बाऱ ननमोननया का प्रकोऩ एवॊ ननयॊत्रण

रेखक भॊडर
शोबा शक्
ु रा, सौम्मा अयोया, शशखा श्रीवास्तव, याहुर कुभाय द्वववेदी, नदीभ सरभानी, नीयज भैनारी,
रयतेश आमय, जीतेन्द्र द्वववेदी, जजजततभा जनतानाभाराका एवॊ फाफी यभाकाॊत

इन रेखों को ववश्व ननभोननमा ददवस, १२ नवम्फय २०११, के उऩरक्ष्म भें , शरखा गमा है . इन रेखों
भें अशबव्मजक्त औय ववचाय रेखक के औय जजन रोगों का साऺातकाय हुआ उनके हैं.
अक्टूफय २०११

शसदटज़न न्द्मूज़ सववयस (सी.एन.एस.) के रेख ऩय कोई बी
कॉऩीयाईट नहीॊ हैं, औय जन-दहत भें इसका उऩमोग औय ववतयण
हो इसी आशम से हभने इस प्रकाशन को प्रस्तुत ककमा है .

प्रकाशक एवॊ भुरक: ऩूजा प्रकाशन
सी-२२११, सी-ब्राक चौयाहा, इॊददया नगय, रखनऊ-२२६०१६
पोन: २३५८२३०
ईभेर: editor@citizen-news.org
भूल्म: रूऩमे ५०

2 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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अनक्र
ु मणणका
ववषय 1: शशशु के जन्द्भ से ६ भाह तक ननभोननमा एवॊ अन्द्म सॊक्रभण से फचाव भें एकभात्र स्तनऩान का भहतव

भाॉ का दध
ू - नवजात शशशु का प्रथभ टीका …………………………………………………………………………………………… 6

केवर स्तन-ऩान ही नवजात शशशु का सवोततभ आहाय है - ऊऩय का दध
ू नहीॊ……………………………… 9

स्तनऩान से ननभोननमा से फचाव भभ
ु ककन ………………………………………………………………………………………… 12
फच्चे को ननभोननमा से फचाने भें सफसे कायगय "भाॉ का दध
ू ” ……………………………………………………………… 15
स्तनऩान फढाता है फच्चों की प्रनतयोधक ऺभता………………………………………………………… 17

शशशु के जीवन के ऩहरे 6 भहीने स्तनऩान : एकभात्र सुयक्षऺत उऩाम…………………………………… 19
फच्चों को ननभोननमा से फचाता है भाॊ का दध
ू …………………………………………………………… 21
ववषय २: ननभोननमा एवॊ अन्द्म सॊक्रभण से फचाव भें ऩौजटटक आहाय एवॊ स्वच्छता का भहतव

फच्चों का सऩ
ु ोषण औय ननभोनमा से फचाव…………………………………………………………… 24

अच्छा ऩोषण फच्चों को ननभोननमा से फचाता है …………………………………………………………27

सुऩोषण से ननभोननमा फचाओ भुभककन……………………………………………………………… 29
फच्चों भें ननभोननमा फचाव के शरए ऩोषण औय स्वच्छता जरूयी………………………………………… 31

ऩोषण एवॊ स्वच्छता का ध्मान यखें, फच्चों को ननभोननमा से फचाएॊ…………………………………… 33
ववषय ३: ननभोननमा एवॊ अन्द्म सॊक्रभण औय घय के अन्द्दय वामु प्रदष
ू ण

ननभोननमा का फचाव औय धम्र
ू ऩानयदहत वातावयण…………………………………………………… 36
फच्चों भें ननभोननमा के खतये को फढाता है घय के बीतय का प्रदष
ू ण…………………………………… 39

फच्चों भें ननभोननमा जनती है अस्वच्छता औय ऩयोऺ धम्र
ू ऩान………………………………………… 41

घय के बीतय का प्रदष
ू ण एवॊ फच्चों भें ननभोननमा……………………………………………………… 43

घय भें धम्र
ू ऩान से बी हो सकता है फच्चे को ननभोननमा………………………………………………… 45
ववषय ४: ननभोननमा टीका

घातक ननभोननमा से फचाव के शरमे जीवन यऺक टीके………………………………………………… 48
ननभोननमा के टीका के फाये भें जनभानस भें अऻानता………………………………………………… 51
सफसे जरूयतभॊद फच्चों को नहीॊ रग यहा है ननभोननमा टीका…………………………………………

53

फच्चों को शरए सस्ते ननभोननमा टीके की उऩरब्धता………………………………………………… 54
टीका रगवाकय फच्चे को ननभोननमा से फचाएॊ………………………………………………………… 56
ववषय ५: ननमोननया उऩचार

चभतकायी औषधध द्वाया ननभोननमा का उऩचाय……………………………………………………… 59

सभम यहते उऩचाय, फचा सकता है ननभोननमा से फच्चे की जान……………………………………… 62
ननभोननमा ग्रस्त-फच्चों को अक्सय नहीॊ शभरता सभम से उऩचाय……………………………………

64

अच्छे एॊटीफामोदटक्स से हो सकता है ननभोननमा का इराज…………………………………………… 66
फच्चों भें ननभोननमा का उऩचाय एक चन
ु ौती………………………………………………………… 68

3 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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आबाय
इस ऩस्
ु तक को शसदटज़न न्द्मज़
ू सववयस (सी.एन.एस.) की भदद से दस रेखकों ने करभफद्ध ककमा है
जो इस प्रकाय हैं: सौम्मा अयोया, शशखा श्रीवास्तव, शोबा शुक्रा, याहुर कुभाय द्वववेदी, नदीभ
सरभानी, नीयज भैनारी, जीतेन्द्र द्वववेदी, रयतेश आमय, जजजततभा जनतानाभाराका एवॊ फाफी
यभाकाॊत. हभ २०११ स्भार ग्राॊट्स पॉय वल्डय ननभोननमा डे के अनुगह
ृ ीत हैं कक उन्द्होंने इस प्रमास को
औय अशबनव बायत पाउनडेशन को सभथयन प्रदान ककमा. हभ आबायी हैं जॉन हाऩककॊस
ववश्वववद्मारम, गावी अराइॊस, ग्रोफर अराइॊस पॉय क्रीन स्टोव्स, अॊतयायटरीम वक्सीन अक्सेस
सेण्टय, एवॊ फेस्ट शोट पाउनडेशन के जजनके भहतवऩूणय सहमोग से मह प्रमास सॊबव हो सका.
हभाया ववशेष आबाय है दहॊदी, उदय ू औय अॊग्रेजी के सॊऩादकों औय अनुवादकों का जजनभें सुश्री बफभरा
शभश्रा, सुश्री भामा जोशी एवॊ सुश्री शहरा घाननभ प्रभुख हैं.
हभ उन सफ रोगों का तहे ददर से धन्द्मवाद कयना चाहें गे जजनका हभने साऺातकाय ककमा.

छायाकार:

शोबा शुक्रा, सौम्मा अयोया, शशखा श्रीवास्तव, याहुर कुभाय द्वववेदी, नदीभ सरभानी, नीयज

भैनारी, रयतेश आमय, जीतेन्द्र द्वववेदी, एवॊ फाफी यभाकाॊत

4 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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ववषम 1
शशशु के जन्द्भ से ६ भाह तक ननभोननमा
एवॊ अन्द्म सॊक्रभण से फचाव भें एकभात्र
स्तनऩान का भहतव

5 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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भाॉ का दध
ू - नवजात शशशु का प्रथभ टीका
भाॉ का दध
ू नवजात-शशशुओॊ एवॊ फच्चों के शरमे एक आदशय ऩौजटटक आहाय है । मह शशशु के शरमे ग्रास के सभान है
एवॊ इसे शशशु को ददमे जाना वारा प्रथभ टीका (वैक्सीन) बी कहा जा सकता है । भाॉ के दध
ू भें फच्चों को ऩोवषत
कयने की अद्ववतीम ऺभता होती है । इसके अनतरयक्त भाॉ के दध
ू भें अनेकों योग प्रनतकायक (इम्मून ग्रोववनाश)
ऩामे जाते है जो शशशुओॊ को फचऩन की आभ फीभारयमों से जजनभें ननभोननमा एक फीभायी है , यऺा प्रदान कयते है ।
ननभोननमा से ववश्व बय भें प्रनतददन 4,300 से अधधक शशशओ
य मा से सयु क्षऺत,
ु ॊ की भतृ मु होती है । भाॉ का दध
ू ऩण
ू त
ऩचने भें आसानी से उऩरब्ध होता है ।
स्तन-ऩान शशशु के स्वास््म एवॊ जीवन के शरमे सफसे सस्ता एवॊ प्रबावकायी उऩाम है । जन्द्भ के प्रथभ छ: भहीनों
तक शशशुओॊ को स्तन-ऩान से वॊधचत यखने के कायण ववश्व भें राखों कयोड़ों शशशुओॊ की प्रनतवषय भतृ मु होती है जो
योकी जा सकती है । स्तन-ऩान शशशुओॊ को तातकाशरक राब दे ने के अनतरयक्त उन्द्हें जीवन बय शायीरयक एवॊ
भानशसक रूऩ से स्वस्थ यहने की ऺभता दे ता है । इसभें कोई आश्चमय की फात नहीॊ है कक ववश्व स्वास्थम सॊगठन
शशशु जन्द्भ के प्रथभ 6 भहीनों तक स्तन-ऩान को सकक्रम रूऩ से प्रोतसादहत कयता है ।
डॉ. नीरभ शसॊह, जो ‘वारसल्म रयसोसय सेन्द्टय पॉय हे ल्थ' की भुख्म कामयकताय है एवॊ प्रसूनत व स्त्री योग ववशेषऻ हैं,
के अनुसाय ऩूणय रूऩ से स्तन-ऩान का तातऩमय है कक शशशु को भात्र केवर भाॉ का दध
ू ही दे ना चादहमे, भाॉ के दध
ू के
अनतरयक्त कोई बी औय चीज जैसे ऩानी, ग्राइऩवाटय अथवा शहद नहीॊ दे ना चादहमे। भाॉ के दध
ू भें योग प्रनतयोधक
ग्रोव्मुशरनज ऩामे जाते है जो शशशुओॊ को अनेक प्रकाय की फीभारयमों, ववशेष कय ननभोननमा व अनतसाय की
प्रनतयोधकता प्रदान कयते हैं।
इसके अनतरयक्त भाॉ का दध
ू , शशशुओॊ की भानशसक ऺभता का ववकास कयने भें बी सहामता प्रदान कयता है । मह
ऩामा गमा है कक स्तन-ऩान कयने वारे फच्चों का फोवद्धक स्तय ऊऩय का दध
ू ऩीने वारे फच्चों की अऩेऺा मा 10 गुना
अधधक होता है । स्तन-ऩान कयने वारे फच्चों भें जीवन भें आगे जाकय चभय योगों, अस्थभा एवॊ ह्रदम सम्फजन्द्धत
योगों के प्रनत एरजी को बी कभ कयता है । प्रशसद्ध फार योग ववशेषऻ डॉ. एस.एन. यस्तोगी, जजनका एक ननजी
क्रीननक है , के अनुसाय केवर स्तन-ऩान ही नवजात शशशुओॊ का सफसे उततभ बोजन है ।
डॉ. एस. के. सेहता, जो रखनऊ की एक प्रशसद्ध फार एवॊ नवजात शशशु ववशेषऻ है , के अनुसाय स्तनऩान भाॉ एवॊ
फच्चे के फीच एवॊ बावनातभक सॊफॊध स्थावऩत कयता है जजससे भाॉ व फच्चे के सॊफॊध औय भजफूत हो जाते हैं। इसके
अनतरयक्त भाॉ के दध
ू भें कुछ ववशेष हायभोन्द्स ऩामे जाते हैं जो गाम मा बैंस के दध
ू भें नहीॊ होते है । मे हायभोन्द्स
फच्चें भें अनेक फीभारयमाॉ जजनभें से ननभोननमा एक है , के प्रनतयोधकता प्रदान कयते हैं।

6 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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धचककतसकों द्वाया भाॉ के दध
ू की गुणवतता को प्रभाणणत कयने के फाद बी 40 प्रनतशत से कभ नवजात शशशुओॊ को
केवर भाॉ का दध
ू वऩरामा जाता है । डॉ. नीरभ शसॊह की क्रीननक भें आने वारी भाताओॊ भें से केवर 15 प्रनतशत
मा 20 प्रनतशत भातामें ही इस ननमभ का ऩारन कयती ऩामी गमी। इस ववषम भें भाताओॊ को प्रोतसादहत कयने की
अतमन्द्त आवश्मकता है क्मोंकक स्तन-ऩान कयाने के सॊफॊध भें उन्द्हें अनेक प्रकाय के भ्रभ है जैसे स्तन के 'ननऩुर'
भें ददय होना, मा ऩमायप्त भात्रा भें फच्चें के शरमे दध
ू का न होना, स्तन-ऩान सॊफॊधी अन्द्म जानकायी न होना मा कुछ
साभाजजक वणायसॊकृनतक अवयोध इतमादद।
डॉ. नीरभ शसॊह के कथनानुसाय नवजात शशशु की भाॉ को स्तन-ऩान प्रोतसादहत कयने के शरमे न केवर डॉक्टय
वयन नसय, ऩरयचारयका तथा अन्द्म रोगों का बी सहमोग आवश्मक है । डॉक्टय को भाॉ को इस फात का ववश्वास
ददराना चादहमे कक केवर स्तन-ऩान द्वाया ही नवजात शशशु को आहाय प्राप्त होता है । डॉक्टय को भाॉ को शशशु के
जन्द्भ के फाद ही स्तन-ऩान आयम्ब कयने की सराह दे नी चादहमे। धचककतसीम कभयचारयमों (ऩैयाभेडडकर स्टाप)
का कतयव्म है कक वे भाॉ को नवजात शशशु को केवर स्तन-ऩान कयने के शरमे प्रोतसादहत कयें । ऩरयवाय के सदस्मों
का बी कतयव्म है कक वे भाॉ को स्तन-ऩान की भहतता फतामेंगे व भाॉ के खानऩान व ऩोषण का बी ध्मान यखें।
कामययत भाताओॊ के शरमे उनके काभ कयने के स्थान का वातावयण, एवॊ कामय कयने की सुववधामें नवजात शशशुओॊ
के अनक
ु ू र होनी चादहमे। कामययत भाताओॊ को अऩने नवजात शशशओ
ु ॊ को स्तन-ऩान कयाने की सवु वधा शभरनी
चादहमे - दफ्तय भें उन्द्हें एक एकान्द्त स्थान शभरना चादहमे जहाॉ वे स्तन-ऩान कया सकें। गबयवती कामययत
भदहराओॊ को 6 भहीनों का भात ृ अवकाश शभरना चादहमे। सॊसाय के अनेक याटरों ने इस ओय ठोस कदभ उठामे हैं
ककन्द्तु हभाये दे श बायत भें अबी इस ववषम ऩय फहुत काभ कयना है ।
डॉ. एस. एन. यस्तोगी का कहना है कक ‘‘कुछ भदहरामें अऩनी शायीरयक आकृनत ऩय अतमाधधक ध्मान दे ती है । वे
सोचती हैं कक स्तन-ऩान कयाने से उनकी शायीरयक सन्द्
ु दयता कभ हो जामेगी,’’ ऩयन्द्तु ऐसा सोचना बफल्कुर गरत
है । इसके अनतरयक्त कुछ गबयवती भदहरामें स्वमॊ इतनी अल्ऩ ऩोवषत होती है कक उन्द्हें इस फात का डय फना यहता
है कक वे अऩने नवजात शशशुओॊ को उधचत भात्रा भें अऩना दध
ू नहीॊ दे ऩामेगी।
डॉ. एस. के. सेहता का कहना है कक ‘‘बायतवषय भें अधधकतय गबयवती भदहरामें अल्ऩ-ऩोवषत है औय उन्द्हें इस फात
का डय फना यहता है कक वे उधचत भात्रा भें नवजात शशशुओॊ को अऩना दध
ू नहीॊ दे ऩामेगी। अत: वे डडब्फे का व
अन्द्म प्रकाय का ऊऩय का दध
ू शशशुओॊ को वऩराना आयम्ब कय दे ती है । भाॉ का दध
ू के अनतरयक्त अन्द्म सबी प्रकाय
के दध
ू नवजात शशशु के शरमे अतमन्द्त हाननकायक होती हैं। मदद नवजात शशशु को प्रथभ 6 भहीनों तक केवर औय
केवर स्तन-ऩान कयामा जामे तो उसे अनेक प्रकाय के सॊक्रभक योगों के होने की सॊबावना कभ हो जाती है । केवर
रगबग 1 प्रनतशत उदाहयणों भें ऩामा गमा है कक भाॉ का दध
ू उधचत भात्रा भें नहीॊ होता है , मा गबयवती भदहरा
ककसी गॊबीय योग से ऩीडड़त है । इन्द्हीॊ दशाओॊ भें डाक्टय शशशु को केवर उसके उऩमोग के शरमे फनामा गमा डडब्फें

7 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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का दध
ू जो फाजाय भें उऩरब्ध होता है व जजसे भाॉ-फाऩ खयीद सकते है , नवजात शशशु को वऩराने की सराह दे ते हैं,
ऩयन्द्तु डडब्फे के दध
ू व फोतर से दध
ू वऩराने भें अनेक खयाबफमाॉ है । फोतर से दध
ू वऩराने भें स्वच्छता का
अतमाधधक ध्मान यखना चादहमे, अन्द्मथा शशशु को ककसी बी प्रकाय का सॊक्रभण होने की सॊबावना यहती है , इसके
अनतरयक्त फोतर से दध
ू वऩराते सभम भातामें फहुधा उसभें ऩानी शभरा दे ती हैं। ऐसा दध
ू ऩीने वारा शशशु
कुऩोवषत यहता है ।
डॉ. नीरभ शसॊह का मह बी कहना है कक शशशु के शरमे फनामा गमा डडब्फें का दध
ू शशशु को ऩोषक ततव तो दे सकता
है ऩयन्द्तु डडब्फे के इस प्रकाय के शशशु के दध
ू भें ‘इम्मून ग्रोववनस नहीॊ ऩामे जाते हैं। साथ ही फोतर से दध
ू वऩराने
भें अतमधधक स्वच्छता का ध्मान यखना आवश्मक है जो हभाये दे श भें सॊबव नहीॊ है । बायत एक उटण कदटफन्द्ध
दे श है । महाॉ का उच्च ताऩभान अनेक प्रकाय के सॊक्राभक योगों को पैराने भें सहामक होता है । डडब्फे का दध

शशशुओॊ को फीभारयमों से रड़ने की ऺभता नहीॊ प्रदान कयता है ।
स्तन ऩान के राबों के प्रनत घोय अऻानता के वातावयण भें बी श्रीभती अल्ऩना शसॊह ऐसी कुछ भाताओॊ के ववचाय
उदाहयणीम हैं श्रीभती अल्ऩना ने अऩने दस
ू ये शशशु को शहय के प्राइवेट नशसयग होभ (शसटी अस्ऩतार) भें आऩये शन
द्वाया जन्द्भ ददमा। वे कहती है , ‘‘भैंने आऩये शन द्वाया जन्द्भे शशशु को जन्द्भ के ठीक फाद से स्तन-ऩान कयाना
प्रायम्ब कय ददमा तथा 6 भहीनों तक भैंने अऩने शशशु को ऩानी मा ऊऩय का दध
ू नहीॊ ददमा। भझ
ु े 3 भहीनों के
भाततृ व अवकाश के फाद अऩना कामयबाय सॊबारना ऩड़ा। भैं स्तन-ऩॊऩ की सहामता से अऩना दध
ू 3,4 घॊटे तक
सॊग्रदहत कय रेती थी। इस प्रकाय भैंने अऩने शशशु को कभ से कभ एक वषय तक स्तन-दग्ु ध वऩरामा।
स्तन-ऩान को प्रोतसादहत कयने के शरमे स्वास््म सॊफॊधी सुववधामें उऩरब्ध होनी चादहमे-उदाहयण के शरमे
नवजात शशशुओॊ की भाताओॊ को स्तन-ऩान के ववषम के सराहकाय उऩरब्ध होने चादहमे। स्तन-ऩान को अधधक
से अधधक प्रोतसादहत कयना चादहमे। भाताओॊ एवॊ शशशओ
ु ॊ को इस प्रकाय की सवु वधामें उऩरब्ध कयाने के शरमे
150 दे शों भें 20,000 से अधधक शशशु कल्माणकायी सुववधामें उऩरब्ध हैं। इसके शरमे हभ ववश्व स्वास््म सॊगठनमूनीसेप (WHO-UNICEF) के फहुत आबायी है . स्तनऩान सॊफॊधी अनेक प्रकाय के अपवाहों एवॊ साभाजजक
साॊस्कृनतक अवधायणाओॊ को दयू कयने के शरमे जन स्वास््म कल्माण के कामय भें कामययत कतायओॊ की अतमन्द्त
आवश्मकता है , हभें केवर भाताओॊ को नहीॊ अवऩतु उनके ऩारयवारयक सदस्मों को बी स्तन-ऩान के गुणवतताओॊ के
प्रनत जागरूक कयने की आवश्मकता है । स्तन-ऩान को प्रोतसादहत कयने के शरमे सम्ऩूणय सभाज के सहमोग की
आवश्मकता है ।

सौम्मा अयोया - सी.एन.एस.
(अनुवाद: सुश्री ववभरा शभश्र)

8 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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केवर स्तन-ऩान ही नवजात शशशु का सवोततभ आहाय है
- ऊऩय का दध
ू नहीॊ
वाल्मावस्था भें होने वारी ननभोननमा फीभायी को योकने भें भाॉ के दध
ू का फहुत भहतवऩूणय मोगदान है । ववश्व बय
भें प्रनत 20 सेकेंड भें 1 फच्चे की भतृ मु ननभोननमा से हो यही है । प्रनतवषय 1.6 कयोड़ फच्चों की भतृ मु ननभोननमा योग
से होती है । भतृ मु का मह आॊकड़ा ववश्व बय भें होने वारी शशशुओॊ की भतृ मु का रगबग 20 प्रनतशत है । इनभें से
(रगबग 98 प्रनतशत) फच्चे जजनकी भतृ मु ननभोननमा से होती है ववकासशीर दे शों के हैं। बायत वषय भें प्रनत वषय
40,000 से अधधक 5 वषय की आमु से कभ के फच्चों की भतृ मु ननभोननमा योग से ऩीडड़त होकय होती है ।केवर स्तनऩान ही फच्चों को अनेक प्रकाय के योगों, ववशेषकय ननभोननमा, रड़ने की ऺभता प्रदान कयता है । भाॉ का दध
ू ही
शशशु को अनेक ऩोषक ततव दे ता है साथ ही इम्मूनोग्रोबफन, प्रनतयोधक ततव बी दे ती है । इन ततवों से शशशुओॊ को
“वसननरी सॊफॊधधत योगों से रड़ने की ऺभता शभरती है । इनके द्वाया फच्चों की योग प्रनतयोधक ऺभता फढती है ।
स्तन-ऩान न कयने वारे फच्चे स्तन-ऩान कयने वारे फच्चों की अऩेऺा ऩाॉच गुना अधधक सॊख्मा भें ननभोननमा योग
से ऩीडड़त होकय भतृ मु को प्राप्त कयते हैं. हभें माद यखना चादहमे कक ननभोननमा पेपड़ों के सॊक्रशभत होने ऩय होता
है । ननभोननमा होने ऩय पेपड़ों भें भवाद व रव बय जाता है जजसके कायण पेपड़ों भें ऑक्सीजन की भात्रा कभ हो
जाती है एवॊ श्वास रेने भें कटट होता है । इस सफका कायण जीवाणु सॊफॊधधत सॊक्रभण होता है (मद्मवऩ ववषाणु एवॊ
पन्द्गस) ननभोननमा योग के भूर कायण है । मह योग फच्चों की ववकशसत होती हुमी योग प्रनतयोधक ऺभता के
कुऩोषणता के कायण, प्रदवू षत वातावयण के कायण एच. आइ. वी. से सॊक्रशभत होने के कायण, तऩेददक के कायण,
इन्द्फ्रुमनजा एवॊ खसया योग के कायण एवॊ जन्द्भ के सभम अल्ऩ बाय के कायण दफ
य ऩड़ जाने से होता है ।
ु र
वतयभान सभम भें सॊसाय भें केवर 38 प्रनतशत फच्चे ही स्तन-ऩान कयते हैं. स्तन-ऩान कयाने भें अनेक फाधामें हैं
जैसे सभम की कभी, साभाजजक व साॊस्कृनतक रूदढवाददतामें, फाय-फाय प्रसव कयना, ऊऩय का डडब्फे का दध

आसानी से उऩरब्ध होना तथा स्तन-ऩान सॊफॊधी ऻान की कभी होना। नेल्सन अस्ऩतार के फार-योग ववशेषऻ डॉ.
ददनेश ऩाॊडे का कहना है कक "आजकर की भाताओ भें 'काकटे र पीडडॊग' अथायत फच्चे को फोतर का दध
ू वऩराना
फहुत प्रधचशरत हैं। ववशेषकय कामययत भदहराओॊ भें मह फहुत प्रधचशरत है । अत: उनके फच्चे ऊऩय का दध
ू अथवा
डडब्फे का दध
ू ऩीते हैं।
नेरसन अस्ऩतार रखनऊ के ननदे शक डॉ. अजम शभश्र ने वऩछरे 6 भहीनों भें गॊबीय ननभोननमा से ऩीडड़त 30
शशशुओॊ का इराज ककमा है । जफ भैं शसतम्फय 2011 भें उनके अस्ऩतार गई तो ऩामा कक 10 ददन से कभ उम्र के
नवजात शशशुओॊ को जो शशशु ननभोननमा से ऩीडड़त थे, उऩचाय के शरमे बती ककमा गमा था। उन नवजात शशशुओॊ
के अनतरयक्त थोड़े फड़े शशशु बी ननभोननमा के उऩचाय के शरमे बती ककमे गमे थे।

9 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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डॉ. अशभता ऩाॊडे जो छत्रऩनत शाहूजी भहायाज धचककतसा ववश्वववद्मारम भें प्रसूनत एवॊ स्त्री-योग ववबाग भें
सहामक प्रोपेसय हैं, बी इस फात की ऩजु टट कयती हैं कक उनके अस्ऩतार भें फार ननभोननमा से ऩीडड़त फड़ी सॊख्मा
भें फच्चों का उऩचाय होता है । उनका कहना है कक "हभ स्त्री-योग ववशेषऻों को भात्र 48 घॊटे मा 7 ददन के जन्द्भे
नवजात शशशुओॊ का जो ननमोनेटर ननभोननमा से ऩीडड़त होते है , उऩचाय कयना ऩड़ता हैं। वाल्मवस्था भें
ननभोननमा से ऩीडड़त फच्चें की भतृ मु भें 50 प्रनतशत भतृ मद
ु य ‘ननमोनेटर ननभोननमा’ से ऩीडड़त नवजात शशशओ
ु ॊ
की होती है । सवेऺण कयने ऩय ऩामा गमा है कक भत
ृ जन्द्भें शशशुओॊ भें 30 प्रनतशत से 60 प्रनतशत तक एवॊ जन्द्भ के
1 मा 2 ददन फाद भय जाने वारे शशशुओॊ भें 50 प्रनतशत से 60 प्रनतशत तक ‘वाल्मननभोननमा’ से ऩीडड़त थे। मह
उन शशशओ
ु ॊ की 'एताप्सी' (भतृ मप्र
ु ान्द्त चीय-पाड़) द्वाया भारभ
ू ऩड़ा।"
स्तन-ऩान से राबों की भहतव को फताते हुमे डॉ. अशभता ऩाॉडे ने फतामा कक, "भैं एक सयकायी अस्ऩतार भें कामययत
हूॉ। महाॉ हभ रोग केवर स्तन-दग्ु ध को ही नवजात शशशुओॊ का ऩूणय आहाय भानते है औय इसी फात का प्रचाय कयते
हैं कक प्रथभ 6 भहीनों तक नवजात शशशुओॊ को केवर भाॉ का ही दध
ू ही ददमा जाना चादहमे। इसके अनतरयक्त उन्द्हें
शक्कय, ग्राइवाटय, शहद, नारयमर ऩानी इतमादद कुछ बी नहीॊ दे ना चादहमे । हभ डॉक्टय प्रसव कयाने के 10
शभननट फाद ही नवजात शशशु को स्तन-ऩान कयाते हैं। हभ शशशु को उसकी ‘नाय’ सभेत भाॊ के ऩेट ऩय शरटा दे ते
है । शशशु के इतनी जल्दी स्तन-ऩान कयने से भाॊ के ऩेट से प्रेसेन्द्टय एवॊ णझल्री फाहय ननकर आने भें सहामता
शभरती है ।"
डॉ. अजम शभश्र का भानना है , "मद्मवऩ भातामें नवजात शशशओ
ु ॊ को केवर स्तन-ऩान’ कयाने के राबों को बरीबाॊनत सभझती है । ककन्द्तु वे अऩनी शायीरयक सुॊदयता को इतना अधधक भहततव दे ती हैं कक वे स्तन-ऩान कयाने भें
सॊकोज कयती है । गाॉवों भें भातामें फाय-फाय गबयवती होने के कायण शशशुओॊ को गाम का दध
ू वऩराती हैं।"
डॉ. अशभता ऩाॊडे के अनस
ु ाय "आधथयक रूऩ से सभथय उच्चवगीम सभाज की भाताओॊ की अऩेऺा गयीफ भातामें
स्तन-ऩान को ही अधधक प्राथशभकता दे ती है । आधथयक रूऩ से सम्ऩन्द्न ऩरयवाय की रड़ककमों को स्तन-ऩान उधचत
अवधध तक कयाने भें अनेक सभस्मामें ददखामी ऩड़ती हैं। अनेक कामययत भाताओॊ को प्रसव के कुछ ही सप्ताह फाद
अऩने नवजात शशशुओॊ को घय ऩय कई घॊटों तक छोड़ना ऩड़ता है । अत: वे मा तो फहुत ही शीघ्र ही स्तन-ऩान
कयाना फॊद कय दे ती हैं मा शशशु को कभ से कभ एक फाय ऊऩय का दध
ू वऩराना आयम्ब कय दे ती हैं, उनका भानना
है कक मदद शशशु को आयम्ब से ही ऊऩय का दध
ू ऩीने की आदत नहीॊ डारी जामेगी तो वह फाद भें ऊऩय का दध
ू नहीॊ
ऩीना चाहे गा- ऐसी दशा भें भाताओॊ को फड़ी सभस्मा हो जामेगी।"
प्रथभ फाय फनी भाताओॊ का भानना है कक उनके स्तनों भें प्रसव के कुछ ददनों फाद तक ऩमायप्त भात्रा भें दध
ू नहीॊ
उतयता है । अत: उन्द्हें शशशुओॊ को ऊऩय का दध
ू दे ना ऩड़ता है । ऩयन्द्तु डॉ. अशभता ऩाण्डेम इस फात को दृढ ववश्वास
से कहती है कक भाता के स्तन से प्रसव के फाद से कुछ ददनों तक जो बी रव ऩदाथय (क्रोयोस्रभ) ननकरते हैं वे
नवजात शशशु के ऩोषण के शरमे ऩमायप्त होते हैं। गबय की ऩण
ू य अवधध ऩय जन्द्भ रेने वारे शशशु भें ऩमायप्त भात्रा भें
10 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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'ग्राइकोजेन' ऩामा जाता है जो उसके शरमे प्रायम्ब के 2 ददनों तक ऩमायप्त आहाय का काभ कयता है । इसके
अनतरयक्त मदद शशशु को जन्द्भ रेने कुछ सभम के फाद भाॉ के स्तन ऩय रगा ददमा जाॊता है तो भाॉ के स्तन से रव व
दध
ू अऩने आऩ ननकरने रगता है । मह एक प्रकाय की चक्रीम (साईककशरक) प्रकक्रमा होती है -मदद शशशु को भाॉ के
स्तन ऩय रगा ददमा जाता है तो चकक्रम कक्रमा से हायभोन्द्स ननकरने रगते है व भाॉ के स्तन भें दध
ू की भात्रा स्वमॊ
फढने रगती है । जजतना अधधक शशशु भाॉ का स्तन-ऩान कयता है उतना ही अधधक दध
ू स्तन भें आता यहता है ।
व्मॊगातभक उदाहयण स्वरूऩ श्रीभती अनुयाधा ने जजन्द्होंने एक शशशु को आऩये शन द्वाया एक ननजी नशसॊग होभ भें
जन्द्भ ददमा फतामा कक प्रसव के फाद उनके स्तनों से रव नहीॊ ननकरे। अत: डॉक्टय ने उन्द्हें अऩने नवजात शशशु को
ऊऩय का दध
ू 2 ददनों के शरमे स्वच्छ कऩ व चम्भच से वऩराने की आऻा दी। फाद भें उन्द्होंने अऩने शशशु का स्तनऩान कयाना प्रायम्ब कय ददमा। इसी प्रकाय एक औय मुवती भाॉ श्रीभती फीना ने फतामा कक उन्द्होंने शशशु को जन्द्भ
दे ने के 12 ददनों फाद अऩने शशशु को स्तन-ऩान कयाना आयम्ब ककमा उन्द्होंने अऩनी नवजन्द्भी ऩत्र
ु ी को ऩानी बी
वऩरामा साथ भें अनतसाय योग न होने दे ने के शरमे उसे दवाई बी वऩरामी। वे शशशु को दध
ू के साथ ऩानी वऩराने के
कायण होने वारे दटु ऩरयणाभों से अनशबऻ थी।
अत: मुवती रड़ककमों को नवजात शशशु को केवर स्तन-ऩान कयाने की आवश्मकता को सभझने के शरमे व
जागरूक फनाने के शरमे सभुदानमक एवॊ अस्ऩतार स्तय ऩय अधधक से अधधक इस ववषम ऩय कामयक्रभ होने की
अनत आवश्मकता है । डॉक्टयों को उन्द्हें नवजात शशशुओॊ को स्तनऩान कयाने के राबों से अवगत कयाना चादहमे।
ववश्व स्वास््म सॊगठन इस फात की ऩुजटट कयता है कक 6 भहीने की उम्र तक शशशु का ऩूणय आहाय केवर औय
केवर स्तनऩान ही है तथा 2 वषय की आमु तक स्तन ऩान से प्राप्त आहाय के साथ अन्द्म सहामक ऩौजटटक आहाय
बी फच्चे को दे ना चादहमे। गबयवती भाताओॊ को माद यखना चादहमे कक उनका दध
ू ही फच्चों के शरमे ननभोननमा व
अन्द्म फीभारयमों से रड़ने के शरमे सफसे अधधक शस्त्र हधथमाय के सभान होता हैं। उन्द्हें सभाज भें स्तनऩान से
सॊफॊधधत पैरे हुमे भ्राभक प्रचायों के ववऩयीत इस फात को सभझाना चादहमे कक प्रथभ 6 भहीनों तक नवजात
शशशुओॊ को केवर भाॉ के दध
ू की ही आवश्मकता होती है प्रथभ 6 भहीनों तक भाॉ का दध
ू ही उनका ऩौजटटक आहाय
होता है ।

शोबा शुक्रा - सी.एन.एस.
(अनुवाद: सुश्री ववभरा शभश्र)

11 | फार

ननभोननमा

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प्रकोऩ

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स्तनऩान से ननभोननमा से फचाव भुभककन
5 वषय की आमु से कभ फच्चों के शरमे ववश्व बय भें ननभोननमा नाभक योग प्राण घातक हो सकता है । प्रनतवषय
रगबग 1.6 राख फच्चों की भतृ मु इस योग से होती है । मह आॊकड़ा ववश्वबय भें होने वारी शशश-ु भतृ मु का रगबग
१/5 बाग है । अन्द्म घातक श्वशन सॊफॊधी सॊक्रभण के सभान ननभोननमा सॊसाय के उन फच्चों को, जो गयीफ व
कुऩोवषत, अल्ऩऩोवषत है , अऩना घातक शशकाय फनाता है । ववकशसत दे शों की अऩेऺा ववकासशीर दे शों के फच्चे 10
गन
ु ा अधधक सॊख्मा भें इस योग के शशकाय होते हैं। गयीफ दे शों भें ननभोननमा योग 100,000 फच्चों भें से 7,320
फच्चों के शरमे प्राण रेवा ऩामा गमा है । दक्षऺणी एशशमा एवॊ सफ-सहाया अफ्रीका भें 21 प्रनतशत फच्चों की भतृ मु
ननभोननमा से होती है । घातक श्वसन सॊफॊधी सॊक्रभण 2010 के अनुसाय ऩोषक ततवों की कभी के कायण ववश्व बय
भें 44 प्रनतशत फार - भतृ मु ननभोननमा से होती है ।
बायत भें फाल्मवस्था की ननभोननमा का योग फहुत अधधक सॊख्मा भें ऩामा जाता है , शयीय की योग-प्रनतयोधक
ऺभता के शरमे एक फाय फीभायी होने ऩय उसके दटु प्रबाव को कभ कयने के शरमे उधचत ऩोजटटक आहाय फच्चों के
शरमे अनत आवश्मक है । सबी डॉक्टय इस फात से सहभत है कक कुऩोषण फच्चों की योगों से रड़ने की ऺभताओॊ को
कभ कयता है जजसके कायण फच्चे अनेक योगों, जजनभें से ननभोननमा बी एक है , के शशकाय फन जाते हैं।
मद्मवऩ अल्ऩऩोषक का कायण ननधयनता बी है , ऩयन्द्तु गयीफ वऩता को सस्ता ऩयन्द्तु ऩोषण बोज्म ऩदाथों के ववषम
की अनशबऻता ही उनके फच्चों को उधचत आहाय शभरने से वॊधचत यखता है । मह फात ववशेषकय सतम है कक शहयों
भें यहने वारे ऩरयवायों के फच्चों का दै ननक बोजन 'प्रोसेस्ड' एवॊ 'पास्ट पूड' ही होता जाता है । शहय की झोऩड़ऩट्टी
भें यहने वारे रोग बी साधायण एवॊ ऩौजटटक खाना जैसे की दार-योटी के फजाम धचकनाई एवॊ चफीमुक्त खाना
ऩसॊद कयते हैं।
रखनऊ के प्रशसद्ध अस्ऩतार सॊजम गाॉधी स्नातकोततय आमुववयऻान सॊस्थान के जठयाॊत्र ववऻान
(गैस्रोएन्द्टयारजी) ववबाग के प्रोपेसय एवॊ ववबागाध्मऺ डॉ. गौड़दास चौधयी बी इस फात से सहभत है कक
अल्ऩऩोवषत फच्चे आसानी से ननभोननमा योग से ऩीडड़त हो जाते हैं। डॉ. चौधयी फच्चों के स्वास््म के फहुत फड़े
सभथयक हैं एवॊ अशबमानयत हैं। उनका कहना है , कक ननभोननमा जैसी अनेक फीभारयमों का एक भहतवऩूणय कायण
है "अव्मवजस्थत जीवनशैरी" - स्थर
ू काम फच्चें बी कुऩोवषत होते है । अत: उनभें योग प्रनतयोधक ऺभता कभ हो
जाती है । अत: इस फात को सुननजश्चत कयना अनत आवश्मक है कक फच्चों का शयीय बाय आद्यश बाय होना चादहमे
तथा उन्द्हें खेरों भें रूधच यखनी चादहमे मा उन्द्हें शायीरयक व्मामाभ ऩमायप्त भात्रा भें कयना चादहमें ताकक उनके
पेपड़े, औय सम्ऩूणय शयीय स्वस्थ यहें । जजससे वे ननभोननमा तथा अन्द्म श्वशन सॊफॊधी योगों से न ऩीडड़त हों।’’

12 | फार

ननभोननमा

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नेरसन अस्ऩतार के फार-योग ववशेषऻ डॉ. ददनेश ऩाॊडे ने फतामा कक कुछ वषों ऩहरे गयीफ ऩरयवायों की अऩेऺा
सम्ऩन्द्न ऩरयवायों के फच्चों को ननभोननमा योग कभ होता था। ऩयन्द्तु प्रोटीन ततव सॊफॊधी कुऩोवषत आहाय,
अतमाधधक बीड़-बाड़, घय के बीतय व फाहय का दवू षत वातावयण एवॊ जीवन शैरी भें अनेकों ऩरयवतयन के कायण
सभाज के उच्च वगीम ऩरयवायों भें बी इस योग का प्रबाव दे खा जाता है । तथा ननभोननमा एवॊ अनतसाय योगों से
ऩीडड़त फच्चों की सॊख्मा फढ यही है । उन्द्होंने द:ु ख प्रकट कयते हुमे कहा कक पास्ट-पूड जो ऩूणय रूऩ से ऩौजटटक नहीॊ
होता है कक रोकवप्रमता के कायण, फच्चें कुऩोवषत यहते हैं तथा उनकी योगों से रड़ने की प्रनतयोधक ऺभता बी कभ
हो जाती है । अत: ननभोननमा योग केवर ननधयन ऩरयवायों तक ही सीशभत नहीॊ यह गमा है । मद्मवऩ ववकासशीर
दे शों जैसे बायत भें ननभोननमा का योग अल्ऩ आम वारे ऩरयवायों भें अधधक ऩामा जाता है ।
डॉ. ददनेश ऩाॊडे के ववचाय से "अच्छा ऩौजटटक आहाय भॊहगा नहीॊ होता है । कुछ गाॉवों भें फच्चों को अच्छा ऩौजटटक
बोजन जैसे नदी से ननकारी गमी ताजी भछरी एवॊ शद्ध
ु गाम मा बैंस का दध
ू आसानी से प्राप्त हो जाता है । गाॉवों
के फच्चों को हयी सजब्जमाॉ एवॊ दार सस्ते व आसानी से शभर जाते हैं। शहयों भें यहने वारे ऩरयवाय आहाय ऩय फहुत
अधधक धन व्मम कयते हैं ककन्द्तु वे आहाय की ऩौजटटकता ऩय अधधक भहतव नहीॊ दे ते हैं। भैं इस फात ऩय अधधक
भहतव दे ता हूॉ कक आहाय की ऩौजटटकता भात्रा एवॊ गण
ु के अनस
ु ाय सॊतशु रत होनी चादहमे। आहाय फच्चों की
आवश्मकता अनुसाय होना चादहमे। व्मवसानमक आधाय ऩय प्राप्त बोज्म ऩदाथय जैसे ‘पास्ट पूड’ जजनका छऩाई
एवॊ ववद्मुतीम साधनों से अतमाधधक प्रचाय ककमा जाता है , नहीॊ खाने चादहमे। सादा घय का फना हुआ आहाय ही
फच्चों के शरमे राबदामक होता है ।"
नेरसन अस्ऩतार के ननदे शक डॉ. अजम शभश्र इस फात ऩय ववशेष ध्मान दे ते हैं कक सवयसाधायण जनता को इस
फात के शरमे शशक्षऺत कयना आवश्मक है कक अच्छा आहाय ‘ननभोननमा’ एवॊ अन्द्म फीभारयमों से फच्चों की यऺा
कयता हैं। उनका ववचाय है "भाॉ-फाऩ को अऩने फच्चों की कैरोयी की आवश्मकताएॉ जाननी चादहमे। उन्द्हें अऩने
फच्चों के शरमे एक सॊतशु रत बोजन सयु क्षऺत कयना चादहमे जजसभें प्रोटीन काफोहाइड्रेट, रौह व कैजल्शमभ उधचत
भात्रा भें ऩामे जाते हैं। भैं ये शद
े ाय बोज्म ऩदाथय को जैसे हयी सजब्जमाॉ, दारें, साधायण योटी मा चऩाती जो सस्ती व
स्वास््म के शरमे गुणकायी है , फच्चों को ददमे जाने का आग्रह करूॊगा। भाॉ-फाऩ को चादहमे कक वे अऩने फच्चों को
‘पास्ट-पूड’ जैसे ऩीजा, फगययस, ऩेस्रीज औय कोल्ड-डड्रॊक्स रेने के शरमे उतसादहत न कयें क्मोंकक मे सफ ऩदाथय
फहुत हाननकायक होते हैं तथा कबी कबी ही शरमे जाने चादहमे। भैं परों को अधधक भहतव दॉ ग
ू ा उनके यसों को नहीॊ
क्मोंकक परों भें ये शों के साथ-साथ खननज ततव बी ऩामे जाते हैं।"
गबायशम जीवन की प्रायजम्बक अवस्था से, वाल्मवस्था से दी अऩमायप्त ऩौजटटक आहाय, शशशुओॊ की सदा के शरमे
अऩमायप्त योग ननयोधक ऺभता एवॊ बमानक श्वसन सॊफॊधी सॊक्रभण जैसे ननभोननमा से सॊफॊधधत है । भाता से प्राम:
ऩामे जाने वारे ऩौजटटक आहाय की अनुधचत भात्रा फाद भें फच्चों की ननभोननमा का एक फड़ा कायण होता हैं, क्मोंकक
मह जन्द्भ के सभम शशशु के अल्ऩ बाय के कायण होता है । स्तनऩान की गुणवतता को कभ सभझने के कायण शशशु
भें कुऩोषण एवॊ ववटाशभन की कभी की आशॊका फढ जाती है ।

13 | फार

ननभोननमा

का

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डॉ. अशभता ऩाॊडे जो छत्रऩनत शाहूजी भहायाज धचककतसा ववश्वववद्मारम के प्रसूनत एवॊ स्त्री-योग ववबाग के
सहामक प्रोपेसय हैं, कहती है कक "मद्मवऩ ननभोननमा योग धनी एवॊ गयीफ सबी फच्चों को होता है ऩय अध्मन
कयने से ऩता चरा है , कक कुऩोवषत फच्चों को ननभोननमा अधधक होता है , जो सॊक्रभण उन फच्चों भें जो सम्ऩण
ू य
ऩौजटटक आहाय ऩाते है केवर श्वसननरी के ऊऩयी बाग को सवॊशभत कयके सभाप्त हो जाता है वही सॊक्रभण
कुऩोवषत फच्चों अतमन्द्त दफ
य ता प्रदान कयने वारे ननभोननमा योग का कायण फन जाता है । भैं मह बी कहना
ु र
चाहूॉगी कक सस
ु म्ऩन्द्न ऩरयवायों के फच्चे, जजन्द्हें ऩमायप्त भात्रा भें बोजन शभरता है , बी कुऩोवषत होते हैं. इसके कई
कायण हैं-उन्द्हें स्तनऩान नहीॊ कयामा गमा होता है , उन्द्हें ऊऩय का दध
ू ददमा जाता है जजसभें ऩमायप्त भात्रा भें प्रोटीन
नहीॊ ऩामे जाते है , मा ऊऩय के दध
ू भें ऩानी शभराकय वऩरामा जाता है . भाताओॊ की मह गरत धायणा होती है कक
ऩानी शभरा दध
ू आसानी से ऩच जाता है . जैसे फच्चा फढता है उसे दध
ू के अनतरयक्त औय बी बोज्म ऩदाथय जैसे
चाकरेट फ्राईज, वयगय, ऩीजा, इतमादद ददमे जाने रगते है . जैसे फच्चा फड़ा होने रगता है तो उसे भाॉ का दध

वऩराना फॊद कयना ऩड़ता है औय उसकी योग प्रनतयोधक ऺभता को फढाने के शरमे प्रोटीन मुक्त आहाय जजसभें पर
सजम्भशरत है ददमा जाने रगता है ।"
स्वास््म की भहतता एवॊ ऩौजटटक आहाय ‘ननभोननमा योग’ को कभ कयने भें सहामक होते हैं। 'अक्मट

रयसऩेयेटयी इन्द्पेक्शन एटरस २०१०' के अनुसाय इस योग की सही योकथाभ अॊतयायटरीम सभुदामों द्वाया
सजम्भशरत कामय कयने की प्रनतऻा है । ऩोषणता एवॊ ननभोननमा तथा अन्द्म फीभारयमों से रड़ने की प्रनतयोधक
ऺभता को फढाने के शरमे ववश्व स्वास््म सॊगठन 6 भहीनों तक केवर स्तनऩान कयाने को भहतव दे ता है तथा 2
वषय तक स्तनऩान एवॊ अन्द्म ऩौजटटक आहाय दे ने ऩय जोय दे ता है । इसके फाद फच्चे को अन्द्म ऩौजटटक एवॊ स्वस्थ
आहाय दे ना चादहमे. गत कुछ वषों भें बोज्म ऩदाथों की फढती हुमी कीभतों के कायण कुऩोषणता की आशॊकाए औय
फढ गमी हैं। हाराॉकक हभायी सयकायें कुऩोषण को साभुदानमक स्तय ऩय योकने के शरमे वचनफद्ध हैं, इस रेख को
शरखते सभम ‘बोज्म ऩदाथों’ की कीभतों भें 9.13 प्रनतशत ववृ द्ध हुमी है ।

शोबा शुक्रा - सी.एन.एस.
(अनव
ु ाद: सश्र
ु ी ववभरा शभश्र, रखनऊ)

14 | फार

ननभोननमा

का

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फच्चे को ननभोननमा से फचाने भें सफसे कायगय "भाॉ का दध
ू "
उततय प्रदे श के ववशबन्द्न स्वास््म धचककतसकों का भानना है कक शशशु के जीवन के ऩहरे छ् भहीने तक केवर भाॉ
का दध
ू अनत आवश्मक है . मह शशशु को न केवर ननभोननमा फजल्क अन्द्म फहुत साये शायीरयक सॊक्रभण जैसे
अनतसाय दस्त, कुऩोषण आदद से बी फचाता है . औय फच्चे को स्वस्थ यखने भें सफसे कायगय है . फच्चे को, जीवन
के शुरुआती छ: भहीने भें , ऊऩय से ककसी बी प्रकाय का दध
ू 'सप्रीभें ट' मा कपय फोतर का दध
ू नहीॊ दे ना चादहए.
एक अध्ममन के अनुसाय जीवन के शुरुआती छ् भहीने तक केवर भाॉ का दध
ू ऩीने वारे फच्चों की तुरना भें फच्चे,
जो अऩने जीवन के ऩहरे छ् भहीने तक केवर भाॉ का दध
ू नहीॊ ऩीते हैं, उनभें ननभोननमा से भयने का ५ गुना
अधधक खतया होता है .
ववश्व स्वास््म सॊगठन ने बी फतामा है कक शशशु जीवन के ऩहरे छ् भाह तक केवर स्तनऩान ही उसके आहाय का
एकभात्र स्रोत है . एक भाह से कभ आमु के फच्चों भें , श्वास सम्फन्द्धी फीभारयमों से होने वारी कुर भौत भें से, ४४%
भौतें कभ स्तनऩान के कायण होती हैं. फहयाइच जजरा अस्ऩतार के वरयटठ फार योग ववशेषऻ डॉ. के. के. वभाय के
अनस
ु ाय "भाॉ के दध
ू भें ववटाशभन तथा कोरेस्रभ (नवदग्ु ध) होता है . जो फच्चे को स्वस्थ यखने भें औय ननभोननमा
तथा अन्द्म शायीरयक सॊक्रभण से फचाने भें भहतवऩूणय बूशभका ननबाता है . अत् मह फहुत आवश्मक होता है कक हय
भाता शशशु के जीवन के ऩहरे छ् भाह तक फच्चे को केवर अऩना ही दध
ू वऩरामे. फच्चे को ऊऩय से फोतर का दध

नहीॊ दे ना चादहए क्मोककॊ जो गुण भाॉ के दध
ू भें है वह औय ककसी बी चीज़ भें नहीॊ है ".
फहयाइच जजरा अस्ऩतार के स्त्री योग ववशेषऻ डॉ. ऩी. के शभश्र का बी भानना है कक "भाॉ का दध
ू फहुत सायी
फीभारयमों औय सॊक्रभणों से फचाता है . इसीशरए भाॉ का दध
ू फच्चे के शरए सफसे अच्छा ऩोषण है . औय इससे अच्छा
ऩोषण औय कुछ नहीॊ हो सकता है . अत् जो बी गबयवती भदहराएॊ महाॉ ऩय आती हैं. हभ उन्द्हें अच्छी तयह से फताते
हैं कक वे शशशु के जीवन के ऩहरे छ् भहीने तक उसे केवर भाॉ का दध
ू वऩरामें औय ऊऩय से कोई बी अन्द्म दध
ू मा
कपय फोतर का दध
ू न वऩरामें".
रखनऊ शहय के फार योग ववशेषऻ डॉ कुभुद अनूऩ के अनुसाय "भाॉ का दध
ू सफसे सवोतभ है . मह न केवर फच्चे
को सॊक्रशभत फीभायी जैसे दस्त औय गैस्रोएन्द्टयाइदटस (आॉत मा ऩेट भें जरन) से फचाता है वयन फच्चे के
शायीरयक ववकास भें बी सहामक होता है , तथा उसके शयीय की प्रनतयोधक ऺभता को फढाकय उसे अन्द्म फीभारयमों
से रड़ने की शजक्त प्रदान कयता है . अत् भाॉ का दध
ू फच्चे के जीवन के ऩहरे छ् भहीने तक के शरए अऩने आऩ भें
एक सम्ऩूणय ऩोषण है . इसके अनतरयक्त फच्चे को ऊऩय से कोई अन्द्म दध
ू सप्रीभें ट दे ने की आवश्मकता नहीॊ होती
है ".
फहयाइच जजरा अस्ऩतार के डॉ. शभश्र तथा डॉ.वभाय का भानना है कक उनके अस्ऩतार भें आने वारी भदहराओॊ भें
से रगबग ९० प्रनतशत भदहराएॊ फच्चों को स्तनऩान कयाती हैं. औय डॉ. शभश्र का मह बी कहना है कक "शहयी
15 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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भदहराएॊ फच्चों को स्तनऩान कभ कया ऩाती हैं जजसके कई कायण हैं. कुछ भदहरामें हैं जो कहीॊ ऩय कामययत हैं
उनके शरए फच्चे को सभम से स्तनऩान कया ऩाना फहुत कदठन हो जाता है . कुछ भदहराएॊ फच्चों को मा तो कभ
स्तनऩान कयाती हैं मा कपय स्तनऩान कयाना ही नहीॊ चाहती हैं. अत् इस ववषम ऩय जन साधायण को शशऺा औय
जागरूकता की आवश्मकता है . प्राम् दे खा गमा है कक जफ डॉक्टय गबयवती भदहरामें को उधचत ऩयाभशय दे ते हैं तो वे
अऩने फच्चे को अऩना स्तनऩान कयाती हैं".
नवजात शििओ
ु ॊ के शऱये सववश्रेस्थ माॉ-का-दध
ू , ऩरन्तु समाज में व्याप्त मान्यताओॊ के कारण जन्म के ऩश्चात ्
उन्हें शमऱता है बकरी का दध
ू , िहद, ऩानी आदद
-----------------जहाॉ एक तयप सयकायी जजरा अस्ऩतार के डाक्टयों का मह भानना है कक अधधकतय भदहराएॊ फच्चों को स्तनऩान
कयाती है वहीॊ दस
ू यी तयप सभाज भें कुछ ऐसी भान्द्मताएॊ हैं जजनके अनुसाय नवजात शशशु के जन्द्भ के ऩश्चात ्
फकयी का दध
ू , शहद, ऩानी मा कपय अन्द्म कोई चीज भाॉ के दध
ू से ऩहरे वऩराई जाती है . जजसका आॊकरन इससे
रगामा जा सकता है कक फहयाइच जजरा अस्ऩतार भें ननभोननमा से ऩीडड़त अऩने तीन ददनों के फच्चे को ददखाने
आमीॊ भाता का कहना है कक "हभ फच्चे को फकयी का दध
ू वऩरा यहें है क्मोककॊ मह हभाये घय कक ऩुयानी ऩयॊ ऩया है कक
नवजात शशशु को सफसे ऩहरे फकयी का दध
ू वऩरामा जाता है ". ननभोननमा से ही ऩीडड़त एक औय ढाई सार के
फच्चे की भाता जी का कहना है कक वह बी फच्चे को अऩना दध
ू नहीॊ वऩरा ऩामी थीॊ क्मोककॊ उस वक्त उनका दध

नहीॊ आ यहा था.
सभाज भें पैरे इस प्रकाय के प्रचरन न केवर फच्चों के ववकास भें फाधक है फजल्क सभाज भें एक अशबशाऩ के रूऩ
भें व्माप्त हैं जजसको इन धचककतसकों को बी सभझना होगा औय भाताओॊ को ऐसा न कयने का ऩयाभशय दे ना होगा.
क्मोंकक अक्सय ऐसा दे खा गमा है कक जफ धचककतसक गबयवती भदहरामों को ऩूयी तयीके से सभझाते हैं तो वें उनकी
फातों का अनुसयण कयती हैं औय अऩने फच्चे को स्तनऩान कयाती हैं. सभाज भें जागरूकता की कभी है अत्
भदहरामों को जानकाय औय जागरूक फनाना आवश्मक है तबी सभाज भें ऩण
ू य रूऩ से फदराव आमेगा"

याहुर कुभाय द्वववेदी - सी.एन.एस.

16 | फार

ननभोननमा

का

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स्तनऩान फढाता है फच्चों की प्रनतयोधक ऺभता
नवजात शशशुओॊ को जन्द्भ के उऩयाॊत ६ भहीने तक एकभात्र भाॉ का दध
ू शभरने से उनके शयीय की प्रनतयोधक
ऺभता फढ जाती है . गोयखऩुय के वरयटठ फार योग ववशेषऻ डॉ के.एन. द्वववेदी के अनुसाय: "ननभोननमा से ही नहीॊ
फजल्क फहुत सायी फीभारयमों से फचाने के शरए स्तनऩान जरूयी है । स्तनऩान से फच्चों की 'इम्मूननटी' (प्रनतयोधक
ऺभता) अधधक फढती होती है । स्तनऩान से ननभोननमा होने की सम्बावना कभ होती है उस फच्चे की तुरना भें जो
स्तनऩान नहीॊ कय यहा है । हाॊराॊकक ननभोननमा से फचाने के शरए औय बी सावधाननमाॊ फतयनी चादहए जैसे कक ठण्ड
से फचाना चादहए। रेककन जो फच्चें स्तनऩान कय यहे है उनको ननभोननमा होने की सम्बावना कभ होती हैं
क्मोंकक उनकी प्रनतयोधक ऺभता अधधक होती है ।"
ऩहरे की तुरना भें स्तनऩान के फाये भें रोग कहीॊ अधधक जागरूक हैं. "स्तनऩान के फाये भें जागरूकता फढ गमी
है । जो भदहराएॊ ऩहरी फाय भाॉ फनी हैं वें स्तनऩान कयने का सही तयीका सीखने के शरमे फहुत इच्छुक हैं. इस ऩय
जागरूकता अशबमान बी चर यहा है । धचककतसक बी स्तनऩान को कापी फढावा दे ते हैं. दे खा जाए तो स्तनऩान
ऩहरे की तुरना भें फढी है " कहना है डॉ के.एन.द्वववेदी का ।
गोयखऩयु की एक फस्ती भें यहने वारे श्री प्रदीऩ श्रीवास्तव फताते हैं कक: "महाॊ तो भाताएॊ फच्चों को दध
ू वऩराती है
रेककन कुछ रोग अबी बी नहीॊ वऩराती है । अफ तो कई साये कामयक्रभ चर यहे है जजसकी वजह से भाताएॊ स्तन
ऩान कयाने रगी है ।"
गोयखऩुय की फस्ती भें यहने वारी इन्द्रावती फताती है कक उनके नाती को ननभोननमा हुआ था. उन्द्होंने फतामा कक:
"हभाये नाती को ननभोननमा हुआ था। फच्चे के गरे भें ददक्कत था, श्वास पूर यही थी, ऩेट भें बी ददय था, फख
ु ाय बी
था। धचककतसकों ने फतामा कक ननभोननमा ठड़ के वजह से हुई थी. इस फच्चे को भाॊ का दध
ू 5-6 भहीने तक वऩरामा
गमा था औय अफ उसे गाम का दध
ू वऩरा यहे हैं."
सभाज भें जागरूकता होने के फावजद
ू बी अनेक सभद
ु ाम ऐसे हैं जहाॊ स्तनऩान के दहतों के फाये भें ऩमायप्त
जागरूकता नहीॊ ऩहुॊची है . सभाज भें व्माप्त भ्राॊनतमाॊ है औय ऐसे यीनत-रयवाज़ हैं जो फच्चे को एकभात्र स्तनऩान से
वॊधचत कय दे ते हैं. डॉ द्वववेदी का कहना है कक: "स्तनऩान न कयाने का सफसे फड़ा कायण है कक कुछ ऩरयवायों को
नवजात शशशु को स्तनऩान कयाने के पामदों के फाये भें ऩता नहीॊ है . ज्मादातय रोगों को स्तनऩान का भहतव
सभझाने से सभझ भें आ जाता है । अधधकतय रोग रुदढवादी हो कय औय सभझ न होने की वजह से, मा कपय
सभाज भें कुछ गरतपहभी होने के कायण शशशु को स्तनऩान से वॊधचत यखते हैं."
जो भाताऐॊ फोतर से दध
ू वऩराती हैं वो ठीक नहीॊ है . डॉ द्वववेदी के अनुसाय: "फोतर से दध
ू नहीॊ वऩराना चादहए
क्मोंकक उससे इन्द्पेक्सन (सॊक्रभण) होने का खतया होता है , फोतर से दध
ू ऩीने से फच्चे के साॊस की नरी भें दध
ू जा
17 | फार

ननभोननमा

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सकता है । फोतर दध
ू ऩीने वारे फच्चे भें साभान्द्म स्तनऩान कयने वारे फच्चे से चाय से ऩाॊच गुना अधधक
'एस्प्रेशन ननभोननमा' होने का खतया है । मह ननभोननमा फोतर से दध
ू ऩीने के दौयान श्वास नरी भें दध
ू चरा जाता
है जजसकी वजह से फच्चे खतये भें आ जाते हैं।"
शशशु को जन्द्भ-उऩयाॊत ६ भहीने तक भाॉ का दध
ू ही वऩराना चादहए - इसका राब फच्चे को सम्ऩूणय जीवन भें
शभरता है .

जजतेन्द्र द्वववेदी - सी०एन०एस०

18 | फार

ननभोननमा

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शशशु के जीवन के ऩहरे 6 भहीने स्तनऩान : एकभात्र सुयक्षऺत उऩाम
भौसभ के कयवट फदरते ही फीभारयमों की आशॊका फढ जाती है । सफसे ज्मादा असय दे खने को शभरता है , फच्चों
ऩय। वजह, फच्चों की योग प्रनतयोधक ऺभता फड़ों की अऩेऺा कभ होती है । ननभोननमा एक ऐसा योग है जो छोटे
फच्चों भें प्राम् दे खने को शभरता है । राखों फच्चे इस योग का शशकाय होते हैं। ऩूयी दनु नमा भें 5 वषय से कभ उम्र के
रगबग 16 राख फच्चे इस खतयनाक बफभायी से भयते हैं। अगय कुछ फातों का ध्मान यखा जामे तो इस बफभायी ऩय
कापी हद तक काफू ऩामा जा सकता है ।
‘होऩ भदय एण्ड चाइरड केमय सेण्टय’ के फार-योग ववशेषऻ डा0 अजम कुभाय के अनुसाय शशशु के जन्द्भ के
ऩहरे घण्टे से ही एकभात्र स्तनऩान कयाना चादहए जो शशशु को ननभोननमा के साथ-साथ कई अन्द्म बफभारयमों से
बी फचाता है । भगय आज के सभाज भें इसको रेकय भाताओॊ भें कई भ्राॊनतमाॊ हैं जैसे कभ दध
ू होना, जफकक
शुरुआत भें कभ दध
ू आना एक आभ फात है जजसे कोरस्रभ कहते हैं जो कक एक धचऩधचऩा ऩदाथय होता है , रेककन
अगय स्तनऩान कयामा जामे तो कुछ ही सभम भें मह तेजी से फढने रगता है , जजसे अक्सय भातामें सभझती हैं कक
मह दध
ू नहीॊ है , ऩयन्द्तु ऐसा नहीॊ है ।
कोरस्रभ फच्चे भें प्रनतयोधक ऺभता फढाता है इसी ‘होऩ भदय एण्ड चाइरड केमय सेण्टय’ की स्त्री योग
ववशेषऻा डा0 ननधध जौहयी का बी मही भानना है कक स्तनऩान ऩूणय रुऩ से सुयक्षऺत एवॊ स्वच्छ तयीका है । उनका
मह बी कहना है कक आज की बाग दौड़ बयी जजन्द्दगी भें कई भातामें स्तनऩान से कतयाती हैं, जैसे कक वे कहती हैं
कक दध
ू नहीॊ हो यहा है , कभय भें तकरीप है , काभ ऩय जल्दी जाना ऩड़ता है इतमादद। डा0 ननधध जौहयी का बी मही
कहना है कोई बी दध
ू जो हभ शयीय से फाहय से वऩराते हैं उसको सॊक्रभण यदहत कयना फहुत भुजश्कर हो जाता है ,
जो ननभोननमा का एक कायण है ।
मश अस्ऩतार की स्त्री योग ववशेषऻा डा0 रयतु गगय बी अऩने महॉ आने वारी भाताओॊ को बी स्तनऩान की सराह
दे ती हैं। भगय कई फाय भातामें स्तनऩान कयाने भें असभथय होती हैं तो वे उन्द्हें ववश्व स्वास््म सॊगठन द्वाया
ननधायरयत रेकटोजेन नॊ0-1 मा 2 की सराह दे ती हैं साथ-साथ मह बी सराह दे ती हैं कक दध
ू की फोतर, कटोयीचम्भच का ऩूणय रुऩ से सॊक्रभण यदहत होना फहुत जरुयी है । 5 भहीने के फाद वह दार, चावर का ऩानी व परों के
यस वऩराने ऩय बी जोय दे ती हैं।
वातसल्म क्रीननक के सुप्रशसद्ध फार-योग ववशेषऻ डा0 सॊतोष याम का कहना है कक एकभात्र स्तनऩान को कोई
दस
ू या ववकल्ऩ नहीॊ है मह नवजात शशशु भें कई एण्टीफॉडीज की प्रनतयोधक ऺभता को फढाता है जो ककसी बी
पाभर
ूय ा दध
ू से नहीॊ शभर सकती है । डा0 सॊतोष याम का भानना है कक फोतर से दध
ू वऩराने भें शशशु की साॊस की
नरी, पेपड़े भें कई ववकाय ऩैदा कय दे ते हैं जजसभें से ननभोननमा प्रभुख है । डा0 सॊतोष याम कहते हैं कक ऊऩय के दध

19 | फार

ननभोननमा

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से हभ शशशु के अन्द्दय कई सॊक्रभण के यास्ते खोर दे ते हैं। सबी ववशेषऻों की मह याम आती है कक एकभात्र
स्तनऩान से सुयक्षऺत कोई दस
ू या ववकल्ऩ नहीॊ है ।

नीयज भैनारी - सी0एन0एस0

20 | फार

ननभोननमा

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फच्चों को ननभोननमा से फचाता है भाॊ का दध

फच्चों को जन्द्भ से 6 भाह तक केवर भाॊ का ही दध
ू वऩराएॊ क्मोंकक मह उनके शयीय को ननभोननमा, दस्त, औय
ददभागी फख
ु ाय आदद जैसी फीभारयमों से फचाने का कामय कयता है । मह कहना है याजधानी रखनऊ के धचककतसकों
का। डॉ. याभ भनोहय रोदहमा सॊमुक्त धचककतसारम के शशशु योग ववशेषऻ डॉ. अशबषेक वभाय के अनुसाय "भाॉ के
दध
ू भें फहुत साये ऐसे ततव होते हैं जजन्द्हें हभ एन्द्टीफाडीज़ कहते हैं | मे एन्द्टीफाडीज़ ननभोननमा ही नहीॊ वयन औय
फहुत सायी फीभारयमों से फच्चों को फचाते हैं। इसशरए जन्द्भ के शरू
ु के 6 भहीने भें भाॉ का दध
ू दे ना अनत आवश्मक
है ।"
डॉ. अशबषेक वभाय ने फतामा कक "जफ बी कोई गबयवती स्त्री हभाये अस्ऩतार भें आती है तो उनको प्रसवऩूवय जाॊच
के सभम से ही इस फात के शरए तैमाय ककमा जाता है कक वह फच्चे को अऩना ही दध
ू वऩरामें, औय हभाये महाॊ जफ
बी कोई फच्चा ऩैदा होता है तो आवश्मक रूऩ से उनको मह फताते है कक भाॉ का दध
ू ही सफसे अच्छा होता है | आऩ
अऩना ही दध
ू 6 भहीने तक फच्चे को वऩराएॊ | फच्चे की सॊववृ द्ध के शरए 6 भहीने तक भाॉ का दध
ू ऩमायप्त होता है ।
उसके ऊऩय फीभायी का कोई असय नहीॊ ऩड़ता है । ऐसी जस्थनत भें अधधकाॊश भाॉऐॊ फच्चे को अऩना दध
ू वऩराना
ऩसन्द्द कयती हैं, औय जो ऐसा नहीॊ कयती हैं उनके फच्चों भें सॊक्रभण जैसे ननभोननमा, दस्त, ऩोषण की कभी औय
फहुत सायी सभस्माएॊ ज्मादा आती हैं।" डॉ. वभाय ने मह बी फतामा कक "फोतर के दध
ू को हभ भना कयते हैं | अगय
कुछ अनुऩूयक दे ना है तो घय का ही दे ते हैं औय दध
ू भाॊ का ही दे ते हैं। फोतर के दध
ू भें वो ऩोषक ततव नहीॊ होते हैं जो
भाॉ के दध
ू भें ऩामे जाते हैं| इसशरए हभायी कोशशश मही यहती है कक भाॊ फच्चे को अऩना दध
ू ही वऩराए।"
एक ननजी क्रीननक की ननदे शक एवॊ स्त्री योग ववशेषऻा डॉ. यभा शॊखधय के अनुसाय "शुरू भें फच्चे भें प्रनतयोधक
ऺभता इतनी नहीॊ होती है कक वह फीभारयमों से रड़ सके। इसशरए जफ बी उसे कोई सॊक्रभण हो जाता है तो वह
अऩने को उससे नही फचा ऩाता है | रेककन जफ वह स्तनऩान कयता है तो भाॉ के दध
ू भें इतने एॊटीफाडीज़ होते हैं जो
फीभारयमों से रड़ने भें फच्चे की सहामता कयते हैं, औय ननभोननमा, टीफी, जुकाभ, ददभागी फुखाय, दस्त आदद फहुत
सायी फीभारयमों से फच्चे को फचाते हैं। हभ सबी भदहराओॊ को मह याम दे ते है कक कभ से कभ 6 भहीने तक फच्चों
को तो जरूय स्तनऩान कयाएॉ।"
डॉ. यभा शॊखधय आगे फताती हैं कक "कुछ भाॉओॊ भें दवा दे ने के फावजद
ू दध
ू नहीॊ आता है | रेककन उनको हभ
सुझाव दे ते है कक जफ तक दध
ू आ यहा है आऩ फच्चे को दध
ू वऩराती यदहमे औय फाकक अनुऩूयक बी दें जजससे वह
बूखा न यहे । अगय भाॉ का दध
ू ऩमायप्त भात्रा भें हो यहा है तो फच्चे को अरग से कुछ बी दे ने की जरूयत नहीॊ है । मदद
दध
ू ऩमायप्त भात्रा भें नहीॊ है तो फोतर का दध
ू दे सकती हैं। जफ फच्चा तीन भहीने का हो जाए तो उसे दार का ऩानी
बी छानकय दे सकते हैं।"

21 | फार

ननभोननमा

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डॉ. याभ भनोहय रोदहमा सॊमुक्त धचककतसारम के भुख्म धचककतसा अधधकायी डा. आय. एस. दफ
ू े बी स्तनऩान का
सभथयन कयते हैं। उनके अनुसाय "जफ भाॉ फच्चों को स्तनऩान नही कयाती है , औय दध
ू चम्भच आदद से दे ती है तो
दध
ू उसकी साॉस की नरी भें जाने का खतया यहता है । ऩय मदद उसका सय उठाकय स्तनऩान कयामा जाए तो इसकी
सम्बावना ननजश्चत रूऩ से कभ होगी। फच्चों को 6 से 12 भाह तक स्तनऩान कयामें। इससे फाहयी खतयनाक ततव
फच्चे के शयीय के अन्द्दय नहीॊ जाएॊगे। इसीशरए जो फच्चा हभाये अस्ऩतार भें ऩैदा होता है तो उसकी भाता को हभ
भागयदशशयत कयते है , औय स्तनऩान के शरमे फताते है ।"
वहीीँ इसी अस्ऩतार भें जन्द्भ रेने वारी इस्भाईरगॊज झोऩड़ऩट्टी की एक ननभोननमा से ऩीडडत फच्ची तुरसी की भाॊ
ये खा ने फतामा कक फच्ची के जन्द्भ के सभम धचककतसकों ने स्तनऩान के शरए कुछ नही फतामा | कपय बी भाॊ ने
फच्ची को 6 भहीने तक अऩना दध
ू वऩरामा | इसके फावजूद फच्ची को ननभोननमा हो गमा। इसी फस्ती भें यहने
वारी ननभोननमा से ऩीडडत ज्मोनत, मास्भीन औय पयीद की भाॊओॊ ने बी अऩने फच्चों को 6 भहीने तक केवर
अऩना ही दध
ू वऩराने की फात कही।
अऩने शशशु को जन्द्भ से 6 भाह तक केवर स्तनऩान ही कयाएॊ | क्मोंकक मह आसानी से फच्चे के ऩेट भें ऩच जाता
है । जजससे फच्चे का ऩेट खयाफ होने का खतया नहीॊ यहता है । भाॊ के दध
ू भें साये आवश्मक ततव भौजूद होने के
कायण फच्चे को फाहय से कुछ बी रेने की आवश्मकता नही होती है । दध
ू भें भौजूद ततव ही उसे फीभारयमों से रड़ने
की शजक्त प्रदान कयते हैं। इसशरए फच्चों के शरमे ऩहरे 6 भाह तक स्तनऩान फहुत ही जरूयी है , क्मोंकक मह फच्चों
को ननभोननमा जैसी फीभारयमों से रड़ने भें सहामता कयता है । इसशरए प्रतमेक भाॊ को चादहमे कक वह अऩने
नवजात शशशु को 6 भाह तक केवर स्तनऩान ही कयाएॊ, औय ननभोननमा जैसी फीभारयमों से फच्चों को दयू यखें ।
साथ ही धचककतसकों को चादहए कक वे स्तनऩान के फाये भें भदहराओॊ को फताएॊ औय उन्द्हें फच्चों को 6 भाह तक
केवर स्तनऩान ही कयाने की सराह दें जजससे ननभोननमा जैसी फीभारयमों ऩय काफू ऩामा जा सके ।

नदीभ सरभानी - सी.एन.एस.

22 | फार

ननभोननमा

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ववषम २
ननभोननमा एवॊ अन्द्म सॊक्रभण से फचाव भें
ऩौजटटक आहाय एवॊ स्वच्छता का भहतव

23 | फार

ननभोननमा

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फच्चों का सुऩोषण औय ननभोनमा से फचाव
ववशेषत् उन्द्नतशीर दे शों भें कुऩोषण तथा अल्ऩ-ऩोषण एक फहुत फड़ी सभस्मा है । फच्चों भें ननभोननमा व अन्द्म
फीभारयमों के शरए, अऩमायप्त स्वच्छता के साथ मह बी कापी जजम्भेदाय है । ऩाॊच वषय से कभ आमु के फच्चों की
भतृ मु का प्रभुख कायण ननभोननमा है , जजससे प्रनतवषय 15 राख फच्चे भतृ मु को प्राप्त होते हैं। ननभोननमा से भयने
वारे 98 प्रनतशत फच्चे उन्द्नतशीर दे शों भें होते हैं। स्वच्छ वातावयण भें , फच्चों को सही आहाय, सही भात्रा तथा
उधचत सभम भें दे कय इनभें से अनभ
ु ाननत दो नतहाई फच्चों की जान फचाई जा सकती है ।
गयीफी के कायण अल्ऩ ऩोषण तथा अतमाधधक ऩोषण के कायण फच्चों भें भोटाऩे का होना, दोनो ही ऩरयजस्थनतमाॊ
अल्ऩ ऩोषण के अन्द्तगयत आती हैं। धचककतसीम आधाय से बोजन भें प्रोटीन, ऊजाय तथा भाक्रोन्द्मूदरएन्द्ट जैसे
ववटाशभन्द्स आदद की कभी मा अधधकता, अल्ऩ ऩोषण ही होता है । औय फच्चों भें फायफाय सॊक्रभण व अन्द्म
फीभारयमों को फढाता है । कुऩोवषत फच्चों की कभज़ोय योग प्रनतयोधक ऺभता के कायण, अनेकों सॊक्रभण हो सकते
हैं जजसके कायण योग होने व योगों से भतृ मु की सम्बावना फढ जाती है । कुऩोषण, जन्द्भ के सभम कभ वजन का
होना, खसया, ववटाशभन ‘ए’ की कभी, ऺमयोग (टी.फी.) इतमादद ननभोननमा के होने को फढावा दे ते हैं। तथा
ननभोननमा फच्चे भें श्वसन सम्फन्द्धी योगों जैसे अस्थभा (दभा) आदद के होने का एक फड़ा कायक होता है ।
उधचत ऩोषण फच्चे की प्रनतयऺा प्रणारी फढाता है जजससे फच्चे भें सॊक्रभण होने की सम्बावनाओॊ भें कभी के साथ
साथ फीभायी से रड़ने व उससे उफयने की ऺभता भें ववृ द्ध होती है ।
डा. नीरभ शसॊह, प्रसनू त एवॊ स्त्री योग ववषेषऻ जो ‘‘वातसल्म रयसोसय सेंटय ऑन हे ल्थ’’ की भख्
ु म कामयकत्री बी
हैं, का कहना है , ‘‘शशशुमों के शरमे अच्छा खानऩान अनतआवश्मक होता है क्मोंकक इस अवधध भें शयीय व
भजस्तटक के तेज ववकास के कायण ऩोषक ततवों की जरूयत कापी अधधक यहती है । इसशरमे हभें मह जानना
जरूयी है कक फढते फच्चों के शरमे ‘‘कौन से औय ककतना’’ बोज्म ऩदाथय आवश्मक है । क्मोंकक अरग अरग उम्र
के फच्चों के शरमे ऩोषक ततवों की भात्रा शबन्द्न शबन्द्न होती है । हभें मह बी माद यखना चादहमे कक अक्सय कुऩोवषत
भाताएॊ कभ वजन के शशशुमों को जन्द्भ दे ती हैं। इसशरमे, भाताओॊ का आहाय मोजनावस्था से ही अच्छा होना
चादहमे, जजससे वे सॊसाय भें स्वस्थ फच्चों को जन्द्भ दें । डा. एस.के. सेहता, शशशु एवॊ फार योग ववषेषऻ रखनऊ का
कथन है , ‘‘आजकर, भहानगयों भें फच्चे पास्ड पूड, ये डीभेड पूड अधधक तैरीम व भसारेदाय ऩदाथों का सेवन कय
यहे हैं। इस प्रकाय का आहाय उन्द्हें अधधक भोटा फनाता है । तथा बववटम भें डामबफटीज व रृदम योगों की सम्बावना
फढाता है ।’’
डा. नीरभ शसॊह के ववचायानस
ु ाय, ‘‘हभाये दे श भें ननभोननमा एवॊ अनतसाय से होने वारी अधधकाॊश भतृ मु का कायण
कुऩोषण ही है । हभाये उततय प्रदे श भें ऩाॊच वषय से कभ आमु के रगबग 46 प्रनतशत फच्चे अल्ऩ ऩोषण के शशकाय
हैं। हार ही भें ककमे गए एक सवे के अनुसाय हभने कई नवजात शशशुमों को चाम तथा कोल्ड डड्रॊक तक दे ते हुए

24 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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दे खा। शशशुमों को घुट्टी (ग्राइऩ वाटय) तक दी जाती है , औय फच्चों को ददमे जाने वारे फाहय के दध
ू को मा तो भात्रा
फढाने के शरमे अथवा इस अवधायणा के कक शशशु शुद्ध दध
ू को ऩचा नहीॊ सकेगा, अधधक ऩानी शभराकय ऩतरा
ककमा जाता है । इसी प्रकाय के कायणों से फच्चे को उच्च ऊजाय का बोज्म ऩदाथय नहीॊ ददमा जाता है । कई फाय, फढते
फच्चों की आवश्मकताओॊ को न दे खकय अग्रजों (घय के फड़ों) की ऩसॊद का बोजन फनामा जाता है ।’’ शहय के
प्रख्मात फार योग ववषेषऻ डा. एस.एन. यस्तोगी ने कुऩोषण के सम्फन्द्ध भें दटप्ऩणी कयते हुए फतामा कक, ‘‘मह
एक प्रचशरत भ्राॊनत है फच्चों को शद्ध
ु भाॊ का दध
ू नहीॊ दे ने चादहमे, फजल्क इसभें फयाफय भात्रा भें ऩानी शभराना
चादहमे, नही तो मह अनतसाय का कायण हो जामेगा। अधधकाॊश फच्चों के अल्ऩ ऩोषण का कायण दध
ू को तयर
कयना है । कभ वनज के शशशुमों को उच्च प्रोटीन वारे सप्रीभें ट ददमे जाने चादहमे।’’
डा. नीरभ शसॊह स्ऩटट कयती हैं कक, ‘‘अच्छे ऩोषण का तातऩमय भहॊ गे बोज्म ऩदाथय नहीॊ हैं। अधधकतय अधधक
भल्
ू म की वस्तओ
ु ॊ भें ही आवश्मक ऩोषक ततव उऩरब्ध नही होते हैं फजल्क सस्ते व स्थानीम उऩरब्धता वारे घय
भें फनामे बोजन भें बी वही ऩोषक ऩदाथय उऩरब्ध हो सकते हैं। इस सॊदबय भें , भैं एक उदाहयण का उल्रेख कयना
चाहूॊगी कक मद्मवऩ आजकर टीवी ऩय ऐसे ब्ाॊड शशशु-बोजन का ववऻाऩन ददखामा नही जाता है , कपय बी मह एक
अनत प्रचशरत पूड सप्रीभें ट है । महाॊ तक कक घयों भें काभ कयने वारी ऩरयचारयका अऩन धनाठ्म भाशरकों की
नकर कयके अऩन फच्चों को मही णखराती हैं। मह सुजप्रभें ट फ़ूड फच्चे को यवा/सूजी की खीय, दशरमा औय दार
जजतना ही ऩोषण दे ता है । गाॊवों की अशशक्षऺत भाताओॊ के फच्चों के अरावा शहयों की शशक्षऺत भाताओॊ के शशशु बी
कुऩोषण के शशकाय होते है ।’’ साप ऩानी औय स्वच्छ व उन्द्हें स्वास््म के अऩमायप्त साधन ननभोननमा के होने
के कायण हैं। योगों को ननमॊबत्रत कयने भें स्वच्छता के साधनो ऩय अधधक जोय दे ने के शरमे हभ ‘वल्डय है ण्ड वावषॊग
डे’ भनाते हैं। डा. एस.के. सेहता के अनुसाय, ‘‘स्वच्छता सॊफन्द्धी ववऻान की जानकायी ककसी फीभायी, ववशेषकय
गेस्रोइन्द्टसदटनर सॊक्रभण के होने के कायकों के शरए आवश्मक है । ननभोननमा के सॊदबय भें बी फच्चे को छूने से
ऩूवय हाथ धोने से फच्चे को सॊक्रभण का खतया कभ हो जाता है ।’’
डा. नीरभ शसॊह इस फात ऩय जोय दे ती हैं कक, ‘‘फच्चे की दे खये ख कयने वारे को सपाई व स्वच्छता के ववषम भें
जागरूक यहना चादहमे। फच्चे के भर/भूत्र को साप कयने के ऩश्चात ् हय फाय हाथ साफुन व ऩानी से बरी बाॊनत
धोना चादहमे। इसी प्रकाय फच्चे को दध
ू दे ने के ऩव
ू य व फाद भें बी हाथों को साप कयना चादहमे। फच्चे को ऩीने के
शरमे साप ऩानी औय खाने के शरमे ताजा व स्वच्छ बोजन ही दे ना चादहमे। बोजन फन्द्द यखना चादहमे व प्रदवू षत
होने से योकना चादहमे। फच्चे के आस-ऩास स्वच्छ व साप यखना चादहमे, ऩानी को इकठ्ठा नहीॊ होने दे ना चादहमे
तथा फच्चे को प्रनतददन नहराएॊ व साप कऩड़े ऩहनाएॊ। सॊक्रभण से होने वारे योगों, जैसे ननभोननमा व अनतसाय से
फचाव के शरमे मे सयर व साधायण स्वच्छता के उऩाम हैं।
डा. एस.एन. यस्तोगी, शशशु को दध
ू वऩराने से ऩूवय स्तनों को साप कयने ऩय जोय दे ते हैं। उनकी सराह है कक फच्चे
को मदद फोतर से दध
ू दे ना अनतआवश्मक हो, तो कभ से कभ 4 फोतर व 4-5 ननप्ऩर जरूय होने चादहमे। फोतरों
औय ननप्ऩरों को प्रमोग भे राने से ऩव
ू य बरी बाॊनत उफारना चादहमे। फच्चे को साप कऩड़े ऩहनाने चादहमे। एक

25 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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प्रचरन के अनुसाय फच्चे को प्रथभ भाह तक ऩुयाने कऩड़े ऩहनामे जाते हैं। मह उधचत नही है । गयीफी उन्द्भूरन,
कुऩोषण की सभस्मा को दयू कयने भें अन्द्तयायटरीम प्रमासों के अरावा रोगों को अच्छे ऩोषण की भहतता के
सम्फन्द्ध भें बी जागरूक कयना चादहमे। डा. नीरभ शसॊह की सराह है , ‘‘अरग-अरग उम्र के फच्चों की अरगअरग ऩोषक ततवों की जरूयत के सम्फन्द्ध भें आभ रोगों के साथ वाताय कयनी चादहमे। व्मवसानमक आधाय ऩय
केवर याटरीम व अन्द्तयाटरीम अधधवेषनों भें ही इन वातायराऩों को नहीॊ कयना चादहमे, अवऩतु हय जनता तक इस
सॊवाद को प्रसारयत कयने की आवश्मकता हैं."

सौम्मा अयोया - सी.एन.एस.
(अनुवाद: सुश्री भामा जोशी, रखनऊ)

26 | फार

ननभोननमा

का

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अच्छा ऩोषण फच्चों को ननभोननमा से फचाता है
फच्चे जो कुऩोवषत मा अल्ऩऩोवषत औय जन्द्भ से शुरूआती छ् भाह तक शसपय भाॉ का दध
ू नहीॊ ऩीते हैं, उनभें
योगप्रनतयोधक ऺभता कभ होती है जजससे कायण उनभें ननभोननमा के होने का खतया फढ जाता है . अत् फच्चों को
ननभोननमा से फचाने भें उधचत ऩोषण औय भाॉ के दध
ू का भहतवऩूणय मोगदान है . सम्ऩूणय ववश्व भें फच्चों भें
ननभोननमा से होने वारी कुर भौतों भें से ४४% भौतें कुऩोषण के कायण होती हैं.
ववश्व स्वास््म सॊगठन के अनुसाय ऩूये ववश्व भें प्रनतवषय ऩाॊच वषय से कभ आमु के १८ राख फच्चों की भतृ मु
ननभोननमा से होती हैं. मह सॊख्मा फच्चों भें अन्द्म फीभारयमों से होने वारी भतृ मु से कहीॊ अधधक है . ननभोननमा
एक प्रकाय का तीव्र श्वास सम्फन्द्धी सॊक्रभण है जो पेपड़ों की वामक
ु ोजटटकाओॊ को प्रबाववत कयता है . जफ कोई
स्वस्थ भनुटम साॉस रेता है तो में वामुकोजटटकाएॊ हवा से बय जाती हैं. ऩयन्द्तु ननभोननमा से ऩीडड़त व्मजक्त भें मे
कोजटटकाएॊ भवाद औय तयर ऩदाथय से बय जाती हैं जजसके कायण श्वास रेने की प्रकक्रमा कदठन औय द्ु खदामी हो
जाती है तथा शयीय भें ऑक्सीजन सीशभत भात्रा भें ऩहुॉच ऩाती है .
फहयाइच जजरा अस्ऩतार के वरयटठ फार योग ववशेषऻ डॉ के. के. वभाय के अनुसाय "फच्चों को ननभोननमा से फचाने
के शरए सम्ऩण
ू य ऩोषण फहुत आवश्मक है . इससे फच्चों के शयीय को ऩण
ू य रूऩ से सबी प्रकाय के ववटाशभन शभरते
यहते हैं परस्वरूऩ फच्चों का ननभोननमा से फचाव होता यहता है . ऩूणय ऩोषण के शरए फच्चों को दार, चावर औय
योटी दें , फाहय का 'ये डीभेड फेफी फ़ूड' जहाॊ तक सॊबव हो नहीॊ दे ना चादहए. फाहयी ' ये डीभेड फेफी फ़ूड' फच्चे के
स्वास््म के शरए एक ख़याफ ऩोषण है "
फहयाइच जजरा अस्ऩतार के स्त्री योग ववशेषऻ डॉ. ऩी. के शभश्र का भानना है कक "शशशु के शरए जीवन के ऩहरे छ्
भाह तक भाॉ का दध
ू सफसे उधचत ऩोषण है औय जफ फच्चा छ् भाह से अधधक का हो जाए तो दशरमा वगैया ददमा
जा सकता है . फोतर का दध
ू बफल्कुर ही नहीॊ वऩरामें मह फच्चों के शरए सही ऩोषण नहीॊ है . भदहराओॊ भें जानकायी
की कभी है अत् आवश्मक है कक उन्द्हें जानकायी दी जाए मदद वे जानकाय होंगी तो अच्छे ऩोषण कक ववधध अऩनेआऩ अऩना रेंगी".
रखनऊ भें एक ननजी धचककतसारम चराने वारी फार योग ववशेषऻ डॉ. कुभुद अनूऩ जी के अनुसाय "हाथ कक
स्वच्छता फहुत भहतवऩूणय है , जजससे ननभोननमा तथा अन्द्म अनेक फीभारयमों से फच्चों को फचामा जा सकता है .
अत्, उधचत ऩोषण औय स्वच्छता न केवर फच्चे को ननभोननमा तथा अन्द्म योगों से फचाने भें सहामक है फजल्क
फच्चे के शायीरयक ववकास औय योगप्रनतयोधक ऺभता को बी फढाने भें कायगय है . दार, चावर, योटी औय सब्जी
सफसे अच्छा औय सस्ता ऩौजटटक आहाय है जो ककसी बी प्रकाय से हाननकायक नहीॊ है ".

27 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

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डॉ वभाय के अनुसाय बी फच्चों को ननभोननमा से फचाने के शरए सपाई फहुत भहतवऩूणय है . अत् फच्चे को ठीक
प्रकाय से हाथ को धोने के फाद ही स्ऩशय कयना चादहए. फच्चों को कऩड़े धर
ु े व साफ़-सुथये ऩहनाने चादहए. फेहतय
होगा कक कई कऩड़ों का प्रमोग ऩहनाने के शरए कयें मदद एक-दो कऩड़े ही हैं तो हय फाय कऩड़े धर
ु कय ही ऩहनामें.
ववश्व स्वास््म सॊगठन के अनुसाय फच्चों को ननभोननमा से फचाने भें ऩमायप्त भात्रा भें ऩोषण फहुत ही अहभ
बूशभका ननबाता है . फच्चों को आयम्ब के छ् भहीने तक सभुधचत भात्रा भें ऩोषण दे ने के शरए भाॉ का दध
ू ऩमायप्त
है . मह फच्चों के शरए एक प्राकृनतक सयु ऺा है जो कक फच्चों को न केवर ऩण
ू य ऩोषण प्रदान कयता है फजल्क उनभे
योगप्रनतयोधक ऺभता का ववकास बी कयता है .
अत् फच्चों को सभधु चत ऩोषण औय उधचत वातावयण प्रदान कयके हभ उसे न केवर ननभोननमा वयन अन्द्म कई
प्रकाय के भ्राभक फीभारयमों से फचा सकते हैं. फच्चों को उधचत ऩोषण दे ने के शरए उसके जीवन के ऩहरे छ् भाह
तक केवर भाॉ का दध
ू ऩमायप्त है तथा ६ से २४ भाह तक के शरए भाॉ के दध
ू के साथ-२ दार, चावर, योटी, सब्जी,
दशरमा औय अन्द्म ऩूयक आहाय ददमा जा सकता है . रोगों भें जानकायी का अबाव है . सभाज भें फहुत फड़ी
जागरूकता की जरूयत है . तबी सभाज भें रोग ववशबन्द्न प्रकाय के स्वास्थवधयक ववधधमों को अऩनाकय, फच्चों को
ननभोननमा तथा अन्द्म फीभारयमों से फचाने भें सपर हो ऩामेंगें.

याहुर कुभाय द्वववेदी - सी.एन.एस.

28 | फार

ननभोननमा

का

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ननमॊत्रण

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सुऩोषण से ननभोननमा फचाओ भुभककन
फच्चों को ननभोननमा औय कुऩोषण से फचाने के शरए ऩौजटटक आहाय की जरूयत होती है । गोयखऩुय के फार-योग
ववशेषऻ डॉ कें.एन.द्वववेदी का कहना है कक: "ऩौजटटक आहाय तो जीवन की धयु ी है , जैसे ऩेरोर आऩ काय भें डारते
हैं। फच्चे के शरए सफसे अच्छा ऩोषण 6 भहीने तक भाॊ का दध
ू है । 6 भहीने के फाद ठोस आहाय की शुरुआत कयनी
चादहए। कपय धीये -धीये कय के 1 वषय तक बोजन फढाना चादहए। एक सार का फच्चा वह सबी खाना खा सकता है
जो फड़े रोग खा सकते है । इसको कई चयणों भें फाॊटा गमा है । 0 से 6 भहीने तक केवर स्तन ऩान, 6-9 भहीने, 911 भहीने,11-12 भहीने के फीच भें खाने की भात्रा थोड़ी-थोड़ी फढाते है । ऩोषण तो ककसी बी शयीय की आधाय शशरा
है ।"
डॉ द्वववेदी फताते हैं कक फच्चे के शरए नुकसानदामक आहाय क्मा है : "शुरू से ही फच्चों को ऊऩय का दध
ू वऩरा दे ना,
भाॊ का दध
ू न दे ना, पास्टपूड णखराना, खाने भें ऩोषक ततवों की कभी होना, अच्छा बोजन नहीॊ दे ना, सॊतुशरत
आहाय न दे ना, सभम ऩय खाना न णखराना, मे सफ नुकसानदे ह हैं। फच्चों के ववकास के शरए सॊतुशरत आहाय अनत
आवश्मक है । 6 भाह तक के शशशु के शरए भाॊ का दध
ू सॊतुशरत आहाय है ।"
नवजात शशशओ
ु ॊ को जन्द्भ के उऩयाॊत ६ भहीने तक एकभात्र भाॉ का दध
ू शभरने से उनके शयीय की प्रनतयोधक
ऺभता फढ जाती है . ननभोननमा से ही नहीॊ, फजल्क फहुत सायी फीभारयमों से फचाने के शरए स्तनऩान जरूयी है ।
स्तनऩान से फच्चों की 'इम्मूननटी' (प्रनतयोधक ऺभता) अधधक फढती होती है । स्तनऩान से ननभोननमा होने की
सम्बावना कभ होती है उस फच्चे की तुरना भें जो स्तनऩान नहीॊ कय यहा है । हाॊराॊकक ननभोननमा से फचाने के
शरए औय बी सावधाननमाॊ फयतनी चादहए जैसे कक ठण्ड से फचाना चादहए। रेककन जो फच्चें स्तनऩान कय यहे हैं
उनको ननभोननमा होने की सम्बावना कभ होती हैं क्मोंकक उनकी प्रनतयोधक ऺभता अधधक होती है ।
ऩहरे की तुरना भें आजकर रोग स्तनऩान के फाये भें कहीॊ अधधक जागरूक हैं. "स्तनऩान के फाये भें जागरूकता
फढ गमी है । जो भदहराएॊ ऩहरी फाय भाॉ फनी हैं वें स्तनऩान कयने का सही तयीका सीखने के शरमे फहुत इच्छुक हैं.
इस ऩय जागरूकता अशबमान बी चर यहा है । धचककतसक बी स्तनऩान को कापी फढावा दे ते हैं. दे खा जाए तो ऩहरे
री तुरना भें , स्तनऩानकयाने वारी भदहराओॊ का प्रनतशत फढा है " कहना है डॉ के.एन.द्वववेदी का ।
गोयखऩुय की एक फस्ती भें यहने वारे श्री प्रदीऩ श्रीवास्तव फताते हैं कक: "महाॊ तो अधधकतय भाताएॊ फच्चों को दध

वऩराती हैं, रेककन कुछ अबी बी नहीॊ वऩराती हैं। अफ तो कई साये कामयक्रभ चर यहे है जजसकी वजह से भाताएॊ
स्तन ऩान कयाने रगी है ।"

29 | फार

ननभोननमा

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गोयखऩुय की फस्ती भें यहने वारी इन्द्रावती फताती है कक उनके नाती को ननभोननमा हुआ था. उन्द्होंने फतामा कक:
"हभाये नाती को ननभोननमा हुआ था। इस फच्चे को भाॊ का दध
ू 5-6 भहीने तक वऩरामा गमा था औय अफ उसे गाम
का दध
ू वऩरा यहे हैं."
सभाज भें जागरूकता होने के फावजूद बी अनेक सभुदाम ऐसे हैं जहाॊ स्तनऩान के दहतों के फाये भें ऩमायप्त
जागरूकता नहीॊ ऩहुॊची है . सभाज भें व्माप्त भ्राॊनतमाॊ है औय ऐसे यीनत-रयवाज़ हैं जो फच्चे को एकभात्र स्तनऩान से
वॊधचत कय दे ते हैं. डॉ द्वववेदी का कहना है कक: "स्तनऩान न कयाने का सफसे फड़ा कायण है कक कुछ ऩरयवायों को
नवजात शशशु को स्तनऩान कयाने के पामदों के फाये भें ऩता नहीॊ है . ज्मादातय रोगों को स्तनऩान का भहतव
सभझाने से सभझ भें आ जाता है । अधधकतय रोग रुदढवादी हो कय औय सभझ न होने की वजह से, मा कपय
सभाज भें कुछ गरतपहभी होने के कायण शशशु को स्तनऩान से वॊधचत यखते हैं."
जो भाताऐॊ फोतर से दध
ू वऩराती हैं वो ठीक नहीॊ है . डॉ द्वववेदी के अनस
ु ाय: "फोतर से दध
ू नहीॊ वऩराना चादहए
क्मोंकक उससे इन्द्पेक्शन (सॊक्रभण) होने का खतया होता है , फोतर से दध
ू ऩीने से फच्चे के साॊस की नरी भें दध
ू जा
सकता है । फोतर दध
ू ऩीने वारे फच्चे भें साभान्द्म स्तनऩान कयने वारे फच्चे से चाय से ऩाॊच गुना अधधक
'एजस्ऩये शनर ननभोननमा' होने का खतया होता है । मह ननभोननमा फोतर से दध
ू ऩीने के दौयान श्वास नरी भें दध

चरा जाता है जजसकी वजह से फच्चे खतये भें आ जाते हैं।"

जजतेन्द्र द्वववेदी - सी०एन०एस०

30 | फार

ननभोननमा

का

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फच्चों भें ननभोननमा फचाव के शरए ऩोषण औय स्वच्छता जरूयी
ककसी बी व्मजक्त को जीववत यहने हे तु ऩौजटटक आहाय की जरूयत होती है । कोई बी व्मजक्त अगय चस्
ु तव
तॊदरू
ु स्त यहना चाहता है तो उसे अऩने शशशुओॊ को बी सही भात्रा भें स्वच्छ व ऩौजटटक आहाय दे ना चादहए। अगय
बोजन स्वच्छ व ऩौजटटक न हो तो पामदा न कयके नुकसान ऩहुॉचाता है औय शायीरयक ऺभता को बी कभ कयता
है , परस्वरूऩ कई खतयनाक फीभारयमाॊ हो जाती हैं। जजसभें से ननभोननमा प्रभुख है ।
शननवाय 12 नवम्फय को ववश्व ननभोननमा ददवस के अवसय ऩय वातसल्म क्रीननक के सप्र
ु शसद्ध फार-योग ववषेषऻ
डा. सॊतोष याम ने हभें फतामा कक फच्चों को अच्छा ऩोषण दे ना अनत आवश्मक है क्मोंकक एक अच्छे ऩोषण भें कई
तयह के एण्टीफाडीज, ववटाशभन जैसे ववटाशभन-‘सी’ होती है जो एक ‘एण्टीआक्सीडेन्द्ट’ की तयह काभ कयती है
औय शयीय की प्रनतयोधक ऺभता को फढाती है , जो फच्चों को जल्दी-जल्दी फीभाय होने से फचाती है । कुऩोषण से
शशकाय फच्चों को सॊक्रभण अधधक होता है , उन फच्चों की तुरना भें जो स्वच्छ व ऩौजटटक आहाय रेते हैं।
डा. सॊतोष याम ‘जॊक पूड’ को आज के ऩरयवेश भें खतयनाक भानते हैं, स्वच्छता की बूशभका को अनतआवश्मक
भानते हुए डा. याम फताते हैं कक ऩेट की फीभायी ही नहीॊ ‘वाइयर ननभोननमा’ बी स्वच्छ न होने से हो सकता है ,
जजसभें भाता वऩता मा घय के अन्द्म सदस्मों का हाथों, फतयन, दध
ू की फोतर आदद का साप न यखना साभान्द्मत्
ऩामा गमा है ।
बच्चे के शऱए म ॊका दध
ू ही सवोत्तम
--------------------‘होऩ भदय एण्ड चाइरड केमय सेण्टय’ के फार-योग ववशेषऻ डा. अजम कुभाय का कहना है कक फच्चे को 6
भहीने के फाद स्तनऩान ऩय ही न यखकय ठोस व सॊतशु रत आहाय दे ना चादहए जजसका भहॊ गा होना जरूयी नहीॊ।
महॉ ॊऩय बी डा. अजम कुभाय ‘पास्ट पूड’, ‘जॊक पूड’ का जजक्र कयते हुए इसको फच्चों को न दे ने की सराह दे ते
हैं एवॊ ववशेष फात का जजक्र कयते हुए वह कहते हैं कक फच्चे के शरए भॉ ॊका दध
ू ही सवोततभ है न कक गाम, बैंस मा
डडब्फे का। क्मोंकक गाम मा बैंस का दध
ू गाम मा बैंस के फच्चे के शरए सवोततभ हो सकता है न कक भनटु म के
फच्चे के शरए। स्वच्छता ऩय उनका बी एक ही भत है कक स्वच्छ शयीय ही फच्चे को ननभोननमा व अन्द्म योगों से
फचाता है ।
मश अस्ऩतार की प्रख्मात स्त्री योग एवॊ प्रसूनत ववशेषऻा डा. रयतु गगय बी भानती हैं कक अच्छे आहाय का भहॊ गा
होना कोई जरूयी नहीॊ है ऩय उनका ऩौजटटक होना अनत आवश्मक है । हाथों के धोने के ववषम भें उनका कहना है कक
आभतौय ऩय भातामें फच्चों को णखराने, दध
ू वऩराने से ऩहरे हाथों को नहीॊ धोती हैं जो फच्चे को सॊक्रशभत कय
सकती है औय उससे ननभोननमा व अन्द्म कई फीभारयमों के होने का खतया यहता है ।

31 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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‘होऩ भदय एण्ड चाइरड केमय सेण्टय’ की स्त्री योग ववषेषऻा (गोल्ड भेडडशरस्ट) डा. ननधध जौहयी कहती हैं
अच्छा ऩोषण तो भहतवऩूणय है ही ऩय उसका स्वच्छ होना बी उतना ही जरूयी है । अक्सय घय भें भाताओॊ को ऩूणय
ऻान न होने की वजह से बी अक्सय फच्चे कुऩोषण का शशकाय हो जाते हैं। उनका भानना है कक भहॊ गे खाने की ना
तो फच्चों को मा फड़ों को आवश्मकता है । भौसभ के पर व सब्जी से अच्छा ऩोषण कोई दस
ू या नहीॊ। कई फाय
भयीज उन्द्हें ‘प्रोटीन डड्रॊक’ नुस्खे भें शरखने के शरए कहते हैं, ऩय वह भौसभी पर व सब्जी को ही प्राथशभकता
दे ती हैं।
स्वच्छता ऩय वे कहती हैं कक साये योग स्वच्छता की कभी से ही शरू
ु होते हैं। वे अऩने अस्ऩतार भें आने वारी
भाताओॊ को स्वच्छता, खास तौय ऩय हाथों को औय फच्चों की दध
ू की फोतर, ननप्ऩर आदद को कैसे साप यखें, का
ववशेष ऻान दे ती हैं। ऩयन्द्तु ऐसा बी ऩामा गमा है कक ऩूणय ऻान व स्वच्छता के फावजूद बी ननभोननमा योग फच्चे
को हो सकता है , जैसे कक आशीष ननगभ एवॊ सॊगीता ननगभ के शशशु को जन्द्भ से 5 भहीने के बीतय ही ननभोननमा
हो गमा था।
अत् प्रकृनत व स्वच्छता से जजतने कयीफ यहें ग,े उतने ही स्वस्थ जीवन का ननभायण कय सकेंगे।

नीयज भैनारी - सी0एन0एस0

32 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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ऩोषण एवॊ स्वच्छता का ध्मान यखें , फच्चों को ननभोननमा से फचाएॊ
गबायवस्था से ही ऩोषण औय स्वच्छता का ध्मान यखा जाए तो जन्द्भ के फाद नवजात शशशु भें होने वारी
ननभोननमा जैसी फीभारयमों से फच्चे की सुयऺा की जा सकती है , औय फच्चे को स्वस्थ यखा जा सकता है |
ननभोननमा ऩाॊच सार तक के फच्चों भें होने वारी एक आभ फीभायी है जजससे, अगय भाॉ चाहे तो अऩने फच्चे को
सुयक्षऺत यख सकती है । जरूयत है तो शसपय थोड़ी सी जागरूकता की औय शशशु जन्द्भ से ऩूवय ही इसके शरए तैमायी
कयने की।
स्त्री योग ववशेषऻा डा. यभा शॊखधय के अनुसाय ‘‘जफ भदहरा गबयवती होती है तो उसे हभ सराह दे ते है कक
आमयन, कैजल्शमभ, प्रोटीन आदद की गोरी रें औय खाने भें ऐसी चीजें खाए जजनभें प्रोटीन होता है , जैसे सोमाफीन,
औय गुड जजसभें आमयन फहुत होता है । गुड़ आमयन का फहुत अच्छा स्त्रोत है , औय शहय एवॊ गाॊव दोनों जगह
आसानी से शभर बी जाता है | मह भहॊ गा बी नही होता है । साथ ही ऩनीय औय दध
ू बी रें जजसभें प्रोटीन औय
कैजल्शमभ दोनों होता है । तो अगय भाॉ को अच्छा ऩोषण दे गें तो फच्चा स्वस्थ ऩैदा होगा। इससे एक पामदा औय
होता है कक फच्चा सभम से ऩहरे नही होता है । जफ फच्चा सभम ऩय होगा तो फीभारयमों का खतया कापी कभ हो
जाता है ।’’
डा. शॊखधय ने मह बी फतामा कक ‘‘साप सपाई का ऩूया ध्मान यखना चादहमे. फच्चे को गोद भें उठाने से ऩहरे
साफुन से हाथ धो रें, औय स्तनऩान कयाने से ऩहरे अऩने स्तन को गीरे तौशरमे से ऩोंछ रें, जजससे ऩसीने मा कपय
अगय ऩाउडय मा क्रीभ आदद रगाती हैं तो मह फच्चे के भॉह
ु भें न जामे. भाॉ को योज नहाना चादहमे, एवॊ फच्चे को
बी योज नहराकय उसके कऩड़े फदरने चादहए। हय फाय ऩेशाफ आदद कयने ऩय फच्चे के कऩड़े फदरें औय गॊदे कऩड़ों
को साफन
ु से धोकय औय ठीक से सख
ु ाकय ही उन्द्हें ऩहनाएॊ | कबी बी गीरे कऩड़े फच्चे को न ऩहनाएॊ। साथ ही जफ
फच्चा थोड़ा फड़ा हो जाम औय कुछ खाने रगे तो ध्मान यखें कक उन्द्हें फाहय की चीज़े न दें | केवर घय की फनी चीज़ें
ही उन्द्हें दें औय शभचय भसारे की चीज़ों से फच्चों को दयू यखें ।’’
डा. याभ भनोहय रोदहमा सॊमक्
ु त धचककतसारम के फार योग ववशेषऻ डा. अशबषेक वभाय फच्चों के ऩोषण के फाये भें
फताते हैं कक ‘‘जो हभाये शयीय के आवश्मक ततव हैं, जैसे काफोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदद, वो एक ननजश्चत भात्रा
भें हभाये शयीय के दहसाफ से जरूयी हैं | जफ वो सही भात्रा भें शयीय को प्राप्त हों तो उसे हभ अच्छा ऩोषण कहते हैं।
अगय हभ फच्चे को गुणकायी आहाय दे ते हैं, जजसभें हय तयह की यऺातभक चीजें भौजूद हों, तो उससे शयीय की
अवयोधक ऺभता फढती है । वह सीधे तो ननभोननमा को नहीॊ योक सकती है । रेककन शयीय को ननभोननमा से रड़ने
की शजक्त जरूय प्रदान कयती हैं, औय वह उधचत खाने से ही आती हैं। तो ननजश्चत रूऩ से एक गुणकायी आहाय से
शयीय को हय तयह की फीभायी से फचाने भें भदद शभरती है ।’’

33 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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प्रतमेक भदहरा जफ वह गबायवस्था भें होती है तो उसका मह सऩना होता है कक उसका होने वारा फच्चा स्वस्थ एवॊ
तॊदरू
ु स्त हो, औय जन्द्भ के फाद सबी तयह की फीभारयमों से सुयक्षऺत यहे । मदद वह अऩने सऩने को साकाय कयना
चाहती हैं तो गबायवस्था से ही अऩने औय फच्चे के ऩोषण का ध्मान यखे जजससे गबय भें ऩर यहे फच्चे का ठीक से
ववकास हो सके, औय फच्चे के जन्द्भ के फाद स्तनऩान कयाने के शरए बी आवश्मक ततव शभर सकें। इसके शरए
मदद सॊबव हो तो भाॉ को दध
ू , अण्डे, भछरी औय भाॊस आदद दें जजससे उसे प्रोटीन ऩूयी भात्रा भें शभर सके। मदद
शाकाहायी हैं तो इसके शरए अनाज औय दारों का प्रमोग कय सकती हैं। चीनी के स्थान ऩय गड़
ु का प्रमोग कयें औय
कैजल्शमभ के शरए फाजये का प्रमोग कयें । ववटाशभन के शरए हये ऩतते वारी सब्जी का प्रमोग कय सकते हैं। इस
प्रकाय मदद गबायवस्था से ही ऩोषण का ख्मार यखेंगें तो जन्द्भ के फाद भाॉ के दध
ू के द्वाया फच्चे को वे सबी
आवश्मक ततव शभर जामेंगें जो फच्चे को ननभोननमा जैसी फीभायी से रड़ने भे सहामता कयें गे औय फच्चा स्वस्थ
यहे गा।

नदीभ सरभानी - सी.एन.एस.

34 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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ववषम ३
ननभोननमा एवॊ अन्द्म सॊक्रभण औय घय के
अन्द्दय वामु प्रदष
ू ण

35 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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ननभोननमा का फचाव औय धम्र
ू ऩानयदहत वातावयण
प्रतमेक 20 सेकण्ड भें ननभोननमा के कायण कहीॊ न कहीॊ ककसी फच्चे की भुतमु होती है । ऩाॊच वषय से कभ आमु के 20
प्रनतशत फच्चों की भतृ मु का कायण ननभोननमा है । मह प्रनतवषय 1.3 शभशरमन फच्चों का कार है । जज़न्द्दगी की मह
हानन अधधक दख
ु दामी होती होती है क्मोंकक इस भतृ मु को प्रमाप्त साधनों द्वाया योका जा सकता है ।
ववश्व स्वास््म सॊगठन द्वाया फच्चों भें ननभोननमा होने के कायणों को फढावा दे ने वारे ववशबन्द्न वातावयण
सम्फन्द्धी त्मों को सूधचफद्ध ककमा गमा है । मह कायण है :
(1) खाना फनाने तथा गभय कयने हे तु फामोभास ईंधन(ठोस ईंधन) जैसे रकड़ी मा गोफय के कायण घय भें होने वारा
वामभ
ू ॊडर का प्रदष
ू ण,
(2) बीड़बये घयों भें ननवास कयना तथा
(3) भाता-वऩता द्वाया धम्र
ू ऩान ककमा जाना।
ववश्व स्वास््म सॊगठन बी मही सराह दे ता है कक घय के अन्द्दय होने वारे वामूभॊडर के प्रदष
ू ण को उऩरब्ध साप
स्टोव औय बीड़बाड़ वारे घयों भें अच्छे स्वास््म ववऻान को फढावा दे कय ननभोननमा से फीभाय होने वारे फच्चों की
सॊख्मा को कभ ककमा जा सकता है ।
ननभोननमा कई प्रकाय से पैरता है । साधायणतम: फच्चों की नाक मा गरे भें ऩामे जाने वारे जीवाणु औय ववषाणु
को साॊस द्वाया शरमे जाने ऩय पेपड़ों भे सॊक्रभण हो सकता है । खाॊसने मा छीॊकने से दवू षत हवा द्वाया बी मह पैर
सकता है । अत् जीवाणु के पैरने को कभ कयने के शरए यहन सहन के वातावयण भें सुधाय, ननभोननमा के ननमॊत्रण
भें एक अहभ बूशभका ननबाता है ।
फच्चों भें ननभोननमा के ननमॊत्रण, फचाव औय धचककतसा (उऩचाय) हे त,ु 2009 भें ववश्व स्वास््म सॊगठन तथा
मनू नसेप द्वाया ‘‘ग्रोफर एऺन प्रान पॉय द प्रीवें षन एण्ड कॊरोर ऑप ननभोननमा’’ का आयम्ब ककमा गमा।
ववशेषत: स्तनऩान औय हाथों की स्वच्छता को फढावा दे कय तथा घयों के अन्द्दय वामू प्रदष
ू ण कभ कयके फच्चों को
ननभोननमा से फचामा जा सकता है । नवीन तकनीकक जानकारयमाॊ घयों का प्रदष
ू ण कभ कय सकती हैं। ऩयम्ऩयागत
खाना फनाने के शरमे प्रमक्
ु त रकड़ी, कॊडे औय कोमरे (जजनका प्रमोग अबी बी कुछ अववकशसत दे शों भें ककमा
जाता है ) के स्थान ऩय तयर ईंधन जैसे शभट्टी का तेर, प्रकृनतक गैस, एरऩीजी इतमादद का इस्तेभार ककमा जा
सकता है । तयर ईंधन के शरमे प्रमुक्त होने वारे चल्
ू हों तथा ठोस ईंधन के उऩमोग भें प्रमुक्त होने वारे चल्
ू हों भें
सध
ु ायोऩयान्द्त प्रमोग कयने ऩय जोणखभ भें कभी दे खी गमी है ।
दस
ॊु भें साॊस रेने की प्रकक्रमा ऩयोऺ धम्र
ू यों के द्वाया प्रमक्
ु त तम्फाकू के धए
ू ऩान होती है । इसे सेकण्ड है ण्ड स्भोक
बी कहते हैं। ननटक्रीम धम्र
ू ऩान भें साॊस रेना फीभायी, अऩॊगता तथा भतृ मु का कायण है । मह श्वसन कक्रमा को
36 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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प्रबाववत कयता है औय पेपड़ों की शजक्त को कभ कय दे ता है । अभेरयका भें , नवजात शशशुओॊ औय 18 वषय से कभ
आमु के फच्चों भें ननचरी श्वसन नरी के सॊक्रभण के अनुभाननत 150,000-300,000 भाभरे ऩयोऺ धम्र
ू ऩान से
प्रबावी हैं, जजसके ऩरयणाभ स्वरूऩ हय वषय अस्ऩतारों भें 7,500-15,000 भयीज़ बती ककमे जाते हैं।
डा. एस.एन. यस्तोगी, प्रख्मात फार-रृदम योग ववशेषऻ चेतावनी दे ते हैं कक ‘‘फच्चे के शरए घय भें हुक्का, फीड़ी औय
शसगये ट का प्रमोग कापी नुकसानदामक होता है । मह ऩयोऺ धम्र
ू ऩान है क्मोंकक इसभें फच्चा कभये भें ववद्मभान
ननकोटीन भें साॊस रेता है जो ननभोननमा का खतया फढा दे ता है । फच्चे के कऺ भें वऩता/ऩरयवाय के अन्द्म सदस्मों
को धम्र
ू ऩान नहीॊ कयना चादहमे। नवजात शशशु को ऩथ
ृ क कभये भें यखना चादहमे तथा कभ से कभ सॊख्मा भें रोगों
उसके ऩास जाना/स्ऩशय कयना चादहमे। रेककन बायत भें साॊस्कृनतक प्रथा के कायण इस आदत को फन्द्द कयना
कापी कदठन है । फच्चे के ऩैदा होने के प्रथभ ददन से ही अनेकों रोग फच्चे के साथ खेरते हैं। मह अच्छी आदत नहीॊ
है । मह साभाजजक प्रथा जो कक अच्छे शशक्षऺत ऩरयवायों भें बी है , फन्द्द होनी चादहमे। कभ से कभ ऩहरे छ् भाह तक
फच्चे के ऩास केवर भाॊ एवॊ उसकी दे खये ख कयने वारे को ही जाने दे ना चादहमे।’’
ककसी फच्चे के चायों ओय का वातावयण औय यहने वारा प्रदष
ू ण फच्चे भें अनेकों फीभारयमों के होने की सम्बावना
का एक फड़ा कायण है । रखनऊ के फार योग ववशेषऻ डा. एस. के. सेहता का कहना है कक ‘‘मदद घय भें हवा औय
धऩ
ू के आने का उधचत प्रफन्द्ध हो, औय घय भें यहने वारों की सॊख्मा कभ हो अथायत अधधक बीड़बाड़ न हो, जजससे
फच्चे के यहने के शरमे प्रमाप्त तथा ऩथ
ृ क स्थान यहे , तो फच्चे को सॊक्रभण के अवसय कभ यहते हैं। रेककन, मदद
फच्चे के चायों ओय का वातावयण इस प्रकाय का हो कक उसभें थोड़े स्थान भें यहने वारों की सॊख्मा अधधक हो तथा
वातावयण खाना फनाने के ईंधन मा तम्फाकू के धए
ॊु से प्रदवू षत हो, तो फच्चे भें सॊक्रभण की सम्बावना अधधक हो
जाती है । इस प्रकाय के ऩरयवायों भें तीव्र दभा औय ऺमयोग के होने की अधधक सम्बावना यहती है तथा मे योग फच्चे
को बी हो सकता हैं।’’
तम्फाकू के प्रमोग औय इससे ननभोननमा के फढते भाभरों के भध्म सम्फन्द्ध को भानते हुए डा. नीरभ शसॊह फार
योग एवॊ स्त्री योग ववशेषऻ जो ‘‘वातसल्म रयसोसय सेंटय ऑन हे ल्थ’’ की भुख्म कामयकायी बी हैं, कहती हैं कक
‘‘घयों के अन्द्दय की दवू षत हवा वास्तव भें ननभोननमा को फढावा दे ती है । ग्राभीण ऺेत्रों भें चल्
ू हे भे बोजन फनाने के
कायण कापी धआ
ु ॊ होता है । तम्फाकू का धआ
ु ॊ बी फच्चों भें ननभोननमा औय अन्द्म श्वसन सम्फन्द्धी योगों का कायण
है । तम्फाकू ऩीने वारे अशबबावकों के कायण घयों के अन्द्दय अधधक प्रदष
ू ण होता है , औय ऐसे दवू षत वातावयण भें
यहने वारे फच्चों भें योगों का अधधक खतया होता है । जहाॊ तक सम्बव हो, फच्चों को स्वच्छ तथा प्रदष
ू ण यदहत
वातावयण भें यखना चादहमे।’’
डा. यस्तोगी बी भानते हैं कक शहयों भें अधधकतय रोग गैस के चल्
ू हों का प्रमोग कयते हैं जजससे तर
ु नातभक रूऩ से
वातावयण कभ प्रदवू षत होता है । रेककन अबी बी गाॊवों भें रोग बोजन फनाने के शरमे रकड़ी औय कोमरे का
इस्तेभार कयते हैं जजससे घयों भें हवा अधधक दवू षत हो जाती है । ग्राभीण ऺेत्रों भें सपाई औय स्वास््म ववऻान
सम्फन्द्धी ऻान की कभी है । रेककन शहयों भें रोग कुछ अधधक जागरूक हैं जजससे वे सतकय यहते हैं।
37 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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डा. एस. के. सेहता का भत है कक ‘‘सयकाय घयों के प्रदष
ू ण को कभ कयने के शरमे खाना फनाने के शरमे गैस के
प्रमोग को फढावा दे यही है । मह घयों के अन्द्दय की हवा को कभ दवू षत कये गा। तम्फाकू के प्रमोग के ववयोध भें ऩहरे
से ही ननमभ है , जो सावयजननक स्थरों ऩय जहाॊ रोग एकत्र होते हैं। तम्फाकू ऩीने का ननषेध कयता है । अशबबावकों
को मह सभझना चादहमे कक जफ वे घयों भें धम्र
ू ऩान कयते हैं तो उनके फच्चे ऩयोऺ रूऩ से धम्र
ू ऩान के सम्ऩकय भें आ
जाते हैं। इसशरमे मदद वे धम्र
ू ऩान बफल्कुर न कयें तो सवोततभ होगा, रककन कभ से कभ उन्द्हें फच्चों के सभऺ
धम्र
ू ऩान नहीॊ कयना चादहमे।
इस सम्फन्द्ध भें सबी धचककतसकों का एक भत है कक धआ
ु ॊयदहत वातावयण औय फच्चे के सभऺ धम्र
ू ऩान न कयने
से कापी हद तक हवा को स्वच्छ फनामा जा सकता है । अन्द्म ककसी बी प्रकाय के प्रदष
ू ण से फचाव बी जरुयी है
क्मोंकक सॊक्रभण के शरमे मही ककसी न ककसी प्रकाय से जजम्भेदाय है । अत् घयों के बीतय के वातावयण की
स्वच्छता के शरमे उऩाम ककमे जाने चादहमे, क्मोंकक इसी के द्वाया ननभोननमा से फचाव औय इसे योका बी जा
सकता है ।

सौम्मा अयोया - सी.एन.एस.
(अनुवाद: सुश्री भामा जोशी, रखनऊ)

38 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

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फच्चों भें ननभोननमा के खतये को फढाता है घय के बीतय का प्रदष
ू ण
फच्चों भें ननभोननमा के खतये को फढाने भें घय के बीतय का प्रदष
ू ण जैसे धम्र
ू ऩान,घय भें रकड़ी जराकय मा गाम के
गोफय को गयभ कयके खाना ऩकाना आदद अहभ बूशभका ननबाते है . एक अध्ममन के अनुसाय प्रनतवषय ८७१५००
फच्चे घय के अन्द्दय के प्रदष
ू ण से होने वारे ननभोननमा के कायण भयते हैं. ववश्व स्वास््म सॊगठन के अनुसाय
“वातावयण सम्फन्द्धी प्रदष
ू ण, जैसे कक रकड़ी व गोफय के कॊडे ऩय खाना ऩकाना, अथवा अन्द्म जैववक ईंधन का
प्रमोग कयना, घय भें धम्र
ू ऩान कयना औय बीड़ बये स्थान ऩय यहना बी फच्चों भें ननभोननमा के खतये को फढाता
है ”. अत् फच्चों को साफ़-सुथये औय अच्छे वातावयण भें यखना चादहए ताकक उनभें ननभोननमा तथा अन्द्म
फीभारयमाॉ होने का जोणखभ कभ से कभ हो.
फहयाइच जजरा अस्ऩतार के वरयटठ फार योग ववशेषऻ डॉ. के. के. वभाय के अनस
ु ाय "घय के बीतय का प्रदष
ू ण, जैसे
फीड़ी ऩीना, चल्
ू हे ऩय खाना ऩकाना आदद, फार ननभोननमा के खतये को फढा दे ता है . ग्राभीण ऺेत्र भें सॊक्रभण पैरने
के औय बी फहुत से कायण हैं, जैसे गाॉव भें भरखाना घय के अन्द्दय ही कच्ची दीवायों का फना होता है जजसके कायण
सॊक्रभण पैरने का खतया फढ जाता है . अत् भरखाना घय के फाहय फनना चादहए औय ऩक्की दीवायों का फनना
चादहए. बायत सयकाय द्वाया भरखाना फनाने का जो कामयक्रभ चरामा गमा है उसे रोगों को अऩनाना चादहए.
ग्राभीण घयों के फच्चे प्राम् जभीन ऩय फैठकय खाना खाते हैं. ऐसा नहीॊ कयना चादहए. घय की शरऩाई-ऩुताई होनी
चादहए. घय ऩक्के ईंट का फना होना चादहए. जो शहयी ऺेत्र के रोग हैं उनभें सॊक्रभण पैरने का खतया कभ होता है
क्मोंकक उन्द्हें शुद्ध ऩानी शभरता है जफकक ग्राभीण ऺेत्र भें शुद्ध ऩानी उऩरब्ध नहीॊ होता जजसके कायण उनभें
सॊक्रभण पैरने का खतया औय बी ज्मादा फढ जाता है ".
रखनऊ भें अऩना ननजी क्रीननक चराने वारी फार योग ववशेषऻ डॉ. कुभुद अनूऩ प्रदष
ू ण के शरए धम्र
ू ऩान को
दोषी भानती हैं. उनका कहना है कक "शहयी ऩरयऩेऺ भें धम्र
ू ऩान घय के बीतय के प्रदष
ू ण का एक फड़ा कायण है .
फच्चे जो ऩयोऺ रूऩ से धम्र
ू ऩान के शशकाय हो जाते हैं वह उनके शरए फहुत ही हाननकायक होता है औय उनभें
ननभोननमा होने का खतया फढ जाता है . धम्र
ू ऩान न केवर ननभोननमा फजल्क अस्थभा तथा अन्द्म कई प्रकाय के
सॊक्रभणों को दावत दे ता है . अत् फच्चों को ऩयोऺ धम्र
ू ऩान के कुप्रबावों से फचाने के शरए घय के बीतय धम्र
ू ऩान
वधचयत होना चादहए. तबी हभ फच्चों भें ननभोननमा तथा अन्द्म स्वास्थ सम्फन्द्धी फीभारयमों के खतये को कभ कय
ऩामेंग"े .
डॉक्टय भें बी घय के बीतय होने वारे प्रदष
ू ण से जन्द्भे सॊक्रभण के फाये भें जानकायी का अबाव है . जजसका अन्द्दाजा
हभ इस फात से ही रगा सकते हैं कक फहयाइच जजरा अस्ऩतार के स्त्री योग ववशेषऻ डॉ. ऩी. के शभश्र घय के बीतय
के प्रदष
ू ण को ननभोननमा का कायण नहीॊ भानते हैं. उनके अनुसाय "धम्र
ू ऩान, तम्फाकू के प्रमोग से मा कपय घय भें
खाना ऩकाने के शरए अॊगीठी के उऩमोग से सीधे तौय ऩय ननभोननमा के होने का खतया नहीॊ होता है . ऩय फच्चे को
धए
ु ॊ भें यखने से घट
ु न हो सकती है ऩय इससे सीधे तौय ऩय कोई फीभायी होने का खतया नहीॊ होता है ".
39 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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धम्र
ू ऩान से ननभोननमा के होने का खतया फढ जाता है . जजसका अनुभान इससे रगामा जा सकता है कक फहयाइच
जजरा अस्ऩतार भें ददखाने आमी ननभोननमा से ऩीडड़त ढाई सार के एक फच्चे की भाता ने फतामा कक उसके घय भें
कई रोग धम्र
ू ऩान औय तम्फाकू का सेवन कयते हैं औय घय भें खाना बी चल्
ू हे ऩय ऩकामा जाता है . एक औय भाता,
जजसका तीन ददनों का फच्चा जो ननभोननमा से ऩीडड़त था, ने फतामा कक उसके घय भें बी चल्
ू हे ऩय खाना ऩकामा
जाता है औय फच्चे के वऩता फीड़ी, शसगये ट औय गुटके का सेवन कयते हैं .
फेहतय स्वास््म दे खबार, उधचत ऩोषण औय ऩमायवयण भें सुधाय स्वतॊत्र कायक हैं जो फार ननभोननमा के घटनाओॊ
को कभ कय सकते हैं. अत् सभाज भें रोगों के जीवन स्तय भें ऩरयवतयन राने के शरए इन कायकों की बशू भका
प्रभुख है . सयकाय को बी इन कायकों को ध्मान भें यख कय ही स्वास््म कामयक्रभों को कक्रमाजन्द्वत कयना चादहए.
जफ रोगों का जीवन स्तय फेहतय होगा तथा रोग अच्छे जीवन स्तय की ववधध अऩनामेंगें तबी ननभोननमा तथा
अन्द्म सॊक्रभणों से फचाव सम्बव हो ऩामेगा.

याहुर कुभाय द्वववेदी - सी.एन.एस.

40 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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फच्चों भें ननभोननमा जनती है अस्वच्छता औय ऩयोऺ धम्र
ू ऩान
घय के बीतय ववशेष तौय ऩय साफ़-सपाई यखनी चादहए औय अॊगीठी मा धम्र
ू ऩान के धए
ु ॊ से अऩने फच्चों को फचाना
चादहए. शोध के अनुसाय इस धए
ु ॊ से न केवर फच्चों के स्वास््म ऩय अवाॊछनीम कुप्रबाव ऩड़ता है फजल्क उनभें
ननभोननमा होने का खतया फढ बी जाता है .
गोयखऩुय के फार योग ववशेषऻ डॉ के.एन. द्वववेदी का कहना है कक: "ननभोननमा ननमॊत्रण के शरए स्वच्छता तो
फहुत आवश्मक है । अऩने दे श भें ऩयम्ऩया है फच्चों को काजर रगाने की, तेर भाशरश कयने की. इन सफ चीजों से
फच्चो को फचाना चादहए। फच्चा स्वस्थ तबी यहे गा जफ वह स्वच्छ यहे गा। दोनों एक दस
ू ये के ऩमायमवाची हैं।"
गोयखऩुय की एक फस्ती भें यहने वारे प्रदीऩ श्रीवास्तव फताते हैं कक: "जजस झोऩड़-ऩट्टी भें भैं यहता हूॉ वहाॉ ७-१०
सार की उम्र से ही फच्चे धम्र
ू ऩान कय यहे हैं. फच्चे को ऩयोऺ रूऩ से धम्र
ू ऩान से फचाना भुजश्कर है क्मोंकक घय इतने
छोटे होते हैं औय आस ऩास बी रोग ऩयोऺ धम्र
ू ऩान के नुक्सान से अनशबऻ हैं. भुझे बी आज जानकायी हुई कक धए
ु ॊ
से फच्चे को ननभोननमा हो सकता है ."
नवजात शशशुओॊ की दो औय भाताओॊ से ऩूछने ऩय ऩता चरा कक उन्द्हें बी ऩयोऺ धम्र
ू ऩान के खतयों के फाये भें नहीॊ
ऩता था. मह बी नहीॊ ऩता था कक ऩयोऺ धम्र
ू ऩान से फच्चों को ननभोननमा हो सकता है . इनभें से एक भाता तो स्वमॊ
सुयती तम्फाकू खाती हैं. श्रीवास्तव साहफ कहते हैं कक अधधकाॉश रोग फीड़ी मा सुयती तम्फाकू ही खाते हैं औय
शसगये ट ऩीने वारों की सॊख्मा कभ है .
गोयखऩुय की एक फस्ती भें यहने वारी इन्द्रावती फताती हैं कक उनके नाती को ननभोननमा हुआ था. उन्द्होंने फतामा
कक: "हभाये नाती को ननभोननमा हुआ था। फच्चे के गरे भें ददक्कत था, श्वास पूर यही थी, ऩेट भें बी ददय था, फख
ु ाय
बी था। धचककतसकों ने फतामा कक ननभोननमा ठण्ड के वजह से हुई थी. इस फच्चे को भाॊ का दध
ू 5-6 भहीने तक
वऩरामा गमा था औय अफ उसे गाम का दध
ू वऩरा यहे हैं. घय भें कोई फीड़ी मा शसगये ट तो नहीॊ ऩीता है , ऩय खाना
रकड़ी जरा कय ही फनता है . तम्फाकू 'सयु ती' खाई जाती है ."
ववशेषऻों के अनस
ु ाय रकड़ी आदद जरा कय चल्
ू हे ऩय खाना फनाने से जो धआ
ु ॊ ननकरता है उससे फच्चों को फचाना
चादहए. शसगये ट फीडी के धए
ु ॊ से बी सबी को फचना चादहए क्मोंकक इससे स्वास््म ऩय अनेक कुप्रबाव ऩड़ते हैं
जजनभें से ननभोननमा एक है . तम्फाकू सेवन तो हय रूऩ भें खतयनाक औय जान रेवा नशा हैं.
बायत भें १० कयोड़ रोगों से बी अधधक फीड़ी का सेवन कयने वारे रोग हैं. जजतने रोग फीड़ी ऩीने की वजह से
तम्फाकू-जननत भतृ मु को प्राप्त होते हैं, उतने अन्द्म सबी प्रकाय के तम्फाकू उतऩादों द्वाया जननत फीभारयमों से बी
नही भयते. ववश्व स्वास््म सॊगठन अॊतयायटरीम ऩुरुस्काय ववजेता प्रोपेसय (डॉ) यभा कान्द्त ने फतामा कक मे त्म
फीड़ी भोनोग्राप नाभक यऩट भें साभने आए हैं जो स्वास््म एवॊ ऩरयवाय कल्माण भॊत्रारम ने जायी की थी.
41 | फार

ननभोननमा

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प्रकोऩ

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"तम्फाकू हय रूऩ भें घातक है . वतयभान भें फीड़ी ऩीने की दय कई प्रदे शों भें अधधक है , जैसे भणणऩुय, शभजोयभ,
नागारैंड औय शसजक्कभ भें १०.६ - १४.२ प्रनतशत, अरुणाचर प्रदे श, असाभ, बफहाय, चॊडीगढ औय भेघारम भें ४.६ ९.२ प्रनतशत, भहायाटर, ऩजश्चभ फॊगार, आॊध्र प्रदे श, बत्रऩुया, उड़ीसा, उततयाखॊड, याजस्थान, भध्म प्रदे श भें १.1 २.९ प्रनतशत, औय गोवा, तशभर नाडू, उततय प्रदे श, ददल्री, कनायटक, गुजयात, दहभाचर प्रदे श औय ऩॊजाफ भें मह
दय १० प्रनतशत है " कहा प्रोपेसय (डॉ) यभा कान्द्त ने. बायत भें शभजोयभ भें फीड़ी सेवन की दय सफसे अधधक है औय
ऩॊजाफ भें सफसे कभ.
"फीड़ी भें तम्फाकू की भात्रा शसगये ट की तर
ु ना भें कभ होती है ऩय ननकोटीन, टाय औय अन्द्म हाननकायक ऩदाथों की
भात्रा कापी अधधक होती है . इनभें से कई ऐसे ऩदाथय हैं जजनसे कैंसय होने की सम्बावना फढ जाती है " कहा प्रोपेसय
(डॉ) यभा कान्द्त ने जो अणखर बायतीम शल्म-धचककतसकों (सजयनों) के सॊघ के नव-ननवायधचत याटरीम अध्मऺ हैं.
फीड़ी ऩीने से स्वास््म ऩय जान-रेवा कु-प्रबावों भें भुख के कैंसय, खाने की नरी के कैंसय आदद प्रभुख हैं, जो
तम्फाकू-जननत कैंसय के कुर अनऩ
ु ात का ७५ प्रनतशत हैं! इस यऩट भें मह बी प्रभाणणत हुआ है कक फीड़ी ऩीने औय
तऩेददक मा टीफी के भध्म सीधा सम्फन्द्ध है .
फच्चों को ववशेषकय तम्फाकू के धए
ु ॊ से औय चल्
ू हे से ननकरने वारे धए
ु ॊ से फचाना चादहए, औय जहाॉ तक भुभककन
हो उन्द्हें स्वच्छ औय स्वस्थ वातावयण भें ही यखना चादहए.

जजतेन्द्र द्वववेदी - सी०एन०एस०

42 | फार

ननभोननमा

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घय के बीतय का प्रदष
ू ण एवॊ फच्चों भें ननभोननमा
वाहनों से ननकरने वारे धए
ु ॊ से पेपड़ों को होने वारे नुकसान के फाये भें सबी जानते हैं, रेककन मह धऑ
ु ॊ गबय भें
ऩर यहे भ्रूण के ववकास भें बी फाधक होता है । इसी प्रकाय घय के अन्द्दय के प्रदष
ू ण से बी फच्चों भें अनेक जानरेवा
बफभायी होती है । जो कक बोजन फनाने वारी अॊगीठी, शभट्टी तेर के स्टोव, कॊडा मा कपय भाता वऩता के शसगये ट,
फीड़ी, हुक्का आदद के सेवन से होती है । जजसभें वो फच्चा ऩयोऺ-अऩयोऺ रूऩ से धए
ु ॊ को अऩने अन्द्दय सॉस के
साथ रेता है । इन सफ की वजह से फच्चों भें अनेक बफभारयमॉ ॊघय कय जाती हैं जजनभें से ननभोननमा प्रभख
ु है ।

मश अस्ऩतार की प्रख्मात स्त्री-योग ववशेषऻा डॉ. रयतू गगय कहती हैं कक घय के अन्द्दय यसोई के धए
ु ॊ, वातावयण भें
भौसभ फदरने के कायण पैर जाते हैं, जजसे फच्चा अऩने सॉस के साथ रेता है । सोते सभम फच्चे के ऊऩय हल्का
कऩड़ा डार कय इससे फचामा जा सकता है । ककन्द्तु जो सफसे धचन्द्ता की फात है वह है भाता मा वऩता का शसगये ट
मा फीड़ी सेवन कयना। ऩयोऺ धम्र
ू ऩान का फच्चे की सेहत ऩय १००% असय ऩड़ता है क्मोंकक शसगये ट फीड़ी का धआ
ुॊ
हल्का होता है औय आसानी से फच्चों के पेपडे भें साॊस के साथ चरा जाता है , जो ननभोननमा का सफसे फड़ा वाहक
है ।
इसका सफसे फड़ा उदाहयण हभें तफ दे खने को शभरा जफ एक शशक्षऺत भाता वऩता भनु नन्द्र नाथ औय प्रबा आनन्द्द
ने हभें फतामा कक उनके फच्चे को ननभोननमा हुआ था ऩय उसके फाद बी उन्द्होने शसगये ट से होने वारे प्रदष
ू ण के
फाये भें ज्मादा ध्मान नहीॊ ददमा। जफकक इनका फच्चा एक ‘प्री-भैच्मोय’ फच्चा था।
‘होऩ भदय एण्ड चाइल्ड केमय सेन्द्टय’ की गोल्ड भैडीशरस्ट डा. ननधध जौहयी का भानना है कक घय के आस ऩास
होने वारे ननभायण से धर
ू के कण फच्चे के साॊस के साथ साॊस नरी से होते हुए सीधे पेपड़ों भें चरे जाते हैं जो ऩहरे
दभा (अस्थभा) कपय फाद भें ननभोननमा भें फदर जाता है । घय के अन्द्दय भाता, वऩता का फीड़ी मा शसगये ट के सेवन
को बी वे ४०% तक कायण भानती हैं।
इसी ‘होऩ भदय एण्ड चाइल्ड केमय सेन्द्टय’ के गोल्ड भेडशरस्ट फार योग ववशेषऻ डा. अजम कुभाय कहते हैं कक
वामु प्रदष
ू ण हय तयह से खतयनाक है खास तौय ऩय साॊस की बफभायी भें जजसके सफसे फड़े शशकाय फच्चे होते हैं
जजनकी प्रनतयोधक ऺभता कभ होती है । इसका सीधा असय फच्चों के पेपड़ों ऩय ऩड़ता है । पेपड़ों की प्रनतयोधक
ऺभता कभ हो जाती है औय पेपडे साभान्द्म कीटाणुओॊ को बी अऩनी ओय आभॊबत्रत कय दे ते हैं। एक तयह से योग
से रड़ने की जो ढार है वो कभजोय हो जाती है । जजससे की कोई बी ननभोननमा के कीटाणु आसानी से प्रवेश कय
जाते हैं औय ननभोननमा योग पैरा दे ते हैं।
फच्चों भें ननभोननमा का एक प्रभुख कायण हैं घय के अन्द्दय जरने वारे चल्
ू हे । वामु प्रदष
ू ण से फच्चों के पेपडे भें
सीधा असय होता है जजससे फच्चों को फचामा जा सकता है अगय अॊगीठी, चल्
ू हों को घय से फाहय जरामा जाए तो।

43 | फार

ननभोननमा

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शसगये ट से होने वारे प्रदष
ू ण के ववषम भें डा. अजम कुभाय कहते हैं कक भाता वऩता द्वाया शसगये ट से जो धआ
ुॊ
पैरता है वह फच्चों के पेपडे ऩय सीधा असय कयता है । अगय भॉ फाऩ शसगये ट ऩीना नहीॊ छोड़ सकते हैं तो कभ से
कभ घय के फाहय वऩएॊ औय इसकी सजा अऩने फच्चों को न दें ।
ऐसा ही वातसल्म क्रीननक के फार योग ववशेषऻ डा. सॊतोष याम का कहना है । फीड़ी, शसगये ट से फच्चों भें एरजी हो
जाती है , जजससे उनकी योग से रड़ने की ऺभता कभ हो जाती है , इसभें पेपड़ों की एरजी प्रभुख है । घय के अन्द्दय
के प्रदष
ू ण के सॊदबय भें डा. सॊतोष याम कहते हैं कक घय के अन्द्दय जरने वारे भच्छय-ननयोधक ‘कोइर’ मा फतती
वामु प्रदष
ू ण का बी प्रभख
ु कायण है । शसगये ट बी फच्चों भें पेपडे के योग का एक भख्
ु म कायण है ।
वामु प्रदष
ू ण के प्रभुख कायण हैं घय भें जरने वारी अॊगीठी, चल्
ू हे , आदद, जो पेपड़ों भें कई प्रकाय के ववकाय ऩैदा
कयते हैं जजससे ननभोननमा होने की आशॊका यहती है । इनसे फचा जा सकता है अगय खाना घय से फाहय फनामा
जाए मा सौमय ऊजाय का इस्तभार ककमा जाएॊ।
इन्द्हीॊ सफ फातों को ध्मान भें यखते हुए सभाज भें प्रदष
ू ण को कभ कयने का सॊदेश जाना चादहए औय हभ सफ इसे
अऩनी जजम्भेदायी सभझें।

नीयज भैनारी - सी0एन0एस0

44 | फार

ननभोननमा

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घय भें धम्र
ू ऩान से बी हो सकता है फच्चे को ननभोननमा
घयों के अन्द्दय होने वारे वामु प्रदष
ू ण से फच्चों को ननभोननमा जैसी फीभायी हो सकती है . बोजन ऩकाने के शरए
जरामा गमा ईंधन औय घय के सदस्मों द्वाया ककमे गए धम्र
ू ऩान के धए
ु ॊ भें भौजूद हाननकायक ततव अप्रतमऺ रूऩ
से फच्चे के शयीय भें जाने के कायण नवजात शशशु को ननभोननमा का कहय झेरना ऩड़ सकता है | क्मोंकक
ननभोननमा का सम्फन्द्ध पेपड़ों से होता है , इसशरए जफ फच्चा प्रदष
ू ण वारे वातावयण भें साॉस रेता है तो इस वामु
भें भौजूद हाननकायक ततवों का प्रबाव उसके पेपड़ों ऩय ऩड़ता है औय फच्चा ननभोननमा जैसी फीभायी का शशकाय हो
जाता है ।
डा. याभ भनोहय रोदहमा सॊमक्
ु त धचककतसारम के शशशु योग ववशेषऻ डा. अशबषेक वभाय के अनस
ु ाय ‘‘ गाॉव भें
रकड़ी मा उऩरे से बोजन ऩकामा जाता है , क्मोंकक वहाॊ शहयों की तयह गैस की उऩरब्धता नही है | साथ ही साथ
घय भें जो साप सपाई की जाती है उससे धर
ू उड़ती है , औय घयों भें जानवय बी ऩारे जाते हैं। इन सबी कायणों से
घय का वातावयण प्रदवू षतहोता है । इनसे फच्चों को साॉस रेने भें ददक्कत आ सकती है तथा उन्द्हें ननभोननमा औय
अन्द्म श्वास की फीभारयमाॉ हो सकती है । अगय हभ घय का वातावयण स्वस्थ यखें तो फच्चे को इन फीभारयमों से
फचामा जा सकता है ।’’
डा. वभाय ने मह बी फतामा कक ‘‘शसगये ट औय फीड़ी के सेवन का असय ननभोननमा ऩय तो इतना अधधक नहीॊ है ,
रेककन औय दस
ू यी फीभारयमों, जैसे अस्थभा आदद, का खतया यहता है । प्रदष
ू ण को कभ कयने के शरए बोजन
ऩकाने के शरए रकड़ी मा उऩरे का प्रमोग कभ ककमा जा सकता है । शहयों भें पशय ऩय ऩोछा रगाने से बी धर
ू को
कभ ककमा जा सकता है । औय मदद घय भें ऩारतू जानवय हैं तो उन्द्हें घय के फाहय ही यखें तो ज्मादा अच्छा औय
फेहतय है । इस फात का ध्मान यखें कक फच्चों को उनसे दयू यखा जाम, औय फच्चों को जानवयों के साथ खेरने न
ददमा जाम. घयों भें ऩोछे , भच्छयदानी आदद का प्रमोग कयें तो इससे फच्चों को ननभोननमा जैसी फीभायी से फचामा
जा सकता है ।’’
इजन्द्दया नगय की स्त्री योग ववशेषऻा डा. यभा शॊखधय के अनुसाय ‘‘जजन घयों भें रकड़ी मा कन्द्डों के चल्
ू हे जरते हैं
मा कपय रोग फीड़ी शसगये ट का सेवन कयते हैं तो मे घय के वातावयण को प्रदवू षत कय दे ते हैं, औय जफ फच्चे उस
वातावयण भें साॊस रेते हैं तो मह धआ
ु ॉ पेपड़ों भें जाकय अन्द्दय जभा हो जाता है जजससे फच्चों को कभ आक्सीजन
शभरती है , औय फच्चों के शयीय भें फीभारयमों से रड़ने की ऺभता धीये -धीये कभ होने रगती है । इसशरए जफ घय भें
झाड़ू ऩोछा हो यहा है तो फच्चों को वहाॉ से हटा दें औय ऩानी भें कपनाइमर मा नीभ की ऩतती डारकय ऩोछा
रगाएॊ।’’
डा. याभ भनोहय रोदहमा सॊमुक्त धचककतसारम के भुख्म धचककतसा अधधकायी डा. आय. एस. दफ
ू े ने घय के अन्द्दय
धम्र
ू ऩान के फाये भें फतामा कक “धम्र
ू ऩान का असय ननजश्चत रूऩ से फच्चों ऩय ऩड़ता है . जफ छोटे कभये भें धम्र
ू ऩान
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ननभोननमा

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ककमा जाएगा तो फच्चा इसको साॉस रेने के दौयान अऩने अन्द्दय अवशोवषत कये गा जजसके कायण उसके ऊऩय
इसका असय ऩड़ेगा।’’
इन्द्हीॊ सफ कायणों के चरते ये खा की फच्ची तुरसी ननभोननमा की शशकाय हो गमी है . ये खा मह फात जानती तक नही
है कक रकड़ी के चल्
ू हे से ननकरने वारा धआ
ुॊ ही उसकी फच्ची के ननभोननमा होने का कायण है । वह अऩनी फच्ची
को गोद भें रेकय फड़े आयाभ से खाना फनाती है , औय उसका ऩनत बी फच्चों के साथ फैठकय फीड़ी का सेवन कयता
है , जजसका कुप्रबाव उसकी भासूभ फच्ची को झेरना ऩड़ यहा है । दवा राने ऩय बी कोई असय नही होता है । क्मोंकक
इन रोगों को मह ऩता ही नही है कक कभी कहाॊ है । इन्द्हें ककसी धचककतसक ने इस फाये भें फतामा ही नहीॊ |
आभतौय ऩय ननभोननमा को एक आभ फीभायी की तयह सभझा जाता है । रेककन मह अफ आभ फीभायी नही यही
क्मोंकक ऩाॊच सार तक के फच्चों की भौतें ननभोननमा के कायण हय सार फढती जा यही हैं। इसशरए ननभोननमा को
आभ फीभायी सभझकय इसे अनदे खा न कयें । अऩने फच्चे को ननभोननमा औय दस
ू यी साॉस की फीभारयमों से फचाने
के शरमे घयों के अन्द्दय होने वारे प्रदष
ू ण को योकें औय अगय घय भें खाना शभट्टी के चल्
ू हे ऩय फनाती हैं तो अऩने
फच्चों को उसके धए
ु ॊ से दयू यखें औय जजस स्थान ऩय फच्चे हों वहाॊ धम्र
ू ऩान का सेवन तो बफल्कुर न कयें । तबी
आऩका फच्चा स्वस्थ यह ऩामेगा.

नदीभ सरभानी - सी.एन.एस.

46 | फार

ननभोननमा

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ववषम ४
ननभोननमा टीका

47 | फार

ननभोननमा

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घातक ननभोननमा से फचाव के शरमे जीवन यऺक टीके
ननभोननमा जैसी फीभारयमों से हय वषय राखों फच्चे कार ग्रशसत होते हैं जफकक इन फीभारयमों को उऩरब्ध टीकों
द्वाया योका जा सकता है । ननभोननमा 5 वषय तक के फच्चों की भतृ मु का कायण है जजसके कायण रगबग 15 राख
फच्चों की प्रनतवषय भतृ मु हो जाती है । मद्मवऩ ननभोननमा 5 वषय से कभ आमु के फच्चों का 20 प्रनतशत कायण है , ऩय
दब
ु ायग्म से ऩूये ववश्व भें स्वास््म के कुर खचय का भात्र 5 प्रनतशत ही ननभोननमा के शरमे व्मम ककमा जाता है ।
स्रै प्टोकोकस ननभोनी हीभोपीरस इन्द्फ्रए
ू ॊजी जो ननभोननमा उतऩन्द्न कयने के शरमे भख्
ु म कीटाणु हैं, की
योकथाभ के शरमे टीके उऩरब्ध हैं तथा कई दे शों भें उऩमोग भें रामे जा यहे हैं, रेककन तत
ृ ीम ववश्व के बायत जैसे
दे श जोकक ऩूये ववश्व के फचऩन भें होने वारा ननभोननमा के 40 प्रनतशत भाभरे के शरमे जजम्भेदाय हैं, भें उऩमयक्त
टीके का उऩमोग फहुत कभ हो यहा है । मदद मह टीका (वैक्सीन) उन्द्नतशीर याटर भें उऩरब्ध हों औय उऩमोग भें
राए जाएॊ तो एक अनुभान के अनुसाय 5 वषय से कभ से रगबग 10 राख फच्चों की जान प्रतमेक वषय फचाई जा
सकती है ।
टीकाकयण फच्चों को ननभोननमा से फचाता है । मह दफ
य ता ऩैदा कयने वारी फीभायी है जजसके अक्सय फहुत ऩुयाने
ु र
श्वसन सम्फन्द्धी योग औय सेप्टीसीशभमा जैसे जदटर अथवा घातक ऩरयणाभ हो सकते हैं। सबी फच्चों को इससे
फचत का अधधकाय है । ववश्व स्वास््म सॊगठन का नवजात शशशुओॊ का टीकाकयण कामयक्रभ शशशुओॊ की प्रथभ 6
भाह तक की अवधध तक दहफ तथा ननभोकोकर कन्द्जुगेट वैक्सीन की तीन खयु ाक ददमे जाने की शसपारयश कयता
है । इस सभम ऩीसीवी कुछ ही दे शों भें उऩरब्ध है जफकक दहफ द्वाया टीकाकयण अनेक दे शों के टीकाकयण
कामयक्रभ का दहस्सा है ।
ननभोकोकर वैक्सीनस एक्सीरेयेट डेवरऩभें ट एण्ड इॊरोडक्शन प्रान, दे शों दाताओॊ, शशऺण, अॊतदे शीम सॊगठन
औय उद्मोग के भध्म साझे द्वाया अल्ऩ आम वगय के दे शों भें ननभोकोकर टीकाकयण को फढावा दे ने के शरए
‘‘ग्रोफर एराॊस पाय वैक्सीन एण्ड इभूनाइजेशन (जीएवीआई)’’ द्वाया आधथयक सहामता प्राप्त एक ऩरयमोजना
है । इसको अबी कामायजन्द्वत ककमे जाने ऩय 2030 तक अनुभाननत 54 राख फच्चों के ननधन को योका जा सकता है ।
हीभोकपरस इन्द्फ्रूॊजी टाइऩ फी वैक्सीन खतयनाक ननभोननमा के फचाव के शरमे खोजी गई एक शभधश्रत वैक्सीन
है । मन
ू ाइटे ड स्टे ट्स भें 1980 से 1990 तक दहफ वैक्सीन का ननमशभत इस्तेभार ककमे जाने से, आक्रभक दहफ
फीभायी के भाभरों की सॊख्मा 40-100 प्रनत 1,00,000 फच्चों से घटकय 1.3 प्रनत 1,00,000 फच्चों तक हो गई।
जीएवीआई द्वाया ववकासशीर दे शों के शरए दहफ टीके का कभ दाभों भें ददमे जाने का प्रस्ताव है । सीडीसी तथा
डब्ल्मए
ू चओ द्वाया 6 सप्ताह की आमु से प्रायम्ब कयते हुए, सबी शशशओ
ु ॊ का ऩोशरसचायाइड प्रोटीन कन्द्जग
ू ेट
द्वाया टीकाकयण कयने की शसपारयश की गमी है ।

48 | फार

ननभोननमा

का

प्रकोऩ

एवॊ

ननमॊत्रण

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डा. एस. के. सेहता, फार योग व नवजात योग ववशेषऻ उम्भीद कयते हैं कक ‘‘मद्मवऩ मे टीके अबी कापी भहॊ गे हैं,
रेककन बायत सयकाय डब्ल्मूएचओ के साथ शभरकय हभाये जैसे ववकासशीर दे शों भें दहफ वैक्सीन को उऩरब्ध
कयवाने का प्रमास कय यही है । जो बी हो आभ रोगों भें इसकी उऩरब्धता फहुत कभ है । दस
ू ये टीके जैसे खसया
वैक्सीन, जो ववश्व स्वास््म सॊगठन की शसपारयशों का एक अॊग है , बी कापी आवश्मक है क्मोंकक खसया,
ननभोननमा होने की सम्बावना को फढाती है ।"
इसी प्रकाय, फार योग व स्त्री योग ववशेषऻ, डा. नीरभ शसॊह जो "वातसल्म रयसोसय सेंटय आन हे ल्थ" की भुख्म
कामयकत्री बी हैं, का भत है , ‘‘तऩेददक (ऺम योग) को योकने के शरमे प्रमोग भें रामी जाने वारा फीसीजी टीका बी
फहुत आवश्मक है । ऺम योग के कायण फच्चों भें फहुत से श्वसन सम्फॊधी योग औय सॊक्रभण होते हैं। दस
ू या टीका,
डडऩथीरयमा औय दटटनेस के शरमे डीऩीटी है , जजसभें प्रथभ दो सॊक्रभण ऊऩयी श्वसन नरी से सम्फजन्द्धत है ।
तीसया नौ भाह ऩय ददमे जाने वारा, खसया योग का टीका बी आवश्मक है । मद्मवऩ मह टीका सीधे तौय ऩय
ननभोननमा को नही योकता है ककन्द्तु ऩयोऺ रूऩ से फचाव होता है । क्मोंकक चेचक (खसया) से ऩीडडत फच्चा
ननभोननमा का सॊक्रभण ऩाने के नजदीक होता है । इसशरए ऩैदा होने से 12 वषय तक इस टीकाकयण का ऩारन
कयना चादहमे। दहफ वैक्सीन का प्रमोग अबी हार ही से प्रायम्ब ककमा गमा है । हभाये दे श भें उऩरब्ध है । भहॊ गी
होने के कायण, शहय के रोग ही इसे रे सकते हैं औय अऩने फच्चों का टीकाकयण कयवा सकते हैं।"
उक्त वणणयत टीके साधायण योगों की तीव्र ऩकड़ द्वाया होने वारे घातक ननभोननमा को योकते हैं। हाराॊकक फच्चे का
टीकाकयण ननभोननमा से शत प्रनतशत फचाव नही कयता है । अशबबावकों औय दे खबार कयने वारों को इस
वास्तववकता को जानना आवश्मक है । टीकाकयण ऩण
य ऩेण सपर नही होता है । अच्छे ऩोषण के साथ उधचत
ू रू
स्वास््म बी ननभोननमा के फचाव कामयक्रभ का एक वह
ृ द बाग है । इस सॊदबय भें , फार योग एवॊ फार रृदम योग
ववशेषऻ डा. एस.एन. यस्तोगी जजनका रखनऊ भें अऩना दवाखाना है , बी फताते हैं, ‘‘ स्रै प्टोकोकस ननभोनी मा
हीभोकपरस इन्द्फ्रए
ू न्द्जी अथवा भाइकोप्राज्भा जैसे अनेकों योग कायकों द्वाया ननभोननमा हो सकता है ।
अशबबावक सोचते हैं कक मदद उन्द्होंने एक फाय फच्चे का टीकाकयण कयवा ददमा है तो वह कबी बी ननभोननमा से
प्रबाववत नही होगा/होगी।’’
रोगों की जागरूकता के आबाव तथा इन जीवन यऺक टीकों के भूल्म के कायण, बायत भें अनेकों फच्चे इसका
राब नही उठा ऩाते हैं। अक्टूफय, 2011 के प्रथभ सप्ताह भें ‘छत्रऩनत शाहूजी भहायाज धचककतसा ववश्वववद्मारम
के फार योग ववबाग के आई.सी.म.ू भें अऩने जीवन से रड़ने वारे, तीन वषय के फच्चे अथवय से शभरकय भैने दे खा
कक वह उनभे से एक फच्चा है जो दहफ वैक्सीन का राब नही उठा सका था। उसकी भाॊ श्रीभती ये नू फारा शभाय, ने
द्ु खऩव
य फतामा, हभने सन
ू क
ु ा था कक ननभोननमा फच्चों भें होने वारी साधायण फीभायी है औय फच्चे कबी-कबी
इससे सॊक्रशभत हो जाते हैं, रेककन हभने कबी नही सोचा था कक मह इतनी गम्बीय होगी। हभने फच्चे का प्रतमेक
योग के प्रनत टीकाकयण कयवामा था। टीकाकयण सम्फन्द्धी काडय के दहसाफ से साये टीके रगवामे। हभें मह नहीॊ
भारभ
ू था कक इसभें ननभोननमा का टीका बी था। मदद हभें ऻात होता इसका बी टीकाकयण कयवा रेते। धन,

49 | फार

ननभोननमा

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फच्चे से अधधक भूल्मवान नही है । इसके उऩचाय हे तु हभने राखों रूऩमे व्मम कय ददमे है । हभ एक नशसिंगहोभ से
दस
ू ये भें बागते यहे , जफ तक इस धचककतसारम भें नही ऩहुॊच।े अफ हभें इसके ठीक होने की कुछ उम्भीद है ।’’
बायत औय कुछ अन्द्म ववकासशीर दे शों भें अबी बी ननभोननमा का टीका, टीकाकयण कामयक्रभ का दहस्सा नही है ।
वास्तव भें मही दे श है जजनभें ननभोननमा होने की अधधक सम्बावना है । बायतीम सभाज की सुशशक्षऺत भाताएॊ ही
सुननजश्चत कयती है कक प्रतमेक घातक फीभायी के प्रनत उनके फच्चे का टीकाकयण ककमा गमा है । रखनऊ के
प्राइवेट शसटी हाजस्ऩटर भें एक अक्टूफय को अऩने दस
ू ये फच्चे को जन्द्भ दे ने वारी, श्रीभती अल्ऩना शसॊह कहती हैं
कक ‘‘भैने सन
ु ा है कक ननभोननमा सफसे खतयनाक फीभारयमों भें से एक है । भैं टीके का नाभ नही फता सकती,
रेककन भेये डाक्टय ने भुझे इसके फाये भें फतामा औय भैने अऩने ऩहरे फच्चे को, जो अफ तीन वषय का है , मह टीका
सावधानी के दहसाफ से रगवामा। ककन्द्तु मह टीका प्रस्ताववत टीकाकयण की सूची भें दशायमा नही गमा है ।’’
टीकाकयण क्मों आवश्मक है , सॊस्तत
ु टीकाकयण कामयक्रभ तथा फच्चों को टीका कहाॉ रगवामा जा सकता है , इस
सम्फन्द्ध भें अशबबावकों तथा दे खये ख कयने वारों को जागरूक कयने के शरमे ववश्व स्वास््म सॊगठन सकक्रम
बूशभका ननबाता है । ननभोननमा के टीकों के ववकास के शरए अन्द्वेषण व ववकास के प्रमासों की अनतआवश्मकता
है । अन्द्तयायटरीम सॊगठनों के प्रमासों औय ववततीम सहामता से ववकासशीर दे शों भें मह टीके उधचत भूल्मों ऩय
अववरम्फ उऩरब्ध कयवाने चादहमे।

सौम्मा अयोया - सी.एन.एस.
(अनव
ु ाद: सश्र
ु ी भामा जोशी, रखनऊ)

50 | फार

ननभोननमा

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ननभोननमा के टीका के फाये भें जनभानस भें अऻानता
फाज़ाय भें ननभोननमा से फचाव के शरए टीका उऩरब्ध तो जरूय है रेककन फहुत से रोगों को इसके फाये भें नहीॊ ऩता
औय महाॉ तक कक कुछ धचककतसक बी अनजान हैं. एक अध्ममन के अनुसाय फच्चे जजनभें ननभोननमा से फचाव का
टीकाकयण नहीॊ होता है , उनभें ननभोननमा से भयने का ४० गुना अधधक खतया यहता है . ववश्व स्वास््म सॊगठन ने
बी ननभोननमा से फचाव के शरए कई प्रकाय के टीके सुझामे हैं ऩय मह एक फहुत फड़ी बफडम्फना है कक जनभानस भें
इसके फाये भें जानकायी का अबाव है .
सम्ऩूणय ववश्व भें प्रनतवषय कयीफ १८ राख, ऩाॊच वषय से कभ उम्र के फच्चे ननभोननमा के कायण भयते हैं औय मदद
मही वतयभान दौय जायी यहा तो २०१० से २०१५ के फीच १३.२ शभशरमन अधधक भौतें होंगी. अत् मह फहुत
आवश्मक है कक रोगों भें ननभोननमा के टीकाकयण के फाये भें जागरूकता फढामी जाए जजससे कक प्रतमेक भातावऩता अऩने फच्चे को सभम से ननभोननमा से फचाव के टीके रगवामें. एक अध्ममन के अनुसाय ननभोननमा से
फचाव के शरए प्रमोग की जाने वारी ‘हीभोपीरस इनफ्रुॊजी टाइऩ फी’ (‘हीफ’) टीका के व्माऩक प्रमोग से
कयीफ चाय राख जाने फचामी जा सकती हैं.
ववश्व स्वास््म सॊगठन ने फच्चों को ननभोननमा से फचाने के शरए दो तयीके के टीकों के प्रमोग को फतामा है . ऩहरा
टीका हीभोपीरस इनफ्रुॊजी टाइऩ फी (हीफ) औय दस
ू या ननभोकोकर कॊजुगेट वैक्सीन (ऩीसीवी १३) के नाभ से
जाना जाता है . हीफ टीका व्माऩक रूऩ से रगबग १३६ दे शों भें उऩरब्ध है जफकक ऩीसीवी १३ टीका बायत सदहत
भात्र ३१ दे शों भें ही उऩरब्ध है . हीफ टीका, फच्चों को ननभोननमा से फचाने भें प्रबाकयी टीका है ऩयन्द्तु ववकासशीर
दे शों भें अबी कापी भात्रा भें फच्चे इसके टीकाकयण से वॊधचत हैं. एक शोध के अनुसाय २००३ भें , ववकासशीर दे शों
के ४२% टीकाकयण के तुरना भें ववकशसत दे शों भें ९२% फच्चों ने हीफ टीका प्राप्त ककमा था.
फहयाइच जजरा अस्ऩतार के फार योग ववशेषऻ डॉ. के के वभाय का कहना है कक "फाजाय भें ननभोननमा का टीका
उऩरब्ध तो ज़रूय है ऩय वह फहुत भहॉगा है इसशरए सबी को रग ऩाना सॊबव नहीॊ हो ऩाता है . ववश्व स्वास््म
सॊगठन ने बी ननभोननमा से फचाव के शरए इनफ्रूएॊज़ा टीका को सुझामा है . जो छ् भहीने से कभ उम्र के फच्चों को
दो डोज़ एक-एक भहीने के अॊतयार ऩय रगती है .
ननभोननमा के टीका के फाये भें रोगों भें जानकायी का अबाव है जजसका अॊदाजा इससे रगामा जा सकता है कक
फहयाइच जजरा अस्ऩतार भें ददखाने आमी, ननभोननमा से ऩीडड़त ढाई सार के फच्चे की भाता का कहना है कक
हभाये फच्चे को टीका तो रगा था ऩय हभें मह नहीॊ भारूभ कक ककस चीज का टीका रगा था. ननभोननमा के टीका के
फाये भें अऻानता आभ जनता भें ही नहीॊ फजल्क कुछ धचककतसकों भें बी दे खी जा सकती है . जजसका अनुभान हभ
इस फात से बी रगा सकते हैं कक फहयाइच जजरा अस्ऩतार के स्त्री योग ववशेषऻ डॉ. ऩी. के शभश्र का कहना है कक

51 | फार

ननभोननमा

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"हभाये महाॉ तो डी.ऩी.टी का टीका रगता है ननभोननमा के शरए कोई औय टीका नहीॊ रगता है हभें इसके फाये भें
जानकायी नहीॊ है ".
एक ओय जहाॉ ननभोननमा सम्ऩूणय ववश्व भें होने वारे शशशु भतृ मु का सफसे फड़ा कायण है औय आभ जनभानस भें
ननभोननमा के फाये भें साऺयता का अबाव है वहीॊ दस
ू यी ओय मह फड़े दब
ु ायग्म कक फात है कक ननभोननमा बायत
सयकाय द्वाया चरामे जाने वारे स्वास््म प्रोग्राभों का बाग नहीॊ है . अत् सयकाय को ननभोननमा के फाये भें
जागरूकता फढाने के शरए याटरीम स्तय का प्रोग्राभ चराना ननतमाॊत आवश्मक है . डॉ. के के वभाय का कहना है कक
ववश्व स्वास््म सॊगठन को बी अऩनी गाइड राइन फदरनी चादहए नमे औय सस्ते टीके को अऩनाना चादहए जो
ननशुल्क ववतरयत की जा सके.

याहुर कुभाय द्वववेदी - सी.एन.एस.

52 | फार

ननभोननमा

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सफसे जरूयतभॊद फच्चों को नहीॊ रग यहा है ननभोननमा टीका
ऩाॊच वषय से कभ आमु के फच्चों भें ननभोननमा भतृ मु का सफसे फड़ा कायण है . इसके फावजद
ू ननभोननमा का टीका
बायत सयकाय के फार टीकाकयण कामयक्रभ का बाग नहीॊ है . इसको ननजी रूऩ से खयीदना ऩड़ता है औय भहॊ गा होने
के कायण अधधकाॉश रोगों की ऩहुॉच के फाहय है . सफसे द्ु ख की फात तो मह है कक जजन फच्चों को ननभोननमा का
खतया सफसे अधधक है , उनको ही ननभोननमा टीका रगने की सम्बावना सफसे कभ है . उदहायण के तौय ऩय
क्मोंकक ननभोननमा टीकाकयण सयकाय अऩने स्वास््म कामयक्रभों भें नहीॊ प्रदान कयती है , तो ऐसे फच्चे जो गयीफ
ऩरयवाय से हैं, जजनके शरए स्वच्छता, धआ
ु -यदहत वातावयण, बीड़-बाड़, ऩौजटटक आहाय, स्वास््म जागरूकता,
आदद शभरने की सम्बावना बी कभ है , उनभें ननभोननमा अधधक होती है औय घटक स्वरुऩ रेती है .
गोयखऩयु की एक फस्ती भें यहने वारे प्रदीऩ श्रीवास्तव फताते हैं कक: "भेये फच्चे को बी ननभोननमा हुआ था. जजस
फस्ती भें हभ रोग यहते हैं वहाॉ अधधकाॊश रोग अऩने फच्चों का टीकाकयण तो कया यहे है ऩय कुछ रोग ऐसे बी हैं
जो अबी बी नहीॊ रगवा यहे हैं. ऐसे रोगों के शरए जो अऩने फच्चों को टीका नहीॊ रगवा यहे हैं, उनके शरए
जागरूकता कामयक्रभ की जरूयत है औय उनको जागरूक ककमा जा सकता है । वऩछरे वषय एक ऩरयवाय टीकाकयण
नहीॊ कयवा यहा था, जजनको हभ रोगों ने जागरूक ककमा उसके फाय उसने रगवामा।"
गौय हो कक प्रदीऩ को मह नहीॊ भारूभ है कक ननभोननमा का टीका रगा है कक नहीॊ. जजस टीकाकयण का प्रदीऩ जजक्र
कय यहे हैं वो सयकायी स्वास््म कामयक्रभ के अॊतगयत फच्चों को नन:शुल्क भुहैमा ककमा जाता है औय उसभें
ननभोननमा का टीका नहीॊ शाशभर है . ऩयन्द्तु प्रदीऩ इस फात से अनजान हैं.
गोयखऩुय की एक औय फस्ती भें यहने वारी इन्द्रावती फताती है कक उनके नाती को ननभोननमा हुआ था. उन्द्होंने
फतामा कक: "हभाये नाती को ननभोननमा हुआ था। फच्चे के गरे भें ऩये शानी थी, श्वास पूर यही थी, ऩेट भें बी ददय
था, फख
ु ाय बी था। धचककतसकों ने फतामा कक ननभोननमा ठण्ड के वजह से हुई थी. इस फच्चे को भाॊ का दध
ू 5-6
भहीने तक वऩरामा गमा था औय अफ उसे गाम का दध
ू वऩरा यहे हैं."
इन्द्रावती आगे फताती हैं कक "फच्चों का टीकाकयण फयाफय कया यहे हैं." मह ऩूछने ऩय कक "कौन-कौन सा टीका
रगा है ?", इन्द्रावती कहती हैं कक: "टीका के फाये भें नहीॊ फता ऩामेगें। सयकायी अस्ऩतार से रगवामा था औय कोई
ऩैसा नहीॊ रगा था."
ज़ादहय है कक ननभोननमा टीका सयकायी टीकाकयण मोजना भें शाशभर होना चादहए क्मोंकक फच्चों भें मह एक फड़ा
भतृ मु का कायण है .

जजतेन्द्र द्वववेदी - सी०एन०एस०

53 | फार

ननभोननमा

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फच्चों को शरए सस्ते ननभोननमा टीके की उऩरब्धता
ननभोननमा जैसे जानरेवा योग से फच्चों को फचाने के शरमे हभायी सयकाय से ऩास कोई खास यणनीनत नहीॊ है ।
सयकायी द्वाया फच्चों के शरए नन्शुल्क टीकाकयण प्रणारी भें ननभोननमा शाशभर ही नहीॊ है जफकक 5 सार से कभ
आमु के फच्चों भें ननभोननमा सफसे फड़ा भौत का कायण है ।
सयकायी प्राथशभक स्वास््म केन्द्रों ऩय सस्ते टीकों मा ननभोननमा के उऩचाय की अनुऩरब्धता प्रभुख है । हय वषय
राखों फच्चे इस फीभायी से अऩनी जान गवॉ दे ते हैं ऩय हभायी सयकाय आज बी हाथ ऩय हाथ यखे फैठी है । साभान्द्म
जन तक आज बी मे सुववधा नहीॊ ऩहुॊची है । वषय 2008 भें 5 वषय से कभ उम्र के फच्चों भें ननभोननमा से होने वारी
भतृ मु 371605 थी जो कक 5 वषय से कभ सबी तयह के भतृ मु की २०.३% थी।
मश अस्ऩतार की स्त्री योग ववशेषऻा डा0 रयतु गगय फताती हैं कक ववश्व स्वास््म सॊगठन द्वाया दो ही प्रकाय के
टीके उऩरब्ध हैं। एक तो इनपूरेन्द्जा वेकसीन दस
ू या नीभोकोकर वेकसीन जजसे 10-12 सार तक के फच्चे को हय
सार रगाना ऩड़ता है जजससे कापी हद तक ननभोननमा के हभरे से फचा जा सकता है ऩयन्द्तु मह थोड़ा भॊहगा है ।
गयीफ व्मजक्त इसको बफल्कुर नहीॊ रगवा सकता। भध्मभवगीम रोग अऩने अन्द्म खचों को कभ कयके रगवा
सकते है । सयकायी अस्ऩतारों भें मह टीका उऩरब्ध नहीॊ है । डा0 रयतु गगय का मह भानना है कक इसे सयकायी
अस्ऩतारों भें उऩरब्ध होना चादहए जजससे गयीफ रोग जो ननभोननमा से ग्रशसत हैं इसका राब उठा सकें।
‘होऩ भदय एण्ड चाइल्ड केमय सेन्द्टय’ की स्त्री योग ववशेषऻ डा0 ननधध जौहयी का कहना है कक ववश्व स्वास््म
सॊगठन ने फच्चों के शरए तो टीके उऩरब्ध कयामे हैं ऩय व्मस्कों के शरए नहीॊ। ववश्व स्वास््म सॊगठन की मोजना
है कक फच्चों को फोतर से दध
ू न वऩराकय स्तनऩान कयामा जामे औय ऩोषण, स्वच्छता ऩय ववशेष ध्मान ददमा
जामे जजससे की शशशुओॊ भें ननभोननमा से होने वारी भतृ मु ऩय काफू ऩामा जा सके। आगे डा0 ननधध जौहयी कहती हैं
कक सयकायी अस्ऩतारों भें ननभोननमा से फचाव का टीकाकयण स्वास््म प्रोग्राभ का दहस्सा नहीॊ है । बायत सयकाय
ने इसको अऩने प्रोग्राभ भें नहीॊ जोड़ा है ।
वातसल्म क्रीननक के फार योग ववशेषऻ डा0 सॊतोष याम टीके के फाये भें कहते हैं कक फाजाय भें मह टीका दो नाभ से
आता है एक दो सार से छोटे फच्चों को रगामा जाता है वह प्रेगनाय नाभ से आता है ऩय वह फहुत भॊहगा होता है जो
साभान्द्म रोगों की ऩहुॉच से दयू है । दस
ू ाय टीका नीभोवेक्स 23 नाभ से आता है जो ज्मादा भॊहगा नहीॊ है । ववश्व
स्वास््म सॊगठन ने जो भानक ददमे हैं उनके अनुसाय कुछ रोग जो इसको खयीद सकते हैं वह टीका रगवा सकते
हैं ऩहरा डेढ भहीने, दस
ू या ढाई भहीने, तीसया साढे तीन भहीने औय 18 भहीने ऩय इसका फूस्टय डोज। ऩय मह सफ
टीके सयकायी टीकाकयण स्वास््म प्रोग्राभ का बाग नहीॊ हैं।

54 | फार

ननभोननमा

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‘होऩ भदय एण्ड चाइल्ड केमय सेन्द्टय’ के फार योग ववशेषऻ डा0 अजम कुभाय बी फाजाय भें दो टीकों का जजक्र
कयते हैं - ऩहरा, साभान्द्म फच्चों के शरए जो ननभोननमा से ग्रशसत नही हैं औय जो फहुत भहॊ गा है जजसे
ननभोकोकर वैकशसन कहते हैं। ननभोननमा के टीके अतमधधक भॊहगे होने की वजह से आभ रोगों की ऩहुॊच से दयू हैं
जो फच्चे के जीवन के ऩहरे दो सार भें चाय फाय रगते हैं जजसकी अनुभाननत रागत 15,500/- के आस ऩास आती
है । आगे डा0 अजम कुभाय कहते हैं कक सयकायी अस्ऩतारों भे मह टीका उऩरब्ध नही है औय मह सयकाय की ककसी
बी स्कीभ भें नहीॊ है । भगय मह टीका उनकी क्रीननक ऩय उऩरब्ध है ।
डा0 अजम कुभाय ननभोननमा जैसे योग को ककसी ववशेष वगय भें न फाॊटकय कहते हैं कक मह ककसी बी अभीय मा
गयीफ वगय भें हो सकता है । अगय फच्चा कुऩोषण का शशकाय है तो उच्च मा ननम्न वगय का पकय नहीॊ ऩड़ता
जानकायी का अबाव फच्चे भें कुऩोषण को फढाता है । कुऩोषण होने से कई औय फीभायी हो जाती है जजससे
ननभोननमा मा ननभोननमा से कोई औय फीभायी का खतया फढ जाता है ।
बायत जैसे दे श भें मह एक जदटर सभस्मा है खासतौय ऩय गयीफ रोगों भें जो स्वच्छता का ववशेष ध्मान नहीॊ
यखते। जजसके कायण औय बी फीभायी इनके साथ हो जाती है , मा औय फीभायी के साथ ननभोननमा हो जाता है ।
शशऺा का अबाव एक प्रभुख कायण है । खास कय दे हातों भे जहाॊ भाता-वऩता इस योग के प्रनत ज्मादा जागरूक नही
हैं। शशऺा, स्वच्छता, स्वास््म के ववषम भें अगय सयकाय सभम-सभम ऩय जागरूकता कामयक्रभ चरामे तो इस
जानरेवा फीभायी से होने वारी भतृ मुदय को फहुत हद तक कभ ककमा जा सकता है ।

नीयज भैनारी - सी0एन0एस0

55 | फार

ननभोननमा

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प्रकोऩ

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टीका रगवाकय फच्चे को ननभोननमा से फचाएॊ
“ननभोननमा से फचाव के शरए उनके फैक्टीरयमा के दहसाफ से फाजाय भें टीके उऩरब्ध हैं। सयकायी अस्ऩतारों भें
अबी इनकी उऩरब्धता नही है । मे टीके ववश्व स्वास््म सॊगठन भानक के अनरू
ु ऩ ही तैमाय ककमे गए हैं।’’ मह
कहना है डा. याभ भनोहय रोदहमा सॊमुक्त धचककतसारम के शशशु योग ववशेषऻ डा. अशबषेक वभाय का।
ननभोननमा पेपड़ों भें असाधायण तयीके से सूजन आने के कायण होता है । इसभें पेपड़ों भें ऩानी बय जाता है ।
आभतौय ऩय ननभोननमा होने के कई कायण हो सकते हैं जैसे फैजक्टरयमा, वाइयस, पपॊू द मा कपय पेपड़ों भें चोट
आदद रगना । वैसे तो मह फीभायीहय आमु वगय के रोगों को हो सकती है , रेककन मह सफसे अधधक ऩाॊच सार तक
के फच्चों भें ऩामी जाती है ।
फच्चों भें ननभोननमा फदरते भौसभ के कायण बी हो सकती है , खास कय सदी के भौसभ भें । तो मदद फच्चे को ऩहरे
से ही टीका रगवा ददमा जाए, तो कापी सीभा तक ननभोननमा होने का खतया सभाप्त हो सकता है । फाजाय भें
उऩरब्ध मह टीका रगवाने ऩय फच्चे को खतया बी नही यहता है । क्मोंकक मह टीका डब्ल्मुएचओ के भानक के
अनुरूऩ ही तैमाय ककमा गमा है ।
डा. अशबषेक वभाय के अनुसाय ‘‘ननभोननमा के टीके अरग-अरग फैक्टीरयमा के दहसाफ से फनाए गमे हैं।
हीभोपरेजक्सन, परए
ू ॊजा फी ननभोननमा के शरए औय वामयस के शरए बी फहुत साये टीके ववकशसत ककमे गमे है ,
जैसे ये सऩाइये ट सेन्द्सनर वाइयस के शरमे बी टीका है , औय ऩैयाइन्द्परूएॊजा, इन्द््रुएन्द्ज़ा, इन सफके शरए टीके हैं।
मे फैक्टीरयमा औय वामयस कहीॊ न कहीॊ से साॊस की नरी को प्रबाववत कयते हैं। इस प्रकाय ननभोननमा के टीके तो
फहुत हैं, औय डब्ल्मए
ू चओ ने हय टीके के शरए भानक बी फनामा है । भानक के अनरू
ु ऩ ही टीके फनामे जाते हैं, औय
इसके फाद फाज़ाय भें आते है । इनका भानक, भयीज़ की आमु के दहसाफ से होता है , औय उसी प्रकाय से रगामे बी
जाते हैं।’’
डा. वभाय ने मह बी फतामा कक ‘‘ इन टीकों की सयकायी अस्ऩतार भें उऩरब्धता नहीॊ है । मह फाहय से रेकय ही
रगवामा जाता है । हभाये महाॉ डीऩीटी, ऩोशरमो, फीसीजी, है ऩेटाइदटस फी आदद कुर सात प्रकाय के टीके रगते हैं।
इसभें ननभोननमा का टीका शाशभर नही है । इसके अनतरयक्त अगय आऩको कोई टीका रगवाना है तो आऩको
अऩने ननजी स्तय ऩय फाजाय से खयीद कय रगवाना होगा।’’
इजन्द्दया नगय भें यभा क्रीननक की ननदे शक एॊव स्त्री योग ववशेषऻा डा. यभा शॊखधय ने फतामा कक ‘‘ननभोननमा के
टीके के शरमे डब्ल्मूएचओ ने एक भानक ननधायरयत ककमा है , औय ननभोननमा के शरमे टीका आता बी है । जोकक
‘हीफ’ नाभ से आता है । मह टीका फच्चे के जन्द्भ के 6 हफ्ते के फाद से रगता है । औय 1-1 भहीने के अन्द्तयार ऩय
तीन खयु ाक भें रगामा जाता है औय मह फच्चों के ननभोननमा से फचाता है । रेककन मह 100 प्रनतशत सयु क्षऺत
56 | फार

ननभोननमा

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उऩाम नहीॊ है । अगय सॊक्रभण हो गमा तो फच्चे को ननभोननमा हो सकता है । रेककन उतना ज्मादा नहीॊ होगा, कुछ
कभ होगा जो कक अच्छे एन्द्टीफामोदटक्स से जल्दी ठीक ककमा जा सकता है ।’’
डा. याभ भनोहय रोदहमा सॊमुक्त धचककतसारम के भुख्म धचककतसा अधीऺक डा. आय. एस. दफ
ू े सयकायी
अस्ऩतारों भें ननभोननमा के टीके की उऩरब्धता के फाये भें फतातें हैं कक ‘‘ननभोननमा के टीके के शरए डब्ल्मूएचओ
के द्वाया एक भानक है जजसे हभ ध्मान भें यखकय ही इसका प्रमोग कयते है । सयकायी अस्ऩतारों भें इसकी
उऩरब्धता कभ है । रेककन मह टीके फाहय से बी शभर जाते हैं।"
आभतौय ऩय ननभोननमा से ग्रशसत फच्चे को खाॊसी, जक
ु ाभ, फख
ु ाय, साॊस रेने भें ददक्कत, ऩसशरमों का चरना
औय खाॊसी भें कप आना आदद रऺण होते हैं। इन्द्ही रऺणों को ध्मान भें यखकय ननभोननमा का इराज ककमा
जाता है । ननभोननमा के इराज भें एॊटीफामोदटक्स दवाओॊ का प्रमोग ककमा जाता है ।
ऩाॊच सार तक के फच्चों भें ननभोननमा का अधधक होने का एक कायण सयकायी अस्ऩतारों भें टीके का उऩरब्ध न
होना बी है । मही वजह है कक सयकायी अस्ऩतारों भें जन्द्भ रेने वारी तर
ु सी, मास्भीन, ज्मोनत औय पयीद टीके के
अबाव भें ननभोननमा जैसी फीभायी से जूझ यहें हैं | इनके भाता वऩता को मह बी नही ऩता है कक ननभोननमा के शरमे
फाजाय भें टीका बी उऩरब्ध है ।
वैसे तो ननभोननमा का इराज सॊबव है रेककन मदद फच्चों का शरू
ु भें ही टीकाकयण कया ददमा जामे तो ननभोननमा
जैसी फीभायी से फच्चों को फचामा जा सकता है , औय इन टीकों की उऩरब्धता मदद सयकायी, अधयसयकायी औय गैय
सयकायी सबी प्रकाय के अस्ऩतारों भें कय दी जाम, तो बायत भें प्रतमेक ददन सैकड़ों फच्चों को ननभोननमा की वजह
से अऩनी जान न गॉवानी ऩड़े। औय मदद टीका रगा होने के फाद ननभोननमा होता बी है तो शयीय की अवयोधक
ऺभता इतनी होगी कक धचककतसकों द्वाया एॊटीफामोदटक्स दे ने ऩय फच्चा जल्दी ठीक हो जाएगा।

नदीभ सरभानी - सी.एन.एस.

57 | फार

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ववषम ५
ननभोननमा उऩचाय

58 | फार

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चभतकायी औषधध द्वाया ननभोननमा का उऩचाय
ननभोननमा ननचरी श्वसन नरी के सॊक्रभण का एक गम्बीय प्रकाय है , जो ववशेषकय पेपड़ों को प्रबाववत कयता है ।
फच्चों की भतृ मु का मह एक प्रभुख कायण है तथा ववश्व बय के 20 प्रनतशत शशशुओॊ की भतृ मु के शरमे जजम्भेदाय है ।
ननभोननमा जननत के कायण होने वारी भतृ मु कभ कयने का सवोततभ उऩाम सभम से दी गमी प्रबावी धचककतसा है ।
ननभोननमा से ऩीडड़त फच्चों का योगप्रनतकायक दवाओॊ, जजन्द्हें साधायणत: चभतकायी औषधध के नाभ से जाना
जाता है , से तवरयत इराज कयने ऩय भतृ मु की सम्बावना कापी कभ की जा सकती है । प्राक्करन आॊकड़े फताते है
कक ननभोननमा से ग्रशसत फच्चों को ववश्वस्तय ऩय मदद योगप्रनतकायक(Antibiotic) धचककतसा उऩरब्ध की जाती
तो प्रनतवषय रगबग 600,000 जीवन फचामे जा सकते है । ननभोननमा से होने वारी भतृ मु को कभ कयने के शरमे
मदद योकथाभ एवॊ धचककतसा दोनों ववश्व स्तय ऩय ककमा जाता तो मह सॊख्मा दग
ु नी से बी अधधक अथायत रगबग
1.3 शभशरमभ होती है ।
मह फीभायी, जजसभें एक अथवा दोनों पेपड़ों भें वस तथा रव एरफोमराम (Alveoli) तक बय जाता है , को
सुननजश्चत कयने के शरमे सीने (छाती) का एक्स-ये तथा प्रमोगशारा भें जाॉच की जाती है । मह फीभायी (ऑक्सीजन
गह
ृ ण कयने को साॉस रेने की कक्रमा) को प्रबाववत कयती है , जजससे साॉस रेना कदठन हो जाता है । रेककन सॊसाधनों
के अबाव के कायण सम्बाववत ननभोननमा के भाभरों को उनके क्रीननकर रऺणों जैसे तेज मा कदठनता से साॉस
रेना, खाॉसी, फुखाय आदद द्वाया ऩहचाना जाता है । नवजात शशशु स्तनऩान कयने भें अऺभ हो सकते हैं तथा
फेहोशी, हाइऩोथशभयमा व दौये का अनब
ु व कय सकते हैं। इसशरमे फच्चों भें ननभोननमा के रऺण ऩहचानने तथा
उधचत धचककतसा सुववधा दे ने भें दे खबार कयने वारों का आवश्मक मोगदान होता हैं।
ननभोननमा के कभ गम्बीय भयीजों का इराज उधचत योगप्रनतकायक दवाओॊ द्वाया ककमा जा सकता हैं। गम्बीय
ननभोननमा के भाभरों को अववरम्फ इॊजेक्शन द्वाया एन्द्टीफामोदटक्स तथा मदद आवश्मक हो तो ऑक्सीजन
जाने के शरमे धचककतसारम को बेज दे ना चादहए।
ननभोननमा से ऩीडड़त ऩाॉच वषय तक के फच्चों भें भतृ मुदय कभ कयने हे तु तीन आवश्मक स्तय हैं:
1. ननभोननमा से ऩीडड़त फच्चों को ऩहचानना,
2. धचककतसारम-स्वास््म केन्द्र-भात ृ व फार स्वास््म केन्द्र भें उधचत धचककतसा-सवु वधा प्राप्त कयना, तथा
3. धचककतसक द्वाया फतामा गमा उऩचाय प्राप्त कयना। प्रगनतशीर दे शो भें रगबग 20 प्रनतशत दे खबार कयने
वारे ही फीभायी के रऺण ऩहचानते हैं, तथा उनभें से केवर 54 प्रनतशत फच्चों को धचककतसा उऩरब्ध कयवा ऩाते
हैं।

59 | फार

ननभोननमा

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गयीफ फच्चों की तुरना भें शहय व शशक्षऺत ऩरयवायों के फच्चों को उधचत धचककतसा-सुववधा अधधक शभर ऩाती है
तथा आधथयक ववषभताओॊ से जूझते हुए 68 दे शों भें रगबग 33 प्रनतशत ननभोननमा से ऩीडड़त फच्चे एन्द्टीफामोदटक
का राब ऩाते हैं।
ननभोननमा / सेऩशसस (sepsis) के रऺण वारे दो भाह तक के शशशुओॊ भें अन्द्म शशशुओॊ की अऩेऺा गम्बीय फीभायी
तथा भतृ मु की सम्बावना का अधधक खतया यहता है । अत: ऐसे शशशुओॊ को अववरम्फ धचककतसा हे तु ककसी
अस्ऩतार भें बेज दे ना चादहमे। स्थानीम उऩरब्ध धचककतसा की ननऩुणता के आधाय ऩय धचककतसा का तयीका चन
ु ा
जाना चादहए। ककन्द्ही योग प्रनतकायक के शरमे कुछ स्थानों भें प्रनतयोधक ऺभता का स्तय अधधक हो सकता है
जजससे ननभोननमा के फचाव के शरमे वे औवषधधमाॉ कभ प्रबावी हो सकती है । अन्द्म स्थानों भें अधधक खतये वारे
वगय, जैसे कुऩोवषत मा एच.आई.वी. सक्रॊशभत फच्चे अधधक सॊख्मा भें हो सकते हैं, जजसके अनुसाय ही उनकी
धचककतसा-प्रणारी का चन
ु ाव ककमा जा सकता है ।
ऩयाभशयदाता फारयोग तथा नवजात शशशु ववशेषऻ डॉ. एस.के. सेहता स्ऩटट कयते हैं, ‘‘ बायत सयकाय औय ववश्व
स्वास््म सॊगठन (WHO) ने ननभोननमा की ऩहचान हे तु सयर तयीके की सॊस्तुनत की है , जजससे गाॉवों भें बी, जहाॉ
धचककतसक की उऩरब्धता नहीॊ हैं, एक अनऩढ बी फीभायी की ऩहचान कय सके। डब्ल्मू एच ओ द्वाया भूररूऩ से
तीन प्रकाय के ननभोननमा को सूचीफद्ध ककमा गमा है 1. ननभोननमा ना होना,
2. ननभोननमा जजसका इराज सेऩरान है तथा
3. गम्बीय ननभोननमा:- इस भाभरे भें बायत सयकाय द्वाया अनभ
ु ोददत ककमा गमा है कक मदद व्मजक्त जानकाय है
तो भयीज को एम्ऩीशसरीन जेन्द्टाभाइशसन ददमा जाना चादहमे तथा भयीज को ववशेषऻ के ऩास बेजना
चादहमे।’’
रखनऊ के फार-योग तथा फार-ह्रदम योग ववशेषऻ, डॉ. एस.एन. यस्तोगी का भत है - ‘‘ फीभायी का इराज कायक
ततव, जो जीवाणु हो सकता है अथवा जीवाणु नहीॊ बी हो सकता हैं, ऩय ननबयय कयता हैं। इस प्रकाय धचककतसा भें
शबन्द्नता हो जाती है । बायत भें सवायधधक होने वारा ननभोननमा टमूफयकूरय (tubercular) ननभोननमा है ।
ननभोननमा की धचककतसा के शरमे स्रै प्टोभाइशसन ददमा जा सकता है ।’’
डॉ. एस. के. सेहता, जजन्द्होंने कई वषों तक ववख्मात धचककतसारमों व रखनऊ एवॊ ददल्री के गैय-सयकायी
अस्ऩतारों भें कामय ककमा है , कहते हैं, ‘‘सयकायी धचककतसारमों भें बायत सयकाय की शसपारयशों का ऩारन हो यहा
है । बायत सयकाय तथा डब्ल्मू एच ओ ने जनसाधायण ऩय अधधक ध्मान ददमा है । इसशरमे सेऩरोन ननभोननमा के
इराज के शरए कापी अच्छी तथा सस्ती औषधध है तथा ग्राभीण ऺेत्रों भें बायत सयकाय द्वाया सॊस्तत
ु है । जो बी हो
प्राइवेट सेक्टय भें व्मजक्तगत रूझान अधधक आवश्मक होता है औय हभ सेऩरान के शरमे उच्च प्रनतयोध दे ख यहे
हैं। इसशरमे हभ तेज योग प्रनतकायक दे ने का चन
ु ाव कयते हैं।’’

60 | फार

ननभोननमा

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सराहकाय प्रसूनत ववशेषऻ तथा स्त्री-योग ववशेषऻ, डॉ. नीरभ शसॊह, जो ‘वातसल्म यीसोसय सेन्द्टय आन हे ल्थ’ की
भुख्म कामयदामी बी हैं, के अनुसाय कई प्रदे शों भें फच्चों भें गम्बीय “वसन-नरी के सॊक्रभण की धचककतसा सभेककत
फार सॊयऺण कामयक्रभ का अॊग है । कपय बी ननभोननमा के फचाव के शरमे आवश्मक जागरूकता का अबाव है । अबी
बी इस भाभरे कापी अनशबऻता है तथा जागरूकता हे तु ववशेष कामयक्रभों के प्रमोजन की आवश्मक है । अनतसाय
के फाद फच्चों भें ननभोननमा जजन्द्दगी के शरमे सफसे घातक फीभायी है । सयकायी औय गैय-सयकायी धचककतसारमों
भें होने वारे इराज के भध्म शबन्द्नता के शरमे सभम, सराह, धचककतसा, इराज भें होने वारा व्मम तथा अन्द्म
कायण जजम्भेदाय है । इस ऺेत्र भें सयकाय द्वाया कापी तयक्की की गमी है औय अफ मे इराज सयकायी अस्ऩतारों
भें बी उऩरब्ध हैं कपय बी सयकायी आभ सयकायी धचककतसा प्रणारी भें भयीजों की अधधकता, ववशेषऻों का अबाव,
सॊसाधनों की कभी तथा दवाओॊ का उऩरब्ध न होना आदद कई कायण हैं, जजस ऩय ववचाय होना चादहमे।
छत्रऩनत शाहूजी भहायाज धचककतसा ववश्वववद्मारम के फार-योग ववबाग भें स्वास््म-राब कय यहे 3 वषय के
अथवय, जजससे भैं अक्टूफय 2011 के प्रथभ सप्ताह भें शभरी, की कहानी फच्चों भें ननभोननमा के उधचत उऩचाय न
शभरने के कायण होने वारे घातक ऩरयणाभ का ज्वरन्द्त उदाहयण है । ननभोननमा के ऩहरे ही रऺण भें इसके
अशबबावकों ने तयु न्द्त प्राइवेट सेक्टय भें धचककतसा प्राप्त कयवामी, रेककन अथवय की दशा बफगड़ने ऩय वे एक
नशसिंग होभ से दस
ू ये भें दौड़ते यहे । उन्द्हें रगा कक धचककतसक उनसे ववततीम राब ऩाने भें अधधक उतसुक थे। अन्द्त
भें वे उसे छत्रऩनत शाहूजी भहायाज धचककतसा ववश्वववद्मारम जो एक सयकायी धचककतसारम हैं, भें चाय अगस्त
को रामे। अन्द्तत: फाजाय भें उऩरब्ध नवीनतभ योग प्रनतकायक फच्चे को ददमा गमा औय उसकी हारत जस्थय हो
गमी।
बायत भें हभ रोग सयकायी स्वास््म प्रणारी को ककस प्रकाय कभ कय आॊकते हैं, इस त्म का मह एक उदाहयण
है । चरी आ यही कशभमों के फावजूद बी सयकायी स्वास््म-तॊत्र गम्बीय फीभायी के भयीजों को सवोततभ उऩचाय दे ने
भें सऺभ है ।
फच्चों भें ननभोननमा के फचाव व उऩचाय को फढावा दे ने के उद्देश से 2009 भें ‘द ग्रोफर एक्शन प्रान पॉय द
प्रीवेन्द्सन एण्ड कन्द्रोर ऑफ़ ननभोननमा’ (GAPP) की स्थाऩना की गमी। चरो हभ सफ शभरकाय प्रतमेक फीभाय
फच्चे की सही दे खबार तथा ननभोननमा के उऩचाय की प्रनतफद्धता हे तु सॊकल्ऩ कयें ।

सौम्मा अयोया - सी.एन.एस.
(अनुवाद: सुश्री भामा जोशी, रखनऊ)

61 | फार

ननभोननमा

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सभम यहते उऩचाय, फचा सकता है ननभोननमा से फच्चे की जान
एॊटीफामोदटक्स ननभोननमा के इराज के शरए एक प्रकाय की याभ फाण औषधध है जजसके सभम यहते प्रमोग से
ननभोननमा से ननजात ऩामा जा सकता है . ऩूये बायत वषय भें प्रनत वषय रगबग ४३ शभशरमन रोग ननभोननमा से
ग्रशसत होते हैं औय १० राख भौते तीव्र श्वास सम्फन्द्धी सॊक्रभण से होती है जो की ऩूये ववश्व भें तीव्र श्वास
सम्फन्द्धी सॊक्रभण से होने वारी भौतों का २५% है . ववश्व स्वास््म सॊगठन ने बी ननभोननमा के इराज के शरए
एॊटीफामोदटक्स के प्रमोग को ननधायरयत ककमा है . मह एॊटीफामोदटक्स सयकायी तथा गैय-सयकायी स्वास्थ केन्द्रों ऩय
आसानी से उऩरब्ध हैं कपय बी सम्ऩूणय ववश्व भें प्रनत वषय ऩाॊच वषय से कभ उम्र के १६ राख फच्चे ननभोननमा से
भयते हैं जो की फच्चों भें अन्द्म ककसी बी फीभायी से होने वारी भतृ मु से कहीॊ अधधक है .
उततय प्रदे श के ववशबन्द्न सयकायी तथा गैय-सयकायी धचककतसकों का मह भानना है कक सभाज भें शशऺा औय
जागरूकता की कभी है . मदद सही तयीके से रोगों को ककसी बी फीभायी के प्रनत सचेत ककमा जाए औय सभम-सभम
ऩय फच्चों का भेडडकर चेकअऩ कयाने के शरए प्ररयत ककमा जाए तो सम्ऩूणय ववश्व भें होने वारे फार भतृ मु दय को
कापी हद तक कभ ककमा जा सकता है . ननभोननमा जैसे घातक फीभायी से ननजात ऩाने के शरए सभम यहते
एॊटीफामोदटक्स का प्रमोग फहुत ही आवश्मक है . अत् भाताओॊ को फच्चे के स्वास््म के फाये भें फहुत ही सचेत
यहने की ज़रुयत है औय थोड़ी सी तबफमत ख़याफ होने ऩय बी शीघ्र अनत शीघ्र ककसी धचककतसक से ऩयाभशय रेना
चादहए.
ननभोननमा जैसी घातक फीभायी से ननजात ऩाने के शरए शरु
ु वाती रऺणों को ऩहचानकय शीघ्र अनत शीघ्र
एॊटीफामोदटक्स दवाओॊ के इस्तेभार की जरूयत होती है ऩयन्द्तु एक शोध के अनुसाय ववकाशीर दे शों भें २०% फच्चों
के केमयधगवय (दे ख-ये ख कयने वारे) ही ननभोननमा के रऺणों को ऩहचान ऩाते हैं जजनभे से केवर ५४% ही
प्रनतकक्रमा कयते हुए फच्चों को सभम से धचककतसकों तक रे जाते हैं.
ववश्व स्वास््म सॊगठन ने बी ननभोननमा के इराज के शरए भानक सुझामे हैं. फहयाइच जजरा अस्ऩतार के वरयटठ
फार योग ववशेषऻ डॉ. के के वभाय ने फतामा कक ववश्व स्वास््म सॊगठन द्वाया ननभोननमा के उऩचाय के शरए
भानक तम ककमा गमा है . सेऩरोंन सीयऩ तथा सेऩरोंन टे फरेट आती है जो साये सयकायी अस्ऩतारों भें भुफ्त भें
उऩरब्ध कयामी जाती है . डॉ. के के वभाय का मह बी भानना है कक "सयकायी अस्ऩतार कक तर
ु ना भें गैय-सयकायी
अस्ऩतारों भें उऩरब्ध उऩचाय भें फहुत अॊतय होता है . सयकायी अस्ऩतारों भें सीशभत दवाएॊ आती हैं औय वही
सफको दी जाती है . ऩयन्द्तु गैय-सयकायी अस्ऩतारों भें कई तयह की दवाएॊ दी जाती हैं कौन सी दवा ज़रूयी है तथा
कौन सी नहीॊ ज़रूयी है मह सफ जाॉच ऩयख कय दवाएॊ दी जाती हैं". डॉ. वभाय का कहना है कक ववश्व स्वास््म
सॊगठन को अऩनी गाइड राइन फदरनी चादहए. अबी ऩुयाना शसस्टभ चरा आ यहा है उसे फदरकय नमा रागू
कयना चादहए. नमी दवाओॊ को तथा नमे टीके को अऩनाना चादहए."

62 | फार

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रखनऊ भें एक ननजी जक्रननक को जराने वारी फार योग ववशेषऻ डॉ. कुभुद कहती हैं कक "ननभोननमा से फचने
के शरए सभम यहते ननदान फहुत ही आवश्मक है . अत् जजतनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी फच्चे को अस्ऩतार भें
ददखाना चादहए. गाॉव भें अक़्य रोग ७ से १० ददनों तक इॊतज़ाय कयते यहते हैं औय जफ फच्चे की हारत नाजक
ु हो
जाती है तफ अस्ऩतार भें ददखाने आते हैं. अत् सभाज भें एक फड़े जागरूकता की आवश्मकता है ”.
स्ऩटट है कक ननभोननमा जैसे सॊक्राभक फीभायी से फचाव के शरए एॊटीफामोदटक्स जीवन अभत
ृ की तयह कायगय है
ऩयन्द्तु सभम यहते ननभोननमा जैसी प्राण घातक फीभायी के रऺणों को ऩहचान ऩाना औय उधचत एॊटीफामोदटक्स
का प्रमोग कयते हुए उऩचाय कय ऩाना सभाज भें आज बी एक कड़ी चन
ु ौती के रूऩ भें व्माप्त है जजसे अस्वीकाय
नहीॊ जा सकता. अत् सयकाय को बी इस ददशा भें सकायातभक दृजटटकोण अऩनाते हुए जनदहतैषी कामयक्रभों का
आगाज़ कयना होगा.

याहुर कुभाय द्वववेदी - सी.एन.एस.

63 | फार

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ननभोननमा ग्रस्त-फच्चों को अक्सय नहीॊ शभरता सभम से उऩचाय
इस फात भें कोई सॊदेह नहीॊ है कक ननभोननमा टीकाकयण औय उऩचाय को सयकायी अस्ऩतारों भें भह
ु ै मा कयवाना
चादहए क्मोंकक ननभोननमा ५ सार से कभ आमु के फच्चों के शरए भतृ मु का सफसे फड़ा कायण है , जफकक इससे
ऩूणत
य म:फचाव औय उऩचाय दोनों ही भुभककन हैं. हारत मह है कक ननज़ी औय सयकायी स्वास््म व्मवस्था दोनों भें
ही अक्सय गुणातभक दृजटट से उततभ टीकाकयण औय उऩचाय उऩरब्ध नहीॊ है . हाराॉकक ननभोननमा टीकाकयण
ननज़ी स्वास््म व्मवस्था भें अक्सय शभर जाता है ऩयन्द्तु कुछ अऩवाद छोड़, अनेक ननज़ी धचककतसक ववश्व
स्वास््म सॊगठन के द्वाया फतामे गए उऩचाय की तुरना भें ननभोननमा की अरग-अरग उऩचाय ववधध अऩनाते हैं.
सयकायी स्वास््म व्मवस्था भें ननभोननमा टीकाकयण उऩरब्ध नहीॊ है , जफकक गयीफ घय के फच्चों को ही
ननभोननमा होने का अधधक खतया यहता है , औय इस फात की सफसे कभ सम्बावना बी कक वे ननज़ी अस्ऩतार भें
जा कय भहॊ गा ननभोननमा टीका रगवा ऩाएॊगे. ननज़ी स्वास््म व्मवस्था भें कुछ जगह सवोततभ ननभोननमा
टीकाकयण औय उऩचाय सेवा उऩरब्ध है , ऩयन्द्तु मह इतनी भहॊ गी है कक आभ रोगों की ऩहुॉच के फाहय ही है . गौय
तरफ फात मह है कक ननभोननमा कुऩोषण, अस्वच्छता, बीड़-बाड़, ऩयोऺ धम्र
ू ऩान, चल्
ू हे के धए
ु ,ॊ आदद से ऩनऩता
है जजसकी सम्बावना आधथयक रूऩ से कभज़ोय घयों भें अधधक होती है .
सयकायी स्वास््म प्रणारी भें कुछ जगह तो फहुत ही कुशर स्वास््मकभी औय ननभोननमा उऩचाय सेवाएॉ उऩरब्ध
हैं, ऩयन्द्तु ननभोननमा टीकाकयण नहीॊ. ननभोननमा ग्रशसत फच्चों के अशबबावकों से फात कयने से ऩता चरा कक
शसपय फड़े सयकायी अस्ऩतार भें ही ननभोननमा उऩचाय शभरना अव्मवहारयक है .
गोयखऩुय के सयकायी अस्ऩतार की एक स्वास््मकभी ने कहा कक अक्सय जफ तक फच्चे महाॉ ऩहुॉचते हैं तफ तक
ननभोननमा ववकयार रूऩ धायण कय चक
ु ा होता है . जफ ननभोननमा के आयॊ शबक रऺण आते हैं तो रोग स्वमॊ ही
इराज कयते हैं, आसऩास ददखाते हैं औय जफ जस्थनत सुधयती नहीॊ है तफ ही जजरा अस्ऩतार रे कय आते हैं.
गोयखऩुय की एक फस्ती भें यहने वारी इन्द्रावती का कहना है कक जफ उनके नाती को ननभोननमा हुआ था तफ वे
उसे अस्ऩतार तफ ही रेकय गमीॊ जफ आसऩास के धचककतसकों के इराज से जस्थनत नहीॊ सध
ु यी. जजरा अस्ऩतार
जो १५ ककरोभीटय दयू है वहाॉ जाने भें सभम औय ऩैसा दोनों रगता हैं, उस ददन की भजदयू ी बी नहीॊ शभरती है ,
भजदयू ी से छुट्टी रेनी ऩड़ती है , औय मदद फच्चा अस्ऩतार भें बती कय शरमा जाए तो यहना ऩड़ता है . इसका मह
भतरफ नहीॊ है कक रोग अस्ऩतार जाएॉ नहीॊ, ऩयन्द्तु मे सायी सेवाएॉ ऩास के प्राथशभक स्वास््म केंर ऩय क्मों नहीॊ
उऩरब्ध हैं?
इन्द्रावती का कहना सही है . मदद गुणातभक दृजटट से फदढमा स्वास््म सेवाएॉ प्राथशभक स्वास््म केंर ऩय उऩरब्ध
होंगी तो ननभोननमा का उऩचाय शीघ्र हो सकेगा, औय भतृ मु दय भें बी वाॊछनीम सध
ु ाय होगा. ननभोननमा टीकाकयण

64 | फार

ननभोननमा

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एवॊ

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को याटरीम टीकाकयण कामयक्रभ भें बी शाशभर कयना होगा वनाय जजन फच्चों को ननभोननमा का सफसे अधधक
खतया है वही इस टीके से वॊधचत यह जाते यहें ग.े
बायत सयकाय के मोजना आमोग को अऩनी आगाभी १२वीॊ ऩञ्च वषीम मोजना (२०१२-२०१७) भें ननभोननमा
टीकाकयण को बी शाशभर कयना चादहए.

जजतेन्द्र द्वववेदी - सी०एन०एस०

65 | फार

ननभोननमा

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अच्छे एॊटीफामोदटक्स से हो सकता है ननभोननमा का इराज
फच्चे भें ननभोननमा का सफसे फड़ा कायण सॊक्रभण है । ननभोननमा के कई प्रकाय के कीटाणु होते हैं जजनभें
फैक्टे रयमा, औय कई प्रकाय के वाइयस बी शाशभर हैं | ननभोननमा का इराज इन्द्ही के ऊऩय ननबयय कयता है |
ननभोननमा का सॊक्रभण जजस प्रकाय का होता उसी प्रकाय का एॊटीफामोदटक्स दे कय इसका इराज ककमा जाता है
ताकक इसका असय भयीज ऩय जल्दी हो सके |
डा. अशबषेक वभाय जो डा. याभ भनोहय रोदहमा सॊमुक्त धचककतसारम, रखनऊ भें फार योग ववशेषऻ हैं, के अनुसाय
‘‘ननभोननमा से फचाव के शरए घय भें जजनको खाॊसी आती हो, जजनको वाइयस का सॊक्रभण हो, धए
ु ॊ का वातावयण
हो मा कपय सदी के भौसभ भें फच्चों को ज्मादा फचाने की जरूयत ऩड़ती है । अगय भाॉ मा घय के ककसी औय सदस्म
को खाॊसी आ यही है तो उनके हाथों भे फच्चे को न दें । तबी फच्चे का फचाव हो सकता है । फाकी टीके बी रगवामें।
उऩचाय के शरए डब्ल्मूएचओ भानक के सेप्रान, एभऩीशसरीन औय एन्द्टाभाइसीन जैसी दवाइमाॊ इस्तेभार की
जाती हैं | रेककन कबी-कबी तो अस्ऩतार भें औय बी फहुत सायी दवाईमाॊ उऩरब्ध यहती हैं जजनसे हभ उऩचाय
कयते हैं। जैसे जफ फच्चा साॊस रेने भें ददक्कत कयता है तो आक्सीजन बी दी जाती है । उऩचाय का सही तयीका
अस्ऩतार के स्तय ऩय ननबयय कयता है । अगय एक अच्छे स्तय का अस्ऩतार है --चाहे वह सयकायी हो मा गैय
सयकायी उसभें कोई खास अन्द्तय नहीॊ होता है । हभाया अस्ऩतार सयकायी है | रेककन महाॊ की सवु वधा ककसी बी
गैय सयकायी अस्ऩतार से कभ नहीॊ है । महाॉ की कामय प्रणारी बी फेहतय है । महाॉ ऩय ननभोननमा के इराज के शरए
हय तयह की सुववधाएॊ उऩरब्ध है । हभाये महाॉ आक्सीजन आनराइन है औय भोफीराइजसय बी वाडय भें यहते हैं। हय
तयह की ननगयानी की सवु वधा इस अस्ऩतार भें है । इस अस्ऩतार भें डब्ल्मए
ू चओ ने जो दवाईमाॊ ननधायरयत कय
यखी है वह महाॊ ऩय औय रगबग सबी सयकायी अस्ऩतारों भें उऩरब्ध हैं। चाहे वो शहय का अस्ऩतार हो मा कपय
दे हात का।’’
इसी अस्ऩतार के भुख्म धचककतसा अधधकायी डा. आय. एस. दफ
ू े ने फतामा कक ‘‘सयकाय इस ऩय कापी ध्मान दे यही
है । सयकाय फहुत सायी मोजनाएॊ चरा यही है । ‘जननी सयु ऺा मोजना’ इसका उद्देश्म ही मही है कक भाॉ औय फच्चे
की सुयऺा का ध्मान यखा जामे। हभाये अस्ऩतार भें ननभोननमा का डब्ल्मूएचओ भानक के द्वाया ही इराज हो यहा
है ।’’
गैय सयकायी क्रीननक की ननदे शक एवॊ स्त्री योग ववशेषऻा डा. यभा शॊखधय ननभोननमा के इराज के फाये भें फताती
हैं कक ‘‘हभायी क्रीननक भें जो बी फच्चा आता है , औय हभें ननभोननमा की शॊका होती है तो हभ मही याम दे ते है कक
फच्चे को धचककतसक के ऩास जल्दी रामें, जजससे अच्छे एन्द्टीफामोदटक दे कय योग को जल्दी ननमॊबत्रत ककमा जा
सके, औय फच्चा ननभोननमा की गम्बीय अवस्था भें न ऩहुॉच ऩाए।’’

66 | फार

ननभोननमा

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डा. यभा शॊखधय ने मह बी फतामा कक ‘‘सयकायी अस्ऩतारों भें दवा उऩरब्ध नहीॊ यहती है | जो दवा उनके ऩास
उऩरब्ध होती है वही वो भयीज को दे ते हैं। फाजाय भें योज नई-नई दवाएॊ आ यही हैं | इसशरमे महाॉ मह सोचना नहीॊ
ऩड़ता है कक हभाये ऩास क्मा है । हभें जो अच्छा रगता है हभ वही दे ते है जजससे फच्चा जल्दी ठीक हो सके। जो
डब्ल्मूएचओ के भानक फनामे जाते है वो सम्भेरनों के द्वाया हभ सबी धचककतसकों तक ऩहुॉचाने की कोशशश की
जाती है । औय हभ रोग उसको ऩढ औय सभझकय कपय उसका ऩारन कयते हैं।’’
ननभोननमा अक्सय ऩाॊच सार से कभ आमु के फच्चों को अधधक होता है । मदद आऩ फच्चे की दे खबार भें कुछ फातों
का ध्मान यखेंगें तो हो सकता है आऩका फच्चा ननभोननमा से फच जाए। नवजात शशशु को हभेशा गभय कऩड़े जैसे
टोऩी, भोजा आदद ऩहनाकय यखें। फच्चे को खाॊसी, जक
ु ाभ फख
ु ाय आदद होने ऩय तयु ॊ त धचककतसक को ददखाएॊ।
अगय फच्चा भाॊ का दध
ू नही ऩी यहा है तो उसे घय ऩय कुछ औय दे ने के फजाम धचककतसक को ददखाएॊ। मदद
धचककतसक अस्ऩतार भें बती कयके इराज कयाने को कहे तो राऩयवाही न कयें , औय उसका इराज शीघ्र कयाएॊ।
घय भें साप सपाई का ववशेष ध्मान यखें। घय के कोने आदद को साप यखें औय वहाॊ झाड़ू, ऩोछा आदद ठीक प्रकाय से
रगाएॊ, जजससे फच्चे को ककसी प्रकाय का सॊक्रभण न हो |

नदीभ सरभानी - सी.एन.एस.

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ननभोननमा

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फच्चों भें ननभोननमा का उऩचाय एक चन
ु ौती
ननभोननमा जो ववशेषकय 5 सार से कभ आमु के फच्चों भें सफसे फड़ा भतृ मु का कायण हैं, उसकी योकधाभ,
टीकाकयण एवॊ उऩचाय के शरए सयकाय ने कायगय कदभ नहीॊ उठाए हैं। उऩचाय के भानको का न होना, टीकाकयण
का कोई उधचत स्वास््म कामयक्रभ न होना, याटरीम टीकाकयण कामयक्रभ भें ननभोननमा टीका का शाशभर न होना,
ननभोननमा जैसे प्राणघातक योगों को औय फढावा दे ता है जो कक एक फड़ा धचन्द्ता का ववषम है ।
हभने जफ वातसल्म क्रीननक के फार योग ववषेषऻ से डब्र.ू एच.ओ. द्वाया भानकों औय सयकायी अस्ऩतारों भें
ननभोननमा योग के उऩचाय की उऩरब्धता के ववषम भें फात की तो उन्द्होंने फतामा कक ननभोननमा टीका सयकायी
सेवा भें नन्शुल्क उऩरब्ध नहीॊ है । सयकायी औय गैय सयकायी उऩचाय भें बी अन्द्तय है । ववश्व स्वास््म सॊगठन
द्वाया ननभोननमा उऩचाय भानकों के अनुसाय ननभोननमा को तीन बागों भें फाॊटा गमा है - ‘भाइल्ड’ मा सौम्म,
‘भोडये ट’ मा भध्मभ औय ‘सीववमय’ मा गम्बीय। वैसे तो सभम-सभम ऩय ववश्व स्वास््म सॊगठन अऩने
भानको भें पेय फदर कयती यहती है भगय शहयों की अऩेऺा दे हातों भें अबी बी मह एक फड़ी सभस्मा है ।
‘होऩ भदय एण्ड चाइल्ड केमय सेन्द्टय’ के फार-योग ववशेषऻ डा. अजम कुभाय का बी कहना है कक सयकायी
अस्ऩतारों भें ननभोननमा का टीका उऩरब्ध नहीॊ है । ककन्द्तु मह उऩचाय इनकी क्रीननक ऩय उऩरब्ध है । भहॊ गा
होने के कायण आज बी मह गयीफ रोगों की ऩहुॊच से दयू है । सयकायी औय गैय सयकायी अस्ऩतारों भें उऩचाय के
अन्द्तय के ववषम भें वे कहते हैं कक उऩचाय भें ववशेष अन्द्तय नहीॊ है दवाईमाॊ वही हैं ऩय सयकायी तन्द्त्र सुचारू रूऩ से
कामय नहीॊ कयता जजससे कक गयीफ रोगों को ननजी अस्ऩतारों की तयप रूख कयना ऩडता है औय अधधक ऩैसा दे ना
ऩड़ता है । उनका कहना है कक सयकायी स्वास््म केन्द्रों ऩय ववश्व स्वास््म सॊगठन द्वाया भानक प्राथशभक स्तय
ऩय उऩरब्ध हैं। अगय ऩये शानी कहीॊ है तो प्राथशभक स्वास््म केन्द्रों ऩय। अधधकतय ननजी अस्ऩतारों भें मह
उऩचाय सॊबव है ।
‘होऩ भदय एण्ड चाइल्ड केमय सेन्द्टय’ की गोल्ड भेडडशरस्ट स्त्री योग ववषेषऻा डा. ननधध जौहयी बी इस फात से
सहभत हैं कक सयकायी औय ननजी अस्ऩतारों के उऩचाय भें फडा अॊतय है । उनका भानना है कक ननजी अस्ऩतार भें
धचककतसक ऩूणय रूऩ से जजम्भेदाय होता है औय उसकी जवाफदे ही होती है । जफकक सयकयी अस्ऩतारों भें ‘अम्ब्ेरा
रीटभें ट’ होता है जजसभें कक अरग-अरग धचककतसकों के अरग-अरग ददन ऩयाभशय के शरए उऩरब्ध होने के
कायण भयीज सभम-सभम ऩय एक ही धचककतसक को अक्सय नहीॊ ददखा ऩाता जजससे कक व्मजक्त ववशेष की
जजम्भेदायी नहीॊ फनती जो एक फड़ा अन्द्तय है । आगे वें फताती हैं कक दे हातों भें ववश्व स्वास््म सॊगठन के भानक
उऩरब्ध नहीॊ हैं। भगय शहयों भें रोग ननभोननमा उऩचाय भानकों के फाये भें जानते हैं जो एक फड़ी उऩरब्धता है ।
मश अस्ऩतार की प्रख्मात स्त्री योग ववशेषऻा डा. रयतू गगय का भानना है कक सयकायी अस्ऩतारों भें ननभोननमा के
भयीज को शसपय प्राथशभक उऩचाय के नाभ ऩय ‘एण्टीफामोदटक’ मा ‘ब्न्द्कोडामरेटय’ इन्द्जेक्शन ही उऩरब्ध हो
68 | फार

ननभोननमा

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ऩाता है जो एक अधयू ा उऩचाय है । ववश्व स्वास््म सॊगठन के भानकों द्वाया ननभोननमा का उऩचाय फहुत कभ
सयकायी फड़े अस्ऩतारों भें मा ननजी अस्ऩतारों भें ही उऩरब्ध है । ननभोननमा का ऩमायप्त उऩचाय उनके ननजी
अस्ऩतार ऩय बी उऩरब्ध है ।
ननभोननमा को एक जदटर सभस्मा फताते हुए डा. रयतू गगय फताती है कक इस फीभायी की सही ऩहचान होनी चादहए
क्मोंकक फच्चा हभेशा ननभोननमा से ही नहीॊ ग्रशसत होता है । वह भुख्मत् तीन शभरते-जुरते रक्ष्णों वारी
फीभारयमों से ग्रशसत हो सकता है । ब्न्द्कोराइदटस जजसभें फच्चे के पेपडे भें हल्की सूजन आ जाती है जजसे हल्का
ॊ आना कहते हैं। दस
सा ‘कप’ मा खॉसी
ू या है ब्न्द्को ननभोननमा जजसभें आरा रगाने ऩय सीने भें ‘क्रेऩ’ सन
ु ाई
दे ते हैं रेककन अगय सीटी सी आवाज आती है तो ब्न्द्को-अस्थभा मा दभा हो सकता है ।
सयकयी तन्द्त्र औय गैय सयकायी अस्ऩतारों के फीच भें आज का साभान्द्म गयीफ भयीज वऩस कय यह गमा है । मा तो
ननभोननमा का ऩण
ू य उऩचाय उऩरब्ध नहीॊ है , मा कपय अस्ऩतारों भें उऩचाय इतना भहॊ गा है कक साभान्द्म गयीफ
भयीज उऩचाय कया नहीॊ सकता। बायत जैसे कभ शशऺा वारे दे श भें मह जस्थनत औय बी बमावह हो जाती है ।
ववश्व स्वास््म सॊगठन/ मूननसेप के अथक प्रमास से उम्भीद की जा यही है कक ववश्व बय भें 2015 तक ननभोननमा
से भयने वारे भयीजों की सॊख्मा 12 राख तक कभ हो सकती है जो एक फड़ी चन
ु ौती है ।

नीयज भैनारी - सी0एन0एस0

69 | फार

ननभोननमा

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बाऱ ननमोननया से बचाव के शऱये कुछ बातों का वविेष ध्यान रखें :
 शशशु को जन्द्भ-उऩयाॊत कभ-से-कभ ६ भहीने शसपय स्तनऩान कयाएॉ
 भाॉ औय शशशु को ऩौजटटक आहाय (नवजात शशशु के शरमे ६ भहीने तक
भाॉ का दध
ू ही सवोततभ आहाय है ) औय स्वच्छ वातावयण दें

 शशशु को चल्
ॊु , तम्फाकू धए
ॊु आदद से दयू यखें , साफ़-सपाई
ू हे के धए
फनामे यखें

 ननभोननमा टीका सॊबव हो तो रगवाएॊ
 ननभोननमा रऺणों को बफना ववरम्फ ऩहचाने, तयु ॊ त उधचत इराज
कयवाए

70 | फार

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