“ ीम ागवत प रचय अ यास म”

‘मनोगत’
सम त भागवत अ यासा थय को नम कार एवं सबका मन:पूवक वागत।
ीमद भागवत के द ता के बारे म, भागवत धम के बारे म, और इस धम के हमारे
दैिनक जीवन के संदभ के बारे म और भागवत म िव दत आचरण शा

का मह वबताने का

कोई भी कारण नह है, और ना ही उसक ज रत है।
मनु य जीवन म भागवत के मह व से आप सभी प रिचत ह, फर भी हम सभी इस
शा

को, वयं भगवान ारा रिचत इस घटना Coustitution को हेतु पुर सर दुलि त

करते ह, यह कहना भी शायद गलत नह होगा।
येक मानव मा

का, कम से कम

येक भारतीय

ि

का अपने जीवन म

भागवत का कम से कम एक बार वाचन ही नह अिपतु ामािणकता से अ ययन करना भी
अ यंत आव यक है। गीता फाऊंडेशन िमरज, का गीता, भागवत का सार व चार यह एक
मुख हेतु है। इसी के तहत भागवत अ ययन म अनुश ासन और सरलता लाने हेतु
‘ ीम ागवत प रचय अ यास म’ यह एक उप म है।
ीमद भागवत महापुराण के अ याय म से ित दन िसफ एक अ याय का इस
से, भि

िमलाकर 365

ापूण मनसे , एक साल म अ ययन हो इसी उ े य से सभी अ याय को
का यह अ यास

करने के प ात के वल एक
उसी के उ र का संदभ प

म तैयार कया है। ित दन एक अ याय का वाचन

का उ र िलखना है। उसी

ावली म ही

ोक का नंबर भी िलखा आ है।

ही डायरी/नोटबुक म ित दन के अ याय का

येक

के बाद

येक अ यासा थ को अपनी

व उसका उ र िलखना है। इसे कसी के

भी पास समी ा करने के िलये भेजने क ज रत नह है। इसे अपने ही पास रखना है। इसी
तरह एक वष म संपूण भागवत महापुराण का वाचन कर उसका अ ययन, चतन, मनन हो
यही सभी अ यासा थय से अपे ा है। इसी एक वष के अ यास म के बाद अगर इसी का
िव तृत अ यास करने क

ेरणा होती है तो ‘प

ारा ीम ागवत अ यास’ यह चार साल

का अ यास म भी है।
इस ‘भागवत प रचय’ के अ यास
कसी भी एक क म इसके िलये

म क शु आत करने से पहले, थम आप को

वेश ा

करना ज री है और अपना नाम रिज टर

करवाना ज री है। इसी पुि तका म आपको 365

, अ यासा थय को सूचना,

अ यास म के िलये

वेशपि का, क

मुख के नाम व उनके पते, फोन नं. इ या द क

सूचना उपल ध है। यही इस उप म का और अ यास म का संि

व प है।

भागवत चार- सार के इस सं था के आज तक के सभी काय म
(मो. 9766646752) और

ी अ ण नरगुंदे

ी िव ाधर परांजपे (मो. 9850070414) का ब त बड़ा

सहभाग रहा है और आगे भी रहेगा। इस भागवत प रचय अ यास म को िनभाने क संपूण
िज मेदारी डॉ.

ीकांत कु लकण िमरज (मो. 09372223487) ने वे छा से अपनायी है।

इसीिलए इस उप म का िव

त इस भूिमका से यह उप म सं था उ ह स पती है।

एक तरह से यह अ यास म अित सरल तीत होता है और यह है भी अितसरल,
परं तु ीमदभागवत महापुराण का अ ययन आकलन क दृि से सरल नह है। भागवत ‘धम’
है और यह धम माने भागवत धम िन य जीवन म आचरने के िलए है । धम यह अथ
समझकर उसे आचरण म लाने क दृि

से भागवत को समझना िनि त ही क ठन है।

भागवत धम आचरण के िलये तो है ही पर िजस त व के आधार पर यह संपूण िव
सुिनयंि त तरीके से चल रहा है वह त व, वह िव ान, यही भागवत का आधार है। भागवत
धम का आचरण करते-करते उसका त व जानना, उसका अनुभव लेना यही

और अंितम कत

येक मानव का

है, इस बात का उ लेख भागवत म है। और इसी वजह से भागवत

का अ ययन करके , उसके

के उ र िलखना व यह उप म पूरा करना यह इस

अ यास म का ाथिमक उ े य है, पर अंितम उ

नह ।

ित दन एक अ याय पढ़कर, उसे समझकर, उसपर चतन करना, भागवत
धम समझने का

यास करना, उसका त व ान, आचरण शा , आचरण म लाकर इस

अ यास म का (18 से 45 उमर मयादा म) सार करना उ ह इस अ यास के िलये े रत
करना यह इस अ यास म का असल उ े य है। इस दृि से भागवत का
अथ, अ याय का िवषय, उसका त व ान, शा

येक ोक, उसका

संक पना इन सारी बात का मेरे जीवन से

रहनेवाला संदभ जानना यह असली मायने म भागवत का अ यास है। इस भूिमका से कोई
भी अ यासक सं था के साथ कभी भी संपक कर सकता है। उसका वागत ही होगा। यही
भागवत क , भगवान क सही अथ म पूजा है। सभी को शुभे छा।
ीकृ ण: शरणं मम॥

आपका सु द

ध यवाद!

आपटे

उप म क शु आत: चै कृ णस मी
शके 1935, 1, म 2013
पुि तका का दान मू य

30/-

ा तािवक व अ यास म का व प
इस उप म का कु ल व प, उसक शु आत, गती, मूल उ े य व वेश

या

इ यादी क यो य क पना व जानकारी हेतु यह ा तािवक है।
ीम ागवत प रचय अ यास म क जानकारी इक ा करने हेतु नह है। यह अपने
आपम अ यास, मनन, चतन व उसम से खुद का
का वा याय है। इससे
1) वैयि क

ि

व िवकास सा य करना, इस व प

ि म व िवकास को तीन अंगो से गित होना अपेि त है।
मता बढ़ाना, 2) पर पर से अवलंिब व का यो य तरीके से

ान

िनमाण कर एकदूसरे को सहकाय क भावना वृ दगत होना, 3) और, जो प रि थित हमारे
िनयं ण से बाहर है उसे धाड़ंसपूवक सामना करना फर भी सकारा मक मानिसकता
िनमाण करना ।
यह अ यास म तय करते समय अ यासा थय को मूल

ंथ पढ़ने क उ सुकता

िनमाण करना मुख उ े य है। इस दृि से हर ( येक) अ याय म से चुने ए

ोक पर से

का अ यास करते समय उस अ याय क िवशेषता समझ म आएगी।
अनुभव ा ी से मनु य के बताव म इ

दशा म लेने वाले बदलाव को, ‘सीखना’

कहते ह। इस दृि से भागवत एक शै िणक ंथ है। अ यासाथ खुद ही अपनी परी ा लेक र
वयं म आये ये प रवतन का िनर ण कर, इसी बात से इस अ यास म क वा तिवक
पूणता होगी।
मानवीजीवन साथक बनाने क

दशा देने वाले ‘ ीम ागवत’ इस

ासा दक व

अलौ कक ंथ का अ यास इस उप म ारा आप ज र कर। हम सब भगवान

ीकृ ण के

आिशवाद और उनक कृ पा याचना करते ह, इसिलये ीकृ ण चरण म यह सेवा अपण करने
के िलये ाथना कर।
भगवान

ीकृ ण का जीवन एक असामा य जीवन है।

ीकृ ण च र

तक मया दत नह है। महाभारत भगव ीता, भागवत जैसे अनेक
हरीदास ने, संत ने और एकदम सामा य

कसी भी ंथ

ंथ ने, का

ने,

ी-पु ष ने भी अपने िन य जीवन म दल से

जतन कया है।
भगवान, राम, ियशुि
पर

ीकृ ण का बचपन

त, गौतम बु

इनका बचपन यादातर कोई याद नह करता

येक घर म खेलता है। बचपन के उनके िम , उनक शरारत, और

उनक लीलाएँ उनका उ मादक ता

य और गोिपय को लुभाने वाली उनक मुरली सब

कु छ अलौ कक है। साथ ही साथ कं स और िशशुपाल से बैर और पांडव का र णकता,

ौपदी का सखा ऐसी अनेक भूिमका

म रहते ए हर भूिमका िनभाते ए वह त मय हो

जाते थे और उतनी ही त परता से उसभूिमका का िवसजन भी करते थे। आसाि
िवरि

और

क परमाविध उ होन कु शलता से हािसल क ।
छोटा ब ा, िम , भाई, वादक, ि यकर, यो ा, पित, कु शल राजकरणी, व ा,

त व , यह सारी भूिमकाएँ उसने बड़ी त मयता से िनभाई और इसी पूणावतार म अनासि
क परमाविध हािसल क । उसका अवतार िजतना अ भुत था उतनी ही अ भुत उसक
लीलाएँ भी। कसी महान स ाट के समान उ होन जीवन

तीत कया और कसी िवर

सं यासी के समान उसने अपने अवतार क समा ी भी क ।
ीम ागवत उस परमा मा
सगुण साकार
हमारा

ए भगवान क लीला

दय स

को रचा। उन मह ष

के

का अमृत रस बह रहा है। इसके

दत होता है और हम रोमांिचत होते है। मह ष

कये। उ होने महाभारत

भगवान

ीकृ ण क वा मयीन मूत है, इसम भ

प इितहास रचा, मो

माग,

ासजी को ीम ागवत के

द ऐसे

काश से भि

के िलये

वण पठन से

ास ने वेद के िवभाग
ह सू व स ह पुराण

व परमशांित ा

ई।

ीकृ ण जी ने भूलोक से अपने परमधाम म जाने का िनणय कया तब कली

ादुभाव से दुजन का भाव बढ़ेगा और स न को उनसे परे शािनयाँ होगी इसिलये

के िलये भगवान ने

ीम ागवत सागर म वेश कया और अपना तेज भागवत म

थािपत कया। इसीिलये ीशुकाचायजी कहते हय

ान िवराग भि सिहत नै क यमािव कृ तं।

वन पठन िवचारणपरो भ या िवमु ये र:॥

अथात, िजस ंथ म ान, वैरा य, भि
ऐसे

इनसे यु

िनवृि पर माग बताया आ है,

ीम ागवत का भि पूवक वण, पठन और िन द यासन करने से मनु य अव य मु

होता है।
ीम ागवत यह एक ासा दक ंथ है। उसके पारायण से लौ कक व पारलौ कक
फल क

ाि

होती है। ले कन इस

ासा दक

ंथ का

योग या उपयोग मु यत: अगर

भगवान पर

ेम के िलये ही अगर कया जाये तो मनु य ज म का साथक ही होगा।

ीम ागवत

ंथ के बारे म पठन क लालसा उ पन ह और इस उ सुकता क वजह से

उसका अ यास हो,इसिलये यह अ यास म का आप सब लाभ ल िजहोन इस काय क
ेरणा देकर पूण व तक ले गये उस भगवान

ीकृ ण चरण म यह कायपु य म सम पत

करता ँ।
आपके न

डॉ. ीकांत कु लकण

ीरामकृ ण गाडगील

िमरज

िमरज

09372223487

9420792562

ीमद भागवत प रचय अ यास म
अ यासा थय को सूचना
1)

ीम ागवत महापुराण पर आधा रत यह अ यास म होने पर गीता ेस गोरखपुर
कािशत दो खंडा मक ंथ

येक के पास होना आव यक है। (सं कृ त संिहता और

िह दी अथ इस व प म होना ज री है।
2)

इस अ यास म म 18 वष क आयु से कोई भी वेश पा सकता है। अ यास म का
व प ब त ही सरल होने से

वेश लेने पर उसे अ यंत िन ापूवक पूण कर यह

अपे ा है। इस अ यास म के िलये सं कृ त ान होना आवशयक नह है।
3)

इस महापुराण के 12 कं ध म 335 अ याय ह और भागवत महा म के शु आत के 6
अ याय कु ल 341 अ याय है। इसके अलावा फल ुित के अंितम अ याय और 4 और
भगवत गीता के 18 अ याय इस तरह से कु ल 363 अ याय होते ह। इन सभी 363
अ याय पर

येक एक

पूछा गया है और अंितम दो

ह। इस तरह इस अ यास म म कु ल 365
पढ़कर अपनी नोटबुक या डायरी म थम
है।

वयं समी णा मक

ह। ित दन के वल एक अ याय

िलखकर बाद म उसका उ र िलखना

येक दन तारीख और वार िलखना आव यक है। अ र

येक

ि

के

मतानुसार सु प होना चािहए।
4)

येक

के बाद को क म उस

शु आत म

व उसके प ात उ र के

के उ र का

ोक नंबर बताया है इसिलये

ोक का अथ िलखना है। उ र प होना

ज री है। उ र के बारे म सारांश म अपने िवचार िलखने ह तो वह को क म िलख।
पर वह िलख ऐसा ज री नह है।
5)

इसी पुि तका म आगे सारे

म से दये गए ह।

6)

अ यास म क शु आत हर साल 1 ,मई 1ऑग ट, 1 नवंबर, 1 फरवरी के दन
होगी। पर उसके 1 मिहना पहले यानी 1 अ ेल, 1 जुलाई, 1 अ टू बर, 1 जनवरी
तक

वेश

या पूरी होना आव यक है।

येक अ यासाथ को अपना नाम

िलखवाना आव यक है। नाम िलखवाने के प ात हर एक को अ यासाथ
दया जाएगा। अपना नाम स िलयत के अनुसार कसी भी के
िमरज के

म िलखवा सकते है। िजस के

मांक

या गीता फाऊंडेशन

म अपना नाम िलखवाया है उस के

से

ही सभी प

वहार या संपक कर। अपना पता बदलने पर संबंिधत के

को सूचना

देना आव यक है।
7)

के

मुख के नाम, पता और फोन नं. इसी पुि तका म दये गए ह। वेश पुि तकाएँ

उ ह के पास उपल ध होगी।
8)

थम 90 बाद म 183 और बादम 270 तक
अ यासाथ को संबंिधत के

के उ र िलखने के प ात

येक

मुख को नीचे बताए अनुसार प िलखना आव यक है


मैन ‘भागवत प रचय’ इस अ यास म के 90/183/270
उस बाबत म पूण

के जवाब िलखे ह और

प से समाधानी ँ। म िनयोिजत लाकाविध म अ यास म पूरा

क ं गा/क ँ गी।
365

के जवाब िलखकर अ यास म पूण करने के प ात नीचे बताया आ प

भेजना है –
मुझे यह बताते

ए आनंद हो रहा है क भगवान क कृ पा से मैन

ीम ागवत

प रचय’ यह अ यास म पूण कया है। इसके आगे भागवत का चार साल का िव तृत
अ यास म म िह सा लेने क मेरी इ छा है/ नह है। म के

मुख के संपक म

र ँगा/र ँगी।
ध यवाद!
अ यास म शु

करने क तारीख :

अ यास म समा करने क तारीख :
ह ता र :
पूरा नाम व पता :
रिज े शन नं. :
(अ यास म के बारे म अपना अनुभव तथा सूचना अलग कागज पर िलखकर भेज।)
यह प

िलफाफे म भेज। साथ म वयं का पता िलखा

लगाकर भेज।

आ िलफाफा ( ट कट)

येक संपक के समय अ यासाथ का रिज ेशन नं. एवं नाम का पूण

एवं प उ लेख करना आव यक है।

9)

येक अ यासाथ को

वेश लेते समय पुि तका म दी गई

फोटो कॉपी िनकालकर उसे पूणतया भरकर संबंिधत के

वेश पुि तका उसक
मुख के पास भेजना है।

उसके साथ वयं का पता िलखा आ पो टकाड िलफाफे म भेजना अिनवाय है । उस
काड के

ारा अ यासाथ को रिज े शन नं. बताया जाएगा। ऊपरी पूतता के

िबना/रिज शन के बीना अ यास म शु
10) भागवत प रचय इस पर 365
मुख को बताने के

नह कर सकते।

के उ र का अ यास म पूण करने पर के

ात यो य कालाविध म

येक अ यासाथ को एक श ती

दया जाएगा।

11) आपक

वा याय पुि तका का नए अ यासाथ या िज होन वेश नह िलया है उन

अ यासाथ को मत दीिजए। आप उ ह इस उप म म वेश लेने के िलए वृ

कर

सकते ह।
12)

ीम ागवत महापुराण इस ंथ ा ी के िलये आपको कोई सम या आती है तो आप
के

मुख या गीता फाउं डेशन िमरज से संपक कर सकते ह।

13) यह पुि तका उप म संबंिधत जानकारी

वेश पि का इ या द के

िलए

geetagurukul.blogspot.in से download कर सकते ह।
14) परदेश के अ यासाथ अपनी

वेश पि का shriramdas@gmail.com पर

ीकांत जोशी सगापुर को भेज।
15) कसी भी सम या के समाधान संदभ म आप
(98500701414) डॉ.

ी नरगुंदे (9766646752) ी परांजपे

ीकांत कु लकण (9372223487) या गीता फाउं डेशन

िमरज इनसे संपक कर।

चतन
ऊँ
ीम ागवत प रचय अ यास म म हम भागवत पर 365

के उ र िलखकर

चतना मक अ यास करने वाले ह। पर यह सब य ?
भागवत के
हम

थम

ोक म कहा गया है “स यं परं धीमिह” परम स य परमा मा का

यान कर। (भाग 1.1.1) आगे कहा है “जीव य त विज ासा” जीवन का फल

त विज ासा है। (भाग 1.2.10) आगे चतु: ोक भागवत म भी कहा गया है ‘एतावदेव
िज़ ा यं’ मनु य जीवन म इं सान ने एक ही बात क िज ासा करनी चािहए और वह है

परमा मात व जो सव

हर व

और सव प म है (भाग 2.9.35) यह स यत व का,

परमा मत व का सतत अनुसंधान ही जीवन का परमो

येय है। इस अव था को गीता म

ा हीि थित कहा गया है। इस येय ा ी के िलये इस अ यास म को यान म रखते ए
हम थोड़ा चतन कर। इस येय

ा ी का माग

या है? उस स य

‘परमधम’ कहा गया है। भागवत का िवषय भी ‘परमधम’ है।
मो

ा ी के माग को

ीमदभागवत महापुराण म

ा ी तक क कोई भी कामना न रखते ए परमधम को समझाया है।
अब हम इसी मनु य ज म म परमत व क

ा ी उस स यत व से एक पता साधनी

है। यह िनि त येय हमने तय कया है और उस येय ा ी के िलये परमधम आचरण का
तरीका जानना यह माग है। हम इसी के िलये यह अ यास करना है। इस धम के अथ का
िववरण संपूण भागवत म है और उसी को ‘भागवत धम’ कहा गया है।
मनु य शरीर से, वाणी से, मन से, इं य से, बु ी से, अहंकार से या वभावानुसार
जो-जो कम करता है वो सारे कम उसने उस परमपु ष नारायण को सम पत करना चािहए।
(भाग 11.2.36) इसे ही सरल भाषा म भागवत धम कहा गया है। अब बताइये सारे कम,
काया से, वाचा से, मन से, बुि

से या और कसी भी तरह से कये गए ह वह परमपु ष को

अपण करना इसका अथ या? इसके बारे म हम कभी सोचते ह? भागवत अ ययन ारा
हम यह सब जानना है।
अपने अवतार काय को संप

कर परमधाम जाते समय भगवान

ीकृ ण उ व जी

को मंगलमय धम कहते ए यही बात समझाते ए कहते ह – कु यात सवािण कमािण मदथ
शनकै :

मरन। म य पतमनिध ो म मा ममनोरित:॥ (भागवत 11.29.9) कृ ण के

पूवावतार का यह आखरी वा य है इिसिलये इसका मह व समिझये। वह कहते है, ‘मनु य ने
सारे कम मेरे िलये ही करने चािहये और वह कम करते समय मेरा मरण करने का अ यास
धीरे -धीरे बढ़ाना चािहए। इससे उसका मन और िच

मुझ म सम पत हो जाएगा और

उसका मन और आ मा मुझ म समा जाएगी।
भगवान आगे कहते ह ‘मेरी ा ी से सवसाधन म सव े साधन म यही मानता ँ
क संपूण चराचर म म ही ँ यह भावना मन वाणी शरीर के सभी कम म होनी चािहए।
(भाग 11.29.19) इसी संदभ म भगावन किपल माता देव ित को कहते ह सव ािणय के

प म ि थत मुझ परमा मा का यथायो य, दान, मान, मै ीपूण

वहार और समदृि

ारा

पूजन करना चािहए। (भागवत 3.29.27)
ये सभी बात हम त व प से समझना नह चािहए या? यह बात हम कब समझग?
और समझने के िलये हम कभी

करते ह? अब इसी संदभ म एक दूसरा िवचार करके

देखते ह।
भगवान उ व से कहते ह ‘योगा यो मया ो ा नृणां
भि


े ोिविध सया।

ानं कम च

नोपायोS योSि त कु िचत्’॥ (भागवत 11.20.6) मैने ही मनु यमा

के क याण

हेतु ान, कम और भि

इन तीन योग का उपदेश दया है। इसके अित र

दूसरा कोई भी

उपाय कह भी नही है।
अब देखना यह है क मनु य मा के क याण हेतु इन तीन िन ा

के अलावा, तीन

योग के अलावा अ य कोई उपाय नह है। तो फर हमारा क याण कसम है और ान, कम
और भि

यह तीन योग का वा तिवक मतलब या है? या हम इसे जानते ह? या इससे

जानने का कभी य करते ह?
एक और मह व का िवषय हमारे सुनने म आता है और वह है सां यशा । भागवत
गीता के दूसरे अ याय म सां या त व ही समझाया गया है। इसे किपल सां य भी कहते ह।
भागवत म भगवान उ व को सां यशा

समझाते ए कहते ह क यह सां यशा

जानने

पर मनु य अपना का पिनक भेद पी

म तुरंत छोड़ देता है। अब यह का पिनक भेद

छोड़ना ही अ ैत िस ांत नह है तो या है? कसी भी कार के भेदरिहत जो स य ह है,
उसे भगवान कहते ह। (भागवता11.24.3) यह भेद रिहत
है अहं

हाि म’। अगर ‘म

ह माने या है? वेदांत म कहा

ह’ ँ तो फर यह अनुभव म इस मनु य ज म म ा क ँ गा

या नह ?
भागवत जैसे त विवषयक ंथ म भगवान का च र अित िव तार म बताया गया है।
उसम भगवान क लीला

का वणन है, उनक अवतार कथाएँ है, भगवान के भ

च र कथाएँ है। या यह सब मनोरं जन के िलए होगा? भगवान क लीला द
जीवन म मेरे येय ाि म या उसका कोई भी संदभ नह होगा?

है, पर मेरे

भागवत म िव ान है। उसम सृि

क उ प ी व िवनाश क

या का रह य

समझाया है। आशा िह परमं दु:खं नैरा यं परमं सुखम्। आशा ही सबसे बड़ा दु:ख है व
िनराशा ही सबसे बड़ा सुख है”। (भागवत 11.8.44) ये त व ान समझाया है। ‘चेत:
ख व य ब धाय मु ये चा मनो मतमं।‘ जीव को ब

करने वाला और मो ं देने वाला मन

ही है यह माना गया है। (भागवत 3.25.15) यह मानसशा

है। भागवत म खगोलशा ,

अथशा , शरीरशा

जैसे िवषय भी ह। यह सब म कब समझूंगा? इसके िबना जीवन म

मेरा कोई भी काम

कता नह है यह हमारी एक ब त बड़ी भूल है’ वा तिवक इन सब के

िबना मेरा काम कता है परं तु दूदववश यह बात मुझे समझ म नह आ रही है।
भागवत या गीता माने पंच अ छी तरह कै से िनभाये यह समझाने वाला शा
और यह शा

है

येक मनु य ने अपनी त ण अव था म ही समझ लेना चािहए, ऐसा

लोकमा य ितलक अित न ता एवं माणीकता से कहते है।
सारांश मनु य ज म के क याणाथ, िन: ेयस ा ी हेतु भागवत धम जानने के िलये
मानवी ज म म परम येय साधने के िलये हम यह अ यास करने वाले है। जीवन का
िन: ेयस जानने के िलये हम भगवान
बुि

ीकृ ण के शरण जाते है और ‘ददािम बुि

दान करो ऐसी ाथना कर। ीकृ ण: शरणं मम्।

योगं तम्’

॥ ऊँ त सत्॥

ऊँ
“गीता फाऊँडेशन”
(यत तध दृढवत)
“चैत य” लोकमा य कॉलोनी, पँढरपुर रोड, िमरज – 416410
…………………

ीम ागवत प रचय अ यास म’

सादर नम कार,
ीमद भागवत महापुराण का जीवन म कम से कम एक बार तो अ यासपूण वाचन,
मनन और चतन हो, इसी उ े य से “ ीम ागवत प रचय’ अ यास म आपके िलये हम
तुत कर रहे ह। भागवत क , इसी बहाने भगवान ही पूजा, यही इसका भाव है।
भागवत का अ यास य करना चािहये? भागवत का िवषय ‘धम’ यही है और धम
का अथ जीवन का आचरण शा

है।

येक मनु य का अंितम परम येय ाि

िन: ेयस जो है, उसी का वणन इस ंथ म है। यह धम जब क
गया होने पर, उसे अपने जीवन म बसाना यह अपना आ
भगवान को अिभ ेत यह धम वाभािवक

प से

के िलये

भगवान ारा बताया

( थम) कत

होना चािहये।

येक जात, धम, लग, उ के

ि य के

िलये है।
इस उप म म आप िह सा ल इसिलये इस उप म क आपको सिवनय सूचना दे रहे
ह। ित दन 1 अ याय इस तरीके से 365 दन म आप ीमद भागवत पढ़कर उसपर चतन
व मनन कर यही अपे ा है। पढने पर उसी अ याय से पूछे गये
है।

येक

के आगे ही िजस

का उ र आपने िलखना

ोक म उसका उ र है उसका संदभ

आपने एक नोटबुक या डायरी म हर दन का एक

मांक दया आ है।

व उसका उ र िलखना है। सभी

के उ र िलखने के प ात उस नो बुक या डायरी को कह भी समी ा के िलये भेजना नह
है। उसे िसफ अपने ही पास रखना है।
इस उप म म सहभागी होने के िलये नीचे बताये गये कसी भी के
रिज टर करके अभासाथ

मांक लेना आव यक है। कु ल 365

म अपना नाम

मसे 90/180/270/365

ऐसे सारे

एक ही

ावली म समािव

दौरान के सभी आव यक
रिज़ टर कया है उसी के
आपको एक माणप

कए गये ह।

येक 3 मिहने बाद आपके उस

के उ र िलखे जाने पर आपने िजस के

म अपना नाम

मुख को बताना आव यक है। सभी 365

ो र पूण होने पर

दया जायेगा। इस उप म म 18 साल से ऊपर का कोई भी

ि

वेश ले सकता है।
इस अ यास म के िलये गीता
महापुराण’ (सं कृ त

ेस, गोरखपुर

ारा

कािशत ‘ ीम ागवत

ोक व उसका हदी अथ) इसके दो ख ड लेना आव यक है।(क मत

300/-) और गीता फाऊँडेशन िमरज ारा कािशत ‘ ीम ागवत प रचय अ यास म’
पुि तका (

30/-) लेना आव यक है।

इस अ यास म क शु आत 1 मे 2013 से ई है। उसके आगे के
1ऑग ट, 1नोवे बर, 1 फे ुवरी म लगे। इसक

वेश

वेश अनु म से

या हर बार 1 माह पहले शु

ह गी। इस तरह से हर साल नये अ यासाथ य को साल म चार बार वेश ले सकते ह।
सदर प रचय अ यास म पूण करने के प ात अगर कसी

ि

िव तृत, चार साल का अ यास म करने क इ छा हो तो वह “प
अ यास म” म वेश पा सकते ह।
वेश ाि के कु छ मुख के

को भागवत का ही
ारा

ीम ागवत

ीमद् भागवत प रचय अ यास म
िह दी अनुवाद
सूचना

:

का उ र िलखते समय थम

एवं बादम उस

ोकका पूण अथ

िलखना क री है।
वेश

:

ीम ागवत महापुराण के

थम कं ध, थम अ यायम से मंगलाचरण के

थम 3 ोक अथ सिहत िलिखये।

‘भागवत महा य’ के
अनु मांक अ याय मांक
1

1

किलयुगक परे शािनय का नाश करने वाले साधन कौनसे ह? (भागवत
महा य 1,-11)

2

2

भगवानको वशम करने का एकमा उपाय कौनसा है? (2,18)

3

3

सनका दकोने भि को रहने के थान के बारे म कहा है उस

ोक का अथ

िलिखए।(3,71)
4

4

मेरे उ ारका साधन बताओ, यह कहने के बाद गोकणने आ मदेवको
भगवानक भि

करने को कहा, उस ोकका अथ िलिखए।(4,-79) ( ोक

नं. 74 से 81 पुन: प ढ़ये)
5

5

भागवत कथा वण करनेके प ात भी फल ाि के भेदका कौन सा रह य
हरीदासजी ने बताया? (5,71,73)

6

6

ी शुकदेवजी ने मुि के जो माग बताए ह उन दो
(6,-81,82)

ोक का अथ िलिखए।

‘ थम क ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
7

1

ीम ागवत महापुराण क शु आत कन दोन के संवाद से

ई है?

( ोक 2)
8

2

धम-अथ-काम व मो

यह

येक पु षाथ का कौन सा फल/हेतु बताया

गया है? ( ोक 9 से 11)
9

3

इस अ यायके अनुसार भगवानके अवतार के नाम िलिखए।

10

4

मह ष

11

5

ऐसी वाणीको कौन सी उपमा दी गई है, िजसम भगवान ीकृ णके यशका

ासके असंतोष का कारण िलखे। ( ोक 30,31)

वणन नह है। ( ोक 10)
12

6

भगवत दशनके िलए

ाकु ल

ीनारदजी को दशन न होनेका कौनसा

कारण भगवानजी ने बताया? ( ोक 22)
13

7

थामा के बारे म भगवान

ीकृ ण ने अजुन को शा िवदीत कौनसी

दो बात बताई? ( ोक 53,54)
14

8

कुं ती ने भगवानसे कौनसे 2 वर माँग? ( ोक 25, 41)

15

9

भी मिपतामह ने युिधि र को या उअपदेश दया? ( ोक 26,28)

16

10

हि तनापुरक कु लीन ि याँ आपसम या कह रही थी? ( ोक 21)

17

11

पांचज य नामके शंख को कसक उपमा दी गई है? ( ोक 2)

18

12

उ राके गभ थ वीरको िजस योितमय पु षके दशन ए उसका वणन
करो। ( ोक 8,9)

19

13

िवदुर ने धृतरा को या उपदेश दया? ( ोक 25,26)

20

14

युिधि रको महसूस होने वाले कलयुग के अपशकु न का वणन कर । ( ोक
3 से 5)

21

15

गीतो

ानका (

ान) अजुन को पुन: मरण होने पर उसक जो

अव था

ई, उस अव थाका वणन करने वाला

ोक व उसका अथ

िलिखए। ( ोक 31)
22

16

पृ वी ने धम के बताये ये 39 सहजगुण कौनसे है? ( ोक 26 से 28)

23

17

किलयुगक िवनती मानते

ए राजा परीि तने कलीको रहने के िलये

कौनसे पांच थान दये? ( ोक 38 व 39)
24

18

शमीक मुनीके पु ने राजा परीि तको या ाप दया? ( ोक 37)

25

19

परीि त राजाने ा हण को ( ोक 24) व ीशुकाचायजी को या सवाल
कये?( ोक 37,38)

‘ि तीय क ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
26

1

27

2

28

3

शुकाचायजी ने मनु य ज मका े लाभ कौनसा बताया है? ( ोक 6)
हांड के

मण का के

कौन सा है? ( ोक 25) (िशशुमार च

एवं

लँक होल म कोई समानता है

या इस बाबत कसी िव ान के

ाधयापक से चचा कर उनका मंत

बताइये)

उपासक ।का सव े िहत िव दत करने वाला

ोक अथ सिहत िलिखय।

( ोक 11)
29

4

शुकाचायजी ने भगवान

ीकृ णजी का मरण करके उ ह नमन कये ए

ोक म से कोई भी एक ोक िलिखए। ( ोक 12 से 24)
30

5

नारदजीने

हदेवसे या सवाल कया? ( ोक 2 से 4)

31

6

िवभूितत वका अथ प करने वाले 44 व

ोकका अथ िलिखए। ( ोक

44)
32

7

हंस अवतारम भगवानजी ने या काय कया? ( ोक 19)

33

8

इस अ यायम राजा परीि तने शुकाचायजी से पूछे ए
एक

34

9

मसे कसी

(एक ोक) का अथ िलिखए।

चतु: ोक भागवत के चार ोक का अथ िलिखय। ( ोक 32 से 35)

35

10

भागवत पुराणके दस िवषय कौनसे ह? ( ोक 1)

‘तृतीय क ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
36

1

तीथया ा के दौरान िवदुरजीने कौनसा वेष धारण कया था व वे कौनसे
तका पालन कर रहे थे। ( ोक 19)

37

2

भगवान
कसके

38

3

39

4

ीकृ णजीने गोवधन पवत पूजाके

पम गोय

कस हेतुसे व

ारा करवाया? ( ोक 32)

भौमासुरके पु का नाम िलिखये ( ोक 6)
भुका कौन सा िविच

च र देख िव ान क बुि

भी सं िमत होती

है? ( ोक 16)
40

5

िवदुरजी ने मै ेयजी से िमलते ही थम कौन सा सवाल पूछा? ( ोक 2)

41

6

दस ाण के नाम िलिखये। ( ोक 9 का िव ेषण नीचे दया गया है)

42

7

43

8

ािणय के चार कार के नाम िलिखये। ( ोक 27)
िव क रचना करने म सहायक कौनसी पाँच व तुएँ

हदेव ने देखी?

( ोक 32)
44

9

मनु य का सव े कमफल कौन सा है? िलिखये। ( ोक 13)

45

10

मै य
े मुिनजी ारा बनाई गई 9 व सृ ी कौन सी है? ( ोक 25)

46

11

‘नािडका’ क कालगणना गित कै से सुिनि त क गई है? ( ोक 9)

47

12

’ नाम कै से

चिलत

आ? उसके रहने का थान व अ य नाम

बताइये? ( ोक 10 से 12)
48

13

भगवान ‘अिजत’ जी के य

व प का वणन क िजये। ( ोक 37)

49

14

क यपजी ने दती को समझाते ए 27 व शलोक म या कहा है? ( ोक
27)

50

15

भगवानके पाषद जय-िवजय को सनका दक ने या
34)

ाप दया? ( ोक

51

16

ारपाल जय-िवजय को भगवान ने

या आ ासन दया?

ोक अथ

क िभ ा मांगने के बाद उ ह ने िहर या

को या

िलिखये व मम समझाईये। ( ोक 31)
52

17

व ण राजासे यु

उ र दया? ( ोक 30)
53

18

िहर या

का वध करने के िलये

हदेवजी ने भगवान को कौन सा

मंगलमय मुहत साधने क िबनित क , वह

ोक अथ सिहत िलिखये।

( ोक 27)
54

19

िहर या

के वध हेतु भगवान ने कौन सा अवतार िलया? ( ोक 31)

55

20

56

21

कदमजी के तुित उपरांत स

57

22

मनु मृितका मह व कस ोक म है? ोक का अथ दीिजए। ( ोक 38)

58

23

अपना प ाताप

हदेवजी का अिवभाव कहाँ से आया? ( ोक 16)
ए भगवान ने या कहा? ( ोक 24)

करते ये देव ती ने कदमजी से या कहा? ( ोक

56)
59

24

कदमऋिषजी ने अपनी नौ क या

का याह कन कन से रचाया? ( ोक

22 से 24)
60

25

भगवान किपलजी अपनी माता को

ान का उपदेश दे ते ये

ोक 15 से

19 म या कहते ह? (इसका अथ िलिखये एवं उसपर चतन क िजए)
61

26

चौबीस त व िज ह कृ ित का काय माना गया है, उनके नाम िलिखए।
ोक व अथ िलिखए। ( ोक 11)

62

27

इस अ याय के

थम चार

ोक म भगवान किपलजी कौन सा िववेकयु

िवचार करने को कहते ह? उन ोक का अथ िलिखए। ( ोक 1 से 4)
63

28

किपल मुिनजी भगवान यान के जो 21 से 33
यान से प ढ़ये और उनम से कसी भी दो

ोक बताते ह वह सारे

ोक का अथ दीिजए? ( ोक

21 से 33)
64

29

भागवत म कौन से पांच मुि

के

कार बताये ह? ( ोक 13)

65

30

जीव अपना परा म जानता नह है, ऐसा य कहा गया है? ( ोक 1)

66

31

माता के गभ थ जीव, ज म बेला म भगवान से

प म संवाद

साधते ए या आ ासन देता है? ( ोक 21)
67

32

सभी कार क योग साधना

का एकमा इ फल कौन आ है? ( ोक

27)
68

33

िव णु प किपल भगवान को

णाम करते

ये देव ती ने

या कहा?

( ोक 8)
किपलजी ने देव ती के संवाद प अ याय 24 से 33 तीन बार पढ़कर
समिझए और उस पर चतन क िजए। यह सारे अ याय मैने तीन बार पढ़े
है ऐसा

ंमाणप

ऊपरी सवाल जवाब के बाद अपनी ही डायरी या

नोटबुक म िलिखए।

‘चतुथ क ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
69

1

हाजी, िव णुजी एवं महादेवजी के िच ह और उनके वाहन िलखये।
( ोक 24)

70

2

नंदी ने द को कौन सा ाप दया? ( ोक 21)

71

3

जनमानस म नम कार/ णाम इ या द करने क

या म कौनसा त व

िछपा आ है? यह नम कार कसको कया जाता है। ( ोक 22)
72

4

साधुप ु ष के

े व कौन सा ल ण सतीदेवी ने बताया है? ( ोक 12)

73

5

महादेव भगवानजी क जटा पटकने से उ प

पु ष का नाम या है?

( ोक 3,4)
74

6

महादेवजी का वणन

हदेव जीने अि तीय पर

इन श द म

कया है? ( ोक 42)
75

7

पाँच तरह के य

एवं उनके यजुम

कौन से ह? िजनसे भगवानजी क

पूजा होती है? ( ोक 41)
76

8

नारदजी ने ुव को कौन सा परमगु

मं बताया? ोक 54)

77

9

ुव ने भगवान

ीहरी जी क

तुित करते ये कै से शु आत क ? ( ोक

6)
78

10

ुव क प ी और पु

के नाम िलिखए? ( ोक 1)

79

11

भगवान ीहरी भ

80

12

भगवान के दोनो पाषद के नाम िलखकर उनका वणन क िजए। ( ोक

के कै से बताव से स िच होते ह? ( ोक 13)

20,22)
81

13

नारदजी ने कस ंथ क रचना क एवं कौन सा उपदेश कया? ( ोक 3)

82

14

वेना ारा कए गये अ याचार के बारे म मुिनय क

या ित या थी?

( ोक 11)
83

15

पृथुराजा के न ता

करने वाले िवचार कौन से है? ( ोक 25,26)

84

16

पृथुराजा सा ात व ण राजा जैसे होने चािहए ऐसा य कहा गया है?
( ोक 10)

85

17

पृथुराजा ने पृ वी का उ लेख धराधर ऐसे य कया है? ( ोक 34,35)

86

18

‘अपताविप म ं ते उपावतत मे िवभो’ इसका पयावरण संतुलन क दृि से
या अथ होता है? ( ोक 11)

87

19

(राजा पृथु के िववेक, संयमीवृ ी, स नशीलता, अनासि
वाले)

88

20

ोक

जागृत करने

हदेवने राजा को या उपदेश कया? ( ोक 34)
मांक4:20:3 से 13 म भगवान ने राजा पृथु को जो उपदेश दया

है, उसे दो बार प ढए और मने 4.20.3 से 13 यह

ोक दो बार पढ़े ह

ऐसा जवाब म िलिखए।
89

21

राजा पृथु जाजन से 35व ोक म जो कहते ह उसे िलिखए? ( ोक 35)

90

22

मनु य को पंच के िवषय म कौन-कौन से कारण से/ आचरण से वैरा य
िनमाण होता है? ( ोक 22 से 25)

ऊपर िव दत थम 90

90 दन िलखकर अपनी उ रपुि तका म

िन िलिखत प िलिखए और आप िजस के
िन

से जुड़े ए ह वहाँ भी आप

सूचना द। साथ म self addressed postal card भेजना ज री

है। क

मुख को िलखे प

म आपका नाम, संपूण पता और रिज े शन

मांक िलखना ज री है।
“मैने

ीम ागवत महापुराण के

थम 90

के उ र िलख है। इस

बारे म म संपूण समाधानी ँ। म भगवान का यान करता।करती ँ और
यह मेरा कम म भगवान को आदरपूवक समपण करता/करती ँ।”
(इसके बाद कं द 3 अ याय 25 वा

ोक 29 से 33

ोक

ारा भगवान

का यान कर।)
91

23

अपने अंतकाल म राजा पृथु ने खुद को

ह प म कै से ि थर कया यह

िलिखए। ( ोक 14 से 18)
92

24

चेतागण को भगवान शंकरजी ने कौन सा तो सुनाया? ( ोक 71)

93

25

राजा पुरंजन क नगरी म नौ ार थे, उनके नाम बताओ ( ोक 47 से 53)
(इन नव ारो को मानवी देह के नौ ार से ुलना करके समझो)

94

26

राजा पुरंजन के रथ का वणन करो। ( ोक 1 से 3)

95

27

िवधाता ने कालक याको कौन सा गु काय करने को कहा? ( ोक 27 से
30)

96

28

नगरी के

पक का प ीकरण दो ( ोक 57,58) एवं ई र व जीव कसे

कहा है यह िलखो? ( ोक 62,63)
97

29

ीनारदजी ने ाचीन बह राजा को

पक का प ीकरण दया है वह

समझो एवं उसे कौन सा गु साधन समझाया है यह बताओ? ( ोक 53
से 55)
98

30

चेता ने भगवान से या मांग ा? ( ोक 33)

99

31

नारदजी ने चेता को दये उपदेश का सार समझाओ। ( ोक 19)

‘पंचम क ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
100

1

हदेवजी ि य त से उपदेश पर 17 व

ोक म जो कहते है वह िलिखए

और उसका अथ समिझए।

( ोक 17)

101

2

अ ी -पूविच ी अ सरा के नौ पु

के नाम िलिखए।

( ोक 19)

102

3

ॠि वज ने भगवान क

103

4

ऋषभ के नौ भगवद् – भ

राजकु मार के नाम िलखो। ( ोक 11,12)

104

5

इस अ याय के

ोक म ऋषभजी ने अपने पु

तुती गाते ए या मांग ा?

थम 27

( ोक 12)

को जो उपदेश

दया है, उसे ऋषभ गीता कहते ह। उसे समझकर उसके 26,27 व

ोक

म ऋषभजी या कहते ह, उसे िलखो।
( ोक 26,27)
105

6

ऋषभदेवजी ने अ िसि य को नकारने के कारण को बताते

ीशुकदेवजी 2 से 5 व ोक म या कहते ह?
( ोक 2से5)
106

7

महाराज भरत ने कन चार कार के ऋ वीज

ारा य

कये? ( ोक 5)

107

8

मनु य जीवन के अंतसमय के मरणानुसार या भावना

के अनुसार उस

जीव को अगली योनी

होती है, यह िस ांत का अनुभव लेने के

प ात, प ा ापद ध राजा भरत इस अ याय के 26 से 29

ोक म या

कहते ह? ( ोक 27 से 29)
108

9

जीवनभर योगसाधना करने के प ात भी मनु य को अगर अंतसमय
भगवान का मरण न हो तो वह दुगती को ा न होते ए कै से वह जीव
कसी योग

या शु

आचरण वाले कु ल म ज म

करता है, यह

भगवद-गीता का िस ांत (गीता8-40,41) राजा भरत के बारे म िस
आ, यह प करने वाले दो ोक का अथ िलखो।

( ोक 1,2)

109

10

राजा र गण जडभरत से एक अ यंत मह वपूण

करता है, उस

का

अथ समझना और िलखना। ( ोक 22) (अगले चार अ याय म इसी
िवषय का (
110

11

का) िव तृत प ीकरण कया गया है।)

अ याय 11 वां कम से कम दो बार पढना और 5 व ोक का अथ िलखना।
( ोक 5)

111

12

राजा र गण ने कया आ

( ोक 4) और राजा भरत ने दया आ

उ र, उसका सारांश ( ोक 16) इन दोन

ोक के अथ िलखो। ( ोक

4,16)
112

13

इस अ याय म राजा भरत ने जो उपदेश दया है, उसके अनुसार राजा
र गण ने कस बुि

113

14

का याग या? ( ोक 25)

भगवान िव णुजी का कालच नाम का आयुध है उसका वणन करने वाले
ोक का अथ िलखो। ( ोक 29)

114

15

राजष गया अपने वधम का पालन ब त अ छे तरीके से कै से करते ह?
( ोक 7) (अगर मुझे मेरे वधम का पालन करना है तो यह बात मुझे भी
अ छे तरीके से मालूम होना अितआव यक है।)

115

16

हम िजस ीप पर रहते ह उसका नाम व िव तार िलखो। ( ोक 5)

116

17

माता गंगा, िजसे िव णुपद या भगवतपदी कहा गया है, उसका वणन
करो। ( ोक 1)

117

18

महाभागवत

हादजी भगवान नृ सहदेवजी क

तुत ी कै से करते ह?

( ोक 8)
118

19

भारतवष क न दय के नाम िलखो। ( ोक 18) (यह न दयाँ माने
देवताएँ, जो हम इ भोग देती ह, पर या हम ‘पर परं भावय त:’ इस
भावना से, य

भावना से

गती साधते ह? गीता अ.3:11:12 इनपर

चतन करो)
119

20

सूय को मातड या िहर यगभ य कहते ह? ( ोक 44)

120

21

सूय क गती का वणन करने वाले तीन

ोक िलख। ( ोक 12,13व 19)

(हजार वष पुराना यह वणन है, इसका िव ान समझ।)

121

22

ऋतु

का वणन करने वाले ोक का अथ िलख।

122

23

इस अ याय के लोक 4 व 5 म िशशुमार च
( ोक 4,5) (िशशुमार च

( ोक 5)
का वणन है, उसे िलख।

और लक होल म कोई समानता आपको

तीत होती है या? इस शा

के कसी अ यापक से आप चचा कर।)

123

24

हण का अ याि मक अथ या है?

( ोक 3)

124

25

ीसंकषणदेव का वणन कर।

( ोक 1)

125

26

रौरव नरकवास के पा कौन है?

( ोक 10)

‘ष म क ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
126

1

इस अ याय का मम बताने वाला

ोक 11 वा का अथ िलख और उसपर

चतन कर। ( ोक 11)
127

2

ोक 9 और 10 का अथ िलख। ( ोक 9,10) (नाम का महा य समझ)

128

3

भागवत धम का महा य या है और इस धम का रह य जानने वाले 12
लोग कौन है? ( ोक 21 व 22)

129

4

जापित ने

ोक 23 से 34 ारा भगवान जी क

तुत ी गाई है उस

तो का नाम या है? ( ोक 22)
130

5

जापित ने नारदजी को या ाप दया? ( ोक 43)

131

6

बारा आ द य के नाम िलिखये। ( ोक 39)

132

7

िव

प ने कौन सी िव ा के

भाव से असुर क संपि

छीन ली। ( ोक

39)
133

8

इस अ याय के
िव

134

9

135

10

ोक 12 से 34 म जो वै णवी िव ा बताई गई है, वह

प ने कस तो

तुती से स

ारा इ

को बताई। ( ोक 3)

ए भगवान देव से या बोले? ( ोक 48 व 49)

दिशची ऋषी देव को अपना शरीर अपण करते समय या बोले। ( ोक 8
से 10)

136

11

भगवान संकषण के चरण म अपना मन लीन करने के िलये उ सुक
वृ ासुर ने उनसे कौनसी ाथना क ? ( ोक 26)

137

12

इं के सामने वृ ासुर ने कौन से मा मक िवचार

कये? ( ोक 13 व

14)
138

13

नाम मरण का महा म बताने वाला ोक िलिखये। ( ोक 8)

139

14

का साद देते समय अंगीरा ऋषी िच के तु से या कहते ह? ( ोक

29)
140

15

राजा िच के तु को समझाते ए नारदजी ने या कहा? ( ोक 5)

141

16

मृत राजकु मार क जीवा मा ने नारद जी से या कहा? ( ोक 4 से 6)

142

17

पावती के

ाप को वीकारते ए िच के तु ने या कहा? ( ोक 17 से

22)
143

18

क यप जी ने दती को पु

ाि के िलये कौन सा त बताया। ( ोक 54)

144

19

पुंसवन त क िवधी म माता ल मीदेवी को उ े य कर कौन सी ाथना
क गई है। ( ोक 6)

‘स म क ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
145

1

भगवान के चरण म मन लीन करने का मह व बताने वाले 3

ोक का

अथ िलख। ( ोक 29 से 31) (त मात के ना युपायेन मन: कृ णेिनवेशयेत
मह वपूण)
146

2

िहर यक यपु ने अपनी माता को सां वन करते ए या कहा? ( ोक 23
से 26)

147

3

148

4

िहर यक यपु ने

हदेवजी से या मांगा? ( ोक 35 से 37)

हाद के गुण का वणन करने वाला कोई भी एक ोक िलख। ( ोक 31
से 33)

149

5

हाद के
24)

ारा बताई गई नौ कार क भि

कौन सी है? ( ोक 23 व

150

6

असुर बालक को

हाद ने या उपदेश दया। ( ोक 3 से 5)

151

7

शरीर के छह िवकार एवं आ मा के बारह सव

म ल ण कौन से ह?

( ोक 18 से 20)
152

8

भगवान नृ सह क

153

9

भगवान नृ सह क

तुती करते ए गंधव ने या कहा? ( ोक 50)
तुती करते ए

हाद ने या कहा? ( ोक 40 से

41)
154

10

जय िवजय इन दोनो ने, िहरा या
और िशशुपाल – दंतव

– िहर यक यपु, कुं भकण – रावण

प म भगवान का बैर भाव से मरण करते ए

शरीर याग दया और उ ह भगवान क

ाि

ई, इसका मम या है?

( ोक 39 व 40)
155

11

धम के तीस ल ण कौन से है? ( ोक 8 से 12)

156

12

भोग बु ी हमेशा रहने के कारण बताने वाले
( ोक 10) (इस

ोक का अथ िलिखये।

ोक म देह एवं इं याँ आभासपूण है इस वा य पर

चतन कर।
157

13

हाद ने महामुनी से या

पूछा? ( ोक 16,17) (महामुनी ने 20 व

ोक से दया उ र समझ।)
158

14

गृह थ ने भगवान से भी िवजय हािसल क , ऐसे कब समझना चािहये?
( ोक 12)

159

15

अधम क कौन सी पाँच शाखाएँ है? ( ोक 12 से 14)

‘अ म क ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
160

1

161

2

162

3

स य पर ह क

ा या िलख। ( ोक 12)

ाणसंकट आने पर गजे
25 वे

ने या उपाय सोचा? ( ोक 1 से 33)

ोक का अथ िलखकर उसपर चतन कर। (गजे

का इितहास

कहने का ता पय इसी त व को समझना है) ( ोक 25)
163

4

भगवानजी ने गजे

को मु

करने पर उसक

या अव था ई? ( ोक

6)
164

5

भगवान क

तुती करते ये

हदेवजी ने या कहा? ( ोक 47)

165

6

भगवान ने देव को या सलाह दी? ( ोक 18 से 20)

166

7

भगवान िशव हलाहल ाशन करने का या कारण बताते ह? ( ोक 38)

167

8

दै यो ने अमृत कलश िछनने के प ात भगवान देव से या बोले? ( ोक
35 से 37)

168

9

समु मंथन क इस लीला का रह य बनाने वाले

ोक का अथ िलख।

( ोक 28, 29)
169

10

देव और असुर के सं ाम म असुर सेन ापती बलीराजा क ओर से लडने
वाले दै य के नाम िलख। ( ोक 19 से 22)

170

11

नमुची दै य को मारने हेतु इं

को आकाशवाणी से

या उपाय सुनाई

दया? ( ोक 37 से 40)
171

12

शंकरजी को अपना मोिहनी

प दखाने पर भगवान ने या कहा? ( ोक

39,40)
172

13

अि िनकु मारजी क माता का नाम या है? ( ोक 10)

173

14

हर म वंतर म काम करने के िलये भगवान कस- कस क िनयुि
ह? ( ोक 2)

करते

174

15

बली ने जब इं पुरीपर आ मण कया तब देव के गु

बृह पतीजी ने इं

को या सलाह दी? ( ोक 29 से 31)
175

16

क यपजी ने अ दती को कौन सा त बताया? ( ोक 58)

176

17

भगवान ने अ दती को कौन सा वर दया? ( ोक 17,18)

177

18

वामन अवतार म ा हण कु मार को राजा बली ने या कहा? ( ोक 32)

178

19

वामन अवतार म भगवान ने बलीराजा से या मांगा? ( ोक 27)

179

20

राजा बली ने गु देव शु ाचायजी से या कहा? ( ोक 10 से 12)

180

21

व ण के पाश म बंधे ए बली से भगवान ने या कहा? ( ोक 29 से 32)

181

22

हदेवजी ारा क गई तुती से स िच

भगवान ने या कहा? ( ोक

24 से 26)
182

23

183

24

हादजी भगवान से या बोले? ( ोक 6)
म यावतारी भगवान राजष स य त से या कहते ह? ( ोक 32 से 34)
ं . 91 से 183
म एवम क

के उ र 93 दन म पूरे कारने पर उ रपुि तका

मुख को (के साथ) सूचना देते ये िलख। उसम आपका नाम,

संपूण पता और रिज ेशन मांक ज र िलख।
“मैने ीमद भागवत महापुराण के 91 से 183

के उ र िलख है। इस

बारे म म संपूण समाधानी ँ। म भगवान का यान करता।करती ँ और
यह मेरा कम म भगवान को आदरपूवक समपण करता/करती ँ।”
(इतना कहने पर कं द 3 अधयन 25 वा
भगवान का यान कर।

ोक 29 से 33

ोक

ारा

‘नवम कं ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
184

1

मे पवत के नीचे ि थत वन म जाने के बाद सु ु

का

ी प म प रवतन

होने का या कारण है? ( ोक 32)
185

2

पृष ा को कु लपुरोिहत विश जी ने या ाप दया। ( ोक 9)

186

3

कु कु ीराजा रे वती के साथ

हदेवजी के पास गए थे तब

हदेवजी ने

राजा से या कहा? ( ोक 32,33) (इसम “काल” क गित का िव ान
समिझये।)
187

4

दुवासा ऋषी के शरण आने पर भगवान ने उ ह या कहा। ( ोक 63,64)

188

5

अंबरीश राजा ने सुदशन च क

189

6

िवकु ी का पु

190

7

हरीशचं ने संतान ा ी के िलये व ण क

तुत ी कर के या मांगा? ( ोक 10,11)

कन- कन नाम से पहचाना जाता है? ( ोक 19)
ाथना करके कौन सा वचन

दया? ( ोक 9)
191

8

बा का क पि से ज म बालक का नाम ‘सगर’ य रखा गया? ( ोक 4)

192

9

च वत खटवांग राजा ने अंतकाल म मन म कौनसे िवचार कये? ( ोक
44 से 47)

193

10

शरीरधारी समंदर भगवान रामचं के शरण म आकर या बोले? ( ोक
15)

194

11

राम, ल मण, भरत एवं श ु

के पु

का नाम िलिखये। ( ोक11 से 13)

195

12

इ वाकु वंश का और वृहदबल वंश का आिखरी वंशज कौन है? ( ोक 8
और 16)

196

13

िनमीराजा के शरीर मंथन से उ प

कु मार का नाम बताइये? ( ोक 12

एवं 13)
197

14

राजा पु रवा ने जातवेदा अि के कन तीन भाग म िह से कये? ( ोक
46)

198

15

परशुराम ने िपता जगद ी को मिह पती नगर म कये परा म के बारे म
बताने पर जगद ी ऋषी या बोले? ( ोक 38 से 41)

199

16

आज भी भगवान परशुराम का वा त

कहाँ है? ( ोक 26)

200

17

दघतमा के पु का नाम या है? वह कौन से वेद के वतक ह? ( ोक 4)

201

18

उ म, म यम एवं अधम पु

क राजा पु

ारा क गई

ा या

ए ययाती ने देवयानी से जो िनवेदन कया उस

ोक का

बताओ? ( ोक 44)
202

19

वैरा य उ प

अथ, सार सिहत िलिखये। ( ोक 16)
203

20

एकब याने कतने बनते ह? ( ोक 26)

204

21

चांडाल क क णापूण वाणी सुनकर रतीदेव ने कौन से अमृतमय श द
बोले। ( ोक 12)

205

22

पांच पांडव के पु

के नाम बताइये। ( ोक 29 से 32)

206

23

यदुवंश कौन-कौन से नाम से िस

207

24

वसुदेवजीके सात मुख पि य के नाम बताओ। ( ोक 45)

है? ( ोक 30)

‘दशम कं ध (पूवाध)’ के
अनु मांक अ याय मांक
208

1

देवक को मारने से रोकने के िलये वसुदेव जी कं स से जो बोले, उनम से
एक मा मक ोक किहए। ( ोक 42)

209

2

योगमाया कन नाम से जानी जाती है? ( ोक 11,12)

210

3

देवक के पास कट भगवान िव णुजी को वसुदेवजी ने कस

प म देखा?

( ोक 9 व 10)
211

4

212

5

भगवान िव णुजी के शरीर कौन-कौन से ह? ( ोक 41)
और आ मशुि

के (आ म ान के ) या कारण है? ( ोक 4)

213

6

अगर पूतना जैसी रा सी को भी सदगती िमल सकती है, तो हम सामा य
जन को भी सदगती कै से िमल सकती है, इस

ोक का अथ िलख। ( ोक

35,36)
214

7

बालकृ ण ने जब ज हाई ली तब यशोदा ने उसके मुख म

या देखा?

( ोक 35,36)
215

8

मैने िम ी नह खाई, इस बात को िस

करने के िलये जब भगवान ने मुँह

खोला तब यशोदाजी ने उनके मुँह म या देखा? ( ोक 37 से 39)
216

9

यशोदा ने कृ ण को र सी से (र सी का समानाथ श द गुण) बाँधा इस
भाव के पीछे जो मा मकता प क है, उस ोक का अथ िलिखये। ( ोक
13,14)

217

10

कु बेर पु

नल कु बेर और मिण ीव इन दोन को नारद जी ने कौन सा

ाप दया। (जीवन म हर घटना के पीछे काय व कारण भाव होता ही है,
यह समझने के िलये यह इितहास होता है। हम वह काय कारण भाव
मालूम नह होता है। यह भगवान क कृ पा ही है। ( ोक 21,22)
218

11

गोपाल कृ ण ने बकासुर का उ ार कै से कया? ( ोक 50, 51)

219

12

िज होन भगवान का सहारा नह िलया उनक

या अव था होगी? और

िजनको भगवान ने बांध रखा है, उ ह सदगित िमलेगी ही, यह त व कहने
वाला ोक व उसका अथ िलिखये। ( ोक 27)
220

13

भगवान का वणन करने वाले अितसुंदर
को गाते ए

ोक का अथ िलख। (इसी

ोक

ास जी के िश य शुकाचायजी को ढू ंढने जब वन म गए तब

इसी ोक को सुनकर शुकाचायजी आक षत ए।) ( ोक 11)
221

14

हदेव ारा रिचत भगवान क

तुत ी तो

म से कसी भी एक

ोक

का अथ िलिखये। ( ोक 1 से 40)
222

15

भगवान क लीला, यह त व प

करने वाले

ोक का अथ िलिखये।

( ोक 19)
223

16

ग ड कािलया सप को अब कभी नह खाएगा। इस का या कारण है।
( ोक 63)

224

17

भगवान ने गोपबाल का जंगल क आग से कै से बचाव कया ( ोक 25)

225

18

वृंदावन का वणन है उस सुंदर ोक का अथ िलख ( ोक 7)

226

19

गोपबालक क गाय कौन से वन म ग ? ( ोक 2)

227

20

वषाऋतु और मानवी जीवन इन द नो का वणन करने वाले

ोक का अथ

िलख ( ोक 20)
228

21

वेणुग ीत म उ म सािह य का नमुना, इस अथ से क पनाशि

का िवलास

करने वाले ोक का अथ िलख। ( ोक 9)
229

22

कृ ण ने गोिपय को उनके कस दोषिनरसन हेतु शासन कया ? ( ोक
19)

230

23

य पि याँ कन चार कार के अ

231

24

भगवान

ीकृ ण ने नंद और

ीकृ ण जी के पास ला । ( ोक 10)

जवािसय को इं पूजा के संदभ म या

कहा? ( ोक 13)
232

25

आसानी से गोवधन पवत उठाने क लीला करने का कारण बताने वाले
ोक का अथ िलख। ( ोक 16 से 18)

233

26

गोवधन लीला के बाद जवािसय ने भगवान क मन िह मन पूजा करते
ए या ाथना क ? ( ोक 25)

234

27

भगवान

ीकृ ण को अिभषेक करके इं ने उ ह या नाम दया। ( ोक

22,23)
235

28

गोपबाल को भगवान ने अपने मायाितत परमधाम का दशन

कराया। ( ोक 13)
236

29

इस अ याय के 27 व

ोक का अथ िलख और रास ड़ा के दौरान

भगवान के अंतरधान होने का कारण बताइये। ( ोक 28, 48)
237

30

रास ड़ा के दौरान भगवान के अंतरधान होने पर िवरही गोिपय क
या अव था ई? ( ोक 3,44)

238

31

िवरही गोिपय ने

ीकृ ण का गुणगान करते

ए जो अ भुत क पना

िवलास का वणन कया है, वह या है? ( ोक 15)
239

32

ि भुवन के सभी ऋिष, संत,

ानी गोिपय के गुणगान

उसका भगवान ने या कारण दया है। ( ोक 22)

य गाते ह?

240

33

रास डा के दौरान राजा परीि त ने शुकाचायजी से पूछे
( ोक 27 से 29) समझ और शुकाचायजी ने उन

ए सवाल

के जो जवाब दये

ह उनम से 30 से 33 ोक के कारण िलख ।( ोक 30 से 33)
241

34

सुदशन नाम के िव ाधर को अजगर योिन ा

होने का या कारण है।

( ोक 12,13) (जीवन म घटने वाले हर काय के पीछे कारण होता है।
िसफ हम वह कायकारण भाव पता नह होता है)
242

35

य दशन क अपे ा यान म कया आ मरण ती होता है, यह प
करने वाली गोिपय ने भगवान का मरण वणन कये

ोक का अथ

िलख। ( ोक 6 से 13 आ द म से कोई भी दो ोक)
243

36

कं स ने मुि क, चाणूर, शल तोषल को या आ ा दी? ( ोक 24 व 25)

244

37

देव ष नारदजी ने

ीकृ णजी को एकांत म ले जाकर उनके

गुण एवं

भिव य म होने वाले उनके अ छे कम का वणन करके उनक शरण म
जाते ए या कहा? ( ोक 23)
245

38

गोकु ल म जाने के बाद , भगवान

ीकृ ण का दशन करके होने वाली

अव था का मन ही मन चतन करते

ए अ ू रजी ने यान म

या

क पना क ? ( ोक 19 से 21)
246

39

यमुना नदी म छलांग लगाने के बाद अ ू रजी ने या देखा? ( ोक 53 से
55)

247

40

अ ू रजीने भगवान

ीकृ ण क

तुती करते

या कहा? ( ोक

26,27)
248

41

सुदामाजीने भगवान

ीकृ णसे

या माँगा? और भगवान

ीकृ ण ने

सुदामा को या दया? ( ोक 51,52)
249

42

सुंदर कतु कु बड़ी सैरं ी ने ीकृ ण जी से या कहा? ( ोक 3,4)

250

43

मथुरावािसय को बलराम,

ीकृ ण म कन दस रस का अनुभव

( ोक 17)
251

44

कं स और उसक भािभय ने शोक करते ए या कहा? ( ोक 47, 48)

आ।

252

45

सां दपनी मुनीके पास बलराम, कृ णने

या िश ा

क ? ( ोक

33,34,36)
253

46

भगवान
भावनाएँ

254

47

गोिपय क

ीकृ जी ने उ वजीके पास गोिपय के बारे म कौन सी
क ? ( ोक 45)
ीकृ णके

ित त मयता देख उ व ने गोिपय से या कहा?

( ोक 59)
255

48

अ ू र ारा क गई तुती सुनकर भगवानने उसे या कहा? ( ोक 31)

256

49

अ ू रका अमृतमय उपदे श सुनकर
वाला, अथात आस

ूतरा ने ( रा य को पकडकर रखने

मनु य, अथात हमारा ितिनिध) या कहा? ( ोक

27)

‘दशम कं ध (उ राध)’ के
अनु मांक अ याय मांक
257

50

जरासंधक सेनाने राजधानीको चार ओर से घेर िलया, यह देख

ीकृ ण

अपने अवतार के उ े य के बारे म या सोचते ह? ( ोक 7 से 10)
258

51

भि

िबना क साधना के बारे म भगवान कौन सा िवचार

करते ह?

( ोक 61)
259

52

भगवान

ीकृ णको िव ासपा

ा हण

ारा भेजे गये प म आखरी म

मणी ने या कहा? ( ोक 43)
260

53

भगवान लेने आये ह यह संदेश ा हण ारा िमलने पर

मणीने उ ह

( ा हण को) या दया? ( ोक 31)
261

54

शरीर के छह िवकार कौन से ह? ( ोक 47)

262

55

263

56

स ािजताने भगवान ीकृ ण पर कौन सा आरोप लगाया?

264

57

अ ू र के माता िपता का नाम या है? ( ोक 32)

265

58

मणी, जांबवती, एवं स यभामा के अित र

मणी पु

िप ले ज म म कौन था? ( ोक 1 व 2)
( ोक 16)

ीकृ ण क अ य कौन सी

पाँच पि य के िववाह का वणन इस अ याय म है उनके नाम िलिखये।

266

59

देव क मूखता का एवं वैभव क मग री का वणन कस तरह कया गया
है? ( ोक 41)

267

60

ीकृ णजीने
जवाब

मणी क मसखरी करने के उ े य से जो कहा उसका

मणी ने दया वह बडा मा मक है। ( ोक 34,47 पढ़े) (उनमे से

थम दो जवाब का अथ िलख। ( ोक 34, 35)
268

61

बलरामजी ने

मी को य और कै से मारा? ( ोक 36)

269

62

बाणासुर ने भगवान शंकरजी से या माँगा? और भगवान शंकर जी ने
उ ह या जवाब दया। ( ोक 8,10)

270

63

भगवान

ीकृ ण बाणासुर के बारे म भगवान शंकरजी से या कहते ह?

( ोक 47 से 49)
ं 184 से 270 तक के

ो र 87 दन म अपनी उ रपुि तका म

िलखने के प ात उ रपुि तका म और अपने क

मुख को प िलखे साथ

म self addressed postal card भी भेज। प

म आप अपना नाम,

संपूण पता और रिज ेशन नं. ज र िलख।
(मैने

ीमद भागवत महापुराण के 184 से 270

के उ र िलख है।

इस बारे म म समाधानी ँ। म भगवान का यान करता।करती ँ और यह
मेरा कम म भगवान को आदरपूवक समपण करता/करती ँ।”
(इसके बाद कं द 3 अधयन 28 वा
का यान कर।

ोक 21 से 33

ोक

ारा भगवान

‘दशम कं ध (उतराध)’ के
अनु मांक अ याय मांक
271

64

नृगराजा के इितहास का मम कहने वाला ोक कौन सा है? ( ोक 41)

272

65

गु से को भी भि

म प रव तत करते ए गोिपयां या कहती ह? ( ोक

14)
273

66

काशी नरे श पु

सुदि ण ने भगवान शंकर जी क आराधना करने पर

शंकरजीने उसे या वर दया। ( ोक 30)
274

67

बलराम जी ने उ ार कया आ ि िवद कौन था? ( ोक 2)

275

68

कौरव के

कये अधम का िनषेध करने के िलये बलराम जी ने उ ह

िनभयता से या कहा? ( ोक 21 से 23)
276

69

भगवानजी के गृह था म का वैभव देखे ए नारदजी को भगवान ने या
कहा? ( ोक 40) (भगवान जी का यह वचन बड़े ग भत अथ का एवं
मह वपूण है।)

277

70

भगवान जी क सभा का नाम एवं उसक िविश ता या है? ( ोक 17)

278

71

उ व जी ने भगवान जी के पूछे जाने पर उ ह राजक य और बौि क
प रप ता अनु प या सलाह दी? ( ोक 2 से 4)

279

72

राजसूय य

ारा दि वजय पाने के िलये युिधि र ने अपने भाईय को

कहाँ भेजा? ( ोक 13)
280

73

जरासंध क कारागृह से मु

कराए गए राजा

को भगवान

या उपदेश दया? ( ोक 21,23) (यह उपदेश राजा

ीकृ ण ने

के िनिम

से हम

सभी के िलये है।)
281

74

राजसूय य

के

संगवश कौन से वेद ,

ा हण, ऋि वज, राजा

उपि थित थी? ( ोक 7,11)
282

75

मयदान ारा िन मत सभा म िगर जाने पर दुय धन क अव था कै सी ई
थी? ( ोक 39)

283

76

िशशुपाल िम

शा वराजा ने कौन सी आराधना कर या वर मांगा?

( ोक 4 से 6)
284

77

भगवान ीकृ णजीने राजा शा वका उ ार कै से कया? ( ोक 35,36)

285

78

बलरामजी ारा कौन सा अधम आ यह

ा हण ने कहा और उसपर

उ होने बलरामजी को या सुझाव दया? ( ोक 29 से 32)
286

79

287

80

ीिव णुजी का थान एवं वहाँ के पिव तीथ कौन से ह? ( ोक 18)
वणा िमय के तीन गु कौन से थे? ( ोक 32) और सां दपनी मुनी ने
गु के ऋण से मु

288

81

ा संपि

होनेका या उपाय बताया। ( ोक 41)

का कारण यदु े भगवान

ीकृ ण है यह जानकर भ

सुदामा देव के मन म कौन से िवचार आए? ( ोक 34 से 36)
289

82

कु

म गोिपय के िमलने पर ि यतम

ीकृ ण ने उ ह या कहा?

( ोक 44, 47)
290

83

सोलह हजार पि य क और से रोिहणी ने ौपदी से या कहा? ( ोक
41,42)

291

84

धमर णाथ अवत रत भगवान

ीकृ ण ने ऋिषय से या कहा? ( ोक

11) (यिह ोक 10:49:11 म आया है? याद है?)
292

85

293

86

देवक के उन छह पु
ृतदेव

का नाम िलखो िज ह कं स ने मारा? ( ोक 51)

ा हण और ब ला व राजा जब िमिथला नगरी जा रहे थे तब

रा ते म उ ह भगवान जी के कौन-कौन से देश से जाना पडा? ( ोक
20)
294

87

लय होने के बाद परमा मा को सजग करने के िलये उनका ितपादन
करते ए ऋिषवचन म से एक वचन का एक

ोक का अथ िलख। ( ोक

14 से 41 म से कसी भी एक ोक का अथ िलख।)
295

88

इस अ याय म भगवान

ीकृ ण युिधि र को एक अ यंत मा मक बात

बताते ह, वह अ यंत मह वपूण है? उन चार
8 से 11)

ोक के अथ िलखो। ( ोक

296

89

ा हण ने अजुन को अप रप
अपना अहंकार

करते

कहने पर (गीतोपदेश
ए अजुन ने

ा हण से

33,34) भगवान जी के रथ म जुड़े चार अ

ुत अजुन भी)
या कहा? ( ोक

के नाम िलख। ( ोक 49)

इस अ याय के 58 व ोक का अथ िलिखये। ( ोक 58)
297

90

ीकृ ण के पु

म से अठारह महारथी पु कौन थे? ( ोक 33,34) इस

अ याय के 47 व ोक का अथ िलख। ( ोक 47)

‘एकादश कं ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
298

1

यदुवंश का नाश के करने के िलये भगवान ने कौन सी योजना बनाई?
( ोक 4) मुिनय ने यदुकुमार को कौन सा ाप दया? ( ोक 16)

299

2

िवदेह राजा ने नौ योगे र को या सवाल पूछा? ( ोक 30, 31) इस
अ याय म भागवत धम क
धम का मम बताने वाला
के उ म भ

300

3

माया क

या

ा या क गई है? ( ोक 34) भागवत

ोक कौन सा है अथ िलख। ( ोक 36) भगवान

का वणन करने वाले ोक का अथ िलख। ( ोक 52)
ा या बताईये। ( ोक 3) माया पार करने का माग बताईये।

( ोक 33) परम स य नारायण जी का व प बताइये। ( ोक 35)
301

4

“हरी अनंत हरी कथा अनंता” यह त व कहाने वाला

ोक कौन सा है?

( ोक 2)
302

5

िवशु

धम क आचरण म लाने म लाने यो य

ा या िलख। ( ोक 12 व

13)
303

6

दो न दयाँ कौन सी है? उनका मह व या है? ( ोक 19)

304

7

तेज वी अवधूत

ा हण

ारा बनाए गए 24 गु

कौन से है? ( ोक

33,34)
305

8

पगला वे या से या सीखना चािहए? ( ोक 44)

306

9

“मनु य शरीर” इस गु से या सीखना चािहए? ( ोक 25, 29)

307

10

परमानंद देने वाला आ म ान
12)

पी अ ी कै से िनमाण होता है? ( ोक

308

11

और मु ाव था का व प प करने वाले

ोक कौन से ह? ( ोक

6,8)
309

12

वेद का रह य कौन जानते है? ( ोक 22,23)

310

13

गुण क वृ ी करने वाले 10 कारण कौन से ह? ( ोक 4)

311

14

भगवान के कस सुकुमार

312

15

िस दीयाँ के कतने कार होते ह? ( ोक 3)

313

16

िवभूित त व को समझाने वाला ोक कौन सा है? उसका अथ समझाइये।

प का यान करना चािहए? ( ोक 38 से 41)

( ोक 40) (गीता अ याय 10 ोक 41 म भगवान यही कहते ह।
314

17

जनसामा य के िलये सवसाधारण धम कौन सा है? ( ोक 21)

315

18

चार आ म का धम संि

316

19

परो

म बताइये।( ोक 42 से 46)

ान, िव ान और सतत व क

ा याएँ बताएँ। ( ोक 14 से 16)

यम व िनयम कौन से ह बताइये? ( ोक 33 से 35)
317

20

मनु य मा के क याण का उपाय कौन सा है? ( ोक 6) असली योग कौन
सा है? ( ोक 21)

ानयोग, भि योग, कमयोग के अिधकारी कौन है

बताइये। ( ोक 7 व 8)
318

21

चार पु षाथ क िस ी कै से ा कर सकते ह? ( ोक 6)

319

22

अ या म, अिधभूत व अिधदैव इन त व को समझाने वाले

ोक का अथ

िलख। ( ोक 31) शरीर क नौ अव थाए कौन सी है? ( ोक 46) मृ यु व
ज म इनक
320

23

ा या िलख। ( ोक 38,39)

अथ म (धन म) कौन से पं ह अनथ माने है? ( ोक 18, 19) परमयोग
कसे कहा गया है? ( ोक 46)

321

24

सां य यह संक पना

करने वाला और स य माने

या इसे

समझानेवाला ोक कौन सा है? ( ोक 17,18)
322

25

स व, रज व तमोगुण का कै से वतन होता है? ( ोक 2 से 4) साि वक,
राजसी व तामसी कम का व प बताएँ। ( ोक 23)

323

26

ोक 19 से 22 म बताया आ िवचार िलख। ( ोक 19 से 22)

324

27

पूजा क तीन िविधयाँ कौन सी है? ( ोक 7) िन काम पूजा का फल या
है? ( ोक 53)

325

28

उ दवजी ने 11 व

ोक म पूछे ये सवाल का उ र िलख। ( ोक 13 से

17)
326

29

भागवत धम का सार िजसम है वह ोक कौन सा है? ( ोक 8,9) वा तव

ानी कौन है? ( ोक 13,14) भगवान क

ाि का

े साधन कौन

सा है? ( ोक 19) पिव होने का माग या है? ( ोक 27) उ दवजी के
िनिम मा

से भगवान ने

येक मनु यमा

को आखरी व

या कहा

है? ( ोक 44)
327

30

भगवान के लीलािव ह का याग करते समय के व प का वणन करो।
( ोक 27 से 32)

328

31

भगवान के परमधाम गमन का रह य बताओ। ( ोक 11 से 13)

‘ ादश कं ध’ के
अनु मांक अ याय मांक
329

1

किलयुग के राजा (रा यकता) कै से होग? ( ोक 41 से 43)

330

2

किलयुग का ल ण संि

331

3

धम के चार पैर कौन से है? ( ोक 18) नाम का महा य बताओ। ( ोक

म वणन करो। ( ोक 2 से 5)

44, 49, 52)
332

4

चार कार के

लय बताये। ( ोक 4,6,22,34,38)

333

5

राजा परीि त को जो अंितम उपदेश दया उसका सार वणन कर । ( ोक
11)

334

6

भागवत

वण से राजा प रि त क

या अव था यी? ( ोक 5) त क

नाग ने जब प रि त राजा को काटा तब उसक अव था कै सी थी? ( ोक
13)
335

7

पुराण के दस ल ण बताइये। ( ोक 9,10) अठारह पुराण के
नाम बताइये। ( ोक 23,24)

मब

336

8

नर नारायण क

तुती करते समय माक डेय मुिन ने या कहा। ( ोक

48,49)
337

9

माक डेय मुनी ने भगवान नारायण से या मांगा? ( ोक 6) सुंदर बालक
को देखते ही या आ? ( ोक 27 से 34)

338

10

माक डेय मुनी ने भगवान शंकर से या माँगा? ( ोक 34)

339

11

भगवान भगश दाथ म कौन से छह गुण भगवान धारण करते ह? ( ोक
18)

340

12

हरी नाम का महा य बताइये। ( ोक 46) सुंद र ान और सुंदर कम इस
बारे म िवचार प कर। ( ोक 52)

341

13

सूतजीने उपसंहार करते ए कसे नम कार कया। ( ोक 1) सभी पुराण

ोक सं या या है? ( ोक 9)

“ ीमद भागवत प रचय अ यास
अ यासाथ

म’ भगवान के चरण म अपण करके

ोक 18,22,23 का अथ िलख।

वदीयं व तु गो वद तु यमेव समपये।
तेन वदि

कमले र त मे य छ ा तीम्॥

(हे गो वद म आपको आपक ही व तु अपण कर रहा

ँ/रही

बहाने आपके चरण कमल का शा त ेम आप मुझे दान कर।

ँ। इसी

‘ ीम ागवत महा मय’ के
अनु मांक अ याय मांक
342

1

जभूमी के रह य

या है? ( ोक 19,20) भगवान को आ माराम

आ काम य कहा गया है? ( ोक 21,22) अिन

पु व नाभने कौन-

कौन से गाँव बसाए और य बसाए? ( ोक 37,38)
343

2

ीकृ ण का िवरह प ी का लदी को य

पश नह करता? ( ोक 18)

बांसूरी व चं ावली कसे कहा गया है? ( ोक 13) आज भी उ व जी का
अि त व कहाँ और कस
344

3

हदेवजी ने
उ वजी ने

प म है? ( ोक 23,24)

ीम ागवत का स ाह पारायण य
ीम ागवत क

ाि

कया? ( ोक 26)

का या माग बताया है? ( ोक 60,

64)
345

4

ोता व व ा के ल ण बताओ1 ( ोक 21,22)
चार कार कौन से है? ( ोक 24 से 29) और

ीम ागवत सेवन के
ीम ागवत शा

या

फल देता है? ( ोक 48)

‘ ीम गवत गीता’ के
अनु मांक अ याय मांक
346

1

अजुन क अव था देख संजय ने या कहा? ( ोक 47)

347

2

आ मा को कौन-कौन से िवशेषण दये गये ह? ( ोक 24) कमयोग के चार
सू बताने वाला

ोक कौन सा है? ( ोक 47) ि थर बुि

के पु ष का

वणन कै से कया है? ( ोक 56)
348

3

े मनु य कसे कहा है? ( ोक 7) जीवन म सभी कम भगवान को ही
अपण करने चािहये यह कहते समय भगवान या कहते ह? ( ोक 30)
दु मन कसे कहा गया है? ( ोक 37)

349

4

भगवान अवतार कब और य लेते ह? ( ोक 7, 8) पंिडत कसे कहा है?
( ोक 19)

350

5

सां य योग क ि थित का वणन करो ( ोक 13)
ल ण बताओ? ( ोक 24)

ानी पु ष के

351

6

भगवान को ा
िविध प

ऐ पु ष का ल ण बताओ। ( ोक 8) यानयोग क

करो। ( ोक 13 व 14) योग

साधक को या गती ा

होती है? उसका वणन करो। ( ोक 41 से 43)
352

7

अपरा और परा कृ ित कौन सी है? ( ोक 4,5) चार कार के भ

कौन

से ह? ( ोक 16)
353

8

अंतकाल म भगवान का मरण करने का फल

या है? ( ोक 5,6)

उ रायण और दि णायन माग क गित कौन सी है? ( ोक 24 से 26)
354

9

भगवान के सव ापक त व का वणन कर। ( ोक 4,5) जो पु ष भगवान
का अन य चतन करते ह उ ह भगवान ने कौन सा आ ासन दया है?
( ोक 22) कम के बारे म भगवान ने या आ ा दी है और उसका या
फल बताया है? ( ोक 27,28)

355

10

भगवान क िवभूितय को त वश: जानने का

या फल है? ( ोक 7)

भगवान क िवभूितय का अनंत व और त व या है? ( ोक 40,41)
356

11

अजुन ने भगवान से या इ छा जताई? ( ोक 3) भगवान से द दृि

करने के बाद अजुनने या देख ा? ( ोक 10,11) भगवान का वह

प देख भयभीत अजुन को भगवान ने आिखरकार अपना कौन सा

दखाया? ( ोक 49)
357

12

का शी उ ार करने क िलये भगवान या ित ा करते है? ( ोक

7)

ोक 13 से 20 म भगवान अपने भ

कसी भी दो

का वणन करते ह उसम से

ोक म से ल ण िलख ( ोक 13 से 20 म से कोई भी दो

ोक)
358

13

े का व प और उसके िवकार बताय। ( ोक 5 व 6) ोक 7 से 11 म
ान के ल ण बताय ह, वह िलख। ( ोक 7 से 11) आ मा एवं परमा मा
क एकता ितपा दत करते ए या कहा है? ( ोक 22)

359

14

सारे भूतमा

क उ प ी का रह य या है? ( ोक 3) साि वक, राजस

और तामस कम का फल या है? ( ोक 16) गुण के अतीत होने का या
उपाय है? ( ोक 26)
360

15

थवृ के

पक के

ारा संसार का कया गया वणन प करो/ ( ोक

1,2) भगवान के व प के बारे म या कहा गया है? ( ोक 14)

361

16

इस अ याय म कौन से 26 दैवी गुण बताये गये ह? ( ोक 1 से 3) आसुरी
वभाव के

ि य का वणन करते ए इस दो

( ोक 12,13) शा

ोक म या कहा है?

के अनुसार आचरण करो यह कहने के िलए भगवान

ने या कहा? ( ोक 23,24)
362

17

363

18

“ॐ त सत्” क मिहमा कस कार से कही गई है? ( ोक 23 से 26)
कसी भी कम होने के पीछे कौन से पांच हेतु कहे गये ह? ( ोक 13,14)
वधम पालन क

शंसा करते ये या कहा है? इसी अथ का भगवद्

गीता के तीसरे अ याय म कौन सा

ोक है? (अ याय 18 वां

ोक 47

और अ याय 3 से 35 वां शलोक) संपूण गीता का सार वणन करने वाले
इस अ याय के दो

ोक िलख। ( ोक 65,66) (अ याय 9 के 34

ोक म

भी यही कहा है।) संपूण गीता सुनने के बाद अजुन ने या कहा? ( ोक
73) ीकृ ण और अजुन के

भाव के बारे म गीता म आखरी म या कहा

है? ( ोक 78)
364

19

भागवत अ ययन के बारे म आपका कै सा अनुभव है? आपको अ छे से
समझ म आयी ई या समझ म न आयी बात (अ यास

म म से) िलख।

भागवत का त व ान और आचरण शा , काल के अनु प नह है, ऐसा
आपको तीत होता है या? उसके कारण बताय, आपको अगर सं कृ त
नह आती है, तब भी आप भागवत क संिहता का वाचन कर सकते ह,
या आपको इसम
365

20

भागवत अ यास

ची है?
म दूसर से करवाने के िलये आप उ ह कै से

े रत

करग? त ण लोग म (25 से 45 क उमर के लोग) भागवत अ ययन के
िलये या करना चािहए? भागवत का िव तृत चार साल का अ यास म
है। यह थोड़ा मुि कल है। अगर आप इ छु क ह तो अपने क
संपक कर।
“ॐ त सत्”

मुख से