भासिक यासिपर ( १५ नवम्फय २०११ – १५ ददिम्फय २०११

जातक अऩने नाभाक्षय िे यासि का पर दे खें | िूमय वृजिक यासि भं वविाखेा भं , फुध वृजिक | भं , िुक्र वृजिक

)
नक्षत्र भं , भॊगर सिॊह

भासिक यासिपर चन्द्र यासि क आधाय ऩय ददमा गमा है | जजन्द्हं अऩनी जन्द्भ यासि ऩता नहीॊ है वे े भं व २२ नवम्फय िे धनु भं , गुरु ( वक्री ) भेष भं , िसन २०

नवम्फय िे तुरा भं , याहू वृजिक भं व कतु वृषब भं , चॊर का यासि ऩरयवतयन हय दो ददन भं होता है े वतयभान ग्रहजथथसत क अनुिाय भासिक यासिपर इि प्रकाय है | े

भे ष : ( चू , चे , चो , रा , री , रू , रे , रो , आ )

िूमय ऩॊचभेि होकय अष्टभ भं जथथत है | िाथ दह फुध षष्टेि व तृतीमेि होकय याहू क िाथ अष्टभ बाव े भं जथथत है | मह जथथसत थवथ्म हे तु ठीक नहीॊ है | श्वाि व उदय िे िम्फॊसधत ऩये िानी आ िकती है | ऩड़ोसिमं व छोटे बाई फहन द्वाया कष्ट व हासन िॊबव है | अग्रीभंट व कंट्रे क्ट ऩेऩय दे खेकय वैभनथम यहे गा | मह भाि थोडा िॊबर कय यहने का है | उऩाम : दगाय चारीिा का ऩाठ कयं | ु वृषब : ( इ , ऊ , ए , ओ , वा , वव , वू , वे , वो )

हथताक्षय कयं | छर हो िकता है | नौकयी व व्माऩय जथथसत ठीक यहे गी | िॊतान व ऩत्नी िे िॊफॊधं भं

यासि थवाभी िुक्र िप्तभ थथान भं जथथत है व िूमय , फुध व याहू दक िप्तभ भं मुसत है | फुध दद्वसतमेि ् व ऩॊचभेि है | वैवादहक िुखे भं वृवि व िाथ ही प्रेभ िॊफॊधं क सरए िभम अनुकर है | िॊतान िे े ू िम्फन्द्ध अच्छे यहं गे | नौकयी भं असधकायी वगय िे वाक् मुि हो िकता है | क्रोध ऩय सनमॊत्रण यखें

अन्द्मथा ऩये िानी होगी | व्माऩय क सरए जथथसत अनुकर है व िाथ ही जभीन जामदाद क्रम ववक्रम े ू सरए िभम फहुत अच्छा है |

हे तु िभम अनुकर है | बाग्मेि व कामेष िसन अऩनी उच्चथथ यासि भं प्रवेि कये गा | ऩदोन्द्नसत क ू े

उऩाम : दहया यत्न चाॊदी भं फनवाकय िुक्रवाय िुफह अनासभका भं धायण कयं | सभथुन : ( का , दक , क , घ , छ , क , को , हा ) ू े

यासि थवाभी फुध छटवे बाव भं तृतीमेि िूमय व याहू क िाथ जथथत है | क़र्य व ऋण िम्फॊसधत कामय े

हे तु िुब िभम है | थवथ्म िम्फॊसधत ऩये िानी हो िकती है | तृतीमेि िूमय व याहू की छटवे बाव भं उऩजथथसत ियकायी ऩक्ष िे राब ददखेाती है | िप्तभेि गुरु राब थथान भं जथथत है जो की वववाह एवॊ प्रणम िॊफॊधं क सरए अनुकर है | व्माऩय क सरए े ू े ठीक है | िुब िभम चर यहा है | नौकयी भं वाद वववाद

की िम्बावना है | छोटे बाई व फहन को चोट रग िकती है | िेमय फाजाय भं सनवेि क सरए िभम े

उऩाम : िुखेा नारयमर फहते हुए जर भं प्रवादहत कयं |

कक : ( ही , हू , हे , हो , डा , डी , डू , डे , डो ) य

िूमय वृजिक यासि भं दद्वतीमेि होकय व्ममेि व तृतीमेि फुध क िाथ ऩॊचभ बाव भं जथथत है | मह े

िभम थोड़ी िावधानी का है खेािकय अगय आऩ िॊतान की चाह यखेते है | प्रेभ िॊफॊधं भं अचानक

कटु ता आ िकती है मा धोखेा हो िकता है | नौकयी भं िभम ठीक नहीॊ यहे गा व िाथ ही असधकायी अऩनी वाणी का ध्मान यखेे अन्द्मथा ददक्कत होगी | उऩाम : िूमय को योजाना िुफह अनासभका भं धायण कयं | जर अवऩयत कये

वगय का िहमोग नहीॊ सभरेगा | वैवाहीक जीवन भं ऩये िानी होगी | उदय िम्फॊसधत योग हो िकते है |

| भूॊगा यत्न ताम्फे भं फनवाकय भॊगरवाय िुफह

सिॊ ह : ( भा , भी , भू , भं , भो , टा , टी , टू , टे )

भॊगर की यासि भं उऩजथथसत क कायण क्रोध फढे गा | ऩयाक्रभ व रड़ने की प्रवृवि फढे गी | िाथ ही े हे तु िभम उसचत है | िुक्र गृह की ऩॊचभ बाव भं थथसत प्रेभ िॊफॊधं क सरए अच्छी है | वैवादहक े

सिक्षा क क्षेत्र भं उन्द्नसत सभरेगी व ऩढ़ाई भं भन रगेगा | वाहन व जभीन जामदाद क क्रम ववक्रम े े जीवन भं भधुयता फनी यहे गी | धासभयक कामं क प्रसत आकषयण फढे गा | नौकयी भं फाधा व व्माऩाय की े थथसत ठीक यहे गी | भाता की फीभायी की वजह िे ऩये िान यहं गे | प्रोऩटी फेचने ऩय राब सभरेगा | कभीिन िे राब |

उऩाम : बैयव चारीिा का ऩाठ कयं व ऩन्द्ना यत्न फुधवाय क ददन कसनविका भं धायण कये | े कन्द्मा : ( टो , ऩा , ऩी , ऩू , ष , ढ , ऩे , ऩो )

छोटे बाई फहन व ऩड़ोसिमं िे भतबेद फनंगे व कटु ता यहे गी | थवबाव भं सचडसचडाऩन फना यहे गा , ध्मान यखें | नौकयी व अन्द्म कामय क्षेत्र भं ऩये िानी फनी यहे गी | भॊगर की द्वादि बाव भं थथसत क े कायण अचानक व्मम फढं गे | दघयटना की िॊबावना है | वाहन मोग व मात्रा क मोग फनते है | े ु

थथानाॊतयण की वजह िे ऩये िासनमाॊ फढ़े गी | असधकायी वगय का िहमोग प्राप्त नहीॊ होगा | िेमय फाजाय भं सनवेि हे तु िभम अिुब है |ब्रहथऩसत वक्री है व अष्टभ थथान िे गोचय कय यहा है इिसरए िॊतान क सरमा िभम ठीक नहीॊ है | े

उऩाम : याहू मॊत्र की ऩूजा कयं | तु रा : ( या , यी , रु , ये , यो , ता , ती , तू , ते ) थवाथ्म िाभान्द्म यहे गा | वाणी भं कटु ता यहे गी व थाइयोइड िे िम्फॊसधत ऩये िानी हो िकती है |

भॊगर की राब थथान भं जथथसत क कायण फड़े बाई व सभत्रं क िाथ वैभनथम यह िकता है व वववाद े े की जथथसत फनेगी | ब्रहथऩसत भेष यासि िे गोचय कय यहा है | वैवादहक िम्फन्द्ध जुडंगे व वववाह की थथसत फनेगी | धन राब की थथसत फनी यहे गी | नेत्रं भं कष्ट हो िकता है | चतुथि व ऩॊचभेि िसन े की उच्च यासि भं जथथसत ऩारयवारयक िम्फन्द्ध व प्रणम िॊफॊधं क सरए अनुकर है | व्माऩाय व नौकयी े ू रे सरए िभम ठीक है | ऩुयाना रुका हुआ धन प्राप्त होगा |

उऩाम : गाम को चाया जखेराए व गाम की

िेवा कये |

वृजिक : ( तो , ना , नी , नू , ने , नो , मा , मी , मू ) कामेष िूमय की वृजिक यासि भं थथसत अच्छी है | ऩदोन्द्नसत व असधकायी वगय िे िहमोग सभरेगा | याहू का गोचय कष्टदामक है | ववश्वािघात हो िकता है | िप्तभेि िुक्र की धनु यासि भं जथथसत िकता व्माऩय व वववाह हे तु िुब है | वैवादहक जीवन भं थोडा कष्ट हो िकता है | जीवनिाथी को योग हो व्मम होगा |

है | थवबाव भं उग्रता यहे गी व िाथ ही एक भानसिक बम फना यहे गा | घय एवॊ वाहन ऩय

उऩाम : िूमय मॊत्र की थथाऩना कय , सनमसभत ऩूजन कयं | धनु : ( मे , मो , ब , बी , बू , धा , पा , ढा , बे ) यासिि गुरु ऩॊचभ बाव िे गोचय कय यहा है जो की िुब है | िूमय , फुध व याहू की द्वादि बाव की

थथसत अचानक व्मम होने का िॊकत दे ती | थवाथ्म अच्छा यहे गा व भन प्रिन्द्न यहे गा | भाता वऩटा े का िुखे सभरेगा | घय भं सभत्र व अन्द्म रयश्तेदायं का आवागभन रगा यहे गा | जीवनिाथी ऩय व्मम होगा | जीवनिाथी क बाग्म िे कामय भं िपरता सभरेगी | ववद्यासथयमं क सरए िभम फहुत ही े े अनुकर है , ऩरयश्रभ कयं गे तो िपरता सभरेगी | ित्रु ऩक्ष का दभन होगा | ू

उऩाम : ऩुखेयाज यत्न िोने मा अष्टधातु भं फनवाकय गुरुवाय िुफह तजयनी भं धायण कये | िूमय मॊत्र का ऩूजन कयं |

भकय : ( बो , जा , जी , खेी , खेू , खेे , खेो , गा , गी

)

यासि थवाभी िसन तुरा यासि भं जथथत है | तुरा यासि भं िसन उच्च का होता है | यासिि व धनेि

होकय उच्च का होना भकय यासि वारं क सरए फहुत ही राबदामक है | ऩदोन्द्नसत व व्माऩाय भं राब े सभरेगा | फड़े बाई व सभत्रं िे िम्फन्द्ध अच्छे यहं गे व उनका िहमोग प्राप्त होगा | वऩता क सरए कष्ट े का िभम है |न्द्मामाधीन भाभरं भं अनुकर ऩरयणाभ सभरंगे | बाग्म वविेष रूऩ िे िाथ दे गा | ू अध्माजमभक व भाॊगसरक कामय िॊऩन्द्न हंगे |

उऩाम ; िसन मॊत्र की थथाऩना कय “ ऊ िॊ िनैियाम नभ् “ भन्द्त्र का ९ मा १०८ फाय जऩ कयं | ॉ कम्ब : ( गु , गे , गो , िा , िी , िु , िे ु , िो , दा )

यासि थवाभी िसन उच्चथथ होकय बाग्म बाव भं जथथत है | बाग्मोदम व वऩता क िहमोग िे े

अममसधक राब | उच्च असधकारयमं िे कष्ट | ववजजरंि क कायण ऩये िानी | भॊगर की िप्तभथथ े जथथसत | धासभयक कामं व भाॊगसरक कामं भं व्मम होगा | कतु की चतुथय थथान भं जथथसत े ऩारयवारयक जीवन भं कष्टदामक होगी | दघयटना क प्रसत िचेत यहं | े ु उऩाम : यवववाय क ददन रार गाम को गुड व योटी जखेराएॊ | े

जथथसत क कायण वैवादहक जीवन भं ददक्कत | िॊतान हे तु िभम अनुकर है | व्माऩाय भं राब की े ू

भीन : ( दी , द ू , थ , दे , दो , चा , ची )

यासि थवाभी गुरु का गोचय भेष यासि िे चर यहा है , थवा्म उिभ यहे गा | उियाधय भं आसथयक

िॊिाधनं भं वृवि होगी | इि भाि भं मात्रामे असधक होगी | भॊगर का षष्ट बाव भं होना , ित्रु ऩक्ष क सरए हासनकायक है | भुक़दभे भं जीत िॊबव है | नौकयी भं वववाद हो िकते है | वैवादहक जीवन े फड़ी फीभायी मा उरझन दे िकता है | नए कामं को िुरू कयने िे ऩहरे िचेत यहे व छोटी िी फात को बी अनदे खेी न कये | अच्छा यहे गा व ऩत्नी क िहमोग िे आऩको राब सभरेगा | भाता वऩता को कष्ट | अष्टभथथ िसन कोई े

उऩाम : हनुभान जी को सिन्द्दय का चोरा चढाएॊ | ू ऩ आकाि ( ज्मोसतष सियोभजण )

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