या मुिलम के अलावा दूसरा नाम गलत है ?

अभी हाल मे कु छ िदनो से कु छ लोग इस बात पर ज़ोर दे रहे है िक अलाह तआला ने
हमारा नाम िसफ मुिलम रखा है इस के िसवा और कोई नाम रखे तो ये िफरका वराना नाम
होगे और इस बात के िलये कु रआन क$ इस आयत से दलील ली जाती है :
∩∠∇∪ #x‹≈yδ ’Îûuρ ã≅ö6s% ÏΒ tÏϑÎ=ó¡ßϑø9$# ãΝä39£ϑy™ uθèδ 4

‘’अलाह ने तु&हारा नाम मुिलम रखा इस कु रआन मे भी और इससे पहले क$ शरीयतो मे
भी ।‘’ (सुरह हज 22:78)
इस आयते करीमा पर हर मुसलमान का इमान है िकसी को इस से इंकार नह) *योिक
िकसी एक आयत या हदीस मे इस जािनब अदना सा इशारा भी नह) िमलता िक िमलते
इलािमया के िलये मुलेमीन के अलावा दीगर िकसी नाम का इतेमाल हराम व ममनूअ है
या इस से उ&मत मे इ,तेशार पैदा होता है ।
भाइयो हर मुसलमान बखूबी वािकफ है िक अलाह पर इमान न लाने वालो को
कु रआन ने कािफर कहा है और अलाह के साथ शरीक करने वालो को मुि/क कहा है और
जो अलाह का कलमा पढ़ लेता है उस का भी कोई नाम चािहये एैसे कलमा गो को अलाह
तआला ने मुिलम नाम रखने को कहा है । इस हैिसयत से हर कलमा गो मुसलमान ह4आ ।
लेिकन ये कहना िक हमारा नाम िसफ मुिलम है अलाह पर िकतना बड़ा बोहतान है *योिक
अलाह तआला के नेक व सालेह बंदो को िकसी एक मखसूस नाम से नही बिक कु रआन मे
बेशुमार नामो से याद िकया गया है । कही उ,हे मोमीन कही 6ययबून, सालेहात, त7येबात,
औिलया अलाह, हज़बलाह, अ8दुलाह, अंसार, मुहाजेरीन, अ8दुल जैसे बे शुमार िसफती
नामो से याद िकया गया है इस आयत के म9ेनज़र देखा जाये तो िफर िसफ मुिलम कहने
वाले उन आयतो के मुि,कर समझे जायेगे िजस मे मुिलम के अलावा दूसरा नाम आया है ।

2

एक मुसलमान के िलये तो वािजब है िक वो कु रआन के ज़ेर व ज़बर पर भी इमान रखे ।
अलाह तआला ने और नबी करीम सलालाह4 अलैिह वसलम ने ल;ज़ मुिलेमीन के
अलावा जो दूसरा नाम रखा है उस के दलाईल आगे कु रआन व हदीस से पेश िकये जायेगे ।
कु रआन मे िसफ ल;ज़ मुलेमीन आया है जमाअत का ल;ज़ हदीस मे है और
जमाअत मुलेमीन के अफाज़ हदीसो मे कसरत से आये है और वो िबकु ल सहीह है ।
इससे मुराद ह4कुमत मुलेमीन है िजस क$ तशरीह आगे हदीस क$ रौशनी मे क$ जायेगी ।
मुिलम व मोिमन मे फक
अलाह तआला ने हमारा नाम मुिलम के अलावा मोमीन भी रखा है और ये बात याद
रहे िक हर मुिलम मोिमन नह) हो सकता लेिकन हर मोमीन मुिलम होगा । अलाह तबारक
व तआला का इरशाद है :È≅äzô‰tƒ $£ϑs9uρ $oΨôϑn=ó™r& (#þθä9θè% Å3≈s9uρ (#θãΖÏΒ÷σè? öΝ©9 ≅è% ( $¨ΨtΒ#u Ü>#{ôãF{$# ÏMs9$s% *
¨βÎ) 4 $º↔ø‹x© öΝä3Î=≈yϑôãr& ôÏiΒ Νä3÷GÎ=tƒ Ÿω …ã&s!θß™u‘uρ ©!$# (#θãè‹ÏÜè? βÎ)uρ ( öΝä3Î/θè=è% ’Îû ß≈yϑƒM}$#
∩⊇⊆∪ îΛÏm§‘ Ö‘θàxî ©!$#

‘’कहा ब9ओ
ु ने हम ईमान ले आये आप कह दीिजये तुम ईमान नह) लाये लेिकन तुम
कहो िक हम मुसलमान हो गये और तु&हारे िदलो मे ईमान दािखल नह) ह4आ, तुम अगर
अलाह और उसके रसुल क$ फमाबरदारी करने लगो तो अलाह तु&हारे अमाल मे से कु छ
भी कम नह) करेगा, बेशक अलाह ब>शने वाला मेहरबान है ।‘’ (सुरह ह4जरात 49:14)

3

हािफज़ इ8ने हजर रह0 फरमाते है िक हक बात ये है िक दोनो (मुिलम व मोमीन) मे
आम व खास का फक है बस हर मोमीन मुिलम है लेिकन हर मुिलम का मोमीन होना
ज?री नह) ।(फतह4ल बारी 1/115)
यािन मुिलम एक आम ल;ज़ है िजस मे हर िकम का मुसलमान शािमल है फािसक,
फािजर, मुनािफक, िबदअती, शराबी, जुआरी, नमाजी, बे नमाजी़, सब को मुिलम कहते है
जब िक मोमीन का ल;ज़ खास है प*के मुसलमानो के िलये ।
एक बार रसुले अकरम सलालाह4 अलैिह वसलम ह4नैन का माले गनीमत तकसीम
फरमा रहे थे तब आपने मुिलम व मोिमन के बारे मे इस तरह इशाद फरमाया :साद िबन अबी व*कास रिज0 @रवायत करते है िक रसुलुलाह सलालाह4 अलैिह
वसलम ने चंद लोगो को कु छ माल िदया और हजरत साद बैठे ह4ये थे । आप ने एक श>स
(जुऐल िबन सुराका) को छोड़ िदया । हांलािक वह श>स तमाम लोगो मे मुझे Bयादा पसंद
था । मैने कहा िक ऐ अलाह के रसूल सलालाह4 अलैिह वसलम आप ने फलां श>स को
कु छ नह) िदया अलाह क$ कसम मै तो उस को मोिमन समझता हDं । आप सलालाह4
अलैिह वसलम ने फरमाया – या मुिलम ? िफर थोड़ी देर मै चुप रहा िफर जो हाल मै उस
श>स के बारे मे जानता था उसने दोबारा कहने को मजबूर िकया तो मैने िफर कहा – आप
ने फलां श>स को *यो छोड़ िदया ? अलाह क$ कसम मै तो उसको मोिमन जानता हDं ।
आप सलालाह4 अलैिह वसलम ने फरमाया – या मुिलम ? िफर थोड़ी देर मै चुप रहा
िफर जो हाल मै उस श>स के बारे मे जानता था उसने िफर कहने पर मजबूर िकया तो मै ने
तीसरी बार भी वही कहा और आप सलालाह4 अलैिह वसलम ने भी वही फरमाया (यािन
तुम उसे मोिमन जानते हो या मुिलम) इसके बाद आप सलालाह4 अलैिह वसलम ने
फरमाया: ऐ साद मै एक श>स को कु छ देता हDं हालांिक दूसरे श>स को उस से अEछा
समझता हDं यह इस खौफ से िक कही अलाह उस को औंधा कर के जह,नम मे न ढके ल दH ।
(िकताबुल ईमान, हदीस नं0 27, सहीह बुखारी, िकताबुल मगाज़ी, िकताबुल ईम)

4

मोिमन ही जनत के हकदार है
अलाह तआला ने ज,नत का वादा मोिमन के िलये िकया है एक मुिलम को मोिमन
बनने के बाद ज,नत हािसल होगी *योिक मोिमन और मुिलम का फक आप ने पढ़ िलया है
मोिमन ही ज,नत मे जायेगH इस क$ दलील कु रआन मे मौजूद है । अलाह तआला का इशाद
है :4†s\Ρé& ÷ρr& @Ÿ2sŒ ÏiΒ $[sÎ=≈|¹ Ÿ≅Ïϑtã ôtΒuρ ( $yγn=÷WÏΒ āωÎ) #“t“øgä† Ÿξsù Zπy∞ÍhŠy™ Ÿ≅Ïϑtã ôtΒ
∩⊆⊃∪ 5>$|¡Ïm ΎötóÎ/ $pκŽÏù tβθè%y—öãƒ sπ¨Ψpgø:$# šχθè=äzô‰tƒ y7Í×‾≈s9'ρé'sù Ñ∅ÏΒ÷σãΒ uθèδuρ

‘’और िजस ने नेक$ क$ है चाहे व मद हो या औरत और वो मोिमन हो तो ये लोग
ज,नत मे जायेगे और वहां बे शुमार रोज़ी पायेगे ।‘’ (सुरह मोिमन 40:40)
सुरह फतेह मे अलाह तआला इशाद फरमाता है :$pκŽÏù tÏ$Î#≈yz ã≈pκ÷ΞF{$# $pκÉJøtrB ÏΒ “̍øgrB ;M≈¨Ζy_ ÏM≈oΨÏΒ÷σßϑø9$#uρ tÏΖÏΒ÷σßϑø9$# Ÿ≅Åzô‰ã‹Ïj9
∩∈∪ $VϑŠÏàtã #——öθsù «!$# y‰ΖÏã y7Ï9≡sŒ tβ%x.uρ 4 öΝÍκÌE$t↔ÍhŠy™ óΟßγ÷Ζtã tÏex6ãƒuρ

‘’तािक मोिमन मदI और मोिमन औरतो को एैसे बागो मे दािखल करे िजन के नीचे
नहरे बह रही है िजन मे वो हमेशा रहेगH और उन से उन क$ बुराईयां दूर कर दे और अलाह
के नज़दीक ये बड़ी कामयाबी है ।‘’ (सुरह फतेह 48:5)

5

स़ुरह तौबा मे अलाह तआला का इशाद है :$pκŽÏù tÏ$Î#≈yz ã≈yγ÷ΡF{$# $yγÏGøtrB ÏΒ “̍øgrB ;M≈¨Ζy_ ÏM≈oΨÏΒ÷σßϑø9$#uρ šÏΖÏΒ÷σßϑø9$# ª!$# y‰tãuρ
ã—öθxø9$# uθèδ y7Ï9≡sŒ 4 çŽt9ò2r& «!$# š∅ÏiΒ ×β≡uθôÊÍ‘uρ 4 5βô‰tã ÏM≈¨Ζy_ †Îû Zπt6ÍhŠsÛ zÅ3≈|¡tΒuρ
∩∠⊄∪ ÞΟŠÏàyèø9$#

‘’और अलाह ने मोिमन मदI और मोिमन औरतो से एैसे बगाअत का वादा िकया है
िजन मे नहरे जारी है उन मे वो हमेशा रहेगे नीज सदाबहार बगाअत मे, पाक$ज़ा कयाम गाहो
मे भी और अलाह क$ खुशनुदगी तो उन सब नेअमतो से बढ़ कर होगी यही बह4त बड़ी
कामयाबी है ।‘’ (सुरह तौबा 9:72)
सुरह िनसा मे अलाह तआला ने फरमाया :tβθè=äzô‰tƒ y7Í×‾≈s9'ρé'sù ÖÏΒ÷σãΒ uθèδuρ 4s\Ρé& ÷ρr& @Ÿ2sŒ ÏΒ ÏM≈ysÎ=≈¢Á9$# zÏΒ ö≅yϑ÷ètƒ ∅tΒuρ
∩⊇⊄⊆∪ #ZŽÉ)tΡ tβθßϑn=ôàムŸωuρ sπ¨Ψyfø9$#

‘’और जो कोई नेक काम करे >वाह मद हो या औरत बशतK वो मोिमन हो पस एैसे ही
लोग ज,नत मे दािखल होगे और उन पर ज़रा भी जुम न िकया जायेगा । (सुरह िनसा
4:124)
ल;ज़ मोिमन मुसलमानो के िसफाती नामो मे से है इसी तरह अलाह तआला के
ज़ाती नाम के अलावा िसफाती नाम 99 या इस से Bयादा है नबी करीम सलालाह4 अलैिह
वसलम के ज़ाती नाम के अलावा िसफाती नाम है । इसी तरह अहले हदीस भी एक िसफाती
नाम जो अहद @रसालत से है । अहद @रसालत मे तमाम लोगो का मज़हब िसफ कु रआन व
सु,नत क$ तरफ था लेिकन जब लोग मु>तिलफ िफकI मे बंट गये तो वो पुरानी जमाअत जो

6

‘’म अना व असहाबी’’ (एक जमाअत िजसके िलये अलाह के रसुल सलालाह4 अलैिह
वसलम ने कहा था 73 मे 72 िफकK जह,नमी होगे और एक जमाअत जो ज,नत मे जायेगी
िजस पर आज मM और मेरे सहाबा है) से थी उसने अपना पुराना नाम अहले हदीस बाक$
रखा और ये उनका िसफाती नाम है और कयामत तक ‘’म अना अलैिह व असहाबी’’ के
तज़ पर अमल करने वाली जमाअत इसी िसफाती नाम यािन अहले हदीस से मु,सिलक रहेगी
िजसक$ दलील आगे दी जायेगी ।
अलाह तआला कयामत के िदन इस जमाअत को इसी अहले हदीस नाम से पुकारेगा िजस
क$ दलील ये हदीस है :‘’हज़रत अनस रिज0 से @रवायत है िक रसुलुलाह सलालाह4 अलैिह वसलम ने
फरमाया िक जब कयामत का िदन होगा तो अहले हदीस इस हाल मे आयेगे के उन के साथ
दो अितया (कु रआन व सु,नत) होगी पस अलाह उन से कहेगा तुम अहले हदीस हो नबी
सलालाह4 अलैिह वसलम पर दु?द भेजते थे ज,नत मे दािखल हो जाओ ।‘’ (तबरानी,
सखावी, तारीख बगदाद 3)

दीगर नामो के दलाईल कु रआन व हदीस क रौशनी मे
अलाह का ज़ाती नाम अलाह है और इस के बह4त से िसफाती नाम है मसलन
रहमान, रहीम, अलीम, कदीर, रBज़ाक, कु 9सु , रब, वगैरह वगैरह अलाह तआला ने
फरमाया :tβ÷ρt“ôfã‹y™ 4 ϵÍ×‾≈yϑó™r& þ’Îû šχρ߉Åsù=ムtÏ%©!$# (#ρâ‘sŒuρ ( $pκÍ5 çνθãã÷Š$$sù 4o_ó¡çtø:$# â!$oÿôœF{$# ¬!uρ
∩⊇∇⊃∪ tβθè=yϑ÷ètƒ (#θçΡ%x. $tΒ

7

’’अलाह के अEछे अEछे नाम है उसे उन नामो के साथ पुकारो’’ (अल अराफ 7: 180)
और एक दूसरी जगह अलाह तआला ने फरमाया :öyγøgrB Ÿωuρ 4 4o_ó¡çtø:$# â!$yϑó™F{$# ã&s#sù (#θããô‰s? $¨Β $wƒr& ( z≈uΗ÷q§9$# (#θãã÷Š$# Íρr& ©!$# (#θãã÷Š$# È≅è%
∩⊇⊇⊃∪ Wξ‹Î6y™ y7Ï9≡sŒ t÷t/ Æ9tFö/$#uρ $pκÍ5 ôMÏù$sƒéB Ÿωuρ y7Ï?Ÿξ|ÁÎ/

‘’आप कह दे िक अलाह को पुकारो या रहमान को पुकारो िजस नाम से भी पुकारो
उस के अEछे नाम है ।‘’ (बनी इNराईल 17:110)
यािन अलाह तआला के उन िसफाती नामो को नाम कहा गया है ।
‘’अबु ह4रैरा रिज0 से @रवायत है िक रसुलुलाह सलालाह4 अलैिह वसलम ने
फरमाया िक अलाह तआला के िन,यानवे नाम है जो श>स उन को याद करेगा वह ज,नत
मे दािखल होगा ।‘’ (मुOफकु न अलैह,(बुखारी, मुिलम), िमPकात 2/707)
नबी करीम सलालाह अलैिह वसलम के मु तिलफ नाम
‘’जुबैर िबन मुतईम रिज0 ने बयान िकया िक अलाह के रसुल सलालाह4 अलैिह
वसलम ने फरमाया – मेरे पांच नाम है । मै ‘’मुह&मद’’ और ‘’माही’’ हDं, िक अलाह
तआला मेरे जरीये कु Q को िमटायेगा और मM ‘’आिकब’’ हDं यानी आिखरी नबी हDं, मेरे बाद
कोई नया नबी दुिनया मH नह) आयेगा ।‘’ (िकताबुल फज़ाइल हदीस नं0 3532, सहीह
बुखारी)
मुसलमानो के चंद नाम कु रआन मे

8

∩⊇⊃∪ tβθçΗxqöè? ÷/ä3ª=yès9 ©!$# (#θà)¨?$#uρ 4 ö/ä3÷ƒuθyzr& t÷t/ (#θßsÎ=ô¹r'sù ×οuθ÷zÎ) tβθãΖÏΒ÷σßϑø9$# $yϑ‾ΡÎ)

‘’बेशक मोिमन आपस मे भाई है ।‘’ (सुरह ह4जरात 49:10)
∩⊇∪ tβθãΖÏΒ÷σßϑø9$# yxn=øùr& ô‰s%

‘’बेशक मोिमनो ने कामयाबी हािसल कर ली’’ (सुरह मोिमनून 23:1)
∩⊄⊄∪ tβθßsÎ=øçRùQ$# ãΝèδ «!$# z>÷“Ïm ¨βÎ) Iωr&

‘’जान लो िक अलाह का ज6था ही कामयाब होगा ।‘’ (सुरह मुजादला 58:22)
9≈|¡ômÎ*Î/ Νèδθãèt7¨?$# tÏ%©!$#uρ Í‘$|ÁΡF{$#uρ t̍Éf≈yγßϑø9$# zÏΒ tβθä9¨ρF{$# šχθà)Î6≈¡¡9$#uρ
tÏ$Î#≈yz ã≈yγ÷ΡF{$# $yγtFøtrB “̍ôfs? ;M≈¨Ζy_ öΝçλm; £‰tãr&uρ çµ÷Ζtã (#θàÊu‘uρ öΝåκ÷]tã ª!$# š†Å̧‘
∩⊇⊃ ∪ ãΛÏàyèø9$# ã—öθxø9$# y7Ï9≡sŒ 4 #Y‰t/r& !$pκŽÏù

‘’और मुहाजरीन और अंसार सािबक और मुक9म है और िजतने लोग इ>लास के
साथ उन के पै? है अलाह उन सब से राजी ह4आ और वह सब अलाह से राज़ी ह4ए ।‘’
(सुरह तौबा 9:100)

9

Ïπtã$y™ ’Îû çνθãèt7¨?$# šÏ%©!$# Í‘$|ÁΡF{$#uρ š̍Éf≈yγßϑø9$#uρ ÄcÉ<¨Ζ9$# ’n?tã ª!$# šU$¨? ‰s)©9
óΟÎγÎ/ …çµ‾ΡÎ) 4 óΟÎγøŠn=tæ z>$s? ¢ΟèO óΟßγ÷ΨÏiΒ 9,ƒÌsù Ü>θè=è% à9ƒÌ“tƒ yŠ$Ÿ2 $tΒ Ï‰÷èt/ .ÏΒ Íοtó¡ãèø9$#
∩⊇⊇∠∪ ÒΟŠÏm§‘ Ô∃ρâu‘

‘’अलाह तआला ने पैग&बर के हाल पर तवBजो फरमाई और मुहाजरीन और अंसार
के हाल पर भी िज,होने ने एैसी तंगी के व*त पैग&बर का साथ िदया ।'' (सुरह तौबा
9:117)
अलाह र8बुल इBज़त ने उ&मत क$ दो जमाअतो को जब िक दोनो जमाअते
मुसलमान ही थी दो अलग अलग नामो से िजR िकया अगर उन नामो से इ>तेलाफ व
इ,तेशार को हवा िमलती तो हरिगज़ हरिगज़ अलाह तआला उ,हे दो अलग अलग नाम नह)
देता । इस के िलये दीगर बह4त नाम भी कु रआन मजीद से सािबत है मसलन अलफु करा,
अलसालेहीन, अल शोहदा, अल िस9ीक$न, वगैरह ।
अलाह तआला ने िसफ इसी उ&मत के मुिलम का ही दूसरा नाम नह) रखा बिक
इस से पहले क$ उ&मत का भी मुिलम के अलावा दुसरा नाम रखा है ।
दलील – अलाह तआला का इशाद है :$oΨ‾Ρr'Î/ ô‰pκô−$#uρ $¨ΨtΒ#u (#þθä9$s% ’Í<θß™tÎ/uρ †Î1 (#θãΨÏΒ#u ÷βr& z↵ÎiƒÍ‘#uθysø9$# ’n<Î) àMø‹ym÷ρr& øŒÎ)uρ
∩⊇⊇ ∪ tβθßϑÎ=ó¡ãΒ

‘’और जब िक मै ने हवा@रन को ह4*म िदया िक तुम मुझ पर और मेरे रसुल पर ईमान
लाओ उ,होने ने कहा हम ईमान लाये आप पर शािहद रिहये िक हम मुसलमान है ।‘’(सुरह
माईदा 5:111)

10

इस आयत मे अलाह तआला ने अहले िकताब को मुिलम के नाम से नवाजा है
लेिकन उन मुसलमानो को िफर कु रआन मजीद मे इन अफाज़ मे िखताब िकया गया
अलाह तआला का इशाद है
y7Í×‾≈s9'ρé'sù ª!$# tΑt“Ρr& !$yϑÎ/ Νà6øts† óΟ©9 tΒuρ 4 ϵŠÏù ª!$# tΑt“Ρr& !$yϑÎ/ È≅ŠÅgΥM}$# ã≅÷δr& ö/ä3ósu‹ø9uρ
∩⊆∠∪ šχθà)Å¡≈xø9$# ãΝèδ

‘’और इंजील वालो को भी चािहये िक अलाह तआला ने जो कु छ इंजील मे नाि़जल
िकया है इसी के मुतािबक ह4*म करे और जो अलाह तआला के नािजल करदा से ही ह4*म
न करे वो फािसक है।'' (सुरह माईदा 5:47)
इस आयते करीमा से ये बात वाजेह हो जाती है है िक मुसलमान अपनी िकताब क$
तरफ भी मंसूख हो सकते है जैसे अलाह तआला ने ईसाईयो को मुसलमान होने के बावजूद
उ,हे अहले इंजील से िखताब फरमाया उन क$ िकताब का नाम इंजील था – हमारी िकताब
का नाम खुद िकताब ही मे हदीस रखा गया है । मु>तसर ये िक अहले हदीस कहलाना
मुिलम होने के िखलाफ नह) हम मुिलम भी है और अहले हदीस भी िजस तरह ईसाई
मुिलम भी है और अहले इंजील भी ।
मुसलमानो के दुसरे नाम अहदीस मे
सहीह अहदीस मे भी कई नामो का िजR िमलता है ।
(1) ‘’पस तुम मुसलेमीन को उनके नामो के साथ पुकारो जो नाम अलाह अBज
व जल ने उनके नाम रखे है यािन मुसलमान, मोिमन और अ8दुलाह ।‘’
(मुसनद अहद 4/130)

11

(2) ‘’ऐ कु रआन वालो िवS पढ़ा करो *योिक अलाह भी िवS है, दोत रखता है
िवS को।‘’(सहीह मुिलम, सुनन अबू दाऊद 1413)
(3) ‘’िगलान िबन जरीर ने बयान िकया मै ने हज़रत अनस िबन मिलक रिज0 से
पूछा बताईये अंसार अपना नाम आप लोगे ने खुद रखा िलया था या आप
लोगो का ये नाम अलाह तआला ने रखा उ,होने कहां नही बिक हमारा ये
नाम अलाह तआला ने रखा है ।‘’ (सहीह बुखारी)
ल;ज अंसार नािसर क$ जमाअ है िजस के मायना मददगार के है मदीना के कबीले
औस और खजरज जब मुसलमान ह4ए और नुसरत ईलाम के िलये आहजरत सलालाह4
अलैिह वसलम से अहद िकया तो अलाह पाक ने अपने रसुल पाक सलालह4 अलैिह
वसलम क$ जबान पर ल;ज अंसार से उन को इBजत ब>शी । हािफज इ8ने हजर फरमाते
है अंसार इलामी नाम है रसुले करीम सलालाह4 अलैिह वसलम ने औस और खजरज
और उन के दोत कबीलो का ये नाम रखा जैसा िक हदीस अनस रिज0 मे िजR है । इसी
तरह और भी कई नामो का िजR िमलता है ।
उ#महातुल मोिमनीन व अमी$ल मोिमनीन का लकब
कु रआन व हदीस का मुताला करने वाले जानते है िक मोिमन नाम क$ तकरार बह4त
Bयादा है अज़वाज मुतहरात (पाक बीिवयां) व खुलफा व उमरा क$ िनसबत इसी तरफ क$
गई है अलाह तआला का इशाद है :∩∉∪ 3 öΝåκçJ≈yγ¨Βé& ÿ…çµã_≡uρø—r&uρ ( öΝÍκŦàΡr& ôÏΒ šÏΖÏΒ÷σßϑø9$$Î/ 4’n<÷ρr& ÷É<¨Ζ9$#

‘’नबी मोिमन के साथ खुद उनक$ न;स से भी Bयादा तालुक रखते है और आप
सलालाह4 अलैिह वसलम क$ बीिवयां मोिमनीन क$ मांए है । ‘’(सुरह अहज़ाब 33:6)

12

अलाह तआला ने आप सलालाह4 अलैिह वसलम क$ बीिवयT को उ&महातुल
मोिमनीन का नाम िदया है । िकसी सहाबी रसुल सलालाह4 अलैिह वसलम से या ताबई से
या मुह9ीस से ये बात सािबत नह) िक उ,होने ने नबी करीम सलालाह4 अलैिह वसलम क$
बीिवयT को उ&महातुल मोिमनीन के बजाए उ&महातुल मुलेमीन कहा हो । कु रआन व हदीस
मे मुिलम नाम से Bयादा मोिमन को अहिमयत दी गई है ।
अमी$ल मोिमनीन
उ&महातुल मोिमनीन क$ तरह अमी?ल मोिमनीन का नाम भी सहाबा िकराम मे जाना
पहचाना था और सहाबा िकराम रिज0 और उन के बाद के लोग खुलफाए राशेदीन और बाद
के खुलफा को अमी?ल मोिमनीन के नाम से याद िकया करते थे आज का एक मामूली
मुिलम भी इस से वािकफ है *योिक उ&मुल मोिमनीन क$ तरह अमी?ल मोिमनीन का नाम
भी मशहDर है । इस नाम क$ इ8तेदा कै से ह4ई ये एक िदलचप वािकया है । अलामा हैसमी
नकल करते है िक उमर िबन अ8दुल अजीज़ ने अबूबR िबन सुलेमान से कहा वो सब से
पहले खलीफा कौन है िज,हे अमी?ल मोिमनीन िलखा गया ? अबूबR िबन सुलेमान ने कहा
मुझे अशफा िबन अ8दुलाह ने खबर दी जो िक मुहािजरीन अUवल मे से है िक लबीद िबन
रािबया और अदी िबन हाितम रिज0 मदीना आए िफर दोनो मिजद आए और उ,होने ने
वहां उमरो िबन अल आस रिज0 को पाया पस उ,होने ने कहा ऐ इ8ने आस रिज0 आप
हमारे िलये अमी?ल मोिमनीन से इजाजत हािसल करे (*योिक हम उनसे िमलना चाहते है)
अV िबन आस रिज0 ने कहा अलाह िक कसम तुम ने उनके (उमर िबन ख6ताब रिज0)
नाम के बारे मे दु?त बात कही है *योिक वो अमीर है और हम मोिमनीन है िफर अV िबन
आस रिज0 उमर रिज0 के पास आए और असलाम अलैकुम कहा आप अमीर है और हम
मोिमनीन चुनांचे इसी िदन से अमी?ल मोिमनीन िलखना जारी हो गया ।(िकताब अल
िफरका जदीद हवाला रवाहा तबरानी 61/9)

13

िकसी एक सहाबी या मुहि9स से ये बात सािबत नह) िक उ,होने अमी?ल मोिमनीन के
बजाए अमी?ल मुसलेमीन के अफाज़ इतेमाल िकये हो ।
अहले हदीस नाम पर लान तआन
जबसे अहले हदीस क$ दावत जो िसफ कु रआन व सु,नत क$ दावत है इसमे ना कु फा
के तरफ, ना बगदाद क$ तरफ, ना लाहौर क$ तरफ, ना सहारनपुर क$ तरफ, ना बरेली क$
तरफ, ना देवबंद क$ तरफ, और न िकसी उ&मती क$ तरफ बुलाया जाता है, बिक िसफ
दावत दी जाती या तो रब के कु रआन क$ या मुह&मद सलालाह4 अलैिह वसलम के
फरमान क$ । मगर देखा जाता है िक अपने आपको तौहीद परत कहने वाले भी िकसी ना
िकसी उ&मती या िकसी ना िकसी शहर क$ तरफ अपने आपको मंसूब करे ह4ए है और अपने
मसलक के िखलाफ एक अफाज़ भी सुनने को तैयार नह) भले ही उनका मसलक कु रआन
व सु,नत के िखलाफ *यो न दावत दे, िफर भी उससे िचमटे रहेगे । इसी तरह जबसे अहले
हदीस क$ दावत शु? ह4ई बड़े बड़े नाम नमुद तौहीद परतो ने इस पर लान तआन िकया
जैसे ये अंWजो के ज़माने क$ पैदावार है (उटा चोर कोतवाल को डांट,े िकसी क$ क$
बुिनयाद 1865 क$ तो िकसी क$ 1940 क$,यािन कोई भी जमात 150 साल से पहले क$
नह) है), अहले हदीस बुखारी क$ तकलीद करते है, इनको बुखारी का बुखार है, बुखारी भी
इंसान थे उनसे भी गलती ह4ई होगी (मगर सहीह बुखारी से एक जईफ हदीस ला नही
सकते), तो *या अगर हदीसो को जमा करने वाले इंसान थे तो िफर बताया जाये िक
कु रआन को जमा करने वाले कौन थे ? हदीसे तो मुह9ीसो क$ कसीर तादाद ने जमा क$,
(और पुरी दुिनया मे िजतने मजािहब है उनमे से िसफ इलाम को ये शफ हािसल है िक
रसुलुलाह सलालाह4 अलैिह वसलम क$ हदीस जमा करते करते इस उ&मत के 10
लाख अफराद के िज,दगी के हालत भी जमा हो गये यािन वे 10 लाख लोग िज,होने हदीसे
@रवायत क$ है, वो कहां कहां रहे, कै सा खाते थे, कै से पीते थे, कै सा अ>लाक था, वगैरह
वगैरह) मगर कु रआन तो हज़रत जैद िबन सािबत रिज0 ने जमा िकया, *या वो इंसान नह)

14

थे, *या वो नह) सोचते क$ उनक$ लान तआन से कु रआन भी महफू ज़ नह) रहेगा । अलाह
तआला फरमाता है :∩∪ tβθÝàÏ≈ptm: …çµs9 $‾ΡÎ)uρ tø.Ïe%!$# $uΖø9¨“tΡ ßøtwΥ $‾ΡÎ)

‘’हमने ही इस ि़जR को नाि़जल िकया और हम ही इसक$ िहफाज़त करने वाले है ।‘’
(सुरह िहX 15:9)
िजR से मुराद कु रआन व हदीस ही है । मगर वो जानते नह) अलाह िहदायत करे ।
अहले हदीस कोई नई जमाअत नह) है तमाम अहले इम इस बात को अEछी तरह
जानते है िक उन का नसबुल एैन िकताब व सु,नत है और जब से िकताब व सु,नत है उस
व*त से ये जमाअत है इस िलये उनक$ दावत िकताब व सु,नत क$ तरफ है िकसी गांव या
शहर क$ तरफ नह) । अलाह तआला ने कई मकामात पर कु रआन को हदीस कहा है :tβθãΖÏΒ÷σムϵÏG≈tƒ#uuρ «!$# y‰÷èt/ ¤]ƒÏ‰tn Äd“r'Î7sù ( Èd,ysø9$$Î/ y7ø‹n=tã $yδθè=÷GtΡ «!$# àM≈tƒ#u y7ù=Ï?
∩∉∪

‘’अलाह तआला और उसक$ आयतो (हदीस) के बाद िकस पर ईमान लाओगे
।‘’(सुरह जािसया 45:6)
दुसरी जगह इशाद फरमाया :∩∈⊃∪ šχθãΖÏΒ÷σム…çνy‰÷èt/ ¤]ƒÏ‰tn Äd“r'Î7sù

‘’अब इस कु रआन (हदीस) के बाद िकस बात पर ईमान लाओगे ।‘’ (सुरह मुरसलात
77:50)

15

एक जगह :∩∉∪ $¸y™r& Ï]ƒÏ‰y⇔ø9$# #x‹≈yγÎ/ (#θãΖÏΒ÷σムóΟ©9 βÎ) öΝÏδ̍≈rO#u #’n?tã y7|¡ø‾Ρ ÓìÏ‚≈t/ y7‾=yèn=sù

‘’पस अगर ये लोग इस हदीस (कु रआन) पर ईमान न लाये तो *या आप उन के पीछे
इसी गम मे अपनी जान हलाक कर डालेगे ।‘’(सुरह कहफ 18:6)
इसके अलावा और दीगर आयते है िजनमे ल;ज़ हदीस से मुराद कु रआन है और हर
खतीब भी अपने खुतबे जुमाअ मे ये पढ़ता है :‘’फ ई,ना खैरल हदीसे िकताबुलाह’’
यािन ‘’बेहतरीन हदीस अलाह क$ िकताब है ।‘’ और इसी तरह नबी करीम
सलालाह4 अलैिह वसलम के अकवाल अफआल और तकारीर को हदीस कहा गया है
(मुकदमा िमPकात सफा 3) इन चंद दलाईलो से ये बात ज़ािहर हो गई िक कु रआन मजीद
और नबी करीम सलालाह4 अलैिह वसलम के अकवाल(फरमान), अफआल(फे अल, कोई
अमल करना), और तकरीर(आपके सामने कोई काम िकया गया उसके बारे मे आपक$
खामोशी या ह4*म) हदीस है लेहाज़ा इस एतबार से अहले हदीस के मानी होगे ‘’सहाबे
कु रआन व हदीस’’ यािन ‘’कु रआन और नबी करीम सलालाह4 अलैिह वसलम के
अहकाम पर अमल करने वाला’’
असहाबुल हदीस, अहले हदीस, अहले सु,नत, अहल या असहाब के मानी
मानने वाले है, अब इस क$ िनबत हदीस क$ तरफ कर दे तो मानी होगे हदीस वाले और
कु रआन को भी अलाह ने हदीस कहा है जैसा िक ऊपर गुजर चुका है । अब ये बात अEछी
तरह वाजेह होगी िक इलाम से मुराद कु रआन व हदीस है और कु रआन व हदीस से मुराद
इलाम है और मसलक अहले हदीस क$ बुिनयाद इ,ही दोनो चीज़ो पर है और यही जमाअत
ह*का है और रसुले करीम सलालाह4 अलैिह वसलम के इस हदीस का मतलब ला तजालू

16

तईफा मन उ&मती ‘’मेरी उ&मत मे से एक जमाअत हमेशा हक पर कायम रहेगी उन का मुखािलफ उन
को नुकसान न पह4ंचा सके गा यहां तक क$ अलाह का ह4*म (कयामत) आ पह4ंचेगा ।''
(मुिलम, इ8ने माजा)
मुह9ीिसन और मु;फसेरीन ने इस हदीस से यही मुराद ली है िक वह िगरोह अहले
हदीस है ।
हज़रत इमाम बुखारी रह0 फरमाते है िक िजस जमाअत के बारे मे ह4जूर सलालाह4
अलैिह वसलम ने फरमाया है िक वह सदा हक पर रहेगी इससे मुराद जमाअत अहले हदीस
है ।
हज़रत इमाम बुखारी रह0 के उताद अली िबन मदीनी रह0 फरमाते है िक वह
मुज़;फर मंसूर हमेशा हक पर रहने वाली जमाअत अहले हदीस है ।(शफ असहाबुल हदीस)
रसुले करीम सलालाह4 अलैिह वसलम ने फरमाया :‘’सिदयो मे बेहतरीन सदी मेरी है िफर वो लोग जो उन के बाद होगे, िफर वो लोग जो
उन के बाद होगे ।‘’(मु6तफकु न अलैिह)
इससे मुराद सहाबा, ताबई, ताबे ताबई का दौर है, 222 िहजरी तक का ज़माना
खै?ल कु ?न समझा जाता है उन लोगो ने खुद अपने िलये अहले हदीस का लकब इतेमाल
िकया और इसी तरह मुह9ेसीन िकराम मु;फसरीन िकराम अ7यमा अरबा, और ने अहले
हदीस लकब इतेमाल िकया है । आईये अब आपके सामने लकब अहले हदीस के वो
दलाईल पेश िकये जा रहे है जो सहाबा रिज0 के दौर से मौजूदा दौर तक है तािक दूध का
दूध और पानी का पानी हो जाये ।

17

लकब अहले हदीस सहाबा िकराम के दौर मे
(1) हज़रत अबु सईद खुदरी रिज0 जब हदीस के जवान तुलबा (िवZाथ[) को देखते
तो फरमाते तु&हे मरहबा रसुलुलाह सलालाह4 अलैिह वसलम ने तु&हारे बाबत
हमे वसीयत फरमाई है, हमे ह4*म िदया है िक हम तु&हारे िलये अपनी मजिलसो मे
कु शादगी करे और तुम को हदीस समझाये *योिक तुम हमारे ताबई जांनशी और
अहले हदीस हो ।‘’ (शफ असहाबुल हदीस) इससे सािबत ह4आ िक सहाबा िकराम
खुद को भी और अपने ताबईन को भी अहले हदीस कहते थे ।
(2) हज़रत अनस रिज0 से @रवायत है िक रसुलुलाह सलालाह4 अलैिह वसलम ने
फरमाया िक जब कयामत का िदन होगा तो अहले हदीस इस हाल मे आयेगे िक
उन के साथ दोअितये (कु रआन व सु,नत) होगी पस अलाह उन से कहेगा तुम
अहले हदीस हो नबी सलालाह4 अलैिह वसलम पर द?द भेजते थे ज,नत मे
दािखल हो जाओ । (तबरानी, सखावी, तारीख बगदाद 3)
(3) कसीर @रवायत करने वाले सहाबी हज़रत अबु ह4रैरा रिज0 (जो हनफ$ उलेमाओ
के नजदीक गैर फक$ह कहलाते है, यािन िज,हे दीन क$ समझबुझ नह) थी,
नाऊजुिबलाह, सु&मा नाऊजुिबलाह) िजनका िवसाल 57 या 58 िहजरी मे
ह4आ, के मु6तािलक इमाम अबूबR िबन दाऊद रह0 फरमाते है िक मैने आपको
>वाब मे ये फरमाते ह4ए देखा –‘’दुिनया का सब से पहला हदीस वाला अहले
हदीस मै था ।‘’ (तजिकरातुल ह4;फाज़ 1,29)
(4) कु रआन के सबसे बड़े मु;फसीर हज़रत अबदुलाह िबन अ8बास रिज0 िजनका
िवसाल 68 िहजरी मे ह4आ, अहले हदीस थे । (तारीख बगदाद 3,227)

18

लकब अहले हदीस ताबईन के दौर मे
(1) मशहDर ताबई हजरत आिमर िबन शरजील शैबी रह0 िवसाल 104 िहजरी अहले
हदीस थे ।
(2) शेख अली लाहौरी ने अपनी मशहDर िकताब ‘’कशफु ल महजूब’’ मे फरमाया है
अ8दुलाह िबन मुबारक रह0 इमाम अहलेहदीस थे, यािन अ8दुलाह िबन मुबारक
रह0 अहले हदीस के इमाम थे ।
(3) अलामा जैहबी और इमाम खतीब ने िजR िकया है िक इमाम ज़हरी खलीफा
अ8दुल मािलक िबन अबु सुलेमान, उबैदु लाह िबन अV, य\ा िबन सईद अंसारी,
ताबईन मे अहले हदीस के इमाम थे ।(तजिकरातुल ह4;फाज़ 97, तारीख बगदाद
2,245)
(4) अबूबR िबन अयाश ताबई रह0 कहा करते थे िक अहले हदीस हर ज़माना मे दुसरे
अहले मज़हब क$ तरह बराबर मौजूद रहे है ।(मीजान शअरानी)
(5) सहीह मुिलम के मुकदमे मे अ7यमा अहले हदीस का िजR िकया गया है मािलक
िबन अनस रह, शैबा िबन हBजाज रह0, सुिफयान िबन उयैना, य\ा िबन सईद,
क6तान, और अ8दुरहमान िबन मेहदी वगैरह । (मुकदमा सहीह मुिलम)
(6) इमाम इ8ने कु तैबा ने अपनी िकताब जो मा?फ अमा अ7यमा अहले हदीस से
मशहDर है इस मे उन लोगो के नाम िगनाये है जो नबी सलालाह4 अलैिह वसलम
के ज़माने से आप के ज़माने तक गुज़र चुके है और सौ नाम िगनाये है और इमाम
इ8ने कु तैबा तीसरी सदी िहजरी के मशहDर इमाम है जैसा िक अलामा जैहबी रह0
ने िजR िकया है और उन क$ हालते िज,दगी मे िलखा है मेरा >याल है िक उन
क$ वफात 310 िहजरी मे ह4ई है ।(तजिकरातुल ह4;फाज़)

19

लकब अहले हदीस ताबे ताबईन के दौर मे
(1) ताबे ताबईन अपने आप को अहले हदीस के नाम से इBज़त देते थे और इस नाम
से खुश होते थे जैसा िक सुिफयान सुरी रह0 ने कहा िक अहले हदीस मेरे पास न
आये तो मै उन के पास उन के घरो मे जाऊगां ।(शफ अहले हदीस)
(2) ताबे ताबईन हज़रत सुिफयान िबन उयैना रह0 को उन के उताद इमाम अबू
हनीफा रह0 ने अहले हदीस बनाया था, जैसा िक आप अपने ल;जो मे यूं बयान
करते है पहले इमाम अबू हनीफा रह0 ही ने मुझ को अहले हदीस बनाया था ।
(हदाईकु ल हनिफया 134, तारीख बगदाद 9,178)
(3) अलामा शहर सतानी रह0 ने अपनी िकताब अल मलल व अल खल मे अ7यमा
अहले हदीस के नाम िगनाये है और वो अहले िहजाज और वो मािलक िबन अनस
रह0 और मुह&मद िबन इदरीस शाफई रह0 के असहाब मे और सुिफयान सुरी के
असहाब मे और दाऊद िबन अली िबन मुह&मद के असहाब मे और इसी तरह
अलामा इ8ने खलदुन ने अपनी िकताब तारीख इ8ने खलदुन मे िजR िकया है
।(तारीख इ8ने खलदुन 1,372)
(4) अलामा अबू मंसूर अ8दुल कदीर िबन तािहर तैयमी बगदादी ने अपनी मशहDर
िकताब उसूले दीन मे सहाबा, ताबईन, ताबे ताबईन, के हालत का िजR िकया है,
दौराने िजR मे कहा िक रोम ज़जीरा शाम और आज़र बेजान क$ सरहदो के पूरे
बािश,दे अहले हदीस के मज़हब पर थे और इसी तरह अिQका और उ,दुलुस के
बािश,दे बहरे मग@रब के पूरे बािश,दे, यमन क$ सरहद के पूरे बािश,दे अहले हदीस
थे । (उसूले दीन 1,310)
(5) इमाम ह;स िबन ]यास रह0 वफात 194 िहजरी फरमाते है अहले हदीस हम खेर
अहले दुिनया पूरी दुिनया मे बेहतरीन जमाअत अहले हदीस है ।

20

(6) इमाम सुिफयान सूरी रह0 वफात 162 िहजरी फरमाते है फ@रPते आसमानो के
पहरेदार है और अहले हदीस जमीन के पहरेदार है । यािन यही दीन क$ दावत देने
वाले और तकरीर व तहरीर से इस क$ िहफाज़त करने वाले है । नीज़ फरमाते है
उन के िलये यही नेक$ काफ$ है िक वह जब हदीस मे आप सलालाह4 अलैिह
वसलम का नाम आता है तो दु?द शरीफ िलखते और पढ़ते है ।
(7) खलीफा हा?न रशीद वफात 193 िहजरी कहते है चार िसफते मुझे चार जमाअतो
मे िमली – कु Q जहिमया मे, बहस व झगड़ा मोतिजला मे, झूठ राफिजयो मे, और
हक अहले हदीसो मे ।
(8) अ8दुलाह िबन दाऊद रह0 वफात 213 िहजरी फरमाते है िक मैने अपने उताद
से सुना िक अहले हदीस अलाह तआला क$ तरफ से उस के दीन के अमीन है
यािन इम व अमल मे रसुलुलाह सलालाह4 अलैिह वसलम के दीन क$
िहफाज़त करने वाले है ।
ये अकवाल शफ असहाबुल हदीस से िलये गये है । इस तफसील से मालूम ह4आ िक
सहाबा, ताबईन, ताबे ताबईन ये खै?ल कु ?न (खैर के तीन ज़माने) अहले हदीस के नाम से
मशहDर थे और उन को अहले हदीस कहा जाता था ।
लकब अहले हदीस चारो इमामो क नज़र मे
अ7यमा अरबा (चारो इमाम) खुद भी अहले हदीस थे और बड़ी ही िश9त के साथ
लोगो को अपनी तकलीद से मना करते ह4ए िसफ कु रआन व हदीस क$ दावत देते थे ।
(1) इमाम अबू हनीफा रह0 वफात 150 िहजरी आपके शािगद सुिफयान िबन
उयैना रह0 फरमाते है –‘’िक पहले पहले इमाम अबू हनीफा रह0 ने मुझ को
अहले हदीस बनाया था ।(हदाईकु ल हनिफया सफा 134)

21

हनिफया के बानी मशहDर इमाम मुह&मद रह0 के कौल के मुतािबक उ,होने ने
अपनी िकताब मुव6ता इमाम मुह&मद मे ज़हरी के बारे मे कहा िक इ8ने शहाब
(ज़हरी रह0) मदीना मे अहले हदीस के नजदीक सब से बड़े आिलम थे ।
(2) इमाम शाफई रह0 वफात 204 िहजरी (एक हनफ$ ने इनके सर पर लोहे क$
सलाख का वार िकया िजसके ज>म से इनक$ वफात 54 साल क$ उV मे ही
हो गई, िफरका परती का इबरतनाक अंजाम अलाह रहम करे) शेखुल
इलाम इ8ने तैिमया वफात 728 िहजरी आप के यािन इमाम शाफई रह0 के
बारे मे फरमाते है िक आपने अहले हदीस का मज़हब पकड़ा और इसी को
अपने िलये पस,द फरमाया ।
(3) अलामा इ8ने क7युम वफात 751 िहजरी ने इमाम शाफई रह0 का कौल
नकल िकया है यािन इमाम शाफई रह0 ने फरमाया –‘’िक तुम अपने ऊपर
हदीस वालो (अहले हदीस) को लािजम पकड़ो *योिक वो दूसरो के एतबार से
Bयादा दु?त और सहीह है
(4) इमाम शाफई रह0 से @रवायत है आप फरमाते थे िक अहले हदीस हर ज़माने मे
वैसे ही है िजस तरह सहाबा रिज0 अपने ज़माने मे थे । यािन वो स>ती के
साथ िकताब व सु,नत क$ पैरवी करते थे ।
(5) इमाम मािलक रह0 वफात 180 िहजरी आप के मु6तािलक अलामा श&सु9ीन
अबू अ8दुलाह जैहबी वफात 748 िह0 िलखते है िक ‘’इमाम मािलक रह0
अहले हदीस के इमाम थे ।
(6) सहीह मुिलम के मुकदमे सफा 23 मे इमाम मुिलम िबन िहजाज िनशापुरी
रह0 वफात 261 िह0 ने इमाम मािलक रह0 को इमाम अहले हदीस कहा है ।
(7) इमाम अहमद िबन हंबल रह0 वफात 241 िहजरी के बारे इमाम तैिमया
फरमाते है ‘’िक आप अहले हदीस के मज़हब पर थे ।‘’

22

(8) इमाम अहमद िबन हंबल रह0 ताईफा मंसूरा वाली हदीस क$ तशरीह फरमाते है
‘’यािन अगर ताईफा मंसूरा वाली जमाअत से मुराद अहले हदीस नही है तो
िफर मुझे मालूम नह) िक ये कौन है ।‘’
(9) हािफज़ इ8ने कसीर रह0 ने अलाह तआला का ये कौल ‘’िजस िदन हम
तमाम उ&मतो को उनके इमामो के साथ बुलायेगH (सुरह बनी इNराईल
17:71)’’ नकल करके फरमाते है िक सफ सालेहीन इस आयत करीमा के
पेशे नज़र ये कहते है िक हज़रात अहले हदीस के िलये इस से बड़ा शफ और
*या हो सकता है िक उ,हे उनके अपने इमाम व रहबर नबी करीम सलालाह4
अलैिह वसलम के साथ बुलाया जायेगा ।(तफसीर इ8ने कसीर सफा 200)
(10) शेख अ8दुल कादीर िजलानी रह0 क$ शहादत – आपने फरमाया ‘’अहले
िबदअत क$ कु छ अलामते है िजन से उन के पहचान हो जाती है एक अलामत
तो ये है िक वो अहले हदीस को बुरा कहते है ।‘’(गुनयातु6तालेबीन 80)
(11) अलामा शेख नािस?9ीन अलबानी रह0 फरमाते है ‘’अलह&दुिललाह मै
सलफ$ और अहले हदीस हDं और ये यक$न है िक िजस श>स का मनहज
सलिफयत नही वो हक से हटा ह4आ है ।‘’
अहले हदीस ही मुिलम है
अलाह के मेहबूब रसुल मुह&मद िबन अ8दुलाह सलालाह4 अलैिह वसलम से
पुछा गया िक मुिलम कौन है – आप सलालाह4 अलैिह वसलम ने फरमाया ‘’िजनमे 3
अलामते पाई जाये वो मुिलम है (1) हमारे िकबले क$ तरफ ?ख करे ।
(2) हमारी तरह नमाज़ पढ़ने का एहतेमाम करे ।
(3) हमारा जबीहा खाये ।
(रवाहा मुिलम, रवाहा बुखारी)

23

इस हदीस से ज़ािहर है िक (1) िसफ अहले हदीस क$ िकबले क$ तरफ ?ख करते है िकसी दुसरी जगह मसलन
इराक, बगदाद, सहारनपुर, देवबंद, लाहौर, बरेली, वगैरह वगैरह क$ तरफ दावत नह) देते ।
(2) िसफ अहले हदीस ही आप सलालाह4 अलैिह वसलम क$ तरह नमाज़ पढ़ने का
एहतेमाम करते है और इसी क$ दावत देते है, और नमाज़ के अरकान मे से िकसी भी
अरकान जो सािबत हो पर लान तआन नही करते । या िकसी उ&मती के इBतेहाद पर हदीस
को नह) छोड़ते ।
(3) िसफ अहले हदीस ही अलाह और रसुल क$ हलाल कदा चीज को हलाल समझते है
एैसा नह) िक िबBजु, गोह, घोड़ा, मुदा मछली जो पानी पर तैरे मेढ़क को हराम समझे
(हनफ$ मे हराम, शाफई, मािलक$, हंबली मे हलाल) जैसे क$ दुसरे लोगो ने उ&मती के
इBतेहाद से अलाह के हलाल को हराम करार दे चुके है । िजनके बारे मे अलाह र8बुल
इBज़त फरमाता है ‘’उन लोगो ने अलाह को छोड़कर अपने आिलमो को अपना रब बना
िलया ‘’ (सुरह तौबा 9:31)
मुिलम, मोिमन और अहले हदीस क$ वजाहत कर दी गई । अलाह हम सब को हक
को समझने उस पर चलने और उसक$ दावत देने क$ तौफ$क अता फरमाये । आमीन या
र8बुल आलमीन ।
व आख?द दवािन वलह&दुिललाहे र8बुल आलमीन ।

इलािमक दावाअ से,टर,
रायपुर छ6तीसगढ़

Sign up to vote on this title
UsefulNot useful