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गुरुत्व कामाारम द्राया प्रस्तुत भाससक ई-ऩत्रिका

NON PROFIT PUBLICATION

ससतम्फय- 2012

FREE
E CIRCULAR

गुरुत्व ज्मोसतष ऩत्रिका
ससतम्फय 2012
सॊऩादक

सचॊतन जोशी
सॊऩका
गुरुत्व ज्मोसतष त्रवबाग

गुरुत्व कामाारम

92/3. BANK COLONY,
BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018,
(ORISSA) INDIA

ई- जन्भ ऩत्रिका
अत्माधुसनक ज्मोसतष ऩद्धसत द्राया
उत्कृ द्श बत्रवष्मवाणी के साथ
१००+ ऩेज भं प्रस्तुत

पोन

91+9338213418,
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gurutva_karyalay@yahoo.in,

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ऩत्रिका प्रस्तुसत

सचॊतन जोशी,

E HOROSCOPE
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100+ Pages

स्वस्स्तक.ऎन.जोशी
पोटो ग्राफपक्स

सचॊतन जोशी, स्वस्स्तक आटा
हभाये भुख्म सहमोगी

स्वस्स्तक.ऎन.जोशी (स्वस्स्तक
सोफ्टे क इस्न्डमा सर)

फहॊ दी/ English भं भूल्म भाि 750/GURUTVA KARYALAY
BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA
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बायतीम ऩयॊ ऩया भूर रुऩ से त्रवसबन्न धासभाक आस्थ औय त्रवद्वास ऩय आधारयत है । प्रद्लावरी
से बत्रवष्म ऻात कयने की ऩौयास्णक प्रथा ऩुयातन कार से ही चरी आयही हं । मफह कायण हं
की अनेको त्रवद्रानो अऩनी खोज एवॊ अनुबव के आधाय ऩय त्रवसबन्न प्रद्लावरीमं …4
बायतीम सॊस्कृ सत भं प्रत्मेक शुबकामा कयने के ऩूवा बगवान श्री गणेश जी की ऩूजा की जाती हं इसी

सरमे मे फकसी बी कामा का शुबायॊ ब कयने से ऩूवा कामा का "श्री गणेश कयना" कहा जाता हं । एवॊ
प्रत्मक शुब कामा मा अनुद्षान कयने के ऩूवा ‘‘श्री गणेशाम नभ्” का …6

बत्रवष्म ऻात प्रद्लावरी त्रवशेष भं ऩढे ़

सवा कामा ससत्रद्ध
कवच …37

गणेश रक्ष्भी मॊि…91

नवयत्न जफित श्रीमॊि..72

ऩुरुषाकाय शसन
मॊि…71

त्रवशेष भं 

प्रद्लावरी त्रवशेष 

श्री गणेश सवाप्रथभ ऩूजनीम कैसे फने?

6

श्री याभ शराका प्रद्लावरी

40

गणेश ऩूजन हे तु शुब भुहूता

10

गौतभ केवरी भहात्रवद्या (प्रद्लावरी)

42

शुबकामं भं सवाप्रथभ गणेशजी ..

11

चंतीसा मन्ि द्राया बत्रवष्म ऻान प्रद्लावरी

48

सयर त्रवसध से श्री गणेश ऩूजन

12

बत्रवष्म ऻान के सरए यभर प्रद्लावरी

गणेश ऩूजन भं कोन से पूर चढाए।

18

श्री हनुभान प्रद्लावरी

62
64

शाऩके कायण गणऩसत ऩूजन भं तुरसी..

19

श्री कृ ष्ण शराका प्रद्लावरी

66

गणेश के चभत्कायी भॊि

20

ऩमूष
ा ण का भहत्व

68

गणेश ऩूजन से ग्रहऩीडा दयू होती हं ।

23

गणेश चतुथॉ ऩय चॊद्र दशान सनषेध क्मं

24

भॊिससद्ध स्पफटक श्री मॊि

21

गणेश चतुथॉ ज्मोसतष की नजय भं

26

बाग्म रक्ष्भी फदब्फी

22

गणेशजी ने धायण फकमा ज्मोसतषी रुऩ

27

द्रादश भहा मॊि

27

वषा की त्रवसबन्न चतुथॉ व्रत का भहत्व

29

सवा कामा ससत्रद्ध कवच

37

भनोवाॊसछत परो फक प्रासद्ऱ हे तु ससत्रद्ध प्रद …

35

सवाससत्रद्धदामक भुफद्रका

46

गणेश ऩूजन से वास्तु दोष सनवायण

36

श्री हनुभान मॊि

73

गणेश वाहन भूषक केसे फना

38

भॊिससद्ध रक्ष्भी मॊिसूसच

74

भॊि ससद्ध दै वी मॊि सूसच

74

भॊि ससद्ध रूद्राऺ

76

भॊि ससद्ध दर
ा साभग्री
ु ब

76

ससत्रद्ध त्रवनामक व्रत .. & सॊकद्शहय चतुथॉ व्रत ..
गणेश जी की कथा

39
61

 स्थामी औय अन्म रेख 

यासश यत्न…75

सॊऩादकीम

4

श्रीकृ ष्ण फीसा मॊिकवच /

77

भाससक यासश पर

82

याभ यऺा मॊि

78

ससतम्फय 2102 भाससक ऩॊचाॊग

86

जैन धभाके त्रवसशद्श मॊि

79

ससतम्फय-2012 भाससक व्रत-ऩवा-त्मौहाय

88

घॊटाकणा भहावीय सवा ससत्रद्ध भहामॊि

80

अभोद्य भहाभृत्मुॊजम कवच

81

याशी यत्न एवॊ उऩयत्न

81

ससतम्फय 2102 -त्रवशेष मोग

भॊि ससद्ध रूद्राऺ …79

अभोद्य भहाभृत्मुज
ॊ म
कवच …81

हभाये उत्ऩाद 

दै सनक शुब एवॊ अशुब सभम ऻान तासरका

94
94

फदन-यात के चौघफडमे

95

शसन ऩीिा सनवायक

87

फदन-यात फक होया - सूमोदम से सूमाास्त तक

96

सवा योगनाशक मॊि/

98

ग्रह चरन ससतम्फय -2012

97

भॊि ससद्ध कवच

100

सूचना

105 YANTRA LIST

101

हभाया उद्दे श्म

107 GEM STONE

103

त्रप्रम आस्त्भम
फॊध/ु फफहन
जम गुरुदे व
बायतीम ऩयॊ ऩया भूर रुऩ से त्रवसबन्न धासभाक आस्थ औय त्रवद्वास ऩय आधारयत है । प्रद्लावरी से बत्रवष्म ऻात
कयने की ऩौयास्णक प्रथा ऩुयातन कार से ही चरी आयही हं । मफह कायण हं की अनेको त्रवद्रानो अऩनी खोज एवॊ अनुबव
के आधाय ऩय त्रवसबन्न प्रद्लावरीमं की यचना की हं । स्जसके भाध्मभ से अऩने इद्श का ध्मान कयके, अऩने असबद्श
प्रद्लनं का सॊबत्रवत प्रद्लावरी से उत्तय प्राद्ऱ फकमा जा सकता हं ।

फतामा जाता हं की सैकडो़ वषा ऩूवा हभाये त्रवद्रानो ने

अऩने ऻान फर एवॊ खोज से सनधाारयत शब्धं एवॊ अॊको के भाध्म भं प्रद्लावरी की सॊयचना की, इस प्रद्लावरी के भाध्मभ
से व्मत्रि अऩने असतत की शुब-अशुब घटनाओॊ के यहस्म को सयरता से ऻात कय सकता हं ।

प्रद्लावरी से बत्रवष्म ऻात कयना सफसे सयर त्रवसध हं , क्मोकी, इस भं नाहीॊ कोई रॊफी चौिी गणनाएॊ हं नाही
कोई जफटर प्रणारी हं । फस अऩने प्रद्ल को स्भयण कयते हुवे सनधाारयत प्रद्लावरी ऩय शराका मा अऩनी अनासभका
अॊगुसर धुभाकय आसानी से ऻात फकमा जा सकता हं ।

कुछ जानकायं का भानना हं की प्रद्लावरी के भाध्मभ से एकदभ स्स्टक बत्रवष्मवाणी मा अऩने प्रद्लं का हर
प्राद्ऱ हो जामे मह सॊबव नहीॊ हं , क्मोफक प्रद्लावरी भं केवर उसे प्रस्तुत कयने वारे व्मत्रि के सनधाारयत उत्तय फह होते हं ,
जो की भनुष्म की वास्तत्रवक सभस्माओॊ का सॊऩूणा हर फता ऩामे मह सॊबव नहीॊ हं , रेफकन कुछ हद तक इस प्रद्लावरी
का उऩमोग त्रफना कोई फिा जोस्खभ उठामे अऩने भागादशान हे तु अवश्म फकमा जा सकता हं ।

ऩाठकं के भागादशान के सरमे प्रद्लावरी त्रवशेषाॊक फक प्रस्तुसत फक गई हं ।
सबी ऩाठको के भागादशान मा ऻानवधान के सरए प्रद्लावरी से सॊफॊसधत त्रवसबन्न उऩमोगी जानकायी इस अॊक भं त्रवसबन्न
ग्रॊथो एवॊ सनजी अनुबवो के आधाय ऩय सॊकसरत की गई हं । जानकाय एवॊ त्रवद्रान ऩाठको से अनुयोध हं , मफद प्रद्लावरी
से सॊफॊसधत त्रवषम भं सभम, स्थान, वस्तु, स्स्थसत इत्माफद के सॊकरन, प्रभाण ऩढ़ने, सॊऩादन भं, फडजाईन भं, टाईऩीॊग
भं, त्रप्रॊफटॊ ग भं, प्रकाशन भं कोई िुफट यह गई हो, तो उसे स्वमॊ सुधाय रं मा फकसी मोग्म जानकाय मा त्रवद्रान से सराह
त्रवभशा कय रे। क्मोफक प्रद्लावरी की त्रवसबन्न प्रणारी भं अॊतय होने के कायण एवॊ त्रवद्रानो के सनजी अनुबव व त्रवसबन्न
ग्रॊथो भं वस्णात प्रद्लावरी से सॊफॊसधत जानकायीमं भं एवॊ त्रवद्रानो के स्वमॊ के अनुबवो भं सबन्नता होने के कायण
प्रद्लावरी से सॊफॊसधत परकथन सबन्नता सॊबव हं ।

सबी जैन फॊधु/फहनो को ऩमुष
ा ण भहाऩवा की ढे यसायी शुबकाभनाएॊ औय
गुरुत्व कामाारम ऩरयवाय की औय से…

॥सभच्छाभी दक्
ु कड्भ ्॥
सचॊतन जोशी

5

*****

ससतम्फय 2012

बत्रवष्म ऻात प्रद्लावरी से सॊफॊसधत त्रवशेष सूचना*****

 ऩत्रिका भं प्रकासशत प्रद्लावरी से सम्फस्न्धत सबी जानकायीमाॊ गुरुत्व कामाारम के असधकायं के साथ ही
आयस्ऺत हं ।
 ऩौयास्णक ग्रॊथो ऩय अत्रवद्वास यखने वारे व्मत्रि प्रद्लावरी के त्रवषम को भाि ऩठन साभग्री सभझ सकते हं ।
 प्रद्लावरी का त्रवषम आस्था एवॊ त्रवद्वास ऩय आधारयत होने के कायण इस अॊकभं वस्णात सबी जानकायीमा
बायसतम ग्रॊथो से प्रेरयत होकय सरखी गई हं ।
 प्रद्लावरी से सॊफॊसधत त्रवषमो फक सत्मता अथवा प्राभास्णकता ऩय फकसी बी प्रकाय फक स्जन्भेदायी कामाारम मा
सॊऩादक फक नहीॊ हं ।
 प्रद्लावरी भं वस्णात सॊफॊसधत बत्रवष्मवाणी फक प्राभास्णकता एवॊ प्रबाव फक स्जन्भेदायी कामाारम मा सॊऩादक
फक नहीॊ हं औय ना हीॊ प्राभास्णकता एवॊ प्रबाव फक स्जन्भेदायी के फाये भं जानकायी दे ने हे तु कामाारम मा सॊऩादक
फकसी बी प्रकाय से फाध्म हं ।
 प्रद्लावरी से सॊफॊसधत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रवद्वास होना आवश्मक हं । फकसी बी व्मत्रि त्रवशेष को फकसी
बी प्रकाय से इन त्रवषमो भं त्रवद्वास कयने ना कयने का अॊसतभ सनणाम उनका स्वमॊ का होगा।
 प्रद्लावरी से सॊफॊसधत ऩाठक द्राया फकसी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्वीकामा नहीॊ होगी।
 प्रद्लावरी से सॊफॊसधत रेख प्राभास्णक ग्रॊथो, हभाये वषो के अनुबव एव अनुशॊधान के आधाय ऩय फदमे गमे हं ।
 हभ फकसी बी व्मत्रि त्रवशेष द्राया प्रद्लावरी ऩय त्रवद्वास फकए जाने ऩय उसके राब मा नुक्शान की स्जन्भेदायी
नफहॊ रेते हं । मह स्जन्भेदायी प्रद्लावरी ऩय त्रवद्वास कयने वारे मा उसका प्रमोग कयने वारे व्मत्रि फक स्वमॊ फक
होगी।
 क्मोफक इन त्रवषमो भं नैसतक भानदॊ डं, साभास्जक, कानूनी सनमभं के स्खराप कोई व्मत्रि मफद नीजी स्वाथा
ऩूसता हे तु प्रद्लावरी का प्रमोग कताा हं अथवा प्रद्लावरी के उऩमोग कयने भे िुफट यखता हं मा उससे िुफट होती
हं तो इस कायण से प्रसतकूर अथवा त्रवऩरयत ऩरयणाभ सभरने बी सॊबव हं ।
 प्रद्लावरी से सॊफॊसधत जानकायी को भानकय उससे प्राद्ऱ होने वारे राब, हानी फक स्जन्भेदायी कामाारम मा
सॊऩादक फक नहीॊ हं ।
 हभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे प्रद्लावरी ऩय आधारयत रेखं भं वस्णात जानकायी को हभने कई फाय स्वमॊ ऩय एवॊ
अन्म हभाये फॊधग
ु ण ने बी अऩने नीजी जीवन भं अनुबव फकमा हं । स्जस्से हभ कई फाय प्रद्लावरी के आधाय
ऩय स्स्टक उत्तय की प्रासद्ऱ हुई हं । असधक जानकायी हे तु आऩ कामाारम भं सॊऩका कय सकते हं ।

(सबी त्रववादो केसरमे केवर बुवनेद्वय न्मामारम ही भान्म होगा।

ससतम्फय 2012

6

श्री गणेश सबी दे वताओॊ भं सवाप्रथभ ऩूजनीम कैसे फने?

 सचॊतन जोशी
बायतीम सॊस्कृ सत भं प्रत्मेक शुबकामा कयने के ऩूवा

कथा इस प्रकाय हं : तीनो रोक भं सवाप्रथभ कौन ऩूजनीम

बगवान श्री गणेश जी की ऩूजा की जाती हं इसी सरमे मे

हो?, इस फात को रेकय सभस्त दे वताओॊ भं त्रववाद खडा हो

फकसी बी कामा का शुबायॊ ब कयने से ऩूवा कामा का "श्री

गमा। जफ इस त्रववादने फडा रुऩ धायण कय सरमे तफ

गणेश कयना" कहा जाता हं । एवॊ प्रत्मक शुब कामा मा

सबी दे वता अऩने-अऩने फर फुत्रद्धअ के फर ऩय दावे

अनुद्षान कयने के ऩूवा ‘‘श्री गणेशाम नभ्” का उच्चायण

प्रस्तुत कयने रगे। कोई ऩयीणाभ नहीॊ आता दे ख सफ

फकमा जाता हं । गणेश को सभस्त ससत्रद्धमं को दे ने वारा

दे वताओॊ ने सनणाम सरमा फक चरकय बगवान श्री त्रवष्णु

भाना गमा है । सायी ससत्रद्धमाॉ गणेश भं वास कयती हं ।

को सनणाामक फना कय उनसे पैसरा कयवामा जाम।

इसके ऩीछे भुख्म कायण हं की बगवान श्री गणेश
सभस्त त्रवघ्ननं को टारने वारे हं , दमा एवॊ
कृ ऩा के असत सुॊदय भहासागय हं ,

सबी दे व गण त्रवष्णु रोक भे उऩस्स्थत हो गमे,
बगवान त्रवष्णु ने इस भुद्दे को गॊबीय होते
दे ख श्री त्रवष्णु ने सबी दे वताओॊ

एवॊ तीनो रोक के कल्माण
हे तु

बगवान

को

गणऩसत

अऩने

सशवजी ने कहा इसका

सभस्त त्रवघ्नन फाधाओॊ

सही

को दयू कयने वारे गणेश

ब्रह्माजी

त्रवनामक हं । गणेशजी
के

त्रवशेष रोक कथा प्रचसरत हं । इन त्रवशेष एवॊ रोकत्रप्रम
कथाओॊ का वणान महा कय यहं हं ।
इस के सॊदबा भं एक कथा है फक भहत्रषा वेद व्मास ने
भहाबायत को से फोरकय सरखवामा था, स्जसे स्वमॊ गणेशजी
ने सरखा था। अन्म कोई बी इस ग्रॊथ को तीव्रता से सरखने भं
सभथा नहीॊ था।
सवाप्रथभ कौन ऩूजनीम हो?

सृत्रद्शकताा

फह

फताएॊगे।

अन्म दे वताओॊ के साथ

सागय एवॊ त्रवधाता हं ।
प्रथभ ऩूजे जाने के त्रवषम भं कुछ

सनदान

सशवजी श्री त्रवष्णु एवॊ

अथाह

बगवान गणेश को सवा

रेकय

सशवरोक भं ऩहुच गमे।

सफ प्रकाय से मोग्म हं ।

त्रवद्या-फुत्रद्ध

साथ

सभरकय

ब्रह्मरोक

ऩहुचं

औय ब्रह्माजी को सायी फाते
त्रवस्ताय से फताकय उनसे पैसरा
कयने का अनुयोध फकमा। ब्रह्माजी ने कहा प्रथभ

ऩूजनीम वहीॊ होगा जो जो ऩूये ब्रह्माण्ड के तीन चक्कय
रगाकय सवाप्रथभ रौटे गा।
सभस्त दे वता ब्रह्माण्ड का चक्कय रगाने के सरए अऩने
अऩने वाहनं ऩय सवाय होकय सनकर ऩिे । रेफकन, गणेशजी
का वाहन भूषक था। बरा भूषक ऩय सवाय हो गणेश कैसे
ब्रह्माण्ड के तीन चक्कय रगाकय सवाप्रथभ रौटकय सपर
होते। रेफकन गणऩसत ऩयभ त्रवद्या-फुत्रद्धभान एवॊ चतुय थे।

ससतम्फय 2012

7

गणऩसत ने अऩने वाहन भूषक ऩय सवाय हो कय अऩने

ऩूजा कयं गे, फकन्तु तुम्हायी ऩूजा नहीॊ कयं गे, उन्हं तुभ

भाता-त्रऩत फक तीन प्रदस्ऺणा ऩूयी की औय जा ऩहुॉचे सनणाामक

त्रवघ्ननं द्राया फाधा ऩहुॉचाओगे।

ब्रह्माजी के ऩास। ब्रह्माजी ने जफ ऩूछा फक वे क्मं नहीॊ गए

जन्भ की कथा बी फिी योचक है ।

ब्रह्माण्ड के चक्कय ऩूये कयने, तो गजाननजी ने जवाफ फदमा फक

गणेशजी की ऩौयास्णक कथा

भाता-त्रऩत भं तीनं रोक, सभस्त ब्रह्माण्ड, सभस्त तीथा,

बगवान

सभस्त दे व औय सभस्त ऩुण्म त्रवद्यभान

होना चाफहमे, जो ऩयभ शुब, कामाकुशर

की ऩरयक्रभा ऩूयी कय री, तो इसका

तथा उनकी आऻा का सतत ऩारन

तात्ऩमा है फक भंने ऩूये ब्रह्माण्ड की

कयने भं कबी त्रवचसरत न हो। इस

प्रदस्ऺणा ऩूयी कय री। उनकी मह

प्रकाय सोचकय भाता ऩावाती नं अऩने

तकासॊगत मुत्रि स्वीकाय कय री गई औय

सरॊगऩुयाण के अनुसाय (105।
15-27) – एक फाय असुयं से िस्त
दे वतागणं द्राया की गई प्राथाना से
बगवान

सशव

ने

सुय-सभुदाम

को

असबद्श वय दे कय आद्वस्त फकमा। कुछ

ही सभम के ऩद्ळात तीनो रोक के
दे वासधदे व भहादे व बगवान सशव का
भाता ऩावाती के सम्भुख ऩयब्रह्म स्वरूऩ
गणेश जी का प्राकट्म हुआ।

सवात्रवघ्ननेश भोदक त्रप्रम गणऩसतजी का
जातकभााफद सॊस्काय के ऩद्ळात ् बगवान
सशव ने अऩने ऩुि को उसका कताव्म

सभझाते हुए आशीवााद फदमा फक जो
तुम्हायी ऩूजा फकमे त्रफना ऩूजा ऩाठ,
अनुद्षान

इत्माफद

शुब

कभं

का

अनुद्षान

कये गा, उसका

भॊगर

बी

अभॊगर भं ऩरयणत हो जामेगा। जो
रोग पर की काभना से ब्रह्मा, त्रवष्णु,
इन्द्र अथवा अन्म दे वताओॊ की बी

अन

फकमा फक उनका स्वमॊ का एक सेवक

अत् जफ भंने अऩने भाता-त्रऩत

'सवाप्रथभ ऩूज्म' भाने गए।

फक

उऩस्स्थसत भं भाता ऩावाती ने त्रवचाय

होते हं ।

इस तयह वे सबी रोक भं सवाभान्म

सशव

भॊगरभम ऩावनतभ शयीय के भैर से

भॊि ससद्ध ऩन्ना गणेश
बगवान श्री गणेश फुत्रद्ध औय सशऺा के

अऩनी भामा शत्रि से फार गणेश को
उत्ऩन्न फकमा।
एक सभम जफ भाता ऩावाती

कायक ग्रह फुध के असधऩसत दे वता

भानसयोवय भं स्नान कय यही थी तफ

प्रबाव को फठाता हं एवॊ नकायात्भक

सके इस हे तु अऩनी भामा से गणेश को

गणेश के प्रबाव से व्माऩाय औय धन

के सरए सनमुि कय फदमा।

हं । ऩन्ना गणेश फुध के सकायात्भक

उन्हंने स्नान स्थर ऩय कोई आ न

प्रबाव को कभ

कयता हं ।. ऩन्न

जन्भ दे कय 'फार गणेश' को ऩहया दे ने

भं वृत्रद्ध भं वृत्रद्ध होती हं । फच्चो फक

इसी दौयान बगवान सशव उधय

ऩढाई हे तु बी त्रवशेष पर प्रद हं

ऩन्ना गणेश इस के प्रबाव से फच्चे
फक

फुत्रद्ध

कूशाग्र

होकय

उसके

आत्भत्रवद्वास भं बी त्रवशेष वृत्रद्ध होती

हं । भानससक अशाॊसत को कभ कयने भं

भदद कयता हं , व्मत्रि द्राया अवशोत्रषत

आ जाते हं । गणेशजी सशवजी को योक
कय कहते हं फक आऩ उधय नहीॊ जा
सकते हं । मह सुनकय बगवान सशव
क्रोसधत हो जाते हं औय गणेश जी को
यास्ते से हटने का कहते हं फकॊतु गणेश

हयी त्रवफकयण शाॊती प्रदान कयती हं ,

जी अिे यहते हं तफ दोनं भं मुद्ध हो

कयती

पेपिे , जीब,

सशवजी फार गणेश का ससय धि से

भं सहामक होते हं । कीभती ऩत्थय

का जफ ऩावाती को ऩता चरता है तो वे

व्मत्रि के शायीय के तॊि को सनमॊत्रित

जाता है । मुद्ध के दौयान क्रोसधत होकय

भस्स्तष्क औय तॊत्रिका तॊि इत्माफद योग

अरग कय दे ते हं । सशव के इस कृ त्म

भयगज के फने होते हं ।

त्रवराऩ औय क्रोध से प्ररम का सृजन

हं ।

स्जगय,

Rs.550 से Rs.8200 तक

कयते हुए कहती है फक तुभने भेये ऩुि
को भाय डारा।

ससतम्फय 2012

8

ऩावातीजी के द्ु ख को दे खकय सशवजी ने उऩस्स्थत

नहीॊ फकमा। ऩयन्तु भाता ऩावाती के फाय-फाय कहने ऩय

गणको आदे श दे ते हुवे कहा सफसे ऩहरा जीव सभरे, उसका

शसनदे व नं जेसे फह अऩनी द्रत्रद्श सशशु फारके उऩय ऩडी,

ससय काटकय इस फारक के धि ऩय रगा दो, तो मह फारक

उसी ऺण

जीत्रवत हो उठे गा। सेवको को सफसे ऩहरे हाथी का एक फच्चा

गमा। भाता ऩावाती के त्रवरऩ कयने ऩय बगवान ् त्रवष्णु

सभरा। उन्हंने उसका ससय राकय फारक के धि ऩय रगा फदमा,
फारक जीत्रवत हो उठा।

फारक गणेश का गदा न धि से अरग हो

ऩुष्ऩबद्रा नदी के अयण्म से एक गजसशशु का भस्तक
काटकय रामे औय गणेशजी के भस्तक ऩय रगा फदमा।

उस अवसय ऩय तीनो दे वताओॊ ने उन्हं सबी रोक

गजभुख रगे होने के कायण कोई गणेश फक उऩेऺा न

भं अग्रऩूज्मता का वय प्रदान फकमा औय उन्हं सवा अध्मऺ

कये इस सरमे बगवान त्रवष्णु अन्म दे वताओॊ के साथ भं

ब्रह्मवैवताऩुयाण के अनुसाय (गणऩसतखण्ड) –

ऩूजे जामंगे एवॊ उनके ऩूजन के त्रफना कोई बी दे वता ऩूजा

ऩद ऩय त्रवयाजभान फकमा। स्कॊद ऩुयाण

सशव-ऩावाती के त्रववाह होने के फाद उनकी कोई
सॊतान नहीॊ हुई, तो सशवजी ने ऩावातीजी से बगवान
त्रवष्णु के शुबपरप्रद ‘ऩुण्मक’ व्रत कयने को कहा ऩावाती

के ‘ऩुण्मक’ व्रत से बगवान त्रवष्णु ने प्रसन्न हो कय

तम फकम फक गणेश सबी भाॊगरीक कामो भं अग्रणीम
ग्रहण नहीॊ कयं गे।
इस ऩय बगवान ् त्रवष्णु ने श्रेद्षतभ उऩहायं से

बगवान गजानन फक ऩूजा फक औय वयदान फदमा फक

सवााग्रे तव ऩूजा च भमा दत्ता सुयोत्तभ।

ऩावातीजी को ऩुि प्रासद्ऱ का वयदान फदमा। ‘ऩुण्मक’ व्रत के

सवाऩूज्मद्ळ मोगीन्द्रो बव वत्सेत्मुवाच तभ ्।।

प्रबाव से ऩावातीजी को एक ऩुि उत्ऩन्न हुवा।
ऩुि जन्भ फक फात सुन कय सबी दे व, ऋत्रष,
गॊधवा आफद सफ गण फारक के दशान हे तु ऩधाये । इन दे व
गणो भं शसन भहायाज बी उऩस्स्थत हुवे। फकन्तु शसनदे व
ने ऩत्नी द्राया फदमे गमे शाऩ के कायण फारक का दशान

(गणऩसतखॊ. 13। 2)
बावाथा: ‘सुयश्रेद्ष! भंने सफसे ऩहरे तुम्हायी ऩूजा फक है ,
अत् वत्स! तुभ सवाऩूज्म तथा मोगीन्द्र हो जाओ।’
ब्रह्मवैवता ऩुयाण भं ही एक अन्म प्रसॊगान्तगात ऩुिवत्सरा

दग
ु ाा फीसा मॊि

शास्त्रोि भत के अनुशाय दग
ु ाा फीसा मॊि दब
ु ााग्म को दयू कय व्मत्रि के सोमे हुवे बाग्म को जगाने वारा भाना
गमा हं । दग
ु ाा फीसा मॊि द्राया व्मत्रि को जीवन भं धन से सॊफॊसधत सॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ होता हं । जो व्मत्रि

आसथाक सभस्मासे ऩये शान हं, वह व्मत्रि मफद नवयािं भं प्राण प्रसतत्रद्षत फकमा गमा दग
ु ाा फीसा मॊि को
स्थासद्ऱ कय रेता हं , तो उसकी धन, योजगाय एवॊ व्मवसाम से सॊफॊधी सबी सभस्मं का शीघ्र ही अॊत होने रगता
हं । नवयाि के फदनो भं प्राण प्रसतत्रद्षत दग
ु ाा फीसा मॊि को अऩने घय-दक
ु ान-ओफपस-पैक्टयी भं स्थात्रऩत कयने
से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं , व्मत्रि शीघ्र ही अऩने व्माऩाय भं वृत्रद्ध एवॊ अऩनी आसथाक स्स्थती भं सुधाय होता
दे खंगे। सॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा चैतन्म दग
ु ाा फीसा मॊि को शुब भुहूता भं अऩने घय-दक
ु ान-ओफपस भं
स्थात्रऩत कयने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं ।

भूल्म: Rs.730 से Rs.10900 तक

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ससतम्फय 2012

9

आकाशस्मासधऩो त्रवष्णुयग्नेद्ळैव भहे द्वयी।

ऩावाती ने गणेश भफहभा का फखान कयते हुए ऩयशुयाभ से

वामो् सूम्ा स्ऺतेयीशो जीवनस्म गणासधऩ्।।

कहा –

त्वफद्रधॊ रऺकोफटॊ च हन्तुॊ शिो गणेद्वय्।
स्जतेस्न्द्रमाणाॊ प्रवयो नफह हस्न्त च भस्ऺकाभ ्।।
तेजसा कृ ष्णतुल्मोऽमॊ कृ ष्णाॊद्ळ गणेद्वय्।
दे वाद्ळान्मे कृ ष्णकरा् ऩूजास्म ऩुयतस्तत्।।
(ब्रह्मवैवताऩु., गणऩसतख., 44। 26-27)

बावाथा:- क्रभ इस प्रकाय हं भहाबूत असधऩसत
1. स्ऺसत (ऩृथ्वी) सशव
2. अऩ ् (जर) गणेश

3. तेज (अस्ग्न) शत्रि (भहे द्वयी)
4. भरूत ् (वामु) सूमा (अस्ग्न)
5. व्मोभ (आकाश) त्रवष्णु

बावाथा: स्जतेस्न्द्रम ऩुरूषं भं श्रेद्ष गणेश तुभभं जैसे
राखं-कयोिं जन्तुओॊ को भाय डारने की शत्रि है ; ऩयन्तु
तुभने भक्खी ऩय बी हाथ नहीॊ उठामा। श्रीकृ ष्ण के अॊश
से उत्ऩन्न हुआ वह गणेश तेज भं श्रीकृ ष्ण के ही सभान
है । अन्म दे वता श्रीकृ ष्ण की कराएॉ हं । इसीसे इसकी
अग्रऩूजा होती है ।

बगवान ् श्रीसशव ऩृथ्वी तत्त्व के असधऩसत होने के

कायण उनकी सशवसरॊग के रुऩ भं ऩासथाव-ऩूजा का त्रवधान
हं । बगवान ् त्रवष्णु के आकाश तत्त्व के असधऩसत होने के

कायण उनकी शब्दं द्राया स्तुसत कयने का त्रवधान हं ।
बगवती दे वी के अस्ग्न तत्त्व का असधऩसत होने के कायण
उनका अस्ग्नकुण्ड भं हवनाफद के द्राया ऩूजा कयने का
त्रवधान हं । श्रीगणेश के जरतत्त्व के असधऩसत होने के

शास्त्रीम भतसे
शास्त्रोभं ऩॊचदे वं की उऩासना कयने का त्रवधान हं ।

आफदत्मॊ गणनाथॊ च दे वीॊ रूद्रॊ च केशवभ ्।

ऩॊचदै वतसभत्मुिॊ सवाकभासु ऩूजमेत ्।। (शब्दकल्ऩद्रभ
ु )
बावाथा: - ऩॊचदे वं फक उऩासना का ब्रह्माॊड के ऩॊचबूतं के
साथ सॊफॊध है । ऩॊचबूत ऩृथ्वी, जर, तेज, वामु औय आकाश
से फनते हं । औय ऩॊचबूत के आसधऩत्म के कायण से

कायण उनकी सवाप्रथभ ऩूजा कयने का त्रवधान हं , क्मंफक
ब्रह्माॊद भं सवाप्रथभ उत्ऩन्न होने वारे जीव तत्त्व ‘जर’ का
असधऩसत होने के कायण गणेशजी ही प्रथभ ऩूज्म के
असधकायी होते हं ।
आचामा भनु का कथन है “अऩ एच ससजाादौ तासु फीजभवासृजत ्।” (भनुस्भृसत 1)

आफदत्म, गणनाथ(गणेश), दे वी, रूद्र औय केशव मे ऩॊचदे व

बावाथा:

बी ऩूजनीम हं । हय एक तत्त्व का हय एक दे वता स्वाभी हं -

इस प्रभाण से सृत्रद्श के आफद भं एकभाि वताभान जर का
असधऩसत गणेश हं ।

भॊि ससद्ध दर
ा साभग्री
ु ब
हत्था जोडी- Rs- 370

घोडे की नार- Rs.351

भामा जार- Rs- 251

त्रफल्री नार- Rs- 370

भोसत शॊख- Rs- 550

धन वृत्रद्ध हकीक सेट Rs-251

ससमाय ससॊगी- Rs- 370

दस्ऺणावतॉ शॊख- Rs- 550

इन्द्र जार- Rs- 251

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10

ससतम्फय 2012

गणेश ऩूजन हे तु शुब भुहूता

 सचॊतन जोशी
वैऻासनक ऩद्धसत के अनुसाय ब्रह्माॊड भं सभम व अनॊत आकाश के असतरयि सभस्त वस्तुएॊ

भमाादा मुि हं । स्जस प्रकाय सभम का न ही कोई प्रायॊ ब है न ही कोई अॊत है । अनॊत आकाश की बी

सभम की तयह कोई भमाादा नहीॊ है । इसका कहीॊ बी प्रायॊ ब मा अॊत नहीॊहोता। आधुसनक भानव ने इन
दोनं तत्वं को हभेशा सभझने का व अऩने अनुसाय इनभं भ्रभण कयने का प्रमास फकमा हं ऩयन्तु उसे
सपरता प्राद्ऱ नहीॊ हुई है ।

साभान्मत् भुहूता का अथा है फकसी बी कामा को कयने के सरए सफसे शुब सभम व सतसथ चमन

कयना। कामा ऩूणत
ा ् परदामक हो इसके सर, सभस्त ग्रहं व अन्म ज्मोसतष तत्वं का तेज इस प्रकाय
केस्न्द्रत फकमा जाता है फक वे दष्ु प्रबावं को त्रवपर कय दे ते हं । वे भनुष्म की जन्भ कुण्डरी की
सभस्त फाधाओॊ को हटाने भं व दम
ु ोगो को दफाने मा घटाने भं सहामक होते हं ।

शुब भुहूता ग्रहो का ऎसा अनूठा सॊगभ है फक वह कामा कयने वारे व्मत्रि को ऩूणत
ा ् सपरता की

ओय अग्रस्त कय दे ता है ।

फहन्द ू धभा भं शुब कामा केवर शुब भुहूता दे खकय फकए जाने का त्रवधान हं । इसी त्रवधान के

अनुसाय श्रीगणेश चतुथॉ के फदन बगवान श्रीगणेश की स्थाऩना के श्रेद्ष भुहूता आऩकी अनुकूरता हे तु
दशााने का प्रमास फकमा जा यहा हं । फहन्द ू धभा ग्रॊथं के अनुसाय शुब भुहूता दे खकय फकए गए कामा
सनस्द्ळत शुब व सपरता दे ने वारे होते हं ।

श्रीगणेश चतुथॉ के सरमे (19 ससतॊफय 2012 फुधवाय)
प्रात् 6: 08 से 7:38 तक राब

सुफह 7: 38 से 9:08 तक अभृत
सुफह 10:38 से 12:08 तक शुब
सॊध्मा् 4:38 से 6:08 तक राब
अन्म शुब सभम

वृस्द्ळक रग्न भं (10:36 से दोऩहय 12:55 तक ) तथा कॊु ब रग्न भं (सॊध्मा 04:41 से सॊध्मा 06:09
तक) बगवान श्रीगणेश प्रसतभा की स्थाऩना की जा सकती हं ।

क्मंफक ज्मोसतष के अनुशाय वृस्द्ळक औय कॊु ब दोनं स्स्थय रग्न हं । स्स्थय रग्न भं फकमा गमा कोई बी
शुब कामा स्थाई होता हं ।

त्रवद्रानो के भतानुशाय शुब प्रायॊ ब मासन आधा कामा स्वत् ऩूण।ा

11

ससतम्फय 2012

शुबकामं भं सवाप्रथभ गणेशजी की ऩूजा क्मं होती हं ?

 सचॊतन जोशी
गणऩसत शब्द का अथा हं ।
गण(सभूह)+ऩसत (स्वाभी) = सभूह के स्वाभी को सेनाऩसत अथाात गणऩसत कहते हं । भानव शयीय भं ऩाॉच
ऻानेस्न्द्रमाॉ, ऩाॉच कभेस्न्द्रमाॉ औय चाय अन्त्कयण होते हं । एवॊ इस शत्रिओॊ को जो शत्रिमाॊ सॊचासरत कयती हं उन्हीॊ को
चौदह दे वता कहते हं । इन सबी दे वताओॊ के भूर प्रेयक हं बगवान श्रीगणेश।
बगवान गणऩसत शब्दब्रह्म अथाात ् ओॊकाय के प्रतीक हं , इनकी भहत्व का मह हीॊ भुख्म कायण हं ।
श्रीगणऩत्मथवाशीषा भं वस्णात हं ओॊकाय का ही व्मि स्वरूऩ गणऩसत दे वता हं । इसी कायण सबी प्रकाय के शुब
भाॊगसरक कामं औय दे वता-प्रसतद्षाऩनाओॊ भं बगवान गणऩसत फक प्रथभ ऩूजा फक जाती हं । स्जस प्रकाय से प्रत्मेक भॊि
फक शत्रि को फढाने के सरमे भॊि के आगं ॐ (ओभ ्)

आवश्मक रगा होता हं । उसी प्रकाय प्रत्मेक शुब भाॊगसरक कामं

के सरमे ऩय बगवान ् गणऩसत की ऩूजा एवॊ स्भयण असनवामा भानी गई हं । इस सबी शास्त्र एवॊ वैफदक धभा, सम्प्रदामं ने
इस प्राचीन ऩयम्ऩया को एक भत से स्वीकाय फकमा हं इसका सदीमं से बगवान गणेश जी क प्रथभ ऩूजन कयने फक
ऩयॊ ऩया का अनुसयण कयते चरे आयहे हं ।
गणेश जी की ही ऩूजा सफसे ऩहरे क्मं होती है , इसकी ऩौयास्णक कथा इस प्रकाय है ऩद्मऩुयाण के अनुसाय (सृत्रद्शखण्ड 61। 1 से 63। 11) –
एक फदन व्मासजी के सशष्म ने अऩने गुरूदे व को प्रणाभ
कयके प्रद्ल फकमा फक गुरूदे व! आऩ भुझे दे वताओॊ के ऩूजन का सुसनस्द्ळत क्रभ फतराइमे। प्रसतफदन फक ऩूजा भं सफसे
ऩहरे फकसका ऩूजन कयना चाफहमे ?
तफ व्मासजी ने कहा:

त्रवघ्ननं को दयू कयने के सरमे सवाप्रथभ गणेशजी की ऩूजा कयनी चाफहमे। ऩूवक
ा ार भं

ऩावाती दे वी को दे वताओॊ ने अभृत से तैमाय फकमा हुआ एक फदव्म भोदक फदमा। भोदक दे खकय दोनं फारक (स्कन्द
तथा गणेश) भाता से भाॉगने रगे। तफ भाता ने भोदक के प्रबावं का वणान कयते हुए कहा फक तुभ दोनो भं से जो
धभााचयण के द्राया श्रेद्षता प्राद्ऱ कयके आमेगा, उसी को भं मह भोदक दॉ ग
ू ी। भाता की ऐसी फात सुनकय स्कन्द भमूय ऩय

आरूढ़ हो कय अल्ऩ भुहूतब
ा य भं सफ तीथं की स्न्नान कय सरमा। इधय रम्फोदयधायी गणेशजी भाता-त्रऩता की ऩरयक्रभा
कयके त्रऩताजी के सम्भुख खिे हो गमे। तफ ऩावातीजी ने कहा- सभस्त तीथं भं फकमा हुआ स्न्नान, सम्ऩूणा दे वताओॊ को
फकमा हुआ नभस्काय, सफ मऻं का अनुद्षान तथा सफ प्रकाय के व्रत, भन्ि, मोग औय सॊमभ का ऩारन- मे सबी साधन
भाता-त्रऩता के ऩूजन के सोरहवं अॊश के फयाफय बी नहीॊ हो सकते।

इससरमे मह गणेश सैकिं ऩुिं औय सैकिं गणं से बी फढ़कय श्रेद्ष है । अत् दे वताओॊ का फनामा हुआ मह भोदक भं
गणेश को ही अऩाण कयती हूॉ। भाता-त्रऩता की बत्रि के कायण ही गणेश जी की प्रत्मेक शुब भॊगर भं सफसे ऩहरे ऩूजा
होगी।

तत्ऩद्ळात ् भहादे वजी फोरे- इस गणेश के ही अग्रऩूजन से सम्ऩूणा दे वता प्रसन्न हंजाते हं । इस सरमे तुभहं

सवाप्रथभ गणेशजी की ऩूजा कयनी चाफहमे।

ससतम्फय 2012

12

सयर त्रवसध से श्री गणेश ऩूजन

 त्रवजम ठाकुय
श्री गणेशजी की ऩूजा से व्मत्रि को फुत्रद्ध, त्रवद्या,

ऩत्रवि कयण:

त्रववेक योग, व्मासध एवॊ सभस्त त्रवध्न-फाधाओॊ का स्वत्

सफसे ऩहरे ऩूजन साभग्री व गणेश प्रसतभा सचि ऩत्रवि

नाश होता है

कयण कयं

श्री गणेशजी की कृ ऩा प्राद्ऱ होने से व्मत्रि के
भुस्श्कर से भुस्श्कर कामा बी आसान हो जाते हं ।
स्जन

रोगो

को

व्मवसाम-नौकयी

भं

त्रवऩयीत

ऩरयणाभ प्राद्ऱ हो यहे हं, ऩारयवारयक तनाव, आसथाक तॊगी,
योगं से ऩीिा हो यही हो एवॊ व्मत्रि को अथक भेहनत
कयने के उऩयाॊत बी नाकाभमाफी, द:ु ख, सनयाशा प्राद्ऱ हो

अऩत्रवि् ऩत्रविो वा सवाावस्थाॊ गतो त्रऩ वा।

म् स्भये त ् ऩुण्डयीकाऺॊ स फाह्याभ्मन्तय् शुसच्॥

इस भॊि से शयीय औय ऩूजन साभग्री ऩय जर छीटं इसे
अॊदय फाहय औय फहाय दोनं शुद्ध हो जाता है
आचभन:

ॐ केशवाम नभ:

यही हो, तो एसे व्मत्रिमो की सभस्मा के सनवायण हे तु

ॐ नायामण नभ:

चतुथॉ के फदन मा फुधवाय के फदन श्री गणेशजी की

ॐ भध्वामे नभ:

त्रवशेष ऩूजा-अचाना कयने का त्रवधान शास्त्रं भं फतामा हं ।

हस्तो प्रऺल्म हसशाकेशम नभ :

स्जसके पर से व्मत्रि की फकस्भत फदर जाती हं
औय उसे जीवन भं सुख, सभृत्रद्ध एवॊ ऎद्वमा की प्रासद्ऱ होती
हं । श्री गणेश जी का ऩूजन अरग-अरग उद्दे श्म एवॊ
काभनाऩूसता हे तु अरग-अरग भॊि व त्रवसध-त्रवधान से
फकमा जाता हं , इस सरमे महाॊ दशााई गई ऩूजन त्रवसध भं
अॊतय होना साभान्म हं ।
सबी ऩाठको के भागादशान हे तु श्री गणेश जी का
ऩूजन त्रवधान फदमा जा यहा हं ।

त्व च धायम भा दे त्रव ऩत्रवि कुरू च आसनभ॥्

यऺा भॊि:

'अऩक्राभन्तु बूतासन त्रऩशाचा् सवातो फदशा।

अऩसऩान्तु ते बूता् मे बूता् बूसभसॊस्स्थता्।
मे बूता त्रवनकताायस्ते नद्शन्तु सशवाऻमा।'

इस भॊि से दशं फदशाओॊ भं त्रऩरा सयसं सछटके स्जसेस

ऩूजन साभग्री :
कुॊकुॊभ, केसय, ससॊदयू , अवीय-गुरार, ऩुष्ऩ औय भारा,
ऩान,

ॐ ऩृथ्वी त्वमा धृता रोका दे त्रव त्व त्रवद्गणुनाधृता्।

सवेषाभवयोधेन ब्रह्मकभा सभायबे।

गणेश ऩूजा:

चारव,

आसान सुत्रद्ध:

सुऩायी,

ऩॊचाभृत,

ऩॊचभेवा,

गॊगाजर,

त्रफरऩि, धूऩ-दीऩ, नैवैद्य भं रड्डू )रड्डू 3 ,5,7, 11त्रवषभ
सॊख्मा भं (मा गूड अथवा सभश्री का प्रसाद रगाएॊ। रंग,
इरामची, नायीमर, करश,
इि, जनेऊ, त्रऩरी सयसं,

1सभटय रार कऩडा, फयक,
इत्माफद आवश्मक साभग्रीमाॊ।

सभस्त बूत प्रेत फाधाओॊ का सनवायण होता है
स्वस्ती वाचन:

स्वस्स्त न इन्द्रो वृद्धश्रवा :स्वस्स्त न :ऩूषा त्रवद्ववेदा:।

स्वस्स्तनस्ता यऺो अरयद्शनेसभ :स्वस्स्त नो फृहस्ऩसतादधात॥
इस के फाद श्री गणेश जी के भॊगर ऩाठ कयना चाफहए
जो की इस प्रकाय है

ससतम्फय 2012

13

रॊफोदयद्ळ त्रवकटो त्रवघ्नननाशो त्रवनामक्।

गणेश जी का भॊगर ऩाठ:

सुभुखद्ळैकदन्तद्ळ कत्रऩरो गजकणाक:।

धुम्रकेतुय ् गणाध्मऺो बारचॊद्रो गजानन॥

रम्फोदयद्ळ त्रवकटो त्रवघ्रनाशो त्रवनामक:॥

द्रादशैतासन नाभासन म् ऩठे च्छृणु मादऽत्रऩ॥

द्राद्रशैतासन नाभासन म :ऩठे च्छे णुमादत्रऩ॥

सॊग्राभे सॊकटे चैव त्रवघ्ननस्तस्म न जामते॥

सॊग्राभे सॊकटे चैव त्रवघ्रस्तस्म न जामते॥

प्रसन्न वदनॊ ध्मामेत ् सवा त्रवघ्ननोऩशाॊतमे॥

धूम्रकेतुगण
ा ाध्मऺो बारचन्द्रो गजानन:।

त्रवद्यायॊ बे त्रववाहे च प्रवेशे सनगाभे तथा।

त्रवद्यायम्बे त्रववाहे च प्रवेशे सनगाभे तथा।

शुक्राॊफय धयॊ दे वॊ शसशवणं चतुबज
ुा भ ्।

जऩेद् गणऩसत स्तोिॊ षस्ड्बभाासे परॊ रबेत ्।

एकाग्रसचन होकय गणेश का ध्मान कयना चाफहए

सॊवॊत्सये ण ससत्रद्धॊ च रबते नाि सॊशम्॥

श्री गणेश का ध्मान कयं :
गजाननॊ

बूतगणाफद

सेत्रवतभ ्

कत्रऩत्थ

वक्रतुॊड भहाकाम सूमक
ा ोफट सभ प्रब।

जम्फूपर

चारुबऺणभ।् उभासुतभ ् शोक त्रवनाश कायकभ ् नभासभ

त्रवघ्ननेद्वय ऩाद ऩॊकजभ॥् ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम
नभ् गणेशॊ ध्मामासभ भॊि का उच्चायण कयं ।

सनत्रवघ्ना नॊ कुरु भे दे व सवा कामेषु सवादा॥

असबस्ससताथा ससद्धध्मथं ऩूस्जतो म् सुयासुयै्।
सवा त्रवघ्नन हयस्तस्भै गणासधऩतमे नभ्॥

त्रवघ्ननेद्वयाम वयदाम सुयत्रप्रमाम रॊफोदयाम सकराम

जगस्त्धताम। नागाननाम श्रुसतमऻ त्रवबुत्रषताम गौयीसुताम

आह्वानॊ:
इस भॊि से श्री गणेश का आहवान कये मा भन ही भन
भं श्री गणेश जी को ऩधायने के सरमे त्रवनसत कयं । हाथभं

गणनाथ नभो नभस्ते॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् गणेशॊ स्भयासभ
भॊि का उच्चायण कयके ऩुष्ऩ अत्रऩत
ा कयं

अऺत रेकय आहवान कयं ।

आगच्छ बगवन्दे व स्थाने चाि स्स्थयो बव

मावत्ऩूजाॊ करयष्मासभ तावत्वॊ सस्न्नधौ बव।।
ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ्

षोडशोऩचाय गणऩतीऩूजन:

अस्मै प्राण् प्रसतद्षन्तु अस्मै प्राणा् ऺयन्तु च।
अस्मै दे वतभचीमा भाभहे सत च कद्ळन॥

गणेशॊ ध्मामासभ भॊि का उच्चायण कयके अऺते डारदं .....
इस भॊि से श्री गणेश की भूसता मा प्रसतभा ऩय हल्दी मा
कुभकुभ से यॊ गे चारव डारं। मफद प्रसतभा के प्रहरे से
प्राण-प्रसतद्षा हो गई हं तो आवश्मिा नहीॊ हं तफ केवर
सुऩायी ऩय ही चारव डारं।

आसनॊ:
आसन सभत्रऩात कयं । मफद ऩहरे से वस्त्र त्रफछामा हुवा हं
तो उस स्थान ऩय हल्दी मा कुभकुभ से यॊ गे अऺत
डारकय ऩुष्ऩ अत्रऩत
ा कयं ।

यम्मॊ सुशोबनॊ फदव्मॊ सवा सौख्म कयॊ शुबभ ्।
आसनॊ च भमादत्तॊ गृहाण ऩयभेद्वय॥

स्भयण:

हाथभं ऩुष्ऩ रेकय श्री गणेशजी का स्भयण कयं ।
नभस्तस्भै गणेशाम सवा त्रवध्न त्रवनासशने॥
कामाायॊबेषु सवेषु ऩूस्जतो म् सुयैयत्रऩ।

सुभुखद्ळैक दॊ तद्ळ कत्रऩरो गजकणाक्॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् आसनॊ
सभऩामासभ॥

मफद द्ऴोक ऩढने भं कफठनाई हो तो आसन सभऩाासभ श्री
गॊ गणेशाम नभ् का उच्चायण कयते हुवे गणेश जी के
चयण धोमे।

ससतम्फय 2012

14

ऩाद्यॊ:

उष्णोदकॊ सनभारॊ च सवा सौगन्ध सॊमुतभ ्।
ऩाद प्रऺारनाथााम दत्तॊ ते प्रसतगृह्यताभ ्॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् ऩाद्यॊ सभऩामासभ॥

इस के स्थान ऩय ऩम् स्नानभ ् सभऩामासभ गॊ गणेशाम

नभ् का उच्चायण कये तथा ऩम् के स्थान ऩय दध
ू कहं ,
दहीॊ कहं , धृतभ ् कहं , भधु कहं , शकाया कहं के स्नान
कयामे।

ऩमसस्तु सभुद्भूतॊ भधुयाम्रॊ शसशप्रबभ ् ।

दध्मानीतॊ भमा दे व स्नानाथं प्रसतगृह्यताभ ् ॥

अघ्नमं:

नवनीतसभुत्ऩन्नॊ सवासॊतोषकायकभ ् ।

आचभनीभं जर, पूर, पर, चॊदन, अऺत, दस्ऺणा

घृतॊ तुभ्मॊ प्रदास्मासभ स्नानाथं प्रसतगृह्यताभ ् ॥

इत्माफद हाथ भं यख कय सनम्न भॊि का उच्चायण कयं ...

अध्मा गृहाण दे वेश गॊध ऩुष्ऩऺतै् सह।

तरु ऩुष्ऩ सभुत्ऩन्नॊ सुस्वादु भधुयॊ भधु ।

करुणा कुरु भं दे व गृहाणाध्मै् नभोस्तुते॥

तेज् ऩुत्रद्शकयॊ फदव्मॊ स्नानाथं प्रसतगृह्यताभ ् ॥

भॊि का उच्चायण कयके अध्मा की साभग्रीमा अत्रऩात कयदं ।

भराऩहारयकाॊ फदव्मॊ स्नानाथं प्रसतगृह्यताभ ् ॥

इऺुसायसभुद्भूताॊ शकायाॊ ऩुत्रद्शदाॊ शुबाभ ् ।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् अघ्नमं सभऩामासभ

ऩमो दसध धृत चैव भधु च शकायामुतभ ्।

आचभन:

सवा तीथा सभामुिॊ सुगॊसध सनभार जरभ ्।
आचम्मताॊ भमा दत्तॊ गृहीत्वा ऩयभेद्वयॊ ॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् आचभनॊ
सभऩामासभ॥

स्नानॊ:

गॊगा च मभुना ये वा तुॊगबद्रा सयस्वसत।

कावेयी सफहता नद्य् सद्य् स्नाथाभत्रऩत
ा ा॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् स्नानॊ सभऩामासभ
भॊि का उच्चायण कयते हुवे स्नान कयामे।

ऩॊचाभृत भमानीतॊ सनानाथा प्रसतघृहमताभ॥
वस्त्रॊ:
ऩॊचाभृत स्नान के फाद स्वच्छ कय के वस्त्र ऩहनामे मा
सभत्रऩात कयं ।

सवा बूषाफदके सौम्मे रोकरज्जा सनवायणे ।
भमोऩऩाफदते तुभ्मॊ वाससी प्रसतगृहीताभ ् ॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् वस्त्रोऩवस्त्रे
सभऩामासभ॥

मऻोऩवीत

ततऩद्ळमात सनम्न भॊि से मऻोऩवीत ऩहनामे

ऩॊचाभृत स्नान :

नवसभस्तॊतुसबमुि त्रिगुणॊ दे वताभमॊ।

तत ऩद्ळमात ऩॊचाभृत से क्रभश् दध
ू , दही, घी, शहद,

शक्कय से स्नान कया कय शुद्धजर मा गॊगाजर से उि
भॊि से ऩुन् स्वच्छ कयरे।

सऩफीतॊ भमा दत्तॊ गृहाण ऩयभेद्वयभ ्॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् मऻोऩत्रवतॊ
सभऩामासभ॥

तत ऩद्ळमात शुद्ध वस्त्र से ऩोछ कय प्रसतत्रद्षत कयं ।
दध
ू स्नान :

काभधेनु सभुत्ऩनॊ सवेषाॊ जीवन ऩयभ ्।

ऩावनॊ मऻ हे तुद्ळ ऩम :स्नानाथाभत्रऩत
ा भ ्॥

चॊदन:

ततऩद्ळमात रार चॊदन चढामे।

श्रीखण्ड चन्दन फदव्मॊ केशयाफद सुभनीहयभ ्।

त्रवरेऩनॊ सुश्रद्ष चन्दनॊ प्रसतगृहमतभ ्॥ ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत
श्री गणेशाम नभ् कुॊकुभॊ सभऩामासभ॥

ससतम्फय 2012

15

कुॊकुॊभ:

ततऩद्ळमात कुॊकुॊभ अवीय-गुरार चढामे।

आबूषण :

ततऩद्ळमात आबूषण चढामे।

कुॊकुॊभ काभना फदव्मॊ काभना काभ सॊबवभ ्।

अरॊकायान्भहाफदव्मान्नानायतन त्रवसनसभातान।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् कुॊकुभॊ

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् आबूषण

कुॊकुॊभ नासचातो दे व गृहाण ऩयभेद्वयभ ्॥

गृहाण दे व-दे वेश प्रसीद ऩयभेद्वय॥

सभऩामासभ॥

ससॊदयू :

ततऩद्ळमात ससॊदयू चढामे।

सभऩामासभ॥

इि:

ततऩद्ळमात इि अथाात ् सुगॊसधत तेर चढामे।

ससॊदयू ॊ शोबनॊ यिॊ सौबाग्मॊ सुखवधानभ ्।
शुबदॊ काभदॊ चैव ससॊदयू ॊ प्रसतगृहमताभ।

चम्ऩकाशो वकुरॊ भारती भोगयाफदसब्।

वाससतॊ स्स्नग्ध तासेरु तैरॊ चारु प्रगृहमातभ ्॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् ससॊदयू ॊ सभऩामासभ॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् तैरभ ् सभऩामासभ॥

अऺत:

धूऩ :

ततऩद्ळमात हल्दी मा कुॊकुॊभ से यॊ गे अऺत चढामे।
अऺताद्ळ सुयश्रेद्ष कुॊकुभािा् सुशोसबता्।

भमा सनवेफदता बक्त्मा गृहाण ऩयभेद्वरय॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् अऺतान ्
सभऩामासभ॥

ऩुष्ऩ :

ततऩद्ळमात ऩुष्ऩ भारा आफद चढामे।

भाल्मादीसन सुगन्धीसन भारत्मादीसन वै प्रबो।
भमा नीतासन ऩुष्ऩास्ण गृहाण ऩयभेद्वय॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् ऩुष्ऩास्ण
सभऩामासभ॥

दव
ू ाा:

ततऩद्ळमात दव
ू ाा चढामे।

दव
ु ाा कयान्सह रयतान भृतन्भॊगर प्रदान।
आनी ताॊस्तव ऩूजाथा गृहाण ऩयभेद्वय॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् दव
ू ांकुयान
सभऩामासभ॥

ततऩद्ळमात धूऩ आफद जरामे।

वनस्ऩसत यसोद्भूतो गॊधाढ्मो गॊध उत्तभ्।

आध्नम सवा दे वानाॊ धूऩोमॊ प्रसतगृह्यताभ ्॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् धूऩॊ सभऩामासभ॥
दीऩ:

ततऩद्ळमात दीऩ आफद जरामे।

आज्मेन वसताना मुिॊ वफिना च प्रमोस्जतभ ् भमा।
दीऩॊ गृहाण दे वेश िेरोक्म सतसभयाऩह॥।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् दीऩॊ दशामासभ॥
नैवेद्य :

ततऩद्ळमात नैवेद्य अत्रऩत
ा कयं ।

शकाया खॊडखाद्यासन दसधऺीय घृतासन च।

आहायॊ बक्ष्मॊ बोज्मॊ च गृहाण गणनामक।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् नैवेद्यॊ सनवेदमासभ॥
ततऩद्ळमात नैवेद्य ऩय जर सछडके।
गॊ गणऩतमे नभ्

ससतम्फय 2012

16

ततऩद्ळमात इस भॊि का उच्चायण कयते हुवे ऩाॊच फाय
बोजन कयामे.....

हाथ से बोजन की गॊध दयू कयने हे तु चॊदनमुि ऩानी

ॐ प्राणाम नभ्।

अत्रऩत
ा कयं ।

ॐ अऩानाम नभ्।

ॐ गणेशाम नभ् कयोद्रतानाथे गॊधॊ सभऩामासभ.

ॐ व्मानाम नभ्।

ॐ उदानाम नभ्।

भुख शुत्रद्ध हे तु ऩान-सुऩायी इरामची औय रवॊग अत्रऩत

ॐ सभानाम नभ्।

कयं ।

एरारवंग सॊमुिॊ ऩुगीपरॊ सभस्न्वतभ ्,

ततऩद्ळमात इस भॊि का उच्चायण कयते हुवे जर अत्रऩात
कयं ।

ताॊफुरॊ च भमा दत्तॊ गृहाण गणनामक.

भध्मे ऩानीमॊ सभऩामासभ।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् भुखवासॊ
सभऩामासभ।

फपय से उि भॊि का ऩाॊच फाय उच्चायण कयते हुवे ऩाॊच
फाय बोजन कयामे....

दस्ऺणा:

ततऩद्ळमात दस्ऺणा अत्रऩत
ा कयं ।

ततऩद्ळमात इस भॊि का उच्चायण कयते हुवे तीन फाय

फहयण्म गबा गबास्थॊ हे भफीजॊ त्रवबावसो।

जर अत्रऩात कयं ....

ॐ गणेशाम नभ् उत्तय ऩोषणॊ सभऩामासभ।

अनॊत ऩूण्म परदभत् शाॊसतॊ प्रमच्छ भे॥।

ॐ गणेशाम नभ् हस्त प्रऺारनॊ सभऩामासभ।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् दस्ऺणाॊ

ॐ गणेशाम नभ् भुख प्रऺारनॊ सभऩामासभ।

सभऩामासभ।

कनकधाया मॊि
आज के मुग भं हय व्मत्रि असतशीघ्र सभृद्ध फनना चाहता हं । धन प्रासद्ऱ हे तु प्राण-प्रसतत्रद्षत कनकधाया मॊि के साभने
फैठकय कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं । इस कनकधाया मॊि फक ऩूजा अचाना कयने से
ऋण औय दरयद्रता से शीघ्र भुत्रि सभरती हं । व्माऩाय भं उन्नसत होती हं , फेयोजगाय को योजगाय प्रासद्ऱ होती हं ।
श्री आफद शॊकयाचामा द्राया कनकधाया स्तोि फक यचना कुछ इस प्रकाय फक हं , स्जसके श्रवण एवॊ ऩठन कयने से

आस-ऩास के वामुभॊडर भं त्रवशेष अरौफकक फदव्म उजाा उत्ऩन्न होती हं । फठक उसी प्रकाय से कनकधाया मॊि अत्मॊत
दर
ा मॊिो भं से एक मॊि हं स्जसे भाॊ रक्ष्भी फक प्रासद्ऱ हे तु अचूक प्रबावा शारी भाना गमा हं । कनकधाया मॊि को
ु ब

त्रवद्रानो ने स्वमॊससद्ध तथा सबी प्रकाय के ऐद्वमा प्रदान कयने भं सभथा भाना हं । जगद्गरु
ु शॊकयाचामा ने दरयद्र ब्राह्मण
के घय कनकधाया स्तोि के ऩाठ से स्वणा वषाा कयाने का उल्रेख ग्रॊथ शॊकय फदस्ग्वजम भं सभरता हं । कनकधाया

भूल्म: Rs.730 से Rs.8200 तक

भॊि:- ॐ वॊ श्रीॊ वॊ ऐॊ ह्रीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्वाहा'

GURUTVA KARYALAY
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ससतम्फय 2012

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प्रदस्ऺणा:

ततऩद्ळमात प्रदस्ऺणा कयं ।

मासन कासन च ऩाऩासन जन्भान्तय कृ तासन च।
तासन सवाास्ण नश्मन्तु प्रदस्ऺणा ऩदे ऩदे ।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् प्रदस्ऺणाॊ कयोसभ।
आयती:
नीयाजन-आयती प्रगट कय उसभं चॊदन-ऩुष्ऩ रगामे कऩुय
प्रज्वसरत कयं ।

चॊद्राफदत्मौ च धयस्ण त्रवद्युदस्ग्न त्वभेव च।

त्वभेव सवा ज्मोसतत्रष आतॉक्मॊ प्रसतगृह्यताभ ्॥

कऩुया ऩूयेण भनोहये ण सुवणा ऩािान्तय सॊस्स्थतेन।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् ऩुष्ऩाॊजसर
सभऩामासभ।

प्राथाना:
त्रवघ्ननेद्वयाम वयदाम सुयत्रप्रमाम रॊफोदयाम सकराम
जगत्रद्धताम। नागाननाम श्रुसतमऻ त्रवबुत्रषताम गौयीसुताम
गणनाथ नभो नभस्ते। बिासतानाशन ऩयाम गणेद्वयाम
सवेद्वयाम शुबदाम सुयेद्वयाम। त्रवद्याधयाम त्रवकटाम च
वाभनाम बत्रि प्रसन्न वयदाम नभो नभस्ते।

नभस्काय:

प्रफदद्ऱबासा सहगतेन नीयाजनॊ ते ऩरयत कयोसभ।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् नीयाजनॊ
सभऩामासभ।

॥श्री गणेश आयसत॥
जम गणेश जम गणेश जम गणेश दे वा
जम गणेश जम गणेश जम गणेश दे वा.

सनत्रवघ्ना नॊ कुरु भे दे व सवा कामेषु सवादा।

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् नभस्कायान ्
सभऩामासभ।

त्रवशेष अध्मा:
आचभनी भं जर, चावर, पूर, पर, चॊदन दस्ऺणा आफद
अध्मा भं रे

यऺ यऺ गणाध्मऺ यऺ िेरोक्म यऺक।

भाता जाकी ऩायवती त्रऩता भहादे वा॥ जम गणेश.....

बिनाभ बमॊकताा िाता बवबवाणावात ्॥

एकदन्त दमावन्त चायबुजाधायी
भाथे ऩय सतरक सोहे भूसे की सवायी॥ जम गणेश.....
ऩान चढ़े पर चढ़े औय चढ़े भेवा
रड्डु अन का बोग रगे सन्त कयं सेवा॥ जम गणेश.....

परेन पसरतॊ तोमॊ परेन पसरतॊ धनभ ्।

परास्मघ्नमं प्रदानेन ऩूणाा सन्तु भनोयथा्॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् त्रवशेषाघ्नमं
सभऩामासभ।

अॊधे को आॉख दे त कोफढ़न को कामा

फाॉझन को ऩुि दे त सनधान को भामा॥ जम गणेश.....
' सूय' श्माभ शयण आए सपर कीजे सेवा
जम गणेश जम गणेश जम गणेश दे वा॥ जम गणेश.....
आयती के चायो औय जर घुभामे फपय गणेशजी को
आयती फदखामे खुद आयती रेकय हाथ धोरे।
फपय दोनो हाथकी अॊजसरभं ऩुष्ऩ रेकय ऩुष्ऩाॊजसर दं ।

नाना सुगॊधी ऩुष्ऩास्ण ऋतुकारोद्भवासन च।
ऩुष्ऩाॊजसर प्रदानेन प्रसीद गणनामक।

रॊफोदय नभस्तुभ्मॊ सतत भोदक त्रप्रम।

ऺभाऩन:

आह्वानॊ न जानासभ न जानासभ त्रवसजानभ ्।
ऩूजाॊ चैव न जानासभ ऺभस्व गणनामक॥

ॐ ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेशाम नभ् ऺभाऩनॊ
सभऩामासभ॥

अनमा ऩूज्मा ससत्रद्धफुत्रद्ध सफहत श्री गणेश् त्रप्रमताभ ्॥

***

ससतम्फय 2012

18

गणेश ऩूजन भं कोन से पूर चढाए।

 सचॊतन जोशी
गणेश जी को दव
ू ाा सवाासधक त्रप्रम है । इस सरमे सपेद मा हयी दव
ू ाा चढ़ानी
चाफहए। दव
ू ाा की तीन मा ऩाॉच ऩत्ती होनी चाफहए।

गणेश जी को तुरसी छोिकय सबी ऩि औय ऩुष्ऩ त्रप्रम हं ।
गणेशजी ऩय तुरसी चढाना सनषेध हं ।

न तुरस्मा गणासधऩभ‌् (ऩद्मऩुयाण)
बावाथा :तुरसी से गणेशजी की ऩूजा कबी नहीॊ कयनी
चाफहमे।

'गणेश तुरसी ऩि दग
ु ाा नैव तु दव
ू ाामा' (कासताक भाहात्म्म)
बावाथा :गणेशजी की तुरसी ऩि से एवॊ दग
ु ााजी की दव
ू ाा ऩूजा नहीॊ

कयनी चाफहमे।

गणेशजी की ऩूजा भं भन्दाय के रार पूर चढ़ाने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ
होता हं । रार ऩुष्ऩ के असतरयि ऩूजा भं द्वेत,ऩीरे पूर बी चढ़ाए जाते हं ।

सॊकटनाशन गणेशस्तोिभ ्

सॊकटनाशन गणेश स्तोिभ ् का प्रसत फदन ऩाठ कयने से सभस्त प्रकाय के सॊकटोका नाश होता है , श्री गणेशजी फक कृ ऩा एवॊ सुख
सभृत्रद्ध फक प्राद्ऱ होती है ।

वक्रतुड
ॊ भहाकाम सूमक
ा ोफट सभप्रब । सनत्रवाघ्ननभ ् कुरु भं दे व सवा कामेषु सवादा ॥ त्रवघ्ननेद्वयाम वयदाम सूयत्रप्रमाम रम्फोदयाम सकराम
जगफद्रताम । नागाननाम श्रुसतमऻ त्रवबूत्रषताम गौयीसुताम गणनाथ नभोनभस्ते ॥
स्तोि:

प्रणम्म सशयसा दे वॊ गौयीऩुॊि त्रवनामकभ ् बिावासॊ स्भये सनत्मॊ आमुकाभाथाससद्धमे ॥ १ ॥
प्रथभॊ वक्रतुॊडॊ च एकदॊ तॊ फद्रसतमकभ ् तृतीमॊ कृ ष्णत्रऩॊगाऺॊ गजवकिॊ चतुथक
ा भ् ॥ २ ॥

रॊफोदयॊ ऩॊचभॊ च षद्शभॊ त्रवकटभेव च सद्ऱभॊ त्रवघ्ननयाजॊ च धूम्रवणं तथाअद्शकभ ् ॥ ३ ॥
नवॊ बारचॊद्रॊ च दशभॊ तु त्रवनामकभ ् एकादशॊ गणऩसतॊ द्रादशॊ तु गजाननभ ् ॥ ४ ॥

द्रादशैतासन नाभासन त्रिसॊध्मॊ म: ऩठे न्नय: न च त्रवघ्ननबमॊ तस्म सवा ससत्रद्ध कयॊ प्रबो ॥ ५ ॥
त्रवद्यासथा रबते त्रवद्याॊ धनासथा रबते धनभ ् ऩुिासथा रबते ऩुिाॊभोऺासथा रबते गसतभ ् ॥ ६ ॥
जऩेत्गणऩसतस्तोिॊ षडसबभासै: परॊ रबेत सॊवतसये णससत्रद्धॊ च रबते नािसॊशम् ॥ ७ ॥

अद्शभ्मोब्राह्मणोभ्मस्म सरस्खत्वा म: सभऩामेत ् तस्म त्रवद्या बवेत्सवाा गणेशस्म प्रसादत् ॥ ८ ॥
॥ इसतश्री नायदऩुयाणे ‘सॊकटनाशन गणेशस्तोिभ ्’ सॊऩूणभ
ा ्॥

19

ससतम्फय 2012

शाऩ के कायण गणऩसत ऩूजन भं तुरसी सनत्रषद्ध हं ?

 सचॊतन जोशी
तुरसी सभस्त ऩौधं भं श्रेद्ष भानी जाती हं । फहॊ द ू धभा भं सभस्त ऩूजन कभो भं तुरसी को

प्रभुखता दी जाती हं । प्राम् सबी फहॊ द ू भॊफदयं भं चयणाभृत भं बी तुरसी का प्रमोग होता
हं । इसके ऩीछे ऎसी काभना होती है फक तुरसी ग्रहण कयने से तुरसी अकार भृत्मु को
हयने वारी तथा सवा व्मासधमं का नाश कयने वारी हं ।
ऩयन्तु मही ऩूज्म तुरसी को बगवान श्री गणेश की ऩूजा भं सनत्रषद्ध भानी गई हं ।

शास्त्रं भं उल्रेख हं :

तुरसीॊ वजासमत्वा सवााण्मत्रऩ ऩिऩुष्ऩास्ण गणऩसतत्रप्रमास्ण। (आचायबूषण)

गणेशजी को तुरसी छोिकय सबी ऩि-ऩुष्ऩ त्रप्रम हं ! गणऩसतजी को दव
ू ाा असधक
त्रप्रम है ।
इनसे सम्फद्ध ब्रह्मकल्ऩ भं एक कथा सभरती हं
एक सभम नवमौवन सम्ऩन्न तुरसी दे वी नायामण ऩयामण होकय तऩस्मा के सनसभत्त से तीथो भं भ्रभण कयती हुई गॊगा तट ऩय

ऩहुॉचीॊ। वहाॉ ऩय उन्हंने गणेश को दे खा, जो फक तरूण मुवा रग यहे थे। गणेशजी अत्मन्त सुन्दय, शुद्ध औय ऩीताम्फय धायण फकए

हुए आबूषणं से त्रवबूत्रषत थे, गणेश काभनायफहत, स्जतेस्न्द्रमं भं सवाश्रद्ष
े , मोसगमं के मोगी थे गणेशजी वहाॊ श्रीकृ ष्ण की
आयाधना भं घ्नमानयत थे। गणेशजी को दे खते ही तुरसी का भन उनकी ओय आकत्रषात हो गमा। तफ तुरसी उनका उऩहास उडाने
रगीॊ। घ्नमानबॊग होने ऩय गणेश जी ने उनसे उनका ऩरयचम ऩूछा औय उनके वहाॊ आगभन का कायण जानना चाहा। गणेश जी ने
कहा भाता! तऩस्स्वमं का घ्नमान बॊग कयना सदा ऩाऩजनक औय अभॊगरकायी होता हं ।

शुबे! बगवान श्रीकृ ष्ण आऩका कल्माण कयं , भेये घ्नमान बॊग से उत्ऩन्न दोष आऩके सरए अभॊगरकायक न हो।
इस ऩय तुरसी ने कहा—प्रबो! भं धभाात्भज की कन्मा हूॊ औय तऩस्मा भं सॊरग्न हूॊ। भेयी मह तऩस्मा ऩसत प्रासद्ऱ के सरए हं । अत:

आऩ भुझसे त्रववाह कय रीस्जए। तुरसी की मह फात सुनकय फुत्रद्ध श्रेद्ष गणेश जी ने उत्तय फदमा हे भाता! त्रववाह कयना फडा बमॊकय
होता हं , भं ब्रम्हचायी हूॊ। त्रववाह तऩस्मा के सरए नाशक, भोऺद्राय के यास्ता फॊद कयने वारा, बव फॊधन से फॊधे, सॊशमं का उद्गभ
स्थान हं । अत: आऩ भेयी ओय से अऩना घ्नमान हटा रं औय फकसी अन्म को ऩसत के रूऩ भं तराश कयं । तफ कुत्रऩत होकय तुरसी ने
बगवान गणेश को शाऩ दे ते हुए कहा फक आऩका त्रववाह अवश्म होगा। मह सुनकय सशव ऩुि गणेश ने बी तुरसी को शाऩ फदमा
दे वी, तुभ बी सनस्द्ळत रूऩ से असुयं द्राया ग्रस्त होकय वृऺ फन जाओगी।

इस शाऩ को सुनकय तुरसी ने व्मसथत होकय बगवान श्री गणेश की वॊदना की। तफ प्रसन्न होकय गणेश जी ने तुरसी से
कहा हे भनोयभे! तुभ ऩौधं की सायबूता फनोगी औय सभमाॊतय से बगवान नायामण फक त्रप्रमा फनोगी। सबी दे वता आऩसे स्नेह
यखंगे ऩयन्तु श्रीकृ ष्ण के सरए आऩ त्रवशेष त्रप्रम यहं गी। आऩकी ऩूजा भनुष्मं के सरए भुत्रि दासमनी होगी तथा भेये ऩूजन भं आऩ
सदै व त्माज्म यहं गी। ऎसा कहकय गणेश जी ऩुन: तऩ कयने चरे गए। इधय तुरसी दे वी द:ु स्खत ह्वदम से ऩुष्कय भं जा ऩहुॊची औय
सनयाहाय यहकय तऩस्मा भं सॊरग्न हो गई। तत्ऩद्ळात गणेश के शाऩ से वह सचयकार तक शॊखचूड की त्रप्रम ऩत्नी फनी यहीॊ। जफ
शॊखचूड शॊकय जी के त्रिशूर से भृत्मु को प्राद्ऱ हुआ तो नायामण त्रप्रमा तुरसी का वृऺ रूऩ भं प्रादब
ु ााव हुआ।

ससतम्फय 2012

20

गणेश के चभत्कायी भॊि

 सचॊतन जोशी
ॐ गॊ गणऩतमे नभ् ।
एसा शास्त्रोि वचन हं फक गणेश जी का मह भॊि चभत्कारयक औय तत्कार पर दे ने वारा भॊि हं । इस भॊि का ऩूणा
बत्रिऩूवक
ा जाऩ कयने से सभस्त फाधाएॊ दयू होती हं । षडाऺय का जऩ आसथाक प्रगसत व सभृस्ध्ददामक है ।

ॐ वक्रतुॊडाम हुभ ् ।
फकसी के द्राया फक गई ताॊत्रिक फक्रमा को नद्श

कयने के सरए, त्रवत्रवध काभनाओॊ फक शीघ्र ऩूसता
के सरए उस्च्छद्श गणऩसत फक साधना फकजाती
हं । उस्च्छद्श गणऩसत के भॊि का जाऩ अऺम
बॊडाय प्रदान कयने वारा हं ।
ॐ हस्स्त त्रऩशासच सरखे स्वाहा ।
आरस्म, सनयाशा, करह, त्रवघ्नन दयू कयने के सरए
त्रवघ्ननयाज रूऩ की आयाधना का मह भॊि जऩे।

ॐ गॊ स्ऺप्रप्रसादनाम नभ:।

गणेश के कल्माणकायी भॊि
गणेश भॊि फक प्रसत फदन एक भारा भॊिजाऩ अवश्म कये ।
फदमे गमे भॊिो भे से कोई बी एक भॊिका जाऩ कये ।
(०१) गॊ ।

(०२) ग्रॊ ।

(०३) ग्रं ।

(०४) श्री गणेशाम नभ् ।
(०५) ॐ वयदाम नभ् ।

भॊि जाऩ से कभा फॊधन, योगसनवायण, कुफुत्रद्ध,

(०६) ॐ सुभॊगराम नभ् ।

त्रवघ्नन दयू होकय धन, आध्मास्त्भक चेतना के

(०८) ॐ वक्रतुॊडाम हुभ ् ।

गणऩसत का भॊि जऩे।

(१०) ॐ गॊ गणऩतमे नभ् ।

कुसॊगत्रत्त, दब
ू ााग्म, से भुत्रि होती हं । सभस्त

(०७) ॐ सचॊताभणमे नभ् ।

त्रवकास एवॊ आत्भफर की प्रासद्ऱ के सरए हे यम्फॊ

(०९) ॐ नभो बगवते गजाननाम ।

ॐ गूॊ नभ:।
योजगाय की प्रासद्ऱ व आसथाक सभृस्ध्द प्राद्ऱ होकय
सुख सौबाग्म प्राद्ऱ होता हं ।

ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ग्रं गॊ गण्ऩत्मे वय वयदे नभ्

(११) ॐ ॐ श्री गणेशाम नभ् ।

मह भॊि के जऩ से व्मत्रि को जीवन भं फकसी बी प्रकाय

का कद्श नहीॊ ये हता है ।

आसथाक स्स्थसत भे सुधाय होता है ।

एवॊ सवा प्रकायकी रयत्रद्ध-ससत्रद्ध प्राद्ऱ होती है ।

ॐ तत्ऩुरुषाम त्रवद्महे वक्रतुण्डाम धीभफह तन्नो
दस्न्त् प्रचोदमात।

रक्ष्भी प्रासद्ऱ एवॊ व्मवसाम फाधाएॊ दयू कयने हे तु उत्तभ भानगमा हं ।

ॐ गी् गूॊ गणऩतमे नभ् स्वाहा।
इस भॊि के जाऩ से सभस्त प्रकाय के त्रवघ्ननो एवॊ सॊकटो का का नाश होता हं ।

ससतम्फय 2012

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ॐ श्री गॊ सौबाग्म गणऩत्मे वय वयद सवाजनॊ भं

त्रववाह भं आने वारे दोषो को दयू कयने वारं को िैरोक्म

वाद-त्रववाद, कोटा कचहयी भं त्रवजम प्रासद्ऱ, शिु बम से

वशभानम स्वाहा।

भोहन गणेश भॊि का जऩ कयने से शीघ्र त्रववाह व अनुकूर
जीवनसाथी की प्रासद्ऱ होती है ।

ॐ वक्रतुण्डे क द्रद्शाम क्रीॊहीॊ श्रीॊ गॊ गणऩतमे वय वयद
सवाजनॊ भॊ दशभानम स्वाहा ।

इस भॊिं के असतरयि गणऩसत अथवाशीषा, सॊकटनाशक, गणेश
स्त्रोत, गणेशकवच, सॊतान गणऩसत स्त्रोत, ऋणहताा गणऩसत

स्त्रोत भमूयेश स्त्रोत, गणेश चारीसा का ऩाठ कयने से गणेश
जी की शीघ्र कृ ऩा प्राद्ऱ होती है ।

ॐ वय वयदाम त्रवजम गणऩतमे नभ्।

गॊ

गणऩतमे

सवात्रवघ्नन

रम्फोदयाम ह्रीॊ गॊ नभ्।

हयाम

सवााम

सवागुयवे

छुटकाया ऩाने हे तु उत्तभ।

ॐ नभ् ससत्रद्धत्रवनामकाम सवाकामाकिे सवात्रवघ्नन प्रशभनाम
सवा याज्म वश्म कायनाम सवाजन सवा स्त्री ऩुरुषाकषाणाम
श्री ॐ स्वाहा।

इस भॊि के जाऩ को मािा भं सपरता प्रासद्ऱ हे तु प्रमोग
फकमा जाता हं ।

ॐ हुॊ गॊ ग्रं हरयद्रा गणऩत्मे वयद वयद सवाजन रृदमे
स्तम्बम स्वाहा।
मह हरयद्रा गणेश साधना का चभत्कायी भॊि हं ।

इस भॊि के जाऩ से भुकदभे भं सपरता प्राद्ऱ होती हं ।

भॊि ससद्ध स्पफटक श्री मॊि
"श्री मॊि" सफसे भहत्वऩूणा एवॊ शत्रिशारी मॊि है । "श्री मॊि" को मॊि याज कहा जाता है क्मोफक मह अत्मन्त शुब फ़रदमी मॊि
है । जो न केवर दस
ू ये मन्िो से असधक से असधक राब दे ने भे सभथा है एवॊ सॊसाय के हय व्मत्रि के सरए पामदे भॊद सात्रफत होता
है । ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा चैतन्म मुि "श्री मॊि" स्जस व्मत्रि के घय भे होता है उसके सरमे "श्री मॊि" अत्मन्त फ़रदामी

ससद्ध होता है उसके दशान भाि से अन-सगनत राब एवॊ सुख की प्रासद्ऱ होसत है । "श्री मॊि" भे सभाई अफद्रसतम एवॊ अद्रश्म शत्रि
भनुष्म की सभस्त शुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे सभथा होसत है । स्जस्से उसका जीवन से हताशा औय सनयाशा दयू होकय वह
भनुष्म असफ़रता से सफ़रता फक औय सनयन्तय गसत कयने रगता है एवॊ उसे जीवन भे सभस्त बौसतक सुखो फक प्रासद्ऱ होसत
है । "श्री मॊि" भनुष्म जीवन भं उत्ऩन्न होने वारी सभस्मा-फाधा एवॊ नकायात्भक उजाा को दयू कय सकायत्भक उजाा का

सनभााण कयने भे सभथा है । "श्री मॊि" की स्थाऩन से घय मा व्माऩाय के स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने से वास्तु दोष म वास्तु से
सम्फस्न्धत ऩये शासन भे न्मुनता आसत है व सुख-सभृत्रद्ध, शाॊसत एवॊ ऐद्वमा फक प्रसद्ऱ होती है ।

गुरुत्व कामाारम भे "श्री मॊि" 12 ग्राभ से 2250 Gram (2.25Kg) तक फक साइज भे उसरब्ध है

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ससतम्फय 2012

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ॐ ग्रं गॊ गणऩतमे नभ्।

गृह करेश सनवायण एवॊ घय भं सुखशास्न्त फक प्रासद्ऱ हे तु।

ॐ श्री गणेश ऋण सछस्न्ध वये ण्म हुॊ नभ् पट ।

मह ऋण हताा भॊि हं । इस भॊि का सनमसभत जाऩ कयना
चाफहए। इससे गणेश जी प्रसन्न होते है औय साधक का ऋण

ॐ गॊ रक्ष्म्मौ आगच्छ आगच्छ पट्।

इस भॊि के जाऩ से दरयद्रता का नाश होकय, धन प्रासद्ऱ
के प्रफर मोग फनने रगते हं ।

चुकता होता है । कहा जाता है फक स्जसके घय भं एक फाय बी
इस भॊि का उच्चायण हो जाता है है उसके घय भं कबी बी
ऋण मा दरयद्रता नहीॊ आ सकती।

ॐ गणेश भहारक्ष्म्मै नभ्।

व्माऩाय से सम्फस्न्धत फाधाएॊ एवॊ ऩये शासनमाॊ सनवायण एवॊ

जऩ त्रवसध

व्माऩय भं सनयॊ तय उन्नसत हे तु।

प्रात: स्नानाफद शुद्ध होकय कुश मा ऊन के आसन ऩय ऩूवा
फक औय भुख होकय फैठं। साभने गणॆशजी का सचि, मॊि

ॐ गॊ योग भुिमे पट्।

बमानक असाध्म योगं से ऩये शानी होने ऩय, उसचत ईराज
कयाने ऩय बी राब प्राद्ऱ नहीॊ होयहा हो, तो ऩूणा त्रवद्वास
सं भॊि का जाऩ कयने से मा जानकाय व्मत्रि से जाऩ
कयवाने से धीये -धीये योगी को योग से छुटकाया सभरता हं ।

मा भूसता स्थासद्ऱ कयं

फपय षोडशोऩचाय मा ऩॊचोऩचाय से

बगवान गजानन का ऩूजन कय प्रथभ फदन सॊकल्ऩ कयं ।
इसके फाद बगवान ग्णेशका एकाग्रसचत्त से ध्मान कयं ।
नैवेद्य भं मफद सॊबव होतो फूॊफद मा फेसन के रड्डू का
बोग रगामे नहीॊ तो गुड का बोग रगामे। साधक को

ॐ अन्तरयऺाम स्वाहा।

गणेशजी के सचि मा भूसता के सम्भुख शुद्ध घी का दीऩक

रगते हं ।

फक प्रासद्ऱ होती हं । मफद एक फदन भं १०८ भारा सॊबव न

गॊ गणऩत्मे ऩुि वयदाम नभ्।

सकता हं । भॊि जाऩ कयने भं मफद आऩ असभथा

इस भॊि के जाऩ से भनोकाभना ऩूसता के अवसय प्राद्ऱ होने

जराए।

योज १०८ भारा का जाऩ कय ने से शीघ्र पर

हो तो ५४, २७,१८ मा ९ भाराओॊ का बी जाऩ फकमा जा

इस भॊि के जाऩ से उत्तभ सॊतान फक प्रासद्ऱ होती हं ।

ॐ वय वयदाम त्रवजम गणऩतमे नभ्।

हो, तो फकसी ब्राह्मण को उसचत दस्ऺणा दे कय
उनसे

जाऩ

कयवामा

जा

सकता

हं ।

इस भॊि के जाऩ से भुकदभे भं सपरता प्राद्ऱ होती हं ।

बाग्म रक्ष्भी फदब्फी
सुख-शास्न्त-सभृत्रद्ध की प्रासद्ऱ के सरमे बाग्म रक्ष्भी फदब्फी :- स्जस्से धन प्रसद्ऱ, त्रववाह मोग,
व्माऩाय वृत्रद्ध, वशीकयण, कोटा कचेयी के कामा, बूतप्रेत फाधा, भायण, सम्भोहन, तास्न्िक
फाधा, शिु बम, चोय बम जेसी अनेक ऩये शासनमो से यऺा होसत है औय घय भे सुख सभृत्रद्ध
फक प्रासद्ऱ होसत है , बाग्म रक्ष्भी फदब्फी भे रघु श्री फ़र, हस्तजोडी (हाथा जोडी), ससमाय
ससन्गी, त्रफस्ल्र नार, शॊख, कारी-सफ़ेद-रार गुॊजा, इन्द्र जार, भाम जार, ऩातार तुभडी
जेसी अनेक दर
ा साभग्री होती है ।
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गणेश ऩूजन से ग्रहऩीडा दयू होती हं ।
गणऩसत सभस्त रोकंभं सवा प्रथभ ऩूजेजाने वारे
एकभाि दे वाता हं । गणेश सभस्त गण के गणाध्मऺक
होने के कायणा गणऩसत नाभ से बी जाने जाते हं ।
एवॊ

सुखो

फक

प्रासद्ऱ

एवॊ

अऩनी

व्मत्रि भं नेतत्ृ व कयने फक त्रवरऺण शत्रि का त्रवकास होता हं ।
बाई के सुख भं वृत्रद्ध होती हं ।
गणेशजी फुत्रद्ध औय त्रववेक के असधऩसत स्वासभ

भनुष्म को जीवन भं सभस्त प्रकाय फक रयत्रद्धससत्रद्ध

 सचॊतन जोशी

फुध ग्रह के असधऩसत दे व हं । अत: त्रवद्या-फुत्रद्ध प्रासद्ऱ के

सम्स्त

सरए गणेश जी की आयाधना अत्मॊत परदामी ससद्धो होती

आध्मास्त्भक-बौसतक इच्छाओॊ फक ऩूसता हे तु गणेश जी फक

हं । गणेशजी के ऩूजन से वाकशत्रि औय तकाशत्रि भं वृत्रद्ध

ऩूजा-अचाना एवॊ आयाधना अवश्म कयनी चाफहमे।

होती हं । फहन के सुख भं वृत्रद्ध होती हं ।

गणेशजी का ऩूजन अनाफदकार से चरा आ यहा हं ,

बगवान गणेश फृहस्ऩसत(गुरु) के सभान उदाय,

इसके असतरयि ज्मोसतष शास्त्रं के अनुशाय ग्रह

ऻानी एवॊ फुत्रद्ध कौशर भं सनऩूणा हं । गणेशजी का ऩूजन-

ऩीडा दयू कयने हे तु बगवान गणेश फक ऩूजा-अचाना कयने

अचान कयने से फृहस्ऩसत(गुरु) से सॊफॊसधत ऩीडा दयू होती

पर

व्मत्रि के धन औय सॊऩत्रत्त भं वृत्रद्ध होती हं । ऩसत के सुख

से

सभस्त ग्रहो के अशुब प्रबाव दयू होते हं एवॊ शुब
फक

प्रासद्ऱ

होती हं ।

इस

सरमे

गणेश

ऩूजाका

अत्मासधक भहत्व हं ।

वक्रतुण्ड भहाकाम सूमक
ा ोफट सभप्रब्।

सनत्रवघ्ना नॊ कुरू भे दे व सवा कामेषु सवादा।।

बगवान गणेश सूमा तेज के सभान तेजस्वी हं ।
गणेशजी का ऩूजन-अचान कयने से सूमा के प्रसतकूर प्रबाव का
शभन होकय व्मत्रि के तेज-भान-सम्भान भं वृत्रद्ध होती हं ,
उसका मश चायं औय फढता हं । त्रऩता के सुख भं वृत्रद्ध होकय
व्मत्रि का आध्मास्त्भक ऻान फढता हं ।
बगवान गणेश चॊद्र के सभान शाॊसत एवॊ शीतरता के
प्रसतक हं । गणेशजी का ऩूजन-अचान कयने से चॊद्र के प्रसतकूर
प्रबाव का नाश होकय व्मत्रि को भानससक शाॊसत प्राद्ऱ होती हं ।
चॊद्र भाता का कायक ग्रह हं इस सरमे गणेशजी के ऩूजन से
भातृसुख भं वृत्रद्ध होती हं ।
बगवान गणेश भॊगर के सभान सशत्रिशारी एवॊ
फरशारी हं । गणेशजी का ऩूजन-अचान कयने से भॊगर के
अशुब प्रबाव दयू होते हं औय व्मत्रि फक फर-शत्रि भं वृत्रद्ध
होती हं । गणेशजी के ऩूजन से ऋण भुत्रि सभरती हं । व्मत्रि
के साहस, फर, ऩद औय प्रसतद्षा भं वृत्रद्ध होती हं स्जस कायण

हं औय व्मत्रि कं आध्मास्त्भक ऻान का त्रवकास होता हं ।
भं वृत्रद्ध होती हं । बगवान गणेश धन, ऐद्वमा एवॊ सॊतान
प्रदान कयने वारे शुक्र के असधऩसत हं । गणेशजी का ऩूजन
कयने से शुक्र के अशुब प्रबाव का शभन होता हं । व्मत्रि
को सभस्त बौसतक सुख साधन भं वृत्रद्ध होकय व्मत्रि के
सौन्दमा भं वृत्रद्ध होती हं । ऩसत के सुख भं वृत्रद्ध होती हं ।

बगवान गणेश सशव के ऩुि हं । बगवान सशव शसन
के गुरु हं । गणेशजी का ऩूजन कयने से शसन से सॊफॊसधत
ऩीडा दयू होती हं । बगवान गणेश हाथी के भुख एवॊ ऩुरुष
शयीय मुि होने से याहू व केतू के बी असधऩसत दे व हं ।

गणेशजी का ऩूजन कयने से याहू व केतू से सॊफॊसधत ऩीडा
दयू होती हं । इससरमे नवग्रह फक शाॊसत भाि बगवान
गणेश के स्भयण से ही हो जाती हं । इसभं कोई सॊदेह

नहीॊ हं । बगवान गणेश भं ऩूणा श्रद्धा एवॊ त्रवद्वास फक
आवश्मिा हं । बगवान गणेश का ऩूजन अचान कयने से
भनुष्म का जीवन सभस्त सुखो से बय जाता है । जन्भ
कुॊडरी भं चाहं होई बी ग्रह अस्त हो मा नीच हो अथवा
ऩीफडत हो तो बगवान गणेश फक आयाधना से सबी ग्रहो
के अशुब प्रबाव दयू होता हं एवॊ शुब परो फक प्रासद्ऱ
होती हं ।

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ससतम्फय 2012

गणेश चतुथॉ ऩय चॊद्र दशान सनषेध क्मं...

 सचॊतन जोशी
गणेश चतुथॉ ऩय चॊद्र दशान सनषेध होने फक ऩौयास्णक भान्मता हं ।
शास्त्रंि वचन के अनुशाय जो व्मत्रि

इस फदन चॊद्रभा को जाने-

अन्जाने दे ख रेता हं उसे सभथ्मा करॊक रगता हं । उस ऩय झूठा
आयोऩ रगता हं ।

कथा

एक फाय जयासन्ध के बम से बगवान कृ ष्ण

सभुद्र के फीच नगय फनाकय वहाॊ यहने रगे। बगवान
कृ ष्ण ने स्जस नगय भं सनवास फकमा था वह स्थान आज
द्रारयका के नाभ से जाना जाता हं ।
उस सभम द्रारयका ऩुयी के सनवासी से प्रसन्न

होकय सूमा बगवान ने सिजीत मादव नाभक व्मत्रि
अऩनी स्मभन्तक भस्ण वारी भारा अऩने गरे से उतायकय
दे दी।
मह भस्ण प्रसतफदन आठ सेय सोना प्रदान कयती थी। भस्ण ऩातेही
सिजीत मादव सभृद्ध हो गमा। बगवान श्री कृ ष्ण को जफ मह फात
ऩता चरी तो उन्हंने सिजीत
से स्मभन्तक भस्ण ऩाने

की इच्छा व्मि की। रेफकन सिजीत ने भस्ण श्री कृ ष्ण को न दे कय अऩने बाई

प्रसेनजीत को दे दी। एक फदन प्रसेनजीत सशकाय ऩय गमा जहाॊ एक शेय ने प्रसेनजीत को भायकय भस्ण रे री। मही
यीछं के याजा औय याभामण कार के जाभवॊत ने शेय को भायकय भस्ण ऩय कब्जा कय सरमा था।
कई फदनं तक प्रसेनजीत सशकाय से घय न रौटा तो सिजीत को सचॊता हुई औय उसने सोचा फक श्रीकृ ष्ण ने ही

भस्ण ऩाने के सरए प्रसेनजीत की हत्मा कय दी। इस प्रकाय सिजीत ने ऩुख्ता सफूत जुटाए त्रफना ही सभथ्मा प्रचाय कय
फदमा फक श्री कृ ष्ण ने प्रसेनजीत की हत्मा कयवा दी हं । इस रोकसनॊदा से आहत होकय औय इसके सनवायण के सरए
श्रीकृ ष्ण कई फदनं तक एक वन से दस
ू ये वन बटक कय प्रसेनजीत को खोजते यहे औय वहाॊ उन्हं शेय द्राया प्रसेनजीत
को भाय डारने औय यीछ द्राया भस्ण रे जाने के सचि सभर गए। इन्हीॊ सचिं के आधाय ऩय श्री कृ ष्ण जाभवॊत की गुपा

भं जा ऩहुॊचे जहाॊ जाभवॊत की ऩुिी भस्ण से खेर यही थी। उधय जाभवॊत श्री कृ ष्ण से भस्ण नहीॊ दे ने हे तु मुद्ध के सरए

तैमाय हो गमा। सात फदन तक जफ श्री कृ ष्ण गुपा से फाहय नहीॊ आए तो उनके सॊगी साथी उन्हं भया हुआ जानकाय
त्रवराऩ कयते हुए द्रारयका रौट गए। २१ फदनं तक गुपा भं मुद्ध चरता यहा औय कोई बी झुकने को तैमाय नहीॊ था। तफ
जाभवॊत को बान हुआ फक कहीॊ मे वह अवताय तो नहीॊ स्जनके दशान के सरए भुझे श्री याभचॊद्र जी से वयदान सभरा था।

तफ जाभवॊत ने अऩनी ऩुिी का त्रववाह श्री कृ ष्ण के साथ कय फदमा औय भस्ण दहे ज भं श्री कृ ष्ण को दे दी। उधय कृ ष्ण

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ससतम्फय 2012

जफ भस्ण रेकय रौटे तो उन्हंने सिजीत को भस्ण वाऩस कय दी। सिजीत अऩने फकए ऩय रस्ज्जत हुआ औय अऩनी
ऩुिी सत्मबाभा का त्रववाह श्री कृ ष्ण के साथ कय फदमा।

कुछ ही सभम फाद अक्रूय के कहने ऩय ऋतु वभाा ने सिजीत को भायकय भस्ण छीन री। श्री कृ ष्ण अऩने फिे
बाई फरयाभ के साथ उनसे मुद्ध कयने ऩहुॊचे। मुद्ध भं जीत हाससर होने वारी थी फक ऋतु वभाा ने भस्ण अक्रूय को दे दी

औय बाग सनकरा। श्री कृ ष्ण ने मुद्ध तो जीत सरमा रेफकन भस्ण हाससर नहीॊ कय सके। जफ फरयाभ ने उनसे भस्ण के
फाये भं ऩूछा तो उन्हंने कहा फक भस्ण उनके ऩास नहीॊ। ऐसे भं फरयाभ स्खन्न होकय द्रारयका जाने की फजाम इॊ द्रप्रस्थ
रौट गए। उधय द्रारयका भं फपय चचाा पैर गई फक श्री कृ ष्ण ने भस्ण के भोह भं बाई का बी सतयस्काय कय फदमा। भस्ण
के चरते झूठे राॊछनं से दख
ु ी होकय श्री कृ ष्ण सोचने रगे फक ऐसा क्मं हो यहा है । तफ नायद जी आए औय उन्हंने
कहा फक हे कृ ष्ण तुभने बाद्रऩद भं शुक्र चतुथॉ की यात को चॊद्रभा के दशान फकमेथे औय इसी कायण आऩको सभथ्मा
करॊक झेरना ऩि यहा हं ।
श्रीकृ ष्ण चॊद्रभा के दशान फक फात त्रवस्ताय ऩूछने ऩय नायदजी ने श्रीकृ ष्ण को करॊक वारी मह कथा फताई थी।
एक फाय बगवान श्रीगणेश ब्रह्मरोक से होते हुए रौट यहे थे फक चॊद्रभा को गणेशजी का स्थूर शयीय औय गजभुख
दे खकय हॊ सी आ गई। गणेश जी को मह अऩभान सहन नहीॊ हुआ। उन्हंने चॊद्रभा को शाऩ दे ते हुए कहा, 'ऩाऩी तूने भेया

भजाक उिामा हं । आज भं तुझे शाऩ दे ता हूॊ फक जो बी तेया भुख दे खेगा, वह करॊफकत हो जामेगा।
गणेशजी शाऩ सुनकय चॊद्रभा फहुत दख
ु ी हुए। गणेशजी शाऩ के शाऩ वारी फाज चॊद्रभा ने सभस्त दे वताओॊ को सोनाई
तो सबी दे वताओॊ को सचॊता हुई। औय त्रवचाय त्रवभशा कयने रगे फक चॊद्रभा ही यािी कार भं ऩृथ्वी का आबूषण हं औय

इसे दे खे त्रफना ऩृथ्वी ऩय यािी का कोई काभ ऩूया नहीॊ हो सकता। चॊद्रभा को साथ रेकय सबी दे वता ब्रह्माजी के ऩास
ऩहुचं। दे वताओॊ ने ब्रह्माजी को सायी घटना त्रवस्ताय से सुनाई उनकी फातं सुनकय ब्रह्माजी फोरे, चॊद्रभा तुभने सबी गणं
के अयाध्म दे व सशव-ऩावाती के ऩुि गणेश का अऩभान फकमा हं । मफद तुभ गणेश के शाऩ से भुि होना चाहते हो तो

श्रीगणेशजी का व्रत यखो। वे दमारु हं , तुम्हं भाप कय दं गे। चॊद्रभा गणेशजी को प्रशन्न कयने के सरमे कठोय व्रततऩस्मा कयने रगे। बगवान गणेश चॊद्रभा की कठोय तऩस्मा से प्रसन्न हुए औय कहा वषाबय भं केवर एक फदन बाद्रऩद
भं शुक्र चतुथॉ की यात को जो तुम्हं दे खेगा, उसे ही कोई सभथ्मा करॊक रगेगा। फाकी फदन कुछ नहीॊ होगा। ’ केवर
एक ही फदन करॊक रगने की फात सुनकय चॊद्रभा सभेत सबी दे वताओॊ ने याहत की साॊस री। तफ से बाद्रऩद भं शुक्र
चतुथॉ की यात को चॊद्रभा के दशान का सनषेध हं ।

सशऺा से सॊफॊसधत सभस्मा
क्मा आऩके रडके-रडकी की ऩढाई भं अनावश्मक रूऩ से फाधा-त्रवघ्नन मा रुकावटे हो यही हं ? फच्चो को
अऩने ऩूणा ऩरयश्रभ एवॊ भेहनत का उसचत पर नहीॊ सभर यहा? अऩने रडके-रडकी की कॊु डरी का

त्रवस्तृत अध्ममन अवश्म कयवारे औय उनके त्रवद्या अध्ममन भं आनेवारी रुकावट एवॊ दोषो के कायण
एवॊ उन दोषं के सनवायण के उऩामो के फाय भं त्रवस्ताय से जनकायी प्राद्ऱ कयं ।
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ससतम्फय 2012

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गणेश चतुथॉ ज्मोसतष की नजय भं
गणऩसत सभस्त रोकंभं सवा प्रथभ ऩूजेजाने वारे
एकभाि दे वाता हं । गणेश सभस्त गण के गणाध्मऺक
होने के कायणा गणऩसत नाभ से बी जाने जाते हं ।
एवॊ

सुखो

फक

प्रासद्ऱ

एवॊ

अऩनी

बाई के सुख भं वृत्रद्ध होती हं ।
गणेशजी फुत्रद्ध औय त्रववेक के असधऩसत स्वासभ

भनुष्म को जीवन भं सभस्त प्रकाय फक रयत्रद्धससत्रद्ध

व्मत्रि भं नेतत्ृ व कयने फक त्रवरऺण शत्रि का त्रवकास होता हं ।

फुध ग्रह के असधऩसत दे व हं । अत: त्रवद्या-फुत्रद्ध प्रासद्ऱ के

सम्स्त

सरए गणेश जी की आयाधना अत्मॊत परदामी ससद्धो होती

आध्मास्त्भक-बौसतक इच्छाओॊ फक ऩूसता हे तु गणेश जी फक

हं । गणेशजी के ऩूजन से वाकशत्रि औय तकाशत्रि भं वृत्रद्ध

ऩूजा-अचाना एवॊ आयाधना अवश्म कयनी चाफहमे।

होती हं । फहन के सुख भं वृत्रद्ध होती हं ।

गणेशजी का ऩूजन अनाफदकार से चरा आ यहा हं ,

बगवान गणेश फृहस्ऩसत(गुरु) के सभान उदाय,

इसके असतरयि ज्मोसतष शास्त्रं के अनुशाय ग्रह

ऻानी एवॊ फुत्रद्ध कौशर भं सनऩूणा हं । गणेशजी का ऩूजन-

ऩीडा दयू कयने हे तु बगवान गणेश फक ऩूजा-अचाना कयने

अचान कयने से फृहस्ऩसत(गुरु) से सॊफॊसधत ऩीडा दयू होती

पर

व्मत्रि के धन औय सॊऩत्रत्त भं वृत्रद्ध होती हं । ऩसत के सुख

से

सभस्त ग्रहो के अशुब प्रबाव दयू होते हं एवॊ शुब
फक

प्रासद्ऱ

होती हं ।

इस

सरमे

गणेश

ऩूजाका

अत्मासधक भहत्व हं ।

वक्रतुण्ड भहाकाम सूमक
ा ोफट सभप्रब्।

सनत्रवघ्ना नॊ कुरू भे दे व सवा कामेषु सवादा।।
बगवान गणेश सूमा तेज के सभान तेजस्वी हं ।
गणेशजी का ऩूजन-अचान कयने से सूमा के प्रसतकूर प्रबाव का
शभन होकय व्मत्रि के तेज-भान-सम्भान भं वृत्रद्ध होती हं ,
उसका मश चायं औय फढता हं । त्रऩता के सुख भं वृत्रद्ध होकय
व्मत्रि का आध्मास्त्भक ऻान फढता हं ।
बगवान गणेश चॊद्र के सभान शाॊसत एवॊ शीतरता के
प्रसतक हं । गणेशजी का ऩूजन-अचान कयने से चॊद्र के प्रसतकूर
प्रबाव का नाश होकय व्मत्रि को भानससक शाॊसत प्राद्ऱ होती हं ।
चॊद्र भाता का कायक ग्रह हं इस सरमे गणेशजी के ऩूजन से
भातृसुख भं वृत्रद्ध होती हं ।
बगवान गणेश भॊगर के सभान सशत्रिशारी एवॊ
फरशारी हं । गणेशजी का ऩूजन-अचान कयने से भॊगर के
अशुब प्रबाव दयू होते हं औय व्मत्रि फक फर-शत्रि भं वृत्रद्ध
होती हं । गणेशजी के ऩूजन से ऋण भुत्रि सभरती हं । व्मत्रि
के साहस, फर, ऩद औय प्रसतद्षा भं वृत्रद्ध होती हं स्जस कायण

हं औय व्मत्रि कं आध्मास्त्भक ऻान का त्रवकास होता हं ।
भं वृत्रद्ध होती हं ।
बगवान गणेश धन, ऐद्वमा एवॊ सॊतान प्रदान कयने
वारे शुक्र के असधऩसत हं । गणेशजी का ऩूजन कयने से
शुक्र के अशुब प्रबाव का शभन होता हं । व्मत्रि को
सभस्त बौसतक सुख साधन भं वृत्रद्ध होकय व्मत्रि के
सौन्दमा भं वृत्रद्ध होती हं । ऩसत के सुख भं वृत्रद्ध होती हं ।

बगवान गणेश सशव के ऩुि हं । बगवान सशव शसन
के गुरु हं । गणेशजी का ऩूजन कयने से शसन से सॊफॊसधत
ऩीडा दयू होती हं । बगवान गणेश हाथी के भुख एवॊ ऩुरुष
शयीय मुि होने से याहू व केतू के बी असधऩसत दे व हं ।

गणेशजी का ऩूजन कयने से याहू व केतू से सॊफॊसधत ऩीडा
दयू होती हं । इससरमे नवग्रह फक शाॊसत भाि बगवान
गणेश के स्भयण से ही हो जाती हं । इसभं कोई सॊदेह

नहीॊ हं । बगवान गणेश भं ऩूणा श्रद्धा एवॊ त्रवद्वास फक
आवश्मिा हं । बगवान गणेश का ऩूजन अचान कयने से
भनुष्म का जीवन सभस्त सुखो से बय जाता है ।
जन्भ कुॊडरी भं चाहं होई बी ग्रह अस्त हो मा
नीच हो अथवा ऩीफडत हो तो बगवान गणेश फक
आयाधना से सबी ग्रहो के अशुब प्रबाव दयू होता हं एवॊ
शुब परो फक प्रासद्ऱ होती हं ।

ससतम्फय 2012

27

जफ गणेशजी ने धायण फकमा ज्मोसतषी का रुऩ

 सचॊतन जोशी
फहन्द ु धभा भं सवाप्रथन ऩूजनीम बगवान गणेश ने

एक शता है फक जफ तक ऩृथ्वी ऩय भेया शासन यहे गा,

एक फाय ज्मोसतषी का रुऩ धायण कय सरमा। हराॊफक हभ

तफ तक सबी दे वता केवर स्वगा रोक भं ही सनवास

बगवान गणेश के त्रवसबन्न रुऩं से ऩरयसचत हं , रेफकन

कयं गे। वे ऩृथ्वी ऩय नहीॊ आएॉगे।

उनके ज्मोसतषीम रुऩ से कभ ही रोग ऩरयसचत हंगे!

कहा। अस्ग्न, सूम,ा इन्द्र इत्माफद सबी दे वता ऩृथ्वी से

त्रवद्रानं का कथन हं की बगवान गणेश ज्मोसतषी रुऩ

अॊतध्माान हो गमे तो रयऩुञ्जम ने प्रजा के कल्माण हुते

ब्रह्मा जी की सृत्रद्श सॊचारन भं सहामता हे तु धायण फकमा
था।

ऩौयास्णक कथा के अनुशाय एकफाय एक फाय याजा
रयऩुञ्जम ने कफठन साधना से भन तथा इस्न्द्रमं को
अऩने वश भं कय सरमा। याजा रयऩुञ्जम की साधना से
सन्तुद्श होकय ब्रह्मा जी ने उन्हं सम्ऩूणा बूरोक ऩय

ब्रह्मा जी ने तथास्तु

उन सफ दे वताओॊ का रूऩ धायण कय सरमा।

रयऩुञ्जम को दे वताओॊ का रुऩ धायण फकमे हुवे

दे खकय सबी दे वता फहुत क्रोसधत हो गमे। याजा रयऩुञ्जम
के सभस्त ऩृथ्वी ऩय शासन कयने के कायण वह फदवोदास

के नाभ से प्रससद्ध हुए। रयऩुञ्जम ने काशी को अऩनी
याजधानी फनामा। उनके शासन भं अऩयाध का कहीॊ

प्रजाऩारन औय नागयाज वासुफक की कन्मा के साथ

नाभो-सनशान नहीॊ था। असुय बी भनुष्म के वेश भं आकय

त्रववाह का आसशवााद फदमा।

याजा की सेवा भं उऩस्स्थत हो जाते थे। सवाि धभा की

ब्रह्मा जी की आऻा को सुनकय रयऩुञ्जम ने कहा,

प्रधानता थी।

भं आऩका मह आसशवााद स्वीकाय कयता हूॉ, रेफकन भेयी

द्रादश भहा मॊि
मॊि को असत प्रासचन एवॊ दर
ा मॊिो के सॊकरन से हभाये वषो के अनुसॊधान द्राया फनामा गमा हं ।
ु ब

 ऩयभ दर
ा वशीकयण मॊि,
ु ब

 सहस्त्राऺी रक्ष्भी आफद्ध मॊि

 बाग्मोदम मॊि

 आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ मॊि

 भनोवाॊसछत कामा ससत्रद्ध मॊि

 ऩूणा ऩौरुष प्रासद्ऱ काभदे व मॊि

 याज्म फाधा सनवृत्रत्त मॊि

 योग सनवृत्रत्त मॊि

 गृहस्थ सुख मॊि

 साधना ससत्रद्ध मॊि

 शीघ्र त्रववाह सॊऩन्न गौयी अनॊग मॊि

 शिु दभन मॊि

उऩयोि सबी मॊिो को द्रादश भहा मॊि के रुऩ भं शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से भॊि ससद्ध ऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत एवॊ चैतन्म मुि फकमे
जाते हं । स्जसे स्थाऩीत कय त्रफना फकसी ऩूजा अचाना-त्रवसध त्रवधान त्रवशेष राब प्राद्ऱ कय सकते हं ।

GURUTVA KARYALAY

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ससतम्फय 2012

28
दस
ु यी तयप दे वरोक भं, ऩृथ्वी ऩय अऩना आवास छूटने
के कायण सभस्त दे वता औय बगवान सशव अत्मसधक

द्ु खी थे। सबी इसी उरझन भे थे की फकसी तयह याजा

बगवान गणेश ने सम्ऩूणा काशी नगयी को अऩने
वश भं कय सरमा। याजा रयऩुञ्जम से दयू यहकय बी

बगवान गणेश ने उनके सचत्त को याज-काज से त्रवयि कय

रयऩुञ्जम के याज भं कभी ढू ॉ ढ़कय उन्हं बूरोक के याज से

फदमा। १८वं फदन बगवान त्रवष्णु ने ब्राह्मण का वेश धायण

हटामा जाम। इसी प्रमास भं दे वताओॊ ने रयऩुञ्जम के

कयके अऩना नाभ ऩुण्मकीता, गरुि का नाभ त्रवनमकीता

याजकाज भं कई प्रकाय के त्रवघ्नन उऩस्स्थत फकए, रेफकन

तथा रक्ष्भी का नाभ गोभोऺ प्रससद्ध फकमा। वे स्वमॊ गुरु

कोई बी त्रवध्न-फाधा रयऩुञ्जम के साभने फटक नहीॊ ऩामी।

रूऩ भं तथा उन दोनं को चेरं के रूऩ भं रेकय काशी

रयऩुञ्जम को ऩथभ्रद्श कयने के सरए बगवान सशव ने

ऩहुॊचे।

काशी बेजा। इस प्रकाय क्रभश् कई दे वता ऩृथ्वी ऩय आते

स्भयण कयके उसने ऩुण्मकीता का स्वागत कयके उऩदे श

गए औय एक-एक कय सबी महीॊ सनवास कयने रगे।

सुना। ऩुण्मकीता ने फहन्द ू धभा का खॊडन कयके फौद्ध धभा

क्रभश: ६४ मोसगसनमं, सूम,ा ब्रह्मा, सशव गण आफद को

तफ बगवान सशव ने अऩने ऩुि श्रीगणेश को काशी

रयऩुञ्जम को सभाचाय सभरा तो गणेश जी की फात को

का भॊडन फकमा। प्रजा सफहत याजा रयऩुञ्जम फौद्ध धभा का

जाने के सरमे आदे श फदमा। बगवान श्रीगणेश ने काशी भं

ऩारन कयके अऩने धभा से ऩथभ्रद्श हो गमा। ऩुण्मकीता ने

आऩना आवास एक भस्न्दय भं फनामा तथा वे स्वमॊ एक

याजा रयऩुञ्जम से कहा फक सात फदन उऩयाॊत उसे

वृद्ध ब्राह्मण का वेश धायण कय काशी भं यहने रगे। काशी

सशवरोक चरे जाना चाफहए। उससे ऩूवा सशवसरॊग की

भं धीये -धीये रोग बगवान श्रीगणेश के ऩास अऩना

स्थाऩना बी आवश्मक है । श्रद्धारु याजा ने उसके कथन

बत्रवष्म जानने के सरमे आने रगे। धीये -धीये उनकी कीसता

अनुसाय फदवोदासेद्वय सरॊग की स्थाऩना एवॊ त्रवसध-ऩूवक

तथा प्रससत्रद्ध याजा रयऩुञ्जम तक ऩहूॉची तो उन्हंने वृद्ध

ऩूजा-अचाना कयवाई। गरुि त्रवष्णु जी के सॊदेशस्वरूऩ

वृद्ध ज्मोसतषी के आने ऩय रयऩुञ्जम ने उनका

गमे। तदऩ
ु याॊत रयऩुञ्जम ने सशवरोक प्राद्ऱ फकमा तथा

ज्मोसतषी को अऩने महाॉ आभॊत्रित फकमा।

त्रवशेष आदय सत्काय फकमा औय सनवेदन फकमा फक, इस

सभस्त घटना का त्रवस्तृत वणान कयने सशव के सम्भुख
दे वतागण काशी भं अॊश रूऩ से यहने के ऩुन: असधकायी

सभम भेया भन बौसतक ऩदाथं एवॊ सबी कभं से दयू हो

फन गमे। त्रवद्रानं का कथन हं की गणेश जी के ज्मोसतषी

यहा है । इससरए आऩ अच्छी तयह गणना कय भेये बत्रवष्म

रुऩ धायण कयने से ऩूवा सबी दे वताओॊ के प्रमास सनष्पर

का वणान कीस्जए। तफ उन वृद्ध ज्मोसतषी ने रयऩुञ्जम से

हुवे थे। इस सरए मह गणेशजी के ज्मोसतषी रुऩ का ही

कहा फक, “आज से १८वं फदन उत्तय फदशा की ओय से एक

चभत्काय था की याजा रयऩुञ्जम ने गणेश जी की फात

तेजस्वी ब्राह्मण का आगभन होगा औय वे ही तुम्हं उऩदे श

ऩय त्रवद्वास कय ब्राह्मण रुऩ धायी त्रवष्णु जी की फात ऩय

दे कय तुम्हाया बत्रवष्म सनस्द्ळत कयं गे।

त्रवद्वास फकमा औय उनके कहे अनुशाय कामा सॊऩन्न फकमा।

धन वृत्रद्ध फडब्फी
धन वृत्रद्ध फडब्फी को अऩनी अरभायी, कैश फोक्स, ऩूजा स्थान भं यखने से धन वृत्रद्ध होती हं स्जसभं कारी हल्दी,
रार- ऩीरा-सपेद रक्ष्भी कायक हकीक (अकीक), रक्ष्भी कायक स्पफटक यत्न, 3 ऩीरी कौडी, 3 सपेद कौडी, गोभती
चक्र, सपेद गुॊजा, यि गुॊजा, कारी गुॊजा, इॊ द्र जार, भामा जार, इत्मादी दर
ा वस्तुओॊ को शुब भहुता भं तेजस्वी
ु ब
भॊि द्राया असबभॊत्रित फकम जाता हं ।

भूल्म भाि Rs-730

ससतम्फय 2012

29

वषा की त्रवसबन्न चतुथॉ व्रत का भहत्व

 सचॊतन जोशी
श्रावण कृ ष्ण चतुथॉ

श्रावण शुक्र चतुथॉ

सॊकद्शचतुथॉ व्रत

दव
ू ाा गणऩसत व्रत

ऩौयास्णक ग्रॊथ बत्रवष्मोत्तय के अनुशाय सॊकद्शचतुथॉ
व्रत प्रत्मेक भासकी कृ ष्ण चतुथॉ को फकमा जाता है । मफद
चतुथॉ दो फदन चन्द्रोदमव्मात्रऩनी हो मा दोनं फदन न हो
तो भातृत्रवद्धा प्रशस्मते के अनुसाय ऩहरे फदन व्रत कयना
चाफहमे।
व्रतधायी को चाफहमे फक वह प्रात्स्त्रानाफदके ऩद्ळात ्
व्रत कयनेका सॊकल्ऩ कयके फदनबय मथा सॊबव भौन यहे
औय सामॊकारभं ऩुन्स्त्रान कयके रार वस्त्र धायणकय

ऩौयास्णक ग्रॊथ सौयऩुयाण के अनुशाय मह व्रत
श्रावण शुक्र चतुथॉ को फकमा जाता है । गणेश जी के
ऩूजन हे तु इसभं भध्मािव्मात्रऩनी चतुथॉ री जाती है ।
मफद चतुथॉ दो फदन हो मा दोनं फदन न हो तो भातृत्रवद्धा
प्रशस्मते के अनुसाय ऩूवत्रा वद्धा व्रत कयना चाफहमे।
चतुथॉ फदन प्रात्स्त्रानाफद कयके सुवणाके गणेशजी
फनवावे

जो

एकदन्त,

चतुबज
ूा ,

गजानन

औय

स्वणा

ससॊहासन ऩय त्रवयाजभान हं।
इसके असतरयि सोनेकी दव
ू ाा बी फनवावे। फपय

ऋतुकार भं उऩरब्ध गन्ध ऩुष्ऩाफद से गणेशजीका ऩूजन

सवातोबद्र फनाकय भण्डरऩय करश की स्थाऩन कयके

कये ,(शास्रोि भत से गणेश ऩूजन भं तुरसी ऩि वस्जात हं )

उसभं स्वणाभम दव
ू ाा रगाकय उसऩय उि गणेशजीका

उसके फाद चन्द्रोदम होने ऩय चन्द्रभा का ऩूजन
कये औय अघ्नमा से ऩूजन कय स्वमॊ बोजन कये तो
व्रतधायी को सुख, सौबाग्म औय सम्ऩत्रत्तकी प्रासद्ऱ होती है ।

स्थाऩन कये ।

गणेश जी को यिवस्त्राफदसे त्रवबूत्रषत कये औय
अनेक प्रकायके सुगास्न्धत ऩि, ऩुष्ऩाफद अऩाण कय के
ऩूजन कये । फेरऩि, अऩाभागा, शभीऩि, दफ
ू आदी अऩाण
कयं । (शास्रोि भत से गणेश ऩूजन भं तुरसी ऩि वस्जात हं )।

सॊकद्शचतुथॉ की व्रत कथा:

स्तोि,

ऩौयास्णक कथा के अनुशाय सत्ममुग भं याजा
मुवनाद्व के ऩास सम्ऩूणा शास्त्रं के ऻाता ब्रह्मशभाा नाभक
ब्राह्मण थे, स्जनके सात ऩुि औय सात ऩुिवधुएॉ थीॊ।
ब्रह्मशभाा जफ वृद्ध हुए, तफ फिी छ् फहुओॊकी अऩेऺा छोटी
फहूने द्वशुयकी असधक सेवा की। तफ उन्हंने सॊतद्श
ु होकय
ऩुिवधु

से

चतुथॉका

व्रत

कयवामा,

स्तवन

आफद

का

त्रवसधवत

उच्चायण कय के गणेश जी की ऩरयक्रभा कय अऩयाधं के
सरए गणेद्वय गणाध्मऺ गौयीऩुि गजानन। व्रतॊ सम्ऩूणााताॊ
मातु त्वत्प्रसादाफदबानन ॥ का उच्चायण कयते हुवे ऺभामाचना प्राथाना कयं । इस प्रकाय तीन मा ऩाॉच वषा तक
व्रत ऩारन से सभस्त भनोकाभनाएॉ ऩूयी होती हं ।
इस

व्रत

को

कयने

वारे

भनुष्म

की

सॊऩूणा

स्जसके

काभनाएॉ ऩूयी होती हं औय अन्त भं उसे गणेशजी का ऩद

प्रबावसे वह भयणऩमान्त सफ प्रकायके सुख साधनंसे

प्राद्ऱ हो जाता है । त्रवद्रानो का कथ हं की िैरोक्म भं

सॊमुि यही।

सॊकद्शहय

आयती,

इसके सभान अन्म कोई व्रत नहीॊ है ।

ससतम्फय 2012

30

असधक भास की गणेश चतुथॉ
व्मासजी के कथनानुशाय असधक भास भं चतुथॉ
की गणेद्वयके नाभ से ऩूजा कयनी चाफहए। ऩूजन हे तु

अऩने भुखायत्रवन्द से इस सतसथ का भाहत्म फढाते हुवे
कहा है फक इस चतुथॉ व्रत का सनरूऩण एवॊ भाहात्म्म की
सॊऩूणा भफहभा वखानना शक्म नहीॊ।

षोडशोऩचाय की त्रवसध उत्तभ होती है ।

चतुथॉ व्रत के राब:
हय भहीने गणेश जी की प्रसन्नता के सनसभत्त व्रत
कयं । इसके प्रबाव से त्रवद्याथॉ को त्रवद्या, धनाथॉ को धन
प्रासद्ऱ एवॊ कुभायी कन्मा को सुशीर वय की प्रासद्ऱ होती है
औय वह सौबाग्मवती यहकय दीघाकार तक ऩसत का
सुखबोग कयती है । त्रवधवा द्राया व्रत कयने ऩय अगरे
जन्भ भं वह सधवा होती हं एवॊ ऐद्वमा-शासरनी फन कय
ऩुि-ऩौिाफद का सुख बोगती हुई अॊत भं भोऺ ऩाती है ।

ऩुिेच्छुको ऩुि राब होता एवॊ योगी का योग सनवायण होता
है । बमबीत व्मत्रि बम यफहत होता एवॊ फॊधन भं ऩिा
हुआ फॊधन भुि हो जाता है ।

बाद्रऩद शुक्र चतुथॉ
सशवाचतुथॉव्रत:
ऩौयास्णक ग्रॊथ बत्रवष्मऩुयाण के अनुशाय बाद्रऩद
शुक्र चतुथॉकी ' सशवा ' सॊऻा है । इसभं स्नान, दान,
जऩ औय उऩवास कयनेसे सौगुना प्राद्ऱ पर होता है ।
स्स्त्रमाॉ मफद इस फदन गुि, घी, रवण औय अऩूऩाफदसे
अऩने सास द्वशुय मा भाॉ आफदको तृद्ऱ कये तो उनके
सौबाग्मकी वृत्रद्ध होती है ।
श्री गणेश की प्राकट्म सतसथ होने के कायण
बाद्रऩद शुक्र चतुथॉ बगवान गुणेश की वयदामक सतसथ
अत्मासधक प्रख्मात हुई। उस फदन भध्माि कार भं

बगवान गणेश की प्रसतभा का श्रद्धा-बत्रिऩूणा ऩूजन कय
गणेश जी के स्भयण, सचॊतन एवॊ नाभ-जऩ का अद्धद्भत

भाहात्म्म है । शास्त्रं भं उल्रेख हं की गणेश चतुथॉ का
ऩुण्मभम एवॊ अत्मॊत परप्रदासमनी है । स्वमॊ ब्रह्मा जी ने

बाद्रऩद कृ ष्ण चतुथॉ
फहुरा चतुथॉ व्रत
बाद्रऩद भास के कृ ष्णऩऺ की चतुथॉ फहुरा चौथ

मा चतुथॉ फहुरा के नाभ से बी प्रससद्ध है ।

फहन्द ु भान्मताओॊ के अनुशाय बाद्रऩद भास की

कृ ष्ण चतुथॉ के फदन ऩुिवती स्स्त्रमाॊ अऩने ऩुिं की

कुशरता एवॊ भॊगरकाभना के सनसभत्त फहुरा व्रत यखती
हं । रेफकन कुछ त्रवद्रानो का भत हं की फहुरा चतुथॉ सही
भामनं भं गो-भाता की ऩूजा एवॊ वचन ऩारन की प्रेयणा
दे ने वारा ऩवा है ।
स्जस प्रकाय भाॊ की तयह गो-भाता अऩना दध

त्रऩराकय हभ सफको ऩारती है , इस सरए हभं अत:भन भं

उनके प्रसत कृ तऻता का बाव यखकय ही मह व्रत कयना
चाफहए। मह व्रत सॊतान सुख का दे नेवारा तथा ऐद्वमा को
फढाने वारा है ।
ऩायॊ ऩरयक रूऩ से इस फदन व्रत को कयने वारी
स्त्रीमाॊ इस ऩवा के फदन गाम का दध
ू एवॊ उससे सनसभात

कोई ऩदाथा नहीॊ खाती हं । क्मोकी, इस सतसथ भं गाम के
दध
ू ऩय केवर उसके फछडे का असधकाय भाना जाता है ।
फदन बय उऩवास यखने के फाद सामॊकार फछडे
सफहत गौ की ऩूजा की जाती हं । कुल्हड भं खाने की जो
साभग्री को यखकय गाम को बोग रगामा जाता है , फाद
भं स्त्रीमाॊ उसी को प्रसाद के रूऩ भं ग्रहण कयती है । कई
जगम इस फदन जौ के सत्तू तथा गुड का बोग बी
रगाकय खामा जाता है ।
फहुराचतुथॉ के व्रत से मह प्रेयणा सभरती है हभं

हभंशा सत्म के साथ-साथ अऩने कताव्म एवॊ वचनं का
सदा ऩारन होना चाफहए।

ससतम्फय 2012

31

त्रवद्रानो के भतानुशाय बाद्रऩद कृ ष्ण चतुथॉ को
फहुरासफहत गणेश की गॊध, ऩुष्ऩ, भारा औय दव
ू ाा आफद
के द्राया त्रवसध-त्रवधान से ऩूजा कय ऩरयक्रभा कयनी चाफहए।
साभथ्मा के अनुसाय दान-ऩुण्म कयं । दान कयने की स्स्थसत
न हो तो फहुरा गो भाता फक प्रसतभा को प्रणाभ कय

उसका त्रवसजान कय दं । इस प्रकाय ऩाॉच, दस मा सोरह
वषं तक इस व्रत का ऩारन कयके उद्याऩन कयं । उस
सभम दध
ू दे ने वारी स्वस्थ गाम का दान कयना चाफहए।

भागाशीषा शुक्र चतुथॉ
कृ च्र चतुथॉ व्रत:

भागाशीषा शुक्र चतुथॉ की कृ च्र चतुथॉ कहा जाता है ।
ऩौयास्णक ग्रॊथ स्कन्दऩुयाण भं उल्रेख हं की
कृ च्रचतुथॉ व्रत भागाशीषा शुक्र चतुथॉसे आयम्ब होकय
प्रत्मेक चतुथॉको वषाऩमान्त कयके फपय दस
ू ये , तीसये औय
चौथे वषा भं कयनेसे चाय वषाभं ऩूणा होता है ।

कृ च्रचतुथॉ व्रत की त्रवसध मह है फक ऩहरे वषाभं

(भागाशीषा शुक्र चतुथॉ को) प्रात्स्त्रानके ऩद्ळात ् व्रतका

आस्द्वन कृ ष्ण चतुथॉ
आस्द्वन कृ ष्ण चतुथॉको व्रत हो औय उसी फदन
भाता - त्रऩता आफदका श्राद्ध बी कयना हो तो त्रवद्रानो के
भतानुशाय फदनभं श्राद्ध कयके ब्राह्मणंको बोजन कया दे
औय अऩने फहस्सेके बोजनको सूॉघकय गौ को स्खरा दे ।
यात्रिभं चन्द्रोदमके फाद स्वमॊ बोजन कये ।

व्रत कथा:
ऩौयास्णक कथा के अनुशाय एक फाय फाणासुयकी

सनमभ ग्रहण कयके गणेशजीका मथात्रवसध ऩूजन कये ।

नैवेद्यभं रड्डू सतरकुटा, जौका भॉडका औय सुहारी अऩाण
कयके इस भॊि का उच्चायण कयं ..

त्वत्प्रसादे न दे वेश व्रतॊ वषाचतुद्शमभ ्।

सनत्रवघ्र
ा ेन तु भे मातु प्रभाणॊ भूषकध्वज ॥
सॊसायाणावदस्
ु तायॊ सवात्रवघ्रसभाकुरभ ्।

तस्भाद् दीनॊ जगन्नाथ िाफह भाॊ गणनामक ॥
प्राथाना कयके एक फाय ऩरयसभत बोजन कये । इस
प्रकाय प्रत्मेक चतुथॉको कयता यहकय दस
ू ये वषा उसी

ऩुिी ऊषाको स्वसन भं कृ ष्ण ऩौि असनरुद्धका दशान हुआ।

भागाशीषा शुक्र चतुथॉको ऩुन् मथाऩूवा सनमभ ग्रहण, व्रत

सचिरेखाके द्राया असनरुद्धको अऩने घय फुरा सरमा। इससे

इसी प्रकाय प्रत्मेक चतुथॉको वषाऩमान्त कयके तीसये वषा

ऊषाको उनके प्रत्मऺ दशानकी असबराषा हुई औय उसने

औय ऩूजा कयके पि ( यात्रिभं एक फाय ) बोजन कये ।

असनरुद्धकी भाताको फिा कद्श हुआ। इस सॊकटको टारनेके

फपय भागाशीषा शुक्र चतुथॉको व्रत सनमभ औय ऩूजा

महाॉ सछऩे हुए असनरुद्धका ऩता रग गमा औय ऊषा तथा

सभरे उसीका एक फाय ) बोजन कये ।

सरमे भाताने व्रत फकमा, तफ इस व्रतके प्रबावसे ऊषाके
असनरुद्ध द्रायका आ गमे।

आस्द्वन शुक्र चतुथॉ
आस्द्वन शुक्र चतुथॉ नवयाि भं ऩिने के कायण
भाॊ बगवती के ऩूजन के साथ यािी जागयण कयने का
त्रवशेष भहत्व हं एवॊ इस फदन गणेश जी का ऩुरुषसूि
द्राया षोडशोऩचाय ऩूजन कयके बत्रिऩूवक
ा ऩूजा का त्रवशेष
भाहात्म्म है ।

कयके अमासचत ( अथाात त्रफना भाॉगे जो कुछ स्जतना
इस प्रकाय एक वषा तक प्रत्मेक चतुथॉको व्रत
कयके चौथे वषाभं उसी भागाशीषा शुक्र चतुथॉको सनमभ
ग्रहण, व्रत सॊकल्ऩ औय ऩूजनाफद कयके सनयाहाय उऩवास
कये । इस प्रकाय वषाऩमान्त प्रत्मेक चतुथॉको व्रत कयके
चौथा वषा सभाद्ऱ होनेऩय सपेद कभरऩय ताॉफेका करश
स्थाऩन कयके सुवणाके गणेशजीका ऩूजन कये । सवत्सा
गौका दान कये , हवन कये औय चौफीस सऩत्नीक ब्राह्मणंको
बोजन कयवाकय वस्त्राबूषणाफद दे कय स्वमॊ बोजन कये तो

ससतम्फय 2012

32

इस व्रतके कयनेसे सफ प्रकायके त्रवघ्नन दयू हो जाते हं औय
व्रती को सफ प्रकायकी सम्ऩत्रत्त प्राद्ऱ होती है ।

वयचतुथॉ व्रत:
ऩौयास्णक ग्रॊथ स्कन्दऩुयाण भं उल्रेख हं की मह
व्रत कृ च्रचतुथोके सभान मह व्रत बी भागाशीषा शुक्र
चतुथॉसे आयम्ब होकय चाय वषाभं ऩूणा होता है ।
प्रथभ वषाभं प्रत्मेक चतुथॉको फदनाद्धा के सभम एक

फाय अरोन ( त्रफना नभक का ) बोजन, दस
ू ये वषाभं नि
( यात्रि ) बोजन, तीसये भं अमासचत बोजन औय चौथेभं

उऩवास कयके मथाऩूवा सभाद्ऱ कये । मह व्रत सफ प्रकायकी
अथाससत्रद्ध दे ने वारा है ।
ऩरयसभत बोजनके त्रवषमभं कहीॊ ऩय 32 ग्रास औय
फकसीने 29 ग्रास फतरामे हं ।
स्भृत्मन्तय भं उल्रेख हं

अद्शौ ग्रासा भुनेबक्ष्
ा मा् षोडशायण्मवाससन्।
द्रात्रिश
ॊ द् गृहस्थमा ऩरयसभतॊ ब्रह्मचारयण् ॥

अथाात: भुसनको आठ, वनवाससमंको सोरह, गृहस्थंको
फत्तीस औय ब्रह्मचारयमंको अऩरयसभत ( मथारुसच ) ग्रास
बोजन कयनेको कहा गमा है ।
ग्रासका प्रभाण है एक आॉवरेके फयाफय अथवा
स्जतना सुगभतासे भुह
ॉ भं जा सके, उतना एक ग्रास होता
है । न्मून बोजनके सरमे ( माऻवल्क्मने ) तीन ग्रास
सनमत फकमे हं ।

भागाशीषा कृ ष्ण चतुथॉ
सचॊताभणी चतुथॉ व्रत:
भागाशीषा कृ ष्ण चतुथॉ को सचॊताभणी चतुथॉ के
नाभ से जाना जाता हं । त्रवद्रानो के कथनानुशाय इस फदन
ऩूया फदन केवर ऩानी त्रऩकय उऩवास फकमा जाता हं । यािी
के सभम चन्द्रोदम के फाद करश ऩय श्रीसचॊताभणी गणेश
की स्थाऩना कय उसका त्रवसध-वत ऩूजन कयने का त्रवधान
हं । नैवेद्य भं भोदक का बोग रगामे।

ऩौष कृ ष्ण चतुथॉ
सॊकद्शचतुथॉ व्रत:
ऩौयास्णक ग्रॊथ बत्रवष्मोत्तय के अनुशाय ऩौष कृ ष्ण
चतुथॉ को गणऩसत स्भयणऩूवक
ा प्रात्स्त्रानाफद सनत्मकभा
कयनेके ऩद्ळात ् सॊकल्ऩ कयके फदनबय भौन यहे । यात्रिभं

ऩुन् स्त्रान कयके गणऩसत - ऩूजनके ऩद्ळात ् चन्द्रोदमके
फाद चन्द्रभाका ऩूजन कयके अघ्नमा दे , फपय बोजन कयने
का त्रवधान फतामा गमा हं ।

ऩौष शुक्र चतुथॉ
ऩौष शुक्र व्रत त्रवसध ऩूवक
ा कयने वारे भनुष्म को
धन-सॊऩत्रत्त का अबाव नहीॊ यहता। उसी सबी प्रकाय के
सुख सौबाग्म की प्रासद्ऱ होती हं ।

भाघ शुक्र चतुथॉ
शास्न्तचतुथॉ व्रत:
ऩौयास्णक ग्रॊथ बत्रवष्मऩुयाण के अनुशाय भाघ
शुक्र चतुथॉको गणेशजीका ऩूजन कयके घीभं सने हुए
गुिके ऩूआ औय रवणके ऩदाथा अऩाण कये औय गुरुदे वकी
ऩूजा कयके उनको गुि, रवण औय घी दे तो इस व्रतसे
सफ प्रकायकी स्स्थय शास्न्त प्राद्ऱ होती है ।

अॊगायकचतुथॉ व्रत:

ऩौयास्णक ग्रॊथ भत्स्मऩुयाण के अनुशाय मफद भाघ

शुक्र चतुथॉको भॊगरवाय हो तो उस फदन प्रात्स्त्रानके
ऩहरे शयीयभं सभट्टी रगाकय शुद्ध स्त्रान कये , रार धोती
ऩहने, वस्त्राअबूषण आफद से सुसस्ज्जत धायण कये औय
उत्तयासबभुख फैठकय 'अस्ग्नभूद्धाा' भन्त्नका जऩ कये । फपय
बूसभको गोफयसे रीऩकय अङ्गयकाम बौभाम नभ् का जऩ
कये । फपय उसऩय रार चन्दनका अद्शदर फनामे तथा
उसकी ऩूवााफद चायं फदशाओॊभं बक्ष्म बोजन औय चावरंसे
बये हुए चाय कयवे यख कय गन्धाऺताफदसे ऩूजन कयके।
दान भं कत्रऩरा गौ औय रार यॊ गका अतीव सौम्म धुयॊधय

ससतम्फय 2012

33

फैर दे ना औय साथभं शय्मा दे ना सहस्त्रगुण पर दे ने
वारा होता है ।

पाल्गुन शुक्र चतुथॉ
ढु स्ण्ढयाज व्रत:
पाल्गुन भास की चतुथॉ को भॊगरदामक ढु स्ण्ढयाज

सुखचतुथॉ व्रत:
ऩौयास्णक ग्रॊथ बत्रवष्मऩुयाण के अनुशाय

चतुथॉ तु चतुथॉ तु मदाङ्गायकसॊमुता।

चतुथ्मां तु चतुथ्मां तु त्रवधानॊ श्रृणु मा शभ ् ॥

भाघ शुक्र चतुथॉको मफद भॊगरवाय हो तो रार वणाके

गन्ध, अऺत औय ऩुष्ऩ, नैवेद्यसे गणेशजीका ऩूजन कयके
उऩवास कये । इस प्रकाय चाय-चाय चतुथॉ ( भाघ, वैशाख,
बाद्रऩद औय ऩौष ) का एक वषा व्रत कये तो सफ प्रकायके
सुख प्राद्ऱ होते हं । प्रत्मेक चतुथॉको बौभवाय होना
आवश्मक है ।

व्रत फकमा जाता है । चतुथॉ के फदन व्रत-उऩवास के साथ
गणेशजी की सोने की भूसता फनवाकय उसकी श्रद्धाबत्रिऩूवक
ा ऩूजा की जासत हं । गणेशजी को प्रसन्न कयने
के सरए उस फदन सतर से ही दान, होभ, ऩूजन आफद
फकमे जाते हं । उस फदन सतर के ऩीठे से ब्राह्मणं को
बोजन कयाकय व्रती स्वमॊ बी बोजन कयते हं । इस व्रत
के प्रबाव से सभस्त सम्ऩदाओॊ की वृत्रद्ध होती है औय
भनुष्म गणेशजी की कृ ऩा से ही ससत्रद्ध प्राद्ऱ कय रेता है ।
भत्स्मऩुयाण के अनुसाय पाल्गुन शुक्र चतुथॉ को
भनोयथ चतुथॉ कहते हं । ऩूजनोऩयान्त निव्रत का त्रवधान
है । इस प्रकाय फायहं भहीने की प्रत्मेक शुक्र चतुथॉ को

गणेशव्रत
ऩौयास्णक ग्रॊथ बत्रवष्मऩुयाण के अनुशाय भाघ
शुक्र ऩूवत्रा वद्धा चतुथॉको प्रात् स्त्रानाफद कयके सॊकल्ऩ
कयके वेदीऩय रार वस्त्र त्रफछामे। रार अऺतंका अद्शदर
फनाकय उसऩय ससन्दयू चसचात गणेशजीको स्थात्रऩत कये ।
स्वमॊ रार धोती ऩहनकय रार वणाके पर ऩुष्ऩाफदसे

षोडशोऩचाय ऩूजन कये । नैवेद्यभं (सबगोकय छीरी हुई )

हल्दी, गुि, शक्कय औय घी इनको सभराकय बोग रगामे

व्रत कयते हुए वषाबय के फाद उस स्वणाभूसता का दान
कयने से भनोयथ ससद्ध होते हं । अस्ग्नऩुयाण भं इसको
अत्रवघ्नना चतुथॉ कहाॊ गमा है ।

पाल्गुन कृ ष्ण चतुथॉ
पाल्गुन भास की कृ ष्ण चतुथॉ को सतर चतुथॉ बी कहाॊ
जाता हं

चैि कृ ष्ण चतुथॉ

औय निव्रत (यात्रिभं एक फाय बोजन कये तो सम्ऩूणा
अबीद्श ससद्ध होते हं ।

श्रीगणेश का त्रवसधऩूवक
ा ऩूजन कय ब्राह्मण को दस्ऺणा के
रुऩ भं सुवणा दे ने ऩय भनुष्म को सॊऩूणा दे वताओॊ से वॊफदत

भाघ कृ ष्ण चतुथॉ

हो जाता हं औय वह श्री त्रवष्णु रोक को प्राद्ऱ कयता है ।

वक्रतुण्डचतुथॉ
ऩौयास्णक ग्रॊथ बत्रवष्मोत्तय

के अनुशाय भाघ कृ ष्ण

चन्द्रोदमव्मात्रऩनी चतुथॉको वक्रतुण्डचतुथॉ कहते हं । इस
व्रतका आयम्ब सॊकल्ऩ कयके कये । सामॊकारभं गणेशजीका
औय चन्द्रोदमके सभम चन्द्रका ऩूजन कयके अघ्नमा दे । इस
व्रतको भाघसे आयम्ब कयके हय भहीनेभं कये तो सॊकटका
नाश हो जाता है ।

चैि भास की चतुथॉ को वासुदेवस्वरूऩ बगवान

कथा:
ऩौयास्णक कथा के अनुशाय प्राचीन कारभं भमूयध्वज नाभका

याजा फिा प्रबावशारी औय धभाऻ था। एक फाय उसका ऩुि

कहीॊ खो गमा औय फहुत अनुसॊधान कयनेऩय बी न सभरा।

तफ भस्न्िऩुिकी धभावती स्त्रीके अनुयोधसे याजाके सम्ऩूणा
ऩरयवाने चैि कृ ष्ण चतुथॉका फिे सभायोहसे मथात्रवसध व्रत

फकमा। तफ बगवान गणेशजीकी कृ ऩासे याजऩुि आ गमा
औय उसने भमूयध्वजकी आजीवन सेवा की।

ससतम्फय 2012

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वैशाख कृ ष्ण चतुथॉ

आषाढ़ चतुथॉ

वैशाख भास की चतुथॉ को सॊकद्शी गणेश का ऩूजा

आषाढ़ भास की चतुथॉ को असनरुद्धस्वरूऩ गणेश

कय ब्राह्मणं को शॊख का दान कयना चाफहए। इसके प्रबाव

का त्रवसधऩूवक
ा ऩूजन कयके सॊन्माससमं को तूॊफी का ऩाि

से भनुष्म सभस्त रोक भं कल्ऩं तक सुख प्राद्ऱ कयता है ।

दान कयना चाफहए। इस व्रत को कयने वारा भनुष्म को

वैशाख शुक्र चतुथॉ

भनोवाॊसछत पर प्राद्ऱ होते है ।

वैशाख भास की कृ ष्ण चतुथॉ को श्रीकृ ष्णत्रऩॊगाऺ
गणऩसत का ऩूजन फकमा जाता हं ।

गणेश का त्रवसधवत ऩूजन कय एसा उराब पर प्राद्ऱ कय
रेता है , जो दे व सभुदाम के सरए बी अप्राप्त्म है ।

ज्मेद्ष कृ ष्ण चतुथॉ

नोट: आऩकी अनुकूरता हे तु गणेश ऩूजन की सयर त्रवसध
इस अॊक भं उऩरब्ध कयवाई गई हं । कृ समा उस त्रवसध से

सॊकद्शचतुथॉव्रत:
ऩौयाणुक ग्रॊथ बत्रवष्मोत्तय के अनुशाय ज्मेद्ष भास
के कृ ष्ण ऩऺ की चतुथॉको, प्रात्स्त्रानाफद सनत्मकभा कयके
व्रतके सॊकल्ऩसे फदनबय भौन यहे । सामॊकारभं ऩुन् स्त्रान
कयके गणेशजीका औय चन्द्रोदम होने ऩय चन्द्रभा का
ऩूजन कये

चतुथॉ के फदन भनुष्म श्रद्धा-बत्रिऩूवक
ा भॊगरभूसता

तथा शॊखभं दध
ू , दव
ू ाा, सुऩायी आफद से

त्रवसधवत ऩूजन कयं । वामन दान कयके बोजन कये ।

ऩूजन कयने से ऩूवा फकसी जानकाय गुरु मा त्रवद्रान से सराह
त्रवभशा अवश्म कयरं। क्मोफक प्राॊसतम व ऺेत्रिम ऩूजन ऩद्धसत

भं सबन्नता होने के कायण ऩूजन त्रवसध भं सबन्नता सॊबव
हं । उऩरब्ध कयवाई गई ऩूजन ऩद्धसत को सयर से सयर

फनाकय केवर आऩके भगादशान के उद्दे श्म से प्रदान की गई
हं ।

त्रवशेष सुझाव: जो रोग सुवणा भूसता फनवाने मा दान कयने

ज्मेद्ष शुक्र चतुथॉ

की ऺभता न हो तो वणाक (अथाात हल्दी चूण)ा से ही

ज्मेद्ष भास की शुक्र ऩऺ की चतुथॉ को प्रद्मरूऩी
गणेश की ऩूजा कय ब्राह्मणं को पर-भूर का दान कयने

गणऩसत की प्रसतभा फना कय ऩूजन कय सकते हं मा दान
कय सकते हं ।

से व्रतधायी को स्वगारोक प्राद्ऱ होते हं ।

श्री मॊि

गुरुत्व कामाारम भं ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा चैतन्म मुि "श्री मॊि" 500 ग्राभ, 750 ग्राभ, 1000 ग्राभ
औय 1250 ग्राभ, 2250 ग्राभ साईज़ भं केवर सरसभटे ड स्टॉक उऩरब्ध हं । श्री मॊि के सॊफॊध भं असधक
जानकायी के सरए कामाारम भं सॊऩका कयं ।

"श्री मॊि" 12 ग्राभ से 1250 ग्राभ तक फक साइज भे उसरब्ध है ।
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92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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ससतम्फय 2012

भनोवाॊसछत परो फक प्रासद्ऱ हे तु ससत्रद्ध प्रद गणऩसत स्तोि

 सचॊतन जोशी
प्रसतफदन इस स्तोि का ऩाठ कयने से
भनोवाॊसछत पर शीघ्र प्राद्ऱ होते हं ।
भनोवाॊसछत पर प्राद्ऱ कयने हे तु गणेशजी
के सचि मा भूसता

के साभने भॊि जाऩ कय सकते

हं । ऩूणा श्रद्धा एवॊ ऩूणा त्रवद्वास के साथ भनोवाॊसछत
पर प्रदान कयने वारे इस स्तोि का प्रसतफदन
कभ से कभ 21 फाय ऩाठ अवश्म कयं ।

असधकस्म असधकॊ परभ ्।

जऩ स्जतना असधक हो सके उतना अच्छा है । मफद भॊि
असधक फाय जाऩ कय सकं तो श्रेद्ष।
प्रात् एवॊ सामॊकार दोनं सभम कयं , पर
शीघ्र प्राद्ऱ होता है ।
काभना ऩूणा होने के ऩद्ळमात बी सनमसभत स्त्रोत रा ऩाठ कयते यहना चाफहए। कुछ एक त्रवशेष ऩरयस्स्थसत भं ऩूवा
जन्भ के सॊसचत कभा स्वरूऩ प्रायब्ध की प्रफरता के कायण भनोवाॊसछत पर की प्रासद्ऱ मा तो दे यी सॊबव हं !
भनोवाॊसछत पर की प्रासद्ऱ के अबाव भं मोग्म त्रवद्रान की सराह रेकय भागादशान प्राद्ऱ कयना उसचत होगा।
अत्रवद्वास व कुशॊका कयके आयाध्म के प्रसत अश्रद्धा व्मि कयने से व्मत्रि को प्रसतकूर प्ररयणाभ फह प्राद्ऱ होते हं ।
शास्त्रोि वचन हं फक बगवान (इद्श) फक आयाधना कबी व्मथा नहीॊ जाती।

भॊि:-

गणऩसतत्रवघ्ना नयाजो रम्फतुण्डो गजानन्। द्रै भातुयद्ळ हे यम्फ एकदन्तो गणासधऩ्॥
त्रवनामकद्ळारुकणा् ऩशुऩारो बवात्भज्। द्रादशैतासन नाभासन प्रातरुत्थाम म् ऩठे त॥्

त्रवद्वॊ तस्म बवेद्रश्मॊ न च त्रवघ्ननॊ बवेत ् क्वसचत।् (ऩद्म ऩु. ऩृ. 61।31-33)

बावाथा: गणऩसत, त्रवघ्ननयाज, रम्फतुण्ड, गजानन, द्रै भातुय, हे यम्फ, एकदन्त, गणासधऩ, त्रवनामक, चारुकणा, ऩशुऩार औय
बवात्भज- गणेशजी के मह फायह

नाभ हं । जो व्मत्रि प्रात्कार उठकय इनका सनमसभत ऩाठ कयता हं , सॊऩूणा त्रवद्व

उनके वश भं हो जाता हं , तथा उसे जीवन भं कबी त्रवघ्नन का साभना नहीॊ कयना ऩिता।

प्रद्ल कुण्डरी से अऩने फकसी बी प्रद्लं का स्स्टक उत्तय प्राद्ऱ फकस्जए।
क्मा आऩ अत्माधुसनक ज्मोसतष प्रणारी से अऩने बत्रवष्म से सॊफॊसधत प्रश्नो का स्स्टक उत्तय प्राद्ऱ कयना चाहते हं तो
आऩ गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कय सकते हं । हभाये प्रद्ल ज्मोसतष त्रवशेऻ आऩके द्राया ऩूछे गमे प्रद्ल का ग्रहं के अधाय
ऩय उनकी सूक्ष्भ गणना कय उसके स्स्टक परादे श से आऩको अवगत कयाने का प्रमास कयं गे। 3 प्रद्ल भाि :550

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ससतम्फय 2012

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गणेश ऩूजन से वास्तु दोष सनवायण

 सचॊतन जोशी
फहॊ द ू सॊस्कृ सत भं बगवान गणेश सवा त्रवघ्नन

त्रवनाशक भाना हं । इसी कायण गणऩसत जी का
ऩूजन फकसी बी व्रत अनुद्षान भं सवा प्रथभ फकमा
जाता हं । बवन भं वास्तु ऩूजन कयते सभम बी
गणऩसत जी को प्रथभऩूजा जाता हं । स्जस घय भं
सनमसभत गणऩसत जी का त्रवसध त्रवधान से ऩूजन

होता हं , वहाॊ सुख-सभृत्रद्ध एवॊ रयत्रद्ध-ससत्रद्ध का सनवास
होता हं ।
गणेश प्रसतभा (भूसता) की स्थाऩना बवन के
भुख्म द्राय के ऊऩय अॊदय-फहाय दोनो औय रगाने से
असधक राब प्राद्ऱ होता हं ।
गणेश

प्रसतभा

(भूसता)

की

ऩूजा

घयभं

स्थाऩना कयने ऩय उन्हं ससॊदयू चढाने से शुब पर
फक प्रासद्ऱ होती हं ।

बवन भं द्रायवेध हो, अथाात बवन के भुख्म
द्राय के साभने वृऺ, भॊफदय, स्तॊब आफद द्राय भं प्रवेश
कयने वारी उजाा हे तु फाधक होने ऩय वास्तु भं उसे द्रायवेध भाना जाता हं । द्रायवेध होने ऩय वहाॊ यहने वारं भं
उच्चाटन होता हं । ऐसे भं बवन के भुख्म द्राय ऩय गणोशजी की फैठी हुई प्रसतभा (भूसता) रगाने से द्रायवेध का सनवायण
होता हं । रगानी चाफहए फकॊतु उसका आकाय 11 अॊगुर से असधक नहीॊ होना चाफहए।

ऩूजा स्थानभं ऩूजन के सरए गणेश जी की एक से असधक प्रसतभा (भूसता) यखना वस्जात हं ।

भॊि ससद्ध भूॊगा गणेश
भूॊगा गणेश को त्रवध्नेद्वय औय ससत्रद्ध त्रवनामक के रूऩ भं जाना जाता हं । इस के ऩूजन से जीवन भं सुख
सौबाग्म भं वृत्रद्ध होती हं ।यि सॊचाय को सॊतुसरत कयता हं । भस्स्तष्क को तीव्रता प्रदान कय व्मत्रि को चतुय
फनाता हं । फाय-फाय होने वारे गबाऩात से फचाव होता हं । भूॊगा गणेश से फुखाय, नऩुॊसकता , सस्न्नऩात औय
चेचक जेसे योग भं राब प्राद्ऱ होता हं ।

भूल्म Rs: 550 से Rs: 10900 तक

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ससतम्फय 2012

सवा कामा ससत्रद्ध कवच
स्जस व्मत्रि को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने के फादबी उसे भनोवाॊसछत सपरतामे एवॊ फकमे गमे कामा
भं ससत्रद्ध (राब) प्राद्ऱ नहीॊ होती, उस व्मत्रि को सवा कामा ससत्रद्ध कवच अवश्म धायण कयना चाफहमे।

कवच के प्रभुख राब: सवा कामा ससत्रद्ध कवच के द्राया सुख सभृत्रद्ध औय नवग्रहं के नकायात्भक प्रबाव को
शाॊत कय धायण कयता व्मत्रि के जीवन से सवा प्रकाय के द:ु ख-दारयद्र का नाश हो कय सुख-सौबाग्म एवॊ

उन्नसत प्रासद्ऱ होकय जीवन भे ससब प्रकाय के शुब कामा ससद्ध होते हं । स्जसे धायण कयने से व्मत्रि मफद
व्मवसाम कयता होतो कायोफाय भे वृत्रद्ध होसत हं औय मफद नौकयी कयता होतो उसभे उन्नसत होती हं ।

 सवा कामा ससत्रद्ध कवच के साथ भं सवाजन वशीकयण कवच के सभरे होने की वजह से धायण कयता
की फात का दस
ू ये व्मत्रिओ ऩय प्रबाव फना यहता हं ।

 सवा कामा ससत्रद्ध कवच के साथ भं अद्श रक्ष्भी कवच के सभरे होने की वजह से व्मत्रि ऩय भाॊ भहा

सदा रक्ष्भी की कृ ऩा एवॊ आशीवााद फना यहता हं । स्जस्से भाॊ रक्ष्भी के अद्श रुऩ (१)-आफद
रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-सॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रवजम
रक्ष्भी, (७)-त्रवद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन सबी रुऩो का अशीवााद प्राद्ऱ होता हं ।

 सवा कामा ससत्रद्ध कवच के साथ भं तॊि यऺा कवच के सभरे होने की वजह से ताॊत्रिक फाधाए दयू
होती हं , साथ ही नकायत्भन शत्रिमो का कोइ कुप्रबाव धायण कताा व्मत्रि ऩय नहीॊ होता। इस
कवच के प्रबाव से इषाा-द्रे ष यखने वारे व्मत्रिओ द्राया होने वारे दद्श
ु प्रबावो से यऺाहोती हं ।

 सवा कामा ससत्रद्ध कवच के साथ भं शिु त्रवजम कवच के सभरे होने की वजह से शिु से सॊफॊसधत

सभस्त ऩये शासनओ से स्वत् ही छुटकाया सभर जाता हं । कवच के प्रबाव से शिु धायण कताा
व्मत्रि का चाहकय कुछ नही त्रफगड सकते।

अन्म कवच के फाये भे असधक जानकायी के सरमे कामाारम भं सॊऩका कये :
फकसी व्मत्रि त्रवशेष को सवा कामा ससत्रद्ध कवच दे ने नही दे ना का अॊसतभ सनणाम हभाये ऩास सुयस्ऺत हं ।

GURUTVA KARYALAY
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ससतम्फय 2012

38

गणेश वाहन भूषक केसे फना
सभेरू ऩवात ऩय सौभरय ऋत्रष का आश्रभ था। उनकी अत्मॊत रूऩवान तथा ऩसतव्रता ऩत्नी का नाभ भनोभमी था।

एक फदन ऋत्रषवय रकिी रेने के सरए वन भं चरे गए। उनके जाने के ऩद्ळमात भनोभमी गृहकामा भं व्मस्त हो गईं।

उसी सभम एक दद्श
ु कंच नाभक गॊधवा वहाॊ आमा। जफ कंच ने रावव्मभमी भनोभमी को दे खा, तो उसके बीतय काभ

जागृत होगमा एवॊ वह व्माकुर हो गमा। कंच ने भनोभमी का हाथ ऩकि सरमा। योती व काॊऩती हुई भनोभमी उससे
दमा की बीख भाॊगने रगी। उसी सभम वहा सौबरय ऋत्रष आ गए।
भूषक

उन्हं गॊधवा को श्राऩ दे ते हुए कहा, तुभने चोय की बाॊसत भेयी सहधसभानी का हाथ ऩकिा हं , इस कायण तुभ अफसे
होकय

धयती

के

नीचे

औय

चोयी

कयके

अऩना

ऩेट

बयोगे।’

ऋत्रष का श्राऩ सुनकय गॊधवा ने ऋत्रष से प्राथाना की- हे ऋत्रषवय, अत्रववेक के कायण भंने आऩकी ऩत्नी के हाथ का स्ऩशा
फकमा। भुझे ऺभा कय दं ।
ऋत्रष फोरे: कंच! भेया श्राऩ व्मथा नहीॊ होगा। तथात्रऩ द्राऩय भं भहत्रषा ऩयाशय के महाॊ गणऩसत दे व गजरूऩ भं प्रकट हंगे।
तफ तुभ उनका वाहन फन जाओगे। इसके ऩद्ळमात तुम्हाया कल्माण होगा तथा दे वगण बी तुम्हाया सम्भान कयं गे।

श्री हनुभान मॊि
शास्त्रं भं उल्रेख हं की श्री हनुभान जी को बगवान सूमद
ा े व ने ब्रह्मा जी के आदे श ऩय हनुभान जी को

अऩने तेज का सौवाॉ बाग प्रदान कयते हुए आशीवााद प्रदान फकमा था, फक भं हनुभान को सबी शास्त्र
का ऩूणा ऻान दॉ ग
ू ा। स्जससे मह तीनोरोक भं सवा श्रेद्ष विा हंगे तथा शास्त्र त्रवद्या भं इन्हं भहायत

हाससर होगी औय इनके सभन फरशारी औय कोई नहीॊ होगा। जानकायो ने भतानुशाय हनुभान मॊि की

आयाधना से ऩुरुषं की त्रवसबन्न फीभारयमं दयू होती हं , इस मॊि भं अद्भत
ु शत्रि सभाफहत होने के कायण

व्मत्रि की स्वसन दोष, धातु योग, यि दोष, वीमा दोष, भूछाा, नऩुॊसकता इत्माफद अनेक प्रकाय के दोषो को
दयू कयने भं अत्मन्त राबकायी हं । अथाात मह मॊि ऩौरुष को ऩुद्श कयता हं । श्री हनुभान मॊि व्मत्रि को
सॊकट, वाद-त्रववाद, बूत-प्रेत, द्यूत फक्रमा, त्रवषबम, चोय बम, याज्म बम, भायण, सम्भोहन स्तॊबन इत्माफद
से सॊकटो से यऺा कयता हं औय ससत्रद्ध प्रदान कयने भं सऺभ हं ।

श्री हनुभान मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी के सरमे गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कयं ।
भूल्म Rs- 730 से 10900 तक

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39

ससतम्फय 2012

ससत्रद्ध त्रवनामक व्रत त्रवधान

 सचॊतन जोशी
ससत्रद्ध त्रवनामक व्रत बाद्रऩद शुक्र ऩऺ की चतुथॉ को ही फकमा जाता है । शास्त्रोि भान्मता के अनुशाय फदन दोऩहय भं
गणेशजी का जन्भ हुआ था। इसीसरए इस चतुथॉ को त्रवनामक चतुथॉ, ससत्रद्धत्रवनामक चतुथॉ औय श्रीगणेश चतुथॉ के
नाभ से जाना जाता है । इस सरमे ऩौयास्णक कार से ही इस सतसथ को गणेशोत्सव मा गणेश जन्भोत्सव के रूऩ भं
भनामा जाता हं ।
वैसे तो प्रत्मेक भास की चतुथॉ को गणेशजी का व्रत होता है । रेफकन बाद्रऩद के चतुसथा व्रत का त्रवशेष भाहात्म्म है ।

ऎसी भान्मता हं की इस फदन जो श्रधारु व्रत, उऩवास औय दान आफद शुब कामा फकमा जाता है , श्रीगणेश की कृ ऩा से
सौ गुना पर प्राद्ऱ हो जाता हं । व्मत्रि को श्री त्रवनामक चतुथॉ कयने से भनोवाॊसछत पर प्राद्ऱ होता है ।
शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से श्री गणेशजी का ऩूजन व व्रत इस प्रकाय कयना अत्मॊत राबप्रद होता हं ।

त्रवसध

प्रात्कार स्नानआफद सनत्मकभा से शीघ्र सनवृत्त हो कय। अऩने साभथाम के अनुसाय ऩूणा बत्रि बाव से

बगवान गणेश की सोने, चाॊदी, ताॊफे, ऩीतर मा सभट्टी से फनी प्रसतभा स्थात्रऩत कयं । भूसता को षोिशोऩचाय ऩूजनआयती आफद से त्रवसध-वत ऩूजन कयं ।


गणेशजी की भूसता ऩय ससॊदयू चढ़ाएॊ।

गणेशजी का भॊि फोरते हुए 21 दव
ु ाा दर चढ़ाएॊ।

श्री गणेशजी को रड्डु ओॊ का बोग रगाएॊ।

ब्राह्मण बोजन कयाएॊ औय ब्राह्मणं को दस्ऺणा प्रदान कयने के ऩद्ळात ् सॊध्मा के सभम स्वमॊ बोजन ग्रहण कयं ।

इस तयह ऩूजन कयने से बगवान श्रीगणेश असत प्रसन्न होते हं औय अऩने बिं की सकर इच्छाओॊ की ऩूसता कयते
हं ।

सॊकद्शहय चतुथॉ व्रत का प्रायॊ ब कफ हुवा
सॊकद्शहय चतुदशॉ कथा् बायद्राज भुसन औय ऩृथ्वी के ऩुि भॊगर की कफठन तऩस्मा से प्रसन्न होकय भाघ भास के कृ ष्ण
ऩऺ भं चतुथॉ सतसथ को गणऩसत ने उनको दशान फदमे थे।
गजानन के वयदान के परस्वरूऩ भॊगर कुभाय को इस फदन भॊगर ग्रह के रूऩ भं सौय भण्डर भं स्थान प्राद्ऱ हुवाथा। भॊगर

कुभाय को गजानन से मह बी वयदान सभरा फक भाघ कृ ष्ण ऩऺ की चतुदशॉ स्जसे सॊकद्शहय चतुथॉ के नाभ से जाना जाता हं उस
फदन जो बी व्मत्रि गणऩसतजी का व्रत यखेगा उसके सबी प्रकाय के कद्श एवॊ त्रवघ्नन सभाद्ऱ हो जाएॊगे।

एक अन्म कथा के अनुसाय बगवान शॊकय ने गणऩसतजी से प्रसन्न होकय उन्हं वयदान फदमा था फक भाघ कृ ष्ण ऩऺ की
चतुथॉ सतसथ को चन्द्रभा भेये ससय से उतयकय गणेश के ससय ऩय शोबामभान होगा। इस फदन गणेश जी की उऩासना औय व्रत त्रिताऩ (तीनो प्रकाय के ताऩ) का हयण कयने वारा होगा। इस सतसथ को जो व्मत्रि श्रद्धा बत्रि से मुि होकय त्रवसध-त्रवधान से
गणेश जी की ऩूजा कये गा उसे भनोवाॊसछत पर फक प्रासद्ऱ होगी।

ससतम्फय 2012

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श्री याभ शराका प्रद्लावरी
श्री याभद्ऴाका प्रद्लावरी की भफहभा स्वमॊ ससद्ध हं । मफद आऩ फकसी कामा को कयने मा नहीॊ कयने को रेकय असभॊजस
मा उरझन भं हो तो त्रवद्रानं के भतानुशाय श्री याभद्ऴाका प्रद्लावरी के भाध्मभ से आऩके उरझे प्रश्नं का उत्तय सयरता
से एवॊ स्स्टक प्राद्ऱ होता हं । इसभं जया बी सॊशम नहीॊ हं ।

सु

प्र

त्रफ

हो

भु

सु

नु

त्रफ

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यं

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स्ज

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सभ सभ रय

स्ख स्ज

सन

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यी

जा

हू

हीॊ

षा

जू

या

ये

त्रवसध-श्रीयाभचन्द्रजी का ध्मान कय अऩने प्रद्ल को भन भं दोहयामं। फपय ऊऩय दी गई सायणी भं से फकसी एक अऺय ऩय
अॊगुरी यखं। अफ उससे अगरे अऺय से क्रभश् नौवाॊ अऺय को सरखते जामं जफ तक ऩुन् उसी जगह नहीॊ ऩहुॉच जामं। इस
प्रकाय एक चौऩाई फनेगी, जो अबीद्श प्रद्ल का उत्तय होगी।

महाॊ हभने आऩकी अनुकूरता हे तु नौवे अऺय के कोद्शक को एक सभान यॊ ग भं यॊ गने का प्रमास फकमा हं
स्जससे आऩको हय नौवे अऺयको सगनती कयने की आवश्मिा न यहं आऩ सीधे एक सभान यॊ गो के कोद्शक भं रीखे
अऺयोको सभरारे/सरख रे औय जो चौऩाई फने उस चौऩाई को बी दे खने भं आऩको आसानी हो इस उद्दे श्म से उसी
यॊ ग भं यॊ गने का प्रमास फकमा हं ।

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ससतम्फय 2012

1 सुनु ससम सत्म असीस हभायी। ऩूस्जफह भन काभना तुम्हायी।
पर् -प्रद्लकत्ताा का प्रद्ल उत्तभ है , कामा ससद्ध होगा।
मह चौऩाई फारकाण्ड भं श्रीसीताजी के गौयीऩूजन के प्रसॊग भं है । गौयीजी ने श्रीसीताजी को आशीवााद फदमा है ।
2 प्रत्रफसस नगय कीजै सफ काजा। रृदम यास्ख कोसरऩुय याजा।

पर्-बगवान ् का स्भयण कयके कामाायम्ब कयो, सपरता सभरेगी।

मह चौऩाई सुन्दयकाण्ड भं हनुभानजी के रॊका भं प्रवेश कयने के सभम की है ।
3 उघयं अॊत न होइ सनफाहू। कारनेसभ स्जसभ यावन याहू।।
पर्-इस कामा भं बराई नहीॊ है । कामा की सपरता भं सन्दे ह है ।

मह चौऩाई फारकाण्ड के आयम्ब भं सत्सॊग-वणान के प्रसॊग भं है ।
4 त्रफसध फस सुजन कुसॊगत ऩयहीॊ। पसन भसन सभ सनज गुन अनुसयहीॊ।।
पर्-खोटे भनुष्मं का सॊग छोि दो। कामा की सपरता भं सन्दे ह है ।
मह चौऩाई फारकाण्ड के आयम्ब भं सत्सॊग-वणान के प्रसॊग भं है ।
5 होइ है सोई जो याभ यसच याखा। को करय तयक फढ़ावफहॊ साषा।।
पर्-कामा होने भं सन्दे ह है , अत् उसे बगवान ् ऩय छोि दे ना श्रेमष्कय है ।
मह चौऩाई फारकाण्डान्तगात सशव औय ऩावाती के सॊवाद भं है ।
6 भुद भॊगरभम सॊत सभाजू। स्जसभ जग जॊगभ तीयथ याजू।।
पर्-प्रद्ल उत्तभ है । कामा ससद्ध होगा।
मह चौऩाई फारकाण्ड भं सॊत-सभाजरुऩी तीथा के वणान भं है ।
7 गयर सुधा रयऩु कयम सभताई। गोऩद ससॊधु अनर ससतराई।।
पर्-प्रद्ल फहुत श्रेद्ष है । कामा सपर होगा।

मह चौऩाई श्रीहनुभान ् जी के रॊका प्रवेश कयने के सभम की है ।
8 फरुन कुफेय सुयेस सभीया। यन सनभुख धरय काह न धीया।।
पर्-कामा ऩूणा होने भं सन्दे ह है ।
मह चौऩाई रॊकाकाण्ड भं यावन की भृत्मु के ऩद्ळात ् भन्दोदयी के त्रवराऩ के प्रसॊग भं है ।
9 सुपर भनोयथ होहुॉ तुम्हाये । याभ रखनु सुसन बए सुखाये ।।
पर्-प्रद्ल फहुत उत्तभ है । कामा ससद्ध होगा।

मह चौऩाई फारकाण्ड ऩुष्ऩवाफटका से ऩुष्ऩ राने ऩय त्रवद्वासभिजी का आशीवााद है ।

ससतम्फय 2012

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गौतभ केवरी भहात्रवद्या (प्रद्लावरी)

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी
111 112 113 121 122 123 131 132 133
211 212 213 221 222 223 231 232 233
311 312 313 321 322 323 331 332 333
उऩय दशााएॊ गमे अॊक शकुनावरी प्रद्लावरी से उत्तय प्राद्ऱ कयने से ऩूवा शुद्ध एवॊ ऩत्रवि होकय अऩने इद्श दे व का
स्भयण कयते हुवे उऩय दशााएॊ गमे अॊक कोद्शको भं से फकसी एक कोद्शक ऩय अऩनी अॊगुरी अथवा शराका यखं। स्जस
कोद्शक ऩय आऩने अॊगुरी अथवा शराका यखी हं उस कोद्शक भं अॊफकत सॊख्मा के अनुसाय आऩके अबीद्श प्रद्ल का हर
नीचे क्रभश् अॊको भं फदमा गमा हं ।
111: आऩने जो प्रद्ल त्रवचाया है वह सपर होगा। तुम्हाये खयाफ फदनं का नाश होकय अच्छे फदन आए हं । भन की
काभनाएॉ ऩूणा हंगी। त्रवत्रवध प्रकाय की सचॊताएॉ भन भं यहती हं , वे अफ थोिे फदनं भं नाश हो जाएॉगी। एक सभि के
धोखे को बोग यहे हो। धभा कामा की इच्छा है , ऩयन्तु ऩाऩकभा से त्रवघ्नन आता है । आभदनी से खचा असधक यहता है ।
कोई कामा ससद्ध होने को आता है , तो शिु उसभं त्रवघ्नन डार दे ते हं । दान-ऩुण्म कयो। स्जससे भन की असबराषा ऩूणा
होगी।

त्रवयोधी

चाहे

फकतनी

कोसशश

कयं , ऩयन्तु

तुम्हायी

धायणा

अवश्म

परीबूत

होगी।

112: आऩका अबीद्श प्रद्ल राबदामक है । धन की प्रासद्ऱ होगी। बाग्मोदम के फदन अफ नजदीक आ गए हं । स्जस कामा
को हाथ भं रोगे, उसभं जम प्राद्ऱ कयोगे। त्रप्रमजन का सभराऩ होगा। धभा के कामा कयते यहो, स्जससे ऩुण्म की प्रासद्ऱ
होगी तथा सुख बी सभरेगा। भन सचस्न्तत यहता है । बाइमं से जुदाई होगी। भकान फनाने का इयादा कयते हो वह ऩाय
ऩिे गा। जभीन से तुभको राब होगा। आभदनी से खचा असधक होता है । तीथं की मािा कयने की असबराषा है , वह ऩूणा
होगी। धासभाक कामा सम्ऩन्न होगा।
113: आऩका अबीद्श प्रद्ल अच्छा है । तुम्हाये फदर को आयाभ सभरेगा। सुख-चैन प्राद्ऱ कयोगे। जो कामा भन भं सोचा
है , उसभं त्रवजम प्राद्ऱ कयोगे। त्रप्रमजनं का सभराऩ होगा। सचन्ता के फदन सनकर चुके हं तथा अफ अच्छे फदन आए हं ।
धभा के प्रबाव से सुखी हुए हो तथा आगे बी सुख प्राद्ऱ कयोगे। कद्श सहन कयते हुए बी दस
ू ये का कामा कयते हो ऩयन्तु
अऩने कामा भं सुस्ती यखते हो। फुत्रद्ध तेज है , त्रफगिे कामा को बी सुधाय रेते हो। बत्रवष्म भं राब सभरेगा।

121: आऩका त्रवचाया हुआ प्रद्ल राबदामक है । फहुत फदनं तक द्ु ख सहन कयने से सनयाश हो गए हो, फुये फदन सनकर
गए हं औय अफ शुब फदन आए हं । भन की इच्छाएॉ परीबूत हंगी। स्जतनी रक्ष्भी गॊवाई है उससे बी असधक प्राद्ऱ

कयोगे। स्जस काभ की सचन्ता कयते हो वह सचन्ता सभट जामेगी, उसभं एक व्मत्रि त्रवघ्नन उऩस्स्थत कयने आमेगा, फकन्तु

43

ससतम्फय 2012

अन्त भं तुभको सपरता प्राद्ऱ होगी। बाइमं तथा सम्फस्न्धमं का सनबाव कयते हो, स्जससे तुम्हायी कीसता फढ़ी है । फदर
के उदाय हो, जहाॉ जाते हो वहाॉ सुख सभरता है ।
122: आऩने जो काभ त्रवचाया है , उसभं सपरता नहीॊ सभर ऩाएगी। आऩने आज तक फहुतं का बरा फकमा है । अशुब
कभा के उदम से त्रवघ्नन उऩस्स्थत होते हं । जहाॉ तक फन सके वहाॉ तक धभा कयो। अऩने इद्शदे व की मथाशत्रि आयाधना
तथा भन्ि का जऩ कयो, स्जससे तकरीप दयू होगी।

123: आऩके अबीद्श कामा भं सपरता अवश्म सभरेगी। इतने ऩाऩकभा के थे तथा आऩने भहान सॊकट उठामे हं । अफ
शुब फदन आए हं । फहुतं का बरा फकमा, फकन्तु उन्होनं उऩकाय न भाना। धभा के सनसभत्त का सनकारा हुआ ऩैसा घय भं

न यखो। तीथं की मािा कयो, स्जस स्थान ऩय द्ु खी हुए हो, उस स्थान का त्माग कयो, दस
ू ये स्थान भं जाकय यहो।

ऩयदे श भं राब होगा। तुम्हाया फदर सचन्ता भं डू फा यहता है । अफ शुब कभा का उदम हुआ है । त्रवचाये हुए कामा भं
सपरता एवॊ धन प्राद्ऱ होगा।

131: जो फात आऩने सोची है वह अवश्म ससद्ध होगी, स्जसका नुकसान हुआ है वह दयू होकय बत्रवष्म भं राब होगा।
धन सभरेगा। तुम्हाये हाथ से धभा के कामा हंगे। स्जस भनुष्म से भुराकात चाहते हो वह होगी। सचन्ता के फदन अफ गए
हं । धातु, धन, सम्ऩत्रत्त औय कुटु म्फ की वृत्रद्ध होगी।
132: आज तक तुम्हाये फिे -फिे दश्ु भन हुए अफ उनका जोय नहीॊ चरेगा। भन भं त्रवचाये हुए कामं भं सपरता प्राद्ऱ
कयोगे। इज्जत भं वृत्रद्ध होगी। तुम्हाये हाथं से धभा के कामा हंगे, भन वाॊसछत सुख की प्रासद्ऱ होगी। बाइमं का सभराऩ
होगा। दान-ऩुण्म के प्रबाव से सुखी हंगे।
133: इतने फदन सॊकट यहा। सचॊसतत कामा अच्छी तयह से ऩाय न ऩिा, अफ अच्छे फदनं की शुरुआत हुई है , जो कामा

त्रवचाया है वह परीबूत होगा, फकसी बी प्रकाय का त्रवघ्नन नहीॊ आमेगा। इद्शदे व के प्रबाव से रक्ष्भी प्राद्ऱ होगी, त्रप्रमजन
से अचानक राब होगा।
211: तुभने भन भं स्जस कामा का त्रवचाय फकमा है , वह सपर नहीॊ होगा। इसके ससवाम कोई दस
ू या काभ कयो। तीथं
की मािा कयो, स्जससे ऩुण्म का राब हो। दश्ु भन रोग तुभको फाधाएॉ डारते हं ।

212: त्रवचाया हुआ कामा होगा। प्रेसभका से राब होगा। कुटु म्फ की वृत्रद्ध होगी। फहुत भुद्दत से त्रवचाया हुआ कामा होगा।

दश्ु भन तुम्हाये त्रवरुद्ध कोसशश कयं गे, फकन्तु तुम्हाये सद्भाग्म के आगे उनका जोय नहीॊ चरेगा। तीथं की मािा कयने की
इच्छा है वह हो सकेगी। भकान फनाने का तथा जभीन खयीदने का तुम्हाया इयादा सपर होगा। तुभको जभीन से राब
है । बाग्मफर से कामा ससद्ध हंगे।
213: द्ु ख के फदन अफ दयू हो गए हं । सुख के फदन शुरु हुए हं । फहुत फदनं से कद्श उठा यहे हो, ऩयदे श गए तो बी
सुख की प्रासद्ऱ न हुई, फकन्तु अफ सुख बोगने के फदन प्राद्ऱ हुए हं । आफरु फढ़े गी, सॊतान का सुख होगा। इतने फदनं
सभिं तथा कुटु म्फी जनं की तयप से द्ु ख सहन फकमा। जहाॉ तक फना दस
ू यं का बरा फकमा, ऩयन्तु उन रोगं ने गुण

नहीॊ भाना। शिु रोग ऩग-ऩग ऩय तैमाय यहते हं , फकन्तु उनका जोय नहीॊ चरता क्मंफक तुम्हाया बाग्म फरवान ् है । ऩास

भं धन थोिा है , फकन्तु इज्जत अच्छी है , इससरमे स्जतना प्राद्ऱ कयने का त्रवचाय कयोगे उतना प्राद्ऱ कय सकोगे। सभि
रोगं से जैसा चाफहए वैसा सुख नहीॊ है । इज्जत आफरु के सरमे खचा फहुत कयते हो। तुम्हाया धभा सुधया हुआ
है , इससरए धभा ऩय श्रद्धा यखो।

221: इतने फदन गए वे अच्छे गए, जो जो कामा फकए वे बी ऩाय ऩि गए, फकन्तु अफ जो कामा फदर भं त्रवचाया है वह
ऩाऩ कभा के उदम से ऩूणा नहीॊ होगा। सभि रोग बी शिु हो जाएॉगे। कुटु म्फ भं अनफन यहे गी, बाई जुदा हंगे। जो काभ

44

ससतम्फय 2012

फदर भं त्रवचाया है , उसका त्माग कयना ही श्रेद्ष है । धभा ऩय श्रद्धा यखो, इद्शदे व की सेवा कयो, दान-ऩुण्म के प्रबाव से
सुख सभरेगा।
222: जो काभ भन भं त्रवचाया है , उसको छोिकय दस
ू या काभ कयो। मफद इस त्रवचाये हुए कामा को कयोगे तो सॊकट

उत्ऩन्न होगा, नुकसान होगा, शिु रोग त्रवघ्नन उऩस्स्थत कयं गे। इद्शदे व की सेवा कयो, तीथं ऩय जाओ, स्जससे दस
ू ये कामा
बी सुधयं गे। फदर भं त्रवत्रवध प्रकाय की सचन्ताओॊ ने वास फकमा है , वह त्रवचाये हुए कामा को छोि दे ने से दयू होगी।

223: मह सवार अच्छा है , सुख के फदन नजदीक आए हं । व्माऩाय से धन प्राद्ऱ होगा, ऐशो-आयाभ प्राद्ऱ कयोगे। ऩत्नी
का सुख प्राद्ऱ कयोगे तथा सॊतान की वृत्रद्धहोगी, जो कामा कयोगे उसभं राब प्राद्ऱ कयोगे। ईभानदायी से काभ कयते हो तो
अन्त भं बरा ही होगा। धभा के प्रबाव से सुखी हंगे, इससरमे धभा को बूरना भत, धभा के कामं भं सुस्ती यखना ठीक नहीॊ।

231: स्जस कामा के सरए भन भं त्रवचाय फकमा है , वह कामा तीन भास भं होगा। अऩनी स्त्री की तयप से राब होगा।
आज तक कुटु म्फीजनं की तयप से सुख नही सभरा, फकन्तु बत्रवष्म भं सभरेगा। सॊतानं की वृत्रद्ध होगी। ससुयार के खचा
की सचन्ता है , सो सभट जाएगी। आफरु के सरए आभदनी से खचा असधक कयना ऩिता है । तीथं की मािा कयने का
इयादा है , फकन्तु त्रवघ्नन आता है । बत्रवष्म भं धभा कामा कय सकोगे। रृदम भं स्जस कामा की सचन्ता है , वह धभा के प्रबाव
से दयू हो जाएगी, इससरए धभा ऩय श्रद्धा यखो, स्जससे सपरता प्राद्ऱ कय सकोगे।

232: जो काभ त्रवचाया है , उसे छोिकय कोई दस
ू या काभ कयो। त्रवचाये हुए कामा को कयने भं राब नहीॊ है , मफद कयोगे
तो तुभको तुम्हाया स्थान छोिकय दस
ू ये स्थान ऩय जाना ऩिे गा, कुटु म्फीजनं का त्रवमोग होगा। इससरए उसचत है फक इस
कामा को छोि दो। धभा भं होसशमाय यहना तथा अऩनी शत्रि के अनुसाय दान-ऩुण्म कयना स्जससे सुख हो।

233: थोिे फदनं भं धन सभरेगा। जो काभ त्रवचाया है , वह ऩूणा होगा। त्रप्रमजनं से सभराऩ होगा। जभीन, जागीय अथवा
भकान से राब होगा। आफरु फढ़े गी। धभा कामं भं खचा कयो। उसके प्रताऩ से सुख-चैन यहे गा। याज्मऩऺ से राब होगा।
भन की धायणा ऩूणा होगी। स्त्री की तयप से सुख है । एक सभम अकस्भात ् राब सभरेगा।

311: मह सवार फहुत ही गयभ है । स्जस कामा का त्रवचाय फकमा है , वह ऩूणा होगा। भुकदभा जीत जाओगे, व्माऩाय
योजगाय भं राब होगा। कीसता फढ़े गी, याज्म की तयप से राब होगा। धभा के प्रबाव से सुख सभरा है तथा बत्रवष्म भं बी
सभरेगा। दस
ू यं के कामा ऩरयश्रभ से ऩूया कयते हो, फकन्तु अशुब कभा उफदत होने से अऩने कभा भं उदासीन यहते
हो, त्रवदे श मािा होगी औय वहाॉ राब होगा। धभा ऩय श्रद्धा यखो स्जससे सॊकट दयू हं। अऩने हाथ से रक्ष्भी प्राद्ऱ कयोगे।

312: जो कामा त्रवचाया है उसे छोिकय कोई दस
ू या काभ कयो अन्मथा शिु रोग त्रवघ्नन डारंगे, दौरत की खयाफी

होगी, घय के भनुष्मं तथा ऩशुओॊ ऩय सॊकट आएगा, इससरए त्रवचाये हुए कामा को छोि दे ना ही उसचत है । धभा के प्रबाव
से सफ कामा सपर होते हं । सनयासश्रतं को आश्रम दो तथा दे वासधदे व का स्भयण कयो स्जससे सुखी हंगे।

313: मह प्रद्ल अच्छा है । धन तथा स्त्री से सहमोग एवॊ सुख सभरेगा। सॊतान से सुख सभरेगा। सॊतान होगी, त्रप्रमजन का
सभराऩ होगा। अभुक भुद्दत की धायी हुई धायणा सपर होगी। सचन्ता के फदन अफ दयू हुए हं । दे व गुरु तथा धभा की
सेवा कयो। दश्ु भन रोग सताते हं , फकन्तु अफ तुम्हाया प्रायब्ध फरवान ् फना है स्जससे इन रोगं का जोय नहीॊ चरेगा।
जभीन से राब होगा। कीसता के सरए खचा असधक कयना ऩिता है । सभिं से राब होगा।

321: जभीन, भकान अथवा फाग-फगीचे से राब होगा। धन प्राद्ऱ कयोगे, स्नेही जन से सभराऩ होगा। फकसी बी भनुष्म के साथ
सभिता होगी औय उसके द्राया धनाफद की प्रासद्ऱ होगी। ऩुण्म के उदम से इच्छाएॉ ऩयीऩूणा होगी। धभा का आयाधन कयो। दश्ु भन रोग
ऩग-ऩग ऩय तैमाय यहं गे, फकन्तु सन्भुख होने से उनका जोय नहीॊ चरेगा। अऩनी शत्रि के अनुसाय खचा कयो। भकान फनाने के

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भनोयथ परीबूत हंगे। धन ऩैदा कयते हो, फकन्तु खचा असधक होने से इकट्ठा नहीॊ होता है ,त्रऩता से धन थोिा सभरेगा। स्त्री की
तयप से राब होगा। वृद्धावस्था भं धभा के कामा फन सकते हं ।
322: जो कामा आऩने भन भं त्रवचाया है , उसभे शिु रोग त्रवघ्नन डारंगे, ऩरयणाभ अच्छा नहीॊ। याज्म की तयप से
नायाजगी होगी मफद सुखी होना चाहते हो, तो त्रवचाया हुआ कामा छोिकय दस
ू या कामा कयो, तुम्हाये सहमोगी फदर गए
हं , उनका त्रवद्वास भत कयना। बजन-ऩूजन, व्रत-सनमभ भं ध्मान दो।

323: स्जस कामा का भन भं त्रवचाय फकमा है , उसभं राब होगा, इच्छा ऩूणा होगी, स्नेही का सभराऩ होगा, जो जो
सचन्ताएॉ उऩस्स्थत हुई हं , वे सफ दयू हंगी। धभा के कामा फन सकंगे। फहुत फदनं से ऩयदे श भं द्ु ख प्राद्ऱ फकमा
है , फकन्तु अफ द्ु ख के फदन गए। तीथामािा होगी। अफ दे श भं जाकय आनन्द प्राद्ऱ कयोगे। धभा के कामं भं रक्ष्म
यखो, स्जससे सफ सुख प्राद्ऱ कयोगे।

331: तुम्हाये भन की सचन्ता सभटे गी। फीभायी की परयमाद दयू होगी। भन की धायणा ऩूणा होगी। थोिे फदनं भं ही धन

की प्रासद्ऱ होगी। स्नेही का सभराऩ होगा। धभा-कभा भं ऩैसा खचा कयो, स्जससे ऩरयणाभ भं पामदा होगा। अच्छे फदन आए
हं , ऩाऩकभा

से

इतने

फदन

द्ु ख

प्राद्ऱ

फकमा

है , ऩयन्तु

अफ

वे

फीत

गए

हं ।

332: फुये फदन गए अफ अच्छे फदन आए हं । जभीन तथा धन-दौरत भं जो हासन हुई है , वह सभट जाएगी तथा बत्रवष्म
भं राब होगा। ऩयभेद्वय का ध्मान कयो। रृदम शुद्ध है , स्जससे भन की सचन्ता जल्दी दयू होगी। ऩयदे श भं यहे भनुष्म की
सचन्ता है सो उसका सभराऩ होगा। धभा के प्रबाव से सुखी हंगे।

333: इतने फदन सनधान अवस्था भं व्मतीत फकए, फकन्तु अफ धन प्राद्ऱ होगा तथा भन की धायणा परीबूत होगी।
जीवनसाथी से सुख प्राद्ऱ होगा, तीन भफहने फाद अच्छे फदन आएॉगे। इद्शदे व की आयाधना कयो। आभदनी से खचा असधक
है , धन इकट्ठा फकमा नहीॊ, सभि की तयप से धोखा सभरा है , दश्ु भन रोग ऩीछे से सनन्दा कयते हं , फकन्तु साभने आकय
फोर नहीॊ सकते। जभीन से राब होगा। ऩयभेद्वय का जऩ कयो।

 क्मा आऩको उच्च असधकायी से ऩये शानी हं ?
 क्मा आऩकी अऩने सहकभाचायी से अनफन होती हं ?

 क्मा आऩके असधनस्थ कभाचायी आऩकी फात नही भानते?
मफद आऩको अऩने उच्च असधकायी, सहकभाचायी, असधनस्थ कभाचायी से ऩये शानी हं । आऩके अनूकुर कामा नहीॊ कयते मा
आऩको कयने नहीॊ दे ते? वह आऩकी फात नहीॊ भानतं? त्रफना वजह आऩको ऩये शान कयते हं ? अन आवश्मक कामा आऩसे
कयवाते हं । आऩका प्रभोशन रुकवादे ते हं । उसचत कामा कयने ऩय बी आऩके कामा भं नुक्श सनकारते हं ? मफद आऩ इसी
तयह फक फकसी सभस्मा से ग्रस्त हं तो आऩ उन असधकायी, सहकभॉ, असधनस्थकभॉ मा अन्म फकसी व्मत्रि त्रवशेष के
नाभ से गुरुत्व कामाारत द्राया शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से भॊि ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा चैतन्म मुि वशीकयण कवच एवॊ
एस.एन.फडब्फी फनवारे एवॊ उसे अऩने घय-ओफपस भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रवसध-त्रवधान से आऩ त्रवशेष राब प्राद्ऱ
कय सकते हं । मफद आऩ भॊि ससद्ध वशीकयण कवच एवॊ एस.एन.फडब्फी फनवाना चाहते हं , तो सॊऩका कयं ।

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सवाससत्रद्धदामक भुफद्रका
इस भुफद्रका भं भूॊगे को शुब भुहूता भं त्रिधातु (सुवणा+यजत+ताॊफ)ं भं जिवा कय उसे शास्त्रोि त्रवसधत्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो द्राया सवाससत्रद्धदामक फनाने हे तु प्राण-प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा चैतन्म मुि फकमा
जाता हं । इस भुफद्रका को फकसी बी वगा के व्मत्रि हाथ की फकसी बी उॊ गरी भं धायण कय सकते हं ।
महॊ भुफद्रका कबी फकसी बी स्स्थती भं अऩत्रवि नहीॊ होती। इस सरए कबी भुफद्रका को उतायने की
आवश्मिा नहीॊ हं । इसे धायण कयने से व्मत्रि की सभस्माओॊ का सभाधान होने रगता हं । धायणकताा
को जीवन भं सपरता प्रासद्ऱ एवॊ उन्नसत के नमे भागा प्रसस्त होते यहते हं औय जीवन भं सबी प्रकाय
की ससत्रद्धमाॊ बी शीध्र प्राद्ऱ होती हं ।

भूल्म भाि- 6400/-

(नोट: इस भुफद्रका को धायण कयने से भॊगर ग्रह का कोई फुया प्रबाव साधक ऩय नहीॊ होता हं ।)

सवाससत्रद्धदामक भुफद्रका के त्रवषम भं असधक जानकायी के सरमे हे तु सम्ऩका कयं ।

ऩसत-ऩत्नी भं करह सनवायण हे तु
मफद ऩरयवायं भं सुख-सुत्रवधा के सभस्त साधान होते हुए बी छोटी-छोटी फातो भं ऩसत-ऩत्नी के त्रफच भे करह होता यहता हं ,

तो घय के स्जतने सदस्म हो उन सफके नाभ से गुरुत्व कामाारत द्राया शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से भॊि ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत
ऩूणा चैतन्म मुि वशीकयण कवच एवॊ गृह करह नाशक फडब्फी फनवारे एवॊ उसे अऩने घय भं त्रफना फकसी ऩूजा, त्रवसधत्रवधान से आऩ त्रवशेष राब प्राद्ऱ कय सकते हं । मफद आऩ भॊि ससद्ध ऩसत वशीकयण मा ऩत्नी वशीकयण एवॊ गृह करह
नाशक फडब्फी फनवाना चाहते हं , तो सॊऩका आऩ कय सकते हं ।

100 से असधक जैन मॊि
हभाये महाॊ जैन धभा के सबी प्रभुख, दर
ा एवॊ शीघ्र प्रबावशारी मॊि ताम्र ऩि,
ु ब
ससरवय (चाॊदी) ओय गोल्ड (सोने) भे उऩरब्ध हं ।

हभाये महाॊ सबी प्रकाय के मॊि कोऩय ताम्र ऩि, ससरवय (चाॊदी) ओय गोल्ड (सोने) भे फनवाए जाते है । इसके

अरावा आऩकी आवश्मकता अनुशाय आऩके द्राया प्राद्ऱ (सचि, मॊि, फिज़ाईन) के अनुरुऩ मॊि बी फनवाए

जाते है . गुरुत्व कामाारम द्राया उऩरब्ध कयामे गमे सबी मॊि अखॊफडत एवॊ 22 गेज शुद्ध कोऩय(ताम्र
ऩि)- 99.99 टच शुद्ध ससरवय (चाॊदी) एवॊ 22 केये ट गोल्ड (सोने) भे फनवाए जाते है । मॊि के त्रवषम भे
असधक जानकायी के सरमे हे तु सम्ऩका कयं ।

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भॊि ससद्ध वाहन दघ
ा ना नाशक भारुसत मॊि
ु ट

ऩौयास्णक ग्रॊथो भं उल्रेख हं की भहाबायत के मुद्ध के सभम अजुन
ा के यथ के अग्रबाग ऩय भारुसत ध्वज एवॊ
भारुसत मन्ि रगा हुआ था। इसी मॊि के प्रबाव के कायण सॊऩूणा मुद्ध के दौयान हज़ायं-राखं प्रकाय के आग्नेम अस्त्र-

शस्त्रं का प्रहाय होने के फाद बी अजुन
ा का यथ जया बी ऺसतग्रस्त नहीॊ हुआ। बगवान श्री कृ ष्ण भारुसत मॊि के इस
अद्भत
ा नाग्रस्त कैसे हो
ु यहस्म को जानते थे फक स्जस यथ मा वाहन की यऺा स्वमॊ श्री भारुसत नॊदन कयते हं, वह दघ
ु ट
सकता हं । वह यथ मा वाहन तो वामुवेग से, सनफाासधत रुऩ से अऩने रक्ष्म ऩय त्रवजम ऩतका रहयाता हुआ ऩहुॊचेगा।
इसी सरमे श्री कृ ष्ण नं अजुन
ा के यथ ऩय श्री भारुसत मॊि को अॊफकत कयवामा था।

स्जन रोगं के स्कूटय, काय, फस, ट्रक इत्माफद वाहन फाय-फाय दघ
ा ना ग्रस्त हो यहे हो!, अनावश्मक वाहन को
ु ट

नुऺान हो यहा हं! उन्हं हानी एवॊ दघ
ा ना से यऺा के उद्दे श्म से अऩने वाहन ऩय भॊि ससद्ध श्री भारुसत मॊि अवश्म
ु ट

रगाना चाफहए। जो रोग ट्रान्स्ऩोफटं ग (ऩरयवहन) के व्मवसाम से जुडे हं उनको श्रीभारुसत मॊि को अऩने वाहन भं अवश्म
स्थात्रऩत कयना चाफहए, क्मोफक, इसी व्मवसाम से जुडे सैकडं रोगं का अनुबव यहा हं की श्री भारुसत मॊि को स्थात्रऩत
कयने से उनके वाहन असधक फदन तक अनावश्मक खचो से एवॊ दघ
ा नाओॊ से सुयस्ऺत यहे हं । हभाया स्वमॊका एवॊ अन्म
ु ट
त्रवद्रानो का अनुबव यहा हं , की स्जन रोगं ने श्री भारुसत मॊि अऩने वाहन ऩय रगामा हं , उन रोगं के वाहन फडी से

फडी दघ
ा नाओॊ से सुयस्ऺत यहते हं । उनके वाहनो को कोई त्रवशेष नुक्शान इत्माफद नहीॊ होता हं औय नाहीॊ अनावश्मक
ु ट
रुऩ से उसभं खयाफी आसत हं ।

वास्तु प्रमोग भं भारुसत मॊि: मह भारुसत नॊदन श्री हनुभान जी का मॊि है । मफद कोई जभीन त्रफक नहीॊ यही हो, मा उस
ऩय कोई वाद-त्रववाद हो, तो इच्छा के अनुरूऩ वहॉ जभीन उसचत भूल्म ऩय त्रफक जामे इस सरमे इस भारुसत मॊि का
प्रमोग फकमा जा सकता हं । इस भारुसत मॊि के प्रमोग से जभीन शीघ्र त्रफक जाएगी मा त्रववादभुि हो जाएगी। इस सरमे
मह मॊि दोहयी शत्रि से मुि है ।

भारुसत मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी के सरमे गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कयं । भूल्म Rs- 255 से 10900 तक

क्मा आऩके फच्चे कुसॊगती के सशकाय हं ?

 क्मा आऩके फच्चे आऩका कहना नहीॊ भान यहे हं ?
 क्मा आऩके फच्चे घय भं अशाॊसत ऩैदा कय यहे हं ?
घय ऩरयवाय भं शाॊसत एवॊ फच्चे को कुसॊगती से छुडाने हे तु फच्चे के नाभ से गुरुत्व कामाारत द्राया शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान
से भॊि ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा चैतन्म मुि वशीकयण कवच एवॊ एस.एन.फडब्फी फनवारे एवॊ उसे अऩने घय भं स्थात्रऩत
कय अल्ऩ ऩूजा, त्रवसध-त्रवधान से आऩ त्रवशेष राब प्राद्ऱ कय सकते हं । मफद आऩ तो आऩ भॊि ससद्ध वशीकयण कवच एवॊ
एस.एन.फडब्फी फनवाना चाहते हं , तो सॊऩका इस कय सकते हं ।

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चंतीसा मन्ि द्राया बत्रवष्म ऻान प्रद्लावरी

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी

9 16 2 7
6 3 13 12
15 10 8 1
4 5 11 14
बत्रवष्म ऻान प्रद्लावरी को चंतीसा मन्ि के अनुरुऩ फनामा गमा हं ।

 प्रद्लकताा को अऩने इद्श का ध्मान कयके नीचे वस्णात 34 प्रद्लं भं से अऩने सॊफॊसधत प्रद्ल का उच्चायण मा स्भयण
कयते हुए फदमे गमे चंतीसा मन्ि के फकसी बी अॊक ऩय अॊगुरी यखं।

 अॊगुरी यखं अॊक की सॊख्मा एवॊ अऩने प्रद्ल की सॊख्मा को जोिकय उसभं से 1 अॊक घटा दं ।
 जो सॊख्मा शेष फचे उस सॊख्मा को 34 प्रद्लं की प्रद्ल तासरका भं दे ख कय उस सॊख्मा के दे वता का नाभ नोट कय
रं।

 जो दे वता का नाभ प्राद्ऱ हुवा है , उस दे वता के प्रद्ल पर भं चंतीसा मन्ि ऩय अॊगुरी यख कय प्राद्ऱ हुइ सॊख्मा को
अऩने सॊफॊसधत प्रद्ल का उत्तय सभझे।

 चंतीसा मन्ि की सॊख्मा एवॊ प्रद्ल सॊख्मा का जोि मफद 34 अॊक से असधक हो तो जोिकय प्राद्ऱ हुइ सॊख्मा भं से 34
घटा कय शेष फची हुइ सॊख्मा को 34 प्रद्लं की प्रद्ल तासरका भं दे ख कय उस सॊख्मा के दे वता का नाभ प्राद्ऱ कयं ।

उदाहयण:1
इद्श का ध्मान कय 34 प्रद्लं भं से मफद फकसी ने चमन फकमा हो प्रद्ल नॊफय 3 बाग्मोदम कफ होगा? तो, उस प्रद्ल का
स्भयण कय के चंतीसा मन्ि की सॊख्मा भं से फकसी एक सॊख्मा 16 ऩय अॊगुरी यखी हो, तो प्रद्ल सॊख्मा 3 + 16 जो
चंतीसा मन्ि ऩय अॊगुरी यख कय प्राद्ऱ हुइ सॊख्मा हं उन दोनो का जोड 3+16 = 19 होता हं उस उस सॊख्मा भं से 1
घटाकय 19-1 = 18 शेष सॊख्मा फचती हं । अफ प्रद्ल तारीका के प्रद्ल क्रभ की सॊख्मा 18 के दे वता शसन हं , तो अफ
शसनदे व के प्रद्लपर ऩय 16 नॊफय के पर भं सरखा हं बाग्मोदम शीघ्र होगा।

उदाहयण:2
मफद फकसी का प्रद्ल हो प्रद्ल सॊख्मा 27. आज का फदन कैसा यहे गा? तो उस प्रद्ल का स्भयण कयके चंतीसा मन्ि की
सॊख्मा भं से फकसी एक सॊख्मा का चमन कयने ऩय सॊख्मा 10 ऩय अॊगुरी यखी हो तो 27 + 10 का जोि 37 होता है , अफ

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37 भं से 1 घटाने ऩय 37-1= 36 सॊख्मा प्राद्ऱ हुई रेफकन प्रद्ल तासरका भं 36 सॊख्मा का प्रद्ल नहीॊ हं प्रद्ल तासरका भं
केवर 34 प्रद्ल फदमे गमे हं , तो अफ 36 सॊख्मा भं से 34 घटामे तो शेष फची सॊख्मा हं 2 तो अफ प्रद्लतारी का के 2यं
प्रद्ल के दे वता हं ब्रह्मा, अफ ब्रह्माजी के प्रद्लपर ऩय 10 नॊफय के पर भं सरखा हं फदन शुब यहे गा।

उदाहयण:3
मफद फकसी का प्रद्ल हो प्रद्ल सॊख्मा 32. अभुक स्त्री भुझे प्रेभ कयती है मा नहीॊ? तो उस प्रद्ल का स्भयण कयके चंतीसा
मन्ि की सॊख्मा भं से फकसी एक सॊख्मा का चमन कयने ऩय सॊख्मा 15 ऩय अॊगुरी यखी हो तो 32 + 15 का जोि 47
होता है , अफ 47 भं से 1 घटाने ऩय 47-1= 46 सॊख्मा प्राद्ऱ हुई रेफकन प्रद्ल तासरका भं 46 सॊख्मा का प्रद्ल नहीॊ हं प्रद्ल

तासरका भं केवर 34 प्रद्ल फदमे गमे हं , तो अफ 46 सॊख्मा भं से 34 घटामे तो शेष फची सॊख्मा हं 12 तो अफ प्रद्लतारी
का के 12वं प्रद्ल के दे वता हं ऩृथ्वी, अफ ऩृथ्वी प्रद्लपर ऩय 15 नॊफय के पर भं सरखा हं फदखावटी प्रेभ कयती है ।
इसी प्रकाय आऩ अऩने सॊफॊसधत प्रद्ल का उत्तय सयरता से प्राद्ऱ कय सकते हं ।

सॊख्मा प्रद्ल
1
सन्तान सुख होगा मा नहीॊ?

दे वता
गणेश

सॊख्मा प्रद्ल
18
भेयी सचॊता दयू होगी मा नहीॊ?

दे वता
शसन

2

कोटा -केस भं हाय होगी मा जीत?

ब्रह्मा

19

सभि के साथ कैसी फनेगी?

याहु

3

बाग्मोदम कफ होगा?

त्रवष्णु

20

कजा सभरेगा मा नहीॊ?

केतु

4

नौकयी सभरेगी मा नहीॊ?

सशव

21

खोई वस्तु सभरेगी मा नहीॊ?

ध्रुव

5

तयक्की का मोग है मा नहीॊ?

इन्द्र

22

ऩयदे शी कफ आमेगा?

मभ

6

खेती भं राब होगा मा हासन?

अस्ग्न

23

मािा से राब सभरेगा मा हासन?

त्रवद्वेदेवा

7

भकान फनेगा मा नहीॊ?

वामु

24

बाइमं भं कैसी फनेगी?

मऺ

8

ऩास होऊॊगा मा पेर?

सूमा

25

कुआॊ फनेगा मा नहीॊ?

बैयव

9

त्रवद्या प्राद्ऱ होगी मा नहीॊ?

चन्द्रभा

26

मह वषा कैसा यहे गा?

वासुफक

10

भेया जीवन कैसा व्मतीत होगा?

वसुदेव

27

आज का फदन कैसा यहे गा?

कुफेय

11

जीवन भं सपरता सभरेगी मा नहीॊ?

वरुण

28

ऩुि होगा मा कन्मा?

सभि

12

गुद्ऱ धन सभरेगा मा नहीॊ?

ऩृथ्वी

29

भेयी इच्छा ऩूयी होगी मा नहीॊ?

जमन्त

13

त्रववाह होगा मा नहीॊ?

अस्द्वनी

30

स्त्री स्वबाव भं कैसी सभरेगी?

तऺक

14

फीभाय अच्छा होगा मा नहीॊ?

भॊगर

31

सम्फन्धी धोखा तो नहीॊ दे गा?

शेष

15

स्वसन पर कैसा है ?

फुध

32

अभुक स्त्री भुझे प्रेभ कयती है मा नहीॊ?

काभ

16

तफादरा होगा मा नहीॊ?

फृहस्ऩसत

33

तीथा मािा को जाना होगा मा नहीॊ?

कार

17

व्माऩाय से राब यहे गा मा हासन?

शुक्र

34

भस्न्दय फनेगा मा नहीॊ?

अनन्त

ससतम्फय 2012

50

गणेश
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको सन्तान का सुख अवश्म सभरेगा।
2
फकसी की सहामता से भस्न्दय शीघ्र फनेगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आज का फदन भध्मभ यहे गा।
10
मह वषा आऩके सरए उत्तभ यहे गा।

3

तीथा मािा भं त्रवघ्नन आनेकी सॊबावना हं ।

11

कुएॊ का सनभााण नहीॊ होगा।

4

स्त्री आऩसे शुद्ध प्रेभ कयती है ।

12

बाइमं भं अच्छी फन जाएगी।

5

आऩके सम्फन्धी आऩको धोखा दे सकता है ।

13

इस मािा से राब सभरना कफठन है ।

6

आऩकी स्त्री का स्वबाव गयभ यहे गा।

14

ऩयदे शी शीघ्र ही रौटे गा।

7

इच्छा ऩूयी होने भं दे यी हो सकती है ।

15

खोई वस्तु की शीघ्र प्रासद्ऱ होगी।

8

कन्मा सुख भं वृत्रद्ध होगी।

16

कजा सभरने भं कफठनाई होगी।

ब्रह्मा
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
कोटा -केस भं आऩकी जीत होगी।
2
सन्तान सुख हे तु इद्श दे वता का ऩूजन कयं ।
3
भस्न्दय सनभााण भं त्रवरम्फ होगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
सॊतान सुख प्राद्ऱ होगा।
10
आज का फदन आऩके सरए शुब यहे गा।
11
मह वषा आऩके सरए अनुकूर नहीॊ है ।

4

तीथा मािा जाने की इच्छा ऩूणा होगी।

12

कुआॉ सनभााण की इच्छा ऩूणा होगी।

5

इस सभम स्त्री प्रेभ नहीॊ कयती है ।

13

बाइमं भं अनफन की सॊबावना असधक है ।

6

सम्फन्धी आऩको धोखा दे सकता है , सावधान यहं ।

14

आऩको मािा से राब होगा।

7

आऩकी स्त्री का स्वबाव सयर यहे गा।

15

ऩयदे शी के आने भं त्रवरम्फ होगा।

8

इस सभम इच्छा की ऩूसता शीघ्र नहीॊ हो सकेगी।

16

खोई वस्तु के सभरने की सॊबावना कभ हं ।

त्रवष्णु
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩका बाग्मोदम शीघ्र ही होगा।
2
कोटा -केस भं त्रवजम प्राद्ऱ होने भं सन्दे ह है ।
3
आऩको सन्तान सुख उऩाम से प्राद्ऱ होगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩकी इच्छा ऩूयी होने भं सन्दे ह है ।
10
आऩको कन्मा सुख की प्रासद्ऱ होगी।
11
आज का फदन आऩके सरए शुब नहीॊ यहे गा।

4

भस्न्दय सनभााण की इच्छा ऩूयी होगी।

12

मह वषा आऩके सरए शुब यहे गा।

5

तीथा मािा ऩय जाने भं त्रवरम्फ होगा।

13

कुॊआॉ सनभााण होने भं सॊदेह हं ।

6

स्त्री आऩसे गोऩनीम प्रेभ कयती है ।

14

बाइमं भं अनफन असधक यहे गी।

7

सम्फन्धी आऩको धोखा नहीॊ दे गा।

15

मािा भं राब सभरने की सम्बावना कभ हं ।

8

आऩकी स्त्री का स्वबाव उत्तभ होगा।

16

ऩयदे शी को आने भं त्रवरम्फ होगा। सनस्द्ळॊत यहं ।

ससतम्फय 2012

51

सशव
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको नौकयी शीघ्र सभर जामेगी।
2
आऩके बाग्मोदम भं अबी दे य है ।
3
कोटा -केस भं आऩकी हाय होने की सम्बावना हं ।
4
सॊतान सुख की इच्छा शीघ्र ऩूणा होगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
स्त्री के स्वबाव से आऩका स्वबाव सभर जामेगा।
10
आऩकी इच्छा ऩूयी होगी।
11

आऩको सॊतान सुख सभरेगा।

12

आज का फदन फदन शुब है ।

5

भस्न्दय नहीॊ फनेगा।

13

मह वषा आऩके सरए उत्तभ नहीॊ यहे गा।

6

तीथा-मािा नहीॊ होने का सॊकेत है ।

14

कुआॉ सनभााण की इच्छा ऩूयी होगी।

7

स्त्री आऩसे प्रेभ कयती है ।

15

बाइमं भं अनफन यहने की सम्बावना हं ।

8

सम्फन्धी आऩको धोखा दे सकता हं , सावधान यहं ।

16

आऩको मािा भं राब सभरेगा।

.

इन्द्र

सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩकी तयक्की के मोग अच्छे हं ।
2
आऩको नौकयी प्रमत्न से सभरेगी।
3
आऩके बाग्मोदम भं त्रवरम्फ होगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩसे सम्फन्धी गोऩसनम चार चरेगा।
10
आऩकी स्त्री का स्वबाव अच्छा यहे गा।
11
आऩकी इच्छा ऩूणा होने भं सन्दे ह है ।

4

कोटा -केस भं आऩकी जीत अवश्म होगी।

12

कन्मा सुख भं वृत्रद्ध का सॊकेत हं ।

5

आऩको सॊतान सुख उऩाम से सभरेगा।

13

आज का फदन भध्मभ यहे गा।

6

भस्न्दय सनभााब की आशा ऩूणा होगी।

14

आऩके सरए मह वषा कफठनाई बया यहे गा।

7

तीथा मािा ऩय जाना सॊबव हं ।

15

कुवं का सनभााण दे यी से होगा।

8

स्त्री आऩसे प्रेभ नहीॊ कयती,फदखावटी प्रेभ कय यही है ।

16

बाइमं के त्रफच भं अच्छा भेर यहे गा।

.

अस्ग्न

सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको खेती से राब होगा।
2
आऩकी तयक्की भं दे य हो सकती है ।
3
आऩको शीघ्र नौकयी नहीॊ सभरेगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
उस स्त्री के सरए प्रेभ का फदखावा ही अच्छा है ।
10
सम्फन्धी आऩको धोखा नहीॊ दे गा।
11
आऩकी स्त्री का स्वबाव प्रसतकूर होगा।

4

आऩका बाग्मोदम शीघ्र ही होगा।

12

इच्छा शीघ्र ऩूयी नहीॊ होगी।

5

कोटा -केस की जीत भं सन्दे ह है ।

13

सॊतान सुख प्राद्ऱ होगा।

6

आऩको सन्तान का सुख दे य से सभरेगा।

14

आज का फदन आऩके सरए उत्तभ है ।

7

भस्न्दय का सनभााण त्रप्रमजनो के सहमोग से होगा।

15

आऩके सरए मह वषा उत्तभ यहे गा।

8

तीथा मािा होने भं सॊदेह यहे गा।

16

कुएॉ के सनभााण की इच्छा ऩूयी होगी।

ससतम्फय 2012

52

वामु
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩकी गृह सनभााण की काभना ऩूयी होगी।
2
आऩको खेती भं राब कभ होगा।
3
आऩकी तयक्की अबी नहीॊ होगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
फकसी कायण आऩकी तीथा मािा अबी नहीॊ होगी।
10
स्त्री आऩसे प्रेभ कयती है ।
11

सम्फन्धी आऩको धोखा दे सकते हं ।

4

आऩको नौकयी कापी प्रमत्न के फाद सभरेगी।

12

आऩकी स्त्री का स्वबाव कुछ सचिसचिा होगा।

5

आऩका बाग्मोदम शीघ्र हो सकता हं ।

13

आऩकी इच्छा ऩूणा होगी।

6

कोटा -केस भं आऩको त्रवजम सभरने भं कफठन है ।

14

आऩको कन्मा का सुख प्राद्ऱ होगा।

7

आऩको सॊतान का सुख सभरेगा।

15

आज का फदन आऩके सरए प्रसतकूर यहे गा।

8

आऩकी भस्न्दय फनाने की काभना ऩूणा होगी।

16

मह वषा आऩके सरए भध्मभ यहे गा।

सूमा
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
इस ऩरयऺा भं सपर होने की ऩूणा सॊबावना हं ।
2
आऩका भकान फनने भं त्रवरम्फ है ।
3
आऩको इस फाय खेती से राब नहीॊ होगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
भस्न्दय सनभााण होगा रेफकन दे य से।
10
मह तीथा मािा आऩके सरए उत्तभ यहे गी।
11

उस स्त्री का प्रेभ फदखावटी है ।

4

इस फाय आऩकी तयक्की शीघ्र होगी।

12

आऩका सम्फन्धी धोखा नहीॊ दे गा।

5

आऩको नौकयी अबी नहीॊ सभरेगी।

13

आऩकी स्त्री का स्वबाव उत्तभ यहे गा।

6

आऩका बाग्मोदम दे य से होगा।

14

आऩकी मह इच्छा ऩूयी नहीॊ होगी।

7

आऩके भुकदभा जीतने की सॊबावना प्रफर हं ।

15

आऩको सॊतान सुख प्राद्ऱ होगा।

8

सॊतान सुख भं फाधा, सॊतान गोऩार का ऩूजन कयं ।

16

आऩका फदन शुब यहे गा।

चन्द्रभा
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको उत्तभ त्रवद्या प्राद्ऱ होगी।
2
इस फाय आऩके सपर होने भं सन्दे ह यहे गा।
3
आऩका भकान अबी नहीॊ फन सकेगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको सॊतान सुख त्रवरम्फ से प्राद्ऱ होगा।
10
भस्न्दय फनने भं त्रवघ्नन आमेगं।
11
तीथा मािा होने भं सन्दे ह हं ।।

4

इस फाय खेती से आऩको राब सभरेगा।

12

आऩके सरए गोऩसनम प्रेभ हासनकायक होगा।

5

आऩकी तयक्की का मोग इस फाय नहीॊ है ।

13

सम्फन्धी आऩको धोखा दे गा।

6

आऩको नौकयी शीध्र सभर जामेगी।

14

आऩकी स्त्री का स्वबाव अनुकूर नहीॊ होगा।

7

आऩका बाग्मोदम शीघ्र होगा।

15

आऩकी इच्छा ऩूयी होने भं त्रवरम्फ होगा।

8

कोटा -केस भं त्रवजम प्रासद्ऱ भं सन्दे ह यहे गा।

16

कन्मा सुख भं वृत्रद्ध होगी।

53

ससतम्फय 2012

वसुदेव
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩका आने वारा जीवन सुखऩूवक
ा यहे गा।
2
आऩके त्रवद्या प्रासद्ऱ की सॊबावना थोिी हं ।
3
इस वषा ऩरयऺा भं असपरता सभर सकती हं ।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
कोटा -केस भं आऩकी त्रवजम सनस्द्ळत होगी।
10
आऩको सन्तान सुख सभरने भं फाधाएॊ आमेगी।
11

भस्न्दय के सनभााण भं त्रवघ्नन आमंगे।

12

आऩकी तीथामािा की इच्छा ऩूणा नहीॊ होगी।

4

आऩकी भकान की इच्छा ऩूणा होने भं त्रवरॊफ होगा।

5

स्त्री आऩसे सच्चा प्रेभ कयती है ।

6

इस फाय खेती से कभ राब सभरने की सॊबावना हं । 13
14
आऩकी तयक्की का मोग इस फाय फन यहा है ।

7

आऩको नौकयी सभरने भं अबी दे य है ।

15

आऩको स्त्री उत्तभ स्वबाव की सभरेगी।

8

आऩका बाग्मोदम शीघ्र होने की सॊबावना हं ।

16

आऩकी इच्छा शीघ्र ऩूयी होगी।

आऩका सम्फन्धी आऩको धोखा नहीॊ दे गा।

वरुण
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको जीवन भं सपरता प्राद्ऱ होगी।
2
आऩका जीवन सॊघषाभम यहे गा।
3
आऩकी त्रवद्या अऩूणा होने की सॊबावना हं ।
4
ऩरयऺा भं सपरता सभरने की ऩूणा सम्बावना हं ।
5
आऩका भकान फनाने की इच्छा अबी ऩूणा नहीॊ होगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩका बाग्मोदम शीघ्र होने का सॊकेत है ।
10
कोटा -केस भं आऩकी जीत होने भं सन्दे ह है ।
11

आऩको सन्तान सुख उऩाम के फाद भं प्राद्ऱ होगा।

12

आऩकी भस्न्दय सनभााण की इच्छा ऩूयी होगी।

13

तीथा मािा की काभना ऩूणा होगी।

6

इस फाय आऩको खेती से त्रवशेष राब नहीॊ होगा।

14

स्त्री आऩसे गोऩसनम प्रेभ कयती है ।

7

आऩकी इस फाय तयक्की होने भं सन्दे ह यहे गा।

15

सम्फन्धी का आऩको धोखा दे ना कफठन है ।

8

आऩको नौकयी सभरने के अबी सभम रगेगा है ।

16

आऩकी स्त्री का स्वबाव सभरनसाय यहे गा।

ऩृथ्वी
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको गुद्ऱ धन प्राद्ऱ होगा।
2
आऩको जीवन भं सपरता सभर जाएगी।
3
आऩका जीवन सॊघषा से फीतेगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको जल्दी नौकयी सभर जामेगी।
10
आऩके बाग्मोदम भं दे य है ।
11

कोटा -केस भं आऩकी हाय होने की सॊबावना है ।

4

आऩको त्रवद्या प्राद्ऱ होगी।

12

आऩको सन्तान सुख प्राद्ऱ होगा।

5

इस फाय आऩके सपर होने भं सन्दे ह है ।

13

भस्न्दय फनने भं त्रवरम्फ होगा।

6

आऩका भकान अबी दे य से फनेगा।

14

तीथा मािा भं रुकावट सम्बव हं ।

7

आऩको इस फाय खेती से अच्छा राब सभरेगा।

15

स्त्री आऩसे फदखावटी प्रेभ कयती है ।

8

आऩकी तयक्की अबी नहीॊ होगी।

16

आऩका सम्फन्धी आऩको धोखा नहीॊ दे गा।

ससतम्फय 2012

54

अद्वनी
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩका त्रववाह हो जामेगा।
2
अऩको गुद्ऱ धन त्रवशेष उऩाम द्राया सभरेगा।
3
कफठन प्रमासं के फाद जीवन भं सपरता प्राद्ऱ होगी।
4
आऩका जीवन अच्छे से फीतेगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩके तयक्की भं त्रवरम्फ है ।
10
आऩको जल्द नौकयी सभर जामेगी।
11

आऩका बाग्मोदम शीघ्र होगा।

12

कोटा -केस भं आऩको त्रवजम की प्रासद्ऱ होगी।

5

उत्तभ त्रवद्या प्राद्ऱ नहीॊ होगी।

13

आऩको सन्तान का सुख उऩाम से होगा।

6

इस फाय सपरता सभरने की सम्बावना कभ हं ।

14

आऩके भस्न्दय सनभााण की काभना भं त्रवरम्फ होगा।

7

आऩकी भकान की इच्छा दे य से ऩूणा होगी।

15

तीथा मािा होने की सम्बावना कभ हं ।

8

आऩको खेती भं असधक राब नहीॊ होगा।

16

स्त्री आऩसे सच्चा प्रेभ कयती है ।

भॊगर
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
फीभाय अच्छा हो जामेगा।
2
आऩका त्रववाह होने भं सन्दे ह है ।
3

गुद्ऱ धन इद्श दे व के ऩूजन से प्राद्ऱ हो सकता हं ।

4

आऩको जीवन भं सपरता अवश्म सभरेगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको खेती भं राब अवश्म सभरेगा।
10
आऩकी तयक्की दे य से होगी।
11
आऩको अबी नौकयी सभरने भं सन्दे ह है ।
12
आऩका बाग्मोदम त्रवरम्फ से होगा।

5

आऩका जीवन भध्मभ वगा का होगा।

13

कोटा -केस की जीत भं सन्दे ह होगा।

6

आऩको त्रवद्या प्राद्ऱ हो जामेगी।

14

सनस्द्ळन्त यहं , सन्तान सुख अवश्म

7

इस फाय आऩको सपरता प्राद्ऱ होगी।

15

भस्न्दय सनभााण की इच्छा शीघ्र ऩूणा होगी।

8

आऩका भकान शीघ्र फनेगा।

16

तीथा मािा की इच्छा ऩूयी होगी।

सभरेगा।

फुध
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩके स्वसन का पर उत्तभ सभरेगा।
2
फीभाय व्मत्रि दे य से स्वस्थ होगा।
3
आऩका त्रववाह उऩाम के ऩद्ळमात होगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩका भकान अबी नहीॊ फनेगा।
10
आऩको खेती से राब त्रवशेष सभरेगा।
11
आऩकी तयक्की त्रवरम्फ से होगी।

4

आऩको गुद्ऱ धन प्राद्ऱ होगा।

5

आऩका बाग्मोदम शीघ्र होगा।

6

आऩको जीवन भं सपरता सयरता से नहीॊ सभरेगी। 13
14
आऩके जीवन भं कफठनाइमाॊ असधक यहे गी।

7

आऩको त्रवद्या प्रासद्ऱ इद्श ऩूजा से सभरेगी।

15

आऩको सन्तान सुख उऩाम ऩद्ळमात सभरेगा।

8

आऩके सपर होने भं सन्दे ह है ।

16

भस्न्दय फनने भं त्रवरम्फ होगा।

12

आऩको नौकयी अबी नहीॊ सभरेगी।
कोटा -केस भं आऩकी जीत होगी।

ससतम्फय 2012

55

फृहस्ऩसत
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩका तफादरा शीघ्र होगा।
2
आऩके स्वसन का पर असधक शुब नहीॊ है ।
3
फीभाय व्मत्रि के ठीक होने भं सन्दे ह है ।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩ सपर होगं, इद्श ऩूजन से राब सभरेगा।
10
आऩकी भकान की काभना ऩूयी होगी।
11
आऩको खेती से ऩूया राब नहीॊ सभरेगा।

4

आऩका त्रववाह हो जामेगा।

12

आऩकी तयक्की शीघ्र ही होगी।

5

आऩको गुद्ऱ धन उऩाम से सभरेगा।

13

आऩको नौकयी सभर जामेगी।

6

आऩको जीवन भं सपरता कभ सभरेगी।

14

आऩका बाग्मोदम त्रवरम्फ से होगा।

7

आऩका जीवन अच्छी तयह से फीतेगा।

15

आऩको कोटा -केस भं त्रवजम प्रासद्ऱ भं सन्दे ह है ।

8

आऩको त्रवद्या प्रासद्ऱ भं कफठनाई होगी।

16

आऩको सॊतान सुख सयरता से नहीॊ सभरेगा।

शुक्र
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको व्माऩाय भं सावधानी से राब सभरे।
2
आऩका तफादरा हो जामेगा।
3
आऩके स्वसन का पर शुब है ।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको त्रवद्या थोिी भािा भं प्राद्ऱ होगी।
10
आऩ सपर होगे।
11

आऩका भकान त्रवरम्फ से फनेगा।

4

फीभाय व्मत्रि शीघ्र स्वस्थ हो जामेगा।

12

आऩको खेती से राब सभरने भं सन्दे ह है ।

5

आऩका त्रववाह उऩाम से होगा।

13

आऩकी तयक्की अबी नहीॊ होगी।

6

आऩको गुद्ऱ धन अवश्म सभरेगा।

14

आऩको नौकयी सभरने भं कद्श होगा है ।

7

आऩको जीवन भं सपरता कफठनाई से प्रासद्ऱ होगी।

15

आऩका बाग्मोदम शीघ्र होने वारा है ।

8

आऩके जीवन भं कफठनाइमाॊ असधक आमेगीॊ।

16

कोटा -केस भं आऩकी जीत सनस्द्ळत होगी।

शसन
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩकी सचन्ता दयू होने भं वि रगेगा।
2
आऩको व्माऩाय भं राब होगा।
3
आऩका तफादरा अबी नहीॊ होगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩका जीवन सुखभम व्मतीत होगा।
10
आऩ अस्च्छ त्रवद्या प्राद्ऱ कय सकोगे।
11

आऩका सपर होना भुस्श्कर है ।

4

आऩके स्वसन का पर उत्तभ है ।

12

आऩका भकान अबी नहीॊ फनेगा।

5

फीभाय व्मत्रि के ठीक होने भं सन्दे ह है ।

13

इस फाय आऩको खेती से राब नहीॊ सभरेगा।

6

आऩका त्रववाह होने भं सन्दे ह है ।

14

आऩकी तयक्की अबी नहीॊ होगी।

7

आऩको गुद्ऱ धन आसुयी ससत्रद्ध द्राया सभर सकेगा।

15

आऩको नौकयी शीघ्र सभर जामेगी।

8

आऩ जीवन भं अस्च्छ सपरता प्राद्ऱ कयोगे।

16

आऩका बाग्मोदम शीघ्र होगा।

ससतम्फय 2012

56

सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩका सभि आऩको धोखा दे गा, सावधान यहे ।
2
आऩकी भानससक सचॊता शीघ्र दयू हो जामेगी।
3
आऩको व्माऩाय से राब नहीॊ होगा।

याहु

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको जीवन भं सपरता कभ सभरेगी।
10
आऩका जीवन फाधाओॊ से मुि यहे गा।
11
आऩको उत्तभ त्रवद्या प्राद्ऱ नहीॊ हो सकेगी।

4

आऩका तफादरा हो जामेगा।

12

आऩके सपर होने भं सन्दे ह है ।

5

आऩके स्वसन का पर अच्छा नहीॊ है ।

13

आऩकी भकान की इच्छा ऩूयी होगी।

6

फीभाय व्मत्रि जल्द अच्छा हो जामेगा।

14

इस फाय आऩको खेती भं राब सभरेगा।

7

आऩका त्रववाह हो जामेगा।

15

आऩकी तयक्की प्रमत्न के उऩयाॊत होगी।

8

गुद्ऱ धन आऩके बाग्म भं नहीॊ है ।

16

आऩको नौकयी सभरने भं त्रवरम्फ होगा।

केतु
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको इस सभम कजा सभरने भं अबी दे य है ।
2
आऩ सभि से सतका यहं ।
3

आऩकी भानससक सचॊता इद्श आयाधना से दयू होगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको गुद्ऱ धन त्रऩतृ ऩूजन से सभरेगा।
10
आऩको जीवन भं त्रवशेष सपरता नहीॊ सभरेगी।
11
आऩको जीवन भं सपरता कभ सभरेगी।

4

आऩको व्माऩाय भं अवश्म राब होगा।

12

आऩको त्रवद्या कफठन ऩरयश्रभ से प्राद्ऱ होगी।

5

आऩका तफादरा रुक सकता हं ।

13

आऩ सपर हो जाओगे।

6

आऩके स्वसन का पर भध्मभ यहे गा।

14

आऩकी भकान की इच्छा जल्द ऩूयी नहीॊ होगी।

7

फीभाय व्मत्रि अच्छा हो जामेगा।

15

आऩको खेती से इस फाय त्रवशेष राब नहीॊ होगा।

8

आऩका त्रववाह उऩाम के फाद होगा।

16

आऩकी तयक्की भं त्रवघ्नन-फाधा आसकती हं ।

ध्रुव
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको खोमी वस्तु प्रमत्न के उऩयाॊत सभर सकेगी।
2
आऩको इस सभम कजा सभर जामेगा।
3
आऩकी सभि के साथ नहीॊ फनेगी।
4

आऩकी सचन्ता शीघ्र दयू होगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩका त्रववाह दे य से होगा।
10
आऩको गुद्ऱ धन सभरने भं सन्दे ह है ।
11
आऩको जीवन भं सपरता कद्श से सभरेगी।
12
आऩको जीवन भं सुख नहीॊ सभरेगा।

5

आऩको व्माऩाय भं असधक राब नहीॊ होगा।

13

आऩ त्रवद्या प्राद्ऱ कयोगे।

6

आऩका तफादरा इसफाय नहीॊ होगा।

14

आऩके सपर होने भं सन्दे ह है ।

7

आऩके स्वसन का पर उत्तभ है ।

15

आऩका भकान अबी नहीॊ फनेगा।

8

फीभाय व्मत्रि के अच्छे होने भं सन्दे ह है ।

16

आऩको इस फाय खेती से त्रवशेष राब सभरेगा।

ससतम्फय 2012

57

मभ
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
ऩयदे शी का आना सॊबव है ।
2
आऩको खोमी वस्तु सभर जामेगी।
3
आऩको इस सभम कजा सभरना भुस्श्कर होगा।
4
आऩकी सभि के साथ अच्छी फन जामेगी।
5

आऩकी सचन्ता अबी दयू नहीॊ होगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
व्मत्रि की फीभायी अच्छी हो जामेगी।
10
आऩका त्रववाह हो जामेगा।
11
आऩको गुद्ऱ धन प्राद्ऱ होगा।
12

आऩका जीवन भं सपर होना कफठन है ।

13

आऩ जीवन सुखऩूवक
ा व्मतीत होगा।

6

आऩको व्माऩाय से राब सभरेगाअ।

14

आऩको उत्तभ त्रवद्या प्राद्ऱ नहीॊ कय सकोगे।

7

आऩका तफादरा हो जामेगा।

15

इस फाय आऩ सपर नहीॊ होगं।

8

आऩके स्वसन का पर भध्मभ है ।

16

आऩकी तयक्की भं फाधा आमंगी।

त्रवद्वेदेवा
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩके सरए मािा राबदामी यहे गी।
2
ऩयदे शी अबी नहीॊ आमेगा।
3
आऩको खोमी वस्तु नहीॊ सभरेगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩके स्वसन का पर अशुब है ।
10
फीभाय व्मत्रि जल्द अच्छा नहीॊ होगा।
11
आऩका त्रववाह होने भं सन्दे ह है ।

4

आऩको इस सभम कजा दे य से सभरेगा।

12

आऩको गुद्ऱ धन नहीॊ सभरेगा।

5

आऩकी सभि के साथ नहीॊ फन सकेगी।

13

आऩको जीवन भं अच्छी सपरता सभरेगी।

6

आऩकी सफ सचन्ता दयू हो जामेगी।

14

आऩके जीवन भं कद्श असधक सभरंगे।
आऩ उत्तभ सशऺा प्राद्ऱ कयोगे।

7

आऩको व्माऩाय भं राब सभरना कफठन है ।

15

8

आऩका तफादरा नहीॊ होगा।

16

आऩ सपर हो जाओगे।

मऺ-प्रद्ल-पर
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩकी बाइमं भं फननी भुस्श्कर है ।
2
आऩको मािा भं राब कभ सभरे।
3
ऩयदे शी शीघ्र ही आ जामेगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩका तफादरा हो सकता हं ।
10
आऩके स्वसन का पर शुब है ।
11

फीभाय व्मत्रि जल्दी अच्छा हो जामेगा।

4

आऩको खोमी वस्तु सभर जामेगी।

12

आऩका त्रववाह उऩाम के फाद होगा।

5

इस सभम आऩको कजाा नहीॊ सभरेगा।

13

आऩको गुद्ऱ धन शीघ्र प्राद्ऱ होगा।

6

आऩका सभि के साथ अच्छा भेर होगा।

14

आऩका जीवन भं सपर होना भुस्श्कर है ।

7

आऩकी सचन्ता अबी नहीॊ सभटे गी।

15

आऩका जीवन सुखऩूवक
ा फीतेगा।

8

आऩको व्माऩाय से राब सभरेगा।

16

आऩको त्रवद्या इद्श कृ ऩा से प्राद्ऱ होगी।

ससतम्फय 2012

58

बैयव
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩकी कुएॉ के सनभााण की काभना ऩूयी होगी।
2
आऩकी बाइमं से अच्छी फन जामेगी।
3
आऩको मािा से राब नहीॊ यहे गा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको व्माऩाय भं राब सभरने भं भुस्श्कर है ।
10
आऩका तफादरा प्रमत्न से होगा।
11
आऩके स्वसन का पर उत्तभ नहीॊ है ।

4

आऩका ऩयदे शी अबी नहीॊ आमेगा।

12

फीभाय व्मत्रि का स्वस्थ होना कफठन है ।

5

आऩको खोमी वस्तु प्रमत्न से सभरेगी।

13

सनस्द्ळन्त यहे आऩका त्रववाह हो जामेगा।

6

आऩको इस सभम कजा सभर सकेगा।

14

आऩको गुद्ऱ धन नहीॊ सभरेगा।

7

आऩकी सभि से फननी कफठन है ।

15

आऩको जीवन भं अच्छी सपरता सभरेगी।

8

आऩकी सचन्ता सभटे गी, इद्श ऩूजा कयं ।

16

आऩके जीवन भं त्रवशेष फाधाएॊ आमंगी।

वासुफक
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩके सरए मह वषा भध्मभ यहे गा।
2
कुआॊ इस सभम फन जामेगा।
3
आऩकी बाइमं से नहीॊ फनेगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩकी सचन्ता सभट जामेगी।
10
आऩको व्माऩाय से राब सभरेगा।
11
आऩका तफादरा हो जामेगा।

4

आऩको मािा भं राब सभरेगा।

12

आऩके स्वसन का पर शुब है ।

5

ऩयदे शी शीघ्र ही आ जामेगा।

13

फीभाय व्मत्रि के अच्छे होने भं सन्दे ह है ।

6

आऩको खोमी वस्तु सभरेगी।

14

आऩका त्रववाह उऩाम से हो सकेगा।

7

आऩको इस सभम कजा सभरेगा।

15

आऩको गुद्ऱ धन त्रऩतृ ऩूजा से सभर सकेगा।

8

आऩका सभि धोखा दे गा, सावधान।

16

आऩको जीवन भं सपरता कभ सभरेगी।

कुफेय
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩके सरए आज का फदन शुब नहीॊ है ।
2
आऩके सरए मह वषा अच्छा यहे गा।
3
कुआॊ इस सभम नहीॊ फन सकेगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩ सभि के साथ सावधानी से कामा कये ।
10
आऩकी सचन्ता अबी दयू नहीॊ होगी।
11

आऩको व्माऩाय से राब सभरना कफठन है ।

4

आऩकी बाइमं भं अच्छी फन जामेगी।

12

आऩका तफादरा नहीॊ होगा।

5

आऩको मािा से त्रवशेष राब नहीॊ सभरेगा।

13

आऩके स्वसन का पर शुब नहीॊ है ।

6

ऩयदे शी फकसे कायण से अबी नहीॊ आमेगा।

14

फीभाय व्मत्रि अच्छा हो जामेगा।

7

आऩको खोमी वस्तु सभरने भं सन्दे ह है ।

15

आऩका त्रववाह उऩाम से होगा।

8

आऩको इस सभम कजा नहीॊ सभरेगा।

16

आऩको गुद्ऱ धन शीघ्र प्राद्ऱ होगा।

ससतम्फय 2012

59

सभि
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको सॊतान सुख प्राद्ऱ होगा।
2
आऩके सरए आज का फदन शुब है ।
3
आऩके सरए मह वषा उत्तभ यहे गा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको इस सभम कजा कफठनाई से सभरेगा।
10
आऩकी सभि के साथ अच्छी फनेगी।
11
आऩकी सचन्ता सभट जामेगी।

4

कुआॊ इस सभम फन जामेगा।

12

आऩको व्माऩाय से राब नहीॊ सभरेगा।

5

आऩका बाइमं से अनफन होगी।

13

आऩका तफादरा हो जामेगा।

6

आऩको मािा भं कभ राब सभरेगा।

14

आऩके स्वसन का पर शुब है ।

7

ऩयदे शी से जल्द भुराकात होगी।

15

फीभाय व्मत्रि रे स्वस्थ होने भं सन्दे ह है ।

8

आऩको खोमी वस्तु नहीॊ सभरेगी।

16

आऩका त्रववाह शीघ्र ही हो जामेगा।

जमन्त
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩकी इच्छा दे य से ऩूणा होगी।
2
आऩके कन्मा सुख भं वृत्रद्ध होगी।
3
आऩके सरए आज का फदन भध्मभ यहे गा।
4
आऩके सरए मह वषा उत्तभ यहे गा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको खोमी वस्तु सभरने भं सन्दे ह है ।
10
आऩको इस सभम कजा नहीॊ सभरेगा।
11
आऩकी सभि के साथ फनना कफठन है ।
12

आऩकी भानससक सचन्ता फढ़ जामेगी।

5

इस सभम कुआॊ फनने भं रुकावटं ज्मादा है ।

13

आऩको व्माऩाय भं राब कफठनाई से सभरेगा।

6

आऩका बाइमं से भेर-सभराऩ अच्छा यहे गा।

14

अबी आऩका तफादरा होने भं सन्दे ह है ।

7

आऩको मािा भं राब यहे गा।

15

आऩके स्वसन का पर अच्छा नहीॊ है ।

8

ऩयदे शी अबी आने भं सन्दे ह हं ।

16

फीभाय व्मत्रि शीघ्र ही अच्छा होगा।

शेष
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩके सम्फन्धी आऩको धोखा नहीॊ दे गा।
2
आऩको स्त्री तेज स्वबाव की सभरेगी।
3
आऩकी इच्छा ऩूयी होने भं सन्दे ह है ।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩको मािा से त्रवशेष राब नहीॊ सभरेगा।
10
ऩयदे शी शीघ्र वाऩस आ जामेगा।
11
आऩको खोमी वस्तु सभरने भं सन्दे ह है ।

4

आऩके कन्मा सुख भं वृत्रद्ध होगी।

12

आऩको इस सभम कजा नहीॊ सभरेगा।

5

आऩके सरए आज का फदन भध्मभ यहे गा।

13

आऩकी सभि के साथ अच्छी फन जामेगी।

6

आऩके सरए मह वषा उत्तभ यहे गा।

14

7

इस सभम कुआॊ फनाने भं आकस्स्भक त्रवघ्नन-फाधा

आऩकी सचन्ता अबी दयू नहीॊ होगी।

15

आऩको व्माऩाय से राब सभरेगा।

आमेगी।
8

आऩकी बाइमं से फननी भुस्श्कर यहे गी।

16

आऩके तफादरे की इच्छा त्रवरम्फ से ऩूणा होगी।

ससतम्फय 2012

60

तऺक
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩको स्त्री सयर स्वबाव की सभरेगी।
2
आऩकी इच्छा जल्द ऩूयी होगी।
3
आऩको सॊतान सुख प्राद्ऱ होगा।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
ऩयदे शी के आने भं वि रग सकता हं ।
10
आऩको खोमी वस्तु त्रवरम्फ से सभरेगी।
11
आऩको कजा सभरने भं त्रवरम्फ होगा।

4

आऩके सरए आज का फदन शुब यहे गा।

12

आऩकी सभि के साथ नही फनेगी।

5

आऩके सरए मह वषा अच्छा यहे गा।

13

6

कुआॊ इस सभम फन जामेगा।

आऩकी सचन्ता शीघ्र दयू होगी।

14

आऩको व्माऩाय से त्रवशेष राब नहीॊ सभरेगा।

7

आऩकी बाइमं से अनफन यहे गी।

15

आऩकी तफादरे की इ९च्छा जल्द ऩूयी होगी।

8

आऩको मािा भं राब सभरने भं कफठनाई होगी।

16

आऩके स्वसन का पर उत्तभ होगा।

काभ
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
स्त्री आऩसे गोऩसनम प्रेभ कयती है ।
2
आऩके सम्फन्धी से धोखे की उम्भीद कभ है ।
3
आऩकी स्त्री सयर स्वबाव होगी।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩकी बाइमं से साधायण फनेगी।
10
आऩको मािा से राब सभरेगा।
11
ऩयदे शी अबी नहीॊ आमेगा।

4

आऩकी इच्छा जल्द ऩूयी होगी।

12

आऩको खोमी वस्तु सभर जामेगी।

5

आऩको सॊतान सुख प्राद्ऱ होगा।

13

आऩको इस सभम कजा सभर जामेगा।

6

आऩके सरए आज का फदन शुब नहीॊ है ।

14

आऩकी सभि के साथ नहीॊ फनेगी।

7

आऩके सरए मह वषा भध्मभ यहे गा।

15

आऩकी सचॊता शीघ्र सभट जामेगी।

8

गृह-सनभााण की काभना जल्द ऩूयी होगी।

16

आऩको व्माऩाय भं हासन होगी।

कार
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩकी तीथा मािा अबी नहीॊ होगी।
2
स्त्री आऩसे सच्चा प्रेभ कयती है ।
3

सम्फन्धी आऩको धोखा दे सकता है ।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
कुआॉ फननं भं त्रवरम्फ होगा।
10
आऩका बाइमं से भेर कभ यहे गा।
11
आऩको मािा से राब नहीॊ यहे गा।

4

आऩको स्त्री प्रसतकूर स्वबाव की सभरेगी।

12

ऩयदे शी अबी नहीॊ आमेगा।

5

आऩकी इच्छा ऩूयी होने भं त्रवरम्फ होगा।

13

आऩको खोमी वस्तु सभरना कफठन है ।

6

कन्मा सुख भं वृत्रद्ध होगी।

14

आऩको इस सभम कजा सभरने भं सन्दे ह है ।

7

आऩके सरए आज का फदन शुब यहे गा।

15

आऩकी सभि के साथ अच्छी फन जामेगी।

8

आऩके सरए मह वषा अच्छा नहीॊ यहे गा।

16

आऩकी सचॊता कुछ सभम फाद सभटे गी।

ससतम्फय 2012

61

अनन्त
सॊख्मा
प्रद्ल पर
1
आऩकी भस्न्दय फनवाने की इच्छा ऩूयी होगी।
2
आऩ तीथा मािा कय सकोगे।
3

स्त्री आऩसे त्रवशेष प्रेभ नहीॊ कयती है ।

सॊख्मा
प्रद्ल पर
9
आऩके सरए मह वषा भध्मभ है ।
10
आऩकी कुएॉ के सनभााण की इच्छा शीघ्र ऩूयी होगी।
11
आऩकी बाइमं से नहीॊ फनेगी।

4

सम्फन्धी आऩको धोखा नहीॊ दे गा।

12

आऩको मािा से राब सभरेगा।

5

आऩको स्त्री उत्तभ स्वबाव की सभरेगी।

13

ऩयदे शी जल्द आ जामेगा।

6

आऩकी इच्छा जल्द ऩूयी होगी।

14

आऩको खोमी वस्तु नहीॊ सभर सकेगी।

7

आऩको सॊतान सुख प्राद्ऱ होगा।

15

आऩको इस सभम कजा शीघ्र सभर जामेगा।

8

आऩके सरए आज का फदन शुब नहीॊ है ।

16

आऩकी सभि से अनफन यहे गी, सावधान।

गणेश जी की कथा
ऩोयास्णक कथा के अनुशाय एक नगय भं एक फहुत ही ग़यीफ औय अॊधी फुफढ़मा थी। फुफढ़मा का एक फेटा औय फहू थे।
वह फुफढ़मा सनमसभत गणेश जी की ऩूजन फकमा कयती थी। एक फदन गणेश जी उसकी ऩूजा से प्रस्न्न हो कय उसके
साभने प्रकट होकय फुफढ़मा से फोरे भं तुम्हायी ऩूजा से प्रसन्न हुॉ भाॊ! तू जो चाहे सो भाॊग रे।

फुफढ़मा गणेश जी से फोरी भुझसे तो भाॊगना नहीॊ आता। कैसे औय क्मा भाॊगू ?' तफ गणेशजी फोरे अऩने फहू-फेटे से
ऩूछकय भाॊग रे।

तफ फुफढ़मा ने अऩने फेटे से कहा- 'गणेशजी कहते हं तू कुछ भाॊग रे फता भं क्मा भाॊगू?
ऩुि ने कहा- भाॊ! तू धन भाॊग रे।
फहू से ऩूछा तो फहू ने कहा- नाती भाॊग रे।

तफ फुफढ़मा ने सोचा फक मे तो अऩने-अऩने भतरफ की फात कह यहे हं ।
अत: उस फुफढ़मा ने ऩिोससनं से ऩूछा, तो उन्हंने कहा- फुफढ़मा! तू तो थोिे फदन जीएगी, क्मं तू धन भाॊगे औय क्मं
नाती भाॊगे।
तू तो अऩनी आॊखं की योशनी भाॊग रे, स्जससे तेयी स्ज़न्दगी आयाभ से कट जाए।
इस ऩय फुफढ़मा फोरी- मफद आऩ प्रसन्न हं , तो भुझे नौ कयोि की भामा दं , सनयोगी कामा दं , अभय सुहाग दं , आॊखं की
योशनी दं , नाती दं , ऩोता, दं औय सफ ऩरयवाय को सुख दं औय अॊत भं भोऺ दं ।
मह सुनकय तफ गणेशजी फोरे- भाॊ! तुने तो हभं ठग फदमा।
फपय बी जो तूने भाॊगा है वचन के अनुसाय सफ तुझे सभरेगा। औय मह कहकय गणेशजी अॊतधाान हो गए।
उधय फुफढ़मा भाॊ ने जो कुछ भाॊगा वह सफकुछ सभर गमा।
हे गणेशजी! जैसे आऩने उस फुफढ़मा भाॊ को सफकुछ फदमा, वैसे ही सफको दे ना।

ससतम्फय 2012

62

बत्रवष्म ऻान के सरए यभर प्रद्लावरी

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी
त्रवसध: यभर प्रद्लावरी से प्रद्ल का उत्तय जान ने का तयीका है फक चॊदन की रकिी का चौकोय ऩासा फनाकय उस ऩय 1,
2, 3, 4 अॊफकत कया रं। फपय अऩने सॊफॊसधत प्रद्ल का सचॊतन कयते हुए तीन फाय ऩासा छोिं । पेके हुवे ऩासे के उसका जो
अॊक आमे, उसी अॊक ऩय अऩने प्रद्ल का पर दे खं। मफद फकसी कायण ऩासा नहीॊ हो तो, महाॊ दशाामी गई सायणी भं
अनासभका अॊगुरी यखकय अऩने प्रद्लं का पर जान सकते हं ।
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111. आऩकी भनोकाभना शीघ्र ऩूणा होगी।
112. कोई भहत्वऩूणा कामा कयने से ऩूवा अऩने सनणाम
ऩुत्रवाचाय कय रं।
113. कफठन ऩरयश्रभ के फाद गमा धन ऩुन् प्राद्ऱ होगा।
114. ऩूणा त्रवद्वास से सुख की प्रासद्ऱ होगी।
121. अऩना चरयि साप यखं एवॊ अनुसचत कभा से फचे।
122. सभम शीघ्र फदरने वारा है । इद्श उऩासना कयं ।
123. फकसी सनणाम को रेने से ऩूवा अस्च्छतयह सोचत्रवचायरं। अन्मथा नुक्शान सॊबव हं ।
124. प्रसतकूर ऩरयस्स्थसत भं अऩना सॊमभ एवॊ धैमा फनामे
यखे। सपरता जरूय सभरेगी।
131. वास्तत्रवकता भं जीवन जीमे व अऩनी बावुकता ऩय
सनमॊिण यखं।

132. करकी सचॊता छोिकय वताभान भं जीने का प्रमास कयं ।

133. सब्र का पर भीठा होता है । कभं का पर अवश्म
प्राद्ऱ होगा।
134. सच्चाई औय ईभानदायी से अऩने बाग्म को
उज्जवर फनामे।
141. अऩने इद्श ऩय बयोसा यखे आऩके शुब फदन जल्द
आने वारे है ।
142. अच्छे कभा कयं पर बी अच्छा सभरेगा।
143. नीसत औय यीसत से कामा कयं सपरता अवश्म प्राद्ऱ
होगी।
144. धन राब उत्तभ यहे गा, सत्कभा कयते यहं ।
211. जल्दफाजी से फचे व फकसी भहत्वऩूणा सनणाम ऩय
सोच-त्रवचाय कय ही पैसरा रं।
212. घय की सुख-सभृत्रद्ध फढे ़गी।

63

ससतम्फय 2012

213. घय-ऩरयवाय भं जल्द भाॊगसरक कामा होगं। त्रवसधवत

324. अऩनं के त्रफच भं यहकय कामा कयं , सपरता

इद्श आयाधना कयते यहं ।

सभरेगी।

214. अच्छे कभा कयते यहे जल्द ही आऩके बाग्म का

331. शिु ऩऺ से सावधान यहं , आऩ ऩय गुद्ऱ वाय हो

ससताया फुरॊफदमं ऩय होगा।

सकता हं ।

221. भाता-त्रऩता एवॊ फडे ़ फुजुगंकी सेवाकयं धन राब होगा।

332. आऩके सबी कामा शीघ्र ऩूणा हंगे सॊदेह न कयं ।

222. जरुयत भॊद की सहामता कयं । बाग्म उज्जवर

333. सभम शुब हं भहत्वऩूणा सनणाम से आऩको त्रवशेष

होगा।

राब की प्रासद्ऱ होगी।

223. सनमसभत दे वी उऩासना कयं , औयतं का सम्भान कयं

334. एकाग्रसचत्त से अऩने कामा को सॊऩन्न कयं , असधक

224. ऩूयानी ऩये शासनमं से जल्द छुटकाया सभरने वारा हं ।

341. शिु ऩय त्रवजम प्राद्ऱ होगी।

सकर कामा ससद्ध होगा।
231.

ढ़ सनस्द्ळम से अऩने कामा को ऩूया कयने का प्रमत्न

राब की प्रासद्ऱ होगी।

342. सपरता की दौि भं अऩनो की अवहे रना न कयं ,

कयं सपरता सनस्द्ळन्त सभरेगी।

अन्मथा बाग्म साथ छोड दे गा।

232. अऩने गुस्से ऩय सनमॊिण यखं, अन्मथा हानी सॊबव हं ।

343. फुयाईमंको दयू कयं व अऩनी त्रवचायधाया को शुद्ध यखं।

233. इद्श आयाधना कयते यहं , आऩके साये कद्श जल्द दयू

344. आऩको जल्द ही इद्श कृ ऩा से राब की प्रासद्ऱ होगी।

हो जामंगे।

411. आऩके बौसतक सुख साधन एवॊ धन-सम्ऩत्रत्त भं वृत्रद्ध

234. त्रप्रमजनो का ऩूणा सहमोग प्राद्ऱ होगा।

होगी।

241. आॉख भूॊद कय फकसी ऩय बयंसा भत कयं , फडा़

412. आऩके उसचत व्मवहाय से आऩके कामा ससद्ध होगं।

नुक्शान उठाना ऩडे ़गा।

413. फकसी बी कामा भं असत आत्भत्रवद्वास अच्छा नहीॊ हं

242. नकायात्भक त्रवचायं को छोि कय सकायात्भ सोच

इससरए दोफाया सोच कय सनणाम रं।

अऩनामे कामा सपर होगं।

414. आऩकी भनोकाभनाएॊ ऩूणा होगी।

243. उसचत सभम ऩय उसचत सनणाम रेने भं सऺभ फने

421. आऩको कामा ऺेि भं सपरता प्राद्ऱ होगी।

अऩको सबी प्रकाय के सुख-सभृत्रद्ध प्राद्ऱ होगी।

422. इस सभम फकसी कामा भं फि़ जोस्खभ नहीॊ उठामं।

244. अऩने कामा को ऩूणा ईभानदायी से कयं , सपरता

423. बाग्म आऩके साथ हं , आऩके सबी कामा सपर होगं।

अवश्म सभरेगी।

424. अऩने कामा भं राऩयवाहीॊ नहीॊ यखं, अन्मथा प्रसतकूर

311. ईद्वय ऩय बयोसा यखं आऩका कामा सपर होगा।

ऩरयणाभ सॊबव हं ।

312. दफ
ु ुत्रा द्ध व दद्श
ु त्रवचायधाया वारे रोगं से सावधान

431. फकसी कामा भं जल्दफाजी अच्छी नहीॊ हं , धैमा यखं।

यहं , महॊ रोग आऩका इस्तभार कय सकते हं ।

432. भौके का पामदा उठामे ऩरयस्स्थती अनुकूर हं ।

313. आऩकी इच्छा ऩूणा होगी।

433. सावधानी से कामा कयं , सपरता सभरेगीॊ।

314. जीवन भं सकायात्भक द्रत्रद्श कोण अऩनामे अवश्म

434. त्रप्रमजनं का ऩूणा सहमोग प्राद्ऱ होगा।

सपरता सभरेगी।

441. शुब कभं का पर जल्द ही सभरने वारा हं ।

321. आसथाक राब सभरने की प्रफर सॊबावना हं ।

442. सतका यहकय कामा कयं शिुओॊ ऩय त्रवजम सभरेगी।

322. सभम प्रसतकूर हं , थोडा़ इन्तजाय कयं ।

443. शीघ्र ही अच्छा सभम आनेवारा हं ।

323. त्रप्रमजनं की बावनाओॊ का सम्भान कयं सपरता

444. आऩका कामा सपर होगा, अऩने इद्श ऩय बयोसा

सभरेगी।

यखं।

ससतम्फय 2012

64

श्री हनुभान प्रद्लावरी

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी
त्रवसध: श्री याभ बि श्री हनुभान जी का ध्मान कय अऩने प्रद्ल को भन भं दोहयामं। फपय दशााई गई सायणी ऩय तजानी
अॊगुरी घुभाते हुवे प्रद्ल का स्भयण कयते हुवे फकसी एक अऺय ऩय अॊगुरी यखं। जो अऺय आमे उसे अऩने प्रद्ल का
असबद्श उत्तय सभझे औय प्रद्ल पर तासरका भं उसको ऩढ़ं ।

अ आ म

ि

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ठ ऻ

अ् ब

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प्रद्ल पर तासरका
अ:- सभम उत्तभ हं सबी शुब कामं भं सनस्द्ळत सपरता सभर सकती हं ।
आ:- सॊमभ औय धैमा फनामे यखॊ, कामा ऩूणा होने भं सभम रग सकता हं ।
इ:- आऩकी आसथाक स्स्थसत उत्तभ होगी, सबी ऺेिं भं राब सभर सकता हं ।
ई:- सभम प्रसतकूर हं कोई बी सनणाम रेने से ऩूवा उस ऩय अस्च्छ तयह त्रवचाय कयरं।
उ:- कामा ऺेि भं उत्तभ सपरता प्राद्ऱ होगी। दान ऩुण्म राबप्रद यहे गा।
ऊ:- स्वास्थ्म उत्तभ यहे गा। ऩारयवायीक जीवन भं सुख सभृत्रद्ध प्राद्ऱ होगी।
ए:- फकसी ऩय आखॉ भूॊद कय बयोसा कयना नुक्शान दे ने वारा होगा, सतका यह कय सनणाम रं।
ऐ:- व्मवहाय कूशर यहं , राऩयवाफह आऩकी साभास्जक प्रसतद्षा बॊग कय सकती हं ।
ओ:- ऩारयवायीक सभस्माओॊ से ग्रस्त यहं गे। भानससक अशाॊसत फढ़ सकती हं , इद्शदे व का ऩूजन कयं ।
औ:- सॊतान सॊफॊसधत सभस्माएॊ आऩको ऩये शान कय सकती हं ।
अॊ:- ऩुयानी सभस्माएॊ दयू होगी, शुब सभम आने वारा हं , भौके का पामदा उठामं।
क:- आऩको व्माऩाय से त्रवशेष राब होगा । अच्छा सभम आने वारा है ।
ख:- धन राब सभरेगा हं । शुब सभम का आगभन होगा।
ग:- त्रवदे श मािा राब प्रद यहे गी।

धन भं वृत्रद्ध साभास्जक मश फढ़े गा।

घ:- सनकट के बत्रवषम भं शुब सभम आने वारा हं ।

65

ससतम्फय 2012

ङ:- सभम प्रसतकूर हं , इद्श आयाधना से याहत सभरेगी।
च:- शीघ्र ही शुब सभाचाय की प्रासद्ऱ होगी । सचॊता दयू होगी।
छ:- त्रप्रमजनो के सहमोग से राब सभरेगा ।
ज:- फकसी भाध्म भं आकस्स्भक धन राब हो सकता है ।
झ:- दयू स्थ स्थान की मािा हे तु सभम अनुकूर नहीॊ हं । एक भाह प्रसतऺा कयं ।
ज:- कोटा -कचहयी के कामा भं सपरता सभरेगी।
ट:- फकसी से अनावश्मक वाद-त्रववाद से दयू यहं , सभम प्रसतकूर हं ।
ठ:- भनोकाभना शीघ्र ऩूणा होगी । इद्श आयाधना कयं ।
ड:- ऩूयानी ऩये शासनमं से छुटकाया सभरेगा।
ढ:- सभम प्रसतकूर है , एक वषा तक जोस्खभ बये सनणामं से दयू यहं , दान-ऩुण्म कयते यहे जल्द सभम फदरेगा।
ण:- फकसी भहत्वऩूणा सनणाम रेते सभम त्रवशेष सावधान यहं सभम प्रसतकूर हं ।
त:- सभम त्रवऩरयत है , फकसी से वाद-त्रववाद भं उरझे नहीॊ इद्श आयाधना कयं ।
थ:- दयू स्थान से राब प्राद्ऱ हो सकता हं , ऩारयवायीक सभस्माएॊ कद्श प्रद यहे गीॊ।
द:- सभम भध्म हं , स्थान ऩरयवतान राब प्रद हो सकता हं ।
ध:- याजफकम कामा से कद्श होने की सॊबावना हं , सावधान यहं ।
न:- स्वास्थ्म सॊफॊसधत सभस्माएॊ ऩये शान कय सकती हं । राऩयवाही नुक्शान दे ह हो सकती हं ।
ऩ:- सभम उत्तभ हं भौके का पामदा उठामे असधक भािा भं राब प्राद्ऱ होगा।
प:- आकस्स्भक धन राब हो सकता हं , कामा ऺेि भं ऩूणा सपरता प्राद्ऱ होगी।
ब:- सभम अनुकूर हं , अऩना कभा कयते यहे अवश्म सपरता सभरेगी।
भ:- कामाऺेि भं त्रवशेष राब की प्रासद्ऱ होगी। सभम अनुकूर यहे गा।
म:- ऩुयानी ऩये शानीमं से भुत्रि सभरेगी, स्वजनो का सहमोग प्राद्ऱ होगी।
य:- जल्द ही शुब सभम आने वारा हं । सनमसभत अऩने ईद्श दे वका ऩूजन कयं ।
र:- सभम अनुकूर हं , आऩकी भनोकाभनाएॊ ऩूणा होगी।
व:- फहुभूर वस्तुओॊ को सॊबारकय यखं, आकस्स्भक दघ
ा नाएॊ सॊबव हं अत् आऩ तीन भाह तक सावधान यहं ।
ु ट
श:- स्वास्थ्म सॊफॊसधत सभस्माएॊ हो सकती हं , सावधान यहं ।
ष:- शुब सभाचाय की प्रासद्ऱ होगी, अऩनं से व्मवहाय कूशर यहं ।
स:- ऩारयवायीक सुख भं वृत्रद्ध होगी, अत्रववाफहत हं तो त्रववाह सॊबव हं ।
ह:- कफठन ऩरयश्रभ के उऩयाॊत सपरता प्राद्ऱ होगी।
ऺ:- कामा ऺेि भं प्रगसत होगी। आऩकी भनोकाभनाएॊ ऩूणा होगी।
ि:- कामाऺेि भं ऩरयश्रभ के अनुरुऩ पर प्राद्ऱ होगं। इद्श आयाधना राबप्रद यहे गी।
ऻ:- सभम अनुकूर हं , बत्रवष्म उज्जवर यहे गा, अऩनो से सॊफॊध फनामे यखं।

ससतम्फय 2012

66

श्री कृ ष्ण शराका प्रद्लावरी

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी
त्रवसध: श्रीकृ ष्ण का ध्मान कय अऩने प्रद्ल को भन भं दोहयामं। फपय ऊऩय दी गई सायणी भं से फकसी एक अऺय ऩय
अॊगुरी यखं। अफ उससे अगरे अऺय से क्रभश् फायहवं अऺय को सरखते जामं जफ तक ऩुन् उसी जगह नहीॊ ऩहुॉच
जामं। इस प्रकाय एक चौऩाई फनेगी, जो अबीद्श प्रद्ल का उत्तय होगी।

महाॊ हभने आऩकी अनुकूरता हे तु फायहवं अऺय के कोद्शक को एक सभान यॊ ग भं यॊ गने का प्रमास फकमा हं
स्जससे आऩको हय फायहवं अऺयको सगनती कयने की आवश्मिा न यहं आऩ सीधे एक सभान यॊ गो के कोद्शक भं रीखे

अऺयोको सभरारे/सरख रे औय जो चौऩाई फने उस चौऩाई को बी दे खने भं आऩको आसानी हो इस उद्दे श्म से उसी यॊ ग
भं यॊ गने का प्रमास फकमा हं ।
सभ

हो

त्रव

फक

का

सभ

सर

ाा

रय

सध

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67

ससतम्फय 2012

1. तन भन कय जहॊ भेर न होई। फनत काज कहत सफ कोई।।

पर्- बायतकाण्ड भं गान्धायी अऩने ऩुि को सभझा यही है । पर उत्तभ नहीॊ है । कामा भं ऩूणा रुऩ से भन नहीॊ रग
यहा है । इससे अबीद्श कामा के ससद्ध होने भं सॊदेह है ।

2. भन अनुकूर सदा होइ जाई। त्रवसध त्रवधान भं मह नहीॊ बाई।।

पर्- द्रायकाकाण्ड भं जयासन्ध सशशुऩार को रुकभणी स्वमॊवय के सभम हाय जाने ऩय सभझा यहे है । इसका पर
भध्मभ है । फकसी अबीद्श की आशॊका तो नहीॊ है , ऩयन्तु अबीद्श कामा की ससत्रद्ध बी नहीॊ होगी।
3. हरय इच्छा हरयसन नहीॊ ऩूछा। होइहहु अवसस भनोयथ छूछा।।

पर्- स्वगाायोहण काण्ड भं त्रफना बगवान ् श्रीकृ ष्ण से ऩूछे ऋत्रषमं का शाऩ से साम्फ के ऩेट से सनकरे भूसर को
चूणा कयके सभुद्र भं पंक फदमा था। इसका पर खयाफ है । अबीद्श कामा की ससत्रद्ध कबी बी नहीॊ होगी।
4. होइहहु सपर सदा सफ ठाॊही। नहीॊ तसनक सॊशम मफह भाहीॊ।।

पर्- मह चौऩाई बीष्भ त्रऩताभह के याजनीसतक उऩदे श के ऻान-काण्ड भं है । प्रद्ल-पर उत्तभ है । अबीद्श कामा की
ससत्रद्ध अवश्म होगी।

5. मह चौऩाई उस सभम की है , जफ श्रीकृ ष्ण ने अऩने सखाओॊ को सभझाकय ब्रजकाण्ड भं बोजन हे तु फद्रज-ऩस्त्नमं के
ऩास बेजा था। पर साभान्म है । सनयन्तय प्रमत्न कयने से ही पर सभरना सम्बव है ।
6. बासग तुम्हारय न जाम फखानी। धन्म न कोउ तुभ सभ जग प्रानी।।

पर्- बायत-काण्ड भं इसको सूम-ा ग्रहण के अवसय ऩय एकत्रित हुए याजा-भहायाजा उग्रसेन से कहते हं । मह पर
उत्तभ है । अबीद्श कामा की ससत्रद्ध होगी।

7. त्रवसध त्रवधान कय उरटन हाया। नहीॊ सभथा कोउ मफह सॊसाया।।

पर्- भथुया काण्ड भं अक्रूय के सभझाने ऩय धृतयाद्स का कथन है । प्रद्ल-पर साभान्मतमा उत्तभ नहीॊ है , अबीद्श कामा
की ससत्रद्ध ऩाना सन्दे हास्ऩद रगती है ।

8. फकमे सुकृत फहु ऩावत नाहीॊ। वह गसत दीन आजु तेफह काहीॊ।।

पर्- स्वगाायोहण काण्ड भं बगवान ् श्रीकृ ष्ण अऩने ऩैय के तरवे भं फाण भायने वारे व्माध को शुब गसत दे यहे हं ।
प्रद्ल-पर अतीव श्रेद्ष है । अबीद्श कामा की ससत्रद्ध शीघ्र ही सभरेगी।

9. कह धभाज जेफह ऩय तव दामा। सहजहीॊ सुरब त्रवजम मदयु ामा।।

पर्- बयतकाण्ड भं बीष्भ त्रऩताभह के यथ से सगय जाने ऩय मुसधत्रद्षय बगवान ् श्रीकृ ष्ण से कह यहे हं । प्रद्लपर श्रेद्ष
है । अबीद्श कामा की ससत्रद्ध होगी।

10. काभ न होई असॊबव कोई। साहस कयइ रहइ पर सोई।।

पर्- ब्रजकाण्ड भं बगवान ् कृ ष्ण ब्रजवाससमं से वृषबासुय द्राया बमबीत होने ऩय कह यहे हं । प्रद्लपर साभान्मतमा
उत्तभ है । साहस ऩूवक
ा सनयन्तय प्रमत्न कयने ऩय ही अबीद्श कामा की ससत्रद्ध होगी।
11. सभरत न शाॊसत कुसॊगसत भाहीॊ। सनत नव व्मासध ग्रसत नय काहीॊ।।

पर्- बयतकाण्ड भं धृतयाद्स के दयफाय भं जाकय बगवान ् श्रीकृ ष्ण दम
ु ोधन को सॊसध के सरए सभझा यहे हं । प्रद्लपर
अत्मन्त नेद्श है । अबीद्श कामा के असतरयि असनद्श होने की सॊबावना बी है ।
12. सभरहफहॊ तुभफह त्रवजम यन भाहीॊ। जीसत न सकत इन्द्रहू चाहीॊ।।

पर्- मुद्ध के सरए तैमाय अजुन
ा ने जफ बगवती दग
ु ाा दे वी की स्तुसत की तो बगवती दग
ु ाा ने उन्हं आसशवााद फदमा।
मह उसी सभम की चौऩाई है । प्रद्ल-पर अतीव श्रेद्ष है । अबीद्श कामा की शीघ्र ससत्रद्ध ही सभरेगी।

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ससतम्फय 2012

ऩमूष
ा ण का भहत्व

 सचॊतन जोशी

जैन धभा के अनुमामी ऩमूष
ा ण ऩवा को जीव की आत्भ शुत्रद्ध का भागा फताते हं ।

जैन भुसनजनो के अनुसाय

ऩमूष
ा ण ऩवा इद्श आयाधना औय ऺभा का ऩवा बी हं । ऩमूष
ा ण को भुख्मत: भनुष्म के ऩुनसनभााण का द्योतक भानाजाता हं ।
ऩमूष
ा ण भं भनुष्म अऩने सबतय की त्रवकृ सतमं का त्माग कयता हं ।
ऩमूष
ा ण के फदनं भं श्रावक-श्रात्रवकाएॊ ब्रह्मचमा का ऩारन, यात्रि बोज त्माग, ससचत्त का त्माग यखते हं । व्रतउऩवास, साभसमक-प्रसतक्रभण, प्रवचन-श्रवण आफद के भाध्मभ से इन फदनं असघक से असघक सभम धभा ध्मान भं
व्मतीत फकमा जाता हं ।
ऩमूष
ा ण के फदन

श्रावक-श्रात्रवकाएॊ उऩवास यखते हं औय स्वमॊ के ऩाऩं की आरोचना कयते हुए बत्रवष्म भं उनसे

फचने की प्रसतऻा कयते हं । इसके साथ ही वे चौयासी राख मोसनमं भं त्रवचयण कय यहे , सभस्त जीवं से ऺभा भाॉगते
हुए मह सूसचत कयते हं फक उनका फकसी से कोई फैय नहीॊ है ।
श्रावक-श्रात्रवकाएॊ ऩयोऺ रूऩ से वे मह सॊकल्ऩ कयते हं फक वे प्रकृ सत भं कोई हस्तऺेऩ नहीॊ कयं गे। भन, वचन
औय कामा से जानते मा अजानते वे फकसी बी फहॊ सा की गसतत्रवसध भं बाग न तो स्वमॊ रंगे, न दस
ू यं को रेने को
कहं गे औय न रेने वारं का अनुभोदन कयं गे। मह आद्वासन दे ने के सरए फक उनका फकसी से कोई फैय नहीॊ है , वे मह
बी घोत्रषत कयते हं फक उन्हंने त्रवद्व के सभस्त जीवं को ऺभा कय फदमा है औय उन जीवं को ऺभा भाॉगने वारे से
डयने की जरूयत नहीॊ है ।
ऺभा दे ने से भनुष्म अन्म सभस्त जीवं को अबमदान दे ते हं औय उनकी यऺा कयने का सॊकल्ऩ रेते हं । तफ
व्मत्रि सॊमभ औय त्रववेक का अनुसयण कयं गे, आस्त्भक शाॊसत अनुबव कयं गे औय सबी जीवं औय ऩदाथं के प्रसत भैिी
बाव यखंगे। आत्भा तबी शुद्ध यह सकती है जफ वह अऩने सेफाहय हस्तऺेऩ न कये औय फाहयी तत्व से त्रवचसरत न हो।
ऺभा-बाव जैन धभा का भूरभॊि है ।
जैन धभा भं द्वेताम्फय भूसताऩूजक ऩयम्ऩया भं आठ फदनं तक "कल्ऩसूि" ऩढ़ा व सुना जाता हं ।
जफफक जैन धभा भं स्थानकवासी ऩयम्ऩया भं आठ फदनं तक "अन्तक शा सूि" का वाचन फकमा जाता हं ।

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ससतम्फय 2012

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ससतम्फय 2012

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ससतम्फय 2012

71

सॊऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत 22 गेज शुद्ध स्टीर भं सनसभात अखॊफडत

ऩुरुषाकाय शसन मॊि

ऩुरुषाकाय शसन मॊि (स्टीर भं) को तीव्र प्रबावशारी फनाने हे तु शसन की कायक धातु शुद्ध स्टीर(रोहे )
भं फनामा गमा हं । स्जस के प्रबाव से साधक को तत्कार राब प्राद्ऱ होता हं । मफद जन्भ कॊु डरी भं

शसन प्रसतकूर होने ऩय व्मत्रि को अनेक कामं भं असपरता प्राद्ऱ होती है , कबी व्मवसाम भं घटा,
नौकयी भं ऩये शानी, वाहन दघ
ा ना, गृह क्रेश आफद ऩये शानीमाॊ फढ़ती जाती है ऐसी स्स्थसतमं भं
ु ट

प्राणप्रसतत्रद्षत ग्रह ऩीिा सनवायक शसन मॊि की अऩने को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थाऩना कयने से
अनेक राब सभरते हं । मफद शसन की ढै ़मा मा साढ़े साती का सभम हो तो इसे अवश्म ऩूजना चाफहए।
शसनमॊि के ऩूजन भाि से व्मत्रि को भृत्मु, कजा, कोटा केश, जोडो का ददा , फात योग तथा रम्फे सभम

के सबी प्रकाय के योग से ऩये शान व्मत्रि के सरमे शसन मॊि असधक राबकायी होगा। नौकयी ऩेशा आफद

के रोगं को ऩदौन्नसत बी शसन द्राया ही सभरती है अत् मह मॊि असत उऩमोगी मॊि है स्जसके द्राया
शीघ्र ही राब ऩामा जा सकता है ।

भूल्म: 1050 से 8200

सॊऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत
22 गेज शुद्ध स्टीर भं सनसभात अखॊफडत

शसन तैसतसा मॊि

शसनग्रह से सॊफॊसधत ऩीडा के सनवायण हे तु त्रवशेष राबकायी मॊि।
भूल्म: 550 से 8200

GURUTVA KARYALAY
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72

ससतम्फय 2012

नवयत्न जफित श्री मॊि

शास्त्र वचन के अनुसाय शुद्ध सुवणा मा यजत
भं सनसभात श्री मॊि के चायं औय मफद नवयत्न
जिवा ने ऩय मह नवयत्न जफित श्री मॊि
कहराता हं । सबी यत्नो को उसके सनस्द्ळत
स्थान ऩय जि कय रॉकेट के रूऩ भं धायण
कयने से व्मत्रि को अनॊत एद्वमा एवॊ रक्ष्भी
की प्रासद्ऱ होती हं । व्मत्रि को एसा आबास
होता हं जैसे भाॊ रक्ष्भी उसके साथ हं ।
नवग्रह को श्री मॊि के साथ रगाने से ग्रहं
की अशुब दशा का धायणकयने वारे व्मत्रि
ऩय प्रबाव नहीॊ होता हं ।

गरे भं होने के कायण मॊि ऩत्रवि यहता हं एवॊ स्नान कयते सभम इस मॊि ऩय स्ऩशा कय जो
जर त्रफॊद ु शयीय को रगते हं , वह गॊगा जर के सभान ऩत्रवि होता हं । इस सरमे इसे सफसे

तेजस्वी एवॊ परदासम कहजाता हं । जैसे अभृत से उत्तभ कोई औषसध नहीॊ, उसी प्रकाय रक्ष्भी
प्रासद्ऱ के सरमे श्री मॊि से उत्तभ कोई मॊि सॊसाय भं नहीॊ हं एसा शास्त्रोि वचन हं । इस प्रकाय के
नवयत्न जफित श्री मॊि गुरूत्व कामाारम द्राया शुब भुहूता भं प्राण प्रसतत्रद्षत कयके फनावाए जाते
हं ।

असधक जानकायी हे तु सॊऩका कयं ।

GURUTVA KARYALAY
92/3BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)

Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
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73

ससतम्फय 2012

भॊि ससद्ध वाहन दघ
ा ना नाशक भारुसत मॊि
ु ट

ऩौयास्णक ग्रॊथो भं उल्रेख हं की भहाबायत के मुद्ध के सभम अजुन
ा के यथ के अग्रबाग ऩय भारुसत ध्वज एवॊ
भारुसत मन्ि रगा हुआ था। इसी मॊि के प्रबाव के कायण सॊऩूणा मुद्ध के दौयान हज़ायं-राखं प्रकाय के आग्नेम अस्त्र-

शस्त्रं का प्रहाय होने के फाद बी अजुन
ा का यथ जया बी ऺसतग्रस्त नहीॊ हुआ। बगवान श्री कृ ष्ण भारुसत मॊि के इस
अद्भत
ा नाग्रस्त कैसे हो
ु यहस्म को जानते थे फक स्जस यथ मा वाहन की यऺा स्वमॊ श्री भारुसत नॊदन कयते हं, वह दघ
ु ट
सकता हं । वह यथ मा वाहन तो वामुवेग से, सनफाासधत रुऩ से अऩने रक्ष्म ऩय त्रवजम ऩतका रहयाता हुआ ऩहुॊचेगा।
इसी सरमे श्री कृ ष्ण नं अजुन
ा के यथ ऩय श्री भारुसत मॊि को अॊफकत कयवामा था।

स्जन रोगं के स्कूटय, काय, फस, ट्रक इत्माफद वाहन फाय-फाय दघ
ा ना ग्रस्त हो यहे हो!, अनावश्मक वाहन को
ु ट

नुऺान हो यहा हं! उन्हं हानी एवॊ दघ
ा ना से यऺा के उद्दे श्म से अऩने वाहन ऩय भॊि ससद्ध श्री भारुसत मॊि अवश्म
ु ट

रगाना चाफहए। जो रोग ट्रान्स्ऩोफटं ग (ऩरयवहन) के व्मवसाम से जुडे हं उनको श्रीभारुसत मॊि को अऩने वाहन भं अवश्म
स्थात्रऩत कयना चाफहए, क्मोफक, इसी व्मवसाम से जुडे सैकडं रोगं का अनुबव यहा हं की श्री भारुसत मॊि को स्थात्रऩत
कयने से उनके वाहन असधक फदन तक अनावश्मक खचो से एवॊ दघ
ा नाओॊ से सुयस्ऺत यहे हं । हभाया स्वमॊका एवॊ अन्म
ु ट
त्रवद्रानो का अनुबव यहा हं , की स्जन रोगं ने श्री भारुसत मॊि अऩने वाहन ऩय रगामा हं , उन रोगं के वाहन फडी से

फडी दघ
ा नाओॊ से सुयस्ऺत यहते हं । उनके वाहनो को कोई त्रवशेष नुक्शान इत्माफद नहीॊ होता हं औय नाहीॊ अनावश्मक
ु ट
रुऩ से उसभं खयाफी आसत हं ।

वास्तु प्रमोग भं भारुसत मॊि: मह भारुसत नॊदन श्री हनुभान जी का मॊि है । मफद कोई जभीन त्रफक नहीॊ यही हो, मा उस
ऩय कोई वाद-त्रववाद हो, तो इच्छा के अनुरूऩ वहॉ जभीन उसचत भूल्म ऩय त्रफक जामे इस सरमे इस भारुसत मॊि का
प्रमोग फकमा जा सकता हं । इस भारुसत मॊि के प्रमोग से जभीन शीघ्र त्रफक जाएगी मा त्रववादभुि हो जाएगी। इस सरमे
मह मॊि दोहयी शत्रि से मुि है ।

भारुसत मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी के सरमे गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कयं । भूल्म Rs- 255 से 10900 तक

श्री हनुभान मॊि

शास्त्रं भं उल्रेख हं की श्री हनुभान जी को बगवान सूमद
ा े व ने ब्रह्मा जी के आदे श ऩय हनुभान

जी को अऩने तेज का सौवाॉ बाग प्रदान कयते हुए आशीवााद प्रदान फकमा था, फक भं हनुभान को सबी शास्त्र का ऩूणा

ऻान दॉ ग
ू ा। स्जससे मह तीनोरोक भं सवा श्रेद्ष विा हंगे तथा शास्त्र त्रवद्या भं इन्हं भहायत हाससर होगी औय इनके
सभन फरशारी औय कोई नहीॊ होगा। जानकायो ने भतानुशाय हनुभान मॊि की आयाधना से ऩुरुषं की त्रवसबन्न फीभारयमं

दयू होती हं , इस मॊि भं अद्भत
ु शत्रि सभाफहत होने के कायण व्मत्रि की स्वसन दोष, धातु योग, यि दोष, वीमा दोष, भूछाा,

नऩुॊसकता इत्माफद अनेक प्रकाय के दोषो को दयू कयने भं अत्मन्त राबकायी हं । अथाात मह मॊि ऩौरुष को ऩुद्श कयता
हं । श्री हनुभान मॊि व्मत्रि को सॊकट, वाद-त्रववाद, बूत-प्रेत, द्यूत फक्रमा, त्रवषबम, चोय बम, याज्म बम, भायण, सम्भोहन
स्तॊबन इत्माफद से सॊकटो से यऺा कयता हं औय ससत्रद्ध प्रदान कयने भं सऺभ हं ।
श्री हनुभान मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी के सरमे गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कयं । भूल्म Rs- 730 से 10900 तक

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ससतम्फय 2012

74

भॊि ससद्ध त्रवशेष दै वी मॊि सूसच
आद्य शत्रि दग
ु ाा फीसा मॊि (अॊफाजी फीसा मॊि)

सयस्वती मॊि

भहान शत्रि दग
ु ाा मॊि (अॊफाजी मॊि)

सद्ऱसती भहामॊि(सॊऩूणा फीज भॊि सफहत)

नव दग
ु ाा मॊि

कारी मॊि

नवाणा मॊि (चाभुॊडा मॊि)

श्भशान कारी ऩूजन मॊि

नवाणा फीसा मॊि

दस्ऺण कारी ऩूजन मॊि

चाभुॊडा फीसा मॊि ( नवग्रह मुि)

सॊकट भोसचनी कासरका ससत्रद्ध मॊि

त्रिशूर फीसा मॊि

खोफडमाय मॊि

फगरा भुखी मॊि

खोफडमाय फीसा मॊि

फगरा भुखी ऩूजन मॊि

अन्नऩूणाा ऩूजा मॊि

याज याजेद्वयी वाॊछा कल्ऩरता मॊि

एकाॊऺी श्रीपर मॊि

भॊि ससद्ध त्रवशेष रक्ष्भी मॊि सूसच
श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि)

भहारक्ष्भमै फीज मॊि

श्री मॊि (भॊि यफहत)

भहारक्ष्भी फीसा मॊि

श्री मॊि (सॊऩूणा भॊि सफहत)

रक्ष्भी दामक ससद्ध फीसा मॊि

श्री मॊि (फीसा मॊि)

रक्ष्भी दाता फीसा मॊि

श्री मॊि श्री सूि मॊि

रक्ष्भी गणेश मॊि

श्री मॊि (कुभा ऩृद्षीम)

ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि

रक्ष्भी फीसा मॊि

कनक धाया मॊि

श्री श्री मॊि (श्रीश्री रसरता भहात्रिऩुय सुन्दमै श्री भहारक्ष्भमं श्री भहामॊि)

वैबव रक्ष्भी मॊि (भहान ससत्रद्ध दामक श्री भहारक्ष्भी मॊि)

अॊकात्भक फीसा मॊि
ताम्र ऩि ऩय सुवणा ऩोरीस
(Gold Plated)
साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
460
820
1650
2350
3600
6400
10800

ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीस
(Silver Plated)
साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
370
640
1090
1650
2800
5100
8200

ताम्र ऩि ऩय
(Copper)

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
255
460
730
1090
1900
3250
6400

मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी हे तु सॊऩका कयं ।

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ससतम्फय 2012

75

यासश यत्न
भेष यासश:

भूग
ॊ ा

Red Coral
(Special)
5.25" Rs. 1050
6.25" Rs. 1250
7.25" Rs. 1450
8.25" Rs. 1800
9.25" Rs. 2100
10.25" Rs. 2800

वृषब यासश:

हीया

Diamond
(Special)
10 cent
20 cent
30 cent
40 cent
50 cent

Rs. 4100
Rs. 8200
Rs. 12500
Rs. 18500
Rs. 23500

सभथुन यासश:

कका यासश:

ससॊह यासश:

कन्मा यासश:

Green Emerald

Naturel Pearl
(Special)

Ruby
(Old Berma)
(Special)

Green Emerald

ऩन्ना

(Special)
5.25" Rs. 9100
6.25" Rs. 12500
7.25" Rs. 14500
8.25" Rs. 19000
9.25" Rs. 23000
10.25" Rs. 28000

भोती

5.25"
6.25"
7.25"
8.25"
9.25"
10.25"

Rs. 910
Rs. 1250
Rs. 1450
Rs. 1900
Rs. 2300
Rs. 2800

भाणेक

2.25"
3.25"
4.25"
5.25"
6.25"

Rs.
Rs.
Rs.
Rs.
Rs.

12500
15500
28000
46000
82000

ऩन्ना

(Special)
5.25" Rs. 9100
6.25" Rs. 12500
7.25" Rs. 14500
8.25" Rs. 19000
9.25" Rs. 23000
10.25" Rs. 28000

** All Weight In Rati

All Diamond are Full
White Colour.

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

तुरा यासश:

वृस्द्ळक यासश:

धनु यासश:

कॊु ब यासश:

भीन यासश:

हीया

भूग
ॊ ा

ऩुखयाज

भकय यासश:

नीरभ

नीरभ

Diamond
(Special)

Red Coral

Y.Sapphire

B.Sapphire

B.Sapphire

Y.Sapphire

(Special)

(Special)

(Special)

(Special)

(Special)

10 cent
20 cent
30 cent
40 cent
50 cent

Rs. 4100
Rs. 8200
Rs. 12500
Rs. 18500
Rs. 23500

All Diamond are Full
White Colour.

5.25" Rs. 1050
6.25" Rs. 1250
7.25" Rs. 1450
8.25" Rs. 1800
9.25" Rs. 2100
10.25" Rs. 2800
** All Weight In Rati

ऩुखयाज

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

* उऩमोि वजन औय भूल्म से असधक औय कभ वजन औय भूल्म के यत्न एवॊ उऩयत्न बी हभाये महा व्माऩायी भूल्म ऩय उसरब्ध
हं ।

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ससतम्फय 2012

76

भॊि ससद्ध रूद्राऺ
Rudraksh List

Rate In
Indian Rupee

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Indian Rupee

Rudraksh List

एकभुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

2800, 5500

आठ भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

एकभुखी रूद्राऺ (नेऩार)

750,1050, 1250, आठ भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

दो भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

30,50,75

नौ भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

910,1250

दो भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

50,100,

नौ भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

2050

दो भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

450,1250

दस भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

1050,1250

तीन भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

30,50,75,

दस भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

2100

तीन भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

50,100,

ग्मायह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

1250,

तीन भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

450,1250,

ग्मायह भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

2750,

चाय भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

25,55,75,

फायह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

1900,

चाय भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

50,100,

फायह भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

2750,

ऩॊच भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

25,55,

तेयह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

3500, 4500,

ऩॊच भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

225, 550,

तेयह भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

6400,

छह भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

25,55,75,

चौदह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

10500

छह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

50,100,

चौदह भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

14500

सात भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

75, 155,

गौयीशॊकय रूद्राऺ

1450

सात भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

225, 450,

गणेश रुद्राऺ (नेऩार)

550

सात भुखी रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

1250

गणेश रूद्राऺ (इन्डोनेसशमा)

750

820,1250
1900

रुद्राऺ के त्रवषम भं असधक जानकायी हे तु सॊऩका कयं ।
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भॊि ससद्ध दर
ा साभग्री
ु ब
हत्था जोडी- Rs- 370

घोडे की नार- Rs.351

भामा जार- Rs- 251

त्रफल्री नार- Rs- 370

भोसत शॊख- Rs- 550

धन वृत्रद्ध हकीक सेट Rs-251

ससमाय ससॊगी- Rs- 370

दस्ऺणावतॉ शॊख- Rs- 550

इन्द्र जार- Rs- 251

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ससतम्फय 2012

77

श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि
फकसी बी व्मत्रि का जीवन तफ आसान फन जाता हं जफ उसके चायं औय का भाहोर उसके अनुरुऩ उसके वश
भं हं। जफ कोई व्मत्रि का आकषाण दस
ु यो के उऩय एक चुम्फकीम प्रबाव डारता हं , तफ

रोग उसकी सहामता एवॊ

सेवा हे तु तत्ऩय होते है औय उसके प्राम् सबी कामा त्रफना असधक कद्श व ऩये शानी से सॊऩन्न हो जाते हं । आज के
बौसतकता वाफद मुग भं हय व्मत्रि के सरमे दस
ॊ कत्व को कामभ
ू यो को अऩनी औय खीचने हे तु एक प्रबावशासर चुफ

यखना असत आवश्मक हो जाता हं । आऩका आकषाण औय व्मत्रित्व आऩके चायो ओय से रोगं को आकत्रषात कये इस
सरमे सयर उऩाम हं , श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि। क्मोफक बगवान श्री कृ ष्ण एक अरौफकव एवॊ फदवम चुॊफकीम व्मत्रित्व के
धनी थे। इसी कायण से श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के ऩूजन एवॊ दशान से आकषाक व्मत्रित्व प्राद्ऱ होता हं ।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के साथ व्मत्रिको

ढ़ इच्छा शत्रि एवॊ उजाा प्राद्ऱ

होती हं , स्जस्से व्मत्रि हभेशा एक बीड भं हभेशा आकषाण का कंद्र यहता हं ।
मफद फकसी व्मत्रि को अऩनी प्रसतबा व आत्भत्रवद्वास के स्तय भं वृत्रद्ध,
अऩने सभिो व ऩरयवायजनो के त्रफच भं रयश्तो भं सुधाय कयने की ईच्छा होती
हं उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि का ऩूजन एक सयर व सुरब भाध्मभ
सात्रफत हो सकता हं ।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि ऩय अॊफकत शत्रिशारी त्रवशेष ये खाएॊ, फीज भॊि एवॊ

श्रीकृ ष्ण फीसा कवच
श्रीकृ ष्ण

फीसा

कवच

को

केवर

त्रवशेष शुब भुहुता भं सनभााण फकमा
जाता हं । कवच को त्रवद्रान कभाकाॊडी

ब्राहभणं द्राया शुब भुहुता भं शास्त्रोि

अॊको से व्मत्रि को अद्धद्भत
ु आॊतरयक शत्रिमाॊ प्राद्ऱ होती हं जो व्मत्रि को

त्रवसध-त्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो

श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के ऩूजन व सनमसभत दशान के भाध्मभ से बगवान

मुि कयके सनभााण फकमा जाता हं ।

सफसे आगे एवॊ सबी ऺेिो भं अग्रस्णम फनाने भं सहामक ससद्ध होती हं ।

श्रीकृ ष्ण का आशीवााद प्राद्ऱ कय सभाज भं स्वमॊ का अफद्रतीम स्थान स्थात्रऩत कयं ।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि अरौफकक ब्रह्माॊडीम उजाा का सॊचाय कयता हं , जो
एक प्राकृ त्रत्त भाध्मभ से व्मत्रि के बीतय सद्दबावना, सभृत्रद्ध, सपरता, उत्तभ
स्वास्थ्म, मोग औय ध्मान के सरमे एक शत्रिशारी भाध्मभ हं !

श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के ऩूजन से व्मत्रि के साभास्जक भान-सम्भान व

द्राया ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा चैतन्म
स्जस के पर स्वरुऩ धायण कयता
व्मत्रि को शीघ्र ऩूणा राब प्राद्ऱ होता
हं । कवच को गरे भं धायण कयने
से वहॊ अत्मॊत प्रबाव शारी होता
हं । गरे भं धायण कयने से कवच

ऩद-प्रसतद्षा भं वृत्रद्ध होती हं ।

हभेशा रृदम के ऩास यहता हं स्जस्से

कंफद्रत कयने से व्मत्रि फक चेतना शत्रि जाग्रत होकय शीघ्र उच्च स्तय

एवॊ शीघ्र ऻात होने रगता हं ।

त्रवद्रानो के भतानुशाय श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के भध्मबाग ऩय ध्मान मोग

व्मत्रि ऩय उसका राब असत तीव्र

को प्राद्ऱहोती हं ।

भूरम भाि: 1900

जो ऩुरुषं औय भफहरा अऩने साथी ऩय अऩना प्रबाव डारना चाहते हं औय उन्हं अऩनी औय आकत्रषात कयना
चाहते हं । उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि उत्तभ उऩाम ससद्ध हो सकता हं ।

ऩसत-ऩत्नी भं आऩसी प्रभ की वृत्रद्ध औय सुखी दाम्ऩत्म जीवन के सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि राबदामी होता हं ।

भूल्म:- Rs. 730 से Rs. 10900 तक उसरब्द्ध

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ससतम्फय 2012

78

याभ यऺा मॊि
याभ यऺा मॊि सबी बम, फाधाओॊ से भुत्रि व कामो भं सपरता प्रासद्ऱ हे तु उत्तभ मॊि हं । स्जसके प्रमोग
से धन राब होता हं व व्मत्रि का सवांगी त्रवकाय होकय उसे सुख-सभृत्रद्ध, भानसम्भान की प्रासद्ऱ होती
हं । याभ यऺा मॊि सबी प्रकाय के अशुब प्रबाव को दयू कय व्मत्रि को जीवन की सबी प्रकाय की
कफठनाइमं से यऺा कयता हं । त्रवद्रानो के भत से जो व्मत्रि बगवान याभ के बि हं मा श्री
हनुभानजी के बि हं उन्हं अऩने सनवास स्थान, व्मवसामीक स्थान ऩय याभ यऺा मॊि को अवश्म
स्थाऩीत कयना चाफहमे स्जससे आने वारे सॊकटो से यऺा हो उनका जीवन सुखभम व्मतीत हो सके
एवॊ उनकी सभस्त आफद बौसतक व आध्मास्त्भक भनोकाभनाएॊ ऩूणा हो सके।

ताम्र ऩि ऩय सुवणा ऩोरीस

ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीस

ताम्र ऩि ऩय

(Gold Plated)

(Silver Plated)

(Copper)

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
460
820
1650
2350
3600
6400
10800

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
370
640
1090
1650
2800
5100
8200

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

GURUTVA KARYALAY
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भूल्म
255
460
730
1090
1900
3250
6400

79

ससतम्फय 2012

जैन धभाके त्रवसशद्श मॊिो की सूची
श्री चौफीस तीथंकयका भहान प्रबात्रवत चभत्कायी मॊि

श्री एकाऺी नारयमेय मॊि

श्री चोफीस तीथंकय मॊि

सवातो बद्र मॊि

कल्ऩवृऺ मॊि

सवा सॊऩत्रत्तकय मॊि

सचॊताभणी ऩाद्वानाथ मॊि

सवाकामा-सवा भनोकाभना ससत्रद्धअ मॊि (१३० सवातोबद्र मॊि)

सचॊताभणी मॊि (ऩंसफठमा मॊि)

ऋत्रष भॊडर मॊि

सचॊताभणी चक्र मॊि

जगदवल्रब कय मॊि

श्री चक्रेद्वयी मॊि

ऋत्रद्ध ससत्रद्ध भनोकाभना भान सम्भान प्रासद्ऱ मॊि

श्री घॊटाकणा भहावीय मॊि

ऋत्रद्ध ससत्रद्ध सभृत्रद्ध दामक श्री भहारक्ष्भी मॊि

श्री घॊटाकणा भहावीय सवा ससत्रद्ध भहामॊि

त्रवषभ त्रवष सनग्रह कय मॊि

श्री ऩद्मावती मॊि

ऺुद्रो ऩद्रव सननााशन मॊि

श्री ऩद्मावती फीसा मॊि

फृहच्चक्र मॊि

श्री ऩाद्वाऩद्मावती ह्रंकाय मॊि

वॊध्मा शब्दाऩह मॊि

ऩद्मावती व्माऩाय वृत्रद्ध मॊि

भृतवत्सा दोष सनवायण मॊि

श्री धयणेन्द्र ऩद्मावती मॊि

काॊक वॊध्मादोष सनवायण मॊि

श्री ऩाद्वानाथ ध्मान मॊि

फारग्रह ऩीडा सनवायण मॊि

श्री ऩाद्वानाथ प्रबुका मॊि

रधुदेव कुर मॊि

बिाभय मॊि (गाथा नॊफय १ से ४४ तक)

नवगाथात्भक उवसग्गहयॊ स्तोिका त्रवसशद्श मॊि

भस्णबद्र मॊि

उवसग्गहयॊ मॊि

श्री मॊि

श्री ऩॊच भॊगर भहाश्रृत स्कॊध मॊि

श्री रक्ष्भी प्रासद्ऱ औय व्माऩाय वधाक मॊि

ह्रीॊकाय भम फीज भॊि

श्री रक्ष्भीकय मॊि

वधाभान त्रवद्या ऩट्ट मॊि

रक्ष्भी प्रासद्ऱ मॊि

त्रवद्या मॊि

भहात्रवजम मॊि

सौबाग्मकय मॊि

त्रवजमयाज मॊि

डाफकनी, शाफकनी, बम सनवायक मॊि

त्रवजम ऩतका मॊि

बूताफद सनग्रह कय मॊि

त्रवजम मॊि

ज्वय सनग्रह कय मॊि

ससद्धचक्र भहामॊि

शाफकनी सनग्रह कय मॊि

दस्ऺण भुखाम शॊख मॊि

आऩत्रत्त सनवायण मॊि

दस्ऺण भुखाम मॊि

शिुभख
ु स्तॊबन मॊि

(अनुबव ससद्ध सॊऩण
ू ा श्री घॊटाकणा भहावीय ऩतका मॊि)

मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी हे तु सॊऩका कयं ।

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ससतम्फय 2012

80

घॊटाकणा भहावीय सवा ससत्रद्ध भहामॊि को स्थाऩीत

कयने से साधक की सवा भनोकाभनाएॊ ऩूणा होती हं । सवा
प्रकाय के योग बूत-प्रेत आफद उऩद्रव से यऺण होता हं ।
जहयीरे औय फहॊ सक प्राणीॊ से सॊफसॊ धत बम दयू होते हं ।
अस्ग्न बम, चोयबम आफद दयू होते हं ।

दद्श
ु व असुयी शत्रिमं से उत्ऩन्न होने वारे बम

से मॊि के प्रबाव से दयू हो जाते हं ।

मॊि के ऩूजन से साधक को धन, सुख, सभृत्रद्ध,

ऎद्वमा, सॊतत्रत्त-सॊऩत्रत्त आफद की प्रासद्ऱ होती हं । साधक की
सबी प्रकाय की सास्त्वक इच्छाओॊ की ऩूसता होती हं ।

मफद फकसी ऩरयवाय मा ऩरयवाय के सदस्मो ऩय

वशीकयण, भायण,

उच्चाटन इत्माफद जाद-ू टोने वारे

प्रमोग फकमे गमं होतो इस मॊि के प्रबाव से स्वत् नद्श
हो जाते हं औय बत्रवष्म भं मफद कोई प्रमोग कयता हं तो
यऺण होता हं ।

कुछ जानकायो के श्री घॊटाकणा भहावीय ऩतका

मॊि से जुडे अद्धद्भत
ु अनुबव यहे हं । मफद घय भं श्री

घॊटाकणा भहावीय ऩतका मॊि स्थात्रऩत फकमा हं औय मफद

कोई इषाा, रोब, भोह मा शिुतावश मफद अनुसचत कभा

कयके फकसी बी उद्दे श्म से साधक को ऩये शान कयने का प्रमास कयता हं तो मॊि के प्रबाव से सॊऩण
ू ा
ऩरयवाय का यऺण तो होता ही हं , कबी-कबी शिु के द्राया फकमा गमा अनुसचत कभा शिु ऩय ही उऩय
उरट वाय होते दे खा हं ।

भूल्म:- Rs. 1650 से Rs. 10900 तक उसरब्द्ध

सॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY
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ससतम्फय 2012

81

अभोद्य भहाभृत्मुॊजम कवच
अभोद्य् भहाभृत्मुॊजम कवच व

उल्रेस्खत अन्म साभग्रीमं को शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से त्रवद्रान

ब्राह्मणो द्राया सवा राख भहाभृत्मुज
ॊ म भॊि जऩ एवॊ दशाॊश हवन द्राया सनसभात कवच अत्मॊत
प्रबावशारी होता हं ।

अभोद्य् भहाभृत्मुॊजम कवच
कवच फनवाने हे तु:
अऩना नाभ, त्रऩता-भाता का नाभ,
गोि, एक नमा पोटो बेजे

अभोद्य् भहाभृत्मुॊजम
कवच
दस्ऺणा भाि: 10900

याशी यत्न एवॊ उऩयत्न
त्रवशेष मॊि
हभायं महाॊ सबी प्रकाय के मॊि सोने-चाॊफदताम्फे भं आऩकी आवश्मिा के अनुशाय

फकसी बी बाषा/धभा के मॊिो को आऩकी
आवश्मक फडजाईन के अनुशाय २२ गेज
सबी साईज एवॊ भूल्म व क्वासरफट के

असरी नवयत्न एवॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध हं ।

शुद्ध ताम्फे भं अखॊफडत फनाने की त्रवशेष
सुत्रवधाएॊ उऩरब्ध हं ।

हभाये महाॊ सबी प्रकाय के यत्न एवॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध हं । ज्मोसतष कामा से जुडे़
फधु/फहन व यत्न व्मवसाम से जुडे रोगो के सरमे त्रवशेष भूल्म ऩय यत्न व अन्म साभग्रीमा व अन्म
सुत्रवधाएॊ उऩरब्ध हं ।

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ससतम्फय 2012

82

भाससक यासश पर

 सचॊतन जोशी
भेष: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : बूसभ-बवन-वाहन से सॊफॊसधत कामो भं राब प्राद्ऱ होगा। व्मवसासमक मािा भं सपरता
प्राद्ऱ हो सकती है । व्मम ऩय सनमन्िण यखने से राब प्राद्ऱ होगा।

शिु ऩऺ से सावधान

यहं आऩ ऩय झूठे आयोऩ रग सकते है । शिुओॊ ऩय आऩका प्रबाव यहे गा। आऩके त्रवयोधी
एवॊ शिु ऩऺ ऩयास्त हंगे। आऩका साभास्जक जीवन उच्च स्तय का हो सकता हं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : आऩकी आसथाक स्स्थसत प्रफर होगी। नौकयी, व्मवसाम भं
आऩ अऩने कामा का अच्छा प्रदशान कयने भं सभथा हंगे। ऩूणा ऩरयश्रभ एवॊ किी भेहनत
से फकमे गमे कामो भं सपरता प्राद्ऱ कय सकते हं । ऩैतक
ृ धन-सॊऩत्रत्त की प्रासद्ऱ हो
सकती हं । भहत्वऩूणा एवॊ घये रू भाभरो भं चुनौतीओॊ का साभना कयना ऩड सकता हं ।
प्रेभ सॊफॊसधत भाभरो भं बी सपरता प्राद्ऱ कय सकते है ।

वृषब: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : अनाचश्मक खचा कयने से फचे अन्मथा फडा आसथाक
नुकसान हो सकता हं । साझेदायी से धनराब की प्रासद्ऱ होगी। उन्नसत के सरए आऩको
अऩनी भहत्वऩूणा मोजनाओॊ को मथा शीघ्र अभर भं राना चाफहए। अन्मथा आऩके
प्रसतमोगी आऩसे आगे सनकर सकते हं । नए व्मावसासमक राब प्राद्ऱ हो सकते हं ।
जीवनसाथी का स्वास्थ्म सचॊताजनक हो सकता हं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : मफद नौकयी कय यहे हं तो ऩदौन्नसत के मोग हं । व्मवसाम
से जुडे हं तो त्रवशेष रुऩ से आऩको फकसी स्त्रोत से आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ होने के मोग
फन यहे हं । अऩनी आम भं वृत्रद्ध कय अऩने ऩुयाने ऋण का बुगतान कयने के सरए उत्तभ सभम सात्रफत हो सकता हं ।
ऩरयवाय के रोगो के सरए त्रवशेष रुऩ से खचा कयना ऩड सकता हं ।

जीवनसाथी से सहमोग सभरेगा।

सभथुन: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : सभम आऩके सरए उत्तभ सात्रफत हो सकता हं ।
व्मवसामीक कामो भं त्रवरॊफ हो सकता हं । इद्श सभिो एवॊ त्रप्रमजनो से आसथाक राब प्राद्ऱ

हो सकता हं । बूसभ-बवन इत्माफद कामो भं त्रवशेष राब प्रासद्ऱ हो सकती हं । ऩरयवाय के
फकसी सदस्म का स्वास्थ्म आऩकी सचॊता का त्रवषम हो सकता हं । ऩरयवाय के ऩुयाने
वाद-त्रववादो को जल्द सुरझाने का प्रमास कयं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : उत्तभ वाहन सुख के मोग फन यहे हं । नौकयी भं ऩदौन्नसत
के मोग फन यहे हं । व्मवसाम भं आकस्स्भक धनराब प्राद्ऱ हो सकता हं । शिु व त्रवयोधी
ऩऺ ऩये शानी का कायण फन सकता हं । जीवन साथी से ऩूणा सहमोग प्राद्ऱ होगा।
दयू स्थानो की व्मवसामीक मािाएॊ आऩके सरए राबदामक हो सकती हं । ऩरयवाय भं सुख-शाॊसत फनाए यखने का प्रमास
कयं ।

83

ससतम्फय 2012

कका: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : कामाऺेि भं आऩके आसथाक राबं भं वृत्रद्ध होने के मोग फन यहे हं । दाॊऩत्म सुख भं
वृत्रद्ध होगी। आऩको शायीरयक कद्श ऩये शान कय सकते हं । सभाज भं आऩके मश एवॊ
कीसता की वृत्रद्ध होगी। प्रेभ सॊफॊधो भं सपरता एवॊ दाॊऩत्म सुख भं वृत्रद्ध के मोग हं । शिु
ऩऺ से सावधान यहं आऩ ऩय झूठे आयोऩ रग सकते है ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : आऩकी आम के स्त्रोत एक से असधक फन सकते हं ।
आऩको दयू स्थ स्थानो की मािाएॊ कयनी ऩि सकती हं । सयकाय से त्रवशेष राबप्राद्ऱ हो
सकते हं । आऩकी भहत्वऩूणा मोजनाएॊ सपर होने के मोग हं । नमे रोगो से सभिता
होगी। अऩने व्ममं ऩय सनमन्िण यखने का प्रमास कयं औय ऋण रेने से फचे औय ऩुयाने
ऋणं का बुगतान कयने का प्रमास कये ।

ससॊह: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : कोटा -कचहयी के कामो भं सपरता प्राद्ऱ हो सकती हं । फकसी को फदमा हुवा उधाय धन
वाऩस प्राद्ऱ हो सकता हं । अऩने कामाऺेि भं अऩने प्रसतद्रॊ द्रीमं से आगे सनकरने के सरए

फकसी भहत्वऩूणा मोजना ऩय त्रवशेष रुऩ से कामा कयना ऩि सकते हं । अऩने अनावश्मक
खचो ऩय सनमन्िण यखने का प्रमास कयं । आऩफक साभास्जक कामो भं त्रवशेष रुसच हो
सकती हं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : नौकयी व्मवसाम से सॊफॊसधत सभस्माओॊ का सनवायण
होगा। बूसभ-बवन से साॊफॊसधत कामो से राब प्राद्ऱ हो सकते हं । आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ
के साधन प्राद्ऱ हो सकते हं । आऩके त्रवयोधी एवॊ शिु ऩऺ ऩयास्त हंगे। ऋण रेने से
फचे औय ऩुयाने ऋणं का बुगतान कयने का प्रमास कये । प्रेभ सॊफॊधं भं सपरता प्राद्ऱ हो
सकती हं । अऩने स्वास्थ्म का त्रवशेष ख्मार यखे।

कन्मा: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : छोटी-छोती व्मवसासमक सभस्माओॊ के सनवायण हे तु
कजा रेना ऩि सकता हं । आऩके रुके हुए भहत्वऩूणा कामा ऩूये हो सकते हं । अऩनी

वाणी एवॊ क्रोध ऩय सनमॊिण यखे अन्मथा आऩके फने फनामे कामा त्रफगड सकते हं ।
अऩने खाने- ऩीने का ध्मान यखे अन्मथा आऩका का स्वास्थ्म नयभ हो सकता है । प्रेभ
सॊफॊधं भं सपरता प्राद्ऱ हो सकती हं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ के मोग फन यहे है । नमा व्मवसाम
मा नौकयी प्राद्ऱ हो सकती हं मा आऩके कामा ऺेि भं नमे फदराव हो सकते हं । बूसभबवन से सॊफॊसधअ भाभरो भं राबप्रासद्ऱ हो सकती हं । कोटा -कचहयी के कामा भं
सपरता प्राद्ऱ हो सकती हं । त्रवऩयीत सरॊग के प्रसत आऩका त्रवशेष झुकाव यहे गा। आऩके त्रवयोधी एवॊ शिु ऩऺ ऩयास्त
हंगे।

ससतम्फय 2012

84

तुरा: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : अऩने कामाऺेि भं आऩ किी भेहनत औय ऩरयश्रभ से धन राब प्राद्ऱ कय सकते
हं । अत्मासधक बागदौि के कायण आऩको थकावट हो सकती हं । त्रवयोधी एवॊ शिु ऩऺ से
ऩये शानी हो सकती हं । दयू स्थ स्थानं की मािाएॊ राबदामक ससद्ध होगी।

जीवन साथी

से रयश्तो भं सुधाय होगा। प्रेभ सॊफॊसधत भाभरो के सरए सभम सभराझुरा सात्रफत हो
सकता हं । स्वास्थ्म के प्रसत सचेत यहं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : आऩकी भहत्वऩूणा मोजनाए ऩूणा हो सकती हं । नौकयीव्मवसाम से सॊफॊसधत कामं के सरए मह सभम आसथाक राबदे ने वारा यहे गा। बूसभबवन-वाहन से सॊफॊसधत कामो भं राब प्राद्ऱ होगा। अऩनी असधक खचा कयने फक प्रवृत्रत्त
ऩय सनमॊिण कयने का प्रमास कयं । आऩके बौसतक सुख साधनो भं वृत्रद्ध होगी। जीवन
साथी से ऩूणस
ा हमोग प्राद्ऱ होगा।

वृस्द्ळक: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : आऩ किी भेहनत औय ऩरयश्रभ से धन राब प्राद्ऱ
कय सकते हं । छोटी-छोटी सभस्माए आने के उऩयाॊत बी काभमाफी प्राद्ऱ होगी। फकसी से
वाद-त्रववाद

कयने

से

फचे।

यखने के सरमे आऩको ऩूणा

सभाज

भं

अऩना

नाभ

औय

प्रसतद्षा फनाए

मोजनाफद्ध तरयके सेकामा कयना चाफहमे। खाने-ऩीने का

त्रवशेष

ध्मान यखे अन्मथा स्वास्थ्म सॊफॊसधत सभस्माएॊ हो सकती हं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012

:

व्मवसाम भं सपरता

कय

साथ व्मवहाय

प्राद्ऱ

अच्छा

यखे

उच्चासधकारयमं
सकते

अन्मथा

हं ।

से

राब

स्वास्थ्म

सभस्माओॊ

प्राद्ऱ

उत्तभ

का

होगा।

यहे गा।

साभना

नौकयी-

जीवन साथी के

कय

सकते

हं ।

सभिं ऩय अॊधात्रवद्वास कयने के कायण आऩके ऩरयवय भं त्रववाद फढसकते है । ऩरयवाय औय रयश्तेदायं से आस्त्भमता के अनुबव
भं कभी यह सकती हं ।

धनु: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : बूसभ-बवन-वाहन से सॊफॊसधत कामो भं रुसच फढे गी। रेफकन इस दौयान इन सचजं भं
बायी भािा भं सनवेश कयना नुक्शा कायक हो सकता हं । आऩके बौसतक सुख-साधनो भं
वृत्रद्ध होगी। सॊतान ऩऺ के प्रसत सचॊता यहे गी। जीवन साथी के साथ वैचारयक भतबेद
सॊबव

हं ।

धासभाक

मािा

मा

दयू स्थ

स्थानो

की

मािा

होने

के

मोग

हं ।

प्रेभ सॊफॊसधत भाभरो भं अनफन हो सकती हं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012
नौकयी-व्मवसाम भं धन राब की प्रासद्ऱ हो सकती हं । कोटा -कचहयी के कामो भं
सपरता प्राद्ऱ कय सकते हं । कामाऺेि भं आऩके जोश एवॊ उत्साह भं वृत्रद्ध होगी। आऩके
साभास्जक भान-सम्भान औय ऩद-प्रसतद्षा भं वृत्रद्ध होगी। नमे रोगो की सभिता से राब प्राद्ऱ कय सकते हं । ऩरयवाय के
फकसी सदस्म का स्वास्थ्म कभजोय हो सकता हं । जीवनसाथी से साथ व्मवहाय कूशर यहं ।

ससतम्फय 2012

85

भकय: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : नौकयी व्मवसाम भं भहत्वऩूणा कामो को कुशरता से ऩूया कयने का प्रमास कयं ।
व्मम ऩय सनमन्िण यखने से राब प्राद्ऱ होगा। बूसभ- बवन-वाहन के क्रम-त्रवक्रम से राब प्राद्ऱ हो सकता हं । अऩने खानेऩीने का ध्मान यखे अन्मथा आऩका का स्वास्थ्म नयभ होसकता है । प्रेभ सॊफॊसधत भाभरो भं
अनफन हो सकती हं रेफकन अल्ऩ प्रमासो से सॊफॊदो भं सुधाय होने रगेगा।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : ऩरयवाय के सदस्मं से छोटी-छोटी फातं भं त्रववाद हो सकते
हं । ऋण दे ने से फचं अन्मथा धन की ऩुन् प्रासद्ऱ भं त्रवरॊफ हो सकता हं । आवश्मकता से
असधक सॊघषा कयना ऩड सकता है । आऩके साभास्जक भान-सम्भान औय ऩद-प्रसतद्षा भं
वृत्रद्ध होगी। आऩके स्वास्थ्म भं सगयावट हो सकती हं । नमे रोगो से सभिता राबप्रद हो
सकती हं ।

कॊु ब: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : कामाऺेि भं आऩकी कामा शैरी अत्मासधक सफक्रम हो
जाएगी। आऩको आकस्स्भक धन की प्रासद्ऱ हो सकती हं । बूसभ-बवन-वाहन की प्राद्ऱी हो
सकती हं । फकसी से वाद-त्रववाद कयने से फचे अन्मथा कोटा -कचहयी के चक्कयं भं
उरझना ऩड सकता हं । सॊतान ऩऺ के प्रसत त्रवशेष सचॊता यह सकती हं । प्रेभ सॊफॊसधत
भाभरो के सरए सभम सभराझुरा सात्रफत हो सकता हं ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : आऩको एकासधक स्त्रोत से धनराब प्राद्ऱ हो सकता हं । प्राम्
आऩके सबी कामा सुचारु रुऩ से ऩूणा हंगे। ऋण के रेन-दे ने से फचने का प्रमास कयं
अन्मथा धन की ऩुन् प्रासद्ऱ-बुगतान भं त्रवरॊफ हो सकता हं ।

प्रकृ सत भं फदराव से

आऩका स्वास्थ्म नयभ यह सकता है । ऩरयवाय की सुख -शास्न्त को फनामे यखने का प्रमास कयं । थोडी से सावधाने से
स्वास्थ्म सुख भं वृत्रद्ध होगी।

भीन: 1 से 15 ससतम्फय 2012 : व्मवासाम से जुडे हं औय साझेदायी की मोजना फना
यहे हं तो सभम प्रसतकूर सात्रफत हो सकता हं । इद्श सभिो के सहमोग से नमे रोगो से
सभिता होगी। भहत्वऩूणा एवॊ घये रू भाभरो भं चुनौतीओॊ का साभना कयना ऩड सकता
हं । प्रेभ सॊफॊसधत भाभरं भं सभस्माएॊ उत्ऩन्न हो सकती हं । सॊमभ भं यहने का प्रमास
कयं । प्रकृ सत भं फदराव से आऩका स्वास्थ्म नयभ यह सकता है ।
16 से 30 ससतम्फय 2012 : कामाऺेि भं जोस्खभ बये कामा कयने से फचे क्मोफक आऩकी
राऩयवाही आऩको रॊफे सभम का नुक्शान कय सकती हं । आम से व्मम असधक होने के

मोग फन यहे हं । ऋण के रेन-दे ने से फचने का प्रमास कयं अन्मथा धन की ऩुन् प्रासद्ऱबुगतान भं त्रवरॊफ हो सकता हं ।
के मोग हं ।

व्मवसासमक मािा राबदामक ससद्ध होगी। जीवनसाथी के साथ सॊफॊधं भं सुधाय होने

ससतम्फय 2012

86

ससतम्फय 2012 भाससक ऩॊचाॊग
फद

वाय

भाह

ऩऺ

सतसथ

सभासद्ऱ

नऺि

सभासद्ऱ

मोग

सभासद्ऱ

कयण

सभासद्ऱ

चॊद्र

यासश

सभासद्ऱ

1

शसन

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

एकभ

19:16:06 ऩू.बाद्रऩद

30:10:29 धृसत

25:40:29 फारव

07:17:59 कुॊब

23:57:00

2

यत्रव

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

फद्रतीमा

19:39:06 ऩू.बाद्रऩद

06:10:58 शूर

25:05:21 तैसतर

07:23:10 भीन

-

3

सोभ

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

तृतीमा

20:39:36 उ.बाद्रऩद

07:29:17 गॊड

24:57:24 वस्णज

08:04:54 भीन

-

4

भॊगर

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

चतुथॉ

22:15:43 ये वसत

09:25:05 वृत्रद्ध

25:19:28 फव

09:24:09 भीन

09:25:00

5

फुध

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

ऩॊचभी

24:24:39 अस्द्वनी

11:53:42 ध्रुव

26:03:05 कौरव

11:18:05 भेष

-

6

गुरु

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

षद्षी

26:54:12 बयणी

14:46:42 व्माघात

27:00:46 गय

13:37:19 भेष

21:33:00

7

शुक्र

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

सद्ऱभी

29:29:23 कृ सतका

17:53:45 हषाण

28:05:00 त्रवत्रद्श

16:11:34 वृष

-

8

शसन

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

अद्शभी

31:56:07 योफहस्ण

20:57:03 वज्र

29:01:44 फारव

18:44:52 वृष

-

9

यत्रव

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

07:56:36 भृगसशया

23:43:29 ससत्रद्ध

29:41:36 कौरव

07:56:36 वृष

10:24:00

10 सोभ

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

नवभी

09:58:58 आद्रा

25:58:58 व्मसतऩात

29:55:13 गय

09:58:58 सभथुन

-

11 भॊगर

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

दशभी

11:23:50 ऩुनवासु

27:33:13 वरयमान

29:34:09 त्रवत्रद्श

11:23:50 सभथुन

21:14:00

12 फुध

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

एकादशी

12:04:38 ऩुष्म

28:23:23 ऩरयग्रह

28:38:23 फारव

12:04:38 कका

-

13 गुरु

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

द्रादशी

11:59:30 अद्ऴेषा

28:28:34 सशव

27:04:11 तैसतर

11:59:30 कका

28:28:00

14 शुक्र

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

िमोदशी

11:10:18 भघा

27:53:26 ससत्रद्ध

24:59:03 वस्णज

11:10:18 ससॊह

-

15 शसन

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

चतुदाशी

09:41:44 ऩू.पाल्गुनी 26:44:33 साध्म

22:25:48 शकुसन

09:41:44 ससॊह

-

16 यत्रव

अ.बाद्रऩद

कृ ष्ण

07:41:17 उ.पाल्गुनी 25:11:17 शुब

19:30:02 नाग

07:41:17 ससॊह

08:23:00

17 सोभ

शु.बाद्रऩद

शुक्र

26:41:47 हस्त

23:22:05 शुक्र

16:19:17 फारव

16:00:32 कन्मा

-

18 भॊगर

शु.बाद्रऩद

शुक्र

तृतीमा

23:58:12 सचिा

21:26:20 ब्रह्म

13:01:01 तैसतर

13:19:46 कन्मा

10:25:00

19 फुध

शु.बाद्रऩद

शुक्र

चतुथॉ

21:16:31 स्वाती

19:30:35 इन्द्र

09:41:50 वस्णज

10:36:12 तुरा

-

अद्शभी

/ नवभी

अभावस्मा

/ प्रसतऩदा
प्रसतऩदा

/ फद्रतीमा

ससतम्फय 2012

87

20 गुरु

शु.बाद्रऩद

शुक्र

ऩॊचभी

18:42:19 त्रवशाखा

17:41:23 वैधसृ त

06:23:34 फव

07:58:15 तुरा

12:07:00

21 शुक्र

शु.बाद्रऩद

शुक्र

षद्षी

16:18:27 अनुयाधा

16:02:30 प्रीसत

24:15:38 तैसतर

16:18:27 वृस्द्ळक

-

22 शसन

शु.बाद्रऩद

शुक्र

सद्ऱभी

14:08:38 जेद्षा

14:38:38 आमुष्भान

21:28:19 वस्णज

14:08:38 वृस्द्ळक

14:39:00

23 यत्रव

शु.बाद्रऩद

शुक्र

अद्शभी

12:17:34 भूर

13:32:34 सौबाग्म

18:55:04 फव

12:17:34 धनु

-

24 सोभ

शु.बाद्रऩद

शुक्र

नवभी

10:43:23 ऩूवााषाढ़

12:43:23 शोबन

16:36:49 कौरव

10:43:23 धनु

18:33:00

25 भॊगर

शु.बाद्रऩद

शुक्र

दशभी

09:27:57 उत्तयाषाढ़

12:11:04 असतगॊड

14:34:30 गय

09:27:57 भकय

-

26 फुध

शु.बाद्रऩद

शुक्र

एकादशी

08:32:12 श्रवण

12:01:16 सुकभाा

12:47:12 त्रवत्रद्श

08:32:12 भकय

24:03:00

27 गुरु

शु.बाद्रऩद

शुक्र

द्रादशी

07:58:58 धसनद्षा

12:11:09 धृसत

11:17:43 फारव

07:58:58 कुॊब

-

28 शुक्र

शु.बाद्रऩद

शुक्र

िमोदशी

07:48:13 शतसबषा

12:45:25 शूर

10:06:58 तैसतर

07:48:13 कुॊब

-

29 शसन

शु.बाद्रऩद

शुक्र

चतुदाशी

08:04:41 ऩू.बाद्रऩद

13:45:56 गॊड

09:16:52 वस्णज

08:04:41 कुॊब

07:28:00

30 यत्रव

शु.बाद्रऩद

शुक्र

ऩूस्णाभा

08:49:15 उ.बाद्रऩद

15:13:38 वृत्रद्ध

08:49:15 फव

08:49:15 भीन

-

शसन ऩीिा सनवायक
सॊऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत 22 गेज शुद्ध स्टीर भं सनसभात अखॊफडत ऩौरुषाकाय शसन मॊि
ऩुरुषाकाय शसन मॊि (स्टीर भं) को तीव्र प्रबावशारी फनाने हे तु शसन की कायक धातु शुद्ध स्टीर(रोहे ) भं फनामा गमा
हं । स्जस के प्रबाव से साधक को तत्कार राब प्राद्ऱ होता हं । मफद जन्भ कुॊडरी भं शसन प्रसतकूर होने ऩय व्मत्रि को
अनेक कामं भं असपरता प्राद्ऱ होती है , कबी व्मवसाम भं घटा, नौकयी भं ऩये शानी, वाहन दघ
ा ना, गृह क्रेश आफद
ु ट

ऩये शानीमाॊ फढ़ती जाती है ऐसी स्स्थसतमं भं प्राणप्रसतत्रद्षत ग्रह ऩीिा सनवायक शसन मॊि की अऩने को व्मऩाय स्थान मा

घय भं स्थाऩना कयने से अनेक राब सभरते हं । मफद शसन की ढै ़मा मा साढ़े साती का सभम हो तो इसे अवश्म ऩूजना
चाफहए। शसनमॊि के ऩूजन भाि से व्मत्रि को भृत्मु, कजा, कोटा केश, जोडो का ददा , फात योग तथा रम्फे सभम के सबी
प्रकाय के योग से ऩये शान व्मत्रि के सरमे शसन मॊि असधक राबकायी होगा। नौकयी ऩेशा आफद के रोगं को ऩदौन्नसत
बी शसन द्राया ही सभरती है अत् मह मॊि असत उऩमोगी मॊि है स्जसके द्राया शीघ्र ही राब ऩामा जा सकता है ।

भूल्म: 1050 से 8200

GURUTVA KARYALAY
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ससतम्फय 2012

88

ससतम्फय-2012 भाससक व्रत-ऩवा-त्मौहाय
फद

वाय

भाह

ऩऺ

सतसथ

सभासद्ऱ

प्रभुख व्रत-त्मोहाय

1

शसन

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

एकभ

19:16:06

-

2

यत्रव

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

फद्रतीमा

19:39:06

अशून्मशमन व्रत, भहाव्मसतऩात दे ययात 3.32 से

3

सोभ

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

तृतीमा

20:39:36

भहाव्मसतऩात प्रात: 8.50 फजे तक

4

भॊगर

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

चतुथॉ

22:15:43

5

फुध

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

ऩॊचभी

24:24:39

सशऺक फदवस, डा.याधाकृ ष्णन जमॊती, भदय टे येसा स्भृसत फदवस,

6

गुरु

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

षद्षी

26:54:12

-

7

शुक्र

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

सद्ऱभी

29:29:23

-

8

शसन

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

अद्शभी

31:56:07

काराद्शभी व्रत, त्रवद्व साऺयता फदवस,

9

यत्रव

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

07:56:36

-

10

सोभ

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

नवभी

09:58:58

ऩॊ. गोत्रवन्दवल्रब ऩॊत स्भृसत फदवस

11

भॊगर

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

दशभी

11:23:50

सॊत त्रवनोफा बावे जमॊती, भहादे वी वभाा स्भृसत फदवस

12

फुध

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

एकादशी

12:04:38

13

गुरु

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

द्रादशी

11:59:30

प्रदोष व्रत, जैन ऩमुष
ा ण ऩवा प्रायॊ ब, ब्रह्मानॊद रोधी स्भृसत फदवस

14

शुक्र

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

िमोदशी

11:10:18

भाससक सशवयात्रि व्रत, फहॊ दी फदवस,

15

शसन

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

चतुदाशी

09:41:44

अद्शभी

/ नवभी

अॊगायकी सॊकद्शी श्रीगणेश चतुथॉ व्रत (चॊ.उ.या.8.35), दादाबाई
नौयोजी जमॊती,

कभरा एकादशी व्रत, ऩुरुषोत्तभी एकादशी, द्वेताॊफय जैन ऩमुष
ा ण
ऩवा प्रायॊ ब,

श्राद्ध की अभावस्मा, कल्ऩसूि वाॊचन एवॊ ऩास्ऺक प्रसतक्रभण
(द्वेताॊफय जैन), रस्ब्धत्रवधान व्रत 5 फदन (फदगॊफय जैन)
स्नान-दान हे तु उत्तभ ऩुरुषोत्तभी अभावस्मा, रुद्रव्रत, भौनव्रत

16

यत्रव

अ.बाद्रऩद कृ ष्ण

अभावस्मा

/ प्रसतऩदा

प्रायॊ ब,
07:41:17

कन्मा-सॊक्रास्न्त

सामॊ

5:56

फजे,

स्नान-दान

का

ऩुण्मकार फदन 11:32 से सामॊ 5:56 फजे तक, ऩुरुषोत्तभ
(असधक/भर) भास- व्रत-सनमभ ऩूण,ा वैधसृ त भहाऩात प्रात:
9.35 से फदन 2.36 फजे तक, भहावीय जन्भवाॊचन(द्वेताॊफय जैन)

ससतम्फय 2012

89

17

सोभ

शु.बाद्रऩद शुक्र

18

भॊगर

शु.बाद्रऩद शुक्र

प्रसतऩदा

/ फद्रतीमा
तृतीमा

26:41:47

23:58:12

त्रवद्वकभाा ऩूजा, नवीन चॊद्र-दशान, श्रीयाभदे व ऩीय जमॊती व
नवयाि प्रायॊ ब (याज.) तेराघय (द्वेताॊफय जैन),
हरयतासरका तीज व्रत, फिी तीज, वायाहावताय जमॊती, गौयी
तृतीमा व्रत, केविा तीज, गौयी तीज (ओिीसा), त्रिरोक तीज
ससत्रद्धत्रवनामक चतुथॉ व्रत(चॊ.उ.या.8.41), श्रीगणेशोत्सव 11 फदन,
श्रीकृ ष्ण-करॊकनी चतुथॉ, शास्त्रोि भत से आज के फदन चॊद्रभा

19

फुध

शु.बाद्रऩद शुक्र

चतुथॉ

21:16:31

का दशान सवाथा सनत्रषद्ध, ऩत्थय (ढे रा) चौथ, चौठ चॊद्र (सभसथ.),
सौबाग्म चतुथॉ (ऩ.फॊ), सशवा चतुथॉ, सयस्वती ऩूजा (ओिीसा),
रक्ष्भी ऩूजा, जैन सॊवत्सयी (चतुथॉ ऩऺ) (द्वेताॊफय जैन),
भूरसूिवाॊचन (द्वेताॊफय जैन),
ऋत्रषऩॊचभी-भध्माि भं सद्ऱत्रषा ऩूजन, गगा एवॊ अॊसगया ऋत्रष
जमॊती, आकाश ऩॊचभी (जैन), जैन सॊवत्सयी (ऩॊचभी ऩऺ), गुरु

20

गुरु

शु.बाद्रऩद शुक्र

ऩॊचभी

18:42:19

ऩॊचभी (ओिीसा), यऺाऩॊचभी (ऩ.फॊ), बायतंद ु जमॊती, दशरऺण

व्रत 10 फदन एवॊ ऩुष्ऩाॊजसर व्रत 5 फदन (फदगॊफय जैन), आकाश
ऩॊचभी (जैन),
सूमष
ा द्षी व्रत, रोराका षद्षी (काशी), फरदे व छठ-श्रीफरयाभ जमॊती
21

शुक्र

शु.बाद्रऩद शुक्र

षद्षी

16:18:27

भहोत्सव (ब्रज), रसरता षद्षी, भॊथन षद्षी (ऩ.फॊ), स्कन्द कुभाय
षद्षी व्रत, सोभनाथ व्रत (ओिीसा), अनुयाधा नऺि भं ज्मेद्षा गौयी
का आवाहन, चॊदनषद्षी (जैन), कारू सनवााण फदवस (जैन)
भुिाबयण सद्ऱभी व्रत, सॊतान सद्ऱभी व्रत, रसरता सद्ऱभी (ऩ.फॊओिीसा), नवाखाई, अऩयास्जता ऩूजा, ज्मेद्षानऺि भं ज्मेद्षागौयी

22

शसन

शु.बाद्रऩद शुक्र

सद्ऱभी

14:08:38

का ऩूजन, भहारक्ष्भी व्रत-अनुद्षान प्रायॊ ब (चॊद्रोदम कारीन अद्शभी
भं), सूमा सामन तुरायासश भं यात्रि 8.19 फजे, शयद् सम्ऩात,
भहात्रवषुव फदवस, सूमा दस्ऺणी गोराद्र्ध भं, सनदोष-शीरसद्ऱभी
(फदगॊफय जैन),
श्रीदग
ु ााद्शभी

23

यत्रव

शु.बाद्रऩद शुक्र

अद्शभी

12:17:34

व्रत, श्रीअन्नऩूणााद्शभी

व्रत, श्रीयाधाद्शभी

व्रतोत्सव

(फयसाना-भथुया), दधीसच जमॊती, भहायत्रववाय व्रत, भूर नऺि भं
ज्मेद्षागौयी का त्रवसजान, सन:शल्म अद्शभी (फदग.जैन), दफ
ु री
आठभ (द्वेत.जैन),

24

सोभ

शु.बाद्रऩद शुक्र

नवभी

10:43:23

श्रीभद्भागवत जमॊती-सद्ऱाह प्रायॊ ब,नन्दानवभी, अदख
ु नवभी, श्रीचॊद्र
जमॊती, तर नवभी (ऩ.फॊ- ओिीसा),

ससतम्फय 2012

90

दशावताय दशभी व्रत, तेजा दशभी, श्रीयाभदे व ऩीय नवयाि एवॊ
25

भॊगर

शु.बाद्रऩद शुक्र

दशभी

09:27:57

भेरा याभदे व सभाद्ऱ (याज.), ऩॊ. दीनदमार उऩाध्माम जमॊती,
सुगन्ध-धूऩ दशभी एवॊ अनन्त व्रत प्रायॊ ब (फदग.जैन),
ऩद्मा

26

फुध

शु.बाद्रऩद शुक्र

एकादशी

08:32:12

एकादशी

एकादशी,

व्रत,

धभाा-कभाा

वाभनद्रादशी

ऩाश्व-ऩरयवतानी
एकादशी,

(भध्मािकारीन

एकादशी,

डोर

श्रवण

जरझूरनी

ग्मायस

नऺिमुता),

(भ.प्र.),
वाभनावताय

जमॊती, श्रवणद्रादशी,
27

गुरु

शु.बाद्रऩद शुक्र

द्रादशी

07:58:58

श्माभफाफा द्रादशी,

प्रदोष

व्रत,

बुवनेद्वयी

भहात्रवद्या जमॊती,

हरयवासय प्रात: 7:58 फजे तक, त्रवद्व ऩमाटन फदवस
भतान्तय से अनन्तचतुदाशी व्रत (भध्मािव्मात्रऩनी चतुदाशी होने

28

शुक्र

शु.बाद्रऩद शुक्र

िमोदशी

07:48:13

से

दे श के

कुछ अॊचरं

भं

आज)

गोत्रियाि

व्रत

प्रायॊ ब,

भहाव्मसतऩात प्रात: 7:59 से फदन 1:06 फजे तक, शहीद बगत
ससॊह जमॊती, यत्निम व्रत 3 फदन (फदग.जैन)
अनन्तचतुदाशी व्रत, गणेश त्रवसजान (भहायाद्स), ऩूस्णाभा व्रत,
श्रीसत्मनायामण ऩूजा-कथा, उभा भहे द्वय व्रत, भहारमा प्रायॊ ब-

29

शसन

शु.बाद्रऩद शुक्र

चतुदाशी

08:04:41

प्रौद्षऩदी

ऩूस्णाभा

का

श्राद्ध,

नान्दीभाताभह

श्राद्ध,

कुरधभा,

इन्द्रगोत्रवन्द ऩूजा (ओिीसा), रोकऩार ऩूजा ऩूस्णाभा, ऩास्ऺक
प्रसतक्रभण (द्वेत. जैन), ईद्वयचॊद्र त्रवद्यासागय जमॊती,
स्नान-दान हे तु उत्तभ ऩूस्णाभा, गोत्रियाि व्रत ऩूण,ा सॊन्माससमं का
30

यत्रव

शु.बाद्रऩद शुक्र

ऩूस्णाभा

08:49:15

चातुभाास सभाद्ऱ, श्रीभद्भागवत सद्ऱाह ऩूण,ा प्रसतऩदा का श्राद्ध,
अम्फाजी

का

भेरा

(गुज),

सॊध्मा

ऩूजा,

ऺभावाणी

ऩवा

(फदग.जैन),

क्मा आऩ फकसी सभस्मा से ग्रस्त हं ?
आऩके ऩास अऩनी सभस्माओॊ से छुटकाया ऩाने हे तु ऩूजा-अचाना, साधना, भॊि जाऩ इत्माफद कयने का सभम नहीॊ
हं ? अफ आऩ अऩनी सभस्माओॊ से फीना फकसी त्रवशेष ऩूजा-अचाना, त्रवसध-त्रवधान के आऩको अऩने कामा भं सपरता
प्राद्ऱ कय सके एवॊ आऩको अऩने जीवन के सभस्त सुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा प्राद्ऱ हो सके इस सरमे गुरुत्व
कामाारत द्राया हभाया उद्दे श्म शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो द्राया ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा चैतन्म मुि
त्रवसबन्न प्रकाय के मन्ि- कवच एवॊ शुब परदामी ग्रह यत्न एवॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩहोचाने का है ।

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ससतम्फय 2012

91

गणेश रक्ष्भी मॊि
प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेश रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दक
ु ान-ओफपस-पैक्टयी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत
कयने व्माऩाय भं त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं । मॊि के प्रबाव से बाग्म भं उन्नसत, भान-प्रसतद्षा एवॊ

व्माऩय भं वृत्रद्ध होती

हं एवॊ आसथाक स्स्थभं सुधाय होता हं । गणेश रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने से बगवान गणेश औय दे वी रक्ष्भी का

Rs.730 से Rs.10900 तक

सॊमुि आशीवााद प्राद्ऱ होता हं ।

भॊगर मॊि से ऋण भुत्रि
भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद के त्रववादो को हर कयने के काभ भं राब दे ता हं , इस के असतरयि व्मत्रि को ऋण
भुत्रि हे तु भॊगर साधना से असत शीध्र राब प्राद्ऱ होता हं ।

त्रववाह आफद भं भॊगरी जातकं के कल्माण के सरए भॊगर

मॊि की ऩूजा कयने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं । प्राण प्रसतत्रद्षत भॊगर मॊि के ऩूजन से बाग्मोदम, शयीय भं खून की
कभी, गबाऩात से फचाव, फुखाय, चेचक, ऩागरऩन, सूजन औय घाव, मौन शत्रि भं वृत्रद्ध, शिु त्रवजम, तॊि भॊि के दद्श
ु प्रबा,

भूल्म भाि Rs- 730

बूत-प्रेत बम, वाहन दघ
ा नाओॊ, हभरा, चोयी इत्मादी से फचाव होता हं ।
ु ट

कुफेय मॊि
कुफेय मॊि के ऩूजन से स्वणा राब, यत्न राब, ऩैतक
ृ सम्ऩत्ती एवॊ गिे हुए धन से राब प्रासद्ऱ फक काभना कयने वारे

व्मत्रि के सरमे कुफेय मॊि अत्मन्त सपरता दामक होता हं । एसा शास्त्रोि वचन हं । कुफेय मॊि के ऩूजन से एकासधक
स्त्रोि से धन का प्राद्ऱ होकय धन सॊचम होता हं ।

ताम्र ऩि ऩय सुवणा ऩोरीस

ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीस

ताम्र ऩि ऩय

(Gold Plated)

(Silver Plated)

(Copper)

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
460
820
1650
2350
3600
6400
10800

साईज

भूल्म

साईज

भूल्म

1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

370
640
1090
1650
2800
5100
8200

1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

255
460
730
1090
1900
3250
6400

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92

ससतम्फय 2012

नवयत्न जफित श्री मॊि
शास्त्र वचन के अनुसाय शुद्ध सुवणा मा यजत भं सनसभात श्री मॊि के चायं औय मफद नवयत्न जिवा ने ऩय मह नवयत्न
जफित श्री मॊि कहराता हं । सबी यत्नो को उसके सनस्द्ळत स्थान ऩय जि कय रॉकेट के रूऩ भं धायण कयने से व्मत्रि को
अनॊत एद्वमा एवॊ रक्ष्भी की प्रासद्ऱ होती हं । व्मत्रि को एसा आबास होता हं जैसे भाॊ रक्ष्भी उसके साथ हं । नवग्रह को
श्री मॊि के साथ रगाने से ग्रहं की अशुब दशा का धायण कयने वारे व्मत्रि ऩय प्रबाव नहीॊ होता हं । गरे भं होने के
कायण मॊि ऩत्रवि यहता हं एवॊ स्नान कयते सभम इस मॊि ऩय स्ऩशा कय जो जर त्रफॊद ु शयीय को रगते हं , वह गॊगा
जर के सभान ऩत्रवि होता हं । इस सरमे इसे सफसे तेजस्वी एवॊ परदासम कहजाता हं । जैसे अभृत से उत्तभ कोई

औषसध नहीॊ, उसी प्रकाय रक्ष्भी प्रासद्ऱ के सरमे श्री मॊि से उत्तभ कोई मॊि सॊसाय भं नहीॊ हं एसा शास्त्रोि वचन हं । इस
प्रकाय के नवयत्न जफित श्री मॊि गुरूत्व कामाारम द्राया शुब भुहूता भं प्राण प्रसतत्रद्षत कयके फनावाए जाते हं ।

अद्श रक्ष्भी कवच
अद्श रक्ष्भी कवच को धायण कयने से व्मत्रि ऩय सदा भाॊ भहा रक्ष्भी की कृ ऩा एवॊ आशीवााद फना
यहता हं । स्जस्से भाॊ रक्ष्भी के अद्श रुऩ (१)-आफद रक्ष्भी, (२)-धान्म रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)गज रक्ष्भी, (५)-सॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रवजम रक्ष्भी, (७)-त्रवद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन सबी
रुऩो का स्वत् अशीवााद प्राद्ऱ होता हं ।

भूल्म भाि: Rs-1250

भॊि ससद्ध व्माऩाय वृत्रद्ध कवच
व्माऩाय वृत्रद्ध कवच व्माऩाय के शीघ्र उन्नसत के सरए उत्तभ हं । चाहं कोई बी व्माऩाय हो अगय उसभं राब के स्थान ऩय
फाय-फाय हासन हो यही हं । फकसी प्रकाय से व्माऩाय भं फाय-फाय फाॊधा उत्ऩन्न हो यही हो! तो सॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत भॊि
ससद्ध ऩूणा चैतन्म मुि व्माऩात वृत्रद्ध मॊि को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थात्रऩत कयने से शीघ्र ही व्माऩाय वृत्रद्ध एवॊ

भूल्म भाि: Rs.730 & 1050

सनतन्तय राब प्राद्ऱ होता हं ।

भॊगर मॊि
(त्रिकोण) भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद के त्रववादो को हर कयने के काभ भं राब दे ता हं , इस के असतरयि व्मत्रि को
ऋण भुत्रि हे तु भॊगर साधना से असत शीध्र राब प्राद्ऱ होता हं । त्रववाह आफद भं भॊगरी जातकं के कल्माण के सरए
भॊगर मॊि की ऩूजा कयने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं ।

भूल्म भाि Rs- 730

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93

ससतम्फय 2012

त्रववाह सॊफॊसधत सभस्मा
क्मा आऩके रडके-रडकी फक आऩकी शादी भं अनावश्मक रूऩ से त्रवरम्फ हो यहा हं मा उनके वैवाफहक जीवन भं खुसशमाॊ कभ
होती जायही हं औय सभस्मा असधक फढती जायही हं । एसी स्स्थती होने ऩय अऩने रडके-रडकी फक कुॊडरी का अध्ममन

अवश्म कयवारे औय उनके वैवाफहक सुख को कभ कयने वारे दोषं के सनवायण के उऩामो के फाय भं त्रवस्ताय से जनकायी प्राद्ऱ
कयं ।

सशऺा से सॊफॊसधत सभस्मा
क्मा आऩके रडके-रडकी की ऩढाई भं अनावश्मक रूऩ से फाधा-त्रवघ्नन मा रुकावटे हो यही हं ? फच्चो को अऩने ऩूणा ऩरयश्रभ
एवॊ भेहनत का उसचत पर नहीॊ सभर यहा? अऩने रडके-रडकी की कुॊडरी का त्रवस्तृत अध्ममन अवश्म कयवारे औय
उनके त्रवद्या अध्ममन भं आनेवारी रुकावट एवॊ दोषो के कायण एवॊ उन दोषं के सनवायण के उऩामो के फाय भं त्रवस्ताय से
जनकायी प्राद्ऱ कयं ।

क्मा आऩ फकसी सभस्मा से ग्रस्त हं ?
आऩके ऩास अऩनी सभस्माओॊ से छुटकाया ऩाने हे तु ऩूजा-अचाना, साधना, भॊि जाऩ इत्माफद कयने का सभम नहीॊ हं ?
अफ आऩ अऩनी सभस्माओॊ से फीना फकसी त्रवशेष ऩूजा-अचाना, त्रवसध-त्रवधान के आऩको अऩने कामा भं सपरता प्राद्ऱ
कय सके एवॊ आऩको अऩने जीवन के सभस्त सुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा प्राद्ऱ हो सके इस सरमे गुरुत्व कामाारत
द्राया हभाया उद्दे श्म शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो द्राया ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा चैतन्म मुि त्रवसबन्न प्रकाय के
मन्ि- कवच एवॊ शुब परदामी ग्रह यत्न एवॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩहोचाने का हं ।

ज्मोसतष सॊफॊसधत त्रवशेष ऩयाभशा
ज्मोसत त्रवऻान, अॊक ज्मोसतष, वास्तु एवॊ आध्मास्त्भक ऻान सं सॊफॊसधत त्रवषमं भं हभाये 30 वषो से असधक वषा के
अनुबवं के साथ ज्मोसतस से जुडे नमे-नमे सॊशोधन के आधाय ऩय आऩ अऩनी हय सभस्मा के सयर सभाधान प्राद्ऱ कय
सकते हं ।

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ओनेक्स
जो व्मत्रि ऩन्ना धायण कयने भे असभथा हो उन्हं फुध ग्रह के उऩयत्न ओनेक्स को धायण कयना चाफहए।
उच्च सशऺा प्रासद्ऱ हे तु औय स्भयण शत्रि के त्रवकास हे तु ओनेक्स यत्न की अॊगूठी को दामं हाथ की सफसे छोटी

उॊ गरी मा रॉकेट फनवा कय गरे भं धायण कयं । ओनेक्स यत्न धायण कयने से त्रवद्या-फुत्रद्ध की प्रासद्ऱ हो होकय स्भयण

शत्रि का त्रवकास होता हं ।

ससतम्फय 2012

94

ससतम्फय 2012 -त्रवशेष मोग
कामा ससत्रद्ध मोग
2
4
8
12

प्रात: 6.10 से फदन-यात
प्रात: 9.25 से फदन-यात
सूमोदम से यात्रि 8.56 तक
फदन 12.04 से 13 ससतॊफय को प्रात:4.22 तक

सम्ऩूणा फदन-यात

16
20
23
30

सामॊ 5.40 से 21 ससतॊफय को सामॊ 4.02 तक
सूमोदम से फदन 1.31 तक
सूमोदम से फदन 3.12 तक

अभृत मोग
4

प्रात: 9.25 से फदन-यात

8

सूमोदम से यात्रि 8.56 तक

16/17

यात्रि 1.10 से सूमोदम तक

त्रिऩुष्कय मोग (तीन गुना) मोग
1

सामॊ 7.15 से 2 ससतॊफय को प्रात: 6.10 तक

त्रवघ्ननकायक बद्रा
3
6/7
10
14

प्रात: 8.08 से यात्रि 8.38 तक

19

प्रात: 10.36 से यात्रि 9.15 तक

यात्रि 2.53 से सामॊ 4.11 तक

22

फदन 2.08 से यात्रि 1.12 तक

यात्रि 10.40 से 11 ससतॊफय फदन 11.23 तक

25

यात्रि 8.58 से 26 ससतॊफय को प्रात: 8.31 तक

फदन 11.09 से यात्रि 10.24 तक

29

प्रात: 8.03 से यात्रि 8.25 तक

मोग पर :

 कामा ससत्रद्ध मोग भे फकमे गमे शुब कामा भे सनस्द्ळत सपरता प्राद्ऱ होती हं , एसा शास्त्रोि वचन हं ।
 त्रिऩुष्कय मोग भं फकमे गमे शुब कामो का राब तीन गुना होता हं । एसा शास्त्रोि वचन हं ।
 शास्त्रोि भत से त्रवघ्ननकायक बद्रा मा बद्रा मोग भं शुब कामा कयना वस्जात हं ।

दै सनक शुब एवॊ अशुब सभम ऻान तासरका
गुसरक कार

मभ कार

(शुब)

(अशुब)

सभम अवसध

सभम अवसध

सभम अवसध

यत्रववाय

03:00 से 04:30

12:00 से 01:30

04:30 से 06:00

सोभवाय

01:30 से 03:00

10:30 से 12:00

07:30 से 09:00

भॊगरवाय

12:00 से 01:30

09:00 से 10:30

03:00 से 04:30

फुधवाय

10:30 से 12:00

07:30 से 09:00

12:00 से 01:30

गुरुवाय

09:00 से 10:30

06:00 से 07:30

01:30 से 03:00

शुक्रवाय

07:30 से 09:00

03:00 से 04:30

10:30 से 12:00

शसनवाय

06:00 से 07:30

01:30 से 03:00

09:00 से 10:30

वाय

याहु कार
(अशुब)

ससतम्फय 2012

95

फदन के चौघफडमे
सभम

यत्रववाय

सोभवाय

भॊगरवाय फुधवाय गुरुवाय

शुक्रवाय

शसनवाय

06:00 से 07:30

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

चर

कार

07:30 से 09:00

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

09:00 से 10:30

राब

शुब

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

10:30 से 12:00

अभृत

योग

राब

शुब

चर

कार

उद्रे ग

12:00 से 01:30

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

चर

01:30 से 03:00

शुब

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

03:00 से 04:30

योग

राब

शुब

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

04:30 से 06:00

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

चर

कार

यात के चौघफडमे
सभम

यत्रववाय

सोभवाय

भॊगरवाय

फुधवाय गुरुवाय

शुक्रवाय

शसनवाय

06:00 से 07:30

शुब

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

09:00 से 10:30

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

10:30 से 12:00

योग

राब

शुब

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

12:00 से 01:30

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

चर

01:30 से 03:00

राब

शुब

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

03:00 से 04:30

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

चर

कार

04:30 से 06:00

शुब

चर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

07:30 से 09:00

अभृत

योग

राब

शुब

चर

कार

उद्रे ग

शास्त्रोि भत के अनुशाय मफद फकसी बी कामा का प्रायॊ ब शुब भुहूता मा शुब सभम ऩय फकमा जामे तो कामा भं सपरता

प्राद्ऱ होने फक सॊबावना ज्मादा प्रफर हो जाती हं । इस सरमे दै सनक शुब सभम चौघफिमा दे खकय प्राद्ऱ फकमा जा सकता हं ।

नोट: प्राम् फदन औय यात्रि के चौघफिमे फक सगनती क्रभश् सूमोदम औय सूमाास्त से फक जाती हं । प्रत्मेक चौघफिमे फक अवसध 1

घॊटा 30 सभसनट अथाात डे ढ़ घॊटा होती हं । सभम के अनुसाय चौघफिमे को शुबाशुब तीन बागं भं फाॊटा जाता हं , जो क्रभश् शुब,
भध्मभ औय अशुब हं ।

* हय कामा के सरमे शुब/अभृत/राब का

चौघफडमे के स्वाभी ग्रह

शुब चौघफडमा

भध्मभ चौघफडमा

अशुब चौघफिमा

चौघफडमा स्वाभी ग्रह

चौघफडमा स्वाभी ग्रह

चौघफडमा

स्वाभी ग्रह

शुब

गुरु

चय

उद्बे ग

सूमा

अभृत

चॊद्रभा

कार

शसन

राब

फुध

योग

भॊगर

शुक्र

चौघफिमा उत्तभ भाना जाता हं ।

* हय कामा के सरमे चर/कार/योग/उद्रे ग
का चौघफिमा उसचत नहीॊ भाना जाता।

ससतम्फय 2012

96

फदन फक होया - सूमोदम से सूमाास्त तक
वाय

1.घॊ

2.घॊ

3.घॊ

4.घॊ

5.घॊ

6.घॊ

7.घॊ

8.घॊ

9.घॊ

यत्रववाय

सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

सोभवाय

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

भॊगरवाय

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

फुधवाय

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु भॊगर सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

गुरुवाय

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

शुक्रवाय

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु

शसनवाय

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

चॊद्र

चॊद्र
फुध

10.घॊ 11.घॊ 12.घॊ

यात फक होया – सूमाास्त से सूमोदम तक
यत्रववाय

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

सोभवाय

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

भॊगरवाय

शसन

गुरु

भॊगर

फुधवाय

सूमा

शुक्र

फुध

गुरुवाय

चॊद्र

शसन

गुरु

शुक्रवाय

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

गुरु भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु

सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

भॊगर सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसनवाय

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु भॊगर सूमा

शुक्र

फुध

चॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

चॊद्र

चॊद्र

होया भुहूता को कामा ससत्रद्ध के सरए ऩूणा परदामक एवॊ अचूक भाना जाता हं , फदन-यात के २४ घॊटं भं शुब-अशुब सभम
को सभम से ऩूवा ऻात कय अऩने कामा ससत्रद्ध के सरए प्रमोग कयना चाफहमे।

त्रवद्रानो के भत से इस्च्छत कामा ससत्रद्ध के सरए ग्रह से सॊफॊसधत होया का चुनाव कयने से त्रवशेष राब
प्राद्ऱ होता हं ।

 सूमा फक होया सयकायी कामो के सरमे उत्तभ होती हं ।
 चॊद्रभा फक होया सबी कामं के सरमे उत्तभ होती हं ।
 भॊगर फक होया कोटा -कचेयी के कामं के सरमे उत्तभ होती हं ।
 फुध फक होया त्रवद्या-फुत्रद्ध अथाात ऩढाई के सरमे उत्तभ होती हं ।
 गुरु फक होया धासभाक कामा एवॊ त्रववाह के सरमे उत्तभ होती हं ।
 शुक्र फक होया मािा के सरमे उत्तभ होती हं ।
 शसन फक होया धन-द्रव्म सॊफॊसधत कामा के सरमे उत्तभ होती हं ।

ससतम्फय 2012

97

ग्रह चरन ससतम्फय -2012
Day
1

Sun

Mon

Ma

04:14:55

10:20:01

06:11:21

2

04:15:53

11:02:58

3

04:16:51

4

Me

Jup

Ven

Sat

Rah

Ket

Ua

Nep

Plu

04:05:45

01:20:32

02:29:58

06:02:12

07:05:34

01:05:34

11:13:35

10:07:30

08:12:59

06:12:00

04:07:41

01:20:38

03:01:01

06:02:18

07:05:22

01:05:22

11:13:33

10:07:28

08:12:58

11:15:37

06:12:40

04:09:38

01:20:44

03:02:05

06:02:23

07:05:12

01:05:12

11:13:31

10:07:26

08:12:58

04:17:49

11:28:00

06:13:19

04:11:35

01:20:50

03:03:09

06:02:29

07:05:05

01:05:05

11:13:29

10:07:25

08:12:58

5

04:18:48

00:10:08

06:13:58

04:13:32

01:20:56

03:04:13

06:02:35

07:05:00

01:05:00

11:13:27

10:07:23

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ससतम्फय 2012

सवा योगनाशक मॊि/कवच
भनुष्म अऩने जीवन के त्रवसबन्न सभम ऩय फकसी ना फकसी साध्म मा असाध्म योग से ग्रस्त होता हं । उसचत
उऩचाय से ज्मादातय साध्म योगो से तो भुत्रि सभर जाती हं , रेफकन कबी-कबी साध्म योग होकय बी असाध्म होजाते हं ,
मा कोइ असाध्म योग से ग्रससत होजाते हं । हजायो राखो रुऩमे खचा कयने ऩय बी असधक राब प्राद्ऱ नहीॊ हो ऩाता।
डॉक्टय द्राया फदजाने वारी दवाईमा अल्ऩ सभम के सरमे कायगय सात्रफत होती हं , एसी स्स्थती भं राब प्रासद्ऱ के सरमे
व्मत्रि एक डॉक्टय से दस
ू ये डॉक्टय के चक्कय रगाने को फाध्म हो जाता हं ।
बायतीम ऋषीमोने अऩने मोग साधना के प्रताऩ से योग शाॊसत हे तु त्रवसबन्न आमुवये औषधो के असतरयि मॊि,
भॊि एवॊ तॊि का उल्रेख अऩने ग्रॊथो भं कय भानव जीवन को राब प्रदान कयने का साथाक प्रमास हजायो वषा ऩूवा फकमा
था। फुत्रद्धजीवो के भत से जो व्मत्रि जीवनबय अऩनी फदनचमाा ऩय सनमभ, सॊमभ यख कय आहाय ग्रहण कयता हं , एसे
व्मत्रि को त्रवसबन्न योग से ग्रससत होने की सॊबावना कभ होती हं । रेफकन आज के फदरते मुग भं एसे व्मत्रि बी
बमॊकय योग से ग्रस्त होते फदख जाते हं । क्मोफक सभग्र सॊसाय कार के अधीन हं । एवॊ भृत्मु सनस्द्ळत हं स्जसे त्रवधाता के
अरावा औय कोई टार नहीॊ सकता, रेफकन योग होने फक स्स्थती भं व्मत्रि योग दयू कयने का प्रमास तो अवश्म कय
सकता हं । इस सरमे मॊि भॊि एवॊ तॊि के कुशर जानकाय से मोग्म भागादशान रेकय व्मत्रि योगो से भुत्रि ऩाने का मा
उसके प्रबावो को कभ कयने का प्रमास बी अवश्म कय सकता हं ।
ज्मोसतष त्रवद्या के कुशर जानकय बी कार ऩुरुषकी गणना कय अनेक योगो के अनेको यहस्म को उजागय कय
सकते हं । ज्मोसतष शास्त्र के भाध्मभ से योग के भूरको ऩकडने भे सहमोग सभरता हं , जहा आधुसनक सचफकत्सा शास्त्र
अऺभ होजाता हं वहा ज्मोसतष शास्त्र द्राया योग के भूर(जि) को ऩकड कय उसका सनदान कयना राबदामक एवॊ
उऩामोगी ससद्ध होता हं ।
हय व्मत्रि भं रार यॊ गकी कोसशकाए ऩाइ जाती हं , स्जसका सनमभीत त्रवकास क्रभ फद्ध तयीके से होता यहता हं ।
जफ इन कोसशकाओ के क्रभ भं ऩरयवतान होता है मा त्रवखॊफडन होता हं तफ व्मत्रि के शयीय भं स्वास्थ्म सॊफॊधी त्रवकायो
उत्ऩन्न होते हं । एवॊ इन कोसशकाओ का सॊफॊध नव ग्रहो के साथ होता हं । स्जस्से योगो के होने के कायण व्मत्रि के
जन्भाॊग से दशा-भहादशा एवॊ ग्रहो फक गोचय स्स्थती से प्राद्ऱ होता हं ।
सवा योग सनवायण कवच एवॊ भहाभृत्मुॊजम मॊि के भाध्मभ से व्मत्रि के जन्भाॊग भं स्स्थत कभजोय एवॊ ऩीफडत
ग्रहो के अशुब प्रबाव को कभ कयने का कामा सयरता ऩूवक
ा फकमा जासकता हं । जेसे हय व्मत्रि को ब्रह्माॊड फक उजाा एवॊ
ऩृथ्वी का गुरुत्वाकषाण फर प्रबावीत कताा हं फठक उसी प्रकाय कवच एवॊ मॊि के भाध्मभ से ब्रह्माॊड फक उजाा के
सकायात्भक प्रबाव से व्मत्रि को सकायात्भक उजाा प्राद्ऱ होती हं स्जस्से योग के प्रबाव को कभ कय योग भुि कयने हे तु
सहामता सभरती हं ।
योग सनवायण हे तु भहाभृत्मुॊजम भॊि एवॊ मॊि का फडा भहत्व हं । स्जस्से फहन्द ू सॊस्कृ सत का प्राम् हय व्मत्रि
भहाभृत्मुॊजम भॊि से ऩरयसचत हं ।

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ससतम्फय 2012

कवच के राब :
एसा शास्त्रोि वचन हं स्जस घय भं भहाभृत्मुॊजम मॊि स्थात्रऩत होता हं वहा सनवास कताा हो नाना प्रकाय फक

आसध-व्मासध-उऩासध से यऺा होती हं ।
ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा चैतन्म मुि सवा योग सनवायण कवच फकसी बी उम्र एवॊ जासत धभा के रोग चाहे स्त्री

हो मा ऩुरुष धायण कय सकते हं ।

जन्भाॊगभं अनेक प्रकायके खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रहो फक प्रसतकूरता से योग उतऩन्न होते हं ।

कुछ योग सॊक्रभण से होते हं एवॊ कुछ योग खान-ऩान फक असनमसभतता औय अशुद्धतासे उत्ऩन्न होते हं । कवच
एवॊ मॊि द्राया एसे अनेक प्रकाय के खयाफ मोगो को नद्श कय, स्वास्थ्म राब औय शायीरयक यऺण प्राद्ऱ कयने हे तु
सवा योगनाशक कवच एवॊ मॊि सवा उऩमोगी होता हं ।
आज के बौसतकता वादी आधुसनक मुगभे अनेक एसे योग होते हं , स्जसका उऩचाय ओऩये शन औय दवासे बी कफठन

हो जाता हं । कुछ योग एसे होते हं स्जसे फताने भं रोग फहचफकचाते हं शयभ अनुबव कयते हं एसे योगो को योकने
हे तु एवॊ उसके उऩचाय हे तु सवा योगनाशक कवच एवॊ मॊि राबादासम ससद्ध होता हं ।
प्रत्मेक व्मत्रि फक जेसे-जेसे आमु फढती हं वैसे-वसै उसके शयीय फक ऊजाा कभ होती जाती हं । स्जसके साथ अनेक

प्रकाय के त्रवकाय ऩैदा होने रगते हं एसी स्स्थती भं उऩचाय हे तु सवायोगनाशक कवच एवॊ मॊि परप्रद होता हं ।
स्जस घय भं त्रऩता-ऩुि, भाता-ऩुि, भाता-ऩुिी, मा दो बाई एक फह नऺिभे जन्भ रेते हं , तफ उसकी भाता के सरमे

असधक कद्शदामक स्स्थती होती हं । उऩचाय हे तु भहाभृत्मुॊजम मॊि परप्रद होता हं ।
स्जस व्मत्रि का जन्भ ऩरयसध मोगभे होता हं उन्हे होने वारे भृत्मु तुल्म कद्श एवॊ होने वारे योग, सचॊता भं उऩचाय

हे तु सवा योगनाशक कवच एवॊ मॊि शुब परप्रद होता हं ।
नोट:- ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा चैतन्म मुि सवा योग सनवायण कवच एवॊ मॊि के फाये भं असधक जानकायी हे तु
सॊऩका कयं ।

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ससतम्फय 2012

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भॊि ससद्ध कवच

भॊि ससद्ध कवच को त्रवशेष प्रमोजन भं उऩमोग के सरए औय शीघ्र प्रबाव शारी फनाने के सरए तेजस्वी भॊिो द्राया

शुब भहूता भं शुब फदन को तैमाय फकमे जाते हं . अरग-अरग कवच तैमाय कयने केसरए अरग-अरग तयह के
भॊिो का प्रमोग फकमा जाता हं .

 क्मं चुने भॊि ससद्ध कवच?

 उऩमोग भं आसान कोई प्रसतफन्ध नहीॊ
 कोई त्रवशेष सनसत-सनमभ नहीॊ
 कोई फुया प्रबाव नहीॊ

 कवच के फाये भं असधक जानकायी हे तु

भॊि ससद्ध कवच सूसच
सवा कामा ससत्रद्ध

4600/-

ऋण भुत्रि

910/-

त्रवघ्नन फाधा सनवायण

550/-

सवा जन वशीकयण

1450/-

धन प्रासद्ऱ

820/-

नज़य यऺा

550/-

अद्श रक्ष्भी

1250/-

तॊि यऺा

730/-

460/-

सॊतान प्रासद्ऱ

1250/-

शिु त्रवजम

दब
ु ााग्म नाशक

730/-

* वशीकयण (२-३ व्मत्रिके सरए)

1050/-

स्ऩे- व्माऩय वृत्रद्ध

1050/-

त्रववाह फाधा सनवायण

730/-

* ऩत्नी वशीकयण

640/-

कामा ससत्रद्ध

1050/-

व्माऩय वृत्रद्ध

730/--

* ऩसत वशीकयण

640/-

आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ

1050/-

सवा योग सनवायण

730/-

सयस्वती (कऺा +10 के सरए)

550/-

नवग्रह शाॊसत

910/-

भस्स्तष्क ऩृत्रद्श वधाक

640/-

सयस्वती (कऺा 10 तकके सरए)

460/-

बूसभ राब

910/-

काभना ऩूसता

640/-

* वशीकयण ( 1 व्मत्रि के सरए)

640/-

काभ दे व

910/-

त्रवयोध नाशक

640/-

योजगाय प्रासद्ऱ

550/-

ऩदं उन्नसत

910/-

योजगाय वृत्रद्ध

730/-

*कवच भाि शुब कामा मा उद्दे श्म के सरमे

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
Call Us - 9338213418, 9238328785
Our Website:- www.gurutvakaryalay.com and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/
Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com
(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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YANTRA LIST

EFFECTS

Our Splecial Yantra
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12 – YANTRA SET
VYAPAR VRUDDHI YANTRA
BHOOMI LABHA YANTRA
TANTRA RAKSHA YANTRA
AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA
PADOUNNATI YANTRA
RATNE SHWARI YANTRA
BHUMI PRAPTI YANTRA
GRUH PRAPTI YANTRA
KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA

For all Family Troubles
For Business Development
For Farming Benefits
For Protection Evil Sprite
For Unexpected Wealth Benefits
For Getting Promotion
For Benefits of Gems & Jewellery
For Land Obtained
For Ready Made House
-

Shastrokt Yantra
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AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA
BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL)
BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL)
BHAGYA VARDHAK YANTRA
BHAY NASHAK YANTRA
CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta)
CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA
DARIDRA VINASHAK YANTRA
DHANDA POOJAN YANTRA
DHANDA YAKSHANI YANTRA
GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra)
GARBHA STAMBHAN YANTRA
GAYATRI BISHA YANTRA
HANUMAN YANTRA
JWAR NIVARAN YANTRA
JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA
YANTRA
KALI YANTRA
KALPVRUKSHA YANTRA
KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA)
KANAK DHARA YANTRA
KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA
KARYA SHIDDHI YANTRA
 SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA
KRISHNA BISHA YANTRA
KUBER YANTRA
LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA
LAKSHAMI GANESH YANTRA
MAHA MRUTYUNJAY YANTRA
MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA
MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA)
MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA
NAVDURGA YANTRA

Blessing of Durga
Win over Enemies
Blessing of Bagala Mukhi
For Good Luck
For Fear Ending
Blessing of Chamunda & Navgraha
Blessing of Chhinnamasta
For Poverty Ending
For Good Wealth
For Good Wealth
Blessing of Lord Ganesh
For Pregnancy Protection
Blessing of Gayatri
Blessing of Lord Hanuman
For Fewer Ending
For Astrology & Spritual Knowlage
Blessing of Kali
For Fullfill your all Ambition
Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga
Blessing of Maha Lakshami
For Successes in work
For Successes in all work
Blessing of Lord Krishna
Blessing of Kuber (Good wealth)
For Obstaele Of marriage
Blessing of Lakshami & Ganesh
For Good Health
Blessing of Shiva
For Fullfill your all Ambition
For Marriage with choice able Girl
Blessing of Durga

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YANTRA LIST

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60
61
62
63
64

EFFECTS

NAVGRAHA SHANTI YANTRA
NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA
 SURYA YANTRA
 CHANDRA YANTRA
 MANGAL YANTRA
 BUDHA YANTRA
 GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA)
 SUKRA YANTRA
 SHANI YANTRA (COPER & STEEL)
 RAHU YANTRA
 KETU YANTRA
PITRU DOSH NIVARAN YANTRA
PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA
RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA
RAM YANTRA
RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA
ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA
SANKAT MOCHAN YANTRA
SANTAN GOPAL YANTRA
SANTAN PRAPTI YANTRA
SARASWATI YANTRA
SHIV YANTRA

For good effect of 9 Planets
For good effect of 9 Planets
Good effect of Sun
Good effect of Moon
Good effect of Mars
Good effect of Mercury
Good effect of Jyupiter
Good effect of Venus
Good effect of Saturn
Good effect of Rahu
Good effect of Ketu
For Ancestor Fault Ending
For Pregnancy Pain Ending
For Benefits of State & Central Gov
Blessing of Ram
Blessing of Riddhi-Siddhi
For Disease- Pain- Poverty Ending
For Trouble Ending
Blessing Lorg Krishana For child acquisition
For child acquisition
Blessing of Sawaswati (For Study & Education)
Blessing of Shiv
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth &
65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA)
Peace
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth
66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA
For Bad Dreams Ending
67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA
For Vehicle Accident Ending
68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA
VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All
69 MAHALAKSHAMI YANTRA)
Successes
For Bulding Defect Ending
70 VASTU YANTRA
VIDHYA
YASH
VIBHUTI
RAJ
SAMMAN
PRAD
BISHA
YANTRA
For Education- Fame- state Award Winning
71
Blessing of Lord Vishnu (Narayan)
72 VISHNU BISHA YANTRA
Attraction For office Purpose
73 VASI KARAN YANTRA
Attraction For Female
 MOHINI VASI KARAN YANTRA
74
Attraction For Husband
 PATI VASI KARAN YANTRA
75
Attraction For Wife
 PATNI VASI KARAN YANTRA
76
Attraction For Marriage Purpose
 VIVAH VASHI KARAN YANTRA
77
Yantra Available @:- Rs- 255, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above…..

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ससतम्फय 2012

103

GURUTVA KARYALAY
NAME OF GEM STONE

GENERAL

Emerald
(ऩन्ना)
Yellow Sapphire
(ऩुखयाज)
Blue Sapphire
(नीरभ)
White Sapphire
(सफ़ेद ऩुखयाज)
Bangkok Black Blue(फंकोक नीरभ)
Ruby
(भास्णक)
Ruby Berma
(फभाा भास्णक)
Speenal
(नयभ भास्णक/रारडी)
Pearl
(भोसत)
Red Coral (4 यसत तक) (रार भूॊगा)
Red Coral (4 यसत से उऩय)( रार भूॊगा)
White Coral
(सफ़ेद भूॊगा)
Cat’s Eye
(रहसुसनमा)
Cat’s Eye Orissa (उफडसा रहसुसनमा)
Gomed
(गोभेद)
Gomed CLN
(ससरोनी गोभेद)
Zarakan
(जयकन)
Aquamarine
(फेरुज)
Lolite
(नीरी)
Turquoise
(फफ़योजा)
Golden Topaz
(सुनहरा)
Real Topaz (उफडसा ऩुखयाज/टोऩज)
Blue Topaz
(नीरा टोऩज)
White Topaz
(सफ़ेद टोऩज)
Amethyst
(कटे रा)
Opal
(उऩर)
Garnet
(गायनेट)
Tourmaline
(तुभर
ा ीन)
Star Ruby
(सुमक
ा ान्त भस्ण)
Black Star
(कारा स्टाय)
Green Onyx
(ओनेक्स)
Real Onyx
(ओनेक्स)
Lapis
(राजवात)
Moon Stone
(चन्द्रकान्त भस्ण)
Rock Crystal
(स्फ़फटक)
Kidney Stone
(दाना फफ़यॊ गी)
Tiger Eye
(टाइगय स्टोन)
Jade
(भयगच)
Sun Stone
(सन ससताया)
Diamond
(.05 to .20 Cent )

(हीया)

MEDIUM FINE

200.00
550.00
550.00
550.00
100.00
100.00
5500.00
300.00
30.00
75.00
120.00
20.00
25.00
460.00
15.00
300.00
350.00
210.00
50.00
15.00
15.00
60.00
60.00
60.00
20.00
30.00
30.00
120.00
45.00
15.00
09.00
60.00
15.00
12.00
09.00
09.00
03.00
12.00
12.00
50.00

500.00
1200.00
1200.00
1200.00
150.00
190.00
6400.00
600.00
60.00
90.00
150.00
28.00
45.00
640.00
27.00
410.00
450.00
320.00
120.00
30.00
30.00
120.00
90.00
90.00
30.00
45.00
45.00
140.00
75.00
30.00
12.00
90.00
25.00
21.00
12.00
11.00
05.00
19.00
19.00
100.00

(Per Cent )

(Per Cent )

FINE

SUPER FINE

1200.00 1900.00
1900.00 2800.00
1900.00 2800.00
1900.00 2800.00
200.00
500.00
370.00
730.00
8200.00 10000.00
1200.00 2100.00
90.00
120.00
12.00
180.00
190.00
280.00
42.00
51.00
90.00
120.00
1050.00 2800.00
60.00
90.00
640.00 1800.00
550.00
640.00
410.00
550.00
230.00
390.00
45.00
60.00
45.00
60.00
280.00
460.00
120.00
280.00
120.00
240.00
45.00
60.00
90.00
120.00
90.00
120.00
190.00
300.00
90.00
120.00
45.00
60.00
15.00
19.00
120.00
190.00
30.00
45.00
30.00
45.00
15.00
30.00
15.00
19.00
10.00
15.00
23.00
27.00
23.00
27.00
200.00
370.00
(PerCent )

(Per Cent)

SPECIAL

2800.00 & above
4600.00 & above
4600.00 & above
4600.00 & above
1000.00 & above
1900.00 & above
21000.00 & above
3200.00 & above
280.00 & above
280.00 & above
550.00 & above
90.00 & above
190.00 & above
5500.00 & above
120.00 & above
2800.00 & above
910.00 & above
730.00 & above
500.00 & above
90.00 & above
90.00 & above
640.00 & above
460.00 & above
410.00& above
120.00 & above
190.00 & above
190.00 & above
730.00 & above
190.00 & above
100.00 & above
25.00 & above
280.00 & above
55.00 & above
100.00 & above
45.00 & above
21.00 & above
21.00 & above
45.00 & above
45.00 & above
460.00 & above
(Per Cent )

Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus

104

ससतम्फय 2012

BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION
We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and Spiritual
Science in the modern context, across the world.
Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.
exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts

BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION
Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birth
details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate the
area of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mention
in the special comment box . We shall confirm before we set the appointment. Please choose from :

PHONE/ CHAT CONSULTATION
Consultation 30 Min.:
Consultation 45 Min.:
Consultation 60 Min.:

RS. 1250/-*
RS. 1900/-*
RS. 2500/-*

*While booking the appointment in Addvance

How Does it work Phone/Chat Consultation
This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized
discussion with our expert astrologers. There is no limit on the number of question although time is of
consideration.
Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with a
confirmation whether the time is available for consultation or not.
 We send you a Phone Number at the designated time of the appointment
 We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment
 You would need to refer your Booking number before the chat is initiated
 Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.
 Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications
 We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is
sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.
 For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat
is recommended
 Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neck
In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for
properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate.
All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T.
Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can be
answered right away.
BOOKING FOR PHONE/ CHAT CONSULTATION PLEASE CONTECT

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ससतम्फय 2012

सूचना
 ऩत्रिका भं प्रकासशत सबी रेख ऩत्रिका के असधकायं के साथ ही आयस्ऺत हं ।
 रेख प्रकासशत होना का भतरफ मह कतई नहीॊ फक कामाारम मा सॊऩादक बी इन त्रवचायो से सहभत हं।
 नास्स्तक/ अत्रवद्वासु व्मत्रि भाि ऩठन साभग्री सभझ सकते हं ।
 ऩत्रिका भं प्रकासशत फकसी बी नाभ, स्थान मा घटना का उल्रेख महाॊ फकसी बी व्मत्रि त्रवशेष मा फकसी बी स्थान मा
घटना से कोई सॊफॊध नहीॊ हं ।
 प्रकासशत रेख ज्मोसतष, अॊक ज्मोसतष, वास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मास्त्भक ऻान ऩय आधारयत होने के कायण
मफद फकसी के रेख, फकसी बी नाभ, स्थान मा घटना का फकसी के वास्तत्रवक जीवन से भेर होता हं तो मह भाि
एक सॊमोग हं ।
 प्रकासशत सबी रेख बायसतम आध्मास्त्भक शास्त्रं से प्रेरयत होकय सरमे जाते हं । इस कायण इन त्रवषमो फक
सत्मता अथवा प्राभास्णकता ऩय फकसी बी प्रकाय फक स्जन्भेदायी कामाारम मा सॊऩादक फक नहीॊ हं ।
 अन्म रेखको द्राया प्रदान फकमे गमे रेख/प्रमोग फक प्राभास्णकता एवॊ प्रबाव फक स्जन्भेदायी कामाारम मा सॊऩादक
फक नहीॊ हं । औय नाहीॊ रेखक के ऩते फठकाने के फाये भं जानकायी दे ने हे तु कामाारम मा सॊऩादक फकसी बी
प्रकाय से फाध्म हं ।
 ज्मोसतष, अॊक ज्मोसतष, वास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मास्त्भक ऻान ऩय आधारयत रेखो भं ऩाठक का अऩना
त्रवद्वास होना आवश्मक हं । फकसी बी व्मत्रि त्रवशेष को फकसी बी प्रकाय से इन त्रवषमो भं त्रवद्वास कयने ना कयने
का अॊसतभ सनणाम स्वमॊ का होगा।
 ऩाठक द्राया फकसी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्वीकामा नहीॊ होगी।
 हभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे सबी रेख हभाये वषो के अनुबव एवॊ अनुशॊधान के आधाय ऩय सरखे होते हं । हभ फकसी बी व्मत्रि
त्रवशेष द्राया प्रमोग फकमे जाने वारे भॊि- मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोकी स्जन्भेदायी नफहॊ रेते हं ।
 मह स्जन्भेदायी भॊि-मॊि मा अन्म प्रमोग मा उऩामोको कयने वारे व्मत्रि फक स्वमॊ फक होगी। क्मोफक इन त्रवषमो भं नैसतक
भानदॊ डं , साभास्जक , कानूनी सनमभं के स्खराप कोई व्मत्रि मफद नीजी स्वाथा ऩूसता हे तु प्रमोग कताा हं अथवा
प्रमोग के कयने भे िुफट होने ऩय प्रसतकूर ऩरयणाभ सॊबव हं ।
 हभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे सबी भॊि-मॊि मा उऩाम हभने सैकडोफाय स्वमॊ ऩय एवॊ अन्म हभाये फॊधग
ु ण ऩय प्रमोग फकमे हं
स्जस्से हभे हय प्रमोग मा भॊि-मॊि मा उऩामो द्राया सनस्द्ळत सपरता प्राद्ऱ हुई हं ।
 ऩाठकं फक भाॊग ऩय एक फह रेखका ऩून् प्रकाशन कयने का असधकाय यखता हं । ऩाठकं को एक रेख के ऩून्
प्रकाशन से राब प्राद्ऱ हो सकता हं ।
 असधक जानकायी हे तु आऩ कामाारम भं सॊऩका कय सकते हं ।
(सबी त्रववादो केसरमे केवर बुवनेद्वय न्मामारम ही भान्म होगा।)

106

ससतम्फय 2012

FREE
E CIRCULAR

गुरुत्व ज्मोसतष ऩत्रिका ससतम्फय -2012
सॊऩादक

सचॊतन जोशी
सॊऩका
गुरुत्व ज्मोसतष त्रवबाग

गुरुत्व कामाारम

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वेफ

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107

ससतम्फय 2012

हभाया उद्दे श्म
त्रप्रम आस्त्भम
फॊध/ु फफहन
जम गुरुदे व
जहाॉ आधुसनक त्रवऻान सभाद्ऱ हो जाता हं । वहाॊ आध्मास्त्भक ऻान प्रायॊ ब हो जाता हं , बौसतकता का आवयण ओढे व्मत्रि
जीवन भं हताशा औय सनयाशा भं फॊध जाता हं , औय उसे अऩने जीवन भं गसतशीर होने के सरए भागा प्राद्ऱ नहीॊ हो ऩाता क्मोफक
बावनाए फह बवसागय हं , स्जसभे भनुष्म की सपरता औय असपरता सनफहत हं । उसे ऩाने औय सभजने का साथाक प्रमास ही श्रेद्षकय
सपरता हं । सपरता को प्राद्ऱ कयना आऩ का बाग्म ही नहीॊ असधकाय हं । ईसी सरमे हभायी शुब काभना सदै व आऩ के साथ हं । आऩ
अऩने कामा-उद्दे श्म एवॊ अनुकूरता हे तु मॊि, ग्रह यत्न एवॊ उऩयत्न औय दर
ा भॊि शत्रि से ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत सचज वस्तु का हभंशा
ु ब
प्रमोग कये जो १००% परदामक हो। ईसी सरमे हभाया उद्दे श्म महीॊ हे की शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो द्राया ससद्ध
प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा चैतन्म मुि सबी प्रकाय के मन्ि- कवच एवॊ शुब परदामी ग्रह यत्न एवॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩहोचाने का हं ।

सूमा की फकयणे उस घय भं प्रवेश कयाऩाती हं ।
जीस घय के स्खिकी दयवाजे खुरे हं।

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Sep
2012

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