इ तेमाल के िलए तैयार कये

गये सोने क ज़कात

﴾ ‫﴿ ز ة ا ﻫﺐ ا ﻌﺪ ﻼﺳﺘﻌﻤﺎل‬
[ fgUnh & Hindi & ‫] ﻫﻨﺪي‬

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2009 - 1430

‫﴿ ز ة ا ﻫﺐ ا ﻌﺪ ﻼﺳﺘﻌﻤﺎل ﴾‬
‫» ﺑﺎ ﻠﻐﺔ ا ﻨﺪﻳﺔ «‬

‫ﻤﺪ ﺻﺎﻟﺢ ا ﻨﺠﺪ‬

‫ﺗﺮ ﺔ‪ :‬ﻋﻄﺎء ا ﺮ ﻦ ﺿﻴﺎء اﷲ‬

‫‪2009 - 1430‬‬

‫‪1‬‬

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eSa vfr esgjcku vkSj n;kyq vYykg ds uke ls vkjEHk djrk gw¡A
‫ وﺳ ﺌﺎت‬،‫ور أﻧﻔﺴﻨﺎ‬

‫ وﻧﻌﻮذ ﺑﺎﷲ ﻣﻦ‬،‫ﻤﺪه و ﺴﺘﻌﻴﻨﻪ و ﺴﺘﻐﻔﺮه‬

‫إن ا ﻤﺪ ﷲ‬

:‫ و ﻌﺪ‬، ‫ وﻣﻦ ﻳﻀﻠﻞ ﻓﻼ ﻫﺎدي‬، ‫ ﻣﻦ ﻳﻬﺪه اﷲ ﻓﻼ ﻀﻞ‬،‫أﻋﻤﺎ ﺎ‬

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इ तेमाल के िलए तैयार कये गये सोने क ज़कात
:
म आप से िनवेदन करता हँू क मुझे और मेरे भाईय को सोने,

या सोने और चाँद के उन आभूषण के ज़कात के वषय म

जानकार द जो इ तेमाल के िलए तैयार कये गये ह, खर द
और ब

के िलए नह ं ह।

य क कुछ लोग कहते ह क :

सोने और चाँद के जो गहने पहनने के िलए ह उन म ज़कात
नह ं है , और कुछ दसरे
लोग का कहना है क : उन म ज़कात

अिनवाय है चाहे वे इ तेमाल के िलए ह , या यपार के िलए ह ,
और यह क इ तेमाल के िलए तैयार कए गए गहन म ज़कात
के बारे म व णत हद स, उन हद स से अिधक मज़बूत ह जो

2

उन म ज़कात न होने के बारे म व णत ह, आप से आशा है क
कृ पया मेरे

का उ र द गे।

उ र:
हर

कार क

शंसा और

तुित अ ललाह के िलए यो य है ।

व ान इस बात पर सहमत ह सोने और चाँद के आभूषण पर

ज़कात अिनवाय है य द वह गहना हराम इ तेमाल के िलए है ,
या वह यापार इ या द के िलए तैयार कया गया है । क तु

अगर वह वैध आभूषण है जो इ तेमाल के िलए, या उधार दे ने

के िलए तैयार कया गया है जैसे क चाँद क अंगूठ , म हलाओं
का आभूषण तथा जो हिथयार के द त के िलए वैध कया गया
है , तो इस म ज़कात के अिनवाय होने के बारे म व ान का
मतभेद है । कुछ व ान इस बात क ओर गये ह क उस म
ज़कात अिनवाय है

य क वह अ लाह तआला के इस कथन के

सामा य अथ के अंतगत आता है : "और जो लोग सोने चाँद

का कोष (खज़ाना) रखते ह और उसे अ लाह के माग म खच
नह ं करते उ ह क दायक सज़ा क सूचना पहँु चा द जए।"
(सूरतु ौबा :34)

क़ुतुबी अपनी तफसीर म कहते ह : इ ने उमर र ज़य लाहु

अ हमा
ने सह ह बुखार म इस अथ का वणन कया है , एक

द हाती ने उन से कहा : मुझे अ लाह तआला के फरमान :

"और जो लोग सोना और चाँद इक ठा कर के रखते ह।" के

बारे म बताय। इ ने उमर ने कहा : " जस ने उसे इक ठा कर
के रखा और उस का ज़कात नह ं दया तो उस के िलए बबाद

3

है , यह ज़कात का आदे श उतरने से पहले था, जब ज़कात का
आदे श आ गया तो अ लाह तआला ने उसे धन के शु

करण

का साधन बना दया।" (बुखार 2/111 (तालीक़न), 5/204

(तालीक़न), इ ने माजा 1/569 - 570 (हद स सं या : 1787),
बैहक़ 4/82)
तथा इसिलए भी क ऐसी हद स आई ह जो इस बात क अपे ा
करती ह, उ ह ं म से वह हद स है जसे अबू दाऊद, नसाई और
ितिमज़ी ने अ
दादा के

बन शुऐब से और उ ह ने अपने बाप और

ारा रवायत कया है क : एक म हला नबी

स ल लाहु अलै ह व स लम के पास आई जस के साथ उस

क एक लड़क भी थी, और उसक लड़क के हाथ म दो सोने के
मोटे कंगन थे। तो आप स ल लाहु अलै ह व स लम ने उस से
कहा : " या तुम इस क ज़कात दे ती हो ?" उस ने कहा :
नह ं। आप ने फरमाया : " या तु ह यह बात पसंद है क

अ लाह तआला क़यामत के दन तुझे इन के बदले आग के दो
कंगन पहनाये ?" इस पर उस म हला ने उन दोन को िनकाल
कर नबी स ल लाहु अलै ह व स लम क ओर फक दया और
कहा क : वे दोन अ लाह और उस के रसूल के िलए ह।

(अहमद 2/178, 204, 208, अबू दाऊद 2/212 (हद स सं या
: 1563), ितिमज़ी 3/29-30 (हद स सं या :637), नसाई

5/38 (हद स सं या : 2479, 2480), दारक़ुतनी 2/112, इ ने

अबी शैबा 3/153, अबू उबैद ( कताबुल अमवाल पृ0 537 हद स
सं या : 1260, सं करण हरास), बैहक़ 4/140)

4

तथा अबू दाऊद ने अपनी सुनन म, हा कम ने अपनी मुसतदरक
म और दारक़ुतनी और बैहक़ ने अपनी अपनी सुनन म आइशा
र ज़य लाहु अ हा से रवायत कया है क उ ह ने कहा :

अ लाह के पैगंबर स ल लाहु अलै ह व स लम मेरे पास आये

तो आप ने मेरे हाथ म चाँद के छ ले दे ख कर फरमाया : "ऐ
आइशा, यह

या है ?" म ने कहा : ऐ अ लाह के पैगंबर, म ने

इ ह इस िलए तैयार कया है ता क आप के िलए बनवा-िसंघार
क ँ । आप ने फरमाया : " या तुम इन क ज़कात दे ती हो ?"
म ने कहा : नह ं या जो अ लाह ने चाहा, आप ने फरमाया :

"यह तु हारे नरक के िलए काफ है ।" (अबू दाऊद 2/312 हद स
सं या : 1565, और श द अबू दाऊद के ह ह, दारक़ुतनी
2/105-106, हा कम 1/389-390, बैहक़ 4/139)
तथा वह हद स भी आधार है जसे उ ह ने उ मे सलमह से
रवायत कया है क उ ह ने कहा : म सोने के आभूषण

पहनती थी तो म ने कहा : ऐ अ लाह के पैगंबर,

या यह

खज़ाना है ? तो आप ने फरमाया : "जो ज़कात अदा कये जाने
क रािश को पहँु च गया और उस का ज़कात िनकाल दया गया

तो वह खज़ाना नह ं है ।" (अबू दाऊद 2/212-213 हद स सं या
: 1564, दारक़ुतनी 2/105, हा कम 1/390, बैहक़ 4/83,
140)
तथा कुछ लोग इस बात क ओर गये ह क उस म ज़कात
अिनवाय नह ं है ;

य क वह जाइज़ इ तेमाल के

ारा कपड़े

और अ य व तुओं क तरह बन गया, वह मू य के वग से

नह ं रह गया। तथा उ ह ने आयत के सामा य अथ का उ र

5

यह दया है क वह सहाबा कराम र ज़य लाहु अ हम
ु के अमल

से विश

हो जाता है ,

य क सह ह (शु ) इसनाद के

आइशा र ज़य लाहु अ हा से

ारा

मा णत है क वह अपने भाई क

अनाथ बे टय क दे खभाल करती थीं जन के पास आभूषण थे,
तो वे उन क ज़क़ात नह ं िनकालती थीं।
तथा दारक़ुतनी ने अपनी इसनाद के साथ अ मा ब त अबू ब
र ज़य लाहु अ हा से रवायत कया है क वह अपनी बे टय को

सोने के आभूषण पहनाती थीं और उन क ज़कात नह ं

िनकालती थीं, जन का मू य लगभग पचास हज़ार था। (सुनन
दारक़ुतनी 2/109)
अबू उबैद अपनी कताब "अल-अमवाल" म कहते ह : हम से

हद स बयान कया इसमाईल बन इ ाह म ने, उ ह ने रवायत
कया ना फ

से और उ ह ने रवायत कया इ ने उमर

र ज़य लाहु अ हमा
से क वह अपनी बे टय म से एक औरत

क शाद दस हज़ार पर करते थे और वह उन म से चार हज़ार
का उस के िलए आभूषण तैयार करते थे। उ ह ने कहा क तो
वे उस क ज़कात नह ं दे ते थे। (दारकु़तनी ने इसी के समान

रवायत कया है 2/109, अबू उबैद ने अल-अमवाल म रवायत
कया है , पृ0 540 हद स सं या : 1276, (हरास सं करण),

बैहक़ 4/138).
तथा उ ह ने कहा : इसमाईल बन इ ाह म ने हम से हद स
बयान कया अ यूब से, और उ ह ने अ

बन द नार से क

उ ह ने कहा क : जा बर बन अ दु लाह से पूछा गया क :
या आभूषण म ज़कात है ? उ ह ने उ र दया : नह ं, कहा
6

गया: य द वह दस हज़ार को पहँु च जाये ? कहा : यह बहत
ु है ।

(इसे शाफेई ने अपनी मुसनद (िसंद के

म के साथ) 1/228

हद स सं या : 629 म और अल-उ म 2/41 म रवायत कया
है , अबू उबैद कताबुल अमवाल पृ0 540 हद स सं या : 1275
(हरास सं करण), बैहक़ 4/138).
इन दोन कथन म सब से उ च कथन उन लोग का है ज ह
ने आभूषण म ज़कात के अिनवाय होने क बात कह है , जब क
वह िनसाब (ज़कात के अिनवाय होने क

यूनतम रािश) को

पहँु च जाये, या उस के मािलक के पास सोने और चाँद , या

यापार के सामान म से इतनी रािश हो जस से िनसाब पूरा हो

जाये ;

यो क सोने और चाँद म ज़कात के अिनवाय होने क

हद स सामा य है , और हमारे
करने वाला कोई

ान के अनुसार उस को विश

माण नह ं है , तथा अ द ु लाह बन अ

बन

आस, आइशा और उ मे सलमह र ज़य लाहु अ हम
ु क पीछे
उ ल खत हद स के आधार पर, और उन हद स क सनद
जैियद ह, उन म कोई

भावकार आप

नह ं है , अत: उन पर

अमल करना अिनवाय है । जहाँ तक ितिमज़ी और इ ने ह म

और मौिसली के उन को ज़ईफ क़रार दे ने का संबध
ं है तो हमारे
ान के अनुसार उसका कोई अधार नह ं है , जब क

ात होना

चा हए क ितिमज़ी र हमहु लाह ने जो कुछ उ लेख कया है
उस म वह माज़ूर ह,

य क उ ह ने अ द ु लाह बन अ

बन

आस क हद स को ज़ईफ तर क़ से रवायत कया है , जब क
अबू दाऊद, नसाई और इ ने माजा ने उसे दसरे
शु

तर क़ से

रवायत कया है , शायद क ितिमज़ी र हमहु लाह को इस का

पता नह ं चला।

7

और अ लाह ह के हाथ म तौफ क़ (श

का

ोत) है , तथा

अ लाह तआला हमारे ई दत
ू मुह मद स ल लाहु अलै ह व

स लम और आप क संतान तथा आप के सािथय पर दया और
शांित अवत रत करे ।

अल

नह अ ाईमह िललबुहू स अल-इ लािम या वल-इ ता (वै ािनक

अनुसध
ं ान और फ वा जार करने क

थायी सिमित) 9/264

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