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21 Sadi Ka Samvidhan Hamara Yug Nirman Sat Sankalp

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इककी सवी सदी का सं ि वधा न - हमा रा यु ग ि नमा रण सतसं कलप

*
ले खकः
पं ० शी रा म °मा र ¹¤ा यर

*
7का°क
यु ग िनमारण यî«ना 7े स
गाय¬ी dपिम, म°ुरा


¹नु4मिणका

º. यु ग िनमारण िम°न का °î9णा-प¬- ;
×. हम ,°वर कî सवर ¤यापी, ·यायकारी मानकर ........ ¿
;. °रीर कî ¬गवान¸ का मंिदर समUकर .................. º×
×. मन कî कु िव¤ारî ¹र दु ¬ारवना¹ं से ................. º¿
'. इî·¢य संयम, ¹°र संयम, समय संयम ................. ×;
). ¹पने ¹पकî समा« का (क ¹ि¬¬ ¹ंग ........... ׿
u. मयारदा¹ं कî पालगे, व«र ना¹ं से ¤¤ गे .................. ;;
¿. समUदारी, ,मानदारी, î«-मेदारी ¹र ...................... ׺
°. ¤ारî ¹र मधुरdा, ¹व¤Fdा, सादगी ........................ ×)
º०. ¹नीिd से 7ाP स9लdा की ¹पे÷ा ...................... '×
ºº. मनु'य के म¸लयांकन की कसî°ी ........................... )०
º×. द¸ सरî के सा° वह ¤यवहार नही कर गे .................... );
º;. नर- नारी पर¹पर पिव¬ ¸îP रखगे )u
º×. संसार म सत7वîVयî के पु7य 7सार ........................ uº
º'. पर-परा¹ं की dुलना म िववेक कî महvव दगे u×
º). सv«नî कî सं गिõd करने, ¹नीिd से लîहा ................ ¿०
ºu. राPीय (कdा (वं समdा के 7िd ................. ¿×
º¿. मनु'य ¹पने ¬ा¹य का िनमार dा ¹प ह................... °º
º°. हम ¤दलगे, यु ग ¤दलेगा, हम सुधर गे ................. °u
×०. ¹पना म¸लयांकन ¬ी करdे रह
º०;
׺. dî ि9र हम कया करना ¤ािह(
º०u

यु ग ि नमा रण ि म°न का °î 9णा - प¬
यु ग िनमारण î«से लेकर गाय¬ी पîरवार ¹पनी िन8ा ¹र dतपरdाप¸वर क ¹¹सर हî रहा ह, ¨सका ¤ी« सतसंकलप ह ¹
¨सी ¹धार पर हमारी सारी िव¤ारणा, यî«ना, गिdिवîधया (वं कायर 4म सं¤ाîलd हîdे ह, इसे ¹पना °î9णा- प¬ ¬ी कहा
«ा सकdा ह ¹ हम म से 7तयेक कî (क द िनक धािमर क क तय की dरह इसे िनतय 7ाdःकाल प{ना ¤ािह( ¹र साम¸िहक °ु¬
¹वसरî पर (क ¤यî+ ¨¤¤ारण कर ¹र °े9 लîगî कî ¨से दु हराने की ° ली से प{ा «ाना ¤ािह(¹
संकलप की °î+ ¹पार ह ¹ यह िव°ाल 7Hा7¬ परमातमा के (क Fî°े संकलप का ही 7िd9ल ह ¹ परमातमा म इ¤Fा
‘ ’ ¨õी (कî¯हं ¤ह ¹याम म ¹के ला ह¸- ¤ह d हî «ा¬ , ¨स संकलप के 9ल¹व¹प dीन गुण, पं ¤dvव ¨प«े ¹र सारा संसार
¤नकर d यार हî गया¹ मनु'य के सं कलप ¤ारा इस ¬¤÷- खा¤÷ दु िनया कî (सा सु¤यवî¹°d ¹प िमला ह ¹ यिद (सी
¹कां÷ा न «गी हîdी, ¹व°यकdा ¹नु¬व न हîdी dî कदाि¤d¸ मानव 7ाणी ¬ी ¹·य व·य प°ु¹ं की ¬ािd ¹पनी मîd के
िदन प¸रे कर रहा हîdा¹
इ¤Fा «¤ ¤ु î| ¤ारा पîर'क d हîकर ¸{ िन°¤य का ¹प धारण कर लेdी ह, d¤ वह संकलप कहलाdी ह ¹ मन का
के ·¢ीकरण «¤ िकसी संकलप पर हî «ाdा ह , dî ¨सकी प¸िdर म िव°े9 किõना, नही रहdी¹ मन की साम°यर ¹पार ह , dî
स9लdा के ¨पकरण ¹नायास ही «ु°dे ¤ले «ाdे ह ¹ ¤ुरे संकलपî की प¸िdर के îल( ¬ी «¤ साधन ¤न «ाdे ह , dî
सतसंकलपî के ¤ारे म dî कहना ही कया ह ? धमर ¹र सं¹क िd कî «î िव°ाल ¬वन मानव «ािd के îसर पर F¬Fाया की
dरह मद ह, ¨सका कारण +ि9यî का सतसंकलप ही ह ¹ संकलप इस िव°व की स¤से 7¤ं¬ °î+ ह ¹ िवUान की °îध ¤ारा
¹गिणd 7ाक िdक °î+यî पर िव«य 7ाP करके व°वdî ¤ना लेने का शेय मानव की सं कलप °î+ कî ही ह ¹ ि°÷ा,
ि¤िकतसा, ि°लप, ¨Uîग, सािहतय, कला, संगीd ¹िद िविवध िद°ा¹ं म «î 7गिd ह , ¹« िदखा, प÷dी ह , ¨सके म¸ल म
मानव का संकलप ही सî¬िहd ह , इसे 7तय÷ कलपव÷ कह सकdे ह ¹ ¹कां÷ा कî म¸dर ¹प देने के îल( «¤ मनु 'य िकसी
िद°ा िव°े9 म ¹¹सर हîने के îल( ¸{ िन°¤य कर लेdा ह dî ¨सकी स9लdा म संदेह नही रह «ाdा¹
¹« 7तयेक िव¤ार°ील ¤यî+ यह ¹नु¬व करdा ह िक मानवीय ¤े dना म वे दु गु र ण पयारP मा¬ा म ¤{ ¤ले ह ,
î«नके कारण ¹°ाî·d ¹र ¹¤यव¹°ा Fा, रहdी ह ¹ इस î¹°िd म पîरवdर न की ¹व°यकdा ¹िनवायर ¹प से 7dीd हîdी
ह, पर यह कायर के वल ¹कां÷ा मा¬ से प¸णर न हî सके गा, इसके îल( (क सुिनî°¤d िद°ा िनधारîरd करनी हîगी ¹र ¨सके
îल( सि4य ¹प से संगिõd कदम ¤{ाने हîगे¹ इसके ि¤ना हमारी ¤ाहना (क कलपना मा¬ ¤नी रहेगी¹ यु ग िनमार ण सतसंकलप
¨सी िद°ा म (क सुिनî°¤d कदम ह ¹ इस °î9णाप¬ म स¬ी ¬ावना( धमर ¹र °ा+ की ¹द°र परं परा के ¹नु¹प (क
¤यवî¹°d °ंग से सरल ¬ा9ा म संि÷P °·दî म रख दी ग, ¹र ि¤ंdन कर d°ा यह िन°¤य कर िक हम ¹पना «ीवन इसी
°ा ¤े म °ालना ह ¹ द¸ सरî कî ¨पदे° करने की ¹पे÷ा इस संकलप प¬ म ¹तम- िनमार ण पर सारा °यान क ि¢d िकया गया ह ¹
द¸ सरî कî कु F करने के îल( कहने का स¤से 7¬ाव°ाली dरीका (क ही ह िक हम व सा करने लग¹ ¹पना िनमारण ही यु ग
िनमार ण का ¹तयंd महvवप¸णर कदम हî सकdा ह ¹ ¤¸ द- ¤¸ द «ल के िमलने से ही समु¢ ¤ना ह ¹ (क- (क ¹¤Fा मनु'य िमलकर
ही ¹¤Fा समा« ¤नेगा¹ ¤यî+ िनमारण का ¤यापक ¹व¹प ही यु ग िनमारण के ¹प म पîरलि÷d हîगा¹
7¹dुd यु ग िनमार ण सतसंकलप की ¬ावना¹ं का ¹पPीकरण ¹र िववे ¤न पाõक इसी पु¹dक के ¹गले लेखî म
प{ गे¹ इस ¬ावना¹ं कî गहरा, से ¹पने ¹ंdःकरणî म «¤ हम «ान लगे , dî ¨सका साम¸िहक ¹व¹प (क यु ग ¹कां÷ा के
¹प म 7¹dुd हîगा ¹र ¨सकी प¸िdर के îल( ¹नेक देवdा, ¹नेक महामानव, नर dन म नारायण ¹प धारण करके 7ग° हî
प÷गे¹ यु ग पîरवdर न के îल( î«स ¹वdार की ¹व°यकdा ह, वह पहले ¹कां÷ा के ¹प म ही ¹वdîरd हîगा¹ इसी ¹वdार
का स¸°म ¹व¹प यह यु ग िनमारण सतसंकलप ह , इसके महvव का म¸लयांकन हम गं¬ीरdाप¸वर क ही करना ¤ािह(¹ यु ग िनमारण
— सतसंकलप का 7ा¹प िन-न 7कार ह
हमा रा यु ग ि नमा रण सतसं कलप
— हम ,°वर कî सवर ¤यापी, ·यायकारी मानकर ¨सके ¹नु°ासन कî ¹पने «ीवन म ¨dार गे¹
— °रीर कî ¬गवान¸ का मंिदर समUकर ¹तम- संयम ¹र िनयिमddा ¤ारा ¹रî¹य की र÷ा कर गे¹
— मन कî कु िव¤ारî ¹र दु ¬ारवना¹ं से ¤¤ा( रखने के îल( ¹वा°याय (वं सतसं ग की ¤यव¹°ा रख रहगे¹
— इं ि¢य संयम, ¹°र संयम, समय संयम ¹र िव¤ार संयम का सdd ¹+यास कर गे¹
— ¹पने ¹पकî समा« का (क ¹ि¬¬ ¹ंग मानगे ¹र स¤के िहd म ¹पना िहd समUगे¹
— मयारदा¹ं कî पालगे, व«र ना¹ं से ¤¤गे, नागîरक कdर ¤यî का पालन कर गे ¹र समा«िन8 ¤ने रहगे¹
—समUदारी, ,मानदारी, î«-मेदारी ¹र ¤हादु री कî «ीवन का (क ¹िवî¤F¬ ¹ं ग मानगे¹
— ¤ारî ¹र मधुरdा, ¹व¤Fdा, सादगी (वं सv«नdा का वाdावरण ¨तप¬ कर गे¹
— ¹नीिd से 7ाP स9लdा की ¹पे÷ा नीिd पर ¤लdे ह ( ¹स9लdा कî ि°रîधायर कर गे¹
— मनु'य के म¸लयांकन की कसî°ी ¨सकी स9लdा¹ं, यî¹यdा¹ं (वं िव¬¸िdयî कî नही, ¨सके सारî ¹र
सतकमì

कî मानगे¹
— द¸ सरî के सा° वह ¤यवहार न कर गे, «î हम ¹पने îल( पसंद नही¹
—नर- नारी पर¹पर पिव¬ ¸îP रखगे¹
— संसार म सत7वîVयî के पु 7य 7सार के îल( ¹पने समय, 7¬ाव, Uान, पु¢9ा°र (वं धन का (क ¹ं° िनयिमd
¹प से लगाdे रहगे¹
— पर-परा¹ं की dुलना म िववे क कî महvव दगे¹
— सv«नî कî संगिõd करने, ¹नीिd से लîहा लेने ¹र नव- स«न की गिdिवîधयî म प¸ री ¢ि¤ लगे¹
— राPीय (कdा (वं समdा के 7िd िन8ावान¸ रहगे¹ «ािd, îलं ग, ¬ा9ा, 7ांd, स-7दाय ¹िद के कारण पर¹पर कî,
¬ेद¬ाव न ¤रdगे¹
— मनु'य ¹पने ¬ा¹य का िनमारdा ¹प ह , इस िव°वास के ¹धार पर हमारी मा·यdा ह िक हम ¨तक P ¤नगे ¹र
द¸ सरî कî शे8 ¤ना(गे, dî यु ग ¹व°य ¤दलेगा¹
—‘‘ हम ¤दलगे- ’’ यु ग ¤दलेगा , ‘‘ हम सुधर गे- ’’ यु ग सुधरे गा इस d°य पर हमारा पîरप¸णर िव°वास ह ¹
इस यु ग िनमारण सतसंकलप का पाõ िनयिमd द िनक ¨पासना के पहले िनतय 7िd िकया «ाना ¤ािह(¹ पाõ धीमी
गिd से समUdे ह (, िव¤ार करdे ह ( िकया «ाना ¤ािह(¹ इसके 7तयेक स¸¬ पर यु ग ¤ेdना सािहतय की पु ¹dक सं•या '× से
)° dक म िव¹dd िववे ¤ना दी ग, ह ¹ प¸रे सतसंकलप का (क पाõ कर लेने के ¤ाद मन ¤ाहे स¸¬ की िव¹dd िववे ¤ना का
‘‘ ¹वा°याय ¹पने द िनक ¹वा°याय का ¹ं ग ¤ना लेना ¤ािह(¹ इसी सीरी« की पु¹dक सं•या u० ¹पना म¸लयांकन ¬ी करdे
’’ रह का ¹वा°याय क¬ी- क¬ी करdे रहना ¤ािह( dािक ¹तम- िनमारण की िद°ा म हम िकdना ¹गे ¤{ , इसका म¸लयांकन
हîdा रहdा ह ¹ यह ×० पुî¹dका¹ं ( 'º से u०) का स° मनु'य कî देव मानव ¤नाने म स÷म ह, ¹व°यकdा ह श|ाप¸वर क
¹वा°याय, ि¤ंdन, मनन (वं ¹नु°ासन की¹

(क ¤¤¤े कî दे° का नेdा ¤नने की ¤÷ी ¬ारी इ¤Fा °ी, पर क से ¤ना «ा(? यह ¤ाd समU म नही ¹dी °ी¹ (क
िदन € कîलन की «ीवनी प{dे समय ¨सने Uाना«र न की महVा समUी¹ ¤¤¤ा ¨स िदन से ¹वा°याय म (क मन से «ु°
गया ¹र ¹पने मî¹d'क म Uान का िव°ाल ¬7¬ार (क¬ कर îलया¹ यही ल÷का (क िदन ¹«•ं°ाइना का राPपिd ¤ना,
नाम °ा- ¬îिमं गî 9ाî¹°नî सारिमं°î¹
हम ,°वर कî सवर ¤या पी , ·या यका री मा नकर ¨सके ¹नु°ा सन कî ¹पने «ी वन म ¨dा र गे ¹

«ीव कî परमे°वर का ¹ं° कहा गया ह ¹ î«स 7कार «ल के 7पाd म से पानी के ¹नेक Fî°े - Fî°े Uरने ¨तप¬ हîdे
¹र िवलय हîdे ह, ¨सी 7कार िवि¬¬ «ीवधारी परमातमा म से ¨तप¬ हîकर ¨सी म लय हîdे रहdे ह ¹ ¹î¹dकdा वह
°ु| ¸îP ह î«सके ¹धार पर मनु'य ¹पने «ीवन की रीिd- ‘‘ नीिd का 4म õीक 7कार ¤ना सकने म सम°र हîdा ह ¹ हम
,°वर के पु¬ ह, महान¸ महVा, °î+ (वं साम°यर के पुं« ह ¹ ¹पने िपdा के ¨Vराîधकार म हम वह 7िd¬ा ¨पल·ध ह ,
î«ससे ¹पने सं¤ंîधd «गd का, समा« (वं पîरवार का सु¤यवî¹°d सं¤ालन कर सक ¹ ,°वर की िव°े9 7स¬dा, ¹नुकं पा
(वं सहायdा 7ाP करने के îल( हम परमे°वर का ¹Uानु वdî धमर परायण हîना ¤ािह(¹ 7तयेक 7ाणी म ¬गवान¸ ¤याP ह ,
इसîल( हम हर िकसी के सा° सv«नdा का ¤यवहार करना ¤ािह(¹ संसार के पदा°ì

का िनमारण स¬ी के îल( ह, इसîल(
¹नाव°यक ¨पयîग न कर ¹ पाप से ¤¤ , कयîिक पाप करना ¹पने ,°वर के सा° ही दु ¤यर वहार करना ह ¹ कमर का 9ल
,°वरीय िवधान का ¹िवî¤F¬ ¹ंग ह ¹ इसîल( सतकमर कर ¹र सुखी रह , दु 'कमì

से ¤¤ dािक दु ःख न सहन प÷¹ ये
¬ावना( (वं मा·यdा( î«सके मन म î«dनी ही गहरी हîगी, «î इ·ही मा·यdा¹ं के ¹नु¹प ¹पनी रीिd- नीिd ¤ना रहा
हîगा, ’’ वह ¨सी ¹नुपाd म ¹î¹dक कहला(गा¹
मनु'य कî ¹नंd 7िd¬ा 7दान करने के ¨परांd परमातमा ने ¨सकी ¤ुî|मVा परखने का ¬ी (क िवधान ¤नाया ह ¹
¨पल·ध 7िd¬ा का वह सदु पयîग कर सकdा ह या नही, यही ¨सकी परी÷ा ह ¹ «î इस परी÷ा म ¨Vीणर हîdा ह , ¨से वे
¨पहार िमलdे ह, î«·ह «ीवन मुî+, परमपद, ¹नंd (°वयर , îस|ाव¹°ा, +ि9तव (वं देवतव ¹िद नामî से पु कारdे ह, «î
¹स9ल हîdा ह , ¨से क÷ा म ¹नुVीणर िवUा°î की dरह (क व9र ¹र प{ने के îल( ¤îरासी लाख यîिनयî का (क ¤ककर
प¸रा करने के îल( रîक îलया «ाdा ह ¹ यह ¤ुî|मVा की परी÷ा इस 7कार हîdी ह िक ¤ारî ¹र पाप, 7लî¬न, ¹वा°र , लî¬,
¹हं कार (वं वासना, d'णा के °+î से सîv«d ° dान ख÷ा रहdा ह ¹र द¸ सरी ¹र धमर , कdर ¤य, ¹नेह, संयम की मधुर
मु¹कान के सा° िवहसdा ह ¹ ¬गवान¸¹ इन दîनî म से «ीव िकसे ¹पनाdा ह , यही ¨सकी ¤ुî| की परी÷ा ह , यह परी÷ा ही
,°वरीय लीला ह ¹ इसी 7यî«न के îल( संसार की (सी िवल÷णdा î¤िवधाप¸णर î¹°िd ¤नी ह ¹ हम म से ¹नेक दु ¤र ल ¤यî+
° dान के 7लî¬न म 9 सdे ¹र गला क°ाdे ह ¹ िववे क कु ं िõd हî «ाdा ह ¹ ¬गवान¸ पह¤ानने म नही ¹dा, स·मागर पर
¤लना नही ¤न प÷dा ¹र हम ¤îक÷ी ¤¸क कर मानव «ीवन म ¨पल·ध हî सकने वाले ¹विणर म सî¬ा¹य से वं ि¤d रह «ाdे
ह ¹ ,°वर पर ¹°¸° िव°वास ¹र ¨सकी ¹िवî¤F¬ समीपdा का ¹नु¬व, इसी î¹°िd कî ¹î¹dकdा कहdे ह ¹ ¨सका नाम
‘ ’ ¨पासना ह ¹ परमे°वर सवर ¬ ¤याP ह, कî, गु P, 7क° ¹°ान ¨सकी ¨पî¹°िd से रिहd नही, वह सवा‚ dयारमी °°- °° की
«ानdा ह ¹ सतकमर ही ¨से ि7य ह ¹ धमर मागर पर ¤लने वाले कî ही वह ƒयार करdा ह ¹ इdना ही मा·यdा dî ,°वर ¬+ म
िवकîसd हîनी ही ¤ािह(¹ इस 7कार की िन8ा î«सम हîगी वह न °रीर से दु 'कमर करे गा ¹र न मान म दु ¬ारवî कî ¹°ान
देगा¹ इसी 7कार î«सकî ,°वर के सवर ¤यापक ¹र ·यायकारी हîने का िव°वास ह, वह कु मागर पर पर क से रखेगा? ¹î¹dक
कु कमî नही हî सकdा¹ «î कु कमî ह ¨सकी ¹î¹dकdा कî (क िव¬ं¤ना या 7वं¤ना ही कहना ¤ािह(¹
,°वर का दं ¬ (वं ¨पहार ही ¹साधारण ह ¹ इसîल( ¹î¹dक कî इस ¤ाd का सदा °यान रहेगा िक दं ¬ से ¤¤ा
«ा( ¹र ¨पहार 7ाP िकया «ा(¹ यह 7यî«न Fु °- पु° प¸«ा- ¹¤र ना «प- °यान से प¸रा नही हî सकdा¹ ¬ावना¹ं ¹र
ि4या¹ं कî ¨तक Pdा के °ा ¤े म °ालने से ही यह 7यî«न प¸रा हîdा ह ¹ ·यायिन8 «« की dरह ,°वर िकसी के सा°
प÷पाd नही करdा¹ ¹dन, ¹¤र न करके ¨से ¨सके िनयम िवधान से िव¤îलd नही िकया «ा सकdा ह ¹ ¹पना प¸«न ¹मरण
या गु णगान करने वाले के सा° यिद वह प÷पाd करने लगे, d¤ ¨सकी ·याय- ¤यव¹°ा का कî, म¸लय न रहेगा, सîP की सारी
¤यव¹°ा ही ग÷¤÷ा «ा(गी¹ स¤कî ¹नु°ासन म रखने वाला परमे°वर ¹वयं ¬ी िनयम ¤यव¹°ा म ¤धा ह ¹ यिद कु F
¨¤F ं खलdा (वं ¹¤यव¹°ा ¤रdेगा dî ि9र ¨सकी सîP म प¸री dरह ¹ंधेर खाdा 9 ल «ा(गा¹ ि9र कî, ¨से न dî
·यायकारी कहेगा ¹र न समद°î¹ d¤ ¨से खु °ामदी या îर°वdखîर नाम से पुकारा «ाने लगेगा, «î ¤ापल¸स ¹dुिd कर दे ,
¨ससे 7स¬, «î पु'प- न वे U ¬° कर, ¨ससे 7स¬¹
¬गवान¸ कî हम सवर ¤यापक (वं ·यायकारी समUकर गुP या 7क° ¹प से ¹नीिd ¹पनाने का क¬ी ¬ी, कही ¬ी
साहस न कर ¹ ,°वर के दं ¬ से ¬र ¹ ¨सका ¬+वतसल ही नही ¬यानक रî¢ ¹प ¬ी ह ¹ ¨सका रî¢ ¹प ,°वरीय दं ¬ से
दं ि¬d ¹सं•यî ¢¹ण, ¹°+, म¸क, ¤îधर, ¹ंध, ¹पं ग, कारावास (वं ¹¹पdालî म प÷े ह ( कPî से कराहdे ह ( लîगî की
दयनीय द°ा कî देखकर सह« ही समUा «ा सकdा ह ¹ के वल वं°ी ¤«ाने वाले ¹र रास र¤ाने वाले ,°वर का ही °यान न
रख, ¨सका ि¬°¸लधारी ¬ी (क ¹प ह, «î ¹सुरdा ¹र िनम„ दु रातमा¹ं का न°ंस दमन, मदर न ¬ी करdा ह ¹ ·यायिन8
«« कî î«स 7कार ¹पने सगे सं¤ंîधयî, 7°ंसक िम¬î dक कî कõîर दं ¬ देना प÷dा ह, 9ासी (वं कî÷े लगाने की स«ा
देने कî िवव° हîना प÷dा ह , वसे ही ,°वर कî ¬ी ¹पने ¬+- ¹¬+ का, 7°ंसक- िनंदक का ¬ेद िक( ि¤ना ¨सके °ु¬-
¹°ु¬ कमì

का दं ¬ पुर¹कार देना हîdा ह ¹ ,°वर हमारे सा° प÷पाd करे गा¹ सतकमर न करdे ह ( ¬ी िविवध- िवध स9लdा(
देगा या दु 'कमì

के करdे रहने पर ¬ी दं ¬ से ¤¤े रहने की ¤यव¹°ा कर देगा, (सा सî¤ना िनdांd ¬¸ल ह ¹ ¨पासना का
¨…े°य इस 7कार ,°वर से ¹नुि¤d प÷पाd कराना नही हîना ¤ािह(, वरन, यह हîना ¤ािह( िक वह हम ¹पनी 7स¬dा के
7माण¹व¹प स†ावना¹ं से ¹d- 7îd रहने, सत7वîVयî म संल„ रहने की 7ेरणा, ÷मdा (वं िह-मd 7दान कर, ¬य (वं
7लî¬न के ¹वसर ¹ने पर वे ¬ी सतप° से िव¤îलd न हîने की ¸{dा 7दान कर यही ,°वर की क पा का सवर शे8 ि¤‡ ह ¹
पापî से ¬र ¹र पु7य से 7ेम, यही dî ¬गवद¸- ¬+ के 7धान ि¤‡ ह ¹ कî, ¤यî+ ¹î¹dक ह या नाî¹dक, इसकी पह¤ान
िकसी िdलक, «ने¬, कं õी, माला, प¸«ा- पाõ ¹नान, द°र न ¹िद के ¹धार पर नही वरन¸ ¬ावनातमक (वं ि4यातमक
गिdिवîधयî कî देखकर ही की «ा सकdी ह ¹ ¹î¹dक की मा·यdा 7ािणमा¬ म ,°वर की ¨पî¹°िd देखdी ह ¹ इसîल( ¨से
हर 7ाणी के सा° ¨दारdा, ¹तमीयdा (वं सेवा सहायdा से ¬रा मधुर ¤यवहार करना प÷dा ह ¹ ¬î+ का ¹°र ह - 7ेम «î
7े मी ह , वह ¬+ ह ¹ ¬î+ ¬ावना का ¨दय î«सके ¹ंdःकरण म हîगा, ¨सके ¤यवहार म 7ेम की ¹«ˆ िनUर îरणी ¤हने
लगेगी¹ वह ¹पने ि7यdम कî सवर ¤यापक देखेगा ¹र स¬ी से ¹तयंd सî-यdा प¸णर ¤यवहार करके ¹पनी ¬î+ ¬ावना का
पîर¤य देगा¹ ,°वर द°र न का यही ¹प ह ¹ हर ¤र- ¹¤र म िFपे ह ( परमातमा कî «î ¹पनी Uान ¸îP से देख सका ¹र
dदनु¹प ¹पने कdर ¤य का िनधाररण कर सका, मानना ¤ािह( िक ¨से ,°वर द°र न का ला¬ िमल गया¹ ¹पने म परमे°वर कî
¹र परमे°वर म ¹पने कî देखने की िद¤य ¸îP î«से 7ाP हî ग,, समUना ¤ािह( िक ¨सने प¸णर dा का «ीवन ल°य 7ाP कर
îलया¹
°री र कî ¬गवा न¸ का मं ि दर समUकर ¹तमसं यम ¹र ि नयि मddा ¤ा रा ¹रî ¹ य की र÷ा कर गे ¹
¹î¹dकdा ¹र कdर ¤य परायणdा की सत7वîV का 7¬ाव पहले ¹पने स¤से समीपवdî ¹व«न पर प÷ना ¤ािह(¹
हमारा स¤से िनक°वdî सं¤ंधी हमारा °रीर ह ¹ ¨सके सा° स‰¤यवहार करना, ¨से ¹व¹° ¹र सुरि÷d रखना ¹तयाव°यक
ह ¹ °रीर कî न°वर कहकर ¨सकी ¨पे÷ा करना ¹°वा ¨से ही सं«îने- सवारने म सारी °î+ ख¤र कर देना, दîनî ही °ंग
¹कलयाणकारी ह ¹ हम संdुलन का मागर ¹पनाना ¤ािह(¹
हमारा सदा सहायक सेवक °रीर ह ¹ वह ¤î¤ीसî °ं°े सîdे - «ागdे हमारे îल( काम करdा रहdा ह ¹ वह î«स ¬ी
î¹°िd म हî, ¹पनी साम°यर ¬र ¹Uा पालन के îल( dतपर रहdा ह ¹ सुिवधा- साधनî के ¨पा«र न म ¨सी का पु¢9ा°र काम
देdा ह ¹ इdना ही नही, वरन¸ समय- समय पर ¹पने- ¹पने °ं ग से ¹नेक 7कार के रसा¹वादन ¬ी कराdी रहdी ह ¹ ने¬, कान,
नाक, î«Šा Uानेî·¢यî ¤ारा Uान dं dु ¹पने- ¹पने °ंग के रसा¹वादन कराdे रहdे ह ¹ इन िव°े9dा¹ं के कारण ही ¹तमा
¨सकी सेवा- साधना का मु ¹ध हî «ाdी ह ¹र ¹पने सुख ही नही ¹î¹dतव dक कî ¬¸ल कर ¨सी म प¸री dरह रम «ाdी ह ¹
¨सका सु ख- दु ःख मानापमान ¹िद ¹पनी िन« की ¬ाव- संवे दना म सî-मîलd कर लेdी ह ¹ यह °िन8dा इdनी ¹îधक
स°न हî «ाdी ह िक ¤यî+, ¹तमा की सVा, ¹व°यकdा dक कî ¬¸ल «ाdा ह ¹र °रीर कî ¹पना ही ¹पा मानने
लगdा ह ¹ ¨सका ¹ंd हî «ाने पर dî «ीवन की इिdशी ही मान ली «ाdी ह ¹
(से व9ादार सेवक कî सम°र , िनरîग (वं दी°र «ीवी ¤ना( रखना 7तयेक िव¤ार°ील का कdर ¤य ह ¹ ¤ाहdे dî स¬ी
(सा ही ह, पर «î रहन- सहन ¹हार- िवहार ¹पनाdे ह, वह िवधा (सी ¨ल°ी प÷ «ाdी ह िक ¨सके कारण ¹पने ि7य पा¬
कî ¹पार हािन ¨õानी प÷dी ह, इdना ¹तया¤ार सहना प÷dा ह िक ¨सका क¤¸मर dक िनकल «ाdा ह ¹र रîdा-कलपdा
दु ¤र लdा ¹र ¢¹णdा से ¹îसd हîकर ¤यî+ ¹समय म ही दम dî÷ देdा ह ¹
यह स¤ ¹Uान के कारण हîdा ह, «î हî° स¬ालने से प¸वर ही ¹ि¬¬ावकî के ¹ना÷ीपन के कारण वह ¹पने ¬पर
लाद लेdा ह ¹ ¹व¹°- सम°र रहना कु F ¬ी किõन नही ह ¹ 7क िd के संके dî का ¹नुसरण करने ¬र से यह 7यî«न îस| हî
सकdा ह ¹ 7क िd के स¬ी «ीवधारी यही करdे ¹र दु °र °ना « सी ¹कî¹मक पîरî¹°िdयî कî Fî÷कर साधारणdया िनरîग
रहdे ¹र समयानुसार ¹पनी मîd मरdे ह ¹ 7क िd के संदे°- संके dî कî «¤ सîP के स¬ी «ीवधारी मî°ी ¤ुî| हîने पर ¬ी
समU लेdे ह dî कî, कारण नही िक मनु'य « सा ¤ुî|«ीवी ¨·ह न ¹पना सके ¹ 7क िd के ¹वा¹°य र÷ा के िनयम ¤यवहार
म ¹िd सरल ह ¹ ¨ि¤d ¹र ¹नुि¤d का िनणर य करने वाले यं¬ इसी °रीर म लगे ह , «î dतकाल यह ¤dा देdे ह िक कया
करना ¤ािह(, कया नही? मयारदा¹ं का पालन ¹र व«र ना¹ं का ¹नु°ासन मानने ¬र से ¨…े°य की प¸िdर हî «ाdी ह ¹
¹हार- िवहार का °यान रखने के ¹वा¹°य र÷ा की सम¹या हल हî «ाdी ह ¹ ¹हार 7मु ख प÷ ह , î«से ¹वा¹°य,
¹नु°ासन का प¸वार|र कहा «ा सकdा ह ¹ ¨Vरा|र म िवहार ¹dा ह , î«सका dातपयर हîdा ह िनतय कमर , °î¤, ¹नान, °यन,
पîरशम, संdî9 ¹िद¹ इ·ही के सं¤ंध म समुि¤d «ानकारी 7ाP कर लेने ¹र ¨नका पîरपालन करdे रहने से (क 7कार से
¹रî¹य का ¤ीमा « सा हî «ाdा ह ¹
°रीर कî ,°वर के पिव¬ िनवास के ¹प म मा·यdा देना ¨ि¤d ह ¹ यह d°य °यान म ¤ना रहे dî °रीर के 7िd
िनर°र क मîह¹¹ddा से ¤¤कर, ¨सके 7िd कdर ¤यî का संdुîलd िनवार ह सं¬व ह ¹ मंिदर कî स«ाने , सवारने म ¬गवान¸ कî
¬ुला देना िनरी म¸ खर dा ह , िकं dु देवालयî कî गंदा, िdर¹क d, ‹P, «ीणर - °ीणर रखना ¬ी पाप माना «ाdा ह ¹ °रीर ¹पी मंिदर
कî मनमानी ¤ुरी ¹दdî के कारण ¢¹ण ¤नाना 7क िd की ¸îP म ¤÷ा ¹पराध ह ¹ ¨सके 9ल¹व¹प पी÷ा, ¤े¤ नी, ¹लपायु,
¹î°र क हािन, िdर¹कार « से दं ¬ ¬îगने प÷dे ह ¹
¢¹णdा या ¤ीमारी कही ¤ाहर से नही ¹dी¹ िवकार dî ¤ाहर से ¬ी 7िवP हî सकdे ह d°ा °रीर के ¹ंदर ¬ी पदा
हîdे ह, िकं dु °रीर सं¹°ान म ¨·ह ¤ाहर िनकाल 9 कने की ¹†ु d ÷मdा िवUमान ह ¹ मनु'य ¹पने इं ि¢य ¹संयम ¤ारा
«ीवनी °î+ कî ¤ुरी dरह नP कर देdा ह ¹ ¹हार- िवहार के ¹संयम से °रीर के पा¤न dं ¬, र+ सं ¤ार, मî¹d'क, ¹नायु
सं¹°ान ¹िद पर ¬ारी ¹°ाd प÷dा ह ¹ ¤ार- ¤ार के ¹°ाd से वे दु ¤र ल (वं रîग¹¹d हîने लग «ाdे ह ¹ िन¤र ल सं¹°ान
¹ंदर के िवकारî कî ¹वा¬ािवक °ं ग से ¤ाहर नही िनकाल पाdे¹ 9ल¹व¹प वे °रीर म (कि¬d हîने लगdे ह d°ा
¹¹वा¬ािवक °ंग से ¤ाहर िनकलने लगdे ह ¹ यही î¹°िd ¤ीमारी कहलाdी ह ¹
¹व¹° रहने पर ही कî, ¹पना ¹र द¸ सरî का ¬ला कर सकdा ह ¹ î«से दु ¤र लdा ¹र ¢¹णdा °ेरे ह ( हîगी, वह
िनवार ह के यî¹य ¬ी ¨तपादन न कर सके गा¹ द¸ सरî पर ¹îशd रहेगा¹ परावल-¤न (क 7कार से ¹पमान«नक î¹°िd ह ¹
¬ार¬¸d हîकर «ीने वाले न कही स-मान पाdे ह ¹र न िकसी की सहायdा कर सकने म सम°र हîdे ह ¹ î«ससे ¹पना ¤îU
ही सही 7कार ¨õ नही पाdा, वह द¸ सरî के îल( िकस 7कार िकdना ¨पयîगी हî सकdा ह?
मनु'य «·म ¹गिणd िव°े9dा¹ं ¹र िव¬¸िdयî से ¬रा प¸रा ह ¹ िकसी कî ¬ी यह F¸ ° ह िक ¨dना ¬ ¤ा ¨õे
î«dना ¹¤ dक कî, महामानव ¨तक9र कर सका ह , पर यह सं¬व d¬ी ह, «¤ िक °रीर ¹र मन प¸णर dया ¹व¹° हî¹ «î
î«dनî के îल(, î«dना ¨पयîगी ¹र सहायक îस| हîdा ह , ¨से ¨सी ¹नुपाd म स-मान ¹र सहयîग िमलdा ह ¹ ¹पने
¹र द¸ सरî के ¹+यु दय म यîगदान करdे ¨सी म ¤न प÷dा ह , «î ¹व¹°, सम°र रहने की î¹°िd ¤ना( रहdा ह ¹ इसîल(
¹नेक दु ःखद दु ¬ार¹यî ¹र ¹ि¬°ापî म 7°म ¹¹व¹°dा कî ही माना गया ह ¹ 7यतन यह हîना ¤ािह( िक व सी î¹°िd
¨तप¬ न हîने पा(¹ स¤¤े ¹°ì

म «ीवन ¨dने ही समय का माना «ाdा ह , î«dना िक ¹व¹°dाप¸Œ¸वर क î«या «ा सके ¹
कु F ¹पवादî कî Fî÷कर ¹¹व¹°dा ¹पना िन« का ¨पा«र न ह ¹ ¬ले ही वह ¹न«ाने म , ‹मव° या द¸ सरî की
देखा- देखी ¨से ·यîd ¤ुलाया गया हî¹ सîP के स¬ी 7ाणी «ीवन ¬र िनरîग रहdे ह ¹ मरणकाल ¹ने पर «ाना dî स¬ी कî
प÷dा ह ¹ मनु'य की ¨¤F ं खल ¹दd ही ¨से ¤ीमार ¤नाdी ह ¹ «ी¬ का ¤°îरापन ¹िd°य मा¬ा म ¹खाU खाने के îल(
¤ाîधd करdा रहdा ह ¹ î«dना ¬ार ¨õ नही सकdा ¨dना लादने पर िकसी का ¬ी क¤¸मर िनकल सकdा ह ¹ पे° पर ¹प¤
¬ी इसी कारण ¤{ दî÷dी ह ¹ ि¤ना प¤ा स÷dा ह ¹र स÷न र+ 7वाह म िमल «ाने से «हा ¬ी ¹वसर िमलdा ह , रîग का
ल÷ण ¨¬र प÷dा ह ¹ कामुकdा की कु °े ¤ «ीवनी °î+ का ¤ुरी dरह ÷रण करdी ह ¹र मî¹d'क की dी°णdा का हरण
कर लेdी ह ¹ ¹¹व¤Fdा, प¸री नीद न लेना, क÷े पîरशम से «ी ¤ुराना, न°े¤ा«ी « से कु °े ¤ ¬ी ¹वा¹°य कî ««र र ¤नाने का
कारण ¤नdे ह ¹ खु ली हवा ¹र रî°नी से ¤¤ना, °ु°न ¬रे वाdावरण म रहना ¬ी ¢¹णdा का (क ¤÷ा कारण ह ¹ ¬य का
¹4î° « से ¨dार- ¤{ाव ¬रे vवार- ¬ा°े ¬ी मनîिवकार ¤नdे ¹र ¤यî+ कî सनकी, कम«îर (वं ¤ीमार ¤नाकर रहdे ह ¹
°रीर कî िनरîग ¤नाकर रखना किõन नही ह ¹ ¹हार, शम (वं िवशाम का संdुलन ि¤õा कर हर ¤यî+ ¹रî¹य (वं
दी°र «ीवी पा सकdा ह ¹ ¹ल¹य रिहd, शमयु +, ¤यवî¹°d िदन¤यार का िनधार रण किõन नही ह ¹ ¹वाद कî नही ¹वा¹°य कî
ल°य करके ¨पयु + ¬î«न की ¤यव¹°ा हर î¹°िd म ¤ना, «ानी सं¬व ह ¹ सुपा¤य ¹हार समुि¤d मा¬ा म लेना «रा ¬ी
किõन नही ह ¹ °रीर कî ¨ि¤d िवशाम देकर हर ¤ार dरîdा«ा ¤ना लेने के îल( कही से कु F लेने नही «ाना प÷dा¹ यह
स¤ हमारी ¹संयम (वं ¹संdुलन की व îV के कारण ही नही सध पाdा ¹र हम इस सुर दु लर ¬ देह कî पाकर ¬ी नकर « सी
हीन ¹र याdना ¹¹d î¹°िd म प÷े रहdे ह ¹
°ारीîरक ¹रî¹य के मु•य ¹धार ¹तम संयम (वं िनयिमddा ही ह ¹ इनकी ¨पे÷ा करके मा¬ ¹9îधयî के सहारे
¹रî¹य ला¬ का 7यास मग मरीि¤का के ¹िdîर+ कु F नही ह ¹ ¹व°यकdा प÷ने पर ¹9îधयî का सहारा लाõी की dरह
îलया dî «ा सकdा ह, िकं dु ¤लना dî परî से ही प÷dा ह ¹ °ारीîरक ¹रî¹य (वं स°+dा î«स «ीवनी °î+ के ¬पर
¹धाîरd ह, ¨से ¤ना( रखना इ·ही मा°यमî से सं¬व ह ¹ °रीर कî 7¬ु मंिदर की dरह ही महvव द¹ ¤¤काने , िFFîरे ¤नाव
•ंगार से ¨से द¸ र रख¹ ¨से ¹व¤F, ¹व¹° (वं स÷म ¤नाना ¹पना पु7य कdर ¤य मान¹ ¨पवास ¤ारा ¹वाद (वं ¹िd ¹हार
की दु '7वîVयî पर िनयं¬ण पाने का 7यास कर ¹ मîन (वं 7H¤यर साधना ¤ारा «ीवनी °î+ ÷ीण न हîने द¹ ¨से ¹ंdमु र खी
हîने का ¹+यास कर ¹ शम°ीलdा कî िदन¤यार म ¹°ान िमले¹ «ीवन के महvवप¸णर 4मî कî िनयिमddा के ि°कं «े म (सा
कद िदया «ा( िक कही िव•ंखलdा न ¹ने पा(¹ °î÷ी- सी dतपरdा ¤रd कर यह साधा «ाना सं¬व ह ¹ (सा करके इस
°रीर से वे ला¬ पा( «ा सकdे ह, î«नकी सं¬ावना °ा+कारî से लेकर वUािनकî dक ने ¹वीकार की ह ¹
dक ¤ीमाîरया (क पहा÷ पर रहा करdी °ी¹ ¨न िदनî की ¤ाd ह , (क िकसान कî «मीन की कमी महस¸स ह ,,
¹d(व ¨सने पहा÷ का°ना °ु¹ कर िदया¹ पहा÷ ¤÷ा °¤राया¹ ¨सने ¤ीमाîरयî कî ¹Uा दी- ¤ेि°यî °¸° प÷î इस िकसान
पर ¹र इसे नP- ‹P कर ¬ालî¹ ¤ीमाîरया दं ¬- ¤ õक लगाकर ¹गे ¤{ी ¹र िकसान पर ¤{ ¤ õी¹ िकसान ने िकसी की
परवाह नही की, ¬°ा रहा ¹पने काम म¹ °रीर से पसीने की धार िनकली ¹र ¨सी म îलप°ी ह , ¤ीमाîरया ¬ी ¤ह ग,

¹
पहा÷ ने 4ु | हîकर °ाप दे िदया- मेरी ¤े°ी हîकर dुमने हमारा इdना काम नही िकया, ¹¤ «हा हî वही प÷ी रहî¹ d¤ से
¤ीमाîरया पîरशमी लîगî पर ¹सर नही कर पाdी, ¹लसी लîग ही ¨नके ि°कार हîdे ह ¹

मन कî कु ि व¤ा रî ¹र दु ¬ा रवना ¹ं से ¤¤ा ( रखने के î ल( ¹वा °या य (वं सतसं ग की ¤यव¹°ा रखे रह गे ¹
°रीर की dरह मन के सं¤ंध म ¬ी लîग 7ायः ¬¸ल करdे ह ¹ °रीर कî स«ाने - सवारने कî महvव देकर लîग ¨से
¹व¹°, िनरîगी (वं स°+ ¤नाने की ¤ाd ¬¸ल «ाdे ह ¹ मन के ¤ारे म ¬ी (सा ही हîdा ह ¹ लîग मन कî महvव देकर मनमानी
करने म लग «ाdे ह, मनî¤ल ¤{ाने ¹र मन कî ¹व¤F (वं सुसं¹क d ¤नाने की ¤ाd पर °यान नही िदया «ाdा¹ इस ¬¸ल
के कारण «ीवन म कदम- कदम पर िव¬-¤ना¹ं म 9 सना प÷dा ह ¹ dं दु ¢¹dी के सा° मन की दु ¢¹dी का ¬ी °यान रखना
¹िनवायर ह ¹ ¹व¹° °रीर म मन िवक d हî dî ¨…ं¬dा, ¹हं कार 7द°र न, परपी÷ा « से िनक P कायर हîने लगdे ह ¹ गुं ¬े -
¤दमा°î से लेकर रा÷सî dक के ¹पराध «गd म «î कु F हî रहा ह , ¨से ¹¹व¹° मन का ¨प¢व कहा «ा सकdा ह ¹ मन
यिद ¹¤Fी िद°ा म मु÷ «ा(, ¹तमसुधार, ¹तम- िनमारण ¹र ¹तम- िवकास म ¢ि¤ लेने लगे dî «ीवन म (क ¤मतकार ही
7¹dुd हî सकdा ह ¹
°रीर के 7िd कdर ¤य पालन करने की dरह मन के 7िd ¬ी हम ¹पने ¨Vरदाियतवî कî प¸ णर करना ¤ािह(¹ कु िव¤ारî
¹र दु ¬ारवना¹ं से मन गंदा, मîलन ¹र पिdd हîdा ह , ¹पनी स¬ी िव°े9dा¹ं ¹र शे8dा¹ं कî खî देdा ह ¹ इस î¹°िd
से सdकर रहने ¹र ¤¤ने की ¹व°यकdा कî ¹नु¬व करना हमारा पिव¬ कdर ¤य ह ¹ मन कî सही िद°ा देdे रहने के îल(
¹वा°याय की वसी ही ¹व°यकdा ह , « से °रीर कî ¬î«न देने की¹ ¹तम- िनमार ण करने वाली, «ीवन की सम¹या¹ं कî
सही °ं ग से सुलUाने वाली ¨तक P िव¤ारधारा की पु¹dक प¸रे °यान, मनन ¹र ि¤ंdन के सा° प{dे रहना ही ¹वा°याय ह ¹
यिद सुलUे ह ( िव¤ारî के , «ीवन िवUा के Uाdा कî, सं‹ांd सv«न ¨पल·ध हî सकdे हî dî ¨नका सतसंग ¬ी ¨पयîगी
îस| हî सकdा ह ¹
मानव «ीवन की महVा कî हम समU¹ इस ¹वणर ¹वसर के सदु पयîग की ¤ाd सî¤, ¹पनी गु îत°यî म से ¹îधकां°
की î«-मेदारी ¹पनी समU ¹र ¨·ह सुलUाने के îल( ¹पने गुण, कमर व ¹व¬ाव म ¹व°यक हेर- 9े रा करने के îल( सदा
कि°¤| रह¹ इस 7कार की ¨पलî·ध ¹तम िनमारण की 7े रणा देने वाले सतसािहतय से , 7¤ु | मî¹d'क के सतपु¢9î की
सं गिd से (वं ¹तम िनरी÷ण (वं ¹तम- ि¤ंdन से िकसी ¬ी ¤यî+ कî सह« ही हî सकdी ह ¹
मन का ¹व¬ाव ¤ालक « सा हîdा ह, ¨मंग से ¬रकर वह कु F न कु F कराना (वं ¤îलना ¤ाहdा ह ¹ यिद िद°ा दी
«ा( ¹र ¨सकी ि4या°ीलdा के ¹नुसार कायर िमलdा रहे, dî वह ¹वयं ¬ी संdî9 पाdा ह d°ा द¸ सरî कî ¬ी सुख देdा ह ¹
मन के îल( ¨सकी कलपना- °î+ के ¹नुसार सारî (वं स†ावना¹ं का ÷े¬ खîल िदया «ा(, dî वह संdुP ¬ी रहdा ह
d°ा िहdकारी ¬ी îस| हîdा ह ¹ ¹नेह, क dUdा, सîहा¢र सहयîग ¹िद के िव¤ारî कî ¤ार- ¤ार दु हराया «ा(, dî मन म
कु िव¤ारî ¹र दु ¬ारवना¹ं कî «गह न िमलेगी¹
पîरî¹°िd (वं वाdावरण के 7¬ाव से ¤ह d ¤ार मन पर ¨नका ¹सर हîने लगdा ह ¹ ¨स î¹°िd म कु िव¤ारî के
िवपरीd, स°+ सारî से ¨·ह का°ना ¤ािह(¹ « से ¹वा°र परdा, धîखे¤ा«ी, काम¤îरी के िव¤ार ¹( dî शम°ीलdा ¹र
7मािणकdा से लîगî की ¹†ु d 7गिd के d°यप¸णर ि¤ंdन से ¨·ह ह°ाया «ा सकdा ह ¹ यिद िकसी के िवपरीd ¹¤रण पर
4îध ¹( या ¤े 9 ¨¬रे dî ¨सकी म«¤¸री समUकर ¨सके 7िd क¢णा, ¹तमीयdा से ¨से धîया «ा सकdा ह ¹ यह िवUा
सतसािहतय के ¹वा°याय, सतपु¢9î की संगिd (वं ,मानदारी से िक( ग( ¹तम- ि¤ंdन से ही पा, «ा सकdी ह ¹ लîहा, लîहे
कîक का°dा ह ¹ गरम लîहे कî õं ¬ा लîहे की F नी का°dी ह ¹ ¤ु¬े ह ( का°े कî िनकालने के îल( का°े का ही 7यîग करना
प÷dा ह ¹ िव9 कî िव9 मारdा ह ¹ हî°यार से हî°यार कî मुका¤ला िकया «ाdा ह ¹ िकसी िगलास म ¬री ह , हवा कî ह°ाना
हî dî ¨सम पानी ¬र देना ¤ािह(¹ पानी का 7वे ° हîने से हवा ¹पने ¹प िनकल «ा(गी¹ ि¤Žी पाल लेने से ¤¸हे °र म कहा
õहरdे ह? कु िव¤ारî कî मार ¬गाने का (क dरीका ह िक ¨नके ¹°ान पर सारî की ¹°ापना की «ा(¹ मन म «¤
सार ¬रे रहगे, dî ¨से ¬ी÷ से ¬री धमर °ाला कî देखकर ¹पने ¹प लî° «ाने वाले मु साि9र की dरह कु िव¤ार ¬ी कî,
द¸ सरा रा¹dा खî« लगे¹ ¹वा°याय ¹र सतसंग म î«dना ¹îधक समय लगाया «ाdा ह, ¨dनी ही कु िव¤ारî से सुर÷ा ¤न
प÷dी ह ¹ रî°ी ¹र पानी î«स 7कार °रीर की सुर÷ा ¹र पîरपुîP के îल( ¹व°यक ह, ¨सी 7कार ¹îतमक î¹°रdा ¹र
7गिd के îल( सारî, स†ावî की 7¤ुर मा¬ा हम ¨पल·ध हîनी ही ¤ािह(¹ इस ¹व°यकdा की प¸िdर ¹वा°याय ¹र
सतसंग से, मनन ¹र ि¤ंdन से प¸री हîdी ह ¹ यु ग िनमारण के îल(, ¹तम- िनमारण के यह 7धान साधन ह ¹ मन की °ुî| के
îल( इसे ही राम¤ाण दवा माना गया ह ¹
¤यî+ के मन मî¹d'क म इस «·म की ही नही «·म- «·मा·dरî की िवक िdया ¬री रहdी ह ¹ न «ाने िकdने
कु िव¤ार, कु वîVया (वं म¸{- मा·यdा( हमारे मन- मî¹d'क कî °ेरे रहdी ह ¹ Uान पाने ¹°वा िववेक «ागd करने के îल(
¹व°यक ह िक पहले हम ¹पने िव¤ारî (वं सं¹कारî कî पîर'क d कर ¹ िव¤ार (वं सं¹कार पîर'कार के ¹¬ाव म Uान के
îल( की ग, साधना िन'9ल ही ¤ली «ा(गी¹ ¨¬िd (वं 7गिd की ¹धारि°ला मनु'य के ¹पनी िव¤ार ही ह ¹ िव¤ारî के
¹नु¹प ही ¨सका «ीवन ¤नdा- ि¤ग÷dा ह ¹ िव¤ार सा¤े की dरह ह, «î मनु'य «ीवन कî ¹पने ¹नु¹प °ाल îलया करdे
ह ¹ मनु'य का «î ¬ी ¹प सामने ¹dा ह, वह िव¤ारî का 7िdि¤ं¤ ह ¹ करdा ह ¹ ¹पने ¹ं dîरक (वं ¤ा• «ीवन कî
dे«¹वी, 7खरdाप¸णर d°ा पुरîगामी ¤नाने के îल( ¹पनी िव¤ार °î+ कî िवकîसd, पîरमाî«र d करना हîगा¹ यह कायर ¨¬d
िव¤ारî के संपकर म ¹ने से ही प¸ रा हî सकdा ह ¹
¬°वर गामी िव¤ारधारा ¹वा°याय ¹र सतसंग के मा°यम से 7ाP की «ा सकdी ह ¹ ¹îतमक िवकास (वं ¹तम
ि°÷ण के îल( ¹वा°याय (वं सतसं ग दî ही मागर ह ¹ ¹« की पîरî¹°िdयî म ¹वा°याय ही स¤से ¤÷ा सरल मागर ह ¹ ¨सी के
¤ारा द¸ र¹°, ¹वगर वासी या दु लर ¬ महापु¢9î का सतसंग िकसी ¬ी ¹°ान, िकसी ¬ी समय, िकdनी देर dक ¹पनी सुिवधानुसार
7ाP िकया «ा सकdा ह ¹ ¨¤¤कîि° के िव¤ारî की प¸ «ी ¹îधकाîधक मा¬ा म «मा िक( ि¤ना हम न dî ¹ंdःकरण कî °ु|
कर सकdे ह ¹र न ¨¤¤ मागर पर ¹¹सर हîने के îल( 7े रणा 7ाP कर सकdे ह ¹ ¹dः ¹वा°याय कî साधना का (क ¹ंग
समUकर ¹पने िनतय कमì

म ¹°ान देना ¹व°यक ह ¹ मन- मî¹d'क से ¹वांFनीयdा¹ं कî ¤ुहारने का कायर िनतय
¹वा°याय ¹र सतसंग से हîdे रहना ¤ािह(¹
ि°ि÷d ¤यî+ कî ¹वा°याय कर ही सकdे ह ¹ ¹ि°ि÷d d°ा î«नका मन ¹वा°याय म नही लगdा, ¨न लîगî के
îल( सतसंग ही (क ¨पाय ह ¹ िव¤ारणा पल°dे ही «ीवन िद°ा ही पल° «ाdी ह ¹ ¹वा°याय (वं सतसंग िव¤ारî कî ¹°ािपd
करdे ह, परं dु ¹« सतसंग की सम¹या िवक° हî ग, ह ¹ ¹dः î«न महान¸ ¹तमा¹ं का सतसंग ला¬ लेना ¤ाह , ¨नके ¤ारा
îलखे िव¤ारî का ¹वा°याय dî िकया ही «ा सकdा ह ¹ ¹वा°याय (क 7कार का सतसंग ही ह ¹ इसके îल( वे ही ¤ुनी ह ,
पु¹dक हîनी ¤ािह(, «î «ीवन की िविवध सम¹या¹ं कî ¹°याîतमक ¸îP से सुलUाने म ¤यावहाîरक मागर द°र न कर ¹र
हमारी सवा‚गीण 7गिd कî ¨ि¤d 7ेरणा देकर ¹¹गामी ¤ना(¹
¹वा°याय, सतसंग, ि¤ंdन (वं मनन इन ¤ारî ¹धारî पर मानîसक दु ¤र लdा कî ह°ाना ¹र ¹तम¤ल ¤{ाना िन¬र र
करdा ह ¹ ¹वा°याय के ¹¬ाव म मन की न «÷dा «ाdी ह न संकीणर dा, ग·दगी, म¸{dा (वं िव9यासî+ से Fु °कारा िमलdा
ह ¹ ¹वा°याय के îल( समय िनकालना ही प÷ेगा¹ इसके îल( Fî°ा- सा ¹°याîतमक पु¹dकालय ¹पने - ¹पने °रî म ि°ि÷d
लîग ¤ना सकdे ह ¹ पु¹dक dî मागकर ¬ी प{ी «ा सकdी ह ¹ Uान लेना ¹र देना दîनî ही पु7य कायर समUकर िक( «ा
सकdे ह ¹ ¹पने पîरवार म साPािहक सतसंग िकया «ा सकdा ह ¹ इसके îल( ¹ख7¬ vयîिd, यु ग िनमारण यî«ना ¹°वा
7Uापुराण के 7े रणा7द ¹ं° प{कर सुना( «ा सकdा ह ¹ साPािहक गîî8या (वं सतसंग िव¤ारधारा कî पîर'क d करने के îल(
महvवप¸णर समUना ¤ािह(¹
स‰¹ं° «ीdे- «ागdे देवdा हîdे ह ¹ ¨नका ¹वा°याय करना, ¨नकी ¨पासना करने के समान ही ह ¹ ¬î«न से प¸वर
साधना वे °यन से प¸वर ¹वा°याय का 4म सुिनî°¤d ¹प से ¤लना ¤ािह(¹ सतकमì

कî 7े रणा देने वाले दî ही ¹वलं ¤न ह -
सार ¹र स†ाव¹ सार ¹वा°याय से ¹र स†ाव ¨पासना से िवकîसd व पîरपुP हîdे ह ¹ यह ¹îतमक ¹¬-«ल
हमारी ¹तमा कî िनतय िनयिमd ¹प से िमलdा रहना ¤ािह(¹ इसे ¹तमा ¹र परमातमा की «ीवन ¹र ¹द°र के िमलन-
सम·वय की पî9ण साधना कहा «ा सकdा ह ¹ ¹वा°याय के ि¤ना िव¤ार पîर'कार नही, «हा Uान नही वहा ¹ंधकार हîना
¹वा¬ािवक ह ¹र ¹Uानी न के वल इस «·म म ही वरन¸ «·म- «·मा·dरî dक, «¤ dक Uान का ¹लîक नही पा लेdा,
ि¬िवध dापî की याdना सहdा रहेगा¹ ¹तमवान¸ ¤यî+ ¹वा°याय के सरल ¨पाय से ही ¬îिdक Uान की याdना से मु+ हî
सकdा ह ¹
इं ि ¢य सं यम, ¹°र सं यम, समय सं यम ¹र ि व¤ा र सं यम का सdd ¹+या स कर गे ¹
पुराने कु सं¹कारी ¹+यासî कî िनर¹d करने के îल( न( ¨तसाह से , साहसप¸वर क सत7यî«नî कî द िनक ि4याकलाप
म सî-मîलd करना प÷dा ह ¹र ¤ार- ¤ार ¨¬रने वाली प°ु- 7वîVयî कî िनर¹d करने के îल( क÷ा ¢ख ¹पनाना प÷dा
ह ¹ इस 7कार ¹पने ¹प से «¸Uने कî ही सं यम समUना ¤ािह(¹ ¹«ु र न की ¬¸िमका, इस ¹पने से सं °9र करने (महा¬ारd) म
7तयेक कमर यîगी कî िन¬ानी प÷dी ह ¹
«ीवन (क यु |¹°ली ह, î«सम मनु'य कî सdd कामुक 7िdक¸ ल िव¤ारî से लेकर ि¤र संि¤d 7वîVयî dक (वं
+dुकाल की ¤दलdी पîरî¹°िdयî से लेकर वाdावरण म ¹¹वा¬ािवक पîरवdर न से «¸Uना प÷dा ह ¹ «ीवनी °î+, «î ¨से
मानîसक ¹प से ल÷ सकने यî¹य साहसी (वं ¨सके °रीर सं¹°ान कî रîगी हîने से ¤¤ाdी ह , (क ही ¹नुदान की पîरणिd
हे- संयम «î इसे ¹पनाdा ह, वह न रîगी हîdा ह न दु ःखी¹ वह «ीवन सं¹ाम म क¬ी दु ःखी नही हîdा d°ा िव•ंखîलd
¹¹d- ¤य¹d िव¤ार ¨से 7¬ािवd नही कर पाdे¹ संयम (वं सं°9र (क- द¸ सरे के पयारयवा¤ी ह d°ा ¹संयम की पîरणिd ही
दीन- हीन दîर¢dा, रîग- °îक के ¹प म हîdी ह ¹ «ीवन देवdा की ¨पासना d¤ ही ¬ली 7कार सं¬व ह, «¤ ¹पने «ीवन
रसî कî ¤य°र ¤हाना Fî÷कर मनु 'य ¨·ह स«नातमक ि¤ंdन व कdर ¤य म िनयîî«d कर ¹ यिद ¤यî+ ¹संयम के दु 'पîरणामî
कî समU «ा(, dî ¬¸dल पर ¹वगर ¹ «ा( d°ा दु ःख दाîर¢य सवर °ा समाP हî «ा(¹
«ीवन स-पदा के ¤ार ÷े¬ ह- इं ि¢य °î+, समय °î+, िव¤ार °î+, धन (साधन) °î+¹ ¹रं ¬ की dीन dî ,°वर
7दV ह ¹ ¤î°ी इन dीनî के संयु + 7यतन से ¬îिdक ÷े¬ म पु ¢9ा°र ¤ारा ¹î«र d की «ाdी ह ¹ «î ¤यî+ इ·ह द वी िव¬¸िdया
मानकर इनका सुिनयî«न करdा ह, ¹¬ाव से ¬रे संसार म रहdे ह ( ¬ी साधन (क¬ कर लेdा ह ¹ °ारीîरक साम°यर , वाणी
का सही ¨पयîग (वं समय स-पदा का सही सुिनयî«न करने के îल( ये िव¬¸िdया ¬गवान¸ ने ¤ह d सî¤- समUकर मानव कî
िवरासd म दी ह ¹
दस इं ि¢यî म दî 7मुख ह , î«नम से (क î«Šा d°ा द¸ सरी «ननेî·¢य ह ¹ î«सने इनकî व° म कर îलया, समUî
¨सने °ारीîरक, मानîसक ¹वा¹°य कî 7ाP कर îलया ह ¹ î«Šा संयम से °ारीîरक ¹वा¹°य d°ा «ननेî·¢य के संयम से
मनî¤ल ¹÷ु7ण रहdा ह ¹ î«Šा का °रीरगd ¹वा¹°य से सीधा सं¤ंध ह ¹ î«Šा ¹वाद कî 7धानdा देकर (से पदा°ì

कî
खाdी रहdी ह , «î ¹नाव°यक ही नही, हािनकारक ¬ी हîdे ह ¹ ¹वाद- ¹वाद म ¬î«न की मा¬ा ¤{ने से पे° खरा¤ d°ा
¹सं•य रîग हî «ाdे ह ¹
समय संयम म ि°î°लdा रहने से मनु 'य िनî°¤d ¹प से ¹लसी ¹र 7मादी ¤नdा ह ¹ िनयिमddा न रहने से «î
िकया «ाdा ह, वह ¹धा- ¹ध¸रा रहdा ह ¹ समय का सदु पयîग, सुिनयîî«d शम से ही िकया «ा सकdा ह ¹ ¹ल¹य का ¹°र
ह- °ारीîरक शम से ¤¤ना d°ा 7माद, मानîसक «÷dा का नाम हे¹ °रीर ¤लवान हîdे ह ( ¬ी ¤यî+ शम से «ी ¤ु रा(, dî
¨से 7माद कहा «ाdा ह ¹ हमारे स¤से समीपवdî °¬ु ¹ल¹य ¹र 7माद ही ह ¹ «î समय देवdा की ¹वहेलना करdे ह , वे
«ीवन कî िनर°र क ि¤dा कर ¤लdे ¤नdे ह ¹ समय के ¹संयमी ही ¹लप«ीवी कहलाdे ह, ¬ले ही ¨नकी ¹यु कु F ¬ी हî¹
समय ,°वर 7दV स-पदा ह ¹ ¨से शम म मनîयîगप¸वर क िनयîî«d करके िवि¬¬ 7कार की संपदा( , िव¬¸िdया ¹î«र d की «ा
सकdी ह ¹ «î समय गवाdा ह , ¨से «ीवन गवाने वाला ही समUा «ाdा ह ¹
समय की dरह ही िव¤ार 7वार कî ¬ी सत7यî«नî म िनरd रखा «ा(¹ ¨तक P ¨पयîगी िव¤ारî कî मयारदा म
सीमा¤| रखने से वे स«नातमक 7यî«नî म लगdे ह ¹र महvवप¸णर 7िd9ल ¨तप¬ करdे ह ¹ मनîिन¹ह के ¹+यास से
«ीवन के 7तयेक ÷े¬ म महvवप¸णर स9लdा 7ाP करdे ह ¹ िनतय िव¤ारî की ¹नग{dा ¹¹d- ¤य¹ddा से ¤¤ना ¤ािह(¹
िव¤ारî कî सुिनयîî«d कर ल°य िव°े9 से «î÷कर लîिकक व ¹îतमक «गd म ला¬ाî·वd हîना ¤ािह(¹ ¤यî+ «î ¬ी
कायर करdा ह , ‘‘ वह िव¤ारî की पîरणिd ह ¹ «î « सा सî¤dा ह , ’’ वह व सा ही करdा ह ¹ इस ¨î+ कî सद व ¹मरण रखना
¤ािह(¹ िव¤ारî कî ¹वारा कु Vî की dरह ¹ि¤ंतय ि¤ंdन म ¬°कने न देने का िनतय ¹+यास करना ¤ािह(¹ िव¤ारî कî हर
समय ¨पयîगी िद°ाधारा के सा° िनयîî«d करके रखना ¤ािह(¹ ¹नग{, ¹नुपयु +, िनर°र क िव¤ारî से «¸Uने के îल(
सारî की सेना कî पहले से ही d यार रखना ¤ािह(¹ ¹ि¤ं तय ि¤ंdन ¨õdे ही «¸U प÷ ¹र ¨·ह िनर¹d करके ¬गा द¹
ि¤ि÷या °र म ¤÷ा हîdा ह, ¨सम प°ु- पि÷यî का °¸ मने- ि9रने की ¹«ादी हîdी ह, पर ¤ाहर «ाने नही िदया «ाdा, õीक
यही नीिd िव¤ार व ¬व के ¤ारे म ¬ी ¤रdी «ा(, ¨·ह «हा- dहा ि¤खरने न िदया «ा(¹
पîरशम (वं मनîयîग का 7तय÷ 9ल धन ह ¹ ¬îिdक (वं ¹îतमक दîनî ÷े¬î म ¤यî+ कî ¹प¤यय की F¸ ° नही ह ¹
पसा ¤ाहे ¹पना हî या पराया, मेहनd से कमाया गया हî या मु •d म िमला हî, ¨से हर हालd म «ीवनîपयîगी, समा«îपयîगी
साम°यर मानना ¤ािह(¹ शम, समय (वं मनîयîग मा¬ सत7यî«नî हेdु ही ¤यय करना ¤ािह(¹ शम, समय (वं मनîयîग dीन
संपदा( ¬गवd¸ 7दV ह ¹ ¹dः धन कî काल देवdा (वं शम देवdा का सî-मîलd ¹नुदान मानना ¤ािह(¹ « सी द¸ रदि°र dा
समय ¹र िव¤ार के ¹प¤यय के îल( ¤रdने की ह, व सी ही धन पर ¬ी लाग¸ हîdी ह ¹ ¤¤ाया धन परमा°र म ही लगाना õीक
रहdा ह ¹ ¤ु î|मानी इसी म ह िक î«dना ¬ी कमाया «ा(, ¨सका ¹नाव°यक सं ¤य ¹°वा ¹प¤यय न हî¹ «î कमा( ह (
धन का सदा°यdा म ¨पयîग नही करdा, वह °र म दु '7वîVयî कî ¹मंि¬d करdा ह ¹ ल°मी ¨सी °र म 9लdी- 9¸ लdी ह,
«हा ¨सका सदु पयîग हîdा ह ¹ ¹¬-¤रयु + िववाह, 7द°र न, 9 °न पर¹dी म ¹नाव°यक ख¤र करने से ¨पा«र न का सही
¨पयîग नही हîdा¹ यही से सामाî«क ¹पराधî कî ¤{ावा िमलdा ह ¹ पाîरवाîरक कलह, मुकदमे¤ा«ी ¹िद ¬ी इ·ही कारणî
से ¨प«dी ह ¹ समु¢ सं ¤य नही करdा, मे° ¤नकर ¤रस «ाdा ह , dî ¤दले म निदया द¸ ना «ल लेकर लî°dी ह ¹ यिद वह ¬ी
क पण हî, सं¤य करने लगdा, dî निदया स¸ख «ाdी, ¹काल Fा «ाdा ¹र यिद ¹तयîधक ¨दार हî °न°îर ¤रसने लगdा
dî ¹िdवîP की िव¬ीि9का ¹ «ाdी¹ ¹dः समî·वd नीिd ही õीक ह ¹ °यान रखना ¤ािह( िक «î ¨पा«र न से ¤¤ाया «ा(,
¨से ¨ि¤d 7यî«न म िनयîî«d कर द¹ कमाने म न ¹नीिd ¤रdी «ा( ¹र न ¨पे÷ा¹ ख¤र करने म सv«नdा (वं
सतपîरणामî की «ा¤ प÷dाल रखी «ा( ¹·य°ा संप¬dा, दîर¢dा से ¬ी ¹îधक °ाdक îस| हîdी ह ¹ इससे समा« म
द¸ ि9d परं परा( पनपdी ह ¹ धन के ल°मी कहdे ह ¹ सत7यî«न म लगे dî ल°मी, ¹प¤यय िकया «ा(, ¹नीिd से कमाया या
ख¤र िकया «ा( dî वह माया ह ¹ माया का ना° सद व ह ¹ ह ¹
संयम पर न ि°क पाने का कारण ¨सका ¹व¹प न समU पाना ह ¹ ¹व¹प न समU पाने से ¤यî+ ¨सी dरह 9 स
«ाdे ह, « से ¹ंधेरी राd म मागर म ¬रे पानी कî स¸ खी «मीन समUकर ¤यî+ ¨सम पर 9 सा देdा ह ¹ ¹व¹प (वं महvव
समUना किõन नही ह, परं dु ¨सके îल( मनु'य कî प¸रा 7यास d°ा िनतय 7िd ¹+यास करना हîगा¹ ¹व¹प ¹र महvव
समUने के îल( ¹व°यक ¨Uîग न कर पाना ¬ी ¹संयम की वîV की ही 7िdि4या ह ¹ ¹dः «î संयम का ला¬ लेना ¤ाह
वे ¨सका ¹व¹प ¹र महvव समU¹ संयम काप (क प÷ «हा ¹नाव°यक ¹प¤यय कî रîकना ह , वहा द¸ सरी हî ¨से
स«नातमक कायì

हेdु िनयîî«d करना ¬ी ह ¹ साम°यर d¬ी शेय¹कर पîरणाम ¨तप¬ करdी ह , «¤ ¨से ¹¹d- ¤य¹ddा (वं
¹नुपयु +dा से ¤¤ाकर स«नातमक सत7यî«नî के îल( 7यु + िकया «ा(¹

सPि9र यî की ¤ õक हîने वाली °ी¹ ¨ससे प¸वर ही वेद¤यास कî महा¬ारd îलखकर देना °ा¹ समय कम °ा, dî ¬ी
¨·हîने गणे° «ी की मदद ली ¹र महा¬ारd îलखना 7ारं ¬ कर िदया¹ महा¬ारd समय से प¸वर ही îलख गया¹ ¹ंिdम °लîक
îलखाdे ¤यास «ी ने कहा- गणे° ¹°¤यर ह िक प¸रा महा¬ारd îलख गया ¹र इस ¤ी¤ ¹प (क °·द ¬ी नही ¤îले¹ गणे°
«ी ने कहा- ¬गवन¸ इस संयम के कारण ही हम लîग व9ì

का कायर कु F ही िदन म संप¬ करने म सम°र ह ( ह ¹ ¤ाdî म समय
नP करने से काम म िवलं ¤ हîdा ह ¹ ¹पने काम म दVि¤V (वं °ांd हîकर लगे रहना ¤ािह(¹

¹पने ¹पकî समा « का (क ¹ि ¬¬ ¹ं ग मा न गे ¹र स¤के ि हd म ¹पना ि हd समU गे ¹
सामाî«क ·याय का îस|ांd (सा ¹का‘ d°य ह िक इसकी (क ÷ण के îल( ¬ी ¨पे÷ा नही की «ा सकdी¹ (क
वगर के सा° ¹·याय हîगा dî द¸ सरा वगर क¬ी ¬ी °ांिdप¸वर क «ीवनयापन न कर सके गा¹ सामाî«क ·याय, ¹îधकारî का
¨पयîग द¸ सरî की ¬ािd ही कर सक , (सी î¹°िd पदा िक( ि¤ना हमारा समा« °î9ण- मु+ नही हî सकdा¹ सî हा°î से
कमा¹ ¬ले ही, पर ¨से ह«ार हा°î से दान ¹व°य कर दî ¹°ारd¸ ¹गिणd ¤ुराइयî कî «·म देने वाली सं¹ह- वîV कî
पनपने न दî¹
कî, ¤यî+ ¹पने पास सामा·य लîगî की ¹पे÷ा ¹तयîधक धन d¬ी सं¹ह कर सकdा ह «¤ ¨सम कं «¸सी,
खु दग«î, ¹नुदारdा ¹र िन8 रdा की ¬ावना ¹व°यकdा से ¹îधक मा¬ा म ¬री ह , हî¹ «¤िक द¸ सरे लîग ¬ारी किõनाइयî
के ¤ी¤ ¹तयंd कु îतसd ¹र ¹¬ाव¹¹ddा «ीवनयापन कर रहे ह, ¨नके ¤¤¤े ि°÷ा ¹र ि¤िकतसा dक से वंि¤d हî रहे हî,
«¤ ¨नकी ¹व°यकdा¹ं की ¹र से «î ¹ ख ¤ंद िक( रहेगा, िकसी कî कु F ¬ी न देना ¤ाहेगा, देगा dî रा,- रVी कî
देकर पहा÷- सा य° ल¸°ने कî ही ¹वसर िमलेगा dî कु F देगा, (सा ¤यî+ ही धनी ¤न सकdा ह ¹ सामाî«क ·याय का
dका«ा यह ह िक हर ¤यî+ ¨तपादन dî ¬रप¸र करे , पर ¨स ¨पा«र न के ला¬ म द¸ सरî कî ¬ी सî-मîलd रखे¹ स¤ लîग
िमल- «ुलकर खा(, î«( ¹र «ीन द¹ दु ःख ¹र सुख स¤ लîग िमल- ¤ा° कर ¬îगे¹ यह दîनî ही ¬ार यिद (क के कं धे पर
¹ प÷dे ह, dî वह द¤ कर ¤कना¤¸र हî «ाdा ह , पर यिद स¤ लîग इ·ह ¹पस म ¤ा° लेdे ह dî िकसी पर ¬ार नही
प÷dा, स¤का ि¤V हलका रहdा ह ¹र समा« म िव9मdा का िव9 ¬ी ¨तप¬ नही हî पाdे¹
î«स 7कार ¹î°र क समdा का îस|ांd सनाdन ¹र °ा°वd ह ¨सी 7कार सामाî«क समdा का मानवीय
¹îधकारî की समdा का ¹द°र ¬ी ¹पîरहायर ह ¹ इसकî ¤ु नîdी नही दे सकdे¹ िकसी «ािd, वं° या कु ल म «·म लेने के
कारण िकसी मनु'य के ¹îधकार कम नही हî सकdे ¹र न ¬ ¤े माने «ा सकdे ह ¹ Fî°े या ¤÷े हîने की, नी¤ या ¬ ¤ हîने
की कसî°ी गुण, कमर , ¹व¬ाव ही हî सकdे ह ¹ ¹पनी ¤यî+गd िव°े9dा¹ं के कारण िकसी का ·य¸ नाîधक मान हî सकdा ह ,
पर इसîल( कî, कदािप ¤÷ा या Fî°ा नही माना «ा सकdा िक ¨सने ¹मु क कु ल म «·म îलया ह ¹ इस 7कार की
¹िववे कप¸णर मा·यdा( «हा ¬ी ¤ल रही ह, वहा कु F लîगî का ¹हं कार ¹र कु F लîगî का द ·य ¬ाव ही कारण हî सकdा
ह ¹ ¹¤ ¨õdी ह , दु िनया इस 7कार के क¸ ÷े- क¤ा÷ा « से िव¤ारî कî dे«ी से ह°ाdी ¤ली «ा रही ह ¹
î+यî के ¤ारे म पु¢9î ने «î (सी मा·यdा ¤ना रखी ह िक °रीर म ि¬¬dा रहने मा¬ से नर ¹र नारी म से िकसी
की हीनdा या महVा मानी «ा(, वह õीक नही¹ यह ¬ली 7कार समU लेना ¤ािह( िक हम समा« के ¹ि¬¬ ¹ंग ह ¹ î«स
7कार (क °रीर से सं¤ंîधd स¬ी ¹वयवî का ¹वा°र पर¹पर सं¤| ह, ¨सी 7कार सारी मानव «ािd (क ही नाव म ¤ õी ह ,
ह ¹ प°कdा की ¬ावना रखने वालî, ि¬¬ ¹वा°ì

, ि¬¬ ¹द°ì

¹र ि¬¬ मा·यdा¹ं वाले लîग कही ¤ह d ¤÷ी सं•या म
¹îधक इक’े हî «ा( dî वे (क राP, (क समा«, (क «ािd नही ¤न सकdे¹ (कdा के ¹द°ì

म «ु÷े ह ( ¹र ¨स ¹द°र
के îल( स¤ कु F िनFावर कर देने की ¬ावना वाले ¤यî+यî का सम¸ह ही समा« या राP ह ¹ °î+ कî ˆîd इसी (कानु¬¸िd
म ह ¹ यह °î+ ¤ना( रखने के îल( हर ¤यî+ ¹वयं कî िवरा°¸ पु¢9 का (क ¹ं ग, राPीय म°ीन का (क 7ामािणक पु«ार
मानकर ¤ले, स¤के संयु + िहd पर ¹¹°ा रखे, यह ¹व°यक ह ¹ हमारी सवा‚ गीण 7गिd का ¹धार यही ¬ावना ¤न सकdी
ह ¹
स¤के िहd म ¹पना िहd सî¬िहd हîने की ¤ाd «¤ कही «ाdी ह dî लîग यह ¬ी dकर देdे ह िक ¹पने ¤यî+गd
िहd म ¬ी स¤का िहd साधना ¤ािह(¹ यिद यह स¤ ह dî हम ¹पने िहd की ¤ाd ही कयî न सî¤ ? यहा हम सुख ¹र िहd
का ¹ंdर समUना हîगा¹ सु ख के वल हमारी मा·यdा ¹र ¹+यास के ¹नुसार ¹नु¬व हîdा ह , «¤िक िहd °ा°वd îस|ांdî
से «ु÷ा हîdा ह ¹ हम देर dक सîdे रहने म , कु F ¬ी खाdे रहने म सुख का ¹नु¬व dî कर सकdे ह , िकं dु िहd dî «लदी
¨õने, पîरशमी (वं संयमी ¤नने से ही सधेगा¹ ¹¹dु ¤यî+गd सु ख कî गîण d°ा सावर «िनक िहd कî 7धान मानने का
िनद•° सतसंकलप म रखा गया ह ¹
¤यî+गd ¹वा°र कî साम¸िहक ¹वा°र के îल( ¨तसगर कर देने का नाम ही पु 7य, परमा°र ह, इसी कî दे°¬î+, तयाग,
¤îलदान, महानdा ¹िद नामî से पुकारdे ह ¹ इसी नीिd कî ¹पनाकर मनु'य महापु ¢9 ¤नdा ह , लîकिहd की ¬¸िमका
संपादन करdा ह ¹र ¹पने दे°, समा« का मु ख ¨“वल करdा ह ¹ मुî+ ¹र ¹वगर का रा¹dा ¬ी यही ह ¹ ¹तमा की °ांिd
¹र स‰गिd ¬ी ¨सी पर िन¬र र ह ¹ इसके िवपरीd द¸ सरा रा¹dा यह ह î«सम ¤यî+गd ¹वा°र के îल(, सारे समा« का
¹िहd करने के îल( मनु 'य कि°¤| हî «ाdा ह ¹ द¸ सरे ¤ाहे î«dनी ¹पîV म 9 स «ा( , ¤ाहे î«dनी हािन ¹र पी÷ा
¨õा(, पर ¹पने îल( िकसी की कु F परवाह न की «ा(¹ ¹पराधी मनîवîV इसी कî कहdे ह ¹ ¹तम- हनन का, ¹तम-पdन
का मागर यही ह ¹ इसी पर ¤ाहdे ह ( ¤यî+ नारकीय यं¬णा से ¬रे ह ( सवर ना° के गdर म िगरdा ह ¹
इसîल( ¹पनी स‰गिd (वं समा« की 7गिd का मागर समUकर, ¤यî+गd सुख- ¹वा°र की ¹ंधी दî÷ ¤ंद करके
¤यापक िहdî की साधना 7ारं ¬ करनी ¤ािह(¹ ¹पनी शेयानु¬¸िd कî 4म°ः सु खî, ¹वा°ì

से ह°ाकर ¤यापक िहdî की ¹र
मî÷ना ही हमारे îल( शेय¹कर ह ¹
¬गवान ने मनु'य कî इdनी सारी सुिवधा( , िव°े9dा(, इसîल( नही दी ह िक वह ¨नसे ¹वयं ही मî«- म«ा करे ¹र
¹पनी काम- वासना¹ं की ¹ग कî ¬÷काने ¹र ¨से ¤ु Uाने के गîरखधं धे म लगा रहे¹ यिद मî«- म«ा करने के îल( ही
,°वर ने मनु'य कî इdनी सुिवधा( दी हîdी ¹र ¹·य 7ािणयî कî ¹कारण इससे वं ि¤d रखा हîdा dî िन°¤य ही वह
प÷पाdी õहरdा¹ ¹·य «ीवî के सा° ¹नुदारdा ¹र मनु'य के सा° ¨दारdा ¤रdने का ¹·याय ¬ला वह परमातमा कयî
करे गा, «î िन'प÷, «गd िपdा, समद°î ¹र ·यायकारी के नाम से 7îस| ह ¹
यु ग िनमारण सतसंकलप म इस ¹तयंd ¹व°यक कdर ¤य की ¹र °यान ¹कि9र d िकया गया ह िक मनु'य का «ीवन
¹वा°र के îल( नही, परमा°र के îल( ह ¹ °ा+î म ¹पनी कमा, कî ¹प ही खा «ाने वाले कî ¤îर माना गया ह ¹
«î िमला ह ¨से ¤ा°कर खाना ¤ािह(¹ मनु'य कî «î कु F ¹·य 7ािणयî के ¹िdîर+ िमला ह ¹ ह वह ¨सका
¹पना िन« का ¨पा«र न नही, वरन¸ सîP के ¹िद से लेकर ¹¤ dक के शे8 सतपु¢9î के शम (वं तयाग का 9ल ह ¹ यिद (सा
न ह ¹ हîdा dî मनु 'य ¬ी (क दु ¤र ल व·य प°ु की dरह रीF- वानरî की dरह ¹पने िदन का° रहा हîdा¹ इस तयाग ¹र
¨पकार की पु7य 7ि4या का नाम ही धमर , सं¹क िd (वं मानवdा ह ¹ ¨सी के ¹धार पर, 7गिd प° पर इdना ¹गे ¤{ «ाना
सं¬व ह ¹¹ यिद इस पु7य 7ि4या कî dî÷ िदया «ा(, मनु'य के वल ¹पने मdल¤ की ¤ाd सî¤ने ¹र ¨सी म लग रहने की
नीिd ¹पनाने लगे , dî िन°¤य ही मानवीय सं¹क िd नP हî «ा(गी ¹र ,°वरीय ¹दे° के ¨Žं°न के 9ल¹व¹प «î
िवक िd ¨तप¬ हîगी, ¨ससे सम¹d िव°व कî ¬ारी ¬ास सहन करना प÷ेगा¹ परमा°र की ¹धारि°ला के ¹प म «î परमा°र
मानव «ािd की ¹ंdरातमा ¤ना ¤ला ¹ रहा ह , ¨से नP- ‹P कर ¬ालना, ¹वा°î ¤नकर «ीना िन°¤य ही स¤से ¤÷ी म¸खर dा
ह ¹ इस म¸खर dा कî ¹पनाकर हम सवर dîमु खी ¹पîVयî कî ही िनमं¬ण देdे ह ¹र ¨लUनî के दलदल म ¹« की dरह ही
िदन- िदन गहरे धसdे ¤ले «ाdे ह ¹
शाव¹dी म ¬यंकर ¹काल प÷ा¹ िनधर न लîग ¬¸ ख मरने लगे¹ ¬गवान¸ ¤ु| ने संप¬ लîगî कî ¤ुलाकर कहा- ¬¸ख से
पीि÷dî कî ¤¤ाने के îल( कु F ¨पाय करना ¤ािहये¹ संप¬ ¤यî+यî की कमी नही °ी, पर कî, कह रहा °ा- मु Uे dî °ा°ा हî
गया, 9सल प दा ही नही ह , ¹िद¹ ¨स समय सुि7या नामक ल÷की ख÷ी ह , ¹र ¤îली- म द¸ गी, स¤कî ¹¬¹ लîगî ने
कहा- ल÷की d¸ ! d¸ dî ¬ीख मा गकर खाdी ह, द¸ सरî कî कया îखला(गी? सुि7या ने कहा- हा म ¹« से इन पीि÷dî के îल(
°र- °र «ाकर ¬ीख मागकर ला¬ गी, पर िकसी कî मरने नही द¸ गी¹ ¨सकी ¤ाd सुनकर द°र क ¹d·ध रह ग( ¹र स¤ने ¨से
धन (वं ¹¬ देना 7ारं ¬ कर िदया¹
मया रदा ¹ं कî पा ल गे , व«र ना ¹ं से ¤¤ गे , ना गî रक कdर ¤यî का पा लन कर गे ¹र समा «ि न8 ¤ने रह गे ¹

परमातमा ने मनु'य कî ¹·य 7ािणयî की ¹पे÷ा िव°े9 ¤ुî| ¹र °î+ दी ह ¹ इस संसार म î«dनी ¬ी महvवप¸णर
°î+या ह, ¨नम ¤ु î| °î+ ही सवìपîर ह ¹ मानव «ािd की ¹¤ dक की इdनी ¨¬िd के पीFे ¨सकी ¤îî|क िव°े9dा का
¤मतकार ही सî¬िहd ह ¹ इdनी ¤÷ी °î+ देकर मनु'य कî परमातमा ने कु F ¨Vरदाियतवî म ¬ी ¤ाधा ह , dािक दी ह , °î+
का दु ¢पयîग न हî¹ ¨Vरदाियतवî का नाम ह- कdर ¤य धमर ¹
रे लगा÷ी इं «न म िव°े9 °î+ हîdी ह, यह ¹पने मागर से ¬°क प÷े dî ¹न°र ¨तप¬ कर सकdा ह ¹ इसîल( «मीन
पर दî प°री ि¤Fा दी ग, ह ¹र इं «न कî ¨सी पर ¤लdे रहने की ¤यव¹°ा ¤ना, ग, ह ¹ ि¤«ली म ¤ह d °î+ रहdी ह ¹
वह °î+ इधर- ¨धर न ि¤खरे प÷े इसîल( ¨सका िनयं¬ण रखना ¹व°यक ह ¹ इस ¨…े°य की प¸िdर के îल( यह 7¤ंध िकया
गया ह िक ि¤«ली dार म ही हîकर 7वािहd हî ¹र वह dार ¬ी ¬पर से °का रहे¹ हर °î+°ाली dvव पर िनयं¬ण
¹व°यक हîdा ह ¹ िनयंि¬d न रहने देने पर «î °î+°ाली व¹dु( ¹न°र पदा कर सकdी ह ¹ मनु'य कî यिद परमातमा ने
िनयंि¬d न रखा हîdा, ¨स पर धमर कdर ¤यî का ¨Vरदाियतव न रखा हîdा dî िन°¤य ही मानव 7ाणी इस सîP का स¤से
¬यं कर स¤से ¹न°र कारी 7ाणी îस| ह ¹ हîdा¹
¹°+ या ¹वलप °î+ वाले पदा°र या «ीव िनयंि¬d रह सकdे ह कयîिक ¨नके ¤ारा ¤ह d °î÷ी हािन की सं¬ावना
रहdी ह ¹ की÷े- मकî÷े मकखी- म¤Fर कु Vा- ि¤Žी 7¬िd Fî°े «ीवî पर कî, ¤ं धन नही रहdे , पर ¤ ल, °î÷ा, ¬ °, हा°ी ¹िद
«ानवरî पर नाक की र¹सी (ना°) लगाम, नके ल ¹ंकु ° ¹िद के ¤ारा िनयं¬ण रखा «ाdा ह ¹ यिद (सा 7िd¤ंध न हî dî वह
°î+°ाली «ानवर ला¬कारी îस| हîने की ¹पे÷ा हािन ही ¨तप¬ कर गे¹
¹िनयंि¬d मनु'य िकdना °ाdक हî सकdा ह, इसकी कलपना मा¬ से îसहरन हîdी ह ¹ î«न ¹सुरî, दानवî,
द¹यु ¹ं , दु रातमा¹ं के कु क तयî से मानव स+यdा कलं िकd हîdी रहे ह, वे °कल- स¸रd से dî मनु'य ही °े , पर ¨·हîने
¹वे ¤Fा¤ार ¹पनाया, मयारदा¹ं कî dî÷ा, न धमर का िव¤ार िकया, न कdर ¤य का¹ °î+यî के मद म «î कु F ¨·ह स¸Uा,
î«सम ला¬ िदखा, िदया, वही करdे रहे, 9ल¹व¹प ¨नका «ीवन स¤ 7कार °िणd ¹र िनक P ¤ना रहा¹ ¨नके ¤ारा
¹सं•यî का ¨तपी÷न हîdा रहा¹ ¹सुरdा का ¹°र ही ¨¤F ं खलdा ह ¹
मयारदा¹ं का ¨Žं °न करने की °°ना( , दु °र °ना( कहलाdी ह ¹र ¨नके 9ल¹व¹प सवर ¬ िव÷î¬ ¬ी ¨तप¬ हîdा
ह ¹ स¸यर , ¤·¢मा, ¹ह, न÷¬, प°वी स¬ी ¹पनी िनयd क÷ा ¹र धुरी पर °¸ मdे ह , (क द¸ सरे के सा° ¹क9र ण °î+ म ¤धे
रहdे ह ¹र (क िनयd ¤यव¹°ा के ¹नु¹प ¹पना कायर 4म «ारी रखdे ह ¹ यिद वे िनयd ¤यव¹°ा के ¹नु¹प ¹पना
कायर 4म «ारी रख, dî ¨सका पîरणाम 7लय ही हî सकdा ह ¹ यिद ¹ह मागर म ¬°क «ा(गे dî (क द¸ सरे से °कराकर
िवना° की 7ि4या ¨तप¬ कर दगे¹ मनु 'य ¬ी «¤ ¹पने कdर ¤य मागर से ¬°कdा ह dî ¹पना ही नही, द¸ सरे ¹नेकî का ना°
¬ी करdा ह ¹
परमातमा ने हर मनु'य की ¹ंdरातमा म (क मागर द°र न ¤ेdना की 7िd8ा की ह, «î ¨से हर ¨ि¤d कमर करने की
7े रणा (वं ¹नुि¤d करने पर ¬तसर ना करdी रहdी ह ¹ सदा¤रण कdर ¤यपालन के कायर , धमर या पु7य कहलाdे ह, ¨नके करdे
ही dत÷ण करने वाले कî 7स¬dा (वं °ांिd का ¹नु¬व हîdा ह ¹ इसके िवपरीd यिद ¹वे ¤Fा¤ार ¤रdा गया ह , धमर मयारदा¹ं
कî dî÷ा गया ह, ¹वा°र के îल( ¹नीिd का ¹¤रण िकया गया ह, dî ¹ंdरातमा म लv«ा, संकî¤, प°¤ाdाप, ¬य ¹र
¹लािन का ¬ाव ¨तप¬ हîगा¹ ¬ीdर ही ¬ीdर ¹°ाî·d रहेगी ¹र (सा लगेगा मानî ¹पना ¹ंdरातमा ही ¹पने कî îधककार
रहा ह ¹ इस ¹तम 7dा¬”ा की पी÷ा कî ¬ुलाने के îल( ¹पराधी 7वîV के लîग न°े¤ा«ी का सहारा लेdे ह ¹ ि9र ¬ी ¤ न
कहा, पाप व îVया «लdी ह , ¹î„ की dरह ह ¹ «î पहले वही «लन प दा करdी ह «हा ¨से ¹°ान िमलdा ह ¹
¹तम 7dा¬”ा स¤से ¤÷ी मानîसक ¤याîध ह ¹ î«सका मन ¹पने दु 'कमì

के îल( ¹पने ¹पकî îधककारdा रहेगा,
वह क¬ी ¹ं dîरक ¸îP से स°+ न रह सके गा¹ ¨से ¹नेक मानîसक दî9 दु गु र ण °ेर गे ¹र धीरे - धीरे ¹नेक मनîिवकारî से
¹¹d हî «ा(गा¹
मयारदा¹ं का ¨Žं °न करके लîग dातकाîलक °î÷ा ला¬ ¨õाdे देखे «ाdे ह ¹ द¸ रगामी पîरणामî कî न सî¤कर लîग
dुरं d के ला¬ कî देखdे ह ¹ ¤े,मानी से धन कमाने, दं ¬ से ¹हं कार ¤{ाने ¹र ¹नुपयु + ¬îगî के ¬îगने से «î ÷िणक सुख
िमलdा ह , वह पîरणाम म ¬ारी िवपîV ¤नकर सामने ¹dा ह ¹ मानîसक ¹वा¹°य कî नP कर ¬ालने ¹र ¹°याîतमक
महVा (वं िव°े9dा¹ं कî समाP करने म स¤से ¤÷ा कारण ¹तम 7dा¬”ा ह ¹ ¹ले प÷ने से î«स 7कार 9सल नP हî
«ाdी ह, ¨सी 7कार ¹तम 7dा¬”ा की ¤î° प÷dे रहने से मन ¹र ¹ंdःकरण के स¬ी शे8 dvव नP हî «ाdे ह ¹र (सा
मनु'य 7े d- िप°ा¤î « सी °म°ान मनिम लेकर िनरं dर िव÷ु·ध िव¤रdा रहdा ह ¹
धमर कdर ¤यî की मयारदा कî dî÷ने वाले ¨¤F ं खल, कु मागर गामी मनु'यî कî गिdिवîधयî कî रîकने के îल(, ¨·ह दं ¬
देने के îल( समा« ¹र °ासन की ¹र से «î 7िdरîधातमक ¤यव¹°ा ह , ह , ¨ससे सवर °ा ¤¤े रहना सं¬व नही¹ ध¸dर dा के
¤ल पर ¹« िकdने ही ¹पराधी 7वîV के लîग सामाî«क ¬तसर ना से ¹र कान¸ न दं ¬ से ¤¤ िनकलने म स9ल हîdे रहdे
ह, पर यही ¤ाल सदा स9ल हîdी रहेगी, (सी ¤ाd नही ह ¹ ¹सतय का ¹वरण ¹ंddः F°ना ही ह ¹ «न- मानस म ¤याP
° णा का स¸°म 7¬ाव ¨स मनु'य पर ¹¸°य ¹प से प÷dा ह ¹ î«सके ¹िहd पîरणाम ही सामने ¹dे ह ¹ रा«दं ¬ से ¤¤े
रहने के îल( (से लîग îर°वd म ¤ह d ख¤र करdे ह , िनरं dर ¬रे ¹र द¤े रहdे ह, ¨नका कî, स¤¤ा िम¬ नही रहdा¹ «î
लîग ¨नसे ला¬ ¨õाdे ह, वे ¬ी ¬ीdर ही ¬ीdर °णा करdे ह ¹र समय ¹ने पर °¬ु ¤न «ाdे ह ¹ î«नकी ¹तमा
îधककारे गी ¨नके îल( देर- स¤ेर म स¬ी कî, îधककारने वाले ¤न «ा(गे¹ (सी îधककार (कि¬d करके यिद मनु 'य «ीिवd
रहा हî ¨सका «ीवन न «ीने के ¤रा¤र ह ¹
िनयं¬ण म रहना ¹व°यक ह ¹ मनु'य के îल( यही ¨ि¤d ह िक वह ,°वरीय मयारदा¹ं का पालन करे ¹ ¹पने
¨Vरदाियतवî कî समUे ¹र कdर ¤यî कî िन¤ाह¹ नीिd, सदा¤ार ¹र धन का पालन करdे ह ( सीिमd ला¬ म संdî9 करना
प÷ सकdा ह ¹ गरी¤ी ¹र सादगी का «ीवन ि¤dाना प÷ सकdा ह , पर ¨सम ¤ न ¹îधक ह ¹ ¹नीिd ¹पनाकर ¹îधक धन
(कि¬d कर लेना सं¬व ह, पर (सा धन ¹पने सा° इdने ¨प¢व लेकर ¹dा ह िक ¨नसे िनप°ना ¬ारी ¬ासदायक îस|
हîdा ह ¹ दं ¬ ¹र ¹हं कार का 7द°र न करके लîगî के ¬पर «î रî¤ «माया «ाdा ह , ¨ससे ¹dं क ¹र कîd¸हल हî सकdा
ह, पर श|ा ¹र 7िd8ा का द°र न ¬ी दु लर ¬ रहेगा¹ िवलाîसdा ¹र वासना का ¹नुपयु + ¬îग ¬îगने वाला ¹पना °ारीîरक,
मानîसक ¹र सामाî«क संdुलन नP करके खîखला ही ¤नdा «ाdा ह ¹ परलîक ¹र पुन«र ·म कî ¹ंधकारमय ¤नाकर
¹तमा कî ¹संdुP ¹र परमातमा कî ¹7स¬ रखकर ÷िणक स¸ खî के îल( ¹नीिd का मागर ¹पनाना, िकसी ¬ी ¸îP से
द¸ रदि°र dा प¸णर नही कहा «ा सकdा¹
¤ुî|मVा इसी म ह िक हम धमर , कdर ¤य पालन का महvव समU , सदा¤ार की मयारदा¹ं का ¨Žं°न न कर ¹ ¹वयं
°ांिdप¸वर क î«( ¹र द¸ सरî कî सुखप¸वर क «ीने द¹ यह स¤ िनयं¬ण की नीिd ¹पनाने से ही सं¬व हî सकdा ह ¹ कdर ¤य ¹र
धमर का ¹ंकु ° परमातमा ने हमारे ¬पर इसीîल( रखा ह िक स·मागर म ¬°क नही¹ इन िनयं¬णî कî dî÷ने की ¤े Pा करना
¹पने ¹र द¸ सरî के îल( महdी िवपîVयî कî ¹मंि¬d करने की म¸खर dा करना ही िगना «ा(गा¹
समा« म ¹व¹° पर-परा कायम रह , ¨सी से ¹पनी ¹र स¤की सुिवधा ¤नी रहेगी¹ यह °यान म रखdे ह ( हम म से
7तयेक कî ¹पने नागîरक कdर ¤यî का पालन करने म ¬ावनाप¸वर क दVि¤V हîना ¤ािह(¹ समा« स¤का ह ¹ स¤ लîग °î÷ा-
°î÷ा ि¤गा÷ कर dî स¤ िमलाकर ि¤गा÷ की मा¬ा ¤ह d ¤÷ी हî «ा(गी, िकं dु यिद °î÷े- °î÷े 7यतन सुधार ¬ी ¤ह d हî
सकdा ह ¹ ¨ि¤d यही ह िक हम स¤ िमलकर ¹पने समा« कî सुधारने , सं¤ाîलd करने ¹र ¹व¹° पर-परा( 7¤îलd करने
का 7यतन कर ¹र स+य, सुिवकîसd लîगî की dरह ¬îिdक (वं ¹îतमक 7गिd कर सुख- संdî9 7ाP कर सक ¹
द¸ सरî की सुिवधा कî °यान म रखdे ह ( ¹पनी सुिवधा ¹र ¹वdं ¬dा कî ¹वे ¤Fाप¸वर क सीिमd करना, स+य दे° के
स+य नागîरकî का कdर ¤य ह ¹ ¹व¤Fdा कî ही लीî«(, कही ¬ी नाक, °¸क सा9 करना, पान- d-¤ाक¸ की पीक ¬ाल देना,
¹पने îल( कु F द¸ र «ाने का कP ¬ले ही ¤¤ा(, पर द¸ सरî कî °णा, ¹सुिवधा हîगी ¹र यिद ¹पने कî कî, रîग ह dî
¨सका ¹4मण ¨स गंदगी म ¹ने - «ाने वाले पर हîगा¹ ¬ले ही कî, रîके नही, पर हमारा नागîरक कdर ¤य ह िक द¸ सरî की
¹सुिवधा कî °यान म रखdे ह ( ¹वयं ¨स गंदगी कî ¬ालने के यî¹य ¨पयु + ¹°ान dक «ाकर ¨से सा9 कर ¹ ¤ी÷ी -îसगरे °
हम पीdे ह dî °यान रख िक ¹¹व¤F धु ¹ Fî÷ने से पास म ¤ õे ह ( द¸ सरे लîगî की dि¤यd खरा¤ dî नही हîdी, ¹वयं ही
पdा लगा( िक िकसी कî ¹सुिवधा dî नही हîdी¹ यिद हमारी ¨स ि4या से द¸ सरî कî dकली9 हîdी ह, dî स+यdा का
dका«ा यही ह िक कही ¹·य¬ «ाकर ¤ी÷ी िप( ¹र धु ¹ Fî÷¹ स¤से ¹¹ह यह ह िक इस ¤ुरी ¹दd कî Fî÷ ही द¹
°रî की ग·दगी लîग ¹कसर गली या स÷क पर ¬ाल देdे ह , ¨ससे रा¹dा िनकलने वालî कî ¹सुिवधा ह ¹र
सावर «िनक ¹°ानî की ¹व¤Fdा ¹¹d- ¤य¹d हîdी ह ¹ ¨ि¤d यही ह िक °रî म क¸ ÷ेदान रख ¹र «¤ स9ा, कमर ¤ारी ¹(,
d¤ ¨से ¨õवा द¹ ¹°î¬नीय ¹¹व¤Fdा से ¨स गली म रहने वाले d°ा िनकलने वालî कî कP न पह ¤ा(¹ सावर «िनक
¹°ानî की ¹व¤Fdा ¹र ¤यव¹°ा नP करना यह ¤dाdा ह िक इन ि°नîने ¤यî+यî कî मनु'यdा के ¹रं ि¬क कdर ¤य
नागîरकdा dक का ही Uान नही ह ¹
मुसाि9रखाने, धमर °ाला, पा4, नदी- िकनारे îसनेमा°र ¹िद स¤के काम म ¹ने वाले ¹°ानî म लîग «हा- dहा र…ी
काग«, दîने, पVे, îसगरे ° के खîखे, म¸ ग9ली के िFलके ¹िद प°कdे रहdे ह ¹र देखdे- देखdे ये ¹°ान गंदगी से ¬र «ाdे
ह ¹ रे लगाि÷यî के ि¬·¤े म «हा हर ¹दमी कî ि°¤िप¤ ¤ õना प÷dा ह, (सी गंदगी ¤ह d ¹खरdी ह ¹ सं¬ासî म मलम¸¬ का
िवस«र न गलd ¹°ानî पर करने से वहा की î¹°िd (सी हî «ाdी ह िक द¸ सरî कî ¨सका ¨पयîग करना किõन प÷dा ह ¹
«¤िक िकdने ही मुसाि9र ख÷े ¤ल रहे ह , d¤ कु F लîग ि¤¹dर ि¤Fा(, °ाग ल-¤ी िक( ले°े रहdे ह ¹र ¨õाने पर Uग÷dे
ह ¹ इन लîगî कî मनु'यdा की ¹रं ि¬क ि°÷ा सीखनी ही ¤ािह( िक सावर «िनक ¨पयîग के ¹°ान या व¹dु¹ं का ¨dना ही
¨पयîग कर î«dना िक ¹पना हक ह ¹ सामा·य ि¬·¤े ¤ õने ¬र के îल( ह ¹ खाली हî dî कî, ले° ¬ी सकdा ह , पर «¤िक
¹नेक मु साि9र ख÷े या ल°कdे ¤ल रहे ह ¹र ¤ं द लîग ले°ने कî (सा ¹नंद ¨õा( , î«से 7ाP करने का हक ¨·ह नही ह
dî ¨से °ीõdा या प°ुdा ही कहा «ा(गा¹
के ले, नारं गी ¹िद के िFलके लîग यî ही 9 कdे रहdे ह ¹र ¹( िदन दु °र °ना( हîdी रहdी ह ¹ िकdने ही लîग गाय
पालdे ह ¹र द¸ ध दु हकर ¨·ह ¹वारा यह समUकर Fî÷ देdे ह िक िकसी की ¤ी« खाकर ¹पना पे° ¬र ला(गी ¹र हम
द¸ ध देगी¹ गî माdा के 7िd 7¤îलd श|ा के ¹धार पर कî, ¨से मारे गा नही ¹र ¹पना काम ¤न «ा(गा¹ इस dरह वह
गाय लîगî की व¹dु( खाकर, ि¤खेर कर, द¸ सरî का रî« नुकसान करdी ¹र िप°dी, कु °dी रहdी ह ¹ इस dरह द¸ सरî कî
कP देने d°ा ¹वयं ला¬ ¨õाने कî कया कहा «ा(? ¹वयं कीdर न करने का मन ह dî ¹पने °र म प¸«ा के ¨पयु + मंद ¹वर म
7स¬dाप¸वर क कर, पर ला¨¬¹पीकर लगाकर राd ¬र धमाल म¤ाने ¹र प÷îस के ¤ीमारî, परी÷ाî°र यî d°ा ¹·य लîगî की
नीद नP करने वाली ,°वर¬î+ से ¬ी पिहले हम ¹पनी नागîरक मयारदा¹ं ¹र î«-मेदाîरयî कî समUना ¤ािह(¹ î«सका
¹°र ह िक द¸ सरî की सुिवधा कî °यान म रखdे ह ( ¹पनी इ¤Fा कî ¹वे ¤Fाप¸वर क सीमा¤| करना¹
व¤न का पालन ¹र ,मानदारी का ¤यवहार मनु'य का 7ा°िमक (वं निdक कdर ¤य ह ¹ î«स समय पर î«ससे
िमलने का, कî, व¹dु देने , काम प¸रा करने का व¤न िदया ह, ¨स स¤ कî õीक समय पर प¸रा करने का °यान रखना ¤ािह(
dािक द¸ सरî कî ¹सुिवधा का सामना न करना प÷े¹ यिद हम द«î या मî¤ी ह dî ¨ि¤d हे िक वायदे के समय पर ¨से देने
का °î+ ¬र 7यतन कर ¹ ¤ार- ¤ार dका«े करने ¹र िनरा° वािपस लî°ने म «î समय ख¤र हîdा ह ¹र ¹सुिवधा हîdी ह
¨से देखdे ह ( (से द«î, धî¤ी ¹पनी 7ाP म«द¸ री से ¹ाहक का ¤îगु ना- दस गु ना नुकसान कर देdे ह ¹ ¬ा9ण करना ह dî हम
õीक समय पर पह ¤ना ¹र िनयिमd समय म ही प¸रा करना ¤ािह(¹ समय का °यान न रखना, सुनने वालî के सा°
¤ेइ·सा9ी ह ¹ दावd î«स समय की रखी ह, ¨सी समय ¹रं ¬ कर देनी ¤ािह(¹ मेहमानî कî °ं°î 7dी÷ा म ि¤õा( रहना,
(क 7कार से ¨नका समय ¤¤ारद करना ह ¹ î«से धन की ¤¤ारदी के समान ही हािनकारक समUा «ाना ¤ािह(¹
व¹dु का म¸लय ¹र ¹व¹प «î ¤dाया गया ह वही व¹dुdः हîना ¤ािह(¹ ¹सली म नकली की िमलाव° कर देना,
दामî म ि°सा- िप°ी करके कमीवे °ी करना, ¤यापार करने वालî के îल( सवर °ा ¹°î¬नीय ह ¹ ि°स- ि°स कर कमी करना
îल( सवर °ा ¹°î¬नीय ह ¹ ि°स- ि°स कर कमी करना ¹पनी िव°वसनीयdा d°ा 7ामािणकdा पर कलं क लगाना ह ¹ ¹सली
¹र नकली व¹dु( ¹लग- ¹लग ¤े¤ी «ा( ¹र ¨नके दाम वसे ही महगे , स¹dे ¹पP िक( «ा( dî ¤यापारी की साख ¤{े गी
¹र ¹ाहकî का समय ¤¤ेगा d°ा संdî9 हîगा¹ ,मानदारी °ा°े का सîदा नही ह ¹ वह 7ामािणकdा (वं िव°वसनीयdा की
परी÷ा ¬र ¤ाहdी ह ¹ इस कसî°ी पर सही हîना हर ¤यवसायी का नागîरक कdर ¤य ह ¹ यह कdर ¤य पालन ¤यî+ का स-मान
¬ी ¤{ाdा ह ¹र ¤यवसाय ¬ी¹
द¸ सरî की ¹सुिवधा कî °यान म रखdे ह ( ¹पनी सुिवधा कî सीमा¤| रखना, ि°Pdा ¹र स+यdा ¬रा मधुर
¤यवहार करना, मीõे व¤न ¤îलना, व¤न का पालन करना, 7ामािणकdा ¹र िव°व¹ddा की रीिd- नीिd ¹पनाना, समा« के
7िd ¹पनी î«-मेदाîरयî कî हम म से 7तयेक कî सीखना ¹र प¸रा करना ही ¤ािह(¹ ¤ािह( dािक समा« म ि°P नागîरकî
की dरह हम õीक dरह से «ी सक ¹र द¸ सरî कî «ीने दे सक ¹
समUदा री , ,मा नदा री , î «-मे दा री ¹र ¤हा दु री कî «ी वन का (क ¹ि वî ¤F¬ ¹ं ग मा न गे ¹

— सुसं¹काîरdा के îल( ¤ार ¹धारî कî 7मुख माना गया ह (1) समUदारी, (×) ,मानदारी, (;) î«-मेदारी, (×)
¤हादु री¹ इ·ह ¹°याîतमक- ¹ं dîरक वîर8dा की ¸îP म ¨dना ही महvवप¸णर माना «ाना ¤ािह( î«dना िक °रीर के îल(
¹¬, «ल, व+ ¹र िनवास कî ¹िनवायर समUा «ाdा ह ¹
समUदारी का dातपयर ह- द¸ रद°î िववे क°ीलdा का ¹पनाया «ाना¹ ¹मdîर से लîग dातकाîलक ला¬ कî ही स¤
कु F मानdे ह ¹र ¨सके îल( ¹ना¤ार ¬ी ¹पना लेdे ह ¹ इससे ¬िव'य ¹ंधकारमय ¤नdा ह ¹र ¤यî+तव का ¹dर (क
7कार से हेय ही ¤न «ाdा ह ¹ ¹द¸ रदि°र dा dुdर - 9ु dर ¹îधक सुिवधा स-पादन के îल( लालाियd रहdी ह ¹र इस ¨dावली
म (से काम करने म ¬ी नही îUUकdी, î«नकी ¬ावी पîरणिd ¤ुरे िक¹म की हî सकdी ह ¹ म¸खर ि¤ि÷या ¹र मFîलया इसी
दु ¤ु र î| के कारण dिनक से 7लî¬न म ¹पनी î«ंदगी देdी देखी ग, ह ¹ ¤°îरे ¤यî+ इसी ललक म ¹पनी ¹वा¹°य संपदा कî
dहस- नहस कर लेdे ह ¹ यîना¤ार म ¹िdवाद ¤रdने वाले लîग, «वानी म ही ¤¸{े खîखले हîकर ¹काल मतयु के मु ह म ¤ले
«ाdे ह ¹ ¹पराधी dvवî म से ¹îधकां° लîग इसी मनîवîV के हîdे ह ¹ प{ने का समय ¹वारागदî म गु«ार देने वाले ¤यî+
«वानी म ही दर- दर की õîकर खाdे ह ¹ न°े¤ा«ी ¬ी इसी म¸ खर dा कî ¹पना कर धीमी ¹तम हतया करने म ¤ेध÷क लगे
रहdे ह ¹ (सी नासमUी के रहdे ¹« का, ¹¬ी का ला¬ ही स¤ कु F दीख प÷dा ह ¹र ¬िव'य की सं¬ावना¹ं की संद¬र
म सî¤ने dक की 9ु सर d नही िमलdी¹
द¸ रदि°र dा, िववे क°ीलdा, ¨स ¹नु¬वी िकसान की गिdिवîधयî « सी ह , î«नके ¹नुसार खेd «îdने , ¤ी« ¤îने
खाद- पानी देने, रखवाली करने म ¹रं ि¬क हािन ¨õाने ¹र कP सहने कî ि°रîधायर िकया «ाdा ह ¹ द¸ रदि°र dा ¨से ¤dाdी
ह िक इसका 7िd9ल ¨से समयानुसार िमलने ही वाला ह ¹ (क ¤ी« के दाने के ¤दले सî दाने ¨गने ही वाले ह ¹र समय
पर ¨स 7यास के 7िd9ल कîõे ¬रे धन धा·य के ¹प म िमलने ही वाले ह ¹ संयम ¹र सतकायर (से ही ¤ुî|मVा ह ¹ पु7य
परमा°र म ¬िव'य कî ¨“वल ¤नाने वाली सं¬ावना( सî¬िहd ह ¹ सं यम का 7िd9ल व¬व ¹र पî¢9 के ¹प म ¸îPगd
हîने वाली ह ¹ द¸ र¤ीन के सहारे द¸ र dक की व¹dु¹ं कî देखा «ा सकdा ह ¹ ¹र ¨स «ानकारी के ¹धार पर ¹îधक
¤ुî|मVा प¸णर िनणर य îलया «ा सकdा ह ¹ ¹°यातम की ¬ा9ा म इसी कî ddीय ने¬ खु लना ¬ी कहdे ह , î«सके ¹धार पर
िवपîVयî से ¤¤ना ¹र ¨“वल ¬िव'य की सं¬ावना¹ं का स«न सं¬व हî सकdा ह ¹
सुसं¹काîरdा का द¸ सरा ि¤‡ ह- ,मानदारी क°नी ¹र करनी कî (क- सा रखना ,मानदारी ह ¹ ¹दान- 7दान म
7ामािणकdा कî इसी îस|ांd के सहारे ¹÷ु7ण रखा «ाdा ह ¹ िव°वसनीयdा इसी ¹धार पर ¤नdी ह ¹ सहयîग ¹र स†ाव
¹î«र d करने के îल( ,मानदारी ही 7मुख ¹धार ह ¹ इसे ¹पने ¤यवसाय म ¹पनाकर िकdनî ने Fî°ी î¹°िd से ¨õकर ¤÷े
¤नने म स9लdा पा, ह ¹ ¤÷े ¨Vरदाियतवî कî ¨पल·ध करने ¹र ¨सका िनवारह करने म ,मानदार ही स9ल हîdे ह ¹ इस
स‰गुण कî सुसं¹काîरdा का (क महvवप¸णर प÷ माना गया ह ¹ ¨से ¹पनाने वाले ,मानदारी ¹र पîरशम की कमा, से ही
¹पना काम ¤ला लेdे ह ¹ ¨नकी गरी¤ी ¬ी (सी °ानदार हîdी ह , î«स पर ¹मीरी के ¬ं¬ार कî िनFावर िकया «ा सके ¹
सुसं¹काîरdा का dीसरा प÷ ह- î«-मेदारी मनु'य ¹नेकानेक î«-मेदाîरयî से ¤धा ह ¹ ह ¹ यî ग र î«-मेदार लîग
कु F ¬ी कर गु«रdे ह, िकसी ¬ी िद°ा म ¤ल प÷dे ह ¹ ¹पने िक·ही ¬ी ¨Vरदाियतवî से िनलर v«dाप¸वर क इं कार कर सकdे
ह, पर î«-मेदार लîगî कî ही ¹पने ¹नेक ¨Vरदाियतवî का सही रीिd से , सही समय पर िनवारह करना प÷dा ह ¹ ¹वा¹°य
कî सुरि÷d रखने की, «ीवन स-पदा का शे8dम सदु पयîग करने की, लîक परलîक कî ¨तक P ¤नाने की ¤यî+गd
î«-मेदारी «î िन¬ाना ¤ाहdे ह, वे ही संdî9, य° ¹र ¹रî¹य का ला¬ 7ाP कर सकdे ह ¹ पाîरवाîरक î«-मेदाîरया समUने
वाले ¹îशdî कî ¹वावल-¤ी, स‰गुणी ¤नाने म िनरd रहdे ह ¹र संdान ¤{ाने के ¹वसर ¹ने पर 9¸ क- 9¸ क कर कदम
रखdे ह ¹ ह«ार ¤ार सî¤dे - समUdे ह ¹र िव¤ार करdे ह िक ¹+यागd कî ¤ुलाने के îल( ¨पयु + साम¹ी, ¹îशdî ¹र
¹सम°ì

के 7िd ¹पने ¨Vरदाियतवî का िनवारह करने म संकीणर ¹वा°र परdा ¨·ह ¤ाधा नही ¬ालdी¹
पे° ¹र 7«नन dक ही मनु 'य की सीमा नही ह ¹ धमर ¹र सं¹क िd के 7िd, िव°व मानवdा के 7िd, मनु'य के
सामाî«क (वं सावर ¬îम ¨Vरदाियतव «ु÷े ह, यहा dक िक ¹·य 7ािणयî (वं वन¹पिdयî के 7िd ¬ी¹ ¨न स¬ी के सं¤ंध म
दाियतवî (वं कdर ¤यî के िनवार ह की ि¤ंdा हर िकसी कî रहनी ¤ािह(¹ यह कायर d¬ी सं¬व ह , «¤ ¹पनी संकीणर ¹वा°र परdा
पर ¹ं कु ° लगाया «ा(¹ ¹सd ¤यावहाîरक ¹dर का िनवारह ¹वे ¤Fाप¸वर क ¹वीकार िकया «ा(¹ यह लî¬, मîह, ¹हं कार का,
वासना, d'णा ¹र संकीणर ¹वा°र परdा का °°ा°îप ¬पर Fाया हîगा, dî ि9र नासमU ¤¤¤î का मन, न dî ¨स ¹dर का
सî¤ेगा ¹र न सयानî से लîकमंगल के îल( कु F िनकालdे ¤न प÷ेगा¹ ¹व°यकdा( dî कî, °î÷े शम, समय म प¸री कर
सकdा ह , पर व ¬व «·य ¬îिdक महvवाका÷ा( dî (सी ह î«·ह प¸री कर सकना रावण, िहर7यक°यपु, îसकं दर ¹िद dक के
îल( सं¬व नही ह ¹, ि9र सामा·य ¹dर के लîगî की dî ¤ाd ही कया ह? वे हिव° की «लdी ि¤dा¹ं वाली क°मक° म
¹«ीवन िव¤रण करdे रहdे ह ¹ ¬¸d- पलीd की dरह ¬रdे - ¬राdे समय गु«ारdे ¹र ¹·ddः ¹संdî9 d°ा पाप की ¤•ानî
ही îसर पसर लादकर िवदा हîdे ह ¹ î«·ह मानव «·म के सा° «ु÷ी ह , î«-मेदाîरया िन¤ाहनी हî, ¨नके îल( करने कî dî
¤ह d कु F प÷ा ह, पर वह स¤ ¤न d¬ी प÷ेगा «¤ िन«ी «ीवन म संdî9 ¹र सत7वîV संवधर न « से लîकमं गल के कायì

के
îल( समुि¤d ¨तसाह ¹ंdःकरण म ¨मंगdा हî¹ î«-मेदाîरया िन¤ाहने का, सुसं¹काîरdा के ल°य dक पह ¤ने वाला यही
रा«मागर ह ¹
सुसं¹काîरdा का ¤î°ा ¤रण ह- ¤हादु री द िनक «ीवन म ¹नेकानेक ¨लUन ¹dी रहdी ह ¹ ¨न स¤से िनप°ने के
îल( ¹व°यक साहस हîना ¹व°यक ह, ¹·य°ा ह÷¤÷ी म समाधान का कî, सही ¨पाय dक नही स¸U प÷ेगा¹ ¹गे ¤{ने
¹र ¬ ¤ा ¨õने की 7िd¹प|ार¹ं म सî-मîलd हîना प÷dा ह ¹ गुण, कमर , ¹व¬ाव की गहरा, dक °ुसे, «·म «·मा·dरî के
कु सं¹कारî से ¬ी, िनरं dर वह महा¬ारd ल÷ने का क तय करना प÷dा ह , î«सम गीdाकार ने ¹«ु र न कî 7°ंसा (वं ¬तसर ना
की नीिd ¹पनाdे ह ( 7वV हîने के îल( ¨|d िकया ह ¹ ¹पने कî िनखारने , ¨¤ारने ¹र ¨Fालने के îल( ¹द-य साहस
का सहारा îल( ि¤ना कî, मागर नही¹ समा« म ¹वांFनीय dvवî की, ¹ंधिव°वासî, कु 7¤लनî ¹र ¹ना¤ारî की कमी नही
ह ¹
¨नके सा° समUîdा सं¬व नही, «î ¤ल रहा ह, ¨से ¤लने देना सहन नही हî सकdा¹ ¨सके िव¢| ¹सहयîग,
िवरîध की नीिd ¹पना( ि¤ना ¹र कî, ¤ारा नही¹ इसके îल( सv«न 7क िd के लîगî कî सं गिõd ¬ी dî करना हîdा ह ¹
यह स¬ी ¤हादु री के ि¤‡ ह , इ·ह ¬ी सुसं¹काîरdा का महvवप¸णर ¹ं ग माना गया ह ¹
स+यdा के सवर dîमु खी ÷े¬ कî 7काि°d करने के îल( «ाग¹कdा, परा4म, 7यतन ¹पना( «ाने की ¹व°यकdा ह,
वही सुसं¹काîरdा कî ¬ी ¤{ाने ¹र ¹पनाने के îल(, ¬रप¸र 7यतन करdे रहने की ¬ी ¹िनवायर ¹व°यकdा ह ¹

शी ि¤मनलाल °ीdलवा÷ ¤ं¤, की िकसी 9मर म काम करdे °े¹ (क मामले म ¤¤ने के îल( (क ¹दमी ¨नके पास
¹या ¹र (क लाख ¢प( की îर°वd देने लगा, पर शी °ीdलवा÷ ने ¨से ¹¹वीकार कर िदया¹ ¨स ¤यî+ ने कहा-समU
लीî«(, इdनी ¤÷ी रकम कî, देगा नही¹ शी °ीdलवा÷ हसे ¹र ¤îले - देने वाले dî ¤ह d हîगे , पर इं कार करने वाला मु U
« सा ही िमलेगा¹ यही °ीdलवा÷ (क िदन ¤ं¤, िव°विवUालय के कु लपिd िनयु + ह (¹
¤ा रî ¹र मधुरdा , ¹व¤Fdा , सा दगी ¹र सv«नdा का वा dा वरण ¨तप¬ कर गे ¹
िकसके ¬ीdर कया ह , इसका पîर¤य ¨सके ¤यवहार से «ाना «ा सकdा ह ¹ «î °रा¤ पीकर ¹र लहसुन खाकर
¹या हîगा, ¨सके मुख से ¤द¤¸ ¹ रही हîगी¹ इसी 7कार î«सके ¬ीdर दु ¬ारवना( , ¹हं कार ¹र दु Pdा का ¹Fापन ¬रा
हîगा, वह द¸ सरî के सा° ¹¬¢dाप¸णर ¤यवहार करे गा¹ ¨सकी वाणी से ककर °dा ¹र ¹स+यdा °पके गी¹ द¸ सरे से इस dरह
¤îलेगा î«ससे ¨से नी¤ा िदखाने, ि¤{ाने, िdर¹क d करने ¹र म¸खर îस| करने का ¬ाव °पके ¹ (से लîग िकसी पर ¹पने
¤÷ƒपन की Fाप Fî÷ सकdे , ¨ल°े °णा¹पद ¹र ¤े 9¬ा«न ¤नdे ¤ले «ाdे ह ¹ क°ु व¤न ममर ¬ेदी हîdे ह, वे î«स पद Fî÷
«ाdे ह, ¨से िdलिमला देdे ह ¹र सदा के îल( °¬ु ¤ना लेdे ह ¹ क°ु ¬ा9ी िनरं dर ¹पने °¬ु¹ं की सं•या ¤{ाdा ¹र िम¬î
की °°ाdा ¤ला «ाdा ह ¹
द¸ सरî के सा° ¹सv«नdा ¹र ¹ि°Pdा का ¤रdाव करके क, लîग सî¤dे ह , इससे ¨नके ¤÷ƒपन की Fाप
प÷ेगी, पर हîdा ि¤लकु ल ¨ल°ा ह ¹ िdर¹कारप¸णर ¤यवहार करने वाला ¤यî+ °मं¬ी ¹र ¹Fा समUा «ाdा ह ¹ िकसी के
मन म ¨सके 7िd ¹दर नही रह «ाdा¹ ¨|d ¹व¬ाव के ¤यî+ ¹पना दî9 ¹प ¬ले ही न समU , द¸ सरे लîग ¨·ह ¨°ला,
हलका मानdे ह ¹र ¨दासीनdा, ¨पे÷ा का ¤यवहार करdे ह ¹ समय प÷ने पर (सा ¤यî+ िकसी कî ¹पना स¤¤ा िम¬ नही
¤ना पाdा ¹र ¹÷े व+ कî, ¨सके काम नही ¹dा¹ स¤ dî यह ह िक मुसी¤d के व+ वे स¤ लîग 7स¬ हîdे ह , î«नकî
क¬ी िdर¹कार सहना प÷ा °ा¹ (से ¹वसर पर वे ¤दला लेने ¹र किõना, ¤{ाने की ही ¤ाd सî¤dे ह ¹
हम संसार म रहना ह dî सही ¤यवहार करना ¬ी सीखना ¤ािह(¹ सेवा- सहायdा करना dî ¹गे की ¤ाd ह, पर
इdनी सv«नdा dî हर ¤यî+ म हîनी ¤ािह( िक î«ससे वा¹dा प÷े ¨ससे न–dा, स†ावना के सा° मीõे व¤न ¤îल , °î÷ी-
सी देर dक क¬ी िकसी से िमलने का ¹वसर ¹(, d¤ ि°Pा¤ार ¤रd¹ इसम न dî पसा ¤यय हîdा ह, न समय¹ î«dने
समय म क°ु व¤न ¤îले «ाdे ह , ¹¬¢ ¤यवहार िकया «ाdा ह, ¨ससे कम समय म मीõे व¤न ¹र ि°P dरीके से ¬ी ¤यवहार
िकया «ा सकdा ह ¹ ¨|d ¹व¬ाव द¸ सरî पर ¤ुरी Fाप Fî÷dा ह ¹र ¨सका पîरणाम क¬ी- क¬ी ¤ुरा ही िनकलdा ह ¹
¹कारण ¹पने °¬ु ¤{ाने ¤लना, ¤ुî|मानी की ¤ाd नही¹ इस 7कार के ¹व¬ाव का ¤यî+ ¹ंddः °ा°े म रहdा ह ¹
«¤ हम िकसी से िमल या हमसे कî, िमले , dî 7स¬dा ¤य+ की «ानी ¤ािह(¹ मु¹कराdे ह ( ¹ि¬वादन करना
¤ािह( ¹र ि¤õाने - ¤ õने कु °ल समा¤ार प¸Fने ¹र साधारण ि°Pा¤ार ¤रdने के ¤ाद ¹ने का कारण प¸Fना, ¤dाना ¤ािह(
¹ यिद सहयîग िकया «ा सकdा हî dî वसा करना ¤ािह( ¹·य°ा ¹पने पîरî¹°िdया ¹पP करdे ह ( सहयîग न कर सकने
का दु ःख ¤य+ करना ¤ािह(¹ इसी 7कार यिद द¸ सरा कî, सहयîग नही कर सका ह dî ¬ी ¨सका समय लेने ¹र
सहानु¬¸िdप¸णर °·दî म ही देना ¤ािह(¹ ¹खा, ककर °, ¨पे÷ाप¸णर ¹°वा UŽाह°, िdर¹कार ¬रा ¨Vर देना °ीõ ¹र गवार
कî ¬ी °î¬ा देdा ह ¹ हम ¹पने कî इस पं î+ म ख÷ा नही करना ¤ािह(¹
¤÷े «î ¤यवहार कर गे , ¤¤¤े व सा ही ¹नुकरण सीखगे¹ यिद हम ¹पने ¤¤¤î कî ¹ि°P, ¨…ं¬ ¤नाना हî dî ही हम
¹स+य ¤यवहार की ¹दd ¤ना( रहनी ¤ािह( ¹·य°ा ¹ि¤तय इसी म ह िक ¹वे °, ¨Vे«ना, ¨¤ल प÷ना, 4îध म
dमdमा «ाना, ¹ि°P व¤न ¤îलना ¹र ¹सतय ¤यवहार करने का दî9 ¹पने ¹ंदर यिद ¹वलप मा¬ा म हî dî ¬ी ¨से ह°ाने
के îल( स•dी के सा° ¹पने ¹व¬ाव के सा° सं°9र कर ¹र d¬ी ¤न ल , «¤ ¹पने म सv«नdा की 7वîV का समुि¤d
समावे ° हî «ा(¹
हम ¹पनी ¹र द¸ सरî की ¸îP म सv«नdा ¹र °ालीनdा से पîरप¸णर (क शे8 मनु'य की dरह ¹पना ¹¤रण ¹र
¤यî+तव ¤ना सक dî समUना ¤ािह( िक मनु'यdा की 7°म परी÷ा म ¨Vीणर हî ग(¹ ¨सके ¹गे के कदम न िdकdा, सेवा,
¨दारdा, संयम, सदा¤ार, पु7य, परमा°र के ह ¹ इसम ¬ी पहली (क ¹िd ¹व°यक °dर यह ह िक हम सv«नdा की सामा·य
पîर¬ा9ा समU ¹र ¹पना(, î«सके ¹ंdगर d मधुर ¬ा9ण ¹र िवन–, ि°P (वं म दु ¤यवहार ¹िनवायर हî «ाdा ह ¹
¹¹व¤Fdा मनु'य की ¹ं dîरक ¹र ग,- गु«री î¹°िd का पîर¤य देdी ह ¹ गंदा ¹दमी यह 7क° करdा ह िक ¨से
¹वांFनीयdा ह°ाने ¹र ¨तक Pdा ¤ना( रखने म कî, ¢ि¤ नही ह ¹ लापरवाह, ¹लसी ¹र 7मादी ही गंदे देखे ग( ह «î
¹वांFनीयdा से समUîdा करके ¨से गले से लगा( रह सकdा ह , वही गं दा ¬ी रह सकdा ह ¹ गंदगी देखने म स¤कî ¤ुरी
लगdी ह ¹र ¨स ¤यî+ के 7िd सह« ही °णा ¬ाव ¨तप¬ करdी ह ¹ गं दे कî कîन ¹पने समीप ि¤õाना ¤ाहेगा? दु ग‚ ध से
िकसे ¹पनी नाक, मलीनdा से िकसे ¹पनी ¹ ख ¹र हेय 7वîV कî देखकर कîन मनîद°ा ÷ु·ध करना ¤ाहेगा¹
गंदगी ¹वा¹°य की ¸îP से ¹dीव हािनकारक ह ¹ ¨से ¤ीमारी का संदे°वाहक कह सकdे ह ¹ «हा गंदगी रहेगी वहा
¤ीमारी «¹र पह ¤ेगी¹ गं दगी से ¤ीमारी कî ¤ह d ƒयार ह ¹ 9¸ लî कî dला° करdी ह , िddली î«स 7कार 9¸ ल पर «ा
पह ¤dी ह , ¨सी dरह «हा गंदगी 9ल- 9¸ ल रही हîगी वहा ¤ीमारी ¬ी खî«, dला° करdी ह , «¹र पह ¤ «ा(गी¹ ¤ीमारी ¬ी
गं दगी पदा करdी ह यह õीक ह, पर यह िनî°¤d ह िक «î गं दे ह वे ¹व¹° न रह सक गे¹ मनु'य की म¸ल 7क िd गंदगी के
िव¢| ह, इसîल( िकसी ¤यî+ या पदा°र कî गंदा देखdे ह dî ¹नायास ही °णा ¨तप¬ हîdी ह , वहा से द¸ र ह°ने का «ी
करdा ह ¹ ¹¹dु î«·ह मनु'यdा का Uान ह, ¨·ह गं दगी ह°ाने का ¹व¬ाव ¹पनी 7क िd म ¹िनवायर dः «î÷ देना ¤ािह(¹
हर हालd म हर ¤यî+ कî ¹व¤Fdा के îल( ¹नान ¹व°यक मानना ¤ािह(¹ ¤े¤क « से रîगî म म«¤¸री ¨तप¬ हî
«ा( dî ¤ाd द¸ सरी ह, नही dî ¤ीमारî कî ¬ी ि¤िकतसक के पराम°र से ¹व¤Fdा का कî, न कî, रा¹dा «¹र िनकालdे
रहना ¤ािह(¹
मु ह की स9ा, ¤ह d °यान देने यî¹य ह ¹ «ी¬ पर मल की (क पdर «मने लगdी ह ¹र दाdî की îUरी म ¹¬ के
कण िFपे रहकर स÷न पदा करdे ह ¹ स¤ेरे कु Žा करdे समय दाdî कî ¬ली 7कार सा9 करना ¤ािह(¹ î«dने ¤ार कु F
खाया «ा( ¨dने ही ¤ार कु Žा करना ¤ािह( ¹र राd कî सîdे समय dî «¹र ही मु ह की स9ा, कर लेनी ¤ािह(¹ इससे
दाd ¹îधक िदन ि°क गे, मु ह म ¤द¤¸ न ¹(गी ¹र लîगî कî पास ¤ õने पर द¸ र ह°ने की ¹व°यकdा न प÷ेगी¹
कप÷े «î °रीर कî F¸ dे ह , ¨·ह िव°े9 °यान देकर सा¤ुन से रî« धîना ¤ािह(¹ ¤िनयान, ¹ं¬रिवयर, धîdी,
पाय«ामा ¹िद पसीना सîखdे रहdे ह ¹र रî« सा¤ु न d°ा ध¸प की ¹पे÷ा करdे ह ¹ कî° « से कप÷े î«नका पसीने से
स-पकर नही हîdा, िनतय धîने से F¸ ° पा सकdे ह ¹ ¬ारी ि¤¹dरî कî धîना dî किõन प÷ेगा, पर °रीर F¸ ने वाली ¤ादर
«लदी- «लदी ¤दलdे रहना ¤ािह( ¹र ि¤¹dर कî क÷ी ध¸प म हर रî« सु खाना ¤ािह(¹
°र के ¤dर न इस dरह नही रहने ¤ािह( î«न पर ¤¸हे ¹र िFपकली पे°ा¤ कर ¹र ¨स «हर से ¹7तय÷ ¤ीमाîरया
°रीरî म °ुस प÷¹ खु ले ह ( वाU पदा°ì

म की÷े - मकî÷े °ुसdे ह ¹ इसîल( हर खाने म काम ¹ने वाली व¹dु द¤ी- °की रहनी
¤ािह(¹ कप÷े, ¤dर न, 9नî¤र, िकdा¤ , «¸dे d°ा ¹·य सामान य°ा¹°ान रखा हî dî ही सुंदर लगेगा ¹·य°ा ि¤खरी ह ,
¹¹d- ¤य¹d ¤ी« क¸ ÷े ¹र गंदगी की ही °कल धारण कर लेdी ह , ¬ले ही वे िकdनी ही म¸लयवान कयî न हî¹ î«स व¹dु कî
Uा÷dे- पîFdे न रहा «ा(गा, वह ध¸ल की पdर «मा हîने d°ा लगाdार +dु 7¬ाव सहdे रहने से मली, पुरानी हî «ा(गी¹ हर
¤ी« स9ा,, मर-मd ¹र ¤यव¹°ा ¤ाहdी ह ¹ °र का हर पदा°र हम से यही ¹°ा करdा ह िक ¨से ¹व¤F ¹र
सु ¤यवî¹°d रखा «ा(¹ î«·ह ¹व¤Fdा से स¤¤ा 7े म ह , वे °रीर का •ंगार करके ही न ¤ õ «ा(गे वरन¸ «हा रहगे वहा हर
पदा°र की °î¬ा, ¹व¤Fdा (वं सुसv«ा का °यान रखगे¹ मकान की °¸°- 9¸ ° ¹र îलपा,- पुdा, का, िकवा÷î की रं गा, का
°यान रखा «ा(गा dî ¨सम ¤ह d प सा ख¤र नही हîdा¹ °î÷ा- °î÷ा समय ¤¤ाकर °र के लîग िमल- «ुलकर यह स¤ सह«
ही (क मनîरं «न की dरह करdे रह सकdे ह ¹र °र पîरवार म °रीर ¹र ¤¤¤î म मानवîि¤d ¹व¤Fdा का द°र न हî
सकdा ह ¹ कलाकाîरdा, ¹व¤Fdा से ¹रं ¬ हîdी ह ¹ ¹वांFनीयdा कî ¹¹वीकार करने की 7वîV का ¹ि¬वधर न °रीर से
¹रं ¬ हîकर व+î dक ¹र मन से लेकर ¤यवहार dक की ¹व¤Fdा dक िवकîसd हîdा ¤ला «ाdा ह ¹र इस ¹¤Fी
¹दd के सहारे परम स—दयर से ¬रे ह ( इस िव°व म ¬गवान की 7का°वान कलाकाîरdा कî देखकर ¹नंद िव¬îर रहdा
ह ¹ प¸णर dा के ल°य dक पह ¤ा «ा सकdा ह ¹
¹पने यहा मल- म¸¬ सं¤ंधी गं दगी के लîग ¤ुरी dरह ¹+य¹d हî ग( ह ¹ पु राने °ं ग के पाखानî म ि9नायल, ¤¸ ना ¹िद
न प÷ने से ¨नम ¬ारी दु ग‚ ध ¹dी ह ¹ ¤¤¤î कî नाîलयî पर, गîलयî म °•ी कराके रा¹dे दु ग‚ ध प¸णर (वं «ी िम¤लाने वाले
¤ना िद( «ाdे ह ¹ °रî के ¹गे लîग क¸ ÷े का °े र लगा देdे ह ¹ पे°ा¤ (से ¹°ानî पर करdे रहdे ह , «हा सावर «िनक
¹वागमन रहdा ह ¹ स9ा, कमî के ¬रîसे स¤ कु F िन¬र र रहdा ह ¹ यह नही सî¤dे िक मल- म¸¬ ¹îखर ह dî हमारे ही
°रीर का, ¨सकी ¹व¤Fdा के îल( कु F काम ¹वयं ¬ी कर ¹र स9ा, कमî के काम म सहयîग देकर ¹व¤Fdा ¤ना( रखने
का ¹पना कdर ¤य िन¤ाह¹ देहाdî म dî ¹र ¬ी ¤ुरी द°ा का वाdावरण, गंदगी, दु ग‚ ध ¹र ¹¹वा¹°यकर, °णा¹पद ¸°यî से
¬रा रहdा ह ¹ क¸ ÷े ¹र गî¤र के °े र «हा- dहा लगे रहdे ह ¹र ¨सकी स÷न सावर «िनक ¹वा¹°य के îल( संक° ¨तप¬
करdी रहdी ह ¹ इस िद°ा म िव°े9 ¹प से °यान िदया «ाना ¤ािह(¹ सîखdा पे°ा¤ °र, सîखdा नाîलया d°ा ग˜े खîद कर
लक÷ी के °î¤ालय ¤ह d स¹dे म d°ा ¤÷ी ¹सानी से ¤ना( «ा सकdे ह ¹ गा व म पानी का लî°ा सा° ले «ाने की dरह
यिद खु रपी ¬ी लîग सा° ले «ाया कर ¹र Fî°ा ग˜ा खîदकर ¨सम °î¤ «ाने के ¨परांd ग˜े कî °क िदया कर, dî
«मीन कî खाद ¬ी िमले ¹र गं दगी के कारण ¨तप¬ हîने वाली °ारीîरक, मानîसक ¹र सामाî«क ¹वांFनीयdा ¬ी ¨तप¬
न हî¹
¹व¤Fdा मानव «ीवन की सु¢ि¤ का 7°म गु ण ह ¹ हम ¹पने °रीर, व+, ¨पकरण (वं िनवास की ¹व¤Fdा कî
(सा 7¤ंध करना ¤ािह( î«ससे ¹पने कî संdî9 ¹र द¸ सरî कî ¹नंद िमले¹ िनमर लdा, िनरîिगdा, िनî°¤ं ddा ¹र िनîलर Pdा
के ¹धार पर ¨तप¬ की ग, ¹तमा की पिव¬dा हम ,°वर से िमलाने का प° 7°¹d करdी ह ¹ ¹व¤Fdा कî हम ¹िनवायर
मान ¹र ¹¹व¤Fdा का िन'कासन िनरं dर करdे रह, यही हमारे îल( ¨ि¤d ह ¹
¹¤Fा हî हम समUदारी ¹र सv«नdा से ¬रा ह ¹, सादगी का «ीवन î«(¹ ¹पनी ¤ा• सुसv«ा वाले पîरवार
की d°ा समा« की वा¹dिवक ¹व°यकdा¹ं कî प¸रा करने म लगाने लग¹ सादगी सv«नdा का 7िdिनîधतव करdी ह ¹
î«सका वे°- िव·यास सादगीप¸णर ह, ¨से ¹îधक 7ामािणक (वं िव°व¹d माना «ा सकdा ह ¹ «î î«dना ही ¨|dपन
िदखा(गा, समUदारî की ¸îP म ¨dनी ही इv«d िगरा लेगा¹ इसîल( ¨ि¤d यही ह िक हम ¹पने व+ सादा रख , ¨नकी
îसला, ¬ले- मानसî « सी करा( , «ेवर न ल°का( नाख¸न ¹र हîõ न रं गे , ¤ालî कî इस dरह से न स«ा( î«ससे द¸ सरî कî
िदखाने का ¨प4म करना प÷े¹ नर- नारी के ¤ी¤ मानîसक ¤यि¬¤ार का ¤ह d कु F स«न इस 9 °न- पर¹dी म हîdा ह ¹
सादगी, °ालीनdा ¹र सv«नdा का स«न करdी ह ¹ ¨सके पीFे गं¬ीरdा ¹र 7ामािणकdा, िववे क°ीलdा ¹र
¤îî|क पîरपकवdा Uा कdी ह ¹ व¹dुdः इसी म इv«d के स¸¬ सî¬िहd ह ¹ सादगी °î9णा करdी ह िक यह ¤यî+ द¸ सरî कî
¹कि9र d या 7¬ािवd करने की ¤ाल¤ा«ी नही, ¹पनी वा¹dिवकdा िविदd कराने म संdुP ह ¹ यही ,मानदारी ¹र स¤¤ा,
की राह ह ¹ यह ¹मदनी ¤{ाने का ¬ी (क dरीका ह ¹ ि9«¸लख¤î रîकना ¹°ारd¸ ¹मदनी ¤{ाना¹ समय ¹ गया ह िक इस
¤ाल ¤ुî| कî Fî÷कर 7î{dा का ¸îPकîण ¹पनाया «ा(¹ हम गरी¤ दे° की िनवासी ह ¹ सवर साधारण कî सामा·य सुसv«ा
¹र पîरिमd ख¤र म काम ¤लाना प÷dा ह ¹ ¹पनी व¹dु î¹°िd यही ह िक ¹पने करî÷î ¬ा,- ¤हनî की पंî+ म ही हम ख÷े
हîना ¤ािह( ¹र ¨·ही की dरह रहन- सहन का dरीका ¹पनाना ¤ािह(¹ इस समUदारी म ही इv«d पाने के स¸¬ सî¬िहd
ह ¹ 9 °न पर¹dी ¹र ¹प¤यय की राह ¹पनाकर हम ¹î°र क संक° कî ही िनमंि¬d करdे ह ¹
¹व¤Fdा के सा° «ु÷ी ह , सादगी ¹पने ¹प म (क ¨तक P ¹dर का 9 °न ह ¹ ¨सम गरी¤ी का नही महानdा का
पु° ह ¹ सादा वे °¬¸9ा ¹र सुसv«ा वाला ¤यî+ ¹पनी ¹वdं ¬ 7िd¬ा ¹र ¹वdं ¬ ि¤ंdन का पîर¤य देdा ह ¹ ¬े÷- ¤ाल कî
Fî÷कर «î िववे क°ीलdा का रा¹dा ¹पनाdा ह , वह ¤हादु र ह ¹ सादगी हम ि9«¸लख¤î से ¤¤ाकर ¹î°र क î¹°रdा म ही
सम°र नही करdी वरन¸ हमारी ¤ाîरि¬क ¸{dा ¬ी 7मािणd करdी ह ¹ ¹कारण ¨तप¬ हîने वाले ,'यार ¹र लांFन से ¤¤ने
का ¬ी यही सरल मागर ह ¹

¬™० महे·¢ना° सरकार ¹पनी कार से कही «ा रहे °े¹ मागर म परमहं स ¹वामी शी रामक 'ण का ¹शम प÷dा °ा¹
«¤ वे पास से िनकले dî (क ¤यî+ कî °ांd ि¤V ¤ õे देखा¹ ¨·हîने समUा िक माली ह, सî ¨ससे 9¸ ल dî÷कर लाने कî
कहा¹ ¨स ¤यî+ ने ¤÷ी 7स¬dा के सा° 9¸ ल dî÷कर दे िद(¹ ¬™० महे·¢ना° ¤ले ग(¹ द¸ सरे िदन वे परमहं स से िमलने
ग(, dî देखकर ¹वाक¸ रह ग( िक î«स ¤यî+ ने ¨·ह ि¤ना िकसी ¹ि¬मान के ¹दरप¸वर क 9¸ ल िद( °े , वह माली नही, ¹वयं
रामक 'ण परमहं स ही °े¹

¹नी ि d से 7ा P स9लdा की ¹पे ÷ा नी ि d पर ¤लdे ह ( ¹स9लdा कî ि °रî धा यर कर गे ¹
लîगî की ¸îP म स9लdा का ही म¸लय ह ¹ «î स9ल हî गया, ¨सी की 7°ंसा की «ाdी ह ¹ देखने वाले यह नही
देखdे िक स9लdा नीिdप¸वर क 7ाP की हî या ¹नीिdप¸वर क¹ U¸ õे , ¤े,मान, दगा¤ा«, ¤îर, लु°े रे ¬ी ¤ह d धन कमा सकdे ह ¹
िकसी ¤ालाकी से कî, ¤÷ा पद या गîरव ¬ी 7ाP कर सकdे ह ¹ ¹प लîग dî के वल ¨स कमा, ¹र िव¬¸िd मा¬ कî ही
देखकर ¨सकी 7°ंसा करने लगdे ह ¹र सम°र न ¬ी, पर सî¤ना ¤ािह( िक कया यह dरीका ¨ि¤d ह ? स9लdा की ¹पे÷ा
नीिd शे8 ह ¹ यिद नीिd पर ¤लdे ह ( पîरî¹°िdव° ¹स9लdा िमली ह dî वह ¬ी कम गîरव की ¤ाd नही ह ¹ नीिd का
¹°ायी महvव ह, स9लdा का ¹¹°ा,¹ स9लdा न िमलने से ¬îिdक «ीवन के ¨तक9र म °î÷ी ¹सुिवधा रह सकdी ह, पर
नीिd तयाग देने पर dî लîक, परलîक, ¹तम- संdî9 ¤îर¬, धमर , कdर ¤य ¹र लîकिहd स¬ी कु F नP हî «ाdा ह ¹ ,सामसीह
ने 4¸ स पर ¤{कर परा«य ¹वीकार की, पर नीिd का पîरतयाग नही िकया¹ ि°वा«ी, राणा 7dाप, ¤ंदा व रागी, गु ¢ गîिव·द
îसंह, ल°मी¤ा,, सु¬ा9¤ं¢ ¤îस ¹िद कî परा«य का ही मु ह देखना प÷ा, पर ¨नकी वह परा«य ¬ी िव«य से ¹îधक
महvवप¸णर °ी¹ धमर ¹र सदा¤ार पर ¸{ रहने वाले स9लdा म नही कdर ¤य पालन म 7स¬dा ¹नु¬व करdे ह ¹र इसी
¸{dा कî î¹°र रख सकने कî (क ¤÷ी ¬ारी स9लdा मानdे ह ¹ ¹नीिd ¹र ¹स9लdा म से यिद (क कî ¤ु नना प÷े dî
¹स9लdा कî ही पसंद करना ¤ािह(, ¹नीिd कî नही¹ «लदी स9लdा 7ाP करने के लî¬ म ¹नीिd के मागर पर ¤ल
प÷ना (सी ¤÷ी ¬¸ल ह î«सके îल( सदा प°¤ाdाप ही करना प÷dा ह ¹
वा¹dव म नीिdमागर Fî÷कर िकसी मानवîि¤d सदु …े°य की प¸ िdर की नही «ा सकdी¹ मनु'यdा खîकर पा, स9लdा
कम से कम मनु'य कहलाने म गîरव ¹नु¬व करने वाले के îल( 7स¬dा की ¤ाd नही ह ¹ यिद कî, ¤यî+ ¬पर से नी¤े
«लदी पह ¤ने की ¨dावली म सीधा क¸ दकर हा°- पर dî÷ ले dî कî, ¨से «लदी पह ¤ने म स9ल ह ¹ नही कहना ¤ाहेगा¹
इससे dî °î÷ा देर म पह ¤ना ¹¤Fा¹ मानवîि¤d निdक ¹dर गवाकर िकसी (क िव9य म स9लdा की लालसा ¨परî+
7संग « सी िव¬-¤ना ही ह ¹ हर िव¤ार°ील कî इससे सावधान रहकर, नीिdमागर कî ¹पना( रहकर मनु'यdा के ¹नु¹प
वा¹dिवक स9लdा ¹î«र d करने का 7यास करना ¤ािह(¹
पîधे की «÷ म पानी िमलdा «ा(गा dî वह ¤{dा ही ¤लेगा¹ ¹नीिd का पî9ण हîdा रहा dî वह िदन- द¸ नी राd-
¤îगुनी ¤{dी रहेगी¹ ¹·याययु + ¹¤रण करने वालî कî 7îतसाहन ¨नसे िमलdा ह, «î इसे सहन करdे ह ¹ ¨तपीि÷d
¤ु प¤ाप स¤ कु F सह लेdा ह , यह समUकर ¹तया¤ारी की िह-मd द¸ नी- ¤îगुनी हî «ाdी ह ¹र वह ¹पना मागर िन'कं °क
समUकर ¹र ¬ी ¹îधक ¨तसाह से ¹ना¤रण करने पर ¨dा¹ हî «ाdा ह ¹ ¹·याय सहना- ¹पने « से ¹·य, ¹सं•य कî
¨सी dरह का ¨तपी÷न सहने के îल( पîरî¹°िdया प दा करना ह ¹ ¹नीिd सहना 7तय÷dः ¹ddायी कî 7îतसाहन देना ह
द¸ सरî कî ¹नीिd से पीि÷d हîdे देखकर िकdने ही लîग सî¤dे ह िक î«स पर ¤ीdेगी वह ¬ुगdेगा¹ हम कयî ¤य°र
का Uं U° मîल ल¹ (क सdाया «ाdा रहdा ह - प÷îसी ¤ु प¤ाप देखdा रहdा ह ¹ दु P लîग हम ¬ी न सdाने लग, यह सî¤कर
वे ¹ ख 9े र लेdे ह ¹र ¨…ं¬î कî ¨…ं¬dा ¤रddे रहने का िन¤ार ध ¹वसर िमलdा रहdा ह ¹ ¤ार गुं¬े सî ¹दिमयî की ¬ी÷
म °ुसकर सरे ¤ा«ार (क- दî कî ¤ाकु ¹ं से गîद सकdे ह ¹ सारी ¬ी÷ dमा°ा देखेगी, ¹ ख 9े रे गी या ¬ाग ख÷ी हîगी¹ कही
हम ¬ी ¤पे° म न ¹ «ा( , इस ¬य से कî, ¨न ¤ार दु Pî कî रîकने या पक÷ने का साहस न करे गा¹ इस «ाdीय दु ¤र लdा
कî समUdे ह ( ही ¹( िदन दु ¹साहîसक ¹पराधî की, ¤îरी, हतया, ल¸°, कतल, ¤लातकार ¹िद की °°ना( °ि°d हîdी
रहdी ह ¹ «ानकार, सं¤ंîधd ¹र î«·ह स¤ कु F माल¸म ह , वे गवाही dक देने नही «ाdे ¹र ¹dं कवादी ¹दालdî से ¬ी
F¸ ° «ाdे ह ¹र द¸ ने- ¤îगुने «î° से ि9र «न- साधारण कî ¹dं िकd करdे ह ¹ (क- (क करके िव°ाल «न- सम¸ह °î÷े से
¨…ं¬î ¤ारा सdाया «ाdा रहdा ह ¹ लîग ¬य¬ीd, ¹dं िकd, पीि÷d रहdे ह, पर कु F कर नही पाdे¹ मन ही मन कु ÷कु ÷ाdे
रहdे ह ¹ िव°ाल «न- ‘ ’ सम¸ह िनरीह कहला( ¹र °î÷े से दु P- दु रा¤ारी िन¬र य हîकर सं¬¹d, ¹dं िकd करdे रह, यह िकसी
दे° की «नdा के îल( सामाî«कdा के îल( ¬ारी कलं क- काîलमा ह ¹ इससे ¨स वगर की कायरdा, नपुंसकdा, ¬ी¢dा,
िन«îवdा ही îस| हîdी ह ¹ (सा वगर पु¢9 कहलाने का ¹îधकारी नही¹ पु¢9ा°र करने वाले कî, साहस ¹र °îयर रखने वाले
कî पु¢9 कहdे ह ¹ «î ¹नीिd का 7िdरîध नही कर सकdा, ¨से नपुंसक, िन«îव ¹र ¹|रमd ¬ी कहना ¤ािह(¹ यह î¹°िd
हमारे îल( ¹dीव लv«ा7द ह ¹
हम (क- (क करके सdा( «ाdे ह, इसका (क ही कारण ह िक साम¸िहक 7िdरîध की ÷मdा खî ग,¹ ¨से «गाया
«ाना ¤ािह(¹ ¹« «î (क पर ¤ीd रही ह , वह कल ¹पने पर ¬ी ¤ीd सकdी ह ¹ द¸ सरे पर हîने वाले ¹तया¤ार का 7िdरîध
हम न कर गे dî हमारी सहायdा के îल( कयî ¹(गा? यह सî¤कर ¤यî+गd सुर÷ा की इस ¤पे° म ¹पने कî ¬ी ¤î° लगे ,
¹î°र क d°ा द¸ सरे 7कार की ÷िd ¨õानी प÷े dî ¬ी इसे मनु 'यdा के ¨Vरदाियतव का म¸ लय समUकर ¤ु काना ¤ािह(¹ इसे
सहन करना ही ¤ािह(¹ °¸रवीरî कî ¹°ाd सहने का ही पुर¹कार िमलdा ह ¹र वे इसी ¹धार पर लîक- श|ा के
¹îधकारी ¤नdे ह ¹
लîक- श|ा के ¹îधकारी dीन ही ह - º संd, (×) सुधारक, (;) °हीद¹ î«·हîने ¹पने ¹¤रणî, िव¤ारî ¹र
¬ावना¹ं म ¹द°र वािदdा (वं ¨तक Pdा का समावे ° कर रखा ह, वे संd ह ¹ िवप¬ पîरî¹°िdयî कî ¤दलकर «î सु ¤यव¹°ा
¨तप¬ करने म संल„ ह- ¹नîि¤तय के ¹°ान पर ¹ि¤तय की 7िd8ापना कर रहे ह , वे सुधारक ह ¹ ¹·याय से «¸Uने म
î«·हîने ¹°ाd सहे ¹र ¤¤ारदी हî हसdे ह ( ि°रîधायर िकया ह , वे °हीद ह ¹ (से महामानवî के 7िd मनु'यdा सदा क dU
रही ह ¹र इिdहास ¨नका सदा ¹ि¬नंदन करdा रहा ह ¹ ¬ले ही ¹पîV सहनी प÷े , पर इस गîरव से गîरवाî·वd हî सकdा
हî, ¨से ¹पने कî ध·य ही मानना ¤ािह(¹ ¹नीिd का साम¸िहक 7िdरîध करने की 7वîV हम «न- मानस म «ा¹d करनी
¤ािह( ¹र î«·हîने इस संद¬र म कु F कP सहा हî, °îयर िदखाया हî, तयाग िकया हî, ¨नका ¬ाव ¬रा सावर «िनक ¹ि¬नंदन
िकया «ाना ¤ािह(, dािक वसा 7îतसाहन द¸ सरî कî ¬ी िमले ¹र «न- «ीवन म ¹नीिd से ल÷ने की ¨मंग ¨õ प÷े¹
हम क, ¤ार (सी ¤ाd मानने ¹र (से काम करने के îल( िवव° िकया «ाdा ह, î«·ह ¹वीकार करने कî ¹पनी
¹तमा नही कहdी, ि9र ¬ी हम द¤ाव म ¹ «ाdे ह ¹र इं कार नही कर पाdे¹ इ¤Fा न हîdे ह ( ¬ी ¨स द¤ाव म ¹कर वह
करने लगdे ह, «î न करना ¤ािह(¹ (से द¤ावî म िम¬î या ¤ु«ुगì

का िनद•° इdने ¹¹हप¸वर क सामने ¹dा ह िक गु ण-दî9
का °यान रखने वाला ¹समं«स म प÷ «ाdा ह ¹ कया कर , कया न कर? कु F स¸ U नही प÷dा¹ कम«îर 7क िd के मनु'य
‘ ’ 7ायः (से ¹वसरî पर ना नही कह पाdे ¹र इ¤Fा न रहdे ह ( ¬ी वसा करने लगdे ह ¹ इस ¤ुरी î¹°िd म साहसप¸वर क
इनकार कर देना ¤ािह(¹ î«से हम ¤ु रा समUdे ह , ¨से ¹वीकार न करना सतया¹ह ह ¹र यह िकसी ¬ी ि7य«न, सं¤ंधी या
¤ु«ुगर के सा° िकया «ा सकdा ह ¹ इसम ¹नुि¤d या ¹धमर रVी¬र नही ह ¹ इिdहास म (से ¨दाहरण पग- पग पर ¬रे प÷े ह ¹
7šाद, ¬रd, िव¬ी9ण, ¤îल ¹िद की ¹वUा 7•याd ह ¹ ¹«ु र न कî गु ¢«नî से ल÷ना प÷ा °ा¹ मीरा ने पिd का कहना नही
माना °ा¹ मîह¹¹d ¹ि¬¬ावक ¹पने ¤¤¤î कî ¹नेक dरह के कु क तय करने के îल( िवव° करdे ह ¹ ¤े,मानी का धं धा करने
वाले ¤ु«ुगर ¹पने ¤¤¤î से ¬ी वही कराdे ह ¹ ¹पनी म¸{dा ¹र ¹ि{वािदdा की रीिd- नीिd ¹पनाने के îल( ¬ी द¤ाdे ह, न
मानने पर नारा« हîdे ह, ¹वUा का ¹रîप लगाdे ह, (सी द°ा म िकं कdर ¤यिवम¸{ हîने की «¹रd नही ह ¹ ¹द°र यही रहना
¤ािह( िक के वल ¹ि¤तय कî ही ¹वीकार िकया «ा(गा, ¤ाहे वह िकसी के प÷ म «ाdा हî¹ ¹नîि¤तय करे ही हालd म
¹¹वीकार िकया «ा(गा, ¤ाहे िकसी ने ¬ी ¨सके îल( िकdना ही द¤ाव कयî न ¬ाला हî¹ ¹« की सामाî«क कु रीिdयî के
¹ंधानुकरण म पुरानी पी{ी ही ¹¹णी ह ¹ ¤¤¤î का «लदी िववाह कर ¨·ह ¹वा¹°य d°ा ि°÷ा से वंि¤d करना, ¨नका
िम°या मîह मा¬ ह ¹ न–dाप¸वर क (से ¹वसरî पर ¹पनी हõ, ¹सहमिd ¤य+ की «ा सकdी ह ¹ ¸{dाप¸वर क ¹पP °·दî म यह
कह िदया «ा( िक हम िकसी ¬ी °dर पर ख¤îला िववाहî·माद ¹वीकार नही¹ «¤ करना हîगा dî ि¤ना दहे«, «ेवर d°ा
ि¤ना ध¸मधाम का िववाह ही कर गे¹ देखने ¬र म यह ¹वUा ह , पर व¹dुdः इसम हर िकसी का के वल िहd साधन ही
सî¬िहd ह ¹ इसîल( ¤ुरा लगने पर ¬ी क÷वी दवा की dरह यह ¹वUा स¤के îल( शेय¹कर ह ¹ ¹d(व ¨से िकसी 7कार
¹नुि¤d ¹°वा ¹धमर नही कहा «ा सकdा¹
दî¹dी के नाम पर लîग îसगरे °, °रा¤, «ु¹, îसनेमा ¹िद के कु मागर पर °सी°ना ¤ाहdे ह ¹ (से ¹वसरî पर ¬ी
¹पनी सहमिd कî ¹पP ¹र क÷े °·दî म ¤य+ कर सकdे ह ¹ दî¹dी का मdल¤ िम¬ कî कु मागर से Fु ÷ाना ह ¹ प°-‹P
करने के îल( °सी° ले «ाना नही¹ इसी 7कार क«र मागने वाले , ¬ीख के îल( ¹÷ने वाले , ¹नीिd का िवरîध न करके ¤ु प
रहने का ¹¹ह करने वाले लîग ¹( िदन सामने ¹dे रहdे ह ¹र ¤dुरdाप¸वर क ¹पने dकर d°ा 7िd¬ा का (सा 7यîग
करdे ह िक ¹िन¤Fा हîने पर ¬ी ¨नके 7¬ाव म ¹कर वसा ही करने कî िवव° हîdे ह ¹ (से ¹वसरî पर हमारा साहस
इdना 7खर हîना ¤ािह( िक न– िकं dु ¹पP °·दî म इनकार कर सक ¹ इनकार, ¹सहयîग, िवरîध ¹र सं °9र इन ¤ार °+î
से हम ¹नीिd ¹र िववे क का सामना कर सकdे ह ¹ सतय ¹र ·याय के îल( इन °+î का 7यîग हम साहसी °¸रवीर यî|ा
की dरह करdे ¬ी रहना ¤ािह(¹

¹क¤र ने राणा 7dाप कî संदे° ¬े«ा िक यिद ¹प हमसे °¬ुdा Fî÷ द ¹र संîध कर ल , dî ¹पकî «ंगल- «ंगल ¬°कना
न प÷े¹ ¹प «î ¬ी राvय ¤ाह, हम दे सकdे ह ¹
¹क¤र के 7लî¬न कî õु कराdे ह ( महाराणा 7dाप ने îलखा- ¹पने धमर ¹र ¹पनी सं¹क िd की र÷ा के îल( «ंगल-
«ंगल ¬°कना dî कया 7ाण ¬ी देना प÷े dî ¬ी ¹वीकार ह , पर िकसी 7लî¬न के ¹गे Uु कना ¹वीकार नही¹
मनु'य के म¸लया ंकन की कसî °ी , ¨सकी स9लdा ¹ं, यî¹ यdा ¹ं (वं ि व¬¸ि dयî कî नही , ¨सके
सî ¤¤ा रî ¹र सतकमì

कî मा न गे ¹
मनु'य की शे8dा की कसî°ी यह हîना ¤ािह( िक ¨सके ¤ारा मानवीय ¨¤¤ म¸लयî का िनवार ह िकdना हî सका,
¨नकî िकdना 7îतसाहन दे सका¹ यî¹यdा( , िव¬¸िdया dî साधन मा¬ ह ¹ लाõी (वं ¤ाक¸ ¹वयं न dî 7°ंसनीय ह , न
िनंदनीय¹ ¨नका 7यîग पी÷ा पह ¤ाने के îल( ह ¹ या 7ाण र÷ा के îल(? इसी ¹धार पर ¨नकी ¬तसर ना या 7°ंसा की «ा
सकdी ह ¹ मनु'य की िव¬¸िdया (वं यî¹यdा( ¬ी (से ही साधन ह ¹ ¨नका ¨पयîग कहा हîdा ह , इसका पdा ¨सके िव¤ारî
(वं कायì

से लगdा ह ¹ वे यिद सद¸ ह dî वह साधन ¬ी सद¸ ह, पर यिद वे ¹सद¸ ह dî वह साधन ¬ी ¹सद¸ कहे «ा(गे¹
मनु'यdा का गîरव (वं स-मान इन «÷- साधनî से नही, ¨सके 7ाण¹प सारî (वं सत7वîVयî से «î÷ा «ाना ¤ािह(¹
¨सी ¹धार पर स-मान देने, 7ाP करने की पर-परा ¤ना, «ानी ¤ािह(¹
î«स कायर से 7िd8ा ¤{dी ह, 7°ंसा हîdी ह, ¨सी काम कî करने के îल(, ¨सी मागर पर ¤लने के îल( लîगî कî
7îतसाहन िमलdा ह ¹ हम 7°ंसा ¹र िनं दा करने म , स-मान ¹र िdर¹कार करने म °î÷ी सावधानी ¤रd , dî लîगî कî
कु मागर पर न ¤लने ¹र सतप° ¹पनाने म ¤ह d हद dक 7ेरणा दे सकdे ह ¹ ¹मdîर से ¨नकी 7°ंसा की «ाdी ह , î«·हîने
स9लdा, यî¹यdा, स-पदा (वं िव¬¸िd (कि¬d कर ली ह ¹ ¤मतकार कî नम¹कार िकया «ाdा ह ¹ यह dरीका गलd ह ¹
िव¬¸िdयî कî लîग के वल ¹पनी सु ख- सुिवधा के îल( ही (कि¬d नही करdे वरन¸ 7िd8ा 7ाP करना ¬ी ¨…े°य हîdा ह ¹ «¤
धन- व¬व वालî कî ही समा« म 7िd8ा िमलdी ह, dî मान का ¬¸खा मनु'य िकसी ¬ी कीमd पर ¨से 7ाP करने के îल(
¹dुर हî ¨õdा ह ¹ ¹नीिd ¹र ¹पराधî की ¤{îVरी का (क 7मुख कारण यह ह िक ¹ंधी «नdा स9लdा की 7°ंसा
करdी ह ¹र हर ¹स9लdा कî िdर¹कार की ¸îP से देखdी ह ¹ धन के 7िd, धनी के 7िd ¹दर ¤ुî| d¬ी रहनी ¤ािह(
«¤ वह नीिd ¹र सदा¤ारप¸वर क कमाया गया हî, यिद ¹धमर ¹र ¹नीिd से ¨पाî«र d धन ¤ारा धनी ¤ने ह ( ¤यî+ के 7िd
हम ¹दर ¸îP रखdे ह dî इससे ¨स 7कार के ¹पराध करने की 7वîV कî 7îतसाहन ही िमलdा ह ¹र इस ¸îP से
¹पराध वî| कî 7îतसाहन ही िमलdा ह ¹र इस ¸îP से ¹पराध वî| म हम ¹वयं ¬ी ¬ागीदार ¤नdे ह ¹
द¸ सरî कî स·मागर पर ¤लाने का, कु मागर की ¹र 7îतसािहd करने का (क ¤ह d ¤÷ा साधन हमारे पास मद ह , वह
ह ¹दर ¹र ¹नादर¹ î«स 7कार वî° देना (क Fî°ी °°ना मा¬ ह, पर ¨सका पîरणाम द¸ रगामी हîdा ह ¨सी 7कार ¹दर
के 7क°ीकरण का ¬ी द¸ रगामी पîरणाम सं¬व ह ¹ °î÷े से वî° ¤ु नाव संdुलन कî इधर से ¨धर कर सकdे ह ¹र ¨स ¤ुने
ह ( ¤यî+ का ¤यî+तव िकसी महvवप¸णर ¹°ान पर पह ¤कर राPीय ¹र ¹ंdरारPीय ÷े¬î म ¹7तयाि°d ¬¸िमका संप¬ कर
सकdा ह ¹ °î÷े से वî° ¤यापक ÷े¬ म ¹पना 7¬ाव िदखा सकdे ह ¹र ¹नहîनी सं¬ावना( साकार ¤ना सकdे ह , ¨सी
7कार हमारी ¹दर ¤ुî| यिद िववेकप¸णर ¬¸िमका 7¹dुd करे dî िकdने ही कु मागर पर ¤{dे ह ( कदम ¢क सकdे ह ¹र
िकdने ही स·मागर की ¹र ¤लdे ह ( îUUकने वाले पî°क 7ेरणा ¹र 7îतसाहन पाकर ¨स िद°ा म dतपरdाप¸वर क ¹¹सर
हî सकdे ह ¹
î«न लîगî ने ¤ाधा¹ं कî सहdे ह ( ¬ी ¹पने «ीवन म कु F ¹द°र ¨पî¹°d िक( ह , ¨नका सावर «िनक स-मान
हîना ¤ािह(, ¨नकी 7°ंसा मु+कं õ से की «ानी ¤ािह( ¹र «î लîग िनं दनीय मागì

¤ारा ¨¬िd कर रहे ह , ¨नकी 7°ंसा
(वं सहायdा िकसी ¬ी ¹प म नही करनी ¤ािह(¹ ¹वांFनीय कायì

म सî-मîलd हîना ¬ी (क 7कार से ¨·ह 7îतसाहन देना
ही ह कयîिक शे8 पु¢9î की ¨पî¹°िd मा¬ से लîग कायर म ¨नका सम°र न मान लेdे ह ¹र ि9र ¹वयं ¬ी ¨नका सहयîग
करने लगdे ह ¹ इस 7कार ¹नुि¤d कायì

म हमारा 7तय÷ ¹र परî÷ सम°र न ¹ंddः ¨·ह ¤{ाने वाला ही îस| हîdा ह ¹

हम मनु'य का म¸लयांकन ¨सकी स9लdा¹ं (वं िव¬¸िdयî से नही वरन¸ ¨स नीिd ¹र गिdिवîध के ¹धार पर
करना ¤ािह(, î«सके ¹धार पर वह स9लdा 7ाP की ग,¹ ¤े,मानी से करî÷पिd ¤ना ¤यî+ ¬ी हमारी ¸îP म िdर¹क d
हîना ¤ािह( ¹र वह ¹स9ल ¹र गरी¤ ¤यî+ î«सने िवप¬ पîरî¹°िdयî म ¬ी «ीवन के ¨¤¤ ¹द°ì

की र÷ा की, ¨से
7°ंसा, 7िd8ा, स-मान ¹र सहयîग स¬ी कु F 7दान िकया «ाना ¤ािह(¹ यह याद रखने की ¤ाd ह िक «¤ dक «नdा का,
िनंदा- 7°ंसा का, ¹दर- िdर¹कार का मापद7¬ न ¤दलेगा, d¤ dक ¹पराधी म¸ Fî पर dाव देकर ¹पनी स9लdा पर गवर
करdे ह ( िदन- िदन ¹îधक ¨¤F ं खलdा हîdे ¤लगे ¹र सदा¤ार के कारण सीिमd स9लdा या ¹स9लdा 7ाP करने वाले
îख¬ ¹र िनरा° रहकर सतप° से िव¤îलd हîने लगगे¹ यु ग- िनमार ण सतसंकलप म यह 7¤ल 7ेरणा 7¹dुd की ग, ह िक हम
मनु'य के म¸लयांकन की कसî°ी ¨सकी स9लdा¹ं (वं िव¬¸िdयî कî नही सv«नdा ¹र ¹द°र वािदdा कî ही रख¹
पा¬dा का िवकास ही ¹नेकानेक िव¬¸िdयî ¹र संपदा¹ं की ¨पलî·ध का (क मा¬ मागर ह ¹
द¸सरî के सा ° वह ¤यवहा र नही कर गे , «î हम ¹पने î ल( पसं द नही ¹
हम ¤ाहdे ह िक द¸ सरे लîग हमारे सा° सv«नdा का ¨दार ¹र मधुर ¤यवहार कर , «î हमारी 7गिd म सहायक हî
¹र (सा कायर न कर, î«ससे 7स¬dा ¹र सुिवधा म िकसी 7कार िव›न ¨तप¬ हî¹ õीक (सी ही ¹°ा द¸ सरे लîग ¬ी हम
से करdे ह ¹ «¤ हम (सा सî¤dे ह िक ¹पने ¹वा°र की प¸िdर म कî, ¹ ¤ न ¹ने दी «ा( ¹र द¸ सरî से ¹नुि¤d ला¬ ¨õा
ल, dî व सी ही ¹कां÷ा द¸ सरे ¬ी हम से कयî न कर गे ? लेने ¹र देने के दî ¤ा° रखने म ही सारी ग÷¤÷ी पदा हîdी ह ¹ यिद
यही õीक ह िक हम िकसी के सहायक न ¤न , िकसी के काम न ¹( , िकसी से ¨दारdा, न–dा ¹र ÷मा की रीिd- नीिd न
¤रd dî इसके îल( ¬ी d यार रहना ¤ािह( िक द¸ सरे लîग हमारे सा° वसी ही ध Pdा ¤रdगे dî हम ¹पने मन म कु F ¤ु रा न
मानगे¹
«¤ हम रे ल म ¤{dे ह ¹र द¸ सरे लîग पर 9 ला( ि¤¹dर «मा( ¤ õे हîdे ह , dî हम ख÷ा रहना प÷dा ह ¹ ¨न लîगî
से पर समे° लेने ¹र हम ¬ी ¤ õ «ाने देने के îल( कहdे ह dî वे ल÷ने लगdे ह ¹ Uं U° से ¤¤ने के îल( हम ख÷े -ख÷े
¹पनी या¬ा प¸ री करdे ह ¹र मन ही मन ¨न «गह °ेरे ¤ õे लîगî की ¹वा°र परdा ¹र ¹नुदारdा कî कîसdे ह , पर «¤ हम
«गह िमल «ाdी ह ¹र न( याि¬यî के 7िd õीक वसे ही िन8 र ¤न «ाdे ह , कया यह दु हरा ¸îPकîण ¨ि¤d ह? हमारी क·या
िववाह यî¹य हî «ाdी ह dî हम ¤ाहdे ह िक ल÷के वाले ि¤ना दहे« के सv«नîि¤d ¤यवहार करdे ह ( िववाह सं¤ंध ¹वीकार
कर, दहे« मा गने वालî कî ¤ह d कîसdे ह, पर «¤ ¹पना ल÷का िववाह यî¹य हî «ाdा ह dî हम ¬ी õीक वसी ही
¹नुदारdा िदखाdे ह « सी ¹पनी ल÷की के िववाह- ¹वसर पर द¸ सरî ने िदखा, °ी¹ कî, हमारी ¤îरी, ¤े,मानी कर लेdा ह ,
õग लेdा ह dî ¤ुरा लगdा ह, पर 7कारांdर से वसी ही नीिd ¹पने कारî¤ार म हम ¬ी ¤रddे ह ¹र d¤ ¨स ¤dुरdा पर
7स¬ हîdे ¹र गवर ¹नु¬व करdे ह ¹ यह दु मु ही नीिd ¤रdी «ाdी रही dî मानव- समा« म सुख- °ांिd क से कायम रह
सके गी?
कî, ¤यî+ ¹पनी «¹रd के व+ कु F ¨धार हमसे ले «ाdा ह dî हम यही ¹°ा करdे ह िक ¹÷े व+ की इस
सहायdा कî सामने वाला ¤यî+ क dUdाप¸वर क याद रखेगा ¹र «लदी से «लदी इस ¨धार कî लî°ा देगा¹ यिद वह वापस
देdे व+ ¹ ख ¤दलdा ह dî हम िकdना ¤ुरा लगdा ह ¹ यिद इसी ¤ाd कî °यान म रखा «ा( ¹र िकसी के ¨धार कî
लî°ाने की ¹पनी ¹कां÷ा के ¹नु¹प ही °यान रखा «ा( dî िकdना ¹¤Fा हî¹ हम िकसी का ¨धार ¹व°यकdा से
¹îधक (क ÷ण ¬ी कयî रîक कर रख ? हम द¸ सरî से यह ¹°ा करdे ह िक वे «¤ ¬ी कु F कह या ¨Vर द , न–, ि°P, मधुर
¹र 7ेम ¬री ¤ाdî से सहानु¬¸िdप¸णर ¢ख के सा° ¤îल¹ कî, क°ु dा, ¢खा,, िन8 रdा, ¨पे÷ा ¹र ¹ि°Pdा के सा° «¤ा¤
देdा ह dî ¹पने कî ¤ह d दु ःख हîdा ह ¹ यिद यह ¤ाd मन म समा «ा(, dî ि9र हमारी वाणी म सदा ि°Pdा ¹र मधुरdा ही
कयî न °ु ली रहेगी? ¹पने कP के समय हम द¸ सरî की सहायdा िव°े9 ¹प से ¹पेि÷d हîdी ह ¹ इस ¤ाd कî °यान म «ा(,
dî ि9र हमारी वाणी म सदा ि°Pdा ¹र मधुरdा ही कयî न °ुली रहेगी? ¹पने कP के समय हम द¸ सरî की सहायdा िव°े9
¹प से ¹पेि÷d हîdी ह ¹ इस ¤ाd कî °यान म रखा «ा( dî «¤ द¸ सरे लîग कP म प÷े हî, ¨·ह हमारी सहायdा की ¹पे÷ा
हî, d¤ कया यही ¨ि¤d ह िक हम िन8 रdा धारण कर ल ? ¹पने ¤¤¤î से हम यह ¹°ा करdे ह िक ¤ु{ापे म हमारी सेवा
कर गे, हमारे िक( ¨पकारî का 7िd9ल क dUdाप¸वर क ¤ु का(गे, पर ¹पने ¤¸{े मा- ¤ाप के 7िd हमारा ¤यवहार ¤ह d ही
¨पे÷ाप¸णर रहdा ह ¹ इस दु हरी नीिd का कया क¬ी कî, सतपîरणाम िनकल सकdा ह?
हम ¤ाहdे ह िक हमारी ¤ह¸- ¤ेि°यî की द¸ सरे लîग इv«d कर, ¨·ह ¹पनी ¤हन- ¤े°ी की िनगाह से देख , ि9र यह
कयî कर ¨ि¤d हîगा िक हम द¸ सरî की ¤िहन- ¤ेि°यî कî दु Pdा ¬री ¸îP से देख ? ¹पने दु ःख के समान ही द¸ सरî का «î
दु ःख समUेगा वह मास क से ख सके गा? द¸ सरî पर ¹·याय ¹र ¹तया¤ार क से कर सके गा? िकसी की ¤े,मानी करने , िकसी
कî िdर¹क d, लांिFd ¹र «लील करने की ¤ाd क से सî¤े गा? ¹पनी Fî°ी- मî°ी ¬¸लî के ¤ारे म हम यही ¹°ा करdे ह िक
लîग ¨न पर ¤ह d °यान न दगे, ‘ ’ ÷मा करî ¹र ¬¸ल «ा¹ की नीिd ¹पना(गे dî ि9र हम ¬ी ¨dनी ही ¨दारdा मन म
कयî नही रखनी ¤ािह( ¹र क¬ी िकसी से कî, दु ¤यर वहार ¹पने सा° ¤न प÷ा ह dî ¨से कयî न ¬ुला देना ¤ािह(?
¹पने सा° हम द¸ सरî से î«स सv«नdाप¸णर ¤यवहार की ¹°ा करdे ह, ¨सी 7कार की नीिd हम द¸ सरî के सा°
¹पनानी ¤ािह(¹ हî सकdा ह िक कु F दु P लîग हमारी सv«नdा के ¤दले म ¨सके ¹नुसार ¤यवहार न कर ¹ ¨दारdा का
ला¬ ¨õाने वाले ¹र ¹वयं िन8 रdा धारण िक( रहने वाले नर- प°ु¹ं की इस दु िनया म कमी नही ह ¹ ¨दार ¹र ¨पकारी
पर ही °ाd ¤लाने वाले हर «गह ¬रे ह ¹ ¨नकी दु गर िd का ¹पने कî ि°कार न ¤नना प÷े, इसकी सावधानी dî रखनी
¤ािह(, पर ¹पने कdर ¤य ¹र सî«·य कî इसîल( नही Fî÷ देना ¤ािह( िक ¨सके îल( सतपा¬ नही िमलdे¹ ¤ादल हर
«गह व9ार करdे ह, स¸यर ¹र ¤ं¢मा हर «गह ¹पना 7का° 9 लाdे ह , प°वी हर िकसी का ¬ार ¹र मल- म¸¬ ¨õाdी ह , ि9र
हम ¬ी वसी ही महानdा ¹र ¨दारdा का पîर¤य कयî नही देना ¤ािह(?
¨दारdा 7क िd के लîग क, ¤ार ¤ालाक लîगî ¤ारा õगे «ाdे ह ¹र ¨ससे ¨·ह °ा°ा ही रहdा ह , पर ¨नकी
सv«नdा से 7¬ािवd हîकर द¸ सरे लîग î«dनी ¨नकी सहायdा करdे ह, ¨स ला¬ के ¤दले म õगे «ाने का °ा°ा कम ही
रहdा ह ¹ स¤ िमलाकर वे ला¬ म ही रहdे ह ¹ इसी 7कार ¹वा°î लîग िकसी के काम नही ¹ने से ¹पना कु F ह«र या हािन
हîने का ¹वसर नही ¹ने देdे , पर ¨नकी सहायdा नही करdा dî वे ¨स ला¬ से वंि¤d ¬ी रहdे ह ¹ (सी द°ा म वह
¹नुदार ¤ालाक ¤यî+, ¨स ¨दार ¹र ¬îले ¤यî+ की ¹पे÷ा °ा°े म ही रहdा ह ¹ दु हरे ¤ा° रखने वाले ¤े,मान दु कानदारî
कî क¬ी 9लdे - 9¸ लdे नही देखा गया¹ ¹वयं खु दग«î ¹र ¹ि°Pdा ¤रdने वाले लîग «¤ द¸ सरî से सv«नdा ¹र सहायdा
की ¹°ा करdे ह dî õीक दु हरे ¤ा° वाले ¤े,मान दु कानदार का ¹नुकरण करdे ह ¹ (सा ¤यवहार क¬ी िकसी के îल( ¨¬िd
¹र 7स¬dा का कारण नही ¤न सकdा¹
दु कानदार ¹पने पसे िगनने लगा, dî देखा ¨सम क, खî°े îसकके ¬ी लîग धîखे म दे ग(¹ वह îसकके नाली म
9 कने लगा, dî प÷îसी ने कहा- म¸खर « से िकसी ने dुUे धîखे म िद( ह, d¸ ¬ी (से ही िकसी कî ¬े÷ दे¹ दु कानदार ने कहा-
°î÷े से îसकके क, लîगî कî ¤े,मानी ¹र ध¸dर dा îसखा( , ¨ससे ¹¤Fा dî खî°े îसककî कî 9 क देना ह ¹ यह कहकर
¨सने îसकके पानी म 9 क िद(¹
नर- ना री पर¹पर पि व¬ ¸î P रख गे ¹
नर का नारी के 7िd d°ा नारी का नर के 7िd पिव¬ ¸îPकîण हîना, ¹तमî¬िd सामाî«क 7गिd (वं सुख- °ांिd के
îल( ¹व°यक ह ¹ 7H¤यर œd का पालन करने वाले, ¹िववािहd नर- नाîरयî के îल( ¤यवहार (वं ि¤ं dन म (क- द¸ सरे के 7िd
पिव¬dा का समावे ° ¹िनवायर ह ही, िक·dु ¹·यî कî ¬ी ¨सकी ¨पे÷ा नही करनी ¤ािह(¹ ¹पिव¬ पा°िवक ¸îP रखकर
कî, ¬ी वगर , द¸ सरे वगर की शे8dा का न dî म¸लयांकन कर सकdा ह ¹र न ¨नका ला¬ ¨õा सकdा ह ¹ इस हािन से ¤¤ने
की ¹तयîधक ¨पयîगी 7ेरणा इस वाकय म दी ग, ह ¹
‘ ’ नारी इस संसार की सवìतक Pdा पिव¬dा ह ¹ «ननी के ¹प म वह ¹गाध वातसलय लेकर इस धरdी पर ¹वdीणर
हîdी ह ¹ पतनी के ¹प म तयाग ¹र ¤îलदान की, 7े म ¹र ¹तमदान की स«ीव 7िdमा के ¹प म 7िdî8d हîdी ह ¹ ¤हन के
¹प म ¹नेह, ¨दारdा ¹र ममdा की देवी « सी पîरलि÷d हîdी ह ¹ पु¬ी के ¹प म वह कîमलdा, मदु लdा, िन°Fलdा की
7िdक िd के ¹प म इस नीरस संसार कî सरस ¤नाdी रहdी ह ¹ परमातमा ने नारी म सतय, ि°व ¹र सुंदर का ¹नंd ¬ं¬ार
¬रा ह ¹ ¨सके ने¬î म (क ¹लîिकक vयîिd रहdी ह, î«सकी कु F िकरण प÷ने मा¬ से िन8 र •दयî की ¬ी मुरUा, ह ,
कली îखल सकdी ह ¹ दु ¤र ल, ¹पंग मानव कî °î+मान ¹र सVा स-प¬ ¤नाने का स¤से ¤÷ा शेय यिद िकसी कî हî
सकdा ह dî वह नारी का ही ह ¹ वह म¸िdर मान¸ 7े रणा, ¬ावना ¹र ¹9¸ िdर के ¹प म ¹¤े dन कî ¤े dन ¤नाdी ह ¹ ¨सके
साय म ¹िकं ¤न ¤यî+ का ¬ा¹य मुखîरd हî ¨õdा ह ¹ वह ¹पने कî क d- क तय ह ¹ ¹नु¬व करdा ह ¹
नारी की महVा ¹î„ के समान ह ¹ ¹î„ हमारे «ीवन का ˆîd ह , ¨सके ¹¬ाव म हम िन«îव ¹र िन'7ाण ¤नकर
ही रह सकdे ह ¹ ¨सका ¨पयîिगdा की î«dनी मिहमा गा, «ा(, ¨dनी ही कम ह , पर इस ¹î„ का द¸ सरा पहल¸ ¬ी ह, वह
¹प°र करdे ही काली नािगन की dरह लपलपाdी ह , ¨õdी ह ¹र F¸ dे ही F°प°ा देने वाली, ¬ारी पी÷ा देने वाली
पîरî¹°िd ¨तप¬ कर देdी ह ¹ नारी म «हा ¹नंd गुण ह, वहा (क दî9 (सा ¬ी ह î«सके ¹प°र करdे ही ¹सीम वेदना से
F°प°ाना प÷dा ह ¹ वह ¹प ह- नारी का रमणी ¹प¹ रमण की ¹कां÷ा से «¤ ¬ी ¨से देखा, सî¤ा ¹र Fु ¹ «ा(गा d¬ी
वह काली नािगन की dरह ¹पने िव9 ¬रे दं d ¤ु¬î देगी¹ ि¤¤F¸ की ¤नाव° क सी ¹¤Fी ह, पर ¨सके ¬ंक कî F¸ dे ही
िवपîV ख÷ी हî «ाdी ह ¹ मधुमकखी िकdनी ¨पकारी ह ¹ ¬—रा िकdना मधुर ग¸ «dा ह , काdर क से रं ग- ि¤रं गे परî से ¤लdी ह ,
¤रर ¹र dd या ¹पने FVî म ¤ õे ह ( क से सुंदर गुलद¹dे से स«े दीखdे ह, पर इनम से िकसी का ¬ी ¹प°र हमारे îलये
िवपîV का कारण ¤न «ाdा ह ¹ नारी के कािमनी ¹र रमणी के ¹प म «î (क िव9 की Fî°ी- सी पî°ली िFपी ह , ह , ¨स
सु नहरी क°ार से हम ¤¤ना ही ¤ािह(¹
¹पने से ¤÷ी ¹यु की नारी कî माdा के ¹प म , समान ¹यु वाली कî ¤हन के ¹प म , Fî°ी कî पु¬ी के ¹प म
देखकर, ¨·ही ¬ावना¹ं का ¹îधकाîधक ¹ि¬व|र न करके हम ¨dने ही ¹šािदd ¹र 7मुिदd हî सकdे ह , « से माdा
सर¹वdी, माdा ल°मी, माdा दु गार के ¤रणî म ¤ õकर ¨नके ¹नंd- वातसलय का ¹नु¬व करdे ह ¹ हम गाय¬ी ¨पासक ¬गवान¸
की सवर शे8 स«ीव र¤ना कî नारी ¹प म ही मानdे ह ¹ नारी म ¬गवान¸ की क¢णा, पिव¬dा ¹र सदा°यdा का द°र न करना
हमारी ¬î+¬ावना का दा°र िनक ¹धार ह ¹ ¨पासना म ही नही, ¤यावहाîरक «ीवन म ¬ी हमारा ¸îPकîण यही रहना ¤ािह(¹
नारी मा¬ कî हम पिव¬ ¸îP से देख¹ वासना की ¸îP से न सî¤े , न ¨से देख, न ¨से Fु (¹
दा-पतय «ीवन म संdानîतपादन का िव°े9 7यî«न या ¹वसर ¹व°यक हî dî पिd- पतनी कु F ÷ण के îल( वासना
की (क हलकी ध¸प- Fाह ¹नु¬व कर सकdे ह ¹ °ा+î म dî इdनी ¬ी F¸ ° नही ह, ¨·हîने dî ग¬र दान सं¹कार कî ¬ी
यUîपवीd या मु7¬न- सं¹कार की ¬ािd (क पिव¬ धमर क तय माना ह ¹र इसी ¸îP से ¨स ि4या कî स-प¬ करने की ¹Uा
दी ह, पर मानवीय दु ¤र लdा कî देखdे ह ( दा-पतय «ीवन म (क सीिमd मयारदा के ¹ंdगर d वासना कî F¸ ° िमल सकdी ह ¹
इसके ¹िdîर+ दा-पतय «ीवन ¬ी (सा ही पिव¬ हîना ¤ािह( « सा िक दî सहîदर ¬ाइयî का या दî सगी ¤हनî का हîdा ह ¹
िववाह का ¨…े°य दî °रीरî कî (क ¹तमा ¤नाकर «ीवन की गा÷ी का ¬ार दî कं धî पर °îdे ¤लना ह , दु '7वîVयî कî
7îतसािहd करना नही¹ यह dî îसनेमा का, गं दे ि¤¬î का, ¹°लील सािहतय का ¹र दु ¤ु र î| का 7साद ह , «î हमने नारी की
परम पु नीd 7िdमा कî (से ¹°लील, गंदे ¹र गिहर d ¹प म िगरा रखा ह ¹ नारी कî वासना के ¨…े°य से सî¤ना या देखना,
¨सकी महानdा का व सा ही िdर¹कार करना ह, « से िकसी ¹व°यकdा कî प¸णर करने के ¨…े°य से देखना¹ यह ¸îP î«dनी
िनंदनीय ¹र ° िणd ह, ¨dनी ही हािनकर ¹र िव¹ह ¨तप¬ करने वाली ¬ी ह ¹ हम ¨स î¹°िd कî ¹पने ¬ीdर से ¹र
सारे समा« से ह°ाना हîगा ¹र नारी कî ¨स ¹व¹प म पु नः 7िdî8d करना हîगा, î«सकी (क ¸îP मा¬ से मानव 7ाणी
ध·य हîdा रहा ह ¹
¨परî+ पंî+यî म नारी का « सा ि¤¬ण नर की ¸îP से िकया गया ह , õीक व सा ही ि¤¬ण कु F °·दî के हेर- 9े र के
सा° नारी की ¸îP से नर के स-¤·ध म िकया «ा सकdा ह ¹ «ननेî·¢य की ¤नाव° म रा,- रVी ¹ंdर हîdे ह ( ¬ी मनु 'य की
¸îP से दîनî ही लग¬ग समान ÷मdा, ¤ुî|, ¬ावना (वं î¹°िd के ¤ने ह ( ह ¹ यह õीक ह िक दîनî म ¹पनी-¹पनी
िव°े9dा( ¹र ¹पनी- ¹पनी ·य¸ नdा( ह, ¨नकी प¸ िdर के îल( दîनî (क- द¸ सरे का ¹शय लेdे ह ¹ यह ¹शय पिd- पतनी के
¹प म के वल काम 7यî«न के ¹प म हî, (सा िकसी ¬ी 7कार ¹व°यक नही¹ नारी के 7िd नर ¹र नर के 7िd नारी
पिव¬, पु नीd, कdर ¤य ¹र ¹नेह का साîतवक (वं ¹वगîय सं¤ंध रखdे ह ( ¬ी माdा, पु¬ी या ¤हन के ¹प म सखा, सहîदर,
¹व«न ¹र ¹तमीय के ¹प म शे8 सं¤ंध रख सकdे ह , वसा ही रखना ¬ी ¤ािह(¹ पिव¬dा म «î ¹«ˆ ¤ल ह , वह वासना
के नारकीय की¤÷ म क¬ी ¬ी ¸îPगî¤र नही हî सकdा¹ वासना ¹र 7ेम दîनî ¸îPकîण (क- द¸ सरे से ¨dने ही ि¬¬ ह ,
î«dनी ¹वगर से नरक म ि¬¬dा ह ¹ ¤याि¬¤ार म ¤े 9, ,'यार, ¹îधपतय, संकीणर dा, कामुकdा, ¹प- स—दयर •ंगार, कलह,
िनरा°ा, कु {न, पdन, žास, िनंदा ¹िद ¹गिणd यं¬णा( ¬री प÷ी ह, पर 7े म इन स¤से सवर °ा मु+ ह ¹ पिव¬dा म तयाग,
¨दारdा, °ु¬कामना, स•दयdा ¹र °ांिd के ¹िdîर+ ¹र कु F हî ही नही सकdा¹
यु Œु ग िनमारण सतसंकलप म, ¹तमवd¸ सवर ¬¸dे9ु की, पर¢¤ये9ु लî8वd¸, परदारे 9ु माdवd¸ की पिव¬ ¬ावना( ¬री प÷ी
ह, इ·ही के ¹धार पर नवयु ग का स«न हî सकdा ह ¹ इ·ही का ¹वलं ¤न लेकर इस दु िनया कî ¹वगर के ¹प म पîरणd करने
का ¹वƒन साकार हî सकdा ह ¹
«î 7¹dुd सî¬ा¹य का सदु पयîग करdे ह, वे 4म°ः ¹îधक ¬ ¤े ¨õdे ¹र प¸ णर dा के ल°य dक «ा पह ¤dे ह ¹
सं सा र म सत7वî Vयî के पु7य- 7सा र के î ल(, ¹पने समय, 7¬ा व, Uा न, पु¢9ा °र (वं धन का (क ¹ं °
ि नयि मd ¹प से लगा dे रह गे ¹
परमा°र परायण «ीवन «ीना ह dî ¨सके नाम पर कु F ¬ी करने लगना ¨ि¤d नही¹ परमा°र के नाम पर ¹पनी °î+
(से कायì

म लगानी ¤ािह( î«नम ¨सकी सवार îधक सा°र कdा हî¹ ¹वयं ¹पने ¹ंदर से लेकर ¤ाहर समा« म सत7वîVया
पदा करना, ¤{ाना इस ¸îP से स¤से ¹îधक ¨पयु + ह ¹ संसार म î«dना कु F सतकायर ¤न प÷ रहा ह, ¨न स¤के म¸ल म
सत7वîVया ही काम करdी ह ¹ लहलहाdी ह , खेdी d¬ी हî सकdी ह , «¤ ¤ी« का ¹î¹dतव मद हî¹ ¤ी« के ि¤ना पîधा
कहा से ¨गेगा? ¬ले या ¤ुरे कायर ¹नायास ही नही ¨प« प÷dे , ¨नके म¸ल म सारî ¹र कु िव¤ारî की «÷ «मी हîdी ह ¹
समय पाकर ¤ी« î«स 7कार ¹ंकु îरd हîdा ¹र 9लdा- 9¸ लdा ह, ¨सी 7कार सत7वîVया ¬ी ¹गिणd 7कार के पु7य-
परमा°ì

के ¹प म िवकîसd (वं पîरलि÷d हîdी ह ¹ î«स °ु'क •दय म स†ावना¹ं के îल(, सारî के îल( कî, ¹°ान
नही िमला, ¨सके ¤ारा «ीवन म कî, शे8 कायर ¤न प÷े , यह लग¬ग ¹सं¬व ही मानना ¤ािह(¹ î«न लîगî ने कî, सतकमर
िक( ह, ¹द°र का ¹नुकरण िकया ह, ¨नम से 7तयेक कî ¨ससे प¸वर ¹पनी पा°िवक व îVयî पर िनयं¬ण कर सकने यî¹य
सारî का ला¬ िकसी न िकसी 7कार िमल ¤ुका हîdा ह ¹ कु कमî ¹र दु ¤ु र î|¹¹d मनु'यî के इस °िणd î¹°िd म प÷े
रहने की î«-मेदारी ¨नकी ¨स ¬¸ल पर ह , î«सके कारण वे सारî की ¹व°यकdा ¹र ¨पयîिगdा कî समUने से वं ि¤d
रहे, «ीवन के इस सवìपîर ला¬ की ¨पे÷ा करdे रहे, ¨से ¤य°र मानकर ¨ससे ¤¤dे ¹र कdराdे रहे¹ म¸ लdः मनु'य (क
7कार का काला कु ¹प लîहा मा¬ ह ¹ सारî का पारस F¸ कर ही वह सîना ¤नdा ह ¹ (क नग7य dु¤F 7ाणी कî मानवdा
का महान¸ गîरव िदला सकने की ÷मdा के वल मा¬ सारî म ह ¹ î«से यह सî¬ा¹य नही िमल सका, वह ¤े¤ारा कयî कर
¹पने «ीवन- ल°य कî समU सके गा ¹र कयî कर ¨सके îल( कु F 7यतन- पु¢9ा°र कर सके गा?
इस संसार म ¹नेक परमा°र ¹र ¨पकार के कायर ह , वे स¤ ¹वरण मा¬ ह , ¨नकी ¹तमा म , स†ावना( सî¬िहd
ह ¹ स†ावना सिहd सतकमर ¬ी के वल °îग मा¬ ¤नकर रह «ाdे ह ¹ ¹नेक सं¹°ा( ¹« परमा°र का ¹¬-¤र करके îसंह की
खाल ¹{े ि9रने वाले •ंगाल का ¨पहासा¹पद ¨दाहरण 7¹dुd कर रही ह ¹ ¨नसे ला¬ िकसी का कु F नही हîdा, िव¬-¤ना
¤{dी ह ¹र पु¢9ा°र कî ¬ी लîग ¹°ंका (वं संदेह की ¸îP से देखने लगdे ह ¹ 7ाण रिहd °रीर िकdने ही सुंदर व+
धारण िक( ह ( कयî न हî, ¨से कî, पसंद न करे गा, न ¨ससे िकसी का कî, ¬ला हîगा¹ इसी 7कार स†ावना रिहd «î कु F
¬ी लîकिहd, «नसेवा के 7यास िक( «ा(गे, वे ¬ला, नही, ¤ुरा, ही ¨तप¬ कर गे¹
¤ुराइया ¹« संसार म इसîल( ¤{ ¹र 9ल- 9¸ ल रही ह िक ¨नका ¹पने ¹¤रण ¤ारा 7¤ार करने वाले पकके
7¤ारक, प¸री dरह मन, कमर , व¤न से ¤ुरा, 9 लाने वाले लîग ¤ह सं•या म मद ह ¹ ¹¤Fाइयî के 7¤ारक ¹« िन8ावान¸
नही, ¤ाd¸नी लîग ही िदखा, प÷dे ह, 9ल¹व¹प ¤ुराइयî की dरह ¹¤Fाइयî का 7सार नही हî पाdा ¹र वे पî°ी के व¤नî
की dरह के वल कहने- सु नने ¬र की ¤ाd रह «ाdी ह ¹ क°ा- वाdार¹ं कî लîग ¤यवहार की नही कहने - सु नने की ¤ाd मानdे ह
¹र इdने मा¬ से ही पु7य ला¬ की सं¬ावना मान लेdे ह ¹
सत7वîVयî कî मनु'य के •दय म ¨dार देने से ¤{कर ¹र कî, महvवप¸णर सेवा कायर इस संसार म नही हî सकdा¹
व¹dु¹ं की सहायdा ¬ी ¹व°यकdा के समय ¨पयîगी îस| हî सकdी ह, पर ¨सका ¹°ा, महvव नही ह ¹ ¹î°र क ¸îP से
स-प¬ ¤यî+ के ¹िdîर+ ¹·य लîग (सी सेवा कर ¬ी नही सकdे¹ हर ¹दमी ¹°ायी ¹प से ¹पनी सम¹या, ¹पने
पु¢9ा°र ¹र िववे क से ही हल कर सकdा ह ¹ द¸ सरî की सहायdा पर «ीिवd रहना न dî िकसी मनु'य के गîरव के ¹नुक¸ ल
हे ¹र न ¨ससे ¹°ायी हल ही िनकलdा ह ¹ î«dनी ¬ी किõनाइया ¤यî+गd d°ा साम¸िहक «ीवन म िदखा, प÷dी ह ,
¨नका (कमा¬ कारण कु ¤ुî| ह ¹ यिद मनु'य ¹पनी ¹दdî कî सुधार ले , ¹व¬ाव कî सही ¤ना ले ¹र िव¤ारî d°ा कायì


का õीक dारd-य ि¤õा ले dî ¤ाहर से ¨तप¬ हîdी दीखने वाली स¬ी किõनाइया ¤ाd की ¤ाd म हल हî सकdी ह ¹ ¤यî+
¹र समा« का कलयाण इसी म ह िक सत7वîVयî कî ¹îधकाîधक पनपने का ¹वसर िमले¹ इसी 7यास म 7ा¤ीनकाल म
कु F लîग ¹पने «ीवन के ¨तसगर करdे °े , ¨·ह ¤÷ा माना «ाdा °ा ¹र 7ाHण के स-मानस¸¤क पद पर 7िdî8d िकया
«ाdा °ा¹ ¤¸ िक सत7वîVयî कî पनपना संसार का स¤से महvवप¸णर कायर ह इसîल( ¨सम लगे ह ( ¤यî+यî कî स-मान ¬ी
िमलना ¤ािह(¹
दानî म सवìVम दान 7Hदान कहा «ाdा ह ¹ 7Hदान का ¹°र ह- Uान दान¹ Uान का ¹°र ह - वह ¬ावना ¹र िन8ा
«î मनु'य के निdक ¹dर कî सुî¹°र ¤ना( रहdी ह ¹ यु ग िनमारण सतसंकलप म î«न सत7वîVयî के पु 7य 7सार की 7े रणा
की ग, ह, वह यही 7Hदान ह ¹ इस ¹मd «ल से सी¤ा «ाने पर मुरUाdा ह ¹ यु ग- मानस पुनः हरा- ¬रा पु'प- पŽवî से
पîरप¸णर ¤न सकdा ह ¹ इसी महान¸ कायर कî परमा°र कहा «ा सकdा ह , î«सकî प¸रा करने के îल( परमातमा ने मनु'य कî
िव°े9 ÷मdा, सVा ¹र महVा 7दान की ह ¹
समय, 7¬ाव, Uान, पु¢9ा°र ¹र धन की पा¤î िव¬¸िdयî का ¹îधकाîधक ¬ाग हम परमा°र के îल( लगाना ¤ािह(¹
¤यî+गd «ीवन की ¹व°यकdा प¸ िdर म िद¤य- िव¬¸िdयî कî प¸री dरह नP न कर देना ¤ािह(, वरन¸ ·य¸ नाîधक मा¬ा म कु F
न कु F इनका ¹ं° परमा°र के îल( सत7वîVयî के िवकास के îल( सुरि÷d रख लेना ¤ािह(¹ द िनक «ीवन म î«स 7कार
¹·य ¹नेक ¹व°यक कायर िनयd रहdे ह ¹र ¨·ह िकसी न िकसी 7कार प¸रा करdे ह , ¨सी 7कार इस परमा°र कायर कî
¬ी (क िनdांd ¹व°यक ¹र लîक- परलîक के îल( शेय¹कर महvवप¸णर कायर मानना ¤ािह(¹ î«स कायर कî हम महvवप¸णर
मान लगे, ¨सके îल( समय, 7¬ाव, Uान, पु¢9ा°र (वं धन का (क िनयिमd ¹ं° िनरं dर लगाdे रहना ¬ार ¹व¹प 7dीd न
हîगा, वरन¸ ¨स मागर म िकया ह ¹ 7यतन «ीवन कî ध·य ¤नाने वाला सवìVम सा°र क कायर 7dीd हîने लगेगा¹
सत7वîVयî के संव|रन के îल( यु ग िनमारण ¹ि¬यान के ¹ंdगर d ¹नेक कायर 4म सुUा( ग( ह ¹ Uîला पु¹dकालय
हर (क के îल( सुल¬ ह ¹ î«सके पास «î िव¬¸िd हî वह ¨से ¨सके îल( िनयîî«d करdे रहने का 4म ¤ना ल¹ समय ¹र
शम पु¢9ा°र dî हर ¤यî+ लगा ही सकdा ह ¹ ¨सका सुिनî°¤d ¹ं° लगाने का िनयम ¤ना लेना ¤ािह(¹ 7¬ाव°ाली ¤यî+
¨सका सम°र न खु ले ¹प म कर, लîगî पर ¨सके îल( द¤ाव ¬ाल dî का9ी 7गिd हî सकdी ह ¹ Uानवान ¹पनी स¸ U¤¸U (वं
मागर द°र न से लेकर 7ेरणा देने dक का कायर कर सकdे ह ¹ धनवान ¨नके îल( ¹व°यक साधन «ु°ा( रह सकdे ह ¹ ·य¸नdम
(क °ं°ा समय (वं (क िदन की ¹य सत7वîVयî के संव|र न के îल( लगाने का 4म हर ¤यî+ ¤ना ले dî इdना ¤÷ा कायर
हî सकdा ह िक इिdहास म ¨से ¹वणार÷रî म îलखा «ा(¹
पर-परा ¹ं की dुलना म ि ववे क कî महvव द ¹
¨ि¤d- ¹नुि¤d का, ला¬- हािन का िन'क9र िनकालने ¹र िकधर ¤लना, िकधर नही ¤लना इसका िनणर य करने के
îल( ¨पयु + ¤ुî| ¬गवान¸ ने मनु'य कî दी ह ¹ ¨सी के ¹धार पर ¨सकी गिdिवîधया ¤लdी ¬ी ह , पर देखा यह «ाdा ह िक
द िनक «ीवन की साधारण ¤ाdî म «î िववे क õीक काम करdा ह , वही महvवप¸णर सम¹या सामने ¹ने पर कु ं िõd हî «ाdा ह ¹
पर-परा¹ं की dुलना म dî िकसी िवरले का ही िववे क «ा¹d रहdा ह , ¹·य°ा ¹ं dîरक िवरîध रहdे ह ( ¬ी लîग पानी म
¤ह d ह ( िdनके की dरह ¹िनî¤Fd िद°ा म ¤हने लगdे ह ¹ ¬े÷î कî Uु7¬ î«धर ¬ी ¤ल प÷े, ¨सी ¹र स¤ ¬े÷ ¤{dी
«ाdी ह ¹ (क ¬े÷ कु ( म िगर प÷े dî पीFे की स¤ ¬े÷ ¨सी कु ( म िगरdी ह , ¹पने 7ाण गवाने लगdी ह ¹ देखा- देखी की,
नकल करने की 7वîV ¤ंदर म पा, «ाdी ह ¹ वह द¸ सरî कî « सा करdे देखdा ह , वसा ही खु द ¬ी करने लगdा ह ¹ इस
¹ंधानुकरण की ¹दd कî «¤ मनु'य का मन ¬ी, इसी dरह मान लेने के îल( करdा ह, dî वह यह îस| करने की कîि°°
करdा ह िक ¹दमी ¤ंदर की ¹लाद ह ¹
समा« म 7¤îलd िकdनी ही 7°ा( (सी ह, î«नम ला¬ रVी ¬र ¬ी नही, हािन ¹नेक 7कार से ह, पर (क की
देखा- देखी द¸ सरा ¨से करने लगdा ह ¹ ¤ी÷ी ¹र ¤ाय का 7¤ार िदन- िदन ¤{ रहा ह ¹ Fî°े - Fî°े ¤¤¤े ¤÷े °îक से इ·ह पीdे
ह ¹ सî¤ा यह «ाdा ह िक यह ¤ी« ¤÷ƒपन ¹°वा स+यdा की िन°ानी ह ¹ इ·ही पीना (क 9 °न की प¸िdर करना ह ¹र
¹पने कî ¹मीर, धनवान साि¤d करना ह ¹ (सी ही कु F ‹ांिdयî से 7े îरd हîकर °îक, म«े, 9 °न « सी िदखावे की ¬ावना
से (क की देखा- देखी द¸ सरा इन न°ीली व¹dु¹ं कî ¹पनाdा ह ¹र ¹ंd म (क कु °े ¤ के ¹प म वह लd (सी ¤ुरी dरह
लग «ाdी ह िक Fु ÷ा( नही F¸ °dी¹
¤ाय, ¤ी÷ी, ¬ाग, गा«ा, °रा¤, ¹9ीम ¹िद स¬ी न°ीली ¤ी« ¬यंकर दु ¤यर सन ह, इनके ¤ारा °ारीîरक ¹र
मानîसक ¹वा¹°य नP हîdा ह ¹र ¹î°र क î¹°िd पर ¤ुरा 7¬ाव प÷dा ह ¹ हर न°े¤ा« ¹व¬ाव की ¸îP से िदन-िदन
°ि°या ¹दमी ¤नdा «ाdा ह ¹ 4îध, ¹वे °, ि¤ंdा, िनरा°ा, ¹ल¹य, िनदर यdा, ¹िव°वास ¹िद िकdने ही मानîसक दु गु र ण
¨प« प÷dे ह ¹ समUाने पर या ¹वयं िव¤ार करने पर हर न°े¤ा« इस लd की ¤ुरा, कî ¹वीकार करdा ह , पर िववे क की
7खरdा ¹र साहस की स«ीवdा न हîने से कु F कर नही पाdा¹ (क ¹ंध पर-परा म ¬े÷ की dरह ¤लdा ¤ला «ाdा ह ¹
कया यही मनु'य की ¤ुî|मVा ह ?
सामाî«क कु रीिdयî से िहं द¸ समा« इdना ««र र हî रहा ह िक इन िवक िdयî के कारण «ीवनयापन कर सकना ¬ी
म°यम वगर के लîगî के îल( किõन हîdा ¤ला «ा रहा ह ¹ ¤¤¤î का िववाह (क नर¬÷ी िप°ा¤ की dरह हर ¹ि¬¬ावक के
îसर पर नं गी dलवार îल( ना¤dा रहdा ह ¹ िववाह के िदन «ीवन ¬र के गा{ी कमा, के पसî कî हîली की dरह 9¸ क देने के
îल( हर िकसी कî िवव° हîना प÷dा ह ¹ हतयारा दहे« Fु री लेकर हमारी ¤î¤¤यî का ख¸ न पी «ाने के îल( िन¬र य हîकर
िव¤रण करdा रहdा ह ¹ म तयु ¬î«, ¹सर- मîसर नेग¤ार, मुं¬न, द¹°îन, «ने¬ ¹र ¬ी न «ाने कया- कया ¬°- प°ांग काम
करने के îल( लîग िवव° हîdे रहdे ह ¹र «î कु F कमाdे ह , ¨सका ¹îधकां° ¬ाग इ·ही ि9«¸लखि¤र यî म ¹वाहा करdे
रहdे ह ¹ «ेवर ¤नवाने म ¢प( म से ¹õ ¹ने हा° रहdे ह, «ान- «îîखम ,'यार, ¹हं कार, सुर÷ा की ि¤ंdा, ·या« की हािन
¹िद ¹नेक ¹पîVया ¨तप¬ हîdी रहdी ह, ि9र ¬ी पर-परा «î ह ¹ स¤ लîग « सा करdे ह , व सा ही हम कयî न कर?
िववे क का पर-परा¹ं की dुलना म परा¹d हî «ाना, वसा ही ¹°¤यर «नक ह « सा िक ¤करे का °ेर की गरदन मरî÷ देना¹
¹°¤यर की ¤ाd dî ¹व°य ह , पर हî यही रहा ह ¹
°रीर के रîगी, मन के मलीन ¹र समा« के कु सं¹कारी हîने का (क ही कारण ह- ¹िववे क यî हम ¹क¸ ली ि°÷ा ¬ ¤े
द«• dक 7ाP िक( रहdे ह ¹र ¹पने °ं ग की ¤dुरdा ¬ी ख¸¤ हîdी ह , पर «ीवन की म¸ल¬¸d सम¹या¹ं कî गहरा, dक
समUने म 7ायः ¹सम°र ही रहdे ह ¹ ¤ाहरी ¤ाdî पर ख¸ ¤ ¤हस करdे ¹र सî¤dे - समUdे ह, पर î«स ¹धार पर हमारा
«ीवनî…े°य िन¬र र ह, ¨सकी ¹र °î÷ा ¬ी °यान नही देdे¹ इसी का नाम ह- ¹िववे क िव¤ार°ीलdा का यिद ¹¬ाव न हî
¹र गुण- दî9 की ¸îP से ¹पनी ¤यî+गd ¹र साम¸िहक सम¹या¹ं पर सî¤ना समUना ¹रं ¬ कर , dî 7dीd हîगा िक
¤ुî|मVा का दावा करdे ह ( ¬ी हम िकdनी ¹îधक म¸ खर dा से ¹îसd हî रहे ह ¹ सीधी- सादी िव¤ारधारा कî ¹पनाकर मनु'य
¹पनी सवर dîमु खी सुख- °ांिd कî सुरि÷d रख सकdा °ा ¹र इस प °वी पर ¹वगर का ¹नंद 7ाP कर सकdा °ा, पर ¹ धी,
°े {ी, ¹नुि¤d, ¹नुपयु + इ¤Fा, ¹कां÷ा( वह dî रखdा ही ह, ¨सके समीपवdî लîग ¬ी ¤ं दन के व÷ के समीप रहने वालî
की dरह सु वाîसd हîdे रहdे ह ¹ ¹पने मन का, ¹पने ¸îPकîण का पîरवdर न ¬ी कया हमारे îल( किõन ह? द¸ सरî कî
सुधारना किõन हî सकdा ह , पर ¹पने कî कयî नही सुधारा «ा सके गा? िव¤ारî की प¸ «ी का ¹¬ाव ही सारी मानîसक
किõनाइयî का कारण ह ¹ िववेक का ¹ंdःकरण म 7ादु ¬ारव हîdे ही कु िव¤ार कहा ि°क गे ¹र कु िव¤ारî के ह°dे ही ¹पना
प°ु «ीवन, देव «ीवन म पîरविdर d कयî न हî «ा(गा?
कु F म¸ {dा( , ¹ंध पर-परा(, ¹निdकdा( , संकीणर dा( हमारे साम¸िहक «ीवन म 7वे ° पा ग, ह ¹ दु ¤र ल मन से सî¤ने
पर वे ¤÷ी किõन, ¤÷ी दु 'कर, ¤÷ी गहरी «मी ह , दीखdी ह, पर व¹dुdः वे काग« के ¤ने रावण की dरह ¬रावनी हîdे ह (
¬ी ¬ीdर से खîखली ह ¹ हर िव¤ार°ील ¨नसे °णा करdा ह , पर ¹पने कî (काकी ¹नु¬व करके ¹स- पास ि°रे लîगî की
¬ावु कdा कî ¬रकर कु F कर नही पाdा¹ किõना, इdनी सी ह ¹ कु F ही °î÷े से िववे क°ील लîग यिद संगिõd हîकर ¨õ
ख÷े हî ¹र «मकर िवरîध करने लग, dî इन कु रीिdयî कî माम¸ली से सं °9र के ¤ाद ¤कना¤¸र कर सकdे ह ¹ गîवा की
«नdा ने î«स 7कार ¬ारdीय 9î«î का ¹वागd िकया, व सा ही ¹वागd इन कु रीिdयî से सdा, ह , «नdा ¨नका करे गी, «î
इन ¹ंध- पर-परा¹ं कî dî÷- मरî÷ कर रख देने के îल( कि°¤| सिनकî की dरह मा¤र करdे ह ( ¹गे ¤{ गे¹
हतयारा दहे« काग« के रावण की dरह ¤÷ा वी¬तस, न °ंस (वं ¬रावना लगdा ह ¹ हर कî, ¬ीdर ही ¬ीdर ¨ससे
° णा करdा ह , पर पास «ाने से ¬रdा ह ¹ कु F साहसी लîग ¨सम पलीdा लगाने कî दî÷ प÷ dî ¨सका «÷ म¸ल से
¨·म¸लन हîने म देर न लगेगी¹ दास- 7°ा देव- दासी 7°ा, ¤ह - िववाह «·मdे ही क·या- वध ¬¸d- प¸«ा प°ु ¤îल ¹िद ¹नेक
सामाî«क कु रीिdया िकसी समय ¤÷ी 7¤ल लगdी °ी, ¹¤ देखdे ही कु रीिdया, ¹निdकdा( (वं संकीणर dा( म«¤¸dी से «÷
«मा( दीखdी ह, िववे क°ीलî के संगिõd 7िdरîध के सामने देर dक न õहर सक गी¹ ¤ाल¸ की दीवार की dरह वे (क ही
धकके म ¬र¬राकर िगर प÷गी¹ िव¤ारî की 4ांिd का (क ही d¸9ान इस िdनकî के °े र कî ¨÷ाकर ¤ाd की ¤ाd म िFdरा
देगा¹ î«स न( समा« की र¤ना ¹« ¹वƒन सी लगdी ह , िव¤ार°ीलdा के «ा¹d हîdे ही यह म¸िdर मान¸ हîकर सामने ख÷ी
दीखेगी¹
प¸vय गु¢देव का सारा «ीवन ही धमर ¹र ¹°यातम की िव¤ारधारा 7वािहd करने म ¤यdीd ह ¹ ह ¹ यु ग िनमारण के
îल( हम पहले «न- मानस कî ¤दलना हîगा, कायì

म पîरवdर न dî ¨सके ¤ाद ही सं¬व हîगा¹ « से- « से हमारी िव¤ारधारा
7¤ु| हîगी, िववे क°ीलdा «गेगी वसे ही व से ¹नुपयु + कî तयागने ¹र ¨पयु + कî ¹हण करने की 7वîV सि4य हîdी
«ा(गी¹
¹वामी िववे कानंद ने ¹पनी साधना ¨पासना Fî÷ दी ¹र कलकVा म 9 ले ƒलेग के 7कîप से लîगî कî ¤¤ाने म
«ु( ग(¹ (क ¬ा, ने प¸Fा- महारा« ¹पकी ¨पासना साधना का कया ह ¹? ¹वामी«ी ने कहा- ¬गवान¸ के पु¬ दु ःखी हî ¹र
म ¨नका नाम «प रहा हî¬ , कया dुम इसे ही ¨पासना समUdे हî?
पसे की कमी के कारण «¤ वे रामक 'ण ¹शम की «मीन ¤े¤ने कî d यार हî ग( dî (क ि°'य ने प¸Fा -महारा«
¹प गु¢ ¹मारक ¤े¤ गे कया? िववे कानंद ने ¨Vर िदया-मõ- मंिदरî की ¹°ापना संसार की ¬ला, के îल( हîdी ह ¹ यिद
¨सका ¨पयîग ¬ले काम म हîdा ह , dî इसम हािन कया ह?

सv«नî कî सं गि õd करने , ¹नी ि d से लî हा ले ने ¹र नवस«न की गि dि वî धयî म प¸री ¢ि ¤ ल गे ¹
कîमल ¹र सî-य dvवî कî इ°ारे म समUाकर िववेक (वं dकर ¤ारा ¹ि¤तय सुUाकर स·मागर गामी ¤नाया «ा
सकdा ह , पर कõîर ¹र दु P dvवî कî ¤दलने के îल(, लîहे कî ¹ग म dपाकर िप°ा, करने वाली लुहार की नीिd ही
¹पनानी प÷dी ह ¹ दु यìधन कî समUाने- ¤ुUाने म «¤ शीक 'ण स9ल न हî सके , d¤ ¨से ¹«ु र न के ¤ाणî ¤ारा सीधे रा¹dे
पर लाने का 7¤ंध करना प÷ा¹ िहं सक प°ु न–dा ¹र ¹ि¤तय की ¬ा9ा नही समUdे , ¨·ह dî °+ ही का¤¸ म ला सकdे
ह ¹ ¬गवान¸ कî ¤ार- ¤ार धमर की ¹°ापना के îल( ¹वdार लेना प÷dा ह, सा° ही वे ¹सुरdा के ¨·म¸लन का ¢¢ क तय ¬ी
करdे ह ¹
¤यî+गd «ीवन म देव °î+ का ¹वdरण िन¹संदेह (क स«नातमक क तय ह ¹ ¨सके îल( स‰गुणî के ¹ि¬व|र न की
साधना िनरं dर करनी प÷dी ह, पर सा° ही ¹ंdरं ग म िFपे ह ( दî9- दु गु र णî से «¸Uना ¬ी प÷dा ह ¹ यिद कु सं¹कारî का
¨·म¸लन न िकया «ा(, dî स‰गुण पनप ही न सक गे ¹र सारी °î+ इन क9ाय- कलम9î म ही नP हîdी रहेगी¹ ¹ल¹य,
7माद, ¹वे °, ¹संयम ¹िद दु गु र णî के िव¢| क÷ा मî¤ार ख÷ा करना प÷dा ह ¹र पग- पग पर ¨नसे «¸Uने के îल( dतपर
रहना प÷dा ह ¹ गीdा का रह¹यवाद ¹ंdरं ग के इ·ही °¬ु¹ं कî कîरव मानकर ¹«ु र न ¹पी «ीव कî इनसे ल÷ मरने के îल(
7îतसािहd करdा ह ¹ î«सने ¹पने से ल÷कर िव«य पा,, व¹dुdः ¨से ही स¤¤ा िव«ेdा कहा «ा(गा¹
साम¸िहक «ीवन म समय- समय पर ¹नेक ¹ना¤ार ¨तप¬ हîdे रहdे ह ¹र ¨·ह रîकने के îल( सरकारी d°ा गर
सरकारी ¹dर पर 7¤ल 7यतन करने प÷dे ह ¹ पुîलस, «ेल, ¹दालd, कान¸न, सेना ¹िद के मा°यम से सरकारी दं ¬ संिहdा
¹ना¤ार कî रîकने का य°ासं¬व 7यतन करdी ह ¹ «न ¹dर पर ¬ी ¹वांFनीय ¹र ¹सामाî«क dvवî का 7िdरîध ¹व°य
हîdा ह ¹ यिद वह रîक°ाम न हî, ¨…ं¬dा ¹र दु Pdा का 7िdरîध न िकया «ा( dî वह देखdे - देखdे ¹का°- पाdाल dक
¤{ दî÷े ¹र ¹पने सवर ¬÷ी मु ख म °ालीनdा ¹र °ांिd कî देखdे - देखdे िनगल «ा(¹
इन िदनî निdक, ¤îî|क ¹र सामाî«क ÷े¬ म ¹वांFनीय dvवî का इdना ¹îधक ¤ाह लय हî गया ह िक °ांिd ¹र
सु ¤यव¹°ा के îल( (क 7कार से संक° ही ¨तप¬ हî गया ह ¹ Fल, ¹सतय, ¤नाव° ¹र िव°वास°ाd का (सा 7¤लन हî
गया ह िक िकसी ¤यî+ पर सह« ही िव°वास करना खdरे से खाली नही रहा¹ िव¤ारî की ¸îP से मनु'य ¤ह d ही संकीणर ,
¹वा°î, ¹Fा ¹र कमीना हîdा ¤ला «ा रहा ह ¹ पे° ¹र 7«नन के ¹िdîर+ कî, ल°य नही, ¹द°र वािदdा ¹र
¨तक Pdा ¹¤ कहने- सु नने ¬र की ¤ाd रह ग, ह ¹ ¤यवहार म कî, ि¤रला ही ¨से काम म लाdा हî¹ सामाî«क कु रीिdयî का
dî कहना ही कया? िववाहî·माद, मतयु- ¬î« ¬ ¤- नी¤ नारी िdर¹कार, ¤ाल- िववाह व |- िववाह ¹िद न «ाने िकdनी 7कार
की कु रीिdया ¹पने समा« म °ुसी ¤ õी ह ¹ यिद ¨·ह vयî का तयî ही ¤ना रहने िदया गया, dî हम संसार के स+य दे°î म
िपF÷े ह ( ¹र ¨पहासा¹पद ही न माने «ा(गे, वरन¸ ¹पनी दु ¤र लdा¹ं के ि°कार हîकर ¹पना ¹î¹dतव ही खî ¤ õ गे¹
¹गले िदनî इस ¤ाd की ¹व°यकdा प÷ेगी िक ¤यî+गd, सामाî«क ¹र रा«निdक ÷े¬ म सं¤याP ¹गिणd
दु '7वîVयî के िव¢| ¤यापक पîरमाण म सं°9र ¹रं ¬ िकया «ा(¹ इसîल( हर नागîरक कî ¹ना¤ार के िव¢| ¹रं ¬ िक(
ग( धमर - यु | म ¬ाग लेने के îल( ¹Šान करना हîगा¹ िकसी समय dलवार ¤लाने वाले ¹र îसर का°ने म ¹¹णी लîगî कî
यî|ा कहा «ाdा °ा, ¹¤ मापद7¬ ¤दल गया¹ ¤ारî ¹र सं ¤याP ¹dं क ¹र ¹ना¤ार के िव¢| सं °9र म «î î«dना
साहस िदखा सके ¹र ¤î° खा सके , ¨से ¨dना ही ¤÷ा ¤हादु र माना «ा(गा¹ ¨स ¤हादु री के ¬पर °î9ण- िवहीन समा«
की ¹°ापना सं¬व हî सके गी¹ दु ¤ु र î| ¹र कु तसा से ल÷ सकने म «î लîग सम°र हîगे , ¨·ही का पु ¢9ा°र पीि÷d मानवdा कî
¬ाण दे सकने का य° संि¤d कर सके गा¹
¬ारdीय समा« कî ¤े,मान ¹र गरी¤ ¤नने के îल( िवव° करने वाले सतयाना°ी िववाहî·माद नामक ¹सुर से प¸री
°î+ के सा° «¸Uना प÷ेगा¹ ¹¬ी 7¤ार, िवरîध, 7िdUाप¬ ¹िद के हलके कदम ¨õा( ग( ह , ¹गे ¤लकर ¹सहयîग,
सतया¹ह ¹र ि°राव « से ¤÷े कदम ¨õाकर इस कु 7°ा कî गिहर d ¹र वî«र d ¤नने के îल( °िणd ¹र दु P समUे «ाने के
îल( िवव° कर गे¹ ¹गले िदनî (सा 7¤ल लîकमd d यार कर गे , î«सम िववाहî के नाम पर 7¤îलd ¨|dपन कî «ीिवd रह
सकना ¹सं¬व हî «ा(¹ प¸णर सादगी ¹र ¹वलप ख¤र के िववाहî का 7¤लन हîने dक ¹पना सं°9र ¤लdा रहेगा¹ हम d¤
dक न ¤ न लगे ¹र न लेने दगे, «¤ dक िक इस ¹निdक (वं ¹वांFनीय 7°ा का दे° से काला मु ह न हî «ा(¹
मdक ¬î« के नाम पर ° िणd दावd खाने की िन8 रdा, प°ु¤îल की न°ंसdा, ¬ ¤- नी¤ के नाम पर मानवीय
¹îधकारî का ¹पहरण, नारी कî पद- दîलd ¹र ¨तपी÷न करने की 4¸ रdा हमारे समा« पर लगे ह ( (से कलं क ह , î«नका
सम°र न कî, ¬ी िववेक°ील ¹र स•दय ¤यî+ कर ही नही सकdा¹ म¸{ पर-परा¹ं ने इन कु रीिdयî कî धािमर कdा के सा°
«î÷ िदया ह, इस î¹°िd कî क¤ dक सहन िकया «ाdा रहेगा? इस म¸{dा के िव¢| 7¤ार म से ¹गे ¤{कर हम क,
¹र (से सि4य कदम ¨õाने प÷गे , î«·ह ¬ले ही ¹°ाî·d ¨तप¬ करने वाले कहा «ा(, परं dु ¢क गे d¬ी, «¤ मानवdा के
म¸ल¬¸d ¹धारî कî ¹वीकार करने वाले ¹र Uग÷े का खdरा मîल लेकर ¬ी ¹नीिd से हर म पर «¸Uने के îल( कमर
कस ल, ¬ले ही इस संद¬र म हम कî, ¬ी खdरा कयî न ¨õाना प÷े¹
वयî+क दî9- दु गु र णî से ल÷ने ¹र «ीवन कî ¹व¤F, पिव¬ िनमर ल ¤नाने के îल( ¹गर कु सं¹कारî से ल÷ना प÷dा
ह, dî वह ल÷ा, ल÷ी ही «ानी ¤ािह(¹ पîरवार म कु F सद¹यî कî दास- दासी की dरह ¹र कु F कî रा«ा- रानी की dरह
रहने कî यिद पर-परा का पालन माना «ाdा ह , dî ¨से ¤दल कर (सी पर-परा( ¹°ािपd करनी प÷गी, î«नम स¤कî
·यायानु क¸ ल ¹îधकार, ला¬, शम d°ा सहयîग करने की ¤यव¹°ा करे ¹ ¹î°र क ÷े¬ म ¤े,मानी कî 7शय न िमले¹ ¤यî+गd
¤यवहार म Fल करने ¹र धîखे¤ा«ी की गुं «ाइ° न रहे¹ (सी पîरî¹°िdया ¨तप¬ करने के îल( 7¤ल लîकमd d यार
करना प÷ेगा ¹र ¹वांFनीय dvवî के ¨स 7िdरîध कî इdना सि4य ¤नाना प÷ेगा िक ¹पराध, ¨…ं¬dा ¹र गुं ¬ागदî करने
की िह-मd करना िकसी के îल( ¬ी सं¬व न रहे¹ हराम की कमा, खाने वाले , ‹Pा¤ारी, ¤े,मान लîगî के िव¢| इdनी dीœ
7िdि4या ¨õानी हîगी, î«सके कारण ¨·ह स÷क पर ¤लना ¹र मु ह िदखाना किõन हî «ा(¹ î«धर से वे िनकल ¨धर से
ही îधककार की ¹वा« ही ¨·ह सु ननी प÷¹ समा« म ¨नका ¨õना- ¤ õना ¤ंद हî «ा( ¹र ना,, धî¤ी, द«î कî, ¨नके
सा° िकसी 7कार का सहयîग करने के îल( d यार न हî¹
सावर «िनक सं¹°ा¹ं म ¹वा°र परdा ¹र नेdािगरी ल¸°ने के îल( î«न दु रातमा¹ं ने ¹Ÿा «मा îलया ह, ¨·ह द¸ ध म
से मकखी की dरह िनकाल कर 9 क िदया «ा(¹ धमर ¹र ¹°यातम का ल¤ादा ¹{कर «î रं गे îसयार ¹पना ¨Ž¸ सीधा कर
रहे ह, ¨नकी ¹सîलयd ¤îराहे पर नं गी ख÷ी कर दी «ा(, dािक लîग ¨·ह ¬रप¸र îधककारे ¹ ¬îले लîगî कî ¹नेक हा°î से
ल¸°ने से ¤¤ाना, (क ¬ ¤ी ¹र शे8 सेवा हîdी ह ¹ ¿० लाख ि¬खमंगे नाना 7कार के °îग ¤नाकर î«स dरह õगी ¹र
हरामखîरी करने म «ु°े ह ( ह , ¹îखर ¨से क¤ dक सहन िकया «ाdा रहेगा¹ ¹व¤F °ासन 7दान करने के îल( रा«निdक
नेdा ¹र िवधायकî, °ासकî ¹र ¹9सरî कî यह सî¤ने के îल( ¤ा°य िकया «ा(गा िक वे ¹पने िन«ी ला¬ के îल( नही,
लîकमं गल के îल( ही °ासन- dं ¬ का ¨पयîग कर ¹
इस 7कार सं °9र की ¤ह मुखी 7¤ं ¬ 7ि4या ¹गले िदनî यु ग िनमार ण यî«ना ¹रं ¬ करे गी¹ ¨सके साधन « से -« से
िवकîसd हîdे «ा(गे, सं° °î+ î«dनी मा¬ा म ¨सके हा° लगेगी, ¨सी ¹नुपाd म वह °ांd, ¹िहं सक, सv«नîि¤d,
सां¹क िdक कायर के ¹°क स-पादन म «ु°े गी¹ पग- पग पर ¹नîि¤तय के , ¹·याय के सा° ल÷ा «ाने वाला यह धमर - यु | d¬ी
समाP हîगा, «¤ मानवdा के ¹द°र की िव«य पdाका सारे िव°व म 9हराने लगेगी¹
¹«ाद िहं द सेना के îल( धन की ¹व°यकdा °ी¹ ¨सके îल( सु¬ा9 ¤ा¤¸ की माला नीलाम की «ाने लगी¹ dीसरी
¤îली म (क ¤यî+ ने ¹पने °र का सारा सîना देdे ह ( कहा- नेdा«ी कया हमारी पा¬dा की परी÷ा धन से ही हîगी? नेdा«ी
¤—के ¹र ¤îले- dुम स¤ कहdे हî, स¤से ¤÷ी °î+ मनु'य ह, इसîल( ¨·हîने धन मागने की ¹पे÷ा «वान मा गे¹ वह ¤यî+
पहला °ा, î«सने ¹«ाद िहं द सेना म ¹पना नाम îलखाया¹

रा P ी य (कdा (वं समdा के 7ि d ि न8ा वा न¸ रह गे ¹ «ा ि d, î लं ग, ¬ा 9ा , 7ा ंd, स-7दा य ¹ि द के का रण पर¹पर
कî, ¬े द¬ा व न ¤रd गे ¹
¹गली °dा·दी की सं¬ावना( ¹†ु d, ¹नुपम ¹र ¹¬¸dप¸वर ह ¹ वUािनक, ¤îî|क ¹र ¹Uîिगक 7गिd के सा°-
सा° ही ¨दार ¤ेdना का ¹वम¸लयन ¬ी इ·ही िदनî ह ¹ ह ¹ î«सके कारण 7गिd के नाम पर «î कु F ह¹dगd ह ¹ ह,
¨सका दु ¢पयîग हîने का पîरणाम ¨ल°े ¹प म ही सामने ¹( ह ¹ सुिवधा साधन ¹व°य ही ¤{े ह , पर ¨लUे मानस ने न
के वल ¤यî+तव का ¹dर िगराया ह , वरन¸ साधनî कî इस ¤ुरी dरह 7यु + िकया ह िक िपFले प¸वर «î की सामा·य î¹°िd की
dुलना म हम कही ¹îधक सम¹या¹ं म 9 स «ाने « सी î¹°िd ¹व°य ह, पर (सा नही हî सकdा िक देवतव से (क सी{ी
नी¤े ही समUा «ाने वाला मनु'य ¹सहाय ¤नकर ¹पना सवर ना° ही देखdा रहे, समय रहdे न ¤े d¹
मानस ¤दलने से 7¤लन ग÷¤÷ाdे ह ¹र ¤यव¹°ा ¹¹d- ¤य¹d हî «ाdी ह ¹ ि¤खराव ¹र िव9मdा दî ¤÷े सं क°
ह, «î ¹सं•यî 7कार के संक°î कî «·म देdे ह ¹ इ·ह िनर¹d करने के îल( (कdा ¹र समdा की सवर dîमुखी 7िd8ा करनी
प÷dी ह ¹ इdना ¤न प÷ने पर वे स¬ी ¹वरîध ¹नायास ही समाP हî «ाdे ह , «î िdल से dा÷ ¤नकर, रा, का पवर d ¤न कर
महािवना° कî ¤ु नîdी देdे ह ( ग«र - d«र न कर रहे °े¹ नवयु ग म (कdा ¹र समdा के दîनî îस|ांd हर ¤यî+ कî इ¤Fा या
¹िन¤Fा ¹र ¹ं गीकार करने प÷गे , (सा मनीि9यî, ¬िव'य¢Pा¹ं का ¹ि¬मd ह ¹ °ासन ¹र समा« कî ¬ी ¹पनी
मा·यdा( ¤यव¹°ा( इसी 7कार की ¤नानी प÷गी¹ 7वाह ¹र 7¤लन के ¹नु¹प ¹पने ¹व¬ाव म ¹व°यक पîरवdर न करने
हîगे¹ ¹¬ंगे¤ा«ी dî ¬ली- ¤ुरी ¤यव¹°ा म ¹पनी ¨…ं¬dा का पîर¤य देने के îल( कही न कही से ¹ °पकdी ह ¹ «लdे
दीपक की लî ¤ुUाने के îल( पdं गî के दल ¨स पर °¸° प÷ने से ¤ा7 नही ¹dे, ¬ले ही इस दु रि¬संîध म ¨·ह ¹पने पंख
«लाने ¹र 7ाण गवाने प÷¹ d¸9ान का मागर रîकने वाले व÷î कî ¨ख÷dे ¹र Uîप÷î कî ¹समान म ¨÷dे ह ( ¹( िदन
देखा «ाdा ह ¹ महाकाल के िनधार रण (वं ¹नु°ासन के सामने कî, ¨…ं¬dा ¹वरîध ¤न कर ¹÷ेगी ¹र ¤यवधान ¤नकर
कारगर रîक°ाम करे गी, इसी ¹°ंका न की «ा( dî ही õीक ह ¹
इककीसवी सदी की स-प¸णर ¤यव¹°ा (कdा ¹र समdा के îस|ांdî पर िनधार îरd हîगी¹ हर ÷े¬ म , हर 7सं ग म,
¨·ही का ¤îल¤ाला ¸îPगî¤र हîगा¹ इस ¬िवd¤यdा के ¹नु¹प हम ¹¬ी से धीमी- धीमी d याîरया °ु¹ कर द dî यह ¹पने
िहd म हîगा¹ 7H मुह¸Vर म «ागकर िनतयकमर से िनप° लेने वाले ¤यî+ स¸ यìदय हîdे ही ¹पने ि4याकलापî म «ु° «ाdे ह,
«¤िक िदन ¤{े dक सîdे रहने वाले िकdने ही कामî म िपF÷ «ाdे ह ¹
म¸धर ·य मनीि9यî का कहना ह िक ¹गले िदनî (कdा, (क सवर मा·य ¤यव¹°ा हîगी¹ स¬ी लîग िमल«ुल कर रहने के
îल( िवव° हîगे¹ ¬े { ¤ावल की îख¤÷ी पकाने, °ा, ,

° की मद ख÷ी करने का कî, ¨पहासा¹पद îखलवा÷ नही
करे गा¹ स+यdा के ¤{dे ¤रणî म (कdा ही स¤की ¹रा°य हîगी¹ ि¤लगाव का 7द°र न करने वाली ¤ाल- îखलवा÷ देर dक
¹पनी ¹लग पह¤ान न रह सके गी¹ ि¤खराव सहन न हîगा¹ ि¤लगाव कî कही से ¬ी सम°र न नही िमलेगा¹ संकीणर
¹वा°र परdा ¹र ¹पने मdल¤ से मdल¤ रखने वाली ÷ु¢dा िकसी ¬ी ÷े¬ म ¤यावहाîरक न हîगी¹ िमल«ुल कर रहने पर ही
°ांिd, सुिवधा ¹र 7गिd की िद°ा म ¤{ा «ा सके गा¹ वसुध व कु °ु ं¤कम¸ का ¹द°र ¹¤ समा«वाद, सम¸हवाद, संगõन,
(कीकरण का िवधान ¤न कर समय के ¹नु¹प कायारî·वd हîगा¹ ¨से स¬ी िवU«नî का समान सम°र न ¬ी िमलेगा¹
¹गली दु िनया (कdा का ल°य ¹वीकारने के îल( िन°¤य कर ¤ुकी ह ¹ ¹÷ंगे¤ा«ी से िन¤°ना ही °े9 ह ¹ वे 7वाह म
¤हने वाले पVî की dरह लहरî पर ¨Fलdे क¸ दdे कही से कही «ा पह ¤ गे¹ ¤4वाd से °कराने की म¸खर dा करने वाले
िdनकî के ¹î¹dतव ¨स वायु ¬वर म 9 स कर ¹पना ¹î¹dतव dक गवा ¤ õdे ह ¹ (कdा ¹¤ ¹पîरहायर हîकर रहेगी¹ «ािd-
पािd के नाम पर रं ग, वणर ¹र îलं ग के ¹धार पर ¹लग- ¹लग क¤ीले ¤सा कर रहना ¹िदम काम म ही सं¬व °ा, ¹« के
¹ि¤तय कî सम°र न देने वाले यु ग म नही¹
संसार ¬र म (क ही «ािd का ¹î¹dतव रहेगा ¹र वह ह सुसं¹क d, स+य मनु'य «ािd का¹ काले, पीले, स9े द,
गेह ¹ ¹िद रं गî की ¤म÷ी हîने से िकसी कî ¬ी ¹पनी ¹लग ि¤रादरी ¤ना( रह सकना ¹¤ सं¬व न हîगा¹ समUदारी के
माहîल म मा¬ ·याय ही «ीिवd रहेगा ¹र ¹ि¤तय ही सराहा, ¹पनाया «ा(गा, d¸dी ¨सी की ही ¤îलेगी¹
धमर स-7दायî के नाम पर, ¬ा9ा, «ािd, 7°ा, ÷े¬ ¹िद के नाम पर «î क ि¬म िव¬ेद की दीवार ¤न ग, ह , वे लहरî
की dरह ¹पना- ¹पना ¹लग 7द°र न ¬ले ही करdी रह , पर वे स¬ी (क ही «ला°य की सामियक हल¤ल ¬र मानी «ा(गी¹
पानी म ¨õने वाले ¤¤¸ले °î÷ी देर ¨Fलने- म¤लने का कîd¸हल िदखाdे ह, इसके ¤ाद तवîरd ही ¨नका ¹°ाह «लराि° म
िवलय, समापन हî «ाdा ह ¹ मनु'य कî ¹लगाव ¹र ि¤खराव म ¤ाधने वाले 7¤लन इन िदनî िकdने ही पुराdन, °ा+-
स-मd ¹°वा सं कीणर dा पर ¹धाîरd हîने के कारण िकdने ही 7¤ल 7dीd कयî न हîdे हî, पर ¹गले d¸9ान म इन ¤ालु,
°र- °रîदî म से (क का ¬ी पdा न ¤लेगा¹ मनु'य «ािd ¹¬ी इन िदनî ¬ले ही (क न हî, पर ¹गले ही िदनî वह सुिनî°¤d
¹प से (क ¤न कर रहेगी¹
धराdल (क दे° ¤न कर रहेगा¹ दे°î की क ि¬म दीवार खी¤कर ¨सके °ु क÷े ¤ने रहना न dî ¤यावहाîरक रहेगा, न
सुिवधा«नक¹ इनके रहdे °î9ण, ¹4ामकdा, ¹पाधापी का माहîल ¤ना ही रहेगा¹ दे° ¬î+ के नाम पर यु | िF÷dे रहगे
‘‘ ¹र सम°र दु ¤र लî कî पीसdे रहगे¹ «ंगल का कान¸ न- ’’ मत¹य ·याय इस ¹7ाक िdक िव¬ा«न की ¤यव¹°ा ने ही ¨तप¬
िकया ह ¹ हर ÷े¬ का नागîरक ¹पनी ही Fî°ी कîõîरयî म रहने के îल( ¤ाîधd ह ¹ वहा यह सुिवधा नही िक ¹पनी
¹नुक¸ लdा वाले िकसी ¬ी ÷े¬ म ¤स सक ¹
कु F दे°î के पास ¹पार ¬¸िम ह , कु F कî ¤ेdुकी ि°¤िप¤ म रहना प÷dा ह ¹ कु F दे°î ने ¹पने ÷े¬ की खिन« (वं
7ाक िdक स-पदा¹ं पर ¹îधकार °îि9d करके धन कु ¤ेर « सी î¹°िd 7ाP कर ली ह ¹र कु F कî ¹सीम शम करने पर
¬ी 7ाक िdक स-पदा का ला¬ न िमलने पर ¹सहायî की dरह dरसdे रहना प÷dा ह ¹ ¬गवान ने धरdी कî ¹पने स¬ी पु¬î
के îल( समान सुिवधा देने के îल( स«ा ह ¹ 7ाक िdक स-पदा पर स¬ी का समान हक ह ¹ ि9र कु F दे° ¹नुि¤d ¹îधकार
कî ¹पनी िप°ारी म ¤ंद कर °े9 कî दाने - दाने के îल( dरसाव , यह िव¬ा«न ¹·यायप¸णर हîने के कारण देर dक ि°के गा
नही¹ ¹« की दादागीरी ¹गे ¬ी इसी 7कार ¹पनी लाõी ¤«ाdी रहेगी, यह हî नही सके गा¹ िव°व (क दे° हîगा ¹र ¨स
पर रहने वाले स¬ी मनु 'य ,°वर 7दV स¬ी साधनî का ¨पयîग (क िपdा की संdान हîने के नाdे कर सक गे¹ पîरशम ¹र
कî°ल के ¹धार पर िकसी कî कु F ¹îधक िमले , यह द¸ सरी ¤ाd ह , पर प dक स-पदा पर dî स¬ी संdानî का समान
¹îधकार हîना ही ¤ािह(¹ ¹ि¤तय हîना ¤ािह(, ‘‘ ’’ ‘‘ (सा मनी9ा ने °îि9d िकया ह ¹ ·याय यु ग म ¨से हî रहा ह या हî
’’ गया कहा «ा(गा¹
¤¸ द ¹गल- ¹लग रह कर ¹पनी शी गîरमा का पîर¤य नही दे सकdी¹ ¨·ह हवा का (क Uîका ¬र सुखा देने म
सम°र हîdा ह , पर «¤ वे िमलकर (क िव°ाल «ला°य का ¹प धारण करdी ह , dî ि9र ¨नकी सम°र dा ¹र ¤यापकdा
देखdे ही ¤नdी ह ¹ इस d°य कî हम सम¸¤ी मानव «ािd कî (कdा के के ·¢ पर क ि¢d करने के îल( साहîसक dतपरdा
¹पनाdे ह ( सं¬व कर िदखाना हîगा¹
धमर स-7दायî की िव¬ा«न रे खा ¬ी (सी ही ह , «î ¹पनी मा·यdा¹ं कî स¤ ¹र द¸ सरî के 7िdपादनî कî U¸õा
îस| करने म ¹पने ¤ुî|- व ¬व से °ा+ा°ì

, °करावî के ¹ प÷ने पर ¨¬रdी रही ह ¹ ¹+- °+î वाले यु |î ने िकdना
िवना° िकया ह, ¨सका 7तय÷ हîने के नाdे लेखा- «îखा îलया «ा सकdा ह , पर ¹पनी धमर मा·यdा द¸ सरî पर °îपने के
îल( िकdना द¤ाव ¹र िकdना 7लî¬न, िकdना प÷पाd ¹र िकdना ¹·याय इन कामî म लगाया गया ह , इसकी परî÷
िववे ¤ना िकया «ाना सं¬व हî dî 7dीd हîगा िक इस ÷े¬ के ¹4मण ¬ी कम दु ःखदायी नही रहे ह ¹ ¹गे ¬ी इसका इसी
7कार पîरपî9ण ¹र 7¤लन हîdा रहा dî िववाद, िवना° ¹र िव9ाद °°गे नही ¤{dे ही रहगे¹ ¹नेकdा म (कdा खî«
िनकालने वाली द¸ रदि°र dा कî स-7दायवाद के ÷े¬ म ¬ी 7वे ° करना ¤ािह(¹
¹रं ि¬क िदनî म सवर -धमर - सम¬ाव सिह'णु dा, ि¤ना °करा( ¹पनी- ¹पनी म«î पर ¤लने की ¹वdं ¬dा ¹पना(
रहना õीक ह, काम ¤ला¬ नीिd ह ¹ ¹ंddः िव°व मानव का (क ही मानव धमर हîगा¹ ¨सके îस|ांd ि¤ंdन, ¤îर¬ ¹र
¤यवहार के सा° «ु÷ने वाली ¹द°र वािदdा पर ¹वलं ि¤d हîगे¹ मा·यdा¹ं ¹र पर-परा¹ं म से 7तयेक कî dकर , d°य,
7माण, परी÷ण (वं ¹नु¬व की कसîि°यî पर कसने के ¨परांd ही िव°व धमर की मा·यdा िमलेगी¹ सं÷ेप म ¨से ¹द°र वादी
¤यî+तव ¹र ·यायîि¤d िन8ा पर ¹वलं ि¤d माना «ा(गा¹ िव°व धमर की ¤ाd ¹« ¬ले ही स°न dिमˆा म किõन माल¸म
प÷dी हî, पर वह समय द¸ र नही «¤ (कdा का स¸यर ¨गेगा ¹र इस समय «î ¹¸°य ह , ¹सं¬व 7dीd हîdा ह , वह ¨स
वेला म 7तय÷ (वं 7का°वान हîकर रहेगा¹ यही ह ¹ने वाली सdयु गी समा« ¤यव¹°ा की कु F Uलिकया, «î हर ¹î¹dक
कî ¬िव'य के 7िd ¹°ावान¸ ¤नाdी ह ¹
* पे°वा की सेना की ¹र धु ¹ ¨÷dा देखकर d म¸र लं ग ने प¸Fा- यह कया हî रहा ह? खु ि9या ¹9सरî ने ¤dाया-
िह·द¸ (क द¸ सरे का Fु ¹ ¬î«न नही खाdे , इसीîल( स¤ ¹पना- ¹पना ¹लग- ¹लग ¬î«न पका रहे ह, ¨सी का धु ¹ ह ¹
d म¸र ने कहा- «î «ािd इस dरह िव¬+ हî, ¨से «ीdना कया किõन ह? ¨सी समय हमला ¤îल िदया ¹र पे°वा की सेना
«ीd ली ग,¹
* िकसी ने ि¤नîवा «ी से प¸Fा- ¹प महाराPीय 7ाHण ह- कîकण¹° या दे°¹°? ¨·हîने कहा- म दे° म रहdा ह,
इसîल( दे°र° ह¸, काया म रहdा ह¸ इसîल( काय¹° ह¸ ¹र स¤से ¹îधक dî म ¹व¹° ह¸ «î िक िकसी धमर , «ािd ¹र
दे° से सं¤ंध नही रखdा¹ वे सv«न ¹पनी «ािd- पािd म¸लक संकीणर dा पर ¤ह d लîv«d ह (¹
मनु'य ¹पने ¬ा ¹ य का ि नमा र dा ¹प ह , इस ि व°वा स के ¹धा र पर हमा री मा ·यdा ह ि क हम ¨तक P ¤न गे
¹र द¸सरî कî शे 8 ¤ना ( गे , dî यु ग ¹व°य ¤दले गा ¹
पîरî¹°िdयî का हमारे ¬पर ¤÷ा 7¬ाव प÷dा ह ¹ ¹स- पास का « सा वाdावरण हîdा ह, वसा ¤नने ¹र करने के
îल( मनिम का ¢Uान हîdा ह ¹र साधारण î¹°िd के लîग ¨न पîरî¹°िdयî के सा¤े म °ल «ाdे ह ¹ °°ना( हम
7¬ािवd करdी ह, ¤यî+ का 7¬ाव ¹पने ¬पर प÷dा ह ¹ इdना हîdे ह ( ¬ी यह मानना प÷ेगा िक स¤से ¹îधक 7¬ाव
¹पने िव°वासî का ही ¹पने ¬पर प÷dा ह ¹ पîरî¹°िdया िकसी कî d¬ी 7¬ािवd कर सकdी ह , «¤ मनु'य ¨नके ¹गे
îसर Uु का दे¹ यिद ¨नके द¤ाव कî ¹¹वीकार कर िदया «ा( dî ि9र कî, पîरî¹°िd िकसी मनु'य कî ¹पने द¤ाव म देर
dक नही रख सकdी¹ िव°वासî की dुलना म पîरî¹°िdयî कî 7¬ाव िन°¤य ही नग7य ह ¹
कहdे ह िक ¬ा¹य की र¤ना 7Hा «ी करdे ह ¹ सुना «ाdा ह िक कमर - रे खा( «·म से पहले ही îलख दी «ाdी ह ¹
(सा ¬ी कहा «ाdा ह िक dकदीर के ¹गे dदवीर की नही ¤लdी¹ ये िकं वदं िdया (क सीमा dक ही स¤ हî सकdी ह ¹ «·म
से ¹ंधा, ¹पंग ¨तप¬ ह ¹ या ¹°+, ¹िवकîसd ¤यî+ (सी िवपîV सामने ¹ ख÷ी हîdी ह , î«ससे ¤¤ सकना या रîका
«ा सकना ¹पने व° म नही हîdा¹ ¹î„का7¬, ¬¸क-प, यु |, महामारी, ¹काल- मतयु दु ि¬र ÷, रे ल, मî°र ¹िद का पल° «ाना,
¤îरी, ¬क dी ¹िद के क, ¹वसर (से ¹ «ाdे ह ¹र (सी िवपîV सामने ¹ ख÷ी हîdी ह , î«ससे ¤¤ सकना या रîका
«ा सकना ¹पने व° म नही हîdा¹ (सी कु F °°ना¹ं के ¤ारे म ¬ा¹य या हîd¤यdा की ¤ाd मानकर संdî9 िकया «ाdा ह ¹
पीि÷d मनु'य के ¹ं dîरक िव÷î¬ कî °ांd करने के îल( ¬ा¹यवाद की d÷पन द¸ र करने के îल( ¬™क°र लîग नीद की गîली
îखला देdे ह , मि9र या का इं «ेक°न लगा देdे ह, कîकीन ¹िद की 9ु रहरी लगाकर पीि÷d ¹°ान कî सु¬ कर देdे ह ¹ ये
िव°े9 पîरî¹°िdयî के िव°े9 ¨प¤ार ह ¹ यदा- कदा ही (सी ¤ाd हîdी ह , इसîल( इ·ह ¹पवाद ही कहा «ा(गा¹
पु¢9ा°र का िनयम ह ¹र ¬ा¹य ¨सका ¹पवाद¹ ¹पवादî कî ¬ी ¹î¹dतव dî मानना प÷dा ह , पर ¨नके ¹धार
पर कî, नीिd नही ¹पना, «ा सकdी, कî, कायर 4म नही ¤नाया «ा सकdा¹ क¬ी- क¬ी î+यî के पे° से मनु'याक िd से
ि¬¬ ¹क िd के ¤¤¤े «·म लेdे देखे ग( ह ¹ क¬ी- क¬ी कî, पे÷ ¹समय म ही 9ल- 9¸ ल देने लगdा ह , क¬ी- क¬ी ¹ी'म
+dु म ¹ले ¤रस «ाdे ह, यह ¹पवाद ह ¹ इ·ह कîd¸हल की ¸îP से देखा «ा सकdा ह , पर इनकî िनयम नही माना «ा
सकdा¹ इसी 7कार ¬ा¹य की गणना ¹पवादî म dî हî सकdी ह, पर यह नही माना «ा सकdा िक मानव «ीवन की सारी
गिdिवîधया ही प¸वर िनî°¤d ¬ा¹य- िवधान के ¹नुसार हîdी ह ¹ यिद (सा हîdा dî पु¢9ा°र ¹र 7यतन की कî, ¹व°यकdा
ही न रह «ाdी¹ î«सके ¬ा¹य म « सा हîdा ह , व सा यिद ¹िम° ही ह, dî ि9र पु¢9ा°र करने से ¬ी ¹îधक कया िमलdा ¹र
पु¢9ा°र न करने पर ¬ी ¬ा¹य म îलखी स9लdा ¹नायास ही कयî न िमल «ाdी?
हर ¤यî+ ¹पने- ¹पने ¹¬ीP ¨…े°यî के îल( पु ¢9ा°र करने म संल„ रहdा ह, इससे 7क° ह िक ¹तमा का
सुिनî°¤d िव°वास पु¢9ा°र के ¬पर ह ¹र वह ¨सी का 7ेरणा िनरं dर 7¹dुd करdी रहdी ह ¹ हम समU लेना ¤ािह( िक
7Hा «ी िकसी का ¬ा¹य नही îलखdे , हर मनु'य ¹पने ¬ा¹य का िनमारdा ¹वयं ह ¹ î«स 7कार कल का «माया ह ¹ द¸ ध
¹« दी ¤न «ाdा ह , ¨सी 7कार कल का पु¢9ा°र ¹« ¬ा¹य ¤नकर 7¹dुd हîdा ह ¹ ¹« के कमì

का 9ल ¹« ही नही
िमल «ाdा¹ ¨सका पîरपाक हîने म , पîरणाम 7ाP हîने म , पîरणाम िनकलने म कु F देर लगdी ह ¹ यह देरी ही ¬ा¹य कही «ा
सकdी ह ¹ परमातमा समद°î ¹र ·यायकारी ह , ¨से ¹पने स¤ पु¬ समान ¹प से ि7य ह , ि9र वह िकसी का ¬ा¹य ¹¤Fा,
िकसी का ¤ुरा îलखने का ¹·याय या प÷पाd कयî करे गा? ¨सने ¹पने हर ¤ालक कî ¬ले या ¤ुरे कमर करने की प¸णर
¹वdं ¬dा 7दान की ह, पर सा° ही यह ¬ी ¤dा िदया ह िक ¨नके ¬ले या ¤ुरे पîरणाम ¬ी ¹व°य 7ाP हîगे¹ इस 7कार कमर
कî ही यिद ¬ा¹य कह dî ¹तयु î+ न हîगी¹
हमारे «ीवन म ¹गिणd सम¹या( ¨लUी ह , गु îत°यî के ¹प म िवकîसd वे 9 धारण िक( सामने ख÷ी ह ¹ इस क°ु
सतय कî मानना ही ¤ािह(¹ ¨नके ¨तपादक हम ¹वयं ह ¹र यिद इस d°य कî ¹वीकार करके ¹पनी ¹दdî,
िव¤ारधारा¹ं, मा·यdा¹ं ¹र गिdिवîधयî कî सुधारने के îल( d यार हî, dî इन ¨लUनî कî हम ¹वयं ही सुलUा सकdे ह ¹
¤े¤ारे ¹ह- न÷¬î पर दî9 °îपना ¤ेकार ह ¹ लाखî- करî÷î मील द¸ र िदन- राd ¤ककर का°dे ह ( ¹पनी मîd के िदन प¸रे करने
वाले ¹ह- न÷¬ ¬ला हम कया सु ख- सुिवधा 7दान कर गे? ¨नकî Fî÷कर स¤¤े ¹हî का प¸ «न ¹रं ¬ कर, î«नकी °î÷ी-सी
क पा- कîर से ही हमारा सारा 7यî«न îस| हî सकdा ह , सारी ¹कां÷ा( देखdे- देखdे प¸णर हî सकdी ह ¹
नव- राि¬यî म हम हर साल नव दु गार¹ं की प¸«ा करdे ह , मानdे ह िक ¹नेक +î|- îसî|या 7दान करdी ह ¹ सुख-
सुिवधा¹ं की ¨पलî·ध के îल( ¨नकी क पा ¹र सहायdा पाने के îल( िविवध साधना व प¸«न िक( «ाdे ह ¹ î«स 7कार
देवलîकवाîसनी नव दु गार( ह, ¨सी 7कार ¬¸ - लîक म िनवास करने वाली, हमारे ¹तयंd समीप, °रीर ¹र मî¹d'क म ही
रहने वाली नî 7तय÷ देिवया ¬ी ह ¹र ¨नकी साधना का 7तय÷ पîरणाम ¬ी िमलdा ह ¹ देवलîकवाîसनी देिवयî के 7स¬
हîने ¹र न हîने की ¤ाd dî संिद¹ध हî सकdी ह , पर °रीर- लîक म रहने वाली नî देिवयî की साधना का शम क¬ी ¬ी ¤य°र
नही «ा सकdा¹ यिद °î÷ा ¬ी 7यतन इनकी साधना के îल( िकया «ा(, ¨सका ¬ी समुि¤d ला¬ िमल «ाdा ह ¹ हमारे
मनः÷े¬ म िव¤रण करने वाली इन नî देिवयî के नाम ह
(º) ¹कां÷ा, (×) िव¤ारणा, (;) ¬ावना, (×) श|ा, (') 7वîV, ()) िन8ा, (u) ÷मdा, (¿) ि4या, (°) मयारदा¹
इनकî संdुîलd करके मनु'य ¹P îसî|यî ¹र नव िनî|यî कî ¹वामी ¤न सकdा ह ¹ संसार के 7तयेक 7गिd°ील मनु'य
कî «ाने या ¹न«ाने म इनकी साधना करनी ही प÷ी ह ¹र इ·ही के ¹नु¹ह से ¨·ह ¨¬िd के ¨¤¤ि°खर पर ¤{ने का
¹वसर िमला ह ¹
¹पने कî ¨तक P ¤नाने का 7यतन िकया «ा(, dî हमारे संपकर म ¹ने वाले द¸ सरे लîग ¬ी शे8 ¤न सकdे ह ¹ ¹द°र
सदा कु F ¬ ¤ा रहdा ह ¹र ¨सकी 7िdि4या कु F नी¤ी रह «ाdी ह ¹ ¹द°र का 7िd8ापन करने वालî कî सामा·य «नdा
के ¹dर से सदा ¬ ¤ा रहना प÷ा ह ¹ संसार कî हम î«dना ¹¤Fा ¤नाना ¹र देखना ¤ाहdे ह , ¨सकी ¹पे÷ा ¹वयं कî कही
¬ ¤ा ¤नाने का ¹द°र ¨पî¹°d करना प÷ेगा¹ ¨तक Pdा ही शे8dा ¨तप¬ कर सकdी ह ¹ पîरपकव °रीर की माdा ही
¹व¹° ¤¤¤े का 7सव करdी ह ¹ ¹द°र िपdा ¤न , d¤ ही सुसंdिd का सî¬ा¹य 7ाP कर सक गे¹ ¹द°र िपdा ¤न , d¤ ही
सुसंdिd का सî¬ा¹य 7ाP कर सक गे¹ यिद ¹द°र पिd हî, dî ही पिdœdा पतनी की सेवा 7ाP कर सक गे¹ °रीर की ¹पे÷ा
Fाया कु F कु ¹प ही रह «ाdी ह ¹ ¤ेहरे की ¹पे÷ा 9î°î म कु F ·य¸ नdम ही रहdी ह ¹ हम ¹पने ¹पकî î«स ¹dर dक
िवकîसd कर सके हîगे, हमारे समीपवdî लîग ¨ससे 7¬ािवd हîकर कु F ¬पर dî ¨õ गे , dî ¬ी हमारी ¹पे÷ा कु F नी¤ रह
«ा(गे¹ इसîल( हम द¸ सरे से î«dनी सv«नdा ¹र शे8dा की ¹°ा करdे हî, ¨सकी dुलना म ¹पने कî कु F ¹îधक ही
¬ ¤ा 7मािणd करना हîगा¹ हम िनî°¤d ¹प से यह याद रखे रहना हîगा िक ¨तक Pdा के ि¤ना शे8dा ¨तप¬ नही हî
सकdी¹
लेखî ¹र ¬ा9णî का यु ग ¹¤ ¤ीd गया¹ गाल ¤«ाकर, लं ¤ी- ¤î÷ी ¬ीग हाककर या ¤÷े- ¤÷े काग« काले करके
संसार के सुधार की ¹°ा करना ¤य°र ह ¹ इन साधनî से °î÷ी मदद िमल सकdी ह , पर ¨…े°य प¸ रा नही हî सकdा¹ यु ग
िनमार ण « से महान¸ कायर के îल( dî यह साधन सवर °ा ¹पयारP ¹र ¹प¸णर ह ¹ इसका 7धान साधन यही हî सकdा ह िक हम
¹पना मानîसक ¹dर ¬ ¤ा ¨õा( , ¤ाîरि¬क ¸îP से ¹पे÷ाक d ¨तक P ¤न¹ ¹पने ¹¤रण से ही द¸ सरî कî 7¬ाव°ाली
ि°÷ा दी «ा सकdी ह ¹ गिणd, ¬¸ गîल, इिdहास ¹िद की ि°÷ा म कहने- सुनने की 7ि4या से काम ¤ल सकdा ह, पर ¤यî+
िनमार ण के îल( dî िनखरे ह ( ¤यî+तवî की ही ¹व°यकdा प÷ेगी¹ ¨स ¹व°यकdा की प¸िdर के îल( स¤से पहले हम ¹वयं
ही ¹गे ¹ना प÷ेगा¹ हमारी ¨तक Pdा के सा°- सा° संसार की शे8dा ¹पने ¹प ¤{ने लगेगी¹ हम ¤दलगे, dî यु ग ¬ी «¹र
¤दलेगा ¹र हमारा यु ग िनमारण संकलप ¬ी ¹व°य प¸णर हîगा¹
¹« वे +ि9- मुिन नही रहे, «î ¹पने ¹द°र ¤îर¬ ¤ारा लîक ि°÷ण करके , «न साधारण के ¹dर कî ¬ ¤ा ¨õाdे
°े¹ ¹« वे 7ाHण ¬ी नही रहे , «î ¹पने ¹गाध Uान, वं दनीय तयाग ¹र 7¤ल- पु¢9ा°र से «न- मानस की पdनî·मुख प°ु-
7वîVयî कî मî÷कर देवतव की िद°ा म पल° ¬ालने का ¨Vरदाियतव ¹पने कं धî पर ¨õाdे °े¹ व÷î के ¹¬ाव म (रं ¬ का
पे÷ ही व÷ कहलाdा ह ¹ इस िव¤ारधारा से «ु÷े िव°ाल देव पîरवार के पîर«न ¹पने Fî°े - Fî°े ¤यî+तवî कî ही ¹द°र वाद
की िद°ा म ¹¹सर कर, dî ¬ी कु F न कु F 7यî«न îस| हîगा, कम से कम (क ¹व¢| ¤ार dî खु लेगा ही¹ यिद हम मागर
¤नाने म ¹पनी Fî°ी- Fî°ी हî¹dयî कî लगा द, dî कल ¹ने वाले यु ग 7वdर कî की मंî«ल ¹सान हî «ा(गी¹ यु ग िनमार ण
सतसंकलप का °ंखनाद करdे ह ( Fî°े - °î+यî के «ागरण की ¤े dना कî यिद ¤ाîरि¬क संधान के îल( «म «ा¹d कर सक ,
dî ¹« न सही dî कल, हमारा यु ग िनमारण सं कलप प¸णर हîकर रहेगा¹
यु ग पîरवdर न की सुिनî°¤ddा पर िव°वास करना हवा, महल नही ¤îलक d°यî पर ¹धाîरd (क सतय ह ¹
पîरî¹°िdया िकdनी ही िवक° हî, «¤ सदा°यdा स-प¬ संकलप°ील ¤यî+ (क «ु° हîकर कायर करdे ह dî î¹°िd ¤दले
ि¤ना नही रहdी¹ ¹सुरdा के ¹dं क से मुî+ का पîरािणक ¹•यान हî या î«नके °ासन म स¸यर नही ¬¸¤dा °ा , ¨नके
¤ं गुल से मु+ हîने का ¹वdं ¬dा ¹ि¬यान, नग7य °î+ से ही सही, पर सं कलप°ील ¤यî+यî का समुदाय ¨सके îल( यु ग-
°î+ के ¹वdरण का मा°यम ¤न ही «ाdा ह ¹ यु ग िनमारण ¹ि¬यान से पîरि¤d ¤यî+ यह ¬ली 7कार समUने लगे ह िक
यह ,°वर 7े îरd 7ि4या ह ¹ इस संकलप कî ¹पनाने वाला ,°वरीय सं कलप का ¬ागीदार कहला सकdा ह ¹ ¹¹dु , ¨सकी
स9लdा पर प¸री ¹¹°ा रखकर ¨सकî «ीवन म ¤îरdा°र करने- कराने के îल( प¸ री °î+ Uîक देना, स¤से ¤÷ी समUदारी
îस| हîगी¹

‘‘ हम ¤दल गे - ’’ यु ग ¤दले गा , ‘‘ हम सुधर गे - ’’ यु ग सुधरे गा इस d°य पर हमा रा पî रप¸णर ि व°वा स ह ¹
यु ग िनमारण की यî«ना का शी गणे° हम ¹पने ¹प से ¹रं ¬ करना ¤ािह(¹ वdर मान नारकीय पîरî¹°िdयî कî
¬ावी सु ख- °ाî·dमयी ¹वगîय वाdावरण म ¤दलने के îल( ि¤ंdन ही (कमा¬ वह के ·¢ ि¤·दु ह , î«सके ¹धार पर ¤यî+ की
िद°ा, 7िd¬ा, ि4या, î¹°िd (वं 7गिd प¸णर dया िन¬र र ह ¹ ि¤ंdन की ¨तक Pdा, िनक Pdा के ¹धार पर ¤यî+, देव ¹र ¹सुर
¤नdा ह ¹ ¹वगर ¹र नरक का स«न प¸णर dया मनु'य के ¹पने हा° म ह ¹ ¹पने ¬ा¹य ¹र ¬िव'य का िनमारण हर कî, ¹वयं
ही करdा ह ¹ ¨त°ान (वं पdन की कु «ी ि¤ंdन की िद°ा कî ही माना गया ह¹ हम ¹पनी पîरî¹°िdया यिद ¨तक P ¹dर की
¹¬ीP हî dî इसके îल( (क ¹िनवायर °dर यह ह िक ¹पने ि¤ं dन की धारा िनक Pdा की िद°ा म 7वािहd हîने से रîककर
¨से ¨तक Pdा की ¹र मî÷ द¹ यह मî÷ ही हमारे ¹dर, ¹व¹प ¹र पîरî¹°िdयî कî ¤दलने म सम°र हî सकdा ह ¹ ि¤ंdन
िनक P ¹dर का हî ¹र हम महानdा वरण कर सक , यह सं¬व नही¹ संकीणर ¹र ¹वा°î लîग ¹नीिd से कु F पसे ¬ले ही
इक’े कर ल, पर ¨न िव¬¸िdयî से सवर °ा वंि¤d ही ¤ने रहगे , «î ¤यî+तव कî 7खर ¹र पîरî¹°िdयî कî सु ख- °ांिd से
¬री संdî9«नक ¤ना सकdी ह ¹
समा« ¤यî+यî के सम¸ह का नाम ह ¹ ¤यî+ « से हîगे समा« वसा ही ¤न «ा(गा¹ लîग « से हîगे वसा ही समा« (वं
राP ¤नेगा¹ दीन दु ¤र ल ¹dर की «नdा क¬ी सम°र ¹र ¹व¹° राP का िनमारण नही कर सकdी¹ धमर , °ासन, ¤यवसाय,
¨Uîग, ि¤िकतसा, ि°÷ा, कला ¹िद स¬ी ÷े¬î का नेdतव «नdा के ही ¹दमी करdे ह ¹ «न- मानस का ¨Vर िगरा ह ¹ हî
dî ¬ ¤े , ¹¤Fे , सम°र ¹र स«ीव ¤यî+तव नेdतव के îल( कहा से ¹(गे?
¤यî+ ¹र समा« की सम¹ 7गिd के îल( ि¤ंdन की ¹व¹° िद°ा (वं ¨तक Pdा ¸îPकîण का हîना ¹िनवायर (वं
¹व°यक ह ¹ इसकी प¸िdर ¤ाहे ¹« की «ा( ¤ाहे से ह«ार व9र ¤ाद¹ 7गिd का 7¬ाव ¨सी िदन ¨दय हîगा, î«स िदन यह
¬ली- ¬ािd ¹नु¬व कर îलया «ा(गा िक दु दर °ा से Fु °कारा पाने के îल( दु ¤ु र î| का पîरतयाग ¹व°यक ह ¹ ¹« की î¹°िd
म स¤से ¤÷ा °îयर , साहस, परा4म ¹र पु¢9ा°र यह ह िक हम प¸रा मनî¤ल इक’ा करके ¹पनी ¹र ¹पने सवे सं¤ंîधd
¤यî+यî की िव¤ार ° ली म (सा 7खर पîरवdर न 7¹dुd कर , î«सम िववे क की 7िd8ापना हî ¹र ¹िववे कप¸णर दु ¬ारवना¹ं
(वं दु '7वîVयî कî प रî dले कु ¤ल कर रख िदया «ा(¹
म¸{dा ¹र दु Pdा के 7िd ¤यामîह ने हम ¹सहाय ¹र कायर ¤ना िदया ह ¹ î«से ¹नुि¤d ¹वांFनीय समUdे ह ,
¨से ¤दलने सुधारने का साहस कर नही पाdे¹ न dî सतय कî ¹पनाने का साहस ह ¹र न ¹सतय कî तयागने का¹ कु ÷-
कु ÷ाdे ¬र «¹र ह िक हम ¹नुपयु + िव¤ारणा (वं पîरî¹°िdयî से ¹¹d ह, पर «¤ सुधार ¹र ¤दलाव का 7°न ¹dा ह,
dî प र °र- °र कर कापने लगdे ह ¹र «ी का पने लगdा ह ¹ कायरdा नस- नस म रम कर ¤ õ ग, ह ¹ ¹पनी ¹वांFनीय
मा·यdा¹ं से «î नही ल÷ सकdा, वह ¹4मणकाîरयî से कया ल÷ेगा? «î ¹पनी िव¤ारणा कî नही सुधार सकdा, वह
पîरî¹°िdयî कî कया सुधारे गा?
यु ग पîरवdर न का °ु¬ारं ¬ ¹पनी मनिम के पîरवdर न के सा° ¹रं ¬ करना हîगा¹ हम लîग नव िनमारण के
संदे°वाहक (वं ¹¹द¸ d ह ¹ पîरवdर न की 7ि4या हम ¹पनी ि¤ंdन िद°ा ¹िववे क से िवलग कर िववे क के ¹धार पर
िविनिमर d करनी ¤ािह(¹ «î ¹सतय ह, ¹वांFनीय ह, ¹नुपयîगी ह, ¨से Fî÷कर हम साहस िदखा(¹ ¹¤ ¤हादु री का मुकु °
¨नके îसर ¤ाधा «ा(गा, «î ¹पनी दु ¤र लdा¹ं से ल÷ सक ¹र ¹वांFनीयdा कî ¹वीकार करने से इं कार कर सक ¹ नव
िनमार ण के ¹¹द¸ dî की साहîसकdा इसी ¹dर की हîनी ¤ािह(¹ ¨नका 7°म ¤रण ¹पनी ¹वांFनीय मा·यdा¹ं कî ¤दल
¬ालने ¹र ¹पने ि4या- कलाप म ¹व°यक पîरवdर न करने के îल( (क ¤ार प¸रा मनî¤ल इक’ा कर लेना ¤ािह( ¹र ि¤ना
द¸ सरî की िनंदा- ¹dुिd की, िवरîध- सम°र न की ि¤ंdा िक( िनिदर P प° पर (काकी ¤ल देना ¤ािह(¹ (से ¤÷े कदम «î ¨õा
सकdे हî, ¨·ही से यह ¹°ा की «ा(गी िक यु ग पîरवdर न के महान¸ ¹ि¬यान म वा¹dिवकdा यîगदान दे सक गे¹
«ानकाîरया देने ¹र ¹हण करने ¬र की ¹व°यकdा वाणी ¹र लेखनी ¤ारा स-प¬ की «ा सकdी ह ¹ dकर ¹र
7माण 7¹dुd करके िव¤ार ¤दले «ा सकdे ह, पर ¹ंdराल म «मी ह , ¹¹°ा¹ं d°ा ि¤र ¹+य¹d गिdिवîधयî कî ¤दलने
के îल( समUाने- ¤ुUाने से ¬ी ¤÷ा ¹धार 7¹dुd करना प÷ेगा ¹र यह ह - ’’ ¹पना ¹द°र (वं ¨दाहरण 7¹dुd करना¹
¹नुकरण की 7ेरणा इसी से ¨तप¬ हîdी ह ¹ द¸ सरî कî इस सीमा dक 7¬ािवd करना िक वे ¬ी ¹वांFनीयdा कî Fî÷ने का
साहस िदखा सक , d¬ी सं¬व ह , «¤ वसे ही साहसी लîगî के ¹नुकरणीय ¹द°र 7¹dुd िक( «ा सक ¹ ¹« ¹द°र वािदdा
की ¤{- ¤{कर ¹पना ¨दाहरण 7¹dुd कर सक , (से िन8ावान¸ देखने कî नही िमलdे¹ यही कारण ह िक ¨पदे°î पर िकया
शम ¤य°र îस| हîdा ¤ला «ा रहा ह ¹र सुधार की ¹¬ीP ¹व°यकdा प¸ री हî सकने का सुयîग नही ¤न पा रहा ह ¹
«न- मानस के पîरवdर न की महdी ¹व°यकdा कî यिद स¤मु¤ प¸रा िकया «ाना ह , dî ¨सका रा¹dा (क ही ह िक
¹द°ì

कî «ीवन म ¨dार सकने वाले साहसी लîगî का (क (सा दल 7क° हî, «î ¹पने ¹¤रणî ¤ारा यह îस| करे िक
¹द°र वािदdा के वल (क- द¸ सरे कî ¨पदे° करने ¬र की िव¬ं¤ना नही ह वरन¸ ¨से कायर ¹प म पîरणd ¬ी िकया «ा सकdा
ह ¹ इस 7िdपादन का 7माण 7¹dुd करने के îल( हम ¹पने कî ही ¹गे करना हîगा¹ द¸ सरî के कं धे पर ¤ंद¸ क रखकर गîली
नही ¤ला, «ा सकdी¹ ¹द°र कî, ¹र 7¹dुd करे ¹र नेdतव हम कर, ¹¤ यह ¤ाd नही ¤लेगी¹ हम ¹पनी ¹¹°ा की
7ामािणकdा ¹पने ¹¤रण ¤ारा îस| करनी हîगी¹ ¹¤रण ही सदा से 7ामािणक रहा ह , ¨सी से लîगî कî ¹नुकरण की
7े रणा िमलdी ह ¹
¹« «न मानस म यह ¬य ¹र गहरा, dक °ुस गया ह िक ¹द°र वादी «ीवन म कP ¹र किõनाइया ¬री प÷ी
ह ¹ ¨तक P िव¤ारणा के वल कहने- सु नने ¬र का मनîर¬ करने के îल( ह ¹ ¨से ¤यावहाîरक «ीवन म कायारî·वd नही िकया «ा
सकdा¹ 7ा¤ीनकाल के महापु¢9î के ¨दाहरण 7¹dुd करना का9ी नही, ¨तसाह dî 7तय÷ से ही ¨तप¬ हîdा ह ¹ «î सामने
ह, ¨सी से ¹नुकरण की 7ेरणा ¨प« सकdी ह ¹ «î इस ¹¬ाव (वं ¹व°यकdा की प¸िdर िकसी न िकसी कî dî प¸री करनी
हî हîगी¹ इसके ि¤ना िवक िdयî ¹र िवपîVयî के वdर मान संक° से Fु °कारा पाया न «ा सके गा¹
यह ¹व°यकdा हम लîगî कî ही प¸ री करनी हîगी¹ द¸ सरî लîग इस म से पीFे ह° रहे ह ¹ ¨·ह नेdािगरी य°,
7°ंसा ¹र मान 7ाP करने की ललक dî ह, पर ¹पने कî ¹द°र वाद की 7dीक 7िdमा के ¹प म 7¹dुd करने का साहस
नही हî रहा ह ¹ ¹« के ¹गिणd d°ाकî°d लîकसेवी ¹वांFनीय लîकमा·यdा¹ं के ही ¹नु गामी ¤ने ह ( ह ¹ धािमर क ÷े¬
के ¹îधकां° नेdा, संd- महं d «नdा की ¹ि{यî, म¸{dा¹ं ¹र ¹ंध- पर-परा¹ं का पî9ण ¨नकी ¹वांFनीयdा¹ं कî
समUdे ह ( ¬ी करdे रहdे ह ¹ रा«निdक नेdा ¹पना ¤ु नाव «ीdने के îल( वî°रî की ¹नुि¤d माग प¸री करने के îल( ¬ी
îसर Uु का( रहdे ह ¹
इस î¹°िd म प÷े ह ( लîग «नमानस के पîर'कार « सी लîकमंगल की म¸ल¬¸d ¹व°यकdा प¸णर कर सकने म सम°र
नही हî सकdे¹ इस 7यî«न की प¸िdर वे कर गे , î«नम लîकरं «न की ¹पे÷ा लîकमंगल के îल( ¹गे ¤{ने का, िनंदा, ¹पय°
¹र िवरîध सहने का साहस हî¹ ¹वdं ¬dा सं¹ाम के सेनािनयî ने ¤ं द¸ क की गîîलया खा, °ी¹ ¤îî|क पराधीनdा के िव¢|
Fे ÷े ह ( ¹पने िव¤ार 4ांिd सं¹ाम म ¬ाग लेने वाले सेनािनयî कî कम से कम गाली खाने के îल( d यार रहना ही हîगा, «î
गाली खाने से ¬रे गा, वह ¹वांFनीयdा के िव¢| ¹वा« क से ¨õा सके गा? ¹नुि¤d से ल÷ क से सके गा? इसîल( यु ग
पîरवdर न के महान¸ ¹ि¬यान का नेdतव कर सकने की ¹व°यकdा °dर यह ह िक इस ÷े¬ म कî, य° ¹र मान पाने के
îल( नही िवरîध, िनंदा ¹र िdर¹कार पाने की िह-मd लेकर ¹गे ¹(¹ नव िनमारण का सुधारातमक ¹ि¬यान गिd°ील
¤नाने म िमलने वाले िवरîध ¹र िdर¹कार कî सहने के îल( ¹गे कîन ¹(? इसके îल( 7खर मनî¤ल ¹र 7¤ं¬ साहस
की ¹व°यकdा हîdी ह ¹ इसे (क दु ¬ार¹य ही कहना ¤ािह( िक म¸धर ·य ¹dर के लîग ¬ी साहस िवहीन लुं «- पुं« िदखा, दे रहे
ह ¹र °îयर परा4म के मागर म ¹ने वाली किõनाइयî से ¬रकर ¹गे ¤{ने की िह-मd नही कर पा रहे ह ¹
¹« स¤¤े ¹°यातम कî कलपना लîक से ¨dार कर ¤यावहाîरक «ीवन म ¨dारे «ाने की िनdांd ¹व°यकdा ह ¹
इसके ि¤ना हम ¹îतमक 7गिd न कर सक गे¹ ¹पना ¹नुकरणीय ¹द°र ¨पî¹°d न कर सक गे ¹र यिद यह न िकया «ा
सका, dî समा« के नव िनमारण का, धरdी पर ¹वगर के ¹वdरण का 7यî«न प¸रा न हî सके गा¹ ¹व°यकdा इस ¤ाd की ह
िक हम ¹पना सम¹d साहस ¤°îर कर ¹पनी वासना¹ं, d'णा¹ं, संकीणर dा¹ं ¹र ¹वा°र परdा¹ं से ल÷ प÷¹ इन ¬व
¤ंधनî कî का° ¬ाल ¹र «ीवन कî (सा 7का°वान¸ ¤ना( , î«सकी ¹¬ा से वdर मान यु ग का सारा ¹ंधकार िdरîिहd हî
सके ¹र ¨“वल ¬िव'य की सं¬ावना( ¹लîिकd हî ¨õ ¹
¹¤ायर रामानु« ¨पदे° दे रहे °े - ¬गवान¸ 7ािणमा¬ म समा( ह ( ह, स¤ म ¹पनी ही ¹तमा देखनी ¤ािह(¹ ¨पदे°
(क ¤ा7¬ाल ¬ी सु न रहा °ा¹ « से ही 7व¤न समाP ह ¹, वह ¹¤ायर 7वर के प र F¸ ने कî ¤{ा¹ ¹¤ायर ने ¨से देखा, dî
4ु | हî ¨õे ¹र ¬ा°ा- मुUे Fु (गा कया? ¤ा7¬ाल िõõक गया ¹र ¤îला- महारा« dî ि9र ¹प ¤dलाइ( िक म ¹पने
¬गवान¸ कî कहा ले «ा¬ ? ¹¤ायर की ¹ ख खु ल ग,

¹ ¤ा7¬ाल कî ¹ंक म ¬रdे ह ( ¨·हîने कहा- dाd ÷मा करî¹ ¹«
dुमने मेरी ¹ ख खîल दी¹

¹पना म¸लया ंकन ¬ी करdे रह
यह िनिवर वाद सतय ह िक धमर ¹र सदा¤ार के ¹द°र वादी îस|ांdî का 7ि°÷ण ¬ा9णî ¹र लेखî से प¸रा नही हî
सकdा¹ ये दîनî मा°यम महvवप¸णर dî ह , पर इनका ¨पयîग इdना ही ह िक वाdावरण d यार कर सक ¹ वा¹dिवक 7¬ाव dî
d¬ी प÷dा ह, «¤ ¹पना ¹नुकरणीय ¹द°र ¨पî¹°d करके िकसी कî 7¬ािवd िकया «ा(¹ ¤¸ िक हम न( समा« की, न(
¹द°ì

, «नमानस म 7िd8ापना करनी ह, इसîल( यह ¹िनवायर ¹प से ¹व°यक ह िक यु ग िनमारण पîरवार के सद¹य
द¸ सरî के सामने ¹पना ¹नुकरणीय ¹द°र रख¹ 7¤ार का यही शे8 dरीका ह ¹ इस प|िd कî ¹पना( ि¤ना «नमानस कî
¨तक Pdा की िद°ा म 7¬ािवd (वं 7े îरd िकया «ाना सं¬व नही¹ इसîल( स¤से महvवप¸णर कायर यह ह िक पîरवार का
7तयेक सद¹य इस ¤ाd की ¤े Pा करे िक ¨सके «ीवन म ¹ल¹य, 7माद, ¹¤यव¹°ा (वं ¹निdकdा की «î दु ¤र लdा( समा,
ह , हî, ¨नका गं ¬ीरdाप¸वर क िनरी÷ण करे ¹र इस ¹तम- ि¤ंdन म «î- «î दî9 ¸îPगî¤र हî, ¨·ह सुधारने के îल( (क
4म¤| यî«ना ¤नाकर ¹गे ¤{ ¤ले¹
¹तम ि¤ंdन के îल( हम म से हर (क हî ¹पने से िन-न 7°न प¸Fने ¤ािह( ¹र ¨नके ¨Vरî कî नî° करना
¤ािह(¹
(º) समय « सी «ीवन की ¤ह म¸लय िनîध का हम õीक 7कार सदु पयîग करdे ह या नही? ¹ल¹य ¹र 7माद म
¨सकी ¤र¤ादी dî नही हîdी?
(×) «ीवन ल°य की 7ाîP का हम °यान ह या नही? °रीर सv«ा म ही इस ¹म¸लय ¹वसर कî नP dî नही कर
रहे? दे°, धमर , समा« ¹र सं¹क िd की सेवा के पु नीd कdर ¤य की ¨पे÷ा dî नही करdे?
(;) ¹पने िव¤ारधारा (वं गिdिवîधयî कî हमने ¹ंधानुकरण के ¹धार पर ¤नाया ह या िववे क, द¸ रदि°र dा (वं
¹द°र वािदdा के ¹नुसार ¨नका िनधाररण िकया ह?
(×) मनîिवकारî ¹र कु सं¹कारî के °मन करने के îल( हम सं°9र °ील रहdे ह या नही? Fî°े - Fî°े कारणî कî लेकर
हम ¹पनी मानîसक °ांिd से हा° धî ¤ õने ¹र 7गिd के सारे मागर ¹व¢| करने की ¬¸ल dî नही करdे¹
(') क°ु ¬ा9ण, िF¢ा·वे 9ण (वं ¹°ु¬ कलपना( करdे रहने की ¹दd Fî÷कर सदा संdुP, 7यतन°ील (वं हसमुख
रहने की ¹दd हम ¬ाल रहे ह या नही?
()) °रीर, व+, °र d°ा व¹dु¹ं कî ¹व¤F (वं सु ¤यवî¹°d रखने का ¹+यास ¹रं ¬ िकया या नही? शम से ° णा
dî नही करdे?
(u) पîरवार कî सुसं¹कारी ¤नाने के îल( ¹व°यक °यान (वं समय लगाdे ह या नही?
(¿) ¹हार साîतवकdा 7धान हîdा ह न? ¤°îरपन की ¹दd Fî÷ी «ा रही ह न? सPाह म (क समय ¨पवास,
«लदी सîना, «लदी ¨õना, ¹व°यक 7H¤यर का िनयम पालdे ह या नही?
(°) ,°वर ¨पासना, ¹तमि¤ंdन (वं ¹वा°याय कî ¹पने िनतय- िनयम म ¹°ान दे रखा ह या नही?
(º०) ¹मदनी से ¹îधक ख¤र dî नही करdे? कî, दु ¤यर सन dî नही? ¤¤d करdे ह न?
¨परî+ दस 7°न िनतय ¹पने ¹पसे प¸Fdे रहने वाले कî «î ¨Vर ¹तमा दे , ¨न पर िव¤ार करना ¤ािह( ¹र «î
¬ुि°या ¸îPगî¤र हî, ¨·ह सुधारने का िनतय ही 7यतन करना ¤ािह(¹
¹तम सुधार के îल( 4िमक पîर'कार की प|िd कî ¹पनाने से ¬ी काम ¤ल सकdा ह ¹ ¹पने सारे दî9- दु गु र णî कî
(क ही िदन म तयाग देने का ¨तसाह dî लîगî म ¹dा ह , पर संकलप °î+ के ¹¬ाव म ¤ह धा वह 7िdUा िन¬ नही पाdी,
°î÷े समय म वही पुराना कु सं¹कारी °रार ¹रं ¬ हî «ाdा ह ¹ 7िdUा( करने ¹र ¨·ह न िन¬ा सकने से ¹पना संकलप ¤ल
°°dा ह ¹र ि9र Fî°ी- Fî°ी 7िdUा¹ं कî िन¬ाना ¬ी किõन हî «ाdा ह ¹ यह 4म क, ¤ार ¤लाने पर dî मनु'य का
¹तमिव°वास ही िहल ¨õdा ह ¹र वह सî¤dा ह िक हमारे कु सं¹कार इdने 7¤ल ह िक «ीवनîतक9र की िद°ा म ¤दल
सकना ¹पने îल( सं¬व ही न हîगा¹ यह िनरा°ा«नक î¹°िd d¬ी ¹dी ह «¤ कî, ¤यî+ ¹वे ° ¹र ¨तसाह म ¹पने
सम¹d दî9- दु गु र णî कî dुरं d तयाग देने की 7िdUा करdा ह ¹र मनî¤ल की ·य¸नdा के कारण ि¤र- संि¤d कु सं¹कारî से ल÷
नही सकdा¹
¹तम°îधन का कायर (क 7कार का देवासुर सं¹ाम ह ¹ कु सं¹कारî की ¹सुरी व îVया ¹पना मî¤ार «मा( ¤ õी रहdी
ह ¹र वे सुसं¹कार धारण के 7यतनî कî िन'9ल ¤नाने के îल( ¹नेकî Fल- ¤ल करdी रहdी ह ¹ इसîल( 4म°ः ¹गे ¤{ने
¹र मं°र िकं dु सु ¤यवî¹°d रीिd से ¹पने दî9- दु गु र णî कî परा¹d करने का 7यतन करना ¤ािह(¹ सही dरीका यह ह िक
¹पनी स¬ी ¤ुराइयî (वं दु ¤र लdा¹ं कî (क काग« पर नî° कर लेना ¤ािह( ¹र 7िdिदन 7ाdःकाल ¨õकर ¨सी िदन का
(सा कायर 4म ¤नाना ¤ािह( िक ¹« ¹पनी ¹मुक दु ¤र लdा कî इdने ¹ं°î म dî °°ा ही देना ह ¹ ¨स िदन कî «î कायर 4म
¤नाया «ा(, ¨सके सं¤ंध म िव¤ार कर लेना ¤ािह( िक इनम क¤, कहा, िकdने, िकन कु सं¹कारî के 7¤ल हîने की सं¬ावना
ह ¹ ¨न सं¬ावना¹ं के सामने ¹ने पर हम कम से कम िकdनी ¹द°र वािदdा िदखानी ¤ािह(, यह िनणर य पहले ही कर लेना
¤ािह( ¹र ि9र सारे िदन 7ाdःकाल की ह , 7िdUा के िन¤ाहने का ¸{dाप¸वर क 7यतन करना ¤ािह(¹ इस 7कार 7िdिदन
°î÷ी- °î÷ी स9लdा ¬ी ¹तम- सुधार की िद°ा म 7ाP हîdी ¤ले dî ¹पना साहस ¤{े गा ¹र धीरे- धीरे स¬ी दî9- दु गु र णî कî
Fî÷ सकना सं¬व हî «ा(गा¹
Fî °े सं कलप- ¤÷ी स9लdा (
¹« इdनी मा¬ा म ही ¬î«न कर गे, इdनी द¸ र °हलने «ा(गे, इdना ¤यायाम कर गे, ¹« dî 7H¤यर रखगे ही, ¤ी÷ी
पीने ¹िद का कî, ¤यसन हî dî रî« î«dना ¤ी÷ी पीdे °े, ¨सम (क कम कर दगे, इdने समय dî ¬«न या ¹वा°याय
कर गे ही, स9र (वं ¤यव¹°ा म ¹« इdनी देर का ¹मु क समय dî लगा(गे ही, इस 7कार की Fî°ी- Fî°ी 7िdUा( िनतय
लेनी ¤ािह( ¹र ¨·ह ¹तयंd क÷ा, के सा° ¨स िदन dî पालन कर ही लेना ¤ािह(¹ द¸ सरे िदन की î¹°िd समUdे ह (
ि9र द¸ सरे िदन की सुधरी िदन¤यार ¤ना, «ा(¹ इसम °ारीîरक ि4या¹ं का ही नही, मानîसक गिdिवîधयî का सुधार करने
का ¬ी °यान रखा «ाना ¤ािह(¹ 7िdिदन Fî°ी- Fî°ी स9लdा( 7ाP करdे ¤लने से ¹पना मनî¤ल िनरं dर ¤{dा ह ¹र
ि9र (क िदन साहस (वं संकलप ¤ल इdना 7¤ल हî «ाdा ह िक ¹तम°îधन की िकसी कõîर 7िdUा कî कु F िदन ही नही
वरन¸ ¹«ीवन िन¤ाहdे रहना सरल हî «ाdा ह ¹
द िनक ¹तमि¤ंdन (वं िदन¤यार िनधाररण के îल( (क समय िनधारîरd िकया «ा(¹ िदन¤यार िनधाररण के îल(, 7ाdः
सîकर ¨õdे ही «¤ dक ° ¹या तयाग न िकया «ा(, वह समय सवìVम ह ¹ ¹मdîर से नीद खु लने के कु F देर ¤ाद ही लîग
° ¹या तयागdे ह, कु F समय dî (से ही ¹लस म प÷े रहdे ह ¹ यह समय द िनक कायर 4म ¤नाने के îल( सवìVम ह ¹ ° ¹या
पर «ाdे समय ही िकसी कî नीद नही ¹ «ाdी, इसम कु F देर लगdी ह ¹ इस ¹वसर कî ¹तम- ि¤ंdन म, ¹पने ¹पसे º०
7°न प¸Fने ¹र ¨नके ¨Vर 7ाP करने म लगाया «ा सकdा ह ¹ î«नके पास ¹·य सुिवधा के समय मद ह , पर ¨परî+
दî समय ¤य¹d से ¤य¹d सv«नî के îल( ¬ी सुिवधा«नक रह सकdे ह ¹ इन दîनî 7ि4या¹ं कî ¹पनाकर हम ¹सानी से
¹îतमक 7गिd के प° पर ¤ह d ¹गे ¤{ सकdे ह ¹

dî ि 9र हम कया करना ¤ा ि ह(?
इस पु¹dक कî प{कर ¹पके मन (वं ¹ंdःकरण म ¹वयं के îल(, दे°, धमर ¹र सं¹क िd के îल( कु F करने की
¨तकं õा ¹व°य «ा¹d ह , हîगी¹ ¹प सî¤ रहे हîगे , ¹îखर हम कया कर? °¤राइ( नही, शे8 «ीवन के îल( द िनक «ीवन
म ¤ह d «ि°लdा की ¹व°यकdा नही हîdी¹ सरल सह« «ीवन «ीdे ह ( ¬ी ¹प सुख- °ांिd ¹नु¬व कर सकdे ह ¹
¤यî+तव के स-प¸णर िवकास के îल( dीन ¨प4म ¹पनाने हîगे - ¨पासना साधना, ¹राधना¹ ¨पासना के îल( िनतय º'
िमन° ¹°वा ;० िमन° का समय 7ाdः ¹नान ¹िद से िनवV हîकर िनकाल¹ देव मंिदर म ,°वर के साय म ¤ õ ¹र
देव °î+यî के ¹°ीवारद (वं क पा की व9ार का ¬ाव रखdे ह ( ¹पने ¹ंदर देवतव की व î| कर ¹नु¬व कर ¹ ¹पकी श|ा
î«स देवdा, î«स मं¬, î«स ¨पासना म ¹पने इP के द वीय गुणî के ¹पने ¹ंदर व î| का ¬ाव ¹व°य रख¹ साधना 7िdपल
करनी हîdी ह ¹ Uान ¹र िववेक का दीपक िनरं dर ¹पने ¹ंdर म 7“वîलd रख¹ िनक Pdा से ¤¤ने (वं ¨तक Pdा की ¹र
¤{ने हेdु मनî¤ल रह¹ दु गु र णî से ¤¤ने (वं ¨तक Pdा की ¹र ¤{ने हेdु मनî¤ल ¤{ाdे रह¹ दु गु र णî से ¤¤ने (वं स‰गुणî कî
धारण करने म सम°र ¤न¹ यही साधना का ¹व¹प ह ¹ इसके îल( 7िdपल सdकर dा (वं «ागिd ¹व°यक ह ¹ दे°, समा«,
धमर ¹र सं¹क िd के ¨त°ान के हेdु िक( ग( सेवा कायर ¹राधना कहलाdे ह ¹
पdन का िनराकरण ही सवìतक P सेवा ह ¹ सेवा साधना से पdन का िनराकरण d¤ ही सं¬व ह , «¤ ¤यî+ के ि¤ंdन
म ¹, ¹क िdयî ¹र ¹वांFनीयdा¹ं का ¨·म¸लन हî «ा(¹ सेवा की ¨मंग ह ¹र सवìतक P ¹प की सेवा करने के îल(
लगन ह , dî इसी ¹dर का सेवा कायर ¹रं ¬ करना ¹र ¤लाना ¤ािह(¹
7°न यह ¨õdा ह िक इस ¹dर की सेवा साधना िकस 7कार की «ा(? मनु'य के ¹dर म ¹( ह ( पdन कî िकस
7कार िम°ाया «ा( ¹र ¨से ¨त°ान की ¹र ¹¹सर िकया «ा(¹ ¹पP ह िक यह कायर िव¤ारî ¹र ¬ावना¹ं के पîर'कार
¤ारा ही िकया «ा सकdा ह ¹ इसके îल( िव¤ार पîर'कार की 7ि4या ¤लानी ¤ािह( d°ा ¨तक P ¹र 7गिd°ील सारî
कî «न- «न dक पह ¤ाना ¤ािह(¹ यह स¤ ह िक समा« म «î कु F ¬ी ¹°ु¬ ¹र ¹वांFनीय िदखा, देdा ह , ¨सका कारण
लîगî के ¤यî+गd दî9 ही ह ¹ ¨न दî9î की ¨तपîV ¤यî+ की द¸ ि9d िव¤ारणा¹ं d°ा िवक d ¸îPकîणî से हîdी ह ¹ ¬îग
7धान ¹कां÷ा( रखने से मनु'यî की ¹dîP ¤{ «ाdी ह ¹र वे ¹îधक सुख साम¹ी की मा ग करdे ह ¹ ¹वा°र के कारण ही
Fीना Uप°ी ¹र ¤ालाकी ¤े,मानी ¤{dी ह ¹ शम से ¤¤ने ¹र मî« करने की इ¤Fा( «¤ dीœ हî «ाdी ह , dî ¨ि¤d-
¹नुि¤d का िव¤ार Fî÷कर लîग कु मागर पर ¤लने लगdे ह , î«सका पîरणाम ¨नके ¹वयं के îल( ही नही सारे समा« के
îल( ¬ी °ाdक हîdा ह ¹ इस ¹द¸ रदि°र dाप¸णर 7ि4या कî ¹पनाने से ही संसार म सवर ¬ दु ःख- द ·य का िव¹dार ह ¹ ह ¹
पdन का िनवारण करने के îल( मानवीय ¸îPकîण म पîरवdर न करना ¹व°यक ह ¹र ¨स पîरवdर न के îल( मनु'य
का «ीवन- द°र न ¬ी ¬ ¤ा ¤नाया «ाना ¤ािह(¹ पिdd ¬ावना¹ं वाले ¤यî+ के îल( लाFना (वं ¹तम- ¹लािन की ¤य°ा
कPदायक नही हîdी, वह िनलर v« ¤ना कु कमर करdा रहdा ह ¹ «¤ लîक मानस का ¹dर ¬ावनातमक ¸îP से ¬ ¤ा ¨õे गा
d¤ ही «ीवन म शे8dा ¹(गी ¹र ¨सी के ¹धार पर िव°व °ांिd की मंगलमय पîरî¹°िdया ¨तप¬ हîगी¹
¹« का मनु'य स+यdा के ÷े¬ म िवकास करने के सा°- सा° इdना िव¤ार°ील ¬ी ¤ना ह िक यिद ¨से d°य
समUा( «ा(, dî वह ¨·ह समUने ¹र मानने के îल( d यार हî «ाdा ह ¹ लîकसेिवयî कî इस 7यî«न के îल( °र-°र
«ाना ¤ािह( ¹र लîगî की ¹¹°ा( , मा·यdा( d°ा िव¤ारणा( पîर'क d करने के îल( 7यतन करना ¤ािह(¹
7तयेक ¤यî+ इdना ¤ुî|मान ¹र 7िd¬ा°ाली नही हîdा िक वह d°यî कî सही- सही समUा सके ¹र िकस
पîरî¹°िdयî म कया िकया «ाना ¤ािह(, इसका मागर द°र न कर सके ¹ इसके îल( सुलUी िव¤ारधारा का सािहतय लेकर
िनकलना ¤ािह( d°ा लîगî कî ¨से प{ने d°ा िव¤ार करने की 7े रणा देनी ¤ािह(, ¨सके सा° ¹ि°ि÷d ¤यî+यî के îल(
प{कर सुनाने या पराम°र ¤ारा 7े रणा देने की 7ि4या ¤ला, «ानी ¤ािह(¹ ¹रं ¬ म स¬ी लîगî की ¢ि¤ इस ¹र नही हî
सकdी¹ ¹dः «î लîग UानयU की ¹व°यकdा समUdे ह , ¨·ह ¤ािह( िक वे (सा िव¤ार- सािहतय लîगî dक ¹वयं लेकर
पह ¤ ¹ यह õीक ह िक कु ¹ ƒयासे के पास नही «ाdा, ƒयासे कî ही कु ¹ के पास «ाकर पानी पीना प÷dा ह ¹ गिमर यî म «¤
¤यापक «ल संक° ¨तप¬ हî «ाdा ह, dî ¤ादलî कî ही «गह- «गह «ाकर ¤रसना प÷dा ह ¹ लîक- सेिवयî कî ¬ी सारî
¹र स‰7ेरणा¹ं की °ीdल सुखद «लवîP के îल( «न- «न dक पह ¤ना ¤ािह(¹ ¨सके îल( ¨न ¤यî+यî म पहल
सारî के 7िd ¬¸ख «गाना ¹व°यक ह ¹ ¬¸ख ¨तप¬ करने का यह कायर स-पकर ¤ारा ही सं¬व हîdा ह ¹ ¨सके ¤ाद
सारî ¹र सत7ेरणा¹ं कî ¨पल·ध कराने की ¹व°यकdा ह ¹ यह ¹व°यकdा सािहतय ¹र िन-न सेवा कायì

¤ारा प¸री
की «ा सकdी ह ¹
शी रा म Uî ला पु¹dका लय
हमारी 7ा°िमक ¹व°यकdा िव¤ार 4ांिd की ह ¹ Uान यU इस यु ग का स¤से ¤÷ा पु7य ह ¹ Uान दान से ¤{कर
¹« की पîरî¹°िdयî म कî, दान नही¹ Uान साधना ही यु ग की स¤से ¤÷ी साधना ह ¹
¹« की î¹°िd म (क ही ¨पाय ह , î«ससे इस यु गांdरकारी 7¤ल 7ेरणा कî °र- °र dक, «न- «न dक पह ¤ाया
«ा सकdा ह ¹ वह ¨पाय ह- शीराम Uîला पु ¹dकालय¹ िव¤ार°ील ¤यî+, î«नके मन म दे°, धमर , समा«, सं¹क िd के 7िd
ददर हî, «î मानवीय ¹द°ì

कî 9लdा- 9¸ लdा देखने कî इ¤Fु क हî, î«·ह सु·दर ¹र सु¤यवî¹°d नवयु ग के 7िd ¹क9र ण
हî, वे ¹पना °î÷ा शम ख¤र करने लग , «ीवन सािहतय कî ¹पने ° ले म रख , ¹वयं प{े ¹र ¹पने हर ि°ि÷d सद¹य कî
प{ा( (वं ¹ि°ि÷dî कî सुना(¹
Uîला पु¹dकालय ¹मd ¤ा°ने का, 7का° ¤ा°ने का, कलयाण ¤ा°ने का ¹ि¬यान ह ¹ यह ¹सीम दान ¹र ¹नुपम
पु7य परमा°र ह ¹ ¹तमा की ¬¸ख ¹·dःकरण की ƒयास ¤ुUाकर हम ¨dना पु7य सं ¤य कर सकdे ह, î«dना करî÷ मन
¹¬दान ¹र लाख मी°र व+दान करने पर ¬ी सं¬व नही¹ कयî कर? क से कर?
(º) ¹¤ dक 7Uा ल°ु पु ¹dकमाला की दî सî dीस प™के ° ¤ुकस 7काि°d हî ¤ु की ह ¹ पîर«नî से ¹नुरîध ह िक
¹प शीराम Uîला पु¹dकालय के º× सद¹य ¤नाने के îल( ¬ाक ख¤र सिहd कु ल º;०) ¢पया मनी¹¬र र या ¤ क ¬ ा•°
¤ारा यु ग िनमारण यî«ना, म°ुरा- ; के नाम ¬े« कर सî प™क°े ¤ुकस ¹लग- ¹लग मगा ल¹
(×) इनम से ¹लग- ¹लग िव9यî की ¹õ- ¹õ पु¹dकî के º× स° ¤ना ल¹
(;) (क सद¹य से º×) ¢पया लेकर ¨·ह ¹õ पु¹dकî का (क स° दे द¹ इसी 7कार º× सद¹य ¤नाने ह ¹ 7यतन
यही कर िक स¬ी सद¹य पास- पास रहने वाले हî¹ (क ही कायार लय क कमर ¤ाîरयî कî ¹°वा (क ¤ा«ार के दु कानदारî कî
¹°वा (क ही मîहŽे के पîर«नî कî सद¹य ¤नाया «ा(¹
(×) सद¹य ¤नाdे समय ¨·ह º×) ¢पया लेकर ¹õ पु¹dक दे द ¹र ¨·ह माह म ¹व°य प{ लेने का ¹नुरîध
कर ¹ (क माह ¤ाद यह स° द¸ सरे स° से ¤दलकर देने का ¹°वासन ¬ी ¨·ह दे द¹ इस 7कार º×) ¢प( ख¤र करके वे
º××) ¢प( की पु¹dक (क व9र म प{ सक गे¹ इस यî«ना म 7ारं ¬ म ¹पकî कु F धन लगाना प÷ेगा, लेिकन वह धन
सद¹य ¤नाdे ही वापस िमल «ा(गा¹
(') सद¹यî कî 7िdमास स° क से ¤दलकर िद( «ा( इसके îल( यह िवîध ¹पना सकdे ह ¹ Uîला पु ¹dकालय
¤लाने वाले पîर«न ¹वयं 7िdमाह सद¹य सं•या (क का स° सद¹य सं•या दî कî, सद¹य सं•या दî का स° सद¹य
सं•या dीन कî, सद¹य सं•या dीन का स° सद¹य सं•या ¤ार कî इसी 7कार ¹गे ¤{dे ह ( सद¹य सं•या º× का स°
सद¹य सं•या (क कî देकर ¤दल द¹
()) कु F पîर«न प{ी ह , पु¹dकî कî खरीदने की माग कर गे¹ इसके îल( ¹पकी ¹िdîर+ पु ¹dक ¹पने पास
मगाकर रखनी ¤ािह(¹ कु F पु¹dक खî «ाdी ह , ¨नका म¸ लय लेकर ¨नके ¹°ान पर द¸ सरी पु¹dक लगानी प÷गी, इसके îल(
¬ी ¹िdîर+ पु¹dकî की ¹व°यकdा हîगी¹ ¨+ िवîध से कायर करने से (क ¬ा, या ¤हन ह«ारî सद¹य शीराम Uîला
पु¹dकालय के ¤ना सकdे ह ¹





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