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अभय शहीद याभ प्रसाद 'बफस्मभर' की आत्भकथा

अभय शहीद याभप्रसाद 'बफस्मभर' ने मह आत्भकथा ददसम्फय १९२७ भें गोयखऩयु जेर भें लरखी

थी । उन्हें १९ ददसम्फय १९२७ को पाॊसी ऩय रटकामा गमा था । गोयखऩुय भें अऩनी जेर की
कोठयी भें उन्होने अऩनी जीवनी लरखनी शुरू की, जो पाॊसी के केवर तीन ददन ऩहरे सभाप्त
हुई। १८ ददसम्फय १९२७ को उनकी भाॉ अऩने एक सॊगी श्री शिव वभमा के साथ उनसे लभरने
आमीॊ । बफस्मभर ने अऩनी जीवनी की हमतलरखखत ऩाॊडुलरपऩ भाॉ द्वाया रामे गमे खाने के

फक्से (दटफपन) भें छिऩाकय यख दी औय इसे लशव वभाा जी को सौंऩ ददमा। लशव वभाा जी इसे
जेर के फाहय राने भें सपर यहे । फाद भें श्री बगवतीचयण वभमा जी ने इन ऩन्नों को ऩुमतक

रूऩ भें िऩवामा। ऩता चरते ही बिदटश सयकाय ने इस ऩुमतक ऩय प्रछतफन्ध रगा ददमा औय
इसकी प्रछतमाॉ जब्त कय रीॊ गमीॊ। सन १९४७ भें मवतन्रता प्रास्प्त के फाद कुि आमासभाजी
रोगों ने इस जीवनी को ऩुन: प्रकालशत कयामा।
अनुक्रभखणका
1. बफस्मभर प्रथभ खण्ड
2. बफस्मभर प्रथभ खण्ड-1
3. बफस्मभर द्पवतीम खण्ड
4. बफस्मभर तत
ृ ीम खण्ड
5. बफस्मभर चतथ
ु ा खण्ड
6. बफस्मभर चतथ
ु ा खण्ड-1
7. बफस्मभर चतथ
ु ा खण्ड-2

बफस्मभर प्रथभ खण्ड
Contents
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1 प्रथभ खण्ड

o

1.1 आत्भ-चरयत

o

1.2 ददु दान

o

1.3 गाहाम्म जीवन

o

1.4 भेयी कुभायावमथा

2 सॊफधॊ धत कड़िमाॉ

3 फाहयी कडडमाॉ

[edit]प्रथभ

खण्ड

[edit]आत्भ-चरयत
तोभयधमय भें चम्फर नदी के फकनाये ऩय दो ग्राभ आफाद हैं , जो ग्वालरमय याज्म भें फहुत ही प्रलसद्ध हैं , क्मोंफक इन ग्राभों के छनवासी फ़िे उद्दण्ड हैं । वे याज्म की सत्ता
की कोई धचन्ता नहीॊ कयते । जभीदायों का मह हार है फक स्जस सार उनके भन भें आता है याज्म को बलू भ-कय दे ते हैं स्जस सार उनकी इच्िा नहीॊ होती, भारगज
ु ायी
दे ने से साप इन्काय कय जाते हैं । मदद तहसीरदाय मा कोई औय याज्म का अधधकायी आता है तो मे जभीॊदाय फीह़ि भें चरे जाते हैं औय भहीनों फीह़िों भें ही ऩ़िे

यहते हैं । उनके ऩशु बी वहीॊ यहते हैं औय बोजनादद बी फीह़िों भें ही होता है । घय ऩय कोई ऐसा भूल्मवान ऩदाथा नहीॊ िो़िते स्जसे नीराभ कयके भारगुजायी वसूर
की जा सके । एक जभीॊदाय के सम्फॊध भें कथा प्रचलरत है फक भारगुजायी न दे ने के कायण ही उनको कुि बूलभ भापी भें लभर गई । ऩहरे तो कई सार तक बागे
यहे । एक फाय धोखे से ऩक़ि लरमे गए तो तहसीर के अधधकारयमों ने उन्हें फहुत सतामा । कई ददन तक बफना खाना-ऩानी के फॉ धा यहने ददमा । अन्त भें जराने की
धभकी दे , ऩैयों ऩय सूखी घास डारकय आग रगवा दी । फकन्तु उन जभीॊदाय भहोदम ने बूलभ-कय दे ना मवीकाय न फकमा औय मही उत्तय ददमा फक ग्वालरमय भहायाज
के कोष भें भेये कय न दे ने से ही घाटा न ऩ़ि जामेगा । सॊसाय क्मा जानेगा फक अभुक व्मस्क्त उद्दॊडता के कायण ही अऩना सभम व्मतीत कयता है । याज्म को लरखा
गमा, स्जसका ऩरयणाभ मह हुआ फक उतनी बूलभ उन भहाशम को भापी भें दे दी गई । इसी प्रकाय एक सभम इन ग्राभों के छनवालसमों को एक अद्बुत खेर सू ा ।
उन्होंने भहायाज के रयसारे के साठ ऊॉट चुयाकय फीह़िों भें छिऩा ददए । याज्म को लरखा गमा; स्जस ऩय याज्म की ओय से आऻा हुई फक दोनों ग्राभ तोऩ रगाकय उ़िवा
ददए जाएॉ । न जाने फकस प्रकाय सभ ाने -फु ाने से वे ऊॉट वाऩस फकए गए औय अधधकारयमों को सभ ामा गमा फक इतने फ़िे याज्म भें थो़िे से वीय रोगों का छनवास
है , इनका पवध्वॊस न कयना ही उधचत होगा । तफ तोऩें रौटाईं गईं औय ग्राभ उ़िामे जाने से फचे । मे रोग अफ याज्म-छनवालसमों को तो अधधक नहीॊ सताते , फकन्तु
फहुधा अॊग्रेजी याज्म भें आकय उऩद्रव कय जाते हैं औय अभीयों के भकानों ऩय िाऩा भायकय यात-ही-यात फीह़ि भें दाखखर हो जाते हैं । फीह़ि भें ऩहुॉच जाने ऩय ऩुलरस
मा पौज कोई बी उनका फार फाॉका नहीॊ कय सकती । मे दोनों ग्राभ अॊग्रेजी याज्म की सीभा से रगबग ऩन्द्रह भीर की दयू ी ऩय चम्फर नदी के तट ऩय हैं । महीॊ के
एक प्रलसद्ध वॊश भें भेये पऩताभह श्री नायामणरार जी का जन्भ हुआ था । वह कौटुस्म्फक करह औय अऩनी बाबी के असहनीम दव्ु मावहाय के कायण भजफूय हो अऩनी
जन्भबूलभ िो़ि इधय-उधय बटकते यहे । अन्त भें अऩनी धभाऩत्नी औय दो ऩुरों के साथ वह शाहजहाॉऩुय ऩहुॉचे । उनके इन्हीॊ दो ऩुरों भें ज्मेष्ठ ऩुर श्री भुयरीधय जी
भेये पऩता हैं । उस सभम इनकी अवमथा आठ वषा औय उनके िोटे ऩुर - भेये चाचा (श्री कल्माणभर) की उम्र ि् वषा की थी । इस सभम महाॊ दलु बाऺ का बमॊकय
प्रकोऩ था ।

[edit]दर्ु दा न
अनेक प्रमत्न कयने के ऩ्‍चात श शाहाजहाॉऩुय भें एक अत्ताय भहोदम की दक
ु ान ऩय श्रीमुत श नायामणरार जी को तीन रुऩमे भालसक वेतन की नौकयी लभरी । तीन रुऩमे
भालसक भें दलु बाऺ के सभम चाय प्राखणमों का फकस प्रकाय छनवााह हो सकता था ? दादीजी ने फहुत प्रमत्न फकमा फक अऩने आऩ केवर एक सभम आधे ऩेट बोजन
कयके फच्चों का ऩेट ऩारा जाम, फकन्तु फपय बी छनवााह न हो सका । फाजया, कुकनी, साभा, ज्वाय इत्मादद खाकय ददन काटने चाहे , फकन्तु फपय बी गुजाया न हुआ तफ
आधा फथुआ, चना मा कोई दस
ू या साग, जो सफ से समता हो उसको रेकय, सफसे समता अनाज उसभें आधा लभराकय थो़िा-सा नभक डारकय उसे मवमॊ खाती, ऱिकों
को चना मा जौ की योटी दे तीॊ औय इसी प्रकाय दादाजी बी सभम व्मतीत कयते थे । फ़िी कदठनता से आधे ऩेट खाकय ददन तो कट जाता, फकन्तु ऩेट भें घोटूॉ दफाकय
यात काटना कदठन हो जाता । मह तो बोजन की अवमथा थी, वमर तथा यहने के मथान का फकयामा कहाॉ से आता ? दादाजी ने चाहा फक बरे घयों भें भजदयू ी ही लभर
जाए, फकन्तु अनजान व्मस्क्त का, स्जसकी बाषा बी अऩने दे श की बाषा से न लभरती हो, बरे घयों भें सहसा कौन पव्‍वास कय सकता था ? कोई भजदयू ी ऩय अऩना
अनाज बी ऩीसने को न दे ता था ! डय था फक दलु बाऺ का सभम है , खा रेगी । फहुत प्रमत्न कयने के फाद एक-दो भदहराएॊ अऩने घय ऩय अनाज पऩसवाने ऩय याजी हुईं,
फकन्तु ऩुयानी काभ कयने वालरमों को कैसे जवाफ दें ? इसी प्रकाय अ़िचनों के फाद ऩाॉच-सात सेय अनाज ऩीसने को लभर जाता, स्जसकी पऩसाई उस सभम एक ऩैसा
प्रछत ऩॊसेयी थी । फ़िे कदठनता से आधे ऩेट एक सभम बोजन कयके तीन-चाय घण्टों तक ऩीसकय एक ऩैसा मा डेढ़ ऩैसा लभरता । फपय घय ऩय आकय फच्चों के लरए
बोजन तैमाय कयना ऩ़िता । तो-तीन वषा तक मही अवमथा यही । फहुधा दादाजी दे श को रौट चरने का पवचाय प्रकट कयते, फकन्तु दादीजी का मही उत्तय होता फक
स्जनके कायण दे श िूटा, धन-साभग्री सफ नष्ट हुई औय मे ददन दे खने ऩ़िे अफ उन्हीॊ के ऩैयों भें लसय यखकय दासत्व मवीकाय कयने से इसी प्रकाय प्राण दे दे ना कहीॊ
श्रेष्ठ है , मे ददन सदै व न यहें गे । सफ प्रकाय के सॊकट सहे फकन्तु दादीजी दे श को रौटकय न गई ।

चाय-ऩाॊच वषा भें जफ कुि सज्जन ऩरयधचत हो गए औय जान लरमा फक मरी बरे घय की है , कुसभम ऩ़िने से दीन-दशा को प्राप्त हुई है , तफ फहुत सी भदहराएॊ
पव्‍वास कयने रगीॊ । दलु बाऺ बी दयू हो गमा था । कबी-कबी फकसी सज्जन के महाॉ से कुि दान लभर जाता, कोई िाह्भण-बोजन कया दे ता । इसी प्रकाय सभम
व्मतीत होने रगा । कई भहानुबावों ने, स्जनके कोई सन्तान न थी औय धनादद ऩमााप्त था, दादाजी को अनेक प्रकाय के प्ररोबन ददमे फक वह अऩना एक ऱिका उन्हें
दे दें औय स्जतना धन भाॊगे उनकी बें ट फकमा जाम । फकन्तु दादीजी आदशा भाता थी, उन्होंने इस प्रकाय के प्ररोबनों की फकॊ धचत-भार बी ऩयवाह न की औय अऩने
फच्चों का फकसी-न-फकसी प्रकाय ऩारन कयती यही ।

भेहनत-भजदयू ी तथा िाह्भण-वस्ृ त्त द्वाया कुि धन एकर हुआ । कुि भहानुबावों के कहने से पऩताजी के फकसी ऩाठशारा भें लशऺा ऩाने का प्रफन्ध कय ददमा गमा ।
श्री दादाजी ने बी कुि प्रमत्न फकमा, उनका वेतन बी फढ़ गमा औय वह सात रुऩमे भालसक ऩाने रगे । इसके फाद उन्होंने नौकयी िो़ि, ऩैसे तथा दअ
ु न्नी, चवन्नी
इत्मादद फेचने की दक
ु ान की । ऩाॉच-सात आने योज ऩैदा होने रगे । जो ददु दा न आमे थे, प्रमत्न तथा साहस से दयू होने रगे । इसका सफ श्रे म श्री दादी जी को ही है ।
स्जस साहस तथा धैमा से उन्होंने काभ लरमा वह वामतव भें फकसी दै वी शस्क्त की सहामता ही कही जाएगी । अन्मथा एक अलशषितऺत ग्राभीण भदहरा की क्मा साभ्मा
है फक वह छनतान्त अऩरयधचत मथान भें जाकय भेहनत भजदयू ी कयके अऩना तथा अऩने फच्चों का ऩेट ऩारन कयते हुए उनको लशषितऺत फनामे औय फपय ऐसी
ऩरयस्मथछतमों भें जफ फक उसने अबी अऩने जीवन भें घय से फाहय ऩैय न यखा हो औय जो ऐसे कट्टय दे श की यहने वारी हो फक जहाॉ ऩय प्रत्मेक दहन्द ू प्रथा का

ऩूणत
ा मा ऩारन फकमा जाता हो, जहाॉ के छनवासी अऩनी प्रथाओॊ की यऺा के लरए प्राणों की फकॊ धचत-भार बी धचन्ता न कयते हों । फकसी िाह्भण, ऺबरम मा वै्‍म की
कुरवधू का क्मा साहस, जो डेढ़ हाथ का घूॊघट छनकारे बफना एक घय से दस
ू ये घय ऩय चरी जाए । शूद्र जाछत की वधुओॊ के लरए बी मही छनमभ है फक वे यामते भें
बफना घूॊघट छनकारे न जाएॉ । शूद्रों का ऩहनावा ही अरग है , ताफक उन्हें दे खकय ही दयू से ऩहचान लरमा जाए फक मह फकसी नीच जाछत की मरी है । मे प्रथाएॉ इतनी
प्रचलरत हैं फक उन्होंने अत्माचाय का रूऩ धायण कय लरमा है । एक सभम फकसी चभाय की वधू, जो अॊग्रेजी याज्म से पववाह कयके गई थी, कुर-प्रथानुसाय जभीॊदाय के
घय ऩैय िूने के लरए गई । वह ऩैयों भें बफिुवे (नुऩूय) ऩहने हुए थी औय सफ ऩहनावा चभायों का ऩहने थी । जभीॊदाय भहोदम की छनगाह उसके ऩैयों ऩय ऩ़िी । ऩूिने
ऩय भारूभ हुआ फक चभाय की फहू है । जभीॊदाय साहफ जूता ऩहनकय आए औय उसके ऩैयों ऩय ख़िे होकय इस जोय से दफामा फक उसकी अॊगुलरमाॉ कट गईं । उन्होंने
कहा फक मदद चभायों की फहुऐॊ बफिुवा ऩहनें गीॊ तो ऊॉची जाछत के घय की स्मरमाॊ क्मा ऩहनें गीॊ ? मे रोग छनतान्त अलशषितऺत तथा भूखा हैं फकन्तु जाछत-अलबभान भें चूय
यहते हैं । गयीफ-से-गयीफ अलशषितऺत िाह्भण मा ऺबरम, चाहे वह फकसी आमु का हो, मदद शूद्र जाछत की फमती भें से गुजये तो चाहे फकतना ही धनी मा वद्ध
ृ कोई शूद्र
क्मों न हो, उसको उठकय ऩारागन मा जुहाय कयनी ही ऩ़िेगी । मदद ऐसा न कये तो उसी सभम वह िाह्भण मा ऺबरम उसे जूतों से भाय सकता है औय सफ उस शूद्र
का ही दोष फताकय उसका छतयमकाय कयें गे ! मदद फकसी कन्मा मा फहू ऩय व्मलबचारयणी होने का सन्दे ह फकमा जाए तो उसे बफना फकसी पवचाय के भायकय चम्फर भें
प्रवादहत कय ददमा जाता है । इसी प्रकाय मदद फकसी पवधवा ऩय व्मलबचाय मा फकसी प्रकाय आचयण-भ्रष्ठ होने का दोष रगामा जाए तो चाहे वह गबावती ही क्मों न
हो, उसे तुयन्त ही काटकय चम्फर भें ऩहुॊचा दें औय फकसी को कानों-कान बी खफय न होने दें । वहाॉ के भनुष्म बी सदाचायी होते हैं । सफकी फहू-फेटी को अऩनी फहूफेटी सभ ते हैं । स्मरमों की भान-भमाादा की यऺा के लरए प्राण दे ने भें बी सबी नहीॊ दहचफकचाते । इस प्रकाय के दे श भें पववादहत होकय सफ प्रकाय की प्रथाओॊ को
दे खते हुए बी इतना साहस कयना मह दादी जी का ही काभ था ।

ऩयभात्भा की दमा से ददु दा न सभाप्त हुए । पऩताजी कुि लशऺा ऩा गए औय एक भकान बी श्री दादाजी ने खयीद लरमा । दयवाजे-दयवाजे बटकने वारे कुटुम्फ को
शास्न्तऩूवाक फैठने का मथान लभर गमा औय फपय श्री पऩताजी के पववाह कयने का पवचाय हुआ । दादीजी, दादाजी तथा पऩताजी के साथ अऩने भामके गईं । वहीॊ
पऩताजी का पववाह कय ददमा । वहाॉ दो चाय भास यहकय सफ रोग वधू की पवदा कयाके साथ लरवा राए ।

[edit]गमहास्थ्म

जीवन

पववाह हो जाने के ऩ्‍चात पऩताजी म्मुछनलसऩैलरटी भें ऩन्द्रह रुऩमे भालसक वेतन ऩय नौकय हो गए । उन्होंने कोई फ़िी लशऺा प्राप्त न की थी । पऩताजी को मह
नौकयी ऩसन्द न आई । उन्होंने एक-दो सार के फाद नौकयी िो़िकय मवतन्र व्मवसाम आयम्ब कयने का प्रमत्न फकमा औय कचहयी भें सयकायी मटाम्ऩ फेचने रगे ।
उनके जीवन का अधधक बाग इसी व्मवसाम भें व्मतीत हुआ । साधायण श्रे णी के गहृ मथ फनकय उन्होंने इसी व्मवसाम द्वाया अऩनी सन्तानों को लशऺा दी, अऩने
कुटुम्फ का ऩारन फकमा औय अऩने भुहल्रे के गणभान्म व्मस्क्तमों भें धगने जाने रगे । वह रुऩमे का रेन-दे न बी कयते थे । उन्होंने तीन फैरगाड़िमाॊ बी फनाईं थीॊ ,
जो फकयामे ऩय चरा कयतीॊ थीॊ । पऩताजी को व्मामाभ से प्रेभ था । उनका शयीय फ़िा सुदृढ़ व सुडौर था । वह छनमभ ऩूवक
ा अखा़िे भें कु्‍ती ऱिा कयते थे ।

पऩताजी के गहृ भें एक ऩुर उत्ऩन्न हुआ, फकन्तु वह भय गमा । उसके एक सार फाद रेखक (श्री याभप्रसाद) ने ज्मेष्ठ शुक्र ऩऺ 11 सम्वत श 1954 पवक्रभी को जन्भ
लरमा । फ़िे प्रमत्नों से भानता भानकय अनेक गॊडे, ताफीज तथा कवचों द्वाया श्री दादाजी ने इस शयीय की यऺा के लरए प्रमत्न फकमा । ममात श फारकों का योग गहृ भें
प्रवेश कय गमा था । अत्एव जन्भ रेने के एक मा दो भास ऩ्‍चात श ही भेये शयीय की अवमथा बी ऩहरे फारक जैसी होने रगी । फकसी ने फतामा फक सपेद खयगोश
को भेये शयीय ऩय घुभाकय जभीन ऩय िो़ि ददमा जाम, मदद फीभायी होगी तो खयगोश तुयन्त भय जामेगा । कहते हैं हुआ बी ऐसा ही । एक सपेद खयगोश भेये शयीय
ऩय से उतायकय जैसे ही जभीन ऩय िो़िा गमा, वैसे ही उसने तीन-चाय चक्कय काटे औय भय गमा । भेये पवचाय भें फकसी अॊश भें मह सम्बव बी है , क्मोंफक औषधध
तीन प्रकाय की होती हैं - (1) दै पवक (2) भानुपषक, (3) ऩैशाधचक । ऩैशाधचक औषधधमों भें अनेक प्रकाय के ऩशु मा ऩषितऺमों के भाॊस अथवा रुधधय का व्मवहाय होता है ,
स्जनका उऩमोग वैद्मक के ग्रन्थों भें ऩामा जाता है । इसभें से एक प्रमोग फ़िा ही कौतुहरोत्ऩादक तथा आ्‍चमाजनक मह है फक स्जस फच्चे को जबोखे (सूखा) की
फीभायी हो गई हो, मदद उसके साभने चभगाद़ि चीयकय रामा जाए तो एक दो भास का फारक चभगाद़ि को ऩक़िकय उसका खून चूस रेगा औय फीभायी जाती यहे गी ।
मह फ़िी उऩमोगी औषधध है औय एक भहात्भा की फतराई हुई है ।

जफ भैं सात वषा का हुआ तो पऩताजी ने मवमॊ ही भु े दहन्दी अऺयों का फोध कयामा औय एक भौरवी साहफ के भकतफ भें उदा ू ऩढ़ने के लरए बेज ददमा । भु े बरीबाॊछत मभयण है फक पऩताजी अखा़िे भें कु्‍ती ऱिने जाते थे औय अऩने से फलरष्ठ तथा शयीय से डेढ़ गुने ऩ्े को ऩटक दे ते थे, कुि ददनों फाद पऩताजी का एक
फॊगारी (श्री चटजी) भहाशम से प्रेभ हो गमा । चटजी भहाशम की अॊग्रेजी दवा की दक
ु ान थी । वह फ़िे बायी नशेफाज थे । एक सभम भें आधा िटाॊक चयस की
धचरभ उ़िामा कयते थे । उन्हीॊ की सॊगछत भें पऩताजी ने बी चयस ऩीना सीख लरमा, स्जसके कायण उनका शयीय छनतान्त नष्ट हो गमा । दस वषा भें ही सम्ऩूणा शयीय
सूखकय हड्डडमाॊ छनकर आईं । चटजी भहाशम सुयाऩान बी कयने रगे । अत्एव उनका करेजा फढ़ गमा औय उसी से उनका शयीयाॊत हो गमा । भेये फहुत-कुि
सभ ाने ऩय पऩताजी ने चयस ऩीने की आदत को िो़िा, फकन्तु फहुत ददनों के फाद ।

भेये फाद ऩाॊच फहनों औय तीन बाईमों का जन्भ हुआ । दादीजी ने फहुत कहा फक कुर की प्रथा के अनुसाय कन्माओॊ को भाय डारा जाए, फकन्तु भाताजी ने इसका
पवयोध फकमा औय कन्माओॊ के प्राणों की यऺा की । भेये कुर भें मह ऩहरा ही सभम था फक कन्माओॊ का ऩोषण हुआ । ऩय इनभें से दो फहनों औय दो बाईमों का
दे हान्त हो गमा । शेष एक बाई, जो इस सभम (1927 ई०) दस वषा का है औय तीन फहनें फचीॊ । भाताजी के प्रमत्न से तीनों फहनों को अच्िी लशऺा दी गई औय
उनके पववाह फ़िी धूभधाभ से फकए गए । इसके ऩूवा हभाये कुर की कन्माएॊ फकसी को नहीॊ ब्माही गईं, क्मोंफक वे जीपवत ही नहीॊ यखी जातीॊ थीॊ ।

दादाजी फ़िी सयर प्रकृछत के भनुष्म थे । जफ तक वे जीपवत यहे , ऩैसे फेचने का ही व्मवसाम कयते यहे । उनको गाम ऩारने का फहुत फ़िा शौक था । मवमॊ ग्वालरमय
जाकय फ़िी-फ़िी गामें खयीद राते थे । वहाॊ की गामें कापी दध
ू दे ती हैं । अच्िी गाम दस मा ऩन्द्रह सेय दध
ू दे ती है । मे गामें फ़िी सीधी बी होती हैं । दध
ू दोहन
कयते सभम उनकी टाॊगें फाॊधने की आव्‍मकता नहीॊ होती औय जफ स्जसका जी चाहे बफना फच्चे के दध
ू दोहन कय सकता है । फचऩन भें भैं फहुधा जाकय गाम के
थन भें भुॉह रगाकय दध
ू पऩमा कयता था । वामतव भें वहाॊ की गामें दशानीम होती हैं ।

दादाजी भु े खूफ दध
ू पऩरामा कयते थे । उन्हें अ्ायह गोटी (फछघमा फग्घा) खेरने का फ़िा शौक था । सामॊकार के सभम छनत्म लशव-भस्न्दय भें जाकय दो घण्टे तक
ऩयभात्भा का बजन फकमा कयते थे । उनका रगबग ऩचऩन वषा की आमु भें मवगाायोहण हुआ ।

फाल्मकार से ही पऩताजी भेयी लशऺा का अधधक ध्मान यखते थे औय जया-सी बूर कयने ऩय फहुत ऩीटते थे । भु े अफ बी बरी-बाॊछत मभयण है फक जफ भैं नागयी के
अऺय लरखना सीख यहा था तो भु े 'उ' लरखना न आमा । भैने फहुत प्रमत्न फकमा । ऩय जफ पऩताजी कचहयी चरे गए तो भैं बी खेरने चरा गमा । पऩताजी ने
कचहयी से आकय भु

से 'उ' लरखवामा तो भैं लरख न सका । उन्हें भारूभ हो गमा फक भैं खेरने चरा गमा था, इस ऩय उन्होंने भु े फन्दक
ू के रोहे के गज से इतना

ऩीटा फक गज टे ढ़ा ऩ़ि गमा । बागकय दादीजी के ऩास चरा गमा, तफ फचा । भैं िोटे ऩन से ही फहुत उद्दण्ड था । पऩताजी के ऩमााप्त शासन यखने ऩय बी फहुत
उद्दण्डता कयता था । एक सभम फकसी के फाग भें जाकय आ़िू के वऺ
ृ ों भें से सफ आ़िू तो़ि डारे । भारी ऩीिे दौ़िा, फकन्तु भैं उनके हाथ न आमा । भारी ने सफ
आ़िू पऩताजी के साभने रा यखे । उस ददन पऩताजी ने भु े इतना ऩीटा फक भैं दो ददन तक उठ न सका । इसी प्रकाय खूफ पऩटता था, फकन्तु उद्दण्डता अव्‍म कयता
था । शामद उस फचऩन की भाय से ही मह शयीय फहुत कठोय तथा सहनशीर फन गमा ।

[edit]भेयी

कुभमयमवस्थथम

जफ भैं उदा ू का चौथा दजाा ऩास कयके ऩाॉचवें भें आमा उस सभम भेयी अवमथा रगबग चौदह वषा की होगी । इसी फीच भु े पऩताजी के सन्दक
ू के रुऩमे-ऩैसे चुयाने
की आदत ऩ़ि गई थी । इन ऩैसों से उऩन्मास खयीदकय खूफ ऩढ़ता । ऩुमतक-पवक्रेता भहाशम पऩताजी के जान-ऩहचान के थे । उन्होंने पऩताजी से भेयी लशकामत की ।
अफ भेयी कुि जाॉच होने रगी । भैने उन भहाशम के महाॉ से फकताफें खयीदना ही िो़ि ददमा । भु

भें दो-एक खयाफ आदतें बी ऩ़ि गईं । भैं लसगये ट ऩीने रगा ।

कबी-कबी बॊग बी जभा रेता था । कुभायावमथा भें मवतन्रताऩूवक
ा ऩैसे हाथ आ जाने से औय उदा ू के प्रेभ-यसऩूणा उऩन्मासों तथा गजरों की ऩुमतकों ने आचयण ऩय
बी अऩना कुप्रबाव ददखाना आयम्ब कय ददमा । घुन रगना आयम्ब हुआ ही था फक ऩयभात्भा ने फ़िी सहामता की । भैं एक योज बॊग ऩीकय पऩताजी की सॊदक
ू ची भें
से रुऩए छनकारने गमा । नशे की हारत भें होश ठी क न यहने के कायण सॊदक
ू ची खटक गई । भाताजी को सॊदेह हुआ । उन्होंने भु े ऩक़ि लरमा । चाबी ऩक़िी गई
। भेये सन्दक
ू की तराशी री गई, फहुत से रुऩमे छनकरे औय साया बेद खुर गमा । भेयी फकताफों भें अनेक उऩन्मासादद ऩाए गए जो उसी सभम पा़ि डारे गए ।

ऩयभात्भा की कृऩा से भेयी चोयी ऩक़ि री गई नहीॊ तो दो-चाय वषा भें न दीन का यहता औय न दछु नमाॊ का । इसके फाद बी भैंने फहुत घातें रगाई, फकन्तु पऩताजी ने
सॊदक
ू ची का तारा फदर ददमा था । भेयी कोई चार न चर सकी । अफ तफ कबी भौका लभर जाता तो भाताजी के रुऩमों ऩय हाथ पेय दे ता था । इसी प्रकाय की
कुटे वों के कायण दो फाय उदा ू लभडडर की ऩयीऺा भें उत्तीणा न हो सका, तफ भैंने अॊग्रेजी ऩढ़ने की इच्िा प्रकट की । पऩताजी भु े अॊग्रेजी ऩढ़ाना न चाहते थे औय
फकसी व्मवसाम भें रगाना चाहते थे, फकन्तु भाताजी की कृऩा से भैं अॊग्रेजी ऩढ़ने बेजा गमा । दस
ू ये वषा जफ भैं उदा ू लभडडर की ऩयीऺा भें पेर हुआ उसी सभम ऩ़िौस
के दे व-भस्न्दय भें , स्जसकी दीवाय भेये भकान से लभरी थी, एक ऩुजायीजी आ गए । वह फ़िे ही सच्चरयर व्मस्क्त थे । भैं उनके ऩास उठने-फैठने रगा ।

भैं भस्न्दय भें आने-जाने रगा । कुि ऩूजा-ऩाठ बी सीखने रगा । ऩुजायी जी के उऩदे शों का फ़िा उत्तभ प्रबाव हुआ । भैं अऩना अधधकतय सभम मतुछतऩूजन तथा
ऩढ़ने भें व्मतीत कयने रगा । ऩुजायीजी भु े िह्भचमा ऩारन का खूफ उऩदे श दे ते थे । वे भेये ऩथ-प्रदशाक फने । भैंने एक दस
ू ये सज्जन की दे खा-दे खी व्मामाभ कयना
बी आयम्ब कय ददमा । अफ तो भु े बस्क्त-भागा भें कुि आनन्द प्राप्त होने रगा औय चाय-ऩाॉच भहीने भें ही व्मामाभ बी खूफ कयने रगा । भेयी सफ फुयी आदतें औय
कुबावनाएॉ जाती यहीॊ । मकूरों की िुदट्टमाॉ सभाप्त होने ऩय भैंने लभशन मकूर भें अॊग्रेजी के ऩाॉचवें दजजे भें नाभ लरखा लरमा । इस सभम तक भेयी औय सफ कुटे वें तो
िूट गई थीॊ, फकन्तु लसगये ट ऩीना न िूटता था । भैं लसगये ट फहुत ऩीता था । एक ददन भें ऩचास-साठ लसगये ट ऩी डारता था । भु े फ़िा द्ु ख होता था फक भैं इस

स्जनके साप्तादहक अधधवेशन प्रत्मेक शुक्रवाय को हुआ कयते थे । वहीॊ ऩय धालभाक ऩुमतकों का ऩाठन. ये र से कट गमा ! पऩताजी के रृदम को बी फ़िा बायी धक्का ऩहुॉचा । उस ददन से वह भेयी प्रत्मेक फात सहन कय रेते थे. अफ तुभ आमा-सभाज से अऩना नाभ कटा दो । भैंने पऩताजी से कहा फक आमा-सभाज के लसद्धान्त सावाबौभ हैं . पवषम पवशेष ऩय छनफन्ध-रेखन औय ऩाठन तथा वाद-पववाद होता था । कुभाय-सबा से ही भैंने जनता के सम्भुख फोरने का अभ्मास फकमा । फहुधा कुभाय-सबा के नवमुवक लभरकय शहय के भेरों भें प्रचायाथा जामा कयते थे । फाजायों भें व्माख्मान दे कय आमा-सभाज के लसद्धान्तों का प्रचाय कयते थे । ऐसा कयतेकयते भुसरभानों से फुफाहसा होने रगा । अतएव ऩुलरस ने ग़िे का बम दे खकय फाजायों भें व्माख्मान दे ना फन्द कयवा ददमा । आमा-सभाज के सदममों ने कुभाय- . इस कायण कबी-कबी मवप्नदोष हो जाता । तफ फकसी सज्जन के कहने से भैंने नभक खाना बी िो़ि ददमा । केवर उफारकय साग मा दार से एक सभम बोजन कयता । लभचा-खटाई तो िूता बी न था । इस प्रकाय ऩाॉच वषा तक फयाफय नभक न खामा । नभक न खाने से शयीय के दोष दयू हो गए औय भेया मवाम्म दशानीम हो गमा । सफ रोग भेये मवाम्म को आ्‍चमा की दृस्ष्ट से दे खा कयते थे । भैं थो़िे ददनों भें ही फ़िा कट्टय आमा-सभाजी हो गमा । आमा-सभाज के अधधवेशन भें जाता-आता । सन्मासी-म्हात्भाओॊ के उऩदे शों को फ़िी श्रद्धा से सुनता । जफ कोई सन्मासी आमा-सभाज भें आता तो उसकी हय प्रकाय से सेवा कयता. अधधक पवयोध न कयते थे । भैं ऩढ़ने भें फ़िा प्रमत्न कयता था औय अऩने दजजे भें प्रथभ उत्तीणा होता था । मह अवमथा आठवें दजजे तक यही । जफ भैं आठवें दजजे भें था. इस कायण शाहजहाॉऩुय का जरवामु राबदामक दे खकय वहाॉ ठहये थे । भैं उनके ऩास आमा-जामा कयता था । प्राणऩण से भैंने मवाभीजी भहायाज की सेवा की औय इसी सेवा के ऩरयणाभमवरूऩ भेये जीवन भें नवीन ऩरयवतान हो गमा । भैं यात को दो-तीन फजे तक औय ददन-बय उनकी सेवा-सुश्रुषा भें उऩस्मथत यहता । अनेक प्रकाय की औषधधमों का प्रमोग फकमा । कछतऩम सज्जनों ने फ़िी सहानुबूछत ददखराई. नदी भें मनान फकमा औय जरऩान फकमा । दस ू ये ददन सन्ध्मा सभम ऩॊ० अखखरानन्दजी का व्माख्मान आमा-सभाज भस्न्दय भें था । भैं आमा-सभाज भस्न्दय भें गमा । एक ऩे़ि के नीचे एकान्त भें ख़िा व्माख्मान सुन यहा था फक पऩताजी दो भनुष्मों को लरए हुए आ ऩहुॊचे औय भैं ऩक़ि लरमा गमा । वह उसी सभम मकूर के है ड-भामटय के ऩास रे गए । है ड-भामटय साहफ ईसाई थे । भैंने उन्हें सफ वत्ृ तान्त कह सुनामा । उन्होंने पऩताजी को सभ ामा फक सभ दाय ऱिके को भायना-ऩीटना ठी क नहीॊ । भु े बी फहुत कुि उऩदे श ददमा । उस ददन से पऩताजी ने कबी बी भु ऩय हाथ नहीॊ उठामा. फपय वह सन्मासी चाहे स्जस भत का अनुमामी होता । जफ भैं अॊग्रेजी के सातवें दजजे भें था तफ सनातनधभी ऩस्ण्डत जगतप्रसाद जी शाहजहाॉऩुय ऩधाये उन्होंने आमा-सभाज का खण्डन कयना प्रायम्ब फकमा । आमा-सभास्जमों ने बी उनका पवयोध फकमा औय ऩॊ० अखखरानॊदजी को फुराकय शामराथा कयामा । शामराथा सॊमकृत भें हुआ । जनता ऩय अच्िा प्रबाव हुआ । भेये काभों को दे खकय भुहल्रे वारों ने पऩताजी से भेयी लशकामत की । पऩताजी ने भु से कहा फक आमा-सभाजी हाय गए. क्मोंफक भेये घय से छनकर जाने ऩय घय भें फ़िा ऺोब यहा । एक यात एक ददन फकसी ने बोजन नहीॊ फकमा. क्मोंफक भेयी प्राणामाभ सीखने की फ़िी उत्कट इच्िा थी । स्जस सन्मासी का नाभ सुनता. सफ फ़िे द्ु खी हुए फक अकेरा ऩुर न जाने नदी भें डूफ गमा. ऩयन्तु भन की वस्ृ त्तमाॊ ठी क न होतीॊ । भैने याबर के सभम बोजन कयना त्माग ददमा । केवर थो़िा सा दध ू ही यात को ऩीने रगा । सहसा ही फुयी आदतों को िो़िा था.जीवन भें लसगये ट ऩीने की कुटे व को न िो़ि सकूॊगा । मकूर भें बयती होने के थो़िे ददनों फाद ही एक सहऩाठी श्रीमुत सुशीरचन्द सेन से कुि पवशेष मनेह हो गमा । उन्हीॊ की दमा के कायण भेया लसगये ट ऩीना बी िूट गमा । दे व-भस्न्दय भें मतुछत-ऩूजा कयने की प्रवस्ृ त्त को दे खकय श्रीमुत भुॊशी इन्द्रजीत जी ने भु े सन्ध्मा कयने का उऩदे श ददमा । भुॊशीजी उसी भस्न्दय भें यहने वारे फकसी भहाशम के ऩास आमा कयते थे । व्मामाभादद के कायण भेया शयीय फ़िा सुगदठत हो गमा था औय यॊ ग छनखय आमा था । भैंने जानना चाहा फक सन्ध्मा क्मा वमतु है । भुॊशीजी ने आमा-सभाज सम्फन्धी कुि उऩदे श ददए । इसके फाद भैंने सत्माथाप्रकाश ऩढ़ा । इससे तख्ता ही ऩरट गमा । सत्माथाप्रकाश के अध्ममन ने भेये जीवन के इछतहास भें एक नवीन ऩष्ृ ठ खोर ददमा । भैंने उसभें उस्ल्रखखत िह्भचमा के कदठन छनमभों का ऩारन कयना आयम्ब कय ददमा । भैं कम्फर को तख्त ऩय बफिाकय सोता औय प्रात्कार चाय फजे से ही शैमा-त्माग कय दे ता । मनान-सन्ध्मादद से छनवत्ृ त हो कय व्मामाभ कयता. उसी सभम मवाभी श्री सोभदे व जी सयमवती आमा-सभाज शाहजहाॊऩुय भें ऩधाये । उनके व्माख्मानों का जनता ऩय फ़िा अच्िा प्रबाव हुआ । कुि सज्जनों के अनुयोध से मवाभी जी कुि ददनों के लरए शाहजहाॉऩुय आमा-सभाज भस्न्दय भें ठहय गए । मवाभी जी की तफीमत बी कुि खयाफ थी. शहय से तीन-चाय भीर उसकी सेवा के लरए जाता. फकन्तु योग का शभन न हो सका । मवाभीजी भु े अनेक प्रकाय के उऩदे श ददमा कयते थे । उन उऩदे शों को भैं श्रवण कय कामा-रूऩ भें ऩरयणत कयने का ऩूया प्रमत्न कयता । वामतव भें वह भेये गुरुदे व तथा ऩथ-प्रदशाक थे । उनकी लशऺाओॊ ने ही भेये जीवन भें आस्त्भक फर का सॊचाय फकमा स्जनके सम्फन्ध भें भैं ऩथ ृ कश वणान करूॊगा । कुि नवमुवकों ने लभरकय आमा-सभाज भस्न्दय भें आमा कुभाय सबा खोरी थी. उन्हें कौन हया सकता है ? अनेक वाद-पववाद के ऩ्‍चात श पऩताजी स्जद्द ऩक़ि गए फक आमा-सभाज से त्मागऩर न दे गा तो घय िो़ि दे । भैंने बी पवचाया फक पऩताजी का क्रोध अधधक फढ़ गमा औय उन्होंने भु ऩय कोई वमतु ऐसी दे ऩटकी फक स्जससे फुया ऩरयणाभ हुआ तो अच्िा न होगा । अतएव घय त्माग दे ना ही उधचत है । भैं केवर एक कभीज ऩहने ख़िा था औय ऩाजाभा उताय कय धोती ऩहन यहा था । ऩाजाभे के नीचे रॊगोट फॉधा था । पऩताजी ने हाथ से धोती िी न री औय कहा 'घय से छनकर' । भु े बी क्रोध आ गमा । भैं पऩताजी के ऩैय िूकय गहृ त्मागकय चरा गमा । कहाॉ जाऊॉ कुि सभ भें न आमा । शहय भें फकसी से जान-ऩहचान न थी फक जहाॉ छिऩा यहता । भैं जॊगर की ओय बाग गमा । एक यात औय एक ददन फाग भें ऩे़ि भें फैठा यहा । बूख रगने ऩय खेतों भें से हये चने तो़ि कय खाए.

न भैंने हमताऺय फकए । अऩने जीवन भें सवा प्रकाय से सत्म का आचयण कयता था. स्जन्होंने अकायण ही पऩताजी ऩय रादठमों का प्रहाय फकमा था । भैं चाहता था फक मदद पऩमतौर लभर जाए तो भैं पऩताजी के शरुओॊ को भाय डारूॊ ! मह एक नारी का पऩमतौर वह भहाशम अऩने ऩास यखते तो थे. भुकदभा खारयज हो जामेगा । फकन्तु भु ऩय कुि बी प्रबाव न हुआ. फकन्तु फारक ही तो थे. भेयी भाता जी मवगीम दे वी हैं । भु भें जो कुि जीवन तथा साहस आमा. फकन्तु भाताजी भेया उत्साह बॊग न होने दे ती थीॊ । स्जस के कायण उन्हें फहुधा पऩता जी की डाॊट-पटकाय तथा दॊ ड बी सहना ऩ़िता था । वामतव भें . फकन्तु आऩस भें कोई भेर न था । फैठने-उठने से आऩस भें प्रेभ फढ़ गमा । वह एक ग्राभ के छनवासी थे । स्जस ग्राभ भें उनका घय था वह ग्राभ फ़िा प्रलसद्ध है । फहुत से रोगों के महाॊ फन्दक ू तथा तभॊचे बी यहते हैं. चाहे कुि हो जाए. वह भेयी भाता जी तथा गुरुदे व श्री सोभदे व जी की कृऩाओॊ का ही ऩरयणाभ है । दादीजी तथा पऩता जी भेये पववाह के लरए . क्मोंफक भेयी वापषाक ऩयीऺा थी । ऩयीऺा सभाप्त कयके भैं बी फहन के पववाह भें सस्म्भलरत होने को गमा । फायात आ चुकी थी । भु े ग्राभ के फाहय ही भारूभ हो गमा था फक फायात भें वे्‍मा आई है । भैं घय न गमा औय न फायात भें सस्म्भलरत हुआ । भैंने पववाह भें कोई बी बाग न लरमा । भैंने भाताजी से थो़िे से रुऩए भाॉगे । भाताजी ने भु े रगबग 125 रुऩए ददए. तो ऩूिा क्मा रामे ? भैंने कुि कहकय टार ददमा । रुऩमे सफ खचा हो गए । शामद एक धगन्नी फची थी. उन भहाशम के ऩास बी एक नारी का िोटा-सा पऩमतौर था स्जसे वह अऩने साथ शहय भें यखते थे । जफ भु से अधधक प्रेभ फढ़ा तो उन्होंने वह पऩमतौर भु े यखने के लरए ददमा । इस प्रकाय के हधथमाय यखने की भेयी उत्कट इच्िा थी. ऩय इण्टय क्रास भें फैठकय दस ू यों के साथ-साथ चरा गमा । इस फात से भु े फ़िा खेद हुआ । भैने अऩने साधथमों से अनुयोध फकमा फक मह तो एक प्रकाय की चोयी है । सफको लभरकय इण्टय क्रास का बा़िा मटे शन भामटय को दे ना चादहमे । एक सभम भेये पऩता जी दीवानी भें फकसी ऩय दावा कयके वकीर से कह गए थे फक जो काभ हो वह भु से कया रें । कुि आव्‍मकता ऩ़िने ऩय वकीर साहफ ने भु े फुरा बेजा औय कहा फक भैं पऩताजी के हमताऺय वकारतनाभें ऩय कय द ूॉ । भैंने तुयन्त उत्तय ददमा फक मह तो धभा के पवरुद्ध होगा. सो भैंने भाता जी को रौटा दी । भु े जफ फकसी फात के लरए धन की आव्‍मकता होती तो भैं भाता जी से कहता औय वह भेयी भाॉग ऩूयी कय दे ती थीॊ । भेया मकूर घय से एक भीर दयू था । भैंने भाता जी से प्राथाना की फक भु े साइफकर रे दें । उन्होंने रगबग एक सौ रुऩमे ददए । भैंने साइफकर खयीद री । उस सभम भैं अॊग्रेजी के नवें दजजे भें आ गमा था । कोई धालभाक मा दे श सम्फन्धी ऩुमतक ऩढ़ने की इच्िा होती तो भाता जी से ही दाभ रे जाता । रखनऊ काॊग्रेस जाने के लरए भेयी फ़िी इच्िा थी । दादी जी औय पऩता जी तो फहुत पवयोध कयते यहे . सत्म फात कह दे ता था । भेयी भाता भेये धभा-कामों भें तथा लशऺादद भें फ़िी सहामता कयती थीॊ । वह प्रात्कार चाय फजे ही भु े जगा ददमा कयती थीॊ । भैं छनत्म-प्रछत छनमभऩूवाक हवन फकमा कयता था । भेयी िोटी फहन का पववाह कयने के छनलभत्त भाता जी औय पऩता जी ग्वालरमय गए । भैं औय श्री दादाजी शाहजहाॉऩुय भें ही यह गए. कफ तक इस प्रकाय कामा चरा सकते थे ? कुभाय-सबा टूट गई । तफ आमा-सभास्जमों को शास्न्त हुई । कुभाय-सबा ने अऩने शहय भें तो नाभ ऩामा ही था । जफ रखनऊ भें काॊग्रेस हुई तो बायतवषीम कुभाय सम्भेरन का बी वापषाक अधधवेशन वहाॉ हुआ । उस अवसय ऩय सफसे अधधक ऩारयतोपषक राहौय औय शाहजहाॊऩुय की कुभाय सबाओॊ ने ऩाए थे. फकन्तु कुभाय फकसी का अनुधचत शासन कफ भानने वारे थे ! आमासभाज के भस्न्दय भें तारा डार ददमा गमा फक कुभाय-सबा वारे आमासभाज भस्न्दय भें अधधवेशन न कयें । मह बी कहा गमा फक मदद वे वहाॉ अधधवेशन कयें गे. स्जनको रेकय भैं ग्वालरमय गमा । मह अवसय रयवाल्वय खयीदने का अच्िा हाथ रगा । भैंने सुना था फक रयमासत भें फ़िी आसानी से हधथमाय लभर जाते हैं । फ़िी खोज की । टोऩीदाय फन्दक ू तथा पऩमतौर तो लभरे थे. इस प्रकाय का ऩाऩ भैं कदापऩ नहीॊ कय सकता । वकीर साहफ ने फहुत कुि सभ ामा फक एक सौ रुऩए से अधधक का दावा है . स्जनकी प्रशॊसा सभाचाय-ऩरों भें प्रकालशत हुई थी । उन्हीॊ ददनों लभशन मकूर के एक पवद्माथी से भेया ऩरयचम हुआ । वह कबी-कबी कुभाय-सबा भें आ जामा कयते थे । भेये बाषण का उन ऩय अधधक प्रबाव हुआ । वैसे तो वह भेये भकान के छनकट ही यहते थे. जो ग्राभ भें ही फन जाते हैं । मे सफ टोऩीदाय होते हैं . क्मोंफक भेये पऩता के कई शरु थे. क्मोंफक फारूद अच्िी न थी । भु े फ़िा खेद हुआ । भाता जी बी जफ रौटकय शाहजहाॉऩुय आई. फकन्तु भाता जी ने भु े खचा दे ही ददमा । उसी सभम शाहजहाॉऩुय भें सेवा-सलभछत का आयम्ब हुआ था । भैं फ़िे उत्साह के साथ सेवा सलभछत भें सहमोग दे ता था । पऩता जी औय दादा जी को भेये इस प्रकाय के कामा अच्िे न रगते थे . फकन्तु वह भहाशम भेये महाॊ आते-जाते यहे । रगबग अ्ायह वषा की उम्र तक भैं ये र ऩय न चढ़ा था । भैं इतना दृढ़ सत्मवक्ता हो गमा था फक एक सभम ये र ऩय चढ़कय तीसये दजजे का दटकट खयीदा था. फकन्तु कायतूसी हधथमाय का कहीॊ ऩता नहीॊ रगा । ऩता रगा बी तो एक भहाशम ने भु े ठग लरमा औय 75 रुऩमे भें टोऩीदाय ऩाॉच पामय कयने वारा एक रयवाल्वय ददमा । रयमासत की फनी हुई फारूद औय थो़िी सी टोपऩमाॉ दे दीॊ । भैं इसी को रेकय फ़िा प्रसन्न हुआ । सीधा शाहजहाॉऩुय ऩहुॉचा । रयवाल्वय को बय कय चरामा तो गोरी केवर ऩन्द्रह मा फीस गज ऩय ही धगयी. तो ऩुलरस को फुराकय उन्हें भस्न्दय से छनकरवा ददमा जाएगा । कई भहीनों तक हभ रोग भैदान भें अऩनी सबा के अधधवेशन कयते यहे . फकन्तु उसको चराकय न दे खा था । भैंने उसे चराकय दे खा तो वह छनतान्त फेकाय लसद्ध हुआ । भैंने उसे रे जाकय एक कोने भें डार ददमा । उस भहाशम से मनेह इतना फढ़ गमा फक साॊमकार को भैं अऩने घय से खीय की थारी रे जाकय उनके साथ साथ उनके भकान ऩय ही बोजन फकमा कयता था । वह भेये साथ श्री मवाभी सोभदे वजी के ऩास बी जामा कयते थे । उनके पऩता जफ शहय आए तो उनको मह फ़िा फुया भारूभ हुआ । उन्होंने भु से अऩने ऱिके के ऩास न आने मा उसे कहीॊ साथ न रे जाने के लरए फहुत ता़िना की औय कहा फक मदद भैं उनका कहना न भानॉग ू ा तो वह ग्राभ से आदभी राकय भु े पऩटवाएॉगे । भैंने उनके ऩास आना-जाना त्माग ददमा.सबा के प्रमत्न को दे खकय उस ऩय अऩना शासन जभाना चाहा.

तो उसके फकसी ऩष्ृ ठ ऩय उज्जवर अऺयों भें तुम्हाया बी नाभ लरखा जामेगा । गुरु गोपवन्दलसॊहजी की धभाऩत्नी ने जफ अऩने ऩुरों की भत्ृ मु का सम्वाद सुना था. वह मह फक एक फाय श्रद्धाऩूवक ा तुम्हाये चयणों की सेवा कयके अऩने जीवन को सपर फना रेता । फकन्तु मह इच्िा ऩूणा होती नहीॊ ददखाई दे ती औय तुम्हें भेयी भत्ृ मु का द्ु ख-सम्वाद सुनामा जामेगा । भाॉ ! भु े पव्‍वास है फक तुभ मह सभ कय धैमा धायण कयोगी फक तुम्हाया ऩुर भाताओॊ की भाता . वह अवणानीम है । भु े जीवन की प्रत्मेक घटना का मभयण है फक तुभ ने फकस प्रकाय अऩनी दे व वाणी का उऩदे श कयके भेया सुधाय फकमा है । तुम्हायी दमा से ही भैं दे श-सेवा भें सॊरग्न हो सका । धालभाक जीवन भें बी तुम्हाये ही प्रोत्साहन ने सहामता दी । जो कुि लशऺा भैंने ग्रहण की उसका श्रे म तुम्हीॊ को है । स्जस भनोहय रूऩ से तुभ भु े उऩदे श कयती थीॊ. वह कयो. उसका मभयण कय तुम्हायी भॊगरभमी भूछता का ध्मान आ जाता है औय भमतक नत हो जाता है । तुम्हें मदद भु े ता़िना बी दे नी हुई. तो फ़िे मनेह से हय एक फात को सभ ा ददमा । मदद भैंने धष्ृ ताऩूणा उत्तय ददमा तफ तुभ ने प्रेभ बये शब्दों भें मही कहा फक तुम्हें जो अच्िा रगे.फहुत अनुयोध कयते. उन्हीॊ भें जो कोई लशषितऺत थीॊ. इसका ऩरयणाभ अच्िा न होगा । जीवनदारी ! तुभ ने इस शयीय को जन्भ दे कय केवर ऩारन-ऩोषण ही नहीॊ फकमा फकन्तु आस्त्भक तथा साभास्जक उन्नछत भें तुम्हीॊ भेयी सदै व सहामक यहीॊ । जन्भ-जन्भान्तय ऩयभात्भा ऐसी ही भाता दें । भहान से भहान सॊकट भें बी तुभ ने भु े अधीय न होने ददमा । सदै व अऩनी प्रेभ बयी वाणी को सुनाते हुए भु े सान्त्वना दे ती यहीॊ । तुम्हायी दमा की िामा भें भैंने अऩने जीवन बय भें कोई कष्ट अनुबव न फकमा । इस सॊसाय भें भेयी फकसी बी बोग-पवरास तथा ऐ्‍वमा की इच्िा नहीॊ । केवर एक तष्ृ णा है .बायत भाता . फकन्तु ऐसा कयना ठी क नहीॊ. भाता जी उनसे अऺय-फोध कयतीॊ । इस प्रकाय घय का सफ काभ कय चुकने के फाद जो कुि सभम लभर जाता.की सेवा भें अऩने जीवन को फलर-वेदी की बें ट कय गमा औय उसने तुम्हायी कुऺ को करॊफकत न फकमा.3 िह्भचमा व्रत का ऩारन  2 सॊफधॊ धत कड़िमाॉ  3 फाहयी कडडमाॉ [edit]प्रथभ [edit]भेयी खण्ड भमॉ ग्मायह वषा की उम्र भें भाता जी पववाह कय शाहजहाॉऩुय आई थीॊ । उस सभम वह छनतान्त अलशषितऺत एवॊ ग्राभीण कन्मा के सदृश थीॊ । शाहजहाॉऩुय आने के थो़िे ददनों फाद श्री दादी जी ने अऩनी फहन को फुरा लरमा । उन्होंने भाता जी को गहृ -कामा की लशऺा दी । थो़िे ददनों भें भाता जी ने घय के सफ काभ-काज को सभ लरमा औय बोजनादद का ठी क-ठी क प्रफन्ध कयने रगीॊ । भेये जन्भ होने के ऩाॊच मा सात वषा फाद उन्होंने दहन्दी ऩढ़ना आयम्ब फकमा । ऩढ़ने का शौक उन्हें खुद ही ऩैदा हुआ था । भुहल्रे की सखी-सहे री जो घय ऩय आमा कयती थी. अऩनी प्रछतऻा ऩय दृढ़ यहा । जफ मवाधीन बायत का इछतहास लरखा जामेगा. उस भें ऩढ़ना-लरखना कयतीॊ । ऩरयश्रभ के पर से थो़िे ददनों भें ही वह दे वनागयी ऩुमतकों का अवरोकन कयने रगीॊ । भेयी फहनों की िोटी आमु भें भाता जी ही उन्हें लशऺा ददमा कयती थीॊ । जफ भैंने आमा-सभाज भें प्रवेश फकमा. तफ से भाता जी से खूफ वातााराऩ होता । उस सभम की अऩेऺा अफ उनके पवचाय बी कुि उदाय हो गए हैं । मदद भु े ऐसी भाता न लभरती तो भैं बी अछत साधायण भनुष्मों की बाॊछत सॊसाय चक्र भें पॊसकय जीवन छनवााह कयता । लशऺादद के अछतरयक्त क्रास्न्तकायी जीवन भें बी उन्होंने भेयी वैसी ही सहामता की है .1 भेयी भाॉ o 1.2 भेये गुरुदे व o 1. जैसी भेस्जनी को उनकी भाता ने की थी । मथासभम भैं उन सायी फातों का उल्रेख करूॊगा । भाताजी का सफसे फ़िा आदे श भेये लरए मह था फक फकसी की प्राण हाछन न हो । उनका कहना था फक अऩने शरु को बी कबी प्राण दण्ड न दे ना । उनके इस आदे श की ऩूछता के लरए भु े भजफूयन दो-एक फाय अऩनी प्रछतऻा बॊग बी कयनी ऩ़िी थी । जन्भदारी जननी ! इस ददशा भें तो तुम्हाया ऋण-ऩरयशोध कयने के प्रमत्न का अवसय न लभरा । इस जन्भ भें तो क्मा मदद अनेक जन्भों भें बी साये जीवन प्रमत्न करूॉ तो बी भैं तुभ से उऋण नहीॊ हो सकता । स्जस प्रेभ तथा दृढ़ता के साथ तुभने इस तुच्ि जीवन का सुधाय फकमा है . तो फहुत . फकन्तु भाता जी मही कहतीॊ फक लशऺा ऩा चुकने के फाद ही पववाह कयना उधचत होगा । भाता जी के प्रोत्साहन तथा सद्व्मवहाय ने भेये जीवन भें वह दृढ़ता प्रदान की फक फकसी आऩस्त्त तथा सॊकट के आने ऩय बी भैंने अऩने सॊकल्ऩ को न त्मागा । बफस्मभर प्रथभ खण्ड-1 Contents [hide]  1 प्रथभ खण्ड o 1.

क्मोंफक आऩके दादा भहायाजा यणजीत लसॊह के भॊबरमों भें से एक थे । आऩके जन्भ के कुि सभम ऩ्‍चात श आऩकी भाता का दे हान्त हो गमा था । आऩकी दादी जी ने ही आऩका ऩारन-ऩोषण फकमा था । आऩ अऩने पऩता की अकेरी सन्तान थे । जफ आऩ फढ़े तो चाधचमों ने दो-तीन फाय आऩको जहय दे कय भाय दे ने का प्रमत्न फकमा. ताफक उनके ऱिकों को ही जामदाद का अधधकाय लभर जाम । आऩके चाचा आऩ ऩय फ़िा मनेह यखते थे औय लशऺादद की ओय पवशेष ध्मान यखते थे । अऩने चचेये बाईमों के साथ-साथ आऩ बी अॊग्रेजी मकूर भें ऩढ़ते थे । जफ आऩने एण्ने न्स की ऩयीऺा दी तो ऩयीऺा पर प्रकालशत होने ऩय आऩ मूछनवलसाटी भें प्रथभ आमे औय चाचा के ऱिके पेर हो गमे । घय भें फ़िा शोक भनामा गमा । ददखाने के लरए बोजन तक नहीॊ फना । आऩकी प्रशॊसा तो दयू . जो श्रीमुत अफुर कराभ आजाद के फ़िे बाई थे. मह सफ मवप्न है " । इन्हीॊ शब्दों को ऩढ़कय डडप्टी कलभ्‍नय कहता फक हभ तुम्हाया कुि नहीॊ कय सकते । मवाभी सोभदे व भ्रभण कयते हुए फम्फई ऩहुॊचे । वहाॊ ऩय आऩके उऩदे शों को सुनकय जनता ऩय फ़िा प्रबाव ऩ़िा । एक व्मस्क्त. उस सभम आऩ राहौय भें थे । वहाॊ आऩने एक सभाचाय-ऩर की सम्ऩादकी के लरए डडक्रेयेशन दाखखर फकमा । डडप्टी कलभ्‍नय उस सभम फकसी के बी सभाचायऩर के डडक्रेयेशन को मवीकाय न कयता था । जफ आऩसे बें ट हुई तो वह फ़िा प्रबापवत हुआ औय उसने डडक्रेयेशन भॊजूय कय लरमा । अखफाय का ऩहरा ही अग्ररेख 'अॊग्रेजों को चेतावनी' के नाभ से छनकरा । रेख इतना उत्तेजनाऩूणा था फक थो़िी दे य भें ही सभाचाय ऩर की सफ प्रछतमाॊ बफक गईं औय जनता के अनुयोध ऩय उसी अॊक का दस ू या सॊमकयण प्रकालशत कयना ऩ़िा । डडप्टी कलभ्‍नय के ऩास रयऩोटा हुई । उसने आऩको दशानाथा फुरामा । वह फ़िा क्रुद्ध था । रेख को ऩढ़कय काॊऩता. इस घटना से आऩके जीवन को औय बी फ़िा आघात ऩहुॉचा । चाचाजी के कहने-सुनने ऩय कालरज भें नाभ लरख तो लरमा. अॊधेया कापी हो गमा था । मवाभी जी ने फ़िी गहयी ठॊ डी साॊस री । भैने चेहये की ओय दे खा तो आॊखों से आॊसू फह यहे थे । भु े फ़िा आ्‍चमा हुआ । भैने कई घण्टे प्राथाना की. तफ चाचाजी ने ऩूिा तो भारूभ हुआ फक वे नमे कऩ़िे छनधान पवद्माधथामों को फाॊट ददमा कयते हैं । चाचाजी ने कहा फक जफ कऩ़िे फाॉटने की इच्िा हो तो कह ददमा कयो. अऩने कऩ़िे न फाॊटा कयो । आऩ फहुत छनधान पवद्माधथामों को अऩने घय ऩय ही बोजन कयामा कयते थे । चाधचमों तथा चचाजात बाईमों के व्मवहाय से आऩको फ़िा क्रेश होता था । इसी कायण से आऩने पववाह न फकमा । घये रू दव्ु मावहाय से दख कय लरमा औय एक यात को जफ सफ सो यहे थे. तफ आऩने उऩयोक्त पववयण सुनामा । . हभ पवद्माधथामों को कऩ़िे फनवा ददमा कयें गे. उनकी यभखणमों की फेइज्जती हो इत्मादद । फकन्तु मह सफ मवप्न है . फकन्तु फ़िे उदासीन यहने रगे । आऩके रृदम भें दमा फहुत थी । फहुधा अऩनी फकताफें तथा कऩ़िे दस ू ये सहऩादठमों को फाॉट ददमा कयते थे । एक फाय चाचाजी से दस ू ये रोगों ने कहा फक िजरार को कऩ़िे बी आऩ नहीॊ फनवा दे ते. औय क्रोध भें आकय भेज ऩय हाथ दे भायता था । फकन्तु अॊछतभ शब्दों को ऩढ़कय चुऩ हो जाता । उस रेख के कुि शब्द मों थे फक "मदद अॊग्रेज अफ बी न सभ ेंगे तो वह ददन दयू नहीॊ फक सन श 1857 के दृ्‍म फपय ददखाई दें औय अॊग्रेजों के फच्चों को कत्र फकमा जाम. औय सापा फाॊधते थे । श्रीमुत अफुर कराभ आजाद के ऩूवज ा अयफ के छनवासी थे । आऩके पऩता के फम्फई भें फहुत से भुयीद थे औय कथा की तयह कुि धालभाक ग्रन्थ ऩढ़ने ऩय हजायों रुऩमे चढ़ावे भें आमा कयते थे । वह सज्जन इतने भोदहत हो गए फक उन्होंने धालभाक कथाओॊ का ऩाठ कयने के लरए जाना ही िो़ि ददमा । वह ददन यात आऩके ऩास ही फैठे यहते । जफ आऩ उनसे कहीॊ जाने को कहते तो वह योने रगते औय कहते फक भैं तो आऩके आस्त्भक ऻान के उऩदे शों ऩय भोदहत हूॉ । भु े सॊसाय भें फकसी वमतु की इच्िा नहीॊ । आऩने एक ददन नायाज होकय उनको धीये से चऩत भाय दी स्जससे वे ददन-बय योते यहे । उनको घय वारों तथा लशष्मों ने फहुत सभ ामा फकन्तु वह धालभाक कथा कहने न जाते । मह दे खकय उनके भुयीदों को फ़िा क्रोध आमा फक हभाये धभागुरु एक काफपय के चक्कय भें पॉस गए हैं । एक सन्ध्मा को मवाभी जी अकेरे सभुद्र के तट ऩय भ्रभण कयने गमे थे फक कई भुयीद फन्दक ू रेकय मवाभीजी को भाय डारने के लरए भकान ऩय आमे । मह सभाचाय जानकय उन्होंने मवाभी के प्राणों का बम दे ख मवाभी जी से फम्फई िो़ि दे ने की प्राथाना की । प्रात्कार एक मटे शन ऩय मवाभी जी को ताय लभरा फक आऩके प्रेभी श्रीमुत अफुरकराभ आजाद के बाई साहफ ने आत्भहत्मा कय री । ताय ऩढ़कय आऩको फ़िा क्रेश हुआ । स्जस सभम आऩको इन फातों का मभयण हो आता था तो फ़िे द्ु खी होते थे । भैं एक सन्ध्मा के सभम आऩके छनकट फैठा था. आऩका व्माख्मान सुनकय भोदहत हो गमे । वह आऩको अऩने घय रे गमे । इस सभम तक आऩ गेरुआ कऩ़िा न ऩहनते थे । केवर एक रुॊगी औय कुताा ऩहनते थे. जो वह ऩुयाने पटे -कऩ़िे ऩहने फपयता है । चाचाजी को फ़िा आ्‍चमा हुआ क्मोंफक उन्होंने कई जो़िे कऩ़िे थो़िे ददन ऩहरे ही फनवामे थे । आऩके सन्दक ू ों की तराशी री गई । उनभें दो-चाय जो़िी ऩुयाने कऩ़िे छनकरे. वह प्राप्त हो गई । उसी मथान ऩय यहकय श्री िजरार ने मोग-पवद्मा की ऩूणा लशऺा ऩाई । मोधगयाज की कृऩा से आऩ 15-20 घण्टे की सभाधध रगा रेने रगे । कई वषा तक आऩ वहाॉ यहे । इस सभम आऩको मोग का इतना अभ्मास हो गमा था फक अऩने शयीय को आऩ इतना हल्का कय रेते थे फक ऩानी ऩय ऩ् ृ वी के सभान चरे जाते थे । अफ आऩको दे श भ्रभण का अध्ममन कयने की इच्िा हुई । अनेक मथानों से भ्रभण कयते हुए अध्ममन कयते यहे । जभानी तथा अभेरयका से फहुत सी ऩुमतकें भॊगवाई जो शामरों के सम्फन्ध भें थीॊ । जफ रारा राजऩतयाम को दे श-छनवाासन का दण्ड लभरा था. चुऩचाऩ उठकय घय से छनकर श ु ी होकय आऩने घय त्माग दे ने का छनशचम गमे । कुि साभान साथ भें लरमा । फहुत ददनों तक इधय-उधय बटकते यहे । बटकते-बटकते आऩ हरयद्वाय ऩहुॉचे । वहाॉ एक लसद्ध मोगी से बें ट हुई । श्री िजरार को स्जस वमतु की इच्िा थी. फकसी ने उस ददन बोजन कयने को बी न ऩूिा औय फ़िी उऩेऺा की दृस्ष्ट से दे खा । आऩका रृदम ऩहरे से ही घामर था.हपषात हुई थी औय गुरु के नाभ ऩय धभा यऺाथा अऩने ऩुरों के फलरदान ऩय लभठाई फाॉटी थी । जन्भदारी ! वय दो फक अस्न्तभ सभम बी भेया रृदम फकसी प्रकाय पवचलरत न हो औय तुम्हाये चयण कभरों को प्रणाभ कय भैं ऩयभात्भा का मभयण कयता हुआ शयीय त्माग करूॉ । [edit]भेये गुरुदे व भाता जी के अछतरयक्त जो कुि जीवन तथा लशऺा भैंने प्राप्त की वह ऩूज्मऩाद श्री मवाभी सोभदे व जी की कृऩा का ऩरयणाभ है । आऩका नाभ श्रीमुत िजरार चौऩ़िा था । ऩॊजाफ के राहौय शहय भें आऩका जन्भ हुआ था । आऩका कुटुम्फ प्रलसद्ध था.

जो इतने फ़िे भहानुबाव को पाॊसी की सजा का हुक्भ दे ददमा । भैंने प्रछतऻा की फक इसका फदरा अव्‍म रूॊगा । जीवन-बय अॊग्रेजी याज्म को पवध्वॊस कयने का प्रमत्न कयता यहूॊगा । इस प्रकाय की प्रछतऻा कय चुकने के ऩ्‍चात श भैं मवाभीजी के ऩास आमा । सफ सभाचाय सुनाए औय अखफाय ददमा । अखफाय ऩढ़कय मवाभीजी बी फ़िे दखु खत हुए । तफ भैंने अऩनी प्रछतऻा के सम्फन्ध भें कहा । मवाभीजी कहने रगे फक प्रछतऻा कयना सयर है . फकन्तु ऩयभहॊ स याभकृष्ण. स्जनको सुर ाने वारा कोई न लभरेगा । मदद मह शयीय नष्ट न हुआ. तफ आऩको खून धगयता था । कबी दो िटाॊक.अॊग्रेजी की मोग्मता आऩकी फ़िी उच्चकोदट की थी । आऩका शामर पवषमक ऻान फ़िा गम्बीय था । आऩ फ़िे छनबीक वक्ता थे । आऩकी मोग्मता को दे खकय एक फाय भद्रास की काॊग्रेस कभेटी ने आऩको अखखर बायतवषीम काॊग्रेस का प्रछतछनधध चुनकय बेजा था । आगया की आमालभर-सबा के वापषाकोत्सव ऩय आऩके व्माख्मानों को श्रवण कय याजा भहे न्द्रप्रताऩ बी फ़िे भुग्ध हुए थे । याजा साहफ ने आऩके ऩैय िुए औय आऩको अऩनी कोठी ऩय लरवा रे गए । उस सभम से याजा साहफ फहुधा आऩके उऩदे श सुना कयते औय आऩको अऩना गुरु भानते थे । इतना साप छनबीक फोरने वारा भैंने आज तक नहीॊ दे खा । सन श 1913 ई. फकन्तु आऩ इतने दफ ु ार हो गए थे फक जया-सा ऩरयश्रभ कयने मा दस-फीस कदभ चरने ऩय ही आऩको फेहोशी आ जाती थी । आऩ फपय कबी इस मोग्म न हो सके फक कुि दे य फैठ कय कुि फक्रमाऐॊ भु े फता सकते । आऩने कहा था. कबी चाय िटाॊक औय कबी कबी तो एक सेय तक खून धगय जाता था । फवासीय आऩको नहीॊ थी । ऐसा कहते थे फक फकसी प्रकाय मोग की फक्रमा बफग़ि जाने से ऩेट की आॊत भें कुि पवकाय उत्ऩन्न हो गमा । आॉत स़ि गई । ऩेट धचयवाकय आॉत कटवानी ऩ़िी औय तबी से मह योग हो गमा था । फ़िे-फ़िे वैद्म-डाक्टयों की औषधध की फकन्तु कुि राब न हुआ । इतने कभजोय होने ऩय बी जफ व्माख्मान दे ते तफ इतने जोय से फोरते फक तीन-चाय पराांग से आऩका व्माख्मान साप सुनाई दे ता था । दो-तीन वषा तक आऩको हय सार आमासभाज के वापषाकोत्सव ऩय फुरामा जाता । सन श 1915 ई० भें कछतऩम सज्जनों की प्राथाना ऩय आऩ आमासभाज भस्न्दय शाहजहाॉऩुय भें ही छनवास कयने रगे । इसी सभम से भैंने आऩकी सेवा-सुश्रुषा भें सभम व्मतीत कयना आयम्ब कय ददमा । मवाभीजी भु े धालभाक तथा याजनैछतक उऩदे श दे ते थे औय इसी प्रकाय की ऩुमतकें ऩढ़ने का बी आदे श कयते थे । याजनीछत भें बी आऩका ऻान उच्च कोदट का था । रारा हयदमार का आऩसे फहुत ऩयाभशा होता था । एक फाय भहात्भा भुॊशीयाभ जी (मवगीम मवाभी श्रद्धानन्द जी) को आऩने ऩुलरस के प्रकोऩ से फचामा । आचामा याभदे व जी तथा श्रीमुत कृष्णजी से आऩका फ़िा मनेह था । याजनीछत भें आऩ भु े अधधक खुरते न थे । आऩ भु से फहुधा कहा कयते थे फक एण्नें स ऩास कय रेने के फाद मूयोऩ मारा अव्‍म कयना । इटरी जाकय भहात्भा भेस्जनी की जन्म्बूलभ के दशान अव्‍म कयना । सन श 1916 ई० भें राहौय षड्मॊर का भाभरा चरा । भैं सभाचाय ऩरों भें उसका सफ वत्ृ ताॊत फ़िे चाव से ऩढ़ा कयता था । श्रीमुत बाई ऩयभानन्द से भेयी फ़िी श्रद्धा थी. तफ आऩने भु े मोगाभ्मास सम्फन्धी कुि फक्रमाएॊ फताने की इच्िा प्रकट की. अऺयश् सत्म हुईं । आऩ कहा कयते थे फक द्ु ख है फक मह शयीय न यहे गा औय तेये जीवन भें फ़िी पवधचर-पवधचर सभममाएॉ आमेंगीॊ. क्मोंफक उनकी लरखी हुई 'तवायीख दहन्द' ऩढ़कय भेये रृदम ऩय फ़िा प्रबाव ऩ़िा था । राहौय षड्मॊर का पैसरा अखफायों भें िऩा । बाई ऩयभानन्द जी को पाॊसी की सजा ऩढ़कय भेये शयीय भें आग रग गई । भैंने पवचाया फक अॊग्रेज फ़िे अत्माचायी हैं . जो असम्बव है . मवाभी याभतीथा तथा भहात्भा कफीयदास के उऩदे शों का वणान प्राम् फकमा कयते थे । धालभाक तथा आस्त्भक जीवन भें जो दृढ़ता भु भें उत्ऩन्न हुई. तो तेया जीवन बी सॊसाय भें एक आदशा जीवन होगा । भेया दब ु ााग्म था फक जफ आऩके अस्न्तभ ददन फहुत छनकट आ गए. मवाभी पववेकानन्द. भेया मोग भ्रष्ट हो गमा । प्रमत्न करूॊगा. भें भैंने आऩका ऩहरा व्माख्मान शाहजहाॉऩुय भें सुना था । आमासभाज के वापषाकोत्सव ऩय आऩ ऩधाये थे । उस सभम आऩ फये री भें छनवास कयते थे । आऩका शयीय फहुत कृश था. वैसे ही आऩ रेखक बी थे । आऩके कुि रेख तथा ऩुमतकें आऩके एक बक्त के ऩास थीॊ जो मों ही नष्ट हो गईं। कुि रेख आऩने प्रकालशत बी कयाए थे । रगबग 57 वषा की उम्र भें आऩने इहरोक त्माग ददमा । इस मथान ऩय भैं भहात्भा कफीयदास के कुि अभत ृ वचनों का उल्रेख कयता हूॉ जो भु े फ़िे पप्रम तथा लशऺाप्रद भारूभ हुए – 'कबफयम' ियीय सयमम है बमडम दे के फस । जफ बर्िममयी खुि यहै तफ जीवन कम यस ॥१॥ . फकन्तु उस ऩय दृढ़ यहना कदठन है । भैंने मवाभीजी को प्रणाभ कय उत्तय ददमा फक मदद श्रीचयणों की कृऩा फनी यहे गी तो प्रछतऻा ऩूछता भें फकसी प्रकाय की रुदट न करूॊगा । उस ददन से मवाभीजी कुि-कुि खुरे । आऩ फहुत-सी फातें फतामा कयते थे । उसी ददन से भेये क्रास्न्तकायी जीवन का सूरऩात हुआ । मद्मपऩ आऩ आमासभाज के लसद्धान्तों को सवाप्रकाये ण भानते थे. वह मवाभीजी भहायाज के सदऩ ु दे शों का ही ऩरयणाभ हैं । आऩकी दमा से ही भैं िह्भचमा-ऩारन भें सपर हुआ । आऩने भेये बपवष्म-जीवन के सम्फन्ध भें जो-जो फातें कहीॊ थीॊ. भु से ऩूि रेना फक भैं कहाॉ जन्भ रूॊगा । सम्बव है फक भैं फता सकूॉ । छनत्म-प्रछत सेय-आध-सेय खून धगय जाने ऩय बी आऩ कबी बी ऺुब्ध न होते थे । आऩकी आवाज बी कबी कभजोय न हुई । जैसे अद्पवतीम आऩ वक्ता थे. क्मोंफक आऩको एक अजीफ योग हो गमा था । आऩ जफ शौच जाते थे . भयण सभम ऩास यहना. इनके याज्म भें न्माम नहीॊ.

तो ऩरयस्मथछतमाॉ स्जनभें उसे छनवााह कयना ऩ़िता है . उसे सुधयने नहीॊ दे तीॊ । वे पवचायते हैं फक थो़िा सा .'कबफयम' ऺुधम है कूकयी कयत बजन भें बॊग । ममको टुकयम डमरय के सुशभयन कयो ननिॊक ॥२॥ नीॊद ननसमनी नीच की उट्ठ 'कबफयम' जमग । औय यसममन त्ममग के नमभ यसमम चमख ॥३॥ चरनम है यहनम नहीॊ चरनम बफसवें फीस । 'कबफयम' ऐसे सुहमग ऩय कौन फॉधमवे सीस ॥४॥ अऩने अऩने चोय को सफ कोई डमये भमरय । भेयम चोय जो भोर्हॊ शभरे सयवस डमरॉ वमरय ॥५॥ कहे सुने की है नहीॊ दे खम दे खी फमत । दल् ू हम दल्ु ल्हन शभशर गए सूनी ऩयी फयमत ॥६॥ नैनन की करय कोियी ऩुतयी ऩरॉ ग बफछमम । ऩरकन की चचक डमरय के ऩीतभ रेहु रयझमम ॥७॥ प्रेभ पऩममरम जो पऩमे सीस दल्छछनम दे म । रोबी सीस न दै सके. मे नौकय फच्चों को नष्ट कयते हैं । मदद कुि बगवान की दमा हो गई. वे उन्हें फनावें ! भध्मभ श्रे णी के व्मस्क्त बी अऩने व्मवसाम तथा नौकयी इत्मादद भें पॉसे होने के कायण सन्तान की ओय अधधक ध्मान नहीॊ दे सकते । समता काभचराऊ नौकय मा नौकयानी यखते हैं औय उन्हीॊ ऩय फार-फच्चों का बाय सौंऩ दे ते हैं. औय फच्चे नौकय-नौकयाछनमों के हाथ से फच गए तो भुहल्रे की गन्दगी से फचना फ़िा कदठन है । यहे -सहे मकूर भें ऩहुॉचकय ऩायॊ गत हो जाते हैं । कालरज ऩहुॉचते-ऩहुॉचते आजकर के नवमुवकों के सोरहों सॊमकाय हो जाते हैं । कालरज भें ऩहुॉचकय मे रोग सभाचाय-ऩरों भें ददए औषधधमों के पवऻाऩन दे ख-दे खकय दवाइमों को भॉगा-भॉगाकय धन नष्ट कयना आयम्ब कयते हैं । 95 प्रछतशत की आॉखें खयाफ हो जाती हैं । कुि को शायीरयक दफ ु ारता तथा कुि को पैशन के पवचाय से ऐनक रगाने की फुयी आदत ऩ़ि जाती है शामद ही कोई पवद्माथी ऐसा हो स्जसकी प्रेभ-कथा कथामें प्रचलरत न हों । ऐसी अजीफ-अजीफ फातें सुनने भें आती हैं फक स्जनका उल्रेख कयने से बी ग्राछन होती है । मदद कोई पवद्माथी सच्चरयर फनने का प्रमास बी कयता है औय मकूर मा कालरज भें उसे कुि अच्िी लशऺा बी लभर जाती है . नमभ प्रेभ कम रेम ॥८॥ सीस उतमये बुॉइ धयै तमऩे यमखै ऩमॉव । दमस 'कबफयम' मूॊ कहे ऐसम होम तो आव ॥९॥ ननन्दक ननमये यमखखमे आॉखन कुई छफमम । बफन ऩमनी समफुन बफनम उज्जवर कये सुबमम ॥१०॥ [edit]ब्रह्भचमा व्रत कम ऩमरन वताभान सभम भें इस दे श की कुि ऐसी दद ु ा शा हो यही है फक स्जतने धनी तथा गणभान्म व्मस्क्त हैं उनभें 99 प्रछतशत ऐसे हैं जो अऩनी सन्तान-रूऩी अभूल्म धनयालश को अऩने नौकय तथा नौकयाछनमों के हाथ भें सौंऩ दे ते हैं । उनकी जैसी इच्िा हो.

याभकृष्ण. बीष्भ. मा जो फुयी सॊगत भें ऩ़िकय अऩना आचयण बफगा़ि रेते हैं औय फपय अच्िी लशऺा ऩाने ऩय आचयण सुधायने का प्रमत्न कयते हैं ." तात्ऩमा मह है फक फक मदद एक सभम कोई फात ऩैदा हुई. भानो सदा के लरए यामता खुर गमा । दवाईमाॉ कोई राब नहीॊ ऩहुॉचाती । अण्डों का जूस. ऩुन् सो जावे । सदै व खुरी हवा भें सोना चादहमे । फहुत भुरामभ औय धचकने बफमतय ऩय न सोवे । जहाॉ तक हो सके. फान है । अभ्मास अच्िे औय फुये दोनों प्रकाय के होते हैं । मदद हभाये भन भें छनयन्तय अच्िे पवचाय उत्ऩन्न हों. तो फकतनी कदठनता प्रतीत हो । इसी प्रकाय फारक का ख़िा होना औय चरना बी है फक उस सभम वह फकतना कष्ट अनुबव कयता है . तो उनका पर अच्िे अभ्मास होंगे औय मदद फुये पवचायों भें लरप्त यहे . अथाात श भाता-पऩता के अभ्मासों के अनुकयण ही फच्चों के अभ्मास का सहामक होता है । दस है . तो हभाया जीवन फ़िा दख ु भम प्रतीत होता । लरखने का अभ्मास. शुष्क भेवा. दमानन्द तथा याभभूछता की जीवछनमों का अध्ममन कयो । स्जन पवद्माधथामों को फाल्मावमथा भें कुटे व की फान ऩ़ि जाती है . 'अभ्मास' कहते हैं । भानवी चरयर इन्हीॊ अभ्मासों द्वाया फनता है । अभ्मास से तात्ऩमा आदत. रक़िी के तख्त ऩय कम्फर मा गाढ़े कऩ़िे की चद्दय बफिाकय सोवे । अधधक ऩाठ न कयना हो तो 9 मा 10 फजे सो जावे । प्रात्कार 3 मा 4 फजे उठकय कुल्रा कयके शीतर जरऩान कये औय शौच से छनवत ृ . तो छन्‍चम रूऩेण अभ्मास फुये होंगे । भन इच्िाओॊ का केन्द्र है । उन्हीॊ की ऩूछता के लरए भनुष्म को प्रमत्न कयना ऩ़िता है । अभ्मासों के फनने भें ऩैतक ू ये . फासी तथा उत्तेजक ऩदाथों का त्माग कये । प्माज. खट्टे गरयष्ट. ऩयन्तु सपर भनोयथा नहीॊ होते. भाॊस आदद ऩदाथा बी व्मथा लसद्ध होते हैं । सफसे आव्‍मक फात चरयर सुधायना ही होती है । पवद्माधथामों तथा उनके अध्माऩकों को उधचत है फक वे दे श की दद ु ा शा ऩय दमा कयके अऩने चरयर को सुधायने का प्रमत्न कयें । साय भें िह्भचमा ही सॊसायी शस्क्तमों का भूर है । बफन िह्भचमा-व्रत ऩारन फकए भनुष्म-जीवन छनतान्त शुष्क तथा नीयस प्रतीत होता है । सॊसाय भें स्जतने फ़िे आदभी हैं .जीवन का आनन्द रे रें . रार लभचा. चयऩये . मवबाव. आभ की खटाई औय अधधक भसारेदाय बोजन कबी न खावे । सास्त्वक बोजन कये । शुष्क बोजन का बी त्माग कये । जहाॉ तक हो सके सब्जी अथाात श साग अधधक खावे । बोजन खूफ चफा-चफा कय फकमा कये । अधधक गयभ मा अधधक ठॊ डा बोजन बी वस्जात है । मकूर अथवा कालरज से आकय थो़िा-सा आयाभ कयके एक घण्टा लरखने का काभ कयके खेरने के लरए जावे । भैदान भें थो़िा घूभे बी । घूभने के लरए चौक फाजाय की गन्दी हवा भें जाना ठी क नहीॊ । मवच्ि वामु का सेवन कयें । सॊध्मा सभम बी शौच अव्‍म जावे । थो़िा सा ध्मान कयके हल्का सा बोजन कय रें । मदद हो सके तो याबर के सभम केवर दग्ु ध ऩीने का अभ्मास डार रें मा पर खा लरमा कयें । मवप्नदोषादद व्माधधमाॊ केवर ऩेट के बायी होने से ही होती हैं । स्जस ददन बोजन बरी बाॊछत नहीॊ ऩचता. मह शस्क्त इतनी प्रफर हो सकती है फक इसके द्वाया भनुष्म ऩैतक ृ सॊसाय तथा ऩरयस्मथछतमों को बी जीत सकता है । हभाये जीवन का प्रत्मेक कामा अभ्मासों के अधीन है । मदद अभ्मासों द्वाया हभें कामा भें सुगभता न प्रतीत होती. भिरी. दग्ु ध अथवा सफसे उत्तभ मह है फक गेहूॉ का दलरमा यॊ धवाकय मथारुधच भीठा मा नभक डारकय खावे । फपय अध्ममन कये औय दस फजे से ग्मायह फजे के भध्म भें बोजन रे । बोज भें भाॊस. स्जन्हें फयाफय ि् घॊटे चरना होता है . कृष्ण. रहसुन. उधचत है फक अऩनी ददनचमाा छनस््‍चत कये । खान-ऩानादद का पवशेष ध्मान यखे । भहात्भाओॊ के जीवनचरयर तथा चरयर-सॊगठन सॊफन्धी ऩुमतकों का अवरोकन कये । प्रेभाराऩ तथा उऩन्मासों से सभम नष्ट न कये । खारी सभम अकेरा न फैठे । स्जस सभम कोई फुये पवचाय उत्ऩन्न हों. फकन्तु एक भनुष्म भीरों तक चरा जाता है । फहुत रोग तो चरते-चरते नीॊद बी रे रेते हैं । जैसे जेर भें फाहयी दीवाय ऩय घ़िी भें चाफी रगाने वारे. ईसा. उन्हें बी छनयाश न होना चादहए । भनुष्म-जीवन अभ्मासों का एक सभूह है । भनुष्म के भन भें लबन्नलबन्न प्रकाय के अनेक पवचाय तथा बाव उत्ऩन्न होते यहते हैं । फक्रमा के फाय-फाय होने से उसभें ऐस्च्िक बाव छनकर जाता है औय उसभें तात्कालरक प्रेयणा उत्ऩन्न हो जाती है । इन तात्कालरक प्रेयक फक्रमाओॊ की. मदद कुि खयाफी ऩैदा हो गई तो दवाई खाकय मा ऩौस्ष्टक ऩदाथों का सेवन कयके दयू कय रें गे । मह उनकी फ़िी बायी बूर है । अॊग्रेजी की कहावत है "Only for one and for ever. शेयों तथा गानों को न ऩढ़ें औय न सुने । स्मरमों के दशान से फचता यहे । भाता तथा फहन से बी एकान्त भें न लभरे । सुन्दय सहऩादठमों मा अन्म पवद्माधथामों से मऩशा तथा आलरॊगन की बी आदत न डारे। पवद्माथी प्रात्कार सूमा उदम होने से एक घण्टा ऩहरे शैमा त्मागकय शौचादद से छनवत ृ हो व्मामाभ कये मा वामु-सेवनाथा फाहय भैदान भें जावे । सूमा उदम होने के ऩाॉच-दस लभनट ऩूवा मनान से छनवत ृ होकय मथा-पव्‍वास ऩयभात्भा का ध्मान कये । सदै व कुऐॊ के ताजे जर से मनान कये । मदद कुऐॊ का जर प्राप्त हो तो जा़िों भें जर को थो़िा-सा गुनगुना कय रें औय गलभामों भें शीतर जर से मनान कये । मनान कयने के ऩ्‍चात श एक खुयखुये तौलरमे मा अॊगोिे से शयीय खूफ भरे । उऩासना के ऩ्‍चात श थो़िा सा जरऩान कये । कोई पर. भेस्जनी फॊदा. वे फहुधा चरते-चरते सो लरमा कयते हैं । भानलसक बावों को शुद्ध यखते हुए अन्त्कयण को उच्च पवचायों भें फरऩूवाक सॊरग्न कयने का अभ्मास कयने से अव्‍म सपरता लभरेगी । प्रत्मेक पवद्माथी मा नवमुवक को. उनभें से अधधकतय िह्भचमा-व्रत के प्रताऩ से फ़िे फने औय सैंक़िों-हजायों वषा फाद बी उनका मशगान कयके भनुष्म अऩने आऩको कृताथा कयते हैं । िह्भचमा की भदहभा मदद जानना हो तो ऩयशुयाभ. याभ. जैसी ऩरयस्मथमों भें छनवास होता ृ सॊमकाय. जो फक िह्भचमा के ऩारन की इच्िा यखता है . जो ऩुनयावस्ृ त्त का पर है . प्रमत्न से बी अभ्मासों का छनभााण होता है . रक्ष्भण. वैसे ही अभ्मास बी ऩ़िते हैं । तीसये . तुयन्त शीतर जरऩान कय घूभने रगे मा फकसी अऩने से फ़िे के ऩास जाकय फातचीत कयने रगे । अ्‍रीर (इ्‍कबयी) गजरों. वमर ऩहनना. उसी ददन पवकाय हो जाता है मा भानलसक बावनाओॊ की अशुद्धता से छनद्रा ठी क न आकय मवप्नावमथा भें वीमाऩात हो जाता है । याबर के सभम साढ़े दस फजे तक ऩठन-ऩाठन कये . ऩठन-ऩाठन इत्मादद इनके प्रत्मऺ उदाहयण हैं । मदद हभें प्रायस्म्बक सभम की बाॉछत सदै व सावधानी से काभ रेना हो. भिरी के तेर.

उसभें बी फ़िे उत्साह से कामा फकमा । दस ू यों की सेवा का बाव रृदम भें उदम हुआ । कुि सभ भें आने रगा फक वामतव भें दे शवासी फ़िे द्ु खी हैं । उसी वषा भेये ऩ़िौसी तथा लभर स्जनसे भेया मनेह अधधक था. एण्नें स की ऩयीऺा ऩास कयके कालरज भें लशऺा ऩाने चरे गमे । कालरज की मवतॊर वामु भें रृदम भें बी मवदे श के बाव उत्ऩन्न हुए । उसी सार रखनऊ भें अखखर बायतवषीम काॊग्रेस का उत्सव हुआ । भैं बी उसभें सस्म्भलरत हुआ । कछतऩम सज्जनों से बें ट हुई । दे श-दशा का कुि अनुभान हुआ. अत्एव सयकाय को ऩरटने का प्रमत्न कयना चादहए । भैंने बी इसी प्रकाय के पवचायों भें मोग ददमा । काॊग्रेस भें भहात्भा छतरक के ऩधायने की खफय थी. व्मामाभ कय लरमा । मदद हो सके तो प्रोपेसय याभभूछता की पवधध से दण्ड-फैठक कयें । प्रोपेसय साहफ की पवधध पवद्माधथामों के लरए राबदामक है । थो़िे सभम भें ही ऩमााप्त ऩरयश्रभ हो जाता है । दण्ड-फैठक के अरावा शीषाासन औय ऩद्भासन का बी अभ्मास कयना चादहए औय अऩने कभये भें वीयों औय भहात्भाओॊ के धचर यखने चादहमें । बफस्मभर द्पवतीम खण्ड Contents [hide]  1 द्पवतीम खण्ड o 1.हो ऩठन-ऩाठन कयें । सूमोदम के छनकट फपय छनत्म की बाॊछत व्मामाभ मा भ्रभण कयें । सफ व्मामाभों भें दण्ड-फैठक सवोत्तभ है । जहाॉ जी चाहा.3 हधथमायों की खयीद o 1. का पवद्माथी भोटय के आगे रेट गए । सफ कुि सभ ामा गमा.7 ऩॊ० गें दारार दीषितऺत  2 सॊफधॊ धत कड़िमाॉ  3 फाहयी कडडमाॉ [edit]द्पवतीम [edit]स्थवदे ि खण्ड प्रेभ ऩूज्मऩाद श्रीमवाभी सोभदे व का दे हान्त हो जाने के ऩ्‍चात श जफ से अॊग्रेजी के नवें दजजे भें आमा. श्रीयाभ वाजऩेमी जी ने डारी. भगय फकसी की एक न सुनी । हभ रोगों की दे खादे खी औय कई नवमुवक बी भोटय के साभने आकय फैठ गए । उस सभम भेये उत्साह का मह हार था फक भुॉह से फात न छनकरती थी.1 मवदे श प्रेभ o 1. स्जसे वे उधचत न सभ ते थे । अत् उन सफने प्रफन्ध फकमा फक जैसे ही रोकभान्म छतरक ऩधायें . जगतनायामण जी थे । अन्म गणभान्म सदममों भें ऩॊ.4 भैनऩयु ी षड्मन्र o 1. उन्हें घेयकय गा़िी भें बफठा लरमा जाए औय सवायी छनकारी जाए । मऩेशर आने ऩय रोकभान्म सफसे ऩहरे उतये । मवागतकारयणी के सदममों ने काॊग्रेस के मवमॊसेवकों का घेया फनाकय रोकभान्म को भोटय भें जा बफठामा । भैं तथा एक एभ. केवर योता था औय कहता था.6 ऩरामनावमथा o 1. औय छन्‍चम हुआ फक दे श के लरए कोई पवशेष कामा फकमा जाए । दे श भें जो कुि हो यहा है उसकी उत्तयदामी सयकाय ही है । बायतवालसमों के द्ु ख तथा दद ु ा शा की स्जम्भेदायी गवनाभेंट ऩय ही है . उन्हें भोटय भें बफठाकय शहय के फाहय फाहय छनकार रे जाऐॊ । इन सफ फातों को सुनकय नवमुवकों को फ़िा खेद हुआ । कालरज के एक एभ. उन्होंने मवीकाय न फकमा । एक नवमुवक ने भोटय का टामय काट ददमा । रोकभान्मजी फहुत कुि सभ ाते फकन्तु वहाॉ सुनता कौन ? एक फकयामे की गा़िी से घो़िे खोरकय रोकभान्म के ऩैयों ऩय लसय यख उन्हें उसभें बफठामा औय सफने लभरकय हाथों से गा़िी खीॊचनी शुरू की । इस प्रकाय रोकभान्म का इस धूभधाभ से मवागत हुआ फक फकसी नेता की .5 पव्‍वासघात o 1. ए.2 क्राॊछतकायी आन्दोरन o 1. भोटय भेये ऊऩय से छनकार रे जाओ । मवागतकारयणी के सदममों ने काॊग्रेस के प्रधान को रे जाने वारी गा़िी भाॊगी. गोकयणनाथजी तथा अन्म उदाय दर वारों (भाडये टों) की सॊख्मा अधधक थी । भाडये टों को बम था फक मदद रोकभान्म की सवायी शहय भें छनकारी गई तो काॊग्रेस के प्रधान से बी अधधक सम्भान होगा.ए. कुि मवदे श सॊफन्धी ऩुमतकों का अवरोकन प्रायॊ ब हुआ । शाहजहाॉऩुय भें सेवा-सलभछत की नीॊव ऩॊ. के पवद्माथी ने इस प्रफन्ध का पवयोध कयते हुए कहा फक रोकभान्म का मवागत अव्‍म होना चादहए । भैंने बी इस पवद्माथी के कथन भें सहमोग ददमा । इसी प्रकाय कई नवमुवकों ने छन्‍चम फकमा फक जैसे ही रोकभान्म मऩेशर से उतयें . इस कायण से गयभ दर के अधधक व्मस्क्त आए हुए थे । काॊग्रेस के सबाऩछत का मवागत फ़िी धूभधाभ से हुआ था । उसके दस ू ये ददन रोकभान्म फार गॊगाधय छतरक की मऩेशर गा़िी आने का सभाचाय लभरा । रखनऊ मटे शन ऩय फ़िा जभाव था । मवागत कारयणी सलभछत के सदममों से भारूभ हुआ फक रोकभान्म का मवागत केवर मटे शन ऩय ही फकमा जामेगा औय शहय भें सवायी न छनकारी जाएगी । स्जसका कायण मह था फक मवागत कारयणी सलभछत के प्रधान ऩॊ.

सीधे जाकय दाभ दें गे औय रयवाल्वय रेकय चरे आमेंगे । प्रत्मेक दक ु ान दे खी. औय नमा-सा कयके हभाये हाथ फेचना शुरू फकमा । खूफ ठगा । हभ रोग कुि जानते नहीॊ थे । इस प्रकाय अभ्मास कयने से कुि नमा ऩुयाना सभ ने रगे । एक दस ू ये लसक्रीगय से बें ट हुई । वह मवमॊ कुि नहीॊ जानता था. तफ पवचाय हुआ फक एक ऩुमतक प्रकालशत की जामे औय उसभें जो राब हो उससे हधथमाय खयीदे जामें । ऩुमतक प्रकालशत कयने के लरए धन कहाॉ से आमे ? पवचाय कयते-कयते भु े एक चार सू ी । भैंने अऩनी भाता जी से कहा फक भैं कुि योजगाय कयना चाहता हूॉ.उतने जोयों से सवायी न छनकारी गई । रोगों के उत्साह का मह हार था फक कहते थे फक एक फाय गा़िी भें हाथ रगा रेने दो. स्जनभें मे रोग रयमासत की फनी हुई फारूद काभ भें राते हैं । मह फारूद फयसात भें सीर खा जाती है औय काभ नहीॊ दे ती । एक फाय भैं अकेरा रयवाल्वय खयीदने गमा । उस सभम सभ ता था फक हधथमायों की दक ु ान होगी. उनके लरए ये स्जडेंट (गवनाभेंट का प्रछतछनधध. फकन्तु उसने वचन ददमा फक वह कुि यईसों से हभायी बें ट कया दे गा । उसने एक यईस से भुराकात कयाई स्जसके ऩास एक रयवाल्वय था । रयवाल्वय खयीदने की हभने इच्िा प्रकट की । उस भहाशम ने उस रयवाल्वय के डेढ़ सौ रुऩमे भाॊगे । रयवाल्वय नमा था । फ़िा कहने सुनने ऩय सौ कायतूस उन्होंने ददमे औय 155 रुऩमे लरमे । 150 रुऩमे उन्होंने मवमॊ लरए. औय फन्दक ू इत्मादद ऩय राइसेंस नहीॊ होता । अतएव इस प्रकाय के अमर फ़िी सुगभता से प्राप्त हो सकते हैं । दे शी याज्मों भें हधथमायों ऩय कोई राइसेंस नहीॊ. स्जसका भुख्म उद्दे्‍म क्रास्न्तकायी आन्दोरन भें बाग रेना है । महीॊ से क्राॊछतकायी सलभछत की चचाा सुनकय कुि सभम फाद भैं बी क्राॊछतकायी सलभछत के कामा भें मोग दे ने रगा । अऩने एक लभर द्वाया बी क्राॊछतकायी सलभछत का सदमम हो गमा । थो़िे ही ददन भें भैं कामाकारयणी का सदमम फना लरमा गमा । सलभछत भें धन की फहुत कभी थी. गें दारार जी. इस कहावत के अनुसाय तथा इसलरए बी फक हभ रोगों को कोई दस ू या ऐसा जरयमा बी न था. जो घय ऩय सन्दक ू भें यखे-यखे फयसात भें सीर खाकय ऩानी ऩानी हो गई । भु े फ़िा द्ु ख हुआ । दस ू यी फाय जफ भैं क्रास्न्तकायी सलभछत का सदमम हो चुका था. कहीॊ फकसी ऩय फन्दक ू इत्मादद का पवऻाऩन मा कोई दस ू या छनशान न ऩामा । फपय एक ताॉगे ऩय सवाय होकय सफ शहय घूभा । ताॉगे वारे ने ऩूिा फक क्मा चादहए । भैंने उससे डयते-डयते अऩना उद्दे्‍म कहा । उसी ने दो-तीन ददन घूभ-घूभकय एक टोऩीदाय रयवाल्वय खयीदवा ददमा औय दे शी फनी हुई फारूद एक दक ु ान से ददरा दी । भैं कुि जानता तो था नहीॊ. औय दे शी फारूद बी वहीॊ के रोग शोया. स्जस ऩय कायतूस मा कायतूसी हधथमाय लभर सकें । महाॉ तक फक पवरामती फारूद औय फॊदक ू की टोऩी बी नहीॊ लभरती. भैंने भाता जी से 200 रुऩमे औय रे लरमे । ऩुमतक की बफक्री हो जाने ऩय भाता जी के रुऩमे ऩहरे चुका ददमे । रगबग 200 रुऩमे औय बी फचे । ऩुमतकें अबी बफकने के लरए फहुत फाकी थी । उसी सभम 'दे शवालसमों के नाभ सॊदेश' नाभक एक ऩचाा िऩवामा गमा. कटाय तथा दो-चाय टोऩीदाय फन्दक ू ें यखी दे खीॊ । दाभ ऩूिे । इसी प्रकाय वातााराऩ कयके ऩूिा फक क्मा आऩ कायतूसी हधथमाय नहीॊ फेचते मा औय कहीॊ नहीॊ बफकते? तफ उसने सफ पववयण सुनामा । उस सभम उसके ऩास टोऩीदाय एक नरी के िोटे -िोटे दो पऩमतौर थे । भैंने वे दोनों खयीद लरमे । एक कटाय बी खयीदी । उसने वादा फकमा फक मदद आऩ फपय आमें तो कुि कायतूसी हधथमाय जुटाने का प्रमत्न फकमा जामे । रारच फुयी फरा है . िह्भचायी जी के दर सदहत ग्वालरमय भें धगयफ्ताय हो गमे थे । अफ सफ पवद्माधथामों ने अधधक उत्साह के साथ काभ कयने की प्रछतऻा की । ऩचजे कई स्जरों भें रगामे गमे औय फाॊटे गए । ऩचजे तथा 'अभेरयका को मवाधीनता कैसे लभरी' ऩुमतक दोनों सॊमुक्त प्रान्त की सयकाय ने जब्त कय लरमे । [edit]हचथममयों की खयीद अधधकतय रोगों का पवचाय है फक दे शी याज्मों भें हधथमाय (रयवाल्वय. औय हय एक को फॊदक ू इत्मादद यखने की आजादी बी है । फकन्तु कायतूसी हधथमाय फहुत कभ रोगों के ऩास यहते हैं. पऩमतौर तथा याइपरें इत्मादद) सफ कोई यखता है . जो रयमासतों भें यहता है ) की आऻा रेनी ऩ़िती है । बफना ये स्जडेण्ट की भॊजूयी के हधथमायों सॊफॊधी कोई चीज फाहय से रयमासत भें नहीॊ आ सकती । इस कायण इस खटखट से फचने के लरए रयमासत भें ही टोऩीदाय फॊदक ू ें फनती हैं . फकन्तु फ़िा ही उत्तभ था । दाभ उसके नमे के फयाफय दे ने ऩ़िे । अफ उसे पव्‍वास हो गमा फक मह हधथमायों के खयीदाय हैं । उसने प्राणऩण से चेष्टा की औय कई रयवाल्वय तथा दो-तीन याइपरें जुटाई । उसे बी अच्िा राब हो जाता था । प्रत्मेक वमतु ऩय वह फीस-फीस रुऩमे भुनापा रे रेता था । फाज-फाज चीज ऩय दन ू ा नपा खा रेता था । इसके फाद हभायी सॊमथा के दो-तीन सदमम लभरकय गमे । दक ु ानदाय ने बी हभायी उत्कट इच्िा को दे खकय इधय-उधय से ऩुयाने हधथमायों को खयीद कयके उनकी भयम्भत की. उसभें अच्िा राब होगा । मदद रुऩमे दे सकें तो फ़िा अच्िा हो । उन्होंने 200 रुऩमे ददमे । ’अभेरयका को मवाधीनता कैसे लभरी’ नाभक ऩुमतक लरखी जा चुकी थी । प्रकालशत होने का प्रफॊध हो गमा । थो़िे रुऩमे की जरूयत औय ऩ़िी. गन्धक तथा कोमरा लभराकय फना रेते हैं । फन्दक ू की टोऩी चुया-छिऩाकय भॉगा रेते हैं । नहीॊ तो टोऩी के मथान ऩय बी भनसर औय ऩुटाश अरग-अरग ऩीसकय दोनों को लभराकय उसी से काभ चराते हैं । हधथमाय यखने की आजादी होने ऩय बी ग्राभों भें फकसी एक-दो धनी मा जभीॊदाय के महाॉ टोऩीदाय फॊदक ू मा टोऩीदाय िोटी पऩमतौर होते हैं . वहाॊ की धूर सफके भाथे ऩय ददखाई दे ती । कुि उस धूर को बी अऩने रूभार भें फाॊध रेते थे । इस मवागत से भाडये टों की फ़िी बद्द हुई । [edit]क्मॊनतकमयी आन्दोरन काॊग्रेस के अवसय ऩय रखनऊ से ही भारूभ हुआ फक एक गुप्त सलभछत है . मह फात बफल्कुर ठी क है . स्जसका कयण मह है फक कायतूस मा पवरामती फारूद खयीदने ऩय ऩुलरस भें सूचना दे नी होती है । याज्म भें तो कोई ऐसी दक ु ान नहीॊ होती. सभ े अधधक दाभों का होगा । खयीद लरमा । पवचाय हुआ फक इस प्रकाय ठगे जाने से . उसभें से जो पूर नीचे धगय जाते थे उन्हें उठाकय रोग ऩल्रे भें फाॉध रेते थे । स्जस मथान ऩय रोकभान्म के ऩैय ऩ़िते. भैं कुि ददनों फाद फपय गमा । इस सभम उसी ने एक फ़िा सुन्दय कायतूसी रयवाल्वय ददमा । कुि ऩुयाने कायतूस ददमे । रयवाल्वय था तो ऩुयाना. तफ दस ू ये सहमोधगमों की सम्भछत से दो सौ रुऩमे रेकय हधथमाय खयीदने गमा । इस फाय भैंने फहुत प्रमत्न फकमा तो एक कफा़िी की-सी दक ु ान ऩय कुि तरवायें . क्मोंफक मे सफ चीजें फाहय से भॊगानी ऩ़िती हैं । स्जतनी चीजें इस प्रकाय की फाहय से भॊगामी जाती हैं . 5 रुऩमे कभीशन के तौय ऩय दे ने ऩ़िे । रयवाल्वय चभकता हुआ नमा था. खॊजय. एकदभ दो सेय फारूद खयीदी. उधय हधथमायों की बी जरूयत थी । जफ घय वाऩस आमा. जीवन सपर हो जाए । रोकभान्म ऩय पूरों की जो वषाा की जाती थी. जहाॉ से हधथमाय लभर सकते. क्मोंफक ऩॊ.

साथ भें दो सौ कायतूस बी दे यहे थे । कायतूस बयने का साभान बी दे ते थे. स्जसे भैं बरी-बाॉछत जानता था । भुहल्रे भें खुफपमा ऩुलरस वारों की आॉख फचाकय ऩूिा फक अभुक घय फकसका है ? भारूभ हुआ ऩुलरस इॊमऩेक्टय का ! भैं इतमतत् कयके जैसे-जैसे छनकर आमा औय अछत शीघ्र अऩने टहयने का मथान फदरा । उस सभम हभ रोगों के ऩास दो याइपरें . सफके दग ु ने दाभ ददमे थे । 155 रुऩमे के रयवाल्वय के दाभ केवर 30 रुऩमे ही थे औय 10 रुऩमे के सौ कायतूस इस प्रकाय कुर साभान 40 रुऩमे का था. जाछत के भुसरभान थे । हभायी फातों ऩय उन्हें ऩूणा पव्‍वास न हुआ । कहा फक अऩने थानेदाय से लरखा राओ फक वह तुम्हें जानता है । भैं गमा । स्जस मथान का यहने वारा फतामा था. स्जसका भूल्म 300 रुऩमे दे ना ऩ़िा । कायतूस एक बी न लभरा । हभाये ऩुयाने लभर कफा़िी भहोदम के ऩास भाउजय पऩमतौर के ऩचास कायतूस ऩ़िे थे । उन्होंने फ़िा काभ ददमा । हभ भें से फकसी ने बी ऩहरे भाउजय पऩमतौर को दे खा बी न था । कुि न सभ सके फक कैसे प्रमोग फकमा जाता है । फ़िे कदठन ऩरयश्रभ से उसका प्रमोग सभ भें आमा । हभने तीन याइपरें . वह 250 रुऩमे भाॊगते थे. उसने चायों ओय मटे शन ऩय ताय ददरवाए । ये रगाड़िमों की तराशी री गई । ऩय ऩुलरस की असावधानी के कायण हभ फार-फार फच गए । रुऩमे की चऩत फुयी होती है । एक ऩुलरस सुऩरयटे ण्डें ट के ऩास एक याइपर थी । भारूभ हुआ वह फेचते हैं । हभ रोग ऩहुॉचे । अऩने आऩ को रयमासत का यहने वारा फतरामा । उन्होंने छन्‍चम कयने के लरए फहुत से प्र्‍न ऩूिे. एक फायह फोय की दोनारी कायतूस फन्दक ू . उसे 100 रुऩमे भें खयीदा । एक भाउजय पऩमतौर बी चोयी कयामा. इस प्रकाय ऩुयानी याइपर के नई के सभान दाभ भाॉगते थे । हभ रोग बी 250 रुऩमे दे ते थे । ऩुलरस कप्तान ने बी पवचाया फक ऩूये दाभ लभर यहे हैं । मवमॊ वद्ध ृ हो चुके थे । कोई ऩुर बी न था । अतएव 250 रुऩमे रेकय याइपर दे दी । ऩुलरस भें कुि ऩूिने न गए । उन्हीॊ ददनों याज्म के एक उच्च ऩदाधधकायी के नौकय से लभरकय उनके महाॉ से रयवाल्वय चोयी कयामा । स्जसके दाभ लरमट भें 75 रुऩमे थे. से जब्त फकताफ अभेरयका को मवाधीनता कैसे लभरी" । खुफपमा ऩुलरस वारों ने काॊग्रेस का कैम्ऩ घेय लरमा । साभने ही आमासभाज का कैम्ऩ था. दे खकय आॊखें खुर गईं । स्जतने रयवाल्वय मा फन्दक ू ें हभने खयीदी थीॊ. उस सदमम ने कोई उत्तय न ददमा । उसे आऻाऩर ददमा गमा औय भाय दे ने की धभकी दी गई । वह ऩुलरस के ऩास गमा । भाभरा खुरा । भैनऩुयी भें धयऩक़ि शुरू हो गई । हभ रोगों को बी सभाचाय लभरा । ददल्री भें काॊग्रेस होने वारी थी । पवचाय फकमा गमा फक 'अभेरयका को मवाधीनता कैसे लभरी' नाभक ऩुमतक जो मू. स्जसके दाभ लरमट भें उस सभम 200 रुऩमे थे । हभें भाउजय पऩमतौर की प्रास्प्त की फ़िी उत्कट इच्िा थी । फ़िे बायी प्रमत्न के फाद मह भाउजय पऩमतौर लभरा. याइपर के दाभ लरमट भें 150 रुऩमे लरखे थे. ऩर रे जा कय ऩुलरस कप्तान साहफ को ददमा । फ़िे गौय से दे खने के फाद वह फोरे. जो रगबग 50 रुऩमे का होता है . स्जसके फदरे 155 रुऩमे दे ने ऩ़िे । फ़िा खेद हुआ । कयें तो क्मा कयें ! औय कोई दस ू या जरयमा बी तो न था । कुि सभम ऩ्‍चात श कायखानों की लरमटें रेकय तीन-चाय सदमम लभरकय गमे । खूफ जाॊच-खोज की । फकसी प्रकाय रयमासत की ऩुलरस को ऩता चर गमा । एक खुफपमा ऩुलरस वारा भु े लभरा. काॊग्रेस के अवसय ऩय फेची जावे । काॊग्रेस के उत्सव ऩय भैं शाहजहाॉऩुय की सेवा सलभछत के साथ अऩनी एम्फुरेन्स की टोरी रेकय गमा । एम्फुरेन्स वारों को प्रत्मेक मथान ऩय बफना योक जाने की आऻा थी । काॊग्रेस-ऩॊडार के फाहय खुरे रूऩ से नवमुवक मह कय कय ऩुमतक फेच यहे थे . अगय अफ बी इत्भीनान न हो तो भजफूयी है । हभ ऩुलरस भें न जामेंगे."मू. दस-फायह रुऩमे खचा फकए. औय उसे कन्धे . उधय भैनऩुयी के एक सदमम ऩय रीडयी का बूत सवाय हुआ । उन्होंने अऩना ऩथ ृ क सॊगठन फकमा । कुि अमर-शमर बी एकबरत फकए । धन की कभी की ऩूछता के लरमे एक सदमम ने कहा फक अऩने फकसी कुटुम्फी के महाॉ डाका डरवाओ. सयकाय ने जब्त कय री थी. भारूभ हुआ फक हभ भें से एक व्मस्क्त उसी ददन जाने वारा था. वहाॉ ऩय ऩुमतक पवक्रेताओॊ की ऩुलरस ने तराशी रेना आयम्ब कय ददमा । भैंने काॊग्रेस कैम्ऩ ऩय अऩने मवमॊसेवक इसलरए िो़ि ददमे फक वे बफना मवागतकारयणी सलभछत के भन्री मा प्रधान की आऻा ऩाए फकसी ऩुलरस वारे को कैम्ऩ भें न घुसने दें । आमासभाज कैम्ऩ भें गमा । सफ ऩुमतकें एक टैं ट भें जभा थीॊ । भैंने अऩने ओवयकोट भें सफ ऩुमतकें रऩेटीॊ. औय एक-दो जभीॊदायों के नाभ भारूभ कयके एक ऩर लरखा फक भैं उस मथान के यहने वारे अभुक जभीॊदाय का ऩुर हूॉ औय वे रोग भु े बरीबाॉछत जानते हैं । उसी ऩर ऩय जभीॊदायों के दहन्दी भें औय ऩुलरस दायोगा के अॊग्रेजी भें हमताऺय फना. क्मोंफक हभ रोग ऱिके तो थे ही । ऩुलरस सुऩरयटे ण्डें ट ऩें शनमाफ्ता. उसने कई हधथमाय ददराने का वामदा फकमा.ऩी. तीन टोऩीदाय रयवाल्वय औय ऩाॉच कायतूसी रयवाल्वय खयीदे । प्रत्मेक हधथमाय के साथ ऩचास मा सौ कायतूस बी रे लरए । इन सफ भें रगबग चाय हजाय रुऩमे व्मम हुए । कुि कटाय तथा तरवायें इत्मादद बी खयीदी थीॊ । [edit]भैनऩुयी षड्मन्र इधय तो हभ रोग अऩने कामा भें व्ममथ थे. एक को िो़ि. दो टोऩीदाय फन्दक ू ें . औय वह ऩुलरस इॊमऩेक्टय के घय रे गमा । दै वात श उस सभम ऩुलरस इॊमऩेक्टय घय भौजूद न थे । उनके द्वाय ऩय एक ऩुलरस का लसऩाही था. वहाॉ के थानेदाय का नाभ भारूभ फकमा. ऩी. "भैं थानेदाय से दमााफ्त कय रूॊ । तुम्हें बी थाने चरकय इत्तरा दे नी होगी फक याइपर खयीद यहे हैं ।" हभ रोगों ने कहा फक हभने आऩके इत्भीनान के लरए इतनी भुसीफत ेरी.काभ न चरेगा । फकसी प्रकाय कुि जानने का प्रमत्न फकमा जाए । फ़िी कौलशश के फाद करकत्ता. चाय रयवाल्वय तथा दो पऩमतौर खयीदे हुए भौजूद थे । फकसी प्रकाय उस खुफपमा ऩुलरस वारे को एक कायीगय से जहाॉ ऩय फक हभ रोग अऩने हधथमायों की भयम्भत कयाते थे. जो रगबग दो सौ होंगी. फम्फई से फन्दक ू -पवक्रेताओॊ की लरमटें भाॊगकय दे खीॊ.

उसे काभ भें रा सकता था । वहाॊ से आकय अन्म सदममों से लभरकय सफ पववयण कह सुनामा । कुि ददन जॊगर भें यहा । इच्िा थी फक सन्मासी हो जाऊॊ । सॊसाय कुि नहीॊ । फाद को फपय भाता जी के ऩास गमा । उन्हें सफ कह सुनामा । उन्होंने भु े ग्वालरमय जाने का आदे श ददमा । थो़िे ददनों भें भाता-पऩता सबी दादीजी के बाई के महाॊ आ गमे । भैं बी ऩहुॊच गमा । भैं हय वक्त मही पवचाय फकमा कयता फक भु े फदरा अव्‍म रेना चादहए । एक ददन प्रछतऻा कयके रयवाल्वय रेकय शरु की हत्मा कयने की इच्िा भें गमा बी. हभ रोगों के चेहये योशनी भें दे खकय उनका शक जाता यहा । कहने रगे . व्मथा भें खून होगा । अबी ठी क नहीॊ । अकेरे फदरा रेना उधचत नहीॊ । औय कुि साधथमों को रेकय फपय फदरा लरमा जाएगा । भेये एक साधायण लभर प्रमाग भें यहते थे । उनके ऩास जाकय फ़िी भुस््‍कर से एक चादय री औय ये र से रखनऊ आमा । रखनऊ आकय फार फनवामे । धोती-जूता खयीदे ."मभुना के छनकट फैठो" । भैं तट से दयू एक ऊॉचे मथान ऩय फैठा था । भैं वहीॊ फैठा यहा । वे तीनों बी भेये ऩास आकय फैठ गमे । भैं आॉखें फन्द फकमे ध्मान कय यहा था । थो़िी दे य भें खट से आवाज हुई । सभ ा फक साधथमों भें से कोई कुि कय यहा होगा । तुयन्त ही पामय हुआ । गोरी सन्न से भेये कान के ऩास से छनकर गई ! भैं सभ गमा फक भेये ऊऩय ही पामय हुआ । भैं रयवाल्वय छनकारता हुआ आगे को फढ़ा । ऩीिे फपय दे खा.पवद्माथी हैं . क्मोंफक रुऩमे भेये ऩास थे । रुऩमे न बी होते तो बी भैं सदै व जो चारीस ऩचास रुऩमे की सोने की अॊगूठी ऩहने यहता था. वहाॉ से चरा आमा । भैं फार-फार फच गमा । भु से दो गज के पासरे ऩय से भाउजय पऩमतौर से गोलरमाॉ चराईं गईं औय उस अवमथा भें जफफक भैं फैठा हुआ था ! भेयी सभ भें नहीॊ आमा फक भैं फच कैसे गमा ! ऩहरा कायतूस पूटा नहीॊ । तीन पामय हुए । भैं गद्गद् होकय ऩयभात्भा का मभयण कयने रगा । आनन्दोल्रास भें भु े भूिाा आ गई । भेये हाथ से रयवाल्वय तथा खोर दोनों धगय गमे । मदद उस सभम कोई छनकट होता तो भु े बरी-बाॊछत भाय सकता था । भेयी मह अवमथा रगबग एक लभनट तक यही होगी फक भु े फकसी ने कहा. फकन्तु सपरता न लभरी । इसी प्रकाय उधे़ि -फुन भें भु े ज्वय आने रगा । कई भहीनों तक फीभाय यहा । भाता जी भेये पवचायों को सभ गई । भाता जी ने फ़िी सान्त्वना दी । कहने रगी फक प्रछतऻा कयो फक तुभ अऩनी हत्मा की चेष्टा कयने वारों को जान से न भायोगे । भैंने प्रछतऻा कयने भें आनाकानी की.'यात के सभम रारटे न रेकय चरा कीस्जए । गरती हुई. सभ े फक छघय गए । कदभ उठाना ही चाहते थे फक फपय आवाज आई . रयवाल्वय कन्धे ऩय रटकाए. सफ के सफ दीवाय ऩय से उतय कय भकान िो़ि कय चर ददए । अॊधेयी यात थी । थो़िी दयू गए थे फक हठात श की आवाज आई .'ख़िे हो जाओ. कई लसऩादहमों को लरए हुए आ ऩहुॉचे । ऩूिा 'कौन हो ? कहाॉ जाते हो ?' हभ रोगों ने कहा . भुआप कीस्जमे' । हभ रोग बी सराभ ा़िकय चरते फने । एक फाग भें पॉू स की भ़िैमा ऩ़िी थी । उस भें जा फैठे । ऩानी फयसने रगा । भूसराधाय ऩानी धगया । सफ कऩ़िे बीग गए । जभीन ऩय बी ऩानी बय गमा । जनवयी का भहीना था. वह भहाशम भाउजय हाथ भें लरए भेये ऊऩय गोरी चरा यहे हैं ! कुि ददन ऩहरे भु से उनका ग़िा हो चुका था. मटे शन जा यहे हैं । 'कहाॊ जाओगे'? 'रखनऊ' । उस सभम यात के दो फजे थे । रखनऊ की गा़िी ऩाॉच फजे जाती थी । दायोगा जी को शक हुआ । रारटे न आई. तफ भैं गोरी चराना व्मथा जान. मदद वह ऩक़िा गमा तो सफ बेद खुर जाएगा. नहीॊ तो गोरी भायते हैं ' । हभ रोग ख़िे हो गए । थो़िी दे य भें एक ऩुलरस का दायोगा फन्दक ू हभायी तयप फकए हुए. फकन्तु फाद भें सभ ौता हो गमा था । फपय बी उन्होंने मह कामा फकमा । भैं बी साभना कयने को प्रमतुत हुआ । तीसया पामय कयके वह बाग ख़िे हुए । उनके साथ प्रमाग भें ठहये हुए दो सदमम औय बी थे । वे तीनों बाग ख़िे हुए । भु े दे य इसलरमे हुई फक भेया रयवाल्वय चभ़िे के खोर भें यखा था । मदद आधा लभनट औय उनभें से कोई बी ख़िा यह जाता तो भेयी गोरी का छनशाना फन जाता । जफ सफ बाग गमे.ऩय डारकय ऩुलरस वारों के साभने से छनकरा । भैं वदी ऩहने था. फन्दक ू ें जभीन भें गा़िकय प्रमाग ऩहुॊचे । [edit]पवश्वमसघमत प्रमाग की एक धभाशारा भें दो-तीन ददन छनवास कयके पवचाय फकमा गमा फक एक व्मस्क्त फहुत दफ ु ारात्भा है . कौन जाता है ?' हभ रोग सात-आठ आदभी थे. टोऩ रगाए हुमे था । एम्फुरेन्स का फ़िा सा रार बफल्रा भेये हाथ ऩय रगा हुआ था. 'उठ !' भैं उठा । रयवाल्वय उठा लरमा । खोर उठाने का मभयण ही न यहा । 22 जनवयी की घटना है । भैं केवर एक कोट औय एक तहभद ऩहने था । फार फढ़ यहे थे । नॊगे ऩैय भें जूता बी नहीॊ । ऐसी हारत भें कहाॉ जाऊॉ । अनेक पवचाय उठ यहे थे । इन्हीॊ पवचायों भें छनभग्न मभुना-तट ऩय फ़िी दे य तक घूभता यहा । ध्मान आमा फक धभाशारा भें चरकय तारा तो़ि साभान छनकारॉ ू । फपय सोचा फक धभाशारा जाने से गोरी चरेगी. फकसी ने कोई सन्दे ह न फकमा औय ऩुमतकें फच गईं । ददल्री काॊग्रेस से रौटकय शाहजहाॉऩुय आमे । वहाॊ बी ऩक़ि-धक़ि शुरू हुई । हभ रोग वहाॉ से चरकय दस ू ये शहय के एक भकान भें ठहये हुमे थे । याबर के सभम भकान भालरक ने फाहय से भकान भें तारा डार ददमा । ग्मायह फजे के रगबग हभाया एक साथी फाहय से आमा । उसने फाहय से तारा ऩ़िा दे ख ऩुकाया । हभ रोगों को बी सन्दे ह हुआ.'ख़िे हो जाओ. अत् उसे भाय ददमा जामे । भैंने कहा . खूफ जा़िा ऩ़ि यहा था । यात बय बीगते औय दठठुयते यहे । फ़िा कष्ट हुआ । प्रात्कार धभाशारा भें जाकय कऩ़िे सुखामे । दस ू ये ददन शाहजहाॉऩुय आकय.भनुष्म हत्मा ठी क नहीॊ । ऩय अन्त भें छन्‍चम हुआ फक कर चरा जामे औय उसकी हत्मा कय दी जामे । भैं चुऩ हो गमा । हभ रोग चाय सदमम साथ थे । हभ चायों तीसये ऩहय ूॊसी का फकरा दे खने गमे । जफ रौटे तफ सन्ध्मा हो चुकी थी । उसी सभम गॊगा ऩाय कयके मभुना-तट ऩय गमे । शौचादद से छनवत्ृ त होकय भैं सॊध्मा सभम उऩासना कयने के लरए ये ती ऩय फैठ गमा । एक भहाशम ने कहा . तो वह कहने रगी फक भैं .

खाने रगे । िह्भचायी .भातऋ ृ ण के फदरे भें प्रछतऻा कयाती हूॉ. उन्हीॊ ऩय ही गुजय होता था । ऩहनने के कऩ़िे तक न थे । पववश हो रयवाल्वय तथा फन्दक ू ें फेचीॊ. तफ शाहजहाॉऩुय आकय कोई व्मवसाम कयने का पवचाय हुआ. उनकी फहुत फुयी दशा हुई । भहीनों चनों ऩय ही सभम काटना ऩ़िा । दो चाय रुऩमे जो लभरों तथा सहामकों से लभर जाते थे. ताफक भाता-पऩता की कुि सेवा हो सके । पवचाय फकमा कयता था फक इस जीवन भें अफ फपय कबी आजादी से शाहजहाॉऩुय भें पवचयण न कय सकूॉगा. जहाॊ तक जाने के लरए एक ऩ़िाव दे ना ऩ़िता था । चरते -चरते सफ थक गए. उसने बोजन राने को कहा. नीराभ फकमा जाएगा । पऩताजी घफ़िाकय दो हजाय के भकान को आठ सौ भें तथा औय दस ू यी चीजें बी थो़िे दाभों भें फेचकय शाहजहाॉऩुय िो़िकय बाग गए । दो फहनों का पववाह हुआ । जो कुि यहा फचा था. तफ आऩने लशवाजी सलभछत की मथाऩना की थी. उसभें से चौथ रेकय हधथमाय खयीदना औय उस दर भें फाॊटना । इसकी सपरता के लरए आऩ रयमासत से हधथमाय रा यहे थे जो कुि नवमुवकों की असावधानी के कायण आगया भें मटे शन के छनकट ऩक़ि लरए गए थे । आऩ फ़िे वीय तथा उत्साही थे । शान्त फैठना जानते ही न थे । नवमुवकों को सदै व कुि न कुि उऩदे श दे ते यहते थे । एक एक सप्ताह तक फूट तथा वदी न उतायते थे । जफ आऩ िह्भचायी जी के ऩास सहामता रेने गए तो दब ु ााग्मवश धगयफ्ताय कय लरए गए । िह्भचायी के दर ने अॊग्रेजी याज्म भें कई डाके डारे थे । डाके डारकय मे रोग चम्फर के फीह़िों भें छिऩ जाते थे । सयकायी याज्म की ओय से ग्वालरमय भहायाज को लरखा गमा । इस दर के ऩक़िने का प्रफन्ध फकमा गमा । सयकाय ने तो दहन्दम ु तानी पौज बी बेजी थी."भैं उनसे फदरा रेने की प्रछतऻा कय चुका हूॉ ।" भाता जी ने भु े फाध्म कय भेयी प्रछतऻा बॊग कयवाई । अऩनी फात ऩक्की यखी । भु े ही लसय नीचा कयना ऩ़िा । उस ददन से भेया ज्वय कभ होने रगा औय भैं अच्िा हो गमा । [edit]ऩरममनमवस्थथम भैं ग्राभ भें ग्राभवालसमों की बाॊछत उसी प्रकाय के कऩ़िे ऩहनकय यहने रगा । दे खने वारे अधधक से अधधक इतना सभ सकते थे फक भैं शहय भें यह यहा हूॉ. जो आगया स्जरे भें चम्फर के फकनाये फहुत ददनों तक ऩ़िी यही । ऩुलरस सवाय तैनात फकए फपय बी मे रोग बमबीत न हुए । पव्‍वासघात भें ऩक़िे गए । इन्हीॊ का एक आदभी ऩुलरस ने लभरा लरमा । डाका डारने के लरए दयू एक मथान छनस््‍चत फकमा गमा. क्मोंफक उसके फकसी छनकट सम्फॊधी का भकान छनकट था । वह ऩू़िी फनवा कय रामा । सफ ऩू़िी खाने रग गए । िह्भचायी जी जो सदै व अऩने हाथ से फनाकय बोजन कयते थे मा आरू अथवा घुइमाॊ बून कय खाते थे. उतना भैं बी जोत रेता था । भेया चेहया बफल्कुर कारा ऩ़ि गमा । थो़िे ददनों के लरमे भैं शाहजहाॉऩुय की ओय घूभने आमा तो कुि रोग भु े ऩहचान बी न सके ! भैं यात को शाहजहाॉऩुय ऩहुॉचा । गा़िी िूट गई । ददन के सभम ऩैदर जा यहा था फक एक ऩुलरस वारे ने ऩहचान लरमा । वह औय ऩुलरस वारों को रेने के लरए गमा । भैं बागा. स्जसका उद्दे्‍म था लशवाजी की बाॊछत दर फना कय रूटभाय कयवाना. थो़िे ही ददनों भें अच्िा-खासा फकसान फन गमा । उस कठोय बूलभ भें खेती कयना कोई सयर काभ नहीॊ । फफूर. नीभ के अछतरयक्त कोई एक-दो आभ के वऺ ृ कहीॊ बरे ही ददखाई दे जाएॉ । फाकी मह छनतान्त भरुबूलभ है । खेत भें जाता था । थो़िी ही दे य भें यफेयी के काॊटों से ऩैय बय जाते । ऩहरे-ऩहर तो फ़िा कष्ट प्रतीत हुआ । कुि सभम ऩ्‍चात श अभ्मास हो गमा । स्जतना खेत उस दे श का एक फलरष्ठ ऩुरुष ददन बय जोत सकता था. तफ ददन कटे । फकसी से कुि कह बी न सकते थे औय धगयफ्तायी के बम के कायण कोई व्मवमथा मा नौकयी बी न कय सकते थे । उसी अवमथा भें भु े व्मवसाम कयने की सू ी। भैंने अऩने सहऩाठी तथा लभर श्रीमुत सुशीरचन्द्र सेन. गाम तथा बैंस रेकय ऊसय भें चयाने के लरए जामा कयता था । खारी फैठा यहना ऩ़िता था. ऩहरे ददन का ही थका हुआ था । रगबग फीस भीर ऩहरे ददन ऩैदर चरा था । उस ददन बी ऩैंतीस भीर ऩैदर चरना ऩ़िा । भेये भाता-पऩता ने सहामता की । भेया सभम अच्िी प्रकाय व्मतीत हो गमा । भाताजी की ऩॉूजी तो भैंने नष्ट कय दी । पऩताजी से सयकाय की ओय से कहा गमा फक ऱिके की धगयफ्तायी के वायॊ ट की ऩूछता के लरए ऱिके का दहमसा. राब बी होगा । कामा बी सयर है । फॊगरा से दहन्दी भें ऩुमतकों का अनुवाद कयके प्रकालशत कयवाऊॉगा । अनुबव कुि बी नहीॊ था । फॊगरा ऩुमतक 'छनदहलरमट यहमम' का अनुवाद प्रायम्ब कय ददमा । स्जस प्रकाय अनुवाद फकमा. जो उसके दादा की जामदाद होगी. सम्बव है कुि ऩढ़ा बी होऊॉ । खेती के काभों भें भैंने पवशेष ध्मान नहीॊ ददमा । शयीय तो हष्ट-ऩुष्ट था ही. की मभछृ त भें फॊगरा बाषा का अध्ममन फकमा । भेये िोटे बाई का जन्भ हुआ तो भैंने उसका नाभ सुशीरचन्द्र यखा । भैंने पवचाया फक एक ऩुमतकभारा छनकारूॊ. उन्होंने बी उस ददन ऩू़िी खाना मवीकाय फकमा । सफ बूखे तो थे ही. उसका मभयण कय कई फाय हॊ सी आ जाती है । कई फैर . अतएव काऩी-ऩैंलसर साथ रे जाता औय ऩुमतक का अनुवाद फकमा कयता था । ऩशु जफ कहीॊ दयू छनकर जाते तफ अनुवाद िो़ि राठी रेकय उन्हें हकायने जामा कयता था । कुि सभम के लरए एक साधु की कुटी ऩय जाकय यहा । वहाॉ अधधक सभम अनुवाद कयने भें व्मतीत कयता था । खाने के लरए आटा रे जाता था । चाय-ऩाॉच ददन के लरए आटा इक्ा यखता था । बोजन मवमॊ ऩका रेता था । अफ ऩुमतक ठी क हो गई. क्मा जवाफ है ? भैंने उनसे कहा . ऩ़िाव ददमा गमा । जो आदभी ऩुलरस से लभरा हुआ था. स्जनका दे हान्त हो चुका था. ऩय ऩयभात्भा की रीरा अऩाय है । वे ददन आमे । भैं ऩुन् शाहजहाॉऩुय का छनवासी हुआ । [edit]ऩॊ० गें दमरमर दीक्षऺत आऩका जन्भ मभुना-तट ऩय फटे ्‍वय के छनकट 'भई' ग्राभ भें हुआ था । आऩने भैदनक्मूरेशन (दसवाॊ) दजाा अॊग्रेजी का ऩास फकमा था । आऩ जफ ओयै मा स्जरा इटावा भें डी० ए० वी० मकूर भें टीचय थे. तो 'सुशीर-भारा' के नाभ से ग्रन्थभारा छनकारी । ऩुमतक का नाभ 'फोरशेपवकों की कयतूत' यखा । दस ू यी ऩुमतक 'भन की रहय' िऩवाई । इस व्मवसाम भें रगबग ऩाॊच सौ रुऩमे की हाछन हुई । जफ याजकीम घोषणा हुई औय याजनैछतक कैदी िो़िे गए. वह बी व्मम हो गमा । भाता-पऩता की हारत फपय छनधानों जैसी हो गई । सलभछत के जो दस ू ये सदमम बागे हुए थे.

1 मवतन्र जीवन o 1. वह नभमते कय चर दे ता था । ऩलु रस का फ़िा प्रकोऩ था । प्रत्मेक सभम वह िामा की बाॊछत ऩीिे -ऩीिे फपया कयती थी । इस प्रकाय का जीवन कफ तक व्मतीत फकमा जाए ? भैंने कऩ़िा फुनने का काभ सीखना आयम्ब फकमा । जुराहे फ़िा कष्ट दे ते थे । कोई काभ लसखाना नहीॊ चाहता था । फ़िी कदठनता से भैंने कुि काभ सीखा । उसी सभम एक कायखाने भें भैनेजयी का मथान खारी हुआ । भैंने उस मथान के लरमे प्रमत्न फकमा । भु से ऩाॉच सौ रुऩमे की जभानत भाॉगी . ऩस्ण्डत गें दारारजी को सयकाय ने ग्वालरमय याज्म से भॉगामा । ग्वालरमय के फकरे का जरवामु फ़िा ही हाछनकायक था । ऩस्ण्डत जी को ऺम योग हो गमा था । भैनऩुयी मटे शन से जेर जाते सभम ग्मायह फाय यामते भें फैठ कय जेर ऩहुॊचे । ऩुलरस ने जफ हार ऩूिा तो उन्होंने कहा "फारकों को क्मों धगयफ्ताय फकमा है ? भैं हार फताऊॉगा ।" ऩुलरस को पव्‍वास हो गमा । आऩको जेर से छनकार कय दस ू ये सयकायी गवाहों के छनकट यख ददमा । वहाॉ ऩय सफ पववयण जान याबर के सभम एक औय सयकायी गवाह को रेकय ऩस्ण्डत जी बाग ख़िे हुए । बाग कय एक गाॊव भें एक कोठयी भें ठहये । साथी कुि काभ के लरए फाजाय गमा औय फपय रौट कय न आमा. फपय हाथ न आए । ि् भास के ऩ्‍चात स्जन्हें सजा हुई वे बी याजकीम घोषणा से भुक्त कय ददए गए । खुफपमा ऩुलरस पवबाग का क्रोध ऩूणत ा मा शाॊत न हो सका औय उनकी फदनाभी बी इस केस भें फहुत हुई । बफस्मभर तत ृ ीम खण्ड Contents [hide]  1 तत ृ ीम_खण्ड o 1. तफ धच्ी बेजकय उन्होंने हभको सफ हार फतामा । एक ददन फकरे भें हभ रोगों ऩय बी सन्दे ह हो गमा था. कुि रोगी से भाये गए. अन्त भें फकसी प्रकाय जॊजीय खुरवाई । रुऩमे वह साथ ही रे गमा था । ऩास एक ऩैसा बी न था । कोटा से ऩैदर आगया आए । फकसी प्रकाय अऩने घय ऩहुॉचे । फहुत फीभाय थे । पऩता ने मह सभ कय फक घय वारों ऩय आऩस्त्त न आए. फाहय से कोठयी की जॊजीय फन्द कय गमा । ऩस्ण्डत जी उसी कोठयी भें तीन ददन बफना अन्न-जर फन्द यहे । सभ े फक साथी फकसी आऩस्त्त भें पॊस गमा होगा. उसकी मवप्न भें बी आशॊका नहीॊ थी । ऩस्ण्डत जी की प्रफर इच्िा थी फक उनकी भत्ृ मु गोरी रगकय हो । बायतवषा की एक भहान आत्भा पवरीन हो गई औय दे श भें फकसी ने जाना बी नहीॊ ! आऩकी पवमतत ृ जीवनी 'प्रबा' भालसक ऩबरका भें प्रकालशत हो चुकी है । भैनऩुयी षड्मन्र के भुख्म नेता आऩ ही सभ गए थे । इस षड्मन्र भें पवशेषताएॊ मे हुईं फक नेताओॊ भें से केवर दो व्मस्क्त ऩुलरस के हाथ आए. फ़िी कदठनता से एक अधधकायी की सहामता से हभ रोग छनकर सके । जफ भैनऩुयी षड्मन्र का अलबमोग चरा.4 चारफाजी  2 सॊफधॊ धत कड़िमाॉ  3 फाहयी कडडमाॉ [edit]तत ृ ीम_खण्ड [edit]स्थवतन्र जीवन याजकीम घोषणा के ऩ्‍चात जफ भैं शाहजहाॊऩुय आमा तो शहय की अद्बुत दशा दे खी । कोई ऩास तक ख़िे होने का साहस न कयता था ! स्जसके ऩास भैं जाकय ख़िा हो जाता था. इस प्रकाय 80 आदलभमों भें से 25-30 जान से भाये गए । सफ ऩक़ि कय ग्वालरमय के फकरे भें फन्द कय ददए गए । फकरे भें हभ रोग जफ ऩस्ण्डत जी से लभरे.3 नोट फनाना o 1.जी ने एक ऩू़िी ही खाई उनकी जफान ऐॊठने रगी औय जो अधधक खा गए थे वे धगय गए । ऩूयी राने वारा ऩानी रेने के फहाने चर ददमा । ऩूड़िमों भें पवष लभरा हुआ था । िह्भचायी जी ने फन्दक ू उठाकय ऩूयी राने वारे ऩय गोरी चराई । िह्भचायी जी का गोरी चराना था फक चायों ओय से गोरी चरने रगी । ऩुलरस छिऩी हुई थी । गोरी चरने से िह्भचायी जी के कई गोरी रगीॊ । तभाभ शयीय घामर हो गमा । ऩॊ० गें दारार जी की आॉख भें एक ियाा रगा । फाईं आॉख जाती यही । कुि आदभी जहय के कायण भये .2 ऩन ु ् सॊगठन o 1. तो जो दे खा उसे लरखते हुए रेखनी कम्ऩामभान होती है ! ऩस्ण्डत जी शयीय त्माग चुके थे । केवर उनका भत ृ शयीय भार ही ऩ़िा हुआ था । मवदे श की कामा-लसपद्ध भें ऩॊ० गें दारार जी दीषितऺत ने स्जस छन्सहाम अवमथा भें अस्न्तभ फलरदान ददमा. ऩुलरस को सूचना दे नी चाही । ऩस्ण्डत जी ने पऩता से फ़िी पवनम-प्राथाना की औय दो-तीन ददन भें घय िो़ि ददमा । हभ रोगों की फहुत खोज की । फकसी का कुि ऩता न ऩामा. ददल्री भें एक प्माऊ ऩय ऩानी पऩराने की नौकयी कय री । अवमथा ददनों ददन बफग़ि यही थी । योग बीषण रूऩ धायण कय यहा था । िोटे बाई तथा ऩत्नी को फुरामा । बाई फकॊ कत्ताव्मपवभूढ़ ! वह क्मा कय सकता था ? सयकायी अमऩतार भें बती कयाने रे गमा । ऩस्ण्डत जी की धभाऩत्नी को दस ू ये मथान भें बेजकय जफ वह अमऩतार आमा. स्जनभें गें दारार दीषितऺत एक सयकायी गवाह को रेकय बाग गए. श्रीमुत लशवकृष्ण जेर से बाग गए.

राइसेंस आदद सफ डार जाते थे फक भेये महाॊ उनकी वमतुएॊ सुयषितऺत यहें गी ! सभम के इस पेय को दे खकय भु े हॉ सी आती थी । इस प्रकाय कुि कार व्मतीत हुआ । दो-चाय ऐसे ऩुरुषों से बें ट हुई. स्जनसे भैंने दो सौ रुऩए की जभानत दे ने की प्राथाना की थी. आदद । भान्म ऩुरुषों की प्रवस्ृ त्त दे खकय भैंने बी मवीकृछत दे दी । भेये ऩास जो अमर-शमर थे.गई । भेयी दशा फ़िी शोचनीम थी । तीन-तीन ददवस तक बोजन प्राप्त नहीॊ होता था. जो नेता भहाशम को जानता था । नेता भहाशम रयवाल्वय तथा कुि सोने के आबूषणों सदहत धगयफ्ताय हो गए । उनकी वीयता की फ़िी प्रशॊसा सुनी थी. ऩय फकसी का साहस न हो सका फक उसको प्रकालशत कयें ! आगया. क्मोंफक भैंने प्रछतऻा की थी फक फकसी से कुि सहामता न रॉ ग ू ा । पऩता जी से बफना कुि कहे भैं चरा आमा था । भैं ऩाॉच सौ रुऩमे कहाॉ से राता । भैंने दो-एक लभरों से केवर दो सौ रुऩए की जभानत दे ने की प्राथाना की । उन्होंने साप इन्काय कय ददमा । भेये रृदम ऩय वज्रऩात हुआ । सॊसाय अॊधकायभम ददखाई दे ता था । ऩय फाद को एक लभर की कृऩा से नौकयी लभर गई । अफ अवमथा कुि सुधयी । भैं सभ्म ऩुरुषों की बाॊछत सभम व्मतीत कयने रगा । भेये ऩास बी चाय ऩैसे हो गए । वे ही लभर. जो इस प्रकाय प्रकट हुई फक कई आदलभमों के नाभ ऩुलरस को फताए औय इकफार कय लरमा ! रगबग तीस-चारीस आदभी ऩक़िे गए । . वे भैंने रागत से बी कभ भूल्म ऩय करकत्ता के एक व्मस्क्त श्रीमुत दीनानाथ सगछतमा को दे दीॊ । फहुत थो़िी ऩुमतकें भैंने फेची थीॊ । दीनानाथ भहाशम ऩुमतकें ह़िऩ कय गए । भैंने नोदटस ददमा । नालरश की । रगबग चाय सौ रुऩमे की डडग्री बी हुई. उसके नेता से भु े लभरामा । उसकी वीयता की फ़िी प्रशॊसा की । वह एक अलशषितऺत ग्राभीण ऩुरुष था । भेयी सभ गमा फक मह फदभाशों का मा मवाथी जनों का कोई सॊगठन है । भु भें आ से उस दर के नेता ने दर का कामा छनयीऺण कयने की प्राथाना की । दर भें कई पौज से आए हुए ऱिाई ऩय से वाऩस फकए गए व्मस्क्त बी थे । भु े इस प्रकाय के व्मस्क्तमों से कबी कोई काभ न ऩ़िा था । भैं दो-एक भहानुबावों को साथ रे इन रोगों का कामा दे खने के लरए गमा । थो़िे ददनों फाद इस दर के नेता भहाशम एक वे्‍मा को बी रे आए । उसे रयवाल्वय ददखामा फक मदद कहीॊ गई तो गोरी से भाय दी जाएगी । मह सभाचाय सुन उसी दर के दस ू ये सदमम ने फ़िा क्रोध प्रकालशत फकमा औय भेये ऩास खफय बेजने का प्रफन्ध फकमा । उसी सभम एक दस ू या आदभी ऩक़िा गमा. करकत्ता इत्मादद कई मथानों भें घूभ कय ऩुमतक भेये ऩास रौट आई । कई भालसक ऩबरकाओॊ भें 'याभ' तथा 'अऻात' नाभ से भेये रेख प्रकालशत हुआ कयते थे । रोग फ़िे चाव से उन रेखों का ऩाठ कयते थे । भैंने फकसी मथान ऩय रेखन शैरी का छनमभऩूवाक अध्ममन न फकमा था । फैठे-फैठे खारी सभम भें ही कुि लरखा कयता औय प्रकाशनाथा बेज ददमा कयता था । अधधकतय फॊगरा तथा अॊग्रेजी की ऩुमतकों से अनुवाद कयने का ही पवचाय था । थो़िे सभम के ऩ्‍चात श्रीमुत अयपवन्द घोष की फॊगरा ऩुमतक 'मौधगक साधन' का अनुवाद फकमा । दो-एक ऩुमतक-प्रकाशकों को ददखामा ऩय वे अछत अल्ऩ ऩारयतोपषक दे कय ऩुमतक रेना चाहते थे । आजकर के सभम भें दहन्दी के रेखकों तथा अनुवादकों की अधधकता के कायण ऩुमतक प्रकाशकों को बी फ़िा अलबभान हो गमा है । फ़िी कदठनता से फनायस के एक प्रकाशक ने 'मौधगक साधन' प्रकालशत कयने का वचन ददमा । ऩय थो़िे ददनों भें वह मवमॊ ही अऩने सादहत्म भस्न्दय भें तारा डारकय कहीॊ ऩधाय गए । ऩुमतक का अफ तक कोई ऩता न रगा । ऩुमतक अछत उत्तभ थी । प्रकालशत हो जाने से दहन्दी सादहत्म-सेपवमों को अच्िा राब होता । भेये ऩास जो 'फोरशेपवक कयतूत' तथा 'भन की रहय' की प्रछतमाॊ फची थीॊ. भैंने ददए । जो दर उन्होंने एकबरत फकमा था. स्जस से ऩयाभशा कयता । व्मथा के उद्मोग धन्धों तथा मवतन्र कामों भें शस्क्त का व्मम कयता यहा । [edit]ऩुन् सॊगिन स्जन भहानुबावों को भैं ऩूजनीम दृस्ष्ट से दे खता था. अफ भेये ऩास चाय-चाय हजाय रुऩमों की थैरी अऩनी फन्दक ू . उन्हीॊ ने अऩनी इच्िा प्रकट की फक भैं क्रास्न्तकायी दर का ऩुन् सॊगठन करूॊ । गत जीवन के अनुबव से भेया रृदम अत्मॊत दखु खत था । भेया साहस न दे खकय इन रोगों ने फहुत उत्सादहत फकमा औय कहा फक हभ आऩको केवर छनयीऺण का कामा दें गे. कानऩुय. फकन्तु दीनानाथ भहाशम का कहीॊ ऩता न चरा । वह करकत्ता िो़िकय ऩटना गए । ऩटना से बी कई गयीफों का रुऩमा भाय कय कहीॊ अन्तधाान हो गए । अनुबवहीनता से इस प्रकाय ठोकयें खानी ऩ़िीॊ । कोई ऩथ-प्रदशाक तथा सहामक नहीॊ था. धन की कभी न होगी. स्जन को ऩहरे भैं फ़िी श्रद्धा की दृस्ष्ट से दे खता था । उन रोगों ने भेयी ऩरामनावमथा के सम्फन्ध भें कुि सभाचाय सुने थे । भु से लभरकय वे फ़िे प्रसन्न हुए । भेयी लरखी हुई ऩुमतकें बी दे खीॊ । इस सभम भैं तीसयी ऩुमतक 'कैथेयाइन' लरख चुका था । भु े ऩुमतकों के व्मवसाम भें फहुत घाटा हो चुका था । भैंने भारा का प्रकाशन मथधगत कय ददमा । 'कैथेयाइन' एक ऩुमतक प्रकाशक को दे दी । उन्होंने फ़िी कृऩा कय उस ऩुमतक को थो़िे हे य-पेय के साथ प्रकालशत कय ददमा । 'कैथेयाइन' को दे खकय भेये इष्ट लभरों को फ़िा हषा हुआ । उन्होंने भु े ऩुमतक लरखते यहने के लरए फ़िा उत्सादहत फकमा । भैंने 'मवदे शी यॊ ग' नाभक एक औय ऩुमतक लरख कय एक ऩुमतक प्रकाशक को दी । वह बी प्रकालशत हो गई । फ़िे ऩरयश्रभ के साथ भैंने एक ऩुमतक 'क्रास्न्तकायी जीवन' लरखी । 'क्रास्न्तकायी जीवन' को कई प्रकाशकों ने दे खा. फाकी सफ कामा मवमॊ कयें गे । कुि भनुष्म हभने जुटा लरए हैं .

जो साये बायतवषा भें ठगी का काभ कयके हजायों रुऩमे ऩैदा कयता है । भैं एक सज्जन को जानता हूॉ स्जन्होंने इसी प्रकाय ऩचास हजाय से अधधक रुऩए ऩैदा कय लरए । होता मह है फक मे रोग अऩने एजेण्ट यखते हैं । वे एजें ट साधायण ऩुरुषों के ऩास जाकय जोट फनाने की कथा कहते हैं । आता धन फकसे फुया रगता है ? वे नोट फनवाते हैं । इस प्रकाय ऩहरे दस का नोट फनाकय ददमा. फकसी को फीस सार की सजाएॊ हुईं । एक फेचाया. भु े फताना कुि भत. स्जसका फकसी डकैती से कोई सम्फन्ध न था. केवर शरुता के कायण पॊसा ददमा गमा । उसे पाॊसी हो गई औय सफ प्रकाय डकैछतमों भें सस्म्भलरत था. केवर ऩाॊच वषा की सजा यह गई । जेर वारों से लभरकय उसने डकैछतमों भें लशनाख्त न होने दी थी । इस प्रकाय इस दर की सभास्प्त हुई । दै वमोग से हभाये अमर फच गए । केवर एक ही रयवाल्वय ऩक़िा गमा । [edit]नोट फनमनम इसी फीच भेये एक लभर की एक नोट फनाने वारे भहाशम से बें ट हुई । उन्होंने फ़िी फ़िी आशाएॉ फाॊधी । फ़िी रम्फी-रम्फी मकीभ फाॊधने के ऩ्‍चात श भु से कहा फक एक नोट फनाने वारे से बें ट हुई है । फ़िा दऺ ऩुरुष है । भु े बी फना हुआ नोट दे खने की फ़िी उत्कट इच्िा थी । भैंने उन सज्जन के दशान की इच्िा प्रकट की । जफ उक्त नोट फनाने वारे भहाशम भु े लभरे तो फ़िी कौतूहरोत्ऩादक फातें की । भैंने कहा फक भैं मथान तथा आधथाक सहामता दॊ ग ू ा. ऩुलरस उसके ऩीिे ऩ़िी हुई थी । एक ददन ऩुलरस कप्तान ने सवाय तथा तीस-चारीस फन्दक ू वारे लसऩाही रेकय उनके घय भें उसे घेय लरमा । उसने ित ऩय चढ़कय दोनारी कायतूसी फन्दक ू से रगबग तीन सौ पामय फकए । फन्दक ू गयभ होकय गर गई । ऩुलरस वारे सभ े फक घय भें कई आदभी हैं । सफ ऩुलरस वारे छिऩकय आ़ि भें से सुफह की प्रतीऺा कयने रगे । उसने भौका ऩामा । भकान के ऩीिे से कूद ऩ़िा. वे फाजाय भें फेच आमे । सौ रुऩमे का फनाकय ददमा वह बी फाजाय भें चरामा. नोट फनाओ । स्जस प्रकाय उन्होंने भु से कहा. उसे ऩहरे पाॊसी की सजा की आऻा हुई. ऩय भैं नोट फनाने की यीछत अव्‍म दे खना चाहता हूॉ । ऩहरे-ऩहर उन्होंने दस रुऩए का नोट फनाने का छन्‍चम फकमा । भु से एक दस रुऩमे का नमा साप नोट भॊगामा । नौ रुऩमे दवा खयीदने के फहाने से रे गए । याबर भें नोट फनाने का प्रफन्ध हुआ । दो शीशे राए । कुि कागज बी राए । दो तीन शीलशमों भें कुि दवाई थी । दवाइमों को लभराकय एक प्रेट भें सादे कागज ऩानी भें लबगोए । भैं जो साप नोट रामा था. 'इस प्रमोग भें फ़िा व्मम होता है । िोटे भोटे नोट फनाने भें कोई राब नहीॊ । फ़िे नोट फनाने चादहमें. अतएव हाईकोटा से पाॊसी की सजा भाप हो गई. उसी सभम वह साथी सादे कागज की ऩुड़िमा फदर कय दस ू यी ऩुड़िमा रे आमा स्जसभें दोनों नोट थे । इस प्रकाय नोट फन गमा । इस प्रकाय का एक फ़िा बायी दर है . उस ऩय एक सादा कागज रगाकय दोनों को दस ू यी दवा डारकय धोमा । फपय दो सादे कागजों भें रऩेट एक ऩुड़िमा सी फनाई औय अऩने एक साथी को दी फक उसे आग ऩय गयभ कय राए । आग वहाॊ से कुि दयू ऩय जरती थी । कुि सभम तक वह आग ऩय गयभ कयता यहा औय ऩुड़िमा राकय वाऩस दे दी । नोट फनाने वारे ने ऩुड़िमा खोरकय दोनों शीशों को दवा भें धोमा औय पीते से शीशों को फाॊधकय यख ददमा औय कहा फक दो घण्टे भें नोट फन जाएगा । शीशे यख ददमे । फातचीत होने रगी । कहने रगा. उसने तुयन्त दसों अॊगुलरमों के छनशान फना ददमे । वह फुयी तयह काॊऩ यहा था । भेये उन्नीस रुऩमे खचा हो चुके थे । भैंने दोनों नोट यख लरए औय शीशे. एक लसऩाही ने दे ख लरमा । उसने लसऩाही की नाक ऩय रयवाल्वय का कुन्दा भाया । लसऩाही धचल्रामा । लसऩाही के धचल्राते ही भकान भें से एक पामय हुआ । ऩुलरस वारे सभ े भकान ही भें है । लसऩाही को धोखा हुआ होगा । फस. फकसी को ऩचास सार. वह जॊगर भें छनकर गमा । अऩनी मरी को एक टोऩीदाय फन्दक ू दे आमा था फक मदद धचल्राहट हो तो एक पामय कय दे ना । ऐसा ही हुआ । औय वह छनकर गमा । जॊगर भें जाकय एक दस ू ये दर से लभरा । जॊगर भें बी एक सभम ऩुलरस कप्तान से साभना हो गमा । गोरी चरी । उसके बी ऩैय भें ियजे रगे थे । अफ मह फ़िे साहसी हो गए थे । सभ गए थे फक ऩुलरस वारे फकस प्रकाय सभम ऩय आ़ि भें छिऩ जाते हैं । इन रोगों का दर छिन्न- लबन्न हो गमा था । अत् उन्होंने भेये ऩास आश्रम रेना चाहा । भैंने फ़िी कदठनता से अऩना ऩीिा िु़िामा । तत्ऩ्‍चात श जॊगर भें जाकय मे दस ू ये दर से लभर गए । वहाॉ ऩय दयु ाचाय के कायण जॊगर के नेता ने इन्हें गोरी से भाय ददमा । इस प्रकाय सफ छिन्न-लबन्न हो गमा । जो ऩक़िे गए उन ऩय कई डकैछतमाॊ चरी । फकसी को तीस सार. उस ऩय उसके हाथों की दसों अॊगुलरमों के छनशान रगवामे फक वह ऐसा काभ न कये गा । दसों अॊगुलरमों के छनशान दे ने भें उसने कुि ढ़ीर की । भैंने रयवाल्वय उठाकय कहा फक गोरी चरती है . फकन्तु भैंने कह ददमा था फक नोट फनाते सभम भैं वहाॉ उऩस्मथत यहूॉगा. भैंने सफ प्रफन्ध कय ददमा. औय चर क्मों न जामे? इस प्रकाय के सफ नोट असरी होते .एक दस ू या व्मस्क्त जो फहुत वीय था. स्जसके ऩास डकैती का भार तथा कुि हधथमाय ऩाए गए । ऩुलरस से गोरी बी चरी. अनजान ऩढ़े -लरखे बी धोखे भें आ सकते हैं । फकन्तु तू भु े धोखा दे ने आमा है ! अन्त भें भैंने उससे प्रछतऻा ऩर लरखाकय. ऩय ऩैयवी अच्िी हुई.'फकतना साप नोट है !' भैंने हाथ भें रेकय दे खा । दोनों नोटों के नम्फय लभरामे । नम्फय छनतान्त लबन्न-लबन्न थे । भैंने जेफ से रयवाल्वय छनकार नोट फनाने वारे भहाशम की िाती ऩय यख कय कहा 'फदभाश ! इस तयह ठगता फपयता है ?' वह काॊऩकय धगय ऩ़िा । भैंने उसको उसकी भूखत ा ा सभ ाई फक मह ढ़ोंग ग्राभवालसमों के साभने चर सकता है . दवाएॊ इत्मादद सफ िी न रीॊ फक लभरों को तभाशा ददखाऊॊगा । तत्ऩ्‍चात श उन भहाशम को पवदा फकमा । उसने फकमा मह था फक जफ अऩने साथी को आग ऩय गयभ कयने के लरए कागज की ऩुड़िमा दी थी. स्जससे ऩमााप्त धन की प्रास्प्त हो ।' इस प्रकाय भु े बी लसखा दे ने का वचन ददमा । भु े कुि कामा था । भैं जाने रगा तो वह बी चरा गमा । दो घण्टे के फाद आने का छन्‍चम हुआ । भैं पवचायने रगा फक फकस प्रकाय एक नोट के ऊऩय दस ू या सादा कागज यखने से नोट फन जाएगा । भैंने प्रेस का काभ सीखा था । थो़िी फहुत पोटोग्रापी बी जानता था । साइन्स (पवऻान) का बी अध्ममन फकमा था । कुि सभ भें न आमा फक नोट सीधा कैसे िऩेगा । सफसे फ़िी फात तो मह थी फक नम्फय कैसे िऩें गे । भु े फ़िा बायी सन्दे ह हुआ । दो घण्टे फाद भैं जफ गमा तो रयवाल्वय बयकय जेफ भें डारकय रे गमा । मथासभम वह भहाशम आमे । उन्होंने शीशे खोरकय कागज खोरे । एक भेया रामा हुआ नोट औय दस ू या एक दस रुऩमे का नोट उसी के ऊऩय से उतायकय सुखामा । कहा .

स्जस सभम भैं भैनऩुयी षड्मन्र के सदममों के सदहत कामा कयता था. जो अधधक धन रेने की इच्िा कयें . उनको केवर गुजाया-भार सलभछत की ओय से ददमा जा सकता है । जो रोग फकसी व्मवमथा को कयते हैं . उधचत नहीॊ है । तत्ऩ्‍चात श उन भहानुबावों की सम्भछत हुई फक एक छनस््‍चत कोष सलभछत के सदममों को दे ने के छनलभत्त मथापऩत फकमा जामे.हैं । वे तो केवर चार भें यख ददमे जाते हैं । इसके फाद कहा फक हजाय मा ऩाॉच सौ का नोट राओ तो कुि धन बी लभरे । जैसे-तैसे कयके फेचाया एक हजाय का नोट रामा । सादा कागज यखकय शीशे भें फाॊध ददमा । हजाय का नोट जेफ भें यखा औय चम्ऩत हुए ! नोट के भालरक यामता दे खते हैं . फकन्तु मे रोग ऩुलरस को छनमभऩूवाक चौथ दे ते यहते हैं औय इस कायण फचे यहते हैं । [edit]चमरफमजी कई भहानुबावों ने गुप्त सलभछत छनमभादद फनाकय भु े ददखामे । उनभें एक छनमभ मह बी था फक जो व्मस्क्त सलभछत का कामा कयें . उस सभम हभभें से कोई बी अऩने व्मस्क्तगत (प्राइवेट) खचा भें सलभछत का धन व्मम कयना ऩूणा ऩाऩ सभ ता था । जहाॉ तक हो सकता अऩने खचा के लरए भाता-पऩता से कुि राकय प्रत्मेक सदमम सलभछत के कामों भें धन व्मम फकमा कयता था । इसका कायण भेया साहस इस प्रकाय के छनमभों भें सहभत होने का न हो सका । भैंने पवचाय फकमा फक मदद कोई सभम आमा औय फकसी प्रकाय अधधक धन प्राप्त हुआ. फकसी से कुि कह बी नहीॊ सकते । करेजा भसोसकय यह जाते हैं । ऩुलरस ने इस प्रकाय के कुि अलबमुक्तों को धगयफ्ताय बी फकमा. औय आऩस भें वैभनमम फढ़े । स्जसके ऩरयणाभ फ़िे बमॊकय हो सकते हैं । अत् इस प्रकाय के कामा भें मोग दे ना भैंने उधचत न सभ ा । भेयी मह अवमथा दे ख इन रोगों ने आऩस भें षडमन्र यचा. स्जसकी आम का ब्मौया इस प्रकाय हो फक डकैछतमों से स्जतना धन प्राप्त हो उसका आधा सलभछत के कामों भें व्मम फकमा जाए औय आधा सलभछत के सदममों को फयाफय फयाफय फाॊट ददमा जाए । इस प्रकाय के ऩयाभशा से भैं सहभत न हो सका औय भैंने इस प्रकाय की गुप्त सलभछत भें . स्जनके बोजन का प्रफन्ध होना अधधक कदठन काभ न था । अफ भाता जी की उत्कट इच्िा हुई फक भैं बी पववाह कय रॉ ू । कई अच्िे -अच्िे पववाह-सम्फन्ध के सुमोग एकबरत हुए । फकन्तु भैं पवचायता था फक जफ तक ऩमााप्त धन ऩास न हो. वे रोग ही भु से इस प्रकाय के छनमभ फनाने की भाॊग कयने रगे । भु े फ़िा आ्‍चमा हुआ । प्रथभ प्रमत्न भें . तो सादे कागजों के अरावा कुि नहीॊ लभरता. उन्हें फकसी प्रकाय का भालसक बत्ता दे ना उधचत न होगा । स्जन्हें सलभछत के कोष भें से कुि ददमा जामे. अनेकों प्रकाय की उम्भीदें फॊधाई थीॊ. तो कुि सदमम ऐसे मवाथी हो सकते हैं . फक स्जस प्रकाय भैं कहूॉ वे छनमभ मवीकाय कय रें औय पव्‍वास ददराकय स्जतने अमर-शमर भेये ऩास हों. पववाह-फन्धन भें पॊसना ठी क नहीॊ । भैंने मवतन्र कामा आयम्ब फकमा. वहाॊ नोट फनाने वारे का ऩता ही नहीॊ । अन्त भें पववश हो शीशों को खोरा जाता है . उनकी उत्कट इच्िा थी फक वह एक रयवाल्वय यखें औय इस इच्िा ऩूछता के लरए उन्होंने भेया पव्‍वासऩार फनने के कायण भु से बेद कहा था । भु से एक रयवाल्वय भाॊगा फक भैं उन्हें कुि सभम के लरए रयवाल्वय दे द ूॉ । मदद भैं उन्हें रयवाल्वय दे दे ता तो वह उसे हजभ कय जाते ! भैं कय ही क्मा सकता था । फाद को फ़िी कदठनता से इन चारफास्जमों से अऩना ऩीिा िु़िामा । अफ सफ ओय से धचत्त को हटाकय फ़िे भनोमोग से नौकयी भें सभम व्मतीत होने रगा । कुि रुऩमा इक्ा कयने के पवचाय से. सफ कामा मवमॊ कयने के वचन ददए थे. स्जसभें कछतऩम भनुष्मों के प्राणों का उत्तयदाछमत्व हो औय थो़िा-सा बेद खुरने से ही फ़िा बमॊकय ऩरयणाभ हो सकता है . स्जसका एक उद्दे्‍म ऩेट-ऩूछता हो. वे अऩने लसय ऩय हाथ भायकय यह जाते हैं । इस डय से फक मदद ऩुलरस को भारूभ हो गमा तो औय रेने के दे ने ऩ़िें गे. श उनको भु से रेकय सफ ऩय अऩना आधधऩत्म जभा रें । मदद भैं अमर-शमर भाॊगूॊ तो भु से मुद्ध फकमा जाए औय आव्‍मकता ऩ़िे तो भु े कहीॊ रे जाकय जान से भाय ददमा जामे । तीन सज्जनों ने इस प्रकाय षडमन्र यचा औय भु से चारफाजी कयनी चाही । दै वात श उनभें से एक सदमम के भन भें कुि दमा आ गई । उसने श आकय भु से सफ बेद कह ददमा । भु े सुनकय फ़िा खेद हुआ फक स्जन व्मस्क्तमों को भैं पऩता तुल्म भानकय श्रद्धा कयता हूॉ वे ही भेये नाश कयने के लरए इस प्रकाय नीचता का कामा कयने को उद्मत हैं । भैं सम्बर गमा । भैं उन रोगों से सतका यहने रगा फक ऩुन् प्रमाग जैसी घटना न घटे । स्जन भहाशम ने भु से बेद कहा था. पऩता. मोग दे ने से इन्काय कय ददमा । जफ भेयी इस प्रकाय की दृस्ष्ट दे खी तो उन भहानुबावों ने आऩस भें षड्मॊर यचा । जफ भैंने उन भहानुबावों के ऩयाभशा तथा छनमभादद को मवीकाय न फकमा तो वे चुऩ हो गए । भैं बी कुि सभ स्जन्होंने कई प्रकाय की आशाएॊ दे खकय भु न सका फक जो रोग भु भें इतनी श्रद्धा यखते थे. उनको बी कुि व्मवसाम कयने का प्रफन्ध कयना उधचत है . से क्रास्न्तकायी दर का ऩुनसांगठन कयने की प्राथानाएॊ की थीॊ. कुि कभीशन इत्मादद का प्रफन्ध कय रेता था । इस प्रकाय पऩताजी का थो़िा सा बाय फॊटामा । सफसे िोटी फहन का पववाह नहीॊ हुआ था । पऩताजी के साभ्मा के फाहय था फक उस फहन का पववाह फकसी बरे घय भें कय सकते । भैंने रुऩमा जभा कयके फहन का पववाह एक अच्िे जभीॊदाय के महाॊ कय ददमा । पऩताजी का बाय उतय गमा । अफ केवर भाता. नौकयी िो़ि दी । एक लभर ने सहामता दी । भैंने ये शभी कऩ़िा फुनने का एक छनजी कायखाना खोर ददमा । फ़िे भनोमोग तथा ऩरयश्रभ से कामा फकमा । ऩयभात्भा की दमा से अच्िी सपरता हुई । एक-डेढ़ सार भें ही भेया कायखाना चभक गमा । तीन-चाय हजाय की ऩूॊजी से कामा आयम्ब फकमा था । एक सार फाद . ताफक मे रोग सवाथा सलभछत की सहामता ऩय छनबाय यहकय छनये बा़िे के टट्टू न फन जाएॊ । बा़िे के टट्टुओॊ से सलभछत का कामा रेना. दादी तथा िोटे बाई थे. उन्हें सलभछत की ओय से कुि भालसक ददमा जामे । भैंने इस छनमभ को अछनवामा रूऩ से भानना अमवीकाय फकमा । भैं महाॊ तक सहभत था फक जो व्मस्क्त सवा-प्रकाये ण सलभछत के कामा भें अऩना सभम व्मतीत कयें .

6 जेर  2 सॊफधॊ धत कड़िमाॉ  3 फाहयी कडडमाॉ [edit]चतथ ु ा खण्ड [edit]वह ृ त् सॊगिन मद्मपऩ भैं अऩना छन्‍चम कय चुका था फक अफ इस प्रकाय के कामों भें कोई बाग न रॉ ूगा. जो थो़िी-फहुत आधथाक सहामता दे ते थे । फकन्तु प्रान्त बय के प्रत्मेक स्जरे भें सॊगठन कयने का पवचाय था । ऩलु रस की दृस्ष्ट से फचाने के लरए बी ऩूणा प्रमत्न कयना ऩ़िता था । ऐसी ऩरयस्मथछत भें साधायण छनमभों को काभ भें राते हुए कामा कयना फ़िा कदठन था । अनेक उद्मोगों के ऩ्‍चात श कुि बी सपरता न होती थी । दो-चाय स्जरों भें सॊगठनकताा छनमत फकमे गमे थे. भेये ददर के अयभान न छनकरे थे । असहमोग आन्दोरन लशधथर हो चक ु ा था । ऩूणा आशा थी फक स्जतने दे श के नवमव ु क उस आन्दोरन भें बाग रेते थे. जो एक ही ददन भें साये बायतवषा भें ऩचजे फॊट गमे ! उसी के फाद भैंने कामाकारयणी की एक फैठक कयके जो केन्द्र खारी हो गमा था. अभत ृ सय. तथापऩ भु े ऩुन् क्रास्न्तकायी आन्दोरन भें हाथ डारना ऩ़िा. उन्होंने बी हाथ खीॊच लरमा । अफ हभ रोगों की अवमथा फहुत खयाफ हो गई । सफ कामा-बाय भेये ही ऊऩय आ चुका था । कोई बी फकसी प्रकाय की भदद न दे ता था । जहाॊ-तहाॊ से ऩथ ृ क-ऩथ ृ क स्जरों भें कामा कयने वारे भालसक व्मम की भाॊग कय यहे थे । कई भेये ऩास आमे बी । भैंने कुि रुऩमा कजा रेकय उन रोगों को एक भास का खचा ददमा । कईमों ऩय कुि कजा बी हो चक ु ा था । भैं कजा न छनऩटा सका । एक केन्द्र के कामाकत्ताा को जफ ऩमााप्त धन न लभर सका.सफ खचा छनकारकय रगबग दो हजाय रुऩमे का राब हुआ । भेया उत्साह औय बी फढ़ा । भैंने एक दो व्मवसाम औय बी प्रायम्ब फकए । उसी सभम भारूभ हुआ फक सॊमुक्त प्रान्त के क्रास्न्तकायी दर का ऩुनसांगठन हो यहा है । कामाायम्ब हो गमा है । भैंने बी मोग दे ने का वचन ददमा. तो वह कामा िो़िकय चरे गमे । भेये ऩास क्मा प्रफन्ध था.2 कामाकत्तााओॊ की दद ु ा शा o 1. जो भैं उसकी उदय-ऩूछता कय सकता ? अद्बुत सभममा थी ! फकसी तयह उन रोगों को सभ ामा । थो़िे ददनों भें क्रास्न्तकायी ऩचजे आमे । साये दे श भें छनस््‍चत छतधथ ऩय ऩचजे फाॊटे गमे । यॊ गून.4 ये रवे डकैती o 1. फकन्तु ऩेट तो सफके हैं । ददनबय भें थो़िा सा अन्न ऺुधा छनवस्ृ त्त के लरए लभरना ऩयभाव्‍मक है । फपय शयीय ढ़कने की बी आव्‍मकता होती है । अतएव कुि प्रफन्ध तो ऐसा होना चादहए. स्जनको कुि भालसक गुजाया ददमा जाता था । ऩाॊच-दस भहीने तक तो इस प्रकाय कामा चरता यहा । फाद को जो सहामक कुि आधथाक सहामता दे ते थे. उनभें अधधकतय क्रास्न्तकायी आन्दोरन भें सहामता दें गे औय ऩूयी रगन से काभ कयें गे । जफ कामा आयम्ब हो गमा औय असहमोधगमों को टटोरा तो वे आन्दोरन से कहीॊ अधधक लशधथर हो चुके थे । उनकी आशाओॊ ऩय ऩानी फपय चक ु ा था । छनज की ऩॊूजी सभाप्त हो चक ु ी थी । घय भें व्रत हो यहे थे । आगे की बी कोई पवशेष आशा न थी । काॊग्रेस भें बी मवयाज्म दर का जोय हो गमा था । स्जनके ऩास कुि धन तथा इष्ट लभरों का सॊगठन था. तफ मवतन्रताऩूवाक क्रास्न्तकायी कामा भें मोग दे सकूॊगा । ि् भास तक भैंने अऩने कायखानों का सफ काभ साप कयके अऩने सा ी को सफ काभ सभ ा ददमा. स्जसका कायण मह था फक भेयी तष्ृ णा न फु ी थी.5 धगयफ्तायी o 1. राहौय.3 अशान्त मव ु क दर o 1. फकन्तु उस सभम भैं अऩने व्मवसाम भें फुयी तयह पॊसा हुआ था । भैंने ि् भास का सभम लरमा फक ि् भास भें भैं अऩने व्मवसाम को अऩने साथी को सौंऩ दॊ ग ू ा. औय अऩने आऩको उसभें से छनकार रूॊगा. उसके लरए एक . फम्फई. वे कौंलसरों तथा असेंफरी के सदमम फन गमे । ऐसी अवमथा भें मदद क्रास्न्तकायी सॊगठनकतााओॊ के ऩास ऩमााप्त धन होता तो वे असहमोधगमों को हाथ भें रेकय उनसे काभ रे सकते थे । फकतना बी सच्चा काभ कयने वारा हो. तत्ऩ्‍चात श अऩने वचनानुसाय कामा भें मोग दे ने का उद्मोग फकमा । बफस्मभर चतथ ु ा खण्ड Contents [hide]  1 चतथ ु ा खण्ड o 1. स्जसभें छनत की आव्‍मकताएॊ ऩयू ी हो जाएॊ । स्जतने धनी-भानी मवदे श-प्रेभी थे उन्होंने असहमोग आन्दोरन भें ऩूणा सहामता दी थी । फपय बी कुि ऐसे कृऩारु सज्जन थे.1 वह ृ त श सॊगठन o 1. करकत्ता तथा फॊगार के भुख्म शहयों तथा सॊमुक्त प्रान्त के सबी भुख्म-भुख्म स्जरों भें ऩमााप्त सॊख्मा भें ऩचों का पवतयण हुआ । बायत सयकाय फ़िी सशॊक हुई फक ऐसी कौन सी औय इतनी फ़िी सुसॊगदठत सलभछत है .

ऩय इतना कयने ऩय बी गुजय न हो सकी । मुवक दर कुि भहानुबावों की प्रकृछत होती है फक अऩनी कुि शान जभाना मा अऩने आऩ को फ़िा ददखाना अऩना कत्ताव्म सभ ते हैं . मवालबभानी औय सच्चे कामाकत्ताा थे । इस दर ने पवदे श से अमर प्राप्त कयने का फ़िा उत्तभ सूर प्राप्त फकमा था. कुि सभ भें नहीॊ आता था । अन्त भें धैमा धायण कय दृढ़ताऩूवाक कामा कयने का छन्‍चम फकमा । इसी फीच भें फॊगार आडडानेंस छनकरा औय धगयफ्तारयमाॊ हुईं । इनकी धगयफ्तायी ने महाॊ तक असय डारा फक कामाकत्तााओॊ भें छनस्ष्क्रमता के बाव आ गमे । क्मा प्रफन्ध फकमा जामे. लभर जामा कयें गे । मही नहीॊ.भहाशम को छनमुक्त फकमा । केन्द्र भें कुि ऩरयवतान बी हुआ. उस सभम भेयी उत्कण्ठा थी फक मदद एक रयवाल्वय लभर जामे तो दस फीस अॊग्रेजों को भाय दॊ ू । इसी प्रकाय के बाव भैंने कई नवमुवकों भें दे खे । उनकी फ़िी प्रफर हाददा क इच्िा होती है फक फकसी प्रकाय एक रयवाल्वय मा पऩमतौर उनके हाथ रग जामे तो वे उसे अऩने ऩास यख रें । भैंने उनसे रयवाल्वय ऩास यखने का राब ऩूिा. अफ क्मा कयें ?" भैं उनके सूखे-सूखे भुख दे ख फहुधा यो ऩ़िता फक मवदे श सेवा का व्रत रेने के कायण पकीयों से बी फुयी दशा हो यही है ! एक एक कुताा तथा धोती बी ऐसी नहीॊ थी जो साफुत होती । रॊगोट फाॊध कय ददन व्मतीत कयते थे । अॊगोिे ऩहनकय नहाते थे. भालसक चन्दा वसूर कयें ऩय फकसी ने कुि न सुनी । कुि सज्जनों ने व्मस्क्तगत प्राथाना की फक वे अऩने वेतन भें से कुि भालसक दे ददमा कयें । फकसी ने कुि ध्मान न ददमा । सदमम योज भेये द्वाय ऩय ख़िे यहते थे । ऩरों की बयभाय थी फक कुि धन का प्रफन्ध कीस्जए. तफ तो फपय वे अऩने आऩको फ़िा बायी कामाकत्ताा जादहय कयते हैं । जनसाधायण बी अन्धपव्‍वास से उनकी फातों ऩय पव्‍वास कय रेते हैं । पवशेषकय नवमुवक तो इस प्रकाय के भनुष्मों के जार भें शीघ्र ही पॊस जाते हैं । ऐसे ही रोग नेताधगयी की धुन भें अऩनी डेढ़ चावर की खखच़िी अरग ऩकामा कयते हैं । इसी कायण ऩथ ृ क-ऩथ ृ क दरों का छनभााण होता है । इस प्रकाय के भनुष्म प्रत्मेक सभाज तथा प्रत्मेक जाछत भें ऩामे जाते हैं । इनसे क्रास्न्तकायी दर बी भुक्त नहीॊ यह सकता । नवमुवकों का मवबाव चॊचर होता है . एक सभम दो-दो ऩैसे के सत्तू खाते थे । भैं ऩन्द्रह वषा से एक सभम दध ू ऩीता था । इन रोगों की मह दशा दे खकय भु े दध ू ऩीने का साहस न होता था । भैं बी सफके साथ फैठ कय सत्तू खा रेता था । भैंने पवचाय फकमा फक इतने नवमुवकों के जीवन को नष्ट कयके उन्हें कहाॊ बेजा जामे । जफ सलभछत का सदमम फनामा था. वे शान्त यहकय सॊगदठत कामा कयना फ़िा दष्ु कय सभ ते हैं । उनके रृदम भें उत्साह की उभॊगें उठती हैं । वे सभ ते हैं दो चाय अमर हाथ आमे फक हभने गवनाभेंट को नाकों चने चफवा ददए । भैं बी जफ क्रास्न्तकायी दर भें मोग दे ने का पवचाय कय यहा था. बूखों भय यहे हैं । दो एक को व्मवसाम भें रगाने का इन्तजाभ बी फकमा । दो चाय स्जरों भें काभ फन्द कय ददमा. सभम आने ऩय हभ पवशेष प्रकाय की भशीन वारी फन्दक ू ें बी फनवा सकेंगे । इस सभम सलभछत की आधथाक अवमथा फ़िी खयाफ थी । इस सूर के हाथ रग जाने औय इसके राब उठाने की इच्िा होने ऩय बी बफना रुऩमे के कुि होता ददखराई न ऩ़िता था । रुऩमे का प्रफन्ध कयना छनतान्त आव्‍मक था । फकन्तु वह हो कैसे ? दान कोई न दे ता था । कजा बी न लभरता था. तो कोई सन्तोषजनक उत्तय नहीॊ दे सके । कई नवमुवकों को भैंने इस शौक को ऩूया कयने भें सैंक़िों रुऩमे फयफाद कयते बी दे खा है । फकसी क्रास्न्तकायी आन्दोरन के सदमम नहीॊ. स्जससे बमॊकय हाछनमाॊ हो जाती हैं । बोरे-बारे आदभी ऐसे भनुष्मों भें पव्‍वास कयके उनभें आशातीत साहस. अथवा अनुकूर ऩरयस्मथछतमों के उऩस्मथत हो जाने से उन्होंने फकसी उच्च कामा भें मोग दे ददमा. फकन्तु भालसक वेतन दे ने के लरए हभ फाध्म नहीॊ । कोई फीस रुऩमे कजा के भाॊगता था. औय कईमों ने असन्तुष्ट होकय कामा िो़ि ददमा । भैंने बी सभ [edit]अिमन्त लरमा . कोई पवशेष कामा बी नहीॊ. कुि छनणाम नहीॊ कय सके । भैंने प्रमत्न फकमा फक फकसी तयह एक सौ रुऩमा भालसक का कहीॊ से प्रफन्ध हो जाए । प्रत्मेक केन्द्र के प्रछतछनधध से हय प्रकाय से प्राथाना की थी फक सलभछत के सदममों से कुि सहामता रें . तो रोगों ने फ़िी-फ़िी आशाएॊ फधाई थीॊ । कईमों का ऩढ़ना-लरखना िु़िा कय इस काभ भें रगा ददमा था । ऩहरे से भु े मह हारत भारूभ होती तो भैं कदापऩ इस प्रकाय की सलभछत भें मोग न दे ता । फुया पॉसा । क्मा करूॉ. एक सभम ऺेर भें बोजन कयते थे. तो हभको भार उधाय बी लभर जामा कये गा औय हभें जफ फकसी प्रकाय के स्जतनी सॊख्मा भें अमरों की आव्‍मकता होगी. फकन्तु कोया उत्तय लभरा । फकॊ कत्ताव्मपवभूढ़ था । कुि सभ भें न आता था । कोभर-रृदम नवमुवक भेये चायों ओय फैठकय कहा कयते. मोग्मता तथा कामादऺता की आशा कयके उन ऩय श्रद्धा यखते हैं । फकन्तु सभम आने ऩय मह छनयाशा के रूऩ भें ऩरयखणत हो जाती है । इस प्रकाय के भनुष्मों की फकन्हीॊ कायणों वश मदद प्रछतष्ठा हो गई. औय मथा सभम भूल्म छनऩटा ददमा कयें गे. क्मोंफक सयकाय के ऩास सॊमुक्त प्रान्त के सम्फन्ध भें फहुत सी सूचनाएॊ ऩहुॊच चुकी थीॊ । बपवष्म की कामा-प्रणारी का छनणाम फकमा गमा । [edit]कममाकत्तमाओॊ की दद ु ा िम इस सलभछत के सदममों की फ़िी दद ु ा शा थी । चने लभरना बी कदठन था । सफ ऩय कुि न कुि कजा हो गमा था । फकसी के ऩास साफुत कऩ़िे तक न थे । कुि पवद्माथी फन कय धभा ऺेरों तक भें बोजन कय आते थे । चाय-ऩाॊच ने अऩने-अऩने केन्द्र त्माग ददमे । ऩाॊच सौ से अधधक रुऩमे भैं कजा रेकय व्मम कय चुका था । मह दद ु ा शा दे ख भु े फ़िा कष्ट होने रगा । भु से बी बयऩेट बोजन न फकमा जाता था । सहामता के लरए कुि सहानुबूछत यखने वारों का द्वाय खटखटामा. कोई ऩचास का बफर बेजता था.ठी क ही है . भहज शौफकमा रयवाल्वय ऩास यखें गे । ऐसे ही थो़िे से मुवकों का एक दर एक भहोदम ने बी एकबरत फकमा । वे सफ फ़िे सच्चरयर. औय उस ही ऩय छनबाय यह कय कामा कय सकते हो तो कयो । हभसे स्जस सभम हो सकेगा दें गे. "ऩस्ण्डत जी. स्जससे मथारुधच ऩमााप्त अमर लभर सकते थे । उन अमरों के दाभ बी अधधक न थे । अमर बी ऩमााप्त सॊख्मा भें बफरकुर नमे लभरते थे । महाॊ तक प्रफन्ध हो गमा था फक हभ रोग रुऩमे का उधचत प्रफन्ध कय दें गे. वहाॊ के कामाकत्तााओॊ से मऩष्ट शब्दों भें कह ददमा फक हभ भालसक शुल्क नहीॊ दे सकते । मदद छनवााह का कोई दस ू या भागा हो. औय कोई उऩाम न दे ख डाका डारना तम हुआ । फकन्तु फकसी .

भु से बी सहामता चाही । भैंने आधथाक सहामता दे कय अऩना एक सदमम बेजने का वचन ददमा । फकन्तु कुि रुदटमाॊ हुईं स्जससे सम्ऩूणा दर अमत-व्ममत हो गमा । भैं इस पवषम भें कुि बी न जान सका फक दस ू ये दे श के क्रास्न्तकारयमों ने प्रायस्म्बक अवमथा भें हभ रोगों की बाॊछत प्रमत्न फकमा मा नहीॊ । मदद ऩमााप्त अनुबव होता तो इतनी साधायण बूरें न कयते । रुदटमों के होते हुए बी कुि न बफग़िता औय न कुि बेद खुरता. ऩय सफ शान्त यहे । ड्राइवय भहाशम तथा एक इॊजीछनमय भहाशम दोनों का फुया हार था । वे दोनों अॊग्रेज थे । ड्राइवय भहाशम इॊ जन भें रेटे यहे । इॊ जीछनमय भहाशम ऩाखाने भें जा िुऩे ! हभने कह ददमा था फक भुसाफपयों से न फोरें गे । सयकाय का भार रूटेंगे । इस कायण भुसाफपय बी शास्न्तऩूवाक फैठे यहे । सभ े तीस-चारीस आदलभमों ने गा़िी को चायों ओय से घेय लरमा है । केवर दस मुवकों ने इतना फ़िा आतॊक पैरा ददमा । साधायणत् इस फात ऩय फहुत से भनुष्म पव्‍वास कयने भें बी सॊकोच कयें गे फक दस नवमुवकों ने गा़िी ख़िी कयके रूट री । जो बी हो. भेया ख्मार है फक इन्हीॊ भहाशम की गोरी उसके रग गई. औय गा़िी का सन्दक ू उताय कय तो़ि डारें . क्मोंफक तीसये दजजे भें फहुधा प्रफन्ध ठी क नहीॊ यहता है । इस कायण से दस ू ये दजजे की जॊजीय खीॊचने का प्रफन्ध फकमा गमा । सफ रोग उसी ने न भें सवाय थे । गा़िी ख़िी होने ऩय सफ उतयकय गाडा के डडब्फे के ऩास ऩहुॊच गमे । रोहे का सन्दक ू उतायकय िे छनमों से काटना चाहा. जो कुि लभरे उसे रेकय चर दें । ऩयन्तु इस कामा भें भनुष्मों की अधधक सॊख्मा की आव्‍मकता थी । इस कायण मही छन्‍चम फकमा गमा फक गा़िी की जॊजीय खीॊचकय चरती गा़िी को ख़िा कयके तफ रूटा जामे । सम्बव है फक तीसये दजजे की जॊजीय खीॊचने से गा़िी न ख़िी हो. तफ कुल्हा़िा चरा । भुसाफपयों से कह ददमा फक सफ गा़िी भें चढ़ जाओ । गा़िी का गाडा गा़िी भें चढ़ना चाहता था. ऩय उसे जभीन ऩय रेट जाने की आऻा दी. रखनऊ तक अव्‍म दस हजाय रुऩमे की आभदनी होती होगी । सफ फातें ठी क कयके कामाकत्तााओॊ का सॊग्रह फकमा । दस नवमुवकों को रेकय पवचाय फकमा फक फकसी िोटे मटे शन ऩय जफ गा़िी ख़िी हो. सीधी कयके दागने रगे । भैंने जो दे खा तो डाॊटा. मा भुकाफरे भें गोरी न चरे तफ तक फकसी आदभी ऩय पामय न होने ऩाए । भैं नय-हत्मा कयाके डकैती को बीषण रूऩ दे ना नहीॊ चाहता था । फपय बी भेया कहा न भानकय अऩना काभ िो़ि गोरी चरा दे ने का मह ऩरयणाभ हुआ ! गोरी चराने की ड्मूटी स्जनको भैंने दी थी वे फ़िे दऺ तथा अनुबवी भनुष्म थे. क्मोंफक गोरी चराने की उनकी ड्मूटी (काभ) ही न थी । फपय मदद कोई भुसाफपय कौतुहरवश फाहय को लसय छनकारे तो उसके गोरी जरूय रग जामे ! हुआ बी ऐसा ही । जो व्मस्क्त ये र से उतयकय अऩनी मरी के ऩास जा यहा था. आभदनी वारे सन्दक ू उताय यहे हैं । छनयीऺण कयने से भारूभ हुआ फक उसभें जॊजीयें तारा कुि नहीॊ ऩ़िता. केवर दो तीन पामय हुए थे । उसी सभम मरी ने कोराहर फकमा होगा औय उसका ऩछत उसके ऩास जा यहा था. आव्‍मकता होने ऩय तारा खोरकय उताय रेते होंगे । इसके थो़िे ददनों फाद रखनऊ मटे शन ऩय जाने का अवसय प्राप्त हुआ । दे खा एक गा़िी भें से कुरी रोहे के. औय गाडा के डडब्फे भें डार ददमा । कुि खटऩट की आवाज हुई । भैंने उतय कय दे खा फक एक रोहे का सन्दक ू यखा है । पवचाय फकमा फक इसी भें थैरी डारी होगी । अगरे मटे शन ऩय उसभें थैरी डारते बी दे खा । अनुभान फकमा फक रोहे का सन्दक ू गाडा के डडब्फे भें जॊजीय से फॊधा यहता होगा. मदद रूटना है तो सयकायी भार क्मों न रूटा जामे ? इसी उधे़िफुन भें एक ददन भैं ये र भें जा यहा था । गाडा के डडब्फे के ऩास गा़िी भें फैठा था । मटे शन भामटय एक थैरी रामा. दे ख रो कोई साभान यह तो नहीॊ गमा. ताफक बफना गाडा के गा़िी न जा सके । दो आदलभमों को छनमुक्त फकमा फक वे राइन की ऩगडण्डी को िो़िकय घास भें ख़िे होकय गा़िी से हटे हुए गोरी चराते यहें । एक सज्जन गाडा के डडब्फे से उतया । उनके ऩास बी भाउजय पऩमतौर था । पवचाया फक ऐसा शुब अवसय जाने कफ हाथ आए । भाउजय पऩमतौर काहे को चराने को लभरेगा? उभॊग जो आई. उनसे बूर होना असम्बव है । उन रोगों को भैंने दे खा फक वे अऩने मथान से ऩाॊच लभनट फाद पामय कयते थे । मही भेया आदे श था । सन्दक ू तो़ि तीन गठरयमों भें थैलरमाॊ फाॊधी । सफसे कई फाय कहा. वह अऺयश् सत्म लसद्ध हुआ । ऩुलरस वारों की वीयता का भु े अन्दाजा था । इस घटना से बपवष्म के कामा की फहुत फ़िी आशा फन्ध गई । नवमव ु कों भें बी उत्साह फढ़ गमा । स्जतना कजाा था छनऩटा ददमा । अमरों की खयीद के लरए रगबग एक हजाय रुऩमे बेज ददमे । प्रत्मेक केन्द्र के कामाकत्तााओॊ को मथामथान बेजकय दस ू ये प्रान्तों भें बी कामा-पवमताय कयने का छनणाम कयके कुि प्रफन्ध फकमा । एक मुवकदर ने फभ फनाने का प्रफन्ध फकमा. क्मोंफक भैंने जो सॊगठन फकमा .व्मस्क्त पवशेष की सम्ऩस्त्त (private property) ऩय डाका डारना हभें अबीष्ट न था । सोचा. जो उक्त भहाशम की उभॊग का लशकाय हो गमा ! भैंने मथाशस्क्त ऩूणा प्रफन्ध फकमा था फक जफ तक कोई फन्दक ू रेकय साभना कयने न आमे. क्मोंफक स्जस सभम मह भहाशम सन्दक ू नीचे डारकय गाडा के डडब्फे से उतये थे. मों ही यखे जाते हैं । उसी सभम छन्‍चम फकमा फक इसी ऩय हाथ भारूॊगा । [edit]ये रवे डकैती उसी सभम से धुन सवाय हुई । तुयन्त मथान ऩय जो टाइभ टे फुर दे खकय अनुभान फकमा फक सहायनऩुय से गा़िी चरती है . तारा ऩ़िा यहता होगा. स्जनके ऩास फन्दक ू ें मा याइपरें थीॊ । दो अॊग्रेज सशमर पौजी जवान बी थे . इस ऩय बी एक भहाशम चद्दय डार आए ! यामते भें थैलरमों से रुऩमा छनकारकय गठयी फाॊधी औय उसी सभम रखनऊ शहय भें जा ऩहुॊचे । फकसी ने ऩूिा बी नहीॊ. मटे शन के तायघय ऩय अधधकाय कय रें . वामतव भें फात मही थी । इन दस कामाकत्तााओॊ भें अधधकतय तो ऐसे थे जो आमु भें लसपा रगबग फाईस वषा के होंगे औय जो शयीय से फ़िे ऩुष्ट न थे । इस सपरता को दे खकय भेया साहस फढ़ गमा । भेया जो पवचाय था. कहाॉ से आमे हो ? इस प्रकाय दस आदलभमों ने एक गा़िी को योककय रूट लरमा । उस गा़िी भें चौदह भनुष्म ऐसे थे. िे छनमों ने काभ न ददमा. न इस अवमथा को ऩहुॊचते. कौन हो.

फक सम्बवत् दस ू ये मथानों भें बी धगयफ्तारयमाॊ हुई होंगी । धगयफ्तारयमों के सभाचाय सुनकय शहय के सबी लभर बमबीत हो गए । फकसी से इतना बी न हो सका फक जेर भें हभ रोगों के ऩास सभाचाय बेजने का प्रफन्ध कय दे ता !hamara koi bhi aadami [edit]जेर जेर भें ऩहुॊचते ही खुफपमा ऩुलरस वारों ने मह प्रफन्ध कयामा फक हभ सफ एक दस ू ये से अरग यखे जाएॊ . सफको शान्त कय दे ता । कबी नेतत्ृ व को रेकय वाद-पववाद चर जाता । एक केन्द्र के छनयीऺक के वहाॉ कामाकत्ताा अत्मन्त असन्तुष्ट थे । क्मोंफक छनयीऺक से अनुबवहीनता के कायण कुि बूरें हो गई थीॊ । मह अवमथा दे ख भु े फ़िा खेद तथा आ्‍चमा हुआ. जो इस अवमथा का दशान कयना ऩ़िा । [edit]चगयफ्तमयी काकोयी डकैती होने के फाद से ही ऩुलरस फहुत सचेत हुई । फ़िे जोयों के साथ जाॊच आयम्ब हो गई । शाहजहाॊऩुय भें कुि नई भूछतामों के दशान हुए । ऩुलरस के कुि पवशेष सदमम भु से बी लभरे । चायों ओय शहय भें मही चचाा थी फक ये रवे डकैती फकसने कय री ? उन्हीॊ ददनों शहय भें डकैती के एक दो नोट छनकर आमे. उस दे श के वासी हभाये साथ फकतनी सहानुबूछत यखते हैं ? कुि जेर का अनुबव बी प्राप्त कयना था । वामतव भें .था उसभें फकसी ओय से भु े कभजोयी न ददखाई दे ती थी । कोई बी फकसी प्रकाय की रुदट न सभ सकता था । इसी कायण आॊख फन्द फकमे फैठे यहे । फकन्तु आमतीन भें साॊऩ छिऩा हुआ था. जो भेयी जेफ भें था । कुि होनहाय फक तीन चाय ऩर भैंने लरखे थे डाकखाने भें डारने को बेजे. तो दीस्जए । भैंने कहा कोई आऩस्त्तजनक वमतु घय भें नहीॊ । उन्होंने फ़िी सज्जनता की । भेये हथक़िी आदद कुि न डारी । भकान की तराशी रेते सभम एक ऩर लभर गमा. शौचादद से छनवत ू के ृ होने ऩय फाहय द्वाय ऩय फन्दक कुन्दों का शब्द सुनाई ददमा । भैं सभ गमा फक ऩुलरस आ गई है । भैं तुयन्त ही द्वाय खोरकय फाहय गमा । एक ऩुलरस अपसय ने फढ़कय हाथ ऩक़ि लरमा । भैं धगयफ्ताय हो गमा । भैं केवर एक अॊगोिा ऩहने हुए था । ऩुलरस वारे को अधधक बम न था । ऩूिा मदद घय भें कोई अमर हो. तफ तक डाक छनकर चुकी थी । भैंने वे सफ इस ख्मार से अऩने ऩास ही यख लरए फक डाक के फम्फे भें डार दॊ ग ू ा । फपय पवचाय फकमा जैसे फम्फे भें ऩ़िे यहें गे. फकन्तु फपय बी एक दस ू ये से फातचीत हो जाती थी । मदद साधायण कैददमों के साथ यखते तफ तो फातचीत का ऩूणा प्रफन्ध हो जाता. स्जन्हें भैं मा एक व्मस्क्त औय जानता था । कोई तीसया व्मस्क्त इस प्रकाय से ब्मौये वाय नहीॊ जान सकता था । भु े फ़िा आ्‍चमा हुआ । फकन्तु सन्दे ह इस कायण न हो सका फक भैं दस ू ये व्मस्क्त के कामों भें अऩने शयीय के सभान ही पव्‍वास यखता था । शाहजहाॊऩुय भें स्जन-स्जन व्मस्क्तमों की धगयफ्तायी हुई. भैं काभ कयते कयते थक गमा था । बपवष्म के कामों भें अधधक नय हत्मा का ध्मान कयके भैं हतफुपद्ध सा हो गमा था । भैंने फकसी के कहने की कोई बी धचन्ता न की । याबर के सभम ग्मायह फजे के रगबग एक लभर के महाॊ से अऩने घय ऩय गमा । यामते भें खुफपमा ऩुलरस के लसऩादहमों से बें ट हुई । कुि पवशेष रूऩ से उस सभम बी वे दे खबार कय यहे थे । भैंने कोई धचन्ता न की औय घय जाकय सो गमा । प्रात्कार चाय फजने ऩय जगा. वह बी फ़िी आ्‍चमाजनक प्रतीत होती थी । स्जन ऩय कोई सन्दे ह बी न था. ऐसा गहया भुॊह भाया फक चायों खानों धचत्त कय ददमा ! ल्जन्हें हभ हमय सभझे थे गरम अऩनम सजमने को. जो बमॊकय रूऩ धायण कय रेती । भेये ऩास जफ भाभरा आता तो भैं प्रेभ-ऩूवक ा सलभछत की दशा का अवरोकन कयाके. अफ तो ऩुलरस का अनुसॊधान औय बी फढ़ने रगा । कई लभरों ने भु से कहा बी फक सतका यहो । दो एक सज्जनों ने छनस््‍चतरूऩेण सभाचाय ददमा फक भेयी धगयफ्तायी जरूय हो जाएगी । भेयी सभ भें कुि न आमा । भैंने पवचाय फकमा फक मदद धगयफ्तायी हो बी गई तो ऩुलरस को भेये पवरुद्ध कुि बी प्रभाण न लभर सकेगा । अऩनी फुपद्धभत्ता ऩय कुि अधधक पव्‍वास था । अऩनी फुपद्ध के साभने दस ू यों की फुपद्ध को तुच्ि सभ ता था । कुि मह बी पवचाय था फक दे श की सहानुबूछत की ऩयीऺा की जाए । स्जस दे श ऩय हभ अऩना फलरदान दे ने को उऩस्मथत हैं . ऩुलरस उन्हें कैसे जान गई? दस ू ये मथानों ऩय क्मा हुआ कुि बी न भारूभ हो सका । जेर ऩहुॊच जाने ऩय भैं थो़िा फहुत अनुभान कय सका. वही अफ नमग फन फैिे हभमये कमट खमने को ! नवमुवकों भें आऩस की हो़ि के कायण फहुत पवतण्डा तथा करह बी हो जाती थी. क्मोंफक नेताधगरय का बूत सफसे बमानक होता है । स्जस सभम से मह बूत खोऩ़िी ऩय सवाय होता है . वैसे जेफ भें ऩ़िे हैं । भैं उन ऩरों को वापऩस घय रे आमा । उन्हीॊ भें एक ऩर आऩस्त्तजनक था जो ऩुलरस के हाथ रग गमा । धगयफ्ताय होकय ऩुलरस कोतवारी ऩहुॊचा । वहाॊ ऩय खुफपमा ऩुलरस के एक अपसय से बें ट हुई । उस सभम उन्होंने कुि ऐसी फातें की. उसी सभम से सफ काभ चौऩट हो जाता है । केवर एक दस ू ये को दोष दे खने भें सभम व्मतीत होता है औय वैभनमम फढ़कय फ़िे बमॊकय ऩरयणाभों का उत्ऩादक होता है । इस प्रकाय के सभाचाय सुन भैंने सफको एकबरत कय खूफ पटकाया । सफ अऩनी रुदट सभ कय ऩिताए औय प्रीछतऩूवाक आऩस भें लभरकय कामा कयने रगे । ऩय ऐसी अवमथा हो गई थी फक दरफन्दी की नौफत आ गई थी । इस प्रकाय से तो दरफन्दी हो ही गई थी । ऩय भु ऩय सफ की श्रद्धा थी औय भेये वक्तव्म को सफ भान रेते थे । सफ कुि होने ऩय बी भु े फकसी ओय से फकसी प्रकाय का सन्दे ह न था । फकन्तु ऩयभात्भा को ऐसा ही मवीकाय था. इस कायण से सफको अरग अरग तनहाई की कोठड़िमों भें फन्द फकमा गमा । मही प्रफन्ध .

दस ू ये स्जरे की जेरों भें बी. ताफक ऩुलरस का ध्मान दयू ी की ओय चरा जामे. कुि इधय-उधय की फातें कयके बेद जानने का प्रमत्न कयते हैं । अनुबवी रोग तो ऩुलरस वारों से लभरने से इन्काय ही कय दे ते हैं । क्मोंफक उनसे लभरकय हाछन के अछतरयक्त राब कुि बी नहीॊ होता । कुि व्मस्क्त ऐसे होते हैं जो सभाचय जानने के लरए कुि फातचीत कयते हैं । ऩुलरस वारों से लभरना ही क्मा है । वे तो चारफाजी से फात छनकारने की ही योटी खाते हैं । उनका जीवन इसी प्रकाय की फातों भें व्मतीत होता है । नवमुवक दछु नमादायी क्मा जानें ? न वे इस प्रकाय की फातें ही फना सकते हैं । जफ फकसी तयह कुि सभाचाय ही न लभरते तफ तो जी फहुत घफ़िाता । मही ऩता नहीॊ चरता फक ऩुलरस क्मा कय यही है . फनायसीरार फमान दे चुके । फनायसीरार के सम्फन्ध भें सफ लभरों ने कहा था फक इससे अव्‍म धोखा होगा. उन्होंने जी बय के ऩुलरस की भदद की । लशनाख्तों भें अलबमुक्तों को साधायण भस्जमने टों की बाॊछत बी सुपवधाएॊ न दीॊ । ददखाने के लरए कागजी काया वाई खूफ साप यखी । जफान के फ़िे भीठे थे । प्रत्मेक अलबमुक्त से फ़िे तऩाक से लभरते थे । फ़िी भीठी भीठी फातें कयते थे । सफ सभ ते थे फक हभसे सहानुबूछत यखते हैं । कोई न सभ सका फक अन्दय ही अन्दय घाव कय यहे हैं । इतना चाराक अपसय शामद ही कोई दस ू या हो । जफ तक भुकदभा उनकी अदारत भें यहा. फकसी को कोई लशकामत का भौका ही न ददमा । मदद कबी कोई फात हो बी जाती तो ऐसे ढॊ ग से उसे टारने की कौलशश कयते फक फकसी को फुया ही न रगता । फहुधा ऐसा बी हुआ फक खुरी अदारत भें अलबमुक्तों से ऺभा तक भाॊगने भें सॊकोच न फकमा । फकन्तु कागजी कामावाही भें इतने होलशमाय थे फक जो कुि लरखा सदै व अलबमुक्तों के पवरुद्ध ! जफ भाभरा सेशन सुऩुदा फकमा औय आऻाऩर भें मुस्क्तमाॊ दी. ऩय भेयी फुपद्ध भें कुि न सभामा था । प्रत्मेक जानकाय ने फनायसीरार के सम्फन्ध भें मही बपवष्मवाणी की थी फक वह आऩस्त्त ऩ़िने ऩय अटर न यह सकेगा । इस कायण सफ ने उसे फकसी प्रकाय के गुप्त कामा भें रेने की भनाही की थी । अफ तो जो होना था सो हो ही गमा । थो़िे ददनों फाद स्जरा करक्टय लभरे । कहने रगे पाॊसी हो जाएगी । फचना हो तो फमान दे दो । भैंने कुि उत्तय न ददमा । तत्ऩ्‍चात श खुफपमा ऩुलरस के कप्तान सादहफ लभरे. उसी सभम यामफये री भें फनवायी रार की धगयफ्तायी हुई. भुकदभे के सम्फन्ध भें कोई फातचीत न कये । सुपवधा के लरए सफसे प्रथभ मह ऩयभाव्‍मक है फक एक पव्‍वास-ऩार वकीर फकमा जाए जो मथासभम आकय फातचीत कय सके । वकीर के लरमे फकसी प्रकाय की रुकावट नहीॊ हो सकती । वकीर के साथ अलबमुक्त की जो फातें होती हैं. तफ सफ की आॊखें खुरीॊ फक फकतना गहया घाव भाय ददमा । भुकदभा अदारत भें न आमा था. भु े हार भारूभ हुआ । भैंने ऩॊ० हयकयननाथ से कहा फक सफ काभ िो़िकय सीधे यामफये री जाएॊ औय फनायसीरार से लभरें . फकमा गमा था । अरग-अरग यखने से ऩुलरस को मह सुपवधा होती है फक प्रत्मेक से ऩथ ृ क-ऩथ ृ क लभरकय फातचीत कयते हैं । कुि बम ददखाते हैं . सजा जरूय हो जामेगी । मदद फकसी वकीर से लभर लरमा होता तो उसका धैमा न टूटता । ऩॊ० हयकयननाथ शाहजहाॊऩुय आए. ऩयन्तु उन्हें तो पव्‍वसनीम सूर हाथ रग चुका था. फहुत सी फातें की । कई कागज ददखराए । भैंने कुि कुि अन्दाजा रगामा फक फकतनी दयू तक मे रोग ऩहुॊच गमे हैं । भैंने कुि फातें फनाई. वे फनावटी फातों ऩय क्मों पव्‍वास कयते ? अन्त भें उन्होंने अऩनी मह इच्िा प्रकट की फक मदद भैं फॊगार का सम्फन्ध फताकय कुि फोरशेपवक सम्फॊध के पवषम भें अऩना फमान दे दॊ . बाग्म का क्मा छनणाम होगा ? स्जतना सभम व्मतीत होता जाता था उतनी ही धचन्ता फढ़ती जाती थी । जेर -अधधकारयमों से लभरकय ऩुलरस मह बी प्रफन्ध कया दे ती है फक भुराकात कयने वारों से घय के सम्फन्ध भें फातचीत कयें . स्जस सभम वह अलबमुक्त श्रीमुत प्रेभकृष्ण खन्ना से लभरे. मह अनुबव फाद भें हुआ । धगयफ्तायी के फाद शाहजहाॊऩुय के वकीरों से लभरना बी चाहा. उससे भारूभ हुआ. फकन्तु शाहजहाॊऩुय भें ऐसे दब्फू वकीर यहते हैं जो सयकाय के पवरुद्ध भुकदभें भें सहामता दे ने भें दहचकते हैं । भु से खुफपमा ऩुलरस के कप्तान साहफ लभरे । थो़िी सी फातें कयके अऩनी इच्िा प्रकट की फक भु े सयकायी गवाह फनाना चाहते हैं । थो़िे ददनों भें एक लभर ने बमबीत होकय फक कहीॊ वह बी न ऩक़िा जाए. फनायसीरार से बें ट की औय सभ ा फु ा कय उसे सयकायी गवाह फना ददमा । फनायसीरार फहुत घफयाता था फक कौन सहामता दे गा. उनको कोई दस ू या सुन नहीॊ सकता । क्मोंफक इस प्रकाय का कानून है . औय सजा के थो़िे ददनों फाद ही जेर से छनकारकय इॊग्रैंड बेज दें गे औय ऩन्द्रह हजाय रुऩमे ऩारयतोपषक बी सयकाय से ददरा दें गे । भैं भन ही भन भें फहुत हॊ सता था । अन्त भें एक ददन फपय भु से जेर भें लभरने को गुप्तचय पवबाग के कप्तान साहफ आमे । भैंने अऩनी कोठयी भें से छनकरने से ही इन्काय कय ददमा । वह कोठयी ऩय आकय फहुत सी फातें कयते यहे . फकन्तु उन्होंने भेयी फातों ऩय कुि बी ध्मान न ददमा । भु े फनायसीरार ऩय ऩहरे ही सॊदेह था. उस सभम अलबमुक्त ने ऩॊ० हयकयननाथ से फहुत कुि कहा फक भु से तथा दस ू ये अलबमुक्तों से लभर रें । मदद वह कहा भान जाते औय लभर रेते तो फनायसीदास को साहस हो जाता औय वह डटा यहता । उसी याबर को ऩहरे एक इन्मऩेक्टय फनायसीरार से लभरे । फपय जफ भैं सो गमा तफ फनायसीरार को छनकार कय रे गए । प्रात्कार ऩाॊच फजे के कयीफ जफ फनायसीरार को ऩुकाया । ऩहये ऩय जो कैदी था. क्मोंफक उसका .ू तो वे भु े थो़िी सी सजा कया दें गे. जहाॊ जहाॊ बी इस सम्फन्ध भें धगयफ्तारयमाॊ हुई थी. अन्त भें ऩये शान होकय चरे गए । लशनाख्तें कयाई गईं । ऩुलरस को स्जतने आदभी लभर सके उतने आदभी रेकय लशनाख्त कयाई । बाग्मवश श्री अईनुद्दीन साहफ भुकदभे के भस्जमने ट भुकया य हुए.

उससे इस प्रकाय की पवकट वेदना होती थी फक कोई उनके ऩास ख़िा होकय उस िटऩटाने के दृ्‍म को दे ख न सकता था । एक भैडडकर फोडा फनामा गमा. फकन्तु इस दर के कुि व्मस्क्त ऐसे थे. तो कह ददमा गमा फक सेठजी को कोई फीभायी ही नहीॊ है ! जफ से काकोयी षड्मॊर के अलबमुक्त जेर भें एक साथ यहने रगे. ऩय उसने न ददमे । स्जरा अपसय की शान भें यहा । धगयफ्ताय होते ही सफ शान लभट्टी भें लभर गई । फनवायीरार के फमान दे दे ने से ऩुलरस का भुकदभा फहुत कभजोय था । सफ रोग चायों ओय से एकबरत कयके रखनऊ स्जरा जेर भें यखे गए । थो़िे सभम तक अरग अरग यहे . फकन्तु फॊगालरमों की हारत मह है फक स्जस फकसी कामाारम मा दफ्तय भें एक बी फॊगारी ऩहुॊच जाएगा. पप्रम सहोदय का दे हान्त होने ऩय बी आॊख से आॊसू न धगया. औय स्जसका भु े बम था. स्जसका उनके नैलभस्त्तक जीवन भें ऩग-ऩग ऩय प्रकाश होता था । अनेक प्रमत्न कयने ऩय बी जेर के फाहय इस प्रकाय का अनुबव कदापऩ न प्राप्त हो सकता था । फ़िी बमॊकय से बमॊकय आऩस्त्त भें बी भेये भुख से आह न छनकरी. तबी से उनभें एक अद्बुत ऩरयवतान का सभावेश हुआ. जहाॊ अदारत भें कोई बी शहय का आदभी न आता था ! इतना बी तो न हुआ फक एक अच्िा प्रेस-रयऩोटा य ही यहता. छनत्म नई चारें चरी जाती थीॊ । आऩस भें ही एक दस ू ये के पवरुद्ध षड्मॊर यचे जाते थे ! फॊगालरमों का न्मामअन्माम सफ सहन कय लरमा जाता था । इन सायी फातों ने भेये रृदम को टूक टूक कय डारा । सफ कृत्मों को दे ख भैं भन ही भन घुटा कयता । .'हाम! हाम!' ऩय कुि बी सुनवाई न हुई ! औय फातें तो दयू . कॊघा तथा साफुन साथ यखता था । भु े इससे बम बी था. वे ही उन रोगों का छतयमकाय तक कयने रगे ! इसी प्रकाय आऩस का वाद-पववाद कबी-कबी बमॊकय रूऩ धायण कय लरमा कयता । प्रान्तीम प्र्‍न छि़ि जाता । फॊगारी तथा सॊमुक्त प्रान्त वालसमों के कामा की आरोचना होने रगती । इसभें कोई सन्दे ह नहीॊ फक फॊगार ने क्रास्न्तकायी आन्दोरन भें दस ू ये प्रान्तों से अधधक कामा फकमा है . स्जनके कटु वचनों के कायण भेये रृदम ऩय चोट रगती थी औय अश्रुओॊ का स्रोत उफर ऩ़िता था । भेयी इस अवमथा को दे खकय दो चाय लभरों को जो भेयी प्रकृछत को जानते थे. प्रेस भें बेजता यहता ! इस्ण्डमन डेरी टे रीग्राप वारों ने कृऩा की । मदद कोई अच्िा रयऩोटा य आ बी गमा. कयती यही । इन सायी फातों को दे खकय जज का साहस फढ़ गमा । उसने जैसा जी चाहा सफ कुि फकमा । अलबमुक्त धचल्रामे . थो़िे ही ददनों भें उस कामाारम मा दफ्तय भें फॊगारी ही फॊगारी ददखाई दें गे ! स्जस शहय भें फॊगारी यहते हैं उनकी फमती अरग ही फसती है । फोरी बी अरग । खानऩान बी अरग । जेर भें मही सफ अनुबव हुआ । स्जन भहानुबावों को भैं त्माग की भूछता सभ ता था. स्जसभें तीन डाक्टय थे । उनकी कुि सभ भें न आमा. स्जसका अवरोकन कय भेये आ्‍चमा की सीभा न यही । जेर भें सफसे फ़िी फात तो मह थी फक प्रत्मेक आदभी अऩनी नेताधगयी की दहु ाई दे ता था । कोई बी फ़िे-िोटे का बेद न यहा । फ़िे तथा अनुबवी ऩुरुषों की फातों की अवहे रना होने रगी । अनुशासन का नाभ बी न यहा । फहुधा उल्टे जवाफ लभरने रगे । िोटी-िोटी फातों ऩय भतबेद हो जाता । इस प्रकाय का भतबेद कबी कबी वैभनमम तक का रूऩ धायण कय रेता । आऩस भें ग़िा बी हो जाता । खैय ! जहाॊ चाय फतान यहते हैं . फकन्तु हभाये दर के एक खास आदभी का वह पव्‍वासऩार यह चुका था । उन्होंने सैंक़िों रुऩमे दे कय उसकी सहामता की थी । इसी कायण हभ रोग बी अन्त तक उसे भालसक सहामता दे ते यहे थे । भैंने फहुत कुि हाथ-ऩैय भाये । ऩय कुि बी न चरी. उसने फमान दे ददमे । जफ तक मह धगयफ्ताय न हुआ था कुि सदममों ने इसके ऩास जो अमर थे वे भाॊगे. औय जो कुि अदारत की कामावाही ठी क ठी क प्रकालशत की गई तो ऩुलरस वारों ने जज साहफ से लभरकय तुयन्त उस रयऩोटा य को छनकरवा ददमा ! जनता की कोई सहानुबूछत न थी । जो ऩुलरस के जी भें आमा. वह फार फच्चों तथा घय को सम्बारता मा इतने सभम तक घय-फाय िो़िकय भुकदभा कयता ? मदद चाय अच्िे ऩैयवी कयने वारे होते तो ऩुलरस का तीन-चौथाई भुकदभा टूट जाता । रखनऊ जैसे जनाने शहय भें भुकदभा हुआ. फ़िा आ्‍चमा होता था । लरखते हुए रृदम कस्म्ऩत होता है फक उन्हीॊ सज्जनों भें फॊगारी तथा अफॊगारी का बाव इस प्रकाय बया था फक फॊगालरमों की फ़िी से फ़िी बूर. जो कुि अदारत भें होता था. फकन्तु अदारत भें भुकदभा आने से ऩहरे ही एकबरत कय ददए गए । भुकदभे भें रुऩमे की जरूयत थी । अलबमुक्तों के ऩास क्मा था ? उनके लरए धन-सॊग्रह कयना दष्ु कय था । न जाने फकस प्रकाय छनवााह कयते थे । अधधकतय अलबमुक्तों का कोई सम्फन्धी ऩैयवी बी न कय सकता था । स्जस फकसी के कोई था बी. भैं तु से भुहब्फत कयता हूॉ) ठूॊस-ठूॊस कय बया था.यहन सहन इस प्रकाय का था फक जो ठी क न था । जफ दस ू ये सदममों के साथ यहता तफ उनसे कहा कयता फक भैं स्जरा सॊगठनकत्ताा हूॊ । भेयी गणना अधधकारयमों भें है । भेयी आऻा ऩारन फकमा कयो । भेये ूठे फतान भरा कयो । कुि पवरालसता-पप्रम बी था. उनका फकसी प्रान्त पवशेष से क्मा सम्फन्ध ? ऩयन्तु साऺात श दे ख लरमा फक प्रत्मेक फॊगारी के ददभाग भें कपववय यवीन्द्रनाथ का गीत 'आभय सोनाय फाॊगरा आलभ तोभाके बारोवासी' (भेये सोने के फॊगार. स्जनकी आऻा को भैं सॊसाय भें सफ से श्रेष्ठ भानता था स्जनकी जया सी क़िी दृस्ष्ट बी भैं सहन न कय सकता था. प्रत्मेक सभम शीशा. श्रीमुत दाभोदयमवरूऩ सेठ को ऩुलरस ने जेर भें स़िा डारा । रगबग एक वषा तक वे जेर भें त़िपते यहे । सौ ऩौंड से केवर छिमासठ ऩौंड वजन यह गमा । कई फाय जेर भें भयणासन्न हो गए । छनत्म फेहोशी आ जाती थी । रगबग दस भास तक कुि बी बोजन न कय सके । जो कुि िटाॊक दो िटाॊक दध ू फकसी प्रकाय ऩेट भें ऩहुॊच जाता था. उनके अन्दय बी फॊगारीऩने का बाव दे खा । भैंने जेर से फाहय कबी मवप्न भें बी मह पवचाय न फकमा था फक क्रास्न्तकायी दर के सदममों भें बी प्रान्तीमता के बावों का सभावेश होगा । भैं तो मही सभ ता यहा फक क्रास्न्तकायी तो सभमत बायतवषा को मवतन्र कयाने का प्रमत्न कय यहे हैं . वही हुआ । बा़िे का टट्टू अधधक फो न सम्बार सका. वहाॊ खटकते ही हैं । मे रोग तो भनुष्म दे हधायी थे । ऩयन्तु रीडयी की धुन ने ऩाटीफन्दी का ख्मार ऩैदा कय ददमा । जो मुवक जेर के फाहय अऩने से फ़िों की आऻा को वेद-वाक्म के सभान भानते थे . हठधभी तथा बीरुता की अवहे रना की गई । मह दे खकय अन्म ऩुरुषों का साहस फढ़ता था. जो भुकदभे की सायी कामावाही को.

उनभें से ऩाॊच-ि् भहात्भाओॊ ने इस प्रान्त की जेरों के व्मवहाय के कायण ही जेरों भें प्राण त्माग ददमे ! इस पवचाय के अनुसाय काकोयी के रगबग सफ हवाराछतमों ने अनशन व्रत आयम्ब कय ददमा । दस ू ये ही ददन सफ ऩथ ृ क कय ददमे गए । कुि व्मस्क्त डडस्मनक्ट जेर भें यखे गए. क्मोंफक इस भुकदभे के ऩहरे भैंने फकसी अदारत भें सभम न व्मतीत फकमा था. वह फहुत ढ़ीरा हो गमा । नवमुवकों की श्रद्धा को भु से हटाने के लरए अनेकों प्रकाय की फातें की जाने रगीॊ । भुख्म नेता भहोदम ने मवमॊ कुि कामाकत्तााओॊ से भेये सम्फन्ध भें कहा फक मे कुि रुऩमे खा गए । भैंने एक एक ऩैसे का दहसाफ यखा था । जैसे ही भैंने इस प्रकाय की फातें सुनीॊ. भैंने कामाकारयणी के सदममों के साभने यखकय दहसाफ दे ना चाहा. मह पवचाय िो़ि ददमा गमा । मुवकवन्ृ द की सम्भछत हुई फक अनशन व्रत कयके सयकाय से हवाराती की हारत भें ही भाॊगें ऩूयी कया री जाएॊ क्मोंफक रम्फी-रम्फी सजाएॊ होंगी । सॊमुक्त प्रान्त की जेरों भें साधायण कैददमों का बोजन खाते हुए सजा काटकय जेर से स्जन्दा छनकरना कोई सयर कामा नहीॊ । स्जतने याजनैछतक कैदी षड्मन्रों के सम्फन्ध भें सजा ऩाकय इस प्रान्त की जेरों भें यखे गए. औय अऩने पवरुद्ध आऺेऩ कयने वारे को दण्ड दे ने का प्रमताव उऩस्मथत फकमा । अफ तो फॊगालरमों का साहस न हुआ फक भु से दहसाफ सभ ें । भेये आचयण ऩय बी आऺेऩ फकमे गए । स्जस ददन सपाई की फहस भैंने सभाप्त की. सयकायी तथा सपाई के वकीरों की स्जयह सुन कय भैंने बी साहस फकमा था । इसके फाद जफ से ऩहरे भुख्म नेता भहाशम के पवषम भें सयकायी वकीर ने फहस कयनी शुरू की । खूफ ही आ़िे हाथों लरमा तो भुख्म नेता भहाशम का फुया हार था. जो हभसे फकसी प्रकाय का ऩयाभशा फकमा जाए ? तफ उत्तय लभरा फक व्मस्क्तगत फात थी । भैंने फ़िे जोय के साथ पवयोध फकमा फक मह कदापऩ व्मस्क्तगत फात नहीॊ हो सकती । खूफ पटकाय फतराई । भेयी फातों को सुन चायों ओय खरफरी भची । भु े फ़िा क्रोध आमा फक फकतनी धूत्ताता से काभ लरमा गमा । भु े चायों ओय से चढ़ाकय ऱिने के लरए प्रमतुत फकमा गमा । भेये पवरुद्ध षड्मॊर यचे गए । भेये ऊऩय अनुधचत आऺेऩ फकए गए. जेर भें स़िने को डार कय मवमॊ फॊधेज से छनकर जाने का प्रमत्न फकमा गमा । धधक्काय है ऐसे जीवन को ! फकन्तु सोच-सभ बफस्मभर चतथ ु ा खण्ड-1 कय चुऩ यहा । . दे ख तो क्मा हो यहा है ?' भैंने जेफ से कागज छनकार कय ऩढ़े । ऩढ़कय शोक तथा आ्‍चमा की सीभा न यही । ऩुलरस द्वाया सयकाय को ऺभा-प्राथाना बेजी जा यही थी । बपवष्म के लरए फकसी प्रकाय के दहॊसात्भक आन्दोरन मा कामा भें बाग न रेने की प्रछतऻा की गई थी । Undertaking दी गई थी । भैंने भुख्म कामाकत्तााओॊ से सफ पववयण कह कय इस सफ का कायण ऩूिा फक क्मा हभ रोग इस मोग्म बी नहीॊ यहे . क्मोंफक उन्हें आशा थी फक सम्बव है सफूत की कभी से वे िूट जाएॊ मा अधधक से अधधक ऩाॊच मा दस वषा की सजा हो जाए । आखखय चैन न ऩ़िी । सी० आई० डी० अपसयों को फुरा कय जेर भें उनसे एकान्त भें डेढ़ घण्टे तक फातें हुई । मुवक भण्डर को इसका ऩता चरा । सफ लभरकय भेये ऩास आमे । कहने रगे .एक फाय पवचाय हुआ फक सयकाय से सभ ौता कय लरमा जाए । फैरयमटय साहफ ने खुफपमा ऩुलरस के कप्तान से ऩयाभशा आयम्ब फकमा । फकन्तु मह सोचकय फक इससे क्रास्न्तकायी दर की छनष्ठा न लभट जाए. नवमुवकों के जीवन का बाय रेकय रीडयी की शान ा़िी गई औय थो़िी सी आऩस्त्त ऩ़िने ऩय इस प्रकाय फीस-फीस वषा के मुवकों को फ़िी-फ़िी सजाएॊ ददरा. तफ सयकाय के कान ऩय बी जूॊ यें गी । उधय सयकाय का कापी नुकसान हो यहा था । जज साहफ तथा दस ू ये कचहयी के कामाकत्तााओॊ को घय फैठे वेतन दे ना ऩ़िता था । सयकाय को मवमॊ धचन्ता थी फक फकसी प्रकाय अनशन िूटे । जेर अधधकारयमों ने ऩहरे आठ आने योज तम फकमे । भैंने उस सभ ौते को अमवीकाय कय ददमा औय फ़िी कदठनता से दस आने योज ऩय रे आमा । उस अनशन व्रत भें ऩन्द्रह ददवस तक भैंने जर ऩीकय छनवााह फकमा था । सोरहवें ददन नाक से दध ू पऩरामा गमा था । श्रीमुत योशनलसॊह जी ने बी इसी प्रकाय भेया साथ ददमा था । वे ऩन्द्रह ददन तक फयाफय चरते-फपयते यहे थे । मनानादद कयके अऩने नैलभस्त्तक कभा बी कय लरमा कयते थे । दस ददन तक भेये भुख को दे खकय अनजान ऩुरुष मह अनुभान बी नहीॊ कय सकता था फक भैं अन्न नहीॊ खाता । सभ ौते के स्जन खुफपमा ऩुलरस के अधधकारयमों से भुख्म नेता भहोदम का वातााराऩ फहुधा एकान्त भें हुआ कयता था. क्मोंफक भु से ऩुलरस फहुत असन्तुष्ट थी । भु े ऩुलरस से न लभरने ददमा गमा । ऩरयणाभमवरूऩ सी० आई० डी० वारे भेये द्‍ु भन हो गए । सफ भेये व्मवहाय की ही लशकामत फकमा कयते । ऩुलरस अधधकारयमों से फातचीत कयके भुख्म नेता भहोदम को कुि आशा फॊध गई । आऩका जेर से छनकरने का उत्साह जाता यहा । जेर से छनकरने के उद्मोग भें जो उत्साह था. इस सम्फन्ध भें फातचीत कय यहे हैं । भु े सन्तोष न हुआ । दो मा तीन ददन फाद भुख्म नेता भहाशम एकान्त भें फैठ कय कई घॊटे तक कुि लरखते यहे । लरखकय कागज जेफ भें यख बोजन कयने गए । भेयी अन्तयात्भा ने कहा. ' उठ. इस सभम सी० आई० डी० अपसय से क्मों भुराकात की जा यही है ? भेयी स्जऻासा ऩय उत्तय लभरा फक सजा होने के फाद जेर भें क्मा व्मवहाय होगा. कुि सेण्नर जेर बेजे गए । अनशन कयते ऩन्द्रह ददवस फीत गए. सयकायी वकीर ने उठकय भुक्त कण्ठ से भेयी फहस की प्रशॊसा की फक आऩने सैंक़िों वकीरों से अच्िी फहस की । भैंने नभमकाय कय उत्तय ददमा फक आऩके चयणों की कृऩा है . सभ ौते की फात खत्भ होने जाने ऩय बी आऩ उन रोगों से लभरते यहे ! भैंने कुि पवशेष ध्मान न ददमा । मदा कदा दो एक फात से ऩता चरता फक सभ ौते के अछतरयक्त कुि दस ू यी फातें बी होती हैं । भैंने इच्िा प्रकट की फक भैं बी एक सभम सी० आई० डी० के कप्तान से लभरूॊ.

क्मोंफक वह फनवायीरार का ऩोमट फाक्स (डाक ऩाने वारा) था । इसने फनवायीरार के एक रय्‍तेदाय का ऩता फतामा. 1 ऩय 13 लसतॊफय को होगा. एक कायतूसी पौजी रयवाल्वय तथा कुि कायतूस ऩुलरस के हाथ रगे । श्री फनवायीरार की खोज हुई । फनवायीरार बी ऩक़ि लरमे गए । धगयफ्तायी के थो़िे ददनों फाद ही ऩुलरस वारे लभरे. धगयफ्ताय होते ही ऩुलरस को फमान दे ददमा औय वह सयकायी गवाह फना लरमा गमा । इसी प्रकाय यामफये री भें मकूर के पवद्माथी कुॊवय फहादयु के ऩास ऩासार आमा था.Contents [hide]  1 चतथ ु ा खण्ड o 1. जो वह भु े दे आता है । मकूर के है डभामटय द्वाया इन्दब ु ूषण के ऩास आए हुए ऩरों की नकर कया के हाटा न साहफ के ऩास बेजी जाती यही । इन्हीॊ ऩरों से हाटा न साहफ को भारूभ हुआ फक भेयठ भें प्रान्त की क्रास्न्तकायी सलभछत की फैठक होने वारी है । उन्होंने एक सफ-इॊमऩेक्टय को अनाथारम भें . औय सम्बव है फक फकसी फ़िे शहय भें डाकखाने की आभदनी रूटी जाए । हाटा न साहफ को एक सूर से एक ऩर लभरा.1 अलबमोग o 1. अऩना फमान दे ददमा औय वह सयकायी गवाह फना लरमा गमा । मह कुि अधधक जानता था । इसके फमान से क्रास्न्तकायी ऩर के ऩासारों का ऩता चरा । फनायस के डाकखाने से स्जन-स्जन के ऩास ऩासार बेजे गमे थे उन को ऩुलरस ने धगयफ्ताय फकमा । कानऩुय भें गोऩीनाथ ने स्जस के नाभ ऩासार गमा था.3 पाॊसी की कोठयी  2 सॊफधॊ धत कड़िमाॉ  3 फाहयी कडडमाॉ [edit]चतुथा खण्ड [edit]अशबमोग काकोयी भें ये रवे ने न रुट जाने के फाद ही ऩलु रस का पवशेष पवबाग उक्त घटना का ऩता रगाने के लरए तै नात फकमा गमा । एक पवशेष व्मस्क्त लभ० हाटा न इस पवबाग के छनयीऺक थे । उन्होंने घटनामथर तथा ये रवे ऩुलरस की रयऩोटों को दे ख कय अनुभान फकमा फक सम्बव है मह कामा क्रास्न्तकारयमों का हो । प्रान्त के क्रास्न्तकारयमों की जाॊच शुरू हुई । उसी सभम शाहजहाॉऩुय भें ये रवे डकैती के तीन नोट लभरे । चोयी गए नोटों की सॊख्मा सौ से अधधक थी स्जनका भूल्म रगबग एक हजाय रुऩमे के होगा । इनभें से रगबग सात सौ मा आठ सौ रुऩमे के भूल्म के नोट सीधे सयकाय के खजाने भें ऩहुॊच गए । अत् सयकाय नोटों के भाभरे को चुऩचाऩ ऩी गई । मे नोट लरमट प्रकालशत होने से ऩूवा ही सयकायी खजाने भें ऩहुॊच चुके थे । ऩुलरस का लरमट प्रकालशत कयना व्मथा हुआ । सयकायी खजाने भें से ही जनता के ऩास कुि नोट लरमट प्रकालशत होने के ऩूवा ही ऩहुॊच गए थे. क्मोंफक उसी श्री याभनाथ ऩाण्डेम के ऩते का ऩर भेयी धगयफ्तायी के सभम भेये भकान से ऩामा था । याभनाथ ऩाण्डेम के ऩर ऩुलरस के ऩास ऩहुॊचे थे । अत् इन्दब ु ूषण को धगयफ्ताय फकमा गमा । इन्दब ु ूषण ने दस ू ये ददन अऩना फमान दे ददमा । धगयफ्ताय फकमे हुए व्मस्क्तमों भें से कुि से लभर-लभराकय फनायसीरार ने बी.2 अशपाक o 1. बेजा । उन्हीॊ ददनों हाटा न साहफ को फकसी पवशेष सूर से भारूभ हुआ फक शीघ्र ही कनखर भें डाका डारने का प्रफन्ध क्रास्न्तकायी सलभछत के सदमम कय यहे हैं . 9 तथा 10 अगमत 1925 को शाहजहाॉऩुय नहीॊ था । अधधक जाॊच होने रगी । इस जाॊच-ऩ़ितार भें ऩुलरस को भारूभ हुआ फक गवनाभेण्ट मकूर शाहजहाॉऩुय के इन्दब ु ूषण लभर नाभी एक पवद्माथी के ऩास भेये क्रास्न्तकायी दर सम्फन्धी ऩर आते हैं . जो भेये हाथ का लरखा था । इस ऩर भें लसतम्फय भें होने वारे श्राद्ध का स्जक्र था स्जसकी 13 तायीख छनस््‍चत की गई थी । ऩर भें था फक दादा का श्राद्ध नॊ. उसने बी धगयफ्ताय होते ही फमान दे ददमा औय सयकायी गवाह फना लरमा गमा । इसके ऩास भनीआडाय बी आमा कयते थे . जहाॊ तराशी रेने से फनवायीरार का एक नॊ क लभरा । इस नॊ क भें एक कायतूसी पऩमतौर. उसे ऩुलरस धगयफ्ताय कय चुकी थी. उल्टासीधा सु ामा औय फनवायीरार ने बी अऩना फमान दे ददमा तथा इकफारी भुरस्जभ फनामे गए । श्रीमुत फनवायीरार ने काकोयी डकैती भें अऩना सस्म्भलरत होना . अव्‍म ऩधारयमे । भैं अनाथारम भें लभरूॊगा । ऩर ऩय 'रुद्र' के हमताऺय थे । आगाभी डकैछतमों को योकने के लरए हाटा न साहफ ने प्रान्त बय भें 26 लसतम्फय सन श 1925 ई० को रगबग तीस भनुष्मों को धगयफ्ताय फकमा । उन्हीॊ ददनों भें इन्दब ु ूषण के ऩास आए हुए ऩर से ऩता रगा फक कुि वमतुएॊ फनायस भें फकसी पवद्माथी की कोठयी भें फन्द हैं । अनुभान फकमा गमा फक सम्बव है फक वे हधथमाय हों । अनुसन्धान कयने से दहन्दी पव्‍वपवद्मारम के एक पवद्माथी की कोठयी से दो याइपरें छनकरीॊ । उस पवद्माथी को कानऩुय भें धगयफ्ताय फकमा गमा । इन्दब ु ूषण ने भेयी धगयफ्तायी की सूचना एक ऩर द्वाया फनायस को बेजी । स्जसके ऩास ऩर बेजा था. जहाॊ ऩय भीदटॊग होने का ऩता चरा था. जो शाहजहाॊऩुय की जेर भें था. इस कायण वे जनता के ऩास छनकर आमे । उन्हीॊ ददनों भें स्जरा खुफपमा ऩुलरस को भारूभ हुआ फक भैं 8.

औय लरखा था फक फाईस स्जरों भें सलभछत का कामा हो यहा है । मे कागज इस षड्मन्र के सम्फन्ध के सभ े गए । श्रीमुत याजेन्द्रनाथ रादह़िी दषितऺणे्‍वय फभ केस भें दस वषा की दीऩान्तय की सजा ऩाने के फाद इस भुकदभे भें रखनऊ बेजे गए । अफ रगबग ित्तीस भनुष्म धगयफ्ताय हुए थे । अ्ाईस ऩय भस्जमने ट की अदारत भें भुकदभा चरा । तीन व्मस्क्त 1. श्रीमुत शचीन्द्रनाथ फख्शी. तुफत ा बी दफी जमती । भमिूक के थोडे से बी एहसमन फहुत हैं । . भाता-पऩता का कुि बी ख्मार न फकमा. स्जन्हें फनायस षड्मन्र से आजन्भ कारेऩानी की सजा हुई थी. धगयफ्ताय हुए । इन्दब ु ूषण के धगयफ्ताय हो जाने के फाद उसके है डभामटय को एक ऩर भध्म प्रान्त से लभरा. इसी प्रकाय के दस ू ये अलबमुक्तों ऩय था. ऩय रृदम ऩय फ़िा आघात रगा फक स्जनकी उदय ऩूछता के लरए प्राणों को सॊकट भें डारा. पाॊसी की कोठयी भें ही आकय सॊतोषदामक दो फातें कय जाते ! एक-दो सज्जनों ने इतनी कृऩा तथा साहस फकमा फक दस लभनट के लरए अदारत भें दयू ख़िे होकय दशान दे गए । मह सफ इसलरमे फक ऩुलरस का आतॊक िामा हुआ था फक धगयफ्ताय न कय लरमे जाएॊ । इस ऩय बी स्जसने जो कुि फकमा भैं उसी को अऩना सौबाग्म सभ ता हूॉ. श्रीमुत अशपाकउल्रा खाॊ पयाय यहे । फाकी सफ भुकदभा अदारत भें आने से ऩहरे िो़ि ददए गए । अ्ाईस भें से दो ऩय से भस्जमने ट की अदारत भें भुकदभा उठा लरमा गमा । दो को सयकायी गवाह फनाकय उन्हें भापी दी गई । अन्त भें भस्जमने ट ने इक्कीस व्मस्क्तमों को सेशन सुऩुदा फकमा । सेशन भें भुकदभा आने ऩय श्रीमुत दाभोदयमवरूऩ सेठ फहुत फीभाय हो गए । अदारत न आ सकते थे. अत् अन्त भें फीस व्मस्क्त यह गए । फीस भें से दो व्मस्क्त श्रीमुत शचीन्द्रनाथ पव्‍वास तथा श्रीमुत हयगोपवन्द सेशन की अदारत से भुक्त हुए । फाकी अठायह की सजाएॊ हुई । श्री फनवायीरार इकफारी भुरस्जभ हो गए थे । यामफये री स्जरा काॊग्रेस कभेटी के भन्री बी यह चुके हैं । उन्होंने असहमोग आन्दोरन भें 6 भास का कायावास बी बोगा था । इस ऩय बी ऩुलरस की धभकी से प्राण सॊकट भें ऩ़ि गए । आऩ ही हभायी सलभछत के ऐसे सदमम थे फक स्जन ऩय सलभछत का सफ से अधधक धन व्मम फकमा गमा । प्रत्मेक भास आऩको ऩमााप्त धन बेजा जाता था । भमाादा की यऺा के लरए हभ रोग मथाशस्क्त फनवायीरार को भालसक शुल्क ददमा कयते थे । अऩने ऩेट काट कय इनका भालसक व्मम ददमा गमा । फपय बी इन्होंने अऩने सहामकों की गदा न ऩय िुयी चराई ! अधधक से अधधक दस वषा की सजा हो जाती । स्जस प्रकाय सफूत इनके पवरुद्ध था. भस्जमने ट के महाॊ जभानत नाभॊजूय हुई. पऩमतौर तथा कुि याजद्रोहात्भक सादहत्म ऩक़िा गमा । इसी भकान भें श्रीमुत याजेन्द्रनाथ रादह़िी फी० ए० जो इस भुकदभें भें पयाय थे. स्जस प्रकाय की आव्‍मकता होती मथाशस्क्त उनको ऩूणा कयने की प्राणऩण से चेष्टा कयता था. स्जनभें सॊमुक्त प्रान्त के सफ स्जरों का नाभ था. उन्होंने ही भेये खखराप ग़िे भें स्जनके घयों की यऺा की थी. फुयी तयह से भाय खाई. वैसे ही. उन्होंने बी अद्बुत रूऩ धायण फकमा । एक ठाकुय साहफ के ऩास काकोयी डकैती का नोट लभर गमा था । वह कहीॊ शहय भें ऩा गए थे । जफ धगयफ्तायी हुई. खुरे रूऩ से ऩैयवी कयने को भना कयते यहे फक ऩुलरस खखराप है . जज साहफ ने चाय हजाय की जभानत भाॊगी । कोई जभानती न लभरता था । आऩके वद्ध ृ बाई भेये ऩास आमे । ऩैयों ऩय लसय यखकय योने रगे । भैंने जभानत कयाने का प्रमत्न फकमा । भेये भातापऩता कचहयी जाकय. ऩुलरस के फहकाने से सेशन भें फमान दे ते सभम जो नई फातें इन्होंने जो़िी. वही इस प्रकाय आऺेऩ कयें । सलभछत के सदममों ने इस प्रकाय का व्मवहाय फकमा । फाहय जो साधायण जीवन के सहमोगी थे . 3. सहोदय तथा लभर सभ कय हय तयह की सेवा कयने को तै माय यहता था.फतामा था । उधय करकत्ते भें दषितऺणे्‍वय भें एक भकान भें फभ फनाने का साभान. श्रीमुत चन्द्रशेखय आजाद. ददन को ददन औय यात को यात न सभ ा. स्जन ूठ गवादहमाॊ फनवाकय बेजी ! कुि लभरों के बयोसे ऩय उनका नाभ गवाही भें ददमा फक जरूय गवाही दें गे । सॊसाय रौट जाए ऩय मे नहीॊ डडग सकते । ऩय वचन दे चुकने ऩय बी जफ ऩुलरस का दफाव ऩ़िा. वे बी गवाही दे ने से इन्काय कय गए ! स्जनको अऩना रृदम. स्जन्हें दस-दस वषा की सजा हुई । मही नहीॊ. 2. उनसे इतना बी न हुआ फक कबी जेर ऩय आकय दशान दे जाते. ऩय भैंने एक न सुनी । कचहयी जाकय. स्जसे उसने हाटा न साहफ के ऩास वैसा ही बेज ददमा । इस ऩर से एक व्मस्क्त भोहनरार खरी का चान्दा भें ऩता चरा । वहाॊ से ऩुलरस ने खोज रगाकय ऩूना भें श्रीमुत याभकृष्ण खरी को धगयफ्ताय कयके रखनऊ बेजा । फनायस भें बेजे हुए ऩासारों के सम्फन्ध से जफरऩुय भें श्रीमुत प्रणवेशकुभाय चटजी को धगयफ्ताय कयके बेजा गमा । करकत्ता से श्रीमुत शचीन्द्रनाथ सान्मार. 7 रयवाल्वय. औय उनका आबायी हूॉ । वह पूर चढमते हैं . इस भुकदभे भें रखनऊ बेजे गए । श्रीमुत मोगेशचन्द्र चटजी फॊगार आडडानेंस के कैदी हजायीफाग जेर से बेजे गए । आऩ अक्तूफय सन श 1924 ई० भें करकत्ते भें धगयफ्ताय हुए थे । आऩके ऩास दो कागज ऩामे गए थे. उनभें भेये सम्फन्ध भें कहा फक याभप्रसाद डकैछतमों के रुऩमे से अऩने ऩरयवाय का छनवााह कयता है ! इस फात को सुनकय भु े हॊ सी बी आई. कौलशश कयके जभानत दाखखर कयाई । जेर से उन्हें मवमॊ जाकय िु़िामा । ऩय जफ भैंने उक्त भहाशम का नाभ उक्त घटना की गवाही दे ने के लरए सूधचत फकमा. औय स्जन्हें फाॊकुया भें 'क्रास्न्तकायी' ऩचजे फाॊटने के कायण दो वषा की सजा हुई थी. एक फना हुआ फभ. रयऩोटा हो जाएगी. तफ ऩुलरस ने उन्हें धभकामा औय उन्होंने ऩुलरस को तीन फाय लरख कय दे ददमा फक हभ याभप्रसाद को जानते बी नहीॊ ! दहन्द-ू भुस्मरभ के फार-फच्चे भेये सहाये भुहल्रे भें छनबामता से छनवास कयते यहे .

स्जन्हें साधायण ऻान बी नहीॊ होता । साधायण ऩुलरस से खुफपमा भें आते हैं । साधायण ऩुलरस की दयोगाई कयते हैं. तो ऩुलरस लसय ऩटक कय यह जाती. ऩुलरस ने इस प्रान्त के सॊददग्ध क्रास्न्तकायी व्मस्क्तमों ऩय दृस्ष्ट डारी. क्मोंफक जनता भें आन्दोरन पैरने से फदनाभी हो जाती है । सयकाय ऩय जवाफदे ही आती है । अधधक से अधधक दो चाय भनुष्म ऩक़िे जाते औय अन्त भें उन्हें बी िो़िना ऩ़िता । ऩयन्तु जफ ऩुलरस को वामतपवक सूर हाथ आ गमा उसने अऩनी सत्मता को प्रभाखणत कयने के लरए लरखा हुआ प्रभाण ऩुलरस को दे ददमा । उस अवमथा भें मदद ऩुलरस धगयफ्तारयमाॊ न कयती तो फपय कफ कयती ? जो बी हुआ. क्मों बेद होता है . कुि बी ऩता न चरता । बफना दृढ़ प्रभाणों के बमॊकय से बमॊकय व्मस्क्त ऩय हाथ यखने का साहस नहीॊ होता. फातचीत की । एक दो को कुि धभकी दी । 'चोय की दाढ़ी भें छतनका' वारी जनश्रुछत के अनुसाय एक भहाशम से ऩुलरस को साया बेद भारूभ हो गमा । हभ सफ के सफ चक्कय भें थे फक इतनी जल्दी ऩुलरस ने भाभरे का ऩता कैसे रगा लरमा ! उक्त भहाशम की ओय तो ध्मान बी न जा सकता था । ऩय धगयफ्तायी के सभम भु से तथा ऩुलरस के अपसय से जो फातें हुईं. ऩयभात्भा उनका बी बरा कये । अऩना तो जीवन बय मही उसूर यहा । सतममे तुझको जो कोई फेवपम. तथा रेखक के वामतपवक रेख भें तथा फनावटी रेख भें बेद कय सकता है । इस प्रकाय का कोई बी अनुबव तथा ऻान न यखते हुए बी एक प्रान्त की क्रास्न्तकायी सलभछत का सम्ऩूणा बाय रेकय उसका सॊचारन कय यहा था । फात मह है फक क्रास्न्तकायी कामा की लशऺा दे ने के लरए कोई ऩाठशारा तो है ही नहीॊ । मही हो सकता था फक ऩुयाने अनुबवी क्रास्न्तकारयमों से कुि सीखा जाए । न जाने फकतने व्मस्क्त फॊगार तथा ऩॊजाफ के षड्मन्रों भें धगयफ्ताय हुए. वे ही ऩुलरस जान सकी । जो फातें आऩको भारूभ न थीॊ. वे ऩुलरस को फकसी प्रकाय न भारूभ हो सकीॊ । उन फातों से मह छन्‍चम हो गमा फक मह काभ उन्हीॊ भहाशम का है । मदद मे भहाशम ऩुलरस के हाथ न आते औय बेद न खोर दे ते. दौ़ि-धूऩ की. फक थो़िी सी कुशरता से कामा कयने ऩय ऩुलरस के लरए ऩता ऩाना फ़िा कदठन है । वामतव भें उनके कुि बाग्म ही अच्िे होते हैं । जफ से इस भुकदभे की जाॊच शुरू हुई. कुि ऩद-वपृ द्ध हो गई औय सफ काभ फन्द ! इस प्रान्त भें कोई फाकामदा ऩुलरस का गुप्तचय पवबाग नहीॊ. फक जफ भैं फादशाही एरान के फाद शाहजहाॉऩुय आमा था. एक भनुष्म के रेख भें क्मा बेद होता है . स्जसको छनमलभत रूऩ से लशऺा दी जाती हो । फपय काभ कयते कयते अनुबव हो ही जाता है । भैनऩुयी षड्मन्र तथा इस षड्मन्र से इसका ऩूया ऩता रग गमा. ऩय फकसी ने बी मह उद्मोग न फकमा फक एक इस प्रकाय की ऩुमतक लरखी जाए.ऩयभात्भा से मही प्राथाना है फक सफ प्रसन्न तथा सुखी यहें । भैंने तो सफ फातों को जानकय ही इस भागा ऩय ऩैय यखा था । भुकदभे के ऩहरे सॊसाय का कोई अनुबव ही न था । न कबी जेर दे खी. लरखन करा पवशेषऻ हमताऺय को प्रभाखणत कय सकता है . तो तुभ से मकूर भें बें ट हुई थी । तुम्हायी भु । तुभने भु से भैनऩुयी षड्मन्र के सम्फन्ध भें कुि फातचीत कयनी चाही थी । भैंने मह सभ से लभरने की फ़िी हाददा क इच्िा थी कय फक एक मकूर का भुसरभान पवद्माथी भु से इस प्रकाय की फातचीत क्मों कयता है . अऩने छन्‍चम ऩय डटे यहे । . भजे भें रम्फी-रम्फी घूस खाकय फ़िे फ़िे ऩेट फढ़ा आयाभ कयते हैं । उनकी फरा तकरीप उठाए ! मदद कोई एक-दो चाराक हुए बी तो थो़िे ददन फ़िे औहदे की फपयाक भें काभ ददखामा. 'बफल्स्थभर' । तो भुॊह से कुछ न कहनम आह ! कय रेनम ॥ हभ िहीदमने वपम कम दीनों ईभमॊ औय है । शसजदे कयते हैं हभेिम ऩमॊव ऩय जल्रमद के ॥ भैंने अलबमोग भें जो बाग लरमा अथवा स्जनकी स्जन्दगी की स्जम्भेदायी भेये लसय ऩय थी. उसभें से ज्मादा दहमसा श्रीमुत अशपाकउल्रा खाॊ वायसी का है । भैं अऩनी करभ से उनके लरए बी अस्न्तभ सभम भें दो शब्द लरख दे ना अऩना कत्ताव्म सभ ता हूॊ । [edit]अिपमक भु े बरीबाॊछत माद है . जो रेखन शैरी को दे खकय रेखकों का छनणाम कय सकता है । मह बी नहीॊ ऩता था फक रेख फकस प्रकाय लभरामे जाते हैं . उनभें ऩुलरस अपसय ने वे सफ फातें भु से कहीॊ स्जनको भेये तथा उक्त भहाशम के अछतरयक्त कोई बी दस ू या जान ही न सकता था । औय बी फ़िे ऩक्के तथा फुपद्धगम्म प्रभाण लभर गए फक स्जन फातों को उक्त भहाशम जान सके थे . क्मोंफक भेया कुि पवशेषानुबव नहीॊ । इस प्रान्त की खुफपमा ऩुलरस वारे तो भहान श बौंद ू होते हैं. उनसे लभरी. स्जससे नवागन्तुकों को कुि अनुबव की फातें भारूभ होतीॊ । रोगों को इस फात की फ़िी उत्कण्ठा होगी फक क्मा मह ऩुलरस का बाग्म ही था. जो सफ फना फनामा भाभरा हाथ आ गमा । क्मा ऩुलरस वारे ऩयोऺ ऻानी होते हैं ? कैसे गुप्त फातों का ऩता चरा रेते हैं ? कहना ऩ़िता है फक मह इस दे श का दब ु ााग्म ! सयकाय का सौबाग्म !! फॊगार ऩुलरस के सम्फन्ध भें तो अधधक कहा नहीॊ जा सकता. न फकसी अदारत का कोई तजुफाा था । जेर भें जाकय भारूभ हुआ फक फकसी नई दछु नमा भें ऩहुॊच गमा । भुकदभे से ऩहरे भैं मह बी न जानता था फक कोई रेखन-करा-पवऻान बी है . तुम्हायी फातों का उत्तय उऩेऺा की दृस्ष्ट से दे ददमा था । तुम्हें उस सभम फ़िा खेद हुआ था । तुम्हाये भुख से हाददा क बावों का प्रकाश हो यहा था । तुभने अऩने इयादे को मों ही नहीॊ िो़ि ददमा. इसका कोई पवशेषऻ (handwriting expert) बी होता है .

'याभ' कहता है । कहते फक 'अल्राह. फकन्तु तुभ अऩने छन्‍चम ऩय दृढ़ थे । भेये ऩास आमासभाज भस्न्दय भें आते जाते थे । दहन्द-ू भुस्मरभ ग़िा होने ऩय. तुम्हाये ददर भें भुल्क की खखदभत कयने की ख्वादहश थी । अन्त भें तुम्हायी पवजम हुई । तुम्हायी कौलशशों ने भेये ददर भें जगह ऩैदा कय री । तुम्हाये फ़िे बाई भेये उदा ू लभडडर के सहऩाठी तथा लभर थे. जो भुसरभान बी ऩढ़ सकें ? तुभ ने मवदे शबस्क्त के बावों को बरी बाॊछत सभ ने के लरए ही दहन्दी का अच्िा अध्ममन फकमा । अऩने घय ऩय जफ भाता जी तथा भ्राता जी से फातचीत कयते थे . प्रीछत तथा लभरता का ऩरयणाभ क्मा हुआ ? भेये पवचायों के यॊ ग भें तुभ बी यॊ ग गए । तुभ बी कट्टय क्रास्न्तकायी फन गए । अफ तो तुम्हाया ददन-यात प्रमत्न मही था फक फकसी प्रकाय हो भुसरभान नवमुवकों भें बी क्रास्न्तकायी बावों का प्रवेश हो. फक वे दहन्दओ ु ॊ के साथ लभर कय के दहन्दम ु तान की बराई कयते । जफ भैं दहन्दी भें कोई रेख मा ऩुमतक लरखता तो तुभ सदै व मही अनुयोध कयते फक उदा ू भें क्मों नहीॊ लरखते. तुम्हाये भुॊह से फायम्फाय 'याभ' 'हाम याभ' शब्द छनकर यहे थे । ऩास ख़िे बाई-फाॊधवों को आ्‍चमा था फक 'याभ'. तो मही फक भुसरभानों को खुदा अक्र दे ता. फकन्तु िोटे बाई फनकय तुम्हें सन्तोष न हुआ । तुभ सभानता का अधधकाय चाहते थे.स्जस प्रकाय हो सका काॊग्रेस भें फातचीत की । अऩने इष्ट लभरों द्वाया इस फात का पव्‍वास ददराने की कौलशश की फक तुभ फनावटी आदभी नहीॊ. भस्जमने ट. खुफपमा ऩुलरस के अपसय. काफपय के नाभ से ऩुकायते थे. मह जानकय भु े फ़िी प्रसन्नता हुई । थो़िे ददनों भें ही तुभ भेये िोटे बाई के सभान हो गमे थे. फकन्तु तुभ इन फातों की फकॊ धचतभार धचन्ता न कयते थे । भेये कुि साथी तुम्हें भुसरभान होने के कायण घण ृ ा की दृस्ष्ट से दे खते थे. स्जससे सफको फ़िा आ्‍चमा होता था । तुम्हायी इस प्रकाय की प्रवस्ृ त्त को दे खकय फहुतों को सन्दे ह होता था फक कहीॊ इमराभ धभा त्माग कय शुपद्ध न कया रे । ऩय तुम्हाया रृदम तो फकसी प्रकाय अशुद्ध न था. उसने अऩने पप्रम सखा अशपाक को बी उसी भात-ृ बूलभ की बें ट चढ़ा ददमा । 'असगय' हयीभ इश्क भें हस्थती ही जुभा है । यखनम कबी न ऩमॊव महमॊ सय शरमे हुए ॥ [edit]पमॊसी की कोियी अस्न्तभ सभम छनकट है । दो पाॊसी की सजाएॊ लसय ऩय ूर यही हैं । ऩुलरस को साधायण जीवन भें औय सभाचायऩरों तथा ऩबरकाओॊ भें खूफ जी बय के कोसा है । खुरी अदारत भें जज साहफ. तो तुम्हाये भुॊह से दहन्दी शब्द छनकर जाते थे. अथवा भददगाय नहीॊ. 'याभ' की यट थी ! उस सभम फकसी लभर का आगभन हुआ. स्जसने अऩना तन-भन-धन सवामव भात-ृ सेवा भें अऩाण कयके अऩना अस्न्तभ फलरदान बी दे ददमा. तुभ लभर की श्रेणी भें अऩनी गणना चाहते थे । वही हुआ । तुभ सच्चे लभर फन गमे । सफ को आ्‍चमा था फक एक कट्टय आमासभाजी औय भुसरभान का भेर कैसा ? भैं भुसरभानों की शुपद्ध कयता था । आमासभाज भस्न्दय भें भेया छनवास था. सयकायी वकीर तथा सयकाय को खूफ आ़िे हाथों लरमा है । हये क के ददर भें भेयी फातें चुब यही हैं । कोई दोमत आशना. वे बी क्रास्न्तकायी आन्दोरन भें मोग दें । स्जतने तुम्हाये फन्धु तथा लभर थे सफ ऩय तुभने अऩने पवचायों का प्रबाव डारने का प्रमत्न फकमा । फहुधा क्रास्न्तकायी सदममों को बी फ़िा आ्‍चमा होता फक भैंने कैसे एक भुसरभान को क्रास्न्तकायी दर का प्रछतस्ष्ठत सदमम फना लरमा । भेये साथ तुभने जो कामा फकमे. वे सयाहनीम हैं । तुभने कबी बी भेयी आऻा की अवहे रना न की । एक आऻाकायी बक्त के सभान भेयी आऻा ऩारन भें तत्ऩय यहते थे । तुम्हाया रृदम फ़िा पवशार था । तुभ बाव से फ़िे उच्च थे । भु े मदद शास्न्त है तो मही फक तुभने सॊसाय भें भेया भुख उज्जवर कय ददमा । बायत के इछतहास भें मह घटना बी उल्रेखनीम हो गई फक अशपाकउल्रा ने क्रास्न्तकायी आन्दोरन भें मोग ददमा । अऩने बाई फन्धु तथा सम्फस्न्धमों के सभ ाने ऩय कुि बी ध्मान न ददमा । धगयफ्ताय हो जाने ऩय बी अऩने पवचायों भें दृढ़ यहे ! जैसे तुभ शायीरयक फरशारी थे. ऩय तुम्हायी 'याभ'. स्जसने अऩने सहोदय के बावी बाग्म को बी दे श-सेवा की बें ट कय ददमा. ऩय तुभ कबी बी उनके पवचायों से सहभत न हुए । सदै व दहन्द-ू भुस्मरभ ऐक्म के ऩऺऩाती यहे । तुभ एक सच्चे भुसरभान तथा सच्चे दे शबक्त थे । तुम्हें मदद जीवन भें कोई पवचाय था. औय जज ने भुकदभे का पैसरा लरखते सभम तुम्हाये गरे भें जमभारा (पाॊसी की यमसी) ऩहना दी । प्माये बाई. वैसे ही भानलसक वीय तथा आत्भा से उच्च लसद्ध हुए । इन सफके ऩरयणाभमवरूऩ अदारत भें तुभको भेया सहकायी (रेफ्टीनें ट) ठहयामा गमा. तुभ अचेत थे. तुम्हें मह सभ कय सन्तोष होगा फक स्जसने अऩने भाता पऩता की धन-सम्ऩस्त्त को दे श-सेवा भें अऩाण कयके उन्हें लबखायी फना ददमा. तुम्हाये भुहल्रे के सफ कोई खुल्रभखुल्रा गालरमाॊ दे ते थे. अल्राह' कयो. स्जसका सहाया हो । एक ऩयभ पऩता ऩयभात्भा की माद है । गीता ऩाठ कयते हुए सन्तोष है फक - . तफ सफ रोग 'याभ-याभ' के बेद को सभ े ! अन्त भें इस प्रेभ. फपय तुभ शुपद्ध फकस वमतु की कयाते ? तुम्हायी इस प्रकाय की प्रगछत ने भेये रृदम ऩय ऩूणा पवजम ऩा री । फहुधा लभर भॊडरी भें फात छि़िती फक कहीॊ भुसरभान ऩय पव्‍वास कयके धोखा न खाना । तुम्हायी जीत हुई. जो 'याभ' के बेद को जानते थे । तुयन्त भैं फुरामा गमा । भु से लभरने ऩय तुम्हें शास्न्त हुई. भु भें तुभभें कोई बेद न था । फहुधा भैंने तुभने एक थारी भें बोजन फकए । भेये रृदम से मह पवचाय ही जाता यहा फक दहन्द ू भुसरभान भें कोई बेद है । तुभ भु ऩय अटर पव्‍वास तथा अगाध प्रीछत यखते थे । हाॊ ! तुभ भेया नाभ रेकय ऩुकाय नहीॊ सकते थे । तुभ सदै व 'याभ' कहा कयते थे । एक सभम जफ तुम्हाये रृदम-कम्ऩ (Palpitation of heart) का दौया हुआ.

मनान. साधना की गुपा तो लभर गई । इसी कोठयी भें मह सुमोग प्राप्त हो गमा फक अऩनी कुि अस्न्तभ फात लरखकय दे शवालसमों को अऩाण कय दॊ ू । सम्बव है फक भेये जीवन के अध्ममन से फकसी आत्भा का बरा हो जाए । फ़िी कदठनता से मह शुब अवसय प्राप्त हुआ । भहसूस हो यहे हैं फमदे पनम के झोंके | खुरने रगे हैं भुझ ऩय असयमय ल्जन्दगी के ॥ फमये अरभ उिममम यॊ गे ननिमत दे तम । आमे नहीॊ हैं मॊू ही अन्दमज फेर्हसी के ॥ वपम ऩय र्दर को सदके जमन को नजये जफम कय दे । भह ु ब्फत भें मह रमल्जभ है कक जो कुछ हो कपदम कय दे ॥ अफ तो मही इच्िा है - फहे फहये फनम भें जल्द मम यव रमि 'बफल्स्थभर' की । कक बख ू ी भछशरममॊ हैं जौहये िभिीय कमनतर की ॥ . भैं कुछ कीन्हम नमर्हॊ । जहमॊ कहीॊ कुछ भैं ककमम.अस्न्तभ सभम के लरए तैमाय हो जाओ. मवदे श की बराई सभ कय फकमा । मदद शयीय की ऩारना की तो इसी पवचाय से की फक सुदृढ़ शयीय से बरे प्रकाय मवदे शी सेवा हो सके । फ़िे प्रमत्नों से मह शुब ददन प्राप्त हुआ । सॊमुक्त प्रान्त भें इस तुच्ि शयीय का ही सौबाग्म होगा जो सन श 1857 ई० के गदय की घटनाओॊ के ऩ्‍चात श क्रास्न्तकायी आन्दोरन के सम्फॊध भें इस प्रान्त के छनवासी का ऩहरा फलरदान भातव ृ ेदी ऩय होगा । सयकाय की इच्िा है फक भु े घोटकय भाये । इसी कायण इस गयभी की ऋतु भें साढ़े तीन भहीने फाद अऩीर की तायीख छनमत की गई । साढ़े तीन भहीने तक पाॊसी की कोठयी भें बूॊजा गमा । मह कोठयी ऩऺी के पऩॊजये से बी खयाफ है । गोयखऩुय जेर की पाॊसी की कोठयी भैदान भें फनी है । फकसी प्रकाय की िामा छनकट नहीॊ । प्रात्कार आठ फजे से याबर के आठ फजे तक सूमा दे वता की कृऩा से तथा चायों ओय ये तीरी जभीन होने से अस्ग्न वषाण होता यहता है । नौ पीट रम्फी तथा नौ पीट चौ़िी कोठ़िी भें केवर ि् पीट रम्फा औय दो पीट चौ़िा द्वाय है । ऩीिे की ओय जभीन के आठ मा नौ पीट की ऊॊचाई ऩय एक दो पीट रम्फी तथा एक पुट चौ़िी खख़िकी है । इसी कोठयी भें बोजन. ऩयभात्भा का बजन कयो । भु े तो इस कोठयी भें फ़िा आनन्द आ यहा है । भेयी इच्िा थी फक फकसी साधु की गुपा ऩय कुि ददन छनवास कयके मोगाभ्मास फकमा जाता । अस्न्तभ सभम वह इच्िा बी ऩूणा हो गई । साधु की गुपा न लभरी तो क्मा.बगवद्गीतम/५/१० 'जो पर की इच्िा को त्माग कयके कभों को िह्भ भें अऩाण कयके कभा कयता है . भर-भूर त्माग तथा शमनादद होता है । भच्िय अऩनी भधुय ध्वछन यात बय सुनामा कयते हैं । फ़िे प्रमत्न से याबर भें तीन मा चाय घण्टे छनद्रा आती है . तुभ ही थे भुझ नमर्हॊ । ब्रह्भण्ममधमम कभमाखण सॊगॊ त्मक्‍त्वम कयोनत म् । शरप्मते न स ऩमऩेभमो् ऩद्भऩरशभवम्बस् ॥ . फकसी-फकसी ददन एक-दो घण्टे ही सोकय छनवााह कयना ऩ़िता है । लभट्टी के ऩारों भें बोजन ददमा जाता है । ओढ़ने बफिाने के दो कम्फर हैं । फ़िे त्माग का जीवन है । साधन के सफ साधन एकबरत हैं । प्रत्मेक ऺण लशऺा दे यहा है .जो कुछ ककमम सो तैं ककमम. वह ऩाऩ भें लरप्त नहीॊ होता । स्जस प्रकाय जर भें यहकय बी कभर-ऩर जर भें नहीॊ होता ।' जीवनऩमान्त जो कुि फकमा.

भौत .2 अस्न्तभ सभम की फात  2 सॊफधॊ धत कड़िमाॉ  3 फाहयी कडडमाॉ [edit]चतुथा खण्ड [edit]ऩरयणमभ ग्मायह वषा ऩमान्त मथाशस्क्त प्राणऩण से चेष्टा कयने ऩय बी हभ अऩने उद्दे्‍म भें कहाॊ तक सपर हुए ? क्मा राब हुआ ? इसका पवचाय कयने से कुि अधधक प्रमोजन लसद्ध न होगा. औय उन्हीॊ भें से कुि ने व्मथा भें जान गॊवाई । कुि धन बी खचा फकमा । दहन्द-ू शामर के अनुसाय फकसी की अकार भत्ृ मु नहीॊ होती. क्मोंफक हभने राब हाछन अथवा जम-ऩयाजम के पवचाय से क्रास्न्तकायी दर भें मोग नहीॊ ददमा था । हभने जो कुि फकमा वह अऩना कत्ताव्म सभ कय फकमा । कत्ताव्म-छनणाम भें हभने कहाॊ तक फुपद्धभत्ता से काभ लरमा. अथाात श मवाधीनता का जो मभायक छनभााण फकमा गमा है वह अत्माचारयमों के लरए लशऺा का कामा कये औय अत्माचाय ऩीड़ितों के लरए उदाहयण फने । गाजी भुमतपा कभारऩाशा स्जस सभम तुकी से बागे थे उस सभम केवर इक्कीस मव ु क उनके साथ थे । कोई साजो-साभान न था.The monument so raised may serve as a lesson to the oppressors and an instance to the oppressed. सो इतना धन तो बरे आदलभमों के पववाहोत्सवों भें व्मम हो जाता है । गण्मभान व्मस्क्तमों की तो पवरालसता की साभग्री का भालसक व्मम इतना होगा. है जा. वह उसकी पवधध सभम ऩय ही प्राण त्माग कयता है । केवर छनलभत्त-भार कायण उऩस्मथत हो जाते हैं । राखों बायतवासी भहाभायी. तो उसका उत्तयदाछमत्व फकस ऩय है ? यह गमा धन का व्मम.1 ऩरयणाभ o 1. मह तो भानना ही ऩ़िेगा फक धगयी हुई अवमथा भें बी बायतवासी मव ु कों के रृदम भें मवाधीन होने के बाव पवयाजभान हैं । वे मवतन्र होने की मथाशस्क्त चेष्टा बी कयते हैं । मदद ऩरयस्मथछतमाॊ अनक ु ू र होतीॊ तो मही इने-धगने नवमुवक अऩने प्रमत्नों से सॊसाय को चफकत कय दे ते । उस सभम बायतवालसमों को बी फ्ाॊसीलसमों की बाॊछत कहने का सौबाग्म प्राप्त होता जो फक उस जाछत के नवमुवकों ने फ्ाॊसीसी प्रजातन्र की मथाऩना कयते हुए कहा था . ताऊन इत्मादद अनेक प्रकाय के योगों से भय जाते हैं । कयो़िों दलु बाऺ भें अन्न बफना प्राण त्मागते हैं.सभझकय कॉू कनम इसकी ज़यम ऐ दमगे नमकमभी । फहुत से घय बी हैं आफमद इस उजडे हुए र्दर से ॥ बफस्मभर चतथ ु ा खण्ड-2 Contents [hide]  1 चतुथा खण्ड o 1. स्जसका स्जस पवधध से जो कार होता है . इसका पववेचन कयना उधचत जान ऩ़िता है । याजनैछतक दृस्ष्ट से हभाये कामों का इतना ही भूल्म है फक कछतऩम होनहाय नवमुवकों के जीवन को कष्टभम फनाकय नीयस कय ददमा. स्जतना फक हभने एक षड्मन्र के छनभााण भें व्मम फकमा । हभ रोगों को डाकू फताकय पाॊसी औय कारे ऩानी की सजाएॊ दी गई हैं । फकन्तु हभ सभ ते हैं फक वकीर औय डॉक्टय हभसे कहीॊ फ़िे डाकू हैं । वकीर-डॉक्टय ददन-दहा़िे फ़िे फ़िे तारक ु े दायों की जामदादें रूट कय खा गए । वकीरों के चाटे हुए अवध के तारुकेदायों को ढूॊढे यामता बी ददखाई नहीॊ दे ता औय वकीरों की ऊॊची अट्टालरकाएॊ उन ऩय खखरखखरा कय हॊ स यही हैं । इसी प्रकाय रखनऊ भें डॉक्टयों के बी ऊॊचे-ऊॊचे भहर फन गए । फकन्तु याज्म भें ददन के डाकुओॊ की प्रछतष्ठा है । अन्मथा यात के साधायण डाकुओॊ औय ददन के इन डाकुओॊ (वकीरों औय डॉक्टयों) भें कोई बेद नहीॊ । दोनों अऩने अऩने भतरफ के लरए फुपद्ध की कुशरता से प्रजा का धन रूटते हैं । ऐछतहालसक दृस्ष्ट से हभ रोगों के कामा का फहुत फ़िा भूल्म है । स्जस प्रकाय बी हो.

अयाजक. गौय. जो अऩने जीवन से छनयाश हो चुका था । सभम के पेय ने उसी उद्दण्ड पवद्माथी को अॊग्रेज जाछत का याज्म मथाऩन कत्ताा राडा क्राइव फना ददमा । श्री सुनमात सेन चीन के अयाजकवादी ऩरातक (बागे हुए) थे । सभम ने ही उसी ऩरातक को चीनी प्रजातन्र का सबाऩछत फना ददमा । सपरता ही भनुष्म के बाग्म का छनभााण कयती है । असपर होने ऩय उसी को फफाय डाकू. सो वह तो फहुत दयू की फात है । क्रास्न्त का नाभ ही फ़िा बमॊकय है । प्रत्मेक प्रकाय की क्रास्न्त पवऩषितऺमों को बमबीत कय दे ती है । जहाॊ ऩय याबर होती है तो ददन का आगभन जान छनलशचयों को द्ु ख होता है । ठॊ डे जरवामु भें यहने वारे ऩश-ु ऩऺी गयभी के आने ऩय उस दे श को बी त्माग दे ते हैं । फपय याजनैछतक क्रास्न्त तो फ़िी बमावनी होती है । भनुष्म अभ्मासों का सभूह है । अभ्मासों के अनस ु ाय ही उसकी प्रकृछत बी फन जाती है । उसके पवऩयीत स्जस सभम कोई फाधा उऩस्मथत होती है . नहीॊ तो भत्ृ मु भें कुि दे य न थी । वही भहात्भा रेछनन रूस के बाग्म पवधाता फने । श्री लशवाजी डाकू औय रुटेये सभ े जाते थे. िाह्भण-यऺक िरऩछत लशवाजी फना ददमा ! बायत सयकाय को बी अऩने मवाथा के लरए िरऩछत के मभायक छनभााण कयाने ऩ़िे । क्राइव एक उद्दण्ड पवद्माथी था. तो उनको बम प्रतीत होता है । इसके अछतरयक्त प्रत्मेक सयकाय के सहामक अभीय औय जभीॊदाय होते हैं । मे रोग कबी नहीॊ चाहते फक उनके ऐशो आयाभ भें फकसी प्रकाय की फाधा ऩ़िे । इसलरए वे हभेशा क्रास्न्तकायी आन्दोरन को नष्ट कयने का प्रमत्न कयते हैं । मदद फकसी प्रकाय दस ू ये दे शों की सहामता रेकय. वे बी सभम ऩाकय फुदद्दफर से जनता की खयी कभाई से प्राप्त फकए अधधकायों को ह़िऩ कय फैठते हैं । मवाथा के वशीबूत होकय वे श्रभजीपवमों तथा कृषकों को उन्नछत का अवसय नहीॊ दे ते । अन्त भें मे रोग बी धछनकों के ऩऺऩाती होकय याजतन्र के मथान भें धछनकतन्र की ही मथाऩना कयते हैं । रूसी क्रास्न्त के ऩ्‍चात श मही हुआ था । रूस के क्रास्न्तकायी इस फात को ऩहरे से ही जानते थे । अत्एव उन्होंने याज्मसत्ता के पवरुद्ध मुद्ध कयके याजतन्र की सभास्प्त की । इसके फाद जैसे ही धनी तथा फुपद्धजीपवमों ने यो़िा अटकाना चाहा फक उसी सभम उनसे बी मुद्ध कयके उन्होंने वामतपवक प्रजातन्र की मथाऩना की । . फर से सफ प्रकाय के अधधकारयमों को दफा फैठते हैं । कामाकारयणी सलभछतमों भें फ़िे-फ़िे अधधकाय धछनमों को प्राप्त हो जाते हैं । दे श के शासन भें धछनमों का भत ही उच्च आदय ऩाता है । धन फर से दे श के सभाचाय ऩरों. तफ कहीॊ क्रास्न्तकायी दर को दे श भें ऩैय यखने का मथान लभर सकता है । मह तो क्रास्न्तकायी दर की मथाऩना की प्रायस्म्बक फातें हैं । यह गई क्रास्न्त.का वायण्ट ऩीिे -ऩीिे घूभ यहा था । ऩय सभम ने ऐसा ऩरटा खामा फक उसी कभार ने अऩने कभार से सॊसाय को आ्‍चमाास्न्वत कय ददमा । वही काछतर कभारऩाशा टकी का बाग्म छनभााता फन गमा । भहाभना रेछनन को एक ददन शयाफ के ऩीऩों भें छिऩ कय बागना ऩ़िा था. सभम ऩाकय क्रास्न्तकायी दर क्रास्न्त के उद्मोगों भें सपर हो जामे. दे श भें क्रास्न्त हो जाए तो बी मोग्म नेता न होने से अयाजकता पैरकय व्मथा की नयहत्मा होती है . क्रास्न्तकारयमों के साथ जनता की ऩूणा सहानुबूछत हो. कर कायखानों तथा खानों ऩय उनका ही अधधकाय हो जाता है । भजफूयन जनता की अधधक सॊख्मा धछनकों का सभथान कयने को फाध्म हो जाती है । जो ददभाग वारे होते हैं. याजद्रोही तथा हत्माये के नाभों से पवबूपषत फकमा जाता है । सपरता उन्हीॊ नाभों को फदर कय दमार.ु प्रजाऩारक. औय उस प्रमत्न भें अनेकों सुमोग्म वीयों तथा पवद्वानों का नाश हो जाता है । इसका ज्वरन्त उदाहयण सन श 1857 ई० का गदय है । मदद फ्ाॊस तथा अभयीका की बाॊछत क्रास्न्त द्वाया याजतन्र को ऩरट कय प्रजातॊर मथापऩत बी कय लरमा जाए तो फ़िे-फ़िे धनी ऩुरुष अऩने धन. ऩय सभम आमा जफ फक दहन्द ू जाछत ने उन्हें अऩना लसयभौय फनामा. धालभाक तथा साभास्जक फकसी प्रकाय की ऩरयस्मथछत इस सभम क्रास्न्तकायी आन्दोरन के ऩऺ भें नहीॊ है । इसका कायण मही है फक बायतवालसमों भें लशऺा का अबाव है । वे साधायण से साधायण साभास्जक उन्नछत कयने भें बी असभथा हैं । फपय याजनैछतक क्रास्न्त की फात कौन कहे ? याजनैछतक क्रास्न्त के लरए सवाप्रथभ क्रास्न्तकारयमों का सॊगठन ऐसा होना चादहए फक अनेक पवघ्न तथा फाधाओॊ के उऩस्मथत होने ऩय बी सॊगठन भें फकसी प्रकाय रुदट न आमे । सफ कामा मथावत श चरते यहें । कामाकत्ताा इतने मोग्म तथा ऩमााप्त सॊख्मा भें होने चादहएॊ फक एक की अनुऩस्मथछत भें दस ू या मथानऩूछता के लरए सदा उद्मत यहे । बायतवषा भें कई फाय फकतने ही षड्मन्रों का बण्डा पूट गमा औय सफ फकमा कयामा काभ चौऩट हो गमा । जफ क्रास्न्तकायी दरों की मह अवमथा है तो फपय क्रास्न्त के लरए उद्मोग कौन कये ! दे शवासी इतने लशषितऺत हों फक वे वताभान सयकाय की नीछत को सभ कय अऩने हाछन-राब को जानने भें सभथा हो सकें । वे मह बी ऩूणत ा मा सभ ते हों फक वताभान सयकाय को हटाना आव्‍मक है मा नहीॊ । साथ ही साथ उनभें इतनी फुपद्ध बी होनी चादहमे फक फकस यीछत से सयकाय को हटामा जा सकता है ? क्रास्न्तकायी दर क्मा है ? वह क्मा कयना चाहता है ? क्मों कयना चाहता है ? इन सायी फातों को जनता की अधधक सॊख्मा सभ सके. न्मामकायी. प्रजातन्रवादी तथा भहात्भा फना दे ती है । बायतवषा के इछतहास भें हभाये प्रमत्नों का उल्रेख कयना ही ऩ़िेगा फकन्तु इसभें बी कोई सन्दे ह नहीॊ है फक बायतवषा की याजनैछतक.

औय इस अवमथा भें . वह ऐस्क्टव (कामाशीर) भें म्फय फनता है . उसका कहना ही क्मा है ! कैसे फ़िी-फ़िी आशाएॊ फाॊधकय इन व्मस्क्तमों को क्रास्न्तकायी सलभछत का सदमम फनामा गमा था. जफ फक असहमोधगमों ने सयकाय की ओय से घण ृ ा उत्ऩन्न कयाने भें कोई कसय न िो़िी थी. जो यात बय का जागा था । सफ ऩुलरस अपसय बी यात बय के जगे हुए थे. इसी प्रकाय की फातों से भन को शान्त फकमा जाता है । बायत के जनसाधायण की तो कोई फात ही नहीॊ । अधधकाॊश लशषितऺत सभुदाम बी मह नहीॊ जानता फक क्रास्न्तकायी दर क्मा चीज है .अफ पवचायने की फात मह है फक बायतवषा भें क्रास्न्तकायी आन्दोरन के सभथाक कौन-कौन से साधन भौजूद हैं ? ऩूवा ऩष्ृ ठों भें भैंने अऩने अनुबवों का उल्रेख कयके ददखरा ददमा है फक सलभछत के सदममों की उदय-ऩूछता तक के लरए फकतना कष्ट उठाना ऩ़िा । प्राणऩण से चेष्टा कयने ऩय बी असहमोग आन्दोरन के ऩ्‍चात श कुि थो़िे से ही धगने चुने मव ु क मुक्तप्रान्त भें ऐसे लभर सके. क्मोंफक मे सफ चीजें भुॊशी जी के ऩास आकय जभा होती थीॊ औय भैं बफना फकसी फॊधन के फीच भें खुरा हुआ फैठा हूॊ । डड० स० ु को तुयन्त सन्दे ह हुआ. उसे सॊमथा का कुि असरी बेद भारूभ होता है . फ़िे-फ़िे त्मागी भहात्भाओॊ के दशान होंगे. जो एक रयवाल्वय मा पऩमतौर अऩने ऩास यखने की इच्िा न यखता हो । स्जस सभम उन्हें रयवाल्वय के दशान होते. औय भैं ऩास ही कुसी ऩय खुरा हुआ फैठा था । केवर एक लसऩाही खारी हाथ ऩास भें ख़िा था । इच्िा हुई फक फन्दक ू उठाकय कायतूसों की ऩेटी को गरे भें डार रूॊ. क्मोंफक धगयफ्तारयमों भें रगे यहे थे । सफ आयाभ कयने चरे गए थे । छनगयानी वारा लसऩाही बी घोय छनद्रा भें सो गमा ! दफ्तय भें केवर एक भुन्शी लरखा ऩढ़ी कय यहे थे । मह बी श्रीमुत योशनलसॊह अलबमुक्त के पूपीजात बाई थे । मदद भैं चाहता तो धीये से उठकय चर दे ता । ऩय भैंने पवचाया फक भन् ु शी जी भहाशम फुये पॊसेंगे । भैंने भुॊशी जी को फुराकय कहा फक मदद बावी आऩस्त्त के लरए तैमायी हो तो भैं जाऊॊ । वे भु े ऩहरे से जानते थे । ऩैयों ऩ़ि गए फक धगयफ्ताय हो जाऊॉगा. अफ सलभछत के व्मम से दे श-भ्रभण का अवसय बी प्राप्त होगा. फपय उनसे सहानुबूछत कौन यखे ? बफना दे शवालसमों की सहानुबूछत के अथवा बफना जनता की आवाज के सयकाय बी फकसी फात की कुि धचन्ता नहीॊ कयती । दो-चाय ऩढ़े लरखे एक दो अॊग्रेजी अखफाय भें दफे हुए शब्दों भें मदद दो एक रेख लरख दें तो वे अयण्मयोदन के सभान छनष्पर लसद्ध होते हैं । उनकी ध्वछन व्मथा भें ही आकाश भें पवरीन हो जाती है । तभाभ फातों को दे खकय अफ तो भैं इस छनणाम ऩय ऩहुॊचा हूॊ फक अच्िा हुआ था जो भैं धगयफ्ताय हो गमा औय बागा नहीॊ. तफ मही पवचाय होता है फक ऐसे दग ा ऩथ भें मे ऩरयणाभ तो होते ही हैं । दस ु भ ू ये दे श के क्राछनकारयमों के भागा भें बी ऐसी ही फाधाएॊ उऩस्मथत हुई होंगी । वीय वही कहराता है जो अऩने रक्ष्म को नहीॊ िो़िता. सयकाय द्वाया जब्त फकताफें कुि तो ऩहरे ही ऩढ़ा दी जाती हैं. फार फच्चे बूखे भय जामेंगे । भु े दमा आ गई । एक घण्टे फाद श्री अशपाकउल्रा खाॊ के भकान की कायतूसी फन्दक ू औय कायतूसों से बयी हुई ऩेटी राकय उन्हीॊ भुॊशी जी के ऩास यख दी गई. खुरे रूऩ भें याजद्रोही फातों का ऩूणा प्रचाय फकमा गमा था । इस ऩय बी फोरशेपवक सहामता की आशाएॊ फॊधा फॊधाकय तथा क्रास्न्तकारयमों के ऊॉचे-ऊॉचे आदशों तथा फलरदानों का उदाहयण दे दे कय प्रोत्साहन ददमा जाता था । नवमव ु कों के रृदम भें क्रास्न्तकारयमों के प्रछत फ़िा प्रेभ तथा श्रद्धा होती है । उनकी अमर-शमर यखने की मवाबापवक इच्िा तथा रयवाल्वय मा पऩमतौर से प्राकृछतक प्रेभ उन्हें क्रास्न्तकायी दर से सहानुबूछत उत्ऩन्न कया दे ता है । भैंने अऩने क्रास्न्तकायी जीवन भें एक बी मुवक ऐसा न दे खा. दस ू यी ओय श्रीमुत प्रेभकृष्ण का भाऊजय पऩमतौर तथा कायतूस यखे हैं. इत्मादद । ऩयन्तु जैसे ही एक मव ु क क्रास्न्तकायी दर का सदमम फनकय हाददा क प्रेभ से सलभछत के कामों भें मोग दे ता है . वे सभ ते फक ईष्टदे व के दशान प्राप्त हुए. तफ सभ भें आता है फक कैसे बीषण कामा भें उसने हाथ डारा है । फपय तो वही दशा हो जाती है जो 'नकटा ऩॊथ' के सदममों की थी । जफ चायों ओय से असपरता तथा अपव्‍वास की घटाएॊ ददखाई दे ती हैं. थो़िे ददन की ही कसय है . सयकायी गुप्तचय पवबाग का बी हार भारूभ हो सकेगा. फकन्तु भु े तो अऩने शस्क्त की ऩयीऺा कयनी थी । धगयफ्तायी के फाद स़िक ऩय आध घण्टे तक बफना फकसी फॊधन के खुरा हुआ फैठा था । केवर एक लसऩाही छनगयानी के लरए ऩास फैठा हुआ था. जो मों कबी प्राप्त नहीॊ हो सकता । साथ ही साथ ख्मार होता है फक क्रास्न्तकारयमों ने दे श के याजा भहायाजाओॊ को तो अऩने ऩऺ भें कय ही लरमा होगा ! अफ क्मा. तबी तो इतनी फ़िी सयकाय से मुद्ध कयने का प्रमत्न कय यहे हैं ! सोचते हैं फक धन की बी कोई कभी न होगी ! अफ क्मा. यही सही की बी आशा यहती है फक फ़िा उच्च सादहत्म दे खने को लभरेगा. बागने की भु े सुपवधाएॊ थीॊ । धगयफ्तायी से ऩहरे ही भु े अऩनी धगयफ्तायी का ऩूया ऩता चर गमा था । धगयफ्तायी के ऩूवा बी मदद इच्िा कयता तो ऩुलरस वारों को भेयी हवा न लभरती. थो़िे ददनों भें ही उसे पवशेष सदमम होने के अधधकाय प्राप्त होते हैं. फपय कौन साभने आता है ! ऩय फपय सोचा फक भश ुॊ ी जी ऩय आऩस्त्त आएगी. आधा जीवन सपर हो गमा ! उसी सभम से वे सभ ते हैं फक क्रास्न्तकायी दर के ऩास इस प्रकाय के सहस्रों अमर होंगे. उन्होंने फन्दक ू तथा पऩमतौर को वहाॊ से हटवाकय भारखाने भें फन्द कयवामा । छन्‍चम फकमा फक अफ बाग चरूॊ । ऩाखाने के फहाने से फाहय छनकर गमा । एक लसऩाही कोतवारी से फाहय दस ू ये मथान भें शौच के छनलभत्त लरवा रामा । दस ू ये लसऩादहमों ने उससे फहुत कहा . पव्‍वासघात कयना ठी क नहीॊ । उस सभम खुफपमा ऩुलरस के डडप्टी सुऩरयण्टे ण्डेंट साभने ित ऩय आमे । उन्होंने दे खा फक भेये एक ओय कायतूस तथा फन्दक ू ऩ़िी है . रौटा ददमा सयकाय का याज्म ! फभ फनाना सीख ही जाएॊगे ! अभय फूटी प्राप्त हो जाएगी. जो क्रास्न्तकायी आन्दोरन का सभथान कयके सहामता दे ने को उद्मत हुए । इन धगने-चुने व्मस्क्तमों भें बी हाददा क सहानब ु ूछत यखने वारे. अऩनी जान ऩय खेर जाने वारे फकतने थे.

उनकी जेर भें फकसी कैदी मा लसऩाही. फपय भु े कौन ऩाता ? फकन्तु तुयन्त पवचाय आमा फक स्जस लसऩाही ने पव्‍वास कयके तुम्हें इतनी मवतन्रता दी. यॊ गत रगवाई गई. तो भैं फचा रूॊगा । लसऩाही तो कोई धचन्ता ही न कयते थे । चायों ओय शास्न्त थी । केवर इतना प्रमत्न कयना था फक रोहे की कटी हुई सराखों को उठाकय फाहय हो जाऊॊ । चाय भहीने ऩहरे से रोहे की सराखें काट री थीॊ । काटकय वे ऐसे ढॊ ग से जभा दी थीॊ फक सराखें धोई गई. ऩय उऩयोक्त फात सोचकय बागना मथधगत ही कय ददमा । मे सफ फातें चाहे प्रराऩ ही क्मों न भारूभ हों. अल्ऩामु भें भत्ृ मु तथा अनेक प्रकाय के योगों से जीवन बय उनकी भुस्क्त नहीॊ हो सकती । कृषकों भें उद्मोग का तो नाभ बी नहीॊ ऩामा जाता । मदद एक फकसान को जभीॊदाय की भजदयू ी कयने मा हर चराने की नौकयी कयने ऩय ग्राभ भें आज से फीस वषा ऩूवा दो आने योज मा चाय रुऩमे भालसक लभरते थे.फकसी को बी कोई कष्ट नहीॊ । सफ फ़िे प्रसन्न यहते थे । इसके अछतरयक्त भेयी ददनचमाा तथा छनमभों का ऩारन दे खकय ऩहरे के लसऩाही अऩने गुरु से बी अधधक भेया सम्भान कयते थे । भैं मथाछनमभ जा़िे. सन्तान वपृ द्ध. ऩय फकसी को कोई ऩता न चरा ! जैसे ही भैं जेर से बागने का पवचाय कयके उठा था. तो हभाया उद्मोग क्रास्न्तकायी आन्दोरन के कहीॊ अधधक राबदामक होता. क्मोंफक वे जानते थे फक मदद लसऩाही मा जभादाय सऩ ु रयण्टें डेंट जेर के साभने ऩेश कयना चाहें गे. आठवें ददन हथो़िे से ठोकी जातीॊ औय जेर के अधधकायी छनत्म प्रछत सामॊकार घूभकय सफ ओय दृस्ष्ट डार जाते थे. ध्मान आमा फक स्जन ऩॊ० चम्ऩारार की कृऩा से सफ प्रकाय के आनन्द बोगने की मवतन्रता जेर भें प्राप्त हुई. सफके प्रभाण पवद्मभान हैं । भैं इस सभम इस ऩरयणाभ ऩय ऩहुॊचा हूॊ फक मदद हभ रोगों ने प्राणऩण से जनता को लशषितऺत फनाने भें ऩूणा प्रमत्न फकमा होता. अफ उसकी मरी तथा चाय सन्तान बी हैं ऩय उसी वेतन भें उसे छनवााह कयना ऩ़िता है । उसे उसी ऩय सन्तोष कयना ऩ़िता है । साये ददन जेठ की रू तथा धऩ ू भें गन्ने के खेत भें ऩाने दे ते उसको यतौन्धी आने रगती है । अॊधेया होते ही आॊख से ददखाई नहीॊ दे ता. तीसये ददन ा़िी जाती. उनके फुढ़ाऩे भें जफफक थो़िा सा सभम ही उनकी ऩेंशन के लरए फाकी है. क्मा उन्हीॊ के साथ पव्‍वासघात कयके छनकर बागूॊ ? सोचा जीवन बय फकसी के साथ पव्‍वासघात न फकमा । अफ बी पव्‍वासघात न करूॊगा । उस सभम भु े मह बरी बाॊछत भारभ ू हो चुका था फक भु े पाॊसी की सजा होगी. ऩय उसके फदरे भें आधा सेय स़िे हुए शीये का शयफत मा आधा सेय चना तथा ि् ऩैसे योज भजदयू ी लभरती है . लसऩाही भहोदम को साथ रेकय कोतवारी की हवारात भें आकय फन्द हो गमा । रखनऊ जेर भें काकोयी के अलबमुक्तों को फ़िी बायी आजादी थी । याम साहफ ऩॊ० चम्ऩारार जेरय की कृऩा से हभ कबी न सभ सके फक जेर भें हैं मा फकसी रय्‍तेदाय के महाॉ भेहभानी कय यहे हैं । जैसे भाता-पऩता से िोटे -िोटे ऱिके फात फात ऩय ऐॊठ जाते । ऩॊ० चम्ऩारार जी का ऐसा रृदम था फक वे हभ रोगों से अऩनी सॊतान से बी अधधक प्रेभ कयते थे । हभ भें से फकसी को जया सा कष्ट होता था. गभी तथा फयसात भें प्रात्कार तीन फजे से उठकय सॊध्मादद से छनवत ृ हो छनत्म हवन बी कयता था । प्रत्मेक ऩहये का लसऩाही दे वता के सभान भेयी ऩूजा कयता था । मदद फकसी के फार फच्चे को कष्ट होता था तो वह हवन की बबूत रे जाता था ! कोई जॊर भाॊगता था । उनके पव्‍वास के कायण उन्हें आयाभ बी होता था तथा उनकी श्रद्धा औय बी फढ़ जाती थी । ऩरयणाभ मवरूऩ जेर से छनकर जाने का ऩूया प्रफन्ध कय लरमा । स्जस सभम चाहता चुऩचाऩ छनकर जाता । एक याबर को तैमाय होकय उठ ख़िा हुआ । फैयक के नम्फयदाय तो भेये सहाये ऩहया दे ते थे । जफ जी भें आता सोते. दीवाय से उतयकय फाहय आमा. जभादाय मा भुन्शी . सो उनको उदयऩूछता के उद्मोग से ही सभम नहीॊ लभरता जो धभा. जफ इच्िा होती फैठ जाते. तो उन्हें फ़िा द्ु ख होता था । हभाये तछनक से कष्ट को बी वह मवमॊ न दे ख सकते थे । औय हभ रोग ही क्मों. तो आज बी वही वेतन फॊधा चरा आ यहा है ! फीस वषा ऩूवा वह अकेरा था. स्जसभें ही उसे अऩने ऩरयवाय का ऩेट ऩारना ऩ़िता है । . सभाज तथा याजनीछत के ओय कुि ध्मान दे सकें । भद्मऩानादद दव्ु मासनों के कायण उनका आचयण बी ठी क नहीॊ यह जाता । व्मलबचाय.फक यमसी डार रो । उसने कहा भु े पव्‍वास है मह बागें गे नहीॊ । ऩाखाना छनतान्त छनजान मथान भें था । भु े ऩाखाना बेजकय वह लसऩाही ख़िा होकय साभने कु्‍ती दे खने भें भमत है ! हाथ फढ़ाते ही दीवाय के ऊऩय औय एक ऺण भें फाहय हो जाता. स्जसका ऩरयणाभ मथामी होता । अछत उत्तभ होगा मदद बायत की बावी सन्तान तथा नवमव ु कवन्ृ द क्रास्न्तकायी सॊगठन कयने की अऩेऺा जनता की प्रवस्ृ त्त को दे श सेवा की ओय रगाने का प्रमत्न कयें औय श्रभजीवी तथा कृषकों का सॊगठन कयके उनको जभीॊदायों तथा यईसों के अत्माचायों से फचाएॊ । बायतवषा के यईस तथा जभीॊदाय सयकाय के ऩऺऩाती हैं । भध्म श्रेणी के रोग फकसी न फकसी प्रकाय इन्हीॊ तीनों के आधश्रत हैं । कोई तो नौकयऩेशा हैं औय जो कोई व्मवसाम बी कयते हैं. फकन्तु सफ अऺयश् सत्म हैं. उसके साथ पव्‍वासघात कयके बागकय उसको जेर भें डारोगे ? क्मा मह अच्िा होगा ? उसके फार-फच्चे क्मा कहें गे ? इस बाव ने रृदम ऩय एक ठोकय रगाई । एक ठॊ डी साॊस बयी. उन्हें बी इन्हीॊ के भुॊह की ओय ताकना ऩ़िता है । यह गमे श्रभजीवी तथा कृषक.

पवदे शी साभग्री से सुसस्ज्जत फाजायों भें घूभने. मा ऩ़िे-ऩ़िे सोमा कयता है ! फकसी ग्राभवासी से फातचीत कयने से उसका ददभाग थक जाता है . रूस सयकाय की ओय से दे श सेवकों ऩय भनभाने अत्माचाय होते यहे । स्जस सभम से 'केथेयाइन' ने ग्राभीण सॊगठन का कामा अऩने हाथ भें लरमा. खट्टा तथा चटऩटा बोजन कयने. स्जनकी सॊख्मा इस दे श भें रगबग ि् कयो़ि है . ये रवे. एप० ए०. फीस मा तीस रुऩए की नौकयी के लरए ठोकयें खाते फपयते हैं उन्हें नौकयी का आसया िो़िकय कई उद्मोग जैसे फढ़ईधगयी. जूते फनाना. जहाज तथा खानों भें जहाॊ कहीॊ श्रभजीवी हों. ऩन्द्रह. तफ तो आभ के आभ गुठलरमों के दाभ ही लभर गमे । चाया समता लभरता है । घी-दध ू फार फच्चे खाते ही हैं . दध दो गाम मा बैंस ऩार री. उस सभम प्रत्मेक आन्दोरन स्जसका लशषितऺत जनता सभथान कये गी. उनकी दशा को सुधायने के लरए श्रभजीपवमों के सॊघ की मथाऩना की जाए. भीठा. उनकी बी मही इच्िा यहती है फक स्जस प्रकाय हो सके उनके ऱिके कोई सयकायी नौकयी ऩा जाएॊ । ग्राभीण फारक स्जस सभम शहय भें ऩहुॊचकय शहयी शान को दे खते हैं. उसी सभम से जायशाही की नीॊव दहरने रगी । श्रभजीपवमों के सॊघ बी मथापऩत हुए । रूस भें ह़ितारों का आयम्ब हुआ । उसी सभम से जनता की प्रवस्ृ त्त को दे खकय भदान्धों के नेर खुर गए । बायतवषा भें सफसे फ़िी कभी मही है फक इस दे श के मव ु कों भें शहयी जीवन व्मतीत कयने की फान ऩ़ि गई है । मव ु क-वन्ृ द साप-सुथये कऩ़िे ऩहनने. उनके रृदम से बाग्म-छनभााता को हटाकय उद्मोगी फनने की लशऺा दे । कर कायखाने. रुहायधगयी. धोफी का काभ.स्जनके रृदम भें बायतवषा की सेवा के बाव उऩस्मथत हों मा जो बायतबलू भ को मवतॊर दे खने मा मवाधीन फनाने की इच्िा यखता हो. वे अऩनी बराई फुयाई सभ ने के मोग्म हो जाएॊगे. तबी से फकसानों को अऩनी वामतपवक अवमथा का ऻान होने रगा औय वे अऩने लभर तथा शरु को सभ ने रगे. स्जसे अरग फैठे ऩढ़ा कयता है . घूभ घूभ कय रूस के मव ु क तथा मव ु छतमों ने जायशाही के पवरुद्ध प्रचाय आयम्ब फकमा. फी० ए० ऩास कयने भें हजायों रुऩए नष्ट कयके दस. ऩक्की स़िकों ऩय चरने. ताफक उनको अऩनी अवमथा का ऻान हो सके औय कायखानों के भालरक भनभाने अत्माचाय न कय सकें औय अिूतों को. एण्ने न्स. ऩमााप्त लशऺा प्राप्त कयाने का प्रफन्ध हो तथा उनको साभास्जक अधधकायों भें सभानता लभरे । स्जस दे श भें ि् कयो़ि भनुष्म अिूत सभ े जाते हों. इतनी फुयी तयह से उन ऩय पैशन का बूत सवाय हो जाता है फक उनके भक ु ाफरे पैशन फनाने की धचन्ता फकसी को बी नहीॊ ! थो़िे ददनों भें उनके आचयण ऩय बी इसका प्रबाव ऩ़िता है औय वे मकूर के गन्दे ऱिकों के हाथ भें ऩ़िकय फ़िी फुयी फुयी कुटे वों के घय फन जाते हैं । उनसे जीवन-ऩमान्त अऩना ही सुधाय नहीॊ हो ऩाता । फपय वे ग्राभवालसमों का सुधाय क्मा खाक कय सकेंगे ? असहमोग आन्दोरन भें कामाकत्तााओॊ की इतनी अधधक सॊख्मा होने ऩय बी सफके सफ शहय के प्रेटपाभों ऩय रेक्चयफाजी कयना ही अऩना कत्ताव्म सभ ते थे । ऐसे फहुत थो़िे कामाकत्ताा थे. तो उसे वहाॊ दो चाय ददन काटना फ़िा कदठन हो जाता है । मा तो कोई उऩन्मास साथ रे जाता है . स्जसभें चाय मा ऩाॊच घण्टा भेहनत कयके तीस रुऩमे भालसक की आम न हो जाए । ग्राभ भें रक़िी मा कऩ़िों का भूल्म फहुत कभ होता है औय मदद फकसी जभीॊदाय की कृऩा हो गई औय एक सूखा हुआ वऺ ू समते दाभों भें लभर जाता है औय मवमॊ एक मा ृ कटवा ददमा तो ि् भहीने के लरए ईंधन की िुट्टी हो गई । शुद्ध घी. अव्‍म सपर होगा । सॊसाय की फ़िी से फ़िी शस्क्त बी उसको दफाने भें सभथा न हो सकेगी । रूस भें जफ तक फकसान सॊगठन नहीॊ हुआ. मा उससे फातचीत कयना वह अऩनी शान के खखराप सभ ता है । ग्राभवासी जभीॊदाय मा यईस जो अऩने ऱिकों को अॊग्रेजी ऩढ़ाते हैं. मथान-मथान ऩय कृषक सुधायक सॊघों की मथाऩना की. उसे उधचत है फक ग्राभीण सॊगठन कयके कृषकों की दशा सुधायकय. भकान फनाना. कऩ़िा फुनना. याजधगयी इत्मादद सीख रेना चादहए । मदद जया साप सुथये यहना हो तो वैद्मक सीखें । फकसी ग्राभ मा कमफे भें जाकय काभ शुरू कयें । उऩयोक्त काभों भें कोई काभ बी ऐसा नहीॊ है . उस दे श के वालसमों को मवाधीन फनने का अधधकाय ही क्मा है ? इसी के साथ ही साथ स्मरमों की दशा बी इतनी सध ु ायी जाए फक वे अऩने आऩको भनुष्म जाछत का अॊग सभ ने रगें । वे ऩैय की जूती तथा घय की गुड़िमा न सभ ी जाएॊ । इतने कामा हो जाने के फाद जफ बायत की जनता अधधकाॊश लशषितऺत हो जाएगी. स्जन्होंने ग्राभों भें कुि कामा फकमा । उनभें बी अधधकतय ऐसे थे. जो केवर हुल्ऱि कयाने भें ही दे शोद्धाय सभ ते थे ! ऩरयणाभ मह हुआ फक आन्दोरन भें थो़िी सी लशधथरता आते ही सफ कामा अमत-व्ममत हो गमा । इसी कायण भहाभना दे शफन्धु धचतयॊ जनदास ने अस्न्तभ सभम भें ग्राभ-सॊगठन ही अऩने जीवन का ध्मेम फनामा था । भेये पवचाय से ग्राभ सॊगठन की सफसे सुगभ यीछत मही हो सकती है फक मव ु कों भें शहयी जीवन िो़िकय ग्राभीण जीवन के प्रछत प्रीछत उत्ऩन्न हो । जो मुवक लभडडर. दजी का काभ. भेज-कुसी ऩय फैठने तथा पवरालसता भें पॊसे यहने के आदी हो गए हैं । ग्राभीण जीवन को वे छनतान्त नीयस तथा शुष्क सभ ते हैं । उनकी सभ भें ग्राभों भें अधासभ्म मा जॊगरी रोग छनवास कयते हैं । मदद कबी फकसी अॊग्रेजी मकूर मा कारेज भें ऩढ़ने वारा पवद्माथी फकसी कामावश अऩने फकसी सम्फन्धी के महाॊ ग्राभ भें ऩहुॊच जाता है .

कोई खुफपमा ऩुलरस का रयऩोटा य नहीॊ फैठा जो रयऩोटा कये । वैसे मदद कोई खद्दयधायी ग्राभ भें उऩदे श कयना चाहे तो तुयन्त ही जभीॊदाय ऩुलरस भें खफय कय दे औय मदद कमवे के वैद्म. भु ऩय बी उसका प्रबाव हुआ । भैंने तुयन्त उसकी जीवनी 'केथेयाइन-८' नाभ से दहन्दी भें प्रकालशत कयाई । भैं बी उसी प्रकाय काभ कयना चाहता था. उन्हें कष्ट सहन कयने की आदत डारकय सुसॊगदठत रूऩ से ऐसा कामा कयना चादहए. दजी. रक़िी के लरए ऩैसा खचा नहीॊ कयना ऩ़िता । हजायों अच्िे -अच्िे ग्राभ हैं स्जनभें वैद्म. तथा याबर ऩाठशाराएॊ खोरकय उन्हें तथा उनके फच्चों को लशऺा दे ने का बी प्रफन्ध फकमा जाए । स्जतने मुवक उच्च लशऺा प्राप्त कयके व्मथा भें धन व्मम कयने की इच्िा यखते हैं. कुम्हाय मा वैद्म से काभ नहीॊ ऩ़िता ? भेया ऩूणा अनुबव है फक इन रोगों की बोरे-बारे ग्राभवासी खश ु ाभद कयते यहते हैं । योजाना काभ ऩ़िते यहने से औय सम्फन्ध होने से मदद थो़िी सी चेष्टा की जाए औय ग्राभवालसमों को थो़िा सा उऩदे श दे कय उनकी दशा सुधायने का मत्न फकमा जाए तो फ़िी जल्दी काभ फने । अल्ऩ सभम भें ही वे सच्चे मवदे श बक्त खद्दयधायी फन जाएॊ । मदद उनभें एक दो लशषितऺत हों तो उत्सादहत कयके उनके ऩास एक सभाचाय ऩर भॊगाने का प्रफन्ध कय ददमा जाए । दे श की दशा का बी उन्हें कुि ऻान होता यहे । इसी तयह सयर-सयर ऩुमतकों की कथाएॊ सुनाकय उनभें से कुप्रथाओॊ को बी िु़िामा जा सकता है । कबी कबी मवमॊ याभामण मा बागवत की कथा बी सुनामा कयें । मदद छनमलभत रूऩ से बागवत की कथा कहें तो ऩमााप्त धन बी चढ़ावे भें आ सकता है . जैसे रारटे न द्वाया तमवीयें ददखाकय मा फकसी दस ू ये उऩाम से उनको एक मथान ऩय एकबरत फकमा जा सके. ऱिके ऩढ़ाने वारे अथवा कथा कहने वारे ऩस्ण्डत कोई फात कहें तो सफ चऩ ु चाऩ सुनकय उस ऩय अभर कयने की कौलशश कयते हैं औय उन्हें कोई ऩूिता बी नहीॊ । इसी प्रकाय अनेक सुपवधाएॊ लभर सकती हैं स्जनके सहाये ग्राभीणों की साभास्जक दशा सुधायी जा सकती है । याबर-ऩाठशाराएॊ खोरकय छनधान तथा अिूत जाछतमों के फारकों को लशऺा दे सकते हैं । श्रभजीवी सॊघ मथापऩत कयने भें शहयी जीवन तो व्मतीत हो सकता है . फीस कोस दयू दौ़िना ऩ़िता है । वे इतने द्ु खी होते हैं फक स्जनका अनभ ु ान कयना कदठन है । पववाह आदद के अवसयों ऩय मथासभम कऩ़िे नहीॊ लभरते । काष्टाददक औषधधमाॊ फ़िे फ़िे कमफों भें नहीॊ लभरतीॊ । मदद भाभूरी अत्ताय फनकय ही कमफे भें फैठ जाएॊ. धोफी. स्जसका एक सभम जरूयत ऩय काभ छनकर गमा. उनको चादहए फक पवद्माऩीठों के साथ-साथ उद्मोगऩीठ. उस सभम उनके साथ वातााराऩ कयके भनोहय उऩदे शों द्वाया उनको उनकी दशा का ददग्दशान कयाने का अवसय लभर सकता है । इन रोगों के ऩास वक्त फहुत कभ होता है । इसलरए फेहतय मही होगा फक धचत्ताकषाण साधनों द्वाया फकसी उऩदे श कयने की यीछत से. उनके लरए उधचत है फक वे अधधक से अधधक अॊग्रेजी के दसवें दजजे तक की मोग्मता प्राप्त कय फकसी करा कौशर को सीखने का प्रमत्न कयें औय उस करा कौशर द्वाया ही अऩना जीवन छनवााह कयें । जो धनी-भानी मवदे श सेवाथा फ़िे-फ़िे पवद्मारमों तथा ऩाठशाराओॊ की मथाऩना कयते हैं. धोफी छनवास ही नहीॊ कयते । उन ग्राभों के रोगों को दस. फढ़ई.। कॊडों का ईंधन होता है औय मदद फकसी की कृऩा हो गई तो पसर ऩय एक मा दो बुस की गा़िी बफना भूल्म ही लभर जाती है । अधधकतय काभकास्जमों को गाॊव भें चाया. फकन्तु इसके लरए उनके साथ अधधक सभम खचा कयना ऩ़िेगा । स्जस सभम वे अऩने अऩने काभ से िुट्टी ऩाकय आयाभ कयते हैं. स्जसभें पवद्माथी प्रचाय कयने का ढॊ ग सीख सकें । स्जन मव ु कों के रृदम भें मवदे श सेवा के बाव हों. स्जसका ऩरयणाभ मथामी हो । केथेयाइन ने इसी प्रकाय कामा फकमा था । उदय-ऩूछता के छनलभत्त केथेयाइन के अनुमामी ग्राभों भें जाकय कऩ़िे सीते मा जूते फनाते औय याबर के सभम फकसानों को उऩदे श दे ते थे । स्जस सभम भैंने केथेयाइन की जीवनी (The Grandmother of the Russian Revolution) का अॊग्रेजी बाषा भें अध्ममन फकमा. लशल्ऩपवद्मारम तथा कराकौशर बवनों की मथाऩना बी कयें । इन पवद्मारमों के पवद्माधथामों को नेताधगयी के रोब से फचामा जाए । पवद्माधथामों का जीवन सादा हो औय पवचाय उच्च हों । इन्हीॊ पवद्मारमों भें एक एक उऩदे शक पवबाग बी हो. वह आबायी हो जाता है । उसकी आॊखें नीची यहती हैं । आव्‍मकता ऩ़िने ऩय वह तुयन्त सहामक होता है । ग्राभ भें ऐसा कौन ऩुरुष है स्जसका रुहाय. स्जससे एक ऩुमतकारम मथापऩत कय दें । कथा कहने के अवसय ऩय फीच फीच भें चाहे फकतनी याजनीछत का सभावेश कय जामे . ऩय फीच भें ही क्रास्न्तकायी दर भें पॊस गमा । भेया तो अफ मह दृढ़ छन्‍चम हो गमा है फक अबी ऩचास वषा तक क्रास्न्तकायी दर को बायतवषा भें सपरता नहीॊ लभर सकती क्मोंफक महाॊ की स्मथछत उसके उऩमुक्त नहीॊ । अत्एव क्रास्न्तकायी दर का सॊगठन कयके व्मथा भें नवमव ु कों के जीवन को नष्ट कयना औय शस्क्त का दरु ु ऩमोग कयना आदद फ़िी बायी बूरें हैं । इससे राब के मथान भें हाछन की सॊबावना फहुत अधधक है । नवमव ु कों को भेया अस्न्तभ सन्दे श मही है फक वे रयवाल्वय मा पऩमतौर को अऩने ऩास यखने की इच्िा को त्माग कय सच्चे . दजी. औय दो-चाय फकताफें दे ख कय ही औषध ददमा कयें तो बी तीस-चारीस रुऩमे भालसक की आम तो कहीॊ गई ही नहीॊ । इस प्रकाय उदय छनवााह तथा ऩरयवाय का प्रफन्ध हो जाता है । ग्राभों की अधधक जनसॊख्मा से ऩरयचम हो जाता है । ऩरयचम ही नहीॊ.

मह शामरों का छन्‍चम है । मद्मपऩ मह फात वह ऩयिह्भ ही जानता है फक फकन कभों के ऩरयणाभमवरूऩ कौन सा शयीय इस आत्भा को ग्रहण कयना होगा फकन्तु अऩने लरए मह भेया दृढ़ छन्‍चम है फक भैं उत्तभ शयीय धायण कय नवीन शस्क्तमों सदहत अछत शीघ्र ही ऩुन् बायतवषा भें ही फकसी छनकटवती सम्फन्धी मा इष्ट लभर के गह ृ भें जन्भ ग्रहण करूॊगा. नहीॊ दी जा सकती । चीप कोटा से अऩीर खारयज हो जाने के फाद मथाछनमभ प्रान्तीम गवनाय तथा फपय वाइसयाम के ऩास दमा प्राथाना की गई । याभप्रसाद 'बफस्मभर'. ऩय इसभें भेया कोई पवशेष दोष नहीॊ. जो भैंने चीप कोटा के जजों को ददमा था. आत्भा को जन्भ भयण के फन्धन भें ऩ़िना ही होता है . क्मोंफक भेया जन्भ-जन्भान्तय उद्दे्‍म यहे गा फक भनुष्म भार को सबी प्रकृछत ऩदाथों ऩय सभानाधधकाय प्राप्त हो । कोई फकसी ऩय हकूभत न कये । साये सॊसाय भें जनतन्र की मथाऩना हो । वताभान सभम भें बायतवषा की अवमथा फ़िी शोचनीम है । अत्एव रगाताय कई जन्भ इसी दे श भें ग्रहण कयने होंगे औय जफ तक फक बायतवषा के नय-नायी ऩूणत ा मा सवारूऩेण मवतन्र न हो जाएॊ. जफफक 19 ददसम्फय 1927 ई० सोभवाय (ऩौष कृष्णा 11 सम्वत श 1984 पव०) को 6 फजे प्रात्कार इस शयीय को पाॊसी ऩय रटका दे ने की छतधथ छनस््‍चत हो चुकी है । अत्एव छनमत सभम ऩय इहरीरा सॊवयण कयनी होगी । मह सवाशस्क्तभान प्रबु की रीरा है । सफ कामा उसकी इच्िानुसाय ही होते हैं । मह ऩयभपऩता ऩयभात्भा के छनमभों का ऩरयणाभ है फक फकस प्रकाय फकसको शयीय त्मागना होता है । भत्ृ मु के सकर उऩक्रभ छनलभत्त भार हैं । जफ तक कभा ऺम नहीॊ होता.दे श सेवक फनें । ऩूण-ा मवाधीनता उनका ध्मेम हो औय वे वामतपवक साम्मवादी फनने का प्रमत्न कयते यहें । पर की इच्िा िो़िकय सच्चे प्रेभ से कामा कयें . क्मोंफक भैं बी तो अल्ऩऻ जीव भार ही हूॊ । बूर न कयना केवर सवाऻ से ही सम्बव है । हभें ऩरयस्मथछतमों के अनुसाय ही सफ कामा कयने ऩ़िे औय कयने होंगे । ऩयभात्भा अगरे जन्भ से सुफुपद्ध प्रदान कये ताफक भैं स्जस भागा का अनुसयण करूॊ वह रुदट यदहत ही हो । अफ भैं उन फातों का उल्रेख कय दे ना उधचत सभ ता हूॊ. जो चाहे सो लरखते. स्जसभें प्रछतऻा की थी फक अफ बपवष्म भें क्रास्न्तकायी दर से कोई सम्फन्ध न यखूॊगा । इस भेभोरयमर का स्जक्र भैंने अऩनी अस्न्तभ दमा-प्राथाना ऩर भें . अत्एव याभप्रसाद सफ से फ़िा गुमताख भुरस्जभ है । अफ भापी चाहे वह फकसी रूऩ भें भाॊगे. याजेन्द्रनाथ रादह़िी.'वेद वाणी' का अनुऩभ घोष भनुष्म भार के कानों तक ऩहुॊचाने भें सभथा हो सकॊू । सम्बव है फक भैं भागा-छनधाायण भें बूर करूॊ. जो काकोयी षड्मन्र के अलबमुक्तों के सम्फन्ध भें सेशन जज के पैसरा सुनाने के ऩ्‍चात घदटत हुई । 6 अप्रैर सन श 1927 ई० को सेशन जज ने पैसरा सुनामा था । 7 जुराई सन श 1927 ई० को अवध चीप कोटा भें अऩीर हुई । इसभें कुि की सजाएॊ फढ़ीॊ औय एकाध की कभ बी हुईं । अऩीर होने की तायीख से ऩहरे भैंने सॊमुक्त प्रान्त के गवनाय की सेवा भें एक भेभोरयमर बेजा था. ऩयभात्भा से भेयी मह प्राथाना होगी फक वह भु े इसी दे श भें जन्भ दे . उसके पवरुद्ध आवाज उठाई है . कमयण सदम ही भत्ृ मु कम दे िोऩकमयक कभा हो ॥ [edit]अल्न्तभ सभम की फमत आज 16 ददसम्फय 1927 ई० को छनम्नलरखखत ऩॊस्क्तमों का उल्रेख कय यहा हूॊ. ऩयभात्भा सदै व उनका बरा ही कये गा । मर्द दे ि-र्हत भयनम ऩडे भुझको सहस्रों फमय बी तो बी न भैं इस कष्ट को ननज ्ममन भें रमऊॉ कबी । हे ईि बमयतवषा भें ित फमय भेयम जन्भ हो. ताफक उसकी ऩपवर वाणी . खुफपमा पवबाग के कामाकत्तााओॊ ऩय राॊिन रगामे हैं अथाात श अलबमोग के सभम जो अन्माम होता था. कय ददमा था । फकन्तु चीप कोटा के जजों ने भेयी फकसी प्रकाय की प्राथाना मवीकाय न की । भैंने मवमॊ ही जेर से अऩने भक ु दभे की फहस लरखकय बेजी िाऩी गई । जफ मह फहस चीप कोटा के जजों ने सुनी उन्हें फ़िा सन्दे ह हुआ फक फहस भेयी लरखी हुई न थी । इन तभाभ फातों का नतीजा मह छनकरा फक चीप कोटा अवध द्वाया भु े भहाबमॊकय षड्मन्रकायी की ऩदवी दी गई । भेये ऩ्‍चाताऩ ऩय जजों को पव्‍वास न हुआ औय उन्होंने अऩनी धायणा को इस प्रकाय प्रकट फकमा फक मदद मह (याभप्रसाद) िूट गमा तो फपय वही कामा कये गा । फुपद्ध की प्रखयता तथा सभ ऩय प्रकाश डारते हुए भु े 'छनदा मी हत्माये ' के नाभ से पवबूपषत फकमा गमा । रेखनी उनके हाथ भें थी. योशनलसॊह तथा अशपाकउल्रा खाॊ के भत्ृ मु-दण्ड को फदरकय अन्म दस ू यी सजा दे ने की लसपारयश कयते . फकन्तु काकोयी षड्मन्र का चीप कोटा का आद्मोऩान्त पैसरा ऩढ़ने से बरीबाॊछत पवददत होता है फक भु े भत्ृ मुदण्ड फकस ख्मार से ददमा गमा । मह छन्‍चम फकमा गमा फक याभप्रसाद ने सेशन जज के पवरुद्ध अऩशब्द कहे हैं .

जो अफ बायतवालसमों के नयभ से . सो काकोयी वारों ने फकमा । भत्ृ मद ु ण्ड को यद्द कय दे ने से दे श भें फकसी प्रकाय की शास्न्त बॊग होने अथवा फकसी पवप्रव के हो जाने की सॊबावना न थी । पवशेषतमा तफ जफ फक दे श बय के सफ प्रकाय के दहन्द-ू भुस्मरभ असेम्फरी के सदममों ने इसकी लसपारयश की थी । षड्मन्रकारयमों की इतनी फ़िी लसपारयश इससे ऩहरे कबी नहीॊ हुई । फकन्तु सयकाय तो अऩना ऩास सेधा यखना चाहती है । उसे अऩने फर ऩय पव्‍वास है । सय पवलरमभ भेरयस ने ही मवमॊ शाहजहाॊऩुय तथा इराहाफाद के दहन्द ु भस ु लरभ दॊ गों के अलबमुक्तों के भत्ृ मद ु ॊ ड यद्द फकमे हैं. क्मोंफक दौया जज ने लसपारयश की है फक मदद मे रोग ऩ्‍चाताऩ कयें तो सयकाय दण्ड कभ दे । चायों अलबमुक्तों ने ऩ्‍चाताऩ प्रकट कय ददमा है । फकन्तु वाइसयाम भहोदम ने बी एक न सुनी । इस पवषम भें भाननीम ऩॊ० भदनभोहन भारवीम जी ने तथा असेम्फरी के कुि अन्म सदममों ने वाइसयाम से लभरकय बी प्रमत्न फकमा था फक भत्ृ मुदण्ड न ददमा जाए । इतना होने ऩय सफको आशा थी फक वाइसयाम भहोदम अव्‍मभेव भत्ृ मुदण्ड की आऻा यद्द कय दें गे । इसी हारत भें चुऩचाऩ पवजमदशभी से दो ददन ऩहरे जेरों को ताय बेज ददए गए फक दमा नहीॊ होगी सफ की पाॊसी की तायीख भक ु या य हो गई । जफ भु े सुऩरयण्टे ण्डेंट जेर ने ताय सुनामा. तो सयकाय की ओय से फ़िे जोयदाय शब्दों भें कहा गमा फक सयकाय के ऩास ऩूया सफूत है । खुरी अदारत भें अलबमोग चरने से गवाहों ऩय आऩस्त्त आ सकती है । मदद आडडानेन्स के कैदी रेखफद्ध प्रछतऻा-ऩर दाखखर कय दें फक वे बपवष्म भें क्रास्न्तकायी आन्दोरन से कोई सम्फन्ध न यखेंगे.हुए सॊमुक्त प्रान्त की कौंलसर के रगबग सबी छनवााधचत हुए भेम्फयों ने हमताऺय कयके छनवेदन ऩर ददमा । भेये पऩता ने ढ़ाई सौ यईस. आनये यी भस्जमने ट तथा जभीॊदायों के हमताऺय से एक अरग प्राथाना ऩर बेजा. फकन्तु श्रीभान सय पवलरमभ भेरयस की सयकाय ने एक न सुनी ! उसी सभम रेस्जमरेदटव असेम्फरी तथा कौंलसर ऑप मटे ट के 78 सदममों ने हमताऺय कयके वाइसयाम के ऩास प्राथानाऩर बेजा फक काकोयी षड्मन्र के भत्ृ मद ु ण्ड ऩाए हुओॊ को भत्ृ मुदण्ड की सजा फदर कय दस ू यी सजा कय दी जाए. जफफक छनत्म नमे दहन्द ू भुसलरभ दॊ गे फढ़ते ही जाते थे । मदद काकोयी के कैददमों को भत्मुदॊड भाप कयके दस ू यी सजा दे ने से दस ू यों का उत्साह फढ़ता तो क्मा इसी प्रकाय भजहफी दॊ गों के सम्फन्ध भें बी नहीॊ हो सकता था ? भगय वहाॊ तो भाभरा कुि औय ही है . फकन्तु कोई एक बी दघ ु ट । काकोयी षड्मन्र केस ऩूये डेढ़ सार तक खुरी अदारतों भें चरता यहा । सफूत की ओय से रगबग तीन सौ गवाह ऩेश फकमे गए । कई भुखबफय तथा इकफारी खुरे तौय से घूभते यहे . औय बी कुि हधथमायों के भक ा ना मा हत्मा की सूचना ऩुलरस न दे सकी ु दभे खुरी अदरत भें चरामे गए. तो सयकाय उन्हें रयहाई दे ने के पवषम भें पवचाय कय सकती है । फॊगार भें दषितऺणे्‍वय तथा शोबा फाजाय फभ केस आडडानेन्स के फाद चरे । खुफपमा पवबाग के डडप्टी सुऩरयण्टे ण्डेंट के कत्र का भुकदभा बी खर ु ी अदारत भें हुआ. क्मोंफक मह उन्होंने एक छनमभ सा फना यखा है फक प्रत्मेक पाॊसी के कैदी की ओय से स्जस की लबऺा की अजी वाइसयाम के महाॊ खारयज हो जाती है . तो भैंने बी कह ददमा था फक आऩ अऩना काभ कीस्जए । फकन्तु सुऩरयण्टे ण्डेंट जेर के अधधक कहने ऩय फक एक ताय दमा-प्राथाना का सम्राट के ऩास बेज दो. वह एक ताय सम्राट के नाभ से प्रान्तीम सयकाय के ऩास अव्‍म बेजते हैं । कोई दस ू या जेर सऩ ु रयण्टे ण्डेंट ऐसा नहीॊ कयता । उऩयोक्त ताय लरखते सभम भेया कुि पवचाय हुआ फक पप्रवी-कौंलसर इॊग्रैण्ड भें अऩीर की जाए । भैंने श्रीमुत भोहनरार सक्सेना वकीर रखनऊ को सूचना दी । फाहय फकसी को वाइसयाम द्वाया अऩीर खरयज कयने की फात ऩय पव्‍वास बी न हुआ । जैसे तैसे कयके श्रीमुत भोहनरार द्वाया पप्रवीकौंलसर भें अऩीर कयाई गई । नतीजा तो ऩहरे से भारूभ था । वहाॊ से बी अऩीर खारयज हुई । मह जानते हुए फक अॊग्रेज सयकाय कुि बी न सुनेगी भैंने सयकाय को प्रछतऻा-ऩर क्मों लरखा ? क्मों अऩीरों ऩय अऩीरें तथा दमा-प्राथानाएॊ कीॊ ? इस प्रकाय के प्र्‍न उठ सकते हैं । सभ भें सदै व मही आमा फक याजनीछत एक शतयॊ ज के खेर के सभान है । शतयॊ ज के खेरने वारे बरी बाॊछत जानते हैं फक आव्‍मकता होने ऩय फकस प्रकाय अऩने भोहये भयवा दे ने ऩ़िते हैं । फॊगार आडडानेन्स के कैददमों के िो़िने मा उन ऩय खुरी अदारत भें भक ु दभा चराने के प्रमताव जफ असेम्फरी भें ऩेश फकए. ऩय कहीॊ कोई दघ ा ना मा फकसी को धभकी दे ने की कोई सूचना ऩुलरस ने न दी । सयकाय ु ट की इन फातों की ऩोर खोरने की गयज से भैंने रेखफद्ध फॊधेज सयकाय को ददमा । सयकाय के कथनानुसाय स्जस प्रकाय फॊगार आडडानेन्स के कैददमों के सम्फन्ध भें सयकाय के ऩास ऩूया सफूत था औय सयकाय उनभें से अनेकों को बमॊकय षड्मन्रकायी दर का सदमम तथा हत्माओॊ का स्जम्भेदाय सभ ती तथा कहती थी. उनके पैसरे खुफपमा ऩुलरस की इच्िानुसाय लरखे जाते हैं । फये री ऩुलरस काॊमटे फरों की हत्मा के अलबमोग भें छनतान्त छनदोष नवमुवकों को पॊसामा गमा औय सी० आई० डी० वारों ने अऩनी डामयी ददखराकय पैसरा लरखामा । काकोयी षड्मन्र भें बी अन्त भें ऐसा ही हुआ । सयकाय की सफ चारों को जानते हुए बी भैंने सफ कामा उसकी रम्फी रम्फी फातों की ऩोर खोरने के लरए ही फकमे । काकोयी के भत्ृ मुदण्ड ऩामे हुओॊ की दमा प्राथाना न मवीकाय कयने का कोई पवशेष कायण सयकाय के ऩास नहीॊ । सयकाय ने फॊगार आडडानेंस के कैददमों के सम्फन्ध भें जो कुि कहा था. स्जनको फक इराहाफाद हाईकोटा से भत्ृ मुदण्ड ही दे ना उधचत सभ ा गमा था औय उन रोगों ऩय ददन दहा़िे हत्मा कयने के सीधे सफूत भौजूद थे । मे सजामें ऐसे सभम भाप की गई थीॊ. तो इसी प्रकाय काकोयी षड्मन्रकारयमों के रेखफद्ध प्रछतऻा कयने ऩय कोई गौय क्मों न फकमा ? फात मह है फक जफया भाये योने न दे म । भु े तो बरी बाॊछत भारूभ था फक सॊमुक्त प्रान्त भें स्जतने याजनैछतक अलबमोग चरामे जाते हैं.

तफ क्मा नमे बायतवषा की मवतन्रता के नाभ ऩय दहन्द ू भुसरभान अऩने छनजी िोटे िोटे पामदों का ख्मार न कयके आऩस भें एक नहीॊ हो सकते ? ऩयभात्भा ने भेयी ऩुकाय सुन री औय भेयी इच्िा ऩूयी होती ददखाई दे ती है । भैं तो अऩना कामा कय चक ु ा । भैंने भुसरभानों भें से एक नवमुवक छनकारकय बायतवालसमों को ददखरा ददमा. उस सभम तक बायतवषा की याजनैछतक स्मथछत ऩूणत ा मा सुधयी हुई हो । जनसाधायण का अधधक बाग सुयषितऺत हो जाए । ग्राभीण रोग बी अऩने कत्ताव्म सभ ने रग जाएॊ । पप्रवी कौंलसर भें अऩीर लबजवाकय भैंने जो व्मथा का अऩव्मम कयवामा. औय प्रान्त का नेता बी भैं ही था । अत्एव भत्ृ मद ु ण्ड तो अकेरा भु े ही लभरना चादहए था । अन्म तीन को पाॊसी नहीॊ दे नी चादहए थी । इसके अछतरयक्त दस ू यी सजाएॊ सफ मवीकाय होती । ऩय ऐसा क्मों होने रगा ? भैं पवरामती न्मामारम की बी ऩयीऺा कयके मवदे शवालसमों के लरए उदाहयण िो़िना चाहता था फक मदद कोई याजनैछतक अलबमोग चरे तो वे कबी बूरकय के बी फकसी अॊग्रेजी अदारत का पव्‍वास न कयें । . ऩयन्तु भेये पवशेष आग्रह से ही उन्होंने सयकाय से दमा प्राथाना की थी । इसका दोषी भैं ही हूॊ जो भैंने अऩने प्रेभ के ऩपवर अधधकायों का उऩमोग कयके श्री अशपाकउल्रा खाॊ को उनके दृढ़ छन्‍चम से पवचलरत फकमा । भैंने एक ऩर द्वाया अऩनी बूर मवीकाय कयते हुए भ्रात-ृ द्पवतीमा के अवसय ऩय गोयखऩुय जेर से श्री अशपाक को ऩर लरखकय ऺभा प्राथाना की थी । ऩयभात्भा जाने फक वह ऩर उनके हाथों तक ऩहुॊचा बी था मा नहीॊ । खैय ! ऩयभात्भा की ऐसी इच्िा थी फक हभ रोगों को पाॊसी दी जाए. औय अगरी काॊग्रेस (भद्रास) ऩय सफ याजनैछतक दर के नेता तथा दहन्द ू भस ु रभान एक होने जा यहे हैं । वाइसयाम ने जफ हभ काकोयी के भत्मुदण्ड वारों की दमा प्राथाना अमवीकाय की थी. ऩालरामाभें ट भें बायत सधचव राडा फकानहे ड के तथा अन्म भजदयू नेताओॊ के बाषणों से बरी बाॊछत सभ भें आमा है फक फकस प्रकाय बायतवषा को गुराभी की जॊजीयों भें जक़िे यहने की चारें चरी जा यही हैं । भैं प्राण त्मागते सभम छनयाश नहीॊ हूॊ फक हभ रोगों के फलरदान व्मथा गए । भेया तो पव्‍वास है फक हभ रोगों की छिऩी हुई आहों का ही मह नतीजा हुआ फक राडा फकानहे ड के ददभाग भें ऩयभात्भा ने एक पवचाय उऩस्मथत फकमा फक दहन्दम ु तान के दहन्द ू भुसलरभ ग़िों का राब उठाओ औय बायतवषा की जॊजीयें औय कस दो । गए थे योजा िु़िाने. औय मदद ऐसा कयें गे तफ तो मवयाज्म कुि दयू नहीॊ । क्मोंफक फपय तो बायतवालसमों को काभ कयने का ऩूया भौका लभर जाएगा । दहन्द-ू भुस्मरभ एकता ही हभ रोगों की मादगाय तथा अस्न्तभ इच्िा है . जो ऩूयी तौय से काभमाफ हुआ । अफ दे शवालसमों से मही प्राथाना है फक मदद वे हभ रोगों के पाॊसी ऩय चढ़ने से जया बी दखु खत हुए हों. नभाज गरे ऩ़ि गई ! बायतवषा के प्रत्मेक पवख्मात याजनैछतक दर ने औय दहन्दओ ु ॊ के तो रगबग सबी तथा भस ु रभानों के अधधकतय नेताओॊ ने एक मवय होकय यामर कभीशन की छनमुस्क्त तथा उसके सदममों के पवरुद्ध घोय पवयोध व्मक्त फकमा है . उसे सफ ऩूयी तौय से भानें औय उस ऩय अभर कयें । ऐसा कयने के फाद वह ददन फहुत दयू न होगा जफफक अॊग्रेजी सयकाय को बायतवालसमों की भाॊग के साभने लसय ुकाना ऩ़िे. बायतवालसमों के जरे हुए ददरों ऩय नभक ऩ़िे.नयभ दर के नेताओॊ के बी शाही कभीशन के भुकया य होने औय उसभें एक बी बायतवासी के न चुने जाने. वे बफरबफरा उठें औय हभायी आत्भाएॊ उनके कामा को दे खकय सुखी हों । जफ हभ नवीन शयीय धायण कयके दे श सेवा भें मोग दे ने को उद्मत हों. तो उन्हें मही लशऺा रेनी चादहए फक दहन्द-ू भुसरभान तथा सफ याजनैछतक दर एक होकय काॊग्रेस को अऩना प्रछतछनधध भानें । जो काॊग्रेस तम कये . चाहे वह फकतनी कदठनता से क्मों न प्राप्त हो । जो भैं कह यहा हूॊ वही श्री अशपाकउल्रा खाॊ वायसी का बी भत है . उसी सभम भैंने श्रीमुत भोहनरार जी को ऩर लरखा था फक दहन्दम ु तानी नेताओॊ को तथा दहन्द-ू भुसरभानों को अगरी काॊग्रेस ऩय एकबरत हो हभ रोगों की माद भनानी चादहए । सयकाय ने अशपाकउल्रा को याभप्रसाद का दादहना हाथ कयाय ददमा । अशपाकउल्रा कट्टय भस ु रभान होकय ऩक्के आमासभाजी याभप्रसाद का क्रास्न्तकायी दर के सम्फन्ध भें मदद दादहना हाथ फनते. उसका बी एक पवशेष अथा था । सफ अऩीरों का तात्ऩमा मह था फक भत्ृ मुदॊड उऩमुक्त नहीॊ । क्मोंफक न जाने फकसकी गोरी से आदभी भाया गमा । अगय डकैती डारने की स्जम्भेदायी के ख्मार से भत्ृ मुदण्ड ददमा गमा तो चीप कोटा के पैसरे के अनुसाय बी भैं ही डकैछतमों का स्जम्भेदाय तथा नेता था. जो सफ ऩयीऺाओॊ भें ऩूणा उत्तीणा हुआ । अफ फकसी को मह कहने का साहस न होना चादहए फक भुसरभानों ऩय पव्‍वास न कयना चादहए । ऩहरा तजुफाा था. क्मोंफक अऩीर के सभम हभ दोनों रखनऊ जेर भें पाॊसी की कोठरयमों भें आभने साभने कई ददन तक यहे थे । आऩस भें हय तयह की फातें हुई थीॊ । धगयफ्तायी के फाद से हभ रोगों की सजा फढ़ने तक श्री अशपाकउल्रा खाॊ की फ़िी बायी उत्कट इच्िा मही थी फक वह एक फाय भु से लभर रेते जो ऩयभात्भा ने ऩूयी की । श्री अशपाकउल्रा खाॊ तो अॊग्रेजी सयकाय से दमा प्राथाना कयने ऩय याजी ही न थे । उसका तो अटर पव्‍वास मही था फक खुदाफन्द कयीभ के अरावा फकसी दस ू ये से प्राथाना न कयनी चादहए.

तफ तक वे बूरकय बी फकसी प्रकाय के क्रास्न्तकायी षड्मन्रों भें बाग न रें । मदद दे श सेवा की इच्िा हो तो खर ु े आन्दोरनों द्वाया मथाशस्क्त कामा कयें . अन्मथा उनका फलरदान उऩमोगी न होगा । दस ू ये प्रकाय से इससे अधधक दे श सेवा हो सकती है . जफ तक उन्हें कत्ताव्म-अकत्ताव्म का ऻान न हो जाए. वही फुये फुये नाभ धयते हैं औय अन्त भें भन ही भन कुढ़ कय प्राण त्मागने ऩ़िते हैं। दे शवालसमों से मही अस्न्तभ पवनम है फक जो कुि कयें .तफीमत आमे तो जोयदाय फमान दें । अन्मथा भेयी तो याम है फक अॊग्रेजी अदारत के साभने न तो कबी कोई फमान दें औय न कोई सपाई ऩेश कयें . जो ज्मादा उऩमोगी लसद्ध होगी । ऩरयस्मथछत अनुकूर न होने से ऐसे आन्दोरनों भें ऩरयश्रभ प्राम् व्मथा जाता है । स्जसकी बराई के लरए कयो. काकोयी षड्मन्र के अलबमोग से लशऺा प्राप्त कय रें । इस अलबमोग भें सफ प्रकाय के उदाहयण भौजूद हैं । पप्रवी कौंलसर भें अऩीर दाखखर कयाने का एक पवशेष अथा मह बी था फक भैं कुि सभम तक पाॊसी की तायीख टरवा कय मह ऩयीऺा कयना चाहता था फक नवमुवकों भें फकतना दभ है औय दे शवासी फकतनी सहामता दे सकते हैं । इससे भु े फ़िी छनयाशाजनक सपरता हुई । अन्त भें भैंने छन्‍चम फकमा था फक मदद हो सके तो जेर से छनकर बागूॊ । ऩैसा हो जाने से सयकाय को अन्म तीन पाॊसी वारों की सजा भाप कय दे नी ऩ़िेगी औय मदद न कयते तो भैं कया रेता । भैंने जेर से बागने के अनेकों प्रमत्न फकमे. सफ लभरकय कयें औय सफ दे श की बराई के लरए कयें । इसी से सफका बरा होगा। भयते 'बफल्स्थभर' 'योिन' 'रहयी' 'अिपमक' अत्ममचमय से । होंगे ऩैदम सैंकडों इनके रुचधय की धमय से ॥ (सभमप्त) . क्मोंफक भैं इस नतीजे ऩय ऩहुॊचा हूॊ फक ऩयभात्भा को मही भॊजूय था । भगय भैं नवमव ु कों से फपय बी नम्र छनवेदन कयता हूॊ फक जफ तक बायतवालसमों की अधधक सॊख्मा सुलशषितऺत न हो जाए. वहाॊ से भु े प्राण-यऺा के लरए एक रयवाल्वय तक न लभर सका ! एक नवमव ु क बी सहामता को न आ सका ! अन्त भें पाॊसी ऩा यहा हूॊ । पाॊसी ऩाने का भु े कोई शौक नहीॊ. फकन्तु फाहय से कोई सहामता न लभर सकी । महीॊ तो रृदम को आघात रगता है फक स्जस दे श भें भैंने इतना फ़िा क्रास्न्तकायी आन्दोरन तथा षड्मन्रकायी दर ख़िा फकमा था.