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Prema

Prema

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Di sc l ai mer :










पेमचॊद

पेमा
2


उपनयास कम


पेमा: 3
3
पेमा

ऩहरा अधमाम
सचची उदारता

सॊधमा का सभम है , ड

फने वारे स

मय की स

नहयी ककयणे यॊ गीन शीशो की
आड से , एक अॊगेजी ढॊ ग ऩय सजे ह

ए कभये भे झ ॉ क यही है जजससे साया
कभया यॊ गीन हो यहा है । अॊगेजी ढॊ ग की भनोहय तसवीये , जो दीवायो से रटक
यहीॊ है , इस सभम यॊ गीन वसर धायण कयके औय बी स

ॊदय भार

भ होती है ।
कभये के फीचोफीच एक गोर भेज है जजसके चायो तयप नभय भखभरी गदोकी
यॊ गीन क

रसय म बफछी ह

ई है । इनभे से एक क

सी ऩय एक म

वा ऩ

रष सय नीचा
ककमे ह

ए फै ठा क

छ सोच यहा है । वह अतत स

ॊदय औय रऩवान ऩ

रष है जजस
ऩय अॊगेजी काट के कऩडे फह

त बरे भार

भ होते है । उसके साभने भेज ऩय
एक कागज है जजसको वह फाय-फाय दे खता है । उसके चे हये से ऐसा ववददत
होता है कक इस सभम वह ककसी गहये सोच भे ड

फा ह

आ है । थोडी दे य तक
वह इसी तयह ऩहर

फदरता यहा , कपय वह एकाएक उठा औय कभये से फाहय
तनकरकय फयाॊडे भे टहरने रगा , जजसभे भनोहय प

रो औय ऩततो के गभरे
सजाकय धये ह

ए थे। वह फयाॊडे से कपय कभये भे आमा औय कागज का ट

कडा
उठाकय फडी फेचै नी के साथ इधय-उधय टहरने रगा। सभम फह

त स

हावना
था। भारी प

रो की कमारयमो भे ऩानी दे यहा था। एक तयप साईस घोडे को
टहरा यहा था। सभम औय सथान दोनो ही फह

त यभणीक थे। ऩयनत

वह
अऩने ववचाय भे ऐसा रवरीन हो यहा था कक उसे इन फातो की बफरक




धध न थी। ह ॉ , उसकी गदय न आऩ ही आऩ दहराती थी औय हाथ बी आऩ
ही आऩ इशाये कयते थे —जैसे वह ककसी से फाते कय यहा हो। इसी फीच भे
एक फाइरसककर पाटक के अॊदय आती ह

ई ददखामी दी औय एक गोया-धचटठा
आदभी कोट ऩतर

न ऩहने , ऐनक रगामे , रसगाय ऩीता , ज

ते चयभय कयता ,
उतय ऩडा औय फोरा, ग

ड ईवतनॊ ग, अभ

तयाम।
अभ

तयाम ने चौककय सय उठामा औय फोरे —ओ। आऩ है रभसटय
दाननाथ। आइए फै दठए। आऩ आज जरसे भे न ददखामी ददमे।
दाननाथ—कै सा जरसा। भ

झे तो इसकी खफय बी नहीॊ।
4
अभ

तयाम—(आशचमय से) ऐॊ। आऩको खफय ही नहीॊ। आज आगया के
रारा धन

षधायीरार ने फह

त अचछा वमाखमान ददमा औय ववयोधधमो के द ॉ त
खटटे कय ददमे।
दाननाथ—ईशवय जानता है भ

झे जया बी खफय न थी , नहीॊ तो भै
अवशम आता। भ

झे तो रारा साहफ के वमाखमानो के स

नने का फह

त ददनो
से शौक है । भेया अबागम था कक ऐसा अचछा सभम हाथ से तनकर गमा।
ककस फात ऩय वमाखमान था?
अभ

तयाम—जातत की उननतत के रसवा द

सयी कौन-सी फात हो सकती
थी? रारा साहफ ने अऩना जीवन इसी काभ के हे त

अऩय ण कय ददमा है ।
आज ऐसा सचचा दे शबकत औय तनषकास जातत-सेवक इसदे श भे नहीॊ है । मह


सयी फात है कक कोई उनके रसदवाॊतो को भाने मा न भाने , भगय उनके
वमाखमानो भे ऐसा जाद

होता है कक रोग आऩ ही आऩ खखॊ चे चरे आते है ।
भै ने रारा साहफ के वमाखमानो के स

नने का आनॊद कई फाय पापत ककमा है ।
भगय आज की सऩीच भे तो फात ही औय थी। ऐसा जान ऩडता है कक उनकी
जफान भे जाद

बया है । शबद वही होते है जो हभ योज काभ भे रामा कयते
है । ववचाय बी वही होते है जजनकी हभाये मह ॉ पततददन चचाय यहती है । भगय
उनके फोरने का ढॊ ग क

छ ऐसा अऩ

वय है कक ददरो को र

बा रेता है ।
दाननाथ को ऐसी उततभ सऩीच को न स

नने का अतमॊत शोक ह

आ।
फोरे —माय, भै जॊभ का अबागा ह

ॉ। कमा अफ कपय कोई वमाखमान न होगा?
अभ

तयाम—आशा तो नहीॊ है कमोकक रारा साहफ रखनऊ जा यहे है ,
उधय से आगया को चरे जाएॊगे। कपय नहीॊ भार

भ कफ दशय न दे ।
दाननाथ—अऩने कभय की हीनता की कमा कह

ॉ। आऩने उससऩीच
कीकोई नकर की हो तो जया दीजजए। उसी को दे खकय जी को ढायस द

ॉ ।
इस ऩय अभ

तयाम ने वही कागज का ट

कडा जजसको वे फाय-फाय ऩढ
यहे थे दाननाथ के हाथ भे यख ददमा औय फोरे —सऩीच के फीच-फीच भे जो
फाते भ

झको सवाय हो जाती है तो आगा-ऩीछा क

छ नहीॊ सोचते , सभझाने
रगे—रभर, त

भ कै सी रडकऩन की फाते कयते हो। त

भको शामद अबी
भार

भ नहीॊ कक त

भ कै सा बायी फोझ अऩने सय ऩय रे यहे हो। जो यासता
अबी त

भको साप ददखामी दे यहा है वह क ॉ टो से ऐसा बया है कक एक-एक
ऩग धयना कदठन है ।
5
अभ

तयाम—अफ तो जो होना हो सो हो। जो फात ददर भे जभ गमी
वह तभ गमीॊ। भै ख

फ जानता ह

ॊ कक भ

झको फडी-फडी कदठनाइमो का साभना
कयना ऩडे गा। भगय आज भेया दहसाफ ऐसा फढा ह

आ है कक भै फडे से फडा
काभ कय सकता ह

ॊ औय ऊॉ चे से ऊॉ चे ऩहाड ऩय चढ सकता ह

ॉ।
दाननाथ—ईशवय आऩके उतसाह को सदा फढावे। भै जानता ह

ॉ कक आऩ
जजस काभ के ररए उदमोग कये गे उसे अवशम ऩ

या कय ददखामेगे । भै आऩके
इयादो भे ववधन डारना कदावऩ नहीॊ चाहता। भगय भन

षम का धभय है कक
जजस काभ भे हाथ रगावे ऩहरे उसका ऊॉ च-नीच ख

फ ववचाय रे। अफ पचछन
फातो से हटकय पतमऺ फातो की तयपा आइए। आऩ जानते है कक इस शहय
के रोग, सफ के सफ, ऩ

यानी रकीय के पकीय है । भ

झे बम है कक साभाजजक


धाय का फीज मह ॉ कदावऩ पर-प

र न सके गा। औय कपय , आऩका सहामक
बी कोई नजय नहीॊ आता। अके रे आऩ कमा फना रे गे। शामद आऩके दोसत
बी इस जोखखभ के काभ भे आऩका हाथ न फॉटा सके । चाहे आऩको फ

या
रगे, भगय भै मह जरय कह

ॉगा कक अके रे आऩ क

छ बी न कय सके गे।
अभ

तयाम ने अऩने ऩयभ रभर की फातो को स

नकय सा उठामा औय
फडी गॊबीयता से फोरे —दाननाथ। मह त

भको कमा हो गमा है । कमा भै त

महाये


ॉह से ऐसी फोदे ऩन की फाते स

न यहा ह

ॊ । त

भ कहते हो अके रे कमा फना
रोगे? अके रे आदरभमो की कायग

जारयमो से इततहास बये ऩडे है । गौतभ फ

दव
कौन था? एक जॊगर का फसनेवारा साध

, जजसका साये दे श भे कोई भददगाय
न था। भगय उसके जीवन ही भे आधा दहनदोसतान उसके ऩै यो ऩय सय धय


का था। आऩको ककतने पभाण द

ॉ । अके रे आदरभमो से कौभो के नाभ चर
यहे है । कौभे भय गमी है । आज उनका तनशान बी फाकी नहीॊ। भगय अके रे
आदरभमो के नाभ अबी तक जजॊदा है । आऩ जानते है कक परेटो एक अभय
नाभ है । भगय आऩभे ककतने ऐसे है जो मह जानते हो कक वह ककस दे श का
यहने वारा है ।
दाननाथ सभझदाय आदभी थे। सभझ गमे कक अबी जोश नमा है औय
सभझाना फ

झाना सफ वमथय होगा। भगय कपय बी जी न भाना। एक फाय औय
उरझना आवशमक ‘अचछी जान ऩडी भै ने उनको त

यॊ त नकर कय ररमा।
ऐसी जलदी भे ररखा है कक भेये रसवा कोई द

सया ऩढ बी न सके गा। दे खखए
हभायी राऩयवाही को कै सा आडे हाथो ररमा है :
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6
सजजनो। हभायी इस द

दय शा का कायण हभायी राऩयवाही है । हभायी
दशा उस योगी की-सी हो यही है जो औषधध को हाथ भे रेकय दे खता है भगय


ॉह तक नहीॊ रे जाता। ह ॉ बाइमो। हभ ऑॊ खे यचाते है भगय अॊधे है , हभ
कान यखते है भगय फहये है , हभ जफान यखते है भगय ग

ॉगे है । ऩयॊ त

अफ वह
ददन नहीॊ यहे कक हभको अऩनी जीत की फ

याइमाॉ न ददखामी दे ती हो। हभ
उनको दे खते है औय भन भे उनसे घ

णा बी कयते है । भगय जफ कोई सभम
आ जाता है तो हभ उसी ऩ

यानी रकीय ऩय जाते है औय नअय फातो को
असॊबव औय अनहोनी सभझकय छोड दे ते है । हभाये डोगे का ऩाय रगाना ,
जफ कक भलराह ऐसे फाद औय कादय है , कदठन ही नहीॊ पतम

त द

ससाधम है ।
अभ

तयाम ने फडे ऊॉ चे सवयो भे उस कागज को ऩढा। जफ वह च

ऩ ह


तो दाननाथ ने कहा —तन:सॊदे ह फह

त ठीक कहा है । हभायी दशा के अन




ही है ।
अभ

तयाम—भ

झको यह-यहकय अऩने ऊऩय कोध आता है कक भै ने सायी
सऩीच कमो न नकर कय री। अगय कहीॊ अॊगेजी सऩीच होती तो सफेया होते
ही साये सभाचायऩरो भे छऩ जाती। नहीॊ तो शामद कहीॊ ख

रासा रयऩोटय छऩे
तो छऩे। (रककय) तफ भै जरसे से रौटकय आमा ह

ॉ तफ से फयाफय वही
शबद भेये कान भे ग

ॉज यहे है । पमाये रभर। त

भ भेये ववचायो को ऩहरे से
जानते हो, आज की सऩीच ने उनको औय बी भजफ

त कय ददमा है । आज से
भेयी पततऻा है कक भै अऩने को जातत ऩय नमौछावय कय द

ॉ गा। तन , भन,
धन सफ अऩनी धगयी ह

ई जातत की उननतत के तनरभतत अऩय ण कय द

ॉ गा।
अफ तक भेये ववचाय भ

झ ही तक थे ऩय अफ वे पतमऺ होगे। अफ तक भेया
हदम द

फय र था , भगय आज इसभे कई ददरो का फर आ गमा है । भै ख


जानता ह

ॉ कक भै कोई उचच-ऩदवी नहीॊ यखता ह

ॊ । भेयी जामदाद बी क


अधधक नहीॊ है । भगय भै अऩनी सायी जभा जथा अऩने दे श के उदवाय के
ररए रगा द

ॉ गा। अफ इस पततऻा से कोई भ

झको डडगा नहीॊ सकता। (जोश
से )ऐ थककय फै ठी ह

ई कौभ। रे , तेयी द

दय शा ऩय ऑॊ स

फहानेवारो भे एक


खखमाया औय फढा। इस फात का नमाम कयना कक त

झको इस द

खखमाये से
कोई राब हागा मा नहीॊ , सभम ऩय छोडता ह

ॉ।
मह कहकय अभ

तयाम जभीन की ओय दे खने रगे। दाननाथ , जो उनके
फचऩन के साथी थे औय उनके फचऩन के साथी थे औय उनके सवबाव से
बरीब ॉ तत ऩरयधचत थे कक जफ उनको कोई ध

न भार

भ ह

आ। फोरे —अचछा
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7
भै ने भान ररमा कक अके रे रोगो ने फडे फडे काभ ककमे है औय आऩ बी
अऩनी जातत का क

छ न क

छ बरा कय रे गे भगय मह तो सोधचमे कक आऩ
उन रोगो को ककतना द

ख ऩह

ॉचामेगे जजनका आऩसे कोई नाता है । पेभा से
फह

त जलद आऩका वववाह होनेवारा है । आऩ जानते है कक उसके भ ॉ -फाऩ
ऩयरे रसये के कटटय दहनद

है । जफ उनको आऩकी अॊगेजी ऩोशाक औय खाने-
ऩीने ऩय रशकामत है तो फतराइए जफ आऩ साभजजक स

धाय ऩय कभय
फाॊधेगे तफ उनका कमा हार होगा। शामद आऩको पेभा से हाथ धोना ऩडे ।
दाननाथ का मह इशाया करेजे भे च

ब गमा। दो-तीन रभनट तक वह
सननाटे भे जभीन की तयप ताकते यहे । जफ सय उठामा तो ऑॊ खे रार थीॊ
औय उनभे ऑॊ स

डफडफामे थे। फोरे —रभर, कौभ की बराई कयना साधायण
काभ नहीॊ है । मदमवऩ ऩहरे भै ने इस ववषम ऩय धमान न ददमा था , कपय बी
भेया ददर इस वकत ऐसा भजफ

त हो यहा है कक जातत के ररए हय एक द


बोगने को भै कदटफदव ह

ॉ। इसभे सॊदे ह नहीॊ कक पेभा से भ

झको फह

त ही
पेभ था। भै उस ऩय जान दे ता था औय अगय कोई सभम ऐसा आता कक


झको उसका ऩतत फनने का आनॊद रभरता तो भै साबफत कयता कक पेभ
इसको कहते है । भगय अफ पेभा की भोहनी भ

यत भ

झ ऩय अऩना जाद

नहीॊ
चरा सकती। जो दे श औय जातत के नाभ ऩय बफक गमा उसके ददर भे कोई


सयी चीज जगह नहीॊ ऩा सकती। दे खखए मह वह पोटो है जो अफ तक
फयाफय भेये सीने से रगा यहता था। आज इससे बी अरग होता ह

ॊ मह
कहते-कहते तसवीय जेफ से तनकरी औय उसके ऩ

यजे-ऩ

यजे कय डारे , ‘पेभा
को जफ भार

भ होगा कक अभ

तयाम अफ जातत ऩय जान दे ने रगा, उसके ददन
भे अफ ककसी नवमौवना की जगह नही यही तो वह भ

झे ऺभा कय दे गी।
दाननाथ ने अऩने दोसत के हाथो से तसवीय छीन रेना चाही। भगय न
ऩा सके । फोरे —अभ

तयाम फडे शोक की फात है कक त

भने उस स

नदयी की
तसवीय की मह दशा की जजसकी त

भ ख

फ जानते हो कक त

भ ऩय भोदहत है ।


भ कै से तनठ

य हो। मह वही स

ॊदयी है जजससे शादी कयने का त

महाये
वै क

ॊ ठवासी वऩता ने आगह ककमा था औय त

भने ख

द बी कई फाय फात हायी।
कमा त

भ नहीॊ जानते कक वववाह का सभम अफ फह

त तनकट आ गमा है ।
ऐसे वकत भे त

महाया इस तयह भ

ॉह भोड रेना उस फेचायी के ररए फह

त ही
शोकदामक होगा।
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8
इन फातो को स

नकय अभ

तयाम का चे हया फह

त भररन हो गमा। शामद
वे इस तयह तसवीय के पाड दे ने का क

छ ऩछतावा कयने रगे। भगय जजस
फात ऩय अड गमे थे उस ऩय अडे ही यहे । इनहीॊ फातो भे स

मय असत हो गमा।
अॉधेया छा गमा। दाननाथ उठ खडे ह

ए। अऩनी फाइरसककर सॉबारी औय
चरते-चरते मह कहा —रभसटय याम। ख

फ सोच रो। अबी क

छ नहीॊ बफॊ गडा
है । आओ आज त

भको गॊगा की सै य कया रामे। भै ने एक फजया ककयामे ऩय
रे यकखा है । उस ऩय च ॉ दनी यात भे फडी फहाय यहे गी।
अभ

तयाम —इस सभम आऩ भ

झको ऺभा कीजजए। कपय रभर

ॉ गा।
दाननाथ तो मह फातचीत कयके अऩने भकान को यवाना ह

ए औय
अभ

तयाम उसी अॉधेये भे, फडी दे य तक च

ऩचाऩ खडे यहे । वह नहीॊ भार

भ कमा
सोच यहे थे। जफ अॉधेया अधधक ह

आ तो वह जभीन ऩय फै ठ गमे। उनहोने
उस तसवीय के ऩ

जे सफ एक-एक कयके च

न ररमे। उनको फडे पमाय से सीने
भे रगा ररमा औय क

छ सोचते ह

ए कभये भे चरे गए।
फाफ

अभ

तयाम शहय के पततजषठत यईसो भे सभझे जाते थे। वकारत
का ऩेशा कई ऩ

शतो से चरा आता था। ख

द बी वकारत ऩास कय च

के थे।
औय मदमवऩ वकारत अबी तक चभकी न थी , भगय फाऩ-दादे ने नाभ ऐसा
कभामा था कक शहय के फडे-फडे यईस बी उनका दाफ भानते थे। अॊगेजी
काररज भे इनकी रशऺा ह

ई थी औय मह अॊगेजी सभमता के पेभी थे। जफ
तक फाऩ जीते थे तफ तक कोट-ऩतर

न ऩहनते ततनक डयते थे। भगय उनका
दे हाॊत होते ही ख

र ऩडे । ठीक नदी के सभीऩ एक स

ॊदय सथान ऩय कोठी
फनवामी। उसको फह

त क

छ खचय कयके अॊगेजी यीतत ऩय सजामा। औय अफ
उसी भे यहते थे। ईशवय की क

ऩा से ककसी चीज कीकभी न थी। धन-दवम ,
गाडी-घोडे सबी भौज

द थे।
अभ

तयाम को ककताफो से फह

त पेभ था। भ

भककन न था कक नमी
ककताफ पकारशत हो औय उनके ऩास न आवे। उततभ कराओॊ से बी उनकी
तफीमत को फह

त रगाव था। गान-ववदमा ऩय तो वे जान दे ते थे। गो कक
वकारत ऩास कय च

के थे भगय अबी वह वववाह नहीॊ ह

आ था। उनहोने ठान
ररमा था कक जफ वह वकारत ख

फ न चरने रगेगी तफ तक वववाह न
करॉ गा। उस शहय के यईस रारा फदयीपसाद साहफ उनको कईसार से अऩनी
इकरौती रडकी पेभा के वासते , च

न फै ठे थे। पेभा अतत स

ॊदय रडकी थी औय
ऩढने ररखने , सीने वऩयोने भे तनऩ

ण थी। अभ

तयाम के इशाये से उसको
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9
थोडी सही अॊगेजी बी ऩढा दी गमी थी जजसने उसके सवबाव भे थोडी-सी
सवतॊरता ऩै दा कय दी थी। भ

ॊशी जी ने फह

त कहने-स

नने से दोनो पेरभमो को
धचटठी ऩरी ररखने की आऻा दे दी थी। औय शामद आऩस भे तसवीयो की
बी अदरा-फदरी हो गमे थी।
फाफ

दाननाथ अभ

तयाम के फचऩन के साधथमो भे से थे। काररज भे
बी दोनो का साथ यहा। वकारत बी साथ ऩास की औय दो रभरो भे जैसी
सचची पीतत हो सकती है वह उनभे थी। कोई फात ऐसी न थी जो एक द

सये
के ररए उठा यखे। दाननाथ ने एक फाय पेभा को भहताफी ऩय खडे दे ख ररमा
था। उसी वकत से वह ददर भे पेभा की ऩ

जा ककमा कयता था। भगय मह
फात कबी उसकी जफान ऩय नहीॊ आमी। वह ददर ही ददर भे घ

टकय यह
जाता। सै कडो फाय उसकी सवाथय दजषट ने उसे उबाया था कक त

कोई चार
चरकय फदयीपसाद का भन अभ

तयाम से पे य दे , ऩयॊ त

उसने हय फाय इस
कभीनेऩन के खमार को दफामा था। वह सवबाव का फह

त तनभय र औय
आचयण का फह

त श

दव था। वह भय जाना ऩसॊद कयता भगय ककसी को
हातन ऩह

ॉचाकय अऩना भनोयथ कदावऩ ऩ

या नहीॊ कय सकता था। मह बी न
था कक वह के वर ददखाने के ररए अभ

तयाम से भेर यखता हो औय ददर भे
उनसे जरता हो। वह उनके साथ सचचे रभर बाव का फतायव कयता था।
आज बी, जफ अभ

तयाम ने उससे अऩने इयादे जादहय ककमे तफ उसेन
सचचे ददर से उनको सभझाकय ऊॉ च नीच स

झामा। भगय इसका जो क


असय ह

आ हभ ऩहरे ददखा च

के है । उसने साप साप कह ददमा कक अगय


भ रयपायभयो कीभॊडरी भे रभरोगे तो पेभा से हाथ धोना ऩडे गा। भगय
अभ

तयाम ने एक न स

नी। रभर का जो धभय है वह दाननाथ ने ऩ

या कय
ददमा। भगय जफ उसने दे खा कक मह अऩने अन

षठान ऩय अडे ही यहे गे तो
उसको कोई वजह न भार

भ ह

ई कक भै मह सफ फाते फदयी पसाद से फमान
कयके कमो न पेभा का ऩतत फनने का उदमोग करॉ । महाॊ से वह मही सफ
फाते सोचते ववचायते घय ऩय आमे। कोट-ऩतर

न उताय ददमा औय सीधे सादे
कऩडे ऩदहन भ

ॊशी फदयीपसाद के भकान को यवाना ह

ए। इस वकत उसके ददन
की जो हारत हो यही थी , फमान नही की जा सकती। कबी मह ववचाय
आता कक भेया इस तयह जाना, रोगो को भ

झसे नायाज न कय दे । भ

झे रोग
सवाथी न सभझने रगे । कपय सोचता कक कहीॊ अभ

तयाम अऩना इयादा ऩरट
दे औय आशचमय नहीॊ कक ऐसा ही हो , तो भै कहीॊ भ

ॉह ददखाने मोगम न
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10
यह

ॉगा। भगय मह सोचते सोचते जफ पेभा की भोहनी भ

यत ऑॊ ख के साभने
आ गमी। तफ मह सफ शॊकाए द

य हो गमी। औय वह फदयीपसाद के भकान
ऩय फाते कयते ददखामी ददमे।
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सया अधमाम

जऱन ब

री बऱा है

रारा फदयीपसाद अभ

तयाम के फाऩ के दोसतो भे थे औय अगय उनसे
अधधक पततजषठत न थे तो फह

त हे ठे बी न थे। दोनो भे रडके -रडकी के
बमाह की फातचीत ऩककी हो गमी थी। औय अगय भ

ॊशी धनऩतयाम दो फयस
बी औय जीते तो फेटे का सेहया दे ख रेते। भगय कारवश हो गमे। औय मह
अभायन भन भे ररमे वै क

णठ को रसधाये । हाॊ , भयते भयते उनकी फेटे हो मह
नसीहत थी कक भ

० फदयीपसाद की रडकी से अवशम वववाह कयना।
अभ

तयाम ने बी रजाते रजाते फात हायी थी। भगय भ

ॊशी धनऩतयाम को भये
आज ऩ

च फयस फीत च

के थे। इस फीच भे उनहोने वकारत बी ऩास कय री
थी औय अचछे खासे अॊगेज फन फै ठे थे। इस ऩरयवतय न ने ऩजबरक की ऑॊ खो
भे उनका आदय घटा ददमा था। इसके ववऩयीत फदयीपसाद ऩकके दहनद

थे।
सार बय , फायहो भास , उनके महाॊ शीभदागवत की कथा ह

आ कयती थी।
कोई ददन ऐसा न जाता कक बॊडाय भे सौ ऩचास साध

ओॊ का पसाद न फनता
हो। इस उदायता ने उनको साये शहय भे सववपम फना ददमा था। पततददन बोय
होते ही , वह गॊगा सनान को ऩै दर जामा कयते थे ओय यासते भे जजतने
आदभी उनको दे खते सफ आदय से सय झ

काते थे औय आऩस भे कानाप

सी
कयते कक द

खखमायो का मह दाता सदा परता प

रता यहे ।
मदमवऩ रारा फदयीपसाद अभ

तयाम की चार-ढार को ऩसॊद न कयते
थे औय कई फेय उनको सभझा कय हाय बी च

के थे , भगय शहय भे ऐसा
होनहाय, ववदमावान, स

ॊदय औय धतनक कोई द

सया आदभी न था जो उनकी
पाण से अधधक वपम रडकी पेभा के ऩतत फनने के मोगम हो। इस कायण वे
फेफस हो यहे थे। रडकी अके री थी , इसररए द

सये शहय भे बमाह बी न कय
सकते थे। इस रडकी के ग

ण औय स

ॊदयता की इतनी पशॊसा थी कक उस
शहय के सफ यईस उसे चाहते थे। जफ ककसी काभ काज के भौके ऩय पेभा
सोरहो शॊगाय कयके जीती तो जजतनी औय जसरम ॉ वह ॉ होतीॊ उसके ऩै यो तरे
आॊखे बफछाती। फडी फ

ढी औयते कहा कयती थी कक ऐसी स

ॊदय रडकी कहीॊ
दे खने भे नहीॊ आई। औय जैसी पेभा औयतो भे थी वै से ही अभ

तयाम भदो भे
थे। ईशवय ने अऩने हाथ से दोनो का जोड रभरामा था।
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ह ॉ , शहय के ऩ

याने दहनद

रोग इस वववाह के खखराप थे। वह कहते
कक अभ

तयाम सफ ग

ण आगय सही , भगय है तो ईसाई। उनसे पेभा जैसी
रडकी का वववाह कयना ठीक नहीॊ है । भ

ॊशी जी के नातेदाय रोग बी इस
शादी के ववरदव थे। इसी खीॊचातानर भे ऩ ॉ च फयस फीत च

के थे। अभ

तयाम
बी क

छ फह

त उदमभ न भार

भ होते थे। भगय इस सार भ

ॊशी फदयीपसाद ने
बी दहमाफ ककमा , औय अभ

तयाम बी भ

सतैद ह

ए औय वववाह की साइत
तनशचम की गमी। अफ दोनो तयप तैमारयमाॊ हो यही थी। पेभा की भाॊ
अभ

तयाम के नाभ ऩय बफकी ह

ई थी औय रडकी के ररए अबी से गहने ऩाते
फनवाने रगी थी , कक तनदान आज मह भहाबमानक खफय ऩह

ॉची कक
अभ

तयाम ईसाई हो गमा है औय उसका ककसी भेभ से वववाह हो यहा है ।
इस खफय ने भ

ॊशी जी के ददर ऩय वही काभ ककमा जो बफजरी ककसी
हये बये ऩेड ऩयधगय कय कयती है । वे फ

ढे तो थे ही, इसधकके को न सह सके
औय ऩछाड खाकय जभीन ऩय धगय ऩडे । उनका फेस

ध होना था कक साया
बीतय फाहय एक हो गमा। तभाॊभ नौकय चाकय , अऩने ऩयामे इकटठे हो गमे
औय ‘कमा ह

आ’। ‘कमा ह

आ’। का शोय भचने रगा। अफ जजसको दे खखमे
मही कहता कपयता है कक अभ

तयाम ईसाई हो गमा है । कोई कहता है थाने भे
यऩट कयो , कोई कहता है चरकय भायऩीट कयो। फाहय से दभ ही दभ भे
अॊदय खफय ऩह

ॉची। वहा बी क

हयाभ भच गमा। पेभा की भाॊ फेचायी फह


ददनो से फीभाय थी। औय उनहीॊ की जजद थी कक फेटी की शादी जह ॉ तक
जलद हो जाम अचछा है । मदमवऩ वह ऩ

याने ववचाय की फ

ढी औयत थी औय
उनको पेभा का अभ

तयाम के ऩास पेभ ऩर बेजना एक ऑॊ ख न बाता था।
तथावऩ जफ से उनहोने उनको एक फाय अऩने आॊगन भे खडे दे ख ररमा था
तफ से उनको मही ध

न सवाय थी कक भेयी ऑॊ खो की ताया का वववाह हो तो
उनहीॊ से हो। वह इस वकत फै ठी ह

ई फेटी से फातचीत कय यही थी कक फाहय
से मह खफय ऩह

ॉची। वह अभ

तयाम को अऩना दभाद सभझने रगी थी —औय


छ तो न हो सका फेटी को गरे रगाकय योने रगी। पेभा ने आस

को
योकना चाहा , भगय न योक सकी। उसकी फयसो की सॊधचत आशारऩी फेर-
ऺण भार भे क

महरा गमी। हाम। उससे योमा बी न गमा। धचतत वमाक

र हो
गमा। भ ॉ को योती छोड वह अऩने कभये भे आमी , चायऩाई ऩय धभ से धगय
ऩडी। जफान से के वर इतना तनकरा कक नायामण , अफ कै से जीऊॉ गी औय
उसके बी होश जाते यहे । तभाभ धय की रौडडम ॉ उस ऩय जान दे ती थी। सफ
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की सफ एकर हो गमीॊ। औय अभ

तयाम को ‘हतमाये ’ औय ‘ऩाऩी’ की ऩदववम ॉ
दी जाने रगी।
अगय घय भे कोई ऐसा था कक जजसको अभ

तयाम के ईसाई होने का
ववशवास न आमा तो वह पेभा के बाई फाफ

कभरा पसाद थे। फाफ

सहाफ फडे
सभझदाय आदभी थे। उनहोने अभ

तयाम के कई रेख भारसकऩरो भे दे खे थे ,
जजनभे ईसाई भत का खॊडन ककमा गमा था। औय ‘दहनद

धभय की भदहभा ’
नाभ की जो ऩ

सतक उनहोने ररखी थी उसकी तो फडे -फडे ऩॊडडतो ने तायीप
की थी। कपय कै से भ

भककन था कक एकदभ उनके खमार ऩरट जाते औय वह
ईसाई भत धायण कय रेते। कभरापसाद मही सोच यहे थे ककदाननाथ आते
ददखामी ददमे। उनके चे हये से घफयाहट फयस यही थी। कभरापसाद ने उनको
फडे आदय से फै ठामा औय ऩ

छने रगे —माय, मह खफय कह

से उडी ? भ

झे तो
ववशवास नहीॊ आता।
दाननाथ—ववशवास आने की कोई फात बी तो हो। अभ

तयाम का ईसाई
होना असॊबव है । हाॊ वह रयपाभय भॊडरी भे जा रभरे है , भ

झसे ब

र हो गमी
कक मही फात त

भसे न कही।
कभरापसाद—तो कमा त

भने रारा जी से मह कह ददमा?
दाननाथ ने सॊकोच से सय झ

का कय कहा —मही तो ब

र हो गई। भेयी
अकर ऩय ऩतथय ऩड गमे थे। आज शाभ को जफ अभ

तयाम से भ

राकात
कयने गमा तो उनहोने फात फात भे कहा कक अफ भै शादी न करॉ गा। भै ने


छ न सोचा ववचाया औय मह फात आकय भ

ॊशी जी से कह दी। अगय


झको मह भार

भ होता कक इस फात का मह फतॊगड हो जामगा तो भै कबी
न कहता। आऩ जानते है कक अभ

तयाम भेये ऩयभ रभर है । भै ने जो मह
सॊदे शा ऩह

ॉचामा तो इससे ककसी की फ

याई कयने का आशम न था। भै ने के वर
बराइ की नीमत से मह फात कही थी। कमा कह

ॉ , भ

ॊशी जी तो मह फात


नते ही जोय से धचलरा उठे —‘वह ईसाई हो गमा। भै ने फह

तेया अऩना
भतरफ सभझामा भगय कौन स

नता है । वह मही कहते भ

छाय खाकय धगय
ऩडे ।
कभरापसाद मह स

नते ही रऩककय अऩने वऩता के ऩास ऩह

ॊ चे । वह
अबी तक फेस

ध थे। उनको होश भे रामे औय दाननाथ का भतरफ सभझामा
औय कपय घय भे ऩह

ॊ चे । उधय साये भ

हलरे की रिरमा पेभा के कभये भे एकर
हो गमी थीॊ औय अऩने अऩने ववचायन

साय उसको सचे त कयने की तयकीफे
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कय यही थी। भगय अफ तक ककसी से क

छ न फन ऩडा। तनदान एक स

ॊदय
नवमौवना दयवाजे से आती ददखामी दी। उसको दे खते ही सफ औयतो ने शोय
भचामा जो ऩ

णाय आ गमी। अफ यानी को चे त आ जामेगी। ऩ

णाय एक बाहभणी
थी। इसकी उम के वर फीस वषय की होगी। मह अतत स

शीरा औय रऩवती
थी। उसके फदन ऩय सादी साडी औय सादे गहने फह

त ही बरे भार

भ होते
थे। उसका वववाह ऩॊडडत फसॊतक

भाय से ह

आ था जो एक दफतय भे तीस
रऩमे भहीने के नौकय थे। उनका भकान ऩडोस ही भे था। ऩ

णाय के घय भे


सया कोई नथा। इसररए जफ दस फजे ऩॊडडत जी दफतय को चरे जाते तो
वह पेभा के घय चरी आती औय दोनो सखखमा शाभ तक अऩने अऩने भन
की फाते स

ना कयतीॊ। पेभा उसको इतना चाहती थी कक मदद वह कबी ककसी
कायण से न आ सकती तो सवमॊ उसके धय चरी जाती। उसे दे खे बफना
उसको कर न ऩडती थी। ऩ

णाय का बी मही हार था।


णाय ने आते ही सफ जसरमो को वह ॉ से हटा ददमा , पेभा को इर


घामा के वडे औय ग

राफ का छीॊटा भ

ख ऩय भाया। धीये धीये उसके तरवे
सहरामे, सफ खखडककम ॉ ख

रवा दीॊ। इस तयह जफ ठॊ डक ऩह

ॉची तो पेभा ने
ऑॊ खे खोर दीॊ औय चौककय उठ फै ठी। फ

ढी भ ॉ की जान भे जान आई। वह


णाय की फरामे रेने रगी। औय थोडी दे य भे सफ जसरमाॉ पेभा को आशीवायद
दे ते ह

ए रसॊ धायी। ऩ

णाय यह गई। जफ एकाॊत ह

आ तो उसने कहा—पमायी पेभा।
ऑॊ खे खोरो। मह कमा गत फना यकखी है ।
पेभा ने फह

त धीये से कहा —हाम। सखी भेयी तो सफ आशाऍ ॊ रभटटी भे
रभर गमीॊ।


णाय —पमायी ऐसी फाते न कयो। जया ददर को सॉबारो औय फताओ


भको मह खफय कै से रभरी?
पेभा —क

छ न ऩ

छो सखी, भै फडी अबाधगनी ह

ॉ (योकय) हाम, ददर फै ठा
जाता है । भै कै से जीऊॉ गी।


णाय —पमायी जया ददर को ढायस तो दो। भै अबी सफ ऩता रगमे दे ती


ॉ। फाफ

अभ

तयाम ऩय जो दोष रोगो ने रगामा है वह सफ झ

ठ है ।
पेभा —सखी, त

महाये भ

ॉह भे घी शककय। ईशवय कये त

महायी फाते सच
हो। थोडी दे य च

ऩ यहने के फाद वह कपय फोरी —कहीॊ एक दभ के ररए भेयी
उस कठकरेजजमे से बेट हो जाती तो भै उनका ऺेभ क

शर ऩ

छती। कपय


झे भयने का यॊ ज न होता।
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णाय —मह कै सी फात कहती हो सखी, भये वह जो त

भको दे ख न सके ।


झसे कहो भै ताॊफे के ऩर ऩय ररख द

ॊ कक अभ

तयाम अगय बमाह कये गे तो


महीॊ से कये गे। त

महाये ऩास उनके फीरसमो ऩर ऩडे है । भार

भ होता है ककसी
ने करेजा तनकार के धय ददमा है । एक एक शबद से सचचा पेभ टऩकता है ।
ऐसा आदभी कबी दगा नहीॊ कय सकता। पेभा —मही सफ सोच सोच कय तो
आज चाय फयस से ददर को ढायस दे यही ह

ॊ । भगय अफ उनकी फातो का भ

झे
ववशवास नहीॊ यहा। त

महीॊ फताओ , भै कै से जान

कक उनको भ

झसे पेभ है ?
आज चाय फयस के ददन फीत गमे । भ

झे तो एक एक ददन काटना द

बय हो
यहा है औय वह ॉ क

छ खफय ही नहीॊ होती। भ

झे कबी कबी उनके इस
टारभटोर ऩय ऐसी झ

ॉझराहट होती है कक त

भसे कमा कह

ॊ । जी चाहता है
उनको ब

र जाऊॉ । भगय क

छ फस नहीॊ चरता। ददर फेहमा हो गमा।
मह ॉ अबी मही फाते हो यही थी कक फाफ

कभरापसाद कभये भे दाखखर


ए। उनको दे खते ही ऩ

णाय ने घ

घॉट तनकार री औय पेभा रे बी चट ऑॊ खो
से ऑॊ स

ऩोछ ररए औय सॉबर फै ठी। कभरापसाद —पेभा, त

भ बी कै सी
नादान हो। ऐसी फातो ऩय त

भको ववशवास कमोकय आ गमा ? इतना स

नना
था कक पेभा का भ

खडा ग

राफ की तयह खखर गमा। हषय के भाये ऑॊ खे
चभकने रगी। ऩ

णाय ने आदहसता से उसकी एक उॉ गरी दफामी। दोनो के ददर
धडकने रगे कक दे खे मह कमा कहते है ।
कभरापसाद—फात के वर इतनी ह

ई कक घॊटा बय ह

आ , रारा जी के
ऩास फाफ

दाननाथ आमे ह

ए थे। शादी बमाह की चचाय होने रगी तो फाफ


साहफ ने कहा कक भ

झे तो फाफ

अभ

तयाम के इयादे इस सार बी ऩकके नहीॊ
भार

होते। शामद वह रयपाभय भॊडरी भे दाखखर होने वारे है । फस इतनी सी
फात रोगो ने क

छ का क

छ सभझ ररमा। रारा जी अधय फेहोश होकय धगय
ऩडे । अमभा उधय फदहवास हो गमी। अफ जफ तक उनको सॊबार

कक साये
घय भे कोराहर होने रगा। ईसाई होना कमा कोई ददलरगी है । औय कपय
उनको इसकी जरयत ही कमा है । ऩ

जा ऩाठ तो वह कयते नहीॊ तो उनहे कमा


तते ने काटा है कक अऩना भत छोड कय नकक

फने । ऐसी फे सय-ऩै य की
फातो ऩय एतफाय नहीॊ कयना चादहए। रो अफ भ

ॉह धो डारो। हॉसी-ख

शी की
फातचीत की। भ

झे त

महाये योने-धोने से फह

त यॊ ज ह

आ। मह कहकय फाफ


कभरापसाद फाहय चरे गमे औय ऩ

णाय ने हॊ सकय कहा —स

ना क

छ भै जो
कहती थी कक मह सफ झ

ठ है । रे अफ भ

ॊह भीठा कयावो।
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पेभा ने पप

जलरत होकय ऩ

णाय को छाती से ररऩटा ररमा औय उसके
ऩतरे ऩतरे होठो को च

भकय फोरी—भ

ॉह भीठा ह

आ मा औय रोगी?


णाय —मह रभठाइम ॉ यख छोडो उनके वासते जजनकी तनठ

याई ऩय अबी


ढ यही थी। भेये ररए तो आगया वारे की द

कान की ताजी-ताजी अभ

ततम ॉ
चादहए।
पेभा—अचछा अफ की उनको धचटठी ररखॉगी तो ररख द

ॉ गी कक ऩ

णाय
आऩसे अभ

ततम ॉ भ ॉ गती है । ऩ

णाय —त

भ कमा ररखोगी , ह ॉ , भै आज का साया


ताॊत ररख
ूॉगी। ऐसा-ऐसा फनाऊॉ गी कक त

भ बी कमा माद कयो। सायी करई
खोर द

ॉ गी।
पेभा—(रजाकय) अचछा यहने दीजजए मह सफ ददलरगी। सच भानो


णाय , अगय आज की कोई फात त

भने ररखी तो कपय भै त

भसे कबी न
फोर

गी।


णाय —फोरो मा न फोरो, भगय भै ररख
ूॉगी जरय। इसके ररए तो उनसे
जो चाह

ॉगी रे र

ॉ गी। फस इतना ही ररख द

ॉ गी कक पेभा को अफ फह

त न
तयसाइए।
पेभा—(फात काटकय) अचछा ररखखएगा तो दे ख
ूॉगी। ऩॊडडत जी से
कहकय वह द

गय त कयाऊॉ कक सायी शयायत ब

र जाओ। भार

भ होता है उनहोने


महे फह

त सय चढा यखा है ।
अबी दोनो सखखम ॉ जी बय कय ख

श न होने ऩामी थीॊ कक उनको यॊ ज
ऩह

ॉचाने का कपय साभान हो गमा। पेभा की बावज अऩनी ननद से हयदभ
जरा कयती थी। अऩने सास-सस

य से मह ॉ तक कक ऩतत से बी , कद यहती
कक पेभा भे ऐसे कौन से च ॉ द रगे कक साया घयाना उन ऩय तनछावय होने को
तैमाय यहता है । उनका आदय सफ कमो कयते है भेयी फात तक कोइ नहीॊ


छता। भै उनसे ककसी फात भे कभ नहीॊ ह

ॉ। गोये ऩन भे , स

ॊदयता भे , श

ॊगाय
भे भेया नॊफय उनसे फयाफय फढा-चढा यहता है । ह ॉ वह ऩढी-ररखी है । भै फौयी
इस ग

ण को नहीॊ जानती। उनहे तो भदो भे रभरना है , नौकयी-चाकयी कयना
है , भ

झ फेचायी के बाग भे तो घय का काभ काज कयना ही फदा है । ऐसी
तनयरज रडकी। अबी शादी नहीॊ ह

ई , भगय पेभ-ऩर आते-जाते है । , तसवीये
बेजी जाती है । अबी आठ-नौ ददन होते है कक प

रो के गहने आमे है । ऑॊ खो
का ऩानी भय गमा है । औय ऐस क

रवॊती ऩय साया क

नफा जान दे ता है । पेभा
उनके ताने औय उनकी फोरी-ठोररमो को हॉसी भे उडा ददमा कयती औय अऩने
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बाई के खाततय बावज को ख

श यखने की कपक भे यहती थी। भगय बाबी का


ॉह उससे हयदभ प

रा यहता। आज उनहोने जमोही स

ना कक अभ

तयाम ईसाई
हो गमे है तो भाये ख

शी के प

री नहीॊ सभामी। भ

सकयाते , भचरते , भटकते ,
पेभा के कभये भे ऩह

ॉची औय फनावट की हॉसी हॉसकय फोरी —कमो यानी आज
तो फात ख

र गमी। पेभा ने मह स

नकय राज से सय झ

का ररमा भगय ऩ

णाय
फोरी—साया ब ॉ डा प

ट गमा। ऐसी बी कमा कोई रडकी भदो ऩय कपसरे।
पेभा ने रजाते ह

ए जवाफ ददमा—जाओ। त

भ रोगो की फरा से । भ

झसे भत
उरझो।
बाबी —नहीॊ-नहीॊ , ददलरगी की फात नहीॊ। भदय सदा के कठकरेजी होते
है । उनके ददर भे पेभ होता ही नहीॊ। उनका जया-सा सय धभके तो हभ
खाना-ऩीना तमाग दे ती है , भगय हभ भय ही कमो न जामॉ उनको जया बी
ऩयवा नहीॊ होती। सच है , भदय का करेजा काठ का।


णाय —बाबी। त

भ फह

त ठीक कहती हो। भदो का करेजा सचभ

च काठ
का होता है । अफ भेये ही मह ॉ दे खो , भहीने भे कभ-सेकभ दस-फायह ददन उस


मे साहफ के साथ दोये ऩय यहते है । भै तो अके री स

नसान घय भे ऩडे -ऩडे
कयाहा कयती ह

ॉ। वह ॉ क

छ खफय ही नहीॊ होती। ऩ

छती ह

ॉ तो कहते है , योना-
गाना औयतो का काभ है । हभ योमे -गामे तो सॊसाय का काभ कै से चरे।
बाबी—औय कमा , जानो सॊसाय अके रे भदो ही के थाभे तो थभा है ।
भेया फस चरे तो इनकी तयप ऑॊ ख उठाकय बी न दे ख

। अफ आज ही दे खो ,
फाफ

अभ

तयाम का कयतफ ख

रा तो यानी ने अऩनी कै सी गत फना डारी।
(भ

सकयाकय) इनके पेभ का तो मह हार है औय वह ॉ चाय वषय से हीरा
हवारा कयते चरे आते है । यानी। नायाज न होना , त

महाये खत ऩय जाते है ।
भगय स

नती ह

ॉ वह ॉ से ववयरे ही ककसी खत का जवाफ आता है । ऐसे
तनभोदहमो से कोई कमा पेभ कये । भेया तो ऐसो से जी जरता है । कमा ककसी
को अऩनी रडकी बायी ऩडी है कक क

ऍ ॊ भे डार दे । फरा से कोई फडा
भारदाय है , फडा स

ॊदय है , फडी ऊॉ ची ऩदवी ऩय है । भगय जफ हभसे पेभ ही न
कये तो कमा हभ उसकी धन-दौरत को रेकय चाटै ? सॊसाय भे एक से एक
रार ऩडे है । औय, पेभा जैसी द

रदहन के वासते द

रहो का कार।
पेभा को मह फाते फह

त फ

यी भार

भ ह

ई , भगय भाये सॊकोच के क


फोर न सकी। ह ॉ , ऩ

णाय ने जवाफ ददमा —नहीॊ , बाबी, त

भ फाफ

अभ

तयाम ऩय
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अनमाम कय यही हो। उनको पेभा से सचचा पेभ है । उनभे औय द

सये भदो भे
फडा बेद है ।
बाबी—ऩ

णय अफ भ

ॊह न ख

रवाओ। पेभ नहीॊ ऩतथय कयते है ? भाना कक
वे फडे ववदमावारे है औय छ

टऩने भे बमाह कयना ऩसॊद नहीॊ कयते। भगय अफ
तो दोनो भे कोई बी कभरसन नहीॊ है । अफ कमा फ

ढे होकय बमाह कये गे ? भै
तो फात सच कह

ॊ गी उनकी बमाह कयने की चे षठा ही नहीॊ है । टारभटोर से
काभ तनकारना चाहते है । मही बमाह के रऺण है कक पेभा ने जो तसवीय
बेजी थी वह ट

कडे -ट

कडे कयके ऩै यो तरे क

चर डारी। भै तो ऐसे आदभी का


ॉह बी न दे ख
ूॉ।
पेभा ने अऩनी बावज को भ

सकयाते ह

ए आते दे खकय ही सभझ ररमा
था कक क

शर नहीॊ है । जफ मह भ

सकयाती है , तो अवशम कोई न कोई आग
रगाती है । वह उनकी फातचीत का ढॊ ग दे खकय सहभी जाती थी कक दे खे मह
कमा स

नावनी स

नाती है । बाबी की मह फात तीय की तयह करेजे के ऩाय हो
गई हकका फकका होकय उसकी तयप ताकने रगी, भगय ऩ

णा को ववशवास न
आमा, फोरी मह कमा अनथय कयती हो , बाबी। बइमा अबी आमे थे उनहोने
इसकी क

छ बी चचाय नही की। भै । तो जानती ह

ॊ कक ऩहरी फात की तयह
मह बी झ

ठी है । मह असॊबव है कक वह अऩनी पेभा की तसवीय की ऐसी


गय त कये ।
बाबी—त

महाये न ऩततमाने को भै कमा करॊ , भगय मह फात त

महाये
बइमा ख

द भ

झसे कह यहे थे। औय कपय इसभे फात ही कौन-सी है , आज ही
तसवीय भॉगा बेजो। दे खो कमा जवाफ दे ते है । अगय मह फात झ

ठी होगी तो
अवशम तसवीय बेज दे गे। मा कभ से कभ इतना तो कहे गे कक मह फात झ

ठी
है । अफ ऩ

णाय को बी कोई जवाफ न स

झा। वह च

ऩ हो गमी। पेभा क

छ न
फोरी। उसकी ऑॊ खो सेऑॊ स

ओ की धाया फह तनकरी। बावज का चे हया ननद
की इस दशा ऩय खखर गमा। वह अतमॊत हवषय त होकय अऩने कभये भे आई ,
दऩय ण भे भ

हॉ दे खा औय आऩ ही आऩ भगन होकय फोरी —‘मह घाव अफ क


ददनो भे बये गा।‘
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19
तीसया अधमाम


ठे मददगार

फाफ

अभ

तयाम यात बय कयवटे फदरते यहे । जमो-जमो उनहोने अऩने
नमे इयादो औय नई उभॊगो ऩय ववचाय ककमा तमो-तमो उनका ददर औय बी
दढ होता गमा औय बोय होते-होते दे शबजकत का जोश उनके ददर भे रहये
भायने रगा। ऩहरे क

छ दे य तक पेभा से नाता ट

ट जाने की धचॊ ता इस रहय
ऩय फ ॉ ध का काभ कयती यही। भगय अॊत भे रहये ऐसी उठीॊ कक वह फ ॉ ध ट


गमा।


फह होते ही भ

ॉह-हाथ धो , कऩडे ऩदहन औय फाइरसककर ऩय सवाय
होकय अऩने दोसतो की तयप चरे। ऩहरे ऩदहर रभसटय ग

रजायीरारफी.ए.
एर.एर.फी. के मह ॉ ऩह

ॉचे । मह वकीर साहफ फडे उऩकायी भन

षम थे औय
साभाजजक स

धाय का फडा ऩऺ कयते है । उनहोने जफ अभ

तयाम के इयादे ओय
उनके ऩ

ये होने की कलऩनाए स

नी तो फह

त ख

श ह

ए औय फोरे —आऩ भेयी
ओय से तनजशचॊत यदहए औय भ

झे अऩना सचचा दहतैषी सभखझए। भ

झे फह


हषय ह

आ कक हभाये शहय भे आऩ जैसे मोगम ऩ

रष ने इस बायी फोझ को
अऩने साय ररमा। आऩ जो काभ चाहे भ

झे सौऩ दीजजए , भै उसको अवशम


या करगा औय उसभे अऩनी फडाई सभझ

ॉगा।
अभ

तयाम वकीर साहफ की फातो ऩय रट

हो गमे। उनहोने सचचे ददर
से उनको धनमवाद ददमा औय कहा कक भै इश शहय भे एक साभाजजक स

धाय
की सबा सथावऩत कयना चाहता ह

ॉ। वकीर साहफ इस फात ऩय उछर ऩडे
औय कहा कक आऩ भ

झे उस सबा का सदसम औय दहतधचनतक सभझे। भै
उसकी भदद ददरोजान से करॉ गा। उभ

तयाम इस अचछे शग

न होते ह


दाननाथ के घय ऩह

ॉचे । हभ ऩहरे कह च

के है कक दाननाथ के घय ऩह

ॉचे । हभ
ऩहरे कह च

के है कक दाननाथ उनके सचचे दोसतो भे थे। वे दनको दे खते ही
फडे आदय से उठ खडे ह

ए औय ऩ

छा-कमो बाई, कमा इयादे है ?
अभ

तयाम ने फह

त गमबीयत से जवाफ ददमा —भै अऩने इयादे आऩ ऩय
पकट कय चका ह

ॉ औय आऩ जानते है कक भै जो क

छ कहता ह

ॉ वह कय
ददखाता ह

ॉ। फस आऩ के ऩास के वर इतना ऩ

छना के ररए आमा ह

ॉ कक आऩ
इस श

ब कामय भे भेयी क

छ भदद कये गे मा नहीॊ ? दाननाथ साभजजक स

धाय
को ऩॊसद तो कयता था भगय उसके ररए हानी मा फदनाभी रेना नहीॊ चाहता
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20
था। कपय इस वकत तो, वह रारा फदयी पसाद का क

ऩाऩार बी फनना चाहता
था, इसररए उसने जवाफ ददमा—अभ

तयाम त

भ जानते हो कक भै हय काभ भे


महाया साथ दे ने को तैमाय ह

ॉ। रऩमा ऩै सा सभम , सबी से सहामता करग ॉ ,
भगय तछऩे-तछऩे। अबी भै इस सबा भे ख

लरभ-ख

लरा सजमभररत होकय


कसान उठाना उधचत नहीॊ सभझता। ववशे ष इस कायण से कक भेये
सजमभरत होने से सबा को कोई फर नहीॊ ऩह

ॉचे गा।
फाफ

अभ

तयाम ने अधधक वादान

वाद कयना अन

धचत सभझा। इसभे
सनदे ह नहीॊ कक उनको दाननाथ से फह

त आशा थी। भगय इस सभम वह मह ॉ
फह

त न ठहये औय ववदमा के ररए परसद थे। जफ अभ

तयाम ने उनसे सबा
सॊफॊध फाते कीॊ तो वह फह

त ख

श ह

ए। उनहोने अभ

तयाम को गरे रगा ररमा
औय फोरे —रभसटय अभ

याम, त

भने भ

झे ससते छोड ददमा। भै ख

द कई ददन
से इनहीॊ फातो के सोच-ववचाय भे ड

फा ह

आ ह

ॉ। आऩने भेये सय से फोझ उताय
ररमा। जैसी मागता इस काभ के कयने की आऩभे है वह भ

झे नाभ को बी
नहीॊ। भै इस सबा का भेमफय ह

ॉ।
फाफ

अभ

तयाम को ऩॊडडत जी से इतनी आशा न थी। उनहोने सोचा था
कक अगय ऩॊडडत जी इस काभ को ऩसॊद कये गे तो ख

लरभख

लरा शयीक होते
खझझके गे। भगय ऩॊडडत जी की फातो ने उनका ददर फह

त फढा ददमा। मह ॉ से
तनकरे तो वह अऩनी ही ऑॊ खो भे दो इॊ च ऊॉ चे भार

भ होते थे। अऩनी
अथय रसवद के नशे भे झ

भते-झाभते औय भ

ॉछो ऩय ताव दे ते एन.फी. अगयवार
साहफ की सेवा भे ऩह

ॉचे रभसटय अगयावारा अॊगेजी औय सॊसक

त के ऩॊडडत
थे। वमाखमान दे ने भे बी तनऩ

ण थे औय शहय भे सफ उनका आदय कयते थे।
उनहोने बी अभ

तयाम की सहामता कयने का वादा ककमा औय इस सबा का
जवाइणट सेकटे यी होना सवीकाय ककमा। ख

रासा मह कक नौ फजते-फजते
अभ

तयाम साये शहय के परसद औय नई योशनीवारे ऩ

रषो से रभर आमे औय
ऐसा कोई न था जजसने उनके इयादे की ऩशॊसा न की हो , मा सहामता कयने
का वादा न ककमा हो। जरसे का सभम चाय फजे शाभ को तनमत ककमा
गमा।
ददन के दो फजे से अभ

तयाम के फॉगरे ऩय रजसे की तैमारयम ॉ होने
रगीॊ। ऩशय बफछामे गमे। छत भे झाड-पान

स , ह ॉ डडमाॉ रटकामी गमीॊ। भेज
औय क

रसय म ॉ सजाकय धयी गमी औय सबासदो के ररए खाने-ऩीने का बी
पफॊध ककमा गमा। अभ

तयाम ने सबा के ररए एक ररए एक तनमभावरी
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फनामी। एक वमाखमान ररखा औय इन काभो को ऩ

या कयके भेमफयो की याह
दे खने रगे। दो फज गमे , तीन फज गमे , भगय कोई न आमा। आखखय चाय
बी फजे , भगय ककसी की सवायी न आमी। ह ॉ , इॊजीतनमय साहफ के ऩास से
एक नौकय मह सॊदे श रेकय आमा कक भै इस सभम नहीॊ आ सकता।
अफ तो अभ

याम को धचॊ ता होने रगी कक अगय कोई न आमा तो भेयी
फडी फदनाभी होगी औय सफसे रजजजत होना ऩडे गा तनदान इसी तयह ऩ ॉ च
फज गए औय ककसी उतसाही ऩ

रष की स

यत न ददखाई दी। तफ ता अभ

तयाम
को ववशवास हो गमा कक रोगो ने भ

झे धोखा ददमा। भ

ॊशी ग

रजयीरार से
उनको फह

त क

छ आशा थी। अऩना आदभी उनके ऩास दौडामा। भगय उसने
रौटकय फमान ककमा कक वह घय ऩय नहीॊ है , ऩोरो खेरने चरे गमे। इस
सभम तक छ: फजे औय जफ अबी तक कोई आदभी न ऩधाया तो अभ

तयाम
का भन फह

त भररन हो गमा। मे फेचाये अबी नौजवान आदभी थे औय
मदमवऩ फात के धनी औय ध

न के ऩ

ये थे भगय अबी तक झ

ठे दे शबकतो
औय फने ह

ए उदमोधगमो का उनको अन

बव न ह

आ था। उनहे फह

त द

:ख


आ। भन भाये ह

ए चायऩाई ऩय रेट गमे औय सोचने रगे की अफ भै कहीॊ


ॉह ददखाने मोगम नहीॊ यहा। भै इन रोगो को ऐसा कदटर औय कऩटी नहीॊ
सभझता था। अगय न आना था तो भ

झसे साप-साप कह ददमा होता। अफ
कर तभाभ शहय भे मह फात पै र जाएगी कक अभ

तयाम यईसो के घय दौडते
थे , भगय कोई उनके दयवाजे ऩय फात ऩ

छने को बी न गमा। जफ ऐसा
सहामक रभरेगे तो भेये ककमे कमा हो सके गा। इनहीॊ खमारो ने थोडी दे य के
ररए उनके उतसाह को बी ठॊ डा कय ददमा।
भगय इसी सभम उनको रारा धन

षधायीरार की उतसाहवधय क फाते
माद आमीॊ। वही शबद उनहोने रोगो के हौसरे फढमा थे , उनके कानो भे


ॉजने रगे —रभरो, अगय जातत की उननतत चाहते हो तो उस ऩय सवय सव
अऩय ण कय दो। इन शबदो ने उनके फै ठते ह

ए ददर ऩय अॊक

श का काभ
ककमा। चौक कय उठ फै ठे , रसगाय जरा ररमा औय फाग की कमारयमो भे टहरे
रगे। च ॉ दनी तछटकी ह

ई थी। हवा के झोके धीये -धीये आ यहे थे। स

नदय प

रो
के ऩौधे भनद-भनद रहया यहे थे। उनकी स

गनध चायो ओय पै री ह

ई थी।
अभ

तयाम हयी-हयी द

फ ऩय फै ठ गमे औय सोचने रगे। भगय सभम ऐसा


हावना था औय ऐसा अननददामक सननाटा छामा ह

आ था कक चॊचर धचतत
पेभा की ओय जा ऩह

ॉचा। जेफ से तसवीय के ऩ

जे तनकार ररमे औय च ॉ दनी
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यात भे उसी फडी दे य तक गौय से दे खते यहे । भन कहता था —ओ अबागे
अभ

तयाम त

कमोकय जजमेगा। जजसकी भ

यत आठो ऩहय तेये साभने यहती थी,
जजसके साथ आननद बोगने के ररए त

इतने ददनो ववयाहाधगन भे जरा ,
उसके बफना तेयी जान कै सी यहे गी ? त

तो वै यागम ररमे है । कमा उसको बी
वै याधगन फनामेगा? हतमाये उसको त

झे सचचा पेभ है । कमा त

दे खता नहीॊ कक
उसके ऩर पेभ भे ड

फे ह

ए यहते है । अभ

तयाम अफ बी बरा है । अबी क


नहीॊ बफगडा। इन फातो को छोडो। अऩने ऊऩय तयस खाओ। अऩने अभायनो के
रभटी भे न रभराओ। सॊसाय भे त

महाये जैसे फह

त-से उतसाही ऩ

रष ऩडे ह


है । त

महाया होना न होना दोनो फयाफय है । रारा फदयीपसाद भ

ॉह खोरे फै ठे
है । शादी कय रो औय पेभा के साथ पेभ कयो। (फेचै न होकय) हा भै बी कै सा
ऩागर ह

ॉ। बरा इस तसवयी ने भेया कमा बफगाडा था जो भै ने इसे पाडा
डारा। हे ईशवय पेभा अबी मह फात न जानती हो।
अबी इसी उधेडफ

न भे ऩडे ह

ए थे कक हाथो भे एक ऽत राकय ददमा।
घफयाकय ऩ

छा—ककसका ऽत है?
नौकय ने जवाफ ददमा—रारा फदयीपसाद का आदभी रामा है ।
अभ

तयाम ने क ॉ ऩते ह

ए हाथो से ऩरी री औय ऩढने रगे। उसभे ररखा
था—
‘‘फाफ

अभ

तयाम, आशीवायद
हभने स

ना है कक अफ आऩ सनात धभय को तमाग कयके ईसाइसामो की
उस भॊडरी भे जो रभरे है जजसको रोग ब

र से साभाजजक स

धाय सबा कहते
है । इसररए अफ हभ अतत शोक के साथ कहते है कक हभ आऩसे कोई नाता
नहीॊ कय सकते।
आऩका श

बधचॊ तक
फदयीपसाद ।’’

इस धचटी को अभ

तयाम ने कई फाय ऩढा औय उनके ददर भे अग
खीॊचातानी होने रगी। आतभसवाथय कहता था कक इस स

नदयी को अवशम
बमाहो औय जीवन के स

ख उठाइओ। दे शबजकत कहती थी जो इयादा ककमा है
उस ऩय अडे यहो। अऩना सवाथय तो सबी चाहते है । त

भ द

सयो का सवाथय
कयो। इस अतनतम जीवन को वमतीत कयने का इससे अचछा कोई ढॊ ग नहीॊ
है । कोई ऩनदह रभनट तक मह रडाई होती यही। इसका तनणय म के वर दो
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अऺय ररखने ऩय था। दे शबकत ने आतभसवाथय को ऩयासत कय ददमा था।
आखखय वह ॉ से उठकय कभये भे गमे औय कई ऩर कागज ऽफय कयने के
फाद मह ऩर ररखा—
‘‘भहाशम, पणाभ


ऩा ऩर आमा। ऩढकय फह

त द

:ख ह

आ। आऩने भेयी फह

त ददनो की
फॉधी ह

ई आशा तोड दी। खैय जैसा आऩ उधचत सभझे वै सा कये । भै ने जफ से
होश सॉबारा तफ से भै फयाफय साभाजजक स

धाय का ऩऺ कय सकता ह

ॉ। भ

झे
ववशवास है कक हभाये दे श की उननती का इसके रसवाम औय कोई उऩाम नहीॊ
है । आऩ जजसको सनातन धभय सभझे ह

ए फै ठै है , वह अववदमा औय
असभमता का पतमऺ सवरऩ है ।
आऩका क

ऩाकाॊऺी
अभ

तयाम।
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चौथा अधमाम
जवानी की मौत
सभम हवा की तयह उडता चरा जाता है । एक भहीना ग

जय गमा।
जाडे का क

ॉ च ह

आ औय गभी की रै नडोयी होरी आ ऩह

ॉची। इस फीच भे
अभ

तयाम ने दो-तीन जरसे ककमे औय मदमवऩ सबासद दस से जमादा कबी
न ह

ए भगय उनहोने दहमाव न छोडा। उनहोने पततऻा कय री थी कक चाहे
कोई आवे मा न आवे , भगय तनमत सभम ऩय जरसा जरय ककमा करग ॉ ।
इसके उऩयानत उनहोने दे हातो भे जा-जाकय सयर-सयर बाषाओॊ भे वमाखमान
दे ना श

र ककमा औय सभाचाय ऩरो भे साभाजजक स

धाय ऩय अचछे -अचछे रेख
बी ररखे। इनको तो इसके रसवाम कोई काभ न था। उधय फेचायी पेभा का
हार फह

त फेहार हो यहा था। जजस ददन उसे-उनकी आखखयी धचटी ऩह

ॉची थी
उसी ददन से उसकी योधगमो की-सी दशा हो यही थी। हय घडी योने से काभ
था। फेचायी ऩ

णय रसयहाने फै ठे सभझामा कयती। भगय पेभा को जया बी चै न
न आता। वह फह

धा ऩडे -ऩडे अभ

तयाम की तसवीय को घणटो च

ऩचाऩ दे खा
कयती। कबी-कबी जफ फह

त वमाक

र हो जाती तो उसके जी भे आता कक भौ
बी उनकी तसवीय की वही गत करॉ जो उनहोने भेयी तसवीय की की है । भगय
कपय त

यनत मह खमार ऩरट खा जाता। वह उस तसवी को ऑॊ खो से रेती ,
उसको च

भती औय उसे छाती से धचऩका रेती। यात भे अके रे चायऩाई ऩय
ऩडे -ऩडे आऩ ही आऩ पेभ औय भ

हबबत की फाते ककमा कयती। अभ

याम के


र पेभ-ऩरो को उसने यॊ गीन कागज ऩय , भोटे अऺयो , भे नकर कय ररमा
था। जफ जी फह

त फेचै न होता तो ऩ

णय से उनहे ऩढवाकय स

नती औय योती।
बावज के ऩास तो वह ऩहरे बी फह

त कभ फै ठती थी , भगय अफ भ ॉ से बी


छ खखॊ ची यहती। कमोकक वह फेटी की दशा दे ख-दे ख क

ढती औय अभ

तयाम
को इसका कयण सभझकय कोसती। पेभा से मह कठोय वचन न स

ने जाते।
वह ख

द अभ

तयाम का जजक फह

त कभ कयती। ह ॉ , जफ ऩ

णाय मा कोई औय


सयी सहे री उनकी फात चराती तो उसको ख

फ कान रगाकय स

नाती। पेभा
एक ही भास भे गरकय क ॉ टा हो गमी। हाम अफ उसको अऩने जीवन की
कोई आशा न थी। घय के रोग उसकी दवा-दार भे रऩमा ठीकयी की तयह


क यहे थे भगय उसको क

छ पमदा न होता। कई फाय रारा फदयीपसाद जी
के जी भे मह फात आई कक इसे अभ

तयाम ही से बमाह द

ॉ । भगय कपय बाई-
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फहन के डय से दहमाव न ऩडता। पेभा के साथ फेचायी ऩ

णाय बी योधगणी फनी


ई थी।
आखखय होरी का ददन आमा। शहय भे चायो ओय अफीय औय ग

रार
उडने रगा , चायो तयप से कफीय औय बफयादयीवारो के मह ॉ से जनानी
सवारयम ॉ आना श

र ह

ई औय उसे उनकी खाततय से फनाव-रसगाय कयना ,
अचछे -अचछे कऩडा ऩहनना , उनका आदय-समभान कयना औय उनके साथ
होरी खेरना ऩडा। वह हॉसने , फोरने औय भन को द

सयी फातो भे रगाने के
ररए फह

त कोरशश कयती यही। भगय क

छ फस न चरा। योज अके र भे
फै ठकय योमा कयती थी , जजससे क

छ तसकीन हो जाती। भगय आज शभय के
भाये यो बी न सकती थी। औय ददन ऩ

णय दस फजे से शाभ तक फै ठी अऩनी
फातो से उसका ददर फहरामा कयती थी भगय थी भगय आज वह बी सवेये
ही एक झरक ददखाकय अऩने घय ऩय तमोहाय भना यही थी। हाम ऩ

णाय को
दे खते ही वह उससे रभरने के ररए ऐसी झऩटी जैसे कोई धचडडमा फह

त ददनो
के फाद अऩने वऩॊ जये से तनकर कय बागो। दोनो सखखम ॉ गरे रभर गमीॊ।


णाय ने कोई चीज भ ॉ गी —शामद क

भक

भे होगे। पेभा ने सनद

क भगामा।
भगय इस सनद

क को दे खते ही उसकी ऑॊ खो भे ऑॊ स

बय आमे। कमोकक मह
अभ

तयाम ने ऩय सार होरी के ददन उसके ऩास बेजा था। थोडी दे य भे ऩ

णाय
अऩने घय चरी गमी भगय पेभा घॊटो तक उस सनद

क को दे ख-दे ख योमा की।


णाय का भकान ऩडोसी ही भे था। उसके ऩतत ऩजणडत फसॊतक

भाय
फह

त सीधे भगय शै कीन औय पेभी आदभी थे। वे हय फात सरी की
इचछान

साय कयते। उनहोने उसे थोडा-फह

त ऩढमा बी था। अबी बमाह ह

ए दो
वषय बी न होने ऩामे थे , पेभ की उभॊगे दोनो ही ददरो भे उभड ह

ई थी , औय
जमो-जमो ददन फीतते थे तमो-तमो उनकी भ

हबफत औय बी गहयी होती जाती
थी। ऩ

णाय हयदस ऩतत की सेवा पसनन यहती , जफ वह दस फजे ददन को
दफतय जाने रगते तो वह उनके साथ-साथ दयवाजे तक आती औय जफ तक
ऩजणडत जी ददखामी दे ते वह दयवाजे ऩय खडी उनको दे खा कयती। शाभ को
जफ उनके आने का सभम हाता तो वह कपय दयवाजे ऩय आकय याह दे खने
रगती। औय जमोही व आ जाते उनकी छाती से ररऩट जाती। औय अऩनी
बोरी-बारी फातो से उनकी ददन बय की थकन धो दे ती। ऩॊडडत जी की
तयखवाह तीस रऩमे से अधधक न थी। भगय ऩ

णाय ऐसी ककफमात से काभ
चराती कक हय भहीने भे उसके ऩास क

छ न क

छ फच यहता था। ऩॊडडत जी
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फेचाये , के वर इसररए कक फीवी को अचछे से अचछे गहने औय कऩडे ऩहनावे ,
घय ऩय बी काभ ककमा कयते। जफ कबी वह ऩ

णाय को कोई नमी चीज
फनवाकय दे ते वह प

री न सभाती। भगय रारची न थी। ख

द कबी ककसी
चीज के ररए भ

ॉह न खोरती। सच तो मह है कक सचचे पेभ के आननद ने
उसके ददर भे ऩहनने-ओढने की रारसा फाकी न यकखी थी।
आखखय आज होरी का ददन आ गमा। आज के ददन का कमा ऩ

छना
जजसने सार बय चाथडो ऩय काटा वह बी आज कहीॊ न कहीॊ से उधाय ढ

ॉ ढकय
राता है औय ख

शी भनाता है । आज रोग रॉ गोटी भे पाग खेरते है । आज के
ददन यॊ ज कयना ऩाऩ है । ऩॊडडत जी की शादी के फाद मह द

सयी होरी ऩडी
थी। ऩहरी होरी भे फेचाये खारी हाथ थे। फीवी की क

छ खाततय न कय सके
थे। भगय अफ की उनहोने फडी-फडी तैमारयमाॉ की थी। कोई डढ सौ , रऩमा
ऊऩय से कभामा था , उसभे फीवी के वासते एक स

नदय कॊ गन फनवा था , कई
उततभ साडडमाॉ भोर रामे थे औय दोसतो को नेवता बी दे यकखा था। इसके
ररए ब ॉ तत-ब ॉ तत के भ

यबफे, आचाय, रभठाइम ॉ भोर रामे थे। औय गाने-फजाने
के सभान बी इकटे कय यकखे थे। ऩ

णाय आज फनाव-च

नाव ककमे इधय-उधय
छबफ ददखाती कपयती थी। उसका भ

खडा क

नदा की तयह दभक यहा था उसे
आज अऩने से स

नदय सॊसाय भे कोई द

सयी औयत न ददखामी दे ती थी। वह
फाय-फाय ऩतत की ओय पमाय की तनगाहो से दे खती। ऩजणडत जी बी उसके


ॊगाय औय पफन ऩय आज ऐसी यीझे ह

ए थे कक फेय-फेय घय भे आते औय
उसको गरे रगाते। कोई दस फजे होगे कक ऩजणडत जी घय भे आमे औय


सकया कय ऩ

णाय से फोरे —पमायी, आज तो जी चाहता है त

भको ऑॊ खो भे
फै ठे रे । ऩ

णाय ने धीये से एक ठोका दे कय औय यसीरी तनगाहो से दे खकय
कहा—वह दे खो भै तो वह ॉ ऩहरे ही से फै ठी ह

ॉ। इस छबफ ने ऩजणडत जी को


बा ररमा। वह झट फीवी को गरे से रगाकय पमाय कयने। इनहीॊ फातो भे
दस फजे तो ऩ

णाय ने कहा —ददन फह

त आ गमा है , जया फै ठ जाव ता उफटन
भर द

ॉ । दे य हो जामगी तो खाने भे अफेय-सफेय होने से सय ददय होने रेगेगा।
ऩजणडत जी ने कहा —नहीॊ-नहीॊ दो। भै उफटन नहीॊ भरवाऊॉ गा। राओ
धोती दो, नहा आऊॉ ।


णाय —वाह उफटन भरवावै गे। आज की तो मह यीतत ही है । आके फै ठ
जाव।
ऩजणडत—नहीॊ, पमायी, इसी वकत जी नहीॊ चाहता, गभी फह

त है ।
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णाय ने रऩककय ऩतत का हाथ ऩकड ररमा औय चायऩाई ऩय फै ठकय
उफटन भरने रगी।
ऩजणडत—भगय जया जलदी कयना , आज भै गॊगा जी नही जाना चाहता


ॉ।


णाय-अफ दोऩहय को कह ॉ जाओगे। भहयी ऩानी राएगी , महीॊ ऩय नहा
रो।
ऩजणडत—मही पमायी, आज गॊगा भे फडी फहाय यहे गी।


णाय —अचछा तो जया जलदी रौट आना। मह नहीॊ कक इधय-उधय तैयने
रगो। नहाते वकत त

भ फह

त त

भ फह

त द

य तक तैय जामा कयते हो।
थोडी दे य भे ऩजणडत जी उफटन भरवा च

के औय एक ये शभी धोती ,
साफ

न, तौररमा औय एक कभॊडर हाथ भे रेकय नहाने चरे। उनका कामदा
था कक घाट से जया अरग नहा कयते मह तैयाक बी फह

त अचछे थे। कई
फाय शहय के अचछे तैयाको से फाजी भाय च

के थे। मदमवऩ आज घय से वादा
कयके चरे थे कक न तैये गे भगय हवा ऐसी धीभी-धीभ चर यही थी औय ऩानी
ऐसा तनभय र था कक उसभे भवदभ-भवदभ हरकोये ऐसे बरे भार

भ होते थे
औय ददर ऐसी उभॊगो ऩय था कक जी तैयने ऩय ररचामा। त

यॊ त ऩानी भे क


ऩडे औय इधय-उधय कलरोरे कयने रगे। तनदान उनको फीच धाये भे कोई
रार चीजे फहती ददखामा दी। गौय से दे खा तो कभर के प

र भार

भ ह

ए।


मय की ककयणो से चभकते ह

ए वह ऐसे स

नदय भारभ होते थे कक
फसॊतक

भाय का जी उन ऩय भचर ऩडा। सोचा अगय मे रभर जामे तो पमायी


णाय के कानो के ररए झ

भके फनाऊॉ । वे भोटे -ताजे आदभी थे। फीच धाये तक
तैय जाना उनके ररए कोई फडी फात न थी। उनको ऩ

या ववशवास था कक भै


र रा सकता ह

ॉ। जवानी दीवानी होती है । मह न सोचा था कक जमो-जमो
भै आगे फढ

ॉ गा तमो-तमो प

र बी फढे गे। उनकी तयप चरे औय कोई ऩनदह
रभनट भे फीच धाये भे ऩह

ॉच गमे। भगय वह ॉ जाकय दे खा तो प

र इतना ही


य औय आगे था। अफ क

छ-क

छ थकान भार

भ होने रगी थी। भगय फीच भे
कोई ये त ऐसा न था जजस ऩय फै ठकय दभ रेते। आगे फढते ही गमे। कबी
हाथो से जोय भायते , कबी ऩै यो से जोय रगाते , प

रो तक ऩह

ॉचे । भगय उस
वकत तक हाथ-ऩ ॉ व दोनो फोझर हो गमे थे। मह ॉ तक कक प

रो को रेने के
ररए जफ हाथ रऩकाना चाहा तो उठ न सका। आखखय उनको द ॉ तो भे
दफामा औय रौटे । भगय जफ वह ॉ से उनहोने ककनायो की तयप दे खा तो ऐसा
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भार

भ ह

आ भानो हजाय कोस की भॊजजर है । फदन भे जया बी शजकत फाकी
न यही थी औय ऩानी बी ककनाये से धाये की तयप फह यहा था। उनका दहमाव


ट गमा। हाथ उठामा तो वह न उठे । भानो वह अॊग भे थे ही नहीॊ। हाम
उस वकत फसॊतक

भाय के चे हये ऩय जो तनयाशा औय फेफसी छामी ह

ई थी ,
उसके खमार कयने ही से छाती पटती है । उनको भार

भ ह

आ कक भै ड

फा
जा यहा ह

ॉ। उस वकत पमायी ऩ

णाय की स

धध आमी कक वह भेयी फाट दे ख यही
होगी। उसकी पमायी-पमायी भोहनी स

यत ऑॊ खे के साभने खडी हो गमी। एक
फाय औय हाथ पे का भगय क

छ फस न चरा। ऑॊ खो से ऑॊ स

फहने रगे औय
दे खते-दे खते वह रहयो भे रोऩ हा गमे। गॊगा भाता ने सदा के ररए उनको
अऩनी गोद भे ररमा। कार ने प

र के बेस भे आकय अऩना काभ ककमा।
उधय हार का स

ररए। ऩॊडडत जी के चरे आने के फाद ऩ

णाय ने थाररम ॉ
ऩयसीॊ। एक फतय न भे ग

रार घोरी, उसभे रभरामा। ऩॊडडत जी के ररए सनद


से नमे कऩडे तनकारे। उनकी आसतीनो भे च

ननटे डारी। टोऩी सादी थी ,
उसभे रसताये ट ॉ के । आज भाथे ऩय के सय का टीका रगाना श

ब सभझा जाता
है । उसने अऩने कोभर हाथो से के सय औय चनदन यगडा , ऩान रगामे , भेवे
सयौते से कतय-कतय कटोया भे यकखे। यात ही को पेभा के फाीचे से स

नदय
कररम ॉ रेती आमी थी औय उनको तय कऩडे भे रऩेट कय यख ददमा था।
इस सभम वह ख

फ खखर गमी थीॊ। उनको तागे भे ग

ॉथकय स

नदय हाय फनामा
औय मह सफ पफनध कयके अऩने पमाये ऩतत की याह दे खने रगी। अफ ऩॊडडत
जी को नहाकय आ जाना चादहए था। भगय नहीॊ , अबी क

छ दे य नहीॊ ह

ई।
आते ही होगे , मही सोचकय ऩ

णाय ने दस रभनट औय उनका यासता दे खा। अफ


छ-क

छ धचॊ ता होने रगी। कमा कयने रगे ? ध

ऩ कडी हो यही है । रौटने ऩय
नहामा-फेनहामा एक हो जाएगा। कदाधचत माय दोसतो से फातो कयने रगे।
नहीॊ-नहीॊ भै उनको ख

फ जानती ह

ॉ। नदी नहाने जाते है तो तैयने की स

झती
है । आज बी तैय यहे होगे। मह सोचकय उसने आधा घॊटे औय याह दे खी।
भगय जफ वह अफ बी न आमे तफ तो वह फै चै न होने रगी। भहयी से
कहा—‘बफलरो जया रऩक तो जावा , दे खो कमा कयने रगे। बफलरो फह


अचछे सवाबव की फ

दढमा थी। इसी घय की चाकयी कयते-कयते उसके फार
ऩक गमे थे। मह इन दोनो पाखणमो को अऩने रडको के सभान सभझती थी।
वह त

यॊ त रऩकी ह

ई गॊगा जी की तयप चरी। वह ॉ जाकय कमा दे खती है कक
ककनाये ऩय दो-तीन भलराह जभा है । ऩॊडडत जी की धोती , तौररमा , साफ


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कभॊडर सफ ककनाये ऩय धये ह

ए है । मह दे खते ही उसके ऩै य भन-भन बय के
हो गए। ददर धड-धड कयने रगा औय करेजा भ

ॉह को आने रगा। मा
नायामण मह कमा ाजफ हो गमा। फदहवास घफयामी ह

ई नजदीक ऩह

ॉची तो
एक भलराह ने कहा—काहे बफलरो, त

महाये ऩॊडडत नहाम आवा यहे न।
बफलरो कमा जवाफ दे ती उसका गरा रॉ ध गमा , ऑॊ खो से ऑॊ स

फहने
रगे, सय ऩीटने रगी। भलराहो ने सभझामा कक अफ योमे -ऩीटे का होत है ।
उनकी चीज वसत

रेव औय घय का जाव। फेचाये फडे बरे भनई यहे न। बफलरो
ने ऩॊडडत जी की चीजे री औय योते-ऩीटती घय की तयप चरी। जमो-जमो वह
भकान के तनकट आती तमो-तमो उसके कदभ वऩछे को हटे आते थे। हाम
नायाण ऩ

णाय को मह सभाचाय कै से स

नाऊॉ गी वह बफचायी सोरहो रसॊ गाय ककमे
ऩतत की याह दे ख यही है । मह खफय स

नकय उसकी कमा गत होगी। इस
धकके से उसकी तो छाती पट जामगी। इनहीॊ ववचायो भे ड

फी ह

ई बफलरो ने
योते ह

ए घय भे कदभ यकखा। तभाभ चीजे जभीन ऩय ऩटक दी औय छाती
ऩय दोहतथड भाय हाम-हाम कयने रगी। फेचायी ऩ

णाय इस वकत आईना दे ख
यही थी। वह इस सभम ऐसी भगन थी औय उसका ददर उभॊगो औय अयभानो
से ऐसा बया ह

आ था कक ऩहरे उसको बफलरो के योने-ऩीटने का कायण
सभझ भे न आमा। वह हकफका कय ताकने रगी कक मकामक सफ भजाया
उसकी सभझ भे आ गमा। ददर ऩय एक बफजरी कौध गमी। करेजा सन से
हो गमा। उसको भार

भ हो गमा कक भेया स

हाग उठ गमा। जजसने भेयी फ ॉ ह
ऩकडी थी उससे सदा के ररए बफछड गमी। उसके भ

ॉह से के वर इतना
तनकरा—‘हाम नायामण’ औय वह ऩछाड खाकय धभ से जभीन ऩय धगय ऩडी।
बफलरो ने उसको सॉबारा औय ऩॊखा झरने रगी। थोडी दे य भे ऩास-ऩडोस की
सै कडो औयते जभा हो गमीॊ। फाहय बी फह

त आदभी एकर हो गमे। याम ह


कक जार डरवामा जाम। फाफ

कभरापसाद बी आमे थे। उनहोने ऩ

ररस को
खफय की। पेभा को जमोही इस आऩजतत की खफय रभरी उसके ऩै य तरे से
रभटी तनकर गमी। चटऩट आढकय घफयामी ह

ई कोठे से उतयी औय धगयती-
ऩडती ऩ

णाय की घय की तयप चरी। भ ॉ ने फह

त योका भगय कौन स

नता है ।
जजस वकत वह वह ॉ ऩह

ॉची चायो ओय योना-धोना हो यहा था। घय भे ऐसा न
था जजसकी ऑॊ खो से ऑॊ स

की धाया न फह यही हो। अबधगनी ऩ

णाय का
ववराऩ स

न-स

नकय रोगो के करेजे भ

ॉह को आम जाते थे। हाम ऩ

णाय ऩय जो
ऩहाड ट

ट ऩडा वह सातवे फै यी ऩय बी न ट

टे । अबी एक घॊटा ऩहरे वह अऩने
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को सॊसाय की सफसे बागमवान औयतो भे सभसझती थी। भगय दे खते ही
दे खते कमा का कमा हो गमा। अफ उसका-सा अबागा कौन होगा। फेचायी
सभझाने -फ

झाने से जया च

ऩ हो जाती , भगय जमोही ऩतत की ककसी फात की


धध आती तमो ही कपय ददर उभड आता औय नमनो से नीय की झडी रग
जाती, धचतत वमाक

र हो जाता औय योभ-योभ से ऩसीना फहने रगता। हाम
कमा एक-दो फात माद कयने की थी। उसने दो वषय तक अऩने पेभ का
आननद र

टा था। उसकी एक-एक फात उसका हॉसना , उसका पमाय की
तनगाहो से दे खना उसको माद आता था। आज उसने चरते -चरते कहा था —
पमायी ऩ

णाय , जी चाहता है , त

झे ऑॊ खो भे बफठा र

ॉ । अपसोस हे अफ कौन
पमाय कये गा। अफ ककसकी ऩ

तररमो भे फै ठ

ॉ गी कौन करेजे भे फै ठामेगा। उस
ये शभी धोती औय तोररमा ऩय दजषट ऩडी तो जोय से चीख उठी औय दोनो
हाथो से छाती ऩीटने रगी। तनदान पेभा को दे खा तो झऩट कय उठी औय
उसके गरे से ररऩट कय ऐसी प

ट-प

ट कय योमी कक बीतय तो बीतय फाहय


शी फदयीपसाद , फाफ

कभरापसाद औय द

सये रोग आॉखो से रभार ददमे
फेअजखतमाय यो यहे थे। फेचायी पेभा के ररए भहीने से खाना-ऩीना द

रय ब हो
यहा था। ववयाहनर भे जरते-जरते वह ऐसी द

फय र हो गमी थी कक उसके भ

ॉह
से योने की आवाज तक न तनकरती थी। दहचककम ॉ फॉधी ह

ई थीॊ औय ऑॊ खो
से भोती के दाने टऩक यहे थे। ऩहरे व सभझती थी कक साये सॊसाय भे भै ही
एक अबाधगन ह

ॉ। भगय इस सभम वह अऩना द

:ख ब

र गमी। औय फडी


जशकर से ददर को थाभ कय फोरी —पमायी सखी मह कमा ाजफ हो गमा ?
पमायी सखी इ़सके जवाफ भे अऩना भाथा ठोका औय आसभान की ओय दे खा।
भगय भ

ॉह से क

छ न फोर सकी।
इस द

खखमायी अफरा का द

:ख फह

त ही करणामोगम था। उसकी
जजनदगी का फेडा रगानेवारा कोई न था द

:ख फह

त ही करणमोगमा था
उसकी जजनदगी का फेडा ऩाय रगानेवारा कोई न था। उसके भै के भे रसपय
एक फ

ढे फाऩ से नाता था औय वह फेचाया बी आजकर का भेहभान हो यहा
था। सस

यार भे जजससे अऩनाऩा था वह ऩयरोक रसधाया , न सास न सस


न अऩने न ऩयामे। काई च

लर

बय ऩानी दे ने वारा ददखाई न दे ता था। घय
भे इतनी जथा-ज

गती बी न थी कक सार-दो सार के ग

जाये बय को ग

जाये
बय हो जाती। फेचायी ऩॊडडत जी को अबी-नौकयी ही कयते ककतने ददन ह

ए थे
कक रऩमा जभा कय रेते। जो कभामा वह खामा। ऩ

णाय को वह अबी वह फाते
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नहीॊ स

झी थी। अबी उसको सोचने का अवकाश ही न भीरा था। ह ॉ , फाहय
भयदाने भे रोग आऩस भे इस ववषम ऩय फातचीत कय यहे थे।
दो-ढाई घणटे तक उस भकान भे जसरमो का ठटा रगा यहा। भगय शाभ
होते-होते सफ अऩने घयो को रसधायी। तमोहाय का ददन था। जमादा कै से
ठहयती। पेभा क

छ दे य से भ

छाय ऩय भ

छाय आने रगी थी। रोग उसे ऩारकी
ऩय उठाकय वहाॉ से रे गमे औय ददमा भे फतती ऩडते-ऩडते उस घय भे रसवाम


णाय औय बफलरी के औय कोई न था। हाम मही वकत था कक ऩॊडडत जी
दफतय से आमा कयते। ऩ

णाय उस वकत दवाये ऩय खडी उनकी याह दे खा कयती
औय जमोही वह डमोढी भे कदभ यखते वह रऩक कय उनके हाथो से छतयी
रे रेती औय उनके हाथ-भ

ॉह धोने औय जरऩान की साभगी इकटी कयती।
जफ तक वह रभषटानन इतमादद खाते वह ऩान के फीडे रगा यखती। वह पेभ
यस का ब

ख, ददन बय का थका-भ ॉ दा , सरी की दन खाततयदारयमो से गदगद
हो जाता। कहाॉ वह पीतत फढानेवारे वमवहाय औय कह ॉ आज का सननटा ?
साया घय ब ॉ म-ब ॉ म कय यहा था। दीवाये काटने को दौडती थीॊ। ऐसा भार


होता कक इसके फसनेवारो उजड गमे। फेचायी ऩ

णाय ऑॊ गन भे फै ठी ह

ई। उसके
करेजे भे अफ योने का दभ नहीॊ है औय न ऑॊ खो से ऑॊ स

फहते है । ह ॉ , कोई
ददर भे फै ठा ख

न च

स यहा है । वह शोक से भतवारी हो गमी है । नहीॊ भार


इस वकत वह कमा सोच यही है । शामद अऩने रसधायनेवारे वऩमा से पेभ की
फाते कय यही है मा उससे कय जोड के बफनती कय यही है कक भ

झे बी अऩने
ऩास फ

रा रो। हभको उस शोकात

या का हार ररखते गरातन होती है । हाम ,
वह उस सभम ऩहचानी नहीॊ जाती। उसका चे हया ऩीरा ऩड गमा है । होठो ऩय
ऩऩडी छामी ह

ई है , ऑॊ खे स

यज आमी है , रसय के फार ख

रकय भाथे ऩय
बफखय गमे है , ये शभी साडी पटकाय ताय-ताय हो गमी है , फदन ऩय गहने का
नाभ बी नहीॊ है च

डडमा ट

टकय चकनाच

य हो गमी है , रमफी-रमफी स ॉ से आ
यही है । व धचनता उदासी औय शोक का पतमऺ सवरऩ भार

भ होती है । इस
वकत कोई ऐसा नहीॊ है जो उसको तसलरी दे । मह सफ क

छ हो गमा भगय


णाय की आस अबी तक क

छ-क

छ फॉधी ह

ई है । उसके कान दयवाजे की तयप
रगे ह

ए ह

ए है कक कहीॊ कोई उनके जीववत तनकर आने की खफय राता हो।
सच है ववमोधगमो की आस ट

ट जाने ऩय बी फॉधी यहती है ।
शाभ होते-होते इस शोकदामक घटना की ऽफय साये शहय भे ग

ॉज
उठी। जो स

नता रसय ध

नता। फाफ

अभ

तयाम हवा खाकय वाऩस आ यहे थे कक
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यासते भे ऩ

ररस के आदरभमो को एक राश के साथ जाते दे खा। फह

त-से
आदरभमो की बीड रगी ह

ई थी। ऩहरे तो वह सभझे कक कोई ख

न का


कदभा होगा। भगय जफ दरयमाफत ककमा तो सफ हार भार

भ हो गमा।
ऩजणडत जी की अचानक भ

तम

ऩय उनको फह

त योज ह

आ। वह फसॊतक

भाय
को बरी ब ॉ तत जानते थे। उनहीॊ की रसपारयश से ऩॊडडत जी दफतय भे वह
जग रभरी थी। फाफ

साहफ राश के साथ-साथ थाने ऩय ऩह

ॉचे । डाकटय ऩहरे
से ही आमा ह

आ था। जफ उसकी ज ॉ च के तनरभतत राश खोरी गमी तो
जजतने रोग खडे थे सफके योगेटे खडे हो गमे औय कई आदरभमो की ऑॊ खो
से ऑॊ स

तनकर आमे। राश प

र गमी थी। भगय भ

खडा जमो का तमो था
औय कभर के स

नदय प

र होठो के फीच द ॉ तो तरे दफे ह

ए थे। हाम , मह
वही प

र थे जजनहोने कार फनकय उसको डसा था। जफ राश की ज ॉ च हो


की तफ अभ

तयाम ने डाकटय साहफ से राश के जराने की आऻा भ ॉ गी जो
उनको सहज ही भे रभर गमी। इसके फाद वह अऩने भकान ऩय आमे। कऩडे
फदरे औय फाईरसककर ऩय सवाय होकय ऩ

णाय के भकान ऩय ऩह

ॉचे । दे खा तो
चौतयपासननाटा छामा ह

आ है । हय तयप से रसमाऩा फयस यहा है । मही
सभम ऩॊडडत जी के दफतय से आने का था। ऩ

णाय योज इसी वकत उनके ज

ते
की आवजे स

नने की आदी हो यही थी। इस वकत जमोही उसने ऩै यो की चाऩ


नी वह बफजरी की तयह दयवाजे की तयप दौडी। भगय जमोही दयवाजे ऩय
आमी औय अऩने ऩतत की जगी ऩय फाफ

अभ

तयाम को खडे ऩामा तो दठठक
गमी। शभय से सय झ

का ररमा औय तनयाश होकय उरटे ऩ ॉ व वाऩास ह

ई।


सीफत के सभम ऩय ककसी द

:ख ऩ

छनेवारो की स

यत ऑॊ खो के ररए फहाना
हो जाती है । फाफ

अभ

तयाम एक भहीने भे दो-तीन फाय अवशम आमा कयते
थे औय ऩॊडडत जी ऩय फह

त ववशवास यखते थे। इस वकत उनके आने से ऩ

णाय
के ददर ऩय एक ताजा सदभा ऩह

ॉचा। ददर कपय उभड आमा औय ऐसा प

ट-


ट कय योमी कक फाफ

अभ

तयाम, जो भोभ की तयह नभय ददर यखते थे , फडी
दे य तक च

ऩचाऩ खडे बफस

या ककमे। जफ जया जी दठकाने ह

आ तो उनहोने
भहीय को फ

राकय फह

त क

छ ददरासा ददमा औय दे हरीज भे खडे होकय ऩ

णाय
को बी सभझमा औय उसको हय तयहा की भदद दे ने का वादा कयके , धचयाग
जरते-जरते अऩने घय की तयप यवाना ह

ए। उसी वकत पेभा अऩनी भहताफी
ऩय हवा खाने तनकरी थी। सकी ऑॊ खे ऩ

णाय के दयवाजे की तयप रगी ह


थीॊ। तनदान उसने ककसी को फाइरसककर ऩय सवाय उधाय से तनकरते दखा।
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गौय से दे खा तो ऩदहचान गई औय चौककय फोरी —‘अये , मह तो अभ

तयाम
है ।
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ऩाॉचवाॊ अधमाम
अॉय ! यह गजरा कया हो गया?
ऩॊडडत फॊसतक

भाय का द

तनमा से उठ जाना के वर ऩ

णाय ही के ररए
जानरेवा न था , पेभा की हारत बी उसी की-सी थी। ऩहरे वह अऩने बागम
ऩय योमा कयती थी। अफ ववधाता ने उसकी पमायी सखी ऩ

णाय ऩय ववऩजतत
डारकय उसे औय बी शोकात

य फना ददमा था। अफ उसका द

ख हटानेवारा ,
उसका गभ गरत कयनेवारा काई न था। वह आजकर यात-ददन भ

ॉह रऩेटे
चायऩाई ऩय ऩडी यहती। न वह ककसी से हॉसती न फोरती। कई-कई ददन
बफना दाना-ऩानी के फीत जाते। फनाव-रसगाय उसको जया बी न बाता। सय
के फर दो-दो हफते न ग

ॉथे जाते। स

भायदानी अरग ऩडी योमा कयती। कॉ घी
अरग हाम-हाम कयती। गहने बफलक

र उताय पे के थे। स

फह से शाभ तक
अऩने कभये भे ऩडी यहती। कबी जभीन ऩय कयवटे फदरती , कबी इधय-उधय
फौखरामी ह

ई घ

भती, फह

धा फाफ

अभ

तयाम की तसवीय को दे खा कयती। औय
जफ उनके पेभऩर माद आते तो योती। उसे अन

बव होता था कक अफ भै थोडे
ददनो की भेहभान ह

ॉ।
ऩहरे दो भहीने तक तो ऩ

णाय का बहभणो के खखराने-वऩराने औय ऩतत
के भ

तक-सॊसकाय से स ॉ स रेने का अवकाश न रभरा कक पेभा के घय जाती।
इसके फाद बी दो-तीन भहीने तक वह घय से फाहय न तनकरी। उसका जी
ऐसा फ

झ गमा था कक कोई काभ अचछा न रगता। हाॉ , पेभा भ ॉ के भना
कयने ऩय बी दो-तीन फाय उसके घय गमी थी। भगय वह ॉ जाकय आऩ योती
औय ऩ

णाय को बी रराती। इसररए अफ उधय जाना छोड ददमा था। ककनत


एक फात वह तनतम कयती। वह सनधमा सभम भहताफी ऩय जाकय जरय
फै ठती। इसररए नहीॊ कक उसको सभम स

हाना भार

भ होता मा हवा खाने को
जी चाहता था, नहीॊ पतम

त के वर इसररए कक वह कबी- कबी फाफ

अभ

तयाम
को उधय से आते-जाते दे खती। हाम ररज वकत वह उनको दे खते उसका
करेजा फ ॉ सो उछारने रगता। जी चाहता कक क

द ऩड

ॉ औय उनके कदभो ऩय
अऩनी जान तनछावय कय द

ॉ । जफ तक वह ददखामी दे ते अकटकी फ ॉ धे उनको
दे खा कयती। जफ वह ऑॊ खो से आझरा हो जाते तफ उसके करेजे भे एक


क उठती, आऩे की क

छ स

धध न यहती। इसी तयह कई भहीने फीत गमे।
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35
एक ददन वह सदा की ब ॉ तत अऩने कभये भे रेटी ह

ई फदर यही थी
कक ऩ

णाय आमी। इस सभम उसको दे खकय ऐसा ऻात होता था कक वह ककसी
पफर योग से उठी है । चे हया ऩीरा ऩड गमा था , जैसे कोई प

र भ

यझा गमा
हो। उसके कऩोर जो कबी ग

राफ की तयह खखरे ह

ए थे अफ क

महरा गमे
थे। वे भ

गी की-सी ऑॊ खे जजनभे ककसी सभम सभम जवानी का भतवाराऩन
औय पेभी का यस बया ह

आ था अनदय घ

सी ह

ई थी , रसय के फार कॊ धो ऩय
इधय-उधय बफखये ह

ए थे , गहने-ऩाते का नाभ न था। के वर एक नै न स

ख की
साडी फदन ऩय ऩडी ह

ई थी। उसको दे खते ही पेभा दौडकय उसके गरे से
धचऩट गमी औय राकय अऩनी चायऩाई ऩय बफठा ददमा।
कई रभनट तक दोनो सखखम ॉ एक-द

सये के भ

ॉह को ताकती यहीॊ। दोनो
के ददर भे खमारो का दरयमा उभडा ह

आ था। भगय जफान ककसी की न


रती थी। आखखय ऩ

णाय ने कहा —आजकर जी अचछा नहीॊ है कमा ? गरकय
क ॉ टा गमी हो
पेभा ने भ

सकयाने की चे षटा कयके कहा —नहीॊ सखी , भै फह

त अचछी
तयह ह

ॉ। त

भ तो क

शर से यही?


णाय की ऑॊ खो भे आॉस

डफडफा आमे। फोरी —भेया क

शर-आननद कमा


छती हो, सखी आननद तो भेये ररए सऩना हो गमा। ऩ ॉ च भहीने से अधधक
हो गमे भगय अफ तक भेयी आॉखे नहीॊ झऩकीॊ। जान ऩडता है कक नीॊद ऑॊ स


होकय फह गमी।
पेभा—ईशवय जानता है सखी , भेया बी तो मही हार है । हभायी-त

महायी
एक ही गत है । अगय त

भ बमाही ववधवा हो तो भै क

ॉ वायी ववधवा ह

ॉ। सच
कहती ह

ॉ सखी , भै ने ठान ररमा है कक अफ ऩयभाथय के काभो भे ही जीवन
वमतीत करॉ गा।


णाय —कै सी फाते कयती हो , पमायी भेया औय त

महाया कमा जोडा ?
जजतना स

ख बोगना भेये बाग भे फदा था बोग च

की। भगय त

भ अऩने को
कमो घ

रामे डारती हो? सच भानो, सखी, फाफ

अभ

तयाम की दशा बी त

महायी
ही-सी है । वे आजकर फह

त भररन ददखामी दे ते है । जफ कबी इधय की फात
चरती ह

ॉ तो जाने का नाभ ही नहीॊ रेते। भै ने एक ददन दे खा , वह त

महाया
काढा ह

आ रभारा ररमे ह

ए थे।
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मह फाते स

नकय पेभा का चे हया खखर गमा। भाये हषय के ऑॊ खे
जगभगाने रगी। ऩ

णाय का हाथ अऩने हाथो भे रेकय औय उसकी ऑॊ खो से
ऑॊ खे रभराकय फोरी-सखी, इधय की औय कमा-कमा फाते आमी थीॊ ?


णाय-(भ

सकयाकय) अफ कमा सफ आज ही स

न रोगी। अबी तो कर ही
भै ने ऩ

छा कक आऩ बमाह कफ कये गे , तो फोरे-‘जफ त

भ चाहो।’ भै फह

त रजा
गई।
पेभा—सखी, त

भ फडी ढीठ हो। कमा त

भको उनके साभने तनकरते-
ऩै ठते राज नहीॊ आती?


णाय —राज कमो आती भगय बफना साभने आमे काभ तो नहीॊ चरता
औय सखी , उनसे कमा ऩयदा करॉ उनहोने भ

झ ऩय जो-जो अन

गह ककमे है
उनसे भै कबी उऋण नहीॊ हो सकती। ऩदहरे ही ददन , जफ कक भ

झ ऩय वह
ववऩजतत ऩडी यात को भेये महाॉ चोयी हो गमी। जो क

छ असफाफा था ऩावऩमो
ने भ

स ररमा। उस सभम भेये ऩास एक कौडी बी न थी। भै फडे पे य भे ऩडी


ई थी कक अफ कमा करॉ । जजधय ऑॊ ख उठाती , अॉधेया ददखामी दे ता। उसके
तीसये ददन फाफ

अभ

तयाम आमे। ईशवय कये वह म

ग-म

ग जजमे: उनहोने
बफलरो की तनऽाह फ ॉ ध दी औय भेये साथ बी फह

त सर

क ककमा। अगय वह
उस वकत आडे न आते तो गहने-ऩाते अफ तक कबी के बफक गमे होते।
सोचती ह

ॉ कक वह इतने फडे आदभी हाकय भ

झ रबखारयनी के दयवाजे ऩय
आते है तो उनसे कमा ऩयदा करॉ । औय द

तनमा ऐसी है कक इतना बी नहीॊ
दे ख सकती। वह जो ऩडोसा भे ऩॊडाइन यहती है , कई फाय आई औय फोरी कक
सय के फार भ

डा रो। ववधवाओॊ का फार न यखना चादहए। भगय भै ने अफ
तक उनका कहना नहीॊ भाना। इस ऩय साये भ

हलरे भे भेये फाये भे तयह-तयह
की फाते की जाती है । कोई क

छ कहता है , कोई क

छ। जजतने भ

ॉह उतनी
फाते । बफलरो आकय सफ व

ततानत भ

झसे कहती है ।सफ स

ना रेती ह

ॉ औय यो-
धोकय च

ऩ हो यहती ह

ॉ। भेये बागम भे द

ख बोगना , रोगो की जरी-कटी


नना न ररखा होता तो मह ववऩजतत ही काहे को ऩडती। भगय चाहे क

छ हो
भै इन फारो को भ

ॉडवाकय भ

णडी नहीॊ फनना चाहती। ईशवय ने सफ क

छ तो
हय ररमा, अफ कमा इन फारो से बी हाथ धोऊॉ ।
मह कहकय ऩ

णाय ने कॊ धो ऩय बफखये ह

ए रमफे-रमफे फारो ऩय ऐसी
दजषट से दे खा भानो वे कोई धन है । पेभा ने बी उनहे हाथ से सॉबारा कय
कहा—नहीॊ सखी खफयदाय , फारो को भ

ॉडवाओगी तो हभसे-त

भसे न फनगी।
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ऩॊडाइन को फकने दो। वह ऩगरा गई है । मह दे खो नीचे की तयप जो ऐठन
ऩड गमी है , कै सी स

नदय भार

भ होती है मही कहकय पेभा उठी। फकस भे


गजनधत तेर तनकारा औय जफ तक ऩ

णाय हाम-हाम कये कक उसके सय की
चादय खखसका कय तेर डार ददमा औय उसका सय जाॉघ ऩय यखकय धीये -धीये
भरने रगी। फेचायी ऩ

णाय इन पमाय की फातो को न सह सकी। ऑॊ खो भे
ऑॊ स

बयकय फोरी —पमायी पेभा मह कमा गजफ कयती हो। अबी कमा काभ
उऩहास हो यहा है ? जफ फार सॉवाये तनकर

ॉ गी तो कमा गत होगी। अफ त

भसे
ददर की फात कमा तछऩाऊॉ । सखी , ईशवय जानता है , भ

झे मह फार ख

द फोझ
भार

भ होते है । जफ इस स

यत का दे खनेवारा ही सॊसाय से उठ गमा तो मह
फार ककस काभ के । भगय भै इनके ऩीछे ऩडोरसमो के ताने सहती ह

ॉ तो
के वर इसररए कक सय भ

डाकय भ

झसे फाफ

अभ

तयाम के साभने न तनकरा
जाएगा। मह कह कय ऩ

णाय जभीन की तयप ताकने रगी। भानो वह रजा
गमी है । पेभा बी क

छ सोचने रगी। अऩनसखी के सय भे तेर भरा , कॊ घी
की फार ग

ॉथे औय तफ धीये से आईना राकय उसके साभने यख ददमा। ऩ

णाय
ने इधय ऩ ॉ च भहीने से आईने का भ

ॉह नहीॊ दे खा था। वह सझती थी कक भेयी


यत बफरक

र उतय गमी होगी भगय अफ जो दे खा तो रसवमा इसके कक भ

ॉह
ऩीरा ऩड गमा था औय कोई बेद न भार

भ ह

आ। भधमभ सवय भे फोरी —
पेभा, ईशवय के ररए अफ फस कयो , बाग से मह रसॊ गाय फदा नहीॊ है ।
ऩडोरसन दे खे गी तो न जाने कमा अऩयाध रगा दे ।
पेभ उसकी स

यत को टकटकी रगाकय दे ख यही थी। मकामक


सकयाकय फोरी—सखी, त

भ जानती हो भै ने त

महाया रसॊ गाय कमो ककमा?


णाय —भै कमा जान

ॉ। त

महाया जी चाहत होगा।
पेभा-इसररए कक त

भ उनके साभने इसी तयह जाओ।


णाय —त

भ फडी खोटी हो। बरा भै उनके साभने इस तयह कै से
जाऊॉ गी। वह दे खकय ददर भे कमा भे कमा कहे गे। दे खनेवारे मो ही फेरसय-ऩै य
की फाते उडामा कयते है , तफ तो औय बी नह भार

भ कमा कहे गे।
थोडी दे य तक ऐसे ही हॊ सी-ददलरी की फातो-फातो भे पेभा ने कहा-सखी,
अफ तो अके रे नहीॊ यहा जाता। कमा हजय है त

भ बी महीॊ उठ आओ। हभ


भ दोनो साथ-साथ यहे ।


णाय —सखी, भेये ररए इससे अधधक हषय की कौन-सी फात होगी कक


महाये साथ यह

ॉ। भगय अफ तो ऩै य प

क-प

क कय धयना होती है । रोग
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महाये घय ही भे याजी न होगे। औय अगय मह भान बी गमे तो बफना फाफ


अभ

तयाम की भजी के कै से आ सकती ह

ॉ। सॊसाय के रोग बी कै से अॊधे है ।
ऐसे दमार



रष कहते है कक ईसाई हो गमा है कहनेवारो के भ

ॉह से न
भार

भ कै से ऐसी झ

ठी फात तनकारती है । भ

झसे वह कहते थे कक भै शीघ
ही एक ऐसा सथान फनवानेवारा ह

ॉ जहाॉ अनाथ जह ॉ अनाथ ववधवाऍ ॊ आकय
यहे गी। वह ॉ उनके ऩारन-ऩोषण औय वसर का पफनध ककमा जाएगा औय
उनके ऩढना-ररखाना औय ऩ

जा-ऩाठ कयना रसखामा जामगा। जजस आदभी के
ववचाय ऐसे श

द हो उसको वह रोग ईसाई औय अधभी फनाते है , जो ब

रकय
बी रबखभॊगे को बीख नहीॊ दे ते। ऐसा अॊधेय है ।
पेभा- फदहन, सॊसाय का मही है । हाम अगय वह भ

झे अऩनी रौडी फना
रेते तो बी भेया जीवन सपर हो जाता। ऐसे उदायधचतत दाता चे यी फनना बी
कोई फडाई की फात है ।


णाय —त

भ उनकी चे यी काहे को फनेगी। काहे को फनेगी। वह तो आऩ


महाये सेवक फनने के ररए तैमाय फै ठे है । त

महाये रारा जी ही नहीॊ भानते।
ववशवास भानो मदद त

भसे उनका बमाह न ह

आ तो कवाये ही यहे गे।
पेभा—मह ॉ मही ठान री है कक चे यी फन

ॉगी तो उनहीॊ की।


छ दे ये तक तो मही फाते ह

आ की। जफ स

मय असत होने रगा तो
पेभा ने कहा —चरो सखी, त

भको फगीचे की सै य कया रावे । जफ से त

महाया
आना-जाना छ

टा तफ से भै उधय ब

रकय बी नहीॊ गमी।


णाय —भेये फार खोर दो तो चर

ॉ । त

महायी बावज दे खेगी तो ताना
भाये गी।
पेभा—उनके ताने का कमा डय, वह तो हवा, से उरझा कयती है । दोनो
सखखमाॊ उठी औय हाथ ददमे कोठे से उताय कय प

रवायी भे आमी। मह एक
छोटी-सी फधगमा थी जजसभे ब ॉ तत-ब

तत के प

र खखर यहे थे। पेभा को प

रो
से फह

त पभ था। उसी ने अऩनी ददरफरावा के ररए फगीचा था। एक भारी
इसी की दे ख-बार के ररए नौकय था। फाा के फीचो-फीच एक गोर चफ

तया
फना ह

आ था। दोनो सखखम ॉ इस चफ

तेये ऩय फै ठ गमी। इनको दे खते ही भारी
फह

त-सी कररम ॉ एक साप तयह कऩडे भे रऩेट कय रामा। पेभा ने उनको


णाय को दे ना चाहा। भगय उसने फह

त उदास होकय कहा —फदहन, भ

झे ऺभा
कयो,इनकी फ

फास त

भको भ

फायक हो। सोहाग के साथ भै ने प

र बी तमाग
ददमे। हाम जजस ददन वह काररऩी नदी भे नहाने गमे है उस ददन ऐसे ही
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कररमो का हाय फनामा था। (योकय) वह हाय धया का धया का गमा। तफ से
भै ने प

रो को हाथ नहीॊ रगामा। मह कहते-कहते वह मकमक चौक ऩडी औय
फोरी—सखी अफ भै जाउॉ गी। आज इतवाय का ददन है । फाफ

साहफ आते
होगे।
पेभा ने योनी हॉसकय कहा-‘नही’ सखी, अबी उनके आने भे आध घणटे
की दे य है । भ

झे इस सभम का ऐसा ठीक ऩरयचम रभर गमा है कक अगय
कोठयी भे फनद कय दो तो बी शामद गरती न करॉ । सखी कहते राज आती
है । भै घणटो फै ठकय झयोखे से उनकी याह दे खा कयती ह

ॉ। चॊचर धचतत को
फह

त सभझती ह

ॉ। ऩय भानता ही नहीॊ।


णाय ने उसको ढायस ददमा औय अऩनी सखी से गरे रभर, शभायती ह




ॊघट से चे हये को तछऩामे अऩने घय की तयफ चरी औय पेभी ककसी के
दशय न की अरबराषा कय भहताफी ऩय जाकय टहरने रगी।


णाय के भकान ऩय ऩह

ॉचे ठीक आधी घडी ह

ई थी कक फाफ

अभ

तयाम
फाइरसककर ऩय पय-पय कयते आ ऩह

ॉचे । आज उनहोने अॊगेजी फाने की जगह
फॊगारी फाना धायण ककमा था , जो उन ऩय ख

फ सजता था। उनको दे खकय
कोई मह नहीॊ कह सकता था कक मह याजक

भाय नहीॊ है फाजायो भे जफ
तनकराते तो सफ की ऑॊ खे उनहीॊ की तयप उठती थीॊ। यीतत के ववरद आज
उनकी दादहनी कराई ऩय एक फह

त ही स

गजनधत भनोहय फेर का हाय ररऩटा


आ था, जजससे स

गनध उड यही थी औय इस स

गनध से रेवेणडय की ख

शफ


रभरकय भानो सोने भे सोहागा हो गमा था। सॊदरी ये शभी के फेरदाय क

यते
ऩय धानी यॊ ग की ये शभी चादय हवा के भनद-भनद झोको से रहया-रहया कय
एक अनोखी छवव ददखाती थी। उनकी आहट ऩाते ही बफलरो घय भे से
तनकर आई औय उनको रे जाकय कभये भे फै ठा ददमा।
अभ

तयाम—कमो बफलरो, सग क

शर है?
बफलरो—ह ॉ , सयकाय सफ क

शर है ।
अभ

तयाम—कोई तकरीफ तो नहीॊ है ?
बफलरो—नहीॊ , सयकाय कोई तकरीफ नहीॊ है ।
इतने भे फै ठके का बीतयवारा दयवाजा ख

रा औय ऩ

णाय तनकरी।
अभ

तयाम ने उसकी तयफ दे खा तो अचमबे भे आ गमे औय उनकी तनगाह
आऩ ही आऩ उसके चे हये ऩय जभ गई। ऩ

णाय भाये रजजा के गडी जाती थी
कक आज कमो मह भेयी ओय ऐसे ताक यहे है । वह ब

र गमी थी कक आज
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भै ने फारो भे तेर डारा है , कॊ घी की है औय भाथे ऩय रार बफनदी बी रगामी
है । अभ

तयाम ने उसको इस फनाव-च

नाव के साथ कबी नहीॊ दे खा था औय न
वह सभझे थे कक वह ऐसी रऩवती होगी।


छ दे य तक तो ऩ

णाय सय नीचा ककमे खडी यही। मकामक उसको
अऩने ग

ॉथे के श की स

धध आ गमी औय उसने झट रजाकय सय औय बी
तनह

या ररमा , घ

ॉघट को फढाकय चे हया तछऩा ररमा। औय मह खमार कयके
कक शामद फाफ

साहफ इस फनाव रसॊ गाय से नायाज हो वह फह

त ही बोरेऩन
के साथ फोरी—भै कमा कर, भै तो पेभा के घय गमी थी। उनहोने हठ कयके
सय भे भे तेर डारकय फार ग

ॉथ ददमे। भै कर सफ फार कटवा डार

ॉ गी। मह
कहते-कहते उसकी ऑॊ खो भे ऑॊ स

बय आमे।
उसके फनाव रसॊ गाय ने अभ

तयाम ऩय ऩहरे ही जाद

चरामा था। अफ
इस बोरेऩन ने औय र

बा ररमा। जवाफ ददमा —नहीॊ—नहीॊ, त

महे कसभ है ,
ऐसा हयधगज न कयना। भै फह

त ख

श ह

ॉ कक त

महायी सखी ने त

महाये ऊऩय
मह क

ऩा की। अगय वह मह ॉ इस सभम होती तो इसके तनहोये भे भै उनको
धनमवाद दे ता।


णाय ऩढी-ररखी औयत थी। इस इशाये को सभझ गमी औय झे ऩेय गदय न
नीचे कय री। फाफ

अभ

तयाम ददर भे डय यहे थे कक कहीॊ इस छे ड ऩय मह
दे वी रषट न हो जाए। नहीॊ तो कपय भनाना कदठन हो जाएगा। भगय जफ
उसे भ

सकयाकय गदय न नीची कयते दे खा तो औय बी दढठाई कयने का साहस


आ। फोरे —भै तो सभझता था पेभा भ

झे ब

र होगी। भगय भार

भ होता है
कक अबी तक भ

झ ऩय क

छ-क

छ सनेह फा़ी है ।
अफ की ऩ

णाय ने गदय न उठामी औय अभ

तयाम के चे हये ऩय ऑॊ खे
जभाकय फोरी, जैसे कोई वकीर ककसी द

खीमाये के ररए नमाधीश से अऩीर
कयता हो-फाफ

साहफ , आऩका के वर इतना सभझना कक पेभा आऩको ब


गमी होगी, उन ऩय फडा बायी आऩेऺ है । पेभा का पेभ आऩके तनरभतत सचचा
है । आज उनकी दशा दे खकय भै अऩनी ववऩजतत ब

र गमी। वह गर कय
आधी हो गमी है । भहीनो से खाना-ऩीना नाभार है । साये ददन आनी कोठयी
भे ऩडे -ऩडे योम कयती है । घयवारे राख-राख सभझाते है भगय नहीॊ भानतीॊ।
आज तो उनहोने आऩका नाभ रेकय कहा-सखी अगय चे यी फन

ॉगी तो उनहीॊ
की।
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मह सभाचाय स

नकय अभ

तयाम क

छ उदास हो गमे। मह अजगन जो
करेजे भे स

रग यही थी औय जजसको उनहोने साभाजजक स

धाय के याख तरे
दफा यकखा था इस सभम ऺण बय के ररए धधक उठी , जी फेचै न होने रगा,
ददर उकसाने रगा कक भ

ॊशी फदयीपसाद का घय द

य नहीॊ है । दभ बय के ररए
चरो। अबी सफ काभ ह

आ जाता है । भगय कपय दे शदहत के उतसाह ने ददर
को योका। फोरे —ऩ

णाय , त

भ जानती हो कक भ

झे पेभा से ककतनी भ

हबफत थी।
चाय वषय तक भै ददर भे उनकी ऩ

जा कयता यहा। भगय भ

ॊशी फदयपसाद ने
भेयी ददनो की फॉधी ह

ई आस के वर इस फात ऩय तोड दी कक भै साभाजजक


धाय का ऩऺऩाती हो गमा। आखखय भै ने बी यो-योकय उस आग को फ

झामा
औय अफ तो ददर एक द

सयी ही दे वी की उऩासना कयने रगा है । अगय मह
आशा बी मो ही ट

ट गमी तो सतम भानो, बफना बमाह ही यह

ॉगा।


णाय का अफ तक मह ऽमार था कक फाफ

अभ

तयाम पेभा से बमाह
कये गे। भगय अफ तो उसको भार

भ ह

आ कक उनका बमाह कहीॊ औय रग यहा
है तफ उसको क

छ आशचमय ह

आ। ददर से फाते कयने रगी। पमायी पेभा , कमा
तेयी पीतत का ऐसा द

खदामी ऩरयणाभ होगा। तेयो भ ॉ -फाऩ, बाई-फॊद तेयी जान
के गाह हो यहे है । मह फेचाया तो अबी तक त

झ ऩय जान दे ता है । चाहे वह
अऩने भ

ॉह से क

छ बी न कहे , भगय भेया ददर गवाही दे ता है कक तेयी


हबफत उसके योभ-योभ भे वमाऩ यही है । भगय जफ तेये रभरने की कोई
आशा ही न हो तो फेचायी कमा कये भजफ

य होकय कहीॊ औय बमाह कये गा।
इसभे सका कमा दोष है । भन भे इस तयह ववचाय कय फोरी-फाफ

साहफ ,
आऩको अधधकाय है जह ॉ चाहो सॊफॊध कयो। भगय भै भो मही कह

ॉगी कक अगय
इस शहय भे आऩके जोड की कोई है तो वही पभा है ।
अभ

त०—मह कमो नहीॊ कहतीॊ कक मह ॉ उनके मोगम कोई वय नहीॊ ,
इसीररए तो भ

ॊशी फदयीपसाद ने भ

झे छ

टकाय ककमा।


णाय —मह आऩ कै सी फात कहते है । पेभा औय आऩका जोड ईशवय ने
अऩने हाथ से फनामा है ।
अभ

त०—जफ उनके मोगम भै था। अफ नहीॊ ह

ॉ। ऩ

णाय —अचछा आजकर
ककसके मह ॉ फातचीत हो यही है ?
अभ

त०—(भ

सकयाकय) नाभ अबी नहीॊ फताऊॉ गा। फातचीत तो हो यही
है । भगय अबी कोई ऩककी उमभेदे नहीॊ है ।
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णाय —वाह ऐसा बी कहीॊ हो सकता है ? मह ॉ ऐसा कौन यईस है जो
आऩसे नाता कयने भे अऩनी फडाई न सभझता हो।
अभ

त०—नहीॊ क

छ फात ही ऐसी आ ऩडी है ।


णाय —अगय भ

झसे कोई काभ हो सके तो भै कयने को तैमाय ह

ॉ। जो
काभ भेये मोगम हो फता दीजजए।
अभ

त—(भ

सकयाकय)त

महायी भयजी बफना तो वह काभ कबी ऩ

या हो ही
नही सकता। त

भ चाहो तो फह

त जलद भेया घय फस सकता है ।


णाय फह

त पसनन ह

ई कक भै बी अफ इनके क

छ काभ आ सक

ॉ गी।
उसकी सभझ भे इस वाकम के अथय नहीॊ आमे कक ‘त

महायी भजी बफना तो
वह काभ ऩ

या हो ही नहीॊ सकता। उसने सभझा कक शामद भ

झसे मही कहे गे
कक जा के रडकी को दे ख आवे। छ: भहीने के अनदय ही अनदय वह इसका
अरबपाम बरी ब ॉ तत सभझ गमी सभझ गमी।
फाफ

अभ

तयाम क

छ दे य तक मह ॉ औय फै ठे । उनकी ऑॊ खे आज इधय-
उधाय से घ

भ कय आतीॊ औय ऩ

णाय के चे हये ऩय गड जाती। वह कनजखम से
उनकी ओय ताकती तो उनहे अऩनी तयफ ताकते ऩाती। आखखय वह उठे औय
चरते सभम फोरे —ऩ

णाय , मह गजया आज त

महाये वासते रामा ह

ॉ। दे खो इसभे
से कै से स

गनध उड यही है ।


णाय बौमचक हो गमी। मह आज अनोखी फात कै सी एक रभनट तक
तो वह इस सोच ववचाय भे थी कक र

ॉ मा न र

ॉ मा न र

ॉ । उन गजयो का
धमान आमा जो उसने अऩने ऩतत के ररए होरी के ददन फनमे थे। कपय की
कररमो का खमार आमा। उसने इयादा ककमा भै न र

ॉ गी। जफान ने कहा—भै
इसे रेकय कमा करॉ गी , भगय हाथ आऩ ही आऩ फढ गमा। फाफ

साहफ ने


श होकय गजया उसके हाथ भे वऩनहामा , उसको ख

फ नजय बयकय दे खा।
कपय फाहय तनकर आमे औय ऩै यगाडी ऩय सवाय हो यवाना हो गमे। ऩ

णाय कई
रभनट तक सननाटे भे खडी यही। वह सोचती थी कक भै ने तो गजया रेने से
इनकाय ककमा था। कपय मह भेये हाथ भे कै से आ गमा। जी चाह कक पे क दे ।
भगय कपय मह खमार ऩरट गमा औय उसने गजये को हाथ भे ऩदहन ररमा।
हाम उस सभम बी बोरी-बारी ऩ

णाय के सभझ भे न आमा कक इस ज

भरे
का कमा भतरफ है कक त

भ चाहो तो फह

त जलद भेया घय फस सकता है ।
उधय पेभा भहताफी ऩय टहर यही थी। उसने फाफ

साहफ को आते दे खा
था।उनकी सज-धज उसकी ऑॊ खो भे ख

फ गमी थी। उसने उनहे कबी इस
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फनाव के साथ नहीॊ दे खा था। वह सोच यही थी कक आज इनके हाथ भे
गजया कमो है । उसकी ऑॊ खे ऩ

णाय के घय की तयफ रगी ह

ई थीॊ। उसका जी


ॉझराता था कक वह आज इतनी दे य कमो रगा यहे है ? एकाएक ऩै यगाडी
ददखाई दी। उसने कपय फाफ

साहफ को दे खा। चे हया खखरा ह

आ था। कराइमो
ऩय नजय ऩडी गमी, हॉम वह गजया कमा हो गमा?
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छठा अधमाम


ये पर सौ द

रे


णाय ने गजया ऩदहन तो ररमा। भगेय यात बय उसकी ऑॊ खो भे नीॊद
नहीॊ आमी। उसकी सभझ भे मह फात न आती थी। कक अभ

तयाम ने उसे
गजया कमो ददमा। उसे ऐसा भार

भ होता था कक ऩॊडडत फसॊतक

भाय उसकी
तयप फह

त कोध से दे ख यहे है । उसने चाहा कक गजया उताय कय पे क द


भगय नहीॊ भार

भ कमो उसके हाथ क

ऩने रगे। सायी यात उसने ऑॊ खो भे
काटी। पबात ह

आ। अबी स

मय बगवान ने ,बी क

ऩा न की थी कक ऩॊडाइन औय
चौफाइन औय फाफ

कभरापसाद की फ

द भहयाजजन औय ऩडोस की सेठानी जी
कई द

सयी औयतो के साथ ऩ

णाय के भकान भे आ उऩजसथत ह

ई। उसने फडे
आदय से सफको बफठामा, सफके ऩै य छ

एॊ उसके फाद मह ऩॊचामत होने रगी।
ऩॊडाइन (जो फ

ढाऩे की फजह से स

खकय छोहाये की तयह हो गमी थी)-
कमो द

रदहन, ऩॊडडत जी को गॊगाराब ह

ए ककतने ददन फीते ?


णाय-(डयते-डयते) ऩच भहीने से क

छ अधधक ह

आ होगा।
ऩॊडाइन-औय अबी से त

भ सफके घय आने-जाने रगीॊ। कमा नाभ कक
कर त

भ सयकाय के घय चरी गमी थीॊ। उनक कवायी कनमा के ऩास ददन
बय फै ठी यहीॊ। बरा सोचो ओ त

भने कोई अचछा काभ ककमा। कमा नाभ कक


महाया औय उनका अफ कमा साथ। जफ वह त

महायी सखी थीॊ , तफ थीॊ। अफ
तो त

भ ववधवा हो गमीॊ। त

भको कभ से कभ सार बय तक घय से फाहय
ऩव न तनकारना चादहए। त

महाये ररए सार बय तक हॅसना-फोरना भना है
हभ मह नहीॊ कहते कक त

भ दशय न को न जाव मा सनान को न जाव। सनान-


जा तो त

महाया धभय ही है । ह , ककसी सोहाधगन मा ककसी कवायी कनमा ऩय


भको अऩनी छामा नही डारनी चादहए।
ऩॊडाइन च

ऩ ह

ई तो भहायाजजन ट

इम की तयह चहकने रगीॊ-कमा
फतराऊॉ , फडी सयकाय औय द

रादहन दोनो रह

का ध

ॊट ऩीकय यह गई। ईशवय
जाने फडी सयकाय तो बफरख-बफरख यो यही थीॊ कक एक तो फेचायी रडकी के
मो हय जान के रारे ऩडे है । द

सयी अफ य ॉ ड फेवा के साथ उठना-फै ठना है ।
नहीॊ भार

भ नायामण कमा कयनेवारे है । छोटी सकायय भाये कोध के कऩ यही
थी। ऑखो से जवारा तनकर यही थी। फाये भै ने उनको सभझामा कक आज
जाने दीजजए वह फेचायी तो अबी फचचा है । खोटे -खये का भभय कमा जाने।
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सयकाय का फेटा जजमे , जफ फह

त सभझामा तफ जाके भानीॊ। नहीॊ तो कहती
थीॊ भै अबी जाकय खडे -खडे तनकार दे ती ह

ॉ। सो फेटा, अफ त

भ सोहाधगनो के
साथ फै ठने मोगम नहीॊ यहीॊ। अये ईशवय ने तो त

भ ऩय ववऩजतत डार दी। जफ
अऩना पाणवपम ही न यहा तो अफ कै सा हॉसना-फोरना। अफ तो त

महाया धभय
मही है कक च

ऩचाऩ अऩने घय भे ऩडी यहो। जो क

छ रखा-स

खा रभरे खावो
वऩमो। औय सकायय का फेटा जजमे , जाॉह तक हो सके , धभय के काभ कयो।
भहायाजजन के च

ऩ होते ही चौफाइन गयजने रगीॊ। मह एक भोटी
बदे रसर औय अधेड औयत थी —बरा इनसे ऩ

छा कक अबी त

महाये द

रहे को
उठे ऩ ॉ च भहीने बी न फीते , अबी से त

भ कॊ धी-चोटी कयने रगीॊ। कमा कक


भ अफ ववधवा हो गई। त

भको अफ रसॊ गाय-ऩेटाय से कमा सयोकाय ठहया।
कमा नाभ कक भै ने हजायो औयतो को दे खा है जो ऩतत के भयने के फाद
गहना-ऩाता नहीॊ ऩहनती। हॉसना-फोरना तक छोड दे ती है । मह न कक आज
तो स

हाग उठा औय कर रसॊ गाय-ऩटाय होने रगा। भै रलरो-ऩततो की फात
नहीॊ जानती। कह

ॉगी सच। चाहे ककसी को तीता रगे मा भीठा। फाफ


अभ

तयाम का योज-योज आना ठीक नहीॊ है । है कक नही, सेठानी जी?
सेठानी जी फह

त भोटी थीॊ औय बायी-बायी गहनो से रदी थी। भाॊस के
रोथडे हडडडयमो से अरग होकय नीचे रटक यहे थे। इसकी बी एक फह

य ॉ ड
हो गमी थी जजसका जीवन इसने वमथय कय यखा था। इसका सवबाव था कक
फात कयते सभम हाथो को भटकामा कयती थी। भहायाजजन की फात


नकय—‘जो सच फात होगी सफ कोई कहे गा। इसभे ककसी का कमा डय।
बरा ककसी ने कबी य ॉ ड फेवा को बी भाथे ऩय बफॊ दी दे ते दे खा है । जफ सोहाग
उठ गमा तो कपय रसॊ द

य कै सा। भेयी बी तो एक फह

ववधवा है । भगय आज
तक कबी भै ने उसको रार साडी नहीॊ ऩदहनने दी। न जाने इन छोकरयमो का
जी कै सा है कक ववधवा हो जाने ऩय बी रसॊ गाय ऩय जी ररचामा कयता है ।
अये इनको चादहए कक फाफा अफ य ॉ ड हो गई। हभको तनगोडे रसॊ गाय से कमा
रेना।
भहायाजजन—सकायय का फेटा जजमे त

भ फह

त ठीक कहती हो सेठानी
जी। कर छोटी सकायय ने जो इनको भ ॉ ग भे सेद

य रगामे दे खा तो खडी ठक
यह गमी। द ॉ तो तरे उॊ गरी दफामी कक अबी तीन ददन की ववधवा औय मह
रसगाय। सो फेटा , अफ त

भको सभझ-फ

झकय काभ कयना चादहए। त

भ अफ
फचचा नहीॊ हो।
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सेठानी—औय कमा, चाहे फचचा हो मा फ

ढी। जफ फेयाह चरेगी तो सफ
ही कहे गे। च

ऩ कमो हो ऩॊडाइन, इनके ररए अफ कोई याह-फाट तनकार दो।
डाइन—जफ मह अऩने भन की होगमीॊ तो कोई कमा याह-फाट तनकारे।
इनको चादहए कक मे अऩने रॊफेरॊफे के श कटवा डारे। कमा नाभ कक द

सयो के
घय आना-जाना छोड दे । कॊ धी-चोटी कबी न कये ऩान न खामे। यॊ गीन साडी
न ऩहने औय जैसे सॊसाय की ववधवामे यहती है वै से यहे ।
चौफाइन—औय फाफ

अभ

तयाम से कह दे कक मह ॉ न आमा कये । इस
ऩय एक औयत ने जो गहने कऩडे से फह

त भारदाय न जान ऩडती थी ,
कहा—चौफाइन मह सफ तो त

भ कह गमी भगय जो कहीॊ फाफ

अभ

तयाम धचढ
गमे तो कमा त

भ इस फेचायी का योटी-कऩडा चरा दोगी ? कोई ववधवा हो
गमी तो कमा अफ अऩना भ

ॉह सी रे ।
भहयाजजन—(हाथ चभकाकय) मह कौन फोरा ? ठसो। कमा भभता
पडकने रगी?
सेठानी—(हाथ भटकाकय) त

झे ककसने फ

रामा जो आ के फीच भे फोर
उठी। य ॉ ड तो हो गमी हो, काहे नहीॊ जा के फाजय भे फै ठती हो।
चौफाइन—जाने बी दो सेठानी जी, इस फौयी के भ

ॉह कमा रगती हो।
सेठानी—(कडककय) इस भ

ई को मह ॉ ककसने फ

रामा। मह तो चाहती है
जैसी भै फेहमास ह

ॉ वै सा हीसॊसाय हो जाम।
भहयाजजन—हभ तो सीख दे यही थीॊ तो इसे कमो फ

या रगा ? मह कौन
होती है फीच भे फोरनेवारी?
चौफाइन—फदहन, उस क

टनी से नाहक फोरती हो। उसको तो अफ


टनाऩा कयना है ।
इस बाॊतत कट

जकतमो दवाया सीख दे कय मह सफ जसरमाॉ महा से
ऩधायी। भहयाजजन बी भ

ॊशी फदयीपदान के मह ॉ खाना ऩकाने गमीॊ। इनसे
औय छोटी सकायय से फह

त फनती थी। वह इन ऩय फह

त ववशवास यखती थी।
भहयाजजन ने जाते ही सायी कथा ख

फ नभक-रभचय रगाकय फमान की औय
छोटी सयकाय ने बी इस फात को ग ॉ ठ फ ॉ ध ररमा औय पेभा को जराने औय


रगाने के ररए उसे उततभ सभझकय उसके कभये की तयप चरी।
मो तो पेभा पततददन सायी यात जगा कयती थी। भगय कबी-कबी घॊटे
आध घॊटे के ररए नीॊद आ जाती थी। नीॊद कमा आ जाती थी , एक ऊॊ घ सी
आ जाती थी , भगय जफ से उसने फाफ

अभ

तयाम को फॊगाररमो के बेस भे
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दे खा था औय ऩ

णा के घय से रौटते वकत उसको उनकी कराई ऩयगजया न
नजय आमा था तफ से उसके ऩेट भे खरफरी ऩडी ह

ई थी कक कफ ऩ

णाय आवे
औय कफ साया हार भार

भ हो। यात को फेचै नी के भाये उठ-उठ घडी ऩय
ऑॊ खे दौडाती कक कफ बोय हो। इस वकत जो बावज के ऩै याॊ की चार स

नी
तो मह सभझकय कक ऩ

णाय आ यही है , रऩकी ह

ई दयवाजे तक आमी। भगय
जमोही बावज को दे खा दठठक गई औय फोरी—कै से चरीॊ , बाबी?
बाबी तो मह चाहती ही थीॊ कक छे ड-छाड के ररए कोई भौका रभरे।
मह पशन स

नते ही ततनक का फोरी —कमा फताऊ कै से चरी ? अफ से जफ


महाये ऩास आमा करॉ गी तो इस सवार का जवाफ सोचकय आमा करॉ गी।


महायी तयह सफका रोह

थोडे ही सपे द हो गमा है कक चाहे ककसी की जान
तनकर, जाम, घी का घडा ढरक जाए , भगय अऩने कभये से ऩ ॉ व फाहय न
तनकारे।
पेभा ने वह सवार मो ही ऩ

छ ररमा था। उसके जफ मह अथय रगामे
गमे तो उसको फह

त फ

या भार

भ ह

आ। फोरी —बाबी, त

महाये तो नाक ऩय


ससा यहता है । त

भ जया-सी फात का फतगॊढ फना दे ती हो। बरा भै ने कौन
सी फात फ

या भानने की कही थी?
बाबी—क

छ नहीॊ , त

भ तो जो क

छ कहती हो भानो भ

ॉह से प


झाडती हो। त

महाये भ

ॉह भे रभसयी घोरी ह

ई न। औय सफके तो नाक ऩय


ससा यहता है , सफसे रडा ही कयते है ।
पेभा—(झलराकय) बावज, इस सभम भेया तो धचतत बफगडा ह

आ है ।
ईशवय के ररए भ

झसे भत उरझो। भै तो मो ही अऩनी जान को यो यही ह

ॊ ।
उस ऩय से त

भ औय बी नभक तछडकने आमीॊ।
बाबी—(भटककय) हाॊ यानी , भेया तो धचतत बफडा ह

आ है , सय कपया


आ है । जया सीधी-सादी ह

ॉ न। भ

झको दे खकय बागा कयो। भै । कटही


ततमा ह

ॊ , सफको काटती चरती ह

ॊ । भै बी मायो को च

ऩके -च

ऩके धचटठी-ऩरी
ररखा कयती , तसवीये फदरा कयती तो भै बी सीता कहराती औय भ

झ ऩय
बी घय बय जान दे ने रगता। भगय भान न भान भै तेया भेहभान। त

भ राख
जतन कयो, राख धचदटठम ॉ ररखो भगय वह सोने की धचडडमा हाथ आनेवारी
नहीॊ। मह जरी-कटी स

नकय पेभा से जबत न हो सका। फेचायी सीधे सवबाव
की औयत थी। उसका वषो से ववयह की फजगन भे जरते-जरते करेजा औय
बी ऩक गमा था। वह योने रगी।
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बावज ने जफ उसको योते दे खा तो भाये हषय के ऑॊ खे जगभगा गमीॊ।
हततेये की। कै सा ररा ददमा। फोरी —बफरखने कमा रगीॊ , कमा अमभा को


नाकय दे शतनकारा कया दोगी ? क

छ झ

ठ थोडी ही कहती ह

ॉ। वही अभ

तयाम
जजनके ऩास आऩ च

ऩके -च

ऩके पेभ-ऩर बेजा कयती थी अफ ददन-दहाडे उस
य ॉ ड ऩ

णाय के घय आता है औय घॊटो वहीॊ फै ठा यहता है । स

नती ह

ॉ प

र के
गजये रा राकय ऩहनाता है । शामद दो एक गहने बी ददमे है ।
पेभा इससे जमादा न स

न सकी। धगडधग कय फोरी —बाबी, भै त

महाये
ऩै यो ऩडती ह

ॊ भ

झ ऩय दमा कयो। भ

झे जो चाहो कह रो। (योकय) फडी हो, जी
चाहे भाय रो। भगय ककसी का नाभ रेकय औय उस ऩय छठे यखाकय भेये
कदर को भत जराओ। आखखय ककसी के सय ऩय झ

ठ-भ

ठ अऩयाध कमो
रगाती हो।
पेभा ने तो मह फात फडी दीनता से कही। भगय छोटी सयकाय ‘छ

दे
यखकय’ ऩय बफगड गमीॊ। चभक कय फोरीॊ —ह ॉ , ह ॉ यानी , भै द

सयो ऩय छ

दे
यखकय त

भको जराने आती ह

ॊ न। भै तो झ

ठ का वमवहाय कयती ह

ॉ। भ

झे


महाये साभने झ

ठ फोनरे से रभठाई रभरती होगी। आज भ

हलरे बय भे घय
घय मही चचाय हो यही है । त

भ तो ऩढी ररखी हो , बरा त

महीॊ सोचो एक तीस
वषय के सॊडे भदय वे का ऩ

णाय से कमा काभ ? भाना कक वह उसका योटी-कऩडा
चराते है भगय मह तो द

तनमा है । जफ एक ऩय आ ऩडती है तो द

सया उसके
आड आता है । बरे भन

षमो का मह ढॊ ग नहीॊ है कक द

साये को फहकामा कये ,
औय उस छोकयी को कमा को ई फहकामेगा वह तो आऩ भदो ऩय डोये डारा
कयती है । भै ने तो जजस ददन उसकी स

यत दे खी यथी उसी ददन ताड गमी थी
कक मह एक ही ववष की गाॊठ है । अबी तीन ददन बी द

लहे को भये ह

ए नहीॊ
फीते कक सफको झभकडा ददखाने रगी। द

लहा कमा भया भानो एक फरा द




ई। कर जफ वह मह ॉ आई थी तो भै फार फ

ॊधा यही थी। नहीॊ तो डे उढी के
बीतय तो ऩै य धयने ही नहीॊ दे ती। च

डै र कहीॊ की , मह ॉ आकय त

महायी सहे री
फनती है । इसी से अभ

तयाम को अऩना मौवन ददखाकय अऩना ररमा। कर
कै सा रचक-रचक कय ठ



क-ठ



क् चरती थी। दे ख-दे ख कय ऑॊ खे प

टती
थीॊ। खफयदाय, जो अफ कबी , त

भने उस च

डै र को अऩने मह ॉ बफठामा। भै
उसकी स

यत नहीॊ दे खना चाहती। जफान वह फरा है कक झ

ठ फात का बी
ववशवास ददरा दे ती है । छोटी सयकाय ने जो क

छ कहा वह तो सफ सच था।
बरा उसका असय कमो न होता। अगय उसने गजया ररमे ह

ए जाते न दे खा
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होता तो बावज की फातो को अवशम फनावट सभझती। कपय बी वह ऐसी
ओछी नहीॊ थी कक उसी वकत अभ

तयाम औय ऩ

णाय को कोसने रगती औय
मह सभझ रेती कक उन दोनो भे क

छ स ॉ ठ-ग ॉ ठ है । ह ॉ , वह अऩनी चायऩाइ
ऩय जाकय रेट गमी औय भ

ॉह रऩेट कय क

छ सोचने रगी।
पेभा को तो ऩॊरॊग ऩय रेटकय बावज की फातो को तौरने दीजजए औय
हभ भदायने भे चरे। मह एक फह

त सजा ह

आ रॊफा चौडा दीवानखाना है ।
जभीन ऩय रभजायऩ

य ख

फस

यत कारीने बफछी ह

ई है । ब ॉ तत-ब ॉ तत की गदेदाय


रसय म ॉ रगी ह

ई है । दीवाये उततभ धचरो से ब

कऺत है । ऩॊखा झरा जा यहा
है । भ

ॊशी फदयीपसाद एक आयाभक

सी ऩय फै ठे ऐनक रगामे एक अखफाय ऩढ
यहे है । उनके दामे -फामे की क

रसय मो ऩय कोई औय भहाशम यईस फै ठे ह

ए है ।
वह साभने की तयप भ

ॊशी ग

रजायीरार है औय उनके फगर भे फाफ

दाननाथ
है । दादहनी तयप फाफ

कभरापसाद भ

ॊशी झॊमभनरार से क

छ कानाप

सी कय
यहे है । फामीॊ औय दो तीन औय आदभी है जजनको हभ नहीॊ ऩहचानते। कई
रभनट तक भ

ॉशी फदयीपसाद अखफाय ऩढते यहे । आखखय सय उठामा औय सबा
की तयप दे खकय फडी गॊबीयता से फोरे —फाफ

अभ

तयाम के रेख अफ फडे ही
तनॊ दनीम होते जाते है ।


रजायीरार —कमा आज कपय क

छ जहय उगरा?
फदयीपसाद —क

छ न ऩ

तछए , आज तो उनहोने ख

री-ख

री गाररम ॉ दी
है । हभसे तो अफ मह फदायशत नहीॊ होता।


रजायी —आखखय कोइ कह ॉ तक फदायशत कये । भै ने तो इस अखफाय
का ऩढना तक छोड ददमा।
झमभनरार —गोमा अऩने अऩनी सभझ भे फडा बायी काभ ककमा।
अजी आऩकाधभय मह है कक उन रेखो को कादटए , उनका उततय दीजजए। भै
आजकर एक कववतत यच यहा ह

ॉ , उसभे भै ने इनको ऐसा फनामा है कक मह
बी कमा माद कये गे।
कभरापसाद —फाफ

अभ

तयाम ऐसे अधजीवे आदभी नहीॊ है कक आऩके
कववत, चौऩाई से डय जाऍ ॊ । वह जजस काभ भे ररऩटते है साये जी से ररऩटते
है ।
झमभन० —हभ बी साये जी से उनके ऩीछे ऩड जाऍ ॊ गे। कपय दे खे वह
कै से शहय भे भ

ॉह ददखाते है । कहो तो च

टकी फजाते उनको साये शहय भे
फदनाभ कय द

ॉ ।
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कभरा० —(जोय दे कय) मह कौन-सी फहाद

यी है । अगय आऩ रोग उनसे
ववयोध भोर ररमा चाहते है । तो सोच-सभझ कय रीजजए। उनके रेखो को
ऩदढए, उनको भन भे ववचारयए, उनका जवाफ ररखखए, उनकी तयह दे हातो भे
जा-जाकय वमाखमान दीजजए तफ जा के काभ चरेगा। कई ददन ह

ए भै अऩने
इराके ऩय से आ यहा था कक एक ग ॉ व भे भै ने दस-फायह हजाय आदरभमो की
बीड दे खी। भै ने सभझा ऩै ठ है । भगय जफ एक आदभी से ऩ

छा तो भार




आ। कक फाफ

अभ

तयाम का वमाखमान था। औय मह काभ अके रे वही नहीॊ
कयते , काररज के कई होनहाय रडके उनके सहामक हो गमे है औय मह तो
आऩ रोग सबी जानते है कक इधय कई भहीने से उनकी वकारत अॊधाध

ॊध
फढ यही है ।


रजायीरार—आऩ तो सराह इस तयह दे ते है गोमा आऩ ख

द क

छ न
कये गे।
कभरापसाद—न, भै इस काभ भे । आऩका शयीक नहीॊ हो सकता। भ

झे
अभ

तयाम के सफ रसदवाॊतो से भेर है , रसवाम ववधवा-वववाह के ।
फदयीपसाद—(डऩटकय) फचच, कबी त

भको सभझ न आमेगी। ऐसी फाते


हॉ से भत तनकारा कयो।
झभनरार—(कभरापसाद से) कमा आऩ ववरामत जाने के ररए तैमाय
है ?
कभरापसाद—भै इसभे कोई हातन नहीॊ सभझता।


राजयीरार—(हॊ सकय) मह नमे बफगडे है । इनको अबी असऩतार की
हवा खखराइए।
फदयीपसाद—(झलराकय) फचचा , त

भ भेये साभने से हट जाओ। भ

झे
योज होता है ।
कभरापसाद को बी ग

ससा आ गमा। वह उठकय जाने रगे कक दो-तीन
आदरभमो ने भनामा औय कपय क

सय् ऩय राकय बफठा ददमा। इसी फीच भे
रभसटय शभाय की सवायी आमी। आऩ वही उतसाही ऩ

रष है जजनहोने अभ

तयाम
को ऩककी सहामता का वादा ककमा था। इनको दे खते ही रोगो ने फडे आदय
से क

सी ऩय बफठा ददमा। रभटय शभाय उस शहय भे मम

तनरसऩै ररटी के सेके टयी
थे।


राजायीरार—कदहए ऩॊडडत जी कमा खफय है ?
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रभसटय शभाय —(भ

ॉछो ऩय हाथ पे यकय) वह ताजा खफय रामा ह

ॉ कक
आऩ रोग स

नकय पडक जामॉगे। फाफ

अभ

तयाम ने दरयमा के ककनाये वारी
हयी बयी जभीन के ररए दयखासत है । स

नता ह

ॉ वह ॉ एक अनाथारम
फनवामेगे।
फदयीपसाद—ऐसा कदावऩ नहीॊ हो सकता। कभरापसाद। त

भ आज उसी
जभीन के ररए हभायी तयप से कभेटी भे दयखासत ऩेश कय दो। हभ वह ॉ
ठाक

यदवाया औय धभय शारा फनावामेगे।
रभसटय शभाय —आज अभ

तयाम साहफ के फॉगरे ऩय गमे थे। वह ॉ फह


दे य तक फातचीत होती यही। साहफ ने भेये साभने भ

सकयाकय कहा —
अभ

तयाम, भै दे ख
ूॉगा कक जभीन त

भको रभरे।


रजायीरार ने सय दहराकय कहा —अभ

तयाम फडे चार के आदभी है ।
भार

भ होता है, साहफ को ऩहरे ही से उनहोने अऩने ढॊ ग ऩय रगा ररमा है ।
रभसटय शभाय —जनाफ, आऩको भार

भ नहीॊ अॊगेजो से उनका ककतना
भेरजोर है । हभको अॊगेज भेमफयो से कोई आशा नहीॊ यखना चादहए। वह सफ
के सफ अभ

तयाम का ऩऺ कये गे।
फदयीपसाद—(जोय दे कय) जह ॉ तक भेया फस चरेगा भै मह जभीन
अभ

तयाम को न रेने द

ॉ गा। कमा डय है , अगय औय ईसाई भेमफय उनके
तयपदाय है । मह रोग ऩ ॉ च से अधधक नहीॊ। फाकी फाईस भेफय अऩने है । कमा
हभको उनकी वोट बी न रभरेगी ? मह बी न होगा तो भै उस जभीन को
दाभ दे कय रेने ऩय तैमाय ह

ॉ।
झमभनरार—जनाफ, भ

झको ऩकका ववशवास है कक हभको आधे से
जजमादा वोट अवशम रभर जामॉगे।

× × ×


एक फह

त ही उततभ यीतत से सजा ह

आ कभया है । उसभे रभसटय
वारटय साहफ फाफ

अभ

तयाम के साथ फै ठे ह

ए क

छ फाते कय यहे है । वारटय
साहफ मह ॉ के करभशनय है औय साधायण अॊगेजो के अततरयकत पजा के फडे
दहतैषी औय फडे उतसाही पजाऩारक है । आऩका सवबाव ऐसा तनभय र है कक
छोटा-फडा कोई हो , सफसे हॉसकय ऺेभ-क

शर ऩ

छते औय फात कयते है । वह
पजा की अवसथा को उननत दशा भे रे जाने का उदमोग ककमा कयते है औय
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मह उनका तनमभ है कक ककसी दहनद

सतानी से अॊगेजी भे नहीॊ फोरेगे। अबी
वऩछरी सार जफ परेग का डॊ का चायो ओय घेनघोय फज यहा था , वारटय
साहफ, गयीफ ककसानो के घय जाकय उनका हार-चार दे खते थे औय अऩने
ऩास से उनको कॊ फर फ ॉ टते कपयते थे। औय अकार के ददनो भे तो वह सदा
पजा की ओय से सयकाय के दयफाय भे वादान

वाद कयने के ररए ततऩय यहते
है । साहफ अभ

तयाम की सचची दे शबजकत की फडी फडाई ककमा कयते है औय
फह

धा पजा की यऺा कयने भे दोनो आदभी एक-द

सये की सहामता ककमा
कयते है ।
वारटय —(भ

सकयाकय) फाफ

साहफ। आऩ फडा चाराक है आऩ चाहता है
कक भ

ॊशी फदयी पसाद से थै री-बय , रऩमा रे। भगय आऩका फात वह नहीॊ
भानने सकता।
अभ

तयाम —भै ने तो आऩसे कह ददमा कक भै अनाथारम अवशम
फनवाउॉ गा औय इस काभ भे फीस हजाय से कभ न रगेगा। अगय आऩ भेयी
सहामता कये गे तो आशा है कक मह काभ बी सपर हो जाए औय भै बी फना
यह

ॉ। औय अगय आऩ कतया गमे तो ईशवय की क

ऩा से भेये ऩास अबी इतनी
जामदाद है कक अके रे दो अनाथारम फनवा सकता ह

ॉ। भगय ह ॉ, तफ भै औय
काभो भे क

छ बी उतसाह न ददखा सक

ॉ गा।
वारटय —(हॊ सकय) फाफ

साहफ। आऩ तो जया से फात भे नायाज हो
गमा। हभ तो फोरता है कक हभ त

महाया भदद दो हजाय से कय सकता है ।
भगय फदयीपसाद से हभ क

छ नहीॊ कहने सकता। उसने अबी अकार भे
सयकाय को ऩ ॉ च हजाय ददमा है ।
अभ

तयाम —तो मह दो हजाय भे रेकय कमा करॉ गा ? भ

झे तो आऩसे
ऩॊदह हजाय की ऩ

यी आशा थी। भ

ॊशी फदयीपसाद के ररए ऩ ॉ च हजाय कमा
फडी फात है ? तफ से इसका द

गना तो वह एक भॊददय फनवाने भे रगा च

के
है । औय के वर इस आशा ऩय कक उनको सी आई.ई की ऩदवी रभर जाएगी ,
वह इसका दस ग

ना आज दे सकते है ।
वारटय —(अभ

तयाम से हाथ रभराकय) वेर , अभ

तयाम। त

भ फडा
चाराक है । त

भ फडा चाराक है त

भ भ

ॊशी फदयीपसाद को र

टना भ ॉ गता है ।
मह कहकय साहफ उठ खडे ह

ए। अभ

तयाम बी उठे । फाहय कपटन खडी
थी दोनो उस ऩय फै ठ गमे। साईस ने घोडे को चाफ

क रगामा औय दे खते
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दे खते भ

ॊशी फदयीपसाद के भकान ऩय जा ऩह

ॊ चे । ठीक उसी वकत जफ वह ॉ
अभ

तयाम से याय फढाने की फाते सोची जा यही थीॊ।
पमाये ऩाठकगण। हभ मह वणय न कयके कक इन दोनो आदरभमो के
ऩह

ॉचते ही वह ॉ कै सी खरफरी ऩड गमी , भ

ॊशी फदयीपसाद ने इनका कै सा
आदय ककमा , ग

रजायीरार, दाननाथ औय रभसटय शभाय कै सी ऑॊ खे च

याने
रगे, मा साहफ ने कै से काट-छाॊट की फाते की औय भ

ॊशी जी को सी.आई.ई
की ऩदवी की ककन शबदो भे आशा ददराइ आऩका सभम नहीॊ गॉवामा चाहते।


रासा मह कक अभ

तयाम को मह ॉ से सततयह हजाय रऩमा रभरा। भ

ॊशी
फदयीपसाद ने अके रे फायह हजाय ददमा जो उनकी उमभेद से फह

त जमादा
था। वह जफ मह ॉ से चरे तो ऐसा भार

भ होता था कक भानो कोई गढी जीते
चरे आ यहे है । वह जभीन बी जजसके ररए उनहोने कभेटी भे दयखसत की
थी रभर गमी औय आज ही इॊजीतनमय ने उसको नाऩ कय अनाथारम का
नकशा फनाना आयॊ ब कय ददमा।
साहफ औय अभ

तयाम के चरे जाने ऩय मह ॉ मो फाते होने रगी।
झमभनरार—माय, हभको तो इस रौडे ने आज ऩाॊच सौ के रऩ भे
डार ददमा।


रजायी रार—जनाफ, आऩ ऩ ॉ च सौ को यो यही है मह ॉ तो एक हजाय
ऩय ऩानी कपय गमा। भ

ॊशी जी तो सी.आई.ई की ऩदवी ऩावेगे ।मह ॉ तो कोई
यामफहाद

यी को बी नहीॊ ऩ

छता।
कभरापसाद—फडे शोक की फात है कक आऩ रोग ऐसे श

ब कामय भे
सहामता दे कय ऩछताते है । अभ

तयाम को दे खखए कक उनहोने अऩना एक ग ॉ व
फेचकय दस हजाय रऩमा बी ददमा औय उस ऩय दौड-ध

ऩ अरग कय यहे है ।


ॊशी फदयीपसाद—अभ

तयाम फडा उतसाही आदभी है । भै ने आज इसको
जाना। फचचा कभरापसाद। त

भ आज शाभ को उनके मह ॉ जाकय हभायी ओय
से धनमवाद दे दे ना।
झमभनरार—(भ

ॊह पे यकय) आऩ कमो न पसनन होगे , आऩको तो
ऩदवी रभरेगी न?
कभरापसाद—(हॊ सकय) अगय आऩका वह कववतत तैमाय हो तो जया


नाइए।
दाननाथ जो अफ तक च

ऩचाऩ फै ठे ह

ए थे फोरे —अफ आऩ उनकी तनॊ दा
कयने की जगह उनकी पॊशसा कीजजए।
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रभसटय शभाय —अचछा, जो ह

आ सो ह

आ , अफ सबा ववसजय न कीजजए ,
आज मह भार

भ हो गमा कक अभ

तयाम अके रे हभ सफ ऩय बायी है ।
कभरापसाद—आऩने नहीॊ स

न, सतम की सदा जम होती है ।
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सातवाॊ अधमाम
आज से कभी मननदर न जाऊॉ गी
फेचायी ऩ

णाय , ऩॊडाइन, चौफाइन, रभसयाइन आदद के चरे जाने के फाद
योने रगी। वह सोचती थी कक हाम। अफ भै ऐसी भनह

स सभझी जाती ह

ॊ कक
ककसी के साथ फै ठ नहीॊ सकती। अफ रोगो को भेयी स

यत काटने दौडती है ।
अबी नहीॊ भार

भ कमा-कमा बोगना फदा है । मा नायामण। त

ही भ

झ द

खखमा
का फेडा ऩाय रगा। भ

झ ऩय न जाने कमा क

भतत सवाय थी कक रसय भे एक
तेर डरवा ररमौ। मह तनगोडे फार न होते तो काहे को आज इतनी फजीहत
होती। इनहीॊ फातो की स

धध कयते कयते जफ ऩॊडाइन की मह फात माद आ
गमी कक फाफ

अभ

तयाम का योज योज आना ठीक नहीॊ तफ उसने रसय ऩय
हाथ भायकय कहा —वह जफ आऩ ही आऩ आते है तो भै कै से भना कय द

ॉ ।
भै । तो उनका ददमा खाती ह

ॉ। उनके रसवाम अफ भेयी स

धध रेने वारा कौन
है । उनसे कै से कह द

ॉ कक त

भ भत आओ। औय कपय उनके आने भे हयज ही
कमा है । फेचाये सीधे सादे बरे भन

षम है । क

छ नॊगे नहीॊ , शोहदे नहीॊ। कपय
उनके आने भे कमा हयज है । जफ वह औय फडे आदरभमो के घय जाते है ।
तफ तो रोग उनको ऑॊ खो ऩय बफठाते है । भ

झ रबखारयन के दयवाजे ऩय आवे
तो भै कौन भ

ॉह रेकय उनको बगा द

ॉ । नहीॊ नहीॊ , भ

झसे ऐसा कबी न होगा।
अफ तो भ

झ ऩय ववऩजतत आ ही ऩडी है । जजसके जी भे जो आवै कहै ।
इन ववचायो से छ

टटी ऩाकय वह अऩने तनमभान

साय गॊगा सनान को
चरी। जफ से ऩॊडडत जी का दे हाॊत ह

आ था तफ से वह पततददन गॊगा नहाने
जामा कयती थी। भगय भ

ॉह अॊधेये जाती औय स

मय तनकरते रौट आती। आज
इन बफन फ

रामे भेहभानो के आने से दे य हो गई। थोडी द

य चरी होगी कक
यासते भे सेठानी की फह

से बेट हो गई। इसका नाभ याभकरी था। मह
फेचायी दो सार से यॉडाऩा बोग यही थी। आम

१६ अथवा १७ सार से अधधक
न होगी। वह अतत स

ॊदयी नख-रशख से द

रसत थी। गात ऐसा कोभर था कक
दे खने वारे दे खते ही यह जाते थे। जवानी की उभय भ

खडे से झरक यही थी।
अगय ऩ

णाय ऩके ह

ए आभ के सभान ऩीरी हो यही थी , तो वह ग

राफ के प


की बातत खखरी ह

ई थी। न फार भे तेर था, न ऑॊ खो भे काजर, न भ ॉ ग भे
सॊद

य, न द ॉ तो ऩय रभससी। भगय ऑॊ खो भे वह चॊचरता थी , चार भे वह
रचक औय होठो ऩय वह भनबवानी रारी थी कक जजससे फनावटी श

ॊगाय की
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जरयत न यही थी। वह भटकती इधय-उधय ताकती, भ

सकयाती चरी जा यही
थी कक ऩ

णाय को दे खते ही दठठक गमी औय फडे भनोहय बाव से हॊ सकय
फोरी—आओ फदहन, आओ। त

भ तो जानो फताशे ऩय ऩै य धय यही हो।


णाय को मह छे ड-छाड की फात फ

यी भार

भ ह

ई। भगय उसने फडी नभी
से जवाफ ददमा—कमा करॊ फदहन। भ

झसे तो औय तेज नहीॊ चरा जाता।
याभकरी—स

नती ह

ॊ कर हभायी डाइन कई च

डै रो के साथ त

भको
जराने गमी थी। जानो भ

झे सताने से अबी तक जी नहीॊ बया। त

भसे कमा
कह

फदहन, मह सफ ऐसा द

ख दे ती है कक जी चाहता है भाह

य खा र

ॉ । अगय
मही हार यहा तो एक ददन अवशम मही होना है । नहीॊ भार

भ ईशवय का कमा
बफगाडा था कक सवपन भे बी जीवन का स

ख न पापत ह

आ। बरा त

भ तो
अऩने ऩतत के साथ दो वषय तक यहीॊ बी। भै ने तो उसका भ

ॉह बी नहीॊ दे खा।
जफ तभाभ औयतो को फनाव-रसॊ गाय ककमे हॉसी-ख

शी चरते-कपयते दे खती ह


तो छाती ऩय साऩॉ रोटने रगता है । ववधवा कमा हो गई घय बय की रौडी
फना दी गमी। जो काभ कोई न कये वह भै करॊ । उस ऩय योज उठते ज

ते ,
फै ठते रात। काजय भत रगाओ। ककससी भत रगाओ। फार भत ग

ॉथाओ।
यॊ गीन साडडम ॉ भत ऩहनो। ऩान भत खाओ। एक ददन एक ग

राफी साडी ऩहन
री तो च

डै र भायने उठी थी। जी भे तो आमा कक सय के फार नोच र

ॉ भगय
ववष का घ

ॉट ऩी के यह गमी औय वह तो वह, उसकी फेदटम ॉ औय द

सयी फह

ऍ ॊ


झसे कननी काटती कपयती है । बोय के सभम कोई भेया भ

ॉह नहीॊ दे खता।
अबी ऩडोस भे एक बमाह ऩडा था। सफ की सफ गहने से रद रद गाती
फजाती गमी। एक भै ही अबाधगनी घय भे ऩडी योती यही। बरा फदहन , अफ
कह ॉ तक कोई छाती ऩय ऩतथय यख रे। आखखय हभ बी तो आदभी है ।
हभायी बी तो जवानी है । द

सयो का याग-यॊ ग , हॉसी, च

हर दे ख अऩने भन भे
बी बावना होती है । जफ ब

ख रगे औय खाना न रभरे तो हाय कय चोयी
कयनी ऩडती है ।
मह कहकय याभकरी ने ऩ

णाय का हाथ अऩने हाथ भे रे ररमा औय


सकयाकय धीये धीये एक गीत ग

नग

नाने रगी। फेचायी ऩ

णाय ददर भे क

ढ यही
थी कक इसके साथ कमो रगी। यासते भे हजायो आदभी रभरे। कोई इनकी
ओय ऑॊ खे पाड पाड घ

यता था, कोई इन ऩय फोररमा फोरता था। भगय ऩ

णाय
सय को ऊऩय न उठाती थी। ह ॉ , याभकरी भ

सकया भ

सकया कय फडी चऩरता
से इधय उधय ताकती , ऑॊ खे रभराती औय छे ड छाड का जवाफ दे ती जाती
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थी। ऩ

णाय जफ यासते भे भदो को खडे दे खती तो कतया के तनकर जाती भगय
याभकरी फयफस उनके फीच भे से घ

सकय तनकरती थी। इसी तयह चरते
चरते दोनो नदी के तट ऩय ऩह

ॉची। आठ फज गमा था। हजायो भदय जसरम ॉ ,
फचचे नहा यहे थे। कोई ऩ

जा कय यहा था। कोई स

मय दे वता को ऩानी दे यहा
था। भारी छोटी-छोटी डाररमो भे ग

राफ , फेरा , चभेरी के प

र ररमे
नहानेवारो को दे यहे थे। चायो औय जै गॊगा। जै गॊगा। का शबद हो यहा था।
नदी फाढ ऩय थी। उस भटभै रे ऩानी भे तैयते ह

ए प

र अतत स

ॊदय भार


होते थे। याभकरी को दे खते ही एक ऩॊडे ने कही —‘इधय सेठानी जी , इधय।‘
ऩॊडा जी भहायाज ऩीतामफय ऩहने , ततरक भ

दा रगामे , आसन भाये , चॊदन
यगडने भे ज

टे थे। याभकरी ने उसके सथान ऩय जाकय धोती औय कभॊउर
यख ददमा।
ऩॊडा—(घ

यका) मह त

महाये साथ कौन है ?
याभ०—(ऑॊ खे भटकाकय) कोई होगी त

भसे भतरफ। त

भ कौन होते हो


छने वारे ?
ऩॊडा—जया नाभ स

न के कान ख

श कय रे ।
याभ०—मह भेयी सखी है । इनका नाभ ऩ

णाय है ।
ऩॊडा—(हॉसकय) ओहो हो। कै सा अचछा नाभ है । है बी तो ऩ

णय चॊदभा
के सभान। धनम बागम है कक ऐसे जजभान का दशय न ह

आ।
इतने भे एक द

सया ऩॊडा रार रार ऑॊ खे तनकारे , कॊ धे ऩय रठ यखे ,
नशे भे च

य, झ

भता-झाभता आ ऩह

ॉचा औय इन दोनो ररनाओॊ की ओय घ


कय फोरा, ‘अये याभबयोसे , आज तेये चॊदन का यॊ ग फह

त चोखा है ।
याभबयोसे —तेयी ऑॊ खे काहे को प

टे है । पेभ की फ

टी डारी है जफ जा
के ऐसा चोखा यॊ ग बमा।
ऩॊडा—तेये बागम को धनम है मह यकत चॊदन (याभकरी की तयप
दे खकय) तो त

ने ऩहरे ही यगडा यकखा था। ऩयॊ त

इस भरमाधगय (ऩ

णाय की
तयप इशाया कयके ) के साभने तो उसकी शोबा ही जाती यही।


णाय तो मह नोक-झोक सभझ-सभझ कय झेऩी जाती थी। भगय
याभकरी कफ च

कनेवारी थे। हाथ भटका कय फोरी —ऐसे कयभठॉ दढमो को
थोडे ही भरमाधगय रभरा कयता है ।
याभबयोसे —(ऩॊडा से) अये फौये , त

इन फातो का भभय कमा जाने। दोनो
ही अऩने-अऩने ग

ण भे चोखे है । एक भे स

गॊध है तो द

सये भे यॊ ग है ।
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णाय भन भे फह

त रजजजत थी कक इसके साथ कह ॉ पॉ स गमी। अफ
तक वो नहा-धोके घय ऩह

ॉची होती। याभकरी से फोरी —फदहन, नहाना हो तो
नहाओ, भ

झको दे य होती है । अगय त

भको दे य हो तो भै अके रे जाऊॉ ।
याभबयोसे —नहीॊ , जजभान। अबी तो फह

त सफेया है । आनॊदऩ

वय क सनान
कयो।


णाय ने चादय उताय कय धय दी औय साडी रेकय नहाने के ररए
उतयना चाहती थी कक मकामक फाफ

अभ

तयाम एक सादा क

ताय ऩहने , सादी
टोऩी सय ऩय यकखे , हाथ भे नाऩने का पीता ररमे चॊद ठे के दायो के साथ
अतत ददखामी ददमे। उनको दे खते ही ऩ

णाय ने एक रॊगी घ

घॊट तनकार री
औय चाहा कक सीदढमो ऩय रॊफाई-चौडाइ नाऩना था कमोकक वह एक जनाना
घाट फनवा यहे थे। वह ऩ

णाय के तनकट ही खडे हो गमे। औय कागज ऩेरसॊ र
ऩय क

छ ररखने रगे। ररखते-ररखते जफ उनहोने कदभ फढामा तो ऩै य सीढी
के नीचे जा ऩडा। कयीफ था कक वह औधै भ

ॉह धगये औय चोट-चऩेट आ जाम
कक ऩ

णाय ने झऩट कय उनको सॉबारा ररमा। फाफ

साहफ ने चौककय दे खा तो
ददहना हाथ एक स

ॊदयी के कोभर हाथो भे है । जफ तक ऩ

णाय अऩना घ

ॉघट
फढावे वह उसको ऩहचान गमे औय फोरे —पमायी, आज त

भने भेयी जान फचा
री।


णाय ने इसका क

छ जवाफ न ददमा। इस सभम न जाने कमो उसका
ददर जोय जोय से धडक यहा था औय आखो भे ऑॊ स

बया आता था। ‘हाम।
नायामण, जोकहीॊ वह आज धगय ऩडते तो कमा होता...मही उसका भन फेय फेय
कहता। ‘भै बरे सॊमोग से आ गमी थी। वह रसय नीचा ककमे गॊगा की रहयो
ऩय टकटकी रगामे मही फाते ग

नती यही। जफ तक फाफ

साहफ खडे यहे ,
उसने उनकी ओय एक फेय बी न ताका। जफ वह चरे गए तो याभकरी


सकयाती ह

ई आमी औय फोरी —फदहन, आज त

भने फाफ

साहफ को धगयते
धगयते फचा ररमा आज से तो वह औय बी त

महाये ऩै यो ऩय रसय यकखेगे।


णाय —(कडी तनगाहो से दे खकय) याभकरी ऐसी फाते न कयो। आदभी
आदभी के काभ आता है । अगय भै ने उनको सॉबार ररमा तो इसभे कमा फात
अनोखी हो गमी।
याभकरी—ए रो। त

भ तो जया सी फात ऩय तततनक गमीॊ।


णाय —अऩनी अऩनी रधच है । भ

झको ऐसी फाते नहीॊ बाती।
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याभकरी—अचछा अऩयाध ऺभा कयो। अफ सकय य से ददलरगी न
करॉ गी। चरो त

रसीदर रे रो।


णाय —नहीॊ, अफ भै मह ॉ न ठहरॉ गी। स

यज भाथे ऩसय आ गमा।
याभकरी—जफ तक इधय उधय जी फहरे अचछा है । घय ऩय तो जरते
अॊगायो के रसवाम औय क

छ नहीॊ।
जफ दोनो नहाकय तनकरी तो कपय ऩॊडो ने छे डनाऩ चाहा , भगय ऩ

णाय
एकदभ बी न रकी। आखखय याभकरी ने बी उसका साथ छोडना उधचत न
सभझा। दोनो थोडी द

य चरी होगी। कक याभकरी ने कहा —कमो फदहन, ऩ

जा
कयने न चरोगी?


णाय —नहीॊ सखी, भ

झे फह

त दे य हो जामगी।
याभ०—आज त

भको चरना ऩडे गा। ततनक दे खो तो कै से ववहाय की
जगह है । अगय दो चाय ददन बी जाओ तो कपय बफना तनतम गमे जी न
भाने।


णाय –त

भ जाव, भै न जाऊॉ गी। जी नहीॊ चाहता।
याभ०—चरो चरो , फह

त इतयाओ भत। दभ की दभ भे तो रौटे आते
है ।
यासते भे एक तॊफोरी की द

कान ऩडी। काठ के ऩटयो ऩय स

पे द बीगे


ए कऩडे बफछे थे। उस ऩय ब ॉ तत-ब ॉ तत के ऩान भसारो की ख

फस

यत
डडबफम ॉ , स

गॊध की शीरशम ॉ , दो-तीन हये -हये ग

रदसते सजा कय धये ह

ए थे।
साभने ही दो फडे -फडे चौखटे दाय आईने रगे ह

ए थे। ऩनवाडी एक सजीमा
जवान था। सय ऩय दोऩलरी टोऩी च

नकय टे डी दे यकखी थी। फदन भे तॊजेफ
का पॉ सा ह

आ क

ताय था। गरे भे सोने की तावीजे। ऑॊ खो भे स

भाय , भाथे ऩय
योयी, ओठो ऩय ऩान की गहयी रीरी। इन दोनोजसरमो को दे खते ही फोरा —
सेठानी जी, ऩान खाती जाव।
याभकरी ने चठ सय से चादय खसका दी औय कपय उसको एक अन

ऩभ
बाव से ओढकय हॊ सते ह

ए नमनो से फोरी—‘अबी पसाद नहीॊ ऩामा’।
ऩनवाडी—आवो। आवो। मह बी तो पसाद ही है । सॊतो के हाथ की
चीज पसाद से फढकय होती है । मह आज त

महाये साथ कौन शजकत है ?
याभ—मह हभायी सखी है ।
तमफोरी—फह

त अचछा जोडा है । धनम् बागम जो दशय न ह

आ।
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याभकरी द

कान ऩय ठभक गमी औय शीशे भे दे ख दे ख अऩने फार
सॉवायने रगी। उधय ऩनवाडी ने चाॉदी के वयक रऩेटे ह

ए फीडे प

यती से फनामे
औय याभकरी की तयप हाथ फढामा। जफ वह रेने को झ

की तो उसने अऩना
हाथ खीॊच ररमा औय हॉसकय फोरा—त

महायी सखी रे तो दे ।
याभ०—भ

ॉह फनवा आओ, भ

ॉह। (ऩान रेकय) रो, सखी, ऩान खाव।


णाय —भै न खाऊॉ गी।
याभ—त

महायी कमा कोई सास फै ठी है जो कोसेगी। भेयी तो सास भना
कयती है । भगय भै उस ऩय बी पततददन खाती ह

ॉ।


णाय —त

महायी आदत होगी भै ऩान नहीॊ खाती।
याभ—आज भेयी खाततय से खाव। त

महे कसभ है ।
याभकरी ने फह

त हठ की भगय ऩ

णाय ने धगरौरयम ॉ न रीॊ। ऩान खाना
उसने सदा के ररए तमाग ददमा था। इस सभम तक ध

ऩ फह

त तेज हो गमी
थी। याभकरी से फोरी —ककधय है त

महाया भॊददय ? वहाॉ चरते-चरते तो साॊझ
हो जामगी।
याभ—अगय ऐसे ददन कटा जाता तो कपय योना काहे का था।


णाय च

ऩ हो गमी। उसको कपय फाफ

अभ

तयाम के ऩै य कपसरने का
धमान आ गमा औय कपय भन भे मह पशन ककमा कक कहीॊ आज वह धगय
ऩडते तो कमा होता। इसी सोच भे थी कक तनदान याभकरी ने कहा —रो
सखी, आ गमा भॊददय।


णाय ने चौककय दादहनी ओय जो दे खा तो एक फह

त ऊॉ चा भॊददय
ददखामी ददमा। दयवाजे ऩय दो फडे-फडे ऩतथय के शे य फने ह

ए थे। औय सै कडो
आदभी बीतय जाने के ररए धककभ-धकका कय यहे थे। याभकरी ऩ

णाय को
इस भॊददय भे रे गमी। अॊदय जाकय कमा दे खती है कक ऩकका चौडा ऑॊ गन है
जजसके साभने से एक अॉधेयी औय सॉकयी गरी दे वी जी के धाभ को गमी है ।
दादहनी ओय एक फायादयी है जो अतत उततभ यीतत ऩय सजी ह

ई है । मह ॉ एक


वा ऩ

रष ऩीरा ये शभी कोट ऩहने , सय ऩय ख

फस

यत ग

राफी यॊ ग की ऩगडी
फ ॉ धे , तककमा-भसनद रगामे फै ठा है ।ऩेचवान रगा ह

आ है । उगारदान ,
ऩानदान औय नाना पकाय की स

ॊदय वसत

ओॊ से साया कभया ब

वषत हो यहा है ।
उस म

वा ऩ

रष के साभने एक स

धय कारभनी रसॊ गाय ककमे ववयाज यही है ।
उसके इधय-उधय सऩयदामे फै ठे ह

ए सवय रभरा यहे है । सै कडो आदभी फै ठे
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औय सै कडो खडे है । ऩ

णाय ने मह यॊ ग दे खा तो चौककय फोरी —सखी, मह तो
नाचघय सा भार

भ होता है । त

भ कहीॊ ब

र तो नहीॊ गमीॊ ?
याभ—(भ

सकयाकय) च

ऩ। ऐसा बी कोई कहता है । मही तो दे वी जी का
भददय है । वह फयादयी भे भहॊ त जी फै ठे है । दे खती हो कै सा यॉगीरा जवान है ।
आज श

कवाय है , हय श

क को मह ॉ याभजनी का नाच होता है ।
इस फीच भे एक ऊॉ चा आदभी आता ददखामी ददमा। कोई छ: प

ट का
कद था। गोया-धचटठा , फारो भे कॊ धी कह ह

ई , भ

ॉह ऩान से बये , भाथे ऩय
ववब

तत यभामे , गरे भे फडे -फडे दानो की रदाऺ की भारा ऩहने कॊ धे ऩय एक
ये शभी दोऩटटा यकखे , फडी-फडी औय रार ऑॊ खो से इधय उधय ताकता इन
दोनो जसरमो के सभीऩ आकय खडा हो गमा। याभकरी ने उसकी तयप कटाऺ
से दे खकय कहा—कमो फाफा इनदवत क

छ ऩयशाद वयशाद नहीॊ फनामा?
इनद—त

महायी खाततय सफ हाजजय है । ऩहरे चरकय नाच तो दे खो। मह
कॊ चनी काशभीय से फ

रामी गमी है । भहॊ त जी फेढफ यीझे है , एक हजाय रऩमा
इनाभ दे च

के है ।
याभकरी ने मह स

नते ही ऩ

णाय का हाथ ऩकडा औय फायादयी की ओय
चरी। फेचायी ऩ

णाय जाना न चाहती थी। भगय वह ॉ सफके साभने इनकाय
कयते बी फन न ऩडता था। जाकय एक ककनाये खडी हो गमी। सै कडो औयते
जभा थीॊ। एक से एक स

नदय गहने रदी ह

ई । सै कडो भदय थे , एक से एक
गफर ,उततभ कऩडे ऩहरे ह

ए। सफ के सफ एक ही भे रभरे ज

रे खडे थे।
आऩस भे फीररम ॉ फोरी जाती थीॊ , ऑॊ खे रभरामी जाती थी , औयते भदो भे ।
मह भेरजोर ऩ

णाय को न बामा। उसका दहमाव न ह

आ कक बीड भे घ

से। वह
एक कोने भे फाहय ही दफक गमी। भगय याभकरी अनदय घ

सी औय वह ॉ कोई
आध घणटे तक उसने ख

फ ग

रछये उडामे। जफ वह तनकरी तो ऩसीने भे ड

फी


ई थी।तभाभ कऩडे भसर गमे थे।


णाय ने उसे दे खते ही कहा —कमो फदहन, ऩ

जा कय च

कीॊ ? अफ बी घय
चरोगी मा नहीॊ ?
याभ0—(भ

सकयाकय) अये , त

भ फाहय खडी यह गमीॊ कमा?
जया अनदय चरके दे खो कमा फहाय है ? ईशवय जाने कॊ चनी गाती कमा
है ददर भसोस रेती है ।


णाय —दशय न बी ककमा मा इतनी दे य के वर गाना ही स

नती यहीॊ ?
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याभ0—दशय न कयने आती है भेयी फरा। मह ॉ तो ददर फहराने से काभ
है । दस आदभी दे खे दस आदरभमो से हॉसी ददलरगी की , चरो भन आन हो
गमा। आज इनददतत ने ऐसा उततभ पसाद फनामा है कक त

भसे कमा फखान
करॉ ।


णाय –कमा है ,चयणाभ

त?
याभ0—(हॅसकय) ह ॉ , चयणाभ

त भे फ

टी रभरा दी गमी है ।


णाय —फ

टी कै सी?
याभ0—इतना बी नहीॊ जानती हो, फ

टी बॊग को कहते है ।


णाय —ऐहै त

भने बॊग ऩी री।
याभ—मही तो पसाद है दे वी जी का। इसके ऩीने भे कमा हजय है । सबी
ऩीते है । कहो तो त

भको बी वऩराऊॉ ।


णाय —नहीॊ फदहन, भ

झे ऺभा कयो।
इधय मही फाते हो यही थी कक दस-ऩॊदह आदभी फायादयी से आकय
इनके आसऩास खडे हो गमे।
एक—(ऩ

णाय की तयप घ

यकय) अये मायो, मह तो कोई नमा सवरऩ है ।


सया—जया फच के चरो, फचकय।
इतने भे ककसी ने ऩ

णाय के कॊ धे से धीये से एक ठोका ददमा। अफ वह
फेचायी फडे पे य भे ऩडी। जजधय दे खती है आदभी ही आदभी ददखामी दे ती है ।
कोई इधय से हॊ सता है कोइ उधय से आवाजे कसता है । याभकरी हॉस यही है ।
कबी चादय को खखसकाती है । कबी दोऩटटे को सॉबारती है । एक आदभी ने
उससे ऩ

छा—सेठानी जी, मह कौन है?
याभकरी—मह भेयी सखी है, जया दशय न कयाने को रामी थी।


सया—इनहे अवशम रामा कयो। ओ हो। कै सा ख

रता ह

आ यॊ ग है ।
फाये ककसी तयह इन आदरभमो से छ

टकाया ह

आ। ऩ

णाय घय की ओय
बागी औय कान ऩकडे कक आज से कबी भॊददय न जाउॉ गी।
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आठवाॊ अधमाम


छ और बातचीत


णाय ने कान ऩकडे कक अफ भॊददय कबी न जाऊगी। ऐसे भॊददयो ऩय
दई का कोऩ बी नहीॊ ऩडता। उस ददन से वह साये घय ही ऩय फै ठी यहती।
सभम काटना ऩहाड हो जाता। न ककसी के मह ॉ आना न जाना। न ककसी से
बेट न भ

राकात। न कोई काभ न धॊधा। ददन कै से कटे । ऩढी-ररखी तो
अवशम थी , भगय ऩढे कमा। दो-चाय ककससे-कहानी की ऩ

यानी ककताफे ऩॊडडत
जी की सॊद

क भे ऩडी ह

ई थी , भगय उनकी तयप दे खने को अफ जी नहीॊ
चाहता था। कोई ऐसा न था जो फाजाय से राती भगय वह ककताफो का भोर
कमा जाने। दो-एक फाय जी भे आमा कक कोई ऩ

सतक पेभा के घय भे
भॉगवामे। भगय कपय क

छ सभझकय च

ऩ हो यही। फेर-फ

टे फनाना उसको आते
ही न थे । कक उससे जी फहरामे , ह ॉ सीना आता था। भगय सीमे ककसके
कऩडे । तनतम इस तयह फेकाभ फै ठे यहने से वह हयदभ क

छ उदास सी यहा
कयती। ह ॉ , कबी-कबी ऩॊडाइन औय चौफाइन अऩने चे रे-चाऩडो के साथ आकय


छ रसखावन की फाते स

ना जाती थीॊ। भगय जफ कबी वह कहतीॊ कक फाफ


अभ

तयाम का आना ठीक नहीॊ तो ऩ

णाय साप-साप कह दे ती कक भै उनको
आने से नहीॊ योक सकती औय न कोई ऐसा फतायव कय सकती ह

ॉ जजससे वह
सभझे कक भेया आना इसको फ

या रगता है । सच तो मह है कक ऩ

णाय के हदम
भे अफ अभ

तयाम के ररए पेभ का अॊक

य जभने रगा था। मदमवऩ वह अबी
तक मही सभझती थी कक अभ

तयाम मह ॉ दमा की याह से आमा कयते है ।
भगय नहीॊ भार

भ कमो वह उनके आने का एक-एक ददन धगना कयती। औय
जफ इतवाय आता तो सफेये ही से उनके श

बगभन की तैमारयम ॉ होने रगती।
बफलरो फडे पेभ से साया भकान साप कयती। क

रसय माॊ औय तसवीयो ऩय से
सात ददन की जभी ह

ई ध

र-रभटटी द

य कयती। ऩ

णाय ख

द बी अचछे औय
साप कऩडे ऩहनती। अफ उसके ददर भे आऩ ही आऩ फनाव-रसॊ गाय कयने की
इचछा होती थी। भगय ददर को योकती। जफ फाफ

अभ

तयाम आ जाते तो
उसका भररन भ

ख क

ॊ दन की तयह दभकने रगता। उसकी पमायी स

यत औय
बी अधधक पमायी भार

भ होने रगती। जफ तक फाफ

साहफ यहते उसे अऩना
घय बया भार

भ होता। वह इसी कोरशश भे यहती कक ऐसी कमा फात कर
जजसभे वह पसनन होकय घय को जावे । फाफ

साहफ ऐसे हॉसभ

ख थे कक योते
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को बी एक फाय हॉसा दे ते। मह ॉ वह ख

फ फ

रफ

र की तयह चहकते। कोई ऐसी
फात न कहते जजससे ऩ

णाय द

खखत हो। जफ उनके चरने का सभम आता तो
वह क

छ उदास हो जाती। फाफ

साहफ इसे ताड जाते औय ऩ

णाय की खाततय से


छ दे य औय फै ठते। इसी तयह कबी-कबी घॊटो फीत जाते। जफ ददमा भे
फतती ऩडने की फेरा आती तो फाफ

साहफ चरे जाते। ऩ

णाय क

छ दे य तक
इधय-उधय फौखराई ह

ई ध

भती। जो जो फाते ह

ई होती , उनको भन भे
दोहयाती। मह सभम उस आनॊददामक सवपन-सा जान ऩडता था जो ऑॊ ख के


रते ही बफराम जाता है ।
इसी तयह कई भास औय फीत गमे औय आखखय जो फात अभ

तयाम के
भन भे थी वह ऩ

यी हो गमी। अथायत ऩ

णाय को अफ भार

भ होने रगा कक भेये
ददर भे उनकी भ

हबफभ सभाती जाती है । औय उनका ददर बी भेयी भ

हबफत
से खारी नहीॊ। अफ ऩ

णाय ऩहरे से जमादा उदास यहने रगी। हाम। ओ फौये
भन। कमा एक फाय पीतत रगाने से तेया जी नहीॊ बया जो त

कपय मह योग
ऩार यहा है । त

झे क

छ भार

भ है कक इस योग की औषधध कमा है ? जफ त


मह जानता है तो कपय कमो , ककस आशा ऩय मह सनेह फढा यहा है औय फाफ


साहफ। त

भको कमा कहना भॊज

य है ? त

भ कमा कयने ऩय आमे हो? त

महाये जी
भे कमा है ? कमा त

भ नहीॊ जानते कक मह अजगन धधके गी तो कपय फ

झामे न


झे गी? भ

झसे ऐसा कौन-सा ग

ण है ? कह ॉ की फडी स

ॊदयी ह

ॉ जो त

भ पेभा ,
पमायी पेभा, तो तमागे दे ते हो ? वह फेय फेय भ

झको फ

राती है । त

महीॊ फताओ ,
कौन भ

ॉह रेकय उसके ऩास जाऊॉ औय त

भ तो आग रगाकय द

य से तभाशा
दे खोगे। इसे फ

झामेगा कौन ?फेचायी ऩ

णाय इनहीॊ ववचायो भे ड

फी यहती। फह


चाहती कक अमतयाम का खमार न आने ऩावे , भगय क

छ फस न चरता।
अऩने ददर का ऩरयचम उसको एक ददन मो रभरा कक फाफ

अभ

तयाम
तनमत सभम ऩय नहीॊ आमे। थोडी दे य तक तो वह उनकी याह दे खती यही
भगय जफ वह अफ बी न आमे तफ तो उसका ददर क

छ भसोसने रगा। फडी
वमाक

रता से दौडी ह

ई दीवाजे ऩय आमी औय आध घॊटे तक कान रगामे
खडी यही, कपय बीतय आमी औय भन भायकय फै ठ गमी। धचतत की क

छ वही
अवसथा होने रगी जो ऩॊडडत जी के दौये ऩय जाने के वकत ह

आ कयती। शॊका


ई कक कहीॊ फीभाय तो नहीॊ हो गमे। भहयी से कहा —बफलरो, जया दे खो तो
फाफ

साहफ का जी कै सा ? नहीॊ भार

भ कमो भेया ददर फै ठा जाता है । बफलरो
रऩकी ह

ई फाफ

साहफ के फॉगरे ऩय ऩह

ॉची तो ऻात ह

आ कक वह आज दो
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तीन नौकयो को साथ रेकय फाजाय गमे ह

ए है । अबी तक नहीॊ आमे। ऩ

याना


ढा कहाय आधी ट ॉ गो तक धोती फ ॉ धे सय दहराता ह

आ आमा औय कहने
रगा—‘फेटा फडा खयाफ जभाना आवा है । हजाय का सउदा होम तो, द

इ हजाय
का सउदा होम तो हभही रै आवत यहे न। आज ख

द आऩ गमे है । बराइतने
फडे आदभी का उस चाहत यहा। फाकी कपय सफ अॊगेजी जभाना आमा है ।
अॉगेजी ऩढ-ऩढ के जउन न हो जाम तउन अचयज नहीॊ। बफलरो फ

ढे कहय
के सय दहराने ऩय हॉसती ह

ई घय को रौटी। इधय जफ से वह आमी थी ऩ

णाय
की ववधचर दशा हो यही थी। ववकर हो होकय कबी बीतय जाती , कबी फाहय
आती। ककसी तयह चै न ही न आता। जान ऩडता कक बफलरो के आने भे दे य
हो यही है । कक इतने भे ज

ते ही आवाज स

नामी दी। वह दौड कय दवाय ऩय
आमी औय फाफ

साहफ को टहरते ह

ए ऩामा तो भानो उसको कोई धन रभर
गमा। झटऩट बीतय से ककवाढ खोर ददमा। क

सी यख दी औय चौखट ऩय सय
नीचा कयके खडी हो गमी।
अभ

तयाम—बफलरो कहीॊ गमी है कमा?


णाय —(रजाते ह

ए) ह ॉ , आऩ ही के मह ॉ तो गमी है ।
अभ

त०—भेये मह ॉ कफ गमी? कमो क

छ जरयत थी?


णाय —आऩके आने भे ववरॊफ ह

आ तो भै ने शामद जी न अचछा हो।
उसको दे खने के ररए बेजा।
अभ

त०—(पमाय से दे खकय) फीभायी चाहे कै सी ही हो , वहभ

झे मह ॉ
आने से नहीॊ योक सकती। जया फाजाय चरा गमा था। वह ॉ दे य हो गमी।
मह कहकय उनहोने एक दपे जोय से ऩ

काया , ‘स

खई, अॊदय आओ’ औय
दो आदभी कभये भे दाखखर ह

ए। एक के हाथ भे ऐक सॊद

क था औय द

सये के
हाथ भे तह ककमे ह

ए कऩडे । सफ साभान चौकी ऩय यख ददमा गमा। फाफ


साहफ फोरे —ऩ

णा, भ

झे ऩ

यी आशा है कक त

भ दो चाय भाभ

री चीजे रेकय


झे क

ताथय कयोगी।(हॊ सकय) मह दे य भे आने का ज

भायना है ।


णाय अचमबे भे आ गई। मह कमा। मह तो कपय वही सनेह फढाने
वारी फाते है । औय इनको खयीदने के ररए आऩ ही फाजाय गमे थे।
अभ

तयाम। त

महाये ददर भे जो है वह भै जानती ह

ॊ । भेये ददर भे जो है वह


भ बी जानते हो। भगय इसका नतीजा? इसभे सॊदे ह नहीॊ कक इन चीजो की


णाय को फह

त जरयत थी। ऩॊडडत जी की भोर री ह

ई सारयमा अफ तक रॊगे
तॊगे चरी थी। भगय अफ ऩहनने को कोई कऩडे न थे। उसने सोचा था कक
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अफ की जफ फाफ

साहफ के महा से भारसक तनखवाह रभरेगी तो भाभ

री
सारयम ॉ भगा र

ॉ गी। उसे मह कमा भार

भ था कक फीच भे फनायसी औय ये शभी
सारयमो का ढे य रग जामगा। ऩदहरे तो वह जसरमो की सवाबाववक
अतमरबराषा से इन चीजो को दे खने रगी भगय कपय मह चे त कय कक भेया
इस तयह चीजो ऩय धगयना उधचत नहीॊ है वह अरग हट गमी औय फोरी —
फाफ

साहफ। इस अन

गह के ररए भै आऩको धनमवाद दे ती ह

ॉ , भगय मह
बायी-बायी जोडे भेये ककस काभ के । भेये ररए भोटी-झोयी सारयम ॉ चादहए। भै
इनहे ऩहन

गी तो कोई कमा कहे गा।
अभ

तयाम—त

भने रे ररमा। भेयी भेहनत दठकाने रगी , औय भै क


नहीॊ जानता।
इतने भे बफलरो ऩह

ॉची औय कभये भे फाफ

साहफ को दे खते ही तनहार
हो गमी। जफ चौकी ऩय दजषठ ऩडी औय इन चीजो को दे खा तो फोरी —कमा
इनके ररए आऩ फाजाय गमे थे। फ

ढा कहय यो यहा था कक भेयी दसत

यी भायी
गमी।
अभ

तयाम—(दफी जफान से) वह सफ कहाय भेये नौकय है । भेये ररए
फाजाय से चीजे राते है । त

महाये सकायय का भै चाकय ह

ॉ।
बफलरो मह स

नकय भ

सकयाती ह

ई बीतय चरी गई। ऩ

णाय के कान भे
बी बनक ऩड गमी थी। फोरी —उरटी फात न कदहए। भै तो ख

द आऩकी
चे रयमो कीचे यी ह

ॉ। इसके फाद इधय-उधय की क

छ फाते ह

ई। भाघ-ऩ

स के ददन
थे , सयदी ख

फ ऩड यही थी। फाफ

साहफ दे य तक न फै ठ सके औय आठ फजते
फजते वह अऩने घय को रसधाये । उनके चरे जाने के फाद ऩ

णाय ने जो सॊद


खोरा तो दॊ ग यह गमी। जसरमो के रसॊ गाय की सफ साभधगम ॉ भौज

द थीॊ
औय जो चीज थी स

ॊदय औय उततभ थी। आइना , कॊ घी , स

गॊधधत तेरो की
शीरशम ॉ , ब ॉ तत’बातत के इर , हाथो के कॊ गन , गरे का चॊदहाय , जडाऊ, एक
रऩहरा ऩानदान , ररखने ऩढने के साभान से बयी एक सॊद

कची , ककससे-
कहानी की ककतफो, इनके अततरयकत औय बी फह

त-सी चीजे फडी उततभ यीतत
से सजाकय धयी ह

इ थी। कऩडो का फेठन खोरा तो अचछी से अचछी सारयमा
ददखामी दी। शफय ती, धानी, ग

राफी, उन ऩय ये शभ के फेर फ

ट फने ह

ए। चादये
बायी स

नहये काभ की। बफलरो इन चीजो को दे ख-दे ख प

री न सभाती थी।
फोरी—फह

। मह सफ चीजे त

भ ऩहनोगी तो यानी हो जाओगी—यानी।
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णाय —(धगयी ह

ई आवाज भे ) क

छ बॊग खा गमी हो कमा बफलरो। भै
मह चीजे ऩहन

ॉगी तो जीती फच

ॉगी। चौफाइन औय सेठानी ताने दे दे कय जान
रे रेगी।
बफलरो—ताने कमा दे गी , कोई ददललगी है । इसभे उनके फाऩ का कमा
इजाया। कोई उनसे भाॊगने जाता है ।


णाय ने भहयी को आशचमय की ऑॊ खो से दे खा। मही बफलरो है जो अबी
दो घॊटे ऩहरे चौआइन औय ऩडाइन से समभतत कयती थी औय भ

झे फेय-फेय
ऩहनने -ओढने से फजाय कयती थी। मकामक मह कमा कामाऩरट हो गमी।
फोरी—क

छ सॊसाय के कहने की बी तो राज है ।
बफलरो—भै मह थोडा ही कहती ह

ॉ कक हयदभ मह चीजे ऩहना कयो।
जफ फाफ

साहफ आवे थोडी दे य के ररए ऩहन ररमा।,


णाय(रजाकय)—मह रसॊ गाय कयके भ

झसे उनके साभने कमोकय तनकरा
जामगा। त

महे माद है एक फेय पेभा ने भेये फार ग

ॉध ददमे थे। त

भसे कमा
कह

ॉ। उस ददन वह भेयी तयप ऐसा ताकते थे जैसे कोई ककसी ऩय जाद

कये ।
नहीॊ भार

भ कमा फात है कक उसी ददन से वह जफ कबी भेयी ओय दे खते है
तो भेयी छाती-धड धड कयने रगती है । भ

झसे जान-फ

झकय कपय ऐसी ब

र न
होगी।
बफलरो—फह

, उनकी भयजी ऐसी ही है तो कमा कयोगी , इनहीॊ चीजो के
ररए कर वह फाजाय गमे थे। सै कडो नौकय-चाकय है भगय इनहे आऩ जाकय
जामे। त

भ इनको न ऩहनोगी तो वह अऩने ददर भे कमा कहे गे।


णाय —(ऑॊ खो भे ऑॊ स

बयकय) बफलरो। फाफ

अभ

तयाम नहीॊ भार


कमा कयने वारे है । भेयी सभझ भे नहीॊ आता कक कमा करॉ । वह भ

झसे ददन-
ददन अधधक पेभ फढाते जाते है औय भै अऩने ददर को कमा कह

ॉ , त

भसे
कहते रजजा आती है । वह अफ भेये कहने भे नहीॊ यहा। भोहलरे वारे अरग
फदनाभ कय यहे है । न जाने ईशवय को कमा कयना भॊज

य है ।
बफलरो ने इसका क

छ जवाफ न ददमा। ऩ

णाय ने बी उस ददन खाना न
फनामा। स

झ ही से जाकय चायऩाई ऩय रेट यही। द

सये ददन स

फह को उठकय
उसने वह ककताफे ऩढना श

र की , जो फाफ

सहाफ जामे थे। जमो-जमो वह
ऩढती उसको ऐसा भार

भ होता कक कोई भेयी ही द

ख की कहानी कह यहा है ।
इनके ऩढने भे जो जी रगा तो इतवाय का ददन आमा। ददन तनकरते ही
बफलरो ने हॉसकय कहा—आज फाफ

साहफ के आने का ददन है ।
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68


णाय —(अनजान फनकय) कपय?
बफलरो—आज त

भको जरय गहने ऩहनने ऩडे गे।


णाय —(दफी आवाज से) आज तो भेये सय भे ऩीडा हो यही है ।
बफलरो—नौज, त

महाये फै यी का सय ददय कये । इस फहाने से ऩीछा न


टे गा।


णाय —औय जो ककसी ने भ

झे ताना ददमा तो त

जानना।
बफलरो—ताना कौन य ॉ ड दे गी।
सफेये ही से बफलरो ने ऩ

णाय का फनाव-रसॊ गाय कयना श

र ककमा। भहीनो
से सय न भरा गमा था। आज स

गॊधधत भसारे से भरा गमा , तेर डारा
गमा, कॊ घी की गमी, फार ग

ॉथे गमे औय जफ तीसये ऩहय को ऩ

णाय ने ग

राफी


ती ऩहनकय उस ये शभी काभ की शफय ती सायी ऩहनी, गरे भे हाय औय हाथो
भे कॊ गन सजामे तो स

ॊदयता की भ

ततय भार

भ होने रगी। आज तक कबी
उसने ऐसे यतन जडडत गहने औय फह



लम कऩडे न ऩहने थे। औय न कबी
ऐसी स

घय भार

भ ह

ई थी। वह अऩने भ

खायववॊ द को आऩ दे ख दे ख क


पसनन बी होती थी, क

छ रजाती बी थी औय क

छ शोच बी कयती थी। जफ
स ॉ झ ह

ई तो ऩ

णाय क

छ उदास हो गमी। जजस ऩय बी उसकी ऑॊ खे दयवाजे
ऩय रगी ह

ई थीॊ औय वह चौक कय ताकती थी कक कहीॊ अभ

तयाम तो नहीॊ
आ गमे। ऩ ॉ च फजते फजते औय ददनो से सफेये फाफ

अभ

तयाम आमे। कभये भे
फै ठे , बफलरो से क

शरानॊद ऩ

छा औय ररचामी ह

ई ऑॊ खो से अॊदय के दयवाजे
की तयप ताकने रगे। भगय वह ॉ ऩ

णाय न थीॊ , कोई दस रभनट तक तो
उनहोने च

ऩचाऩ उसकी याह दे खी , भगय जफ अफ बी न ददखामी दी तो
बफलरो से ऩ

छा—कमो भहयी, आज त

महायी सकायय कह ॉ है ?
बफलरो—(भ

सकयाकय) घय ही भे तो है ।
अभ

त०—तो आमी कमो नहीॊ। कमा आज क

छ नायाज है कमा?
बफलरो—(ह

ॊ सकय) उनका भन जाने।
अभ

त०—जया जाकय ररवा जाओ। अगय नायाज हो तो चरकय भनाऊॉ ।
मह स

नकय बफलरो हॉसती ह

ई अॊदय गई औय ऩ

णाय से फोरी —फह

,
उठोगी मा वह आऩ ही भनाने आते है ।


णाय —बफलरो, त

महाये हाथ जोडती ह

ॉ , जाकय कह दो, फीभाय है ।
बफलरो—फीभायी का फहाना कयोगी तो वह डाकटय को रेने चरे जामॅगे।


णाय —अचछा, कह दो, सो यही है ।
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बफलरो—तो कमा वह जगाने न आऍ ॊ गे ?


णाय —अचछा बफलरो, त

भ ही के ई फहाना कय दो जजससे भ

झे जाना न
ऩडे ।
बफलरो—भै जाकय कहे दे ती ह

ॉ कक वह आऩको फ

राती है ।


णाय को कोई फहाना न रभरा। वह उठी औय शभय से सय झ

कामे ,


ॉघट तनकारे , फदन को च

याती , रजाती , फर खाती , एक धगरौयीदान ररमे
दयवाजे ऩयआकय खडी हो गइ अभ

तयाम ने दे खा तो अचमबे भे आ गमे।
ऑॊ खे चौधधमा गमीॊ। एक रभनट तक तो वह इस तयह ताकते यहे जैसे कोई
रडके खखरौने को दे खे। इसके फाद भ

सकयाकय फोरे —ईशवय, त

धनम है ।


णाय —(रजाती ह

ई) आऩ क

शर से थे ?
अभ

त०—(ततछी तनगाहो से दे खकय) अफ तक तो क

शर से था , भगय
अफ खैरयमत नहीॊ नजय आती।


णाय सभझ गमी , अभ

तयाम की यॊ गीरी फातो का आनॊद रेते रेते वह
फोरने भे तनऩ

ण हो गमी थी। फोरी—अऩने ककमे का कमा इराज?
अभ

त०—कमा ककसी को अऩनी जान से फै य है ।


णाय ने रजाकय भ

ॉह पे य ररमा। फाफ

साहफ हॉसने रगे औय ऩ

णाय की
तयप पमाय की तनगाहो से दे खा। उसकी यरसक फाते उनको फह

त बाइ , क


कार तक औय ऐसी ही यस बयी फाते होती यहीॊ। ऩ

णाय को इस फात की स

धध
बी न थी कक भेया इस तयह फोरना चारना भेये ररए उधचत नहीॊ है । उसको
इस वकत न ऩॊडाइन का डय था , न ऩडोरसमो का बम। फातो ही फातो भे
उसने भ

सकयाकय अभ

तयाम से ऩ

छा —आऩको आजकर पेभा का क


सभाचाय रभरा है ?
अभ

त०—नहीॊ ऩ

णाय , भ

झे इधय उनकी क

छ खफय नहीॊ रभरी। ह ॉ ,
इतना जानता ह

ॉ कक फाफ

दाननाथ से बमाह की फातचीत हो यही है ।


णाय —फाफ

दाननाथ तो आऩके रभर है ?
अभ

त०—रभर बी है औय पेभा के मोगम बी है ।


णाय —मह तो भै न भान

गी। उनका जोड है तो आऩ ही से है । ह ,
आऩका बमाह बीतो कहीॊ ठहया था?
अभ

त०—ह ॉ , क

छ फातचीत हो यही थी।


णाय —कफ तक होने की आशा है ?
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70
अभ

त०—दे खे अफ कफ बागम जागता है । भै तो फह

त जलदी भचा यहा


ॊ ।


णाय —तो कमा उधय ही से खखॊ चाव है । आशचमय की फात है ।
अभ

त०—नहीॊ ऩ

णाय , भै जया बागमहीन ह

ॉ। अबी तक रसवाम फातचीत
होने के औय कोई फात तम नहीॊ ह

ई।


णाय —(भ

सकयाकय) भ

झे अवशम नवता दीजजएगा।
अभ

त० —त

महाये ही हाथो भे तो सफ क

है । अगय त

भ चाहो तो भेये
सय सेहया फह

त जलद फॉध जाए।


णाय बौचक होकय अभ

तयाम की ओय दे खने रगी। उनका आशम अफ
की फाय बी वह न सभझी। फोरी —भेयी तयप से आऩ तनजशचत यदहए। भ

झसे
जह ॉ तक हो सके गा उठा न यख
ूॉगी।
अभ

त० —इन फातो को माद यखना , ऩ

णाय , ऐसा न हो ब

र जाओ तो
भेये सफ अयभान रभटटी भे रभर जाऍ ॊ ।
मह कहकय फाफ

अभ

तयाम उठे औय चरते सभम ऩ

णाय की ओय दे खा।
उसकी ऑॊ खे डफडफामी ह

ई थी , भानो ववनम कय यही थी कक जया दे य औय
फै दठए। भगय अभ

तयाम को कोइ जरयी काभ था धीये से उठ खडे ह

ए औय
फोरे —जी तो नही चाहता कक मह ॉ से जाऊॉ । भगय आज क

छ काभ ही ऐसा
आ ऩडा। मह कहा औय चर ददमे। ऩ

णाय खडी योती यह गई।
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71
नौवाॊ अधमाम


म सचम

च जाद

गर हो
नौ फजे यात का सभम था। ऩ

णाय अॉधेये कभये भे चायऩाई ऩय रेटी ह


कयवटे फदर यही है औय सोच यही है आखखय वह भ

झे स कमा चाहते है ? भै
तो उनसे कह च

की कक जह ॉ तक भ

झसे हो सके गा आऩका कामय रसदव कयने
भे कोई फात उठा न यख
ूॉगी। कपय वह भ

झसे ककतना पेभ फढाते है । कमो भेये
सय ऩय ऩाऩ की गठयी रादते है भै उनकी इस भोहनी स

यत को दे खकय
फेफस ह

ई जाती ह

ॉ।
भै कै से ददर को सभझाऊ? वह तो पेभ यस ऩीकय भतवारा हो यहा है ।
ऐसा कौन होगा जो उनकी जाद

बयी फाते स

नकय यीझ न जाम ? हाम कै सा
कोभर सवबाव है । ऑॊ खे कै सी यस से बयी है । भानो हदम भे च

बी जाती है ।
आज वह औय ददनो से अधधक पसनन थे। कै सा यह यहकय भेयी औय
ताकते थे। आज उनहोने भ

झे दो-तीन फाय ‘पमायी ऩ

णाय ’ कहा। क

छ सभझ भे
नहीॊ आता कक कमा कयनेवारे है ? नायामण। वह भ

झसे कमा चाहते है । इस
भोहबफत का अॊत कमा होगा।
मही सोचते-सोचते जफ उसका धमान ऩरयणाभ की ओय गमा तो भाये
शभय के ऩसीना आ गमा। आऩ ही आऩ फोर उठी।
न......न। भ

झसे ऐसा न होगा। अगय मह वमवहाय उनका फढता गमा
तो भेये ररए रसवाम जान दे दे ने के औय कोई उऩाम नहीॊ है । भै जरय जहय
खा र

ॉ गी। नही-नहीॊ , भै बी कै सी ऩागर हो गमी ह

ॉ। कमा वह कोई ऐसे वै से
आदभी है । ऐसा सजजन ऩ

रष तो सॊसाय भे न होगा। भगय कपय मह पेभ


झसे कमो रगाते है । कमा भेयी ऩयीऺा रेना चाहती है । फाफ

साहफ। ईशचय
के ररए ऐसा न कयना। भै त

महायी ऩयीऺा भे ऩ

यी न उतरॉ गी।


णाय इसी उधेड-फ

न भे ऩडी थी कक नीॊद आ गमी। सफेया ह

आ। अबी
नहाने जाने की तैमायी कय यही थी कक फाफ

अभ

तयाम के आदभी ने आकय
बफलरो को जोय से ऩ

काया औय उसे एक फॊद ररपापा औय एक छोटी सी
सॊद

कची दे कय अऩनी याह रगा। बफलरो ने त

यॊ त आकय ऩ

णाय को मह चीजे
ददखामी।


णाय ने क ॉ ऩते ह

ए हाथो से खत ररमा। खोरा तो मह ररखा था —
‘पाणपमायी से अधधक पमायी ऩ

णाय।
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जजस ददन से भै ने त

भको ऩहरे ऩहर दे खा था , उसी ददन से त

महाये
यसीरे नै नो के तीय का घामर हो यहा ह

ॉ औय अफ घाव ऐसा द

खदामी हो
गमा है कक सहा नहीॊ जाता। भै ने इस पेभ की आग को फह

त दफामा। भगय
अफ वह जरन असहम हो गमी है । ऩ

णाय। ववशवास भानो , भै त

भको सचचे
ददर से पमाय कयता ह

ॊ । त

भ भेये हदम कभर के कोष की भाररक हो। उठते
फै ठते त

महाया भ

सकयाता ह

आ धचर आखो के साभने कपया कयता है । कमा


भ भ

झ ऩय दमा न कयोगी ? भ

झ ऩय तयस न खाओगी ? पमायी ऩ

णाय। भेयी
ववनम भान जाओ। भ

झको अऩना दास , अऩना सेवक फना रो। भै त

भसे
कोई अन

धचत फात नहीॊ चाहता। नायामण। कदावऩ नहीॊ , भै त

भसे शासरीम
यीतत ऩय वववाह कयना चाहता ह

ॉ। ऐसा वववाह त

भको अनोखा भार

भ होगा।


भ सभझोगी, मह धोखे की फात है । भगय सतम भानो, अफ इस दे श भे ऐसे
वववाह कहीॊ कहीॊ होने रगे है । भै त

महाये ववयह भे भय जाना ऩसॊद करॉ गा ,
भगय त

भको धोखा न द

ॊ गा।
‘ऩ

णाय। नही भत कयो। भेयी वऩछरी फातो को माद कयो। अबी कर ही
जफ भै ने कहा कक ‘त

भ चाहो तो भेये सय फह

त जलद सेहया फॉध सकता है । ‘
तफ त

भने कहा था कक ‘भै बय शजकत कोई फात उठा न यख
ूॉगी। अफ अऩना
वादा ऩ

या कयो। दे खो भ

कय भत जाना।
‘इस ऩर के साथ भै एक जहाऊ कॊ गन बेजता ह

। शाभ को भै त

महाये
दशय न को आऊॉ गा। अगय मह कॊ गन त

महायी कराई ऩय ददखाइ ददमा तो
सभझ जाऊॉ गा कक भेयी ववनम भान री गमी। अगय नहीॊ तो कपय त

महे भ

ॉह
न ददखाऊॉ गा।


महायी सेवा का अरबराषी
अभ

तयाम।



णाय ने फडे गौय से इस खत को ऩढा औय शोच के अथाह सभ

द भे
गोते खाने रगी। अफ मह ग

र खखरा। भहाऩ

रष ने वह ॉ फै ठकय मह ऩाखॊड
यचा। इस ध

भय ऩन को दे खो कक भ

झसे फेय फेय कहते थे कक त

महाये ही ऊऩय
भेया वववाह ठीक कयने का फोझ है , भै फौयी कमा जान

ॉ कक इनके भन भे कमा
फात सभामी है । भ

झसे वववाह का नाभ रेते उनको राज नहीॊ होती। अगय


हाधगन फनना बाग भे फादा होता तो ववधवा काहे जोोो होती। भै अफ
इनको कमा जवाफ द

ॉ । अगय ककसी द

सये आदभी ने मह गारी ररखी होती तो
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उसका कबी भ

हॉ न दे खती। भै कमा सखी पेभा से अचछी ह

ॉ ? कमा उनसे


ॊदय ह

ॉ ?कमा उनसे ग

णवती ह

ॉ ? कपय मह कमा सभझकय ऐसी फाते ररखते
है ? वववाह कये गे। भै सभझ गमी जैसा वववाह होगा। कमा भ

झे इतनी बी
सभझ नहीॊ ? मह सफ उनकी ध

तय ऩन है । वह भ

झे अऩने घय यकखा चाहते है ।
भगय ऐसा भ

झसे कदावऩ न होगा। भै तो इतना ही चाहती ह

ॉ कक कबी-कबी
उनकी भोहनी भ

यत का दशय न ऩामा करॉ । कबी-कबी उनकी यसीरी फततम ॉ


ना करॉ औय उनका क

शर आनॊद , स

ख सभाचाय ऩामा करॉ । फस। उनकी
ऩतनी फनने के मोगम भै नहीॊ ह

ॉ। कमा ह

आ अगय हदम भे उनकी स

यत जभ
गमी है । भै इसी घय भे उनका धमान कयते कयते जान दे द

ॉ गी। ऩय भोह के
फस के आकय भ

झसे ऐसा बायी ऩाऩ न ककमा जाएगा। भगय इसभे उन
फेचाये का दोष नहीॊ है । वह बी अऩने ददर से हाये ह

ए है । नहीॊ भार

भ कमो


झ अबाधगनी भे उनका पेभ रग गमा। इस शहय भे ऐसा कौन यईस है जो
उनको रडकी दे ने भे अऩनी फडाई न सभझे । भगय ईशवय को न जाने कमा
भॊज

य था कक उनकी पीतत भ

झसे रगा दी। हाम। आज की स ॉ झ को वह
आएगे। भेयी कराई ऩय कॊ गन न दे खेगे तो ददर भे कमा कहे गे ? कहीॊ आना-
जाना तमाग दे तो भै बफन भाये भय जाऊॉ । अगय उनका धचतत जया बी भेयी
ओय से भोटा ह

आ, तो अवशम जहय खा र

गीॉ। अगय उनके भन भे जया बी
भाख आमा, जया बी तनगाह फदरी, तो भेया जीना कदठन है ।
बफलरो ऩ

णाय के भ

खडे का चढाव-उताय फडे गौय से दे ख यही थी। जफ
वह खत ऩढ च

की तो उसने ऩ

छा—कमा ररखा है फह

?


णाय —(भररन सवय भे ) कमा फताऊॉ कमा ररखा है ?
बफलरो—कमो क

शर तो है?


णाय —ह ॉ , सफ क

शर ही है । फाफ

साहफ ने आज नमा सव ॉ ग यचा।
बफलरो—(अचॊबे से) वह कमा?


णाय —ररखते है कक भ

झसे......
उससे औय क

छ न कहा गमा। बफलरो सभझ गमी। भगय वहीॊ तक
ऩह

ची जह ॉ तक उसकी फ

दवव ने भदद की। वह अभ

तयाम की फढती ह




हबफत को दे ख-दे खकय ददर भे सभझे फै ठी ह

ई थी कक वह एक न एक
ददन ऩ

णाय को अऩने घय अवशम डारेगे। ऩ

णाय उनको पमाय कयती है , उन ऩय
जान दे ती है । वह ऩहरे फह

त दहचककचामगी भगय अॊत भे भान ही जामगी।
उसने सै कडो यईसो को दे खा था कक नाइनो कहारयमो, भहयाजजनो को घय डार
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ररमा था। अफ की बी ऐसा ही होगा। उसे इसभे कोई फात अनोखी नहीॊ
भार

भ होती थी कक फाफ

साहफ का पेभ सचच है भगय फेचाये रसवाम इसके
औय कय ही कमा सकते है कक ऩ

णाय को घय डार रे । दे खा चादहए कक फह


भानती है मा नहीॊ। अगय भान गमीॊ तो जफ तक जजमेगे , स

ख बोगेगी। भै
बी उनकी सेवा भे एक ट

कडा योटी ऩामा करॉ गी औय जो कहीॊ इनकाय ककमा
तो ककसी का तनफाह न होगा। फाफ

साहफ ही का सहाया ठहया। जफ वही भ

ॉह
भोड रे गे तो कपय कौन ककसको ऩ

छता है ।
इस तयह ऊॉ च-नीच सोचकय उसने ऩ

णाय से ऩ

छा-त

भ कमा जवाफ दो
दोगी?


णाय-जवाफ ऐसी फातो का बी बर कहीॊ जवाफ होता है । बरा
ववधवाओॊ का कहीॊ बमाह ह

आ है औय वही बी बहभभण का ऺबरम से। इस
तयह की चनद कहातनमाॊ भै ने उन ककताफो भे ऩढी जो वह भ

झे दे गमे है ।
भगय ऐसी फात कहीॊ सै त

क नहीॊ दे खने आमी।
बफलरो सभझी थी कक फाफ

साहफ उसको घय डयानेवारे है । जफ बमाह
का नाभ स

ना तो चकया कय फोरी-कमा बमाह कयने को कहते है ?


णाय-ह ॉ ।
बफलरो—त

भसे?


णाय-मही तो आशचय है ।
बफलरो—अचयाज सा अचयज है बरा ऐसी कहीॊ बमा है । फारक ऩक
गमे भगय ऐसा बमाह नहीॊ दे खा।


णाय-बफलरो, मह सफ फहाना है । उनका भतरफ भै सभझ गमी।
बफलरो-वह तो ख

री फात है ।


णाय —ऐसा भ

झसे न होगा। भै जान दे द

ॉ गी ऩय ऐसा न करॉ गी।
बफलरो—फह

उनका इसभे क

छ दोष नहीॊ है । वह फेचाये बी अऩने ददर
से हाये ह

ए है । कमा कये ।


णाय —हाॉ बफलरो, उनको नहीॊ भार

भ कमो भ

झसे क

छ भ

हबफत हो गमी
है औय भेये ददर का हार तो त

भसे तछऩा नहीॊ। अगय वह भेयी जान भ ॉ गते
तो भै अबी दे दे ती। ईशवय जानता है , उनके जया से इशाये ऩय भै अऩने को
तनछावय कय सकती ह

ॉ।
भगय जो फात व चाहते है भ

झसे न होगी। उसके सोचती ह

ॉ तो भेया
करेजा काॉऩने रगता है ।
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बफलरो—ह ॉ , फात तो ऐसा ही है भ

दा...


णाय-भगय कमा , बरेभान

सो भे ऐसा कबी होता ही नहीॊ। ह ॉ , नीच
जाततमो भे सगाई, डोरा सफ क

छ आता है ।
बफलरो—फह

मह तो सच है । भगय त

भ इनकाय कयोगी तो उनका ददर


ट जामेगा।


णाय —मही डय भाये डारता है । भगय इनकाय न करॉ तो कमा करॉ । मह
तो भै बी जानती ह

ॉ कक वह झ

ठ-सच बमाह कय रे गे। बमाह कमा कय रे गे।
बमाह कमा कये गे , बमाह का नाभ कये गे। भगय सोचो तो द

तनमा कमा कहे गी।
रोग अबी से फदनाभ कय यहे है , तो न जाने औय कमा-कमा आऺेऩ रगामेगे।
भै सखी पेभा को भ

ॉह ददखाने मोगस नहीॊ यह

ॉगी। फस मही एक उऩाम है कक
जान दे द

ॉ , न यह फ ॉ स न फजे फ ॉ स

यी। उनको दो-चाय ददन तक यॊ ज यहे गा ,
आखखय ब

र जाऐॊगे। भेयी तो इजजत फच जामगी।
बफलरो—(फात ऩरट कय) इस सनद

कचे भे ’ कमा है ?


णाय-खोर कय दे खो।
बफलरो ने जो उसे खोरा तो एक ़ीभती कॊ गन हयी भखभर भे
रऩेटकय धया था औय सनक

भे सॊदर की स

गॊध आ यही थी। बफलरो ने
उसको तनकार ररमा औय चाहा की ऩ

णाय के हथ खीॊच ररमा औय ऑॊ खो भे
ऑॊ स

बय कय फोरी —भत बफलरो , इसे भत ऩहनाओ। सनद

क भे फॊद कयके
यख दो।
बफलरो—जया ऩहनो तो दे खो कै सा अचछा भार

भ होता है ।


णाय —कै से ऩहन

ॉ। मह तो इस फात का स

चक हो जाएगा कक उनकी
फात भॊज

य है ।
बफलरो-कमा मह बी इस चीठी भे ररखा है ?


णाय —ह ॉ , ररखा है कक भै आज शाभ को आऊॉ गा औय अगय कराई
ऩय कॊ गन दे ख
ूॉगा तो सभझ जाऊॉ गा कक भेयी फात भॊज

य है ।
बफलरो—कमा आज ही शाभ को आऍ ॊ गे ?


णाय —ह ॉ ।
मह कहकय ऩ

णाय ने रसय नीचा कय ररमा। नहाने कौन जाता है । खाने
ऩीने की ककसको स

ध है । दोऩहय तक च

ऩचाऩ फै ठी सोचा की। भगय ददर ने
कोई फात तनणय म न की ह ॉ , -जमो-जमो स ॉ झ का सभम तनकट आमा था तमो-
तमो उसका ददर धडकता जाता था कक उनके साभने कै से जाऊॉ गी। वह भेयी
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कराई ऩय कॊ गन न दे खगे तो कमा कहे गे ? कहीॊ रठ कय चरे न जामॉ ? वह
कहीॊ रयसा गमे तो उनको कै से भनाऊॉ गी ?भगय तबफम ता ़ामदा है कक जफ
कोई फात उसको अतत रौरीन कयनेवारी होती है तो थोडी दे य के फाद वह
उसे बागने रगती है । ऩ

णाय से अफ सोचा बी न जाता था। भाथे ऩय हाथ घये
भौन साधे धचनता की धचर फनी दीवाय की ओय ताक यही थी। बफलरो बी
भान भाये फै ठी ह

ई थी। तीन फजे होगे कक मकामक फाफ

अभ

तयाम की भान


आवाज दयवाजे ऩय बफलरो ऩ

कयाते स

नामी दी। बफलरो चट फाहय दौडी औय


णाय जलदी से अऩनी कोठयी भे घ

स गमी कक दवाजा बेड ररमा। उसका ददर
बय आमा औय वह ककवाड से धचभट कय प

ट-प

ट योने रगी। उधय फाफ


साहफ फह

त फेचै न थे। बफलरो जमोही फाहय तनकरी कक उनहोने उसकी तयफ
आस-बयी ऑॊ खो से दे खा। भगय जफ उसके चे हये ऩय ख

शी का कोई धचहन न
ददखामी ददमा तो वह उदास हो गमे औय दफी आवज भे फोरी —भहयी,


महायी उदासी दे खकय भेया ददर फै ठा जाता है ।
बफलरो ने इसका उततय क

छ न ददमा।
अभ

तयाम का भाथा ठनका कक जरय क

छ गडफड हो गमी। शामद
बफगड गमी। डयते-डयते बफलरो से ऩ

छा—आज हभाय आदभी आमा था?
बफलरो हा आमा था।
अभ

त—क

छ दे गमा?
बफलरो—दे कमो नहीॊ गमा।
अभ

त तो कमा ह

आ? उसको ऩहना?
बफलरो—ह ॉ , ऩहना अये ऑॊ ख बय के दे खा तो ह

ई नहीॊ। तफ से फै ठी यो
यही है । न खाने उठी, न गॊगा जी गमी।
अभ

त—क

छ कहा बी। कमा फह

त खफा है ?
बफलरो—कहतीॊ कमा? तबी से ऑॊ स

का ताय नहीॊ ट

टा।
अभ

तयाम सभझ गमे कक भेयी चार फ

यी ऩडी। अबी भ

झे क

छ ददन
औय धीयज यखना चादहए था। वह जरय बफगड गमीॊ। अफ कमा करॉ ? कमा
अऩना-सा भ

ॉह रे के रौट जाऊॉ ? मा एक दपा कपय भ

राकात कय र

ॉ तफ
रौट जाऊॉ कै से रौट

ॉ । रौटा जामगा ? हाम अफ न रौटा जामगा। ऩ

णाय त


दे खने भे फह

त सीधी औय बोरी है , ऩयनत

तेया हदम फह

त कठोय है । त

ने
भेयी फातो का ववशवास नहीॊ भाना त

सभझती है भै त

झसे कऩट कय यहा ह

ॉ।
ईशवय के ररए अऩने भन से मह शॊका तनकार डार। भै धीये -धीये तेये भोह भे
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कै सा जकड गमा ह

ॉ कक अफ तेये बफना जीना कदठन है । पमायी जफ भै ने


झसे ऩहर फातचीत की थी तो भ

झे इसकी कोई आशा न थी कक त

महायी
भीठी फातो औय त

महायी भनद भ

सकान का जाद



झ ऩय ऐसा चर जामगा
भगय वह जाद

चर गमा। औय अफ रसवाम त

महाये उसे औय कौन अताय
सकता है । नहीॊ , भै इस दयवाजे से कदावऩ नहीॊ दहर

ॉ गा। त

भ नायाज होगी।
झलराओगी। भगय कबी न कबी भ

झ ऩय तयस आ ही जामगा। फस अफ
मही कयना उधचत है । भगय दे खी पमायी , ऐसा न कयना कक भ

झसे फात
कयना छोड दो। नहीॊ तो भेया कहीॊ दठकाना नहीॊ। कमा त

भ हभसे सचभ


नायाज हो। हाम कमा त

भ ऩहयो से इसररए यो यही हो कक भेयी फातो ने


भको द

ख ददमा।
मह फाते सोचते-सोचते फाफ

साहफ की ऑॊ खो भे ऑॊ स

बय आमे औय
उनहोने गदगद सवय भे बफलरो से कहा —भहयी, हो सके तो जया उनसे भेयी


रा़ात कया दो। कह दो एक दभ के ररए रभर जामे। भ

झ ऩय इतनी क

ऩा
कयो।
भहयी ने जो उनकी ऑॊ खे रार दे खीॊ तो दौड ह

ई घय भे आमी ऩ

णाय के
कभये भे ककवाड खटखटाकय फोरी---फह

, कमा ाजफ कयती हो, फाहय तनकरो,
फेचाये खडे यो यहे है ।


णाय ने इयादा कय ररमा था कक भै उनके साभने कदावऩ न जाऊॉ गी।
वह भहयी से फातचीत कयके आऩ ही चरे जामॉगे। भगय जफ स

ना कक यो यहे
है तो पततऻा ट

ट गमी। फोरी—त

भन जा के कमा कह ददमा?
भहयी—भै न तो क

छ बी नहीॊ कहा।


णाय से अफ न यहा गमा। चट ककवाड खोर ददमे। औय क ॉ ऩती ह


आवाज से फोरी-सच फतराओ बफलरो, कमा फह

त यो यहे है ?
भहयी-नायामण जाने, दोनो ऑॊ खे रार टे स

हो गमी है । फेचाये फै ठे तक
नहीॊ। उनको योते दे खकय भेया बी ददर बय आमा।
इतने भे फाफ

अभ

तयाम ने ऩ

काय कय कहा —बफलरो, भै जाता ह

ॉ।
अऩनी सकायय से कह दो अऩयाध ऺभा कये ।


णाय ने आवाज स

नी। वह एक ऐसे आदभी की आवाज थी जो तनयाशा
के सभ

द भे ड

फता हो। ऩ

णाय को ऐसा भार

भ ह

आ जैसे उसके हदम को ककसी
ने छे द ददमा। ऑॊ खो से ऑॊ स

की झडी रग गमी। बफलरो ने कहा —फह

, हाथ
जोडती ह

ॉ, चरी चरो जजसभे उनकी बी खाततयी हो जाए।
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मह कहकय उसने आऩ से उठती ह

ई ऩ

णाय का हाथ ऩकड कय उठामा
औय वह घ

ॉघट तनकार कय , ऑॊ स

ऩोछती ह

ई , भदायने कभये की तयप चरी।
बफलरो ने दे खा कक उसके हाथो भे कॊ गन नहीॊ है । चट सनद

कची उठा रामी
औय ऩ

णाय का हाथ ऩकड कय चाहती थी कक कॊ गन वऩनहा दे । भगय ऩ

णाय ने
हाथ झटक कय छ

डा ररमा औय दभ की दभ भे फै ठक के बीतय दयवाजे ऩय
आके खडी यो यही थी। उसकी दोनो ऑॊ खे रार थी औय ताजे ऑॊ स

ओ की
ये खाऍ ॊ गारो ऩय फनी ह

ई थी। ऩ

णाय ने घ

ॉघट उठाकय पेभ-यस से बयी ह


ऑॊ खो से उनकी ओय ताका। दोनो की ऑॊ खे चाय ह

ई। अभ

तयाम फेफस होकय
फढे । रससकती ह

ई ऩ

णाय का हाथ ऩकड ररमा औय फडी दीनता से फोरे —


णाय , ईशवय के ररए भ

झ ऩय दमा कयो।
उनके भ

ॉह से औय क

छ न तनकरा। करणा से गरा फॉध गमा औय वह
सय नीचा ककमे ह

ए जवाफ के इजनतजाय भे खडा हो गमे। फेचायी ऩ

णाय का
धै मय उसके हाथ से छ

ट गमा। उसने योते-योते अऩना सय अभ

तयाम के कॊ धे
ऩय यख ददमा। क

छ कहना चाहा भगय भ

ॉह से आवाज न तनकरी। अभ

तयाम
ताड गमे कक अफ दे वी पसनन हो गमी। उनहोने ऑॊ खो के इशाये से बफलरो से
कॊ गन भॉगवामा। ऩ

णाय को धीये स क

सी ऩय बफठा ददमा। वह जया बी न
खझझकी। उसके हाथो भे कॊ गन वऩनहामे , ऩ

णाय ने जया बी हाथ न खीॊचा। तफ
अभ

तयाम न साहसा कयके उसके हाथो को च

भ ररमा औय उनकी ऑॊ खे पेभ
से भगन होकय जगभगाने रगीॊ। योती ह

ई ऩ

णाय ने भोहबफत-बयी तनगाहो से
उनकी ओय दे खा औय फोरी—पमाय अभ

तयाम त

भ सचभ

च जाद

गय हो।
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दसवाॉ अधमाम
वववाह हो गया
मह ऑॊ खो दे खी फात है कक फह

त कयके झ

ठी औय फे-रसय ऩै य की फाते
आऩ ही आऩ पै र जामा कयती है । तो बरा जजस फात भे सचचाई नाभभार
बी रभरी हो उसको पै रते ककतनी दे य रगती है । चायो ओय मही चचाय थी कक
अभ

तयाम उस ववधवा बाहभणी के घय फह

त आमा जामा कयता है । साये शहय
के रोग कसभ खाने ऩय उदमत थे कक इन दोनो भे क

छ स ॉ ठ-ग ॉ ठ जरय है ।


छ ददनो से ऩॊडाइन औयचौफाइन आदद ने बी ऩ

णाय के फनाव-च

नाव ऩय
नाक-बौ चढाना छोड ददमा था। कमोकक उनके ववचाय भे अफ वह ऐसे फनधनो
की बागी थी। जो रोग ववदवान थे औय दहनद

सतान के द

सये दे शो के हार
जानते थे उनको इस फात की फडी धचनता थी कक कहीॊ मह दोनो तनमोग न
कये रे । हजायो आदभी इस घात भे थे कक अगय कबी यात को अभ

तयाम


णाय की ओय जाते ऩकडे जामॉ तो कपय रौट कय घय न जाने ऩावे । अगय
कोई अबी तक अभ

तयाम की नीमत की सपाई ऩय ववशवास यखता था तो
वह पेभा थी। वह फेचायी ववयाहजगन भे जरते-जरते क ॉ टा हो गई थी , भगय
अबी तक उनकी भ

हबफत उसके ददर भे वै सी ही फनी ह

ई थी। उसके ददर भे
कोई फै ठा ह

आ कह यहा था कक तेया वववाह उनसे अवशम होगौ। इसी आशा
ऩय उसके जीवन का आधाय था। वह उन रोगो भे थी जो एक ही फाय ददर
का सौदा च

काते है ।
आज ऩ

णाय से वचन रेकय फाफ

साहफ फॉगरे ऩय ऩह

ॉचने बी न ऩामे थे
कक मह ऽफय एक कान से द

सये कान पै रने रगी औय शाभ होते-होते साये
शहय भे मही फात ग

ॉजने रगी। जो कोई स

नता उसे ऩहरे तो ववशवास न
आता। कमा इतने भान-भमायदा के ईसाई हो गमे है , फस उसकी शॊका रभट
जाती। वह उनको गाररम ॉ दे ता , कोसता। यात तो ककसी तयह कटी। सवेया
होते ही भ

ॊशी फदयीपसाद के भकान ऩय साये नगय के ऩॊडडत, ववदवान धनाढम
औय पततजषठत रोग एकर ह

ए औय इसका ववचाय होने रगा कक मह शादी
कै से योकी जाम।
ऩॊडडत ब



दतत—ववधवा वववाह वजजय त है कोई हभसे शासरथय कय रे।
वेदऩ

याण भे कहीॊ ऐसा अधधकाय कोई ददखा दे तो हभ आज ऩॊडडताई कयना
छोड दे ।
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इस ऩय फह

त से आदभी धचलरामे , ह ॉ , ह ॉ , जरय शासराथय हो।
शासरथय का नाभ स

नते ही इधय-उधय से सै कडो ऩॊडडत ववदमाथी फारो
भे ऩोधथमाॊ दफामे , रसय घ

टामे , अॉगोछा कॉ धे ऩय यकखे , भ

ॉह भे तभाक

बये ,
इकटे हो गमे औय झक-झक होने रगी कक जरय शासरथय हो। ऩहरे मह
शरोक ऩ

छा जाम। उसका मह उततय दे तो कपय मह पशन ककमा जावे। अगय
उततय दे ने भे वह रोग सादहतम मा वमाकयण भे जया बी च

के तो जीत हभाये
हाथ हो जाम। सै कडो कठभ

लरे गॉवाय बी इसी भणडरी भे रभरकय कोराहर
भचा यहे थे। भ

ॉशी फदयीपसाद ने जफ इनको शासरथय कयने ऩय उतार दे खा
तो फोरे —ककस से कयोगे शासराथय ? भान रो वह शासराथय न कये तफ?
सेठ ध

नीभर —बफना शासराथय ककमे वववाह कय रेगे (धोती समहार
कय) थाने भे यऩट कय द

ॉ गा।
ठॊ क

य जोयावय रसॊ ह—(भोछो ऩय ताव दे कय) कोई ठटा है बमाह कयना ,
रसय काट डार

ॉ गा। रोह

की नदी फह जामगी।
याव साहफ—फायता की फायात काट डारी जामगी।
इतने भे सै कडो आदभी औय आ डटे । औय आग भे ईधन रगाने रगे।
एक—जरय से जरय रसय गॊजा कय ददमा जाए।


सया—घय भे आग रगा दे गे। सफ फायात जर-ब

न जामगी।
तीसया—ऩहरे उस मारी का गरा घोट दे गे।
इधय तो मह हयफोग भचा ह

आ था , उधय दीवानखाने भे फह

त से
वकीर औय भ

खताय यभझलरा भचा यहे थे। इस वववाह को नमाम ववरद
साबफत कयने के ररए फडा उदमोग ककमा जा यहा था। फडी तेजी से भोटी-
भोटी ऩ

सतको के वयक उरटे जा यहे थे। फयसो की ऩ

यानी-ध

यानी नजीये ऩढी
जा यही थी कक कहीॊ से कोई दाॉव-ऩकड तनकर आवे। भगय कई घणटे तक
सय ऽऩाने ऩय क

छ न हो सका। आखखय मह समभतत ह

ई कक ऩहरे ठाक


जोयावय रसॊ ह अभ

तयाम का धभकावे । अगय इस ऩय बी वह न भाने तो जजस
ददन फायात तनकरे सडक ऩय भायऩीट की जाम। इस पसताव के फाद न भानो
तो ववसजय न ह

ई। फाफ

अभ

तयाम फमाह की तैमारयमो भे रगे ह

ए थे कक ठाक


जोयावय रसॊ ह का ऩर ऩह

ॉचा। उसभे ररखा था—
‘फाफ

अभ

तयाम को ठाक

य जोयावय रसॊ ह का सराभ-फॊदगी फह

त-फह


तयह से ऩह

ॉचे । आगे हभने स

ना है कक आऩ ककसी ववधवा बाहभणी से
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वववाह कयने वारे है । हभ आऩसे कहे दे ते है कक ब

र कय बी ऐसा न
कीजजएगा। नहीॊ तो आऩ जाने औय आऩका काभ।’
जोयावय रसॊ ह एक धनाढम औय पततजषठत आदभी होने के उऩयानत उस
शहय के रठै तो औयफ ॉ के आदरभमो का सयदाय था औय कई फेय फडे -फडो को
नीचा ददखा च

का था। असकी धभकी ऐसी न थी कक अभ

तयाम ऩय उसका


छ असय न ऩडता। धचटी को दे खते ही उनके चे हये का यॊ ग उड गमा।
सोचना रगे कक ऐसी कौन-सी चार चर

ॉ कक इसको अऩना आदभी फना र


कक इतने भे द

सयी धचटी ऩह

ॉची। मह ग

भनाभ थी औय सका आशा बी
ऩहरी धचटी से रभरता था। इसके फाद शाभ होते -होते सै कडो ग

भनाभ
धचदटम ॉ आमीॊ। कोई की कहता था कक अगय कपय बमाह का नाभ ररमा तो
घय भे आग रगा दे गे। कोई सय काटने की धभकी दे ता था। कोई ऩेट भे


यी बोकने के ररए तैमाय था। ओय कोई भ

ॉछ के फात उखाडने के ररए


टककम ॉ गभय कय यहा था। अभ

तयाम मह तो जानते कक शहयवारे ववयोध
अवशम कये गे भगय उनको इस तयह की याड का ग

भान बी न था। इन
धभककमो ने जया दे य के ररए उनहे बम भे डार ददमा। अऩने से अधधक
खटका उनको ऩ

णाय के फाये भे था कक कहीॊ मही सफ द

षट उसे न कोई हातन
ऩह

ॉचावे । उसी दभ कऩडे ऩदहन , ऩै यगाडी ऩय सवाॊय होकय चटऩट भजजसरे ट
की सेवा भे उऩजसथत ह

ए औय उनसे ऩ

या-ऩ

या व

ततानत कहा। फाफ

साहफ का
अॊगे जो भे फह

त भान था। इसररए नहीॊ कक वह ख

शाभदी थे मा अपसयो की


जा ककमा कयते थे ककनत

इसररए कक वह अऩनी भमायदा यखना आऩ जानते
थे। साहफ ने उनका फडा आदय ककमा। उनकी फाते फडे धमान से स

नी।
साभाजजक स

धाय की आवशकता को भाना औय ऩ

ररस के स

ऩरयणटे णडे ट को
ररखा कक आऩ अभ

तयाम की यऺा के वासते एक गायद यवाना कीजजए औय
ऽफय रेते यदहए कक भायऩीट , ख

नखयाफ न हो जाम। स ॉ झ होते —होते तीस
रसऩादहमो का एक गायद फाफ

साहफ के भकान ऩय ऩह

ॉच गमा , जजनभे से
ऩ ॉ च फरवान आदभी ऩ

णाय के भकान की दहफाजत कयने के ररए बेज गमे।
शहयवारो ने जफ दे खा कक फाफ

साहफ ऐसा पफनध कय यहे है तो औय
बी झलरामे। भ

ॊशी फदयीपसाद अऩने सहामको को रेकय भजजसरे ट के ऩास
ऩह

ॉचे औय द

हाई भचाई कक अगय वह वववाह योक न ददमा गमा तो शहय भे
फडा उऩदव होगा औय फरवा हो जाने का डय है । भगय साहफ सभझ गमे कक
मह रोग रभरज

र कय अभ

तयाम को हातन ऩह

ॉचामा चाहते है । भ

ॊशी जी से
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कहा कक सकायय ककसी आदभी की शादी-वववाह भे ववघन डारना तनमभ के
ववरद है । जफ तक कक उस काभ से ककसी द

सये भन

षम को कोई द

ख न हो।
मह टका-सा जवाफ ऩाकय भ

ॊशी जी फह

त रजजजत ह

ए। वह ॉ से जर-ब

नकय
भकान ऩय आमे औय अऩने सहामको के साथ फै ठकय पै सरा ककमा कक जमो
ही फायात तनकरे , उसी दभ ऩचास आदभी उस ऩय ट

ट ऩडे। ऩ

ररसवारो की
बी खफय रे औय अभ

तयाम की बी हडडी-ऩसरी तोडकय धय दे ।
फाफ

अभ

तयाम के ररए मह सभम फह

त नाज

क था। भगय वह दे श का
दहतैषी तन-भन-धन से इस स

धाय के काभ भे रगा ह

आ था। वववाह का ददन
आज से एक सपताह ऩीछे तनमत ककमा गमा। कमोकक जमादा ववरमफ कयना
उधचत न था औय मह सात ददन फाफ

साहफ ने ऐसी है यानी भे काटे कक
जजसक वणय न नहीॊ ककमा जासकात। पततददन वह दो काॊसटे बफरो के साथ
वऩसतौरो की जोडी रगमो दो फेय ऩ

णाय के भकान ऩय आते। वह फेचायी भाये
डय के भयी जाती थी। वह अऩने को फाय-फाय कोसती कक भै ने कमो उनको
आशा ददराकय मह जोखखभ भोर री। अगय इन द

षटो ने कहीॊ उनहे कोई
हातन ऩह

ॉचाई तो वह भेयी ही नादानी का पर होगा। मदमवऩ उसकी यऺा के
ररए कई रसऩाही तनमत थे भगय यात-यात बय उसकी ऑॊ खो भे नीॊद न
आती। ऩतता बी खडकता तो चौककय उठ फै ठती। जफ फाफ

साहफ सफेये
आकय उसको ढायस दे ते तो जाकय उसके जान भे जान आती।
अभ

तयाम ने धचदटम ॉ तो इधय-उधय बेज ही दी थीॊ। वववाह के तीन-
चाय ददन ऩहरे से भेहभान आने रगे। कोई भ

मफई से आता था , कोई
भदयास से , कोई ऩॊजाफ से औय कोई फॊगार से । फनायस भे साभाजजक स

धाय
के ववयाधधमो का फडा जोय था औय साये बायतवषय के रयफभय यो के जी भे रगी


ई थी कक चाहे जो हो, फनायस भे स

धाय के चभतकाय पै राने का ऐसा अऩ

वय
सभम हाथ से न जाने दे ना चादहए , वह इतनी द

य-द

य से इसररए आते थे
कक सफ काशी की ब

रभ भे रयपाभय की ऩताका अवशम गाड दे । वह जानते थे
कक अगय इस शहय भे मह वववाह हो तो कपय इस स

फे के द

सये शहयो के
रयपाभय यो के ररए यासता ख

र जामगा। अभ

तायाम भेहभानो की आवबगत भे
रगे ह

ए थे। औय उनके उतसाही चे रे साप-स

थये कऩडे ऩहने सटे शन ऩय जा-
जाकय भेहभानो को आदयऩ

वय क राते औय उनहे सजे ह

ए कभयो भे ठहयाते थे।
वववाह के ददन तक मह ॉ कोई डे ढ सौ भेहभान जभा हो गमे। अगय कोई
भन

षम साये आमायवतय की सभमता , सवतॊरता , उदायता औय दे शबजकत को
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एकबरत दे खना चाहता था तो इस सभम फाफ

अभ

तयाम के भकान ऩय दे ख
सकता था। फनायस के ऩ

यानी रकीय ऩीटने वारे रोग इन तैमारयमो औय ऐसे
पततजषठत भेहभानो को दे ख-दे ख द ॉ तो उॉ गरी दफाते। भ

ॊशी फदयीपसाद औय
उनके सहामको ने कई फेय ध

भ-धाभ से जनसे ककमे हयफेय मही फात तम ह


कक चाहे जो भायऩीट जरय की जाम। वववाह क ऩहरे शाभ को फाफ

अभ

तयाम
अऩने साधथमो को रेकय ऩ

णाय के भकान ऩय ऩह

ॉचे औय वह ॉ उनको फयाततमो
के आदय-समभान का पफॊध कयने के ररए ठहया ददमा। इसके फाद ऩ

णाय के
ऩास गमे। इनको दे खते ही उसकी ऑॊ खे भे ऑॊ स

बय आमे।
अभ

त—(गरे से रगाकय) पमायी ऩ

णाय , डयो भत। ईशवय चाहे गा तो फै यी
हभाया फार बी फ

का न कया सके । कर जो फयात मह ॉ आमेगी वै सी आज
तक इस शहय भे ककसी के दयवाजे ऩय न आमी होगी।


णाय —भगय भै कमा करॉ । भ

झे भो भार

भ होता है कक कर जरय
भायऩीट होगी। चायो ओ से मह खफय स

न-स

न भेया जी आधा हो यहा है । इस
वकत बी भ

ॊशी जी के मह ॉ राग जभा है ।
अभ

त—पमायी त

भ इन फातो को जया बी धमान भे न राओॊ। भ

ॊशी जी
के मह ॉ तो ऐसे जरसे भहीनो से हो यहे है औय सदा ह

आ कये गे। इसका कमा
डय। ददर को भजफ

त यकखो। फस , मह यात औय फीच है । कर पमायी ऩ

णाय
भेये घय ऩय होगी। आह वह भेये ररए कै से आननद का सभम होगा।


णाय मह स

नकय अऩना डय ब

र गमी। फाफ

साहफ को पमायी की
तनगाहो से दे खा औय जफ चरने रगे तो उनके गरे से ररऩट कय फोरी —


भको भेयी कसभ, इन द

षटो से फचे यहाना।
अभ

तयाम ने उसे छाती से रगा ररमा औय सभझा-फ

झाकय अऩने
भकान को यवाना ह

ए।
ऩहय यात गमे , ऩ

णाय के भकान ऩय , कई ऩॊडडत ये शभी फाना सजे , गरे
भे प

रो का हाय डारे आमे ववधधऩ

वय क रकभी की ऩ

जा कयने रगे। ऩ

णाय
सोरहो रसॊ गाय ककमे फै ठी ह

ई थी। चायो तयप गैस की योशनी से ददन के
सभान पकाश हो यहा था। काॊसटे बफर दयवाजे ऩय टहर यहे थे। दयवाजे का
भै दान साप ककमा जा यहा था औय शारभमाना खडा ककमा जा यहा था।


रसय म ॉ रगामी जा यही थीॊ , पशय बफछामा गमा , गभरे सजसमे गमे। सायी
यात इनहीॊ तैमारयमो भे कटी औय सफेया होते ही फायात अभ

तयाम के घय से
चरी।
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फायात कमा थी सभमता औय सवाधीनता की चरती-कपयती तसवीय थी।
न फाजे का धड-धड ऩड-ऩड , न बफग

रो की धो धो ऩो ऩो , न ऩारककमो का


भय ट, न सजे ह

ए घोडो की धचलराऩो , न भसत हाधथमो का ये रऩेर, न सोटे
फलरभवारो की कताया , न प

रवाडी , न फगीचे , फजलक बरे भान

षो की एक
भॊडरी थी जो धीये -धीये कदभ फढाती चरी जा यही थी। दोनो तयप जॊगी


ररस के आदभी वददय म ॉ ड ॉ टे सोटे ररमे खडे थे। सडक के इधय-उधय झ

ॊड के


ॊड आदभी रमफी-रमफी रादठम ॉ ररमे एकर औय थे फायात की ओय दे ख-
दे ख द ॉ त ऩीसते थे। भगय ऩ

ररस का वह योफ था कक ककसी को च

ॉ कयने का
बी साहस नहीॊ होता था। फायाततमो से ऩचास कदभ की द

यी ऩय रयजवय


ररस के सवाय हधथमायो से रै स, घोडो ऩय यान ऩटयी जाभमे , बारे चभकाते
ओय घोडो को उछारते चरे जाते थे। ततस ऩय बी सफको मह खटका रग


आ था कक कहीॊ ऩ

ररस के बम का मह ततररसभ ट

ट न जाम। मदमवऩ
फायाततमो के चे हये से घफयाहट रेशभार बी न ऩाई जाती थी तथावऩ ददर
सफके धडक यहे थे। जया बी सटऩट होती तो सफके कान खडे हो जाते। एक
फेय द

षटो ने सचभ

च धावा कय ही ददमा। चायो ओय हरचर भचगी। भगय
उसी दभ ऩ

ररस ने बी डफर भाचय ककमा औय दभ की दभ भे कई फसाददमो
की भ

शके कस रीॊ। कपय ककसी को उऩदव भचाने का साहस न ह

आ। फाये
ककसी तयह घॊटे बय भे फायात ऩ

णाय के भकान ऩय ऩह

ॉची। मह ॉ ऩहरे से ही
फायाततमो के श

बागभन का साभान ककमा गमा था। ऑॊ गन भे पशय रगा ह


था। क

रसय म ॉ धयी ह

ई थीॊ ओय फीचोफीच भे कई ऩ

जम बहभण हवनक

णड के
ककनाये फै ठकय आह

तत दे यहे थे। हवन की स

गनध चायो ओय उड यही थी।
उस ऩय भॊरो के भीठे -भीठे भधमभ औय भनोहय सवय जफ कान भे आते तो
ददर आऩ ही उछरने रगता। जफ सफ फायती फै ठ गमे तफ उनके भाथे ऩय
के सय औय चनदन भरा गमा। उनके गरो भे हाय डारे गमे औय फाफ


अभ

तयाम ऩय सफ आदभीमो ने ऩ

षऩो की वषाय की। इसके ऩीछे घय भकान के
बीतय गमा औय वह ॉ ववधधऩ

वय क वववाह ह

आ। न गीत गामे गमे , न गारी-
गरौज की नौफत आमी, न नेगचाय का उधभ भचा।
बीतय तो शादी हो यही थी , फाहय हजायो आदभी रादठम ॉ औय सोटे
ररए ग

र भचा यहे थे। ऩ

ररसवारे उनको योके ह

ए भकान के चौधगदय खडे थे।
इसी फची भे ऩ

ररस का कपतान ब आ ऩह

ॉचा। उसने आते ही ह

कभ ददमा कक
बीड हटा दी जाम। औय उसी दभ ऩ

ररसवारो ने सोटो से भायभाय कय इस
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बीड को हटाना श

र ककमा। जॊगी ऩ

ररस ने डयाने के ररए फनद

को की दो-चाय
फाढे हवा भे सय कय दी। अफ कमा था , चायो ओय बगदड भच गमी। रोग
एक ऩय एक धगयने रगे। भगय ठीक उसी सभम ठाक

य जोयावय रसॊ ह फाॉकी
ऩधगमा फ ॉ धे , यजऩ

ती फाना सजे , दोहयी वऩसतौर रगामे ददखामी , ददमा।
उसकी भ

ॉछे खडी थी। ऑॊ खो से अॊगाये उड यहे थे। उसको दे खते ही वह रोफ
जो तछततय-बफतत हो यहे थे कपय इकटा होने रगो। जैसे सयदाय को दे खकय
बागती ह

ई सेना दभ ऩकड रे। दे खते ही दे खते हजाय आदभी से अधधक
एकर हो गमे। औय तरवाय के धनी ठाक

य ने एक फाय कडक कय कहा —‘जै


गाय जी की वहीॊ साये ददरो भे भानो बफजरी कौध गमी , जोश बडक उठा।
तेवरयमो ऩय फर ऩड गमे औय सफ के सफ नद की तयह उभडते ह

ए आगे को
फढे । जॊगी ऩ

ररसवारे बी सॊगीने चढामे , साफ फ ॉ धे , डटे खडे थे। चायो ओय
बमानक सननाटा छामा ह

आ था। धडका रगा ह

आ था कक अफ कोई दभ भे
रोह

की नदी फहा चाहती है । कपतान ने जफ इस फाढ को अऩने ऊऩय आते
दे खा तो अऩने रसऩादहमो को ररकाया औय फडे जीवट से भै दान भे आकय
सवायो को उबायने रगा कक मकामक वऩसतौर की आवाज आमी औय कपतान
की टोऩी जभीन ऩय धगय ऩडी भगय घाव ओछा रगा। कपतान ने दे ख ररमा
था। कक मह वऩसतौर जोयावय रसॊ ह ने सय की है । उसने बी चट अऩनी
फनद

क सॉबारी ओय तनशाने का रगाना था कक ध ॉ म से आवाज ह

ई ओय
जोयावय रसॊ ह चायो खाने धचतत जभीन ऩय आ यहा। उसके धगयते ही सफके
दहमाव छ

ट गमे। वे बेडो की ब ॉ तत बगाने रगे। जजसकी जजधय सीॊग सभाई
चर तनकरा। कोई आधा घणटे भे वह ॉ धचडडमा का ऩ

त बी न ददखामी ददमा।
फाहय तो मह उऩदव भचा था , बीतय द

रहा-द

रदहन भाये डय के स

खे
जाते थे। फाफ

अभ

तयाम जी दभ-दभ की खफय भॉगाते औय थय-थय क ॉ ऩती


ई ऩ

णाय को ढायस दे ते। वह फेचायी यो यही थी कक भ

झ अबाधगनी के ररए
भाथा वऩटौवर हो यही है कक इतने भे फनद

क छ

टी। मा नायामण अफ की
ककसकी जान गई। अभ

तयाम घफयाकय उठे कक जया फाहय जाकय दे खे । भगय


णाय से हाथ न छ

डा सके । इतने भे एक आदभी ने कपय आकय कहा —फाफ


साहफ ठाक

य ढे य हो गमे। कपतान ने गोरी भाय दी।
आधा घणटे भे भै दान साफ हो गमा औय अफ मह ॉ से फयात की बफदाई
की ठहयी। ऩ

णाय औय बफलरो एक सेजगाडी भे बफठाई गई औय जजस सज-धज
से फयात आमी थी असी तयह वाऩस ह

ई। अफ की ककसी को सय उठाने का
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साहस नहीॊ ह

आ। इसभे सनदे ह नहीॊ कक इधय-उधय झ

ॊड आदभी जभा थे औय
इस भॊडरी को कोध की तनगाहो से दे ख यहे थे। कबी-कबी भनचरा जवान
एकाध ऩतथय बी चरा दे ता था। कबी ताररम ॉ फजामी जाती थीॊ। भ

ॉह धचढामा
जाता था। भगय इन शयायतो से ऐसे ददर के ऩोढे आदरभमो की गमबीयता भे
कमा ववधन ऩड सकता था। कोई आधा घणटे भे फयात दठकाने ऩय ऩह

ॉची।


जलहन उतायी गमी ओय फयाततमाॊ की जान भे जान अमी। अभ

तयाम की


शी का कमा ऩ

छना। वह दौड-दौड सफसे हाथ रभराते कपयते थे। फ ॉ छे खखरी
जाती थीॊ। जमोही द

जलहन उस कभये भे ऩह

ॉची जो सवमॊ आऩ ही द

जलहन की
तयह सजा ह

आ था तो अभ

तयाम ने आकय कहा —पमायी, रोहभ क

शर से
ऩह

ॉच गमे। ऐॊ , त

भ तो यो यही हो...मह कहते ह

ए उनहोने रभार से उसके
ऑॊ स

ऩोछे औय उसे गरेसे रगामा।
पेभ यस की भाती ऩ

णाय ने अभ

तयाम का हाथ ऩकड ररमा औय फोरी—
आऩ तो आज ऐसे पसननधचतत है , भानो कोई याज रभर गमा है ।
अभ

त—(ररऩटाकय) कोई झ

ठ है जजसे ऐसी यानी रभरे उसे याज की
कमा ऩयवाह
आज का ददन आननद भे कटा। द

सये ददन फयाततमो ने बफदा होने की
आऻा भ ॉ गी। भगय अभ

तयाम की मह सराह ह

ई कक रारा धन

षधायीरार
कभ से कभ एक फाय सफको अऩने वमाखमान से क

तऻ कये मह सराह सफो
ऩसॊद आमी। अभ

तयाम ने अऩने फगीचे भे एक फडा शारभमान खडा कयवामा
औय फडे उतसव से सबा ह

ई। वह ध

ऑॊ धय वमाखमान ह

ए कक साभाजजक


धाय का गौयव सफके ददरो भे फै ठे गमा। कपय तो दो जरसे औय बी ह


औय द

ने ध

भधाभ के साथ। साया शहय ट

टा ऩडता था। सै कडो आदरभमो का
जनेऊ ट

ट गमा। इस उतसव के फाद दो ववधवा वववाह औय ह

ए। दोनो द

लहे
अभ

तयाम के उतसाही सहामको भे थे औय द

जलहनो भे से एक ऩ

णाय के साथ
गॊगा नहानेवारी याभकरी थी। चौथे ददन सफ नेवतहयी बफदा ह

ए। ऩ

णाय फह


कननी काटती कपयी , भगय फयाततमो के आगह से भजफ

य होकय उनसे


राकात कयनी ही ऩडी। औय रारा धन

षधायीरार ने तो तीन ददन उसे
फयाफय सरी-धभय की रशऺा दी।
शादी के चौथे ददन फाद ऩ

णाय फै ठी ह

ई थी कक एक औयत ने आकय
उसके एक फॊद ररफापा ददमा। ऩढा तो पेभा का पेभ-ऩर था। उसने उसे


फायकफादी दी थी औय फाफ

अभ

तयाम की वह तसवीय जो फयसो से उसके
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गरे का हाय हो यही थी , ऩ

णाय के ररए बेज दी थी। उस ऽत की आखखयी
सतये मह थीॊ ---
‘सखी, त

भ फडी बागमवती हो। ईशवय सदा त

महाया सोहाग कामभ यखे ।


महाये ऩतत की तसवीय त

महाये ऩास बेजती ह

ॉ। इसे भेयी मादगाय सभझाना।


भ जानती हो कक भै इसको जान से जमादा पमायी सभझती यही। भगय अफ
भै इस मोगम नही कक इसे अऩने ऩास यख सक

ॉ । अफ मह त

भको भ

फायक
हो। पमायी , भ

झे ब

रना भत । अऩने पमाये ऩतत को भेयी ओय से धनमवाद
दे ना।


महायी अबाधगनी सखी—
पेभा’

अपसोस आज के ऩनदवे ददन फेचायी पेभा फाफ

दाननाथ के गरे फ ॉ धी
दी गमी। फडे ध

भधभ से फयात तनकरी। हजायो रऩमा र

टा ददमा गमा। कई
ददन तक साया शहय भ

ॊशी फदयीपसाद के दयवाजे ऩय नाच दे खता यहा। राखो
का वाय-नमाया हो गमा। बमाह के तीसये ही ददन भ

ॊशी जी ऩयरोक को
रसधाये । ईशवय उनको सवगय वास दे ।
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गमायहवाॉ अधमाम
ववरोधियो का ववरोि
भेहभानो के बफदा हो जाने के फाउ मह आशा की जाती थी कक
ववयोधी रोग अफ रसय न उठामेगे। ववशे ष इसररए कक ठाक

य जोयावाय रसॊ ह
औय भ

ॊशी फदयीपसाद के भय जाने से उनका फर फह

त कभ हो गमा था।
भगय मह आशा ऩ

यी न ह

ई। एक सपताह बी न ग

जयने ऩामा था कक औय
अबी स

धचत से फै ठने बी न ऩामे थे कक कपय मही द ॉ तककरककर श

र हो
गमी।
अभ

तयाम कभये भे फै ठे ह

ए एक ऩर ऩढ यहे थे कक भहयाज च

ऩके से
आमा औय हाथ जोडकय खडा हो गमा। अभ

तयाम ने सय उठाकय उसको दे खा
तो भ

सकयाकय फोरे —कै से चरे भहायाज?
भहयाज—हज

य, जान फकसी होम तो कह

ॉ।
अभ

त—शौक से कहो।
भहयाज—ऐसा न हो कक आऩ रयसहे हो जामॉ।
अभ

त—फात तो कहो।
भहयाज—हज

य, डय रगती है ।
अभ

त—कमा तनखवाह फढवाना चाहते हो?
भहयाज—नाहीॊ सयकाय
अभ

त—कपय कमा चाहते हो?
भहयाज—हज

य,हभाया इसतीपा रे ररमा जाम।
अभ

त—कमा नौकयी छोडोगे ?
भहयाज—ह ॉ सयकाय। अफ हभसे काभ नहीॊ होता।
अभ

त—कमो, अबी तो भजफ

त हो। जी चाहे तो क

छ ददन आयाभ कय
रो। भगय नौकयी कमो छोडो भहयाज—नाहीॊ सयकाय, अफ हभ घय को जाइफ।
अभ

त—अगय त

भको मह ॉ कोई तकरीफ हा तो ठीक-ठीक कह दो।
अगय तनखवाह कहीॊ औय इसके जमादा रभरने की आशा हो तो वै सा कहो।
भहयाज—हज

य, तनखमावह जो आऩ दे ते है कोई कमा भाई का रार
दे गा।
अभ

तयाम—कपय सभझ भे नहीॊ आता कक कमो नौकयी छोडना चहाते
हो?
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भहयाज—अफ सयकाय, भै आऩसे कमा कह

ॉ। मह ॉ तो मह फाते हो यही
थीॊ उधय चमभन व यमभन कहाय औय बगेर

व द

कखी फायी आऩस भे फाते
कय यहे थे।
बगेर

—चरो, चरो जलदी। नहीॊ तो कचहयी की फेरा आ जैहै ।
चमभन—आगे-आगे त

भ चरो।
बगेर

—हभसे आग

ॉ न चरा जैहै ।
चमभन—तफ कौन आग

ॉ चरै ?
बगेर

—हभ के का फताई।
यमभन—कोई न चरै आग

ॉ तो हभ चररत है ।


कखी—तै आगे एक फात कदहत है । नह कोई आग

ॉ चरे न कोई ऩीछ

ॉ ।
चमभन---कपय कै से चरा जाम।
बगेर

—सफ साथ-साथ चरै ।
चमभन—त

महाय ़ऩाय
बगेर

—साथ चरे भाॉ कौन हयज है?
भमभन—तफ सयकाय से फततमामे कौन?
बगेर

—द

कखी का ख

फ बफततमाफ आवत है ।


कखी—अये याभ ये भै उनके ताई न जैह

ॉ। उनका दे ख के भोका भ

तास
हो आवत है ।
बगेर

---अचछा, कोऊ न चरै तो हभ आग

ॉ चररत है
सफ के सफ चरे। जफ फयाभदे भे ऩह

ॉचे तो बगेर

रक गमा।
भमभन—ठाढे काहे हो गमो? चरे चरौ।
बगेर

---अफ हभ न जाफै । हभाया तो छाती धडत है ।
अभ

तयाम ने जो फयाभदे भे इनको स ॉ म-साॉम फाते कयते स

ना तो कभये
से फाहय तनकर आमे औय हॉस कय ऩ

छा—कै से चरे , बगेर

?
बगेर

का दहमाव छ

ट गमा। रसय नीचा कयके फोरा —हज

य, मह सफ
कहाय आऩसे क

छ कहने आमे है ।
अभ

तयाम—कमा कहते है? मह सफ तो फोरते ही नहीॊ
बगेर

—(कहायो से) त

भको जौन क

छ कहना होम सयकाय से कहो।
कहाय बगेर

के इस तयह तनकर जाने ऩय ददर भे फह

त झलरमे।
चमभन ने जया तीखे होकय कहा —त

भ काहे नाहीॊ कहत हौ ? त

महाय भ

ॉह भे
जीब नहीॊ है?
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अभ

तयाम—हभ सभझ गमे। शामद त

भ रोग इनाभ भ ॉ गने आमे हो।
कहायो से अफ रसवाम ह ॉ कहने के औय क

छ न फन ऩडा। अभ

तयाम ने उसी
दभ ऩ ॉ च रऩमा बगेर

के हाथ ऩय यख ददमा। जफ मह सफ कपय अऩनी
काठयी भे आमे तो मो फाते कयने रगे —
चमभन—बगेर

आ फडा फोदा है ।
यमभन—अस यीस रागत यहा कक खाम बये का दे ई।


कखी—वह ॉ जाम के ठक

यासोहाती कयै रागा।
बगेर

—हभासे तो उनके साभने क

छ कहै न गवा।


कखी---तफ काहे को मह ॉ से आगे-आगे गमा यहमो।
इतने भे स

खई कहाय रकडी टे कता खसता ह

आ आ ऩह

ॉचा। औय
इनको जभा दे खकय फोरा—का बवा? सयकाय का कहे न?


कखी—सयकाय के साभने जाम कै सफ ग

ॉगे हो गमे। कोई के भ

ॉह से
फात न ररकरी।
बगेर

—स

खई दादा त

भ तनमाव कयो , जफ सयकाय हॉसकय इनाभ दे
रागे तफ कै से कहा जात कक हभ नौकयी छोडन आमे है ।


खई—हभ तो त

भसे ऩहरे कह दीन कक मह ॉ नौकयी छोडी के सफ
जने ऩछतैहो। अस बराभान

ष कह

ॉ न रभरे।
बगेर

—दादा, त

भ फात राख रऩमा की कहत हो।
चमभन—एभ ॉ कौन झ

ठ है । अस भनई काह ॉ रभरे।
यमभन आज दस फयस यहत बमे भ

दा आधी फात कफह

ॉ नाहीॊ कहे न।
बगेर

—यीस तो उनके दे ह भे छ

नहीॊ गै। जफ फात कयत है हॉसकय।
भमभन—बै मा, हभसे कोऊ कहत कक त

भ फीस करदाय रेव औय हभाये
मह ॉ चर के काभ कयो तो हभ सयाकय का छोड के कह

ॉ न जाइत। भ

दा
बफयादयी की फात ठहयी। ह

कका-ऩानी फनद होई गवा तो कपय के ह के दवाये
जैफ।
यमभन—मही डय तो जान भाये डारते है ।
चमभन—चौधयी कह गमे है ककआज इनके य काभ न छोड दे हो तो टाट
फाहय कय दीन जैही।


खई—हभ एक फेय कह दीन कक ऩछतौहो। जस भन भे आवे कयो।
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कहाय बगेर

के इस तयह तनकर जाने ऩय ददर भे फह

त झलरमे।
चमभन ने जया तीखे होकय कहा —त

भ काहे नाहीॊ कहत हौ ? त

महाय भ

ॉह भे
जीब नहीॊ है?
अभ

तयाम—हभ सभझ गमे। शामद त

भ रोग इनाभ भ ॉ गने आमे हो।
कहायो से अफ रसवाम ह ॉ कहने के औय क

छ न फन ऩडा। अभ

तयाम ने
उसी दभ ऩ ॉ च रऩमा बगेर

के हाथ ऩय यख ददमा। जफ मह सफ कपय अऩनी
काठयी भे आमे तो मो फाते कयने रगे —
चमभन—बगेर

आ फडा फोदा है ।
यमभन—अस यीस रागत यहा कक खाम बये का दे ई।


कखी—वह ॉ जाम के ठक

यासोहाती कयै रागा।
बगेर

—हभासे तो उनके साभने क

छ कहै न गवा।


कखी---तफ काहे को मह ॉ से आगे-आगे गमा यहमो।
इतने भे स

खई कहाय रकडी टे कता खसता ह

आ आ ऩह

ॉचा। औय
इनको जभा दे खकय फोरा—का बवा? सयकाय का कहे न?


कखी—सयकाय के साभने जाम कै सफ ग

ॉगे हो गमे। कोई के भ

ॉह से
फात न ररकरी।
बगेर

—स

खई दादा त

भ तनमाव कयो , जफ सयकाय हॉसकय इनाभ दे
रागे तफ कै से कहा जात कक हभ नौकयी छोडन आमे है ।


खई—हभ तो त

भसे ऩहरे कह दीन कक मह ॉ नौकयी छोडी के सफ
जने ऩछतैहो। अस बराभान

ष कह

ॉ न रभरे।
बगेर

—दादा, त

भ फात राख रऩमा की कहत हो।
चमभन—एभ ॉ कौन झ

ठ है । अस भनई काह ॉ रभरे।
यमभन आज दस फयस यहत बमे भ

दा आधी फात कफह

ॉ नाहीॊ कहे न।
बगेर

—यीस तो उनके दे ह भे छ

नहीॊ गै। जफ फात कयत है हॉसकय।
भमभन—बै मा, हभसे कोऊ कहत कक त

भ फीस करदाय रेव औय हभाये
मह ॉ चर के काभ कयो तो हभ सयाकय का छोड के कह

ॉ न जाइत। भ

दा
बफयादयी की फात ठहयी। ह

कका-ऩानी फनद होई गवा तो कपय के ह के दवाये
जैफ।
यमभन—मही डय तो जान भाये डारते है ।
चमभन—चौधयी कह गमे है ककआज इनके य काभ न छोड दे हो तो टाट
फाहय कय दीन जैही।
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खई—हभ एक फेय कह दीन कक ऩछतौहो। जस भन भे आवे कयो।
आठ फजे यात को जफ फाफ

अभ

तयाम सै य रयके आमे तो कोई टभटभ
थानेवारा न था। चायो ओय घ

भ-घ

भ कय ऩ

काया। भगय ककसी आहट न
ऩामी। भहायाज, कहाय, साईस सबी चर ददमे। महाॉ तक कक जो साईस उनके
साथ था वह बी न जाने कह ॉ रोऩ हो गमा। सभझ गमे कक द

षटो ने छर
ककमा। घोडे को आऩ ही खोरने रगे कक स

खई कहाय आता ददखाई ददमा।
उससे ऩ

छा —मह सफ के सफ कह ॉ चरे गमे ? स

खई —(ख ॉ सकय) सफ छोड
गमे। अफ काभ न कयै गे।
अभ

तयाम—त

महे क

छ भार

भ है इन सबो ने कमो छोड ददमा?


खई—भार

भ काहे नाहीॊ , उनके बफयादयीवारे कहते है इनके मह ॉ काभ
भत कयो। अभ

तयाम याम की सभझ भे ऩ

यी फात आ गमी कक ववयाधधमो ने
अऩना कोई औय फस न चरते दे खकय अफ मह ढॊ ग यचा है । अनदय गमे तो
कमा दे खते है कक ऩ

णाय फै ठी खाना ऩका यही है । औय बफलरो इधय-उधय दौड
यही है । नौकयो ऩय द ॉ त ऩीसकय यह गमे। ऩ

णायसे फोरे---आज त

भको फडा
कषट उठाना ऩडा।


णाय —(हॉसकय) इसे आऩ कषट कहते है । मह तो भेया सौबागम है ।
ऩतनी के अधयो ऩय भनद भ

सकान औय ऑॊ खो भे पेभ दे खकय फाफ

साहफ के
चढे ह

ए तेवय फदर गमे। बडकता ह

आ कोध ठॊ डा ऩड गमा औय जैसे नाग


ॉफी फाजे का शबद स

नकय धथयकने रगता है औय भतवारा हो जाता उसी
ब ॉ तत उस घडी अभ

तयाम का धचतत बी ककरोरे कयने रगा। आव दे खा न
ताव। कोट ऩतर

न , ज

ते ऩहने ह

ए यसोई भे फेधडक घ

स गमे। ऩ

णाय ह ॉ ,ह ॉ
कयती यही। भगय कौन स

नता है । औय उसे गरे से रगाकय फोरे —भै त

भको
मह न कयने द

ग ॉ ।


णाय बी पतत के नशे भे फस

ध होकय फोरी-भै न भान

ॉगी।
अभ

त०—अगय हाथो भे छारे ऩडे तो भै ज

यभाना रे र

ॉ गा।


णाय —भै उन छारो को प

र सभझ

ॉगी, ज

याभान कमो दे ने रगी।
अभ

त०—औय जो रसय भे धभक-अभक ह

ई तो त

भ जानना।


णाय-वाह ऐसे ससते न छ

टोगे। चनदन यगडना ऩडे गा।
अभ

त—चनदन की यगडाई कमा रभरेगी।


णाय —वाह (हॊ सकय) बयऩेट बोजन कया द

ॉ गी।
अभ

त—क

छ औय न रभरेगा?
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णाय —ठॊ डा ऩानी बी ऩी रेना।
अभ

त—(रयरसमाकय) क

छ औय रभरना चादहए।


णाय —फस,अफ क

छ न रभरेगा।
मह ॉ अबी मही फाते हो यही थीॊ कक फाफ

पाणनाथ औय फाफ

जीवननाथ
आमे। मह दोनो काशभीयी थे औय काररज भे रशऺा ऩाते थे। अभ

तयाम क
ऩऺऩाततमो भे ऐसा उतसाही औय कोई न था जैसे मह दोनो म

वक थे। फाफ


साहफ का अफ तक जो अथय रसद ह

आ था , वह इनहीॊ ऩयोऩकारयमो के
ऩरयशभ का पर था। औय वे दोनो के वर जफानी फकवास रगानेवारी नहीॊ
थे। वयन फाफ

साहफ की तयह वह दोनो बी स

धाय का क

छ-क

छ कतय वम कय


के थे। मही दोनो वीय थे जजनहोने सहिो रकावटो औय आधाओॊ को हटाकय
ववधवाओॊ से बमाह ककमा था। ऩ

णाय की सखी याभकरी न अऩनी भयजी से
पाणनाथ के साथ वववाह कयना सवीकाय ककमा था। औय रकभी के भ ॉ -फ ॉ ऩ
जो आगये के फडे पततषठत यईस थे , जीवननाथ से उसका वववाह कयने के
ररए फनायस आमे थे। मे दोनो अरग-अरग भकान भे यहते थे।
फाफ

अभ

तयाम उनके आने की खफय ऩाते ही फाहय तनकर आमे औय


सकयाकय ऩ

छा—कमो, कमा खफय है?
जीवननाथ—मह आऩके मह ॉ सननाटा कै सा?
अभ

त०—क

छ न ऩ

छो, बाई।
जीवन०—आखखय वे दयजन-बय नौकयी कहाॉ सभा गमे ?
अभ

त०—सफ जहनन

भ चरे गमे। जाररभो ने उन ऩय बफयादयी का
दफाव डारकय मह ॉ से तनकरवा ददमा।
पाणनाथ ने ठटा रगाकय काह---रीजजए मह ॉ बी वह ढॊ ग है ।
अभ

तयाम—कमा त

भ रोगो के मह ॉ बी मही हार है ।
पाणनाथ---जनाफ, इससे बी फदतय। कहायी सफ छोड बागो। जजस


एसे ऩानी आता था वह ॉ कई फदभाश रठ ररए फै ठे है कक कोई ऩानी बयने
आमे तो उसकी गदय न झाडे।
जीवननाथ—अजी, वह तो कहो क

शर होमी कक ऩहरे से ऩ

ररस का
पफनध कय ररमा नहीॊ तो इस वकत शामद असऩतार भे होते।
अभ

तयाम—आखखय अफ कमा ककमा जाए। नौकयो बफना कै से काभ
चरेगा?
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पाणनाथ—भेयी तो याम है कक आऩ ही ठाक

य फतनए औय आऩ ही
चाकय।
जीवनाथ—त

भ तो भोटे -ताजे हो। क

एॊ से दस-फीस करसे ऩानी खीॊच
रा सकते हो।
पाणनाथ—औय कौन कहे कक आऩ फतय न-ब ॉ डे नहीॊ भ ॉ ज सकते।
अभ

त-अजी अफ ऐसे कॊ गार बी नहीॊ हो गमे है । दो नौकय अबी है ,
जफ तक इनसे थोडा-फह

त काभ रे गे। आज इराके ऩय ररख बेजता ह

ॉ वह ॉ
दो-चाय नौकय आ जामॉगे।
जीवन—मह तो आऩने अऩना इजनतजाभ ककमा। हभाया काभ कै से
चरे।
अभ

त.—फस आज ही मह ॉ उठ आओ, चटऩट।
जीवन.—मह तो ठीक नहीॊ। औय कपय मह ॉ इतनी जगह कह ॉ है ?
अभ

त.—वह ददर से याजी है । कई फेय कह च

की है कक अके रे जी
घफयाता है । मह ऽफय स

नकय प

री न सभामेगी।
जीवन—अचछा अऩने मह ॉ तो टोह र

ॉ ।
पाण—आऩ बी आदभी है मा घनचककय। मह ॉ टोह र

ॉ वह ॉ टोह र

ॉ ।
बरभानसी चाहो तो फगघी जोतकय रे चरो। दोनो पाखणमो को मह ॉ राकय
फै ठा दो। नहीॊ तो जाव टोह ररमा कयो।
अभ

त—औय कमा, ठीक तो कहते है । यात जमादा जामगी तो कपय क


फनामे न फनेगी।
जीवन—अचछा जैसी आऩकी भयजी।
दोनो म

वक असतफर भे गमे। घोडा खोरा औय गाडी जोतकय रे गमे।
इधय अभ

तयाम ने आकय ऩ

णाय से मह सभाचाय कहा। वह स

नते ही पसनन
हो गई औय इन भेहभानो के ररए खाना फनाने रगी। फाफ

साहफ ने स

खई
की भदद से दो कभये साफ कयामे। उनभे भेज , क

रसय माॉ औय द

सयी जरयत
की चीजे यखवा दीॊ। कोई नौ फजे होगे कक सवारयम ॉ आ ऩह

ॉचीॊ। ऩ

णाय उनसे
फडे पमाय से गरे रभरी औय थोडी ही दे य भे तीनो सखखम ॉ फ

रफ

र की तयह
चहकने रगीॊ। याभकरी ऩहरे जया झेऩी। भगय ऩ

णाय की दो-चाय फातो न
उसका दहमाव बी खोर ददमा।
थोडी दे य भे बोजन तैमाय हा गमा। ओय तीनो आदभी यसोई ऩय गमे।
इधय चाय-ऩ ॉ च फयस से अभ

तयाम दार-बात खाना ब

र गमे थे। कशभीयी
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फावयची तयह तयह क सारना, अनेक पकाय के भाॊस खखरामा कयता था औय
मदमवऩ जलदी भे ऩ

णाय रसवाम सादे खानो के औय क

छ न फना सकी थी ,
भगय सफने इसकी फडी पशॊसा की। जीवननाथ औय पाणनाथ दोनो काशभीयी
ही थे , भगय वह बी कहते थेकक योटी-दार ऐसी सवाददषट हभने कबी नहीॊ
खाई।
यात तो इस तयह कटी। द

सय ददन ऩ

णाय ने बफलरो से कहा कक जया
फाजाय से सौदा राओ तो आज भेहानो को अचछी-अचछी चीजे खखराऊॉ ।
बफलरो ने आकय स

खई से ह

कभ रगामा। औय स

खई एक टोकया रेकय
फाजाय चरे। वह आज कोई तीस फयस से एक ही फतनमे से सौदा कयते थे।
फतनमा एक ही चाराक था। फ

ढऊ को ख

फ दसत

यी दे ता भगय सौदा रऩमे भे
फायह आने से कबी अधधक न दे ता। इसी तयह इस घ

ये साह

ने सफ यईसो
को प ॉ सा यकखा था। स

खई ने उसकी द

कान ऩय ऩह

ॉचते है टाकया ऩटक ददमा
औय ततऩाई ऩय फै ठकय फोरा —राव घ

ये , क

छ सौदा स



प तो दो भगय दे यी
न रगे।
औय हय फेय तो घ

ये हॉसकय स

खई को तभाख

वऩराता औय त

यनत
उसके ह

कभ की ताभीर कयने रगता। भगय आज उसने उसको औय फडी
रखाई से दे खकय कहा—आगे जाव। हभाये मह ॉ सौदा नहीॊ है ।


खई—जया आदभी दे ख के फात कयो। हभे ऩहचानते नहीॊ कमा?


ये —आगे जाव। फह

त टे -टे न कयो।


खई-क

छ भ ॉ ग-व ॉ ग तो नहीॊ खा गमे कमा? अये हभ स

खई है ।


ये —अजी त

भ राट हो तो कमा? चरो अऩना यासता दे खो।


खई—कमा त

भ जानते हो हभे द

सयी द

कान ऩय दसत

यी न रभरेगी ?
अबी त

महये साभने दो आने रऩमा रेकय ददखा दे ता ह

ॉ।


ये —त

भ सीधे से जाओगे कक नहीॊ ? द

कान से हटकय फात कयो।
फेचाया स

खई साह

की सइ रखाई ऩय आशचय म कयता ह

आ द

सयी द

कान ऩय
गमा। वह ॉ बी मही जवाफ रभरा। तीसयी द

कान ऩय ऩह

ॉचा। मह ॉ बी वही


तकाय रभरी। कपय तो उसने साया-फाजाय छान डारा। भगय कहीॊ सौदा न
रभरा। ककसी ने उसे द

कान ऩय खडा तक होने न ददमा। आखखय झक
भायकय-सा भ

ॉह ररमे रौट आमा औय सफ सभाचाय कह। भगय नभक-भसारे
बफना कै से काभ चरे। बफलरो ने वहा , अफ् की भै जाती ह

ॉ। दे ख
ूॉ कै से कोई
सौदा नहीॊ दे ता। भगय वह हाते जमो ही फाहय तनकरी कक एक आदभी उसे
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इधय-उधय टहरता ददखामी ददमा। बफलरो को दे खते ही वह उसके साथ हो
ररमा औय जजस जजस द

कान ऩय बफलरो गई वह बी ऩयछाई की तयह साथ
रगा यहा। आखखय बफलरो बी फह

त दौड-ध

ऩ कय हाथ झ

राते रौट आमी।
फेचयी ऩ

णाय ने हाय कय सादे ऩकवान फनाकय धय ददमे।
फाफ

अभ

तयाम ने जफ दे खा कक दोही रोग इसी तयह ऩीछे ऩडे तो उसी
दभ रारा धन

षधायीरार को ताय ददमा कक आऩ हभाये माह ॉ ऩ ॉ च होरशमाय
खखदभतगाय बेज दीजजए। रारा साहफ ऩहरे ही सभझे ह

ए थे कक फनायस भे


षट रोग जजतना ऊधभ भचामे थोडा है । ताय ऩाते ही उनहोने अऩने अऩने
होटर के ऩ ॉ च नौकयो को फनायस यवाना ककमा। जजनभे एक काशभीयी भहयाज
बी थी। द

सये ददन मह सफ आ ऩह

ॉचे । सफ के सफ ऩॊजाफी थे , जो न तो
बफयादयी के ग

राभ थे औय न जजनको टाट फाहय ककमे जाने का खटका था।
ववयोधधमो ने उसके बी कान बयने चाहे । भगय क

छ द ॉ व चरा। सौदा बी
रखनऊ से इतना भ ॉ गा ररमा जो कई भहीनो को काफी था।
जफ रोगो ने दे खा इन शयायतो से अभ

तयाम को क

छ हातन ऩह

ॉची तो
औय ही चार चरे। उनके भ

वजककरो को फहकाना श

र ककमा कक वह तो
ईसाई हो गमे है । साहफो के सॊग फै ठकय खाते है । उनको ककसी जानवय के
भाॊस से ववचाय नहीॊ है । एक ववधवा बहभाणी से वववाह कय ररमा है । उनका


ॉह दे खना , उनसे फातचीत कयना बी शासर के ववरद है । भ

वजककरो को
फहकाना श

र कक माह कक वह तो ईसाई हो गमे है । ववधवा बहभणी से
वववाह कय ररमा है । उनका भ

ॉह दे खना , उनसे फातचीत कयना बी शासर के
ववरद है । भ

वजककरो भे फह

धा कयके दे हातो के याजऩ

त ठाक

य औय ब

ॊइहाय थे
जो महाता अववदमा की कारकोठयी भे ऩडे ह

ए थे मा नमे जभाने क
चभतकाय ने उनहे चौधधमा ददमा था। उनहोने जफ मह सफ ऊटऩटाॉग फाते


नी तफ वे फह

त बफगडे , फह

त झलरामे औय उसी दभ कसभ खाई की अफ
चाहे जो हो इस अधभी को कबी भ

कदभा न दे गे। याभ याभ इसको वेदशासर
का ततनक ववचाय नहीॊ बमा कक चट एक य ॉ ड को घय भे फै ठार ररमा। छी
छी अऩना रोक-ऩयरोक दोनो बफगाड ददमा। ऐसा ही था तो दहनद

के घय भे
काहे को जनभ ररमा था। ककसी चोय-चॊडार के घय जनभे होते। फाऩ-दादे का
नाभ रभटा ददमा। ऐसी ही फाते कोई दो सपताह तक उने भ

वजककरो भे
पै री। जजसका ऩरयणाभ मह ह

आ कक फाफ

अभ

तयाम का यॊ ग पीका ऩडने
रगा। जह ॉ भाये भ

कदभो के स ॉ स रेने का अवकाश न रभरता था। वह ॉ
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अफ ददन-बय हाथ ऩय हाथ धये फै ठे यहने की नौफत आ गमी। मह ॉ तक कक
तीसया सपताह कोया फीत गमा औय उनको एक बी अचछा भ

कदभा न रभरा।
जज साहफ एक फॊगारी फाफ

थे। अभ

तयाम के ऩरयशभ औय तीवता ,
उतसाह औय चऩरता ने जज साहफ की ऑॊ खो भे उनहोने फडी पशॊसा दे
यकखी थी। वह अभ

तयाम की फढती ह

ई वकारत को दे ख-दे ख सभझ गमे थे
कक थोडी ही ददनो भे मह सफ वकीरो का सबाऩतत हा जाएगा। भगय जफ
तीन हफते से उनकी स

यत न ददखामी दी तफ उनको आशचमय ह

आ।
सरयशतेदाय से ऩ

छा कक आजकर फाफ

अभ

तयाम कह ॉ है । सरयशतेदाय साहफ
जातत के भ

सरभान औय फडे सचचे , साप आदभी थे। उनहोने साया बमोया जो


ना था कह स

नामा। जज साहफ स

नते ही सभझ गमे कक फेचाये अभ

तयाम
साभाजजक काभो भे अगणम फनने का पर बोग यहे है । द

सये ददन उनहोने


द अभ

तयाम को इजरास ऩय फ

रवामा औय दे हाती जभीॊदायी के साभने
उनसे फह

त दे य तक इधय-उधय की फाते की। अभ

तयाम बी हॉस-हॉस उनकी
फातो का जवाफ ददमा ककमे। इस फीच भे कई वकीरो औय फै रयसटय जज
साहफ को ददखाने कक ररए कागज ऩर - रामे भगय साहफ ने ककसी के
ओय धमान नहीॊ ददमा। जफ वह चरे तो साहफ ने क

सी उठकय हाथ रभरामा
औय जया जोय से फोरो – फह

त अचछा , फाफ

साहफ जैसा आऩ फोरता है ,
इस भ

कदभे भे वै सा ही होगा।
आज जफ कचहयी फयखासत ह

ई तो उन जभीदायो भे जजनके भ

कदभे
आज ऩेश थे , मो गरेचौय होने रगी।
ठाक

य साहफ- ( ऩगडी.फ

धे , भ

छे खडी.ककमे , भोटासा रदव हाथ भे
ररमे)
आज जज साहफ अभ

तयाम से ख

फ- ख

फ फततमात यहे ।
रभश जी- (रसय घ

टामे ,टीका रगामे , भ

ह भे तमफाक

दाफामे औय कनघे
ऩय अगोछा यकखे)


फ फ फततमावत यहा भानो कोउ अऩने रभर से फततमावै ।
ठाक

य- अभ

तयाम कस हॉस- हॉस भ

डी दहरावत यहा।
रभश जी- फडे . आदरभमन का सफजगह आदय होत है ।
ठाक

य- जफ रो दोनो फततमात यहे तफ तर

क कउ वकीर आमे फाकी
साहे फ कोउ की ओय ततनक नाहीॊ ताककन।
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रभश जी- हभ कहे दे इत है त

भाय भ

कदभा उनहीॊ के याम से चरे।


नत यहमो कक नाहीॊ जफ अभ

तयाम चरे रागे तो जज साहफ कहे न कक
इस भ

कदभे भे वै सा ही होगा
ठाक

य- स

ना काहे नहीॊ , फाकी कपय काव कयी।
रभश जी- इतना तो हभ कदहत है कक अस वककर वऩयथी बय भे
नाहीॊ ना।
ठाक

य- कसफहस कयत है भानो जजहवा ऩय सयसवती फै ठी होम। उनकय
फयाफयी कयै मा आज कोई नाहीॊ है ।
रभश जी- भ

दा इसाई होइ गमा। य

ड.से बमाह ककहे रस।
ठाक

य- एतनै तो फीच ऩया है । अगय उनका वकीर ककहे होईत तो
फाजी फद के जीत जाईत।
इसी तयह दोनो भे फाते ह

ई औय ददमा भे फती ऩडते - ऩडते दोनो
अभ

तयाम के ऩास गमे औय उनसे भ

कदभे की क

र रमदाद फमान कक। फाफ


साहफ ने ऩहरे ही सभझ ररमा था कक इस भ

कदभे भे क

छ जान नहीॊ
है । ततस ऩय उनहोने भ

कदभा रे ररमा औय द

सये ददन एसी मोगमता से फहस
की कक द

सयी ओय के वककर- भ

खततमाय खडे .भ

ह ताकते यह गमे। आखिय
जीत का सेहया बी उनहीॊ के रसय यहा। जज साहफ उनकी फकत

मा ऩय एसे
पसनन ह

ए कक उनहोने हॉसकय घनमफाद ददमा औय हाथ रभरमा। फस अफ
कमा था । एक तो अभ

तयाम मो ही परसदव थे , उस ऩय जज साहफ का मह
वताव औय बी सोने ऩय स

हागा हो गमा । वह फॉगरे ऩय ऩह

ॉच कय चै न से
फै ठने बी न ऩामे थे , कक भ

वजककरो के दर के दर आने रगे औय दस फजे
यात तक मही ताता रगा यहा। द

सये ददन से उनकी वकारत ऩहरे से बी
अधधक चभक उठी ।
दोदहमो जफ दे खा कक हभायी चार बी उरटी ऩडी. तो औय बी दत
ऩीसने रगे। अफ भ

ॊशी फदयीपसाद तो थे दह नहीॊ कक उनहे सीधी चारे
फताते। औय न ठाक

य थे कक क

छ फाह

फर का चभतकाय ददखाते । फाफ


कभरापसाद अऩने वऩता के साभने ही से इन फातो से अरग हो गमे थे।
इसररमे दोदहमो को अऩना औय क

छ फस न दे ख कय ऩॊडडत बग

दत का
दवाय खटखटामा उनसे कय जोड कय कहा कक भहायाज ! क

ऩा-रसनध

! अफ
बायत वषय भे भहा उतऩात औय घोय ऩाऩ हो यहा है । अफ आऩ ही चाहो तो
उसका उदवाय हो सकता है । रसवाम आऩ के इस नौका को ऩाय रगाने
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वारा इस सॊसाय भे कोई नहीॊ है । भहायाज ! अगय इस सभम ऩ

या फर न
रगामा तो कपय इस नगय के वासी कहीॊ भ

ह ददखाने के मोगम नहीॊ यहे गे।


ऩा के ऩयनारे औय धभय के ऩोखया ने जफ अऩने जजभानो को ऐसी दीनता
से सत

तत कयते दे खा तो दत तनकारकय फोरे आऩ रोग जौन है तैन घफयामे
भत। आऩ दे खा कये कक ब



दत कमा कयते है ।
सेठ ध

नीभर- भहायाज ! क

छ ऐसा मतन कीजजमे कक इस द

षट का
सतमानाश् हो जाम ! कोई नाभ रेवा न फचे ।
कई आदभी- ह भहायाज! इस घडी तो मही चादहमे।




दत- मही चादहमे तो मही रेना। सवय था नाश न कय द

तो बाहभण
नहीॊ। आज के सातवे ददन उसका नाश हो जामेगा।
सेठ जी- दववम जो रगे फेखटके कोठी से भॅगा रेना ।




दत- इसके कहने की कोइ आवशमकता नहीॊ। के वर ऩच सौ
बाहभण का पततददन बोजन होगा।
फाफ

दीनानाथ-तो कदहमे तो कोई हरवाई रगा ददमा जाए। याघो
हरवाई ऩेडे औय रड

फह

त अचछे फनाता है ।




दत- जो ऩ

जा भै कयाउगा उसभे ऩेडा खाना वजजय त है । अधधक
इभयती का सेवन हो उतना ही कामय रसदव हो जाता है ।
इस ऩय ऩॊडडत जी के एक चे रे ने कहा- गर जी ! आज तो आऩ ने
नमाम का ऩाठ दे ते सभम कहा था कक ऩेडे के साथ दही रभरा ददमा जाए तो
उसभे कोइ दोष नहीॊ यहता।




दत- (हॅसकय) ह- ह अफ सभयण ह

आ। भन

जी ने इस शरोक
भे इस फात का पभाण ददमा है ।
दीनानाथ-(भ

सकयाकय) भहायाज! चे रा तो फडा ततब है ।
सेठ जी- मह अऩने गरजी से फाजी रे जामेगा।




दत- अफ कक इसने एक मऻ भे दो सेय ऩ

रयम खामी। उस ददन
से भै ने इसका नाभ अॊततभ ऩयीऺा भे ररख ददमा।
चे रा- भै अऩने भन से थोडा ही उठा । अगय जजभान हाथ जोडकय
उठा न दे ते तो अबी सेय बय औय खा के उठता।
दीनानाथ-कमो न हो ऩटे ! जैसे ग

र वै से चे रा!
सेठ जी- भहायाज , अफ हभको आऻा दीजजए। आज हरवाई आ
जाएगा। भ

नीभ जी बी उसके साथ रगे यहे गे । जो सौ दो सौ का काभ रगे
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नीभ जी से पयभा दे ना। भगय फात तफ है कक आऩ बी इस बफषम भे जान
रडा दे ।
ऩॊडडत जी ने रसय का कदू दहराकय कहा- इसभे आऩ कोई खटका न
सभखझमे। एक सपताह भे अगय द

षट का न नाश हो जाए तो ब



दत नहीॊ।
अफ आऩको ऩ

जन की बफधध बी फता ही द

। स

तनए ताॊबरक बफदमा भे एक
भॊर एसा बी है जजसके जगाने से फै यी की आम

ऺीण होती है । अगय दस
आदभी पततददवस उसका ऩाठ कये तो आम

भे दोऩहय की हातन होगी। अगय
सौ आदभी ऩाठ कये तो दस ददन की हातन होगी।
मदद ऩाच सौ ऩाठ तनतम हो तो हय ददन ऩाच वष आम

घटती है ।
सेठ जी- भहायाज, आऩ ने इस घडी एसी फात कही कक हभाया चोरा
भसत हो गमा , भसत हो गमा ,
दीनानाथ- क

ऩारसनघ

, आऩ घनम हो ! आऩ घनम हो !
फह

त से आदभी- एक फाय फोरो- ऩॊडडत ब



दत जम !
फह

त से आदभी- एक फाय फोरो- द

षठो की छै ! छै ! !
इस तयह कोराहर भचाते ह

ए रोग अऩने- अऩने घयो को रौटे । उसी
ददन याघो हरवाई ऩॊडडत जी के भकान ऩय जा डटा। ऩ

जा-ऩाठ होने रगे ।
ऩाच सौ ब

कखड एकर हो गमे औय दोनो ज

न भार उडाने रगे। धीये - धीये
ऩाच सौ से एक हजाय नमफय ऩह

चा ऩ

जा-ऩाठ कौन कयता है । सफेये से
बोजन का पफनध कयते – कयते दोऩहय हो जाता था। औय दोऩहय से बॊग-


टी छानते यात हो जाती थी। ह ऩॊडडत ब



दत दास का नाभ ऩ

ये शहय भे
उजागय हो यहा था। चायो ओय उनकी फडाई गाई जा यही थ। सात ददन मही
अधाध

ॊध भचा यहा। मह सफ क

छ ह

आ । भगय फाफ

अभ

तयाम का फार
फाॉका न हो सका। कही चभाय के सयाऩे डागय रभरते है । एसे ऑॊ ख् के
अॊधे औय गॉठ के ऩ

ये न पॉ से तो ब



दत जैसे ग

गो को चखौततमा कौन
कयामे। सेठ जी के आदभी ततर- ततर ऩय अभ

तयाम के भकान ऩय दौडते थे
कक दे खे क

छ जॊर –भर का पर ह

आ कक नहीॊ। भगय सात ददन के फीतने
ऩय क

छ पर ह

आ तो मही कक अभ

तयाम की वकारत सदा से फढकय चभकी


ई थी।
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101
फायहवाॉ अधमाम
एक सरी के दो प

रष नहीॊ हो सकते
पेभा का बमाह ह

ए दो भहीने से अधधक फीत च

के है भगय अबी तक
उसकी अवसथा वही है जो क

ॉ वायाऩन भे थी। वह हयदभ उदास औय भररन
यहती है । उसका भ

ख ऩीरा ऩड गमा। ऑॊ खे फै ठे ह

ई , सय के फार बफखये ,
उसके ददर भे अबी तक फाफ

अभ

तयाम की भ

हबफत फनी ह

ई है । उनकी भ

ततय
हयदभ उसकी ऑॊ खो के साभने नाचा कयती है । वह फह

त चाहती है कक
उनकी स

यत हदम से तनकार दे भगय उसका क

छ फस नहीॊ चरता। मदमवऩ
फाफ

दाननाथ उससे सचचा पेभ यखते है औय फडे स

नदय हॉसभ

ख , रभरनसाय
भन

षम है । भगय पेभा का ददर उनसे नहीॊ रभरता। वह उनसे पेभ-बाव
ददखाने भे कोई फात उठा नहीॊ यखती। जफ वह भौज

द होते है तो वह हॉसती
बी है । फातचीत बी कयती है । पेभ बी जताती है । भगय जफ वह चरे जाते है
तफ उसके भ

ख ऩय कपय उदासी छा जाती है । उसकी स

यत कपय ववमोधगन
की-सी हो जाती है । अऩने भै के भे उसे योने की कोई योक-टोक न थी। जफ
चाहती औय जफ तक चाहती, योमा कयती थी। भगय मह ॉ या बी नहीॊ सकती।
मा योती बी तो तछऩकय। उसकी फ

ढी सास उसे ऩान की तयह पे या कयती है ।
के वर इसररए नहीॊ कक वह उसका ऩास औय दफाव भानती है फजलक इसररए
कक वह अऩने साथ फह

त-सा दहे ज रामी है । उसने सायी ग

हसथी ऩतोह

के
ऊऩय छोड यकखी है औय हयदभ ईशवय से ववनम ककमा कयती है कक ऩोता
खेराने के ददन जलद आमे।
फेचायी पेभा की अवसथा फह

त ही शोचनीम औय करणा के मोगम है ।
वह हॉसती है तो उसकी हॉसी भे योना रभरा होता है । वह फातचीत कयती है
तो ऐसा जान ऩडता है कक अऩने द

ख की कहानी कह यही है । फनाव-रसॊ गाय
से उसकी ततनक बी रधच नहीॊ है । अगय कबी सास के कहने -स

नने से क


सजावट कयती बी है तो उस ऩय नहीॊ ख

रता। ऐसा भार

भ होता है कक
इसकी कोभर गात भे जो भोदहन थी वह रठ कय कहीॊ औय चरी गमी। वह
फह

धा अऩने ही कभये भे फै ठी यहती है । ह ॉ , कबी-कबी गाकय ददर फहराती
है । भगय उसका गाना इसररए नहीॊ होता कक उससे धचतत को आननद पापत
हो। फजलक वह भध

य सवयो भे ववराऩ औय ववषाद के याग गामा कयती है ।
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102
फाफ

दाननाथ इतना तो शादी कयने के ऩहरे ही जानते थे कक पेभा
अभ

तयाम ऩय जान दे ती है । भगय उनहोने सभझा था कक उसकी पीतत
साधायण होगी। जफ भै उसको बमाह कय राऊॉ गा , उससे सनहे , फढाऊॉ गा, उस
ऩय अऩने के तनछावय करॉ गा तो उसके ददर से वऩछरी फाते रभट जामॉगी
औय कपय हभायी फडे आननद से कटे गी। इसररए उनहोने एक भहीने के
रगबग पेभा के उदास औय भररन यहने की क

छ ऩयवाह न की। भगय
उनको कमा भार

भ था कक सनहे का वह ऩौधा जो पेभ-यस से सीॊच-सीॊच कय
ऩयवान चढामा गमा है भहीने-दो भहीने भे कदावऩ नहीॊ भ

यझा सकता। उनहोने


सये भहीने बय बी इस फात ऩय धमान न ददमा। भगय जफ अफ बी पेभा के


ख से उदासी की घटा पटते न ददखामी दी तफ उनको द

ख होने रगा। पेभ
औय ईषमाय का चोरी-दाभन का साथ है । दाननाथ सचचा पेभ दे खते थे। भगय
सचचे पेभ के फदरे भे सचचा पेभ चाहते बी थे। एक ददन वह भार

भ से
सफेय भकान ऩय आमे औय पेभा के कभये भे गमे तो दे खा कक वह सय


कामे ह

ए फै ठी है । इनको दे खते ही उसने सय उठामा औय चोट ऑॊ चर से
ऑॊ स

ऩोछ उठ खडी ह

ई औय फोरी —भ

झे आज न भार

भ कमो रारा जी की
माद आ गमी थी। भै फडी से यो यही ह

ॉ।
दाननाथ ने उसको दे खते ही सभझ ररमा था कक अभ

तयाम के ववमोग
भे ऑॊ स

फाहमे जा यहे है । इस ऩय पेभा ने जो मो हवा फतरामी तो उनके
फदन भे आग रग गमी। तीखी धचतवनो से दे खकय फोरे —त

महायी ऑॊ खे है
औय त

महाये ऑॊ स

, जजतना योमा जाम यो रो। भगय भेयी ऑॊ खो भे ध

र भत
झोको।
पेभा इस कठोय वचन को स

नकय चौक ऩडी औय बफना क

छ उततय
ददमे ऩतत की ओय डफडफाई ह

ई ऑॊ खो से ताकने रगी। दाननाथ ने कपय
कहा—
कमा ताकती हो , पेभा ? भै ऐसा भ

खय नहीॊ ह

ॉ , जैसा त

भ सभझती हो।
भै ने बी आदभी दे खे है औय भै बी आदभी ऩहचानता ह

ॉ। भै त

महायी एक-एक
फात की गौय से दे खता ह

ॉ भगय जजतना ही दे खता ह

ॉ उतना ही धचतत को


ख होता है । कमोकक त

महाया फतायव भेये साथ पीका है । मदमवऩ त

भको मह


नना अचछा न भार

भ होगा भगय हाय कय कहना ऩडता है कक त

भको


झसे रेश-भार बी पेभ नहीॊ है । भै ने अफ तक इस ववषम भे जफान खोरने
का साहस नहीॊ ककमा था औय ईशवय जानता है कक त

भसे ककस ़दय
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103


हबफत कयता ह

ॉ। भगय भ

हबफत सफ क

छ सह सकती है , रखाई नहीॊ सह
सकती औय वह बी कै सी रखाई जो ककसी द

सये ऩ

रष के ववमोग भे उतऩनन


ई हो। ऐसा कौन फेहाम , तनरय जज आदभी होगा जो मह दे खे कक उसकी
ऩतनी ककसी द

सये के ररए ववमोधगन फनी ह

ई है औय उसका रह

उफरने न
रगे औय उसके हदम भे कोध कक जवारा धधक न उठे । कमा त

भ नहीॊ
जानती हो कक धभय शासर के अन

साय सरी अऩने ऩतत के रसवाम ककसी द

सये
भन

षम की ओय क

दजषट से दे खने से बी ऩाऩ की बीगी हो जाती है औय
उसका ऩततवत बॊग हो जाता है ।
पेभा त

भ एक फह

त ऊॉ चे घयाने की फेटी हो औय जजस घयाने की त


फह

हो वह बी इस शहय भे ककसी से हे ठा नहीॊ। कमा त

महाये ररए मह शभय
की फात नहीॊ है कक त

भ एक फाजायो की घ

भनेवारी य ॉ ड बाहभणीॊ के त

लम
बी न सभझी जाओ औय वह कौन है जजसने त

महाया ऐसा तनयादय ककमा ?
वही अभ

तयाम, जजसके ररए त

भ ओठो ऩहय भोती वऩयोमा कयती हो। अगय
उस द

षट के हदम भे त

महाया क

छ बी पेभ होता तो वह त

महाये वऩता के
फाय-फाय कहने ऩय बी त

भको इस तयह धता न फताता। कै से खेद की फात
है । इनहीॊ ऑॊ खो ने उसे त

महायी तसवीय को ऩै यो से यौदते ह

ए दे खा है । कमा


भको भेयी फातो का ववशवास नहीॊ आता ? कमा अभ

तयाम के कतय वम से नहीॊ
ववददत होता है की उनको त

महायी यतती-बय बी ऩयवाह नहीॊ है कमा उनहोने
डॊ के की चोट ऩय नहीॊ साबफत कय ददमा कक वह त

भको त

चछा सभझते है ?
भाना कक कोई ददन ऐसा था कक वह वववाह कयने की अरबराषा यखते थे।
ऩय अफ तो वह फात नहीॊ यही। अफ वह अभ

तयाम है जजसकी फदचरनी की
साये शहय भे ध

भ भची ह

ई। भगय शोक औय अतत शोक की फात है कक त


उसके ररए ऑॊ स

फहा-फहाकय अऩने भेये खानदान के भाथे काररख का टीका
रगाती हो।
दाननाथ भाये कोध के काॉऩ यहे थे। चे हया तभतभामा ह

आ था। ऑॊ खो
से धचनगायी तनकर यही थी। फेचायी पेभा रसय नीचा ककमे ह

ए खडी यो यही
थी। ऩतत की एक-एक फात उसके करेजे के ऩाय ह

ई जाती थी। आखखय न
यहा गमा। दाननाथ के ऩै यो ऩय धगय ऩडी औय उनहे गभय -गभय ऑॊ स

की फ

ॉदो
से रबगो ददमा। दाननाथ ने ऩै य खसका ररमा। पेभा को चायऩाई ऩय फै ठा
ददमा ओय फोरे —पेभा, योओ भत। त

महाये योने से भेये ददर ऩय चोट रगती
है । भै त

भको रराना नहीॊ चाहता। ऩयनत

उन फातो को कहे बफना यह बी
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104
नहीॊ सकता। अगय मह ददर भे यह गई तो नतीजा फ

या ऩै दा कये गी। कान
खोरकय स

नो। भै त

भको पाण से अधधक पमाय कयता ह

ॉ। त

भको आयाभ
ऩह

ॉचाने के ररए हाजजय ह

ॉ। भगय त

भको रसवाम अऩने ककसी द

सये का खमार
कयते नहीॊ दे ख सकता। अफ तक न जाने कै से -कै से भै ने ददर को सभझामा।
भगय अफ वह भेये फस का नहीॊ। अफ वह मह जरन नहीॊ सह सकता। भै


भको चे तामे दे ता ह

ॉ कक मह योना-धोना छोडा। मदद इस चे ताने ऩय बी त


भेयी फात न भानो तो कपय भ

झे दोष भत दे ना। फस इतना कहे दे ता ह

ॉ। कक
सरी के दो ऩतत कदावऩ जीते नहीॊ यह सकते।
मह कहते ह

ए फाफ

दाननाथ कोध भे बये फाहय चरे आमे। फेचायी पेभा
को ऐसा भार

भ ह

आ कक भानो ककसी ने करेजे भे छ

यी भाय दी। उसको
आज तक ककसी ने ब

रकय बी कडी फात नहीॊ स

नामी थी। उसकी बावज
कबी-कबी ताने ददमा कयती थी भगय वह ऐसा न होते थे। वह घॊटो योती
यही। इसके फाद उसने ऩतत की सायी फातो ऩय ववचाय कयना श

र ककमा औय
उसके कानो भे मह शबद ग

ॉजने रगे-एक सरी के दो ऩतत कदावऩ जीते नहीॊ
यह सकते।
इनका कमा भतरफ है?
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105
तेयहवाॊ अधमाम
शोकदायक घटना


णाय , याभकरी औय रकभी तीनो फडे आननद से दहत-रभरकय यहने
रगी। उनका सभम अफ फातचीत , हॉसी-ददलरगी भे कट जात। धचनता की
ऩयछाई बी न ददखामी दे ती। ऩ

णाय दो-तीन भहीने भे तनखय कय ऐसी
कोभरागी हो गमी थी कक ऩदहचान न जाती थी। याभकरी बी ख

फ यॊ ग-रऩ
तनकारे थी। उसका तनखाय औय मौवन ऩ

णाय को बी भात कयता था। उसकी
ऑॊ खो भे अफ चॊचरता औय भ

ख ऩय वह चऩरता न थी जो ऩहरे ददखामी
दे ती थी। फजलक अफ वह अतत स



भाय कारभनी हो गमी थी। अचछे सॊग भे
फै ठते-फै ठते उसकी चार-ढार भे गमबीयता औय धै मय आ गमा था। अफ वह
गॊगा सनान औय भजनदय का नाभ बी रेती। अगय कबी-कबी ऩ

णाय उसको
छोडने के ररए वऩछरी फाते माद ददराती तो वह नाक-बौ चढा रेती , रठ
जाती। भगय इन तीनो भे रकभी का रऩ तनयारा था। वह फडे घय भे ऩै दा


ई थी। उसके भ ॉ -फाऩ ने उसे फडे राड-पमाय से ऩारा था औय उसका फडी
उततभ यीतत ऩय रशऺा दी थी। उसका कोभर गत, उसकी भनोहय वाणी, उसे
अऩनी सखखम ॉ भे यानी की ऩदावी दे ती थी। वह गाने-फजाने भे तनऩ

ण थी
औय अऩनी सखखमो को मह ग

ण रसखामा कयती थी। इसी तयह ऩ

णाय को
अनेक पकाय के वमॊजन फनाने का वमसन था। फेचायी याभकरी के हाथो भे
मह सफ ग

ण न थे। ह ॉ , वह हॉसोडी थी औय अऩनी यसीरी फातो से सखखमो
को हॉसामा कयती थी।
एक ददन शाभ को तीनो सखखमाॉ फै ठी फातधचत कय यही थी कक ऩ

णाय
ने भ

सकयाकय याभकरी से ऩ

छा —कमो यमभन, आजकर भजनदय ऩ

जा कयने
नहीॊ जाती हो।
याभकरी ने झेऩकय जवाफ ददमा —अफ वह ॉ जाने को जी नहीॊ चाहता।
रकभी याभकरी का सफ व

ततानत स

न च

की थी। वह फोरी—ह ॉ फ

आ, अफ तो
हॉसने -फोरने का साभान घय ही ऩय ही भौज

द है ।
याभकरी—(ततनककय) त

भसे कौन फोरता है , जो रगी जहय उगरने।
फदहन, इनको भना कय दो , मह हभायी फातो भे न फोरा कये । नहीॊ तो अबी


छ कह फै ठ

ॉ गी तो योती कपये गी।


णाय —भत रतछभी (रकभी) सखी को भत छोडो।
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106
रकभी—(भ

सकयाकय) भै ने क

छ झ

ठ थोडे ही कहा था जो इनको ऐसा
कड

आ भार

भ ह

आ।
याभकरी—जैसी आऩ है वै सी सफको सभझती है ।


णाय — रतछभी , त

भ हभायी सखी को फह

त ददक ककमा कयती हो।


महयी फार से वह भजनदय भे जाती थी।
रकभी—जफ भै कहती ह

ॉ तो योती काहे को है ।


णाय —अफ मह फात उनको अचछी नहीॊ रगती तो त

भ काहे को कहती
हो। खफयदाय, अफ कपय भजनदय का नाभ भत रेना।
रकभी—अचछा यमभन, हभे एक फात दो तो , हभ कपय त

महे कबी न
छे डे —भहनत जी ने भॊर दे ते सभम त

महये कान भे कमा कहा ? हभाया भाथा


ए जो झ

ठ फोरे।
याभकरी—(धचटक कय) स

ना रतछभी, हभसे शयायत कयोगी तो ठीक न
होगा। भै जजतना ही तयह दे ती ह

ॉ , त

भ उतनी ही सय चढी जाती हो।


णाय —ऐ तो फतरा कमो नहीॊ दे ती, इसभे कमा हजय है?
याभकरी—क

छ कहा होगा , त

भ कौन होती हो ऩ

छनेवारी ? फडी आमीॊ
वह ॉ से सीता फन के


णाय —अचछा बाई, भत फताओ, बफगडती काहे को हो?
रकभी—फताने की फात ही नहीॊ फतरा कै से दे ।
याभकरी—कोई फात बी हो कक मो ही फतरा द

ॉ ।


णाय —अचछा मह फात जाने दो। फताओ उस तॊफोरी ने त

महे ऩान
खखराते सभम कमा कहा था।
याभकरी—कपय छे डखानी की स

झी। भै बी ऩते की फात कह द

ॉ गी तो
रजा जाओगी।
रकभी—त

महे हभाय कसभ सखी , जरय कहो। मह हभ रोगो की फातो
तो ऩ

छ रेती है , अऩनी फाते एक नहीॊ कहतीॊ।
याभकरी—कमो सखी, कह

ॉ? कहती ह

ॉ, बफगडना भत।


णाय- कहो, स ॉ च को ऑॊ च कमा।
याभकरी—उस ददन घाट ऩय त

भने ककस छाती से ररऩटा ररमा था।


णाय — त

महाया सय
रकभी— सभझ गमी। फाफ

अभ

तयाम होगे। कमो है न?
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107
मह तीनो सखखम ॉ इसी तयह हॉस-फोर यहीॊ थीॊ कक एक फ

ढी औयत ने
आकय ऩ

णाय को आशीवायद ददमा औय उसके हाथ भे एक खत यख ददमा। ऩ

णाय
ने अऺय ऩदहचाने , पेभा का ऩर था। उसभे मह ररखा था—
‘‘पमायी ऩ

णाय त

भसे बे ट कयने को फह

त जी चाहता है । भगय मह ॉ घय
से फाहय ऩ ॉ व तनकारने की भजार नहीॊ। इसररए मह ऽत ररखती ह

ॉ। भ

झे


भसे एक अतत आवशमक फात कयनी है । जो ऩर भे नहीॊ ररख सकती ह

ॉ।
अगय त

भ बफलरो को इस ऩर का जवाफ दे कय बेजो तो जफानी कह द

ॉ गी।
दे खा दे य भत कयना। नहीॊ तो अनथय हो जाएगा। आठ फजे के ऩहरे बफलरो
मह ॉ अवशम आ जाए।


महायी सखी
पेभा’’

ऩर ऩढते ही ऩ

णाय का धचतत वमाक

र हो गमा। चे हये का यॊ ग उड गमा
औय अनेक पकाय की शॊकाएॉ रगी। मा नायामण अफ कमा होनेवारा है ।
ररखती है दे खो दे य भत कयना। नहीॊ तो अनथय हो जाएगा। कमा फात है ।
अबी तक वह कचहयी से नहीॊ रौटे । योज तो अफ तक आ जामा कयते
थे। इनकी मही फात तो हभ को अचछी नहीॊ रगती।
रकभी औय याभकरी ने जफ उसको ऐसा वमाक

र दे खा तो घफयाकय
फोरीॊ —कमा फदहन, क

शर तो है? इस ऩर भे कमा ररखा है ?


णाय —कमा फताऊॉ कमा ररखा है । याभकरी , त

भ जया कभये भे जा के
झ ॉ को तो आमे मा नहीॊ अबी।
याभकरी ने आकय कहा—अबी नहीॊ आमे।
रकभी—अबी कै से आमेगे ? आज तो तीन आदभी वमाखमान दे ने गमे
है । इसी घफयाहट भे आठ फजा। ऩ

णाय ने पेभा के ऩर का जवाफ ररखा औय
बफलरो को दे कय पेभा को घय बेज ददमा। आधा घॊटा बी न फीता था कक
बफलरो रौट आमी। यॊ ग उडा ह

आ। फदहवास औय घफयामी ह

ई। ऩ

णाय ने उसे
दे खते ही घफयाकय ऩ

छा—कहो बफलरो, क

शर कहो।
बफलरो (भाथा ठोककय) कमा कह

ॉ, फह

कहते नहीॊ फनता। न जाने अबी
कमा होने वारा है ।


णाय —कमा कहा? क

छ धचटी-ऩरी तो नहीॊ ददमा?
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बफलरो—धचटी कह ॉ से दे ती ? हभको अनदय फ

राते डयती थीॊ। दे खते ही
योने रगी औय कहा —बफलरो, भै कमा करॉ , भेया जी मह ॉ बफरक

र नहीॊ
रगता। भै वऩछरी फाते माद कयके योमा कयती ह

ॉ। वह (दाननाथ) कबी जफ


झे योते दे ख रेते है तो फह

त झलराते है । एक ददन भ

झे फह

त जरी-कटी


नामी औय चरते-सभम धभका कय कहा —एक औयत के दो चाहनेवारे
कदावऩ जीते नहीॊ यह सकते। मह कहकय बफलरो च

ऩ हो गमी। ऩ

णाय के
सभझ भे ऩ

यी फात न आमी। उसने कहा —च

ऩ कमो हो गमी ? जलदी कहो ,
भेया दभ रका ह

आ है ।
बफलरो—इतना कहकय वह योने रगी। कपय भ

झको नजदीक फ

रा के
कान भे कहा —बफलरो, उसी ददन से भै उनके तेवय फदरे ह

ए दे खती ह

ॉ। वह
तीन आदरभमो के साथ रेकय योज शाभ को न जाने कह ॉ जाते है । आज भै ने
तछऩकय उनकी फातचीत स

न री। फायह फजे यात को जफ अभ

तयाम ऩय चोट
कयने की सराह ह

ई है । जफ से भै ने मह स

ना है , हाथो के तोते उडे ह

ए है ।


झ अबाधगनी के कायण न जाने कौन-कौन द

ख उठामेगा।
बफलरो की जफानी मह फाते स

नकय ऩ

णाय के ऩै य तरे से रभटी तनकर
गमी। दनानाथ की तसवीय बमानक रऩ धायण ककमे उसकी ऑॊ खो के साभने
आकय खडी हो गमी।
वह उसी दभ दौडती ह

ई फै ठक भे ऩह

ॉची। फाफ

अभ

तयाम का वह ॉ ऩता
न था। उसने अऩना भाथा ठोक बफलरो से कह ॉ —त

भ जाकय आदरभमो कह
दो। पाटक ऩय खडे हो जाए। औय ख

द उसी जगह एक क

सी ऩय फै ठकय


नने रगी कक अफ उनको कै से खफय करॉ कक इतने भे गाडी की खडखडाहट


नामी दी। ऩ

णाय का ददर फडे जोय से धड-धड कयने रगा। वह रऩक कय
दयवाजे ऩय आमी औय क ॉ ऩती ह

ई आवाज से ऩ

काय फोरी —इतनी दे य कह ॉ
रगामी? जलदी आते कमो नहीॊ ?
अभ

तयाम जलदी से उतये औय कभये के अनदय कदभ यखते ही ऩ

णाय
ऐसे ररऩट गमी भानो उनहे ककसी के वाय से फचा यही है औय फोरी —इतनी
जलदी कमो आमे , अबी तो फह

त सवेया है ।
अभ

तयाम—पमायी, ऺभा कयो। आज जया दे य हो गमी।


णाय —चररए यहने दीजजए। आऩ तो जाकय सै य-सऩाटे कयते है । मह ॉ


सयो की जान हरकान होती है
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109
अभ

तयाम—कमा फतामे, आज फात ऐसी आ ऩडी कक रकना ऩडा। आज
भाप कयो। कपय ऐसी दे य न होगी।
मह कहकय वह कऩडे उतायने रगे। भगय ऩ

णाय वही खडी यही जैसे
कोई चौकी ह

ई हरयणी। उसकी ऑॊ खे दयवाजे की तयप रगी थीॊ। अचानक
उसको ककसी भन

षम की ऩयछाई दयवाजे के साभने ददखामी ऩडी। औय वह
बफजरी की याह चभककय दयवाजा योककय खडी हो गमी। दे खा तो कहाय था।


ता खोरने आ यहा था। फाफ

साहफ न धमान से दे खा तो ऩ

णाय क

छ घफयामी


ई ददखामी दी। फोरे---पमायी, आज त

भ क

छ घफयामी ह

ई हो।


णाय —साभनेवारा दयवाजा फनद कया दो।
अभ

तयाम—गयभी हो यही है । हवा रक जाएगी।


णाय —मह ॉ न फै ठने द

ॉ गी। ऊऩय चरो।
अभ

तयाम—कमो फात कमा है? डयने की कोई वजह नहीॊ।


णाय —भेया जी मह ॉ नहीॊ रगता। ऊऩय चरो। वह ॉ च ॉ दनी भे ख

फ ठॊ डी
हवा आ यही होगी।
अभ

तयाम भन भे फह

त सी फाते सोचते-सोचते ऩ

णाय के साथ कोठे ऩय
गमे। ख

री ह

ई छत थी। क

रसय म ॉ धयी ह

ई थी। नौ फजे यात का सभम , चै र
के ददन, च ॉ दनी ख

फ तछटकी ह

ई, भनद-भनद शीतर वाम

चर यही थी। फगीचे
के हये -बये व

ऺ धीये -धीये झ

भ-झ

भ कय अतत शोबामभान हो यहे थे। जान
ऩडता था कक आकाश ने ओस की ऩतरी हरकी चादय सफ चीजो ऩय डार दी
है । द

य-द

य के ध

ॉ धरे-ध

ॉ धरे ऩेड ऐसे भनोहय भार

भ होते है भानो वह दे वताओॊ
के यभण कयने के सथान है । मा वह उस तऩोवन के व

ऺ है जजनकी छामा भे
शक

नतरा औय उसकी सखखम ॉ भभण ककमा कयती थीॊ औय जह ॉ उस स

नदयी
ने अऩने जान के अधाय याजा द

षमनत को कभर के ऩतते ऩय पेभ-ऩाती
ररखी थी।


णाय औय अभ

तयाम क

रसय मा ऩय फै ठ गमे। ऐसे स

खदाम एकाॊत भे
चनदभा की ककयणो ने उनके ददरो ऩय आकभण कयना श

र ककमा। अभ

तयाम
ने ऩ

णाय के यसीरे अधय च

भकय कहा—आज कै सी स

हावनी चाॉदनी है ।


णाय —भेयी जी इस घडी चाहत है कक भै धचडडमा होती।
अभ

तयाम—तो कमा कयतीॊ।


णाय —तो उडकय उन द

यवारे ऩेडो ऩय जा फै ठती।
अभ

तयाम—अहा हा दे खा रकभी कै सा अराऩ यही है ।
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णाय —रकभी का-सा गाना भै ने कहीॊ नहीॊ स

ना। कोमरा की तयह


कती है ।


नो कौन गीत है । स

ना
भोयी स

धध जतन बफसयै हो, भहयाज।
अभ

तयाम—जी चाहता है , उसे महीॊ फ

रा र

ॉ ।


णाय- नहीॊ। मह ॉ गाते रजामेगी। स

नो।
इतनी ववनम भै त

भसे कयत हौ
ददन-ददन सनेह फढै मो भहयाज।
अभ

तयाम—हाम जी फेचै न ह

आ जाता है ।


णाय---जैसे कोई करेजे भे फै ठा च

टककम ॉ रे यहा हो। कान रगाओ ,


छ स

ना, कहती है ।
भै भध

भाती अयज कयत ह


तनत ददन ऩजततमा ऩठै मो, भहयाज
अभ

तयाम—कोई पेभ—यस की भाती अऩने सजन से कह यही है ।


णाय —कहती है तनत ददन ऩजततमा ऩठै मो , भहयाज हाम फेचायी पेभ भे


फी ह

ई है ।
अभ

तयाम---च

ऩ हो गमी। अफ वह सननटा कै सा भनोहय भार

भ होता
है ।


णाय---पेभा बी फह

त अचछा गाती थी। भगय नहीॊ।
पेभा का नाभ जफान ऩय आते ही ऩ

णाय म़ामक चौक ऩडी औय
अभ

तयाम के गरे भे हाथ डारकय फोरी —कमो पमाये त

भ उन गडफडी के
ददनो भे हभाये घय जाते थे तो अऩने साथ कमा रे जामा कयते थे।
अभ

तयाम—(आशचमय से) कमो? ककसररए ऩ

छती हो?


णाय —मो ही धमान आ गमा।
अभ

तयाम—अॊगेजी तभॊचा था। उसे वऩसतौरा कहते है ।


णाय —बरा ककसी आदभी के वऩसतौर की गोरी रगे तो कमा हो।
अभ

तयाम—त

यॊ त भय जाए।


णाय —भै चराना सीख
ूॉ तो आ जाए।
अभ

तयाम—त

भ वऩसतौर चराना सीखकय कमा कयोगी ? (भ

सकयाकय)
कमा नै नो की कटायी क

छ कभ है ? इस दभ मही जी चाहता है कक त

भको
करेजा भे यख र

ॉ ।
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णाय —(हाथ जोडकय) भेयी त

भसे मही ववनम है —
भेया स

धध जतन बफसयै हो, भहायाज
मह कहते-कहते ऩ

णाय की ऑॊ खो भे नीय बय आमा। अभ

तयाम। अभ

तयाम बी
गदगद सवय हो गमे औय उसको ख

फ बे च-बे च पमाय ककमा , इतने भे बफलरो
ने आकय कहा—चररए यसोई तैमाय है ।
अभ

तयाम तो उधय बोजन ऩाने गमे औय ऩ

णाय ने इनकी अरभायी
खोरकय वऩसतौर तनकार री औय उसे उरट-ऩ

रट कय गौय से दे खने रगी।
जफ अभ

तयाम अऩने दोनो रभरो के साथ बोजन ऩाकय रौटे औय ऩ

णाय को
वऩसतौर ररमे दे खा तो जीवननाथ ने भ

सकयाकय ऩ

छा —कमो बाबी , आज
ककसका रशकाय होगा?


णाय-इसे कै से छोडते है , भेये तो सभझ ही भे नहीॊ आत।
जीवननाथ—राओ भै फता द

ॉ ।
मह कहकय जीवननाथ ने वऩसतौर हाथ भे रीॊ। उसभे गोरी बयी औय
फयाभदे भे आमे औय एक ऩेड के तने भे तनशान रगा कय दो-तीन फामय
ककमे। अफ ऩ

णाय ने वऩसतैर हाथ भे री। गोरी बयी औय तनशाना रगाकय
दागा, भगय ठीक न ऩडा। द

सया फामय कपय ककमा। अफ की तनशाना ठीक
फै ठा। तीसया फामय ककमा। वह बी ठीक। वऩसतौर यख दी औय भ

सकयाते ह


अनदय चरी गमी। अभ

तयाम ने वऩसतौर उठा ररमा औय जीवननाथ से
फोरे —क

छ सभझ भे नहीॊ आता कक आज इनको वऩसतौर की ध

न कमो
सवाय है ।
जीवननाथ—वऩसतौर यकख दे ख के छोडने की जी चाहा होगा।
अभ

तयाम—नहीॊ ,आज जफ से भै आमा ह

ॉ ,क

छ घफयमा ह

आ दे ख यहा ह

ॉ।
जीवननाथ—आऩने क

छ ऩ

छा नहीॊ।
अभ

तयाम—ऩ

छा तो फह

त भगय जफ क

छ फतरामे बी , ह

ॉ-ह ॉ कय के
टार गई।
जीवननाथ—ककसी ककताफ भे वऩसतौर की रडाई ऩढी होगी। औय
कमा?
पाणनाथ—मही भै बी सभझता ह

ॉ।
जीवननाथ—रसवाम इसके औय हो ही कमा सकता है ?


छ दे य तक तीनो आदभी फै ठे गऩ-शऩ कयते यहे । जफ दस फजने को
आमे तो रोग अऩने-अऩने कभयो भे ववशाभ कयने चरे गमे। फाफ

साहफ बी
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रेटे । ददन-बय के थके थे। अखफाय ऩढते-ऩढते सो गमे। भगय फेचायी ऩ

णाय
की ऑॊ खो भे नीॊद कह ॉ ? वह फाय फजे तक एक कहानी ऩढती यही। जफ
तभाभ सोता ऩड गमा औय चायो तयप सननाटा छा गमा तो उसे अके रे डय
भार

भ होने रगा। डयते ही डयते उठी औय चायो तयप के दयवाजे फनद कय
ररमे। भगय जवनी की नीॊद , फह

त योकने ऩय बी एक झऩकी आ ही गमी।
आधी घडी बी न फीती थी कक बम भे सोने के कायण उसे एक अतत बॊमकय
सवपन ददखामी ददमा। चौककय उठ फै ठी , हाथ-ऩ ॉ व थय-थय क ॉ ऩने रगे। ददर
भे धडकन होने रगी। ऩतत का हाथ ऩकडकय चाहती थी कक जगा दे । भगय
कपय मह सभझकय कक इनकी पमायी नीॊद उचट जएगी तो तकरीप होगी ,
उनका हाथ छोड ददमा। अफ इस सभम उसकी जो अवसथा है वणय न नहीॊ की
जा सकती। चे हया ऩीरा हो यहा है , डयी ह

ई तनगाहो से इधय-उधय ताक यही
है , ऩतता बी खडखडाता है ता चौक ऩडती है । कबी अभ

तयाम के रसयहाने
खडी होती है , कबी ऩै ताने। रै मऩ की ध

ॊधरी योशनी भे वह सननाटा औय बी
बमानक भार

भ हो यहा है । तसवीये जो दीवायो से रटक यही है , इस सभम
उसको घ

यते ह

ए भार

भ होती है । उसके सफ योगटे खडे है । वऩसतौर हाथ भे
ररमे घफया-घफया कय घडी की तयप दे ख यही है । मकामक उसको ऐसा
भार

भ ह

आ कक कभये की छत दफी जाती है । कपय घडी की स

इमो को दे खा।
एक फज गमा था इतने ही भे उसको कई आदरभमो के ऩ ॉ व की आहट
भार

भ ह

ई। करेजा फ

सो उछारने रगा। उसने वऩसतौर समहारी। मह सभझ
गमी कक जजन रोगो के आने का खटका था वह आ गमे। तफ बी उसको
ववशवास था कक इस फनद कभये भे कोई न आ सके गा। वह कान रगामे ऩै यो
की आहट रे यही थी कक अकसभात दयवाजे ऩय फडे जोय से धकका रगा औय
जफ तक वह फाफ

अभ

तयाम को जगामे कक भजफ

त ककवाड आऩ ही आऩ


र गमे औय कई आदभी धडधडाते ह

ए अनदा घ

स आमे। ऩ

णाय ने वऩसतौर
सय की। तडाके की आवाज ह

ई। कोई धमभ से धगय ऩडा , कपय क

छ खट-खट
होने रगा। दो आवाजे वऩसतौर के छ

टने की औय ह

ई। कपय धभाका ह

आ।
इतने भे फाफ

अभ

तयाम धचलरामे। दौडो-दौडो , चोय , चोय। इस आवाज के


नते ही दो आदभी उनकी तयप रऩके । भगय इतने भे दयवाजे ऩय रारटे न
की योशनी नजय आमी औय पाणानाथ औय जीवननाथ हाथो भे सोटे ररए आ
ऩह

ॉचे । चोय बागने रगे , भगय दो के दोनो ऩकड ररए गमे। जफ रारटे ने
रेकय जभीन ऩय दे खा तो दो राशे ददखामी दीॊ। एक तो ऩ

णाय की राश थी
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औय द

सयी एक भदय की। मकामक पाणनाथ ने धचलरा कय कहा—अये मह तो
फाफ

दाननाथ है ।
फाफ

अभ

तयाम ने एक ठॊ डी साॉस बयकय कहा —आज जफ भै ने उसके
हाथ भे वऩसतौर दे खा तबी से ददर भे एक खटका-सा रगा ह

आ था। भगय ,
हाम कमा जानता था कक ऐसी आऩजतत आनेवारी है ।
पाणनाथ—दाननाथ तो आऩके रभरो भे थे।
अभ

तयाम---रभरो भे जफ थे तफ थे। अफ तो शर

है ।
× × × × ×


णाय को द

तनमा से उठे दो वषय फीत गमा है । स ॉ झ का सभम है ।
शीतर-स

गॊधधत धचतत को हषय दे नेवारी हवा चर यही है । स

मय की ववदा
होनेवारी ककयणे खखडकी से फाफ

अभ

तयाम के सजे ह

ए कभेये भे जाती है
औय ऩ

णाय के ऩ

ये कद की तसवीय के ऩै यो को च

भ-च

भ कय चरी जाती है ।
उनकी रारी से साया कभया स

नहया हो यहा है । याभकरी औय रकभी के


खडे इस सभम भाये आननद के ग

राफ की तयह खखरे ह

ए है । दोनो गहने-
ऩाते से रौस है औय जफ वह खखडकी से बय तनकारती है औय स

नहयी
ककयणे उनके ग

राफ-से भ

खडो ऩय ऩडती है तो जान ऩडता है कक स

मय आऩ
फरै मा रे यहा है । वह यह-यहकय ऐसी धचतवनो से ताकती है से ताकती है
जैसी ककसी की यही है । मकामक याभकरी ने ख

श होकय कहा —स

खी वह
दे खो आ गमे। उनके कऩडे कै से स

नदय भार

भ दे ते है ।
एक अतत स

नदय कपटन चभ-चभ कयती ह

ई पाटक के अॊदय दाखखर
होती है औय फॉगरे के फयाभदे भे आकय रकती है । फाफ

अभ

तयाम उसभे से
उतयते है । भगय अके रे नहीॊ। उनका एक हाथ पेभा के हाथ भे है । मदमवऩ
फाफ

साहफ का स

नदय चे हया क

छ ऩीरा हो यहा है । भगय होठो ऩय हरकी-सी


सकयाहट झरक यही है औय भाथे ऩय के शय का टीका औय गरे भे


फस

यत हाय औय शोबा फढा यहे है ।
पेभा स

नदयता की भ

यत औय जवानी की तसवीय हो यही है । जफ हभने
उसको वऩछरी फाय दे खा था तो धचनता औय द

फय रता के धचहन भ

खडे से ऩामे
जाते थे। भगय क

छ औय ही मौवन है । भ

खडा क

नदन के सभान दभक यहा
है । फदन गदयाम ह

आ है । फोटी —फोटी नाच यही है । उसकी चॊचरता दे खकय
आशचमय होता है कक कमा वही ऩीरी भ

ॉह औय उरझे फार वारी योधगन है ।
उसकी ऑॊ खो भे इस सभम एक घडे का नशा सभामा ह

आ है । ग

राफी जभीन
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की हये ककनाये वारी साडी औय ऊदे यॊ ग की करोइमो ऩय च

नी ह

ई जाके ट उस
ऩय खखर यही है । उस ऩय गोयी-गायी कराइमो भे जडाऊ कडे फारो भे ग

ॉथे


ए ग

राफ के प

र, भाथे ऩय रार योयी की गोर-बफॊ दी औय ऩ ॉ व भे जयदोज
के काभ के स

नदय भे स

हागा हो यहे है । इस ढग के रसॊ गाय से फाफ

साहफ को
ववशे ष कयके रगाव है कमोकक ऩ

णाय दे वी की तसवीय बी ऐसी ही कऩडे ऩदहने
ददखामी दे ती है औय उसे दे खकय कोई भ

जशकर से कह सकता है कक पेभा ही
की स

यत आइने भे उततय कय ऐसा मौवन नहीॊ ददखा यही है ।
अभ

तयाम ने पेभा को एक भखभरी क

सी ऩय बफठा ददमा औय भ

सकया
कय फोरे —पमायी पेभा आज भेयी जजनदगी का सफसे भ

फायक ददन है ।
पेभा ने ऩ

णाय की तसवीय की तयप भररन धचतवनो से दे खकय कहा —
हभायी जजनगी का कमो नही कहते ?
पेभा ने मह कहा था कक उसकी नजय एक रार चीज ऩय जा ऩडी जो


णाय की तसवीय के नीचे एक ख

फस

यत दीवायगीय ऩय धयी ह

ई थी। उसने
रऩककय उसे उठा ररमा। औय ऊऩय का ये शभी धगराप हटाकय दे खा तो
वऩसतौर था।
फाफ

अभ

तयाम ने धगयी ह

ई आवाज भे कहा —मह पमायी ऩ

णाय की
तनशानी है , इसी से उसने भेयी जान फचामी थी।
मह कहते —कहते उनकी आवाज क ॉ ऩने रगी।
पेभा ने मह स

नकय उस वऩसतौरा को च

भ ररमा औय कपय फडी
ररहाज के साथ उसी जगह ऩय यख ददमा।
इतने भे द

सयी कफटन दाखखर होती है । औय उसभे से तीन म

वक
हॉसते ह

ए उतयते है । तीनो का हभ ऩहचानते है ।
एक तो फाफ

जीवननाथ है , द

सये फाफ

पाणनाथ औय तीसये पेभा के
बाई फाफ

कभरापसाद है ।
कभरापसाद को दे खते ही पेभा क

सी से उठ खडी ह

ई , जलदी से घ

घॉट
तनकार कय रसय झ

का ररमा।
कभरापाद ने फदहन को भ

सकयाकय छाती से रगा ररमा औय फोरे —भै


भको सचचे ददर से भ

फायफाद दे ता ह

ॉ।
दोनो म

वको ने ग

र भचाकय कहा—जरसा कयाइमे जरसा, मो ऩीछा न


टे गा।
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