गु मौय (ज म ३४० पु॰ई॰, राज ३२२[1]-२९८ पु॰ई॰[2])

म भारत म स ाट थे। इनको कभी कभी च

गु नाम से भी

संबोिधत कया जाता है । इ ह ने मौय सा ा य क
थी। च 



थापना क

गु पूरे भारत को एक सा ा य के अधीन लाने म

सफ़ल रहे ।

स ा चं गु मौय के रा यारोहण क ितिथ साधारणतया 324
ई.पू. िनधा रत क जाती है । उ ह ने लगभग 24 वष तक शासन
कया, और इस कार उनके शासन का अंत ाय: 300 ई.पू. म
हुआ।
चं गु मौय के वंशा द के बारे म अिधक

ात नह ं है । हं द ू

सा ह य पंरपरा उसके नंद से संब ,बताती है ।
जैन प रिस पवन ् के अनुसार चं गु मौय मयूरपोषक के एक
ाम के मु खया क पु ी से उ प न थे। म यकालीन अिभलेख
के सा यानुसार मौय सूय वंशी मांधाता से उ प न थे। बौ
सा ह य म मौय

य कहे गए ह। महावंश चं गु कोमो रय

(मौय) ख य से पैदा हुआ बताता
है । द यावदान म बंदस
ु ार वयं क मूधािभ ष
ह। स ाट अशोक भी वयं को

य बताते ह। महाप रिन बान

जाित िस होते ह। प पिलवन ई.पू. छठ शता द म नेपाल क
थत 

: 

 

:      

  

: 

, 

य कहते

सु से मो रय प पिलवन के शासक, गणतां क यव थावाली
तराई म 

,    

मनदे ई से लेकर आधुिनक दे व रया जले

के कसया दे श तक को कहते थे। मगध सा ा य क

सारनीित के कारण इनक

वतं

थित शी ह समा हो गई। यह ं

कारण था क चं गु का मयूरपोषक , चरवाह तथा लु धक के संपक म पालन हुआ। परं परा के अनुसार वह बचपन म अ यंत
ती णबु

था, एवं समवय क बालक का स ा बनकर उनपर शासन करता था। ऐसे ह कसी अवसर पर चाण य क

उसपर पड़ , फलत: चं गु त िशला गए जहाँ उ ह राजोिचत िश ा द गई। ीकइितहासकार ज टन के अनुसार सां ोका स
(चं गु ) साधारणज मा था।
िसकंदर के आ मण के समय लगभग सम त उ र भारत धनानंद ारा शािसत था। नंद स ा अपनी िन न उ प

एवं

िनरं कुशता के कारण जनता म अ य थे। ा ण चाण य तथा चं गु ने रा य म या असंतोष का सहारा ले नंद वंश को
उ छ न करने का िन य कया अपनी उ े यिस

के िनिम चाण य और चं गु ने एक वशाल वजयवा हनी का बंध

कया ा ण ंथ म नंदो मूलन का ेय चाण य को दया गया है । मु ारा स के अनुसार रा य के वा त वक शासक चाण य
थे। चं गु उनके हाथ म कठपुतली थे। ज टन के अनुसार चं गु डाकू था और छोटे -बड़े सफल हमल के प ात ् उसने
सा ा यिनमाण का िन य कया। अथशा
े णय से करनी चा हए। मु ारा स से

म कहा है क सैिनक क भरती चोर , ले छ , आट वक तथा श ोपजीवी

ात होता है क चं गु ने हमालय दे श के राजा पवतक से संिध क । चं गु क सेना

पारसीक तथा व क भी रहे ह गे। लूटाक के अनुसार सां ोको स ने संपूण भारत को 6. ाणर ा के िनिम चं गु को वहाँ से भागना पड़ा। भारतीय सा ह यक परं पराओं से लगता है क चं गु और चाण य के ित भी नंदराजा अ यंत अस ह णु रह चुके थे। महावंश ट का के एक उ लेख से लगता है क चं गु ने आरं भ म नंदसा ा य के म य भाग पर आ मण कया. भारत छोड़ा। चं गु के यवनयु के बारे म व तारपूवक कुछ नह ं कहा जा सकता। इस सफलता से उ ह पंजाब और िसंध के ांत िमल गए। चं गु मौय का संभवत: मह वपूण यु नंद के साथ उप रिल खत संघष के बाद हुआ। ज टन एवं लूटाक के वृ क िसकंदर के भारत अिभयन के समय चं गु ने उसे नंद के व यवहार ने यवन वजेता को ु म प है यु के िलये भड़काया था. कंदहार से ा अशोक के संबंध को थािय व दान करने क भाषी लेख से िस हो गया है । इस कार था पत हुए मै ी से से यूकस न मेग थनीज नाम का एक दत ू चं गु के दरबार म भेजा। . य क इसी वष प म पंजाब के शासक प यूदेमस (Eudemus) ने अपनी सेनाओं स हत.000 सैिनक क वशाल वा हनी ारा जीतकर अपने अधीन कर िलया। ज टन के मत से भारत चं गु के अिधकार म था। चं गु ने सव थम अपनी थित पंजाब म स ढ़ क । उसका यवन व वातं य यु संभवत: िसकंदर क मृ यु के कुछ ह समय बाद आरं भ हो गया था। ज टन के अनुसार िसकंदर क मृ यु के उपरांत भारत ने सां ोको स के नेत ृ व म दासता के बंधन को तोड़ फका तथा यवन रा यपाल को मार डाला। चं गु ने यवन के व अिभयन लगभग 323 ई. कंबोज. 'वंब मो रयर' से थम मौय स ा चं गु का ह अनुमान अिधक संगत लगता है । मैसूर से उपल ध कुछ अिभलेख से चं गु उ ारा िशकारपुर तालुक के अंतगत नागरखंड क र ा करने का उ लेख िमलता है । अिभलेख 14वीं शता द का है कंतु ीक. िसकंदर क भारतीय वजय पूर करने के िलये आगे बढ़ा. के लगभग िसंधु के कनारे आ उप थत हुआ। ीक लेखक इस यु का योरे वार वणन नह ं करते। कंतु ऐसा तीत होता है क चं गु क श के संमुख से यूकस को झुकना पड़ा। फलत: से यूकस ने चं गु को ववाह म एक यवनकुमार तथा ए रया ( हरात). कंतु उ ह इस अिभयान म पूण सफलता 317 ई.00. परोपिनसदाइ (काबुल) और गे ोिसय (बलूिच तान) के ांत दे कर संिध य क । इसके बदले चं गु ने से यूकस को 500 हाथी भट कए। उप रिल खत ांत का चं गु मौय एवं उसके उततरािधका रय के शासनांतगत होना. कंतु कशोर चं गु के घृ कर दया। फलत:. कंतु उ ह शी ह अपनी ु ट का पता चल गया और नए आ मण सीमांत दे श से आरं भ हुए। अंतत: उ ह ने पाटिलपु घेर िलय और धननंद को मार डाला। इसके बाद. करात. ऐसा तीत होता है क चं गु ने अपने सा ा य का व तार द ण म भी कया। मामुलनार नामक ाचीन तिमल लेखक ने ितनेवे ल जले क पो दियल पहा ड़य तक हुए मौय आ मण का उ लेख कया है । इसक पु लेखक एवं ंथ से होती है । आ ामक सेना म यु अ य ाचीन तिमल य कोशर लोग स मिलत थे। आ ामक क कण से एिललमलै पहा ड़य से होते हुए क गु (कोयंबटू र) जले म आए. और यहाँ से पो दियल पहा ड़य तक पहुँचे। दभ ु ा यवश उपयु उ लेख म इस मौयवा हनी के नायक का नाम ा नह ं होता। कंतु. या उसके बाद िमली होगी. यवन. म आरं भ कया होगा.पू. कंतु भारत क राजनीितक थित अब तक प रवितत हो चुक थी। लगभग सारा े एक श शाली शासक के नेत ृ व म था। से यूकस 305 ई.पू.म शक. वै य पु यगु यहाँ के रा यपाल थे। च ं गु का अंितम यु िसकंदर के पूवसेनापित तथा उनके समकालीन सी रया के ीक स ा से यूकस के साथ हुआ। ीक इितहासकार ज टन के उ लेख से मा णत होता है क िसकंदर क मृ यु के बाद से यूकस को उसके वामी के सु व तृत सा ा य का पूव भाग उ रािधकार म ा हुआ। से यूकस.पू. एराकोिसया (कंदहार). तिमल लेखक आ द के स य के आधार पर इसक ऐितहािसकता एकदम अ वीकृ त नह ं क जा सकती। चं गु ने सौरा क वजय भी क थी। महा प दामन ् के जूनागढ़ अिभलेख से मा णत है क चं गु के रा ीय.

द म मैसूर तथा द ण-प ण म म सौरा तक का व तृत भू दे श स मिलत था। सा ा य का सबसे बड़ा अिधकार स ा वयं था। शासन क सु वधा क से संपूण सा ा य को विभ न ांत म वभा जत कर दया गया था। ांत के शासक स ा के ित उ रदायी होते थे। रा यपाल क सहायता के िलये एक मं प रष हुआ करती थी। क य तथा ांतीय शासन के विभ न वभाग थे. और सबके सब एक अ य सा ा य के दरू थ दे श सड़क एवं राजमाग के िनर ण म काय करते थे। ारा एक दस ू रे से जुड़े हुए थे। पा टलपु (आधुिनक पटना) चं गु क राजधानी थी जसके वषय म यूनानी राजदत ू मेग थनीज़ ने व तृत ववरण दए ह। नगर के शासिनक वृ ांत से हम उस युग के सामा जक एवं आिथक प र थितय को समझने म अ छ सहायता िमलती है । मौय शासन बंध क शंसा आधुिनक राजनीित ने भी क है जसका आधार 'कौ टलीय अथशा ' एवं उसम था पत क गई रा य वषयक मा यताएँ ह। चं गु के समय म शासन यव था के सू अ यंत सु ढ़ थे। [संपा दत कर]शासन यव था चं गु मौय के सा ा य क शासन यव था का अथशा से होता है (दे .यह वृ ांत इस बात का माण है क चं गु का ाय: संपूण राजयकाल यु ारा सा ा य व तार करने म बीता होगा। परवत जैन परं पराओं के अनुसार चं गु अपने अंितम दन म जैन हो गए और वामी भ बाहु के साथ वणबेलगोल चले गए। वह ं उ ह ने उपवास ारा शर र याग कया। वणबेलगोल म जस पहाड़ पर वे रहते थे. यह मूल प से चं गु मौय के मं ी क कृ ित थी। . मेग थनीज़)। अथशा ान धान प से मेग थनीज़ के वणन के अविश अंश और कौ ट य के म य प कुछ प रवतन के तीसर शता द के अंत तक होने क संभावना तीत होती है . उसका नाम चं िग र है और वह ं उनका बनवाया हुआ 'चं गु ब त' नामक मं दर भी है ।  [] 1  2  3   4    [संपा दत कर]सा ा य  च गु मौय का सा ा य चं गु का सा ा य अ यंत व तृत था। इसम लगभग संपूण उ र और पूव भारत के साथ साथ उ र म बलूिच तान.

मान. तोल और माप के साधन पर कर. केश साधन के समय वह दत ू से िमलता है । मृितय क परं परा के व है । मेगे थनीज और कौ ट य दोन से ह क र ा अ धार अपना शयनक अथशा म राजा ा को धम. जैसे कोष. ल ण. मजदरू और मू य पर िनयं ण रखना। मेग थनीज ऐसे अिधका रय का उ लेख करता है जो भूिम को नापते थे और. सभी को िसंचाई के िलये नहर के पानी का उिचत भाग िमले.राजा शासन के विभ न अंग का धान था। शासन के काय म वह अथक प से य त रहता था। अथशा म राजा क दैिनक चया का आदश काल वभाजन दया गया है । मेगे थनीज के अनुसार राजा दन म नह ं सोता वरन ् दनभर याय और शासन के अ य काय के िलये दरबार म ह रहता है . ूतकर. को ागार. मािलश कराते समय भी इन काय म यवधान नह ं होता. मु ा. प न. आकर. जो अपने अपने अ य के अधीन थे। मेग थनीज के अनुसार राजा क सेवा म गु चर क एक बड़ सेना होती थी। ये अ य कमचा रय पर कड़ राजा को येक बात क सूचना दे ते थे। अथशा म भी चर क िनयु रखते थे और और उनके काय को वशेष मह व दया गया है । मेग थनीज ने पाटिलपु के नगरशासन का वणन कया है जो संभवत: कसी न कसी प म अ य नगर म भी चिलत रह होगी। (दे खए 'पाटिलपु ') अथशा म नगर का शसक नाग रक कहलाता है औरउसके अधीन थािनक और गोप होते थे। शासन क इकाई ाम थे जनका शासन ािमक ामवृ क सहायता से करता था। ािमक के ऊपर मश: गोप और थािनक होते थे। अथशा म दो कार क यायसभाओं का उ लेख है और उनक काय विध तथा अिधकार े का व तृत ववरण है । साधारण कार धम थीय को द वानी और कंटकशोधन को फौजदार क अदालत कह सकते ह। दं ड वधान कठोर था। िश पय का अंगभंग करने और जानबूझकर व य पर राजकर न दे ने पर ाणदं ड का वधान था। व ासघात और यिभचार के िलये अंग छे द का दं ड था। मेग थनीज ने राजा को भूिम का वामी कहा है । भूिम के वामी कृ षक थे। रा य क जो आय अपनी िनजी भूिम से होती थी उसे सीता और शेष से ा भूिमकर को भाग कहते थे। इसके अित र सीमाओं पर चुंगी. लवण. नौ. यवहार और च र से अिधक मह व दया गया ात होता है क राजा के ाण क र ा के िलये समुिचत यव था थी। राजा के शर र याँ करती थीं। मेगे थनीज का कथन है क राजा को िनरं तर ाण य लगा रहता है जससे हर रात वह बदलता है । राजा केवल यु या ा. गौ.मं ी और सिचव। इनक स या अिधक नह ं थी कंतु ये बड़े मह वपूण थे और रा य के उ च पद पर िनयु होते थे। अथशा म शासन के अिधका रय के प म 18 तीथ का उ लेख है । शासन के विभ न काय के िलये पृथक् वभाग थे. वे याओं. सेना. वंधनागार. य ानु ान. ववीत. तटकर. इस बात का समथन ण करते थे। िसंचाई क यव था के दामन ् के जूनागढ़ के अिभलेख से होता है । इस लेख म चं गु के ारा सौरा म एक पहाड़ नद के जल को रोककर सुदशन झील के िनमाण का उ लेख है । मेग थनीज ने चं गु के सै यसंगठन का भी व तार के साथ वणन कया है । चं गु क वशाल सेना म छ: लाख से भी अिधक सैिनक थे। सेना का बंध यु प रष करती थी जसम पाँच पाँच सद य क छ: सिमितयाँ थीं। इनम से पाँच सिमितयाँ . दे वता आ द. सुरा. ूत. सू . ग णका. सीता. सं था. प य. सुवण. याय और आखेट के िलये ह अपने ासाद से बाहर आता था। आखेट के समय राजा का माग र सय से िघरा होता था जनक लाँघने पर ाणदं ड िमलता था। अथशा आव यक म राजा क सहायता के िलये मं प रष क यव था है । कौ ट य के अनुसार राजा को बहुमत मानना चा हए और पर अनुप थत मं य का वचार जानने का उपाय करना चा हए। मं प रष क मं णा को गु रखते का वशेष यान रखा जाता था। मेगे थनीज ने दो कार के अिधका रय का उ लेख कया है . इसिलये नहर को णािलय का िनर िलये चं गु ने वशेष य कया. उ ोग और िश प पर कर. दं ड तथा आकर और वन से भी रा य को आय थी। अथशा का आदश है क जा के सुख और भलाई म ह राजा का सुख और भलाई है । अथशा म राजा के ारा अनेक कार के जन हत काय का िनदश है जैसे बेकार के िलये काम क यव था करना. व यकर. कु य. पौतव. शु क. वधवाओं और अनाथ के पालन का बंध करना. आयुधागार. सून.

पदाित.  एज ऑव नंदाज ऐंड द मौयाज (के. ↑ Kulke. वशेष प से नंदवंशीय नरे श ने इस यव था क नींव कसी प म डाली थी। [संपा दत कर]स दभ थ  राधा कुमुद मुकज : चं गु मौय ऐंड हज टाइ स. ISBN 0-415-15481-2. भाग 1.  स यकेतु व ालंकार : मौय सा ा य का इितहास. नीलकंठ शा ी संपा दत).  मै ं डल : एं यट इं डया ऐज़ ड  कौ ट य का अथशा  हे मचं रायचौधुर : पोिल टकल ह  ाइ ड बाइ मेग थनीज़ ऐंड ए रअन.). 59. क ज.ए.मश: नौ. पृ. बंबई.  दक ज ह ऑव इं डया (ई. Rothermund. पृ. 264-295. London: Routledge. अ . 1953. 1952. 5469. 467-473. 1960. और गज सेना के िलये थीं। एक सिमित सेना के यातायात और आव यक यु साम ी के वभाग का बंध दे खती थी। मेगे थनीज के अनुसार समाज म कृ षक के बाद सबसे अिधक सं या सैिनक क ह थी। सैिनक को वेतन के अित र रा य से अ श और दस ू र साम ी िमलती थीं। उनका जीवन संप न और सुखी था। चं गु मौय क शासन यव था क वशेष ता सुसंग ठत नौकरशाह थी जो रा य म विभ न कार के आँकड़ को शासन क सु वधा के िलये एक करती थी। क का शासन के विभ न वभाग और रा य के विभ न दे श पर गहरा िनयं ण था। आिथक और सामा जक जीवन क विभ न दशाओं म रा य के इतने गहन और कठोर िनयं ण क कसी अ य काल म हम कोई सूचना नह ं िमलती। ऐसी यव था क उ प का हम पूण ाचीन भारतीय इितहास के ान नह ं है । कुछ व ान ् हे लेि न टक रा य के मा यम से शाखामनी ईरान का भाव दे खते ह। इस यव था के िनमाण म कौ ट य ओर चं गु क मौिलकता को भी उिचत मह व िमलना चा हए। ऐसा तीत होता है क यह यव था िनतांत नवीन नह ं थी। संभवत: पूववत मगध के शासक . 1922 1. pp. 2. पृ. (ष सं करण) कलक ा. ऑव ऐशट इं डया. Dietmar (1998) [1986]. ↑ Kulke and Rothermund 1998:62 [संपा दत कर]यह भी दे खये  मौय सा ा य  मगध  भारत का इितहास . द एज ऑव इ पीर यल यूिनट (र. Hermann. A History of India (Third Edition ed. मजूमदार एवं अ. बनारस. रै सन संपा दत).च. रथ. 132-165. पुसालकर संपा दत) पृ.द.आर.

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