दैि नक उपयोग के चमतकारी मनत

Easy Mantra For Everyday Bliss (Hindi)

यह 1 बात है िबगडे िरशतो को सुध ारने का आसान उपाय

जीवन मे समाज, कायर केत मे मेल-िमलाप या अपनो के बीच ही उठने-बैठने के दौरान बातो, िवचारो या
वयवहार को लेकर दस
ू रो से मतभेद पैदा होते है। सवाथर पूितर न होना भी इसका कारण हो सकता है। लेिकन
इससे आिखर मे वयिक ही नही उससे जुडे लोग भी एक-दस
ु ारव बना लेते है।
ू रो को दोषी मानकर मन मे दभ
ऐसी भावना असल मे वयिक िवशेष को ही जयादा नुकसान पहु च
ं ाती है। कयोिक खराब मनोदशा वयिक को
अपने कायर और लकय से दरू कर बुरे नतीजे देती है।
सवाल यह बनता है िक कया ऐसा संभव है िक वयिक वयावहािरक जीवन मे ऐसी िसथितयो से बचकर
संतुिलत और सफल जीवन बीता सके? इस बात का हल रामचिरत मानस मे िलखे एक पसंग मे िमल
सकता है। जानते है वह चौपाई और पसंग का संदेश बोले लखन मधुर मृद ु बानी, गयान िबराग भगित रस सानी।
काहु न कोउ सुख दख
ु कर दाता, िनज कृत करम भोग सबु भाता।।
इस पसंग के मुतािबक राम, लकमण और सीता को वनवास के दौरान कष मे देख जब िनषादराज माता
कैकई को दोषी ठहराते है। तब लकमण िनषादराज को जान, वैरागय और भिक से भरी बात कहते हु ए
समझाते है िक कोई िकसी को सुखी या द ु:खी नही करता बिलक सभी अपने िकए गए कमो ं का फल भोगते
है।
इस चौपाई मे संदेश यही है िक सवाथर या िहतपूितर की सोच मे वयिक या समूह एक-दस
ू रे को दोषी मानकर
कुछ भी फैसला या पितिकया करने से पहले यह जरर सोच-िवचार करे िक उस बात के िलए वह सवयं
िकतने िजममेदार है। ऐसा करने से मन मे आए कोध, देष या कटु भावना घटती है। मन अशांत नही होता,
सोच सही िदशा मे जाती है और संबंधो मे िमठास आती है।

काम हो या कोई इिमतहान, यह गणे श मं त बोल पाएं सफलता

बुिद और िववेक का तालमेल न केवल लकय तक पहु च
ं ना आसान बनाकर सुख की हर चाहत को पूरी
करता है। िकंतु मकसद को पूरी करने के िलए अहम है िक उससे जुडी संभािवत बाधाओं को धयान रख
पहले से ही तैयारी की जाए। इनके बावजूद भी अनेक अवसरो पर अनजानी-अनचाही मुसीबतो से दो-चार
होना पडता है।
िहनद ू धमर मे भगवान शी गणेश ऐसे ही देवता के रप मे पूजनीय है, िजनका नाम जप ही कायर मे आने वाली
जानी-अनजानी िवघ, बाधाओं का नाश कर देता है।

शासो मे गृहसथी हो या वयापार या िफर िकसी परीका और पितयोिगता मे सफलता की चाह रखने वालो के
िलए शी गणेश के इस मंत जप का महतव बताया गया है। िजसमे भगवान शी गणेश के 12 नामो की सतुित
है। जानते है यह शी गणेश मंत - बुधवार या हर रोज इस मंत का सुबह शी गणेश की सामानय पूजा के साथ जप बेहतर नतीजे देता है। पूजा
मे दवू ार चढाना और मोदक का यथाशिक भोग लगाना न भूले।
गणपितर िवघराजो लमबतुण डो गजानन:।
देम ातुर शच हे र मब एकदनतो गणािधप:।
िवनायकशचायकणर : पशुप ालो भावातमज:।
दादशै त ािन नामािन पातरतथाय य: पठे त ्।
िवशवं तसय भवे द शयं न च िवघं भवते ् ् किशचत।

भोजन से पहले बोले यह मं त ..होगा से ह त के साथ पै स ो का भी फायदा
सांसािरक जीवन मे तीन जररतो को अहम माना जाता है। ये है - रोटी, कपडा और मकान। इनमे रोटी का
संबंध भूख से और भूख का संबंध पेट से जुडा होता है। कहा भी जाता है िक पेट ही इंसान को अचछे या बुरे
कमो की ओर ले जाता है।
यही कारण है िक धमर से जुडा वयिक बुरे कमो ं और िदनो से बचने के िलए जब ईशवर से पाथर ना करता है, तो
उनमे से एक कामना होती है िक घर मे अन का भणडार भरा रहे। िजससे घर-पिरवार से तनाव और अशांित
दरू रहती है।
ऐसी ही खुशहाली के िलए शासो मे माता पावर ती के अनपूणार रप की उपासना का बहु त महतव है। माना
जाता है िक मां अनपूणार की भिक के शुभ पभाव से घर मे अन का भणडार भरा रहता है। िकंतु अगर रोज मां
अनपूणार की उपासना करना संभव न हो तो यहां बताया जा रहा है आसान उपाय, िजसे रोज सुबह-शाम
भोजन से पहले अपनाया जा सकता है। यह उपाय है - भोजन मंत।
यह भोजन मंत असल मे माता पावर ती के अनपूणार सवरप का ही धयान है। िजसके पभाव से भूख और
भोजन की कमी का द ु:ख वयिक और पिरवार को नही सताती। साथ ही शांित, सवासथय, धन और समृिद
घर-आं गन मे बनी रहती है। जानते है यह भोजन मंत अनपूणे सदापूणे शंकर पाण वलभे।
जान वैरागय िसदयथर िभखां देिह च पावर ित।।

शिनदे व को खुश कै से करे

शिनदेव को खुश करने के िलए शिनवार के िदन मुंह अंधेरे उठ कर सनान करे ,शिन मंिदर मे जाकर शिन देव को
नीले लाजवनती के फूल,काले ितल,वस, काली उडद दाल,तेल, गुड चढाए,धूप,दीप जलाकर शिन बीज मंत का
जाप करे
ऊं पां पी पौ स: शनये नम ऊं शं शिनशचराय नम
पूजा समापन कर राहु और केतु की पूजा करे,िफर पीपल पर जल चढाए और पीपल पर सूत बांधकर सात बार
पिरकमा करे। शाम को शिन मंिदर मे जाकर दीप भेट करे और उडद दाल की िखचडी बनाकर शिन महाराज को
पशाद चढाए िफर उसी िखचडी को भोजन के रप मे खाएं शिनवार के िदन काली चीिटयो को गुड एवं आटा
देना चािहए। काले रंग के वस धारण करे,शिनवार के िदन 108 तुलसी के पतो पर जय शी राम िलखकर,पतो
को सूत मे िपरो कर माला बना कर शी हिर िवषणु के गले मे डाले। साढसती वालो के िलए यह राम बाण का काम
करता है िफर शािन देव जी की आरती करे
जै शिन देवा, जै शिन देवा, जय जय जय शिन देवा। अिखल सृिष मे कोिट-कोिट जन करे तुमहारी सेवा। जय
शिन देवा,जय शिन देवा,जय जय जय शिन देवा। जां पर कुिपत होउ तुम सवामी,घोर कष वह पावे, धन वैभव
और मान-कीितर , सब पलभर मे िमट जावे, राजा नल को लगी शिन दशा,राजपाट हर लेवा। जय शिन देवा, जय
शिन देवा, जय जय जय शिन देवा। जां पर पसन होउ तुम सवामी, सकल िसिद वह पावे, तुमहारी कृपा रहे तो,
उसको जग मे कौन सतावे, तांबा, तेल औरितल से जो, करे भकजन सेवा। जय शिन देवा, जय शिन देवा, जय
जय जय शिन देवा। हर तुमहारी जय-,जय कार जगत मे होवे, कलयुग मे शिनदेव महातम, द ु:ख दिरदता धोवे।
करं आरती भिक भाव से भेट चढाऊं मेवा। जय शिन देवा, जय शिन देवा, जय जय जय शिन देवा

नवगह पीडा को द रू करे

इस सृिष की कतार धतार मां अमबा है,वे ही समसत जीवो की पालनहार है। गहो का भी हमारे जीवन मे बहु त महतव
है। इस तथय को नकारा नही जा सकता,िविभन गह दोषो को दरू करने के िलए बहु त से उपाय करने पडते है।
इन उपायो मे शिक साधना के िवशेष काल माघ माह के गुप नवराित बहु त ही शुभ है मानयता है िक इस काल मे
मां अमबा की उपासना के मात एक िवशेष मंत का जप करने से नवगह पीडा को दरू िकया जा सकता है। यह देवी
के 9 अकरी बीज मंत है। जो पहले तीन अकर महाकाली, महासरसवती और महालकमी के बीज मंत है। वही
सामूिहक देवी शिक के रप मे इस मंत के नौ अकर नवदगु ार की नौ शिकयां का रप है। यह नौ शिकयां ही नवगहो
की एक-एक गह की िनयंतक मानी गई है।इनमे शैलपुती-सूयर,चंदघंटा-केतु,कूषमाणडा-चंदमा,सकनदमातामंगल,कातयायनी-बुध,महागौरी-गुर,िसिददाती-शुक,कालराित-शिन,बहचािरणी-राहु की िनयंतक है।
- गुप नवराित मे या पितिदन मां अमबा की सनान करके वस, गंध, अकत, फूल, फल, नैवेद से पूजा करे
तदउपरांत धूप व दीप जलाकर लाल आसन पर पूवर िदशा की तरफ मुंह करके बैठे।
- अब 108 बार सफिटक की माला से इस नवाणर मंत का जप करे, ये सारे गह दोष दरू कर मनवांिछत फल देगा।
- ॐ ऐं ही कली चामुणडायै िवचचे।

बीज मं त

ॐ कार मंत जैसे दस
ू रे २० मंत और है | उनको बोलते है बीज मंत | उसका अथर खोजो तो समझ मे नही
आएगा लेिकन अंदर की शिकयो को िवकिसत कर देते है | सब िबज मंतो का अपना-अपना पभाव होता है |
जैसे ॐ कार बीज मंत है ऐसे २० दस
ू रे भी है |
ॐ बं ये िशवजी की पूजा मे बीज मंत लगता है | ये बं बं.... अथर को जो तुम बं बं.....जो िशवजी की पूजा मे
करते है | लेिकन बं.... उचचारण करने से वायु पकोप दरू हो जाता है | गिठया ठीक हो जाता है | िशव राित के
िदन सवा लाख जप करो बं..... शबद, गैस टर बल कैसी भी हो भाग जाती है | बीज मंत है |
ऐसे ही साधको को एक िबज मंत देते है|
खं .... हाटर -टैक कभी नही होता है | हाई बी.पी., लो बी.पी. कभी नही होता | ५० माला जप करे, तो लीवर
ठीक हो जाता है | १०० माला जप करे तो शिन देवता के गह का पभाव चला जाता है | खं शबद |

ऐसे ही बह परमातमा का कं शबद है | बह वाचक | तो बह परमातमा के ३ िवशेष मंत है | ॐ, खं और कं |
ऐसे ही रामजी के आगे भी एक बीज मंत लग जाता है | री रामाय नम: ||
कृषण जी के मंत के आगे बीज मंत लग जाता है | कली कृषणाय नम: ||
तो जैसे एक-एक के आगे, एक-एक के साथ िमंडी लगा दो तो १० गुना हो गया | ऐसे ही आरोगय मे भी ॐ हु ं
िवषणवे नम: | तो हु ं िबज मंत है | ॐ िबज मंत है | िवषणवे..., तो िवषणु भगवान का सुिमरन | ये आरोगय के
मंत है | तो िबज मंत िजसमे िजतने |
एक मै मंत देता हू ँ, जो एकदम सीिरयस है, केस ठीक नही है, डॉकटरो को समझ मे नही आ रहा, तिबयत
ठीक नही है, फलाना है, िधनगना है, एकदम िवशेष जो रोगगसत अथवा समसया से, तकलीफ से गसत है |
उनको मै मंत देता हू ँ | उसको मैने ऐसे ही िवनोद मे नाम रख िदया यमराज का मोबाईल नमबर है, तो उसमे
४ िबज मंत है |
तो बीज मंतो की साधना अथवा बीज मंतो का पभाव उसी सिचचदानंद परमातमा से आता है |
ये जो देवता लोग आशीवारद देते है अथवा िजनका आशीवारद पडता है, उनके जीवन मे बीज मंतो का भी
पभाव पडता है |
Beej(Seed) mantras
There are 20 more mantras like AUM-kar mantra. These are known as seed mantras. You
can never understand the meaning of these mantras but these mantras are effective in
awakening the inner powers. Every seed mantra has its own special impact. Just like
AUM mantra, there are 20 other mantras.
BAM - This mantra is effective during prayers for Lord Shiva. It is same as the BAM ..
BAM ... that is recited during invocations to Lord Shiva. Chanting BAM ... can alleviate
gas related ailments. Arthritis can be cured. On the night of Shivratri, reciting it one and
quarter lakh times... can alleviate even the worst of gas troubles. There is another seed
mantra which is also offered to all aspirants.
KHAM - This mantra ensures that heart attack can never occur. One is never troubled
with high or low blood pressure. If one can recite 50 malas, then liver can be permanently
cured. If one can recite 100 malas, then ill influence of Lord Shani will disappear forever
from your life. i.e. using KHAM syllable.
There is another similar syllable for Brahma Supreme soul, KAM, also called as Brahma
vaachak. So, Lord Brahma has three special mantras: AUM, KHAM and KAM.
Similarly, there is a mantra which is affixed in front of Lord Rama's mantra. REEM
RAMAAYA NAMAH ||
Similarly, there is a mantra which is affixed in front of Lord Krishna's mantra. KLEEM
KRISHNAAYA NAMAH ||
Just as adding a zero in front of ones increases its value ten times. Such is a similar
mantra , AUM HOOM VISHNAVE NAMAH | HOOM is the seed mantra. AUM is a
seed mantra. VISHNAVE is recollection of Lord's name. So, this mantra is beneficial in
improving health as it has a number of seed mantras.

I also offer a mantra for those serious cases,where doctors are not able to diagnose the
situation, health is degrading gradually. You are troubled with humdrum ailments, always
sick or in pain. Funnily, I have also renamed this as the mobile number of Yama Raaj,
this mantra has four seed mantras.
So, the effect of seed mantras or their powers all come from that supreme soul.
Also, when Gods grant boons or people receive blessings from others, all these are
accomplished by the power of seed mantras only.

धनवान बना दे इतने दानो की रदाक माला से िशव मं त जप

िशव की पसनता से जीवन मे सुखो की चाहत के िलए अनेक िशव भक तरह-तरह से िशव को मनाते है।
चूंिक िशव भिक सरल और जलदी ही फल देने वाली मानी जाती है। इसिलए िशव उपासना के िवशेष िदनो
मे िशव पूजा और जागरण के दौरान िशव मंत जप का बहु त महतव है।
धािमर क दिष से िशव मंत जप रदाक की माला से करना बहु त पभावी माना जाता है। िकंतु अनेक भक इस
बात से अनजान होते है िक अलग-अलग रदाक के दानो की रदाक माला से िशव मंत जप अलग-अलग
कामनाओं को पूरी करने वाले होते है।
यहां जानते है मंत जप के दौरान िकतने रदाक की माला मे िकतने दाने हो और उसका कया फल िमलता है?
- 30 रदाक के दानो वाली माला से मंत जप धन-संपित देने वाली होती है।
- 27 दानो की रदाक माला से मंत जप अचछी सेहत और ऊजार देने वाली होती है।
- 25 दानो की रदाक माला से मंत जप मोक देने वाली होती है।
- 15 रदाक की माला से मंत जप तंत िसिद, अिभचार कमर के िलए शेष मानी जाती है।
- 54 दानो की रदाक माला से मंत जप मानिसक अशांित दरू करती है।
- 108 दानो की रदाक की माला सबसे शेष मानी जाती है। कयोिक इस माला से मंत जप सांसािरक जीवन
की हर कामना िसद करने वाली मानी जाती है।

चं द लमहो की इन मं त ो से िवषणु पूज ा दे त ी है अपार पै स ा, शांि त और सुख

िहनद ू धमर मे भगवान िवषणु जगत के पालन करने वाले देवता है। भगवान िवषणु साितवक शिकयो के पतीक
है। शासो मे उनका सवरप सौमय बताया गया है।
यही कारण है िक सांसािरक दिष से भगवान िवषणु की उपासना सुख, आनंद, पेम, शांित के साथ बल देने
वाली मानी जाती है। धािमर क परंपराओं मे िवषणु पूजा की तरह-तरह से िविध-िवधान और पूजा सामिगयो

दारा बताई गई है। िकंतु यहां बताई जा रही भगवान िवषणु की एक ऐसी पूजा िजसमे न िकसी पूजा सामगी
की जररत होती है, न ही िकसी पितमा की।
िवषणु की यह पूजा मन के भावो से की जाती है। िजसे मानस पूजा भी कहते है। खासतौर पर गुरवार और
एकादशी ितिथ पर मानस पूजा का फल पूजा सामिगयो से की गई पूजा से भी शुभ और अिधक माना गया
है। इस पूजा मे कोई भी वयिक मन के भावो से िजतनी चाहे उतनी माता और बेहतर पूजा सामिगयां भगवान
िवषणु को अिपर त कर सकता है। बस भाव ही अहम होते है।
जानते है ऐसी ही िवषणु मानस पूजा की िविध - सुबह सनान कर घर के देवालय मे भगवान िवषणु इस मंत से धयान करे संशखचक सिकरीट कुणडल सपीत वस सरसी रहेशणम्।
सहार वकसथल कौसतुभिसयं नमािम िवषणु िशरसा चतुभर ुजम।।
- इसके बाद मन ही मन इन 16 पूजा मंतो से िवषणु की मानस पूजा करे ॐ पादयो: पादं समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ हसतयो: अघयर समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ आचमनीयं समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ गनधं समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ पुषपं समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ पुषपमाला समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ धूप समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ दीपं दशर यािम नारायणाय नम:।
ॐ नैवेदं िनवेदयािम नारायणाय नम:।
ॐ आचमनीयं समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ ऋतुफलम् समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ पुनराचमनीय समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ पूगीफलं समपर यािम नारायणाय नम:।
ॐ आराितर कयं समपर यािम नारायणाय नम:।

ॐ पुषपाञिल समपर यािम नारायणाय नम:।
अंत मे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत का जप करे।

जब ना लगे कोई दवा तो गै स की िदककत के िलए अपनाएं ये रामबाण
कबज और गैस की समसया ऐसी है जो िकसी भी उम के वयिक को हो सकती है। बचचे से लेकर बडे तक
िकसी भी आयु वगर वाले को इस समसया से जूझना पड सकता है। गैिसटर क टर बल तो परेशानी का कारण
होता ही है साथ ही इससे पीिड़्त वयिक को िसरददर , कमरददर , पेटददर ,सीने मे ददर जैसी कई समसयाएं हो
सकती है। अगर आप भी गैस से परेशान है और इसे जड से िमटाना चाहते है तो िनयिमत रप से मंडूकासन
करे। इस आसन मे हमारे शरीर की आकृित मेढक के समान हो जाती है इसिलए इसे मंडूकासन कहा जाता
है।

मंडूकासन की िविध-

मंडूकासन के िलए पहले नीचे चटाई िबछाकर बैठ जाएं । इसके बाद दोनो पैरो को घुटनो से मोडकर पीछे की
ओर ले जाएं और एिडय़ो को फैलाकर दोनो पंजो को िमलाकर उस पर बैठ जाएं । दोनो हाथो के अंगूठो को
अंदर करके मुटठी बांध ले और मुटठी को एक-दस
ू रे से सटाकर नािभ के पास रखे। अब सांस अंदर
खीचकर शरीर को ढीला छोड दे। सांस को छोडते हु ए शरीर को धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाते हु ए छाती
को घुटनो से लगाएं । इसके बाद सांस लेते हु ए शरीर को वािपस पहले वाली िसथित मे ले आएं । िफर कुछ देर
रककर सांस को छोडते हु ए िफर से छाती को घुटनो से लगाएं । इस िकया को 3 बार करे।

आसन से रोगो मे लाभ-

इस आसन से पेट की सभी मांसपेिशयो की मािलश होती है, िजससे पेट के अिधकतर रोग खतम हो जाते
है। यह आसन पेट को बाहर िनकलने से रोकता है अथारत चबी को बढऩे से रोकता है। यह सांस की तेज

गित को सामानय करता है इसिलए िजन वयिकयो की सांस फूलती हो उनके िलए यह आसन बहु त
लाभकारी होता है। यह आसन अपच (भोजन का न पचना) व गैस का अिधक बनना कम करता है। इससे
घुटनो, िपणडिलयो तथा टखनो का ददर दरू होता है। इस आसन से पंजो को बल िमलता है, िजससे पैरो मे
उछलने की शिक बढती है। यह आसन बलडपेशर (उचच रकचाप), वायु िवकार को खतम करने के िलए
अिधक लाभकारी है। यह आसन शरीर मे ऊपर की वायु को ऊपर से तथा नीचे की वायु को नीचे से
िनकाल देता है। खाने को लेकर असावधानी रखने वाले लोगो के िलए यह आसन काफी फायदेमंद है।
पितिदन मंडूकासन करने पर पेट की कई छोटी-बडी समसयाएं आपसे सदैव दरू ही रहेगी।

सदी मे रख िलया इन बातो का धयान तो गमी मे भी बाल नही झडे गे
सदी हो या गमी बदलते मौसम मे बालो का झडऩा एक आम समसया हो जाती है। मौसम मे हलके से भी
बदलाव का असर सीधे बालो पर भी िदखाई पडता है। अिधक सदी मे बालो मे डेडरफ हो जाता है। ऐसे मे
हम कुछ िटप्स बताने जा रहे है, अगर आपने इन बातो का धयान रख िलया तो िसफर सदी मे ही नही बिलक
गमी मे भी बाल नही झडेगे।
- सदी मे बालो मे डीप कंडीशनर पयोग करना चािहए। सपाह मे एक बार इसका अवशय इसतेमाल करे।
- बालो को सुखाने या सटाइल बनाने के िलए आयरन, बलो डर ायर और किलर ग आयरन का भूल कर भी
इसतेमाल गलती से भी पयोग न करे।
- सदी मे वूलन कैप लगाने की जगह रेशमी या सािटन सकाफर पहने। इससे आपके बाल नही टू टेगे।
- अगर फेस कवर करे तो बालो के पहले पूरी तरह जरर सुखा ले।
- इस मौसम मे बालो को बांधे रखना ही बेहतर है।
- बाल धोने के एक िदन पहले तेल ना लगाएं तेल को नहाने से 2 घंटे पहले या एक िदन पहले रात को
मािलश करे, अगले िदन धो ले।
- गीले बालो मे कंघी न करे।
- सिदर यो मे बालो की मािलश के िलए नािरयल का तेल, सरसो का तेल, ितल के तेल इतयािद का पयोग
करे।

- बालो मे डेडरफ ठंड के मौसम मे एक आम समसया है। डेडरफ से छुटकारा पाने के िलए नीबू का रस और
नािरयल का तेल को िमलाकर मािलश करे।
- हरे व पतेदार सिबजयो के साथ ही पोिटन युक चीजो का सेवन करे।
- िवटािमन सी और ई वाली चीजो का सेवन भरपूर माता मे करे।

आसान तरीका: िमनटो मे द रू हो जाएगी घं ट ो की थकान

असंतुिलत खाना और अिनयिमत िदनचयार का हमारी शारीिरक ऊजार पर काफी बुरा पभाव पडा है। इसी
वजह से अिधकांश लोगो के साथ थकान की समसया बनी रहती है। ऑिफस कायर जयादातर बैठे रहने वाला
होता है ऐसे मे बैठे-बैठे भी थकावट महसूस होने लगती है।ऐसे मे कई अनय समसयाएं शुर हो जाती है शरीर
की रोगपितरोधी कमता घटती जाती है। इन सभी से बचने के िलए जररी है कुछ वयायाम जररी है।थकान
से बचने के िलए सबसे सरल और कारगर उपाय है भूनमनासन। इस आसन से कुछ ही िदनो मे आपकी
थकान दरू हो जाएगी और हर कायर पूरी सफूितर के साथ कर सकेगे। यह आसन कमर और रीढ के िलए
काफी लाभदायक है। इसमे हम शरीर को पीछे या आगे की ओर न झुकाकर दाएं या बाएं घुमाते है। इससे
लंबे समय तक बैठने या खडे होने से आई थकावट दरू होती है।

भून मनासन की िविध

समतल सथान पर कंबल आिद िबछाकर बैठ जाएं । दोनो पैर सामने रखे। शरीर को सीधा रखकर सांस
भिरए। कमर से ऊपर के भाग को सीधे हाथ की ओर मोडे और दोनो हथेिलयो को जमीन पर दािहनी तरफ
रखे। अब सांस छोडते हु ए अपने िसर को जमीन से छूने का पयास करे। इस िसथित मे कुछ कण रके। सांस
सामानय रखे। इसके बाद सांस भरते हु ए शरीर को ऊपर की ओर लाएं और सांस को छोडते हु ए शरीर को
सीधा कर ले। ऐसे ही दस
ू री और से इस पिकया को करे।

भून मनासन के िलए सावधािनयां

- इस आसन को सभी आसनो के अंत मे करे।

- भू-नमनासन करते समय अपना धयान पीठ और कंधे की मांसपेिशयो पर लगाकर रखे।

- आसन के दौरान कोिशश करे िक रीढ की हडी सीधी रहे और शरीर का वजन हाथो पर आए।

- इससे रीढ की हडी और कमर के िनचले िहससे का तनाव कम होता है।

- गभर वती मिहलाएं शुरआत के तीन महीनो तक इस आसन का अभयास कर सकती है। इसके बाद इस
आसन को न करे।

ठं ड मे पुर ष कर ले ये पयोग, ताकत के िलए और कु छ भी खाने की जररत
नही रहे ग ी
आयुवेद मे ठंड को खाने-पीने और सेहत बनाने के िलए सबसे बिढय़ा मौसम माना गया है। कहा जाता है िक
सिदर यो के मौसम मे सेवन की गई चीजो का पभाव शरीर पर सालभर रहता है। इसीिलए ठंड मे सेहत बनाने
के िलए लोग कई तरह की चीजो का सेवन करते है।
पुरषो को तो आयुवेद मे िवशेषकर नपुंसकता दरू कर ठंड मे ताकत देने वाली चीजो को पयोग करने को
कहा गया है। आज हम बताने जा रहे है आपको एक ऐसा आयुवेिदक योग, िजसका पयोग करने के बाद
पुरषो को सालभर िकसी भी तरह की ताकत बढाने वाली दवाई या िकसी अनय चीज के इसतेमाल की
जररत नही होगी।
सामगी - असगंध, सफेद मूसली, काली मूसली, कौच के बीज, शतावर, ताल मखाना, बीजबंद, जायफल,
जािवती, ईसबगोल, नागकेशर, सोठ, गोल िमचर , लौग, पीपर कमलगटे की िगरी, छुहारे, मुनकका, िचरोजी
सब 50-50 गाम, िमशी सवा दो िकलो, घी 400 गाम।
बनाने की िविध- िमशी और घी को छोडकर शेष सारी औषिधयो को अलग-अलग कूटपीस कर कपडे से
छान ले। सबको िमलाकर घी मे भून ले।अब िमशी की पतली चाशनी बनाकर उतार ले और सारी दवा इसमे
डालकर अचछी तरह िमलाकर उपर सोने व चांदी का वकर िमला दे।
से व न िविध - 10 से 20 गाम इस योग को चाटकर उपर से एक िगलास गरमागरम दध
ू पी जाएं ।
लाभ -सिदर यो मे कुछ िदन इसका लगातार सेवन करते रहने से नपुंसकता दरू होती है। वीयर गाढा और पुष
होता है। शरीर बलवान बन जाता है।इसके अलावा पेशाब मे जलन, पथरी और वात रोग भी इसके लगातार
सेवन से िमट जाते है।

दमदार नुस खे : एक महीने मे बना दे गे छरहरा

िजतनी खुशी इंसान को सौनदयर को देख कर िमलती है, उतना ही सुख उसे खुद को खूबसूरत िदखाने मे
हािसल होता है। अगर आप भी मोटापे से परेशान है तो आजमा कर देखे। इन छोटे मगर बेहद कारगर घरेलू
उपायो को जो सैकडो सालो से 100 फीसदी असरदार व पामािणक िसद होते रहे है। छरहरा यानी एक दम
िफट-फाट शरीर जो सवासथय और सौनदयर दोनो ही सतरो पर 24 केरेट खरा हो....

1. सुबह सूयोदय के समय जागकर हर रोज 1-2 िगलास गुनगुना पानी पीएं और कुछ देर टहले।

2. कम से कम एक नीबू अपनी डेली डाइट मे अवशय शािमल करे।

3. पितिदन सुबह या शाम के समय कम से कम 2-3 िक.मी. पैदल मगर तेज गित के साथ घूमने के िलये
अवशय जाएं ।

4. सुबह नाशते मे िसफर अंकुिरत अन- मूंग, चना, सोया.. आिद का ही सेवन करे।

5. सट फूड, तले हु ए, जयादा फेट वाले और िफज मे रखे हु ए बासी भोजन सभी से जहां तक संभव हो
बचकर रहे।

6. िदन मे सोना यथा संभव छोड दे।

7. शाम का भोजन राित 8 बजे से पहले ही कर ले।

8. चाय, काफी और कोलडिडर ंकस को िजतना हो सके कम से कम सेवन करे।

9. खाने के ततकाल बाद कभी न सोएं ।

10. पूरे िदन मे तीन या चार बार से अिधक कुछ न खाएं , दो बार नाशता और दो बार भोजन यह संखया
अिधकतम और अंितम होना चािहये।

11. पितिदन रात को अमृत के समान गुणकारी ितफला चूणर का सेवन अवशय करे।

ये है उम बढाने के दस आसान तरीके

लंबी उम तो सभी चाहते है, लेिकन लंबी उम कैसे पाएं ये बात बहु त कम लोग जानते है। हमारे बडे-बुजुगर
कह गए है पहला सुख िनरोगी काया यानी संपूणर सुखी जीवन की कामना िबना अचछे सवासथय के नही की
जा सकती। िकसी के पास िकतना ही धन हो लेिकन अगर सवसथ शरीर न हो तो सारे ही सुख वयथर है। हर
इंसान सवसथ शरीर और लंबी उम पाना चाहता है तािक वह पूणरता के साथ और सारे सुख उठाते हु ए
आनंदमयी तरीके से जीवन जी सके। अगर आप भी लंबी उम पाना चाहते है तो याद रखे ये दस सूत।
- भोजन के तुरत
ं बाद सोना या पिरशम करना, भोजन करते हु ए बाते करना और भोजन के अंत जल-पीना
अपच और कबज करने वाले काम है। इनसे बचे।
- भूख लगे तब भोजन न करना, खूब चबाएं िबना िनगल जाना, भोजन करने के बाद तीन घंटे के अंदर ही
दोबारा खाना और अिधक माता मे खाना सुखद नही होता।
- िजसे शौच से िनवृत होने मे एक िमनट से जयादा समय न लगता हो एक वह सबसे सवसथ होता है। मल
िवसजर न मे जरा भी िवलंब न होना अचछी पाचनशिक का सूचक है तो वह वयिक शरीर से सवसथ और
बलवान होगा ही। इसिलए धयान रखे िक कबज न रहे।
- जलदबाजी करना अचछा नही, िबना िवचारे बोलना या कोई काम करना अचछा नही। िवचार कर बोलना
शेषता और बोलने के बाद सोचना मूखरता है। ऐसा वयिक मानिसक रप से असवसथ है।
- पांच काम हमेशा ठीक समय पर करना चािहए। पात: उठना, शौच कायर , सनान भोजन और सोना।
- देखे िबना जल न पीए, जाने िबना िमतता न करे, हाथ धोए िबना भोजन न करे, पूछे िबना राय न दे।
- िदनभर मे कम से कम दस से बारह गलास पानी पीएं ।
- अित वयायाम, अित बोलना, अित पिरशम, अित जागरण और अित मैथन
ु इन कमो ं से आयु कम हो जाती
है।
- खाने की चीजो व औषिध की अित से भी बचना चािहए। खाने-पीने मे िकसी भी चीज की अित िवष का
काम करती है।
- अिधक तनाव भी उम कम होने का एक बडा कारण है। इसिलए तनाव से बचे।

चममच भर हलदी के फायदे : जाने गे तो है र ान हो जाएं गे
हलदी का उपयोग भारतीय खाने मे मसालो के रप मे पाचीन समय से िकया जाता है। हलदी का सबसे
जयादा उपयोग दाल व सबजी मे िकया जाता है कयोिक यह दाल व सबजी का रंग पीला करता है और भोजन
को सवािदष भी बनाती है। मधुमेह रोिगयो के िलए हलदी िकसी औषधी से कम नही है। मधुमेह के रोिगयो को
पितिदन गरम दध
ू मे हलदी चूणर िमलाकर पीना चािहए। दरअसल, हलदी मे वातनाशक गुण होते है िजससे

मधुमेह की समसया से िनजात पाने मे मदद िमलती है।
अपने घर पर ही छोटे-छोटे पयोग कर इसके अलग-अलग लाभ उठाए जा सकते है। आयुवेद के अनुसार,
यह शरीर की रोग पितरोधक कमता बढाती है। खून को साफ करती है। मिहलाओं की पीिरयड से जुडी
समसयाओं को भी दरू करती है।लीवर संबंधी समसयाओं मे भी इसे गुणकारी माना जाता है। यही वजह है िक
सदी-खांसी होने पर दध
ू मे कचची हलदी पाउडर डालकर पीने की सलाह दी जाती है। जररी है िक हलदी
को हमेशा एयर टाइट कंटेनर मे रखे तािक इसके सवाद और गुणवता मे कोई कमी नही आए।पेट मे कीडे
होने पर 1 चममच हलदी पाउडर रोज सुबह खाली पेट एक सपाह तक ताजा पानी के साथ लेने से कीडे
खतम हो सकते है। चाहे तो इस िमशण मे थोडा नमक भी िमला सकते है। इससे भी फायदा होगा।
चेहरे के दाग-धबबे और झाइयां हटाने के िलए हलदी और काले ितल को बराबर माता मे पीसकर पेसट
बनाकर चेहरे पर लगाएं । हलदी-दध
ू का पेसट लगाने से तवचा का रंग िनखरता है और आपका चेहरा िखलािखला लगता है।खांसी होने पर हलदी की छोटी गांठ मुह
ं मे रख कर चूसे। इससे खांसी नही उठती।तवचा से
अनचाहे बाल हटाने के िलए हलदी पाउडर को गुनगुने नािरयल तेल मे िमलाकर पेसट बना ले। अब इस पेसट
को हाथ-पैरो पर लगाएं । इसे तवचा मुलायम रहती है और शरीर के अनचाहे बाल भी धीरे-धीरे हट जाते है।

कृ षण का है ये फं डा, जीना है तो जीओ ऐसे

भागवत अंक 338 मे आपने पढा....भगवान मुसकुराए और पांडवो से कहा- चलो। बडा अजीब लगा। भगवान
अजुरन के कंधे पर हाथ रखकर कहते है अजुरन लीला तो देखो मेरे यदवु ंश को यह वरदान था िक उनहे कोई
दस
ू रा नही मार सकेगा, मरेगे तो आपस मे ही मरेगे। देखो इस वृदा ने शाप दे िदया तो यह वयवसथा भी हो
गई अब आगे....
भगवान ने कहा अजुरन मेरी मृतयु के िलए जो कुछ भी उसने कहा है मुझे सवीकार है। कोई तो माधयम होगा
और भगवान मुसकुराते हु ए पांडव से कहते है चलो आज वही भगवान अपने दाएं पैर को बाएं पैर पर रखकर
अपनी गदर न को वृक से िटकाकर बैठे पतीका कर रहे थे अपनी मृतयु की।िजसने मृतयु का इतना बडा महायज
िकया था महाभारत वह ऋिष देखते ही देखते इस संसार से चला गया। यूं चले जाएं गे ऐसा भरोसा नही था।
एक महान अिभयान का महानायक यूं छोडकर चला गया कृषण एक बात कहा करते थे िक जब मै संसार से
जाऊं तो कोई रोना मत।
कृषण को रोना पसंद नही। कृषण कहते है रदन मत किरए आं सू बडी कीमती चीज है। मुझे आं सू का
अिभषेक तो अचछा लगता है पर रोना हो तो मेरे िलए रोओ, मुझे पाने के िलए रोओ। मेरी देह पर मत रोओ,
यह िनषपाण देह पर भगवान ने कहा था िक मेरे अंितम समय मे रोना मत, कयोिक कृषण का एक िसदांत था
मै जीवनभर खुश रहा हू ं और मैने जीवनभर लोगो को खुश रखा है। इसिलए रोना मत, द ु:खी मत होना।

सदी सपे श ल: घी-बादाम के इस पयोग से याददाशत हो जाएगी तीन-गुन ा

अचछा व िनयिमत खान-पान न होना भी याददाशत कमजोर होने का बडा कारण है। इसीिलए लोग ठंड मे घी
और बादाम का सेवन करते है। लेिकन अगर घी व बादाम का सेवन आयुवेिदक तरीके से िकया जाए तो
िकसी की भी याददाशत तीन गुना बढ सकती है।
कैसे बनाएं बादाम घृत- बादाम का िछलका रिहत िगरी और नािरयल की िगरी 50-50 गाम खसखस व मगज
70-70 गाम, खरबूजे की िगरी 5 गाम, िचरौजी 5 गाम और िपसता 5 गाम इन सबको कूट पीसकर रखे। िफर
400 गाम घी लािलमायुक होने तक गमर करे और उक िमशण को डाल दे। तब घी का रंग बदलने लगे तब
नीचे उतारकर छानकर सुरिकत रखे।
इस पकार तैयार इस घृत बादाम को दध
ू मे िमलाकर सेवन करे। मिसतषक और तलुवो पर इस घी की
मािलश भी उपयोगी है। इस घी के उपरोक पकार सेवन से िदमाग की िनबर लता, शुषकता , आं खो की जयोित
बढती है व मानिसक कायर करने वालो के िलए बादाम घृत बहु त अिधक लाभदायक है।
नोट- घी को छानने के बाद शेष पदाथर को आटे मे भूनकर िमलाकर और थोडी चीनी डालकर पंजीरी
बनाकर सुबह नाशते के रप मे सेवन करे। बहु त उतम रहेगा।

लं ब ी उम तक रहे गे चमचमाते मजबूत दांत बस याद रखे ये बात
सवसथ मोितयो से चमकदार दांत िकसी की भी खूबसूरती मे चार चांद लगा देते है। वही दस
ू री तरफ मैले व
असवसथ दांत सुंदरता को कम कर देते है। इसिलए सौदयर का खास खयाल रखने के साथ ही पूरे वयिकतव
को पभावशाली बनाने के िलए दांतो के सवासथय का िवशेष खयाल रखना बहु त आवशयक है। वैसे तो दांतो
की समसया होने पर डेटल िटर टमेट जररी है लेिकन िफर भी अगर कोई भी नीचे िलखी छोटी-छोटी बातो का
धयान रखे, तो अपनी मुसकान लंबी उम तक कायम रख सकता है।
- िनयिमत रप से िदन मे कम से कम दो बार बश करे।
- खाने मे फल और सिबजयां सेब, गाजर, ककडी, खीरा खाएं । इनसे मुंह साफ रहता है।
- कोई भी कोलडिडर ंक पीने के बाद बश जरर करे, पर आरेज जूस पीने के 20 िमनट बाद बश करे, कयोिक
इससे दांतो पर एनेमल का कवर चढने मे मदद िमलती है।
- कभी-कभी बेिकंग सोडा से बश िकया जा सकता है। लेिकन इसके पानी को पीना नही चािहए।
- दांतो के साथ जीभ को भी साफ करना जररी है। इससे सांस की बदबू दरू होने मे सहायता िमलती है
और इसके साथ जीभ पर जमी गंदगी से पैदा होने वाले संकामक रोगो से भी बचा जा सकता है।

- शककर और मीठे पदाथर बैकटीिरया को पनपने मे सहायक होता है, िजससे दांत कमजोर होते है। शुगर कम
से कम ले।
- पानी जयादा से जयादा पीएं ।
- साल मे कम से कम एक बार दांतो की कलीिनंग भी अवशय कराएं ।

आसान उपाय: कमर ददर से िमले ग ा छु टकारा, नही रहे ग ी दवा की दरकार
मिहलाओं को पुरषो की तुलना मे कमर ददर अिधक परेशान करता है। वैसे तो कमर ददर के कई कारण हो
सकते है, लेिकन अिधकांशत: मांसपेिशयो मे िखंचाव और रीढ की हडी मे ददर के चलते कमर ददर होता है।
लेिकन इस ददर के कारण कई अनय िदककते भी हो सकती है। लेिकन दवाओं से हमेशा के िलए कमर ददर से
छुटकारा पाना संभव नही है। अगर आपके साथ भी कमर ददर की समसया है, तो नीचे िलखे योगासनो को
िनयिमत रप से करे जलद ही कमर ददर से छुटकारा िमल जाएगा।
पवन मुक ासन
कमर के बल लेटे। दाएं घुटने को हाथो से पकड कर जंघा को पेट पर दबाते, सांस छोडते हु ए घुटने को सीने
के पास ले आएं । ठोडी को घुटने से छूने का पयास करे। बायां पैर जमीन पर सीधा िटका रहे। शवास भरते
हु ए पैर व िसर को वापस जमीन पर लाएं । ऐसे ही बाएं पैर से करे व िफर दोनो पैरो से। इसे पांच बार दोहराएं ।
यह िकयाएं रीढ की हडी को लचीला व मजबूत बनाएं गी।
तानासन
जमीन पर आसन िबछाएं व कमर के बल उस पर लेट जाएं । एडी-पंजे िमले रहे व हथेिलयां जमीन पर
जंघाओं की बगल मे िटकी रहे। शवास भरते हु ए हाथो को िसर के ऊपर ले जाएं और हथेिलयां आपस मे
जोड ले। पूरे शरीर मे िखंचाव महसूस करे। कमर से ऊपर का भाग ऊपर की ओर खीचे व नीचे का नीचे की
ओर। िफर धीरे-धीरे सांस छोडते हु ए हाथो को वापस ले आएं ।
सपारस न
पेट के बल लेट जाएं । पैरो को पीछे की ओर खीचे व एडी-पंजे िमलाए रखे। सांप की पूंछ की तरह। हथेिलयो

व कोहिनयो को पसिलयो के पास लाएं । ऐसे िक हथेिलयां कंधो के नीचे आ जाएं और िसर जमीन को छुए।
आं खे बंद रखे। चेहरा व सीना ऊंचा उठाएं , कमर के वजन पर सांप की तरह। इस िसथित मे जब तक हो
सके, बनी रहे। िफर धीरे-धीरे सांस छोडते हु ए जमीन पर वापस आ जाएं । िवशाम करे, हथेिलयां िसर के
नीचे िटका दे।

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