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e-mail : laxmishankaracharya@yahoo.in
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-------------------------------------------------------------------------------------------22 " ----------- फपय हभनें उनके फीच 'फ़माभत ' के ददन तक के लरए वैभनस्म औय द्वेष की आग बड़का दी,
औय अल्राह जल्द उन्हें फता दे गा जो कुछ वे कयते यहे हैं ।"
-( 6 ,5 ,14 )
23 - " वे चाहते हैं की जजस तयह से वे 'काफिय' हुए हैं उसी तयह से तभ
ु बी ' काफिय ' हो जाओ , फपय तभ
ु एक
जैसे हो जाओ तो उनभें से फकसी को अऩना साथी न फनाना जफ तक वे अल्राह की याह भें दहजयत न कयें ,

औय मदद वे इससे फपय जावें तो उन्हें जहाॉ कहीॊ ऩाओ ऩकड़ो औय उनका ( ़त्र ) वध कयो । औय उनभें से
फकसी को साथी औय सहामक भत फनाना ।"
-( 5 , 4 , 89 )
24 - " उन ( काफियों ) से रड़ो ! अल्राह तुम्हाये हाथों उन्हें मातना दे गा , औय उन्हें रुसवा कये गा औय उनके
भु़ाफरे भें तुम्हायी सहामता कये गा , औय 'ईभान ' वारों के ददर ठॊ डे कये गा ।"
-( 10 , 9 , 14 )
उऩयोक्त आमतों से स्ऩष्ट है की इनभें इष्माा, द्वेष , घण
ृ ा , कऩट, रड़ाई-झगडा, रूट-भाय औय हत्मा कयने के

आदे श लभरते हैं । इन्हीॊ कायणों से दे श व ववदे श भें भुजस्रभों के फीच दॊ गे हुआ कयते हैं ।
ददल्ऱी प्रशासन ने सन ् 1985 में सर्व श्री इन्द्रसेन शमाव और राजकुमार आयव के वर्रुद्ध ददल्ऱी के मैट्रोपोलऱटन
मैजजस्ट्ट्रे ट की अदाऱत में , उक्त पत्रक छापने के आरोप में मुक़द्दमा ककया था । न्द्यायाऱय ने 31 जुऱाई 1986
को उक्त दोनों महानुभार्ों को बरी करते हुए ननर्वय ददया कक:
------------------------------------------------------------------------------( 34 )
-------------------------------------------------------------------------------

18

" कुरआन मजीद की पवर्त्र पस्ट्
ु तक के प्रनत आदर रखते हुए उक्त आयतों के सऺ
ू म अध्यन से स्ट्पष्ट होता है
कक ये आयतें बहुत हाननकारक हैं और घर्
ु ऱमानों और दे श के अन्द्य र्गों में
ृ ा की लशऺा दे ती हैं, जजससे मस
भेदभार् को बढार्ा लमऱने की संभार्ना होती है ।"

दहन्द्द ू रायटसव फोरम , नयी ददल्ऱी - 27 द्र्ारा पन
ु मदुव रत एर्ं प्रकालशत ।

ऊऩय ददए गए इस ऩैम्परेट का सफसे ऩहरे ऩोस्टय छाऩा गमा था । जजसे श्री इन्रसेन शभाा ( तत्कारीन उऩ
प्रधान, दहन्द ू भहासबा, ददल्री ) औय श्री याज कुभाय आमा ने छऩवामा था । इस ऩोस्टय भें कुयआन भजीद की
आमतें , भोहम्भद पारूख खाॊ द्वाया दहॊदी अनव
ु ाददत तथा भक्तफा अर हसनात याभऩयु से 1996 भें प्रकालशत

कुयआन भजीद से री गई थीॊ । मह ऩोस्टय छऩने के कायण इन दोनों रोगों ऩय इॊडडमन ऩेनर कोड की धया

153 ए औय 165 ए के अॊतगात ( एप० आइ० आय० 237/83मू0 /एस,235ए, 1ऩी०सी० हौज़ ़ाज़ी , ऩुलरस स्टे शन

ददल्री ) भें भु़द्दभा चरा था जजसभें उक्त िैसरा हुआ था ।
अफ हभ दे खेंगे की क्मा इस ऩैम्परेट की मह आमतें वास्तव भें ववलबन्न वगों के फीच घण
ृ ा पैराने व झगड़ा
कयने वारी हैं ?

पैम्फऱेट में लऱखी पहऱे क्रम की आयत है :
1 - ' फपय जफ हयाभ के भहीने फीत जाएॉ तो " भुशरयकों ' को जहाॉ कहीॊ ऩाओ ़त्र कयो , औय ऩकड़ो , औय

उन्हें घेयो , औय हय घात की जगह उनकी ताक भें फैठो। फपय मदद वे 'तौफा' कय रें नभाज़ ़ामभ कयें औय,
ज़कात दें , तो उनका भागा छोड़ दो । नन:सॊदेह अल्राह फड़ा ऺभाशीर औय दमा कयने वारा है ।"
-सूया 9 आमत-5
-----------------------------------------------------------------------------------------------( 35 )
-----------------------------------------------------------------------------------------------इस आमत के सन्दबा भें -जैसा फक हज़यत भह
ु म्भद ( सल्र० ) की जीवनी से स्ऩष्ट है की भक्का भें औय भदीना
जाने के फाद बी भश
ु रयक काफिय कुयै श , अल्राह के यसर
ू ( सल्र० ) के ऩीछे ऩड़े थे । वह आऩ को सत्म-धभा

इस्राभ को सभाप्त कयने के लरए हय सॊबव कोलशश कयते यहते । काफिय कुयै श ने अल्राह के यसूर को कबी
चैन से फैठने नहीॊ ददमा । वह उनको सदै व सताते ही यहे । इसके लरए वह सदै व रड़ाई की साजजश यचते
यहते ।
अल्राह के यसूर ( सल्र०) के दहजयत के छटवें सार ज़ी़दा भहीने भें आऩ ( सल्र० ) सैंकड़ों भुसरभानों के

साथ हज के लरए भदीना से भक्का यवाना हुए । रेफकन भुनाफपकों ( मानन कऩटचारयमों ) ने इसकी ऽफय ़ुयै श
को दे दी । ़ुयै श ऩैाम्फय भुहम्भद ( सल्र० ) को घेयने का कोई भौ़ा हाथ से जाने न दे ते । इस फाय बी वह
घात रगाकय यस्ते भें फैठ गमे । इसकी ऽफय आऩ ( सल्र० ) को रग गई । आऩने यास्ता फदर ददमा औय

भक्का के ऩास हुदैबफमा कॉु ए के ऩास ऩड़ाव डारा । कॉु ए के नाभ ऩय इस जगह का नाभ हुदैबफमा था ।
जफ ़ुयै श को ऩता चरा फक भह
ु म्भद अऩने अनुमामी भुसरभानों के साथ भक्का के ऩास ऩहुॉच चक
ु े हैं औय

हुदैबफमा ऩय ऩड़ाव डारे हुए हैं , तो काफियों ने कुछ रोगों को आऩ की हत्मा के लरए हुदैबफमा बेजा, रेफकन वे
सफ हभरे से ऩहरे ही भुसरभानों द्वाया ऩकड़ लरए गमे औय अल्राह के यसर
ू ( सल्र० ) के साभने रामे गमे
। रेफकन आऩने उन्हें ारती का एहसास कयाकय भाि कय ददमा ।

19

उसके फाद रड़ाई-झगड़ा, खन
ू -ऽयाफा टारने के लरए हज़यत उस्भान ( यजज़० ) को ़ुयै श से फात कयने के लरए

बेजा । रेफकन ़ुयै श ने हज़यत उस्भान ( यजज़०) को ़ैद कय लरमा । उधय हुदैबफमा भें ऩड़ाव
-----------------------------------------------------------------------------------------------( 36 )
-----------------------------------------------------------------------------------------------डारे अल्राह के यसर
ू ( सल्र० ) को ऽफय रगी फक हज़यत उस्भान ( यजज़० ) ़त्र कय ददए गमे । मह सन
ु ते ही
भस्
ु रभान हज़यत उस्भान ( यजज़० ) के ़त्र का फदरा रेने के लरमे तैमायी कयने रगे ।

जफ ़ुयै श को ऩता चरा फक भस्
ु रभान अफ भयने-भायने को तैमाय हैं औय अफ मद्ध
ु ननजचचत है तो फातचीत के
लरमे सह
ु ै र बफन अम्र को हज़यत भह
ु म्भद ( सल्र० ) के ऩास हुदैबफमा बेजा । सह
ु ै र से भारभ
ू हुआ फक उस्भान
( यजज़० ) का ़त्र नहीॊ हुआ वह ़ुयै श फक ़ैद भें हैं । सह
ु ै र ने हज़यत उस्भान ( यजज़० ) को ़ैद से आज़ाद
कयने व मद्ध
ु टारने के लरमे कुछ शातें ऩेश कीॊ ।

[ ऩहरी शता थी- इस सार आऩ सफ बफना हज फकमे रौट जाएॉ । अगरे सार आएॊ रेफकन तीन ददन फाद चरे
जाएॉ ।
[ दस
ू यी शता थी- हभ ़ुयै श का कोई आदभी भुस्रभान फन कय मदद आए तो उसे हभें वाऩस फकमा जामे ।
रेफकन मदद कोई भुस्रभान भदीना छोड़कय भक्का भें आ जाए, तो हभ वाऩस नहीॊ कयें गे ।

[ तीसयी शता थी- कोई बी ़फीरा अऩनी भज़ी से ़ुयै श के साथ मा भुसरभानों के साथ शालभर हो सकता है

[ सभझौते भें चौथी शता थी- फक:- इन शतों को भानने के फाद ़ुयै श औए भुसरभान न एक दस
ु ये ऩय हभरा
कयें गे औय न ही एक दस
ु ये के सहमोगी ़फीरों ऩय हभरा कयें गे । मह सभझौता 10 सार के लरए हुआ ,
हुफैददमा सभझौते के नाभ से जाना जाता है ।

हाराॉफक मह शतें एक तयिा औय अन्मामऩूणा थीॊ, फपय बी शाॊनत औय सब्र के दत
ू भुहम्भद ( सल्र० ) ने इन्हें
स्वीकाय कय लरमा , जजससे शाॊनत स्थावऩत हो सके ।

रेफकन सभझौता होने के दो ही सार फाद फनू-फक्र नाभक
------------------------------------------------------------------------------------------------( 37 )
-------------------------------------------------------------------------------------------------़फीरे ने जो भक्का के ़ुयै श का सहमोगी था, भस
ु रभानों के सहमोगी ़फीरे खज़
ु ाआ ऩय हभरा कय ददमा ।
इस हभरे भें ़ुयै श ने फनू-फक्र ़फीरे का साथ ददमा ।

खज़
ु ाआ ़फीरे के रोग बाग कय हज़यत भह
ु म्भद ( सल्र० ) के ऩास ऩहुॊचे औय इस हभरे फक ऽफय दी ।
ऩैाम्फय भह
ु म्भद ( सल्र०) ने शाॊनत के लरए इतना झुक कय सभझौता फकमा था । इसके फाद बी ़ुयै श ने
धोखा दे कय सभझौता तोड़ डारा ।

अफ मुद्ध एक आवचमकता थी , धोखा दे ने वारों को दजडडत कयना शाॊनत फक स्थाऩना के लरए ज़रूयी था । इसी
ज़रुयत को दे खते हुए अल्राह फक ओय से सूया 9 की आमत नाजज़र हुई ।
इनके नाजज़र होने ऩय नफी ( सल्र० ) ने सूया 9 की आमतें सुनाने के लरए हज़यत ( यजज़० ) को भुशरयकों के ऩास
बेजा । हज़यत अरी ( यजज़० ) ने जाकय भुशरयकों से मह कहते हुए फकभुसरभानों के लरए अल्राह का ियभान
आ चक
ु ा है उन को सूया 9 की मह आमत सुना दी-

20

( ऐ भुसरभानों ! अफ ) ऽुदा औय उसके यसूर की तयि से भुशरयकों से, जजन तुभ ने अह्द ( मानन सभझौता )
कय यखा था, फे-ज़ायी ( औय जॊग की तैमायी ) है । (1 )

तो ( भुशरयको ! तुभ ) ज़भीन भें चाय भहीने चर फपय रो औय जान यखो फक तुभ को आजजज़ न कय सकोगे
औय मह बी फक ऽद
ु ा काफियों को रुसवा कयने वारा है । ( 2 )

औय हज्जे-अकफय के ददन ऽद
ु ा औय उसके यसूर फक तयि से आगाह फकमा जाता है फक ऽद
ु ा भुशरयकों से
फेज़ाय है औय उसका यसूर बी ( उन से दस्तफयदाय है ) । ऩस अगय तुभ तौफा कय रो , तो तुम्हाये ह़ भें

फेहतय है औय न भानो ( औय ऽद
ु ा से भु़ाफरा कयो ) तो जान यखो
----------------------------------------------------------------------------------------------( 38 )
----------------------------------------------------------------------------------------------फक तभ
ु ऽद
ु ा को हया नहीॊ सकोगे औय ( ऐ ऩैाम्फय ! ) काफियों को द:ु ख दे ने वारे अज़ाफ फक ऽफय सन
ु ा दो । (
3)
-कुयआन, ऩाया 10 , सूया 9 , आमत- 1 ,2 ,3 ,
अरी ने भुशरयकों से कह ददमा फक " मह अल्राह का ियभान है अफ सभझैता टूट चक
ु ा है औय मह तुम्हाये

द्वाया तोड़ा गमा है इसलरमे अफ इज़्ज़त के चाय भहीने फीतने के फाद तुभ से जॊग ( मानन मुद्ध ) है ।
"
सभझौता तोड़ कय हभरा कयने वारों ऩय जवाफी हभरा कय उन्हें कुचर दे ना भुसरभानों का ह़ फनता था,
वह बी भक्के के उन भुशरयकों के ववरुद्ध जो भुसरभानों के लरए सदै व से अत्माचायी व आक्रभणकायी थे ।
इसलरमे सवोच्च न्मामकताा अल्राह ने ऩाॊचवीॊ आमत का ियभान बेजा ।

इस ऩाॊचवी आमत से ऩहरे वारी चौथी आमत " अर-फत्ता, जजन भुशरयकों के साथ तुभ ने अह्द फकमा हो, औय
उन्होंने तुम्हाया फकसी तयह का ़ुसूय न फकमा हो औय न तुम्हाये भु़ाफरे भें फकसी फक भदद की हो, तो जजस
भुद्दत तक उसके साथ अह्द फकमा हो , उसे ऩूया कयो ( फक ) ऽद
ु ा ऩयहे ज़गायों को दोस्त यखता है ।"
- कुयआन, ऩाया 10 , सूया 9 , आमत-4

से स्ऩष्ट है फक जॊग का मह एरान उन भुशरयकों के ववरुद्ध था जजन्होनें मुद्ध के लरए उकसामा, भजफूय फकमा,

उन भुशरयकों के ववरुद्ध नहीॊ जजन्होनें ऐसा नहीॊ फकमा । मुद्ध का मह एरान आत्भयऺा व धभायऺा के लरए था

अत: अन्मानममों , अत्माचारयमों द्वाया ज़फदस्ती थोऩे गमे मुद्ध से अऩने फचाव के लरए फकमे जाने वारा नहीॊ
कहा जा सकता ।
----------------------------------------------------------------------------------------------( 39 )
----------------------------------------------------------------------------------------------अत्माचारयमों औय अन्मानममों से अऩनी व धभा की यऺा के लरए मद्ध
ु कयना औय मद्ध
ु के लरए सैननकों को
उत्सादहत कयना धभा सम्भत है ।

इस ऩचे को छाऩने व फाॉटने वारे रोग क्मा मह नहीॊ जानते फक अत्माचारयमों औय अन्मानममों के ववनाश के
लरए ही मोगेचवय श्री कृष्ण ने अजन
ुा को गीता का उऩदे श ददमा था । क्मा मह उऩदे श रड़ाई-झगड़ा कयने वारा
मा घण
ृ ा पैराने वारा है ? मदद नहीॊ, तो फपय कुयआन के लरए ऐसा क्मों कहा जाता है ?

फपय मह सूया उस सभम भक्का के अत्माचायी भुशरयकों के ववरुद्ध उतायी गमी । जो अल्राह के यसूर के ही

21

बाई-फन्धु ़ुयै श थे । फपय इसे आज के सन्दबा भें औय दहन्दओ
ु ॊ के लरए क्मों लरमा जा यहा है ? क्मा दहन्दओ
ु ॊ
व अन्म ाैयभुजस्रभों को उकसाने औय उनके भन भें भुसरभानों के लरए घण
ृ ा बयने तथा इस्राभ को फदनाभ
कयने की घणृ णत साजज़श नहीॊ है ?

पैम्फऱेट में लऱखी दस
ु रे क्रम की आयत है :
2 - " हे 'ईभान' राने वारों ! 'भुशरयकों' ( भूनताऩूजक ) नाऩाक हैं ।"
- सूया 9 , आमत- 28

रगाताय झगड़ा-िसाद, अन्माम-अत्माचाय कयने वारे अन्मामी , अत्माचायी अऩववत्र नहीॊ, तो औय क्मा हैं ?
पैम्फऱेट में लऱखी तीसरी क्रम की आयत है :
3 - " नन:सॊदेह ' काफिय' तुम्हाये खर
ु े दचु भन हैं ।"
- सूया 4 , आमत-101

वास्तव भें जान-फझ
ू कय इस आमत का एक अॊश ही ददमा गमा है । ऩयू ी आमात ध्मान से ऩढ़ें - " औय जफ
तुभ सिय को जाओ, तो तुभ ऩय कुछ गुनाह नहीॊ फक नभाज़ को कभ ऩढो, फशते फक तुभको
------------------------------------------------------------------------------------------------( 40 )
------------------------------------------------------------------------------------------------डय हो फक काफिय रोग तुभको ईज़ा ( तकरीि ) दें गे । फेशक काफिय तुम्हाये खर
ु े दचु भन हैं ।"
-कुयआन, ऩाया 5 , सूया 4 , आमत-101

इस ऩूयी आमात से स्ऩष्ट है फक भक्का व आस-ऩास के काफिय जो भुसरभानों को सदै व नु़सान ऩहुॉचाना
चाहते थे ( दे णखए हज़यत भुहम्भद सल्र० की जीवनी ) । ऐसे दचु भन काफियों से सावधान यहने के लरए ही इस
101 वीॊ आमात भें कहा गमा है :- 'फक नन:सॊदेह ' काफिय ' तुम्हाये खर
ु े दचु भन हैं ।'

इससे अगरी 102 वीॊ आमात से स्ऩष्ट हो जाता है जजसभें अल्राह ने औय सावधान यहने का ियभान ददमा है
फक :
औय ( ऐ ऩैाम्फय ! ) जफ तुभ उन ( भुजादहदों के रचकय ) भें हो औय उनके नभाज़ ऩढ़ाने रगो, तो चादहए फक

एक जभाअत तुम्हाये साथ हथथमायों से रैस होकय खड़ी यहे , जफ वे सज्दा कय चक
ु ें , तो ऩये हो जाएॉ , फपय दस
ू यी
जभाअत , जजसने नभाज़ नहीॊ ऩढ़ी ( उनकी जगह आमे औय होलशमाय औय हथथमायों से रैस होकय ) तम्
ु हाये साथ
नभाज़ अदा कये । काफिय इस घात भें हैं फक तभ
ु ज़या अऩने हथथमायों औय अऩने साभानों से गाफिर हो
जाओ, तो तभ
ु ऩय एक फायगी हभरा कय दें ।
-कुयआन, ऩाया 5 , सयू ा 4 , आमत-102

ऩैाम्फय भुहम्भद ( सल्र०) फक जीवनी व ऊऩय लरखे तथ्मों से स्ऩष्ट है फक भुसरभानों के लरए काफियों से

अऩनी व अऩने धभा फक यऺा कयने के लरए ऐसा कयना आवचमक था । अत: इस आमत भें झगड़ा कयने, घण
ृ ा
पैराने मा कऩट कयने जैसी कोई फात नहीॊ है , जैसा फक ऩैम्परेट भें लरखा गमा है । जफफक जान-फूझ कय

22

कऩटऩण
ू ा ढॊ ग से आमात का भतरफ फदरने के लरमे आमत के केवर एक अॊश को लरख कय
-------------------------------------------------------------------------------------------------( 41 )
-------------------------------------------------------------------------------------------------औय शेष नछऩा कय जनता को वयगाराने , घण
ृ ा पैराने व झगड़ा कयने का कामा तो वे रोग कय यहे हैं, जो इसे
छाऩने व ऩयू े दे श भें फाॉटने का कामा कय यहे हैं ।जनता ऐसे रोगों से सावधान यहे ।
में लऱखी चौथे क्रम कक आयत है :
4 - "हे 'ईभान' रेन वारों ! ( भुसरभानों !) उन 'काफियों' से रड़ो जो तुम्हाय आस-ऩास हैं, औय चादहमे फक वे तुभभें

सख्ती ऩामें ।"

-सयू ा 9 , आमत-123

ऩैाम्फय भह
ु म्भद ( सल्र० ) फक जीवनी व ऊऩय लरखे जा चक
ु े तथ्मों से स्ऩष्ट है फक भस
ु रभानों को काफियों
से अऩनी व अऩने धभा फक यऺा कयने के लरमे ऐसा कयना आवचमक था । इसलरए इस आत्भयऺा वारी
आमात को झगड़ा कयने वारी नहीॊ कहा जा सकता ।
पैम्फऱेट में लऱखी 5र्ें क्रम कक आयत है :
5 - ; जजन रोगों ने हभायी ' आमतों ' का इॊकाय फकमा , उन्हें हभ जल्द ही अजनन भें झोंक दें गे । जफ उनकी खारें
ऩक जामेंगी तो हभ उन्हें दस
ू यी खारों से फदर दें गे ताफक वे मातना का यसास्वादन कय रें । नन:सॊदेह अल्राह
प्रबत्ु वशारी तत्वदशी है । "
-सूया 5 , आमत-56

मह तो धभा ववरुद्ध जाने ऩय दोज़ऽ ( मानन नयक ) भें ददमा जाने वारा दॊ ड है । सबी धभों भें उस धभा की
भान्मताओॊ के अनुसाय चरने ऩय स्वगा का अकल्ऩनीम सुख औय ववरुद्ध जाने ऩय नयक का बमानक दॊ ड है ।

फपय कुयआन भें फतामे गए नयक ( मानन दोज़ऽ ) के दॊ ड के लरमे एतयाज़ क्मों? इस भाभरे भें इन ऩचाा छाऩने
व फाॉटने वारों को हस्तऺेऩ कयने का क्मा अथधकाय है ?

मा फपय क्मा इन रोगों को नयक भें भानवाथधकायों की थचॊता
-------------------------------------------------------------------------------------------------( 42 )
-------------------------------------------------------------------------------------------------सताने रगी है ?
पैम्फऱेट में लऱखी 6र्ें क्रम की आयत है :
6 - '"हे 'ईभान' रेन वारों ! ( भुसरभानों ) अऩने फाऩों औय बाइमों को लभत्र न फनाओ मदद वे ' ईभान ' की अऩेऺा '
कुफ्र' को ऩसॊद कयें । औय तुभ भें जो कोई उनसे लभत्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही रोग ज़ालरभ होंगे ।"
-सूया 9 ' आमत-23

ऩैाम्फय भह
ु म्भद ( सल्र० ) जफ एकेचवयवाद का सन्दे श दे यहे थे, तफ कोई व्मजक्त अल्राह के यसर
ू ( सल्र० )

23

द्वाया तौहीद ( मानन एकेचवयवाद ) के ऩैााभ ऩय ईभान ( मानन ववचवास ) राकय भुसरभान फनता औय फपय
अऩने भाॊ-फाऩ, फहन-बाई के ऩास जाता, तो वे एकेचवयवाद से उसका ववचवास ऽत्भ कयाके फपय से

फहुईचवयवादी फना दे ते । इस कायण एकेचवयवाद की यऺा के लरमे अल्राह ने मह आमात उतायी जजससे
एकेचवयवाद के सत्म को दफामा न जा सके । अत: सत्म की यऺा के लरमे आई इस आमत को झगड़ा कयने
वारी मा घण
ृ ा पैराने वारी आमत कैसे कहा जा सकता है ? जो ऐसा कहते हैं वे अऻानी हैं ।
पैम्फऱेट में लऱखी 7र्ें क्रम की आयत है :
7 - " अल्राह ' काफियों' रोगों को भागा नहीॊ ददखता ।"
-सूया 9 , आमत-37

आमात का भतरफ फदरने के लरमे इस आमत को बी जान-फूझ कय ऩूया नहीॊ ददमा गमा, इसलरए इसका सही
भकसद सभझ भें नहीॊ आता । इसे सभझने के लरमे हभ आमात को ऩूया दे यहे हैं ।:

अम्न के फकसी भहीने को हटाकय आगे-ऩीछे कय दे ना कुफ्र भें फढ़ती कयता है । इस से काफिय गुभयाही भें
ऩड़े यहते हैं । एक सार तो
-------------------------------------------------------------------------------------------------( 43 )
-------------------------------------------------------------------------------------------------उसको हरार सभझ रेते हैं औय दस
ू ये सार हयाभ, ताफक अदफ के भहीनों की, जो खद
ु ा ने भु़या य फकमे हैं,

थगनती ऩूयी कय रें औय जो खद
ु ा ने भना फकमा है , उसको जामज़ कय रें । उनके फुये अभर उन को बरे
ददखाई दे ते हैं औय अल्राह काफिय रोगों को भागा नहीॊ ददखता ।
-कुयआन, ऩाया 10 , सूया 9 , आमत- 37

अदफ मा अम्न ( मानन शाॊनत ) के चाय भहीने होते हैं, वे हैं - ज़ीकादा, जज़जल्हज्जा, भुहया भ,औय यजफ । इन चाय

भहीनों भें रड़ाई-झगड़ा नहीॊ फकमा जाता । काफिय कुयै श इन भहीनों भें से फकसी भहीने को अऩनी ज़रुयत के
दहसाफ से जान-फूझ कय आगे-ऩीछे कय रड़ाई-झगड़ा कयने के लरमे भान्मता का उल्रॊघन फकमा कयते थे ।

अनजाने भें बटके हुए को भागा ददखामा जा सकता है , रेफकन जानफूझ कय बटके हुए को भागा इचवय बी नहीॊ
ददखाता । इसी सन्दबा भें मह आमात उतयी । इस आमत का रड़ाई-झगड़ा कयने मा घण
ृ ा पैराने से कोई
सम्फन्ध नहीॊ है ।

पैम्फऱेट में लऱखी 8र्ें क्रम की आयत है :
8 - " हे 'ईभान' राने वारों ! ------------ औय 'काफियों' को अऩना लभत्र न फनाओ । अल्राह से डयते यहो मदद तुभ
ईभान वारे हो । "

मह आमात बी अधयू ी दी गमी है । आमात के फीच का अॊश जान फूझ कय नछऩाने की शयायत की गमी है ।
ऩूयी आमात है -

ऐ ईभान राने वारों ! जजन रोगों को तुभसे ऩहरे फकताफें दी गमी थीॊ, उन को औय काफियों को जजन्होंने

तुम्हाये धभा को हॊ सी औय खेर फना यखा है , लभत्र न फनाओ औय अल्राह से डयते यहो मदद तुभ ईभान वारे

24

हो ।

-कुयआन, ऩाया 6 , सूया 5 , आमत-57
---------------------------------------------------------------------------------------------( 44 )
---------------------------------------------------------------------------------------------आमत को ऩढ़ने से साि है फक काफिय ़ुयै श तथा उन के सहमोगी महूदी औय ईसाई जो भस
ु रभानों के धभा

की हॊ सी उड़ामा कयते थे , उन को दोस्त न फनाने के लरए मह आमात आई । मे रड़ाई-झगड़े के लरए उकसाने
वारी मा घण
ु हाये धभा
ृ ा पैराने वारी कहाॉ से है ? इसके ववऩयीत ऩाठक स्वमॊ दे खें की ऩैम्परेट भें ' जजन्होंने तम्
को हॊ सी औय खेर फना यखा है ' को जानफझ
ू कय नछऩा कय उसका भतरफ ऩयू ी तयह फदर दे ने की साजजश
कयने वारे क्मा चाहते हैं?

पैम्फऱेट में लऱखी 9र्ें क्रम कक आयत है :
9 -" फपटकाये हुए ( ाैय भजु स्रभ ) जहाॉ कहीॊ ऩामे जामेंगे ऩकडे जामेंगे औय फयु ी तयह ़त्र फकमे जामेंगे ।"
-सयू ा 33 ,आमत-61
इस आमात का सही भतरफ तबी ऩता चरता है जफ इसके ऩहरी वारी 60वीॊ आमत को जोड़ा जामे ।

अगय भुनाफिक ( मानन कऩटचायी ) औय वे फुये रोग जजनके ददरों भें भज़ा है औय जो mado ( के शहय ) भें फुयीफुयी ऽफयें उड़ामा कयते हैं, ( अऩने फकयदाय से ) रुकेंगे नहीॊ, तो हभ तुभ को उनके ऩीछे रगा दें गे , फपय वहाॊ
तुम्हाये ऩड़ोस भें न यह सकेंगे, भगय थोड़े ददन । ( 60 )

( वह बी फपटकाये हुए ) जहाॉ ऩामे गए, ऩकडे गए औय जान से भाय डारे गए । ( 61 )
- कुयआन , ऩाया 22 , सूया 33 , आमत- 60 -61

उस सभम भदीना शहय जहाॉ अल्राह के यसूर ( सल्र० ) का ननवास था, कुयै श के हभरे का सदै व अॊदेशा यहता

था । मुद्ध जैसे भाहौर भें कुछ भुनाफपक ( मानन कऩटचायी ) औय महूदी तथा ईसाई जो भुसराभनों के ऩास बी
आते औय काफिय ़ुयै श से बी लभरते यहते औय
-----------------------------------------------------------------------------------------------( 45 )
---------------------------------- ------------------------------------------------------------अपहवाहें उड़ामा कयते थे। मुद्ध जैसे भाहौर भें जहाॉ हभरे का सदै व अॊदेशा हो, अपवाह उड़ाने वारे जासूस
फकतने ऽतयनाक हो सकते हैं, अॊदाज़ा फकमा जा सकता है । आज ़ानून भें बी ऐसे रोगों की सज़ा भौत हो

सकती है । वास्तव भें शाॊनत की स्थाऩना के लरए उनको मही दडड उथचत है । मह न्मामसॊगत है । अत: इस
आमत को झगड़ा कयने वारी कहना दब
ु ाानमऩण
ू ा है ।
पैम्फऱेट में लऱखी 10र्ें क्रम की आयत है :
10 - " ( कहा जामगा ) : ननचचम ही तभ
ु औय वह जजसे तभ
ु अल्राह के लसवा ऩज
ू ते थे ' जहन्नभ ' का ईधन हो
। तभ
ु अवचम उसके घाट उतयोगे ।
-सयू ा 21 , आमात-98

25

इस्राभ एकेचवयवादी भज़हफ है , जजसके अनुसाय एक इचवय ' अल्राह ' के अरावा फकसी दस
ू ये को ऩूजना सफसे

फड़ा ऩाऩ है । इस आमात भें इसी ऩाऩ के लरए अल्राह भयने के फाद जहन्नभ ( मानन नयक ) का दडड दे गा ।
ऩैम्परेट भें लरखी ऩाॊचवें क्रभ की आमत भें हभ इस ववषम भें लरख चक
ु े हैं अत: इस आमत को बी झगड़ा
कयने वारी आमत कहना न्मामसॊगत नहीॊ है ।
पैम्फऱेट में लऱखी 11र्ें क्रम की आयत है :
11- ' औय उससे फढ़कय ज़ालरभ कौन होगा फकसे उसके ' यफ ' की ' आमातों ' के द्वाया चेतामा जामे, औय फपय वह
उनसे भुॊह पेय रे । ननचचम ही हभें ऐसे अऩयाथधमों से फदरा रेना है ।"
-सूया 32, आमत- 22

इस आमत भें बी ऩहरे लरखी आमत की ही तयह अल्राह
------------------------------------------------------------------------------------------------( 46 )
------------------------------------------------------------------------------------------------उन रोगों को नयक का दडड दे गा जो अल्राह की आमतों को नहीॊ भानते । मह ऩयरोक की फातें है अत: इस
आमत
का सम्फन्ध इस रोक भें रड़ाई-झगड़ा कयाने मा घण
ृ ा पैराने से जोड़ना शयायत ऩूणा हयकत है ।
पैम्फऱेट में लऱखी 12र्ें क्रम की आयत है :
12 - " अल्राह ने तभ
ु से फहुत सी ' गननभतों ' ( रट
ू ) का वादा फकमा है जो तम्
ु हाये हाथ आएॉगी,"
-सूया 48 ,आमत-20

ऩहरे भें मह फता दॊ ू फक ानीभत का अथा रूट नहीॊ फजल्क शत्रु की ़ब्ज़ा की गई सॊऩजत्त होता है । उस

सभम भुसरभानों के अजस्तत्व को लभटने के लरए हभरे होते मा हभरे की तैमायी हो यही होती । काफिय औय
उनके सहमोगी महूदी व ईसाई धन से शजक्तशारी थे । ऐसे शजक्तशारी दचु भनों से फचाव के लरए उनके
ववरुद्ध भुसरभनों का हौसरा फढ़ामे यखने के लरए अल्राह की ओय से वामदा हुआ ।
मह मुद्ध के ननमभों के अनुसाय जामज़ है । आज शत्रु की ़ब्ज़ा की गई सॊऩजत्त ववजेता की होती है ।
अत: इसे झगड़ा कयाने वारी आमत कहना दब
ु ाानमऩूणा है ।
पैम्फऱेट में लऱखी 13र्ें क्रम की आयत है :
13 - " तो जो कुछ ' ानीभत ' ( रूट ) का भार तुभने हालसर फकमा है उसे ' हरार ' व ऩाक सभझ कय खाओ ,"
- सूया 8 , आमत -69

फायहवें क्रभ की आमत भें ददए हुए तका के अनुसाय इस आमात का बी सम्फन्ध आत्भयऺा के लरए फकमे जाने
वारे मुद्ध भें लभरी चर सॊऩजत्त से है , मुद्ध भें हौसरा फनामे यखने से है । इसे बी झगड़ा फढ़ाने
-----------------------------------------------------------------------------------------------( 47 )
------------------------------------------------------------------------------------------------

26

वारी आमत कहना दब
ु ाानमऩूणा है ।
पैम्फऱेट में लऱखी 14र्ें क्रम की आयत है :
14 - " हे नफी ! ' काफियों 'औय ' भुनाफिकों ' के साथ जजहाद कयो , औय उन ऩय सख्ती कयो औय उनका दठकाना '

जहन्नभ ' है , औय फुयी जगह है जहाॉ ऩहुॊचे ।"
जैसे फक हभ ऊऩय फता चक
ु े हैं फक काफिय कुयै श अन्मामी व अत्माचायी थे औय भुनाफि़ ( मानन कऩट कयने
वारे कऩटचायी ) भुसरभानों के हभददा फन कय आते, उनकी जासूसी कयते औय काफिय कुयै श को सायी सूचना
ऩहुॊचाते तथा काफियों के साथ लभर कय अल्राह के यसूर ( सल्र० ) फक णखल्री उड़ाते औय भुसरभानों के
णखराि साजजश यचते । ऐसे अधलभामों के ववरुद्ध रड़ना अधभा को सभाप्त कय धभा की स्थाऩना कयना है ।
ऐसे ही अत्माचायी कौयवों के लरए मोगेचवय श्री कृष्णन ने कहा था:
अथ चेत ् त्वालभभॊ धभमा सॊग्राभॊ न करयष्मलस ।
तत: स्वधभा कीनता च दहत्वा ऩाऩभवाप्स््सी ।।
-गीता अध्माम 2 चरोक-33

हे अजुन
ा ! फकन्तु मदद तू इस धभा मुक्त मुद्ध को न कये गा तो अऩने धभा औय कीनता को खोकय ऩाऩ को प्राप्त
होगा ।

तस्भात्त्वभजु त्तष्ठ मशो रबस्व जजत्वा शत्रन
ू ् बङ्क्ष
ु ्व याज्मॊ सभद्ध
ृ ॊ ।
- अध्माम 11 , चरोक-33

इसलरए तू उठ ! शत्रओ
ु ॊ ऩय ववजम प्राप्त कय, मश को प्राप्त कय धन-धान्म से सॊऩन्न याज्म का बोग कय ।
----------------------------------------------------------------------------------------------( 48 )
----------------------------------------------------------------------------------------------ऩोस्टय मा छाऩने व फाॉटने वारे श्रीभद् बगवद् गीता के इस आदे श को क्मा झगड़ा- रड़ाई कयाने वारा कहें गे
? मदद नहीॊ, तो इन्हीॊ ऩरयस्थनतमों भें आत्भयऺा के लरए अत्माचारयमों के ववरुद्ध जजहाद ( मानन आत्भयऺा व
धभायऺा के लरए मुद्ध ) कयने का ियभान दे ने वारी आमत को झगड़ा कयाने वारी कैसे कह सकते हैं? क्मा मह
अन्मामऩूणा नननत नहीॊ है ? आणखय फकस उद्देचम से मह सफ फकमा जा यहा है ?
पैम्फऱेट में लऱखी 15र्ें क्रम की आयत है :
15 - " तो अवचम हभ ' कुफ्र ' कयने वारों को मातना का भज़ा चखामेंगे, औय अवचम ही हभ उन्हें सफसे फुया
फदरा दें गे उस कभा का जो वो कयते थे ।"
-सूया 41 , आमत-27

उस आमत को लरखा जजसभें अल्राह काफियों को दजडडत कये गा, रेफकन मह दडड क्मों लभरेगा ? इसकी वजह
इस आमत के ठक ऩहरे वारी आमत ( जजस की मह ऩूयक आमत है ) भें है , उसे मे नछऩा गए । अफ इन

आमतों को हभ एक साथ दे यहे हैं । ऩाठक स्वमॊ दे खें फक इस्राभ को फदनाभ कयने फक साजजश कैसे यची
गई है ? :

27

औय काफिय कहने रगे फक इस कुयआन को सुना ही न कयो औय ( जफ ऩढने रगें तो ) शोय भचा ददमा कयो ,
ताफक ाालरफ यहो । ( 26 )

तो अवचम हभ ' कुफ्र ' कयने वारों को मातना का भज़ा चखामेंगे, औय अवचम ही हभ उन्हें सफसे फुया फदरा दें गे
उस कभा का जो वे कयते थे । ( 27 )

- कुयआन , ऩाया 24 , सूया 41, आमत- 26 -27

अफ मदद कोई अऩनी धालभाक ऩुस्तक का ऩाठ कयने रगे मा नभाज़ ऩढने रगे, तो उस सभम फाधा ऩहुॉचाने के
लरए शोय भचा दे ना
----------------------------------------------------------------------------------------------( 49 )
----------------------------------------------------------------------------------------------क्मा दष्ु टताऩण
ू ा कभा नहीॊ है ? इस फयु े कभा फक सज़ा दे ने के लरमे ईचवय कहता है , तो क्मा वह झगड़ा कयाता
है ?

भेयी सभझ भें नहीॊ आ यहा फक ऩाऩ कभों का पर दे ने वारी इस आमत भें झगड़ा कयाना कैसे ददखाई ददमा ?
पैम्फऱेट में लऱखी 16र्ें क्रम की आयत है :
16 - " मह फदरा है अल्राह के शत्रओ
ु ॊ का ( 'जहन्नभ' की ) आग । इसी भें उनका सदा घय है , इसके फदरे भें
फक हभायी ' आमातों ' का इॊकाय कयते थे ।"
-सूया 41 , आमत- 28

मह आमत ऊऩय ऩन्रहवें क्रभ फक आमात की ऩूयक है जजसभें काफियों को भयने के फाद नयक का दडड है , जो
ऩयरोक की फात है इसका इस रोक भें रड़ाई-झगड़ा कयाने मा घण
ृ ा पैराने से कोई सम्फन्ध नहीॊ है ।
पैम्फऱेट में लऱखी 17र्ें क्रम की आयत है :
17- " नन:सॊदेह अल्राह ने ' ईभान' वारों ( भुसरभानों ) से उनके प्राणों औय भारों को इसके फदरे भें ऽयीद लरमा
है फक उनके लरमे ' जन्नत' है , वे अल्राह के भागा भें रड़ते हैं तो भायते बी हैं औय भाये बी जाते हैं ।"
-सूया 9 , आमत-11
गीता भें है ;

हतो वा प्राप्स्मलस स्वगा जजत्वा वा बो्स्मे भहीभ ् ।
तस्भादजु त्तष्ठ कौन्तेम मुद्धाम कृतननचचम: ।।

-गीता अध्माम 2 चरोक-37
-----------------------------------------------------------------------------------------------( 50 )
-----------------------------------------------------------------------------------------------मा ( तो तू मद्ध
ु भें ) भाया जा कय स्वगा को प्राप्त होगा ( अथवा ) जीत कय , ऩथ्
ृ वी का याज्म बोगेगा । इसलरए
हे अजन
ुा ! ( तू ) मद्ध
ु के लरए ननचचम कय क्र खड़ा हो जा ।

गीता के मह आदे श रड़ाई-झगड़ा फढ़ने वारा बी नहीॊ है , मह अधभा को फढ़ने वारा बी नहीॊ है , क्मोंफक मह

28

तो अन्मानममों व अत्माचारयमों का ववनाश कय धभा की स्थाऩना के लरए फकमे जाने वारे मुद्ध के लरए है ।

इन्हीॊ ऩरयजस्थनतमों भें अन्मामी , अत्माचायी, भुशरयक काफियों को सभाप्त कयने के लरए ठीक वैसा ही अल्राह (

मानन ऩयभेचवय ) का पयभान बी सत्म धभा की स्थाऩना के लरमे है , आत्भयऺा के लरए है । फपय इसे ही झगड़ा
कयने वारा क्मों कहा गमा ? ऐसा कहने वारे क्मा अन्मामऩूणा नननत नहीॊ यखते ? जनता को ऐसे रोगों से
सावधान हो जाना चादहए ।

पैम्फऱेट में लऱखी 18र्ें क्रम की आयत है :
18 - " अल्राह ने इन भुनाफि़ ( अधा भुजस्रभ ) ऩुरुषों औय भुनाफिक जस्त्रमों औय ' काफपयों ' से जहन्नुभ ' की
आग का वादा फकमा है जजसभें वह सदा यहें गे । मही उन्हें फस है । अल्राह ने उन्हें रानत की औय उनके
लरमे स्थामी मातना है ।"
-कुयआन, ऩाया 10 ,सूया 9 ,आमात-68

सूया 9 की इस 68वीॊ आमत के ऩहरे वारी 67वीॊ आमत को ऩढने के फाद इस आमत को ऩढ़ें , ऩहरे वारी 67वीॊ
आमत है ।

भुनाफिक भदा औय भुनाफि़ औयतें एक दस
ु ये के हभजजॊस ( मानन एक ही तयह के ) हैं, फक फुये काभ कयने को
कहते औय नेक काभों से भना कयते औय ( खचा कयने भें ) हाथ फॊद फकमे यहते हैं, उन्होंने ऽद
ु ा को बर
ु ा ददमा
तो खद
ु ा ने बी उनको बुरा ददमा । फेशक भन
ु ाफिक
-----------------------------------------------------------------------------------------------( 51 )
-----------------------------------------------------------------------------------------------न- ियभान है ।
-कुयआन, ऩाया 10 , सूया 9 , आमत-67

स्ऩष्ट है भुनाफि़ ( कऩटचायी ) भदा औय औयतें रोगों को अच्छे काभों से योकते औय फुये काभ कयने को कहते । अच्छे
काभ के लरए खोटा लसक्का बी न दे ते । खद
ु ा ( मानन ऩयभीचवय ) को कबी माद न कयते , उसकी अवऻा कयते औय

खयु ािात भें रगे यहते । ऐसे ऩावऩमों को भयने के फाद फ़माभत के ददन जहन्नभ ( मानन नयक ) की सज़ा की चेतावनी
दे ने वारी अल्राह की मह आमात फुये ऩय अच्छाई की जीत के लरए उतयी न की रड़ाई-झगड़ा कयने के लरए ।
पैम्फऱेट में लऱखी 19र्ें क्रम की आयत है :
19 - " हे नफी! ' ईभान ' वारों ( भुसरभानों ) को रड़ाई ऩय उबायो । मदद तुभ 20 जभे यहने वारे होंगे तो वे 200 ऩय

प्रबुत्व प्राप्त कयें गे , औय मदद तुभ भें 100 हों तो 1000 ' काफियों ' ऩय बायी यहें गे , क्मोंफक वे ऐसे रोग हैं जो सभझ फूझ
नहीॊ यखते ।

-सूया 8 , आमत-65
भक्का के अत्माचायी ़ुयै श व अल्राह के यसर
ू ( सल्र० ) के फीच होने वारे मद्ध
ु भें ़ुयै श की सॊख्मा अथधक होती औय

सत्म के यऺक भुसरभानों की कभ । ऐसी हारात भें भुसरभानों का हौसरा फढ़ाने व उन्हें मुद्ध भें जभामे यखने के लरए
अल्राह की ओय से मह आमत उतयी । मह मुद्ध अत्माचायी व आक्रभणकायी काफियों से था न फक सबी काफियों मा ाैय-

29

भुसरभानों से । अत :मह आमात अन्म धभाावरजम्फमों से झगड़ा कयने का आदे श नहीॊ दे ती । इसके प्रभाण भें एक
आमत दे यहे हैं ।:

जजन रोगों ( मानन काफियों ) ने तुभसे दीन के फाये भें जॊग नहीॊ
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