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जहाँ हर चीज है !

यार|
सभी चाहत के पुजार|
!यार| Íजसक| ज़बां
वह| है मेरा िह=दःतां ु
जहाँ ग़ािलब क| ग़ज़ल है
वो !यारा ताज महल है
!यार का एक िनशां
वह| है मेरा िह=दःतां ु
जहाँ फू ल| का Íबःतर है
जहाँ अ¹बर क| चादर है
नजर तक फै ला सागर है
सुहाना हर इक मंजर है
वो झरने और हवाएँ,
सभी िमल जुल कर गाय
!यार का गीत जहां
वह| है मेरा िह=दःतां ु
जहां सूरज क| थाली है
जहां चंदा क| !याली है
िफजा भी 4या िदलवाली है
कभी होली तो िदवाली है
वो Íबंिदया चुनर| पायल
वो साड| मेहं द| काजल
रं गीला है समां
वह| है मेरा िह=दःतां ु
कह| पे निदयाँ बलखाएं
कह|ं पे पंछ| इतराय
बसंती झूले लहराएं
जहां अÍ=ग=त ह भाषाएं
सुबह जैसे ह| चमक|
बजी मंिदर म घंट|
और मÍःजद म अजां
वह| है मेरा िह=दःतां ु
कह|ं गिलय| म भंगड़ा है
कह| ठे ले म रगडा है
हजार| िकःम आम| क|
ये चौसा तो वो लंगडा है
लो िफर ःवतंऽ िदवस आया
ितरं गा सबने लहराया
लेकर िफरे यहाँ-वहां
वह| है मेरा िह=दःतां ु
Page 1of 1 मेरा िह=दःतां ु : A Hindi poem on India on the eve of Independece Day | Emotionally Spea...
10/11/2011 http://vikas-gupta.in/2009/08/13/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%...

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