SVH PUBLICATION

UN BROKAN DREAM
AKHAND BHARAT
SAIL PATEL [जनोक्तत]
03-30-12

छद्म धभमननयऩेऺवाद आतॊकवाद से ज्मादा खतयनाक है

1

2

अतसय बायत के वाभऩॊथी फद्धु िजीवी औय याष्ट्रद्रोही मभडडमा दे श के याष्ट्रवादी आन्दोरन की

तर
ु ना पामसस्ट औय नाजीवाददमैऄ से कयते हैं . "नाजीवाद " एक ऐसा शब्द है , क्जसे बफना ककसी

फहस के एक गारी का दजाम दे ददमा गमा है . रेककन जया उन क्स्थनतमैऄ ऩय नजय डामरए, क्जनके
फीच नाजी आन्दोरन ऩनऩा औय दहटरय का उदम हुआ. दहटरय की आत्भकथा "भीन केम्प" के
अॊग्रेजी अनुवादक जेम्स भपन ने अऩने अनुवाद की रस्स्तावना भ कुछ मे जानकारयमाॊ दी हैं
....अगय आऩ को इसे ऩढ़कय आज के बायत की माद आमे तो मह गरती भेयी नहीॊ है .

दहटरय की आत्भकथा का ऩहरा बाग तफ मरखा गमा जफ वह फावेरयमा के ककरे भ फॊदी था.

वह वहाॊ तमयॉ औय कैसे ऩहुॊचा???

1923 भ फ़्ाॊस ने जभमनी ऩय आक्रभण कयके रुय रस्दे श औय याइनरैंड के कई जभमन शहयैऄ ऩय
कब्जा कय मरमा.

जभमन अऩना फचाव नहीॊ कय सके तमयॊकक वासामई की सॊधध के अनुसाय जभमनी

का नन् शस्रीकयण कय ददमा गमा था. साथ ही फ़्ाॊस ने याइनरैंड को जभमनी से अरग एक
स्वतॊर याज्म फनाने के मरए रस्चाय अमबमान चरामा.

आन्दोरनकारयमैऄ को मह आन्दोरन चराने

औय जभमनी को तोड़ने के मरए फेदहसाफ ऩैसे ददए गए. साथ ही फावेरयमा भ बी फ़्ाॊस के उऩननवेश
के रूऩ भ अरग कैथोमरक याज्म फनाने के मरए आन्दोरन चरामा गमा. मे आन्दोरन अगय
सपर हो जाते तो जभमनी से अरग हुए मे बाग कैथोमरक ऑक्स्रमा से मभर जाते औय
एक कैथोमरक ब्राक तैमाय हो जाता जो फ़्ाॊस के सैन्म औय याजनैनमक रस्बाव भ यहता औय
वस्तुत: जभमनी छोटे - छोटे टुकड़ैऄ भ फॉट जाता.
1923 भ फावेरयमा का अरगाववादी आन्दोरन सपरता के कगाय ऩय था. फावेरयमन जनयर वॉन
रासोव, फमरमन से आदे श नहीॊ रेते थे. जभमन याष्ट्रीम ध्वज कहीॊ ददखाई नहीॊ दे ता था. महाॉ तक
की फवेरयमन रस्धानभॊरी ने फवेरयमा की स्वतॊरता की घोषणा कयने का ननणमम रे मरमा. तबी
दहटरय ने वाऩस रस्हाय ककमा.

3

कापी सभम से दहटरय म्मयननख के आस ऩास के इराके भ सभथमन जुटा यहा था औय एक

याष्ट्रीम रस्दशमन कयने की तैमायी कय यहा था. उसे रस्थभ द्धवश्वमुि के जभमन कभाॊडय रुदेनदोर्फम का
सभथमन रस्ाप्त था औय आशा थी की जभमन सेनाएॊ अरगाववाददमैऄ के द्धवरुि उसका साथ दगी. 8
नवम्फय की यात को फवेरयमन अरगाववाददमैऄ की एक सबा फुराई गई , क्जसभ फवेरयमन

रस्धानभॊरी डॉ. वॉन कायम फवेरयमा की स्वतॊरता की घोषणा ऩढ़ने वारे थे. जैसे ही रस्धानभॊरी ने
अऩना बाषण ऩढ़ना आयॊ ब ककमा दहटरय औय जनयर रुदेन्दोपम ने हॉर भ रस्वेश ककमा औय सबा
बॊग कय दी गई.

अगरे ददन नाजी सभथमकैऄ ने याक्ष्ट्रम एकता के ऩऺ भ सड़कैऄ ऩय एक द्धवशार रस्दशमन ककमा.
दहटरय औय रुदेनदोर्फम ने इसका नेतत्ृ व ककमा. जैसे ही रस्दशमन शहय के भुख्म चौक ऩय ऩहुॊचा,
सेना ने गोमरमाॊ चरा दी. 16 रस्दशमनकायी भाये गए, 2 रोगैऄ ने फाद भ सैननक फैयकैऄ भ दभ तोड़
ददमा.
दहटरय स्वमॊ घामर हो गमा. जनयर रद
ु े नदोर्फम गोमरमैऄ के फीच चरते हुए सीधे सैननकैऄ तक
ऩहुॊच,े औय ककसी बी सैननक को अऩने ऩव
य म कभाॊडय ऩय गोरी चरने का साहस नहीॊ हुआ. दहटरय

औय उसके कई साधथमैऄ को धगयफ्ताय कय मरमा गमा औय रॊद्सस्फेगम के ककरे भ फॊदी फनामा गमा
. 20 पयवयी 1924 को दहटरय ऩय "याष्ट्रद्रोह " का भुकदभा चरामा गमा, औय ऩाॊच सार के कैद
की सजा सुनाई गई.

दहटरय को कुर 13 भहीने तक कैद भ यखा गमा. महीॊ जेर भ दहटरय की "भीन केम्प" मरखी

गई. दहटरय ने अऩनी मह आत्भकथा उन सोरह रस्दशमनकायी शहीदैऄ को श्रिाॊजमर भ सभद्धऩमत की
है , क्जन्हैऄने अऩने दे श की एकता के मरए सॊघषम कयते हुए अऩने ही दे श के सैननकैऄ की गोमरमैऄ
का साभना ककमा.

आज जफ हभाये दे श भ आतॊकवाददमैऄ को भेहभान फना कय यखा जा यहा है , अरगाववाददमैऄ को
सय ऩय बफठामा जा यहा है , दे शद्रोदहमैऄ को ऩद्म ऩुयस्काय ददए जा यहे हैं औय दे शबततैऄ को आतॊकी
फता कय जेरैऄ भ डारा जा यहा है ...तफ दे श के साभने मह रस्श्न खड़ा है की हभाये याजनीनतक
द्धवकल्ऩ तमा हैं?

4

सेक्मूरय भॊगोर याज्म का इततहास .... औय बायत का बविष्म!

भयनतमबॊजक इस्रामभक सभाज का एक फहुत फड़ा द्धवयोधाबास है - ईयान भ तेयहवीॊ शताब्दी के एक
महयदी द्धवद्सवान ् यामशद-उद-ददन की एक द्धवशारकाम भयनतम . यामशद-उद -ददन ने भॊगोर सभ्मता का
इनतहास मरखा, औय उनका अऩना जीवन कार सभकारीन इनतहास की एक कहानी फताता है जो
बायत के मरए एक फहुत जरुयी सफक है .
भॊगोरैऄ ने चॊगेज खान के सभम ऩयये एमशमा से रेकय मययोऩ तक अऩना दफदफा फनामा, औय भध्म
ऩयवम एमशमा भ अऩना शासन कामभ ककमा. भॊगोर भुख्मत् ताॊबरक धभम (भॊरामण) का ऩारन

कयते थे जो भयरत् बायत से ननकर कय नतब्फत, चीन, जाऩान औय ऩयये भध्म एमशमा भ पैरा था.

भगोरैऄ ने द्धवश्व का ऩहरा सच्चा धभम ननयऩेऺ याज्म फनामा (बायत के Pseudo Secular याजनीनतक
तॊर जैसा नहीॊ), जहाॉ सबी धभों के रोगैऄ को न मसपम अऩना धभम भानने की आजादी थी, फक्ल्क
सफके फीच स्वस्थ सॊवाद स्थाद्धऩत कयने का रस्मत्न ककमा गमा. भॊगोरैऄ की इस धामभमक उदायता
का सनातन धमभममैऄ, भॊगोर-तुकम के अदद सभ्मता के रोगैऄ औय महयददमैऄ ने स्वागत ककमा. इसाई
इसके फाये भ मभरा जुरा बाव यखते थे, जफकक भध्म-ऩयवम के भुक्स्रभ इनसे फहुत घण
ृ ा कयते थे.
इस दौयान चॊगेज खान के वॊशज (ऩयऩोते) आयगन
ु खान ने एक महयदी डॉतटय शाद-उद-दौरा को
अऩना वजीय फनामा. शाद-उद-दौरा फहुत कुशर औय रस्नतबावान था. उसके सभम भ आयगुन
खान ने फगदाद औय नतफरयज भ कई भॊददय फनवाए औय भतका ऩय कब्जा कयने की मोजना

फनामीॊ. उसी सभम आयगन
ु खान फुयी तयह फीभाय ऩड़ा, औय भौका दे ख कय भुक्स्रभैऄ ने शाद-उददौरा की हत्मा कय दी. शाद-उद-दौरा ने अऩने सभम भ अन्म कई महयददमैऄ को रस्शासन भ
स्थान ददमा था, उन्ही भ से एक थे याशशद-उद-दीन, जो फाद भ आयगुन खान के उत्तयाधधकायी
भहभूद गजान के वजीय फने.

आयगन
ु की भत्ृ मु के फाद भक्ु स्रभ औय भॊगोरैऄ के फीच रगाताय सॊघषम चरा, औय भक्ु स्रभैऄ ने

भॊगोर अथमव्मवस्था को कभजोय कयने के मरए फाजाय को नकरी नोटैऄ औय मसतकैऄ से बय ददमा
- मह तयकीफ जो आज बी बायत के द्धवरुि रस्मोग की जा यही है .
गजान खान के सभम यामशद-उद-दीन ने क्स्थनत को अॊतत् ननमॊरण भ मरमा, अथमव्मवस्था को
वाऩस ऩटयी ऩय रामा, टै तस-सुधाय ककमे, औय सभद्धृ ि वाऩस रौटी. रेककन भुक्स्रभैऄ से सॊघषम

5

चरता यहा औय औय भुसरभान रगाताय गजान खान ऩय इस्राभ स्वीकाय कयने का दफाव फनामे
यहे . अन्त् भ क्स्थनत को शाॊत कयने के मरए गजान खान औय यामशद-उद-दीन ने

ऊऩयी तौय ऩय

इस्राभ स्वीकाय कय मरमा, औय गजान को अभीय-उर-भोमभन घोद्धषत ककमा गमा. अफ भुसरभान

गजान खान ऩय दफाव फनाने रगे की वह भॊददयैऄ, चचों, औय मसनागोग (महयदद धभम स्थर) को तोड़े
औय दस
य ये रोगैऄ को बी इस्राभ स्वीकाय कयने को फाध्म कये .
यामशद-उद-दीन के वजीय यहते गजान खान, औय उसके बाई ओल्जजतु का शासन रगबग शाॊनत

औय क्स्थयता से गुजय गमा. यामशद स्वमॊ को अयस्तु औय गजान को अऩना Alexander कहता था.
यामशद ने दनु नमा के कोने कोने से धभम-गुरुओॊ औय द्धवद्सवानैऄ को फगदाद के दयफाय भ जगह दी.

हाराॉकक इस्रामभक गुट ने यामशद-उद-दीन ऩय रगाताय आयोऩ रगामा कक उसने अऩना भयर महयदी
धभम अबी बी नहीॊ छोड़ा था.

6

कपय इल्खानेत वॊश के तेयहव याजा ओक्ल्जतु (धभम ऩरयवतमन के फाद भोहम्भद खद
ु ाफन्द) की भत्ृ मु
के फाद इस्रामभक गुट का ऩयया ननमॊरण हो गमा. यामशद-उद-दीन ऩय ओक्ल्जतु की हत्मा का

आयोऩ रगामा गमा औय छुऩ कय अन्दय ही अन्दय महयदी धभम से सहानुबयनत यखने का आयोऩ
रगामा गमा. उसे कैद कय मरमा गमा, उसकी आॉखैऄ के साभने उसके फेटे का सय काट ददमा गमा.
कपय यामशद का सय काट कय उसके कटे सय को नतफरयज की सडकैऄ ऩय घुभामा गमा. इतने से ही
यामशद-उद-दीन के रस्नत उनकी घण
ृ ा ऽत्भ नहीॊ हुई. ऩॊद्रहवीॊ शताब्दी भ तैभयु -रॊग के फेटे मभयान
शाह ने यामशद-उद-दीन की कब्र खद
ु वा कय उसकी सय कटी राश ऩास के महयदी कबब्रस्तान भ
कपॊ कवा दी.

7

मह था सेतमुररयज्भ का अॊत औय इस्राभ के रस्नत नयभ यवैमा यखने का ऩरयणाभ.

हभाये मरए इस कहानी से मही मशऺा है की एक धभम ननयऩेऺ याज्म इस्राभ का साभना नहीॊ कय
सकता है . अगय एक सेतमुरय याज्म की सीभाओॊ के फीच फड़ी भुक्स्रभ सॊख्मा यहे गी तो धीये -धीये
मे रोग शासन तॊर ऩय हावी हो ही जामगे. आज हभाये जो नेता इफ्ताय ऩादटम मैऄ भ

हयी ऩगड़ी

औय गोर टोऩी रगामे घयभ यहे हैं, कर उन्ह करभा ऩढना होगा औय सुन्नत कयवानी होगी. कपय
उन्ह अऩने बाई फॊधओ
ु ॊ ऩय तरवाय उठाने को कहा जामेगा, औय अॊत भ उनका औय उनके फच्चैऄ
का वही हार होगा जो यामशद-उद-दीन का हुआ.

तमा भुरामभ मसॊह मादव की आॉख के आगे मही भुल्रे एक ददन अखखरेश मसॊह का सय नहीॊ
काटगे? ऩय इन दहन्दओ
ु ॊ को मह कौन सभझामे.....

साइप्रस का इततहास.... औय बायत का बविष्म!
साइरस्स नाभ के इस छोटे से दे श की कहानी को ध्मान से ऩढ़....कुछ जानी ऩहचानी रगेगी.

8

साइरस्स एक छोटा सा द्सवीऩ है जो टकन से 40 भीर दक्षऺण औय ग्रीस से 480 भीर दक्षऺणऩयवम ऩय

क्स्थत है । एक सभम इस द्सवीऩ ऩय 720,000 ग्रीक यहते थे ।ऩय 1571 भ टकन ने इस ऩय आक्रभण
कय ददमा औय इसके उत्तयी बाग ऩय इस्ताम्फुर का कब्जा हो गमा। 1878 भ बब्रदटश ने इसे रीज
ऩय मरमा। रीज रस्थभ द्धवश्व मुि के फाद सभाप्त हो गमा औय 1925 भ मह द्सवीऩ बब्रदटश याज
की colony फन गई। 1960 भ बब्रदटश ने इसे आजाद कय ददमा औय साइरस्स गणतॊर फना जहाॉ
80 % ग्रीक थे औय 20 % तुकम थे ।
जल्द ही तुकम भुक्स्रभ को ग्रीक ईसाई के साथ यहने भ ऩये शानी भहसयस होने रगी. अफ

भुसरभानैऄ के मरए मे कोई नई फात नहीॊ है . 1878 भ ओटोभन तुकम साम्राज्म का शासन सभाप्त
होने से साइरस्स 'दाय-उर -इस्राभ ' नहीॊ यह गमा फक्ल्क मह मह साइरस्स के तुकम भुक्स्रभैऄ के

मरए 'दाय-उर -हब्र' (land of conflict ) फन गमा। शक्ततशारी बब्रदटश साम्राज्म के साभने वे कुछ
कय नहीॊ सकते थे ,ऩय बब्रदटश के जाते ही क्स्थनत फदर गई .

साइरस्स के तुकम भुक्स्रभ अफ बी कुछ कयने की क्स्थनत भ नहीॊ थे तमयॊकक उनकी सॊख्मा कुर

जनसॉख्मा का २०% थी। इसमरए 1974 भ तुकम भुक्स्रभ ने टकन को साइरस्स ऩय आक्रभण कयने
को फुरामा। साइरस्स की सयकाय इस आक्रभण को योक नहीॊ ऩाई। 1975 भ तुकम भुक्स्रभैऄ

ने द्धवबाजन की भाॊग की। अरग हुए बाग ने अऩने आऩ को 1983 भ आजाद घोद्धषत कय ददमा
औय नाभ यखा 'Turkish Republic of northern cyprus 'औय टकन ने उसे एक नए दे श का दजाम दे
ददमा । गौय कयने वारी फात मह है कक ऩहरे 16 वीॊ सदी तक इस दे श भ मसपम ग्रीक ईसाई यहते

9

थे. 1571 भ तुकम आम एवॊ उत्तयी साइरस्स भ ग्रीक ईसाई के साथ यहने रगे। सफसे दख
ु द फात मह
है कक 1974 भ जुराई अगस्त की घुसऩैठ भ तुकन आक्रभणकारयमैऄ ने फफमयता ऩयवक
म ग्रीक ईसाईमैऄ
को वहाॊ से बगा ददमा । 200 ,000 ग्रीक ईसाई को फरऩयवक
म ननकार ददमा ।वे रोग अऩना घय
फाय छोड़कय दक्षऺण बाग भ आ गए जहाॉ ग्रीक ईसाई यहते थे ।वे रोग अऩने

ही घय भ शयणाथॉ

फन गए औय मे सफ ककमा गमा ठीक द्धवबाजन कक भाॊग से ऩहरे औय उसके फाद 1983 भ
साइरस्स का एकतयर्फा द्धवबाजन हो गमा । Ethnic cleansing के फाद बी उत्तयी बाग भ
12 ,000 ग्रीक यह गए। 20 वषों के फाद वहाॊ मसपम 715 ग्रीक यह गए औय अफ शन्
य म । कहाॉ गए
मे रोग ???

भैंने मह सफ तमयॉ मरखा? तमयॊकक कश्भीय,ऩाककस्तान औय फॊगरादे श भ मही हुआ औय आज बी हो
यहा है । फॊगार ,असभ, केयर भ मही सफ हो यहा है। तमा हभरोग साइरस्स दे श मा कश्भीय से
कुछ सीखेगे ???? तमा अबी बी हभ मह दद्धु वधा होनी चादहए कक इस्राभ तमा कयता है औय आगे
तमा कये गा ????

हहन्द ू कहाॉ जामे ?
जफ से ऩककस्तान फना है वहाॉ दहन्दओ
के साथ धामभमक आधाय ऩय बेदबाव धभाांतयण अऩहयण

हप्तावाशुरी हत्माए हो यही है ,

दहन्द य औयतो औय रड़ककमैऄ के साथ फरात्काय औय उसके फाद भुक्स्रभ रडको के साथ
जफयदस्ती शादी बी कयवामा जा यहा है

ऩाककस्तान भ दहन्द य का जीना दब
य य हो गमा है , अबी कुछ ददन ऩहरे दहन ् सभाचाय ऩरैऄ से
जानकायी मभरी की ,कुछ दहन्द य के

भक्स्जद भ रगी नर

से ऩानी द्धऩने के फाद भक्स्जद के ऩानी के टॊ की को न केवर शुिी कयण ककमा गमा फक्ल्क उन
दहन्दओ
को द्धऩट-द्धऩट कय फुया हार कय ददमा गमा !

ऩककस्तान के दहन्द य इतना डये सहभे है की अऩहयण के डय से अऩने फच्चो को स्कयर नहीॊ बेज
यही है ,जफ ऩाककस्तान फना था तो वहाॊ दहन्दओ
की कुर आफादी

10

२२ % थी जो आज १.७% यह गई है , दहन्द य द्धवहीन ऩाककस्तान होने भ अफ ज्मादा सभम नहीॊ
फचा है , बायत सयकाय इस भाभरे भ ऩककस्तान सयकाय से न कुछ

फात कयने की इच्छुक है औय न दहन ् ऩककस्तान से सफकुछ अऩना छोड़ कय आमे हुए दहन्दओ

को फसाने के मरए कोई तयीका !
अफ तो अऩना दे श बी ऩयामा रगने रगा है ,दहन्द य ककसके बयोशे औय कहाॉ जामे जफ अऩना दहन ्
नहीॊ अऩनाना चाहता ..तो तमा ऩाककस्तान भ ही घुट घुट कय भयने के अरावा उसका कोई दस
य या
चाया नहीॊ है , जफ की एक रयऩोटम के भत
ु ाबफक ७५०० ऩाककस्तानी अवैध रूऩ से औय कई हजाय
फॊग्राददशी अवैध रूऩ से दहन्दस्
ु थान भ यह यही है , क्जसको कुछ याजनेताओ ने तो उनको

बायतीम नागरयकता दे ने की बी भाॊग कय चक
के साथ बेदबाव तमैऄ ? तमैऄ की
ु े है ,कपय दहन्दओ

वह दहन्द य है !

आज बी ऩाककस्तान से आमे दहन्द य ददल्री भ सदभे भ है की उसे वाऩस ऩाककस्तान न बेज ददमा
जाए

,गह
ृ भॊरारम ने आदे श बी दे ददमा रेककन कुछ दहन्द य सॊगठनैऄ के

उच्च न्मारम भ दामय एक माधचका के वजह से कपरहार उनको ऩककस्तान बेजने ऩय योक रग
गई है ..आगे दे खते है उन दहन्दओ
के बाग्म भ तमा मरखा है

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बायत सयकाय हहन्दओ
ु ॊ की हत्मा ऩय चप्ु ऩी क्मेआ साधे है ?
बायत सयकाय दहन्दओ
ु ॊ की हत्मा ऩय चप्ु ऩी तमैऄ

साधे है ?

उल्रेखनीम है कक ईद-उर-जह
ु ा (7 नवम्फय) के ददन कयाची से 400 भीर दयय चक कसफे भ

कट्टयवादी भक्ु स्रभैऄ ने तीन दहन्दओ
ु ॊ (डा. अजीत कुभाय, डा. नये श कुभाय औय डा. अशोक कुभाय)
की हत्मा कय दी थी, जफकक डा. सेनतमा ऩार को फयु ी तयह घामर कय ददमा था। अबी इनका

इराज चर ही यहा है । इस हत्मा के खखराप ऩाककस्तानी दहन्दओ
ु ॊ ने हड़तार की, द्धवयोध रस्दशमन
ककमा औय दोद्धषमैऄ को कड़ी से कड़ी सजा दे ने की भाॊग की। अभयीकी द्धवदे श द्धवबाग ने बी

दहन्दओ
ु ॊ की हत्मा की ननन्दा की औय कहा कक अल्ऩसॊख्मकैऄ को ननशाना फनामा जाना जामज

नहीॊ है । ऩाककस्तान सयकाय को हत्मायैऄके खखराप कायम वाई कयनी चादहए। ककन्तु बायत सयकाय ने
दहन्दओ
ु ॊ की हत्मा ऩय चप्ु ऩी साधे यखी।

ऩाककस्तान भ दहन्दओ
ु ॊ के साथ जो व्मवहाय हो यहा है , वह यैऄगटे खड़े दे ने वारा है । होरी, ददवारी,
दशहया जैसे रस्भुख त्मोहायैऄ ऩय बी ऩाककस्तान भ सावमजननक छुट्टी नहीॊ होती है । दहन्दओ
ु ॊ को

भक्न्दय जाने से योका जाता है । कोई दहन्द य भय जाता है तो उसको दपनाने को कहा जाता है ।…
इसमरए फड़ी सॊख्मा भ ऩाककस्तानी दहन्द य बायत आ यहे हैं, औय महाॊ भयना ऩसन्द कयते हैं, ऩय
ऩाककस्तानरौटना नहीॊ। ऐसे ही एक ऩाककस्तानी दहन्द य ने फतामा कक कट्टयवादी कबी बी ककसी

दहन्द य के घय आ जाते हैं औय फहय-फेटी भाॊगने रगते हैं। नहीॊ दे ने ऩय घयैऄ भ आग रगा दे ते हैं,
ऩरु
ु षैऄ को भायते-ऩीटते हैं औय हभाये साभने ही दहन्द य भदहराओॊ के साथ दष्ट्ु कभम कयते हैं। अफ
आऩ ही फताओ कोई दहन्द य ऩाककस्तान भ कैसे यह सकता है ?

दहन्दओ
ु ॊ का मही हार फॊगरादे श भ बी है । शामद ही ऐसा कोई ददन फीतता होगा, जफ ककसी दहन्द य
भदहरा के साथ कट्टयवादी फदतभीजी न कयते हैऄगे। कोई भदहरा कट्टयवाददमैऄ का द्धवयोध कयती है
तो उसे भौत के घाट उताय ददमा जाता है । 1 अततफ
य य, 2011 की एक घटना है , जो फगॊरादे श भ
कट्टयवाददमैऄ की कयतयत को फताती है । इस घटना की द्धवस्तत
ृ जानकायी ‗फॊगरादे श भाइनोरयटी

12

वॉच‘ द्सवाया दनु नमाबय भ बेजी गई। उसी जानकायी के अनुसाय उऩमत
ुम त घटना गाॊव-वोरावो, थानारूऩगॊज, क्जरा-नायामणगॊज (फॊगरादे श) की है ।

1 अततफ
य य को दोऩहय फाद रूभा यानी दास (15) घय ऩय अकेरी थी। तबी भो. दरीभ (22), भो.
यपीकुर इस्राभ (23) औय भो. शभीभ मभमाॊ उसके घय भ दाखखर हो गए। इन तीनैऄ ने ऩहरे

उसके साथ दष्ट्ु कभम ककमा औय फाद भ पाॊसी रगाकय हत्मा कय दी। कुछ दे य फाद घय वारैऄ को

इस घटना की जानकायी मभरी। वे रोग ऩुमरस थाने जाने को तैमाय हुए तो अऩयाधधमैऄ ने उन्ह
भुकदभा दजम नकयने की चेतावनी दी। इस कायण दो ददन तक रूभा यानी दास का शव घय ऩय

ऩड़ा यहा। तीसये ददन मानी 3 अततयफय, 2011 को रूऩगॊज थाने भ ‗नायी ओ मशशु ननयजतन दभन
अीन, 2000 (सॊशोधधत-2003) की धाया 9 (1)‘ के तहत आयोद्धऩमैऄ के खखराप भाभरा दजम हुआ।
ककन्तु ककसी दफाव की वजह से ऩुमरस आयोद्धऩमैऄ को फचाने भ रगी है ।

15 वषॉमा रूभा यानी दास अऩने द्धऩता ऩयणो योफी दास एवॊ भाता भारती यानी दास की इकरौती
सन्तान थी। कुछ सभम से आयोऩी उसके ऩीछे रगे थे औय ननकाह के मरए दफाव डार यहे थे।

इन फदभाशैऄ से अऩनी फेटी को फचाने के मरए दास दम्ऩनत ने अऩना घय बी फदर मरमा। ककन्तु
वे गण्
ु डे वहाॊ बी ऩहुॊच गए।

चाहे ऩाककस्तान हो मा फॊगरादे श दोनैऄ दे शैऄ भ दहन्द य भदहराओॊ को द्धवशेष रूऩ से ननशाने ऩय यखा
जा यहा है । याह चरती ककसी रड़की को सये आभ उठाकय कहा जाता है कक उसने इस्राभ कफयर
कय मरमा है औय उसका ननकाह ककसी भुक्स्रभ से कय ददमा जाता है । ऐसी घटनाएॊ ददनैऄददन

फढ़ती जा यही हैं। इसमरए दोनैऄ दे शैऄ के दहन्द य बायत आना चाहते हैं। मही वजह है कक कुछ रोग
सवार उठाने रगे हैं कक तमा कुछ सार फाद ऩाककस्तान औय फॊगरादे श दहन्द-य द्धवहीन हो जाएॊगे?

13

ऩाककस्तान औय फॊगरादे श की मे घटनाएॊ तमा उन भानवाधधकारयमैऄ तक नहीॊ ऩहुॊचती हैं, जो
कश्भीय भ सेना ऩय भानवाधधकाय के उल्रॊघन का आयोऩ रगाकय हो-हल्रा भचाते हैं? तमा
दहन्दओ
ु ॊ के उत्ऩीड़न की खफय उन बायतीम सेकुरय नेताओॊ तक नहीॊ ऩहुॊचती हैं, जो हभास के

ककसी आतॊकी को भायने ऩय इस्रामर को ऩानी ऩी-ऩीकय कोसते हैं? बायत भ कुछ रोग अतसय

मह बी कहते हैं कक ऩाककस्तान औय बायत के याजनेता अऩने स्वाथम के मरए दोनैऄ दे शैऄ के फीच
खटास ऩैदा कयते हैं, जफकक दोनैऄ दे शैऄ के रोग अभन चाहते हैं, एक-दस
य ये से भुहब्फत कयते हैं।

ऐसे रोग अऩने ऩाककस्तानी मभरैऄ से मह तमैऄ नहीॊ ऩयछते कक ऩाककस्तान भ दहन्द य 1 रस्नतशत से

बी कभ तमैऄ यह गए हैं? मदद ऩाककस्तानी भक्ु स्रभ अऩने महाॊ के दहन्दओ
ु ॊ से भह
ु ब्फत कयते तो वे
रट
ु -ऩीटकय बायत नहीॊ आते? ऩाककस्तान भ दहन्दओ
ु ॊ की आफादी कभ होने की सफसे फड़ी वजह है

भतान्तयण। दहन्दओ
ु ॊ कोजफदम स्ती इस्राभ कफयरवामा जाता है । इस ऩय बायतीम सेकुरय कबी कुछ
तमैऄ नहीॊ फोरते हैं? ऩाककस्तान व फॊगरादे श भ दहन्दओ
ु ॊ के साथ हार भ घटी मे नश
ृ ॊस घटनाएॊ
तमा उनकी सॊवेदनाएॊ झकझोय ऩाएॊगी?

वहाॊ दहन्दओ
ु ॊ के मरए फनाई जा यहीॊ अभानवीम क्स्थनतमैऄ ऩय बायत सयकाय तमैऄ चप्ु ऩी साधे
यहती है ?

14

अयफ की प्राचीन सभद्ध
ृ िैहदक सॊस्कृतत औय बायत
अयफ की प्राचीन सभद्ध
ृ िैहदक सॊस्कृतत औय बायत

अयफ दे श का बायत, बग
ु शक्र
ु ाचामम तथा उनके ऩोर औवम से ऐनतहामसक सॊफॊध रस्भाखणत है ,
ृ ु के ऩर
महाॉ तक कक "दहस्री ऑप ऩमशममा" के रेखक साइतस का भत है कक अयफ का नाभ औवम के ही

नाभ ऩय ऩड़ा, जो द्धवकृत होकय "अयफ" हो गमा। बायत के उत्तय-ऩक्श्चभ भ इरावतम था, जहाॉ दै त्म
औय दानव फसते थे, इस इरावतम भ एमशमाई रूस का दक्षऺणी-ऩक्श्चभी बाग, ईयान का ऩव
य ॉ बाग
तथा धगरधगत का ननकटवतॉ ऺेर सक्म्भमरत था। आददत्मैऄ का आवास स्थान-दे वरोक बायत के

उत्तय-ऩव
य म भ क्स्थत दहभारमी ऺेरैऄ भ यहा था। फेफीरोन की रस्ाचीन गप
ु ाओॊ भ ऩयु ाताक्त्त्वक खोज
भ जो मबक्त्त धचर मभरे है , उनभ द्धवष्ट्णु को दहयण्मकमशऩु के बाई दहयण्माऺ से मि
ु कयते हुए
उत्कीणम ककमा गमा है ।

उस मुग भ अयफ एक फड़ा व्माऩारयक केन्द्र यहा था, इसी कायण दे वैऄ, दानवैऄ औय दै त्मैऄ भ इरावतम
के द्धवबाजन को रेकय 12 फाय मुि 'दे वासुय सॊग्राभ' हुए। दे वताओॊ के याजा इन्द्र ने अऩनी ऩुरी

ज्मन्ती का द्धववाह शुक्र के साथ इसी द्धवचाय से ककमा था कक शुक्र उनके (दे वैऄ के) ऩऺधय फन
जाम, ककन्तु शुक्र दै त्मैऄ के ही गुरू फने यहे । महाॉ तक कक जफ दै त्मयाज फमर ने शुक्राचामम का

कहना न भाना, तो वे उसे त्माग कय अऩने ऩौर औवम के ऩास अयफ भ आ गमे औय वहाॉ 10 वषम
यहे । साइतस ने अऩने इनतहास ग्रन्थ "दहस्री ऑप ऩमशममा" भ मरखा है कक 'शुक्राचामम मरव्ड टे न
इमसम इन अयफ'। अयफ भ शक्र
ु ाचामम का इतना भान-सम्भान हुआ कक आज क्जसे 'काफा' कहते है ,
वह वस्तत
ु ् 'काव्म शक्र
ु ' (शक्र
ु ाचामम) के सम्भान भ ननमभमत उनके आयाध्म बगवान मशव का ही
भक्न्दय है । काराॊतय भ 'काव्म' नाभ द्धवकृत होकय 'काफा' रस्चमरत हुआ। अयफी बाषा भ 'शक्र
ु ' का
अथम 'फड़ा' अथामत 'जम्
ु भा' इसी कायण ककमा गमा औय इसी से 'जम्
ु भा' (शक्र
ु वाय) को भस
ु रभान
ऩद्धवर ददन भानते है ।

"फह
ृ स्ऩनत दे वानाॊ ऩुयोदहत आसीत ्, उशना काव्मोऽसुयाणाभ ्"-जैमभननम ब्रा.(01-125)
अथामत फह
ृ स्ऩनत दे वैऄ के ऩुयोदहत थे औय उशना काव्म (शुक्राचामम) असुयैऄ के।

15

रस्ाचीन अयफी काव्म सॊग्रह गॊथ 'सेअरूर-ओकुर' के 257व ऩष्ट्ृ ठ ऩय हजयत भोहम्भद से 2300 वषम
ऩयवम एवॊ ईसा भसीह से 1800 वषम ऩयवम ऩैदा हुए रफी-बफन-ए-अयव्तफ-बफन-ए-तयु पा ने अऩनी
सुरस्मसि कद्धवता भ बायत बयमभ एवॊ वेदैऄ को जो सम्भान ददमा है , वह इस रस्काय है "अमा भुफाये कर अयज भुशैमे नैऄहा मभनाय दहॊदे।
व अयादकल्राह भज्जोनज्जे क्जकयतुन।1।
वह रवज्जरीमतुन ऐनाने सहफी अयवे अतुन क्जकया।
वहाजेही मोनज्जेरयु म यसर
य मभनर दहॊदतन
ु ।2।
मकयरयनल्राह् मा अहरर अयज आरभीन पुल्रहुभ।
पत्तेफेऊ क्जकयतर
ु वेद हुतकुन भारन मोनज्वेरतन
ु ।3।
वहोफा आरभुस्साभ वर मजुयमभनल्राहे तनजीरन।
पऐ नोभा मा अयवीमो भत्ु तवअन मोवसीयीमोनजातन
ु ।4।
जइसनैन हुभारयक अतय नासेहीन का-अ-खफ
ु ातुन।
व असनात अराऊढ़न व होवा भश-ए-यतन
ु ।5।"
अथामत-(1) हे बायत की ऩुण्मबयमभ (मभनाय दहॊदे) तय धन्म है , तमैऄकक ईश्वय ने अऩने ऻान के मरए

तुझको चन
ु ा। (2) वह ईश्वय का ऻान रस्काश, जो चाय रस्काश स्तम्बैऄ के सदृश्म सम्ऩयणम जगत ् को
रस्कामशत कयता है , मह बायतवषम (दहॊद तुन) भ ऋद्धषमैऄ द्सवाया चाय रूऩ भ रस्कट हुआ। (3) औय
ऩयभात्भा सभस्त सॊसाय के भनुष्ट्मैऄ को आऻा दे ता है कक वेद, जो भेये ऻान है , इनके अनुसाय

आचयण कयो।(4) वह ऻान के बण्डाय साभ औय मजुय है , जो ईश्वय ने रस्दान ककमे। इसमरए, हे भेये
बाइमैऄ! इनको भानो, तमैऄकक मे हभ भोऺ का भागम फताते है ।(5) औय दो उनभ से रयक् , अतय

(ऋग्वेद, अथवमवेद) जो हभ भ्रातत्ृ व की मशऺा दे ते है , औय जो इनकी शयण भ आ गमा, वह कबी
अन्धकाय को रस्ाप्त नहीॊ होता।

इस्राभ भजहफ के रस्वतमक भोहम्भद स्वमॊ बी वैददक ऩरयवाय भ दहन्द य के रूऩ भ जन्भ थे, औय
जफ उन्हैऄने अऩने दहन्द य ऩरयवाय की ऩयम्ऩया औय वॊश से सॊफॊध तोड़ने औय स्वमॊ को ऩैगम्फय

16

घोद्धषत कयना ननक्श्चत ककमा, तफ सॊमुतत दहन्द य ऩरयवाय नछन्न-मबन्न हो गमा औय काफा भ क्स्थत
भहाकाम मशवमरॊग (सॊगे अस्वद) के यऺाथम हुए मुि भ ऩैगम्फय भोहम्भद के चाचा उभय-बफन-एहश्शाभ को बी अऩने रस्ाण गॊवाने ऩड़े। उभय-बफन-ए-हश्शाभ का अयफ भ एवॊ केन्द्र काफा (भतका)

भ इतना अधधक सम्भान होता था कक सम्ऩयणम अयफी सभाज, जो कक बगवान मशव के बतत थे एवॊ
वेदैऄ के उत्सुक गामक तथा दहन्द य दे वी-दे वताओॊ के अनन्म उऩासक थे, उन्ह अफुर हाकभ अथामत
'ऻान का द्धऩता' कहते थे। फाद भ भोहम्भद के नमे सम्रस्दाम ने उन्ह ईष्ट्मावश अफुर क्जहार
'अऻान का द्धऩता' कहकय उनकी ननन्दा की।

जफ भोहम्भद ने भतका ऩय आक्रभण ककमा, उस सभम वहाॉ फह
ृ स्ऩनत, भॊगर, अक्श्वनी कुभाय, गरूड़,
नमृ सॊह की भयनतममाॉ रस्नतक्ष्ट्ठत थी। साथ ही एक भयनतम वहाॉ द्धवश्वद्धवजेता भहायाजा फमर की बी थी,

औय दानी होने की रस्मसद्धि से उसका एक हाथ सोने का फना था। 'Holul' के नाभ से अमबदहत मह
भयनतम वहाॉ इब्राहभ औय इस्भाइर की भयक्त्तममो के फयाफय यखी थी। भोहम्भद ने उन सफ भयक्त्तममैऄ

को तोड़कय वहाॉ फने कुएॉ भ पक ददमा, ककन्तु तोड़े गमे मशवमरॊग का एक टुकडा आज बी काफा
भ सम्भानऩयवक
म न केवर रस्नतक्ष्ट्ठत है , वयन ् हज कयने जाने वारे भुसरभान उस कारे (अश्वेत)
रस्स्तय खण्ड अथामत 'सॊगे अस्वद' को आदय भान दे ते हुए चभ
य ते है ।

रस्ाचीन अयफैऄ ने मसन्ध को मसन्ध ही कहा तथा बायतवषम के अन्म रस्दे शैऄ को दहन्द ननक्श्चत ककमा।
मसन्ध से दहन्द होने की फात फहुत ही अवैऻाननक है । इस्राभ भत के रस्वतमक भोहम्भद के ऩैदा
होने से 2300 वषम ऩयवम मानन रगबग 1800 ईश्वी ऩयवम बी अयफ भ दहॊद एवॊ दहॊद य शब्द का व्मवहाय
ज्मैऄ का त्मैऄ आज ही के अथम भ रस्मुतत होता था।

अयफ की रस्ाचीन सभि
ृ सॊस्कृनत वैददक थी तथा उस सभम ऻान-द्धवऻान, करा-कौशर, धभम-सॊस्कृनत
आदद भ बायत (दहॊद) के साथ उसके रस्गाढ़ सॊफॊध थे। दहॊद नाभ अयफैऄ को इतना प्माया रगा कक
उन्हैऄने उस दे श के नाभ ऩय अऩनी क्स्रमैऄ एवॊ फच्चैऄ के नाभ बी दहॊद ऩय यखे।
अयफी काव्म सॊग्रह ग्रॊथ ' सेअरूर-ओकुर' के 253व ऩष्ट्ृ ठ ऩय हजयत भोहम्भद के चाचा उभय-बफनए-हश्शाभ की कद्धवता है क्जसभ उन्हैऄने दहन्दे मौभन एवॊ गफुर दहन्द य का रस्मोग फड़े आदय से

ककमा है । 'उभय-बफन-ए-हश्शाभ' की कद्धवता नमी ददल्री क्स्थत भक्न्दय भागम ऩय श्री रक्ष्भीनायामण
भक्न्दय (बफड़रा भक्न्दय) की वादटका भ मऻशारा के रार ऩत्थय के स्तम्ब (खम्फे) ऩय कारी
स्माही से मरखी हुई है , जो इस रस्काय है " कपद्धवनक क्जकया मभन उरुमभन तफ असेक ।

17

करुवन अभातातुर हवा व तजतकरू ।1।
न तज खेयोहा उड़न एररवदए मररवया ।
वरुकएने जातल्राहे औभ असेरू ।2।
व अहारोरहा अजहय अयानीभन भहादे व ओ ।
भनोजेर इरभुद्दीन भीनहुभ व समत्तरू ।3।
व सहफी वे माभ पीभ कामभर दहन्दे मौभन ।
व मकुरन
य न रातहजन पइन्नक तवज्जरू ।4।
भअस्समये अयव्राकन हसनन कुल्रहयभ ।
नजभ
ु न
ु अजा अत सम्
ु भा गफर
ु दहन्द य ।5।
अथामत ् - (1) वह भनुष्ट्म, क्जसने साया जीवन ऩाऩ व अधभम भ बफतामा हो, काभ, क्रोध भ अऩने

मौवन को नष्ट्ट ककमा हो। (2) अदद अन्त भ उसको ऩश्चाताऩ हो औय बराई की ओय रौटना
चाहे , तो तमा उसका कल्माण हो सकता है ? (3) एक फाय बी सच्चे रृदम से वह भहादे व जी की
ऩयजा कये , तो धभम-भागम भ उच्च से उच्च ऩद को ऩा सकता है । (4) हे रस्बु ! भेया सभस्त जीवन

रेकय केवर एक ददन बायत (दहॊद) के ननवास का दे दो, तमैऄकक वहाॉ ऩहुॉचकय भनुष्ट्म जीवन-भुतत
हो जाता है । (5) वहाॉ की मारा से साये शुब कभो की रस्ाक्प्त होती है , औय आदशम गुरूजनैऄ (गफुर
दहन्द)य का सत्सॊग मभरता है ।

18

!!जाततप्रथा ने हभें शसपफ फफाफद ही ककमा है .!!
जफसे हभाये बायत दे श ने इस जात-ऩात को गॊबीयता से रेना शुरू ककमा है तफसे हभाया दे श

दनु नमा को याह ददखाने वारे दजे से ननकरकय मसपम दनु नमा का सफसे फड़ा कजमदाय औय मबखायी
दे श फनकय यह गमा है . औय ऩक्श्चभी दनु नमा के दे श इसीमरए इतनी तयतकी कय ऩाए तमैऄकक

उन्हैऄने अऩनी फहुत सी कमभमैऄ के फावजयद सबी आदमभमैऄ को मसपम उनकी ऩैदाइश को ऩैभाना न
फनाकय औय ऩैदाइश की ऩयवाह ककमे फगैय इॊसान की इज्जत के भाभरे भ फयाफयी का ह़/दजाम
ददमा. इसी शैतानी जात-ऩात के चरते न मसपम हभने सददमैऄ तक ़त्र-ए-आभ औय फरात्काय को
सहा है ऩय भातब
य ी औय ददम नाक फॊटवाये को बी सहा है . अफ कोई हभसे मे ऩयछने की
ृ मय भ के खन
गुस्ताखी हधगमज न कये की इस शैतानी जात-ऩात के पामदे औय नुकसान तमा हैं ?

हाॉ मे जरूय है कक द्धऩछरे कुछ सभम भ जफसे इस शैतानी जात-ऩात की ऩकड़ कापी कभ हुई है तो
हभने याहत की एक साॊस री है . आऩ एक फात औय सभझ र कक जहाॉ बी इस शैतानी जात-ऩात
का सयददम फना हुआ है उसकी एक फहुत फड़ी वजह है इस जात-ऩात का याजनीनतकयण. औय
इस याजनीनतकयण के गोयखधॊधे औय भतकायी वारी दक
ु ानदायी के फॊद न होने मरए हभ सफ

क्जम्भेवाय इसीमरए हैं कक हभ सफ खद
ु से आगे फढ़कय उन सफ यस्भैऄ, ककताफैऄ औय यीनत-रयवाजैऄ,
जो जन्भ आधारयत जानत-ऩानत को भानते हैं, को कयड़ा कयकट जैसी गॊदगी सभझकय कयड़ेदान भ

नहीॊ डारते फक्ल्क इस गन्दगी को अऩने सभाज रुऩी क्जस्भ ऩय रऩेटे हुए हैं. रानत है उन सफ
रोगैऄ ऩय जो इस शैतानी जात-ऩात को ऽत्भ कयने के मरए आगे नहीॊ आते......
दे खा जामे तो जानत व्मवस्था कभजोय होने के फाद से दह बायत गर
ु ाभ फना औय सभस्मा फढा ।हजाय
सार ऩहरे कक दहन्द ु व्मफस्था भेँ बायत रस्गनत ऩय दह था ।कपय बी जानतफाददता दे श के मरए खयाफ है
खत्भ कयने कक ऩहर होनी चादहए ।

19

िन भेन आभी-ितफभान भे दे श को सख्त जरुयत
वप्रम शभत्रेआ आज सिाफधधक चचाफ भे है िन भेन आभी जनता ऩार्टी के अध्मऺ डॉ सुब्रभणणमभ

स्िाभी एिॊ नयें द्र भोदी | उनके विगत के फाये भें कई तयहे की फातें की जाती है | अर्टर जी को छोड़
कय इन २५ िर्षों भें कोई बी इतना ऩरयणाभ जनक याजनामक जनता के फीच नहीॊ आमा |
दस
ू यी औय फाफा याभदे ि एिॊ अन्म धभाफचामों ने इनको अऩना भागफदशफन दे ने के शरए अऩना

सिफस्ि न्मौछािय कयने का तनणफम कय शरमा है | जफ याजनेता याजनीतत अऩने बौततक सुखो के

शरए कयने रगे औय याजधभफ बूर जामे तो उसी सभम धभफ को रे धभाफचामों को आगे आना होता
है | िही ऩहर फाफा याभदे ि ने की | उसको सिफप्रथभ अॊगीकाय कयने िारे याजनेता है डॉ स्िाभी

|उन्हेआने याजधभफ स्िीकाय ककमा है न याज-भहजफ | धभफ औय भजहफ भें िही अॊतय है जो धयती
औय आसभान भें है |

कुछ उजरेखनीम सयाहनीम ऩरयणाभ है जो डॉ स्िाभी को सफ से अरग कयते है |
१) आऩातकार भें सकिम बूशभका
२)एततहाशसक जनता ऩार्टी को ल्जॊदा यखे हुए है
३) इरेक्रोतनक िोहर्टॊग भशीन ऩय केस ककमा,ल्जसके ऩरयणाभ स्िरुऩ ऩूयी प्रणारी को सुधाया जा
यहा है

४)सोतनमा गाॉधी नाभक विदे शी र्षड्मॊत्र को प्रायॊ ब से ही अॊकुश भें यखना
५) सोतनमा को प्रधानभॊत्री फनने से योका
६) सोतनमा के णखराप चुनाि रड़ने ऩय माधचकाए रगाना

20

७)याभसेतु ऩय सुप्रीभ कोर्टफ भें फहस कय याभसेतु ऩय स्थगनादे श प्राप्त कयाना
८)२ जी स्ऩेक्रभ ऩय कई भॊत्रत्रमेआ को ततहाड़ जेर शबजिाकय भ्रष्र्टाचाय ऩय प्रत्मऺ प्रहाय ककमा
९)साम्प्प्रदातमकता रक्षऺत विधेमक की तनभाफत्री सोतनमा गाॉधी के विरुद्ध बायतीम सभाज को
विखॊडडत कय दे ने ऩय एप आई आय दजफ कय, साभल्जक सॊतुरन फनामा
१०) सुप्रीभ कोर्टफ ने डॉ स्िाभी के भ्रष्र्टाचाय के प्रतत अत्मधधक सजग यहने ऩय उनको सैजमूर्ट
ककमा

अफ आऩ स्िमॊ तनणफम कये
१) क्मा आऩ उन रोगो का साथ दे ते यहें गे जो आऩके साथ औय दे श के साथ छर कयते यहे है
२)यॊ गे शसमायो का साथ दोगें मा ?
३)कफ तक शभडडमा के सिेऺणेआ भें बयभाओगें
४)ितफभान दे श का सॊविधान ही कापी है , जरुयत है केिर तीऺण दृल्ष्र्ट िारे याजनेता की है न?
५)दे श का अधधसॊख्म मुिा डॉ स्िाभी-भोदी को अऩना भानता है , दे खे सोशर साइट्स ऩय ऩरयणाभ
राखो भें सॊख्मा है याष्रबक्तेआ की

महद आऩ उक्त विियण से सहभत है तो आमे हभाये साथ मातन ऐक्शन कभेर्टी एगें स्र्ट कये प्शन
इन इल्न्डमा( ACACI) से जुड़े
हभसे सॊऩकफ कयने के शरए हभाये ग्रुऩ के सदस्म फने
हभाये ग्रुऩ है
१) डॉ सब्र
ु भणणमभ स्िाभी(चिव्मह
ू विजेता) पेसफुक
२)SUBRMANIAN SWAMI
३)अणखर बायतीम साहहत्म ऩरयर्षद्

21

"इस्तीपा क्मेआ तैमाय था"
" धचदॊ फयभ का कर फेदाग साबफत होना दे श का सौबाग्म मा दब
ु ामग्म "
कर ददनाॊक 04-02-2012 को ननचरी अदारत ऩदटमारा कोटम के भाननीम न्मामाधीश श्री ओ.ऩी.
सैनी द्सवाया हभाये भाननीम गह
ृ भॊरी को टय जी भाभरे भ तरीन धचट दे दी गई । मे धचदॊ फयभ जी
के मरमे फहुत ही खश
ु ी की फात होगी औय उन्हैऄने याहत की साॊस री होगी । ननक्श्चत रूऩ भ
गह
ृ भॊरी औय काॊग्रेस ऩाटॊ इसक्रे मरमे फधाई के ऩार हैं ।ऩय भेया मह भानना है कक उनसे बी
ज्मादा इस दे श औय उसकी अवाभ के मरमे मह सच
य ना याहत बयी औय खश
ु ी की है कक हभाये

गह
ृ भॊरी कानयनी रूऩ से फेदाग साबफत हुए । तमैऄकक क्जस सयकाय ऩय बयोसा कय अवाभ जी यही
है अगय वो ही भ्रष्ट्ट ननकरता तो शामद अवाभ का बयोसा इस रोकतॊर औय सयकाय से औय बी
ज्मादा टयट जाता औय रोकतॊर के के मरमे इसके फहुत ही घातक ऩरयणाभ ननकरते । वैसे काॊग्रेस
औय श्री धचॊदफयभ के मरमे इस फात ऩय बम तमैऄ था ? औय खश
ु ी तमैऄ भनाई गई मह फात भेयी

सभझ से ऩये है ? तमैऄकक पैसरे ऩय खश
ु ी जादहय कयते सभम श्री धचदॊ फयभ का मह फमान कक "
उन्हैऄने इस्तीपा तैमाय यखा था " कहीॊ न कहीॊ मह सवार अबी बी ऩैदा कयता है कक जफ श्री

धचदॊ फयभ दोषी नहीॊ थे तो कपय उन्ह इस्तीपा तैमाय यखने की तमा जरुयत थी । इस फमान के दो
भामने ननकारे जा सकते हैं ऩदहरा " मह कक शामद गह
ृ भॊरी सभझते है कक कहीॊ न कहीॊ वो दोषी
हैं "इसमरमे उन्हैऄने इस्तीपा तैमाय यखा था मा दस
य या " उन्ह न्मामऩामरका ऩय मे बयोसा नहीॊ था
कक वो सही पैसरे बी कय सकती है । " इसके अरावा खश
ु ी भनाने का उन्ह इसमरमे हक औय
जरुयत नहीॊ है कक - जरुयत इसमरए नहीॊ कक जफ वो दोषी ही नहीॊ थे तो उन्ह ककस फात की

खश
ु ी फक्ल्क उन्ह इस फात ऩय अपसोस औय आक्रोश जताना चादहमे कक उन्ह फेवजह ऩये शान
ककमा गमा ।

औय हक इसमरमे नहीॊ कक उनके द्सवाया याजा ऩय रगाभ न रगाने की वजह से इतना फडा ा़ स्कैभ

22

हो गमा औय अवाभ का बयोसा सयकाय से उठ गमा औय अदारतैऄ का इस कामम भ कहीॊ फहुत
ज्मादा सभम फफामद हुआ । जो फहुभयल्म सभम अदारतैऄ को दस
य ये रस्कयणौ को ननऩटाने भ जाना

था वो सयकाय के खखराप रगे भुकदभैऄ को ननऩटाने भ चरा गमा ।मे फडा ही दब
ु ामग्मऩयणम है कक
सयकाय से भदद की अऩेऺा अदारतैऄ को उनके खखराप रगे भुकदभैऄ को बी ननऩटाना ऩडता है

।कर का पैसरा बरे ही कुछ बी यहा हो ऩय इसके अरावा बी कहीॊ न कहीॊ 122 राइसस का यद्द
होना बरे ही कानयनी रुऩ भ सयकाय (द्धवत्तभॊरी औय रस्धानभॊरी ) को दोषी न ठहयाता हो ऩय

नैनतक रूऩ से सयकाय की जवाफदे ही तम कयता है ,वो इसमरमे कक इस अबी तक सयकाय का
कानन
य ी रुऩ भ भ्रष्ट्टाचाय भ सक्म्भमरत होना न मसि होता हो ऩयन्तु इस फात से इॊकाय नहीॊ

ककमा जा सकता कक वो इतने फडे भ्रष्ट्टाचाय को योकने भ असभमथ यही । हाॊ चकॊय क रोअय कोटम ने

पैसरा ददमा है इसमरमे कोटम औय जज ऩय सॊदेह कयना शामद गरत ही नहीॊ कोटम की अवभानना
बी होगा ।ऩय इसके द्धवऩयीत अगय इस पैसरे को उच्च मा उसके आगे उच्चत्तभ न्मामारम भ
चन
ु ौती दी जाती है औय जैसा कक सब्र
ु हभन्मभ स्वाभी का बयोसा कह यहा हैं कक धचदॊ फयभ इसभ
दोषी हैं औय अगय वो उच्च / उच्चत्तभ न्मामारम द्सवाया दोषी ऩामे जाते है तो कपय दो फात

खडी ा़ हैऄगी ऩदहरे मे कक तमा 1) ननचरी अदारत इतनी सऺभ नहीॊ है कक वो सही मा गरत का
पैसरा रे सके मा 2) तमा ननचरी अदारत ननष्ट्ऩऺ पैसरे सुनाने भ असभथम है । औय अगय

नतीजा गह
य यी फात होगी ऩय
ृ भॊरी के खखराप आता है तो उस सभम उसे जो बी सजा हो वो दस

तफ तक दे श को औय ककतना नुकसान ऩहुॊच चक
ु ा होगा वो कल्ऩना से ऩये है । औय वो इस दे श
का फहुत फडा ा़ " "दब
ु ामग्म" होगा ऩय अगय धचॊदफयभ अॊनतभ रूऩ से बी ननयाऩयाधी साबफत होते हैं
तो मे दे श के मरमे फहुत ही "सौबाग्म" की फात होगी ।दे श को इॊतजाय यहे गा उस ऩरयणाभ का ।
हाॊ इन सफ भुकदभैऄ के दौयान नन:सॊदेह डा.स
ा़ ुब्रहभन्मभ स्वाभी एक हीयो साबफत हुए हैं औय वो
भ्रष्ट्टाचारयमैऄ की धायणा फदरने औय उनको मह सॊकेत दे ने भ सपर हुए हैं कक वो सुधय जाम
अन्मथा जेर के दयवाजे उनके मरमे बी उतने ही खर
ु े हुए हैं क्जतने के एक आभ अऩयाधी के
मरमे ।

जम दहन्द ।

23

हदल्विजम शसॊह से रेकय उनके गद्दाय ऩुखोका कारा धचर्टठा.. कुर चरयत्र कहो मा
हदल्विजम चरयत्र..करॊक से ऩरयऩूण!फ !हदल्विजम शसॊह गद्दायेआ का िॊशज :ह्तत्मा का आयोऩी !!
भनुष्म को जैसे सॊस्काय अऩने ऩुयखेआ से शभरते हेऄ ,उसके अनुरूऩ ही उसका स्िबाि ,चरयत्र औय

विचाय फन जाते हेऄ .मह एक तनविफिाद सत्म है .औय हदल्विजम के ऊऩय ऩूयी तयह से रागू होती
है .हदल्विजम खद
ु को प्रथ्िी याज चौहान का िॊशज फताता है .रेककन इसका कोई प्रभाण नहीॊ

शभरता है .हदल्विजम ऺत्रत्रओॊ की एक उऩजातत "खीची "से सम्प्फॊधधत है .इसका विियण "खीची
इततहास सॊग्रह... "भें शभरता है .इसके रेखक A .H .Nizami औय G .S .Khichi है .ऩुस्तक का

सॊऩादन R .P .Purohit ने ककमा है .ककताफ "णखची शोध सॊस्थान जोधऩुय "से प्रकाशशत हुई थी
.एक औय ऩुस्तक "Survay of khichii History "भें खीधचमेआ के फाये भें जानकायी शभरती है .णखची
धन रेकय ककसी याजा के शरए मुद्ध कयते थे .आज हदल्विजम खुद को भध्म प्रदे श भें गुना ल्जरा

के एक छोर्टी सी रयमासत "याघोगढ़ "का याजा कहता है .उसके चभचे उसे हदवगी याजा ऩुकायते है
.

1 -हदल्विजम का ऩि
फ कौन था
ू ज

ऩस्
ु तक के अनस
ु ाय हदल्विजम के हाथेआ जो रयमासत शभरी एक "गयीफ दास "नाभके सैतनक को अकफय ने
दी थी .जफ याजऩत
ु ाना औय भारिा के सबी ऺत्रत्रम याणा प्रताऩ के साथ हो यहे थे .गयीफ दास अकफय के
ऩास चरा गमा .अकफय ने उसकी सेिा से प्रसन्न होकय भारिा के सफ
े ाय को हुक्भ बेजा की गयीफ दास
ू द
को एक ऩयगना मातन ऩाॊच गाॉि दे हदए जाएॉ . गयीफ दास की भौत के फाद उसके ऩत्र
ु "फरिॊत शसॊह
(1770 -1797 ) ने इसिी 1777 भें फसॊत ऩॊचभी के हदन एक गढ़ी की नीॊि यखी औय उसका नाभ अऩने कुर
दे िता "याघोजी "के नाभ ऩय "याघोगढ़ "यख हदमा था .

कनफर र्टाड के इततहास के अनस
ु ाय फरिॊत शसॊह ने 1797 तक याज ककमा .औय अॊगये जेआ से दोस्ती फढ़ाई.जफ
सन 1778 भें प्रथभ भयाठा मद्ध
ु हुआ तो फरिॊत शसॊह ने अॊगये जी फौज की भदद की थी

24
इसका उजरेख जनयर Gadred ने "Section from State Papers .Maratha Volume I Page 204 भें ककमा है
.फरिॊत शसॊह की इस सेिा के फदरे कम्प्ऩनी सयकाय ने Captain fielding की तयप से फरदे ि शसॊह को ऩत्र
बेजा ,ल्जसभे शरखा था कॊऩनी फहादयु की तयप से मह ऩयगना जो फाराभेर्टभें है उसका ककरा याघोगढ़
तम्प्
ु हें प्रदान ककमा जाता है औय उसके साथ के गािेआ को अऩना याज्म सभझो .महद शसॊधधमा सयकाय ककसी
प्रकाय का दखर कये तो इसकी सच
ू ना भझ
ु े दो.

फाद भें जफ 1818 भें फरिॊत शसॊह का नाती अजीत शसॊह (1818 -1857 )गद्दी ऩय फैठा तो अॊगये जेआ के प्रतत
विद्रोह होने रगे था ,अजीत शसॊह ने विाशरमय के ये ल्जडेंर्ट को ऩत्र बेजा कक,आजकर भहायाज शसॊधधमा
फगाित की तय्मायी कय यहे हेऄ .उनके साथ झाॉसी औय दस
ू यी रयमासत के याजा बी फगाित का झॊडा खड़ा
कय यहे हेऄ .इसशरए इन फाधगमेआ को सजा दे ने के शरए जजदी से अॊगये जी फौज बेल्जए ,उस ऩत्र का जिाफ
गिाशरमय के ये ल्जडेंर्ट A .Sepoyrs ने इस तयह हदमा "आऩ कॊऩनी की फौज की भदद कयो औय फाधगमेआ साथ
नहीॊ दो .आऩ हभाये दोस्त हो ,अगय शसॊधधमा फौज मेतो उस से मद्ध
ु कयो .कॊऩनी की फौज तनकर चक
ु ी है .
रेककन सन 1856 भें एक दघ
फ ना भें अजीत शसघ की भौत हो गमी .उसके फाद 1857 भें उसका रड़का "जम
ु र्ट
भॊगर शसॊह "(1857 -1900 )गद्दी ऩय फैठा इसके फाद "वििभजीत शसॊह याजा फना (1900 -1902 (.रेककन
अॊग्रेज ककसी कायण से उस से नायाज हो गए .औय उसे गद्दी से उताय शसयेआज ऩरयिाय के एक मि
ु क
"भदरूऩ शसॊह "को याजा फना हदमा ल्जसका नाभ "फहादयु शसॊह "यख हदमा गमा ( 1902 -1945 )अॊगये जेआ की
इस भेहयफानी के शरए फहादयु शसॊह ने अॊगये जी सयकाय का धन्मिाद हदमा औय कहा भेऄ िाइसयाम का
आबायी हूॉ .भेऄ िादा कयता हूॉ कक सयकाय का िपादाय यहूॉगा .भेयी मही इच्छा है कक अॊगये जी सयकाय के
शरए रड़ते हुए ही भेयी जान तनकर जामे .

इसी अॊगये ज बक्त गद्दाय का रड़का "फरबद्र शसॊह "हुआ जो हदल्विजम का फाऩ है .फरबद्र का जन्भ 1914
भें हुआ था औय इसके फेर्टे हदल्विजम का जन्भ 28 पयियी 1947 को इन्दौय भें हुआ था .

फरबद्र शसॊह ने भध्म बायत (ऩि
ू फ भध्म प्रदे श )की विधान सबा का चन
ु ाि हहन्द ू भहा सबा की शसर्ट से रड़ा
था .औय काॊग्रेस के उम्प्भीदिाय जादि को हयामा था .सन 1969 भें हदल्विजम ने बी नगय ऩाशरका चुनाि
काॊग्रेस के विरुद्ध रड़ा था .औय जीत कय अध्मऺ फन गमा था . रेककन इभयजेंसी के दौयान धगयफ्तायी से

25
फचने शरए जफ हदल्विजम अऩने सभाधी "अजन
ुफ शसघ "के ऩास गमा तो उसने काॊग्रस भें आने की सराह
दी .औय कहा महद जागीय फचाना है तो काॊग्रेस भें आ जाओ .

इस तयह हदल्विजम का ऩयू ा िॊश अिसयिाद ,खुशाभद खोयी .औय अॊगये जेआ सेिा कयने रगा है इसी कायण से
जफ हदल्विजम उज्जैन गमा था तो िहाॊ के बाजमभ
ु ो के अध्मऺ "धनञ्जम शभाफ "ने सफके साभने गद्दाय
कयाय हदमा था .ओय सफत
ू के शरए एक सी डी फी ऩत्रकायेआ को फाॊर्टी थी (ऩत्रत्रका शि
ु िाय 22 जुराई 2011
बोऩार )

2 -हदल्विजम ने काॊग्रेसी नेत्री की हत्मा कयिामी !

अबी तक अधधकाॊश रोग इस फात का यहस्म नहीॊ सभझ ऩा यहे थे कक हदल्विजम R .S .S औय हहदओ
ु ॊ से
क्मेआ धचढ़ता है .अबी अबी इसका कायण ऩता चरा है .मद्मवऩ मह घर्टना ऩयु ानी है .इसके अनस
ु ाय 14
पयियी 1997 को यत के कयीफ 11 फजे हदल्विजम उसके बाई रक्ष्भण शसॊह औय कुछ दस
ु ये रोगेआ ने "सयरा
शभश्रा "नाभकी एक काॊग्रेसी नेत्री की कोई ज्िरन शीर ऩदाथफ डार कय हत्मा कय दी थी .औय भहहरा को
उसी हारत भें जरता छोड़कय बाग गए थे .इतने सभम के फाद मह भाभरा सभाज सेिी औय फी जे ऩी
के ऩि
ू फ ऩार्षफद भहे श गगफ ने कपय अदारत भें ऩहुॊचा हदमा है औय सी .जे .एभ ् श्री आय .जी शसॊह के सभऺ
,हदल्विजम शसॊह ,उसके बाई रऺभण शसॊह ,तत्कारीन र्टी आई एस.एभ ् जैदी ,नामफ तहसीरदाय आय
.के.तोभय ,तहसीरदाय डी.के. सत्ऩथी ,डा .मोगीयाज शभाफ .ऍफ.एस.एर के मतू नर्ट प्रबायी हर्षफ शभाफ औय नौकय
सब
ु ार्ष के णखराप बायतीम दॊ ड सॊहहता की धाया 302 ,201 .212 ,218 ,120 फी ,औय 461 अधीन भाभरा दजफ
कयने के आदे श दे ने के शरए आिेदन कय हदमा है .परयमादी भहे श गगफ ने धाया 156 .3 मह बी तनिेदन बी
ककमा है कक उक्त सबी आयोवऩमेआ के विरुद्ध जजदी कामफिाही कक जामे .इसऩय सी. जे. एभ ् भहोदम ने
सन
ु िाई की तायीख 28 जुराई तम कय दी है .मही कायण है कक हदल्विजम सबी हहन्दओ
ु ॊ का गाशरमाॉ दे ता
है (दै तनक जागयण 23 जुराई 2011 बोऩार ) हभ सफ जानते है कक आऩसी वििाह सम्प्फन्ध कयते सभम
ऩरयिाय का खानदान दे खा जाता है .तनमोजक ककसी को नौकयी दे ते सभम आिेदक की ऩारयिारयक
ऩष्ृ ठबशू भ दे ख रेते है .महाॊतक जानियेआ की बी नस्र दे खी जाती है .

26
कपय गद्दायेआ की सॊतान गद्दाय दे श बक्त कैसे हो सकते हेऄ .विदे शी अॊगये जेआ के चभचे विदे शी सोतनमा
चभचाधगयी क्मेआ न कये गा .ऐसा व्मल्क्त कुत्ते से बी फदतय है ,कुत्ता अऩनो को नहीॊ कार्टता है .इसने तो
काॊग्रेसी भहहरा नेत्री की तनदफ मता ऩि
फ हत्मा कया दी .
ू क
अजफ गजफ के दे खो तभाशे
खुशॉ के है मसपम मह प्मासे
दहन्द य भक्ु स्रभ को गरे रगा कय
कपय ऩीछे से अॊगठ
य ा ददखा कय
फात न भानो इनकी माय
धगया दो मह गद्दायेआ की सयकाय !

27

मशिॊतयाि होरकय मह उस भहान िीयमोद्धा का नाभ है , ल्जसकी तुरना विख्मात इततहास
शास्त्री एन एस इनाभदाय ने 'नेऩोशरमन' से की है ।
by Raj Buranpuri on Saturday, February 25, 2012 at 8:42pm ·

एक ऐसा शासक, ल्जसके साभने अॊग्रेजेआ ने हयफाय र्टे क हदए घुर्टने.
एक ऐसा बायतीम शासक ल्जसने अकेरे दभ ऩय अॊग्रेजेआ को नाकेआ चने चफाने ऩय भजफूय कय

हदमा था। इकरौता ऐसा शासक, ल्जसका खौप अॊग्रेजेआ भें साप-साप हदखता था। एकभात्र ऐसा
शासक ल्जसके साथ अॊग्रेज हय हार भें त्रफना शतफ सभझौता कयने को तैमाय थे। एक ऐसा शासक,
ल्जसे अऩनेआ ने ही फाय-फाय धोखा हदमा, कपय बी जॊग के भैदान भें कबी हहम्प्भत नहीॊ हायी। इतना
भहान था िो बायतीम शासक, कपय बी इततहास के ऩन्नेआ भें िो कहीॊ खोमा हुआ है । उसके फाये भें
आज बी फहुत रोगेआ को जानकायी नहीॊ है । उसका नाभ आज बी रोगेआ के शरए अनजान है । उस
भहान शासक का नाभ है - मशिॊतयाि होरकय। मह उस भहान िीयमोद्धा का नाभ है , ल्जसकी

तुरना विख्मात इततहास शास्त्री एन एस इनाभदाय ने 'नेऩोशरमन' से की है । ऩल्चचभ भध्मप्रदे श की
भारिा रयमासत के भहायाज मशिॊतयाि होरकय का बायत की आजादी के शरए ककमा गमा

मोगदान भहायाणा प्रताऩ औय झाॊसी की यानी रक्ष्भीफाई से कहीॊ कभ नहीॊ है । मशितॊयाि होरकय
का जन्भ 1776 ई. भें हुआ। इनके वऩता थे - तुकोजीयाि होरकय। होरकय साम्राज्म के फढ़ते
प्रबाि के कायण विाशरमय के शासक दौरतयाि शसॊधधमा ने मशिॊतयाि के फड़े बाई भजहाययाि को
भौत की नीॊद सुरा हदमा। इस घर्टना ने मशिॊतयाि को ऩूयी तयह से तोड़ हदमा था। उनका अऩनेआ
ऩय से विचिास उठ गमा। इसके फाद उन्हेआने खुद को भजफूत कयना शुरू कय हदमा। मे अऩने

काभ भें कापी होशशमाय औय फहादयु थे। इसका अॊदाजा इसी से रगामा जा सकता है कक 1802 ई.

भें इन्हेआने ऩुणे के ऩेशिा फाजीयाि द्वितीम ि शसॊधधमा की शभरीजुरी सेना को भात दी औय इॊदौय
िाऩस आ गए। इस दौयान अॊग्रेज बायत भें तेजी से अऩने ऩाॊि ऩसाय यहे थे। मशिॊत याि के

साभने एक नई चन
ु ौती साभने आ चक
ु ी थी। बायत को अॊग्रेजेआ के चॊगर
ु से आजाद कयाना। इसके
शरए उन्हें अन्म बायतीम शासकेआ की सहामता की जरूयत थी। िे अॊग्रेजेआ के फढ़ते साम्राज्म को

योक दे ना चाहते थे। इसके शरए उन्हेआने नागऩयु के बेआसरे औय विाशरमय के शसॊधधमा से एकफाय

कपय हाथ शभरामा औय अॊग्रेजेआ को खदे ड़ने की ठानी। रेककन ऩयु ानी दचु भनी के कायण बेआसरे औय
शसॊधधमा ने उन्हें कपय धोखा हदमा औय मशिॊतयाि एक फाय कपय अकेरे ऩड़ गए। उन्हेआने अन्म

शासकेआ से एकफाय कपय एकजर्ट
ु होकय अॊग्रेजेआ के णखराप रड़ने का आग्रह ककमा, रेककन ककसी ने
उनकी फात नहीॊ भानी। इसके फाद उन्हेआने अकेरे दभ ऩय अॊग्रेजेआ को छठी का दध
ू माद हदराने

की ठानी। 8 जून 1804 ई. को उन्हेआने अॊग्रेजेआ की सेना को धर
ू चर्टाई। कपय 8 जुराई, 1804 ई. भें
कोर्टा से उन्हेआने अॊग्रेजेआ को खदे ड़ हदमा। 11 शसतॊफय, 1804 ई. को अॊग्रेज जनयर िेरेस्रे ने रॉडफ

28

जमुक को शरखा कक महद मशिॊतयाि ऩय जजदी काफू नहीॊ ऩामा गमा तो िे अन्म शासकेआ के साथ
शभरकय अॊग्रेजेआ को बायत से खदे ड़ दें गे। इसी भद्देनजय निॊफय, 1804 ई. भें अॊग्रेजेआ ने हदग ऩय

हभरा कय हदमा। इस मुद्ध भें बयतऩुय के भहायाज यॊ ल्जत शसॊह के साथ शभरकय उन्हेआने अॊग्रेजेआ
को उनकी नानी माद हदराई। मही नहीॊ इततहास के भुतात्रफक उन्हेआने 300 अॊग्रेजेआ की नाक ही

कार्ट डारी थी। अचानक यॊ ल्जत शसॊह ने बी मशिॊतयाि का साथ छोड़ हदमा औय अॊग्रजेआ से हाथ
शभरा शरमा। इसके फाद शसॊधधमा ने मशिॊतयाि की फहादयु ी दे खते हुए उनसे हाथ शभरामा। अॊग्रेजेआ
की धचॊता फढ़ गई। रॉडफ जमक
ु ने शरखा कक मशिॊतयाि की सेना अॊग्रेजेआ को भायने भें फहुत आनॊद
रेती है । इसके फाद अॊग्रेजेआ ने मह पैसरा ककमा कक मशिॊतयाि के साथ सॊधध से ही फात सॊबर
सकती है । इसशरए उनके साथ त्रफना शतफ सॊधध की
जाए। उन्हें जो चाहहए, दे हदमा जाए। उनका ल्जतना
साम्राज्म है , सफ रौर्टा हदमा जाए। इसके फािजूद

मशिॊतयाि ने सॊधध से इॊकाय कय हदमा। िे सबी शासकेआ
को एकजुर्ट कयने भें जुर्टे हुए थे। अॊत भें जफ उन्हें
सपरता नहीॊ शभरी तो उन्हेआने दस
ू यी चार से अॊग्रेजेआ

को भात दे ने की सोची। इस भद्देनजय उन्हेआने 1805 ई.
भें अॊग्रेजेआ के साथ सॊधध कय री। अॊग्रेजेआ ने उन्हें
स्ितॊत्र शासक भाना औय उनके साये ऺेत्र रौर्टा हदए।
इसके फाद उन्हेआने शसॊधधमा के साथ शभरकय अॊग्रेजेआ

को खदे ड़ने का एक औय प्रान फनामा। उन्हेआने शसॊधधमा को खत शरखा, रेककन शसॊधधमा दगेफाज
तनकरे औय िह खत अॊग्रेजेआ को हदखा हदमा। इसके फाद ऩूया भाभरा कपय से त्रफगड़ गमा।

मशिॊतयाि ने हजरा फोर हदमा औय अॊग्रेजेआ को अकेरे दभ ऩय भात दे ने की ऩूयी तैमायी भें जुर्ट

गए। इसके शरए उन्हेआने बानऩुय भें गोरा फारूद का कायखाना खोरा। इसफाय उन्हेआने अॊग्रेजेआ को
खदे ड़ने की ठान री थी। इसशरए हदन-यात भेहनत कयने भें जुर्ट गए थे। रगाताय भेहनत कयने
के कायण उनका स्िास्थ्म बी धगयने रगा। रेककन उन्हेआने इस ओय ध्मान नहीॊ हदमा औय 28
अक्र्टूफय 1806 ई. भें शसपफ 30 सार की उम्र भें िे स्िगफ शसधाय गए। इस तयह से एक भहान

शासक का अॊत हो गमा। एक ऐसे शासक का ल्जसऩय अॊग्रेज कबी अधधकाय नहीॊ जभा सके। एक
ऐसे शासक का ल्जन्हेआने अऩनी छोर्टी उम्र को जॊग के भैदान भें झेआक हदमा। महद बायतीम शासकेआ
ने उनका साथ हदमा होता तो शामद तस्िीय कुछ औय होती, रेककन ऐसा नहीॊ हुआ औय एक
भहान शासक मशिॊतयाि होरकय इततहास के ऩन्नेआ भें कहीॊ खो गमा औय खो गई उनकी फहादयु ी,
जो आज अनजान फनी हुई है ।

29

अफ तक कयीफ सोतनमा गाॉधी के विर्षम भे चारीस आय र्टी आई के द्िाया जानकायी
भाॊगी गमी है , ल्जसे सयकायने उखाड़ पैका है ..क्मा मह कानून की र
एक तयप बैऄद य मुवयाज औय सोननमा गाॉधी अऩनी ऩीठ थऩथऩाते है कक काॊग्रेस ने इस दे श को

आयटीआई जैसा कानयन ददमा ..रेककन सयकाय ने सोननमा गाॉधी के द्धवषम भे डारे जाने वारे आय
टी आई को उठाकय पेक ददमा ..तमा मह कानयन की राचायी का नभयना है मा हभायी फेऩयवाही
का...?

अफ तक कयीफ सोननमा गाॉधी के द्धवषम भे चारीस आय टी आई के द्सवाया जानकायी भाॊगी गमी है
.. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
१- सोननमा गाॉधी द्धऩछरे १० सारो भे कहा कहा गमी ?

कयीफ ऩाॊच सार तक धतके खाने के फाद जफ अयजदाय ने सुरस्ीभ कोटम का रुख ककमा तफ सयकाय

ने कहा कक सयकाय को इस फाये भे कोई जानकयी नहीॊ है ..वाह ये काॊग्रेस .. कोई बी द्धवदे श जाता
है तो ऩासऩोटम ऩय हवाई अड्डे ऩय इम्भीग्रेशन का भह
ु य रगता है औय उसके ऩासऩोटम भे ऩयय ी
जानकायी दजम की जाती है .. औय सफको भारभ
य है कक ऩासऩोटम ककसी बी व्मक्तत की ननजी

सम्ऩनत नहीॊ होता फक्ल्क सयकाय की सभाक्प्त है .औय मे सयकाय के मरए एक मभनट का काभ है
की वोसोननमा गाॉधी के ऩयये द्धवदे श मारा का ब्मौया दे ..

अबी बी केस सुरस्ीभ कोटम भे चर यहा है , रेककन ना जाने तमैऄ सोननमा गाॉधी के तयप से इस
छोटे भाभरे भे बायत के फड़े वकीरैऄ भे से एक अमबषेक भनु मसॊघवी रड़ यहे है
..~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

२- सोननमा गाॉधी के ईराज का खचम तमा बायत सयकाय ने उठामा था ? मदद हा तो ककतना
बुगतान हुआ?

कई भहीनैऄ तक कई भॊरारमैऄ भे मे अजॉ गुजयी ..ककसी ने जफाफ नहीॊ ददमा ..जफ अयजदाय ने

सुचना आमोग भे केस ककमा तफ इसे साॊसदैऄ का द्धवशेषाधधकाय का भाभरा फताकय इस अजॉ ऩय

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कोई जफाफ दे ने से सयकाय ने भना कय ददमा
.~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
~३-सोननमा औय याहुर गाॉधी सयकायी पाइरैऄ भे अऩना अधधकारयक धभम तमा मरखते है औय
हकीकत भे वो ककस धभम का ऩारन कयते है ?

ऩाॊच सारो तक द्धवमबन्न भॊरारमैऄ भे मे पाइर बटकती यही .. फाद भे सुरस्ीभ कोटम भे जाने ऩय
सयकाय का जफाफ आमा कक चॉ कय क सयकाय जनगणना के सभम रोगो के ननजी जानकायी इकट्ठा
कयती है इसमरए कानयन के भुताबफक सयकाय इस जानकायी को सावमजननक नहीॊ कय सकती
..~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

४- सोननमा गाॉधी को वोटय काडम जायी कयने के सभम सोननमा गाॉधी ने कौन कौन से
दस्तावेज ननवामचन आमोग को ददए ?

कहने को तो बायत का ननवामचन आमोग एक स्वरॊत सॊवैधाननक सॊस्था है रेककन सोननमा गाॉधी के
भाभरे ऩय वो बी एक गुराभ जैसे व्महाय कयने रगता है .. मसुचना सीधे सीधे ननवामचन आमोग
के अधधकाय छे र भे आता है कपय बी ननवामचन आमोग ने नौ द्धवबागैऄ भे इस पाइर को सारो
तक घुभामा .. औय आज बी कोईजफाफ नही

ददमा ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
~५- बायत ऩाक मुि के सभम सोननमा गाॉधी कहा थी ?

आज तक ककसी बी द्धवबाग ने इसका खर
ु ासा आधधकारयक रूऩ से नहीॊ ककमा है .जफकक द्धवदे श

भॊररम एक मभनट के इसका जफाफ दे सकता है .. हकीकत भे बायत ऩाक मद्स
ु के सभम अपवाह
उडी थी कक ऩाककस्तानी रड़ाकय द्धवभान ददल्री ऩय फभफायी कय सकते है .. कपय सोननमा गाॉधी

अऩने फच्चो औय याजीव गाॉधी को अकेरे छोडकय अऩनी जान फचाने के मरए इटरी यहने चरी
गमी थी .~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
६- सोननमा गाॉधी का जन्भ रस्भाण ऩर

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आज तक सयकाय ने अयजदाय को नहीॊ ददमा .. ईसाई सभाज भे जन्भ रस्भाण ऩर दे ने का
अधधकाय केवर चचम के ऩादयी को है .. औय सोननमा गाॉधी के ऩास बी इटरी के तुरयन कस्फे के

ऩादयी का जन्भ रस्भाण ऩर होना चादहए , रेककन सोननमा गाॉधी बायत भे एकपडेद्धवद कयके फनामा
हुआ दस
य या जन्भ रस्भाण ऩर सयकायी द्धवबागैऄ भे दी है ..
इस फाये भे कहा जाता है कक सोननमा गाॉधी ने अऩनी जन्भनतधथ भे पेयपाय की है तमोकक
सुब्रभण्मभ स्वाभी ने जो तुरयन के चचमसे उनका जन्भनतधथ हामसर ककमे है उसके अनुसाय तो
सोननमा गाॉधी के द्धऩता चाय सारो से जेर भे थे .कपय इनका जन्भ
!!!!!!!!!!!!!!!~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
७-याफटम वढे या का द्धऩछरे ऩन्द्रह सारो का आईटी रयटनम

आमकय द्धवबाग नहीॊ दे यहा है . तमोकक कहा जाता है की द्धरस्मॊका से शादी के ऩहरे याफटम के ऩास
ऩैन काडम तक नहीॊ था औय वो आमकय नहीॊ दे ते थे तमोकक उनकी आभदनी इतनी बी नहीॊ थी
की वो आमकय के दामये भे आमे .. इस जानकायी से सयकाय को डय है की याष्ट्रीम दाभाद जनता
के साभने फेनकाफ हैऄ जामेगा ..~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
८-याफटम वढे या को ककस कानयन के तहत हवाई अड्डैऄ ऩय जाॉच से छयट मभरी है ?

मे पाइर कई द्धवबागैऄ के चतकय काट यही है ..औय आज तक सयकाय ने नहीॊ फतामा की आखखय
याफटम वढे या को हवाई अड्डे ऩय सयु छा जाॉच से छयट तमैऄ मभरी है
? ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

९- याहुर गाॉधी ने अऩनी एभकपर की डडग्री नाभ फदर कय री है औय वो भैकजी भे बी नाभ

फदरकय एक सार तक नौकयी ककमे .. याहुर गाॉधी के ऩासऩोटम ऩय अरग नाभ है औय उनके
सॊसॊद भे ददमे पाभम औय ननवामचन भे अरग है .. तमा बायत सयकाय इसे फ्रोड नहीॊ भानती ?
आज तक इसका जफाफ नहीॊ आमा .. कपय जफ याहुर गाॉधी के आकपस भे अयजदाय ने ऩयछा तो
याहुर गाॉधी का मसपम एक राईन का जफाफ आमा की मरट्टे से भेये जान को खतया था ..

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रेककन मे कानयन की ऩरयधध भे एक फ्राड भना जामेगा

मभरैऄ मे है दावा जो याहुर गाॉधी मऩ
य ी भे अऩने कुते की आस्तीन चढाकय कहते है कक हभने इस
दे श को आय टी आई जैसा शशतत कानयन ददमा ..रेककन मे कानयन इस नकरी गाॉधी ऩरयवाय के
आगे ककतना ताकतवय है उसका नभयना आऩ खद
ु दे ख रीक्जए

हदल्विजम शसॊह से रेकय उनके गद्दाय ऩुखोका कारा धचर्टठा.. कुर चरयत्र कहो मा
हदल्विजम चरयत्र..करॊक से ऩरयऩूण!फ !हदल्विजम शसॊह गद्दायेआ का िॊशज :ह्तत्मा का आयोऩी !!
भनुष्म को जैसे सॊस्काय अऩने ऩुयखेआ से शभरते हेऄ ,उसके अनुरूऩ ही उसका स्िबाि ,चरयत्र औय

विचाय फन जाते हेऄ .मह एक तनविफिाद सत्म है .औय हदल्विजम के ऊऩय ऩूयी तयह से रागू होती
है .हदल्विजम खद
ु को प्रथ्िी याज चौहान का िॊशज फताता है .रेककन इसका कोई प्रभाण नहीॊ

शभरता है .हदल्विजम ऺत्रत्रओॊ की एक उऩजातत "खीची "से सम्प्फॊधधत है .इसका विियण "खीची
इततहास सॊग्रह... "भें शभरता है .इसके रेखक A .H .Nizami औय G .S .Khichi है .ऩुस्तक का

सॊऩादन R .P .Purohit ने ककमा है .ककताफ "णखची शोध सॊस्थान जोधऩुय "से प्रकाशशत हुई थी
.एक औय ऩुस्तक "Survay of khichii History "भें खीधचमेआ के फाये भें जानकायी शभरती है .णखची
धन रेकय ककसी याजा के शरए मुद्ध कयते थे .आज हदल्विजम खुद को भध्म प्रदे श भें गुना ल्जरा

के एक छोर्टी सी रयमासत "याघोगढ़ "का याजा कहता है .उसके चभचे उसे हदवगी याजा ऩुकायते है
.

1 -हदल्विजम का ऩि
फ कौन था
ू ज

ऩस्
ु तक के अनस
ु ाय हदल्विजम के हाथेआ जो रयमासत शभरी एक "गयीफ दास "नाभके सैतनक को अकफय ने
दी थी .जफ याजऩत
ु ाना औय भारिा के सबी ऺत्रत्रम याणा प्रताऩ के साथ हो यहे थे .गयीफ दास अकफय के

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ऩास चरा गमा .अकफय ने उसकी सेिा से प्रसन्न होकय भारिा के सफ
े ाय को हुक्भ बेजा की गयीफ दास
ू द
को एक ऩयगना मातन ऩाॊच गाॉि दे हदए जाएॉ . गयीफ दास की भौत के फाद उसके ऩत्र
ु "फरिॊत शसॊह
(1770 -1797 ) ने इसिी 1777 भें फसॊत ऩॊचभी के हदन एक गढ़ी की नीॊि यखी औय उसका नाभ अऩने कुर
दे िता "याघोजी "के नाभ ऩय "याघोगढ़ "यख हदमा था .

कनफर र्टाड के इततहास के अनस
ु ाय फरिॊत शसॊह ने 1797 तक याज ककमा .औय अॊगये जेआ से दोस्ती फढ़ाई.जफ
सन 1778 भें प्रथभ भयाठा मद्ध
ु हुआ तो फरिॊत शसॊह ने अॊगये जी फौज की भदद की थी

इसका उजरेख जनयर Gadred ने "Section from State Papers .Maratha Volume I Page 204 भें ककमा है
.फरिॊत शसॊह की इस सेिा के फदरे कम्प्ऩनी सयकाय ने Captain fielding की तयप से फरदे ि शसॊह को ऩत्र
बेजा ,ल्जसभे शरखा था कॊऩनी फहादयु की तयप से मह ऩयगना जो फाराभेर्टभें है उसका ककरा याघोगढ़
तम्प्
ु हें प्रदान ककमा जाता है औय उसके साथ के गािेआ को अऩना याज्म सभझो .महद शसॊधधमा सयकाय ककसी
प्रकाय का दखर कये तो इसकी सच
ू ना भझ
ु े दो.

फाद भें जफ 1818 भें फरिॊत शसॊह का नाती अजीत शसॊह (1818 -1857 )गद्दी ऩय फैठा तो अॊगये जेआ के प्रतत
विद्रोह होने रगे था ,अजीत शसॊह ने विाशरमय के ये ल्जडेंर्ट को ऩत्र बेजा कक,आजकर भहायाज शसॊधधमा
फगाित की तय्मायी कय यहे हेऄ .उनके साथ झाॉसी औय दस
ू यी रयमासत के याजा बी फगाित का झॊडा खड़ा
कय यहे हेऄ .इसशरए इन फाधगमेआ को सजा दे ने के शरए जजदी से अॊगये जी फौज बेल्जए ,उस ऩत्र का जिाफ
गिाशरमय के ये ल्जडेंर्ट A .Sepoyrs ने इस तयह हदमा "आऩ कॊऩनी की फौज की भदद कयो औय फाधगमेआ साथ
नहीॊ दो .आऩ हभाये दोस्त हो ,अगय शसॊधधमा फौज मेतो उस से मद्ध
ु कयो .कॊऩनी की फौज तनकर चुकी है .
रेककन सन 1856 भें एक दघ
फ ना भें अजीत शसघ की भौत हो गमी .उसके फाद 1857 भें उसका रड़का "जम
ु र्ट
भॊगर शसॊह "(1857 -1900 )गद्दी ऩय फैठा इसके फाद "वििभजीत शसॊह याजा फना (1900 -1902 (.रेककन
अॊग्रेज ककसी कायण से उस से नायाज हो गए .औय उसे गद्दी से उताय शसयेआज ऩरयिाय के एक मि
ु क
"भदरूऩ शसॊह "को याजा फना हदमा ल्जसका नाभ "फहादयु शसॊह "यख हदमा गमा ( 1902 -1945 )अॊगये जेआ की
इस भेहयफानी के शरए फहादयु शसॊह ने अॊगये जी सयकाय का धन्मिाद हदमा औय कहा भेऄ िाइसयाम का
आबायी हूॉ .भेऄ िादा कयता हूॉ कक सयकाय का िपादाय यहूॉगा .भेयी मही इच्छा है कक अॊगये जी सयकाय के
शरए रड़ते हुए ही भेयी जान तनकर जामे .

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इसी अॊगये ज बक्त गद्दाय का रड़का "फरबद्र शसॊह "हुआ जो हदल्विजम का फाऩ है .फरबद्र का जन्भ 1914
भें हुआ था औय इसके फेर्टे हदल्विजम का जन्भ 28 पयियी 1947 को इन्दौय भें हुआ था .

फरबद्र शसॊह ने भध्म बायत (ऩि
ू फ भध्म प्रदे श )की विधान सबा का चुनाि हहन्द ू भहा सबा की शसर्ट से रड़ा
था .औय काॊग्रेस के उम्प्भीदिाय जादि को हयामा था .सन 1969 भें हदल्विजम ने बी नगय ऩाशरका चुनाि
काॊग्रेस के विरुद्ध रड़ा था .औय जीत कय अध्मऺ फन गमा था . रेककन इभयजेंसी के दौयान धगयफ्तायी से
फचने शरए जफ हदल्विजम अऩने सभाधी "अजन
ुफ शसघ "के ऩास गमा तो उसने काॊग्रस भें आने की सराह
दी .औय कहा महद जागीय फचाना है तो काॊग्रेस भें आ जाओ .

इस तयह हदल्विजम का ऩयू ा िॊश अिसयिाद ,खुशाभद खोयी .औय अॊगये जेआ सेिा कयने रगा है इसी कायण से
जफ हदल्विजम उज्जैन गमा था तो िहाॊ के बाजमभ
ु ो के अध्मऺ "धनञ्जम शभाफ "ने सफके साभने गद्दाय
कयाय हदमा था .ओय सफत
ू के शरए एक सी डी फी ऩत्रकायेआ को फाॊर्टी थी (ऩत्रत्रका शि
ु िाय 22 जुराई 2011
बोऩार )

2 -हदल्विजम ने काॊग्रेसी नेत्री की हत्मा कयिामी !

अबी तक अधधकाॊश रोग इस फात का यहस्म नहीॊ सभझ ऩा यहे थे कक हदल्विजम R .S .S औय हहदओ
ु ॊ से
क्मेआ धचढ़ता है .अबी अबी इसका कायण ऩता चरा है .मद्मवऩ मह घर्टना ऩयु ानी है .इसके अनस
ु ाय 14
पयियी 1997 को यत के कयीफ 11 फजे हदल्विजम उसके बाई रक्ष्भण शसॊह औय कुछ दस
ु ये रोगेआ ने "सयरा
शभश्रा "नाभकी एक काॊग्रेसी नेत्री की कोई ज्िरन शीर ऩदाथफ डार कय हत्मा कय दी थी .औय भहहरा को
उसी हारत भें जरता छोड़कय बाग गए थे .इतने सभम के फाद मह भाभरा सभाज सेिी औय फी जे ऩी
के ऩि
ू फ ऩार्षफद भहे श गगफ ने कपय अदारत भें ऩहुॊचा हदमा है औय सी .जे .एभ ् श्री आय .जी शसॊह के सभऺ
,हदल्विजम शसॊह ,उसके बाई रऺभण शसॊह ,तत्कारीन र्टी आई एस.एभ ् जैदी ,नामफ तहसीरदाय आय
.के.तोभय ,तहसीरदाय डी.के. सत्ऩथी ,डा .मोगीयाज शभाफ .ऍफ.एस.एर के मतू नर्ट प्रबायी हर्षफ शभाफ औय नौकय
सब
ु ार्ष के णखराप बायतीम दॊ ड सॊहहता की धाया 302 ,201 .212 ,218 ,120 फी ,औय 461 अधीन भाभरा दजफ

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कयने के आदे श दे ने के शरए आिेदन कय हदमा है .परयमादी भहे श गगफ ने धाया 156 .3 मह बी तनिेदन बी
ककमा है कक उक्त सबी आयोवऩमेआ के विरुद्ध जजदी कामफिाही कक जामे .इसऩय सी. जे. एभ ् भहोदम ने
सन
ु िाई की तायीख 28 जर
ु ाई तम कय दी है .मही कायण है कक हदल्विजम सबी हहन्दओ
ु ॊ का गाशरमाॉ दे ता
है (दै तनक जागयण 23 जुराई 2011 बोऩार ) हभ सफ जानते है कक आऩसी वििाह सम्प्फन्ध कयते सभम
ऩरयिाय का खानदान दे खा जाता है .तनमोजक ककसी को नौकयी दे ते सभम आिेदक की ऩारयिारयक
ऩष्ृ ठबशू भ दे ख रेते है .महाॊतक जानियेआ की बी नस्र दे खी जाती है .

कपय गद्दायेआ की सॊतान गद्दाय दे श बक्त कैसे हो सकते हेऄ .विदे शी अॊगये जेआ के चभचे विदे शी सोतनमा
चभचाधगयी क्मेआ न कये गा .ऐसा व्मल्क्त कुत्ते से बी फदतय है ,कुत्ता अऩनो को नहीॊ कार्टता है .इसने तो
काॊग्रेसी भहहरा नेत्री की तनदफ मता ऩि
फ हत्मा कया दी .
ू क

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आजादी के फाद बायतीम सेना की मह सफसे शभफनाक ऩयीऺा है ,ल्जसभें थर सेनाध्मऺ के
ऩद को सयकाय दाादाय कय यही है !!
Read in ENGLISH & HINDI .आजादी के फाद बायतीम सेना की मह सफसे शभफनाक ऩयीऺा है ,
ल्जसभें थर सेनाध्मऺ के ऩद को सयकाय दाादाय कय यही है !! English:

In our country the army has always been in an exalted position. It is the army that protects our
country. However, corruption has gripped the army. Several complaints and issues have come to
the fore, including that of low quality rations. Those alleged in the misappropriation and deceit
have been caught and punished too. Obtrusively, politicians were involved in most of the cases.
The recent controversy swirls around Army Chief General V.K. Singh‘s date of birth (DoB).
Shri Kamal Tawri is a retired IAS officer. He is vice president of National Thinkers Forum
which is an NGO.
When he noticed ina newspaper, controversy regarding General V.K. Singh‘s DoB, he
immediately filed an RTI on October 28, 2010. The RTI was sent to CPIO, Indian
Army integrated headquarter of Ministry of Defence Room no G-6, D-1 wing Sena Bhawan,
New Delhi.
He asked information about the present chief of Army General Vijay Kumar Singh and age of all
Lieutenant Generals who could appointed in place of General V.K. Singh as he is going to retire.
In its response a list was sent.
According to the list, General V.K. Singh, PVSM, AVSM, YSM, ADS birth date is February 7,
1951.

HIGH SCHOOL VERSUS NDA

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General V.K Singh was born on 10th of May , 1951 in Fafoda village of Haryana. While
studying in Birla school Pilani General VK Singh decided to join army. It was the year of 1965
and he was 15 years of age. The forms of NDA were filled. Several boys sat together and were
filling the forms a teacher was helping them to do so. It was a UPSC form .He mentioned birth
date as 10th May 1950 by mistake. Indeed, the form was sent. It was a provisional form. When
he received the high school certificate it was sent to UPSC. UPSC asked him that in his high
school certificate birth date is mentioned as 10th of May 1951. VK Singh sent clarification that
date mentioned in certificate is 10 May 1951. Indeed his clarification was accepted by UPSC. He
received a receipt of it.
VK Singh was selected in NDA and he passed out in the year 1970. IMA provided him an
Identity Card on which the date of birth was mentioned as 10 May 1951. General VK Singh
started his new life in army.
DISCLOSED ISSUE
With advent of year 2006 Major General V.K Singh received a letter which was signed by the
then Military Secretary Richard Khare in which he wrote that we have found that your birth date
has been mentioned in two ways . There is difference in record of Adjutant General Branch and
Military Secretary Branch. Adjutant General Branch is custodian branch in which it is mentioned
as 10 May 1951 and in Military Secretary Branch it is mentioned as 10th of May 1950.
General V.K Singh clarified that his birth date is 10th of May 1951. He sent his high school
certificate also for clarification. Military secretary branch wrote that it will take clarification
from Adjutant General Branch. Adjutant General Branch wrote to military secretary branch that
the date of birth of General V.K Singh is 10th of May 1951.
GENERAL J.J SINGH‘s CONSPIRACY
During that time General J.J Singh was chief of Army staff. Files were sent to him for correction.
He passed an order that if you want to change birth date then it could be done within two years.
General J .J Singh played a trick here. He estimated no matter whether his birth year is 1950 or
1951 he will certainly be chief of Army staff. However if his birth date would be considered as
10 May 1951 then Leftinent General Bikram Singh could not be chief of Army staff. It is
coincidence that General J.J Singh is from Sikh community. And leftinent Genral Bikram Singh
is also from Sikh community.
PRESSURE OF GENERAL DEEPAK KAPOOR
After General J.J Singh, General Deepak Kapoor became chief of Army. He called VK Singh
and informed that due to his letter all files have been stopped due to your letter. I have seen all
the papers. I want to send it to law ministry I am your chief I am telling you not to stop
movement of files
Opinion of three Former Chief Justice of India

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General VK Singh is known as an honest officer. Till now there is no allegation on him except
that his date of birth mentioned in army and defense ministry is not same.
Justice JS verma wrote in his conclusion, ―I therefore fail to appreciate how the MS branch or
anyone else can raise a controversy in this behalf or question the correctness of DoB of General
VK Singh recorded throughout by the AG branch as 10th of May 1951.‖
On the other hand G.V Patnaik said , ―it transpires that the Ministry of law which the appropriate
authority for giving legal opinion to other departments, has already opened to this effect that
Date of birth of the querist can only be 10th of May 1951 . I do not know on what basis the
learned Attorney Genral has given contrary opinion.‖
Justice V.N Khare said , ― In view of the above it is my opinion that at this stage the correct
course of action would be to accept the DOB of the querist as found in the records of the AG
branch to be 10th May 1951 and make necessary changes where required.‖
The fourth retired chief justice said that he agree to the opinions of all three former chief justice
and considers the opinion of Attorney General published in newspaper.
SOLUTION
Attorney General Vahanavati is already in web of suspicion in case of 2G spectrum case. He
forced to give altogether different opinion from law ministry. It is a conspiracy played by
politicians and IAS officials. Whether General VK Singh will fight against it or not is not
certain but in order to prove himself right he must move to the president where she can ask the
opinion of chief justice. Chief justice could himself look into this matter under section 143
permits and in the end general VK Singh could move to Supreme Court. If the decision of
Supreme Court would be in favour of General VK Singh then the only option left for Defence
Minister and Prime Minister would be to resign. It is a catch 22 situation for the government.

हहॊदी :
दे श के सवोच्च न्मामारम भ सेना औय सयकाय आभने-साभने हैं. आजादी के फाद बायतीम सेना
की मह सफसे शभमनाक ऩयीऺा है , क्जसभ थर सेनाध्मऺ की सॊस्था को सयकाय दाादाय कय यही
है . ऩहरी फाय सेनाध्मऺ औय सयकाय के फीच द्धववाद का पैसरा अदारत भ होगा. द्धववाद बी
ऐसा, क्जसे सन
ु कय दनु नमा बय भ बायत की हॊ सी उड़ यही है . मह भाभरा थर सेनाध्मऺ जनयर

द्धवजम कुभाय मसॊह की जन्भनतधथ का है . इस भाभरे भ एक ऩीआईएर सुरस्ीभ कोटम के साभने है .
वहाॊ तमा होगा, मह ऩता नहीॊ, रेककन इस द्धववाद को रेकय जो भ्रभ पैरामा जा यहा है , उसे

सभझना जरूयी है . चौथी दनु नमा ने इस द्धववाद ऩय तह़ी़ात की. ़यीफ छह भहीने ऩहरे हभने

इस द्धववाद से जुड़े साये तथ्मैऄ को साभने यखा, साये दस्तावेज ऩेश ककए. साये तथ्म औय सफत
य इस

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फात को साबफत कयते हैं कक जनयर वी के मसॊह की जन्भनतधथ 10 भई, 1951 है , रेककन सयकाय ने
इस तथ्म को ठुकया ददमा औय उनकी जन्भनतधथ 10 भई, 1950 भान री. सयकाय की इस क्जद का
याज तमा है . सयकाय तमैऄ दे श के सवोच्च सेनाधधकायी को फेइज़्जजत कयने ऩय तुरी है , जफकक मह
फात ददन के उजारे की तयह सापा़ है कक जनयर वी के मसॊह की जन्भनतधथ 10 भई, 1951 है .

साक्ष्म इतने ऩतके हैं कक सुरस्ीभ कोटम के तीन-तीन बयतऩयवम चीप जक्स्टस ने अऩनी याम जनयर वी
के मसॊह के ऩऺ भ दी है . इसके फावजयद अगय द्धववाद जायी है तो इसका भतरफ है कक दार भ
कुछ कारा है .

एक भ्रभ पैरामा जा यहा है कक जनयर वी के मसॊह ने ही अऩनी जन्भनतधथ का द्धववाद उठामा है .
भीडडमा झयठी ऽफय ददखा यहा है कक जनयर वी के मसॊह अऩनी जन्भनतधथ को फदरना चाहते थे.
मह द्धववाद जनयर वी के मसॊह ने नहीॊ उठामा. ह़ी़त मह है कक जनयर वी के मसॊह की

जन्भनतधथ को रेकय कबी कोई द्धववाद ही नहीॊ था. जफसे वह सेना भ आए, तफसे 36 सार तक
सेना के आधधकारयक दस्तावेजैऄ, रस्ोभोशन औय हय जगह उनकी जन्भनतधथ 10 भई, 1951 ही है .
जफ जनयर वी के मसॊह थर सेनाध्मऺ फने, उस सभम ऐसी ऽफय आभ थीॊ कक दे श बय भ सेना की
जभीन की रयट हो यही है . दे श के अरग-अरग इरा़ैऄ से सेना की जभीनैऄ ऩय अवैध ननभामण मा
उनके बफक जाने की ऽफय टीवी चैनरैऄ औय द्धरस्ॊट भीडडमा भ रगाताय आती थीॊ. सेना के

अधधकायी औय बय-भाक्ा़ पमा मभरजुर कय इस काभ को अॊजाभ दे यहे थे. सुकना जभीन घोटारा
साभने आमा. इस घोटारे भ ऩयवम मभमररी सेक्रेटयी रेक्फ्टनट जनयर अवधेश रस्काश का नाभ

आमा. उस व़तत वह तत्कारीन सेना रस्भुख जनयर दीऩक कऩयय के रस्भुख सराहकायैऄ भ थे.

सुकना जभीन घोटारे ऩय जनयर वी के मसॊह ने अऩनी रयऩोटम दी. रगा कक सेना की जभीन का

सौदा कयने वारे अधधकारयमैऄ को सजा मभरेगी, रेककन जनयर कऩयय ने ऽद
ु से कोई एतशन नहीॊ

मरमा. ह़ी़त मह है कक चॊद सैन्म अधधकायी ब-य भाक्ा़ पमाओॊ के साथ मभरकय सेना की जभीनैऄ
का फॊदयफाॊट कय यहे थे. वी के मसॊह के आते ही मह गोयखधॊधा फॊद हो गमा. जनयर वी के मसॊह
ने सेना की रस्नतष्ट्ठा वाऩस ददराई औय भ्रष्ट्टाचाय को योका. ऐसी तमा फात है कक जनयर वी के
मसॊह की जन्भनतधथ का द्धववाद तफ उठामा गमा, जफ अवधेश रस्काश का नाभ सक
ु ना जभीन
घोटारे भ उजागय हुआ.

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मह द्धववाद जनयर वी के मसॊह ने नहीॊ, फक्ल्क मभमररी के सेक्रेटयी ब्राॊच ने शुरू ककमा है . वह बी

तफ, जफकक जनयर वी के मसॊह 36 सारैऄ तक सेना को अऩनी सेवाएॊ दे चुके थे. ऩयये 36 सारैऄ तक
उनकी जन्भनतधथ 10 भई, 1951 ही यही. सवार मह उठता है कक ककसी बी सैननक की जन्भनतधथ

के रयकॉडम को यखने की क्जम्भेदायी ककसकी है औय कौन सा रयकॉडम आधधकारयक रूऩ से भान्म है .
़ानयन के भुताबफ़, मह काभ मभमररी की एडजयटैंट ब्राॊच का है . सयकाय को दे श की जनता को मह

फताना चादहए कक उसने एडजयटैंट ब्राॊच के रयकॉडम को तयजीह तमैऄ नहीॊ दी, जफकक मही आधधकारयक

रूऩ से भान्म है . सयकाय की ऐसी तमा भजफयय ी है कक वह इस द्धववाद भ सेक्रेटयी ब्राॊच की फात को
सच भान यही है , क्जसका काभ अधधकारयमैऄ का रयकॉडम यखना नहीॊ है .

कुछ रोग दरीर दे यहे हैं कक उन्हैऄने एनडीए के पॉभम भ अऩनी जन्भनतधथ 10 भई, 1950 दजम

कयाई थी, इसीमरए उनकी जन्भनतधथ मह फताई जा यही है . ह़ी़त मह है कक जफ वह एनडीए भ
शामभर हुए, तफ उनकी उम्र 15 सार थी. भतरफ मह कक वह नाफामरग थे. ककसी नाफामरग द्सवाया
बये गए पॉभम का ़ानयन भ कोई स्थान नहीॊ है . ़ानयन के भुताबफ़, जफ कोई नाफामरग ककसी
दस्तावेज को ऩेश कयता है तो उसे ऩमामप्त सफयत ऩेश कयना ऩड़ता है . ़ानन
य की नजय भ

जन्भनतधथ का सफसे फड़ा सफयत दसवीॊ तरास का सदटम कपकेट भाना जाता है . जनयर वी के मसॊह के
हाईस्कयर सदटम कपकेट भ उनकी जन्भनतधथ 10 भई, 1951 दजम है . जनयर वी के मसॊह का सदटम कपकेट
दो-तीन सारैऄ के फाद एनडीए भ जभा ककमा गमा, तमैऄकक उस जभाने भ स्कयर औय कॉरेज के

सदटम कपकेट फनने भ इतना सभम रग जाता था. इसके फाद से उनकी जन्भनतधथ 10 भई, 1951 हो
गई. 1997 भ एडजयटैंट जनयर ब्राॊच ने मरखकय ददमा कक जनयर वी के मसॊह की जन्भनतधथ 10

भई, 1951 है . 2007 भ बी एडजयटैंट जनयर ब्राॊच ने कपय मह फतामा कक उनकी सही जन्भनतधथ 10
भई, 1951 है .

भीडडमा भ एक ऽफय पैराई जा यही है कक जनयर वी के मसॊह ने 24 जनवयी, 2008 को मह भान
मरमा था कक उनकी जन्भनतधथ 10 भई, 1950 है . जफकक मह भाभरा कुछ औय ही है . चौथी दनु नमा
इस द्धववाद के ऩहरे ही मह जानकायी दे चक
ु ा है कक तत्कारीन थर सेनाध्मऺ दीऩक कऩयय ने वी
के मसॊह ऩय मह दफाव डारा था कक वह एक सहभनत ऩर मरखकय द, नहीॊ तो उनके खऽरापा़
एतशन मरमा जा सकता है औय जनयर वी के मसॊह ने मह मरखकय दे ददमा था कक ऐज

डामये तटे ड फाई चीप ऑप आभॉ स्टाप, आई एतसेप्ट. जनयर वी के मसॊह का अॊफारा से करकत्ता
राॊसपय हो गमा. उन्हैऄने कपय चीप ऑप आभॉ स्टाप को ऩर मरखा कक आऩने भुझे फुरामा,

आऩने भुझसे कहा कक आऩ भेये भाभरे को ़ानयन भॊरारम बेज यहे हैं. आऩ ऩय चीप के नाते

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भेया ऩयया द्धवश्वास है , रेककन आऩने वामदे के दहसाफ से जो कहा था, वह नहीॊ ककमा. एधथकरी औय
रॉक्जकरी मह सही नहीॊ है . चीप ऑप आभॉ स्टाप ने वह ऩर यख मरमा, जवाफ नहीॊ ददमा. जफ
जनयर वी के मसॊह मभरने गए तो जनयर दीऩक कऩयय ने कहा, भैं कुछ नहीॊ करूॊगा, तुभ चीप
फनना तो ऽद
ु ठीक कया रेना अऩनी जन्भनतधथ. जनयर वी के मसॊह चऩ
ु चाऩ वाऩस चरे
आए. अफ सयकाय उसी ऩर को एक सफयत के रूऩ भ ऩेश कय यही है .

सयकाय की नायाजगी की कई वजह हैं. बायतीम सेना एक रक का इस्तेभार कयती है , क्जसका
नाभ है टे रा रक. बायतीम थरसेना टे रा रक का इस्तेभार मभसाइर राॊचय की तैनाती औय बायीबयकभ चीजैऄ के राॊसऩोटे शन भ इस्तेभार कयती है . इन रकैऄ का द्धऩछरा ऑडमय पयवयी, 2010 भ
ददमा गमा था, रेककन ऽयीद भ फड़े ऩैभाने ऩय गड़फड़ी की मशकामत साभने आईं तो आभॉ चीप वी
के मसॊह ने इस सौदे ऩय भह
ु य रगाने से इॊकाय कय ददमा. बायत अथम भव
य सम मरमभटे ड मानी

फीईएभएर मरमभटे ड को क्जस व़तत इन रकैऄ की आऩनय तम का ठे का मभरा, तफ बायतीम सेना की

कभान जनयर दीऩक कऩयय के हाथ भ थी. ननमभैऄ के भत
ु ाबफ़, हय सार आभॉ चीप को इस डीर
ऩय साइन कयने होते हैं, रेककन रयश्वतखोयी से रेकय भानकैऄ के उल्रॊघन तक की मशकामतैऄ की

वजह से जनयर वी के मसॊह ने साइन नहीॊ ककए. ़ानन
य के भत
ु ाबफ़, टे रा रकैऄ की ऽयीददायी सीधे
कॊऩनी से होनी चादहए, रेककन फीईएभएर ने मह ऽयीददायी टे रा मसऩॉतस (मयके) मरमभटे ड से की,
जो नतो स्वमॊ उऩकयण फनाती है औय न उऩकयण फनाने वारी कॊऩनी की सक्ब्सडडमयी है .

उऩकयण फनाने वारी भयर कॊऩनी का नाभ है टे रा मसऩॉतस एएस, जो स्रोवाककमा की कॊऩनी है .

दयअसर, फीईएभएर द्सवाया टे रा रकैऄ की ऽयीद का ऩयया भाभरा सॊदेह के घेये भ है . एक अॊग्रेजी
अऽफाय डीएनए के भुताबफ़, यऺा भॊरारम की ओय से अबी तक ददए गए कुर ठे कैऄ भ बायी
धनयामश फतौय रयश्वत दी गई है . डीएनए के भुताबफ़, मह ऩयया यै केट 1997 से चर यहा है .

फीईएभएर भ उच्च ऩद ऩय यह चक
ु े एक ऩयवम अधधकायी के हवारे से मह बी ऽफय आई कक अबी
तक कॊऩनी टे रा रकैऄ की डीर से जड़
ु ा कुर 5,000 कयोड़ रुऩमे तक का कायोफाय कय चक
ु ी है . मह

कायोफाय टे रा मसऩॉतस (मक
य े ) मरमभटे ड के साथ ककमा गमा है . इसे स्रोवाककमा की टे रा मसऩॉतस
एएस की सक्ब्सडडमयी फतामा जाता यहा है . फीईएभएर के इस ऩव
य म अधधकायी के भत
ु ाबफ़, 5,000

कयोड़ रुऩमे के इस कायोफाय भ 750 कयोड़ रुऩमे फीईएभएर एवॊ यऺा भॊरारम के अधधकारयमैऄ को
फतौय रयश्वत ददए गए. फात महीॊ ऽत्भ नहीॊ होती है . फीईएभएर के एक शेमयधायक एवॊ वरयष्ट्ठ
अधधवतता के एस ऩेरयमास्वाभी याष्ट्रऩनत के हस्तऺेऩ औय सीफीआई जाॊच की भाॊग कय चक
ु े हैं.

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वह कहते हैं, ऽयीद के मरए क्जतनी यकभ की भॊजययी दी जाती है , उसका कभ से कभ 15 पीसदी
दहस्सा कभीशन भ चरा जाता है . ऊऩय से नीचे तक सफको दहस्सा मभरता है . भैंने 2002 भ

कॊऩनी की एजीएभ भ मह भुद्दा उठामा था, रेककन इस ऩय चचाम नहीॊ की गई. एक रस्नतक्ष्ट्ठत

बफजनेस अऽफाय ने महाॊ तक मरखा कक फीईएभएर की टे रा रकैऄ की डीर को कायगय फनाने भ
जुटी हधथमाय द्धवक्रेताओॊ की रॉफी ने आभॉ चीप को आठ कयोड़ रुऩमे की रयश्वत की ऩेशकश बी
की थी, क्जसे जनयर वी के मसॊह ने ठुकया ददमा.

रकैऄ की सॊदेहास्ऩद डीर को रेकय 8 भई, 2005 को भीडडमा भ ऽफय आई थी. डीएनए अऽफाय ने
एक औय ऽर
ु ासा ककमा कक टे रा मसऩॉतस (मयके) मरमभटे ड की स्थाऩना 1994 भ बब्रटे न भ हुई थी.
जोजप भक्जस्की औय वीनस रस्ोजेत्स मरमभटे ड इसके शेमय होल्डय थे. स्रोवाककमा के न्माम
भॊरारम की आधधकारयक वेफसाइट के भुताबफ़, टे रा मसऩॉतस एएस 1998 भ अक्स्तत्व भ आई.

इसका भतरफ मह हुआ कक 1997 भ फीईएभएर ने ऐसी कॊऩनी की सक्ब्सडडमयी के साथ सभझौता
ककमा, जो उस सभम अक्स्तत्व भ ही नहीॊ थी. टे रा मसऩॉतस (मयके) की शेमय होक्ल्डॊग भ कई फाय
फदराव हुआ, रेककन स्रोवाक कॊऩनी के ऩास कबी इसका एक शेमय बी नहीॊ यहा. फीईएभएर के
चेमयभैन वी आय एस नटयाजन के भुताबफ़, इॊग्रैंड के वेतरा ग्रुऩ के ऩास टे रा कॊऩननमैऄ का
स्वामभत्व है . वेतरा ग्रुऩ के चेमयभैन यद्धवॊदय ऋद्धष हैं. वेतरा ग्रुऩ के ऩास ही टे रा मसऩॉतस (मयके)

का बी भामरकाना ह़ है . टे रा चेक कॊऩनी के बी फहुभत शेमय वेतरा ग्रुऩ के ऩास हैं. अफ सवार
मह उठता है कक तमा आभॉ चीप ऩय इसमरए ऩद छोड़ने का दफाव है , तमैऄकक उन्हैऄने टे रा डीर
ऩय दस्तऽत नहीॊ ककए थे? तमा फीईएभएर सेकड हैंड रकैऄ का आमात कय यही है औय तमा
स्रोवाककमा भ भैन्मुपैतचरयॊग प्राॊट फॊद हो गमा है ? तमा ऩुयाने रकैऄ की भयम्भत को घये रय

उत्ऩादन के तौय ऩय ददखामा जा यहा है ? यद्धवॊदय ऋद्धष कौन है , उसे इतने यऺा सौदैऄ का ठे का तमैऄ
ददमा जा यहा है ? इस रॉफी के मरए सयकाय भ काभ कयने वारे रोग कौन हैं? अगय सयकाय इन
सवारैऄ का जवाफ नहीॊ दे ती है तो इसका भतरफ मही है कक आभॉ चीप को दठकाने रगाने के
मरए भाक्ा़ पमा औय अधधकारयमैऄ ने मभरजर
ु कय जन्भनतधथ का फहाना फनामा है .

इसके अरावा जनयर वी के मसॊह ने सेना के आधनु नकीकयण के मरए एक प्रान तैमाय ककमा, मह

प्रान डडपस मभननस्री भ रटका हुआ है . उन्हैऄने इस फीच कई ऐसे काभ ककए, क्जनसे आम्सम
डीरयैऄ औय बफचौमरमैऄ की नीॊद उड़ गई. मसॊगाऩुय टे तनोरॉजी से एक डीर हुई थी. इस कॊऩनी की
याइपर को टे स्ट ककमा गमा, उसके फाद जनयर वी के मसॊह ने रयऩोटम दी कक मह याइपर बायत के
मरए उऩमु ुतत नहीॊ है . बायतीम सेना को नए औय आधनु नक हधथमायैऄ की जरूयत है . इस जरूयत

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को दे खते हुए वह अगरे एक-दो सारैऄ भ बायी भारा भ सैन्म शस्र औय नए उऩकयण ऽयीदने
वारी है . ऽासकय, बायत इस सार बायी भारा भ भॉडनम असॉल्ट याइपर ऽयीदने वारा है . बायत
का सैन्म इनतहास मही फताता है कक आम्सम डीर के दौयान जभकय घयसखोयी औय घऩरेफाजी होती
है . जनयर वी के मसॊह सेना के अस्र-शस्रैऄ की ऽयीददायी भ ऩायदमशमता राना चाहते हैं. वह एक
ऐसा मसस्टभ फनाना चाहते हैं, क्जसभ सैननकैऄ को दनु नमा के सफसे आधनु नकतभ हधथमाय मभर,
रेककन कोई बफचौमरमा न हो औय न कहीॊ ककसी को दरारी खाने का अवसय मभरे. जफसे वह
सेनाध्मऺ फने हैं, तफसे बायतीम सेना ऩय कोई घोटारे मा भ्रष्ट्टाचाय का आयोऩ नहीॊ रगा.
भ्रष्ट्टाचाय के जो ऩयु ाने भाभरे थे, उन्ह न म़िपम ननऩटामा गमा, फक्ल्क उन्हैऄने आदशम जैसे घोटारे
की जाॊच भ एजमसमैऄ की भदद की. आदशम हाउमसॊग सोसाइटी के जभीन घोटारे भ जनयर वी के
मसॊह ने भस्
ु तैदी ददखाई. सेना की कोटम ऑप इनतवामयी का गठन ककमा, क्जसभ दो ऩव
य म

सेनाध्मऺैऄ-जनयर दीऩक कऩयय औय जनयर एन सी द्धवज सदहत कई टॉऩ अधधकारयमैऄ को

क्जम्भेदाय ठहयामा गमा. इन सफका नतीजा मह हुआ कक आम्सम डीरयैऄ की रॉफी, अधधकायी, जभीन
भाक्ा़ पमा औय ऐसे कई साये रोग जनयर वी के मसॊह के खऽरापा़ राभफॊद हो गए औय उनकी
जन्भनतधथ के द्धववाद को हवा दी.

जनयर वी के मसॊह ने एक औय काभ ककमा, क्जसकी वजह से अधधकारयमैऄ को ऩये शानी हुई. मह
भाभरा जवानैऄ की मयननपॉभम मानी कऩड़ैऄ से जुड़ा है . ऩहरे जो मयननपॉभम सप्राई होती थी, वह
आधे से ज़्जमादा रोगैऄ को कपट नहीॊ होती थी. जवानैऄ को उनकी भाऩ के भुताबफ़ कऩड़े नहीॊ

मभरते थे. उन कऩड़ैऄ को कपय से मसरवाने की जरूयत ऩड़ती थी. जनयर वी के मसॊह ने इसे योका.
उन्हैऄने पैसरा मरमा कक जवानैऄ को मभरने वारे कऩड़े अच्छी कॊऩनी के हैऄ औय हय सैननक की
भाऩ रेकय मसराई हो. जनयर वी के मसॊह ने एक औय पैसरा मरमा, जो अधधकारयमैऄ को चब
ु गमा.
उन्हैऄने सेना भ भीट की सप्राई कयने वारे भीट कायटे र का ़िपामा कय ददमा, वे रोग जो भीट
सप्राई कयते थे, वह ठीक नहीॊ था. जनयर वी के मसॊह ने इसके मरए ग्रोफर टडय की शरु
ु आत

की, ताकक दनु नमा का सफसे फेहतय भीट सेना के जवानैऄ को मभरे. जफ जनयर वी के मसॊह ने थर
सेनाध्मऺ का ऩद सॊबारा, उस व़तत बायतीम सेना की साख दाॊव ऩय रगी थी. सेना के कई

घोटारे उजागय हो चक
ु े थे. अफ तक ईभानदाय सभझे जाने वारे इस भहकभे को रोग शक की

ननगाह से दे खने रगे थे. सेना के रोग बी दफी जुफान भ कहने रगे थे कक कुव्मवस्था की वजह

से उनकी क्स्थनत ऽयाफ होती जा यही है . ऊऩय से ऩाककस्तान की तऱप से घुसऩैदठमैऄ का बायत भ
आना ननयॊ तय जायी था. दे श भ नतसरी हभरे हो यहे थे. सयकाय नतसमरमैऄ के द्धवरुि सैन्म

कायम वाई कयने का भन फना यही थी. भतरफ मह कक जनयर वी के मसॊह के साभने कई चन
ु ौनतमाॊ
थीॊ. सेनाध्मऺ फनते ही उन्हैऄने सेना भ भौजयद भ्रष्ट्टाचाय औय भाक्ा़ पमा तॊर को ऽत्भ कयना शुरू

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कय ददमा. रगता है , मह फात नॉथम ब्रॉक औय साउथ ब्रॉक भ फैठे अधधकारयमैऄ को ऽयाफ रगी.
दे श भ सयकायी तॊर कैसे चर यहा है , मह एक स्कयरी फच्चे को बी ऩता है . रगता है , दे श भ जो
ईभानदाय औय आदशमवादी रोग हैं, उनके मरए सयकायी तॊर भ कोई जगह नहीॊ यह गई है . उन्ह
ईनाभ मभरने की जगह सजा दी जाती है औय जरीर ककमा जाता है .

तमा इस दे श भ अरग-अरग नागरयकैऄ के मरए अरग-अरग ़ानयन हैं मा कपय मह भान मरमा

जाए कक इस दे श को भाक्ा़ पमा सयगना औय सयकाय भ फैठे उनके दरार चरा यहे हैं. ऩयये दे श की
जनता एक ऐसे नघनौने वातमे से रूफरू हो यही है , क्जसे दे खते हुए मह कहा जा सकता है कक

द्धऩछरे सात सारैऄ भ क्जस तयह दे श भ सॊवैधाननक औय याजनीनतक सॊस्थानैऄ की फफामदी हुई है ,
वैसी ऩहरे कबी नहीॊ हुई. है यानी की फात मह है कक सयकाय एक तऱप मह कह यही है कक थर
सेनाध्मऺ झयठ फोर यहे हैं औय दस
य यी तऱप वह उनसे डीर बी कयती है कक उन्ह ककसी दे श का

याजदत
य मा ककसी याज्म का गवनमय फना ददमा जाएगा. मही नहीॊ, मह धभकी बी दी जा यही है कक
अगय वह कोटम गए तो उन्ह सेनाध्मऺ के ऩद से ब़खामस्त कय ददमा जाएगा. जनयर वी के मसॊह

को कोटम जाने का ऩयया अधधकाय है , तमैऄकक मह भाभरा म़िपम जनयर वी के मसॊह का नहीॊ है , मह
उनकी जन्भनतधथ के द्धववाद का भाभरा नहीॊ है , मह भाभरा दे श के सवोच्च थरसेना अधधकायी

नाभक सॊस्था से जुड़ा है . सयकाय क्जस तयह इस सॊस्था ऩय कीचड़ उछार यही है , वह इस दे श के
नागरयक-सैन्म रयश्ते, रस्जातॊर औय बद्धवष्ट्म के मरए घातक है . एक सच्चे सैननक को हय हार भ

रड़ने के मरए तैमाय यहना चादहए. इसमरए जनयर वी के मसॊह को ऽद
ु के मरए नहीॊ, फक्ल्क इस
सॊस्था की गरयभा फचाने के मरए कोटम भ जाना चादहए. अगय वह नहीॊ गए तो इसका भतरफ

मही है कक दे श के भाकपमा, अधधकायी औय नेता जफ चाह, धगयोह फनाकय बद्धवष्ट्म के सेनाध्मऺैऄ
को नीचा ददखा सकते हैं, उन्ह भनचाहा काभ कयाने के मरए भजफयय कय सकते हैं. जनयर वी के
मसॊह रड़ यहे हैं, मह अच्छी फात है . हो सकता है , बद्धवष्ट्म भ ककसी दस
य ये ईभानदाय सेनाध्मऺ के
साथ कपय ऐसा हो, रेककन वह जनयर वी के मसॊह की तयह रड़ बी न सके.

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श्री याभसेतु ध्िस्त प्रोजेक्र्ट के ऩीछे की बमानक गहयाई (तस्
ु र्टीकयण भर
ू हे तु नहीॊ िो तो
शसपफ आड़ऩेदाश है ) - याज फुयानऩुयी.
श्री याभसेतु ध्िस्त प्रोजेक्र्ट के ऩीछे छुऩी बमानक गहयाई (तुस्र्टीकयण भूर हे तु नहीॊ िो तो शसपफ
आड़ऩेदाश है ) - याज फुयानऩुयी.

तमा आऩ जानते है याभसेतु तोड़ने के इयादैऄ के ऩीछे मसपम तुस्टीकयण नहीॊ था जी हा ऩय

उसका साइड एफ्पेतट जरुय था वो बी भुफ्त भ.. हकीकत तमा है इसके ऩीछे आइमे जाननेकी

कोमशश कये : ऩयया द्धवश्व आज उजाम की फढती भाॊग की भाय जेर यहा है ,एसेभ वाजऩमी सयकायने
दो फोम्फ ब्रास्ट ककमे औय जवाफ भ अभेरयका ने हभायी कॊऩननमो के उनके फाजाय भ एतसऩोटम
ऩय ऩाफॊधी रगादी ये डडमो एक्तटव मुयेननमभ ऩय तो इॊददया सयकाय के सभम से ऩाफॊधी थी. कपय
अचानक अभेरयका इतना

नाभसे की हभाये दे श भ
ककमा उसके दस
ु ये हजायो

दरयमाददर केसे हुआ दोस्ती के
अणुउजाम के मरए अग्रीभट ऩेश
कायन

आऩ जानते होगे ऩय जो

सफसे अहभ ् है वो है

"याभसेतु ", अफ आऩ कहोगे तमा

दोस्तैऄ मे १७,५०,०००

सारो से बायत श्रीरॊका के बफचभे

द्धवध्मभान है ही ..! औय

उजाम के सन्दबम भ केसे बफच भ

आमा तो मेबी योचक

जानकायी है .अॊग्रेजी ऩारमभट के

रयऩोटम अनुसाय सन १४८०

के सार भ एक बमानक सुनाभी

फकवास है याभसेतु

बफचभे कहा से आमा ??? तो

आमा था क्जसभे मे श्री याभसेतु सभॊदय के ननचे चरा गमा.उसके ऩहरे तक क्जसका व्माऩारयक

उऩमोग ३००० सार तक दोनैऄ तयप के रोगो ने ककमा बायत से कऩडा जाता था औय श्रीरॊका से
कारी मभचम औय ऩत्ता आता था.

अफ इन सफके ऩीछे फात कुछ गहयी है , हभाये द्धवऻानी द्धऩछरे कई सारो से मे खोजनेभे रगे है की

मुयेननमभ के अनतरयतत औय कोनसा हभाये ऩास ये डडमो एक्तटवे इॊधन है क्जससे फम्फ औय बफजरी
फना सके.औय आऩ जानते होगे की हभाया जो "एर्टोशभक एनेजी कशभसन" है उसभे ६००० द्धवऻानी
इसी काभ भ द्धऩछरे चारीस सारो से रगे हुए है ;उन विऻातनमो को ऩता चरा की बायत भें

तशभरनाडु के सभुद्री प्रदे श भें एक एसा ये डडमो एल्क्र्टि इॊधन है ल्जससे अगरे १५० सारतक रगाताय

46

त्रफजरी फनामीॊ जा सकती है औय िो ये डडमो एल्क्र्टि इॊधन का हभ उऩमोग कयना सुरु कय दे तो ककसीबी दे श
के साभने हाथ फैराने की जरुयत नहीॊ है .

हभाये ऩयवम याष्ट्रऩनत अब्दर
ु कराभजी एसी सोच यखते थे की अभेरयका से मुयेननमभ की बीख

भाॊगने से अच्छा है की बायत से उऩरब्ध इॊधन का उऩमोग ककमा जामे औय हभाये ऩास एसे कुछ
एसे ये डडमो एक्तटव इॊधन है . कभ से कभ ऩाॊच एसे तत्वैऄ का ऩता चरा है औय उसभे एक तत्व
तो एसा ऩामा गमा है की १५० सार तक ४ राख भेगािोर्ट त्रफजरी हय घॊर्टे फनामीॊ जा सकती है मे फात
ऩयवम याष्ट्रऩनत अब्दर
ु कराभजीने व्मक्ततगत तौय ऩय श्री याजीव दीक्षऺत को ददल्री भ कही थी तो
साभने याजीव जी ने अऩने स्वबाव के अनुसाय कहा की मे फात खर
ु के जनता भ कहे ते तमैऄ

नहीॊ तो जवाफ मभरा रयटामय होने के फाद कहुगा जफ तक सत्ता भ हु तफतक नहीॊ कह सकता
तमुकी रस्धानभॊरी नहीॊ चाहते औय उन्हैऄने रयटामय होने के फाद अऩना ऩहरा इॊर्टयव्मू इॊडडमन

एक्सप्रेस को हदमा ल्जसभे शेखय गुप्ता से ढाई घॊर्टेके इॊर्टयव्मू भें कहा हभें अभेरयका से १ ग्राभ बी मुयेतनमभ
रेनेकी जरुयत नहीॊ है अगय हभ इॊधन फनामे तो अगरे १५० सार चर सकता है .

अफ अभेरयका की नजय हभाये उस इॊधन ऩय ऩड़ी है वो चाहता है बायत सयकाय उनको हभाया
मे इॊधन दे औय फदरेभे अभेरयकी सयकाय उनको थोडा फहोत मयु े ननमभ दे गी मे है खेर .अफ

जाननए इस खेर को ऩयय ा कयने के मरए वो इॊधन कहा है तो वो वही जगह है क्जसे आऩ श्री

याभसेतु कहते है जो साढ़े नतन मभर चौढा औय ऩनतश मभर रम्फा है . अफ िैऻातनको ने जो ऩता

रगामा है की मे जो श्री याभसेतु जहा ऩय है सभुद्र की तरेर्टी भें िही ऩय सफसे ज्मादा ये डडमो एल्क्र्टि इॊधन है
,तो अफ मे ये डडमो एक्तटव इॊधन चादहए ककसको ? अभेरयका को.. औय मे तबी सॊबव है जफ मे श्री
याभसेतु तोडा जामे .औय हभायी भनभोहन सयकाय इसके मरए फहोत फेताफ है इसे तोड़कय फेचने
के मरए अफ फताईमे मे कहना गरत है की भनभोहन अभेरयकी एजट है जो हभायी सयकाय भ
फेठा है जफसे इसने वल्डम फैंक भ काभ ककमा है औय उनके सत्ता भ आने की आगाही वल्डम
फैंक/आई.ऍभ.ऍर्फ. ने १ सार ऩहरे की थी.औय मे एजट चाहता है की वो गद्दी से उतये उसके
ऩहरे मे श्री याभसेतु टयट जामे औय तबी वहा से ये डडमो एक्तटव भटे रयअर ननकरेगा जो इसे
अभेरयका मबजवाना है औय फदरे भ अभेरयका थोडा फहोत मुयेननमभ दे गा एसा अग्रीभट है .

आऩको शामद भारभ
य होगा की जो धनष
ु कोदट एरयमा है वहा ऩय सात रस्काय के ये डडमो एक्तटव

तत्व है एसा द्धवऻाननमैऄ का कहना है जो १५० सार तक ननकरे जाने ऩय बी ऽतभ होने वारा
नहीॊ है . अफ इसको रॊर्ट
ु नेभें भनभोहन शसॊह को एक सहमोगी शभर गमा ल्जसका नाभ है "करुनातनधध"

47

ल्जन्हेआने याभ के होने न होने औय याभ कोनसी इॊजीतनमरयॊग कॉरेज भें गए थे जेसी फकिास कयते यहते थे
घौय कील्जमेगा मे शसपफ हभाये दे श भें ही सॊबि है जहा के हहन्दओ
ु का खन
ू ऩानी है .

अफ ऩयया खेर मह है की साढ़े सरह राख सार ऩुयाना मह याभसेतु ऩुर तोड़ कय यडडमो एक्तटव

इॊधन अभेरयका को फेचा जामे औय इसके मरए कॊऩनी बी फनामीॊ गमी है क्जसभे ऩाटम नय है

करूणाननधध औय टी.आय.फारय. र्टी.आय.फारू जो उस िक्त शशवऩॊग शभतनस्र्टय(२००४-२००९) थे. तो जफ

इनकी मे कॊऩनी कहती है ऩुर तोड़ कय जो कचया ननकरेगा उसको इकट्डा कय कय कही कही बेज
दगे तो आऩको जयठ फतामा जाता है की मे कचया है मे ये डडमो एक्तटव भटे रयअर को कचया फता

कय बेजना नहीॊ फेचना चाहते है औय इसका सौदा मे सफ मभरके खाना चाहते है .अफ मे खेर को
हभ दहन्दस्
ु तानी सभज जामे औय कबी श्री याभसेतु टयटने न ददमा जामे. तमा याभसेतु,हय योज

होने वारे स्कैभ ,औय हभसे, इस दे श से ताल्रुक यखने वारी हय फात का क्जम्भा मसपम भाननीम
सुब्रभण्मभ स्वाभी ऩय है ?? औय कुछ नहीॊ तो उनको खल्
ु रा सहमोग तो दे दह सकते हो !! - by
Raj Buranpuri.
----------------------------------------------------------------------------------------------------FYI : The sea separating India and Sri Lanka is called Sethusamudram meaning "Sea of the
Bridge". Maps prepared by a Dutch cartographer in 1747, available at the Tanjore Saraswathi
Mahal Library show this area as Ramancoil, a colloquial form of the Tamil Raman Kovil (or
Rama's Temple).[9] Another map of Mughal India prepared by J. Rennel in 1788 retrieved from
the same library called this area as "the area of the Rama Temple", referring to the temple
dedicated to Lord Rama at Rameswaram. Many other maps in Schwartzberg's historical atlas and
other sources such as travel texts by Marco Polo call this area by various names such as
Sethubandha and Sethubandha Rameswaram.

The western world first encountered it in "historical works in the 9th century" by Ibn
Khordadbeh in his Book of Roads and Kingdoms (ca. 850 CE), referring to it is Set Bandhai or
"Bridge of the Sea". Later, Alberuni described it. The earliest map that calls this area by the
name Adam's bridge was prepared by a British cartographer in 1804.

Geological Survey of India (GSI) carried out a special programme called ―Project
Rameswaram‖ that concluded that age data of corals indicate that the Rameswaram island
has evolved since 125,000 years ago.

48

The government of India constituted nine committees before independence, and five committees
since then to suggest alignments for a Sethusamudram canal project. Most of them suggested
land-based passages across Rameswaram island and none suggested alignment across Adam's
bridge. The Sethusamudram project committee in 1956 also strongly recommended to the Union
government to use land passages instead of cutting Adam's bridge because of the several
advantages of land passage.

Here i quote translation of one chant :
"Then the gods, Gandharvas, Siddhas (living beings superior to humans) and supreme Rishis
(great sages) assembled in the sky, eager to see that masterpiece, and the gods and Gandharvas
gazed on that causeway, so difficult of construction, that was ten leagues* in width and a
hundred in length built by Nala.
*leagues = An obsolete unit of distance of variable length (usually 3 miles) !!

Questions to Government
1. Why was the route of Metro passing 'close' Qutub Minar in New Delhi was abandoned and
later reworked fearing prospective damages to this 815 years man made monument?
2. Why the project of Taj corridor (which would have made lot of dollars to our money minded
govt) was put off after the hue and cry of environmentalists as the construction near Taj 'may'
cause bad effect on this 359 years old man made monument. Please give attention here that
these monuments were not going to be destroyed but were 'feared' to get damaged.
3. Will any government in China would destroy or even alter The great wall of China(2695 years
old) for the sake of any amount of money?
4. Will any one allow pulling down 4507 years old Pyramids of Egypt in lieu of any uncountable
amount of money?

If the answer is NO, then why this 17,25,000 years old man made monument is being destroyed
for the sake of some coins?
Ram Setu (Sethu) Destruction Status {this destruction info. from Official Setusamudram
Project Government Website}
Date

Destruction Status

Sept 17, 2007

24.76%

Sept 11, 2007

24.47%

Sept 5, 2007

23.65%

49

Aug 31, 2007

23.11%

Aug 27, 2007

22.53%

Aug 2, 2007

19.46%

July 28, 2007

17.57%

50

*** बायत के कानन
ू ****::: Indian Education Act * @ मे है हहॊदस्
ु तान भेयी जान
Indian Education Act * - 1858 भ Indian Education Act फनामा गमा। इसकी ड्राक्फ्टॊ ग रोडम
भैकोरे ने की थी। रेककन उसके ऩहरे उसने महाॉ (बायत) के मशऺा व्मवस्था का सवेऺण कयामा
था, उसके ऩहरे बी कई अॊग्रेजैऄ ने बायत के मशऺा व्मवस्था के फाये भ अऩनी रयऩोटम दी थी।
अॊग्रेजैऄ का एक अधधकायी था G.W.Litnar औय दस
य या था Thomas Munro, दोनैऄ ने अरग अरग
इराकैऄ का अरग-अरग सभम सवे ककमा था। 1823 के आसऩास की फात है मे Litnar , क्जसने
उत्तय बायत का सवे ककमा था, उसने मरखा है कक महाॉ 97% साऺयता है औय Munro, क्जसने
दक्षऺण बायत का सवे ककमा था, उसने मरखा कक महाॉ तो 100 % साऺयता है , औय उस सभम जफ
बायत भ इतनी साऺयता है औय भैकोरे का स्ऩष्ट्ट कहना था कक बायत को हभेशा-हभेशा के मरए
अगय गुराभ फनाना है तो इसकी दे शी औय साॊस्कृनतक मशऺा व्मवस्था को ऩययी तयह से ध्वस्त

कयना होगा औय उसकी जगह अॊग्रेजी मशऺा व्मवस्था रानी होगी औय तबी इस दे श भ शयीय से
दहन्दस्
ु तानी रेककन ददभाग से अॊग्रेज ऩैदा हैऄगे औय जफ इस दे श की मयननवमसमटी से ननकरगे तो
हभाये दहत भ काभ कयगे औय भैकोरे एक भह
ु ावया इस्तेभार कय यहा है "कक जैसे ककसी खेत भ
कोई पसर रगाने के ऩहरे ऩयय ी तयह जोत ददमा जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा औय अॊग्रेजी

मशऺा व्मवस्था रानी होगी।" इसमरए उसने सफसे ऩहरे गरु
ु कुरैऄ को गैयकानन
य ी घोद्धषत ककमा, जफ
गरु
ु कुर गैयकानन
य ी हो गए तो उनको मभरने वारी सहामता जो सभाज के तयप से होती थी वो
गैयकानन
य ी हो गमी, कपय सॊस्कृत को गैयकानन
य ी घोद्धषत ककमा औय इस दे श के गरु
ु कुरैऄ को घभ

घभ
य कय ऽत्भ कय ददमा उनभे आग रगा दी, उसभ ऩढ़ाने वारे गरु
ु ओॊ को उसने भाया-ऩीटा, जेर

भ डारा। 1850 तक इस दे श भ 7 राख 32 हजाय गरु
ु कुर हुआ कयते थे औय उस सभम इस दे श
भ गाॉव थे 7 राख 50 हजाय, भतरफ हय गाॉव भ औसतन एक गरु
ु कुर औय मे जो गरु
ु कुर होते थे
वो सफ के सफ आज की बाषा भ Higher Learning Institute हुआ कयते थे उन सफभे 18 द्धवषम

ऩढामा जाता था, औय मे गुरुकुर सभाज के रोग मभर के चराते थे न कक याजा, भहायाजा, औय
इन गुरुकुरैऄ भ मशऺा नन्शुल्क दी जाती थी। इस तयह से साये गुरुकुरैऄ को ऽत्भ ककमा गमा

औय कपय अॊग्रेजी मशऺा को कानयनी घोद्धषत ककमा गमा औय करकत्ता भ ऩहरा कॉन्वट स्कयर
खोरा गमा, उस सभम इसे फ्री स्कयर कहा जाता था, इसी कानयन के तहत बायत भ करकत्ता

मयननवमसमटी फनाई गमी, फम्फई मयननवमसमटी फनाई गमी, भद्रास मयननवमसमटी फनाई गमी औय मे तीनैऄ

गुराभी के जभाने के मयननवमसमटी आज बी इस दे श भ हैं औय भैकोरे ने अऩने द्धऩता को एक धचट्ठी

मरखी थी फहुत भशहयय धचट्ठी है वो, उसभ वो मरखता है कक "इन कॉन्वट स्कयरैऄ से ऐसे फच्चे
ननकरगे जो दे खने भ तो बायतीम हैऄगे रेककन ददभाग से अॊग्रेज हैऄगे औय इन्ह अऩने दे श के फाये
भ कुछ ऩता नहीॊ होगा, इनको अऩने सॊस्कृनत के फाये भ कुछ ऩता नहीॊ होगा, इनको अऩने

ऩयम्ऩयाओॊ के फाये भ कुछ ऩता नहीॊ होगा, इनको अऩने भुहावये नहीॊ भारयभ हैऄगे, जफ ऐसे फच्चे

51

हैऄगे इस दे श भ तो अॊग्रेज बरे ही चरे जाएॉ इस दे श से अॊग्रेक्जमत नहीॊ जाएगी" औय उस सभम
मरखी धचट्ठी की सच्चाई इस दे श भ अफ सार्फ-सार्फ ददखाई दे यही है । औय उस एतट की भदहभा
दे खखमे कक हभ अऩनी बाषा फोरने भ शभम आती है , अॊग्रेजी भ फोरते हैं कक दस
य यैऄ ऩय योफ ऩड़ेगा,
अये हभ तो खद
ु भ हीन हो गए हैं क्जसे अऩनी बाषा फोरने भ शभम आ यही है , दस
य यैऄ ऩय योफ
तमा ऩड़ेगा।

रोगैऄ का तकम है कक अॊग्रेजी अॊतयामष्ट्रीम बाषा है , दनु नमा भ 204 दे श हैं औय अॊग्रेजी मसपम 11 दे शैऄ
भ फोरी, ऩढ़ी औय सभझी जाती है , कपय मे कैसे अॊतयामष्ट्रीम बाषा है । शब्दैऄ के भाभरे भ बी
अॊग्रेजी सभि
ृ नहीॊ

दरयद्र बाषा है । इन
अॊग्रेजैऄ की जो फाइबफर
है वो बी अॊग्रेजी भ
नहीॊ थी औय ईशा
भसीह अॊग्रेजी नहीॊ
फोरते थे। ईशा भसीह
की बाषा औय फाइबफर
की बाषा अयभेक थी।
अयभेक बाषा की मरद्धऩ
जो थी वो हभाये फॊगरा
बाषा से मभरती जुरती

थी, सभम के कारचक्र भ वो बाषा द्धवरुप्त हो गमी। सॊमुतत याष्ट्ट सॊघ जो अभेरयका भ है वहाॊ की
बाषा अॊग्रेजी नहीॊ है , वहाॊ का साया काभ फ्रच भ होता है । जो सभाज अऩनी भातब
ृ ाषा से कट
जाता है उसका कबी बरा नहीॊ होता औय मही भैकोरे की यणनीनत थी।

52

मे सच्चाई बी फहोत कड़िी होती है दोस्तो...क्मा कपय से गरती का आॊकरन ऩचास सार
फाद होना है ? जैसे आजादी के ऩचास सार फाद हुआ।
नहीॊ-नहीॊ अन्ना (&कम्ऩनी) तुभ ग…….. नहीॊ हो सकते
आज से एक सार ऩहरे तक हभ नहीॊ ऩता था ! कक जन रोकऩार बफर तमा है ? एक सार बी
ऩयया नहीॊ; कुछ ही भहीने कहो। हभ केवर इतना जानते थे कोई अन्ना हजाये हैं जो भहायाष्ट्र भ
सभाज सेवी हैं। औय सयकाय से टकयाते यहते हैं। अन्ना(& कॊऩनी) भ से एकाध को सीरयमर के

कायण मा सयचना के अधधकाय के कायण केवर नाभ से जानते थे। फाककमैऄ का तो कबी नाभ बी
नहीॊ सुना था।

हभ ऩ...ता रगा ; फाफा याभदे व जॊतय-भॊतय ददल्री भ भ्रष्ट्टाचाय के द्धवरुि एक रस्दशमन कय यहे हैं,
अचानक ऩता रगा कक इसभ ―अन्ना हजाये (& कॊऩनी)‖ बी बाग रगे। मे दो-तीन नाभ ऐसे थे
क्जन ऩय दे श के रोगैऄ को द्धवश्वास था, इससे फड़ी ऽश
ु ी हुमी। तबी हभ ऩता रगा कक जन
रोकऩार बफर तमा है । आऩके "अरस्ेर के अनशन" भ "बायत स्वामबभान" के काममकतामओॊ ने फढ़चढ़ कय दहस्सा मरमा तमैऄकक इन्ह फाफा याभदे व द्धऩछरे ऩाॊच सार से अऩने मोग मशद्धवयैऄ के
भाध्मभ से दे शबक्तत का ऩाठ ऩढ़ा यहे थे औय व्मवस्था ऩरयवतमन के आन्दोरन की जड़ भजफत

कय यहे थे; क्जससे नई आजादी आसानी से मभर सके। रेककन ! जफ आऩके तेवय वहाॊ फदर गए;
औय बायत स्वामबभान के काममकतामओॊ को कोई भहत्त्व नहीॊ ददमा गमा, उससे बी फड़ी फात;
अनशन तोड़ने के फाद जो नए नाभ जनता को औय सुनाई ददए ! तो भाथा ठनका ! औय दार भ
कारा नजय आने रगा ।

हभ बायत स्वामबभान वारैऄ का आन्दोरन है ; सम्ऩयणम व्मवस्था ऩरयवतमन का। क्जसभे अॊग्रेजैऄ के

द्सवाया "सशतम" दी गमी आजादी, उनके द्सवाया रागय 34735 कानयन, उनके द्सवाया रागय शैक्षऺक कोसम
औय व्मवस्था,उनकी फनामीॊ न्माम औय कानयन व्मवस्था,उनका फनामा तॊर, औय बी जो कुछ

उन्हैऄने बायतीमैऄ का "स्वामबभान" सभाप्त कयने के मरए ककमा था; वह सफ फदरना। अन्ना !
(&कॊऩनी) आऩने शामद न दे खा हो; हभ तो 2003 से फाफा याभदे व जी को आस्था चैनर ऩय दे ख
यहे हैं औय जफ से "बायत स्वामबभान रस्ट" फना है उसके सदस्म बी हैं। दे श के जो रोग सॊस्काय
हीन हो गए थे उनके सॊस्काय जगाने का काभ फाफा जी ने ककमा है ; रोग अस्वस्थ यहने के औय
दवा- दारू के आदद हो चक
ु े थे उन्ह स्वास्थ्म का भहत्त्व फाफा जी ने ही फतामा औय स्वस्थ यहने

53

का तयीका फतामा। औय सफसे फड़ी फात मे फताई औय अहसास कयामा कक आजादी के 60 वषों के
फाद बी बायत गुराभी से उफया नहीॊ है ;अद्धऩतु औय फुयी क्स्थनत भ है । उन्हैऄने ही फतामा कक

"बायत के भ्रष्ट्टैऄ का 300 राख कयोड़" रुऩमा द्धवदे शी फैंकैऄ भ जभा है । 100 राख कयोड़ तो महीॊ
बायत भ ही जभा है । फाफा जी ने ही सभझामा है कक मे इतना रुऩमा है कक एक-एक गाॉव को
100 कयोड़ रुऩमा मभर सकता है । उन्हैऄने ही फड़े नोट( कयसी) फॊद कयने की भाॊग की, औय इसके
मरए रोगैऄ को सभझामा। स्वदे शी का भहत्त्व औय द्धवदे शी की रयट उन्हैऄने ही सभझाई। सभझाई
ही नहीॊ अद्धऩतु द्धवदे शी कम्ऩननमैऄ से भक
ु ाफरे के मरए स्वदे शी साभान बी उऩरब्ध कयामा ।
आमव
ु ेद का भहत्त्व तो दनु नमा बर
य ही चक
ु ी थी उसे बी फाफा जी औय फारकृष्ट्ण जी ने ही

रस्नतष्ट्ठाद्धऩत ककमा औय अन्ना (&कॊऩनी) ! जन रोकऩार बफर को बी फाफा ने अऩने भद्द
ु ैऄ भ
शामभर ककमा, मे जानते हुए बी; कक "इस व्मवस्था भ कोई बी कानन
य फन जामे सपर नहीॊ
होगा"। केवर इसमरए; कक आन्दोरन दो ददशाओॊ भ न बटके, जैसा कक सयकाय चाहती थी।

ऩय फड़ा आश्चमम है अन्ना(&कॊऩनी) ! आऩने एक फाय बी व्मवस्था ऩरयवतमन की फात नहीॊ की।
कबी द्धवदे शी कम्ऩननमैऄ के द्धवयोध की फात नहीॊ की,कबी बी द्धवदे शैऄ भ जभा धन की फात नहीॊ
की, कबी बी कु व्मवस्थाओॊ की फात नहीॊ की, कु सॊस्कायैऄ की फात नहीॊ की; तमैऄ ? इससे हभाये
भन भ भ्रभ ऩैदा हो यहा है । कक मे उसी तयह तो नहीॊ हो यहा जैसे क्राक्न्तकारयमो के साथ

काॊग्रेस(अॊग्रेजैऄ की मभरीबगत से) ने ककमा। नहीॊ-नहीॊ अन्ना (&कम्ऩनी) तुभ गरत नहीॊ हो सकते
। इतने फड़े व्मवस्था ऩरयवतमन के आन्दोरन को 'केवर एक जन रोकऩार बफर "कानयन भार" के

मरए' बटकाने का करॊक आऩने भाथे नहीॊ रे सकते। तुभ उन शक्ततमैऄ के हाथैऄ भ भोहये नहीॊ फन
सकते जो बायत का स्वामबभान जागना नहीॊ दे ख सकते। तुभ द्धवदे शी कम्ऩननमैऄ के षड्मॊरैऄ भ

शामभर नहीॊ हो सकते। तुभ सयकाय(भ्रष्ट्टैऄ) की इच्छा ऩयनतम नहीॊ कय सकते ?अन्ना (&कॊऩनी) तुभ
आज के भ्रष्ट्ट भीडडमा का भोहया नहीॊ फन सकते; क्जन ऩय द्धवदे शी कम्ऩननमैऄ औय ऩाश्चात्म
भानमसकता के रोगैऄ का कब्जा है ।

ऩय ; न जाने तमैऄ ? द्धवश्वास नहीॊ होता । न तुम्हाये द्धवचाय ही हभने ऐसे सुने, न कोई गनतद्धवधध
हभने ऐसी दे खी कक आऩने कबी "नई आजादी नई व्मवस्था" का जो आन्दोरन फाफा याभदे व ने
चरामा है उसका सभथमन ककमा हो। शामद ही आऩ भ से ककसी ने बी आज तक आस्था चैनर
ऩय बायत स्वामबभान का जनजागयण (मोग मशद्धवयैऄ को) दे खने के मरए सुफह जल्द उठने की
जहभत उठाई हो ।

54

रेककन तमा कय ? आऩ औय कोई बी स्वतन्र है कुछ बी कयने को । सही का ऩता तो तबी चर
जाता है ; रेककन गरती का आॊकरन ऩचास सार फाद होता है । जैसे आजादी के ऩचास सार

फाद हुआ। तफ बी जनता की जागरूकता को भ्राभक आजादी की ओय भोड़ ददमा गमा था औय
व्मवस्था कुछ रोगैऄ ने अऩने औय खानदानो के याज कयने के मरए फनवा री थी

55

भारेगाॊि फभकाॊड के सॊदेह भें धगयफ्ताय साध्िी प्रऻा शसॊह ठाकुय द्िाया नाशसक कोर्टफ भें
हदमे गमे शऩथऩत्र ऩय आधारयत.
||फहन रस्ऻा की भामभमक दशा : एक साध्वी को दहन्द य होने की सजा औय ककतनी दे य तक|| फहन
रस्ऻा की सचाई अवश्म ऩढ़े |

भैं साध्वी रस्ऻा चॊद्रऩार मसॊह ठाकुय, उम्र-38 सार, ऩेशा-कुछ नहीॊ, 7 गॊगा सागय ...अऩाटम भेन्ट,

कटोदया, सययत,गुजयात याज्म की ननवासी हयॊ जफकक भैं भयरत् भध्म रस्दे श की ननवामसनी हयॊ. कुछ
सार ऩहरे हभाये अमबबावक सययत आकय फस गमे. द्धऩछरे कुछ सारैऄ से भैं अनब
ु व कय यही हयॊ
कक बौनतक जगत से भेया कटाव होता जा यहा है . आध्माक्त्भक जगत रगाताय भुझे अऩनी ओय

आकद्धषमत कय यहा था. इसके कायण भैंने बौनतक जगत को अरद्धवदा कयने का ननश्चम कय मरमा
औय 30-01-2007 को सॊन्मामसन हो गमी.
जफ से सन्मामसन हुई हयॊ भैं अऩने जफरऩयु वारे आश्रभ से ननवास कय यही हयॊ. आश्रभ भ भेया
अधधकाॊश सभम ध्मान-साधना, मोग, रस्ाणामभ औय आध्माक्त्भक अध्ममन भ ही फीतता था. आश्रभ
भ टीवी इत्मादद दे खने की भेयी कोई आदत नहीॊ है , महाॊ तक कक आश्रभ भ अखफाय की कोई
सभुधचत व्मवस्था बी नहीॊ है . आश्रभ भ यहने के ददनैऄ को छोड़ द तो फाकी सभम भैं उत्तय

बायत के ज्मादातय दहस्सैऄ भ धामभमक रस्वचन औय अन्म धामभमक कामों को सॊऩन्न कयाने के मरए
उत्तय बायत भ माराएॊ कयती हयॊ. 23-9-2008 से 4-10-2008 के दौयान भैं इॊदौय भ थी औय महाॊ भैं
अऩने एक मशष्ट्म अण्णाजी के घय रूकी थी. 4 अतटयफय की शाभ को भैं अऩने आश्रभ जफरऩुय
वाऩस आ गमी.

7-10-2008 को जफ भैं अऩने जफरऩुय के आश्रभ भ थी तो शाभ को भहायाष्ट्र से एटीएस के एक

ऩमु रस अधधकायी का पोन भेये ऩास आमा क्जन्हैऄने अऩना नाभ सावॊत फतामा. वे भेयी एरएभएर

फ्रीडभ फाईक के फाये भ जानना चाहते थे. भैंने उनसे कहा कक वह फाईक तो भैंने फहुत ऩहरे फेच
दी है . अफ भेया उस फाईक से कोई नाता नहीॊ है . कपय बी उन्हैऄने भझ
ु े कहा कक अगय भैं सयय त आ
जाऊॊ तो वे भझ
ु से कुछ ऩछ
य ताछ कयना चाहते हैं. भेये मरए तयु ॊ त आश्रभ छोड़कय सयय त जाना

सॊबव नहीॊ था इसमरए भैंने उन्ह कहा कक हो सके तो आऩ ही जफरऩयु आश्रभ आ जाईमे, आऩको

जो कुछ ऩछ
य ताछ कयनी है कय रीक्जए. रेककन उन्हैऄने जफरऩयु आने से भना कय ददमा औय कहा
कक क्जतनी जल्दी हो आऩ सयय त आ जाईमे. कपय भैंने ही सयय त जाने का ननश्चम ककमा औय रे न
से उज्जैन के यास्ते 10-10-2008 को सुफह सययत ऩहुॊच गमी. ये रवे स्टे शन ऩय बीभाबाई ऩसयीचा
भुझे रेने आमे थे. उनके साथ भैं उनके ननवासस्थान एटाऩ नगय चरी गमी.

56

महीॊ ऩय सुफह के कोई 10 फजे भेयी सावॊत से भुराकात हुई जो एरएभएर फाईक की खोज कयते
हुए ऩहरे से ही सययत भ थे. सावॊत से भैंने ऩयछा कक भेयी फाईक के साथ तमा हुआ औय उस

फाईक के फाये भ आऩ ऩडतार तमैऄ कय यहे हैं? श्रीभान सावॊत ने भुझे फतामा कक द्धऩछरे सप्ताह

मसतॊफय भ भारेगाॊव भ जो द्धवस्पोट हुआ है उसभ वही फाईक इस्तेभार की गमी है . मह भेये मरए
बी बफल्कुर नमी जानकायी थी कक भेयी फाईक का इस्तेभार भारेगाॊव धभाकैऄ भ ककमा गमा है .
मह सुनकय भैं सन्न यह गमी. भैंने सावॊत को कहा कक आऩ क्जस एरएभएर फ्रीडभ फाईक की
फात कय यहे हैं उसका यॊ ग औय नॊफय वही है क्जसे भैंने कुछ सार ऩहरे फेच ददमा था.

सययत भ सावॊत से फातचीत भ ही भैंने उन्ह फता ददमा था कक वह एरएभएर फ्रीडभ फाईक भैंने

अतटयफय 2004 भ ही भध्मरस्दे श के श्रीभान जोशी को 24 हजाय भ फेच दी थी. उसी भहीने भ भैंने
आयटीओ के तहत जरूयी कागजात (टीटी पाभम) ऩय हस्ताऺय कयके फाईक की रेन-दे न ऩययी कय

दी थी. भैंने साप तौय ऩय सावॊत को कह ददमा था कक अतटयफय 2004 के फाद से भेया उस फाईक
ऩय कोई अधधकाय नहीॊ यह गमा था. उसका कौन इस्तेभार कय यहा है इससे बी भेया कोई

भतरफ नहीॊ था. रेककन सावॊत ने कहा कक वे भेयी फात ऩय द्धवश्वास नहीॊ कय सकते. इसमरए
भुझे उनके साथ भुॊफई जाना ऩड़ेगा ताकक वे औय एटीएस के उनके अन्म साथी इस फाये भ औय
ऩयछताछ कय सक. ऩयछताछ के फाद भैं आश्रभ आने के मरए आजाद हयॊ.

महाॊ मह ध्मान दे ने की फात है कक सीधे तौय ऩय भुझे 10-10-2008 को धगयफ्ताय नहीॊ ककमा गमा.
भुॊफई भ ऩयछताछ के मरए रे जाने की फाफत भुझे कोई सम्भन बी नहीॊ ददमा गमा. जफकक भैं

चाहती तो भैं सावॊत को अऩने आश्रभ ही आकय ऩयछताछ कयने के मरए भजफयय कय सकती थी
तमैऄकक एक नागरयक के नाते मह भेया अधधकाय है . रेककन भैंने सावॊत ऩय द्धवश्वास ककमा औय
उनके साथ फातचीत के दौयान भैंने कुछ नहीॊ नछऩामा. भैं सावॊत के साथ भुॊफई जाने के मरए

तैमाय हो गमी. सावॊत ने कहा कक भैं अऩने द्धऩता से बी कहयॊ कक वे भेये साथ भुॊफई चर. भैंने
सावॊत से कहा कक उनकी फढ़ती उम्र को दे खते हुए उनको साथ रेकय चरना ठीक नहीॊ होगा.

इसकी फजाम भैंने बीभाबाई को साथ रेकय चरने के मरए कहा क्जनके घय भ एटीएस भुझसे
ऩयछताछ कय यही थी.

शाभ को 5.15 मभनट ऩय भैं, सावॊत औय बीभाबाई सयय त से भॊफ
ु ई के मरए चर ऩड़े. 10 अतटयफय

को ही दे य यात हभ रोग भुॊफई ऩहुॊच गमे. भुझे सीधे काराचौकी क्स्थत एटीएस के आकपस रे
जामा गमा था. इसके फाद अगरे दो ददनैऄ तक एटीएस की टीभ भुझसे ऩयछताछ कयती यही. उनके
साये सवार 29-9-2008 को भारेगाॊव भ हुए द्धवस्पोट के इदम -धगदम ही घयभ यहे थे. भैं उनके हय
सवार का सही औय सीधा जवाफ दे यही थी.

57

अतटयफय को एटीएस ने अऩनी ऩयछताछ का यास्ता फदर ददमा. अफ उसने उग्र होकय ऩयछताछ

कयना शुरू ककमा. ऩहरे उन्हैऄने भेये मशष्ट्म बीभाबाई ऩसयीचा (क्जन्ह भैं सययत से अऩने साथ राई
थी) से कहा कक वह भुझे फेल्ट औय डॊडे से भेयी हथेमरमैऄ, भाथे औय तरुओॊ ऩय रस्हाय कये . जफ
ऩसयीचा ने ऐसा कयने से भना ककमा तो एटीएस ने ऩहरे उसको भाया-ऩीटा. आखखयकाय वह

एटीएस के कहने ऩय भेये ऊऩय रस्हाय कयने रगा. कुछ बी हो, वह भेया मशष्ट्म है औय कोई मशष्ट्म

अऩने गुरू को चोट नहीॊ ऩहुॊचा सकता. इसमरए रस्हाय कयते वतत बी वह इस फात का ध्मान यख
यहा था कक भझ
ु े कोई चोट न रग जाए. इसके फाद खानद्धवरकय ने उसको ककनाये धकेर ददमा
औय फेल्ट से खद
ु भेये हाथैऄ, हथेमरमैऄ, ऩैयैऄ, तरओ
ु ॊ ऩय रस्हाय कयने रगा. भेये शयीय के दहस्सैऄ भ
अबी बी सज
य न भौजद
य है .

13 तायीख तक भेये साथ सुफह, दोऩहय औय यात भ बी भायऩीट की गमी. दो फाय ऐसा हुआ कक
बोय भ चाय फजे भुझे जगाकय भारेगाॊव द्धवस्पोट के फाये भ भुझसे ऩयछताछ की गमी. बोय भ
ऩयछताछ के दौयान एक भयछवारे आदभी ने भेये साथ भायऩीट की क्जसे भैं अबी बी ऩहचान

सकती हयॊ. इस दौयान एटीएस के रोगैऄ ने भेये साथ फातचीत भ फहुत बद्दी बाषा का इस्तेभार
कयना शुरू कय ददमा. भेये गरू
ु का अऩभान ककमा गमा औय भेयी ऩद्धवरता ऩय सवार ककमे गमे.
भुझे इतना ऩये शान ककमा गमा कक भुझे रगा कक भेये साभने आत्भहत्मा कयने के अरावा अफ
कोई यास्ता नहीॊ फचा है .

14 अतटयफय को सुफह भुझे कुछ जाॊच के मरए एटीएस कामामरम से कापी दयय रे जामा गमा जहाॊ

से दोऩहय भ भेयी वाऩसी हुई. उस ददन भेयी ऩसयीचा से कोई भुराकात नहीॊ हुई. भुझे मह बी
ऩता नहीॊ था कक वे (ऩसयीचा) कहाॊ है . 15 अतटयफय को दोऩहय फाद भुझे औय ऩसयीचा को एटीएस
के वाहनैऄ भ नागऩाड़ा क्स्थत याजदत
य होटर रे जामा गमा जहाॊ कभया नॊफय 315 औय 314 भ हभे
क्रभश् फॊद कय ददमा गमा. महाॊ होटर भ हभने कोई ऩैसा जभा नहीॊ कयामा औय न ही महाॊ
ठहयने के मरए कोई खानाऩयनतम की. साया काभ एटीएस के रोगैऄ ने ही ककमा.
भझ
ु े होटर भ यखने के फाद एटीएस के रोगैऄ ने भझ
ु े एक भोफाईर पोन ददमा. एटीएस ने भझ
ु े
इसी पोन से अऩने कुछ रयश्तेदायैऄ औय मशष्ट्मैऄ (क्जसभ भेयी एक भदहरा मशष्ट्म बी शामभर थी)

को पोन कयने के मरए कहा औय कहा कक भैं पोन कयके रोगैऄ को फताऊॊ कक भैं एक होटर भ
रूकी हयॊ औय सकुशर हयॊ. भैंने उनसे ऩहरी फाय मह ऩयछा कक आऩ भुझसे मह सफ तमैऄ कहराना
चाह यहे हैं. सभम आनेऩय भैं उस भदहरा मशष्ट्म का नाभ बी सावमजननक कय दॊ ग
य ी.
एटीएस की इस रस्ताड़ना के फाद भेये ऩेट औय ककडनी भ ददम शुरू हो गमा. भुझे बयख रगनी फॊद
हो गमी. भेयी हारत बफगड़ यही थी. होटर याजदत
य भ राने के कुछ ही घण्टे फाद भुझे एक

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अस्ऩतार भ बतॉ कया ददमा गमा क्जसका नाभ सुश्रस
ु ा हाक्स्ऩटर था. भुझे आईसीमय भ यखा

गमा. इसके आधे घण्टे के अॊदय ही बीभाबाई ऩसयीचा बी अस्ऩतार भ रामे गमे औय भेये मरए
जो कुछ जरूयी कागजी काममवाही थी वह एटीएस ने बीभाबाई से ऩययी कयवाई. जैसा कक बीभाबाई
ने भुझे फतामा कक श्रीभान खानद्धवरकय ने हाक्स्ऩटर भ ऩैसे जभा कयवामे. इसके फाद ऩसयीचा

को एटीएस वहाॊ से रेकय चरी गमी क्जसके फाद से भेया उनसे ककसी रस्काय का कोई सॊऩकम नहीॊ
हो ऩामा है .

इस अस्ऩतार भ कोई 3-4 ददन भेया इराज ककमा गमा. महाॊ भेयी क्स्थनत भ कोई सुधाय नहीॊ हो
यहा था तो भुझे महाॊ से एक अन्म अस्ऩतार भ रे जामा गमा क्जसका नाभ भुझे माद नहीॊ है .
मह एक ऊॊची ईभायत वारा अस्ऩतार था जहाॊ दो-तीन ददन भेया ईराज ककमा गमा. इस दौयान
भेये साथ कोई भदहरा ऩुमरसकभॉ नहीॊ यखी गमी. न ही होटर याजदत
य भ औय न ही इन दोनो

अस्ऩतारैऄ भ. होटर याजदत
य औय दोनैऄ अस्ऩतार भ भुझे स्रे चय ऩय रामा गमा, इस दौयान भेये

चेहये को एक कारे कऩड़े से ढॊ ककय यखा गमा. दस
य ये अस्ऩतार से छुट्टी मभरने के फाद भुझे कपय
एटीएस के आकपस काराचौकी रामा गमा.

इसके फाद 23-10-2008 को भझ
ु े धगयफ्ताय ककमा गमा. धगयफ्तायी के अगरे ददन 24-10-2008 को

भझ
ु े भख्
ु म न्मानमक भक्जस्रे ट, नामसक की कोटम भ रस्स्तत
ु ककमा गमा जहाॊ भझ
ु े 3-11-2008 तक

ऩुमरस कस्टडी भ यखने का आदे श हुआ. 24 तायीख तक भुझे वकीर तो छोडड़मे अऩने
ऩरयवायवारैऄ से बी मभरने की इजाजत नहीॊ दी गमी. भुझे बफना कानयनी रूऩ से धगयफ्ताय ककमे ही
23-10-2008 के ऩहरे ही ऩारीग्रैकपक टे स्ट ककमा गमा. इसके फाद 1-11-2008 को दस
य या
ऩामरग्राकपक टे स्ट ककमा गमा. इसी के साथ भेया नाको टे स्ट बी ककमा गमा.

भैं कहना चाहती हयॊ कक भेया राई डडटे तटय टे स्ट औय नाको एनेक्ल्सस टे स्ट बफना भेयी अनुभनत के
ककमे गमे. सबी ऩयीऺणैऄ के फाद बी भारेगाॊव द्धवस्पोट भ भेये शामभर होने का कोई सफयत नहीॊ
मभर यहा था. आखखयकाय 2 नवॊफय को भुझे भेयी फहन रस्नतबा बगवान झा से मभरने की इजाजत

दी गमी. भेयी फहन अऩने साथ वकारतनाभा रेकय आमी थी जो उसने औय उसके ऩनत ने वकीर
गणेश सोवानी से तैमाय कयवामा था. हभ रोग कोई ननजी फातचीत नहीॊ कय ऩामे तमैऄकक एटीएस

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को रोग भेयी फातचीत सुन यहे थे. आखखयकाय 3 नवॊफय को ही सम्भाननीम अदारत के कोटम रूभ
भ भैं चाय-ऩाॊच मभनट के मरए अऩने वकीर गणेश सोवानी से मभर ऩामी.

10 अतटयफय के फाद से रगाताय भेये साथ जो कुछ ककमा गमा उसे अऩने वकीर को भैं चाय-ऩाॊच

मभनट भ ही कैसे फता ऩाती? इसमरए हाथ से मरखकय भाननीम अदारत को भेया जो फमान ददमा
था उसभ द्धवस्ताय से ऩययी फात नहीॊ आ सकी. इसके फाद 11 नवॊफय को बामखरा जेर भ एक

भदहरा काॊस्टे फर की भौजयदगी भ भुझे अऩने वकीर गणेश सोवानी से एक फाय कपय 4-5 मभनट

के मरए मभरने का भौका ददमा गमा. इसके अगरे ददन 13 नवॊफय को भुझे कपय से 8-10 मभनट के
मरए वकीर से मभरने की इजाजत दी गमी. इसके फाद शुक्रवाय 14 नवॊफय को शाभ 4.30 मभनट

ऩय भुझे भेये वकीर से फात कयने के मरए 20 मभनट का वतत ददमा गमा क्जसभ भैंने अऩने साथ
हुई सायी घटनाएॊ मसरमसरेवाय उन्ह फताई, क्जसे महाॊ रस्स्तुत ककमा गमा है .

(भारेगाॊव फभकाॊड के सॊदेह भ धगयफ्ताय साध्वी रस्ऻा मसॊह ठाकुय द्सवाया नामसक कोटम भ ददमे गमे
शऩथऩर ऩय आधारयत.

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Burning issue,intentionally ignored..can u ignore this as a indian citizen????
Burning issue, intentionally ignored..can u ignore this as a citizen of india???????????????
बायत से ननकरा हुआ एक औय इस्राभी याष्ट्र फाॊग्रादे श द्धवश्व के उन सफसे फड़े दे शैऄ भ है जो
रगाताय शयणाधथममैऄ को ऩैदा कय यहे हैं। इ*** ा खामभमाजा बायत को बुगतना ऩड़ यहा है।
बायत भ फाॊग्रादे शी भुसरभानैऄ का आसानी से रगाताय घुसऩैठ होते यहने का भुख्म कायण

बायत-फाॊग्रादे श की 4096 की.भी. रम्फी साझी सीभा है , याज्मवाय क्स्थनत कुछ इस रस्काय ऩक्श्चभ
फॊगार-2217 कक.भी., असभ-262 कक.भी., भेघारम 443, कक.भी., बरऩुया-858 कक.भी., मभजोयभ-318

कक.भी.। असभ के ऩयवम याज्मऩार रे. जनयर अजम मसॊह ने कहा था कक 6000 फाॊग्रादे शी अवैध
रूऩ से रस्नतददन सीभा ऩाय कय बायत भ रस्वेश कयते हैं। मह अवैध घुसऩैठ रस्नतवषम रगबग 22

राख होती है । फाॊग्रादे श की ओय से जायी अननमॊबरत औय अवैध घुसऩैठ ने द्धऩछरे कुछ दशकैऄ से
बायत के खखराप जनसाॊक्ख्मकीम हभरे का रूऩ धायण कय मरमा है । मह बायत की अथमव्मवस्था

औय सुयऺा दोनैऄ के मरए एक फड़ा खतया है । इन घुसऩैदठमैऄ भ भुक्स्रभ औय दहन्दओ
ु ॊ का अनुऩात

4 1 का है । द्धऩछरे दस वषों भ बायत फाॊग्रादे श सीभा के दोनो औय कयीफ 3000 से ज्मादा भक्स्जद
औय भदयसे उग आए हैं। महाॊ कट्टयऩॊथी े भस
ु रभानैऄ के फीच इस्रामभक द्धवचायधाया का खर
ु े आभ
रस्चाय ककमा जा यहा है । खकु पमा एजमसमैऄ के भत
ु ाबफक सभम आने ऩय ऩाककस्तानी एजमसमाॊ इन
कट्टयऩॊधथमैऄ का इस्तेभार ऩव
य ोत्तय को काटने के मरए कय ***ती हैं। आज दे श के सबी याज्म

इनकी की धगयफ्त भ हैं। भक्ु स्रभ घस
ु ऩैदठमैऄ की वजह से इन याज्मैऄ भ इस्राभीकयण का खतया

उत्ऩन्न हो गमा है । आर असभ स्टयडेन््स मनय नमन (आस)य जैसे सशतत ऺेरीम सॊगठनैऄ के द्सवाया

सभम-सभम ऩय ककए गए द्धवयोध के फावजद
य इ*** ा अफ तक ऩमामप्त सभाधान होना शेष ही है ।
घुसऩैठ से ननऩटने के मरए एक अधधननमभ फनामा गमा, अवैध रस्वासी (अधधकयणैऄ द्सवाया

अवधायणा) अधधननमभ, (आई.एभ.डी.टी.) 1983 क्जसे कद्र तथा असभ के सशतत सॊगठन आसय के
भध्म हुए असभ सभझौता 1984 के तहत ऩारयत ककमा गमा। असभ को छोड़कय दे श के फाकी
याज्मैऄ भ द्धवदे शी नागरयकैऄ की ऩहचान कय दे श ननकारा दे ने का रस्ावधान है । अवैध रस्वासी

अधधननमभ के अॊतगमत नागरयकता साबफत कयने का बाय मशकामतकताम ऩय होता है जफकक द्धवदे शी
द्धवषमक अधधननमभ के अॊतगमत मह बाय खद
ु उस व्मक्तत के ऊऩय होता है क्ज*** े ऊऩय सॊदेह
दजम है । मह अधधननमभ 25 भाचम 1971 मा उ*** े फाद आए फाॊग्रादे शी नागरयकैऄ ऩय रागय होता

है । द्धवदे शी नागरयकैऄ के ऩहचान तथा ननष्ट्कासन के सॊदबम भ उतत कानयन अत्मधधक रचीरा तथा
कभजोय होने के कायण अवैध घुसऩैठ योकने की फजाम उस भ भददगाय ही साबफत हुआ है ।

परस्वरूऩ असभ के कई क्जरैऄ की जनसॊख्मा का स्वरूऩ ही फदर गमा है । जहाॊ भयर असभी

नागरयक फहयतामत भ थे, वे अल्ऩ सॊख्मक फन कय यह गए। अधधननमभ अऩने भयर उद्देश्म को
रस्ाप्त कयने भ अऺभ साबफत हुआ। सन ् 2003 भ याज्म की असभ गण ऩरयषद सयकाय ने कद्र से

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इस अधधननमभ को ननयस्त कयने की मसपारयश बी की थी रेककन कद्र ने याज्म सबा भ अल्ऩ
भत का हवारा दे कय ऐसा कय ***ने भ अऺभता जादहय की। जफ कक कद्र सयकाय मदद चाहती
तो दोनैऄ सदनैऄ का सॊमुतत अधधवेशन फुराकय इस अधधननमभ को ननयस्त कय ***ती थी। जैसा
कक ऩोटा भाभरे भ ककमा गमा था। ऻातव्म है कक काॊग्रेसी भुख्मभॊरी दहतेश्वय सैककमा ने स्वमॊ

मह फमान ददमा था कक असभ भ 30 राख से अधधक अवैध फाॊग्रादे शी द्धवदे शी नागरयक यहते हैं।
ककन्तु कुछ ददनैऄ फाद ही अल्ऩसॊख्मकैऄ के बड़क उठने के डय से उन्ह सपाई दे नी ऩड़ी कक उतत
आॊकड़ा कद्र द्सवाया रस्मोक्जत रयऩोटम ऩय आधारयत था। असभ गण ऩरयषद से रोक सबा के

ननवामधचत सदस्म श्री सवामनॊद सोनोवार द्सवाया दामय की गई जनदहत माधचका ऩय सन
ु वाई कयते

हुए सवोच्च न्मामारम ने इस अधधननमभ को यद्द कय ददमा। सवोच्च न्मामरम की तीन सदस्मीम
खॊडऩीठ क्जसभ भख्
ु म न्मामाधीश श्री आय.सी. राहोटी, जी.ऩी. भाथयु तथा श्री ऩी.के. फार
सब्र
ु भण्मभ शामभर थे, ने जनदहत माधचका ऩय सन
ु वाई कयते हुए अऩने पैसरे भ कहा, ‖अवैध
रस्वासी फाॊग्रादे शी घस
ु ऩैदठमैऄ की ऩहचान कय असभ से फाहय ननकारने भ उतत अधधननमभ फहुत
फड़ी फाधा है । सन ् 2001 की जनगणना के भुताबफक ऩक्श्चभ फॊगार के दस, असभ के तीन,

भेघारम के तीन औय बरऩुया के दो क्जरैऄ भ भुक्स्रभ जनसॊख्मा भ 50 रस्नतशत से ज्मादा वद्धृ ि

हुई है । कुछ ऺेर औय क्जरे तो ऐसे हैं जहाॊ दस वषों भ जनसॊख्मा की वक्ृ ध्द की दय 200 रस्नतशत
यही है । जफकक दे श भ भुसरभानैऄ की जनसॊख्मा वद्धृ ि 32.6 रस्नतशत ही यही है । भुक्स्रभ आफादी

भ अरस्त्मामशत वद्धृ ि के कायण इन क्जरैऄ भ यहने वारे भयर ननवामसमैऄ को ऩरामन के मरए भजफयय
होना ऩड़ा है । ऩरामन कय चक
ु े इन ऩरयवायैऄ के आॊकड़े कद्र औय याज्म सयकाय दोनैऄ के ऩास हैं।
रेककन इनको जायी नहीॊ ककमा गमा है । मसरीगुड़ी कॉयीडोय भ इनका जफदम स्त जभावड़ा है । महाॊ

ऐसा नहीॊ है कक इन घुसऩैदठमैऄ का इस्तेभार मसपम फाहयी ताकत ही कय यही हैं। बायत के अॊदय

कुछ याजनीनतक दर इनका राब उठाते हैं। इन घुसऩैदठमैऄ के मरए सफसे फड़ा आकषमण बायत के
सीऩीएभ शामसत याज्म हैं। इन याज्मैऄ भ घुसऩैदठमैऄ का स्वागत याजनैनतक राब के मरए खर
ु े

हाथैऄ से ककमा जाता है । मह दरयमाददरी चन
ु ावैऄ के साथ औय जोय ऩकड़ती है । कम्मुननस्टैऄ को

क्जन ऺेरैऄ भ हाय की आशॊका होती है , उन ऺेरैऄ भ स्वतरू घुसऩैठ फढ़ जाती है । ऩहचान ऩर तुयॊत
तैमाय हो जाते हैं। याजनीनतक ऩादटम माॊ इनका खफ
य इस्तेभार कयती हैं। मही वजह है कक याष्ट्रीम

स्तय ऩय इन घुसऩैदठमैऄ को फाहय ननकारने की कोमशश नहीॊ होती है औय अगय कबी कोमशश की
बी गई तो उ*** ा द्धवयोध ककमा जाता है । ऩक्श्चभ फॊगार का कयीफ 2,200 कक.भी. रॊफा ऺेर

फाॊग्रादे शी सीभा से रगा है । महाॊ 282 द्धवधानसबा सीटैऄ भ 52 द्धवधानसबा सीटैऄ ऩय हाय-जीत का
पैसरा ऩययी तयह से फाॊग्रादे शी घुसऩैदठए कयते हैं। जफकक अन्म 100 सीटैऄ ऩय हाय-जीत भ मे

ननणामक बयमभका अदा कयते हैं। आज दे श के फड़े शहयैऄ भ इन घुसऩैदठमैऄ की फक्स्तमाॊ हैं। ददल्री
ऩुमरस के अनुसाय, अकेरे ददल्री भ 13 राख फाॊग्रादे शी हैं। ददल्री भ सीरभऩुय, जाभा भक्स्जद
औय मभन
ु ा फाजाय आदद इनके गढ़ फन चक
ु े हैं। बफहाय के ऩखय णममाॊ, अयरयमा, ककशनगॊज, कदटहाय

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आदद क्जरैऄ भ इनकी जनसॊख्मा कापी ज्मादा है । मानी मे दे श के बीतय तक पैरे हैं। जहाॉगीय
खाॉ के भुगरस्तान रयसचम इन्स्टी्मयट, फाॊग्रादे श ने एक नतशा रस्कामशत ककमा है , क्ज*** े

अनुसाय ऩयद्धवम औय ऩक्श्चभी ऩाककस्तान के फीच बायत ऺेर भ घुसऩैठ आदद के द्सवाया एवॊ भुस्रीभ
जन्सॊख्मा फढाकय इसे एक नमा इस्राभी याज्म फना दे ना है । इसभ ऩक्श्चभ फॊगार, असभ, बफहाय,
उत्तय रस्दे श, कश्भीय, उत्तयाखण्ड, ददल्री, हरयमाणा औय भध्म रस्दे श के ऺेर को सक्म्भमरत कयने
कक मोजना है । इसमरमे इन उऩमत
ुम त ऺेरो भ फाॊग्रादे शी भुसरभानैऄ का घुसऩैठ रस्भुखता से है ।
इनकी फक्स्तमाॊ बायतीम सीभाओॊ के बीतय फनी ऩाककस्तानी सैन्म छावननमैऄ के सभान हैं। मे

घस
ु ऩैठी सीभा ऩाय से खतयनाक हधथमायैऄ के साथ दे श भ आतॊक पैराने के उद्देश्म से आते हैं। मे
अऩने साथ बायतीम अथमव्मवस्था को कभजोय कयने के मरए फड़ी भारा भ नकरी नोट बी राते
हैं। इनका रस्मोग आई***आई जैसी एजमसमाॊ ननफामध रूऩ से कय यही हैं। धभम औय याजनीनत
इस्राभ रुऩी मसतके के दो ऩहरय हैं। मह कथन आज बी उतना ही सही है क्जतना ऩहरे था। मदद
फाॊग्रादे शी भस
ु रभान अऩने धभमरस्ेरयत याजनैनतक उद्देश्मैऄ के मरमे बायत भ घस
ु ऩैठ कयते हैं, तो
इसभ कोई आश्चमम की फात नहीॊ है तमैऄकक इस्राभ वस्तुतरू रस्ायम्ब से ही एक याजनैनतक

आन्दोरन यहा है । रेककन वोट फैंक फनाने के चतकय भ काॊग्रेस सदहत तथाकधथत धभननयऩेऺ
याजनीनतक दर एवॊ स्थानीम नेताओ ने अवैध फाॊग्रादे मशमैऄ को बायत भ खा***य असभ, ऩक्श्चभ
फॊगार, बरऩुया एवॊ बफहाय आदद याज्मैऄ भ उन्ह याशन काडम फनवाने व भतदाता सयची भ शामभर

कयवाते हुए उन्ह वैधता रस्दान कयने का कामम ककमा है । वहीॊ स्थानीम रोगैऄ ने सस्ते भजदयय औय
नौकय के भोह भ ऩड़कय इन घस
ु ऩैदठमैऄ को अऩने महाॊ यखकय स्वमॊ गॊबीय सॊकट का दावत दे यह
है । 1971 के फाद से अफ तक क्जस तयह हभाये दे श भ फाॊग्रादे शी घुसऩैठ हुई है उससे अद्सद्धवतीम
याष्ट्रीम ऩहचान ऩर को रेकय एक शॊका उत्ऩन्न होती है । तमैऄकक मदद जनसॊख्मा यक्जस्टय बयते

सभम फाॊग्रादे शी घुसऩैठी रस्श्न 11 का उत्तय दे ते सभम अऩनी याष्ट्रीमता ‗बायतीम‘ घोद्धषत कयता
है तो उससे याष्ट्रीमता के फाफत कोई रस्श्न नहीॊ ककमा जाएगा औय ना ही कोई सफयत भाॊगा

जाएगा। याष्ट्रीम जनसॊख्मा यक्जस्टय फनाते सभम फाॊग्रादे शी घुसऩैदठमैऄ की ऩहचान को रेकय
सयकाय के ऩास न कोई स्ऩष्ट्ट नीनत है औय ना ही याजनीनतक इच्छाशक्तत। ऐसे भ वैसे

फाॊग्रादे शी जो बायत भ अवैध रूऩ से यह यहे हैं, याष्ट्रीम जनसॊख्मा यक्जस्टय भ बायत का
नागरयक हो जामेगे। इन ददनैऄ ऩयये बायत भ जनगणना का काभ फड़ी तेजी से चर यहा है । 2011
की इस जनगणना के साथ याष्ट्रीम जनसॊख्मा यक्जस्टय (एनऩीआय) बी तैमाय ककमा जा यहा है ।
फताते चर कक इस याष्ट्रीम जनसॊख्मा यक्जस्टय के आधाय ऩय ही रस्त्मेक व्मक्तत को एक अनयठी
ऩहचान सॊख्मा ‗मयआईडी‘ जायी ककमा जाएगा। उ*** े फाद इसे याष्ट्रीम जनसॊख्मा यक्जस्टय के
डाटाफेस भ जोड़ा जाएगा। सत्ताऩऺ मयऩीए (काॊग्रेस) सयकाय की भॊशा इस फात से बी उजागय

होती है कक भहाभदहभ याष्ट्रऩनत ने बी अऩने अमबबाषण भ याष्ट्रीम ऩहचान ऩर जायी कयने की
चचाम की रेककन फाॊग्रादे शी घस
ु ऩैठ ऩय चप्ु ऩी साध गईं। वहीॊ दस
य यी तयप द्धवत्ता भॊरी रस्णव भख
ु जॉ

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ने बी अऩने फजट बाषण भ याष्ट्रीम ऩहचान ऩर के मरए 1900 कयोड़ रुऩए का फजट द्धवत्ता ीम
वषम 2010-11 के मरए आवॊदटत कय ददमा। ककतनी द्धवडम्फना की फात है कक एक तयप सयकाय दे श
की जनता को फुननमादी सुद्धवधाएॊ उऩरब्ध कयाने भ अऺभ है , वहीॊ दस
य यी तयप अद्सद्धवतीम ऩहचान
ऩर के मरए सयकाय इतनी फड़ी यामश खचम कय यही है । एनऩीआय के डाटा का मसपम सयकायी

उऩमोग ही नहीॊ होगा फक्ल्क उ*** ा फैंककॊग, फीभा औय एड कॊऩननमाॊ बी उऩमोग कयगी। फॊगार
के गवनमय टी.वी. याजेश्वय (18.3.96) एवॊ असभ के गवनमय ***. के. मसन्हा (1998) औय अजम मसॊह
(15.5.2005) अऩनी रयऩोटां भ घस
ु ऩैठ से उत्ऩन्न याजनैनतक सभस्माओॊ एवॊ बायत की सयु ऺा की
ओय ध्मान आकद्धषमत ककमा था भगय भक्ु स्रभ वोट फैंक ने इन दे शद्रोही गनतद्धवधधमैऄ को बी

उऩेक्षऺत कय ददमा। जफकक वास्तव भ फाॊग्रादे शी घस
ु ऩैठ को, ऩाटॊ दहत से उऩय उठकय, याष्ट्र की
सयु ऺा एवॊ अखण्डता की् दृक्ष्ट्ट से सोचना होगा औय इस दे शद्रोही गनतद्धवधधमैऄ को सभाप्त कयने
भ दह बायत का दहत है । ऩाककस्तान भ द्धवदे मशमैऄ को घस
ु ऩैठ की 2 से 10 सार की सजा है ।

सऊदी अये बफमा ने 1994-1995 भ एक राख घस
ु ऩैदठमैऄ को ननकारा क्जसभ 27588 फाॊग्रादे शी

भुस्रभान थे स्वमॊ फाॊग्रादे श ने 1,92,274 योदहॊगा वभॉ को अऩने दे श से ननकार फाहय ककमा चक
ु ा
कपय बायत भ यह यहे फाॊग्रादे शी को तमैऄ नही ननकारा जा ***ता। तमा भुस्रीभ वोट फैंक

याष्ट्रीम सुयऺा से बी अधधक आवश्मक औय भहत्त्वऩयणम है ? मदद हाॉ ! तो दे शद्रोदहमैऄ का वचमस्व

एवॊ याजनैनतक अक्स्तत्व मभटाना ही दे श दहत भ होगा। इ*** े मरए जागैऄ औय फता दो सयकाय
को की हभ सोमे नही है ॥

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"ये भेतनसेन्सेस ऑफ थे नेहरू एज"- (अफ बायत सयकाय द्िाया प्रततफल्न्धत) जातनए इस
ऩुस्तक भे तछऩे याज...
"ये भेतनसेन्सेस ऑफ थे नेहरू एज"- (अफ बायत सयकाय द्िाया प्रततफल्न्धत) जातनए इस ऩुस्तक भे
तछऩे याज...भे याज फूयानऩुयी आऩ को विनॊती कयता हु की इसे ऩहढ़मे औय ईभेर कील्जमे खफ

पैरामे(महा हहन्दी औय english भे उऩरब्ध)...-जनहहत भे जायी ।

अऩनी ऩुस्तक "द नेहरू डामनेस्टी" भ रेखक के.एन.याव (महाॉ उऩरब्ध है ) मरखते हैं....ऐसा भाना

जाता है कक जवाहयरा...र, भोतीरार नेहरू के ऩुर थे औय भोतीरार के द्धऩता का नाभ था गॊगाधय
। मह तो हभ जानते ही हैं कक जवाहयरार की एक ऩुरी थी इक्न्दया द्धरस्मदमशमनी नेहरू । क...भरा
नेहरू उनकी भाता का नाभ था, क्जनकी भत्ृ मु क्स्वटजयरैण्ड भ टीफी से हुई थी । कभरा शुरु से
ही इक्न्दया के कर्फयोज से द्धववाह के खखरार्फ थीॊ... तमैऄ ? मह हभ नहीॊ फतामा जाता...रेककन मह

कर्फयोज गाॉधी कौन थे ? कर्फयोज उस व्माऩायी के फेटे थे, जो "आनन्द बवन" भ घये रय साभान औय

शयाफ ऩहुॉचाने का काभ कयता था...नाभ... फताता हयॉ.... ऩहरे आनन्द बवन के फाये भ थोडा सा...
आनन्द बवन का असरी नाभ था "इशयत भॊक्जर" औय उसके भामरक थे भुफायक अरी...
भोतीरार नेहरू ऩहरे इन्हीॊ भुफायक अरी के महाॉ काभ कयते थे...खैय...हभभ से सबी जानते हैं

कक याजीव गाॉधी के नाना का नाभ था जवाहयरार नेहरू, रेककन रस्त्मेक व्मक्तत के नाना के साथ
ही दादा बी तो होते हैं... औय अधधकतय ऩरयवायैऄ भ दादा औय द्धऩता का नाभ ज्मादा भहत्वऩयणम

होता है , फजाम नाना मा भाभा के... तो कर्फय याजीव गाॉधी के दादाजी का नाभ तमा था.... ककसी
को भारयभ है ? नहीॊ ना... ऐसा इसमरमे है , तमैऄकक याजीव गाॉधी के दादा थे नवाफ खान, एक

भुक्स्रभ व्माऩायी जो आनन्द बवन भ साभान सप्राम कयता था औय क्जसका भयर ननवास था

जयनागढ गुजयात भ... नवाफ खान ने एक ऩायसी भदहरा से शादी की औय उसे भुक्स्रभ फनामा...
कर्फयोज इसी भदहरा की सन्तान थे औय उनकी भाॉ का उऩनाभ था "घाॊदी" (गाॉधी नहीॊ)... घाॊदी

नाभ ऩायमसमैऄ भ अतसय ऩामा जाता था...द्धववाह से ऩहरे कर्फयोज गाॉधी ना होकय कर्फयोज खान थे
औय कभरा नेहरू के द्धवयोध का असरी कायण बी मही था...हभ फतामा जाता है कक याजीव गाॉधी
ऩहरे ऩायसी थे... मह भार एक भ्रभ ऩैदा ककमा गमा है । इक्न्दया गाॉधी अकेरेऩन औय अवसाद
का मशकाय थीॊ । शाॊनत ननकेतन भ ऩढते वतत ही यद्धवन्द्रनाथ टै गोय ने उन्ह अनधु चत व्मवहाय के

मरमे ननकार फाहय ककमा था... अफ आऩ खद
ु ही सोधचमे... एक तन्हा जवान रडकी क्जसके द्धऩता
याजनीनत भ ऩयय ी तयह से व्मस्त औय भाॉ रगबग भत्ृ मु शैमा ऩय ऩडी ा़ हुई हैऄ... थोडी सी

सहानुबयनत भार से तमैऄ ना द्धऩघरेगी, औय द्धवऩयीत मरॊग की ओय तमैऄ ना आकद्धषमत होगी ? इसी

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फात का र्फामदा कर्फयोज खान ने उठामा औय इक्न्दया को फहरा-र्फुसराकय उसका धभम ऩरयवतमन
कयवाकय रन्दन की एक भक्स्जद भ उससे शादी यचा री (नाभ यखा"भैभयना फेगभ") नेहरू को

ऩता चरा तो वे फहुत रार-ऩीरे हुए, रेककन अफ तमा ककमा जा सकता था...जफ मह खफय
भोहनदास कयभचन्द गाॉधी को मभरी तो उन्हैऄने ताफडतोड नेहरू को फुराकय सभझामा, याजनैनतक

छद्धव की खानतय कर्फयोज को भनामा कक वह अऩना नाभ गाॉधी यख रे.. मह एक आसान काभ था
कक एक शऩथ ऩर के जरयमे, फजाम धभम फदरने के मसर्फम नाभ फदरा जामे... तो कर्फयोज खान
(घाॊदी) फन गमे कर्फयोज गाॉधी । औय द्धवडम्फना मह है कक सत्म-सत्म का जाऩ कयने वारे औय
"सत्म के साथ भेये रस्मोग" मरखने वारे गाॉधी ने इस फात का उल्रेख आज तक कहीॊ नहीॊ ककमा,
औय वे भहात्भा बी कहरामे...खैय... उन दोनैऄ (कर्फयोज औय इक्न्दया) को बायत फर
ु ाकय जनता के
साभने ददखावे के मरमे एक फाय ऩन
ु ् वैददक यीनत से उनका द्धववाह कयवामा गमा, ताकक उनके

खानदान की ऊॉची नाक (?) का भ्रभ फना यहे । इस फाये भ नेहरू के सेक्रेटयी एभ.ओ.भथाई अऩनी
ऩस्
ु तक "ये भेननसेन्सेस ऑर्फ थे नेहरू एज" (ऩष्ट्ृ ट ९४ ऩैया २) (अफ बायत सयकाय द्सवाया

रस्नतफक्न्धत) भ मरखते हैं कक "ऩता नहीॊ तमैऄ नेहरू ने सन १९४२ भ एक अन्तजामतीम औय
अन्तधाममभमक द्धववाह को वैददक यीनतरयवाजैऄ से ककमे जाने को अनुभनत दी, जफकक उस सभम मह

अवैधाननक था, कानयनी रूऩ से उसे "मसद्धवर भैरयज" होना चादहमे था" । मह तो एक स्थाद्धऩत तथ्म
है कक याजीव गाॉधी के जन्भ के कुछ सभम फाद इक्न्दया औय कर्फयोज अरग हो गमे थे, हाराॉकक

तराक नहीॊ हुआ था । कर्फयोज गाॉधी अतसय नेहरू ऩरयवाय को ऩैसे भाॉगते हुए ऩये शान ककमा कयते
थे, औय नेहरू की याजनैनतक गनतद्धवधधमैऄ भ हस्तऺेऩ तक कयने रगे थे । तॊग आकय नेहरू ने
कर्फयोज का "तीन भयनतम बवन" भे आने-जाने ऩय रस्नतफन्ध रगा ददमा था । भथाई मरखते हैं कर्फयोज
की भत्ृ मु से नेहरू औय इक्न्दया को फडी ा़ याहत मभरी थी । १९६० भ कर्फयोज गाॉधी की भत्ृ मु बी

यहस्मभम हारात भ हुई थी, जफकक वह दस
य यी शादी यचाने की मोजना फना चक
ु े थे । अऩुष्ट्ट सयरैऄ,
कुछ खोजी ऩरकायैऄ औय इक्न्दया गाॉधी के कर्फयोज से अरगाव के कायण मह तथ्म बी स्थाद्धऩत

हुआ कक श्रीभती इक्न्दया गाॉधी (मा श्रीभती कर्फयोज खान) का दस
य या फेटा अथामत सॊजम गाॉधी, कर्फयोज
की सन्तान नहीॊ था, सॊजम गाॉधी एक औय भुक्स्रभ भोहम्भद मयनुस का फेटा था । सॊजम गाॉधी का
असरी नाभ दयअसर सॊजीव गाॉधी था, अऩने फडे बाई याजीव गाॉधी से मभरता जुरता । रेककन

सॊजम नाभ यखने की नौफत इसमरमे आई तमैऄकक उसे रन्दन ऩुमरस ने इॊग्रैण्ड भ काय चोयी के

आयोऩ भ ऩकड़ मरमा था औय उसका ऩासऩोटम जब्त कय मरमा था । बब्रटे न भ तत्कारीन बायतीम
उच्चामुतत कृष्ट्ण भेनन ने तफ भदद कयके सॊजीव गाॉधी का नाभ फदरकय नमा ऩासऩोटम सॊजम

गाॉधी के नाभ से फनवामा था (इन्हीॊ कृष्ट्ण भेनन साहफ को भ्रष्ट्टाचाय के एक भाभरे भ नेहरू औय
इक्न्दया ने फचामा था) । अफ सॊमोग ऩय सॊमोग दे खखमे... सॊजम गाॉधी का द्धववाह "भेनका आनन्द"
से हुआ... कहाॉ... भोहम्भद मयनुस के घय ऩय (है ना आश्चमम की फात)... भोहम्भद मयनुस की
ऩस्
ु तक "ऩसमन्स, ऩैशन्स एण्ड ऩोमरदटतस" भ फारक सॊजम का इस्राभी यीनतरयवाजैऄ के भत
ु ाबफक

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खतना फतामा गमा है , हाराॊकक उसे "कर्फभोमसस" नाभक फीभायी के कायण ककमा गमा कृत्म फतामा
गमा है , ताकक हभ रोग (आभ जनता) गाकर्फर यह.... भेनका जो कक एक मसख रडकी थी, सॊजम

की यॊ गये मरमैऄ की वजह से गबमवती हो गईं थीॊ औय कर्फय भेनका के द्धऩता कनमर आनन्द ने सॊजम
को जान से भायने की धभकी दी थी, कर्फय उनकी शादी हुई औय भेनका का नाभ फदरकय "भानेका"
ककमा गमा, तमैऄकक इक्न्दया गाॉधी को "भेनका" नाभ ऩसन्द नहीॊ था (मह इन्द्रसबा की नत्ृ माॊगना
टाईऩ का नाभ रगता था), ऩसन्द तो भेनका, भोहम्भद मयनुस को बी नहीॊ थी तमैऄकक उन्हैऄने एक

भक्ु स्रभ रडकी सॊजम के मरमे दे ख यखी थी कर्फय बी भेनका कोई साधायण रडकी नहीॊ थीॊ, तमैऄकक
उस जभाने भ उन्हैऄने फॉम्फे डाईंग के मरमे मसर्फम एक तौमरमे भ द्धवऻाऩन ककमा था। आभतौय ऩय
ऐसा भाना जाता है कक सॊजम गाॉधी अऩनी भाॉ को ब्रैकभेर कयते थे औय क्जसके कायण उनके
सबी फयु े कृत्मैऄ ऩय इक्न्दया ने हभेशा ऩयदा डारा औय उसे अऩनी भनभानी कयने की छयट दी ।

ऐसा रस्तीत होता है कक शामद सॊजम गाॉधी को उसके असरी द्धऩता का नाभ भारभ
य हो गमा था
औय मही इक्न्दया की कभजोय नस थी, वयना तमा कायण था कक सॊजम के द्धवशेष नसफन्दी

अमबमान (क्जसका भुसरभानैऄ ने बायी द्धवयोध ककमा था) के दौयान उन्हैऄने चप्ु ऩी साधे यखी, औय
सॊजम की भौत के तत्कार फाद कार्फी सभम तक वे एक चामबमैऄ का गुच्छा खोजती यहीॊ थी,

जफकक भोहम्भद मयनुस सॊजम की राश ऩय दहाड भाय कय योने वारे एकभार फाहयी व्मक्तत थे...।

(सॊजम गाॉधी के तीन अन्म मभर कभरनाथ, अकफय अहभद डम्ऩी औय द्धवद्समाचयण शुतर, मे चायैऄ
उन ददनैऄ "चाण्डार चौकडी" कहराते थे... इनकी यॊ गये मरमैऄ के ककस्से तो फहुत भशहयय हो चक
ु े हैं
जैसे कक अॊबफका सोनी औय रुखसाना सुरताना [अमबनेरी अभत
ृ ा मसॊह की भाॉ] के साथ इन रोगैऄ
की द्धवशेष नजदीककमाॉ....)एभ.ओ.भथाई अऩनी ऩुस्तक के ऩष्ट्ृ ठ २०६ ऩय मरखते हैं - "१९४८ भ

वायाणसी से एक सन्मामसन ददल्री आई क्जसका काल्ऩननक नाभ श्रिा भाता था । वह सॊस्कृत की
द्धवद्सवान थी औय कई साॊसद उसके व्माख्मान सुनने को फेताफ यहते थे । वह बायतीम ऩुयारेखैऄ

औय सनातन सॊस्कृनत की अच्छी जानकाय थी । नेहरू के ऩुयाने कभमचायी एस.डी.उऩाध्माम ने एक

दहन्दी का ऩर नेहरू को सौंऩा क्जसके कायण नेहरू उस सन्मामसन को एक इॊटयव्मय दे ने को याजी

हुए । चॉ कय क दे श तफ आजाद हुआ ही था औय काभ फहुत था, नेहरू ने अधधकतय फाय इॊटयव्यय
आधी यात के सभम ही ददमे । भथाई के शब्दैऄ भ - एक यात भैने उसे ऩीएभ हाऊस से ननकरते
दे खा, वह फहुत ही जवान, खफ
य सययत औय ददरकश थी - । एक फाय नेहरू के रखनऊ दौये के सभम
श्रध्दाभाता उनसे मभरी औय उऩाध्माम जी हभेशा की तयह एक ऩर रेकय नेहरू के ऩास आमे,
नेहरू ने बी उसे उत्तय ददमा, औय अचानक एक ददन श्रिा भाता गामफ हो गईं, ककसी के ढयॉढे से
नहीॊ मभरीॊ । नवम्फय १९४९ भ फगरयय के एक कॉन्वट से एक सुदशमन सा आदभी ऩरैऄ का एक

फॊडर रेकय आमा । उसने कहा कक उत्तय बायत से एक मुवती उस कॉन्वट भ कुछ भहीने ऩहरे

आई थी औय उसने एक फच्चे को जन्भ ददमा । उस मुवती ने अऩना नाभ ऩता नहीॊ फतामा औय
फच्चे के जन्भ के तयु न्त फाद ही उस फच्चे को वहाॉ छोडकय गामफ हो गई थी । उसकी ननजी

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वस्तुओॊ भ दहन्दी भ मरखे कुछ ऩर फयाभद हुए जो रस्धानभन्री द्सवाया मरखे गमे हैं, ऩरैऄ का वह
फॊडर उस आदभी ने अधधकारयमैऄ के सुऩुदम कय ददमा । भथाई मरखते हैं - भैने उस फच्चे औय
उसकी भाॉ की खोजफीन की कार्फी कोमशश की, रेककन कॉन्वट की भुख्म मभस्रे स, जो कक एक

द्धवदे शी भदहरा थी, फहुत कठोय अनुशासन वारी थी औय उसने इस भाभरे भ एक शब्द बी ककसी
से नहीॊ कहा.....रेककन भेयी इच्छा थी कक उस फच्चे का ऩारन-ऩोषण भैं करुॉ औय उसे योभन

कैथोमरक सॊस्कायैऄ भ फडा करूॉ, चाहे उसे अऩने द्धऩता का नाभ कबी बी भारयभ ना हो.... रेककन
द्धवधाता को मह भॊजयय नहीॊ था.... खैय... हभ फात कय यहे थे याजीव गाॉधी की...जैसा कक हभ
भारभ
य है याजीव गाॉधी ने, तरय यन (इटरी) की भदहरा साननमा भाईनो से द्धववाह कयने के मरमे

अऩना तथाकधथत ऩायसी धभम छोडकय कैथोमरक ईसाई धभम अऩना मरमा था । याजीव गाॉधी फन
गमे थे योफेतो औय उनके दो फच्चे हुए क्जसभ से रडकी का नाभ था "बफमेन्का" औय रडके का
"यॉर" । फडी ही चाराकी से बायतीम जनता को फेवकयर्फ फनाने के मरमे याजीव-सोननमा का दहन्द य
यीनतरयवाजैऄ से ऩन
ु द्धवमवाह कयवामा गमा औय फच्चैऄ का नाभ "बफमेन्का" से फदरकय द्धरस्मॊका औय

"यॉर" से फदरकय याहुर कय ददमा गमा... फेचायी बोरी-बारी आभ जनता ! रस्धानभन्री फनने के
फाद याजीव गाॉधी ने रन्दन की एक रस्ेस कॉन्फ़्ेन्स भ अऩने-आऩ को ऩायसी की सन्तान फतामा
था, जफकक ऩायमसमैऄ से उनका कोई रेना-दे ना ही नहीॊ था, तमैऄकक वे तो एक भुक्स्रभ की सन्तान
थे क्जसने नाभ फदरकय ऩायसी उऩनाभ यख मरमा था। हभ फतामा गमा है कक याजीव गाॉधी
केक्म्ब्रज द्धवश्वद्धवद्समारम के स्नातक थे, मह अधमसत्म है ... मे तो सच है कक याजीव केक्म्ब्रज

मयननवमसमटी भ भेकेननकर इॊजीननमरयॊग के छार थे, रेककन उन्ह वहाॉ से बफना ककसी डडग्री के

ननकरना ऩडा था, तमैऄकक वे रगाताय तीन सार र्फेर हो गमे थे... रगबग मही हार साननमा
भाईनो का था...हभ मही फतामा गमा है कक वे बी केक्म्ब्रज मयननवमसमटी की स्नातक हैं... जफकक

सच्चाई मह है कक सोननमा स्नातक हैं ही नहीॊ,वे केक्म्ब्रज भ ऩढने जरूय गईं थीॊ रेककन केक्म्ब्रज
मयननवमसमटी भ नहीॊ । सोननमा गाॉधी केक्म्ब्रज भ अॊग्रेजी सीखने का एक कोसम कयने गई थी, ना कक
द्धवश्वद्धवद्समारम भ (मह फात हार ही भ रोकसबा सधचवारम द्सवाया भाॉगी गई जानकायी के तहत

खद
ु सोननमा गाॉधी ने भुहैमा कयाई है , उन्हैऄने फडे ही भासयभ अन्दाज भ कहा कक उन्हैऄने कफ मह
दावा ककमा था कक वे केक्म्ब्रज की स्नातक हैं , अथामत उनके चभचैऄ ने मह फेऩय की उडाई थी)।

क्रययता की हद तो मह थी कक याजीव का अक्न्तभ सॊस्काय दहन्द य यीनतरयवाजैऄ के तहत ककमा गमा,

ना ही ऩायसी तयीके से ना ही भुक्स्रभ तयीके से । इसी नेहरू खानदान की बायत की जनता ऩयजा

कयती है , एक इटामरमन भदहरा क्जसकी एकभार मोग्मता मह है कक वह इस खानदान की फहय है
आज दे श की सफसे फडी ऩाटॊ की कतामधताम है औय "यॉर" को बायत का बद्धवष्ट्म फतामा जा यहा है
। भेनका गाॉधी को द्धवऩऺी ऩादटम मैऄ द्सवाया हाथैऄहाथ इसीमरमे मरमा था कक वे नेहरू खानदान की
फहय हैं, इसमरमे नहीॊ कक वे कोई सभाजसेवी मा रस्ाखणमैऄ ऩय दमा यखने वारी हैं....औय मदद कोई

68

साननमा भाइनो की तुरना भदय टे येसा मा एनीफेसेण्ट से कयता है तो उसकी फुद्धि ऩय तयस खामा
जा सकता है औय दहन्दस्
ु तान की फदककस्भती ऩय मसय धन
ु ना ही होगा... –

- ---- Nehru Dynasty Harmohan Singh Walia At the very beginning of his book, "The Nehru
Dynasty", astrologer K. N. Rao mentions the names ofJawahar Lal's father and grandfather.
Jawahar Lal's father was believed to be Moti Lal and Moti Lal's father was one Gangadhar
Nehru. And we all know that Jawahar Lal's only daughter was Indira Priyadarshini Nehru;
Kamala Nehru was her mother, who died in Switzerland of tuberculosis. She was totally against
Indira's proposed marriage with Feroze. Why? No one tells us that! Now, who is this Feroze? We
are told, by many that he was the son of the family grocer. The grocer supplied wines, etc. to
Anand Bhavan, previously known as Ishrat Manzil, which once belonged to a Muslim lawyer
named Mobarak Ali. Moti Lal was earlier an employee of Mobarak Ali. What was the family
grocer's name? One frequently hears that Rajiv Gandhi's grandfather was Pandit Nehru. But then
we all know that everyone has two grandfathers, the paternal and the maternal grandfathers. In
fact, the paternal grandfather is deemed to be the more important grandfather in most societies.
Why is it then nowhere we find Rajiv Gandhi's paternal grandfather's name? It appears that the
reason is simply this. Rajiv Gandhi's paternal grandfather was a Muslim gentleman from the
Junagadh area of Gujarat. This Muslim grocer by the name of Nawab Khan had married a Parsi
woman after converting her to Islam. This is the source where from the myth of Rajiv being a
Parsi was derived. Rajiv's father Feroze was Feroze Khan before he married Indira, against
Kamala Nehru's wishes. Feroze's mother's family name was Ghandy, often associated with Parsis
and this was changed to Gandhi, sometime before his wedding with Indira, by an affidavit. The
fact of the matter is that (and this fact can be found in many writings) Indira was very lonely.
Chased out of the Shantiniketan University by Guru Dev Rabindranath himself for misdemeanor,
the lonely girl was all by herself, while father Jawahar was busy with politics, pretty women and
illicit sex; the mother was in hospital. Feroze Khan, the grocer's son was then in England and he
was quite sympathetic to Indira and soon enough she changed her religion, became a Muslim
woman and married Feroze Khan in a London mosque. Nehru was not happy; Kamala was dead
already or dying. The news of this marriage eventually reached Mohandas Karamchand Gandhi.
Gandhi urgently called Nehru and practically ordered him to ask the young man to change his
name from Khan to Gandhi. It had nothing to do with change of religion, from Islam to
Hinduism for instance. It was just a case of a change of name by an affidavit. And so Feroze
Khan became Feroze Gandhi. The surprising thing is that the apostle of truth, the old man soon
to be declared India's Mahatma and the 'Father of the Nation' didn't mention this game of his in
the famous book, 'My Experiments with Truth'. Why? When they returned to India, a mock
'Vedic marriage' was instituted for public consumption. On this subject, writes M. O. Mathai (a
longtime private secretary of Nehru) in his renowned (but now suppressed by the GOI)
'Reminiscences of the Nehru Age' on page 94, second paragraph: "For some inexplicable reason,
Nehru allowed the marriage to be performed according to Vedic rites in 1942. An inter-religious
and inter-caste marriage under Vedic rites at that time was not valid in law. To be legal, it had to
be a civil marriage. It's a known fact that after Rajiv's birth Indira and Feroze lived separately,
but they were not divorced. Feroze used to harass Nehru frequently for money and also interfere
in Nehru's political activities. Nehru got fed up and left instructions not to allow him into the
Prime Minister's residence Trimurthi Bhavan. Mathai writes that the death of Feroze came as a
relief to Nehru and Indira. The death of Feroze in 1960 before he could consolidate his own
political forces is itself a mystery. Feroze had even planned to remarry. Those who try to keep

69

tabs on our leaders in spite of all the suppressions and deliberate misinformation are aware of the
fact that the second son of Indira (or Mrs. Feroze Khan) known as Sanjay Gandhi was not the
son of Feroze. He was the son of another Moslem gentleman, Mohammad Yunus. Here, in
passing, we might mention that the second son was originally named Sanjiv. It rhymed with
Rajiv, the elder brother's name. When he was arrested by the British police in England and his
passport impounded for having stolen a car it was changed to Sanjay. Krishna Menon was then
India's High Commissioner in London. He offered to issue another passport to the felon who
changed his name to Sanjay. Incidentally, Sanjay's marriage with the Sikh girl Menaka (now
they call her Maneka for Indira Gandhi found the name of Lord Indra's court dancer rather
offensive!) took place quite surprisingly in Mohammad Yunus' house in New Delhi. And the
marriage with Menaka who was a model (She had modeled for Bombay Dyeing wearing just a
towel) was not so ordinary either. Sanjay was notorious in getting unwed young women
pregnant. Menaka too was rendered pregnant by Sanjay. It was then that her father, Colonel
Anand, threatened Sanjay with dire consequences if he did not marry her daughter. And that did
the trick. Sanjay married Menaka. It was widely reported in Delhi at the time that Mohammad
Yunus was unhappy at the marriage of Sanjay with Menaka; apparently he had wanted to get him
married with a Muslim girl of his choice. It was Mohammad Yunus who cried the most when
Sanjay died in the plane accident. In Yunus' book, 'Persons, Passions & Politics' one discovers
that baby Sanjay had been circumcised following Islamic custom, although the reason stated was
phimosis. It was always believed that Sanjay used to blackmail Indira Gandhi and due to this she
used to turn a blind eye when Sanjay Gandhi started to run the country as though it were his
personal fiefdom. Was he black mailing her with the secret of who his real father was? When the
news of Sanjay's death reached Indira Gandhi, the first thing she wanted to know was about the
bunch of keys which Sanjay had with him. Nehru was no less a player in producing bastards.
Atleast one case is very graphically described by M. O. Mathai in his "Reminiscences of the
Nehru Age", page 206. Mathai writes: "In the autumn of 1948 (India became free in 1947 and a
great deal of work needed to be done) a young woman from Benares arrived in New Delhi as a
sanyasin named Shraddha Mata (an assumed and not a real name). She was a Sanskrit scholar
well versed in the ancient Indian scriptures and mythology. People, including MPs, thronged to
her to hear her discourses. One day S. D. Upadhyaya, Nehru's old employee, brought a letter in
Hindi from Shraddha Mata. Nehru gave her an interview in the PM's house. As she departed, I
noticed (Mathai is speaking here) that she was young, shapely and beautiful. Meetings with her
became rather frequent, mostly after Nehru finished his work at night. During one of Nehru's
visits to Lucknow, Shraddha Mata turned up there, and Upadhyaya brought a letter from her as
usual. Nehru sent her the reply; and she visited Nehru at midnight. "Suddenly Shraddha Mata
disappeared. In November 1949 a convent in Bangalore sent a decent looking person to Delhi
with a bundle of letters. He said that a young woman from northern India arrived at the convent a
few months ago and gave birth to a baby boy. She refused to divulge her name or give any
particulars about herself. She left the convent as soon as she was well enough to move out but
left the child behind. She however forgot to take with her a small cloth bundle in which, among
other things, several letters in Hindi were found. The Mother Superior, who was a foreigner, had
the letters examined, and was told they were from the Prime Minister. The person who brought
the letters surrendered them. "I (Mathai) made discreet inquiries repeatedly about the boy but
failed to get a clue about his whereabouts. Convents in such matters are extremely tightlipped
and secretive. Had I succeeded in locating the boy, I would have adopted him. He must have
grown up as a Catholic Christian blissfully ignorant of who his father was." Coming back to

70

Rajiv Gandhi, we all know now that he changed his so called Parsi religion to become a Catholic
to marry Sania Maino of Turin, Italy. Rajiv became Roberto. His daughter's name is Bianca and
son's name is Raul. Quite cleverly the same names are presented to the people of India as
Priyanka and Rahul. What is amazing is the extent of our people's ignorance in such matters. The
press conference that Rajiv Gandhi gave in London after taking over as prime minister of India
was very informative. In this press conference, Rajiv boasted that he was NOT a Hindu but a
Parsi. Mind you, speaking of the Parsi religion, he had no Parsi ancestor at all. His grandmother
(father's mother) had turned Muslim after having abandoned the Parsi religion to marry Nawab
Khan. It is the western press that waged a blitz of misinformation on behalf of Rajiv. From the
New York Times to the Los Angeles Times and the Washington Post, the big guns raised Rajiv
to heaven. The children's encyclopedias recorded that Rajiv was a qualified Mechanical Engineer
from the revered University of Cambridge. No doubt US kids are
among the most misinformed in the world today! The reality is
that in all three years of his tenure at that University Rajiv had
not passed a single examination. He had therefore to leave
Cambridge without a certificate. Sonia too had the same
benevolent treatment. She was stated to be a student in
Cambridge. Such a description is calculated to mislead Indians.
She was a student in Cambridge all right but not of the University
of Cambridge but of one of those fly by night language schools
where foreign students come to learn English. Sonia was working
as an 'au pair' girl in Cambridge and trying to learn English at the
same time. And surprise of surprises, Rajiv was even cremated as
per vedic rites in full view of India's public. This is the Nehru
dynasty that India worships and now an Italian leads a prestigious national party because of just
one qualification - being married into the Nehru family. Maneka Gandhi itself is being accepted
by the non-Congress parties not because she was a former model or an animal lover, but for her
links to the Nehru family. Saying that an Italian should not lead India will amount to narrow
mindedness, but if Sania Maino (Sonia) had served India like say Mother Teresa or Annie
Besant, i.e. in anyway on her own rights, then all Indians should be proud of her just as how
proud we are of Mother Teresa.

"रक्ष्भी नायामण' - जो बायत भ भग
ु र दयफाय भ जो ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी का वकीर था . उसका
फेटा - 'गॊगाधय उर्फम गमासद्द
ु ीन '- जो भा
ु र शसन भ ददल्री का कोतवार था . उसका फेटा-

'भोतीरार नेहरु' - जो अॊग्रेजैऄ से दोस्ती यख कय सबी राब रेता था साथ ही दे शबततैऄ के ...साथ
सम्फन्ध यखने का दावा बी कयता था. उस का फेटा - 'जवाहय रार नेहरु' - बायत के बफबाजन औय
कश्भीय सभस्मा का क्जम्भेदाय, सुबाष-बगत-आजाद-ऩटे र ... आदद को हामसमे ऩय दार दे ने वारा.

उसकी फेटी- 'इॊददया गाॉधी' - रोकतॊर को तानाशाही भ फदरने वारी, ब्रय स्टाय , आसाभ सभस्मा की
क्जम्भेदाय. उसका फेटा - 'याजीव गाॉधी' - सेना के मरए हधथमाय खयीदने भ दरारी खाने वारा ,

भ्रष्ट्टाचाय को भान्मता दे ने की शुरुआत कयने वारा . उसकी ऩत्नी - 'सामना बफॊची उर्फम सोननमा

71

गाॉधी ' - दे श को अऩनी जागीय सझने वारी . उस का फेटा - 'यौर बफॊची उर्फम याहुर गाॉधी' - जो
अबी तक बायत को ढयॊढ़ नहीॊ ऩामा है , बायत को खोजने भ रगा है उस ऩरयवाय के रोगैऄ से औय
ककमा उम्भीद कय सकते हैं

72

साॊप्रदातमक एिॊ रक्षऺत हहॊसा तनिायण विधेमक-2011 हहन्दी भे ऩहढ़मे ..कभसेकभ हये क
बायतीम इसे ऩढे औय जिाफदाय फने हभाये अल्स्तत्िके शरए
'साॊरस्दानमक एवॊ रक्षऺत दहॊसा ननवायण द्धवधेमक-2011'- SICKULAR औय McCauley ऩुरैऄ द्सवाया ...

शभम-ननयऩेऺता औय साॊरस्दानमक-साऩेऺता का मभरा जुरा सॊगभ 1- 'फहुसॊख्मक' हत्माये , दहॊसक औय

दॊ गाई रस्वनृ त के होते हैं। (द्धवकीरीतस के खर
ु ासे भ साभने आमा... था कक दे श के फहुसॊख्मकैऄ को
रेकय सोननमा गाॊधी औय याहुर गाॊधी की इस तयह की भानमसकता है ।) जफकक 'अल्ऩसॊख्मक' तो
दध
य के दर
ु े हैं। वे तो करुणा के सागय होते हैं। अल्ऩसॊख्मक सभुदामक के तो सफ रोग अफ तक
सॊत ही ननकरे हैं।

2- दॊ गो औय साॊरस्दानमक दहॊसा के दौयान नायी फरात्काय अऩयाधैऄ को तबी

दॊ डनीम भानने की फात कही गई है अगय वह अल्ऩसॊख्मक सभद
ु ाम के व्मक्ततमैऄ के साथ हो। मानी

अगय ककसी फहुसॊख्मक सभद
ु ाम की भदहरा के साथ दॊ गे के दौयान अल्ऩसॊख्मक सभद
ु ाम का व्मक्तत
फरात्काय कयता है तो मे दॊ डनीम नहीॊ होगा।

3- मदद दॊ गे भ कोई अल्ऩसॊख्मक घण
ृ ा व वैभनस्म

पैरता है तो मह अऩयाध नहीॊ भाना जामेगा, रेककन अगय कोई फहुसॊख्मक ऐसा कयता है तो उसे
कठोय सजा दी जामेगी। (फहुसॊख्मकैऄ को इस तयह के झठ
य े आयोऩैऄ भ पॊसाना आसान होगा। मानी
उनका भयना तम है ।)

4- इस अधधननमभ भ केवर अल्ऩसॊख्मक सभयहैऄ की यऺा की ही फात की

गई है । साॊरस्दानमक दहॊसा भ फहुसॊख्मक द्धऩटते हैं तो द्धऩटते यह, भयते हैं तो भयते यह। तमा मह भाना
जा सकता है कक साॊरस्दानमक दहॊसा भ मसपम अल्ऩसॊख्मक ही भयते हैं? 5- इस दे श तोड़क कानयन के
तहत मसपम औय मसपम फहुसॊख्मकैऄ के ही खखराप भुकदभा चरामा जा सकता है । अप्ल्सॊख्मक
कानयन के दामये से फाहय हैऄगे।
6- साॊरस्दानमक दॊ गो की सभस्त जवाफदायी फहुसॊख्मकैऄ की ही

होगी, तमैऄकक फहुसॊख्मकैऄ की रस्वनृ त हभेशा से दॊ गे बडकाने की होती है । वे आक्राभक रस्वनृ त के होते
हैं।

7- दॊ गो के दौयान होने वारे जान औय भार के नुकसान ऩय भुआवजे के ह़दाय मसपम

अल्ऩसॊख्मक ही हैऄगे। ककसी फहुसॊख्मक का बरे ही दॊ गैऄ भ ऩयया ऩरयवाय औय सॊऩक्त्त नष्ट्ट हो जाए
उसे ककसी तयह का भुआवजा नहीॊ मभरेगा। वह बीख भाॊग कय जीवन काट सकता है । हो सकता
है साॊरस्दानमक दहॊसा बड़काने का दोषी मसि कय उसके मरए जेर की कोठयी भ व्मवस्था कय दी
जाए।

8- काॊग्रेस की चाराकी औय बी हैं। इस कानयन के तहत अगय ककसी बी याज्म भ दॊ गा

बड़कता है (चाहे वह काॊग्रेस के ननदे श ऩय बड़का हो।) औय अल्ऩसॊख्मकैऄ को कोई नुकसान होता है

तो कद्र सयकाय उस याज्म के सयकाय को तुयॊत फखामस्त कय सकती है । भतरफ काॊग्रेस को अफ

चन
ु ाव जीतने की बी जरूयत नहीॊ है । फस कोई छोटा सा दॊ गा कयाओ औय वहाॊ की बाजऩा मा
अन्म सयकाय को फखामस्त कय स्वमॊ कब्जा कय रो।

सोननमा गाॊधी औय अहभद ऩटे र के नेतत्ृ व

भ इन 'दे शरस्ेमभमैऄ' ने 'साॊरस्दानमक एवॊ रक्षऺत दहॊसा ननवायण द्धवधेमक-2011' को तैमाय ककमा
है ।

आइमे जान इन तथाकधथत साॊरस्दानमक दे शरस्ेमभमैऄ के फाये भ .....

1. सैमद

73

शहफुदीन (Former Member of Parliament ) Syed Shahabuddin is a well known in the political
and academic circles as well as in the mass media and does not need an introduction. In his many
incarnations he has been a university teacher, a diplomat, who served as an ambassador and a
government official who was at the time of his seeking pre-mature retirement, the Joint Secretary
in charge of South East Asia, the Indian Ocean and the Pacific in the Ministry of External
Affairs. He was a MP for three terms between 1979 and 1996 and made a mark as a
Parliamentarian. He has edited Muslim India, the monthly journal of research, documentation
and reference from 1983 to 2002 and again from July 2006. He has been a regular contributor on
current affairs in the media and a familiar participant in seminars and TV discussions.
2. हषम
भॊदय Born 1956 is an Indian social activist and writer. He came into prominence after 2002
Gujarat riots and heads "Aman Biradari" which work for communal harmony. He became
member of National Advisory Council of the UPA government in 2010 and special
commissioner to the Supreme Court.
3. अनु आगा Born 1942) is an Indian
businesswoman and social worker, who led Thermax Ltd., the Rs 3246-crore energy and
environment engineering major, as its chairperson 1996-2004. She had figured among the eight
richest Indian women, and in 2007 was part of 40 Richest Indians by net worth according to
Forbes magazine. After retiring from Thermax, she took to social work, and 2010 was awarded
the Padma Shri (Social Work) by Govt. of India
4. भाजा दारूवारा Maja Daruwala "is
currently executive director of the Commonwealth Human Rights Initiative, a New Delhi-based
nongovernmental organization that promotes the practical realization of human rights in the
Commonwealth states, particularly through police and promoting the right to information. Ms.
Daruwala was until 2005 also the chair of the London-based Minority Rights Group International
and is founder and Chair of the People's Watch Tamil Nadu, a human rights advocacy and
monitoring organization based in South India. She sits on several governing boards and advisory
councils, including the Justice Initiative at the New York-based Open Society Institute and the
New Delhi-based Voluntary Action Network, an umbrella organization aimed at strengthening
civil society in India. From 1992 to 1996 Ms. Daruwala was a program officer for human rights,
women's rights, and social justice at the Ford Foundation in India, Nepal, and Sri Lanka. A
barrister by training, Ms. Daruwala, has conceptualized and edited reports for the
Commonwealth Heads of Government on poverty and the status of the right to information and
is currently editing one on police accountability. She continues to produce a body of journalistic
work, including a television documentary on prisoners and syndicated articles on rights and
governance issues in the region."
5. अफु सरेह शयीप Abusaleh Shariff is from National
Council of Applied Economic Research, New Delhi. He is author of many studies and reports on
Indian Muslims.
6. असगय अरी इॊक्जननमय Asghar Ali Engineer, an Indian Muslim,
is an Islamic scholar, reformist-writer and activist. Internationally known for his work on
liberation theology in Islam, he leads the Progressive Dawoodi Bohra movement. The focus of
his work is on (and action against) communalism and communal and ethnic violence in India and
South Asia. He is an advocate of a culture of peace, non-violence and communal harmony, and
has lectured all over world. He is presently the head of the 'Institute of Islamic Studies' and the
'Centre for Study of Society and Secularism', both of which he founded in 1980 and 1993
respectively.
7. शफनभ हाश्भी Shabnam Hashmi, sister of the activist Safdar Hashmi and
founder of SAHMAT, Marxian historian Prof. K N Panikkar and social activist Harsh Mander

74

are the founding members of ANHAD. Based in Delhi, ANHAD works in the field of
sickularism, human rights and communal harmony. ANHAD (Act Now for Harmony and
Democracy) is an Indian socio-cultural organization established in March 2003, as a response to
2002 Gujarat riots. ANHAD‘s activities include sickular mobilization, sensitizing people about
their democratic rights as enshrined in Indian Constitution, research and publication of books and
reports, welfare programs for marginalised sections of society, launching creative mass
mobilization campaigns. ANHAD is registered as a trust and has six trustees. They are Shabnam
Hashmi, K N Panikkar, Harsh Mander, Shubha Mudgal, Kamla Bhasin, Saeed Akhtar
Mirza.
8. सुखदे व थोयात Sukhadeo Thorat born at Mahimapur, Amravati district,
Maharashtra, India, is an economist and chairman of the University Grants Commission, U.G.C.
Thorat graduated with a B.A from Milind College of Arts, Aurangabad, Maharashtra. He
obtained an M.A. in Economics from Dr. Babasaheb Ambedkar Marathwada University,
M.Phil/Ph.D in Economics from Jawaharlal Nehru University, and Diploma in Economic
Planning, Main School of Planning, Warsaw, Poland. From February 1989 to 1991, Thorat was
visiting faculty at Iowa State University, USA and a consultant with the International Food
Policy Research Institute, Washington, DC. Thorat was Lecturer at Vasantrao Naik College,
Aurangabad from 1973 to 1980. He was Faculty Member at Jawaharlal Nehru University, New
Delhi from 1980 onwards and visiting faculty at Department of Economics, Iowa State
University, AMES, USA during 1989-1991. He has been a Research Associate of the
International Food Policy Research Institute, Washington DC since 1992. He was Director,
Indian Institute of Dalit Studies, New Delhi from January 2003 to February 2006. He has been
Chairman, UGC since February 2006.
9. तीस्ता जावेद सेतरवाड
Grand Daughter of
Motilal Chimanlal Setalvad was became the first and longest serving Attorney General of India
1950-1963 ... due to his devotedness to the Britishers. Co-editor of Communalism Combat
magazine (along with husband Javed Anand). Teesta's husband Javed Anand runs Sabrang
Communications which claims itself as fighting for human rights. Teesta is the official
spokesperson of this organization. Teesta is General Secretary of People's Union for Human
Rights‖ (PUHR). Member of the Pakistan India People's Forum for Peace and Democracy.[29]
When it comes to defending terrorists, there is nobody like Teesta Setalvad. She will lie, shriek,
give false deposition, do anything to damn Hindus under the banner of Communalism Combat.
She also strikes the right pose by lighting candle along with other pseudos against Hindu
fundamentalism only. The Apex Court rightly censured her for sensationalising Gujarat riots
through stupid stories — lapped up media goons — who are anyway might lazy to check the
source.
10. जॉन दमार Born on Oct. 2, 1948 ;- ) On just next birthday of gandhi, after
gandhi's death. Indian fanatic Christian bigot and a self proclaimed campaigner for Dalit rights.
Formerly a journalist with the Delhi edition of the Indian tabloid newspaper, the Mid-Day, he
has gone on to found and preside over the ecumenical All India Christian Council and United
Christian Forum for Human Rights. Dayal, born of Christian parents from Central India, is
married and resides normally in New Delhi. He describes himself as a "human rights activist"
who is "fighting for the rights of Muslim, Christian and Dalit minorities" in India. He is
associated with numerous Christian evangelical groups, such as Dalit Freedom Network
11.
जक्स्टस होस्फेट सयु े श Justice Suresh Hosbet : M.A. L.L.M.: Born on 20th July, 1929. Enrolled
as an Advocate of the Bombay High Court on 30th November, 1953, and practised both on the
Original and Appellate Sides of the High Court. Was a part-time Professor of Law at the
Government Law College, Bombay from 1960 to 1965 and at K.C. Law College, Bombay from

75

1965 to 1968. Was also the Assistant Government Pleader in the Bombay
City Civil & Sessions Court at Bombay from 1967 to 1968. Appointed as
a Judge of the Bombay City Court and Additional Sessions Judge, Greater
Bombay on 29th November, 1968. Promoted as the 2nd Additional
Principal Judge, Bombay City Civil & Sessions Court, in October,
1979. Resigned his post on 23rd June, 1980 and resumed practice in the
High Court at Bombay. Was designated as Senior Advocate of the High
Court at Bombay in 1982. Appointed Additional Judge of the Bombay
High Court with effect from 21-11-1986. Appointed permanent Judge of
the Bombay High Court from 12-6-1987. Retired on 19-7-1991.
12.
याभ ऩुननमानी Ram Puniyani was born on 25th August 1945. He was a
professor in biomedical engineering at the Indian Institute of Technology Bombay, and took
voluntary retirement in December 2004 to work full time for communal harmony in India. He is
involved with human rights activities from last two decades. He is working for communal
harmony and initiatives to oppose the rising tide of Fundamentalism-Fascism in India. He is
associated with various sickular and democratic initiatives like All India Sickular Forum, Center
for Study of Society and Sickularism and ANHAD 13. रूऩये खा वभाम Dr. Roop Rekha Verma,
Ph.D, formerly, the Vice-chancellor, Professor & Head of the Philosophy Department and Dean,
Faculty of Arts Lucknow University has taught there from 1964–2003. She has also been a
recipient of the Commonwealth Academic Staff Fellowship for Oxford and has had the honor to
be invited to deliver lectures and present research papers in various conferences/international
seminars at many Indian and foreign Universities.
14. पयाह नकवी Farah Naqvi is an
Indian writer, consultant and activist. She works on gender rights and minority rights from both a
justice and development perspective. She is a member of the National Advisory Council. 15.
एच .एस पुल्का (Senior Advocate of Delhi High Court, Human Rights Activist, Victim 1984
Riots)

16. कभर पारुखी Sh. Nazmi Waziri, Member of Standing Counsel (Delhi

Govt.)

17. ऩी आई जोसे

18. नाजभी वजीयी

भौराना ननमाज पारुखी

21. मसस्टय भायी स्कारयमा

Independent Consultant - Gender, Law & Human Rights

19. भॊजयय आरभ

22. सभय मसॊह

20.

23. सौभमा उभा

उऩयोतत सभस्त शभम-ननऩेक्षऺमैऄ ने

धभम-ननयऩेऺता की सभस्त ारतर्फहमभमाॉ दयय कय दी हैं ... कृऩमा मह नोट अऩने सभस्त
SICKUALR शरओ
ु ॊ को ददखाम l जम श्री याभ जम बायत जम हो

It may passed by Andha Kanoon!

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हभायी जनता के ऩास इतने साधन नहीॊ है की िह अऩनी खुद
की स्ितॊत्र रयसचफ कय के सबी तथ्मेआ का खद
ु विचरेर्षण कय
सके, साधन औय सभमाबाि द

द्धरस्ॊट एवॊ द्धवजुमर भीडडमा का ऩऺऩात ऩयणम यवैमा , जन साधायण के

गैय सयकायी व्मक्ततमैऄ ऩय कीचड़ उछारना, सेकुररयज्भ की आइ भ

दहतैऄ भ आवाज उठाने वारे
हभेशा बायत के भयल्मैऄ का

नतयस्काय कयना औय कबी बी सही औय सच्ची फात को जनता तक नहीॊ ऩहुॉचाना. मदद
ऩहुॉचाना बी ऩड़े तो उसे ऩरयवनतमत रूऩ भ ऩेश कयना की उससे जनता को कबी सच्चाई का ऩता
ही ना चरे, द्धवगत कुछ ददनैऄ भ जनता के साभने कुछ अधधक तेजी के साथ उबय कय साभने
आमा है .

मह एक बमानक षड्मॊर है , जो की धीये धीये जनता के साभने आ यहा है . इस दे श के कुछ खास
औय अऩने आऩ को सेकुरय कहराने

भ गवम भहसयस कयने वारे न्मयस चैनल्स के भामरकाना हक

के फाये भैं इॊडडमन रीतस(http://indialeaks.blogspot.com/) भैं द्धवस्तत
ृ तयीके से ऩदामपास ककमा है .
इस भाभरे भैं द्धवककरीतस से बी ननवेदन ककमा गमा है की वह बी कुछ औय अऻात तथ्मैऄ को
जादहय कय.

जनता को इन सफ तथ्मैऄ से कोई ऩये शानी नहीॊ होती है मदद मे सफ अऩने कतमव्मैऄ का ननष्ट्ठा
ऩयवक
म ऩारन कयते यहे तथा जनता को मसपम सयकायी एजट की तयह खफय ना सुना कय, उनके
़यीफी भुद्दैऄ से जुड़े ननष्ट्ऩऺ औय सेवा बाव से ओत रस्ोत नेताओॊ जैसे की "डॉ. सुब्रह्भण्मभ

स्वाभी" , औय "स्वाभी याभदे व जी" के जनता को ददए गए सॊदेशैऄ को ऩहुॉचाने भ कोई व्मवधान
ना

कये मा उसको तोड़ भयोड़ कय रस्स्तुत ना कय. ऩयन्तु मे न्मयज चैनल्स तो उससे बी आगे

ननकर गए है मे तो अफ ननष्ट्ऩऺ न्मयज को ना ददखा कय, इनके काॊग्रेसी आका तमा चाह यहे है , वह
ददखाते है .

अबी अबी भैंने एक नेवस चैनर की न्मयज को पेसफुक ऩय दे खा तो एक फाय कपय से

स्तब्ध यह गमा - फाफा याभदे व के सभथमन भ उताये सॊत सभाज को बी इन्होने रस्दद्धय षत कयना

आयम्ब कय ददमा है - आसायाभ के आवाहन ऩय कक सोननमा गाॉधी को दे श छोड़ कय चरे जाना
चादहए ऩय इनकी न्मयज थी - ―आशायाभ के जहयीरे फोर"

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औय खफय (http://khabar.ibnlive.in.com/news/55691/1) बी कुछ कभ योचक नहीॊ मरखी गमी थी

-

- ―क्जस वतत आसायाभ अऩने रस्वचन भ सोननमा के खखराप जहय उगर यहे थे. उनके ऩॊडार भ
छत्तीसगढ़ के भुख्मभॊरी यभन मसॊह बी अऩनी ऩत्नी के साथ भौजयद थे.‖

हभायी जनता के ऩास इतने साधन नहीॊ है की वह अऩनी खद
ु की स्वतॊर रयसचम कय के सबी
तथ्मैऄ का खद
ु द्धवश्रेषण कय सके, साधन औय सभमाबाव दोनैऄ ही इसके मरए क्जम्भेदाय है ,
हाॊराकक तथ्मैऄ से मबऻ यहने की सॊकल्ऩैऄ की कभी को बी

भैं इसके मरमे कुछ हद तक क्जम्भेदाय

भानता हयॉ. रेककन भयर कायण साधना बाव ही है . जनता तो जो द्धरस्ॊट भीडडमा मा टी.वी मा एप.
एभ ् चेनल्स ऩय जो फाते सुनती है , फाय फाय सुनती है तो उसको सच भान ही रेती है मा कपय

उसके भन के एक शॊका घय कय जाती है की कही ऐसा ही तो नहीॊ जो मे कह यहा है की तमोकक
जनता के भन मे मह फात अच्छी तयह से बय दी गमी है की वो साधायण इॊसान है , उन्ह सत्ता
तॊर भैं फाये भैं कुछ जानकायी नहीॊ है औय ना ही उन्ह जो कुछ सयकायी नुभामॊदे कह यहे है , उससे
ज्मादा कुछ जाने की उम्भीद कयना चादहए.

तफ रस्श्न मह उठता है की तो तमा हभ सफ इस सयकायी , वेस्टनम , कैथोमरक
के द्सवाया ऩोद्धषत तथा बायतीमैऄ भर
ु बत
ु द्धवचायैऄ ऩय आघात कयते हुए

औय फैऩदटस्ट चचों

औय सॊस्कायैऄ की कब्र

फनाते हुए न्मज
य चेनल्स का दष्ट्ु रस्चाय सहते यहे मा कपय मसपम सोसर भीडडमा जैसे की पेसफक

औय ब्रोग्स मरख कय अऩने आऩ को शाॊत कय रे मा कपय मा इस दष्ट्ु रस्चाय तथा इसी के जैसे
सयकायी तथा चचम के द्सवाया रस्ामोक्जत सॊस्काय हनन काममक्रभैऄ

के दयय गाभी ऩरयणाभैऄ जो की फहुत
है - एक तो भुझे अबी मह ब्रॉग मरखते सभम स्ऩष्ट्ट तोय ऩय सभझ भ आ यहा है - दहॊदी भैं मह
ब्रॉग मरखने भैं तथा उधचत शब्द को कपय से माद कयने भैं, इॊक्ग्रश भैं मरखने की जगह ककतना
अधधक सभम भुझे रग यहा है जफ की स्वमॊ ही एक दहॊदी बाषी रस्दे श से हयॉ, दहॊदी भेया ऩढाई का

भाध्मभ यहा है . जफ दहॊदी भैं मह हार है तो सॊस्कृत भैं तमा होगा. जो ऩाठक मह सोच यहे होगे की
होभ ऐसे ककसी व्मक्तत से ककन बायनतमैऄ सॊस्कायैऄ की फातैऄ को सुने औय सभझे,भैं उन सफ से
मसपम एक फात कह यहा हयॉ की मह सभम आत्भ भॊथन का है , हभको जो धीये धीये कयके सफ

तयह

से अऩाॊग फना ददमा जा यहा है , साॊस्कृनतक वैशाखखमैऄ रगा दी गमी है , तो तमा हभ सॊस्कृनत की
दौड़ भैं जीत जामगे मा कपय वो क्जन्हैऄने हभ वैशाखी ऩह्न्माई है .

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हभ को अफ सभझ भैं सार्फ सार्फ आने रगा है , बायत फषम के नागरयकैऄ के ऊऩय रगाईमे गए
वैशाखखमैऄ को फाफा जी के वषों की ननयॊ तय ननस्वाथम बाव से की गमी सेवा औय मोग धचककत्सा ने
हटा ददमा है .

अफ हभ अऩनी सॊस्कृनत को औय अधधक अऩद्धवर नहीॊ होने दगे.

हभाया दृक्ष्ट्ट भ्रभ

बी अफ मोग से चरा गमा है , अफ हभ हभाये धन को रेकय बागने वारे तस्कयैऄ ( डॉ.
सुब्रभण्मभस्वाभी के रेख ऩढ़ - सभझ जगाए कक भैं इन्हैं तस्कयैऄ कक उऩाधध से तमैऄ सम्भाननत
कय यहा हयॉ) ने हभायी सम्ऩनत को क्स्वस फैंतस के ककन अऻात खातैऄ भ नछऩा यखा है . हाराकक
अऻात खाते कहना जफकक सभस्त दे श वामशमैऄ को ऻात है कुछ ऻात खातैऄ के फाये भ, अबी

उधचत सभझता हयॉ कक तमोकक जफ फड़े फड़े नाभ उजागय हैऄगे, ककतना ऩैसा दे श भैं फाद्धऩस आएगा,
ककतने रोगो के याजनननतक करयमसम तवाह हो जामगे औय कुछ तो अऩने दस
ु ये दे श कक
नागरयकता औय ऩासऩोटम मरए होने के कायण दे श से फच ननकर बाग ने कोमशश भ इस फाय
जनता के द्सवाया दफोच मरए जामॊगे, मह मसपम सोच कय कक अत्मॊत हषम कक अनब
ु नय त होती है .

हाराकक, इस हषामनुबयनत को बद्धवष्ट्म भ

अनुबयत कयने के मरए, हभ ऩुन् अऩने वत्तमभान भैं रौटना

होगा औय उसको कामामक्न्वत कयने के मरए मह अत्मॊत जरूयी है कक हभाये भहान ऻानी ऩुरुषैऄ फाफा
जी याभदे व भहायाज तथा दे श दहत भैं तत्ऩय ताककमक, तथ्मैऄ के ऊऩय आधारयत जनदहत भैं रड़ने
वारे डॉ. सुब्रभण्मभ स्वाभी जी जैसे रोगो कक वाणी, द्धवचायैऄ को दे श के सभस्त नागरयको भैं
ऩहुचामा जाए.

इस मरए भेया फाफा जी, स्वाभी जी से तथा बायत स्वामबभान रस्ट से ननवेदन है
एक टी.वी न्मयज चैनर कक स्थाऩना कयके जो कक इन दे शद्रोदहमैऄ कक वातैऄ को जन साधायण के
साभने उजागय कय सके.

उस टी.वी न्मयज चैनर ऩय भहान सच्चे तथा दे श दहत भैं तत्ऩय

व्मक्ततमैऄ का साऺात्काय हो तथा ज्वरॊत भुद्दैऄ ऩय वाद द्धववाद दे श के भुख्म धाया से जुड़े तथा
दे श कक कुछ जाने भाने गणभान्म नागरयको के वीच भैं.

मह चैनर ककसी स्टॉक एतस्चज से नहीॊ जुडा हो अन्मथा इसे बी खयीदने कक मरए वेस्टनम
भीडडमा तथा चचम अऩने हाथ ऩैय भायने रगेगी.

एक एप. एभ ्. चैनर कक बी इसी तयह से स्थाऩना कक जाए

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एक RTI (आय टी आई )सेर कक बी स्थाऩना की जाए क्जसका मसपम सयकाय के भाध्मभ से दे श
दहत औय ननधध कक दरारी कयने वारैऄ कक कारी कयतयतैऄ कक बी जानकायी जनता के साभने
राने का कामम हो

हभ दे श बतत तथा बायत के ऩुन गौयव शारी होने का सऩना मरए हुए , इस कामम भैं तन भन
धन से तत्ऩय यहगे.

एक शुरुआत कक अऩेऺा है .

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भे अनसन को कोई ऩमामप्त उऩाम नहीॊ भानता औय खास कय की आज के दौय भे जफ बायत के

नागरयक सोमे हुए हो औय मसपम भीडडमा ही जागके सफको खयीदा हुआ द्रस्म ददखा यही हो ... हभे
शेय फनने की आवस्मतता है औय सुबास चन्द्र फोज की बाॊनत ऩय थोड़ा हट के गुप्त तौय ऩय
फहोत ऊॊचे दयज्जे की ब्रेक कोभण्डो औय इसयाएर की बाॊनत गुप्तचय रस्मसऺण की आवस्मकता है
,बयतकार भे अटरजी के सभम दौयान इसयाएर ने मे ऑपय ददमा हुआ था की कसभीय सभस्मा
को एक ही भहीने भे सुरजा दगे ऩय आयम फ दे शो से सॊफॊध बी तो फनाए यखने थे हभे....एसी पोसम

हो क्जसका एक एक फॊदा सो के फयाफय हो
. ..बरे ही वतमभान भे गामरमा मभरे ऩय
बद्धवस्म भे सम्भान अवस्म मभरेगा ना मब
मभरा तो कोई गभ नहीॊ हभाया आऩका
सफका एक अबीन्नव बायत तो फनेगा
....उतना सफ सम्भान से ज्मादा भामने
यखता है ......कपय से दौहयता हु की भाॊगने
से कुछ नहीॊ मभरता औय मभरे तो उसका
भहत्व ही तमा यहेगा ? माद कयो हभाये

ऩयवज
म ो को हभ गीधड़ नहीॊ मसॊह के फच्चे है
हभाया हक नछनना ही धभम है ॥ गाॊधीजी

का अदहॊसा वाद ननजी जीवन भे उऩमुतत है ऩय दे श के मरए बमावह है कतै स्वीकाय नहीॊ कय

सकते इसे ....सफ रोग जगेगे मे सोचना सभम का अऩभान होगा इसमरए जागे हुए रोगो को ही
आगे आना होगा औय आऩका एक जीवन हाम्भेशा के मरए बयर कय उसकी दे श दहट भे आहुती
दे ना होगा ...इसका नेतत्ृ व एक सवार है क्जसका ककमसकैऄ जवाफ दे ना होगा तमयकी बफना नेतत्ृ व
औय एकता के मे भुदहभ यॊ ग नहीॊ र ऩाएगी ....आशा यखता हु कोई तो भुजे जवाफ कीक्जएगा .

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नमे बायत की अॉधकाय बविष्म ,हहन्द ू ससस्त्र मद्ध
ु प्रायॊ ब नहीॊ ककमा तो ऩयाजम तनल्चचत
है !
नमे बायत की अॉधकाय बविष्म ,हहन्द ू ससस्त्र मुद्ध प्रायॊ ब नहीॊ ककमा तो ऩयाजम तनल्चचत है !
भुल्रो औय ईसाईमैऄ ने तो छुऩे औय कहीॊ कहीॊ खुरे तौय ऩय मुि छे ड़ यखा है ,
दहन्द य औय दहन्दस्
ु थान के द्धवरुि !
अन्ना हजाये औय अन्नाटीभ से आश रगामे फैठे रोगो को तमा ऩता था की मे नाभचीन
होते ही इनके दोगरी शॊकयी खन
य उफार खाने रगेगा , अन्ना औय उनका टीभ दे श से फड़ा हो
गमा ?

अक्ग्नवेश ने ऩहरे अभयनाथ मारा को ऩाखॊड फतामा ,कपय हयाभखोय रस्शाॊत बयषण ने कश्भीय की
आजादी की

फात की रेककन अन्ना औय दे श खाभोश रेककन जफ कुछ दे शबततैऄ ने हयाभजादो की धन
ु ाई की
तो उनकी याम

ननजी हो गई !
अफ एक नछन्दार भेधा ऩाटकय कश्भीयी आतॊकवाददमैऄ की यखैर सेना के द्धवरुि भोचाम खोर यखी
है !
मे हयाभजादी को कश्भीयी दहन्दओ
का योना चीखना सुनाई नहीॊ दे ता ,औय अन्ना के मे अनभोर

यतन है ,

अन्ना को भहायाष्ट्र भ उत्तय बायनतमैऄ की द्धऩटाई नहीॊ ददखती ,दे श द्धवयोधी ब्मान सुनाई नहीॊ दे ता
है ,

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कुछ जमचॊदैऄ औय भान मसॊह -के बाॊजो ने दहन्द य धभमगुरूओ को नीचा ददखने की कोई अवसय
नहीॊ छोड़ यहे हैं ,

झयठा ,ढैऄगी , ठग , बगेडय ,चोय , ड़ोगऔय न जाने तमा तमा सावमजननक रूऩ से कहते हैं !
रेककन दहन्द य खाभोश , कबी कोई ऩादयी मा भौराना इभाभ को ऐसा फोर कय ददखाए आग रग
जाती है , दॊ गे शुरू हो जाते है ,

अफ कुछ अकफय फाफय के औरादैऄ ने दे ल्री मयननवमसमटी भ याभामण को ही गरत फतामा है याभ
सीता को बाई फहन

औय यावन को सीता का द्धऩता औय हनभ
ु ान जी को यमसमा फतामा है ....एक ऩैगम्फय का काटयमन
फना था बब्रटे न भ

कुत्ते के औराद भुल्रो को मभचॉ रगी दहन्दस्
ु थान भ ककतना कोहयाभ भचामा रेककन तमा कय
हभ दहन्द य है !

अऩभान सहने की शल्क्त को नाऩॊस
ू कता कहते हेऄ ,शाॊतत औय अहहन्र्षा भानिता की फात कयते
कयते हभ कामय हो गए है !

अफ हभ नहीॊ उठ खड़े हुए तो ऩाककस्तान भें जैसे १२-१३ सार के हहन्द ू रड़ककमेआ का फरात्काय
औय हहॊदस्
ु तान आमे हहन्द ू
िाऩस ऩाककस्तान जाने से ऩहरे कहते है भुझे गोरी भाय दो रेककन ऩाककस्तान नहीॊ जाऊॊगा !
िही हारत हभायी होने िारी है

कचभीयी हहन्द ू ने भुजरो ऩय बयोर्षा ककमा था आज बुगत यहे है ! ऩाककस्तान -फॊगरादे श आफ्गातनस्तान के हहन्द ू तो बायत

भें यहत भहशुश कयने आ जाते हेऄ बायत का हहन्द ू कहाॉ जामेगा ..........सोचो बाई रोग जागो
औय जगाओ हहन्द ू याष्र फनाओ !

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भस
ु रभान औय ईसाई का सम्प्ऩण
ू फ आधथफक िहहसकाय
भुसरभान ईसाई औय इनके द्िाया पैरामा जा यहा आतॊकिाद से आऩ रड़ नहीॊ सकते! तो कभ

से कभ इनका सम्प्ऩूणफ आधथफक िहहसकाय कय के उन्हें शभर्टामा मा
कभजोय तो जरूय ककमा जा सकता है !! भुसरभान औय ईसाई

आऩ के से हीॊ कभामा गमा भुनापा भें से अऩना धाशभफक चॊदा (
जकात ) दे कय,आऩ के तफाही का साभान रामेंगे औय आऩ के

साथ औय आऩ के फच्चो के साथ खन
ू की होरी खेरेंगे ! सािधान

! आइमे शभर कय आज से हह सॊकजऩ रे की कैसी बी प्रल्स्थतत हो
रेककन हभ अऩना १ बी ऩैसा भुसरभानेआ मा ईसाईमेआ के हाथ भें
नहीॊ दें गे .जागो हहन्द ू जागो

भुसरभान ईसाई औय इनके द्सवाया पैरामा जा यहा आतॊकवाद से आऩ रड़ नहीॊ सकते! तो कभ से
कभ इनका सम्ऩयणम आधथमक वदहसकाय कय के उन्ह मभटामा मा कभजोय तो जरूय ककमा जा

सकता है !! भुसरभान औय ईसाई आऩ के से हीॊ कभामा गमा भुनापा भ से अऩना धामभमक चॊदा
( जकात ) दे कय,आऩ के तफाही का साभान रामगे औय आऩ के साथ औय आऩ के फच्चो के
साथ खन
य की होरी खेरगे ! सावधान ! आइमे मभर कय आज से दह सॊकल्ऩ रे की कैसी बी

रस्क्स्थनत हो रेककन हभ अऩना १ बी ऩैसा भुसरभानैऄ मा ईसाईमैऄ के हाथ भ नहीॊ दगे .जागो
दहन्द य जागो

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सेक्मर
ू यिादी इततहासकायेआ के छरािे
सभम शामद फीता गमा जफ हभाये दे श भ, अॊग्रेजैऄ के शासन के फावजयद बी, इनतहास बी इनतहास
को उस रस्ेयणा-श्रोत की तयह ऩढ़ामा जाता था, जहाॊ उसके ऩीरे, ऩुयाने ऩन्नैऄ भ बी हभ दे श की

अऩनी द्धवयासत के रस्ेयक – तत्वैऄ को ढयॊढ़ ही रेते थे। स्वतॊरता सॊग्राभ के सभम बी नतरक, यानाडे,
सुबाषचॊद्र फोस आदद दजमनैऄ याष्ट्रीम रस्नतबाओॊ ने दे श के इनतहास के घटनाक्रभैऄ से ही फहुधा
याष्ट्ररस्ेभ की ऩयॊजी रस्ाप्त की थी।

कपय द्धऩछरे दशकैऄ भ वह सभम आमा जफ हभाये दे श के कधथत फक्ु ध्दजीद्धवमैऄ ने इनतहास को

अऩने याजनीनतक ऩयवामग्रहैऄ व आमानतत द्धवचायधायाओॊ के मरए एक हधथमाय की तयह रस्मुतत कयना
शुरू कय ददमा। ऩुयाने घटनाक्रभैऄ का वही द्धवश्रेषण स्वीकाय ककमा गमा क्जस ऩय साम्मवादी
यजाभॊद थे। उनकी भयर स्थाऩनाएॊ ही द्धवकृत भॊतव्मैऄ से बयी ऩययी थी जैसे रस्ाचीन बायत भ

ऐनतहामसक कारक्रभैऄ को व्मवक्स्थत रूऩ से यखन भ कोई रूधच नहीॊ थी। वे दॊ तकथाओॊ औय सुने-

सुनाए आख्मानैऄ मा चयणैऄ की रस्शक्स्तमैऄ मा द्धवरूदावरी को इनतहास भानने रगे थे। इसीमरए ऐसे
इनतहासकाय चाहे वे योमभरा थाऩय हैऄ मा इयपान हफीफ मा याभशयण शभाम मा उनके जैसे अनेक
वाभऩॊथी द्धवचायक रस्ाचीन इनतहास के श्रोता े ॊ की द्धवश्वसनीमता का भखौर उड़ाने से कबी नहीॊ
चक
य ते थे।
इस रूझान का एक कुक्त्सत रूऩ हार भ उच्च न्मामारम के आदे श ऩय अमोध्मा भ याभ

जन्भबमय भ के स्थान ऩय उत्खनन के फाद बायतीम ऩयु ातत्व द्धवबाग की सवेऺण रयऩोटम के सॊफॊध भ
दे खने को मभरा है । हय छोटा फड़ा ऩरकाय मा याजनेता एक इनतहासकाय मा ऩयु ातत्वद्धवद भ

रूऩाॊतरयत हो गमा औय द्धववादास्ऩद बफॊदओ
ु ॊ के नाभ ऩय द्धवदष
य कैऄ की ऩैयोडडमैऄ जैसी दटप्ऩणी कयने
रगा। क्जन्ह उत्खनन मा ऩुयातत्व की कक्रमाद्धवधध की सतही सभझ बी नहीॊ थी वे याजनीनतक

कायणैऄ से भीडडमा भ छाए यहे । 10 वीॊ शताब्दी के द्धवशार भॊददयैऄ के बयमभगत साक्ष्मैऄ के फावजयद,
अनगमर रस्राऩ की फानगी साभने है – ऩुयातत्व द्धवबाग का ददर भॊगवाई है , मह ऩुयाताक्त्वक

धोखाधड़ी है , मही होगा मह ऩहरे से ऩता था, रस्ाचीन अवशेष भक्स्जद के है , वहाॊ याभ की रस्नतभा
तमैऄ नही ननकरी? वहाॊ हडड्डमाॊ तमैऄ नहीॊ ननकरी?
ननरमज्जता के साथ-साथ फेवकयकपमैऄ की बी एक सीभा होती है ऩय हभाये अॊग्रेजी भीडडमा के एक

वगम की साक्जश बी एक साये रस्कयण के उजागय हो गई। चाय तरैऄ के उत्खनन के फाद औय एक
द्धवशार भॊददय के ढाॊचे के रस्चयु रस्भाण मभरने के फाद बी जो 50-30 भीटय क्रभश् उत्तय दक्षऺण
एवॊ ऩव
य म ऩक्श्चभ तक द्धवस्तारयत था हभाये दे श के अनेक द्धवद्सवानैऄ की आॊखैऄ भ ऩट्टी फॊधी यही।

ददल्री के एक रस्नतक्ष्ट्ठत दहॊदी साप्तादहक सभाचाय ने दहॊद-य द्धवयोधी इनतहासकाय इयपान हफीफ के

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मरए ऩयये दो ऩष्ट्ृ ठैऄ के ऊऩय भोटे अऺयैऄ के शीषमक के साथ दरयमाददर होकय कारॎ भ दे ददए थे।

शीषकम था- ‗खोदा सभाधान, ननकरा घभासान!‘ भॊददय के उत्खनन भ 50 स्तॊब-आधायैऄ का मभरना,
दहॊद य आस्था के अनेक करात्भक रस्तीकैऄ की उऩरक्ब्ध इन सफसे उन्ह जैसे कोई सयोकाय नहीॊ था
तमैऄकक उनका अऻान व दयु ाग्रह उनकी भान्मताओॊ की धक्ज्जमाॊ उड़ा यहा था।

हभाये दे श का इनतहास हजायैऄ सार ऩुयाना है औय आज की याजनीनतक सीभाओॊ के ऩय वह एक
फह
ृ त्तय बायत का घटनाक्रभ था। दे श के अधधकाॊश वाभऩॊथी इनतहासकायो ॊकी भान्मताम मा

व्माख्माएॊ सदै व ऩऺऩातऩयणम होने के साथ हास्मास्ऩद बी रगती है। कहीॊ इयपान हफीफ कहते हैं कक
भध्ममुग के सॊतैऄ ने ऐकेश्वय इस्राभ से सीखा। कहीॊ मरखा कक भुक्स्रभ आक्राॊताओॊ का उद्देश्म
मसपम रयट-खसोट था, धभाांतयण मा भॊददयैऄ का द्धवध्वॊस नहीॊ। नोफर ऩुयस्काय द्धवजेता वी. एस.
नमऩार ने कुछ ददनैऄ ऩहरे रॊदन के एक ऩर को ददए साऺात्काय भ कहा था कक बायत भ
भुक्स्रभ आक्रभणकारयमैऄ ने तमा ककमा मह जानने के मरए हय दहॊद य को एक फाय हम्ऩी के

ध्वॊसाशेषैऄ को जरूय दे खना चादहए। उनका रृदम द्धवदीणम हुए बफना नहीॊ यह सकता। क्स्थनत की
गॊबीयता इस फात से सभझी जा सकती हैं कक वी. एस. नमऩार ने रॊदन-क्स्थत एक ऩरकाय
पारूख ढैऄडी को महाॊ तक कहा कक रस्मसध्द वाभऩॊथी इनतहासकाय योमभरा थाऩय एक ‗फ्रॉड‘ है ।
आज अनेक ऩरकाय जो अऩने को इनतहासकाय के रूऩ भ छाऩते हैं वे अऩने कॊु दठत एवॊ द्धवषातत

तकों से दहॊद य अतीत ऩय आघात कय यहे हैं। उनभ ‗एमशमन एज‘ भ ननममभत रूऩ से मरखने वारे

अखखरेश मभत्तर शामद सफसे आगे हैं। उनके तकों भ द्धवक्षऺप्तता अधधक है औय उन्ह एक रेख
ने ‗नीभ हकीभ‘ – शारमटन – इनतहासकाय बी कहा है । ‗इनतहास‘ शीषमक साप्तादहक स्तॊब भ
बाषामी अबद्रता, दहॊद य सॊगठनैऄ व साभान्म दहॊदओ
य ॊ ऩय द्धवषवभन कयना ही इसका अकेरा उद्देश्म है ।
उदाहयण के मरए 2 नवॊफय, 2003 के ‗एमशमन एज‘ के यद्धववायीम ऩरयमशष्ट्ट भ सन ् 1192 ई. भ

शहाफुद्दीन गोयी की तयाईन की भैदान भ द्धवजम का क्जक्र कयते हुए मभत्तर का कहना है कक
‖दहॊद य साॊरस्दानमक‖ रेखक मसपम भॊददयैऄ व भहरैऄ के द्धवनाश की फात कयते हैंऩय वे बयरते हैं कक 13
वीॊ सदी के फाद से ही तुकन मा ऩाश्तैऄ-बाषी द्धवजेताओॊ ने स्थाऩत्म के साथ-साथ ‗तयाना‘ कव्वारी

मा सादहत्म की दस
य यी द्धवद्समाओॊ के ऺेर भ अबयत ऩयवम मोगदान ददमा। इसी तयह 26 अतटयफय, 2003
‗एमशमन एज‘ के अॊक भ ‗दहॊद य धभाांधैऄ एवॊ सॊघ के नेताओॊ‘ की बत्समना कयते हुए वे भॊददय के
द्धवध्वॊस ऩय दहॊदओ
ु ॊ को ‗याऺसाज वेमय दहॊदज
य ‘ शीषमक मरखते हैं कक याजऩयतैऄ की वीयता की
कहाननमाॊ बी भनगढ़ॊ त है औय सोभनाथ के भॊददय के द्धवध्वॊस ऩय दहॊदओ
ु ॊ ने सुद्धवधाजनक फात
मरखी हैं। कनमर टॉड का 1839 भ मरखा ‗द एनाल्स एॊड एॊटीक्तवटीज ऑप याजऩयताना‘ की

आरोचना कयते हुए कक वह बब्रदटश सयकाय के सभम दहॊद-य भुक्स्रभ तनाव फढ़ाने औय दहॊदओ
ु ॊ को
शह दे ने मरए चयणैऄ के रस्ाचीन मशोगान ऩय आधारयत थी औय इसका ऐनतहामसक भयल्म नहीॊ है ।

86

वह अॊग्रेज अधधकायी अवश्म था साये जीवन याजऩयत जानत का सच्चा मभर यहा औय याजस्थान के

‗इनतहास का द्धऩता‘ कहा जाता है । वह 17 वषम बी अवधध भ ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी भ फॊगार भ आमा
औय साया जीवन याजस्थान के इनतहास साभग्री एकर कयने भ बफता ददमा। उसका जन्भ 1782 भ
हुआ था औय 1835 भ भार 53 वषम भ उसकी भत्ृ मु हो गई। इसी तयह 14 मसतॊफय, 2003 को
मभत्तर द्सवाया ‗द-एॊग्रो-आय. एस. एस. नेतसस‘ शीषमक रेख भ उन्हैऄने कहाननमाॊ गढ़ी हैं कक
स्वतॊरता सॊग्राभ के दौयान सॊघ ने ककस तयह अॊग्रेजैऄ का साथ ददमा था। ‗एमशमन एज‘ के ही 28
मसतॊफय, 2003 के अॊक भ ‗दहॊदत्ु व एट आगया पोटम ‘ भ उन्हैऄने छरऩनत मशवाजी के शौमम ऩय

आऩक्त्तजनक व बड़ाकाऊ दटप्ऩणी की है जैसे उनका आगया ककरे से ननकरना कोई भहत्वऩण
य म
घटना नहीॊ थी तमैऄकक वे वहाॊ भग
ु रैऄ को वचमस्व स्वीकाय कयने गए थे।

इस तयह के इनतहासकायैऄ को हभ कफ तक सहगे जो कहते हैं कक छरऩनत मशवाजी की
द्धवजमगाथा के ऩीछे ऺेरीम भयाठा दृक्ष्ट्टकोण था। गुरू तेग फहादयु एक रुटेये थे, उनकी पाॊसी के
ऩीछे उनके ऩरयवाय के रोगैऄ की साक्जश थी। जैन तीथांकयैऄ की ऐनतहामसकता सॊदेहजनक है ।
ददल्री के भुगर शासकैऄ की नाक भ दभ कयने वारे द्धवद्रोही जाट याजा रुटेये थे।
इन सफसे अधधक खतयनाक द्धवचायैऄ के रस्चाय भ उनका मह कहना कक आमम आक्रभणकारयमैऄ के
रूऩ भ भध्म एमशमा उत्तयी ध्रव
ु आदद दे शैऄ से बायत आए थे औय उन्हैऄने मसॊधु घाटी की सभ्मता
से जुड़े द्रद्धवड़ैऄ को अऩदस्थ ककमा औय दक्षऺण की ओय खदे ड़ ददमा। कोट दीजी(मसॊध), कारी
फॊगन(याजस्थान), योऩड़(ऩॊजाफ) औय रोथर (गुजयात) के नए ऩुयाताक्त्वक साक्ष्मैऄ द्सवाया मह

ऩयवामग्रह ध्वस्त ककमा जा चक
ु ा है ऩय उनकी मह यट अबी बी जायी है । डॉ. ऩी. वी. वतमक ने

अऩने खगोरशास्र साक्ष्मैऄ व भहाबायत के कारक्रभैऄ को वैऻाननक ढॊ ग से ननधामरयत कयने की
कोमशश की है । ऩय आज बी कुछ भ्रमभत इनतहासकाय याभ से जुड़ी अमोध्मा कहाॊ हैं ऩय सॊशम

रस्कट कय यहे हैं। हार भ एक दस
य ये वाभऩॊथी इनतहासकाय ने याभामण शब्द के गरत उच्चायण के
आधाय ऩय धभम के सभयचे मसध्दाॊत को एक काल्ऩननक ऩष्ट्ृ ठबयमभ ऩय स्थाद्धऩत कय ददमा। याभामण

का उच्चायण ‗यम्माण‘ भान कय क्रौंच-फध से सॊफॊधधत रस्मसध्द श्रोक का नमा अथम खोज ननकारा
औय इस श्रोक को कद्धवता न भानकय धामभमक सयर घोद्धषत कय ददमा। अमोध्मा को फौध्द – धभम

का ऩद्धवर नगय कहना बी एक घखृ णत याजनीनत-रस्ेरयत साक्जश रगती है । मह एक भामभमक ऩीड़ा

का द्धवषम है कक मह सफ मरखनेवारे अॊग्रेजी भीडडमा भ औय सयकायी सॊस्थानैऄ भ अऩना वचमस्व
फनाए हुए हैं।
दे श की रस्ाचीन इनतहास की भातसमवादी रस्चमरत शब्दावरी द्सवाया हय तयह से छीछारेदय कयने का
असपर रस्मास ककमा गमा है कक वह क्रोध से अधधक हॊ सी का द्धवषम रगता है । कुछ उदाहयण

दे खने मोग्म हैं। भनु ‗भानवद्रोही‘ थे, ऩौयाखणक यचनाएॊ ‗काल्ऩननक आख्मानैऄ के ननयथमक काराकभम

87

का थोक का काभ था, द्धवदयु नीनत दहन्दओ
ु ॊ की साभॊती-सॊस्कृनत की एक भहत्वऩयणम आचाय-सॊदहता
है , श्रीभद्भगवदगीता मुध्द औय दहॊसा को वैचारयक आधाय दे ने वारा ग्रॊथ है , आदद-आदद!

एक दस
य ये इनतहासकाय ने तो 20 वीॊ शताब्दी की ‗फह
ृ त ऩयॊ ऩया‘ व रघुऩयॊ ऩया के सयर ‗कृग्वेद‘ के

आख्मानो के रूऩ भ वेदैऄ भ स्थान ऩा गए हैं? इस द्धवकृत भक्स्तष्ट्क के फुक्ध्दजीवी को शामद मह

माद नहीॊ यहा कक ऩुयाणैऄ की यचना ‗कृग्वेद‘ के फहुत फाद हुई है । इस आशम का रस्श्न उठाने ऩय
ऐसे द्धवद्सवानैऄ का एक ही जवाफ यहता है – बायत भ यचनाओॊ का कार ननधामयण अत्मॊत दष्ट्ु कय
कामम है ।

बायतीम इनतहास के यातैऄ-यात फने जानकायैऄ से ननरमज्ज साम्मवादी नेता बी हैं क्जन्ह हभाये दे श
के अॊग्रेजी भीडडमा के साथ-साथ द्धवदे शैऄ भ बी, मदद उनकी दटप्ऩखणमाॊ दहन्द-य द्धवयोधी हैं, तो आज
खर
ु कय उध्दृत ककमा जाता है । उदाहयण के मरए अभेरयकी भीडडमा आज बी साम्मवाददमैऄ को

अस्ऩश्ृ म भानता है । ऩय जफ हभाये दे श के ऐसे रोग जो भातसमवादी तथा साम्मवादी दर से जड़
ु े

हैं, दहॊद य द्धवयोधी दटप्ऩणी कयते हैं, तफ उनकी याजनीनतक ऩहचान ददए बफना, वे खर
ु कय उध्दृत ककए
जाते हैं। उन्ह भार एक बायतीम फध्
ु दजीवी मा द्धवचायक का द्धवशेषण दे कय उध्दृत ककमा जाता है ।

दहॊदओ
य ॊ के द्धवरूध्द द्धवषवभन कयनेवारैऄ भ चाहे वे कुख्मात साम्मवादी ही तमैऄ न हो वहाॊ स्वीकामम
हैं। कधथत ऩयॊजीऩनतमैऄ व भुतत फाजाय का झॊडा उठानेवारैऄ को साम्मवादी रस्वतता बी स्वीकाय हैं
तमैऄकक दहॊद-य द्धवयोध ही उसके रस्काशन की एक फड़ी शतम है ।

88

सेकुरयिादी विभशफ की आड़ भें : ऩयत-दय-ऩयत खर
ु ता याष्रद्रोही चेहया - हरयकृष्ण तनगभ
आज के याजनीनतक द्धवभशम भ हभाये कुछ फुक्ध्दजीद्धवमैऄ ने एक अजीफ तयह की अयाजकता को

रस्श्रम दे कय अॊग्रेजी भीडडमा के एक फड़े वगम भ, जहाॊ तक दहॊद य की व्माख्मा का रस्श्न है , एक द्धवकृत
दृक्ष्ट्ट व हठधमभमता को भार दहॊद य आस्था का ही अदहत कय याजनीनतक ऩऺ ददखता है औय कबी

बी रगता है कक सेमभदटक धभों की रस्च्छन्न वकारत के मरए इस दष्ट्ु रस्चाय भ जी जान से वे सफ
रगे हुए हैं। उन्ह इतय धभों की बायत सदहत द्धवश्व बय भ चर यही गराकट रस्नतद्सवॊददता औय
उनके अऩनी श्रेष्ट्ठता का रगाताय दावा कयने की रस्वक्ृ त्त भ कुछ बी अटऩटा नहीॊ ददखता है ।

हभाये दे श के द्धवकृत, ददशाहीन औय दहॊद-य द्धवयोधी याजनीनतक दरैऄ की अऩनी भानमसकता का राब
उठाते हुए आज सहसा ऐसे रस्काशनैऄ की फाढ़ आ गई है क्जसभ रगता है अमबव्मक्तत की
स्वतॊरता की जगह अनेक फड़े रेखकैऄ ने याजनीनत अथवा अनेक रॉबफमैऄ की गुराभी स्वेच्छा से

स्वीकाय की है । द्धवडॊफना मह है कक नवउदायवाद औय नेहरूवादी ऩायॊ ऩरयक साभाक्जक द्धवचायधाया मा
दशमन के सभथमन के फहाने अॊग्रेजी दै ननकैऄ का एक रस्बावी वगम औय व्मवस्था द्धवयोधी छद्धव का ढैऄग
कयता है दस
य यी ओय घोय-दहॊद य द्धवयोध द्सवाया वाभऩॊधथमैऄ एवॊ अॊतयामष्ट्रीम रॉबफमैऄ का स्वेच्छा से
भोहया फनने को याजी हो जाता है ।

हार के कुछ रस्काशनैऄ औय भीडडमा भ उनके रस्चाय के स्तय को दे खते हुए मह सॊदेश एक कटु
मथाथम फन चक
ु ा है । हार भ द्धवनम रार द्सवाया सॊऩाददत 287 ऩष्ट्ृ ठैऄ का ऑतसपोडम मयनीवमसमटी रस्ेस
द्सवाया रस्कामशत ग्रॊथ क्जसका शीषमक है ‗ऩोमरटकर दहन्दइु ज्भ

् दद रयमरक्जमस इभेक्जनेशन इन

ऩक्ब्रक क्स्पमसम‘ मह मसध्द कयने भ कुराॊचे बय यहा है कक 19 वीॊ शाताब्दी के उत्तयाधम की

याष्ट्रवाद की अवधायणा ने स्वतॊरता के फाद दहॊद य धभम का ऩयणम रूऩ से याजनीनतक रूऩाॊतयण कय
ददमा। फहुसॊख्मकैऄ के दक्षऺणऩॊथी रूझानैऄ का हव्वा खड़ा कय रेखक कहता है कक दहन्दत्ु व की
अवधायणा से बी एक कदभ आगे याजनीनतक दहॊदत्ु व है जो दे श के दयय गाभी दहत भ नहीॊ है ।

स्ऩष्ट्ट है कक दहॊद य सॊगठनैऄ की हय उस गनतद्धवधध मा यणनीनत को क्जसके द्सवाया वे याष्ट्रद्धवयोधी,

अवाॊछनीम, सॊकीणम औय द्धवजातीम तत्वैऄ के रस्वेश ऩय अॊकुश रगाना चाहते हैं, वे चाहते हैं कक वे
चाहे दे श के वाभऩॊथी मा सेतमयरय द्धवचायक हो मा क्जनकी धभम ननयऩेऺता की व्माख्मा भार

अल्ऩसॊख्मकैऄ के तुष्ट्टीकयण तक सीमभत है , उन्ह फौखरा दे ती है । मह कड़वा सच है कक इस दे श

के कधथत रस्गनतशीर कहराने वारे रेखक उदाय, ननयॊ तय सॊवाद को रस्ोत्साहन दे ने वारे, सभीऺा एवॊ
ननत्म नए तकों को, द्धवचायैऄ को आत्भसात ् कयनेवारे दहॊद य दशमन को साॊरस्ादानमक, असदहष्ट्णु औय
वगमशस्रु भानते है । वे अॊधे फन जाते हैं मा न दे खने को ढा े ॊग कयते हैं जफ इतय धभों की

आक्राभकता मा अनम
ु ाईमैऄ को फढ़ाने की अॊधी क्जद से ऩारा ऩड़ता है । तमा इसे ऩढ़े मरखैऄ की
आज की द्धवचायधाया का आतॊकवाद नहीॊ कहा जा सकता है ।

89

फहुसॊख्मकैऄ के द्धवरूध्द हार भ द्धवषवभन कयने वारे रेखकैऄ भ ज्मोनतभमम शभाम की वाइककॊग
नाभक रस्काशन – गह
ृ द्सवाया छाऩी ऩुस्तक ‗टे यीपाइॊग द्धवजन‘ शामद सफसे आगे हैं क्जन्हैऄने दहॊद य

याष्ट्रवाद की अवधायणा की ननॊदा कयते हुए धचयऩरयधचत भातसमवाद शब्दावरी रस्मुतत की है । सॊघ के
द्सद्धवतीम सयसॊघचारक श्री भाधवयाव सदामशवयाव गोरवरकय ऩय उॊ गरी उठाने के साथ-साथ इस
रेखक ने तथ्मैऄ व साक्ष्मैऄ के द्धवद्रऩ
य ीकयण, मभथ्माकयण औय सॊदबों को सुद्धवधानुसाय कुदटरता के
साथ तोड़ा-भयोड़ा है । इसी रेखक की जफ सन ् 2003 भ ऩगुइन द्सवाया रस्कामशत ऩुस्तक ‗दहॊदत्ु व
एतस्प्रोरयॊग द आईडडमा ऑप दहॊद य नेशनमरज्भ‘ साभने आ गई थी दे श के अॊग्रेजी रस्ेस ने इसे

आवश्मकता से अधधक भहत्व ददमा था। हार की उनकी ऩस्
ु तक का शीषमक ‗टे यीपाइॊग द्धवजन‘ तो

इतनी ननॊदात्भक है जैसे दहॊद य सॊगठनैऄ की द्धवचायधाया ही दे श को आतॊककत मा बमबीत कयनेवारी

हो। हभ द्धवस्भत
ृ नहीॊ कय सकते हैं कक दे श की फड़ी अॊग्रेजी ऩबरका ‗इॊडडमा टयडे‘ ने इसकी सभीऺा
को ही ‗फोगीभैन इन सैफ्रॉन‘ शीषमक से छाऩी थी। हभभ से कदाधचत फहुत से रोगैऄ को मह ऻात
नहीॊ होगा कक अॊग्रेजी भ फोगीभैन का अथम होता है – रस्ेतात्भा, शैतान, बत
य , हौवा। वाभऩॊथी
भग
ृ भयीधचकाओॊ भ मरप्त, दहॊद य द्धवयोधधमैऄ का स्वाबाद्धवक मभर मह रेखक जो कोई बी भातसमवादी
व्माख्मा मा नेहरुवादी द्धवचायधाया की वैधता ऩय रस्श्नधचह्भ रगाने का रस्मास कयता है उस ऩय
ऩुनरूत्थानवादी, साॊरस्दानमक औय तत्ववादी मा दक्षऺणऩॊथी होने का रेफर जड़ता है । दहॊदत्ु व की

स्वबाद्धवक अमबव्मक्तत सवमसभावेशक है – मह ऐसे रोग बयर जाते हैं। मही हभायी ऩहचान का
भुख्म गुण ऩहरे बी था औय आज बी है , इसे नकाया नहीॊ जा सकता है ।

90

क्मा हहन्दस्
ु तान भें हहन्द ू होना गुनाह है ? - 1
क्मा हहन्दस्
ु तान भें हहन्द ू होना गुनाह है ? इस सिार का जिाफ अधधकाॊश रोग हाॊ भें दे ते हेऄ।
आणखय ऐसी सोच क्मेआ ऩैदा हुई?

बायत विचि के दृचमऩर्टर ऩय सफसे फड़ा धभफतनयऩेऺ दे श है । मह ऐसा धभफतनयऩेऺ है , जैसी
धभफतनयऩेऺता होनी फड़ी भल्ु चकर है । जो नई नस्रें हेऄ, उन्हें क्मा भारभ
ू कक हभ क्मा चीज हेऄ।

बायत आजाद हुआ, इसके शरए फाकामदा इॊडडमन इॊडीऩेऄडस
ेऄ एक्र्ट फना, ऩाककस्तान िजद
ू भें आ
गमा। अॊग्रेजेआ ने उन्हें कचभीय नहीॊ हदमा था। उसे हभाये साथ भहायाजा हरय शसॊह ने विरम ककमा
था। ऐसा विरम 542 रयमासतेआ ने ऩहरे ही कय हदमा था। सफकी फात हभने सुनी, भानी ऩयन्तु

कचभीय भें घुॊडी अड़ गई। मह अनोखी धभफतनयऩेऺता थी। शेख औय भहायाजा के अच्छे सॊफॊध नहीॊ

थे। भहायाजा ने उन्हें याजद्रोह के आयोऩ भें कैद कय यखा था जफकक ऩॊडडत नेहरू औय भहायाजा के
सॊफॊध बी अच्छे नहीॊ थे। भहायाजा की नजयेआ भें नेहरू की चारयत्रत्रक सभग्रता सॊहदवध थी। शेख
अब्दज
ु रा ततरशभरा उठे । िह फाहय आए, नेहरू से शभरे औय शेख ने चार चर दी। 27 अक्तूफय,

1947 को ऩाककस्तान ने आिभण कय हदमा। मह एक ऩूणफ रूऩ से सुतनमोल्जत र्षड्मॊत्र था। बमॊकय
भायकार्ट हुई। भहायाजा ने अऩनी रयमासत को बायत के हक भें विरमन के सहभतत ऩत्र ऩय
हस्ताऺय कय हदए। श्रीनगय तो फच गमा, ऩयन्तु हभाया 2/5 बाग ऩाककस्तान ने जफयदस्ती हधथमा

शरमा। ऩाककस्तान की फरात्कायी पौज को जिाफ दे ने के शरए हभायी सेना ऩहुॊच चक
ु ी थी।
घनसाया शसॊह औय त्रब्रगेडडमय ऩयाॊजऩे भौजूद थे। छह घॊर्टे के अन्दय हभाया बूबाग िाऩस आ सकता
था, ऩयन्तु सेना का तनमॊत्रण औय उसे आगे फढऩे का अधधकाय केिर शेख के हाथ भें विशेर्ष
आदे श के द्िाया नेहरू ने दे यखा था।

कायण था- हभायी धभफतनयऩेऺता। सिार बायतीमता का नहीॊ धभफतनयऩेऺता का था। भहायाजा हरय
शसॊह योते यहे , हभने अऩना बू-बाग गॊिा हदमा औय भाभरा सॊमुक्त याष्र तक जा ऩहुॊचा। हभ
अऩनी सयजभीॊ से विशार सेना होते हुए बी दचु भन को खदे ड़ नहीॊ सके हभायी धभफतनयऩेऺता आड़े
आ गई। भाभरा सॊमुक्त याष्र भें रर्टक गमा। ऩाककस्तान ने हभाये ब-ू बाग का 13 हजाय िगफ

ककरोभीर्टय 2 भाचफ, 1963 को चीन को दान कय हदमा। सीभा तनधाफयण के फहाने ककमे गए इस
कुकृत्म ऩय फतौय विदे श भॊत्री बुट्टो ने हस्ताऺय कय हदए औय उधय चीन के तत्कारीन विदे श भॊत्री

चेन मी ने दस्तखत ककए। इसी को कहते हेऄ 'भार भहायाज का शभजाफ खेरे खोरी।' भार ककसी का
था औय कभार कौन कय यहा था।

91

जफ ऩॊडडत नेहरू ऩय दफाि ऩड़ा तो उन्हेआने भगयभच्छी आॊसुओॊ से बया एक बार्षण रोकसबा भें 5

भाचफ, 1963 को हदमा था। मह एक 'धभफतनयऩेऺ औय ढेआगी' प्रधानभॊत्री की तकयीय थी। यो यहे थे कक
हभ क्मा कयें , अबी सभम विऩयीत है , हभने अऩना 'प्रोर्टै स्र्ट' कय हदमा है ।

काॊग्रेसी फॊधु इसे ऩढ़ें औय अऩना शसय ऩीर्टें । नेहरू योते क्मेआ न? 1962 के मुद्ध भें उन्हेआने हभायी

दग
ु तफ त कयिा दी। चीन के नाभ से रूह काॊऩ यही थी। इसकी सायी दास्ताॊ तफ रे. जनयर िी.एभ.

कौर ने अऩनी ककताफ ―Untold Story‖ भें फमान कय दी। उसे बी आज ऩढ़ा जाना चाहहए रेककन
ककसे कपि है जो इन दस्तािेजेआ भें जाए? नेहरू का 1964 भें तनधन हो गमा। 1965 भें ऩाककस्तान ने
हभ ऩय आिभण कय हदमा। तफ तक रार फहादयु शास्त्री की कृऩा से हभ भें फड़ा गुणात्भक पकफ

आ गमा था। हभने ऩाककस्तान को हदन भें ताये हदखिा हदए। हभायी सेनाएॊ राहौय तक जा ऩहुॊचीॊ।
उन्हेआने कच्छ के यण भें हभाया एक हहस्सा कब्जे भें रे शरमा। ऩाककस्तान ने चार चरी। हभाये
ऩयभशभत्र कोसील्जन से शभरकय अमूफ ने ताशकॊद भें सभझौता ककमा। हभने उनका साया बूबाग
छोड़ हदमा, उन्हेआने कच्छ भें आज तक हभायी जभीन न छोड़ी। क्मेआ? हभने धभफतनयऩेऺ तयीके से
इसका प्रौर्टे स्र्ट ककमा। 1971 भें कपय िही तायीख दह
ु याई गई।

हभ चाहते तो शशभरा सभझौता भें अऩना कचभीय िाऩस रे सकते थे, ऩय इॊहदया जी की
धभफतनयऩेऺता आड़े आ गई। तफ से रेकय आज तक कचभीय जर यहा है । आज एक धभफतनयऩेऺ
सयकाय हभाये दे श भें िजूद भें आ गई है रेककन इन 30-32 िर्षों भें कचभीय भें क्मा हुआ इसका
हार सुनें। कचभीय घार्टी से 2.14 गुना ऺेत्रपर जम्प्भू का है । कचभीय घार्टी से 4.35 गुना ऺेत्रपर

रद्दाख का है । उस याज्म की 90 प्रततशत आम जम्प्भू औय रद्दाख से है । 10 प्रततशत घार्टी से है ।
सम्प्ऩूणफ आम का 90 प्रततशत हहस्सा घार्टी भें खचफ ककमा जाता है । कायण क्मा है ? हभें इस फात

का भरार नहीॊ कक 3 राख हहन्द ू क्मेआ तनकार हदए गए। हभें मह भरार नहीॊ कक फौद्धेआ के साथ
क्मा हो यहा है । ऩय हभें इस फात की सफसे ज्मादा कपि है कक िहाॊ दो नागरयकताएॊ कामभ यहें ।
अनच्
ु छे द 370 कबी न हर्टे ।
बायत का सॊविधान रागू न हो।

92
िहाॊ कोई जभीन न खयीद सके।
बायत का कानन
ू रागू न हो।
िहाॊ की फेर्टी बायत भें कहीॊ शादी कये तो नागरयकता खो फैठे, औय ऩाककस्तान भें कये तो िह महाॊ का
नागरयक हो जाए।

जम्प्भू-कचभीय की स्िामत्तता प्रस्ताि हभायी सयकाय के ऩास है । अगय हभायी सयकाय की

धभफतनयऩेऺता ने कपय जोय भाया, तो हभ शसपफ 'अशबन्न अॊग' यह जाएॊगे, औय हभाया प्माया कचभीय
De-Facto ऩाककस्तान हो जाएगा औय हभाये ऩास De-Jure कचभीय ही यहे गा। हभ तफ इस

अशबन्न अॊग को गाएॊगे, गुनगुनाएॊगे, ओढ़ें गे, त्रफछाएॊगे औय चयखे के गुण गाएॊगे। जम फाऩू की-जम
गाॊधी की। अपसोस! एक अयफ 25 राख रोगेआ का मह भुजक इतना भोहताज हो गमा कक प्राचीन
गौयि औय ऩयम्प्ऩयाएॊ बूर गमा। धधक्काय है इस याष्र के धयती ऩुत्रेआ ऩय। भानशसक रूऩ से इस
याष्र को 'तनणाफमक जॊग' के शरए तैमाय कयना होगा। ''जफ ककसी जातत का अहॊ चोर्ट खाता

है ।ऩािक प्रचॊड होकय, फाहय आता है ।मह िही चोर्ट खाए स्िदे श का फर है ।आहत बज
ु ॊग है , सर
ु गा
हुआ अनर है ।

क्मा हहन्दस्
ु तान भें हहन्द ू होना गुनाह है ? - 2
जीवन भ कबी-कबी अतीत की गहयाई भ झाॊकना फड़ा ही अच्छा रगता है औय सुखरस्द बी। महाॊ
मह फात भैं याष्ट्रैऄ के अतीत के सॊदबम भ कह यहा हयॊ। बायतिर्षफ के ल्जस तॊत्र भें हभ यह यहे हेऄ

औय भूखत
फ ािश ल्जसे 'प्रजातॊत्र' कहते हेऄ िह आजादी के ऩाॊच दशकेआ फाद कैसा शसद्ध हुआ है , इस
ऩय महाॊ भेऄ हर्टप्ऩणी नहीॊ कयना चाहता।

भैं रेतामुग के कार से इस याष्ट्र की द्धवमबन्न शासन रस्णामरमैऄ का अध्ममन द्धऩछरे ददनैऄ कय यहा
था। इसी क्रभ भ कुछ ऐसे तथ्मैऄ की जानकायी मभरी क्जन्ह न केवर भैं ऩाठकैऄ के साथ साॊझा

कयना चाहता हयॊ, अद्धऩतु भेयी भॊशा है कक हभ कुछ फातैऄ की रस्ासॊधगकता आज के मग
ु भ बी जान।
मह फात सत्म है कक श्रीयाभ को ऩरयक्स्थनतवश फनवास जाना ऩड़ा, कपय बी ज्मेष्ट्ठ दशयथनॊदन
होने के नाते भहायाज दशयथ मह दे खकय धचॊनतत थे कक श्रीयाभ धचॊता भ हैं। कुछ रस्श्र उनके भन भ
उभड़-घभ
ु ड़ कय आते हैं औय उन्ह व्मधथत कय जाते हैं। मथासम्बव उन्हैऄने स्वमॊ बी उनका

ननयाकयण ककमा औय फाद भ भहद्धषम वमशष्ट्ठ को द्धवस्ताय से सायी फात फताई। श्रीयाभ औय भहद्धषम

93

वमशष्ट्ठ भ एक रम्फा वातामराऩ हुआ। आज ऩयभ सौबाग्म की फात मह है कक इन सबी वातामराऩैऄ
सम्ऩयणम वत
ृ ाॊत 'मोग वमशष्ट्ठ' भयरत: सॊस्कृत भ उऩरब्ध ग्रॊथ तो है ही, उसके कुछ अच्छे बाष्ट्म बी

उऩरब्ध हैं। आज इसे धामभमक ग्रॊथ की सॊऻा दी जाती है । मोगशास्र का अद्भत
ु ग्रॊथ बी भाना जाता
है , वैयाग्म की बी फहुत सी फात इसभ हैं ऩयन्तु एक याजा का तमा कत्तमव्म होना चादहए, उसभ

ऐसा सफ कुछ ननदहत है । 'मोग वमशष्ट्ठ' अनुऩभ है ककसी अन्म कृनत से इसकी तुरना नहीॊ की जा
सकती।

ठीक इसी रस्काय भहाबायतकार भ एक अॊधे याजा ने जफ मह दे खा कक उसकी द्धवदष
ु ी ऩत्नी ने बी
आॊखैऄ ऩय ऩट्टी फाॊध री औय साये के साये याजकुभाय नारामक ननकर गए तो उस याजा ने द्धवदयु
जी को ननभॊरण ददमा।

एक छोटा ऩयन्तु फड़ा सायगमबमत ग्रॊथ रस्कट हुआ। हभ उसे कहते हैं-द्धवदयु नीनत। बावी घटनाएॊ
कुछ औय थीॊ, वयना धत
ृ याष्ट्र का मह रस्मास स्तत्ु म था।

अफ मशवाजी याजे की फात।
बायतवषम भ दहन्द-ऩद-ऩादशाही का स्वप्न ऩयय ा हुआ। मशवाजी भहायाज को ददव्म ननदे श तो मभरे,
ऩयन्तु उससे ऩहरे एक अद्भत
ु कृनत का रस्ाक्म हुआ। उसका नाभ है - दास फोध। भनष्ट्ु म को
स्वमॊ को अऩनी ऩण
म ा भ सभझ ऩाने की वह अद्भत
य त
ु कृनत है । उसका आशम तमा है , तमा आऩ

जानना चाहगे। आशम है : 'इक फहाना था जुस्तजु तेयी दयअसर थी, भुझे खद
ु अऩनी तराश।' दास
फोध अद्भत
ु है । सभथम गुरु याभदास जी ने अऩने द्धरस्म मशष्ट्म मशवा की झोरी भ 'दास फोध' डारा
औय मशवाजी ने सभस्त याजऩाट उन्ह सभद्धऩमत कय ददमा औय 'याजध्वज' को बगवे भ यॊ ग ददमा
औय नाया रगा 'जम-जम-जम यघुवीय सभथम।

इस श्रख
ॊृ रा भ कौदटल्म को कैसे बयर। अथमशास्र का एक-एक वचन चीख-चीख कय कह यहा है कक

इससे उत्कृष्ट्ट यचना द्धऩछरे हजायैऄ वषों भ नहीॊ यची गई। मोग वमशष्ट्ठ, द्धवदयु नीनत, दास फोध औय
अथमशास्र, सफ कुछ हभाये ऩास था, कपय बी हभ सददमैऄ गुराभ यहे तमैऄकक हभ अऩनी जड़ैऄ से
कट गए। आज इनतहास अऩने आऩको दोहया यहा है । क्जस याह ऩय हभ चर यहे हैं वह मसवाम
'द्धवध्वॊस' के हभ कहाॊ रे जाएगी?

94

कायण तमा है ? कायण एक ही है कक 'गोये अॊग्रेजैऄ' के हाथ से ननकर कय याष्ट्र कारे अॊग्रेजैऄ के हाथ
भ चरा गमा। मह साये के साये 'भैकारे' के भानसऩुर थे। इन्हैऄने बायत को इसकी जड़ैऄ से काट
ददमा।

'धभफतनयऩेऺता' नाभक शब्द बायत के भाथे ऩय कोढ़ फनकय उबया। मह आज बी इस याष्र के
शरए करॊक है । धभफ के प्रतत न तो आज तक कोई तनयऩेऺ हो सका है औय न ही बविष्म भें होगा
क्मेआकक धभफ चेतना का विऻान है , अत: मह हभेशा एक ही यहता है , दो नहीॊ हो सकता। ऺभा, दमा,
शीर, सच्चरयरता मह धायण कयने मोग्म हैं, अत: जो इन्ह धायण कयता है वही धामभमक है , जो
ननयऩेऺ है , वह फेईभान है । अऩने सॊस्कायैऄ को अऺुण्ण यखते हुए धामभमक यहा जा सकता है ।

बगिान कृष्ण ने गीता भें कहा- 'स्िधभे तनधनॊ श्रेमभ ्।' इसका एक ही आशम है , अऩनी तनजता न
खोओ।

अऩने धभम भ भत्ृ मु बी श्रेमस्कय है । ढैऄगी न फनो। ढैऄगी को तो नयक भ बी जगह नहीॊ मभरती।
बायत भ सवमधभम सभबाव के रस्णेता रस्कट हो गए। याजनीनत ने ऐसा करुष ऩैदा ककमा। बगवान
कृष्ट्ण ने कहा- अऩना धभम श्रेष्ट्ठ, ऩयन्तु ककसी की द्धवचायधाया का अनादय न कयो। इन फेइभान
ऩाखॊडडमैऄ को दे खो, जो सवेये भजायैऄ ऩय चादय चढ़ाते हैं, दोऩहय को भॊददयैऄ भ जाते हैं, शाभ को
चचों भ जाकय बाषण दे ते हैं तथा यात भ गुरुद्सवाये जाकय मसयोऩा रेते हैं। ऐसा रगता है , इन्ह
फुित्व रस्ाप्त हो गमा? सावधान! मे ऩहरे दजे के ऩाखॊडी हैं। मह ढैऄग कय यहे हैं, जो याजनेता

ऩयभहॊ सैऄ जैसा आचयण कये उसे तमा कहगे? बायत के एक याज्म कश्भीय से चन
ु -चन
ु कय 'दहन्दओ
ु ॊ'
को खदे ड़ ददमा गमा था। मह याष्ट्र का फहुसॊख्मक सभाज है , मह अऩने अमबन्न अॊग भ नहीॊ यह
सकता। इनकी यऺा का रस्फॊध मह सयकाय नहीॊ कय सकी तमैऄकक सायी की सायी सयकाय
'धभमननयऩेऺ' हैं औय ऩॊडडतैऄ के मरए न्माम भाॊगने वारे साम्रस्दानमक कयाय ददए जाते यहे ।
अगय सच कहना फगावत है , तो सभझो हभ बी फागी हैं।'

इस सम्प्ऩादकीम भें भेऄ फहुत साये सिार उठाऊॊगा। इततहास के कुछ ऩन्नेआ का सहाया रेकय अऩनी
फात को स्ऩष्र्ट करूॊगा कक इस हहन्दस्
ु तान भें हहन्दओ
ु ॊ से कैसा व्मिहाय होता यहा है । शसपफ आज

95

िोर्ट फेऄक की याजनीतत की जा यही है । िोर्टेआ की खाततय अजऩसॊख्मकेआ के तुष्र्टीकयण की नीततमाॊ
जायी हेऄ। आज भनभोहन सयकाय कठघये भें खड़ी है औय इततहास का कार ऩुरुर्ष सयकाय से
ऩूछता है - क्मा हहन्दस्
ु तान भें हहन्द ू होना गुनाह है ?.

क्मा हहन्दस्
ु तान भें हहॊद ू होना गुनाह है - ३
इस दे श भ हभेशा षड्मॊर के तहत दहन्दओ
ु ॊ की आस्था ऩय कयायी चोट की जाती यही है । दहन्दओ
ु ॊ

के आस्था स्थरैऄ की ऩहचान औय दहन्दओ
ु ॊ के आयाध्म दे वैऄ का अऩभान ककमा जाता यहा है । ऩहरे
तो अॊग्रेजेआ ने अऩने शासनकार भें इततहास से छे ड़छाड़ की औय हहन्दओ
ु ॊ को वऩछड़े, भ्रष्र्ट, कामय

औय दककमानूसी, ऩाखॊडी तथा जाततिादी शसद्ध कयने का प्रमास ककमा। भुल्स्रभ आिाॊताओॊ के कारे

कायनाभेआ ऩय ऩदाफ डारा गमा। स्वतॊरता रस्ाक्प्त के फाद बी काॊग्रेस के अनेक तथाकधथत धभमननयऩेऺ
नेताओॊ औय वाभऩॊधथमैऄ ने इनतहास को द्धवकृत कयने का रस्मास ककमा। श्रीभती इॊहदया गाॊधी ने

िाभऩॊथी विचायधाया के डा. नुरुर हसन को केन्द्रीम शशऺा याज्म भॊत्री का ऩद सौंऩा। डा. हसन ने
तुयन्त इततहास तथा ऩाठ्म ऩुस्तकेआ के विकृततकयण का काभ शुरू ककमा। िाभऩॊथी इततहासकायेआ
औय रेखकेआ को एकत्रत्रत कय इस काभ को अॊजाभ दे ना शुरू ककमा।

बायतीम इनतहास अनस
ु ॊधान ऩरयषद का गठन ककमा गमा औय ऩाठ्म ऩस्
ु तकैऄ भ दहन्दओ
ु ॊ के फाये
भ अनगमर फात मरखी गईं। गोयऺा के मरए बायतीमैऄ ने अनेक फमरदान ददए। इसके फावजद

छारैऄ को मह ऩढ़ामा गमा कक आमम गोभाॊस का बऺण कयते थे। हहन्द ू धभफ की यऺा के शरए

अऩना फशरदान दे ने िारे गरु
ु तेग फहादयु जी के फशरदान को भ्राभक ढॊ ग से िणणफत ककमा गमा।
रस्ो. सतीश चन्द्र द्सवाया मरखखत एनसीईआयटी की कऺा 11वीॊ की ऩस्
ु तक 'भध्मकारीन बायत' भ

मरखा गमा - ''गरु
ु तेग फहादयु ने असभ से रौर्टने के फाद शेख अहभद सयहहन्द के एक अनम
ु ामी
हाकपज आशभद से शभरकय ऩूये ऩॊजाफ प्रदे श भें रूर्टभाय भचा यखी थी औय साये प्राॊत को उजाड़

हदमा था।'' ''गुरु को पाॊसी उनके ऩरयिाय के कुछ रोगेआ की साल्जश का नतीजा थी, ल्जसभें औय
रोग बी शाशभर थे, जो गुरु के उत्तयाधधकाय के विरुद्ध थे। ककन्तु मह बी कहा जाता है कक

औयॊ गजेफ गुरु तेग फहादयु से इसशरए नायाज था, क्मेआकक उन्हेआने कुछ भुसरभानेआ को शसख फना

शरमा था।'' धभफतनयऩेऺता के नाभ ऩय गुरु तेग फहादयु जैसी हदव्म विबूतत को रुर्टेया फताना औय
औयॊ गजेफ के अत्माचायेआ की घर्टना ऩय ऩदाफ डारने का प्रमास कयना अऺम्प्म अऩयाध ही है । छद्म

धभफ तनयऩेऺता के ठे केदायेआ ने हहन्द ू सभाज की गरत तस्िीय ऩेश की। जफ केन्द्र भें अर्टर त्रफहायी
िाजऩेमी की सयकाय फनी तो केन्द्रीम भानि सॊसाधन भॊत्री डा. भुयरी भनोहय जोशी ने ऩाठ्म

ऩुस्तकेआ से गुरु तेग फहादयु , बगिान भहािीय औय अन्म भहाऩुरुर्षेआ ऩय आयोऩ रगाने िारे अॊश

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हर्टिाने का प्रमास ककमा तो धभफतनयऩेऺ नेताओॊ ने फिार भचाना शुरू कय हदमा औय आयोऩ
रगामा गमा कक बाजऩा सयकाय शशऺा का बगिाकयण कय यही है ।

इस फवार के फीच कट्टयऩॊथी कबी सयस्वती वॊदना को इस्राभ द्धवयोधी फताकय स्कयरैऄ का फदहष्ट्काय
कयते यहे तो कबी वे अऩने फच्चैऄ को 'ग' से गणेश ऩढ़ाने की फजाम 'ग' से गधा ऩढ़ाने की सीख
दे ते यहे । धभमननयऩेऺता के नाभ ऩय मशवाजी, भहायाणा रस्ताऩ, गुरु गोद्धवन्द मसॊह जी औय वीय

सावयकय आदद के रस्ेयक जीवन चरयरैऄ से छारैऄ को वॊधचत ककमा जाता यहा। रस्पुल्र बफदवई जैसे

रेखकैऄ ने अऩने आरेख Fight Hindutva Head on भ Poisonous Hindutva का इस्तेभार ककमा था
मानी जहयीरा दहन्दत्ु व।

भैंने तफ बी सवार ककमा था - उन्भाद औय नश
ृ ॊसता की याजनीनत की झीनी चादय दे कय ककसने
ऐसा फना ददमा कक बायत भ दहन्दत्ु व को जहयीरा कहा जा यहा है ? तथाकधथत कुछ अॊग्रेजीदाॊ

फद्धु िजीद्धवमैऄ ने इस याष्ट्र के दहन्दत्ु व को घण
ृ ा, द्धवद्सवेष, क्रययता का ऩमामम न केवर स्वीकाय ककमा
फक्ल्क फाय-फाय ऐसा मरखा बी।

क्मा हहन्दस्
ु तान भें हहॊद ू होना गुनाह है - ४
भैंने एक फाय नहीॊ अनेक फाय मरखा है कक उन्भाद की दहन्दत्ु व भ कोई जगह नहीॊ। उन्भाद की

बाषा भत फोरो, राखैऄ वषम की कारजमी द्धवयासत ऩय करॊक भत रगाओ। भैंने फाय-फाय इस फात
को दोहयामा कक चाहे दहन्द य का जुनयन हो चाहे भुक्स्रभ का जुनयन हो, जफ बी भाये जाते हैं ननदोष

ही भाये जाते हैं, जो गरत है । इस्राभी आतॊकवाद ऩय बी भेया मही कहना है कक रस्ेभ औय करुणा
के भागम ऩय चरने वारे इस्राभ के अनुमानममैऄ को मह शोबा नहीॊ दे ता। ककसी बी रेखक ने

'जहयीरा इस्राभ' कबी नहीॊ मरखा, ऐसे भ कुछ उन्भाददमैऄ को जहयीरा दहन्दत्ु व कहने की अनुभनत
कैसे दी जा सकती है । वह अऩने बीतय झाॊक औय खद
ु का द्धवश्रेषण कय।

भैं छद्म फद्धु िजीद्धवमैऄ से कहना चाहयॊगा कक दहन्दत्ु व को सभझना है तो वेद की ऋचाओॊ से सभझ,
उऩननषदैऄ के भॊरैऄ भ झाॊक कय दे ख, भमामदा ऩरु
ु षोत्तभ बगवान याभ के ऩावन चरयर से जान,
श्रीकृष्ट्ण की गीता भ इस दशमन को ऩहचान, मशवाजी औय फॊदा फहादयु का चरयर ऩढ़, रेककन

अपसोस इस याष्ट्र भ बगवान याभ को बी अऩभाननत ककमा गमा। बायत औय श्रीरॊका को जोडऩे

97

वारे ऩुर श्रीयाभ सेतु को तोडऩे का रस्मास ककमा गमा औय हद तो तफ हो गई जफ सयकाय ने

सुरस्ीभ कोटम भ बगवान याभ के अक्स्तत्व को ही नकायने जैसी जघन्म याजनीनत शुरू कय दी। जफ
रस्फर द्धवयोध हुआ तो सयकाय को हरपनाभा वाऩस रेना ऩड़ा। ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम की ऩाठ्म
ऩुस्तकैऄ भ बी बगवान याभ के फाये भ अनगमर दटप्ऩखणमाॊ की गईं जो दहन्द य सभाज के मरए
असहनीम हैं।

मशऺा फचाओ आॊदोरन समभनत ने दे श के उच्चतभ न्मामारम भ एक माधचका दाखखर की थी
क्जसभ मह ननवेदन ककमा गमा था कक फी.ए. (आनसम) इनतहास के द्सद्धवतीम वषम भ एक ननफॊध
ऩढ़ामा जा यहा है क्जसका शीषमक है 'थ्री हण्ड्रेड याभामणा वीथ पाइव एतजाम्ऩर'। ननफॊध के रेखक
हैं ए.के. याभानुजन। इस ननफॊध भ याभामण के सम्भाननत चरयरैऄ जैसे याभ, सीता, रक्ष्भण, हनुभान,
अदहल्मा आदद के द्धवषम भ अत्मॊत आऩक्त्तजनक दटप्ऩणी की गई है । इसी ननफॊध भ अन्म
साभग्री के अनतरयतत ननम्रमरखखत फात ऩढ़ाई जा यही थीॊ-

यावण औय भॊदोदयी की कोई सॊतान नहीॊ थी। दोनैऄ ने मशवजी की ऩज
य ा की। मशवजी ने उन्ह आभ खाने को
ददमा। गरती से साया आभ यावण ने खा मरमा औय उसे गबम ठहय गमा। द:ु ख से फेचैन यावण ने छीॊक

भायी औय सीता का जन्भ हुआ। सीता यावण की ऩर
ु ी थी। उसने उसे जनकऩयु ी के खेत भ त्माग ददमा।
हनभ
ु ान छुटबैमा एक छोटा सा फॊदय था एवॊ काभक
ु व्मक्तत था। वह रॊका के शमनकऺैऄ भ क्स्रमैऄ औय
ऩरु
ु षैऄ को आभोद-रस्भोद कयते फेशभॉ से दे खता कपयता था।
यावण का वध याभ से नहीॊ रक्ष्भण से हुआ।
यावण औय रक्ष्भण ने सीता के साथ व्ममबचाय ककमा।
भाता अदहल्मा को मौन की एक भनय तम फतामा गमा है, क्जसका इन्द्र के साथ रज्जाऩण
य म ढॊ ग से मौन
व्ममबचाय दशाममा गमा है ।

ए.के. याभानज
ु न द्सवाया मरखखत ननफॊध 'थ्री हण्ड्रेड याभामणा' एक ऩस्
ु तक भ सक्म्भमरत था क्जसका
नाभ था 'भैनी याभामण।' मह ऩस्
ु तक ऩौरा रयचभेन (आतसपोडम मनय नवमसमटी) द्सवाया सम्ऩाददत की
गई थी। सम्ऩादक ने अऩनी ऩुस्तक भ ऩुस्तक के उद्देश्म स्ऩष्ट्ट ककए थे। उनका कहना था कक
मह ऩुस्तक याभानॊद सागय द्सवाया रस्दमशमत 'याभामण' टी.वी. सीरयमर के अत्मधधक सकायात्भक
रस्बाव को ननयस्त कयने के मरए मरखी गई है ।

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मशऺा फचाओ आॊदोरन समभनत ने सन ् २००८ भ ऩुस्तक के रस्काशक आतसपोडम मयननवमसमटी रस्ैस,

रॊदन से सम्ऩकम ककमा तथा ननफॊध के द्धवषम भ अऩनी आऩक्त्ता फताई औय कहा कक ऩुस्तक भ
दहन्द य दे वी-दे वताओॊ का अऩभान ककमा गमा है । आतसपोडम मयननवमसमटी रस्ेस ने खेद रस्कट ककमा,

भापी भाॊगी तथा आश्वासन ददमा कक उनका उद्देश्म दहन्दओ
ु ॊ की बावनाओॊ को ठे स ऩहुॊचाना नहीॊ
है । उन्हैऄने ऩुस्तक को वाऩस रेना स्वीकाय ककमा। इसकी सयचना उन्हैऄने ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम
के इनतहास द्धवबाग तथा ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम को बी दी ककन्तु इनतहास द्धवबाग ने इसका
सॊऻान नहीॊ मरमा तथा अनधधकृत रूऩ से ननफॊध को अऩने ऩाठ्मक्रभ भ ऩढ़ाना जायी यखा।

समभनत ने न्मामारम से रस्ाथमना की थी कक इस ननफॊध को ऩाठ्मक्रभ से हटा ददमा जाए।
न्मामारम ने अऩने आदे श भ कहा कक इस सॊफॊध भ कुछ द्धवद्सवानैऄ की याम री जाए। द्धवद्सवानैऄ

की याम द्धवश्वद्धवद्समारम की एकेडेमभक कौंमसर के साभने रस्स्तुत की जाए। कौंमसर के ननणमम के

अनुसाय उऩकुरऩनत अधग्रभ काममवाही कय। ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम के उऩकुरऩनत ने न्मामारम के

आदे श के अनुसाय काममवाही कयके ऩयये तथ्म एकेडेमभक कौंमसर की फैठक भ रस्स्तुत ककए। सदस्मैऄ
ने बी अऩने-अऩने द्धवचाय व्मतत ककए। कौंमसर ने इन द्धवचायैऄ का गम्बीयता से अध्ममन ककमा।
कौंमसर के सभऺ मह तथ्म बी रामा गमा कक उतत ननफॊध केवर 2001 तक के मरए ऩाठ्मक्रभ
के मरए स्वीकृत था औय सन ् 2009 के ऩश्चात ् उसे अनधधकृत रूऩ से ऩढ़ामा जाता यहा है । द्धवषम
के सबी ऩहरुओॊ ऩय द्धवचाय कयने के फाद एकेडेमभक कौंमसर ने द्धववाददत ननफॊध को ऩाठ्मक्रभ से
हटाने का ननणमम मरमा।

रस्ख्मात द्धवद्सवान रृदम नायामण दीक्षऺत मरखते हैं कक जीवॊत इनतहास फोध भ ही याष्ट्र का अभयत्व
है औय द्धवकृत इनतहास भ याष्ट्र की भत्ृ मु। श्रीयाभ बायत के भन का यस औय छॊ द हैं। याभानुजन

के द्धववाददत ननफॊध को ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम के ऩाठ्मक्रभ भ शामभर कयने की भाॊग दहन्द य धभम
के खखराप कुक्त्सत षड्मॊर है ।

इतने वषों से फच्चैऄ को इनतहास की कऺा भ अश्रीर कथा ऩढ़ाई जाती यही औय बगवान याभ
का अऩभान ककमा जाता यहा, हहन्दओ
ु ॊ की सहनशीरता को दाद तो दे नी ही ऩड़ेगी।

99

औयॊ गजेफ की भत्ृ मु .....
14वीॊ औय 15वीॊ शताब्दी भ गद्दायैऄ के कायण कई मुिैऄ भ हाय के फाद दहन्द य भहासबा द्सवाया सॊतैऄ
की अगुवाई भ मह ननणमम मरमा गमा की अफ रस्भुख साधय सॊतैऄ द्सवाया व्मक्तत ननभामण का कामम
अऩने हाथैऄ भ मरए जाए l

इस ऩुनीत कामम हे तु फहुत से सॊतैऄ ने अऩना अऩना याष्ट्रीम एवॊ धामभमक कतमव्म ननबाते हुए
सभम सभम ऩय शययवीयैऄ का ननभामण ककमा l
सभथम गुरु याभदास जी बी इसी श्रेणी भ आते हैं क्जन्हैऄने मशवाजी का ननभामण ककमा l
रस्ाण नाथ भहारस्बु जी ने फुन्दे रखण्ड से छरसार का ननभामण ककमा l
ओहभ नये श को श्री याभ भहारस्बु द्सवाया तैमाय ककमा गमा l
मशवाजी का स्वगमवास हो चक
य ा था l

सम्बाजी के अॊग अॊग काट कय उसकी नश
ृ ॊस हत्मा औयॊ गजेफ के साभने ही कय दी गई थी l
उसके फाद छाऩाभाय मुि रस्णारी से ही सभस्त बायत भ चायैऄ औय से औयॊ गजेफ के द्धवरुि एक
साभयदहक रस्मास दहन्द य भहासबा द्सवाया आयम्ब ककमा गमा क्जसभे की फहुत से धभम-गुरुओॊ औय
साधय सॊतैऄ द्सवाया सभम सभम ऩय नीनतमाॉ औय ऩयाभशम बी ददए जाते यहे l
मह बी एक इनतहास ही है की औयॊ गजेफ की सेना इनतहास भ सफसे फड़ी सेना भानी जाती है ,
धन से बी औय व्मक्ततमैऄ से बी l

छोटे छोटे रस्मास हभेशा ही ककमे जाते थे औयॊ गजेफ को भायने के ऩयन्तु वो ककस्भत का बी धनी
था... औय बायत के गद्दायैऄ ननष्ट्ठा का बी l

भयाठा नेता सॊताजी औय धनाजी द्सवाया एक फाय औयॊ गजेफ के तम्फय की सायी यक्स्समाॉ ही काट
कय तम्फय ही धगया ददमा गमा था, ऩयन्तु औयॊ गजेफ उस यात अऩनी फेटी के तम्फय भ था क्जस
कायण वो तो फच गमा ऩय फाकी सबी भय गए l

इस अचानक हभरे के फाद सॊता जी औय धनाजी की ख्मानत बी फहुत फढ़ गमी थी, हारत मह
हो गमी थी की महद कोई घोड़ा ऩानी नहीॊ ऩीता था तो उसे भस
ु रभान कहते थे की .. तन
ू े क्मा
सॊता जी औय धना जी को दे ख शरमा है .... ??

फुन्दे रखण्ड के वीय छरसार ने सौगॊध की हुई थी की औयॊ गजेफ को व्मक्ततगत मुि भ अऩनी
तरवाय से हयाएगा ..... छरसार द्सवाया ऐसे कई रस्मास बी ककमे गए ऩयन्तु अथक रस्मासैऄ के

100

फावजयद वीय छरसार सपर न हो ऩाए l
अॊतत: रस्ाण नाथ भहारस्बु जी ने कहा की एक एक ददन बायी ऩड़ यहा है दहन्दओ
ु ॊ ऩय, तमैऄकक
औयॊ गजेफ योज ढाई भन जनेऊ न जरा रेता था तफ तक उसे नीॊद नहीॊ आती थी l

आऩ इसी फात से अॊदाजा रगा सकते हैं की ढाई भन जनेऊ एक ददन भ जराने से ककतने
दहन्दओ
ु ॊ को भाया सतामा जाता होगा औय ककतने फड़े स्तय ऩय धभम ऩरयवतमन ककमा जाता होगा,
ककतनी ही औयतैऄ का शायीरयक भान भदम न ककमा जाता होगा औय ककतने ही भक्न्दयैऄ तथा
रस्नतभाओॊ का द्धवध्वॊस ककमा जाता होगा l
रस्ाण नाथ भहारस्बु जी की मह फात सुन कय छरसार जी ने अऩनी सौगॊध वाद्धऩस रेकय कहा की
आऩ जो कहगे भैं वो करूॉगा आऩ दख
ु ी न हैऄ...आदे श द l

रस्ाणनाथ भहारस्बु जी ने एक ऽास रस्काय के जहय से मुतत एक खॊजय ददमा फुन्दे रखण्ड को औय

सायी मोजना सभझाते हुए कहा की मह खॊजय ऩयया नहीॊ भायना है , नहीॊ तो वो तत्कार रस्बाव से
भय जामेगा ..... अत् मे खॊजय केवर उसको एक इॊच से बी कभ गहयाई का घाव दे ते हुए रम्फा
सा एक चीय ही भायना था l

क्जससे की धीये धीये उस जहय का असय पैरेगा औय औयॊ गजेफ तडऩ तडऩ कय भये गा l
फुन्दे रा वीय छरसार ने इस कामम को सपरता ऩयवक
म अॊजाभ ददमा औय जैसा रस्ाण नाथ भहारस्बु

जी ने कहा था उसी रस्काय उसके शयीय ऩय एक चीय ददमा.... औयॊ गजेफ 3 भहीने तक तडऩ तडऩ
कय भया औय एक ददन उसके ऩाऩैऄ का का अॊत हुआ l
औयॊ गशाही भें औयॊ गजेफ ने स्िमभ शरखा है की भुझे प्राण नाथ भहाप्रबु ने औय छत्रसार ने धोखे
औय छर से भाया है l

आऩ सफसे विनम्र अनुयोश है की अऩने इततहास को जानें , जो की आिचमक है की अऩने ऩूिज
फ ेआ के
इततहास जो जानें औय सभझने का प्रमास कयें .... उनके द्िाया स्थावऩत ककमे गए शसद्धाॊतेआ को
जीवित यखें l
ल्जस सनातन सॊस्कृतत को जीवित यखने के शरए औय अखॊड बायत की सीभाओॊ की सीभाओॊ की
यऺा हे तु हभाये असॊख्म ऩूिज
फ ेआ ने अऩने शौमफ औय ऩयािभ से अनेकेआ फाय अऩने प्राणेआ तक की
आहुतत दी गमी हो, उसे हभ ककस प्रकाय आसानी से बुराते जा यहे हेऄ l
सीभाएॊ उसी याष्र की विकशसत औय सुयक्षऺत यहें गी ..... जो सदै ि सॊघर्षफयत यहें गे l

जो रड़ना ही बूर जाएॉ िो न स्िमॊ सुयक्षऺत यहें गे न ही अऩने याष्र को सुयक्षऺत फना ऩाएॊगे l

101
इस्राभी शासन कार भें र्षड्मॊत्रत्रक TAX ..... औय सनातन सॊस्कायेआ की हातन
इस्राभी आक्रभणैऄ के 1200 वषों के इनतहास भ धभम की फहुत हानन हुई, सती रस्था, फार द्धववाह, जात ऩात,
आदद जाने ककतनी ही साभाक्जक फयु ाइमाॊ सनातन धभम को छय गमीॊ, औय काने ककतनी ही द्धवकृनतमाॉ सनातन
धभम को चोदटर कयती यहीॊ l ऐसी ही कुछ फयु ाइमैऄ के फाये भ बायत वषम की इनतहास की ऩस्
ु तकैऄ भ ऩढ़ामा
जाता है ऩयन्तु उन्ह ऩढ़ कय रगता है की वो केवर उऩयी ऻान हैं, औय ज्मादातय फयु ाइमैऄ को सनातन धभम
से जोड़ कय ही ददखा ददमा जाता है, ऩयन्तु मे नहीॊ फतामा जाता की उन फयु ाइमैऄ के असरी कायण तमा थे,
औय ककन कायणैऄ से उन फयु ाइमैऄ का उदम हुआ औय द्धवस्ताय हुआ ?
सनातन सॊस्कृनत के शास्रैऄ के अनस
ु ाय भ भनष्ट्ु मैऄ को 16 सॊस्कायैऄ के साथ अऩना जीवन व्मतीत कयने का
आदे श ददमा गमा है , क्जनके ननमभ औय उद्देश्म अरग अरग हैं l इस्राभी आक्रभणैऄ से ऩहरे तक सॊस्काय
रस्था अऩने ननमभो के अनस
ु ाय ननयॊ तय आगे फढ़ यही थी, ऩयन्तु इस्राभी आक्रभणैऄ के फाद औय सपरतभ
अॊग्रेजी स्वप्न्काय Lord McCauley ने सॊस्काय ऩिनतमैऄ को सनातन सॊस्कृनत से ऩथ
ृ क सा ही कय ददमा l
मदद सही शब्दैऄ भ कहयॊ तो शामाद सॊस्काय रस्था रप्ु तरस्ाम सी ही हो चुकी है l इस्राभी शासनैऄ के काममकारैऄ
भ ककस रस्काय सॊस्कायैऄ भ कभी हुई इसके फाये भ आऩ सफको कुछ फताना चाहता हयॉ, कृऩमा ध्मान से ऩढ़
औय सफको ऩढ़ा कय जागरूक कय .... आऩ सफने इस्राभी शासन कारैऄ भ जक्जमा औय भहसर
य के फाये भ
ही सन
ु ा होगा ....
ऩयन्तु सोचने वारी फात है की तमा इस्राभी भानमसकता के अनस
ु ाय दहन्दओ
ु ॊ ऩय धभाांतयण के मरए दफाव
फनाने हे तु मे दो ही कय (TAX) कापी थे... मे सोचना ही हास्माऩद होगा l इस्राभी शासन कारैऄ भ सभस्त
16 सॊस्कायैऄ ऩय TAX रगामा जाता था, क्जसको की नेहरु, रस्थभ मशऺा भॊरी भौराना अफर
ु कराभ आजाद
औय अरीगढ भक्ु स्रभ द्धवश्वद्धवद्समारम के इनतहासकायैऄ ने बायतीम मशऺा ऩिनत की इनतहास की ऩस्
ु तकैऄ
भ जगह नहीॊ दी l ऐसे औय बी फहुत से द्धवषम हैं क्जन ऩय मह फहस की जा सकती है , ऩयन्तु वो ककसी
औय ददन कयगे l
अयफ से जफ इस्राभी आक्रभण रस्ायम्ब हुए तो अऩनी क्रययता, वेह्शीऩन, आक्राभकता, दरयॊदगी, इयान, मभस्र,
तक
ु न, इयाक, आदद सफ द्धवजम कयते हुए सनातन सॊस्कृनत को सभाप्त कयने भरेच्छैऄ द्सवाया ऋद्धष बमय भ दे व
तल्
ु म अखॊड बायत ऩय आक्रभण ककमे गए l रक्ष्म केवर एक था.... दारुर हफम को ... दारुर इस्राभ फनाने
का
औय इस रक्ष्म के मरए क्जस नीचता ऩय उतया जाए वो सफ उधचत थीॊ इस्राभी भानमसकता के अनस
ु ाय
ऐसी ही नीच भानमसकता के अनस
ु ाय जक्जमा औय भहसर
य जैसे TAXES के फाद सनातन सॊस्कृनत के 16

102
सॊस्कायैऄ ऩय बी TAX रगामा गमा l
सॊस्कायैऄ ऩय TAX रगाने का भख्
ु म कायण मह था की सनातन धभम के अनम
ु ामी TAX के फोझ के कायण
अऩने सॊस्कायैऄ से दयय हो जाएॉ l धीये धीये इस रस्काय के षड्मॊरैऄ के कायण इस्राभी कट्टयऩॊथीमैऄ द्सवाया
अऩनाई गमी इस सोच का मह रक्ष्म मसि होता गमा l
धीये धीये सभम ऐसा बी आमा की कुछ रोग केवर आवश्मक सॊस्कायैऄ को ही कयवाने रगे, औय कुछ रोग
सॊस्कायैऄ से ऩण
म मा कट से गए l
य त
सफसे ऩहरे आता है गबाफधान सॊस्काय .....
ककसी सनातन धभम की स्री द्सवाया जफ गबम धायण ककमा जाता था तो एक ननक्श्चत TAX इराके के भौरवी
मा इभाभ के ऩास जभा ककमा जाता था औय उसकी एक यसीद बी मभरती थी l मदद उस TAX को ददए
बफना ककसी बी सनातन धभम के अनस
ु ामी के घय भ कोई सन्तान उत्ऩन्न होती थी तो उसे इस्राभी सैननक
उठा कय रे जाते थे औय उसकी इस्राभी ननमभो के अनस
ु ाय सन्
ु नत कयके उसे भस
ु रभान फना ददमा जाता
था l
नाभकयण सॊस्काय
नाभकयण सॊस्काय का र्षड्मॊत्र महद दे खा जाए तो सफसे भहत्िऩण
ू फ है ...इस र्षड्मॊत्र को सभझने भें
नाभकयण सॊस्काय भ जफ ककसी फच्चे का नाभ यखा जाता था तो उन ऩय द्धवमबन्न रस्काय के के TAX
ननधामरयत ककमे गए थे ...
उदाहयण के मरए .... कॊु िय व्माऩक शसॊह ...
इसभ "कॊु िय" शब्द एक सम्भाननीम उऩाधध को दशामता है , जो की ककसी याजघयाने से सम्फन्ध यखता हो,
उसके फाद "व्माऩक" शब्द सनातन सॊस्कृनत के शब्दकोश का एक ऐसा शब्द है जो जफ तक चरन भ
यहे गा तफ तक सनातन सॊस्कृनत जीद्धवत यहे गी l
उसके फाद "शसॊह" शब्द आता है .... जो की एक वणम व्मवस्था मा एक वॊशावरी का सच
य क है l
कॊु वय..... ऩय TAX 10000 रुऩमे
व्माऩक ...ऩय TAX 1000 रुऩमे
मसॊह ...... ऩय TAX 1000 रुऩमे
अफ जो TAX चक
ु ाने भ सऺभ रोग थे वो अऩने अऩने फजट के अनस
ु ाय अऩने फाचैऄ के मरए शब
ु नाभ
ननकार रेते थे l

103

सभस्मा वहाॊ उत्ऩन्न हुई क्जनके ऩास ऩैसे न हैऄ....
अफ आऩ सोचगे की ऐसे फच्चैऄ का कोई नाभ नहीॊ होता होगा .... ?
ऩयन्तु ऐसा नही था ... ऐसे गयीफ ऩरयवायैऄ के फच्चैऄ के मरए बी नाभ यखे जाने का रस्ावधान था l
ऩयन्तु ऐसे नाभ उस इराके के भौरवी मा इभाभ द्सवाया भफ्
ु त भ ददमा जाता था औय मह कडा ननमभ था
की जो नाभ इभाभ मा भौरवी दगे वही यखा जामेगा .. अन्मथा दॊ ड का रस्ावधान बी होता था l
अफ जया सोधचमे की ककस रस्काय के नाभ ददए जाते हैऄगे इराके के भौरवी मा इभाभ द्सवाया...
रल्रय याभ,

घसीटा याभ,

रल्रय मसॊह,

यैऄद य भर,

झॊडय याभ,

पाॊसी याभ,

पुद्दय याभ,

खचेडय याभ,

कयड़े मसॊह,

पुग्ग्न मसॊह,

यैऄद य मसॊह,

खचेडय भर,

घासी याभ,

याभ कटोयी,

यैऄद य याभ,

रॊगडा मसॊह,

इस रस्काय के नाभ इराके के भौरवी औय इभाभो द्सवाया भफ्
ु त भ ददए जाते थे l
तमा आऩ ऐसे नाभ अऩने फच्चैऄ के यख सकते हैं ... कबी ?? शामद नहीॊ ?
वििाह सॊस्काय के शरए इराके के भौरिी से स्िीकृतत रेनी ऩडती थी, फयात तनकारने, ढोर नगाड़े फजाने ऩय
बी TAX होता था, औय फयात ककस ककस भागफ से जाएगी मह बी भौरिी मा इभाभ ही तम कयते थे l
औय इस्राशभक केन्द्रेआ के साभने ढोर नगाड़े नहीॊ फजामे जामेंगे, िहाॊ ऩय से सय झक
ु ा कय जाना ऩड़ेगा l
ितफभान सभम भें असभ औय ऩल्चचभ फॊगार के भल्ु स्रभ फहुसॊख्मक ऺेत्रेआ भें तो मह आभ फात है l
अॊततभ सॊस्काय ऩय तो बायी TAX रगामा जाता था, ल्जसके कायण मह तक कहा जाता था कक महद TAX दे ने
का ऩैसा नहीॊ है तो इस्राभ स्िीकाय कयो औय कत्रब्रस्तान भें दपना दो l
वतमभान सभम भ उत्तय रस्दे श के भज
ु फ्पयनगय, सहायनऩयु , आजभगढ़, आदद ऺेरैऄ भ मह आभ फात है l
केयर, फॊगार, असभ के भक्ु स्रभ फहुसॊख्मक ऺेरैऄ भ खल्
ु रभ खल्
ु रा मह पयभान सन
ु ामा जाता है, जहाॊ ऩय
रस्शासन औय ऩमु रस द्सवाया कोई सहामता नहीॊ उऩरब्ध कयवाई जाती l
इस्रामभक शासन कार भ सनातन गरु
ु कुर मशऺा ऩिनत को बी धीये धीये नष्ट्ट ककमा जाने रगा, औयॊ गजेफ
के शासनकार भ तो मह खुल्रभ खुल्रा पयभान सन
ु ामा गमा था कक ...

1

ककस रस्काय दहन्दओ
ु ॊ को भस
ु रभान फनाना है ?
ककस ककस रस्काय की मातनाएॊ दे नी हैं ? ककस रस्काय औयतैऄ का शायीरयक भान भदमन कयना है ?
ककस रस्काय भक्न्दयैऄ को ध्वस्त कयना है ?
ककस रस्काय भनय तममैऄ का द्धवध्वॊस कयना है ?
भनय तममैऄ को तोड़ कय उन ऩय भर भर
य का त्माग कयके उनको भक्न्दय के नीचे ही दफा दे ना, खासकय भॊददयैऄ
की सीदढमैऄ के नीचे, औय कपय उसी के ऊऩय भक्स्जद का ननभामण कय ददमा जाए l
भक्न्दयैऄ के ऩज
ु ारयमैऄ को कटक कय ददमा जाए, मदद वे इस्राभ कफर
य कय तो छोड़ ददमा जाए l
क्जतने बी गरु
ु कुर हैं उनको ध्वस्त कय ददमा जाए औय आचामों को तत्कार रस्बाव से भौत के घाट उताय
ददमा जाए l
गौशाराओॊ को अऩने ननमन्रण भ रे मरमा जाए l
कई भक्न्दयैऄ को ध्वस्त कयते हुए तो वहाॊ ऩय गाम काटी जाती थी l
वतमभान सभम भ औयॊ गजेफ के खद
ु के हाथैऄ से मरखे ऐसे हस्तरेख हैं ..क्जन ऩय उसके दस्तखत बी हैं l
ऐसे अत्माचायेआ औय दभन के कायण उऩनमन जैसा अतत भहत्िऩण
ू फ सॊस्काय बी विरल्ु प्त कक कगाय ऩय
ऩहुॉचने रगा l
धीये धीये सॊस्कायैऄ का मह मसरमसरा ऽत्भ सा होता चरा गमा, वानरस्स्थ औय सन्मास सॊस्कायैऄ को तो रोग
बर
य ही गए तमैऄकक उनका अथम ही नहीॊ ऻात हो ऩामा आने वारी कई ऩीदढ़मैऄ को l
छत्रऩतत शशिाजी भहायाज द्िाया एक फाय ऩॊजाफ ऺेत्र भें Survey कयिामा गमा था ल्जसके अनस
ु ाय ऩॊजाफ
के कई ऺेत्र ऐसे थे जहाॊ ऩय रोग गामत्री भहाभॊत्र बी बर
ू चक
ु े थे, उन्हें उसका उच्चायण तो क्मा इसके फाये
भें ऩता ही नहीॊ था l
धीये धीये ऩॊजाफ औय अन्म ऺेरैऄ भ छरऩनत मशवाजी भहायाज द्सवाया उध्वस्त भक्न्दयैऄ का ननभामण कयवामा
गमा औय कई जगहैऄ ऩय आचामों को बेजा गमा क्जन्हैऄने धभम रस्चाय एवॊ रस्साय के कामम ककमे l
एक भहत्वऩण
य म फात साभने आती है ....
कृऩमा ध्मान से ऩढ़ औय सभझ एक अनोखी कहानी जो बर
ु ा दी गमी SICKULAR बायतीम इनतहासकायैऄ
द्सवाया औय नेहरु की kangres द्सवाया

2
औयॊ गजेफ की भत्ृ मु के 10 वषम के अॊदय अॊदय ही भग
ु मरमा सल्तनत मभटटी भ मभर चुकी थी, यॊ गीरे शाह
अऩनी यॊ गीमरमैऄ के मरए रस्मसि था औय ददन रस्नतददन भग
ु मरमा सल्तनत कजों भ डयफ यही थी l
यॊ गीरे शाह को कजम दे ने भ सफसे आगे जमऩयु के भहायाजा था l
एक फाय भौका ऩाकय जमऩयु के भहायाजा ने अऩना कजाम भाॊग मरमा l
यॊ गीरे शाह ने फयु े सभम ऩय जमऩयु के भहायाजा से सम्फन्ध खयाफ कयना उधचत न सभझा, तमैऄकक आगे
के मरए कजम मभरना फॊद हो सकता था जमऩयु के भहायाज से.. ऩयन्तु यॊ गीरे शाह ने जमऩयु के भहायाजा
की रयमासतैऄ को फढ़ा कय फहुत ही ज्मादा द्धवस्तत
ृ कय ददमा औय कहा की जो नए ऺेर आऩको ददए गए
हैं आऩ वहाॊ से अऩना कय वसर
य क्जससे की कजम उतय जाए l
जमऩयु के भहायाज के रस्बाव ऺेर भ अफ गॊगा ककनाये बब्रजघाट, आगया, बफजनौय, सहायनऩयु , ऩानीऩत,
सोनीऩत आदद फहुत से ऺेर बी सक्म्भमरत हो गए l
इन ऺेरैऄ भ सॊस्कायैऄ के ऊऩय रगने वारे TAX .. जक्जमा औय भहसर
य आदद धामभमक TAXES के कायण
जनता रादह रादह कय यही थी, औय जमऩयु के भहायाजा के रस्बाव ऺेर भ आने के कायण सनातन धभॉ
अऩनी आशाएॊ रगा कय फैठे थे की अफ मह ऩैशाधचक TAXES का मसरमसरा फॊद होगा l
ऩयन्तु जमऩयु के भहायाजा ने TAXES वाद्धऩस नहीॊ मरए l

भयाठा साम्राज्म के ऩेशवा के याजदत
य दीना नाथ शभाम उन ददनैऄ जमऩयु भ ननमत
ु त थे, उन्हैऄने बयतऩयु के
जाट नेता फदनमसॊह की भदद की औय जाटैऄ की अऩनी ही एक सेना फनवा डारी, क्जनको ऩेशवा द्सवाया
भान्मता बी ददरवा दी गमी औय 5000 की भनसफदायी बी ददरवा दी गमी l
धीये धीये फदनमसॊह ने अऩना रस्बाव ऺेर फढ़ामा औय दीना नाथ शभाम के कहने ऩय सभस्त जगहैऄ से
भक्ु स्रभ TAXES से ऩाफॊदी हटवाने रगे l
जमऩयु के भहायाजा ननसहाम हो गए तमैऄकक ऩेशवा से सीधे टकयाव उनके मरए सम्बव नहीॊ था l
इन्हीॊ हदनेआ त्रब्रजघार्ट तक का ऺेत्र जार्टेआ द्िाया भक्
ु त कयिा शरमा गमा ..ल्जसका नाभ यखा
गमा गढ़भक्
ु तेचिय
फदन मसॊह औय याजा सयय जभर ने फहुत से ऺेरैऄ ऩय अऩना रस्बाव स्थाद्धऩत ककमा औय भक्ु स्रभ अत्माचायैऄ
से भक्ु तत ददरवाने का कामम ककमा l
कपय बी ऐसी सभस्माएॊ मदा कडा साभने आ ही जाती थीॊ, की कई कई जगहैऄ ऩय भक्ु स्रभ रोग दहन्दओ
ु ॊ को
घेयकय उनसे TAX रेते थे मा कपय सॊस्कायैऄ के कामों भ द्धवघ्न ऩैदा कयते थे l

3
इस सभस्मा से ननऩटने के मरए आगे चर कय फदनमसॊह के फाद याजा सयय जभर ने गॊगा-भहामऻ का
आमोजन ककमा, क्जसभे गॊगोरी से 11000 करश भॊगवाए गए गॊगा जर के औय उन्ह बयतऩयु के ऩास ही
सज
ु ान गॊगा के नाभ से स्थाद्धऩत कयवामा औय सबी दे वी दे वताओॊ को स्थाद्धऩत कयवामा गमा औय फहुत से
भक्न्दयैऄ का ननभामण कयवामा गमा l

सज
ु ान गॊगा ऩय आने वारे कई वषों तक सॊस्कायैऄ के कामम होते यहे l
1947 के फाद नेहरु औय SICKULAR जभात ने मभर कय सज
ु ान गॊगा का अक्स्तत्व सभाप्त कय ददमा, उसभे
आसऩास के साये गॊदे नारे मभरवा ददए औय आसऩास की पेतटरयमैऄ का गॊदा ऩानी आदद उसभे धगयवा
ददमा l
आसऩास के रोग भर-भर
य त्माग कयने रगे l
इसी वषम हुए एक सवे के अनस
ु ाय सज
ु ान गॊगा के चायैऄ औय 650 से ज्मादा रोगैऄ द्सवाया रस्नतददन भर-भर

त्माग ककमा जाता है l

आऩ सफसे विनम्र अनयु ोश है की अऩने इततहास को जानें, जो की आिचमक है की अऩने ऩि
फ ेआ के इततहास
ू ज
जो जानें औय सभझने का प्रमास कयें .... उनके द्िाया स्थावऩत ककमे गए शसद्धाॊतेआ को जीवित यखें l
ल्जस सनातन सॊस्कृतत को जीवित यखने के शरए औय अखॊड बायत की सीभाओॊ की सीभाओॊ की यऺा
हे तु हभाये असॊख्म ऩि
फ ेआ ने अऩने शौमफ औय ऩयािभ से अनेकेआ फाय अऩने प्राणेआ तक की आहुतत दी गमी
ू ज
हो, उसे हभ ककस प्रकाय आसानी से बर
ु ाते जा यहे हेऄ l

सीभाएॊ उसी याष्र की विकशसत औय सयु क्षऺत यहें गी ..... जो सदै ि सॊघर्षफयत यहें गे l

जो रड़ना ही बर
ू जाएॉ िो न स्िमॊ सयु क्षऺत यहें गे न ही अऩने याष्र को सयु क्षऺत फना ऩाएॊगे l

4
याष्रीम भीडडमा मा याष्रीम दे शद्रोही मा याष्रीम दरार
काॊग्रेस औय चचफ तथा अयफ दे शो के पेके हुए र्टुकड़े ऩय ऩरने िारी भीडडमा के हे डराइन का वियोधाबास
:::::
आखखय नीचता औय रारच की एक हद होती है >>

जया आऩरोग हभाये दे श की नीच औय कुत्ती भीडडमा की हे डराइन का द्धवयोधाबास सनु नए :
1- मशव सेना मा फीजेऩी अगय ऩण
ु े भे भाये गए ककसानो के ऩऺ भे कैऄग्रेसी सयकाय की फखऽमाॉ उधेड़ते है
तो भीडडमा भे हे डराइन होती है “अफ इस भद्द
ु े ऩय याजनीनत शरू
ु हो गई है“
वही जफ Raul Feroze Khan Roberto Vinci GAYandhi बट्टा ऩायसौर भे नौटॊ की कयने जाता है तो उसे फाय
फाय केक्न्द्रत ककमा जाता है औय हे डराइन होती है
“आज याहुर गाॊधी ने ऩीडड़त ककसानो का हार चार ऩछ
य ा औय भत
ृ को के रस्नत सॊवेदना व्मतत की…
औय भामा सयकाय ऩय जभकय फयसे” ऐसी भहा हयाभखोय भीडडमा है हभायी .
सबी चचम द्सवाया ऩोद्धषत औय दे श द्रोहीमैऄ कश्भीयी अरगाववाददमैऄ के सभधथमत इन चेनरैऄ का मही हार है
बाई …. फीजेऩी के नेताओ को याजनीनत से रस्ेरयत कयना, अऩने डडफेट काममक्रभैऄ भे फीजेऩी का एक नेता
औय भ़
ु ाफरे भे 2-3 कैऄग्रेसी + उनके सहमोगी वाभऩॊधथ कुत्तो से रडवाकय भद्द
ु ो को गभ
ु याह कयना, रक्ष्म
होता है फीजेऩी को अयाष्ट्र ऩाटॊ के रूऩ भे धचबरत कयना, ताकक हय मव
ु ा के भख
ु से मही ननकरे फीजेऩी
एक नकाया ऩाटॊ है साॊरस्दानमक ऩाटॊ है ।
औय जफ उन्ह कयाय जवाफ ककसी BJP रस्वतता द्सवाया दे ददमा जाता है, जहाॊ ऩय जवाफ दे ना बायी ऩड़ जाता
है Cristian Communist Chuslim जभात के मरए.. उसी सभम मा तो ब्रेक कय दे ते हैं, मा कपय भद्द
ु े को
याजनननतक यॊ ग दे ने के नाभ ऩय खत्भ कय दे ते हैं
इनके मरए कॉग्रेॊ स ने अगय 10 ककरो का भ्रष्ट्टाचाय ककमा तो उसके साभने फीजेऩी का 30 ग्राभ का
भ्रष्ट्टाचाय 20 ककरो का हो जाएगा ….
2- अगय 10 भहीने से डडमट
य ी से अनऩ
ु क्स्थत औय दहयासत भे दो भौत के अमबमत
ु त तथा जफयन पजॉ
एकपडेद्धवट फनाने के आयोऩी सॊजीव बट्ट को ऩमु रस धगयफ्ताय कयती है तो नीच मभडडमा की हे डराईन होती
है " भोदी का फदरा " मा " मही है भोदी की असरी सद्भावना "

5
रेककन अगय काॊग्रेस शामसत याज्मैऄ भे ककयण फेदी का रस्ोभोशन सयकाय योक दे मा फाफा याभदे व औय
आचामम फक्ल्क्रशन के ऩीछे फदरे के मरए ऩयय ी सीफीआई रगा दे मा भहायाष्ट्र भे ऩाॊच ऩमु रस अधधकारयमो
को धगयफ्ताय काय मरमा जामे मा केन्द्र सयकाय "नोट पाय वोट " भे उल्टे फीजेऩी के साॊसदैऄ को धगयफ्ताय
कय रे तो कपय इस नीच भीडडमा की सनसनी खेज हे डराईन तमैऄ नहीॊ होती ?
3- आज फाफा याभदे व के सम्ऩनत के ऩीछे ऩयय ी भीडडमा ऩड़ी है जो उन्हैऄने मोग मा दवाओ से अक्जमत की है
.. इसभ कोई अऩयाध नहीॊ है ..
रेककन आज की नीच भीडडमा याफटम वढे या के साम्राज्म के ऩीछे तमैऄ नहीॊ ऩड़ती ? उसने मसपम १० सार भे
खयफो की सम्ऩनत कैसे फनाई ? उसने कौन सा जाद य ककमा ?
भीडडमा सोननमा से तमैऄ डयती है ? तमा उसे अऩनी फोटी औय हड्डी खोने का डय है ?
4- मदयु प्ऩा के ऩीछे ऩयय ी भीडडमा कई भहीनो तक जैसे एक सोचा सभझा आन्दोरन चरामा .. वो धाय औय
वो भीडडमा का ऩैनाऩन शीरा ददनछत औय अशोक गहरोत के भ्रष्ट्टाचाय ऩय खाभोश तमैऄ हैऄ जाता है ??
5- गज
ु यात दॊ गो के 10 सार फीत जाने के फाद बी भीडडमा जाककमा जापयी , जादहया शेख , औय दस
य ये
भक्ु स्रभ ऩीडडतो के मरए फहुत सद्भावना ददखाती है .. वो सद्भावना याजफारा के मरए तमैऄ नहीॊ ???
6- गज
ु यात दॊ गो के मरए आज मभडडमा भोदी के मरए क्जन शब्दैऄ का उऩमोग कयती है वही शब्द औय वही
धाय वो काॊग्रस
े के मरए मसख्ख द्धवयोधी दॊ गे औय बागरऩयु दॊ गे औय भफ
ॊु ई दॊ गे के मरए तमैऄ नहीॊ इस्तेभार
कयती ?
7- दे गग
ॊ ा भ हुए ननयॊ तय दॊ गो के फाये भ याष्ट्रीम भीडडमा द्सवाया कुछ बी रस्सारयत नहीॊ ककमा गमा l 8- दे श
भ तेजी से ऩनऩ यहे आतॊकवादी सन्गठन PFI (Popular Front of India) की गनतद्धवधधमैऄ के फाये भ कोई
सभाचाय नहीॊ ददखामा जाता, जफकक मही PFI आज ददल्री NCR भ तेजी से र्फैर यहा है औय अऩनी जड
भजफत
य कय यहा है l इसी PFI भ SIMI औय IM के आतॊकवाददमैऄ को रस्वेश ददमा जा यहा है l औय कोई शॊका
नहीॊ की आने वारे सभम भ बायत के अॊदय ही अॊदय अर-कामदा औय तामरफान से बी फड़ा आतॊकवादी
सन्गठन फन कय उबय जामेगा l
9 -अबी बयतऩयु दॊ गे के मरए गहरोत को मभडडमा "भस
ु रभानैऄ का कानतर " तमैऄ नहीॊ कहती ?
10- जफ अगस्त 2011 भ भयु ादाफाद भ दॊ गे हो यहे थे तो हभाया याष्ट्रीम भीडडमा इॊग्रैण्ड भ हो यहे दॊ गो की

6
कवये ज ददखाने भ व्मस्त थे, ककतना जान भार का नत
ु सान हुआ मे भीडडमा ने नहीॊ ददखा तमैऄकक
भस
ु रभानैऄ का फयु ा, दहॊसक, क्जहादी, नीच, फरात्कायी ऩऺ दे ख कय कहीॊ दहन्द य जाग न जाएॉ l

आज की इस भीडडमा के रस्भख
ु कामम है :
1. आयएसएस को मसम्भी के कताय भे खड़ा कयना
2. बगवा भे आतॊकवाद ढयॉढना, डडग्गी के फमानो को जानफझ
य कय हवा दे ना ताकक दहॊदओ
ु ॊ की वाणी उसी भे
फहकय दहन हो जामे….
3. दहन्द य सॊस्कृनत भे दोष ढयॉढना, अभयनाथ मारा को ढैऄघ कयाय दे ना – पजॉ द्धवऻानी को फर
ु ाकय के
अभयनाथ मारा का वैऻाननक बफन्द ु दे खना ताकक दहन्द य मह सभझे की मह एक ढैऄग है .
4. रॊदन भे 4 रोग भाये तो उसे योज दवाई की तयह दशमकैऄ को द्धऩरानाऔय ठीक उसी सभम भे भयु ादाफाद
भे बगवान मशव की मारा भे शामभर 4-5 दहन्द य भये दॊ गो भे तो उसे बफरकुर बी नहीॊ फताना
5. केयर भे सत्ताधायी ऩाटॊ के क्जहादी मव
ु क ऩाककस्तानी ऩचे फाॊटे तो फड़ी फात नहीॊ है , रेककन सब्र
ु भण्मभ
स्वाभी के फमान फड़ी फात है …..
6. भह
ु म्भद के डेन्भाकम भे फने काटयमन का गस्
ु सा महाॉ के भक्ु स्रभ कोल्हाऩयु औय हुफरी भे सयकायी सॊऩक्त्त
औय भद
ु े दहॊदओ
ु ॊ ऩय हाथ साप कय तो इस भीडडमा की हे डराइन होती है “इनका गस्
ु सा जामज है ककसी के
धभम की बावनाओ के साथ खखरवाड़ उधचत नहीॊ है “वही एक साॊस्कृनतक आतॊकवादी एभ एप हुसेन
फहुसॊख्मक (?) दहॊदओ
ु ॊ के दे वी दे वताओ के नग्न धचर फनाए औय उसके रस्नतकृमा भे फहुसॊख्मक दहॊदओ
ु ॊ के
दे श भे भट्ठ
ु ी बय सॊगठन द्धवयोध कय तोभीडडमा उन ऩय तोगडड़मा टे ग रगाकय हुसेन के रस्नत अऩनी हभददॊ
फताती है ….
7. गोवा भे भॊददय की भनय तममैऄ ऩय ऩैशाफ कयके “ईसा की ताकत फताना” औय भनय तममाॉ ईसाई तोड़े तो कोई
फात नहीॊ….
केयर के भक्ु स्रभ फहुर इराकैऄ भे मभशनयी के गज
ु यने भार से भौत मभरे तो भीडडमा भे कोई हे डराइन /
फात नहीॊ …..तमैऄकक दोनैऄ “मभर सभह
ुॊ ″ का टकयाव है

7
8. रेककन एक भदम दहन्द य उड़ीसा भे ईसाई मभशनरयमैऄ को उनके कुकृत्म ऩय क्जॊदा जराए …..तो इस भीडडमा
की हे डराइन होती है ”दे श भे दहन्द य कट्टयऩॊथ फढ़ यहा है “
9. हभेशा इन्हे व्मवस्था ऩरयवतमन कयने ननकरे स्वाभी याभदे व भे एक चोय, ऩाखॊडी नजय आता है
10. हय योज कभ से कभ 4-5 खफये ऐसी होती है जहाॊ कोई ऩज
ु ायी ककसी भॊददय भे फरात्काय कयता है, कोई
दहन्द य सॊत ढैऄगी ननकरता है , आसायाभ हत्माया ननकरता है आयएसएस के खखराप क्स्टॊ ग ऑऩये शन होता
है , ऐसी भीडडमा क्जसे मसपम दहन्द य के अॊदय ही फरात्कायी, ऩाखॊडी, चोय नजय आता हो वो कैसे रोगो को
जगाएगी ? जफ कोई दे श की भीडडमा ककसी ननजी सॊस्थानो के हाथो भे हो तो उससे ककसी बी तयह की
आशा यखना व्मथम है ….. वह तो मसपम अऩने आकाओ के कहने ऩय अऩने स्वाथम मसद्धि के मरए फहुसॊख्मकैऄ
को फयगराएगी…. ताकक दहन्द य मे खफये ऩढ़ ऩढ़ कय के अऩने आऩ को हीन सभझने रगे औय मभशनरयमैऄ
के मरए धभम ऩरयवतमन के मरए ऩहरी सीढी तैमाय हो जामे ….
11- मदद कोई भक्ु स्रभ मा ईसाई कोई दहॊद य द्धवयोधी ककताफ मरखे तो वो "अमबव्मक्तत की स्वतॊरता" औय
मदद कोई दहॊद य मरखे तो अऩयाध
भहानगयो भे “दहन्द य नाक्स्तको” (नऩस
ुॊ को) की तादात फढ़ यही है गरे भे क्रॉस शोबामभान है …. वाणी भे
आधनु नक कॊऩनी तॊर से रस्ेरयत सेकुरयवाद- अफ तो मह कहने भे बी शभम आती है की जागो दहॊदओ
ु ॊ जागो । तमैऄकक एक बाषण भार से ही मदा कडा
मसपम एक दहन्द य की आॉख खुरती है रेककन फाकी जागते हुए बी अॊदय सोमे यहते है … जमचॊदी का क्जन
कहीॊ न कहीॊ उनभे दहरोये रेता है ….
इस फात का आऩ कबी घभॊड न कय की आऩकी सॊख्मा 70 % हैं….. इसभे से आधे तो सेकुरय "SICKULARS"
की औरादे है फाकी वे जो भौन द्धवयोध कयतेहै रेककन वोट नहीॊ दे ते है तमैऄकक उन्हे अऩना व्माऩारयक
सभम प्माया है ….
औय क्जस तयह से इस दे श भे भक्ु स्रभ जनसॊख्मा तेजी से फढ़ यही है उस दहसाफ से 2060 तक दहॊद य इस
दे श भे अल्ऩसॊख्मक हैऄ जामगे ..
जागो दहॊद य जागो अऩने वोट की कीभत सभझो !! अऩने जानत औय ऺेर को बर
य कय एक नई सफ
ु ह के
मरए तैमाय हैऄ जाओ

8
'विनाशकारे Intellectual फवु द्ध' .... एक उत्तय ... धभफ-तनयऩेऺी SICKULARS के शरए .... जो दोगरी
भानिता की फात कयते हेऄ l
आजकर Sickular रोगैऄ की फाढ़ सी आ गई है ... क्जसे दे खो सनातन धभम ऩय आमे हुए सॊकटैऄ को अनदे खा
कय ... भानवता का उऩदे श दे ने भ रगा हुआ है,
मे वो रोग हैं ... क्जन्ह वसध
ु ैव कुटुम्फकभ औय सवम धभम सभबाव के आगे कुछ बी कहना नहीॊ आता,
इन दो श्रोकैऄ भ ही इनका भानवता का ऻान ऩयय ा हो जाता है l
क्जनसे कबी गीता के ऻान की फात कयो तो ... बी केवर दो ही श्रोक माद आएॊगे,
1. आत्भा अजय है, अभय है ....
2. कभम कय... पर की धचॊता भत कय
फस.... हो गमा ऩयय ा गीता का ऻान, हो गमा जीवन सपर
गीता के ऻान की फात कयते हुए अऻानी रोग मह तमैऄ बर
य जाते हैं की बगवन श्री कृष्ट्ण ने ही एक औय
उऩदे श ददमा था कक "हे ऩाथम! जफ शरु साभने खडा हो, जो घातक अस्रैऄ - शस्रैऄ के साथ हो, उससे दमा
कक आशा नहीॊ कयनी चादहए,
इससे ऩहरे कक वो तभ
ु ऩय आक्रभण कये औय कोई घातक रस्हाय कये ... आगे फढ़ कय उसका सॊहाय कयो
l"
धभम यऺा हे तु सभम सभम ऩय शस्र उठाने की मशऺा बी बगवान श्री कृष्ट्ण ने ही दी l
ऩय भानवता की फात कयने वारे भस
ु रभान - ईसाईमैऄ के द्सवाया मभरने वारे ऩारयश्रमभक ऩय जीने वारे ....
नकरी दहन्दओ
ु ॊ को मह ऻान सभझ भ नहीॊ आते ..... तमैऄकक .... द्धवनाशकारे INTELLECTUAL फद्धु ि ...
अत् ऐसे सभस्त Sickulars के मरए एक छोटा सा उत्तय है , जो अऩने आऩ भ सभस्त ऩाऩी जीव्हाओॊ को
तत्कार रस्बाव से काट सकता है l
रस्सॊग भहाबायत का है ...
कणम कौयवैऄ का सेनाऩनत था औय अजन
ुम के साथ उसका घनघोय मि
ु जायी था l
कणम के यथ का एक चतका जभीन भ पॊस गमा l
उसे फाहय ननकरने के मरए कणम यथ के नीचे उतया औय अजन
ुम को उऩदे श दे ने रगा - "कामय ऩरु
ु ष जैसे
व्मवहाय भत कयो, शयय वीय ननहत्थैऄ ऩय रस्हाय नहीॊ ककमा कयते l धभम के मि
ु ननमभ तो तभ
ु जानते ही हो l
तभ
ु ऩयाक्रभी बी हो l
फस भझ
ु े यथ का मह चतका फाहय ननकरने का सभम दो l भैं तभ
ु से मा श्री कृष्ट्ण से बमबीत नहीॊ हयॉ, रेककन

9
तभ
ु ने ऺरीम कुर भ जन्भ मरमा है , श्रेष्ट्ठ वॊश के ऩर
ु हो l हे अजन
ुम ..... थोड़ी दे य ठहयो "
ऩयन्तु बगवन श्री कृष्ट्ण ने अजन
ुम को ठहयने नहीॊ ददमा, उन्हैऄने कणम को जो उत्तय ददमा वो ननत्म
स्भयणीम है ....
उन्हैऄने कहा " नीच व्मक्ततमैऄ को सॊकट के सभम ही धभम की माद आती है l
द्रौऩदी का चीय हयण कयते हुए,
जुए के कऩटी खेर के सभम,
द्रौऩदी को बयी सबा भ अऩनी जाॊघ ऩय फैठने का आदे श दे ते सभम,
बीभ को सऩम दॊ श कयवाते सभम,
फायह वषम के वनवास औय एक वषम के अऻातवास के फाद रौटे ऩाॊडवैऄ को उनका याज्म वाद्धऩस न कयते
सभम,
16 वषम की आमु के अकेरे अमबभन्मु को अनेक भहायधथमैऄ द्सवाया घेयकय उसे भत्ृ मु भख
ु भ डारते सभम
.... तम्
ु हाया धभम कहाॉ गमा था ?
श्री कृष्ट्ण के रस्त्मेक रस्श्न के अॊत भ भामभमक रस्श्न "तव ते धभमस्तदा गत् " ... ऩछ
य ा गमा है l
इस रस्श्न से कणम का भन द्धवक्च्छन्न हो गमा l
श्री कृष्ट्ण ने अजन
ुम से कहा "वत्स, दे खते तमा हो, चराओ फाण l इस व्मक्तत को धभम की चचाम कयने का
कोई अधधकाय नहीॊ है "
सनातन इनतहास साऺी है की सभस्त शयय वीयैऄ ने ऐसा ही ककमा है l
मशवाजी को क्जन्दा मा भद
ु ाम दयफाय भ राने की रस्नतऻा रेकय ननकरे अपजर खान ने बफना ककसी कायण
के तर
ु जाऩयु औय ऩॊढयऩयु के भक्न्दयैऄ को नष्ट्ट ककमा था, उसकी मह यणनीनत थी की मशवाजी खखमसमाकय
यणबमय भ भ भ आ जाएॉ l ऩयन्तु मशवाजी की यणनीनत मह यही की अफ्ज्ल्खान को जावरी के जॊगरैऄ भ
खीॊच रामा जाए, अॊतत् मशवाजी की यणनीनत औय यणकौशर सपर हुआ, अपजर खान रस्ताऩगढ़ ऩहुॊचा
औय मशवाजी ने उसे मभ-सदन बेज कय द्धवजम रस्ाप्त की l मशवाजी की इस यणनीनत को कऩट नीनत कहने
वारे 'मभशनयी-दहन्द-य इनतहासकायैऄ' औय 'भक्ु स्रभ-दहन्द-य इनतहासकायैऄ' को द्धवजम का भहत्त्व नहीॊ ऩता l
सनातन इनतहास भ शयय वीयैऄ का आदभी साहस, ऩयाक्रभ, फमरदान, मोगदान आदद सफ अतर
ु नीम है ... ऩयन्तु
इस फमरदान, मोगदान, ऩयाक्रभ, शयय वीयता औय साहस को द्धवजम का जो पर मभरना चादहए वह सम्बव
नहीॊ हुआ .... मह सचभच
ु दब
ु ामग्म की फात है l

10
मह सचभच
ु दब
ु ामग्म की फात है की सनातन बायत के नागरयकैऄ को उनका गौयवशारी इनतहास न ऩढ़ा कय
ऩैशाधचक भग
ु रकारीन इनतहास को अत्मॊत भहत्त्व ददमा जाता है औय सनातन ऩीढ़ी अऩने गौयवशारी
इनतहास से दयय जाकय ऩैशाधचक चकाचौंध से भॊरभग्ु ध होती जा यही है l
ऩैशाधचक धभों के षड्मॊरैऄ से अनजान मे ऩीढ़ी .... खोखरी भानवता की फात कयती है तो उनसे मह ऩछ
य ने
की क्जऻासा होती है कक अऩने धामभमक ग्रन्थैऄ की उनको ककतनी सभझ है l
द्धऩता की आऻा को मशयोधामम क्र याजऩद का त्माग कयनेवारे बगवन भमामदाऩरु
ु षोत्तभ श्री याभ,
असरी उत्तयाधधकायी के वनैऄ भ यहने तक वल्कर वस्र धायण कयते हुए घास पयस कक शैय्मा ऩय
सोनेवारे ब्रह्भ-अवताय बयत,
सभस्त द्धवश्व को श्रीभद्भागवद्सगीता का ऻान दे ने वारे सक्च्चदानन्द सत्मनायामन बगवान श्री कृष्ट्ण,
स्वप्न भ ददमा वचन ऩण
य म कयने वारा सत्मवादी हरयश्चन्द्र,
शयण भ आमे कफत
य य के रस्ाण फचने हे तु फाज के बाय साभान अऩना भाॊस दे ने वारे यजा मशवी,
दे वताओॊ की द्धवजम के मरए अऩनी अक्स्थमाॉ दे ने वारे भहद्धषम दधीची,
ह्रदम से ऩनत भाने व्मक्तत का एक वषम फाद होने वारे ननधन को जानते हुए बी उससे ही द्धववाह कयने
वारी औय साऺात ् मभयाज से द्धववाद कयने औय अऩने ऩनत को रस्ाप्त कयने वारी साद्धवरी,
सायी सम्ऩती ठुकया कय आत्भऻान के भागम का अनस
े ी,
ु यण कयने वारी भैरम
द्धऩता कक ऽश
ु ी के मरए आजीवन अद्धववादहत यहने कक 'बीषण' रस्नतऻा रेने वारे दे वव्रत ... द्धऩताभह बीष्ट्भ,
स्वतॊरता के मरए मरए बटकते कपयते भहायाणा रस्ताऩ,
याजऩर
ु के मरए अऩने ऩर
ु का फमरदान दे ने वारी ऩन्ना धाम,
याजा द्सवाया अन्मामऩव
म द्धऩता को हाथी के ऩैयैऄ तरे कुचरवाने के फाद बी अऩनी सायी सम्ऩक्त्त याजा के
य क
मरए दान कयने वारा खॊडो फल्रार,
स्वतॊरता के मरए पाॊसी के पॊदे को गरहाय सभझकय उसे चयभकय ऩयभ-वीयगनत को रस्ाप्त होने वारे हभये
शयय वीय स्वतॊर सेनानी - क्रक्न्तकायी,
उऩयोतत सबी हभाये आदशम हैं,
सत्म, शीर, स्वामभननष्ट्ठा, धभमननष्ट्ठा, त्माग, फमरदान, आदभी साहस, ऩयाक्रभ, द्धवजम आदद भल्
य मैऄ को
रस्नतष्ट्ठाद्धऩत कयने के मरए क्जन शयय वीयैऄ ने अऩना अऩना अऩना त्माग ककमा वे सफ हभाये आदशम हैं l
इन साये आदशों ने क्जन भल्
य मैऄ कक स्थाऩना कक उन भल्
य मैऄ कक यचना .... मानी ... सॊस्कृनत l
सॊस्कृनत औय कुछ नहीॊ होती ...सॊस्कृनत भाने जीवन भल्
य मैऄ कक भामरका l

11
क्जनके मरए हभ जीद्धवत यहने भ आनन्द हो औय भत्ृ मु भ बी गौयव मभरे, ऐसे भल्
य मैऄ की ऩयॊ ऩया ही
सॊस्कृनत होती है l
इन भल्
य मैऄ की यऺा का अथम ही सॊस्कृनत की यऺा कयना होता है l
ऐसे भल्
य मैऄ की ऩयम्ऩया ही सॊस्कृनत का घ्मोतक है l
सभम के साथ अनेक ऩरयवतमन होते हैं, ऩोशाकैऄ भ फदराव आमेगा, घयैऄ की यचना भ फदराव आमेगा,
खानऩान के तयीके बी फदरगे.....
ऩयन्तु जीवन भल्
य म तथा आदशम जफ तक कामभ यहगे तफ तक सॊस्कृनत बी कामभ कहे गी l मही सॊस्कृनत
याष्ट्रीमता का आधाय होती है ....
याष्ट्रीमता का ऩोषण मानन सॊस्कृनत का ऩोषण होता है .... इसे ही साॊस्कृनतक याष्ट्रवाद कहा जाता है l
ॐ सवोऩरय सवमगण
ु सॊऩन्न सनातन वैददक सनातन धभां....
|| सनातनधभम् भहत्भो द्धवश्व्धभम् ||
"द्धवश्व भहाशक्तत फनना हभाया ऩौयाखणक जन्भमसि अधधकाय है , औय हभ इस ऩद को रेकय यहगे ।"
हभ द्धवश्व धभम हैं,

हभ सनातन हैं,

हभ द्धवश्व याष्ट्र हैं,

हभ द्धवश्वगरु
ु हैं,

हभ द्धवश्व रस्ाणी हैं,

हभ द्धवश्वशक्तत हैं.

हभ द्धवश्वात्भा हैं,

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भाॉसाहाय अथाफत शैतान का प्रसाद .... िैल्चिक अशाल्न्त का घय
भाॉसाहाय अथाफत शैतान का प्रसाद .... िैल्चिक अशाल्न्त का घय
भाॉसाहाय को मदद "शैतान का रस्साद" मा "अशाक्न्त का घय" कहा जामे, तो शामद कुछ गरत नहीॊ होगा. डा.
याजेन्द्र रस्साद जी न एक फाय कहा था कक "अगय सॊसाय भें शाल्न्त कामभ कयनी है तो उसके शरए दतु नमा
से भाॉसाहाय को सभाप्त कयना होगा. त्रफना भाॉसाहाय ऩय अॊकुश रगामे मे सॊसाय सदै ि अशाल्न्त का घय ही
फना यहे गा".

डा. याजेन्द्र रस्साद जी न ककतनी सही फात कही है . मे कहना बफल्कुर दरु
ु स्त है कक भाॉसाहाय के चरते दनु नमा
भ शाक्न्त कामभ नहीॊ यह सकती. शाकाहायी नीनत का अनस
ु यण कयने से ही ऩथ्
ृ वी ऩय शाक्न्त, रस्ेभ, औय
आनन्द को धचयकार तक फनामे यखा जा सकता है, अन्मथा नहीॊ.
ऩक्श्चभी द्धवद्सवान भोरयस सी. ककघरी का बी कुछ ऎसा ही भानना है . उनके शब्दैऄ भ कहा जाए, तो " मदद
ऩथ्
ृ वी ऩय स्वगम का साम्राज्म स्थाद्धऩत कयना है तो ऩहरे कदभ के रूऩ भ भाॉस बोजन को सवमथा वजमनीम
कयना होगा, तमैऄकक भाॉसाहाय अदहॉसक सभाज की यचना भ सफसे फडी फाधा है ".
आज जहाॉ शाकाहाय की भहत्ता को स्वीकाय कयते हुए भाॉसाहाय के जनक ऩक्श्चभी याष्ट्रैऄ तक भ शाकाहाय को
अॊगीकाय ककमा जाने रगा है , उसके ऩऺ भ आन्दोरन छे डे जा यहे हैं, क्जसके मरए न जाने ककतनी सॊस्थाम
काममयत हैं. ऩय अपसोस! बगवान याभ औय कृष्ट्ण के बतत, शाकाहायी हनभ
ु ान जी के आयाधक, बगवान
भहावीय के 'क्जतेक्न्द्रम', भहद्धषम दमानन्द जी के अदहॉसक आमम सभाजी औय याभकृष्ट्ण ऩयभहॉस के 'धचत्त
ऩरयष्ट्काय ये ख'े दे खने वारे इस दे श बायत की ऩावन बभ
म : शि
य ी ऩय "ऩण
य त
ु शाकाहायी होटरैऄ" को खोजने तक
की आवश्मकता आन ऩडी है . आज से सैकडैऄ वषम ऩहरे भहान दाशमननक सक
ु यात न बफल्कुर ठीक ही कहा था,
कक-----"इन्सान द्सवाया जैसे ही अऩनी आवश्मकताओॊ की सीभाओॊ का उल्रॊघन ककमा जाता है, वो सफसे ऩहरे
भाॉस को ऩथ्म फनाता है .". रगता है जैसे सीभाओॊ का उल्रॊघन कय भनष्ट्ु म 'द्धववेक' को नोटैऄ की नतजोयी भ
फन्द कय, दस
य यैऄ के भाॉस के जरयमे अऩना भाॉस फढाने के चतकय भ रक्ष्महीन हो, ककसी अॊजान ददशा भ घभ

यहा हो.......
आईमे हभ भाॉसाहाय का ऩरयहाय कय-----"जीवो जीवस्म बोजनॊ" अथामत जीव ही जीव का बोजन है जैसे पारतय
के कऩोरकक्ल्ऩत द्धवचाय का ऩरयत्माग कय "भा दहॉसात सवम बत
य ानन" अथामत ककसी बी जीव के रस्नत दहॉसा न
कय----इस द्धवचाय को अऩनाम.
भाॉस एक प्रतीक है ---िूयता का, क्मेआकक हहॉसा की िेदी ऩय ही तो तनशभफत होता है भाॉस. भाॉस एक ऩरयणाभ है

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"हत्मा" का, क्मेआकक शससकते प्राणणमेआ के प्रतत तनभफभ होने से ही तो प्राप्त होता है --भाॉस. भाॉस एक वऩॊड है
तोडे हुए चिासेआ का, क्मेआकक प्राण घोर्टकय ही तो प्राप्त ककमा जाता है--भाॉस. भाॉस एक प्रदशफन है विचायहीन
ऩतन का, क्मेआकक जीिेआ के प्रतत आदय( Reverence of Life) गॉिाकय ही तो प्राप्त ककमा जाता है--भाॉस.
इसके द्धवऩयीत शाकाहाय ननभमभता के द्धवऩयीत दमारत
ु ा, गन्दगी के द्धवऩयीत स्वच्छता, कुरूऩता के द्धवयोध भ
सौन्दमम, कठोयता के द्धवऩयीत सॊवेदनशीरता, कष्ट्ट दे ने के द्धवऩयीत ऺभादान, जीने का तकम एवॊ भानमसक शाक्न्त
का भर
य ाधाय है .
भाॊसाहाय फीभारयमेआ की जड़ हेऄ. इससे हदर के योग, गोउर्ट, केऄ सय जैसे अनेको योगेआ की िवृ द्ध दे खी गमी हेऄ औय
एक शभथक मह हेऄ की भाॊसाहाय खाने से ज्मादा ताकत शभरती हेऄ इसका प्रफर प्रभाण ऩहरिान सश
ु ीर
कुभाय हेऄ जो विचि के नॊफय एक ऩहरिान हेऄ औय ऩण
ू फ रूऩ से शाकाहायी हेऄ. आऩसे ही ऩछ
ू ते हेऄ की क्मा आऩ
अऩना भाॊस ककसी को खाने दें गे. नहीॊ ना तो कपय आऩ कैसे ककसी का भाॊस खा सकते हेऄ.

जो स्वमॊ अॊधे हैं वे दस
य यो को तमा यास्ता दीखामगे. दहन्द य जो ऩशु फमर भ द्धवश्वास यखते हैं खद
ु ही वेदैऄ के
द्धवरुि कामम कय यहे हैं. ऩशु फमर दे ने से केवर औय केवर ऩाऩ रगता हैं, बरा ककसी को भायकय आऩको
सख
ु कैसे मभर सकता हैं. जहाॉ तक वेदैऄ का सवार हैं भध्मकार भ कुछ अऻानी रोगो ने हवन आदद भ ऩशु
फमर दे ना आयॊ ब कय ददमा था औय उसे वेद सॊगत ददखाने के मरए भहीधय, सामण आदद ने वेदैऄ के कभम
काॊडी अथम कय ददम क्जससे ऩशु फमर का द्धवधान वेदैऄ से मसि ककमा जा सके. फाद भ भातस्भर
ु य , धग्रपीथ
आदद ऩाश्चात्म रोगो ने उसका अॊग्रेजी भ अनव
ु ाद कय ददमा क्जससे ऩयय ा द्धवश्व मह सभझे की वेदैऄ भ ऩशु
फमर का द्धवधान हैं. आधनु नक कार भ ऋद्धष दमानॊद ने जफ दे खा की वेदैऄ के नाभ ऩय ककस रस्काय से घोय
रस्ऩॊच ककमा गमा हैं तो उन्हैऄने वेदैऄ का एक नमा बाष्ट्म ककमा क्जससे पैराई गमी भ्राॊनतमैऄ को मभटामा जा
सके. दे खो वेदैऄ भ ऩशु आदद के फाये भ ककतनी सद
ुॊ य फात कहीॊ गमी हैंऋगवेद ५/५१/१२ भ अक्ग्नहोर को अध्वय मानन क्जसभे दहॊसा की अनभ
ु नत नहीॊ हैं कहा गमा हैं.
मजव
ु ेद १२/३२ भ ककसी को बी भायने से भनाही हैं
मजुवेद १६/३ भ दहॊसा न कयने को कहा गमा हैं
अथवमवेद १९/४८/५ भ ऩशओ
की यऺा कयने को कहा गमा हैं

अथवमवेद ८/३/१६ भ दहॊसा कयने वारे को भायने का आदे श हैं
ऋगवेद ८/१०१/१५ भ दहॊसा कयने वारे को याज्म से ननष्ट्काद्धषत कयने का आदे श हैं
इस प्रकाय चायो िेदेआ भें अनेको प्रभाण हेऄ ल्जनसे मह शसद्ध होता हेऄ की िेदेआ भें ऩशु फशर अथिा भाॊसाहाय

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का कोई िणफन नहीॊ हेऄ.
याभामण , भहाबायत आदद ऩस्
ु तकैऄ भ उन्हीॊ रोगो ने मभरावट कय दी हैं जो हवन भ ऩशु फमर एवॊ
भाॊसाहाय आदद भानते थे.
िेद स्भतृ त ऩयॊ ऩया से सयु क्षऺत हेऄ इसशरए िेदेआ भें कोई शभरािर्ट नहीॊ हो सकती उसभे से एक शब्द अथिा एक
भात्रा तक को फदरा नहीॊ जा सकता.
याभामण भें सद
ुॊ य काॊड स्कन्द ३६ चरोक ४१ भें स्ऩष्र्ट कहाॉ गमा हेऄ की श्री याभ जी भाॊस नहीॊ रेते िे तो
केिर पर अथिा चािर रेते हेऄ.
भहाबायत अनश
ु ासन ऩवम ११५/४० भ याॊनतदे व को शाकाहायी फतामा गाम हैं.
शाॊनत ऩवम २६२/४७ भ गाम औय फैर को भायने वारे को ऩाऩी कहाॉ गाम हैं.इस रस्काय के अन्म रस्भाण बी
मभरते हैं क्जनसे मह बी मसि होता हैं की याभामण एवॊ भहाबायत भ भाॊस खाने की अनभ
ु नत नहीॊ हैं औय
जो बी रस्भाण मभरते हैं वे सफ मभरावट हैं.

औय सफसे भहत्िऩण
ू फ फात ....
आज रस्त्मेक होटर, ये स्तयाॊ, ढाफे आदद ऩय जो भाॊसाहाय मभरता है वो इस्राभ के हरार मसिाॊत के अनस
ु ाय
काट कय ऩयोसा जाता है ... झटका नही र हरार मानी शैतान के नाभ ऩय चढ़ामा गमा रस्साद ... तमा
आऩ मे रस्साद ग्रहण कयना चाहगे ?
औय मदद कय यहे हैं तो आऩ सीधे सीधे ... इस्राभी शैतान भ आस्था रस्कट कय यहे हैं ...

अफ मे आऩ को सोचना है कक तमा आऩ अफ बी भाॉस जैसे इस जड मग
ु ीन अवशेष से अऩनी ऺुधा एवॊ
क्जव्हा रोरऩ
ु ता को शान्त कयते यहना चाहग....................

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धभफ तनयऩेऺ तो ऩशु बी नहीॊ होते ...

सॊसाय भ कोई बी नीच से नीच भनष्ट्ु म बी धभम-ननयऩेऺ हो ही नहीॊ सकता, तमैऄकक कोई बी भनष्ट्ु म
भानवीम गण
ु ैऄ से हीॊ नहीॊ है l
धभम मानी धायण कयने मोग्म भानवीम गण
ु क्जसके भख्
ु म रक्ष्ण होते हैं ...
1. धैमम
2. ऺभा
3. भन ऩय काफय
4. चोयी न कयना
5. भन व ् शयीय की ऩद्धवरता
6. इक्न्द्रमैऄ ऩय ननमन्रण यखना
7. फद्धु ि को स्वाध्माम सत्सॊग से फढ़ाना
8. द्धवद्सवान होना व ् ऻान को स्वाध्माम सत्सॊग से फढ़ाना
9. सत्म फोरना
10. क्रोध न कयना
11. अदहॊसा ऩय कामयता नहीॊ
12. ऩयोऩकाय
13. भोऺ रस्ाप्त कयने हे तु सत कभम कयना
14. भानवता मानी चरयरवान होना
15. दमा
फहन, बाई, द्धऩता, ऩर
ु ी, भाॉ, फेटा एक कभये भ सोमे हैं, वे कुकभम नही कयते, इसके ऩीछे कौन है जो कुकभम से
योक यहा है ?
ऩडोसी के घय भ कोई नहीॊ है औय आऩ उसके घय भ चोयी नहीॊ कयते, कौन है जो आऩको योक यहा है ?
इस कुकभम से ...
उत्तय है ..धभफ
इन रऺणैऄ के बफना तमा ककसी को इॊसान मा भानव भनष्ट्ु म कह सकते हैं ?
क्जससे इन गण
ु ैऄ की अऩेऺा न की जा सके उसे धभम ननयऩेऺ कह सकते हैं ... ऩशओ
ु ॊ भ बी इनभे से

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कुछ गण
ु होते हैं l
धभम ननयऩेऺ तो ऩशु से धगये हुए को कहते हैं l अगय कोई नेता आऩको ऩागर फनामे की धभम-ननयऩेऺ का
अथम सवम धभम साभान होता है तो कपय धभम ननयऩेऺ न कह कय सवम धभम सभबाव ही कहना चादहए l
धभम ननयऩेऺ तो सफसे फड़ी गारी है शामद सफसे बमॊकय गारी है,
साये नेता, जज, सयकायी अधधकायी, MP - MLA - Mayor आदद सफ धभम ननयऩेऺ होने ही शोथ रेते हैं तथा
चुनाव का नाभाॊकन ऩार बयते हैं l
मह असहनीम है ,,, इसकी चचाम कय .. रस्चाय कय तथा मथासम्बव द्धवयोध कय l
दे श के रस्नत कतमव्म ननबाएॊ ... बायत बमय भ ऩन्
ु म बमय भ है , ऋद्धष बमय भ है, दे व बमय भ है ... वेद (ऻान) बमय भ
है ... मह कदाद्धऩ धभम ननयऩेऺ दे श नहीॊ है l
बायत भाता को धभम ननयऩेऺ घोद्धषत कयने का ऩाऩ अऻानी काॊग्रेस ने ककमा था औय आज बी कय यहे हैं
l
फीजेऩी - मशवसेना - RSS - BSP - SP आदद सबी सह यहे हैं ... मह भहान बायत भाता का अऩभान है .....
र्षड्मॊत्र है
धभफ - तनयऩेऺ का अथफ होता है धभफ विरुद्ध, धभफ - विहीन मानी भानिताहीन अथाफत ल्जससे धभफ की अऩेऺा
न की जा सके ... जो धभफ के प्रतत तनयऩेऺ हो l

औय अफ फात कयते हेऄ सिफ धभफ सभान की ...
सफ धातओ
ु ॊ के गहने साभान नहीॊ होते. सोने की कीभत अरग होती है औय अरमु भननमभ, चाॊदी, ऩीतर
रोहे आदद की कीभत अरग होती है l
सफ सयकायी नौकय साभान नहीॊ होते ... चऩयासी, तरकम, करेतटय औय भॊबरमैऄ को अरग अरग श्रेणी के
नौकय भाने जाते हैं l सफ याजनननतक ऩादटम माॊ साभान हैं ... ऐसा कोई कहे तो .. याजनेता नायाज हो जामगे
l अऩनी ऩाटॊ को श्रेष्ट्ठ औय अन्म ऩादटम मैऄ को कननष्ट्ठ फताते हैं .... ऩय धभम के द्धवषम भ सफ धभम साभान
कहने भ उनको रज्जा नही आती l
वास्तव भ जैसे द्धवऻान के जगत भ ककसी एक वैऻाननक की फात तफ तक सच्ची नहीॊ भानी जाती जफ
तक की उसे सम्ऩण
य म द्धवश्व के वैऻाननक तकम-सॊगत औय रस्ामोधगक स्टाय ऩय सच्ची नहीॊ भानते l ऐसे ही
धभम के द्धवषम ऩय बी ककसी एक व्मक्तत के कहने से उसकी फात सच्ची नहीॊ भान सकते l तमैऄकक उसभे

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अऩने धभम के रस्नत याग औय अन्म धभो के रस्नत द्सवेष होने की सम्बावना है l सनातन धभम के मसवा अन्म
धभम अऩने धभम को ही सच्चा भानते हैं, दस
ु ये धभो की ननॊदा कयते हैं l केवर सनातन धभम ही अन्म धभों के
रस्नत उदायता औय सदहष्ट्णत
ु ा का बाव मसखाता है l इसका अथम मह कदाद्धऩ नहीॊ हो सकता की सफ धभम
सभान हैं l
गॊगा का जर औय मे ताराफेआ, कुएॊ मा नारी का ऩानी सभान कैसे हो सकता है l
मदद सभस्त द्धवश्व के सबी धभो को भानने वारे सबी धभों का अध्ममन कयके तटस्थ अमबरस्ाम फताने
वारे द्धवद्सवानैऄ ने ककसी धभम को तकम सॊगत औय श्रेष्ट्ठ घोद्धषत ककमा हो तो उसकी भहानता को सफको
स्वीकाय कयना ऩड़ेगा l सम्ऩण
य म द्धवश्व भ मदद ककसी धभम को ऐसी व्माऩक रस्शक्स्त रस्ाप्त हुई है तो वह है ...
सनातन धभम l
क्जतनी व्माऩक रस्शक्स्त सनातन धभम को मभरी है उतनी ही व्माऩक आरोचना ईसाईमत औय इस्राभ की
अॊतयामष्ट्रीम द्धवद्सवानैऄ औय कपराक्स्पस्तैऄ ने की है ....
सनातन धभम की भदहभा औय सच्चाई को बायत के सॊत औय भहाऩरु
ु ष तो सददमैऄ से सैिाॊनतक औय
रस्ामोधगक रस्भाणैऄ के द्सवाया रस्कट कयते आमे हैं, कपय बी ऩाश्चात्म द्धवद्सवानैऄ से रस्भाखणत होने ऩय ही ककसी
की फात को स्वीकाय कयने वारे ऩाश्चात्म फोद्धिकैऄ के गर
ु ाभ ऐसे बायतीम फद्धु िजीवी रोग इस रेख को
ऩढ़कय बी सनातन धभम की श्रेष्ट्ठता को स्वीअक्र कयगे तो हभे रस्सन्नता होगी औय मदद वो सनातन धभम के
भहान ग्रन्थैऄ का अध्ममन कयगे तो उनको इसकी श्रेष्ट्ठता के अनेक सैिाॊनतक रस्भाण मभरगे औय ककसी
अनब
ु वी ऩरु
ु ष के भागमदशमन भ साधना कयगे तो उनको इसके सत्म के रस्ामोधगक रस्भाण बी मभरगे l आशा
है सनातन धभामवरम्फी इस रेख को ऩढने के फाद स्वमभ को सनातन धभॉ कहराने ऩय गवम का अनब
ु व
कयगे l ननम्नमरखखत द्धवश्व-रस्मसि द्धवद्सवानैऄ के वचन सवम-धभम साभान कहने वारैऄ के भह
यॊ ऩय कयाये तभाचे
भायते हैं औय सनातन धभम की भहत्ता रस्नतऩाददत कयते हैं ... जैसे चऩयासी, सधचव, करेतटय आदद सफ
अधधकायी सभान नहीॊ होते .. गॊगा मभन
ु ा गोदाियी कािेयी आहद नहदमेआ का जर .. औय कुएॊ तथा नारी का
जर साभान नहीॊ होता ऐसे ही सफ धभम सभान नहीॊ होते .... सफके रस्नत स्नेह सदबाव यखना बायत वषम की
द्धवशेषता है रेककन सवम-धभम साभान का बाषण कयने वारे बोरे बरे बायत वामसमैऄ के ददरो ददभाग भ
तक्ु ष्ट्टकयण की कयटनीनतक मशऺा-नननत के औय द्धवदे शी गर
ु ाभी के सॊस्काय बयते हैं l

सिफधभफ साभान कह कय अऩनी ही सॊस्कृतत का गरा घेआर्टने के अऩयाध से उन सज्जनेआ को मे रेख फचाएगा
आऩ स्िमॊ ऩढ़ें औय औयेआ तक मह ऩहुॉचाने की ऩािन सेिा कयें l

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सॊस्कायेआ को नकायो नहीॊ ... अगरी ऩीढ़ी का उधचत चरयत्र तनभाफण कयें
फदरते ऩरयवेश, फदरते वातावयण, फदरी मशऺावक्ृ त्त के कायण हभाये फच्चैऄ का यहन -सहन एकदभ फदर
गमा है l
ऩाश्चात्म सॊस्कृनत के फढ़ते रस्बाव के कायण "Mom - Dad" वारे सॊस्काय फच्चैऄ भ तेजी से ऩनऩ यहे हैं, यही
सही कसाय टे रीद्धवजन धायावादहकैऄ ने ऩयय ी कय दी है l
आज के दादा-दादी, नाना -नानी के साथ साथ भाता द्धऩता को बी सोचना चादहए की जो सॊस्काय उन्ह
ऩव
म ैऄ मभरे थे, तमा वे इन सॊस्कायैऄ को बावी ऩीढी तक ऩॊहुचा ऩा यहे हैं ?
य ज
हय सभाज भ कुछ नीनतगत फात, कुछ ऩयम्ऩयाएॊ एवॊ कुछ धामभमक भान्मताएॊ होती हैं क्जन्ह हभ सॊस्काय
कहते हैं, इन सॊस्कायैऄ को मदद बावी ऩीढ़ी तक न ऩहुचामा जाए तो मे नष्ट्ट हो जाते हैं l
मह बी सत्म है की कार, दयय ी तथा फदरते ऩरयवेश भ सॊस्कायैऄ भ ऩरयवतमन होता यहता है , नई फात जड़

जाती हैं औय कुछ ऩयु ानी फात छयट जाती हैं... कुछ सध
ु ाय हो जाता है l
जैसे... रस्ाचीन कार भ फहय ससयु ार ऩऺ के फड़े रोगैऄ के साभने घघ
यॉ ट ननकरा कयती थीॊ, रेककन आज के
जागरूक सभाज ने इसे फदर ददमा है ... शभम तो आॉखैऄ भ होनी चादहए l
घघ
यॉ ट फहय के मरए ऩये शानी ऩैदा कयता है .. मे तकम उधचत हो बी सकता है ... ऩयन्तु सॊस्कायेआ का
भर
ू स्िरूऩ नहीॊ फदरता .. औय न ही फदरना चाहहए l
क्जस तयह कुछ फात फच्चैऄ के साभने नही की जा सकतीॊ, वैसे ही कुछ सॊकोच फड़े के साभने बी यखा
जाना चादहए, फड़ैऄ के साभने छोटैऄ को सॊममभत व्मवहाय घय के दस
ु ये छोटैऄ को बी ऐसा कयने की मशऺा
दे ता है l
सॊस्काय हभायी अक्स्भता, हभायी सॊस्कृनत औय अऩनेऩन की ऩहचान है l घय के शारीन औय सौम्म
वातावयण का आदद व्मक्तत सभाज भ उसी शारीनता को रेकय ऩहुचता है औय उसकी अऩेऺाएॊ बी उसी
रूऩ भ ढर जायी हैं l सौम्प्मता की इसी शभर्टर्टी भें सॊस्काय परते पूरते हेऄ ....
दे खा जाए तो बावी ऩीढ़ी को सॊस्कृत फनाना इतना कदठन नही है , क्जतना कदठन हभ सोचते हैं l क्जन
ऩरयवायैऄ भ फचऩन से ही फच्चैऄ को नभस्काय, चयण-स्ऩशम, भक्न्दय जाना, धामभमक ऩवों ऩय बागीदायी कयने
तथा ऩारयवारयक आमोजनैऄ भ स्भीमरत होने का अवसय मभरता है, वहाॊ फच्चे स्वत् ही दीक्षऺत औय
मशक्षऺत होते चरे जाते हैं, रेककन क्जन ऩरयवायैऄ भ फच्चैऄ ऩय ऩयय ा ध्मान नही ददमा जाता वे सॊस्काय धायण
भ द्धऩछड़ जाते हैं l
ऐसे भाता - द्धऩता अऩने फच्चैऄ को सॊस्काय शन्य म फना दे ते हैं, हाराॊकक अमबबावक थोड़ी भेहनत कयके मे

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काभ कय सकते हैं, मे काभ रम्फी छुदट्टमैऄ भ कयना चादहए l
ऩरयवाय भ रस्नत भाह एकाध फाय ऩाठ, हवन, ऩज
य ा, कथा आदद जैसे आमोजन अवश्म कयवाए जाएॉ ...खासकय
तफ अवश्म हैऄ जफ फच्चे होस्टर आदद भ यहते हैऄ औय वे घय वाद्धऩस आमे हैऄ... उनके भन भ धभम-कभम
के रस्नत श्रिा बाव उऩजगे औय फढ़गे l
अऩने फच्चैऄ को धभम, सत्म औय नैनतकता के साथ साथ कभम, मोग औय बक्तत के मसिाॊत को सभम सभम
ऩय सभझाने का रस्मास कय, मह द्धवडम्फना है की बायत का सॊद्धवधान सनातन सॊस्कृनत के अनरू
ु ऩ नही है ,
क्जसके कायण द्धवद्समारमैऄ भ तो धभम कभम की मशऺा से वॊधचत ही यखा जामेगा, औय वतमभान भ वाभऩॊथी,
भरेच्छैऄ औय मवनैऄ द्सवाया ककस रस्काय सनातन सॊस्कृनत के इनतहास को तोड़ भोड़ कय ऩढ़ामा जाता है मे
हभ सबी जानते हैं l
आवश्मक है की अऩने फच्चैऄ के उधचत चरयर ननभामण की रस्कक्रमा का आयम्ब हभ स्वमॊ घय से ही कय...
उन्ह अऩने धभम के भल्
य म, मसिाॊत, मशऺाओॊ, ऩयम्ऩयाओॊ, आदद का अधधक से अधधक ऻान द l
सनातन सॊस्कृनत के क्जतने बी आयाध्म हैं, धभम-ग्रन्थ हैं, ऋद्धष - आचामम - गरु
ु आदद हैं उन सफके फाये भ
घय ऩय ही फताएॊ l
बायतीम बमय भ ऩय जन्भ रेने वारे असॊख्म शयय वीयैऄ की द्धवजम गाथाएॊ फताएॊ, याष्ट्ररस्ेभ हे तु अनेकैऄ फमरदान
दे ने वारैऄ की आहुनतमैऄ के फाये भ फताएॊ... क्जससे की याष्ट्र-रस्ेभ की बावनाएॊ उनभे फचऩन से ही कयट कयट
कय बय जाएॉ औय अखॊड बायत के सन
ु हये बद्धवष्ट्म भ वे अऩना शत-रस्नतशत मोगदान दे ऩाएॊ l
द्धऩछरे 2500 वषों भ ... 1400 वषों भ... क्जतने बी आक्रभण सनातन सॊस्कृनत औय ऋद्धष बमय भ दे व तल्
ु म
अखॊड बायत ऩय हुए हैं, उन सफका इनतहास अधधक से अधधक फतामा जाए क्जससे की उन्ह द्धवदे शी रोगैऄ
के आचयण की बरी बाॉती ऩयख हो जाए l
विशेर्षकय भरेच्छेआ औय मिनेआ द्िाया ककमे गए आिभणेआ, रर्ट
ू भाय, हहन्द ू नारयमेआ का शायीरयक भान भदफ न,
भल्न्दयेआ का विध्िॊस, भतू तफमेआ का अऩभान ...औय सफसे भहत्िऩण
ू फ धभाांतयण आहद के फाये भें बी फताएॊ l
ितफभान सभम भें सफसे आिचमक विर्षम है रि ल्जहाद इसके फाये भें विशेर्ष कय अऩने घय की रड़ककमेआ
को अिचम जागरूक कयें l

स्िमॊ का आचयण ऐसा फनाएॊ की फच्चे उनका अनस
ु यण कयें जो वऩता योज घय भें शयाफ ऩीता हो िो फच्चे
को शयाफ से दयू यहने की सीख कैसे दे सकता है ?
जो भाॉ स्िमॊ भमाफहदत कऩडे न ऩहनती हो ..िो बरा अऩने फच्चेआ की क्मा सॊस्काय दे ऩामेगी ?

9

जो फीज आज फोमगे उसके पर आने वारी तीन ऩीढीमैऄ भ ददखाई दगे l ऩयम्ऩयाओॊ को आगे ऩहुचना
सभाज को सयु क्षऺत आधाय दे ने का कामम कतमव्म है ...
औय फच्चेआ को सॊस्काय दे ना ितफभान औय फज
ु ग
ु फ ऩीढी का नैततक कतफव्म बी फनता है l

अॊत भ एक आवश्मक रस्श्न आऩ सफसे ...
क्मा हभ अऩने फच्चेआ को औय आने िारी ऩीहढ़मेआ को ऩन
ु ् 16 सॊस्काय दे ने की प्राचीन व्मिस्था को
ऩन
ु जीवित कय सकते हेऄ ?

10
भहायाजा सह
ु े रदे ि के ऩयािभ की कथा
भहभद
ू गजनिी के उत्तयी बायत को १७ फाय रर्ट
ू ने ि फफाफद कयने के कुछ सभम फाद उसका बाॊजा सराय
गाजी बायत को दारूर इस्राभ फनाने के उद्देचम से बायत ऩय चढ़ आमा । िह ऩॊजाफ ,शसॊध, आज के उत्तय
प्रदे श को येआद्ता हुआ फहयाइच तक जा ऩॊहुचा। यास्ते भें उसने राखेआ हहन्दओ
ु ॊ का कत्रेआभ कयामा,राखेआ हहॊद ू
औयतेआ के फरात्काय हुए, हजायेआ भल्न्दय

तोड़ डारे। याह भें उसे एक बी ऐसाहहन्द ू

िीय नही शभरा जो उसका भान भदफ न

कय सके। इस्राभ की जेहाद की आॊधी

को योक सके। फहयाइच अमोध्मा के

ऩास है के याजा सह
ु े र दे ि ऩासी अऩनी

सेना के साथ सराय गाजी के हत्माकाॊड

को योकने के शरए जा ऩहुॊचे । भहायाजा

ि हहन्द ू िीयेआ ने सराय गाजी ि उसकी

दानिी सेना को भर
ू ी गाजय की तयह

कार्ट डारा । सराय गाजी भाया गमा।

उसकी बागती सेना के एक एक

हत्माये को कार्ट डारा गमा। हहॊद ू ह्रदम

याजा सह
ु े र दे ि ऩासी ने अऩने धभफ

का ऩारन कयते हुए, सराय गाजी को

इस्राभ के अनस
ु ाय कब्र भें दफन कया

हदमा। कुछ सभम ऩचचात ् तग
ु रक िॊश के आने ऩय पीयोज तग
ु रक ने सरायगाजी को इस्राभ का सच्चा
सॊत शसऩाही घोवर्षत कयते हुए उसकी भजाय फनिा दी।आज उसी हहन्दओ
ु ॊ के हत्माये , हहॊद ू औयतेआ के
फरातकायी ,भत
ू ी बॊजन दानि को हहॊद ू सभाज एक दे िता की तयह ऩज
ू ता है । आज िहा फहयाइच भें उसकी
भजाय ऩय हय सार उसफ रगता हॉ औय उस हहन्दओ
ु के हत्माये की भजाय ऩय सफसे ज्मादा हहन्द ू ही जाते हॉ

क्मा कहा जाए ऐसे हहन्दओ
ु को............?
सराय गाजी हहन्दओ
ु ॊ का गाजी फाफा हो गमा है । हहॊद ू िीय शशयोभणण सह
ु े र दे ि ऩासी शसफफ ऩासी सभाज का
हीयो फनकय यह गएॉ है । औय सराय गाजी हहन्दओ
ु ॊ का बगिन फनकय हहन्द ू सभाज का ऩज
ू नीम हो गमा
है ।
भहायाजा सह
ु े रदे ि के ऩयािभ की कथा कुछ इस प्रकाय से है 1001 ई0 से रेकय 1025 ई0 तक भहभद
ू गजनिी ने बायतिर्षफ को रर्ट
ू ने की दृल्ष्र्ट से 17 फाय आिभण ककमा
तथा भथयु ा, थानेसय, कन्नौज ि सोभनाथ के अतत सभद्ध
ू ने भें सपर यहा। सोभनाथ की
ृ भॊहदयेआ को रर्ट
रड़ाई भें उसके साथ उसके बान्जे सैमद साराय भसद
ू गाजी ने बी बाग शरमा था। 1030 ई. भें भहभद

गजनफी की भत्ृ मु के फाद उत्तय बायत भें इस्राभ का विस्ताय कयने की ल्जम्प्भेदायी भसद
ू ने अऩने कॊधो

11
ऩय री रेककन 10 जून, 1034 ई0 को फहयाइच की रड़ाई भें िहाॊ के शासक भहायाजा सह
ु े रदे ि के हाथेआ िह
डेढ़ राख जेहादी सेना के साथ भाया गमा। इस्राभी सेना की इस ऩयाजम के फाद बायतीम शयू िीयेआ का ऐसा
आतॊक विचि भें व्माप्त हो गमा कक उसके फाद आने िारे 150 िर्षों तक ककसी बी आिभणकायी को
बायतिर्षफ ऩय आिभण कयने का साहस ही नहीॊ हुआ।
ऐततहाशसक सत्र
ू ेआ के अनस
ु ाय श्रािस्ती नये श याजा प्रसेनल्जत ने फहयाइच याज्म की स्थाऩना की थी ल्जसका
प्रायॊ शबक नाभ बयिाइच था। इसी कायण इन्हे फहयाइच नये श के नाभ से बी सॊफोधधत ककमा जाता था।
इन्हीॊ भहायाजा प्रसेनल्जत को भाघ भाॊह की फसॊत ऩॊचभी के हदन 990 ई. को एक ऩत्र
ु यत्न की प्राल्प्त हुई
ल्जसका नाभ सह
ु े रदे ि यखा गमा। अिध गजेर्टीमय के अनस
ु ाय इनका शासन कार 1027 ई. से 1077 तक
स्िीकाय ककमा गमा है । िे जातत के ऩासी थे, याजबय अथिा जैन, इस ऩय सबी एकभत नही हेऄ।
भहायाजा सह
ु े रदे ि का साम्राज्म ऩि
ू फ भें गोयखऩयु तथा ऩल्चचभ भें सीताऩयु तक पैरा हुआ था। गेआडा
फहयाइच, रखनऊ, फायाफॊकी, उन्नाि ि रखीभऩयु इस याज्म की सीभा के अॊतगफत सभाहहत थे। इन सबी
ल्जरेआ भें याजा सह
ु े र दे ि के सहमोगी ऩासी याजा याज्म कयते थे ल्जनकी सॊख्मा 21 थी। मे थे -1. यामसामफ
2. यामयामफ 3. अजन
ुफ 4. बवगन 5. गॊग 6. भकयन 7. शॊकय 8. कयन 9. फीयफर 10. जमऩार 11. श्रीऩार 12.
हयऩार 13. हयकयन 14. हयखू 15. नयहय 16. बजरय 17. जुधायी 18. नायामण 19. बजरा 20. नयशसॊह तथा 21.
कजमाण मे सबी िीय याजा भहायाजा सह
ु े र दे ि के आदे श ऩय धभफ एिॊ याष्रयऺा हे तु सदै ि आत्भफशरदान दे ने
के शरए तत्ऩय यहते थे। इनके अततरयक्त याजा सह
ु े र दे ि के दो बाई फहयदे ि ि भजरदे ि बी थे जो अऩने
बाई के ही सभान िीय थे। तथा वऩता की बाॊतत उनका सम्प्भान कयते थे।
भहभद
ू गजनिी की भत्ृ म के ऩचचात ् वऩता सैमद साराय साहू गाजी के साथ एक फड़ी जेहादी सेना रेकय
सैमद साराय भसद
ू गाजी बायत की ओय फढ़ा। उसने हदजरी ऩय आिभण ककमा। एक भाह तक चरे इस
मद्
ु ि ने साराय भसद
ू के भनोफर को तोड़कय यख हदमा िह हायने ही िारा था कक गजनी से फल्ख्तमाय
साहू, साराय सैपुद्दीन, अभीय सैमद एजाजुद्िीन, भशरक दौरत शभमा, यजि साराय औय अभीय सैमद
नसरूजराह आहद एक फड़ी धुड़सिाय सेना के साथ भसद
ू की सहामता को आ गए। ऩन
ु ् बमॊकय मद्
ु ि प्रायॊ ब
हो गमा ल्जसभें दोनेआ ही ऩऺेआ के अनेक मोद्धा हताहत हुए। इस रड़ाई के दौयान याम भहीऩार ि याम
हयगोऩार ने अऩने धोड़े दौड़ाकय भसद
ू ऩय गदे से प्रहाय ककमा ल्जससे उसकी आॊख ऩय गॊबीय चोर्ट आई
तथा उसके दो दाॉत र्टूर्ट गए। हाराॊकक मे दोनेआ ही िीय इस मद्ध
ु भें रड़ते हुए शहीद हो गए रेककन उनकी
िीयता ि असीभ साहस अद्वितीम थी। भेयठ का याजा हरयदत्त भस
ु रभान हो गमा तथा उसने भसद
ू से
सॊधध कय री मही ल्स्थतत फर
ॊ शहय ि फदामूॊ के शासकेआ की बी हुई। कन्नौज का शासक बी भसद
ु द
ू का
साथी फन गमा। अत् साराय भसद
ू ने कन्नौज को अऩना केंद्र फनाकय हहॊदओ
ु ॊ के तीथफ स्थरेआ को नष्र्ट

12
कयने हे तु अऩनी सेनाएॊ बेजना प्रायॊ ब ककमा। इसी िभ भें भशरक पैसर को िायाणसी बेजा गमा तथा स्िमॊ
साराय भसद
ू सप्तकवर्ष (सतरयख) की ओय फढ़ा। शभयआते भसद
ू ी के विियण के अनस
ु ाय सतरयख (फायाफॊकी)
हहॊदओ
ु ॊ का एक फहुत फड़ा तीथफ स्थर था। एक ककिदॊ ती के अनस
ु ाय इस स्थान ऩय बगिान याभ ि रक्ष्भण
ने शशऺा प्राप्त की थी। मह सात कवर्षमेआ का स्थान था, इसीशरए इस स्थान का सप्तऋवर्षफ ऩड़ा था, जो धीये धीये सतरयख हो गमा। साराय भसद
ू विरग्राभ, भजरािा, हयदोई, सॊडीरा, भशरहाफाद, अभेठी ि रखनऊ होते
हुए सतरयख ऩहुॊचा। उसने अऩने गरू
ॊु गढ ़े ककरे भें
ु सैमद इब्राहीभ फाया हजायी को धॊध
ु गढ़ बेजा क्मेआकक धध
उसके शभत्र दोस्त भोहम्प्भद सयदाय को याजा यामदीन दमार ि अजम ऩार ने घेय यखा था। इब्राहहभ
फायाहजायी ल्जधय से गज
ु यते गैय भस
ु रभानेआ का फचना भल्ु स्कर था। फचता िही था जो इस्राभ स्िीकाय कय
रेता था।
आइन - ए - भसद
ू ी के अनस
ु ाय – तनशान सतरयख से रहयाता हुआ फायाहजायी का। चरा है धध
ुॊ गढ़ को
काककरा फायाहजायी का शभरा जो याह भें भन
ु ककय उसे दे उसे दोजख भें ऩहुचामा। फचा िह ल्जसने करभा
ऩढ़ शरमा फाया हजायी का। इस रड़ाई भें याजा दीनदमार ि तेजशसॊह फड़ी ही फीयता से रड़े रेककन िीयगतत
को प्राप्त हुए। ऩयॊ तु दीनदमार के बाई याम कयनऩार के हाथेआ इब्राहीभ फायाहजायी भाया गमा। कडे ़े याजा
दे ि नायामन औय भातनकऩयु के याजा बोजऩात्र ने एक नाई को सैमद साराय भसद
ू के ऩास बेजा कक िह
विर्ष से फझ
ु ी नहन्नी से उसके नाखून कार्टे , ताकक सैमद साराय भसद
ू की इहरीरा सभाप्त हो जामें रेककन
इराज से िह फच गमा। इस सदभें से उसकी भाॉ खत
ु यु भअ
ु जरा चर फसी। इस प्रमास के असपर होने के
फाद कडे भातनकऩयु के याजाओॊ ने फहयाइच के याजाओॊ को सॊदेश बेजा कक हभ अऩनी ओय से इस्राभी
सेना ऩय आिभण कयें औय तभ
ु अऩनी ओय से।
इस प्रकाय हभ इस्राभी सेना का सपामा कय दे गें। ऩयॊ तु सॊदेशिाहक सैमद साराय के गप्ु तचयेआ द्िाया फॊदी
फना शरए गए। इन सॊदेशिाहकेआ भें दो ब्राह्तभण औय एक नाई थे। ब्राह्तभणेआ को तो छोड़ हदमा गमा रेककन
नाई को पाॊसी दे दी गई इस बेद के खुर जाने ऩय भसद
ू के वऩता साराय साहु ने एक फडी सेना के साथ
कड़े भातनकऩयु ऩय धािा फोर हदमा। दोनेआ याजा दे िनायामण ि बोजऩत्र फडी िीयता से रड़ें रेककन ऩयास्त
हुए। इन याजाओॊ को फॊदी फनाकय सतरयख बेज हदमा गमा। िहॉ से सैमद साराय भसद
ू के आदे श ऩय इन
याजाओॊ को साराय सैपुद्दीन के ऩास फहयाइच बेज हदमा गमा। जफ फहयाइज के याजाओॊ को इस फात का ऩता
चरा तो उन रोगो ने सैपुद्दीन को धेय शरमा। इस ऩय साराय भसद
ू उसकी सहामता हे तु फहयाइच की ओय
आगें फढे । इसी फीच अनके वऩता साराय साहू का तनधन हो गमा।

फहयाइच के ऩासी याजा बगिान सम
फ ॊु ड ऩय ल्स्थत बगिान सम
ू फ के उऩासक थे। फहयाइच भें सम
ू क
ू फ के भतू तफ

13
की िे ऩज
ू ा कयते थे। उस स्थान ऩय प्रत्मेक िर्षफ ज्मेष्ठ भास भे प्रथभ यवििाय को, जो फह
ृ स्ऩततिाय के फाद
ऩड़ता था एक फड़ा भेरा रगता था मह भेरा सम
फ हण, चन्द्रग्रहण तथा प्रत्मेक यवििाय को बी रगता था।
ू ग्र
िहाॊ मह ऩयॊ ऩया कापी प्राचीन थी। फाराकफ ऋवर्ष ि बगिान सम
ू फ के प्रताऩ से इस कॊु ड भे स्नान कयने िारे
कुष्ठ योग से भक्
ु त हो जामा कयते थे। फहयाइच को ऩहरे ब्रह्तभाइच के नाभ से जाना जाता था। साराय
भसद
ू के फहयाइच आने के सभाचाय ऩाते ही फहयाइच के याजा गण – याजा यामफ, याजा सामफ, अजन
ुफ
बीखन गॊग, शॊकय, कयन, फीयफय, जमऩार, श्रीऩार, हयऩार, हयख ्, जोधायी ि नयशसॊह भहायाजा सह
ु े रदे ि के
नेतत्ृ ि भें राभफॊद हो गमे। मे याजा गण फहयाइच शहय के उत्तय की ओय रगबग आठ भीर की दयू ी ऩय
बकरा नदी के ककनाये अऩनी सेना सहहत उऩल्स्थत हुए। अबी मे मद्
ु ि की तैमायी कय ही यहे थे कक साराय
भसद
ू ने उन ऩय यात्रत्र आिभण (शफखन
ू ) कय हदमा। भगरयफ की नभाज के फाद अऩनी विशार सेना के
साथ िह बकरा नदी की ओय फढ़ा औय उसने सोती हुई हहॊद ु सेना ऩय आिभण कय हदमा। इस
अप्रत्माशशत आिभण भें दोनेआ ओय के अनेक सैतनक भाये गए रेककन फहयाइच की इस ऩहरी रड़ाई भे
साराय भसद
ू त्रफजमी यहा। ऩहरी रड़ाऌफ भे ऩयास्त होने के ऩचचात ऩन
ु ् अगरी रडाऌफ हे तु हहॊद ू सेना
सॊगहठत होने रगी उन्होने यात्रत्र आिभण की सॊबािना ऩय ध्मान नही हदमा। उन्होने याजा सह
ु े रदे ि के
ऩयाभशफ ऩय आिभण के भागफ भें हजायो विर्षफझ
ु ी कीरे अिचम धयती भें तछऩा कय गाड़ दी। ऐसा यातेआ यात
ककमा गमा। इसका ऩरयणाभ मह हुआ कक जफ भसद
ू की धुडसिाय सेना ने ऩन
ु ् यात्रत्र आिभण ककमा तो िे
इनकी चऩेर्ट भे आ गए। हाराकक हहॊद ू सेना इस मद्
ु ि भे बी ऩयास्त हो गई रेककन इस्राभी सेना के एक
ततहामी सैतनक इस मल्ु क्त प्रधान मद्ध
ु भे भाये गए।
बायतीम इततहास भे इस प्रकाय मल्ु क्तऩि
फ रड़ी गई मह एक अनठ
ू क
ू ी रड़ाई थी। दो फाय धोखे का शशकाय
होने के फाद हहॊद ू सेना सचेत हो गई तथा भहायाजा सह
ु े रदे ि के नेतत्ृ ि भें तनणाफमक रड़ाऌफ हे तु तैमाय हो
गई। कहते है इस मद्ध
ु भें प्रत्मेक हहॊद ू ऩरयिाय से मि
ु ा हहॊद ू इस रड़ाऌफ भे सल्म्प्भशरत हुए। भहायाजा
सह
ु े रदे ि के शाशभर होने से हहॊदओ
ू ॊ का भनोफर फढ़ा हुआ था। रड़ाई का ऺेत्र धचॊतौया झीर से हठीरा औय
अनायकरी झीर तक पैरा हुआ था।
जन
ू , 1034 ई. को हुई इस रड़ाई भें साराय भसद
ू ने दाहहने ऩाचिफ (भैभना) की कभान भीयनसरूजरा को तथा
फामे ऩाचिफ (भैसया) की कभान साराय यज्जफ को सौऩा तथा स्िमॊ केंद्र (कजफ) की कभान सॊबारी तथा
बायतीम सेना ऩय आिभण कयने का आदे श हदमा। इससे ऩहरे इस्राभी सेना के साभने हजायो गामेआ ि
फैरो को छोड़ा गमा ताकक हहॊद ू सेना प्रबािी आिभण न कय सके रेककन भहायाजा सह
ु े रदे ि की सेना ऩय
इसका कोई बी प्रबाि न ऩड़ा। िे बख
ू े शसॊहेआ की बातत इस्राभी सेना ऩय र्टूर्ट ऩडे भीय नसरूजराह फहयाइच
के उत्तय फायह भीर की दयू ी ऩय ल्स्थत ग्राभ हदकोरी के ऩास भाये गए। सैमय साराय सभद
ू के बाॊजे साराय
शभमा यज्जफ फहयाइच के ऩि
ू फ तीन कक. भी. की दयू ी ऩय ल्स्थत ग्राभ शाहऩयु जोत मस
ू प
ु के ऩास भाय हदमे

14
गए। इनकी भत्ृ म 8 जून, 1034 ई 0 को हुई। अफ बायतीम सेना ने याजा कयण के नेतत्ृ ि भें इस्राभी सेना
के केंद्र ऩय आिभण ककमा ल्जसका नेतत्ृ ि साराय भसद
ू स्िॊम कय कहा था। उसने साराय भसद
ू को धेय
शरमा। इस ऩय साराय सैपुद्दीन अऩनी सेना के साथ उनकी सहामता को आगे फढे बमकय मद्
ु ि हुआ ल्जसभें
हजायेआ रोग भाये गए। स्िमॊ साराय सैपुद्दीन बी भाया गमा उसकी सभाधध फहयाइच-नानऩाया ये रिे राइन के
उत्तय फहयाइच शहय के ऩास ही है । शाभ हो जाने के कायण मद्
ु ि फॊद हो गमा औय सेनाएॊ अऩने शशवियेआ भें
रौर्ट गई।
10 जून, 1034 को भहायाजा सह
ु े रदे ि के नेतत्ृ ि भें हहॊद ू सेना ने साराय भसद
ू गाजी की पौज ऩय तप
ू ानी
गतत से आिभण ककमा। इस मद्ध
ु भें साराय भसद
ू अऩनी धोड़ी ऩय सिाय होकय फड़ी िीयता के साथ रड़ा
रेककन अधधक दे य तक ठहय न सका। याजा सह
ु े रदे ि ने शीध्र ही उसे अऩने फाण का तनशाना फना शरमा
औय उनके धनर्ष
ु द्िाया छोड़ा गमा एक विर्ष फझ
ु ा फाण साराय भसद
ू के गरे भें आ रगा ल्जससे उसका
प्राणाॊत हो गमा। इसके दस
ू ये हीॊ हदन शशविय की दे खबार कयने िारा साराय इब्राहीभ बी फचे हुए सैतनको
के साथ भाया गमा। सैमद साराय भसद
ू गाजी को उसकी डेढ़ राख इस्राभी सेना के साथ सभाप्त कयने के
फाद भहायाजा सह
ु े र दे ि ने विजम ऩिफ भनामा औय इस भहान विजम के उऩरक्ष्म भें कई ऩोखये बी खद
ु िाए।
िे विशार ”विजम स्तॊब” का बी तनभाफण कयाना चाहते थे रेककन िे इसे ऩयू ा न कय सके। सॊबित् मह िही
स्थान है ल्जसे एक र्टीरे के रूऩ भे श्रािस्ती से कुछ दयू ी ऩय इकोना-फरयाभऩयु याजभागफ ऩय दे खा जा सकता
है ।

15

शल्क्त-ऩज
ू ा का विस्भयण – शॊकय शयण
by द्धवबु शभाम on Friday, October 21, 2011 at 11:50am ·

कचभीय के विस्थावऩत डॉक्र्टय कवि कुन्दनरार चौधयी ने अऩने कविता सॊग्रह ‗ऑप गॉड, भेन एॊड
शभशरर्टें ट्स‘ की बशू भका भें प्रचन यखा था् ―क्मा हभाये दे िताओॊ ने हभें तनयाश ककमा मा हभ ने

अऩने दे िताओॊ को?‖ इसे उन्हेआने कचभीयी ऩॊडडतेआ भें चर यहे भॊथन के रूऩ भें यखा था। सच ऩछ
ू ें ,
तो मह प्रचन सॊऩण
ू फ बायत के शरए है । इस का एक ही उत्तय है कक हभ ने दे िताओॊ को तनयाश
ककमा। उन्हेआने तो हये क दे िी-दे िता को, महाॉ तक कक विद्मा की दे िी सयस्िती को बी शस्त्र-

सल्ज्जत यखा था। औय हभने शल्क्त की दे िी को बी शभट्टी की भयू त भें फदर कय यख हदमा।
चीख-चीख कय यतजगा कयना शेयाॉ िारी दे िी की ऩज
ू ा नहीॊ। ऩज
ू ा है ककसी सॊकजऩ के साथ

शल्क्त-आयाधन कयना। सम्प्भान से जीने के शरए भत्ृ मु का ियण कयने के शरए बी तत्ऩय होना।
ककसी तयह तयह चभड़ी फचाकय नहीॊ, फल्जक दष्ु र्टता की आॉखेआ भें आॉखें डारकय जीने की यीतत
फनाना। मही िह शल्क्त-ऩूजा है ल्जसे बायत के रोग रॊफे सभम से विस्भत
ु े हेऄ।
ृ कय चक

श्रीअयविॊद ने अऩनी यचना बिानी भॊहदय (1905) भें क्राशसक स्ऩष्र्टता से मह कहा था। उनकी फात
हभाये शरए तनत्म-स्भयणीम है ् ―हभने शल्क्त को छोड़ हदमा है औय इसशरए शल्क्त ने बी हभें
छोड़ हदमा है । … ककतने प्रमास ककए जा चक
ु े हेऄ। ककतने धाशभफक, साभाल्जक औय याजनैततक

आॊदोरन शुरू ककए जा चुके हेऄ। रेककन सफका एक ही ऩरयणाभ यहा मा होने को है । थोड़ी दे य के

शरए िे चभक उठते हेऄ, कपय प्रेयणा भॊद ऩड़ जाती है , आग फझ
ु जाती है औय अगय िे फचे बी यहें
तो खारी सीवऩमेआ मा तछरकेआ के रूऩ भें यहते हेऄ, ल्जन भें से ब्रह्तभ तनकर गमा है ।‖

शल्क्त की कभी के कायण ही हभें विदे शशमेआ की ऩयाधीनता भें यहना ऩड़ा था। अॊग्रेजेआ ने सन ् 1857
के अनुबि के फाद सचेत रूऩ से बायत को तनयस्त्र ककमा। गहयाई से अध्ममन कयके िे इस

तनष्कर्षफ ऩय ऩहुॉचे थे, कक इसके त्रफना उनका शासन असुयक्षऺत यहे गा। तफ बायतीमेआ को तन्शस्त्र

कयने िारा ‗आम्प्सफ एक्र्ट‘ (1878) फनामा। गाॉधीजी ने अऩनी ऩुस्तक ‗हहन्द स्ियाज‘ भें गरत फात

शरखी कक अॊग्रेजेआ ने हभें हधथमाय फर से गुराभ नहीॊ फना यखा है । िास्तविकता अॊग्रेज जानते थे।
काॊग्रेस बी जानती थी। इसीशरए िह साराना अऩने अधधिेशनेआ भें उस एक्र्ट को हर्टाने की भाॉग

यखती थी। काॊग्रेस ने सन ् 1930 के ऐततहाशसक राहौय अधधिेशन भें बी प्रस्ताि ऩास कयके कहा था
कक अॊग्रेजेआ ने ―हभें तन्शस्त्र कयके हभें नऩुॊसक फनामा है ।‖

भगय इसी काॊग्रेस ने सत्ता ऩाने के फाद दे श को उसी नऩुॊसकता भें यहने हदमा! महद स्ितॊत्र होते

ही अॊग्रेजेआ का थोऩा हुआ आम्प्सफ एक्र्ट खत्भ कय हदमा गमा होता, तो बायत का इततहास कुछ औय
होता। हय सभ्मता भें आत्भयऺा के शरए अस्त्र-शस्त्र यखना प्रत्मेक व्मल्क्त का जन्भशसद्ध अधधकाय

16

यहा है । इसे महाॉ अॊग्रेजेआ ने अऩना याज फचाने को प्रततफॊधधत ककमा, औय काॊग्रेस के शब्देआ भें हभें
‗नऩुॊसक‘ फनामा! हभ साभूहहक रूऩ भें तनफफर, आत्भसम्प्भान विहीन हो गए। ऩीहढ़मेआ से ऐसे यहते
अफ मह हभायी तनमतत फन गमी है ।

आज हय हहन्द ू को घय औय स्कूर, सफ जगह मही सीख शभरती है । कक ऩढ़ो-शरखो, रड़ाई-झगड़े न
कयो। महद कोई झगड़ा हो यहा हो, तो आॉखें पेय रो। ककसी दफ
फ फच्चे को कोई उद्दॊड सताता हो,
ु र

तो फीच भें न ऩड़ो। तुम्प्हें बी कोई अऩभातनत कये , तो चऩ
ु यहो। क्मेआकक तुभ अच्छे फच्चे हो, ल्जसे

ऩढ़-शरख कय डॉक्र्टय, इॊजीतनमय मा व्मिसामी फनना है । इसशरए फदभाश रड़केआ से भत उरझना।
सभम नष्र्ट होगा। इस प्रकाय, ककताफी जानकायी औय साभाल्जक कामयता का ऩाठ फचऩन से ही
शसखामा जाता है । फच्चे दग
ु ाफ-ऩूजा कयके बी नहीॊ कयते! उन्हें कबी नहीॊ फतामा जाता कक दै िी
अितायेआ तक को अस्त्र-शस्त्र की शशऺा रेनी ऩड़ती थी। क्मेआकक दष्ु र्टेआ से यऺा के शरए शल्क्तसॊधान अतनिामफ भानिीम ल्स्थतत है । अऩरयहामफ कतफव्म है ।

ितफभान बायत भें हहन्द ू फच्चेआ को िास्तविक शल्क्त-ऩूजा से प्रेग की तयह फचा कय यखा जाता है !
कपय क्मा होता है , मह ऩॊजाफ, फॊगार औय कचभीय के हश्र से दे ख सकते हेऄ। सत्तय सार ऩहरे इन

प्रदे शेआ भें विद्िता, िकारत, अपसयी, फेऄककॊग, ऩत्रकारयता, डॉक्र्टयी, इॊजीतनमयी, आहद तभाभ सम्प्भातनत
ऩदेआ ऩय प्राम् हहन्द ू ही आसीन थे। कपय एक हदन आमा जफ कुछ फदभाश फच्चेआ ने इन्हें

साभूहहक रूऩ से भाय, रताड़ औय कान ऩकड़ कय फाहय बगा हदमा। अन्म अत्माचायेआ की कथा

इतनी रज्जाजनक है कक हहन्दओ
ु ॊ से बया हुआ भीडडमा उसे प्रकाशशत कयने भें बी अच्छे फच्चेआ
सा व्मिहाय कयता है । मा गाॉधीजी का फॊदय फन जाता है ।
तफ अऩने ही दे श भें अऩभातनत, फरात्कृत, विस्थावऩत, एकाकी हहन्द ू को सभझ नहीॊ आता कक कहाॉ
गड़फड़ी हुई? उस ने तो ककसी का फुया नहीॊ चाहा। उसने तो गाॉधी की सीख भानकय दष्ु र्टेआ, ऩावऩमेआ
के प्रतत बी प्रेभ हदखामा। कुछ विशेर्ष प्रकाय के दगाफाजेआ, हत्मायेआ को बी ‗बाई‘ सभझा, जैसे

गाॉधीजी कयते थे। तफ क्मा हुआ, कक उसे न दतु नमा के भॊच ऩय न्माम शभरता है , न अऩने दे श
भें ? उरर्टे , दष्ु र्ट दॊ फग फच्चे ही अदफो-इज्जत ऩाते हेऄ। प्रचन भन भें उठता है , ककन्तु अच्छे फच्चे की
तयह िह इस प्रचन को बी खर
ु कय साभने नहीॊ यखता। उसे आबास है कक इससे त्रफगड़ैर फच्चे

नायाज हो सकते हेऄ। कक ऐसा सिार ही क्मेआ यखा? तफ िह भन ही भन प्राथफना कयता हुआ ककसी
अिताय की प्रतीऺा कयने रगता है ।
हहन्द ू भन की मह ऩूयी प्रकिमा त्रफगड़ैर फच्चे जानते हेऄ। मशऩार की एक कहानी है ् पूरो का

कुताफ। पूरो ऩाॉच िर्षफ की एक अफोध फाशरका है । उसके शयीय ऩय एक भात्र िस्त्र उसकी फ्रॉक है ।
ककसी प्रसॊग भें रज्जा फचाने के शरए िह िही फ्रॉक उठाकय अऩनी आॉख ढॉ क रेती है । कहना

17

चाहहए कक दतु नमा के साभने बायत अऩनी रज्जा उसी फाशरका सभान ढॉ कता है , जफ िह खख
ूॉ ाय

आतॊकिाहदमेआ को ऩकड़ के बी सजा नहीॊ दे ऩाता। फल्जक उन्हें आदय ऩूिक
फ घय ऩहुॉचा आता है !
जफ िह ऩड़ोसी त्रफगड़ैर दे शेआ के हाथेआ तनयॊ तय अऩभातनत होता है , औय उन्हीॊ के नेताओॊ के साभने
बायतीम कणफधाय हॉ सते पोर्टो णखॊचाते हेऄ। इस तयह ‗ऑर इज िेर‘ की बॊधगभा अऩना कय रज्जा
तछऩाते हेऄ। स्िमॊ दे श के अॊदय ऩयू ी हहन्द ू जनता िही िभ दहु याती है , जफ कचभीयी भस
ु रभान ठसक
से हहॊन्दओ
ु ॊ को भाय बगाते हेऄ, औय उरर्टे नई हदजरी ऩय शशकामत ऩय शशकामत ठोकते हेऄ। कपय
बायत से ही से अयफेआ रूऩए साराना पीस िसर
ू कय दतु नमा को मह फताते हेऄ कक िे बायत से

अरग औय ऊॉची चीज हेऄ। ऩाककस्तान अधधकृत कचभीय ‗आजाद कचभीय‘ है , मह फमान श्रीनगय की
गद्दी ऩय फैठे कचभीयी भस
ु रभान दे ते है !

दस
ू ये प्रदे शेआ भें बी कई भुल्स्रभ नेता खर
ु े आभ सॊविधान को अॉगूठा हदखाते हेऄ, उग्रिाहदमेआ, दॊ गाइमेआ
की साभाल्जक, कानूनी भदद कयते हेऄ। ल्जस ककसी को भाय डारने के आह्तिान कयते हेऄ। जफ चाहे
विदे शी भुद्देआ ऩय उऩद्रि कयते हेऄ, ऩड़ोसी हहन्दओ
ु ॊ को सताते-भायते हेऄ। कपय बी हय दर के हहन्द ू

नेता उनकी चौकठ ऩय नाक यगड़ते नजय आते हेऄ। िे हय हहन्द ू नेता को इस्राभी र्टोऩी ऩहनने को
वििश कयते हेऄ, भगय क्मा भजार कबी खुद बी याभनाभी ओढ़ रें ! उनके योजे इफ्ताय भें हय हहन्द ू
नेता की हाल्जयी जरूयी है , भगय िही भुल्स्रभ यहनुभा कबी होरी, दीिारी भनाते नहीॊ दे खे जा

सकते। मह एकतयपा सदबािना औय एकतयपा सेक्मूररयज्भ बी फाशरका पूरो की तयह हहन्द ू
बायत की रज्जा तछऩाती है ।

मह ऩूयी ल्स्थतत दे श के अॊदय औय फाहय िारे त्रफगड़ैर फखफ
ू ी जानते हेऄ। जफकक अच्छा फच्चा
सभझता है कक उसने चऩ
ु यहकय, मा भीठी फातें दहु याकय, एिॊ उद्मोग, व्माऩाय, कम्प्प्मूर्टय औय

शसनेभा भें ऩदक हाशसर कय दतु नमा के साभने अऩनी रज्जा फचा री है । उसे रगता है ककसी ने
नहीॊ दे खा कक िह अऩने ही ऩरयिाय, अऩने ही स्िधभी दे शिासी को गुॊडेआ, उग्रिाहदमेआ के हाथेआ

अऩभातनत, उत्ऩीडड़त होने से नहीॊ फचा ऩाता। साभूहहक औय व्मल्क्तगत दोनेआ रूऩेआ भें । अऩनी

भातब
ृ ूशभ का अततिभण नहीॊ योक ऩाता। उसकी सायी कामफकुशरता औय अच्छा फच्चाऩन इस

द्ु सह िेदना का उऩाम नहीॊ जानता। मह रज्जा तछऩती नहीॊ, फल्जक औय उजागय होती है , जफ

सेक्मूरय फच्चे भौन यखकय हय फात आमी-गमी कयने की दमनीम कोशशश कयते हेऄ। डॉ. बीभयाि
अॊफेदकय की ऐततहाशसक ऩुस्तक ‗ऩाककस्तान मा बायत का विबाजन‘ (1940) भें अच्छे औय
त्रफगड़ैर फच्चे, दोनेआ की सॊऩूणफ भन्ल्स्थतत औय ऩयस्ऩय नीतत अच्छी तयह प्रकाशशत है ।

भगय अच्छे फच्चे ऐसी ऩुस्तकेआ से बी फचते हेऄ। िे केिर गाॉधी की भनोहय ऩोथी ‗हहन्द स्ियाज‘

ऩढ़ते हेऄ, ल्जसभें शरखा है कक आत्भफर तोऩफर से बी फड़ी चीज है । इसशरए िे हय कट्टे औय तभॊचे
के साभने कोई भॊत्र ऩढ़ते हुए आत्भफर हदखाने रगते हेऄ। कपय कोई सुपर न ऩाकय कशरमुग को

18

योते हेऄ। स्िमॊ को कबी दोर्ष नहीॊ दे ते, कक अच्छे फच्चे की उन की सभझ ही गरत है । कक उन्हेआने
अच्छे फच्चे को दब्फू फच्चे का ऩमाफम फना हदमा, ल्जस से त्रफगड़ैर औय शह ऩाते हेऄ। कक मह
प्रककमा सिा सौ सार से अहतनफश चर यही है । शल्क्त-ऩूजा बुराई जा चक
ु ी है । मही अनेक
सभस्माओॊ की जड़ है ।

आज नहीॊ कर, मह शशऺा रेनी ऩड़ेगी कक अच्छे फच्चे को फरिान औय चरयत्रिान बी होना चाहहए।
कक आत्भयऺा के शरए ऩयभुखाऩेऺी होना गरत है। भाभूरी धौंस-ऩट्टी मा फदभाशेआ तक से तनऩर्टने
हे तु सदै ि ऩुशरस प्रशासन के बयोसे यहना न व्मिहारयक, न सम्प्भानजनक, न शास्त्रीम ऩयॊ ऩया है ।

अऩभातनत जीना भयने से फदतय है । दष्ु र्टता सहना मा आॉखें चयु ाना दष्ु र्टता को खर
ु ा प्रोत्साहन है ।
याभामण औय भहाबायत ही नहीॊ, मूयोऩीम धचॊतन भें बी मही सीख है । हार तक मूयोऩ भें द्िॊद्ि-

मुद्ध की ऩयॊ ऩया थी। इसभें ककसी से अऩभातनत होने ऩय हय व्मल्क्त से आशा की जाती थी कक िह
उसे द्िॊद्ि की चन
ु ौती दे गा। चाहे उसभें उसकी भत्ृ मु ही क्मेआ न हो जाए।

इसशरए, कहने को प्रत्मेक शयद ऋतु भें कयोड़ेआ हहन्द ू दग
ु ाफ-ऩूजा भनाते है । इसे शल्क्त-ऩूजन बी

कहते हेऄ। ककन्तु मह िह शल्क्त-ऩूजा नहीॊ, जो स्िमॊ बगिान याभ को याऺसेआ ऩय विजम ऩाने के

शरए आिचमक प्रतीत हुई थी। ल्जसे कवि तनयारा ने अऩनी अदबुत यचना ‗याभ की शल्क्तऩूजा‘ भें
ऩूणत
फ ् जीिन्त कय हदमा है । आइए, उसे एक फाय ध्मान से रृदमॊगभ कयें !

19

भैक्स्भर
ू य द्िाया िेदेआ का विकृततकयण - क्मा, क्मेआ औय कैसे - २
एक भैक्सभूरय की खोज क्मेआ?
उन्नीसिीॊ सदी भें ईस्र्ट इॊडडमा कम्प्ऩनी के साभने ऐसी कौन सी वििचताएॊ थीॊ जो उन्हें अॊग्रेजी
औय सॊस्कृत दोनेआ ही बार्षाओॊ के ऻान भें अधकचये , अनब
ु िहीन, चौफीस िर्षीम, विदे शी जभफन

तनिासी भैक्सभूरय को िेद बाष्म के शरए चन
ु ना ऩड़ा? क्मा िे १७५७ भें स्थावऩत त्रब्रहर्टश शासन को
हहन्द ू धभफशास्त्रेआ का गहन अध्ममन कय महाॉ हहन्द ू धभफ शास्त्रानुसाय शासन चराना चाहते थे? मा
इसके विऩयीत क्मा िे हहन्द ू धभफ शास्त्रेआ को विकृत औय हहन्द ू सॊस्कृतत को हे म शसद्ध कयके

हहन्दओ
ु ॊ को ईसाईमत भें धभाफन्तरयत कयना चाहते थे? ताकक बायत सदै ि के शरए एक ईसाई याज्म
हो सके।

बायत भें ईसाईमेआ की गततविधधमाॉ

ईसाईमत एक धभफ आधारयत साम्राज्मिादी आन्दोरन है ा, औय प्रायम्प्ब से ही बायत ईसाई
शभशनरयमेआ के तनशाने ऩय यहा है । ईसाईमत छर, कऩर्ट, धोखा, जारसाजी औय प्ररोबन आहद के
द्िाया गैय-ईसाईमेआ के धभाफन्तयण के शरए विखमात यही है । बायत भें ऐसा आज बी सैक्मूररयज्भ

की आड़ भें औय तेज गतत से हो यहा है ; औय रगबग १००० हहन्दप्र
ू ततहदन धभाफन्तरयत हो यहे हेऄ।
बायत भें त्रब्रहर्टश शासन की स्थाऩना के ऩहरे बी ऩुतग
फ ार से सत्रहिीॊ सदी भें , सेन्र्ट जोविमय, औय
इर्टरी से योफर्टफ डी नोफरी (१५७७-१६५६) महाॉ आए थे ल्जन्हेआने छर-कऩर्ट से अनेक हहन्दओ
ू ॊ का
धभाफन्तयण ककमा।

ईसाई शभशनरयमेआ ने 'गोिा इन्क्िीजीशन' के दौयान (१५८०-१८१२), हजायेआ हहन्दओ
ु ॊ को ल्जन्दा

जरामा, कत्र ककमा औय उन्हें अनेक प्रकाय से प्रताडड़त ककमा (वप्रमोरकय)। नोफरी ने अऩने को
इर्टरी का योभन ब्राह्तभण फतामा औय १५७८ भें , 'एजयु िेदभ'् के नाभ से एक नकरी िेद की यचना
की। रेककन योफर्टफ नोफरी के छर-कऩर्ट की करई १८४० भें ऩयू ी तयह खर
ु गई। तफ तक, उसके
धोखे से, अनेक हहन्द ू ईसाई फन चक
ु े थे।

20

इसी प्रकाय एक दस
ू या जैसुआइर्ट शभशनयी अब्फे डुफोइस बी अठाहयिीॊ सदी भें बायत आमा।

रेककन कनाफर्टक के हहन्दओ
ु ॊ ने उसकी एक न सुनी क्मेआकक डुफोइस एक धोखेफाज था। (नर्टयाजन, ऩ ृ

वववर्टप्ऩ ्)। इसके फाद, १७९३ भें , इॊगरेऄड से फेऩहर्टस्र्ट चचफ का एक दर ये ि. विशरमभ कैयी के नेतत्ृ ि
भें बायत आमा ल्जसने करकत्ता के ऩास, १७९९ भें सीयभऩुय शभशन स्थावऩत ककमा। कैयी औय
उसके साथी भाशफभैन ने बी हहन्दओ
ु ॊ के धभाफन्तयण के शरएधोखाधड़ी का सहाया शरमा। रेककन

तत्कारीन फॊगार के सप्र
ु शसद्ध सभाज सध
ु ायक एिॊ प्रकाण्ड विद्िान याजा याभभोहन यॉम (१७७२१८३३) की विद्िता, तकफ शैरी औय अकाट्म प्रभाणेआ के साभने ईसाईमेआ की एक दार न गरी।

१८१५ से १८३३ तक करकत्ता भें , जहाॉ कक उस सभम ईस्र्ट इॊडडमा कम्प्ऩनी का भख
ु म कामाफरम था,
श्री यॉम का महाॉ के फौवद्धक िगफ भें अच्छा खासा प्रबाि था।

ऩादयी एडभ द्िाया हहन्द ू धभफ स्िीकायने की प्रततकिमा

१८२१ भें , करकत्ता भें एक ऐसी अविचिसनीम औय सनसनीखेज घर्टना घर्टी ल्जसकी प्रततकिमा के
कायण त्रब्रहर्टश साम्राज्म औय ईसाईमत की बायत भें हहन्द ू धभफ सम्प्फन्धी कामफिभेआ, मोजनाओॊ औय
मद्ध
ु नीततमेआ ऩय व्माऩक प्रबाि ऩड़ा।

हुआ मह कक १९ भाचफ १८१८ को शभशन सोसाइर्टी, रॊदन का ये ि. विशरमभ एडभ नाभक एक ईसाई
शभशनयी सीयभऩुय केन्द्र से सल्म्प्भशरत हुआ औय उसे याजा याभ भोहन यॉम को ईसाईमत भें

धभाफन्तरयत कयने का उत्तयदातमत्ि सौंऩा गमा। इस कामफ बाय को ऩूया कयने के शरए ऩादयी एडभ
श्री यॉम के अधधक सम्प्ऩकफ भें आने रगा औय अनेकेआ फाय िे आऩस भें धाशभफक िाद-वििाद भें बी
उरझने रगे। एक फाद ऩादयी एडभ ने फाइत्रफर के 'हरतनर्टी शसद्धान्त मानी 'तीन दै िीशल्क्तमाॉ'वऩता, ऩुत्र औय ऩवित्र आत्भा', तीनेआ एक ही हेऄ औय एक भें ही तीनेआ हेऄ, इस विर्षम ऩय चचाफ की।

जफकक श्री यॉम ने िेदेआ औय उऩतनर्षदेआ के आधाय ऩय प्रभाण दे ते हुए हहन्दओ
ु ॊ के एकेचियिाद के ऩऺ
भें तकफ हदए तथा िेदेआ की श्रेष्ठता औय उनकी तकफसॊगतत को स्थावऩत ककमा। यॉम के विचाय से
सहभतत जताते हुए एडभ ने ७ भई १८२१ को अऩने शभत्र एन. ब्राइर्ट को अऩने ऩत्र भें इस प्रकाय
शरखा्"It is several months since I began to entertain some doubts respecting the deity of Jesus
Christ, suggested by frequent discussions with Ram Mohan Roy, whom I was trying to
bring over to the belief of that doctrine, and in which I was joined by Mr. Yates, who also

21

professed to experience difficulties on the subject…..I do not hesitate to confess that I am
unable to remove the weighty objections which present themselves against the
doctrine……the objections against it, compared with the arguments for it, appear to me
like a mountain compared with a mole hill."
(Life and Letters of Ram Mohan Roy, p.68; Bharti, p.3).
अथाफत ् ''भेऄनेयाजा भोहन यॉम से कई भहीनेआ तक उनके जीजस सॊफॊधी सॊदेहेआ को दयू कयने के
उद्दे चम

से अनेक फाय फातचीत की ल्जसभें भेऄ जीजस िाइस्र्ट के शसद्धान्त को भनिाने के शरए

प्रमत्नशीर था। इस कामफ भें भेया साथ श्री मेट्स बी दे यहे थे। ऩयन्तु इन्हें बी जीजस के शसद्धान्तेआ
की ऩल्ु ष्र्ट कयने भें कहठनाई अनब
ु ि हुई है । भेऄ मह स्िीकायने भें नहीॊ हहचक यहा हूॉ कक भेऄ यॉम के
जीजस के शसद्धान्तेआ को स्िीकायने के वियोध भें दी गई तकों ि आऩल्त्तमेआ को दयू कयने भें
असपर यहा हूॉ, जो कक भुझे ईसाई शसद्धान्तेआ को न भानने की आऩल्त्तमेआ औय उनके सभथफन भें
हदए गए तकफ ऩहाड़ के साभने ततर सभान प्रतीत हो यहे हेऄ ।''

बायती, ऩ.ृ ३)।

(राइप एण्ड रैर्टसफ ऑप याभभोहन यॉम, ऩ.ृ ६८;

िह श्री यॉम से इतना प्रबावित हुआ कक उसने ईसाई भत त्माग कय हहन्द ू धभफ स्िीकाय कय शरमा।
इस प्रकाय एक ईसाई ऩादयी के तीन सार के बीतय फाईत्रफरीम 'हरतनर्टी' को त्मागने औय िैहदक
एकेचियिाद भें आस्था राने की घर्टना ने रॊदन ईसाई शभशनेआ भें मकामक एक अप्रत्माशशत बूचार
रा हदमा। अभयीका के शभशन ऺेत्रेआ भें बी अबूतऩूिफ प्रततकिमा हुई औय हड़कम्प्ऩ आ गमा। ये िये ण्ड
एडभ के ईसाईमत कोत्मागने औय हहन्द ू धभफ को स्िीकायने से ईसाई शभशनेआ औय शभशनरयमेआ को
जफयदस्त धक्का ऩहुॉचा ल्जससे उनकी बायत भें नीॊि हहर गई। इसीशरए आज बी चचफ 'हरतनर्टी'
ऩय अधधक फर नहीॊ दे ता है ।
इसकी प्रततकिमा भें शभशन सोसामर्टी रॊदन ने अऩनी, २० जन
ू १८२२ की िावर्षफक रयऩोर्टफ भें ये ि.
विशरमभ एडभ के फाये भें मह घोर्षणा की्

"We mention with deep regret that Mr. Adam, late one of their member had embraced
opinions derogatory to the honour of the Saviour, denying the proper divinity of 'Our god
Jesus Christ' in consequence of which the connection between him and the society has been
dissolved."
(Bharti, p. 4)

22

'हभ अत्मन्त द्ु ख के साथ सूधचत कयते हेऄ कक अऩने एक ऩूिफ सदस्म शभ. एडभ ने उद्धायक जीजस
के विरुद्ध अऩभानजनक विचाय व्मक्त ककए हेऄ औय हभाये 'दे ि जीजस िाइस्र्ट' के सभुधचत दे ित्ि
को नकाया है । इसके ऩरयणाभस्िरूऩ उसके औय रॊदन सोसामर्टी के फीच सबी प्रकाय के सॊफॊध
सभाप्त कय हदए गए हेऄ।''
(बायती, प्र.4)
ये ि. विशरमभ एडछभ, ल्जसे चचफ ने अविचिासी घोवर्षत कय, तनष्काशसत कय हदमा, िही सोशसतनमभ
ऩादयी अफ याभ भोहन यॉम के साथ िैहदक धभफ के एकेचियिाद का प्रचायक हो गमा।
उऩयोक्त घर्टनािभ के आघात के ऩरयणाभस्िरूऩ त्रब्रहर्टश कूर्टनीतताोोोॊ औय शभशनरयमेआ को अऩनी
भूर मोजनाओॊ औय मुद्ध नीततमेआ को फदरने के शरए वििश होना ऩड़ा। अफ शभशनयी जगत ने

ईसाइमत के भुखम शसद्धान्तेआ औय सभस्माओॊ ऩय विचाय कयना प्रायॊ ब ककमा औय िे सफ इस नतीजे
ऩय ऩहुॉचे कक यॉम को 'हरतनर्टी' सॊफॊधी आऩल्त्तमेआ का केिर इसी आधाय ऩय उत्तय हदमा जा सकता
है कक िे कोई ऐसा व्मल्क्त ढूॊढ सकें जो सॊसाय के साभने मह शसद्ध कय दे कक िेदेआ भें बी
फहुदेितािाद है औय िे बी अनेक दे िताओॊ की उऩासना की शशऺा दे ते हेऄ। अत् इन घर्टनाओॊ ने
त्रब्रहर्टश शासकेआ को एक ऐसे व्मल्क्त को खोजने के शरए वििश कय हदमा जो हहन्द ू धभफशास्त्रेआ की
ऐसी भ्राभक ि विरूवऩत व्माखमा कय सके ल्जसके ऩरयणाभस्िरूऩ शभशनयी हहन्द ू धभफ की तनदाॊ

कय सकें औय िे हहन्दओ
ु ॊ को ईसाइमत भें आसानी से धभाफन्तयण कयने, तथा ईसाईमेआ की हहन्द ू धभफ
भें िावऩसी को योकने भें सभथफ हो सके।

23

भैक्स्भर
ू य द्िाया िेदेआ का विकृततकयण - क्मा, क्मेआ औय कैसे
बायत के रोगेआ को फ्रेडरयक भैक्सभूरय का ऩरयचम कयाने की आिचमकता नहीॊ हेऄ क्मेआकक त्रब्रहर्टश

शासनकार भें त्रब्रहर्टश याजनीततऻेआ, प्रशासकेआ औय कूर्टनीततऻेआ ने उसे एक सदी (१८४६-१९४७) तक
रगाताय हहन्दओ
ु ॊ का एक अशबन्न शभत्र औय िेदेआ के भहान विद्िान के रूऩ भें प्रस्तुत ककमा है ,

ऩयन्तु सत्म इसके विऩयीत है । िास्ति भें िह हहन्दओ
ु ॊ औय हहन्द ू धभफशास्त्रेआ का एक भहान शखु

था। रेककन दब
ु ाफवम से, उस सभम के ही नहीॊ, फल्जक आज के हहन्द ू बी उसके उद्दे चम ि कामफ के
दयू गाभी प्रबाि को सभझने भें असपर यहे हेऄ क्मेआकक भैक्सभूरय ने अऩनी रेखनी की चतुयाई

द्िायाअऩने िास्तविक स्िरूऩ औय िेद बाष्म के विकृतीकयण के उद्दे चम को फड़े मोजनाफद्ध तयीके
से तछऩाए यखा, महाॉ तक कक उसके तनधन के फाद सन ् १९०१ भें प्रकाशशत स्िशरणखत जीिनी भें
बी उसे उजागय नहीॊ ककमा।

इस सन्दबफ भें श्री ब्रह्तभदत्त बायती ने अऩनी ऩुस्तक 'भैक्सभूरय-ए राइप रौंग भास्कये ड' भें इस
प्रकाय शरखा है ्

"Max Muller's effectiveness as the arch enemy of Hinduism lay dangerously hidden in his
subtle equivocations and in his ability, which seemed congenital, successfully to pass a
counterfeit coin without being caught while performing the feat. His capacity to look honest
and sound sincere on surface was prodigious. the Hindus, of the nineteenth century failed
to discover and understand Max Muller and his Max Mullerism, because, by and large,
being, too gullible, they believed whatever max Muller wrote and said. "Since he had been,
in addition, convertly supported and encouraged by the Englishmen who then ruled
Hindustan, he was able to mount his veiled attacks on Hinduism again and again from
behind the convenient cover of philological
research."
(p. 194)
अथाफत ् ''भैक्सभूरय की हहन्दध
ू भफ के प्रतत कट्र्टय शत्रत
ु ा का प्रबािीऩन उसकी रेखनी की फहुअथी
शैरी भें बमॊकय रूऩ से तछऩा हुआ है । इस सपरता का यहस्म उसकी इस मोवमता से बी आसानी
से सभझा जा सकता है , जैसे कोई चाराक व्मल्क्त खोर्टे शसक्के को चरा दे ने ऩय बी ऩकड़ा नहीॊ
जाता है । उसका ऊऩय से हहन्द ू धभफ शास्त्रेआ- िेदेआ आहद के प्रतत सच्चा औय तनष्ठािान हदखराई

दे ना उसकी आचचमफजनक यहस्मभमी रेखनशैरी की ऺभता का ऩरयचामक है । उन्नीसिी सदी के
हहन्द ू भैक्सभर
ू य औय उसके भैक्सभर
ू यिाद को ऩहचानने औय सभझने भें ऩयू ी तयह असपर यहे

24

हेऄ क्मेआकक हहन्दओ
ु ॊ के आभतौय ऩय अत्मॊत सीधे-सादे होने के कायण उन्हेआने उसे ही सच भान

शरमा जो कक भैक्सभूरय ने कहा औय शरखा। इसके अततरयक्त उसे आजीिन अप्रत्मऺ रूऩ ् से

अॊग्रेजेआ का ऩूणफ सभथफन औय सहमोग शभरता यहा जो कक उस सभम बायत के शासक थे। इसी
कायण िह बार्षा विऻान-शोध की आड़ भें तछऩकय रगाताय हहन्द ू धभफ एिॊ िेदेआ ऩय प्रहाय कयता
यहा।''

(ऩ.ृ १९४)
इसी के साथ-साथ अॊग्रेज शासक रगाताय मही प्रचाय कयते यहे कक भैक्सभर
ू य तो िेदेआ का भहान
विद्िान औय हहन्द ू धभफ तथाहहन्दआ
ु अें का शब
ु धचॊतक है । िे इस कथन की ऩल्ु ष्र्ट इस फात से

कयते हेऄ कक उसने ऑक्सपोडफ मतू निशसफर्टी भें १८४६ से १९०० तक िेदेआ औय हहन्द ू धभफशास्त्रेआ ऩय
एक विशार साहहत्म स्िॊम शरखा तथा अऩने जैसे सहमोगी रेखकेआ द्िाया शरखिाकय उसे स्िमॊ
सॊऩाहदत ककमा।
भैक्सभूरय ने अऩनी फहुअथी रेखनी की आड़ भें आजीिन िेदेआ को विरूवऩत ककमा, कपय बी िह
अऩने को हहन्द ू धभफ का हहतैर्षी होने का ढेआग यचता यहा। इस फात के इतने ऩक्के, सच्चे औय

आचचमफजनक प्रभाण हेऄ कक कोई बी तकफ उसे िेदेआ के विकृतीकयण के दोर्ष से फचा नहीॊ सकता।
भैक्सभूरय की दस
ू यी जीिनी भें असरी स्िरूऩ
इसके शरए हभें फाहय के ककसी दस
ू ये प्रभाणेआ की आिचमकता नहीोेोॊ है क्मेआकक भैक्सभूरय द्िाया
शरणखत साहहत्म औय अऩने शभत्रेआ, ऩरयिायीजनेआ आहद को शरखे उसके ऩत्रेआ भें ही प्माफप्त साभग्री

शभरती है । हाराॊकक भैक्सभर
ू य की स्िशरणखत जीिनी १९०१ भें ही प्रकाशशत हुई थी, ऩयन्तु उसकी
ऩत्नी जोल्जफना भैक्सभर
ू य ने उसके पौयन फाद १९०२, भें उसकी एक औय जीिनी ''दी राइप एण्ड
रैर्टसफ ऑप दी आनये त्रफर फ्रेडरयक भैक्सभर
ू य'' के नाभ से प्रकाशशत की। इसभें अन्म विियणेआ के

सहहत भैक्सभर
ू य द्िाया शरखें ऩत्रेआका सॊकरन बी है । उसके प्रकाशन का उद्दे चम स्ऩष्र्ट कयते हुए
श्रीभती जोल्जफना नऩे ऩस्
ु तक की बशू भका भें शरखा्
"It may be thought that the publication of these volumes is superfluous after two works
'Auld Lang Syne' and the 'Autobiography (2 Vols.) written by Max Muller himself. But it
seemed that something more wanted to show the innermost character of the real man….
The plan pursued throughout these volumes has been to let Max Muller's letters and the
testimony of friends to his mind and character speak for themselves, whilst the whole is
connected by a slight thread of necessary narrative. The selection from the letters has been
made with a view to bring the man rather the scholar before the world."

25

(preface to November,1902, New York Edition; Bharti, p. IX).
अथाफत ् ''ऐसा सोचा जा सकता है ककस्िमॊ भैक्सभूरय द्िाया शरणखत ''औजड रेऄग सामने'' औय

''आत्भजीिनी'' (२ खॊडेआ भें ) प्रकाशशत हो जाने के फाद, इन खॊडेआ के प्रकाशन की कोई आिचमकता
नहीॊ है । रेककन भुझे ऐसा प्रतीत हुआ कक उस भनष्ु म के आन्तरयक चरयत्र की िास्तविकताको
हदखाने के ल्जए कुछ औय अधधक कयने की आिचमकता है । इन खॊडेआ भें जो मोजन रगाताय
अऩनाई गई है िह भैक्सभूरय के ऩत्रेआ औय उसके शभत्रेआ के प्रभाणस्िरूऩ ् हदए गए कथन, उस

भनष्ु म की सोच औय चरयत्र को स्िमॊ उजागय कयते हेऄ, जफकक सभस्त साभग्री आिचमक आत्भकथा
के धागे से फाॊोी हुई हेऄ। महाॉ उद्धत ऩत्रेआ का चन
ु ाि इस उद्दे चम से ककमा गमा है ताकक विचि के
साभने एक विद्िान की अऩेऺा उस भनष्ु म का सही स्िरूऩ प्रस्तत
ु ककमा जा सके।''
(न्मूमाकफ सॊस्कयण, १९०२, प्राक्कथन ऩ.ृ प्ग ्)
इसशरए महाॉ हभाया उद्दे चम मह सभझने का है कक क्मा िह िास्ति भें िेदेआ औय हहन्द ू धभफ

शास्त्रेआ का प्रशॊसक औय बायत का शभत्र था? क्मा िह िेदेआ, उऩतनर्षदेआ, दशफनेआ आहद के उदात्त,
प्रेयणादामक औय आध्माल्त्भक धचॊतन से प्रबावित था, औय उन्हें िह अॊग्रेजी भाध्मभ से विचिबय
भें पैराना चाहता था? क्मा िह बायतीम धभफशास्त्रेआ का ल्जऻासु था? क्मा उसने ऋविेद का बाष्म

बायतीम प्राचनी मास्कीम-ऩाणणनीम ऩद्धतत के अनुसाय ककमा था? उसने सामण-बाष्म को ही आधाय
क्मेआ भाना? क्मा उसने सामण के सबी भाऩदण्डेआ को अऩनामा? महद नहीॊ, तो क्मो? आणखय उसे
िेदेआ भें क्मा शभरा?
क्मा िह तुरनात्भकबार्षा विऻान औय गाथािाद के शोध की आड़ भें एक ऩऺऩाती, ऩूिाफग्रही औय
छद्भिेशी सैक्मूरय ईसाई शभशनयी था? जो िेदेआ औय हहन्द ू धभफ शास्त्रेआ के भ्राभक अथफ कयके
हहन्द ू धभफ को सभर
ू नष्र्ट कयना चाहता था। कमा िह िेदेआ को फाईत्रफर से तनचरे स्तय का

हदखाकय बायतीमेआ को ईसाईमत भें धभाफन्तरयत कयना औय बायत भें त्रब्रहर्टश याज को सुदृढ़ कयना
चाहता था? आणखय उसने िेदेआ औय बायत के प्राचीन इततहास के फाये भें अनेक कऩोर-कल्जऩत

भान्मताएॊ क्मेआ स्थावऩत कीॊ? इसके अरािा ईस्र्ट इॊडडमा कॊऩनी ने बी अॊग्रेजी औय सॊस्कृत दोनेआ

ही बार्षाओॊ के ऻान भें अधकचये , चौफीस िर्षीम, अनब
ु िहीन गैय-त्रब्रहर्टश, जभफन मि
ु क भैक्सभर
ू य को
ही िेदबाष्म के शरए क्मेआ चन
ु ा?

उसने िेदेआ का विकृतीकयण क्मा, क्मेआ औय कैसे ककमा? इन्हीॊ कुछ प्रचनेआ को महाॉ सॊऺेऩ भें

विचरेर्षण ककमा जाएगा ताकक अधकचये ऻानी हहन्द ू औय सैक्मूरयिादी, जो उसके विकृत साहहत्म

के आधाय ऩय सभम-सभम ऩय हहन्द ू धभफ की तनॊदा कयते यहते हेऄ, उसकी िास्तविकता तथा उसके

26

तनहहत उद्दे चम को सभझ सकें। इसके शरए हभें तत्कारीन त्रब्रहर्टश शाशसत बायत की धाशभफक ि
याजनैततक ल्स्थततमेआ कोसभझना होगा, ल्जनके कायण उन्हें एक भैक्सभूरय की तराश कयनी ऩड़ी।

27

बागना.. कामयता की तनशानी नहीॊ .. अवऩतु अगरे अिसय का प्रमास - रिी बायद्िाज
जी
रोग कहते हेऄ की फाफा याभदे ि बाग गमा....

ऩय बाई .. जफ बगाओगे तो... बागना तो ऩड़ेगा ही ?

भय कय रड़ाई नहीॊ जीती जाती ..
...
मे गॊधासुय की जो कहातनमाॊ हेऄ न, इसने ऩूयी ऩीढ़ी का सत्मानाश भाय हदमा....

अहहॊसा.... अनशन...

बगत शसॊह ने बी ककमा था सत्माग्रह .. रट्ठ खा कय शसद्धा हो गमा था ... कपय फन्दक
ू ही उठाई
l

अफ आता हूॉ भुद्दे ऩय....

1. बगिान ् श्री कृष्ण बागे थे.... भथयु ा से... द्िारयका गए..
नाभ ऩडा यणछोड़...
ऩयन्तु नाभ की धचॊता नहीॊ की उन्हेआने...

28

क्मेआकक िो जानते थे की िो ककस कामफ के शरए धयती ऩय आमे हेऄ... औय जयासॊध के साथ होने
िारे मुद्धेआ भें सभम नष्र्ट होगा औय जान भार की हातन अरग....

2. ... चन्द्रगुप्त भौमफ ...

जाने ककतनी फाय धननॊद के याज्म भें फीचेआ फीच घुस कय आिभण कयता था....
कपय हाय कय िावऩस बाग कय आता था...
क्मेआ.... क्मेआकक अगरी फाय कपय कोशशश करूॉगा....
आमफ चाणक्म ने सभझामा की फेर्टा अॊदय से नहीॊ फाहय से जीत .. उसकी सभझ भें नहीॊ आमा...

कपय दोनेआ चािर खाने फैठे...
चन्द्रगुप्त ने चािरेआ भें फीचो फीच हाथ डारा...
चािर गभफ थे... हाथ जर गमा .. तो हाथ ऩीछे खीॊच...

कपय आमफ चाणक्म ने कहा...
तेये से चािर खाए नहीॊ जा यहे .. तू धननॊद को कैसे जीतेगा ?
कपय सभझामा .. फेर्टा... कोने कोने से खाओ...
ठॊ डे कयके खाओ...

3. ऩथ्
ृ िी याज चौहान बी रेके ही बागा था .. सॊमोधगता को ...

29

नहीॊ बागता .. तो जमचॊद उसे िहीॊ खत्भ कय दे ता...

4. शशिाजी .. परेआ के र्टोकये भें छुऩ कय बागे थे...

5. दशभ गुरु गोत्रफॊद जी को बी कई भोकेआ ऩय बागना ही ऩडा था .. नाॊदेड बी गए... हजूय
साहहफ

6. भहायाणा प्रताऩ की आमु तो बागते बागते.. तछऩते तछऩते .. जॊगरेआ भें ही गुजयी ...

7. फुन्दे रखण्ड का भहान शूयिीय छत्रसार.... िो बाग बाग कय ही विजमी हुआ...

8. ताॊत्मा र्टोऩे... नाना साहफ .... मे बी बागते ही थे न...

9. ... औय सनातन सॊस्कृतत की सफसे शूयिीय नारयमेआ भें अऩना नाभ यखने िारी .. ब्राह्तभणी यानी
रक्ष्भी फाई ...

उसको बी अॊत सभम भें बागना ही ऩडा....
अऩने ऩुत्र को ऩीठ ऩय फाॉध कय बागी थी िो ...

10. बगत शसॊह.... बागे थे साॊडसफ को भाय कय...
केश कर्टिा शरए थे....

30

11. चन्द्रशेखय सीतायाभ ततिायी आजाद....
बगिा िस्त्र ऩहन कय ही बागे थे....

12. सुखदे ि .. याजगुरु जी ... सफ बागे ही थे...

13. हुतात्भा गोडसे जी खड़े यह गए....
औय इस ऋवर्ष बूशभ दे ि तुरी अखॊड बायत के तत्कारीन सभस्त जनभानस ने दे खा..... की ककस
प्रकाय...

हयाभखोय को .. हे -याभ फना कय ऩेश ककमा गमा...
नेहरु द्िाया....

************************

बाग जाना..... कामयता नहीॊ होती...
बाग जाना.... एक दस
ू या भोका ढूॉढने का अिसय बी दे ता है ..

इसशरए आिचमक है .. की ितफभान ऩीढ़ी की भानशसकता फदरी जाए....

औय.... हभ सफ स्िमभ अऩनी भानशसक्त अबी फदरें ..

31

तनयथफक CONgrASSi ऩुस्तकेआ की shikshaon को padh कय अऩनी सनातन सॊस्कृतत के
गौयिशारी इततहास को जातनमे...

हभ रोग कबी ऐसे नऩुॊसक नहीॊ थे... इस फात ऩय विचाय कयना आिचमक है l

32

बायतीम सॊस्कृतत भें याष्रधभफ औय विधान का याज्म:बायतीम सॊस्कृनत भ साभाक्जक व्मवस्था का सॊचारन सयकायी कानयन से नहीॊ फक्ल्क रस्चमरत

ननमभैऄ क्जसे ‗धभम‘ के नाभ से जाना जाता था, के द्सवाया होता था। धभम ही वह आधाय था जो
सभाज को सॊमुतत एवॊ एक कयता था तथा द्धवमबन्न वगों भ साभॊजस्म एवॊ एकता के मरए
कतमव्म-सॊदहता का ननधामयण कयता था।

याष्ट्रधभम के फाये भ रस्चमरत शास्रोतत कहावत ् -‘ जननी जन्भबमय भश्च स्वगामदद्धऩ गयीमसी‖ के

अॊतग
म त जननी औय जन्भबमय भ को स्वगम से बी फढकय फतामा गमा है । भातब
ृ मय भ को स्वाधीन

यखने का ऋग्वेद भ स्ऩष्ट्ट आहवन है - मतेभदह स्वयाज्मे। बायतवषम भ ऋग्वेद भ ‗गणाॊना त्वाॊ
गणऩनत‘ आमा है । गण औय जन ऋग्वेद भ हैं। भहाबायत भ धभमयाज मुधधक्ष्ट्ठय ने बीष्ट्भ से आदशम
गणतॊर की ऩरयबाषा ऩयछी। बीष्ट्भ ने (शानतऩवम 107.14) फतामा कक बेदबाव से गण नष्ट्ट होते

हैं।अथवमवेद (6.64.2) भ सभानो भॊर: समभनत: – - सभानॊ चेतो अमबसॊद्धवशध्वभ ्॥ भनुष्ट्मैऄ के द्धवचाय
तथा सबा सफके मरए सभान हो कहा गमा है । एक द्धवचाय एवॊ सफको सभान भौमरक शक्तत

मभरने की फात कही है । द्धवधान के याज्म की सॊक्षऺप्त ऩरयबाषा बी मही है । गण के मरए आॊतरयक
सॊकट फड़ा होता है - आभ्मॊतय यक्ष्मभसा फाह्मतो बमभ ्, फाह्म उतना फड़ा नहीॊ। गणतॊर के भयर शब्द
गण की अवधायणा अथमशास्र के यचनमता कौदटल्म औय आचामम ऩाखणनी के जभाने भ बी वखणमत
है । उस कार भ सभाज के रस्नतननधधमैऄ के दरैऄ को गण कहा जाता था औय मही मभरकय सबा
औय समभनतमाॊ फनाते थे।
ककसी ऐसे काक्ल्ऩनक छोटी शासन व्मवस्था भ बी, सबी पैसरे फहुसॊख्मक वोट से हो, ऐसा सॊबव
नहीॊ। जनता का शासन तबी सॊबव है जफ फहुसॊख्मक सभाज अऩने भत द्सवाया ऐसा द्धवधान फनाए
क्जसका ऩारन रस्त्मेक व्मक्तत के उऩय, ऩुमरस औय न्मामारम द्सवाया कयामा जाए अरोकताॊबरक

तानाशाह अऩने भजॉ को सॊद्धवधान औय कानयन द्सवाया जनता ऩय थोऩ सकते हैं। जो सभाज याष्ट्रैऄ
के ननभामण के ऩयवम ककसी रस्ाकृनतक ननमभ मा भमामदा को तयजीह दे ती हैं औय भानवाधधकायैऄ के

रस्नत सॊवेदनशीर है वे द्धवधान के द्सवाया ननमभमत याज्म का सभमथन कयती हैं।एक ननयॊ कुश तानाशाह
कानयन के ननमभैऄ से रैस होकय भानवाधधकायैऄ की अवहे रना कयता है ।। ककसी श्रेष्ट्ठ कानयन की

सॊयचना के मरए द्धवधध के द्धवधान की आवश्मकता होती है । द्धवधान के याज्म के बफना क्स्थय फडे
रोकताॊबरक सयकाय की कल्ऩना नहीॊ की जा सकती। स्थानमत्व औय ननयन्तयता की खबय फमाॉ औय
याष्ट्र को अऺुण्ण यखने की चाह के कायण ही द्धवधान के याज्म को बेदबाव पैराने वारे

याजनेताओॊ के शासन ऩय रस्ाथमभकता मभरती है । गरती से मा जानफयझकय कोई बी व्मक्तत

ननमॊरण के अबाव भ कानयन का अनुऩारन नहीॊ कयना चाहता है । इसी रस्काय शासनाध्मऺ मा

33

साॊसद सॊद्धवधान को अॊगीकृत औय आत्भाद्धऩमत कयने की शऩथ रेने के फावजयद, अऩने स्वाथमवश मा
याजनैनतक कायणैऄ से उसका गरत अथम ननकारते हैं मा उसकी अवहे रना कयते हैं।

द्धवधध का द्धवधान सयकायैऄ भ वैद्समता स्थाद्धऩत कय क्स्थयता राती है । भानवाधधकाय, व्मक्ततगत
स्वतॊरता औय रस्जातॊर मे तीन भुख्म कायण/उद्देश्म हैं क्जसके मरए जनता शासकैऄ के शासन को

सहन एवॊ सहमोग कयती है । एक सयकाय जो द्धवधध फनाने भ द्धवधान के ननमभैऄ को नजयअॊदाज
कयती है , वह न केवर इन तीन भयल्मैऄ भ कटौती कयती है फक्ल्क अऩने अक्स्तत्व के मरए बी

खतया उत्ऩन्न कयती है । जफ द्धवधान याज्म कयता है तो कोई द्धवमशष्ट्ट आऻा दानमत्व ननवामहन के

फीच नहीॊ आती। तमयककॊ हभे जनता की धचॊता है इसमरए हभ द्धवधान के ननमभैऄ को रस्बावी तयीके
से रागय औय कामामक्न्वत होते दे खना चाहते हैं। कानयन औय कतमव्म का रयश्ता महाॉ उत्तायदानमत्व
का होता है ।

सभान्म ऩरयबाषा भ द्धवधान याज्म मा धभमयाज्म एक ऐसा तॊर है जहाॉ कानन
य जनता भ सवमभान्म

हो; क्जसका अमबरस्ाम(अथम) स्ऩष्ट्ट हो; तथा सबी व्मक्ततमैऄ ऩय सभान रुऩ से रागय हो। मे याजनैनतक
औय नागरयक स्वतॊरता को आदशम भानते हुए उसका सभथमन कयते है , क्जससे कक भानवाधधकाय
की यऺा भ द्धवश्व भ अहभ ् बयमभका ननबाई गई है । द्धवधान के याज्म एवॊ उदाय रस्जातॊर भ

अनतगम्बीय सम्फन्ध है । द्धवधान का याज्म व्मक्ततगत अधधकाय एवॊ स्वतरॊता को फर दे ता है , जो
रस्जाताॊबरक सयकाय का आधाय है । सयकाय द्धवधान के याज्म की श्रेष्ट्ठता स्वीकाय कयते हुए जनता
के अधधकायैऄ के रस्नत सचेत यहती हैं, वहीॊ एक सॊद्धवधान,जनता भ कानयन की स्वीकृनत ऩय ननबमय

कयता है । द्धवधध एवॊ द्धवधान के याज्म भ कुछ खास अन्तय हैं- जो सयकाय रस्ाकृनतक ननमभ, भमामदा,
व्मवहाय द्धवधध को आदम श भानते हुए, ककसी रस्काय के ऩऺऩात नहीॊ कयती तथा न्माम के सॊस्थानैऄ
को रस्ाथमभकता दे ती हैं ,वे द्धवधान द्सवाया स्थाद्धऩत होती हैं।
बाग -2
बायतवषम के स्वतॊरता सॊग्राभ के सॊघषम भ स्वदे शी द्धवचायधाया, याष्ट्र के सॊस्कृनतक गौयव औय उसकी
बावना की अहभ ् बयमभका यही है । स्वाधीनता का अथम याष्ट्रद्धऩता के ननगाह भ याष्ट्र के सभाक्जक

जीवन जो रस्शासननक व्मवस्था, आधथमक द्धवकास औय तत्कारीन धामभमक झुकाव को दषामती है , सबी
को दहन्दस्
य तानी द्धवचायैऄ औय जीवन के सवाांगीण द्धवकास से सुशोमबत कयना था। इॊग्रैण्ड भे ऩढ़े

औय दक्षऺण औय दक्षऺण अफ्रीका भ कानयन तथा याजनीनत भ काममयत याष्ट्रद्धऩता भहात्भा गाॉधी ने

याष्ट्र के स्वतॊरता सॊग्राभ के सॊघषम आभ आवाभ का ऩरयधान स्वदे शी धोती को अऩनामा। गाॉधीजी
का दे हान्त 30 जनवयी 1948 को हुआ। सॊद्धवधान ऩय द्धवचाय – द्धवभसम 5 नवम्फय 1948 से शुरू हुआ।
26 जनवयी 1950 को उसका बायतीम गणयाज्म के रूऩ भ रागु कय ददमा गमा।

34

ककसी याष्ट्र के जीवन भ दे खने के मरए एक वातामन होता है सादहत्म, जो उस याष्ट्र के धभम, करा,
सॊस्कृनत औय भानवीम भयल्मो का बी सजमक होता है । सॊद्धवधान का स्थान इसभ रस्थभ है ।सॊद्धवधान
केवर एक मरखीत दस्तावेज नहीॊ वह याष्ट्र के साॊस्कृनतक, साभाक्जक, याजनीनतक औय आधथमक

रक्ष्मैऄ का भागमदशमक बी होता है । स्वदे शी आॊदोरन से मभरी स्वतॊरता के फाद ननमभमत बायतीम
सॊद्धवधान के ज्मादातय तत्व द्धवदे शी स्रोतैऄ से है । फहुत कभ ही फात हैं जो बायतीम सॊस्कृनतक
भयल्मैऄ ऩय आधारयत हैं क्जसे सॊद्धवधान भ शामभर ककमा गमा है । जफकक मह एक ऐनतहामसक

सच्चाई है , द्धवश्व की सफसे ऩयु ानी गणयाज्म बफहाय के मरच्छवी( वैशारी) भ काममयत थी। सॊद्धवधान
की सॊयचना के ढाॉचे का अधधकतय अॊश औऩननवेमशक दासता के ददनैऄ भ ऩारयत, बायत सयकाय

अधधननमभ 1935 से फना है , क्जसे दब
ु ामग्मवश ननयन्तयता औय क्स्थयता के आधाय ऩय अऩनाना
जरूयी सभझा गमा। सॊद्धवधान का बाग 3 भ अॊककत दाशमननक बाग जो भौमरक अधधकायैऄ से

सॊफधधत है का कुछ बाग, सॊघात्भक शासन रस्णारी, न्मामऩामरका, अभेरयकन सॊद्धवधान से शामभर
ककमा गमा है । बाग 4 भ अॊककत याज्म के नीनत ननदे शक तत्व आमयरैंड से, 4अ भ वण0्म क्श्नय्

ात

भयर कतमव्म सोद्धवमत सॊघ से, याजनैनतक बाग क्जसभे द्धवधानमका औय काममऩामरका के सॊफन्ध औय
भॊरीभॊडर के उत्तायदानमत्व, रस्कक्रमा एवॊ द्धवशेषाधधकाय हैं बब्रटे न से,गणतॊरात्भक शासन व्मवस्था

फ्राॊस से, सॊघ औय याज्मो का शक्ततद्धवबाजन कनाडा से, जभमनी से आऩात उऩफॊध, आस्टे य् मरमा से

सभवतॉ सयची। इन सफके फावजुद बब्रटे न, मययोऩीम सॊघ तथा अन्म याष्ट्र भे भौजयद द्धवधान के याज्म
के मसिाॊन्त बायतीम सॊद्धवधान भ ऩुणम रुऩ से रागय नहीॊ हैं, इसभ सभता का मसिाॊन्त रस्भुख है ।
काममऩामरका औय नौकयशाह के अधधकाय आभ जनता से अधधक हैं।

कहने को तो हभ गणतॊर है , ऩय इस गणतॊर से गण गामफ है , जनतॊर से जन गामफ है तथा तॊर
की तानाशाही है । जन औय गण की बमय भका केवर भत दे ने तक यह गमी आज बी बायतीम

गणयाज्म की सपरता बायतीम एकता औय सॊरस्बत
ु ा के सभऺ चन
ु ौनतमाॊ अऩनी जदटरता के साथ
ऩयय ी तयह भौजद
य है । बायतीम गणतॊर को बायत के अॊदरूनी शक्ततमैऄ ने ही खोखरा ककमा है ।

कानन
य व्मवस्था यस्भ आदामगी ही यह गमी है । न्मामऩामरका जो सॊद्धवधान की क्जम्भेवाय सॊयऺक
है , के न्मामारमैऄ भ रक्म्फत राखैऄ भक
ु दभैऄ भ ‗न्माम भ दे यी के कायण अन्माम है ।‘ आज की

याजनीनतक सोच द्धवमबन्न ऺेरैऄ, जानतमैऄ,वगो को अरग ऩहचान की ओय रे जा यही है । भजहफी
तथा ऺेरीम अरगावाद दे शतोड़क हैं तो बी तुष्ट्टीकयण औय वोटफैंक की यणनीनत के तहत सेकुरय
हैं। सभान नागरयक सदहता याष्ट्र के नीनत ननदे शक सॊवैधाननक तत्व हैं। जम्भय कश्भीय द्धवषमक
सॊवैधाननक सुधाय अनुसयची 370 अस्थाई था, रेककन स्थाई है । अरकामदा, रश्कय-ए-तैमफा औय

आईएसआई आदद द्धवदे शी आॊतकवाददमैऄ का घुसऩैठ आज बी जायी है , जफकक सवोच्च न्मामारम ने
इसे याष्ट्र के द्धवरूि मुि फतामा है । असभ, अरूणाचर, भेघारम, मभजोयभ, भण ्0क्श्नाऩुय, बरऩुया,

नगारैण्ड़, मसक्तकभ ऩय चीन अऩनी काक दृक्ष्ट्ट रगाए हुए है ।अरूणाचर को तो वह अऩने याष्ट्र का

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दहस्सा ही भानता है । इसऩय चीनी यणनीनतकाय झान रुई का स्वप्न -बायत को 25-30 बागैऄ भ
कयने का है । आज बी इन ऩयवोत्ताय याज्मैऄ भ स्वतॊरता मा गणतॊर ददवस जनता के फीच नहीॊ

भनाई जाती। अल्ऩसॊख्मकवाद याष्ट्रीम एकता के मरए घातक है ऩय वोटफैक है । जो याजनीनतक दर
याज्मैऄ भ बाषा,जानत औय ऺेर का रगाकय फने हैं वे अखखर बायतीम सोच कहाॉ से राएग।
कश्भीय के कल्हण याजतॊयधगणी भ बायत की सनातन सॊस्कृनत का इनतहास है । धभामतयण के

शताक्ब्दमैऄ फाद वही सभाज आज स्वामत्ताता के याष्ट्र द्धवयोधी फात कय यहा है , मह स्वामत्तता

जम्भय, रद्दाख को नहीॊ चादहए। इससे तो भजहफी सॊगठन के तकम, कक धभामतयण याष्ट्रातयण है को

ही फर मभरता है । आजादी के फाद तथाकधथत याजनेता ने भुसरभान सभाज को जोड़ने का नहीॊ
भजहफी खौप ददखाकय तोड़ने औय वोटफैंक फनाने का काभ ककमा है । जो आज स्वामत्तता की

फात कयते हैं वह कर का अरगावादी है । कश्भीयी सॊगठन हुरयम मत औय ऩयवोत्ताय याज्मैऄ के उल्पा
का इस भाभरे भ सभान एजेड़ा है । आज सोद्धवमत मयननमन का हश्र हभाये साभने है , जहाॉ
याजनीनतक भहत्वाकाॊऺा कक रड़ाई भ याष्ट्र को ही खॊडडत कय ददमा गमा। आधथमक तॊगी झेर यहे

सोद्धवमत मयननमन को सध
ु ायवादी गोफाच्मोव के भानवीम भयल्मैऄ ऩय आधारयत व्मवस्था दे ना रस्ायॊ ब
ककमा, रेककन मेल्तमसन के रुस के याष्ट्रऩनत फनने औय गोफाच्मोव के नीचा दे खनेकक रारसा ने
सोद्धवमत मयननमन को ही द्धवबाक्जत कय ददमा।
अल्ऩसॊख्मकवाद, आयऺणवाद, ऺेरवाद, जानतवाद औय साम्रस्दानमकतावाद के कायण उत्ऩन्न
बेदबाव से गण नष्ट्ट हो यहे हैं।
सॊद्धवधान के ननभामता बी साॊस्कृनतक ऺभता से ऩरयधचत थे। 221 ऩन्नैऄ के सॊद्धवधान के कुर 22 बाग
थे, तथा इसके हस्तमरखीत रस्नत भ बायतीम सॊस्कृनत के रस्नतक याष्ट्रबाव वारे 23 धचर थे।

भख
ु ऩष्ट्ृ ठ ऩय याभ औय कृष्ट्ण तथा बाग एक भ मसन्धु घाटी सभ्मता की स्भनृ त अॊककत थी।

नागरयकता के भैमरक अधधकाय वारे ऩष्ट्ृ ट ऩय श्री याभ की रॊका द्धवजम, याज्म के नीनत ननदे शक
तत्वैऄ वारे ऩन्ने ऩय कृष्ट्ण अजन
ुम उऩदे श वारे धचर थे। वास्तव भे मह बायतीम सॊस्कृनत के

द्धवकास का इनतहास है । अऩने आखखयी बाषण भ डा. अम्फेड़कय ने रस्ाचीन बायतीम ऩयॊ ऩया की
माद ददराते हुए कहा था – एक सभम था जफ बायत गणयाज्मैऄ से सस
ु क्ज्जत था मह फात नहीॊ
कक बायत ऩहरे सॊसदीम रस्ककमा से अऩरयधचत था। महाॉ वैददक कार से ही एक ऩरयऩण
य म
गणव्मवस्था थी।

दहन्द ु सभाज रस्ाचीन कार से ही अऩनी रस्जा मा सभाज को द्धषक्षऺत कयना अऩना भौमरक कतमव्म

सभझती थी। मही वह आधाय था क्जसऩय ‗दहन्द ु सॊस्कृनत‘ स्थाद्धऩत थी। मशऺा का अथम भनुष्ट्म की

आन्तरयक, यचनात्भक भानमसक द्धवकास औय आक्त्भक इच्छाऩयनतम के मरए उऩमुतत रस्णारी ननमभ,

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द्धवधध औय व्मवस्था द्धवकमसत कयना था। मशऺा को सॊद्धवधान भ उधचत स्थान नहीॊ ददमा गमा औय
इसे भौमरक अधधकायैऄ भ बी नहीॊ शामभर ककमा गमा। ऋग औय अथवमवेद एवॊ भहाबायत भ याज्मैऄ
औय गणयाज्मैऄ के मसिाॊन्तैऄ को सॊद्धवधान भ मथोचीत स्थान नहीॊ मभरा है ।
आधनु नक बायत भ द्धवधान के याज्म के अबाव भ भहत्वऩयणम आधथमक एवॊ गैय आधथमक सॊस्थानैऄ
मथा – ननगभ, फैंक, श्रभ सॊगठनैऄ, कय रस्णारी, रस्फन्धक सॊस्थाम भ अऩायदमशमता, अऺभता औय
स्वाथमऩयक शक्ततमाॉ सय उठाने रगी हैं। क्जसके परस्वरूऩ रोकतॊर के चायैऄ स्तॊम्बैऄ –
द्धवधानमका,न्मामऩामरका, काममऩामरका, भीडडमा बी खोखरी होती जा यही हैं।

जानत, भजहफ, याजनीनत औय ऺेरीम आग्रह सभाज को तोड़ते हैं सॊस्कृनत ही इन्ह जोड़ती है ।

भहाबायत भ धभमयाज मधु धक्ष्ट्ठय ने बीष्ट्भ को जो उऩदे श गणतॊर के फाये भ ददमा था उस उऩदे श

को आज के याजनेताओॊ को गॊबीयता से रेते हुए याष्ट्र की एकता औय अखॊड़ता सनु नक्श्चत कयने
के मरए द्धवधान के याज्म के मसिाॊन्तैऄ को ऩण
य रूऩेण रागु कय दे ना चादहए। एक नई व्मवस्था औय
कानन
य जो बायतीम सॊस्कृनत ऩय ननमभमत हो, द्धवधान का याज्म, स्वतॊरता, भानवाधधकाय, रोकताॊबरक
भल्
य मैऄ से सस
ु क्ज्जत हो आज के बायत की आवश्मकता है ।

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भीडडमा औय भोभफत्ती त्रफग्रेड :
कहा जाता है कक आवश्कता ही अद्धवष्ट्काय की जननी है । औय जहारत की नतयगी भ इल्भ औय
तारीभ की कॊदीर ही यास्ता योशन कयती है। आदभी अऩनी जरुरयमात के मरए हय तयह के रस्मोग
व रस्मास कयता है औय आसऩास की चीजैऄ से ही अऩने ऐशोआयाभ का साभान जुटा रेता है ।

कॊदीर मा भोभवत्ती की कहानी बी कुछ इसी तयह शुरू होती है । ऩाषाण मुग से ही भोभवत्ती के
रस्मोग का ककस्सा साभने आता है मभश्र ऐसा ऩहरा दे श था क्जसभ कॊदीर का रस्मोग ईशा ऩयवम

400 सार ऩहरे से ही शुरू हो गमा था। उसके फाद चीन तथा जाऩान भ कीड़ैऄ औय कुछ पसरैऄ
के फीज से भोभ ननकार कय उसको कागज के ्मयफ भ डारकय भोभफत्ती फनामा जाता था।

बायत भ भोभफत्ती की शुरुआत ऩहरी सदी के आगाज से भॊददय भ दीऩ जराने के मरए दारचीनी
के ऩेड़ से उसकी छार द्धऩघराकय ननकारे गए भोभ से हुई थी।

अभेरयका भ रोगैऄ ने एक खास रस्जानत की भछरी की चफॉ से ऩहरी फाय भोभफत्ती फनाई। उसभ
रकड़ी का एक टुकड़ा घुसेड़ ददमा जाता था ताकक वो सीधी तयह खड़ी यह सके। उसके फाद ऩहरी
सदी के अॊत भ सेरयओ नाभक वऺ
ृ की छार को द्धऩघराकय औय उसभ से भोभ ननकार कय
भोभफत्ती फनाने की रस्था शुरू हो गई।

कारान्तय भ इॊग्रैड भ फसे रोगैऄ ने फेफेरयज नाभक ऩेड़ से भोभफत्ती फनाना शरु
ु कय ददमा।

रेककन मे थोड़ा भहॊ गा साबफत हुआ। मे दीगय फात है कक आज की तायीख भ बी इस ऩेड़ की
छार से इॊग्रैंड भ भोभफत्ती फनाई जाती है । रेककन उसकी भक्ु श्कर मे है कक 8 इॊच की भोभफत्ती
के मरए एक ऩयय े ऩेड़ का छार द्धऩघराना ऩड़ता है ।

कुछ सभम फाद जानवयैऄ की चफॉ से बी भोभफत्ती फनाने की रस्था शुरू हुई रेककन उसकी दग
ु ांध
रोगैऄ को ऩसॊद नहीॊ आई।
फड़े ऩैभाने ऩय भोभफत्ती फनाने की रस्था 14वीॊ सदी के आसऩास शुरू हुई क्जसभ भधभ
ु तखी के
छत्ते से ननकारे गए भोभ का रस्मोग हुआ। फ्राॊस के ऩेरयस भ इसका आद्धवबामव हुआ औय 18वीॊ
सदी के आगाज भ भोभफत्ती फनाने की करा दनु नमा के कई दे शैऄ भ द्धवकमसत हो गई।

भोभफत्ती फनाने की भशीन का ननभामण ऩहरी फाय सन 1825 भ हुआ। भोभफत्ती भ ऩायाकपन का
रस्मोग 1830 भ शुरू हुआ। टै रो ऩदाथम से फनाई गई भोभफत्ती बी कापी सभम तक रोकद्धरस्म
यही।

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आज की तायीख भ घयैऄ से याजभहरैऄ तक, झाड़-पानयस को सजाने भ भोभफत्ती का फड़ा ही अहभ
योर यहा है । बफजरी आने के फाद बी कई दे शैऄ भ औय खासकय कुछ द्धवशेष भौकैऄ ऩय सुगॊधधत
औय यॊ ग बफयॊ गी भोभफक्त्तमाॊ अऩनी अरग ही छटा बफखेयती हैं।

भोभफत्ती के इनतहास के सॊदबम भ मे बी जानना उधचत होगा कक चीन भ भोभफत्ती फनाने की
अरग ही तकनीक थी। सन 265 से 420 ईफी तक क्जॊन साम्राज्म भ इसका रस्चरन कापी फड़े
ऩैभाने ऩय यहा। इस ऩिनत के तहत कागज के ऩन्ने ऩय भधभ
ु तखी के छत्ते से ननकारे गए भोभ
को धचऩका कय भोभफत्ती फनाई जाती थी।फाद भ सयॊग साम्राज्म के सभम भोभफत्ती भ धागा
डारा जाने रगा था।

बायत के सभीऩ नतब्फत दे श भ माक जानवय के भख्खन से भोभफत्ती फनाई जाती थी।
1448 भ ननमभमत दनु नमा की सफसे रस्चीन भोभफत्ती फनाने वारी भशीन आज बी दक्षऺण अफ्रीका
के डफमरन शहय भ भौजयद है । साथ ही गाम मा बैंस की चफॉ से ननमभमत भोभफत्ती के कुछ
कायखाने मययोद्धऩम दे शैऄ भ दे खे जा सकते हैं।

16वीॊ सदी भ मयय ोऩ के कई दे शैऄ भ भहरैऄ औय भकानैऄ भ यौशनी के अरावा सड़क ऩय रस्काश

डारने के क्रभ भ भोभफत्ती का रस्मोग होता था। भगय सन 1830 के फाद से भोभफत्ती फनाने की
तकनीक तथा उसके भयर ऩदाथों के चमन भ बी कापी फदराव आमा।
अभेरयका के जोसेप सैभसन को सन 1830 भ नमे तयीके से भोभफत्ती फनाने का ऩेटट ददमा गमा
था। सन 1934 भ इस कॊऩनी ने रस्नत घॊटे 1500 भोभफत्ती की यफ्ताय से भोभफत्ती ननभामण का
कामम शुरू ककमा जो ऩयये दे श भ फहुत भशहयय हुआ।
सन 1829 भ द्धरस्ॊस द्धवल्सन नाभक एक शख्स ने श्रीरॊका के एक 1400 एकड़ वारे नारयमर के ऩेड़ैऄ
का जखीया खयीदा क्जसका भयर उद्देश्म नारयमर के ऩेड़ की छार की भदद से भोभफत्ती फनाना
था। भगय उसके फदरे वहाॊ ताड़ के ऩेड़ की छार से भोभफत्ती फनने रगी।

सन 1879 भ थाभस एडडसन द्सवाया बफजरी फल्फ के अद्धवष्ट्काय के फाद से बरे ही भोभफत्ती की
भहत्ता भ थोड़ी कभी आई हो। भगय जन्भददन से रेकय धगयजाघयैऄ भ खास ददन ऩय भोभफत्ती
जराने का चरन आज बी फदस्तयय जायी है ।
सोमाफीन से रेकय ऩेरोमरमभ ऩदाथों से बी भोभफत्ती फनाई जाती है औय आज की तायीख भ ऩयय ी
दनु नमा भ 178 ऩदाथों से अरग-अरग ककस्भ की भोभफक्त्तमाॊ फनाई जाती यही हैं।

39

आऩ सोच यहे हैऄगे कक हभ भोभफत्ती का फखान तमैऄ कय यहे हैं ? दयअसर आजकर भोभफत्ती
का इस्तेभार एक खास भानमसकता के रोग खास भौकैऄ ऩय कयने रगे हैं औय तो औय इस खास
भानमसकता के रोगैऄ की एक बफग्रेड सहज ही तैमाय हो गई है क्जसे आऩ भोभफत्ती बफग्रेड कह
सकते हैं। ककसी खास भौके ऩय भोभफत्ती बफग्रेड की धचल्र ऩौ का उतना ही भहत्व होता है
क्जतना याजनीनत की बाषा भ आश्वासन का।
भोभफत्ती बफग्रेड का वैबव आऩको मसपम वैबावशारी ददल्री, भुॊफई जैसे ये शभी भहानगयैऄ भ ही

ददखाई दे गा। कुछ रोग मसपम हाईरस्ोपाइर केस (अभीय ऩरयवाय से जुड़ी घटना) भ न्माम भाॊगने के
मरए एक खास जगह ऩय इकट्ठा होकय भोभफत्ती जराते हैं। अगय ककसी अभीय ऩरयवाय की फेटी

की हत्मा हो गई मा ककसी नाभी भॉडनम ऩरयवाय के साथ अन्माम हो गमा तो भोभफत्ती बफग्रेड के
रोग भोभफत्ती जराकय, सुॊदय-सुॊदय यॊ ग बफयॊ गे ऩोस्टय फनाकय, रेटेस्ट पैशन की ऩोशाक ऩहन कय,
अॊग्रेजी भ नाये रगाते हैं औय अॊग्रेजी भ फमान जायी कयते हैं। दहॊदी फोरने से उन्ह थोड़ा ऩयहे ज
होता है । शामद डय हो कक दहॊदी फोरने से कई द्धवयोध कयने की तवामरटी न डडग्रेड हो जाए इस
मरए स्टाइमरश इॊक्ग्रश भ अऩनी फात कहते हैं। आऩ इस ापरत भ भत यदहएगा की भोभफत्ती
बफग्रेड कोई सॊगठन है औय भोभफत्ती जराने ऩहुॊचने वारे सबी रोग एक दस
य ये को जानते हैं।

भोभफत्ती बब्रगेड के रोग कुछ ऐसे ही इकट्ठा होते हैं जैसे कस्तययी की तराश भ दहयन बटकतेबटकते इकट्ठे हो जाते हैं।

द्धवयोध कयने के मरए एकर हुए भोभफत्ती बफग्रेड के रोगैऄ के चेहये ऩय द्धवयोध का बाव ढयॊढना ऐसे
ही है जैसे सभुद्र भ भोती खोजना। हल्की भस्
ु कान के साथ अऩनी फात ऐसे कहते हैं जैसे ककसी
गेट टय गेदय ऩाटॊ भ आए हो। भजे की फात मे है कक हभायी भीडडमा भोभफत्ती बफग्रेड को खफ

अहमभमत दे ती है । जैसे ही भीडडमा को बनक रगती है कक आज भोभफत्ती बफग्रेड का खास शो हो
होने जा यहा है तो न्मयज चैनरैऄ की ओफी वैन सीधे भोभफत्ती बफग्रेड की राइव कवये ज के मरए
तैनात कय दी जाती है ।

कैभया, राइट , औय ऩयय े एतशन के साथ भोभफत्ती जराई जाती है औय मे अद्भत
ु द्धवयोध आऩ घय
फैठे टीवी ऩय दे ख सकते हैं। मा सीधे कह तो इॊज्वाम कय सकते हैं। तमैऄकक आऩको दख
ु औय

द्धवयोध का बाव कहीॊ बी दे खने को नहीॊ मभरेगा। मे अजीफ द्धवयोधाबास औय मदद आऩ भोभफत्ती
बफग्रेड के रोगैऄ भ द्धवयोध औय दख
ु का बाव दे खना चाहते हैं तो कपय आऩ भाडनम भोभफत्ती बफग्रेड
भ शामभर होने कक मोग्मता नहीॊ यखते।

भोभफत्ती बफग्रेड के साथ भीडडमा की कदभ तार ननयारी हैं। भोभफत्ती बफग्रेड की ऩर-ऩर की
खफय दे ने के मरए न्मयज चैनर राखैऄ रुऩमे खचम कयने भ नहीॊ खझझकते। न्मयज चैनरैऄ की रयऩोटम य

40

भोभफत्ती बफग्रेड के रोगैऄ की भोभफत्ती से भोभफत्ती जराकय फोरतीॊ है जैसे वो खद
ु रयऩोटम य कभ
भोभफत्ती बफग्रेड की भेम्फय ज्मादा हैऄ। औय रयऩोटम य भहोदमा को इसके मरए खफ
य शाफाशी बी दी
जाती हैं उनके इस हुनय की तायीप सीननमय खफ
य चटकाया रेकय कयते हैं।

भोभफत्ती बफग्रेड का चरन अबी नमा है । इसमरए ददल्री, भुॊफई जैसे भहानगयैऄ भ ज्मादा नजय

आता है । ऩय आऩको ऩये शान होने की जरूयत नहीॊ। भॉडनम कहराने का शौंक फड़ी गजफ की चीज
है । इसमरए क्जसे बी खद
ु को भॉडनम साबफत कयना होगा वो जल्द से जल्द भोभफत्ती बफग्रेड भ

शामभर होगा औय वो ददन दयय नहीॊ जफ आऩको छोटे शहयैऄ भ बी भोभफत्ती बफग्रेड के रोग नजय
आने रगगे।

आऩ मे सोच कय ऩये शान हो सकते हैं की दाॊतेवाड़ा भ नतसरी दहॊसा भ भाये गए जवानैऄ के मरए
भोभफत्ती बफग्रेड ने भोभफक्त्तमाॊ तमैऄ नहीॊ जराई? आए ददन ऩक्श्चभ फॊगार भ हो यहे नतसरी
हभरे का द्धवयोध मे भोभफत्ती बफग्रेड तमैऄ नहीॊ कयता? ककसी गयीफ की फेटी की फरात्काय हो जाने
ऩय भोभफत्ती बफग्रेड का भोभ जैस ददर तमैऄ नहीॊ द्धऩघरता ? द्धवदबम भ आत्भहत्मा कय यहे
ककसानैऄ का दख
ु भॊफ
ु ई के भोभफत्ती बफग्रेड को दख
ु ी तमैऄ नहीॊ कयता ? दे श भ हो यहे अयफैऄ के

घोटरैऄ ऩय भोभफत्ती बफग्रेड की ज्वारा तमैऄ नहीॊ जरती ? भहॊ गाई से द्धऩस यही आभ जनता की
ऩीड़ा भोभफत्ती बफग्रेड को तमैऄ नहीॊ ददखाई दे ती?
दयअसर भोभफत्ती बफग्रेड भ शामभर ऩढ़े -मरखे भोटा ऩैसा कभाने वारे रोगैऄ का मे भानमसक
ददवामरमाऩन हैं। मे रोग खद
ु को फाकी दनु नमा से अरग सभझते हैं ऩक्श्चभी सभ्मता की नकर

कयने के मरए द्धऩज्जा हट भ फैठकय हजाय रुऩमे का द्धऩज्जा खा कय औय ऩानी की जगह ―कोल्ड
डड्रॊक‖ से प्मास फुझा कय मे रोग खद
ु को भाडनम सभझते हैं औय ऩक्श्चभी सभ्मता की आॊख, कान,
ददभाग फॊद कय अनस
ु यण कयते हैं। इन्ह रगता है मे ही वल्डमतरास जीवन है ।

भोभफत्ती बफग्रेड के रोग तमा मे नहीॊ जानते की उनके दे श बायत ने सददमैऄ से दनु नमा को शाॊनत

का ऩाठ ऩढ़ामा हैं। शाॊनत का अधधष्ट्ठाता यहे बायत के भहाऩुरुष दनु नमा को शाॊनत औय अदहॊसा का
भागम ददखाते यहे हैं। भहात्भा फुि से रेकय भहात्भा गाॊधी तक मे ऩयॊ ऩया ननयॊ तय चरी आ यही है ।
‗दे दी हभे आजादी बफना खड्ग बफना ढार
साफयभती के सॊत तयने कय ददमा कभार‘
आज बी हभाये दे श के स्कयरैऄ भ छार मे गीत गाते हैं। सायी दनु नमा भहात्भा गाॊधी के सत्म औय
अदहॊसा के भागम का रोहा भानती है । भहात्भा गाॊधी बफना भोभफत्ती जराए, सादगी औय

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अदहॊसात्भक तयीके से द्धवयोध कयते थे औय अॊग्रेजैऄ को सोचने ऩय भजफयय कय दे ते थे। ऩय

भोभफत्ती बफग्रेड को भोभफत्ती ज्मादा बाती है चाहे ककसी को श्रिाॊजमर दे ना हो, मा द्धवयोध रस्गट
कयना हो। भहात्भा गाॊधी को सॊसाधनैऄ के दरु
ु ऩमोग ऩय फहुत दख
ु होता था औय वो हभेशा कभ से
कभ चीजैऄ का इस्तेभार कय जीवन जीने की रोगैऄ को सराह दे ते थे। एक फाय भहात्भा गाॊधी के
जन्भ ददन ऩय उनकी ऩत्नी ने आश्रभ भ घी का दीऩक जरामा था जफ गाॊधी जी ने घी दीऩक
जरते दे खा तो कापी दख
ु ी हुए औय कहा कक क्जस दे श भ राखैऄ रोगैऄ को घी खाने के मरए नहीॊ
मभरता वहाॊ घी का दीऩक चराना सॊसाधनैऄ का दरु
ु ऩमोग कयना है । औय गाॊधी जी ने इसके मरए
रस्ामक्श्चत ककमा था।

अगय गाॊधीजी भोभफत्ती बफग्रेड के पैशनेफर भोभफत्ती शो को दे खते तो दे श के इन भहा
शुबधचतॊकैऄ से शामद हाथ जोड़कय मही ननवेदन कयते की... हे ! भोभफत्ती बफग्रेड के भहानुबावैऄ।

जो धन आऩ भोभफत्ती खयीदने भ खचम कयते हैं वहीॊ धन आऩ शहीदैऄ के ऩरयवायवारैऄ को दे तो
उनकी फड़ी भदद होती।...
भगय मे फात भोभफत्ती बफग्रेड के रोगैऄ के जेहन भ न कबी आई औय न रगता है कबी आएगी?
तमैऄकक भोभफत्ती बफग्रेड के ज्मादातय रोग अभीयी औय वैबव के उस खेभे से तारुक यखते हैं जहाॊ
गयीफी औय अबाव का सामा कबी यहा ही नहीॊ। सॊऩन्न ऩरयवाय के इन रोगैऄ को ऩाॊच रुऩमे की
भोभफत्ती जराने भ भजा आता है , साॊधनैऄ का दरु
ु ऩमोग कयके इनकैऄ आनॊद मभरता है । बोग-

द्धवरास औय आनॊद भ भदहोश भोभफत्ती बफग्रेड के रोगैऄ से उम्भीद कयना कक भोभफत्ती भ ऩैसा
खचम कयने की जगह मे दे श के मरए शहीद हुए शययवीयैऄ के असहाम ऩरयवाय की भदद कयगे ऐसे ही
है जैसे ऩत्थय से द्धऩघरने की उम्भीद कयना।
भोभ तो द्धऩछर जाएगा, भोभफत्ती की फाती जर जाएगी ऩय भोभफत्ती बफग्रेड के रोगैऄ भ
ईभानदायी, सत्मननष्ट्ठा औय सादगी की फाती कफ जरेगी ? कफ भोभफत्ती बफग्रेड दे श की आभ
जनता की बावनाओॊ का रस्नतननधधत्व कये गा ? भोभफत्ती बफग्रेड जभीन से जड़
ु े भद्द
ु े उठाएगा ? कफ
भोभफत्ती बफग्रेड का ददखावे का चोरा वास्तद्धवक ईभानदायी का चोरा धायण कये गा ? कफ

भोभफत्ती बफग्रेड भ पैशन की जगह दे शबक्तत का बाव ददखेगा ? कफ भोभफत्ती जराने वारा मव
ु ा
बफग्रेड सही भामने भ दे श की का शब
ु धचतॊक बफग्रेड फनेगा ?

ऐसे सैकड़ैऄ सवार है जो क्जन ऩय सोचने के मरए सभाज के भहा भदहभ भोभफत्ती बफग्रेड के रोगैऄ
के ऩास शामद सभम नहीॊ है । ऩक्श्चभी दे शैऄ को जफ हभ अऩना आदशम भान रेते हैं औय उनके
फनाए ढये ऩय रगाताय आॊख, कान, ददभाग फॊद कय चरते चरे जाते हैं तो ऐसे ही भोभफत्ती बफग्रेड
ऩैदा होते हैं। क्जनकी बावनाएॊ मसपम भोभफत्ती जराने तक सीमभत होती हैं। दे श की जभीन से

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जुड़ी सभस्माओॊ के फाये भ सोचने सभझने के मरए इनके ऩास वतत नहीॊ होता औय गयीफैऄ ऩय
होने वारे अन्माम के खखराप आवाज उठाने के मरए मरए इनके ऩास भोभफत्ती नहीॊ होती।
कुछ खास घटनाओॊ ऩय ही भोभफत्ती बफग्रेड का हुजयभ नजय आता है जो इनकी सॊकीणम

भानमसकता औय बेदबाव ऩयणम बावनाओॊ को ददखाता है । 26/11 भुॊफई हभरे के फाद भुॊफई के गेटवे

ऑप इॊडडमा के साभने भोभफक्त्तमाॊ रेकय इकट्ठा हुए भोभफत्ती बफग्रेड के रोगैऄ ने अॊग्रेजी भ अऩना
योना योमा। बरे मे बाई रोग घयैऄ भ दहॊदी मा भुॊफईय्मा बाषा फोरते हो रेककन भोभफत्ती बफग्रेड

के शो भ अॊग्रेज फने बफना इनके ऩेट का द्धऩज्जा कैसे ऩचता ? कैसे रोगैऄ को मे ऩता चरता की मे
भहान रोग हाईतरास के हैं औय भॉडमन पैशन की दनु नमा के आदशम भानुष हैं ?
हभाये दे श का भीडडमा भॉडमन भानष
ु ैऄ का फड़ा कदयदान हैं हय न्मज
य चैनर इनकी कवये ज ऩय अऩनी
ऩयय ी ताकत झैऄकने भ कोई कसय नहीॊ छोड़ता है । न्मज
य चैनरैऄ को इस फात से कोई रेना-दे ना
नहीॊ है कक भोभफत्ती बफग्रेड के रोगैऄ की बावनाएॊ ईभानदाय बावक
ु ता से बयी हैं मा ददखावटी

घडड़मारी बावनाओॊ से ? गड
ु द्धवजअ
ु र के बख
य े खफरयमा चैनर, खफय ददखाने के नाभ ऩय, न्मज

चैनर भ सॊद
ु य-सॊद
ु य चेहये ददखाने ऩय ज्मादा बयोसा यखते हैं। बफल्री के बाग से टयटा छीॊका औय
न्मयज चैनरैऄ की भुयाद हुई ऩययी। भोभफत्ती बफग्रेड के रोग न्मयज चरनैऄ की भाॊग ऩय खये उतयते
हैं। बफल्री की तयह न्मज
य चैनर वारे तक रगाए फैठ यहते हैं कक कफ कई भोभफत्ती बफग्रेड के
रोग इकट्ठा हैऄ औय बाई रोग ओफी वैन तान द औय कपय कहना ही तमा....? चरे याग तोयी भ
ख्मार जौनऩुयी औय कुछ तो भोहयम भ भ बी गाएॊ होयी।
भोभफत्ती बफग्रेड को ऩाऩुरय फनाने भ भीडडमा की अहभ बयमभका हैं। खफरयमा चैनर भसारा, तड़का
औय बावनाओॊ के यॊ ग बयकय दे श की जनता के साभने भोभफत्ती बफग्रेड के शो को ऐसे ऩेश कयते
हैं जैसे दे श भोभफत्ती बफग्रेड के शो भ दे शबय का दख
ु द्धऩघर कय फह चरा हो औय उसे फाॊधने का
साया ठे का खफरयमा चैनरैऄ को दे ददमा गमा हो।

ऐसा रगता है भोभफत्ती बफग्रेड वारैऄ की भहा असरी, भहा दख
ु ी बावनाओॊ की बाषा मसपम हभाये

खफरयमा चैनर ही सभझते हैं औय क्जतने दख
ु ी औय भोभ की तयह द्धऩघरने वारे दमारु भोभफत्ती
बफग्रेड के रोग हैं उतने ही दख
ु ी औय उतने ही दमारु हभाये खफरयमा चैनर के बाई रोग हैं। तबी
तो ऩययी बक्तत बावना से भीडडमा बफग्रेड के शो अऩने न्मयज चैनर ऩय ददखाते हैं।
भहादे वी वभाम की कद्धवता के मे ऩॊक्ततमाॊ
―गीत कहीॊ कोई गाता है ,

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गयॊज ककसी ददर भ उठती है ‖
खफरयमा चैनरैऄ औय भोभफत्ती बफग्रेड की जुगरफॊदी भ मे ऩॊक्ततमाॊ कपट फैठती है गीत भोभफत्ती

बफग्रेड के रोग गाते है औय उसकी असरी गयॊज खफरयमा चैनरैऄ के सॊऩादकैऄ के ददर भ गयॊजती हैं
औय कपय घॊटैऄ खफरयमा चैनरैऄ भ भोभफत्ती बफग्रेड की रीरा छाई यहती है ।
खफरयमा चैनरैऄ के मरए शामद भोभफत्ती बफग्रेड वारे गुन-गुनाते हैऄगे
जफ शाभ ढरे आना..
जफ भोभफत्ती जरे आना...
औय मे गीत सुनते ही रोकतॊर के चौथे खॊबे के ऩहये दाय खफरयमा चैनर, खफयैऄ की सायी भमामदा

को छोड़कय भोभफत्ती बफग्रेड के शो की तयप ऐसे बागते हैं जैसे सकमस दे खने के मरए मुवाओॊ की
टोरी गाॊव से कस्फैऄ की तयप बागती है ।

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ऐततहाशसक वििादेआ का स्रोत : िैचारयक कुहर्टरता से कैसे जझ
ू ें?-हरयकृष्ण तनगभ
अबी अधधक ददन नहीॊ हुए जफ सवोच्च न्मामारम ने ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम को आदे श ददमा था
कक वह द्धवशेषऻैऄ की एक समभनत का गठन कय इस फात की जाॊच कये कक द्सद्धवतीम वषम स्नातक
के मरए इनतहास की ऩाठमऩुस्तक के एक अध्माम भ दहन्दओ
ु ॊ के आयाध्म हनुभान के मरए
अऩशब्द तमैऄ रस्मुतत ककए गए औय उन्ह ऩाठ्मक्रभ से तमैऄ न ननकारा जाए।

दक्षऺण एमशमाई आख्मात ऩयॊ ऩयाओॊ की द्धवद्धवधता व याभामण से सॊफॊधधत ऩारा रयचभैन द्सवाया
सॊऩाददत ग्रॊथ भ हनभ
ु ानजी को एक काभक
ु चरयर के रूऩ भ दशाममा गमा है औय सीता ऩनतबतत
नहीॊ थी औय मह बी कहा गमा है कक यावण औय रक्ष्भण ने सीता को ऩथभ्रष्ट्ट ककमा था।

भुख्म न्मामधीश के. जी. फारकृष्ट्णन, न्मामभयनतम वी. सदामशवभ औय जे. एभ. ऩाॊचार की फच ने

उऩकुरऩनत दीऩक ऩटर से जाॊच कयने के मरए कहा कक इनतहास आनसम ऩाठ्मक्रभ भ मह शामभर
कैसे ककमा गमा? सन ् 2005 से ही मह आऩक्त्तजनक साभग्री ऩढ़ाई जा यही थी औय ऩहरे मह

रस्कयण ददल्री उच्च न्मामारम भ उठामा गमा था, फाद भ उसे सवोच्च न्मामारम भ रामा गमा।
कापी अयसे से वाभऩॊथी द्धवचायधायावारे इनतहासकयैऄ ने दे श के कुछ रस्भुख मशऺण सॊस्थानैऄ, क्जनभ

जे.एन.मय. अऩनी एॊटी-स्टै फमरशभट छद्धव फनाने भ शुरू से ही कुख्मात यही है, ने अनेक दे श द्धवयोधी
रुझानो के वचमस्व को फनाए यखने के मरए अकादमभक स्वतॊरता व स्वामत्तता के नाभ ऩय एक
पैशन सा ही फना डारा। इन सॊस्थानैऄ तथा एन.सी.इ.आय.टी. की ऩाठमऩुस्तकैऄ भ इनतहास का

द्धवकृत स्वरूऩ रस्स्तुत ककमा गमा क्जससे द्धवद्समाधथममैऄ के साभने सकायात्भक ऩऺ तो दयय की फात
है , अऩने अतीत से ही द्धवतष्ट्ृ णा होने रगे।साथ ही हय स्थान ऩय उन्ह ऩढ़ामा जा यहा है कक जो

बी रस्ाचीन ऻान-द्धवऻान है , वह अधधकाॊश कऩोरकक्ल्ऩत है औय उसभ गवम कयने मोग्म कोई फात
बी उऩरब्ध नहीॊ है ।
जफ से सॊरस्ग सयकाय सत्तारूढ़ हुई है , उन्होने कपय याजनीनत रस्ेरयत ऩाठमक्रभैऄ का सज
ृ न ककमा
औय सफको ननरमज्जताऩयवक
म सभाप्त ककमा। क्जनको सवोच्च न्मामारम तक ने स्वीकृनत रस्दान की
थी। कपय से इनतहास का द्धवदष
य ीकयण कय ऩुस्तकैऄ के साथ छे ड़छाड़ की गई औय द्धवकृनतमैऄ व

सेकुरयवादी दयु ाग्रहैऄ को दोहयामा गमा। तथ्मैऄ का मभथ्माकयण कयने के साथ-साथ न्मामारमैऄ के
ननणममैऄ तक को नकाया गमा।

मदद हभ भड़
ु कय दे ख तो सफसे ऩहरे ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम के भत
ु त अध्ममन द्धवद्समारम की
फी.ए. के इनतहास के द्सद्धवतीम रस्श्नऩर की आधनु नक बायत से सॊफॊध अध्ममन साभग्री भ जहयय

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मसद्समीकी का ‗सम्रस्दानमकता‘ शीषमक रेख द्धववादैऄ का केन्द्र फना तमैऄकक इसभ याष्ट्रवाद की बावना
की बत्समना की गई थी औय साथ ही सयदाय ऩटे र ऩय आयोऩ रगामा गमा कक वे साम्रस्दानमकता
को फढ़ावा दे ते थे। इसी तयह इक्न्दया गाॊधी याष्ट्रीम भुतत अध्ममन द्धवश्वद्धवद्समारम साभाक्जक
द्धवऻान द्धवद्समाऩीठ के द्सवाया ‗बायत भ धामभमक धचॊतन औय आस्था‘ द्धवषम ऩय जो साभग्री

द्धवद्समाधथममैऄ को ऩढ़ाई जा यही थी उसभ दहन्दओ
ु ॊ के आयाध्म दे वी दे वताओॊ का घोय अऩभान ककमा
गमा था। इस ऩाठ्मक्रभ के सॊमोजक रस्ो. ए. आय. खान औय रस्ो. स्वयाज फसु थे। जफ मशऺा
सॊस्कृनत उत्थान न्मास व दस
य ये सॊगठनैऄ द्सवाया रस्नतयोध ककमा गमा तफ भानव सॊसाधन भॊरी
अजन
ुम मसॊह ने वाऩस मरमा।

ऩय भयर रस्श्न द्धवकृत भानमसकता का है । ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम भ कुछ ददनैऄ ऩहरे इनतहास की
फी. ए. (आनसम) द्सद्धवतीम वषम की ऩुस्तक ‗कल्चय इन एक्न्शमॊट इक्ण्डमा‘ ने अशारीन दटप्ऩखणमैऄ

की सायी सीभाएॊ राॊघ दी औय जफ द्धवस्भम इस फात ऩय हुआ कक इन रेखैऄ की सॊकरनकताम डा.
अद्धऩन्द्रा मसॊह हभाये रस्धानभॊरी की ऩुरी हैं। ए. के. याभानुजभ के इस रेख भ तमा ऩढ़ामा जा यहा
है इसकी कल्ऩना बी नहीॊ की जा सकती है । यावण, भॊदोदयी, रक्ष्भण औय हनुभान सफके साथ

फचकानी हास्मास्ऩद फात जोड़ दी गई हैं। स्वच्छॊ दता औय द्धवकृनत की ऩयाकाष्ट्ठा भार इस दटप्ऩणी
से मभरती है कक यावण औय रक्ष्भण ने सीता से व्ममबचाय ककमा। दीनानाथ फरा औय दस
य ये

मशऺाद्धवदैऄ ने जफ एक माधचका दामय की तफ ददल्री द्धवश्वद्धवद्समारम के कुरऩनत तथा एकेडमभक

ाउॊ मसर को नोदटस जायी ककए गए।

झयठ के ऩुमरॊदे एन. सी. ई. आय. टी. की अन्म ऩुस्तकैऄ भ बी सवमर द्धवद्समभान हैं। तीथांकयैऄ की

ऐनतहामसकता ऩय रस्श्न उठाना औय मरखना कक भहावीय स्वाभी बफना कऩड़े फदरे मा स्नान ककए
12 वषम तक जॊगरैऄ भ बटकते यहे आदद अनगमर फातैऄ को दफाव डारने ऩय ननकारा गमा। हभाये
ऩयवज
म गौ भाॊस खाते थे, मशवाजी धोखेफाज थे, औयॊ गजेफ क्जन्दा ऩीय था- मह सफ साभाक्जक

सभयसता बॊग कयने के भॊतव्म से रस्चारयत ककमा गमा था। दमानॊद इसाई चचों के चहे ते थे औय
सहामता रेते थे। नतरक, अयद्धवन्द, रारा राजऩत याम, द्धवद्धऩन चन्द्राऩार उग्रवादी औय आतॊकवादी
थे। दे श के सम्भाननत नेताओॊ औय अतीत के भहाऩुरुषैऄ के द्धवरुध्द द्धवषवभन अऺम्म अऩयाध है ,
ऩय वाभऩॊथी व सेकुरयवादी इनतहासकायैऄ की मही द्धवकृनत उनके रेखन की शतम फनी है क्जससे
जयझना सयर नहीॊ है तमैऄकक रस्नतकाय का अऩेक्षऺत भनोफर नदायद दीखता है ।

हभ बयरना नहीॊ चादहए कक भातसमवादी याजनीनत व द्धवद्सवता औय द्धवश्रेषण के कु छ द्धवमशष्ट्ट ऩहरय
है क्जन्ह जानना अत्मॊत आवश्मक है । उनका इनतहास रेखन कभ याजनीनत रेखन ज्मादा है ।

इनतहास के अनुशासन मा सच्चाई से उन्ह कुछ रेना-दे ना नहीॊ है । उनके दृक्ष्ट्टकोण के तीन बफन्द ु
यहे हैं – बब्रदटश साम्राज्मवाद, दहन्द य द्धवयोध, भुक्स्रभ तत्ववाद औय वगम सॊघषम इन तीनैऄ को नई

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दृक्ष्ट्ट दे ता है । वे याष्ट्र की अवधायणा भ बी द्धवश्वास नहीॊ कयते हैं। उन्ह सदै व मह कहने भ आनॊद
आता है कक मह दे श अनेक याष्ट्रीमताओॊ का जभघट है । वे मह बी कह यहे हैं कक बायतीम
कारक्रभैऄ के फाये भ सदै व असावधान यहे हैं औय दॊ तकथाओॊ का इनतहास फनाने भ भादहय यहे हैं।
उनकी हठधमभमता का तो मह आरभ यहा है कक वे तैभयय रॊग मा भहभयद गजनवी को आक्राॊता

कहने को तैमाय नहीॊ हैं। मभथ्माकयण के दौय भ वे अकफय की अऩेऺा औयॊ गजेफ की रस्शॊसा के ऩुर
फाॊधते नहीॊ थकते हैं। सभाजशास्रैऄ की हय ऩुस्तक भ भनु को कोसना औय कग्वेद भ क्स्रमैऄ के
ननम्न स्थान की चचाम कयना आज बी उनके द्धवभशम भ रस्भख
ु स्थान ऩाता है । इस द्धवकृनत से
सॊघषम भार फौक्ध्दक स्तय ऩय नहीॊ फक्ल्क एक रस्बावी, आन्दोरनात्भक रूऩ द्सवाया सॊबव है जो
मशऺा के भर
य स्वरूऩ को फचाने के अमबमान द्सवाया ही सॊबव है ।
हभाये इनतहास के मभथ्माकयण की दीघमकारीन भोचेफॊदी भ काॊग्रेसी व वाभऩॊथी शुरू से ही मेनकेन

रस्काये ण एक अधीयता से जुड़े यहे हैं औय इस साक्जश का ऩदामपाश कयना आज के सभम की फड़ी
भाॊग है तबी मह दयु मबसॊधध जनता को बरीबाॊनत सभझ भ आ सकेगी।

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केन्द्र सयकाय का हहन्दओ
ु ॊ के प्रतत घोय अन्माम
1. हहन्दओ
ु ॊ की जनसॊख्मा का प्रततशत कभ कयने के शरए भुसरभानेआ को चाय-चाय शादीमाॊ औय
अधधक फच्चे, जफकक भाननीम उच्चतभ न्मामारम कई फाय दे श के सबी नागरयकेआ के शरमे
Common Civil Code (सभान नागरयक सॊहहता) फनाने का आदे श दे चक
ु ा है ।
2. शशऺा सॊस्थाओॊ भें हहन्दओ
ु ॊ को धाशभफक शशऺा दे ने ऩय ऩाफॊदी ककन्तु गैय हहन्दओ
ु ॊ को स्ितॊत्रता,
ल्जसकी व्मिस्था बायत के सॊविधान की धाया 28, 29 औय 30 भें ही कय दी गई औय इतना ही

नहीॊ सोतनमा गाॊधी की मूऩीए सयकाय तो इस्राभी शशऺा को अत्माधधक प्रसारयत कयने के शरए

अरीगढ़ भुल्स्रभ मूतनिशसफर्टी जैसे कट्टय इस्राभी शशऺा सॊस्थान के बायत के अनेक बागेआ भें चारू
कय यही है जैसे केयर भें भजराऩुयभ, ऩल्चचभ फॊगार भें भुशीदाफाद, त्रफहाय भें ककशनगॊज, भध्म

प्रदे श भें बोऩार आहद ल्जसके ऩरयणाभस्िरूऩ इस्राभी आतॊकिाद की ही फढ़ोतयी होगी। मे सफ
हहन्द ू कयदाताओॊ की गाढ़ी कभाई के ऩैसे से हो यहा है । गैय हहन्द ू अथाफत ् ईसाई, भुसरभानेआ आहद

की शशऺा सॊस्थाओॊ भें अध्माऩकेआ की तनमुल्क्त एिॊ विद्माथी के प्रिेश आहद विर्षमेआ भें उनके विशेर्ष
अधधकाय औय स्िामत्तता हदमे जाने ऩय बी इसके अततरयक्त इस्राभी कट्टयिाद के कायखाने
इस्राभी भदयसेआ को अत्माधधक धन का आिॊर्टन बायत सयकाय द्िाया ककमा जाता है ।
3. गैय हहन्दओ
ु ॊ के शरए अजऩसॊख्मक आमोग (Minority Commission), जो अनेक सॊिेदनशीर

भाभरेआ ऩय हहन्द ू वियोधी औय अजऩसॊख्मकेआ के प्रतत ऩऺऩात कयता हुआ अनेक प्रकाय से काभ
कयता है ।
4. बायत भें हहन्दओ
ु ॊ को नकायते हुए गैयहहन्दओ
ु ॊ (भुसरभान, ईसाई आहद) की आधथफक शल्क्त को
अधधक फढ़ाने के शरए सयकायी खजाने से भुफ्त सब्सीडी औय फहुत कभ ब्माज दय 3 प्रततशत ऩय
ऋण हदमा जाता है । इस प्रकाय गैयहहन्दओ
ु ॊ के भुकाफरे भें हहन्द ू उद्मभी उद्मोग औय व्मिसाम
भें वऩछड़ जाते है । गैयहहन्दओ
ु ॊ की आधथफक सहामता औय उन्नतत के शरए National Minorities
Development & Finance Corporation (NMDFC) का तनभाणफ ककमा गमा।

5. सॊप्रग सयकाय द्िाया केिर गैयहहन्दओ
ु ॊ के हहत साधने के शरए एक अरग अजऩसॊख्मक भॊत्रारम
(Ministry of Minority Affairs) बी फना हदमा गमा है , ल्जसने अनेक प्रकाय से भात्र गैय हहन्दओ
ु ॊ

को आधथफक सहामता दे ने की मोजना फनाई है । ऩयन्तु ऩता नहीॊ हहन्दओ
ु ॊ ने क्मा ऩाऩ ककमा है जो
उन्हें इन सबी मोजनाओॊ से िॊधचत यखा जाता है ।

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6. दक्षऺण बायत के सबी विशार हहन्द ू भॊहदयेआ का प्रफन्धन सयकाय द्िाया अऩने हाथेआ भें शरमा जा

चक
ु ा है औय इन भॊहदयेआ की आम का रगबग आधा धन ईसाई औय भुल्स्रभ सॊस्थाओॊ भें फाॊर्टा जा
यहा है , जोकक हहन्द ू धभफ के प्रसाय भें रगामे जाने की फजाम हहन्द ू धभफ के विरूध्द ही काभ आ
यहा है ।

7. बायत सयकाय द्िाया भुसरभानेआ को हज मात्रा के शरमे कयोड़ेआ रूऩमे सयकायी कोर्ष से हदमे जाते

है जफकक सॊसाय का अन्म कोई बी दे श महाॊ तक की सऊदी अयफ मा ऩाककस्तान बी हज मात्रा के
शरमे धन नहीॊ दे ता बायत भें मह हहन्द ू कयदाता ऩय एक प्रकाय से दॊ ड ही है ।

8. अजऩसॊख्मक भॊत्रारम एिॊ प्रधानभॊत्री की 15 सत्र
ू ी मोजनाओॊ द्िाया गैय हहन्द ू अथाफत ् ईसाई,

भस
ु रभान आहद के फच्चेआ को राखेआ छात्रिल्ृ त्तमाॊ दी जाती हेऄ, ककन्तु हहन्द ू फच्चेआ द्िाया उनसे

अधधक अॊक राने ऩय बी उन्हें इनसे िॊधचत यखा जाता है , इस प्रकाय के बेदबाि से फच्चेआ की
भनोदशा ऩय ककतना घातक प्रबाि ऩड़ता होगा इसकी तो भात्र कजऩना ही की जा सकती है ।
9. मह सफ इसीशरए हो यहा है कक हहन्द ू अऩने ऊऩय हो यहे अन्माम औय अत्माचाय के विरूध्द

आिाज नहीॊ उठाते। जफकक बायत सयकाय को जो र्टै क्स प्राप्त होता है उसभें से 95 प्रततशत र्टै क्स
तो हहन्दओ
ु ॊ द्िाया ही हदमा जाता है । कपय बी श्रीभती सोतनमा गाॊधी की अध्मऺता भें चरने िारी
सॊप्रग सयकाय (UPA) हहन्दओ
ु ॊ को ही कभजोय कयने ऩय तुरी हुई है ।

महद हहन्दओ
ु ॊ के प्रतत हो यहा अन्माम फॊद नहीॊ ककमा गमा तो हहन्द ू ऐसे नेताओॊ को िोर्ट दे ना
फॊद कय दे गें।

49

फेचो औय खाओ
बायतिर्षफ एक ऩुयातन, फहुबार्षी औय साॊस्कृततक विशबन्नता िारा याष्र है । महाॊ रोकतॊत्र बी

अखण्डता, एकता औय सम्प्प्रबुता के धचन्तन ऩय आधारयत है । दे श के फॊर्टिाये के साथ हहन्द-ू

भुल्स्रभ एक वियोधाबासी सम्प्प्रदाम के रूऩ भें उबयने रगे। याजनेताओॊ ने इस विचायधाया को खफ

हिा दी। गॊगा-जभुनी सॊस्कृतत को आभने-साभने खड़ा कय हदमा। दे श र्टूर्टने रगा औय नपयत की
फढ़ती आग भें नेता योहर्टमाॊ सेकने रगे। जफ इससे बी ऩेर्ट नहीॊ बया, तफ अजऩसॊख्मक शब्द का
अविष्काय कय डारा। अच्छे बरे भुख्म धाया भें जीते रोगेआ को भुख्म धाया से फाहय कय हदमा।

अऩने ही दे श भें रोग द्वितीम श्रेणी के नागरयक फन गए। उनके "कोर्टे " तनघाफरयत हो गए। जन
प्रतततनधधमेआ की िूयता की मह ऩयाकाष्ठा ही है कक सॊविधान भें त्रफना "फहुसॊख्मक" की व्माख्मा
ककए "अजऩसॊख्मक" शब्द को थोऩ हदमा गमा। आऩ अजऩसॊख्मकेआ को ऩूछें कक क्मा उत्थान का
चेहया दे खा?

याजनीतत भें सॊिेदना नहीॊ होती। अफ तो रोकतॊत्र भें बी काॊग्रेस/ बाजऩा के प्रधानभॊत्री/ भुख्मभॊत्री

होने रग गए। याष्र औय याज्मेआ का प्रतततनधध कोई बी हदखाई नहीॊ दे ता। कोई ककसी का यहा ही
नहीॊ। कोई ककसी को परता-पूरता सुहाता ही नहीॊ। फस सत्ता-धन रोरुऩता यह गई। इनका बी

अऩयाधीकयण नेताओॊ ने ही ककमा। दे श के सीने ऩय कपय आयऺण के घाि ककए गए। विर्ष उगरने
रगे, अऩने ही गाॊि िारे, ऩड़ोसी। घय फॊर्ट गए, कामाफरम फॊर्ट गए। एकता औय अखण्डता को भेये ही
प्रतततनधधमेआ ने ताय-ताय कय हदमा। नेताओॊ ने खफ
ू जचन भनामा। अफ इन नासूयेआ से भिाद आने
रगा है । आभ आदभी कयाह यहा है । आयऺण के अनुऩात (प्रततशत) की सूची दे खें तो सबी
अजऩसॊख्मक नजय आएॊगे। याष्रीम सराहकाय ऩरयर्षद ल्जस "साम्प्प्रदातमक एिॊ रक्षऺत हहॊसा
तनयोधक त्रफर-2011" को कानूनी जाभा ऩहनाना चाहती है , फहुसॊख्मकेआ के विरूद्ध, उसे ऩहरे
ऩरयबावर्षत तो कये । ककसको फहुसॊख्मक के दामये भें यखना चाहे गी?

हार ही भें याष्रीम सराहकाय ऩरयर्षद की ओय से जायी इस त्रफर के भसौदे को ऩढ़कय रगता है
कक हभने क्मेआ आजादी के शरए सॊघर्षफ ककमा था। क्मेआ हभने जन प्रतततनधधमेआ को दे श फेचने की
छूर्ट दे दी। क्मेआ हभने सभान नागरयकता के अधधकाय को रागू नहीॊ ककमा? क्मेआ हभने कचभीय को
अजऩसॊख्मकेआ के हिारे कय हदमा औय िोर्ट की खाततय तीन कयोड़ (रगबग) फाॊवरादे शी
अजऩसॊख्मकेआ को बायत भें अनाधधकृत रूऩ से फसने की छूर्ट दे दी।

50

इस नए त्रफर को दे खकय तो रगता है कक हभाये नीतत तनभाफता ऩूये दे श को ही थारी भें सजाकय

ऩाककस्तान के हिारे कय दे ना चाहते हेऄ। आचचमफ है कक ऩरयर्षद के साथ-साथ उसके अध्मऺ ने बी
त्रफर तैमाय कयके सयकाय के ऩास बेज हदमा। ऎसा तघनौना त्रफर आजादी के फाद ऩढ़ने-सुनने भें
बी नहीॊ आमा। धधक्कायने रामक है । याष्रीम स्तय के कानून फनाने के शरए सॊसद, सॊविधान एिॊ

याष्रीम एकता ऩरयर्षद के होते हुए ककसी नागरयक ऩरयर्षद की आिचमकता ही क्मा है ? क्मेआ फना
यखी है सपेद हाथी जैसी याष्रीम सराहकाय ऩरयर्षद?

त्रफर कहता है कक जफ साम्प्प्रदातमक दॊ गे हेआ तो इसका दोर्ष केिर फहुसॊख्मकेआ के भाथे ही भढ़ा

जाए। अजऩसॊख्मकेआ को भुक्त ही यखा जाए। तफ अजऩसॊख्मक अऩयाधधमेआ के भन भें बम कहाॊ

यहे गा? िे कबी बी फहुसॊख्मकेआ के विरूद्ध कुछ बी उत्ऩात खड़ा कय सकते हेऄ। तफ कचभीय के
अजऩसॊख्मक कबी बी सेना के जिानेआ के विरूद्ध कोई बी शशकामत कय सकते हेऄ। जाॊच भें उनको
तो दोर्षी भाना ही नहीॊ जाएगा। आज ल्जस आम्र्ड पोसेज स्ऩेशर प्रोर्टे क्शन एक्र्ट ने सेना को
कचभीय औय उत्तय ऩूिफ भें सुयक्षऺत यखा हुआ है , िह बी फेअसय हो जाएगा। फाॊवरादे शी बी
अजऩसॊख्मकेआ के साथ जुड़े ही हेऄ।

दोनेआ शभरकय आफादी का 20 प्रततशत हहस्सा हेऄ। क्मा अऩयाध बाि ककसी के ररार्ट ऩय शरखा होता
है ? क्मा अपगातनस्तान, ऩाककस्तान जैसे दे शेआ भें मही अजऩसॊख्मक आतॊकिाद के सूत्रधाय नहीॊ है
औय महाॊ ककसी तयह की साम्प्प्रदातमक हहॊसा भें शरप्त नहीॊ होने की कसभ खाकय ऩैदा होते हेऄ।

आऩयाधधक प्रिल्ृ त्त व्मल्क्तगत होती है । इसे ककसी सभूह ऩय रागू नहीॊ ककमा जा सकता जैसा कक

मह प्रस्तावित त्रफर कह यहा है । इसी प्रकाय नेकी मा उदायता बी साभूहहक रूऩ से रागू नहीॊ की जा
सकती।

एक अन्म घोर्ष ्ोाणा बी आचचमफजनक है । दॊ गेआ की अथिा अजऩसॊख्मक की शशकामत ऩय होने

िारी जाॊच भें जो फमान अजऩसॊख्मक दे ता है , उस फमान के आधाय ऩय अजऩसॊख्मक के विरूद्ध
ककसी प्रकाय की कानन
ू ी कायफ िाई नहीॊ होगी मा कायफ िाई का आधाय नहीॊ फनेगा। माद है न, जफ

दहे ज वियोधी कानन
ू फना था, तफ ककस प्रकाय रड़के िारेआ की दद
ु फ शा कयते थे ऩशु रस िारे। झठ
ू ी

शशकामतेआ ऩय? ककस प्रकाय अनस
ु धू चत जातत-जनजातत अत्माचाय तनिायण अधधतनमभ के हिारे से

51

त्रफना जाॊच ककए सजा दे ते हेऄ। अऩने ही दे शिासी कानून के ऩदे भें दे श को तोड़ने का तनशभत्त फन
यहे हेऄ। अफ महद मह त्रफर ऩास हो गमा, तफ िैसे ही जुजभ हेआगे, जैसे कुछ अफ्रीकी दे शेआ भें होते
हेऄ। सफकी आॊखें औय कान फॊद हेआगे।

एक भुद्दा औय बी है ल्जसका अिरोकन बी महाॊ कय रेना चाहहए। िह है आयऺण कानून। इसभें

अॊककत सबी जाततमाॊ ककस श्रेणी भें आएॊगी? हहन्दत्ु ि कोई धभफ मा
सम्प्प्रदाम नहीॊ है । क्मा इन सबी जाततमेआ को बी अजऩ सॊख्मक

भाना जाएगा। क्मा शसख, ईसाई, भुल्स्रभ आहद सम्प्प्रदामेआ के फीच

आऩसी हहॊसा होने ऩय साम्प्प्रदातमक हहॊसा के आयोऩ से सबी भुक्त

यहें गे? तफ क्मा मह सच नहीॊ है कक इस कानून का उऩमोग मेन-केन
प्रकाये ण फहुसॊख्मकेआ को आतॊककत कयने के शरए ककमा जामेगा।
इसकी अन्म कोई बशू भका हदखाई ही नहीॊ दे ती। आज जो कानून

हभाये सॊविधान भें हेऄ, िे हय ऩरयल्स्थतत से तनऩर्टने के शरए सऺभ
हेऄ। जरूयत है उन्हें ईभानदायी औय त्रफना बेदबाि रागू कयने की।

जो साठ सार भें तो सॊबि नहीॊ हो ऩामा। याष्रीम एकता ऩरयर्षद बी
मही कामफ दे खती है । सजा का अधधकाय नई सशभतत को बी नहीॊ
होगा। तनल्चचत ही है कक इसका याजनीततक दरू
ु ऩमोग ही होगा।

इसके ऩास स्ितॊत्र ऩुशरस बी होगी। भध्मप्रदे श भें रोकामुक्त ऩुशरस जो कय यही है , उसे कौन नहीॊ
जानता। सयकायें , याजनेताओॊ तथा अऩने चहे तेआ को भॊत्र दे कय त्रफठाती जाएॊगी।

भजे की फात मह है कक अजऩसॊख्मक सभूह की व्माख्मा भें एसर्टी/एससी को बी शाशभर ककमा

गमा है । अथाफत उन्हें फहुसॊख्मकेआ के सभूह से फाहय तनकार हदमा। तफ अन्म आयक्षऺत िगो को
कैसे साथ यखा जा सकेगा? महद उनको बी अजऩसॊख्मक भान शरमा जाए तो, फहुसॊख्मक कोई

फचेगा ही नहीॊ। ब्राह्तभण एिॊ याजऩूत बी आॊदोरन कयते यहते हेऄ आयऺण के शरए। उनको बी दे
दो। तफ आज के अजऩसॊख्मक ही कर फहुसॊख्मक बी हो जाएॊगे।

क्मा होगा, क्मा नहीॊ होगा मह अरग फात है । प्रचन मह है कक भोहजरे के कोई दो घय शभरकय
नहीॊ यह ऩाएॊगे। फल्जक दचु भन की तयह एक-दस
ू ये को तफाह कयने के सऩने दे खने रग जाएॊगे।

अजऩसॊख्मक ऩड़ोशसमेआ को ऩूयी छूर्ट होगी कक दे श भें आएॊ, कानून से भुक्त यहकय अऩयाध कयें औय
सभम के साथ दे श को हधथमा रें। धन्म-धन्म भेया रोकतॊत्र एिॊ उसके प्रहयी!!!

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अण्डे का सच औय यहस्म ल्जसे ऩढ़ कय साया बायत दे श अॊडा खाना छोड दे गा !

आजकर भुझे मह दे ख कय अत्मॊत खेद औय आश्चमम होता है की अॊडा शाकाहाय का ऩमामम फन

चक
ु ा है ,ब्राह्भणैऄ से रेकय जैननमैऄ तक सबी ने खल्
ु रभखुल्रा अॊडा खाना शुरू कय ददमा है ...खैय
भै ज्मादा बयमभका औय रस्कथन भ न जाता हुआ सीधे तथ्म ऩय आ यहा हयॉ

भादा स्तनऩाईमैऄ (फन्दय बफल्री गाम भनष्ट्ु म) भ एक ननक्श्चत सभम के फाद अॊडोत्सजमन एक

चक्र के रूऩ भ होता है उदायहयणत् भनष्ट्ु मैऄ भ मह भहीने भ एक
फाय,.. चाय ददन तक होता है क्जसे भाहवायी मा भामसक धभम कहते
है ..उन ददनैऄ भ क्स्रमैऄ को ऩज
य ा ऩाठ चल्
य हा यसोईघय आदद से

दयय यखा जाता है ..महाॉ तक की स्नान से ऩहरे ककसी को छयना
बी वक्जमत है कई ऩरयवायैऄ भ ...शास्रैऄ भ बी इन ननमभैऄ का
वणमन है
इसका वैऻाननक द्धवश्रेषण कयना चाहयॉगा ..भामसक स्राव के दौयान क्स्रमैऄ भ भादा हाभोन
(estrogen) की अत्मधधक भारा उत्सक्जमत होती है औय साये शायीय से मह ननकरता यहता है ..
इसकी ऩुक्ष्ट्ट के मरए एक छोटा सा रस्मोग करयमे ..एक गभरे भ पयर मा कोई बी ऩौधा है तो
उस ऩय यजस्वरा स्री से दो चाय ददन तक ऩानी से मसॊचाई कयाइमे ..वह ऩौधा सयख जाएगा ,
अफ आते है भुगॉ के अण्डे की ओय
१) ऩक्षऺमैऄ (भुधगममैऄ) भ बी अॊडोत्सजमन एक चक्र के रूऩ भ होता है अॊतय केवर इतना है की वह
तयर रूऩ भ ना हो कय ठोस (अण्डे) के रूऩ भ फाहय आता है ,

२) सीधे तौय ऩय कहा जाए तो अॊडा भग
ु ी की भाहिायी मा भाशसक धभफ है औय भादा हाभोन
(estrogen) से बयऩयय है औय फहुत ही हाननकायक है

53

३) ज्मादा ऩैसे कभाने के मरए आधनु नक तकनीक का रस्मोग कय आजकर भुधगममैऄ को बायत भ
ननषेधधत ड्रग ओक्तसटोमसन(oxytocin) का इॊजेतशन रगामा जाता है क्जससे के भुधगममाॉ रगाताय
अननषेधचत (unfertilized) अण्डे दे ती है

४) इन भ्रयणैऄ (अन्डो) को खाने से ऩुरुषैऄ भ (estrogen) हाभोन के फढ़ने के कायण कई योग उत्ऩन्न
हो यहे है जैसे के वीमम भ शुक्राणुओ की कभी (oligozoospermia, azoospermia) , नऩुॊसकता औय
स्तनैऄ का उगना (gynacomastia), हाभोन असॊतुरन के कायण डडरस्ेशन आदद ...

वहीीँ क्स्रमैऄ भ अननममभत भामसक, फन्ध्मत्व , (PCO poly cystic oveary) गबामशम कैं सय आदद योग
हो यहे है
५) अन्डो भें ऩोर्षक ऩदाथो के राब से ज्मादा इन योगेआ से हाॊनी का ऩरड़ा ही बायी है .
६) अन्डो के अॊदय का ऩीरा बाग रगबग ७० % कोरेस्रोर है जो की ह्रदम योग (heart attack)
का भख्
ु म कायण है
7) ऩक्षऺमैऄ की भाहवायी (अन्डो) को खाना धभम औय शास्रैऄ के द्धवरुि , अरस्ाकृनतक , औय अऩद्धवर
औय चॊडार कभम है

इसकी जगह ऩय आऩ दध
य ऩीक्जए जो के ऩोषक , ऩद्धवर औय शास्र सम्भत बी है

54

फहुसॊख्मक फॊर्टे हुए हेऄ इसशरए अफ बुगतो
बायतिर्षफ एक ऩुयातन, फहुबार्षी औय साॊस्कृततक विशबन्नता िारा याष्र है । महाॊ रोकतॊर बी

अखण्डता, एकता औय सम्रस्बुता के धचन्तन ऩय आधारयत है । दे श के फॊटवाये के साथ दहन्द-य

भुक्स्रभ एक द्धवयोधाबासी सम्रस्दाम के रूऩ भ उबयने रगे। याजनेताओॊ ने इस द्धवचायधाया को खफ

हवा दी। गॊगा-जभुनी सॊस्कृनत को आभने-साभने खड़ा कय ददमा।

दे श टयटने रगा औय नपयत की फढ़ती आग भ नेता योदटमाॊ सेकने रगे। जफ इससे बी ऩेट नहीॊ
बया, तफ अजऩसॊख्मक शब्द का अविष्काय कय डारा। अच्छे बरे भख्
ु म धाया भ जीते रोगैऄ को

भख्
ु म धाया से फाहय कय ददमा। अऩने ही दे श भें रोग द्वितीम श्रेणी के नागरयक फन गए। उनके
‗कोटे ‘ ननघामरयत हो गए। जन रस्नतनननघमैऄ की क्रययता की मह ऩयाकाष्ट्ठा ही है कक सॊद्धवधान भ

बफना ‗फहुसॊख्मक‘ की व्माख्मा ककए ‗अल्ऩसॊख्मक‘ शब्द को थोऩ ददमा गमा। आऩ अजऩसॊख्मकेआ
को ऩूछें कक क्मा उत्थान का चेहया दे खा?

याजनीनत भ सॊवेदना नहीॊ होती। अफ तो रोकतॊर भ बी काॊग्रेस/ बाजऩा के रस्धानभॊरी/ भुख्मभॊरी

होने रग गए। याष्ट्र औय याज्मैऄ का रस्नतनननघ कोई बी ददखाई नहीॊ दे ता। कोई ककसी का यहा ही
नहीॊ। कोई ककसी को परता-पयरता सुहाता ही नहीॊ। फस सत्ता-धन रोरुऩता यह गई। इनका बी

अऩयाधीकयण नेताओॊ ने ही ककमा। दे श के सीने ऩय कपय आयऺण के घाि ककए गए। विर्ष उगरने
रगे, अऩने ही गाॊि िारे, ऩड़ोसी। घय फॊर्ट गए, कामाफरम फॊर्ट गए।

एकता औय अखण्डता को भेये ही रस्नतनननघमैऄ ने ताय-ताय कय ददमा। नेताओॊ ने खफ
य जश्न

भनामा। अफ इन नासययैऄ से भवाद आने रगा है । आभ आदभी कयाह यहा है । आयऺण के अनुऩात
(रस्नतशत) की सयची दे ख तो सबी अल्ऩसॊख्मक नजय आएॊगे। याष्ट्रीम सराहकाय ऩरयषद क्जस
‗साम्प्प्रदातमक एिॊ रक्षऺत हहॊसा तनयोधक त्रफर-2011′ को कानूनी जाभा ऩहनाना चाहती है ,

फहुसॊख्मकेआ के विरूद्ध, उसे ऩहरे ऩरयबावर्षत तो कये । ककसको फहुसॊख्मक के दामये भें यखना
चाहे गी?

55

हार ही भ याष्ट्रीम सराहकाय ऩरयषद की ओय से जायी इस बफर के भसौदे को ऩढ़कय रगता है
कक हभने तमैऄ आजादी के मरए सॊघषम ककमा था। तमैऄ हभने जन रस्नतनननघमैऄ को दे श फेचने की
छयट दे दी। तमैऄ हभने सभान नागरयकता के अनघकाय को रागय नहीॊ ककमा? तमैऄ हभने कश्भीय को
अल्ऩसॊख्मकैऄ के हवारे कय ददमा औय वोट की खानतय तीन कयोड़ (रगबग) फाॊग्रादे शी
अल्ऩसॊख्मकैऄ को बायत भ अनानघकृत रूऩ से फसने की छयट दे दी।

इस नए बफर को दे खकय तो रगता है कक हभाये नीनत ननभामता ऩयये दे श को ही थारी भ सजाकय

ऩाककस्तान के हवारे कय दे ना चाहते हैं। आश्चमम है कक ऩरयषद के साथ-साथ उसके अध्मऺ ने बी
बफर तैमाय कयके सयकाय के ऩास बेज ददमा। ऎसा तघनौना त्रफर आजादी के फाद ऩढ़ने-सुनने भें

बी नहीॊ आमा। तघक्कायने रामक है । याष्रीम स्तय के कानून फनाने के शरए सॊसद, सॊविधान एिॊ

याष्रीम एकता ऩरयर्षद के होते हुए ककसी नागरयक ऩरयर्षद की आिचमकता ही क्मा है ? तमैऄ फना
यखी है सपेद हाथी जैसी याष्ट्रीम सराहकाय ऩरयषद?

बफर कहता है कक जफ साम्रस्दानमक दॊ गे हैऄ तो इसका दोष केवर फहुसॊख्मकैऄ के भाथे ही भढ़ा
जाए। अजऩसॊख्मकेआ को भुक्त ही यखा जाए। तफ अल्ऩसॊख्मक अऩयानघमैऄ के भन भ बम कहाॊ

यहे गा? िे कबी बी फहुसॊख्मकेआ के विरूद्ध कुछ बी उत्ऩात खड़ा कय सकते हेऄ। तफ कश्भीय के
अल्ऩसॊख्मक कबी बी सेना के जवानैऄ के द्धवरूि कोई बी मशकामत कय सकते हैं। जाॊच भ उनको
तो दोषी भाना ही नहीॊ जाएगा। आज क्जस आम्र्ड पोसेज स्ऩेशर रस्ोटे तशन एतट ने सेना को
कश्भीय औय उत्तय ऩयवम भ सुयक्षऺत यखा हुआ है , वह बी फेअसय हो जाएगा। फाॊवरादे शी बी
अजऩसॊख्मकेआ के साथ जुड़े ही हेऄ।

दोनैऄ मभरकय आफादी का 20 रस्नतशत दहस्सा हैं। तमा अऩयाध बाव ककसी के रराट ऩय मरखा
होता है ? क्मा अपगातनस्तान, ऩाककस्तान जैसे दे शेआ भें मही अजऩसॊख्मक आतॊकिाद के सूत्रधाय

नहीॊ है औय महाॊ ककसी तयह की साम्रस्दानमक दहॊसा भ मरप्त नहीॊ होने की कसभ खाकय ऩैदा होते
हैं। आऩयानघक रस्वक्ृ त्त व्मक्ततगत होती है । इसे ककसी सभयह ऩय रागय नहीॊ ककमा जा सकता जैसा
कक मह रस्स्ताद्धवत बफर कह यहा है । इसी रस्काय नेकी मा उदायता बी साभदय हक रूऩ से रागय नहीॊ
की जा सकती।

56

एक अन्म घोषणा बी आश्चममजनक है । दॊ गैऄ की अथवा अल्ऩसॊख्मक की मशकामत ऩय होने वारी
जाॊच भ जो फमान अल्ऩसॊख्मक दे ता है , उस फमान के आधाय ऩय अल्ऩसॊख्मक के द्धवरूि ककसी
रस्काय की कानयनी कायम वाई नहीॊ होगी मा कायम वाई का आधाय नहीॊ फनेगा। माद है न, जफ दहे ज
द्धवयोधी कानयन फना था, तफ ककस रस्काय रड़के वारैऄ की दद
ु म शा कयते थे ऩुमरस वारे। झयठी

मशकामतैऄ ऩय? ककस रस्काय अनुसयधचत जानत-जनजानत अत्माचाय ननवायण अनघननमभ के हवारे से

बफना जाॊच ककए सजा दे ते हैं। अऩने ही दे शवासी कानयन के ऩदे भ दे श को तोड़ने का ननमभत्त फन
यहे हैं। अफ मदद मह बफर ऩास हो गमा, तफ वैसे ही जल्
ु भ हैऄगे, जैसे कुछ अफ्रीकी दे शैऄ भ होते
हैं। सफकी आॊख औय कान फॊद हैऄगे।

एक भुद्दा औय बी है क्जसका अवरोकन बी महाॊ कय रेना चादहए। वह है आयऺण कानयन। इसभ
अॊककत सबी जानतमाॊ ककस श्रेणी भ आएॊगी?

दहन्दत्ु व कोई धभम मा सम्रस्दाम नहीॊ है । तमा मसख, ईसाई, भक्ु स्रभ आदद सम्रस्दामैऄ के फीच आऩसी
दहॊसा होने ऩय साम्रस्दानमक दहॊसा के आयोऩ से सबी भत
ु त यहगे? तफ क्मा मह सच नहीॊ है कक

इस कानून का उऩमोग मेन-केन प्रकाये ण फहुसॊख्मकेआ को आतॊककत कयने के शरए ककमा जामेगा।

इसकी अन्म कोई बयमभका ददखाई ही नहीॊ दे ती। आज जो कानयन हभाये सॊद्धवधान भ हैं, वे हय

ऩरयक्स्थनत से ननऩटने के मरए सऺभ हैं। जरूयत है उन्ह ईभानदायी औय बफना बेदबाव रागय कयने
की। जो साठ सार भ तो सॊबव नहीॊ हो ऩामा। याष्ट्रीम एकता ऩरयषद बी मही कामम दे खती है ।

सजा का अनघकाय नई समभनत को बी नहीॊ होगा। ननक्श्चत ही है कक इसका याजनीनतक दरू
ु ऩमोग

ही होगा। इसके ऩास स्वतॊर ऩुमरस बी होगी। भध्मरस्दे श भ रोकामुतत ऩुमरस जो कय यही है , उसे
कौन नहीॊ जानता। सयकाय, याजनेताओॊ तथा अऩने चहे तैऄ को भॊर दे कय बफठाती जाएॊगी।

भजे की फात मह है कक अजऩसॊख्मक सभूह की व्माख्मा भें एसर्टी/एससी को बी शाशभर ककमा
गमा है । अथामत उन्ह फहुसॊख्मकैऄ के सभयह से फाहय ननकार ददमा। तफ अन्म आयक्षऺत वगो को
कैसे साथ यखा जा सकेगा? मदद उनको बी अल्ऩसॊख्मक भान मरमा जाए तो, फहुसॊख्मक कोई

फचेगा ही नहीॊ। ब्राह्भण एवॊ याजऩयत बी आॊदोरन कयते यहते हैं आयऺण के मरए। उनको बी दे
दो। तफ आज के अजऩसॊख्मक ही कर फहुसॊख्मक बी हो जाएॊगे।

57

तमा होगा, तमा नहीॊ होगा मह अरग फात है । रस्श्न मह है कक भोहल्रे के कोई दो घय मभरकय
नहीॊ यह ऩाएॊगे। फक्ल्क दश्ु भन की तयह एक-दस
य ये को तफाह कयने के सऩने दे खने रग जाएॊगे।

अजऩसॊख्मक ऩड़ोशसमेआ को ऩूयी छूर्ट होगी कक दे श भें आएॊ, कानून से भुक्त यहकय अऩयाध कयें
औय सभम के साथ दे श को हधथमा रें। धन्म-धन्म भेया रोकतॊर एवॊ उसके रस्हयी!!!

58

ऩयु ाना जाततिाद फेशक गरत था, ऩय क्मा आज का जाततिाद सही मा न्मामऩयक है ?
रेखक जीके चेस्टयटन ने कहा था कक मशऺा के भाध्मभ से ऩुयानी ऩीढ़ी अगरी ऩीढ़ी भ अऩनी

आत्भा का रस्वेश कयाती है । अऩनी ऩयॊ ऩया बी भानती है कक सभम आने ऩय अजय-अभय आत्भा
एक जीणम उतयन की तयह ऩुयानी कामा त्मागकय नई कामा धायण कयती है । रेककन दे श की

भौजयदा उच्च मशऺा रस्णारी के भापमत नई ऩीढ़ी भ ऩुयानी ऩीढ़ी की आत्भा का सहज अवतयण
रगबग असॊबव है ।

याजनीनतक वजहैऄ से फाय-फाय आभर
य चर
य फदरी गई नीनतमैऄ ने द्धवश्वद्धवद्समारमीन ऩरयसयैऄ को

रस्नतबा औय शोध को फढ़ावा दे ने के फजाम ऩयीऺा औय दाखखरा रस्णामरमैऄ के चक्रव्मह
य से नघये

दग
ु ो भ फदर ददमा है । उनके रस्वेश द्सवाय ऩय पॊसे अनेक भेधावी छार औय शोधाथॉ तो अतसय
उफय नहीॊ ऩाते, रेककन कोर्टा प्रणारी के तहत रर्टकाई गई कभॊदेआ से भॊझोरे स्तय के कई छात्र

भजे से बीतय खीॊच शरए जाते हेऄ। नतीजा मह कक ऩरयसयैऄ भ कॊु ठा औय भीडडमाकक्रटी फढ़ यही है ,
ऻान का स्तय नहीॊ।

इस सार ददल्री के कुछ जाने-भाने कॉरेजैऄ भ गखणत, कॉभसम औय अथमशास्र सयीखे चहे ते द्धवषमैऄ
भ दाणखरा ऩाने की अहफता (कर्ट ऑप) दय सौ पीसदी तक जा ऩहुॊची है । कपय बी फतामा गमा है
कक दाखखरा खर
ु ने के हफ्तेबय के बीतय वहाॊ उऩरब्ध साभान्म श्रेणी की सफ सीर्टें बय गईं।

नतीजतन नब्फे रस्नतशत तक अॊक ऩाकय बी भनचाहे द्धवषम से वॊधचत यहने जा यहे छारैऄ की
तादाद फहुत अधधक है । कुछ र्टॉऩय बी भनचाहे विर्षमेआ भें दाणखरा नहीॊ ऩा सके। कॉरेज भजफयय हैं,
साधन मा ऺभता से अधधक सीटैऄ ऩय दाखखरे वे कहाॊ तक कय?

उनकी टीधचॊग पैकल्टी भ अनेक भहत्वऩण
य म द्धवषमैऄ की आयक्षऺत सीर्टें विऻाऩन दे कय बी सभधु चत
आिेदक न शभर ऩाने से खारी ऩड़ी हेऄ। मह सीर्टें गैय कोर्टा श्रेणी के शशऺकेआ से बयना भना है ,
इसमरए वे अऩने महाॊ तदथमवादी आधाय ऩय रेतचययैऄ की ननमक्ु तत को द्धववश हैं। नतस ऩय अफ

भाॊग हो यही है कक कॉरेजैऄ भ रेतचययैऄ की ननमक्ु तत ही नहीॊ, रस्ोपेसय मा डीन सयीखे सीननमय

59

ऩदैऄ ऩय उनकी रस्ोन्ननत बी कोटा रस्णारी के ही आधाय ऩय ही हो, ऻान मा शोध कामम की
गुणवत्ता के तहत नहीॊ।

ऩुयानी जानतवादी व्मवस्था भ उच्च मशऺा सवणो की ही फऩौती यही। उसे चन
ु ौती दे ने को जातीम

कोटा रस्णारी फनी, ऩय आज हभ दे ख यहे हेऄ कक उच्च शशऺा के नाभी केंद्रेआ भें गुरु-शशष्मेआ का चमन
औय उनके फीच ऻान के आदान-प्रदान का आधाय ऻान औय अनुबि के फजाम दोफाया एक जाततधभफ आधारयत प्रणारी ऩय ही आ हर्टका है औय ऩरयसयैऄ भ नई तयह की सवणम व्मवस्था फन यही
है , जो उच्च मशक्षऺत मुवाओॊ को सभताभुखी औय सभाजोऩमोगी फनाने के फजाम नई तयह का
द्धवबेदकायी सवणम फना यही है ।

उधय छारैऄ की तादाद, भहत्वाकाॊऺा के साथ सभाज भ ऩैसे का स्तय फढ़ने से भोटी पीस के
आधाय ऩय दाखखरा दे ने वारे (अतसय द्धववाददत गण
ु वत्ता वारे) ननजी कॉरेजैऄ की फाढ़ आ गई है ,
क्जन तक ऩहुॊच ऩैसे वारैऄ की ही है । अचयज तमा कक इन कॉरेजैऄ से ननकरे अधधकतय छारैऄ का
दे श के साभान्म जीवन से कोई रयश्ता नहीॊ फनता।

मह सही है कक सयकायी ननगयानी भ फने आईआईटी, आईआईएभ, एम्स मा ऩीजीआई जैसे औय
कई कॉरेजैऄ ने दनु नमा भ साख फनाई है , ऩय अफ उन ऩय बी सीट फढ़ाने औय पीस की दय घटाने
को रेकय नासभझ सभझौते कयने को उत्कट दफाव ऩड़ यहे हैं।

हभाये द्धवऩयीत चीन ने उच्च शशऺा के ऺेत्र भें पैकजर्टी की गण
ु ित्ता याजनीततक मा जाततिादी

आग्रहेआ के फजाम शैक्षऺक भानदॊ डेआ ऩय सुतनल्चचत कयने औय शोधऩयक काभ का दामया तनयॊ तय

फढ़ाने की हदशा भें इक्कीसिीॊ सदी की चन
ु ौततमाॊ सही तयह से ऩकड़कय हभको भीरेआ ऩीछे छोड़
हदमा है । वहाॊ उच्च मशऺा रगाताय व्माऩक, फहुबाषा-बाषी औय द्धवश्वस्तयीम फन यही है , जफकक
हभाये महाॊ ऩरयसयैऄ भ ऩुयाने मशऺक ककस तयह अऩने ऻान की ऩरयधध फढ़ाएॊ?

60

नए मशऺक ककस तयह उनकी ननगयानी भ रगाताय तैमाय हैऄ औय ऊॊची तारीभ कैसे व्माऩक व
रोकताॊबरक फने, ताकक सबी ऩरयसयैऄ भ रस्नतबावान छारैऄ को भनचाहा द्धवषम ऩढ़ने की गायॊ टी हो?
इन जरूयी सवारैऄ को दयककनाय कय हय सयकाय ने इस तयह के ननमभ-उऩननमभ फनाए हैं कक
धभम-जानत ननयऩेऺ सॊद्धवधान के फावजयद हभायी उच्च मशऺा जानतवाद की जकड़न से भुतत होने के
फजाम दस
य यी तयह के जानतवाद की जॊजीयैऄ से कपय जकड़ गई है ।

ऩुयाना जानतवाद फेशक गरत था, ऩय तमा आज का जानतवाद सही मा न्मामऩयक है ? विर्षभताभम

जाततिाद को ऩोसते यहने की िजह से उच्च शशऺा ऩाकय बी हभाये मुिा कैसे सॊकीणफ औय साभॊती
विचायेआ िारे ही फने हुए हेऄ, इसका रस्भाण टीवी फहसैऄ से फॉरीवुड की कपल्भैऄ तक भ दे खा जा
सकता है ।

बफना झऩे फहुचधचमत ‗जेन एतस‘ के रस्नतननधध छोटे -फड़े ऩदे ऩय से फताते यहते हैं कक शि
ु ऻान,
शोध मा ऩठन-ऩाठन ककतने उफाऊ हैं। वे फीवी मा जॉफ का चमन बी शैक्षऺक ऺभता नहीॊ, फक्ल्क
टोटर ऩैकेज के आधाय ऩय कयते हैं मा गरमपै्यॊड को रस्बाद्धवत कयने के मरए चोयी मा झऩटभायी
कयना भजाककमा शयायत बय भानते हैं। दानमत्वफोध का हार मह है कक इस सार आईआईटी

रस्वेश ऩयीऺा भ टॉऩ कयने वारे छार ने कहा कक इॊजीननमयी कोसम उसके कॎरयमय की एक सीढ़ी
बय होगा, तमैऄकक वह अॊतत: मसद्धवर सेवा भ जाएगा।

इस क्स्थनत को स्वागतमोग्म कह मा ददर तोड़ने वारी? मा उसे मसपम स्वीकाय कय र? स्वीकाय

कयने का भतरफ हुआ कक हभ भान र कक उच्च मशऺा की दनु नमा भ रस्वेश कय यही हभायी नई
ऩीढ़ी के मरए ऩढ़ाई का भतरफ होगा जानत, नौकयी व धन। बफना जरूयत बी सीट हधथमाने मा
ऻान की ऩयॊ ऩया को रगाताय आगे न फढ़ा ऩाने को रेकय उनभ कोई अऩयाध फोध नहीॊ होगा।

दहत स्वाथम जो बी हैऄ, मह तो भानना ही होगा कक मह नमा जाततिाद न शसपफ विर्षभता को स्थामी
फनाकय ऻान का सहज विकास कॊु हठत कय यहा है , साथ ही िह चोय दयिाजेआ से पजी डडधग्रमाॊ

फाॊर्टने िारे कॉरेजेआ, नकरी जातत सहर्टफ कपकेर्ट फनिाने िारे फाफुओॊ औय ट्मूर्टोरयमर के भापफत दे श
भें भ्रष्र्टाचाय कयने की राखेआ नई याहें बी फना यहा है ।

61

सवार इस मा उस जानतवाद की तुरनात्भक द्धववेचना का नहीॊ, सवार मह है कक उच्चमशऺा को
अगय ननरुद्देश्म मा ककसी कधथत अच्छे उद्देश्म से बी कभजोय ककमा जा यहा हो तो तमा उसे
कभजोय होने ददमा जाए?

62

WHO IS A HINDU

In a meeting of the Sanatana Dharma Sabha, Lokamanya Tilak said: ―A Hindu is he who
believes that the Vedas contain self-evident and axiomatic truths.‖

The Hindu Maha Sabha has given another definition: ―A Hindu is one who believes in a religion
which has originated in India.‖

HINDU RELIGION
―Those who burn the dead are Hindus.‖ This is another definition given by some.

―He who protects the cows and the Brahmins is a Hindu.‖
This is another definition given by some.

Some define: ―A Hindu is one who regards India as his
motherland and the most sacred spot on earth.‖

Some others define: ―He who calls and considers himself a Hindu is a Hindu.‖

Some define: ―He who accepts the Vedas, the Smritis, the Puranas and the Tantras as the basis of
religion and of the rule of conduct, and believes in one Supreme God (Brahman), in the Law of
Karma or retributive justice, and in reincarnation (Punarjanma), is a Hindu.‖

―He who follows the Vedic or Sanatana-Dharma is a Hindu.‖ This is the definition by some.

―He who is a follower of the Vedanta is a Hindu.‖ This is another definition given by some
others.

63

―He who has perfect faith in the Law of Karma, the law of reincarnation Avatara,
ancestor worship, Varnashrama Dharma, Vedas and existence of God, he who practises
the instructions given in the Vedas with faith and earnestness, he who does Sandhya,
Sraaddha, Pitri-Tarpana and the Pancha-Maha-Yajnas, he who follows the Varnashrama
Dharmas, he who worships the Avataras and studies the Vedas, is a Hindu.‖ This is the
definition given by some highly cultured men. This is the only correct and complete definition. SRI SWAMI SIVANANDA (The Divine Life Society)

वीय सावयकय दहॊद य की ऩरयबाषा इस रस्काय कयते थे

:-

मो वणामश्रभननष्ट्ठावान ् गोबतत: श्रनु तभातक
ृ : |
भयनतां च नावजानानत सवमधभमसभादय:

||

उत्रस्ेऺते ऩुनजमन्भ तस्भान्भोऺणभीहते |
बयतानुकुल्मॊ बजते स वै दहन्दरु यनत स्भत
ृ : ||
दहॊसमा दम
य ते धचत्तॊ स वै दहन्दरु यतीरयत:

||

जो वणम ओय आश्रभ की व्मवस्था भ ननष्ट्ठा यखने वारा, गो बतत, श्रनु तमैऄ को भाता की बाॊनत ऩयज्म
भानने वारा, दे वभयनतम की जो अवऻा नहीॊ कयता तथा सबी धभो का आदय कयने वारा है , ऩुनजमन्भ
को भानने वारा है ओय उससे भुतत (भोऺ) होने की चेष्ट्ठा कयता है तथा जो सदा सफ जीवैऄ के
अनुकयर फतामव को अऩनाता है वही दहॊद य भाना गमा है दहॊसा से उसका धचत्त द्ु खी होता है ,
इसमरए उसे दहॊद य कहा गमा है !

64

कहानी
एक कहानी सुना यहा हयॉ ,"भाॉ कैसी होती है " एक भाॉ थी क्जसका एक रड़का था, फाऩ भय चक
ु ा था,
भाॉ घयो भ फतमन भाॊजती थी फेटे को अऩना ऩेट काटकय एक अच्छे अॊग्रेजी स्कयर भ ऩढ़ाती

थी,एक ददन स्कयर भ ककसी फच्चे ने उसके रड़के के आॉख भ ऩमसर भाय दी ,रड़के की आॉख

चरी गई ,डातटय ने कहा मे आॉख नहीॊ फचेगी दस
य यी रगेगी ,तो भाॉ ने अऩने करेजे के टुकड़े के

मरए अऩनी एक आॉख दे दी ,अफ वो दे खने भ बी अच्छी नहीॊ थ... ी ,फेटा उसको स्कयर आने को
भना कयता था तमैऄकक वो दे खने भ अच्छी औय ऩढ़ी मरखी नहीॊ थी ऊऩय से एक आॉख बी नहीॊ
यही, उसे अऩनी भाॉ ऩय शभम आती थी, कबी रॊच फॉतस दे ने आती बी थी तो भुह छुऩा कय औय
अऩने को नौकयानी फताती थी ,अऩने फच्चे की ख्वाइश ऩययी कयने को वो ददन यात काभ कयती

रेककन फेटे को कभी भहसयस नहीॊ होने दे ती , फेटा जवान हुआ एक सयकायी अधधकायी फना उसने
रव भैरयज की, उसने अऩनी भाॉ को बी नहीॊ फुरामा ,औय अरग घय रे फीफी के साथ यहने रगा
भाॉ फयढी हो यही थी फीभाय बी यहने रगी ,रेककन रड़का अऩनी ऩत्नी औय हाई सोसाइटी भ

व्मस्त यहने रगा उसे भाॉ की माद बी नहीॊ आती थी, भाॉ फीभाय यहती रेककन ददन यात अऩने ऩर

की सम्रद्धि औय उन्ननत के मरए बगवान ् से दआ
भाॊगती यहती कुछ ऩडोसी भाॉ का ख्मार यखते

,एक फाय वो फहुत फीभाय ऩड़ी तो उसने अऩने फेटे को दे खने की इच्छा जादहय की रोग रड़के को
फर
ु ाने गए तो,वो अऩनी फीफी के साथ कहीॊ टयय ऩे घभ
ु ने जा यहा था वो नहीॊ आमा उसने कुछ
ऩैसे इराज के मरए बेज ददए ,रेककन भाॉ का इराज तो उसका फेटा था क्जसको भयने से ऩहरे
दे खना चाहती थी उसे प्माय दे ना चाहती थी, वो कपय बी फेटे का इन्तेजाय कयती यही ,उसके
करेजे का टुकड़ा उसके आशाओॊ के टुकड़े कय यहा था ,वो आमा रेककन तफ तक भाॉ भय चक
ु ी थी
उसके हाथ भ एक पोटो था रड़के का वही फचऩन की स्कयर ड्रेस फारा पोटो धन्
ु दरा गन्दा सा

क्जसे हय वतत सीने से रगामे यहती थी, आज बी सीने से रगामे थी ,रेककन भयते दभ तक वो
अऩने करेजे के टुकड़े को करेजे से न रगा सकी ददन फीते वतत फदरा रड़के का काय से

एक्तसडट हुआ इस एक्तसडट भ उसकी दोनैऄ आॉख चरी गई चेहये ऩय चोट रगने से कुरूऩ रगने
रगा दोनैऄ ऩैय फेकाय हो गए चरने भ रचाय हो गमा ,ऩत्नी अभीय घय की रड़की थी ,वो ददनैऄ
ददन ऩनत से दयय होने रगी तमैऄकक ऩनत अफ कुरूऩ औय द्धवकराॊग था ,औय एक ददन वो ऩनत को
छोड़ कय चरी गई ,तफ फेटे को भाॉ की माद आमी ,की कैसे उसने अऩने फेटे के मरए अऩनी एक
आॉख दे दी जीवन के आखयी सभम तक वो उसकी पोटो को सीने से रगामे यही,औय वो उसको
अऩनी ऩत्नी औय हाई सोसाइटी के मरए भाॉ को माद बी नहीॊ कयता था आज ईश्वय ने उसे फता
ददमा जनवा ददमा की भाॉ का प्माय असीभ होता है , ननस्वाथम होता है , दनु नमा भ उससे ज्मादा प्माय
कयने फारा कोई नहीॊ ,वो रेटे रेटे मही सैऄच यहा था औय यो यहा था की ईश्वय ने शामद भाॉ के

प्माय की ़द्र न कयने की सजा दी-----------रेककन शामद भाॉ स्वगम भ बी उसकी इस हारत को

65

दे ख तड़ऩ उठी होगी " "भाॉ जीवन का अनभोर औय ननस्वाथम प्माय है ककसी औय के प्माय के मरए
उसे भत ठुकयाना

66

क्मा सचभुच हहन्द ू फहुसॊख्मक हेऄ ?
धामभमक वगम

अनुमानममैऄ की सॊख्मा

भुख्म ऺेर शामभर

(मभमरमन भ)
ईसाईमत

2,000-2,200

ओमशननमा), उऩ सहाया अफ्रीका,

ऩक्श्चभी दनु नमा भ रस्भुख (मययोऩ, अभेरयका,

कपरीऩीॊस औय दक्षऺण कोरयमा
इस्राभ

1,570-1,650

एमशमा, ऩक्श्चभी अफ्रीका, द्सवीऩसभयह

भध्म ऩयव,म उत्तयी अफ्रीका, भध्म एमशमा, दक्षऺण

के साथ भरम फड़ी आफादी चीन औय रूस के
भौजयदा केन्द्रैऄ भ ऩयवॉ अफ्रीका, फाल्कन
रस्ामद्सवीऩ
फौद्ध धभफ

400-1,500

ऑस्रे मरमा औय रूस के ऺेरैऄ भ कुछ.

दक्षऺण एमशमा, ऩयवम एमशमा, दक्षऺण ऩयवम एमशमा,

रोक धभफ

600-3,000

अफ्रीका, एमशमा, अभेरयका

चीनी रोक धभफ

400-1,000

ऩयवम एमशमा, द्धवमतनाभ, मसॊगाऩुय औय

(कन्फ्मयशीवाद ताद्धवस्भ औय सदहत)भरेमशमा.
हहॊदत्ु ि

828-1,000

बायतीम उऩभहाद्सवीऩ,दक्षऺण एमशमा, फारी,

भॉरयशस, कपजी, गम
ु ाना, बरननदाद औय
टोफैगो, सययीनाभ, औय सभुदामैऄ के फीच रस्वासी

बायतीम.
ॊ ो
शशर्ट

27-65

जाऩान

67

शसख धभफ

24-28

बायतीम उऩभहाद्सवीऩ, आस्रे मरमा, उत्तयी

अभेरयका, दक्षऺण ऩयवम एमशमा,बब्रटे न औय
ऩक्श्चभी मययोऩ.
महूदी धभफ
14
(अधधकतय उत्तयी अभेरयका,

इसयाइर औय दनु नमा बय भ महयदी रस्वासी

दक्षऺणी अभेरयका, मययोऩ औय एमशमा).
जैन धभफ

8-12

बायत औय ऩव
य ॉ अफ्रीका.

फहाई धभफ

7.6-7.9

दनु नमा बय भ रस्भख रूऩ से पैरा रेककन शीषम

दस आफादी (अनुमानममैऄ द्धवश्वास फहाई

के आकाय के क्रभ भ) बायत, सॊमत
ु त

द्धवश्व की यामश के फाये भ 60%) यहे हैं (सभद
ु ाम

याज्म अभेरयका,द्धवमतनाभ, केन्मा, डॉ काॊगो,
कपरीऩीॊस, जाक्म्फमा, दक्षऺण अफ्रीका,
ईयान, फोरीद्धवमा
काओ दाई

1/15

द्धवमतनाभ

चेनोडो भत

3

कोरयमा

तेनरयक्मो

2

जाऩान, ब्राजीर.

विक्का

1

नमा धामभमक आॊदोरन ( सॊमुतत याज्म अभेरयका,

ऑस्रे मरमा, मययोऩ, कनाडा.
दतु नमा की भेल्स्सअतनर्टी चचफ 1

जाऩान, ब्राजीर

शसचो -नो- रे

जाऩान, ब्राजीर.

0.8

68

यस्तापयी धाशभफक आॊदोरन

0.7

नमा धामभमक आॊदोरन है , अब्रहमभक धभों जभैका,

0.63

नमा धामभमक आॊदोरन सॊमुतत याज्म अभेरयका,

कैरयबफमन, अफ्रीका.
एकजुर्ट सािफबौशभकता
कनाडा, मययोऩ.

====================================================================
इनके अततरयक्त जाततमेआ भें फॊर्टे हेऄ सो अरग ! औय अफ तो कोढ़ भें खाज नई जाती याज नीतत
ने बी सभाज भें खाई खोद दी है !

चाणतम के 15 सक्य तत वातम ---1) "दस
य यो की गरनतमैऄ से सीखो अऩने ही ऊऩय रस्मोग कयके सीखने को तम्
ु हायी आमक
ु भ ऩड़ेगी."
2)"ककसी बी व्मक्तत को फहुत ईभानदाय नहीॊ होना चादहए ---सीधे फऺ
ृ औय व्मक्तत ऩहरे काटे जाते हैं."
3)"अगय कोई सऩम जहयीरा नहीॊ है तफ बी उसे जहयीरा ददखना चादहए वैसे दॊ श बरे ही न दो ऩय दॊ श दे
सकने की ऺभता का दस
य यैऄ को अहसास कयवाते यहना चादहए. "
4)"हय मभरता के ऩीछे कोई स्वाथम जरूय होता है --मह कडुआ सच है ."
5)"कोई बी काभ शरू
ु कयने के ऩहरे तीन सवार अऩने आऩसे ऩछ
य ो ---भैं ऐसा तमैऄ कयनेजा यहा हयॉ ?
इसका तमा ऩरयणाभ होगा ? तमा भैं सपरयहयॉगा ?"
6)"बम को नजदीक न आने दो अगयमह नजदीक आमे इस ऩय हभरा कयदो मानी बम से बागो भत
इसका साभना कयो ."
7)"दनु नमा की सफसे फड़ी ताकत ऩरु
ु ष का द्धववेक औय भदहरा की सन्
ु दयता है ."
8)"काभ का ननष्ट्ऩादन कयो , ऩरयणाभ से भत डयो."
9)"सग
ॊ का रस्साय हवा के रुख का भोहताज होता है ऩय अच्छाई सबी ददशाओॊ भ पैरती है ."
ु ध
10)"ईस्वय धचर भ नहीॊ चरयर भ फसता है अऩनी आत्भा को भॊददय फनाओ."
11) "व्मक्तत अऩने आचयण से भहान होता है जन्भ से नहीॊ."
12) "ऐसे व्मक्तत जो आऩके स्तय से ऊऩय मा नीचे के हैं उन्ह दोस्त न फनाओ,वह तम्
ु हाये कष्ट्ट का कायण
फनेगे. साभान स्तय के मभर ही सख
ु दाई होते हैं ."
13) "अऩने फच्चैऄ को ऩहरे ऩाॊच सार तक खयफ प्माय कयो. छ् सार से ऩॊद्रह सार तक कठोय अनश
ु ासन
औय सॊस्काय दो.सोरह सार से उनके साथ मभरवत व्मवहाय कयो.आऩकी सॊतनत ही आऩकी सफसे अच्छी
मभर है ."

69
14) "अऻानी के मरए ककताफ औय अॊधे के मरए दऩमण एक साभान उऩमोगी है ."
15) "मशऺा सफसे अच्छी मभर है . मशक्षऺत व्मक्तत सदै व सम्भान ऩाता है . मशऺा की शक्तत के आगे मव
ु ा
शक्तत औय सौंदमम दोनैऄ ही कभजोय हैं ."

70

जो रोग चार्टा भायने का वियोध कय यहे हेऄ. िो आभ आदभी की ऩीड़ा को नही सभझ ऩा
यहे हेऄ...
कर से कई रोग भुझसे शयद ऩावय को चाटा भाये जाने वारे सुॊदयकाॊड ऩय भेये द्धवचाय मा याम

ऩयछ चक
ु े हैं.कभ शब्दैऄ भ कहयॉ तो मह गरत नहीॊ हुआ हैं. भैं इस तयह कक रस्नतकक्रमा का सभथमन
कयता हयॉ. आऩ एक फुिजीवी कक तयह नहीॊ. फक्ल्क एक आभ आदभी के आमाभ से सोधचमे. एक

आभ आदभी को आखखय इस 60 सार के रोकतॊर ने ददमा ही तमा हैं ? एक सड़ी - गरी व्मवस्था
से ज्मादा कुछ नहीॊ.
चाहे वो काॊग्रेस हो मा बाजऩा. फस एक को अर्फसोस इस फात का हैं कक वो ज्मादा रयट न सका.
ककसी ने भॊददय के नाभ ऩय रयटा तो ककसी ने ककसी औय नाभ ऩय.आभ आदभी शासन से सॊवाद
स्थाद्धऩत नहीॊ कय सकता. इस सॊवाद हीनता के मरए सीधे सीधे शासन दोषी हैं.

कबी फि
ु जीवी मा सादहत्मकाय आभ जनता कक आवाज हुआ कयते थे. ददनकय कक कद्धवताओ ने
रोगो भ याष्ट्र बक्तत कक बावना बयी थी. रेककन आज का सादहत्मकाय इन भ्रष्ट्ट नेताओ के हाथो
सम्भाननत होने भ ही गौयव भहसस
य कयता हैं. औय मभडडमा कक फात तो कहना ही तमा एक यखैर
को बी शभम आ जाम मभडडमा का चरयर दे खकय. ऐसे भ आभ आदभी जाम तो कहा जाम ?

उसके ऩास दो ही द्धवकल्ऩ हैं मा तो वो आत्भ हत्मा कय र मा कपय ऩीढी दय ऩीढी गुराभी के
मरए तैमाय यह. कर गोये अॊग्रेज थे आज बयये हैं. उसके मरए तो कुछ बी नहीॊ फदरा.

कर को ककसी उधभ मसॊह ने डामय कक गोरी भाय कय हत्मा की थी. तो आज तो कोई मसपम चाटा
ही भाय यहा हैं. भैं ऐसा कृत्म नहीॊ कय सकता. भेयी रड़ाई वैचारयक हैं. रेककन भैं ऩयया सभथमन बी
कयता हयॉ. तमोकक सभाज को जरूयत दोनैऄ की हैं.

रगे यहो फहादयु ैऄ मव
ु ा तम्
ु हाये साथ हैं. असरी भजा तो तफ आएगा जफ इस भौनी फाफा को कोई
सफक मसखाएगा...

71

कॉयऩोये र्ट घयाने के एजेंर्ट फन गए नक्सरी.....................................
कॉयऩोये र्ट घयाने के एजेंर्ट फन गए नक्सरी............................................
छत्तीसगढ़ भ फड़ी-फड़ी कॊऩननमैऄ के नतसरी सॊगठनैऄ से रयश्तैऄ के उजागय होने के फाद अफ ऩन
ु ्
सयकाय औय जनता को सरवा जड
ु य भ की रस्ासॊधगकता माद आ यही है । अवैध ढॊ ग से धन दे कय

नतसरी फहुर ऺेरैऄ भ खनन औय ऊजाम कॊऩननमाॉ बोरे-बारे आददवामसमैऄ औय अन्म वगों का
शोषण कयती हैं। सवमहाया वगम का कधथत सॊयऺण का दॊ ब बयने वारे नतसरी इनका दोहया शोषण
कयते हैं। ऐश कयने का भाध्मभ फनाकय नतसरी वीयप्ऩन शैरी भ खश
ु हार क्जॊदगी जीते हैं। दहॊसा
का ताण्डव कय ऩुमरस व रस्शासन औय जनरस्नतननधधमैऄ को वहाॉ जाने से योकते हैं। अकयत वन
सॊऩदा का दोहन कयने ऩहुॉचे उद्समोगऩनतमैऄ से राखैऄ रूऩमे की वसयरी के फदरे वे उन्ह अवैध

तयीके से कयोड़ैऄ रूऩमे का राब ऩहुॉचाते हैं। सवमहाया औय ऩयॊजीवाद के द्धवकृत घारभेर से उत्ऩन्न
द्धवद्रऩ
य तस्वीय अत्मॊत बमावह है । कभीशनखोयी के कायण सयकाय के रस्नतननधध बी अनत रस्सन्न

हैं। द्धवकास के नाभ ऩय यामश भ वक्ृ ध्द ही उनकी सॊऩन्नता को फढ़ाता है । छत्तीसगढ़ सयकाय की
एस.आई.टी. द्सवाया जायी रयऩोटम के भुताबफक, दॊ डकायण्म कभेटी की वाद्धषमक आम ऩाॊच कयोड़ है ,

क्जसभ तीन कयोड़ हय सार खचम हो जाते हैं। दो कयोड़ रूऩमे रस्नतवषम सरर कभेटी को बेजा जाता
है । सरवा जुडयभ की वजह से आम का स्रोत घटा है । सयकायी उत्सव से रेकय आमोजनैऄ को
द्धवपर कयने की नतसरी यणनीनत अऩने साम्राज्म के ऺेर को फढ़ाना औय ननयॊ कुश शासन

व्मवस्था को कामभ यखने का है । उद्समोगऩनतमैऄ से अकयत धनयामश दे ने के एक भाभरे का

बॊडापोड़ से सयकाय औय जनता सबी चककत हैं। अबी तो एस्साय कम्ऩनी के जीएभ ही धगयत भ
आमा है । फस्तय भ एनजीओ जम जोहाय सेवा सॊस्थान के दतय से कई आऩक्त्तजनक दस्तावेज
फयाभद ककमे गमे। इसका अध्मऺ काॊग्रेस नेता ऩवन दफ
ु े पयाय है । जाॊच रयऩोटम भ खर
ु ासा हुआ है
कक एस्साय कम्ऩनी ने जान-फयझकय ठे केदायैऄ को अनतरयतत बुगतान ककमा, जो नतसमरमैऄ को दे ने
के मरमे थी। इसकी सीफीआई जाॊच की भाॊग उठने के साथ मसमासी याजनीनत गभाम गई है । स्टीर

ऺेर भ फड़े ननवेश कय यही द्धववादास्ऩद कॊऩनी एस्साय की 267 ककरोभीटय रॊफी भेटर ऩाइऩराइन
दॊ तेवाड़ा (छत्तीसगढ़) से आयॊ ब होकय भरकानधगरय (उड़ीसा) से गुजयते हुए द्धवशाखाऩत्तनभ
(आॊध्ररस्दे श) भ सभाप्त होती है । एनएभडीसी के साथ अनुफॊध के फाद एस्साय ने ऩाइऩराइन

बफछाई क्जससे रस्नतटन 550 रूऩमे की जगह अफ उसे 80 रूऩमे व्मम कयने ऩड़ते हैं। इस कामम को
ऩयय ा कयने भ फाधक न फनने के मरमे नतसमरमैऄ को कयोड़ैऄ रूऩमे ददमे गमे। वषम 2005 औय 2009
के फीच 15 फाय नतसमरमैऄ ने ऩाइऩराइन को ध्वस्त ककमा। उग्रवाददमैऄ ने धचराकैऄडा

(भरकानगयी) भ भई, 2009 भ सॊमॊर ऩय बीषण फभफायी की। ऩाइऩराइन को फन्द यखने से कॊऩनी
को 1800 कयोड़ की ऺनत हुई। नतसमरमैऄ के ताण्डव को योकने भ द्धवपर सयकाय से एस्साय की

72

गुहाय फेकाय जाती यही तबी तो कयोड़ैऄ की थैरी ऩहुॉचाने का काभ कपय शुरू हो गई। इन ऺेरैऄ भ
धॊधा कयने के मरमे मह आवश्मक हो गमा है ।
ऩयवम गह
ृ सधचव जी.के. द्धऩल्रई ने स्वीकाय ककमा कक अनेक उद्समोगऩनतमैऄ से ‗शाॊनत‘ के एवज भ

वाभ उग्रवादी धन वसयरते हैं। कॊऩननमैऄ की सुयऺा के मरमे याज्म औद्समोधगक सुयऺा फरैऄ के गठन

की फात शुरू हुई औय मह बी कहा गमा कक इसका वहन उद्समोग कयगे। इसके फावजयद सयकाय ने
कोई कदभ नहीॊ उठामा। उल्रेखनीम है कक 60 के अॊनतभ दशक भ एनएभडीसी ने फेराडडरा
(दॊ तेवाड़ा) भ फड़े ऩैभाने ऩय खनन कामम शुरू ककमा। सुयऺा के मरमे सी.आई.एस.एप. की तैनाती
हुई। इसके फावजयद वषम 2006 भ नतसरी 20 टन द्धवस्पोटक ऩदाथम उठा रे गए।

अकयत धन-सॊऩदा के फावजद
य दॊ तेवाड़ा भ रस्नत व्मक्तत आम कापी कभ है । म.य एन.डी.ऩी. रयऩोटम भ

इस क्जरे की दमनीम क्स्थनत दशाममी गई है । गत वषम एन.एभ.डी.सी. को 2600 कयोड़ की आम हुई,
ककन्तु उसने क्जरे के द्धवमबन्न द्धवकास ऩरयमोजनाओॊ भ सात कयोड़ 26 राख रूऩमे ही खचम ककमे।
दॊ तेवाड़ा के क्जराधधकायी ओ.ऩी. चौधयी ने इसे धचॊताजनक फतामा। डेढ़ सौ ग्राभैऄ भ न बफजरी है

औय न सड़क। गत वषम सौ व्मक्ततमैऄ की डामरयमा से भौत हो गई थी। उसी रस्काय धचराकोण्डा भ
एस्साय ने ्मयफवेर रगाने का वामदा ककमा, ककन्तु उड़ीसा सयकाय ने ही इसे ऩयया ककमा।
वन ऺेर छत्तीसगढ़-44 रस्नतशत, झायखण्ड-30 रस्नतशत, उड़ीसा-37 रस्नतशत,खनन ऺेर 17रस्नतशत,
(दे श के कुर कोमरे का) 40 रस्नतशत,(दे श के कुर खननज सम्ऩदा का) 70रस्नतशत, (दे श के कुर

फॉतसाइट का) दहॊसा का ताॊडव शहीद जवान वषम 2007-124 वषम 2008-64 वषम 2009-101 वषम 2010153 वषम 2011-37 भाये गमे नतसरी 67 66 113 79 28 ( जयन तक )

उधय नतसमरमैऄ की जनजानतमैऄ के अनतरयतत, ऩुमरस, न्माम व्मवस्था, जनरस्नतननधधमैऄ औय

भीडडमा भ अच्छी ऩकड़ फन गई है । जफ कबी ऩुमरस भुखबफय, दरार आदद को धगयफ्ताय कयती
है तो नतसमरमैऄ के ऩे-योर ऩय काभ कयने वारे मसद्धवर सोसामटी, एनजीओ के सदस्म

भानवाधधकाय हनन की गुहाय रगाकय अदारत को गुभयाह कयने भ सपर हो जाते हैं। इसी वषम
9 मसतम्फय को एस.ऩी.ओ. मरॊगायाभ जफ एस्साय औय नतसमरमैऄ के फीच बफचौमरमे की बयमभका
भ धया गमा तो कई याज खर
ु े। इस सत्म को स्वीकायने के फजाम नतसरी अऩने कधथत

भानवाधधकाय हनन के नेटवकम के जरयमे स्वाभी अक्ग्नवेश औय रस्शाॊत बयषण से रस्ेस कान्फ्रस

कयाकय रस्शासन को दागी फनाने का कुचक्र ककमा। दहभाॊशु ने फमान ददमा कक मरॊगायाभ ने नोमडा
क्स्थत इॊटयनेशनर भीडडमा इॊस्टी्मयट ऑप इक्ण्डमा भ ऩढ़ाई की औय उसकी सॊमरप्तता नहीॊ है ।
द्धवगत एक दशक से छत्तीसगढ़ भ यह यहा दहभाॊशु वनवासी चेतना आश्रभ के फैनय तरे

नतसमरमैऄ की भदद कयता है । उसकी ऩैदर मारा का वनवामसमैऄ ने कापी द्धवयोध बी ककमा था।

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ऩुमरस के भुताबफक, ऐसे कई रोग नतसमरमैऄ के ऩे-योर ऩय काभ कयते हैं। ऩी.मय.सी.एर. रॊफे असे
से भानवाधधकाय की यऺा के नाभ ऩय वाभ उग्रवाददमैऄ की भदद कयता है । इसके भहासधचव

कद्धवता श्रीवास्तव के ननवास ऩय छाऩेभायी भ कई आऩक्त्तजनक सादहत्म, साभधग्रमाॉ फयाभद की
गई। इस गॊदे ‗खेर‘ को जायी यखने भ याइट टय पयड कैम्ऩेन के अरूण याम, क्जमन ड्रेजे, द्धवनामक
सेन, कोमरन गोनसारवेस ने तो सॊमुतत फमान भ अच्छा फतामा। कद्धवता को ननदोष ठहयामा।

दॊ तेवाड़ा के एस.ऩी. अॊककत गगम ने फतामा कक दद
ु ाांत भदहरा उग्रवादी सोनी सोयी के कद्धवता के घय
नछऩने के ऩमामप्त सफत
य हैं। ऩमु रस ने मरॊगा औय सोनी से कई सच उगरवामे। दॊ तेवाड़ा क्जरे भ

नतसवाददमैऄ औय सीआयऩीएप दोनैऄ के दठकाने हैं जहाॉ हत्मा व रस्नतहत्मा सॊक्राभक योग की तयह
पैरी है । महाॉ मदद कोई उग्रवादी के ऩऺ भ है तो हत्मा औय ऩमु रस के ऩऺ भ तो बी हत्मा।

केन्द्रीम गह
ृ भॊरी धचदॊ फयभ ने कहा कक नतसर हभरैऄ भ आतॊकी हभरैऄ की अऩेऺा अधधक रोगैऄ

की जान जा यही है , रेककन क्जन रोगैऄ की जान इसभ नहीॊ जा यही है उनका जीवन दे श भ चर
यहे धीभी तीव्रता के मध्
ु द की द्धवबीद्धषका की जीती-जागती तस्वीय फन चक
ु ा है । इन इराकैऄ भ

न्माम, द्धवश्वास, स्वतॊरता, नैनतकता, सफयत, सही औय गरत की साधायण सभझदायी जैसी चीज बी

धीये -धीये सभाप्त हो यही हैं। सुयऺा फरैऄ औय नतसमरमैऄ के फीच ग्राभीण औय आददवासी पॊसे हुए
हैं। इन इराकैऄ के 90 पीसदी आददवासी भाओवाददमैऄ के सॊऩकम भ हैं। वे उन्ह याशन दे ते हैं औय
उनकी फैठकैऄ भ जाते हैं। वे भजफययन ऐसा कयते हैं, अन्मथा वे इन इराकैऄ भ क्जॊदा ही नहीॊ
फचगे।

हकीकत भ भाओवादी आददवामसमैऄ की यऺा के फजाम अऩनी यऺा के मरमे कवच के रूऩ भ उनका
इस्तेभार कयते हैं औय कॉयऩोये ट घयानैऄ का एजट फनकय वे यह गमे हैं।

74

भेऄने इॊसातनमत को भयते दे खा है ।
आज भुझे एक गहयी जानकायी एवॊ अनुबव से रूफरू होना ऩड़ा औय मह ऻात हुआ की ‗इॊसान
जन्भ नहीॊ रेता है फल्जक इॊसान तो फनना ऩड़ता हेऄ ‘।

फात आज शाभ की है मानन की ४ नवम्फय २०११ की। शाभ के कयीफ ७ फज यह हैऄगे, भैं जया
एटीएभ जा यहा था, अचानक दे खता हयॉ की कुछ भुक्स्रभ रड़के एक गाम को घेय कय खड़े थे जो
की एक ऩेड़ भे फॊधी हुई थी। भझ
ु े सभझते दे य न रगी की मे रोग तमा कय यहे हैं, तमॊक
य ी दो
ददन फाद फकयीद है औय हफ्ते बय ऩहरे से ही गामैऄ को गाडड़मैऄ भ बय बय कय भॊक्जर (फच
य ड़-

खाना) तक ऩहुचाना शुरू हो गमा था। भैं सहसा ही रुक गमा औय उन रोगो के ऩास जाकय ऩयछा
की आऩ रोग मे तमा कय यहे हो ?
इस ऩय ऩहरे तो वो रोग भुझे ऊऩय से नीचे तक घययने रगे, कपय उनभे से से एक फोरा की ऩीछे
हट जाओ मे गाम भायती है । भैंने कहा वो तो ठीक है ऩय मे गाम है ककसकी औय तमयॉ इसे फाॊधे

यतखा है ? कपय उनभे से ही एक फोरा की गाम हभायी है औय हभ इसे धचतऩुय फाजाय भक्स्जद भ
रे जा यहे हैं, ऩयसो नीराभी है औय मह गाम कुफामनी के मरए जा यही है ।

फस इतना सुनना था की भेया खन
य खौर उठा, भैंने उन्हे चेतावनी दे ते हुमे कहा की गाम को तुयॊत
छोड़ दो। उसके फाद भैंने गाम को छुड़ाने का रस्मत्न शुरू कय ददमा, वो रोग ७ – ८ रड़के थे औय
भैं अकेरा, भैंने मभरो औय साधथमैऄ को तुयॊत पोन कयके फुरामा औय इधय वो रोग बी भौके के
नजाकत को सभझते हुमे उस गाम को गाड़ी (Tata ace) भ चढ़ाने रगे।

इतना सफ होते होते वहाॉ कापी रोग इकट्ठे हो गए जो सबी फॊगारी थे, भैं उन सबी रोगो से
अनयु ोध कयने रगा की कृऩमा कयके इन कानतरो से अऩनी भाता को फचाओ ऩय उन रोगो ऩय

जैसे कोई असय ही नहीॊ हो यहा था। वो रोग फस उस भभता रूऩी गाम को तड़ऩते औय उछरते
दे खकय आनॊद रे यहे थे। औय उधय उन कानतरैऄ ने गाम को गाड़ी भे चढ़ा कय फाॊध ददमा। भैं
फस धचल्राता यह गमा, इधय जफ तक भेये साथी ऩहुचते तफ तक वे कानतर गाड़ी को रेकय पयाय
हो गए।भेऄ सोचने रगा की क्मा मही इॊसातनमत है ? कहाॉ गमी िो दमा, करुणा जो एक इॊसान को
इॊसान फनाती है । आज रस्ाम् रस्ाम् रोगैऄ भ इॊसाननमत रुप्त हो चक
ु ी हैं, उनके अॊदय न रस्ाखणमैऄ के
रस्नत दमा है औय न ही यहभ। भैं फस खद
ु को कोसता औय धधतकाताम हुआ यह गमा। ऩय इस ऩयये
घटनाक्रभ के ऩीछे एक फहुत फड़ा रस्श्न यह गमा औय वह मह की क्मा इॊसातनमत भय चक
ु ी है ?
इसका उत्तय जो बी हो ऩय हाॉ आज‗भेऄने इॊसातनमत को भयते हुमे दे खा है ‘।

75

जन गण भन की कहानी ...............................
सन 1911 तक बायत की याजधानी फॊगार हुआ कयता था। सन 1905 भ जफ फॊगार द्धवबाजन को
रेकय अॊग्रेजो के खखराप फॊग-बॊग आन्दोरन के द्धवयोध भ फॊगार के रोग उठ खड़े हुए तो अॊग्रेजो
ने अऩने आऩको फचाने के मरए के करकत्ता से हटाकय याजधानी को ददल्री रे गए औय 1911

भ ददल्री को याजधानी घोद्धषत कय ...ददमा। ऩयये बायत भ ...उस सभम रोग द्धवद्रोह से बये हुए थे
तो अॊग्रेजो ने अऩने इॊग्रॎ ण्ड के याजा को बायत आभॊबरत ककमा ताकक रोग शाॊत हो जामे। इॊग्रैंड
का याजा जोजम ऩॊचभ 1911 भ बायत भ आमा। यद्धवॊद्रनाथ टै गोय ऩय दफाव फनामा गमा कक तुम्हे
एक गीत जोजम ऩॊचभ के स्वागत भ मरखना ही होगा।

उस सभम टै गोय का ऩरयवाय अॊग्रेजैऄ के कापी नजदीक हुआ कयता था, उनके ऩरयवाय के फहुत से
रोग ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी के मरए काभ ककमा कयते थे, उनके फड़े बाई अवनीॊद्र नाथ टै गोय फहुत

ददनैऄ तक ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी के करकत्ता डडद्धवजन के ननदे शक (Director) यहे । उनके ऩरयवाय का
फहुत ऩैसा ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी भ रगा हुआ था। औय खद
ु यद्धवन्द्र नाथ टै गोय की फहुत सहानुबयनत
थी अॊग्रेजैऄ के मरए। यद्धवॊद्रनाथ टै गोय ने भन से मा फेभन से जो गीत मरखा उसके फोर है "जन
गण भन अधधनामक जम हे बायत बाग्म द्धवधाता"। इस गीत के साये के साये शब्दैऄ भ अॊग्रेजी
याजा जोजम ऩॊचभ का गुणगान है , क्जसका अथम सभझने ऩय ऩता रगेगा कक मे तो हकी़त भ ही
अॊग्रेजो की खश
ु ाभद भ मरखा गमा था।

इस याष्ट्रगान का अथम कुछ इस तयह से होता है "बायत के नागरयक, बायत की जनता अऩने भन

से आऩको बायत का बाग्म द्धवधाता सभझती है औय भानती है । हे अधधनामक (Superhero) तम्
ु ही
बायत के बाग्म द्धवधाता हो। तम्
ु हायी जम हो ! जम हो ! जम हो ! तम्
ु हाये बायत आने से सबी

रस्ान्त ऩॊजाफ, मसॊध, गज
ु यात, भयाठा भतरफ भहायास्र, द्रद्धवड़ भतरफ दक्षऺण बायत, उत्कर भतरफ
उड़ीसा, फॊगार आदद औय क्जतनी बी नददमा जैसे मभन
ु ा औय गॊगा मे सबी हद्धषमत है , खश
ु है ,

रस्सन्न है , तुम्हाया नाभ रेकय ही हभ जागते है औय तुम्हाये नाभ का आशीवामद चाहते है । तुम्हायी
ही हभ गाथा गाते है । हे बायत के बाग्म द्धवधाता (सुऩय हीयो ) तुम्हायी जम हो जम हो जम हो।
"

जोजम ऩॊचभ बायत आमा 1911 भ औय उसके स्वागत भ मे गीत गामा गमा। जफ वो इॊग्रैंड चरा
गमा तो उसने उस जन गण भन का अॊग्रेजी भ अनुवाद कयवामा। तमैऄकक जफ बायत भ उसका

76

इस गीत से स्वागत हुआ था तफ उसके सभझ भ नहीॊ आमा था कक मे गीत तमैऄ गामा गमा
औय इसका अथम तमा है । जफ अॊग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह फोरा कक इतना सम्भान औय

इतनी खश
ु ाभद तो भेयी आज तक इॊग्रॎ ण्ड भ बी ककसी ने नहीॊ की। वह फहुत खश
ु हुआ। उसने
आदे श ददमा कक क्जसने बी मे गीत उसके (जोजम ऩॊचभ के) मरए मरखा है उसे इॊग्रैंड फर
ु ामा

जामे। यद्धवन्द्र नाथ टै गोय इॊग्रैंड गए। जोजम ऩॊचभ उस सभम नोफर ऩुयस्काय समभनत का अध्मऺ
बी था।

उसने यद्धवन्द्र नाथ टै गोय को नोफर ऩुयस्काय से सम्भाननत कयने का पैसरा ककमा। तो यद्धवन्द्र

नाथ टै गोय ने इस नोफर ऩुयस्काय को रेने से भना कय ददमा। तमैऄ कक गाॉधी जी ने फहुत फुयी
तयह से यद्धवन्द्रनाथ टे गोय को उनके इस गीत के मरए खफ
य डाॊटा था। टै गोय ने कहा की आऩ भुझे
नोफर ऩुयस्काय दे ना ही चाहते हैं तो भैंने एक गीताॊजमर नाभक यचना मरखी है उस ऩय भुझे दे
दो रेककन इस गीत के नाभ ऩय भत दो औय मही रस्चारयत ककमा जामे क़ भुझे जो नोफेर

ऩुयस्काय ददमा गमा है वो गीताॊजमर नाभक यचना के ऊऩय ददमा गमा है । जोजम ऩॊचभ भान गमा
औय यद्धवन्द्र नाथ टै गोय को सन 1913 भ गीताॊजमर नाभक यचना के ऊऩय नोफर ऩुयस्काय ददमा
गमा।

यद्धवन्द्र नाथ टै गोय की मे सहानब
ु नय त ऽत्भ हुई 1919 भ जफ जमरमा वारा काॊड हुआ औय गाॉधी
जी ने रगबग गारी की बाषा भ उनको ऩर मरखा औय कहा क़ अबी बी तुम्हायी आॉखैऄ से
अॊग्रेक्जमत का ऩदाम नहीॊ उतये गा तो कफ उतये गा, तभ
ु अॊग्रेजैऄ के इतने चाटुकाय कैसे हो गए, तुभ
इनके इतने सभथमक कैसे हो गए ? कपय गाॉधी जी स्वमॊ यद्धवन्द्र नाथ टै गोय से मभरने गए औय

फहुत जोय से डाटा कक अबी तक तुभ अॊग्रेजो की अॊध बक्तत भ डयफे हुए हो ? तफ जाकय
यद्धवॊद्रनाथ टै गोय की नीद खर
ु ी। इस काण्ड का टै गोय ने द्धवयोध ककमा औय नोफर ऩुयस्काय अॊग्रेजी

हुकयभत को रौटा ददमा। सन 1919 से ऩहरे क्जतना कुछ बी यद्धवन्द्र नाथ टै गोय ने मरखा वो
अॊग्रेजी सयकाय के ऩऺ भ था औय 1919 के फाद उनके रेख कुछ कुछ अॊग्रेजो के खखराप होने रगे
थे।

यद्धवन्द्र नाथ टे गोय के फहनोई, सयु े न्द्र नाथ फनजॉ रन्दन भ यहते थे औय ICS ऑकपसय थे। अऩने
फहनोई को उन्हैऄने एक ऩर मरखा था (मे 1919 के फाद की घटना है ) । इसभ उन्हैऄने मरखा है

77

कक मे गीत 'जन गण भन' अॊग्रेजो के द्सवाया भुझ ऩय दफाव डरवाकय मरखवामा गमा है । इसके

शब्दैऄ का अथम अच्छा नहीॊ है । इस गीत को नहीॊ गामा जामे तो अच्छा है । रेककन अॊत भ उन्हैऄने
मरख ददमा कक इस धचट्डी को ककसी को नहीॊ ददखाए तमैऄकक भैं इसे मसपम आऩ तक सीमभत यखना
चाहता हयॉ रेककन जफ कबी भेयी म्रत्मु हो जामे तो सफको फता दे । 7 अगस्त 1941 को यबफन्द्र नाथ
टै गोय की भत्ृ मु के फाद इस ऩर को सुयेन्द्र नाथ फनजॉ ने मे ऩर सावमजननक ककमा, औय साये दे श
को मे कहा क़ मे जन गन भन गीत न गामा जामे।

1941 तक काॊग्रेस ऩाटॊ थोड़ी उबय चक
ु ी थी। रेककन वह दो खेभो भ फट गई। क्जसभे एक खेभे के
सभथमक फार गॊगाधय नतरक थे औय दस
ु ये खेभे भ भोती रार नेहरु थे। भतबेद था सयकाय

फनाने को रेकय। भोती रार नेहरु चाहते थे कक स्वतॊर बायत की सयकाय अॊग्रेजो के साथ कोई
सॊमोजक सयकाय (Coalition Government) फने। जफकक गॊगाधय नतरक कहते थे कक अॊग्रेजो के
साथ मभरकय सयकाय फनाना तो बायत के रोगैऄ को धोखा दे ना है । इस भतबेद के कायण
रोकभान्म नतरक काॊग्रेस से ननकर गए औय उन्हैऄने गयभ दर फनामा। कैऄग्रेस के दो दहस्से हो
गए। एक नयभ दर औय एक गयभ दर।

गयभ दर के नेता थे रोकभान्म नतरक जैसे क्रक्न्तकायी। वे हय जगह वन्दे भातयभ गामा कयते
थे। औय नयभ दर के नेता थे भोती रार नेहरु (महाॉ भैं स्ऩष्ट्ट कय दॉ य कक गाॊधीजी उस सभम

तक काॊग्रेस की आजीवन सदस्मता से इस्तीपा दे चक
ु े थे, वो ककसी तयप नहीॊ थे, रेककन गाॉधी
जी दोनैऄ ऩऺ के मरए आदयणीम थे तमैऄकक गाॉधी जी दे श के रोगैऄ के आदयणीम थे)। रेककन

नयभ दर वारे ज्मादातय अॊग्रेजो के साथ यहते थे। उनके साथ यहना, उनको सुनना, उनकी फैठकैऄ

भ शामभर होना। हय सभम अॊग्रेजो से सभझौते भ यहते थे। वन्दे भातयभ से अॊग्रेजो को फहुत धचढ
होती थी। नयभ दर वारे गयभ दर को धचढाने के मरए 1911 भ मरखा गमा गीत "जन गण भन"
गामा कयते थे औय गयभ दर वारे "वन्दे भातयभ"।

नयभ दर वारे अॊग्रेजैऄ के सभथमक थे औय अॊग्रेजैऄ को मे गीत ऩसॊद नहीॊ था तो अॊग्रेजैऄ के कहने
ऩय नयभ दर वारैऄ ने उस सभम एक हवा उड़ा दी कक भस
ु रभानैऄ को वन्दे भातयभ नहीॊ गाना

चादहए तमैऄ कक इसभ फत
ु ऩयस्ती (भनय तम ऩज
य ा) है । औय आऩ जानते है कक भस
ु रभान भनय तम ऩज
य ा के
कट्टय द्धवयोधी है । उस सभम भक्ु स्रभ रीग बी फन गई थी क्जसके रस्भख
ु भोहम्भद अरी क्जन्ना

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थे। उन्हैऄने बी इसका द्धवयोध कयना शुरू कय ददमा तमैऄकक क्जन्ना बी दे खने बय को (उस सभम
तक) बायतीम थे भन,कभम औय वचन से अॊग्रेज ही थे उन्हैऄने बी अॊग्रेजैऄ के इशाये ऩय मे कहना
शुरू ककमा औय भुसरभानैऄ को वन्दे भातयभ गाने से भना कय ददमा। जफ बायत सन 1947 भ
स्वतॊर हो गमा तो जवाहय रार नेहरु ने इसभ याजनीनत कय डारी। सॊद्धवधान सबा की फहस
चरी। सॊद्धवधान सबा के 319 भ से 318 साॊसद ऐसे थे क्जन्हैऄने फॊककभ फाफु द्सवाया मरखखत
वन्दे भातयभ को याष्ट्र गान स्वीकाय कयने ऩय सहभनत जताई।

फस एक साॊसद ने इस रस्स्ताव को नहीॊ भाना। औय उस एक साॊसद का नाभ था ऩॊडडत जवाहय
रार नेहरु। उनका तकम था कक वन्दे भातयभ गीत से भुसरभानैऄ के ददर को चोट ऩहुचती है
इसमरए इसे नहीॊ गाना चादहए (दयअसर इस गीत से भुसरभानैऄ को नहीॊ अॊग्रेजैऄ के ददर को

चोट ऩहुॊचती थी)। अफ इस झगडे का पैसरा कौन कये , तो वे ऩहुचे गाॉधी जी के ऩास। गाॉधी जी
ने कहा कक जन गन भन के ऩऺ भ तो भैं बी नहीॊ हयॉ औय तुभ (नेहरु ) वन्दे भातयभ के ऩऺ भ
नहीॊ हो तो कोई तीसया गीत तैमाय ककमा जामे। तो भहात्भा गाॉधी ने तीसया द्धवकल्ऩ झॊडा गान

के रूऩ भ ददमा "द्धवजमी द्धवश्व नतयॊ गा प्माया झॊडा ऊॉचा यहे हभाया"। रेककन नेहरु जी उस ऩय बी
तैमाय नहीॊ हुए।

नेहरु जी का तकम था कक झॊडा गान ओकेस्रा ऩय नहीॊ फज सकता औय जन गन भन ओकेस्रा

ऩय फज सकता है । उस सभम फात नहीॊ फनी तो नेहरु जी ने इस भुद्दे को गाॉधी जी की भत्ृ मु तक
टारे यखा औय उनकी भत्ृ मु के फाद नेहरु जी ने जन गण भन को याष्ट्र गान घोद्धषत कय ददमा

औय जफयदस्ती बायतीमैऄ ऩय इसे थोऩ ददमा गमा जफकक इसके जो फोर है उनका अथम कुछ औय
ही कहानी रस्स्तुत कयते है , औय दस
य या ऩऺ नायाज न हो इसमरए वन्दे भातयभ को याष्ट्रगीत फना
ददमा गमा रेककन कबी गमा नहीॊ गमा। नेहरु जी कोई ऐसा काभ नहीॊ कयना चाहते थे क्जससे
कक अॊग्रेजैऄ के ददर को चोट ऩहुॊच,े भुसरभानैऄ के वो इतने दहभामती कैसे हो सकते थे क्जस

आदभी ने ऩाककस्तान फनवा ददमा जफ कक इस दे श के भुसरभान ऩाककस्तान नहीॊ चाहते थे, जन

गण भन को इस मरए तयजीह दी गमी तमैऄकक वो अॊग्रेजैऄ की बक्तत भ गामा गमा गीत था औय
वन्दे भातयभ इसमरए ऩीछे यह गमा तमैऄकक इस गीत से अॊगेजैऄ को ददम होता था।

79

फीफीसी ने एक सवे ककमा था। उसने ऩयये सॊसाय भ क्जतने बी बायत के रोग यहते थे, उनसे ऩुछा
कक आऩको दोनैऄ भ से कौन सा गीत ज्मादा ऩसॊद है तो 99 % रोगैऄ ने कहा वन्दे भातयभ।

फीफीसी के इस सवे से एक फात औय सार्फ हुई कक दनु नमा के सफसे रोकद्धरस्म गीतैऄ भ दस
ु ये नॊफय
ऩय वन्दे भातयभ है । कई दे श है क्जनके रोगैऄ को इसके फोर सभझ भ नहीॊ आते है रेककन वो
कहते है कक इसभ जो रम है उससे एक जज्फा ऩैदा होता है ।

तो मे इनतहास है वन्दे भातयभ का औय जन गण भन का। अफ मे आऩ को तम कयना है कक
आऩको तमा गाना है ?
Where Muslims are Happy and Muslims are not Happy
Paradox!
Countires where the Muslims aren't happy!
***********
* They're not happy in Gaza.
* They're not happy in Egypt.
* They're not happy in Libya.
* They're not happy in Morocco.
* They're not happy in Iran.
* They're not happy in Iraq.
* They're not happy in Yemen.
* They're not happy in Afghanistan.
* They're not happy in Pakistan.
* They're not happy in Syria.
* They're not happy in Lebanon.
************************************

80

And where are they happy?
***
They're happy in England.
They're happy in France.
They're happy in Italy.
They're happy in Germany.
They're happy in Sweden.
They're happy in the USA.
They're happy in Norway.
They're happy in India
They're happy in Australia
They're happy in Canada
They're happy in every country that is not Muslim!
And who do they blame?
* Not Islam.
* Not their leadership.
* Not themselves.
THEY BLAME THE COUNTRIES THEY ARE HAPPY IN!!

81

एक जानकायी जो ऩूये दे श से छुऩा री गई________,

एक जानकायी जो ऩयये दे श से छुऩा री गई________,

अगस्त 2010 भ सीफीआई की टीभ ने रयजवम फैंक ऑप इॊडडमा के वाल्ट भ छाऩा भाया. सीफीआई
के अधधकारयमैऄ का ददभाा उस सभम सन्न यह गमा, जफ उन्ह ऩता चरा कक रयजवम फैंक ऑप
इॊडडमा के ऽजाने भ ऩरी नोट हैं. रयजवम फैंक से मभरे ऩरी नोट वही नोट थे, क्जसे

ऩाककस्तान की खकपमा
एजसी नेऩार के यास्ते बायत बेज यही है . सवार मह है कक बायत के
ु ा़

रयजवम फैंक भ ऩरी नोट कहाॊ से आए? तमा आईएसआई की ऩहुॊच रयजवम फैंक की नतजोयी तक है
मा कपय कोई फहुत ही बमॊकय साक्जश है , जो दहॊदस्
ु तान की अथमव्मवस्था को खोखरा कय चक
ु ी है .
सीफीआई इस सनसनीखेज भाभरे की तह़ी़ात कय यही है . छह फैंक कभमचारयमैऄ से सीफीआई ने
ऩयछताछ बी की है . इतने भहीने फीत जाने के फावजयद ककसी को मह ऩता नहीॊ है कक जाॊच भ

तमा ननकरा? सीफीआई औय द्धवत्त भॊरारम को दे श को फताना चादहए कक फैंक अधधकारयमैऄ ने
जाॊच के दौयान तमा कहा? ऩरी नोटैऄ के इस ऽतयनाक खेर ऩय सयकाय, सॊसद औय जाॊच
एजमसमाॊ तमैऄ चऩ
ु है तथा सॊसद अॊधेये भ तमैऄ है ????

82

४ जून से हभ अऩने भहान दे श का नाभ हय जगह “बायत” शरखेंगे चाहे िह शरवऩ
दे िनागयी हो मा की अॊग्रेजी मा कोई औय !!!!!!!!!.

*द्धरस्म दोस्तैऄ, *** *४ जयन से हभ अऩने भहान दे श का नाभ हय जगह ―बायत‖ मरखगे चाहे वह

मरद्धऩ दे वनागयी हो मा की अॊग्रेजी मा कोई औय !!!!!!!!!................,,,,,,,,,,,,,, *** *हभाये भहान दे श
बायत का नाभ इॊडडमा होना हभ... ाये मरमे गुराभी की एक शभमनाक ननश... ानी है , क्जसे हभ

मभटाना ही चादहए. हभ इस दे श का गौयव टुकड़ैऄ टुकडो भ रा यहे हैं जैसे हभने फम्फई का नाभ
भुॊफई ककमा, करकत्ता का नाभ कोरकाता ककमा, भुॊफई को रुटेये द्धवदे शी फाम्फे कहकय चरे गए

थे.*** *हभाये दे श का नाभ बायत के अरावा दहदस्
ु तान होना तो ऩययी तयह से सभझ भ आता है
ऩयन्तु मसपम एक रुटेये अॊग्रेज के कहने ऩय हभने अऩना गौयवशारी इनतहास बुरा ददमा औय फड़े
ही पक्र के अऩने को इडडमन कहराना गौयव ऩयणम सभझते है . मदद ककसी का नाभ चोय भहोदम
यख ददमा जाम तो तमा ऩहरी ही नजय भ वह हॊसी का ऩार नहीॊ फन जामेगा?*** *जफ ककसी

भहॉ दे श का नाभ दो नहीॊ है तो कपय हभाये ही दे श का दो नाभ तमैऄ है , हभाये सबी धभम ग्रन्थैऄ भ
इसे बायत मरखा जाता है तो कपय सबी सयकायी व्मवस्थाओॊ भ इसे बायत मरखे भ ककसे हजम है .
हभने इसके फाये भ कबी सोचा तमैऄ नहीॊ, अफ तो अॊग्रेज हभाया कुछ नहीॊ बफगाड़ सकते, हभ तो

अफ तथाकधथत स्वतन्र बी हो गए है वह बी ६३ सार ऩहरे. *** *हभायी शक्ततमाॊ** : हभायी
सफसे फड़ी शक्तत है हभायी सहनशीरता, हभायी सदहष्ट्णत
ु ा, हभाया दमावान होना, आध्मात्भ को

भहत्त्व दे ना, ऻान औय साधना, बायत ही ऐसा दे श है जहाॊ ऩय ऩाॉव छुआ जाता है , ऩेड़ैऄ को ऩज
य ा

जाता हैं गाम को ऩयजा जाता है , ऩनत को ऩयभेश्वय औय नायी को दे वी की सॊऻा दी जाती है ऩयन्तु
इन्ही म्रेच्छ अॊग्रेजैऄ ने बायत का ऩहरा वेश्मारम, बायत का ऩहरा शयाफघय औय बायत का

ऩहरा गौ वधशारा अऩनी अय्माशी के मरए कोरकाता भ खोरा औय कपय ऩयये बायत भ खर
ु वाते

ही चरे गए. उन्हैऄने हभाये सम्ऩयणम ऻान ग्रन्थ चयु ा मरए, जो उनके मरए आगे के शोध का आधाय
फना. उन्हैऄने हभ गयीफी के भहाजार भ पॊसामा औय आज ६३ सार फाद बी फड़े फेशभॉ से अऩने

को द्धवकासशीर दे श धगनाते है, १ डारय भ हभाया ५० रुऩमा मभरता है . हभाये कुछ फहुत ही फेशभम
रुटेये नेता द्धवदे मशमैऄ के साथ मभरकय अफ बी इस दे श को रयट यहे है औय रुटवा यहे हैं.अफ हभ
इस रयट को औय सहन नहीॊ कयगे. ** * *इसकी शुरुआत हभ आज ही से कयगे. सफसे ऩहरे

हभ अऩने इस भहान दे श का नाभ हय जगह मसपम बायत मरखगे; ककसी बी जगह इक्ण्डमा मा
इॊडडमन नहीॊ मरखगे. ४ जयन तक इस सन्दे श को हभ हय बायतवासी तक रस्बावी तयीके से ऩहुचा
दे ना है , तमैऄकक मह ४ जयन बी है कुछ ज्मादा ही खास.....*** *अगय आऩको अऩने इस भहान
दे श ऩय गवम है तो इसे अऩने सबी जानने वारैऄ के ऩास अग्रेद्धषत कय. बायत स्वामबभानी
फननए.*** *वॊदे भातयभ***

83

History of destruction
वेदैऄ भ जानत-व्मवस्था नहीॊ........
अबाग्मवश दमरत कहे जाने वारे रोग खद
ु को सभाज की भुख्म धाया से कटा हुआ भहसयस कयते
हैं, परत् हभ सभि
ृ औय सुयक्षऺत साभाक्जक सॊगठन भ नाकाभ यहे हैं | इस का केवर भार
सभाधान मही है कक हभ अऩने भर
य , वेदैऄ की ओय रौटना होगा औय हभायी ऩायस्ऩरयक (एक-दस
य ये
के रस्नत) सभझ को ऩन
ु ् स्थाद्धऩत कयना होगा |

वेदैऄ भ भयरत् ब्राहभण, ऺबरम,वैश्म औय शयद्र ऩुरुष मा स्री के मरए कहीॊ कोई फैयबाव मा बेदबाव
का स्थान नहीॊ है |

जानत (caste) की अवधायणा मदद दे खा जाए तो कार्फी नई है | जानत (caste) के ऩमामम के रूऩ भ
स्वीकाय ककमा जा सके मा अऩनामा जा सके ऐसा एक बी शब्द वेदैऄ भ नहीॊ है | जानत (caste) के
नाभ ऩय साधायणतमा स्वीकृत दो शब्द हैं — जानत औय वणम | ककन्तु सच मह है कक दोनैऄ ही
ऩयणत
म मा मबन्न अथम यखते हैं |

1).....जानत – जानत का अथम है उद्भव के आधाय ऩय ककमा गमा वगॉकयण | न्माम सयर मही कहता

है ―सभानरस्सवाक्त्भका जानत:‖ अथवा क्जनके जन्भ का भयर स्रोत साभान हो (उत्ऩक्त्त का रस्काय
एक जैसा हो) वह एक जानत फनाते हैं | ऋद्धषमैऄ द्सवाया रस्ाथमभक तौय ऩय जन्भ-जानतमैऄ को चाय
स्थर
य द्धवबागैऄ भ फाॊटा गमा है – उनद्भज(धयती भ से उगने वारे जैसे ऩेड़, ऩौधे,रता आदद),

अॊडज(अॊडे से ननकरने वारे जैसे ऩऺी, सयीसऩ
ृ आदद), द्धऩॊडज (स्तनधायी- भनष्ट्ु म औय ऩशु आदद),
उष्ट्भज (ताऩभान तथा ऩरयवेशीम क्स्थनतमैऄ की अनक
ु य रता के मोग से उत्त्ऩन्न होने वारे – जैसे
सक्ष्
य भ क्जवाणय वामयस, फैतटे रयमा आदद) |

हय जानत द्धवशेष के रस्ाखणमैऄ भ शायीरयक अॊगैऄ की सभानता ऩाई जाती है | एक जन्भ-जानत दस
य यी
जानत भ कबी बी ऩरयवनतमत नहीॊ हो सकती है औय न ही मबन्न जानतमाॊ आऩस भ सॊतान
उत्त्ऩन्न कय सकती हैं | अत् जानत ईश्वय ननमभमत है |
जैसे द्धवद्धवध रस्ाणी हाथी, मसॊह, खयगोश इत्मादद मबन्न-मबन्न जानतमाॊ हैं | इसी रस्काय सॊऩण
य म भानव
सभाज एक जानत है | ब्राह्भण, ऺबरम, वैश्म औय शयद्र ककसी बी तयह मबन्न जानतमाॊ नहीॊ हो

84

सकती हैं तमैऄकक न तो उनभ ऩयस्ऩय शायीरयक फनावट (इक्न्द्रमादी) का बेद है औय न ही उनके
जन्भ स्रोत भ मबन्नता ऩाई जाती है |
फहुत सभम फाद जानत शब्द का रस्मोग ककसी बी रस्काय के वगॉकयण के मरए रस्मुतत होने रगा |
औय इसीमरए हभ साभान्मतमा द्धवमबन्न सभुदामैऄ को ही अरग जानत कहने रगे | जफकक मह
भार व्मवहाय भ सहयमरमत के मरए हो सकता है | सनातन सत्म मह है कक सबी भनुष्ट्म एक ही
जानत के हैं |

वणम – ब्राह्भण, ऺबरम, वैश्म औय शद्र
य के मरए रस्मत
ु त ककमा गमा सही शब्द – वणम है – जानत नहीॊ
| मसपम मह चायैऄ ही नहीॊ फक्ल्क आमम औय दस्मु बी वणम कहे गए हैं | वणम का भतरफ है क्जसे

वयण ककमा जाए (चन
ु ा जाए) | अत् जानत ईश्वय रस्दत्त है जफकक वणम अऩनी रूधच से अऩनामा

जाता है | क्जन्हैऄने आममत्व को अऩनामा वे आमम वणम कहराए औय क्जन रोगैऄ ने दस्मु कभम को

स्वीकाया वे दस्मु वणम कहराए | इसी रस्काय ब्राह्भण, ऺबरम, वैश्म औय शद्र
य वणम कहे जाते हैं | इसी
कायण वैददक धभम ‘वणामश्रभ धभम‘ कहराता है | वणम शब्द का तात्ऩमम ही मह है कक वह चमन की
ऩण
य म स्वतॊरता व गण
ु वत्ता ऩय आधारयत है |
३. फौद्धिक कामों भ सॊरग्न व्मक्ततमैऄ ने ब्राहभण वणम को अऩनामा है | सभाज भ यऺा कामम व
मुिशास्र भ रूधच मोग्मता यखने वारे ऺबरम वणम के हैं | व्माऩाय-वाखणज्म औय ऩशु-ऩारन आदद

का कामम कयने वारे वैश्म तथा क्जन्हैऄने इतय सहमोगात्भक कामों का चमन ककमा है वे शयद्र वणम
कहराते हैं | मे भार आजीद्धवका के मरए अऩनामे जाने वारे व्मवसामैऄ को दशामते हैं, इनका जानत
मा जन्भ से कोई सम्फन्ध नहीॊ है |

४. वणों को जन्भ आधारयत फताने के मरए ब्राह्भण का जन्भ ईश्वय के भुख से हुआ, ऺबरम
ईश्वय की बुजाओॊ से जन्भ, वैश्म जॊघा से तथा शयद्र ईश्वय के ऩैयैऄ से उत्ऩन्न हुए मह मसि कयने
के मरए ऩुरुष सयतत के भॊर रस्स्तुत ककमे जाते हैं | इस से फड़ा छर नहीॊ हो सकता, तमैऄकक -

(a) वेद ईश्वय को ननयाकाय औय अऩरयवतमनीम वखणमत कयते हैं | जफ ऩयभात्भा ननयाकाय है तो इतने
भहाकाम व्मक्तत का आकाय कैसे रे सकता है ? (दे ख मजव
ु ेद ४०.८)
(b) मदद इसे सच भान बी र तो इससे वेदैऄ के कभम मसिाॊत की अवभानना होती है | क्जसके
अनुसाय शयद्र ऩरयवाय का व्मक्तत बी अऩने कभों से अगरा जन्भ ककसी याजऩरयवाय भ ऩा सकता
है | ऩयन्तु मदद शयद्रैऄ को ऩैयैऄ से जन्भा भाना जाए तो वही शयद्र ऩुन् ईश्वय के हाथैऄ से कैसे
उत्त्ऩन्न होगा?

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(c) आत्भा अजन्भा है औय सभम से फि नहीॊ (ननत्म है ) इसमरए आत्भा का कोई वणम नहीॊ होता
| मह तो आत्भा द्सवाया भनुष्ट्म शयीय धायण ककमे जाने ऩय ही वणम चन
ु ने का अवसय मभरता है |
तो तमा वणम ईश्वय के शयीय के ककसी दहस्से से आता है ? आत्भा कबी ईश्वय के शयीय से जन्भ

तो रेता नहीॊ तो तमा ऐसा कहा जा सकता है कक आत्भा का शयीय ईश्वय के शयीय के दहस्सैऄ से
फनामा गमा? ककन्तु वेदैऄ की साऺी से रस्कृनत बी शाश्वत है औय कुछ अणु ऩुन् द्धवमबन्न भानव

शयीयैऄ भ रस्वादहत होते हैं | अत् मदद ऩयभात्भा सशयीय भान ही र तो बी मह असॊबव है ककसी
बी व्मक्तत के मरए की वह ऩयभात्भा के शयीय से जन्भ रे |
(d) क्जस ऩुरुष सयतत का हवारा ददमा जाता है वह मजुवेद के ३१ व अध्माम भ है साथ ही कुछ

बेद से ऋग्वेद औय अथवमवेद भ बी उऩक्स्थत है | मजुवेद भ मह ३१ व अध्माम का ११ वाॊ भॊर है
| इसका वास्तद्धवक अथम जानने के मरए इससे ऩहरे भॊर ३१.१० ऩय गौय कयना जरूयी है | वहाॊ

सवार ऩयछा गमा है – भुख कौन है ?, हाथ कौन है ?, जॊघा कौन है ? औय ऩाॉव कौन है ? तुयॊत फाद का
भॊर जवाफ दे ता है – ब्राहभण भुख है , ऺबरम हाथ हैं , वैश्म जॊघा हैं तथा शयद्र ऩैय हैं |

मह ध्मान यख की भॊर मह नहीॊ कहता की ब्राह्भण भख
ु से ―जन्भ रेता‖ है … भॊर मह कह यहा
है की ब्राह्भण ही भुख है | तमैऄकक अगय भॊर भ ―जन्भ रेता‖ मह बाव अमबरस्ेत होता तो ―भुख
कौन है ?‖ इत्मादद रस्श्नैऄ का उत्तय दे ने की आवश्मकता ही नहीॊ थी |

उदाहयणत् मह ऩयछा जाए, ―दशयथ कौन हैं?‖ औय जवाफ मभरे ―याभ ने दशयथ से जन्भ मरमा‖,
तो मह ननयथमक जवाफ है |

इसका सत्म अथम है – सभाज भ ब्राह्भण मा फुद्धिजीवी रोग सभाज का भक्स्तष्ट्क, मसय मा भुख
फनाते हैं जो सोचने का औय फोरने का काभ कये | फाहुओॊ के तुल्म यऺा कयने वारे ऺबरम हैं,

वैश्म मा उत्ऩादक औय व्माऩायीगण जॊघा के साभान हैं जो सभाज भ सहमोग औय ऩोषण रस्दान
कयते हैं (ध्मान द ऊरू अक्स्थ मा कपभय हड्डी शयीय भ यततकोमशकाओॊ का ननभामण कयती हैं औय
सफसे सुदृढ़ हड्डी होती है ) | अथवमवेद भ ऊरू मा जॊघा के स्थान ऩय ‗भध्म‘ शब्द का रस्मोग हुआ
है | जो शयीय के भध्म बाग औय उदय का द्समोतक है | क्जस तयह ऩैय शयीय के आधाय हैं क्जन ऩय
शयीय दटक सके औय दौड़ सके उसी तयह शयद्र मा श्रमभक फर सभाज को आधाय दे कय गनत रस्दान
कयते हैं |

इससे अगरे भॊर इस शयीय के अन्म बागैऄ जैसे भन, आॊख इत्मादद का वणमन कयते हैं | ऩुरुष सयतत
भ भानव सभाज की उत्ऩक्त्त औय सॊतुमरत सभाज के मरए आवश्मक भयर तत्वैऄ का वणमन है |

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मह अत्मॊत खेदजनक है कक साभाक्जक यचना के इतने अरस्नतभ अरॊकारयक वणमन का गरत अथम
रगाकय वैददक ऩरयऩाटी से सवमथा द्धवरुि द्धवकृत स्वरुऩ भ रस्स्तुत ककमा गमा है |
ब्राह्भण ग्रॊथ, भनुस्भनृ त, भहाबायत, याभामण औय बागवत भ बी कहीॊ ऩयभात्भा ने ब्राह्भणैऄ को
अऩने भुख से भाॊस नैऄचकय ऩैदा ककमा औय ऺबरमैऄ को हाथ के भाॊस से इत्मादद ऊरजयरयर
कल्ऩना नहीॊ ऩाई जाती है |

५. जैसा कक आधनु नक मुग भ द्धवद्सवान औय द्धवशेषऻ सम्ऩयणम भानवता के मरए भागमदशमक होने के
कायण हभ से सम्भान ऩाते हैं इसीमरए मह सीधी सी फात है कक तमैऄ ब्राह्भणैऄ को वेदैऄ भ उच्च

सम्भान ददमा गमा है | अऩने ऩव
य म रेखैऄ भ हभ दे ख चक
ु े हैं कक वेदैऄ भ श्रभ का बी सभान रूऩ से
भहत्वऩण
य म स्थान है | अत् ककसी रस्काय के (वणम व्मवस्था भ) बेदबाव के तत्वैऄ की गॊज
ु ाइश नहीॊ
है |

६. वैददक सॊस्कृनत भ रस्त्मेक व्मक्तत जन्भत् शयद्र ही भाना जाता है | उसके द्सवाया रस्ाप्त मशऺा के
आधाय ऩय ही ब्राह्भण, ऺबरम व वैश्म वणम ननधामरयत ककमा जाता है | मशऺा ऩयणम कयके मोग्म
फनने को दस
य या जन्भ भाना जाता है | मे तीनैऄ वणम ‗द्सद्धवज‘ कहराते हैं तमैऄकक इनका दस
य या

जन्भ (द्धवद्समा जन्भ) होता है | ककसी बी कायणवश अमशक्षऺत यहे भनुष्ट्म शयद्र ही यहते हुए अन्म
वणों के सहमोगात्भक कामों को अऩनाकय सभाज का दहस्सा फने यहते हैं |
७. मदद ब्राह्भण का ऩुर द्धवद्समा रस्ाक्प्त भ असपर यह जाए तो शयद्र फन जाता है | इसी तयह शयद्र

मा दस्मु का ऩुर बी द्धवद्समा रस्ाक्प्त के उऩयाॊत ब्राह्भण, ऺबरम मा वैश्म वणम को रस्ाप्त कय सकता

है |मह सम्ऩयणम व्मवस्था द्धवशुि रूऩ से गुणवत्ता ऩय आधारयत है | क्जस रस्काय मशऺा ऩययी कयने के
फाद आज उऩाधधमाॉ दी जाती हैं उसी रस्काय वैददक व्मवस्था भ मऻोऩवीत ददमा जाता था | रस्त्मेक

वणम के मरए ननधामरयत कतमव्मकभम का ऩारन व ननवमहन न कयने ऩय मऻोऩवीत वाऩस रेने का बी
रस्ावधान था
ब्राह्भण शब्द भ रस्मत
ु त हुए शब्द ब्रह्भ का अथम मदद हभ जाने तो इसका भतरफ होता है जो फढे
मा द्धवकास कये | आज का एटभ फभ ऩहरे ब्रह्भास्र इसीमरए कहराता था तमैऄकक वो ऐसा अस्र
था जो मसपम एक ही जगह ऩय असय नहीॊ डारता था फक्ल्क उसके द्सवाया ककमा गमा द्धवनाश का
असय व्माऩक होता था | ऐसे ही ब्रह्भा को बी सक्ृ ष्ट्ट का यचनमता इसीमरए फर
ु ामा जाता है

तमैऄकक ब्रह्भा का अथम ही है जो फढाए मा यचनाओॊ के द्सवाया वद्धृ ि कये | इसी रस्काय से ब्राह्भण

वो व्मक्तत होता था जो सभाज को द्धवकास की ददशा दे ने भ सहामता कये | चकयॊ क सही मशऺा से ही
सभाज का द्धवकास होता है इसीमरए गुरु मा मशऺक जो की वेदैऄ की सही मशऺा दे उसे ही

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ब्राह्भण भाना गमा | आज के सभम भ जो रोग खद
ु को ब्राह्भण वणम का भानते है औय अऩने
आगे ऩुयोदहत मा ऩॊडडत शब्द का रस्मोग कयते है वो ऐसा अऻानता वश कयते है | ऩॊडडत वो जो

ककसी द्धवषमभे ऩाॊडडत्म हामसर कये औय ऩुयोदहत वो जो कभमकाॊड से सभाज के रोगो को धभम की
औय अग्रसय कये | कभमकाॊड औय धभम भ बी अॊतय है | धभम सबी भनुष्ट्मैऄ के मरए एक ही है औय
धभम के दस रऺण है जैसे चोयी न कयना, असत्म न फोरना , दीन दखु खमैऄ की सहामता कयना,
जीवो ऩय दमा कयना, क्रोध न कयना , दहॊसा न कयना आदद | कभमकाॊड की यचना हभाये ऋद्धष

भनु नमैऄ द्सवाया हभ धभम से जोड़े यखने के मरए की गमी | वेद तो मही कहते है की इस ब्रह्भाण्ड

मा कपय औय बी ककसी दस
य ये ब्रह्भाॊडो भ कोई बी जीव जॊतु मदद है तो सफका बगवान एक ही है
| वेद शब्द का अथम ही है ऻान | क्जस ददन हभ सही ऻान हो जाएगा उस ददन से हभ सही वणम
व्मवस्था की औय रौट जामगे औय हभाया बायतीम सभाज सही ददशा ऩामेगा औय सायी दनु नमा

को सही ददशा दे गा तमैऄकक बायत का अथम ही है ऻान भ यत औय बायतीम का अथम है द्धवद्सवान |
शयद्र का अथम होता है सेवा कयने वारा | कोई बी व्मक्तत जो दस
य यो की सेवा कये वो कबी ननयादय

का ऩार हो ही नहीॊ सकता | हभ जफ तक सॊस्कृत बाषा औय अऩने वेदैऄ से दयय है तबी तक हभाये

सभाज भ कुयीनतमाॉ है | क्जस ददन हभ अऩना सॊऩकम सॊस्कृत औय वेदैऄ से बफठा मरमा उसी ददन से
बायतवषम रस्गनत की याह ऩकड़ रेगा |

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क्मेआ भझ
ु े गाॉधी ऩसॊद नहीॊ है ?
तमैऄ भुझे गाॉधी ऩसॊद नहीॊ है ?

1. अभत
ृ सय के जमरमाॉवारा फाा गोरी काण्ड (1919) से सभस्त दे शवासी आक्रोश भ
थे तथा चाहते थे कक इस नयसॊहाय के खरनामक जनयर डामय ऩय अमबमोग चरामा जाए।
गान्धी ने बायतवामसमैऄ के इस आग्रह को सभथमन दे ने से भना कय ददमा।

2. बगत मसॊह व उसके साधथमैऄ के भत्ृ मुदण्ड के ननणमम से साया दे श ऺुब्ध था व
गान्धी की ओय दे ख यहा था कक वह हस्तऺेऩ कय इन दे शबततैऄ को भत्ृ मु से फचाएॊ,
ककन्तु गान्धी ने बगत मसॊह की दहॊसा को अनुधचत ठहयाते हुए जनसाभान्म की इस भाॉग
को अस्वीकाय कय ददमा। तमा आश्चमम कक आज बी बगत मसॊह वे अन्म क्राक्न्तकारयमैऄ
को आतॊकवादी कहा जाता है ।

3. 6 भई 1946 को सभाजवादी काममकतामओॊ को अऩने सम्फोधन भ गान्धी ने भुक्स्रभ
रीग की दहॊसा के सभऺ अऩनी आहुनत दे ने की रस्ेयणा दी।

4.भोहम्भद अरी क्जन्ना आदद याष्ट्रवादी भुक्स्रभ नेताओॊ के द्धवयोध को अनदे खा कयते
हुए 1921 भ गान्धी ने खखरार्फत आन्दोरन को सभथमन दे ने की घोषणा की। तो बी
केयर के भोऩरा भ भुसरभानैऄ द्सवाया वहाॉ के दहन्दओ
ु ॊ की भायकाट की क्जसभ रगबग

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1500 दहन्द ु भाये गए व 2000 से अधधक को भुसरभान फना मरमा गमा। गान्धी ने इस
दहॊसा का द्धवयोध नहीॊ ककमा, वयन ् खद
ु ा के फहादयु फन्दैऄ की फहादयु ी के रूऩ भ
वणमन ककमा।

5.1926 भ आमम सभाज द्सवाया चराए गए शुद्धि आन्दोरन भ रगे स्वाभी
श्रिानन्द जी की हत्मा अब्दर
ु यशीद नाभक एक भुक्स्रभ मुवक ने कय दी, इसकी
रस्नतकक्रमास्वरूऩ गान्धी ने अब्दर
ु यशीद को अऩना बाई कह कय उसके इस कृत्म को
उधचत ठहयामा व शुद्धि आन्दोरन को अनगमर याष्ट्र-द्धवयोधी तथा दहन्द-ु भुक्स्रभ
एकता के मरए अदहतकायी घोद्धषत ककमा।

6.गान्धी ने अनेक अवसयैऄ ऩय छरऩनत मशवाजी, भहायाणा रस्ताऩ व गुरू गोद्धवन्द
मसॊह जी को ऩथभ्रष्ट्ट दे शबतत कहा।

7.गान्धी ने जहाॉ एक ओय काश्भीय के दहन्द ु याजा हरय मसॊह को काश्भीय भक्ु स्रभ
फहुर होने से शासन छोड़ने व काशी जाकय रस्ामक्श्चत कयने का ऩयाभशम ददमा, वहीॊ
दस
य यी ओय है दयाफाद के ननजाभ के शासन का दहन्द ु फहुर है दयाफाद भ सभथमन ककमा।

8. मह गान्धी ही था क्जसने भोहम्भद अरी क्जन्ना को कामदे -आजभ की उऩाधध दी।

9. कॉग्रेॊ स के ध्वज ननधामयण के मरए फनी समभनत (1931) ने सवमसम्भनत से चयखा

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अॊककत बगवा वस्र ऩय ननणमम मरमा ककन्तु गाॉधी कक क्जद के कायण उसे नतयॊ गा कय
ददमा गमा।

10. कॉग्रेॊ स के बरऩुया अधधवेशन भ नेताजी सुबाष चन्द्र फोस को फहुभत से
कॉग्रेॊ स अध्मऺ चन
ु मरमा गमा ककन्तु गान्धी ऩट्टमब सीतायभय्मा का सभथमन कय
यहा था, अत: सुबाष फाफय ने ननयन्तय द्धवयोध व असहमोग के कायण ऩदत्माग कय ददमा।

11. राहोय कॉग्रेॊ स भ वल्रबबाई ऩटे र का फहुभत से चन
ु ाव सम्ऩन्न हुआ ककन्तु
गान्धी की क्जद के कायण मह ऩद जवाहयरार नेहरु को ददमा गमा।

12. 14-15 जयन, 1947 को ददल्री भ आमोक्जत अखखर बायतीम कॉग्रेॊ स समभनत की फैठक
भ बायत द्धवबाजन का रस्स्ताव अस्वीकृत होने वारा था, ककन्तु गान्धी ने वहाॉ
ऩहुॊच रस्स्ताव का सभथमन कयवामा। मह बी तफ जफकक उन्हैऄने स्वमॊ ही मह कहा था
कक दे श का द्धवबाजन उनकी राश ऩय होगा।

13. भोहम्भद अरी क्जन्ना ने गान्धी से द्धवबाजन के सभम दहन्द ु भुक्स्रभ जनसॉख्मा की
सम्ऩण
य म अदरा फदरी का आग्रह ककमा था क्जसे गान्धी ने अस्वीकाय कय ददमा।

14. जवाहयरार की अध्मऺता भ भन्रीभण्डर ने सोभनाथ भक्न्दय का सयकायी व्मम
ऩय ऩन
ु ननमभामण का रस्स्ताव ऩारयत ककमा, ककन्तु गान्धी जो कक भन्रीभण्डर के

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सदस्म बी नहीॊ थे ने सोभनाथ भक्न्दय ऩय सयकायी व्मम के रस्स्ताव को ननयस्त
कयवामा औय 13 जनवयी 1948 को आभयण अनशन के भाध्मभ से सयकाय ऩय ददल्री की
भक्स्जदैऄ का सयकायी खचे से ऩुनननमभामण कयाने के मरए दफाव डारा।

15. ऩाककस्तान से आए द्धवस्थाद्धऩत दहन्दओ
ु ॊ ने ददल्री की खारी भक्स्जदैऄ भ जफ
अस्थाई शयण री तो गान्धी ने उन उजड़े दहन्दओ
ु ॊ को क्जनभ वि
ृ , क्स्रमाॉ व
फारक अधधक थे भक्स्जदैऄ से से खदे ड़ फाहय दठठुयते शीत भ यात बफताने ऩय भजफयय
ककमा गमा।

16. 22 अततयफय 1947 को ऩाककस्तान ने काश्भीय ऩय आक्रभण कय ददमा, उससे ऩयवम
भाउॉ टफैटन ने बायत सयकाय से ऩाककस्तान सयकाय को 55 कयोड़ रुऩए की यामश दे ने का
ऩयाभशम ददमा था। केन्द्रीम भन्रीभण्डर ने आक्रभण के दृक्ष्ट्टगत मह यामश दे ने
को टारने का ननणमम मरमा ककन्तु गान्धी ने उसी सभम मह यामश तयु न्त ददरवाने के
मरए आभयण अनशन ककमा- परस्वरूऩ मह यामश ऩाककस्तान को बायत के दहतैऄ के द्धवऩयीत दे
दी गमी।

17.गाॉधी ने गौ हत्मा ऩय ऩनतमफॊध रगाने का द्धवयोध ककमा

18. द्सद्धवतीमा द्धवश्वा मध
ु भे गाॉधी ने बायतीम सैननको को बब्रटे न का मरए हधथमाय
उठा कय रड़ने के मरए रस्ेरयत ककमा , जफकक वो हभेशा अदहॊसा की ऩीऩनी फजाते है

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.19. तमा ५०००० दहॊद य की जान से फढ़ कय थी भुसरभान की ५ टाइभ की नभाज ?????
द्धवबाजन के फाद ददल्री की जभा भक्स्जद भे ऩानी औय ठॊ ड से फचने के मरए ५००० दहॊद य
ने जाभा भक्स्जद भे ऩनाह रे यखी थी...भुसरभानो ने इसका द्धवयोध ककमा ऩय दहॊद य को ५
टाइभ नभाज से जमादा कीभती अऩनी जान रगी.. इसमरए उस ने भाना कय ददमा. .. उस
सभम गाॉधी नाभ का वो शैतान फयसते ऩानी भे फैठ गमा धयने ऩय की जफ तक दहॊद य को
भक्स्जद से बगामा नही जाता तफ तक गाॉधी महा से नही जाएगा....कपय ऩुमरस ने भजफयय
हो कय उन दहॊद य को भाय भाय कय फयसते ऩानी भे बगामा.... औय वो दहॊद-य -- गाॉधी
भयता है तो भयने दो ---- के नाये रगा कय वाहा से बीगते हुए गमे थे...,,,
रयऩोटम --- जक्स्टस कऩयय .. सरस्
ु ीभ कोटम ..... पॉय गाॉधी वध तमो ?

२०. बगत मसॊह, याजगुरु औय सुखदे व को 24 भाचम 1931 को पाॊसी रगाई जानी थी, सुफह
कयीफ 8 फजे। रेककन 23 भाचम 1931 को ही इन तीनैऄ को दे य शाभ कयीफ सात फजे पाॊसी
रगा दी गई औय शव रयश्तेदायैऄ को न दे कय यातैऄयात रे जाकय ब्मास नदी के ककनाये
जरा ददए गए। असर भ भक
ु दभे की ऩयय ी काममवाही के दौयान बगत मसॊह ने क्जस तयह
अऩने द्धवचाय सफके साभने यखे थे औय अखफायैऄ ने क्जस तयह इन द्धवचायैऄ को तवज्जो दी
थी, उससे मे तीनैऄ, खासकय बगत मसॊह दहॊदस्
ु तानी अवाभ के नामक फन गए थे। उनकी
रोकद्धरस्मता से याजनीनतक रोमबमैऄ को सभस्मा होने रगी थी।
उनकी रोकद्धरस्मता भहात्भा गाॊधी को भात दे नी रगी थी। काॊग्रेस तक भ अॊदरूनी

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दफाव था कक इनकी पाॊसी की सजा कभ से कभ कुछ ददन फाद होने वारे ऩाटॊ के
सम्भेरन तक टरवा दी जाए। रेककन अडड़मर भहात्भा ने ऐसा नहीॊ होने ददमा। चॊद
ददनैऄ के बीतय ही ऐनतहामसक गाॊधी-इयद्धवन सभझौता हुआ क्जसभ बब्रदटश सयकाय सबी
याजनीनतक कैददमैऄ को रयहा कयने ऩय याजी हो गई। सोधचए, अगय गाॊधी ने दफाव फनामा
होता तो बगत मसॊह बी रयहा हो सकते थे तमैऄकक दहॊदस्
ु तानी जनता सड़कैऄ ऩय उतयकय
उन्ह जरूय याजनीनतक कैदी भनवाने भ काभमाफ यहती। रेककन गाॊधी ददर से ऐसा
नहीॊ चाहते थे तमैऄकक तफ बगत मसॊह के आगे इन्ह ककनाये होना ऩड़ता |

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वियाभ -5 फैनय , आमोजन ,तनमभ ,व्मिस्था

सुरस्बात ,
तमा आऩ सबी [ नकायात्भकता को] द्धवचायशीरता को याजनैनतक रूऩ से स्थाद्धऩत कयने के मरए
इस भॊच के द्सवाया अऩनी अमबव्मक्तत द्धवयाभ -५ के रूऩ भ स्वीकाय कयने को तैमाय है ,द्धवचायशीर
याजनैनतक भॊच के सदस्म ,इसके मरए कुछ फाते आऩसे १-इसके मरए केवर ५ रूऩमे ,५ व्मक्तत ,५ मभनट [अधधकतभ चचाम ,बाषण भ ] ५ सुझाव ,द्धवयोध

बफॊद ु /भुद्दे ,५ फैठके ,५ याज्मैऄ [जहाॉ द्धवधानसबा चन
ु ाव होने है ] से जन -भाॊग [ऩसॊद का रस्दशमन ]
घयो ऩय फैनय रगा कय कये सबी भतदाता ,चाहे कोई ककसी बी दर से आस्था यखता हो . |

२ -इस भॊच का उऩमोग आमोजक भॊच की भाॊगो भ स्थानीम भाॊग को बी इन्ही ननम्न मरखखत
ऩाॊच बफन्दओ
भ जोड़ कय कय सकता है .उदहायण के मरए ु
[१- एक ही फाय चन
ु ाव रडे रस्त्माशी ,भ जोड़ा जा सकता है कक-३० -५५ वषम के रस्त्माशी जो एक
ही फाय चन
ु ाव रड़कय कुछ साथमक कामम /अदबुत कामम कयना चाहते है ] .

३- इस भॊच ऩय द्धवचायशीर रोगो का सम्भान उन्ह साभने फैठाकय मा ननणाममक भॊडर के रूऩ भ
यहे गा ,अध्मऺता नहीॊ जो ऩहरे आमे हस्ताऺय मा अॊगयठा रगा कय,सभम मरखते हुए[ घॊटा
अधधकतभ ] जाचाहे जा सके ,फैठक का सभम १ घॊटे से ज्मादा यखने का अथम मही रगामा

जाएगा कक आमोजक को अबी चस्
ु त ,सतकम ,याष्ट्र ,सभम ,उजाम,सॊसाधनैऄ का सही उऩमोग कयने
वारे रस्त्माशी नेता ,सयॊ ऺक ,मा भतदाता नागरयको से सॊऩकम सॊवाद नहीॊ हो ऩामा है ,जैसा बी
उऩरब्ध हो काभ ककमा जामे आमोजक ही कये ननमभो कक धचॊता मे सोचकय कक मे ईश्वयीम
इच्छा ,रस्ेयणा है औय हभाया कतमव्म

है |

४-दै ननक द्धववयखणका [यक्जस्टय ]फना कय हय ५ व्मक्तत से की गमी सॊवाद मारा को मरखता यहे
,कोई बी व्मक्तत आमोजक हो सकता है , उसे ५ ईभानदायो का ऩता हो फस ,अमशक्षऺत व्मक्तत बी
आमोजक फने औय नाभ ऩते ककसी बी अऺय ऻानी से मरखवा सकता है मा इतना मरखना सीख
सकता है |

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५-इस भॊच ऩय सबी ,जानत,धभम ,वगम ,मरॊग को साभने राने का सॊकल्ऩ है ,जो ऻान रस्ेभी ,
याष्ट्ररस्ेभी ,भानवरस्ेभी ,चेतना रस्ेभी व्मक्तत [जो व्मतत हो ]उन सबी को आभॊबरत ककमा जामे |कोई
आ नहीॊ ऩाए इसकी कोई धचॊता न कयते हुए ,५ दै ननक सभाचाय ऩरैऄ भ चाहे वो छोटा सा अऽफाय
ही तमयॉ न हो ,५-साप्तादहक ,५- भामसक ऩबरका ,५ ई भेर ,पेस फुक ऩय बी ५ ही सभयह भ ऩोस्ट
ककमा जामे ,५-ही अन्म मभरो को ५-याज्मैऄ के मरए जो बी ५-ऩरयधचत हो उन्ह बी भोफाइर सन्दे श
मा ई भेर से ,जानकायी /अभॊतन /द्धवऻक्प्त /मा काममक्रभ के पोटो बेजो |
[आऩ सफकी जानकायी के मरए -जफ सरग्न फैनय फन यहा था तो ककसी रस्त्माशी ने १० फैनय औय
ऐसे ही फनवाने औय अऩने ऺेर भ रगवाने की अनुभनत भाॊगी औय फैनय फनवाए ]
कुछ फैठको औय आभ चचाम भ ननम्न बफन्दओ
ऩय बी द्धवयोध prakat कयने ऩय ध्मान केक्न्द्रत

ककमा गमा इनभे से जो बी चाहे आऩ बी अऩने ५ बफन्दओ
भ सम्भमरत कय सकते है |

१- सबी वोट दे सके ,सयकायी कभमचायी जो चन
ु ाव ड्मयटी भ रगते है ,/ऐ टी भ की तयह सुद्धवधा
जनक फनामा जामे चन
ु ाव को |वोट न कयने वारो की नागरयक सुद्धवधाए जब्त हो |

२ ऩाटॊ के चन
ु ाव धचन्ह की जगह ननवामचन मोग सफको एक ही सभम ऩय दे धचन्ह ,औय उसके
साथ रगे रस्त्माशी का रस्भाखणत पोटो -ऩरयचम |

३ ननशुल्क मशऺा ,सभान मशऺा कभजोयो को आवश्मक कोधचॊग सुद्धवधा की भाॊग ऩययी कयने के

मरए रस्मासयत रस्त्माशी जो व्मक्ततगत बफर दे कय सहस से आगे आमे अथामत ' असभान मशऺा
ऩद्दनत ऩय योक रगे /द्धवयाभ रगे |-जो रस्त्माशी इस फात को ऩययी ईभानदायी से स्वीकाय कयगे |
४-जो सुयऺा घेये भ चरे वो आभ आदभी का दहतेषी नहीॊ ,सुयऺा ऩय द्धवयाभ रगे /योक रगे ,जो
सुयऺा रेने को भजफयय है वो अऩने खचे से कये |

५- केवर गयीफ ईभानदाय सबासद ,द्धवधामक ,साॊसद को ही सयकायी सद्धु वधाए रस्ाप्त हो अभीयी
ये खा वारो को नहीॊ |

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कौन से दे िता औय है कहा ,जया एक हो जाओ दे िी शल्क्त अितयण को
ऩतन ऩयम्ऩयाओ औय ऩनतत ऩरकारयता का भार ऩेट के कायण नहीॊ , फक्ल्क ऩाऩी ,ऩशुत्व वारा

दोऩामा जीव [जो भानव का छद्म रूऩ धय] सभाज के फीच आ घुसा है कौन है जो ऩहचान सकता
है मा जो फचने फचाने के उऩाम रस्ाथमना -रस्मास ऩयभ शक्तत की रस्ेयणा से कयने के मरए ,अऩने

को द्धवक्षऺप्त होने से फचा ऩा यहे है । उभा खयु ाना के साथ हुए अन्माम को नायीशक्तत / भभता
स्वरूऩी का अक्स्तत्व मभटाने का हय मुग के रस्मास की तयह रस्तीत हो यहा है ,फस दे खना है की
ककतने शेष है जो भाॉ को स्वीकायते है अन्मथा नायीशक्तत को अफ सॊगदठत हो ही जाना चादहए
,आज से नव यारे रस्ायॊ ब है सॊऻा शयन्म सवेदनाओ से ऩये कीतमन कय रस्ाथमना कयने ऩय कौन सी

दे वी रस्कट होगी ,दे वताओ ने अऩने अस्र ददमे आयाधना की ,मा दे वी ने अस्र ददमे उनकी तऩस्मा
के उऩयाॊत ,औय याऺसो [क्जनको दे वता नहीॊ हाया ऩामे थे उनके मरए सफ एक हुए तफ जाके
शक्तत रस्कट हुए इस फात को सभझ कय आज का दे वतत्व कौन धायण कय यहा है ।मदद कभ से
कभ 6 दे वता -अऩने अस्र 1-चक्र 2-शॊख 3-तरवाय 4- बरशयर 5-गदा 6-धनुष 7- आशॉवाद दे ता
हाथ 8- कभर का पयर फाए हाथ भे

खर
ु े भुह वारे शेय की सवायी कयती दे वी का अथम सभझकय इस मुग भे कौन है जो द्धवचायशीर है
औय ननणमम कयने का द्धववेक फचा ऩा यहे है औय अऩने भाभयरी काभो को बी उसी बाव से जी ऩा
यहे है ऐसे साधना भे रस्मासयतो को भेया शत शत नभन ,वॊदन वही तो दे वता है जो दे वी की

शक्तत अवतयण का भाध्मभ फनगे । हभ सबी को अऩनी ऩहचान कयने के नौ ददन रस्ाप्त हुए है
आइमे ऩयये एकाग्र होकय दनु नमा से द्धवयतत हो अऩनी ऊजाम को बफखयाव [फीभारयमो ,अनावश्मक
सॊऩको- सॊवाद से सयॊ क्षऺत व सुयक्षऺत कये ।

कौन से दे वता औय है कहा ,जया एक हो जाओ दे वी शक्तत अवतयण को,मे ऩुकाय यही भाॉ भानवता ,द्धवक्षऺप्तता द्सवाय ऩय आने को तैमाय खड़ी है ,
कभ से कभ ६ दे वता तो साथ आओ १-चक्र [अष्ट्ट चेतना चक्र को चरवाने के सॊसधाधन सॊऩकम रस्दान कये जो सॊस्थाए ,सॊगठन
,मशऺण -रस्मशऺण ऺेर ]
२-तरवाय -तको की तरवाय से कुतको को मभटाने वारे [आज का रस्चाय तॊर -भीडडमा ,ऩुस्तके
,भनोयॊ जन साधन ,सादहत्मकाय ,कराकाय ]

97

३- गदा - गह
ृ स्थ दान कय जो ब्रहचमम द्सवाया शक्तत सक्जमत अक्जमत कय ने वारे दे वता तुल्म
अऩनी चारयबरक शक्तत के अस्र सभद्धऩमत कये .|

४- शॊख -आह्वाहन कयने वारे अऩने अस्र [सॊसाधन ] सभद्धऩमत कये |
५- बरशयर -जो तीन ऐसे याऺस क्जन्ह [मान द्सवाया ] हवाओ भ अद्रश्म हो भ्रमभत कयने की शक्तत
रस्ाप्त हो जाती है ,उन तीनो को एक साथ ही सभाप्त कयने के मरए तमोकक उनभे से एक को

भायने से राब नहीॊ वो कौन है आज के मुग भ ऩहचाननए औय फतामे आज का वो बरशयर कौन
दे वता दगे |

६--धनुष वो दे वता रस्दान कये -जो ध्मान को फनामे यखे औय एक रक्ष्म ऩय ही केक्न्द्रत हो
ननशाना बेदन भ सऺभ हो |

[सभम की भाॊग के अनस
ु ाय कबी दे वी शक्तत दानमनी दे वताओ के तऩस्मा कयने ऩय अस्र वयदान

स्वरुऩ रस्दान कयती है औय सभम ऩड़ने ऩय जफ दे वता हायते है तो वो दे वी को अस्र सभद्धऩमत कय
यऺा के मरए स्तनु त बी कयते है | दे खे कौन दे वता कहा है जो दे वी का आह्वाहन कयने भ सपर
होते

98

द्धवचायशीर याजनैनतक भॊच का ऩाॊच सयरीम ऩरयचम १-मह भॊच गयीफ अमशक्षऺत भतदाता को बी द्धवचायशीर फनाने के उद्देश्म के साथ आगे आमा है
औय उन्ह ननणाममक की बयमभका ननबाने की ओय उत्सादहत कयना है . |
२-मह भॊच उन सबी साहसी आजन्भ ईभानदायो को आत्भद्धवश्वास से अऩना ऩरयचम दे ने के मरए
आभॊबरत कयता है उन्ह ही याष्ट्रधभम की ऩरयबाषा की व्माख्मा औय स्थाऩना कयनी है |
३-सबी दरैऄ से अऩीर कयनी है कक हभाये फच्चे जो १८ सार के भताधधकायी है ,उन्ह छार सॊघ के
चन
ु ाव कयने ददए जाए ऩयन्तु उनकी याजनीनत भ दरैऄ कक कोई बी बयमभका न यहे औय उनका
स्वस्थ याजनीनतक व्मक्ततत्व उबयने का अवसय मभरे |

४-नायी का सम्भान कयने वारे ही रस्त्माशी उताये जाए ,इसके मरए उनके ऺेर की गैय दरीम
जागरूक भदहराओॊ एवॊ आभ गयीफ ,फीभाय ,अमशक्षऺत भदहरा की बी सॊस्तनु त री जाए . |
५-सबी दरैऄ औय सॊबाद्धवत रस्त्मामशमो से अऩीर है कक द्धवयाभ -५ के ऩरयचम काममक्रभ भ ककसी
जानत,धभम ,व्मक्तत ,कक चचाम ,बाषण न कयके अधधकतभ -५ मभनट भ ५ बफॊद ु यखे .|
जो रोग खद
ु को ईभानदाय कहने भ सॊकोच कय यहे है वो चाहे तो अऩने आस ऩास के ककसी
ईभानदाय का नाभ फताकय अऩना नाभ बी इस ईभानदायी भ दजम कया सकते है .|

रस्त्मेक शामभर होने वारे सदस्म के ५- कतमव्म जो उसे अऩनी स्वमॊ कक ईभानदायी से ऩयया कयना
है -

१-रस्थभ कतमव्म -अऩने भोफाइर भ ३० रूऩमे का msg काडम डरवाकय द्धवयाभ -५ अमबमान के सॊदेशो
को भहीने भ ३००० रोगो को अग्रसारयत कयना है |
२-दस
य या कतमव्म - अऩने काममऺेर औय दै ननक कक्रमा कराऩैऄ के साथ साथ ही जो सम्बावनामे फन
ऩड़े ,१०० ऩचे अवश्म फाॊटे -सफ
ु ह टहरने वारो भ ,फच्चो के साथ शाभ को ऩाकम मा stadium मा
स्कयर के फाहय,रे न फस स्टे शन ये रवे प्रेटपाभम ,सब्जी भॊडी,अस्ऩतार ,खयीददायी कयते वक़्त
,अऩने ऺेर के ऩस्
ु तकारम ,आवास समभनत की फैठक इत्मादद भ |

३- तीसया कतमव्म -अऩने आस ऩास की ऩबरका ,अऽफाय दै ननक साप्तादहक भामसक ,भ द्धवऻक्प्त
तथा अऩने ऺेर के केबफर ऩय १ भहीने रस्सारयत होने की व्मवस्था जो उसी ऺेर के द्धवयाभ -५
सयॊ ऺको द्सवाया उसी ऺेर के रोगो द्सवाया अधधकतभ ५ रूऩमे के सहमोग से ककमा जाएगा . |

99

४- चतुथम कतमव्म -कभ से कभ ५ सदस्मैऄ केनाभ हस्ताऺय के बफना कोई सयचना अग्रसारयत नहीॊ
होगी| इसके मरए सबी सदस्म अऩनी फात पेस फुक ऩय मरखे ,ऩयछे ,फतामे . |

५-अऩने ऺेर के अस ऩास की सभस्माओ के फाये भ ,औय सफसे कभजोय भानमसकता औय सफसे
द्धवद्सवान व्मक्ततत्व का ऩरयचम सॊऩकम सयर अवश्म अऩने ऩास यखे ,ऐसे रोगो को भोहल्रा द्धवयाभ
-५ की सबाओ भ जज [ननणाममक भॊडर भ शामभर ककमा जाएगा |
जो रोग ननम्न द्धवचाय भे द्धवश्वाश यखते है वो आगे आए व्मक्तत भाध्मभ है द्धवचाय का ,फाहय से मरए उधाय का ,क्जसे वो रौटा ही दे ता है ,अऩने भयर औय
ब्माज को मभराकय वो उसकी फऩौती नहीॊ होता ,ऩय ननमभत्त की सॊख्मा कभ होना घातक हुआ
अतसय ,व्मक्तत औय द्धवचाय भे मदद चमन कयना हो तो आऩ ककसे चन
ु गे औय द्धवचाय मा व्मक्तत
के मरए आऩकी तमा ननयॊ तय ऩोषण मोजना होगी ।

तमा आऩने जानने का रस्मास ककमा कक भ्रष्ट्टाचाय का कायण -कक्रमा कहाॉ से रस्ायॊ ब होती है भेयी
अल्ऩफद्धु ि ने भझ
ु े कुछ मॊय फतामा -भ्रष्ट्टाचाय =फेईभानी से =अन्माम से =अव्मवस्था से =असॊतुमरत भानमसकता से = चरयर की
दफ
म ता से =द्धवचायहीनता से =असत्मता से
ु र

असत्मता से फचने का सॊकल्ऩ रेने वारा सॊस्काय दे ने की व्मवस्था कयना बी अरस्त्मश रूऩ से
[कई ऩदो के ऩीछे ,मा कई स्तय-चयणैऄ से गुजयते हुए ] भ्रष्ट्ट भानमसकता ऩय द्धवयाभ रगाने भे
सपर होगा ।
जो रोग आज तक इस सोच व सॊकल्ऩ के साथ जी यहे थे उनके भजफयत द्धवचाय ही आने वारे

सभम भे अवसयवादी भानमसकता को ननमॊबरत कयने के मरए उऩमोगी हैऄगे कृऩमा ऐसे रोगो को
ऩहचान कय उनको सम्भाननत कये मा हभे सधय चत कये ।

द्धवचाय कबी ददखाई नही दे ता वह केवर सन
ु कय भनन कय जाना जाता है रेककन द्धवचाय सदै व अभय है
रेककन भनष्ट्ु म का भत्ृ मु अटर सत्म है इस मरए भैं द्धवचाय को ज्मादा भहत्व दे ता हय ॎ न कक इस नसवय
शयीय को इस शयीय का उऩमोग भार द्धवचाय को सॊचामरत कयने के मरए ककमा जाता है ।

100

एक क्जऻासा फहुत ऩये शान कय यही है ,एक रस्श्न आॊखे ददखा यहा है जया फचाए धचरऩट वारैऄ की
घडड़माॉ रुकी है 65 सार ऩहरे से, सभस्माओॊ की सभझ जो आनी चादहए थी आजादी के फाद से
,जफ दे श को भनोयॊ जक तयीके से ही कुछ फता दे ते तो अनऩद बी सीख ही जाते भौमरक

अधधकायो की बाषा ,वो आज तमयॉ हॊ सा यहे है तमयॉ रुरा यहे है अफ हभसे हभाया फचा खच
ु ा द्धववेक

बी न धोखे से न छीन रे इनसे फचो इनकी घडड़मा हभायी घड़ी को बी योक सकती है दे खो भुॊफई
भे मुवाओॊ के सॊघषम को ----तमा कभ थे याजघयाने,ऩयॊजीऩनत जो ग्रैभय बी दश्ु भन फन फैठा ,तमा

ददमा इसने ददमा दहसाफ रगा कय दे खगे तो हभसे इन्होने अथाह मरमा है बगवान फन गए रोगो
के औय ददमा तमा है , हॉकी की चक दे इॊडडमा के हीयो शाहरुख खान तमा ददरा ऩाएॊगे सधचन की
जगह ध्मानचॊद जी को बायत- यत्न।
कर से टी वी ऩय द्धवऻाऩन भे से भदहरा का डामरौग रस्सारयत नहीॊ हो यहा "an idea भे अमबषेक
से ऩहरे एक भदहरा कहती है की भैंने दे श के मरए वैवादहक जीवन त्माग ददमा है " ककसी फहुत
गॊबीय धचॊतन का ऩरयणाभ थे मे शब्द -------- इसी वैचारयक क्राॊनत की ही तो भै फात कय यही हयॉ
एक फाय सही ददशा भे ऊजाम ने गनत ऩा री तो मभयाज से बी वाऩस रे आएॊगे हभ अऩने
भत
ृ रस्ाम हो यहे तको को क्जनके कायण धभम सॊस्काय सफ फचगे ।
तमा राब होगा रस्काश झा जी की आयऺण कपल्भ से तमा आऩ फता सकते है ?
द्धवचायशीर याजनैनतक भॊच उन रस्त्मामशमैऄ को आभॊबरत कयता है क्जन्हे मसपम एक फाय केअवसय भे ही ऐसे
काभ कयने है क्जससे नायी की जागनृ त सयु ऺा औय सहमोगी नीनतमैऄ के साथ सबी रस्काय के भ्रष्ट्टाचाय को
ऩहचानकय उन्भर
य न कयने की ऺभता हो

जो सत्ता हस्ताॊतयण की भजफयय ी इनतहास भे झेर चुके है वो ऩन
ु :
न दे खनी ऩड़े । उस सभम बी दे शबततो की कोई कभी नहीॊ थी फस दो नाभो की बमय भका को ही
भहत्वऩण
य म फनाने भे मसभट कययह गई थी याजनैनतक ऩरयवतमन से व्मवस्था के सऩने । अफ हभाये साभने
चुनौती मह है कक हभ इस फाय धोखा न खामे । सभम फहुत कभ है फहुत से ऩयु ाने याजनैनतक आधायो को
बी याष्ट्र रस्ेभ से जोड़ना है । अन्ना जी हो मा स्वाभी जी दोनैऄ के ऩास सज्जन रोग तो है ऩयॊ तु तीव्र
चतयु औय दयय दशॉ याजनैनतक व्मक्ततमैऄ तक उनकी ननगाह शामद ऩहुच ही न ऩामे । ऐसे भे सबी सभह
य के
रोगो से अऩीर है कक वो अऩने सदस्मो के गण
ु ो का आकरन कयना रस्ायॊ ब कय दे तथा सभाज भे ऐसे
रोग जो र्फेस फक
ु ऩय नहीॊ है उनका ऩरयचम ककसी बी तयह अवश्म दे ।

101

तमा आऩ धभमननयऩेऺ हैं ? जया कर्फय सोधचमे औय स्वमॊ के मरमे इन रस्श्नैऄ के उत्तय खोक्जमे.....
१. द्धवश्व भ रगबग ५२ भुक्स्रभ दे श हैं, एक भुक्स्रभ दे श का नाभ फताईमे जो हज के मरमे "सक्ब्सडी"
दे ता हो ?
२. एक भुक्स्रभ दे श फताईमे जहाॉ दहन्दओ
ु ॊ के मरमे द्धवशेष कानयन हैं, जैसे कक बायत भ भुसरभानैऄ के
मरमे हैं ?
३. ककसी एक दे श का नाभ फताईमे, जहाॉ ८५% फहुसॊख्मकैऄ को "माचना" कयनी ऩडती है , १५%
अल्ऩसॊख्मकैऄ को सॊतुष्ट्ट कयने के मरमे ?

४. एक भुक्स्रभ दे श का नाभ फताईमे, जहाॉ का याष्ट्रऩनत मा रस्धानभन्री गैय-भुक्स्रभ हो ?
५. ककसी "भुल्रा" मा "भौरवी" का नाभ फताईमे, क्जसने आतॊकवाददमैऄ के खखरार्फ र्फतवा जायी ककमा हो ?
६. भहायाष्ट्र, बफहाय, केयर जैसे दहन्दय फहुर याज्मैऄ भ भुक्स्रभ भुख्मभन्री हो चुके हैं, तमा आऩ कल्ऩना कय
सकते हैं कक भुक्स्रभ फहुर याज्म "कश्भीय" भ कोई दहन्दय भुख्मभन्री हो सकता है ?

७. १९४७ भ आजादी के दौयान ऩाककस्तान भ दहन्दय जनसॊख्मा 24% थी, अफ वह घटकय 1% यह गई है , उसी
सभम तत्कारीन ऩयवॉ ऩाककस्तान (अफ आज का अहसानर्फयाभोश फाॊग्रादे श) भ दहन्दय जनसॊख्मा 30% थी
जो अफ 7% से बी कभ हो गई है । तमा हुआ गुभशुदा दहन्दओ
ु ॊ का ? तमा वहाॉ (औय महाॉ बी) दहन्दओ
ु ॊ के
कोई भानवाधधकाय हैं ?

८. जफकक इस दौयान बायत भ भुक्स्रभ जनसॊख्मा 10.4% से फढकय 14.2% हो गई है , तमा वाकई दहन्दय
कट्टयवादी हैं ?
९. मदद दहन्दय असदहष्ट्णु हैं तो कैसे हभाये महाॉ भुक्स्रभ सडकैऄ ऩय नभाज ऩढते यहते हैं, राऊडस्ऩीकय ऩय
ददन बय धचल्राते यहते हैं कक "अल्राह के मसवाम औय कोई शक्तत नहीॊ है " ?
१०. सोभनाथ भक्न्दय के जीणोिाय के मरमे दे श के ऩैसे का दरु
ु ऩमोग नहीॊ होना चादहमे ऐसा गाॉधीजी ने
कहा था, रेककन 1948 भ ही ददल्री की भक्स्जदैऄ को सयकायी भदद से फनवाने के मरमे उन्हैऄने नेहरू औय
ऩटे र ऩय दफाव फनामा, तमैऄ ?

102
भैं नीचे एक मरस्ट दे यहा हयॊ उसे चेक कयके सच-सच फताम कक इसके अनस
ु ाय आऩ ककतने “साभाक्जक”
हैं?

1) आऩ अऩने बफक्ल्डॊग/गरी/भोहल्रे/सोसामटी भ यहने वारे ककतने व्मक्ततमैऄ को चेहये से, ककतनैऄ को नाभ
से जानते हैं? उनभ से ककतनैऄ के फाये भ मह जानते हैं कक वह तमा काभ कयता है ?

2) क्जन्ह आऩ व्मक्ततगत रूऩ से जानते हैं, उनके घय वषम भ ककतनी फाय गमे हैं?

3) आऩकी कारोनी भ हुई ककतनी शाददमैऄ / अधथममैऄ भ आऩ ककतनी फाय गमे हैं? ककतनी फाय आऩ होरीदीवारी के अरावा बी ऩड़ोमसमैऄ से फात कयते, मभरते हैं?

4) आऩ अऩनी कारोनी/सोसामटी की ककसी भीदटॊग अथवा समभनत भ ककतनी फाय गमे है ? तमा आऩ ककसी
साभाक्जक-साॊस्कृनतक सॊस्था से जुड़े हुए हैं? औय उसकी गनतद्धवधधमैऄ भ भाह भ ककतनी फाय जाते हैं?

5) तमा आऩ अऩने इराके के ऩाषमद (Corporator), द्धवधामक, साॊसद को व्मक्ततगत रूऩ से जानते हैं? उनके
र्फोन नम्फय मा ऩता आऩको भारभ
य है ? अऩने इराके के याजनैनतक काममकतामओ-ॊ भवामरमैऄ-गण्
ु डैऄ को आऩ
ऩहचानते हैं मा नहीॊ?

6) तमा आऩ जानते हैं कक आऩके भोहल्रे-गरी-वाडम का बफजरी कनेतशन ककस राॊसर्फाभमय से है? आऩ
अऩने इराके के बफजरी द्धवबाग के फाये भ उनके र्फोन नम्फय के अरावा औय तमा जानते हैं?

7) तमा आऩ जानते हैं कक आऩके इराके-भोहल्रे-गरी-सड़क को ऩानी की सप्राई कहाॉ से होती है ? तमा
कबी आऩने भोहल्रे की ऩानी की ऩाइऩ राइन की सॊयचना ऩय ध्मान ददमा है ?

8) तमा आऩ कॉरोनी की सीवय राइन के फाये भ जानकायी यखते हैं, कक वह कहाॉ से गई है , कहाॉ-ककस नारे

103
भ जाकय मभरती है, कहाॉ उसके चोक होने की सम्बावना है … आदद-आदद?

9) आऩके भोहल्रे भ अभभ
य न रगाताय वषों तक घभ
य ने वारे अखफाय हॉकय, ब्रेड वारे, दध
य वारे, टे रीर्फोन

कभॉ, बफजरीकभॉ, नरकभॉ, ऑटो रयतशा वारे आदद भ से आऩ ककतनैऄ को चेहया दे खकय ऩहचान सकते हैं?

10) क्जस सड़क-गरी-भोहल्रे से आऩ योजाना दफ़्तय-फाजाय आदद के मरमे गज
ु यते हैं तमा आऩ उस ऩय
चर यही ककसी “असाभान्म गनतद्धवधध” का नोदटस रेते हैं? तमा आऩने कबी अवैध भक्न्दय-दयगाह मा
अनतक्रभण कयके फनाई गई गभ
ु दटमैऄ-ठे रैऄ-दक
ु ानैऄ-भकानैऄ ऩय ध्मान ददमा है?

मह तभाभ जानकारयमाॉ “साभाक्जक जागरुकता” के तहत आती हैं, क्जनकी जानकायी साभान्म तौय ऩय "थोड़ी
मा ज्मादा", रस्त्मेक व्मक्तत को होनी ही चादहमे… तमैऄकक “फयु ा सभम” कहकय नहीॊ आता, कहीॊ ऐसा न हो
कक खतया आऩके चायैऄ ओय भॊडया यहा हो औय आऩ अऩने घय भ टीवी ही दे खते यह जाम…।
==================

अफ स्कोय की फायी - मदद ऊऩय दी गई 10 रस्श्नावरी भ से 7-8 ऩय आऩका उत्तय "हाॉ" है तो आऩ

ननक्श्चत रूऩ से "जागरुक" की श्रेणी भ आते हैं, मदद आऩके उत्तय 4-5 के मरमे ही "हाॉ" हैं, तफ आऩको औय
अधधक जानकायी एकबरत कयने की आवश्मकता है, औय मदद आऩका जवाफ मसर्फम 1 मा 2 के मरमे ही "हाॉ"
है , तफ इसका भतरफ है कक आऩ ननहामत "गैय-साभाक्जक" औय "खुदगजम" ककस्भ के इॊसान हैं…

104

सॊस्कृत फनेगी नासा की बार्षा, ऩढ़ने से गणणत औय विऻान की शशऺा भें आसानी

आगया [आदशम नॊदन गप्ु त]। दे वबाषा सॊस्कृत की गज
यॊ कुछ सार फाद अॊतरयऺ भ सन
ु ाई दे सकती है ।
इसके वैऻाननक ऩहरय का भयु ीद हुआ अभेरयका नासा की बाषा फनाने की कसयत भ जुटा है । इस रस्ोजेतट
ऩय बायतीम सॊस्कृत द्धवद्सवानैऄ के इन्काय के फाद अभेरयका अऩनी नई ऩीढ़ी को इस बाषा भ ऩायॊ गत कयने
भ जुट गमा है ।

गत ददनैऄ आगया दौये ऩय आए अयद्धवॊद पाउॊ डेशन [इॊडडमन कल्चय] ऩाॊडडचेयी के ननदे शक सॊऩदानॊद मभश्रा ने
'जागयण' से फातचीत भ मह यहस्मोद्सघाटन ककमा। उन्हैऄने फतामा कक नासा के वैऻाननक रयक बब्रग्स ने
1985 भ बायत से सॊस्कृत के एक हजाय रस्काॊड द्धवद्सवानैऄ को फर
ु ामा था। उन्ह नासा भ नौकयी का रस्स्ताव
ददमा था। उन्हैऄने फतामा कक सॊस्कृत ऐसी रस्ाकृनतक बाषा है , क्जसभ सर
य के रूऩ भ कॊप्मट
य य के जरयए
कोई बी सॊदेश कभ से कभ शब्दैऄ भ बेजा जा सकता है । द्धवदे शी उऩमोग भ अऩनी बाषा की भदद दे ने से
उन द्धवद्सवानैऄ ने इन्काय कय ददमा था।
इसके फाद कई अन्म वैऻाननक ऩहरय सभझते हुए अभेरयका ने वहाॊ नसमयी तरास से ही फच्चैऄ को सॊस्कृत
की मशऺा शरू
ु कय दी है । नासा के 'मभशन सॊस्कृत' की ऩक्ु ष्ट्ट उसकी वेफसाइट बी कयती है । उसभ स्ऩष्ट्ट
मरखा है कक 20 सार से नासा सॊस्कृत ऩय कापी ऩैसा औय भेहनत कय चुकी है । साथ ही इसके कॊप्मट
य य
रस्मोग के मरए सवमश्रेष्ट्ठ बाषा का बी उल्रेख है ।
स्ऩीच थैयेऩी बी : वैऻाननकैऄ का भानना है कक सॊस्कृत ऩढ़ने से गखणत औय द्धवऻान की मशऺा भ आसानी
होती है , तमैऄकक इसके ऩढ़ने से भन भ एकाग्रता आती है। वणमभारा बी वैऻाननक है । इसके उच्चायण भार
से ही गरे का स्वय स्ऩष्ट्ट होता है । यचनात्भक औय कल्ऩना शक्तत को फढ़ावा मभरता है । स्भयण शक्तत
के मरए बी सॊस्कृत कापी कायगय है । मभश्रा ने फतामा कक कॉर सटय भ कामम कयने वारे मव
ु क-मव
ु ती बी
सॊस्कृत का उच्चायण कयके अऩनी वाणी को शि
ु कय यहे हैं। न्मज
य यीडय, कपल्भ औय धथएटय के आदटम स्ट
के मरए मह एक उऩचाय साबफत हो यहा है । अभेरयका भ सॊस्कृत को स्ऩीच थेयेऩी के रूऩ भ स्वीकृनत मभर
चुकी है ।

105
इस दे श की खयबफमाॉ :
.
मे वो दे श है जहाॉ द्धऩज्जा Ambulance औय Police से जल्दी ऩहुच जाता है .
.
जहाॉ काय रोन मशऺा के मरए मभरने वारे रोने से सस्ता है .
.
जहा आटा चावर तेर चीनी गयीफ की ऩहुच से दयय है रेककन मसभ काडम फ्री है .
.
जहाॉ अयफऩनत रोग गयीफो के जीवन स्तय भ सध
ु ाय हेतु दान दे ने की तर
ु ना भ कक्रकेट टीभ खयीदते हैं.
.
जहाॉ हभ चाम की दक
ु ान ऩय खड़े होकय फार श्रभ ऩय चचाम कयते है औय महाॉ तक कह दे ते है की ऐसे

रोगो को गोरी भाय दे नी चादहए जो फारश्रभ कयवाते है. औय कपय आवाज रगाते है ओमे छोटय सारे कहा

भय गमा चाम कर रामेगा तमा……..
.
मे वो दे श है जहाॉ वतन ऩय भयने वारो को आतॊकवादी कयाय ददमा जाता है . ( भम्
ु फई भई ICSE 6th तरास
की Social Science की फक
ु के ऩेज ६४-६५ भ बगत मसॊह, सख
ु दे व व याजगरु
ु को आतॊकवादी फतामा गमा

है .) औय अपजर गरु
ु औय कसाफ जैसे रोगो को सयकायी खचे ऩय ऩारा जाता है . मे दे श भहान था ककन्तु
हभने इस दे श को उस भक
ु ाभ ऩय ऩॊहुचा ददमा है जहा भह
ु से तो मे गवोक्तत की जा सकती है की भेया

बायत भहान रेककन मे फात ददर से नहीॊ कही जा सकती है . औय सफसे अर्फसोस की फात मे है की मव
ु ा
वगम बी इस औय से भह
ु पेये है की कैसे इस दे श को इसका खोमा हुआ भक
ु ाभ ददरामा जामे…

106

ककसी बी दे श का इस्राभीकयण कैसे होता हेऄ ?

१. भुक्स्रभ आफादी दय हय गैय इस्रामभक दे श भ गैय भुसरभानैऄ
की तुरना भ दग
ु नी यफ़्ताय से फच्चे ऩैदा कयते हैं | क्जससे
अथमव्मवस्था गड़फड़ा जाती हैं |

२. भुक्स्रभ आफादी ऩढाई मरखाई भ कोई रूधच नहीॊ यखती |
अॊग्रेजी, गखणत, द्धवऻानॊ आमे ना आमे कुयान जरुय फच्चैऄ को
ऩढाई जाती है |

३. भक्ु स्रभ जो व्मवसाम कयते हैं वो बी सभाज दहत के नहीॊ

होते | जैसे फड़े व्मवसामी जो टे नयी चराते हैं उसकी गॊदगी नददमैऄ
भ फहाते हैं क्जस से ऩानी भ आसेननक जैसे जहय की भारा
फढती जाती हैं |
४. भुक्स्रभो की गोस्त की दक
ु ाने आसऩास बफभारयमाॊ राती हैं |
जानवयैऄ की हत्मा अन्न-जर सॊकट का रस्भख
ु कायण हैं |

५. जहा भुक्स्रभ अधधक होते हैं वह सॊगदठत तयीके से यहते हैं
औय आसऩास ककसी गैय भक्ु स्रभ को फसने नहीॊ दे ते | १००

दहन्दओ
के फीच एक भुक्स्रभ यह सकता हैं ऩय १०० भुसरभानैऄ

के फीच दहॊद य नहीॊ यह सकता |

६. भुक्स्रभ सॊगदठत होने की वजह से गैय भुसरभानैऄ से फेवजह
झगडा कयते हैं, अगय आस ऩास उनकी सॊऩक्त्त होती हैं तो उस
ऩय कब्जा कय रेते हैं जैसा की कश्भीय भ हुआ |

107

७. ऩरयवाय भ अधधक सदस्म होने से औय अमशक्षऺत होने से छोटे
सॊगदठत अऩयाध कयते हैं | जैसे की अनाधधकृत कब्जे, बफजरी
चोयी, नशीरे ऩदाथो का धॊधा कयते हैं |

८. मे छोटे अऩयाधी जल्द ही फड़े अऩयाधधमैऄ से जा मभरते हैं
औय मे फड़े अऩयाधी बी कबी ना कबी उन्ही भुक्स्रभ फक्स्तमैऄ से
ननकर कय आमे होते हैं | टाइगय भेनन औय दाउद इब्राहीभ
कासकय औय ना जाने ककतने अऩयाधी ऊऩय उठे |
९. फड़े अऩयाधी दे श की अथम व्मवस्था को बफजरी चोयी मा
अनतक्रभण की तयह छोटा भोटा नत
ु सान नहीॊ ऩहुचाते फक्ल्क
हजायो कयोडो का नुतसान ऩहुचाते हैं | जैसे स्टाम्ऩ घोटारे व
हवारा काॊड का रस्भख
ु अब्दर
ु कयीभ तेरगी १०,००० कयोड़ व
हसन अरी ३६,००० कयोड़ इत्मादद यकभ कभाते हैं औय इसे

इस्रामभक भुल्को से गैय इस्रामभक दे शो भ आतॊक हत्मा के
मरए हधथमाय रस्मशऺण ऩय रस्मोग ककमा जाता हैं |

१०. वे भुक्स्रभ जो काकर्फय दे श भ ककमे गए अऩयाध रयट ऩाट

को धामभमक कृत्म भानते हैं वे औय बी तयीको से भक्ु स्रभ रड़के

गैय-इस्रामभक दे श भ जॊग के मरए तैमाय कयते हैं | उनभे से एक
सयरतभ यास्ता जेहाद का हैं काकर्फय का ़त्र हय भक्ु स्रभ ऩय
अननवामम हैं |

108

११. कुयान ऩढ़े फेयोजगाय रड़के जेहाद के मरए आसानी से तैमाय
हो जाते हैं फक्ल्क अऩना सौबाग्म सभझते हैं औय इस्रामभक

दे शो भ भौजद
य अऩने यहनुभाओ की भदद से जेहादी फनते हैं |
१२. मे जेहादी दे श भ सभम सभम ऩय फभ द्धवस्पोट साभदय हक
हत्माए वा दॊ गे कयते हैं | दॊ गो को कुछ रोगो की शयायत कहा
जाता हैं जफकक फभ द्धवस्पोट ऩय कहा जाता हैं की इसका

इस्राभ औय भस
ु रभानैऄ से कोई रेना दे ना नहीॊ जफकक दोनैऄ ही
जेहाद अथामत धभां मुि का दहस्सा हैं |

१३. मदद गैय इस्राभी कौभे सॊगदठत होकय धभां मि
ु का जवाफ
दे ती हैं तो भुक्स्रभ जोय जोय से हल्रा कयना चारु कयते हैं के
हभ ऩय जल्
ु भ औय अत्माचाय हो यहा हैं, हभ सयु क्षऺत नहीॊ इस
भुल्क भ |

१४. भुसरभानैऄ के सॊगदठत होने की वजह से औय हभरावय होने

की वजह से नाक्स्तक याजनैनतक दर भुसरभानैऄ का ऩऺ रेने भ

ही अऩनी बराई सभझते हैं जैसे की बायत भ काॊग्रेस, सभाजवादी,
कभनु नस्ट दर इत्मादद |

१५. तमैऄकक इन दरैऄ का धभम से, सॊस्कृनत से कोई रेना दे ना नहीॊ
होता औय भक्ु स्रभ सभथमन मभरने ऩय इन्ह सत्ता का औय

रारच आ जाता हैं मे भुक्स्रभ आफादी के फढने भ औय सहामता
कयते हैं उनके हय काभ भ चाहे वो गरत हो मा सही, साथ दे ते
हैं |

109

१६. फॊगरादे श से आमे ४ कयोड़ भुक्स्रभो को काॊग्रेस ने ना केवर
फसामा अद्धऩतु उनको क्जस कानन
य (आई. ऍभ. टी. डी. एतट) की
सहामता से ननकारा जा सकता था उसे बी खत्भ कय ददमा |

१७. आतॊकवाद के खखराप कानयन (ऩोटा एतट) फनाना तो दयय
यहा, जो कानयन था उसको बी खत्भ कय ददमा |

१८. भुक्स्रभ नायाज ना हो इस मरए जेहाददमैऄ को उच्चतभ

न्मामारम से दी हुमी को सजा को बी योके यखते हैं | जैसा की
काॊग्रेस ने अपजर गुरु की र्फासी योक यखी हैं |

१९. गैय भक्ु स्रभो के इस कधथत सेकुरय वगम की इस भख
म ा से
य त

भुक्स्रभ खुश होते हैं औय औय तेजी से आफादी फढ़ाने का उऩाए
सोचते हैं

२०. इन उऩामैऄ भ गैय भुक्स्रभ सम्रस्दामे की रड़ककमैऄ को प्माय

के झयठे जार भ पसाना होता हैं औय उनसे फच्चे ऩैदा कयने होते
हैं इन्ह रव जेहादी कहते हैं |

२१. अगय मे रव जेहादी ३-४ दहॊद य मा ईसाई रडककमो को क्जन्ह

मे वगमरा-पुसरा के बगा राए थे, खखरा (वहन) नहीॊ कय ऩाते हैं,
तो बोग कयने के फाद ककसी अधेड उम्र के भुक्स्रभ को फेच दे ते
हैं अधधकतय वह भक्ु स्रभ फदसयय त ही होते हैं इसीमरए उन्ह इस
उम्र तक औयते नहीॊ मभर ऩाती |

२२. भक्ु स्रभ आफादी फढ़ने के साथ-साथ छोटे -छोटे इस्रामभक

ऺेरो का बी ननभामण कयते हैं | जैसे दहॊद य इराके भ अधधक दाभैऄ

110

ऩय कोई एक इभायत खयीद कय रेते हैं औय कपय वहा फड़े
भक्ु स्रभ ऩरयवाय फसा ददए जाते हैं |

२३. मे भुक्स्रभ रोग आसऩास रोगो से आमे ददन झगडा कयते
हैं औय धीये धीये ऩडोमसमो को अऩने घय सस्ते दाभैऄ ऩय ककसी
भुक्स्रभ को ही फेचने को भजफयय कय दे ते हैं इस रस्काय इनकी

एक भकान ऩय खचम की गमी अनतरयतत यकभ से कही अधधक
भन
ु ापा ननकर आता हैं |

२४. भुसरभानैऄ की भक्स्जद अतसय शहय के फीचैऄ-फीच होती हैं
ताकक ककसी तयह की व्मवस्था बफगडने ऩय भीनायो की आड़ से

ऩुमरस को दे ख सके | औय जरुयत ऩड़ने ऩय खुद ऩुमरस व्मवस्था
ऩय हभरा कय सके |

२५. छोटी भुक्स्रभ फक्स्तमाॉ ना केवर सॊगदठत होती हैं अद्धऩतु

हभरावय रोगो से बयी होती हैं | हय घय भ दे सी तभॊचे मभरना
साभान्म फात होती हैं |
२६. बायत भ नव-ननमभमत भुक्स्रभ फक्स्तमाॉ अतसय मा तो

याजभागो के ककनाये होती हैं मा रे न राइनैऄ के ककनाये | याजभागो
के ककनाये फनी भजायो भ क्जनभे से अधधकताय कुत्ते बफक्ल्रमो

की मा खारी ही होती हैं हधथमाय छुऩामे यहने की सॊबावनाओ से
इॊकाय नहीॊ ककमा जाता |

111

२७. मदद गैय-इस्रामभक दे श के अगर-फगर भ इस्रामभक दे श हैं
तो सभम-सभम ऩय इस्रामभक दे श हभरा कयते यहगे जैसा की
बायत का ऩडोसी ऩाककस्तान कयता यहता है |
२८. ऐसे ऩडोसी इस्रामभक भल्
ु क रस्त्मऺ जीत ना ऩाने की

क्स्थनत भ छदभ मुि रस्ायॊ ब कयते हैं | गैय इस्रामभक भुल्क भ

भौजद
य भुक्स्रभो की भदद रेते हैं इस्रामभक एकता के नाभ ऩय |
२९. आफादी भ ३० रस्नतशत तक ऩहुचने ऩय सभम आ जाता
भुक्स्रभो के मरए के वो काकर्फय दे श ऩय कब्जा कय रे तमैऄ की
सॊगदठत ३०% भत ककसी बी रोकताक्न्रक दे श भ कापी है

सयकाय फनाने के मरए मा ग्रह मि
ु के भाध्मभ से कब्जा कयने
के मरए |

३०. इस सम्बावना से बी इनकाय नहीॊ ककमा जा सकता के
भुक्स्रभ ऩडोसी दे श के साथ मभर जामे औय फाहय से हभरे के

सभम अॊदय से बी हभरा कय दे | मुि के सभम ये र राइन उखाड
दे , तेर ऩाइऩराइन तोड़ दे याज भागम जाभ कय द इत्मादद ताकक
सेना को सभम ऩय यसद ना मभरे औय वो हाय जामे |
३१. सेना के हायते ही द्धवदे शी भुक्स्रभ गैय-इस्रामभक दे श भ आ
जामगे औय मोगदान के अनस
ु ाय दे सी भक्ु स्रभो को सत्ता भ
दहस्सेदायी दे दगे तमैऄ की उनकी जीत भ उनका बी फड़ा
मोगदान होगा |

112

३२. दे श को दारुर हयफ से दारुर इस्राभ घोद्धषत कय ददमा
जामेगा | मानन गैय इस्रामभक दे श इस्रामभक दे शो भ से एक हो
जामेगा | गैय इस्रामभक दे श भ तमा तमा होता हैं मे हभ मरखने
की जरुयत नहीॊ कपय बी हभ आगे के रेख भ फताएॉगे |
रेख सभीऺा : आऩ उऩयोतत रेख ऩढ़ कय सभझ ही चुके हैऄगे
की बायत इस्रामभक दे श फनने की कगाय ऩय हैं | सफसे भर

कयण भक्ु स्रभ आफादी का दहन्दओ
ईसाइमैऄ औय अन्म सबी से

दोगुनी यफ़्ताय से फढ़ना हैं | इसका दस
य या रस्भुख कायण है बायत
का पजॉ सेकुरयवाद जो बायत को इस्रामभक याष्ट्र फनाने की
ओय अग्रसय हैं |

आऩ मे कहे सकते हैं के घोटारे अऩयाध भ्रष्ट्टाचाय भ तो दहॊद य बी
आॊगे हैं तो भुक्स्रभो को दोष तमैऄ दे ना | हभाया उत्तय हैं के दहॊद य

भ्रष्ट्टाचाय कय के हधथमाय नहीॊ खयीदते, ना ही उन हधथमायैऄ से वो
ऩाककस्तान भ फभ द्धवस्पोट कयते हैं ना ही याष्ट्र का ख्मार ना
कय के आफादी फढ़ाते हैं | भुक्स्रभ हय कदभ अऩनी कौभ को

ध्मान भ यख के उठाते हैं औय उनका अॊनतभ रक्ष्म होता हैं दे श
का इस्राभीकयण जफकक भ्रष्ट्ट दहॊद य को दहॊद य याष्ट्र से कोई रेना
दे ना नहीॊ होता |

आऩ मे बी सोच यहे हैऄगे के भुक्स्रभो ने दे श भ फड़ा मोगदान
ककमा हैं | जफ हभ उन धगने चन
ु े रोगो को जानते हैं तो ऩता
चरता हैं वो भुक्स्रभ हैं ही नहीॊ | जैसे की अब्दर
ु कराभ

113

अग्नोक्स्टक हैं, अजीभ रस्ेभजी का बी मही हार हैं, अशपाक उल्रा
खान आमम सभाजी थे व दहॊद य याष्ट्र का सभथमन कयते थे |

भुक्स्रभो ने क्जतना मोगदान नहीॊ ककमा था, उस से ज्मादा
फटवाये के तौय ऩय रे मरमा |

फाॊकी आऩ अऩने आस-ऩास भुक्स्रभ गनतद्धवधधमाॉ दे ख कय रेख
की सत्मता ऩयख सकते हैं |

114

रि जेहाद: क्मेआ, कैसे, नुकसान औय फचाि

क्मेआ?
बायत भें जफ इस्राभी सेनाए हभरा कयने को तैमाय ना होती
थी क्मेआ की आमफ बशू भ से इस्राशभक सेनाए ल्जॊदा िाऩस नहीॊ
जाती थी , उस िक्त बायत के भॊहदयेआ से ज्मादा बायत की

औयतो का रारच दे कय जेहादी नेता अऩनी सेनाओ को भना
ऩाते थे बायत ऩय हभरा कयने के शरए | “औयतो की रूर्ट”

नाभक एक ककताफ तक शरखी जा चक
ु ी हेऄ ल्जसभे हदर दे हरा
दे ने िारे आकडे हेऄ भुसरभानेआ द्िाया हहॊद ू ल्स्त्रमेआ को रूर्ट के

साभान की तयह रे जाने के शरए | उन आकडो से तो शसपफ मही
सात्रफत होता हेऄ के अपगातनस्तान औय तुकी की ९० फीसदी

आफादी हहॊद ू औयतो से ही ऩैदा हेऄ | सभम फदर गमा हेऄ, आज

औयतो को भस्
ु रभान एक गैय इस्राशभक दे श भें ऐसे ही उठा के
नहीॊ रे जा सकते फॊगरादे श मा ऩाककस्तान की फात अरग हेऄ |
बायत भें मा मयू ोऩ भें इन्होने अरग तयीके अऩना यखे हेऄ गैय

भुस्रभान औयतो से फच्चे ऩैदा कय के इस्राभ को फढ़ाने के |
तो महाॉ शरू
ु होता हेऄ रि जेहाद |

कैसे?

115

१.

भुल्स्रभ रडको को भौरविमो ि अन्म इस्राशभक सॊगठन

द्िाया हहॊद ू रडककमो को फसाने को ना केिर प्रोत्साहहत ककमा
जाता हेऄ अवऩतु इनाभ के तौय ऩय मा कहे घय फसाने के नाभ

ऩय फड़ी यकभ बी यखी जाती हेऄ | मे यकभ जेहाद के नाभ ऩय,
जकात के नाभ ऩय, ल्जज्मा के नाभ मा आऩके द्िाया ऩेरोर ऩय
दी हुई यकभ से री जाती हेऄ |
२.
कभ से कभ ४-५ रड़के (ज्मादा बी हो सकते हेऄ ) आऩस
भें शभर के हहॊद ू रडककमो को चुनते हेऄ फसाने के शरए |

भस्
ु रभान हभेशा सभह
ू भें यहते हेऄ अऩने कामय स्िाबाि की

िजह से इसशरए उन हहॊद ू रडककमो को फचाना इतना सयर नहीॊ
होता |
३.

मे रड़के गजसफ कारेज के फाहय, कॊप्मूर्टय सॊसथान के

फाहय मा अॊदय, मा कोधचॊग सॊस्थानेआ के आसऩास यहते हेऄ |

कबी-२ रेडडस र्टे रय की दक
ु ान ऩय ४-५ रड़के रगे ही यहते हेऄ |

इन्र्टयनेर्ट ऩय सोशर नेर्टिकफ से रेकय माहू चैर्ट रूभ तक हय िो
जगह जहा इन्हें हहॊद ू रड़ककमा शभर सकती हेऄ िहा मे रगे यहते
हेऄ घात भें |
४.

ज्मादातय भौको ऩय मे रड़के खद
ु को हहॊद ू ही हदखाने का

प्रमास कयते हेऄ | अच्छा भोफाइर सेर्ट, कऩडे, िा भोर्टय साइककर
आकर्षफण के तौय ऩय इनका हधथमाय होते हेऄ | ल्जभ भें घॊर्टो

116

कसयत बी मे रेआग इसी शरए कयते हेऄ ताकक अधधक से अधधक
हहॊद ू रड़ककमा पसा सके |
५.

दक्षऺण बायत भें तो भुजरा भौरिी इन रडको के शरए

ऩसोनाशरर्टी डेिेरोप्भें र्ट कोसे चरिा दे ते हेऄ | ककस तयह फात की
जाए रडककमो से , उन्हें कैसे तोहपे हदए जाए | औय ककस
प्रकाय सेक्मुरय फन कय उनसे शसपफ प्माय भोहब्फत की फात कय
के खफ
ू सयू त सऩने हदखाए जाए |
६.

कपजभ उद्मोग भें फढते खान भेतनमा से मे अफ औय बी

सयर हो गमा हेऄ | ज्मादातय हीयो खान होते हेऄ ऐसी भानशसकता
रड़ककमेआ भें तेजी से फढ़ यही हेऄ जो की सभाज के शरए फहुत की
घातक हेऄ |
७.

अगय हहॊद ू रड़की तनल्चचत सभम भें नहीॊ पसती तो रि

जेहादी अऩने ककसी दस
ू ये शभत्र को उसके ऩीछे रगा दे ता हेऄ औय
खद
ु ककसी औय के ऩीछे रग जाता हेऄ | इसे रड़की पॉयिडफ
कयना कहते हेऄ |
८.

जजद ही मे रड़के बोरी बारी हहॊद ू रडककमो को अऩने

प्माय के जार भें पसा रेते हेऄ | उनभे से कई तो शायीरयक
सम्प्फन्ध बी स्थावऩत कय रेते हेऄ | ज्मादातय घर्टनाओ भें

भुल्स्रभ रड़के िाईग्रा का इस्तेभार कयते हेऄ ताकक रड़ककमा

सॊतुष्र्ट यहे औय उनके खानऩान से आई नाऩुसकता छुऩी यहे |

117

९.

एक फाय रड़की से सम्प्फन्ध स्थावऩत हो गए तो रड़की

को घय से बागने के शरए भनाने भें इन्हें दे य नहीॊ रगती | कही
फाय मे ऩहरे बी भना रेते हेऄ ऩय ऐसा कभ ही होता हेऄ |
१०.

बगा के रड़का रड़की को शादी से ऩहरे इस्राभ कुफूर

कयने ऩय भजफयू कया रेता हेऄ इस्राभी तयीके से शादी के नाभ

ऩय औय रड़की पस जाती हेऄ जार भें क्मेआ की रड़की को िाऩस
जाने की फात तो हदभाग भें आती ही नहीॊ |
११.

रड़की को बगा के इस्राशभक शादी कय रे जाने के फाद

रड़की के साथ तनम्प्न भें से एक घर्टना होती हेऄ
क ) रड़का रड़की का ऩूयी तयह बोग कय के उसके शहय से

चाय ऩाच सौ ककरोभीर्टय दयू फेच दे ता हेऄ ककसी अधेड उम्र के
भुस्रभान आदभी को ल्जसको उसकी फदसूयती की िजह
से

औयत नहीॊ शभरी होती मा उसे फस औयतो का शौक होता हेऄ

| मातन रड़की को िैचमा व्रती के दर दर भें डार दे ता हेऄ |
ख ) रड़की को ऩता चरता हेऄ के रड़का ऩहरे से ही २-३
शाहदमा कये फैठा हेऄ | औय उसे बी नकाफ भें फॊद एक कभया
शभर जाता हेऄ |
घ ) रड़की की ककस्भत अच्छी होती हेऄ औय िो उसकी ऩहरी
फीिी ही तनकरती हेऄ | इस ऩारयल्स्थ भें रड़की नकाफ भें तो कैद
होती हेऄ ऩय उसे अऩने २-३ सौतनो का इन्तेजाय कयना ऩड़ता है
| औय रड़के की गुराभ फन कय यह जाती हेऄ क्मेआ की िो

118

इस्राभ कुफूर कय चुकी होती हेऄ औय इस्राभ भें औयत को
तराक का कोई अधधकाय नहीॊ होता |

नुकसान
१. एक हहॊद ू रड़की के बागने से कभ से कभ ८ हहन्दओ
की

हातन होती हेऄ |

२. जो रड़की बागती हेऄ िहा एक , ल्जसके साथ बागती हेऄ
उसके शरए कभ से कभ ४ फच्चे ऩैदा कयती हेऄ , अगय िहा
रड़की ना बागती औय ककसी हहॊद ू के साथ शादी कयती औय िहा
सभझदाय होता तो कभ से कभ ३ फच्चे ऩैदा कयता इस प्रकाय
१+४+३=८ हहन्दओ
का नक

ु सान

होता हेऄ |

३. अफ जया अनुभान रगाइए के ८ हहॊद ू अगरे ऩच्चीस सार भें
३ फच्चे बी ऩैदा कयते तो २४ औय िो अगरे ऩच्चीस सार भें
७२ इस प्रकाय सौ सार भें ४३२ हहन्दओ
का नक

ु सान होता
शसपफ एक हहॊद ू रड़की के जाने से |

४. िही एक भस्
ु रभान एक हहॊद ू रड़की बागने ऩय उस से ४

फच्चे ऩैदा कयता हेऄ िो ४ अगरे ऩचीस सार भें १६ फच्चे ऩैदा
कयते हेऄ िो १६ अगरे ऩचीस सार भें ६४ फच्चे ऩैदा कयते हेऄ इस
प्रकाय ५१२ भुसरभानेआ की िधृ ध होती हेऄ |

119

५. अफ जोडीमे जया ४३२ + ५१२ = ९४४ हहन्दओ
का

नक
ु सान सौ सार भें त्रफना ककसी तरिाय के जोय के औय कहने
को इस्राभ दतु नमा का सफसे तेजी से फढ़ने िारा भजहफ |

६. इन्र्टयनेर्ट ऩय उऩरब्ध आकडो के अनुसाय हय सार १ राख

से ऊऩय हहॊद ू रड़ककमा भल्ु स्रभ रडको के साथ बाग यही हेऄ तो
अफ जया गुना करयमे ९४४ * १००००० = ९४४००००० मातन नौ

कयोड़ चौिारीस राख का अॊतय फैठेगा शसपफ एक सार भें हहॊद ू
रड़ककमेआ के बागने के नुकसान ऩय अगरे सौ सारो भें | मे

आकड़ा फड़ा जरुय रगता होगा ऩय इसभें भत्ृ मु दय, नाऩस
ु कता

दय , िा अन्म घर्टी बी रगा रे तो बी मे अकडा कयोड़ेआ भें ही
यहे गा |

७. इस आकडे के अनुसाय अगय शसपफ २० सार भुल्स्रभ इसी

दय से रि जेहाद का अशबमान चराते यहे तो उनकी आफादी भें
ककतनी िधृ ध होगी इसका अनभ
ु ान आऩ खद
ु ही रगाइए मानी
आने िारे सभम भें हहन्दओ
का सुऩडा साफ हो जाएगा शसपफ

इस छोर्टे से रगाने िारे फड़े हधथमाय से | रड़ककमा दोनेआ

सभुदामेआ भें कभ हेऄ ऩय हहॊद ू आफादी ऩय हो यहे इस विशेर्ष

तकतनकी हभरे की िजह से हहॊद ू िधृ ध दय को नकायात्भक भें
जाने भें दे य नहीॊ रगेगी |

८. जो हहॊद ू ८०० सारो की जफयदस्त भाय कार्ट के फािजद
ू ८०

कयोड़ फचा हुआ था िो भात्र २० सार के तनयॊ तय एक दय के रि

120

जेहाद से अगरे सौ सारो भें रुप्त होने की कगाय ऩय ऩहुच
जाएगा | जैसे आज महूहदमो का हार हेऄ |

१. रड़की के ऩारन,ऩोर्षण शशऺा ऩय हहॊद ू भा-फाऩ ककतना खचफ
कयते हेऄ ऩय जफ हहन्दओ
को अऩनी कौभ को फढ़ाने का िक्त

आता हेऄ तो भल्ु स्रभ रड़के हहॊद ू रडककमो को रे उड़ते हेऄ | मे

तयीका भुसरभानेआ को खुद के फच्चे ऩैदा कय के उन्हें ऩार ऩास
के फड़ा कयने से बी सयर हेऄ , ऩका ऩकामा खाने का सयरतभ
तयीका हेऄ रि जेहाद |

फचाि
१. रड़ककमेआ को फचऩन से ही िैहदक धभफ के भर
ू बत
ू शसद्धाॊत
औय इस्राभ की कामफ तनतत सभझा दील्जए | मे कामफ आऩ

अऩने फच्चो को खाने के र्टे फर ऩय बी शसखा सकते हेऄ | फच्चो
को फार सत्माथफ प्रकाश औय ककशोयेआ को सत्माथफ प्रकाश ऩढ़ने
को अिचम दे |
२. ककसी बी प्रकाय से ककसी बी भल्ु स्रभ को घय के अॊदय भत
घुसने दे |

३. अगय कोई भल्ु स्रभ रड़का आऩकी रड़की के आसऩास पर्टक

यहा हेऄ तो फौयन कायिाही करयमे | महद खुद आऩ सभथफ नहीॊ तो
अऩने सिफप्रथभ अऩने ऺेत्र के रोगो की उसके फाद िजयॊ ग दर ,

121

विचि हहॊद ू ऩरयर्षद , याष्रीम स्िॊ सेिक सॊघ , आमफ सभाज , मा
अन्म ककसी बी हहॊद ू सॊगठन की भदद रे |

४. ऩुशरस से सहामता रेने भें बी ना चुके |

५. अऩनी रड़की से खुर के फात कये अगय उसका कोई हहॊद ू

प्रेभी हेऄ तो उसे घय ऩय फर
ु ा कय शभरे | इस फात से तनल्चचत हो
जाए के िो हहॊद ू हेऄ | व्मस्त रड़की ऩय भुल्स्रभ जेहादी जजदी
सपरता नहीॊ ऩा ऩाते |

६. अॊतय जातीम शादी को अफ भान्मता दे | मे दे खे के रड़के
का चरयत्र कैसा हेऄ औय िो कयता क्मा हेऄ ना की उसका उऩनाभ
| ककसी बी जाती का हहॊद ू एक भुसरभान से हजाय गुना फहे तय

हेऄ क्मेआ की उसके ऩूिज
फ ो ने अऩना शौमफ हदखा के अऩने धभां को
नहीॊ छोड़ा |

७. दहे ज ना रे, ना दे औय रड़की की जजद से जजद शादी कया
दे |
८. भुसरभानो का आधथफक फहहष्काय कये | औय अऩने ऺेत्र के
रडको को उनकी रड़ककमेआ से शादी कयने को प्रेरयत कये | मे

फदरे की बािना से नहीॊ फल्जक सुयऺा की बािना से कये | इस
से उस भल्ु स्रभ रड़की का बी उद्धाय होगा |

९. भुल्स्रभ रड़का हहॊद ू होने को बी तैमाय हो सकता हेऄ | ऩय
अक्सय ऐसे भाभरो ऩय बयोसा ना कये | इस्राभ भें काकपयो

मातन गैय भस
ु रभानेआ से झूठ फोरना जामज हेऄ इसे तककमा कहा

122

जाता हेऄ | रड़का शसपफ रड़की फसाने के शरए ऐसा नार्टक कय
सकता हेऄ इसशरए जोणखभ भत उठामे |
१०. अगय कोई भुल्स्रभ इस प्रकाय की घर्टना भें हहॊद ू भुल्स्रभ

एकता का हिारा दे तो उस से ऩतू छमेगा के क्मा िो अऩनी फहन
की शादी ककसी हहॊद ू से कया यहा हेऄ | हहॊद ू भल्ु स्रभ एकता शसपफ
हहॊद ू रड़ककमेआ की शादी भुल्स्रभ रड़को से शादी कयने से तो
नहीॊ आमेगी इसभें उन्हें बी फयाफयी का सहमोग दे ना होगा |

११. अगय रड़की बाग बी गई हेऄ तो उसे िाऩस राने भें सॊकोच
ना कये | इसभें कोई शभफ की फात नही फल्जक रड़की को िाऩस
राने से आऩ अऩनी गरती सुधायें गे | हहॊद ू सॊगठनो भें िा आमफ
सभाज के भाध्मभ से आऩको ऐसे फहुत से याष्र बक्त मुिा
शभर जाएॉगे जो उन रडककमो को स्िीकाय कयने को तैमाय हो
जाएॉगे |
१२. कभ से कभ ३ फच्चे अिचम ऩैदा कये औय मे जान रे की
रडककमा सभाज का आधाय हेऄ | उनसे ही कौभ आगे फढ़े गी
इसशरए भ्रण
ू हत्मा के णखराप आन्दोरन भें जागरूक यहे |

123

भस
ु रभान भोहम्प्भद के चरयत्र धचत्रण से क्मेआ डयते हेऄ ?

भोहम्भद का काटयमन फना तो ऩययी दनु नमा के भुसरभानैऄ ने अऩनी-२ जगहैऄ ऩय फरवा ककमा | दनु नमा को इनतनी

फुयी तयह से फदरने वारा व्मक्तत यहस्म फना हुआ हैं | कोई कुछ जानता ही नहीॊ उसके फाये भ | रस्श्न तो मे उठता
हैं के इसाई ईशा भसीह के नाटक भॊच ऩय दोहयाते हैं ताकक उनके अच्छे गुण अन्म रैऄग जान सके औय रे सके |
दहॊद य याभ रीरा यचाते हैं ताकक याभ के अच्छे कृत्मैऄ को ददभाग भ यख सके | अच्छाई की फुयाई ऩय जीत | ऩय

भोहम्भद के नाभ ऩय ऐसा तमा की उनका कोई धचर नहीॊ हो सकता | भक्ु स्रभ कहते हैं इस्राभ भ फत
ु ऩयस्ती

भना हैं इसमरए | फुत ऩयस्ती भना होने से धचरण का तमा रेना दे ना ? तमा काफा भॊददय (उनके मरमे भक्स्जद) की
तस्वीय यखना नहीॊ गरत हैं ऩय यखते हैं | तस्वीय यखने से उसकी फुत ऩयस्ती थोड़े हो जाती हैं फक्ल्क अऩने आदशम
के कृत्मैऄ की माद फनी यहती हैं | जैसे आमम सभाजी ऋद्धष दमानॊद की तस्वीय यखते हैं | दस
य या तकम मे दे सकते के
इस से उनका अऩभान होगा | भान-अऩभान तो जीद्धवत रोगो का होता हैं अगय मे बेद नहीॊ ऩता उन्ह तो फुत

ऩयस्ती बी नहीॊ ऩता | इसी मरए वे हजये अस्वाद को सयक्षऺत कये हुए हैं औय फत
ु ऩयस्ती के द्धवयोध भ होने का
ढैऄग कयते हैं |
वास्तद्धवक फात तो मे हैं के भोहम्भद का कोई चरयर ही नहीॊ था क्जसका धचरण ककमा जाए | तमा ददखाएॊगे
भुसरभान की कैसे भोहम्भद के दादा अफय भक्त्रफ काफा भॊददय का सयऺण कयते थे तीथम माबरमैऄ का रस्फॊध कयते थे
| ककस रस्काय भोहम्भद को फचऩन भ मभगॉ के दौये ऩड़ते थे | कैसे उसने अऩने से १५ वषम आमु भ फड़ी औय अयफ

की अभीय फडु डमा से शादी की | उस अभीय फडु डमा के भयते ही ककस रस्काय ५१ वषॉमा भोहम्भद ने ६ वषम की फच्ची

से शादी(भार्फी चाहयॉगा इस गॊदे कृत्म को भुक्स्रभ शादी कहते हैं) की | ककस रस्काय ९ वषम की होने ऩय उस फच्ची से
सम्बोग ककमा | अऩनी भय फोरे फेटे की फीवी से शादी की औय कैसे मबन्न मबन्न ३१ से ऊऩय औयते यखी | कैसे

भोहम्भद ने उभ ् ककपाम की वि
ृ नेरानी फनय पस्रह के हाथ ऩावो को २ उटो से फॊधवा के पड़वा ददमा | ऊट की चोयी

कयने वारे ८ रोगो के हाथ ऩाॉव कटवा दीमे | वो ऊट जो खुद भोहम्भद ने चुयाए थे | फनय कुइनैका, फनय नाददय, फनय
कुयै जा के रोगो ऩय ककतने अभानष
ु ी अत्माचाय ककमे | दननमा का सफसे ऩहरा इस्राभी आतॊकवादी भोहम्भद ही तो
था जो मे सफ दे खने ऩय सफ सभझ जाएगा | जो भोहम्भद को फचऩन से जानता था उसका चाचा क्जसने ना जाने
ककतनी फाय उसकी जान फचाई ऩय भयते दभ तक कबी कुयै शो का भजहफ नहीॊ छोड़ा औय इस्राभ नहीॊ स्वीकाय

तमैऄ की उसे ऩता था के उसका बतीजा ऩागर हैं | खुद आमशा ने हफ्सा के साथ मभर कय भोहम्भद को जेहय दे

ददमा कहते हैं भोहम्भद कपय एक फच्ची से शादी की मोजना फना यहा था | कपय राब तो आमेशा के फाऩ अफय फक्र

को मभरा ऩहरा खरीपा वही हुआ | ऩय फचा कोई नहीॊ खानदान भ ददमा जरने वारा कोई नहीॊ यहा | आमेशा फयु ी
तयह ़त्र कय दी गई | क्जसने कुयान मरखी उसे खद
ु भोहम्भद ने भयवा ददमा | खैय इतना शैताननमत जो बी

124
मरखेगा भये गा तो हैं ही | ऩयय ी दनु नमा आज इस्राभीकयण के खतये के तरे डगभगा यही हैं, फेकसयय भाये जा यहे हैं |
इन सफ का कायण भोहम्भद था जो कोई बी मे सफ दे ख रेगा उसे सभझने भ एक ऩर नहीॊ रगेगा |

ऩय भोहम्भद को तो ऐसा हौवा फना यखा हैं के उसके फाये भ तो फात कयनी ही नहीॊ | वो इसमरए तमैऄ की खुद

भोहम्भद ने उन सफको फुयी तयह ़त्र कयवा ददमा क्जसने बी उसके ऩैगम्फय होने का रस्भाण भाॉगा | खुद भोहम्भद
ने ना जाने ककतनी फाय अऩनी फात से ऩरटा हैं इसका रस्भाण कुयान की द्धवऩयीत फाते हैं | इसी मरए भुसरभान
भोहम्भद को छुऩा के यखते हैं | भोहम्भद ने जन्नत भ खद
ु की मसपारयश का ऩेच बी पसा यखा हैं ताकक कोई

उसके गरत काभो ऩय ऊॉगरी ना उठाए | ऩय खुद क्जनको बी मे फाते ऩता चरती हैं उनका भानवीम ऩऺ इस्राभ

छुडवा दे ता हैं | ऩय जो वाकई शैतान हैं वो सही जगह हैं तमैऄ के दनु नमा के साये गरत काभ इस्राभ भ जामज हैं

अगय वो गैय भुसरभान के साथ ककमे जाए | तो कोई तमैऄ रयटने, फरात्काय, हत्मा, झयठ फोरने की इजाजत छोड़ेगा
अगय वह अऩयाधी ऩयवतॉ का हैं |

एक फात औय के भोहम्भद दे खने भ फदसयय त था हदीसो की भाने तो |क्जस व्मक्तत ने उसकी तस्वीय फने भोहम्भद

ने उसे दे श ननकारा दे ददमा | औयते उस से नपयत कयती थी | शामद इसी मरए वो औयतो का फरात्काय कयता था
| फात ददखने की नहीॊ हैं फात तो कभो की हैं जो इतने गरत थे की उनको छुऩा के यखने भ ही इस्राभ की बराई
हैं |

अफ हभाये भुक्स्रभ बाई भुझे गारी दे सकते हैं | तकम की उम्भीद तो उनसे कयना फेकाय हैं | ऩय उनसे कहयॉगा के
भेयी कही फातो का रस्भाण आऩ महाॉ से दे ख सकते दहॊदी भ बी उऩरब्ध हैं |

125
हभें हहॊद ू नहीॊ, काॊग्रेसी कहहमे
तमा आऩ रोगो ने कबी उन सच्चे काॊग्रेमसमो का द्ु ख सभझा, क्जन्ह आऩ दहॊद य होने ही दहु ाई दे ने रग
जाते हैं | आज इस रेख भ हभ उन्ही कैऄग्रेमसमो का द्ु ख रस्दमशमत कयगे, जफ आऩ रैऄग उन्ह दहॊद य होने
की गारी दे ते हैं | उनकी व्मथा को फमान कयगे औय उनकी ऩीड़ा को सभझने के मरए इस रेख बय के
मरए भैं काॊग्रेसी फन यहा हय | अत् “हभ काॊग्रेसी” शब्द का रस्मोग करूॉगा, भझ
म ामरक काॊग्रेसी भत
ु े ऩण
य क
सभखझमेगा | भझ
ु भे एक काॊग्रेसी फनने क्जतनी मोग्मता कहा, इतनी मोग्मता के रीमे तो भझ
ु े कई जन्भो
के ऩण्
ु म जोड़ने ऩड़गे | चरीमे कैऄग्रेसी ऩीड़ा का व्माख्मान कयना रस्ायॊ ब कयते हैं |
स्थाऩना : वैसे तो कैऄग्रेस की स्थाऩना भहान भहायाज जमचॊद्र औय उसके सभथमकैऄ ने ८०० वषम ऩव
य म ही
कय दी थी ऩय आज के बायत के रीमे हभ भॊच एक भहान अग्रेज ए.ओ.ह्मभ
य ने ददमा था सन १८८५
काॊग्रेस की स्थाऩना कय के |
विशेर्षता : हभायी द्धवशेषता मे हैं के हभ क्जस सदहष्ट्णु सभाज भ ऩोद्धषत होते हैं उसी से घात कयते हैं |
मोगदान : हभने दे श को कई फड़े नेता ददए हैं ऩय भहात्भा गाॊधी से फड़ा नेता नहीॊ दे ऩाए | आदयणीम
जवाहयरार नेहरु जी ने रस्मास जरुय ककमा ऩय वो भहात्भा जी की तयह दे श का द्धवबाजन नहीॊ कया ऩाए
फस दस
य ये द्धवबाजन मा बायत के इस्राभीकयण का फीज ही डार ऩाए |
इततहास : आऩ रोगो को फाऩय माद तो हैं ना | हाॊ हभाये भहात्भा गाॊधी क्जन्हैऄने अकेरे दभ ऩय बायत को
स्वाधीन कयामा | द्धवश्वास नहीॊ होता तमैऄ तमा आऩ नहीॊ गाते दे दी हभ आजादी बफना खडग बफना ढार
साफयभती के सॊत तन
ु े कय ददमा कभार | वे ही थे जनक हभाये याष्ट्र के, वे थे ऩयु े दे श के फाऩ तबी तो
याष्ट्र द्धऩता कहते हैं |
अगय फाऩय ना होते तो हभ हभाये प्माये ऩडोसी बी ना मभरते ऩाककस्तान औय ऩव
य म ऩाककस्तान (अफ
फॊगरादे श) औय इतने अच्छे ऩडोमसमो के बफना हभाये जवानैऄ को शहादत के अवसय बी ना मभरते | ना
ही हभ ४ मध
ु ो को झेर कय तकननकी तयतकी कयने के रीमे सोच ऩाते | कपय हभाये चाचा नेहरु बी तो
काॊग्रेसी थे, चाचा इसमरए तमैऄ की मे फच्चो से फड़ा प्माय कयते थे | १६ सार की फक्च्चमो से तो कुछ
ज्मादा ही प्माय कयते थे | आज कश्भीय भ हभाये जवान इन्ही की वजह से तो वाददमो का वहा की ठण्ड
का आनॊद रे यहे हैं | इभयजसी जैसी भहान चीज दे ने वारी नेहरु जी की सऩ
य र
ु ी इॊददया जी बी तो कैऄग्रेसी
ही थी | औय ददल्री की सडको को मसखैऄ के खयन से रार कयने वारे दे श को सफसे मव
ु ा रस्धानभॊरी
याजीव गाॉधी काॊग्रेसी ही तो थे | ऩता नहीॊ इॊददया जी औय याजीव जी को द्धवश्व दहॊद य ऩरयषद का सदस्म

126
ककसने फना ददमा जो आऩ रैऄग मसख दहॊद य दॊ गे कहते हैं | अये काॊग्रेस-मसख दॊ गे कदहमे दहॊद य कहे के गारी
भत दीक्जए हभ |
तयक्की : हभने ना केवर अऩने स्तय ऩय उन्ननत की हैं याष्ट्र को बी आगे फढ़ामा हैं | हभने अऩने
चारयबरक स्तय रस् तरयतकी की हैं | ऩहरे हभाये ऩरु
ु ष रस्धान भॊरी चाचा जी को कुवायी रडककमो का शौक
था ऩय उनकी फेटी ने तो आदमभमो का शौक कय के ददखामा | उनके रड़के ने तो औय बी कभार ककमा
एक कैथोमरक फहु दे श के रीमे राए ऩय उसको दहॊद य नहीॊ ककमा खद
ु कैथोमरक हो गए | कपय तो
मभरीजुरी की जगह शि
ु ता आ गमी हभ काॊग्रेमसमो के याजवॊश भ अफ हभ उसी भागम ऩय आगे क्जसऩय
चर कय अॊग्रेजो ने हभ ऩय शाशन ककमा था | हभ ऩय अफ कारे अॊग्रेजो का धब्फा नहीॊ रगेगा अफ हभायी
बी चभड़ी गोयी हो गई |
कपय मही तमैऄ इॊददया गाॉधी ने तो सॊमामसमो ऩय भशीनगन चरवाई थी हभायी भहानतभ नेता सोननमा
गाॉधी जी ने तो सॊमामसमो के भय भ गो भॊश ठुसवा ददमा | तो तयतकी हुई के नहीॊ | नातसरफाड़ी से जो
शरू
ु हुआ उसे हभही काॊग्रमे समो

ने दे श के २०० क्जरो तक ऩहुचवामा | ऩव
य ोत्तय बायत के छोटे -छोटे

याज्मैऄ भ टुकड़े कय याज्म नाभ से चरवाने वारे हभ ही तो हैं | बायतीम सेना वयना ननमॊरण खो फैठती
औय वहा बी दहॊदी औय दहॊद य र्फैर जाते | हभ ऐसा कैसे होने दे ते अफ तो उन रोगो के ऩास अऩनी
सयकाय हैं अऩने नोट हैं हभायी सेना को तो हभने घस
ु ने का अधधकाय ही नहीॊ ददमा | मे सफ हभने
रोकतॊर की भजफत
य ी के मरए ककमा हैं, वयना अगय सेना भजफत
य हो जाती तो रोकतॊर कभजोय हो जाता
ना |
इततहास बी फदरा : रोगो के ददरो से याभ कृष्ट्ण ननकरने का काभ तो हभ १९४७ के तयु ॊ त फाद से ही
तेजी से कयने रग गए थे ऩयन्तु इनतहास से याभ कृष्ट्ण का नाभ मभटा दे ने वारे हभ काॊग्रेसी ही हैं | तो
कौन कहता हैं इनतहास नहीॊ फदरा जा सकता (?) | हभ कुछ बी कय सकते हैं हभ ऩय ककसी का
ननमॊरण नहीॊ हभ इस दे श के यहनभ
ु ा इस दे श का भामरक काॊग्रेसी हैं | नाथयय ाभ गोडसे को तयु ॊ त र्फासी दी
गई ऩय कश्भीय के बाइ अपजार गरु
ु की हभ ११ सार से यऺा कय यहे हैं खद
ु हभाये असरी सॊस्थाऩक
जम चॊद्र जी होते तो बी ऐसा नहीॊ कय ऩाते | अये हभ तो उस एनकाउॊ टय को बी पजॉ फोर कय आसय
फहा सकते हैं क्जसभे ऩमु रसवारे बी भाये गए | ऩय हभाये कीभती आसओ
को दहॊद य नाभ वारे ऩमु रसवारैऄ

के रीए भत सभझना | जो गोये कयने की दहम्भत ना कय सके वो हभने दहम्भत ददखाई | ककताफो से
गामफ याभ के नाभ के रस्भाण बी तो हभ ही मभटाने थे इसमरए हभने याभ सेतु क्जसे यावण बी ना तोड़
सका को तोड़ने का रस्मास ककमा | हा कुछ पस गमा तकननकी भाभरा ऩय ककतने ददन फच ऩाओगे
दहन्दओ
ु हभसे | जफ रस्माग को अल्राहफाद , अमोध्मा को पैजाफाद हभसे ऩव
य म के शासक कय सकते हैं तो
तमा हभ डयफे हुए ऩर
ु को हभेशा के री नहीॊ डयफा सकते |

127
हभने बायत भ क्रोस वारे मसतके चराए | गोये बी सोच नहीॊ ऩाए ईसाइमत के रस्चाय का ऐसा तयीका |
विचिविख्मात : हभने द्धवदे शो भ धन जभा कयने का इतना कीनतमभान स्थाद्धऩत ककमा के हभाये दे श
बायतवषम जी नहीॊ वो हभाया दे श नहीॊ इॊडडमा का नाभ द्धवदे शो भ हो गमा के हभ काॊग्रेसी ककतने अभीय हैं
जो इस दे श के यहनभ
ु ा हैं | औय आऩ दहन्दओ
ु की औकात ही नहीॊ हैं के हभ हाथ रगा सके तमैऄ की
आऩ ही इतने फेवकयप हैं के हभ महाॉ तक ऩहुचाते हैं | हभायी भैडभ जी को आऩ ही रोगो ने ४ राख
वोटो से क्जतामा मे हैं रोकतॊर की ताकत |
तनष्कर्षफ : मु तो हभ तायीप कयते ही जाए ऩय सभम ककसके ऩास हैं | हभ चाऩरस
य ी औय भ्रष्ट्टाचाय दोनैऄ
कयना होता हैं इसमरए सीधे से कुछ फाते फता दे ता हय | हभ दहॊद य नहीॊ हभायी कौभ काॊग्रेसी हैं दहॊद य वो
होता हैं क्जसऩय शासन ककमा जाए काॊग्रेसी वो होता हैं जो भख
ु म दहन्दओ
ु ऩय शासन कये | हभ जो कहते
हैं वो जनता भानती हैं ऩरकाय भानते हैं दनु नमा भानती हैं | अफ इस दे श का बद्धवष्ट्म भैडभ जी के सऩ
ु र

के हाथ भ हैं औय मे ऐसे ही चरेगा जफ तक की हभ इस दे श से महाॉ की सॊस्कृनत महाॉ की सभ्मता को
मभटा ना दे | एक ददन मे दे श आधा इसाई औय आधा इस्राभ के झॊडे के नीचे आ ही जाएगा | तमैऄ की
दहन्दओ
ु को तो हभ साॊरस्दानमक कह राने के डय से ऩेशाफ छुट जाती हैं | औय ऐसी घदटमा कौभ को हक
बी तमा हैं शासन कयने का, सॊस्कृनत, इनतहास का नाभ रेने का | दहॊद य फस मे कह सकते हैं के सफ रैऄग
एक साभान हैं दस
य यैऄ के ग्रॊथो भ झाकना नहीॊ चादहए हारा के मे अऩने ग्रॊथो भ बी नहीॊ झाकते | खैय
छोडडमे हभाये दहॊदी भ नाभ होने से हभ दहॊद य सभझ कय दहॊदए
ु कह के गारी भत दीक्जएगा | हभायी कौभ
ही अरग हैं | हभ शासक वगम हैं हभ गर
ु ाभी कयने वारे दहॊद य नहीॊ | दहन्दओ
ु को हभ अऩनी ऩाॉव के जत
ु े
के नीचे सभझते हैं | सभझे आऩ रैऄग

128

कृऩमा जेहाद भत करयमे... |

भेये प्माये भुक्स्रभ बाइमो, ,
मे

रेख आऩको अऩना सभझ के मरख यहा हय | आऩ हभाये बफछडे हुए बाई हैं, इसभ कोई शक
नहीॊ | सभम हारात ने हभे आऩ से दयय कय ददमा ऩय आज कपय हभाये एक होने का सभम आ
गमा हैं | एक वतत था जफ आऩके ऩयवज
म ो को इस्राभी हुकयभत भ माॉ तो क्जजमा कय ना चक
य ा
ऩाने मा गदम न फचाने के मरए भुस्रभान होना ऩड़ा था | ऩय आज हारात फदर चक
ु े हैं , आगे

औय बी फदरगे | आऩ सबी जानते हैं के दहन्दस्
ु थान ऩय फड़े जेहाद की तमायी चर यही हैं | भेया
मे रेख उसी सम्फन्ध भ हैं | आऩ इनतहास उठा के दे ख रे दहन्दस्
ु थान भ जेहाद हभेशा

नाकाभमाफ हुआ हैं | औय अफ अगय बायत भ कपय जेहाद का रस्मास हुआ तो ननक्श्चत तौय ऩय
मह अॊनतभ द्धवनाशकायी रस्मास होगा, भक्ु स्रभ औय दहॊद य दोनैऄ सभद
ु ामैऄ के मरए | ऩय इस फाय

भक्ु स्रभ बाइमो को अधधक नत
ु सान होगा तमैऄ की आज से ऩहरे दहॊद य इतना ताकतवय कबी नहीॊ
हुआ था | छठी शताब्दी से फायहवी शताब्दी औय फायहवी शताब्दी से सरहवी शताब्दी तक का
सभम अत्माधधक यतत यॊ क्जत यहा ऩय भुक्स्रभ जो मसपम कुछ रस्नतशत ही थे इस मरए फच ऩाए

तमैऄ की दहॊद य अऩने बफछडे हुए बाइमो को वाऩस नहीॊ रेते थे |
सन ् अठायहा सौ के फाद तो हभायी सीभाए वाऩस अपगाननस्तान तक ऩहुच गमी थी,
भहायाजा यणजीत मसॊह औय वीय हयी मसॊह नरवा के रस्मासैऄ से | इस्राभ को फभुक्श्कर शरू
ु आती
सपरता मभर ऩाई ऩैय जभाने के मरए तमैऄ की महाॉ के वीय ऺबरमैऄ ने शुरू भ इस्राभ को बी
एक ईश्वयीम सम्रस्दाम भाना | ऩय आज महाॉ के ऺबरम इस्राभ की एक-एक फात जानते हैं

भुक्स्रभो की रस्मोग की हुई मा की जा सकने वारी हय यणनीनत से वककप हैं | बायत के दहॊद य ही
तमैऄ इस्राभ के फाये भ ऩयय ा द्धवश्व अफ जान यहा हैं | इस्राभ की उत्ऩक्त्त, उसके शुरूआती
इनतहास से वतमभान इनतहास, भान्मतामे, यीती रयवाज, कुयान हदीस रोग सफ जान यहे हैं | सयचना
क्राॊनत के फाद तो रोगो भ जागरूकता दय फढ गमी हैं | खद
ु उन भुक्स्रभ बाईमो की सख्मा भ
बी इजापा हुआ हैं क्जन्हैऄने इस्राभ को जानना चारय ककमा दनु नमा के रगामे हुए आऺेऩैऄ को
जानकाय, उन्हैऄने ऩक्ु ष्ट्ट कयने के फाद औय सॊतोषरस्द उत्तय ना मभरने ऩय मा तो इस्राभ छोड

ददमा मा छोड़ने का भन फना मरमा | अफ्रीका भ फड़े स्तय ऩय इसाई मभशनयी धभामन्तयण कया
यही हैं तो इस्राभी दे शो भ इन्टयनेट के भाध्मभ से इस्राभ की जड़े दहल्री हुमी हैं | इस्राभी
दे शो भ तो इस्राभ ऩय खर
ु ी चचाम कयने वारी वेफसाइट रस्नतफॊधधत कय दी जाती हैं ऩय गैय-

इस्राभी दे शो भ तो भुसरभानैऄ तक इस्राभी ककताफो के आदे शो का कच्चा-धचठा ऩहुच ही यहा हैं
| बायत भ बी शुद्धि अमबमान चारय हैं |

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ऩय इस्राभ के स्वाबाव को जानते हुए शाॊनत को कामभ यखने के मरए उन शुद्धिमो का रस्चाय
नहीॊ ककमा जाता | आमम सभाज इन शुद्धिमो भ रस्भुख मोगदान कयता हैं | कपय उन भानमसक
शुद्धिमो का तमा जो आमम द्धवद्सवानैऄ की वेफसाईटस कय यही हैं |

उधय आऩ रोगो का भनोफर फढ़ाने के मरए भौरद्धवमो के रस्मास चरते यहते हैं की हभने

इतने कन्वटम ककमे, उतने कन्वटम ककमे ऩय वास्तद्धवकता कुछ औय ही होती हैं | जफ जभमन

द्सवतीम द्धवश्व मुि भ अॊग्रेजो को हयाते थे तो इॊग्रैंड के अखफाय इॊग्रैंड जीत यहा हैं इस रस्काय

झठ
य मरख कय भनोफर फढ़ाते थे | वही हार आज इस्राभ का हैं | इॊग्रैंड मि
ु जीता ऩय झठ
य की
फदौरत नहीॊ फक्ल्क जभांस के भक
ु ाफरे फेहतय होने की वजह से | आऩ खद
ु दे खखमे इस्राभी

मशऺाओ ने आऩको तमा ददमा ? अधध