनी उ7नÎत कर ल| क| आज वो दÎनया ु का



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9ौ²ोÎगक| म सबसे अ0णीय दे श है । उ7ह|ने कहा क| जापान म जापानी उ²ोग करता उ²ोग| लगाने
से पव ू यह सोचता है , हमारे राç व् समाज को Íकतना लाभ होगा पर7तु हमारे दे श म परं परा Íवपर|त है यहाँ उ²ोगपÎत Îसफ अपने
लाभ क| बात सोचता है । हमारा सौभा¹य है क| हमारे बीच भारत सरकार से सेवा Îनवत

Íव7ान और 9ौ²ोÎगक| Íवभाग के
वÍर8 वै7ाÎनक Îन1वाथ भावना से इस छोट| से जगह औरै या म आये और अपनी सं1था के मा²यम से बहत

अथक 9यास| और
कÍठनाइय| के बावजदू उनके 5ण Îन°य के आगे इस Íव7ान कायशाला का आयोजन हमारे और या म शFु Íकया तथा
मEय ु अÎथÎत ने 9Îत भाÎगय| का आहवान करते हए

कहा क| आप इस काय शाला म जो भी 7ान वध न
करे ग उसका उपयोग 1वयं अपने Îलए समाज क| भलाइय| के Îलए करते रहे तभी हम Íवकास के स¯चे रा1ते पर
आग बढ सकते ह।

मEय ु अÎथÎथ के उ§ोधन के प°³चत काय Hम क| अ²यHता कर रहे ÷ी० राम दô Îतवार| ने कहा उ7ह|ने कहा 20 सद|
Íव7ान क| थी तो 21 सद| तकनीक| क| है । उ7ह|ने कहा क| यÍद Íव7ान को हम आcमा कह तो 9ौधोÎगक| उसका शÎशर है ।
दोन| के ह| Îस4के के दो पहलु ह। आज क| सबसे बड़ी आव°यकता है , क| हम चीज| को Íव7ान और 9ौधोÎगक| के कारण जो
बदलाव आ रह ह , उनके साथ 9भाव| को बढ़ाएं तथा दशु :9भाव| को समझकर उनका बचाव कर । यह बात हम आम
जनता तक ले जानी है ।

Íव7ान को हम जनता तक ले जाने के Îलए हम सभी भारतीय भाषाओ को अपनाना होगा चÍक ू ँ 1थानीय
1ôर के आम जनता म संचार क| अपनी Hे³ीय भाषा ह| होती है । आम जनता के जीवन म बदलाव लाने के Îलए हम
उ7ह|ं क| भाषा म बोलना होगा और साÍहcय भी उ7ह|ं क| भाषा म सिज त ु करना होगा तभी हम कछ ु आग बढ सकते है । ÷ी० राम
दô Îतवार| ने 1प8 श«द| म कहा क| आज सबसे बड़ी आव°यकता है लोग| क| मानÎसकता को बदलने क| और यह काम आसान हो
जायेगा यÍद हम लोग लोग| म वै7ाÎनक सोच, TÍ8कोण, को ÍवकÎसत करने म सफल हो जाए तो सभी सम1याओं का Îनदान
संभव हो जाएगा और राçीय 9गÎत करे गा, Íबना वै7ाÎनक जागFकता के राçीय Íवकास संभव नह|ं है । छोट|-छोट|
असामािजक दघ टनाओं ु से मÍñ ु के Îलए भी उ7ह|ने वै7ाÎनक जागFकता क| आव°यकता 9ÎतपाÍदत करते हए

,
भोपाल गै स ³ासद| का िजH करते हए

सट|क जानकार| 9दान क|।

अq²यHीय उ{ोदन के उपरा7त सं1था के डायरे 4टर ÷ी० आर० पी० Îसं ह ने सभी आगं तक| ु का अÎथÎतय| का ध7यवाद 7ाÍपत
कर आभार 9दशन Íकया। प°यात Íव7ान लेखन व प³काÍरता कायHम का उदघाटन संप7न हआ

तथा अÎथÎतय| सÍहत
9ÎतभाÎगय| ने Íव7ान प³ पͳकाओं का अवलोकन, पठन, पाठन कर 7ान अज न Íकया । काय Hम Íदन के 11
बजे से आरं भ हो कर दोपहर 2:30 चला। दोपहर का भोजन अवकाश हआ

और सभी ने सह भोज Íकया ।



Íदनां क Íदनां क Íदनां क Íदनां क 16 अग1त अग1त अग1त अग1त 2010 2010 2010 2010, पहला पहला पहला पहला तकनीक| तकनीक| तकनीक| तकनीक| स³ स³ स³ स³

Íदनांक 16अग1त 2010, पहला तकनीक| स³ भोजनावकाश तथा भोजनोपरांत काय शाला का पहला तकनीक| स³
आरं भ हआ

स³ क| अ²यHता ÷ी० राम के श शमा ने क| तथा मंचापÎत ू म ÷ी० आर० पी० Îसं ह, ओम नारायण चतवद| ु ,
÷ी० 9²मन ु और ÷ी० आर० डी० Îतवार| Íवषय Íवशे ष7 के Fप म उपि1थत रह काय शाला के इस 9थम
तकनीक| स³ के मEय ु अÎतÎथ अÎतÎथय| के मांचापÎत ू के उपरा7त Íवषय Íवशे ष7| ने अपना
पÍरचय 9ÎतभाÎगय| को Íदया तथा 9ÎतभाÎगय| से पÍरचय 0हण Íकया गया, इससे Íवषय Íवशे ष7| तथा 9ÎतभाÎगय|
म Îनकटता आयी तcप°यत Íवषय Íवशे ष7| का उधबोधन हआ

िजसमे काय शाला क| साथ कता सके उ£े यश
तथा ल+य 9ाÎB को ÎनदÎशत करते हए

9cयेक 9ÎतभाÎगय| को एक एक रचना Íकसी भी Íवधा म Îलखने के Îलए कहा, िजसम
Íव7ान समाÍहत हो । तथा आम जनता म वै7ाÎनक जागFकता क| Íदशा म एक कदम आग बढाने के Îलए 9ेÍरत


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करते ह| ÷ी० आर० डी० Îतवार| ने भी इस अवसर पर संÍHB Íक7तु सार गÎभ त¯याEयान Íदया जो 9ÎतभाÎगय| के माग
दश न हे त उ7ह ु ले खन के Îलए 9ोcसाÍहत करने वाला तथा 9ेरणादायी था । अं त: म अq²यÍHया उq«होधन
के पसचायत 9थम तकनीक| स³ : आवासन हआ

बाद म चाय /काफ| 1वा~पहार के समय 9ÎतभाÎगय| एवं Íवषय Íवशे ष7|
म आपसी Íवचार ÍवÎनमय हआ ।



दसरा दसरा दसरा दसरा
ू ूू ू
तकनीक| तकनीक| तकनीक| तकनीक| स³ स³ स³ स³

दसरा ू तकनीक| स³ म Íबना Íकसी औपचाÍरकता के Íवषय Íवशे ष7| ने 9ÎतभाÎगय| से चचा क| और उनक| िज7ासाओं को शांत
Íकया उनके मन म उठने वाले Íवचार| को समझा और शंका का समाधान Íकया रचना ले खन के आरि+भक Íट¯स (गरु ) Íदए तथा
9ÎतभाÎगय| से Íवषय चयन करने को कहा । 9ÎतभाÎगय| म काफ| उcसाहः Íदख रहा था, वै7ाÎनक Íवषय| का
चयन करते हए

Íवधा Îनधारण कर Íवषय Íवशे ष7| एवम 9ÎतभाÎगय| ने आपस म चचा कर अपने अपने ले खन के Íवषय|
का Îनधारण कर Îलया । िजस पर Íवषय Íवशे ष7| ने सहमती दशाते हए

यह भी ÎनदÎशत Íकया क| 9Îतभागी चाह तो
रचना क| Íवधा और Íवषय सोच कर आये उसे सोच Íवचार करके बदला भी जा सकता है । इसी के साथ Íदनांक 16 अग1त 2010,
के स³| का अवसान हआ

और चाय /काफ| 1वा~पहार के समय 9ÎतभाÎगय| एवं Íवषय Íवशे ष7| म आपसी Íवचार ÍवÎनमय हआ


तथा औपचाÍरक काय| के साथ आज का Íवराम और Íव÷ाम ।

तीसराः तीसराः तीसराः तीसराः तकÎन तकÎन तकÎन तकÎनक| क| क| क| स³ स³ स³ स³

Íदनांक 17 अग1त 2010 को चाय /काफ| 1वा~पहार के समय 9ÎतभाÎगय| एवं Íवषय Íवशे ष7| म आपसी Íवचार ÍवÎनमय
हआ

, तथा आपसी Íवचार Íवमश के प°ायत बजे से तीसरे स³ का शभाररं भ हआ सव 9थम Íवषय Íवशे ष7| का ु

9ाथÎमक उ§ोधन हआ काय शाला

से स+बंÎधत अब तक 9ÎतभाÎगय| के मन म कई 9÷ व संकाएँ थी,
उनका Îनवारण Íवषय Íवशे ष7| ने Íकया Íव7ान लेखन कै से Íकया जाए इसके Íट¯स (गरु ) Íवषय Íवशे स¹य| ने 9ÎतभाÎगय|
को Íदए । 9ÎतभाÎगय| ने जो ले खन के Íवषे य तथा Íव²ाएँ चयÎनत क| थी उन पर भी चचा हई

तथा 9ÎतभाÎगय| एवम Íवषय
Íवशे ष7| ने आपसी Íवचार ÍवÎनयम §ारा आपसी Íवचार ÍवÎनयम के बाद अं Îतम Fप Íदया गया । इस 9कार खल| ु चचा से
9ÎतभाÎगय| को 7ान-वध न हआ तथा

इस Íवचार मंथन से सभी लाभवाि7वत हए ।

चाय /काफ| 1वा~पहार के समय
9ÎतभाÎगय| एवं Íवषय Íवशे ष7| म आपसी आपसी Íवचार Íवमश इस स³ का अवसान हआ ।




चौथा चौथा चौथा चौथा तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| स³ स³ स³ स³

काय Hम के चौथे स³ म Íवषय Íवशेष7| §ारा इले4çोÎनक के मा²यम के Îलए Íव7ान लेखन से स+बंÎधत Íट¯स (गरु )
Íदए गए/ एतद Íवषे यक 9ÎतभाÎगय| के मन म जो भी शंकाएं है उनका समाधान Íवषय Íवशे ष7| §ारा Íकया गया । इस
स³ क| Íवशे षता यह रह| क| 9ÎतभाÎगय| को Íडिजटल कै मरा का चलाना सÍटं ग करना ू आÍद न के वल बताया गया
बि~क 9ÎतभाÎगय| को कै मरा आपरे ट करने के Íवषय म Íव1तार से बताया गया जो क| 9ÎतभाÎगय| को
बह

त ह| अ¯छा लगा 4य|Íक पÍरसर के बाहर भी चलाने का मौका Íदया गया । भोजनावकाश का समय हआ तो

भोजन के Îलए
स³ावसान Íकया गया ।




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पां चवा पां चवा पां चवा पां चवा तक तक तक तकÎनक| Îनक| Îनक| Îनक| स³ स³ स³ स³

यह स³ काफ| रोचक रहा 4योÍक 9ÎतभाÎगय| §ारा कै मरा संचालन Íकया उस से जड़े ु अनेक 9÷| का सामना Íवषय
Íवशे ष7| करना पड़ा । उ7ह|ने सभी 9÷| को सट|क ढं ग से समझाया गया । 9ÎतभाÎगय| §ारा ÍवÎभ7न पH| तथा ÍवÎभ7न
TÍ8 कोण से 9÷ पछे ू गए िजसके ना के वल उôर Íदए गए बि~क उनको सह| ढं ग से समझाया गया । Íवषय Íवशे ष7| §ारा
अपने संÎचB उदबोधन म यह ÎनदÎशत Íकया गया क| जो समझया जा रहा है वह आप के §ारा चयÎनत लेखन Íवषय को
आगे बढाने के Îलए बहत

आव°यक है । इस स³ म मÍ5त ु मा²यम| तथा इले4çोÎनक मा²यम| के लेखन के
Íवषय| तथा Íवषय चयन के Íवषय म Íवशेष जानकार| दे ते हए Íव7ान लेखन

हे तु ÍवÎभ7न Pोत| क| जानकार| भी 9दान क|
गई स³ांत: म चाय / काफ| वह सवा~पहर के साथ साथ आपसी Íवचार Íवमश भी हए





छटवाँ छटवाँ छटवाँ छटवाँ तकÎनक| स³ तकÎनक| स³ तकÎनक| स³ तकÎनक| स³

Íदनांक 18 अग1त 2010 छटवाँ तकÎनक| स³ स³, सभार+भ ु से पव ू 9 - 10 बजे तक चाय /काफ| 1वा~पहार के समय
9ÎतभाÎगय| एवं Íवषय Íवशे ष7| म आपसी तथा आपसी Íवचार Íवमश के प°यात छटवाँ चcवा 9ारं भ हआ

। यह स³
पर| ू तरह से Íवषय Íवशे ष7| का रहा उ7ह|ने Hमश: मÍ5त ु मा²यम| के Îलए लेखन इले4çोÎनक मा²यम| के Îलए लेखन
तथा ले खन हे त साम0ी जटाने के Îलए महतवपण Pो ु ु ू त| क| Hमश: जानकाÍरयाँ द| । तथा 9ÎतभाÎगय| क| शंकाय| के
समाधान तथा 9÷| के जवाब दे कर उ7ह संत8 Íकया ु गया ।
सातवाँ तकÎनक| स³ सातवाँ तकÎनक| स³ सातवाँ तकÎनक| स³ सातवाँ तकÎनक| स³

स³ का सभारा++भ हआ इस म ु

Íवषय Íवशे ष7| के अनरोध पर नवांकर रचाकार| §ारा रÎचत रचनाओं का ु ु 91ततीकरण ु
हआ सव 9थम रचना क| समीHा 9ÎतभाÎगय| से कराई गई

तदनपरांत ु उसमे आव°यक संशोधन के Îलए महcवपण ू सझाव ु
Íवषय Íवशे ष7| §ारा Íदए गए और यह अनरोध Íकया गया क| इन ु संशोधन के आलोक म रचना म पनह ु : सधर कर पन ु ु :
91तÎत करे ु । 9ÎतभाÎगय| क| रचनाय| के 91ततीकरण का ु दौर परे स³ चलता रहा तथा ू दोपहर भोजन के Îलए
स³ावसान हआ


आठवाँ आठवाँ आठवाँ आठवाँ तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| स³ स³ स³ स³
आठवाँ तकÎनक| स³ म भी 9ÎतभाÎगय| §ारा रचनाओं का 91ततीकरण ु Hमश: एक के बाद एक होता रहा 9थमथ: 9ÎतभाÎगय|
§ारा संशोधन व समीHा क| जाती रह| तcप1¯यात Íवषय Íवशे ष7| रचनाकार| को समझाते हए

उनमे संशोधन| को समझाते हये


उसे अं Îतम Fप दे ने के Îलए Íट¯स (गरु ) दे ते रहे चाय /काफ| 1वा~पहार के समय 9ÎतभाÎगय| एवं Íवषय Íवशे ष7| स³ म आपसी
Íवचार Íवमश चलता रहा ।

नौवा तकÎनक| स³ नौवा तकÎनक| स³ नौवा तकÎनक| स³ नौवा तकÎनक| स³

इस स³ म 9ÎतभाÎगय| को कहानी कÍवता, मÍ5त ु एÍवम आÍद के Îलए समह ू गठन Íकये गए 9cयेक समह

का अलग अलग संपक
कराया गया और 9ÎतभाÎगय| को परामश Íद~या गया सभी का रचना पाठ उसका 91ततीकरण ु



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जार| रहा 9cयेक रचना क| समीHा 9Îतभागी 1वयम करते थे , Íफर Íवषय Íवशे ष7| उसम आवशयक संशोधन व Íदशा -
Îनदश दे कर रचना को स+पाÍदत करने म सहयोग दे त रहे , पर| ू स³ यह| Hम चलता रहा जब तक
सम1त 9ÎतभाÎगय| §ारा अपनी रचनाओं का 91ततीकरण ु परा ू नह|ं कर Îलया गया । अं त: म चाय /काफ| 1वा~पहार के समय
9ÎतभाÎगय| एवं Íवशे ष Íवशे ष7| म आपसी आपसी Íवचार Íवमश इस स³ का अवसान हआ



दसवां दसवां दसवां दसवां तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| स³ स³ स³ स³

12:30 से दसवां तकÎनक| स³ 9ारं भ हआ

। इस स³ म पव ू के स³ म जो समहओं ू का गठन Íकया गया था िजसम Íव7ान कहानी,
Íव7ान कÍवता तथा इले4çोÎनक मा²यम व मÍ5त ु मा²यम के 9थक 9थक समह ू बनाये गये थे तथा एक एक Íवषय Íवशे ष7
को एक-एक समह ू का दाइcव सlपा गया था । 9cयेक समह ू ने अलग-अलग बैठ कर अपने Íवषय Íवशे ष7 के Îनदशन
म अपनी अपनी संशोÍदत रचनाओं का पाठ Íकया तथा उसम स+बंÎधत Íवषय Íवशे ष7| ने आव°यक सझाव ु व सधर ु Íदए।
इस स³ क| Íवशे षता थी क| मÍ5त ु मा²यम के 9ÎतभाÎगय| ने सं1थान के 9बं ध तं³ से जड़कर ु समाचार प³
का ले खन Íकया तथा इले4çोÎनक मा²यम के 9ÎतभाÎगय| ने एक सी० डी० म Íडिजटल कै मरे से सÍटं ग ू के Îलए आलेख Îलखा
तथा तदनसार ु सÍटं ग ू भी क| गई । दोपहर भोजनावकाश हे तु स³ावसान हआ



¹यारहवां ¹यारहवां ¹यारहवां ¹यारहवां तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| स³ स³ स³ स³

¹यारहवां तकÎनक| स³ म सभी 9ÎतभाÎगय| को दो बड़े समह ू म अलग अलग Íवषय Íवशे ष7| क| यÎत ु बनाई गई,
िजसम स+बंÎधत Íवषये क| गहराइय| पर गं भीरता से चचा क| गई । 9ÎतभाÎगय| ने अनेकानेक 9÷ पंछे ू तथा उनके उôर Íवषय
Íवशे ष7| §ारा Íदए गए । स³ांत म सभी को के साथ एकͳत Íकया गया शंकाओं का समाधान तथा 9÷| का उôर Íदया गया ।


बारहवां बारहवां बारहवां बारहवां तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| स³ स³ स³ स³
पन ु : 9थक-9थक समह

ने अपने अपने Íवषय Íवशे ष7| के साथ रचनाय| के 91ततीकरण ु का दौर
जार| रखा तथा उनम संशोधन के Îलए उपयñ ु सझाव ु Íदए गये । िजनके अनपालन ु के Îलए अनरोध ु Íकया गया । 9ÎतभाÎगय|
§ारा एतदÍवषयक साथ क 9÷ भी पंछे ू गये । चाय /काफ| 1वा~पहार के समय 9ÎतभाÎगय| एवं Íवशे ष Íवशे ष7| का स³ म
आपसी Íवचार Íवमश चलता रहा ।


तेरहवां तेरहवां तेरहवां तेरहवां स³ा¯+भ स³ा¯+भ स³ा¯+भ स³ा¯+भ

Íदनांक 19 अग1त 2010 9ातः 9:30 बजे से 10:00 तक स³ा¯+भ चाय /काफ| 1वा~पहार के समय 9ÎतभाÎगय| एवं Íवशे ष
Íवशे ष7| म आपसी Íवचार ÍवÎनयम के बाद स³ारं भ हआ

। इसम पव ू Îन°याcमक काय Hम के अनसार ु 2.30 बजे तक
9ÎतभाÎगय| को ¯यवहाÍरक 9ÎशHण Íदया गए । िजसम मÍ5त ु मा²यम म समाचार पा³ संपादन तथा इले4çोÎनक मा²यम
हे त सी ु ० डी० Îनमाण कराया गया। इस हे त 9ÎतभाÎगय| ु को फ़|~ड ÍवÎसट भी कराया गया। रे शम Íवभाग,
सहारा समाचार प³ कायालय, च+बल नद|, और लौटे हए

कड़े ू के ढ़े र का भी दश न काय तथा लौट कर भोजनावकाश रखा गया



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चौदवां चौदवां चौदवां चौदवां तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| तकÎनक| स³ स³ स³ स³

Íदन के तीन बजे से खला ु स³ आयोिजत हआ

िजसम काय शाला के दौरान ÎलÍखत रचनाओं को जमा कराया गया तथा Íवषय
Íवशे ष7| §ारा उनका म~याकन ू करवाया गया। इस अवसर पर 9ÎतभाÎगय| ने लेखन से स+बंÍदत तमाम 9÷| को पंछा ू और
उनका सट|क उôर Íवषय Íवशे ष7| §ारा Íदया गया । 9ÎतभाÎगय| को सझाव Íदया ु गया क| नवांकर ु रचनकार| को
अपनी सगमता ु के Îलए एक ले खन कल डर ÍवकÎसत कर लेना चाÍहए िजसम वै7ाÎनक| क| जयि7तय| क| ÎतÎथय| तथा महतवपण ू
अनसंधान| ु के Íदवस तथा बड़े वै7ाÎनक 9Îत8ान| के 1थापना Íदवस एवम राçीय अ7तराçीय 1तर पर आयोिजत Íकये जाने वाले Íव
Îभ7न वै7ाÎनक Íदवस यथा 1तनपान Íदवस, Íव7ान Íदवस, तकÎनक| Íदवस, पयावरण Íदवस, आÍद ऐसे अवसर है , िजनम
इले4çोÎनक मीÍडया व Í9ं ट मीÍडया दोन| को साम0ी क| आवय°यकता होती है , इस अवसर पर 9ेÍरत
साम0ी Îनि°त Fप से 1थान 9ाB करती है ।

समापन समापन समापन समापन समारोह समारोह समारोह समारोह ।

अÎतÎथय| का आगमन एवम मां चापÎत ू के प°यात उ7ह प*प ु ग¯छ ु दे कर स+माÎनत Íकया गया । इसके प°यात एसोÎसएशन आफ
साइंÍटÍफक Íरसच एंड डे वलपम ट के महा सÎचव 9ो० आई० बी० Îसं ह, ने स+माÎनत अÎथÎतय| का 1वागत Íकया
काय शाला क| आEया Íवषय Íवशे ष7| §ारा 91तÎत ु क| गई , Íवषय Íवशे ष7| क| ओर से ÷ी० राम दô Îतवार| तथा 9ो० आई०
बी० Îसं ह ने अपने Íवचार ¯यñ करते हए

काय शाला क| उपयोÎगयता पर 9काश डाला । 9ÎतभाÎगय| §ारा Íकये
गये आलेख| का जो म~यांकन ू Íकया गया । उसका Íववरण Íवषय Íवशे ष7 §ारा 91ततु Íकया गया ।
काय Hम के मEय ु अÎथÎत डा० डी० पी० Îसं ह, एसोÎसएट 9ोफे सर एंड हे ड, Íहं द| Íवभाग, Íव० जी० पी० जी० कालेज,
ÍदÍबयापर ु , औरै या, तथा डा० राम कमार| ु गBा ु , 9ोफे सर, Íहं द| Íवभाग, Îतलक महाÍवधालय, औरै या, ने ¯यñ Íकया
इस अवसर पर Íहं द| लेखन म Íव7ान को समाÍहत करने के उ£ेश से इस तरह क| काय शाल| क| मे हती आव°यकता है ।

Íव7ान के बढते महcव को कोई भाषा नकार नह|ं सकती है , इसीÎलए Íहं द| को गौरांÍवत करने के Îलए, उसे मÍहमा मंÍड़त करने
के Îलए यह आव°यक है क| Íव7ान और 9ौ²ोÎगक| के Îलए Íहं द| म नये श«द| का समावेश हो या वे उ7ह यथावत 0हण कर ल , यह
काय Íहं द| के Íव§ान| को करना है । 9ÎतभाÎगय| को यह कौशल ÍवकÎसत करना है , क| रचनाओं म Íव7ान और
9ौधौÎगक| को समाÍहत कर ऐसी रचना को ज7म दे िजससे समाज म वै7ाÎनकता का Íवकास हो । इसके प°यात
9ÎतभाÎगय| के ओर से चार 9ÎतभाÎगय| ने भी Íवचार ¯यñ Íकये । काय Hम के अंत: म डा० डी० पी० Îसं ह,
जो काय Hम क| अ²यHता कर रहे थे, और ÷ी० राम दô Îतवार| ने अपने Íवचार ¯यñ करते हए

कहा क| आज 7ान म ह| शÍñ है ।
इसीÎलए हम 7ान वान होना चाÍहये । जब हम 7ान वान ह|गे तभी हम तमाम जानकाÍरय| से यñ ह| ु गे हम सब
जानते ह क| छोट| छोट| सी जानकाÍरयाँ हमारा बचाव करती ह, उ7ह|ने भोपाल गैस ³ासद| क| और इशारा करते हए

9ÎतभाÎगय| से कहा क| अगर लोग यह दे ख लेते Íक गै स Íरसाव का बहाव Íकस ओर है तो उसक| Íवपर|त Íदशा म
जाने से लोग| क| जान बच सकती थीं । अगर लोग महं ु व नाक पर गीला कपड़ा डाल लेते तो उस जहर|ल| गैस का Íरसाव
जानलेवा न होता । इसीÎलए ऐसी काय शालाय समाज व दे श के Îलए बहत

उपयोगी ह । काय Hम क| अं त म
ध7यवाद 7ापन एसोÎसएशन आफ साइंÍटÍफक Íरसच एंड डेवलपम ट, Íद~ल| के डायरे 4टर ÷ी आर० पी० Îसं ह,
डाटा मायÎनं ग, इ7टरनेट, ÍवÍडयो कै मरा Íवषय Íवशे ष7| ने Íकया । 1मÎत

Îच7ह के साथ Íकट बैग वगै रह
मांचासीन अÎथÎतय| को 9दान कर अं त: म चाय /काफ| 1वा~पहार के समय 9ÎतभाÎगय| एवं Íवशे ष Íवशे ष7| म आपसी आपसी
Íवचार ÍवÎनयम होते हए कायHम का समा

पन कर Íदया गया।




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Prof. I. B. Singh, Senior Scientist and General Secretary of the Organization, Honoring Chief Guest
Dr. R. P. S. Kushwah, Prinicpal ,Shri R.P.Porwal Mahavidhyalaya, Raj Pur, Kanpur, Uttar Pardesh
along with other Subject Specialists Shri. R.D.Tiwari, OM Narayan Chaturvedi, Shri Raghuveer
Singh etc, on the inauguration of science journalism workshop



Participants clapping and cheering after the strong motivating lecture citing Japan as example in the
field of science and technology, and importance of science, required to wake up masses through
science writing in the programme





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Prof. I. B. Singh, Senior Scientist and General Secretary of the Organization, Honoring Chief Guest
Dr. R. P. S. Kushwah, Prinicpal ,Shri R.P.Porwal Mahavidhyalaya, Raj Pur, Kanpur, Uttar Pardesh




Prof. I. B. Singh, Senior Scientist and General Secretary of the Organization, Honoring other Guests
and subject specialists Prof. Raghuveer Singh form, Rajpur vidhyalaya, Kanpur, Uttar Pardesh






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Prof. I. B. Singh, Senior Scientist and General Secretary of the Organization, Honoring Chief Guest
Dr. R. P. S. Kushwah, Prinicpal , by giving memento



Chief Guest Dr. R. P. S. Kushwah, Prinicpal ,Shri R.P.Porwal Mahavidhyalaya, Raj Pur, Kanpur,
Uttar Pardesh giving convincing and motivating lectures to participants for the Science writing
workshop by citing Japan today number one in position in the field of science and technology.








Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 124





Participants carefully listing lectures of subject specialists during workshop of science writing
workshop



Participants carefully listing and writing lectures of subject specialists during workshop of science
writing workshop










Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 125






Participants raising quarries regarding science writing / journalism from Subject Specialists during
the workshop of science writing journalism



Subject specialist Shri. OM Narayan Chaturvedi, Poet and Maha Sachiv of Auriya Hindi
Prohaatsaahan Nidhi, giving lecture on Hindi Science Writing to the participants during science
writing after a session break for lunch








Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 126





Prof. I. B. Singh, Senior Scientist and General Secretary of the Organization, Honoring
Dr. Dharmender Pratap Singh Head Hindi, Dibiyapur Colloge, Uttar Pardesh during workshop of
science writing



Prof. I. B. Singh, Senior Scientist and General Secretary of the Organization, Honoring Subject
Specialist Shri. Om Narayan Chaturvedi, Maha Sachiv Auriya Hindi Prohatsaahan Nidhi, Uttar
Pardesh
in Science Journalism and writing Programme








Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 127






Shri. R.D.Tiwari Subject Specialist and NCSTC nominated resources persons addressing the hurdles
of science journalism and way out to deal the same with dexterity




Participants watching film of Vigyan Lok, Prof I.B.Singh, scientist and General Secretary of
Organisation mentioning finer nuances and needs required in the field of Science Journalism








Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 128






Shri. Pradyuman, Subject Specialist and Shri. R.D.Tiwari with other subject specialists sharing
lighter moments and checking their science writing developed during the programme



Dr. Ram Kumari Gupta Head Hindi, Department Auriya, along with Dr. D.P.Singh, Shri.
Chaturvedi, Shri. Tiwari, and Prof. I.B.Singh and other specialists addressing participants and
encouraging participants for science reporting and writing








Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 129






Participants learning operating and shooting video camera by subject specialists during science
writing workshop


During field visit Shri. Gaurav Trivedi, Bureau Chief of Sahara Samay, Auriya in his office lecturing
about the scope of science journalism also informing about the challenges in the field of journalism,
and traits required to be a science journalist









Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 130






Participants were told to make real time spot reporting in stress, directly on the computer during
field visit and reporting about their previous visit immediately before visiting media office




Participants were told to make real time spot reporting in stress, directly on the computer during
field visit and reporting about their previous visit immediately before visiting media office of Sahara
Samay







Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 131







Participants assembling for briefing before entering into the premises of Resham Vighag,
Mahaveer Gunj, Auriya, Uttar Pradesh




Participants getting briefing before entering into the premises of Resham Vighag, Mahaveer Gunj,
Auriya, Uttar Pradesh and discussing their possible questions and Director of Organisation instructed
to be careful during visiting sericulture division with Dy. Director Resham, U.P






Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 132






On the Participant was made leader and second in command to control and instruct other
participants to maintain high decorum of discipline, participants entering in the double file inside the
office of Dy. Director, Resham, Etawah region, Mahaveer ganj, Auriya, Uttar Pradesh




Participants asking questions regarding development of resham from Shri. Arvind Kumar, Dy.
Director, Etawah Region, inside his office compound, and carefully noting them for writing on the
same subject according to their capacity same was covering through videographer by one of the
Participants





Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 133






Shri. Arvind Kuamar showing the mulberry tray classified food for cocoons and explaining in detail
and satisfying all quarries raising by the participants for science writing same was covering through
videography by one of the Participants



Shri. Arvind Kuamar showing live cocoons and explaining in detail to all participants for science
writing, participants listing and raising quarry out of curiosity same was covering through
videography by one of the Participants







Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 134







Leaders of group made in the workshop handing over lunch packets to participants
and same was covered (videography) by one of the Participants




While coming back from field visit participants were shown the great heap of garbage including
plastic bags giving foul smell they were forced to stay there to get the feeling so that they can
address the local problem of disposing of garbage in scientific manner and write a piece of writing
for the benefit of masses to deal with this ever rising problem even in small towns





Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 135






Participants writing for science writing after their tiring field visit with
the Director of Organization and other Subject specialists





Prof. I.B.Singh Senior Scientist and General Secretary of Organsisation showing
Chambal River to participants along with police commandos for safety and protection







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Prof. I.B.Singh Senior Scientist and General Secretary of Organization along with participants
directing police commandos to route out to the centre from Chambal area ensuring safety and
protection of the participants of science writing /journalism




Participants directly making field visit report on computer system after tiring and informative and
tiring field visits with subject specialist






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Shri Ajay Shukla, Subject Specialist, Senior Journalist and Zilan Prathinidhi Rashtriya Prastavana,
Auriya delivering lecture and same was covering through videographer by one of the Participants





Prof. I.B.Singh Senior Scientist and General Secretary of Organsisation handing over memento
along with Kit Bag to the subject specialist Shri Ajay Shukla Senior Journalist and Zilan Prathinidhi
Rashtriya Prastavana, Auriya






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Subject Specialists delivering certificate of completion and participation in the
Science writing/journalism workshop same was covering through
videography by one person among the Participants



Subject Specialists delivering certificate of completion and participation in the Science
writing/journalism workshop same was
covering through videography by one person among the Participants







Media Department (Print, Electronic Media & RTI Division), Association of Scientific Research & Development 139









Subject Specialists delivering certificate of completion and participation in the Science
writing/journalism workshop same was covering through videography by one person among the
Participants




Subject Specialists delivering certificate of completion and participation in the Science
writing/journalism workshop same was covering through videography by one person among the
Participants



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Subject Specialist delivering lecture and same was covering through videographer by one of the
Participants



Prof. I.B.Singh Senior Scientist and General Secretary of Organization handing over memento to the
Shri R.D.Tiwari NCSTC nominated subject specialist along with others and sharing the joy of
successful completion of Science Writing Workshop, of Auriya, Uttar Pradesh









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दै Îनक दै Îनक दै Îनक दै Îनक जागरण जागरण जागरण जागरण
Íव+ का सबसे जयादा पढ़ा जाने वाला अखबार, वष 63 अं क 327, 98 09, कानपर ु , मंगलवार
17 अग1त 2010, नगर, म~य ू 3.50 Fपये







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(Print, Electronic Media & RTI Division)
C – 47 / Y – 4, Dilshad Garden, Delhi - 110095
Email : asrd_ngo@yahoo.com
Ph. +919899354425, +919818889400








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