(रचनाकार

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के सहयोग से

तुत है चाल चै लन क आ म कथा पीड एफ़

प म. मूल अं ेज़ी से ह द म अनुवाद चिचत, लोक य कथाकार

व उप यासकार – सूरज
मेर आ म कथा

चाल चै लन
चाल चै लन क आ मकथा

-अनुवाद : सूरज

काश

काश ने कया है . )

चाल चै लन होने का मतलब
क है र ज़, चाल चै लन के समकालीन लेखक और प कार ने अपनी कताब चाल
चै लन को भेजते उस पर िन निल खत पं

यां िलखी थीं:

चाल चै लन को
उन कुछ य

य म से एक ज ह ने बना प रचय के भी मेर सहायता क थी, एक

ऐसे श स, हा य म जनक दलभ
कला मकता क मने हमेशा सराहना क है , य क लोग

को हँ साने वाले य

लोग को लाने वाले य

य से

े होते ह।

चाल चै लन ने आजीवन हसाने का काम कया। दिनया
भर के िलए। बना कसी

भेद भाव के। उ ह ने राजाओं को भी हँ साया और रं क को भी हँ साया। उ ह ने चालीस बरस
तक अमे रका म रहते हए
ु पूरे व

के िलए भरपू र हँ सी बखेर । उ ह ने अपने बटलर को भी

हँ साया, और सुदरू चीन के धान मं ी चाऊ एन लाइ भी इस बात के िलए ववश हए
ु क व
शांित के, जीवन मरण के

पर मसले पर हो रह व

नेताओं क बैठक से पहले से वे खास

तौर पर मंगवा कर चाल चै लन क फ म दे ख और चाल के इं तज़ार म अपने घर क
सी ढ़य पर खड़े रह।

चाल ने अिधकांश मूक फ म बनायी और जीवन भर बेज़ुबान ै प के च र को
साकार करते रहे , ले कन इस ै प ने अपनी मूक वाणी से दिनया
भर के करोड़ लोग से

बरस बरस संवाद बनाये रखा और न केवल अपने मन क बात उन तक पहंु चायी, ब क
लोग क जीवन शैली भी बदली। चाल ने लैक एंड हाइट फ म बनायीं ले कन उ ह ने
सबक ज़ंदगी म इतने रं ग भरे क यक न नह ं होता क एक अकेला य

ऐसे कर सकता

है । ले कन चाल ने ये काम कया और बखूबी कया।
दोन व

यु

तक कोई भी ऐसा य

के दौरान जब चार तरफ भीषण मार काट मची हई
ु थी और दरू दरू
नह ं था, न नेता, न राजा, न पीर, न फक र, जो लाख घायल के

ज म पर मरहम लगाता या, जनके बेटे बेह तर जीवन के नाम पर, इ सािनयत के नाम पर
यु क आग म झ क दये गये थे, उनके प रवार को दलासा दे पाता, ऐसे व

म हमारे

सामने एक छोटे से कद का आदमी आता है , जसके चेहरे पर गज़ब क मासूिमयत है , आँख
म है रानी है, जसके अपने सीने म जलन और आंख म तूफान है, और वह सबके ह ठ पर
मु कान लाने का काम करता है । `इस आदमी के य

व के कई पहलु ह। वह घुम कड़,

म त मौला है , भला आदमी है , क व है , व नजीवी है, अकेला जीव है , हमेशा रोमांस और

रोमांच क उ मीद लगाये रहता है । वह तु ह इस बात क यक न दला दे गा क वह वै ािनक
है , संगीत

है , यूक है , पोलो खलाड़ है , अलब ा, वह सड़क पर से िसगरेट उठा कर पीने

वाले और कसी ब चे से उसक टॉफ छ न लेने वाले से यादा कुछ नह ं। और हाँ, य द मौका

2

आये तो वह कसी भली औरत को उसके पछवाड़े लात भी जमा सकता है, ले कन बेइंतहा

गु से म ह ।' वह यह काम अपने अकेले के बलबूते पर करता है । वह सबको हँ साता है और
लाता भी है । `हम हँ से, कई बार दल खोल कर और हम रोये , असली आँसुओं के साथ -

आपके आँसुओं के साथ, य क आप ह ने हम आँसुओं का क मती उपहार दया है ।'
चाल जीिनयस थे, सह मायने म जीिनयस। `जीिनयस श द को तभी उसका सह
अथ िमलता है जब इसे कसी ऐसे य

के साथ जोड़ा जाता है जो न केवल उ कृ

कॉमे डयन है ब क एक लेखक, संगीतकार, िनमाता है और सबसे बड़ बात, उस य

ऊ मा, उदारता और महानता है । आप म ये सारे गुण वास करते ह और इससे बड़ बात, क
आप म वह सादगी है जससे आपका कद और ऊंचा होता है और एक गरमाहट भर सहज
अपील के दशन होते ह जसम न तो कोई हसाबी गणना होती है और न ह कोई यास ह

आप इसके िलए करते ह और इनसे आप सीधे इ सान के दल म वेश करते ह। इ सान, जो
आप ह क तरह मुसीबत का मारा है ।'
ले कन चाल को ये बाना धारण करने म, करोड़ लोग के चेहरे पर हँ सी लाने के िलए
बहत
ु पापड़ बेलने पड़े । भयंकर हताशाओं के, अकेलेपन के दौर उनके जीवन म आये,

पा रवा रक और राजनैितक मोच पर एक के बाद एक मुसीबत उनके सामने आयीं ले कन
चाल कभी डगे नह ं। उ ह अपने आप पर व ास था, अपनी कला क ईमानदार , अपनी
अिभ य

क स चाई पर व ास था और सबसे बड़ बात उनक नीयत साफ थी और वे

अपने आप पर भरोसा करते थे।
उनका पूरा जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। बद क मती एक के बाद एक अपनी
पोटिलयां खोल कर उनके इ तहान लेती रह । जब वे बारह बरस के ह थे तो उनके पता क
मृ यु हो गयी थी। मा सतीस बरस क उ

म। बहत
ु अिधक शराब पीने के कारण। हालां क

वे िलखते ह क म पता को बहत
ु ह कम जानता था और मुझे इस बात क ब कुल भी याद

नह ं थी क वे कभी हमारे साथ रहे ह । उनके पता और मां म नह ं बनती थी इसिलए चाल ने
अपना बचपन मां क छ छाया म ह बताया। चाल के माता पता, दोन ह मंच के कलाकार
थे ले कन ये उसक (मां क ) आवाज के खराब होते चले जाने के कारण ह था क मुझे पांच
बरस क उ

म पहली बार टे ज पर उतरना पड़ा। उस रात म अपनी ज़ंदगी म पहली बार

टे ज पर उतरा था और मां आ खर बार। वे अपनी पहली मंच

तुि त से ह सबके चहे ते बन

गये और फर उ ह ने पीछे मुड़ कर नह ं दे खा। `अभी मने आधा ह गीत गाया था क टे ज
पर िस क क बरसात होने लगी। मने त काल घोषणा कर द क म पहले पैसे बटो ं गा और
उसके बाद ह गाना गाऊंगा। इस बात पर और अिधक ठहाके लगे। टे ज मैनेजर एक माल
ले कर टे ज पर आया और िस के बटोरने म मेर मदद करने लगा। मुझे लगा क वो िस के
अपने पास रखना चाहता है । मने ये बात दशक तक पहंु चा द तो ठहाक का जो दौरा पड़ा वो

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थमने का नाम ह न ले। खास तौर पर तब जब वह माल िलये-िलये वं स म जाने लगा और
म िचंतातुर उसके पीछे -पीछे लपका। जब तक उसने िस क क वो पोटली मेर मां को नह ं
थमा द , म टे ज पर वा पस गाने के िलए नह ं आया। अब म ब कुल सहज था। म दशक से
बात करता रहा, म नाचा और मने तरह-तरह क नकल करके दखायी। मने मां के आय रश
माच थीम क भी नकल करके बतायी।'
चाल का बचपन बेहद गर बी म गुज़रा। `वे लोग, जो र ववार क शाम घर पर डनर
के िलए नह ं बैठ पाते थे, उ ह िभखमंगे वग का माना जाता था और हम उसी वग म आते थे।'
पता के मरने और मां के पागल हो जाने और कोई थायी आधार न होने के कारण चाल को
पूरा बचपन अभाव म गुज़ारना पड़ा और यतीम खान म रहना पड़ा। `हमारा व

खराब चल

रहा था और हम िगरजा घर क खैरात पर पल रहे थे।' मां पागल खाने म और भाई िसडनी

अपनी नौकर पर जहाज म, चाल को डर रहता क कह ं उसे फर से यतीम खाने न भेज दया
जाये, वह सारा सारा दन मकान माल कन क िनगाह से बचने के िलए सड़क पर मारे मारे
फरते, `म लै बेथ वॉक पर और दसर
सड़क पर भूखा- यासा केक क दकान
क खड़ कयां

म झांकता चलता रहा और गाय और सूअर के मांस के गरमा-गरम वा द लजीज पकवान
को और शोरबे म डू बे गुलाबी लाल आलुओं को दे ख-दे ख कर मेरे मुंह म पानी आता रहा।'
चाल को चलना और बोलना सीखने से पहले पहले गाना और नाचना िसखाया गया
था और यह वज़ह रह क वे पांच बरस म मंच पर उतर गये थे और इससे भी बड़ बात क
सात बरस क उ

म वे नृ य के लैसन दया करते थे और इस तरह से होने वाली कमाई से

घर चलाने म मां का हाथ बंटाते थे। `बेशक हम समाज के जस िन नतर तर के जीवन म
रहने को मज़बूर थे वहां ये सहज वाभा वक था क हम अपनी भाषा-शैली के तर के ित
लापरवाह होते चले जाते ले कन मां हमेशा अपने प रवेश से बाहर ह खड़ हम समझाती और
हमारे बात करने के ढं ग, उ चारण पर यान दे ती रहती, हमारा याकरण सुधारती रहती और
हम यह महसूस कराती रहती क हम खास ह।
चाल क

कूली पढ़ाई आधी अधूर रह । दे खा जाये तो वे औपचा रक प से दो बरस

कूल जा पाये और बाक पढ़ाई अनाथ आ म के कूल म या इं गलड के दे श म नाटक

मंडली के साथ शो करते हए
ु एक एक ह ते के िलए अलग अलग शहर के कूल म करते रहे ।
चाल ने िनयिमत प से आठ बरस क उ

म ह एट लंकाशयर लै स मंडली म बाल

कलाकार के प म काम करना शु कर दया था और बारह बरस क उ

तक आते आते वे

इं गलड के सवािधक चिचत बाल कलाकार बन चुके थे और जीवन क असली पाठशाला म
अपनी पढ़ाई कर रहे थे, फर भी कूली पढ़ाई ने उ ह जो कुछ िसखाया, उसके बारे म वे
िलखते ह: `काश, कसी ने कारोबार दमाग इ तेमाल कया होता,
उ ेजनापूण

येक अ ययन क

तावना पढ़ होती जसने मेरा दमाग झकझोरा होता, त य के बजाये मुझ म

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िच पैदा क होती, अंक क कलाबाजी से मुझे आनं दत कया होता, न श के ित रोमांच
पैदा कया होता, इितहास के बारे म मेर

कोण वकिसत कया होता, मुझे क वता क लय

और धुन को भीतर उतारने के मौके दये होते तो म भी आज व ान बन सकता था।
मा आठ बरस क उ

म उ ह जन संकट का सामना करना पड़ा, उससे कोई भी

दसरा
ब चा ब कुल टू ट ह जाता। चाल काम धंधे क तलाश म गिलय म मारे मारे फरते:

`उस व

म आठ बरस का भी नह ं हआ
ु था ले कन वे दन मेर ज़ दगी के सबसे ल बे और

उदासी भरे दन थे।

ऐसे म भी चाल ने कभी ह मत नह ं हार

य क ल य उनके सामने था क उ ह जो

भी करना है , िथयेटर म ह करना है । उ ह ने बीिसय धंधे कये: मुझम धंधा करने क
जबरद त समझ थी। म हमेशा कारोबार करने क नयी-नयी योजनाएं बनाने म उलझा रहता।
म खाली दकान
क तरफ दे खता, सोचता, इनम पैसा पीटने का कौन सा धंधा कया जा

सकता है । ये सोचना मछली बेचने, िच स बेचने से ले कर पंसार क दकान
खोलने तक होता।

हमेशा जो भी योजना बनती, उसमे खाना ज़ र होता। मुझे बस पूंजी क ह ज़ रत होती

ले कन पूंजी ह क सम या थी क कहां से आये। आ खर मने मां से कहा क वह मेरा कूल
छुड़वा दे और काम तलाशने दे ।
मने बहत
ु धंधे कये। मने अखबार बेचे,


ं र का काम कया, खलौने बनाए, लास

लोअर का काम कया, डॉ टर के यहाँ काम कया ले कन इन तरह-तरह के धंध को करते
हए
ु मने िसडनी क तरह इस ल य से कभी भी िनगाह नह ं हटायी क मुझे अंतत: अिभनेता
बनना है, इसिलए अलग-अलग काम के बीच अपने जूते चमकाता, अपने कपड़ पर श
फेरता, साफ कॉलर लगाता और

ड के पास बेड फोड

ट म लैक मोर िथएटर एजे सी म

बीच-बीच म च कर काटता। म तब तक वहाँ च कर लगाता रहा जब तक मेरे कपड़ क
हालत ने मुझे वहाँ और जाने से बलकुल ह रोक नह ं दया।
चाल चै लन ने बचपन म नाई क दकान
पर भी काम कया था ले कन इस आ म

कथा म उ ह ने इसका कोई ज़

नह ं कया है । इस काम का उ ह ये फायदा हआ
क वे

अपनी महान फ म द ेट िथड टे टर म यहद
ू नाई का च र बखूबी िनभा सके।

जब उ ह पहली बार नाटक म काम करने के िलए विधवत काम िमला तो वे जैसे

सातव आसमान पर थे, `म खुशी के मारे पागल होता हआ
ु बस म घर पहंु चा और दल क

गहराइय से यह महसूस करने लगा क मेरे साथ या हो गया है । मने अचानक ह गर बी क
अपनी ज़ंदगी पीछे छोड़ द थी और अपना बहत
ु पुराना सपना पूरा करने जा रहा था। ये

सपना जसके बारे म अ सर मां ने बात क थीं और उसे म पूरा करने जा रहा था। अब म
अिभनेता होने जा रहा था। म अपनी भूिमका के प न को सहलाता रहा। इस पर नया खाक
िलफाफा था। यह मेर अब तक क ज़ंदगी का सबसे मह वपूण द तावेज था। बस क या ा

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के दौरान मने महसूस कया क मने एक बहत
ु बड़ा कला फतह कर िलया है । अब म झोपड़

प ट म रहने वाला नामालूम सा छोकरा नह ं था। अब म िथएटर का एक खास आदमी होने
जा रहा था। मेरा मन कया क म रो पडू ं ।
और इस भूिमका के िलए उ ह ने खूब मेहनत क और अपने च र के साथ पूर तरह
से याय कया। वे लगातार दशक के चहे ते बनते गये। एक मज़ेदार बात ये हई
ु क वे अपनी
ज़ंदगी का पहला करार करने जा रहे थे ले कन उ ह लग रहा था क जतना िमल रहा है , वे

उससे यादा के हकदार ह और वहां वे अपनी यावसाियक बिनया बु

का एक नमूना दखा

ह आये थे, `हालां क यह रािश मेरे िलए छ पर फाड़ लॉटर खुलने जैसी थी फर भी मने यह
बात अपने चेहरे पर नह ं झलकने द । मने िन ता से कहा, `शत के बारे म म अपने भाई से
सलाह लेना चाहंू गा।'

उ नीस बरस क उ

तक आते आते वे इं गिलश िथयेटर म अपनी जगह बना चुके थे

ले कन अपने आपको अकेला महसूस करते। वे बरस से अकेले ह रहते आये थे। यार ने
उनक ज़दं गी म बहत
ु दे र से द तक द थी ले कन वे अपनी अकड़ के चलते वहां भी अपने

प े फक आये थे। हालां क अपने पहले यार को वे ल बे अरसे तक भुला नह ं पाये। `सोलह
बरस क उ

म रोमांस के बारे म मेरे याल को ेरणा द थी एक िथयेटर के पो टर ने

जसम खड़ च टान पर खड़ एक लड़क के बाल हवा म उड़े जा रहे थे। म क पना करता क
म उसके साथ गो फ खेल रहा हंू ।

यह मेरे िलए रोमांस था। ले कन कम उ

का यार तो कुछ और ह होता है । एक

नज़र िमलने पर, शु आत म कुछ श द का आदान दान (आम तौर पर गदहपचीसी के
श द), कुछ ह िमनट के भीतर पूर जंदगी का नज़ रया ह बदल जाता है । पूर कायनात
हमारे साथ सहानुभूित म खड़ हो जाती है और अचानक हमारे सामने छुपी हई
ु खुिशय का
खज़ाना खोल दे ती है ।

म उ नीस बरस का होने को आया था और कान क पनी का सफल कामे डयन था।
ले कन कुछ था जसक अनुप थित खटक रह थी। वसंत आ कर जा चुका था और गिमयां
अपने पूरे खालीपन के साथ मुझ पर हावी थीं। मेर दनचया बासीपन िलये हए
ु थी और मेरा
प रवेश शु क। म अपने भ व य म कुछ भी नह ं दे ख पाता था, वहां िसफ अनमनापन, सब

कुछ उदासीनता िलये हए
ु और चार तरफ आदमी ह आदमी। िसफ पेट भरने क खाितर काम
धंधे से जुड़े रहना ह काफ नह ं लग रहा था। ज़ंदगी नौकर सर खी हो रह थी और उसम
कसी क म क बांध लेने वाली बात नह ं थी।
म बु पने
और अितनाटक यता का पुजार था, व नजीवी भी और उदास भी। म

ज़ंदगी से खफ़ा भी रहता था और उसे यार भी करता था। कला श द कभी भी मेरे भेजे म या

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मेर श द स पदा म नह ं घुसा। िथयेटर मेरे िलए रोज़ी-रोट का साधन था, इससे यादा कुछ
नह ं।
म अकेला होता चला गया, अपने आप से असंतु । म र ववार को अकेला भटकता
घूमता रहता, पाक म बज रहे बड को सुन का दल बहलाता। न तो म अपनी खुद क क पनी
झेल पाता था और न ह कसी और क ह । और तभी एक खास बात हो गयी - मुझे यार हो
गया। मुझे अचानक दो बड़ -बड़ भूर शरारत से चमकती आंख ने जैसे बांध िलया। ये आंख
एक दबले
हरनी जैसे, सांचे म ढले चेहरे पर टं गी हई

ु थीं और बांध लेने वाला उसका भरा पूरा
चेहरा, खूबसूरत दांत, ये सब दे खने का असर बजली जैसा था। ले कन है ट को जी जान से
चाहने के बावजूद उ ह ने अपनी चौथी मुलाकात म ह उसके खराब मूड को दे ख कर फैसला
कर िलया क वह उनसे यार नह ं करती। और संबंध तोड़ बैठे। `मेरा याल यह है क हम
वदा हो जाय और फर कभी दोबारा एक दजे
ू से न िमल।' मने कहा और सोचता रहा क

उसक

ित

या या होगी।

ले कन अब या हो सकता था। `मने या कर डाला था? या मने बहत
ु ज द बाजी

क ? मुझे उसे चुनौती नह ं दे नी चा हये थी। म भी िनरा गावद हंू क उससे दोबारा िमलने के
सारे रा ते ह बंद कर दये? ले कन क मत उ ह दसरे
ू दरवाजे से द तक दे रह थी।

संभावनाओं ने नये दरवाजे खुल रहे थे: अमे रका म संभावनाओं का अंनत आकाश था। मुझे
अमे रका जाने के िलए इसी तरह के कसी मौके क ज रत थी। इं गलड म मुझे लग रहा था
क म अपनी संभावनाओं के िशखर पर पहँु च चुका हँू और इसके अलावा, वहाँ पर मेरे अवसर

अब बंधे बंधाये रह गये थे। आधी-अधूर पढ़ाई के चलते अगर म यू जक हॉल के कामे डयन
के प म फेल हो जाता तो मेरे पास मजदरू के काम करने के भी बहत
ु ह सीिमत आसार
होते।

उनके जीवन का सबसे सुखद पहलु अगर अमे रका जाना था और वहां चालीस बरस
तक रह कर नाटक, फ म और मनोरं जन के सवािधक सफल य

व के प म पूर दिनया

के लोग के दल पर राज करना था तो वहां से जाना भी उनके िलए सबसे दखद
घटना बन

कर आयी। वे खुली अनंत आकाश क खुली हवा क तलाश म अमे रका गये थे और आ खर
खुली हवा क तलाश म मज़बूर हो कर वहां से कूच करना पड़ा और उ

के छठे दशक म

वटज़रलड को अपना घर बनाना पड़ा।
चाल पूर दिनया
के चहे ते थे। वे शायद अकेले ऐसे श स रहे ह गे जनके दो त हर

दे श म, हर फ ड म और हर उ

के थे। वे अमूमन हर दे श के रा या य , रा पित, धान

मं ी से िम ता के तर पर िमलते थे। वे उनक फ म दखाये जाने का आ ह करते, उ ह
राजक य स मान दे ते। उनके घर पर आते और उनके साथ खाना खाते। वे गांधी जी से भी
िमले थे और नेह जी से भी। गांधी जी से वे बहत
भा वत हए

ु थे। उ ह ने बनाड शॉ के घर

7

पर कई बार खाना खाया था और आइं ट न कई बार चाल के घर आ चुके थे। जीवन के हर
े के लोग उनके िम थे: म दो त को वैसे ह पसंद करता हंू जैसे संगीत को पसंद करता हंू ।

शायद मुझे कभी भी बहत
यादा दो त क ज़ रत नह ं रह - आदमी जब कसी ऊंची जगह

पर पहंु च जाता है तो दो त चुनने म कोई ववेक काम नह ं करता। अलब ा वे मानते थे क
ज़ रत के व

कसी दो त क मदद करना आसान होता है ले कन आप हमेशा इतने

खुशनसीब नह ं होते क उसे अपना समय दे पाय।
चाल ने इकतरफा ेम बहत
ु कये। वैसे दे खा जाये तो है ट के साथ उनका पहला

यार भी इकतरफा ह था और शायद यह वजह रह क वे उनतीस बरस क उ

तक अकेले

ह रहे । मेरा अकेलापन कुं ठत करने वाला था य क म दो ती करने क सार ज़ रत पूर
करता था। म युवा था, अमीर था और बड़ ह ती था। इसके बावज़ूद म यू याक म अकेला
और परे शान हाल घूम रहा था।

हालां क चाल ने चार शा दयां क ं ले कन पहली तीन शा दय से उ ह बहत
ु तकलीफ

पहंु ची। पहली शाद करने जाते समय तो वे समझ ह नह ं पा रहे थे क वे ये शाद कर ह

रहे ह। दसर
शाद ने उ ह इतनी तकलीफ पहंु चायी क इस आ म कथा म अपनी दसर
प ी


का नाम तक नह ं बताया है । अलब ा, ऊना ओ नील से उनक चौथी शाद सवािधक सफल
रह । हालां क दोन क उ

म 36 बरस का फक था और ऊना उनक छ ीस बरस तक, यानी

आजीवन उनक प ी रह ं। वे अपने जीवन के अंितम 36 बरस उसी क वजह से अ छ तरह
से गुज़ार सके। पछले बीस बरस से म जानता हंू क खुशी या होती है । म क मत का धनी
रहा क मुझे इतनी शानदार बीवी िमली। काश, म इस बारे म और यादा िलख पाता ले कन

इससे यार जुड़ा हआ
ु है और परफै ट यार सार कुंठाओं से यादा सुंदर होता है य क इसे
जतना यादा अिभ य

कया जाये, उससे अिधक ह होता है । म ऊना के साथ रहता हंू और

उसके च र क गहराई और सौ दय मेरे सामने हमेशा नये नये प म आते रहते ह।

हालां क चाल ने अपनी आ म कथा म पोला नेगर से अपनी अिभ न िम ता का ह

कया है , त य बताते ह क नेगर से उनक प

ह दन के भीतर ह दो बार सगाई हई

थी और टू ट थी। चाल ने अपनी आ म कथा म अपनी सभी संतान का भी उ लेख नह ं

कया है । इसक वजह ये भी हो सकती है क ये आ म कथा 1960 म िलखी गयी थी जब वे
71 बरस के थे और ऊना ने कुल िमला कर उ ह आठ संतान का उपहार दया था और उनक
आठवीं संतान तब हई
ु थी जब चाल 73 बरस के थे और ऊना 37 बरस क ।

अलब ा, अपनी आ म कथा म चाल ने अपने सै स संबंध के बारे म काफ खुल कर

चचा क है : हर दसरे

क तरह मेरे जीवन म भी सै स के दौर आते-जाते रहे । ले कन

उनका मानना है : मेरे याल से तो सै स से च र को समझने म या उसे सामने लाने म
शायद ह कोई मदद िमलती हो। और क ठं ड, भूख और गर बी क शम से य

के

8

मनो व ान पर कह ं अिधक असर पड़ सकता है । जो प र थितयां आपको सै स क तरफ ले
जाती ह, वे मुझे यादा रोमांचक लगती ह।
चाल अमे रका गये तो िथयेटर करने थे ले कन उनके भा य म और बड़े पैमाने पर
दिनया
का मनोरं जन करना िलखा था। अमे रका म और भी कई संभावनाएं थीं। म िथएटर क

दिनया
से यूँ िचपका रहँू ? म कला को सम पत तो था नह ं। कोई दसरा
धंधा कर लेता। मने


अमे रका म टकने क ठान ली थी। शु शु म उ ह अपने पैर जमाने म और अपने मन क
करने म तकलीफ हई
ु ले कन एक बार ै प का बाना धारण करने लेने के बाद उ ह ने फर

पीछे मुड़ कर नह ं दे खा। मेरा च र थोड़ा अलग था और अमे रक जनता के िलए अनजाना
भी। यहाँ तक क म भी उससे कहाँ प रिचत था। ले कन वे कपड़े पहन लेने के बाद म यह
महसूस करता था क म एक वा त वकता हँू , एक जी वत य

हँू । दरअसल, जब म वे कपड़े

पहन लेता और ै प का बाना धारण कर लेता तो मुझे तरह तरह के मज़ा कया याल आने
लगते जनके बारे म म कभी सोच भी नह ं सकता था। चूँ क मेरे कपड़े मेरे च र से मेल खा
रहे थे, मने तभी और उसी व

ह तय कर िलया क भले ह कुछ भी हो जाये, म अपने इसी

ढब को बनाये रखूग
ँ ा।
वे ज द ह अपनी मेहनत और हनर
ु के बल पर ऐसी

थित म आ गये क मनमानी

क मत वसूल कर सक। वे ऑल इन वन थे। लेखक, संगीतकार, अिभनेता, िनदशक, संपादक,
िनमाता और बाद म तो वतरक भी। ज द ह उनक तूती बोलने लगी। ले कन एक मज़ेदार
बात थी उनके य

व म। कसी भी फ म के दशन से पहले वे बेहद नवस हो जाते।

उनक रात क नींद उड़ जाती। पहले शो म वे िथयेटर के अंदर बाहर होते रहते, ले कन
आ य क बात, क सब कुछ ठ क हो जाता और हर फ म पहले क फ म क तुलना म
और सफल होती।
हर फ म के साथ चाल क

िस

का ाफ ऊपर उठता जा रहा था और साथ ह

उनक क मत भी बढ़ती जा रह थी। वे मनमाने दाम वसूल करने क है िसयत रखते थे और
कर भी रहे थे। यू याक म मेरे च र , कैले टर के खलौने और मूितयां सभी डपाटमट टोर
और ग टोर म बक रहे थे। जगफे ड लड़ कयां चाल चै लन गीत गा रह थीं।
उ ह ने बहत
ु तेजी से बहत
ु कुछ हािसल कर िलया था। म िसफ स ाइस बरस का था और मेरे
सामने अनंत स भावनाएं थीं, और थी मेरे सामने एक दो तानी दिनया।
थोड़े से ह अरसे म

म करोड़पित हो जाऊंगा। म कभी इस सब क क पना भी नह ं कर सकता था।

चाल के बहत
ु से िम थे और उनक कई िम ताएं आजीवन रह ं। पु ष से भी और म हलाओं
से भी। वे दसर
से भा वत भी हए
को भी अपने तर के से भा वत कया।


ु और पूर दिनया

ह ट उनके बेहद कर बी िम थे और उ ह अपना आदश मानते थे। मेरे एक-दो बहत
ु ह अ छे
दो त ह जो मेरे

ितज को रौशन बनाये रहते ह।

9

भारतीय िसनेमा के कतने ह कलाकार ने चाल के ै प क नकल करने क कोिशश
क ले कन वे उसे दो एक फ म से आगे नह ं ले जा पाये।
हालां क चाल ने कूली िश ा बहत
ु कम पायी थी ले कन उ ह ने जीवन क कताब

को शु से आ खर तक कई बार पढ़ा था। उ ह मनो व ान क गहर समझ थी। उनका

बचपन बहत
ु अभाव म गुज़रा था और उ ह ने तकलीफ को बहत
ु नज़द क से जाना और

पहचाना था। इसके अलावा वे से फ मेड आदमी थे ले कन उ ह अपने आप पर बहत
ु भरोसा
था। इस आ म कथा म उ ह ने अमूमन सब कुछ पर िलखा है और बेहतर न िलखा है ।

अिभनय, कला, संवाद अदायगी, कैमरा एंगल, िनदशन, िथयेटर, व ान, परमाणु बम,
मानव मनो व ान, मछली मारना, सा यवाद, समाजवाद, पूंजीवाद, यु , अमीर , गर बी,
राजनीित, सा ह य, संगीत, कला, धम, दो ती, भूत ेत कुछ भी तो ऐसा नह ं बचा है जस
पर उ ह ने अपनी वशेष

वाली राय न जा हर क हो। कॉमेड क प रभाषा दे ते हए
ु वे कहते

ह, ` कसी भी कॉमेड म सबसे मह वपूण होता है नज़ रया। ले कन हर बार नज़ रया ढंू ढ ना

आसान भी नह ं होता। कसी कॉमेड को सोचने और उसे िनदिशत करने से यादा दमाग क
सतकता कसी और काम म ज़ र नह ं होती। अिभनय के बारे म वे कहते ह: मने कभी भी
अिभनय का अ ययन नह ं कया है ले कन लड़कपन म ये मेरा सौभा य रहा क मुझे महान
अिभनेताओं के युग म रहने का मौका िमला और मने उनके

ान और अनुभव के व तार को

हािसल कया।
शायद चाल का नाम इस बात के िलए िगनीज़ बुक ऑफ व ड रका स म िलखा
जायेगा क उन पर, उनक अिभनय कला पर, उनक फ म पर, उनक शैली पर और उनके
ै प पर दिनया
भर क भाषाओं म शायद एक हज़ार से भी यादा कताब िलखी गयी ह। जो

भी उनके जीवन म आया, या नह ं भी आया, उसने चाल पर िलखा।

अमे रका जाने और खूब सफल हो जाने के बाद चाल पहली बार दस बरस बाद और दसर
बार

बीस बरस बाद लंदन आये थे और उ ह वहां बचपन क

मृितय ने एक तरह से घेर िलया

था। मेरे अतीत के दन से है ट ह वह अकेली प रिचत य

थी जससे दोबारा िमलना

मुझे अ छा लगता, खास तौर पर इन बेहतर न प र थितय म उससे िमलने का सुख
िमलता।
उ ह ने जीवन म भरपू र दख
ु भी भोगे और सुख भी। ऐसा और कौन अभागा होगा जो

िसफ इसिलए दो त के घर के आसपास मंडराता रहे ता क उसे भी शाम के खाने के िलए
बुलवा िलया जाये और ऐसे य
रा या य

से यादा सुखी और कौन होगा जसे कमोबेश हर दे श के

के यहां से यौते िमलते ह , व

व यात वै ािनक, लेखक और राजनियक

उनसे िमलने के िलए समय मांगते ह और उसके आस पास वलािसता क ऐसी दिनया
हो

10

जसक हम और आप क पना भी न कर सकते ह । जीवन के ये दोन प

चाल

पसर

चै लन ने दे खे और भरपूर दे खे।
उनके जीवन का सबसे दखद

रहा, अमे रका ारा उन पर ये शक कया जाना क

वे खुद क यूिन ट ह और अगर नह ं भी ह तो कम से कम उनसे सहानुभूित तो रखते ह ह
और उनक पाट लाइन पर चलते ह।
इस म भूत ने आजीवन उनका पीछा नह ं छोड़ा और अंतत: अमे रका म चालीस
बरस रह कर, उस दे श के िलए इतना कुछ करने के बाद जब उ ह बेआब हो कर अपना जमा
जमाया संसार छोड़ कर एक नये घर कर तलाश म

व ज़रलड जाना पड़ा तो वे बेहद यिथत

थे। उन पर ये आरोप भी लगाया गया क वे अमे रक नाग रक य नह ं बने। आ वास
वभाग के अिधका रय के सवाल को जवाब दे ते हए
ु वे कहते ह, ` या आप जानते ह क म

इस सार मुसीबत म कैसे फंसा? आपक सरकार पर अहसान करके! स म आपके राजदत

िम टर जोसेफ डे वस को

सी यु

राहत क ओर से सैन

ांिस को म भाषण दे ना था,

ले कन ऐन मौके पर उनका गला खराब हो गया और आपक सरकार के एक उ च अिधकार
ने मुझसे पूछा क या म उनके थान पर बोलने क मेहरबानी क ं गा और तब से म इसम
अपनी गदन फंसाये बैठा हंू ।'

`म क यूिन ट नह ं हंू फर भी म उनके वरोध म खड़ा होने से इ कार करता रहा।

मने कभी भी अमे रक नाग रक बनने का यास नह ं कया। हालां क सैकड़ अमे रक बािशंदे
इं गलड म अपनी रोज़ी-रोट कमा रहे ह। वे कभी भी

टश नाग रक बनने का यास नह ं

करते।
चाल चै लन क यह आ म कथा एक महाका य है एक ऐसे श स के जीवन का,
जसने दया ह दया है और बदले म िसफ वह मांगा जो उसका हक था। उसने हँ सी बांट
और बदले म यार भी पाया और आंसू भी पाये। उसने कभी भी नाराज़ हो कर ये नह ं कहा क
आप गलत ह। उसे अपने आप पर, अपने फैसल पर, अपनी कला पर और अपनी अिभ य
शैली पर व ास था और उस व ास के ित स ची ितब ता भी थी। वह अपने प

कसी से भी लड़ने िभड़ने क ह मत रखता था य क वह जानता था क सच उसके साथ है ।
उसम परफै शन के िलए इतनी ज़द थी क िसट लाइ स के 70 सेकड के एक

य के िलए

पांच दन तक र टे क लेता रहा। अपने काम के ित उसम इतनी िन ा थी क मूक फ म का
युग बीत जाने के 4 बरस बाद भी वह लाख डॉलर लगा कर मूक फ म बनाता है य क
उसका मानना है क हर तरह के मनोरं जन क ज़ रत होती है । वह स चे अथ म जीिनयस
था और ये बात आज भी इस त य से िस हो जाती है क फ म के इतने अिधक प रवतन
से गुज़र कर यहां तक आ पहंु चने के बाद भी स र अ सी बरस पहले बनी उसक फ म हम
आज भी गुदगुदाती है । उस य

के पास मास अपील का जादई
ु िचराग था।

11

मुझे इस बात क खुशी है क म पहली बार चाल चै लन क आ म कथा को ह द
पाठक के सामने ला रहा हंू । ये काम मने कई बरस पहले शु
सारा ह सा क

कया था ले कन इसका काफ

यूटर म हाड ड क क िचता के साथ जल जाने के कारण मने इसे दोबारा

हाथ भी नह ं लगाया था। दोबारा शु

करने के बाद इस अरसे म मने कुछ नह ं कया, न

पढ़ा, न िलखा, बस चाल बाबा के सािन य म बैठा ये काम करता रहा। उ ह अपने भीतर
उतारता रहा।
मने मूल क य के ित पूर तरह से ईमानदार बने रहने क कोिशश क है और जहां
कह ं, आव यक लगा, अपनी तरफ से फुटनोट दये ह। एक बात और क बेशक चाल ने
विधवत कूली िश ा नह ं पायी थी, ले कन उनका भाषा
अं ेज़ी के, ब क

ान अ त
ु है । उ ह ने न केवल

च, इता वी, ीक और जमन संदभ भी खूब दये ह। भाषा उनक शानदार

अं ेज़ी क िमसाल है ।

म व ास करता हंू क मेरा ये काम आपको अ छा लगे गा। हालां क काम बहत
ु बड़ा

था और असीम धैय और समय क मांग करता था, ले कन िम

क शुभकामनाओं के साथ म

इसे पूरा कर पाया, मुझे इसका संतोष है । इसके कुछ अंश ी िनखारे ने टाइप कये ह, कुछ
प न क ड टे शन मेरे छोटे बेटे अिभ ान ने ली है , हाट े न क क वता का सरस अनुवाद
मेर टे लीफोन िम द ि ने कया है । इन सबका आभार।
नैितक बल मेर प ी और िम मधु ने बनाये रखा है , इसिलए यह कताब उसी को सम पत
है ।
और अंत म एक और बात,
या आपको नह ं लगता क अगर हँ साने के िलए कोई नोबल पुर कार होता तो वह
अब तक िसफ एक ह य

को दया जाता और िन

त ह वह नाम होता- चा स पसर

चै लन (1889-1977)
सूरज काश
भूिमका
वे ट िमं टर

ज के खुलने से पहले केिनंगटन रोड िसफ अ

माग हआ
ु करता था।

1750 के बाद, पुल से शु करते हए
ु एक नयी सड़क बनायी गयी थी जससे ाइटन तक का
सीधा रा ता खुल गया था। इसका नतीजा यह हआ
क केिनंगटन रोड पर, जहां मने अपने

बचपन का अिधकांश व

गुज़ारा है , कुछ बहत
ु ह शानदार घर दे खे जा सकते थे। ये घर

वा तुकला के उ कृ नमूने थे। इनके सामने क तरफ लोहे क ि ल वाली बा कनी होती थी।

12

हो सकता है क उन घर म रहने वाल ने कभी अपनी कोच म बैठ कर ाइटन जाते हए
ु जॉज
IV को दे खा होगा।

उ नीसवीं शता द के आते-आते इनम से यादातर घर कराये के कमरे दे ने वाले घर
म और अपाटमट म बदल चुके थे। अलब ा, कुछ घर ऐसे भी बचे रहे जन पर व

क मार

नह ं पड़ और उनम डॉ टर, वक ल, सफल यापार और नाटक वग़ैरह म काम करने वाले
कलाकार रहते आये। र ववार के दन, सुबह के व

केिनंगटन रोड के दोन तरफ के कसी न

कसी घर के बाहर आप कसी हई
ु घोड़ और गाड़ दे ख सकते थे जो वहां रहने वाले नाटक

कलाकार को नौरवुड या मेरटन जैसी दिसय मील दरू क जगह पर ले जाने के िलए तैयार

खड़ हो। वापसी म ये केिनंगटन रोड पर अलग-अलग तरह के शराब घर हाइट हाउस, द'
हा स, और द' टै काड पर कते हए
ु आते थे।

म बारह बरस का लड़का, अ सर टै काड के बाहर खड़ा बेहतर न पोशाक पहने इन

रं गीले चमक ले महानुभाव को उतरते और भीतर लाउं ज बार म जाते दे खा करता था। वहां
नाटक के कलाकार आपस म िमलते-जुलते थे। र ववार के दन का उनका यह शगल हआ

करता था। दोपहर के भोजन के िलए घर जाने से पहले वे अपना एक आ खर पैग यहां िलया
करते थे। वे कतने भ य लगते थे। चारखाने के सूट पहने और भूरे फे ट है ट डाटे , अपनी ह रे
क अंगू ठय और टाइ पन के लशकारे मारते। र ववार को दोपहर दो बजे पब बंद हो जाता था
और वहां मौजूद सब लोग बाहर झुंड बना कर खड़े हो जाते और एक-दसरे
ू को वदा दे ने से
पहले मन बहलाव म व

ज़ाया करते। म उन सबको हसरत भर िनगाह से दे खा करता और

खुश होता य क उनम से कुछे क बेवकूफ भर अकड़ के साथ ड ंग हांकते।
जब उनम से आ खर आदमी भी जा चुका होता तो ऐसा लगता मानो सूय बादल के
पीछे िछप गया हो। और तब म ढहते पुराने घर क अपनी कतार क तरफ चल पड़ता। मेरा
घर केिनंगटन रोड के पीछे क तरफ था। ये तीन न बर पाउनाल टे रेस था जसक तीसर
मं ज़ल पर एक छोट -सी दछ
ु ी पर हम रहा करते थे। तीसर मं ज़ल तक आने वाली सी ढ़यां
ख ता हाल म थीं। घर का माहौल दमघ टू था और वहां क हवा म बास मारते पानी और
पुराने कपड़ क बू रची-बसी रहती।
जस र ववार क म बात कर रहा हंू , उस दन मां खड़क पर बैठ एकटक बाहर दे ख

रह थी। वह मेर तरफ मुड़ और कमज़ोर से मु कुरायी। कमरे क हवा दमघ टू थी और

कमरा बारह वग फुट से थोड़ा-सा ह बड़ा रहा होगा। ये और भी छोटा लगता था और उसक
ढलुआं छत काफ नीची तीत होती थी। द वार के साथ सटा कर रखी गयी मेज़ पर जूठ
लेट और चाय के याल का अ बार लगा हआ
ु था। िनचली द वार से सटा एक लोहे का पलंग

था जस पर मां ने सफेद रं ग पोता हआ
ु था। पलंग और खड़क के बीच क जगह पर एक

छोट सी आग झंझर थी। पलंग के िसरे पर एक पुरानी-सी आराम कुस थी जसे खोल दे ने

13

पर चारपाई का काम िलया जा सकता था। इस पर मेरा भाई िसडनी सोता था ले कन
फलहाल वह समु पर गया हआ
ु था।

इस र ववार को कमरा कुछ यादा ह दमघ टू लग रहा था य क कसी कारण ने मां

ने इसे साफ-सूफ करने म लापरवाह बरती थी। आम तौर पर वह कमरा साफ रखती थी।
इसका कारण यह था क वह खुद भी समझदार, हमेशा खुश रहने वाली और युवा म हला थी।
वह अभी सतीस क भी नह ं हई
ु ी को भी चमका कर सु वधापूण
ु थी। वह इस वा हयात दछ
बना सकती थी। खासकर स दय क सुबह के व

जब वह मुझे मेरा ना ता ब तर म ह दे

दे ती और जब म सो कर उठता तो वह छोटा-सा कमरा सफाई से दमक रहा होता। थोड़ -सी
आग जल रह होती और खूंट पर गरमा-गरम केतली रखी होती और जंगले के पास है डर या
लोटर मछली गरम हो रह होती और वह मेरे िलए टो ट बना रह होती। मां क उ लिसत

कर दे ने वाली मौज़ूदगी, कमरे का सुखद माहौल, चीनी िम ट क केतली म डाले जाते उबलते
पानी क छल-छल करती आवाज़, और म ऐसे व

अपना सा ा हक कॉिमक पढ़ रहा होता।

शांत र ववार क सुबह के ये दलभ
आन ददायक पल होते।

ले कन इस र ववार के दन वह िन वकार भाव से बैठ खड़क से बाहर एकटक दे खे

जा रह थी। पछले तीन दन से वह खड़क पर ह बैठ हई
ु थी। आ यजनक ढं ग से चुप और
अपने आप म खोयी हई।
ु म जानता था क वह परे शान है । िसडनी समु पर गया हआ
ु था

और पछले दो मह न से उसक कोई खबर नह ं आयी थी। मां जस कराये क िसलाई मशीन
पर काम करके कसी तरह घर क गाड़ खींच रह थी, क त क अदायगी समय पर न कये
जाने के कारण ले जायी जा चुक थी (ये कोई नयी बात नह ं थी) और म डांस के पाठ पढ़ा कर
पांच िशंिलंग ह ते का जो योगदान दया करता था, वह भी अचानक ख म हो गये थे।
मुझे संकट के बारे म शायद ह पता रहा हो य क हम तो लगातार ह ऐसे संकट से
जूझते आये थे और लड़का होने के कारण म इस तरह क अपनी परे शािनय को शानदार
भुल कड़पने के साथ दर कनार कर दया करता था। हमेशा क तरह म कूल से दौड़ता हआ

घर आता और मां के छोटे -मोटे काम कर दे ता। बू मारता पानी िगराता और ताज़े पानी के डोल
भर लाता। तब म भाग कर मै काथ प रवार के घर चला जाता और वहां शाम तक खेलता
रहता। मुझे इस दम घ टती दछ
ु ी से िनकलने का कोई न कोई बहाना चा हये होता।

मै काथ प रवार मां का बहत
ु पुराना प रिचत प रवार था। मां उ ह नाटक के दन से

जानती थी। वे केिनंगटन रोड के बेहतर समझे जाने वाले इलाके म आरामदायक घर म रहते
थे। उनक माली है िसयत भी हमार तुलना म बेहतर थी। मै काथ प रवार का एक ह लड़का
था - वैली। म उसके साथ शाम का धुंधलका होने तक खेलता रहता और अमूमन यह होता क
मुझे शाम क चाय के िलए रोक िलया जाता। मने इस तरह कई बार दे र तक वहां मंडराते हए

रात के खाने का भी जुगाड़ कया होगा। अ सर िमसेज मै काथ मां के बारे म पूछती रहती

14

और कहती क कई दन से वह नज़र य नह ं आयी है । म कोई भी बहाना मार दे ता य क
जब से मां द ु दन झेल रह थी, वह शायद ह अपनी नाटक मंडली के प रिचत से िमलनेजुलने जाती हो।

हां, ऐसे भी दन होते जब म घर पर ह रहता और मां मेरे िलए चाय बनाती, सूअर क
चब म मेरे िलए ेड तल दे ती। मुझे ये ड
े बहत
ु अ छ लगती। फर वह मुझे एक घंटे तक
कुछ न कुछ पढ़ कर सुनाती। वह बहत
ु ह बेहतर न पाठ करती थी। और तब म मां के इस
संग-साथ के सुख के रह य का प रचय पाता और तब मुझे पता चलता क म मै काथ
प रवार के साथ जतना सुख पाता, उससे यादा मने मां के साथ रह कर पा िलया है ।
सैर से आ कर म जैसे ह कमरे म घुसा, वह मुड़ और उलाहने भर िनगाह से मेर
तरफ दे खने लगी। उसे इस हालत म दे ख कर मेरा कलेजा मुंह को आ गया। वह बहत
ु कमज़ोर

तथा म रयल-सी हो गयी थी तथा उसक आंख म गहर पीड़ा नज़र आ रह थी। म अकथनीय
दख
ु से भर उठा। म तय नह ं कर पा रहा था क घर पर रह कर उसके आसपास ह बना रहंू या
फर इस सब से दरू चला जाऊं। उसने मेर तरफ तरस खाती िनगाह से दे खा,"तुम लपक कर

मै काथ प रवार के यहां चले य नह ं जाते," उसने कहा था।

मेरे आंसू िगरने को थे," य क म तु हारे पास ह रहना चाहता हंू ।"

वह मुड़ और सूनी-सूनी आंख से खड़क के बाहर दे खने लगी,"तुम भाग कर
मै काथ के यहां ह जाओ और रात का खाना भी वह ं खाना। आज घर म खाने को कुछ भी
नह ं है ।"
मने उसक आवाज म तड़प महसूस क । मने इस तरफ से अपने दमाग के दरवाजे
बंद कर दये,"अगर तुम यह चाहती हो तो म चला जाता हंू ।"

वह कमजोर से मु कुरायी और मेरा िसर सहलाया,"हां..हां तुम दौड़ जाओ।" हालां क

म उसके आगे िगड़िगड़ाता रहा क वह मुझे घर पर ह अपने पास रहने दे ले कन वह मेरे जाने
पर ह अड़ रह । इस तरह से म अपराध बोध क भावना िलये चला गया। वह उसी मनहस

दछ
ु ी क खड़क पर बैठ रह । उसे इस बात का ज़रा सा भी गुमान नह ं था क आने वाले
दन म दभा
ु य क कौन-सी पोटली उसके िलए खुलने वाली है ।

15

एक
मेरा ज म ई ट लेन, वेलवथ म 16 अ ैल 1889 को रात आठ बजे हआ
ु था। इसके

तुरंत बाद, हम, सट

वायर, सट जॉज रोड, लै बेथ म रहने चले गये थे। मेर मां का कहना

है क मेर दिनया
खुिशय से भर हई

ु थी। हमार प र थितयां कमोबेश ठ क-ठाक थीं। हम

तीन कमर के घर म रहते थे जो सु िचपूण तर के से सजे हए
ु थे। मेर शु आती मृितय म

से एक तो ये है क मां रोज़ रात को िथयेटर जाया करती थी और मुझे और िसडनी को बहत
ु ह
यार से आरामदायक ब तर म सहे ज कर िलटा जाती थी और हम नौकरानी क दे ख-रे ख म

छोड़ जाती थी। साढ़े तीन बरस क मेर दिनया
म सब कुछ संभव था; अगर िसडनी, जो

मुझसे चार बरस बड़ा था, हाथ क सफाई के करतब दखा सकता था और िस का िनगल कर
अपने िसर के पीछे से िनकाल कर दखा सकता था तो म भी ठ क ऐसे ह कर के दखा सकता
था। इसिलए म अध पेनी का एक िस का िनगल गया और मज़बूरन मां को डॉ टर बुलवाना
पड़ा।
रोज़ रात को जब वह िथयेटर से वा पस लौटती थी तो उसका यह द तूर-सा था क
मेरे और िसडनी के िलए खाने क अ छ -अ छ चीज़ मेज़ पर ढक कर रख दे ती थी ता क
सुबह उठते ह हम िमल जाय - रं ग- बरं गे और सुगंिधत केक का लाइस या िमठाई। इसके
पीछे आपसी रज़ामंद यह थी क हम सुबह उठ कर शोर-शराबा नह ं करगे। वह आम तौर पर
दे र तक सो कर उठती थी।
मां वैराइट

टे ज क कलाकार थी। अपनी उ

के तीसरे दशक को छूती वह नफ़ासत

पसंद म हला थी। उसका रं ग साफ़ था, आंख बजनी नीली और ल बे, ह के भूरे बाल। बाल
इतने ल बे क वह आसानी से उन पर बैठ सकती थी। िसडनी और म अपनी मां को बहत

चाहते थे। हालां क वह असाधारण खूबसूरत नह ं थी फर भी वह हम वग क कसी अ सरा
से कम नह ं लगती थी। जो लोग उसे जानते थे उ ह ने मुझे बाद म बताया था क वह सुंदर
और आकषक थी और उसम सामने वाले को बांध लेने वाले सौ दय का जादू था। र ववार के
सैर-सपाटे के िलए हम अ छे कपड़े पहनाना उसे बहत
ु अ छा लगता था। वह िसडनी को

ल बी पतलून के साथ चौड़े कालर वाला सूट पहनाती, और मुझे नीली मखमली पतलून और
उससे मेल खाते नीले द ताने। इस तरह के मौके आ मतु

के उ सव होते जब हम

केिनंगटन रोड पर इतराते फरते।
वे टिम

लंदन उन दन धीर-गंभीर हआ
ु करता था। शहर क गित मंथर थी; यहां तक क

टर रोड से चलने वाली घोड़े जुती ाम भी खरामा-खरामा चलतीं और इसी गित से

ह पुल के पास टिमनल पर गोल घेरे, रवा वंग टे बल पर घूम जातीं। जब मां के खाते-पीते
दन थे तो हम भी वे टिम

टर रोड पर रहा करते थे। वहां का माहौल दल खुश करने वाला

और दो ताना होता। वहां शानदार दकान
, रे तरां और संगीत सदन थे। पुल के ठ क सामने

16

कोने पर फल क दकान
रं गीिनय से भर होती। बाहर क तरफ तरतीब से रखे गये संतर ,

सेब , नाशपाती और केल के परािमड सजे होते। इसके ठ क वपर त, सामने क तरफ नद
के उस पार संसद क शांत धूसर इमारत नज़र आतीं।
ये मेरे बचपन का, मेर मन: थितय का और मेरे जागरण का लंदन था। वसंत म
लै बेथ क

मृितयां - छोट मोट घटनाएं और चीज़। मां के साथ घोड़ा बस म ऊपर जा कर

बैठना और पास से गुज़रते िललाक के दर त को छूने क कोिशश करना। तरह-तरह के रं ग
क बस टकट, संतरे के रं ग क , हर , नीली, गुलाबी और दसरे
ू रं ग क । जहां बस और ाम
कती थीं, वहां फुटपाथ पर उन टकट का बखरा होना। मुझे वे टिम

टर पुल के कोने पर

फूल बेचने वाली गुलाबी चेहरे वाली लड़ कयां याद आती ह जो कोट के बटन म लगाने वाले
फूल बनाया करती थीं। उनक द

उं गिलयां तेजी से गोटे और कनार के फन बनाती चलतीं।

ताज़े पानी िछड़के गुलाब क भीगी-भीगी खुशबू , जो मुझे बेतरह उदास कर जाती थी। और वो
उदास कर दे ने वाले र ववार और पीले चेहरे वाले माता- पता और उनके ब चे जो
वे टिम

टर पुल पर पवन च क के खलौने तथा रं गीन गु बारे िलये िघसटते चलते। और

फर पैनी ट मर जो हौले से पुल के नीचे से जाते समय अपने फनेल नीचे कर लेते थे। मुझे
लगता है इस तरह क छोट -छोट घटनाओं से मेर आ मा का ज म हआ
ु था।
और फर, हमारे बैठने के कमरे से जुड़

मृितयां ज ह ने मेर अनुभिू तय पर असर

डाला।
नेल वेन क मां क बनायी आदमकद प टं ग जसे म पसंद नह ं करता था। हमारे
खाने -पीने क मेज़ के ल बोतरे ड बे जो मुझम अवसाद पैदा करते थे और फर छोटा-सा
गोल यू जक बॉ स जसक ऐनामल क हई
ु सतह पर प रय क त वीर बनी हई
ु थीं। इसे
दे ख म खुश भी होता था और परे शान भी।
महान पल क

मृितयां : रायल मछली घर म जाना, मां के साथ वहां के लाइड शो

दे खना, लपट म मु कुराती औरत का जी वत िसर दे खना, 'शी' दे खना, छ: पेनी क
भा यशाली लॉटर , सर ाइज़ पैकेट उठाने के िलए मां का मुझे एक बहत
ु बड़े बुरादे के म तक
ऊपर करना और उस पैकेट म से एक कड का िनकलना जो बजती नह ं थी और एक खलौने
वाले ूच का िनकलना। और फर कटरबर

यू जक हॉल म एक बार जाना जहां लाल

आरामदायक सीट पर पांव पसार कर बैठना और पता को अिभनय करते हए
ु दे खना।
और अब रात का व

हो रहा है और म चार घोड़ वाली ब घी म ऊपर क तरफ सफर झोले म

िलपटा हआ
ु , मां और उसके िथयेटर के और सािथय के साथ चला जा रहा हंू । उनक चाल म

रमा तथा हं सी-खुशी म खुश। हमारा बगुल बजाने वाला अपनी शेखी म हम केिनंगटन रोड से
घोड़े क साज-स जा क सुमधुर न झुन और घोड़ क टाप क संगीतमय आवाज़ के साथ
िलये जा रहा था।

17

तभी कुछ हआ।
ये एक मह ने के बाद क बात भी हो सकती है या थोड़े ह दन के

बाद क भी। अचानक लगा क मां और बाहर क दिनया
के साथ सब कुछ ठ क नह ं चल रहा

है । वह सुबह से अपनी कसी सखी के साथ बाहर गयी हई
ु थी और वा पस लौट तो बहत

अिधक उ ेजना से भर हई
ु थी। म फश पर खेल रहा था और अपने ठ क ऊपर चल रहे भीषण
तनाव के बारे म सतक हो गया था। ऐसा लग रहा था मानो म कुंए क तलहट म सुन रहा
होऊं। मां भावपूण तर के से हाव-भाव जतला रह थी, रोये जा रह थी और बार-बार आम
का नाम ले रह थी - आम

ांग ने ये कहा और आम

ांग ने वो कहा। आम

ांग

ांग जंगली है ।

मां क इस तरह क उ ेजना हमने पहले नह ं दे खी थी और यह इतनी तेज थी क मने रोना
शु कर दया। म इतना रोया क मज़बूरन मां को मुझे गोद म उठाना पड़ा और दलासा दे नी
पड़ । कुछ बरस बाद ह मुझे उस दोपहर के मह व का पता चल पाया था। मां अदालत से

लौट थी। वहां उसने मेरे पता पर ब च के भरण पोषण का खचा-पानी न दे ने क वजह से
मुकदमा ठोक रखा था और बद क मती से मामला उसके प

म नह ं जा रहा था। आम

ांग

मेरे पता का वक ल था।
म पता को बहत
ु ह कम जानता था और मुझे इस बात क ब कुल भी याद नह ं थी

क वे कभी हमारे साथ रहे ह । वे भी वैराइट

टे ज के कलाकार थे। एकदम शांत और

िचंतनशील। आंख उनक एकदम काली थीं। मां का कहना था क वे एकदम नेपोिलयन क
तरह द खते थे। उनक ह क मह न आवाज़ थी और उ ह बेहतर न अदाकार समझा जाता
था। उन दन भी वे हर ह ते चालीस प ड क शानदार रकम कमा िलया करते थे। बस,
द कत िसफ एक ह थी क वे पीते बहत
ु थे। मां के अनुसार यह उन दोन के बीच झगड़े क

जड़ थी।

टे ज कलाकार के िलए यह बहत
ु ह मु कल बात होती क वे पीने से अपने आपको

रोक सक। कारण यह था क उन दन शराब सभी िथयेटर म ह बका करती थी और

कलाकार क अदाकार के बाद उससे उ मीद क जाती थी क वह िथयेटर बार म जाये और
ाहक के साथ बैठ कर पीये। कुछ िथयेटर तो बॉ स ऑ फस से कम और शराब बेच कर
यादा कमा िलया करते थे। कुछे क कलाकार को तो तगड़ त
उनक

वाह ह द जाती थी जनम

ितभा का कम और उस पगार को िथयेटर के बार म उड़ाने का यादा योगदान रहता

था। इस तरह से कई बेह तर न कलाकार शराब के च कर म बरबाद हो गये। मेरे पता भी ऐसे
कलाकार म से एक थे। वे मा सतीस बरस क उ

म यादा शराब के कारण भगवान को

यारे हो गये थे।
मां उनके बारे म मज़ाक ह मज़ाक म और उदासी के साथ क से बताया करती थी।
शराब पीने के बाद वे उ

वभाव के हो जाते थे और उनक इसी तरह क एक बार क

दा बाजी क नौटं क म मां उ ह छोड़-छाड़ कर अपनी कुछ स खय के साथ ाइटन भाग गयी

18

थी। पता जी ने जब हड़बड़ म तार भेजा,"तु हारा इरादा या है और तुरंत जवाब दो?" तो मां
ने वापसी तार भेजा था,"नाच, गाना, पा टयां और मौज-मज़ा, डािलग!"
मां दो बहन म से बड़ थी। उनके पता चा स ह स, जो एक आइ रश मोची थे, काउं ट कॉक,
आयरलड से आये थे। उनके गाल सुख सेब क तरह लाल थे। उनके िसर पर बाल के सफेद
गु छे थे। उनक वैसी सफेद दाढ़ थी जैसी

ह लर के पो े ट म कालाइल क थी। वे कहा

करते थे क रा ीय आंदोलन के दन म पुिलस से िछपने-िछपाने के च कर म वे गीले नम
खेत म सोते रहे । इस कारण से उनके घुटन म हमेशा के िलए दद बैठ गया और इस कारण वे
दोहरे हो कर चलते थे। वे आ खर लंदन म आ कर बस गये थे और अपने िलए ई ट लेन
वेलवथ म जूत क मर मत का काम-धंधा तलाश िलया था।
दाद आधी घुम क ड़न थी। यह बात हमारे प रवार का खुला रह य थी। दाद मां

हमेशा इस बात क शेखी बघारा करती थी क उनका प रवार हमेशा ज़मीन का कराया दे कर
रहता आया था। उनका घर का नाम

मथ था। मुझे उनक शानदार न ह ं बु ढ़या के प म

याद है जो हमेशा मेरे साथ न ह-मु ने ब च जैसी बात करके मुझसे दआ
ु सलाम कया करती
थी। मेरे छ: बरस के होने से पहले ह वे चल बसी थीं। वे दादा से अलग हो गयी थीं जसका
कारण उन दोन म से कोई भी नह ं बताया करता था। ले कन केट आंट के अनुसार इसके
पीछे पा रवा रक झगड़ा था और दादा ने एक ेिमका रखी हई
ु थी और एक बार उसे बीच म ला
कर दाद को है रानी म डाल दया था।

आम जगह के मानदं ड के मा यम से हमारे खानदान के नैितकता को नापना उतना ह गलत
यास होगा जतना गम पानी म थमामीटर डालकर दे खना होता है । इस तरह क आनुवंिशक
काबिलयत के साथ मोची प रवार क दो यार बहन ने घर-बार छोड़ा और टे ज को सम पत
हो गयीं।
केट आंट , मां क छोट बहन, भी टे ज क अदाकारा थी। ले कन हम उसके बारे म
बहत
ु ह कम जानते थे। इसका कारण यह था क वह अ सर हमार ज़ंदगी म से आती-जाती
रहती थी। वह दे खने म बहत
ु आकषक थी और गु सैल वभाव क थी इसिलए मां से उसक

कम ह पटती थी। उसका कभी-कभार आना अचानक छोटे -मोटे टं टे म ह ख म होता था क
मां ने कुछ न कुछ उलटा सीधा कह दया होता था या कर दया होता था।
अ ठारह बरस क उ

म मां एक अधेड़ आदमी के साथ अ

का भाग गयी थी। वह

अ सर वहां क अपनी ज़ंदगी क बात कया करती थी क कस तरह से वह वहां पेड़ के
झुरमुट , नौकर और जीन कसे घोड़ के बीच म ती भर ज़ंदगी जी रह थी।
उसक उ

के अ ठारहव बरस म मेरे बड़े भाई िसडनी का ज म हआ
ु था। मुझे

बताया गया था क वह एक लॉड का बेटा था और जब वह इ क स बरस का हो जायेगा तो उसे

19

वसीयत म दो हजार प ड क शानदार रकम िमलेगी। इस समाचार से म एक साथ ह दखी

और खुश हआ
ु करता था।

मां बहत
ु अरसे तक अ

का म नह ं रह और इं गलड म आ कर उसने मेरे पता से

शाद कर ली। मुझे नह ं पता क उसक ज़ंदगी के अ

क घटना-च

का या हआ
ु , ले कन

भयंकर गर बी के दन म म उसे इस बात के िलए कोसा करता था क वह इतनी शानदार

ज़ंदगी काहे को छोड़ आयी थी। वह हँ स दे ती और कहा करती क म इन चीज़ को समझने क

से बहत
ु कम हंू और मुझे इस बारे म इतना नह ं सोचना चा हये।

मुझे कभी भी इस बात का अंदाज़ा नह ं लग पाया क वह मेरे पता के बारे म कस

तरह क भावनाएं रखती थी। ले कन जब भी वह मेरे पता के बारे म बात करती थी, उसम
कोई कड़ु वाहट नह ं होती थी। इससे मुझे शक होने लगता था क वह खुद भी उनके यार म
गहरे -गहरे डू बी हई
ु थी। कभी तो वह उनके बारे म बहत
ु सहानुभूित के साथ बात करती तो
कभी उनक शराबखोर क लत और हं सक वृ

के बारे म बताया करती थी। बाद के बरस

म जब भी वह मुझसे खफा होती, वह हकारत से कहती,``तू भी अपने बाप क ह तरह कसी
दन अपने आपको गटर म ख म कर डालेगा।"
वह पताजी को अ

का जाने से पहले के दन से जानती थी। वे एक दसरे
ू को यार

करते थे और उ ह ने शामुस ओ' ीयन नाम के एक आय रश मेलो ामा म एक साथ काम
कया था। सोलह बरस क उ
टू र करते हए
ु मां एक अधेड़ उ

म मां ने उसम मुख भूिमका िनभायी थी। क पनी के साथ
के लॉड के स पक म आयी और उसके साथ अ

का भाग

गयी। जब वह वा पस इं गलड आयी तो पता ने अपने रोमांस के टू टे धाग को फर से जोड़ा
और दोन ने शाद कर ली। तीन बरस बाद मेरा ज म हआ
ु था। म नह ं जानता क शराबखोर
के अलावा और कौन-कौन सी घटनाएं काम कर रह थीं ले कन मेरे ज म के एक बरस के ह
बाद वे दोन अलग हो गये थे। मां ने गुज़ारे भ े क भी मांग नह ं क थी। वह उन दन खुद
एक टार हआ
ु करती थी और हर ह ते 25 प ड कमा रह थी। उसक माली है िसयत इतनी

अ छ थी क अपना और अपने ब च का भरण पोषण कर सके। ले कन जब उसक ज़ंदगी
म दभा
ु य ने द तक द तभी उसने मदद क मांग क । अगर ऐसा न होता तो उसने कभी भी
कानूनी कारवाई न क होती।

मां को उसक आवाज़ बहत
ु तकलीफ दे रह थी। वैसे भी उसक आवाज़ कभी भी

इतनी बुलंद नह ं थी ले कन ज़रा-सा भी सद -जुकाम होते ह उसक

वर तं ी म सूजन आ

जाती थी जो फर ह त चलती रहती थी; ले कन उसे मज़बूर म काम करते रहना पड़ता था।
इसका नतीजा यह हआ
क उसक आवाज़ बद से बदतर होती चली गयी। वह अब अपनी

आवाज पर भरोसा नह ं कर सकती थी। गाना गाते-गाते बीच म ह उसक आवाज़ भरा जाती
या अचानक गायब ह हो जाती और फुसफुसाहट म बदल जाती। तब ोता बीच म ठहाके

20

लगने लगते। वे गला फाड़ का िच लाना शु कर दे ते। आवाज़ क िचंता ने मां क सेहत को
और भी डांवाडोल कर दया था और उसक हालत मानिसक रोगी जैसी हो गयी। नतीजा यह
हआ
क उसे िथयेटर से बुलावे आने कम होते चले गये और एक दन ऐसा भी आया क

ब कुल बंद ह हो गये।

ये उसक आवाज़ के खराब होते चले जाने के कारण ह था क मुझे पांच बरस क उ
म पहली बार टे ज पर उतरना पड़ा। मां आम तौर पर मुझे कराये के कमरे म अकेला छोड़
कर जाने के बजाये रात को अपने साथ िथयेटर ले जाना पसंद करती थी। वह उस व

कट न

एट द' ए डरशाट म काम कर रह थी। ये एक गंदा, चलताऊ-सा िथयेटर था जो यादातर
फौ जय के िलए खेल दखाता था। वे लोग उज ड क म के लोग होते थे और उ ह भड़काने
या ओछ हरकत पर उतर आने के िलए मामूली-सा कारण ह काफ होता था। ए डरशॉट म
नाटक म काम करने वाल के िलए वहां एक ह ता भी गुज़ारना भयंकर तनाव से गुज़रना
होता था।
मुझे याद है , म उस व

वं स म खड़ा हआ
ु था जब पहले तो मां क आवाज़ फट और

फर फुसफुसाहट म बदल गयी। ोताओं ने ठहाके लगाना शु कर दये और अनाप-शनाप

गाने लगे और कु े ब लय क आवाज िनकालना शु कर दया। सब कुछ अ प -सा था
और म ठ क से समझ नह ं पा रहा था क ये सब या चल रहा है । ले कन शोर-शराबा बढ़ता
ह चला गया और मज़बूरन मां को टे ज छोड़ कर आना पड़ा। जब वह वं स म आयी तो बुर
तरह से यिथत थी और टे ज मैनेजर से बहस कर रह थी। टे ज मैनेजर ने मुझे मां क
स खय के आगे अिभनय करते दे खा था। वह मां से शायद यह कह रहा था क उसके थान
पर मुझे टे ज पर भेज दे ।
और इसी हड़बड़ाहट म मुझे याद है क उसने मुझे एक हाथ से थामा था और टे ज पर
ले गया था। उसने मेरे प रचय म दो चार श द बोले और मुझे टे ज पर अकेला छोड़ कर चला
गया। और वहां फुट लाइट क चकाच ध और धुंए क पीछे झांकते चेहर के सामने मने गाना
शु कर दया। ऑर े टा मेरा साथ दे रहा था। थोड़ दे र तक तो वे भी गड़बड़ बजाते रहे और
आ खर उ ह ने मेर धुन पकड़ ह ली। ये उन दन का एक मशहर
ू गाना जैक जो स था।
जैक ज स सबका प रिचत और दे खा भाला
घूमता रहता बाज़ार म गड़बड़झाला
नह ं नज़र आती कोई कमी जैक म हम
तब भी नह ं जब वो जैसा था तब कैसा था
हो गयी गड़बड़ जब से छोड़ा उसे बुिलयन गाड़ ने
हो गया बेड़ा गक, जैक गया झाड़ म
नह ं िमलता वह दो त से पहले क तरह

21

भर दे ता है मुझे वह हकारत से
पढ़ता है हर र ववार वह अखबार टे िल ाफ
कभी वह बन कर खुश था टार
जब से जैक के हाथ म आयी है माया
या बताय, हमने उसे पहले जैसा नह ं पाया।
अभी मने आधा ह गीत गाया था क टे ज पर िस क क बरसात होने लगी। मने
त काल घोषणा कर द क म पहले पैसे बटो ं गा और उसके बाद ह गाना गाऊंगा। इस बात
पर और अिधक ठहाके लगे। टे ज मैनेजर एक माल ले कर टे ज पर आया और िस के
बटोरने म मेर मदद करने लगा। मुझे लगा क वो िस के अपने पास रखना चाहता है । मने ये
बात दशक तक पहंु चा द तो ठहाक का जो दौरा पड़ा वो थमने का नाम ह न ले। खास तौर
पर तब जब वह माल िलये-िलये वं स म जाने लगा और म िचंतातुर उसके पीछे -पीछे

लपका। जब तक उसने िस क क वो पोटली मेर मां को नह ं थमा द , म टे ज पर वा पस
गाने के िलए नह ं आया। अब म ब कुल सहज था। म दशक से बात करता रहा, म नाचा
और मने तरह-तरह क नकल करके दखायी। मने मां के आय रश माच थीम क भी नकल
करके बतायी।
रले . . रले. . ब चे को बहकाते रले
रले. . रले. . म वो ब चा जसे बहकाते रले
हो बड़ या हो सेना छोट
नह ं कोई इतना दबला
और साफ

करते अ छे साजट रले

बहादरु अ ठासी म से रले. .।
और कोरस को दोहराते हए
ु म अपने भोलेपन म मां क आवाज़ के फटने क भी नकल

कर बैठा। म ये दे ख कर है रान था क दशक पर इसका जबरद त असर पड़ा है । खूब हं सी के
पटाखे छूट रहे थे। लोग खूब खुश थे और इसके बाद फर िस क क बौछार। और जब मां

मुझे टे ज से िलवाने के िलए आयी तो उसक मौज़ूदगी पर लोग ने जम के तािलयां बजायीं।
उस रात म अपनी ज़ंदगी म पहली बार टे ज पर उतरा था और मां आ खर बार।
जब िनयित आदमी के भा य के साथ खलवाड़ करती है तो उसके यान म न तो दया
होती है और न ह

याय ह । मां के साथ भी िनयित ने ऐसे ह खेल दखाये। उसे उसक

आवाज़ फर कभी वा पस नह ं िमली। जब पतझड़ के बाद स दयां आयीं तो हमार हालत बद
से बदतर हो गयी। हालां क मां बहत
ु सावधान थी और उसने

ोड़े -बहत
ु पैसे बचा कर रखे थे

22

ले कन कुछ ह दन म ये पूंजी भी ख म हो गयी। धीरे -धीरे उसके गहने और छोट -मोट चीज़
बाहर का रा ता दे खने लगीं। ये चीज़ घर चलाने के िलए िगरवी रखी जा रह थीं। और इस पूरे
अरसे के दौरान वह उ मीद करती रह क उसक आ ाज़ वा पस लौट आयेगी।
इस बीच हम तीन आरामदायक कमर के मकान म से दो कमर के मकान म और फर एक
कमरे के मकान म िश ट हो चुके थे। हमारा सामान कम होता चला जा रहा था और हर बार
हम जस तरह के पड़ोस म रहने के िलए जाते, उसका तर नीचे आता जा रहा था।
तब वह धम क ओर मुड़ गयी थी। मुझे इसका कारण तो यह लगता है क शायद उसे
यह उ मीद थी क इससे उसक आवाज़ वा पस लौट आयेगी। वह िनयिमत प से
वे टिम

टर

ज रोड पर

ाइ ट चच जाया करती और हर इतवार को मुझे बाख के आगन

यू जक के िलए बैठना पड़ता और पादर एफ बी मेयेर क जोशीली तथा ामाई आवाज़ को

सुनना पड़ता जो िगरजे के म य भाग से िघसटते हए
ु पैर क तरह आती तीत होती। ज़ र
ह उनके भाषण म अपील होती होगी य क म अ सर मां को दबोच कर थाम लेता और
चुपके से अपने आंसू प छ डालता। हालां क इससे मुझे परे शानी तो होती ह थी।
मुझे अ छ तरह से याद है उस गम दोपहर म प व

ाथना सभा क जब वहां भीड़

म से चांद का एक ठं डा याला गुज़ारा गया। उस याले म वा द अंगूर का रस भरा हआ

था। मने उसम से ढे र सारा जूस पी िलया था और मां का मुझे रोकता-सा वह नम नरम हाथ
और तब मने कतनी राहत महसूस क थी जब फादर ने बाइबल बंद क थी। इसका मतलब
यह था क अब ाथनाएं शु ह गी और ईश वंदना के अंितम गीत गाये जायगे।
मां जब से धम क शरण म गयी थी, वह िथयेटर क अपनी स खय से कभी-कभार ह
िमल पाती। उसक वह दिनया
अब छू मंतर हो चुक थी और उसक अब याद ह बची थीं।

ऐसा लगता था मानो हम हमेशा से ह इस तरह के दयनीय हालात म रहते आये थे। बीच का
एक बरस तो तकलीफ के पूरे जीवन काल क तरह लगा था। हम अब बेरौनक धुंधलके कमरे
म रहते थे। काम-धाम तलाशना बहत
ू था और मां को टे ज के अलावा कुछ आताु ह दभर
जाता नह ं था, इससे उसके हाथ और बंध जाते थे। वह छोटे कद क , लािल य िलये भावुक

म हला थी। वह व टो रयन युग क ऐसी भयंकर वकट प र थितय से जूझ रह थी जहां
अमीर और गर बी के बीच बहत
ु बड़ खाई थी। गर ब-गुरबा औरत के पास हाथ का काम

करने, मेहनत मजूर करने के अलावा और कोई चारा नह ं था या फर थी दकान
वगैरह म

हाड़-तोड़ गुलामी। कभी-कभार उसे निसग का काम िमल जाता था ले कन इस तरह के काम
भी बहत
होते और ये भी बहत

ु दलभ
ु ह कम अरसे के िलए होते। इसके बावजूद वह कुछ न
कुछ जुगाड़ कर ह लेती। वह िथयेटर के िलए अपनी पोशाक खुद सीया करती थी इसिलए

सीने- परोने के काम म उसका हाथ बहत
ु अ छा था। इस तरह से वह चच के लोग क कुछ

पोशाक सी कर कुछे क िशिलंग कमा ह लेती थी। ले कन ये कुछ िशिलंग हम तीन के गुज़ारे

23

के िलए नाकाफ होते। पता जी क दा खोर के कारण उ ह िथयेटर म काम िमलना
अिनयिमत होता चला गया और इस तरह हर ह ते िमलने वाला उनका दस िशिलंग का
भुगतान भी अिनयिमत ह रहता।
मां अब तक अपनी अिधकांश चीज़ बेच चुक थी। सबसे आ खर म बकने के िलए
जाने वाली उसक वो पेट थी जसम उसक िथयेटर क पोशाक थीं। वह इन चीज़ को अब
तब इसिलए अपने पास संभाल कर रखे हए
ु थी क शायद कभी उसक आवाज़ वा पस लौट
आये और उसे फर से िथयेटर म काम िमलना शु हो जाये। कभी-कभी वह ं क के भीतर

झांकती क शायद कुछ काम का िमल जाये। तब हम कोई मुड़ -तुड़ पोशाक या वग दे खते तो
उससे कहते क वह इसे पहन कर दखाये। मुझे याद है क हमारे कहने पर उसने जज क एक
टोपी और गाउन पहने थे और अपनी कमज़ोर आवाज़ म अपना एक पुराना सफल गीत

सुनाया था। ये गीत उसने खुद िलखा था। गीत के बोल तुकबंद िलये हए
ु थे और इस तरह से
थे:

म हंू एक म हला जज

और म हंू एक अ छ जज

मामल के फैसले करती ईमानदार से
पर आते ह नह ं मामले पास मेरे
म िसखाना चाहती हंू वक ल को
एकाध काम क बात

या नह ं कर सकती औरत जात।
आ यजनक तर के से तब वह ग रमापूण लगने वाले नृ य क भंिगमाएं दखाने
लगती। वह तब कसीदाकार भूल जाती और हम अपने पुराने सफल गीत से और नृ य से
तब तक खुश करती रहती जब तक वह थक कर चूर न हो जाती और उसक सांस न उखड़ने
लगती। तब वह बीती बात याद करने लगती और हम अपने नाटक के कुछ पुराने पो टर
दखाती। एक पो टर इस तरह से था:
खासो-खास दशन
नाज़ुक और ितभा स प न
िलली हाल
ग भीर हा य क दे वी,
बहु पन और नतक

24

जब वह हमारे सामने दशन करती तो वह अपने खुद के मनोरं जक अंश तो दखाती
ह , दसर
अिभने य क भी नकल दखाती ज ह उसने तथाकिथत वैध िथयेटर म काम

करते दे खा था।

कसी नाटक को सुनाते समय वह अलग-अलग अंश का अिभनय करके दखाती।
उदाहरण के िलए द' साइन ऑफ द'

ॉस' म मिसया अपनी आंख म अलौ कक काश भरे ,

शेर को खाना खलाने के िलए मांद वाले पंजरे म जाती है । वह हम व सन बैरट क ऊंची
पोप जैसी आवाज म नकल करके दखाती। वह छोटे कद का आदमी था इसिलए पांच इं च
ऊंची ह ल वाले जूते पहन कर घोषणा करता:"यह ईसाइयत या है , म नह ं जानता ले कन म
इतना ज़ र जानता हंू क.. क य द ईसाइयत ने मिसया जैसी औरत बनायी ह तो रोम, नह ं,
जगत ह इसके िलए प व तम होगा।" इस अंश को हा य क झलक के साथ करके दखाती
ले कन उसम बैरेट क
जन य

ितभा के ित सराहना भाव ज र होता।

य म वा त वक ितभा थी, उ ह पहचानने, मान दे ने म उसका कोई

सानी नह ं था। चाहे फर वह नाियका ऐलेन टे र हो, या यू जक हॉल क जो ए वन, वह
उनक कला क या या करती। वह तकनीक क बार क जानकार रखती थी और िथयेटर के
बारे म ऐसे य

क तरह बात करती थी जो िथयेटर को यार करने वाले ह कर सकते ह।

वह अलग-अलग क से सुनाती और उनका अिभनय करके दखाती। उदाहरण के िलए, वह
याद करती स ाट नेपोिलयन के जीवन का कोई संग : दबे पांव अपने पु तकालय म कसी
कताब क तलाश म जाना और माशल नेय ारा रा ते म घेर िलया जाना। मां ये दोन ह
भूिमकाएं अदा करती ले कन हमेशा हा य का पुट ले कर, "महाशय, मुझे इजाज़त द जये क
म आपके िलये ये कताब ला दं ।ू मेरा कद ऊंचा है ।" और नेपोिलयन यह कहते हए
ु खफ़ा होते
हए
ु गुराया "ऊंचा या ल बा?"
मां नेल

वन का व तार से अिभनय करके बताती क वह कस तरह से महल क

सी ढ़य पर झुक हई
ु है और उसक ब ची उसक गोद म है । वह चा स II को धमक दे रह

है ,"इस ब ची को कोई नाम दो वरना म इसे ज़मीन पर पटक दं ग
ू ी।" और स ाट चा स हड़बड़
म सहमत हो जाते ह, "ठ क है , ठ क है , द' डÎक ऑफ अ बांस।"
मुझे ओ ले

ट म तहखाने वाले एक कमरे के घर क वह शाम याद है । म बुखार

उतरने के बाद ब तर पर लेटा आराम कर रहा था। िसडनी रात वाले कूल म गया हआ
ु था

और मां और म अकेले थे। दोपहर ढलने को थी। मां खड़क से टे क लगाये यू टे टामट पढ़
रह थी, अिभनय कर रह थी, और अपने अतुलनीय तर के से उसक या या कर रह थी। वह
गर ब और मासूम ब च के ित यीशू मसीह के ेम और दया के बारे म बता रह थी। शायद
उसक संवेदनाएं मेरे बुखार के कारण थीं, ले कन उसने जस शानदार और मन को छू लेने
वाले ढं ग से यीशू के नये अथ समझाये वैसे मने न तो आज तक सुने और न ह दे खे ह ह। मां

25

उनक स ह णुत ा और समझ के बारे म बता रह थी; उसने उस म हला के बारे म बताया
जससे पाप हो गया था और उसे भीड़ ारा प थर मार कर सज़ा द जानी थी, और उनके ित
यीशू के श द "आप म से जसने कभी पाप न कया हो वह आगे आ कर सबसे पहला प थर
मारे ।"
सांझ का धुंधलका होने तक वह पढ़ती रह । वह िसफ लै प जलाने क िलए ह उठ ।
तब उसने उस व ास के बारे म बताया जो यीशू मसीह ने बीमार म जगाया था। बीमार को
बस, उनके चोगे क तुरपन को ह छूना होता था और वे चंगे हो जाते थे।
मां ने बड़े -बड़े पाद रय और म हला पाद रय क घृणा के बारे म बताया और बताया
क कस तरह से यीशू मसीह को िगर तार कया गया था और वे कस तरह से प टयस के
सामने शांत बने रहे थे। प टयस ने हाथ धोते हए
ु कहा था (मां ने बहत
ु ह शानदार अिभनय

करके ये बताया)," मुझे इस आदमी म कोई खराबी ह नज़र नह ं आती।" तब मां ने बताया क
कस तरह से उन लोग ने यीशू को िनव

कर डाला था और उसे ज़लील कया था और उसके

िसर पर कांट का ताज पहना दया था, उसका मज़ाक उड़ाया था और उसके मुंह पर ये कहते
हए
ु थूका था, "ओ यहू दय के राजा ..।"

जब वह ये सब सुना रह थी तो उसके गाल पर आंसू ढरके चले आ रहे थे। मां ने

बताया क कस तरह से साइमन ने

ॉस ढोने म यीशू मसीह क मदद क थी और कस तरह

भाव व ल हो कर यीशू ने उसे दे खा था। मां ने बाराबास के बारे म बताया जो प ातापी था
और

ॉस पर उनके साथ ह मरा था। वह

मेरे साथ वग म होवोगे", और

मा मांग रहा था और यीशू कह रहे थे, "आज तुम

ॉस से अपनी मां क ओर दे खते हए
ु यीशू ने कहा था, "मां,

अपने बेटे को दे खो।" और उनके अंितम, मरते व
आपने मुझे

क पीड़ा भर कराह, "मेरे परम पता,

मा य नह ं कया?"

और हम दोन रो पड़े थे।
"तुमने दे खा", मां कह रह थी, "वे मानवता से कतने भरे हए
ु थे। हम सब क तरह

उ ह भी संदेह झेलना पड़ा।"

मां ने मुझे इतना भाव व ल कर दया था क म उसी रात मर जाना और यीशू से
िमलना चाहता था। ले कन मां इतनी उ सा हत नह ं थी, "यीशू चाहते ह क पहले तुम जीओ
और अपने भा य को यह ं पूरा करो।" उसने कहा था। ओ ले

ट के उस तहखाने के उस

अंधेरे कमरे म मां ने मुझे उस योित से भर दया था जसे व

ने आज तक जाना है और

जसने पूर दिनया
को एक से बढ़ कर एक कथा त व वाले सा ह य और नाटक दये ह: यार,

दया और मानवता।

हम समाज के जस िन नतर तर के जीवन म रहने को मज़बूर थे वहां ये सहज
वाभा वक था क हम अपनी भाषा-शैली के तर के ित लापरवाह होते चले जाते ले कन मां

26

हमेशा अपने प रवेश से बाहर ह खड़ हम समझाती और हमारे बात करने के ढं ग, उ चारण
पर यान दे ती रहती, हमारा याकरण सुधारती रहती और हम यह महसूस कराती रहती क
हम खास ह।
हम जैस-े जैसे और अिधक गर बी के गत म उतरते चले गये, म अपनी अ ानता के
चलते और बचपने म मां से कहता क वह फर से टे ज पर जाना शु

य नह ं कर दे ती। मां

मु कुराती और कहती क वहां का जीवन नकली और झूठा है और क इस तरह के जीवन म
रहने से हम ज द ह ई र को भूल जाते ह। इसके बावज़ूद वह जब भी िथयेटर क बात करती
तो वह अपने आपको भूल जाती और उ साह से भर उठती। याद क गिलय म उतरने के
बाद वह फर से मौन के गहरे कूंए म उतर जाती और अपने सुई धागे के काम म अपने
आपको भुला दे ती। म भावुक हो जाता य क म जानता था क हम अब उस शानो-शौकत

वाली ज़ंदगी का ह सा नह ं रहे थे। तब मां मेर तरफ दे खती और मुझे अकेला पा कर मेरा
हौसला बढ़ाती।
स दयां िसर पर थीं और िसडनी के कपड़े कम होते चले जा रहे थे। इसिलए मां ने
अपने पुराने रे शमी जैकेट म से उसके िलए एक कोट सी दया था। उस पर काली और लाल
धा रय वाली बांह थीं। कंधे पर ली स थी और मां ने पूर कोिशश क थी क उ ह कसी तरह
से दरू कर दे ले कन वह उ ह हटा नह ं पा रह थी। जब िसडनी से वह कोट पहनने के िलए
कहा गया तो वह रो पड़ा था," कूल के ब चे मेरा ये कोट दे ख कर या कहगे?"

"इस बात क कौन परवाह करता है क लोग या कहगे?" मां ने कहा था,"इसके
अलावा, ये कतना खास क म का लग रहा है ।" मां का समझाने-बुझाने का तर का इतना
शानदार था क िसडनी आज दन तक नह ं समझ पाया है क वह मां के फुसलाने पर वह कोट
पहनने को आ खर तैयार ह कैसे हो गया था। ले कन उसने कोट पहना था। उस कोट क
वजह से और मां के ऊंची ह ल के स डल को काट-छांट कर बनाये गये जूत से िसडनी के
कूल म कई झगड़े हए।
ु उसे सब लड़के छे ड़ते,"जोसेफ और उसका रं ग बरं गा कोट।" और म,

मां क पुरानी लाल ल बी जुराब म से काट-कूट कर बनायी गयी जुराब (लगता जैसे उनम
लीट डाली गयी ह।) पहन कर जाता तो ब चे छे ड़ते,"आ गये सर

ांिसस े क।"

इस भयावह हालात के चरम दन म मां को आधी सीसी िसर दद क िशकायत शु
हई।
ु उसे मज़बूरन अपना सीने - परोने का काम छोड़ दे ना पड़ा। वह कई-कई दन तक अंधेरे
कमरे म िसर पर चाय क प य क प टयां बांधे पड़ रहती। हमारा व

खराब चल रहा था

और हम िगरजा घर क खैरात पर पल रहे थे, सूप क टकट के सहारे दन काट रहे थे और
मदद के िलए आये पासल के सहारे जी रहे थे। इसके बावजूद, िसडनी कूल के घंट के बीच
अखबार बेचता, और बेशक उसका योगदान ऊंट के मुंह म जीरा ह होता, ये उस खैरात के

27

सामान म कुछ तो जोड़ता ह था। ले कन हर संकट म हमेशा कोई न कोई लाइमे स भी
छुपा होता है । इस मामले म ये लाइमे स बहत
ु सुखद था।

एक दन जब मां ठ क हो रह थी, चाय क प ी क प ट अभी भी उसके िसर पर बंधी

थी, िसडनी उस अंिधयारे कमरे म हांफता हआ
ु आया और अखबार ब तर पर फकता हआ

िच लाया,"मुझे एक बटु आ िमला है ।" उसने बटु आ मां को दे दया। जब मां ने बटु आ खोला तो
उसने दे खा, उसम चांद और सोने के िस के भरे हए
ु थे। मां ने तुरंत उसे बंद कर दया और
उ ेजना से वा पस अपने ब तर पर ढह गयी।

िसडनी अखबार बेचने के िलए बस म चढ़ता रहता था। उसने बस के ऊपर त ले पर
एक खाली सीट पर बटु आ पड़ा हआ
ु दे खा। उसने तुरंत अपने अखबार उस सीट के ऊपर िगरा
दये और फर अखबार के साथ पस भी उठा िलया और तेजी से बस से उतर कर भागा। एक

बड़े से हो डग के पीछे , एक खाली जगह पर उसने बटु आ खोल कर दे खा और उसम चांद और
तांबे के िस क का ढे र पाया। उसने बताया क उसका दल ब लय उछल रहा था और वह
बना पैसे िगने ह घर क तरफ भागता चला आया।
जब मां क हालत कुछ सुधर तो उसने बटु ए का सारा सामान ब तर पर उलट दया।
ले कन बटु आ अभी भी भार था। उसके बीच म भी एक जेब थी। मां ने उस जेब को खोला और
दे खा क उसके अंदर सोने के सात िस के छुपे हए
ु थे। हमार खुशी का ठकाना नह ं था। ई र
का लाख-लाख शु

क बटु ए पर कोई पता नह ं था। इसिलए मां क झझक थोड़ कम हो

गयी थी। हालां क उस बटु ए के मािलक के दभा
ु य के ित थोड़ा-सा अफसोस जताया गया था,
अलब ा, मां के व ास ने तुरंत ह इसे हवा दे द क ई र ने इसे हमारे िलए एक वरदान के
प म ऊपर से भेजा है ।
मां क बीमार शार रक थी अथवा मनोवै ािनक, म नह ं जानता। ले कन वह एक
ह ते के भीतर ह ठ क हो गयी। जैसे ह वह ठ क हई
ु , हम छु ट मनाने के िलए समु के

ण तट पर चले गये। मां ने हम ऊपर से नीचे तक नये कपड़े पहनाये।

पहली बार समु को दे ख म जैसे पागल हो गया था। जब म उस प ाड़ गली म तपती दोपहर
म समु के पास पहंु चा तो म ठगा-सा रह गया। हम तीन ने अपने जूते उतारे और पानी म
छप-छप करते रहे । मेरे तलुओं और मेरे टखन को गुदगुदाता गुनगुना समु का पानी और
मेरे पैर के तले से सरकती नम, नरम और भुरभुर रे त.. मेरे आनंद का ठकाना नह ं था।
वह दन भी या दन था। केसर रं ग का समु तट, उसक गुलाबी और नीली
डोलिचयां और उस पर लकड़ के बेलचे। उसके सतरं गी तंबू और छत रयां, लहर पर इतराती
क तयां, और ऊपर तट पर एक तरह करवट ले कर आराम फरमाती क तयां जनम समु
सेवार क गंध रची-बसी थी और वे तट। इन सबक याद अभी भी मेरे मन म चरम उ ेजना से
भर हई
ु लगती ह।

28

1957 म म दोबारा साउथ एंड तट पर गया और उस संकर पहाड़ गली को खोजने का
िन फल यास करता रहा जससे मने समु को पहली बार दे खा था ले कन अब वहां उसका
कोई नामो-िनशान नह ं था। शहर के आ खर िसरे पर वह जो कुछ था, पुराने मछुआर के
गांव के अवशेष ह द ख रहे थे जसम पुराने ढब क दकान
नजर आ रह थीं। इसम अतीत क

धुंधली सी सरसराहट छुपी हई
ु थी। शायद यह समु

सेवार क और टार क महक थी।

बालू घड़ म भर रे त क तरह हमारा खज़ाना चुक गया। मु कल समय एक बार फर

हमारे सामने मुंह बाये खड़ा था। मां ने दसरा
रोज़गार ढंू ढने क कोिशश क ले कन कामकाज

कह ं था ह नह ं। क त क अदायगी का व

हो चुका था। नतीजा यह हआ
क मां क

िसलाई मशीन उठवा ली गयी। पता क तरफ से जो हर ह ते दस िशिलंग क रािश आती थी,
वह भी पूर तरह से बंद हो गयी।
हताशा के ऐसे व

म मां ने दसरा
वक ल करने क सोची। वक ल ने जब दे खा क

इसम से मु कल से ह वह फ स भर िनकाल पायेगा, तो उसने मां को सलाह द क उसे

लै बेथ के द तर के ािधका रय क मदद लेनी चा हये ता क अपने और अपने ब च के
पालन-पोषण के िलए पता पर मदद के िलए दबाव डाला जा सके।
और कोई उपाय नह ं था। उसके िसर पर दो ब च को पालने का बोझ था। उसका खुद का
वा

य खराब था। इसिलए उसने तय कया क हम तीन लै बेथ के यतीम खाने

(वकहाउस) म भरती हो जाय।

29

दो
हालां क हम यतीम खाने यानी वकहाउस म जाने क ज़ लत के बारे म जानते थे
ले कन जब मां ने हम वहां के बारे म बताया तो िसडनी और मने सोचा क वहां रहने म कुछ
तो रोमांच होगा ह और कम से कम इस दमघ टू कमरे म रहने से तो छुटकारा िमलेगा।
ले कन उस तकलीफ से भरे दन म इस बात क क पना भी नह ं कर सकता था क या होने
जा रहा है जब तक हम सचमुच यतीम खाने के गेट तक पहंु च नह ं गये। तब जा कर उसक
दखदायी
द ु वधा का हम पता चला। वहां जाते ह हम अलग कर दया गया। मां एक तरफ

म हलाओं वाले वाड क तरफ ले जायी गयी और हम दोन को ब च वाले वाड म भेज दया
गया।
म मुलाकात के पहले ह दन क दल को छू लेने वाली उदासी को भला कैसे भूल
सकता हंू । यतीम खाने के कपड़ म िलपट मां को मुलाकाितय के कमरे क ओर जाते हए

दे खना। वह कतनी बेचार और परे शान हाल दखायी दे रह थी। एक ह स ाह म उसक उ
यादा नज़र आने लगी थी और वह दब
ु ला गयी थी। ले कन उसका चेहरा हम दे खते ह

दमकने लगा था। िसडनी और म रोने लगे जससे मां को भी रोना आ गया और उसके गाल
पर बड़े -बड़े आंसू ढरकने लगे । आ खर उसने अपने आप को संभाला और हम तीन एक
खुरदर बच पर जा बैठे। हम दोन के हाथ उसक गोद म थे और वह धीरे -धीरे उ ह थपका रह
थी। वह हमारे घुटे हए
ु िसर दे ख कर मु कुरायी और जैसे सां वना दे ते हए
ु थप कयां सी दे ने

लगी। हम बताने लगी क हम ज द ह एक बार फर एक साथ रहने लगगे। अपने लबादे म
से उसने ना रयल क एक कड िनकाली जो उसने एक नस के कफ को लेस लगा कर कमाये
पैस से खर द थी। जब हम अलग हए
ु तो िसडनी लगातार भरे मन से उससे कहता रहा क
उसक उ

कतनी यादा लगने लगी है ।

िसडनी और मने ज द ह अपने आपको यतीम खाने के माहौल के हसाब से ढाल
िलया ले कन उदासी क काली छाया हमेशा हमारे ऊपर मंडराती रहती थी। मुझे बहत
ु ह कम
घटनाएं याद ह ले कन दसरे
ू ब च के साथ एक ल बी-सी मेज पर बैठ कर दोपहर का भोजन

करना अ छा लगता था और हम इसक राह दे खा करते थे। इसका मु खया यतीम खाने का ह
एक िनवासी हआ
ु करता था। यह य

पचह र बरस का एक बूढ़ा आदमी था। उसका चेहरा

ग भीरता ओढ़े रहता था। उसक दाढ़ सफेद थी और उसक आंख म उदासी भर होती थी।
उसने मुझे अपने पास बैठने के िलए चुना य क म ह वहां सबसे छोटा था और जब तक उन
लोग ने मेरे िसर क घुटाई नह ं कर द , मेरे बहत
ु ह सुंदर घुंघराले बाल हआ
ु करते थे। बूढ़ा
आदमी मुझे अपना "शेर" कहा करता था और बताता क जब म बड़ा हो जाऊंगा तो म एक

टॉप है ट लगाया क ं गा और उसक गाड़ म पीछे हाथ बांधे बैठा क ं गा। वह मुझे जस तरह
का नेह दे ता, म उसे बहत
ु पसंद करने लगा था। ले कन अभी एकाध दन ह बीता था क

30

वहां एक और छोटा-सा लड़का आया और उस बूढ़े के पास मेर वाली जगह पर बैठने लगा।
ले कन जब मने पूछा तो उसने मौज म आ कर बताया क हमेशा छोटे और घुंघराले बाल वाले
लड़के को ह वर यता द जाती है ।
तीन स ाह के बाद हम लै बेथ यतीम खाने से यतीम और असहाय के हॉनवैल
कूल म भेज दया गया। ये कूल लंदन से कोई बारह मील दरू था। घोड़

ारा खींची जाने

वाले बेकर वैन म यह बहत
ु ह रोमांचकार या ा थी और इन प र थितय म सुखद भी

य क हॉनवैल के आस-पास का नज़ारा उन दन बहत
ु ह खूबसूरत हआ
ु करता था। वहां

शाहबलूत के दर त थे, पकते गेहूं से भरे खेत थे और फल से खूब लदे फलो ान थे; और तब
से खुले इलाक म बरसात के बाद क खूब तेज़ और माट क स धी-स धी खुशबू मुझे हमेशा
हॉनवैल क याद दला जाती है ।

वहां पहंु चने पर हम अनुमित वाले वाड के हवाले कर दया गया और विधवत कूल

म डालने से पहले हम डा टर और मानिसक िनगरानी म रखा गया। इसका कारण ये था क
तीन या चार सौ ब च म अगर एक भी ऐसा ब चा आ गया जो सामा य न हो या बीमार
वगैरह हो तो ये कूल के वा

य के िलए खराब होता ह , खुद ब चे को भी वकट हालत से

गुज़रना पड़ सकता था।
शु के कुछ दन तक तो म खोया-खोया सा रहा। मेर हालत बहत
ु ह खराब थी।

इसका कारण यह था क यतीम खाने म तो मां को म हमेशा अपने आस-पास महसूस करता
था और इससे मुझे बहत
ु सुकून िमलता था ले कन हॉनवैल म आने के बाद यह लगता क

हम एक दसरे
ू से मील दरू हो गये ह। िसडनी और मेरा दजा बढ़ा दया गया और हम अनुमित
वाले वाड से िनकाल कर विधवत कूल म डाल दया गया। यहां हम एक दसरे
ू से अलग कर
दया गया। िसडनी बड़े ब च के साथ जाने लगा और म िशशुओं के साथ। हम अलग-अलग
लाक म सोते थे और एक-दसरे
ू से कभी-कभार ह िमल पाते। मेर उ

छ: बरस से कुछ ह

यादा थी और म तनहा था। ये बात मुझे खासी परे शान करती। खास तौर पर गिमय क

रात, सोते समय ाथना करते समय जब म रात के सोने क कमीज पहने वाड के बीच -बीच
दसरे
ू बीस न ह मु ने ब च के साथ घुटन के बल झुक कर ाथना करता और दरू डू ब ते सूय
को और ऊंची नीची पहा ड़य क तरफ ल बोतर खड़क म से दे खता और जब हम सब

भराये गले से बेसुर आवाज़ म गाते तो म अपने आपको इससे सब से अलग-थलग पाता।
साथ दो मेरा; रात तेजी से गहराती है
अंिधयार होता जाता है घना: भु साथ दो मेरा
जब और मददगार रह जाय पीछे और आराम हो जाये द ु ार
ओ िनबल के बल, साथ दो मेरा

31

ये तभी होता क म अपने-आपको पूर तरह हताश पाता। हालां क म ाथना के बोल
नह ं समझता था, ले कन ये धुन और धुंधलका मुझे उदासी से भर जाते।
ले कन तब हमार खुशी और आ य का ठकाना न रहा जब दो मह ने के भीतर ह मां
ने हमार रहाई का बंदोब त कर दया था और हम एक बार फर से लंदन और लै बेथ यतीम
खाने म भेज दया गया। मां यतीम खाने के गेट पर अपने खुद के कपड़े पहने हमार राह दे ख
रह थी। उसने रहाई के िलए आवेदन िसफ इसीिलए दया था क वह एक दन अपने ब च
के साथ गुज़ारना चाहती थी और उसक इ छा थी क दो-चार घंटे बाहर गुज़ार कर फर उसी
दन वा पस लौट आये। मां चूं क यतीम खाने म ह रह रह थी इसिलए यह पंच ह एक मा
तर का बचा था उसके पास क दन हमारे साथ गुज़ार सके।
हमारे भीतर जाने से पहले ह हमारे िनजी कपड़े हमसे ले िलये गये थे और उ ह गम

पानी म खंगाल दया गया था। अब ये कपड़े हम बना इ ी कये लौटा दये गये। जब हम

यतीम खाने के गेट से बाहर िनकले तो मां, िसडनी और म, तीन ह मुचड़े हए
ु कपड़ म नमूने
नज़र आ रहे थे। एकदम सुबह का व

था और हम कह ं भी नह ं जाना था इसिलए हम

केिनंगटन पाक क तरफ चल दये। पाक तकर बन एक मील दरू था। िसडनी के पास नौ पस
थे जो उसने माल म गांठ बांध कर रखे हए
ु थे। इसिलए हमने आधा प ड लैक चेर ली और
पूर सुबह पाक म एक बच पर बैठ कर चेर खाते हए
ु गुज़ार द । िसडनी ने अखबार के पुराने

कागज को मोड़-तोड़ कर उसे सुतली से कस कर बांध दया और हम तीन काफ दे र तक इस
काम चलाऊ गद से पकड़ा-पकड़ खेलते रहे । दोपहर के व

हम एक कॉफ शॉप म गये और

अपने बाक सारे पैस से दो पेनी का केक, एक पैनी क सूखी, नमक लगी मछली और अध
पेनी क दो कप चाय खर द कर खच कर डाले। हमने ये चीज़ िमल बांट कर खायीं। इसके बाद
हम फर पाक म वा पस लौट आये। इसके बाद म और िसडनी फर से खेलते रहे और मां
ोिशया ले कर बैठ गयी।
दोपहर के व

हम वा पस यतीम खाने क तरफ चल दये य क मां बहत
ु ह

बेशरमी से बोली क हम चाय के व

तक ज़ र पहंु च जायगे। वहां के अफसर लोग बहत
ु ह

खड़ू स थे य क इसका मतलब होता क हम फर से उन सार

याओं से गुज़रना पड़ता।

हमारे कपड़े गम पानी म खंगाले जाते और िसडनी और मुझे हॉनवैल लौटने से पहले यतीम
खाने म और व

गुज़ारना पड़ता। हां, इससे हम मां से एक बार फर िमलने का मौका िमल

जाता।
ले कन इस बार हम हॉनवैल म लगभग एक बरस तक रहे । यह बरस बहत
ु ह

रचना मक था। मने कूल जाना शु

कया और मुझे अपना नाम िलखना िसखाया गया,"

चै लन।" ये श द मुझे बहत
ु आक षत करते और मुझे लगता - ये ठ क मेर ह तरह ह।

32

हॉनवैल कूल दो ह स म बंटा हआ

ु था। एक ह सा लड़क के िलए था और दसरा

लड़ कय के िलए। शिनवार क दोपहर नानघर न ह मु न के िलए आर
लड़ कयां उ ह नहलाती। हां, ये बात उस व

त रहता और बड़

से पहले क ह जब म सात बरस का नह ं हआ

था। और एक तरह क नाज़ुक िमज़ाजी वाली ल जा इस तरह के अवसर के साथ जुड़ रहती।
चौदह बरस क युवा लड़क मेरे पूरे शर र पर तौिलया रगड़ रह हो तो झप तो होनी ह थी।
सचेत झप के ये मेरे पहले मौके थे।
सात बरस क उ

म मुझे न ह मु ने ब च के वाड म से थानांत रत करके बड़े

ब च के वाड म भेज दया गया। यहां ब च क उ

सात से चौदह बरस के बीच थी। अब म

बड़े ब च क सभी गित विधय म भाग ले सकता था।

ल, ए सरसाइज और ह ते म दो

बार कूल के बाहर हम िनयिमत प से सैर को जाते।

हालां क हॉनवेल म हमार अ छ तरह से दे खभाल क जाती थी ले कन फर भी

माहौल पर मुदनगी छायी रहती। वहां क हवा म ह उदास थी। उन गांव क गिलय म से हम
सैकड़ ब चे एक के पीछे एक चलते। म सैर के उन अवसर को कतना अिधक नापसंद करता
था, और उन गांव को, जन म से हम गुज़र कर जाया करते थे, उन थानीय लोग का हम
घूर-घूर कर दे खना। हम 'बूबी है च के बािशंदे' के नाम से पुकारा जाता था। ये यतीम खाने के
िलए बोलचाल का श द था।
ब च के खेल का मैदान लगभग एक एकड़ ल बा-चौड़ा था। इसम ल बे-चौड़े प थर
जड़े हए
ु थे। इसके चार तरफ एक मं जला ट क इमारत थीं जनम द तर, भंडार घर,
डॉ टर का एक औषधालय, दांत के डॉ टर का कमरा और ब च के कपड़ के िलए

अ मा रयां थीं। अहाते के आ खर िसरे पर एक अंधेरा कमरा था। उसम इन दन चौदह बरस
के एक छोकरे को बंद करके रखा गया था। लड़क के अनुसार वह लड़का आफत क पु ड़या
था। एक गया गुज़रा च र । उसने दसर
मं ज़ल क खड़क से कूद कर कूल से भाग जाने

क कोिशश क थी और वहां से छत पर चढ़ गया था। जब टाफ के लोग उसके पीछे चढ़े तो
उसने उन पर चीज़ फक कर मारनी शु कर द ं और उन पर शाहबलूत फके। ये क सा तब
हआ
ु जब हम न ह-मु ने सो रहे थे। अगली सुबह हम इस क से का पूरा का पूरा हसाबकताब बड़े ब च ने सुनाया था।

इस तरह क बड़ हरकत के िलए हर शु वार को बड़े वाले जमनािशयम म दं ड िमला
करता था। ये एक साठ फुट ल बा और चालीस फुट चौड़ा अंिधयारा-सा हॉल था। इसक छत
ऊंची थी और ऊपर क क ड़य तक र सयां लटक हई
ु थीं। शु वार क सुबह, सात से चौदह
बरस के बीच क उ
आते, और

के दो या तीन सौ ब चे वेश करते और वे िमिलटर के जवान क तरह

वायर के तीन तरफ खड़े हो जाते। सबसे दरू वाले िसरे पर, यानी चौथी तरफ

एक ल बी-सी कूली मेज के पीछे शरारती ब चे अपने-अपने अपराध क सज़ा सुनने और

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सज़ा पाने के िलए एक होते। ये मेज आम वाल क खाने क मेज जतनी ल बी थी। डे क
के सामने तथा दायीं तरफ एक ईज़ल थी जस पर हाथ म बांधने वाले

ै प लटकते रहते और

े म से एक टहनी झूलती रहती।
छोटे -मोटे अपराध के िलए ब चे को ल बी मेज पर िलटा दया जाता। ब चे का चेहरा
नीचे क तरफ होता और उसके पैर एक साजट प ट से कस दे ता। तब दसरा
साजट आता

और ब चे क कमीज को उसक पतलून म से खींच कर बाहर िनकाल दे ता और उसके िसर के
ऊपर क तरफ कर दे ता, और उसक पतलून को कस कर खींचता।
एक थे कै टन ह

म। नेवी से रटायर हए
ु श स। वजन उनका रहा होगा कोई दो सौ

प ड। उनका एक हाथ पीछे रहता और दसरे
ू हाथ म वे मारने के िलए छड़ थामे रहते। छड़ क
मोटाई होती हाथ के अंगूठे के बराबर और ल बाई कोई चार फुट। वे तन कर खड़े हो जाते।

वे छड़ को लड़के के चूतड़ के आर-पार नापते, और तब हौले से और पूर नाटक यता

के साथ वे छड़ ऊपर उठाते और एक सड़ाक के साथ लड़के के चूतड़ पर पड़ती। नज़ारा दल
दहला दे ने वाला होता और िन

त प से लड़का बेहोश हो कर नीचे िगर जाता।

पटाई के िलए कम से कम तीन छ ड़य का और अिधकतम छ: का ावधान था। य द दोषी
को तीन से यादा छ ड़य क मार पड़ती तो उसक चीख दल दहला दे ने वाली होतीं। कई बार
ऐसा भी होता क वह आ यजनक प से शांत रहता या बेहोश ह हो चुका होता। ये मार
आदमी को अधमरा कर दे ने वाली होती इसिलए िशकार को तो अ सर ह एक तरफ ले जाना
पड़ता और उसे जमनािशयम म ले जा कर िलटाना पड़ता, जहां उसे दद कम होने तक कम से
कम दस िमनट तक ितलिमलाना और दद के मारे ऐंठना पड़ता था। दद कम होने पर उसके
चूतड़ पर धोबन क उं गिलय क तरह तीन चौड़ धा रयां बन चुक होतीं।
भूज का मामला अलग था। तीन सं टयां खाने के बाद लड़के को दो साजट सहारा कर
इलाज के िलए सजर म ले जाते।
लड़के यह सलाह दे ते क कोई भी आरोप लगने पर मना मत करो, बेशक आप
िनरपराध ह , य क दोष िस हो जाने पर आपको अिधकतम मार पड़े गी। आम तौर पर
लड़के िनद ष होने पर भी अपनी ज़ुबान नह ं खोलते थे और चुपचाप मार खा लेते थे।
अब म सात बरस का हो चला था और बड़े ब च के सै शन म था। मुझे याद है जब
मने पहली बार इस तरह क पटाई दे खी थी। म शांत खड़ा हआ
ु था और मेरा दल तेजी से

धड़कना शु हो गया जब मने अिधका रय को भीतर आते दे खा। डे क के पीछे वह जांबाज़
बहादरु था जसने कूल से भाग जाने क कोिशश क थी। डे क के पीछे से हम मु कल से

उसका िसर और कंधे ह नज़र आ रहे थे। वह एकदम प -सा नज़र आ रहा था। उसका चेहरा
पतला, ल बोतरा और आंख बड़ थीं। वह बहत
ु छोटा-सा लगता था।

धान अ यापक ने धीमे वर म आरोप प पढ़ा और पूछा,"दोषी या िनद ष?"

34

हमारे जांबाज़ ह रो ने कोई जवाब नह ं दया ले कन सीधे उनक आंख म दे खता रहा।
इसके बाद उसे ईज़ल पर ले जाया गया और चूं क वह ज़रा सा ह था, उसे साबुन क एक पेट
पर खड़ा कर दया गया ता क उसक कलाइय म प टे बांधे जा सक। उसे भूज क छड़ से
तीन बार पीटा गया और फर उसे सजर के िलए ले जाया गया।
गु वार के दन खेल के मैदान म एक बगुल बजता और हम खेलते हए
ु जहां के तहां

मूितय क तरह जड़ खड़े हो जाते। तब कै टन ह

म एक मेगाफोन के ज़ रये उन छोकर के

नाम पुकारते ज ह शु वार को दं ड भोगने के िलए हा जर होना है ।
मेर है रानी का ठकाना न रहा जब एक गु वार मेरा नाम पुकारा गया। म क पना भी
नह ं कर सकता था क मने ऐसा या कर डाला होगा। फर भी कसी नामालूम कारण से म
रोमांिचत था। शायद इसिलए क म इस नाटक के के

म होने जा रहा था। ायल के दन म

आगे क तरफ बढ़ गया। है ड मा टर ने पूछा,"तुम पर आरोप है क तुमने लै न को आग
लगायी।"

यह सच नह ं था। कुछ छोकर ने प थर के फश पर कुछ कागज जला डाले थे और
संयोग से म उस व

लै न का इ तेमाल करने के िलए वहां जा पहंु चा। ले कन आग जलाने

म मेर कोई भूिमका नह ं थी।

"तुम दोषी हो या नह ं?"
म नवस हो गया था और अपने िनयं ण से बाहर क ताकत म म िच लाया,"दोषी।"
न तो मने ाय

त महसूस कया और न ह अ याय क भावना ह महसूस क ले कन एक

तरह का भयमु

रोमांच मुझे लगा जब मुझे डे क के पास ले जाया गया और मेरे चूतड़ पर

तीन सं टयां फटकार गयीं। दद इतना जान लेवा था क मेर तो सांस ह थम गयी। ले कन म
िच लाया या रोया नह ं और हालां क म दद के मारे अधमरा हो गया था और आराम करने के
िलए चटाई पर ले जाया गया था, म अपने आपको परा म के साथ वजेता समझ रहा था।
िसडनी तो रसोई म काम कर रहा था, उस बेचारे को सज़ा के दन तक इसके बारे म
कुछ पता ह नह ं चला। और उसे दसर
के साथ जम म लाया गया तो वह मुझे सज़ा वाली

मेज पर औंधे लेटे और िसर लटकाये दे ख कर है रानी से दं ग रह गया था। उसे झटका लगा था।
उसने बाद म मुझे बताया था क जब उसने मुझे चूतड़ पर तीन बत खाते दे खा था तो वह
गु से के मारे रो पड़ा था।
छोटा भाई अपने बड़े भाई को "भैया" कहकर बुलाता था तो उसम एक तरह क गव क भावना
भर जाती थी और एक सुर ा का भी अहसास होता था। म अ सर डाइिनंग म से बाहर आते
समय अपने इस "बड़े भैया" को दे खा करता था। वह रसोई म काम करता था इसिलए अ सर
मेरे हाथ म ढे र सारे म खन के साथ एक बेड लाइस चुपके से सरका दे ता था। म इसे अपनी
जस म छुपाकर बाहर ले आता और एक अ य छोकरे के साथ िमल-बांट कर खा लेता। ऐसा

35

नह ं था क हम भूख लगी होती थी, दरअसल म खन का इतना बड़ा ल दा एक असाधारण
वलािसता क बात होती थी। ले कन यह ऐ याशी भी बहत
यादा दन तक नह ं चली य क

उसे हॉनवेल छोड़कर ए समाउथ े िनंग िशप पर जाना पड़ा।

यतीम खाने म रहने वाले लड़क को यारह बरस क उमर म वक प दया जाता था
क वे जलसेना या थलसेना, दोन म से कोई एक चुन ल। य द वह जल सेना पस द करे तो
उसे ए समाउथ पर भेज दया जाता था, हालां क यह अिनवाय नह ं था ले कन िसडनी तो
सागर क वराटता म रह कर अपना जीवन बनाना चाहता था। और एक दन वह मुझे
हॉनवेल म अकेला छोड़कर चला गया।
ब च का अपने बाल से खास तरह का जुड़ाव होता है । जब उनके बाल पहली बार
काटे जाते ह तो वे बुर तरह से रोते और छटपटाते ह। चाहे बाल घने उग, सीधे ह या घुंघराले
ह , उ ह ऐसा ह लगता है क मानो उनसे उनके य

व का कोई ह सा अलग कया जा

रहा हो।
हॉनवेल म दाद, रं गवाम क महामार फैली हई
ु थी। यह बीमार छूत क बीमार है

और बहत
ु ह तेजी से फैलती है । इसिलए जो भी ब चा इसक चपेट म आता था उसे पहली
मं जल पर एक अलग कमरे म रहना पड़ता था, जहां से खेल का मैदान नज़र आता था।

अ सर हम खड़ कय म से दे खते क वे द न-ह न ब चे बड़ हसरत भर िनगाह से हमार
ओर टकटक लगाए दे खते रहते थे। उनके घुटे हए
ु िसर पर आयो डन के भूरे चक े नजर
आते। उ ह दे खना बहत
ु ह दल दहला दे ने वाला होता और हम उनक तरफ बहत
ु ह
घृणापूवक दे खते।

इसिलए जैसे ह एक दन अचानक ह एक नस ने डाइिनंग हाल म मेरे िसर पर हाथ
रखा और बाल म उं गिलयां फराने के बाद घोषणा क क मेरे िसर म दाद हो गयी है तो म
सकते म आ गया और बु का फाड़ कर रो पड़ा।
इलाज म ह त लग गये। लगता था, समय ठहर गया है । मेरा िसर मूंड दया गया था
और म ई धुनने वाल क तरह हर समय िसर पर एक माल बांधे रहता था। बस, म एक ह
काम नह ं करता था और वो ये क कभी भी खड़क से नीचे झांक कर नीचे खड़े लड़क क
तरफ नह ं दे खता था, य क म जानता था क वे लड़के ऊपर फंसे ब च को कस हकारत
भर िनगाह से दे खते थे।
मेर बीमार के दौरान मां मुझसे िमलने आयी। उसने कुछ जुगत िभड़ा कर हम यतीम खाने से
बाहर िनकालने का रा ता िनकाल िलया था और अब हम लोग के िलए एक बार फर अपना
घर बसाना चाहती थी। उसक मौजूदगी फूल के गुलद ते क तरह थी। ताज़गी और नेह क
महक से भर हई।
ु उसे इस तरह दे ख कर मुझे अपनी गंद और बेतरतीब हालत पर और घुटे
िसर पर आयो डन लगा दे ख कर अपने आप पर शम आयी।

36

नस ने मां से कहा,"इसके गंदे मुंह क वजह से इस पर नाराज़ न ह ।"
मां हँ सी और मुझे याद है क कस तरह से ये कहते हए
ु उसने मुझे अपने सीने म भींच

िलया था और चूम िलया था,"तेर इस सार गंदगी के बावजूद म तुझे यार करती हंू मेरे
लाल।"

इसके तुरंत बाद ह िसडनी ए समाउथ पर चला गया और मने हानवेल छोड़ दया
ता क म अपनी मां के पास रह सकूं। उसने केिनंगटन रोड के पीछे वाली गली म एक कमरा
कराये पर ले िलया था और कुछ दन तक तो वह हमारा भरण-पोषण करने क हालत म रह ।
थोड़े ह दन बीते थे क हम एक बार फर यतीम खाने के दरवाजे पर खड़े थे। हमारे इस तरह
से वहां वा पस जाने के पीछे कारण ये थे क मां कोई ढं ग का रोजगार तलाश नह ं पायी थी
और िथयेटर म पता जी के दन खराब चल रहे थे। इस थोड़े से अरसे के दौरान हम पछवाड़े

क गिलय के एक कमरे से दसरे
ू कमरे म िश ट होते रहे । ये गो टय के खेल क तरह था और
अपनी आ खर चाल के बाद हमने खुद को फर से यतीम खाने म पाया।

अलग ह अलग रहते हए
ू यतीम खाने म भेज दया गया। और वहां से हम नोरवुड
ु हम दसरे
कूल भेज दया गया। यह कूल हॉनवेल के मुकाबले बेहतर था। यहां क प यां गहर हर

और दर त यादा ऊंचे थे। शायद इस ामीण इलाके म भ यता तो यादा थी ले कन
प रवेश मायूसी से भरा हआ
ु था।

एक दन क बात, िसडनी फुटबाल खेल रहा था। तभी दो नस ने उसे खेल से बाहर

बुलाया और उसे बताया क तु हार मां पागल हो गई है , उसे केन हल के पागलखाने म भेजा
गया है । िसडनी ने जब यह खबर सुनी तो कसी भी क म क

ित

या य

नह ं क और

वा पस जाकर अपने खेल म मशगूल हो गया। ले कन खेल ख म होते ह वह एक सुनसान
कोने म गया और फूट-फूट कर रोया।
िसडनी ने जब मुझे यह खबर द तो म यक़ न ह नह ं कर पाया। म रोया तो नह ं
ले कन पागल कर दे ने वाली उदासी ने मुझे घेर िलया। उसके साथ ऐसा य हआ।
माँ जो

इतनी खुशिमजाज और दल क साफ़ थी, भला पागल कैसे हो सकती है । मोटे तौर पर मने
यह सोचा क माँ ने जान-बूझ कर अपने दमाग के दरवाज़े बंद कर दये ह गे और हम
बेसहारा छोड़ दया है । म हताशा म यह क पना करने लगा क वह परे शान हाल मेर तरफ
दे ख रह है और उसके बाद शू य म घूर रह है ।
आिधका रक प से यह खबर हम एक ह ते बाद िमली। यह भी सुनने म आया क
अदालत ने पता के ख़लाफ ड

जार कर द है क उ ह िसडनी और मुझे अपनी

िनगहबानी म लेना ह होगा। पता के साथ रहने क संभावना ह उ ेजना से भर दे ने वाली थी।
मने अपनी पूर ज़ंदगी म उ ह िसफ़ दो बार ह दे खा था। एक बार मंच पर और दसर
बार

केिनंगटन रोड म एक घर के आगे से गुज़रते हए
ु जब वे ं ट गाडन के रा ते से एक म हला के

37

साथ चले आ रहे थे। म एक पल के िलए ठठका था और उनक तरफ दे खने लगा था। मुझे
पूरा यक़ न था क वे मेरे पता ह ह। उ ह ने मेर पीठ पर हाथ रखकर मुझसे मेरा नाम पूछा
था। इस प र थित क नाटक यता का अंदाज़ा लगाते हए
ु मने भोलेपन से िसहरते हए
ु कहा

था,"चाल चै लन।" तब उ ह ने जानबूझ कर उस म हला क तरफ दे खा, अपनी जेब म हाथ
डालकर कुछ टटोला और आधे

ाउन का िस का मुझे थमा दया। बगैर कुछ और सोचे म

सीधा घर क तरफ लपका और माँ को बताया क म अपने पता से िमलकर आ रहा हंू ।

और अब हम उनके साथ जाकर रहने वाले थे। कुछ भी हो, केिनंगटन रोड जानी-

पहचानी जगह थी और वहां नॉरवुड क तरह अजन बयत और मायूसी नह ं थी।
अिधकार हम एक बेकर वैन म बठा कर 287 केिनंगटन रोड ले गये। यह वह जगह
थी जहां मने अपने पता को बगीचे के रा ते से गुज़रते हए
ु दे खा था। दरवाजा एक म हला ने
खोला। यह वह म हला थी जो उस दन पता के साथ थी। वह ऐ याश और िचड़िचड़ -सी
लगने वाली औरत लगती थी। इसके बावजूद वह आकषक, ल बी और सुंदर दे हय

माल कन थी। उसके ह ठ भरे -भरे और उदास थे। आंख कबूतर जैसी थीं। उसक उ

तीस

बरस के आस-पास हो सकती थी। उसका नाम लुइस था। ऐसा तीत हआ
क िम टर चै लन

घर पर नह ं थे। ले कन सामा य कागज़ी कारवाई पूर करने और ह ता र वगैरह करने के
बाद अिधकार हम लुइस के ज मे छोड़ गये। लुइस हम ऊपर वाली मं ज़ल पर आगे वाली
बैठक म ले गयी। जब हम कमरे के भीतर पहंु चे तो एक छोटा-सा ब चा फश पर खेल रहा था।
बड़ -बड़ , गहर आंख और घने भूरे बाल वाला एक िनहायत ह खूबसूरत ब चा। ये ब चा
लुइस का बेटा था। मेरा सौतेला भाई।
प रवार दो कमर म रहता था और हालां क सामने वाला कमरा बहत
ड़ा था ले कन

उसम रौशनी ऐसे छन कर आती थी मानो पानी के नीचे से आ रह हो। सार चीज लुइस क ह
तरह मायूस नज़र आती थीं। वाल पेपर उदास नज़र आता था। घोड़े के बाल से भरा फन चर
उदासी भरा था और लास केस म पाइक मछली जो अपने ह बराबर एक और पाइक अपने
भीतर ठू ं से हए
ु थी, और उसका िसर पहले वाली के मुंह से बाहर लटक रहा था, बुर तरह से
उदास नज़र आते थे।

लुइस ने पछवाड़े वाले कमरे म िसडनी और मेरे सोने के िलए एक अित र

ब तर

लगवा दया था ले कन ये ब तर बहत
ु ह छोटा था। िसडनी ने सुझाव दया क वह बैठक म

सोफे पर सो जाया करे गा ले कन लुइस ने उसे बरज दया,"तु ह जहां सोने के िलए कहा गया
है , तुम वह ं सोवोगे।" इस संवाद से वकट मौन पसर गया और हम चुपचाप पछवाड़े वाले
कमरे क तरफ बढ़ गये।

38

हमारा जस तर के से वागत हआ
ु था, उसम लेशमा भी उ साह नह ं था। और इसम

है रानी वाली कोई बात भी नह ं थी। िसडनी और म अचानक उसके ऊपर लाद दये गये थे। वैसे
भी हम अपने पता क छोड़ गयी प ी के ह तो ब चे थे।
हम दोन चुपचाप बैठे उसे काम करते दे खते रहे । वह खाने क मेज पर कुछ तैया रयां
कर रह थी। तब उसने िसडनी से कहा,"ऐय, या िनठ ले क तरह से बैठे हो, कुछ काम-धाम
करो और इस िसगड़ म कोयले भरो।" और तब वह मेर तरफ मुड़ और कहने लगी,"और तुम
लपक कर जाओ और हाइट हाट क बगल वाली कसाई क दुकान से एक िशिलंग के छ छड़े
लेकर आओ।"
म उसक मौजूदगी और पूरे माहौल के आतंक से बाहर िनकलने पर खुश ह था
य क एक अ

य भय मेरे भीतर उगने लगा था और म चाहने लगा था क हम वा पस

नौरवुड लौट जाय।

पताजी दे र से घर वा पस आये और उ ह ने गमजोशी से हमारा वागत कया। वे
मुझे बहत
ु अ छे लगे। खाना खाते समय म उनक एक एक गित विध को यान से दे खता

रहा। वे कस तरह से खाते थे और कस तरह से चाकू को पैन क तरह पकड़ते थे और उससे
गो त क बो टयां काटते थे। और म बरस -बरस उनक नकल करता रहा।
जब लुइस ने पताजी को बताया क िसडनी यह िशकायत कर रहा था क उसका
ब तर छोटा है तो उ ह ने कहा क वह बैठक म सोफे पर सो जाया करे गा। िसडनी क जीत ने
लुइस को और भी भड़का दया और उसने िसडनी को इस बात के िलए कभी माफ नह ं कया।
वह हमेशा पताजी के कान िसडनी के खलाफ भरती रहती। लुइस हालां क अ खड़ और
िचड़िचड़ थी और हमेशा असहमत ह रहती थी ले कन उसने मुझे एक बार भी पीटा नह ं या
कभी डांटा फटकारा भी नह ं। ले कन इस बात ने क वह िसडनी को नापसंद करती है , मुझे
हमेशा डराये रखा और म उससे भय खाता रहा। वह जम के पीती थी और उसक यह बात मुझे
भीतर तक हला कर रख दे ती थी। वह अपने छोटे ब चे के मासूम चेहरे को िनहारती हई

हं सती थी और वह अपनी खराब ज़बान म उसे कुछ कहता रहता था। पता नह ं य , म उस
ब चे के साथ हल-िमल नह ं सका। वैसे तो वह मेरा सौतेला भाई था ले कन मने उससे शायद
ह कभी बात क हो, बेशक म उससे चार बरस बड़ा भी था। जब कभी भी लुइस पी कर बैठती
और क़ुड़-कुड़ करती रहती तो म भीतर तक हल जाता था। दसर
तरफ िसडनी था, उसने इन

बात पर कभी भी यान ह नह ं दया। शायद ह कोई ऐसा समय रहा हो जब वह रात म दे र

से न आया हो। मुझ पर यह बं दश थी क म कूल से सीधा ह घर आऊं और घर आते ह मुझे
तरह तरह के काम के िलए दौड़ाया जाता।
लुइस ने हम कैिनंगटन रोड के कूल म भेजा। यह मेरे िलए बाहर दिनया
का एक

छोटा-सा टु कड़ा था य क म दसरे
ू ब च क मौजूदगी म खुद को कम त हा महसूस करता

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था। शिनवार के दन आधी छु ट रहती थी, ले कन म कभी भी इस दन का इं तज़ार नह ं
करता था य क मेरे िलए इसका मतलब था क ज द घर जाना, झाड़ू प छा करना, चाकू
साफ करना, और तो और, लुइस उस दन हर हाल म पीना शु कर दे ती थी। जब म चाकू
साफ कर रहा होता था तो वह अपनी एक सखी के साथ बैठ जाती, पीती रहती और ज़ोर-ज़ोर
से अपनी सखी से कड़ु आहट भरे वर म िशकायत करती रहती क उसे िसडनी और मेर
दे खभाल करनी पड़ती है और कस तरह से उसके साथ यह अ याय कया जा रहा है । मुझे
याद है क उसने मेर तरफ इशारा करते हए
ु अपनी सखी से कहा था क ये तो फर भी ठ क है
ले कन दसरा
वाला तो आफत क पु ड़या है और उसे तो ज़ र ह सुधार घर म भेज दे ना

चा हए। इतना ह नह ं, वो तो चाल क औलाद भी नह ं है । िसडनी के बारे म यह बदज़ुबानी
मुझे भयभीत कर दे ती थी। म हताशा से भर जाता और मायूस-सा अपने ब तर पर जा कर
ढह जाता और आंख खोले िनढाल-सा पड़ा रहता था। उस व

म आठ बरस का भी नह ं हआ

था ले कन वे दन मेर ज़ दगी के सबसे ल बे और उदासी भरे दन थे।

कई बार शिनवार क रात को जब म खुद को बुर तरह से हताश महसूस करता तो
पछवाड़े के बेड म के पास से गुज़रते हुए कसी दो ध किनय वाले बाजे, क स टना का

संगीत सुना करता। कोई जाते-जाते हाइलड माच क धुन बजा रहा होता और उसके साथ
लु चे लड़क और खड़ खड़ करती फेर करके सामान बेचने वाली लड़ कय क आवाज
सुनाई दे तीं। संगीत का वाह और भाव भी मेर बेरहम उदासी पर कोई खास असर नह ं कर
पाता था। इसके बावजूद संगीत दरू जाता हआ
ु धीमा होता चला जाता और म उसके चले जाने
पर अफसोस मनाता। कई बार कोई फेर वाला गली से गुज़रता। एक खास फेर वाले क मुझे
याद है जो रात को ल

टािनया क धुन पर आवाज़ िनकालता था और उसे झटके के साथ

ख म कर दे ता। दरअसल वह घ घे बेच रहा होता था। तीन दरवाजे छोड़कर एक पब था,
जसके बंद होते समय म ाहक क आवाज़ सुन सकता था। वे नशे म धुत गाते, भावुकता
भरा एक उदास गीत जो उन दन खासा लोक य हआ
ु करता था।
पुराने व

क खाितर मत रहने दो नफरत को जंदा

पुराने व

क खाितर कहो भुला दोगे और कर दोगे माफ

जंदगी इतनी छोट क मत गंवाओ लड़ने म
दल इतने क मती क मत तोड़ो इ ह

िमलाओ हाथ और खाओ दो ती क कसम
पुराने व

क खाितर

40

म भावनाओं को कभी पसंद नह ं कर पाया था ले कन मुझे ये गीत मेर उदास हालत
म एक बहत
ु ह नजद क साथी क तरह तीत होता था और मुझे लोर क तरह से सुला दया
करता था।

जब िसडनी रात म दे र से लौटता, और ऐसा अ सर होता था क वह ब तर म सोने
के िलए जाने से पहले खाने क अलमार पर ह ला बोलता था। इससे लुइस बहत
ु ताव खाती
थी। एक रात जब वह पी रह थी तो वह कमरे म आयी और िसडनी क चादर खींच कर

िच लाई और उससे बोली क दफा हो जाओ यहां से। ले कन िसडनी इसके िलए तैयार था,
तुरंत उसने अपने त कये के नीचे हाथ डाला और एक छोटा सा खंजर िनकाला। इसम एक
ल बा बटन हक
ु था और उस पर उसने तेज धार दे रखी थी।

"आओ तो जरा मेरे पास और म ये तु हारे पेट म घुसेड़ दं ग
ू ा," िसडनी िच ला पड़ा था।

लुइस ह क -ब क सी पीछे हट थी,"ऐ य रे , ये हरामी का प ला तो मुझे मार डालेगा।"
"हां, म तु ह मा ं गा," िसडनी ने बड़े ह नाटक य अंदाज म कहा।
"ज़रा घर आने तो दे िम टर चै लन को।"

ले कन िम टर चै लन कभी-कभार ह घर आते थे। अलब ा, मुझे शिनवार क एक
शाम क याद है । लुइस और पताजी बैठे पी रहे थे। और पता नह ं कस वज़ह से हम मकान
माल कन और उसके पित के साथ पहली मं ज़ल पर उनके सामने वाले कमरे के आगे क
जगह पर बैठे हए
ु थे। चमक ली रौशनी म मेरे पता का चेहरा बहत
ु ह

यादा पीला लग रहा

था। और वे बहत
ु ह खराब मूड म अपने आपसे कुछ बड़बड़ा रहे थे। अचानक उ ह ने अपनी

जेब म हाथ डाला और ढे र सारे पैसे िनकाले और गु से म चार तरफ उछाल दये। सोने और
चांद के िस के। इसका असर अितयथाथवाद था। कोई भी अपनी जगह से नह ं हला।
मकान माल कन अपनी जगह से िचपक रह गयी। ले कन मने दे खा क उसक िनगाह सोने
के एक िस के का पीछा कर रह थी जो लुढ़कता हआ
ु दरू एक कुस के नीचे जा पहंु चा था। मेर
िनगाह भी उसी िस के का पीछा कर रह थी। अभी भी कोई भी नह ं हला था। मने सोचा, म
ह िस के उठाने का ीगणेश क ं । मेरे पीछे मकान माल कन और दसरे
ू लोग भी उठे । और

सावधानी पूवक बखरे िस के बीनने लगे , इस तरह से क पता क धमकाती आंख के आगे
अपनी हरकत को वा जब ठहरा सक।
एक शिनवार क बात है , म कूल से लौटा तो दे खा, घर पर कोई भी नह ं है । िसडनी
हमेशा क तरह सारे दन के िलए फुटबाल खेलने गया हआ
ु था। मकान माल कन ने बताया
क लुइस अपने बेटे के साथ सुबह से ह बाहर गयी हई
ु है । पहले तो मैने राहत महसूस क

य क लुइस के न होने का मतलब था क मुझे प छा नह ं लगाना पड़े गा, चाकू-छु रयां साफ

नह ं करनी पड़गी। म खाने के समय के बाद भी बहत
ु दे र तक उनका इं तज़ार करता रहा, तब

मुझे िचंता घेरने लगी। शायद वे लोग मुझे अकेला छोड़ गए थे। जैसे जैसे दोपहर ढलती गई,

41

मुझे उनक याद सताने लगी। ये या हो गया था? कमरा मनहस
ू और पराया-सा लग रहा था
और उसका खालीपन मुझे डरा रहा था। मुझे भूख भी लग आयी थी। इसिलए मने अलमार म
खाने को कुछ तलाशा ले कन वहां कुछ भी नह ं था। म अब खाली घर के भीतर और दे र तक
खड़ा नह ं रह सकता था इसिलए म हताशा म बाहर आ गया और पूर दोपहर मने बाजार म
आवारागद करते हए
सड़क पर भूखा- यासा केक

ु गुज़ार द । म लै बेथ वॉक पर और दसर

क दकान
क खड़ कयां म झांकता चलता रहा और गाय और सूअर के मांस के गरमा-गरम

वा द लजीज पकवान को और शोरबे म डू बे गुलाबी लाल आलुओं को दे ख-दे ख कर मेरे मुंह

म पानी आता रहा। म घंट तक सड़क के कनारे मजमेबाज को तरह-तरह क चीज़ बेचते
दे खता रहा। इस तरह के भटकाव से मुझे थोड़ राहत िमली और कुछ दे र के िलए म अपनी
परे शानी और भूख को भूल गया था।

जब म वा पस लौटा तो रात हो चुक थी। मने दरवाजा खटखटाया ले कन कोई जवाब

नह ं आया। सब बाहर गये हए
ु थे। थका मांदा म केिनंगटन

ॉस रोड पर जा कर, घर के पास

ह एक पुिलया पर जा कर बैठ गया और िनगाह अपने घर पर रखी क शायद कोई आ जाये।
म थका हआ
ु था और बुर हालत थी मेर । म इस बात को भी सोच-सोच कर परे शान हो रहा था
क िसडनी भी कहां चला गया। आधी रात होने को थी और एकाध भूले-भटके आवारा को छोड़

कर केिनंगटन रोड पूर तरह शांत और उजाड़ थी। कैिम ट और सराय क ब य को छोड़
कर बाक सार दकान
क ब यां बंद होने लगी थीं।

तभी संगीत क आवाज सुनायी द । दल क गहराइय को छू लेने वाला संगीत। ये आवाज
हाइट हाट कानर पब क दहलीज से आ रह थीं और सुनसान चौराहे पर एकदम साफ गूंज
रह थीं। धुन जस गीत क थी वह था, 'द हनीसकल एंड द बी' और इसे ले रनेट और
हाम िनयम पर पूर त मयता से बजाया जा रहा था। म इससे पहले कभी भी संगीत लह रय
को ले कर सचेत नह ं हआ
ु और शानदार था। इतना अलौ कक
ु था। ले कन ये गीत तो अ त
और खुशी से भर दे ने वाला। गमजोशी और आ

त से भर दे ने वाला। म अपनी हताशा भूल

गया और सड़क पार वहां तक चला गया जहां वे संगीत

थे। हाम िनयम बजाने वाला अंधा

था और उसक आंख क जगह पर गहरे खोखल थे। और एक जड़ कर दे ने वाला, बदसूरत
चेहरा ले रनेट बजा रहा था।
संगीत सभा ज द ह ख म हो गयी और उनके जाते ह रात फर से पहले से भी
यादा उदास हो गयी। म सड़क पार कर घर क तरफ आया। थका मांदा और कमज़ोर। मने
इस बात क भी परवाह नह ं क क कोई घर लौटा भी है या नह ं। म िसफ ब तर पर पहंु च

कर सो जाता चाहता था। तभी मने ह क रौशनी म बगीचे के रा ते से कसी को अपने घर क
तरफ जाते हए
ु दे खा। ये लुइस थी और साथ म उसका बेटा था जो उसके आगे-आगे भागा जा
रहा था। मुझे ये दे ख कर गहरा सदमा लगा क वह बुर तरह से लड़खड़ा रह थी और एक

42

तरफ बहत
यादा झुक जा रह थी। पहले तो मने यह सोचा क कह ं उसके साथ कोई

दघटना
हो गयी होगी और उसम उसका पैर ज मी हो गया होगा, ले कन तभी मने महसूस

कया क वह बुर तरह से नशे म थी। मने उसे पहले कभी भी इस तरह से नशे म धु नह ं

दे खा था। उसक इस हालत म मने यह उिचत समझा क उसके सामने न ह पड़ा जाये तो
बेहतर। इसिलए म तब तक का रहा जब तक वह घर के अंदर नह ं चली गयी। कुछ ह पल
के बाद मकान माल कन आयी तो म उसके साथ भीतर गया। म जब अंधेरे म सरकते हए

सी ढ़यां चढ़ रहा था क कसी तरह उसक िनगाह म आये बना अपने ब तर तक पहंु च

जाऊं। लुइस सी ढ़य पर एकदम सामने आ खड़ हई
ु ,"ऐ, कहां चले जा रहे हो ओ नवाबजादे ?
ये तेरा घर नह ं है ।"

म बना हले डु ले खड़ा रहा।

"आज रात तुम यहां नह सोवोगे। समझे। बहत
ु झेल चुक म तुम दोन को। दफा हो

जाओ यहां से। तुम और तु हारा वो भाई। करने दो अपने बाप को तुम लोग क तीमारदार ।"
म बना हच कचाहट के मुड़ा और सी ढ़य से नीचे उतर कर घर से बाहर हो गया।
अब म ब कुल भी थका हआ
दशा िमल चुक थी। मने सुना था क

ु नह ं था। मुझे मेर दसर
पता जी

ंस रोड पर वींस है ड पब म जाया करते ह। ये पब आधा मील दरू था। इसिलए म

उस दशा म चल पड़ा। म उ मीद कर रहा था क वे वहां पर मुझे िमल जायगे। ले कन मने

ज द ह उनक छाया आकृित अपनी तरफ आती दे खी। वे गली के लै प क रौशनी म चले
आ रहे थे।
म कुनमुनाया,"वो मुझे अंदर नह ं आने दे रह । और मुझे लगता है वह पीती रह है ।"
जब हम घर क तरफ चले आ रहे थे तो वे हच कचाये,"मेर खुद क हालत बहत

अ छ नह ं है ।"

मने उ ह आ

त करने क कोिशश क क वे बलकुल ठ क-ठाक ह।

"नह ं, म नशे म धु हंू ।"

उ ह ने बैठक का दरवाजा खोला और वहां मौन और डराने क मु ा म खड़े रहे और
लुइस क तरफ दे खते रहे । वह फायर लेस के पास खड़ , मटलपीस पकड़े लहरा रह थी।
"तुमने इसे भीतर य नह ं आने दया?"
वह अकबकाई-सी पता जी क तरफ दे खती रह और फर बुड़बुड़ाई,"तुम भी जह नुम
म जाओ। तुम सब।"
अचानक पता ने बगल क अलमार म से कपड़े झाड़ने का भार

श उठाया और

लुइस क तरफ ज़ोर से दे मारा। श का पछला ह सा ठ क उसके चेहरे के एक तरफ जा
लगा। उसक आंख बंद हु और वह फश पर ज़ोर क आवाज़ करते हए
ु भहरा कर िगर गयी
मानो वह खुद इस उपे ा का वागत कर रह हो।

43

पता क ये करनी दे ख कर मुझे ध का लगा। उनक इस तरह क हं सा दे ख कर मेरे
मन से उनके ित स मान क भावना जाती रह थी। और उसके बाद फर या हआ
ु था, इस
बारे म मेर याददा त बहत
ु धुंधली-सी है । मेरा व ास है क बाद म िसडनी आया था और
पता जी ने हम दोन को ब तर पर िलटा दया था और घर से चले गये थे।

मुझे पता चला था क पताजी और लुइस का उस सुबह ह झगड़ा हआ
ु था य क

पताजी उसे छोड़ कर अपने भाई पसर के पास दन बताने के िलए चले गये थे। उनके भाई
के लै बेथ के आस-पास कई सराय घर थे। अपनी है िसयत के ित संवेदनशील होने के कारण
लुइस ने इस बात को पसंद नह ं कया क वह पसर चै लन के घर जाये और पताजी अकेले
ह चले गये थे। और बदले के भावना से जलते हए
ु लुइस ने दन कह ं और बताया था।
वह पता को यार करती थी। हालां क म उस व

को महसूस कर सका था क जब वह रात के व

बहत
ु छोटा था ले कन म इस बात

फायर लेस के पास बेचैन और उनक उपे ा

से आहत खड़ थी। मुझे इस बात का भी यक न है क वे भी उसे यार करते थे। मने इस बात
को कई मौक पर खुद दे खा। ऐसे भी व

आते थे क जब वे आकषक लगते, नेह से पेश

आते और िथयेटर के िलए िनकलने से पहले शुभ रा

का चुंबन दे कर जाते। और कसी

र ववार क सुबह, जब उ ह ने पी नह ं रखी होती थी, वे हमारे साथ ना ता करते और लुइस को
उन कलाकार के बारे म बताते जो उनके साथ काम कर रहे होते थे। वे हम सब को ये बात
बता कर खूब हं साते। म मुंह बाये िग क तरह उनक तरफ दे खता रहता और उनक हर
गित विध को अपने भीतर उतारता रहता। एक बार जब वे बहत
ु ह खलंदड़े मूड म थे तो

अपने िसर पर तौिलया बांध कर मेज के चार तरफ अपने न ह बेटे के पीछे -पीछे दौड़ते हए

बोलते रहे ,"म हंू राजा टक

बाब।"

शाम को आठ बजे िथयेटर के िलए िनकलने से पहले वे पोट वाइन के साथ छ: क चे

अंडे िनगल जाते। वे शायद ह कभी ठोस आहार लेते। यह उनक खुराक थी जो उ ह पूरा दन
चु त-द ु

त बनाये रखती। वे शायद ह कभी घर आते। कभी आते भी तो िसफ़ नशा उतरने

तक सोने के िलए आते थे।
एक दन ब च के ित ू रता क रोक-थाम करने वाली सोसाइट से कुछ लोग लुइस

से िमलने आये। वह उ ह दे ख कर बुर तरह बेचैन हो गयी थी। वे लोग इसिलए आये थे
य क पुिलस ने उ ह बताया था क उ ह ने िसडनी और मुझे आधी रात को तीन बजे

चौक दार क कोठर के पास सोये हए
ु पाया था। यह उस रात क बात थी जब लुइस ने हम

दोन को बाहर िनकाल कर दरवाजा बंद कर दया था और पुिलस ने जबरद ती उससे दरवाजा
खुलवाया था और हम भीतर लेने के िलए उससे कहा था।
अलब ा, कुछे क दन के बाद, पता जब दसरे
दे श म अिभनय म य त थे, लुइस

को एक प िमला जसम िलखा था क मां ने पागलखाना छोड़ दया है । एक या दो दन के

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बाद मकान माल कन ऊपर आयी और बताने लगी क दरवाजे पर एक औरत खड़ है जो
िसडनी और चाल को पूछ रह है ।
"जाओ, तु हार मां आयी है ।" लुइस ने कहा। थोड़ दे र के िलए म क

थित पैदा हो

गयी। तभी िसडनी कूदा और तेज़ी से दौड़ते हए
ु सीधे मां क बांह म जा समाया। म उसके

पीछे -पीछे लपका। यह वह हमार यार , मु कुराती मां थी और उसने हम दोन को नेह से
अपने सीने से लगा िलया था।
लुइस और मां का एक दसरे
ू से िमलना, खासा परे शानी का कारण बन सकता था,

इसिलए मां दरवाजे पर ह खड़ रह ं और हम दोन भाई अपनी चीज समेटते रहे । दोन तरफ
कोई कड़ु वाहट या दभावना
नह ं थी ब क िसडनी को वदा करते समय लुइस का यवहार

बहत
ु ह अ छा था।

मां ने हे वड अचार फै टर के पास केिनंगटन

ॉस के पीछे वाली गली म एक कमरा

कराये पर ले िलया था। हर दोपहर को वहां एिसड क तीखी गंध वातावरण म फैलने लगती,
ले कन कमरा स ता था और हम सब एक बार फर साथ-साथ रह पा रहे थे। मां क सेहत
बहत
ु अ छ थी और ये बात हमने कभी सोची ह नह ं क वह कभी बीमार भी रह थी।

मुझे इस बात का ज़रा-सा भी गुमान नह ं है क हमारा वह अरसा कैसे गुज़रा। न तो

मुझे कसी सीमा से यादा तकलीफ क याद है और न ह कसी ऐसी सम या क जसका
समाधान हमारे पास न हो। पता क ओर से हर स ाह िमलने वाली दस िशिलंग क रािश
आम तौर पर िनयिमत प से िमलती रह और, हां, मां ने सीने- परोने का काम फर से हाथ
म ले िलया था और िगरजा घर के साथ फर से संबंध बना िलये थे।
उस समय क एक घटना खास तौर पर याद आ रह है । हमार गली के एक िसरे पर
कसाईघर था जहां हमार गली म से हो कर कटने के िलए भेड़ ले जायी जाती थीं। मुझे याद है
क एक भेड़ बच कर िनकल भागी थी और गली म दौड़ती चली गयी थी। सब लोग ये तमाशा
दे खने लगे। कुछे क लोग ने उसे दबोचने क कोिशश क और दसरे
ू कुछ लोग अपनी जगह ह
कूद-फांद रहे थे। म खुशी के मारे खल खला कर हँ स रहा था। ये नज़ारा इतना यादा

हा या पद लग रहा था। ले कन जब भेड़ को पकड़ िलया गया और वा पस कसाईघर क तरफ
ले जाया गया तो ासद क स चाई मुझ पर हावी हो गयी और म भाग कर घर के अंदर चला
गया। म िच ला रहा था और ज़ार-ज़ार रोते हए
ु मां को बता रहा था,"वे लोग उसे मारने के

िलए ले जा रहे ह, वे लोग उसे मारने के िलए ले जा रहे ह।" वह तीखी, वसंत क दोपहर और
उस भेड़ का कॉमेड -भरा पीछा करना, कई दन तक मेरे दलो- दमाग पर छाये रहे । और मुझे
लगता है क शायद कह ं इसी घटना ने ह मेर भावी फ म के िलए ज़मीन तैयार क हो।
ासद और कॉमेड का िमला-जुला प।

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कूल अब नयी ऊंचाइयां छू रहा था। इितहास, क वता और व ान। ले कन कुछ
वषय बहत
ु ह जड़ और नीरस थे। खास तौर पर अंक ग णत। उसके जोड़-भाग मुझम कसी

िल पक और कैश र ज टर, उसके इ तेमाल क छ व पैदा करते थे और और सबसे बड़ बात,
ये लगता था क ये रे ज़गार क कमी से एक बचाव क तरह है ।
इितहास मूखताओं और हं सा का द तावेज था। क ले-आम और राजाओं ारा अपनी
रािनय , भाइय और भतीज को मारने का सतत िसलिसला; भूगोल म िसफ न शे ह न शे
ह थे; का य के नाम पर अपनी याददा त क पर
शा

ा लेने के अलावा कुछ नह ं था। िश ा

मुझे पागल बनाता था और त य क जानकार म मेर कोई खास दलच पी नह ं थी।
काश, कसी ने कारोबार दमाग इ तेमाल कया होता,

उ ेजनापूण

येक अ ययन क

तावना पढ़ होती जसने मेरा दमाग झकझोरा होता, त य के बजाये मुझ म

िच पैदा क होती, अंक क कलाबाजी से मुझे आनं दत कया होता, न श के ित रोमांच
पैदा कया होता, इितहास के बारे म मेर

कोण वकिसत कया होता, मुझे क वता क लय

और धुन को भीतर उतारने के मौके दये होते तो म भी आज व ान बन सकता था।
अब चूं क मां हमारे पास वा पस लौट आयी थी, उसने िथयेटर क तरफ मेर

िच फर

से जगानी शु कर द थी। उसने मुझम यह अहसास भर दया था क मुझ म थोड़ -बहत

ितभा है । ले कन ये सुनहरा मौका बड़े दन से पहले तब तक नह ं आया था जब तक कूल ने

अपना सं

नाटक िसंडरे ला नह ं खेला था और मुझे अपने आपको वह सब अिभ य

करने

क ज़ रत महसूस होने लगी थी जो मुझे मां ने िसखाया-पढ़ाया था। कुछ कारण थे क मुझे
नाटक के िलए नह ं चुना गया था, और भीतर ह भीतर म कुढ़ रहा था और महसूस कर रहा
था क बेहतर होता, म नाटक म भूिमका क ं बजाये उनके जो इस नाटक के िलए चुने गये
थे। जस तरह से ब चे नीरस ढं ग से और क पना श

का सहारा िलये बना अपनी भूिमका

अदा कर रहे थे, उससे मुझम खीज पैदा हो रह थी। बदसूरत बहन म न कोई उ साह था न ह
भीतर उमंग। वे अपनी लाइन रटे -रटाये ढं ग से पढ़ रह थीं जसम कूल के ब च वाली भेड़ चाल और खीझ पैदा करने वाली कृ मता का दबाव था। म मां क द हई
ु िश ा के साथ

बदसूरत बहन म से एक क भूिमका भला कैसे कर सकता था। अलब ा, जस लड़क ने

िसंडरे ला क भूिमका क थी, उसने मुझे बांध िलया था। वह खूबसूरत और नफासत पसंद थी
और उसक उ

चौदह बरस के आस-पास थी। म उससे गुपचुप यार करने लगा था। ले कन

वह मेर पहंु च से दरू थी। सामा जक तौर पर भी और उ

के िलहाज से भी।

मने जब नाटक दे खा तो मुझे ये बकवास लगा ले कन लड़क क खूबसूरती के कारण

मने इसे पसंद कया। उस लड़क ने मुझे उदास कर दया था। अलब ा, मने इस बात को
शायद ह महसूस कया था क दो मह ने बाद मेर ज़ंदगी म कतने शानदार पल आने वाले
थे क मुझे हर लास के सामने ले जाया गया और -िमस

िशला क ब ली का पाठ करने के

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िलए कहा गया। ये एक वांग भर क वता थी जो मां ने अखबार क दकान
के बाहर दे खी थी

और ये उसे इतनी अ छ लगी क वह खड़क पर से नकल करके घर लेती आयी। क ा म

खाने क छु ट के समय म उसे एक लड़के को सुना रहा था। तभी िम टर र ड, हमारे कूल के
अ यापक, ने अपने कागज पर से यान हटा कर दे खा। वे इसे सुन कर इतने खुश हए
ु क
जब क ा के सब ब चे वा पस आ गये तो उ ह ने मुझे ये सुनाने के िलए कहा। पूर क ा

हं सते-हं सते लोट पोट हो गयी। इस वजह से पूरे कूल म मेरा नाम फैल गया और अगले दन
मुझे कूल क हर क ा म, लड़के-लड़ कय क सभी क ाओं म ले जाया गया और उसका
पाठ करने के िलए कहा गया।
हालां क मने पांच बरस क उ

म दशक के सामने मंच पर मां क जगह लेते हए

अिभनय कया था ले कन लैमर से ये मेरा पहला होशो-हवास वाला साबका था। अब कूल
मेरे िलए उ ेजनापूण हो चुका था और अब म शम ला और गुमसुम-सा लड़का नह ं रहा था।
अब म अ यापक और ब च , सबका चहे ता व ाथ बन चुका था। इससे मेर पढ़ाई म भी
सुधार हआ
ु , ले कन मेर पढ़ाई म फर से यवधान आया जब मुझे अ म लंकाशायर बाल
गोपाल मंडली के साथ लॉग नतक के एक प म ह सा लेना पड़ा।

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तीन
पता जी िम टर जै सन को जानते थे। वे एक प के संचालक थे। पता जी ने मां को
इस बात के िलए मना िलया क मेरे िलए टे ज पर कै रयर बनाना एक अ छ शु आत रहे गी
और साथ ह साथ म मां क आिथक प से मदद भी कर पाऊंगा। मेरे िलए खाने और रहने क
सु वधा रहे गी और मां को हर ह ते आधा

ाउन िमला करेगा। शु -शु म तो वह अिन य म

डोलती रह , ले कन िम टर जै सन और उनके प रवार से िमलने के बाद मां ने हामी भर द ।
िम टर जै सन क उ

पचास-पचपन के आस-पास थी। वे लंकाशायर म अ यापक

रहे थे और उनके प रवार म चार ब चे थे। तीन लड़के और एक लड़क । ये चार ब चे अ म
लंकाशायर बाल गोपाल मंडली के सद य थे। िम टर जै सन परम रोमन कैथोिलक थे और
अपनी पहली प ी क मृ यु के बाद दसरा
ववाह करने के बारे म उ ह ने अपने ब च से

सलाह ली थी। उनक दसर
प ीउ

म उनसे भी थोड़ बड़ थी। वे हम पूर नेकनीयती से बता

दया करते क उन दोन क शाद कैसे हई
ु थी। उ ह ने एक अखबार म अपने िलए एक बीवी

के िलए एक व ापन दया था और उसके जवाब म तीन सौ से भी यादा ख़त िमले थे।

भगवान से राह सुझाने के िलए दआ
ु करने के बाद उ ह ने केवल एक ह िलफाफा

खोला था और वह खत था िमसेज जै सन क ओर से। वे भी एक कूल म पढ़ाती थीं और
शायद ये िम टर जै सन क दआओं
का ह असर था क वे भी कैथोिलक थीं।

िमसेज जै सन को बहत
ु अिधक खूबसूरती का वरदान नह ं िमला था और न ह उ ह

कसी भी िनगाह से कमनीय ह कहा जा सकता था। जहां तक मुझे याद है , उनका बड़ा सा,
खोपड़ जैसा पीला चेहरा था और उस पर ढे र सार झु रयां थीं। शायद इन झु रय क वज़ह
यह रह हो क उ ह काफ बड़ उ

म िम टर जै सन को एक बेटे क सौगात दे नी पड़ थी।

इसके बावजूद वे िन ावान और सम पत प ी थीं और हालां क उ ह अभी भी अपने बेटे को
छाती का दध
ू पलाना पड़ता था, वे प क यव था म हाड़-तोड़ मेहनत करके मदद कया
करती थीं।

जब उ ह ने रोमांस क अपनी दा तान सुनायी तो यह दा तान िम टर जै सन क
बतायी कहानी से थोड़ अलग थी। उनम आपस म प

का आदान- दान हआ
ु था ले कन उन

दोन म से कसी ने भी दसरे
ू को शाद के दन तक नह ं दे खा था और बैठक के कमरे म उन

दोन के बीच जो पहली मुलाकात हई
ू रे कमरे म इं तज़ार कर
ु थी और प रवार के बाक लोग दस
रहे थे, िम टर जै सन ने कहा था, "बस, आप वह ह जनक मुझे चाह थी।" और मैडम ने भी
वह बात वीकार क । हम ब च को ये क सा सुनाते समय वे वन

हो कर कहतीं,"ले कन

मुझे नह ं पता था क मुझे हाथ -हाथ आठ ब च क मां बन जाना पड़े गा।"

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उनके तीन ब च क उ

बारह से अ ठारह बरस के बीच थी और लड़क क उ

नौ

बरस थी। उस लड़क के बाल लड़क क तरह कटे हए
ु थे ता क उसे भी मंडली के बाक लड़क
म खपा िलया जा सके।

हर र ववार को मेरे अलावा सब लोग िगरजाघर जाया करते थे। म ह उन सब म
अकेला ोटै टट था, इसिलए अ सर उनके साथ ह चला जाता। मां क धािमक भावनाओं के
ित स मान न होता तो म कब का कैथोिलक बन चुका होता य क म इस धम का
रह यवाद पसंद करता था और घर क बनी हई
ु छोट -छोट ऑ टर तथा ला टर क मेर

व जन क मूितयां, जन पर फूल और मोमब यां सजी रहतीं, मुझे अ छ लगतीं। इ ह ब चे
अपने बेड म के कोने म सजा कर रखते और जब भी उसके आगे से गुज़रते, घुटने टे क कर
ा अ पत करते।

छ: स ताह तक अ यास करने के बाद म अब इस

साथ नाच सकूं। ले कन चूं क म अब आठ बरस क भी उ

थित म था क बाक मंडली के
पार कर चुका था, म अपनी

त खो चुका था और पहली बार दशक के सामने आने पर मुझे मंच का भय लगा। म

मु कल से अपनी टांग हला पा रहा था। ह त लग गये तब कह ं जा कर म मंडली के बाक
ब च क तरह एकल नृ य करने क हालत म आ सका।
म इस बात को ले कर बहत
ु अिधक खुश नह ं था क मुझे भी मंडली के बाक आठ

ब च क तरह लॉग डांसर ह बना रहना पड़े । बाक ब च क तरह म भी एकल अिभनय
करने क मह वाकां ा रखता था। िसफ इसिलए नह ं क इस तरह के काम के यादा पैसे
िमलते थे ब क इसिलए भी क म िश त से महसूस करता था क नाचने के बजाये इस तरह
के अिभनय से कह ं यादा संतु

िमलती है । म बाल हा य कलाकार बनना चाह सकता था

ले कन उसके िलए टे ज पर अकेले खड़े रहने का मा ा चा हये था। इसके अलावा मेर पहली
भीतर

ेरणा यह थी क म एकल नृ य के अलावा जो कुछ भी क ं गा, हा या पद होगा।

मेरा आदश दोहरा अिभनय था। दो ब चे कॉमेड

ै प क तरह कपड़े पहने ह । मने यह बात

अपने एक साथी ब चे को बतायी और हम दोन ने पाटनर बनना तय कया। ये हमारा कब
का पाला सपना पूरा होने जा रहा था। हम अपने आपको

टॉल और चै लन - करोड़पित

ै प कहते और ै प गलमु छे लगाते, और ह रे क बड़ बड़ अंगू ठयां पहनते। हमने उस हर
पहलू पर वचार कर िलया था जो मज़ा कया होता और जससे कमाई हो सकती ले कन
अफ़सोस, ये सपना कभी भी साकार नह ं हो सका।
दशक अ म लंकाशायर बाल गोपाल मंडली पसंद करते थे य क जैसा क िम टर जै सन
कहते थे - हम िथयेटर के ब च जैसे बलकुल भी नह ं लगते थे। उनका यह दावा था क हमने
कभी भी अपने चेहर पर ीज़ पट नह ं पोता, और हमारे गुलाबी गाल वैसे ह गुलाबी थे। य द
कोई ब चा टे ज पर जाने से पहले जरा-सा भी पीला दखायी दे ता तो वे हम बताते क अपने

49

गाल को मसल द। ले कन लंदन म एक ह रात म दो या तीन संगीत सदन म काम करने के
बाद अ सर हम भूल जाते और टे ज पर खड़े हए
ु थके-मांदे और मनहस
ू लगने लगते। तभी

हमार िनगाह वं स म खड़े िम टर जै सन पर पड़ती और वे ज़ोर-ज़ोर से खींस िनपोरते हए

अपने चेहरे क तरफ इशारा कर रहे होते। इसका बजली का-सा असर होता और हम अचानक
हँ सी के मारे दोहरे हो जाते।
परदे स के टू र करते समय हम हर शहर म एक-एक ह ते के िलए कूल जाया करते।
ले कन इससे मेर पढ़ाई म कोई खास इज़ाफा नह ं हआ।

समस के दन म हम लंदन ह पो ोम म िसंडरे ला पटोमाइम म ब ली और कु े

का मूक अिभनय करने का यौता िमला। उन दन ये नया िथयेटर हआ
ु करता था और इसम
वैराइट शो और सकस का िमला-जुला प हआ
ु करता था। इसे बहत
ु खूबसूरती से सजाया

जाता और काफ हं गामा रहा करता था। रं ग का फश नीचे चला जाता था और वहां पानी भर
जाता था और काफ बड़े पैमाने पर बैले होता। एक के बाद एक बला क खूबसूरत लड़ कयां
चमक ली सज-धज म आतीं और पानी के नीचे एकदम गायब हो जातीं। जब लड़ कय क
आ खर पं

भी डू ब जाती तो मैसलाइन, महान

ांसीसी जोकर, शाम क बेतुक , िचकनी

पोशाक म सजे धजे , एक कै प टू ल पर बैठे हाथ म मछली मारने क रॉड िलये अवत रत
होते और बड़ा-सा गहन का ब सा खोलते, अपने कांटे म ह रे का एक नेकलेस फंसाते और
उसे पानी म डाल दे ते। थोड़ दे र के बाद वे छोटे आभूषण िनकालते और कुछ बेसलेट फकते,
और इस तरह पूरा का पूरा ब सा खाली कर डालते। अचानक वे एक झटका खाते और तरहतरह क मजा कया हरकत करते हए
तीत होते और आ खर
ु रॉड के साथ संघष करते हए

कांटे को खींच कर बाहर िनकालते और हम दे खते क पानी म से एक छोटा-सा िश

त कु ा

बाहर आ रहा है । कु ा वह सब कुछ करता जो मासलीन करते। अगर वे बैठते तो कु ा भी बैठ
जाता और अगर वे खड़े होते तो कु ा भी खड़ा हो जाता। मासलीन साहब क कॉमेड हं सीठठोली से भर और आकषक थी और लंदन के लोग उनके पागलपन क हद तक द वाने थे।
रसोई के एक

य म मुझे उनके साथ करने के िलए एक छोटा-सा मजा कया

दया गया। म ब ली बना हआ
ु था और मासलीन एक कु े क तरफ से पीछे आते हए
ु मेरे

ऊपर िगर जाने वाले थे जब क म दध
ू पी रहा होता। वे हमेशा िशकायत कया करते क म

अपनी कमर को इतना नह ं झुकाता क उनके िगरने के बीच आड़े आऊं। मने ब ली का एक
मुखौटा पहना हआ
ु था और मुखौटा ऐसा क जस पर हैरानी के भाव थे। ब च के िलए पहले

मै टनी शो म म कु े के शर र के पछले ह से क तरफ चला गया और उसे सूंघने लगा। जब
दशक हं सने लगे तो म वा पस मुड़ा और उनक तरफ है रानी से दे खने लगा और मने एक डोर
खींची जससे ब ली क घूरती हई
ु आंख मुंद जाती थी। म जब कई बार सूंघने और आंख

मारने का अिभनय कर चुका तो टे ज मैनेजर लपका हआ
ु बैक टे ज म आया और वं स म

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से पागल क तरह हाथ हलाने लगा। ले कन म अपने काम म लगा रहा। कु े को सूंघने के
बाद मने रं गमंच सूंघा और फर अपनी टांग उठा द । दशक हँ स हँ स कर दोहरे हो गये। शायद
इसिलए य क ये हरकत ब ली जैसी नह ं थी। आ खरकार मैनेजर से मेर आंख िमल ह
गयीं और म इतना कूदा-फांदा क लोग हँ सते हँ सते लोट पोट हो गये। वे मुझ पर
झ लाये ,"इस तरह क हरकत फर कभी मत करना।" यह कहते हए
ु उनक सांस फूल रह

थी,"तुम ज र इस िथयेटर के मािलक लॉड चै बरिलन को ये िथयेटर बंद करने पर मजबूर
करोगे।"
िसंडरे ला को आशातीत सफलता िमली। और हालां क मासलीन साहब को कहानी
त व या लॉट के साथ कुछ लेना-दे ना नह ं था, फर भी वे सबसे बड़ा आकषण थे। कई बरस
के बाद मासलीन यूयॉक के ह पो ोम म चले गये और उ ह वहां भी हाथ -हाथ िलया गया।
ले कन जब ह पो ोम क जगह सकस ने ले ली तो मासलीन साहब को ज द ह भुला दया
गया।
1918 या उसके आस पास क बात है, रं गिलंग दस का ी रं ग सकस लॉस एंजे स
म आया तो मासलीन उनके साथ थे। म ये मान कर चल रहा था क उनका ज़

पो टर म

होगा ले कन मुझे यह दे ख कर गहरा ध का लगा क उनक भूिमका बहत
ू जोकर
ु से उन दसरे

क ह तरह थी जो पूरे रं ग म यहां से वहां तक दौड़ते नज़र आते ह। एक महान कलाकार तीन
रं ग वाले सकस क अ ील तड़क-भड़क म खो गया था।
बाद म म उनके े िसंग म म गया और अपना प रचय दया और उ ह याद दलाया
क मने उनके साथ लंदन के ह पो ोम म ब ली क भूिमका अदा क थी। ले कन उनक
ित

या उदासीन थी। यहां तक क अपने जोकर वाले मेक-अप म भी उनका चेहरा सूजा

हआ
ु लग रहा था और वे उदास और सु त लग रहे थे।

एक बरस बाद यू याक म उ ह ने खुदकुशी कर ली। अखबार म एक कोने म छोट -

सी खबर छपी थी क उसी घर म रहने वाले एक पड़ोसी ने गोली चलने क आवाज़ सुनी थी
और मासलीन को फश पर पड़े हए
ु दे खा था। उनके एक हाथ म प तौल थी और ामोफोन

रकाड अभी भी घूम रहा था। रकाड पर जो गीत बज रहा था, वह था, "मूनलाइट एंड रोजेज़।"
कई मशहर
ू अं ेज़ी कॉमे डयन ने खुदकुशी क है । ट ई डन वले, जो बहत
ु ह आला

दरजे के हं सोड़ य

थे, ने सैलून बार के भीतर जाते समय कसी को पीठ पीछे यह कहते

सुन िलया था,"अब इस श स के दन लद गये।" उसी दन उ ह ने टे स नद के कनारे अपने
आप को गोली मार द थी।

51

माक शे रडन, जो इं गलड के सवािधक सफल कामे डयन थे, ने लासगो म एक
सावजिनक पाक म अपने आपको गोली मार द थी य क वे लासगो के दशक क
अपे ाओं पर खरे नह ं उतरे थे।
क कॉयन, जनके साथ हमने उसी शो म काम कया था, जांबाज़, ह टे -क टे
कामे डयन थे और जो अपने एक ह के-फु के गाने के िलए बहत
िस थे:

आप मुझे घोड़े क पीठ पर दोबारा सवार नह ं पायगे
ऐसा नह ं है वह घोड़ा चढ़ सकूं जस पर म
जस घोड़े पर म चढ़ सकता हंू वो तो

है वो जस पर मोहतरमा सुखाती है कपड़े
टे ज के बाहर वे हमेशा खुश रहते और मु कुराते रहते। ले कन एक दोपहर, अपनी
प ी के साथ घोड़ वाली गाड़ पर सैर क योजना बनाने के बाद वे कुछ भूल गये और अपनी
प ी से कहा क वह इं तज़ार करे और वे खुद सी ढ़यां चढ़ कर भीतर गये। बीस िमनट के बाद
जब वह ऊपर यह दे खने के िलए गयी क उ ह आने म दे र य हो रह है तो उसने उ ह

बाथ म के फश पर खून से लथपथ पड़े हए
ु पाया। उनके हाथ म उ तरा था और उ ह ने
अपना गला काट कर अपने आपको लगभग ख म ह कर डाला था।

अपने बचपन म मने जन कई कलाकार के साथ काम कया था और ज ह ने मुझे
भा वत कया था, वे टे ज पर हमेशा सफल नह ं थे ब क टे ज से बाहर उनका वल ण

व हआ
ु करता था। जाम नाम के एक कॉमेड

ै प बाजीगर हआ
ु करते थे जो कड़े

अनुशासन म काम करते थे और िथयेटर के खुलते ह हर सुबह घंट तक अपनी बाजीगर का
अ यास कया करते थे। हम उ ह टे ज के पीछे दे ख सकते थे क वे बिलयड खेलने क छड़
को अपनी ठु ड पर संतुिलत कर रहे ह और एक बिलयड गद उछाल कर उसे इस छड़ के
ऊपर टका रहे ह। इसके बाद वे दसर
गद उछालते और पहली गद के ऊपर टका दे ते। अ सर

वे दसर
गद टकाने म चूक जाते। िम टर जै सन ने बताया क वे चार बरस तक लगातार

इस

क का अ यास करते रहे थे और स ाह के अंत म इसे पहली बार दशक के सामने

दखाना चाह रहे थे। उस रात हम सब वं स म खड़े उ ह दे खते रहे । उ ह ने बलकुल ठ क
दशन कया और पहली ह बार ठ क कया। गद को ऊपर उछालना और बिलयड क छड़
पर ऊपर टका दे ना और फर दसर
गद उछालना और उसे पहली गद के ऊपर टका दे ना

ले कन दशक ने मामूली सी तािलयां ह बजायीं।

िम टर जै सन ने उस रात का क सा बताया था, उ ह ने जाम से कहा था,"तुम इस
क को बहत
ु ह आसान बना डालते हो। इस वज़ह से तुम इसे बेच नह ं पाते। तुम इसे कई

52

बार िमस करो, तब जा कर गद को ऊपर टकाओ, तब बात बनेगी।" जाम हं से थे,"म इतना
कुशल नह ं हंू क इसे िमस कर सकूं।" जाम मानस व ान म भी दलच पी रखते थे और
हमारे च र पढ़ा करते। उ ह ने मुझे बताया था क म जो कुछ भी

ान हािसल क ं गा, उसे

बनाये रखूग
ं ा और उसका बेह तर इ तेमाल क ं गा।
इनके अलावा, ि

फथ बंधु हआ
ु करते थे। मज़ा कया और भाव छोड़ने वाले। उ ह ने

मेरा मनो व ान ह उलट-पुलट डाला था। वे दोन कॉमेड

ै पीज़ जोकर थे और दोन

ै पीज़

पर झूला करते। वे मोटे पैड लगे जूत से एक दसरे
ू के मुंह पर जोर से लात जमाते।
"आह," लात खाने वाला िच लाता।

"ज़रा एक बार फर मार कर तो दखा।"
"ले और ले। एक और लात"

और फर लात खाने वाला है रानी से दे खता रह जाता और आंख नचाता और
कहता,"अरे दे खो, उसने फर से लात मार द है ।"
मुझे इस तरह क पागलपन से भर हं सा से तकलीफ होती। ले कन टे ज से बाहर वे
दोन भाई बहत
ु यारे , शांत और ग भीर होते।

मेरा याल है , कंवदं ती बन चुके ि मा ड के बाद डान लेनो महान अं ेज़ कॉमे डयन

रहे । हालां क मने कभी भी लेनो को उनके चरम उ कष पर नह ं दे खा, वे मेरे िलए कॉमे डयन
के बजाये च र अिभनेता अिधक थे। लंदन के िनचले वग के सनक से भरे जीवन के उनके
खाके, कैच अ यंत मानवीय और दल को छू लेने वाले होते, मां ने मुझे बताया था।
िस मैर लॉयड क
उनके साथ

िस

िछछोर औरत के प म थी। इसके बावजूद जब हमने

ड म ओ ड टवोली म अिभनय कया तो वे यादा ग भीर और सतक

अिभने ी लगीं। म उ ह आंख चौड़ कये दे खता रहता। एक िचंतातुर, छोट -मोट म हला जो
य के बीच आगे-पीछे कदम ताल करती रहती थीं।
वे तब तक गु से म और डर रहतीं जब तक उनके िलए मंच पर जाने का समय न आ
जाता। उसके बाद वे एकदम खुशिमजाज दखतीं और उनके चेहरे पर राहत के भाव आ जाते।
और फार ांसबाय विलय स, जो डकस के पा

का अिभनय करते थे, वे उ रया

ह प, बल साइ स और द' ओ ड यूरोिसट शॉप के बूढ़े आदमी क नकल से मुझे आन दत
कया करते थे। इस खूबसूरत, अिभजा य पु ष का लासगो क उज ड जनता के सामने
अिभनय करना और अपने आप को इन शानदार च र

म ढाल कर करतब दखाना, िथयेटर

के नये ह अथ खोलता था।
उ ह ने सा ह य के ित भी मेरे मन म अनुराग जगाया था। म जानना चाहता था क
आ खर वह अबूझ रह य या है जो कताब म छुपा रहता है , डकस के ये ज़मीनी रं ग के

53

च र जो इस तरह क आ यजनक ु शां कयाई दिनया
म वचरते ह। हालां क म मु कल

से पढ़ पाता था, मने आ खरकार ऑिलवर
म चा स डकस के च र

व टक

ित खर द ।

के साथ इतना यादा रोमांिचत था क म उनक नकल

करने वाले ांसबाय विलय स क नकल करता। इस बात से इनकार कैसे कया जा सकता है
क इस तरह क उभरती हई
ु ितभा पर कसी क िनगाह न जाती। इसे छुपा कर कैसे रखा जा

सकता था। तो हआ
ु ये क एक दन िम टर जै सन ने मुझे अपने दो त का द' ओ ड

यूरोिसट शॉप के बूढ़े का च र िनभा कर उसक नकल करते दे ख िलया। मुझे तब और तभी

जीिनयस मान िलया गया और िम टर जै सन ने तय कर िलया क वे पूर दिनया
से इस

ितभा का प रचय करवा के रहगे।

अचानक मौका आया िमड सबोरो म िथयेटर म। हमारे लॉग नृ य के बाद िम टर

जै सन टे ज पर कुछ इस तरह का भाव िलये हए
ु आये मानो वे एक नये मसीहा का प रचय

कराने के िलए चले आ रहे ह । उ ह ने घोषणा क क उ ह ने एक बाल ितभा खोज िनकाली
है और द' ओ ड यूरोिसट शॉप के उस बूढ़े क

ांसबाय विलय स क नकल करके

दखायेगा जो अपने न ह नेल क मृ यु को पहचान नह ं पाता।
दशक इसके िलए बहत
यादा तैयार नह ं थे, य क वे पहले ह पूर शाम का एक

बोर मनोरं जन झेल चुके थे। अलब ा, म अपनी डांस वाली सामा य पोशाक पहने हए
ु ह मंच
पर आया। मने सफेद लीनन का

ॉक, लेस वाले कॉलर, चमक ले िन कर, बॉकर पट, और

नाचने के समय के लाल जूते पहले पहने हए
ु थे। और म अिभनय कर रहा था ऐसे बूढ़े का जो
न बे बरस का हो। कह ं से हम एक ऐसी पुरानी वग िमल गयी थी - शायद िम टर जै सन

कह ं से लाये ह गे, जो वैसे तो बड़ थी ले कन जो मुझे पूर नह ं आ रह थी हालां क मेरा िसर
बड़ा था ले कन वग उससे भी बड़ थी। ये एक गंजे आदमी वाली वग थी और उसके चार
तरफ सफेद लट झूल रह थीं इसिलए म जब टे ज पर एक बूढ़े आदमी क तरह झुका हआ

पहंु चा तो इसका असर िघसटते गुबरै ले क तरह था और दशक ने इस त य को दबी हं सी के
साथ वीकार कया।

इसके बाद तो उ ह चुप कराना ह मु कल हो गया। म दबी हई
ु फुसफुसाहट म बोल

रहा था," ह

... ह

... शोर मत करो, नह ं तो मेरा नेल जग जायेगा।"

"जोर से बोलो, जोर से बो ो" दशक िच लाये।
ले कन म बहत
ु ह अनौपचा रक तर के से उसी तरह से फुसफुसाहट के वर म ह

बोलता रहा। म इतने अंतरं ग तर के से बोल रहा था क दशक पैर पटकने लगे। चा स डकस
के च र

को जीने के प म ये मेरे कै रयर का अंत था।
हालां क हम कफायत से रहते थे ले कन हम अ म लंकाशायर बाल गोपाल का

जीवन ठ क-ठाक चल रहा था। कभी कभी हम लोग म छोट -मोट असहमित भी हो जाती।

54

मुझे याद है , हम दो युवा ए ोबै स के साथ एक ह
मेर ह उ

तुि त म काम कर रहे थे। िश ु लड़के

के रहे ह गे। उ ह ने हम व ास पूवक बताया क उनक मांओं को तो सात

िशिलंग और छ: पस ह ते के िमलते ह और हर सोमवार क सुबह उ ह ना ते क बैकन और
अंडे क लेट के नीचे एक िशिलंग क पाकेट मनी भी रखी िमलती है । और हम तो, हमारे ह
एक साथी ने िशकायत क ,"हम तो िसफ दो ह पस िमलते ह और बेड जैम का ना ता िमलता
है ।"
जब िम टर जै सन के पु जॉन ने ये सुना क हम िशकायत कर रहे ह तो वह आंसा
हो गया और एकदम रो पड़ा। हम बताने लगा क हम कई बार लंदन के उन उपगनर म ऐसे
भी स ाह गुज़ारने पड़ते ह जब उसके पता को पूर मंडली के िलए मा सात प ड ह िमल पाते
ह और वे कसी तरह गाड़ खींचने म बहत
ु ह मु कल का सामना कर रहे ह।

इन दोन युवा ए ोबै स क इस शानदार जीवन शैली का ह असर था क हमने भी

ए ोबैट बनने क हसरत पाल लीं। इसिलए कई बार सुबह के व , जैसे ह िथयेटर खुलता,
हम म से एक या दो जन एक र सी के साथ कलाबा जयां खाने का अ यास करते। हम र सी
को अपनी कमर से बांध लेते, जो एक पूली से जुड़ होती, और हम म से एक लड़का र सी को
थामे रहता। मने इस तर के से अ छ कलाबा जयां खाना सीख िलया था क तभी म िगरा
और अपने अंगूठे म मोच खा बैठा। इसी के साथ ह मेरे ए ोबैट के कै रयर का अंत हआ।

नृ य के अलावा हमेशा हम लोग क कोिशश होती क अपने आइटम म नया कुछ

जोड़। म एक कॉमेड बाजीगर बनना चाहता था। और इसके िलए मने इतने पैसे बचा िलये थे
क मने उनसे चार रबर क गद और टन क चार लेट खर द ं। म अपने ब तर के पास खड़ा
घंट इनके साथ अ यास कया करता।
िम टर जै सन अिनवाय प से एक बेह तर न आदमी थे। मेरे प छोड़ने से तीन
मह ने पहले उ ह ने मेरे पता क सहायताथ एक आयोजन कया था और उसम हम लोग
शािमल हए
ु थे। मेरे पता उन दन बहत
ु बीमार चल रहे थे। कई वैराइट कलाकार ने बना

कोई शु क िलये अपनी सेवाएं द ं। िम टर जै सन क अ म बाल गोपाल मंडली ने भी अपनी
सेवाएं द ं। उस सहायताथ आयोजन म मेरे पता टे ज पर मौज़ूद थे और वे बहत
ु मु कल से
सांस ले पा रहे थे। बहत
ु तकलीफ़ से वे अपना भाषण दे पाये थे। म टे ज पर एक तरफ खड़ा
उ ह दे ख रहा था। उस व

म नह ं जानता था क वे ितल-ितल मौत क तरफ बढ़ रहे थे।

जब हम लंदन म होते तो म हर स ाह मां से िमलने के िलए जाता। उसे लगता क म
पीला पड़ गया हंू और कमज़ोर हो गया हंू और क नाचने से मेरे फेफड़ पर असर हो रहा है ।
इस बात ने उसे इतना िचंितत कर दया क उसने इस बारे म िम टर जै सन को िलखा।

55

िम टर जै सन इतने नाराज़ हए
ु क आ खरकार उ ह ने मुझे घर का ह रा ता दखा दया
क म िचंतातुर मां का लाडला इतनी बड़ परे शानी के लायक नह ं हंू ।

अलब ा, कुछ ह ह त के बाद मुझे दमा हो गया। दमे के दौरे इतने तेज होते क मां

को पूरा यक न हो गया क मुझे ट बी हो गयी है और वह मुझे तुरंत ा पटन अ पताल ले
गयी। वहां मेर अ छ तरह से पूर जांच क गयी। मेरे फेफड़ म कोई भी खराबी नह ं थी, बस,
मुझे अ थमा हो गया था। मह न तक म उसक तकलीफ से गुज़रता रहा और मुझे सांस लेने
म भी तकलीफ होती थी। कई बार तो मेर खड़क से बाहर कूद जाने क इ छा होती। िसर पर
कंबल डाले जड़ -बू टय क भाप लेने से भी मेरे िसर दद म कोई कमी न आती। ले कन जैसा
क डॉ टर ने कहा था, अंतत: म ठ क हो जाऊंगा, म ठ क हो ह गया।
इस दौरान क मेर

मृितयां प और धूिमल होती रहती ह। सबसे उ लेखनीय छ व

तो हमार दयनीय हालात का िनचाट कछार है । मुझे याद नह ं पड़ता क उन दन िसडनी
कहां था। चूं क वह मुझसे चार बरस बड़ा था, वह कभी-कभार ह मेरे चेतन म आता। ऐसा हो
सकता है क मां क तंग हालत के कारण वह नाना के पास रह रहा हो। हम अपना डोरा-डं डा
उठाये एक गर बखाने से दसरे
ू गर बखाने क ओर कूच करते रहते। और अंतत: 3 पाउनाल
टै रेस क दछ
ु ी पर आ बसे थे।

मुझे अपनी गर बी के सामा जक कलंक का अ छ तरह से भान था। गर ब से गर ब

ब चे भी र ववार क शाम को घर के बने डनर का लु फ ले ह िलया करते थे। घर पर कोई
भुनी हई
ु चीज़ का मतलब स मानजनक

थित हआ
ू गर ब
ु करता था जो एक गर ब को दसरे

से अलग करती थी। वे लोग, जो र ववार क शाम घर पर डनर के िलए नह ं बैठ पाते थे, उ ह
िभखमंगे वग का माना जाता था और हम उसी वग म आते थे। मां मुझे नजद क कॉफ शॉप
से छ: पेनी का डनर (मीट और दो स जयां) लेने के िलए भेजती। और सबसे यादा शम क
बात ये होती क ये र ववार क शाम होती। म उसके आगे हाथ जोड़ता क वह घर पर ह कोई
चीज़ य नह ं बना लेती और वह बेकार म ह यह समझाने क कोिशश करती क घर पर ये
ह चीज बनाने म दगु
ु नी लागत आयेगी।

अलब ा, एक सौभा यशाली शु वार को, जब उसने घुड़दौड़ म पांच िशिलंग जीते थे,

मुझे खुश करने क नीयत से मां ने तय कया क वह र ववार के दन डनर घर पर ह
बनायेगी। दसर

वा द चीज के अलावा वह भूनने वाला मांस भी लायी जसके बारे म वह

तय नह ं कर पा रह थी क ये गाय का मांस है या गुद क चब का ल दा है । ये लगभग पांच
प ड का था और उस पर िच पी लगी हई
ु थी,"भूनने के िलए।"

हमारे पास य क ओवन नह ं था, इसिलए मां ने उसे भूनने के िलए मकान-माल कन

का ओवन इ तेमाल कया और बार-बार उसक रसोई के भीतर आने-जाने क जहमत से
बचने के िलए अंदाज से उस मांस के ल दे को भूनने के िलए ओवन का टाइम सेट कर दया

56

और उसके बाद ह वह रसोईघर म गयी। और हमार बद क मती से हआ
ु ये क हमारा ये
मांस का पंड

केट क गद के आकार का ह रह गया था। इसके बावजूद, मां के इस ढ़

िन य के बावजूद क हमारा खाना बाहर के छ: पस के खाने से कम तकलीफदे ह और यादा
वा द होता है , मने उस भोजन का भरपूर आनंद िलया और यह महसूस कया क हम भी
कसी से कम नह ं।
हमारे जीवन म अचानक एक प रवतन आया। मां अपनी एक पुरानी सहे ली से िमली
जो बहत
ु समृ पहंु चेली चीज़ बन गयी थी, खूबसूरत हो गयी थी और चलती-पुरजी टाइप क
म हला बन गयी थी। उसने एक अमीर बूढ़े कनल क िम

ै स बनने के िलए टे ज को

अल वदा कह द थी।
वह टॉकवेल के फैशनपर त जले म रहा करती थी और मां से फर से िमलने के
अपने उ साह म उसने हम आमं त कया क गिमय म हम उसके यहां आ कर रह। चूं क
िसडनी गांव क तरफ म ती मारने के िलए गया हआ
ु था इसिलए मां को मनाने म ज़रा भी

तकलीफ नह ं हई
ु और उसने अपनी सुई और कसीदे कार के हनर
ु से अपने-आपको काफ ढं ग

का बना िलया था और मने अपना संडे सूट पहन िलया। यह अ म बाल मंडली का अवशेष था
और इस मौके के हसाब से ठ क-ठाक लग रहा था।
और इस तरह रात -रात हम लसडाउन

वायर म कोने वाले एक बहत
ु ह शांत

मकान म पहंु चा दये गये। ये घर नौकर -चाकर से भरा हआ
ु था। वहां गुलाबी और नीले

बैड म थे, छ ंट के परदे थे और सफेद भालू के बाल के नमदे थे। मुझे कतनी अ छ तरह से
याद ह डाइिनंग म के साइड बोड को सजाने वाले बड़े नीले हॉटहाउस े स क और मुझे यह
बात कतनी ल जा से भर दे ती जब म दे खता क वे रह यमय तर के से गायब होते चले जा
रहे ह और हर दन बीतने के साथ उनके ढांचे भर नज़र आने लगे थे।
घर के भीतर काम करने के िलए चार औरत थीं। रसोईदा रन और तीन नौकरािनयां।
मां और मेरे अलावा वहां पर एक और मेहमान थे। बहत
ु तनाव
जनक कुतर हई
ु लाल मूंछ थीं। वे बहत
ु ह आकषक य

त, एक सुदशन युवक

व के मािलक थे और बहत

स जन थे। वे उस घर म थायी सामान क तरह थे ले कन सफेद मूंछ वाले कनल महाशय
के नज़र आने तक ह । उनके आते ह वह खूबसूरत नौजवान गायब हो जाता।

कनल महोदय का आना कभी-कभार ह होता। ह ते म दो-एक बार। जब वे वहां होते
तो पूरे घर म एक रह य का आवरण तना रहता और उनक मौजूदगी हर जगह महसूस क
जाती। और मां मुझे बताती क उनके सामने न पड़ा क ं और उ ह नज़र न आऊं। एक दन म
ठ क उसी व

हॉल म जा पहंु चा जब वे सी ढ़य से नीचे उतर रहे थे।

57

वे ल बे, भ य, राजसी ठाठ-बाठ वाले य

थे और उ ह ने

ॉक कोट और टॉप है ट पहने हए

थे। उनका चेहरा गुलाबी था। ल बी सफेद कलम चेहरे पर दोन तरफ काफ नीचे तक थीं और
िसर गंजा था। वे मेर तरफ दे ख कर िश ता से मु कुराये और अपने रा ते चले गये।
म समझ नह ं पाया क उनके आने के पीछे ये सब या हं गामा था और उनके आते ह
य अफरा-तफर मच जाती थी ले कन वे कभी भी बहत
ु अिधक अरसे तक नह ं रहे और

कुतर मूंछ वाला नौजवान ज द ह लौट आता और सब कुछ पहले क तरह सामा य ढं ग से
चलने लगता।
म कुतर हई
ु मूंछ वाले नौजवान का मुर द हो गया। हम दोन

लाफाम कॉमन तक

ल बी सैर पर जाते और हमारे साथ माल कन के दो खूबसूरत ेहाउं ड कु े होते। उन दन
लाफाम कॉमन का माहौल बेहद खूबसूरत हआ

ु करता था। यहां तक क कैिम ट क दकान

भी, जहां हम अ सर खर दार कया करते थे, फूल के अक क गंध, इ

और साबुन और

पाउडर के साथ भ य लगा करती थी। मेरे अ थमा के इलाज के िलए उ ह ने मां को बताया था
क रोज़ सवेरे वह मुझे ठं डे पानी से नहलाया करे और शायद इससे फायदा भी हआ।
ये नान

बहत
ु ह

वा

यकर थे और म उ ह पसंद करता हआ
ु बड़ा हआ।

यह एक उ लेखनीय बात है क हम कस सफाई से अपने आपको सामा जक मान
मयादाओं के अनुसार ढाल लेते ह। आदमी उपल ध सृ

क भौितक सु वधाओं के साथ

कतनी अ छ तरह से एकाकार और आद हो जाता है । एक स ाह के भीतर ह मेरे िलए सब
कुछ सहज वीकाय हो चला था। बेहतर होने का बोध - सुबह सवेरे क औपचा रकताएं, कु
को ए सरसाइज कराना, उनके नये चमड़े के प टे िलये जाना, फर खूबसूरत घर म वा पस
लौटना, जहां चार तरफ नौकर-चाकर ह , शानदार तर के से चांद के बरतन म परोसे जाने
वाले लंच क

ती ा करना।

हमारे घर का पछवाड़ा एक दसरे
ू घर के पछवाड़े से सटा हआ
ु था और उस घर म भी

उतने ह नौकर थे जतने हमारे घर पर थे। उस घर म तीन लोग रहा करते थे, एक युवा
द प

और उनका एक लड़का जो लगभग मेर ह उ

का था। उसके पास एक बालघर था

जसम बहत
ु खूबसूरत खलौने भरे हए
ु थे। मुझे अ सर उसके साथ खेलने के िलए बुलवा

िलया जाता और रात के खाने के िलए रोक िलया जाता। हम दोन आपस म बहत
ु अ छे दो त
बन गये थे। उसके पता िसट बक म कसी बहत
ु अ छे पद पर काम करते थे और उसक मां
युवा और बेहद खूबसूरत थी।

एक दन मने अपनी तरफ वाली नौकरानी को लड़के क नौकरानी से गुपचुप बात
करते हए
ु सुन िलया क उ ह लड़के के िलए एक गवनस क ज़ रत है ।

"और इसे भी उसी क ज़ रत है ।" हमार वाली नौकरानी ने मेर तरफ इशारा करते

हए
ु कहा। म इस बात से बेह द रोमांिचत हो गया क मेर भी अमीर लड़क क तरह दे खभाल

58

क जायेगी ले कन म इस बात को कभी भी समझ नह ं पाया क य उसने मेरा दजा इतना
ऊपर उठा दया था। हां, तब क बात अलग है क वह जन लोग के िलए काम करती थी या
जनके पड़ोस म वे लोग रहते थे उनका कद ऊपर उठा कर वह खुद ह अपना दजा ऊपर
उठाना चाहती हो। आ खर, म जब भी पड़ोस के उस छोकरे के साथ खाना खाता था, मुझे
कमोबेश यह लगता क म बन बुलाया मेहमान ह तो हंू ।

जस दन हम उस खूबसूरत घर से अपने 3 पाउनाल के घर लौटने के िलए वा पस

चले, वह उदासी भरा दन था, फर भी एक तरह क राहत भी थी क हम अपनी आज़ाद म
वा पस लौट रहे ह। मेहमान के तौर पर वहां रहते हए
ु आ खर हम कुछ तनाव तो होता ह था।
और जैसा क मां कहा करती थी, हम केक क तरह थे। अगर उसे बहत
ु दे र तक रखा जाये तो
वह बासी और अखा हो जाता है । और इस तरह से उस सं

और शानो शौकत से भरे व

के रे शमी तार हमसे िछन गये और हम एक बार फर अपने जाने पहचाने फटे हाल तौर-तर क
म लौट आये।

59

चार
1899 बरस गलमु छ का बरस था। गलमु छ वाले राजा, राजनियक, सैिनक और
ना वक, ू गर, सेिलसबर , रसोइये, कैसर, और

केट खलाड़ । दखावे और शोशेबाजी का

वा हयात बरस। बेइं तहा अमीर और बेइंतहा गर बी का बरस। काटू न और ेस, दोन क
शू यता से भरे राजनैितक हठधिमता से भरे बरस। ले कन इं गलड को कई ध के और
बदमग ज़यां सहनी थीं। अ

ांसवाल म कुछ बोअर कसान बला वज़ह यु

े ड़े हए
ु थे

और बड़े -बड़े प थर के और च टान के पीछे से शानदार िनशाने लगाते हए
ु हमारे लाल कोट
धार सैिनक को मार रहे थे। तब हमारे यु कायालय वाल के दमाग क ब ी जली और

उ ह ने तुरत-फुरत लाल को खाक म बदल दया। अगर बोअर उ ह इस प म मारना चाह
तो भले ह मार सकते ह।
मुझे यु क थोड़ बहत
ु ह जानकार थी और ये मुझे िमली थी दे श भ

व वध मंच पर हा यमय

के गीत ,

तुितय और िसगरे ट क ड बय पर छपी जनरल क त वीर

के मा यम से। अलब ा, हमारे द ु मन ख म न होने वाले वलेन थे। कभी सुनने म आता क
बोअर लोग ने लेड

मथ को घेर िलया है तो इं गलड मेफ कंग को मु

करा लेने के बाद

खुशी के मारे पागल हो गया है । आ खरकार हम जीत ह गये, बेशक ये जीत भी परे शान ह
करने वाली थी। अलब ा, म ये सार बात सबसे सुनता था ले कन मां इस बारे म कुछ नह ं
बताती थी। उसने कभी भी लड़ाई का ज़

नह ं कया। उसके पास लड़ने के िलए खुद क

लड़ाइयां थी।
िसडनी अब चौदह बरस का हो चला था। उसने कूल छोड़ दया था और उसे

डाक घर म तार वाले के प म काम िमल गया था। िसडनी क पगार और मां क िसलाई
मशीन क वज़ह से होने वाली कमाई से हमारा घर कसी तरह ठ क-ठाक चल रहा था ले कन
इसम मां का योगदान मामूली ह था। वह मज़दरू का खून चूसने वाली कसी दकान
के िलए

काम करती थी और उसे वहां पर लाउज सीने के एवज म एक दजन लाउज के िलए एक

िशिलंग और छ: पस िमलते थे। हालां क उसे डजाइन पहले से ह कट कर िमला करते थे,
फर भी एक दजन लाउज सीने म उसे पूरे बारह घंटे लग जाया करते थे। मां का रकाड था
एक ह ते म चौदह दजन लाउज सी कर दे ने का। इससे उसे छ: िशिलंग और नौ पस क
कमाई हई
ु थी।

अ सर रात को म अपनी दछ
ु ी म लेटा जागता रहता और उसे अपनी मशीन पर

झुके काम करते दे खा करता। उसका िसर तेल क कु पी क रौशनी म झुका रहता और उसका
चेहरा नरम छाया म नज़र आता। उसके ह ठ तनाव के कारण थोड़े से खुले होते और वह
अपनी मशीन पर तेज़ी से िसलाई का काम करती रहती। और उसके इस काम क उŠबा दे ने

60

वाली िभन-िभन क आवाज क वजह से मुझे झपक आ जाती। वह जब भी रात-बेरात इस
तरह से दे र तक काम करती थी तो उसके सामने एक ह मकसद होता - पैस क अगली कसी
न कसी क त क मीयाद िसर पर होती। हमेशा क त क अदायगी क सम या िसर पर
खड़ होती।
अब एक और संकट िसर पर आ खड़ा हआ
ु था। िसडनी को कपड़ के नये जोड़े क

ज़ रत थी। वह अपनी टे िल ाफ वाली यूिनफाम ह ते के सभी दन, यहां तक क र ववार को
भी डाटे रहता था और आ खर एक ऐसा दन भी आया क उसके यार दो त उसे इस यूिनफाम
को लेकर छे ड़ने लगे। इस वज़ह से वह दो ह ते तक, उस व

तक घर पर ह रहा जब तक मां

के पास उसके िलए नीले सज का सूट खर दने लायक पैसे नह ं हो गये। उसने कसी तरह से
अ ठारह िशिलंग का बंदोब त कर ह िलया था। इससे हमार अथ यव था म भार

दवािलयेपन क हालत आ गयी थी। इसिलए मां को मजबूरन हर सोमवार को, जब िसडनी

टे िल ाफ आ फस चला जाता था, सूट िगरवी रखना पड़ता था। उसे सूट के िलए सात िशिलंग
िमलते थे। और हर शिनवार को सूट छुड़वा िलया जाता ता क िसडनी उसे ह ते क छु टय
के दौरान पहन सके। यह सा ा हक यव था पूरे साल तब तक चलती रह जब तक सूट फट
कर तार तार नह ं हो गया। तभी ये झटका लगा।
सोमवार क सुबह मां हमेशा क तरह िगरवी वाली दकान
पर गयी तो दकानदार

हच कचाया,"माफ करना, िमसेज चै लन, ले कन अब हम आपको सात िशिलंग उधार नह ं
दे सकते।"
मां है रान रह गयी थी,"ले कन य ?" उसने पूछा था।
"अब इसम अ छा-खासा जो खम है । पट तार-तार हो रह है । दे खो तो ज़रा,"
दकानदार
पट क सीट पर हाथ रखते हए

ु बोला,"आप उसके आर-पार दे ख सकती ह।"
"ले कन इन कपड़ को अगले ह ते छुड़वा िलया जायेगा।" मां ने कहा था।

िगरवी वाले ने िसर हलाते हए
ु कहा,"बहत
ु हआ
ु तो म आपको कोट और वे टकोट के

िलए तीन िशिलंग दे सकता हंू ।"

मां कभी भी रोती नह ं थी ले कन इस तरह के अचानक आये ध के को सह न पाने के

कारण वह आंसू बहाती घर वा पस आयी। पूरा ह ता घर क गाड़ खींचने के िलए उसे इन
सात िशिलंग का ह सहारा था।
इस बीच मेरे खुद के कपड़े , कम से कम कहंू तो चीथड़े हो रहे थे। हम अ म

लंकाशायर बाल गोपाल क जो पोशाक थी, उसक वाली मेर पोशाक अब तार तार हो चली
थी। जहां-तहां िथगिलयां लगी हई
ु थीं। कुहनी पर, पट पर, जूत पर और मोज पर। और

अपनी इसी हालत म म टॉकवैल के अपने खास न ह दो त से जा टकराया। मुझे नह ं पता
था क वह केिनंगटन रोड पर या कर रहा था, ले कन उसे दे ख कर म बहत
ु परे शानी म पड़

61

गया था। हालां क वह मुझसे बहत
ु यार से िमला ले कन म अपनी ख ता हालत के कारण
उससे आंख भी नह ं िमला पर पा रहा था। अपनी परे शानी को छुपाने के िलए मने अपना

आजमाया हआ
ु तर का अपनाया और अपनी बेहतर न, सधी हई
ु आवाज म उसे बताया क

चूं क म बढ़ईिगर क अपनी क ा से आ रहा हंू इसिलए म ये सब पुराने कपड़े पहने हए
ु हंू ।

ले कन उसे मेर इस सफाई म ज़रा सी भी दलच पी नह ं थी। वह जैसे आसमान से िगरा लग
रहा था और अपनी है रानी-परे शानी को छुपाने के िलए दाय बाय दे खने लगा। उसने तब मां के
बारे म पूछा।
मने त काल जवाब दया क मां तो आजकल गांव गयी हई
ु है और तब मने उसी क

तरफ यान दे ना शु

कया,"और सुनाओ, आजकल वह ं रह रहे हो या?"

"हां।" उसने मुझे ऊपर से नीचे तक इस तरह से घूरते हए
ु दे खा मानो मने कोई अपराध

कर दया हो।

"अ छा, तो म जरा चलूंगा," मने अचानक कह कर अपनी जान छुड़ायी।
वह सहष मु कुराया और अ छा वदा कह कर चला गया। वह एक तरफ चला और म उसक
वपर त दशा म बढ़ा। म गु से और शम के कारण िगरते पड़ते भागा जा रहा था।
मां हमेशा कहा करती थी,"तुम हमेशा अपनी मयादा का याग कर सकते हो, ले कन
हो सकता है तु ह कुछ भी न िमले।" ले कन वह खुद ह इस सू वा य का पालन नह ं करती
थी और अ सर मेर िश ता के बोध को ठे स लगती थी। एक दन जब म ा पटन अ पताल
से लौट रहा था तो मने दे खा क मां कुछ सड़कछाप लड़क को ध कया रह थी य क वे एक
पागल औरत को सता रहे थे। उस औरत ने बुर तरह से गंदे चीथड़े लपेटे हए
ु थे और खुद भी

गंद थी। उसका िसर मुंडा हआ
ु था और ये उन दन असामा य बात समझी जाती थी। लड़के

उस पर हँ स रहे थे और एक दसरे
ू को उस पर ध कया रहे थे। और उसे छू नह ं रहे थे मानो उसे
छू लेने से उ ह गंदगी लग जायेगी। वह द ु खयार तब तक हरणी क तरह सड़क के बीच -

बीच खड़ रह जब तक जा कर मां ने उसे उन दु लड़क से छुड़वा नह ं िलया। तब उस औरत
के चेहरे पर पहचान के िच उभरे । उस औरत ने कमज़ोर आवाज म मां को उसके टे ज के
नाम से पुकारा,"तुम मुझे नह ं पहचानती या? म इवा ले टॉक हंू ।"
मां ने उसे तुरंत पहचान िलया। वह मां के साथ क वैराइट

टे ज क पुरानी दो त थी।

मां क इस बात से म इतना परे शान हो गया क आगे बढ़ गया और आगे कोने पर जा
कर मां का इं तज़ार करने लगा। ब चे मेरे पास से गुज़र गये। वे फ तयां कस रहे थे और खी
खी करके हँ स रहे थे। म गु से से लाल पीला हो रहा था। म ये दे खने के िलए मुड़ा क मां को
या हो गया है । हे भगवान, वह औरत मां के साथ लग ली थी और अब दोन मेर तरफ चली
आ रह थीं।
मां ने कहा,"तु ह न ह चाल क याद है ?"

62

"तुम याद क बात करती हो, जब वो ज़रा सा था तो मने कतनी बार उसे अपनी बांह
म उठाया है ।" उस औरत से लाड़ से कहा।
ये वचार ह िलजिलजे थे य क वह औरत इतनी गंद और िघनौनी थी। और जब
हम चले आ रहे थे तो मुझे इस बात से खासी को त हो रह थी क लोग मुड़ मुड़ कर हम तीन
को दे ख रहे थे।
मां उसे वैराइट के दन से 'डै िशंग इवा लै टाक' के नाम से जानती थी। वह उन दन
आकषक और सदाबहार हआ
ु करती थी, मां ने मुझे ऐसा बताया था। उस औरत ने मां को

बताया क वह बीमार थी और अ पताल म थी और अ पताल छोड़ने के बाद से वह मेहराब
के तले और सै वेशन आम के रै न बसेर म ह सो रह थी।
सबसे पहले तो मां ने उसे नान के िलए सावजिनक नानघर म भेजा और उसके

बाद, मेरे आतंक क सीमा न रह जब मां उसे अपने साथ हमार दछ
ु ी पर ले आयी। उसक
इस हालत के पीछे उसक बीमार ह थी या कोई और कारण, म नह ं जान पाया। इससे

वा हयात बात और या हो सकती थी क वह िसडनी क आराम कुस वाले ब तर म सोयी
थी। अलब ा, मां ने उसे वे कपड़े िनकाल कर दये जो वह दे सकती थी और उसे दो िशिलंग
भी उधार दये। तीन दन बाद वह चली गयी और वह आ खर बार थी जब हमने `डै िशंग इवा
लै टाक ' के बारे म दे खा या सुना था।
पता के मरने से पहले मां ने पाउनाल टै रेस वाला घर छोड़ दया था और अपनी एक
सखी, िगरजा घर क सद या और सम पत ईसाई म हला िमसेज टे लर के घर म एक कमरा
कराये पर ले िलया था। वे एक छोटे कद क , लगभग पचास बरस क चौड़े बदन क म हला
थीं। उनका जबड़ा चौकोर था और पीला झु रय दार चेहरा था। उ ह िगरजा घर म दे खते समय
मने पाया था क उनके दांत नकली थे। जब वे गातीं तो उनके दांत उनके ऊपर जबड़े से जीभ
पर िगर जाते। बहत
ु ह मोहक नज़ारा होता।

उनका यवहार भावशाली था और उनके पास अकूत ताकत थी। उ ह ने मां को

अपनी ईसाइयत क छ -छाया म ले िलया था और अपने बड़े से घर क दसर
मं ज़ल पर

सामने क तरफ वाला कमरा बहत
ु ह वा जब कराये पर दे दया था। ये घर क

तान के

पास था।

उनके पित चा स डकस के िम टर पक वक क हबह
ू ू ितकृित थे और उनके घर क

सबसे ऊपर वाली मं ज़ल पर ग णत म काम आने वाले लर बनाने का अपना कारखाना था।
छत पर आसमानी रौशनी आती और मुझे वह जगह बलकुल वगतु य लगती। वहां बहत

अिधक शांित होती। म अ सर िम टर टे लर को काम करते हुए दे खता जब वे अपने मोटे मोटे
कांच वाले च मे से और मै नीफाइं ग लास से गहराई से दे ख रहे होते और ट ल का कोई

63

केल बना रहे होते और इं च के भी पांचव ह से को नाप रहे होते। वे अकेले काम करते और म
अ सर उनके छोटे मोटे काम कर दया करता।
िमसेज टे लर क एक ह इ छा थी क वे कसी तरह अपने पित को ईसाई धम क
ओर मोड़ द। उनक धािमक नैितकता के हसाब से तो उनके पित पापी ह थे। उनक बेट जो
श ल-सूरत म ठ क अपनी मां पर गयी थी, िसफ उसका चेहरा कम सूजा हआ
ु था और हां, वह

काफ जवान भी थी, आकषक होती अगर उसका यवहार ढ ठपने का न होता और उसके तौरतर के आप जनक न होते। अपने पता क तरह वह भी चच नह ं जाती थी। ले कन िमसेज
टे लर ने उन दोन को धम क शरण म लाने क उ मीद कभी भी नह ं छोड़ । बेट अपनी मां
क आंख का तारा थी ले कन मेर मां क आंख का नह ं।
एक दोपहर को, जब म ऊपर वाली मं ज़ल पर िम टर टे लर को काम करते हए
ु दे ख

रहा था, मने नीचे से मां और िमसेज टे लर के बीच कहा-सुनी क आवाज़ सुनी। िमसेज टे लर
बाहर थीं। मुझे नह ं पता क ये सब कैसे शु हआ
ू पर ज़ोर ज़ोर से
ु ले कन वे दोन एक दसरे

िच ला रह थीं। जब म नीचे सी ढ़य पर पहंु चा तो मां सी ढ़य के जंगले पर झुक हई
ु थी,"तुम
अपने आपको समझती या हो? औरत जात क लड़ ?"

"ओह," बेट िच लायी, "एक ईसाई औरत क जुबान से कतने शानदार फूल झर रहे
ह?"
"िचंता मत करो," मां ने तुरंत जवाब दया,"ये सब बाइ बल म है । ओ ड टे टामट का
पांचवां खंड, अ ठाइसवां अ याय, सतीसवां पद, हां, वहां इसके िलए एक दसरा
श द दया

हआ
ु है । बस, तु ह लड़ श द ह सूट करे गा।"

इसके बाद हम अपने पाउनाल टै रेस म वा पस चले आये।
केिनंगटन रोड पर ी टै स बार इस तरह क जगह नह ं थी जहां मेरे पता अ सर

जाया करते ले कन एक बार वहां से गुज़रते हए
ु मुझे पता नह ं ऐसा य लगा क अंदर झांक

कर दे खना चा हये क कह ं वे भीतर तो नह ं बैठे ह। मने सैलून का दरवाजा कुछ ह इं च खोला
था क वे वहां बैठे हए
ु मुझे दखायी दये। वे एक कोने म बैठे हए
ु थे। म वा पस लौटने ह वाला
था क उनके चेहरे पर चमक उभर और उ ह ने मुझे अपने पास आने का इशारा कया। म

इस तरह के वागत से है रान था, य क वे कभी भी दखावे म व ास नह ं रखते थे। वे बहत

बीमार लग रहे थे। आंख उनक भीतर को धंसी हई
ु थीं और उनका शर र सूज कर बहत
ु बड़ा

लग रहा था। उ ह ने अपना एक हाथ नेपोिलयन क तरह अपने वे ट कोट म टका रखा था
मानो अपनी सांस क तकलीफ पर काबू पाना चाहते ह । उस शाम वे बेहद बेचैन थे। वे मां
और िसडनी के बारे म पूछते रहे और मेरे चलने से पहले उ ह ने मुझे अपनी बांह म भरा और
पहली बार मुझे चूमा। यह वह आ खर बार था जब मने उ ह जी वत दे खा।

64

तीन स ाह के बाद उ ह सट थॉमस अ पताल म ले जाया गया। पता जी को वहां ले
जाने के िलए उन लोग को पता जी को शराब पलानी पड़ थी। जब पताजी को पता चला
क वे कहां ह तो वे बुर तरह से लड़े झगड़े । ले कन उनक हालत मर रहे आदमी जैसी थी। वे
मर रहे थे। हालां क वे अभी भी बहत
ु जवान थे, मा सतीस बरस के, वे जलोदर रोग के कारण
मर रहे थे। उन लोग ने पता जी के घुटने से चार गैलन पानी िनकाला था।

मां उ ह दे खने के िलए कई बार गयी और हर मुलाकात के बाद वह और यादा उदास
हो जाती। वह बताती क पता फर उसके पास वा पस आ कर अ

का म नये िसरे से ज़ंदगी

शु करना चाहते ह। म इस तरह क संभावना से ह खल उठता। मां िसर हलाती, य क
वह बेह तर जानती थी,"वे ये बात िसफ इसिलए कह रहे थे य क वे अ छे दखना चाहते थे।"
मां ने बताया था।

एक दन जब वह अ पताल से वा पस आयी तो रे वरड जॉन मैकनील एवजिल ट क

बात सुन कर बहत
ु खफा थी। जब मां पताजी से िमलने गयी थी तो तो वे पता से कह रहे
थे,"दे खो, िम टर चाल , जब भी म तु हार तरफ दे खता हंू तो मुझे एक पुरानी कहावत ह
याद आती है क जो जैसा बोएगा, वैसा ह काटे गा।"

"मरते हए
ु आदमी को दलासा दे ने के िलए आप कतनी अ छ वाणी बोल रहे ह," मां

ने पलट कर जवाब दया था। कुछ ह दन बाद पताजी क मृ यु हो गयी थी।

अ पताल वाले जानना चाहते थे क उनका अंितम सं कार कौन करे गा। मां के पास
तो एक फूट कौड़ भी नह ं थी इसिलए उसने वैराइट आ ट ट सहायता िनिध का नाम
सुझाया। ये िथयेटर वाल क एक चै रट सं था थी। इस सुझाव से प रवार के चै लन वाल
म अ छा खासा हं गामा मच गया। चै लन प रवार का आदमी खैरात के पैस से दफनाया
जाये, ये बात वे कैसे गवारा कर सकते थे। उस समय पता जी के एक छोटे भाई अ बट लंदन
म ह थे। वे अ
उठाया।

का से आये हए
ु थे। उ ह ने पताजी को दफनाने का खचा उठाने का ज मा

ताबूत पर सफेद साटन का कफन लपेटा गया था और पताजी के चेहरे के चार उसके
तरफ ड़े जी के न ह न ह सफेद फूल से सजाया गया था। मां का कहना था क वे इतने
सादगी-भरे और मन को छू लेने वाले लग रह थे। मां ने पूछा था क ये फूल कसने रखवाये ह।
वहां पर मौजूद कमचार ने बताया था क सुबह सुबह एक औरत एक छोटे -से ब चे के साथ
आयी थी और ये फूल रख गयी थी। वह लुइस थी।
पहली गाड़ म मां, अंकल अ बट और म थे। टू टं ग तक क या ा तनाव पूण थी
य क मां इससे पहले कभी भी अंकल अ बट से नह ं िमली थी। वह कुछ कुछ ठाठ-बाठ वाले
आदमी थे और अिभजा य सं कार वाले श स थे। हालां क वे बहत
ु वन थे, उनका यवहार

65

बफ क तरह ठं डा था। उनक

याित एक अमीर आदमी के प म थी। ांसवाल म घोड़ के

उनके रच थे और बोअर यु के दौरान उ ह ने

टश सरकार को घोड़े उपल ध कराये थे।

स वस के दौरान बरसात होने लगी थी। क खोदने वाल ने फटाफट ताबूत पर िम ट
के ल दे फके। इससे बहत
ु ह

ू र क म क आवाज हो रह थी। ये भयावह नज़ारा था और

कुल िमला कर बेहद डरावना था इसिलए म रोने लगा। इसके बाद र तेदार ने अपनी मालाएं
और फूल उस पर डाले। मां के पास डालने के िलए कुछ भी नह ं था, इसिलए उसने मेरा
बेशक मती काले बाडर वाला माल िलया और मेरे कान म फुसफुसायी,"मेरे लाल, ये हम
दोन क तरफ से।" इसके बाद चै लन प रवार रा ते म एक पब म खाना खाने के िलए क
गया और उ हने भीतर जाने से पहले हमसे बहत
ु वन ता से पूछा क हम कहां छोड़ दया
जाये। और हम घर छोड़ दया गया था।

जब हम घर पहंु चे तो घर म खाने को एक दाना भी नह ं था। बीफ के थोड़े शोरबे क

एक लेट रखी थी। मां के पास एक फूट कौड़ भी नह ं थी। उसके पास िसफ दो पस थे जो

उसने िसडनी को खाने का इं तज़ार करने के िलए दे दये थे। पताजी क बीमार के बाद उसने
बहत
ु कम काम हाथ म िलया था इसिलए अब ह ता ख म होने को था और टे िल ाफ बाय के

प म िसडनी क सात िशिलंग ह ते क पगार पहले ह ख म हो चुक थी। अंितम सं कार के

बाद हम भूख लगी हई
ु थी। सौभा य से र

वाला बाहर से गुजर कर जा रहा था। मां के पास

तेल का एक पुराना टोव था जसे मां ने बहत
ु संकोच के साथ अधपेनी म बेचा और उस
अधपेनी क


े लायी जसे हमने उस शोरबे के साथ खाया।

मां चूं क पता क कानूनन वधवा थी इसिलए उसे अगले दन बताया गया क वह
अ पताल जा कर उनका सामान वगैरह ले ले। इस सामान म एक काला सूट था जसम खून
के दाग लगे हए
ु थे। एक जांिघया था, एक कमीज, एक काली टाई, एक पुराना े िसंग गाउन,
घर पर पहनने क कुछ पुरानी च पल, जनम पंज क तरफ कुछ ठु ं सा हआ
ु था। जब मां ने
वह बाहर िनकाला तो लीपर म सोने का एक िस का बाहर लुढ़क आया। ये भगवान क
भेजी हई
ु सौगात थी।

ह त तक हम अपने बाजू पर काली े प क प ट लगाये रहे । शोक का ये संकेत भी

मेरे िलए फायदे मंद रहा य क शिनवार क दोपहर के व

जब म फूल बेचने के काम धंधे पर

िनकलता तो मुझे इससे फायदा ह होता। मने मां को मना िलया था क वह मुझे एक िशिलंग
उधार दे दे । म सीधे ह फूल बाजार गया और नास सस के फूल के दो बंडल खर दे और कूल
से आने के बाद म उनके न ह-न ह बंडल बनाने म जुटा रहा। अगर सब बक जाते तो म सौ
ितशत लाभ कमा सकता था। म सैलून म जाता जहां म अपने संभा वत ाहक तलाशता
कहता,"नास िसस मैडम, िमस .. नास िसस के फूल िमस।" म हलाएं हमेशा पूछतीं,"कौन था
बेटे?" म अपनी आवाज फुसफुसाहट के तर तक ले आता और बताता,"मेरे पता।" और वे

66

मुझे टप दे तीं। मां ये दे ख कर है रान रह गयी क म िसफ दोपहर म काम करके पांच िशिलंग
कमा लाया था। एक दन उसने मुझे झड़क दया जब उसने मुझे एक पब से बाहर आते दे खा।
उस दन से उसने मेरे फूल बेचने पर पाबंद लगा द । उसका ये मानना था क बार म म जा
कर इस तरह से फूल बेचना उसक ईसाईयत को कह ं ठे स लगाता था,"दा पीने से तु हारे
पता मर गये और इस तरह क कमाई से हम पर दभा
ु य का ह साया पड़े गा," उसने कहा।

अलब ा, उसने सार कमाई रख ली थी। उसने फर कभी मुझे फूल बेचने नह ं दये।

मुझम धंधा करने क जबरद त समझ थी। म हमेशा कारोबार करने क नयी-नयी
योजनाएं बनाने म उलझा रहता। म खाली दकान
क तरफ दे खता, सोचता, इनम पैसा पीटने

का कौन सा धंधा कया जा सकता है । ये सोचना मछली बेचने, िच स बेचने से ले कर पंसार

क दकान
खोलने तक होता। हमेशा जो भी योजना बनती, उसमे खाना ज़ र होता। मुझे बस

पूंजी क ह ज़ रत होती ले कन पूंजी ह क सम या थी क कहां से आये। आ खर मने मां से
कहा क वह मेरा कूल छुड़वा दे और काम तलाशने दे ।
मने कई धंधे कये। पहले म एक बसाती क दकान
म ऊपर के काम करने के िलए

रखा गया। काम करने के बाद म तहखाने म खुशी खुशी बैठा रहता, वहां साबुन, टाच,

मोमब य , िमठाइय तथा ब कट से िघरा रहता। म सार क सार िमठाइयां चख कर तब
तक दे खता रहा जब तक खुद बीमार नह ं पड़ गया।
इसके बाद मने

ॉगमोटन एवे यू म हल
ू एंड क

ले टे लर, बीमा डॉ टर के यहां

काम कया। ये काम मेरे ह से म िसडनी क वज़ह से आया था। उसी ने इस काम के िलए
मेर िसफा रश क थी। मुझे हर ह ते के बारह िशिलंग िमलते थे और मुझे रसे शिन ट के
प म काम करना होता था। इसम डॉ टर के चले जाने के बाद द तर को साफ करने क
यूट भी शािमल थी। रसे शिन ट के प म म बहत
ु सफल था य क म वहां पर इं तज़ार

कर रहे मर ज का खूब मनोरं जन करता ले कन जब द तर क सफाई का न बर आता तो
मेरा दल डू बने लगता। इस काम म िसडनी बेहतर था। म पेशाब के पॉट साफ करने म बुरा
नह ं मानता था, ले कन दस-दस फुट खड़ कय को साफ करना मेरे िलए आकाशगंगा

िनकालने जैसा था। इसका नतीजा ये हआ
क द तर गंदे और धूल भरे होते चले गये और एक

दन आया जब मुझे वन तापूवक बता दया गया क म इस काम के िलए बहत
ु ह छोटा हंू ।
जस व


लेसे

मने ये खबर सुनी, म अपने आपको संभाल नह ं पाया और रो पड़ा। डॉ टर

ले टे लर, ज ह ने एक बहत
ु ह अमीर म हला से शाद क थी और उ ह शाद म

टर गेट पर बहत
ु बड़ा मकान िमला हआ
ु था, ने मुझ पर तरस खाया और मुझसे कहा

क वे मुझे अपने घर म ऊपर के काम के िलए पेजबॉय के प म रखवा दगे। तुरंत ह मेरा

दल बाग बाग हो गया। कसी िनजी घर म पेजबॉय, और घर भी कैसा, बहत
ु खूबसूरत। ये

अ छा काम था। इसका कारण ये था क म घर भर क नौकरािनय का दलारा
बन गया था।

67

वे मुझसे ब चे क तरह यवहार करतीं और रात को ब तर पर जाने से पहले गुड नाइट कस
दे तीं। अगर मेर क मत म िलखा होता तो म बटलर बन गया होता। मैडम ने मुझसे कहा क
म तहखाने म जा कर उस जगह को साफ क ं जहां पर पै कंग वाली पे टय का ढे र लगा हआ

था और कचरे का अ बार लगा हआ
ु था जसे साफ करना, अलग करना और फर से लगाना
था। मेरा यान इस काम से उस व

बंट गया जब मेरे हाथ म लगभग आठ फुट ल बा लोहे

का एक पाइप आ गया और म उसे बगुल क तरह बजाने लगा। जस व

म उसके मजे ले

रहा था, मैडम अवत रत हु और मुझे तीन दन का नो टस दे दया गया।
मुझे टे शनर क एक दकान

यू एच

आया ले कन उ ह जैसे ह पता चला क मेर उ

मथ एंडरसन म काम करने म बहत
ु मज़ा

कम है तो उ ह ने बाहर का रा ता दखा

दया। फर म एक दन के िलए लास लोअर बना। मने कूल म लास लोइं ग के बारे म

पढ़ा था और मुझे लगा, ये बहत
ु ह रोमांचकार काम होगा। ले कन गम मेरे िसर पर चढ़ गयी
और मुझे बेहोशी क हालत म बाहर लाया गया और रे त क ढे र पर िलटा दया गया। यह ं पर
इसक इित ी हो गयी। म इस इकलौते दन क पगार लेने भी नह ं गया। इसके बाद मने
े कर,


ं र और टे शनस के यहां काम कया। मने वहां पर झूठ बोला क म हाफडे ल

ं टं ग मशीन चला सकता हंू । ये बहत
ु ह बड़ मशीन थी। लगभग बीस फुट ल बी। मने इस

मशीन को गली से तहखाने म चलते हए
ु दे खा था और मुझे लगा क इसे चलाना तो बेहद
आसान होगा। एक काड पर िलखा था हाफडे ल

ं टं ग मशीन के िलए कागज़ चढ़ाने वाला

लड़का चा हये। जब फोरमैन मुझे मशीन के पास लाया तो ये मुझे दै याकार सर खी लगी।
इसे चलाने के िलए मुझे पांच फुट ऊंचे एक लेटफाम पर खड़ा होना पड़ा। मुझे लगा मानो म
ए फल टावर के ऊपर खड़ा हंू ।

"मारो इसे," फोरमैन ने कहा।
" या मा ं ?"
मुझे हच कचाते दे ख, वह हँ सा,"तो इसका मतलब तुमने हाफडे ल

ं टं ग मशीन पर

कभी काम नह ं कया है ?"
"मुझे बस, एक मौका द जये, म एकदम तेजी से इसे चलाना सीख जाऊंगा।"
"इसे मारो" का मतलब था उस दै य को शु करने के िलए लीवर को खींचो। मशीन
घूमने, चलने और घुरघुराने लगी। मुझे लगा ये मशीन तो मुझे ह िनगल जायेगी। कागज़
बहत
ु ह बड़े बड़े थे। इतने बड़े क आसानी से मुझे एक कागज़ म लपेटा जा सकता था। एक
बड़े से ग े से म कागज को पंखा करता, उ ह कोन से उठाता, और ठ क व

पर मशीन के

जबड़ म धर दे ता ता क वह दै य उ ह िनगल जाये, उस पर छापे और दसरे
ू िसरे पर वा पस

उगल दे । पहले दन तो म उसे इतना घबराया हआ
ु था क कह ं ये भूखा दै य मुझे ह न चबा
जाये। इसके बावजूद मुझे बारह िशिलंग ह ते क पगार पर नौकर पर रख िलया गया।

68

दन िनकलने से पहले, उन ठं ड सुबह म काम पर िनकलने का अपना ह रोमांच था।
गिलयां शांत और सुनसान होतीं। इ का द ु का छायाएं लोखाट के ट म क म यम रौशनी म
ना ते के िलए आते जाते दखायी दे तीं। ऐसा लगता मानो आप अपने साथ के लोग के साथ
ह, उस धुंधलके म गरम चाय पीते हए
ु और आगे मुंह बाये खड़े दन भर के काम के बावजूद
णक राहत पाते हए।
ु और फर

ं टं ग का काम इतना उबाऊ भी नह ं था। बस, ह ते के

आ खर म काम बहत
ु करना पड़ता, िगले टन के उन ल बे रोलर पर से याह हटाने का काम
करना पड़ता। इन रोलर का वजन सौ प ड से भी यादा होता। बाक कुछ िमला कर काम
सहन करने यो य था। अलब ा, वहां पर तीन ह ते तक काम करने के बाद मुझे इ

लुंजा ने

धर दबोचा और मां ने ज़द क क म वा पस कूल क राह पकडू ं ।
उसे अ

िसडनी अब सोलह बरस का हो चला था। एक दन वह खुश खुश घर आया य क

का जाने वाले एक जहाज म डोनोवन लाइन पैसजर बोट पर बगुल बजाने वाले का

काम िमल गया था। उसका काम था खाने वगैरह के िलए बुलाने के िलए बगुल बजाना।
उसने बगुल बजाना ए समाउथ े िनंग कै प म सीख िलया था। अब वह सीखना काम आ
रहा था। उसे हर मह ने दो पाउं ड और दो िशिलंग िमलते और सेकड लास म तीन मेज पर
सव करने के िलए टप अलग से िमलती। उसे जहाज पर जाने से पहले पतीस िशिलंग अि म
प से िमलने वाले थे। तय था वह ये रकम मां को दे कर जाने वाला था। इस सुखद भ व य के
सपने संजोये हम चे टर
गये।
अपनी

ट म एक नाई क दकान
के ऊपर दो कमरे वाले मकान म आ

प से जब िसडनी पहली बार लौटा तो ये मौका उ सव क तरह था। य क

उसके पास टप से कमाये तीन पाउं ड से भी यादा क रकम थी और ये चांद के थे। मुझे याद
है वह अपनी जेब से ब तर पर से अपनी दौलत लुढ़काता जा रहा था। ये पैसे इतने यादा
लगे मुझे जतने मने अपनी ज़ंदगी म नह ं दे खे थे और म उन पर से अपने हाथ हटा ह नह ं
पा रहा था। मने उनक ढे रयां लगायीं, च टे लगाये और उनके साथ तब तक खेलता रहा जब
मां और िसडनी ने आ खर कह ह दया क म नद दा हंू ।

या तो शान थी। या ह म ती थी। ये गम के दन थे और ये हमारे केक और आइस

खाने का काल था। इनके अलावा और भी कई वलािसताएं राह दे ख रह थीं। हमने ना ते म
लोटर, क पर, है डाक मछली खायीं और चाय केक का आनंद िलया, और इतवार के दन
बंद और कटलेट खाये।
िसडनी को सद ने जकड़ िलया और वह कई दन तक ब तर पर पड़ा रहा। मां और
म उसक तीमारदार करते रहे । तभी ये हआ
क हमने खूब छक कर आइस

म खायी। म

एक बड़े से िगलास म एक पेनी क ले कर आया। म ये िगलास इता वी आइस

म क दक
ु ान

म ले गया था और वह िगलास और एक पेनी दे ख कर अ छा खासा िचढ़ा था। दकानदार
ने

69

सुझाव दया क अगली बार म आऊं तो अपने साथ एक बाथ टब ले कर आऊं। गिमय म
हमारा

ं क होता था शरबत और दध।
ू खूब झागदार दध
ू म बुलबुले छोड़ता शरबत, बस

पीते ह तबीयत खुश हो जाती।

िसडनी ने हम अपनी समु

या ा के बहत
ु से रोचक क से सुनाये। अभी उसने अपनी

या ा शु भी नह ं क थी एक बार उसक नौकर पर ह बन आयी। उसने लंच के िलए पहला
बगुल बजाया। बगुल बजाने क उसक

े टस नह ं रह थी और सारे फौजी खूब हो ह ला

करने लगे । मु य ट वड भागता हआ
ु आया,"ऐय तुम या कर रहे हो?"
"सॉर सर, मेरे ह ठ अभी बगुल पर सेट नह ं हए
ु ह।"

"ठ क है , ठ क है , ज द से अपने ह ठ सेट कर लो नह ं तो जहाज चलने से पहले ह
तु ह तट पर ह उतार दे ना पड़े गा।"

खाने के दौरान कचन के बाहर सब वेटर क ल बी ल बी कतार लग जातीं जो अपने

अपने आडर का सामान ले रहे होते। जब तक िसडनी का न बर आता, वह अपना आडर ह
भूल चुका होता और उसे एक बार फर लाइन के आ खर म खड़ा होना पड़ता। िसडनी ने
बताया क पहले कुछ दन तो ये हालत रह क बाक सब तो अपनी वीट डश खा रहे होते
और उसक मेज पर अभी भी सूप ह सव हो रहा होता।
िसडनी तब तक घर पर रहा जब तक सारे पैसे ख म नह ं हो गये। अलब ा, उसे दसर

प के िलए भी बुक कर िलया गया। उसे क पनी से एक बार फर पतीस िशिलंग अि म प
से िमले जो उसने मां को दे दये। ले कन ये रकम यादा दन नह ं चली। तीन ह ह ते बाद
हम बतन क तले म झांक रहे थे। िसडनी के वा पस आने म अभी भी तीन ह ते बाक थे। मां
हालां क अभी भी अपनी िसलाई मशीन पर काम कर ह रह थी, जो कुछ वह कमा रह थी,
हम दोन के िलए काफ नह ं था। नतीजा ये हआ
क हम एक बार फर पाउनाल हॉल लौट

आये।

ले कन म कुछ न कुछ जुगाड़ कर ह िलया करता था। मां के पास पुराने कपड़ का
एक ढे र लगा हआ
ु था। एक दन शिनवार क सुबह थी। मने मां को सुझाव दया क य न म
कोिशश क ं और बाज़ार म जा कर इ ह बेच आऊं। मां इस बात को ले कर थोड़ परे शान हो

गयी। उसका कहना था क ये सब कसी काम के नह ं ह। इसके बावजूद मने एक पुरानी चादर
म कपड़ क पोटली बांधी और ने वंगटन ब ट क ओर चल पड़ा। वहां जा कर मने अपना
माल असबाब फुटपाथ पर फैलाया और गटर पर खड़े हो कर आवाज लगानी शु कर द ं। मेर
दकानदार
बहत

ु ह दयनीय हालत म थी."दे खये साहे बान, मेहरबान, कदरदान," मने एक
पुरानी कमीज हाथ म उठायी और बोलना शु

कया,"बोिलये साहे बान या दे ते ह इसका?

एक िशिलंग, छ: पस, चार पस दो पस।" म उसे एक पेनी म भी न बेच पाया। लोग-बाग आते,
खड़े होते, है रानी से दे खते, और हँ सते हए
ु चले जाते। म परे शान होना शु हो गया। सामने क

70

जवाहरात क दकान
क खड़क से वहां के मािलक ने मुझे दे खना शु कर दया। ले कन मने

ह मत नह ं हार । आ खरकार, गेिलस क एक जोड़ जो इतनी खराब नह ं लग रह थी, म छ:

पस म बेचने म सफल हो ह गया। ले कन मुझे वहां पर खड़े हए
ु जतनी दे र होती जा रह थी,

म उतना ह बेचैन होता जा रहा था। थोड़ दे र बाद उस जवाहरात क दकान
म से एक महाशय

आये और भार

सी लहजे म मुझसे पूछने लगे क म इस धंधे म कब से हंू । उसके वन

चेहरे के बावजूद मने ताड़ िलया क उसके बात करने के लहजे म मज़ाक उड़ाने का सा भाव
था। मने उसे बताया क बस अभी शु ह कया है । वह धीरे धीरे अपनी दकान
पर लौट गया

और अपने दो, खींसे िनपोरते भागीदार के पास लौट गया और फर से वे दकान
क खड़क म

से मुझे दे खने लगे। अब बहत
समेट और घर वा पस लौट

ु हो गया था। मने अपनी दकानदार
आया। मने मां को बताया क मने छ: पस म गेटस बेचे ह तो वह हकारत से बोली, अ छे
भले थे वो तो, उसे यादा पैस म बेचा जा सकता था।
ये एक ऐसा व

था जब हम कराया दे ने के बारे म यादा माथा प ची नह ं करते थे।

हमने आसान तर का ये अपनाया क जब कराया वसूल करने वाला आता तो सारा दन
गायब ह रहते। हमारे सामान क क मत ह

या थी? दो कौड़ । उसे कह ं और ढो कर ले जाने

म यादा पैसे लगते। अलब ा, हमार मं जल एक बार फर 3 पाउनाल टे रेस थी।
उसी समय मुझे एक ऐसे बूढ़े आदमी और उसके बेटे के बारे म पता चला जो केिनंगटन रोड के
पछवाड़े क तरफ एक घुड़साल म काम करते थे। वे घुमंतु खलौने बनाने वाले लोग थे और
लासगो से आये थे। वे लोग खलौने बनाते थे और शहर दर शहर घूमते हए
ु उ ह बेचते थे। वे

बंधन मु

थे और उन पर कोई ज मेवार नह ं थी, इसिलए म उनसे ई या करता था। उनके

धंधे के िलए बहत
ु ह कम पूंजी क ज़ रत थी। एक िशिलंग क मामूली रकम लगा कर वे

धंधा शु कर सकते थे। वे जूत के ड बे इक ठे करते। कोई भी दकानदार
खुशी खुशी ये ड बे

उ ह दे दे ता। फर वे अंगूर क पै कंग म इ तेमाल होने वाला बुरादा जुटाते। ये भी उ ह सत
मत म िमल जाता। उ ह शु आत म जन मद के िलए पूंजी लगानी पड़ती, वे थीं, एक पेनी
क ग द, एक पेनी के

मस वाली रं गीन प नयां, और दो पेनी के रं गीन झालर के गोले।

एक िशिलंग क पूंजी से वे सात दजन नाव बना लेते और एक एक नाव एक एक पेनी क
बकती। नाव के दोन तरफ के ह से जूत के ड ब म से काट िलये जाते, और उ ह ग े के
तले के साथ सी दया जाता। साफ सतह पर ग द फेर दया जाता और फर उस पर कॉक का
बुरादा िछड़क दया जाता। म तूल को रं गीन झालर से सजा दया जाता और सबसे ऊपर
वसले म तूल, नाव के आगे और पीछे वाले ह से पर और पाल फैलाने के डं ड के आ खर
िसरे पर लाल, पीले और नीले झंडे लगा दये जाते। सौ या उससे भी अिधक इस तरह क
रं गीन प नय वाली नाव ाहक को आक षत करतीं और इ ह आसानी से बेचा जा सकता
था।

71

हमारे प रचय का नतीजा ये हआ
क म नाव बनाने म उनक मदद करने लगा और

ज द ह म उनके हनर
ु से वा कफ हो गया। जब वे लोग हमारा पड़ोस छोड़ कर गये तो म खुद
उनके धंधे म उतर गया। छ: पस क मामूली सी पूंजी और काड बोड काटने से हाथ म हए

छाल के साथ म एक ह ह ते म तीन दजन नाव बनाने म कामयाब हो गया था।

ले कन हमार परछ ी पर इतनी जगह नह ं थी क मां के काम और मेरे धंधे के िलए जगह हो
पाती। इसके अलावा मां क िशकायत थी क उसे उबलते हए
ु ग द क बू से उबकाई आती है

और ये भी था क ग द का ड बा हर समय उसके सीये जाने वाले कपड़ के िलए मुसीबत बन
रहा था। संयोग से, सारे घर भर म ये कपड़े बखरे ह रहते। अब चूं क मेरा योगदान मां के
योगदान क तुलना म मामूली ह था, मेर कला को ितलांजिल दे द गयी।
इन दन हम अपने नाना से बहत
ु कम िमले थे। पछले एक बरस से उनक सेहत

ठ क नह ं चल रह थी। उनके हाथ ग ठया क वजह से सूज गये थे और इस कारण वे जूते
गांठने का अपना धंधा नह ं कर पाते थे। पहले के व

म जब भी उनसे बन पड़ता, वे एकाध

िस का दे कर मां क मदद कर दया करते थे। कभी कभी वे हमारे िलए खाना भी बना दया
करते। वे आटे , ओट और याज को दध
ू म उबाल कर और उस पर नमक और काली िमच

बुरक कर शानदार दिलये जैसा यंजन बनाया करते थे। सद क रात म ठं ड का मुकाबला
करने के िलए ये हमारा सबसे ब ढ़या खाना होता।
जब म ब चा था तो म नाना को हमेशा खर दमाग और खड़ू स बूढ़ा समझा करता था
जो मुझे हर व

कसी न कसी बात के िलए टोकते ह रहते थे। कभी याकरण के िलए तो

कभी तमीज के िलए। इन छोट -मोट मुठभेड़ के कारण ह मने उ ह नापसंद करना शु कर
दया था। अब वे अ पताल म अपने जोड़ के दद क वजह से पड़े हए
ु थे और मां उ ह रोज़

दे खने के िलए अ पताल जाती। अ पताल क ये व जट बहत
ु फायदे क होतीं य क वह

अ सर थैला भर ताज़े अंडे ले कर वा पस आती। ये हमार मुफ़िलसी के दन म वलािसता क
तरह होते। जब वह खुद न जा पाती तो मुझे भेज दे ती। मुझे ये दे ख कर हमेशा बहत
ु है रानी
होती जब म नाना को बहत
यादा सहमत और मेरे आने से खुश पाता। वे नस म खासे

लोक य थे। बाद क ज़ंदगी म उ ह ने मुझे बताया था क वे नस के साथ चुहलबाजी करते
और उ ह बताते क जोड़ के दद के बावज़ूद उनक सार मशीनर काम से बेकार नह ं हई
ु है ।

इस तरह क अ ील चुहलबाजी नस को खुश कर दे ती। जब उनके जोड़ का दद काबू म रहता
तो वे जा कर रसोई म काम करते, और इस तरह से हमारे पास अंडे आते। व जट वाले दन
म वे आम तौर पर अपने ब तर पर ह होते और अपने ब तर के पास वाले के बनेट से चुपके
से अंड का एक बड़ा-सा थैला थमा दे ते, जसे म चलने से पहले ना वक वाली अपनी बिनयान
म छुपा लेता।

72

हम कई-कई ह ते अंड पर ह गुज़ार दे ते। उनका कुछ न कुछ बना ह लेते। उबले हए
ु ,

तले हए
ु या उनका क टड ह बना लेते। बेशक नाना इस बात का व ास दलाते क सार नस
उनक दो त ह और कमोबेश जानती ह क या कुछ चल रहा है , अ पताल के वाड से उन

अंड के साथ बाहर िनकलते समय हमेशा मुझे खटका लगा रहता। कभी लगता क म मोम से
िचकने फश पर फसल कर िगर पड़ू ं गा या मेरा फूला हआ
ु पेट पकड़ म आ जायेगा। इस बात

क है रानी होती थी क जब भी म अ पताल से बाहर आने को होता, सार क सार नस वहां से
गायब हो जातीं। हमारे िलये ये बहत
ु ह दु:खद दन था जब नाना को अपने जोड़ के दद से
आराम आ गया और उ ह अ पताल छोड़ना पड़ा।

अब छ: स ाह बीतने को आये थे और िसडनी अब तक नह ं लौटा था। शु -शु म तो
मां इससे इतनी िचंता म नह ं पड़ ले कन एक और ह ते क दे र के बाद मां ने डोनोवन एंड
कैसल लाइन नाम के जहाज के द तर को िलखा तो वहां से ये खबर िमली क उसे जोड़ के
दद के इलाज के िलए केप टाउन के तट पर जहाज से उतार दया गया है । इस खबर से मां
िचंता म पड़ गयी और इससे उसक सेहत पर बुरा असर पड़ा। अभी भी वह िसलाई मशीन पर
काम कर रह थी और म भी इस मामले म क मत वाला था क मुझे कूल के बाद एक
प रवार म नृ य के लैसन दे ने का काम िमल गया था और मुझे ह ते के पांच िशिलंग िमल
जाया करते थे।
लगभग इ ह ं दन मै काथ प रवार केिनंगटन रोड पर रहने आया। िमसेज
मै काथ आय रश कामे डयन रह थीं और मां क सहे ली थीं। उनक शाद एक स टफाइड
एकांउटट वा टर मै काथ से हई
ु थी। ले कन जब मां को मज़बूरन टे ज छोड़ दे ना पड़ा तो

हम लोग क मै काथ प रवार से िमलने -जुलने क संभावना ह नह ं रह और अब वे सात
बरस के बाद एक बार फर िमल रहे थे। अब वे लोग केिनंगटन रोड के खास इलाके म वा कॉट
मै सन म रहने के िलए आ गये थे।
उनका बेटा वैली मै काथ और म लगभग एक ह उ

के थे। जब हम छोटे थे तो बड़े

लोग क नकल कया करते थे मानो हम रं गारं ग काय म के कलाकार ह । हम का पिनक
िसगार पीते, अपनी क पना क घोड़ वाली ब घी म सैर करते, और अपने माता- पता का खूब
मनोरं जन कया करते थे।
अब चूं क मै काथ प रवार वा कॉट मै सन म रहने के िलए आ गया था, मां उनसे
िमलने शायद ह कभी गयी हो ले कन मने और वैली ने प क दो ती कर ली थी। कूल से
वा पस लौटते ह म भाग कर मां के पास यह पूछने के िलए जाता क मेरे लायक कोई काम तो
नह ं है , फर मै काथ प रवार के यहां भागा-भागा पहंु च जाता। हम वा कॉट मै सन के
पछवाड़े िथयेटर खेलते। म चूं क िनदशक बनता इसिलए म हमेशा खलनायक वाले पा

अपने िलए रखता। म अपने आप ह ये जानता था क खलनायक का पा नायक क तुलना

73

म यादा रं गीन होता है । हम वैली के खाने के समय तक खेलते रहते। आम तौर पर मुझे भी
बुलवा िलया जाता। खाने के समय के आस-पास मने अपने आप को उपल ध कराने के अचूक
खुशामद तर के खोज िनकाले थे। अलब ा, ऐसे मौके भी आते जब मेर सार ितकड़म काम
न आतीं और म संकोच के साथ घर लौट आता। मां मुझे दे ख कर हमेशा खुश होती और मेरे
खाने के िलए कुछ न कुछ बना दे ती। कभी शोरबे म तली हई
े या नाना के यहां से जुटाये
ु ड

गये अंड का कोई पकवान और एक कप चाय। वह मुझे कुछ न कुछ पढ़ कर सुनाती या हम
दोन एक साथ खड़क पर बैठ जाते और वह नीचे सड़क पर जा रहे राहगीर के बारे म
मज़ेदार बात करके मेरा दल बहलाती। उनके बारे म वह क से गढ़ कर सुनाती। य द कोई
आदमी खुशिमजाज, फरक जैसी चाल के साथ जा रहा होता तो म कहता,"दे खो जा रहे ह
ीमान हे पांड कौच, बेचारे शत लगाने क जगह जा रहे ह। अगर आज उनक क मत ने

साथ दया तो वह अपनी गल ड के िलए दो सीट वाली पुरानी साइ कल खर दगे।"

जब कोई आदमी धीमी गित से कदम िगनते हए
ु गुजरता तो मां का क सा

होता,"दे खो बेचारे को, घर जा रहा है और उसे पता है आज खाने म उसे फर से वह क द ू
िमलने वाला है । वह क द ू से नफरत करता है ।"

कोई अपनी एंठ म ह चला जा रहा होता तो मां कहती,"दे खो, ये स य समाज के

स जन जा रहे ह। ले कन फलहाल तो वे अपनी पट म हो गये छे द क वजह से खासे परे शान
ह।"
इसके बाद एक और आदमी तेज-तेज चाल से लपकता हआ
ु गुज़र जाता,"उस भले

आदमी ने अभी अभी ईनो क खुराक ली है और

. . .।" और इस तरह से क से चलते रहते

और हम हँ स-हँ स कर दोहरे हो जाते।
एक और स ाह बीतने को आया था ले कन अभी भी िसडनी का कोई समाचार नह ं
िमला था। अगर म और छोटा होता और मां क िचंता के ित यादा संवेदनशील होता तो म
महसूस कर सकता था क उसके दल पर या गुज़र रह थी। मने तब इस बात को दे खा होता
क वह कई दन से खड़क क िसल पर ह बैठ बाहर दे खती रहती थी। उसने कई दन से
कमरे को साफ तक नह ं कया था और बेह द शांत होती चली गयी थी। म शायद तब भी िचंता
म पड़ा होता जब कमीज़ बनाने वाली फम ने उसके काम म मीन-मेख िनकालनी शु कर द
थी और उसे और काम दे ना बंद कर दया था और जब वे बकाया क त क अदायगी न होने
के कारण िसलाई मशीन ह उठा कर ले गये और जब नृ य के पाठ से होने वाली मेर पांच
िशिलंग क कमाई भी अचानक बंद हो गयी तो शायद इस सबके बीच मने इस बात पर यान
दया हो क मां लगातार उदासीन और कंकत य वमूढ़ बनी रह थी।
अचानक िमसेज मै काथ क मृ यु हो गयी। वे कुछ अरसे से बीमार चल रह थीं।
उनक हालत खराब होती चली गयी और अचानक वे गुज़र गयी थीं। त काल ह मेरे दमाग

74

म याल ने हमला बोल दया। कतना अ छा होता अगर िम टर मै काथ मां से ववाह कर
लेते। वैली और म तो अ छे दो त थे ह । इसके अलावा, ये मां क सम याओं का आदश हल
भी होता।
सं कार के तुरंत बाद मने मां से इस बात बारे म बात क ,"अब तुम इसे अपनी
दनचया बना लो मां क अ सर िम टर मै काथ से िमल िलया करो। म शत बद कर कह
सकता हंू क वे तुमसे शाद कर लगे ।"

मां कमजोर से मु कुरायी,"उस बेचारे को एक मौका तो दो," मां ने जवाब दया।
"मां, अगर तुम ढं ग से तैयार हो जाया करो और अपने आपको आकषक बना लो, जैसा
तुम पहले हआ
ु करती थी तो वे ज र तु ह पसंद कर लगे। ले कन तुम तो अपनी तरफ से

कोई कोिशश ह नह ं करती, बस, इस गंदे कमरे म पसर बैठ रहती हो और वा हयात नज़र
आती हो।"

बेचार मां, म अपने इन श द पर कतना अफ़सोस करता हंू । म इस बात को कभी

सोच ह नह ं पाया क वह खाना पूरा न िमलने के कारण कमज़ोर थी। इसके बावजूद अगले
दन, पता नह ं उसम कहां से इतनी ताकत आ गयी, उसने सारा कमरा साफ-सूफ कर दया।
कूल म गिमय क छु टयां शु हो गयी थीं। इसिलए मने सोचा, मै काथ प रवार के यहां
थोड़ा पहले ह चला जाऊं। अपने उस मनहस
ू दड़बे से बाहर िनकलने का कोई तो बहाना

चा हये ह था। उ ह ने मुझे लंच तक कने का यौता दया था। ले कन मुझे ऐसा आभास हो
रहा था क मुझे मां के पास वा पस लौट जाना चा हये। जब म पाउनाल टै रेस वा पस पहंु चा तो
पड़ोस के कुछ ब च ने मुझे गेट के पास ह रोक िलया,"तु हार मां पागल हो गयी है , एक
छोट सी लड़क ने कहा।
ये श द तमाचे क तरह मेरे मुंह पर आ लगे।
" या मतलब है तु हारा?" म िघिघयाया।
"ये सच है ," दसर
ने बताया।

"वो सारे घर के दरवाजे खटखटाती फर रह थी और हाथ म कोयले के टु कड़े ले कर
बांटती फर रह थी क ये ब च के िलए ज म दन का उपहार है । चाहो तो तुम मेर मां से भी
पूछ सकते हो।"
और कुछ सुने बना म रा ते से दौड़ा, खुले दरवाजे से घर के भीतर गया, फलांगता
हआ
ु सी ढ़यां चढ़ा और अपने कमरे का दरवाजा खोला। एक पल के िलए अपनी सांस पर काबू
पाने के िलए म थमा और मां को गहर नज़र से दे खने लगा। ये गरमी क दोपहर थी और

माहौल घुटा-घुटा सा और दबाव महसूस कराने वाला था। मां हमेशा क तरह खड़क पर बैठ
हुई थी। वह धीमे से मुड़ और उसने मेर तरफ दे खा। उसका चेहरा पीला और पीड़ा से ऐंठा
हआ
ु लग रहा था।

75

"मां," म लगभग िच ला उठा।
" या हआ
ु ?" मां ने िन वकार भाव से पूछा।

तब म दौड़ कर गया और अपने घुटन के बल िगरा और उसक गोद म अपना मुंह
छुपा िलया। ज़ोर से मेर

लाई फूट पड़ ।

" को, को, बेटे," वह हौले से मेरा िसर सहलाते हए
ु बोली," या हो गया मेरे ब चे?"
"तु हार तबीयत ठ क नह ं है ," म सुबकते हए
ु िच लाया।
वह मुझे आ

त करते हए
ु बोली,"म तो ब कुल चंगी हंू ।"

वह बहत
यादा खोयी-खोयी और याल म डू बी रह थी।

"नह ं,नह ं, वे सब बता रहे ह क तुम सब घर म फरती रह थी और . . और . .
" म अपना वा य पूरा नह ं कर पाया, ले कन सुबकता रहा।
ह।"

"म िसडनी को तलाश कर रह थी," वह कमज़ोर से बोली,"वे उसे मुझसे दरू रखे हए

तब मुझे पता चला क जो कुछ ब चे बता रहे थे, वह सह था।
"ओह मां, इस तरह क बात मत करो। नह ं, नह ं," म सुबकने लगा,"म तु हारे िलए

डॉ टर बुलवाता हंू ।"

वह मेरा िसर सहलाते हए
ु बोलती रह ,"मै काथ जी को मालूम है क वह कहां है और

वे उसे मुझे दरू रखे हए
ु ह।"

"म मी, म मी, मुझे जरा डा टर को बुलवा लेने दो," म िच लाया। म उठा और सीधे

दरवाजे क तरफ लपका।
मां ने ददभर िनगाह से मेर तरफ दे खा और पूछा,"कहां जा रहे हो?"
"डॉ टर को िलवाने। मुझे यादा दे र नह ं लगेगी।"
मां ने कोई जवाब नह ं दया ले कन मेर तरफ िचंतातुर िनगाह से दे खती रह । म
तेजी से लपक कर नीचे गया और मकान माल कन के पास पहंु चा।

"मुझे तुरंत डॉ टर को बुलवाना पड़े गा। मां क हालत ठ क नह ं है ।"
"हमने पहले ह डॉ टर को बुलवा िलया है ।" मकान माल कन ने बताया।
खैराती डॉ टर बूढ़ा और िचड़िचड़ा था। मकान माल कन क दा तान सुन लेने के

बाद, जो कमोबेश ब च के बताये क से जैसी ह थी, उसने मां क सरसर तौर पर जांच क ।
"पागल . . . इसे आप अ पताल िभजवाइये," कहा उसने।
डॉ टर ने एक पच िलखी। दसर
बात के अलावा इसम ये िलखा था क वह कुपोषण

क मर ज थी। डॉ टर ने इसका मतलब मुझे ये बताया क उसे पूर खुराक नह ं िमलती रह
है ।

76

मकान माल कन ने मुझे दलासा दे ते हए
ु कहा,"ठ क हो जायेगी बेटा, और उसे वहां

खाना भी ठ क तरह से िमलेगा।"

मकान माल कन ने मां के कपड़े -ल े जमा करने म मेर मदद क और उसे कपड़े
पहनाये। मां एक ब चे क तरह सार बात मानती रह । वह इतनी कमज़ोर थी क उसक
इ छा श

ने मानो उसका साथ छोड़ दया हो। जब हम घर से चले तो पास-पड़ोस के ब चे

और पड़ोसी मजमा लगाये गेट के पास खड़े थे और इस अनहोनी को दे ख रहे थे।
अ पताल लगभग एक मील दरू था। जब हम वहां के िलए चल रहे थे तो मां कमजोर

के कारण कसी शराबी औरत क तरह लड़खड़ा कर चल रह थी और दाय-बाय झूम रह थी।
म उसे कसी तरह संभाले हए
ु था। उस दोपहर म धूप का तीखापन हम अपनी गर बी का

अहसास बेदद से करवा रहा था। जो लोग हमारे आस पास से गुज़र कर जा रहे थे ज र सोच
रहे ह गे क मां ने पी रखी है , ले कन मेरे िलए वे सपने म अजगर क तरह थे। वह ब कुल
भी नह ं बोली ले कन शायद वह जानती थी क उसे कहां ले जाया जा रहा है और उसे वहां
पहंु चने क िचंता भी थी। रा ते म मने उसे आ

त करने क कोिशश क ओर वह मु कुरायी

भी। ले कन यह मु कुराहट बेहद कमज़ोर थी।
आ खरकार जब हम अ पताल म पहंु चे तो एक युवा डॉ टर ने मां को अपनी दे खभाल

म ले िलया। नोट को पढ़ने के बाद उसने दयालुता से कहा,"ठ क है िमसेज चै लन, आप इधर
से आइये।"
मां ने चुपचाप उसक बात मान ली। ले कन जब नस उसे ले जाने लगीं तो वह
अचानक मुड़ और दद भर िनगारह से मुझे दे खने लगी। उसे पता चल गया था क वह मुझे
छोड़ कर जा रह है ।
"मां, म कल आऊंगा," मने कमज़ोर उ साह से कहा।
जब वे उसे ले जा रहे थे तो वह पीछे मुड़ मुड कर मेर तरफ िचंतातुर िनगाह से दे ख रह थी।
जब वह जा चुक तो डा टर ने मुझसे कहा,"अब तु हारा या होगा, मेरे नौजवान दो त?"
अब तक म यतीमखान के कूल क बहत
ु रो टयां तोड़ चुका था इसिलए मने

लापरवाह से जवाब दया,"म अपनी आंट के यहां रह लूंगा।"

जब म अ पताल से घर क तरफ वा पस लौट रहा था म िसफ सु न कर दे ने वाली
उदासी ह महसूस कर पा रहा था। इसके बावजूद म राहत महसूस कर रहा था। य क म
जानता था क अ पताल म मां क बेहतर दे खभाल हो पायेगी बजाये घर के अंधेरे म बैठे रहने
के जहां खाने को एक दाना भी नह ं ह ले कन जब वे लोग उसे ले जा रहे थे जो जस तरह से
उसने दल चीर दे ने वाली िनगाह से मुझे दे खा था, वह म कभी भी भूल नह ं पाऊंगा। मने
उसके सभी सहन करने के तर क के बारे म सोचा, उसक चाल के बारे म सोचा, उसके दलार

और उसके यार के बारे म सोचा, और मने उस कृष काया के बारे म सोचा जो थक हार नीचे

77

आती थी और अपने ह

याल म खोयी रहती थी और मुझे अपनी तरफ लपकते हए
ु आते

दे खते ह जसके चेहरे पर रौनक आ जाती थी। कस तरह से वह एकदम बदल जाती थी और
जब म उसके िलफाफे क तलाशी लेने लगता था जसम वह मेरे और िसडनी के िलए अ छ
अ छ चीज लाती थी तो उसके चेहरे के भाव कतने अ छे हो जाते थे और वह मु कुराने
लगती थी। यहां तक क उस सुबह भी उसने मेरे िलए कड बचा कर रखी थी और जस व

उसक गोद म रो रहा था, उसने मुझे कड द थी।
म सीधा घर वा पस नह ं गया। म जा ह नह ं सका। म ने वंगटन ब स माकट क
तरफ मुड़ गया और दोपहर ढलने तक दकान
क खड़ कय म दे खता रहा। जब म अपनी

परछ ी पर वा पस लौटा तो वह हद दरजे तक खाली-खाली लग रह थी। एक कुस पर पानी
का टब रखा हआ
मेर दो कमीज और एक बिनयान उसम
ु था। आधा पानी से भरा हआ।

िभगोने के िलए रखे हुए थे। मने तलाशना शु

कया। घर म खाने को कुछ भी नह ं था।

अ मार म िसफ चाय क प ी का आधा भरा पैकेट रखा हआ
ु था। मटलपीस पर मां का पस

रखा हआ
क कई पिचयां िमलीं।

ु था जसम मुझे तीन पेनी के िस के और िगरवी वाली दकान
मेज के कोने पर वह कड रखी हई
ु थी जो उसने मुझे सुबह द थी। जब म अपने आपको
संभाल नह ं पाया और फूट फूट कर रोया।

भावना मक प से म चुक गया था। उस रात म गहर नींद सोया। सुबह म जागा तो
कमरे का खालीपन भांय भांय कर रहा था। फश पर बढ़ती आती सूय क करण जैसे मां क
गैर मौजूदगी का अहसास करवा रह थीं। बाद म मकान माल कन आयी और बताने लगी क
म वहां पर तब तक रह सकता हंू जब तब वह कमरा कराये पर नह ं दे दे ती और अगर मुझे

खाने क ज़ रत हो तो मुझे कहने भर क दे र होगी। मने उसका आभार माना और उसे बताया
क जब िसडनी वा पस आयेगा तो उसके सारे कज उतार दे गा। ले कन म इतना शरमा रहा था
क खाने के िलए कह ह नह ं पाया।
हालां क मने मां से वायदा कया था क अगले दन उससे िमलने जाऊंगा ले कन म
नह ं गया। म जा ह नह ं पाया। जाने का मतलब उसे और वचिलत करना होता। ले कन
मकान माल कन डॉ टर से िमली। डॉ टर ने उसे बताया क मां को पहले ह केन हल पागल
खाने म ले जाया जा चुका है । इस उदासी भर खबर ने मेर आ मा पर से बोझ हटा दया
य क केन हल पागलखाना वहां से बीस मील दरू था और वहां तक जाने का मेरे पास कोई

ज रया नह ं था। िसडनी ज द ह लौटने वाला था और तब हम दोन उसे दे खने जा पाते।

पहले कुछ दन तक तो म न अपने कसी प रिचत से िमला और न ह कसी से बात ह क ।
म सुबह सुबह ह घर से िनकल जाता और सारा दन मारा मारा फरता। म कह ं न
कह ं से खाने का जुगाड़ कर ह लेता। इसके अलावा, एक आध बार का खाना गोल कर जाना

78

कोई बड़ बात नह ं थी। एक सुबह जब म चुपके से सरक कर बाहर जा रहा था तो मकान
माल कन क िनगाह मुझ पर पड़ गयी और उसने पूछा क या मने ना ता कया है ।
मने िसर हलाया, वह मुझे अपने साथ ले गयी,"तब चलो मेरे साथ," उसने अपनी भार
आवाज म कहा।
म मै काथ प रवार से दरू दरू ह रहा य क म नह ं चाहता था क उ ह मां के बारे म

पता चले। म कसी भगोड़े सैिनक क तरह सबक िनगाह से बचता ह रहा।

मां को गये एक स ाह बीत चुका था और मने राम भरोसे रहने क आदत डाल ली थी
जस पर न तो अफसोस कया जा सकता था और न ह उसे आनंददायक ह कहा जा सकता
था। मेर सबसे बड़ िचंता मकान माल कन थी य क अगर िसडनी वा पस न आया तो दे र
सबेर वह मेरे बारे म सुधारगृह वाल को बता ह दे गी और मुझे एक बार फर है नवेल कूल म
भेज दया जायेगा, इसिलए म उसके सामने पड़ने से कतरा रहा था और कई बार तो बाहर ह
सो जाता।
म कुछ लकड़ चीरने वाल से जा टकराया जो केिनंगटन रोड के पछवाड़े क तरफ
एक घुड़साल म काम करते थे। ये सड़क छाप से दखने वाले लोग थे जो एक अंधेरे से भरे
दालान म काम करते थे और फुसफुसा कर बात करते, सारा दन लक ड़यां चीरते और
कु हाड़ से उनक फांक तैयार करते। बाद म वे उनके आधी आधी पेनी के बंडल बना दे ते। म
उनके खुले दरवाजे के आस पास मंडराता रहता और उ ह काम करते हए
ु दे खता। उनके पास
एक फुट का लकड़ का गुटका होता। वे उसक पतली पतली फांक बनाते और फर से इन
फांक को तीिलय म बदल डालते। वे इतनी तेजी से लक ड़यां चीरते क म है रान हो कर
दे खता ह रह जाता। मुझे उनका ये काम बेहद आक षत करता। ज द ह म उनक मदद करने
लगा। वे अपने िलए लकड़ के ल ठे इमारत िगराने वाले ठे केदार से लाते और उ ह ढो कर
शेड तक लाते, उनके च टे बना कर रखते। इस काम म पूरा एक दन लग जाता। फर वे एक
दन लक ड़यां चीरने का काम करते और उससे अगले दन उसक तीिलयां बनाते। शु वार
और शिनवार वे जलावन क लक ड़यां बेचने के िलए िनकलते ले कन बेचने के काम म मेर
कोई दलच पी नह ं थी। शेड म काम करना कह ं यादा रोमांचक लगता था।
वे लोग तीस और चालीस बरस क उ
बरताव बड़ उ

के बीच के शालीन, शांत लोग थे हालां क वे

के लोग का करते और लगते भी यादा उ

के थे। बॉस (जैसा क हम उसे

कहा करते थे) मधुमेह क वजह से लाल नाक वाला था। उसके ऊपर के दांत झड़ गये थे, बस
एक ह दांत लटकता रहता ले कन फर भी न जाने य उसके चेहरे म एक अपनेपन का
अहसास होता था। अ छा लगता था वह। वह अजीब तर के से हँ सता जससे उसका इकलौता

79

दांत दखायी दे ने लगता। जब चाय के िलए एक और कप क ज़ रत होती तो वह दध
ू का टन
उठाता, उसे धोता, प छता और कहता," या याल है इसके बारे म?"

दसरा
आदमी हालां क सहमत लगता, शांत, सूजे से चेहरे वाला, मोटे ह ठ वाला,

था। वह बहत
ु धीरे धीरे बोलता, एक बजे के कर ब बॉस मेर तरफ दे खता,"ऐय या

तुमने कभी चीज क पपड़ से बना अधपके मांस का वाद िलया है ?"
"हमने इसे कई बार खाया है ," म जवाब दे ता।

तब ठहाके लगाते हए
ु और खींसे िनपोरते हए
ु वह मुझे दो पस दे ता और म ऐश क

राशन क दकान
पर जाता, ये कोने पर चाय क दकान
थी। वह मुझे पसंद करता था और मेरे


पैस पर हमेशा ढे र सार चीज दे दया करता। म वहां से एक पेनी क चीज क पपड़ लेता,
और एक पेनी क


े । चीज को धो लेने और उसक पप ड़यां बना लेने के बाद हम उसम पानी

िमलाते, थोड़ा नमक और काली िमच डालते, कई बार बॉस उसम थोड़ सी सूअर क चब और
कतरे हए
ु याज भी छोड़ दे ता और ये सार चीज िमल कर चाय के कैन के साथ बहत
ु ह पेट
भर कर खाने वाला मामला हो जाता।

हालां क म कभी पैस के िलए पूछता नह ं था,ह ता बीतने पर बॉस ने मुझे छ: पस
दये। ये मेरे िलए सुखद आ य था। जो, जसका चेहरा फूला हआ
ु था, उसे िमग के दौरे

पड़ते। तब बॉस उसे होश म लाने के िलए उसक नाक के नीचे खाक कागज जला कर उसे
सुंघाता। कई बार तो उसके मुंह से झाग िनकलने शु हो जाते और वह अपनी जीभ काटने
लगता। जब वह होश म आता तो बेहद दयनीय और शिमदा लगता।
लकड़हारे सुबह सात बजे से लेकर रात के सात बजे तक काम करते रहते। कई बार
उसके बाद भी। जब वे शेड म ताला लगा कर घर क तरफ रवाना होते, म हमेशा उदास हो
जाया करता। एक दन बॉस ने तय कया क वह हम सबको

ट दे गा और साउथ यू जक

हॉल म दो पेनी क गेलर सीट पर शो दखायेगा। म और जो पहले ह हाथ मुंह धो चुके थे
और बॉस का इं तजार कर रहे थे। म बेहद रोमांिचत था य क उस ह ते े ड कान क कॉमेड
अल ब स (इस क पनी म म कई बरस बाद शािमल हआ
ु ) चल रहा था। जो घुड़साल क

द वार के सहारे खड़ा हआ
ु था और म उसके सामने उ सा हत और रोमांिचत खड़ा हआ
ु था।
तभी अचानक जो ने बहत
ु तेज आवाज़ म चीख मार और उसे दौरा पड़ा और वह उसी म

द वार के सहारे ह नीचे िगर गया। जो होना था, वह कुछ यादा ह था। जब जो को होश आया
तो बॉस चाहते थे क वे वह ं क कर उसक दे खभाल कर ले कन जो ने जद क क वह
एकदम ठ क है और हम दोन उसके बगैर चले जाय। वह सुबह तक एकदम चंगा हो जायेगा।
कूल क धमक एक ऐसी दानव था जसने कभी भी मेरा पीछा नह ं छोड़ा। बीच बीच
म लकड़ चीरने वाले मुझसे कूल के बारे म सवाल पूछ लेते। जब छु टयां ख म हो गयीं तो
वे थोड़े से बेचैने हो गये। अब म साढ़े चार बजे तक, यानी कूल के छूटने के व

तक गिलय

80

म मारा मारा फरता, ले कन ये बहत
ु मु कल काम था। बेमतलब गिलय म फरते रहना

और साढ़े चार बजे तक इं तज़ार करना जब म अपनी राहत क जगह पर और लकड़ चीरने
वाल के पास लौट सकता।
एक रात जब म चुपके से सोने के िलए अपने ब तर म सरक रहा था, मकान
माल कन मुझसे िमलने के िलए आयी। वह बेचार मेर राह दे खती बैठ थी। वह बहत
ु उ े जत
थी। उसने मुझे एक तार थमाया जस पर िलखा था,"कल सुबह दस बजे वाटरलू टे शन पर
पहंु चग
ूं ा। यार, िसडनी।
जस व

म उससे टे शन पर िमला तो मेर हालत वाकई खराब थी। मेरे कपड़े गंदे

और फटे हए
ु थे और मेर कैप म से धागे इस तरह से लटके हए
ु थे मानो कसी लड़क के कट
के नीचे झालर लटकती नज़र आती ह। मने लकड़ चीरने वाल के यहां ह मुंह धो िलया था
और इस तरह से म तीसर मं ज़ल तक दो डोल पानी के भर कर ले जाने और मकान

माल कन क रसोई के आगे से गुज़रने क जहमत उठाने से बच गया था। जब म िसडनी से
िमला तो मेरे कान और गदन के आस पास रात क गंदगी और मैल क परत दखायी दे रह
थी।
मेर तरफ दे खते हए
ु िसडनी ने पूछा," या हआ
ु है ?"

मने सीधे ह खबर नह ं द । थोड़ा व

िलया,"मां पागल हो गयी है और हम उसे अ पताल

भेजना पड़ा।"
उसका चेहरा िचंता से िघर गया ले कन उसने अपने आप पर काबू पा िलया,"तो तुम
कहां रह रहे हो इस व ?"
"वह ं पाउनाल टै रेस"
वह अपना सामान दे खने के िलए मुड़ा। उसने एक हाथ गाड़ का आडर दया और जब कुिलय
ने उस पर उसके सामान के च टे लगाये तो सबसे ऊपर केल क एक गेल भी थी।
"ये हमारे ह या?" म बेस ी से पूछा।
उसने िसर हलाया,"अभी ये क चे ह। इनके तैयार होने म हम एकाध दन का इं तज़ार
करना पड़े गा।"
घर आते समय रा ते म उसने मां के बारे म सवाल पूछने शु कर दये। म इतने
उ साह म था क सार बात िसलिसलेवार बता ह नह ं पाया ले कन उसे सारे सू िमल गये
थे। तब उसने बताया क वह बीमार हो गया था और उसे केप टाउन म उतार कर अ पताल म
ह छोड़ दया गया था। और क वापसी क या ा म उसने बीस पाउं ड कमा िलये थे। ये पैसे वह
मां को दे कर जाना चाहता था। उसने ये पैसे सैिनक के िलए जूए और लाटर के इं तजाम
करके कमाये थे।

81

उसने मुझे अपनी योजनाओं के बारे म बताया। वह अब अपनी समु

या ाएं छोड़ दे ने

का इरादा रखता था और अिभनेता बनना चाहता था। उसने बताया क ये पैसे हमारे िलए बीस
ह त के िलए काफ ह गे और तब तक उसे िथयेटर म कोई न कोई काम िमल ह जायेगा।
जब हम टै सी म केल क गेल के साथ घर पहंु चे तो पड़ोिसय और मकान माल कन

पर इसका बहत
ु अ छा असर पड़ा। मकान माल कन ने िसडनी को मां के बारे म बताया
ले कन सारे डरावने यौरे नह ं बताये।

उसी दन िसडनी शॉ पंग के िलए गया और मेरे िलए नये कपड़े खर दे । और उसी रात
पूर सज धज के साथ हम दोन साउथ यू जकल हॉल के टाल म जा पहंु च।े नाटक के दौरान
िसडनी लगातार कहता रहा,"जरा सोचो तो, मां के िलए इस सब का या मतलब होता।"
उसी ह ते हम मां को दे खने के िलए केन हल गये। जस व

हम व ज टं ग म म

बैठे हए
ु थे, वहां बैठ कर इं तज़ार करना बहत
ु क ठन काम लग रहा था। मुझे याद है क चाभी
घूमने क आवाज़ आयी थी और मां चल कर आ रह थी। वह पीली ऩज़र आ रह थी। उसके

ह ठ नीले पड़ गये थे। हालां क उसने हम पहचान िलया था, उसम उ साह नह ं था और उसक
पुरानी जीवन श

जा चुक थी। उसके साथ एक नस आयी थी। बातूनी और भली म हला।

वह खड़ हो कर बात करना चाह रह थी। कहने लगी,"आप लोग बहत
ु ह गलत व

पर आये

ह। आज आपक मां क हालत बहत
ु अ छ नह ं है । नह ं या?" उसने मां क तरफ दे खा।
मां वन ता से मुसकुरायी मानो उसके जाने क राह दे ख रह हो।

नस ने आगे कहा,"अगली बार जब मां क हालत अ छ हो तुम लोग ज़ र आना।"
आ खरकार वह चली गयी और हम अकेला छोड़ दया गया। हालां क िसडनी ने मां का
मूड बेहतर करने क कोिशश क और उसे अपनी क मत के चमकने और पैसा कमाने और
इतने अरसे तक बाहर रहने के बारे म क से बताता रहा, वह बैठ िसफ सुनती रह और िसर
हलाती रह । वह अपने ह

याल म गुम लग रह थी। मने मां को बताया क वह ज द ह

चंगी हो जायेगी। "हां बेशक," मां ने मायूसी से कहा,"काश उस दोपहर तुमने मुझे एक कप
चाय दे द होती तो म एक दम ठ क हो जाती।"
बाद म डॉ टर ने िसडनी को बताया क कम खुराक िमलने क वजह से मां के दमाग
पर बहत
ु बुरा असर पड़ा है और उसे ठ क ठाक इलाज क ज़ रत है और क हालां क उसे बीच
बीच म बात याद आती ह, पूर तरह से ठ क होने मे उसे कई मह ने लगगे।
ले कन म कई दन तक मां के इस जुमले से मु

नह ं हो सका क "काश उस दोपहर तुमने

मुझे एक कप चाय दे द होती तो म एक दम ठ क हो जाती।"

82

पांच
जोसफ कॉनराड ने इस बारे म अपने एक दो त को िलखा था क ज़ंदगी ने उ ह एक
कोने म दबक
ु े उस अंधे चूहे म बदल डाला था जसे बस, दबोचा जाने वाला हो। ऐसी उपमा से
हम लोग क दयनीय ज़ंदगी को बयान कया जा सकता था। इसके बावजूद हम म से कुछ
लोग क क मत अ छ रह और ऐसे भा यशाली लोगो म से म भी था।
मने बहत
ु धंधे कये। मने अखबार बेचे,


ं र का काम कया, खलौने बनाए, लास

लोअर का काम कया, डॉ टर के यहाँ काम कया ले कन इन तरह-तरह के धंध को करते
हए
ु मैने िसडनी क तरह इस ल य से कभी भी िनगाह नह ं हटायी क मुझे अंतत: अिभनेता
बनना है, इसिलए अलग-अलग काम के बीच अपने जूते चमकाता, अपने कपड़ पर श
फेरता, साफ कॉलर लगाता और

ड के पास बेड फोड

ट म लैक मोर िथएटर एजे सी म

बीच-बीच म च कर काटता। म तब तक वहाँ च कर लगाता रहा जब तक मेरे कपड़ क
हालत ने मुझे वहाँ और जाने से बलकुल ह रोक नह ं दया।
जब म वहाँ पहली बार गया तो वहाँ पर शानदार कपड़े पहने हए
ु अिभनेता-अिभने ी

घेरा बनाए खड़े थे और ल बी-ल बी हांक रहे थे।

म डर से काँपते हए
ु दरवाजे के पास, दरू के एक कोने म खड़ा हो गया। म हद दज का

शम ला लड़का था और अपने िचथड़े हो गये सूट और पंज से फटे जूत को छुपाने क भरसक
कोिशश कर रहा था। अचानक ह भीतर से एक युवा लक लपकता हआ
ु बाहर आता, हाय

तौबा मचाता और वहाँ जुटे अिभनेताओं को स बोिधत करते हए
ु ज़ोर से िच लाता,"तुम, तुम,
और तुम, तु हारे िलए कोई काम नह ं है ।" और ऑ फस िगरजाघर क तरह खाली हो जाता।
एक मौके पर म अकेला ह वहां खड़ा रह गया था।
जब लक ने मुझे दे खा तो अचानक क गया," या चा हए तु ह?"
मुझे लगा, म ओिलवर

व ट क तरह कुछ और मांग रहा होऊं," या आपके पास

ब च के िलए कोई भूिमका है ?"
" या तुमने अपना नाम र ज टर करवा िलया है ?" मने िसर हलाया।
मेर है रानी का ठकाना न रहा जब वह मुझे बगल वाले ऑ फस के भीतर ले गया,मेरा नाम,
पता और दसरे
यौरे दज कये और मुझे बताया क जब भी मेरे लायक कोई काम होगा मुझे

खबर कर दे गा।

म बहत
ु खुश, इस अहसास के साथ वा पस लौटा क मने अपना क

य िनभा दया

है । हालां क म आभार भी मान रहा था क इसका कोई नतीजा नह ं िनकला।
और अब, िसडनी के लौटने के एक मह ने के बाद मुझे एक पो ट काड िमला। इस पर
िलखा था," या आप लैकमोर एजे सी, बेडफोड

ट,

ड म आयगे?"

83

म अपने नये सूट म िम टर लैकमोर के ह सामने ले जाया गया। वे मु कुरा रहे थे
और बहत
ु यार से िमले। म यह मानकर चल रहा था क वे सवश
जांच पड़ताल करगे ले कन वे बहत
ु ह वन

मान ह गे और बार क से

थे और उ ह ने मुझे एक पच द क म चा स

ाहमॅन के कायालय म िम टर सी ई है िम टन को जाकर दे दं ।ू

िम टर है िम टन ने पच पढ़ और यह जानकर बहत
ु खुश और है रान हए
ु कम

कतना छोटा-सा हंू । दरअसल मने अपनी उ

जब क मेर उ

के बारे म झूठ बोला था क म चौदह बरस का हंू

साढ़े बारह बरस क थी। उ ह ने समझाया क मुझे शारलॉक हो स म बली,

पेजबॉय क भूिमका करनी है और शरद ऋतु से शु होने वाले दौरे म चालीस स ाह तक काम
करना है ।
"इस बीच," िम टर है िम टन ने आगे कहा,"एक नये नाटक, जम, द रोमांस ऑफ अ

कॉ नी" म एक अ छे लड़के क बहत
ु ह शानदार भूिमका है । इसे िम टर स सबर ने िलखा
है । ये वह श स ह जो आगामी दौरे म शारलॉक हो स म मुख भूिमका िनभाने जा रहे ह।
जम नाटक `हो स' के दौरे से पहले आजमाइश के तौर पर कं

टन म खेला जायेगा। मेरा

वेतन दो पाउं ड दस िशिलंग ित स ाह रहे गा और मुझे शारलॉक हो स के िलए भी इतना ह
वेतन िमलेगा।
हालां क यह रािश मेरे िलए छ पर फाड़ लॉटर खुलने जैसी थी फर भी मने यह बात
अपने चेहरे पर नह ं झलकने द । मने िन ता से कहा,"शत के बारे म म अपने भाई से सलाह
लेना चाहंू गा।"

िम टर है िम टर हं से और लगा क वे बहत
ु खुश हए
ु ह। इसके बाद उ ह ने सारे

ऑ फस को इक ठा कर िलया और मेर तरफ इशारा करते हए
ु बोले,"ये हमारा बली है । या
याल है इसके बारे म?"

हर कोई बहत
ु खुश हआ
ु और मेर तरफ दे खकर मु कुराया। या हो गया था? ऐसा

लगा मानो पूर दिनया
ह अचानक बदल गयी हो, दिनया
ने मुझे यार से अपने सीने से लगा


िलया हो और मुझे अपना िलया हो। तब िम टर है िम टन ने मुझे स सबर के िलए एक पच
द । उनके बारे म बताया क वे लीसे टर

वायर म ीन म लब म िमलगे। और म वहाँ

से वा पस लौटा, बादल पर सवार।
ीन म लब म भी वह बात हई।
ु िम टर स सबर ने अपने टाफ सद य को

मुझे दे खने के िलए बुलवाया। वहाँ पर उसी समय मुझे यह कहते हुए सामी क भूिमका थमा

द गई क उनके नाटक म यह एक मह वपूण च र है । म डर के मारे थोड़ा नवस था क कह ं
वे उसी समय मुझसे अपना पाठ पढ़ने के िलए न कह द य क म ब कुल भी पढ़ना नह ं
जानता था और म परे शानी म पड़ जाता। सौभा य से उ ह ने मुझे मेरे संवाद घर ले जाने के

84

िलए दे दए क म फुरसत से उ ह पढ़ंू य क वे अगले ह ते से पहले रहसल शु करने वाले
नह ं थे।
म खुशी के मारे पागल होता हआ
ु बस म घर पहंु चा और पूर िश त से यह महसूस

करने लगा क मेरे साथ या हो गया है । मने अचानक ह गर बी क अपनी ज़ंदगी पीछे छोड़
द थी और अपना बहत
ु पुराना सपना पूरा करने जा रहा था। ये सपना जसके बारे म अ सर

मां ने बात क थी और उसे म पूरा करने जा रहा था। अब म अिभनेता होने जा रहा था। ये सब
इतना अचानक और अ

यािशत प से होने जा रहा था। म अपनी भूिमका के प न को

सहलाता रहा। इस पर नया खाक िलफाफा था। यह मेर अब तक क ज़ंदगी का सबसे
मह वपूण द तावेज था। बस क या ा के दौरान मने महसूस कया क मने एक बहत
ु बड़ा
कला फतह कर िलया है । अब म झोपड़ प ट म रहने वाला नामालूम सा छोकरा नह ं था।

अब म िथएटर का एक खास आदमी होने जा रहा था। मेरा मन कया क म रो पडू ं ।

जब मने िसडनी को बताया क या हो गया है तो उसक आंख भर आयीं। वह ब तर
पर पालथी मारकर बैठ गया और खड़क से बाहर दे खने लगा। वह हल रहा था। और तब
अपना िसर हलाते हए
ु उसने गहर उदासी से कहा,"ये हमार ज़ंदगी का िनणायक मोड़ है ।
काश, आज हमार माँ यह खुशी बांटने के िलए हमारे साथ होती।"

मने उ साहपूवक कहा,"जरा सोचो तो, चालीस स ाह तक दो पाउं ड और दस िशिलंग।
मने तो िम टर है िम टन से कह दया है क तु ह ं मेरे कारोबार मामले स भालते हो।"
इसिलए म बेताबी से बोला,"हो सकता है , हम कुछ यादा भी िमल जाएं। खैर, हम हर वष
साठ पाउं ड बचा सकते ह।"
हमने अपने उ साह के चलते यह गणना भी कर ली और तक भी गढ़ िलया क इतनी
बड़ भूिमका के िलए दो पाउं ड और दस िशिलंग क रािश बहत
ु कम है । िसडनी ने यहाँ तक

सोच डाला क वह जाकर पैसे बढ़वाने क बात करे गा। मने कहा क कोिशश करने म कोई हज
नह ं है । ले कन है िम टन अड़ गये।
"वे अिधकतम दो पाउं ड दस िशिलंग ह दे सकते ह।" वे बोले। हम इसे पाकर ह खुश
थे।
िसडनी ने मुझे मेर भूिमका पढ़कर सुनाई और मुझे अपनी पं

यां याद करने म मेर

मदद क । यह काफ बड़ भूिमका थी और लगभग पतीस प न म िलखी हई
ु थी। इसे मने
तीन दन म ह मुंह ज़बानी याद कर िलया था।

` जम' क रहसल र लेन िथएटर क ऊपर वाली मं ज़ल म हु । िसडनी ने मुझे

इतने उ साह के साथ े िनंग द थी क मुझे एक-एक श द याद हो गया था। बस, एक श द
मुझे परे शान कर रहा था। लाइन कुछ इस तरह से थी, "आप अपने आप को समझते या ह
िम टर पयरपाँट मोरगन?" और म कह बैठता,"पुटर पंट मोरगन।" िम टर स सबर ने मुझे

85

ये श द य के य रखने दये। ये शु आती रहसल आँख खोलने वाली थीं। इ ह ने मेरे
सामने तकनीक क एक नयी दिनया
खोल कर रख द । मुझे इस बात क क ई जानकार

नह ं थी क टे ज

ा ट, टायिमंग, वराम, मुड़ने के िलए संकेत, बैठने के िलए संकेत जैसी

कई बात भी होती ह। ले कन ये सार चीज़ मुझे वाभा वक प से आ गयीं। बस, मेर एक ह
खामी को िम टर स सबर ने ठ क कया - बोलते समय म िसर बहत
ु हलाता था और सांस
बहत
ु रोकता था।
कुछ

य क रहसल कर लेने के बाद वे है रान रह गये और मुझसे पूछने लगे क

या मने पहले कभी अिभनय कया है । कतना संतोषजनक था स सबर साहब को और
नाटक दसरे
ू अिभनेताओं को खुश करना! अलब ा, मने उनका उ साह इस तरह से वीकार
कया मानो यह मेरा वाभा वक ज मिस अिधकार हो।
जम को कं

टन िथएटर म पहले ह ते म और फुलहाम िथएटर म दसरे
ू ह ते म

आजमाइश के तौर पर खेला जाना था। यह है नर ऑथर जो स के िस वर कंग पर आधा रत
एक मैलो ामा था। इसक कहानी कुछ इस तरह से थी क एक अिभजा य य

अिन ा रोग

से पी ड़त है और एक दन अपने आपको फल बेचने वाली एक युवा लड़क और अखबार बेचने
वाले एक लड़के के साथ एक दछ
ु ी म रहते हए
ु पाता है । लड़के सामी क भूिमका मने िनभानी
थी। नैितक प से सब ठ क-ठाक था। लड़क दछ
ु ी म एक अलमार म सोती थी और डÎ यू,
उसको हम यह कर पुकारते थे, खाट पर आराम से सोता था और म फश पर सोता था।
पहले अंक का

य 7 ए डे वरयू कोट, द टपल का था। यह एक अमीर वक ल जे स

सीटन गेटलॉक का चबर था। बरबाद यूक अपने वरोधी वक ल के पास जाता है और अपना
भला करने वाली फूल बेचने वाली लड़क , जो बीमार है , क मदद करने के िलए हाथ फैलाता
है । इस लड़क ने अिन ा के उसके रोग म उसक मदद क थी।
न क झ क म वलेन डÎ यू से कहता है ,"दफा हो जाओ। जाओ और भूखे मरो। तुम
और तु हार ये रखैल।"
यूक हालां क कमजोर और म रयल सा है , मेज से कागज़ काटने वाला चाकू उठा
लेता है मानो वह वलेन पर हमला कर रहा हो, ले कन इस तरह से चाकू मेज पर िगरा दे ता है
जैसे उसे िमग का दौरा पड़ा हो और वह वलेन के पैर के पास बेहोश हो कर िगर जाता है । इस
मोड़ पर आकर वलेन क भूतपूव प ी, जससे कभी यह प त डÎ यू ेम कया करता था,
कमरे के भीतर आती है । वह भी यह कहते हए
ु प त डÎ यू के िलए हाथ जोड़ती है ,"उसक मेरे

साथ नह ं बनी। वह अदालत म भी कुछ नह ं कर पाया। कम से कम तुम तो उसक मदद कर
सकते हो।"
ले कन वलेन मना कर दे ता है ।

य चरम उ ेजना तक जा पहंु चता है । वलेन अपनी

भूतपूव प ी पर िन ावान न रहने का आरोप लगाता है और उसे भी छोड़ दे ता है । सनक म

86

आकर वह कागज़ काटने वाला चाकू उठा लेती है जो प त डॉ यू के हाथ से िगरा था और
वलेन को मार दे ती है । वलेन अपनी आराम कुस म िगर कर मर जाता है जब क डÎ यू अभी
भी उसके पैर के पास बेहोश पड़ा हआ
ु है । म हला

य से गायब हो जाती है और डÎ यू को

जब होश आता है तो वह अपने वरोधी को मरा हआ
ु पाता है । वह कहता है ,"हे भगवान, ये मैने
या कर डाला।"

और इस तरह से नाटक चलता रहता है । वह मृतक क जेब क तलाशी लेता है और
उसे एक पस िमलता है जसम कई पाउं ड, ह रे क अंगूठ और आभूषण िमलते ह। वह ये सार
चीज़ अपनी जेब के हवाले करता है और जब वह खड़क रा ते बाहर िनकल रहा है तो मुड़ कर
कहता है ,"गुड बाय गैटलॉक, आ खर तुमने मेर मदद कर ह द ।" और परदा िगरता है ।
दसरा

य उस दछ
ु ी का था जहाँ डÎ यू रहता था। जब

य खुलता है तो एक

अकेला जासूस अलमार के अंदर तांक-झाँक कर रहा है । म सीट बजाते हए
ु आता हँू और
जासूस को दे खकर क जाता हँू ।
अखबारवाला

अरे आप, या आपको नह ं पता क ये एक म हला का बेड म

लड़का -

है ?

जासूस -

या? ये अलमार ? जरा इधर तो आना

लड़का -

बदतमीज, ढ ठ कह ं के!

जासूस -

तुमने ये दखाया। इधर आओ और दरवाजा बंद कर दो।

लड़का -

(उसक तरफ जाते हए
ु ) जरा आराम से। समझे नह ं या? उनके

जासूस लड़का जासूस लड़का जासूस -

अपने ाइं ग म म भ दओं
ु के आमं ण?
म एक जासूस हँू ।

अरे पुिलस वाला ...तब तो हो गई मेर छु ट ।
म तु ह कोई नुकसान नह ं पहंु चाऊंगा। म तो थोड़ -जानकार
चाहता हँू जससे कसी गर ब क मदद हो जाए।

कसी क मदद? य द यहाँ कसी का भला होता है तो वह कम से

कम कसी पुिलस वाले के हाथ तो नह ं ह होगा।

यादा मूरख मत बनो। या मने तुझसे ये कहा है क म कभी

फौज म था।
लड़का -

बना कसी बात के शु

या। म आपके जूते दे ख सकता हँू ।

जासूस -

यहाँ कौन रहता है ?

लड़का -

डÎ यू

जासूस -

वो तो ठ क है , ले कन उसका असली नाम या है ?

लड़का -

मुझे नह ं पता। ले कन वह इसी नाम से जाना जाता है । वैसे आप

87

मुझे इस बात के िलए मार भी सकते ह क मुझे इसका मतलब
नह ं मालूम।
जासूस -

और वो दे खने म कैसा लगता है ?

लड़का -

कागज क तरह पतला, सफेद बाल, दाढ़ सफाचट, टॉपहै ट और
एक आँख वाला च मा पहनता है । और हां!! वह आपको उसी
च मे से दे खता है ।

जासूस -

और जम, - ये कौन है ?

लड़का -

वह आदमी? आपका मतलब लड़क ?

जासूस -

तो यह वह लड़क है जो -

लड़का -

(उसे टोकते हए
ु ) जो अलमार म सोती है । यहाँ ये कमरा हमारा
है , मेरा और डÎ यू का वगैरह। वगैरह ...

और भी बहत
ु कुछ था मेर भूिमका म और मेरा यक न मािनये, दशक को इसम बहत

मज़ा आया। मेरा याल है इसका कारण यह रहा होगा क म अपनी उ

से बहत
ु छोटा

दखता था। म जो भी लाइन बोलता, उस पर ठहाके लगते। िसफ मंच पर कए जाने वाले
काम मुझे परे शान करते। टे ज पर सचमुच क चाय बनाना। म हमेशा म म पड़ जाता क
पहले पॉट म गरम पानी डालना है या चाय क प ी। इसक तुलना म टे ज पर कुछ भी काम
करने के बजाय लाइन बोलना हमेशा आसान होता।
जम नाटक सफल नह ं रहा था। समी क ने उस नाटक पर बहत
ु बेदद से कलम

चलायी। इसके बावजूद मेरा ज़

अनुकूल ढं ग से कया गया। एक समी ा जो मुझे हमार ह

क पनी के िम टर चा स रॉक ने दखायी थी, बहत
ु ह अ छ थी। वे एक पुराने एडा फ
अिभनेता थे और उनका बहत
ु नाम था। और मने अपने अिधकतर

य उनके साथ ह कये

थे। "...नौजवान," उ ह ने गंभीरता से कहा था," जब तुम ये सब पढ़ो तो ये चीज़ तु हारे
दमाग पर सवार नह ं हो जानी चा हये।" और वन ता और सौ यता पर मुझे भाषण पलाने
के बाद लंदन ा पकल टाइ स म से मुझे ये समी ा पढ़ कर सुनायी। मुझे समी ा का एकएक श द याद है ।

नाटक के बारे म हकारत से िलखने के बाद अखबार ने िलखा: "ले कन एक आशा

जगाने वाली बात भी है । सामी क भूिमका, अखबार बेचने वाला छोकरा, लंदन क गिलय का
एक माट अरब, जसने काफ हद तक का नाटक म हा य क कमी पूर क है । बेशक ये
भूिमका िघसी- पट और पुराने ढब क है फर भी, मा टर चाल चै लन ने सामी के रोल को
काफ हद तक रोचक बना दया है । एक शानदार और मेहनती बाल कलाकार, मने हालां क
इस ब चे के बारे म पहले कभी पहले नह ं सुना है फर भी हम िनकट भ व य म इस ब चे के

88

बारे म बहत
ु कुछ बेहतर सुनने को िमलेगा, मुझे ऐसी उ मीद है ।" िसडनी ने इसक एक दजन
ितयां खर द लीं।

` जम' के दो स ाह तक चलने के बाद हमने शरलॉक हो स का पूवा यास शु
इस व

कया।

के दौरान िसडनी और म अभी भी पाउनॉल टै रेस पर ह रह रहे थे। इसका कारण यह

था क आिथक प म अभी भी हम अपने पैर तले क ज़मीन के बारे म बहत
यादा आ

नह ं थे।

पूवा यास के दौरान िसडनी और म मां से िमलने के िलए केन हल गये। पहले तो
नस ने हम यह बताया क हम मां से नह ं िमल पायगे य क मां क तबीयत ठ क नह ं है ।
फर वे िसडनी को एक तरफ ले गयीं और उससे फुसफुसा कर बात करने लगीं, ले कन मने
िसडनी क बात सुन ली थी,"नह ं, मुझे नह ं लगता वह दे ख पायेगा।" तब वह मेर तरफ मुड़
कर उदासी से बोला था,"तुम मां को पागलखाने म नह ं दे खना चाहोगे?"

"नह ं नह ं, म ये बरदा त नह ं कर पाऊंगा।" मने तड़प कर कहा।
ले कन िसडनी मां से िमला और मां ने उसे पहचान िलया और वह सचेत हो गयी।
कुछ ह पल के बाद नस ने आ कर मुझे बताया क अब मां बेहतर है और या म उसे दे खना
चाहंू गा। तब हम दोन पागलखाने वाले कमरे म गये और वहाँ जा कर बैठ गये। इससे पहले
क हम जाते, वह मुझे एक तरफ ले कर गयी और मेरे कान म फुसफुसायी," ह मत मत

हारना, नह ं तो वे लोग तु ह यह ं रख सकते ह।" मां फर से अपनी सेहत वा पस पाने से पहले
पूरे अ ठारह मह ने केन हल म रह । म जब दौरे पर था तो िसडनी िनयिमत प से जा कर
उससे िमलता रहा।
िम टर एच ए स सबर जो टू र पर हो स का पाट कर रहे थे,
वाले िच

ड मै जीन म छपने

क हू ब हू ितकृित थे। उनका ल बोतरा संवेदनशील चेहरा था, और माथे पर

ेरणा दे ते से भाव थे। जतने भी कलाकार हो स क भूिमका अदा कया करते थे, उनम से
स सबर को बेहतर न समझा जाता था। उ ह विलयम िगलेट, मूल हो स और नाटक के
लेखक से भी अ छा माना जाता था।
मेरे पहले टू र के दौरान मैनेजमट ने तय कया क म िम टर और िमसेज

साथ रहंू । िम टर ीन हमार क पनी के बढ़ई थे और िमसेज

ीन के

ीन वाडरोब संभालती थीं। ये

यव था बहत
ु शानदान नह ं कह जा सकती थी। ऊपर से िम टर और िमसेज ीन कभी-

कभार पीते-वीते थे। इसके अलावा, म अ सर उसी व

खाना नह ं खाता था जब वे खाया

करते। जो वे खाया करते वह म नह ं खाता। मुझे यक न है , मेरा

ीन द प

के साथ रहना

मेरे िलये उतना तकलीफदे ह नह ं था, जतना उनके िलए था। इसिलए तीन ह ते तक एक
साथ रहने के बाद हमने आपसी रज़ामंद से अलग होने का फैसला कर िलया। और चूं क म
इतना छोटा था क कसी और कलाकार के साथ नह ं रह सकता था, म अकेला ह रहने लगा।

89

म अजनबी शहर म अकेले रहता, पछवाड़े के कमर म अकेले रहता, और शाम के शो के व
से पहले शायद ह कसी साथी कलाकार से िमलता-जु लता। जब म अपने आप से बात करता
तो मुझे िसफ अपनी ह आवाज़ सुनायी दे ती। अ सर म सैलून म चला जाता जहाँ हमार
क पनी के साथी इक ठे होते। और उ ह बिलय स खेलते दे खता। ले कन म हमेशा पाता क
मेर मौजूदगी से उनक बातचीत म बाधा ह आ खड़ होती है और वे इस बात को मुझे
जतलाने म कोई शम भी महसूस न करते। इसिलए उनक कसी ऐसी-वैसी बात पर मु कुरा
भी दँ ू तो उनक भ हे तन जाती थीं।
म अकेला होता चला गया। र ववार क रात को उ र शहर म पहंु चना, अंिधयार

मु य गली म से गुजरते हए
ु िगरजा घर क घं टय क उदास टु नटु नाहट सुनना। ये सार बात
मेरे अकेलेपन म कुछ भी न जोड़ पाती। स ाह के अंत क छु टय के दन म म थानीय
बाजार खंगालता, और अपनी खर दार करता, राशन-पानी खर दता, मांस खर दता जसे
मकान माल कन पका कर दे दे ती। कई बार मुझे खाने और रहने क सु वधा िमल जाती और
म तब रसोई म बैठ कर प रवार के साथ ह खाता। मुझे वह यव था अ छ लगती य क
उ र इं गलड के रसोईघर साफ-सुथरे और भरे पूरे होते, वहां पॉिलश कए हए
ु फायर ेट होते
और नीली भ टयाँ होतीं। मकान माल कन का ड
े सकना, और ठं डे अंिधयारे दन म से

िनकल कर लंकाशायर रसोई क जलती आग क लाल लौ के दायरे म आना हमेशा अ छा
लगता। वहाँ बना िसंक डबलरो टय के ड बे भ ट के आस-पास पार बखरे होते, तब
प रवार के साथ चाय के िलए बैठना, भ ट से अभी-अभी िनकली गरमा-गरम डबलरोट क
स धी-स धी महक, उस पर लगाया गया ताज़ा म खन...म गंभीर महानता ओढ़े इनका आनंद
उठाता।
म दे श म छह मह ने तक रहा। इस बीच िसडनी को िथयेटर म ह काम तलाशने म
बहत
ु कम सफलता िमली थी इसिलए अब वह कलाकार बनने क अपनी मह वाकां ा को
याग कर

ड म कोल होल म एक बार म काम के िलए आवेदन करने पर मजबूर हो गया।

एक सौ पचास आवेदक म से यह नौकर उसे िमली थी। ले कन मानो एक तरह से यह उसका
पहले क

थित से पतन था।

वह मुझे िनयिमत प से िलखा करता और मां के बारे म मुझे समाचार दे ता रहता।

ले कन म शायद ह उसके खत के जवाब दे ता। इसका एक कारण था क मुझसे वतनी क
गलितयाँ बहत
ु होतीं। उसके एक खत ने तो मुझे इतनी गहराई से हआ
ु और इसक वजह से म
उसके और नजद क आ गया। उसने मुझे उसके खत का जवाब न दे ने के कारण फटकार

लगायी और याद दलाया था क हम कैसे-कैसे दन एक साथ दे ख कर यहाँ तक पहँु चे ह और
इस बात से हम कम से कम एक दसर
के और कर ब होना चा हए।

90

िसडनी ने िलखा,".. मां क बीमार के बाद हम दोन के पास एक दसरे
ू के अलावा और

कौन बचे ह। तुम िनयिमत प से िलखा करो और मुझे बताओ क मेरा एक भाई भी है ।"

उसका प इतना अिधक भावपूण था क मने तुरंत ह उसका जवाब दे दया। अब म
िसडनी को दसरे
ू ह आलोक म दे ख रहा था। उसके प ने

ातृ व के यार का ऐसा अटू ट

बंधन बांधा जो मेर पूर ज़ंदगी मेरे साथ बना रहा।

म अकेले रहने का आद हो चुका था। ले कन म बातचीत करने से इतना वमुख होता
चला गया क जब क पनी का कोई साथी मुझसे िमलता तो म बहत
यादा परे शानी म पड़

जाता। म अपने आपको फटाफट इस बात के िलए तैयार ह न कर पाता क हा जर जवाबी से,
समझदार से कसी बात का जवाब दे सकूं। लोग-बाग मुझे छोड़ कर चले जाते। मुझे प का
यक न है क मेर बु

के ित घबड़ाकर िचंतातुर हो कर ह मुझसे वदा लेते।

अब उदाहरण के िलए, िमस ेटा हॉन को ह ल। वे हमार

मुख अिभने ी थीं।

खूबसूरत, आकषक और दयालुता क सा ात ितमा, ले कन जब मने उ ह सड़क पार कर
अपनी तरफ आते दे खता तो म तेजी से मुड़ कर या तो एक दकान
क खड़क म दे खने लगता

या उससे िमलने से बचने के िलए कसी दसर
ह गली म सरक जाता।

मने अपने-आप क परवाह करनी छोड़ द और अपनी आदत म लापरवाह होता चला

गया। जब म क पनी के साथ या ा कर रहा होता तो रे लवे टे शन पहंु चने म मुझे हमेशा दे र
हो जाती। आ खर पल म पहँु चता और मेर हालत अ त- य त होती, मने कॉलर भी न
लगाया होता, और मुझे हमेशा इस बात के िलए फटकार सुननी पड़ती।

मने अपने साथ के िलए एक खरगोश खर द िलया और म जहाँ भी रहता, उसे छुपा
कर अपने कमरे म ले जाता और मकान माल कन को इस बात क हवा भी न लग पाती। ये
एक छोटा-सा यारा-सा जीव था जो बेशक इधर-उधर मुंह नह ं मारता था। इसक फर इतनी
सफेद और साफ थी क यह बात कसी क

यान म भी नह ं आती थी क इसक गंध कतनी

तीखी हो सकती है । म इसे अपने ब तर के नीचे एक लकड़ के पंजरे म छुपा कर रखता।
मकान माल कन खुशी-खुशी मेरे कमरे म मेरा ना ता ले कर आती, तभी उसे इस महक का
पता चलता, तब वह कमरे से परे शान और िमत हो कर चली जाती, उसके कमरे से बाहर
जाते ह म अपने खरगोश को आज़ाद कर दे ता और वह सारे कमरे म फुदकता फरता।
बहत
ु पहले ह मने अपने खरगोश को इस बात क

े िनंग दे द थी क य ह वह

इस रह य का पता चल भी जाये तो म अपने खरगोश को

क करके दखाने को कह कर

दरवाजे पर खटखट सुने, पलट कर अपनी पेट म चला जाये। अगर मकान माल कन को मेरे
उसका दल जीत लेता और वह फर हम पूरा ह ता रहने के िलए इजाजत दे दे ती।
ले कन टोनीपड , वे स म, मने अपनी

क दखायी तो मकान माल कन रह यमय

ढं ग से मु कुरायी ले कन उसने कोई राय जा हर नह ं क , ले कन उस रात जब म िथयेटर से

91

लौटा तो मेरा

य पालतू खरगोश जा चुका था। जब मने उसके बारे म पूछताछ क तो मकान

माल कन ने िसफ अपना िसर हला दया,"कह ं भाग-वाग गया होगा या उसे ज़ र कसी ने
चुरा िलया होगा।" उसने बड़ चतुराई से अपने-आप ह सम या को सुलझा िलया था।
टोनीपड से हम ऐ बी वेल के खदान वाले शहर म पहँु चे जहाँ हम तीन रात के िलए

कना था। और म इस बात के िलए शु गुजार था क हम िसफ तीन दन ह

कना था

य क ऐ बीवेल एक सीलन-भर जगह थी जो उन दन गंदा-सा शहर हआ
ु करता था,

भयानक, एक जैसे मकान क एक के बाद एक कतार, हर घर म चार छोटे कमरे थे जनम
तेल क कु पयाँ जलतीं। कंपनी के यादातर लोग एक छोटे -से होटल म ठहरे । सौभा य से
मुझे एक खदानकम के घर म सामने क तरफ वाला कमरा िमल गया। कमरा बेशक छोटा
था ले कन ये साफ और आरामदायक था। रात को जब म नाटक से वा पस लौटता तो कमरे म
आग के पास ह मेरा खाना रख दया जाता जहाँ वह गरम रहता।

मकान माल कन ल बी, खूबसूरत-सी औरत थी जसके आस-पास ासद का एक
आवरण िलपटा हआ
ु था। वह सुबह मेरे कमरे म ना ता ले कर आती और शायद ह कभी एकआध श द बोलती। मै नोट कया क उसक रसोई का दरवाजा हमेशा ह बंद रहता। जब भी

मुझे कसी चीज़ क ज़ रत होती, मुझे दरवाजा खटखटाना पड़ता और दरवाजा एकाध इं च ह
खोला जाता।
दसर
रात जब म रात का खाना खा रहा था तो उसका पित आया। वह लगभग अपनी

प ीक उ

का रहा होगा। उस शाम वह िथयेटर गया हआ
ु था और उसे हमारा नाटक अ छा

लगा था। बातचीत करते समय वह खड़ा ह रहा। उसने हाथ म एक जलती मोमब ी पकड़ हई

थी और वह सोने के िलए जाने क तैयार म था। वह बात करते समय थोड़ा का मानो कुछ
कहना चाह रहा हो."...सुनो, मेरे पास कुछ ऐसा है जो मुझे लगता है , तु हारे काम काज म
कह ं फट हो सकता है । कभी मानव मढक दे खा है ? लो इस मोमब ी को पकड़ो और म लै प
पकड़ता हँू ।"

वह मुझे रसोई घर तक ले कर गया और लै प को े सर पर रख दया। े सर पर ऊपर

से नीचे तक अलमार के दरवाज के प ल क जगह पर परदा लगा हआ
ु था। "...ऐ िग बट,
जरा बाहर तो िनकलो।" उसने परदे सरकाते हए
ु कहा।

एक आधा आदमी जसके पैर नह ं थे, सामा य आकार से बड़ा िसर, लाल बाल,

चपटा-सा माथा, बीमार-सा सफेद चेहरा, धँसी हुई नाक, बड़ा-सा मुँह और मजबूत कंधे और

बाह, े सर के नीचे से िनकल कर आया। उसने फलानेल का जांिघया पहना हआ
ु था। जांिघये
के कपड़े को जाँघ तक काट दया गया था। वहाँ उसके दस मोटे , ठू ँ ठ जैसे पंजे नज़र आ रहे
थे। इस डरावने ाणी क उ

बीस से चालीस के बीच कुछ भी हो सकती थी।

92

"ऐ, ... हे िग बट, जरा कूद के दखाओ।" पता ने कहा और द न-ह न आदमी ने अपने
आपको थोड़ा नीचे कया और लगभग मेरे िसर क ऊँचाई तक अपनी बाह ऊपर उछाल द ं।
"... या याल है ? सकस के िलए यह फट रहे गा? मानव मढक?"
म इतना भयभीत हो गया था क जवाब ह न दे सका। अलब ा, मने उ ह कई सक स
के नाम पते बताये जहाँ वे इस बारे म िलख सकते थे।
वे इस बात पर अड़े रहे क ये िलजिलजा ाणी और भी उछल कूद, कलाबा जयाँ और
कूद फाँद दखाये। उसे आराम कुस के ह थे पर हाथ के बल खड़ा कया गया, कुदाया गया।
जब उसने अपने ये सब करतब बंद कये तो मने यह जतलाया क ये वाकई उ साह जनक है
और इन

स पर उसे बधाई द ।

कमरे से बाहर िनकलने से पहले मने उससे कहा ..."गुड नाइट िग बट," तो कूँए म से

आती सी, जबान दबा कर उसे बेचारे ने जवाब दया," ...गुड नाइट।"

उस रात कई बार म उठा और अपने बंद दरवाजे को अ छ तरह दे खा-भाला। अगली
सुबह मकान माल कन खुश िमजाज़ नजर आयी और उसके चेहरे पर संवाद करने जैसे भाव
थे। "मेरा याल है , तुमने कल रात िग बट को दे खा है ," कहा उसने, "हां, ये ज़ र है क जब
हम िथएटर के लोग को घर म रखते ह तो वह े सर के नीचे ह सोता है ।"
तब यह वा हयात याल मेरे मन म आया क म िग बट के ब तर म ह सोता रहा
हँू ।... "हाँ," मने जवाब दया और उसके सकस म जाने क संभावनाओं पर नपे-तुले श द म
ह बात करता रहा।

मकान माल कन ने िसर हलाया,"...हम अ सर इस बारे म सोचते रहे ह।"
मेरा उ साह - या इसे जो भी नाम दे द - मकान माल कन को खुश करता जा रहा था।
वहाँ से चलने से पहले म रसोई म िग बट को बाय-बाय कहने गया। सहज रहने क कोिशश
करते हए
ु मने उसका बड़ा-सा फैला हआ
ु हाथ अपने हाथ म िलया और उसने हौले से मेरा हाथ
दबाया।

चालीस ह त तक अलग-अलग दे श म दशन करने के बाद हम लंदन लौटे । अब
हम आस-पास के उपनगर म आठ ह ते तक दशन करने थे। शरलॉक हो स, जो सदाबहार
सफलता के झँडे गाड़ता था, पहले टू र के होने के बाद तीन ह ते बाद दसरे
ू टू र से शु होने
वाला था।

अब िसडनी और मने तय कया क पाउनाल टे रेस वाला अपना कमरा छोड़ द और
केिनंगटन रोड पर कसी यादा इ ज़तदार जगह म जा कर रह। हम अब सांप क तरह
अपनी कचुल को उतार फक दे ना चाहते थे। अपने अतीत को धो प छ दे ना चाहते थे।

93

मने हो स के अगले दौरे के दौरान िसडनी को एक छोट -सी भूिमका दये जाने के बारे
म मैनेजमट से बात क । और उसे काम िमल भी गया। एक ह ते के पतीस िशिलंग। अब हम
अपने दौरे पर साथ एक साथ थे।
िसडनी हर ह ते मां को खत िलखता था और हमारे दसरे
ू दौरे के आ खर दन म हम

केन हल पागल खाने से एक प िमला क अब हमार मां क सेहत बलकुल ठ क है । यह
िन

त ह एक बेह तर खबर थी। हमने फटाफट अ पताल से मां को ड चाज कराने के

इं तज़ाम कये और इस बात क तैया रयाँ क ं क वह हमारे पास ह र डं ग शहर म पहँु च
जाये। इस मौके का ज

मनाने के िलए हमने एक पेशल ड ल स अपाटमट िलया जसम दो

बेड म थे, एक ाइं ग म था जसम पयानो रखा हआ
ु था। हमने मां का बेड म फूल से सजा
दया और एक शानदार डनर का इं तजाम कया।

िसडनी और म टे शन पर मां का इं तज़ार करते रहे । हम तनाव म भी थे और खुश

भी। ले कन म इस बात को सोच-सोच कर परे शान हआ
ु जा रहा था क अब वह कैसे हमार
ज़ंदगी म फर से फ़ट हो पायेगी, इस बात को जानते हए
ु क उन दन क वह आ मीय

घ ड़यां फर से नह ं जी जा सकगी।

आ खरकार े न आ पहँु ची। सवा रयाँ जैसे-जैसे ड ब म से िनकल कर आ रह थीं,

हम उ ेजना और अिन

तता से उनके चेहरे दे ख रहे थे। और आ खर म वह नज़र आयी।

मु कुराती हई
ु और चुपचाप धीरे -धीरे हमार तरफ बढ़ती हई।
ु जब हम उससे िमलने के िलए

आगे बढ़े तो उसने यादा भाव दिशत नह ं कये ले कन वा स य के साथ हम यार कया।
तय था वह अपने आपको एडज ट करने के भीषण दौर से गुज़र रह थी। टै सी से अपने
कमर तक क उस छोट -सी या ा म हमने हज़ार बात क , मतलब क और बेमतलब क ।
मां को अपाटमट और उसके बेड म के फूल दखा दे ने के ता कािलक उ साह के बाद
हम अपने आपको ाइं ग म म एक दसरे
ू के सामने खाली-खाली बैठा पा रहे थे। हमार सांस

फूल रह थी। धूप भरा दन था और हमारा अपाटमट एक शांत गली म था। ले कन अब इसक
शांित बेचैन कर रह थी। हालां क म खुश होना चाहता था ले कन पता नह ं य , म अपनेआपको एक तरह के दल डू बने वाले के भाव से लड़ता हआ
ु पा रहा था। बेचार मां, उसने खुश
और संतु रहने के िलए ज़ंदगी से कतना कम चाहा था, मुझे अपने तकलीफ़ भरे अतीत क
याद दला रह थी ...वह दिनया
क आ खर औरत थी जसने मुझे इस तरह से भा वत

कया होगा। ले कन मने अपनी तरफ़ से इन भावनाओं को छुपाने क भरपूर कोिशश क ।

उसक उ

थोड़ बढ़ गयी थी और वज़न भी बढ़ गया था। म हमेशा इस बात पर गव कया

करता था क हमार मां कतनी शानदार दखती है और ढं ग से पहनी ओढ़ती है , और म
चाहता था क म अपनी क पनी को उसके बेह तर न प म दखाऊं। ले कन अब वह

94

अनाकषक दख रह थी। मां ने ज़ र मेर शंका के ताड़ िलया होगा तभी तो उसने मेर तरफ
भर िनगाह से दे खा।
झझकते हए
ु मने मां के बाल क लट का ठ क कया,"...मेर क पनी से िमलने से

पहले," म मु कुराया,"म चाहता हँू क तुम अपने सव े
हम एक दसरे
ू से एडज ट हाने म यादा व

प म होवो।"

नह ं लगा। और मेर हताशा उड़न छू हो

गयी। अब हम उस आ मीयता के दायरे से बाहर आ चुके थे जो वह तब जानती थी जब हम
ब चे थे और तब वह उस बात को हम ब च से बेहतर जानती थी। और यह बात हम और भी
यार बना रह थी। हमारे टू र के दौरान वह खर दार करती, सौदा सुलुफ लाती, घर पर फल
वगैरह ले आती, खाने -पीने के िलए कुछ न कुछ अ छ चीज़ ले आती और थोड़े से फल तो
ज र ह खर द कर लाती। हम अतीत म कतने भी गर ब य न रहे ह , शिनवार क रात के

खर दार करते समय हम हमेशा पेनी भर के फूल खर दने का जुगाड़ तो कर ह िलया

करते थे। अ सर वह शांत और अपने आप म गुमसुम रहती और उसका ये अलगाव मुझे
उदास कर जाता। वह हमारे साथ मां क तरह पेश आने के बजाये मेहमान क तरह पेश
आती।
एक मह ने के बाद मां ने लंदन वा पस जाने क इ छा कट क । वह अब घर बसा
लेना चाहती थी ता क जब हम दौरे से वा पस आय तो उसके पास हमारे िलए एक घर हो।
इसके अलावा, जैसा क उसने कहा, इस तरह सदा सैर पर घूमते हए
ु एक अित र

कराया

दे ने क तुलना म लंदन म घर ले कर रहना कह ं यादा स ता पड़े गा।
मां ने चे टर

ट पर नाई क दकान
के ऊपर एक लैट कराये पर ले िलया। यहाँ

हम पहले भी रह चुके थे। मां क त पर दस पाउं ड का फन चर ले आयी। कमरे हालां क
वसिलस के कमर जैसे बड़े और शानदार नह ं थे ले कन मां ने तो कमाल कर दया और

कमर का काया-क प कर दया। उसने सोने के कमर को संतर रं ग के े टस ् और े टोन से

रं ग डाला। अब कमरे सजावट अ मा रय क तरह दखने लगे थे। हम दोन , िसडनी और म
िमल कर हर ह ते चार पाउं ड और पांच िशिलंग कमा रहे थे और उसम से एक पाउं ड और पांच
िशिलंग मां को भेज दे ते।
अपने दसरे
ू दौरे के बाद म और िसडनी घर वा पस लौटे और एक ह ता मां के साथ

रहे । हालां क हम मां के पास आ कर खुश थे, फर भी हम मन ह मन फर से दौरे पर जाने क
चाह रखने लगे थे य क चे टर

ट के घर म वे सार सु वधाएं उस तरह क नह ं थीं

जनके म अब और िसडनी आद होने लगे थे। बला शक मां ने इस बात को ताड़ िलया। जब
हम टे शन पर वदा करने के िलए आयी तो वह काफ खुश लग रह थी ले कन हम दोन ने
सोचा, जब लेटफाम पर खड़ वह माल हलाती हम वदा कर रह थी तो हम वह िचंितत
लगी।

95

हमारे तीसरे दौरे के दौरान मां ने हम िलखा क लुइस, जसके साथ िसडनी और म
केिनंगट रोड पर रहे थे, नह ं रह है । मज़ाक ह तो कहा जायेगा क, उसक मृ यु भी लै बेथ
यतीम घर म ह हई
ु जस जगह पर कुछ अरसे तक हम रखा गया था। वह पता जी के बाद

िसफ चार बरस ह जी पायी थी और अपने ब चे को यतीम छोड़ गयी थी। उस बेचारे को भी
उस अनाथालय म ह रखा गया और उसे भी उसी हॉनवेल कूल म ह भेजा गया था जहाँ
िसडनी और मुझे भेजा गया था।
मां ने िलखा था क वह ब चे से िमलने के िलए गयी थी और उसे बताने क कोिशश
क थी क वह कौन है और क िसडनी और म केिनंगटन रोड पर उसके और उसके
पापा...म मी के साथ रहे थे ले कन ब चे को कुछ भी याद नह ं था य क वह उस समय मा
चार बरस का ह था। उसे अपने पता क भी कोई मृितयां नह ं थीं। अब वह दस बरस का
होने को आया था। उसे लुइस के मायके वाले नाम के साथ रखा गया था और मां जहाँ तक

पता लगा पायी थी, उसका कोई र तेदार नह ं था। मां ने िलखा था क वह खूबसूरत और शांत
लड़का िनकल आया था। वह शम ला और याल म खोया रहने वाला लड़का था। वह उसके
िलए थैला भर िमठाइयां, संतरे और सेब लेकर गयी थी और उससे वायदा कया था क वह
उसके पास िनयिमत प से आती रहे गी और मेरा व ास है वह तब तक जाती भी रह होगी
जब तक वह खुद बीमार हो कर फर से केन हल म वा पस न भेज द गयी हो।
मां के एक बार फर पागल हो जाने क खबर सीने म खंजर क तरह लगी। हम पूरे
यौरे कभी नह ं िमल पाये। हम िसफ एक शु क सरकार पच िमली क वह बेमतलब और
असंगत तर के से गिलय म फरती हई
ु पायी गयी थी। हम कुछ भी तो नह ं कर सकते थे
िसवाय इसके क बेचार मां क क मत के लेखे को वीकार कर ल। उसके बाद उसका
दमाग फर कभी पूर तरह से ठ क नह ं हआ।

वह कई बरस तक केन हल पागल खाने म ह तब तक ए ड़याँ रगड़ती रह जब तक

हम इस लायक नह ं हो गये क उसे एक ाइवेट पागल खाने म भत करवा सक।
कई बार बद क मती के दे वता भी अपनी चलाते-चलाते थक जाते ह और थोड़ -सी
दया माया दखला दे ते ह जैसा क मां के मामले म हआ।
अपने जीवन के अंितम सात बरस

मां को आराम से, फूल से िघरे हए
ु और धूप से िघरे हए
ु बताने का मौका िमला। वह अपने बड़े
हो गये सपूत को यश और क मत के उस तर को भोगते दे ख सक जसक उसने कभी
क पना क थी।
शरलॉक हो स के तीसरे टू र के कारण ह िसडनी और मुझे मां को दे खने आने म
अ छा-खासा व

लग गया।

ॉहमैन क पनी के साथ टू र हमेशा के िलए ख म हो गया।

इसके बाद िथयेटर रॉयल, लैकबन के मािलक िम टर है र यॉक ने

ॉहमैन से छोटे शहर म

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खेलने के िलए शरलॉक हो स के अिधकार खर द िलये। िसडनी और मुझे नयी क पनी म रख
िलया गया ले कन अब हमारा वेतन घटा कर पतीस िशिलंग ित स ाह कर दया गया था।
उ र इं गलड के छोटे शहर म अपे ाकृत ह के तर के क पनी के साथ नाटक
खेलना घुटन पैदा करने वाला और तर से नीचे आने जैसा था। इसके बावजूद, इसने मेरे इस
ववेक को समृ

कया क जो क पनी हम छोड़ कर आये थे और जसम काम कर रहे थे

उनम या फक था। म इस तुलना को छुपाने क कोिशश करता ले कन रहसल के समय,
नये िनदशक क मदद करने के उ साह म म अ सर उसे बताने लगता क ये काम तो
ॉहमैन क पनी म इस तरह से होता था और फलां काम उस तरह से होता था। वह बेचारा तो
मुझसे टे ज डायरे शन, संवाद के संकेत तथा टे ज पर होने वाले काम के बारे म पूछ िलया
करता था। ले कन सच तो यह था क म अपनी इस हरकत से बाक कलाकार के साथ खास
तौर पर लोक य नह ं हो पाया था और मुझे बड़बोले के प म दे खा जाने लगा था। बाद म,
नये टे ज पर अपनी यूिनफाम म से एक बटन खो दे ने के कारण मैनेजर ने मुझ पर दस
िशिलंग का जुमाना ठ क दया। इस बटन के बारे म वे मुझसे पहले भी कई बार कह चुके थे।
विलयम िगलेट, शरलॉक हो स के लेखक, ला रसा नाम के नाटक म मा रयो डोरो
को ले कर आये। ये नाटक भी उ ह ने ह िलखा था। समी क नाटक के ित और िगलेट क
पीच के तर के के ित बहत
ु बेरहम थे, जसक वजह से िगलेट साहब को एक पदा उठाऊ,

कटन रे जर नाटक द' पेनफुल े ड टामट ऑफ शरलाक हो स' िलखने पर मजबूर होना पड़ा।
इसम उ ह ने कभी एक श द भी नह ं बोला था। नाटक के पा

म िसफ तीन ह लोग थे, एक

पगली, खुद हो स और उनका पेज बॉय। जब मुझे िम टर पो टट, िगलेट के बंधक से एक
तार िमला तो मुझे लगा, मेरे िलए वग से खास संदेश आ गया है । मुझसे पूछा गया था क
या म लंदन आ कर कटन रे जर म विलयम िगलेट महोदय के साथ बली क भूिमका अदा
करना चाहँू गा?

म पेसोपेश के मारे कांपने लगा। मेर िचंता ये थी क या मेर क पनी वाले इतने

कम समय के नो टस पर दे श म मेर जगह कोई दसरा
बली खोज लगे। म कई दन तक

उहापोह वाले रह य म डू ब ता-इतराता रहा। अलब ा, उ ह दसरा
बली िमल गया।

लंदन म वा पस लौट कर वे ट एंड म नाटक करने के अनुभव को म िसफ अपने

पुनजागरण के प म ह बयान कर सकता हँू । मेरा दमाग
चकर-िघ नी सा घूम रहा था। शाम के व

येक घटना के रोमांच के साथ

डÎ यू के यॉक िथयेटर म पहँु चना और टे ज

मैनेजर िम टर पो टट से िमलना, जो मुझे िम टर िगलेट के े िसंग प म िलवा ले गये, और
जब मेरा उनसे प रचय करवा दया गया तो उ ह ने मुझसे पूछा,"... या तुम मेरे साथ
शरलॉक हो स म काम करना चाहोगे?"

97

और मेरा उ साह के मारे नवस हो जाना, ..."ओह ज़ र, िम टर िगलेट, ज़ र
ज़ र...।" और अगली सुबह रहसल के िलए टे ज पर इं तज़ार करना और पहली बार मा रयो
डोरो को दे खना। वे िनहायत खूबसूरत सफेद रं ग क गम क पोशाक पहने हए
ु थीं। सुबह के

इतनी खूबसूरत कसी म हला को दे ख लेने का अचानक झटका! वे दो प हये क एक

ब घी म आयी थीं और उ ह ने पाया क उनक पोशाक पर कह ं याह का एक ध बा लग
गया है । वे नाटक क

ापट वाले से पूछना चाह रह थीं क कह ं कुछ होगा इस दाग से

छुटकारा पाने के िलए तो जब उस आदमी ने इस बारे म शक जा हर कया तो उनके चेहरे पर
खीझ के इतने शानदार भाव आये,"ओह, ले कन या ये इतना वा हयात नह ं है ?"
वे बला क सुंदर थीं। म उनसे खफ़ा हो गया। म उनके नाज़ुक, किलय से खलते ह ठ
से नाराज़ हो गया, उनके एक जैसे सफेद दांत से नाराज़ हो गया, उनक मदम त ठु ड ने
मुझे खफ़ा कर दया, उनके लहराते बाल, और उनक गहर भूर आँख ने मुझे नाराज़ कर
दया। म उनके नाराज़ हाने क अदा पर नाराज़ हआ
ु और उस आकषण पर खफ़ा हआ
ु जो

उ ह ने इस बात को पूछते समय दखाया था। इस पूछताछ के दौरान म उनके और ापट

वाले के बस एकदम पास ह खड़ा हुआ था, पर वे मेर उप थित से पूर तरह अनजान थीं।
हालां क म उनके पास ह , उनक खूबसूरती से ठगा और मं

ब सा खड़ा था। म हाल ह म

सोलह बरस का हआ
ु था और इस अचानक चकाच ध के सािन य ने मेरा यह प का इरादा

सामने ला दया क म इससे अिभभूत नह ं होऊँगा। ले कन हे भगवान! वे इतनी खूबसूरत थीं।
ये पहली ह नज़र म यार था।
द' पेनफुल े ड टामट ऑफ शरलॉक हो स' म आइर न वान ुग नाम क एक बहत

ह उ कृ अिभने ी ने पगली क भूिमका क थी और नाटक म बोलने का सारा काम वह

करती थीं जब क हो स चुपचाप बैठे रहते और सुनते। ये समी क पर करारा तमाचा था।
मेर ह से म शु आती लाइन थी, म हो स के अपाटमट मे जा घुसता हँू और दरवाजा थामता
हँू जब क बाहर से पगली दरवाजा लगातार पीट रह है और जब म उ साह म भर कर हो स
को ये समझाना चाहता हँू क या हो रहा है , पगली धड़धड़ाती हई
ु अंदर आती है । लगातार

बीस िमनट तक वह कसी ऐसे मामले के बारे म आँय बाँय बकती रहती है जसके बारे म वह
चाहती है क हो स हाथ म ले ल। चोर छुपे हो स एक पच िलखते है और घंट बजाते ह और
वह पच मुझे थमा दे ते ह। बाद म दो ह टे क टे आदमी आ कर उस पगली को िलवा ले जाते
ह। म तथा हो स अकेले रह जाते ह। म कहता हँू ,"... आप ठ क कहते ह सर, यह सह पागल
खाना था।"

समी क को लतीफा अ छा लगा ले कन लार सा नाटक जो िगलेट ने मैर डोरो के
िलए िलखा था, लॉप गया। हालां क उ ह ने मैर क खूबसूरती के गुणगान कये थे ले कन
उ ह ने िलखा क यह काफ नह ं मदो म नाटक को बांधे रखने के िलए। इसिलए िगलेट ने

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उस सीजन का बाक व

शरलॉक हो स को फर से नये िसरे से पेश करके गुज़ारा। मुझे इस

नाटक म फर से बली क भूिमका के िलए रख िलया गया।
व यात विलय स िगलेट के साथ काम करने के अित उ साह म म अपने काम क
शत वगैरह के बारे म बात करना ह भूल गया। स ाह ख म होने पर िम टर पो टट मेरे पास
आये और मुझे वेतन का िलफाफा दे ते हए
ु शिमदा होते हए
ु कहने लगे,"...म तु ह ये रािश दे ते
हए
ु वाकई शिमदा हँू ले कन

ॉहमैन के द तर म मुझे यह बताया गया था क मुझे तु ह

उतनी ह रािश दे नी है जतनी पहले तुम हमसे लेते रहे थे।...दो पाउं ड और दस िशिलंग।" मुझे
ये रािश पा कर सुखद आ य हआ।

हो स क रहसल के दौरान, म मेर डोरो से फर िमला...वह पहले से भी यादा

खूबसूरत नजर आ रह थीं। मेरे इस संक प के बावजूद क म उनक खूबसूरती के जाल म

नह फँसूंगा, म उनके मौन यार के िनराशाजनक सागर म और गहरे धंसता चला गया। म
इस कमज़ोर से नफ़रत करता था और अपने च र क कमज़ोर के कारण खुद से खफ़ा था।
ये एक तरफा यार का मामला था। म उनसे यार भी करता था और नफ़रत भी करता था।
इतना ह नह ं, वह बला क खूबसूरत और भ य थीं।
हो स म वे एिलस फॉकनर क भूिमका िनभाती थीं। ले कन नाटक के दौरान हम
कभी भी नह ं िमले। अलब ा, म सी ढ़य पर उनका इं तज़ार करता और वे जब गुज़र कर
जातीं तो गुड मािनग कह दया करता। वे जवाब म खुश होकर गुड मािनग कहतीं और यह
था जो हम दोन के बीच हो पाया।
हो स ने हाथ -हाथ सफलता के झंडे गाड़ दये। नाटक जब चल रहा था तो रानी
एले ज ा भी दे खने आयीं। उनके साथ रॉयल बॉ स म ीस के राजा और
बैठे थे।

ंस

यन भी

ंस राजा को जबरद ती नाटक समझाये जा रहे थे और ऐसे अ यंत तनाव भरे और

अशांत पल म जब हो स और म टे ज पर अकेले होते ह, पूरे िथयेटर म गूँजती-सी एक
आवाज़ सुनाई द ,"...मुझे मत बताओ, मुझे मत बताओ।"
डऑन बाउसीका ट का द तर भी यूक ऑफ यॉक िथयेटर म ह था और आते-जाते
वे मेरे िसर पर यार भर चपत लगा दया करते। हाल केन भी ऐसा ह करते। वे अ सर
िगलेट से िमलने बैक टे ज म आ जाया करते। एक मौके पर तो मुझे लॉड कचनर से
मु कुराहट का भी स मान िमला।
जब शरलॉक हो स चल रहा था, उ ह ं दन सर हे नर इ वग का दे हांत हो गया और
मुझे वे टिम

टर ऐ बी म उनके अंितम सं कार म जाने का मौका िमला। म चूँ क वे ट एंड

का ए टर था इसिलए मुझे वशेष पास िमला और म इस बात से बेहद खुश हआ।
अंितम

सं कार के व

म शांत ले वस वालर और डॉ. वा फोड बोड के बीच बैठा। ले वस उन दन

लंदन के रोमां टक अिभनेताओं के बेताज़ बादशाह थे और डॉ टर बोड क

याित र र हत

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सजर के कारण थी। उन पर मने बाद म एक रं गारं ग काय म म उनके पा का वांग कया
था। वालर मौके क नज़ाकत के अनु प खूबसूरत तर के से कपड़े पहने हए
ु थे और गदन

अकड़ाये, सीधे बैठे वे न दाय दे ख रहे थे और न बाय। ले कन डॉ टर बोड , बस इस कोिशश म
क वे हे नर के ताबूत को नीचे अब उतारे जाते समय बेहतर तर के से दे ख पाय, यूक क
छाती से उचक उचक कर दे खते रहे । जब क वालर साहब को अ छ खासी को त हो रह थी।
मने कुछ भी दे खने क कोिशश ह छोड़ द और मेरे आगे जो लोग बैठे हए
ु थे, िसफ उ ह ं क
पीठ क तरफ दे खता रहा।

शारलॉक हो स के बंद होने से दो स ाह पहले िम टर बाउसीकॉ ट ने व यात
िम टर और िमसेज कडल के नाम मुझे इस बात क संभावना के साथ एक प रचय प

दया

क शायद मुझे उनके नये नाटक म कोई भूिमका िमल जाये। वे सट जे स िथयेटर म अपने

सफल नाटक के शो ख म कर रहे थे। िमलने के िलए सवेरे दस बजे का समय तय हआ।

मैडम कडल मुझे फोयर म िमलने वाली थीं। वे बीस िमनट दे र से आयीं। आ खरकार, गली म
एक आकृित उभर । ये िमसेज कडल थीं। ल बी तगड़ , अिभमानी मोहतरमा। उ ह ने यह
कहते हए
ु मेरा अिभवादन कया,"ओह, तो तुम हो, छोकरे से!! हम ज द ह

दे श क तरफ

ले कन फलहाल तो हम बहत
ु ह य त ह। इसिलए तुम कल सुबह इसी व

यहां आ रहे

एक नया नाटक ले कर जा रहे ह। म चाहंू गी क तुम हम अपनी भूिमका पढ़ कर सुनाओ।
हो!!"

"माफ करना मैडम," मने ठं डेपन के साथ जवाब दया, "ले कन म शहर से बाहर कोई
भी काम वीकार नह ं कर सकता।" इसके साथ ह मने अपना है ट ऊपर कया, फोयर से बाहर
आया, वहां से गुज़रती एक टै सी कवायी और - म दस मह ने तक बेकार रहा था।
जस रात यूक ऑफ याक िथयेटर म शारलॉक हो स का अंितम शो हआ
ु , और मैर

डोरो को अमे रका वा पस लौटना था, म अकेला ह बाहर िनकल गया और शराब पी कर बुर

तरह से धु हो गया। दो या तीन बरस बाद फलेडा फया म मने उ ह दोबारा दे खा। उ ह ने
उस नये िथयेटर का समपण कया था जसम म कान कॉमेड क पनी म अिभनय कर रहा
था। वे अभी भी पहले क ह तरह खूबसूरत थीं। म वं स म अपना कॉमेड का मेक अप कये
हए
ु उ ह दे खता रहा था। वे भाषण दे रह थीं। म इतना अिधक शरमा रहा था क आगे बढ़ कर
उ ह अपने बारे म बता ह नह ं पाया था।

लंदन म हो स के समापन पर दे श म काम करने वाली क पनी के नाटक भी
समा हो चले थे और इस तरह से िसडनी और म, दोन ह बना काम के थे। िसडनी ने
अलब ा, नया काम तलाशने म कोई व

नह ं गंवाया। नाटक से संबंिधत एक अखबार ऐरा

म एक व ापन दे ख कर वह सड़क छाप कॉमेड करने वाली चाल मैनान क क पनी म
शािमल हो गया। उन दन इस तरह क बहत
ु सार क पिनयां हआ
ु करती थीं जो हॉल के

100

च कर लगाती फरती थीं। चाल बा ड वन क बक लकस, जो बोगानी क लुनै टक बेकस
और बोइसेटे प, ये सब के सब मूक अिभनय करते थे। हालां क ये लोग हसन कॉमेड करते
थे, उनम साथ साथ बजाया जाने वाला संगीत होता था और ये बहत
ु लोक य हआ
ु करते थे।
सबसे उ कृ क पनी कान साहब क थी जनके पास कॉमे डय का खजाना था। इन सबको
ब स कहा जाता था। ये होते थे, जेल बड, अल ब स, मिमंग ब स। इन तीन केच से कान
साहब ने तीस से भी यादा क पिनय का िथयेटर का ताम झाम खड़ा कर िलया था। इनम
समस पटोमाइम और खूब ताम झाम वाले संगीत काय म होते। कान साहब के इ ह ं
नाटक क दे न थी क वहां से े ड कचन, जॉज े स, है र वै डन, बल र ज़, चाल बैल और
दसरे
ू कई महान कलाकार और कॉमे डयन सामने आये।
ये उसी व

क बात है जब िसडनी मेनान प के साथ काम कर रहा था और उसे े ड

कान ने दे खा और चार पाउं ड ित स ाह के वेतन पर रख िलया। चूं क म िसडनी से चार

बरस छोटा था, इसिलए म कसी भी िथयेटर के काम के िलए न तो बड़ म िगना जाता और न
ह छोट म ह , ले कन मने अपने लंदन के दन म कये गये काम से कुछ पैसे बचा कर रखे
थे, और जस व

िसडनी दे श म काम करता घूम रहा था, म लंदन म ह रहा और पूल के

खेल खेलता रहा।

101

छ:
म कशोराव था क मु कल और अनाकषक उ

के दौर म आ पहंु चा था और उस

के संवेदनशील उतार-चढ़ाव से जूझ रहा था। म बु ूपने और अितनाटक यता का पुजार

था, व नजीवी भी और उदास भी। म ज़ंदगी से खफ़ा भी रहता था और उसे यार भी करता
था। मेरा दमाग अ वकिसत कोष क तरह था फर भी उसम अचानक प रप वता के सोते से
फूट रहे थे। चेहरे बगाड़ते दपण क इस भूल भुलइयां म म इधर उधर डोलता और मेर
मह वाकां ाएं रह-रह कर फूट पड़ती थीं। कला श द कभी भी मेरे भेजे म या मेर श द
स पदा म नह ं घुसा। िथयेटर मेरे िलए रोज़ी-रोट का साधन था, इससे यादा कुछ नह ं।
इस च कर और

म के आलम म म अकेला ह रहता आया। इस अविध के दौरान

मेर ज़ंदगी म रं डय , बेशम औरत और बीच-बीच म एकाध बार शराबखोर के मौके आते
और जाते रहे । ले कन सुरा, सुंदर और न ह गाना बजाना दे र तक मेरे भीतर दलच पी
जगाये रख पाये। म सचमुच रोमांस और रोमांच चाहता था।
म एडवडकालीन कपड़ म गदबदे ब चे, टे ड बॉय के मनोवै ािनक नज़ रये को
अ छ तरह से समझ सकता हंू । हम सब क तरह वह भी यान चाहता है , अपनी ज़ंदगी म

रोमांस और ामा चाहता है । तब य न दशन क भावना के पल और खरम ती क कामना
उसके मन म आये जस तरह से प लक कूल का लड़का अपनी आवारगद और उदं डता के
साथ इस कामना का दशन करता है । या यह ाकृितक और वाभा वक नह ं है क जब वह
अपने वग और तथाकिथत बेहतर वग को अपनी अकड़फूं दखाते हए
ु दे खता है तो उसके मन
म भी यह कुछ करने क ललक जागती है ।

वह जानता है क मशीन उसके मन क बात मानती है और कसी भी वग क बात
मानती है । क उसके िगयर बदलने या बटन दबाने के िलए कसी खास मानिसकता क
ज़ रत नह ं पड़ती। अपनी असंवेदशील उ

म वह कसी नवाब, अिभजा य या व ान क

तरह भयावह नह ं है । उसक उं गली कसी नेपोिलयन सेना क तरह इतनी ताकतवर नह ं है
क कसी शहर को ने तनाबूद कर डाले। या टे ड बॉय अपराधी शासक वग क राख म से
ज म लेता फिन स नह ं है ! उसका यवहार शायद अचेतन क इस भावना से े रत है क

आदमी िसफ अध पालतू जानवर होता है जो पीढ़ दर पीढ़ दसर
पर धोखेबाजी, ू रता और

हं सा के ज रये ह राज करता रहा है । ले कन जैसा क बनाड शॉ ने कहा है,"म आदमी को वैसे

ह भटकाता हंू जस तरह से तकलीफ हमेशा भटकाती ह।"
और आ खर मुझे एक रं गारं ग य

िच , केसै'ज सकस म काम िमल ह गया। मुझे

डक ट पन, हाइवे मैन और ड़ॉ वै फोड बोड पर हसन करना था। मुझे सफलता का पूरा
इलहाम था य क ये िसफ िनचले दज क कॉमेड के अलावा भी बहत
ु कुछ था। ये एक

102

ोफेसरनुमा, व ान, य

का च र -िच ण था और मने खुशी-खुशी मन ह मन तय कया

क म उ ह जस का तस पेश क ं गा। म क पनी म सबक आंख का तारा था। ह ते म तीन
पाउं ड कमाता था। इसम ब च का एक प शािमल था जो एक सड़क

य म बड़ क नकल

उतारता था। मुझे लगा, ये बहत
ु ह वा हयात क म का शो था ले कन इसने मुझे एक

कॉमे डयन के प म खुद को वकिसत करने को मौका दया। जब कैसी'ज सकस ने लंदन म
दशन कये तो हम छ: लोग िमसेज फ डस ् के साथ केिनंगटन रोड पर रहे । वे पसठ बरस

क एक बूढ़ वधवा म हला थीं जनक तीन बे टयां थीं। े डे रका, थे मा, और फोबे।

े डे रका क एक सी के बनेट मेकर के साथ शाद हो रखी थी जो वैसे तो शर फ आदमी था
ले कन िनहायत ह बदसूरत था। उसका चौड़ा-सा तातार चेहरा था, लाल बाल थे, लाल ह मूंछ
और आंख म उसक भगापन था। हम छ: के छ: जन रसोई म खाना खाया करते। हम प रवार
को बहत
ु अ छ तरह से जानने लग गये थे। िसडनी जब भी लंदन म काम कर रहा होता, वह ं
ठहरता।

जब मने अंतत: कैसी'ज़ सकस छोड़ा तो म केिनंगटन रोड लौटा और फ

स प रवार

के पास ह रहता रहा। बूढ़ म हला भली, धैयवान और मेहनतकश थीं और उनक कमाई का
ज़ रया कमर से आने वाला कराया ह था। े डे रका, यानी शाद शुदा लड़क का खचा पानी
उसका पित दे ता था। थे मा और फोबे घर के काम-काज म हाथ बंटातीं। फोबे क उ

पं ह

बरस क थी और वह खूबसूरत थी। उसक कद काठ ल बोतर और िच ड़यानुमा टे ढ़ थी और
वह शार रक तथा भावना मक प से मुझ पर बुर तरह से आस

थी। म दसर
वाली के

ित अपनी भावनाओं को रोकता य क म अभी स ह बरस का भी नह ं हआ
ु था और

लड़ कय के मामले म मेर नीयत डांवाडोल ह रहती थी। ले कन वह तो साधवी कृित क थी
और हमारे बीच कुछ भी हआ
ु नह ं। अलब ा, वह मेर द वानी होती चली गयी और बाद म चल
कर हम दोन बहत
ु अ छे दो त बन गये।

स प रवार बहु त ह अिधक संवेदनशील था और कई बार आपस म वे लोग एक-

दसरे
ू से यार भर झड़प म उलझ जाते। इस तू तू म म का कारण अ सर यह होता क घर
का काम करने क बार कसक है । थे मा, जो लगभग बीस बरस क थी, घर क माल कन
होने का दं भ भरती थी। वह आलसी थी और वह हमेशा यह दावा करती क काम करने क
बार

े डे रका या फोबे क है । यह मामूली-सी बात तू तू म म से बढ़ कर हाथापाई तक जा

पहंु चती। तब गड़े मुरदे उखाड़े जाते और पूरे प रवार क ब खया ह उधेड़ जाती। और उस पर
तुरा ये क ये सबक आंख के सामने ह होता। िमसेज फ डस ् तब रह यो ाटन करतीं क

चूं क थे मा घर से भाग चुक है और िलवरपूल म एक युवा वक ल के साथ रह चुक है अत:
वह अपने आपको यह मान कर चलती है क वह घर क सवसवा होनी चा हये और ये बात
उसक है िसयत से नीचे क है क वह घर का कामकाज करे । िमसेज फ डस ् तब अपना

103

आ खर हिथयार छोड़ती हई
ु कहतीं,"ठ क है , अगर तुम अपने आपको इस तरह क औरत

मानती हो तो यहां से दफ़ा हो जाओ और जा के रहो अपने उसी लीवरपूल वाले वक ल के पास,
बस दे ख लेना अगर वो तु ह अपने घर म घुसने दे तो।" और

य को अंितम प रणित पर

पहंु चाने के िलए िमसेज फ डस ् चाय क केतली उठा कर जमीन पर दे मारतीं। इस दौरान

थे मा मेज पर महारानी क तरह बैठ रहती और ज़रा भी वचिलत न होती। तब वह आराम
से उठती, एक कप उठाती और, और उसे हौले से यह कहते हए
ु ठ क वैसे ह ज़मीन पर टपका
दे ती,"मुझे भी ताव आ सकता है ।" इसके बाद वह एक और कप उठा कर जमीन पर िगराती,

एक और कप, फर एक और कप .. । वह तब तक कप िगरा-िगरा कर तोड़ती रहती जब तक
सारा फश

ॉकर क करच से भर न जाता,"म भी सीन

एट कर सकती हंू ।" इस पूरे नज़ारे

के दौरान मां और उसक बहन असहाय-सी बैठ दे खती रहतीं,"जरा दे खो तो, दे खो तो ज़रा,
या कर डाला है इसने?" मां िघिघयाती।

"ये दे ख, ये दे ख, यहां कुछ और भी है जो तू तोड़ सकती है ," और वे थे मा के हाथ म
चीनी दानी थमा दे तीं। और थे मा आराम से चीनी दानी पकड़ लेती और उसे भी जमीन पर
िगरा दे ती।
ऐसे मौक पर फोबे क बीच-बचाव कराने वाली क भूिमका होती। वह िन प

थी,

ईमानदार थी और पूरा प रवार उसक इ ज़त करता था। और अ सर यह होता क झगड़ा
टं टा िनपटाने के िलए वह खुद ह काम करने के िलए तैयार हो जाती। थे मा उसे ऐसा न करने
दे ती।
मुझे लगभग तीन मह ने होने को आये थे क मेरे पास कोई काम नह ं था और िसडनी
ह मेरा खचा-पानी जुटा रहा था। वह मेरे रहने-खाने के िलए िमसेज फ डस ् को हर ह ते के
चौदह िशिलंग दे रहा था। वह अब े ड कान क क पनी के साथ मु य हा य कलाकार क

भूिमका िनभा रहा था और अ सर े ड के साथ अपने हनरमं
द छोटे भाई क बात छे ड़ दे ता।

ले कन कान उसक बात पर कान ह नह ं धरते थे। उनका मानना था क म बहत
ु छोटा हंू ।

उस समय लंदन म यहद
ू कामे डयन क धूम थी। इसिलए मने सोचा क म भी मूंछ

लगा कर अपनी कम उ

छुपा लूंगा। िसडनी ने मुझे दो पांउड दये जनसे म गाने-बजाने का

साजो-सामान खर द लाया और लतीफ क एक अमर क कताब मै डसन बजट म से ढे र-सारे
मज़ा कया संवाद मार िलये। म ह त तक ै टस करता रहा। फ डस ् प रवार के सामने
दशन करता रहा। वे यान से मेरा काम दे खते और मेरा उ साह भी बढ़ाते ले कन इससे
यादा कुछ नह ं।
मने फोरे टर यु जक हॉल म बना एक भी धेला दये एक ायल ह ते का जुगाड़
कर िलया था। ये एक छोटा-सा िथयेटर था जो यहद
ू चौक पर बीच -बीच माइल एंड रोड से

पीछे क तरफ बना हआ
ु था। म वहां पहले भी कैसी'ज सकस के साथ अिभनय कर चुका था

104

और मैनेजमट ने यह सोचा क म इस लायक तो होऊंगा ह सह क मुझे एक मौका दया
जाये। मेर भावी उ मीद और मेरे सपने इसी ायल पर टके हए
ु थे। फोरे टर के यहां दशन

करने के बाद म इं गलड के सभी मुख स कट म दशन करता। कौन जानता है , हो सकता है
म एक बरस के भीतर ह रं गारं ग काय म के शो का सबसे बड़ा और अखबार क है ड लाइन
पर छा जाने वाला कलाकार बन जाऊं। मने पूरे फ डस ् प रवार के साथ वादा कया था क म
उ ह ह ते के आ खर दन के टकट दलवा दं ग
ू ा। तब तक म अपनी भूिमका के साथ भी
अ छ तरह से याय कर पाऊंगा।

"मेरा याल है क आप अपनी सफलता के बाद हम लोग के साथ नह ं रहना चाहगे?"
फोबे ने पूछा था।
"बेशक, म यह ं रहता रहंू गा।"

सोमवार क सुबह बारह बजे बड रहसल और संवाद अदायगी आ द क रहसल थी
जसे मने यावसाियक तर के से िनपटाया। ले कन मने अब तक अपने मेक अप क तरफ
पया

यान नह ं दया था। रात के शो से पहले म घंट तक े िसंग म म बैठा माथा-प ची

करता रहा, नये-नये योग करता रहा, ले कन म भले ह कतने भी लंबे रे शमी बाल य न
लगाऊं, म अपनी जवानी छुपा नह ं पा रहा था। हालां क इस बारे म म भोला था ले कन मेर
कॉमेड बहत
ु अिधक यहद
ू वरोधी थी और मेरे लतीफे पटे - पटाये थे और वा हयात थे।

ब क मेरे यहद
ू उ चारण क तरह घ टया भी थे। और उस पर तुरा यह क म ब कुल भी
मज़ा कया नह ं लग रहा था।

पहले दो एक लतीफ़ पर ह जनता ने िस के और संतरे के िछलके फकने और जमीन
पर धमाधम पैर पटकने शु कर दये। पहले तो म समझ ह नह ं पाया क आ खर ये हो या
रहा है ! तभी इस सब का आतंक मेरे िसर पर चढ़ गया। मने फटाफट रे ल क गित से बोलना
शु कर दया। हु लड़बाजी और संतर तथा िस क क बरसात बढ़ती जा रह थी। जब म
टे ज से नीचे उतरा, तो म मैनेजमट का फैसला सुनने के िलए भी नह ं का, म सीधे ह

े िसंग म म गया, अपना मेक-अप उतारा, िथयेटर से बाहर िनकला और फर कभी वहां
वा पस नह ं गया। यहां तक क म वहां अपनी संगीत क कताब उठाने भी नह ं गया।
रात को बहत
ु दे र हो चुक थी जब म वा पस केिनंगटन रोड पहंु चा। फ डस ् प रवार

सोने जा चुका था और म इसके िलए उनका अहसानमंद ह था क वे सो चुके थे। सुबह ना ते
के व

िमसेज फ डस ् इस बारे म जानने को िचंितत थीं क शो कैसा रहा। मने उदासीनता

दखायी और कहा,"वैसे तो ठ क रहा ले कन उसम कुछ हे र-फेर करने क ज़ रत पड़े गी।"

उ ह ने बताया क फोबे नाटक दे खने गयी थी ले कन उसने वा पस आ कर कुछ बताया नह ं
य क वह बहत
ु थक हई
ु थी और सीधे ह सोने चली गयी थी। जब मने बाद म फोबे को दे खा

तो उसने इसका कोई ज़

नह ं कया। मने भी कोई ज़

नह ं कया और न ह िमसेज

105

फ डस ् ने या कसी और ने कभी भी इसका कोई ज़
ह य

क क म उसे स ाह तक जार

भगवान का शु

ह कया और न ह इस बात पर है रानी

य नह ं रख रहा हंू ।

है क उन दन िसडनी दसरे
दे श क तरफ गया हआ

ु था और म

उसे बताने क इस ज़हमत से बच गया क आ खर हआ
या था। ले कन ज़ र उसने अंदाजा

लगा िलया होगा या हो सकता है फ डस ् प रवार ने उसे बता दया हो य क उसने मुझसे

कभी भी इस बारे म कोई पूछताछ नह ं क । मने उस रात के द:ु व न को अपनी मृित से धोप छ दे ने क पूर कोिशश क ले कन उसने मेरे आ म- व ास पर एक न िमटने वाला ध बा
छोड़ दया था। उस भुतैले अनुभव ने मुझे यह पाठ पढ़ाया क म खुद को स ची रौशनी म
दे खूं।
मने महसूस कर िलया था क म रं गारं ग हा य कलाकार नह ं हंू । मेरे भीतर वह

आ मीय, नज़द क आने क कला नह ं थी जो आपको दशक के िनकट ले जाती है । और मने
अपने आपको यह तस ली दे ली क म च र

धान हा य कलाकार हंू । अलब ा,

यावसाियक प से अपने पैर पर खड़े होने से पहले मुझे दो एक और िनराशाओं का सामना
करना पड़ा।
स ह बरस क उ

म मने द' मेर मेजर नाम के एक नाटक म कशोर युवक के प म

मु य पा का अिभनय कया। ये एक स ता, हतो सा हत करने वाला नाटक था जो िसफ
एक ह ते चला। मु य नाियका, जो मेर बीवी बनी थी, पचास बरस क औरत थी। हर रात
जब वह मंच पर आती तो उसके मुंह से जन क बू आ रह होती, और मुझे उसके पित क
भूिमका म, उ साह से लबरे ज हो कर उसे अपनी बाह म लेना पड़ता, उसे चूमना पड़ता। इस
अनुभव ने मेरा इस बात से मन ह ख टा कर दया क म कभी मु य कलाकार बनूं।
इसके बाद मने लेखन पर हाथ आजमाये। मने एक कॉमेड

कैच िलखा जसका नाम

था वै व ज ट मैन। ये एक ह के फु के हसन वाला मामला था क कस तरह जूर वचन
भंग के एक मामले म बहस करती है । जूर के सद य म से एक गूंगा- बहरा था, एक शराबी
था और एक अ य नीम-हक म था। मने ये आइ डया चारकोट को बेच दया। ये रं गारं ग मंच
का एक ह नो ट ट था जो कसी हँ सोड़ आदमी को ह नोटाइज़ करता और उसे आंख पर
प ट बांध कर शहर क गिलय म गाड़ चलाने के िलए े रत करता जब क वह खुद पीछे बैठ
कर उस पर चु बक य भाव छोड़ता रहता। उसने मुझे पांडुिल प के िलए तीन पाउं ड दये
ले कन ये शत भी जोड़ द क म ह उसका िनदशन भी क ं गा। हमने अिभनेताओं आ द का
चयन कया और केिनंगटन रोड पर हॉनस ् प लक हाउस लब म म रहसल शु

कर द ।

एक खार खाये ए टर ने कह दया क ये कैच न केवल अनपढ़ वाला है ब क मूखतापूण
भी है ।

106

तीसरे दन जब रहसल चल रह थी, मुझे चारकोट से एक नोट िमला क उसने इस
कैच का िनमाण न करने का फैसला कर िलया है ।
अब म चूं क जांबाज टाइप का नह ं था, मने नोट अपनी जेब के हवाले कया और
रहसल जार रखी। मुझम इतनी ह मत नह ं थी क उ ह रहसल करने से रोक सकूं। इसके
बजाये, म लंच के समय सबको अपने कमरे पर िलवा लाया और उनसे कहा क मेरा भाई
उनसे बात करना चाहता है । म िसडनी को बेड म म ले गया और उसे नोट दखाया। नोट
पढ़ने के बाद िसडनी ने कहा,"ठ क है । तुमने उ ह इस बारे म बता दया है ना!"
"नह ं," म फुसफुसाया।
"तो जा कर बता दो।"
"म नह ं बता सकता। बलकुल भी नह ं। वे लोग तीन दन तक फालतू फंड म रहसल

करते रहे ह।"

"ले कन इसम तु हारा या दोष?" िसडनी ने कहा।
"जाओ और उ ह बता दो," वह िच लाया।
म ह मत हार बैठा और रोने लगा," या कहंू म उनसे?"

"मूरख मत बनो," वह उठा और साथ वाले कमरे म आया और उन सबको चारकोट का
नोट दखाया और समझाया क या हो गया है । तब वह सबको नु कड़ के पब तक ले गया
और सबको सड वच और एक-एक

ं क दलवाये।

अिभनेता एकदम मौजी आदमी होते ह। कब या कर बैठ, कहा नह ं जा सकता। वह
आदमी जो इतना यादा भुनभुना रहा था, एकदम दाशिनक हो गया और जब उसे िसडनी ने
बताया क म कस बुर हालत म था तो वह हँ सा और मेर पीठ पर धौल जमाते हए

बोला,"इसम तु हारा कोई दोष नह ं है पु र, ये सब तो उस हरामी चारकोट का कया धरा है ।"
फोरे टस म अपनी असफलता के बाद मने जस काम म भी हाथ डाला, उसी म म
धराशायी हआ
ु और मुझे एक बार फर असफलता का मुंह दे खना पड़ा। अलब ा, आशावाद

बने रहना जवानी का सबसे बड़ा गुण होता है , य क इसी जवानी म आदमी वभावत: यह
मान कर चलता है क ितकूल प र थितयां भी अ पकािलक ह होती ह और बद क मती
का लगातार दौर भी सह होने के सीधे और संकरे रा ते क तरह सं द ध होता है । दोन ह
िन

त ह समय के साथ-साथ बदलते ह।
मेर क मत ने पलटा खाया। एक दन िसडनी ने बताया क िम टर कान मुझसे

िमलना चाहते ह। ऐसा लगा क वे अपने कसी कामे डयन से नाखुश थे जो फुटबाल नाटक म
िम टर है र वे डन के साथ भूिमका कर रहा था। ये कैच कान साहब का अ यंत सफल
नाटक था। वे डन अ यंत लोक य हा य कलाकार थे जो तीसरे दशक म अपनी मृ यु तक
उसी तरह से लोक य बने रहे ।

107

िम टर कान थोड़े मोटे , तांबई रं ग के आदमी थे। उनक आंख म चमक थी और
जनम हमेशा नापने जोखने के भाव होते। उ ह ने कभी अपना कै रयर आड़े डं ड पर काम
करने वाले ए ोबैट के प म शु

कया था और इसके बाद उ ह ने अपने साथ तीन

धमाकेदार कामे डयन क चौकड़ बनायी। ये चौकड़ मूकािभनय केच का के

थी। वे खुद

बहत
ु ह उ कृ हा य अिभनेता थे और उ ह ने कई कॉमेड भूिमकाओं क शु आत क थी। वे
उस व

तक भी हा य भूिमकाएं करते रहे जब उनक दसर
पांच-पांच क पिनयां एक साथ

चल रह थीं।

उनके मूल सद य म से एक उनक सेवा िनवृ

का मज़ेदार क सा यूं बताया करता

था: एक रात मानचे टर म दशन के बाद, मंडली ने िशकायत क क कान क टाइिमंग
गड़बड़ायी थी और उ ह ने सारे लतीफ के मज़े पर पानी फेर दया। कान , ज ह ने तब तक

अपने पांच दशन से 50,000 पाउं ड जुटा िलये थे, कहा,"ठ क है मेरे दो तो, अगर आप लोग
को ऐसा लगता है तो यह सह । म छोड़ दे ता हंू ।" और तब अपनी वग उतारते हए
ु उ ह ने उसे
े िसंग टे बल पर पटका और हँ सते हए
ु बोले,"इसे आप लोग मेरा इ तीफा समझ लो।"

िम टर कान का घर को ड हारबर लेन, कै बरवैल म था और इससे सटा हआ
ु एक

गोदाम था जसम वे अपनी बीस

तुि तय के िलए सीन िसनर रखा करते थे। उनका अपना

ऑ फस भी वह ं पर था। जब म वहां पहंु चा तो वे बहत
ु यार से िमले, "िसडनी मुझे बताता रहा
है क तुम कतने अ छे हो," उ ह ने कहा," या तु ह लगता है क तुम द' फुटबाल मैच म है र
वे डन के सामने अिभनय कर पाओगे?"
हे र वे डन को खास तौर पर बहत
ु ऊंची पगार पर रखा गया था। उनक पगार च तीस

पाउं ड ित स ाह थी।

"मुझे िसफ मौका चा हये," मने आ म व ास पूण तर के से कहा।
वे मु कुराये,"स ह बरस क उ
हो!"

बहत
ु कम होती है और तुम तो और भी छोटे लगते

म यूं ह कंधे उचकाये,"ये सब मेक अप से कया जा सकता है ।"
कान हं से। इस कंधे उचकाने ने ह मुझे काम दलवाया था, बाद म िसडनी ने मुझे
बताया था।
"ठ क है , ठ क है , हम दे ख लगे क तुम या कर सकते हो।"
ये काम मुझे तीन स ाह तक ायल के प म करना था जसके एवज म मुझे ित
स ाह तीन पाउं ड और दस िशिलंग िमलते और अगर म संतोषजनक पाया जाता तो मुझे एक
बरस के िलए करार पर रख िलया जाता।
लंदन कोलेिसयम म दशन शु होने से पहले मेरे पास अपनी भूिमका का अ ययन
करने के िलए एक स ाह का समय था। कान साहब ने मुझे बताया क म जा कर शेफड बुश

108

ए पायर म द' फुटबाल मैच दे खूं और उस आदमी का अ ययन क ं जसक भूिमका मुझे
करनी है । मुझे ये मानने म कोई शक नह ं क वह सु त और आ म सजग था और ये कहने म
भी कोई झूठ शेखी नह ं है क म जानता था क म उससे आगे िनकल जाऊंगा। भूिमका म
थोड़े और कै रकेचर, और यादा वांग क ज़ रत थी। म अपना मन बना चुका था क म उसे
ठ क वैसे ह पेश क ं गा।
मुझे मा दो ह रहसल द गयीं, य क इससे यादा के िलए िम टर वे डन
उपल ध नह ं थे। दरअसल वे इस बात के िलए भी खफा थे क उ ह अपना गो फ का खेल
छोड़ कर िसफ इसी के िलए आना पड़ा।
रहसल के दौरान म भाव न जमा सका। चूं क म धीमे पढ़ता था अत: मुझे ऐसा
लगा क वे डन साहब मेर

मता के बारे म कुछ संदेह करते थे। िसडनी भी चूं क यह

भूिमका अदा कर चुका था, अगर वह लंदन म होता तो ज़ र मेर मदद करता, ले कन वह तो
दसरे
ू हा य नाटक म अ य दे श म काम कर रहा था।

हालां क द' फुटबाल मैच वांग वाला मामला था, फर भी जब तक िम टर वे डन

साहब सामने न आ जाते, कह ं से भी हं सी क आवाज़ नह ं फूटती थी। सब कुछ उनक एं

के

साथ ह जुड़ा हआ
ु था। और इसम कोई शक नह ं क वे बहत
ु ह शानदार क म के हा य

कलाकार थे और उनके आने से हँ सी का जो िसलिसला शु होता था, वह आ खर तक थमता
नह ं था।
कोिलिसयम म अपने नाटक क शु आत क रात मेर नस र सी क तरह तनी हई

थीं। उस रात का मतलब फर से मेरे खोये हए
ु आ म व ास को वा पस पाना और फोरे टर
म उस रात जो कुछ हआ
ु था, उसके द:ु व न से खुद को मु

करना था। उस वशालकाय

टे ज पर म आगे-पीछे हो रहा था। मेरे डर के ऊपर िचंता कुंडली मारे बैठ थी और म अपने

िलए ाथना कर रहा था।
तभी संगीत बजा। पदा उठा। टे ज पर ए सरसाइज़ करते कलाकार का एक कोरस
चल रहा था। आ खरकार वे चले गये और टे ज खाली हो गया। ये मेरे िलए संकेत था।
भावना मक हा हा कार के बीच म चला। या तो म मौके के अनु प खरा उत ं गा या फर मुंह
के बल िग ं गा। टे ज पर पैर रखते ह म राहत महसूस करने लगा। सब कुछ मेरे सामने साफ
था। दशक क तरफ पीठ करके मने मंच पर वेश कया था। ये मेरा खुद का आइ डया था।
पीछे क तरफ से म टप टॉप लग रहा था।

ॉक कोट पहने हए
ु , टॉप है ट, हाथ म छड़ और

मोजे। हू ब हू एडवडकालीन वलेन। तब म मुड़ा। और अपनी लाल नाक दखलायी। हं सी का
फ वारा। इससे म दशक का कृपापा बन गया। मने उ ेजनापूण तर के से कंधे उचकाये,

अपनी उं गिलयां चटकायीं और टे ज पर इधर उधर चला। एक मुगदर पर ठोकर खायी। इसके
बाद मेर छड़ सीधे जा कर पंिचंग बैग के साथ अटक गयी और वह उछल कर वा पस मेरे मुंह

109

पर आ लगा। म अकड़ कर चला और घूमा, अपने ह िसर क तरफ बार बार छड़ से वार
करता। दशक हँ सी के मारे दोहरे हो गये।
अब म पूर तरह से सहज था और नयी नयी बात मेरे दमाग म घूम रह थीं। म टे ज
को पांच िमनट तक भी बांधे रख सकता था और एक श द भी बोले बना उ ह लगातार हँ सा
सकता था। अपनी वलेनमुमा चाल के बीच मेर पट नीचे सरकने लगी। मेरा एक बटन टू ट
गया था। म बटन क तलाश करने लगा। मने यूं ह कुछ उठाने का नाटक सा कया और
हकारत से परे फक दया,"ये करमजले खरगोश!!!" एक और ठहाका।
है र वे डन का चेहरा पूरे चांद क तरह वं स म नज़र आने लगा था। उनके मंच पर
आने से पहले कभी भी ठहाके नह ं लगे थे।
य ह उ ह ने टे ज पर अपनी एं

ली मने लपक कर ामाई अंदाज म उनक बांह

थाम ली और फुसफुसाया,"ज द क जये, मेर पट खसक जा रह है । एक पन का सवाल
है ।" ये सब उसी व

के सोच हए
ु का कमाल था और इसके िलए कोई रहसल नह ं क गयी

थी। मने है र साहब के िलए दशक को पहले ह तैयार कर दया था। उस शाम उ ह जो
सफलता िमली, वह आशातीत थी और हम दोन ने िमल कर दशक से कई अित र

ठहाके

लगवाये। जब पदा नीचे आया तो मुझे पता था, म कला फतह कर चुका हंू । मंडली के कई

सद य ने हाथ िमलाये और मुझे बधाई द । े िसंग म क तरफ जाते समय वै डन साहब ने
अपने पीछे मुड़ कर दे खा और शु क वर म बोले,"अ छा रहा। बहत
ु ब ढ़या रहा।"

उस रात म अपने घर तक पैदल चल कर गया ता क अपने आपको खाली कर सकूं। म

का और वे टिम

टर

ज पर झुका, और उसके नीचे से बहते गहरे , रे शमी पानी को दे खता

रहा। म खुशी के मारे रोना चाहता था। ले कन म रो नह ं पाया। म ज़ोर लगाता रहा, मु ाएं
बनाता रहा, ले कन मेर आँख म कोई आंसू नह ं आये। म खाली हो चुका था। वे टिम

टर

ज से म चल कर एिलफट एंड कैसल टÎब टे शन तक गया और एक कप कॉफ के िलए एक
टाल पर क गया। म कसी से बात करना चाहता था, ले कन िसडनी तो बाहर के दे श म
था। काश, वह यहां होता तो म उसे आज क रात के बारे म बता पाता! आज क रात मेरे िलये
या मायने रखती थी! खास तौर पर फोरे

र क रात के बाद।

म सो नह ं पाया। एिलफट एंड कैसल से म केिनंगटन गेट तक गया और वहां एक
और कप चाय पी। रा ते म म अपने आप से बितयाता रहा और अकेले हँ सता रहा। ब तर पर
जाने के समय सुबह के पांच बजे थे और म बुर तरह से प त हो चुका था।
पहली रात िम टर कान वहां पर मौजूद नह ं थे। ले कन वे तीसर रात को आये। उस
मौके पर मेर एं

के व

जम कर तािलयां िमलीं। वे बाद म वहां आये। उनके चेहरे पर

मु कुराहट थी और उ ह ने मुझसे कहा क म सवेरे उनके ऑ फस म आ कर करार कर लूं।

110

मने पहली रात के बारे म िसडनी को नह ं िलखा था, ले कन अब मने उसे एक सं
तार भेजा,"मने एक बरस के िलए चार पाउं ड ित स ाह पर करार कर िलया है, यार, चाल ।"
द' फुटबाल मैच लंदन म चौदह स ाह तक रहा और उसके बाद दौरे पर चला गया।
वे डन साहब क कॉमेड वकलांग टाइप क थी। वे धीमी गित के समाचार क तरह
लंकाशायर वाले लहजे म गड़बड़ भाषा बोलते थे। ये अदा उ र इं गलड म बहत
ु ब ढ़या तर के
से चल जाती थी ले कन द

ण म उ ह बहत
ु अिधक भाव नह ं दया गया।

टॉल, का डफ,

लायमाउथ, साउथ पटन, जैसे शहर वे डन के िलए मंदे गये। इन स ाह म वे िचड़िचड़े होते
चले गये और उनका दशन नाम मा का रहा तो वे अपना गु सा मुझ पर उतारते रहे । शो म
उ ह मुझे थ पड़ मारना और ध कयाना था और ये सब काफ बार करना था। इसे झपक लेना
कहा जाता था। इसका मतलब यह होता था क वे मेरे चेहरे पर मारगे ले कन इसे वा त वक
भाव दे ने के िलए वं स म कोई ज़ोर से हाथ से ताली बजायेगा। कई बार वे मुझे सचमुच

मार बैठते, और वह भी बना ज़ रत के और ज़ोर से। मुझे लगता है क वे ई या से भर कर ह
ऐसा करते थे।
बेलफे ट म तो

थित और खराब हो गयी। समी क ने उनक ऐसी-तैसी कर द थी

ले कन मेर भूिमका क तार फ क थी। इसे भला वे डन साहब कैसे सहन कर सकते थे। सो,
एक रात उ ह ने टे ज पर ह अपना गु सा िनकाला और मुझे ऐसा ज़ोर का थ पड़ मारा क
मेर सार कॉमेड िनकाल कर धर द । मेर नाक से खून आने लगा। बाद म मने उ ह बताया
क अगर उ ह ने फर कभी ऐसा कया तो मंच पर ह मुगदर से उनक धुनायी कर दं ग
ू ा। और

उस पर यह भी जोड़ दया क अगर उ ह ई या हो रह है तो उसे कम से कम मुझ पर तो न
िनकाल।

"ई या और वो भी तुमसे?" वे े िसंग म क तरफ जाते हए
ु बोले," य रे , मेर गुदा म

ह इतना टै लट है जतना तु हारे पूरे शर र म भी नह ं होगा।"

"यह वो जगह है जहां आपका टे लट रहता है ।" म गुराया और लपक कर े िसंग म
का दरवाजा बंद कर दया।
िसडनी जब शहर म वा पस आया तो हमने तय कया क

टन रोड पर एक लैट

ले ल और उसे चालीस पाउं ड तक क रािश खच करके उसे सजाएं। हम ने वंगटन ब स म

पुराने फन चर क एक दकान
म गये और मािलक को बताया क हम कतनी रािश खच करने

का मा ा रखते ह और क हमारे पास सजाये जाने के िलए चार कमरे ह। मािलक ने हमार
सम या म य

गत प से दलच पी ली और हमारे काम क चीज़ चुनने म घंट हमारे साथ

खपाये। हमारे पहले वाले कमरे म कालीन बछाया और बाक तीन कमर म िलनोिलयम।
इसके अलावा हम अ तर चढ़ा हआ
ु सामान भी लाये। इसम एक द वान और दो आराम

कुिसयां थीं। बैठने के कमरे के एक कोने म हमने एक न काशीदार मू रश परदा रखा जसके

111

पीछे से पीला ब ब जलता था और उसके सामने वाले कोने म मुल मा चढ़ ईज़ल पर सोने का
पानी चढ़े े म म हमने एक पे टल सजाया। यह त वीर एक िनव

औरत क थी जो एक

पेड टल पर खड़ थी और अपने कंधे के पीछे से दाढ़ वाले िच कार क तरफ दे ख रह थी जो
उसके िनत ब के पास एक म खी को िच त करने क कोिशश कर रहा था। यह कलाकृित
और परदा, मेरे हसाब से कमरे को भरा पूरा बना रहे थे। असली दशन यो य चीज़ तो एक
मू रश िसगरे ट शॉप और एक

च रं ड खाने का जोड़ा थे ले कन हम ये अ छे लगते थे। यहां

तक क हम एक सीधा खड़ा पयानो भी लेते आये। और हालां क हमने अपने बजट से प

पाउं ड यादा खच कर डाले थे, फर भी हम इसक पूर क मत िमल गयी थी। 15 लेनशॉ
मै सन,

टन रोड पर हमारा ये घर हमारे सपन का वग था। दे श म दशन करने के

बाद हम यहां लौटने का कतनी बेस ी से इं तजार कया करते थे। अब हम इतने अमीर हो
चले थे क अपने नाना क भी मदद कर सकते थे और उ ह दस िशिलंग ित स ाह दया
करते थे। और हमार है िसयत इतनी अ छ हो गयी थी क ह ते म दो दन घर का काम
करने वाली नौकरानी आती थी और लैट म झाड़ू प छा कर जाती थी। ले कन इस सफाई क
ज़ रत शायद ह कभी पड़ती हो य क हम कसी चीज़ को उसक जगह से हलाते भी नह ं
थे। हम उसम इस तरह से रहा करते थे मानो ये कोई प व मं दर हो। िसडनी और म अपनी
वशालकाय आराम कुिसय म पसरे रहते और परम संतु

का अहसास लेते। हम एक ऊंचा

सा पीतल का मूढ़ा लेते आये थे जस पर लाल रं ग का चमड़ा मढ़ा हआ
ु था। म आराम कुस से
उठ कर मूढ़े पर चला जाता और दोन पर िमलने वाले आराम क तुलना करता रहता।
सोलह बरस क उ

म रोमांस के बारे म मेरे याल को ेरणा द थी एक िथयेटर के

पो टर ने जसम खड़ च टान पर खड़ एक लड़क के बाल हवा म उड़े जा रहे थे। म क पना
करता क म उसके साथ गो फ खेल रहा हंू, एक ऐसा खेल जस म नापसंद करता हंू , और

ओस भर जमीन पर नीचे क ओर चलते हए
ु , दल क धकड़न बढ़ाने वाली भावनाओं म डू बे
हए
ु , वा

य और कृित के याल म डू बे हए
ु उसके साथ साथ चल रहा हंू ।

यह मेरे िलए रोमांस था। ले कन कम उ

का यार तो कुछ और ह होता है । ये आम

तौर पर एक जैसे ढर पर चलता है । एक नज़र िमलने पर, शु आत म कुछ श द का आदान
दान (आम तौर पर गदहपचीसी के श द), कुछ ह िमनट के भीतर पूर जंदगी का नज़ रया
ह बदल जाता है । पूर कायनात हमारे साथ सहानुभूित म खड़ हो जाती है और अचानक
हमारे सामने छुपी हई
ु खुिशय का खज़ाना खोल दे ती है । और मेरे साथ भी ठ क ऐसा ह हो
गुज़रा था।

म उ नीस बरस का होने को आया था और कान क पनी का सफल कामे डयन था।
ले कन कुछ था जसक अनुप थित खटक रह थी। वसंत आ कर जा चुका था और गिमयां
अपने पूरे खालीपन के साथ मुझ पर हावी थीं। मेर दनचया बासीपन िलये हए
ु थी और मेरा

112

प रवेश शु क। म अपने भ व य म कुछ भी नह ं दे ख पाता था, वहां िसफ अनमनापन, सब
कुछ उदासीनता िलये हए
ु और चार तरफ आदमी ह आदमी। िसफ पेट भरने क खाितर काम
धंधे से जुड़े रहना ह काफ नह ं लग रहा था। ज़ंदगी नौकर सर खी हो रह थी और उसम
कसी क म क बांध लेने वाली बात नह ं थी। म त हा होता चला गया, अपने आप से
असंतु । म र ववार को अकेला भटकता घूमता रहता, पाक म बज रहे बड को सुन का दल
बहलाता। न तो म अपनी खुद क क पनी झेल पाता था और न ह कसी और क ह । और
तभी एक खास बात हो गयी - मुझे यार हो गया।
हम

थम ए पायर म दशन कर रहे थे। उन दन हम रोज़ रात को दो या तीन

यू ज़क हॉल म दशन कया करते थे। एक ाइवेट बस म एक जगह से दसर
जगह जाते।

थम म हम जरा ज द शु कर दे ते ता क उसके बाद कटरबर

यू ज़क हॉल और उसके

भी बाद, टवोली म दशन कर सक। अभी सांझ भी नह ं ढली थी क हमने अपना काम शु
कर दया। गम बरदा त से बाहर हो रह थी और

थम हॉल आधे से यादा खाली था। और

संयोग से ये बात मुझे उदास और त हा होने से वमुख नह ं कर सक ।
बट काउ स यक डू डले ग स नाम क गीत और नृ य क एक मंडली का दशन
हमसे पहले होता था। मुझे उनके बारे म कोई खास खबर नह ं थी। ले कन दसर
शाम, जब म

वं स म उदास और वीतरागी खड़ा हआ
ु था, उनम से एक लड़क नृ य के दौरान फसल गयी

और दसरे
ू लोग ह ह करके हँ सने लगे । उस लड़क ने अचानक नज़र उठायीं और मुझसे आंखे

िमलायीं क या म भी इस मज़ाक का मज़ा ले रहा हंू । मुझे अचानक दो बड़ -बड़ भूर शरारत
से चमकती आंख ने जैसे बांध िलया। ये आंख एक दबले
हरनी जैस,े सांचे म ढले चेहरे पर

टं गी हई
ु थीं और बांध लेने वाला उसका भरा पूरा चेहरा, खूबसूरत दांत, ये सब दे खने का असर
बजली जैसा था। जब वह टे ज से वा पस आयी तो उसने मुझसे कहा क म उसका छोटा-सा

दपण तो थामूं ता क वह अपने बाल ठ क कर ले। इससे मुझे उसे दे खने परखने का एक मौका
िमल गया।
ये शु आत थी। बुधवार तक म इतना आगे बढ़ चुका था क उससे पूछ बैठा क या
म उससे र ववार को िमल सकता हंू । वह हं सी,"म तो तु ह जानती तक नह ं क बना इस

लाल नाक के तुम लगते कैसे हो।" उन दन म मिमंग ब स म शराबी के रोल वाली कॉमेड
कर रहा था और ल बा कोट और सफेद टाई पहने रहता था।
"मेर नाक इतनी यादा तो लाल नह ं है और फर म उतना गया गुजरा भी नह ं हंू

जतना नज़र आता हंू ।" मने कहा, "और इस बात को िस करने के िलए म कल रात अपनी

एक त वीर लेता आऊंगा।"

मेरा याल है मने उसके सामने एक िगड़िगड़ाते, उदास और नौिसखुए कशोर को पेश
कया था जो काली टॉक टाइ पहने हआ
ु था।

113

"ओह, ले कन तुम तो बहत
ु जवान हो," उसने कहा,"मुझे तो लगा क तु हार उ

बहत
यादा होगी।"

"तु ह कतनी लगती है मेर उ ?"
"कम से कम तीस"
म मु कुराया,"म उ नीस पूरे करने जा रहा हंू ।"

चूं क हम लोग रोज़ ह पूवा यास कया करते थे इसिलए स ाह के दन म उससे
िमल पाना मु कल होता था। अलब ा, उसने वायदा कया क वह र ववार क दोपहर ठ क
चार बजे केिनंगटन गेट पर िमलेगी।
र ववार का दन एकदम ब ढ़या, गम भरा था और सूय लगातार चमक रहा था। मने
एक गहरा सूट पहना जो सीने के पास शानदार कटाव िलये हए
ु था और अपने साथ एक काली

आबनूसी छड़ डु लाता चला। मने काली टॉक टाइ भी पहनी हई
ु थी। चार बजने म दस िमनट
बाक थे और घबराहट के मारे मेरा बुरा हाल था, म इं तज़ार कर रहा था और या य को
ामकार से उतरता दे ख रहा था।
जब म इं तज़ार कर रहा था तो मने महसूस कया क मने है ट को बना मेक अप के
तो दे खा ह नह ं था। मुझे इस बात क ब कुल भी याद नह ं आ रह थी क वह दे खने म कैसी
लगती है । म जतनी यादा कोिशश करता, मुझे उसका चेहरा मोहरा याद ह न आता। मुझे
ह के से डर ने जकड़ िलया। शायद उसका सौ दय नकली था। एक
वाली जो भी लड़क

म!! साधारण सी दखने

ामकार म से उतरती, मुझे हताशा के गत म धकेलती जाती। या

िनराशा ह मेरे हाथ लगेगी? या म अपनी ह क पना के ारा छला गया हंू या िथयेटर मेक
अप के नकलीपने ने मुझसे छल कया है ?

चार बजने म तीन िमनट बाक थे क एक लड़क
तरफ बढ़ना शु

ामकार से उतर और उसने मेर

कया। मेरा दल डू ब गया। उसका चेहरा मोहरा िनराश करता था। उसके

साथ पूर दोपहर बताने का याल और उ साह बनाये रखने का नाटक करना, मेर तो हालत
ह खराब हो गयी। इसके बावजूद मने अपना है ट ऊपर कया और अपने चेहरे पर मु कुराहट
लाया। उसने हकारत से मेर तरफ घूरा और आगे बढ़ गयी। भगवान का शु

है , ये वो नह ं

थी।
तब, चार बज कर ठ क एक िमनट पर ामकार म से एक नवयुवती उतर , आगे बढ़
और मेरे सामने आ कर क गयी। इस समय वह बना कसी मेक अप के थी और पहले क
तुलना म यादा सुंदर नज़र आ रह थी। उसने सादा सेलर है ट, पीतल के बटन वाला नीला
वद कोट पहना हआ
ु था, और उसके हाथ ओवरकोट क जेब म गहरे धंसे हए
ु थे।
"लो म आ गयी" कहा उसने।

114

उसक मौजूदगी इतनी आ हा दत करने वाली थी क म बात ह नह ं कर पा रहा था।
मेर सांस फूलने लगी। म कुछ कहने या करने क सोच ह नह ं पाया।
"चलो टै सी कर लेते ह।" म सड़क पर आगे पीछे क तरफ दे खते हए
ु और फर उसक

तरफ मुड़ते हए
ु भार आवाज़ म बोला।
"तुम कहां जाना चाहोगी?"
"कह ं भी"

"तो चलो, वे ट एंड म डनर के िलए चलते ह।"
"म डनर ले चुक हंू " उसने ठं डेपन से कहा।

"ये बात हम टै सी म तय कर लगे" मने कहा।
मेर भावनाओं के उबाल के वजह से वह ज़ र ह सकपका गयी होगी, य क टै सी

म जाते हए
ु म लगातार यह कहता रहा था, "मुझे पता है क मुझे एक दन इसके िलए

अफसोस करना पड़े गा, तुम इतनी यादा सुंदर हो।" म बेकार ह म उस पर भाव जमाने
और उसका दल बहलाने क कोिशश करता रहा। मने बक से तीन पाउं ड िनकाले थे और सोचा
था क ोकाडे रो रे तरां ले कर जाऊंगा। वहां के संगीत और शानो शौकत के माहौल म वह
मुझे बेह द रोमां टक प म दे ख पायेगी। म चाहता था क मुझसे िमल कर उसके पैर तले क
ज़मीन गायब हो जाये। ले कन वह मेर बक बक सुन कर सूनी आंख से और कुछ हद तक
है रान परे शान सी दे खती रह । खास कर एक बात जो म उससे कहना चाह रहा था क वह मेर
ितशोध क दे वी है । ये श द मने नया नया सीखा था।
जो बात मेरे िलए इतने यादा मायने रखती थीं, उ ह वह कतना कम समझ पा रह
थी। इसका से स से कुछ लेना दे ना नह ं था: जो बात मायने रखती थी, वह था उसका संग
साथ। मेर ज़दं गी जस मोड़ पर क हई
ु थी, वहां पर लाव य और सौ दय से िमल पाना
दल
ु भ ह था।

उस शाम ोकाडे रो म मने उसे इस बात के िलए राजी करने क बहत
ु कोिशश क क

वह मेरे साथ डनर ले ले, ले कन कोई फायदा नह ं हआ।
उसने कहा क मेरा साथ दे ने के िलए

वह सड वच ले लेगी। चूं क हमने एक बहत
ु ह भ य रे तरां म एक बहत
ु बड़ मेज घेर रखी

थी, मुझे ये ज़ र लगा क कई तरह के यंजन वाले खाने का ऑडर दया जाये हालां क मुझे
इस सब क ज़ रत नह ं थी। डनर लेना बहत
ु ग भीर मामला हो गया। मुझे ये भी नह ं पता
था क कस छुर कांटे से या खाना होता है । म खाना खाते समय सहज आकषण के साथ

शे खयां बघारता रहा, यहां तक क फंगर बाउल के इ तेमाल म भी मने लापरवाह का अंदाज
अपनाया। ले कन मेरा याल है , रे तरां से बाहर आते समय हम दोन ह राहत महसूस कर
रहे थे।

115

ोकाडे रो के बाद है ट ने तय कया क वह घर जायेगी। मने टै सी का सुझाव दया
ले कन उसने पैदल चलना ह पसंद कया। चूं क वह चै बरलेन म रहती थी, मेरे िलए इससे
अ छ बात और या हो सकती थी। इसका मतलब यह होता क म उसके साथ और यादा

गुज़ार सकता था।
अब चूं क मेर भावनाओं का वार उतरने लगा था, वह मुझसे भी यादा सहज लग

रह थी। उस शाम हम टे स ए बकमट पर चहलकदमी करते रहे । है ट अपनी सहे िलय के
बारे म बात करती रह , हँ सी खुशी क और इधर उधर क बेकार क बात। ले कन मुझे इस
बात का ज़रा सा भी भान नह ं था क वह या कह रह है । मुझे तो िसफ इतना पता था क
रात सौ दय से भर थी, क म वग म चल रहा था और मेरे भीतर आनंद भर उ ेजना के
सोते फूट रहे थे।

उसे वदा कर दे ने के बाद म फर से ए बकमट पर लौटा। म अिभभूत था। मेरे भीतर

एक म यम लौ का उजाला हो रहा था और ती इ छा श

जोर मार रह थी। तीन पाउं ड म

से मेर जेब म जतने भी पैसे बचे थे, मने टे स ए बकमट पर सोने वाले िभखा रय म बांट
दये।
हमने अगली सुबह सात बजे फर से िमलने का वायदा कया था य क शा टे सबर
एवे यू म कह ं आठ बजे उसक रहसल शु होती थी। उसके घर से ले कर वे टिम

टर

रोड अंडर ाउं ड टे शन तक क दरू लगभग डे ढ़ मील क थी और हालां क म दे र तक काम
करता था और शायद ह कभी रात दो बजे से पहले सोता था, म उससे िमलने के िलए सह

पर हा जर था।
कै बरवेल को कसी ने जादई
ु छड़ से छू िलया था य क है ट केली वहां पर रहती

थी। सुबह के व

चै बरलेन क सड़क पर हाथ म हाथ दये अंडर ाउं ड टे शन तक जाना

िमत इ छाओं के साथ घुले िमले वरदान क तरह होता था। गंद , हताशा से भरने वाली
चै बरलेन रोड, जससे म हमेशा बचा करता था, अब लोभन क तरह लगती जब म दरू से

कोहरे म से िनकल कर है ट क आकृित को अपनी ओर आते दे ख रोमांिचत होता। उस साथ
साथ आने के दौरान मुझे ब कुल भी याद न रहता क उसने या कहा है । म स मोहन के
आलम म होता और ये मान कर चलता क कोई रह यमयी ताकत हम एक दजे
ू के िनकट
लायी है और भा य म पहले से ये िलखा था क हम इस तरह से िमलगे।
उससे प रचय पाये मुझे तीन सुबह हो गयी थीं; इन सं

सुबह के कारण बाक

दन के अ त व का पता ह नह ं चलता था। अगली सुबह ह पता चलता था। ले कन चौथी
सुबह उसका यवहार बदला हआ
ु था। वह मुझसे ठं डे पन से िमली। कोई उ साह नह ं था

टे स ए बकमट लंदन का

िस

कला

है । शाम के व

लोग यहां चहलकदमी करते नज़र आते ह। कई सड़क छाप

कलाकार वहां पर तटबंध के पास अपनी गायन और संगीत कला का

दशन करके भीख मांगते ह।

116

उसम। उसने मेरा हाथ भी नह ं थामा। मने इसके िलए उसे फटकारा और मज़ाक म उस पर
आरोप लगाया क वह मुझसे यार नह ं करती है ।
"तुम कुछ यादा ह उ मीद करने लगे हो," कहा उसने "ज़रा ये भी तो दे खो क म
िसफ प

ह बरस क हंू और तुम मुझसे चार बरस बड़े हो।"

म उसके इस जुम ले के भाव को समझ नह ं पाया। ले कन म उस दरू क भी अनदे खी

नह ं कर पाया जो उसने अचानक ह हम दोन के बीच रख द थी। वह सीधे सामने क तरफ

दे ख रह थी और गव नत तर के से चल रह थी। उसक चाल कूली लड़क क तरह थी और
उसके दोन हाथ ओवरकोट क जेब म गहरे धंसे हए
ु थे।

"दसरे
ू श द म कह तो तुम सचमुच मुझसे यार नह ं करती?"
"मुझे नह ं पता," वह बोली।

म ह का ब का रह गया। "अगर तुम नह ं जानती तो तुम यार नह ं करती।"
उ र दे ने के िलए वह चुपचाप चलती रह ।
"दे खो तो जरा, म भी दे वदत
ू ह हंू । मने तुमसे कहा था न क मुझसे तुमसे िमलने का

हमेशा अफसोस होता रहे गा।" मने ह केपन से कहना जार रखा।

मने उसका दमाग टटोलने क कोिशश क क आ खर उसके दमाग म चल या रहा
था और मेरे सभी सवाल के जवाब म वह िसफ यह कहती रह , "मुझे नह ं पता।"
"मुझसे शाद करोगी?" मने उसे चुनौती द ।
"म बहत
ु छोट हंू ।"

"अ छा एक बात बताओ, अगर तु ह शाद के िलए मज़बूर कया जाये वो वो म
होऊंगा या कोई और?"
ले कन उसने कसी भी बात पर हां नह ं क और यह कहती रह ,"मुझे नह ं पता, म
तु ह पसंद करती हंू . .ले कन . ."

"ले कन तुम मुझसे यार नह ं करती।" मने उसे भार मन से टोकते हए
ु कहा।

वह चुप रह । ये बादल भर सुबह थी और गिलयां गंद और हताश पैदा करने वाली
लग रह थीं।
"मुसीबत ये है क मने इस मामले को बहत
ु दरू तक जाने दया है ।" मने भार आवाज़

म कहा। हम अंडर ाउं ड टे शन के गेट तक पहंु च गये थे, "मेरा याल यह है क हम वदा हो
जाय और फर कभी दोबारा एक दजे
ू से न िमल।" मने कहा और सोचता रहा क उसक
ित

या या होगी।

वह उदास दखी।
मने उसका हाथ थामा और हौले से सहलाया,"गुड बाय, यह बेहतर रहे गा। पहले ह
तुम मुझ पर बहत
ु असर डाल चुक हो।"

117

"गुड बाय" उसने जवाब दया,"मुझे माफ करना।"
उसका माफ मांगना मेरे दल पर कटार क तरह लगा। और जैसे ह वह अंडर ाउं ड म
गायब हई
ु , मुझे असहनीय खालीपन ने घेर िलया।

मने या कर डाला था? या मने बहत
ु ज द बाजी क ? मुझे उसे चुनौती नह ं दे नी

चा हये थी। म भी िनरा गावद हंू क उससे दोबारा िमलने के सारे रा ते ह बंद कर दये, हां

तब क बात और है जब म खुद को मूरख बनने दं ।ू मुझे या करना चा हये था? सहन तो मुझे
ह करना होगा। काश, उससे दोबारा िमलने से पहले म अपनी इस मानिसक यं णा को नींद

के ज रये कम कर सकूं। कसी भी क मत पर मुझे तब तक अपने आपको उससे अलग रखना
ह होगा जब तक वह न िमलना चाहे । शायद म कुछ यादा ह ग भीर था, यादा पागल।
अगली बार जब हम िमलगे तो म और अिधक वन

और िन:संग रहंू गा। ले कन या वो फर

से मुझसे िमलना चाहे गी? ज़ र, उसे िमलना ह चा हये। वह इतनी आसानी से मुझसे
कनारा नह ं कर सकती।

अगली सुबह म अपने आप पर काबू नह ं पा सका और चै बरलेन रोड पर जा पहंु चा।

म उससे तो नह ं ले कन उसक मां से िमला,"तुमने है ट को या कर दया है ?" कहा

उ ह ने,"वह रोती हई
ु घर आयी थी और बता रह थी क तुमने उससे कभी न िमलने क बात
कह है ।"

मने कंधे उचकाये और यं य से मु कुराया,"उसने मेरे साथ या कया है ?" तब मने
हच कचाते हए
ु पूछा क या म उससे दोबारा िमल सकता हंू ।

उ ह ने जोर से अपना िसर हलाया, "नह ं, मुझे नह ं लगता क तु ह िमलना

चा हये।"
मने उ ह एक

ं क के िलए आमं त कया और हम बात करने के इरादे से पास ह के

एक पब म चले गये और बाद म मने उनसे एक बार फर उनुरोध कया क वे मुझे है ट से
िमलने द तो वे मान गयीं।
जब हम घर पहंु चे तो है ट ने दरवाजा खोला। वह मुझे दे ख कर है रान और परे शान

नज़र आयी। उसने अभी अभी सनलाइट साबुन से अपना चेहरा धोया था इसिलए एकदम

ताज़ा लग रहा था। वह घर के बाहर वाले दरवाजे पर ह खड़ रह । उसक बड़ बड़ आंख ठं ड
और िनज व लग रह थीं। म समझ गया, मामला िनपट चुका है ।
"तो फर" मने मज़ा कया बनने क कोिशश करते हए
ु कहा,"म एक बार फर गुडबाय

कहने आया हंू ।"

उसने कुछ नह ं कहा ले कन म दे ख पाया क वह मुझसे जान छुड़ाने के िलए बेताब

थी।
मने अपना हाथ आगे बढ़ाया और कहा,"तो!! एक बार फर गुडबाय"

118

"गुडबाय" उसने ठं डे पन से जवाब दया।
म मुड़ा और अपने पीछे मने हौले से दरवाजा बंद होने क आवाज़ सुनी।
हालां क म उससे िसफ पांच ह बार िमला था और हमार कोई भी मुलाकात शायद ह
बीस िमनट से यादा क रह हो, इस सं

हादसे ने मुझे ल बे अरसे तक भा वत कये

रखा।

119

सात
1909 म म पे रस गया। फोलीज़ बेरजेरे ने कान क पनी को एक मह ने क सीिमत
अविध के िलए दशन करने के िलए अनुबंिधत कया था। म दसरे
ू दे श म जाने के याल से

ह कतना उ े जत था। या ा शु करने से पहले हमने एक स ाह के िलए वूल वच म दशन
कये। ये एक वा हयात शहर म बताया गया वा हयात और सड़न भरा स ाह था और म
प रवतन क राह दे ख रहा था। हम र ववार क सुबह िनकलना था। मुझसे गाड़ , ब कुल
छूटने वाली ह थी। कसी तरह भाग कर मने लेटफाम से छूटती गाड़ पकड़ । म सामान
वाला आ खर ड बा ह पकड़ पाया था। उन दन मुझे गा ड़यां िमस करने म महारत हािसल
थी।
चैनल पर तेज धूंआधार बरसात होने लगी। ले कन कोहरे म िलपटे

ांस को पहली

नजर से दे खना कभी न भूलने वाला रोमांचक अनुभव था। ...ये इं गलड नह ं है । मुझे अपने
आपको बार-बार याद दलाना पड़ रहा था। ये महा प है ।
इसे दे खने क अपील क थी। मेरे पता आधे
से इं गलड म आया था। वे

ांस। मने अपनी क पना म हमेशा

च थे। दरअसल, चै लन प रवार मूलत:

ांसीसी ोटै टट इसाई ूग नॉ स के व

उतरे थे। पता के चाचा अ सर गव से कहा करते क एक

ांस

इं गलड क धरती पर

ांसीसी जनरल ने चै लन प रवार

क इं गलड शाखा क नींव रखी थी।
ये ढलती शरद ऋतु के दन थे। और कैलाइस से पे रस तक क या ा बेमज़ा थी।
इसके बावजूद, जैस-े जैसे हम पे रस के िनकट पहंु चते गये, मेर उ ेजना बढ़ती चली गयी। हम
अंधेरे, अकेले गांव से गुज़र कर जा रहे थे। धीरे -धीरे धूसर आसमान म हमने रौशनी के दशन
कये।... वो ह है पे रस का ित बंब, गाड़ म हमारे साथ या ा कर रहे एक

च आदमी ने

बताया।
पे रस म वह सब कुछ था जसक म उ मीद कर रहा था। गारे दू नोद से

यो े

मार तक क या ा ने मुझे उ ेजना और अधैय से भर दया। म हर नु कड़ पर उतर कर पैदल
चलना चाहता था। इस समय शाम के सात बज रहे थे। कैफ़े से आमं त करती सी सुनहर
ब यां चमक रह थी। और उनके बाहर सजी मेज़ जीवन के आनंद क बात कर रह थीं।

कुछे क कार के नये आगमन के अलावा ये अभी भी मौने, पसारो तथा रे नॉइर का ह पे रस
था। र ववार का दन था और लग रहा था जैसे हर आदमी उ सव के मूड म है । उ सव और
उ लास वहां क फ़जां म थे। यहां तक क ओ यो े मार म मेरा प थर क द वार वाला
कमरा जसे म अपनी कारागार कहता था, मेरे उ साह को दबा नह ं पाया य क सारा व
म ब

तो

ा और कैफे के बाहर लगी मेज़ पर ह बैठा रहता था।
र ववार क रात

थी। इसिलए हम फोिलज़ बेरजेरे म शो दे ख पाये। हम यह ं पर

अगले सोमवार से अपना नाटक शु करना था। मने सोचा क कोई भी िथयेटर इतने अिधक

120

लैमर के साथ, अपनी चमक-दमक और ठाट-बाट के साथ अपने दपण और बड़े बड़े फ टक
के फानूस के साथ चमका नह ं था। मोटे -मोटे कालीन बछे फोयर म तथा े स स कल म सार
दिनया
मौजूद थी। बड़ -बड़ गुलाबी र ज ड़त पग ड़यां बांधे भारतीय युवराज, कलगी लगे

टोप म

च और टक अिधकार जो शराब घर म कोिनयाक क चु कयां लेते नज़र आ रहे

थे। बाहर क ओर बड़े फोयर म संगीत क लह रयां बज रह थीं और म हलाएं अपनी पोशाक
को और अपने फर कोट को सहे जती, संभालती घूम रह थीं और अपने संगमरमर सफेद
कंध क झलक दखा रह थीं। वे ऐसी म हलाओं का संसार था ज ह फोयर म बने रहने और
े स सकल म मौजूद रहने क लत लगी हई
ु थी और वे चतुराई से वहां अपनी मौजूदगी दज

करातीं और चहकती फरतीं। वे उन दन वाकई खूब सूरत और वन

हआ
ु करतीं।

फोिलज़ बेरजेरे म यावसाियक दभा
ु षये भी थे जो अपनी टोपी पर दभा
ु षया का

ब ला लगाये िथयेटर के फोयर म घूमते रहते। मने उनम से मुख दभा
ु षये से दो ती कर

ली जो बहत
ु सार भाषाएं धड़ ले से बोल सकता था।

शाम को अपने दशन के बाद म अपनी टे ज क शाम वाली पोशाक पहन लेता और

मज़ा मारने वाल क भीड़ म शािमल हो जाता। उनम से मुझे एक ऐसी हसीना िमली जसने
मेरा दल ह छ न िलया। इस त वंगी हसीना क गदन हं सनुमा थी और उसक रं गत सफेद
थी। वो छोकर छरहर थी और बेह द खूबसूरत थी। उसक सुतवां नाक और ल बी गहर
बरौिनयां थीं। उसने काली मखमली पोशाक पहनी हई
ु थी और हाथ म सफेद द ताने थे। जब
वह े स सकल क सी ढ़यां चढ़ने लगी तो उसने अपना एक द ताना िगरा दया। मने लपक
कर उसका द ताना उठा िलया।
"..माफ करना "उसने कहा
"काश, आप इसे एक बार फर िगरातीं!" मने बदमाशी से कहा।
"माफ करना?"
तब मने महसूस कया क उसे अं ेजी नह ं आती और मुझे

च बोलनी नह ं आती।

इसिलए म भागा-भागा अपने दभा
ु षए दो त के पास गया,"उधर एक बला क खूबसूरत

लड़क खड़ है जसने मेर कामुकता जागृत कर द है । ले कन वह खासी महं गी लग रह है ।"
उसने कंधे उचकाये,"एक लुइस से यादा नह ं,"
"तक तो ठ क है ," मने कहा, हालां क उन दन एक लुइस भी अ छ खासी रकम
हआ
ु करती थी। मने सोचा, और ये थी भी।

मने दभा
तरफ कई
ु षए से एक पो टकाड क दसर

च अिभ य

यां िलखवा कर

रख ली थीं जैसे जब से मने आपको दे खा है, म होश खो बैठा हंू । इ या द ज ह म ऐसे प व
मौक पर इ तेमाल करने का इरादा रखता था। मने दभा
ु षए से कहा क वह शु आती

धंधेदार क बात करवा दे और उसने हमारे िलए दत
ू का काम कया। इधर से उधर संदेश का

121

अदान दान करता रहा। आ खर वह वा पस आया और कहने लगा,"सब कुछ तय हो गया है ।
एक लुइस म। ले कन तु ह उसके घर तक जाने और वा पस आने का टै सी का कराया दे ना
होगा।"
म एक पल के िलए चकराया,"वह रहती कहां है ?" मने पूछा।
" कराये म दस सट से यादा नह ं लगगे।"
दस स स क रकम दल दहला दे ने वाली थी य क मने इस अित र

खच क

उ मीद ह नह ं क थी। मने मजाक म पूछा," या वो पैदल नह ं चल सकती?"
"सुनो, लड़क आला दज क चीज़ है । िसफ कराये के िलए लफड़ा मत करो।" उसने
बताया।
म आ खर तैयार हो गया।

जब सब कुछ तय कर िलया गया तो म े स सकल क सी ढ़य पर उसके पास से
गुजरा। वह मु कुरायी और मने मुड़ कर उसक तरफ दे खा।..."आज शाम!"
"अ छ बात है महाशय"
चूं क हमारे दशन पूरा होने म टाइम था, मने उससे वायदा कया क हम दशन के
बाद वह ं िमलते ह। मेरे दो त ने कहा,"तुम टै सी मंगाना और म तब तक लड़क लेकर
आऊंगा, इससे टाइम बरबाद नह ं होगा।"
"टाइम बरबाद?"
हमार गाड़ जब बोले वयर दे इतािलयंस के पास गुजर तो उसके चेहरे पर रौशनी
और छाया के चहब चे अठखेिलयां कर रहे थे। मने अपने पो टकाड पर िलखी
सी िनगाह डाली और उससे कहा..."आप मुझे बहत
ु अ छ लगी ह!"
ह।"

वह अपने सफेद चमक ले दांत झलकाती हई
ु हँ सी,"आप बहत
ु अ छ

च पर उड़ती
च बोल लेते

म भावुक हो कर आगे बोलता रहा," जब से मने आपको दे खा है , म होश खो बैठा हंू ।"
वह फर हँ सी और उसने मेर

च सुधार ...और समझाया क म अनौपचा रक जबान

का इ तेमाल क ं और उसे तू या तुम कहंू । उसने इसके बारे म सोचा और फर हँ सी। तब

उसने अपनी घड़ क तरफ दे खा। ले कन घड़ बंद हो गयी थी। तब उसने इशारे से बताया क
वह समय जानना चाहती है । और बताया क ठ क बारह बजे उसे एक बहत
ु ह ज र
एपाइं टमट पर जाना है ।

"आज शाम तो नह ं," मने झझकते हए
ु जवाब दया।
"हां आज शाम ह "

"ले कन आप तो आज क पूर शाम के िलए इं गेज ह मोहतरमा? पूर रात के िलए"
वह अचानक बदहवास दखने लगी,"ओह, नह ं, नह ं, पूर रात के िलए नह ं।"

122

इसके बाद वह जद पा आ गयी," फलहाल के िलए बीस

ांक!"

"ये या है?" उसने जोर दे कर जवाब दया।
"आयम सौर ," मने कहा,"मेरा याल है हम टै सी यह ं कवा द।"
और तब टै सी को उसे फािलज़ बेरजेरे म वा पस छोड़ आने का भाड़ा दे कर म टै सी
से उतर गया। उस समय मुझसे यादा उदास, और मोहभंग आदमी कौन रहा होगा।
हम फािलज़ बेरजेरे म दस ह ते तक दशन करने थे य क हम बहत
ु अिधक सफल

जा रहे थे ले कन कान साहब क दसर
बु कंग थी। मेरा वेतन छ: पाउं ड ित स ाह था और

म इसक पाई पाई खच कर रहा था। मेरे भाई िसडनी का एक क ज़न, जो उसके पता क ओर
से उसका कोई लगता था, मेरे प रचय म आया। वह अमीरजादा था और तथाकिथत उ च वग
से नाता रखता था। जन दन वह पे रस म था, उसने मुझे खूब समय भी दया और घुमाया
भी। उसे भी टे ज के क ड़े ने काटा था और वह टे ज का इस हद तक द वाना था क उसने
अपनी मूंछ तक मुंड़वा डालीं ता क वह हमार ह मंडली के कसी सद य जैसा लग सके और
उसे बैक टे ज म आने दया जाये।
दभा
ु य से उसे इं गलड लौट जाना पड़ा, जहां मेरा याल है क उसके मां बाप ने उसक

अ छ खासी िसकाई क और उसे उसके महान माता पता ने द

णअ

का भेज दया।

पे रस म जाने से पहले मने सुना था क है ट क मंडली भी फािलज़ बेरजेरे म ह
दशन कर रह है , इसिलए मुझे पूरा यक न था क उससे वहां पर मुलाकात हो जायेगी। जस
रात म वहां पहंु चा तो म बैक टे ज म गया और उसके बारे म पूछताछ क । ले कन वहाँ पर

एक बैले लड़क से मुझे पता चला क उनक मंडली एक ह ता पहले ह मा को के िलए रवाना
हो चुक है । जस व

म उस लड़क से बात कर रहा था, सी ढ़य से एक बहत
ु ह

खी आवाज

सुनायी द ,"तुरंत इधर आओ, अजन बय से बात करने क तु हार ह मत कैसे हई
ु ?" ये

लड़क क मां थी। मने समझाने क कोिशश क क म तो िसफ अपनी एक िम के बारे म
जानकार लेना चाह रहा था ले कन मां ने मेर तरफ कोई यान नह ं दया,"उस आदमी से
बात करने क कोई ज़ रत नह ं है । चलो एकदम अंदर आ जाओ।"
म उसक इस बदतमीजी पर खासा खफा हआ।
अलब ा, बाद म म उसका अ छा

प रिचत बन गया। वह भी उसी होटल म ह रहती थी जसम म का हआ
ु था। उसक दो

लड़ कयां थीं जो फालीज़ बेरजेरे बैले क सद याएं थी। उनम से छोट वाली तेरह बरस क थी
और मु य अदाकारा थी। वह सुंदर और वदशी
ु थी जब क पं ह बरस क बड़ वाली न तो
सुंदर थी और न ह उसम अ कल ह थी। मां

च थीं भरे पूरे शर र क माल कन थीं। उनक

चालीस बरस के आस पास थी। उ ह ने एक कॉटमैन से शाद रचाई थी और वह इं गलड

म रहता था। जब हमने फालीज़ बेरजेरे म अपने दशन शु

कये तो वे मेरे पास आयीं और

माफ मांगने लगीं क वे इतने बेहू दे तर के से पेश आयी थीं। ये एक बहत
ु ह शानदार

123

दो ताना संबंध क शु आत थी। मुझे अ सर उनके कमरे म चाय के िलए बुला िलया जाता।
चाय वे लोग बेड म म ह बनाया करती थीं।
म अब जब पीछे मुड़ कर दे खता हँू तो म बेहद मासूम था। एक दोपहर को जब

ब चयां बाहर गयी हई
ु थीं और मामा और म अकेले थे उनका यवहार बदल गया और जब वे
चाय छान रह थीं तो उनका बदन कांपने लगा। म उस व

अपने सपन और अपनी उ मीद

क बात कर रहा था, अपने यार और अपनी िनराशाओं क बात कर रहा था, और वे बेहद
भावुक हो गयीं। जब म मेज पर अपनी चाय का याला रखने के िलए उठा तो वे मेरे पास
आयीं ... तुम कतने अ छे हो। उ ह ने कहा और अपने हाथ म मेरा चेहरा भरते हए
ु मेर

आंख म गहरे दे खते हए
ु कहा...तुम इतने यारे ब चे हो क तु हारा दल नह ं तोड़ा जाना
चा हये। उनक िनगाह झुकती होती चलीं गयीं। अजीब तरह से और मं ब हो गयीं और
उनक आवाज़ कांपने लगी...तु ह पता है , म तु ह अपने ब चे क तरह यार करती हँू ।

उ ह ने कहा और अब भी अपने हाथ म मेरा चेहरा भरे हए
ु थीं। तब हौले से उनका चेहरा मेरे
चेहरे के पास आया और उ ह ने मुझे चूम िलया।

"थक यू," मने वन ता पूवक कहा और भोलेपन से उ ह चूम िलया। वे अपनी बेधती
आंख से मुझे बांधे रह ं और उनके ह ठ कांपते रहे । और उनक आंख म पनीली चमक आ
गयी। तभी अचानक अपने आपको संभालते हए
ु वे एक कप चाय और ढालने के िलए चली

गयीं और पल भर म उनका बात करने का तर का बदल गया और मधुर हं सी से और हा य
बोध से उनका चेहरा दमकने लगा," तुम बहत
ु ह
हँू ।"

यारे लड़के हो...म तु ह बहत
ु पसंद करती

उ ह ने अपनी लड़ कय के बारे म मुझे कई रह य बताये,"छोट वाली बहत
ु अ छ

लड़क है ।" उ ह ने बताया,"ले कन बड़ वाली पर िनगाह रखने क ज रत होती है । वह
सम या बनती जा रह है ।"

शो के बाद वे मुझे अपने बड़े वाले बेड म म खाने के िलए आमं त करतीं। इस
बेड म म वे और उनक छोट वाली लड़क सोया करते थे। अपने कमरे म लौटने से पहले म
उ ह और छोट वाली को गुड नाइट कस करता। उसके बाद मुझे एक छोटे वाले कमरे से
गुज़र कर जाना पड़ता जहाँ पर बड़ वाली सोती थी। एक रात जब म उस कमरे से हो कर
गुज़र रहा था तो वह एकदम मेरे पास आ गयी और फुसफुसा कर बोली,"रात को अपने कमरे
का दरवाजा खुला रखना। जब प रवार सो जायेगा तो म तु हारे कमरे म आऊंगी।" मेरा
यक न कर या न कर, मने उसे हकारत से उसके ब तर पर धकेला और लपक कर कमरे से
बाहर आया। फािलस बेरजेरे म उनके अंितम दशन के बाद मने सुना था क उनक बड़ वाली
लड़क , जो मु कल से प
साथ भाग गयी थी।

ह बरस क हई
ु थी, साठ बरस के एक मोटे से जमन डॉग े नर के

124

ले कन म उतना भोला नह ं था जतना दखता था। अपनी मंडली के सािथय के साथ
रात म अ सर म वे यालय के च कर काटता और वहां वे सब हरकत करता जो जवान लोग
करते ह। एक रात, कई पैग चढ़ा लेने के बाद, म एनी टोन नाम के एक भूतपूव लाइट है वी
वेट ईनामी फाइटर के साथ िभड़ गया। ये लफड़ा रे तरां म शु हआ।
और जब वेटर ने तथा

पुिलस ने हम अलग कया तो वह बोला,"म तु ह होटल म दे ख लूंगा।" हम दोन एक ह होटल
म ठहरे हए
ु थे। उसका कमरा मेरे कमरे के ऊपर था। सुबह चार बजे म जब अपने होटल म
लौटा तो मने उसका दरवाजा खटखटाया।

"आ जाओ," वह ज द से बोला," और अपने जूते उतार दो ता क कोई शोर शराबा न
हो।"
ज द ह हम छाती तक नंगे हो गये और एक दसरे
ू के सामने आ गये। हम काफ दे र

तक एक दसरे
ू को हट करते रहे और एक दसरे
ू के वार भी बचाते रहे । इसी म मानो स दयां
लग गयीं। कई बार उसने सीधे ह मेर ठु ड पर वार कया, ले कन कोई असर नह ं हआ।

"मने सोचा, तुम पंच मारोगे ," म ताना मारा। उसने एक छलांग लगाई ले कन उसका वार

खाली गया। और उसका िसर द वार से जा टकराया। वह अपने आप ह प त हो चला था। मने
उसे ख म करने क सोची, ले कन मेरे पंच कमजोर थे। उसे खतरनाक ढं ग से हट कर सकता
था, ले कन मेरे पंच के पीछे जोर नह ं था। अचानक उसने जोर से मेरे मुंह पर एक ज़ोर का
घूंसा मारा, जससे मेरे आगे के दांत हल गये, और इससे मेरा तन बदन गु से के मारे जलने
लगा।"...बहत
ु हो गया," मने कहा,"म अपने दांत नह ं गंवाना चाहता।" वह मेरे ऊपर आया

और मुझसे िलपट गया। और तब शीशे म दे खने लगा। मने उसका चेहरा कुतर कर छलनी कर
दया था। मेरे हाथ इतने सूज गये थे मान द ताने पहन रखे ह । छत पर, द वार पर और
परद पर खून के दाग नज़र आ रहे थे। म नह ं जानता, खून सब जगह कैसे पहंु च गया था।

रात को खून मेरे मुंह के पास से सरकता हआ
ु मेरे गरदन तक आ पहँु चा था। सुबह के

जो न हा छोकरा जो मेरे िलए चाय का याला ले कर आता था, ये दे ख कर िच लाया।

उसने सोचा क मने आ मह या कर ली है । और उसके बाद मने कसी से झगड़ा नह ं कया।
एक रात दभा
ु षया मेरे पास आया और बोला क एक िस संगीतकार मुझसे

िमलना चाहता है , और या म उससे बॉ स म जाना चाहँू गा?

आमं ण रोचक था य क उनके साथ वहाँ पर एक बहत
ु ह खूबसूरत, भ य म हला

बैठ हई
ु षये ने मेरा प रचय कराया। उन महानुभाव ने
ु थीं जो सी बैले क सद या थी। दभा
कहा क वे मेरा काम दे ख कर बहत
ु खुश हए
ु ह और जानना चाहते ह क मेर उ

या है । इन

तार फ भरे श द को सुन कर म स मानपूवक झुका और बीच-बीच म म चोर िनगाह से
उनक िम को भी कन खय से दे ख लेता था,"आप ज मजात एक संगीतकार और नतक ह।"

125

यह महसूस करते हए
ु क इस तार फ के बदले श द कोई मायने नह ं रखते और जवाब

म िसफ मु कुराया ह जा सकता है , मने दभा
ु षये क तरफ दे खा और झुका। संगीतकार

महोदय उठे और मुझसे हाथ िमलाया, तब म भी खड़ा हो गया," हां," उ ह ने मेरा हाथ हलाते
हए
ु कहा,"आप एक स चे कलाकार ह।"

जब वे लोग चले गये तो म दभा
ु षये से पूछा,"उनके साथ वह म हला कौन थी?"

"वे एक सी बैले डांसर है िमस...।" यह एक बहत
ु ह ल बा और मु कल नाम था।
"और इस महाशय का या नाम था?" मने पूछा।

"डे बुसी," उसने जवाब दया,"वे एक व यात क पोजर ह।"
"मने तो उनका नाम कभी नह ं सुना," मने ट पणी क ।
ये बरस मैडम टे नहै ल के कु यात कडल और मुकदमेबाजी का बरस था। उन पर
मुकदमा चला था और उ ह अपने पित क ह या को दोषी नह ं पाया गया था। ये बरस
सनसनीखेज "पॉम पॉम डांस" का था जसम जोड़े कामुकता का दशन करते हए
ु अशोभनीय
तर के से गोल गोल घूम कर नृ य करते थे। ये बरस य

गत आय पर ित पाउं ड पर लगाये

गये छ: पस के अ व सनीय दमाग खराब करने वाले कर का था। इसी बरस डे बुसी ने
इं गलड म अपना

च नाटक

तुत कया जसे जनता ने नकार दया और दशक हॉल से

बाहर िनकल गये।
भार मन के साथ म इं गलड लौटा और दे श के दौरे पर िनकल गया। ये पे रस के
कतना वपर त था। उ र शहर म वे मनहसियत
भर र ववार क शाम। सब कुछ बंद, और

सब कुछ याद दलासी वह उदासी भी जो कामातुर युवक और पतु रय के साथ-साथ चलती।
ये अंिधयार हाई

ट म और पछवाड़े क गिलय म ग त लगाते घूमते रहते। र ववार क

शाम को यह उनका टाइम पास होता था।
इं गलड म मुझे वा पस आये छ: माह बीत चुके थे और म अपने सामा य ट न का
आद हो चला था। और तभी लंदन कायालय से एक ऐसी खबर आयी जसने मुझे रोमांच से
भर दया। िम टर कान ने खबर द क द' फुटबाल मैच के दसरे
ू दौर म मुझे िम टर हे र

वै डन क जगह लेनी है । अब मुझे महसूस हआ
क अब मेरे िसतारे बुलंद पर ह। अब प े मेरे

हाथ म थे। हालां क म अपनी रपेटर म मिमंग बडस ् और दसरे
ू नाटक म सफलता के झंडे

गाड़ चुका था, वे सार चीज द फुटबाल मैच म मु य भूिमका िनभाने के सामने कुछ भी नह ं
थीं। और सबसे बड़ बात तो ये थी क हम ऑ सफोड से शु आत करनी थी। ये लंदन का
सबसे मह वपूण संगीत हॉल था। हम सबसे बड़ा आकषण होने जा रहे थे। और ये पहली बार
होने जा रहा था क पो टर म और व ापन आ द म मेरा नाम सबसे ऊपर जाता। ये बहत

ऊंची छलांग थी। अगर म ऑ सफोड म सफल हो जाता तो इससे म एक नया नाम बनता

126

और म तब इस

थित म होता क और अिधक पगार क मांग कर सकता था और एक दन

ऐसा भी आ सकता था क म अपने खुद के कैच िलखता। दरअसल, इससे हर तरह क
शानदार योजनाओं के ार खुलते थे। चूं क कमोबेश उसी का ट को ह द' फुटबाल मैच के
िलए रखा जा रहा था, इसिलए हम िसफ एक ह ह ते क रहसल क ज़ रत थी। मने इस
बारे म बहत
यादा सोचा क म नाटक म अपनी भूिमका कैसे िनभाऊंगा। है र वे डन

लंकाशायर उ चारण म बोलते थे, मने तय कया क म इसे कॉकने शैली म क ं गा।

ले कन पहली ह रहसल म मुझे वर यं क गड़बड़ का दौरा पड़ गया। मने अपनी
आवाज़ को बचाने के िलए सब कुछ करके दे ख डाला, फुसफुसा कर बात क , भाप को अपने
भीतर िलया, गले पर

े कया, और तब तक लगा रहा जब तक िचंता ने मुझसे मेर

कोमलता और सार कॉमेड छ न ली।

नाटक क पहली रात मेरे गले क नस-नस तनी हई
ु र सी क मा फक खंची हई
ु थी।

ले कन मेर आवाज़ सुनी नह ं जा सक । कान बाद म मेरे आस-पास मंडराते रहे । उनके चेहरे
पर िनराशा और हकारत के िमले जुले भाव थे,"कोई भी तो तु हार आवाज़ नह ं सुन सका।"
वे झड़कते हए
ु बोले, ले कन मने उ ह आ

त कया क अगली रात मेर आवाज़ ज़ र

बेहतर हो जायेगी। ले कन अगली रात भी वह हाल रहा। सच तो ये है क अगली रात वह और
खराब हो चुक थी। इसका कारण ये था क मने आवाज़ के साथ इतनी जोर आजमाइश कर
ली थी क मुझे खतरा लगने लगा क कह ं मेर आवाज़ पूर तरह से चली ह न जाये। अगली
रात मेर भी मेरा यह हाल रहा। नतीजा यह हआ
क पहले ह ते के बाद ह

दशन का पदा

िगर गया। ऑ सफोड म दशन के मेरे सारे सपने चूर चूर हो चुके थे और मेर िनराशा का यह
आलम था क म ए

लूंजा का मर ज हो कर ब तर पर पड़ गया।

है ट से िमले मुझे एक बरस से यादा हो गया था। लू के कोप के बाद कमज़ोर
और उदासी के आलम म मुझे एक बार फर उसका याल आया और म एक रात दे र को
कै बरवैल म उसके घर क तरफ घूमता-घामता पहँु च गया। ले कन घर खाली था और

दरवाजे पर ` कराये के िलए खाली' का बोड लटका हआ
ु था। म बना कसी खास मकसद के

गिलय म भटकता रहा। अचानक रात के अंधेरे म से एक आकृित उभर , सड़क पार करते हए

और मेर तरफ आते हए।

"चाल , आधी रात को तुम यहाँ या कर रहे हो?" ये है ट थी। उसने काला सील क

खाल वाला कोट पहना हआ
ु था और सील क खाल का ह गोल है ट पहना हआ
ु था।
"म तुमसे िमलने आया था,' मने मज़ाक म कहा।
वह मु कुरायी,"बहत
ु कमज़ोर हो गये हो तुम?"

127

मने उसे बताया क म अभी ह

लू से उठा हँू । वह अब स ह बरस क हो रह थी और

खासी सुंदर नज़र आ रह थी और उसने कपड़े भी काफ सलीके से पहने हए
ु थे।
"ले कन सवाल ये है क तुम इस व

यहाँ या कर रह हो?" पूछा मने।

"म अपनी एक सहे ली से िमलने आयी थी और अब अपने भाई के घर जा रह हंू ।

आना चाहोगे तुम मेरे साथ?" उसने जवाब दया।

रा ते म उसने बताया क उसक बहन ने एक अमर क करोड़पित

क से शाद कर

ली है और वे नाइस म रह रहे ह। वह सुबह लंदन छोड़ कर उनसे िमलने के िलए जा रह है ।
उस रात म उसे ठगा-सा खड़ा दे खता और वह अपने भाई के साथ इठला-इठलाकर
नाचती रह । वह अपने भाई के साथ मूखतापूण और ठिगनी क तरह ए टं ग कर रह थी।
और म, अपने आप के बावजूद, इस भावना से अपने आपको मु

नह ं कर पा रहा था क मेर

जु तजू उसके िलए ज़रा सी भी कम नह ं हई
ु थी। अगर वह कसी साधारण जगह से ता लुक
रखती होती? कसी भी और सामा य लड़क क तरह? इस याल ने मुझे उदास कर दया
और म उसक तरफ व तुपरक िनगाह से दे खता रह गया।
उसके शर र म भराव आ गया था और मने उसक छाितय के उभार क तरफ दे खा
और पाया क उनक गोलाइयां छोट थीं और बहत
यादा आकषक नह ं थी। अगर मेर

है िसयत हई
ु तो या म उससे शाद कर पाऊंगा? नह ं, म कसी से भी शाद नह ं करना चाहता
था।

उस ठं ड और चमक ली रात को म जब उसके साथ घर क तरफ आ रहा था तो म
ज़ र ह बहत
ु अिधक उदास तर के से तट थ रहा होऊंगा य क मने उससे इस बात क
आशा य

क क उसका जीवन बहत
ु सुखी और शानदार होगा।

"तुम इतने उदास और टू टे लग रहे थे क म एकदम रोने रोने को थी।" उसने कहा था।
उस रात म एक वजेता क तरह घर लौटा य क मने उसे अपनी उदासी से छू िलया
था और अपने य

व को महसूस करा दया था।

कान ने मुझे फर से मिमंग बडस ् म रख िलया था और वडं बना ये क मेर आवाज़

को पूर तरह से ठ क होने म एक मह ना लग गया था। द' फुटबाल मैच के बारे म मेर जो
िनराशा थी, मने तय कया क अब उसे हावी नह ं होने दं ग
ू ा। ले कन एक याल भी मुझे

सताये जा रहा था क शायद म वै डन क बराबर करने या उनक जगह लेने के का बल नह ं
था। और इससे सबके पीछे फोरे टर िथयेटर म मेर असफलता ह काम कर रह थी। अब तक
चूं क मेरा आ म व ास पूर तरह से लौटा नह ं था, जस भी नये नाटक म मने मु य
भूिमका िनभायी, वह डर का एक ायल था। और अब सबसे अिधक च काने वाला और
अ यिधक िनणायक दन आ गया जब मने िम टर कान को बताया क मेरा करार ख म
होने को है और मुझे वेतन म बढ़ोतर चा हये।

128

कान जसे भी पसंद नह ं करते थे उसके ित ू र और सनक हो सकते थे। चूं क वे
मुझे पसंद करते थे इसिलए मने उनके य

व के इस प

के दशन नह ं कये थे ले कन वे

सचमुच बहत
ु ह बदतमीज़ी भरे तर के से चूर-चूर कर सकते थे। अपने कसी कामे डयन के
दशन के दौरान अगर उ ह वह कामे डयन पसंद नह ं आता था तो वे वं स म खड़े हो कर

इतने ज़ोर से नाक िसनकने का नाटक करते थे क सबको सुनायी दे जाये। वे अ सर ऐसा
करने लगते थे क कामे डयन मंच छोड़ कर ह आ जाता था और उसके साथ हाथा-पाई करने
लगता था। वह आ खर बार थी जब उ ह ने इस तरह क हरकत क थी और अब म उनके
पास वेतन म बढ़ोतर के िलए िभड़ने जा रहा था।
"ठ क है ," उ ह ने खेपन के साथ मु कुराते हए
ु कहा, "तुम वेतन म वृ

चाहते हो और

िथयेटर स कट उसम कटौती करना चाहता है ।" उ ह ने कंधे उचकाये,"ऑ सफोड यू ज़क

हाल के हं गामे के बाद हमारे पास िसफ िशकायत ह िशकायत ह। उनका कहना है क क पनी
उस लायक नह ं है ... दो कौड़ का ै च

ाउड

कान क मंडली म हम कम से कम से छ: मह ने लगते थे क हम परफै ट टै पो वकिसत
कर पाते और तब तक उसे ै च

ाउड के नम से पुकारा जाता था।

"ले कन उसके िलए मुझे ह तो दोषी नह ं ठहरा सकते," मने जवाब दया।
"ले कन वे तो दोषी ठहराते ह।" उनका जवाब था। वे चुभती िनगाह से मेर तरफ घूर
रहे थे।
"उ ह या िशकायत है ?" पूछा मने।
उ ह ने अपना गला खखारा और फश पर दे खने लगे,"उनका कहना है क तुम स म
नह ं हो।"
हालां क उनक यह ट पणी सीधे मेरे पेट म जा कर शूल क तरह चुभी, इससे मुझे
गु सा भी आया, ले कन मने शांत वर म जवाब दया,"ठ क है , दसरे
ू लोग ऐसा नह ं सोचते।

और वे मुझे उससे यादा दे ने को तैयार ह जतना मुझे यहाँ िमल रहा है ।" ये सच नह ं था। मेरे
सामने कोई

ताव नह ं था।

"उनका कहना है क शो फालतू है और कामे डयन दो कौड़ का है । दे खो," उ ह ने फोन
उठाते हए
ु कहा,"म एक टार को फोन क ं गा, बेरमाँडसे को, और तुम उनसे अपने आप सुन

लेना।... मेरा याल है पछले ह ते तु हारा शो बहत
ु ह खराब रहा था।" उ ह ने फोन पर बात
क।

"वा हयात..." फोन पर आवाज आयी।

काना

प म हम सह तर के से टे पो पर महारत हािसल कर सक, इसम एक साथ काम करने म हम छ: मह ने लग जाया

करते थे तब तक हम

ैच

ाउड कहा जाता था।

129

कान ने खींस िनपोर ,"आप इसे कस ण
े ी म डालगे?"
"दो कौड़ा का...शो"
"और चै लन के बारे म या याल है ? हमारे धान कामे डयन? या उसका काम
भी ठ क नह ं?"
"वह तो बू मारता है ।"
कान साहब ने फोन मुझे थमा दया,"अपने आप ह सुन लो..."
म फोन िलया। "...हो सकता है वह बू मारता हो ले कन उससे आधा भी नह ं जतना
आपका सड़ांध भरा िथयटर बू मारता है ।" मने जवाब दया।
कान साहब क मुझे औकात दखाने क तरक ब काम नह ं आयी। मने उनसे कहा क
अगर वे भी मेरे बारे म यह राय रखते ह तो करार का नवीकरण करने का कोई मतलब नह ं

है । कई मायन म कान बहत
ु ह काइयां आदमी थे। ले कन वे मनोवै ािनक नह ं थे। बेशक म
बू मारता था तो भी ये कान साहब को शोभा नह ं दे ता था क फोन क दसर
तरफ से कसी

और से ये कहलवाय। मुझे पांच पाउं ड िमल रहे थे और हालां क मेरा आ म व ास डगमाया
हआ
ु था, फर भी म छ: क मांग कर रहा था। मेर है रानी का ठकाना नह ं रहा जब कान

साहब ने मुझे छ: पाउं ड दे ना वीकार कर िलया और म एक बार उनक िनगाह म राज दल
ु ारा
बन गया।

आ फ र ज़, जो कान साहब क अमे रक क पनी म मैनेजर थे, इं गलड वा पस
आये और उ ह ने ये अफवाह फैला द क वे अपने साथ अमे रका ले जाने के िलए कसी
धान कामे डयन क तलाश म ह।
ऑ सफोड यू जक हॉल के उस बड़े हादसे के बाद से म अमे रका जाने के याल से
भरा हआ
ु था। अकेले जा कर ि ल और रोमांच के िलए नह ं, ब क वहाँ जाने का मतलब

हमेशा नयी आशाएं और नयी दिनया
म एक नयी शु आत। सौभा य से, म जस नये नाटक

के टं ग म मुख भूिमका िनभा रहा था, बरिमंघम म सफलता के झंडे गाड़ रहा था, और जब

िम टर र ज़ वहाँ आ कर क पनी म शािमल हए
ु तो मने अपनी भूिमका को बेहतर बनाने म
जान लड़ा द और इसका नतीजा ये हआ
क र ज़ साहब ने कान साहब को तार भेजा क

उ ह अमे रका के िलए अपना कामे डयन िमल गया है । ले कन कान साहब ने मेरे िलए और
ह मंसूबे बांधे हए
ु थे। इस वा हयात खबर ने मुझे ह त तक पेसोपेश म डाले रखा जब तक

क वे वॉव वॉव नाम के नाटक म दलच पी नह ं लेने लग गये। ये नाटक सी े ट सोसाइट म
कसी सद य को िलये जाने के बारे म हसन था। मुझे और र ज़ साहब को ये नाटक

वा हयात लगा, बना िसर पैर का, बना कसी खािसयत के लगा, ले कन कान साहब पर
इसका नशा सवार था और वे अड़ गये क अमे रका सी े ट सोसाइ टय से भरा पड़ा है । और
उन पर इस तरह का कटा

करने वाला नाटक ज़ र सफल होगा। मेर खुशी और राहत का

130

ठकाना न रहा जब कान साहब ने मुझे ह इसक

धान भूिमका के िलए चुना। अमे रका के

िलए वॉव वॉव।
मुझे अमे रका जाने के िलए इसी तरह के कसी मौके क ज रत थी। इं गलड म मुझे
लग रहा था क म अपनी संभावनाओं के िशखर पर पहँु च चुका हँू और इसके अलावा, वहाँ पर

मेरे अवसर अब बंधे बंधाये रह गये थे। आधी-अधूर पढ़ाई के चलते अगर म यू जक हॉल के
कामे डयन के प म फेल हो जाता तो मेरे पास मजदरू के काम करने के भी बहत
ु ह सीिमत
आसार होते।

अमे रका म संभावनाओं का अंनत आकाश था।
या ा शु करने से पहले क रात म लंदन के वे ट एंड म घूमता रहा, लीसेटर
वायर, कोवे टर

ट, द माल, और पका ड ली म का। उस समय मेरे मन म उदासी

भर भावना थी क ये आ खर बार होगा क म लंदन घूम रहा हँू य क म मन ह मन तय

कर चुका था क मुझे थायी प से अमे रका जाकर ह बसना है । म आधी रात तक दो बजे
तक भटकता रहा, सुनसान गिलय और मेर खुद क उदासी क क वता म डू बता उतराता।
म वदा के दो श द कहने से बच रहा था। अपने नातेदार से और दो त से बछुड़ते
समय आदमी जो कुछ भी महसूस करता है , उनके ारा वदाई दये जाने के बारे म, उसम
और धंसता ह है । म सुबह छ: बजे ह उठ गया था। इसिलए मने इस बात क ज़ रत नह ं
समझी क िसडनी को जगाऊं। ले कन मने मेज पर एक पच छोड़ द ,"अमे रका जा रहा हँू ।
तु ह िलखता रहँू गा। यार। चाल ।"

131

आठ
हम या ा करते हए
ु बारह दन हो चुके थे, और हमारा अगला पड़ाव यूबेक था। बेहद

खराब मौसम और चार तरफ लहराता हआ
ु महासमु । तीन दन तक तो हम टू ट पतवार

लेकर पड़े रहे , इसके बावज़ूद म तो एक दसर
ह दिनया
म जाने के वचार से उ लिसत था

और अपने आपको बहत
ु ह का महसूस कर रहा था। मवेिशय वाली नाव पर हम कनाडा हो
कर जा रहे थे। नाव पर गाय, बैल, भेड़, बकर भले ह न ह , पर चूहे ढे र सारे थे और रह-रह
कर वे बड़ हे कड़ से मेर बथ पर आ धमकते और जूता चलाने पर ह भागते।
िसतंबर क शु आत थी और यू फाउं डलड हमने कोहरे म पार कया। आ खर मु य भूिम के
दशन हए।
ु फुहार पड़ रह थी और दन म भी सट लांरेस नद के तट िनजन नज़र आ रहे थे।

नाव से यूबेक उस चहारद वार क तरह लग रहा था जहाँ है मलेट का भूत चला करता होगा।
मेरा मन टे स के बारे म कुतूहल से भर उठा।
पर जैसे-जैसे हम टोरं टो क ओर बढ़ते गए, पतझड़ के रं ग से दे श और खूबसूरत होता
चला गया और मेर उ मीद पहले से यादा रं गीन हो उठ ं।

टोरं टो म हमने गाड़ बदली और अमे रक आ वासन के द तर से होकर गुज़रे।

आ खरकार र ववार सुबह दस बजे हम यूयाक आ पहँु च।े टाइ स

वायर म जब हम टै सी

से उतरे तो कुछ िनराशा सी हई।
ु सड़क और फुटपाथ पर अखबार इधर-उधर उड़ रहे थे।

ॉडवे बेरौनक दख रहा था, मानो फूहड़-सी कोई औरत अभी-अभी ब तर से उतर हो। ाय:

हरे क नु कड़ पर ऊंची ऊँची कुिसयां थीं जसम जूत के साँचे लगे थे और लोग बना कोट
वगैरह के, केवल कमीज़ पहने हए
ु आराम से बैठ कर अपने जूते पॉिलश करवा रहे थे। दे ख

कर लगा, मानो वे लोग सड़क पर ह शौच आ द से िनवृ हए
ु ह । कई लोग अजन बय सर खे
लगे जो फुटपाथ पर यूं ह खड़े थे मानो अभी-अभी रे लवे टे शन से बाहर िनकले ह और
अगली गाड़ के आने तक का समय काट रहे ह ।
जो भी हो, ये यू याक था, रोमांचक, अ कल चकरा दे ने वाला और कुछ-कुछ
डरावना। दसर
तरफ पे रस यादा दो ताना था। म

च भले ह नह ं बोल पाता था पर

ब तास और कैफे वाले पे रस ने हरे क नु कड़ पर मेरा वागत कया था। ले कन यू याक

बड़े कारोबार क जगह थी। गव से भर िन ु र, ऊँची-ऊँची आकाश को छूने वाली इमारत को
आम आदमी क तकलीफ से कोई सरोकार नह ं था। सैलून बार म भी

ाहक के बैठने क कोई

जगह नह ं थी। िसफ पीतल क ल बी रे िलंग लगी हई
ु थी जस पर आप पैर टका सक, और
खाने क नामी जगह, बेशक साफ-सुथर थी, सफेद संगमरमर लगे हए
ु थे वहां ले कन ये
जगह भी मुझे बेजान और अ पतालनुमा लगीं।

132

फोट -थड

ट से कुछ दरू ाउन टोन हाउसेस म मने पछवाड़े का एक कमरा

िलया, जहाँ अब पुरानी टाइ स ब डं ग खड़ है । घर बड़ा ह मनहस
ू और गंदा था और इसे
दे ख कर मुझे लंदन और अपने छोटे से लैट क याद सताने लगी। बेसमट म धुलाई और

इ तर का कारोबार चलता था और ह ते के दन म भाप के साथ ऊपर उड़कर आती इ तर
होते कपड़ क बू मेर परे शािनय को और बढ़ाती।
उस पहले दन मने अपने आपको बहत
ु ह अधूरा पाया। कसी रे तरां म जाना और

कुछ ऑडर करना तो अ न पर

ा थी य क मेरा अं ेज़ी उ चारण उनसे अलग था और म

धीरे -धीरे बोलता था। कई लोग इतने फराटे से और झटका दे कर बोलते थे क मुझे इस डर से
असु वधा होने लगती क म बोलने चला तो हकलाने लगूंगा और उनका भी समय बरबाद
होगा।

ये चमक-दमक और ये र तार मेरे िलए नई थी। यू यॉक म छोटे से छोटे कारोबार

वाला आदमी भी फुत से काम करता है । जूता पॉिलश करने वाला लड़का पॉिलश वाले कपड़े
को फुत से झटकता है , बार म बयर दे ने वाला ह वैसी ह फुत से बार क चमचमाती सतह
पर बीयर आपक ओर सरका दे गा। अ डे क जद िमले मा ट दे ते व

सोडा लक कसी

कूदते फांदते कलाबाज क तरह काम करता है । एक ह बार म वह एक िगलास झटकता है
और जो भी चीज़ डालनी ह, उन पर टू ट पड़ता है । वनीला लेवर, आइस

म का छोटा-सा

टु कड़ा, दो च मच मा ट, क चा अ डा, बस एक बार म फोड़ डाला, दध
ू िमलाया, फर इन
सबको लेकर एक बतन म ज़ोर से हला कर िमलाया और ली जए पेश है । ये सब कुछ एक
िमनट से भी कम समय म।
एवे यू पर उस पहले दन कई लोग वैसे नज़र आए जैसा म महसूस कर रहा था अकेले और कटे -फटे । इनम से कुछ ऐसे हाव-भाव म थे जैसे वह उस जगह के मािलक ह ।
कई तो बड़े ढ ठ और बदिमजाज थे मानो स जनता और वन ता से पेश आएंगे तो कोई उ ह
कमज़ोर समझ लेगा। ले कन शाम को गिमय के कपड़े पहनी हई
ु भीड़ के साथ जब म ॉडवे
होकर जा रहा था तो जो दे खा उससे मेरा मन आ

त हो गया। कड़ाके क िसतंबर के ठं ड के

बीच हमने इं गलै ड छोड़ा था और झुलसा दे ने वाली अ सी ड ी क गम म यू याक पहँु चे
थे। अभी म चल ह रहा था क बजली क ढे र सार रं ग- बरं गी ब य से ॉडवे जगमगाने

लगा और बेशक मती जवाहरात क तरह चमकने लगा। गम क उस रात म मेरा नज़ रया
बदला और अमे रका का नया मतलब मेरे ज़ेहन म उतरता चला गया। बहमं
ु ज़ला इमारत ,

चमकती खुशनु मा रोशिनय और गुदगुदा दे ने वाले व ापन ने मेरे मन म आशा और रोमांच
क हलचल मचा द । यह है - मने अपने आपसे कहा - म इसी जगह से वा ता रखता हँू ।
ॉडवे पर लगता था हर कोई कसी न कसी कारोबार म है : अिभनेता, हा य

कलाकार, मजमे वाले, सरकस म काम करने वाले और मनोरं जन वाले हर जगह थे। सड़क

133

पर, रे तराओं म, होटल और डपाटमटल टोर म हर आदमी धंधे क बात कर रहा था।
िथएटर मािलक के नाम जहाँ-तहाँ सुनने को िमल जाते: ली शुबट, मा टन बैक, विलयम
मॉ रस, पस विलय स, ला एंड इरलगर,

ॉइमैन, सुिलवन ए ड का सडाइन, पटे जेज़।

घरे लू नौकरानी हो, िल ट वाला हो, वेटर हो, टै सीवाला हो, बारमैन हो, दध
ू वाला हो या
बेकर वाला, जसे दे खो, शो मैन क तरह बात करता। राह चलते लोग क बातचीत के

सुनायी पड़ते अंश भी वह । बूढ़ हो चली माताएं, दखने म कसान क बी वय क तरह और
बात सुिनए तो - वह अभी-अभी वे ट म पटे ज़ेज के िलए काम करके लौटा है । एक दन म
तीन-तीन शो थे। सब कुछ ठ क-ठाक रहा तो बड़ा हा य कलाकार बनेगा।
एक दरबान कह रहा है ,"तुमने वंटर गाडन म जॉनसन को दे खा?"
"ज र, उसने जेक के शो क लाज रख ली।"

अखबार का एक पूरा प ना हर दन िथएटर को सम पत होता था जसम रे सकोस
वाले घोड़ के रे िसंग चाट क मािनंद खबर होतीं। हा य कला म कसने कतना नाम कमाया,
कस पर अिधक तािलयां बजीं, इसके आधार पर रे स के घोड़ क तरह पहले, दसरे
ू और तीसरे
थान दए जाते थे। अभी इस दौड़ म हम शािमल नह ं हुए थे और मुझे इस बात क िचंता

रहती क चाट म हम कस पोजीशन पर आएंगे। 56 ह त तक हमारा काय म पस

विलय स स कट म था। इसके बाद और कोई बु कंग नह ं थी। हमारा अमे रका म टकना
इसी काय म के प रणाम पर िनभर था। नह ं चले, तो इं गलड लौट जाएंगे।
हम लोग ने एक रहसल म िलया और द' वाउ वाउज़ क एक ह ते तक रहसल
क । हमारे दल म र लेन का िस बूढ़ा सनक जोकर वाकर था। स र पार कर चुका था।
आवाज़ तो बड़ गंभीर थी पर रहसल म पता चला क साफ-साफ तो बोल ह नह ं पाता। ऊपर
से लॉट का एक बड़ा ह सा दशक को समझाने का काम उसी को करना था। ऐसी कोई
लाइन जैसे - मज़ाक बेह तहा डरावना होगा उससे बोला ह न जाए और वह कभी बोल पाया
भी नह ं। पहली रात वह ए लब-ए लब बड़बड़ाया। बाद म यह ए लब ह रह गया, पर
आ खर तक सह श द नह ं ह िनकला।
अमे रका म कान का बड़ा नाम था। इसिलए बेहतर न कलाकार के काय म म
सबसे यादा आकषण का के

हम ह होते थे। भले ह मुझे उस केच से नफरत थी, मने

इसका भरपूर उपयोग कया। मुझे उ मीद थी क शायद यह वो चीज़ हो जाये जसे कान
खािलस अमे रका के िलए कहा करते थे।
पहली रात टे ज पर आने से पहले म कतना नवस था, कस तकलीक और पसोपेश
म था, म इसका बयान नह ं कर सकता और न ह इसका क टे ज के साइड म खड़े अमे रक
कलाकार हम दे ख रहे थे तो मुझ पर या बीत रह थी। इं गलड म मेरे पहले लतीफे पर
ज़ोरदार ठहाके लगते थे और इससे पता चल जाता था क बाक क कॉमेड कैसी चलेगी।

134

कप का सीन था, एक तंबू म चाय का कप िलए म वेश करता हंू ।

आच (म) : गुड मािनग हडसन। मुझे थोड़ा-सा पानी चा हए। दगे ?
हडसन : ज र, पर कसिलए
आच

: म नहाना चाहता हँू ।

(दशक क ओर से एक ह क आधी-अधूर हँ सी और फर बे खी चु पी)
हडसन : रात क नींद कैसी रह , आच ?
आच : अरे , मत पूछो। सपने म दे खा, एक इ ली मुझे दौड़ा रह है ।
अब भी दशक म वैसी ह मुदनगी। इस तरह हम बड़बड़ाते रहे और टे ज के बगल म
खड़े अमे र कय के थोबड़े और यादा लटकते गए। ले कन हमारे उस अंक को ख म करने से
पहले ह वे जा चुके थे।

ये केच बचकाना और नीरस था, और मने कान को सलाह द थी क इससे शु आत

न कर। हमारे पास दसरे
यादा मज़ेदार केचेज थे जैसे के टं ग, द डड थी स, द पो ट

ऑ फस और िम टर प कस, एम.पी. जो अमे रक दशक को पसंद आते। ले कन कान
अपनी ज़द पर अड़े रहे ।
जो भी क हए, परदे स म नाकामी से तकलीफ तो होती ह है । हर रात ऐसे दशक के
सामने ा जर बजाना वाकई द ु कर काम था जो एक के बाद एक गुदगुदा दे ने वाली इं गिलश
कॉमेड के आगे बे खी से स नाटा ओढ़े बैठे रह। टे ज पर हमारा आना-जाना शरणािथय क

तरह होता था। ये बेइ ज़ती हम लोग ने छह ह ते तक झेली। दसरे
ू कलाकार हम लोग से यूं
अलग-थलग रहते थे जैसे हम लेग हआ
ु हो। इस तरह से पटकनी खाने और ज़लील होने के
बाद जब हम जाने के िलए टे ज के पास खड़े हए
ु तो लगा मानो लाइन म खड़ा करके हम
गोली मार जानी है ।

हालां क म अपने आपको अकेला और ठु कराया हआ
ु महसूस करता था, फर भी इस

बात के िलए शु गुजार था क म अकेला रह रहा हँू । कम से कम दसर
के साथ अपनी

बेइ ज़ती शेयर तो नह ं करनी पड़ती थी। दन म म लंबी अंतह न वीिथय पर चहलकदमी
कया करता था। कभी िच ड़या घर, तो कभी पाक, मछलीघर और कभी सं हालय जाकर मन
बहला लेता था। अपनी नाकामी के बाद यू याक अब एकदम अपराजेय लगता था। इमारत
इतनी ऊँची जहाँ पहँु चा न जा सके और उनका ित पध प रवेश इतना दबाने वाला क

जसके आगे आप खड़े नह ं हो सकते। इसक शानदार ऊँची इमारत और फैशनबेल दकान

बेरहमी से मुझे मेरे अधूरेपन का अहसास कराती थीं। फ थ एवे यू के परे आलीशान मकान
सफलता के मारक थे, घर नह ं।
म पैदल चल कर शहर भर क धूल फांकता रहता और शहर से होते हए
ु झोपड़ प ट

वाले इलाक क ओर चला जाता। मे डसन

वायर के पाक से होकर, जहाँ लावा रस बूढ़े

135

अपने पैर क तरफ भाव शू यता से घूरते हए
ु हताशा म बच पर बैठे रहते थे। इसके बाद म
सेक ड और थड एवे यू क ओर चला। गर बी यहां बेरहम, तीखी और मारक थी। जहाँ-तहाँ

पसर हई
ु , एक गुराती, अ ठहास करती और िच लाती हई
ु गर बी; दरवाज पर, िचमिनय पर
फैलती हई
ु और रा त पर वमन करती हई
ु गर बी। मेरा दल बैठने लगा और मेरा मन ज द
से ज द ॉडवे लौटने का करने लगा।

अमे रक आदमी आशावाद होता है । अथक चे ा करने वाला और सैकड़ सपन म
डू बा रहने वाला। वह ज द से ज द बाजी मार लेना चाहता है । वह जैक पॉट हट करो! िनकल
चलो! बेच डालो!। कमाओ और भागो! कोई दसरा
धंधा कर लो! म व ास करता है । ले कन

हद से गुज़र जाने के इसी अंदाज़ ने मेर ह मत बँधानी शु कर द । दसर
ओर से दे खा जाये

तो अपनी नाकािमय के चलते म काफ ह का महसूस करने लगा। ऐसा लगने लगा मानो

अब कोई कावट नह ं है । अमे रका म और भी कई संभावनाएं थीं। म िथएटर क दिनया
से

यूँ िचपका रहँू ? म कला को सम पत तो था नह ं। कोई दसरा
धंधा कर लेता। मुझम आ म

व ास लौटने लगा। जो हो गया सो हो गया, मने अमे रका म टकने क ठान ली थी।
असफलता से यान हटाने के िलए मने सोचा, कुछ पढँू और अपना शै

उठाऊं। मने पुरानी कताब क दकान
के च कर लगाने शु

क तर

कए। कई पा य पु तक खर द

डालीं - केलॉ स रे ट रक, एक अं ेजी याकरण और एक लै टन अं ेजी ड शनर - और उ ह
पढ़ने क ठानी। ले कन मेरा संक प धरा का धरा रह गया। कताब को दे खते ह मने उ ह
अपने संदक
बार आने पर ह
ू म एकदम नीचे रख दया और भूल गया - और टे स म दसर

उनक ओर दे खा।

यू याक म पहले ह ते के काय म म एक नाटक था, गस एडवा स कूल डे ज।
ब च को लेकर बनाया गया। इस म डली म एक आकषक च र था जो दखने म छोटा था,
पर चाल-ढाल और तौर-तर क से पहँु ची हई
ु चीज लगता था। उसे िसगरे ट के कूपन से जूए क
लत थी जसके बदले म युनाइटे ड िसगार टोर से िनकल लेटेड कॉफ के बरतन से लेकर
शानदार पयानो तक िमलने का चांस रहता था। उनके िलए वह कसी के भी साथ पाँसा
फकने को तैयार था। वा टर वंचेल नामक यह य
था। उ

असाधारण तेज़ी से बात कर सकता

हो जाने पर भी उसका धुँआधार बोलना जार रहा, पर कई बार मुँह से कुछ का कुछ

िनकल जाया करता था।
हालां क हमारा शो चला नह ं। य

गत प से म लोग का यान खींचने म सफल

रहा। वेरायट के िसम िस वर मैन ने मेरे बारे म कहा,"म डली म कम से कम एक मज़ेदार
अं ेज़ था, और वो अमे रका म चलेगा।"

136

अब तक हम लोग बो रया- ब तर समेट कर छ: ह त के बाद इं गलै ड लौटने का
मन बना चुके थे। पर तीसरे स ाह हमने अपना नाटक फ थ एवे यू िथएटर म खेला। यहां
यादातर दशक अं ेज नौकर और खानसामे थे। सोमवार, पहली रात को हम धमाके से चले।
हर चुटकुले पर वे हँ से। हम सभी च कत थे, म भी, य क मने भी हमेशा जैसी बे खी क
उ मीद क थी। मुझे लगता है , कामचलाऊ दशन से मेरे ऊपर दबाव नह ं था और मने कोई
गलती नह ं क ।
उस स ाह एक एजट ने हम लोग से मुलाकात क और सािलवन ए ड कॉ सडाइन
स कट म बीस ह त के दौरे के िलए बुक कर िलया। ये चलताऊ रं गारं ग व वध शो काय म
था, और हम दन म तीन शो करने थे।
सािलवन कॉ सडाइन के उस पहले दौरे म कोई जबद त धमाका तो हम लोग ने

नह ं कया ले कन और के मुकाबले बीस ह रहे । उन दन िम डल वे ट लुभावना था। उतनी
भाग-दौड़ नह ं थी और माहौल रोमां टक था। हरे क ग टोर और सैलून म घुसते ह चौसर क
टे बल होती थी जहां हर उस चीज के िलए पाँसा फका जा सकता था जो वहाँ बक रह हो।
र ववार क सुबह मेन

ट खड़खड़ाते डाइस क यार और दो ताना आवाज़ से भर होती

थी। कई बार म भी दस सट म एक डालर क चीज़ जीत जाता।
जीवन यापन स ता था। एक ह ते म सात डॉलर पर कसी छोटे होटल म एक कमरा
और दन म तीन बार भोजन िमल जाता था। खाना बहत
ु ह स ता था। सैलून का

लंच

काउं टर हमार मंडली के िलए बहत
ु बड़ा संबल था। एक िनकल (पाँच से ट) म एक िगलास

बीयर और खाने क सबसे वा द और खास चीज़ िमल जाया करती थीं। सूअर क रान होती
थीं, लाइ ड है म, आलू सलाद, सा डन मछिलयां , मैकरॉनी चीज़, लीवर वु ट, कुलचा और
हॉट डॉग! हमारे कुछ सद य इसका फायदा उठाते और अपनी लेट पर तब तक ढे र लगाते
जाते जब तक बार मैन टोक न दे ,"ओए, उतना लाद कर कहाँ चल दए - या लोनडाइक क
तरफ?"
हमारे दल म प

ह या कुछ अिधक लोग थे। े न क बथ के पैसे दे ने के बाद भी हर

मे बर कम से कम अपना आधा मेहनताना बचा लेता था। मेर तन वाह थी एक ह ते म
पचह र डॉलर और इसम से पचास तो शान से बक ऑफ मैनहटन म िनयिमत प से पहँु च
जाते।

साथ प

दौरे के िसलिसले म हम लोग को ट पहँु च।े रं गारं ग काय म क उसी ट म म हमारे
म क तरफ चलने वाल म टे सास का एक सुंदर युवक था जो कसरती झूले पर

करतब दखाता था। वह ये तय नह ं कर पा रहा था क और आगे भी अपने पाटनर के साथ ह
बना रहे या ईनामी दं गल लड़ा करे । रोज सुबह म बॉ संग के द ताने पहन कर उसके साथ

137

उतरता। वह बेशक मुझसे लंबा और भार था, फर भी म उसे जब जैसे चाहता, हट कर
सकता था। हम बहत
ु अ छे दो त बन गए और बॉ संग क एक पार के बाद हम साथ लंच
लेते। वो कहा करता था क उसके आदमी टे सॉस के सीधे सादे कसान ह। वह फाम क

ज़ंदगी के बारे म घ ट बितयाता। ज द ह हम लोग िथएटर का धंधा छोड़ने और साझेदार
म सूअर पालने के बारे म बात करने लगे।
हम दोन के पास कुल िमलाकर दो हजार डॉलर थे और था, ढे र सारा पैसा कमाने का
एक सपना। हमने योजना बनायी। अरकसॉ स म पचास से ट ित एकड़ के हसाब से दो
हज़ार एकड़ जमीन शु म ली जाए और बाक पैसा सूअर खर दने म लगाया जाए। हमने
जोड़-जाड़ कर दे खा क अगर सब कुछ ठ क-ठाक चला तो सूअर के बढ़ते च वृ

ढं ग से

पैदा होने और औसतन हर साल पाँच के हसाब से ब चे जनने के हसाब से पाँच वष म हम
एक लाख डॉलर बना सकते ह।

रे लगाड़ म सफ़र करते हए
ु हम खड़क से बाहर दे खते और सूअर बाड़ को दे खकर

जोश से भर उठते। हमारे खाने , सोने और यहाँ तक क सपने म भी सूअर ह सूअर। सूअर
पालने के वै ािनक तौर तर क पर मने एक कताब न खर द ली होती तो शो बजनेस

छोडकर सूअर पालक बन गया होता। ले कन उस कताब ने, जसम सूअर को बिधया करने
के सिच तर के दए गए थे, मेरा जोश ठ डा कर दया और ज द ह म इस धंधे को भूल
गया।
इस दौरे पर अपने साथ म वायिलन और सेलो लेकर चला था। सोलह बरस क उ

से

ह अपने बेड म म म हर दन चार से छह घ टे इ ह बजाने का अ यास कया करता था। हर
ह ते म िथएटर संचालक से या जसे वो कहता उससे वायिलन के सबक लेता था। म बाएँ
हाथ से बजाता था इसिलए वायिलन भी बाएँ हाथ के हसाब से बँधा था, जसम बास-बार और
साउं डं ग पो ट उलट दए गए थे। मेर बड़ इ छा थी क संगीत समारोह का कलाकार बनूंगा
या ये नह ं कर पाया तो रं गारं ग काय म म बजाऊँगा। ले कन जैसे-जैसे समय बीतता गया,
मेर समझ म आ गया क इसम कभी मा हर नह ं हो पाऊँगा, सो मने इसे छोड़ दया।
1910 का िशकागो अपनी कु पता, भयावहता और कािलमा म एक आकषण िलए
हए
ु था। एक ऐसा शहर जसम अभी भी शु आती दन के िमजाज थे। काल सडिलंग के श द
म धूंए और इ पात का एक फलता-फूलता साहसी महानगर। मुझे इसके चार ओर फैले
समतल मैदान स के घास के मैदान जैसे लगते ह। कुछ नया करने का इसम च ड
उ लास था जो तन-मन को अनु ा णत करता था। ले कन इसके भीतर एक पौ षी एकाक पन
धड़कता था। इस ज मानी बीमार के काट के प म मौजूद था एक रा ीय मनोरं जन जसे
बल क शो ( हसन/पैरोड ) कहा जाता था। इसम बेहरतीन कॉमे डयन का एक गुट होता था
और साथ म बीस या कुछ अिधक कोरस लड़ कयां होती थीं। कुछ सुंदर, कुछ िघसी- पट ।

138

कामे डयन मज़ेदार थे। यादातर शो अ ील होते थे, जनानखाने क कॉमेड घ टया और
बुराइय से भर हई।
ु पूरा माहौल ह मैन का था।

ु काम ित ं ता से भरा हआ
ु जो दे खने

वाल को उ टे कसी भी कार क सामा य कामे छा से अलग कर दे ता था। झूठ-मूठ क
भावुकता दखाना ह उनक

ित

या होती। ऐसे शो िशकागो म भरे पड़े थे। वा स स बीफ

ट नामक ऐसे ह एक शो म अधेड़ उ

क भार -भरकम औरत चु त कपड़ म दशन

करती थीं। इस बात का चार कया जाता था क उन सभी का वजन टन म है । िथएटर के
बाहर शमाये , सकुचाए पोज़ म उनक त वीर बड़ दु:खद और िनराशाजनक होती थीं।
िशकागो म हम वाबाश एवे यू म एक छोटे होटल म रहते थे। जीण-शीण और मनहस

होने के बावजूद इसम एक रोमानी आकषण था य क बल क क अिधकांश लड़ कयां वहाँ

रहती थीं। हर शहर म हम उस होटल के बाहर मधुम खय क तरह लाइन लगा दे ते जहाँ शो
वाली लड़ कयाँ ठहरती थीं। पर जस च कर म जाया करते थे उसम कामयाब नह ं हए।

ऊँचाई पर चलने वाली े न रात को तेज़ी से िनकलतीं और रह-रह कर पुराने बाइ कोप क
तरह मेरे सोने के कमरे क द वाल को झलिमला जातीं। फर भी, मुझे इस होटल से यार था,
हालां क कभी कुछ रोमानी घ टत हआ
ु नह ं।

एक जवान लड़क , शांत और सुंदर, कसी कारण से हमेशा अकेली रहती थी, उसे

चलते दे खकर लगता, जैसे अपने ित बेहद सचेत है । होटल क लॉबी म आते-जाते उसके
पास से होकर कई बार गुज़रा पर इतनी ह मत कभी जुटा नह ं पाया क प रचय पाऊं। वैसे ये
तो कहना ह पड़े गा क अपनी तरफ से उसने कभी प ा नह ं फका।
िशकागो से को ट हम जस े न म जा रहे थे, वो लड़क भी उसी म थी। वे ट जाने
वाली बल क कंपिनयां आम तौर पर हमारे ह रा ते होकर जातीं। और उनका काय म भी
एक ह शहर म पड़ता। गाड़ म मने उसे अपनी कंपनी के एक सद य से बात करते दे खा।
बाद म वह मेरे पास आकर बैठा।
मने पूछा, "कैसी लड़क है वो?"
"बड़ ह यार । बेचार , अफसोस होता है उसके िलए!"
" य ?"
वह झुककर और पास आ गया,"याद है , हवा उड़ थी क शो क कसी लड़क को
िसफिलस है ? बस, यह है ।"
सीटल म उसे कंपनी छोड़ने दया गया। वह अ पताल म भत हई।
ु हमने उसके िलए

पैसे इक ठा कए जसम सार घुमंतू कंपिनय ने योगदान दया। बेचार के बारे म सबको

पता था। अलब ा, वो सबक शु गुजार थी और बाद म सैलवरसम क सुई, जो उस समय
अभी नयी दवा थी, लेकर ठ क हई।
ु और फर से अपनी कंपनी म वापस आ गयी।

139

उन दन पूरे अमे रका म वे यावृ

बेरोक-टोक फैल रह थी। िशकागो का वशेष नाम

हाउस ऑफ ऑल नेश स के चलते था जसे दो अधेड़ उ
थीं। इसक

क म हलाएं, ईवरली बहन चलाती

याित इस बात म थी क यहाँ हर दे श क औरत उपल ध थीं। कमर के फन चर

भी हर टाइल के थे : तुक , जापानी, लूइ XVI, यहाँ तक क अरबी तंबू भी। ये दिनया
का

सबसे खच ला रं ड बाज़ार था। बड़े -बड़े लखपित, उ ोगपित, कै बनेट मं ी, सीनेटर और जज,
सभी इसके ाहक थे। आम तौर पर कसी एक प रपाट के लोग पूरे रं ड बाज़ार को ह एक
शाम के िलए अपने क जे म लेने का ठे का कर लेते करते थे। बताते ह क एक बहत
ु बड़े

ऐ याश ने वहाँ ऐसा डे रा जमाया क तीन ह ते तक उसने दन का उजाला भी नह ं दे खा।
जतना ह हम प

म क तरफ बढ़ते गए, उतना ह मुझे यह पसंद आता गया। े न

के बाहर जंगली ज़मीन के वशाल फैलाव को दे खकर मेरे मन म आशा का संचार होता, भले

ह जगह सुनसान और मटमैली हो। खुली जगह ह के िलए अ छ होती है । दय को वशाल
बनाती है । मेरे दे खने का नज़ रया बड़ा होता था।
वीवलड सट लुइ, िम नपोिलस, सट पॉल, कानसास िसट , डे नवर, बट, बिलं स,
जैसे शहर म आने वाले कल क हलचल थी जो मेर नस-नस को तड़का रह थी।
दसर
रं गारं ग काय म वाली कंपिनय से कई सद य हमारे दो त बने। हर शहर म

रे ड लाइट इलाक म हम म से छ: या उस से अिधक लोग इक ठे हो जाते। कभी-कभी कसी

वे यालय क मैडम को हम लोग पटाने म कामयाब हो जाते। वो उस रात के िलए "अ डा" बंद
कर दे ती और फर हमारा राज होता। यदा-कदा लड़ कयां अिभनेताओं पर फ़दा हो जातीं और
अगले शहर तक उनका पीछा करतीं।
ब ट, मो टाना के रे ड-लाइट इलाके ल बी सड़क और उनसे लगे अगल-बगल के छोटे
रा त वाले हआ
ु करते थे जसम सैकड़ झोप ड़यां थीं, और खाट लगी होती थीं। इनम जो
लड़ कयां िमलती थीं उनक उ

सोलह साल से शु होती थी - एक डॉलर म उपल ध। ब ट

को कसी भी रे ड लाइट इलाके के मुकाबले अपने यहाँ यादा सुंदर लड़ कयां होने का नाज़ था
और ये सच था भी। जहाँ कोई सुंदर-सी लड़क आकषक कपड़ म दखी, दे खने वाला समझ
जाता था क रे ड लाइट वाली है , अपनी शॉ पंग कर रह है । धंधे का टाइम न हो तो वो दाएं-बाएं
नह ं झाँकती थी और इ ज़तदार हो जाती थीं। कई बरस बाद म सॉमर सेट मॉम से उनके सेड
थामसन के च र को लेकर उलझ पड़ा था। जहाँ तक मुझे याद है , जीन ईग स ने उसे

ंग

साइड बूट वगैरह पहना कर पूरा ऊट-पटांग सा प दे दया था। मने उ ह बताया, जनाब ऐसे
कपड़े ब ट मो टाना म कोई भी धंधे वाली पहन ले तो एक अधेला नह ं कमा पाएगी।
1910 म ब ट, मो टाना अभी भी "िनक काटर" वाला शहर था। ल बे-ल बे बूट और
दस गैलन वाली टो पयां और लाल गुलूबंद लगाए खान मजदरू का शहर। बंदक
ू का खेल मने

140

अपनी आँख से सड़क पे दे खा, जसम एक बूढ़ा शै रफ भगोड़े कैद के पैर पर िनशाना लगा
रहा था। तकद र से वो बाद म एक बंद गली म फंस गया, और कुछ हआ
ु नह ं।
हम जैसे जैसे प

म क तरफ बढ़ते जाते, मेरा दल उतना ह खुश होता जाता। शहर

यादा साफ़ थे। रा ते म विनपेग, टे कोमा, सीटल, वकूवर और पोटलड पड़ते थे। विनपेग
और वकूवर म यादातर दशक अं ेज थे और अपने अमे रक झुकाव के बावजूद उनके सामने
अिभनय करने म आनंद आया।
और अंत म केिलफोिनया! खली धूप, संतरे और अंगूर के बाग, और शांत महासागर
के तट पर हज़ार मील तक फैले ताड़ के वृ

का वग! पूव का वेश ार सैन

ांिस को

अ छे यंजन और स ते दाम का शहर, जसने मुझे पहली बार मढ़क क टांग का जायका
दया। खािलस वह ं क चीज,

ॉबेर शॉट केक और एवोकेडो नाशपाती।

हम 1910 म पहँु चे जब शहर 1906 वाले भूकंप से, या उनके श द म कह तो आग से,

उबर चुका था। पहाड़ रा त म अभी एक या दो दरार थीं ले कन नु सान का कोई अवशेष
नह ं। हर चीज़ नयी और चमचमाती हई
ु थी। मेरा छोटा होटल भी।
हमारा काय म ए

ेस म था। इसके मािलक थे िसड ाउमैन और उनके पता, बड़े

ह िमलनसार और सामा जक लोग। पहली बार पो टर पर म अकेला था और कान का नाम
तक नह ं था। दशक - या खूब! "वाऊ वाऊज़" नीरस था कर भी हर शो खचाखच भरा और
ठहाक से गूँजता हआ
ु होता। ाउमैन ने उ सा हत होकर कहा,"कान साहब का काम जब भी
िनपट जाय, मेरे पास आना, हम लोग िमलकर शो करगे।" मेरे िलए यह उ साह जनक बात
थी। सैन

ांिस को म उ मीद और मेहनत के ज़ बे को महसूस कया जा सकता था।

दसर
ओर लॉस एंजे स, बदसूरत शहर था। गम और क दायक। लोग म रयल और

कांितह न लगते थे। जलवायु यादा गम थी पर सैन

ांिस को वाली ताज़गी नह ं थी; कृित

ने उ र कैिलफोिनया को वो संपदाएं द ह जो व सायर बोले वयर वाले ागैितहािसक
कोलतार के ग ढ म हॉलीवुड के गायब हो जाने के बाद भी फलती-फूलती रहगी।
मने अपना पहला दौरा मोरमो स के गृह नगर सा ट लेक िसट म समा

कया। म

मोज़ेज और इज़राएल के ब च के बारे म सोचने लगा। शहर काफ़ फैला और खुला हआ
ु है जो
सूरज क गम म मर िचका क तरह थराता सा दखता है । सड़क क चौड़ाई का अंदाज वह

लगा सकता है जसने वशाल मैदान को पार कया हो। मोरमो स क ह तरह शहर अकेला
और कठोर है । दे खने वाले भी वैसे ह थे।
सिलवान एंड कॉ सीडाइन स कट म "वाउ वाउ'ज" के दशन के बाद हम यू याक
वापस आ गए जहाँ से सीधे इं गलड लौटने का इरादा था, ले कन िम टर विलयम मॉ रस, जो
दसरे
ू रं गारं ग

ट से लड़ रहे थे, ने हम लोग के पूरे दल को यू याक शहर म फोट थड

141

पर

थत अपने िथएटर म छह ह ते के काय म के िलए बुक कया। हमने ए नाइट इन एन

इं लश यू ज़क हॉल से शु आत क । इसम भार सफलता िमली।
स ाह के दौरान एक युवक और उसके दो त लड़ कय से मुलाकात होने तक का
समय काटने के िलए इधर उधर डोलते हए
ु विलयम मॉ रस के अमे रकन यू जक हॉल म

घुस गए। यहाँ, उन लोग ने हमारा शो दे खा। उनम से एक ने कहा, "म कभी बड़ा बना तो एक
आदमी है जसे अपने िलए लूँगा।" वो "ए नाइट इन एन इं लश यूिलक हॉल" क बात कर
रहा था। उस समय वह जी ड लू
फ म के ए

ऱ फथ के िलए ित दन पाँच डॉलर पर बायो ाफ कंपनी म

ा के प म काय कर रहा था। वह य

था, मैक सेनेट जसने बाद म

क टोन कंपनी बनायी।
यू याक म विलयम मॉ रस के िलए छ: स ाह का सफल काय म करने के बाद एक

बार फर सिलवान एंड कंिसडाइन स कट के िलए बीस ह त के दौरे के िलए हमार बु कंग हो
गयी।

थे: सैन

दसरा
दौरा समाि के कर ब आने लगा तो म उदास हो उठा। तीन ह स ाह रह गए

ांिस को, सैन डएगो, सॉ ट लेक िसट और उसके बाद वा पस इं गलड।

सैन

ांिस को से रवाना होने के एक दन पहले माकट

ट पर टहलते हए
ु मने एक

छोट सी दकान
दे खी जसम पद वाली खड़ कयां थीं। िलखा था, "हाथ और प े दे ख कर

आपक तकद र बतायी जाती है - एक डालर।" म अंदर गया, जरा झपता हआ।
मेरा सामना

भीतर के कमरे से िनकलती हई
वह
ु लगभग बयािलस साल क एक सुंदर औरत से हआ।

भोजन के बीच म ह उठ कर आ गई थी। खाना चबाते हए
ु उसने लापरवाह से एक छोट टे बल
क ओर इशारा कया जसम द वार क ओर पीठ और दरवाजे क ओर मुख पड़ता था। मेर
ओर दे खे बना उसने कहा,"बैठ जाइये," और दसर
तरफ खुद बैठ । उसके तौर तर के बड़े

बेढंगे थे। "प

को इधर उधर करो, और तीन बार मेर तरफ काटो और टे बल पर अपनी खुली

हथेली रखो।" उसने प े उलटे , सामने फैलाया और उनका अ ययन कया। फर मेरे हाथ
दे खे। "लंबी या ा के बारे म सोच रहे हो, यानी टे स छोड़ दोगे। पर ज द ह वापस लौटोगे
और एक नया धंधा शु करोगे - जो अभी कर रहे हो उससे कुछ अलग।" इसके बाद वह कुछ
हच कचाई और

म म पड़ गयी, "लगभग वैसा ह , ले कन अंतर है । इस नए कारोबार म मुझे

भार सफलता दखाई दे रह है । तु हारे सामने जबद त कै रयर पड़ा हआ
ु है । पर मुझे नह ं

पता या है ?" पहली बार उसने नज़र ऊपर क ं। फर मेरा हाथ िलया, "अरे , हाँ, तीन शा दयाँ
ह: पहली दोन नह ं चलगी, ले कन अंत म तीन ब च के साथ सुखी ववा हत जीवन बताते
हए
ु आपक ज़ंदगी कटे गी।" (यहाँ वो गलत थी!)। इसके बाद फर से उसने मेरा हाथ
दे खा,"हाँ, पैसा बहत
यादा कमाओगे; कमाने वाला हाथ है ।" फर उसने मेरा चेहरा

142

दे खा," ास नली के यूमोिनया से मरोगे , बयासी साल क उ

म। एक डॉलर, लीज़। और

कुछ पूछना चाहोगे?"
"नह ं," मै हँ सा, "मुझे लगता है , म अकेला अ छा खासा जाऊँगा।"
सा ट लेक िसट म समाचार प अपहरण और बक डकैितय से भरे रहते थे। नाइट
लब और कैफे के ाहक को कतार म द वार क तरक मुँह कए हए
ु खड़ा करवा कर

नकाबपोश लुटेरे लूट लेते थे। एक ह रात म डकैती क तीन घटनाएं हो गयी थीं और पूरे शहर
म आतंक फैल गया था।
शो के बाद हम पीने के िलए पास के कसी सैलून म चले जाते थे, और यदा-कदा
ाहक से प रचय हो जाया करता था। एक शाम एक मोटा, खुश-िमजाज़, गोल चेहरे वाला
आदमी दो और लोग के साथ आया। उनम से उ

म सबसे बड़ा, वो मोटा आदमी आगे आया,

"उस अं ेज़ी नाटक म तु ह ं लोग सा ा ी क भूिमका कर रहे हो?"

हम लोग ने मु करा कर िसर हलाया,"तभी तो कहँू मने तुम लोग को पहचान िलया!

अरे ! आओ आओ!" उसने अपने साथ आए उन लोग को बुलाया और उनसे प रचय करा कर
हम

ं क ऑकर कये।
मोटा अं ेज़ था - वैसे वो उ चारण अब नाम मा को रह गया था - लगभग पचास

का, अ छे वभाव का, छोट चमकती आँख और लाल सुख चेहरे वाला आदमी।
रात जैस-े जैसे बीतती गयी, उसके दोन दो त और मेरे साथ के लोग बार क ओर चले
गए। म "मोटू " के साथ अकेला रह गया। उसके दो त उसे यह कहकर पुकारते थे।
वह हमराज़ हो गया। "उस पुराने दे श म तीन साल पहले म गया था।" उसने
कहा,"ले कन ये वैसा नह ं है - यह तो जगह है । यहाँ तीस साल पहले आया। कुछ नह ं था।
बस, एक अनाड़ मो टाना कॉपर म साल मेहनत करते-करते चूतड़ िघस जाती थी। फर
दमाग लगाया। म कहता हंू यह तो खेल है , अब अपने पास मु ट डे ह। काम करने को।

उसने नोट क मोट ग ड बाहर िनकाली।"
"चलो एक और

ऱं क लेते ह," "बच के!" मने मज़ाक म कहा, "पकड़े जा सकते हो!"

उसने मुझे बड़ शैतानी, और जानकार मु कुराहट से दे खा फर आँख मार कर कहा,
"ये नह ं ब चू!"
जस ढं ग से उसने आँख मार , म अंदर तक सहम गया। इसका मतलब बहत
ु बड़ा था।

वैसे ह मु कराते हए
ु और मुझ पर अपनी नज़र उसी तरह टकाए वह बोलता गया,"समझ रहे
हो?" उसने कहा। मने समझदार से िसर हलाया।

इसके बाद गूढ़ भाव से अपना चेहरा मेरे कान के पास लाकर उसने बात शु क ,"उन
दो प ठ को दे ख रहे हो?" वह अपने िम

के बारे म फुसफुसाया,"वह अपना ल कर है , दो

उ लू के प ठे , दमाग़ जरा भी नह ं, ले कन जगर फौलाद का।"

143

मने सावधानी से अपने होठ पर उं गली रखी क लोग सुन लगे , वो आ ह ता बोले।
"ठ क है , भाईजान, हम लोग आज रात जहाज से िनकल रहे ह।" उसने आगे कहा, "सुनो, हम
तो पुराने जहाजी ठहरे , है न? तु ह कई बार इिलंगटन ए पायर म दे खा है जाते आते।" मुँह
बनाकर उसने कहा,"मु कल काम है मेरे भाई।"
म हँ स पड़ा।
और गहरा राज़दार बनने के बाद उसने मुझसे ताउ

दो ती करनी चाह और मेरा यू

याक का पता माँगा।
"बीते दन क खाितर कभी दो-एक लाइन तु ह िलखूग
ं ा।"
शु

है फर उसने कभी संपक नह ं कया।

144

नौ

अमे रका छोड़ते समय मुझे कोई खास अफसोस नह ं हो रहा था, य क मने लौटने
का मन बना िलया था। कैसे और कब, म नह ं जानता था। इसके बावजूद, मेरा मन अभी से
लंदन और अपने छोटे -से सुकून भरे घर म लौटने क राह दे खने लगा था। जब से म अमे रका
के टू र पर था, ये लैट मेरे िलए मं दर जैसा हो गया था।
िसडनी का समाचार बहत
ु दन से नह ं िमला था। अपने आ खर खत म उसने िलखा

था क नानाजी लैट म रह रहे थे। ले कन मेरे लंदन पहँु चने पर, िसडनी मुझे टे शन पर
िमला और बताया क उसने शाद कर ली है , लैट छोड़ दया है और

सटन रोड पर सजे

सजाए घर म रह रहा है । ये सोच कर मुझे बड़ा झटका लगा क खुिशय से भरा वह छोटा-सा
वग अब नह ं रहा जसने मुझे जीवन जीने को एक अथ दया था, और घर पर नाज करना
िसखाया था --------। अब म बेघर था।

सटन रोड पर मने पीछे क ओर एक कमरा िलया।

जगह इतनी मनहस
ू थी क मने जतनी ज द हो सके, अमे रका लौटने फैसला कर िलया।
कसी खाली लॉट मशीन म िस का डालने पर जैसे कुछ नह ं होता उस रात लंदन मेर

वापसी पर वैसा ह बेपरवाह लगा।
िसडनी ने चूं क शाद कर ली थी और हर शाम काम पर रहता, म उससे कम ह िमल
पाता था; परं तु र ववार को हम मां से िमलने गए। ये बहत
ु ह हताश करने वाला दन था

यो क मां अभी भी ठ क नह ं हई
ु थी। वह अभी-अभी भजन क तन के शोरगुल वाले दौर से

होकर गुज़र थी और उसे ग े दार द वार वाले कमरे म रखा गया था। नस हम पहले ह ताक द
कर चुक थी। िसडनी ने उसे दे खा, ले कन म उससे िमलने क ह मत न कर सका, इसिलए
इं तज़ार करता रहा। िसडनी वा पस आया तो परे शान लग रहा था। उसने बताया क इलाज के
तौर पर मां को बफ़ ले, ठं डे पानी क धार से शॉक दया गया था और उसका चेहरा ब कुल
नीला पड़ गया था। इस पर हम लोग ने उसे एक ाइवेट सं थान म रखने का फैसला कया खच अब हम उठा सकते थे - सो, हम उसे उस जगह पर ले आए पागल खाने म जहां इं गलै ड
के महान कॉमे डयन वग य डान लीओ भत कये गये थे।

हर दन म अपने आपको पहले से कह ं यादा बेगाना और जड़ से कटा हआ
ु महसूस

करता था। मेर समझ से अगर म अपने छोटे से लैट म लौटा होता, तो मेर भावनाएं दसर

होतीं। तब वाभा वक प से उदासी मुझ पर पूर तरह से हावी न हो पाती। अमे रका से आने
के बाद पुराना प रचय, र ित- रवाज और इं गलै ड से मेरा र ता सभी मेरे भीतर उथल-पुथल
मचा रहे थे। इं गलै ड क गम का मौसम अपने सबसे अ छे

प म था जसके जोड़ क

मानी और सुहावनी चीज़ मेर नज़र म कोई दसर
नह ं थी।

145

बॉस कान ने मुझे टै स आइलै ड के अपने हाउस बोट पर स ाहांत के िलए बुलाया।
काफ ल बा चौड़ा इं तज़ाम था। सबकुछ बेहद सु यव थत। महोगनी के पैनल वाले कमरे
और मेहमान के िलए िनजी राजसी ठाठ बाठ वाले कमरे। रात म बोट के चार ओर रं गीन
ब य के मनमोहक बंदनवार जगमगा उठे । गम और सुंदर शाम थी और डनर के बाद अपनी
कॉफ और िसगरेट लेकर ऊपर वाले डे क म जगमगाती रं गीन रोशिनय के नीचे जाकर बैठे
गए। यह वो इं गलै ड था जो मुझे कसी भी दे श से वापस खींच सकता था।
अचानक कह ं से एक बनावट आवाज ने पागल क तरह चीखना शु कर दया; "अरे
दे खो, या यार बोट है मेर , दे खो! मेर म त नाव को! और या रोशनी! हा! हा! हा!" आवाज़
मज़ाक उड़ाने वाली हँ सी म बदल रह थी। हम लोग ने यह दे खने के िलए नज़र दौड़ायी क
कहां से यह धारा फूट कर आ रह है । हमने खेनेवाली नाव म सफेद लेनल के कपड़े पहने एक
आदमी को दे खा जसके पीछे क सीट पर एक औरत लेट हई
ु थी। पूरा

य "पंच" प का के

कसी काटू न िच क तरह था। कोन रे िलंग पर झुके और ज़ोर से आवाज़ लगायी ले कन

उसने अपनी पागल जैसी हँ सी नह ं रोक ।
"अब एक ह चीज़ क जा सकती है ," मने कहा: "हम भी वैसे अ ील बन जाएं जैसा वो
हम सोचता है ।" फर तो मने चुन-चुन कर ऐसी गािलयां सुनायी जो उसके साथ क औरत के
झपने के िलए काफ थी। वो झटपट खसक िलया।
ये मूख िच ला-िच लाकर िच क आलोचना नह ं कर रहा था, ये तो अहं कार भरा
पूवा ह था उस चीज के खलाफ जसे वह िन न वग य ठाठ बाठ समझ रहा था। ब कंघम
पैलेस के सामने वह कभी अ टहास करते हए
ु नह ं िच लाएगा क दे खो म कतने बड़े घर म
रहता हंू , या रा यािभषेक वाले रथ पर नह ं हँ सेगा। हमेशा इस तरह होनेवाले वग करण का

इं गलै ड म मुझे तीखा अनुभव िमला। ऐसा लगता है जैसे इस तरह के अं ेज सामा जक तौर
पर दसर
क किमयां बड़ ज द ह मापने तौलने लगते ह।

हमार अमे रक मंडली काम म लग गयी थी और लंदन के हॉल म हम लोग ने

चौदह स ाह तक दशन कया। शो ठ क चले, दशक भी अ छे थे ले कन हमेशा म यह
सोचता रहता क कह ं अमे रका वा पस जा पाऊँगा या नह ं। इं गलड से मुझे यार था, पर मेरे
िलए वहाँ रहना असंभव था; अपनी पृ भूिम के चलते हमेशा ये बात बेचैन कए रहती क यहाँ
रह कर म अपनी तु छता के दलदल म धंसता चला जा रहा हंू । इसिलए टे स के अगले टू र
के िलए हमारे बुक हो जाने का समाचार पाकर म बड़ा खुश हआ।

र ववार को िसडनी और म मां से िमलने गए। उसक सेहत पहले से बेहतर लगी और

िसडनी के दे श क तरफ जाने से पहले हम लोग ने साथ खाना खाया। लंदन म अपनी
आ खर रात अपनी भावनाओं से जूझता हआ
ु , उदासी और कड़वाहट िलए हए
ु म वे ट एंड म

146

चहलकदमी कर रहा था और अपने आप से कह रहा था, इन गिलय को आ खर बार दे ख रहा
हँू ।
इस बार हम ओलं पक पर सेकंड लास म यू यॉक होते हए
ु पहँु च।े इं जन क धड़कन

धीमी पड़ गयी। उसका मतलब था हम अपनी िनयित के कर ब पहँु च रहे ह। इस बार टे स
अप रिचत नह ं लगा। मुझे लगा म वदे िशय के बीच वदे शी हँू, बाक सबसे जुड़ा हआ।

यू यॉक को म जतना पसंद करता था, उतनी ह उ सुकता से म वे ट क

ती ा

कर रहा था जहाँ फर उन लोग से मुलाकात होगी ज ह अब म अ छा दो त समझता था :
मो टाना के ब ट के बार म काम करने वाला आय रश, िमनेपोिलस का दो ताना
मेहमाननवाज़ जमीन जायदाद वाला लखपती, सट पॉल क सुंदर लड़क जसके साथ मने
एक रोमां टक स ाह बताया था। सॉ ट लेक िसट का कॉ टश खदान मािलक, टकोमा का
िम वत ड ट ट और सेन

ांिस को का ॉमै स प रवार।

शांत के तट पर जाने से पहले हमने " मा स" के इद िगद काय म कये। िशकागो
और फलाडे फया के दरू थ उपनगर और फॉल रवर और यूलुथ जैसे औ ोिगक शहर के
छोटे ( माल) िथएटर म।

पहले क तरह म अकेले रह रहा था ले कन इसके लाभ थे, य क इससे मुझे
वा याय का मौका िमलता था। जसका संक प मने मह न के पहले कया था पर पूरा नह ं
कर पाया था।
कुछ ऐसे लोग होते ह जनम कुछ जानने समझने क

च ड इ छा होती है । म भी

उ ह ं म से एक था। पर मेरा उ े य इतना प व नह ं था। म जानना चाहता था ले कन मुझे
ान से ेम नह ं था, मेरे िलए यह जा हल के ित दिनया
क घृणा से बचने के िलए ढाल थी।

इसिलए जब मुझे समय िमलता था, म सेकड हड कताब क दकान
के च कर लगाता था।

फलाडे फया म यूँ ह एक बार मुझे राबट इं गरसो स क कताब एसेज़ एंड ले चस

का एक सं करण हाथ लग गया। बड़ उ साहजनक खोज थी यह; उसक ना तकता से मेरे
इस व ास को बल िमला क ओ ड टे टामट क भयानक ू रता मानवता के िलए शमनाक
बात थी। फर मुझे इ सन िमले। "से फ रलाए स" ("आ मिनभरता") पर उनका लेख पढ़

कर लगा जैसे मुझे वग य ज मिस अिधकार स प दया गया हो। फर आए शापेनहावर।
मने द व ड एज़ वल एंड आइ डया के तीन खंड खर दे जसे चालीस साल से जब तब पढ़ता
रहा हंू पर कभी भी शु से अंत तक नह ं। वा ट

हटमैन क ली स ऑफ ास से मुझे िचढ़

हई
ु और ये ि ढ़ आज तक बरकरार है । उसम यार भरा दय कुछ यादा ह उमड़ता है और
रा ीय रह यवाद क अित है । शो के बीच िमलने वाले समय म अपने े िसंग म म मने
वेन, पो, हाथटन, इ वग और है ज़िलट को भी पढ़ने का आनंद िलया। दसरे
ू दौरे म शा

ीय

147

िश ा उतनी भले ह न आ मसात कर पाया होऊं जतना म चाहता था, पर जस कारोबार म
म था उसके िनचले तर के उबाऊपन से मेरा प रचय हो गया था।
ये स ते रं गारं ग स क स बड़े ह मनहस
ू और िनराशाजनक थे और अमे रका म मेरे भ व य

क आशा स ाह के हर दन तीन और कभी तीन और कभी चार शो क च क म पसने लगी।
इसक तुलना म इं गलड का रं गारं ग जगत वग था। कम से कम वहाँ स ाह म छ: दन ह
काम करते थे और एक रात म दो ह शो होते थे। अमे रका म हम यह सोच कर संतोष कर
लेना पड़ता था क पैसा कुछ यादा बच रहा है ।
लगातार पाँच मह न तक "कड़ " मेहनत के साथ काम करने क थकान से मेर
ह मत जवाब दे रह थी। इसिलए फलाडे फया म एक ह ते के आराम का जब मौका िमला
तो मने इसे सहष वीकार कया। मुझे बदलाव चा हए था। दसरा
प रवेश चा हये था। अपनी

पहचान खोकर कोई और बन जाने के िलए मौका चा हये था। रोज़-रोज़ क इस घ टया दज
क रं गारं ग

तुित से उकता गया था और सोचा एक ह ते जम कर ऐ

क जाय। काफ पैसे

जमा हो चुके थे और खूँटे से एक बार जो छूटा, दल खोल कर खरचने लगा। और य नह ं?
मने इतना जमा करने के िलए फूंक -फूंक कर खच कया था और ये सोचा था क जब काम
नह ं होगा, उस समय भी संभाल कर खरचना है, तो फर अभी यूं नह ं जरा सा खच कर
िलया जाए?
मने एक मँहगा े िसंग गाउन खर दा और एक शानदार सूटकेस खर दा जसक
क मत पचह र डालर पड़ । दकानदार
तो खुशामद म बछ गया; "सर, क हए तो आपके घर

पर पहँु चा दया जाये?" उसके इन थोड़े से श द ने मेरा िसर ऊंचा कर दया, मुझे कुछ विश
बना दया। अब यूयाक जाऊंगा और इस घ टया रं गारं ग काय म का और इसके पूरे
अ त व का चोला अपने पर से उतार फेकूँगा।
मने होटल ए टॉर म एक कमरा िलया। ये होटल उन दन बड़ा आलीशान माना जाता
था। मने अपना नया कोट और डब टोप पहना, छड़ ली और हाँ, साथ म अपना छोटा सूटकेस
भी ले िलया। लॉबी क तड़क-भड़क और वहाँ आते-जाते लोग का व ास दे ख कर म कुछ
डगमगाया। घबड़ाहट म ह डे क पर जाकर नाम दज कराया।
कमरे का कराया 4.50 डालर ित दन। डरते हए
ु मरे पूछा क कराया एडवांस म दे

दं ।ू लक ने बड़ ह वन ता और दलासा भरे अंदाज म कहा, "अरे नह ं, सर, ऐसी कोई
ज़ रत नह ं है ।"

लॉबी क चमक-दमक और शानो-शौकत के बीच चलते हए
ु मेर भावनाओं को कुछ

कुछ होने लगा और कमरे म पहँु च कर मन रोने को करने लगा। कमरे म म लगभग एक घंटे

तक रहा। बाथ म म लगे तरह-तरह के आइन और नल का मुआयना कया। इसके ठं डे और

148

गम पानी के नल को चलाकर उनका खूब बहाव दे खा। नलक और फ वार क ब ढ़या क म
िनहारता रहा। कतनी बे हसाब होती है वलािसता और कतनी आ

त करती है ।

मने नान कया, बाल म कंघी क , नया बाथ रोब पहना। मेरा इरादा था अपने चार
डॉलर पचास सट क पाई पाई को भोगना। काश, मेरे पास पढ़ने को कुछ होता - अखबार ह
सह । ले कन अखबार मंगाने के िलए फोन करने का आ म व ास नह ं था। सो, कमरे के बीच
म एक कुस पर बैठकर अ यंत उदास मन से हर चीज को िनहारने लगा। जतना दे खता,
उतना ह दु:खी होता जाता।
कुछ दे र बाद मने कपड़े पहने और नीचे उतरा। मु य भोजन क

का रा ता पूछा।

अभी डनर का समय नह ं हआ
ु था। जगह खाली-खाली थी। बस, दो एक खाने वाले पहँु चे थे।
हे ड वेटर मुझे खड़क के पास वाली एक टे बल क ओर ले गया।
"सर, आप यहाँ बैठना पसंद करगे?"

"कह ं भी चलेगा," मने अपनी सबसे उ दा अं ेजी आवाज़ म कहा।
अगले ह पल वेटर क फौज ने मुझे घेर िलया और ठं डा पानी, मे यू, म खन और

े पेश करने लगे। भावुकता म मेर भूख गायब हो चुक थी। अलब ा, मने इशार से काम
िलया और शोरबा, रो ट कया हआ
ु िचकेन और मीठ चीज के तौर पर वनीला आइस

म का

ऑडर दया। शराब का एक मे यू वेटर ने मुझे दया। मने यान से दे खने के बाद आधी
बोतल शै पेन मँगायी। म रईस क भूिमका म इतना डू बा हआ
ु था क भोजन और शराब का

मज़ा या ह लेता। खा पी लेने के बाद मने वेटर को एक डॉलर का टप दया जो उन दन के
हसाब से असाधारण प से यादा था। ले कन बाहर जाते व

जो अदब और आदाब मुझ पर

बरसाये गये, इतनी टप दे नी बनती थी। अकारण ह , म वापस अपने कमरे म गया, दस
िमनट तक बैठा, फर हाथ धोये और बाहर िनकल पड़ा।
चुपचाप मुलायम गम क शाम थी। मेरे मूड क तरह। म मे ोपोिलटन ओपेरा हाउस
क ओर जा रहा था। वहाँ "तै हॉउज़र" चल रहा था। मने कभी भी ै ड ओपेरा नह ं दे खा था।
इसके कुछ अंश रं गारं ग काय म म दे खे थे और मुझे भयंकर िचढ़ थी इससे। पर अभी म
इसके मूड म था। मने एक टकट खर दा और सेकड स कल म बैठा। ओपेरा जमन म था,
जसका एक भी श द अपने प ले नह ं पड़ा और न ह मुझे इसक कहानी मालूम थी। ले कन
रानी के मरने के बाद उसे तीथ या य के सामू हक गान के संगीत के साथ लाया गया तो म
फूट-फूट कर रो पड़ा। इसम मेर जंदगी का सारा दद िसमट आया लगता था। म अपने
आपको रोक नह ं पाया। मेरे आस पास बैठे लोग ने या सोचा होगा, मुझे नह ं पता, ले कन
बाहर िनकला तो बदन म ताकत नह ं रह गई थी और भावना मक प से चूर-चूर हो गया था।
सबसे अंधेरे रा त से होकर म शहर क ओर चलने लगा य क ॉडवे क घूरती
रोशनी मुझसे बदा त नह ं हो रह थी और मूड ठ क होने तक म होटल वाले उस वा हयात

149

कमरे म लौटना भी नह ं चाहता था। ठ क होने पर मेरा सीधा सो जाने का इरादा था। शार रक
और मानिसक प से म िनढाल हो चुका था।
होटल म घुसने के पहले म अचानक हे ट के भाई आथर केली से टकरा गया। हे ट
जस मंडली म थी उसका वह मैनेजर था। उसका भाई होने के नाते हम लोग म दो ती थी।
आथर को मने कई बरस से नह ं दे खा था।
"चाल ! कहाँ जा रहे हो?" उसने कहा। मैने लापरवाह से ए टर क दशा म िसर
हलाया, "सोने जा रहा था।"
आथर पर इसका असर पड़ा।
उसके साथ दो दो त थे। उनसे मेरा प रचय कराने के बाद उसने
सभी मे डसन एवे यू

ताव रखा क हम

थत उसके घर चल, कॉफ पी जाय और गपशप हो।

लैट आरामदायक था। हम लोग ने साथ बैठ कर ह क फु क इधर-उधर क बात

क ं। आथर इस बात के ित सतक था क हमारे अतीत का कोई ज

न आने पाए। वैसे, मेरे

ए टर म ठहरने क बात सुनकर वह और जानने को उ सुक था। ले कन मने कुछ खास
बताया नह ं। िसफ ये क म दो या तीन दन क छुटट म यूयॉक आया था।
कबरवैल म जब आथर रह रहा था तब से अब तक उसने ल बा सफ़र तय कर िलया
था। अब वह अमीर यवसायी बन गया था और अपने जीजा

क जे गॉ ड के िलए काम

करता था। उसक दिनयावी
बात सुन कर म और उदास होता गया। अपने दो त म से एक

क ओर इशारा करते हए
ु केली ने कहा, "अ छा लड़का है वह। अ छे प रवार का है , मेर
जानकार म।" खानदान के बारे म उसक

िच दे खकर म अपने आप पर मु कुराया और

समझ गया क आथर और मेरा मेल नह ं था।
यू याक म म केवल एक दन का। अगली सुबह मने फलाडे फया लौटने का
फैसला कया। उस एक दन म मुझे जो बदलाव चा हए था, वह िमला पर ये भावना मक
अकेलेपन का था। मुझे अब संग-साथ चा हए था। मुझे सोमवार सुबह वाले काय म और
मंडली के लोग से िमलने का इं तज़ार था। पुराने को हू म जुतना कतना भी उबाऊ हो, उस
एक दन के ठाट-बाट से मेरा जी भर गया था।

फलाडे फ़या लौट कर म िथएटर गया। र ज़ साहब के नाम एक तार आया था और
उ ह ने जब उसे खोला, म वह ं था।
"मुझे लगता है कह ं तु हारे िलए तो नह ं," उ ह ने कहा।
िलखा था "आपक कंपनी म चै क़न या वैसे ह नाम का कोई य

है । य द हो तो वह

कैसेल एंड बावमैन, 24 लॉ गकेयर ब डं ग ॉडवे से संपक करे ।"
कंपनी म उस नाम का कोई नह ं था, ले कन र ज़ का मानना था क उस नाम का
मतलब चै लन हो सकता है । फर तो म आनं दत हो उठा य क मुझे, जैसा क पता चला,

150

लॉ गकेयर ब डं ग ॉडवे के बीच -बीच पड़ती थी और इसम वक ल के द तर भरे पड़े थे; ये
याद करके क टे स म कह ं मेर एक अमीर चाची हआ
ु करती थी, मेर क पना को पंख लग
गए; गुज़रने से पहले वो ज़ र अ छा-खासा पैसा छोड़ गयी होगी। सो मने झटपट केसल एंड
बावमैन को तार दया क कंपनी म चै लन नामक एक य
बात कर रहे ह। म उ सुकता से जवाब क

है और वे शायद उसी के बारे म

ती ा करने लगा। उसी दन जवाब िमला। मने

झट से तार फाड़ा और खोलकर पढ़ा।
िलखा था: " या आप चै लन को ज द से ज द द तर म िमलने को कह सकते ह।"
उ सा हत होकर बड़ आशा से मने यू याक के िलए एकदम सुबह क गाड़ पकड़ ।
फलाडे फ़या से ढाई घंटे का रा ता था। या होगा मुझे नह ं पता था - मने क पना क क
कसी वक ल के द तर म बैठा हंू और मुझे कोई वसीयत पढ़कर सुनायी जा रह है ।

पहँु चने पर कुछ िनराशा हुई य क केसल एंड बावमैन वक ल नह ं थे, चलिच

िनमाता थे। अलब ा, ये मामला रोमांचक होने जा रहा था।

चा स केसल क टोन कंपनी के मािलक म से एक थे। उ ह ने कहा क िम टर मैक
सेनेट ने मुझे फोट सेके ड

ट वाले अमे रक

यू ज़क हॉल म पय कड़ क भूिमका म

दे खा था और य द म वह आदमी हँू तो वो मुझे फोड टिलग क जगह रखना चाहगे। मेरे मन

म कई बार फ म म काम करने का याल आया था, और अपने मैनेजर र ज़ के सामने मने
ताव भी रखा था क हम लोग िमलकर साझेदार म कान के केचेज के सवािधकार खर द
ल और उनक फ म बनाएं। ले कन र ज़ को पूरा भरोसा नह ं था, और बात सह भी थी,
य क हम फ म बनाने के बारे म कुछ जानते नह ं थे।
" या मने क टोन क कोई कॉमेड दे खी है ?" केसल साहब ने पूछा। दे खी तो मने कई
थी, ले कन मने ये नह ं बताया क मुझे वो कह ं का ट कह ं का रोड़ा जोड़ के बनायी लगती
थी। अलब ा, माबेल नामड नामक खूबसूरत लड़क , जो बीच बीच म उन फ म म आती
जाती रहती थी, क मौजूदगी के कारण वे अब तक टके हए
ु थे। क टोन ढर क कॉमेड को
लेकर म कुछ खास उ सा हत नह ं था, ले कन मुझे इसक लोक यता का भान था।

इस लाइन म एक साल बताकर रं गारं ग काय म क दिनया
म लौटने पर म

अंतरा ीय िसतारा बन जाऊंगा। इसके अलावा, इसम एक नयी ज़ंदगी और अ छा माहौल भी
था। कैसल का कहना था क करार के अनुसार मुझे ित स ाह तीन फ म म काम करना
होगा और वेतन होगा डे ढ़ सौ डालर। कान क कंपनी से जतना िमलता था, उससे यह दगु
ु ना
था। फर भी मने ना नुकुर करते हए
ु कहा क ित स ाह दो सौ डॉलर से कम नह ं लूँगा।

कैसल साहब ने कहा अब ये सेनेट साहब पर है ; वो उ ह केिलफोिनया म बता दगे। फर मुझे
सूचना िमल जाएगी।

151

कैसल के जवाब का इं तज़ार मने बड़ बेचैनी से कया। शायद म बहुत यादा मांग

बैठा था। आ खरकार खत आया क वे लोग पहले तीन मह न के िलए डे ढ़ सौ डॉलर और बाक
के नौ मह न के िलए एक सौ पचह र डॉलर - जंदगी म अब तक इससे बड़ा ऑफर नह ं
िमला था - के हसाब से साल भर के करार के िलए तैयार थे। सिलवन एंड कंिसडाइन टू र के
समा होते ह काम शु होना था।
ई र क कृपा से लॉस एंजे स म हम लोग ए

ेस म खूब चले थे। यह एक कॉमेड

थी। नाम था "ए नाइट एट द लब"। म एक कमज़ोर बूढ़े पय कड़ क भूिमका म था और
दखने म कम से कम पचास बरस का लग रहा था। नाटक समा होने पर सेनेट साहब खुश
होकर मुझे बधाई दे ने आए थे। उस छोट -सी मुलाकात म मेरा साबका घनी भ ह, भार
अनाकषक मुंह, और मजबूत जबड़े वाले एक भार -भरकम इ सान से पड़ा था और इस चेहरे
मोहरे से म भा वत हआ।
पर म इस उधेड़बुन म था क अपने भ व य के र ते म वह

कतनी स दयता से पेश आएंगे। उस सा ा कार म लगातार म बेहद नवस था और समझ

नह ं पा रहा था क बंदा मुझसे खुश है या नह ं।
म कब उ ह वाइन क ँ गा, उ ह ने चलताऊ ढं ग से पूछा। मैने बताया िसतंबर के
पहले ह ते म शु क ँ गा, जब कान कंपनी से मेरा करार ख म हो रहा है । क सास िसट
छोड़ने को लेकर मेरे मन म कुछ खटका था। कंपनी वापस इं लड जा रह थी और म लॉस
एंजे स, जहाँ म अकेला होऊंगा और बात कुछ जम नह ं रह थी। अंितम काय म के पहले
मने सबके िलए

ं क मंगाया और सबसे वदा लेने के वचार से म कुछ ग़मगीन हो गया।

अपनी मंडली के आथर डे डो, जसक मुझसे कसी कारण वश पटती नह ं थी, को
मज़ाक सूझा और मुझे कुछ उपहासा मक ढं ग से कसमसा कर बताया क कंपनी क ओर
मुझे तोहफ़ा िमलेगा। ये कबूल करता हँू क ये बात मेरे दल को छू गयी थी। अलब ा, कुछ

हआ
ु नह ं। े िसंग म से जब सब जा चुके थे, े ड कान जूिनयर ने वीकार कया क डडो ने
वा तव म एक वदाई भाषण तैयार कया था और मुझे एक भट दे ने क यव था क थी,
ले कन ये दे खकर क मने सबके िलए पीने का इं तजाम कया है , उसक वो सब करने क
ह मत नह ं हई
ु और वह तथाकिथत "उपहार" े िसंग टे बल के आइने के पीछे छोड़ गया था।

ट न क प नी म िलपट हई
ु तंबाकू क खाली ड बया थी जसम िचकनाई वाले रोगन क
पुरानी खुरचन रखी हई
ु थी।

152

दस
उ सुकता और िचंता से भरा म लॉस एंजे स पहँु चा और ेट नादन म एक छोटे से

होटल म कमरा ले कर टक गया। पहली ह शाम को मने एक बसमैन होिलडे का टकट िलया
और ए

ेस म दसरा
शो दे खा। यह ं पर कान क पनी अपने दशन कर चुक थी। एटे डट ने

मुझे पहचान िलया और बाद कुछ ह पल बाद मुझे यह बताने के िलए आया क िम टर सेनेट
और िमस मॉबेल नोमाड मुझसे दो कतार पीछे बैठे हए
ु ह और पूछ रहे ह क या म उनके

साथ बैठना पसंद क ं गा? म रोमांिचत हो गया और ज दबाजी म, फुसफुसा कर कये गये
प रचय के बाद हमने िमल कर शो दे खा। शो के ख म हो जाने के बाद, हम मेन
कदम चल कर गये और ह के-फुलके खाने और

ट पर कुछ

ं क के िलए तहखाने म बने बीयर बार म

चले गये। िम टर सेनेट को यह दे ख कर ध का लगा क म इतनी कम उ

का हँू ।

"मेरा तो याल था क तुम काफ बूढ़े आदमी होवोगे," उ ह ने कहा। उनक आवाज़ म
परे शानी का तंज था। और इस बात ने मुझे भी परे शानी म डाल दया य क सेनेट साहब के
सभी कामे डयन बुढ़ऊ से दखने वाले श स होते थे। े ड मेस पचास से ऊपर क उ

के थे

जब क फोड टिलग भी चालीस के पेटे म थे।
"म उतने बूढ़े जैसा मेक अप कर सकता हँू जतना आप चाह, मने जवाब दया।"

अलब ा, नोमाड यादा आ

त करने वाली थी। मेरे बारे म उसके जो भी यालात थे, उसने

उ ह जा हर नह ं होने दया। िम टर सेनेट ने कहा क मेरा काम त काल ह शु नह ं होगा।
ले कन म एडे डे ल म टू डयो म आ सकता हँू और वहाँ लोग से जान पहचान बढ़ा सकता हंू ।
जब हम कैफे से चले तो हम िम टर सेनेट क भ य रे िसंग कार म ठु ं स गये और उ ह ने मुझे
मेरे होटल पर छोड़ दया।
अगली सुबह, म एडे डे ल के िलए एक

टकार म सवार हआ।
ये जगह लॉस एज स

के एक उप नगर म थी। ये जगह बहत
ु बड़ विच सी दखती थी और म तय नह ं कर पाया

क ये गुज़ारे लायक लोग क रहायशी ब ती थी या फर अध-औ ोिगक ब ती। इसम छोटे -

छोटे काठ कबाड़ और कबाड़ खाने थे और वहाँ उजाड़ से दखने वाले छोटे -छोटे खेत थे जन
पर सड़क क तरफ एकाध लकड़ के खोखे से बने हए
ु थे। कई जगह पूछताछ करने के बाद म
क टोन के सामने पहँु च पाया। यहाँ पर भी ढहते हए
ु खंडहर वाला मामला था। उसके चार
तरफ हर बाड़ लगी हई
ु थी। लगभग डे ढ़ सौ वग फुट क । इसका रा ता एक बगीचे के

गिलयारे से हो कर जाता था और बीच म एक पुराना बंगला पड़ता था। पूर जगह ह एडे डे ल
क ह तरह मनहिसयत
भर लग रह थी। म सड़क के दसर
तरफ खड़ा हो कर उसे दे खता रहा


और मन ह मन उधेड़बुन म लगा रहा क भीतर जाऊँ या नह ं।

लंच टाइम हो रहा था और म औरत , मद को अपने अपने मेक अप म बंगले के बाहर
आते दे खता रहा। इनम क टोन के सुर ाकम भी थे। वे सड़क पार कर सामने बने एक छोटे

153

से जनरल टोर म जाते और सड वच और हॉट डॉग खाते हऐ
ु बाहर आ जाते। उनम से कुछ
लोग एक दसरे
ू को ज़ोर ज़ोर से आवाज़ दे कर पुकार रहे थे,"...ओए हक, ज द करो,

लम से

कहो, फटाफट आये।"

अचानक ह मने शिमदगी महसूस क और तेजी से एक सुर

त दरू पर जा कर एक

कोने म खड़ा हो गया और दे खने लगा क शायद िम टर सेनेट या िमस नोमाड बंगले से बाहर
िनकल कर आ जाय ले कन वे नज़र नह ं आये। म आधे घंटे तक वहाँ खड़ा रहा और फर मने
फैसला कर िलया क होटल म ह वा पस चला जाये। टू डय म जाने और उन सब लोग का
सामना करने क सम या मेरे िलए पहाड़ सी होती चली जा रह थी।
दो दन तक म टू डयो के गेट तक आता रहा ले कन मेर इतनी ह मत नह ं थी क
भीतर तक जा सकूँ। तीसरे दन िम टर सेनेट ने फोन कया और जानना चाहा क मने अब
तक अपनी श ल य नह ं दखायी है । मने कोई भी उलटा सीधा बहाना बना दया। अभी
ठ क इसी व

चले आओ। म तु हारा इं तज़ार क ं गा। उ ह ने कहा। इसिलए म वहाँ जा पहँु चा

और धड़ ले से बंगले के भीतर घुसता चला गया और िम टर सेनेट के िलए पूछा।
वे मुझे दे ख कर बहत
ु खुश हए
ु और मुझे सीधे ह

टू डय म ले गये। मेर खुशी का पारावार न

रहा। नरम, सम रौशनी पूरे सेट पर फैली हई
ु थी। ये रौशनी सफेद कपड़ क बहत
ु बड़ चादर

से आ रह थी जो सूय क रौशनी क चमक को िछतरा रह थीं और इससे पूरे प रवेश को एक
अलौ कक आभा सी िमल रह थी। रौशनी के इस फैलाव से दन क सी रौशनी का आभास
िमल रहा था।
एक या दो अिभनेताओं से िमलवाने के बाद म वहाँ चल रहे कारोबार म दलच पी
लेने लगा। एक दसरे
ू से सटे तीन-तीन सेट लगे हए
ु थे और उन पर तीन कॉमेड क पिनयाँ
काम कर रह थीं। ये सब ऐसा लग रहा था मानो आप व

मेले म कुछ दे ख रहे ह । एक सेट

पर माबेल नोमाड एक दरवाजा पीट रह थीं और िच ला रह थी,"..मुझे भीतर आने दो।" तभी
कैमरा क गया और सीन पूरा हो गया। तब मुझे इस बारे म कुछ भी पता नह ं था क फ म
इस तरह से टु कड़ म बना करती ह।
एक और सेट पर फोड टिलग काम कर रहे थे। मुझे उ ह ं क जगह लेनी थी। िम टर
सेनेट ने उनसे मेरा प रचय कराया। फोड साहब क टोन क पनी छोड़ कर जा रहे थे य क
वे युिनवसल के साथ िमल कर अपनी खुद क क पनी खड़ करने वाले थे। वे जनता के बीच
और टू डयो म सबके बीच बहत
ु अिधक लोक य थे। लोग बाग उनके सेट के आस-पास घेरा

बनाये खड़े थे और उनके अिभनय पर खूब हँ स रहे थे। सेनेट मुझे एक तरफ ले गये और अपने
काम करने के तौर तर के के बारे म बताया,"हमारे पास कोई सीने रयो नह ं होता। हम बस
एक आइ डया आता है , और उसके बाद घटनाओं क

वाभा वक शृंखला चलती है और चलती

रहती है और आ खर म भागा-दौड़ म ख म होती है । यह हमार कॉमेड का िनचोड़ होता है ।"

154

ये तर का अ छा था ले कन य
करता था। इससे आदमी का य

गत तौर पर म पीछा करने के नाटक से नफरत

व ह गायब हो जाता है , नास पट जाता है उसका। अब

चूं क म फ म के बारे म वैसे ह कम जानता था, ले कन इतना ज़ र जानता था क कोई भी
चीज़ य

व पर हावी नह ं होती।

उस दन म एक सेट से दसरे
ू सेट के बीच भटकता रहा और क पिनय को काम करते

दे खता रहा। ऐसा लग रहा था मान वे सब के सब टिलग क ह नकल कर रहे ह । म इससे
िचंता म पड़ गया, य क उनक

टाइल मुझे मा फक नह ं आती थी। वे एक परे शान हाल डच

मेन क भूिमका कर रहे थे, और डच उ चारण म

य के ज़ रये ह ठ हलाने का अिभनय

करते थे। हालां क ये सब मज़ाक भरा होता था ले कन मूक फ म म खो जाता था। म इस
बात को ले कर परे शान था क िम टर सेनेट मुझसे या उ मीद करते ह। उ ह ने मेरा काम

दे खा हआ
ु था और जानते ह ह गे क म फोड टाइप क कॉमेड के लायक नह ं था। ले कन मेर
टाइल तो ठ क उसके वपर त थी। इसके बावजूद टू डयो म सोची या वचार गयी कोई भी

कहानी या

थित सायास या अनायास ह फोड साहे ब को ह

यान म रख कर तय क जाती

थी। यहाँ तक क रो को ऑरब कल भी टिलग क ह नकल कर रहे थे।
टू डयो िन

त ह पहले कोई खेत रहा होगा। माबेल नोमाड का े िसंग म दरू एक

पुराने बंगले म था और इससे सटा हआ
कमरा था जहाँ अिभने य क मंडली क

ु एक दसरा

दसर
म हलाओं के तैयार होने क जगह थी। बंगले के ठ क सामने ह कलाकार क मंडली के

जूिनयर टाफ और क टोन के सुर ा किमय के िलए मु य े िसंग म था जो शायद कभी

खिलहान रहा होगा। इनम यादातर लोग सक स के भूतपूव जोकर और ईनामी कु तीबाज रहे
थे। मुझे टार े िसंग म दया गया। इसे पहले मैक सेनेट, फोड टिलग और रो को
ऑरब

ल इ तेमाल करते रहे थे। यह भी एक खिलहाननुमा ढांचा था जो शायद कभी अ

स जा क

होगा। माबेल नोमाड के अलावा वहां दसर
कई खूबसूरत लड़ कयाँ भी थीं। ये

सौ दय और पाश वकता का अ त
ु और अनूठा संगम था।

कई दन तक म टू डयो दर टू डयो भटकता रहा और है रान परे शान होता रहा क

आ खर काम कब शु होगा। कई बार म टे ज पर आते जाते सेनेट साहब से टकरा जाता,
ले कन वे मेर तरफ सूनी िनगाह से दे खते, और अपने ह

याल म खोये रहते। म इस

असु वधाजनक याल से ह परे शान हो रहा था क वे ये समझते ह गे क उ ह ने मुझे रख
कर गलती ह क है और वे मुझे इस हाल से िनकालने के िलए कोई कोिशश भी तो नह ं कर
रहे थे।
रोज़ दर रोज़ मेर मानिसक शांित सेनेट साहब पर ह िनभर करती थी। अगर हम
कह ं एक दसरे
ू से रा ते म टकरा भी गये तो वे मु कुरा दे ते और मेर उ मीद बढ़ जातीं। बाक

155

क पनी का जो ख था वह दे खो और इं तज़ार करो वाला था ले कन कुछ लोग क िनगाह म
म फोड के गलत वक प के प म ह चुन िलया गया था।
शिनवार आया तो सेनेट साहब बहत
ु ह उदारमना थे। उ ह ने कहा," ं ट ऑ फस म

जाओ और अपना चेक ले लो।" मने उनसे कहा क म चेक के बजाये काम पाने के बारे म
यादा परे शान हंू । म फोड टिलग क नकल करने के बारे म भी बात करना चाहता था

ले कन उ ह ने मुझे ये कह कर दर कनार कर दया,"िचंता मत करो, हम ज द ह तु ह काम
भी दगे।"
िन ठले बैठे हए
ु नौ दन बीत चुके थे और मेरा तनाव मेर िशराओं पर आ रहा था।

अलब ा, फोड साहब मुझे सां वना दे ते, और काम के बाद अ सर वे मुझे शहर तक िल ट भी
दे दे ते। हम रा ते म एले ज़ ा बार म

ं क के िलए कते, उनके कई िम

से िमलते। उनम

से एक थे िम टर ए मर ए सवथ ज ह म शु शु म तो नापसंद करता रहा और उ ह कुछ
हद तक फूहड़ समझता रहा, ले कन वे मुझ पर मज़ाक करते हए
ु फ तयाँ कसते,"मेरा याल
है आप फोड क जगह ले रहे ह। ठ क है , आप हं सोड़ ह या?"

" वन ता इस बात क इजाज़त नह ं दे ती," मने चुटक ली। इस तरह ह िघसाई बहत

तकलीफदे ह थी, खासकर फोड साहब मौजूदगी म।

ले कन पूर सौ यता से उ ह ने मुझे इस हालत से यह कह कर बाहर िनकाल
दया," या आपने इ ह ए
उसम।"

ेस म शराबी क भूिमका म नह ं दे खा है ? बहत
ु हं साया इ ह ने

"वैसे तो इ ह ने मुझे अब तक नह ं हं साया है ।" ए सवथ बोले।
वे मोटे , बेढंगे आदमी थे जो लडर रोग से पी ड़त दखते थे, जसम नीचे का जबड़ा
घोड़े क तरह सूज जाता है और नाक से पानी आने लगता है । उनका चेहरा उदासी से भरा और
मनहिसयत
के भाव िलये होता था। उनके चेहरे पर कोई बाल नह ं थे, उदास आँख, और

लटका चेहरा, और ऐसी मु कुराहट जससे लगे क वे सा ह य, व और राजनीित पर कोई
तोप चीज़ ह। दे श म सबसे यादा जानकार बस, वह ह और उ ह हा य बोध क खूब परख
है । अलब ा, मुझे ये सब नह ं जमा और म तय कया क म उनसे बचने क कोिशश क ं गा।
ले कन एले ज ा बार म एक रात, वे बोले,"अब तक ये जहाज पानी म नह ं उतरा है ?"
"अब तक तो नह ं," म बेचैन हं सी हं सा।
"ठ क है , आप हं सोड़ ह बने रहो।"
इन महाशय से काफ कुछ सुन चुका था म। अब तक तो मने भी तय कया क इनक
कड़वी खुराक का एक घूंट भी आज पला ह दया जाये।
"अ छ बात है , आप जतने हं सोड़ दखते ह, उसके आधे म से भी मेरा काम चल
जायेगा।"

156

"हंु ह, ताने मारने वाला मज़ाक? ठ क है , ठ क है, म इसके बाद उनके िलए एक

ंक

खर द दं ग
ू ा।"

और आ खर वे पल आ ह गये। सेनेट साहब माबेल के साथ लोकेशन पर बाहर गये
हए
ु थे और फोड टिलग क पनी भी वहाँ नह ं थी। और इस हसाब से टू डयो म कोई भी

नह ं था। क टोन के सबसे व र िनदशक हे नर लेहरमैन सेनेट के बाद एक नयी फ म शु
करने वाले थे और चाहते थे क म उसम अखबार के एक रपोटर क भूिमका क ं । लेहरमैन
बहत
ु ह घमंड क म के आदमी थे और इस बात पर उ ह बहत
ु गव था क उ ह ने मशीनी
तर के क कुछ बहत
ु ह सफल कॉमेड फ म बनायी ह। वे कहा करते थे क उ ह य

क ज़ रत नह ं होती और वे अपने िलए हं सी का सारा सामान मैकेिनकल भाव से और
संपादन से पैदा कर सकते ह।
हमारे पास कोई कहानी नह ं थी। सारा क सा

ं टं ग ेस के आस-पास बुना जाना

था जसम यहाँ वहाँ हं सी के कुछ पल जुटाये जाने थे। मने एक ह का
टॉप है ट लगाया, और नींबू अटकाने वाली मूंछ रखीं। जब हमने काम शु

ॉक कोट पहना, एक
कया तो म दे ख पा

रहा था क लेहरमेन साहब के पास नये नये वचार का अकाल था। और ये बात भी थी क
चूं क म क टोन म नया था तो सुझाव दे ने के िलए छटपटा रहा था, परे शान था क सुझाव दँ ू
या नह ं। और यह ं पर आकर मेर लेहरमैन साहब से टकराहट शु हई।
ु एक

य था जसम

मुझे अखबार के स पादक का सा ा कार लेना था और अपनी तरफ से जतना भी सोचा जा
सकता था, मने हँ सी के पल डालने क कोिशश क । और यहां तक कया क बाक कलाकार
को भी सुझाव दे ने क ज़हमत भी उठायी। हालां क फ म तीन दन म पूर हो गयी थी, मुझे
लगा क हम कुछ बहत
ु ह हँ सी-मज़ाक क चीज डालने म सफल रहे थे। ले कन जब मने
तैयार फ म दे खी तो मेरा दल डू ब गया। इसका कारण यह था क स पादक महोदय ने

उसम इतनी बुर तरह से काट-छाँट कर द थी क उसे पहचाना ह नह ं जा सकता था। मेरे
हँ सी मज़ाक वाले सभी

य के ठ क बीच म कची चलायी गयी थी। मेरा तो दमाग ह खराब

हो गया। और सोच-सोच कर परे शान होने लगा क आ खर उ ह ने ऐसा य कया था।
लेहरमैन साहब ने कई बरस बाद इस बात को वयं वीकार कया था क उ ह ने ये सब
जानबूझ कर कया था य क, उनके वचार से म कुछ यादा ह सयाना बन रहा था।

लेहरमैन साहब के साथ जस दन मने अपना काम ख म कया, उसके एक दन बाद
सेनेट साहब लोकेशन से वा पस आये। फोड साहब एक सेट पर थे और ऑरब कल दसरे
ू सेट
पर। पूरा का पूरा सेट तीन क पिनय के काम के कारण य त था और वहाँ ितल धरने क

जगह नह ं थी। म सड़क छाप कपड़ म था और मेरे पास कोई काम धाम नह ं था। इसिलए म
एक ऐसी जगह पर जा कर खड़ा हो गया जहाँ से सेनेट साहब क मुझ पर िनगाह पड़ सके। वे

157

माबेल के साथ खड़े थे और एक होटल लॉबी का सेट दे ख रहे थे और अपने िसगार का िसरा
कुतर रहे थे।
"हम यहाँ कुछ हँ सी चा हये।" उ ह ने कहा और फर मेर तरफ मुड़े,"कॉमेड वाला मेक
अप कर लो। कुछ भी चलेगा।"
मुझे र ी भर भी याल नह ं था क कस तरह का बाना धारण कया जाये। मुझे ेस
रपोटर वाला अपना गेट अप अ छा नह ं लगा था। अलब ा, े िसंग म क तरफ जाते समय
मने सोचा क म बैगी पट पहन लूँ, बड़े -बड़े जूते ह , हाथ म छड़ हो, तंग कोट हो, है ट छोटा सा
हो, और जूते बड़े । म अभी ये तय नह ं कर पाया था क मुझे जवान दखना चा हये या बूढ़ा,
ले कन मुझे याद आया क सेनेट साहब मुझसे उ मीद कर रहे थे क म काफ बूढ़ा लगूँ, मने
छोट छोट मूंछ भी लगाने का फैसला कया जससे, मेरे याल से, बना अपने हाव-भाव
छुपाये म अपनी उ

को यादा दखा सकता था।

मुझे च र के बारे म कोई आइ डया नह ं था। ले कन य ह म तैयार हआ
ु , कपड़ से

और मेक अप से मुझे पता चल गया क इस बाने से कस क म का य

बन चुका है । म

उसे जानने लग गया और जब तक म टे ज तक चल कर आता, उस य

व का पूर तरह से

ज म हो चुका था। जब म सेनेट साहब के सामने आया तो मने च र को ह जीना शु कर
दया और रौब से चलने लगा। अपनी छड़ का हलाते हए
ु और उनके आगे चहल कदमी करते

हए
ु मेरे दमाग से हँ सी भर

थितय और मज़ाक का सोता सा फूटने लगा।

मैक सेनेट क सफलता का राज़ ये था क उनम गज़ब का उ साह था। वे एक बहत
ु ह
बेहतर न

ोता थे और जो बात भी उ ह मज़ा कया लगती, उस पर खुल कर हँ सते थे। वे खड़े -

खड़े तब तक खल खलाते रहे जब तक उनका पूरा शर र हलने डु लने नह ं लग गया। उ ह ने
मेरा उ साह बढ़ाया और मुझे च र समझाया,"तुम जानते हो क इस आदमी के य

व के

कई पहलु ह। वह घुम कड़, म त मौला है , भला आदमी है , क व है , व नजीवी है , अकेला
जीव है , हमेशा रोमांस और रोमांच क उ मीद लगाये रहता है । वह तु ह इस बात क यक न
दला दे गा क वह वै ािनक है, संगीत

है , यूक है , पोलो खलाड़ है , अलब ा, वह सड़क पर

से िसगरे ट उठा कर पीने वाले और कसी ब चे से उसक टॉफ छ न लेने वाले से यादा कुछ
नह ं। और हाँ, य द मौका आये तो वह कसी भली औरत को उसके पछवाड़े लात भी जमा
सकता है , ले कन बेइंतहा गु से म ह ।
म दस िमनट या उससे भी यादा दे र तक यह करता रहा, और सेनेट साहब लगातार हँ सते
रहे , खल खलाते रहे ,"ठ क है , उ ह ने कहा,"चले जाओ सेट पर और दे खो क तुम या कर
सकते हो।"
लेहरमैन क फ म क ह तरह म इस फ म के बारे म भी कुछ भी नह ं जानता था
िसवाय इसके क माबेल नोमाड अपने पित और अपने ेमी के बीच फंस जाती है ।

158

कसी भी कॉमेड म सबसे मह वपूण होता है नज़ रया। ले कन हर बार नज़ रया

ढंू ढना आसान भी नह ं होता। अलब ा, होटल लॉबी म मने यह महसूस कया क म छिलया हँू
जो क कसी मेहमान क तरह पोज़ कर रहा है , ले कन वा त वकता म म एक ै प था जो

थोड़ा बहत
ु आ य चाहता है । म वेश करता हंू और एक म हला के पैर से ठोकर खा जाता हँू ,
म मुड़ता हँू और जैसे माफ माँगते हए
ु अपना है ट उठाता हँू और फर मुड़ता हंू और इस बार

एक पीकदान से टकरा जाता हँू । और इस बार म पीकदान के आगे है ट उठाकर माफ मांगता
हँू । कैमरे के पीछे वे लोग हँ सने लगे।

वहाँ पर काफ भीड़ जमा हो गयी थी। वहाँ न केवल उन दसर
क पिनय के कलाकार

अपना अपना काम छोड़ कर वह ं जुट आये थे ब क टे ज पर काम करने वाले बढ़ई और

वाडरोब म काम करने वाल ने भी अ छ खासी भीड़ जुटा ली थी। और ये सबसे बड़ा पुर कार
था। और जब तक हमने रहसल ख म क , हमारे आस-पास बहत
ु बड़ सं या म दशक खड़े

हए
ू लोग के कंध के पीछे से उचक कर दे खते
ु हँ स रहे थे। ज द ह मने फोड साहब को दसरे
हए
ु दे खा। और जब ये सब ख म हआ
ु तो म जानता था, म कला फतह कर चुका हँू ।

दन के अंत म जब म अपने े िसंग म म गया तो फोड टिलग और ऑरब कल

अपने-अपने मेकअप उतार रहे थे। बहत
ु कम बात हई
ु ले कन पूरे माहौल म एक लहर चल रह
थी। फोड तथा रो को, दोन ने मुझे पसंद कया। ले कन ईमानदार से कहँू तो वे दोन ह
कसी भीतर संघष से जुझ रहे थे।
ये एक ल बा

य था जो पूरे पचह र फुट तक चला। बाद म लेहरमैन और सेनेट

साहब म बहस होती रह क या इस पूरे
समय अमूमन हँ सी मज़ाक के

य को य का य जाने दया जाये य क उस

य क ल बाई मु कल से दस फुट हआ
ु करती थी।

"ये अ छा मज़ाक भरा है ," मने कहा," या ल बाई से वाकई फक पड़ता है ?" तब
उ ह ने तय कया क इस पूरे

य को जस का तस पचह र फुट क ल बाई तक जाने दया

जाये। चूँ क मेरे कपड़े मेरे च र से मेल खा रहे थे, मने तभी और उसी व

ह तय कर िलया

क भले ह कुछ भी हो जाये, म अपनी इसी ढब को बनाये रखूग
ँ ा।
उस रात म

टकार म अपने घर लौटा तो मेरे साथ हमार क पनी म काम करने

वाला एक जूिनयर कलाकार था। उसने कहा,"दो त, आपने कुछ नयी शु आत कर द है । अब
तक ऐसा कभी भी नह ं हआ
ु था क सेट पर इस तरह क हँ सी के मौके आये ह । फोड टिलग
साहब के िलए भी नह ं। आप ज़रा उनका चेहरा तो दे खते, दे खने लायक था।"

"अब हम यह उ मीद कर क लोग बाग िथयेटर म भी इसी तरह से हँ सते ह?" मने
अपनी खुशी को दबाते हए
ु कहा।
कुछ ह दन बाद, एले जे ा बार म मने अपने कॉमन दो त ए मर ए सवथ को मेरे
च र के बारे म फोड साहब को कानाफूसी करते सुना,"जनाब ने बैगी पट पहनी थी, सपाट

159

पैर, और उनक हालत ख ता थी, आप दे खते तो बंदा अ छा खासा हरामी, धूल-गंदगी म सना
लग रहा था। इस तरह के खीझ भरे हाव भाव दखाता है मानो इसक बगल म ची टयाँ काट
रह ह । अ छा खासा काटू न लगता है ।"
मेरा च र थोड़ा अलग था और अमे रक जनता के िलए अनजाना भी। यहाँ तक क
म भी उससे कहाँ प रिचत था। ले कन वे कपड़े पहन लेने के बाद म यह महसूस करता था क
म एक वा त वकता हँू , एक जी वत य

हँू । दरअसल, जब म वे कपड़े पहन लेता और ै प

का बाना धारण कर लेता तो मुझे तरह तरह के मज़ा कया याल आने लगते जनके बारे म
म कभी सोच भी नह ं सकता था।
म उस जूिनयर कलाकार के बहत
ु कर ब आ गया था और हर रात

वा पस आते समय वह मेर कामेड के बारे म दन भर टू ड़य म हई
ु ित

टकार म घर
याओं के बारे म

बताता और बात करता," वो तो कमाल का ह आइ डया था, दो त, तु हारा वे फंगर बॉल म

उं गिलयां डु बोना और उस बुढ़ऊ क मूंछ से पूछ लेना।...आज तक कसी ने इस तरह क बात
के बारे म सोचा भी नह ं होगा।" और इस तरह से वह ये सार बात बताता रहता और मुझे हवा
भरे गु बारे म ऊपर चढ़ाता रहता।
सेनेट साहब के िनदशन म म सहज महसूस करता था य क उनके साथ सेट पर सब
कुछ सहज फूत तय होता चला जाता था। चूँ क कोई भी अपने खुद के बारे म पा ज़ टव या
अंितम प से प का नह ं होता था (यहाँ तक क िनदशक भी नह ं,) इसिलए म अपने बारे म
यह मान कर चलता क म दसर
से यादा जानता हँू । मने सुझाव दे ने शु कर दये ज ह

सेनेट साहब सहष वीकार कर लेते। इस तरह से मुझम यह व ास पनपने लगा क म

सृजन भी कर सकता हँू और अपनी खुद क कहािनयाँ भी िलख सकता हँू । सेनेट महोदय ने

िन य ह इस व ास को े रत कया। ले कन हालां क म सेनेट साहब को खुश कर चुका था,
जनता के दरबार म जा कर उसे खुश करना अभी बाक था।
अगली फ म म मुझे फर से लेहरमैन के हवाले कर दया गया। वे सेनेट साहब को
छोड़ कर टिलग के पास जा रहे थे हालां क वे सेनेट के साथ अपने करार के ख म होने क
तार ख के बाद भी दो ह ते तक कने के िलए तैयार हो गये थे। जब मने उनके साथ फर से
काम करना शु

कया तो म एक से एक नायाब सुझाव से भरा हआ
ु था। वे मेर बात सुनते

और मु कुरा दे ते ले कन उ ह वीकार न करते। वे कहा करते,"हो सकता है इस तरह क बात
िथयेटर म चल जाये ले कन फ म म हमारे पास इन सब बात के िलए फुसत नह ं है । हम
हमेशा गितशील रहना चाहता हँू । कॉमेड पीछा करने के िलए एक बहाना है ।"

म उनक इस सपाटबयानी से सहमत नह ं था,"हा य तो हा य है ।" म तक दे ता,"चाहे

वह फ म म हो या िथयेटर म।" ले कन वे अपनी ह बात पर अड़े रहे , वह करने पर तुले रहे
जो क टोन म होता आया था। सारे ए शन तेज गित से होने चा हये। इसका यह मतलब

160

होता क लगातार दौड़ते रहो, घर क छत पर,

टकार म कूदो, दौड़ो, न दय म छलांग

मारो, और ख भ पर से कूदो। उनक इस कॉमेड क

योर के बावजूद म कसी न कसी

तरह से अकेले क कॉमेड के िलए एकाध गुंजाइश िनकाल ह लेता था, ले कन हमेशा क
तरह, वे उ ह संपादन क

म कटवा ह लेते।

म नह ं समझता क लेहरमैन ने मेरे बारे म सेनेट साहब को कोई बहत
ु अ छ रपोट

द होगी। लेहरमैन के बाद मुझे एक अ य िनदशक को स प दया गया। िम टर िनकोलस

साठ के पेटे म एक अधेड़ आदमी थे जो मोशन फ म क शु आत से ह उनसे जुड़े हए
ु थे।
मेरे सामने उनके साथ भी वह द कत थी। उनके पास कुल िमला कर हँ साने का एक ह

तर का होता था। इसम वे कॉमे डयन को गदन से पकड़ते थे और एक सीन से दसरे
ू सीन तक
उसे घूँसे ह मारते जाते थे। म इससे बार क बात उ ह बताना चाहता था, ले कन वे कुछ भी

सुनने को तैयार नह ं थे। "हमारे पास टाइम नह ं है , टाइम नह ं है ।" वे िच लाते। वे बस कसी
तरह से फोड टिलग क नकल भर चाहते। हालां क मने मामूली सा ह वरोध जतलाया था
ले कन लगता है , वे जाकर सेनेट साहब के कान भर आये क मुझ जैसे सुअर के प ले के
साथ काम करना उनके बस क बात नह ं।
लगभग इसी समय वह फ म जो सेनेट साहब ने िनदिशत क थी, माबे स

े ड टामेट, उप नगर म दखायी गयी। भय और घबड़ाहट के िमले जुले भाव के साथ मने
इसे दशक के बीच बैठ कर दे खा। जब फोड टिलग पद पर आते तो उनका वागत हमेशा
उ साह और हँ सी के साथ होता था ले कन मेरे ह से म ठं डा मौन ह आया। वह सब हँ सी
मज़ाक के सीन जो मने होटल लॉबी म कये थे, मु कल से एकाध मु कुराहट ह जुटा पाये।
ले कन जैसे-जैसे फ म आगे बढ़ , दशक पहले दबी हं सी हँ से, फर खुल कर हँ से, और फ म
के ख म होते न होते, एक दो ज़ोर के ठहाके लगे। उस दशन म मने पाया क दशक नये
आगंतुक को एकदम नकार नह ं दे ते ह।
म द ु वधा म था क ये पहला यास सेनेट साहब क उ मीद पर खरा उतरा या नह ं।

मेरा तो यह मानना है क वे िनराश ह हए
ु थे। वे एकाध दन के बाद मेरे पास आये और
बोले,"सुनो, सब लोग का कहना है क तु हारे साथ काम करना मु कल है ।" म उ ह ये

समझाना चाहता था क म सतक था और िसफ फ म क बेहतर के िलए ह काम कर रहा
था। "वो तो ठ क है , सेनेट बोले, "तुम िसफ वह करो जो तु ह करने के िलए कहा जाये। उसी
म हमार तस ली हो जायेगी।" ले कन अगले ह दन िनकोलस के साथ मेर एक और झड़प
हो गयी और म फट पड़ा,"आप मुझसे जो कुछ करवाना चाहते ह, वह तीन डॉलर रोज़ कमाने
वाला कोई भी ए

ा कर सकता है ।" मने घोषणा कर द ,"म कुछ ऐसा करना चाहता हँू

जसम कुछ अ ल का काम हो, िसफ इधर उधर मारा-मारा िगरते पड़ते रहना और

टकार

161

म से िगरना, ये सब मेरे बस का नह ं। मुझे ह ते के एक सौ पचास डॉलर िसफ इसी के िलए
नह ं िमलते।"
बेचारा "पॉप" िनकोलस, जैसा क हम उसे कहा करते थे, उसक तो हालत खराब थी।
"म पछले दस बरस से इस धंधे म हँू ।" वे कहने लगे , "तुम इन सबके बारे म जानते ह

या

हो?" मने उसे यार से समझाने क कोिशश क ले कन कोई फायदा नह ं हआ।
मने का ट के

बाक कलाकार को भी समझाने क कोिशश क ले कन वे सब भी मेरे खलाफ थे। "ओह, वह

जानता है , वह जानता है , वह पछले कई बरस से इसे लाइन म है ," एक बूढ़े कलाकार ने मुझे
समझाया।
मने कुल िमला कर पाँच फ़ म बनायीं और उन सबम कसी तरह से जोड़-तोड़ करके
अपना खुद का कुछ न कुछ कॉमेड का मसाला डाल ह दया। बेशक उसका संपादन क
बैठे कसाई जो भी करते रहे ह । अब चूँ क म संपादन क

म उसक संपादन कला से वा कफ

हो चुका था इसिलए म सीन के शु म और आ खर म ह अपना हा य का मसाला डाल दे ता
था ता क उसे काटने म उ ह अ छ खासी तकलीफ हो। म सीखने के िलहाज से कोई भी मौका
नह ं चूकता था। म डे वल पंग क

से और संपादन क

के अंदर-बाहर होता रहा था और

दे खता था क संपादन करने वाला कस तरह से कटे हए
ु टु कड़ को आपस म जोड़ता है ।
अब म इस िचंता म था क अपनी खुद क फ म िलखूँ और उनका िनदशन भी क ँ ।
इस िलहाज से मने सेनेट साहब से बात क । ले कन वे तो इस बारे म कुछ सुनने को तैयार ह
नह ं थे। इसके बजाये उ ह ने मुझे माबेल नोमाड के हवाले कर दया। उ ह ने अभी अभी ह
अपनी खुद क फ म का िनदशन शु

कया था। इस बात ने मुझे िच कर दया य क

बेशक माबेल बला क खूबसूरत थीं, उनक िनदशन

मता पर मुझे शक था। इसिलए पहले

ह दन िसर मुंडाते ह ओले पड़े । होनी हो कर रह । हम लॉस एंजे स के एक उप नगर म
लोकेशन पर थे। एक सीन म माबेल मुझसे चाहती थीं क म सड़क पर एक हौज और पानी ले
कर खड़ा होऊं ता क वलेन क कार उस पर फसल जाये। मने सुझाव दया क म हौज पाइप
पर ह खड़ा हो जाता हँू ता क पानी बाहर नह ं आयेगा और जब म अनजाने म उसके नोज़ल
को दे खता हँू और हौज पाइप के ऊपर से पैर हटाता हँू तो पानी क बौछार अचानक मेरे चेहरे
को िभगो दे ती है । ले कन उसने ये कह कर मेरा मुँह बंद कर दया,"हमारे पास व
हमारे पास व

नह ं है ।

नह ं है । वह करो जो आपसे करने को कहा गया है ।"

ये बहत
ु बड़ बात थी। म इसे सहन नह ं कर सकता था और वो भी ऐसी खूबसूरत

लड़क से,"माफ करना, िमस नोमाड, म वह नह ं क ं गा जो मुझे करने के िलए कहा गया है ।
मुझे नह ं लगता क आप इतनी िलयाकत रखती ह क मुझे बता सक क मुझे या करना
चा हये।"

162

ये

य सड़क के बीच -बीच फ माया जाना था और म इसे छोड़ कर चल दया और

एक पुिलया पर जा कर बैठ गया। यार माबेल, उस व

बचार मा बीस बरस क थी,

खूबसूरत और आकषक, हर दल अजीज, हर कोई उसे चाहता था, अब वह कैमरे के पास
है रान परे शान बैठ हई
ु थी। आज तक उससे कसी ने सीधे बात तक नह ं क थी, म भी उसक

खूबसूरती, उसके सौ दय और उसके आकषण का कायल था, और मेरे भी दल के कसी कोने
म उसके नाम के िचराग जलते थे, ले कन ये तो मेरा काम था। त काल ह पूरा का पूरा टाफ
माबेल के चार तरफ झुंड बना कर खड़ा हो गया और स मेलन होने लगा। माबेल ने मुझे बाद
म बताया था क एक दो ए

ा तो मुझे तभी के तभी रगेदना चाहते थे। ले कन उसी ने उ ह

ऐसा करने से मना कर दया। तब उसने अपने एक सहायक को मेरे पास यह पूछने के िलए
भेजा क या म काम जार रखने के िलए इ छुक हँू । म सड़क पार कर उस तरफ गया जहाँ
वह बैठ हई
ु थी।,"म शिमदा हँू," मने माफ सी मांगते हए
ु कहा, "मुझे नह ं लगता क ये
मज़ा कया है या नह ं ले कन अगर आप मुझे एकाध मजा कया

य के बारे म सुझाव दे ने क

अनुमित द तो...।"
उसने कोई बहस नह ं क । "ठ क है ," उसने कहा,"अगर आप वह नह ं करते जो आपको
बताया गया है तो हम टू डयो वा पस चले चलते ह।" हालां क

थित खराब थी, मने हार

मान ली और मने कंधे उचकाये। हमने दन के काम का यादा नुकसान नह ं कया, य क
हम सुबह नौ बजे से शू टं ग कर रहे थे। अब शाम के पाँच बजने को आये थे, और सूय डू बने क
तैयार कर रहा था।
टू डयो म म अपना ीज़ पट उतार रहा था क सेनेट साहब े िसंग म म दनदनाते
हए
ु आये और एकदम फट पड़े ,"ये सब म या सुन रहा हँू ? या लफड़ा है ये सब?"

मने समझाने क कोिशश क ,"कहानी म एकाध ह के फु के हा य क ज़ रत है ।"

मने बताया, "ले कन िमस नोमाड तो कुछ सुनने के िलए तैयार ह नह ं है ।"
"आप िसफ वह क जये जो आपको करने के िलए कहा जाता है , नह ं तो यहाँ से दफा
हो जाइये, करार होता है या नह ं, भाड़ म जाये करार।" वे बोले।
म बहत
ु ह शांत बना हआ
ु था,"िम टर सेनेट, मने जवाब दया,"म यहाँ आने से पहले

भी अपनी रोज़ी रोट कमा रहा था, और अगर मुझे िनकाल भी दया जाता है , तो ठ क है , म
बाहर हो जाता हँू । ले कन म ववेकशील हँू और म भी आप ह क तरह फ म को बेहतर
बनाने क ह उतना ह उ सुक हँू ।"

बना एक श द और बोले उ ह ने ज़ोर से दरवाजा बंद कर दया।

उस रात

टकार म घर जाते समय मने अपने दो त को बताया क या हआ
ु था।

"बहत
आप तो बहत
ु बुरा हआ।

ु ह अ छा करने जा रहे थे।" उसने कहा।

163

" या याल है, वे मुझे िनकाल बाहर करगे?" मने खुश होते हए
ु कहा ता क अपनी

िचंता पर परदा डाल सकूं।

"मुझे इस बात पर कोई है रानी नह ं होगी। जब उ ह आपके े िसंग म से जाते हए

दे खा तो वे अ छे खासे उखड़े हए
ु नज़र आ रहे थे।"
"मेरे साथ ये भी चलेगा। मेरे खीसे म प

ह सौ डॉलर ह और ये मेरे इं गलड वा पस

जाने के कराये के िलए काफ ह। अलब ा, म कल तो आऊंगा ह और अगर उ ह मेर ज़ रत
नह ं है तो यह सह .
अगले दन सुबह मुझे आठ बजे काम पर हा ज़र होना था, ले कन म तय नह ं कर पा
रहा था क जाऊं या नह ं, इसिलए म े िसंग म म बना कोई मेक-अप कये बैठा रहा। आठ
बजने म पाँच िमनट पर सेनेट साहब ने दरवाजे पर अपना चेहरा दखाया। "चाल , म तुमसे

बात करना चाहता हँू । चलो, माबेल के े िसंग म म चल।" उनक टोन आ यजनक प से
दो ताना थी।

"क हये िम टर सेनेट," मने उनके पीछे जाते हए
ु कहा।
माबेल वहाँ पर नह ं थी। उस व

वह ोजे शन म म रशेस दे ख रह थी।

"सुनो, मैक बोले,"माबेल तु हार बहत
ु बड़

शंसक है । और हम सब भी तु ह बहत
ु चाहते ह।

हम जानते ह क तुम बेह तर न कलाकार हो।"

म इस अचानक हए
ु प रवतन को दे ख कर है रान था और म त काल पघलने भी

लगा,"मेरे मन म भी माबेल के िलए बहत
ु अिधक स मान और शंसा के भाव ह," मने कहा,
"ले कन मुझे नह ं लगता क उसम इतनी

मता है क िनदशन कर सके। आ खर वह एकदम

युवा ह तो है ।"
"तुम जो भी सोचो, ले कन भगवान के िलए अपने अहं को पी जाओ और इस पचड़े म
से िनकलने म हमार मदद करो।" सेनेट साहब मेरे कंधे पर धौल ध पा करते हए
ु बोले।
"..और म भी तो यह करने क कोिशश कर रहा हँू ।"

"तो ठ क है । उसके साथ संबंध ठ क रखने के िलए अपनी ओर से पूर कोिशश करो।"
"सुिनये, अगर मुझे ह िनदशन करने का भार स प दगे तो आपको कसी भी क म
क तकलीफ नह ं होगी।" मने कह ह दया।
मैक एक पल के िलए ठठके,"और अगर हम फ म रलीज़ न कर पाये तो उसका
हरजाना कौन भरे गा?"
"म उठाऊंगा खचा।" मने जवाब दया,"म कसी भी बक म प

ह सौ डॉलर जमा

करवा दे ता हँू । और अगर आप फ म रलीज़ न कर पाये तो आप ये पैसे रख सकते ह।"
मैक एक पल के िलए सोचने लग,"कोई कहानी है तु हारे पास?"
"बेशक, आप जतनी मज कहािनयां चाह।"

164

"तो ठ क है ।" मैक बोले,"माबेल के साथ ये फ म पूर कर लो फर हम दे खते ह।"
हम दोन ने िनहायत ह दो ताना लहजे म हाथ िमलाये। बाद म म मोबेल के पास
गया और उससे

मा याचना क । और उसी शाम मैक हम दोन को डनर पर बाहर ले गये।

अगले दन माबेल जतनी मधुरता बखेर रह थी, उससे यादा

य नह ं हो सकती थी। यहाँ

तक क उसने मेरे सुझाव भी माँगे और वचार भी पूछे। इस तरह, पूर कैमरा ट म और बाक
क का ट को है रान छोड़ते हए
ु हमने खुशी-खुशी फ म पूर क । सेनेट साहब के नज़ रये म

अचानक आये इस प रवतन से म है रान था। अलब ा, ये तो मह न के बाद मुझे जा कर इसके
पीछे का एक कारण पता चला। ऐसे लगता है क ह ते के आ खर म सेनेट मुझे नौकर से
िनकालना चाहते थे, ले कन जस सुबह माबेल के साथ मेर झड़प हई
ु थी, मैक को यू याक
कायालय से एक तार िमला था क वे फटाफट चै लन क और फ म बनाय य क वहाँ
उनक बहत
ु अिधक माँग हो गयी थी।

क टोन ारा रलीज क जाने वाली कॉमेड फ म के आम तौर पर बीस

जाते थे। तीस क सं या काफ सफल मानी जाती थी। पछली फ़ म, जो
पतािलस


ं क सं या तक जा पहँु ची थी तथा अित र


ं बनाये

म से चौथी थी,

ितय क माँग बढ़ती ह जा रह

थी। मैक साब के दो ताना यवहार के पीछे ये तार ह काम कर रहा था।
उन दन िनदशन का अंक ग णत बहत
ु ह सीधा सादा हआ
ु करता था। मुझे िसफ

यह दे खना होता था क आने और बाहर जाने के िलए दशा दायीं तरफ थी या बायीं तरफ।
य द कोई कलाकार बाहर जाते समय कैमरे क तरफ पीठ करके गया तो वापसी म उसका
चेहरा कैमरे क तरफ होगा। अलब ा, ये बेिसक िनयम थे।
ले कन और अिधक अनुभव के साथ मने पाया क कैमरा के रखने क जगह का न
केवल मनोवै ािनक भाव होता है ब क इससे सीन भी बनता बगड़ता है । दरअसल, यह
िसनेमाई शैली का आधार था। य द कैमरा बहत
ु नज़द क या बहत
ु दरू रख दया जाये तो इससे
पूरा का पूरा

य बन भी सकता है और पूरा भाव बगड़ भी सकता है । अब चूँ क गित क

कफायत आपके िलए मह वपण होती है , अत: आप नह ं चाहते क अिभनेता बना कसी
वजह के कई कदम चले, हाँ, जब तक इसके िलए कोई खास कारण न हो। इसका कारण यह है
क चलने म कुछ भी ामाई नह ं है । इसिलए कैमरे को रखने का मतलब क पो जशन होना
चा हये और ये अिभनेता के िलए ग रमामय होना चा हये। कैमरे को कहां रखना है , ये बात
िसनेमाई अथ संयोजन क होती है । इस बात के कोई तय िनयम नह ं है क लोज़ अप से
अिधक अ छे प रणाम िमलते ह या लांग शॉट से बेहतर भाव पैदा कया जा सकता है ।
लोज अप महसूस करने क चीज़ है । कुछे क मामल म लाँग शॉट से बहत
ु अ छे

भाव पैदा

कये जा सकते ह।

165

इसका एक उदाहरण मेर शु आती कॉमेड फ म के टं ग म दे खा जा सकता है ।
ै प रं ग म वेश करता है और एक पैर ऊपर करके केट करता है । वह िगरता है, लड़खड़ाता
है और आस-पास के सब लोग को िगराता, लुढ़काता जाता है और तरह तरह क शरारत
करता रहता है । आ खर, वह सबको धराशायी करके दरू वाले कोने क तरफ जा कर दशक के
बीच यह दे खने के िलए भोला बन के बैठ जाता है क उसने या हं गामा बरपा दया है । यहाँ
पर ै प क ये छोट सी आकृित ह बहत
ु कुछ कह जाती है जो शायद लोज अप म उतनी
मजेदार न बन पाती।

जब मने अपनी पहली फ म का िनदशन कया तो मुझम इतना आ म व ास नह ं
था जतना होना चा हये था। दरअसल, मुझे अफरा-तफ़र का दौरा सा पड़ गया था। ले कन
जब सेनेट साहब ने पहले दन का काम दे ख िलया तो म आ
"कॉट इन द रे न"। हालां क ये व

त हो गया। फ म का नाम था

तर य फ म नह ं थी ले कन ये मजेदार थी और काफ

सफल भी रह । जब मने इस पूरा कर िलया तो सेनेट साहब क

ित

या जानने को उ सुक

था। ोजे शन म से उनके बाहर आने तक म उनक राह दे खता रहा।
"तो, बंधुवर, एक और फ म शु करने के िलए तैयार हो?" पूछा उ ह ने। उसके बाद
से तो मने अपनी सभी कॉमेड फ म खुद ह िलखीं और िनदिशत भी क ं। एक ो साहन के
प म सेनेट साहब ने

येक फ म के िलए प चीस डॉलर का बोनस दया।

अब उ ह ने मुझे मानो गोद ह ले िलया था। वे रोज़ रात को मुझे खाने पर बाहर ले
जाते। वे मेरे साथ दसर
क पिनय के िलए कहािनयाँ पर चचा करते। और म उनके साथ

ऐसे-ऐसे पागलपन से भरे

यालात के बारे म बात करता जो कई बार इतने िनजी होते क

जनता उ ह समझ ह न पाती। ले कन सेनेट उ ह सुनते और उ ह वीकार कर लेते।
अब जब मने आम जनता के बीच बैठ कर अपनी फ म दे खीं तो उनक

ित

या

अलग ह थी। क टोन कॉमेड क घोषणा होते ह हलचल और उ ेजना, मेरे पहले-पहले
आगमन के साथ ह , मेरे कुछ करने से पहले ह खुशी भर चीख मेरे िलए बेहद सुकून भर
होतीं। म दशक के बीच बेहद लोक य होता जा रहा था। अगर म अपने जीवन को इसी तरह
से चलाता रह पाता तो मेरे िलए यह संतोष क बात थी। अपने बोनस के साथ म दो सौ डॉलर
हर ह ते के कमा रहा था।
अब चूँ क म अपने काम म उलझा हआ
ु था अब मेरे पास एलै ज़ या बार या अपने

ताना मारने वाले दो त ए मर ए सवथ के पास जाने का व

ह नह ं िमलता था। अलब ा,

म उसे ह त बाद एक दन सड़क पर ह िमल गया। वह कहने लगा,"अरे भई, सुनो तो, म
कुछ अरसे से तु हार फ म दे खता आ रहा हँू । और भगवान क कसम, तुम काफ अ छे हो।
तु हारे पास जो वािलट है , वह यहाँ और से बलकुल ह अलग है । तुमने पहली ह बार म

166

अपने बारे म ये सब य नह बता दया था।" हाँ, हम बाद म जा कर बहत
ु अ छे दो त बन
गये थे।

ऐसा बहत
ु कुछ था जो मने क टोन से सीखा और बदले म बहत
ु कुछ क टोन

क पनी को िसखाया भी। उन दन वे लोग तकनीक, टे ज

ा ट या मूवमट के बारे म बहत

कम जानते थे। म उनके िलए ये चीज िथयेटर से ले कर आया। वे ाकृितक मूक अिभनय

पटोमाइम के बारे म भी बहत
ु कम जानते थे। कसी सीन को लॉक करने के िलए िनदशक

तीन या चार अिभनेताओं को कैमरे क तरफ मुँह करके सपाट खड़ा करवा दे ता और उनम से
एक बहत
ु खुले हावभाव के साथ अपनी ओर इशारा करते हए
ु मूक अिभनय करता, तब वह

अपनी अंगूठ वाली उं गली क तरफ इशारा करता, और फर लड़क क तरफ इशारा करता,"
म तु हार लड़क से शाद करना चाहता हँू ।" उनके मूक अिभनय से बार क या भाव डालने
क जरा भी गुंजाइश न बचती। इसिलए म उनक तुलना म बीस ठहरता। उन शु आती
फ़ म म मुझे पता था क मेरे प
नये, समृ और अब तक अछूते

म कई बात ह। और एक भूगभशा

ी क तरह म एक

े म वेश कर रहा हँू । मेरा याल है , वह मेरे कै रयर का

सबसे अिधक रोमांचक काल था, य क म कुछ आ यजनक करने क दहलीज पर था।

सफलता आपको यारा बना दे ती है और म टू डयो म सबका प रिचत दो त बन
गया। म ए

ा लोग के िलए, टे ज पर काम करने वाल के िलए और वाडरोब वभाग के

िलए और कैमरामेन के िलए चाल था। हालां क म चने के झाड़ पर चढ़ने वाल म से नह ं हँू ,
फर भी सच म ये बात मुझे खुश करती ह थीं य क म जानता था क इस अंतरं गता का

मतलब ह यह है क म सफल हो रहा हँू ।

अब मुझे अपने वचार म आ म व ास नज़र आने लगा था। और म सोच सकता हँू

क सेनेट बेशक मेर तरह काला अ र भस बराबर ह थे, उ ह अपनी पसंद पर भरोसा था
और यह भरोसा उ ह ने मुझम भी पैदा कया। उनके काम करने के तर के ने मुझे आ म

व ास बढ़ाया। टू डयो म उनक पहले दन क ट पणी,"हमारे पास कोई िसने रयो नह ं
होता, हम एक आइ डया पकड़ लेते ह। और फर उसी क लीक पर वाभा वक प रणित पर
चल दे ते ह।" इससे मेर क पना श

को नये पंख लगे थे।

इस तरह से फ म बनाना बहत
ु उ ेजनापूण काम था। िथयेटर म म रात दर रात वह

बंधी बंधायी लीक पर वह सब कुछ जड़, बंधी-बंधायी दनचया दोहराने को मजबूर था। एक

बार टे ज का कारोबार दे ख िलये जाने और तय कर िलये जाने के बाद उनम कुछ नया डालने
क कोई कभी सोचता भी नह ं था। िथयेटर म काम करने क एक ह

े रत करने वाली वजह

होती थी और वह यह थी क अ छा काम या बुरा काम। ले कन फ म म यादा आज़ाद थी।
उनम मुझे रोमांच का अनुभव होता था।
"इस आइ डया के बारे म तुम या सोचते हो?" सेनेट कहते या फर

167

"पता है शहर म मु य बाज़ार म बाढ़ आयी हई
ु है !" इस तरह क ट पणी से ह

क टोन क कामेड क शु आत होती थी। ये एक बांध लेने वाली मोहक खुली हवा थी जो
शानदार थी... य

क सृजना मकता के िलए चुनौती।

ये सब इतना खुला-खुला और सहज रहा...कोई सा ह य नह ं, कोई लेखक नह ं, हम
सब िमल कर एक वचार का ताना बाना बुनते, उसके आस-पास हँ सी ठठोली क बात बांधते
और जैस-े जैसे आगे बढ़ते जाते, कहानी आकार लेने लगती।
उदाहरण के िलए, हज ी ह टा रक पा ट म मने हँ सी क एक ह बात से शु
और वह मेर पहली एं

कया

से थी। म खाल लपेट के एक ागैितहािसक आदमी के प म एं

लेता हँू और जैस-े जैसे म लड केप को दे खता परखता हँू , म अपना पाइप भरने के िलए ओढ़
हई
ु भालू क खाल म से बाल नोचने लगता हँू । ये आइ डया अपने आपम काफ था

ागैितहािसक काल क कथा बुनने म। इसम यार था, द ु मनी थी, मारा मार थी और पीछा

करो के

य थे। यह तर का था जसे क टोन म हम सब अपनाया करते थे।

म अपनी फ म म कॉमेड के अलावा और नये आयाम जोड़ने क अपनी ललक के
शु आती ेरक पल को याद कर सकता हँू । म द' यू जेिनटर नाम क एक फ़ म म काम
कर रहा था। इसम एक

य था जसम कायालय का मैनेजर मुझे नौकर से िनकाल दे ता है ।

उसके सामने िगड़िगड़ाते हए
ु क वह मुझ पर रहम खाये और मुझे नौकर म रहने दे , मने इस
बात का मूक अिभनय शु कर दया क मेरे ढे र सारे छोटे छोटे ब चे ह। तभी मने पाया क

डोरोथी डे वेनपोट नाम क एक वृ नाियका एक तरफ रहसल दे ख रह थी। अचानक उस पर
मेर िनगाह पड़ तो म ये दे ख कर है रान रह गया क वह रो रह थी। उसने बताया,"मुझे पता है
क आप यहाँ हँ साना चाहते ह। ले कन आपने तो मुझे ला ह दया।" उसने एक ऐसी बात क
पु

क जसे म पहले से ह महसूस कर रहा था। मुझम यह काबिलयत थी क म हँ साने के

साथ-साथ ला भी सकूँ।
अगर स दय का असर नह ं होता तो टू डयो का मदाना माहौल सहन करना मु कल
हो जाता। सचमुच माबेल नोमाड क मौजूदगी टू डयो को ग रमा दान करती थी। वह बेहद
खूबसूरत थी, उसक भर -भर आँख, भरे भरे ह ठ जो उसके मुँह के कान से मुलायम तर के से
मुड़ जाते थे जो हा य को और हर तरह क भावना, अदा को अिभ य

करते थे। वह दल क

बहत
ु अ छ थी, ह के फु के मूड म और खुश रहती थी, उसके दल म दया थी और वह
उदारमना थी; हर कोई उसे चाहता था।

वाड म क म हला के ब चे के ित माबेल क उदारता के क से सुनने म आते थे,
कैमरामैन के साथ उसके मज़ाक क बात सुनायी दे तीं। माबेल मुझसे भाई बहन के जैसा यार
करती थी, और इसक एक वजह यह थी क उस समय वह मैक के यार म बुर तरह से
पागल थी। मैक के कारण ह मुझे माबेल को इतना अिधक जानने का मौका िमला। हम तीन

168

अ सर एक साथ बाहर खाना खाते, उसके बाद मैक होटल क लॉबी म सो जाता। हम ये
एकाध घंटा फ म दे ख कर कैफे म ह गुज़ार दे ते। तब वा पस आकर हम मैक को जगाते,
कोई सोच सकता है क इस तरह क िनकटता कसी तरह के रोमांस म बदल जाती, ले कन
ऐसा कुछ भी नह ं हआ।
दभा
ु य से हम दोन अ छे िम बने रहे ।

हाँ, एक बार ऐसा ज़ र हआ
क म, माबेल, रो को ऑरब कल सैन

ां सको म एक

िथयेटर म एक चै रट के िलए एक साथ मंच पर आये तो म और माबेल एक दसरे
ू के काफ

िनकट आ गये और भावना मक प से जुड़ गये। ये एक बहत
ु ह शानदार शाम थी और हम

तीन ने मंच पर बहत
ु ह बेहतर न दशन कया था, माबेल अपना कोट े िसंग म म ह छोड़
आयी थी। उसने मुझसे कहा क म उसे वहाँ ले जाऊं ता क वह कोट ला सके। ऑरब कल और
बाक लोग नीचे कार म इं तज़ार कर रहे थे। एक पल के िलए हम दोन अकेले थे। वह उस

समय अलौ कक सौ दय क दे वी लग रह थी और जब मने उसका कोट उसके कंधे पर डाला
तो मने उसे चूम िलया। बदले म उसने भी मुझे चूमा। हम और भी आगे बढ़ गये होते, ले कन
लोग नीचे इं तज़ार कर रहे थे। बाद म मने मामले को आगे बढ़ाने क कोिशश क , ले कन कोई
भी नतीजा सामने नह ं आया।
"नह ं चाल ," उसने बहत
ु अ छे मूड म हँ सते हए
ु कहा,"म तु हार तरह क नह ं हँू

और न ह तुम मेर ह तरह के हो।"

लगभग उसी समय के दौरान डायमंड जम ाड लॉस एंजे स आये। उस समय
हॉलीवुड का ज म अभी होना था। वे डॉली बहन और उसके पितय के साथ पहँु चे और दल

खोल कर खच कया। उ ह ने एले ज या होटल म जो डनर दया उसम डॉली बहन, उनके
पित, कारलोटा मो टे र , लोउ टे लेगेन, साराह बनहाट के मुख नायक, मैक सेनेट, माबेल
नोमाड, लांशे वीट, नैट गुड वन और कई दसरे
ू लोग शािमल हए
ु । डॉली बहन गज़ब क

खूबसूरत लग रह थीं। दोन बहन और उन दोन के पित और उनके साथ डायमंड जम ैड ,
इन सबके बीच दांत काट रोट वाला मामला था। हमेशा इन सबका एक साथ रहना उलझन
म डालता था।
डायमंड जम ैड एक अ त
ु अमे रक च र थे। वे वन

जॉन बुल सर खे दखते

थे। पहली रात तो म अपनी आंख पर ह व ास नह ं कर सका य क उ ह ने ह रे के कफ
िलंक और शट ं ट पर टड पहने हए
ु थे और हरे क ह रा िशिलंग के आकार से भी बड़ा था।
कुछ ह रात के बाद हमने तट पर नाट गुड वन कैफे म एक साथ खाना खाया तो इस बार
डायमंड जम ैड अपने प ने के सेट के साथ नज़र आये। इस बार तो हरे क प ना छोट
मािचस क ड बया से भी बड़ा था। पहले तो मने यह समझा क उ ह ने ये सब मज़ाक के
तौर पर पहने हए
ु ह और भोलेपन म उनसे पूछ भी िलया क या ये असली ह। उ ह ने
बताया,"ये असली ह ह।"

169

"ले कन ह ये शानदार," मने है रान होते हए
ु कहा। "अगर तुम सचमुच खूबसूरत प ने

दे खना चाहते हो तो ये दे खो," और उ ह ने अपना

स वे टकोट ऊपर उठा दया और मुझे

अपनी बे ट दखायी। ये वींसबेर चै पयनिशप क बे ट जतनी बड़ थी और पूर क पूर
प न से भर हई
ु थी। मने आज तक इतने बड़े प ने नह ं दे खे थे। वे मुझे बहत
ु गव से बता रहे
थे क उनके पास बेशक मती ह र वगैरह के पूरे दस सेट ह और वे हर रात उ ह बदल बदल
कर पहनते ह।
1914 चल रहा था और म प चीस बरस का होने को आया था। मुझम जवानी पैठ रह
थी और म अपने काम म मस फ था। म उससे काम क सफलता के िलए नह ं जुड़ा हआ
ु था

ब क इसके मौज मजे के िलए ह नह ं ब क इससे मुझे हर तरह के फ मी अिभनेताओं से
भी िमलने का मौका िमलता रहा था। कभी न कभी म उन सबका फैन रहा था। मैर पकफोड,
लांशे वीट, िम रयम कूपर, लारा कमबैल यंग, िगश बहन तथा दसरे
ू लोग, वे सब क सब

खूबसूरत थीं और उनसे

िमलना सुख दे ता था।

थॉमस इ स अपने टू डयो म सींक कबाब क पा टय और नृ य के काय म रखते।
ये टू डयो नादन सांता मोिनका के जंगल म था और शांत महासागर के सामने पड़ता था।
या तो मदम त रात हआ
ु करती थी - जवानी और खूबसूरती; मु ाकाश मंच पर मादक

संगीत पर झूम झूम कर िथरकना और पास ह समु तट पर से टकराती लहर क मंद मंद
वर लह रयां बज रह होतीं।
पेगी पयस बेइं तहा खूबसूरत लड़क थी। उसका नरम ज म जैसे बार क से तराशा
गया हो, खूबसूरत गोर गदन, और स मोहक दे हय । मेरे दल म हलचल मचा दे ने वाली वह
पहली औरत थी। क टोन म मेरे आने के तीसरे ह ते तक उसके दशन नह ं हए
ु थे य क
उन दन वह लू से पी ड़त थी। ले कन जस पल हम िमले, उसी पल से एक दजे
ू के दल

िमल गये, िचंगार भड़क और हम एक दसरे
ू के हो गये। मेरा दल गा उठा। वे सुबह कतनी
मानी हआ
ु करती थीं। हर सुबह इस उ मीद के साथ काम पर आना क उस मोहतरमा के

द दार ह गे। र ववार के दन म उसके माता पता के अपाटमट म उससे िमलने चला जाता।
हर रात हमारा िमलन यार पर वीकृित क मुहर लगाता, हर रात संघष म बीतती। हां, पेगी
मुझसे यार करती थी, ले कन ये एक खोये हए
ु यार का मामला था। वह बार बार अपने
आपको रोकती। यहां तक क मने िनराश हो कर कोिशश ह छोड़ द । उस व

मेर यह हालत

थी क कसी से भी शाद करने म मेर दलच पी नह ं थी। मेरे िलए आज़ाद बहत
ु बड़ा रोमांच
था। कोई भी औरत उस धुंधली छ व पर खर नह ं उतरती थी जो मने अपने मन म बसा रखी
थी।
हरे क टू डयो एक प रवार क तरह था। स ाह भर म फ म पूर हो जाया करती थी
और फ चर क ल बाई वाली फ म को पूरा करने म दो या तीन स ाह से अिधक का समय

170

नह ं लगता था। हम सूरज क रौशनी म काम करते थे इसीिलए हम कैिलफोिनया म काम
करते थे; यह कहा जाता था क वहां पर हर बरस नौ मह ने तक धूप चमकती रहती है । लीग
लाइट का आ व कार 1915 के आस पास हआ
ु था; ले कन क टोन क पनी ने उ ह कभी भी
इ तेमाल नह ं कया य क वे लहरदार होती थीं, सूय क रौशनी क तरह साफ नह ं होती थीं
और लै प को सेट करने म बहत
ु व

ज़ाया होता था। क टोन क कॉमेड को बनाने म

मु कल से एक स ाह का समय लगता था। दरअसल, मने वट िमनटस ् ऑफ लव नाम क
एक फ म तो दोपहर म ह पूर कर डाली थी और मज़े क बात यह क इसम शु से ले कर
आ खर तक ठहाके ह ठहाके थे। डाव एंड डायनािमक नाम क एक बेहद सफल फ म को
बनाने म नौ दन लगे थे और इसक लागत आयी थी अ ठारह सौ डॉलर। अब चूं क म एक
हज़ार डॉलर के बजट को पार कर गया था, जो क क टोन कॉमेड क अिधकतम सीमा हआ

करती थी, मुझे प चीस डॉलर के बोनस का नु सान उठाना पड़ा। सेनेट का कहना था क

फ म अपनी लागत िनकाल सक इसका एक ह तर का है क दो दो र ल क फ म बनायी
जाय और वे करते भी यह थे। इनसे पहले ह बरस म एक सौ तीस हजार डॉलर क कमाई
हई।

अब म इस बात का दावा कर सकता था क म कई सफल फ म बना चुका हंू । इनम

वट िमनटस ् ऑफ लव, डाव एंड डायनािमक, ला फंग गैस तथा द टे ज आ द शािमल थीं।

इसी अरसे के दौरान म और माबेल नोमाड मैर

े सलर नाम क एक फ चर फ म म एक

साथ आये। मैर के साथ काम करना सुखद अनुभव था। ले कन मुझे नह ं लगता क फ म
कोई बहत
ु ऊंची चीज़ बन पायी थी। म एक बार फर से फ म का िनदशन करने म जुट
गया।

मने सेनेट साहब से िसडनी क िसफा रश क । अब चूं क चै लन नाम जा ह रहा था,
हमारे ह प रवार के एक और सद य के नाम को शािमल करने म उ ह खुशी ह होनी थी।
सेनेट साहब ने उसे एक बरस के िलए दो सौ डॉलर ित स ाह के वेतन पर करार कर िलया।
ये वेतन मेरे वेतन से प चीस डॉलर ित स ाह अिधक था। िसडनी और उसक प ी ताज़े
ताज़े इं गलड से आये हए
ु उस व
था। बाद म शाम के व

टू डयो पहंु चे जस व

म लोकेशन के िलए िनकलने वाला

हमने एक साथ खाना खाया। मने पूछा क इं गलड म मेर फ म का

या हाल है ।
उसने बताया क मेरा नाम आने से पहले ह कई यू जक हॉल के कलाकार ने उसे
अमे रक िसनेमा के एक नये कामे डयन के बारे म उ साह पूवक बताना शु कर दया था
जसे उ ह ने अभी अभी दे खा था।
िसडनी ने मुझे ये भी बताया क उस व

जब उसने मेर कोई भी कॉमेड फ म दे खी

नह ं थी, वह फ म ए सचज के द तर म यह पूछने गया था क ये फ म कब रलीज ह गी

171

और जब उसने बताया क वह कौन है तो उ ह ने उसे तीन फ म दे खने के िलए आमं त
कया। उसने ोजे शन म म अकेले बैठ कर ये फ म दे खीं और लगातार पागल क तरह
हं सता ह रहा।
"इन सब के बारे म तु हार

या ित

या है ?"

िसडनी ने जो कुछ कहा उसम कुछ भी है रान होने वाली बात नह ं थी, "ओह, म जानता
था क तुम बेहतर न ह करोगे।" उसने व ासपूवक कहा।
मैक सेनेट लॉस एंजे स एथले टक लब के सद य होने के नाते इस बात के
अिधकार थे क वे अपने कसी दो त को एक अ थायी सद यता काड दे सक और इस तरह
से उ ह ने मुझे एक काड दे दया। यह शहर म सभी छड़े लोग और कारोबा रय का अ डा
हआ
ु करता था - एक बहत
ु बड़ा लब जसम पहली ं जल पर एक बड़ा सा डाइिनंग म और
एक लाउं ज थे। ये शाम के व

म हलाओं के िलए भी खुल जाते थे और इनके अलावा एक

कॉकटे ल बार था।
मुझे सबसे ऊपर मं ज़ल पर एक कोने वाला कमरा िमला हआ
ु था जसम एक

पयानो रखा हआ
ु था और थी छोट सी लाइबेर । ये कमरा मोज़ है बगर के कमरे के बगल म

था। वे मे डपाटमटल सटर के मािलक थे। ये टोर शहर का सबसे बड़ा टोर हआ
ु करता था।
लब म रहने का खच उन दन बहत
ु ह मामूली हआ
ु करता करता था। म अपने कमरे के

िलए ित स ाह बारह डॉलर अदा कया करता था और इसम लब क सार सु वधाएं

मसलन, बड़ा सा ज नािशयम, तरण ताल, और बेहतर न सेवाएं शािमल थीं। सार बात होने
के बावजूद म पचह र डॉलर ित स ाह खच करते हए
ु आलीशान ढं ग से रहा करता था।
इ ह ं डॉलर म से म

ं क के एकाध राउं ड और कभी कभार के डनर के पैसे भी रखता।

लब के लोग के बीच एक तरह का भाईचारा था जसे पहले व

यु क घोषणा भी भंग

नह ं कर पायी थी। हर कोई यह सोच रहा था क लड़ाई तो छ: मह ने म िनपट जायेगी या
जैसा क लॉड कचनर ने अनुमान लगाया था क ये चार बरस तक चलेगी, लोग बाग बेकार
म सोचते थे। कई लोग तो इस बात से ह खुश थे क यु क घोषणा हो गयी है य क अब
हम जमन लोग को दखा दगे। नतीजे िनकलने का कोई सवाल ह नह ं था, अं ेज और

उ ह छ: मह ने म ह धूल चटा दगे। यु अभी तक अपने चरम तक नह ं पहंु चा था और
कैिलफोिनया असली यु क ज़मीन से खासा दरू था।

लगभग यह समय था जब सेनेट मेरा करार फर ने नया करने क बात कर रहे थे

और मेर शत जानना चाह रहे थे। म कुछ हद तक तो अपनी लोक यता के बारे म जानता ह
था, ले कन म अपनी सफलता क

ण भंगुरता के बारे म भी जानता था, और ये भी जानता

था क अगर म इसी गित से चलता रहा तो एक ह बरस म चुक जाऊंगा। इसिलए मुझे,
जतना भी हो सके, बटोर लेना होगा। मत चूके चौहान वाली

थित थी।

172

"म एक हज़ार डॉलर ित स ाह चाहता हंू ," मने जान बूझ कर कहा।
सेनेट बगड़ उठे ,"ले कन इतना तो म भी नह ं कमाता।"

"म जानता हंू ।" मने जवाब दया, "ले कन िथयेटर के बाहर जो लाइन लगती ह वे

आपके नाम के िलए नह ं ब क मेरे नाम के िलए लगती ह।"

"हो सकता है," सेनेट बोले,"ले कन हमार सं था क मदद के बना तुम खो जाओगे।"
उ ह ने चेताया, "दे खा नह ं, फोड टिलग का या हाल हो रहा है ?"
ये सच था। फोड टिलग क टोन क पनी छोड़ दे ने के बाद बहत
ु अ छा नह ं कर पा

रहे थे। ले कन मने सेनेट साहब से कहा,"मुझे कॉमेड बनाने के िलए िसफ एक पाक, एक

पुिलसवाले और एक खूबसूरत लड़क क ज़ रत होती है ।" और सच तो ये था क मने िसफ
इसी तामझाम के साथ कई अ यंत सफल फ म बनाकर दखा द थीं।

इस बीच सेनेट ने अपने भागीदार , कैसेल एंड बाउमैन को तार दे कर मेरे करार और

मेर मांग के बारे म उनक सलाह मांगी थी। बाद म सेनेट मेरे पास एक

ताव ले कर

आये,"सुनो, अभी तु हारे चार मह ने बाक ह। हम तु हारा करार फाड़ दगे और अभी से पांच
सौ डालर ह ते के दगे। अगले बरस सात सौ डॉलर और उसके बाद एक बरस म प

ह सौ

डॉलर दगे। इस तरह से तु ह हजार डॉलर ित स ाह िमल जाया करगे।"
"मैक," मने जवाब दया, "अगर आप इस शत को ठ क उलटा कर द तो आप पहले
बरस म मुझे प

ह सौ डॉलर, दसरे
ू बरस म सात सौ डॉलर और तीसरे बरस म पांच सौ द तो

म ले लूंगा।"

"ले कन ये तो पागलपन से भरा वचार है ।"
इस तरह से इसके बाद करार को नया करने क कोई बात ह नह ं हई।

अभी क टोन म मेरा एक मह ना बाक था और अब तक कसी और क पनी ने मेरे
सामने कोई

ताव नह ं रखा था। म नवस हो रहा था और म क पना कर रहा था क सेनेट

इस बात का जानते ह और कसी तरह अपना समय पूरा करने के च कर म थे। आम तौर पर
फ म ख म होने पर वे मेरे पास आते थे और मुझे मज़ाक म ज द से दसर
फ म शु

करने के बारे म उकसाते थे। और अब हालां क मने पछले दो स ाह से कोई काम नह ं कया
था, वे मुझसे दरू दरू ह रहे थे। वे वन

ले कन अलग थलग बने रहे ।

इस सबके बावजूद मेरे आ म व ास ने कभी भी मेरा साथ नह ं छोड़ा। अगर कसी

ने भी मेरे सामने

ताव न रखा तो म अपने आप ह धंधा शु कर दं ग
ू ा। य नह ं। म आ म

व ास से भरा हआ
ु था और अपने आप म िनभर भी था। म जानता था क ठ क कस व

इस भावना ने ज म िलया था। म टू डयो क द वार का सहारा ले कर एक मांग पच भर रहा
था।

173

िसडनी ने क टोन क पनी म आने के बाद कई सफल फ म बनायीं। एक फ म
जसने पूर दिनया
म रकाड ह तोड़ डाले वह थी - द सबमैर न पाइलट। इसम िसडनी ने हर

तरह क कैमरा

क का सहारा िलया। चूं क वह इतना अिधक सफल था, मने उससे स पक

कया और उससे मेरे साथ िमल कर अपनी खुद क क पनी बनाने के बारे म राय मांगी।
"हम िसफ एक कैमरा और एक ै क लाइट चा हये।" मने उसे बताया। ले कन िसडनी
द कयानूसी था। उसे लगा, ये सब कुछ यादा ह जो खम लेने वाला मामला होगा। इसके
अलावा, उसने कहा, "म इतनी अ छ पगार, जतनी मने अपनी पूर जंदगी म नह ं कमायी
है , कैसे छोड़ दं ।ू" इस तरह से वह एक और बरस के िलए क टोन क पनी के साथ ह बना
रहा।

एक दन मुझे युिनवसल क पनी के काल लई ले क तरफ से एक टे िलफोन संदेश

िमला। वे मुझे एक फुट के बारह सट दे ने और मेर फ म के िलए व जुटाने के िलए तैयार
थे। ले कन वे मुझे ह ते के एक हजार डॉलर का वेतन नह ं दगे। इसे दे खते हए
ु मामला आगे
नह ं बढ़ा।

जे स रॉ बंस नाम के एक युवा, जो ऐसेने क पनी का ितिनिध था, ने कहा क उसने
सुना है क म कोई भी करार पर ह ता र करने से पहले दस हज़ार डालर का बोनस और साढ़े
बारह सौ डॉलर ित स ाह का वेतन चाहता हंू । ये मेरे िलए खबर थी। जब तक उसने ज़

नह ं कया था, मने दस हज़ार डालर के बोनस क क पना भी नह ं क थी। ले कन उस सुखद
पल के बाद से ये वचार मेरे दमाग म टं क गया।
उस रात मने रॉ बंस को डनर पर आमं त कया और उसे ह सार बात करने द ं।
उसने बताया क वह सीधे ह ऐसेने क पनी के जी एम एंडरसन के पास से चला आ रहा है ।
लोग उ ह ांको बली के नाम से भी जानते ह। एंड रसन िम टर जाज के पूअर के भागीदार
ह और उनका

ताव है क वे बारह सौ पचास डॉलर ित स ाह दे ने के िलए तैयार ह ले कन

वह बोनस के बारे म कुछ नह ं कह सकता। मने कंधे उचकाये,"यह अड़चन कई लोग के साथ
है ।" मने बात आगे बढ़ायी,"उनके पास बड़े बड़े
ह नह ं करना चाहते।" बाद म उसने सैन

ताव तो ह ले कन वे नकद नारायण क बात

ांिस को म एंडरसन को फोन कया और उसे

बताया क ड ल हो गयी है ले कन म दस हजार नकद बोनस के प म त काल चाहता हंू । वह
मेज पर चहकता हआ
ु वा पस आया, "ड ल प क समझ। और कल आपको दस हज़ार डॉलर
नकद िमल जायगे।"

म सातव आसमान पर था।

ताव इतना शानदार था क सच नह ं लगता था।

ले कन ये सच था य क अगले ह दन रॉ ब सन ने मेरे हाथ म केवल छ: सौ डॉलर का चेक
थमा दया और बताया क िम टर एंडरसन अगले दन खुद ह लॉस एंजे स आ रहे ह और
बाक सब वे खुद ह िनपट लगे। एंडरसन उ साह से भरे हए
ु आये और ड ल के बारे म आ

174

कया ले कन दस हज़ार डॉलर का कोई ज
कर इस मामले को दे ख लगे।"

नह ं,"मेरे पाटनर िम टर पूअर िशकागो पहंु च

हालां क मेरे शक ने िसर उठाना शु कर दया था ले कन मने आशावाद के चलते
अपने शक को दफनाने का ह फैसला कया। अभी भी क टान क पनी के साथ मेरे दो स ाह
बाक थे। अपनी अंितम फ म हज़

ह टा रक पा ट का पूरा कर पाना मेरे िलए खासा

तनावभरा काम था, य क इतने अिधक कारोबार

ताव के साथ उस पर यान के

कर पाना मेरे िलए मु कल था, इसके बावजूद मने आ खर फ म पूर कर ह द ।

175

यारह
क नोट क पनी को छोड़ना मेरे िलए तकलीफदे ह था य क म वहाँ पर सेनेट और
दसरे
ू सभी लोग का

य य

बन चुका था। मने कसी से भी वदा के दो श द नह ं कहे ; म

कह ह नह ं सका। ये सब शु क, आसान तर के से हो गया। मने शिनवार क रात को अपनी
फ म का संपादन पूरा कया और अगले सोमवार िम टर एंडरसन के साथ सैन

ांिस को के

िलए रवाना हो गया जहाँ पर हम उनक हरे रं ग क नयी मसड ज़ कार के दशन हए।
ु हम सट
ांिसस होटल म िसफ लंच के िलए ह

के उसके बाद म नाइ स चले गए। वहाँ पर एंडरसन

का अपना एक छोटा सा टू डयो था और उसम उ ह ने एसेने क पनी के िलए ांको बली
वे ट स बनायी थी (एसेने पूअर और एंडरसन के पहले अ र को िमलाकर बनाया गया
नाम था)।
नाइ स सैन

ांिस को से बाहर क ओर एक घंटे क

ाइव क दरू पर था और रे ल क

पट रय के पास बसा हआ
ु था। एक छोटा सा शहर था और वहाँ क आबाद चार सौ क थी

और वहाँ का काम धंधा लसुन घास तथा पशुपालन था। टू डयो लगभग चार मील बाहर क
ओर एक खेत के बीच -बीच बना हआ
ु था। जब मने इसे दे खा तो मेरा दल डू बने लगा य क
इससे कम ेरणादायक कुछ और हो ह नह ं सकता था। इसक काँच क छत थी, जहाँ पर

गिमय म काम करना बेह द मु कल हो जाता था। एंड रसन के कहा क वे मेरे िलए मेर पसंद
का और कॉमेड बनाने के िलए बेह तर तर के से सुस जत टू डयो िशकागो के आसपास

ढंू ढगे। म नाइ स म िसफ एक ह घंटा रहा और एंडरसन अपने टाफ के साथ कुछ कामकाज़
िनपटाते रहे । तब हम दोन फर से सैन

ांिस को के िलए चल पड़े । वहाँ से हमने िशकागो के

िलए या ा शु क ।
मुझे एंड रसन अ छे लगे थे। उनम एक खास तरह का आकषण था। रे ल या ा म
उ ह ने मेर एक भाई क तरह दे ख भाल क और अलग-अलग टे शन पर कै ड और
प काएं ले आते। वे लगभग 40 बरस के शम ले और चु पे य

थे और जब कारोबार क

चचा क जाती वे बड़े इ मीनान के साथ कह दे ते,"इसके बारे म िचंता मत करो। सब ठ क हो
जाएगा।" वे बहत
ु कम बात करते थे और हमेशा याल से िघरे रहते। इसके बावजूद मने
महसूस कया क वे भीतर ह भीतर काइयाँ थे।
या ा रोचक थी। े न म तीन य

थे ज ह हमन पहली बार डाइिनंग कार म दे खा।

उनम से दो तो संप न लग रहे थे, ले कन तीसरा बेतरतीब-सा लगने वाला साधारण सा
आदमी था। उन तीन को एक साथ खाना खाते दे ख हम है रानी हई।
ु हमने अंदाज़ा लगाया क
दो य

तो इं जीिनयर हो सकते ह और तीसरा सड़क छाप आदमी छोटे -मोटे काम करने के

िलए मज़दरू रहा होगा। जब हम डाइिनंग कार से चले तो उनम से एक हमारे कूपे म आया,

अपना प रचय दया। उसने बताया क वह सट लुईस का शे रफ है और उसने ांको बली को

176

पहचान िलया है । वे फाँसी दए जाने के िलए एक कैद को सैन

वंटन जेल से वा पस सट

लोइस िलए जा रहे ह और चूं क वे कैद को अकेला नह ं छोड़ सकते ह, या हम उनके कूपे म
आकर ज़ला एटॉन से िमलना पसंद करगे?
शे रफ ने व ास के साथ कहा,"हमने सोचा क आपको प र थितय के बारे म
जानना अ छा लगेगा। ये जो कैद है, इसका अ छा-खासा आपरािधक रकाड है । जब
अिधकार ने इसे सट लोइस म िगर तार कया तो इस बंदे ने कहा क उसे अपने कमरे म
जाकर अपने ं क म से कुछ कपड़े -ल े लाने क इजाज़त द जाए और जस व

वह अपने

ं क म सामान तलाश रहा था, तो अचानक ह वह अपनी बंदक
ू के साथ घूमा और अफसर को

गोली मार द और तब भाग कर कैिलफोिनया चला गया। वहाँ पर उसे सधमार करते हए

पकड़ा गया और तीन बरस क सज़ा द गयी और जब वह बाहर िनकला तो जला एटॉन और
म उसका इं तज़ार कर रहे थे। यह एकदम सीधा सादा ह या का मामला है - हम उसे फाँसी
दगे।" उसने जोश के साथ कहा।
एंडरसन और म उनके कूपे म गए। शे रफ हँ सोड़ मोटा-सा आदमी था, जसके चेहरे
पर सदाबहार मु कुराहट और आँख म चमक बसी हई
ु थी। जला एटॉन कुछ यादा-ह
गंभीर आदमी था।

अपने िम से हमारा प रचय कराने के बाद शे रफ ने कहा,"बैठ जाइए।" तब वह कैद
क तरफ मुड़ा,"और ये हक है ।" कहा उसने, "हम इसे सट लोइस वापस ले जा रहे ह, जहाँ पर
वह फंदे म फंसेगा।"
हक व पता
से हँ सा ले कन कुछ कहा नह ं। वह लगभग 45-46 बरस का छ: फुटा

आदमी था। उसने यह कहते हए
ु एंडरसन से हाथ िमलाया, " ांको बली, मने आपको कई बार
दे खा है और हे भगवान! आप कैसे उ ह बंदक
ू थमाते ह और उ ह धाराशायी कर दे ते ह, मने

आज तक नह ं दे खा।" हक मेरे बारे म बहत
ु कम जानता था। उसने बताया: वह तीन बरस तक
सैन

वंटन म रहा था, "और बाहर दिनया
म ऐसा बहत

ु कुछ चलता रहता है , जसके बारे म

आपको पता ह नह ं चलता।"

हालां क हम सब बहत
ु सहजता से बात कर रहे थे ले कन एक भीतर तनाव था,

जससे उबर पाना मु कल लग रहा था। म सकते म था क या कहँू इसिलए म शे रफ के

जुमले पर खींसे िनपोरने लगा।

"ये एक बहत
है ।" ांको बली ने कहा।

ु मु कल दिनया

"हाँ, सो तो है ।" शे रफ ने कहा,"हम इसे कम मु कल बनाना चाहते ह। हक इस बात
को जानता है ।"
"बेशक!" हक ने उपहास करते हए
ु कहा।

177

शे रफ ने उपदे श दे ना शु कर दया,"यह बात मने हक से कह थी जब वह सैन
वंटन से बाहर आया था। मने उससे कहा क अगर वह हमारे साथ यादा सयानापन
दखाएगा तो हम भी उसके साथ वैसे ह पेश आएँगे। हम हथक ड़य का इ तेमाल करना या
ताम झाम फैलाना नह ं चाहते; हमने उसके पैर म िसफ बेड़ डाल रखी ह।"
"बेड़ ! वो या होती है ?" मने पूछा।
"आपने कभी बेड़ नह ं दे खी है ?" शे रफ ने पूछा
"अपने पट ऊपर करो, हक।"
हक ने अपना पाइँ चा ऊपर कया और वहाँ पर लगभग पाँच इं च लंबी और तीन इं च
मोट िनकल लेटेड बेड़ उसके टखने के चार ओर जकड़ हई
ु थी और उसका वज़न 40 प ड

रहा होगा। इससे बातचीत बे ड़य क नयी नयी क म क तरफ मुड़ गयी। शे रफ ने बताया
क इस खास बेड़ म अंदर क तरफ रबर क परत चढ़ हई
ु है , जससे कैद को आसानी हो

जाती है ।

" या ये इसके साथ ह सोता है ?" मने पूछा।
"ये तो भई, िनभर करता है ।" शे रफ ने हक क तरफ सकुचाते हए
ु दे खते हए
ु कहा।
हक क मु कुराहट उदास और रह यमय थी।

हम उनके साथ डनर के समय तक बैठे रहे और जैसे-जैसे दन ढलता गया, बातचीत
उस तर के क ओर मुड़ गयी जसम हक को फर से िगर तार कया गया था। शे रफ ने
बताया था क जेल-सूचना के आदान- दान से उ ह फोटो और उँ गिलय के िनशान िमले थे
और उ ह यक न हो गया क हक ह वह आदमी है जसक उ ह तलाश है । इसिलए जस दन
हक को रहा कया जाना था, वे सैन

वंटन क जेल के दरवाज़े पर पहँु च गए थे।

"हाँ!" अपनी छोट -छोट आँख टम टमाते हए
ु और शे रफ और हक क तरफ दे खते

हए
तरफ इसका इं तज़ार करने लगे। बहत

ु शे रफ बोले,"हम सड़क के दसर
ु ज द ह जेल के
गेट के एक तरफ वाले दरवाज़े से हक बाहर आया।" शे रफ अपनी अनािमका उँ गली अपनी
नाक के पास ले गए और धीरे से यंगपूण हँ सी के साथ हक क दशा म इशारा करते हए

बोले,"मेरा याल है , यह वह य

है , जसक हम तलाश है ।"

एंडरसन और म मं मु ध उसे सुनते रहे ,"इसिलए हमने उसके साथ सौदा कया"
शे रफ ने कहा,"अगर वह हमारे साथ चालबाज़ी करे गा तो हम उसे सीधा कर दगे।" हम इसे
ना ते के िलए ले गए और उसे गरमा गरम केक और अंडे खलाए और दे खए इसे फ ट
लास म या ा कर रहा है । हथकड़ और बेड़ म मु कल से ले जाए जाने से तो यह बेहतर ह
है ।"
हक मु कुराया और भुनभुनाया,"अगर म चाहता तो म आपके साथ

यापण के

मामले पर लड़ सकता था।"

178

शे रफ ने उसे ठं डेपन से दे खा,"उससे तु हारा कोई खास भला न हआ
ु होता, हक।"

उ ह ने धीरे से कहा,"इससे बस मामूली सी दे र ह होती। या आराम से फ ट लास म जाना
बेहतर नह ं ह?
"मेरा याल है , बेह तर ह है ।" हक ने कंधे उचकाए।
जैसे जैसे हम हक क मं ज़ल के नज़द क आ रहे थे, उसने लगभग यार भरे वर म
सट लोईस म जेल के बारे म बात करनी शु कर द ं। उसने दसरे
ू कै दय
लड़े जाने क

ारा अपना मुकदमा

याशा से ह खुशी हो रह थी,"म तो बस सोच रहा हँू क जब म कंगा कोट के

सामने पहंु चग
ूं ा तो वे गो र ला मेरे साथ या करगे। जरा सोचो तो। वे मेरा तंबाखू और मेर
िसगरे ट मुझसे ले लगे।"

शे रफ और एटॉन का हक के साथ संबंध ठ क वैसा ह था जैसी उस सांड के साथ

मैटाडोर का दलार
होता है , जसे वो मारने वाला है । जब वे े न से उतरे तो ये दसंबर का

आ खर दन था और जब हम अलग हए
ु तो शे रफ और एटॉन ने हम नववष क

शुभकामनाएँ द ं। हक ने भी उदासी से यह कहते हए
ु हाथ िमलाए क सार अ छ चीज़ का
अंत होता ह है । यह तय कर पाना मु कल था क उसे वदा कैसे द जाए। उसका अपराध

ू रतापूण और कायरपने का था। इसके बावजूद मने पाया क म उसे शुभकामना के दो श द
कह रहा हँू जस व

वह अपनी भार बेड़ के साथ े न से लंगड़ाता हआ
ु उतर रहा था। बाद म

हम पता चला था क उसे फाँसी दे द गयी थी।

जब हम िशकागो पहँु चे तो हमारा वागत िम टर पूअर के बजाय टू डयो मैनेजर

ने कया। उसने बताया क िम टर पूअर कारोबार के िसलिसले म बाहर गए हए
ु ह और नए

वष क छु टय तक वापस नह ं आएंगे। मुझे नह ं लगा क िम टर पूअर क गैर हा ज़र से
इस वज़ह से कोई खास फक नह ं पड़ने वाला है क नए वष क शु आत से पहले टू डयो म
कुछ भी नह ं होने वाला। इस बीच मने नव वष क पूव सं या एंडरसन, उनक प ी और
प रवार के साथ बतायी। नव वष के दन एंड रसन यह आ ासन दे ते हए
ु कैिलफोिनया के
िलए रवाना हो गए क जैसे ह

पूअर लौटगे वे सारे चीज , जनम दस हजार डॉलर का बोनस

शािमल है , को दे ख लगे। टू डयो औ ोिगक जले म था और ज़ र कभी गोदाम रहा होगा।
सुबह के व

म वहाँ पहँु चा, न तो पूअर आए थे और न ह मेरे कारोबार क यव थाओं के

बारे म कोई हदायत छोड़ गए थे। तुरंत ह लगा क ज़ र कुछ न कुछ गड़बड़ है और ऑ फस
वाले जतना बताने को तैयार थे, उससे यादा जानते थे। ले कन उससे म परे शानी म नह ं
पड़ा; मुझे यक न था क एक अ छ फ म मेर सार सम याओं को हल कर दे गी, इसिलए
मने बंधक से पूछा क या वह जानता है क मुझे टू डयो टाफ के पूरा सहयोग िमलना है
और उनक सार सु वधाओं को इ तेमाल करने क पूर छूट है ।
"बेशक!" उसने ज़वाब दया,"िम टर एंडरसन इस बारे म हदायत दे गए ह।"

179

"तब तो म तुरंत काम करना चाहँू गा।" मने कहा।

"बेहतर है ।" उसने जवाब दया,"पहली मं जल पर आपको िसने रयो वभाग क िमस
लॉयला पास स िमलगी, वे आपको पटकथा दगी।"
"म दसरे
ू लोग क पटकथाओं को इ तेमाल नह ं करता। अपनी खुद क पटकथा

िलखता हँू ।" मने पलटकर जवाब दया।

म लड़ने िभड़ने के मूड म था य क वे सार चीज के बारे म और पूअर क

अनुप थित के बारे म बहत
ु ह के तर के से पेश आ रहे थे; टू डयो का टाफ अकड़ू था और
बक लक क तरह हाथ म सामान क मांग पच िलये इधर उधर डोलता रहता था मानो वे
गारं ट

ट क पनी के सद य ह । उनका कारोबार तर के से पेश आना बहत
ु आकषक था

ले कन उनक फ म नह ं। ऊपर वाली मं ज़ल पर अलग अलग वभाग के बीच इस तरह के

पाट शन डाले गये थे मानो बक के टे लर के दड़बे ह । ये सब कुछ था ले कन सृजना मक काम
के िलए अनुकूल नह ं था। छ: बजते ह , इस बात क परवाह कये बना क

य आधा हआ
ु है

या नह ं, िनदशक सब कुछ छोड़ छाड़ कर चल दे ता और ब यां बंद कर द जातीं और सब
लोग अपने अपने घर चले जाते।

अगली सुबह म कलाकार का चयन करने वाले का टं ग के द तर म गया। "म कुछ
कलाकार चुनना चाहंू गा," मने शु कता से कहा,"इसिलए या आप अपनी क पनी के ऐसे
लोग के मेरे पास भेजने का क करगे जो फलहाल काम म लगे हए
ु नह ं ह?"

उ ह ने मेरे सामने ऐसे लोग हा ज़र कर दये जो उनके याल से मेरे काम के हो

सकते थे। वहां पर भगी आंख वाला एक आदमी था जसका नाम बेन ट पन था जो र सी
वगैरह का काम जानता था और उसके पास उन दन ऐसेने म कोई खास काम नह ं था। मने
उसे हाथ -हाथ पसंद कर िलया, सो उसे चुन िलया। ले कन कोई मुख म हला पा नह ं थी।
कई कई सा ा कार लेने के बाद एक आवेदक म कुछ संभावनाएं नज़र आयीं। वह एक
खूबसूरत सी युवा लड़क थी जसे क पनी ने हाल ह म करार पर रखा था। ले कन, हे
भगवान! म उसके चेहरे पर हाव भाव ला ह न सका। वह इतनी गयी गुज़र थी क मने हार
मान ली और उसे दफा कर दया। कई बरस के बाद लो रया वैनसन ने मुझे बताया था क
वह वह लड़क थी और क ामे म कुछ करने क मह वाकां ा के चलते और वांग वाली
चीज पसंद न करने के कारण ह उस दन उसने जान बूझ कर सहयोग नह ं दया था।
ांिसस ए स बुशमैन, उस व

के ऐसेने के महान कलाकार ने उस जगह के ित मेर

नापसंदगी को ताड़ िलया, "आप टू डयो के बारे म जो कुछ भी सोच," कहा उसने,"ये तो बस,
वपर त ुव वाला मामला है ।" ले कन ऐसा नह ं था। न तो मुझे टू डयो नापसंद था और न
ह मुझे वपर त ुव श द ह पसंद आया। प र थितयां बद से बदतर होती चली गयीं। जब म
अपनी फ म के रशेज़ दे खना चाहता तो वे पॉ ज टव

ंट का खचा बचाने के िलए मूल

180

नेगे टव फ म ह चला दे ते। इस बात ने मुझे डरा दया। और जब मने इस बात क मांग क
क वे एक पॉ ज टव

ंट बनाय तो उ ह ने इस तरह के हाव भाव दखाये मानो म उ ह

दवािलया करने आ गया हंू । वे लोग संक ण और आ म तु थे। चूं क वे फ म कारोबार म

सबसे पहले आये थे, और उ ह पेटट अिधकार से सुर ा िमली हई
ु थी और इस तरह से वे

फ म िनमाण म एकािधकार रखते थे, अ छ फ म बनाना उनका अंितम उ े य था। और

हालां क दसर
क पिनयां उनके पेटट अिधकार को चुनौती दे रह थीं और बेहतर फ म बना

रह थीं, ऐसेने अभी भी अपने तौर तर के बदलने को तैयार नह ं थे और हर सोमवार क सुबह
ताश के प

क तरह िसने रयो का धंधा कर रहे थे।

मने अपनी पहली फ म लगभग पूर कर ली थी। इसका नाम था हज़ यू जॉब। दो
ह ते बीत गये थे और अब तक िम टर पूअर के दशन नह ं हए
ु थे। न तो मुझे वेतन िमला
था और न ह बोनस ह , इसिलए म ितर कार से भरा हआ
ु था।

"िम टर पूअर कहां पर ह?" मने ं ट ऑ फस म जा कर जानना चाहा। वे परे शानी म

पड़ गये और कोई संतोषजनक उ र न दे सके। मने अपनी नाराज़गी छुपाने क कोई कोिशश
नह ं क और पूछा क या हर बार वे अपना कारोबार इसी तर के से करते ह।
कई बरस बाद मने खुद िम टर पूअर से सुना था क हआ
या था। ऐसा लगता है

क जब पूअर, ज ह ने कभी मेरा नाम भी नह ं सुना था, को जब पता चला क एंडरसन ने
मुझे बारह सौ डॉलर ित स ाह और दस हज़ार डॉलर के बोनस पर एक बरस के िलए साइन
कर िलया है तो उ ह ने हड़बड़ाते हए
ु एंडरसन को यह जानने के िलए एक तार भेजा क कह ं वे
पागल तो नह ं हो गये ह और जब पूअर को पता चला क एंडरसन ने मुझे जै स रॉ ब स क
िसफा रश पर िसफ एक जूए के तौर पर साइन कया है , उनक िचंता दगु
ु नी हो गयी। उनके

पास ऐसे ऐसे हँ सोड़ थे जनम से सबसे अ छे कलाकार िसफ पचह र डॉलर ित स ाह पर
काम कर रहे थे और जो वे जो कॉमेड बनाते थे, मु कल से उनका खचा ह िनकल पाता था।
इसिलए पूअर िशकागो से गायब ह हो गये थे।
अलब ा, जब वे लौटे तो अपने कई दो त के साथ िशकागो के बड़े होटल म से एक म
खाना खा रहे थे तो उनक है रानी का ठकाना न रहा जब दो त ने उ ह इस बात पर बधाई द
क म उनक क पनी म शािमल हो गया हंू । इसके अलावा चाल चै लन के बारे म टू डयो

कायालय म पहले से यादा चार होने लगा था। इसिलए उ ह ने सोचा क एक आजमाइश

करके दे खी जाये। उ ह ने होटल के एक छोकरे को बुलवाया, उसे चौथाई डॉलर दया और कहा
क वह पूरे होटल म घूम घूम कर चाल क तलाश के िलए आवाज़ लगाये। लड़का जैसे जैसे
लॉबी म ये िच लाता घूमने लगा क "चाल चै लन के िलए फोन!!", लोग उसके आस पास
जुटने लगे और आलम ये हो गया क चार तरफ उ ेजना और हलचल मच गयी। मेर
लोक यता से ये उनका पहला साबका था। दसर
घटना फ म ए सचज के द तर म तब हई

181

थी जब वे वहां पर मौजूद नह ं थे; उ ह ने पाया क मेरे फ म शु करने से पहले ह फ म
क पसठ ितय क अि म ब
फ म पूर करता, एक सौ तीस

हो जाती थी। ऐसा आज तक नह ं हआ
ु था और जब तक म

ं बक चुके होते और अभी भी ऑडर आ रहे होते। उ ह ने

तुरंत ह क मत तेरह सट से बढ़ा कर प चीस सट ित फुट कर द ।
आ खरकार जब पूअर आये तो मने उनसे छूटते ह अपने वेतन और बोनस क बात
क । वे तरह तरह से

मा मांग रहे थे और बता रहे थे क वे अपने ं ट ऑ फस को मेरे सारे

कारोबार इं तज़ाम करने के िलए कह कर गये थे। उ ह ने करार नह ं दे खा था ले कन ये मान
कर चल रहे थे क उनके ं ट ऑ फस को इसके बारे म सब कुछ मालूम होगा।
पूअर ऊंचे कद के, थोड़े भार शर र वाले मृद ु

भाषी य

थे। वे आकषक भी होते

अगर उनके चेहरे पर मांस क पीली परत न चढ़ होती और उनका मोटा सा ऊपर ह ठ नीचे
वाले ह ठ के ऊपर टका न होता।

"मुझे अफ़सोस है क आप इस तरह से सोचते ह," कहा उ ह ने, "ले कन आप को पता
होना चा हये चाल क हमार फम एक इ ज़तदार फम है और हम अपने करार हमेशा पूरे
करते ह।"
"ठ क है , ले कन इस करार को आप पूरा नह ं कर रहे ह," मने टोका।
"कोई बात नह ं, हम अभी सारे मामले सुलझा लेते ह।" उ ह ने कहा।
"मुझे कोई ज द नह ं है ।" मने कटा
िशकागो म मेरे सं

के साथ जवाब दया।

वास के दौरान पूअर ने मुझे तु करने क हर तरह से

कोिशश क । ले कन म कभी भी उनक अपे ाओं के अनु प खरा नह ं उतर सका। मने उ ह
बताया क म िशकागो म काम करने म खुश नह ं हंू और क अगर वे नतीजे चाहते ह तो मेरे
िलए कैिलफोिनया म काम करने क यव था करा द।

"हम ऐसा कुछ भी करगे जससे आपको खुशी िमले," उ ह ने कहा,"नाइ स जाने के
बारे म या याल है ?"
म इस

ताव पर बहत
ु खुश नह ं था, ले कन म पूअर क तुलना म एंडरसन को

यादा पसंद करता था, इसिलए हज़ यू जॉब पूर कर लेने के बाद म नाइ स चला गया।
को बली अपनी वे टन फ म वह ं पर बनाया करते थे। ये एक-एक र ल क फ म
हआ
ु करती थीं ज ह बनाने म उ ह एक ह दन लगता था। उनके पास सात ह कहािनय के
लॉट थे ज ह वे घुमा- फरा कर बार-बार दोहराते रहते थे और इ ह ं से उ ह ने कई लाख

डॉलर कमाये थे। वे कभी कभार काम करते थे। कभी-कभी वे एक-एक र ल क सात फ म
एक ह ह ते म बना कर धर दे ते। और फर छ: स ाह के िलए छु ट मनाने चले जाते।
नाइ स म टू डयो के आस-पास कैिलफोिनया शैली के कई छोटे -छोटे बंगले थे जो
को बली ने अपनी क पनी के टाफ के िलए बनवाये थे। एक बड़ा-सा बंगला था जो उनके

182

खुद के िलए था। उ ह ने बताया क अगर म चाहंू तो उनके बंगले म उनके साथ ह रह सकता
हंू । म इस

ताव से खुश हआ।

को बली, करोड़पित काउबॉय, ज ह ने िशकागो म अपनी

प ी के आलीशान अपाटमट म मेर आवभगत क थी, के साथ रहने से कम से कम नाइ स
म ज़ंदगी सहने यो य तो रहे गी।
जस समय हम बंगले पर पहंु च,े उस व

अंधेरा था। जब हमने

वच ऑन कये तो

मुझे झटका लगा। जगह एक दम खाली और मनहिसयत
भर थी। उनके कमरे म लोहे क

एक चारपाई रखी थी और उसके ऊपर एक ब ब लटक रहा था। कमरे म फन चर के नाम पर
एक ख ताहाल मेज़ और एक कुस भी थे। पलंग के पास लकड़ क एक पेट रखी थी जस पर
पीतल क एक ऐश े रखी थी जो िसगरे ट के टोट से पूर तरह से भर हई
ु थी। मुझे जो कमरा
दया गया था, वो भी कमोबेश ऐसा ह था। उसम बस, राशन रखने क पेट नह ं थी। कोई भी

चीज़ काम करने क हालत म नह ं थी। गुसलखाने के तो और भी बुरे हाल थे। नहाने के नलके
से एक मग पानी भर कर लै न म ले जाना पड़ता था तभी लश कया जा सकता था और
लै न को इ तेमाल कया जा सकता था। ये घर था जी एम एंडरसन, करोड़पित काउबॉय
का।
म इस नतीजे पर पहंु चा क एंडरसन सनक थे। करोड़पित होने के बावजूद वे

ग रमामय जीवन के ित ज़रा भी परवाह नह ं करते थे। उनके शौक थे, भड़क ले रं ग वाली
कार, नूरा कु तय के पहलवान को पालना, एक िथयेटर रखना और संगीतमय
करना। जब वे नाइ स म काम न कर रहे होते, वे अपना अिधकतर समय सैन

तुि तयां
िस को म

बताते, जहां पर वे छोटे , कम क मत वाले होटल म ठहरते। वे अजीब ह क म के श स थे,
अ प , मौजी और बेचैन, जो आनंद भर अकेली ज़ंदगी क चाह रखते थे। और हालां क
िशकागो म उनक बहत
ु ह खूबसूरत प ी और बेट थी, वे शायद ह उनसे िमलते। वे अलग
और अपने तर के से अपनी ज़ंदगी जी रह थीं।

एक बार फर से एक टू डयो से दसरे
टू डयो म ध के खाना को त म डालता था।

मुझे काम करने वाली एक और यूिनट का इं तज़ाम करने क ज़ रत पड़ । इसका मतलब, एक
और संतोषजनक कैमरामैन, सहायक िनदशक और कलाकार क टोली चुननी पड़ ।
कलाकार क टोली चुनना थोड़ा मु कल काम था य क नाइ स म इतने लोग ह नह ं थे
जनम से चुनने क बात आती। एंडरसन क कॉउबॉय क पनी के अलावा नाइ स म एक और
क पनी थी। ये एक नामालूम सी कॉमेड क पनी थी जनका काम-काज चलता रहता और
जब जी एम एंडरसन क क पनी काम न कर रह होती तो खच िनकाल िलया करती थी।
कलाकार क टोली म बारह लोग थे। और इनम से यादातर कॉउबॉय अिभनेता थे। एक बार
फर मेरे सामने मु य भूिमका के िलए कोई खूबसूरत-सी लड़क तलाश करने क सम या आ
खड़ हई।
ु अब म इस बात को ले कर परे शान था क कैसे भी करके काम शु

कया जाये।

183

हालां क मेरे पास कहानी नह ं थी, मने आदे श दया क तड़क भड़क वाले एक कैफे का सेट
बनाया जाये। जब मुझे हँ सी- ठठोली के िलए कुछ भी न सूझता तो कैफे के वचार से मुझे कुछ
न कुछ ज़ र सूझ जाता। जस समय सेट बनाया जा रहा था, म जी एम एंडरसन के साथ सैन
ांिस को के िलए रवाना हो गया ता क वहां पर उनक संगीतमय कॉमेड म समूहगान गाने
वाली लड़ कय म से अपने िलए मुख अिभने ी चुन सकूं। हालां क वे अ छ लड़ कयां थीं
फर भी उनम से कसी का भी चेहरा फोटोजेिनक नह ं था। एंडरसन के साथ काम करने वाले
काल

ॉस, खूबसूरत युवा जमन-अमे रक काउबॉय ने बताया क वह एक ऐसी लड़क को

जानता है जो कभी-कभी हल

ट पर टाटे के कैफे म जाती है । वह उसे य

गत प से

नह ं जानता था ले कन वह खूबसूरत है और हो सकता है क होटल का मािलक उसका पता
जानता हो।

िम टर टाटे उसे बहत
ु अ छ तरह से जानते थे। वह लवलॉक, नेवादा क रहने वाली

थी और उसका नाम एडना पु वएंस था। तुरंत ह हमने उससे स पक कया और उससे सट
ांिसस होटल म मुलाकात के िलए समय तय कया। वह खूबसूरत से कुछ यादा ह थी।

कमनीय थी वह। सा ा कार के समय वह उदास और ग भीर जान पड़ । मुझे बाद म पता
चला क वह अपने हाल ह के एक ेम संग से उबर रह थी। उसने कॉलेज तक क पढ़ाई क
थी और उसने ब जनेस कोस कया था। वह शांत और अलग थलग रहने वाली लड़क थी।
उसक बड़ -बड़ आंख, सुंदर दं त-पं

और संवेदनशील मुंह था। मुझे इस बात पर शक था क

वह इतनी ग भीर दखती है क वह अिभनय भी कर पायेगी या नह ं और उसम हा य बोध है
या नह ं। इसके बावज़ूद, इन सार बात को दर कनार करते हए
ु हमने उसे रख िलया। वह
मेर कॉमेड फ म म कम से कम सौ दय तो बखेरेगी।

अगले दन हम नाइ स लौट आये ले कन अब तक कैफे बन कर तैयार नह ं हआ
ु था।

जो ढांचा उ ह ने खड़ा कया था, वह वा हयात और बकवास था। टू डयो म प के तौर पर
तकनीक

ान क कमी थी। कुछे क बदलाव के िलए कहने के बाद म कसी आइ डया क

तलाश म बैठ गया। मने एक शीषक सोचा, हज़ नाइट आउट। खुशी क तलाश म एक
शराबी। शु आत करने के िलए इतना काफ था। मने यह महसूस करते हए
ु नाइट लब म

एक झरना लगवा दया क इसी से शायद कुछ हं सी-मज़ाक क चीज िनकल आय। मेरे पास
ठलुए क भूिमका के िलए बेन ट पन था। जस दन हमने फ म शु करनी थी, उससे एक
दन पहले एंडरसन क क पनी के एक सद य ने मुझे रात के खाने पर आमं त कया। ये
सीधी-साद पाट थी। वहां पर एडना पु वएंस को िमला कर हम बीस के कर ब लोग थे। खाने
के बाद कुछ लोग ताश खेलने बैठ गये जब क दसरे
ू लोग आस पास बैठ कर बात करने लगे।
हमारे बीच स मोहन श

, ह नो ट

क बात चल पड़ । मने शेखी बघार क म स मोहन

यां जानता हंू । मने दावे के साथ कहा क म साठ सेकड के भीतर कमरे म कसी को भी

184

ह नोटाइज कर सकता हंू । म इतने आ म व ास के साथ बात कर रहा था क सबको मुझ

पर यक न हो गया। ले कन एडना ने व ास नह ं कया।

वह हँ सी," या बकवास है ? मुझे कोई ह नोटाइज कर ह नह ं सकता।"
"तुम," मने कहा,"एकदम सह य

हो। म तुमसे दस डॉलर क शत बद कर कहता

हंू क म तु ह साठ सेकड के भीतर सुला दं ग
ू ा।"

"ठ क है ," एडना ने कहा, "तो लग गयी शत"
"अब एक बात सुन लो। अगर बाद म तु हार तबीयत खराब हो गयी तो इसके िलए

मुझे दोष मत दे ना। हां, म जो कुछ क ं गा, बहत
यादा ग भीर नह ं होगा।"

मने इस बात क भरपू र कोिशश क क वह पीछे हट जाये ले कन वह अपनी बात पर

डट रह । एक म हला ने उसके आगे हाथ-पैर जोड़े क वह ये सब न करने दे ,"तुम तो एक दम
मूरखा हो," कहा उसने।

"शत अभी भी अपनी जगह पर है ।" एडना ने शांित से कहा।
"ठ क है ," मने जवाब दया,"म चाहता हंू क तुम सबसे अलग, अपनी पीठ द वार से

अ छ तरह से सटा कर खड़ हो जाओ ता क मुझे तु हारा पूरा का पूरा यान िमले।"

उसने नकली हँ सी हँ सते हए
ु मेर बात मान ली। अब तक कमरे म मौजूद सभी लोग

इसम दलच पी लेने लगे थे।

"कोई घड़ पर िनगाह रखे।" मने कहा।
"याद रखना," एडना ने कहा, "आप मुझे साठ सेकड के भीतर सुला दे ने वाले ह।"
"साठ सेकड के भीतर तुम एक दम बेहोश हो जाओगी।" मने जवाब दया।
"शु ," टाइम क पर ने कहा
तुरंत ह मने दो-तीन ामाई हरकत क ं, उसक आंख म घूर-घूर कर दे खा, तब म
उसके चेहरे के िनकट गया और उसके कान म फुसफुसाया ता क दसरे
ू लोग न सुन सक,"झूठ
मूठ का नाटक करो।" और मने हवा म हाथ लहराये, "तुम बेहोश हो जाओगी, बेह ोश, बेह ोश!!"
तब म अपनी जगह पर वा पस आया और वह लड़खड़ाने लगी। तुरंत ह मने उसे
अपनी बाह म थाम िलया। दशक म से दो िच लाये।
"ज द करो," मने कहा, "इसे द वान पर िलटाने म कोई मेर मदद करे ।"
जब उसे होश आया तो उसने है रानी से चार तरफ दे खा और कहा क वह थकान
महसूस कर रह है ।
हालां क वह अपना तक जीत सकती थी और सभी उप थत लोग के सामने अपनी
बात िस कर सकती थी फर भी उसने खुशी-खुशी अपनी जीत को हार म बदल जाने दया।
उसक इस बात से म उसका मुर द हो गया और मुझे तस ली हो गयी क उसम हा य बोध
है ।

185

मने नाइ स म चार कॉमेड फ म बनायीं ले कन चूं क टू डयो सु वधाएं
संतोषजनक नह ं थीं, म अपने आपको जमा हआ
ु या संतु अनुभव नह ं करता था। इसिलए
मने एंडरसन को सुझाव दया क म लॉस एंजे स चला जाता हंू । वहां पर उनके पास कॉमेड

फ म बनाने के िलए बेह तर सु वधाएं थीं। वे सहमत हो गये ले कन ये सहमित एक दसरे
ू ह

कारण से थी। म टू डयो पर एकािधकार जमाये बैठा था जो क तीन क पिनय के लायक
बड़ा या पया

प से टाफ यु

नह ं था। इसिलए उ ह ने बॉयल हाइ स पर एक छोटा-सा

टू डयो कराये पर लेने के िलए बातचीत क । ये टू डयो लॉस एंजे स के बीच -बीच था।
जस व

हम वहां पर थे, दो युवा लड़के, जो अभी कारोबार म बस, शु आत कर ह

रहे थे, आये और टू डयो क जगह कराये पर ले ली। उनके नाम थे हाल रोच और हारो ड
लॉयड।

मेर हर नयी फ म के साथ जैस-े जैसे मेर कॉमेड फ म क क मत बढ़ती गयी,

ऐसेने ने अ

यािशत शत लगानी शु कर द ं और वतरक से मेर दो र ल क कॉमेड के िलए

हर दन के िलए कम से कम पचास डॉलर का कराया वसूल करना शु कर दया। इस तरह
से वे मेर

येक फ म से अि म प से पचास हज़ार डॉलर जमा कर रहे थे।

उन दन म टॉल होटल पर म ठहरा हआ
ु था। ये एक ठ क-ठाक कराये वाला नया

ले कन आराम दायक होटल था। एक शाम मेरे काम से लौटने के बाद, लॉस एंजे स

ए जािमनर से मेरे िलए एक ज़ र टे िलफोन कॉल आया। उ ह यू याक से एक तार िमला था
जसे उ ह ने पढ़ कर सुनाया: यू याक ह पो ोम म हर शाम प

ह िमनट के िलए दो स ाह

तक आ कर दशन करने के िलए चाल चै लन को 25000 डॉलर दगे। इससे उनके काम म
बाधा नह ं पड़े गी।
मने त काल सैन

ांिस को म जी एम एंडरसन को फोन लगाया। दे र हो चुक थी

और म अगली सुबह तीन बजे तक उनसे बात नह ं कर पाया। फोन पर ह मने उ ह तार के
बारे म बताया और पूछा क या वे दो ह ते के िलए मुझे जाने दगे ता क म 25000 डॉलर
कमा सकूं। मने सुझाव दया क म यू याक जाते समय े न म ह कॉमेड बनाना शु कर
सकता हंू और वहां रहते हए
ु उसे पूरा भी कर लूंगा। ले कन एंडरसन नह ं चाहते थे क म ये
काम क ं ।

मेरे बेड म क खड़क होटल के भीतर हॉल क तरफ खुलती थी इसिलए वहां पर
कोई भी बात कर रहा होता तो उसक आवाज़ सभी कमर म गूंजती थी। टे िलफोन कने शन
अ छ तरह से काम नह ं कर रहा था। म दो ह ते के िलए अपने हाथ से प चीस हज़ार डॉलर
नह ं जाने दे सकता। ये बात मुझे कई बार िच ला कर कहनी पड़ ।
ऊपर के कसी कमरे क खड़क खुली और एक आवाज़ पलट कर ज़ोर से िच लायी,
"दफा करो इस हरामजादे को और सो जाओ, बदतमीज कह ं के!!"

186

एंडरसन ने फोन पर बताया क अगर म ऐसेने को दो र ल क एक और कॉमेड बना
कर दे दं ू तो वे मुझे प चीस हज़ार डॉलर दे दगे। उ ह ने वादा कया क अगले ह दन वे लॉस
एंजे स आ रहे ह और करार कर लगे। जब मने टे िलफोन पर बात पूर कर ली तो ब ी बंद

करके सोने जा ह रहा था क मुझे वह आवाज़ याद आयी, म ब तर से उठा, खड़क खोली
और ज़ोर से िच लाया, "भाड़ म जाओ!"
अगले दन एंडरसन प चीस हज़ार डॉलर के साथ लॉस एंजे स आये। यू याक क
मूल क पनी जसने यह

ताव रखा था, दो ह ते बाद ह दवािलया हो गयी। ऐसी थी मेर

क मत।
अब लॉस एंजे स वा पस लौट कर म पहले से यादा खुश था। हालां क बॉयल हाइ स
पर बने हए
टू डयो के आस-पास छोपड़-प टयां थीं, वहां रहने से मुझे एक फायदा से हआ

क म अपने भाई िसडनी के आस-पास ह रह सका। म उससे अ सर शाम को िमल लेता। वह

अभी भी क टोन म ह काम कर रहा था और ऐसेने के साथ मेरा करार ख म होने से एक
मह ना पहले उसका करार पूरा हो जाता। मेर सफलता का ये आलम था क िसडनी ये सोच
रहा था क वह अब अपना पूरा व
लोक यता आने वाली

मेरे कारोबार काम म ह लगाये। रपोट के अनुसार, मेर

येक कॉमेड फ म के साथ बढ़ती ह जा रह थी। हालां क लॉस

एंजे स म िसनेमा हॉल के बाहर लगने वाली ल बी-ल बी कतार को दे ख कर म अपनी
सफलता क सीमा क बारे म जानता था, म इस बात को महसूस नह ं कर पाया क बाक
जगह मेर सफलता कतनी बढ़ है । यू याक म मेरे च र , कैले टर के खलौने और मूितयां
सभी डपाटमट टोर और ग टोर म बक रहे थे। जगफे ड लड़ कयां चाल चै लन गीत
गा रह थीं और अपने खूबसूरत चेहर पर चाल नु मा मूछ लगा कर, डब है ट लगा कर, बड़े जूते
और बैगी पट पहन कर अपनी खूबसूरती का नाश मार रह थीं। वे दोज़ चाल चै लन फ ट
गीत गा रह थीं।
हमारे पास हर तरह के कारोबार

ताव का तांता लगा रहता। इनम कताब ,

कपड़ , मोमब य , खलौन , िसगरेट और टू थपे ट जैसी चीज के

ताव होते। इसके

अलावा शंसक क डाक के लगने वाले अ बार एक और ह परे शानी खड़ कर रहे थे। िसडनी

क ज़द थी क भले ह एक और सिचव रखने का खच उठाना पड़े , सभी खत का जवाब दया
जाना चा हये।
िसडनी ने एंडरसन साहब से इस बारे म बात क क मेर फ म को ट न फ म से
अलग से बेचा जाये। ये ठ क नह ं लगता था क सारा का सारा पैसा वतरक क ह जेब म
जाये। हालां क ऐसेने वाले मेर फ म क सैकड़

ितयां बना कर बेच रहे थे, ये फ म

वतरण के पुराने ढर पर ह बेची जा रह थीं। िसडनी ने सुझाव दया क बैठने क

मता के

अनुसार बड़े िथयेटर के िलए दाम बढ़ाये जाने चा हये। इस योजना को लागू कया जाता तो

187

हरे क फ म से आने वाली रकम एक लाख डॉलर या उससे भी यादा बढ़ सकती थी। एंडरसन
साहब को ये योजना असंभव लगी। उ ह ये योजना पूरे मोशन प चस
खलाफ मोचा बांधने जैसी लगी। इस

ट क नीितय के

ट म सोलह हज़ार िथयेटर थे। फ म खर दने के

उनके िनयम और तर के बदले नह ं जा सकते थे। कुछ ह वतरक ऐसी शत पर फ म खर द
पाते।
बाद म पता चला क ऐसेने ने ब

का अपना पुराना तर का छोड़ दया है और जैसा

क िसडनी से सुझाव दया था, अब वे िथयेटर क बैठने क
रहे थे। इससे, जैसा क िसडनी ने कहा था, मेर

मता के अनुसार अपनी दर बढ़ा

येक कॉमेड फ म के िलए आने वाली

रकम एक लाख डॉलर हो गयी। इस खबर से मेरे कान खड़े हो गये। मुझे ह ते के िसफ बारह
सौ पचास डॉलर ह िमल रहे थे और म िलखने , अिभनय करने और िनदशन करने का सारा

काम कर रहा था। मने िशकायत करना शु कर दया क म बहत
यादा काम कर रहा हंू और

मुझे फ म बनाने के िलए थोड़े और समय क ज़ रत है । मेरे पास एक बरस का करार था

और म हर दो या तीन ह ते म कॉमेड फ म बना कर दे रहा था। ज द ह िशकागो म पूअर
साहब हरकत म आये। वे लॉस एंजे स के िलए े न म सवार हए
ु और एक अित र

चु गे के

प म यह करार कया क अब मुझे हर फ म के िलए दस हज़ार डॉलर का बोनस िमला

करे गा। इससे मेर सेहत को कुछ खुराक िमली।
लगभग इसी समय ड ड

यू ि

फथ ने अपनी ए पक फ म द बथ ऑफ ए नेशन

बनायी जसने उ ह चलिच िसनेमा के उ कृ िनदशक के प म था पत कर दया। इसम
कोई शक नह ं था क वे मूक िसनेमा के बेताज बादशाह थे। हालां क उनके काम म
अितनाटक यता होती थी और कई बार सीमाओं से बाहर और असंगत भी, ले कन ि

फथ क

फ म म मौिलकता क छाप होती थी जसक वज़ह से हर आदमी को उनक फ म दे खनी
होती।
डे िमले ने अपने कै रयर क शु आत द

ह प रं ग कोरस और कारमैन के एक

सं करण से क थी ले कन अपने मेल एंड फमेल के बाद उनका काम कभी भी चोली के पीछे
या है, से आगे नह ं जा सका। इसके बावज़ूद म उनक कारमैन से इतना यादा भा वत था
क मने इस पर दो र ल क एक हसन फ म बनायी थी। ये ऐसेने के साथ मेर आ खर
फ म थी। जब मने ऐसेने को छोड़ दया था तो उ ह ने सार कतरन को जोड़-जाड़ कर उसे
चार र ल क फ म बना दया था। इससे म बुर तरह से आहत हो गया और दो दन तक
ब तर पर पड़ा रहा। हालां क उनक ये करतूत बेई मानी भर थी, फर भी मेरा ये भला कर
गयी क उसके बाद मने अपने सभी करार म ये शत डलवानी शु कर द क मेरे पूरे कये
गये काम म कसी भी क म क कोई काट-छांट, उसे बढ़ाना या उसम छे ड़-छाड़ करना नह ं
चलेगा।

188

मेरे करार के ख म होने का समय िनकट आ रहा था, तभी पूअर साहब को ट पर
मेरे पास एक

ताव ले कर आये। उनका कहना था क इस

ताव का कोई मुकाबला नह ं

कर सकता। अगर म उ ह दो-दो र ल क बारह फ म बना कर दं ू तो वे मुझे साढ़े तीन लाख
डॉलर दगे। फ म िनमाण का खच वे उठायगे। मने उ ह बताया क कसी भी करार पर

ह ता र करने से पहले म चाहंू गा क डे ढ़ लाख डॉलर का बोनस पहले रख दया जाये। इस
बात ने पूअर साहब के साथ कसी भी क म क बातचीत पर वराम लगा दया।

भ व य! भ व य!! शानदार भ व य!! कहां ले जा रहा था भ व य!!! संभावनाएं
पागल कर दे ने वाली थीं। कसी हम खलन क तरह पैसा और सफलता हर दन और तेज
गित से बरस रहे थे। ये सब पागल कर दे ने वाला, डराने वाला था ले कन था है रान कर दे ने
वाला।
जस व

िसडनी यू याक म अलग-अलग

ताव क समी ा कर रहा था, म

कारमैन फ म का िनमाण पूरा करने म लगा हआ
ु था और सांता मोिनका म समु क तरफ

खुलने वाले एक घर म रह रहा था। कसी- कसी शाम म सांता मोिनका तटबंध दसरे
ू िसरे पर
बने नाट गुड वन के कैफे म खाना खा िलया करता था। नाट गुड वन को अमे रक मंच का
महानतम अिभनेता और ह क फु क कॉमेड करने वाला कलाकार समझा जाता था।
शे स पयर काल के अिभनेता और आधुिनक ह के-फु के कॉमेड कलाकार, दोन ह

प म

उनका बहत
ु ह शानदार कै रयर रहा था। वे सर हे नर इ वग के खास दो त थे और उ ह ने
आठ शा दयां क थीं। उनक

येक प ी अपने सौ दय के िलए िस होती। उनक पांचवीं

प ी मै सन इिलयट थी जसे वे तरं ग म आ कर "रोमन िसनेटर" कह कर पुकारते थे।
"ले कन वह वाकई खूबसूरत और बेहद बु
सुसं कृत य

थे और अपने व

मित थी," वे बताया करते। वे बहत
ु सहज

से कई बरस आगे थे। उनम गहरा हा य बोध था और अब

उ ह ने सब-कुछ छोड़-छाड़ दया था। हालां क मने उ ह मंच पर कभी अिभनय करते हए
ु नह ं
दे खा था, म उनका और उनक

ित ा का बहत
ु स मान करता था।

हम बहत
ु अ छे दो त बन गये और पतझड़ के दन क ठठु रती शाम एक साथ

सुनसान समंदर के कनारे चहलकदमी करते हए
ु गुज़ारते। िनचाट उदासी भरा माहौल सघन

हो कर मेर भीतर उ ेजना को आलो कत कर दे ता। जब उ ह पता चला क म अपनी फ म
पूर करके यू याक जा रहा हंू तो उ ह ने मुझे बहत
ु ह शानदार सलाह द । "तुमने आशातीत
सफलता पायी है । और अगर तुम जानते हो क कस तरह से अपने आप से िनपटना है तो

तु हारे सामने एक बहत
ु ह शानदार ज़ंदगी तु हार राह दे ख रह है । जब तुम यू याक पहंु चो
तो ॉडवे से परे ह रहना। जनता क िनगाह से दरू-दरू बने रहो। कई सफल अिभनेता यह

करते ह क वह दे खा जाना और तार फ कया जाना चाहते ह। इससे उनके म ह टू टते ह।"
उनक आवाज़ गहर और गूंज िलये हए
ु थी, "तु ह हर कह ं बुलाया जायेगा," उ ह ने कहना

189

जार रखा,"ले कन सभी यौते वीकार मत करो। िसफ एक या दो दो त चुन और बाक के
बारे म क पना करके ह संतु हो जाओ। कई महान अिभनेताओं ने हर तरह के सामा जक
िनमं ण वीकार करने क गलती क है । जॉन

यू ने भी यह गलती क थी। वे सामा जक

दायर म बहत
ु लोक य थे और उनके घर म चले जाया करते थे ले कन लोग थे क उनके
िथयेटर म नह ं जाते थे। जॉन

यू उ ह उनके ाइं ग म म ह िमल जाते थे। तुमने दिनया

को अपनी मु ठ म कर रखा है और तुम ऐसा करना जार रख सकते हो अगर तुम इससे
बाहर खड़े रहो।" उ ह ने वचार म खोये हए
ु कहा।

ये बहत
ु ह शानदार बात होतीं। कभी कभी उदास कर दे ने वाली। हम उजाड़ समु तट

पर पतझड़ के दन म गोधूिल क वेला म चलते बात करते रहते। नाट अपने कै रयर क
अंितम पायदान पर थे और म अपना कै रयर शु कर रहा था।

जब मने कारमैन का संपादन पूरा कर िलया तो मने फटाफट अपना थोड़ा बहत

सामान समेटा और अपने े िसंग म से सीधे ह
िलए छ: बजे क

टे शन क तरफ लपका ता क यू याक के

े न पकड़ सकूं। मने िसडनी को एक तार भेज दया क म कब चलूंगा और

कब पहंु चग
ूं ा।

ये धीमी गित वाली गाड़ थी और यू याक पहंु चने म पांच दन लगाती थी। म एक

खुले क पाटमट म अकेला बैठा हआ
ु था। उन दन मेरे कॉमेड मेक अप के बना मुझे
पहचाना नह ं जा सकता था। हम अमा रलो, टै सास, होते हए
ु द

णी ट से जा रहे थे। गाड़

वहां शाम को सात बजे पहंु चती थी। मने दाढ़ बनाने का फैसला कया ले कन मुझसे पहले ह
वाश म म दसरे

ू मुसा फर चले गये थे, इसिलए म इं तज़ार कर रहा था। नतीजा ये हआ

गाड़ जब अमा रले पहंु चने को थी, म अभी भी अपना अंडर वयर ह पहने था। जैसे-जैसे गाड़
ने टे शन म वेश कया, हम अचानक शोर शराबे भर उ ेजना ने घेर िलया। वाश म क

खड़क से झांकते हए
ु मने दे खा क टे शन पर बेइं तहा भीड़ जुट हई
ु है । चार तरफ, एक खंबे

से दसरे
ू ख बे तक झं डयां और पताकाएं लहरा रह थीं। लेटफाम पर कई ल बी मेज लगी

हई
ु थीं जन पर ना ता सजा हआ
ु था। मने सोचा, कसी थानीय राजा के वागत या वदाई
के िलए ये सारा ताम-झाम हो रहा होगा। मने अपने चेहरे पर

म लगानी शु क । ले कन

उ ेजना थी क बढ़ती ह जा रह थी। और फर प आवाज़ आनी लगीं,"कहां ह वे?", तभी
ड बे म भगदड़ मच गयी। गिलयारे म लोग-बाग शोर मचाते हए
ु आगे से पीछे और पीछे से

आगे भागे जा रहे थे।

"कहां है वे?, चाल चै लन कहां ह?"
"जी क हये!," मने कहा।
"अमा रलो, टै सास के मेयर क ओर से तथा आपके सभी शंसक क ओर से हम
आपको आमं त करते ह क आप हमारे साथ एक को ड

ं क और ना ता ल।"

190

मुझे अचानक हड़बड़ाहट क भावना ने घेर िलया।
"म इस हालत म कैसे जा सकता हंू ?" मने शे वंग

म के पीछे से कहा।

"ओह, आप कसी भी बात क परवाह न कर। चाल , बस े िसंग गाउन डाल ल और
जनता से िमल ल।"
ज द ज द म मने अपना चेहरा धोया और अध शेव क हालत म कमीज और टाई
डाली और अपने कोट के बटन बंद करता हआ
े न से बाहर आया।

तािलय क गड़गड़ाहट से मेरा वागत कया गया। मेयर साहब ने कहने क कोिशश

क : "िम टर चै लन, अमा रलो के आपके शंसक क ओर से . . .", ले कन लगातार
तािलय और हो-ह ले के बीच उनक आवाज़ डू ब गयी। उ ह ने एक बार फर से बोलना शु
कया, "िम टर चै लन, अमा रलो के आपके शंसक क ओर से म ..." तब भीड़ ने आगे क

तरफ ध का लगाया और मेयर मेरे ऊपर आ िगरे , और हम दोन ह

े न से जा टकराये। और

एक पल के िलए हालत ये हो गयी क वागत भाषण गया तेल लेने, पहले खुद क जान
बचायी जाये।
"पीछे हटो," भीड़ को पीछे धकेलते हए
ु और हमारे िलए रा ता बनाते हए
ु पुिलस वाले

िच लाये।

पूरे समारोह के िलए ह मेयर साहब के उ साह पर पानी फर चुका था और पुिलस
तथा मेरे ित थोड़ िचड़िचड़ाहट के साथ वे बोले, "ठ क है चाल , पहले हम ये सब खाना पीना
ह िनपटा ल, फर आप अपनी े न म सवार हो जाना।"
मेज पर ध का-मु क के बाद चीज थोड़ शांत हु और आ खरकार मेयर साहब

अपना भाषण दे ने म सफल हए।
ु उ ह ने मेज पर च मच ठकठकायी और बोले,"िम टर

चै लन, अमा रलो, टै सास के आपके िम उस खुशी के िलए आपके ित अपना आभार
कट करना चाहते ह जो आपने उ ह उनक तरफ से सड वच और कोला कोला क ये दावत
वीकार करके उ ह द है ।"
अपना श त गान पूरा कर लेने के बाद उ ह ने मुझसे पूछा क या म कुछ कहना
चाहंू गा। उ ह ने मुझसे आ ह कया क म मेज पर ह चढ़ जाऊं। मेज पर चढ़ कर म इस
आशय के कुछ श द बुदबुदाया क म अमा रलो म आ कर बेहद खुश हंू और इस

आ यजनक, रोमांचक वागत पा कर बहत
ु है रान हंू और म इसे अपनी बाक क ज़दगी के
िलए याद रखूंगा। वगैरह वगैरह। तब म बैठ गया और मेयर से बात करने क कोिशश करने
लगा।
मने उनसे पूछा क आ खर उ ह मेरे आगमन का पता ह कैसे चला।

191

"टै िल ाफ ऑपरे टर के ज रये," उ ह ने बताया, उ ह ने प

कया क मने जो तार

िसडनी को भेजा था, वह अमा रलो से रले हो कर गया था इसके बाद कै सास िसट , िशकागो
और यू याक गया था वह तार। और ऑपरे टर ने ये खबर ेस को दे द थी।
जब म े न म लौटा तो अपनी सीट पर जा कर वन ता क मूित बन कर बैठ गया।
एक पल के िलए मेरा दमाग एकदम सु न हो गया था। तभी पूरा का पूरा ड बा ह लोग क
आवा-जाह से गुलज़ार हो उठा। लोग गिलयारे से गुज़रते, मेर तरफ घूर कर दे खते और खींसे
िनपोरते। जो कुछ अमा रलो म हो गया था उसे न तो म मानिसक प से पचा ह पा रहा था
और न ह ढं ग से उसका आनंद ह ले पाया था। म बेह द उ े जत था। म तनाव म बैठा रहा।
एक ह व

म अपने आप को ऊपर और हताश महसूस करते हए।

े न के छूटने से पहले मुझे कई तार थमा दये गये थे। एक म िलखा था," वागत

चाल , हम क सास िसट म आपक राह दे ख रहे ह।" दसरा
था: "जब आप िशकागो पहंु चगे तो

एक िलमो जन आपक सेवा म हा ज़र होगी ता क आप एक टे शन से दसरे
टे शन पर जा

सक।" तीसरे तार म िलखा था: " या आप रात भर के िलए ठहरगे और लैक टोन होटल के
मेहमान बनगे!!" जैसे जैसे हम कै सास िसट के िनकट पहंु चते गये, रे ल क पट रय के दोन
तरफ लोग खड़े थे और शोर मचाते हए
ु अपने है ट हला रहे थे।

कै सास िसट का बड़ा-सा रे लवे टे शन लोग के हजू
ु म से अटा पड़ा था। बाहर जमा हो

रह और भीड़ को काबू म पाने म पुिलस को मु कल का सामना करना पड़ रहा थ। े न के

सहारे एक नसैनी लगा द गयी थी ता क म े न क छत पर चढ़ सकूं और सबको अपना चेहरा
दखा सकूं। मने अपने आपको वह श द दोहराते हए
ु सुना जो म अमा रलो म बोल कर आया

था। मेरे िलए और तार इं तज़ार कर रहे थे: " या म कूल और सं थाओं म जाऊंगा!!" मने

सारे तार अपने सूटकेस म ठूं स िलये ता क यू याक म उनका जवाब दया जा सके। क सास
िसट से ले कर िशकागो के रा ते म भी लोग वैसे ह रे ल जं शन पर और खेत म खड़े थे और
जब उनके सामने से े न गुज़रती तो हाथ हलाते। म बना कसी पूवा ह के इस सबका आनंद
लेना चाहता था ले कन म यह सोचता रहा क दिनया
जो है पागल हो गयी है । अगर कुछ

वांग भर कॉमेड फ म इस तरह क उ ेजना जगा सकती ह तो या सार

याित के बारे म

कुछ ऐसा नह ं था जो नकली था। मने हमेशा सोचा था क जनता मेर तरफ यान दे तो मुझे
अ छा लगेगा और अब जब जनता मुझे िसर आंख पर बठा रह थी तो मुझे अकेलेपन क
हताश करने वाली भावना का साथ मुझे अलग-थलग करती जा रह थी।
िशकागो म जहां पर े न और टे शन बदलना ज़ र था, बाहर जाने के रा ते पर भीड़
जुट हई
ु थी और मुझे धकेल कर एक िलमो जन म बठा दया गया। मुझे लैक टोन टे शन
ले जाया गया और यू याक के िलए अगली े न पकड़ने तक आराम करने के िलए एक सुइट
दे दया गया।

192

लैक टोन होटल म यू याक के पुिलस मुख क तरफ से एक तार आया जसम
मुझसे अनुरोध कया गया था क म उन पर ये अहसान क ं क तय शुदा काय म के
अनुसार ड से

ल टे शन पर उतरने के बजाये 125वीं

ट पर ह उतर जाऊं य क वहां

आपके आने क उ मीद म अभी से भीड़ जुटनी शु हो गयी है ।
125वीं

ट पर िसडनी एक िलमो जन ले कर मुझे लेने आया था। वह तनाव और

उ ेजना म था। वह फुसफुसाया," या याल है इस सबके बारे म। टे शन पर सुबह से लोग
क भीड़ उमड़नी शु हो गयी है । और जब से तुम लॉस एंजे स से चले हो, ेस रोज़ाना
बुले टन जार कर रह है ।" उसने मुझे एक अखबार दखाया जसम बड़े बड़े फांट म िलखा था,
"वो यहां है !!"
दसर
है ड लाइन थी: "चाल छुपते फर रहे ह।"

होटल जाते समय रा ते म उसने बताया क उसने युचूअल फ म काप रे शन के
साथ एक सौदा कया है जसम मुझे छ: लाख स र हज़ार डॉलर िमलगे और ये मुझे दस
हज़ार डॉलर ित स ाह के हसाब से दये जायगे और बीमे का टे ट पास कर लेने के बाद
मुझे करार के िलए साइिनंग रािश के प म प

ह लाख डॉलर दये जायगे।

वक ल के साथ उसक एक लंच मी टं ग थी जसम उसे बाक सारा दन लग जाने
वाला था। इसिलए वह मुझे लाज़ा म, जहां उसने मेरे िलए एक कमरा बुक करवा रखा था,
छोड़ने के बाद चला जायेगा और मुझसे अगली सुबह िमलेगा।
जैसा क हे मलेट कहता है: "अब म अकेला हंू !!" उस दोपहर म गिलय म भटकता

रहा और दकान
क खड़ कय म दे खता रहा, और बेवजह गिलय के नु कड़ पर कता रहा।

अब मेरा या होगा। यहां म था अपने कै रयर के िशखर पर। एकदम चु त द ु

त कपड़ म,

और मेरे पास कोई जगह नह ं थी जहां म जाता। लोग से, रोचक लोग से कोई कैसे िमलता
है !!
मुझे ऐसा लगा क हर कोई मुझे जानता है ले कन म कसी को भी नह ं जानता था।
म अंतमुखी हो गया। अपने आप पर दया आने लगी और मुझ पर उदासी तार होने लगी।
मुझे याद है एक बार क टोन के एक सफल कॉमे डयन ने कहा था,"और अब चूं क
हम पहंु च चुके ह, चाल , ये सब या है ।"
"कहां पहंु चे ह?" मने पूछा था।

मुझे नाट गुड वन क सलाह याद आयी," ॉडवे से दरू ह रहना।" जहां तक मेरा सवाल

है , ॉडवे मेरे िलए रे िग तान है । मने उन पुराने दो त के बारे म सोचा ज ह म सफलता के

इस भ य िशखर पर िमलना चाहंू गा। या मेरे पुराने दो त थे यू याक म या लंदन म या कह ं
भी। म कसी खास दो त से िमलना चाहता था। शायद केली है ट से। म जब से फ म म
आया था, मने उसके बारे म नह ं सुना था। उसक

ित

या मज़ेदार होती।

193

उस व

वह यू याक म अपनी बहन के पास रह रह थी। िमसेज

क गॉ ड। म

फ थ एवे यू तक चल कर गया। उसक बहन का पता था - 834। म घर के बाहर एक पल के
िलए ठठका। है रान हो कर सोचता रहा क वह वहां होगी या नह ं ले कन म दरवाजा
खटखटाने क ह मत नह ं जुटा पाया। शायद वह खुद बाहर आ जाये और म अचानक ह उसे
िमल जाऊं। म वहां पर लगभग आधा घंटे तक इं तज़ार करता रहा, गली के च कर काटता रहा
ले कन कोई बाहर नह ं आया और न ह कोई अंदर ह गया।
म कोल बस सकल पर चाइ

स रे तरां म चला गया और आटे के केक और कॉफ

का आडर दया। मुझे लापरवाह भरे अंदाज म सव कया गया। तब मने वेटर को म खन क
एक और ट कया के िलए आडर दे दया। तभी उसने मुझे पहचान िलया। उसके बाद तो बस
चेन रए शन शु हो गया और भीतर तथा बाहर खूब भीड़ जुट आयी। भीड़ म से कसी तरह
से अपने िलए रा ता बनाना पड़ा और वहां से जाती एक टै सी ले कर गायब हो जाना पड़ा।
दो दन तक म बना कसी से प रिचत से िमले यू याक म भटकता रहा। म
खुशगवार उ ेजना और हताशा के बीच डू ब उतरा रहा था। इस बीच बीमा डॉ टर ने मेर जांच
कर ली थी। कुछ दन बाद िसडनी होटल म आया। वह खुशी से फूला नह ं समा रहा था,"सब
कुछ तय हो गया है । तुमने बीमा टे ट पास कर िलया है।"
इसके बाद शु हु करार पर ह ता र करने क औपचा रकताएं। डे ढ़ लाख का चेक

लेते हए
ु मेरे फोटो िलये गये। उस शाम म टाइ स
टाइ स ब डं ग पर इलै

वायर म भीड़ के बीच खड़ा था जब

क साइन पर खबर आ रह थी - "चै लन ने युचूअल के साथ

670000 डॉलर सालाना पर करार कया।"
म खड़ा दे खता रहा और इसे व तुपरक हो कर पढ़ता रहा मानो ये सब कसी और के
िलए हो। मुझ पर इतना कुछ बीत चुका था क मेर संवेदनाएं चुक गयी थीं।

194

बारह
अकेलापन िघनौना होता है । इसम उदासी का ह का सा घेरा होता है , आक षत कर
पाने या िच जगा पाने क अपया ता होती है इसम। कई बार आदमी इसक वज़ह से थोड़ा
शिमदा भी होता है । ले कन कुछ हद तक अकेलापन हर आदमी के िलए थीम क तरह होता
है । अलब ा, मेरा अकेलापन कुं ठत करने वाला था य क म दो ती करने क सार ज़ रत
पूर करता था। म युवा था, अमीर था और बड़ ह ती था। इसके बावज़ूद म यू याक म
अकेला और परे शान हाल घूम रहा था। मुझे याद है म अं ेज़ी संगीत जगत क कॉमेड
खूबसूरत जोसी कॉिल स से उस व

टार,

अचानक ह िमल गया था जब वह फ थ एवे यू पर

चली जा रह थी।
"ओह," उसने सहानुभूित पूण तर के से कहा,"आप अकेले या कर रहे ह?"
मुझे ऐसा लगा मानो मुझे कुछ यारा सा अपराध करते हए
ु पकड़ िलया गया हो। म

मु कुराया और बोला,"म तो बस, ज़रा दो त के साथ लंच करने के िलए जा रहा था," ले कन
काश, मने उससे सच कह दया होता क म त हा हंू और उसे लंच पर ले जाना मुझे अ छा
लगता, िसफ मेरे संकोच ने ह मुझे ऐसा करने से रोका।

उसी दोपहर को म मै ोपॉिलटन ओपेरा हाउस के पास ह चहल कदमी कर रहा था क
म डे वड बेला को के दामाद मॉ रस गे ट से जा टकराया। म मॉ रस से लॉस एंजे स म िमल
चुका था। उसने अपने कै रयर क शु आत टकट लैक के प म क थी। ये धंधा उस व
बहत
ु फल फूल रहा था जब म पहली बार यू याक आया था। ( टकट लैक वह आदमी होता
है जो िथयेटर म सबसे अ छ सीट पहले खर द कर रख लेता है और बाद म िथयेटर के बाहर
खड़ा हो कर फायदे म बेचता है ।) मॉ रस ने िथयेटर के धंधे म आशातीत सफलता हािसल क
थी। इसका सव च ब द ु था उसके ारा बनायी गयी द िमरै कल जसका िनदशन मै स
रे नहा ट ने कया था। मॉ रस ला वक था। चेहरा उसका पीला, और बड़ बड़ कंचे जैसी

आंख, बड़ा सा मुंह, और मोटे ह ठ। वह ऑ कर वाइ ड का भ ा सं करण नज़र आता था। वह
बहत
ु ह भावुक क म का आदमी था जो जब बोलता था तो ऐसा लगता था मानो आपको
धमका रहा हो।

"आप कहां गायब हो गये थे ीमान," इससे पहले क म जवाब दे पाता, वह आगे
बोला, "आपने मुझे स पक य नह ं