एकावलि

1. Guru Maṇdalā
Worship of the preceptor is utmost importance for a Śrīvidyā upāsakā. श्री गुरुः
सववकारणभूता शक्तुः says Bhāvanopaniṣat. Tantrās have identified three groups of

preceptors viz.,- divine, accomplished and earthly naming them as divy ā,
siddha, and mānava.
Paraśurāma kalpa sutra defines number of gurus in each of above mandalā as
‘muni veda nāga samkhya;- of numbers in groups

viz muni – sages – seven;

vedā – four and nāgā – Serpents – eight. The exact names are not said there,
we are directed to look in other tantrās. Interestingly in Paramānanda tantrā, we
find a reference to various mantras of Śrī Lalitā with respect to the yuga and a
corresponding guru mandala in above said numbers (pages 420 -426), this is
decoded and shared for bliss of all upāsakā.

सत्य युग - मन्त्र : स ुः - दे वता : िलिता
गुर मण्डि: ददव्य घुः

4- पराभट्टाररकाम्बा श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- अघोरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- श्रीकण्ठानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- शक्तधरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- क्रोधीशानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- त्र्यांबकानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- पराभट्टारकानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
लसद्ध घुः

4- प्रततभानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- वीरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

4- सांववदानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- सांववदां बा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
मानव घुः

4- सदालशवानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- महे श्वरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

1

एकावलि
4- सांववदां बा श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

4- श्रीववद्यानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- सांववदां बा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- श्रीमदनत्ु तरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- योगानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- सांववदां बा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
----------------------------------------------------------------------------------रेता यग
ु - मन्त्र : ह्सौं सह ुः - दे वता िलिता
गुर मण्डि: ददव्य घुः

4- परमलशवानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- कामेश्वयवम्बा श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

4- ददव्य घानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- मह घानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- सवावनन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- प्रज्ञादे व्यांबा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- प्रकाशानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
लसद्ध घुः

4- ददव्यानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- चिरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- कैवल्यानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

4- महोदयानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
मानव घुः

4- चिदानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

4- ववश्वश्त्यानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- रमानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- कमिानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- परानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- मनोहरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
2

एकावलि
4- सवात्मानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- प्रततभानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

-------------------------------------------------------------------------

द्वापर यग
- मन्त्र : हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां - दे वता िलिता

गुर मण्डि: ददव्य घुः

4- परप्रकाशानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- पराश्त्यांबा श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

4- कामेश्वयवम्बा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- वज्रेश्वयंबा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- भगमालिन्त्यांबा श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- िोपमुद्राम्बा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- अगसत्यानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
लसद्ध घुः

4- कुिानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- धमाविायावनन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- मु्तकेशीश्वयवम्बा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- दरपकिानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
मानव घुः

4- ववष्णुदेवानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- मातग
ु ाां पूजयालम नमुः
ृ ुप्तानन्त्दनाथ श्रीपादक
4- तेजोदे वानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- ओजोदे वानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- मनोजदे वानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- परमानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- सवात्मानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- ज्ञानानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

---------------------------------------------------------------------------------

3

एकावलि
कलि यग
ु - मन्त्र कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां - दे वता िलिता
गुर मण्डि: ददव्य घुः

4- परप्रकाशानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- परलशवानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः
4- पराश्त्यांबा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- क िेश्वरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- श्
ु िदे व्यांबा श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

4- कुिेश्वरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- कामेश्वयवम्बा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
लसद्ध घुः

4- भोगानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- क्िन्त्नानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- समयानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- सहजानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
मानव घुः

4- गगनानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- ववश्वानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

4- ववमिानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- मदनानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- भुवनानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

4- िरिानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः**
4- सवात्मानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
4- वप्रयानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पज
ू यालम नमुः

It is wonderful to see that the tantra prescribes the worship of all these guru
mandalas as a part of the anuttarāmnāya worship. Hence we can conclude that
whilst once reaches the state of experience there is unification of all paths and
that there is no distinction.(anuttarāmnāya represents the experiential state).
KaulopaniṣaT also says “आम्नाया न ववद्यन्त्ते” for siddha upāsaka.

4

एकावलि
The other tantras like jñānārṇava, dakṣiṇāmūrthi samhitā are in agreement with
the above kādi guru paramparā (the fourth).
The same is also found in compilations such as Śrī tattva cintāmani, prapañca
sāra sāra sañgraha, Śrī Vidyārṇava tantra too.
** This guru in mānava is seen as a female in guhānanda maṇdali pūja
padhhati.

(4- िरिाम्बा श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः)

During worship of āvaraṇa of śyāmalā and vārāhi , we find that they have same
guru maṇdala in nityotsava and some modern texts. On a scrutiny of Śrī
Vidyārṇava tantra, it was seen that, the said guru maṇdala in texts was that of
pūrvāmnāya devatā. śyāmalā being a pūrvāmnāya devatā, the reading is apt.

While vārāhi is a dakṣiṇāmnānya devata, we find a different guru maṇdala. This
is also in tune with uttarāmnāya guru maṇdala which seen in all texts of
dakṣiṇa kālikā pūja padhhati and is also seen in Śrī Vidyārṇava tantra. Also
kula guru and vidyāvatāra guru mandala are shared here.

श्रीपव
ू ावम्नाय गरु व: ( श्री श्यामिा / बािा गर
ु मण्डि:)
कुि गुरवुः
ददव्य घ:

ऐां ्िरां स ुः प्रह्िादानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
ऐां ्िरां स ुः सनकानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

ऐां ्िरां स ुः वलसष्ठानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
लसद्ध घ:

ऐां ्िरां स ुः कुमारानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
ऐां ्िरां स ुः क्रोधानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
ऐां ्िरां स ुः शुकानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
मानव घ :

ऐां ्िरां स ुः ध्यानानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
ऐां ्िरां स ुः बोधानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः
ऐां ्िरां स ुः सुरानन्त्दनाथ श्रीपादक
ु ाां पूजयालम नमुः

5

एकावलि ववद्यावतार गरु वुः ददव्य घ: ऐां ्िरां स ुः समयानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः कु्कुटानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः प्रधानानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः लसद्ध घ: ऐां ्िरां स ुः बोधेशानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पज ू यालम नमुः ऐां ्िरां स ुः कुथरानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः भागववानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः मानव घ : ऐां ्िरां स ुः कन्त्दिानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः तपनानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः अतीतानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः दरक्षा गुरवुः ददव्य घ: ऐां ्िरां स ुः परप्रकाशानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः परमेशानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः परलशवानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः कामेश्वयवम्बा श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः मोक्षानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः कामानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः अमत ु ाां पूजयालम नमुः ृ ानन्त्दनाथ श्रीपादक लसद्ध घ: ऐां ्िरां स ुः ईशानानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः तत्पर ु षानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पज ू यालम नमुः ऐां ्िरां स ुः अघोरानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः वामदे वानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः 6 .

परमगुर.एकावलि ऐां ्िरां स ुः सद्योजातानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः मानव घ : ऐां ्िरां स ुः पञ्िोत्तरानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः परमानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः सववज्ञानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः सवावनन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः लसद्धानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः गोववन्त्दानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ्िरां स ुः शङ्करानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ततुः परमेकष्ठगुर.बगळामुखि गुरमण्डि:) ददव्य घ: ऐां ग्िौं तारकानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं रिकानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं भद्रकानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः लसद्ध घ: ऐां ग्िौं अमरानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं सत्यकानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं भासवरानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः मानव घ : ऐां ग्िौं अमत ु ाां पूजयालम नमुः ृ ानन्त्दनाथ श्रीपादक ऐां ग्िौं बोधानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं पूणावनन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः 7 . श्रीगुरां पूजयेत ् The following is the guru mandala for vārāhi श्रीदक्षक्षणाम्नाय कुि गुरवुः गुरव: ( श्रीवाराहर.

एकावलि ववद्यावतार गरु वुः ददव्य घ: ऐां ग्िौं प्रदरपानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं प्रभासानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं प्रगल्भानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः लसद्ध घ: ऐां ग्िौं प्रभानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पज ू यालम नमुः ऐां ग्िौं ववनयानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं कुमुदानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः मानव घ : ऐां ग्िौं चिदाभानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं चिद्रप ू ानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं प्रकामानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः दरक्षा गुरवुः ददव्य घ: ऐां ग्िौं प्रभवानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं आददनाथानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं ववमिानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं समयानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं लशवानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः लसद्ध घ: ऐां ग्िौं तनवावणानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं गणपानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं हरानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं परशांभ्वानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं चिदां शानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः 8 .

एकावलि मानव घ : ऐां ग्िौं कुरनाथानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पज ू यालम नमुः ऐां ग्िौं ववशुद्धानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं कुशिानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं कुन्त्तशेिरानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं सुडडम्बानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं सुन्त्दरानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ऐां ग्िौं केशानन्त्दनाथ श्रीपादक ु ाां पूजयालम नमुः ततुः परमेकष्ठगर ु .गणाचधपलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः ववद्यावतार गरु वुः 3-सुरानन्त्दलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.महोत्कटलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.ववघ्नराजलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.ववकटलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.हे रम्बलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3.दम ु ि ुव लसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.गणक्रीडलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.ववघ्ननायकलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3. परमगर ु . श्री गणेश गुर मण्डि : कुि गुरवुः श्रीां ह्रां ्िरां. guru maṇdala with vidyāvatāra guru and kula guru was there for Gaṇeśa.बद्ध ु लसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3.गणेश्वरलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3.प्रमोदलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3. श्रीगर ु ां पज ू येत ् On a deeper scrutiny of Śrī Vidyārṇava tantra It was seen that.शांकरलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 9 .सुमुिलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.

सुिावहलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3-परमात्मालसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.एकावलि 3.दज व लसद्धािायव श्री पादक ु य ु ाां पूजयालम नमुः 3.कवीश्वरलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.जयलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.ववनायकलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3. श्रीगुरां पूजयेत ् 10 .ववरूपाक्षलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.दुःु िाररलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.सववभत ू ात्मालसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3-फाििन्त्द्रलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.ब्रह्मण्यलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.महाबिलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.गणञ्जयलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः दरक्षा गुरवुः ददव्य घुः 3. परमगुर.ववश्वलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3.मेघनादलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.तनधीशलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः लसद्ध घुः 3-गजाचधराजलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.िम्बकणवलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3.ववजयलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3.सद्योजातलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः 3.बद्ध ु लसद्धािायव श्री पादक ु ाां पज ू यालम नमुः 3-शूरलसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः ततुः परमेकष्ठगुर.वरप्रदालसद्धािायव श्री पादक ु ाां पूजयालम नमुः मानव घुः 3.

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एकावलि VªÉä¹`öÉxÉxnù ºÉnùÉ {ÉÉiÉÖ xÉÉÊ¦É ¨Éä ºÉ´ÉÇiÉ: |ɦÉÖ:* ʱÉRÂóMÉÆ +´ªÉÉnÂù <ǶÉxÉÉlÉÉä ¨É½þÉxÉÎxnù MÉÖnù¨É´ÉiÉÖ** ÊSÉnùÉxÉxnùºiÉÖ ¨Éä VÉɼxÉÚ ºiÉjÉ ºÉ´ÉÇnùÉ** Ê´ÉtÉ®úhªÉÉä ¨É½þÉEòÉä¶É: {ÉÉiÉÖ VÉRÂóPɪÉÖMÉÆ SÉ ¨Éä** MÉxvÉÉxÉxnùºiÉÖ ¨Éä {ÉÚ´ÉÈ ÊSÉpÚù{ÉÉxÉxnù nùÊIÉhÉÆ*xÉÉlÉÉxÉxÉnùºiÉÖ ¨Éä {ɶSÉÉiÉ ʴɨɱÉÉxÉxnÆ =kÉ®äú** ʴɨɶÉÉÇxÉxnùºiÉlÉÉMxÉäªÉÉÆ xÉè@ñiªÉÉÆ ÊºÉrùªÉÉäÊMÉxÉÓ* +Éi¨ÉÉxÉxnùºiÉÖ ´ÉɪɴªÉÉÆ <ǶÉÉxªÉÉÆ <Ç·É®úÉä%´ÉiÉÖ** {É®ú¨Éäι`ö MÉÖ¯û: {ÉÉiÉÖ >ðv´Éæ ¨ÉÉÆ {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ* {ÉÞl´ªÉÉÆ ºÉ´ÉÇiÉ: {ÉÉiÉÖ {É®ú¨ÉMÉÖ¯û ®úÒ·É®ú:** VɱÉä ºlɱÉä SÉ {ÉÉiÉɱÉäʺÉÀ´ªÉÉQÉÉÊnùVÉä ¦ÉªÉä*¦ÉªÉä¹´ÉxªÉä¹ÉÖ ºÉ´ÉÇjÉ ¸ÉÒMÉÖ¯û:{ÉÉiÉÖ ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ** <ÊiÉnÆù Eò´ÉSÉÆ näùÊ´É ºÉ´ÉÇ EòÉ±É ºÉÖJÉɴɽÆþ* ªÉ: {É`äöiÉ ¦ÉÊHò¦ÉÉ´ÉäxÉ ºÉ ±É¦ÉänùÂMÉÖ¯û´ÉÆ {ÉnÆù** {ÉÚVÉɹ]õ¨ªÉÉÆ SÉiÉÖnùǶªÉÉÆ ºÉÆGòxiÉÉè ʴɹÉÖªÉÉäiÉÇlÉÉ*MÉÖ¯ûÆ ºÉ¨{ÉÚVªÉ Ê´ÉÊvÉ´ÉiÉ Eò´ÉSÉÆ ªÉ: {É`äözÉ®ú:** iɺªÉ ¶ÉÒQÉähÉ ÊºÉnÂùvªÉÎxiÉ xɨɴÉ: ºÉ{iÉEòÉä]õªÉ:* ºÉÚªÉÇOɽþhÉä ¨É½þÉxÉtÉÆ xÉÉʦɨÉÉjÉ VɱÉäºlÉ<iÉ:** º{ɶÉÉÇÊnù ¨ÉÉäIÉ{ɪÉÇxiÉÆ VÉ{ÉäiEò´ÉSɨÉÖkɨÉÆ* iÉnùxiÉä ¨É½þÉ{ÉÚVÉÉÆ EÞòi´ÉÉ ºÉÉvÉEò ºÉkɨÉ:** ¨ÉxjÉʺÉËrù±É¦ÉäiÉ ¶ÉÒQÉÆ MÉÖ¯û®úÉVÉ |ɺÉÉnùiÉ:* ÊxÉiªÉÆ {É`öÊiÉ ªÉÉä vÉÒ¨ÉÉxÉ ÊjÉEòɱÉÆ |ɪÉixÉiÉ: ¶ÉÖÊSÉ:** iɺªÉ nù¶ÉÇxÉ ¨ÉÉjÉähÉ xÉ®ú xÉɪÉÉæ ´É¶ªÉÉä ¦É´ÉäiÉÂ* ¦ÉÚVÉæ Ê´ÉʱÉJÉäiÉ Eò´ÉSÉÆ {ÉÚVÉÉÆ EÞòi´ÉÉ |ɪÉixÉiÉ:** Eòh`äö ´ÉÉ nùÊIÉhÉä ¤ÉɽþÉè ¤É¨vÉxÉÒx´ÉÉ ¨ÉiÉ:κjɪÉ:* iɺªÉɴɱÉÉäEò¨ÉÉjÉähÉ ¦ÉÚiÉ|ÉäiÉ Ê{ɶÉÉSÉEòÉ:** {ÉɱɪÉxiÉä ¨É½þɦÉÒiÉÉ: EÚò¹¨ÉÉhb÷É ®úÉIɺÉÉÊnùEòÉ:* ËEò {ÉÖxɤÉǽÖþxÉÉäHäòxÉ Eò´ÉSÉÆ ºÉ´ÉÇ EòɨÉnÆù** xÉ näùªÉÆ {É®ú ʶɹªÉ䦪ÉÉä näùªÉÆ Ê¶É¹ªÉä¦ªÉ B´É SÉ* §É¹]äõ¦ªÉ: ºÉÉvÉEäò¦ªÉÉäÊ{É xÉ nùtÉiÉ Eò´ÉSɨÉÖkɨÉÆ iɺ¨ÉÉiÉ ¦ÉHòÉªÉ Ê¶É¹ªÉÉªÉ ºÉÉvÉEòÉªÉ |ÉEòɶɪÉäiÉÂ** <ÊiÉ ¸ÉÒ¯ûpùªÉɨɱÉä <Ç·É®ú {ÉÉ´ÉÇiÉҺɨ´ÉÉnäù ¸ÉÒMÉÖ¯ûEò´ÉSÉÆ ºÉ¨{ÉÚhÉÈ 13 .

¨É½þÉMÉhÉ{ÉÊiÉ +É´É®úhÉ{ÉÚVÉÉ MÉhÉä¶É& +Éå ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ M±ÉÉé MÉÆ MÉhÉ{ÉiɪÉä ´É®ú´É®únù ºÉ´ÉÇVÉxÉÆ ¨Éä ´É¶É¨ÉÉxÉªÉ º´ÉɽþÉ * ʺÉrù±ÉI¨ÉÒ& +Éå ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ M±ÉÉé MÉÆ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¨É½þɱÉÎI¨É ´É®ú´É®únäù ¸ÉÓ Ê´É¦ÉÚiɪÉä º´ÉɽþÉ* ¸ÉÒ& +Éå ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Eò¨É±Éä Eò¨É±ÉɱɪÉä |ɺÉÒnù |ɺÉÒnù ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ +Éå ¨É½þɱÉI¨ªÉè xɨÉ&* ¸ÉÒ{ÉÊiÉ& +Éå xɨÉÉä xÉÉ®úɪÉhÉÉªÉ * ÊMÉÊ®úVÉÉ& ¿Ó ªÉÉäÊMÉÊxÉ ªÉÉäÊMÉÊxÉ ªÉÉäMÉä·ÉÊ®ú ªÉÉäMÉä·ÉÊ®ú ªÉÉäMɦɪÉÆEòÊ®ú ºÉEò±É ºlÉÉ´É®ú VÉRÂóPɨɺªÉ ¨ÉÖJÉ ¾þnùªÉÆ ¨É¨É ´É¶ÉÆ +ÉEò¹ÉÇªÉ +ÉEò¹ÉÇªÉ º´ÉɽþÉ* ÊMÉ®úVÉÉ{ÉÊiÉ& xɨÉ&ʶɴÉÉªÉ * ®úÊiÉ& <È C±ÉÓ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ®úÊiÉÊ´Étä ¨É½þɨÉÉäʽþÊxÉ EòɨÉä榃 ºÉ´ÉDZÉÉäEò´É¶ÉÆ EÖò¯û EÖò¯û º´ÉɽþÉ * ®úÊiÉ{ÉÊiÉ& C±ÉÓ xɨÉ&EòɨÉnäù´ÉÉªÉ ºÉ´ÉÇVÉxÉÊ|ɪÉÉªÉ ºÉ´ÉÇVÉxÉ ºÉƨÉÉä½þxÉÉªÉ V´É±É V´É±É |ÉV´É±É |ÉV´É±É ºÉ´ÉÇVÉxɺªÉ ¾þnùªÉÆ ¨É¨É ´É¶ÉÆ EÖò¯û EÖò¯û º´ÉɽþÉ * ¨É½þÒ& +Éå ¿Ó M±ÉÉé xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiªÉè vÉ®úhªÉè vÉ®úÊhÉvÉ®äú º´ÉɽþÉ M±ÉÉé ¿Ó +Éå * ¨É½þÒ{ÉÊiÉ: ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bå EòB<Ç±É¿Ó ºÉÉè& +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä ´É®úɽþ°ü{ÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ¦ÉÚ¦ÉÚ´Ç Éº´É&{ÉiɪÉä ºÉÉè& ºÉEò±É¿Ó Bå ¦ÉÚ{ÉÊiÉi´ÉÆ ¨Éä näùʽþ nùÉ{ÉªÉ º´ÉɽþÉ* @ñÊrù& @Æñ ¸ÉÓ ¿Ó @ñräù @ñÊrùEò®äú @ñÊrùvÉÊ®ú @ñÊrùMÉÖhÉä @ñÊrùnùÉʪÉxÉÒ @Æñ ¸ÉÓ @ñËrù näùʽþ näùʽþ º´ÉɽþÉ * +ɨÉänù& +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä +ɨÉÉänùÉªÉ +ÉxÉxnù°üÊ{ÉhÉä V´É±É V´É±É ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ ºÉ¨ÉÞÊrù& ºÉÉÆ +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ºÉ¨ÉÞrùä ºÉ¨ÉÞÊrùEò®äú ºÉ¨ÉÞÊrù¡ò±Énäù ºÉ¨ÉÞËrù EÖò¯û EÖò¯û º´ÉɽþÉ * |ɨÉÉänù: +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä |ɨÉÉänùÉªÉ {É®ú¨ÉÉxÉxnù°üÊ{ÉhÉä |ÉV´É±É |ÉV´É±É ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ 14 .एकावलि 2.

एकावलि EòÉÎxiÉ& GòÉÆ GòÓ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ EòÉÎxiÉÊ´Étä ¨É½þÉ|ÉEòÉʶÉÊxÉ Ê´É·É°üÊ{ÉÊhÉ <¹]õEòÉÏxiÉ näùʽþ ¨Éä º´ÉɽþÉ* ºÉÖ¨ÉÖJÉ& +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä ºÉÖ¨ÉÖJÉÉªÉ Ê´É·ÉÉxÉxnùEò®úÉªÉ Ê´É·ÉÆ iÉÉä¹ÉªÉ iÉÉä¹ÉªÉ º´ÉɽþÉ ¨ÉnùxÉÉ´ÉiÉÒ& ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¨ÉnùxÉÉ´ÉÊiÉ ¨É½þɨÉɪÉä VÉMÉiºÉ´ÉÈ IÉÉä¦ÉªÉ IÉÉä¦ÉªÉ ¸ÉÓ º´ÉɽþÉ* nÖù¨ÉÖJÇ É& +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä nÖù¨ÉÖJÇ ÉÉªÉ nÖù¹]õv´ÉƺÉEò®úÉªÉ ºÉ´ÉÇ ¶ÉjÉÚxÉ GòÉäÊvÉ GòÉäÊvÉ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ ¨Énùpù´ÉÉ: ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¨É½þɨÉɪÉä ¨Énùpù´Éä ºÉ´ÉǶÉjÉÖ ¨ÉnùpùÉ´ÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ¤±ÉÚÆ º´ÉɽþÉ* +Ê´ÉPxÉ: +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä +Ê´ÉPxÉÉªÉ ¨É½þɦɪɽþ®úÉªÉ ºÉ´ÉÇÊ´ÉPxÉÉxÉ ÊxÉ´ÉÉ®úªÉ ÊxÉ´ÉÉ®úªÉ º´ÉɽþÉ * pùÉÊ´ÉhÉÒ: ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ pùÉÊ´ÉhÉÒ +¨ÉÞiÉä·ÉÊ®ú `Æö ZÉÆ `Æö ´ÉÆ ºÉ´ÉDZÉÉäEò EòÊ`öxÉÆ pùÉ´ÉªÉ pùÉ´ÉªÉ ¿Ó º´ÉɽþÉ* ववघ्नकत्ताव: +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä Ê´ÉPxÉEòjÉæ ºÉ´ÉÇÊ´ÉPxÉÉxÉÉnùÉªÉ ¶ÉjÉÉäÌ´ÉPxÉÆ ºÉnùÉ EÖò¯û EÖò¯û º´ÉɽþÉ * ´ÉºÉÖvÉÉ®úÉ: ´ÉÆ ¸ÉÓ +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ´ÉºÉÖvÉ®äú ú ÊxÉiªÉEò±ªÉÉÊhÉ BÁäʽþ ÊxÉ®ú´ÉÊvÉEèò·ÉªÉÈ ´É¹ÉÇªÉ ´É¹ÉÇªÉ º´ÉɽþÉ* ¶ÉÆJÉÊxÉÊvÉ: ¶ÉÆ ¸ÉÓ +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä ¸ÉÒ¶ÉÆJÉÊxÉvɪÉä |ÉhÉiÉɦÉÒ¹]õ{ÉÚ®úEòÉªÉ BÁäʽþ ºÉ´Éê·ÉªÉÇʺÉËrù näùʽþ ¨Éä º´ÉɽþÉ * ´ÉºÉÖ¨ÉiÉÒ& ´ÉÆ ¸ÉÓ +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ´ÉºÉÖ¨ÉÊiÉ {É®ú¨ÉÉxnùnùÉʪÉÊxÉ BÁäʽþ ºÉEò±Éè·ÉªÉÇʺÉËrù näùʽþ ¨Éä º´ÉɽþÉ* {ÉnÂù¨ÉÊxÉÊvÉ: {ÉÆ ¸ÉÓ +Éå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä {ÉnÂù¨ÉÊxÉvɪÉä Ê´É·Éè·ÉªÉÇEò®úÉªÉ +ÉMÉSUôÉMÉSUô º´Éä¹]õÉlÉÉÇxÉ ºÉÉvÉªÉ º´ÉɽþÉ * 15 .

एकावलि In Śrī Vidyārṇava we find a different catur āvarti tarpaṇa for Gaṇeśa.वरवरद सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 16 .ॐ सवाहा महागणपततां तपवयालम -4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम -4 श्रीां ह्रां ्िरां .्िरां सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .गां सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .ग्िौं सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम -4 श्रीां ह्रां ्िरां .श्रीां सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम -4 श्रीां ह्रां ्िरां . as seen below:- महागणपतत ितुरावकृ त्त तपवणां (गणेश परमलशवन्त्याां) ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम -4 श्रीां ह्रां ्िरां .ह्रां सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .गणपतये सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .

ग्िौं श्त्यात्मने गदायै नमुः गदाां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .श्रीां किात्मने िक्राय नमुः िक्रां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .ह्रां त्ररगुणात्मने त्ररशूिाय नमुः त्ररशूिां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .्िरां प्राणात्मने इक्षुकामक ुव ाय नमुः इक्षुकामक ुव ां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .गां मन्त्रफिात्मने बीजपरू ाय नमुः बीजापरू ां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .एकावलि ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .श्रीां िक्रत्मने अब्जाय नमुः अब्जां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .ह्रां व्याप्त्यत्मने पाशाय नमुः पाशां तपवयालम-4 17 .सवाहा सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ---------------------------------------------------------------------Total = 80 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .

्िरां र्तात्मने उत्पिाय नमुः उत्पिां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .एकावलि ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .गां ववद्यात्मने ववषाणाय नमुः ववषाणां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां -श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां रैिो्यात्मने रत्नकिशाय नमुः रत्नकिशां तपवयालम-4 ------------------------------------------------------------------------------Total = 88 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –श्री-सदहतां श्रीपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –श्रीपतत-सदहताां चश्रयां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –चगररजा-सदहतां चगरजापततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां – चगरजापतत-सदहताां चगरजाां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –रतत-सदहतां रततपततां तपवयालम-4 18 .ग्िौं भुवनात्मने व्रीह्यग्राय नमुः वीह्यग्रां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां .

एकावलि ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां – रततपतत-सदहताां रततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –महर-सदहतां महरपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां – महरपतत-सदहताां महरां तपवयालम-4 ------------------------------------------------------------------------------------Total =64 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां ववघ्नगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां ववनायकगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां वीरगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां शूरगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 19 .

एकावलि ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां वरदगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां इभव्रगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां एकदन्त्तगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां िम्बोदरगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां क्षक्षप्रप्रसादगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां महागणपततगणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 -----------------------------------------------------------.Total =80 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –श्रीां गां ऋवद्ध-सदहतां आमोदां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 20 .

एकावलि श्रीां ह्रां ्िरां –गां श्रीां अमोद-सदहताां ऋवद्धां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –श्रीां गां समवृ द्ध-सदहतां प्रमोदां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –गां श्रीां प्रमोद-सदहताां समवृ द्धां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –श्रीां गां काकन्त्त-सदहतां सम ु ि ु ां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –गां श्रीां सुमुि-सदहताां काकन्त्तां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –्िरां गां मदनावती-सदहतां दम ु ि ुव ां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –गां ्िरां दम ु ि ुव -सदहताां मदनावतीां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –्िरां गां मदद्रवा-सदहतां अववघ्नां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –गां ्िरां अववघ्न-सदहताां मदद्रवाां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –्िरां गां द्राववणी-सदहतां चिघ्नकतावरां तपवयालम-4 21 .

Total = 96 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –ह्रां गां वसम ु ती-सदहतां शङ्ि तनचधां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –गां ह्रां शङ्ितनचध-सदहताां वसम ु तीां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –ग्िौं गां वसुधारा-सदहतां पद्मतनचधां तपवयालम-4 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –गां ग्िौं पद्मतनचध-सदहताां वसुधाराां तपवयालम-4 ------------------------------------------------------------.एकावलि ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 श्रीां ह्रां ्िरां –गां ्िरां ववघ्नकत-व ृ सदहताां द्राववणीां तपवयालम-4 -----------------------------------------------------------.Total = 4 So on a whole = 80+88+64+80+96+32+4 = 444 22 .Total = 32 ॐ श्रीां ह्रां ्िरां ग्िौं गां गणपतये वरवरद सववजनां मे वशमानय सवाहा महागणपततां तपवयालम-4 -------------------------------------------------------------.

¸ÉÒ ±ÉʱÉiÉÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ vªÉÉxÉÆ: ºlÉÚ±É vªÉÉxÉÆ: ¸ÉÒ ±ÉʱÉiÉÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ vªÉÉxÉ ¶±ÉÉäEòÉ: 1) {ÉÉ¶É +RÂóEòÖ ¶É ¤ÉÉhÉ SÉÉ{É +* +¯ûhÉÉÆ Eò¯ûhÉÉiÉ®úÎRÂóMÉiÉÉIÉÓ vÉÞiÉ{ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶É {ÉÖ¹{ɤÉÉhÉ SÉÉ{ÉÉÆ* +ÊhɨÉÉÊnùʦɮúÉ´ÉÞiÉÉÆ ¨ÉªÉÚJÉè®ú½þʨÉiªÉä´É ʴɦÉɴɪÉä ¦É´ÉÉxÉÓ** +É*=tºÉiºÉÚªÉǺɽþ»ÉɦÉÉÆ ®úHò¨ÉɱªÉɨ¤É®úÉäVV´É±ÉÉÆ* {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶Éä¹ÉÖSÉÉ{ÉÉfø¬ÉÆ ÊjÉxÉäjÉÉÆ SÉxpù¶ÉäJÉ®úÉÆ** MÉhÉä¶É-Oɽþ-xÉIÉjÉ-ªÉÉäÊMÉxÉÒ-®úÉʶɰüÊ{ÉhÉÓ* näù´ÉÓ {ÉÒ`ö¨ÉªÉÓ vªÉɪÉä ¨ÉÉiÉÞEòÉÆ ºÉÖxnù®úÓ {É®úÉÆ** 2) {ÉÉ¶É +RÂóEòÖ ¶É SÉÉ{É ¤ÉÉhÉ: +* +É®úHòɦÉÉÆ ÊjÉxÉäjÉÉÆ ¨ÉÊhɨÉEÖò]õ´ÉiÉÓ ®úixÉiÉÉ]õRÂóEò®ú¨ªÉÉÆ* ½þºiÉɤVÉè®úÉkÉ {ÉɶÉÉRÂóEÖò¶É ¨ÉnùxÉvÉxÉÖººÉɪÉEèò: ʴɺ¡Öò®úxiÉÓ** +É{ÉÒxÉÉäkÉÖRÂóMɽþÉ®úiÉ]õʴɱÉÖ`ökÉÉ®ú½þÉ®úÉäVV´É±ÉÉRÂóMÉÓ* vªÉɪÉä%¨¦ÉÉä¯û½þºlÉÉÆ +¯ûÊhɨɴɺÉxÉÉÆ <Ç·É®úÒ¨ÉÒ·É®úÉhÉÉÆ** +É*¤ÉɱÉÉEÇò¨Éhb÷±ÉɦÉɺÉÉÆ SÉiÉÖ¤ÉÉǽÖÆþ ÊjɱÉÉäSÉxÉÉÆ* {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉvÉxÉÖ¤ÉÉÇhÉÆ vÉÉ®úªÉxiÉÓ Ê¶É´ÉÉÆ ¦ÉVÉä** <*{ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉvÉxÉÖ¤ÉÉÇhÉ{ÉÉËhÉ +EòÉǪÉÖiÉ|ɦÉÉÆ* ËEò¶ÉÖEòÉƶÉÖEòÉÆ näù´ÉÓ näùʶÉEÆò ´ÉÒ®ú¨ÉɸɪÉä** <Ç*¥ÉÀº´É°üÊ{ÉhÉÓ ºÉ´ÉǨÉڱɦÉÚiÉÉÆ ¨É½äþ·É®úÓ* {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉäIÉÖ ¤ÉÉhÉÉfø¬ÉÆ {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨɽÆþ ¦ÉVÉä** =*ºÉÚªÉÇEòÉàÊ]õºÉ½þ»ÉɦÉÉÆ SÉiÉÖ¤ÉÉǽÖÆþ ÊjɱÉÉäSÉxÉÉÆ* {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉvÉxÉÖ¤ÉÉÇhÉÆ +Ét¶ÉËHò Ê´ÉÊSÉxiɪÉä** >ð*ºÉÆÊ´ÉxɨɪÉÓ iɯûhɦÉÉxÉֺɽþ»ÉEòÉÏxiÉ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶É-|É´ÉxÉEòɨÉÖEÇ ò-{É\SɤÉÉhÉÉxÉÂ* vªÉɪÉä ÊjɱÉÉäEòVÉxÉxÉÓ º´ÉEò®èúnùÇvÉÉxÉÉÆ ¸ÉÒºÉÖxnù®úÓ ¨ÉÊhɦÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉRÂóMÉÓ** @ñ*SÉiÉÖ¦ÉÖVÇ ÉÉÆ SÉxpùSÉÚb÷ÉÆ ÊjÉxÉäjÉÉÆ EÖòºÉÖ¨É|ɦÉÉÆ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉèIÉ´ÉvÉxÉÖ: |ɺÉÚxÉ-¶É®úºÉ¨ªÉÖiÉÉÆ* jÉè±ÉÉäCªÉºÉÖxnù®úÓ iÉÖªÉÉÈ ºÉ´ÉÉǦɮúhɦÉÚʹÉiÉÉÆ vªÉɪÉɨªÉ½Æþ ¨É½þÉnäù´ÉÓ MÉɪÉjÉÓ ÊjÉ{ÉÖ®úÉÎi¨ÉEòÉÆ** 23 .एकावलि 3.

एकावलि Añ* C´ÉhÉx¨É\VÉÒ®úÉfø¬ÉÆ Eò®úEòʱÉiÉEòÉ\SÉÒMÉÖhɱɺÉiÉ MÉÖ¯û¸ÉÉähÉÒʤɨ¤ÉÆ iÉxÉÖiÉ®ú{ɱÉMxÉÆ {ÉÞlÉÖEÖòSÉÆ* C´ÉhÉiEòh`öÉEò±{ÉÉÆ Eò®úEòʱÉiÉ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶É-vÉxÉÖ¶¶É®Æú ¶ÉÉähÉÆ vÉÉ¨É Îº¨ÉiɨÉÖJɨÉÖ{Éè欃 ÊjÉxɪÉxÉÆ** ±ÉÞ* र्ताां र्ताम्बराां र्तस्रकग्वभूषानुिेपनाां * पाशाङ्कुशेक्षु कोदण्ड प्रसून ववलशिां समरे ** 3) {ÉÉ¶É SÉÉ{É +RÂóEÖò¶É ¤ÉÉhÉ: +* VÉ{ÉÉ{ÉÖ¹{ÉUôɪÉÉÆ ¶ÉʶÉEò±ÉɦÉÚ¹ÉÉÆ ÊjÉxÉäjÉÉÆ Eò®èú: {ÉɶÉÆ {ÉÉèhbÅ÷vÉxÉÖ®úlÉ ºÉÞËhÉ {ÉÖ¹{ÉVɶɮúÉxÉÂ* iÉlÉÉUôɪÉÉÆ ±ÉÒ±ÉÉÆ {É®ú¨ÉʶɴÉ{ɪÉÇRÂóEòÊxɱɪÉÉÆ ¨É½þÉSÉGòºªÉÉxiÉÌ´É®úÊSÉiÉÊxÉEäòiÉÉÆ ¾þÊnù ¦ÉVÉä** 4) +RÂóEÖò¶É {ÉÉ¶É SÉÉ{É ¤ÉÉhÉ: +*EÖòRÂóEòÖ ¨É {ÉRÂóEòºÉ¨ÉɦÉÉÆ +RÂóEòÖ ¶É {ÉɶÉäIÉÖEòÉänùhb÷¶É®úÉÆ* {ÉRÂóEòVÉ ¨ÉvªÉÊxɹÉhhÉÉÆ {ÉRÂóEòä ¯û½þ±ÉÉäSÉxÉÉÆ {É®úÉÆ ´Éxnäù** 5) +RÂóEÖò¶É {ÉÉ¶É ¤ÉÉhÉ SÉÉ{É: +*ºÉÚªÉæxnÖù´ÉμxÉ¨ÉªÉ ¦Éɺ´É®ú{ÉÒ`öMÉä½þÉÆ º´ÉSUôÉMÉÞ½þÒiÉ ºÉÞÊhÉ{ÉÉ¶É ¶É®äúIÉÖSÉÉ{ÉÉÆ* ¤ÉɱÉäxnÖù¨ÉÉèʱɨɯûhÉɨ¤É®úÉfø¬ÉÆ ÊjÉxÉäjÉÉÆ ÊxÉiªÉÉÆ xɨÉÉ欃 ¨É½þiÉÓ ¨É½þxÉÒªÉ ¨ÉÚÍiÉ** 6) SÉÉ{É +RÂóEòÖ ¶É ¤ÉÉhÉ {ÉÉ¶É +* ¤ÉɱÉÉEòÉǪÉÖiÉ iÉäVɺÉÉÆ ÊjÉxɪÉxÉÉÆ ®úHòɨ¤É®úÉä±±ÉÉʺÉxÉÓ xÉÉxÉɱÉRÂóEòÞ ÊiÉ ®úÉVɨÉÉxÉ´É{ÉÖ¹ÉÉÆ ¤ÉɱÉÉäbÖ÷®úÉ]Âõ ¶ÉäJÉ®úÉÆ* ½þºiÉèÊ®úIÉÖvÉxÉÖººÉÞËhÉ ºÉ¨É¶É®Æú {ÉɶÉÆ ¨ÉÖnùÉ Ê¤É§ÉiÉÓ ¸ÉÒSÉGòκlÉiɺÉÖxnù®úÓ ÊjÉVÉMÉiÉɨÉÉvÉÉ®ú¦ÉÚiÉÉÆ º¨É®äú** 7) SÉÉ{É ¤ÉÉhÉ +RÂóEòÖ ¶É {ÉÉ¶É +* =kÉ{iɽäþ¨É¯ûÊSÉ®úÉÆ ®úÊ´ÉSÉxpù´ÉμxÉxÉäjÉÉÆ vÉxÉÖ¶¶É®úÉRÂóEòÖ ¶ÉEòɨÉ{ÉɶÉÉxÉÂ* ®ú¨ªÉè¦ÉÖVÇ ÉènùÇvÉiÉÓ Ê¶É´É¶ÉÊHò°ü{ÉÉÆ ®úÉVÉä·É®úÒ ¾þÊnù ¦ÉVÉÉ欃 vÉÞiÉäxnÖùJÉhb÷ÉÆ** 8) SÉÉ{É ¤ÉÉhÉ {ÉÉ¶É +RÂóEÖò¶É: +* {ÉÖzÉÉMÉɨ¤ÉÖVÉ-VÉÉÊiÉ-EÖòxn.´ÉEÖò±Éè: {ÉÖ¹{Éè®ú±ÉRÂóEòÉÊ®úiÉÉÆ* iÉx´ÉÒʨÉIÉÖvÉxÉÖ:|ɺÉÚxÉÊ´ÉʶÉJÉÉxÉ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÉè ʤɧÉiÉÓ** EòxªÉÉÆ |ÉÉätnùxÉxiÉ ¦ÉÉäVÉ ÊxɱɪÉä Eò±{ÉäiÉÖ®úÒªÉä ʶɴÉä* xÉÉnäù xÉÉnù¨ÉªÉä {É®úÉ{É®ú¨ÉªÉä i´ÉÉÆ ¦ÉɴɪɨªÉΨ¤ÉEòÉÆ** 24 .

एकावलि 9) SÉÉ{É {ÉÉ¶É +RÂóEÖò¶É ¤ÉÉhÉ: +*SÉiÉÖ¦ÉÖVÇ Éä SÉxpùEò±ÉÉ´ÉiÉƺÉä EÖòSÉÉäzÉiÉä EÖòRÂóEòÖ ¨É®úÉMɶÉÉähÉä* {ÉÖhbÅ÷äIÉÖ{ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶É{ÉÖ¹{ɤÉÉhÉ ½þºiÉä xɨɺiÉä VÉMÉnäùEò ¨ÉÉiÉ:** +É*VÉ{ÉÉEÖòºÉÖº¨É¦ÉɺÉÖ®úÉÆ ÊjÉEòÉähÉjɪÉxiÉ®úÉ±É ÊxÉ´ÉÉʺÉxÉÓ ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÓ ºÉäxnÖùEòÉÆ* Eò®úɨ¤ÉÖVÉSÉiÉÖ¹]õªÉÉÆ ¨ÉvÉÖ®úSÉÉ{É-{ÉɶÉÉRÂóEÖò¶É-|ɺÉÚxɶɮ¶ÉÉäʦÉxÉÓ ±ÉʱÉiÉ´Éä¹É¦ÉÚ¹ÉÉÆ ¦ÉVÉä** 10) {ÉÉ¶É ¤ÉÉhÉ SÉÉ{É +RÂóEÖò¶É: +*ʺÉrùʺÉrùiɯû ®úixɦÉÚʨÉEòÉ Eò±{É ´ÉÞIÉ´ÉxÉ´ÉÉÊ]õºÉÆ´ÉÞiÉä* ®úixɺÉɱɴɱɪÉäxÉ ºÉ¨ªÉÖiÉä iÉjÉ ´ÉÉÊ{ɶÉiÉEäòxÉ ºÉÆEÖò±Éä** xÉÒ{É´ÉÉÊ{Éõ¨ÉÊhɨÉhb÷{Éä ¶ÉÖ¦Éä SÉhb÷¦ÉÉxÉÖ ¶ÉʶÉEòÉäÊ]õ ¦ÉɺÉÖ®äú* {ÉɶɤÉÉhÉvÉxÉÖ®úRÂóEòÖ ¶ÉÉÎx´ÉiÉä xÉÚ{ÉÖ®úɨ¤ÉºÉÖ´ÉäÊhÉEòÉvÉ®äú** +ÉÊnùʶɴɨÉ\Uô{É\SÉEòÉä{ÉÊ®ú ¶ÉRÂóEò®úÉRÂóEò¨ÉhÉÒ{ÉÒÊ`öEòÉiÉ]äõ* EòÉÊnù½þÉÊnù¨ÉxÉÖ°üÊ{ÉhÉҨɽÆþ ¦ÉɴɪÉÉ欃 {É®únäù´ÉiÉÉÆ Ê¶É´ÉÉÆ** 11) ¤ÉÉhÉ SÉÉ{É {ÉÉ¶É +RÂóEÖò¶É +* ºÉEÖòRÂóEòÖ ¨ÉʴɱÉä{ÉxÉɨÉʱÉEòSÉÖΨ¤ÉEòºiÉÚÊ®úEòÉÆ* ºÉ¨Éxnù½þʺÉiÉäIÉhÉÉÆ ºÉ¶É®úSÉÉ{É {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÉÆ** +¶Éä¹ÉVÉxɨÉÉäʽþxÉÓ +¯ûhɨÉɱªÉ¦ÉÚ¹Éɨ¤É®úÉÆ* VÉ{ÉÉEÖòºÉ֨ɦÉɺÉÖ®úÉÆ VÉ{ÉÊ´ÉvÉÉè º¨É®äúnùΨ¤ÉEòÉÆ** +É* vªÉɪÉä EòɨÉä·É®úÉRÂóEòºlÉÉÆ EÖò¯ûÊ´Éxnù¨ÉÊhÉ|ɦÉÉÆ* ¶ÉÉähÉɨ¤É®ú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉÒxÉʴɦÉÚʹÉiÉÉÆ** ºÉÉèxnùªÉǶÉä´ÉËvÉ ºÉä¹ÉÖSÉÉ{É{ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÉäVV´É±ÉÉÆ* º´É¦ÉÉʦɮúÊhɨÉÉtÉʦɺÉæ´ªÉÉÆ ºÉ´ÉÇÊxɪÉÉʨÉEòÉÆ** ºÉ´ÉDZÉÉäEèòEò VÉxÉxÉÓ º¨Éä®úɺªÉÉÆ ±ÉʱÉiÉÉΨ¤ÉEòÉÆ** <* {ÉÖ¹{ɤÉÉhÉÆ SÉ {ÉÖhbÅ÷äIÉÖ{ÉɶÉÆ SÉè´ÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÆ Eò®èú:* ¦ÉÚʹÉiÉÉÆ {ÉÖ¹{ÉVÉɱÉè¶SÉ iÉÖªÉÉǨ¤ÉÉÆ ºÉ´ÉÇnùÉ ¦ÉVÉä** 12) +RÂóEÖò¶É SÉÉ{É {ÉÉ¶É ¤ÉÉhÉ +* ®úHòɨ¦ÉÉäÊxÉÊvɨÉvªÉºlÉ Eò±{ÉiÉ°ütÉxÉÉxiÉ®ä ú¨Éhb÷{Éä* vªÉɪÉäiÉÂ-®úixɨɪÉÆ iÉnùxiÉ:iÉäVÉÉäʦɮúɨÉÆ ¨É½þiÉÂ* iÉκ¨ÉxÉ ÊSÉxiÉªÉ ¸ÉÒÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÓ ´ÉävÉÉä½þÊ®újªÉ¨¤ÉEèò: ´ÉxtÉÆ +RÂóEòÖ ¶ÉSÉÉ{É-{ÉɶÉ-Ê´ÉʶÉJÉÉxÉ nùÉä̦ɨÉÖnÇ ùÉʤɧÉiÉÓ** 25 .

एकावलि 13) ¤ÉÉhÉ SÉÉ{É {ÉÉ¶É +RÂóEÖò¶É: +*±ÉÉäʽþiÉÉÆ ±ÉʱÉiÉ-¤ÉÉhÉ-SÉÉ{É-{ÉɶÉ-ºÉÞÊhÉEò®èú:* nùvÉÉxÉÉÆ EòɨɮúÉVÉÉRÂóEäò ªÉÎxjÉiÉÉÆ ¨ÉÖÊnùiÉÉÆ º¨É®äú** 14) SÉÉ{É ¤ÉÉhÉ: +* +ÊiɨÉvÉÖ®úSÉÉ{É ½þºiÉÉÆ +{ÉÊ®úʨÉiɤÉÉhÉ ºÉÉè®ú¦ªÉÉÆ* +¯ûhÉɨÉÊiɶɪÉEò¯ûhÉÉÆ +ʦÉxÉ´ÉEÖò±ÉºÉÖxnù®úÓ ´Éxnäù** 15) ¤ÉÉhÉ SÉÉ{É: +*ºÉxvÉÉªÉ ºÉÖ¨ÉxÉÉä ¤ÉÉhÉÉxÉ Eò¹ÉÇiÉÓ BäIÉ´ÉÆ vÉxÉÖ:* VÉMÉVVÉèjÉÓ VÉ{ÉÉ®úHòÉÆ näù´ÉÓ ´ÉhÉǨɪÉÓ ¦ÉVÉä** 16) +ɪÉÖvÉÉ¦É´É +*¦ÉÚ´É䶨ÉMÉÊjÉ´ÉÞkɹÉÉäb÷¶ÉxÉÉMɶÉGò ÊnùMªÉÖM¨É´Éº´ÉxɱÉEòÉähÉMÉʤÉxnÖù¨ÉvªÉä* ʺÉÀɺÉxÉÉä{ÉÊ®úMÉiÉiÉÉ®úEò{ÉÒ`ö¨ÉvªÉä |ÉÉäi¡Öò±±É{ÉnÂù¨ÉÊxɱɪÉÉÆ ÊjÉ{ÉÖ®úÉÆ ¦ÉVÉä%½Æþ** +É*¸ÉÒÊ´ÉtÉÆ {ÉÊ®ú{ÉÚhÉǨÉä¯ûʶÉJÉ®äú ʤÉxnÖùÊjÉEòÉäxÉÉäVV´É±Éä* ´ÉÉMÉÒ¶ÉÒ¶É ®ú¨Éä¶É ¯ûpùSÉ®úhɨÉ\UäôʶɴÉÉEòÉ®úEäò** EòɨÉÉIÉÓ Eò¯ûhÉÉ®úºÉɨ¤ÉÖÊxɱɪÉÉÆ EòɨÉä·É®úÉRÂóEòκlÉiÉÉÆ* EòÉxiÉÉÆ ÊSÉx¨ÉªÉEòɨÉEòÉäÊ]õ{ÉÒ`öÊxɱɪÉÉ¨É ¸ÉÒ¥ÉÀÊ´ÉtÉÆ ¦ÉVÉä** nù¶É¦ÉÖVÉ ¸ÉÒ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ vªÉÉxÉÆ SÉÉ{ÉÆ SÉäIÉ֨ɪÉÆ |ɺÉÚxÉÊ´ÉʶÉJÉÉxÉ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÉè-{ÉÖºiÉEÆò ¨ÉÉÊhÉCªÉÉIÉ»ÉVÉ´É®Æú ¨ÉÊhɨɪÉÓ ´ÉÒhÉÉÆ ºÉ®úÉäVÉuùªÉä* {ÉÉÊhɦªÉÉÆ +¦ÉªÉÆ ´É®Æú SÉ nùvÉiÉÓ ¥ÉÀÉÊnùºÉä´ªÉÉÆ {É®úÉÆ ÊºÉxnÚù®úɯûhÉ-Ê´ÉOɽþÉÆ ¦ÉMÉ´ÉiÉÓ-iÉÉÆ ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ¨ÉɸɪÉä** ¸ÉÒ ¨É½þɹÉÉäb÷¶ÉÒ vªÉÉxÉÆ ºÉ¨´ÉiÉÉÇxÉ±É EòÉäÊ]õ xÉÒ®únù ¯ûSÉÉÆ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶¨ÉɶÉÖMÉÉxÉ KÉbÂ÷MÉÆ ¨ÉÖhbÂ÷¨É¦ÉªÉÆ BäI´É®úÒ´É®Æú +¹]õÉʦɤÉÉǽÖþʦÉ:* EòɨÉä¶ÉÉxɶɴÉÉä{ÉÊ®úκlÉiÉÉÆ-ºÉnùÉ-jªÉIÉÉÆ ´É½þxiÉÓ{É®úÉÆ ¸ÉÒÊSÉxiÉɨÉÊhÉ-¤ÉÒVÉ®úÉVÉ´É{ÉÖ¹ÉÓ vªÉɪÉä ¨É½þɹÉÉäb÷¶ÉÓ** 26 .

जपाकुसम ु सच्छयां अङ्कुशां पाशां एव ि पुण्रां िापां पुष्पशरान ् त्रबभ्राणां पाखण पङ्कजैुः । बािेन्त्द ु शेिरां नेर रय शोलभ मुिाम्बुजां सव समाकार कामेशी सांकश्िष्टां हृदद भावये ॥ 3) SÉÉ{É {ÉÉ¶É ¤ÉÉhÉ +RÂóEòÖ ¶É: अद्यच्िन्त्द्र-ददवाकरारण-तनभां वामाङ्ककसथताकम्बकाां व्रारोवपत दृ्कटाक्ष कलितोल्िासां जडामकण्डतां | दोलभवुःकामक ुव -पाश-बाण-सु-सखृ ण त्रबभ्राणलमन्त्दोुःकिाां| नानाकल्प-ववराजमान-वपष ु ां कामेश्वरां भावये || --{É\SÉ¥ÉÀ¨É\Uô{ÉÉnäù ´ÉɪÉÖEòÉähÉä-¥ÉÀ <ǶÉÉxÉEòÉähÉä-ʴɹhÉÖ +MxÉäªÉEòÉähÉä-¯ûpù ÊxÉ@ñÊiÉEòÉähÉä-¨É½äþ¶É´É®úÉè ¨É\Uô¡ò±ÉEòÉEòÉ®ú-ºÉnùÉʶɴÉ. जपाकुसुम-सङ्काशां त्ररनेरां िन्त्द्रशेिरां | सखृ ण-पाशेक्षु-कोदण्ड-प्रसूनेषु धरां समरे || b.एकावलि कामेश्वर ध्यानं 1) +ɪÉÖvÉÉ¦É´É श्रीदे वीभूवषतोत्साङ्गां सान्त्द्र लसन्त्दरू रोचिषां | हकारादद मनोवावच्यां वन्त्् कामेश्वरां हरां || 2) +RÂóEÖò¶É {ÉÉ¶É SÉÉ{ɤ ÉÉhÉ: a.+É©É-+¶ÉÉäEò°ü{É ºÉ´ÉÇVɨ¦ÉxÉ {É\SɤÉÉhÉ ºÉ´ÉǺɨ¨ÉÉä½þxÉ {ÉÖhbÅ÷äIÉÖ EòÉänùhb÷ SÉÉ{ÉÉè vÉÞiÉÆ ¸ÉÒEòɨÉä·É®ú ¨É½þɦÉ]Âõ]õÉ®úEÆò iɺªÉÉRÂóEòä ʺÉxnÚù®ú´ÉhÉÉÈ ÊjÉxÉäjÉÉÆ SÉxpù®äúJÉÉʴɦÉÚʹÉiÉÉÆ º¨Éä®úɺªÉÉÆ ºÉnùªÉÉ+{ÉÉRÂóMÉʴɧɨÉÉÆ +ÊhɨÉÉÊnù ºÉ´ÉÇ-+É´É®úhÉ näù´ÉiÉÉ´ÉÞiÉÉÆ +vɺiÉ ½þºiɪÉÉä: ´ÉɨÉnùIɪÉÉä: ºÉ´ÉǴɶÉÒEò®úhÉ ´ÉèpÖù¨É-{ÉÉ¶É ºÉ´ÉǺiɨ¦ÉxÉ ®úÉè{ªÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÉè >ðv´ÉǪÉÉä: nùIÉ´ÉɨɪÉÉä: {ÉnÂù¨É-Eèò®ú´ÉEò±½þÉ®-+É©É-+¶ÉÉäEò°ü{É ºÉ´ÉÇVɨ¦ÉxÉ {É\SɤÉhÉ ºÉ´ÉǺɨ¨ÉÉä½þxÉ {ÉÖhbÅ÷äIÉÖEòÉänùhb÷SÉÉ{ÉÉè vÉÞiÉÉÆ ={Énäù¶ÉEòɱÉä ªÉÉoù¶ÉÆ MÉÖ®úÉä: ¨ÉÖJɺ´É°ü{ÉÆ iÉÉoù¶É¨Éä´É ¸ÉÒ ±ÉʱÉiÉÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòÉ {É®únäù´ÉiÉɪÉÉ: ¨ÉÖJÉÉEÞòÊiÉ º´É°ü{ÉÆ vªÉɪÉäiÉÂ* ºÉÚI¨É vªÉÉxÉÆ: +ÉtÆ EÚò]õjɪÉÊSÉxiÉxÉÆ: |ÉlɨÉÆ ´ÉÉMEÚò]Æõ: ¥ÉÀÉ @ñʹÉ: MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉÒ´ÉÉM¦É´Éä·É®úÒ ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näù´ÉiÉÉ 27 . iɺªÉ¨ÉvªÉä VÉ{ÉÉEÖòºÉ֨ɺÉÆEòɶÉÆ ÊjÉxÉäjÉÆ SÉxpù®äúJÉÉʴɦÉÚʹÉiÉÆ +vɺiɽþºiɪÉÉä: ´ÉɨÉnùIɪÉÉä: ºÉ´ÉǴɶÉÒEò®úhÉ ´ÉèpÖù¨É-{ÉÉ¶É ºÉ´ÉǺiɨ¦ÉxÉ ®úÉè{ªÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÉè >ðv´ÉǪÉÉä: nùIÉ´ÉɨɪÉÉä: {ÉnÂù¨É-Eèò®ú´É-Eò±½þÉ®ú.

ºÉEò±É¿Ó ÊxÉiªÉiÉÞ{iɶÉCiªÉè-ºÉEò±É¿Ó +xÉÉÊnù¤ÉÉävɶÉCiªÉè-ºÉEò±É¿Ó º´ÉiÉxjɶÉCiªÉè-ºÉEò±É¿Ó ÊxÉiªÉ¨É±ÉÖ{iɶÉCiªÉè-ºÉEò±É¿Ó +xÉxiɶÉCiªÉè vªÉÉxÉÆ : Eònù¨¤É´ÉxɨÉvªÉMÉÉÆ EòxÉEò¨Éhb÷{ÉÉxiÉ:κlÉiÉÉÆ ¹Éb÷¨¤ÉÖ¯û½þ´ÉÉʺÉxÉÓ +¨É®úʺÉrùºÉÉènùÉʨÉxÉÓ* 28 .½þºÉEò½þ±É¿Ó pùÓ ºÉ´ÉÇÊ´ÉpùÉ´ÉhÉ ¤ÉÉhÉɪɽþºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ +ÉEò¹ÉÇhÉ ¤ÉÉhÉɪÉ.½þºÉEò½þ±É¿Ó pùÉÆ pùÓ C±ÉÓ ¤±ÉÚÆ ºÉ: ºÉ´ÉǤÉÉhÉä¦ªÉ vªÉÉxÉÆ: ¤ÉɱÉÉEÇòEòÉäÊ]õ ¯ûÊSÉ®úÉÆ º¡òÊ]õEòÉIɨÉɱÉÉÆ EòÉänùhbÆ÷ <IÉÖVÉÊxÉiÉÆ º¨É®ú{ É\SɤÉÉhÉÉxÉÂ* Ê´ÉtÉÆ SÉ ½þºiÉ Eò¨É±Éè: nùvÉiÉÓ ÊjÉxÉäjÉÉÆ vªÉɪÉä ºÉ¨ÉºiÉVÉxÉxÉÓ xÉ´ÉSÉxpùSÉÚb÷ÉÆ** {ÉÚ´ÉÇ´ÉÉM¦É´ÉEÚò]õ xÉÉnùÉÎi¨ÉEòÉ Ê¶ÉJÉÉ +xÉɽþiÉSÉGÆò º{ÉÞ¶ÉxiÉÒ.एकावलि EÆò ¤ÉÒVÉÆ ¿Ó ¶ÉÊHò: B<Ç±É EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ ´ÉÉEÂò ʺÉnÂùvªÉè VÉ{Éä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: xªÉɺÉ: EòB<Ç±É¿Ó ¥ÉÀ´ÉOÉÚÊ{ÉhªÉè. vªÉÉxÉÆ: ¶ÉÖC±ÉÉÆ º´ÉUôʴɱÉä{ɨÉɱªÉ´ÉºÉxÉÉÆ ¶ÉÒiÉÉƶÉÖJÉhb÷ÉäVV´É±ÉÉÆ* ´ªÉÉJªÉɨÉIÉMÉÖhÉÆ ºÉÖvÉÉfø¬Eò±É¶ÉÆ Ê´ÉtÉÆ SÉ ½þºiÉɨ¤ÉÖVÉè:** ʤɧÉÉhÉÉÆ Eò¨É±ÉɺÉxÉÉÆ EÖòSÉxÉiÉÉÆ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ ºÉÖκ¨ÉiÉÉÆ* ´Éxnäù ´ÉÉÎM´É¦É´É|ÉnùÉÆ ÊjÉxɪÉxÉÉÆ ºÉÉè¦ÉÉMªÉºÉÆ{ÉiEò®úÓ** ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®äú ´ÉμxɨÉhb÷±ÉÆ ¨ÉvªÉɼxÉÉEÇòEòÉäÊ]õ {ÉÖ\VɺɨÉÆ ´ÉÉM¦É´ÉEÚò]Æõ vªÉÉi´ÉÉ '"EòB<DZɿÓ'' (16 ´ÉÉ®Æú VÉ{ÉäiÉÂ) ÊuùiÉɪÉÆ EòɨÉEÚò]Æõ:ºÉ¨¨ÉÉä½þxÉ @ñʹÉ: MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉÒEòɨÉä·É®úÒ ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näù´ÉiÉÉ ½Æþ ¤ÉÒVÉÆ ¿Ó ¶ÉÊHò: ºÉEò½þ±É EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ ´É¶ÉÒEò®úhÉ ÊºÉnÂùvªÉè VÉ{Éä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: xªÉɺÉ: ½þºÉEò½þ±É¿Ó pùÉÆ ºÉÆIÉÉä¦ÉhÉ ¤ÉÉhÉɪÉ.EòB<Ç±É¿Ó Ê´É¹hÉÖ´ÉOÉÚÊ{ÉhªÉè-EòB<Ç±É¿Ó ¯ûpù´ÉOÉÚÊ{ÉhªÉèEòB<Ç±É¿Ó {É®ú´ÉOÉÚÊ{ÉhªÉè-EòB<Ç±É¿Ó Ê¶É´É´ÉOÉÚÊ{ÉhªÉè-EòB<Ç±É¿Ó +ÊJɱɴÉOÉÚÊ{ÉhªÉè. iÉjÉ ºÉÚªÉǨÉhb÷±ÉÆ <xpùMÉÉä{ÉEòÉäÊ]õ|ɦÉÆ EòɨÉEÚò]Æõ vªÉÉi´ÉÉ ''½þºÉEò½þ±É¿Ó'' (16´ÉÉ®Æú VÉ{ÉäiÉÂ) iÉÞiÉÒªÉÆ EòɨÉEÚò]Æõ: Ê¶É´É @ñʹÉ: {ÉÆÊHò Uôxnù: ¸ÉÒ+ÉÊnù¶ÉÊHò ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®Òú näù´ÉiÉÉ ºÉÆ ¤ÉÒVÉÆ ¿Ó ¶ÉÊHò: Eò±É EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ SÉiÉÖ´ÉÇMÉÇ ÊºÉnÂùvªÉè VÉ{Éä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: xªÉɺÉ: ºÉEò±É¿Ó ºÉ´ÉÇYɶÉCiªÉè.½þºÉEò½þ±É¿Ó ¤±ÉÚÆ ´É¶ÉÒEò®úhÉ ¤ÉÉhÉɪɽþºÉEò½þ±É¿Ó ºÉ: =x¨ÉÉnùxÉ ¤ÉÉhÉɪÉ.

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एकावलि |É´ÉäʶÉiɨÉÖJÉÒ Ê¤ÉºÉiÉxiÉÖ iÉxÉҪɺÉÒ |ɺÉÖ{iɦÉÖVÉMÉÒÊ¨É´É ¶ÉR óJÉ´ÉiÉ ºÉÉvÉÇ-ÊjɴɱɪÉÉEòÉ®úÉ Ê´ÉtÖ±±ÉiÉÉä{ɨÉÉ Ê´É·É-ºÉÞ¹]õ¬ÉÊnùÊ´ÉvÉÉʪÉÊxÉ º´ÉªÉ¨¦ÉÚ Ê±ÉRÂóMÉ´Éäι]õÊxÉ Ê¤ÉxnÖù-xÉÉnù ʶɴɶÉÊHòº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ-°ü{ÉÉxiÉ®ú¦ÉÚiÉÉ EÖò±ÉEÖòhb÷ʱÉxÉÒ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ¦ÉÚiÉiÉk´ÉÉÊvɹ`öÉjÉÒ £áò ¨ÉÉiÉÞEòÉJªÉÉ näù´ÉiÉÉ Ê¶É´É¶ÉÊHò¦ÉänùäxÉ ÊuùMÉÖÊhÉiÉ+¹]õ˴ɶÉÊiÉ-iÉi´ÉÉi¨ÉEòÉʦÉ: |ÉvÉÉxÉ näù´ÉiÉÉÆ¶É ®úζ¨É¦ÉÚiÉÉʦÉ: ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÉÊnù SɪÉÉÇxÉÉlɨÉʪÉ-SɪÉÉÇxÉÉlɨɪÉÉxiÉ +É´É®úhÉnäù´ÉiÉÉʦÉ:+É´ÉÞiÉ ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ xÉ´ÉÉi¨Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ xÉ´ÉÉi¨Éä·É®úÒ {É®úɨ¤ÉÉ -iÉjÉè´É {ÉnÂù¨Éä +κlÉMÉiÉÉ-vÉÚ©É´ÉhÉÉÇ {É\SÉ´ÉnùxÉÉ-´É®únùÉÊn-+É´ÉÞiÉÉ ºÉÉÊEòxÉÒ -iÉjÉè´É {ÉnÂù¨Éä EÖòRÂóEòÖ ¨É´ÉhÉÉ⠴ɱ±É¦ÉɶÉÊHòªÉÖHòÉä MÉhÉà¶ÉÆ vªÉɪÉäiÉ º´ÉÉÊvɹ`öÉxÉÆ: iÉnÚùv´ÉÈ Ê±ÉRÂóMɺlÉÉxÉä º´ÉÉÊvɹ`öÉxÉÉJªÉ ¹ÉbÂ÷nù±ÉÆ iÉiEòÌhÉEòɪÉÉÆ VɱÉiÉk´ÉÉÊvɹ`öÉjÉÒ ¿Ó EÖòhb÷±ªÉÉJªÉÉ näù´ÉiÉÉ Ê¶É´É¶ÉÊHò¦ÉänùäxÉ ÊuùMÉÖÊhÉiÉ ¹ÉÏbÂ÷´É¶ÉÊiÉ iÉi´ÉÉi¨ÉEòÉʦÉ: |ÉvÉÉxÉ näù´ÉiÉÉÆ¶É ®úζ¨É¦ÉÚiÉÉʦÉ: ±ÉÉä{ÉɨÉÖpùɨɪÉÒ ±ÉÉä{ÉɨÉÖpùɨɪÉÉÊnù ¨Éɽäþ·É®úÒ ¨Éɽäþ·É®úÉxiÉ +É´É®úhÉ näù´ÉiÉÉʦÉ: +É´ÉÞiÉ-¼º±¤±ÉÚÆ uùÒ{Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ uùÒ{Éä·É®úÒ {É®úɨ¤ÉÉ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ¨ÉänùÉäMÉiÉÉ {ÉÒiÉ´ÉhÉÉÇ SÉiÉÖ´ÉÇnùxÉÉ ¤ÉÎxvÉxªÉÉÊnù +É´ÉÞiÉÉ EòÉÊEòxÉÒ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ʺÉxnÚù®ú´ÉhÉÉ⠺ɮúº´ÉiÉÒªÉÖHòÉä ¥ÉÀÉhÉÆ vªÉɪÉäiÉ ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®úEÆò: iÉnÚùv´ÉÈ xÉÉʦɺlÉÉxÉä ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®úEòÉJªÉ nù¶Énù±ÉÆ iÉiEòÌhÉEòɪÉÉÆ +ÎMxÉiÉk´ÉÉÊvɹ`öÉjÉÒ ¸ÉÓ ÊGòªÉÉJªÉÉ näù´ÉiÉÉ Ê¶É´É¶ÉÊHò¦ÉänùäxÉ ÊuùMÉÖÊhÉiÉ BEòËjɶÉiÉ iÉi´ÉÉi¨ÉEòÉʦÉ: |ÉvÉÉxÉ näù´ÉiÉÉÆ¶É ®úζ¨É¦ÉÚiÉÉʦÉ: EòÉè¨ÉÉ®úÒ EòÉè¨ÉÉ®úÉÊnù ¤ÉÒVÉÉEò̹ÉhÉÒ ¤ÉÒVÉÉEò¹ÉÇhÉÉxiÉ +É´É®úhÉ näù´ÉiÉÉʦÉ: +É´ÉÞiÉÉ I®úÉé ºÉÆ´ÉiÉæ·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ºÉÆ´ÉiÉæ·É®úÒ {É®úɨ¤ÉÉ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ¨ÉÉƺÉMÉiÉÉ ®úHò´ÉhÉÉÇ ÊjÉ´ÉnùxÉÉ b÷ɨɪÉÉÇÊnù +É´ÉÞiÉÉ ±ÉÉÊEòxÉÒ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä xÉұɴÉhÉÉ⠨ɽþɱÉI¨ÉÒªÉÖHòÉä ʴɹhÉÖÆ vªÉɪÉäiÉ +xÉɽþiÉÆ: iÉnÚùv´ÉÈ ¾þnùªÉºlÉÉxÉä +xÉɽþiÉÉJªÉ uùÉnù¶Énù±ÉÆ iÉiEòÌhÉEòɪÉÉÆ ´ÉɪÉÖiÉk´ÉÉÊvɹ`öÉjÉÒ Bá YÉÉxÉÉJªÉÉ näù´ÉiÉÉ Ê¶É´É¶ÉÊHò¦ÉänùäxÉ ÊuùMÉÖÊhÉiÉ ºÉ{iÉ˴ɶÉÊiÉ iÉi´ÉÉi¨ÉEòÉʦÉ: |ÉvÉÉxÉ näù´ÉiÉÉÆ¶É ®úζ¨É¦ÉÚiÉÉʦÉ: +Éi¨ÉÉEò̹ÉhÉÒ +Éi¨ÉÉEò¹ÉÇhÉÉÊnù ºÉ´ÉǺÉÆ{ÉÊkÉ{ÉÚ®úhÉÒ ºÉ´ÉǺÉÆ{ÉÊkÉ{ÉÚ®úhÉÉxiÉ +É´É®úhÉ näù´ÉiÉÉʦÉ: +É´ÉÞiÉÉ ¼ºÉJ£åò ½ÆþºÉä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ½ÆþºÉä·É®úÒ {É®úɨ¤ÉÉ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ®úHòÊxɹ`öÉ ¶ªÉɨÉɦÉÉ Êuù´ÉnùxÉÉ Eòɳý®úÉjªÉÉÊnù +É´ÉÞiÉÉ ®úÉÊEòxÉÒ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ½äþ¨É´ÉhÉÉâ {ÉÉ´ÉÇiÉÒªÉÖHòÉä ʶɴÉÆ vªÉɪÉäiÉ ʴɶÉÖÊrù: iÉnÚùv´ÉÈ Eòh`öºlÉÉxÉä ʴɶÉÖrùÉJªÉ ¹ÉÉäb÷¶Énù±ÉÆ iÉiEòÌhÉEòɪÉÉÆ xɦÉÉäiÉk´ÉÉÊvɹ`öÉjÉÒ ¿ÚÆ <SUôÉJªÉÉ näù´ÉiÉÉ Ê¶É´É¶ÉÊHò¦ÉänùäxÉ ÊuùMÉÖÊhÉiÉ ¹ÉÏbÂ÷jɶÉiÉ iÉi´ÉÉi¨ÉEòÉʦÉ: |ÉvÉÉxÉ näù´ÉiÉÉÆ¶É ®úζ¨É¦ÉÚiÉÉʦÉ: ºÉ´ÉǨÉxjɨɪÉÒ ºÉ´ÉǨÉxjɨɪÉÉÊnù EòÉèʱÉxÉÒ 30 .

एकावलि EòÉè±ÉÉxiÉ +É´É®úhÉ näù´ÉiÉÉʦÉ: +É´ÉÞiÉÉ £åò Ê´ÉSSÉä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ Ê´ÉSSÉä·É®úÒ {É®úɨ¤ÉÉ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä i´ÉMMÉiÉÉ +É®úHò´ÉhÉÉÇ ´ÉnùxÉèEòªÉÖiÉÉ +¨ÉÞiÉÉÊnù +É´ÉÞiÉÉ b÷ÉÊEòxÉÒ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ¶ÉÖrùº¡òÊ]õEòºÉÆEòɶÉÉä |ÉÉhÉɶÉÊHòªÉÖHòÉä VÉÒ´ÉÆ vªÉɪÉäiÉ +ÉYÉÉ: iÉnÚùv´ÉÈ §ÉÚ¨ÉvªÉºlÉÉxÉä +ÉYÉÉJªÉ Êuùnù±ÉÆ iÉiEòÌhÉEòɪÉÉÆ ¨ÉxÉÉäiÉk´ÉÉÊvɹ`öÉjÉÒ Bá {É®úÉJªÉÉ näù´ÉiÉÉ Ê¶É´É¶ÉÊHò¦ÉänùäxÉ ÊuùMÉÖÊhÉiÉ uùÉËjɶÉiÉ iÉi´ÉÉi¨ÉEòÉʦÉ: |ÉvÉÉxÉ näù´ÉiÉÉÆ¶É ®úζ¨É¦ÉÚiÉÉʦÉ: ºÉ´ÉÇ®úÉäMɽþ®úSÉGòº´ÉÉʨÉxÉÒ ºÉ´ÉÇ®úÉäMɽþ®úSÉGòº´ÉɨªÉÉÊnù ¨É½þɨɽþɶɪÉÉ ¨É½þɨɽþɶɪÉÉxiÉ +É´É®úhÉnäù´ÉiÉÉʦÉ: +É´ÉÞiÉÉ Bá {É®äú·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ {É®äú¶ÉÒ {É®úɨ¤ÉÉ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ¨ÉVVÉÉMÉiÉÉ ¶ÉÖC±É´ÉhÉÉÇ ¹ÉbÂ÷´ÉxÉÉ ½ÆþºÉ´ÉiªÉÉÊnù +É´ÉÞiÉÉ ½þÉÊEòxÉÒ -iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä Ê´ÉtÖi´ÉhÉÉâ {É®úɶÉÊHòªÉÖHòÉä {É®ú¨ÉÉi¨ÉÉÆ vªÉɪÉäiÉ ºÉ½þ»ÉÉ®Æú: iÉnÚùv´ÉÈ ºÉ½þ»ÉÉ®ú nù±É{ÉnÂù¨ÉÆ +vÉÉä¨ÉÖJÉÆ ªÉÉäMɤɱÉäxÉ >ðv´ÉǨÉÖJÉÆ EÞòi´ÉÉ(ÊSÉxiɪÉäiÉ ´ÉÉ) iÉjÉè´É{ÉnÂù¨Éä ¶ÉÖC±ÉMÉiÉÉ ºÉ´ÉÇ´ÉhÉÉâ{ɶÉÉäʦÉiÉÉ ºÉ´ÉÇiÉÉä¨ÉÖJÉÒ +¨ÉÞiÉÉÊnùºÉ´ÉÇnùä´ÉiÉÉ +É´ÉÞi ÉÉ ªÉÉÊEòxÉÒ -iÉiEòÌhÉEòɪÉÉÆ SÉxpù¨Éhb÷±ÉÆ iÉjÉ +EòÉ®úÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶Éº´É®èú: ºÉʤÉxnÖùEèò: {ÉÚ´ÉÇ®äúJÉÉ EòEòÉ®úÉÊnù iÉEòÉ®úÉxiÉè:ºÉʤÉxnÖùEèò: +vÉÉäʱÉÊJÉiÉè: nùÊIÉhÉ®äúJÉÉ lÉEòÉ®úÉÊnù ºÉEòÉ®úÉxiÉè:ºÉʤÉxnÖùEèò: >ðv´ÉÉæv´ÉÈ Ê±ÉÊJÉiÉè: =nùOÉäJÉÉ iÉnùxiɦÉÉÇMÉä <ǶÉÉxÉEòÉähÉä ½þEòÉ®ú ºÉʤÉxnÖùEò:+ÉMxÉäªÉEòÉähÉä ³ýEòÉ®ú ºÉʤÉxnÖùEò:{ÉζSɨÉEòÉähÉä IÉEòÉ®ú ºÉʤÉxnÖùEò: iÉx¨ÉvªÉä ´ÉɨÉä ¸ÉÒSÉGò¨É½þÉxÉMÉ®úºÉ©ÉÉYÉÒ ®úHò{ÉÉnÆù ¸ÉÒSÉGò¨É½þÉxÉMÉ®ºÉ©ÉÉ]Âõ ¶ÉÖC±É{ÉÉnÆù ªÉÖHÆò ®úHò¨ÉɱªÉɨ¤É®úvÉ®úÉÆ ºÉ´ÉÉǦɮúhɦÉÚʹÉiÉÉÆ ¸ÉÒ +¨ÉÖEòɨ¤ÉÉÆ iÉɨÉvÉÒxÉ ´ÉɨÉÉRÂóEòÆ {ÉÚhÉÇSÉxpù|ɦÉÆ ·ÉäiÉ ¨ÉɱªÉɦɮúhÉvÉ®Æú ¨ÉÖHòÉnùÉ¨É Ê´É¦ÉÚ¹ÉÉfø¬Æ ´É®úɦɪÉEò®Æú |ɺÉzÉ ´ÉnùxÉÆ ¶ÉÉxiÉÆ ºÉ´ÉÇnùä´ÉiÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÆ ¸ÉÒ+¨ÉÖEòÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒMÉÖ¯ûÆ vªÉɪÉäiÉ ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù ¥ÉÀ®úxwÉÉxiÉÆ ºÉEò±É Eò¨É±É EòÌhÉEòɨÉvªÉnäù¶ÉÆ ÊxÉ̦Ét ºÉÖ¹ÉÚ¨xÉÉJªÉ xÉÉb÷Ò vɨÉxÉÒÊ®ú´É ºÉ®úxwÉMɦÉÉÇ ºÉÚI¨ÉiɨÉÉ |É´ÉÞkÉÉ iÉuùɨÉnùÊIÉhɪÉÉä: <b÷ÉÊ{ÉRÂóMɱÉÉ xÉÉb÷Ò* BiÉiºÉ´ÉÈ Ê´ÉÊSÉxiªÉ EÖò±ÉEÖòhb÷ʱÉxÉÓ ''½ÖþÆ º´ÉɽþÉ'' ( ½ÆþºÉ: º´ÉɽþÉ * $ º´ÉɽþÉ) ºÉSÉäiɺÉÉÆ Ê´ÉvÉÉªÉ º´ÉäSUôÉnùhb÷ɽþiÉÉÆ EÞòi´ÉÉäilÉÉªÉ EÖò±É{ÉlÉäxÉ SÉGò¹É]ÂõEòÆ Ê¦ÉxnùiÉÓ ¥ÉÀ®úxwÉÆ xÉÒi´ÉÉ iÉäVÉÉä¨ÉªÉäxÉ ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù±ÉIÉhÉäxÉ {É®ú¨ÉʶɴÉäxÉèCªÉ¨ÉÉ{Ét iɪÉÉä: ºÉɨɮúºªÉäxÉ +ÉxÉxnù¨ÉªÉäxÉ +Éi¨ÉÉxÉÆ Ê´ÉÊSÉxiªÉ {É®ú¥ÉÀɨÉÞiÉÆ iÉÉÆ {ÉɪÉʪÉi´ÉÉ iÉi{ÉÉxÉäxÉ ¨ÉkÉÒ¦ÉÚiÉÉÆ iÉäxÉè´ÉɨÉÞiÉäxÉ Êuùnù³ýSÉGòuùÉ®úÉ Ê´ÉMÉʳýiÉäxÉ b÷ÉÊEòxªÉÉÊnù ¨Éhb÷±ÉÉÊxÉ +É{±ÉɴɪÉxiÉÒ {ÉÖxÉ: ¹É]Âõ SÉGò ¦ÉänùxÉ ¨ÉÉMÉæhÉè´É {É®úÉ´ÉiªÉÇ EÖò±ÉEÚòhbä÷ ªÉlÉÉ{ÉÚ´ÉÈ +´ÉºlÉÉ{ɪÉäiÉÂ* BiÉiÉ EÖòhb÷ʱÉxÉÒ vªÉÉxÉÆ ={ÉɺÉxÉɪÉÉÆ ÊxÉiªÉ¨ÉRÂóMÉÆ* 31 .

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रकश्म मािा सतोरां असांख्यात महुः पुञ्जवपञ्जररकृत ववग्रहां । रकश्ममािाां अहां वन्त्दे महात्ररपरु सन्त् ु दररां।। अक्षस्र्कुकण्डकाहसताां शुद्धसफदटकसकन्त्नभाां। सववववद्यामयीां वन्त्दे गायरीां वेद मातरां ।। आरूढ ऐरावतां श्यामां सहस्र नयनोज्जज्जविां। सफुरत ् वज्रप्रहरणां न मीन्त्द्रां अभयङ्करां ।। र्ताम्बरां र्तभूषां र्तां र्ताब्ज तनष्फुरां । वामाशक्त समाकश्िष्टां घखृ णसूयम व हां भजे ।। ओांकार वाच्यां उच्िाण्ड िण्डाांशु सदृशप्रभां। वासुदेवालभदां ब्रह्मां ववश्वगभवमुपाश्रये ।। दे वीां तुररय गायरीां तुररयातीत पदाश्रयाां । परोरजुः प्रकाशात्मा चिततरूपमहमाश्रये।। िक्षुसतेजोमयां पुष्प कन्त्दक ु ां त्रबभ्रतीां करैुः। र प्य लसांहासनारूढाां दे वीां िक्षुष्मतीां भजे।। धत ृ कल्हार मािालभुः कन्त्यालभुः पररवाररतां। कसथतलमक्षुरथे ववश्वावसांु गन्त्धववमाश्रये ।। आत्त सज्जज धनुबावण टङ्क-एणां वष ृ भकसथतां। अन्त्नपूणाव समाकश्िष्टां पचथषद्रद्र ु माश्रये ।। 33 .एकावलि 4.

एकावलि न का लसम्हसनारूढाां(शा्य)शा्तदशवनदे वताां। जिापच्छमनीां वन्त्दे ताराां वाररचधमेिकाां ।। समसत दरु रत व्याचध सांघ ध्वांस पटरयसे । अच्युतानन्त्त गोववन्त्द नाम्ने धाम्ने नमो नमुः।। लसन्त्दरू ाभां िक्ष्मम्यालिङ्गां ववकटां कुञ्जराननां। महागणपततां दे वां भ्त ववघ्नघ्नमाश्रये।। िन्त्द्राभुः िन्त्द्रमुकुट: कुठारमग ृ धारकुः । वराभय धरुः शांभु पञ्िाक्षरमयो वपुःु ।। ऊध्वावधोमुिपद्मान्त्तकसथतां मत्ृ युञ्जयेश्वरां । वन्त्दे मत्ृ योुः प्रहतावरां िन्त्द्रकोदट सुशीतिां ।। ितुराननां अम्भोजतनषण्णां भारती सिां । अक्षमािावराभीतत कमण्डिुधरां नुमुः ।। पञ्िाशत मातक ृ ाणणुः आरब्धाखििदे हया। समसत ववद्यारूवपणीां ध्यायेऽहां मातक ृ ाकम्बकाां।। श्रीदे वी भवू षतोत्साङ्गां सान्त्द्र लसन्त्दरू रोचिषां। हकारदद मनोवावच्यां वन्त्दे कामेश्वरां हरां ।। अनेक कोदट मातङ्ग-तुरङ्ग-रथ-पङ्क्तलभ: । सेववताां अरणाकाराां वन्त्दे सांपत्सरसवतीां।। सकृ ष्ट कसथततभ्याां सांहृत्याऽनाख्या भासयाचश्रताां। शूि कन्त्था कपािाढयाां िण्डयोगीश्वररां नुमुः ।। 34 .

एकावलि पण ू ावहन्त्तासवरूपाय तसमै परमशम्भवे। आनन्त्द ताण्डवोद्दण्ड पकण्डताय नमो नमुः ।। अकिांक शशाांकाभा त्र्यक्षा िन्त्द्रकिावती। मद्र ु ा पस ु त िसद्बाहुुः पातम ु ाां परमा किा ।। पाशाांकुशाक्षविया ववद्या पुसतक धाररणीां। नववषाव भजे बािाां दाडडमी कुसुम प्रभाां।। दारर्य शैिदम्भोलि क्षीरान्त्नपूणद व वववका। अन्त्नपूणाव परानन्त्दकररणी पातु नुः सदा।। बद्ध्वा पाशेनाांकुशेन कृष्यमाणा सवसाध्यकां। घ्नकन्त्तां वेरण े वल्कास् ृ पाखणां अश्वासनाां भजे।। तेजोमयमहाववद्याां शेिराकञ्ितमसतकाां। र्ताां ितभ ु ज ुव ाां वन्त्दे श्रीववद्या गर ु पादक ु ाां ।। पुण्रेक्षुकोदण्डाां पुष्पेषु सांसण ृ ीगुणां। र्ताां कामेश्वराांकसथाां वन्त्दे परदे वताां।। श्यामिानीिवसनाां शङ्िकुण्डिधाररणीां। ध्यायाम्यभीष्ट मातङ्गी वश्याकषवण काररणीां ।। पुणेन्त्द ु मण्डि छाया वािा लसवद्ध प्रदातयनी। साक्षमािा सपुसतका वाग्वाददन्त्यसतु मे हृदद ।। नकुिर वज्रदन्त्तािर साध्य कजह्वादह दां लशतन। भ्त व्तत्ृ व जननी भावनीया सरसवती।। 35 .

एकावलि वन्त्दे गव व ति मकुटाां श्यामिाां शक ु ङ् ु पाखणनीां। समसत लसवद्धजननीां श्यामिा-गुरपादक ु ाम ्।। शुक वीणा िसत्पाखणां शुद्ध.ववद्यामहरमयीां। श्यामाां नीपवनान्त्तसथाां वन्त्दे सांगीतयोचगनीां।। महाणववे तनपतततां उद्धरन्त्तीां वसुन्त्धराां। महादां ष््ाां महाकायाां नमाम्यन्त् ु मत्त भैरवीां ।। सवप्ने शुभाशुभां भावव वदन्त्तीां भ्तकायवयोुः। दुःु सवप्नहाररणीां वन्त्दे वराहरां सवप्न-नातयकाां ।। मु्तकेशीां वववासनाां सवावभरणभूवषताां। सवयोतन दशवनोन्त्मुह्यत्पशुवगां नमाम्यहां ।। दे लशकाङ्तििसन्त्म लिां िड्चगनीां ि कपालिनीां । भावयालम घनच्छायाां पञ्िमी-गुरपादक ु ाां ।। हिां कपािां मस ु िां वरां पाखणषु त्रबभ्रतीां । किये कोिवदनाां नीि-वाररधरप्रभाां सववववद्यामयीां सववशक्तपीठसवरूवपणीां। श्रीपूततवदेवताां वन्त्दे श्रीकररां मुक्तदातयनीां ।। कन्त्दरे -हृदये-फािे दे लशकाङ्ति-युग-रयां। दधतीां दरप्तभष ू ाढयाां श्रीमहापादक ु ाां नम ु ुः।। इरा त्ररपुरभैरव्या सह सांहारभैरवुः।र्तालभधान योचगन्त्याुः सारसश्िावप पञ्िमुः ।। िामुण्डेतत सवसव मन्त्र पद वा्याुः परोन्त्मुधा । ववद्यालसवद्धकरर वन्त्दे िलििा-ववघ्नदे वता।। 36 .

एकावलि हसकन्त्त हलसतािापा मातङ्गी पररिाररका । वेरहसता हृदद ध्येया श्यामिा-ववघ्न दे वता।। सतकम्भतन पञ्िमीमन्त्र ववघ्नसतम्भनकाररणी। चिन्त्तनीया सदाचित्ते तद्ववद्या लसवद्धदातयतन ।। किाणवमन्त्र वाच्यातन ववघ्नघ्नातन मनीवषण । नुमससवावखण भूतातन सवव दोष तनवत्ृ तये ।। महा पद्माटवी वासैरमीलभदे वतागणैुः । सेववतामलमताां वन्त्दे िलिताां परमेश्वररां ।। या रकश्ममािा सततु तलमत्यद ु ग्राां तल्पात्समद्ध ु ृत्य जपेत्प्रभाते। सववसयलसवद्ध सपह ृ नीयमूततव ववपकत्त मु्त ववजयी ि जीयात ् ।। इतत रकश्ममािा सतोरां सांपूणं 37 .

¨ÉÎxnù®ú {ÉÚVÉÉ 4-+Æ uùÉnù¶ÉÉxiÉ ¨ÉvªÉä ®úHò¶ÉÖC±ÉÉi¨ÉEò MÉÖ¯ûSÉGäò·É®úÉªÉ xɨÉ: 4-+ÉÆ ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úEò¨É±É¨ÉvªÉà +¹]õÉàkÉ®ú ¶ÉiÉvÉÉκlÉiÉ ¨ÉÊhɺÉÊzÉ¦É Eò¨É±Éà ʺÉrù±ÉI¨ÉÒ näù´ªÉɪÉÖHòÉªÉ ¸ÉÒMÉhÉà¶ÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-<Æ ¾þiºÉ®úÉàVɨÉvªÉà SÉIÉÖ¹¨ÉiªÉÉ UôɪÉÉ näù´ªÉɪÉÖHòÉªÉ ºÉ½þ»ÉÊEò®úhÉÉªÉ xɨÉ: 4-<È अनेक कोदट बदहुः ºÉ½þ»Éकोदटयोजनववसतीणव +JÉhb÷ÉEòÉ®ú´ÉÞiªÉÉi¨ÉEò +¨ÉÞiÉɨ¦ÉÉàÊxÉvÉÉè ÊjÉ{ÉÖ®úÉMÉɪÉjªÉ¨¤ÉÉ nàù´ªÉè xɨÉ: 4-=Æ ºlÉÚ±Énäù½þÉi¨ÉEòxÉ´É®úixÉuùÒ{Éà EòɱÉɪɺÉ|ÉÉEòÉ®ितुद्ववारपािकाय ®úHòuùÉnù¶É¶ÉÊHòªÉÖHòÉªÉ uùÒ{ÉxÉÉlÉÉªÉ VÉÒ´ÉÉi¨ÉxÉà xɨÉ: 4->Æð ʱÉRÂóMÉnäù½þÉi¨ÉEò EòɱÉÉªÉºÉ काांसय |ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ xÉÉxÉÉ´ÉÞIɨɽþÉàvªÉÉxɨÉvªÉä ¸ÉҨɽþÉEòɱªÉ¨¤ÉÉ näù´ªÉÖHòÉªÉ ¸ÉҨɽþÉEòɱÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-@Æñ काांसय ताम्र |ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ºÉRÂóEò±{ÉÊ´ÉEò±{É°ü{É iÉèVɺÉÉi¨ÉEò Eò±{É´ÉÉÊ]õEòɨÉvªÉä ¨ÉvÉÖ¸ÉÒ¨ÉÉvɴɸÉÒ ºÉʽþiÉ ¨ÉvÉÖ®®úºÉÉi¨ÉxÉä ´ÉºÉxiÉ-@ñiÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-AÆñ ताम्र सीस |ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶É¤nùiÉx¨ÉÉjÉi¨ÉEò ºÉxiÉÉxÉ´ÉÉÊ]õEòɨÉvªÉä ¶ÉÖGò¸ÉÒ¶ÉÖÊSɸÉÒ ºÉʽþiÉ +ɨ±É®úºÉÉi¨ÉxÉä OÉÒ¹¨É-@ñiÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-±ÉÞÆ सीस वपत्ति |ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ º{ɶÉÇiÉx¨ÉÉjÉi¨ÉEò ½þÊ®úSÉxnùxÉ´ÉÉÊ]õEòɨÉvªÉä xɦɸÉÒxɦɺªÉ¸ÉÒ ºÉʽþiÉ ÊiÉHò®úºÉÉi¨ÉxÉä´É¹ÉÇ-@ñiÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-±ÉßÆ वपत्ति पञ्ििोह |ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¯û{ÉiÉx¨ÉÉjÉi¨ÉEò ¨ÉxnùÉ®ú´ÉÉÊ]õEòɨÉvªÉä <¹É¸ÉÒ >ðVÉǸÉÒ ºÉʽþiÉ Eò]Öõ®úºÉÉi¨ÉxÉä ¶É®únùiÞ ÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 38 .एकावलि 5.

+{ºÉ®úÉäMÉhÉÉ´ÉÞiÉ ¶ÉÊSɪÉÖHòÉªÉ näù´ÉäxpùxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 39 .एकावलि 4-BÆ पञ्ििोह रूप्य |ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ®úºÉiÉx¨ÉÉjÉi¨ÉEò {ÉÉÊ®úVÉÉiÉ´ÉÉÊ]õEòɨÉvªÉä ºÉ½þ¸ÉҺɽþºªÉ¸ÉÒºÉʽþiÉ Eò¹ÉɪɮúºÉÉi¨ÉxÉä ½àþ¨ÉxiÉ-@ñiÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-Bå रूप्य सवणव|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ MÉxvÉiÉx¨ÉÉjÉi¨ÉEò Eònù¨¤É´ÉÉÊ]õEòɨÉvªÉää ¸ÉÒ¶ªÉɨɱÉɨ¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4-+Éå रूप्य सवणव|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ MÉxvÉiÉx¨ÉÉjÉi¨ÉEò Eònù¨¤É´ÉÉÊ]õEòɨÉvªÉä iÉ{ɸÉÒiÉ{ɺªÉ¸ÉÒ ºÉʽþiÉ ±É´ÉhÉ®úºÉÉi¨ÉxÉäʶÉʶɮú-ñiÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-+Éé सवणवपष्ु पराग®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¨ÉÉƺÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò {ÉÖ¹{É®úÉMÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉú¨ÉvªÉà ʺÉrMÉhÉÉ´ÉÞiÉ ¸ÉÒSÉÎhb÷EòɪÉÖHòÉªÉ ¨ÉÞiªÉÖ\VɪÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-+Æ {ÉÖ¹{É®úÉMÉ®úixÉ-{ÉnÂù¨É®úÉMÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ +ÉäVÉÉävÉÉi´ÉÉi¨ÉEò {ÉnÂù¨É®úÉMÉ®úixÉiɯû ´ÉÉÊ]õEòÉú¨ÉvªÉà SÉÉ®úhÉMÉhÉÉ´ÉÞiÉ ¨ÉÉiÉÞEòɨ¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4-+: {ÉnÂù¨É®úÉMÉ®úixÉ-MÉÉä¨ÉàvÉEò®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¨ÉàvÉÉävÉÉi´ÉÉi¨ÉEò MÉÉä¨ÉàvÉEò®úixÉiɯû ´ÉÉÊ]õEòÉú¨ÉvªÉà ªÉÉäÊMÉxÉÒ¦Éè®ú´ÉMÉhÉÉ´ÉÞiÉ EòɱɺÉÆEò̹ÉhªÉ¨¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4-EÆò MÉÉä¨ÉàvÉEò®úixÉ-´ÉXÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ +κlÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ´ÉXÉ®úixÉiɯû ´ÉÉÊ]õEòÉúú¨ÉvªÉà +{ºÉ®úÉäMÉhÉÉ´ÉÞiÉ MÉxvÉ´ÉÇ{ÉiɪÉä Ê´É·ÉɺÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-JÉÆ ´ÉXÉ®úixÉ-EòxÉE -´ÉèbÚ÷ªÉÇ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ i´ÉMvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ´ÉèbÚ÷ªÉÇ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉú¨ÉvªÉà nèùiªÉxÉÉMÉ MÉhÉÉ´ÉÞiÉ ¨É½þɶÉä¹ÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-MÉÆ ´ÉèbÚ÷ªÉÇ®úixÉ-½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ®úÉä¨ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉiɯû ´ÉÉÊ]õEòÉú¨ÉvªÉà ¨ÉxÉÖMÉhÉÉ´ÉÞiÉ ´Éànù¨ÉjÉä MÉɪÉjªÉ¨¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4-PÉÆ ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ-¨ÉÖHòÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖC±ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÖHòÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉúªÉÉ: {ÉÚ´ÉǦÉÉMÉä ºÉÖ®ú{ÉÊiÉ-Bä®úÉ´ÉiÉ´ÉɽþxÉ-´ÉXɽþºiÉ.

एकावलि 4-RÆó ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ-¨ÉÖHòÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖC±ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÖHòÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉúªÉÉ: +ÉMxÉäªÉ¦ÉÉMÉä iÉäVÉÉäÊvÉ{ÉÊiÉ-+VÉ´ÉɽþxÉ-¶ÉÊHò½þºiÉ-º´Éɽþɺ´ÉvÉɪÉÖHòÉªÉ ´Éè·ÉÉxÉ®úxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-SÉÆ ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ-¨ÉÖHòÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖC±ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÖHòÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉúªÉÉ: nùÊIÉhɦÉÉMÉä |ÉäiÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ-¨Éʽþ¹É´ÉɽþxÉ-nùhb÷½þºiÉ ¶ªÉɨɱÉɪÉÖHòÉªÉ ´Éè´Éº´ÉiÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-UÆô ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ-¨ÉÖHòÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖC±ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÖHòÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉúªÉÉ: ÊxÉ@ñÊiɦÉÉMÉä ®úIÉÉäÊvÉ{ÉÊiÉ-|ÉäiÉ´ÉɽþxÉ-KÉbÂ÷MɽþºiÉ-EòɱÉÒªÉÖHòÉªÉ ÊxÉ@ñÊiÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-VÉÆ ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ-¨ÉÖHòÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖC±ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÖHòÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉúªÉÉ: {ÉζSɨɦÉÉMÉä VɱÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ-¨ÉEò®ú´ÉɽþxÉ-{ÉɶɽþºiÉ.{ÉÎnÂù¨ÉxÉÒªÉÖHòÉªÉ ´É¯ûhÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-ZÉÆ ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ-¨ÉÖHòÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖC±ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÖHòÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉúªÉÉ: ´ÉɪɴªÉ ¦ÉÉMÉä |ÉÉhÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ-¯û¯û´ÉɽþxÉ-v´ÉVɽþºiÉ-¨ÉÉäʽþxÉÒHòÉªÉ ºÉ¨ÉÒ®úxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-\ÉÆ ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ-¨ÉÖHòÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖC±ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÖHòÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉúªÉÉ: =kÉ® ú¦ÉÉMÉä ÊxÉÊvÉ{ÉÊiÉ-xÉ®ú´ÉɽþxÉ-¨ÉÊhɽþºiÉ-ÊSÉÊjÉhÉÒªÉÖHòÉªÉ EÖò¤Éä®úxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-]Æõ ½þÊ®úx¨ÉÊhÉ®úixÉ-¨ÉÖHòÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖC±ÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÖHòÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉúªÉÉ: <ǶÉÉxÉ ¦ÉÉMÉä Ê´ÉtÉÊvÉ{ÉÊiÉ-@ñ¹É¦É´ÉɽþxÉ-ÊjɶÉڱɽþºiÉ-¶ÉiÉEòÉäÊ]-¯ûpùMÉhÉÉ´ÉÞiÉ ÊMÉÊ®úVÉɪÉÖHòÉªÉ <ǶÉÉxÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-`Æö ¨ÉÖHòÉ-¨É®úEòiÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¨ÉVVÉÉvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨É®úEòiÉ®úixÉiɯû´ÉÉÊ]õEòÉú¨ÉvªÉàú ½äþ¨ÉiɱɦɴÉxÉäþ ¸ÉÒ´ÉÉiÉÉDZªÉ¨¤ÉÉ näù´ªÉè xɨÉ: 4-bÆ÷ ¨É®úEòiÉ-Ê´ÉpÖù¨É®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¯ûÊvÉ®úvÉÉi´ÉÉi¨ÉEò Ê´ÉpÖù¨É®úixÉ´ÉxÉ ´ÉÉÊ]õEòÉú¨ÉvªÉàú ú ¦ÉÉ®úiÉÒªÉÖHòÉªÉ ¥ÉÀxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-fÆø Ê´ÉpÖù¨É-¨ÉÉÊhÉCªÉ®úixÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ +xÉɽþiÉ iÉi´ÉÉi¨ÉEò ¨ÉÉÊhÉCªÉ¨Éhb÷{Éä ±ÉI¨ÉÒªÉÖHòÉªÉ 40 .

xÉÉxÉÉ®úixɨɪÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¥ÉÀ®úxwÉÉi¨ÉEò xÉÉxÉÉ®úixÉ ºÉ½þ»É ºiɨ¦É ¨Éhb÷{ɨÉvªÉä {ÉÉ´ÉÇiÉÒªÉÖHòÉªÉ ¨É½þɶɨ¦ÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-iÉÆ xÉÉxÉÉ®úixÉ-¨ÉxÉÉäù¨ÉªÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ uùÉnù¶ÉÉxiÉä ºÉ½þVÉκlÉiªÉÉi¨ÉEò +¨ÉÞiÉ´ÉÉÊ{ÉEòɪÉÉÆ ÎºlÉiÉxÉÉÉÊ´É-तनषण्णायै 4-lÉÆ ¨ÉxÉÉäùä पततसदहतायै ±ÉiÉɨÉvªÉä ºÉÊ´ÉEò±{ÉκlÉiªÉÉi¨ÉEò +ÉxÉxnù´ÉÉÊ{ÉEòɪÉÉÆ ´ÉɯûhªÉ¨¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: बुद्ध्यहां कार¨ÉªÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ÎºlÉiÉxÉÉÉÊ´É-तनषण्णायै 4-vÉÆ iÉÉ®úɨ¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: बुवद्ध¨ÉªÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ÎºlÉiÉxÉÉÉÊ´É-तनषण्णायै 4-nÆù पततसदहतायै पततसदहतायै अहां कार सूय|व ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ §ÉÚ¨ÉvªÉä ÊxÉÊvÉvªÉɺÉxÉκlÉiªÉÉi¨ÉEò ʴɨɶÉÇ´ÉÉÊ{ÉEòɪÉÉÆ EÖò¯ûEÖò±±Éɨ¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: |É´ÉÞÊkɺ´É¯û{É ¤ÉɱÉÉiÉ{ÉÉänùÂMÉÉ®ú¨ÉvªÉä-OɽþMÉhÉÉ´ÉÞiÉ- |ÉEòɶɶÉÊHòªÉÖHÖ òÉªÉ ¨ÉÉiÉÉÇhb÷¦Éè®ú´ÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-xÉÆ सय ू व िन्त्द्र|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ÊxÉ´ÉÞÊkɺ´É¯û{É SÉÎxpùEòÉänùÂMÉÉ®ú¨ÉvªÉä-iÉÉ®úÉMÉhÉÉ´ÉÞiÉ- ®úÉäʽþhÉÒªÉÖHÖ òÉªÉ ºÉÉä¨ÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-{ÉÆ िन्त्द्र शङ् ृ गार|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ +¨ÉxɺEòκlÉiªÉÉi¨ÉEò ¨É½þɶÉÞRÂóMÉÉ®ú{ÉÊ®úPÉɨÉvªÉ- ®úiÉÒªÉÖHÖ òÉªÉ ¨Éx¨ÉlÉxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-¡Æò शङ् ृ गार ÊSÉxiÉɨÉÊhÉMÉÞ®úÉVÉ|ÉÉEòÉ®ÉxiÉ®úɱÉMÉiÉ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò त्रर±ÉIÉयोजनाववसतीणव ú ¨É½þÉ{ÉnÂù¨ÉÉ]õ´ÉÒ¨ÉvªÉä ¸ÉÒ¨ÉnùzÉ{ÉÚhÉÉǨ¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4-¤ÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò ºÉ½þ»Éयोजनाववसतीणव-ÊSÉxiÉɨÉÊhÉMÉÞ½®úÉVÉɺªÉ @ñM´ÉänùÉi¨ÉEò-{ÉÚ´ÉÇuùÉ®-¨ÉvªÉä nÖùMÉÉǦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ näù´ªÉè xɨÉ: 41 .एकावलि ¨É½þÉʴɹhÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-hÉÆ ¨ÉÉÊhÉCªÉ.

एकावलि 4-¦ÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò ºÉ½þ»Éयोजनाववसतीणव-ÊSÉxiÉɨÉÊhÉ MÉÞ½®úÉVÉɺªÉ ªÉVÉÖ´ÉænùÉi¨ÉEò nùÊIÉhÉuùÉ®ú ¨ÉvªÉä ´ÉÉM´ÉÉÊnùxªÉ¨¤ÉÉ näù´ªÉè xɨÉ: 4-¨ÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò ºÉ½þ»Éयोजनाववसतीणव-ÊSÉxiÉɨÉÊhÉMÉÞ½®úÉVÉɺªÉ ºÉɨɴÉänùÉi¨ÉEò {ÉζSɨÉuùÉ® ¨ÉvªÉä jÉè{ÉÖ®úʺÉrùÉxiɺɨɪÉnäù´ÉiÉɪÉè xɨÉ: 4-ªÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò ºÉ½þ»Éयोजनाववसतीणव-ÊSÉxiÉɨÉÊhÉ MÉÞ½®úÉVÉɺªÉ +lÉ´ÉÇ´ÉänùÉi¨ÉEò =kÉ®úuùÉ®¨ÉvªÉä ºÉÆ{ÉiEò®úÒ ¦É]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4-®Æú ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò ÊSÉxiÉɨÉÊhÉMÉÞ½®úÉVÉɺªÉ +¨ÉÞiÉ¨ÉªÉ {ÉÚ´ÉÇuùÉ®úºªÉÉäkÉ®úºlÉ´ÉäÊnùEòɪÉÉÆ {É®úɶÉHäò: ¤ÉÖÊrù°üÊ{ÉhªÉè ¸ÉÒ¨ÉÉiÉRÂóMÉÒ·É®úÒnäù´ªÉè xɨÉ: 4-±ÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò ÊSÉxiÉɨÉÊhÉMÉÞ½®úÉVÉɺªÉɨÉÞiÉ¨ÉªÉ {ÉÚ´ÉÇuùÉ®úºªÉ nùÊIÉhɺlɨÉÊhÉ´ÉäÊnùEòɪÉÉÆ {É®úɶÉHäò: +½þRÂóEòÉ®úi¨ÉEò ¸ÉҨɽþÉ´ÉÉ®úÁ¨¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4.ºÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò ÊSÉxiÉɨÉÊhÉ MÉÞ½®úÉVÉÉxiÉ®äú {É\SÉ¥ÉÀ¨ÉªÉ ¨É½þɨÉ\SÉ¡ò±ÉEäò ºÉnùÉxÉxnù{ÉÚhÉÉÇi¨ÉxÉä ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉÉ nÖùʽþjÉä ¤ÉɱÉÉΨ¤ÉEòÉ näù´ªÉè xɨÉ: 4.¶ÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò-ÊSÉxiÉɨÉÊhÉMÉÞ½®úÉVÉÉxiÉ®äú शक्तरक्षाकराय सततदशवषावय Êxɯû{ÉÉÊvÉEòºÉÆδÉnùÉi¨ÉxÉä EÖò¨ÉÉ®EòɨÉä·É®úÉªÉ xɨÉ: 4.´ÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò ÊSÉxiÉɨÉÊhÉ MÉÞ½®úÉVÉɺªÉ {ÉÚ´ÉÇuùÉ®äú +¨ÉÞiÉä·ÉªÉǨ¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4.½Æþ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò-ÊSÉxiÉɨÉÊhÉ MÉÞ½®úÉVÉɺªÉ >ðv´ÉǦÉÉMÉà ºÉEò±É Eò±{ÉxÉÉ ®úʽþiÉÉªÉ {É®ú¶É¨¦ÉÖxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 4-¹ÉÆ ¶ÉÖrùºÉi´É|ÉvÉÉxÉÉxiÉ:Eò®úhÉÉi¨ÉEò-ÊSÉxiÉɨÉÊhÉMÉÞ½®úÉVÉɺªÉ ÊxÉÊvÉvªÉɺÉxÉ iÉÚʱÉEòÉ{ÉÒ`äö अलभतश्िक्रराजरक्षाकरो पण व ाथसदहतायै ू न ¸ÉÒ{ÉÚiªÉǨ¤ÉÉnäù´ªÉè xɨÉ: 4-³Æý Ênù´ªÉnäù½þÉi¨ÉEò ¸ÉÒSÉGò®úÉVÉ-¨É½þÉ®úlɶÉÞRÂóMÉä ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù vɨÉÉÇi¨ÉEò ¸ÉÒ ¥ÉÀ-ʴɹhÉÖ42 .

¦ÉÚ¹ÉhÉÉfÂøªÉ{Éä]õÒvÉÉÊ®úÊhÉ <Æ <SUôÉ-ºÉʽþiÉ ¨É½þÉänùªÉ¨É½þɨÉÉÆMɱªÉ-vÉÉÊ®úhªÉè ®Æú ®úiªÉè xɨÉ: 4.EòVVɱÉÉäVV´É±É¶É±ÉÉEòÉvÉÉÊ®úhªÉè Ë´É Ê´É¹ÉPxªÉè xɨÉ: 4.एकावलि ʶɴɪÉÖÖHòɪÉè ºÉ{iÉÉxÉxÉɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ näù´ªÉè xɨÉ: 4.¸ÉÓ Bà·ÉªÉÇʺÉËrù MÉRÂóMÉÉiÉ®úRÂóMÉvɴɱɨɽþÉSÉɨɮúvÉÉÊ®úhªÉè VªÉå VªÉä¹`öɪÉè ¨É½þɱÉI¨ªÉè xɨÉ: 4.´ÉXÉ¨ÉªÉ EòÉRÂóEòiÉÒvÉÉÊ®úhªÉè Ë¤É Ê¤É¨¤ªÉè xɨÉ: 4.IÉÆ Ênù´ªÉnäù½þÉi¨ÉEò ¸ÉÒ SÉGò®úÉVÉ ¨É½þÉ®úlɨÉvªÉä {ÉÞl´ÉÒ ºÉÊ±É±É ´ÉμxÉ ´Éɪ´ÉÉEòÉ¶É MÉxvÉ ®úºÉ °ü{É º{ɶÉǶɤnù ={ɺlÉ{ÉɪÉÖ{ÉÉnù{ÉÉÊhÉ´ÉÉEÂò QÉÉhÉÊVɼ´ÉÉSÉIÉÖ:i´ÉEÂò ¸ÉÉàjÉ ¨ÉxÉ: ú¤ÉÖÊrù -+½ÆþEòÉ® |ÉEÞòÊiÉ {ÉÖ¯û¹É ÊxɪÉÊiÉ EòÉ±É ®úÉMÉ +Ê´ÉtÉ Eò±ÉÉ ¨ÉɪÉÉ ¶ÉÖrùÊ´ÉtÉ <Ç·É®ú ºÉnùÉÊ¶É´É ¶ÉÊHò ʶɴÉÉi¨ÉEò ¹É]ÂõËjɶkÉi´É ºÉÉä{ÉÉxÉÉä{ÉÊ®ú {É®úÉ{É®ú{É®ú¨ÉÉuèùiÉʤÉxnùÉè ªÉÉäMÉ{ÉÒ`äö MÉÖ°ü{ÉÉvɹ]Òõ¨ÉxjÉÉlÉÉÇxÉÖºÉxvÉÉxÉ´ÉÞÊkÉ°ü{É ¨ÉÊhɨɪɨɽþÉ˺ɽþɺÉxÉÉªÉ xɨÉ: 4.´ªÉVÉxÉEòvÉÉÊ®úhªÉè ËGò ÊGòªÉɪÉè xɨÉ: 4.MÉxvÉSɹÉEòvÉÉÊ®úhªÉè EÖòÆ EÖòΤVÉEòɪÉè xɨÉ: 4.{ÉÖ¹{ɨÉɱÉÉvÉÉÊ®úhªÉè +Æ +Ψ¤ÉEòɪÉè xɨÉ: 4.¨É½þÉEòɱÉÉÎ\SÉEòÉvÉÉÊ®úÊhÉ ½Æþ ½þºÉxiªÉ¨¤ÉÉ ºÉʽþiÉ Eò{ÉÚ®Ç ú´ÉÒÊ]õEòÉvÉÉÊ®úhªÉè ®úÉé ®úÉèpù¬è xɨÉ: 4.ºÉEò±É VÉMÉx¨ÉÉä½þxÉ ¨É½þɨÉEò®úv´ÉVÉvÉÉÊ®úhªÉè +Æ +·ÉÉ°üføɪÉè xɨÉ: 4.Bá ´ÉÉÎCºÉËrù MÉRÂóMÉÉiÉ®úRÂóMÉvÉ´É±É ¨É½þÉSÉɨɮúvÉÉÊ®úhªÉè ºÉÆ ºÉ´ÉÉÇxÉxnùɪÉè ´ÉÉMÉҷɪÉê xɨÉ: 4-±ÉÉÆ ¼±ÉÉÆ ¥ÉÀhÉä {ÉÞÊlÉ´ªÉÉÊvÉ{ÉiɪÉä ®Hò´ÉhÉÉÇªÉ SÉiÉÖ´ÉÇCjÉÉªÉ nùhb-Eò¨Éhb÷±É-EÖòÎhb÷EòÉ-{ÉnÂù¨É43 .´ªÉVÉxÉEòvÉÉÊ®úhªÉè YÉÉÆ YÉÉxÉɪÉè xɨÉ: 4.Eò{ÉÚ®Ç úÉfø¬Eò®úhb÷vÉÉÊ®úhªÉè nÚùÆ nÚùiɪÉê xɨÉ: 4.iÉk´ÉYÉÉxÉnù{ÉÇhÉvÉÉÊ®úhªÉè ºÉÆ ºÉÆ{ÉiEòªÉê xɨÉ: 4.·ÉäiɨÉÖHòɱÉúRÂóEòÉ®¨É½þÉUôjÉvÉÉÊ®úhªÉè ´ÉÉÆ ´ÉɨÉɪÉè xɨÉ: 4.

एकावलि vÉ®úÉªÉ ºÉÞι]õEòjÉæ ´ÉɨÉɶÉCiªÉÉʸÉiÉÉªÉ xɨÉÉä ¥ÉÀ¨ÉªÉèEò¨É\SÉ{ÉÉnùÉªÉ xɨÉ: 4-´ÉÉÆ ¼´ÉÓ Ê´É¹hÉ´Éä +{ÉɨÉÊvÉ{ÉiɪÉä ¶ªÉɨɴÉhÉÉÇªÉ ¶ÉÆJÉ-SÉGò-MÉnùÉ-{ÉnÂù¨É vÉ®úÉªÉ ÎºlÉÊiÉEòjÉæ VªÉä¹`öɶÉCiªÉÉʸÉiÉÉªÉ xɨÉÉä ʴɹhÉ֨ɪÉèEò¨É\SÉ{ÉÉnùÉªÉ xɨÉ: 4-®úÉÆ ¿ÚÆ ¯ûpùÉªÉ iÉäVÉÉà +ÊvÉ{ÉiɪÉä {É\SÉ´ÉCjÉÉªÉ ¶ÉÖrùº¡òÊ]õEòÊxɦÉÉªÉ ¶ÉÚ±É-´ÉXÉ-JÉbÂ÷MÉ-{É®ú¶ÉÖ+¦ÉªÉ-xÉÉMÉ-{ÉɶÉ-PÉh]õÉ-|ɱɪÉÉÎMxÉ-+ÆEÖò¶É-vÉ®úÉªÉ ºÉƽþÉ®úEòjÉæ ®úÉèpùÒ¶ÉCiªÉÉʸÉiÉÉªÉ xɨÉÉä ¯ûpù¨ÉªÉèEò¨É\SÉ{ÉÉnùÉªÉ xɨÉ: 4-ªÉÉÆ ÁÉé <Ç·É®úÉªÉ ´ÉɪɴªÉÉÊvÉ{ÉiɪÉä MÉÉè®ú´ÉhÉÉÇªÉ ¨ÉÞMÉ-]ÆõEò-´É®úɦÉÒÊiÉ-vÉ®úÉªÉ ÊiÉ®úÉàvÉÉxÉEòjÉæ +Ψ¤ÉEòÉ ¶ÉCiªÉÉʸÉiÉÉªÉ xɨÉÉä <Ç·É®ú¨ÉªÉèEò¨É\SÉ{ÉÉnùÉªÉ xɨÉ: 4-¼ºÉÉé ºÉnùÉʶɴÉÉªÉ Ê´ÉªÉnùÉÊvÉ{ÉiɪÉä {É\SÉ´ÉCjÉÉªÉ ÊºÉxnÚù®ú´ÉhÉÉÇªÉ {É\SÉ˴ɶÉÊiÉEò®úÉªÉ +xÉÖOɽþEòjÉæ ¶ÉÉxiÉɶÉCiªÉÉʸÉiÉÉªÉ xɨÉÉä ºÉnùÉʶɴÉ|ÉäiÉ{ÉnÂù¨ÉɺÉxÉÉªÉ ¨É½þɨÉ\SÉ¡ò±ÉEòÉªÉ xɨÉ: 4-ºÉÖ¹ÉÖÎ{iÉ°ü{É |ɱɪÉÉi¨ÉxÉä ½ÆþºÉiÉÚʱÉEòÉiɱ{ÉÉªÉ xɨÉ: 4-+Ê´ÉtÉ%YÉÉxÉ °ü{É ½ÆþºÉiÉÚʱÉEòɨɽþÉà{ÉvÉÉxÉÉªÉ xɨÉ: 4-ºÉ¨Éι]õ +½þRÂóEòÉ®ú °ü{É EòÉèºÉÖ¨¦ÉɺiÉ®úhÉÉªÉ xɨÉ: 4-+´ªÉHò ¨É½þkÉi´ÉÉi¨ÉxÉä ¨É½þÉÊ´ÉiÉÉxÉEòÉªÉ xɨÉ: 4-ªÉÉäMɨÉɪÉÉ°ü{É ÊiÉ®úºEòÊ®úhªÉÉ´ÉÞiÉ ¨É½þɨÉɪÉɪɴÉÊxÉEòɪÉè xɨÉ: 4-+Éå Bá ¿Ó ¸ÉÓ Bá C±ÉÓ ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÓ ªÉ®ú±É´ÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ +Éá ¿Ó ¸ÉÓ +Éá ºÉÉè: C±ÉÓ Bá ºÉi´É ÊSÉi´É +ÉxÉxnùi´É º´É°ü{É vɨÉÇjÉªÉ Ê´ÉÊxɨÉÖHÇ ò º´ÉªÉ\VªÉÉàÊiÉ ={ÉÉÊvÉ®úʽþiÉ ¶ÉÖrùºÉÆÊ´ÉnùÉi¨ÉxÉä ¸ÉÒ ¨É½þÉEòɨÉä·É®úÉªÉ xɨÉ: 4-EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó¸ÉÓ ¨É½þÉàb÷¬ÉhÉ{ÉÒ`ö¨ÉvªÉä EòɨÉä·É®úÉRÂóEòÉJªÉ {É®ú¶Éɨ¦É´É{ÉÒ`öÊxɱɪÉä ºÉ´ÉÇSÉGäò·É®úÒvªÉÉiÉ {É\SɸÉÒ {É\SÉEòÉà¶É {É\SÉEò±{ɱÉiÉÉ {É\SÉEòɨÉnÖùPÉÉ {É\SÉ®úixÉ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxÉ ºÉÆκlÉiÉ ºÉ´ÉÇnù¶ÉÇxɺÉäÊ´ÉiÉ ¹Éb÷RÂóMɪÉÖ´ÉiÉÒºiÉÖiÉ SÉiÉÖ:ºÉ¨ÉªÉnäù´ÉiÉÉ{ÉÚÊVÉiÉ 44 .

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एकावलि

6.xÉ´ÉÉ´É®úhÉ ºÉ¨Éι]õ ¨ÉxjÉÉ:
4 (¨É½þɹÉÉäb÷¶ÉÒ) ¨É½þÉäb÷¬ÉhÉ{ÉÒ`öÊxɱɪÉÉÆ EòɨÉä·É®úÉRÂóEòä ¸ÉÒ¶Éɨ¦É´É{ÉÒ`öºlÉÉÆ SÉiÉÖ¹¹Éι`ö
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46

एकावलि

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ʺÉÊrùºÉʽþiÉ ºÉ´ÉÇÊ´ÉpùÉÊ´ÉÊhɨÉÖpùÉ nù¶ÉÇxɨÉÖÊnùiÉÉ ¶ÉÖ§É ´ÉhÉÇ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶É´É®úɦɪÉEò®ú ÊjÉ{ÉÖ®äú¶ÉÒ
SÉGäò·É®úÒ°ü{É iÉÉ®úºÉÖxnùªÉÉÇʦÉzÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ:
iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ:
4 ºlÉÚ±Énäù½äþ >ð¯û¨ÉڱɪÉÉä ºÉÚIÇ ¨Énäù½äþ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úSÉiÉÖnùDZÉEò¨É±ÉEòÌhÉEòɨÉvªÉä +vÉÇSÉxpùÉä{ÉÊ®ú
®úÉäÊvÉxªÉÉÆ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÉè: VÉ{ÉÉEÖòºÉ֨ɺÉÆEòÉ¶É +¹]nù±ÉÉi¨ÉEò ½þEòÉ®ú |ÉEÞòÊiÉEò%¹]õ¨ÉÚiªÉÉÇi¨ÉEò ʶɴÉÉʦÉzÉä
{ÉÚ´ÉÉǨxÉɪɰü{É Ê´ÉtÉEò±ÉÉi¨ÉEò ¶ÉÉäEò ºlÉɪÉÒ¦ÉÉ´É
Eò±ÉɶÉCiªÉÉi¨ÉEò ºÉÚªÉÇOɽþÉJªÉ ´ÉèJÉ®úÒ´ÉÉOÉÚ{É +¹]õÉ®ú ºÉ´ÉÇ®úÉä½þ®ú ¶ÉÊHò SÉGòÉʦɮʴÉxÉɦÉÉ´É
ºÉƤÉxvÉ Ê¶É´ÉSÉGò°ü{É ºÉÞι]õºÉƽþÉ®úÉi¨ÉEò ºÉÖ¹ÉÖ{iªÉɴɺlÉɺ´É°ü{É ºÉ´ÉÉǺÉÆIÉÉä¦ÉhÉSÉGòÉÊvɹ`öÉjÉÒ
ºÉ´ÉÇiÉxjÉä·É®úÒ ºÉ¨ÉªÉEÖòΤVÉEòÉxÉÖiÉ EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó IÉÆ +ÉxÉxnùÉi¨ÉEò
´ªÉÉ{ÉEòÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlɺÉäÊ´ÉiÉÉ VÉèxÉʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉ +½ÇþxiÉÉ °üÊ{ÉÊhÉ ´ÉèÊnùEònù¶ÉÇxÉ
nù̶ÉiÉ MÉɪÉjÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ nù¶É¨É½þÉÊ´ÉtɪÉÉÆ ÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®ú´ªÉʦÉzÉÉÆ <IÉÖSÉÉ{É-{ÉÖ¹{ɤÉÉhÉ =i{ɱÉ{ÉÖ¹{ɤÉxvÉÖvÉÞiÉ +xÉRÂóMÉEÖòºÉÖ¨ÉÉÊnù Eò¯ûhÉ®úºÉÉi¨É +¹]õ MÉÖ{iÉiÉ®úªÉÉäÊMÉÊxÉ ¨ÉªÉÚJÉÉ´ÉÞiÉ ¨Éʽþ¨ÉÉ
ʺÉÊrùºÉʽþiÉ ºÉ´ÉÉÇEò¹ÉÇÊhɨÉÖpùÉ =x¨ÉÖpùxɨÉÖÊnùiÉÉ ®úHò´ÉhÉÇ-{ÉÖºiÉEòÉIɨÉɱÉÉ-´É®úɦɪÉEò®ú
ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®úSÉGäò·É®úÒ°ü{É ®ú¨ÉɺÉÖxnùªÉÉÇʦÉzÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ
{ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ:
4 ºlÉÚ±Énäù½äþ xÉɦÉÉè ºÉÚI¨Énäù½äþº´ÉÊvɹ`öÉxɹÉbÂ÷nù±ÉEò¨É±ÉEòÌhÉEòɨÉvªÉä ®úÉäÊvÉxªÉÉä{ÉÊ®ú xÉÉnäù ½éþ
¼C±ÉÓ ¼ºÉÉè: nùÉÊb÷¨ÉÒ|ɺÉÚxɺɽþÉänù®äú SÉiÉÖnùÇ ¶ÉÉ®äú <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò SÉiÉÖnùǶÉú¦ÉÖ´ÉxÉÉi¨ÉEò
¨É½þɨÉɪÉÉÉ°ü{É nùÊIÉhÉɨxÉɪɰü{É ¶ÉÉxiÉÉEò±ÉÉi¨ÉEò ¦ÉªÉÉxÉEòºlÉɪÉÒ¦ÉÉ´É VªÉä¹`öÉ ¶ÉCiªÉÉi¨ÉEò ¶ÉxÉè¶SÉ®úOɽþÉJªÉ ¨ÉvªÉ¨ÉÉ´ÉÉOÉÚ{É SÉiÉÖ®ú¸ÉjɪÉÉi¨É jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉ
ʶɴÉSÉGòÉʦɮʴÉxÉɦÉÉ´É ºÉƤÉxvÉ ¶ÉÊHòSÉGò°ü{É ÎºlÉÊiɺÉÞ¹]õ¬Éi¨ÉEò <Ç·É®úÉä{ÉɺÉxÉÉiÉk´É
47

एकावलि

º´É°ü{É ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉnùɪÉEò SÉGòÉÊvɹ`öÉjÉÒ ºÉ´ÉÇiÉk´Éä·É®úÒ PÉÉä®ú EÖòΤVÉEòÉxÉÖiÉ SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ
\ÉÆ ¨ÉÆ YÉÉxÉÉi¨ÉEò ¶ÉCiªÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlɺÉäÊ´ÉiÉÉ ºÉÉÆJªÉ ʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉ ¨ÉÚ±É|ÉEÞòÊiÉ°üÊ{ÉÊhÉ ºÉÉè®únù¶ÉÇxÉ nù̶ÉiÉ ¨ÉÉiÉÉÇhb÷¦Éè®ú´É º´É°üÊ{ÉÊhÉ nù¶É ¨É½þÉÊ´ÉtɪÉÉÆ ¦ÉÖ´ÉxÉä·ÉªÉÇʦÉzÉÉÆ
+ÉMxÉäªÉSÉÉ{É-¤ÉÉhÉ-JÉbÂ÷MÉ-JÉä]õEòvÉ®-úºÉ´ÉǺÉÆIÉÉäʦÉhªÉÉÊnù
¦ÉªÉÉxÉEò®úºÉÉi¨É
SÉiÉÖnùǶɺÉÆ|ÉnùɪɪÉÉäÊMÉÊxÉ ¨ÉªÉÚJÉÉ´ÉÞiÉ <ÇʶÉi´ÉʺÉÊrùºÉʽþiÉ ºÉ´ÉǴɶÉÆEò®úÒ¨ÉÖpùÉ ºÉ¨ÉÖx¨ÉÒ±ÉxɨÉÖÊnùiÉÉ
®úHò´ÉhÉÇ {ÉÖºiÉEòÉIɨÉɱÉÉ ´É®úɦɪÉEò®ú ÊjÉ{ÉÖ®ú´ÉÉʺÉxÉÒSÉGäò·É®úÒ°ü{É ¨ÉɪÉÉ ºÉÖxnùªÉÉÇʦÉzÉ
¸ÉÒ±ÉʱÉiÉÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
{É\SɨÉÉ´É®úhÉ:
4 ºlÉÚ±Énäù½äþ ¾þnùªÉä ºÉÚI¨Énäù½äþ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®úEònù¶Énù±ÉEò¨É±ÉEòÌhÉEòɨÉvªÉä xÉÉnùÉä{ÉÊ®ú xÉÉnùÉxiÉä ¼ºÉé
¼ºC±ÉÓ ¼ºÉÉè: |ɦÉÉ{É®úɦÉÚiÉ ÊºÉxnÚù®ú´ÉhÉâ ¤ÉʽþnÇù¶ÉÉ®ú BEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò nù¶ÉÉ´ÉiÉÉ®úÉi¨ÉEò
ʴɹhÉÖº´É°ü{Éä nùÊIÉhÉɨxÉɪɰü{É ¶ÉÉxiÉÉEò±ÉÉi¨ÉEò VÉÖMÉÖ{ºÉÉ ºlÉɪÉÒ¦ÉÉ´É ®úÉèpùÒ¶ÉCiªÉÉi¨ÉEò
®úɽÖþOɽþÉJªÉ ¨ÉvªÉ¨ÉÉ´ÉÉOÉÚ{É ¹ÉÉäb÷¶Énù³ý ºÉ´ÉÉǶÉÉ{ÉÊ®ú{ÉÚ®úEò ʶɴÉSÉGòÉʦɮʴÉxÉɦÉÉ´É ºÉƤÉxvÉ
¶ÉÊHòSÉGò°ü{É ÎºlÉÊiÉκlÉiªÉÉi¨ÉEò MÉÖ°ü{ɺÉnùxÉÉiÉk´Éº´É°ü{É ºÉ´ÉÉÇlÉǺÉÉvÉEò-SÉGòÉÊvɹ`öÉjÉÒ
ºÉ´ÉÇ{ÉÒÊ`ö·É®úÒ ´ÉÒ®ú EÖòΤVÉEòÉxÉÖiÉ ]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ ±ÉÆ ºÉiªÉÉi¨ÉEò v´ÉxªÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉ
ºÉäÊ´ÉiÉÉ ´ÉènùÒEò ʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉ MÉɪÉjÉÒ°üÊ{ÉÊhÉ ´Éè¹hÉ´Énù¶ÉÇxÉ nù̶ÉiÉ Ê´É¹hÉÖº´É°üÊ{ÉÊhÉ
nù¶É¨É½þÉÊ´ÉtɪÉÉÆ Eò¨É±ÉÉÎi¨ÉEòÉʦÉzÉÉ {É®ú¶ÉÖ-{ÉɶÉ-MÉnùÉ-PÉh]õÉvÉ®ú ºÉ´ÉÇʺÉÊrù|ÉnùÉÊnù
¤ÉÒ¦ÉiºÉ®úºÉÉi¨É-nù¶É-EÖò±ÉÉäkÉÒhÉǪÉÉäÊMÉÊxÉ-¨ÉªÉÚJÉÉ´ÉÞiÉ ´ÉʶÉi´ÉʺÉÊrùºÉʽþiÉ ºÉ´ÉÉæx¨ÉÉÊnùxÉÒ ¨ÉÖpùÉ
=nÂùPÉÉ]õxɨÉÖÊnùiÉÉ =tiºÉÚªÉǺɽþ»ÉÉ¦É {ÉÖºiÉEòÉIɨÉɱÉÉ -´É®úɦɪÉEò® úÊjÉ{ÉÖ®úɸÉÒSÉGäò·É®úÒ°ü{É
´ÉÉCºÉÖxnùªÉÉÇʦÉzÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉɨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
¹É¹`öÉ´É®úhÉ:
4 ºlÉÚ±Énäù½äþ Eòh`äö ºÉÚI¨Énäù½äþ +xÉɽþiÉuùÉnù¶Énù±ÉEò¨É±ÉEòÌhÉEòɨÉvªÉä xÉÉnùÉxiÉÉä{ÉÊ®ú ¶ÉHòÉè
¿Ó C±ÉÓ ¤±Éå VÉ{ÉɺÉÖ¨ÉxɺºÉ½þSÉ®äú +xiÉnÇù¶ÉÉ®ú ®äú¡òú|ÉEÞòÊiÉEò nù¶ÉEò±ÉÉi¨ÉEò ´Éè·ÉÉxÉ®úÉʦÉzÉä
nùÊIÉhÉɨxÉɪɰü{É ¶ÉÉxiÉÉEò±ÉÉi¨ÉEò GòÉävɺlÉɪÉÒ¦ÉÉ´É ´ÉɨÉɶÉCiªÉÉi¨ÉEò EäòiÉÖOɽþÉJªÉ
¨ÉvªÉ¨ÉÉ´ÉÉOÉÚ{É ¹ÉÉäb÷¶Énù³ý ºÉ´ÉÉǶÉÉ{ÉÊ®ú{ÉÚ®úEò ʶɴÉSÉGòÉʦɮʴÉxÉɦÉÉ´É ºÉƤÉxvÉ ¶ÉÊHòSÉGò°ü{É
κlÉÊiɺÉƽþÉ®úÉi¨ÉEò ¸É´ÉhÉiÉk´Éº´É°ü{É ¨É½þÉYÉÉxÉ|ÉnùºÉ´ÉÇ®úIÉÉEò®úSÉGòÉÊvɹ`öÉjÉÒ ºÉ´ÉǪÉÉäMÉä·É®úÒ
VɪÉEÖòΤVÉEòÉxÉÖiÉ iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ ´ÉÆ {ÉÚhÉÉÇiɨÉEò v´ÉÊxɨÉÉjÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlɺÉäÊ´ÉiÉÉ ºÉÉè®ú
ʺÉrùÉxiÉ ºlÉÉÊ{ÉiÉ ¨ÉÉiÉÉÇhb÷ ¦Éè®ú´É°üÊ{ÉÊhÉ ´Éè¹hÉ´Énù¶ÉÇxÉ nù̶ÉiÉ Ê´É¹hÉÖº´É°üÊ{ÉÊhÉ
nù¶É¨É½þÉÊ´ÉtɪÉÉ ¨ÉÉiÉRÂóMªÉÉʦÉzÉÉÆ ·ÉäiÉ´ÉhÉÇ ´ÉXÉ-¶ÉÊHò-iÉÉä¨É®-úSÉGòvÉ®ú ºÉ´ÉÇYÉÉÊnù-®úÉèpù
®úºÉÉi¨É-nù¶É-ÊxÉMɦÉǪÉÉäÊMÉÊxÉ-¨ÉªÉÚJÉÉ´ÉÞiÉ
|ÉÉEòɨªÉʺÉÊrùºÉʽþiÉ
ºÉ´ÉǨɽþÉRÂóEòÖ ¶É¨ÉÖpùÉ
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एकावलि

+RÂóEòÖ ®hÉ ¨ÉÖÊnùiÉÉÆ ®úHò´ÉhÉÇ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶É-Eò{ÉɱÉɦɪÉEò® úÊjÉ{ÉÖ®ú¨ÉÉʱÉxÉÒSÉGäò·É®úÒ°ü{É
Ênù´ªÉ ºÉÖxnùªÉÉÇʦÉzÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉɨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉ:
4 ºlÉÚ±Énäù½äþ ¨ÉÖJÉä ºÉÚI¨Énäù½äþ ʴɶÉÖrù¹ÉÉäb÷¶Énù±ÉEò¨É±ÉEòÌhÉEòɨÉvªÉä ¶ÉHòÉä{ÉÊ®ú ´ªÉÉÊ{ÉEòɪÉÉÆ
¿Ó ¸ÉÓ ºÉÉè: {ÉnÂù¨É®úÉMɯûÊSÉ®ú +¹]õÉ®ú EòEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò%¹]õ¨ÉÚiªÉÉÇi¨ÉEò EòɨÉä·É®úº´É°ü{Éä
{ÉζSɨÉɨxÉɪɰü{É ¶ÉÉxiªÉÉiÉÒiÉEò±ÉÉi¨ÉEò ½þɺªÉºlÉɪÉÒ¦ÉÉ´É Ê´É¹ÉPxÉÒ¶ÉCiªÉÉi¨ÉEò
¤ÉÖvÉOɽþÉJªÉ ¨ÉvªÉ¨ÉÉ´ÉÉOÉÚ{É +¹]õnù³ý-ºÉ´ÉǺÉÆIÉÉä¦ÉhÉÊ¶É´É SÉGòÉʦɮʴÉxÉɦÉÉ´É ºÉƤÉxvÉ
¶ÉÊHòSÉGò°ü{É ºÉƽþÉ®úºÉÞ¹]õ¬Éi¨ÉEò ¨ÉxÉxÉiÉk´Éº´É°ü{É ºÉ´ÉÇ®úÉäMɽþ®úSÉGòÉÊvɹ`öÉjÉÒ
ºÉ´ÉÇ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ ÊºÉrùEÖòΤVÉEòÉxÉÖiÉ {ÉÆ ¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ ®Æú º´É¦ÉÉ´ÉÉi¨ÉEòÉxÉɽþiÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉ
ºÉäÊ´ÉiÉÉ ´Éè¹hÉ´ÉʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉ Ê´É¹hÉÖ°üÊ{ÉÊhÉ ¶ÉÉHònù¶ÉÇxÉ nù̶ÉiÉ ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒ º´É°üÊ{ÉÊhÉ
nù¶É¨É½þÉÊ´ÉtɪÉÉ iÉÉ®úÉ%%ʦÉzÉÉÆ ®úHòɶÉÉäEò{ÉÖ¹{ÉÉ¦É SÉÉ{É-¤ÉÉhÉ-´ÉÒhÉÉ-{ÉÖºiÉEòvÉ®ú ´ÉʶÉxªÉÉÊnù
½þºªÉ®úºÉÉi¨É +¹]õ®ú½þºªÉªÉÉäÊMÉÊxɨɪÉÚJÉÉ´ÉÞiÉ ¦ÉÖÊHòʺÉÊrùºÉʽþiÉ ºÉ´ÉÇJÉäSÉ®úÒ¨ÉÖpùÉ =®ú®úÒE®hÉ
¨ÉÖÊnùiÉÉ-¶É֧ɴÉhÉÇ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉEò{ÉɱÉɦɪÉEò®ú ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùÉSÉGäò·É®úÒ°ü{É {É®úÉ ºÉÖxnùªÉÉÇʦÉzÉ
¸ÉÒ±ÉʱÉiÉÉ ¨É½þÉÊj{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
+ɪÉÖvÉÉSÉÇxÉÆ:
4- xÉäjÉuùªÉä pùÉÆ pùÓ C±ÉÓ ¤±ÉÚÆ ºÉ: {ÉnÂù¨ÉEèò®ú´ÉEò±½þÉ®úÉ©ÉɶÉÉäEò{É\SÉ{ÉÖ¹{É°ü{É䦪ÉÉä
ºÉ´ÉÇVɨ¦ÉxÉ䦪ÉÉä ®úºÉɺ´ÉÉnù°ü{ÉÊ´ÉPxɽþ®äú¦ªÉÉä ¶É¤nù º{ɶÉÇ °ü{É ®úºÉ MÉxvÉ {É\SÉ
iÉx¨ÉÉjÉ°ü{É䦪ÉÉä ÊVÉiÉäÎxpùªÉiÉk´Éº´É°ü{É䦪ÉÉä ¤ÉÉhÉ䦪ÉÉä xɨÉ: ¤ÉÉhÉnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ:
4- §ÉÖÊ´É vÉÆ {ÉÖhbÅ÷äIÉÖEòÉänùhb÷°ü{ÉÉªÉ ºÉ´ÉǺɨ¨ÉÉä½þxÉÉªÉ ¨ÉxÉÉä°ü{ÉÉªÉ Ê´ÉIÉä{É°ü{ÉÊ´ÉPxÉ ½þ®úɪÉ
+xiɨÉÖJÇ É¶ÉÖrù¨ÉxÉ iÉk´É º´É°ü{ÉÉªÉ vÉxÉÖ¹Éä xɨÉ: vÉxÉÖnùæ´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ- xɨÉ:
4- EòhÉæ ¿Ó Ê´ÉpÖù¨ÉÉEòÉ®úÉªÉ ºÉ´ÉǴɶÉÒEò®úhÉÉªÉ ®úÉMɺ´É°ü{ÉÉªÉ EòɹÉɪɰü{ÉÊ´ÉPxɽþ®úÉªÉ iÉÒµÉ
+Éi¨ÉYÉÉxÉäSUôÉ iÉk´É º´É°ü{ÉÉªÉ {ÉɶÉÉªÉ xɨÉ: {ÉɶÉnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ-xɨÉ:
4- xÉɺÉɪÉÉÆ GòÉå ®úÉè{ªÉ¨ÉªÉÉªÉ ºÉ´ÉǺiɨ¦ÉxÉÉªÉ GòÉävÉÉEòÉ®úÉªÉ ±ÉªÉ°ü{ÉÊ´ÉPxɽþ®úÉªÉ +xÉÉi¨É
xÉɨɰü{É uäù¹ÉiÉk´É º´É°ü{ÉÉªÉ +RÂóEòÖ ¶ÉÉªÉ xɨÉ: +RÂóEòÖ ¶Énäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ:
+¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉ:
4 ºlÉÚ±Énäù½äþ xÉäjɪÉÉà ºÉÚIÇ ¨Énäù½äþ ±ÉΨ¤ÉEòÉOÉä +¹]õnù±ÉEò¨É±ÉEòÌhÉEòɨÉvªÉä ´ªÉÉÊ{ÉEòÉä{ÉÊ®
ºÉ¨ÉxÉɪÉÉÆ ¼»Éé ¼ºC±ÉÅÓ ¼»ÉÉè: ¤ÉxvÉÚEò{ÉÖ¹{ɤÉxvÉÖÊEò®úhÉä ÊjÉEòÉähÉ xÉÉnù |ÉEÞòÊiÉEò
MÉÖhÉjɪÉ|ÉvÉÉxÉÊjɶÉÊHò°ü{É ®äúJÉÉjɪÉÉi¨ÉEò =kÉ®úɨxÉɪɰü{É ÊSÉSUôÊHòEò±ÉÉi¨ÉEò ʴɺ¨ÉªÉ
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एकावलि

ºlÉɪÉÒ¦ÉÉ´É nÚùiÉ®úÒ ¶ÉCiªÉÉi¨ÉEò MÉÖ¯ûOɽþÉJªÉ {ɶªÉxiÉÒ´ÉÉOÉÚ{É ¨É½þÉʤÉxnÖù-ºÉ´ÉÉÇxÉxnù¨ÉªÉʶɴÉSÉGòÉʦɮʴÉxÉɦÉɴɺÉƤÉxvÉ ¶ÉÊHòSÉGò°ü{É ºÉƽþÉ®úκlÉiªÉÉi¨ÉEò ÊxÉÊvÉvªÉɺÉxÉiÉk´Éº´É°ü{É
ºÉ´ÉÇʺÉÊrù|ÉnùSÉGòÉÊvɹ`öÉjÉÒ ¦ÉÉäMÉEÖòΤVÉEòÉxÉÖiÉ ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ ¶ÉÆ ªÉÆ
|ÉÊiɦÉÉi¨ÉEäòxuùÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ºÉäÊ´ÉiÉÉ ¶ÉÉHò-ʺÉrùÉxiÉ -ºlÉÉÊ{ÉiÉ ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒ°üÊ{ÉÊhÉ
¶Éè´Énù¶ÉÇxÉ nù̶ÉiÉ ¯ûpùº´É°üÊ{ÉÊhÉ nù¶É¨É½þÉ - Ê´ÉtɪÉÉ ÊUôzɨɺiÉÉ%ʦÉzÉÉÆ
SÉÉ{ɤÉÉhÉ{ÉÉxÉ{ÉÉjɨÉÉiÉÖʱÉRÂóMÉ JÉbÂ÷MÉ¡ò±ÉEò xÉÉMÉ{ÉÉ¶É PÉh]õÉvÉ®ú EòɨÉä·ÉªÉÉÇÊnù +nÂù¦ÉÖiÉ
®úºÉÉi¨É +ÊiÉ®ú½þºªÉªÉÉäÊMÉÊxÉjɪɨɪÉÚJÉÉ´ÉÞiÉ <SUôÉʺÉÊrù ºÉʽþiÉ ºÉ´ÉǤÉÒVɨÉÖpùÉ
Ê´ÉÊxÉnǶÉÇxɨÉÖÊnùiÉÉ-®úHò´ÉhÉ-{ÉÖºiÉEòÉIɨÉɱÉÉ ´É®úɦɪÉEò®ú ÊjÉ{ÉÖ®úɨ¤ÉÉ SÉGäò·É®úÒ°ü{É
¨ÉÉäIɺÉÖxnùªÉÉÇʦÉzÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉɨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
xɴɨÉÉ´É®úhÉ:
4 ºlÉÚ±Énäù½äþ ¨ÉÚÐvxÉ ºÉÚI¨Énäù½äþ +ÉYÉɪÉÉÆ Êuùnù±ÉEò¨É±ÉEòÌhÉEòɨÉvªÉä ºÉ¨ÉxÉÉä{ÉÊ®ú =x¨ÉxªÉÉÆ
¨É½þÉʤÉxnùÉè Eò16 =tiºÉÚªÉǺɽþ»ÉɦÉʤÉxnùÉè ʤÉxnÖù|ÉEÞòÊiÉEò {É®ú¥ÉÀÉi¨ÉEò
>ðv´ÉÉÇxÉÖkÉ®úɨxÉɪɰü{É ÊSÉSUôÊHòEò±ÉÉi¨ÉEò ºÉ¨ÉºlÉɪÉÒ¦ÉÉ´É ºÉ´ÉÉÇxÉxnù¨ÉªÉ ¶ÉCiªÉÉi¨ÉEò
¶ÉÖGòOɽþÉJªÉ {É®úÉ´ÉÉOÉÚ{É ÊjÉEòÉähɺɴÉÇʺÉÊrù|Énù¶ÉÊHòSÉGòÉʦɮʴÉxÉɦÉÉ´É-ºÉƤÉxvÉ Ê¶É´ÉSÉGò°ü{É
ºÉƽþÉ®úºÉƽþÉ®úÉi¨ÉEò ºÉ¨ÉÉÊvÉiÉk´Éº´É°ü{É ¨É½þÉEòÒÌiÉ|Énù ºÉ´ÉÉÇxÉxnù¨ÉªÉSÉGòÉÊvɹ`öÉjÉÒ
ºÉ´ÉÇʺÉräù·É®úÒ ¨ÉÉäIÉEÖòΤVÉEòÉxÉÖiÉ ¹ÉÆ ºÉÆ ½Æþ ³Æý IÉÆ >Æð ºÉÖ¦ÉMÉÉi¨ÉEò ʤÉxuùÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉ
ºÉäÊ´ÉiÉÉ ¶Éè´ÉʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉ ºÉnùÉʶɴɰüÊ{ÉÊhÉ ¶Éɨ¦É´Énù¶ÉÇxÉ nù̶ÉiÉÉ EòɱɺÉRÂóEò̹ÉÊhÉ
º´É°üÊ{ÉÊhÉ nù¶É¨É½þÉÊ´ÉtɪÉÉ ´ÉɨÉäºÉÖxnùÊ®ú nùÊIÉhÉä EòÉʳýEòÉ°ü{ÉähÉ nù¶ÉÇxÉ|Énù
¨É½þÉäb÷¬ÉhÉ{ÉÒ`öÊxÉ±ÉªÉ Eònù¨¤É ´ÉxÉÉxiÉ: ʽþ®úh¨ÉªÉ ºÉ½þ»Énù³ýEò¨É±É EòÌhÉEòɨÉvªÉ
ºÉÉvªÉʺÉrùɺÉxÉ |ɺÉÚxÉiÉÚʱÉEòɪÉÉÆ º´ÉºÉ¨ÉÉ®úÉEòÉ® ú´ÉhÉÇ´Éä¹ÉÉfø¬ ¸ÉÒ¨ÉiEòɨÉä·É®úÉRÂóEòä
º´ÉκiÉEòɺÉxÉä ={Éʴɹ]õ Ê´ÉpÖù¨É{ÉɶÉ-®úÉè{ªÉÉRÂóEòÖ ¶É-<IÉÖSÉÉ{É-{É\SÉ{ÉÖ¹{ɤÉÉhÉ-vÉ®ú
¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú ¶ÉÉxiÉ®úºÉÉi¨É {É®úÉ{É®ú®ú½þºªÉªÉÉäÊ MÉÊxÉ |ÉÉÎ{iɺɴÉÇEòɨÉʺÉÊrùuùªÉºÉʽþiÉ
ºÉ´ÉǪÉÉäÊxɺɴÉÇÊjÉJÉhb÷ɨÉÖpùÉuùªÉ |Énù¶ÉÇxÉʶÉiɨÉÖÊnùiÉÉ-¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒSÉGäò·ÉªÉÇʦÉzÉ
ÊxÉ´ÉÉÇhɺÉÖxnùªÉÉÇʦÉzÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉɨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
¸ÉÒ±ÉʱÉiÉɨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ Ê´É¶Éä¹É¦ÉÉ´É ¨ÉxjÉÉ:
4-EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¸ÉÒºÉÉè¦ÉÉMªÉÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhɸÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ
¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
4-½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó SÉèiÉxªÉÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ. xɨÉ:
4-½þºÉEò±É½þºÉEò½þ±ÉºÉEò±É¿Ó ¸ÉÒiÉÖ®úÒªÉÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ.. xɨÉ:
4-EòB<DZɽþºÉEò½þ±ÉºÉEò±É¿Ó ¸ÉÒ{ÉÚÌiÉÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ..xɨÉ:
50

एकावलि a.ितुथाववरण समकष्ट मन्त्रा: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù ºÉÖ¦ÉMÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉ MÉÖnù{ɪÉÇxiÉ +{ÉÉxÉ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ +±É¨¤ÉÖºÉÉxÉÉb÷Ò º´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò-¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ +iɱɦÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ +ÉEòɶÉÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjÉ ¤ÉÉäÊvÉiÉ ¸ÉÓ ¿Ó ]Æõ ºÉ´ÉǺÉÆÊIÉʦÉÊhɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù {ÉÚhÉÉÇxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉ MÉÖÁ{ɪÉÇxiÉ xÉÉMÉ ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ EÖò½ÚþxÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ Ê´ÉiɱɦÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ |ÉÉhÉÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ C±ÉÓ Bå `Æö ºÉ´ÉÇÊ´ÉpùÉÊ´ÉÊhɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù VÉ`ö®ú{ɪÉÇxiÉ ºÉ¨ÉÉxÉ EÞòEò®ú näù´ÉnùkÉ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ Ê´É·ÉÉänù®úÉxÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ ºÉÖiɱɦÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ VªÉÉäiªÉÉÊvÉEò®úhÉ ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ ºÉÉè: $ bÆ÷ ºÉ´ÉÉÇEò̹ÉÊhɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù ºÉ´ÉÉǴɪÉ{ɪÉÇxiÉ ºÉ¨ÉÉxÉ-vÉxÉ\VɪÉ-´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ ´ÉɯûhÉÉxÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ ¨É½þÉiɱɦÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ +ÉxÉxnù¨ÉªÉÉÊvÉEò®úhÉ ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ ¿Ó ¸ÉÓ fÆø ºÉ´ÉÉǼ±ÉÉÊnùxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù {ÉÉnù{ɪÉÇxiÉ ºÉ¨ÉÉxÉ ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ ½þκiÉÊVɼ´ÉÉxÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú-|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ iɱÉÉiÉ±É ¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ <xpù|ÉÉhÉÉÊvÉEò®úhÉ ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ Eò B hÉÆ ºÉ´ÉǺɨ¨ÉÉäʽþxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù {ÉÉnùÉRÂóMÉÖ¹`ö{ɪÉÇxiÉ ºÉ¨ÉÉxÉ ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ ªÉ¶ÉÉä´ÉiÉÒxÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ ®úºÉÉiÉ±É ¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ ´Éè·ÉÉxÉ®úÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ <Ç ±É iÉÆ ºÉ´ÉǺiÉΨ¦ÉxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù |ÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉnùIɸÉÉäjÉ{ɪÉÇxiÉ ºÉ¨ÉÉxÉ ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ {ɪÉκ´ÉxÉÒ xÉÉb÷Ò º´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ {ÉÉiɱɦÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ MÉÖ{iÉÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjÉ ¤ÉÉäÊvÉiÉ ¿Ó ½þ lÉÆ ºÉ´ÉÇVÉÞΨ¦ÉxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù ¸ÉÒºÉiªÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`ö´ÉɨÉxÉäjÉ{ɪÉÇxiÉ EÚò¨ÉÇ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ MÉÉxvÉÉ®úÒxÉÉb÷Ò º´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ ¦ÉÚ:¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ ºÉ´ÉÇjÉÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ ºÉ Eò nÆù ºÉ´ÉǴɶÉRÂóEò®úÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù ¸ÉÒYÉÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉnùIÉxÉäjÉ{ɪÉÇxiÉ EÚò¨ÉÇ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ {ÉÚ¹ÉÉxÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ ¦ÉÖ´É:¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ +jÉÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ ½þ ±É vÉÆ ºÉ´ÉÇ®ú\VÉxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉÆ-{ÉÚ iÉ xɨÉ: 51 .

एकावलि 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù ʴɨɶÉÉÇxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉ´ÉɨɸÉÉäjÉ{ɪÉÇxiÉ ºÉ¨ÉÉxÉ ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ ¶ÉÎRÂóJÉxÉÒ xÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ º´É:¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ MÉÖ½þÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ ¿Ó ºÉ xÉÆ ºÉ´ÉÉæx¨ÉÉÊnùxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù +ÉxÉxnùÉxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉÊVɼ´ÉÉ{ɪÉÇxiÉ ºÉ¨ÉÉxÉ ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ ºÉ®úº´ÉiÉÒxÉÉb÷Ò º´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ ¨É½þ:¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ +xiÉ®úÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ Eò ±É {ÉÆ ºÉ´ÉÉÇlÉǺÉÉÊvÉxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù |ÉÊiɦÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉ´ÉɨÉxÉɺÉÉ{ɪÉÇxiÉ |ÉÉhÉ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ <b÷ÉxÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ VÉxÉ:¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ +xiɪÉÉǨªÉÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjɤÉÉäÊvÉiÉ ¿Ó ºÉÉè: ¡Æò ºÉ´ÉǺɨ{ÉÊkÉ{ÉÚ®úhÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù º´É¦ÉÉ´ÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉnùIÉxÉɺÉÉ{ɪÉÇxiÉ |ÉÉhÉ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ Ê{ÉRÂóMɱÉÉxÉÉb÷Ò º´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ iÉ{É:¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ +où¶ªÉi´ÉÉÊvÉEò®úhÉ¥ÉÀºÉÚjÉ ¤ÉÉäÊvÉiÉ Bå C±ÉÓ ¤ÉÆ ºÉ´ÉǨÉxjɨɪÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: 4 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÉÊnù ¸ÉÒMÉÖ¯û +¨ÉÖEòÉxÉxnùxÉÉlÉÉÊvÉι`öiÉ¥ÉÀ®úxwÉ{ɪÉÇxiÉ =nùÉxÉ´ÉɪÉÖSÉʱÉiÉ ºÉÖ¹ÉÖ¨xÉÉxÉÉb÷Òº´É°ü{É <ÇEòÉ®ú|ÉEÞòÊiÉEò ¨É½þɨÉɪÉÉƶɦÉÚiÉ ºÉiªÉ¦ÉÖ´ÉxÉκlÉiÉ ¦ÉÚ¨ÉÉÊvÉEò®úhÉ ¥ÉÀºÉÚjÉ ¤ÉÉäÊvÉiÉ ¿Ó ¸ÉÓ ¦ÉÆ ºÉ´ÉÇuùxuùIɪÉRÂóEò®úÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ iÉ xɨÉ: b.मूिाधारदद प्रततभसवभावानन्त्दनाथाचधकष्टत वामदक्षनासापयवन्त्त ईडावपङ्गिानाडीद्वय िलित प्राणवायुरूप सुश्री वकह्नकिा प्रकालशत मत्सयावतारसवरूप दशमहाववद्यायाां कमिाकत्मकालभन्त्न श्रीां कां सववलसवद्धप्रदादे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४.मि ू ाधारदद सभ ु गानन्त्दनाथाचधकष्टत गद ु पयवन्त्त अिम्बस ु ानाडी िलित अपानवायरू ु प धम्र ू ाचिव वकह्नकिा प्रकालशत वामनावतारसवरूप दशमहा- ववद्यायाां धूमावत्यालभन्त्न ह्रां िां सववसांपत्प्रदादे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४.पञ्िमावरण समकष्ट मन्त्रा: ४.मूिाधारदद सवाववयवपयवन्त्त वारणानाडी िलित व्यानवायुरूप उष्मावकह्नकिा प्रकालशत रामावतारसवरूप दशमहाववद्यायाां तारालभन्त्न ्िरां गां सवववप्रयांकरर दे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः 52 .

मूिाधारदद जठरपयवन्त्त ववश्वोदरा नाडी िलित कृकरवायुरूप ववसफुलिङ्चगनी वकह्न किा प्रकालशत नलृ सांहावतारसवरूप दशमहाववद्यायाां त्ररपुरभैरव्यालभन्त्न श्रीां जां सववववघ्नतनवाररणीदे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४.मूिाधारदद श्री गुर अमुकाननदनाथाचधकष्टत ब्रह्मरन्त्रपयवन्त्त सुषुम्नानाडी िलित उदानवायरू ु प ज्जवालिनी वकह्नकिा प्रकालशत वराहावतार- सवरूप दशमहाववद्यायाां भव ु नालभन्त्न ऐां घां सववमङ्गिकाररणी दे वी श्रीपा.मूिाधारदद पूणावनन्त्दनाथाचधकष्टत गुह्यपयवन्त्त कुहूनाडी िलित नागवायुरूप कवपिावकह्नकिा प्रकालशत परशुरामावतारसवरूप दशमहा- ववद्यायाां तछन्त्नमसतालभन्त्न ॐ िां सववदुःु िववमोचिनीदे वी श्रीपादक ु ाां पू-तपवयालम नमुः ४.मूिाधारदद सवाववयवपयवन्त्त वारणानाडी पादपयवन्त्त हकसतकजह्वा नाडी िलित धनञ्जयवायुरूप सुरूपा वकह्न किा प्रकालशत कल््यावतारसवरूप दशमहाववद्यायाां सुन्त्दयवलभन्त्न ए ञां सवव स भाग्यदातयनी दे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः 53 .मि ू ाधारदद जठरपयवन्त्त ववश्वोदरा नाडी िलित दे वदत्त वायरू ु प कव्यवादहनीवकह्नकिा प्रकालशत कृष्णावतारसवरूप दशमहाववद्यायाां कालिकालभन्त्न क झां सवावङ्गसन्त् ु दरर दे वी श्रीपादक ु ाां पज ू यालम तपवयालम नमुः ४.मि ू ाधारदद प्रकाश-ववमशावनन्त्दनाथाचधकष्टत वामदक्षश्रोर पयवन्त्त शङ्खिनी पयकसवनी नाडीद्वय आनन्त्दानन्त्दनाथाचधकष्टत कजह्वा पयवन्त्त सरसवतीनाडी जठरपयवन्त्त ववश्वोदरा नाडी िलित समानवायुरूप हव्य वादहनीवकह्न किाप्रकालशत बिभद्रावतारसवरूप दशमहाववद्यायाां मातङ्ग्यालभन्त्न स ुः ङां सववकाम- फिप्रदा दे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४.मि ू ाधारदद श्रीसत्य-श्रीज्ञानानन्त्दनाथाचधकष्टत दक्षवामनेरपयवन्त्त गान्त्धारर पष ू ानाडीद्वयिलित कूमववायुरूप ज्जवलिनीवकह्नकिाप्रकालशत कूमाववतार-सवरूप दशमहाववद्यायाां बगिालभन्त्न ह्रां छां सवव मत्ृ यु प्रशमनी दे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४.तपवयालम नमुः ४.एकावलि ४.

तपवयालम नमुः पञ्िववधमन्त्नपाचित काग्न्त्यात्मक धूम्राचिववकह्नकिारूप दशमहाववद्यायाां धूमावत्यालभन्त्न वामनावतारसवरूप स वां सववव्याचध-ववनालशनी दे वी श्रीपा-नमुः ४- - िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित - काग्न्त्यात्मक ज्जवालिनी किारूप दशमहाववद्यायाां बगिालभन्त्न कूमाववतारसवरूप क शां सवावधारसवरूपा दे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४- िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित काग्न्त्यात्मक उष्मावकह्नकिारूप दशमहाववद्यायाां तारालभन्त्न रामावतारसवरूप ह षां सववपापहरादे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४- िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित काग्न्त्यात्मक सुरूपावकह्न किारूप दशमहाववद्यायाां सुन्त्दयवलभन्त्न कल््यावतारसवरूप ि सां सवावनन्त्दमयी दे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः 54 - .नमुः ४- िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित - ग्न्त्याां दाहकाग्न्त्यात्मक ज्जवालिनीवकह्नकिारूप दशमहाववद्यायाां भव ु नालभन्त्न वराहावतार सवरूप ह िां सववज्ञानम ४- िेह्य ग्न्त्याां दे वी श्रीपादक ु ाां पू.षष्टावरण समकष्ट मन्त्रा: ४- िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित - ग्न्त्याां रे िकाग्न्त्यात्मक हव्य वादहनीवकह्नकिारूप दशमहा-ववद्यायाां मातङ्ग्यालभन्त्न बिभद्रावतारसवरूप ई मां सववज्ञादे वी श्रीपादक ु ाां पज ू यालम तपवयालम नमुः ४- िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित - ग्न्त्याां शोिकाग्न्त्यात्मक ववसफुलिङ्चगनीकिारूप दशमहाववद्यायाां त्ररपुरभैरव्यालभन्त्न नलृ सांहावतारसवरूप ि यां सववशक्तदे वी श्रीपादक ु ाां पू-तपवयालम नमुः ४- िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित - ग्न्त्याां पािकाग्न्त्यात्मक सुश्रीवकह्नकिारूप दशमहाववद्यायाां कमिाकत्मकालभन्त्न मत्सयावतारसवरूप ह्रां रां सवणश्वयवप्रदा दे वी श्रीपा.एकावलि c.

एकावलि ४- िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित - काग्न्त्यात्मक कवपिावकह्नकिारूप दशमहाववद्यायाां तछन्त्नमसतालभन्त्न परशरु ामावतारसवरूपसवरूप ह्रां हां सववरक्षासवरूवपणी दे वी श्रीपादक ु ाां पू-तपवयालम नमुः ४- िेह्य पञ्िववधमन्त्नपाचित - काग्न्त्यात्मक कव्य वादहनीवकह्नकिारूप दशमहाववद्यायाां कालिका-लभन्त्न कृष्णावतार स क्षां सवेकप्सतफिप्रदादे वी श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः d.नमुः - 55 . समकष्ट मन्त्रा: ४- + - श्रीपादक ु ाां पू-नमुः - ४+ ङां –ि- श्रीपा-नमुः ४S + ञां-ह्रां- श्रीपा-नमुः ४+ - - श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४- + .४- श्रीपा.

एकावलि s ४- + - - श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः + श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः ४- - - सवच्छन्त्द + श्रीपादक ु ाां पूजयालम तपवयालम नमुः 56 .

मनु उपालसता ववद्या. िोपामद्र ु ा उपालसता ववद्या.कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर In the chapter on devī darśana dīkṣā in lalitopākhyānā śrī Hayagrīva instructs sage agastya a puṣpāṅjalī by the āvaraṇa sahasrākṣarī which ends as’…महे श माधव ववधात ृ मन्त्मथ सकन्त्द नन्त्दरन्त्द्र मनु िन्त्द्र कुबेरागसत्य दव ू ावसुःक्रोधभट्टारक ववद्याकत्मके. a completely different approach in each manner to the Divine Mother śrī Lalitā. ववष्णु उपालसता ववद्या-हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 12. अगसत्य उपालसता ववद्या. इन्त्द्र उपालसता ववद्या.Only two are changes are seen.कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4. as a result of their continuous sādhana-1. a śrī Kula tantrā.हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 11. शङ्कर उपालसता ववद्या. सूयव उपालसता ववद्या.सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 10. िन्त्द्र उपालसता ववद्या .कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3. by the devatā.सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 9. नकन्त्द उपालसता ववद्या.हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 7. 57 śrī Devī Lopāmudrā and śrī . This discussion is on the variations observed in them.हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 8. कुबेर उपालसता ववद्या. Jñānārṇava tantra.कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5.Dvādaśa upāsakāḥ In all tantras and stotras we find a reference to twelve upāsakā.हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 6. in the thirteenth chapter visualizes these mantras and gives an elucidation of the same. The following are the mantras envisaged (deciphered from the text) by twelve aspirants.कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. दव ू ावस उपालसता ववद्या. ṛṣi and men.एकावलि 7. काम उपालसता ववद्या.

Agastya.सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां हसकएईिह्रां We find the mantra worshipped by Skanda as3. only composition of the sloka is slightly different. refers to the twelve upāsakā in the 85th stanza as (names are translated) Surya. Gaṇapati and Kāmadeva. Indra. ववधात ृ उपालसता ववद्या.कएईिह्रां हकहिह्रां हसकिह्रां In śrī vidyārṇava tantra we find a reference to above Jñānārṇava tantra list of upasakā and also from another tantra (tantrāntare).हसकिह्रां हसकसकिह्रां सहकहिह्रां In a stotra of a hundred stanzas in antādi style in tamil on Devī Abirami of Thirukadavur by Abirami bhatta. Here an addition to above 58 . kubera. The mantra envisaged by Lord Skanda is seen in śrī vidyārṇava tantra (discussed below).हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 2. Their elucidative slokas.समत ृ ाुः In prapañca sara sara sangraha we find the same list. मनुां िन्त्द्रां कुबेरां ि िोपामुद्राां ि मन्त्मथां* अगसत्यां नकन्त्दकेश ि सय ू ं ववष्णांु ि षण्मि ु ां* लशवां दव ु ावससां िाद क्रमेणान्त्ते समिवयेत ्. which is-- मनुश्िन्त्द्र. िन्त्द्र उपालसता ववद्या . Shiva. Brahma. कुबेर उपालसता ववद्या. Agni. variance with respect to Jñānārṇava is as below-1. Vishnu. Only rituals and methodologies for the kādi vidyā of śrī Manmatha is seen in the subsequent chapters. Skanda. are seen in prapañca sara sara sangraha and also decoded by its author. सकन्त्द उपालसता ववद्या. Candra. the rest upasaka mantras are not discussed there. for all these mantras. Mantra worshipped by Lord Brahmā is seen in Trailokya mohana kavaca as- 1.एकावलि Sūryā are substituted by śrī Brahma and śrī skanda.कुबेरश्ि िोपामुद्रा ि कामराट् * अगसत्य नन्त्दर सूयश्व ि ववष्णु सकन्त्द लशवसतथा * दव ु ावससश्ि महादे व्या द्वदशोपासका.

Budhārcitā(825) = Worshipped by Lord Budha (Planet Mercury) 2. Candravidyā(239) – Worshipped by Lord Candra (Moon) 12. we can also infer their King Lord Vishv āvasu and also to the pair hāhā hoohoo. அம்புலி. propagator of the mankind 3. டதயடலபய Interestingly we can see the list of twelve upāsakā (in the Lalitā sahasranāma -1. wife of Sage Agastya 7. tāpasārādhyā(359)* Sanakādi samrādhyā (726)–Worshipped by the sages viz. Lord Brahma and Indra 5. Mantra worshipped by śrī Agni deva is seen in śrī vidyārṇava. Nandividyā(733) – Worshipped by Lord Nandi The following upāsakā mantras are not known widely. கோதிப் பேோருேடைக் கந்தன். when the list of upāsakā was expanded to twenty five. Rājarājārcitā(305) – Worshipped by Lord Kubera. Lopāmudrārcitā(647) – Worshipped by śrī Devī Lopamudra. (also called as rājarāja) 8. +ÊxɱÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ Ê´ÉtÉ. கோமன் முதல் சோதித்த புண்ணியர் எண்ணிலர் பேோற்றுவர். though this indicates of all gandharvās. பேோதிர் ேிரமன் புரோரி. durvāsā. agastyā. mantra worshipped by śrī Gaṇeśa is not seen. அங்கி குபேரன். Manuvidyā(238) – Worshipped by Lord Manu.एकावलि said we are amazed to see Gaṇeśa and agni deva. Haribrahmendrasevitā(297) – Worshipped by Lord Vishnu. However. Mārtāṇdabhairavārādhyā(785) – Worshipped by Lord Surya (sun) 11. śivārādhyā (406) – Worshipped by Lord Shiva 9. Kamāsevitā(586) – Worshipped by Lord Manmatha 2. Gandharva sevitā(636) – Worshipped by gandharvās. கணேதி. MahāBhairavapūjitā(231) – Worshipped by Lord Bhairavaa (Shiva) 6. four Sanakādi sages 4. முரோரி பேோதியமுனி. அமரர்தம் பகோன். 4. 59 . amazingly they are also twelve-1. Kamalākṣaniṣevitā(558) – Worshipped by Lord Vishnu 10.4-EòºÉEò±É¿Ó ½þºÉ±ÉEò±É¿Ó ºÉEò±É®ú±É¿Ó ஆதித்தன்.

Sarasvati Devī 6. harārādhyā (LT-105).Worshipped by Devī AshvArUdhA 9. 5.एकावलि 3.Worshipped by Vishnu. Saci Devī 4.Worshipped by Shiva 5.Worshipped by Lopamudra. Hādi vidyā (LT-119). Dhīra samarcitā (917) – Worshipped by bold sādhakas 12. 8.Worshipped by people who follow all rules meticulously. wife of agastya 11. Kṣetrapāla samarcitā(345) – Worshipped by Lord Kshetra pāla (protector of divine places) 7. Ā-bāla-gopa vidhitā (994) – Worshipped by the young cattle herder (allusion to Lord Krishna) In Lalitā triśatI also there are references to the upasakas 1. Hayamedha samarcitā (LT108) Worshipped by (Horse) sacrifice 60 .Worshipped by Manmatha 2. Ekavīrādi samsevyā. Guhakāradhyā(720) – Worshipped by the secret worshippers 10. LalāTanayanārcitā (LT-68) – Worshipped by Bhairava 4. śiṣitapūjitā(412). Rambhādi vanditā (741) – Worshipped by celestial dancers at Indra’s court.Worshipped by skilled sādhakas 11.Worshipped by Heroes 3. Kandarpa vidyā (LT-12). Hayārūdhāsevitāñghri. Vīrārādhyā(777) . Pulomajārcitā(545) – Worshipped by wife of Indra. Hari brahmendra sevitā. Hala dṛt pūjitā – Worshipped by BalarAma (Vishnu) 7. Dvija bṛnda niṣevitā(423) – Worshipped by people who are twice-born (this is indicative of having a thirst for self-knowledge) 9. Brahma & Indra 8. śāradārādhyā(123) – Worshipped by wife of Brahma. Lakshmaṇāgraja pūjitā – Worshipped by rAma (Vishnu) 6. Haridaśvādi vanditā (LT-106). sanakādi muni dhyeyā (LT230) Worshipped by sanakadi sages 12.Worshipped by Indra 10.

{É\SÉ˴ɶÉÊiÉ ={ÉɺÉEòÉxÉÉÆ Ê´ÉtÉGò¨É: 1*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó EòɨÉäxÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 2*4-½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¨É½þÉ{ÉÉ{ÉÉèPɶɨÉxÉÒ ±ÉÉä{ÉɨÉÖpùÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: 3*4-Eò½þB<Ç±É¿Ó ½þEòB<Ç±É¿Ó ºÉEòB<Ç±É¿Ó ¨Éx´ÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4*4-ºÉ½þEòB<Ç±É¿Ó ºÉ½þEò½þB<Ç±É¿Ó þºÉ½EòB<Ç±É¿Ó SÉxpùÉä{ÉÉʺÉiÉÉ +¨ÉÞiÉÉJªÉɸÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhɸÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 5*4-½þºÉEòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þB<Ç±É¿Ó ½ºÉþEòB<Ç±É¿Ó ÊxÉÊvÉnùÉ%ÊJɱÉʺÉÊrùnùÉ EÖò¤Éä®úÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ-xɨÉ: 6*4-½þºÉEò±É¿Ó ºÉEò½þºÉEò±É¿Ó ºÉ½þEò½þ±É¿Ó ºEòxvÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 7*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉ½þºÉEò±É¿Ó ºÉ¨ÉÖpù¶ÉÉä¹ÉhÉÒ ¨É½þɺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ºÉÚªÉÉÇÊn ùºiÉΨ¦ÉxÉÒ-+MɺiªÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉxɨÉ:: 8*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉ±ÉEò¿Ó ¨É½þÉʺÉÊrù|ÉnùÉ VÉMÉuù¶ªÉÊ´ÉvÉÉʪÉxÉÒ ¶ÉGòÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 9*4-ºÉB<Ç±É¿Ó ºÉ½þEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ʶɴɺÉÉÊzÉvªÉEòÉÊ®úhÉÒ xÉxtÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 10*4-½þºÉEò±É¿Ó ºÉ½þEò±É¿Ó ºÉEò½þ±É¿Ó ¨É½þÉiÉäVÉ:|ÉnùÉʪÉxÉÒ ºÉÚªÉÉæ{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 11*4-EòB<DZɽ®úÒ ½þºÉEò½þ±É½®úÒ ºÉEò±É½®úÒ ºÉ´ÉǶÉjÉÖxÉɶÉEò®úÒ nÚù´ÉÉǺÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 12*4-½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò±É½þºÉEò½þ±ÉºÉEò±É¿Ó ʶɴɰü{ÉÊ´É´ÉvÉÇxÉÒ ¶ÉRÂóEò®úÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 13*4-½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉB<Ç±É¿Ó ºÉ½þEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉEò±ÉÉ{ÉÊzÉ´ÉÉÊ®úhÉÒ Ê´É¹h´ÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ.xɨÉ: 14*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þEò½þ±É¿Ó ½þºÉEò±É¿Ó =x¨ÉxªÉÖ{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 61 ..एकावलि 7.a.

.एकावलि 15*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þEò½þ±É¿Ó ºÉ½þEò±É¿Ó ´É¯ûhÉÉà{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 16*4-Eò½þB<Ç±É¿Ó ½þ±ÉB<Ç±É¿Ó ºÉEòB<Ç±É¿Ó +{ɨÉÞiªÉÖÊxÉ´ÉÉÊ®úhÉÒ ªÉ¨ÉvɨÉÇ ®úÉVÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ-xɨÉ: 17*4-EòºÉEò±É¿Ó ½þºÉ±ÉEò±É¿Ó ºÉEò±É®ú±É¿Ó +ÊxɱÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 18*4-½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É®ú±É¿Ó xÉÉMÉ®úÉVÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 19*4-EòB®ú®ú±É®ú¿Ó ½þEò±É®ú½þ±É¿Ó ºÉ®úEò±É®ú¿Ó ºÉ´ÉÇ{ÉÉ{ÉÉèPɶɨÉxÉÒ ´ÉɪÉÚ{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 20*4-EòB<Ç®ú±É¿Ó ½þEò½þ±É®ú¿Ó ºÉ½þEò±É®ú¿Ó ¤ÉÖvÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 21*4-Eò½þ±É¿Ó ½þEò±É½þ±É±É®ú¿Ó ºÉEò±É¿Ó <ǶÉÉxÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 22*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ®úiªÉÖ{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 23*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó EòB<Ç±É¿Ó xÉÉ®úɪÉhÉÉà{ÉÉʺÉiÉɸÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: 24*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þEò½þºÉ®ú¿Ó ½þºÉEò±É¿Ó ¥ÉÀÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 25*4-½þºÉEò±É¿Ó ½þEò½þºÉ®ú±É¿Ó ½þºÉEò±É¿Ó VÉÒ´ÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¸ÉÒ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ +RÂóMÉ {É\SÉ®úixÉ Ê´ÉtÉ: 1*4-EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¸ÉÒ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ +RÂóMɦÉÚiÉÉ |ÉlɨɮúixÉÉJªÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ.¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÒ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ +RÂóMɦÉÚiÉÉÊuùiÉҪɮúixÉÉJªÉ ¸ÉÒÊ´ÉtɹÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ.xɨÉ: 2*4.xɨÉ: 3*4-Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ¸ÉÒ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ +RÂóMɦÉÚiÉÉiÉÞiÉҪɮúixÉÉJªÉ ¤ÉɱÉɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4*4-Bá C±ÉÓ =ÎSUô¹]SÉÉhb÷Éʳý ºÉÖ¨ÉÖÊJÉnäùÊ´É-¨É½þÉÊ{ɶÉÉÊSÉÊxÉ ¿Ó `ö:`ö:`ö: º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ +RÂóMɦÉÚiÉÉ SÉiÉÖlÉÇ®úixÉÉJªÉ ºÉÖ¨ÉÖÊJÉ°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ62 .

¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÒÊ´ÉtÉEÚò]õMɦÉÉǹÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 9*4.+Éá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºjÉÓ Bá GòÉé GòÓ ¸ÉÓ ½ÖþÆ ´Éè®úÉMªÉ°üÊ{ÉÊhÉ ¨ÉÉäIÉ|ÉnùÉʪÉxÉÒ iÉÉ®úÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 2*4.¸ÉÓ ºÉÉè: C±ÉÓ Bá ¿Ó +Éá ¿Ó ¸ÉÓ ºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó EòB<Ç±É¿Ó ¿Ó Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ¸ÉÓ ¸ÉÒÊ´ÉtÉ{É®úɹÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 10*4.Bá ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè:C±ÉÓ Bá ºÉÉè: C±ÉÓ ¸ÉÓ ¿Ó Bá ºÉ®úº´ÉiªÉÖ{ÉÉʺÉiÉÉ ºÉnùºÉuùºiÉÖ ÊxÉvÉÉÇ®ú°üÊ{ÉhÉÒ ºÉ´ÉÇÊ´ÉtÉ|ÉnùÉʪÉxÉÒ ´ÉÉMÉÉÊnù¹ÉÉäb÷¶ÉÒ º´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 6*4-½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¨É½þÉYÉÉxɨɪÉÒ ¹ÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 7*4.ºÉÉè: ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ EòB<DZɽþºÉEò½þ±ÉºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ºÉÉè:¸ÉÒÊ´ÉtɨɽþÉ{É®úÉ ¹ÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 11*4.xɨÉ: 63 .C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: ºÉ¨ÉÉÊvÉ°üÊ{ÉhÉÒ ºÉ´ÉÇEòɨÉ|ÉnùÉʪÉxÉÒ EòɨÉÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 4*4.एकावलि 5*4-$ ¿Ó ºjÉÓ ½ÚþÆ GòÓ ¸ÉÓ =OÉiÉÉ®äú ºÉÉè: C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ +RÂóMÉ ¦ÉÚiÉÉ {É\SɨɮúixÉÉJªÉ =OÉiÉÉ®úÉ º´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: ¹ÉÉàb÷¶ÉÒ ¦ÉänùÉ: 1*4.¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ÊSÉkÉ´Éè¨É±ªÉ°üÊ{ÉhÉÒ ºÉ´Éê·ÉªÉÇ|ÉnùÉʪÉxÉÒ ®ú¨ÉÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 5*4.¿Ó ¼ºÉÉè: +Éá Bá ¿Ó ¸ÉÓ Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ºjÉÓ GòÉá Bá ¿Ó ½ÚþÆ ½ÚþÆ ¸ÉÓ ¨ÉÖ¨ÉÖIÉÖi´É°üÊ{ÉhÉÒ ºÉ´ÉÇiÉi´É|ɤÉÉäÊvÉxÉÒ ¨ÉɪÉÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 3*4.EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÒ¹ÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 8*4.$ C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Bá C±ÉÓ ºÉÉè: EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºjÉÓ Bá GòÉá GòÓ <È ½ÖþÆ ¨É½þÉnäù´ÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ ¸ÉҨɽþɹÉÉäb÷¶ÉÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ..

B<ÇEò±É¿Ó $ ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¥ÉÀºÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Bá +Æ +ÉÆ ºÉÉè:B<ÇEò±É¿Ó-¿Ó Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ½þºÉEò½þ±É¿Ó -¸ÉÓ +ÉÆ ¿Ó GòÉá ºÉEò±É¿Ó ºÉ´ÉÇ{ÉÉ{É|ÉhÉÉʶÉxÉÒ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 4.xɨÉ: 4-+Æ +ÉÆ ºÉÉè: ºÉB<ÇEò±É¿Ó *Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ½þºÉEò½þ±É¿Ó *Bá ¿Ó ¸ÉÓ ºÉEò±É¿Ó ¦ÉÖÊHò¨ÉÖÊHò|ÉnùɸÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhɸÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ.$ B<ÇEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó +¹]õÉnù¶ÉÒºÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+Æ +ÉÆ ºÉÉè: Bå ºÉ½þºÉ®éú B<ÇEò±É¿Ó* Bå C±ÉÓ ºÉÉè: <È ºÉ½þºÉEò±É®úÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó* +Éé ºÉ½þºÉ®úÉè: ºÉEò±É¿Ó ½ÆþºÉ: ¨ÉÞiªÉÖ\VɪÉÉ ¸ÉÒÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ4.<ÇBEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¶ÉÉHòEòÉ®úÉVɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.EòB¸ÉÓ ½þºÉEò±É¿Ó C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó +{É®úÉÊVÉiÉÉJªÉ ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 4-Bá EòB<Ç±É¿Ó C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ºÉÉä½Æþ ½þÉé ½ÆþºÉ: ¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó Bá {É®ú¨ÉÉxÉxnùÊSÉnÂùPÉxÉÉ ¥ÉÀÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÖxnù®úÒ ¦ÉänùÉ: 4.एकावलि ʴɶÉä¹É ¸ÉÒÊ´ÉtÉ ¨ÉxjÉÉ: 4-½þ +ÉÆ B<ÇEò±É¿Ó*ºÉÉè:Bá ½þºÉEò½þ±É¿Ó*C±ÉÓ ¸ÉÓ ºÉEò±É¿Ó ´ÉÉÎ\UôiÉ|ÉnùÉ =x¨ÉÊxÉxÉÉ¨É ¸ÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ.¿Ó ¼ºÉÉé º½þÉé ¿Ó º½þÉé ¼ºÉÉé C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó ¿Ó ¿Ó ºÉÉè: ºÉÉè: ½þ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ¼ºÉÉé º½þÉé ¿Ó º½þÉé ¼ºÉÉé ¿Ó ¨É½þÉ{ÉÖ¯û¹É{ÉÚÊVÉiÉÉ ºÉÖxnù®úÒ º´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®ú ºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 64 .xɨÉ: 4-¿ÉÆ ¿Ó B<ÇEò±É¿Ó Bá*¿ÚÆ ¿é ½þºÉEò½þ±É¿Ó ¿Ó*¿Éé ¿: ºÉEò±É¿Ó ¸ÉÓ ºÉ´ÉÇEòɨÉÉlÉÇ|ÉnùɸÉÒÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.xɨÉ: 4.B<ÇEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó $ ºÉEò±É¿Ó +xÉxiɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®Ò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.B<ÇEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¶ÉÉHò±ÉÉä{ÉɨÉÖpùɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉ Æ{ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

½þ±ÉEòºÉ¿Ó EòºÉ½þ±ÉºÉ¿Ó Eò½þºÉ±É¿Ó κlÉÊiɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½þIÉ¨É±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó >ðv´ÉÉǨxÉɪɺɴÉǺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 65 .½þºÉºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó =kÉ®úɨxÉɪɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Eò½þIÉ¨É±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó >ðv´ÉÉǨxÉɪÉʶɴɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Eò±É¿Ó Eò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó nùÊIÉhÉɨxÉɪɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 4.½þEò±ÉºÉ¿Ó Eò½þ±ÉºÉ¿Ó Eò±ÉºÉ½þ¿Ó ¦ÉɺÉɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +ɨxÉÉªÉ ºÉÖxnù®úÒ ¦ÉänùÉ: 4.Eò<ÇB±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó +xÉxiɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {É\SÉEÞòiªÉ ºÉÖxnù®úÒ ¦ÉänùÉ: 4.ºÉ½þEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó {ÉζSɨÉɨxÉɪɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ºÉ½þIÉ¨É±É¿Ó ºÉ½þEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó >ðv´ÉÉǨxÉɪɶÉÊHòºÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½þºÉEò±É¿Ó ½þ±ÉEò½þºÉ¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÞι]õºÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.±ÉEòºÉ¿Ó þºÉ½þEò±É¿Ó ½ºÉºÉ½þEòþ¿Ó ÊxÉ®úÉJªÉɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½þºÉ¿Ó Eò½þ¿Ó ºÉ½þ¿Ó ¯ûpùªÉÉäÊMÉxÉÒ {ÉÚ´ÉÉǨxÉɪɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½þ±ÉEòºÉ¿Ó ½þºÉEò±É¿Ó ½þ½þEò±É¿Ó ºÉƾþÊiɺÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

º´ÉɽþÉ 4-ºÉEò±É¿Ó-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.एकावलि 7. b.ʶɮúºÉä.´É¹É]Âõ 4-EòB<Ç±É¿Ó -+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ 4-½þºÉEò½þ±É¿Ó-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ 4-ºÉEò±É¿Ó-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ 66 .¾þnùªÉɪÉ.xɨÉ: 4-½þºÉEò½þ±É¿Ó-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ. jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉEò´ÉSÉÆ **{ÉÚ´ÉǦÉÉMÉÆ** ¸ÉÒnäù´ªÉÖ´ÉÉSÉ: ¸ÉÒ¨ÉÎkjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉÉÇ ªÉɪÉÉ Ê´ÉtÉ: ºÉÖnùÖ±ÉǦÉÉ:* EÞò{ɪÉÉ EòÊlÉiÉÉ: ºÉ´ÉÉÇ: ¸ÉÖiÉɶSÉÉÊvÉMÉiÉÉ ¨ÉªÉÉ**1 |ÉÉhÉxÉÉlÉÉvÉÖxÉÉ ¥ÉÚʽþ Eò´ÉSÉÆ ¨ÉxjÉÊ´ÉOɽÆþ* jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉÆ SÉäÊiÉ xÉɨÉiÉ: EòÊlÉiÉÆ {ÉÖ®úÉ**2 <nùÉxÉÓ ¸ÉÉäiÉÖʨÉSUôÉ欃 ºÉ´ÉÉÇlÉÇEò´ÉSÉÆ º¡Öò]Æõ**3 <Ç·É®ú =´ÉÉSÉ: ¸ÉÞhÉÖ näùÊ´É |É´ÉIªÉÉ欃 ºÉÖxnùÊ®ú |ÉÉhɴɱ±É¦Éä* jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉÆ xÉÉ¨É ºÉ´ÉÇ Ê´ÉtÉèPÉÊ´ÉOɽÆþ**4 ªÉrÞùi´ÉÉ nùÉxÉ´ÉÉÎx´É¹hÉÖÌxÉVÉÇPÉÉxÉ ¨ÉÖ½Öþ¨ÉÖ½Ç Öþ:* ºÉÞϹ]õ Ê´ÉiÉxÉÖiÉä¥ÉÀÉ ªÉrÞùi´ÉÉ {É`öxÉÉtiÉ:**5 ºÉƽþiÉÉǽÆþ ªÉiÉÉä näùÊ´É näù´Éä¶ÉÉä ´ÉɺɴÉÉä ªÉiÉ:* vÉxÉÉÊvÉ{É: EÖò¤Éä®úÉä%Ê{É ªÉiÉ: ºÉ´Éæ ÊnùMÉÒ·É®úÉ:**6 xÉ näùªÉÆ ªÉnùʶɹªÉ䦪ÉÉä näùªÉÆ Ê¶É¹ªÉä¦ªÉ B´É SÉ* +¦ÉHäò¦ªÉÉä%Ê{É {ÉÖjÉ䦪ÉÉä nùk´ÉÉ ¨ÉÞiªÉ֨ɴÉÉ{xÉÖiÉÉiÉÂ**7 ¸ÉÒ¨ÉÎkjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉÉÇ: Eò´ÉSɺªÉ @ñʹÉ: ʶɴÉ:* UôxnùÉä Ê´É®úÉ]Âõ näù´ÉiÉÉ SÉ ¸ÉÒ¨ÉiÉ ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ**8 vɨÉÉÇlÉÇEòɨɨÉÉäIÉä¹ÉÖ Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: |ÉEòÒÌiÉiÉ:**9 **Eò´ÉSÉ|ÉÉ®ú¨¦É:** +ºªÉ ¸ÉÒ jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉEò´ÉSɺªÉ Ê¶É´É @ñʹÉ: Ê´É®úÉ]Âõ Uôxnù: ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ¨ÉuùÉM¦É´ÉEÚò]Æõ ʤÉVÉÆ EòɨɮúÉVÉEÚò]Æõ ¶ÉÊHò: ¶ÉÊHòEÚò]Æõ EòÒ±ÉEÆò vɨÉÉÇlÉÇEòɨɨÉÉäIÉä VÉ{Éä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: 4-EòB<Ç±É¿Ó -+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.

¾þnùªÉɪÉ.´É¹É]Âõ 4-½þºÉEò½þ±É¿Ó -+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ 4-ºÉEò±É¿Ó-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ 4-ºjÉÓ Bå GòÉå GòÓ <È ½ÖþÆ -Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ: ¦ÉÚ´É䶨ÉMÉÊjÉ´ÉÞkɹÉÉäb÷¶ÉxÉÉMɶÉGò ÊnùMªÉÖM¨É´Éº´ÉxɱÉEòÉähÉMÉʤÉxnÖù¨ÉvªÉä* ʺÉÀɺÉxÉÉä{ÉÊ®úMÉiÉiÉÉ®úEò{ÉÒ`ö¨ÉvªÉä |ÉÉäi¡Öò±±É{ÉnÂù¨ÉÊxɱɪÉÉÆ ÊjÉ{ÉÖ®úÉÆ ¦ÉVÉä%½Æþ** ºÉxvÉÉªÉ ºÉÖ¨ÉxÉÉä ¤ÉÉhÉÉxÉ Eò¹ÉÇiÉÓ BäIÉ´ÉÆ vÉxÉÖ:* VÉMÉVVÉèjÉÓ VÉ{ÉÉ®úHòÉÆ näù´ÉÓ ´ÉhÉǨɪÉÓ ¦ÉVÉä** ±ÉÆ <ÊiÉ {É\SÉ{ÉÚVÉÉ* $ ½þºÉEò½þ±É¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ºÉEò±É¿Ó C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ GòÓ GòÓ GòÓ ¯ûpùºÉÚSªÉOÉähÉ ¨ÉÚ±ÉÊ´ÉtÉ ¶ÉÉ{ÉÆ =iEòұɪÉÉäiEòÒ±ÉªÉ º´ÉɽþÉ**(=iEòÒ±ÉxÉ ¨ÉxjÉÆ ºÉ{iÉ´ÉÉ®Æú VÉ{ÉäiÉÂ) 67 .xɨÉ: 4.´É¹É]Âõ 4-EòB<Ç±É¿Ó -+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ 4-½þºÉEò½þ±É¿Ó-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ 4-ºÉEò±É¿Ó¸ÉÓ-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ 4-¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bå ºÉÉè: -+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.एकावलि 4-EòB<Ç±É¿Ó -+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.ʶɮúºÉä.º´ÉɽþÉ 4-ºÉEò±É¿Ó¸ÉÓ-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.Bå C±ÉÓ ºÉÉè: -iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.xɨÉ: 4-½þºÉEò½þ±É¿Ó-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.º´ÉɽþÉ 4-EòB<DZɿÓ-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.ʶɮúºÉä.¾þnùªÉɪÉ.´É¹É]Âõ 4-½þºÉEò½þ±É¿Ó -+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ 4-ºÉEò±É¿Ó-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ 4-ºÉÉè: Bå C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ -Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ 4-$ C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ -+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.º´ÉɽþÉ 4-EòB<DZɿÓ-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.xɨÉ: 4-$ ¿Ó ¸ÉÓ -iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.¾þnùªÉɪÉ.ʶɮúºÉä.

एकावलि ʶɮúÉä ¨Éä ´ÉÉM¦É´ÉÆ {ÉÉiÉÖ EòB<Ç±É¿Ó °ü{ÉEÆò*½þºÉEò±É¿Ó ±É±É]Æõ {ÉÉiÉÖ EòɨÉä·É®úÉÊnùEÆò ¨É¨É* ½þEò½þ±É¿Ó où¶ÉÉè ¨Éä {ÉÉiÉÖ EòɨÉä·É®ú ¨ÉvªÉ¨ÉÆ*Eò½þªÉ±É¿Ó ¸ÉÖÊiÉ {ÉÉiÉÖ ¨É½þɺÉÉè¦ÉÉMªÉnùɪÉEÆò* ½þEò±ÉºÉ¿Ó ¶ÉCiªÉÉJªÉÆ {ÉÉiÉÖ ÊVɼ´ÉÉÆ SÉ {É\SɨÉÆ* EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò±É¿Ó ½þEò½þ±É¿Ó Eò½þªÉ±É¿Ó ½þEò±ÉºÉ¿Ó ´ÉnùxÉÆ ºÉnùÉ {ÉÉiÉÖ {É\SÉEÚò]õÉ {É\SɨÉÒ**1 EòB<Ç±É¿Ó QÉÉhÉÆ ºÉÉ {ÉÉiÉÖ ´ÉÉM¦É´ÉºÉYÉEÆò* ½þºÉEò½þ±É¿Ó Eòh`Æö {ÉÉiÉÖ EòɨÉä¶ÉºÉYÉEÆò* ºÉEò±É¿Ó ¶ÉÊHòEÚò]Æõ ºEòxvÉÉè {ÉÉiÉÖ {É®úÉΨ¤ÉEòÉ* EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó EòɨÉäxÉÉä{ÉÉʺÉiÉÉ Ê´ÉtÉ EòIÉnäù¶Éä ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**2 C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Bå ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bå ºÉÉè: EòɨÉÉÊnù¹ÉÉäb÷¶ÉÒ {ÉÉiÉÖ ¦ÉÖVÉÉè ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ**3 $ C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºjÉÓ Bå GòÉá GòÓ ¸ÉÓ ½ÖþÆ iÉÉ®úÉÊnù¹ÉÉäb÷¶ÉÒ {ÉÉiÉÖ ¨ÉÊhɤÉxvÉuùªÉÆ ¨É¨É**4 ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bå ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: Bå C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ®ú¨ÉÉÊnù¹ÉÉäb÷¶ÉÒ {ÉÉiÉÖ Eò®úÉè ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ**5 ¿Ó ¼ºÉÉè: $ Bå ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºjÉÓ GòÉå Bå ¿Ó ½ÚþÆ ½ÚþÆ ¸ÉÓ ¨ÉɪÉÉÊnù¹ÉÉäb÷¶ÉÒ JªÉÉiÉÉ ¾þnùªÉÆ {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ**6 Bå ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: C±ÉÓ Bå ºÉÉè:C±ÉÓ ¸ÉÓ ¿Ó Bå ´ÉÉMÉÉÊnù¹ÉÉäb÷¶ÉÒ {ÉÉiÉÖ ºiÉxÉÉè ¨Éä ºÉÖxnù®úÒ {É®úÉ**7 EòB¸ÉÓ ½þºÉEò±É¿Ó C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó xÉJÉ´ÉhÉÉÇ {ÉÉ·ÉÉê {ÉÉi´É{É®úÉÊVÉiÉÉ**8 ¿Ó ¼ºÉÉé º½þÉè ¿Ó º½þÉé ¼ºÉÉé C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó ¿Ó ¿Ó ºÉÉè: ºÉÉè: ½þ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ¼ºÉÉé º½þÉè ¿Ó º½þÉé ¼ºÉÉé ¿Ó ºÉÖxnù®úÒªÉÆ ºÉ¨ÉÉJªÉÉiÉÉ ¨É½þÉ{ÉÖ¯û¹É{ÉÚÊVÉiÉÉ ¨É½þÉMÉÖÁº´É°ü{ÉÉ SÉ Eäò´É±ÉÉxÉxnùÊSÉx¨ÉªÉÒ BEòËjɶÉuùhÉÇ°ü{ÉÉ EòÊ]õnäù¶ÉÆ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**9 ½þºÉEò±É¿Ó ¨Éä {ÉÞ¹`Æö {ÉÉiÉÖ ´ÉÉM¦É´ÉºÉYÉEÆò* ½þºÉEò½þ±É¿Ó EÖòËIÉ EòɨÉEÚò]Æõ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ* ´ÉIÉ:ºlɱÉÆ ¶ÉÊHòEÚò]Æõ ºÉEò±É¿Ó ºÉnùÉ´ÉiÉÖ* 68 .

एकावलि ½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ±ÉÉä{ÉɨÉÖpùÉ {É\SÉnù¶ÉÒ ¨ÉvªÉnäù¶ÉÆ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**10 Eò½þB<Ç±É¿Ó xÉÉË¦É ¨Éä ºÉ´ÉÇnùÉ´ÉiÉÖ* ½þEòB<Ç±É¿Ó EòË]õ ¨Éä ºÉ´ÉÇnùÉ´ÉiÉÖ* ºÉÎClÉxÉÒ (buttock) ¨Éä ºÉnùÉ {ÉÉiÉÖ ºÉEòB<Ç±É¿Ó ºÉnùÉ* Eò½þB<Ç±É¿Ó ½þEòB<Ç±É¿Ó ºÉEòB<Ç±É¿Ó ¨Éä B¹ÉÉ iÉÖ ¨ÉÉxÉ´ÉÒ Ê´ÉtÉ ºÉ´ÉÇiÉ: {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ**11 ºÉ½þEòB<Ç±É¿Ó ¨Éä >ð¯ûªÉÖM¨ÉÆ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ* ºÉ½þEò½þB<Ç±É¿Ó MÉÖÁÆ {ÉÉiÉÖ ºÉnùÉ ¨É¨É* þºÉ½EòB<Ç±É¿Ó VÉÉxÉÖxÉÒ (knee){ÉÉiÉÖ ¨Éä ºÉnùÉ* ºÉ½þEòB<Ç±É¿Ó ºÉ½þEò½þB<Ç±É¿Ó ºÉ½EòB<Ç±É¿Ó VɱɱÉä ¦ÉªÉºÉRÂóPÉÉiÉä ºÉ´ÉÇiÉ: {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ* ºÉÖxnù®úÒ uùÉËjɶÉÊiÉEòÉ SÉxpùÉä{ÉʺÉiÉÉ ¦ÉÞ¶ÉÆ **12 ½þºÉEòB<Ç±É¿Ó ¨Éä VÉRÂóPɪÉÖM¨ÉÆ (calf muscle) ºÉnùÉ´ÉiÉÖ* ½þºÉEò½þB<Ç±É¿Ó MÉÖ±¡òªÉÖM¨ÉÆ (ankle){ÉÉiÉÖ ºÉnùÉ ¨É¨É* ½ºÉþEòB<Ç±É¿Ó {ÉÉnùÉè {ÉÉiÉÖ ºÉ´ÉÇnùÉ* ½þºÉEòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þB<Ç±É¿Ó ½ºÉþEòB<Ç±É¿Ó ºÉnùÉ EÖò¤Éä®äúhÉ |É{ÉÚÊVÉiÉÉ* uùÉ˴ɶÉiªÉIÉ®úÒÊ´ÉtÉ ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉÆ ¨Éä ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**13 EòB<Ç±É¿Ó |ÉÉSªÉÉÆ ¨ÉÉÆ ÊjÉ{ÉÖ®úÉ {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ* ½þºÉEò½þ±É¿Ó {ÉÉiÉÖ ´ÉμxÉEòÉähÉäÊxÉ®úxiÉ®Æú* ºÉ½þºÉEò±É¿Ó ªÉɨªÉÉÆ {ÉÉiÉÖ ¨ÉÉÆ ºÉ´ÉÇʺÉÊrùnùÉ* EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉ½þºÉEò±É¿Ó Ê´ÉtÉMɺiªÉäxÉ ºÉƺÉä´ªÉÉ SÉGòºlÉÉ ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**14 ºÉB<Ç±É¿Ó ÊxÉiªÉÆ xÉè@ñiªÉÉÆ ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ* ºÉ½þEò½þ±É¿Ó {ÉÉiÉÖ |ÉiÉÒSªÉÉÆ ¨Éä ÊuùiÉÒªÉEÆò* ºÉEò±É¿Ó iÉÖ ´ÉɪɴªÉä ºÉnùÉ ¨ÉÉÆ {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ* ºÉB<Ç±É¿Ó ºÉ½þEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó xÉxtÉ®úÉÊvÉiÉ Ê´ÉtäªÉÆ ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉÆ ¨Éä ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**15 ½ºÉEò±É¿Ó =kÉ®äú ºÉnùÉ ¨ÉÉÆ {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ* ºÉ½þEò±É¿Ó Bä¶ÉÉxªÉä {ÉÉiÉÖ ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ* ºÉEò½±Éþ¿Ó >ðv´ÉÈ ºÉÖxnù®úÒ {ÉÉiÉÖ ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ* ½ºÉEò±É¿Ó ºÉ½þEò±É¿Ó ºÉEò½±Éþ¿Ó ¨ÉÉÆ ®úIÉiÉÖ ¨Éä ÊxÉiªÉÆ ºÉÚªÉÇ{ÉÚVªÉÉ ¨É½þÉänùªÉÉ**16 EòB<Ç±É¿Ó ´ÉÉM¦É´ÉÉJªÉÆ +vÉÉä ¨ÉÉÆ {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ* ½þºÉEò½þ±É¿Ó +xiÉ®úÒIÉÆ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ* ºÉ±ÉEò¿Ó iÉÉiÉÔªÉÆ iÉÖ ºÉ´ÉÇiÉ: {ÉÉiÉÖ ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ* EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉ±ÉEò¿Ó ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉÆ ¨Éä ¶ÉGò{ÉÚVªÉÉ ºÉiÉiÉÆ {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ**17 69 .

एकावलि EòB<Ç±É¿Ó ½þEò½þ±É¿Ó ½þºÉEò±É¿Ó SÉ ¥ÉÀÉÌSÉiÉÉ ¥ÉÀ®úxwÉÆ ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ {ÉɪÉÉiÉ ¸ÉÒ¨ÉÎkjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ**18 ½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò±É½þºÉEò½þ±ÉºÉEò±É¿Ó ¶ÉÉRÂóEò®úÒ SÉiÉÖ¹EÚò]õÉ ¨É½þÉÊ´ÉtÉ {ÉÉiÉɱÉä ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**19 ½þºÉEò±É¿Ó +ÉvÉÉ®Æú ¨Éä ºÉnùÉ´ÉiÉÖ* ½þºÉEò½þ±É¿Ó ʱÉRÂóMÉÆ ¨Éä ºÉ´ÉÇnùÉ´ÉiÉÖ* ºÉEò±É¿Ó {ÉÉiÉÖ xÉÉË¦É ºÉnùÉ ¨É¨É* ºÉB<Ç±É¿Ó ¾þnùªÉä +xÉɽþiÉä {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ*ºÉ½þEò½þ±É¿Ó Eòh`Æö ¨Éä {ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ* þºÉEò±É¿Ó ¨ÉxÉÉä¦ÉÖ´Éä ¨Éä ºÉ´ÉÇnùÉ´ÉiÉÖ*½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉB<Ç±É¿Ó ºÉ½þEò½þ±É¿Ó þºÉEò±É¿Ó ¹É]ÂõEòÚ ]õÉ ´Éè¹hÉ´ÉÒÊ´ÉtÉ ¹Éb÷ÉvÉÉ®Æú ºÉnùÉ´ÉiÉÖ* 20 EòB<DZɽþ®úÒ ½þºÉEò½þ±É½þ®úÒ ºÉEò±É½þ®úÒ nÖù´ÉÉǺɺÉÉ |É{ÉÚVªÉÉ ¨ÉÉÆ ÊnùIÉÖÊ´ÉtÉ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**21 Eò½þB<Ç±É¿Ó ½þ±ÉB<Ç±É¿Ó ºÉEòB<Ç±É¿Ó GòÉävÉäxÉ {ÉÚÊVÉiÉÉ Ê´ÉtÉ Ê´ÉÊnùIÉÖ{ÉÊ®ú®úIÉiÉÖ**22 ½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ¨É½þÉYÉÉxɨɪÉÒ Ê´ÉtÉ ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ ¨ÉÉÆ ºÉnùÉ´ÉiÉÖ**23 ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bå ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: Bå C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉÆ ¨Éä ºÉnùÉ{ÉÉiÉÖ ¤ÉÒVÉ°ü{ÉÉ SÉ ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ**24 ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bå ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bå C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉÆ ¨Éä ºÉnùÉ{ÉÉiÉÖ EÚò]õMɦÉÉÇ SÉ ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ**25 $ C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºjÉÓ Bå GòÉå GòÓ <È ½ÖþÆ ¨É½þÉnäù´ÉÒ* ¸ÉҨɽþɹÉÉäb÷¶ÉÒ {ÉÚhÉÉÇ |ÉÊlÉiÉÉ ¦ÉÖ´ÉxÉjɪÉä*YÉÉxÉäxÉ ¨ÉÞiªÉֶɨÉxÉÒ Ê¶É®úºlÉÉ ºÉ´ÉÇnùÉä´ÉiÉÖ*26 Bå EòB<Ç±É¿Ó C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ºÉÉä½Æþ ½þÉé ½ÆþºÉ: ¿ÓºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó Bå ¥ÉÀº´É°üÊ{ÉÊhÉ*+¹]õnù¶ÉÉIÉ®úÒ Ê´ÉtÉ {É®ú¨ÉÉxÉÉnùÊSÉnÂùPÉxÉÉ* xÉäjÉ´ÉänùÉi¨ÉEèò´ÉÇhÉêªÉÖiÇ ÉÉä ¨ÉÉÆ ºÉ´ÉÇnùÉ´ÉiÉÖ*27 70 .

एकावलि **¡ò±É¸ÉÖÊiÉ:** <ÊiÉ iÉä EòÊlÉiÉÆ näùÊ´É ¥ÉÀÊ´ÉtÉEò³äý¤É®Æú* jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉÆ xÉÉ¨É Eò´ÉSÉÆ ¥ÉÀ°ü{ÉEÆò**1 ºÉ{iÉEòÉäÊ]õ¨É½þÉÊ´ÉtɺiÉxjÉä¹ÉÖEòÊlÉiÉÉ: Ê|ɪÉä* iÉɺÉÉÆ ºÉÉ®úÉiºÉÉ®úiÉ®úÉ ªÉÉ SÉ Ê´ÉtÉ ºÉÖMÉÉäÊ{ÉiÉÉ**2 ¤É½ÖþxÉÉjÉÊEò¨ÉÖHäòxÉ ¸ÉҨɽþɹÉÉäb÷¶ÉÒ{É®úÉ* |ÉEòÉʶÉiÉÉ ¨ÉªÉÉ näùÊ´É ªÉÉÆ {ÉÞSUôÊiÉ {ÉÖxÉ:{ÉÖxÉ:**3 ¨É½þÉÊ´ÉtɨɪÉÆ ¥ÉÀEò´ÉSÉÆ ¨Éx¨ÉÖJÉÉäÊnùiÉÆ* MÉÖ¯û¨É¦ªÉSªÉÇ Ê´ÉÊvÉ´ÉiÉ Eò´ÉSÉÆ |É{É`äöiÉ iÉiÉ:**4 näù´ÉҨɦªÉSªÉÇ Ê´ÉÊvÉ´ÉiÉ {ÉÖ®ú¶SɪÉÉÈ ºÉ¨ÉÉSÉ®äúiÉÂ* +¹]õÉäkÉ®ú¶ÉiÉÆ VÉ{i´ÉÉ nù¶ÉÉƶÉÆ ½þ´ÉxÉÉÊnùEÆò**5 iÉiɺºÉÖʺÉrùEò´ÉSÉ:{ÉÖhªÉÉi¨ÉÉ ¨ÉnùxÉÉä{ɨÉ:* ¨ÉxjÉʺÉÊrù¦ÉÇ´ÉäkɺªÉ {ÉÖ®ú¶SɪÉÉÇ Ê´ÉxÉÉiÉiÉ:**6 ´ÉCjÉä iɺªÉ´ÉºÉäuùÉÊhÉ Eò¨É±ÉÉ ÊxɶSɱÉÉMÉÞ½äþ* {ÉÖ¹{ÉÉ\VɱªÉ¹]õEÆò nùi´ÉÉ ¨ÉÚ±ÉäxÉè´É{É`äöiºÉEÞòiÉÂ**7 nù¶É´É¹ÉǺɽþ»ÉÉhÉÉÆ {ÉÚVÉɪÉÉ:¡ò±É¨ÉÉ{xÉÖªÉÉiÉÂ* +Éi¨ÉÉxÉÆ iÉx¨ÉªÉÆ EÞòi´ÉÉ ªÉ: {É`äöiÉ Eò´ÉSÉÆ {É®Æú** 8 ªÉÆ ªÉÆ {ɶªÉÊiÉ ´Éè ¶ÉÒQÉÆ iɺªÉ nùɺÉÉä ¦É´ÉänùÂwÉÖ´ÉÆ* Ê´ÉʱÉJªÉ ¦ÉÚVÉæ EÖòÊ]õEòÉÆ º´ÉhÉǺlÉÉÆ vÉÉ®úªÉätÊnù** 9 Eòh`äö ´ÉÉ ªÉÊnù ´ÉÉ ¤ÉɽþÉè ºÉEÖòªÉÉÇqùɺɴÉÉäVÉMÉiÉÂ* ÊjɱÉÉäEòÓ IÉÉä¦ÉªÉiªÉä´É jÉè±ÉÉäCªÉÊ´ÉVɪÉÒ ¦É´ÉäiÉÂ**10 iÉnÂùMÉÉjÉÆ |ÉÉ{ªÉ¶ÉºjÉÉÊhÉ ¨É½þɺjÉÉnùÒÊxÉ {ÉÉ´ÉÇÊiÉ* ¨ÉɱªÉÉÊxÉ EÖòºÉÖ¨ÉÉxÉÒ´É ºÉÖJÉnùÉÊxɦɴÉÎxiÉʽþ*11 <nÆù Eò´ÉSɨÉYÉÉi´ÉÉ ªÉÉä VÉ{ÉäiºÉÖxnù®úÓ {É®úÉÆ* xɴɱÉIÉÆ |ÉVÉÊ{Éi´ÉÉÊ{É iɺªÉ Ê´ÉtÉ xÉ ÊºÉnÂùvªÉÊiÉ**12 <nù¨Éä´É{É®Æú ªÉº¨ÉiÉ ¦ÉÖÊHò¨ÉÖÊHò|ÉnùɪÉEÆò* iɺ¨ÉÉiºÉ´ÉÇ|ɪÉixÉäxÉ {É`öxÉÒªÉÆ ÊxÉ®úxiÉ®Æú**13 <ÊiÉ ¯ûpùªÉɨɳäý MÉÉè®úÒ·É®ú ºÉÆ´ÉÉnäù ¸ÉÒ®úÉVÉ®úÉVÉä·É®úÒ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉÉÇ: jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉÉJªÉ Eò´ÉSÉÆ ºÉÆ{ÉÚhÉÈ 71 .

¸ÉÓ nùÊIÉhÉɨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉºiÉnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 8.¼ºJ£åò ¼ºÉÉè: +½þ¨É½Æþ +½þ¨É½Æþ ¼ºÉÉè:¼ºJ£åò ¸ÉÓ ¿Ó Bå {É®ú¶É¨¦ÉÖxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ-xɨÉ: 72 .¸ÉÓ. āmnāya and other mantras ¹Éb÷ɨxÉÉªÉ ¨ÉxjÉÉ: 4.$ Bá C±zÉä ÎC±ÉzÉ ¨Énùpù´Éä EÖò±Éä ºÉÉè:¦Éè®ú´Éɹ]õEò xÉ´ÉʺÉrù ´É]ÖõEòjÉªÉ {ÉnùªÉÖMÉ ºÉʽþiÉÉ ºÉÉè¦ÉÉMªÉÉÊ´ÉtÉÊnù ÊuùºÉ½þ»É näù´ÉiÉÉ{ÉÊ®úºÉäÊ´ÉiÉÉ {ÉÚhÉÇÊMÉÊ®ú{ÉÒ`öºlÉ nùÊIÉhÉɨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉªÉ Ê´Étä·É®úÒ ¦ÉÉäÊMÉxÉÒ näù´ªÉ¨¤ÉɸÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.C±ÉÓ {ÉζSɨÉɨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉºiÉnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-C±ÉÓ-¼»ÉÉè:¼»ÉÉè:¼»ÉÉè:¼ºJ£åò ºÉÉè: ¦ÉMÉ´ÉiªÉ¨¤Éä ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÓ +PÉÉä®äú +PÉÉä®äú +PÉÉä®ú¨ÉÖJÉÒ UÅôÉÆ UÅôÓ ÊEòÊhÉÊEòhÉÒ Ê´ÉSSÉä ¼»ÉÉé ¼ºJ£åò ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÓ ¸ÉÓ ¼»ÉÉé: º¿Éè:#Ä nù¶ÉnÚùÊiÉ ¨Éhb÷±É jÉªÉ ´ÉÒ®ú nù¶ÉEò SÉiÉÖ:¹Éι` öʺÉrùxÉÉlÉ ºÉʽþiÉÉ ±ÉÉä{ÉɨÉÖpùÉÊnù ËjɶÉiÉ ºÉ½þ»É näù´ÉiÉÉ{ÉÊ®úºÉäÊ´ÉiÉÉ VÉɱÉxvÉ®ú{ÉÒ`öºlÉ {ÉζSɨÉɨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉªÉ Ê´Étä·É®úÒ EÖòÎ\SÉEòÉnäù´ªÉ¨¤ÉɸÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Bå {ÉÚ´ÉÉǨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉºiÉnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Bå.¿Ó =kÉ®úɨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉºiÉnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¿Ó-£áò ¨É½þÉSÉhb÷ªÉÉäMÉä·É®úÒ xɴɨÉÖpùÉ {É\SÉ´ÉÒ®úɴɳýÒ ºÉʽþiÉÉ iÉÖ®úÒªÉÊ´ÉtÉÊnù ÊuùºÉ½þ»É näù´ÉiÉÉ{ÉÊ®úºÉäÊ´ÉiÉÉ +Éäb÷¬ÉhÉ{ÉÒ`öºlÉ =kÉ®úɨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉªÉ Ê´Étä·É®úÒ EòÉʳýEòÉnäù´ªÉ¨¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (¹ÉÉäb÷¶ªÉÖ{ÉɺÉEòÉxÉÉÆ B´ÉÆ EòiÉÇ´ªÉÆ) >ðv´ÉÉǨxÉɪÉÆ 4-¼ºÉÉé: |ÉɺÉÉnù{É®úɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-º½þÉè:#Ä {É®úÉ|ÉɺÉÉnùɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ºÉÉè: {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¼»Éé ¼»ÉÓ ¼»ÉÉè: MÉÖ¯ûjÉªÉ MÉhÉ{ÉÊiÉ {ÉÒ`öjÉªÉ ºÉʽþiÉÉ ¶ÉÖrùÊ´ÉtÉÊnù SÉiÉÖʹɶÉÊiÉ ºÉ½þ»Énäù´ÉiÉÉ{ÉÊ®úºÉäÊ´ÉiÉÉ EòɨÉÊMÉÊ®ú{ÉÒ`öºlÉ {ÉÚ´ÉÉǨxÉɪɺɨɪÉÊ´Étä·É®úÒ =x¨ÉÉäÊnùxÉÒ näù´ªÉ¨¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

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J£åò ¨É½þÉSÉhb÷ªÉÉäMÉä·É@ñ ºÉΨ´ÉnùuèùiÉʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉÉ EòɱɺÉRÂóEò̹ÉÊhɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +RÂóMÉÉä{ÉÉRÂóMÉ|ÉiªÉRÂóMÉ ¨ÉxjÉÉ: 4.¿Ó ¶ÉÉHònù¶ÉÇxÉÉÊvÉι`öiÉ ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒnäù´ÉÒº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: xÉ´ÉʺÉrùÉxiɨÉxjÉÉ: 4.¦ÉÚ: ¦ÉÖ´É: º´É:iÉiºÉÊ´ÉiÉÖ´ÉÇ®äúhªÉÆ ¦ÉMÉÉænùä´ÉºªÉvÉÒ¨Éʽþ ÊvɪÉÉä ªÉÉä xÉ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ {É®úÉä ®úVɺÉäºÉÉ´ÉnùÉå ´ÉèÊnùEòʺÉrùÉxiÉ ºlÉÉÊ{ÉiÉ ¥ÉÀº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ-: 4.½þÉé $ xɨÉ: ʶɴÉÉªÉ ½þÉé ¶Éè´ÉʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉ ¯ûpùº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+ < = @ñ ±ÉÞ ºÉÉÆJªÉʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉÉ ¨ÉÚ±É|ÉEÞòÊiɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¿ÉÆ ¿Ó ¿ÚÆ ºÉ:ºÉÉè®únù¶ÉÇxÉÉÊvÉι`öiɺÉÚªÉÇnùä´Éº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ-: 4.+ÉÆ XÉÉé GòÉé UÅôÉé [ÉÉé XÉÉé VÉèxÉʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉÉ +½ÇþxiÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.xɴɺɽþEòUô±É½þ®úÓ ¤ÉÉèrùʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉÉ iÉÉ®úɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.SÉÉÆ SÉÓ SÉÚÆ SɨɱɴɮúªÉÚÆ SÉÉ´ÉÉÇEòʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉÉ SÉÎhb÷Eòɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.$ xɨÉÉä xÉÉ®úɪÉhÉÉªÉ ´Éè¹hÉʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉ ¨É½þÉʴɹhÉÖº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.$ xɨÉÉä xÉÉ®úɪÉhÉÉªÉ ´Éè¹hÉ´Énù¶ÉÇxÉÉÊvÉι`öiÉʴɹhÉÖnùä´Éº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.$ ¿Ó PÉÞÊhɺºÉÚªÉÉÇÊnùiªÉÉå ºÉÉè®úʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉ ºÉÚªÉǺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 4.Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: C±ÉÓ Bá Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ¸ÉÒnäù´ªÉRÂóMɦÉÚiÉÉ ¸ÉÒ¤ÉɱÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ-xɨÉ: 4-¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ +zÉ{ÉÚhÉæ ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiɨÉzÉÆ näùʽþ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒnäù´ªÉÖ{ÉÉRÂóMɦÉÚiÉÉ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉǨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 77 .Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶ÉÉHòʺÉrùÉxiɺlÉÉÊ{ÉiÉÉ ¤ÉɱÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

Bá C±ÉÓ ºÉÉè: $ xɨÉ: EòɨÉä·ÉÊ®ú <SUôÉEòɨɡò±É|Énäù ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉÇVÉMÉiIÉÉä¦ÉhÉEòÊ®ú ½ÖþÆ ½ÖþÆ ½ÖþÆ pùÉÆ pùÓ C±ÉÓ ¤±ÉÚÆ ºÉ: ºÉÉè: C±ÉÓ Bá EòɨÉä·É®úÒ ºÉ¨ÉªÉ näù´ÉiÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Bå ¿Ó ºÉ´ÉÇEòɪÉÉÇlÉǺÉÉÊvÉÊxÉ ´ÉXÉä·ÉÊ®ú ´ÉXÉ|Énäù ´ÉXÉ{É\VÉ®ú¨ÉvªÉMÉä ¿Ó ÎC±ÉzÉä Bå GòÉå ÊxÉiªÉ ¨Énùpù´Éä ½ÖþÆ £åò ¿Ó ´ÉXÉä·É®úÒ ºÉ¨ÉªÉ näù´ÉiÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.C±ÉÓ ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¤±ÉÚÆ EòɨÉä·ÉÊ®ú ¿Ó ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉÆEòÊ®ú ºÉ: ÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®úÊ´É Bå Ê´ÉSSÉä C±ÉÓ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉê xɨÉ: ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ºÉ¨ÉªÉ näù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 78 .$ +ÉÆ ¿Ó GòÉá Bʽþ {É®ú¨Éä·ÉÊ®ú º´ÉɽþÉ ¸ÉÒnäù´ÉÒ|ÉiªÉRÂóMɦÉÚiÉÉ ¸ÉÒ+·ÉÉ°üføɸÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {É\SɦÉÚiɶÉÊHò¨ÉxjÉÉ: = >ð +Éà MÉ VÉ b÷ nù ¤É ³ý {ÉÞl´ÉÒ¶ÉÊHòº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: @ñ Añ +Éè PÉ ZÉ fø vÉ ¦É ´É ºÉ VɱɶÉÊHòº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: < <Ç Bà JÉ Uô `ö lÉ ¡ò ®ú IÉ +ÎMxɶÉÊHòº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: + +É B Eò SÉ ]õ iÉ {É ªÉ ¹É ´ÉɪÉÖ¶ÉÊHòº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ±ÉÞ ±Éß +Æ Ró \É hÉ xÉ ¨É ¶É ½þ +ÉEòɶɶÉÊHòº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (It is tradition not to add the catur tAra in front of the above panca bhuta sakti mantras) SÉiÉÖººÉ¨ÉªÉnäù´ÉiÉÉ ¨ÉxjÉÉ: 4.एकावलि 4.Bå ¦ÉMɦÉÖMÉä ¦ÉÊMÉÊxÉ ¦ÉMÉÉänùÊ®ú ¦ÉMɨÉɱÉä ¦ÉMÉɴɽäþ ¦ÉMÉMÉÖÁä ¦ÉMɪÉÉäÊxÉ ¦ÉMÉÊxÉ{ÉÉÊiÉÊxÉ ºÉ´ÉǦÉMɴɶÉÆEòÊ®ú ¦ÉMÉ°ü{Éä ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉä ¦ÉMɺ´É°ü{Éä ºÉ´ÉÉÇÊhÉ ¦ÉMÉÉÊxÉ ¨Éä ÁÉxÉªÉ ´É®únäù ®äúiÉä ºÉÖ®äúiÉä ¦ÉMÉÎC±ÉzÉä ÎC±ÉzÉpù´Éä C±ÉänùªÉ pùÉ´ÉªÉ +¨ÉÉäPÉä ¦ÉMÉÊ´ÉSSÉä IÉÖ¦É IÉÉä¦ÉªÉ ºÉ´ÉǺÉi´ÉÉxÉ ¦ÉMÉä·ÉÊ®ú Bå ¤±ÉÚÆ VÉå ¤±ÉÚÆ ¦Éå ¤±ÉÚÆ ¨ÉÉå ¤±ÉÚÆ ½åþ ¤±ÉÚÆ ½äþ ÎC±ÉzÉä ºÉ´ÉÉÇÊhÉ ¦ÉMÉÉÊxÉ ¨Éä ´É¶É¨ÉÉxÉªÉ ºjÉÓ ¼¤±Éç ¿Ó ¦ÉMɨÉÉʱÉxÉÒ ºÉ¨ÉªÉ näù´ÉiÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

½Æþ Eò15 ¦ÉÖ´ÉxÉÉv´Éɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ.xɨÉ: 4.½Æþ ¿Ó ¨ÉxjÉÉv´Éɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¹Éb÷¬ÉäÊMÉxÉÒ ¨ÉxjÉÉ: 4-b÷ÉÆ b÷Ó bÚ÷Æ bé÷ b÷Éé b÷: b÷¨É±É´É®úªÉÚÆ b÷ÉÊEòÊxÉ ¨ÉÉÆ ®úIÉ ®úIÉ ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉÆEòÊ®ú näù´ªÉÉMÉSUô <¨ÉÉÆ {ÉÚVÉÉÆ MÉÞ¼hÉ MÉÞ¼hÉ ¿Ó PÉÉä®äú näùÊ´É ¿Ó ºÉ: {É®ú¨ÉPÉÉä®äú ½ÆþºÉ: PÉÉä®ú°ü{Éä b÷®ú±ÉEòºÉ½éþ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näùÊ´É ´É®únäù Ê´ÉSSÉä +Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éá +Éé +Æ +: ʴɶÉÖrù{ÉÒ`öκlÉiÉ Ê´É¶ÉÖÊrùb÷ÉÊEòxÉÒ Ê´É¶ÉÖÊrùxÉÉlÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-®úÉÆ ®úÓ °Æü ®éú ®úÉé ®ú: ®ú¨É±É´É®úªÉÚÆ ®úÉÊEòÊxÉ ¨ÉÉÆ ®úIÉ ®úIÉ ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉÆEòÊ®ú näù´ªÉÉMÉSUô <¨ÉÉÆ {ÉÚVÉÉÆ MÉÞ¼hÉ MÉÞ¼hÉ ¿Ó PÉÉä®äú näùÊ´É ¿Ó ºÉ: {É®ú¨ÉPÉÉä®äú ½ÆþºÉ: PÉÉä®ú°ü{Éä b÷®ú±ÉEòºÉ½éþ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näùÊ´É ´É®únäù Ê´ÉSSÉä EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ ]Æõ `Æö +xÉɽþiÉ {ÉÒ`öκlÉiÉ +xÉɽþiÉ®úÉÊEòÊxÉ +xÉɽþiÉxÉÉlÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-±ÉÉÆ ±ÉÓ ±ÉÚÆ ±Éé ±ÉÉé ±É:±É¨É±É´É®úªÉÚÆ ±ÉÉÊEòÊxÉ ¨ÉÉÆ ®úIÉ ®úIÉ ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉÆEòÊ®ú näù´ªÉÉMÉSUô <¨ÉÉÆ {ÉÚVÉÉÆ MÉÞ¼hÉ MÉÞ¼hÉ ¿Ó PÉÉä®äú näùÊ´É ¿Ó ºÉ: {É®ú¨ÉPÉÉä®äú ½ÆþºÉ: PÉÉä®ú°ü{Éä b÷®ú±ÉEòºÉ½éþ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näùÊ´É ´É®únäù Ê´ÉSSÉä bÆ÷ fÆø hÉÆ iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ {ÉÆ ¡Æò ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®ú{ÉÒ`öκlÉiÉ ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®ú±ÉÉÊEòÊxÉ ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®úxÉÉlɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-EòÉÆ EòÓ EÚòÆ Eéò EòÉé Eò:Eò¨É±É´É®úªÉÚÆ EòÉÊEòÊxÉ ¨ÉÉÆ ®úIÉ ®úIÉ ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉÆEòÊ®ú näù´ªÉÉMÉSUô <¨ÉÉÆ {ÉÚVÉÉÆ MÉÞ¼hÉ MÉÞ¼hÉ ¿Ó PÉÉä®äú näùÊ´É ¿Ó ºÉ: {É®ú¨ÉPÉÉä®äú ½ÆþºÉ: PÉÉä®ú°ü{Éä b÷®ú±ÉEòºÉ½éþ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näùÊ´É ´É®únäù Ê´ÉSSÉä ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ º´ÉÉÊvɹ`öÉxÉ{ÉÒ`öκlÉiÉ º´ÉÉÊvɹ`öÉxÉEòÉÊEòÊxÉ º´ÉÉÊvɹ`öÉxÉxÉÉlɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ-xɨÉ: 4-ºÉÉÆ ºÉÓ ºÉÚÆ ºÉé ºÉÉé ºÉ:ºÉ¨É±É´É®úªÉÚÆ ºÉÉÊEòÊxÉ ¨ÉÉÆ ®úIÉ ®ú IÉ ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉÆEòÊ®ú näù´ªÉÉMÉSUô <¨ÉÉÆ {ÉÚVÉÉÆ MÉÞ¼hÉ MÉÞ¼hÉ ¿Ó PÉÉä®äú näùÊ´É ¿Ó ºÉ: {É®ú¨ÉPÉÉä®äú ½ÆþºÉ: PÉÉä®ú°ü{Éä b÷®ú±ÉEòºÉ½éþ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näùÊ´É ´É®únäù Ê´ÉSSÉä ´ÉÆ ¶ÉÆ ¹ÉÆ ºÉÆ ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®ú{ÉÒ`öκlÉiÉ ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úºÉÉÊEòÊxÉ ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úxÉÉlÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 79 .½Æþ Bá {ÉnùÉv´Éɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½Æþ ºÉÉè: Eò±ÉÉv´Éɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½Æþ C±ÉÓ ´ÉhÉÉÇv´Éɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि ¹Éb÷v´ÉÉ ¨ÉxjÉÉ: 4.½Æþ ¸ÉÓ iÉi´ÉÉv´Éɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

Bå ¿Ó ¸ÉÓ ºÉÉè: ¨É½þɱÉI¨ªÉè ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¨É½þɱÉI¨ÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ xɨÉ: 5*4.Bå ¿Ó ºÉÉè: ´ÉμxÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ´ÉμxÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 6*4.xɨÉ: 80 .Bå Bå ºÉÉè: EòÉèʱÉEòɪÉè ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: EòÉèʱÉEòÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: 11*4.Bå C±ÉÓ ¨ÉÉäʽþxÉÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¨ÉÉäʽþxÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 7*4.£åò ¼»ÉÉè: jÉè±ÉÉäCªÉº´ÉÉʨÉxªÉè ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: jÉè±ÉÉäCªÉº´ÉÉʨÉxÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: 9*4.Bå ¿Ó C±ÉÓ ¼»ÉÉè: ÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®ú´ªÉè xɨÉ: ÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 3*4.Bå Bå ºÉÉè: SÉÎhb÷EòɪÉèÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: SÉÎhb÷EòÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: 12*4.Bå b÷ÉÆ b÷Ó bÚÆ÷ bé÷ b÷Éé b÷: ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 10*4.Bå ¼»ÉÉè: ºÉ½þ±É¿Ó ºÉ½þ¿ÉÆ ºÉ½þ¿Ó ºÉ½þ¿Ú: EòɨÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: EòɨÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 2*4.Bå C±ÉÓ ¿Ó ºÉ:´ÉÉEÂò ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ´ÉÉEÂò ÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4*4.Bå Bå ºÉÉè: iÉɱÉÖ¨ÉvªÉ¨ÉɪÉè ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: iÉɱÉÖ¨ÉvªÉ¨ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ.एकावलि 4-½þÉÆ ½þÓ ½ÚþÆ ½éþ ½þÉé ½þ:½þ¨É±É´É®úªÉÚÆ ½þÉÊEòÊxÉ ¨ÉÉÆ ®úIÉ ®úIÉ ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉÆEòÊ®ú näù´ªÉÉMÉSUô <¨ÉÉÆ {ÉÚVÉÉÆ MÉÞ¼hÉ MÉÞ¼hÉ ¿Ó PÉÉä®äú näùÊ´É ¿Ó ºÉ: {É®ú¨ÉPÉÉä®äú ½Æþ ºÉ: PÉÉä®ú°ü{Éä b÷®ú±ÉEòºÉ½éþ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú näùÊ´É ´É®únäù Ê´ÉSSÉä ½Æþ IÉÆ +ÉYÉÉ{ÉÒ`öκlÉiÉ +ÉYÉɽþÉÊEòÊxÉ +ÉYÉÉxÉÉlÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¹Éb÷ÉvÉÉ®ú Ê´ÉtÉ: 4-½ÆþºÉ: º´ÉÉi¨ÉÉxÉxnùʴɦÉÚiªÉè º´ÉɽþÉ ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-ºÉÉä%½Æþ {É®ú¨É½ÆþºÉʴɦÉÚiªÉè º´ÉɽþÉ º´ÉÉÊvɹ`öÉxÉÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-½ÆþºÉ:ºÉÉä%½Æþ º´ÉSUôÉxÉxnù{É®ú¨É½ÆþºÉ{É®ú¨ÉÉi¨ÉxÉ亴ÉɽþÉ ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®úEòÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-½ÆþºÉ:ºÉÉä%½Æþ ½ÆþºÉ: º´ÉÉi¨ÉÉxÉÆ ¤ÉÉävÉªÉ ¤ÉÉävÉªÉ {É®ú¨ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ +xÉɽþiÉÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-ºÉÉä%½Æþ ½ÆþºÉ: ʶɴÉ: {É®ú¨ÉÉi¨ÉÉxÉÆ ¤ÉÉävÉªÉ ¤ÉÉävÉªÉ º´ÉÉi¨ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ Ê´É¶ÉÖrùÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-½ÆþºÉ:ʶɴÉ:ºÉÉä%½Æþ ºÉÉä%½Æþ ½ÆþºÉ: ʶɴÉ: º´ÉSUôÉxÉxnùxÉÉlÉ ÊSÉi|ÉEòɶÉɨÉÞiɽäþiÉ´Éä º´ÉɽþÉ +ÉYÉÉÊ´Étɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: jɪÉÉänù¶ÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ {ÉÚVÉxÉÆ 1*4.C±ÉÓ ¤±ÉÚÆ ºjÉÓ §ÉɨɮúÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: §ÉɨɮúÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 8*4.

¼»Éé ¼ºC±ÉÓ ¼»ÉÉè: ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Bå Bå ºÉÉè: Eò{ÉɱÉÉ%RÂóEòÖ ®ú´ÉÉʺÉxªÉè ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè `ö:`ö:`ö:xɨÉ: Eò{ÉɱÉÉ%RÂóEòÖ ®ú ´ÉÉʺÉxÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: Ê´ÉÊ´ÉvÉ ÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¨ÉxjÉÉ: 4.$ º¼ºÉÉè: {ÉÞl´ÉÒ°ü{ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: {ÉÞl´ÉÒ°ü{ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ.ºÉÉè: VÉÒ´Éä·É®úÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: VÉÒ´Éä·É®úÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.GòÉå GòÉävÉ®úÉ{ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: GòÉävÉ°ü{ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¼»ÉÓ ¼»ÉÓ ¼»ÉÓ ºÉÖJÉnùÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ºÉÖJÉnùÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: ¶É¨¦ÉÖÊ|ɪÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¶É¨¦ÉÖÊ|ɪÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: 4.¿Ó ¦ÉÖ´ÉxÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¦ÉÖ´ÉxÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-½ÆþºÉ: ÊxÉ´ÉÉÇhɺÉÖxnù®úÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ÊxÉ´ÉÉÇhɺÉÖxnù®úÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: 4-¿Ó ¼»ÉÉé º¿Éé ¿Ó Ê|ɪÉÉ{É®ú¨ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: Ê|ɪÉÉ{É®ú¨ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: 4-EòB<Ç±É¿Ó Bå xÉIÉjÉxÉIÉjɴɱ±É¦ÉɪÉè ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: xÉIÉjÉxÉIÉjɴɱ±É¦ÉÉ ÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úÊiÉÊ|ɪÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ®úÊiÉÊ|ɪÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ.¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ ¶ÉGòÊ|ɪÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¶ÉGòÊ|ɪÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.C±ÉÓ EòɨÉä·É®úÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: EòɨÉä·É®úÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¼»ÉÉé ¼ºC±ÉÓ ¼»ÉÉè: ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùɪÉè xɨÉ: ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 ºÉÖxnù®úÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ºÉÖxnù®úÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.(¹ÉÉäb÷¶ÉÒ) ¿Ó ¾þ±±ÉäJÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¾þ±±ÉäJÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.xÉ¡òIɨɱɴɮúªÉÚÆ ¨ÉÉʱÉxÉÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¨ÉÉʱÉxÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-½þ15 näù´ÉÒ ºÉÖxnù®úÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: näù´ÉÒ ºÉÖxnù®úÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ºÉÉè: C±ÉÓ ¦ÉÞMÉÊ|ɪÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¦ÉÞMÉÖÊ|ɪÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½þºÉEò±É¿Ó Bå |ÉÉhÉà¶ÉµÉÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: |ÉÉhÉä¶ÉµÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: 4.xɨÉ: 4.एकावलि 13*4.Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¤ÉɱÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¤ÉɱÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Bå ¶ÉÉ®únùÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¶ÉÉ®únùÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¿Ó ¸ÉÓ ¥ÉÀÉhÉÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¥ÉÀÉhÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½ÆþºÉ: $ Bå ¿Ó ¸ÉÓ ¿Ó ½ÚþÆ ºÉÉä%½Æþ {É®ú¨ÉÉi¨Éº´É°üÊ{ÉhÉÒ ÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: {É®ú¨ÉÉi¨Éº´É°üÊ{ÉhÉÒ ÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ.¸ÉÓ ¿Ó Bå ºÉ: Ê´ÉiÉÉEòÉnäù´ÉÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: Ê´ÉiÉÉEòÉnäù´ÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: 81 .IÉÉé ¸ÉÓ ÊºÉräù·É®úÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ʺÉräù·É®úÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

एकावलि 4444- ¿Ó C±ÉÓ ¦ÉÖ´ÉxÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¦ÉÖ´ÉxÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: Bå ´ÉÉM¦Éè®ú´ÉÒÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ´ÉÉM¦Éè®ú´ÉÒÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: C±ÉÓ Eòɨɰü{ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: Eòɨɰü{ÉÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè: ¶ÉÊHòEÚò]õÉÊjÉ{ÉÖ®úɪÉè xɨÉ: ¶ÉÊHòEÚò]õÉÊjÉ{ÉÖ®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 82 .

{É\SÉʺÉƽɺÉxÉ ¨ÉxjÉÉ: 4.xɨÉ: =kÉ®úʺÉƽɺÉxÉÆ 4.¼»Éé ¼ºC±ÉÅÓ ¼»ÉÉè: nùÊIÉhÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ºÉÆ{Éi|ÉnùɦÉè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ-xɨÉ: {ÉζSɨÉʺÉƽɺÉxÉÆ 4-¿Ó ½ÆþºÉ: ºÉ\VÉÒÊ´ÉÊxÉ VÉÚÆ VÉÒ´ÉÆ |ÉÉhɺÉÎxvɺlÉÆ EÖò¯û ºÉ: º´ÉɽþÉ {ÉζSɨÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ºÉ\VÉÒÊ´ÉxÉÒ¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùÊxÉ ¼»Éé ÎC±ÉzÉä C±ÉäÊnùÊxÉ ¨É½þÉIÉÉä¦ÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ¼ºC±ÉÅÓ $ ¨ÉÉäIÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ¼»ÉÉè: {ÉζSÉ¨É ÊºÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ¨ÉÞiªÉÖ\VɪÉɦÉè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¿Ó ¸ÉÓ ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùÊxÉ ¼»Éé ÎC±ÉzÉä C±ÉäÊnùÊxÉ ¨É½þÉIÉÉä¦ÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ¼ºC±ÉÅÓ $ ¨ÉÉäIÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ¼»ÉÉè: {ÉζSÉ¨É ÊºÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ +¨ÉÞiɺÉ\VÉÒÊ´ÉxÉÒ¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¿Ó ÎC±ÉzÉä Bá GòÉá ÊxÉiªÉ¨Énùpù´Éä ¿Ó {ÉζSɨÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ´ÉXÉä·É®úÒ¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.C±ÉÓ nùÊIÉhÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ EòɨÉä·É®úÒ¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¼»Éé ¼ºC±ÉÅÓ ¼»ÉÉè: {ÉζSɨÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ºÉÆ{Éi|ÉnùɦÉè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.ºÉé ºC±ÉÓ ¼ºÉÉè: nùÊIÉhÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ®úHòxÉäjÉɦÉè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: 4.¼ºÉÉé ½þºÉEò±É¿Ó ¼ºÉÉè: {ÉζSɨÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ.¼ºJ£åò ½þºÉEò±É¿Ó ¼ºÉÉè: =kÉ®úʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ +PÉÉä®ú¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.xɨÉ: 83 .xɨÉ: 4.xɨÉ: 4.¼»Éé ¼ºC±ÉÅÓ ¼»ÉÉè: {ÉÚ´ÉÇʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ºÉÆ{Éi|ÉnùɦÉè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.xɨÉ: nùÊIÉhÉʺÉƽɺÉxÉÆ 4.एकावलि {ÉÚ´ÉÇʺÉƽɺÉxÉÆ 9.¿Ó C±ÉÓ ¼»ÉÉè: nùÊIÉhÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ±ÉʱÉiÉɦÉè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ-xɨÉ: 4.¼ºÉé ½þºÉEò±É¿Ó ¼ºÉÉè: =kÉ®úʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ b÷ɨɮäú·É®úÒ¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.xɨÉ: 4.Bá ºÉ½þEò±É¿Ó ¼»ÉÉè: {ÉÚ´ÉÇʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ SÉèiÉxªÉ¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ .½þºÉEò±É®úbé÷ ½þºÉEò±É®úb÷Ó ½þºÉEò±É®úb÷Éè:{ÉζSɨÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ¦ÉªÉ½þÉÊ®úhÉÒ¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¼ºJ£åò ½þºÉEò±É¿Ó ¼ºÉÉè: nùÊIÉhÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ +PÉÉä®ú¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: 4.Bá C±ÉÓ ºÉÉè: {ÉÚ´ÉÇ ÊºÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ¤ÉɱÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.iÉ.¼»Éé ¼»ÉÉè: =kÉ®úʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ¦ÉªÉv´ÉÆʺÉxÉÒ¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.b÷®ú±ÉEòºÉ½éþ b÷®ú±ÉEòºÉ½þÓ b÷®ú±ÉEòºÉ½þÉè: nùÊIÉhÉʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ¹É]ÂõEòÚ ]õɦÉè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

xɨÉ: 4.½éþ ½þEò±É½þ½þ¿Ó ¼ºÉÉè: >ðv´ÉÇʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ |ÉlɨɺÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.Eò±É½þ½þºÉºÉºÉ¿Ó Eò±É½þ½þºÉºÉºÉ¿Ó Eò±É½þ½þºÉºÉºÉ¿Ó >ðv´ÉÇʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ SÉiÉÖlÉǺÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¼»Éé ¼ºC±ÉÅÓ ¼»ÉÉè: =kÉ®úʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ºÉÆ{Éi|ÉnùɦÉè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.+¼ºÉè +¼ºÉÓ +¼ºÉÉè: >ðv´ÉÇʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ ÊuùiÉҪɺÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.ºÉ½þ½þºÉ±ÉIɽþºÉé ½þºÉ½þºÉ±ÉIɽþºÉÓ ½þºÉ±ÉIɺɽþºÉ½þÉè:>ðv´ÉÇʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ {É\SɨɺÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {É\SÉ{ÉÎ\SÉEòÉ ¨ÉxjÉÉ: {É\SɱÉI¨ÉÒ: 4-¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¨É½þɱÉI¨ÉÒ·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒÊ´ÉtɱÉI¨ªÉ¨¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¸ÉÓ ¨É½þɱÉI¨ÉÒ·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉ ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ±ÉI¨ÉÒ±ÉI¨ªÉ¨¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Eò¨É±Éä Eò¨É±ÉɱɪÉä |ɺÉÒnù |ɺÉÒnù ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ $ ¨É½þɱÉI¨ªÉè xɨÉ:¨É½þɱÉI¨ÉÒ·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¨É½þɱÉI¨ÉÒ±ÉI¨ªÉ¨¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¨É½þɱÉI¨ÉÒ·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ÊjɶÉÊHò±ÉI¨ªÉ¨¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¸ÉÓ ºÉEò±É¿Ó ¸ÉÓ ¨É½þɱÉI¨ÉÒ·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ºÉ´ÉǺÉÉ©ÉÉVªÉ±ÉI¨ªÉ¨¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {É\SÉEòÉä¶ÉÉ: 4-¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¨É½þÉEòÉä¶Éä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒÊ´ÉtÉEòÉä¶Éɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-$ ¿Ó ½ÆþºÉ: ºÉÉä%½Æþ º´ÉɽþÉ ¨É½þÉEòÉä¶Éä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉ VÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {É®ú\VªÉÉäÊiÉEòÉä¶Éɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 84 .एकावलि 4.xɨÉ: 4.xɨÉ: >ðv´ÉÇʺÉƽɺÉxÉÆ 4.Bá ½þºÉB½ÆþºÉºÉé ½þ½þ½þEò±É¿Ó ½þ½þ½þ¿Éè: >ðv´ÉÇʺÉƽɺÉxÉMÉiÉÉ iÉÞiÉҪɺÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

एकावलि 4-$ ¨É½þÉEòÉä¶Éä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {É®úÉÊxɹEò³ý¶Éɨ¦É´ÉÒEòÉä¶Éɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-½ÆþºÉ: ¨É½þÉEòÉä¶Éä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ +VÉ{ÉÉEòÉä¶Éɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-+Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éá +Éé +Æ +: EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ ]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ {ÉÆ ¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ ¶ÉÆ ¹ÉÆ ºÉÆ ½Æþ ³Æý IÉÆ ¨É½þÉEòÉä¶Éä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¨ÉÉiÉÞEòÉ EòÉä¶Éɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {É\SÉEò±{ɱÉiÉÉ: 4-¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¨É½þÉEò±{ɱÉiÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖ xnù®úÒ ¸ÉÒÊ´ÉtÉEò±{ɱÉiÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¿Ó C±ÉÓ Bá ¤±ÉÚÆ ºjÉÓ ¨É½þÉEò±{ɱÉiÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {É\SÉEòɨÉä·É®úÒEò±{ɱÉiÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-+Éá ¿Ó ¼»Éé ¿Ó $ ºÉ®úº´ÉiªÉè xɨÉ: ¨É½þÉEò±{ɱÉiÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉÇ ºÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {ÉÉÊ®úVÉÉiÉä·É®úÒEò±{ɱÉiÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ.xɨÉ: 4-C±ÉÓ Bá ºÉÉè: ¨É½þÉEò±{ɱÉiÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ EÖò¨ÉÉ®úÒEò±{ɱÉiÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-pùÉÆ pùÓ C±ÉÓ ¤±ÉÚÆ ºÉ: ¨É½þÉEò±{ɱÉiÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {É\SɤÉÉhÉä·É®úÒEò±{ɱÉiÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {É\SÉEòɨÉnÖùPÉÉ: 4-¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¨É½þÉEòɨÉnÖùPÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒÊ´ÉtÉEòɨÉnÖùPÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¿Ó ½ÆþºÉ: ºÉ\VÉÒÊ´ÉÊxÉ VÉÚÆ VÉÒ´ÉÆ |ÉÉhÉOÉÎxlɺlÉÆ EÖò¯û ºÉ: º´ÉɽþÉ ¨É½þÉEòɨÉnÖùPÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ +¨ÉÞiÉ{ÉÒ`äö·É®úÒ EòɨÉnÖùPÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùÊxÉ ¼»Éé ÎC±ÉzÉä C±ÉäÊnùÊxÉ ¨É½þÉIÉÉä¦ÉÆ EÖò¯ûEÖò¯û ¼ºC±ÉÅÓ $ ¨ÉÉäIÉÆ EÖò¯ûEÖò¯û ¼»ÉÉè: ¨É½þÉEòɨÉnÖùPÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ºÉÖvÉɺÉÚ:EòɨÉnÖùPÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 85 .

Bá C±ÉÓ ºÉÉè: $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¸ÉÒ¨ÉÉiÉRÂóMÉÒ·ÉÊ®ú ºÉ´ÉÇVÉxɨÉxÉÉä½þÊ®ú ºÉ´ÉǨÉÖJÉ®ú \VÉÊxÉ C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ºÉ´ÉÇ®úÉVɴɶÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉǺjÉÒ{ÉÖ¯û¹É´É¶ÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉÇnùÖ¹]õ¨ÉÞMɴɶÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉDZÉÉäEò´É¶ÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉÇVÉxÉÆ ¨Éä ´É¶É¨ÉÉxÉªÉ º´ÉɽþÉ ºÉÉè: C±ÉÓ Bá ¸ÉÓ ¿Ó Bá ¨É½þÉ®úixÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ®úÉVɨÉÉiÉRÂóMÉÒ®úixÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¨É½þÉ®úixÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒ®úixÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Bá M±ÉÉé Bá xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ´ÉÉiÉÉÇʳý ´ÉÉiÉÉÇʳý ´ÉÉ®úÉʽþ ´ÉÉ®úÉʽþ ´ÉÉ®úɽþ¨ÉÖÊJÉ ´ÉÉ®úɽþ¨ÉÖÊJÉ +xvÉä +ÎxvÉÊxÉ xɨÉ: ¯ûxvÉä ¯ûÎxvÉÊxÉ xɨÉ: Vɨ¦Éä VÉΨ¦ÉÊxÉ xɨÉ: ¨ÉÉä½äþ ¨ÉÉäʽþÊxÉ xɨÉ: ºiɨ¦Éä ºiÉΨ¦ÉÊxÉ xɨÉ: ºÉ´ÉÇnùÖ¹]õ|ÉnÖù¹]õÉxÉÉÆ ºÉ´Éæ¹ÉÉÆ ºÉ´ÉÇ ´ÉÉEÂò ÊSÉkÉ SÉIÉÖ¨ÉÖJÇ ÉMÉÊiÉÊVɼ´ÉÉ ºiɨ¦ÉxÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ¶ÉÒQÉÆ ´É¶ªÉÆ Bá M±ÉÉé `ö:`ö:`ö:`ö: ½ÖþÆ +ºjÉÉªÉ ¡ò]Âõ¨É½þÉ®úixÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxÉ ºÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ´ÉÉ®úɽþÒ®úixÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {É-iÉ-xɨÉ: 86 .एकावलि 4-Bá ¤±ÉÚÆ [ÉÉé VÉÖÆ ºÉ: +¨ÉÞiÉä +¨ÉÞiÉÉänù¦ɴÉä +¨ÉÞiÉä·É®úÒ +¨ÉÞiÉ´É̹ÉÊhÉ +¨ÉÞiÉÆ »ÉÉ´ÉªÉ »ÉÉ´ÉªÉ º´ÉɽþÉ ¨É½þÉEòɨÉnÖùPÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ +¨ÉÞiÉä·É®úÒEòɨÉnÖùPÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¨Éɽäþ·ÉÊ®ú +zÉ{ÉÚhÉæ ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiɨÉzÉÆ näùʽþ º´ÉɽþÉ ¨É½þÉEòɨÉnÖùPÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxÉ ºÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ +zÉ{ÉÚhÉÉÇEòɨÉnÖùPÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {É\SÉ®úixÉÉ: 4-¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¨É½þÉ®úixÉä·É®úÒ ¤ÉÞxnù¨ÉÎhb÷iÉɺÉxɺÉÆκlÉiÉÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉVÉxÉxÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒÊ´ÉtÉ®úixÉɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

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एकावलि 4-½ÆþºÉ:ʶɴÉ:ºÉÉä½Æþ ¼ºJ£åò ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÓ ¼ºÉÉé:º½þÉè:#Ä ¼º±¤±ÉÚÆ +É{ªÉ Gò¨ÉÉÊvÉnäù´ÉiÉä ¹ÉÏbÂ÷´É¶ÉÎx¨ÉlÉÖxÉ ¨ÉªÉÚJÉÉ´ÉÞiÉä Bå ¿Ó ¸ÉÓ ¼ºJ£åò ¼ºÉÉè: ¼º£ÚòÆ Bå Ê®úÊMÉÊ]õÊxÉ Ê{ÉRÂóMÉÊ]õÊxÉ Ê´ÉSSÉä uùÒ{Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ uùÒ{Éä·É®úÒ´É{É®úɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ .iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-½ÆþºÉ:ʶɴÉ:ºÉÉä½Æþ ¼ºJ£åò ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÓ ¼ºÉÉé :º½þÉè:#Ä ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ {ÉÉÌlÉ´ÉGò¨ÉÉÊvÉnäù´ÉiÉä +¹]õ˴ɶÉÎx¨ÉlÉÖxɨɪÉÚJÉÉ´ÉÞiÉä Bå ¿Ó ¸ÉÓ ¼ºJ£åò ¼ºÉÉè: ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÚÆ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¼º£åò EÖòΤVÉEòɪÉè ¿ÉÆ ¿ÚÆ ¿Ó Ró\ÉhÉxÉ¨É +PÉÉä®ú¨ÉÖÊJÉ UÅôÉÆ UÜÆô UÅôÓ ÊEòÊhÉ ÊEòÊhÉÊEòÊhÉÊEòÊhÉ Ê´ÉSSÉä xÉ´ÉÉi¨Éä·É®úÉ´ÉxÉxnùxÉÉlÉ xÉ´ÉÉi¨Éä·É®úÒ{É®úɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉxɨÉ: 88 .

nù¶É¨É½þÉÊ´ÉtɺɨÉι]õ¨ÉxjÉ: $GòÓGòÓGòÓ½ÚþƽþÚÆ ¿Ó¿Ó¿Ó nùÊIÉhÉäEòÉʳýEäò GòÓGòÓGòÓ½ÚþƽÚþÆ ¿Ó¿Ó¿Ó º´ÉɽþÉ {ÉÚ´ÉÇÊnù榃 ¨É½þÉ®úÉjÉÉè +ÉÊ·ÉxÉEÞò¹hÉɹ]õ¨ªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ EÞò¹hÉ´ÉhÉÉÈ ¶É´ÉÉ°üføÉÆ ¨É½þɦÉÒ¨ÉÉÆ PÉÉä®únù¨¹]Åõ ±É±ÉÎVVɼ´É ½þºÉx¨ÉÖJÉÓ ºÉt:ÊUôzÉʶɮú EÞò{ÉÉhÉ ´É®únùɦɪɦÉÖVÉÉÆ ¨ÉÉiÉÞEòÉ´ÉhÉÉÇi¨É ¨ÉÖhb÷¨ÉɱÉÉvÉ®úÉÆ ºÉ½þ»É¶É´ÉEò®ú EòÉ\SÉÒªÉÖiÉÉÆ PÉÉä®ú°ü{ÉʶɴÉÉʦɮúÉ´ÉÞiÉ ¶¨É¶ÉÉxÉÊxɱɪÉÉÆ ¨É½þÉEòɱɾþnùªÉÉä{ÉÊ®ú xÉÞkɪÉxiÉÓ BEòÉIÉ®úMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ ½äþiÉÖEò´É]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ +{ºÉ®úÉä¨Éhb÷±ÉºlÉÉÆ ¨É½þɨÉvÉÖ¨ÉiÉÒªÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖºÉÆ´ÉMÉÇÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ EÞò¹hÉÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ +ÉtÉÆ Ê´ÉtÉ®úÉYÉÒºÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒnùÊIÉhÉEòÉʳýEòÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ jÉÓ ¿Ó ½ÚþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ >ðv´ÉÇÊnù榃 GòÉävÉ®úÉjÉÉè SÉèjɶÉÖC±ÉxɴɨªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ xÉұɴÉhÉÉÈ चिताnùÉʽþiÉ ¶É´ÉÉ°üføÉÆ ¨É½þɦÉÒ¨ÉÉÆ PÉÉä®únù¨¹]Åõ ¤ÉÞ½þiEÖòSɱɨ¤ÉÉänù®úªÉÖiÉÉÆ EòjÉÔ Eò{ÉÉ±É SɹÉEò ÊjɶÉڱɦÉÖVÉÉÆ ¨ÉÖhb÷¨ÉɱÉÉvÉ®úÉÆ xÉMxÉÉÆ ¶¨É¶ÉÉxÉÊxɱɪÉÉÆ xÉÉMÉ°ü{É +IÉÉ䦪ÉÆ Ê¶É®ºÉɴɽþÉÆ uùªÉÉIÉ®ú MÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ ÊjÉ{ÉÖ®úÉxiÉEò´É]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ ÊEòzÉ®úÒ¨Éhb÷±ÉºlÉÉÆ {ÉnÂù¨ÉÉ´ÉiÉÒ ªÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ +IÉ®úÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ ®úɨÉÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ ÊuùiÉÒªÉÉÆ BEòVÉ]õɺÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒiÉÉ®úÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó Bà¶ÉÉxªÉÊnù榃 Ênù´ªÉ®úÉjÉÉè ¨ÉÉMÉǶÉÒ¹ÉÇ{ÉÉèhÉǨªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ ÊºÉxnÚùरारणúÊ´ÉOɽþÉÆ +¨ÉÞiÉɨ¤ÉÉäÊnù¨ÉvªÉºlÉ ®úixÉuùÒपे xÉÉxÉÉ´ÉÞIɨɽþÉätÉxÉ Eònù¨¤É´ÉxÉ{ÉnÂù¨ÉÉ]õ´ÉÒ-¨ÉvªÉºlÉÉÆ ´ÉÉMÉÒ¶ÉÒ¶É-®ú¨Éä¶É-¯ûp-ùSÉ®úhÉ ºÉnùÉÊ¶É´É ¡ò±ÉEò {É\SÉ¥ÉÀɺÉxÉ ¨É\UôÉ°üføÉÆ Ê´ÉpÖù¨É{ÉÉ¶É ®úÉè{ªÉÉRÂóEòÖ ¶É <IÉÖSÉÉ{É {É\SÉ{ÉÖ¹{ɤÉÉhÉ SÉiÉÖ¦ÉÖVÇ ÉÉÆ ¶ÉÉähÉɨ¤É®ú»ÉMÉÉÆ º´ÉºÉ¨ÉÉxÉúÉEòÉ®ú ´ÉhÉÇ´Éä¹É EòɨÉä·É®úÉRÂóEòºlÉÉÆ ´É±±É¦ÉÉMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ +É{ÉnÖùrùÉ®úhÉ´É]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ MÉxvÉ´ÉǨÉhb÷±ÉºlÉÉÆ §É¨É®úɨ¤ÉÉ ªÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ ´Éè·ÉÉxÉ®úÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ Eò±CªÉÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ ¸ÉÒÊ´ÉtɺÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó =kÉ®úÊnùÊ¶É ÊºÉrù®úÉjÉÉè ¦ÉÉpù{Énù¶ÉÖC±ÉuùÉnù¶ªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ =tiºÉÚªÉǺɽþ»É´ÉhÉÉÈ ¸ÉÒ¨ÉÎiºÉÀɺÉxÉÉ°üføÉÆ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶É ´É®únùÉ¦ÉªÉ SÉiÉÖ¦ÉÖVÇ ÉÉÆ ®úHò´ÉºjÉvÉ®úÉÆ ¨ÉÊhÉuùÒ{ɨÉvªÉºlÉÉÆ ¨É½þÉnäù´ÉºÉʽþiÉÉÆ ¨É½þÉMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ +ÎMxÉÊVɼ´ÉÉ´É]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ ¦ÉÚÊiÉxÉÒ¨Éhb÷±ÉºlÉÉÆ jÉè±ÉÉäCªÉ ¨ÉÉäʽþxÉÒªÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ {É®úÉä´ÉǪÉÉʺÉÊ´ÉtÉ °üÊ{ÉhÉÓ ´É®úɽþÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ ¦ÉÖ´ÉxÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ ºÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 89 .एकावलि 11.

एकावलि $ ¼»Éé ¼ºC±ÉÓ ¼»ÉÉè: +vÉÉäÊnù榃 EòɱɮúÉjÉÉè ¨ÉÉPÉ{ÉÚÌhɨÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ ®úHò´ÉhÉÉÈ ¡Öò±±ÉC±½þÉ®úºlÉÉÆ ¨ÉÖhb÷¨ÉɱÉÉvÉ®úÉÆ {ÉÖºiÉEòÉIɨÉɱɴɮúɦɪÉSÉiÉÖ¦ÉÖVÇ ÉÉÆ ´É]ÖõEòÉ ख्य त्ररपरु भैरवºÉʽþiÉÉÆ ÊIÉ|É|ɺÉÉnù®úMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ BEò{ÉÉnù´É]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ EÚò¹¨ÉÉhb÷¨Éhb÷±ÉºlÉÉÆ SÉxpù®äúJÉɪÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ ¶ÉÉÎhb÷±ªÉÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ xÉÞʺÉÀÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ ¤ÉɱÉɺÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ´ÉXÉ´Éè®úÉäSÉxÉÒªÉä ½ÚþÆ ½ÚþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ nùÊIÉhÉÊnù榃 ´ÉÒ®ú®úÉjÉÉè ´Éè¶ÉÉJɶÉÖC±ÉSÉiÉÖnùǶªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ ®úHò´ÉhÉÉÈ Ê´É{É®úÒiÉ®úiªÉÉस्त रततEòɨÉÉ°üføÉÆ EòjÉÔ º´ÉÊUôzÉʶɮ धतृ ú¦ÉÖVÉuùªÉÉÆ xÉMxÉÉÆ गळद्र्त धारा वपबन्त्ती´ÉÌhÉxÉÒ b÷ÉÊEòxÉÒ {ÉÉ·ÉÇuùªÉÉÆ GòÉävɦÉè®ú´ÉºÉʽþiÉÉÆ SÉiÉÖ®úÉIÉ®úMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ ´ÉμxÉ´ÉäiÉɳý´É]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ ÊºÉrùMÉÖÁEò¨Éhb÷±ÉºlÉÉÆ ±É¨{É]õɪÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ VªÉÉäÊiÉÌ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ {É®ú¶ÉÖ®úɨÉÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ |ÉSÉhb÷ SÉÎhb÷EòɺÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒÊUôzɨɺiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ vÉÚÆ vÉÚÆ vÉÚ¨ÉÉ´ÉÊiÉ º´ÉɽþÉ +ÉMxÉäªÉÊnù榃 nùɯûhÉ®úÉjÉÉè VªÉä¹`ö¶ÉÖC±Éɹ]õ¨ªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ vÉÚ©É´ÉhÉÉÈ EòÉEòv´ÉVÉ®úlɺlÉÉÆ ¨ÉÉVÉÇxÉÒ¶ÉÚ{ÉÇधतृ ¦ÉÖVÉuùªÉÉÆ Ê´É¨ÉÖHòEäò¶É¨ÉʱÉxÉɨ¤É®úÉÆ EòɱɦÉè®ú´ÉºÉʽþiÉÉÆ ´ÉÒ®úMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ ¸ÉÒEòɱɴÉ]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ xÉÉÊMÉxÉÒ¨Éhb÷±ÉºlÉÉÆ ¦ÉÒ¹ÉÊhɪÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ ¦ÉÚ¨ÉÉÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ ´ÉɨÉxÉÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ +ÉpÇù{É]õÒºÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒvÉÚ¨ÉÉ´ÉiÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $¼±ÉÅÓ ¤ÉMɳýɨÉÖÊJÉ ºÉ´ÉÇnùÖ ¹]õÉxÉÉÆ ´ÉÉSÉÆ ¨ÉÖJÉÆ {ÉnÆù ºiɨ¦ÉªÉ ÊVɼ´ÉÉÆ EòÒ±ÉªÉ ¤ÉÖËrù Ê´ÉxÉÉ¶ÉªÉ ¼±ÉÅÓ $ º´ÉɽþÉ-{ÉζSɨÉÊnù榃 ´ÉÒ®ú®úÉjÉÉè ´Éè¶ÉÉJɶÉÖC±Éɹ]õ¨ªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ {ÉÒiÉ´ÉhÉÉÈ ºÉÖvÉÉΤvɨÉvªÉ ¨ÉÊhɨÉhb÷{É ®úixÉ´ÉäÊn ùʺÉÀɺÉxɺlÉÉÆ {ÉÒiɴɺjÉɦɮúhÉvÉ®úÉÆ ¨ÉÖnùÂMÉ® ú´ÉèÊ®úÊVɼ´ÉÉvÉÞiɦÉÖVÉuùªÉÉÆ ¨ÉÞiªÉÖ\VɪɺÉʽþiÉÉÆ ÊºÉÀMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ jÉè±ÉÉäCªÉ´É]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ Ê{ɶÉÉSɨÉhb÷±ÉºlÉÉÆ Ê¤Éb÷ÉʱÉEòɪÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ <xpùªÉÉäÊxÉÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ EÚò¨ÉÉÇ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ ¥ÉÀɺjɺÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒ¤ÉMɳýɨÉÖÊJɸÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉʨÉxɨÉ: $ ¿Ó C±ÉÓ ½ÚþÆ ¨ÉÉiÉRÂóMªÉè ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ ´ÉɪÉÖÊnù榃 ¨ÉÉä½þ®úÉjÉÉè ´Éè¶ÉÉJɶÉÖC±ÉiÉÞiÉÒªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ ¶ªÉɨɱɴÉhÉÉÈ ºÉpùixÉʺÉÀɺÉxɺlÉÉÆ ®úixÉÊ´ÉÊSÉjɦÉÚ¹ÉhÉvÉ®úÉÆ +RÂóEòÖ ¶ÉÉʺÉ-{ÉɶÉ-JÉä]Eò-ªÉÖiÉSÉiÉÖ¦ÉÖVÇ ÉÉÆ ¨ÉiÉRÂóMɺÉʽþiÉÉÆ ½þÊ®úpùÉMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ ¸ÉÒ¦ÉҨɴÉ]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ b÷ÉÊEòxÉÒ¨Éhb÷±ÉºlÉÉÆ 90 .

एकावलि ¸ÉÒ¨ÉxÉÉä½þÉÊ®úÊhɪÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ =nÂùMÉÒlÉÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ ¶ªÉɨɳýɺÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒ¨ÉÉiÉRÂóMÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¤É±É¦ÉpùÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ $ ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ Eò¨É±Éä Eò¨É±ÉɱɪÉä |ɺÉÒnù |ɺÉÒnù ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ $ ¨É½þɱÉI¨ªÉè xɨÉ: ÊxÉ@ñiªÉÉÆÊnù榃 ¨É½þÉ®úÉjÉÉè ¨ÉÉMÉǶÉÒ¹ÉÉǨÉÉ´ÉɺªÉÉʴɦÉÚiÇ ÉÉÆ ½äþ¨É´ÉhÉÉÈ Eò¨É±ÉɺÉxɺlÉÉÆ {ÉnÂù¨É¨ÉɱÉÉvÉ®úÉÆ {ÉnÂù¨ÉuùªÉ´É®úɦɪÉSÉiÉÖ¦ÉÖVÇ ÉÉÆ xÉÉ®úɪÉhɺÉʽþiÉÉÆ ´É¶ªÉMÉhÉà¶ÉÊ|ɪÉÉÆ Eò®úÉ±É ´É]ÖõEò±ÉÉʱÉiÉÉÆ ¶Éɤɮú¨Éhb÷±ÉºlÉÉÆ vÉxÉnùɪÉÊIÉhÉÒºÉä´ªÉÉÆ ={ÉÊxɹÉiºÉÖ ¨ÉvÉÖÊ´ÉtÉ°üÊ{ÉhÉÓ ¨ÉiºªÉÉ´ÉiÉÉ®ú°ü{ÉÉÆ ¨É½þɱÉI¨ÉÒºÉÆÊYÉEòÉÆ ¸ÉÒEò¨É±ÉÉÎi¨ÉEòÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 91 .

ºÉ´ÉÇʺÉÊrùºÉÖvÉÉ.ºÉ¨ÉºiÉ º¡òÉä]õ nùÒÎ{iÉ |ɦÉÉºÉ |Éä¨É EòÉè±É nù½þ®ú ±ÉªÉ ªÉÉäÊMÉxÉÒ |ɨÉÖJÉ ºÉ´ÉǶÉÊHò¨Éhb÷±É ¨ÉÎhb÷iÉ ºÉ´ÉǶÉÉHòÉxÉxnù {ÉÒªÉÚ¹É. ºÉ´ÉÇYÉÉxÉÉxÉxnù¶Éä´ÉvÉÒ ºÉ´ÉÇÊ´ÉtɺÉÉènùÉʨÉxÉÒ ºÉ´ÉÉæ±±ÉɺÉEò±±ÉÉä±É ºÉ´ÉǺÉÉ©ÉÉVªÉ¨ÉävÉÉ ºÉ´ÉÉÇxÉxnùºÉ´ÉǺ´É ºÉ{iÉSÉGòÉvÉÒ·É®úÒ Ê´É·É¨Éhb÷±É EòÉʱÉEòÉ ±ÉÒ±ÉÉEòÉʱÉEòÉ YÉÉxÉEòÉʱÉEòÉ +¨ÉÞiÉEòÉʱÉEòÉ +ÉxÉxnùEòÉʱÉEòÉ ¨ÉÉäIÉEòÉʱÉEòÉ nùÊIÉhÉEòÉʱÉEòÉ ¨ÉªÉÚJÉÉ´ÉÞiÉ {ÉÞl´ÉÒ-¨É½þÉEòɱÉ-´ÉɪÉÖ-+ÎMxÉ-+¨ÉÞiÉ-SÉxp-ʤÉxnÖù näù´ÉiÉÉ-ºÉäÊ´ÉiÉÉ ¨É½þÉPÉÉä®úÉ°ü{ÉÉ SÉxpùÉäkɨºÉ¨ÉÖEÖò]õÉ »ÉCEònÂù´ªÉMɱÉpùHòvÉÉ®úÉ -ʴɺ¡ÖòÊ®úiÉÉxÉxÉÉ ÊxÉMɨÉÉMɨÉÉJªÉ¤ÉɱÉ.¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {ÉÖ¹{ÉÉ\VÉʱÉ: 4-ºÉ¨ÉºiÉ |ÉEò]õ MÉÖ{iÉ MÉÖ{iÉiÉ®ú ºÉ¨|ÉnùÉªÉ EÖò±ÉÉäkÉÒhÉÇ ÊxÉMɦÉÇ ®ú½þºªÉ +ÊiÉ®ú½þºªÉ {É®úÉ{É®ú®ú½þºªÉ ªÉÉäÊMÉxÉÒ |ɨÉÖJÉ ¶ÉÊHò¨Éhb÷±É ¨ÉÎhb÷iÉ jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉ ºÉ´ÉÉǶÉÉ{ÉÊ®ú {ÉÚ®úEò ºÉ´ÉǺɨIÉÉä¦ÉhÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉnùɪÉEò ºÉ´ÉÉÇlÉǺÉÉvÉEò ºÉ´ÉÇ®úIÉÉEò®úºÉ´ÉÇ®úÉäMɽþ®ú ºÉ´ÉÇʺÉÊrù|Énù ºÉ´ÉÉÇxÉxnù¨ÉªÉÉJªÉ xÉ´ÉSÉGòÉvÉÒ·É®úÒ ÊjÉ{ÉÖ®úÉ ÊjÉ{ÉÖ®äú¶ÉÒ ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ÊjÉ{ÉÖ®ú´ÉÉʺÉxÉÒ ÊjÉ{ÉÖ®úɸÉÒ ÊjÉ{ÉÖ®ú¨ÉÉʱÉxÉÒ ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùÉ ÊjÉ{ÉÖ®úɨ¤ÉÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ näù´ÉiÉÉ\VÉʱÉ-±ÉÉʱÉiÉ Ênù´ªÉ¸ÉÒ{ÉnùªÉÖMɱÉEò¤É±ÉÒEÞòiÉ ÊxÉ:¶Éä¹É iÉk´ÉOÉɨÉ-º´É°ü{É ¸ÉÒ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉÉ ¨É½þɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòÉJªÉ ºÉEò±ÉVÉMÉx¨ÉÚ±ÉÊSÉSUôÊHò°ü{ÉɪÉÉ: iÉÊ]õ±±ÉiÉɺɨɰü{ÉɪÉÉ: iɯûhÉÉÊnùiªÉEòÉÎxiÉÊxÉ¦É ºÉoù¶ÉɪÉÉ: iÉ{ÉxɶÉʶÉiÉÉ]ÆõEò¨ÉÎhb÷iÉɪÉÉ: ½þÉ®úMÉxvÉxÉÒ®úvÉÉ®úÉ ®úÎ \SÉiÉ SÉɯûªÉÖMÉ±É ¨É½þɨÉä¯û ¶ÉÞRÂóMɺlÉɪÉÉ: ¸ÉҨɽþÉEòɨÉä·É®úÉRÂóEòºlÉɪÉÉ: ºÉEò±ÉºÉÖ®úɺÉÖ®ú¨ÉÉè汃 ±ÉÉʱÉiÉ Ênù´ªÉ¸ÉÒ xÉ´É®úixÉ¨ÉªÉ ¸ÉҨɽþɶÉÊHò ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉҨɽþÉ®úÉVÉ®úÉVÉä·É®úÒ ¨É½þɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ Ênù´ªÉ ¸ÉÒ¨ÉÊhÉ¨ÉªÉ {ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: <ÊiÉ ºÉ¨Éι]õ {ÉÖ¹{ÉÉ\VÉʱÉ: ¸ÉÒ¨ÉqùÊIÉhÉ EòÉʱÉEòÉ {ÉÖ¹{ÉÉ\VÉʱÉ: 3.एकावलि 12.¶É´ÉªÉÖM¨É-EòhÉÉÇ´ÉiÉƺÉÉ JÉbÂ÷MÉ-¨ÉÖhb÷-´É®únùɦɪÉ-SÉiÉÖ½ÇþºiÉÉ ¨ÉÉiÉÞEòÉ´ÉhÉǨÉÖhb÷ ¨ÉɱÉɱÉRÂóEòÞ iÉEòxvÉ®úÉ ºÉ½þ»É¶É´ÉEò® úEòÉ\SÉÒ¨ÉäJɱÉÉ ½þºÉx¨ÉÖJÉÒ PÉÉä®úÉ]Âõ]õ½þɺÉÉ PÉÉä®ú°ü{ÉÉÊ¦É -̶ɴÉÉʦÉ-{ÉÇ®úÒ´ÉÞiÉÉ ¨É½þɶ¨É¶ÉÉxÉ-ÊxɱɪÉÉ ¨É½þÉEòɱÉ.¾þnùªÉÉä{ÉÊ®úxÉÞiªÉxiªÉÉ: EòEòÉ®ú ÊjÉ{É\SɦÉ]Âõ]õÉ®úEò{ÉÒ`äö ¸ÉÒ¨ÉnùÉtÉ Ê´ÉtÉ®úÉYÉÒ nùÊIÉhÉEòÉʱÉEòÉ ¨ÉÊhɨɪÉÊnù´ªÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 92 .

+ÉpÈù V´É±ÉÊiÉ VªÉÉäÊiÉ®ú½þ¨Éκ¨É VªÉÉäÊiÉV´ÉDZÉÊiÉ ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É ªÉÉä%½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éä´ÉɽÆþ ¨ÉÉÆ VÉÖ½þÉä欃 º´ÉɽþÉ** अरणोपतनषत ् इमा नुकां भुवना सीषधेम -1 इन्त्द्रश्ि ववश्वे ि दे वाुः -2 यज्ञां ि नसतन्त्वां ि प्रजाां ि - आददत्यैररन्त्द्रुः सह सीषधातु -3 आददत्यैररन्त्द्रुः सगणो मरतभुः असमाकां भूत्वववता तनूनाां -4 आप्िवसव प्रप्िवसव-5 आण्डी भव मा मह ु ु ुः -6 सि ु ादरन्त्दुःु ितनधनाां -7 प्रततमञ् ु िसव सवाां परु ां 93 .{ÉÉjÉ º´ÉÒEò®úhÉÆ |ÉlÉ¨É {ÉÉjÉ º´ÉÒEò®úhÉÆ 4.Bá EòB<Ç±É¿Ó +JÉhbè÷Eò®úºÉÉxÉxnùEò®äú {É®úºÉÖvÉÉi¨ÉÊxÉ* º´ÉSUôxnùº¡ÖòhÉɨÉjÉ ÊxÉvÉäʽþ EÖò±ÉxÉÉʪÉEäò** $ Bá ´ÉÉM¦É´ÉÉʦÉzÉ |ÉhÉ´ÉÉi¨ÉxÉä ¦ÉÚ: ¦ÉÚºº´É°ü{ÉÉªÉ ¦ÉÚºº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä +Æ +EòÉ®úº´É°ü{ÉÉªÉ +EòÉ®úº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä +Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éá +Éé +Æ +: ¹ÉÉäb÷¶Éº´É®úJÉhb÷º´É°ü{ÉÉªÉ ¹ÉÉäb÷¶Éº´É®úJÉhb÷º´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä iÉiºÉÊ´ÉiÉÖ´ÉÇ®äúhªÉÆ VÉÉiÉ´ÉänùºÉä ºÉÖxÉ´ÉɨɺÉÉä¨ÉÆ jªÉ¨¤ÉEÆò ªÉVÉɨɽäþ |ÉlɨÉ{ÉÉnùº´É°ü{ÉÉªÉ |ÉlɨÉ{ÉÉnùº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä EòB<Ç±É¿Ó ´ÉÉM¦É´ÉEÚò]õº´É°ü{ÉÉªÉ ´ÉÉM¦É´ÉEÚò]õº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä |ÉEÞòiªÉ½ÆþEòÉ®ú¤ÉÖÊrù¨Éxɶ¸ÉÉäjÉ i´ÉEÂò SÉIÉÖ ÊVɼ´ÉÉ QÉÉhÉ ´ÉÉEÂò {ÉÉÊhÉ {ÉÉnù {ÉɪÉÖ ={ɺlÉ ¶É¤nù º{ɶÉÇ °ü{É ®úºÉ MÉxvÉ +ÉEòÉ¶É ´ÉɪÉÖ ´ÉμxÉ ºÉÊ±É±É ¦ÉÚ¨ªÉÉxiÉ SÉiÉÖʹɶÉÊiÉ +Éi¨ÉiÉk´ÉÉÊvÉ{ÉiªÉÉi¨ÉEòÉªÉ +Éi¨É iÉk´ÉÉÊvÉ{ÉiªÉÉi¨ÉxÉä ºlÉڱɶɮúÒ®úÉªÉ ºlÉڱɶɮúÒ®úÉi¨ÉxÉä VÉÉOÉqù¶ÉÉÊvɹ`öÉi¨ÉEòÉªÉ VÉÉOÉqù¶ÉÉÊvɹ`öÉi¨ÉxÉä Ê´É·É{ÉÖ¯û¹ÉÉªÉ Ê´É·É{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉxÉä Ê´É®úÉ]Âõ-{ÉÖ¯û¹ÉÉªÉ Ê´É®úÉ]Âõ-{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉxÉä vÉÚ©ÉÌSɹÉÉÊnù Eò´ªÉÉ´ÉɽþÉxiÉ vɨÉÇ|Énù nù¶ÉEò±ÉÉi¨ÉEò ´ÉμxɨÉhb÷±Éº´É°ü{ÉÉªÉ ´ÉμxɨÉhb÷±Éº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ºÉi´ÉÉi¨ÉEò-¥ÉÀOÉÎxlÉ Ê´Énù±ÉxÉ |É´ÉÒhÉÉªÉ ´ÉÉMÉÉÊnù{É\SÉäÎxpùªÉ ºÉÉÊIÉhÉä +ÉhÉ´É¨É±É ºÉƶÉÉävÉxÉÉªÉ Eò¨ÉÉæ{ÉÉÌVÉiÉ ¥ÉÀhÉä EÖòhb÷ʱÉxÉÒ |ÉEòɶÉ-¨ÉÚ±ÉEòxnùÉªÉ EòÉÊnù-\ÉÉxiÉ´ÉhÉǺlÉ ºÉÞ¹]õ¬ÉÊn-ʺÉnÂùvªÉxiÉ nù¶É´ÉɨÉÉEò±ÉÉi¨É-º´ÉÉÊvɹ`öÉxÉ-ÊxÉ´ÉÉºÉ ºÉÞι]õEÞòiªÉ <SUôɶÉCiªÉÉi¨ÉEò ´ÉÉhÉÒ¥ÉÀº´É°ü{É EòɨÉÊMÉÊ®ú{ÉÒ`öºlÉ ¨É½þÉEòɨÉä·É®úÒ Ê¨ÉjÉä¶ÉÉxÉxnùxÉÉlÉɦªÉÉÆ º´ÉɽþÉ 4.EòB<Ç±É¿Ó ÊjÉ{ÉÖ®úÉnäùÊ´É Ê´ÉnÂù¨É½äþ ´ÉÉM¦É´Éä·ÉÊ®ú vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ¨ÉÖÊHò |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4.एकावलि 13.¸ÉÒ¨ÉSUôRÂóEò®ú¶ÉäJÉ®ú |ÉʴɱɺÉSSÉxpùɨÉÞiÉÉ{ÉÚÊ®úiÉÆ IÉäjÉÉvÉÒ·É®ú ªÉÉäÊMÉxÉÒºÉÖ®úMÉhÉè: ʺÉrèù: ºÉ¨ÉÉ®úÉÊvÉiÉÆ* +ÉxÉxnùÉhÉÇ´ÉEÆò ¨É½þÉi¨ÉEòʨÉnÆù ºÉÉIÉÉiÉ ÊjÉJÉhb÷Éi¨ÉEÆò ´Éxnäù ¸ÉÒ|ÉlɨÉÆ Eò®úɨ¤ÉÖVÉMÉiÉÆ {ÉÉjÉÆ Ê´É¶ÉÖÊrù|ÉnÆù** 4.

अकग्नां इच्छध्वां भारताुः .रकश्मलभुः समुदरररताुः असमल्िोकादमष्ु माच्ि.ववद्वान ् दे वासरु ानभ ु यान ् -२१ यत्कुमारर मन्त्द्रयते यत्योवषद्यत्पततव्रता.25 ÊuùiÉÒªÉ {ÉÉjÉ º´ÉÒEò®úhÉÆ 4.लसकता इव सम्यकन्त्त.13 युवा सुवासाुः .अररष्टां यकत्ककञ्िकत्क्रयते अकग्नसतनुदवेदधातत -२२ अशत ृ ासुः शत ृ ासश्ि.सूयेण सयुजोषसुः .वववेशापराकजता -19 पराङे त्यजामयी पराङेत्यनाशकी -20 इह िामुर िान्त्वेतत .C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó +EÖò±ÉºlÉɨÉÞiÉÉEòÉ®äú ¶ÉÖrùYÉÉxÉEò®äú{É®äú* +¨ÉÞiÉk´É ÊxÉvÉäÁκ¨ÉxÉ ´ÉºiÉÖÊxÉ ÎC±ÉzÉ°üÊ{ÉÊhÉ** $ C±ÉÓ EòɨɮúÉVÉÉʦÉzÉ |ÉhÉ´ÉÉi¨ÉxÉä ¦ÉÖ´É: ¦Éִɺº´É°ü{ÉÉªÉ ¦Éִɺº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä =Æ =EòÉ®úº´É°ü{ÉÉªÉ =EòÉ®úº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ ]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ {ÉÆ ¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ {É\SÉ˴ɶÉÊiɺ{ɶÉÇJÉhb÷º´É°ü{ÉÉªÉ {É\SÉ˴ɶÉÊiÉ º{ɶÉÇJÉhb ÷º´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ¦ÉMÉÉænùä´ÉºªÉ vÉÒ¨ÉÁÉ®úÉÊiÉ ªÉiÉÉäÊxÉnù½þÉÊiÉ´Éänù:ºÉÖMÉÏxvÉ {ÉÖι]õ´ÉvÉÇxÉÆ ÊuùiÉÒªÉ{ÉÉnùº´É°ü{ÉÉªÉ ÊuùiÉÒªÉ{ÉÉnùº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ½þºÉEò½þ±É¿Ó EòɨɮúÉVÉEÚò]õº´É°ü{ÉÉªÉ EòɨɮúÉVÉEÚò]õº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ¨ÉɪÉÉ Eò±ÉÉ +Ê´ÉtÉ ®úÉMÉ EòÉ±É ÊxɪÉÊiÉ {ÉÖ¯û¹ÉÉxiÉ ºÉ{iÉÊ´ÉtÉiÉk´ÉÉÉÊvÉ{ÉiªÉÉi¨ÉEòÉªÉ Ê´ÉtÉiÉk´ÉÉÊvÉ{ÉiªÉÉi¨ÉxÉä ºÉÚI¨É¶É®úÒ®úÉªÉ ºÉÚI¨É¶É®úÒ®úÉi¨ÉxÉä º´É{xÉ nù¶ÉÉÊvɹ`öÉi¨ÉEòÉªÉ º´É{xÉnù¶ÉÉÊvɹ`öÉi¨ÉxÉä iÉèVɺÉ{ÉÖ¯û¹ÉÉªÉ iÉèVɺÉ{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉxÉä ʽþ®úhªÉMɦÉÉÇªÉ Ê½þ®úhªÉMɦÉÉÇi¨ÉxÉä iÉÊ{ÉxªÉÉÊnù-IɨÉÉxiÉ +lÉÇ|Én-uùÉnù¶ÉEò±ÉÉi¨ÉEò ºÉÚªÉǨÉhb÷±Éº´É°ü{ÉÉªÉ ºÉÚªÉǨÉhb÷±Éº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ®úÉVɺÉÉi¨ÉEò-ʴɹhÉÖOÉÎxlÉ-Ê´Énù±ÉxÉ-|É´ÉÒhÉÉªÉ 94 .यज्जवनो ये प्यज्जवनुः सवयवन्त्तो नापेक्षन्त्ते-23 इन्त्दमकग्नां ि ये ववदुःु .एकावलि 8 मररियुः सवयांभव ु ाुः.यशसा सम्पररवत ृ ाां .½þºÉEò½þ±É¿Ó ÊjÉ{ÉÖ®úÉnäùÊ´É Ê´ÉnÂù¨É½äþ EòɨÉä·ÉÊ®ú vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ÎC±ÉzÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4.सवगो िोको ज्जयोततषावत े वत ृ ुः -17 यो वै ताां ब्रह्मणो दे व अमत ृ न ृ ाां परु रां तसमै ब्रह्म ि ब्रह्मा ि आयुुः कीततं प्रजाां ददुःु -18 ववभ्राजमानाां हररणीां.पुरां दहरण्मयीां ब्रह्मा.२५ ऋवषलभरादात ् पकृ श्नलभुः.½èþ¨ÉÆ ¨ÉÒxÉ®úºÉɴɽÆþ nùʪÉiɪÉÉnùkÉ\SÉ{ÉäªÉÉÊnùʦÉ: ÊEòÎ\SÉiÉ SÉ\SɱɮúHò{ÉRÂóEòVÉnù¶ÉÉ iÉþºªÉè ºÉ¨ÉÉ´ÉäÊnùiÉÆ* ´ÉɨÉä º´ÉÉnÖù ʴɶÉÖÊrù ¶ÉÖÊrùEò®úhÉÆ {ÉÉhÉÉè ÊxÉvÉɪÉÉi¨ÉEäò ´Éxnäù {ÉÉjɨɽÆþ ÊuùiÉõҪɨÉvÉÖxÉÉ%%xÉxnèùEò ºÉÆ´ÉvÉÇxÉÆ** 4.14 अष्टािक्रा नव द्वारा -15 दे वानाां पूरयोध्या -16 तसयाां दहरण्मय कोशुः.9 ये शररराण्यकल्पयन ्-10 ते ते दे हां कल्पयन्त्तु -11 मा ि ख्यासमा तीररषत ् -12 उकत्तष्ठ मा सवप्तुः.राज्ञुः सोमसय तप्ृ तासुः .

अज्ञानां ज्ञानां. ज्ञानां बुवद्धश्ि .एकावलि i´ÉMÉÉÊn-{É\SÉäÎxpùªÉ ºÉÉÊIÉhÉä EòĘ́ÉEò¨É±É-ºÉƶÉÉävÉxÉÉªÉ ´ÉÉMÉÖ{ÉÉÌVÉiÉEò¨ÉÇ¥ÉÀhÉä EÖòhb÷ʱÉxÉÒ ¨ÉvªÉºlÉÉxÉ Ê´ÉtÉäiÉ-¨ÉÉxÉÉªÉ ]õÉÊnù-xÉÉxiÉ ´ÉhÉǺlÉ-VÉ®úÉÊnù-nùÒPÉÉÇxiÉ nù¶ÉVªÉä¹`öÉEò±ÉÉi¨É ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®úEò-ÊxÉ´ÉÉºÉ ÎºlÉÊiÉEÞòiªÉ YÉÉxɶÉCiªÉÉi¨ÉEò ±ÉI¨ÉÒxÉÉ®úɪÉhɺ´É°ü{É VÉɱÉxvÉ®{ÉÒ`öºlÉ ¨É½þÉ´ÉXÉä·É®úÒ ¹É¹`öÒ¶ÉÉxÉxnùxÉÉlÉɦªÉÉÆ º´ÉɽþÉ 4. अधमव कारणाज्ञानमेव ज्ञानां. ज्ञानां मोक्षैक कारणां . मोक्षुः सववत्मता लसवद्धुः .+ÉpÈù V´É±ÉÊiÉ VªÉÉäÊiÉ®ú½þ¨Éκ¨É VªÉÉäÊiÉV´ÉDZÉÊiÉ ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É ªÉÉä%½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éä´ÉɽÆþ ¨ÉÉÆ VÉÖ½þÉä欃 º´ÉɽþÉ ** शन्नः कौलिकः शन्नो वारुणी शन्नः शुद्धः शन्नोS ग्नः शन्नः सवं समभवत ् ॐ नमो ब्रह्मणे नमः पृथिव्यै नमोS द्भ्यो नमोS्नये नमो वायवे नमो गुरु्यः त्वमेव प्रत्यक्षं सैवालस त्वामेव प्रत्यक्षं तां वदिष्यालम ऋतं वदिष्यालम सत्य वदिष्यालम तन्मामवतु तद्भवक्तारमवतु अवतु मां अवतु वक्तारं ॐ शागन्तः शागन्तः शागन्तः अथातो धमव कजज्ञासा . एषुः मोक्षुः पञ्ि बन्त्धा ज्ञान सवरूपाुः वपण्डात ् जननां तरैव मोक्षुः एतत ् ज्ञानां सवेकन्त्द्रयाणाां नयनां प्रधानां धमव ववरद्धाुः कायावुः धमव ववदहता न कायावुःसवं शाम्भवी रूपां आम्नाया न ववद्यन्त्ते गुरोरे कुः सवण्यता बवु द्धमन्त्ते आमन्त्र लसद्धेुः मदाददत्याज्जयुः प्राकट्यां न कुयावत ् न कुयावत ् पशु सांभाषणां अन्त्यायो न्त्यायुः न गणयेत ् कमवप आत्मा रहसयां न वदे त ् लशष्याय वदे त ् अन्त्तुः शा्तुः बदहुः लशवुः िोके ि वैष्णवुः अयमेव आिारुः आत्मा ज्ञानात ् मोक्षुः िोकान ् न तनन्त्द्यात ् इत्यध्यात्मां व्रतां न िरे त ् न ततष्ठे त ् तनयमेन तनयमान्त्न मोक्षुः क ि प्रततष्ठाां न कुयावत ् सवव भवेत ् स मु्तो भवतत पठे त ् एतातन सूराखण प्रातरत्थाय दे लशकुः आज्ञा लसवद्धुः भवेत ् तसय इत्याज्ञा पारमेश्वरर यश्िािार ववहरनॊवप यो वा पूजाां न कुववते यतत ज्जयेष्ठां न मन्त्यते नन्त्दते नन्त्दने वने शन्नः कौलिकः शन्नो वारुणी शन्नः शुद्धः शन्नोS ग्नः शन्नः सवं समभवत ् ॐ नमो ब्रह्मणे नमः पृथिव्यै नमोS द्भ्यो नमोS्नये नमो वायवे नमो गुरु्यः त्वमेव प्रत्यक्षं सैवालस त्वामेव प्रत्यक्षं तां वदिष्यालम ऋतं वदिष्यालम सत्य वदिष्यालम तन्मामवतु तद्भवक्तारमवतु अवतु मां अवतु वक्तारं ॐ शागन्तः शागन्तः शागन्तः 95 . अतनत्यां तनत्यां. पञ्ि ववषयाुः प्रपञ्ि. प्रपञ्ि एव ईश्वरुः. योगो मोक्षुः. तेषाां ज्ञान सवरूपाुः. अधमव एव धमवुः.

ºÉEò±É¿Ó ÊjÉ{ÉÖ®úÉnäùÊ´É Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¶ÉHòÒ·ÉÊ®ú vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä%¨ÉÞiÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4.+ÉpÈù V´É±ÉÊiÉ VªÉÉäÊiÉ®ú½þ¨Éκ¨É VªÉÉäÊiÉV´ÉDZÉÊiÉ ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É ªÉÉä%½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éä´ÉɽÆþ ¨ÉÉÆ VÉÖ½þÉä欃 º´ÉɽþÉ** त्ररपुरोपतनषद् पठनां 96 .+xiÉnù¶É-र द्ररEò±ÉÉi¨É-+xÉɽþiÉ-ÊxÉ´ÉɺÉ-ºÉƽþÉ®úEÞòiªÉ ÊGòªÉɶÉCiªÉÉi¨ÉEò Ê´ÉtÉशङ्करº´É°ü{É {ÉÖhÉÇÊMÉÊ®ú {ÉÒ`öºlÉ ¨É½þɦÉMɨÉÉʱÉxÉÒ =bÂ÷b÷Ò¶ÉÉxÉxnùxÉÉlÉɦªÉÉÆ º´ÉɽþÉ 4.ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó i´ÉpÚÊ{ÉhªÉèEò®úºªÉi´ÉÆ EÞòi´ÉÉ ÁäiÉiÉ º´É°üÊ{ÉÊhÉ* ¦ÉÚi´ÉÉ {É®úɨÉÞiÉÉEòÉ®úÉ ¨É滃 ÊSÉiº¡Öò®úhÉÆ EÖò¯û** $ ºÉÉè: ¶ÉCiªÉÉʦÉzÉ |ÉhÉ´ÉÉi¨ÉxÉä ºÉÖ´É: ºÉִɺº´É°ü{ÉÉªÉ ºÉִɺº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ¨ÉÆ ¨ÉEòÉ®úº´É°ü{ÉÉªÉ ¨ÉEòÉ®úº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ ¶ÉÆ ¹ÉÆ ºÉÆ ½Æþ ³Æý IÉÆ nù¶É-+xiɺlÉ>ð¹¨ÉÉJÉhb÷º´É°ü{ÉÉªÉ nù¶É-+xiɺlÉ >ð¹¨ÉÉJÉhb÷º´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ÊvɪÉÉä ªÉÉä xÉ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ ºÉ xÉ: {ɹÉÇnùnùÊiÉ nÖùMÉÉÇÊhÉ Ê´É·ÉÉ =´ÉÉǯûEòÊ¨É´É ¤ÉxvÉxÉÉiÉ iÉÞiÉÒªÉ{ÉÉnùº´É°ü{ÉÉªÉ iÉÞiÉÒªÉ{ÉÉnùº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ºÉEò±É¿Ó ¶ÉÊHòEÚò]õº´É°ü{ÉÉªÉ ¶ÉÊHòEÚò]õº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä Ê¶É´É ¶ÉÊHò ºÉnùÉÊ¶É´É <Ç·É®ú ¶ÉÖrùÊ´ÉtÉxiÉ {É\SÉÊ¶É´É iÉk´ÉÉÊvÉ{ÉiªÉÉi¨ÉEòÉªÉ Ê¶É´ÉiÉk´ÉÉÊvÉ{ÉiªÉÉi¨ÉxÉä EòÉ®úhɶɮúÒ®úÉªÉ EòÉ®úhɶɮúÒ®úÉi¨ÉxÉä ºÉÖ¹ÉÖÎ{iÉnù¶ÉÉÊvɹ`öÉi¨ÉEòÉªÉ ºÉÖ¹ÉÖÎ{iÉ nù¶ÉÉÊvɹ`öÉi¨ÉxÉä |ÉÉYÉ{ÉÖ¯û¹ÉÉªÉ |ÉÉYÉ{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉxÉä +´ªÉÉEÞòiÉ{ÉÖ¯û¹ÉÉªÉ +´ªÉÉEÞòiÉ{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉxÉä +¨ÉÞiÉÉÊnù {ÉÚhÉÉǨÉÞiÉÉxiÉ EòɨÉ|Énù ¹ÉÉàb÷¶ÉEò±ÉÉi¨ÉEò ºÉÉä¨É¨Éhb÷±Éº´É°ü{ÉÉªÉ ºÉÉä¨É¨Éhb÷±Éº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä iÉɨɺÉÉi¨ÉEò ¯ûpùOÉÎxlÉ-Ê´Énù±ÉxÉ-|É´ÉÒhÉÉªÉ +xiÉ:Eò®úhÉ-SÉiÉÖ¹]õªÉ-ºÉÉÊIÉhÉä ¨ÉÉʪÉEò¨É±ÉºÉƶÉÉävÉxÉÉªÉ ¨ÉÉäIÉÉä{ÉÉÌVÉiÉ-ºÉÉÊIÉ¥ÉÀhÉä EÖòhb÷ʱÉxÉÒ-ʶÉJÉÉxiÉtÉêiɨÉÉxÉ-¨É½þÉ|ÉEòɶÉiÉäVɺÉä {ÉÉÊn-¶ÉÉxiÉ-´ÉhÉǺlÉ iÉÒIhÉÉÊn-¨ÉÞiªÉÖ.एकावलि iÉÞiÉÒªÉ {ÉÉjÉ º´ÉÒEò®úhÉÆ 4.ºÉ´ÉÉǨxÉÉªÉ Eò±ÉÉEò±ÉÉ{ÉEòʱÉiÉÆ EòÉèiÉÚ½þ±ÉÉätÉäiÉEÆò <xpùÉä{Éäxpù ¨É½äþxpù ¶¨¦ÉÖ ´É¯ûhÉ ¥ÉÀÉÊnùʦÉ: ºÉäÊ´ÉiÉÆ* vªÉÉiÉÆ näù´ÉMÉhÉè: {É®Æú ¨ÉÖÊxÉMÉhÉè: ¨ÉÉäIÉÉÌlÉʦÉ: ºÉ´ÉÇnùÉ ´Éxnäù {ÉÉjɨɽÆþ iÉÞiÉҪɨÉvÉÖxÉÉ º´ÉÉi¨ÉɴɤÉÉävÉIɨÉÆ* 4.

C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó +EÖò±ÉºlÉɨÉÞiÉÉEòÉ®äú ¶ÉÖrùYÉÉxÉEò®äú{É®äú* +¨ÉÞiÉk´É ÊxÉvÉäÁκ¨ÉxÉ ´ÉºiÉÖÊxÉ ÎC±ÉzÉ°üÊ{ÉÊhÉ** 4.EòB<Ç±É¿Ó ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú Ê´ÉnÂù¨É½äþ ½þºÉEò½þ±É¿Ó {ÉÒ`öEòÉʨÉÊxÉ vÉÒ¨Éʽþ ºÉEò±É¿Ó iÉzÉ ÎC±ÉzÉä |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4.ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó i´ÉpÚÊ{ÉhªÉèEò®úºªÉi´ÉÆ EÞòi´ÉÉ ÁäiÉiÉ º´É°üÊ{ÉÊhÉ* ¦ÉÚi´ÉÉ {É®úɨÉÞiÉÉEòÉ®úÉ ¨É滃 ÊSÉiº¡Öò®úhÉÆ EÖò¯û** 4-Bá ¤±ÉÚÆ [ÉÉé VÉÖÆ ºÉ: +¨ÉÞiÉä +¨ÉÞiÉÉänÂù¦É´Éä +¨ÉÞiÉä·ÉÊ®ú +¨ÉÞiÉ´É̹ÉÊhÉ +¨ÉÞiÉÆ »ÉÉ´ÉªÉ »ÉÉ´ÉªÉ º´ÉɽþÉ** $ Bá C±ÉÓ ºÉÉè: ´ÉCEòɨɶÉCiªÉÉʦÉzÉ |ÉhÉ´ÉÉi¨ÉxÉä ¦ÉÚ¦ÉÖ´Ç ÉººÉÖ´É: ¦ÉÚ¦ÉÖ Ç´ÉººÉִɺº´É°ü{ÉÉªÉ ¦ÉÚ¦ÉÖ´Ç ÉººÉִɺº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä +Éá +ÉáEòÉ®úº´É°ü{ÉÉªÉ +ÉáEòÉ®úº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä +Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éá +Éé +Æ +: EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ ]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ {ÉÆ ¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ ¶ÉÆ ¹ÉÆ ºÉÆ ½Æþ ³Æý IÉÆ +JÉhb÷¨ÉÉiÉÞEòɺ´É°ü{ÉÉªÉ +JÉhb÷¨ÉÉiÉÞEòɺ´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä iÉiºÉÊ´ÉiÉÖ´ÉÇ®äúhªÉÆ VÉÉiÉ´ÉänùºÉä ºÉÖxÉ´ÉɨɺÉÉä¨ÉÆ jªÉ¨¤ÉEÆò ªÉVÉɨɽäþ ¦ÉMÉÉænùä´ÉºªÉvÉÒ¨ÉÁÉ®úÉÊiɪÉÉäÊxÉnù½þÉÊiÉ´Éänù ºÉÖMÉÏxvÉ {ÉÖι]õ´ÉvÉÇxÉÆ ÊvɪÉÉä ªÉÉä xÉ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ ºÉ xÉ: {ɹÉÇnùnùÊiÉ nÖùMÉÉÇÊhÉ Ê´É·ÉÉ =´ÉÉǯûEòÊ¨É´É ¤ÉxvÉxÉÉiÉ {É®úÉä ®úVɺÉäºÉÉ´ÉnùÉå xÉÉ´Éä´ÉʺÉxvÉÖÆ nÖùÊ®úiÉÉiªÉÎMxÉ: ¨ÉÞiªÉÉä¨ÉÖIÇ ÉҪɨÉɨÉÞiÉÉiÉ iÉÖ®úÒªÉ{ÉÉnùºÉʽþiÉ {ÉÚhÉǺ´É°ü{ÉÉªÉ iÉÖ®úÒªÉ{ÉÉnùºÉʽþiÉ {ÉÚhÉǺ´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó¸ÉÓ SÉxpùEò±ÉÉJÉhb÷ Ê´ÉVÉÞΨ¦ÉiÉ {ÉÚhÉǺ´É°ü{ÉÉªÉ {ÉÚhÉǺ´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä |ÉEÞòiªÉ½ÆþEòÉ®ú¤ÉÖÊrù¨Éxɶ¸ÉÉäjÉ i´ÉEÂò SÉIÉÖ ÊVɼ´ÉÉ QÉÉhÉ ´ÉÉEÂò {ÉÉÊhÉ {ÉÉnù {ÉɪÉÖ ={ɺlÉ ¶É¤nù º{ɶÉÇ °ü{É ®úºÉ MÉxvÉ +ÉEòÉ¶É ´ÉɪÉÖ ´ÉμxÉ ºÉÊ±É±É ¦ÉÚ欃 ¨ÉɪÉÉ Eò±ÉÉ +Ê´ÉtÉ ®úÉMÉ EòÉ±É ÊxɪÉÊiÉ {ÉÖ¯û¹É Ê¶É´É ¶ÉÊHò ºÉnùÉÊ¶É´É <Ç·É®ú ¶ÉÖrùÊ´ÉtÉxiÉ ¹É]ÂõËjɶÉkÉk´ÉÉÊvÉ{ÉiªÉÉi¨ÉEòÉªÉ ¹É]Âõ ËjɶÉkÉk´ÉÉÊvÉ{ÉiªÉÉi¨ÉxÉä ºÉ´ÉǶɮúÒ®úÉªÉ ºÉ´ÉǶɮúÒ®úÉi¨ÉxÉä ºÉ´ÉÇnù¶ÉÉÊvɹ`öÉi¨ÉEòÉªÉ ºÉ´ÉÇnù¶ÉÉÊvɹ`öÉi¨ÉxÉä ºÉ´ÉÇ{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉVÉÒ´ÉÉªÉ ºÉ´ÉÇ{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉVÉÒ´ÉÉi¨ÉxÉä vÉÚ©ÉÉÌSɹÉÉÊn-{ÉÚhÉÉǨÉÞiÉÉxiÉ vɨÉÇ-+lÉ-EòɨÉ|Énù +¹]õËjɶÉiEò±ÉÉi¨ÉEò +ÎMxÉ-ºÉÚªÉÇ-ºÉÉä¨É¨Éhb÷±Éº´É°ü{ÉÉªÉ +ÎMxÉ-ºÉÚªÉÇ-ºÉÉä¨É-¨Éhb÷±Éº´É°ü{ÉÉi¨ÉxÉä ºÉi´É.एकावलि SÉiÉÖlÉÇ {ÉÉjÉ º´ÉÒEò®úhÉÆ 4.¨ÉtÆ ¨ÉÒxÉ ®úºÉɴɽÆþ ½þÊ®ú½þ®ú¥ÉÀÉÊnùʦÉ: {ÉÚÊ®úiÉÆ ¨ÉÖpùÉ ¨ÉèlÉÖxÉ vɨÉÇ Eò¨ÉÇ ÊxÉ®úiÉÆ IÉÉ®úɨ±ÉÊiÉHòɸɪÉÆ* +ÉSÉɪÉÉǹ]õEòʺÉrù¦Éè®ú´É-Eò±ÉÉ-¨ÉÉƺÉäxÉ ºÉƶÉÉäÊvÉiÉÆ {ÉɪÉÉiÉ {É\SɨÉEòÉ®úiÉi´ÉºÉʽþiÉÆ {ÉÉjÉÆ SÉiÉÖlÉÈ xɨÉ: 4.Bá EòB<Ç±É¿Ó +JÉhbè÷Eò®úºÉÉxÉxnùEò®äú {É®úºÉÖvÉÉi¨ÉÊxÉ* º´ÉSUôxnùº¡ÖòhÉɨÉjÉ ÊxÉvÉäʽþ EÖò±ÉxÉÉʪÉEäò** 4.®úÉVɺÉ-iÉɨɺÉÉi¨ÉEò ¥ÉÀ97 .

+ÉpÈù V´É±ÉÊiÉ VªÉÉäÊiÉ®ú½þ¨Éκ¨É VªÉÉäÊiÉV´ÉDZÉÊiÉ ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É ªÉÉä%½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éä´ÉɽÆþ ¨ÉÉÆ VÉÖ½þÉä欃 º´ÉɽþÉ** ¹É¹`ö {ÉÉjÉÆ: 4.¯ûpÆù SÉɨɮú ¦Épù {ÉÒ`ö {É®ú¨ÉÉxÉxnùÉäÊnùiÉÆ nùÒ{ÉxÉÆ ´ÉɨÉÉÆ ®úÉVªÉ¨ÉxÉÉä®ú¨ÉÉÆ ¶ÉÖ¦ÉEò®Æú ºÉɪÉÖVªÉºÉÉ©ÉÉVªÉnÆù* xÉÉxÉÉ´ªÉÉÊvÉ ¦É´ÉÉxiÉEÚò{ɽþ®úhÉÆ VÉx¨ÉÉxiÉ®Æú xÉɶÉxÉÆ ¸ÉÒ¨ÉiºÉÖxnùÊ®ú iÉ{ÉÇhÉ p´Éú®úºÉÆ {ÉÉjÉÆ SÉ ¹É¹`Æö ¦ÉVÉä** 98 .एकावलि ʴɹhÉÖ-¯ûpùOÉÎxlÉ-Ê´Énù±ÉxÉ|É´ÉÒhÉÉªÉ ºÉ´ÉÇ|É{É\SɺÉÉÊIÉhÉä +ÉhÉ´É-EòĘ́ÉEò-¨ÉÉʪÉEòÉi¨ÉºÉ´ÉǨɱÉ-ºÉƶÉÉävÉxÉÉªÉ ºÉ´ÉǺÉÉvÉxÉÉä{ÉÉÌVÉiÉ-¶ÉÖrù¥ÉÀhÉä ºÉ´ÉÇEÖòhb÷ʱÉxÉÒ tÉäiɨÉÉxÉ iÉäVɺÉä ¹ÉÉÊn-ù ³ýÉxiÉ´ÉhÉǺlÉ {ÉÒiÉÉÊn-+ʺÉiÉÉxiÉ SÉiÉÖ:¶ÉÉxiÉÉEò±ÉÉi¨É ʴɶÉÖÊrùÊxÉ´ÉɺÉÊiÉ®úÉävÉÉxÉEÞòiªÉ +Ψ¤ÉEòɶÉCiªÉÉi¨ÉEò ¨É½äþ¶ÉÒ-<Ç·É®º´É°ü{É ¸ÉҨɽþÉäb÷¬ÉhÉ{ÉÒ`öºlÉ ¨É½þɸÉÒºÉÖxnù®úÒ ¨É½þɸÉÒºÉÖxnù®úɦªÉÉÆ º´ÉɽþÉ 4.Bá ´Énù ´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùÊxÉ Bá C±ÉÓ ÎC±ÉzÉä C±ÉäÊnùÊxÉ C±ÉänùªÉ C±ÉänùªÉ ¨É½þÉIÉÉä¦ÉÆ EÖò¯û EÖò¯û C±ÉÓ ºÉÉè: ¨ÉÉäIÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ¼ºÉÉé º½þÉè: 4-ºÉ´ÉÇ|ÉhÉ´ÉÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉDZÉÉäEòÉiÉÒiÉÉªÉ Ê¤ÉxuùÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇ´ÉhÉÉÇiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇ{ÉÉnÉùiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇEÚò]ÉõiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇiÉk´ÉÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉǶɮúÒ®úÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÉǴɺlÉÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÉÇhb÷ÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇEòÉ®úhÉÉiÉÒiÉÉªÉ +IÉ®úÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉǨÉhb÷±ÉÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇ|É{É\SÉÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇOÉxlªÉÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉǨɱÉÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉǺÉÉvÉxÉÉiÉÒiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇEÖòhb÷ʱÉxÉÒ |ÉEòɶɨÉÉxÉ-¨É½þÉiÉäVɺÉä ´ÉhÉÉÇÊnùʴɺÉMÉÉÇxiÉ´ÉhÉǺlÉ ÊxÉ´ÉÞiªÉÉÊnù-´ªÉÉä¨É°ü{ÉÉxiÉ ¹ÉÉäb÷¶É ¶ÉÉxiÉÒiÉEò±ÉÉi¨É +ÉYÉÉÊxÉ´ÉÉºÉ +xÉÖOɽþEÞòiªÉ ¶ÉÉxiªÉiÉÒiɶÉCiªÉÉi¨ÉEò {É®úʶɴÉÉ ºÉnùÉÊ¶É´É º´É°ü{É ¶Éɨ¦É´É{ÉÒ`öºlÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉɨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒSɪÉÉÇxÉxnùxÉÉlÉɦªÉÉÆ º´ÉɽþÉ 4.+ÉpÈù V´É±ÉÊiÉ VªÉÉäÊiÉ®ú½þ¨Éκ¨É VªÉÉäÊiÉV´ÉDZÉÊiÉ ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É ªÉÉä%½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éä´ÉɽÆþ ¨ÉÉÆ VÉÖ½þÉä欃 º´ÉɽþÉ** भावनोपतनषद् पठनां {É\SÉ¨É {ÉÉjÉÆ: 4-+ÉvÉÉ®äú ¦ÉÖVÉMÉÉÊn®úÉVɴɱɪÉä {ÉÉjÉÆ ¨É½þÒ¨Éhb÷±ÉÆ ¨ÉtÆ ºÉ{iɺɨÉÖpù´ÉÉÊ®ú Ê{ÉʶÉiÉÆ SÉɹ]õÉè SÉ ÊnùMÉ nÊùxiÉxÉ: ºÉÉä%½Æþ ¦Éè®ú´É¨ÉSÉǪÉxÉ |ÉÊiÉÊnùxÉÆ iÉÉ®úÉMÉhÉè: ®úÊIÉiÉ: +ÉÊnùiªÉ|ɨÉÖJÉè: ºÉÖ®úɺÉÖ®úMÉhÉè®úÉYÉÉEò®èú: ËEòEò®èú:** 4.

¥ÉÀÉ{ÉÇhÉÆ ¥ÉÀ½þÊ´É: ¥ÉÀÉMxÉÉè ¥ÉÀhÉɽÖþiÉÆ* ¥ÉÀè´É iÉäxÉ MÉxiÉ´ªÉÆ ¥ÉÀEò¨ÉÇ ºÉ¨ÉÉÊvÉxÉÉ** 4.+ÉpÈù V´É±ÉÊiÉ VªÉÉäÊiÉ®ú½þ¨Éκ¨É VªÉÉäÊiÉV´ÉDZÉÊiÉ ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É ªÉÉä%½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éä´ÉɽÆþ ¨ÉÉÆ VÉÖ½þÉä欃 º´ÉɽþÉ** ºÉ{iÉ¨É {ÉÉjÉÆ ({ÉÚhÉÇ {ÉÉjÉÆ): 4.एकावलि 4.(¨É½þɹÉÉäb÷¶ÉÒ) {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉäIÉÖ{ÉÖ¹{ɤÉÉhÉvÉ®úɦªÉÉÆ =tnÂù¦ÉÉxÉֺɽþ»ÉɦÉɦªÉÉÆ {É\SÉ¥ÉÀ¨ÉªÉ ¨É\UôÉÊvÉι`öiÉɦªÉÉÆ {É®úº{É®úÉζ±É¹]õ´É{ÉÖvÉÇ®úɦªÉÉÆ xɴɪÉÉè´ÉxÉɦªÉÉÆ SÉxpù®äúJÉÉʴɦÉÚʹÉiÉɦªÉÉÆ ºÉ½þ»ÉÉ®ú-Eò¨É±ÉEòÌhÉEòÉxiÉ®úºlÉɦªÉÉÆ {É®ú¶Éɨ¦É´É{ÉÒ`öºlÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉɨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòÉ ºÉʽþiÉ ¸ÉÒʶɴÉEòɨÉä¶É¨É½þɦÉ]Âõ]õÉ®úEò°ü{ÉɦªÉÉÆ ¸ÉÒ+¨ÉÖEòɨ¤ÉÉ ºÉʽþiÉ ¸ÉÒ+¨ÉÖEòÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒMÉÖ¯û{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: º´ÉɽþÉ** 4.Bá C±ÉÓ ºÉÉè:*¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ*EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó* EòB<DZÉ-½þºÉEò½þ±É-ºÉEò±É¿Ó* ½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó*½þºÉEò±É-½þºÉEò½þ±É-ºÉEò±É¿Ó* ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bá ºÉÉè: 99 .¸ÉÒÊ´ÉtÉÆ {ÉÊ®ú{ÉÚhÉǨÉä¯û ʶÉJÉ®äú ʤÉxnÖù ÊjÉEòÉähÉÉäVV´É±Éä ´ÉÉMÉÒ¶ÉÒ¶É ®ú¨Éä¶É ¯ûpù SÉ®úhɨÉ\Uäô ʶɴÉÉEòÉ®úEäò* EòɨÉÉIÉÓ Eò¯ûhÉÉ®úºÉɨ¤ÉÖ ÊxɱɪÉÉÆ EòɨÉä·É®úÉRÂóEòʺlÉÉiÉÉÆ EòÉxiÉÉÆ ÊSÉx¨ÉªÉ EòɨÉEòÉäÊ]õ ÊxɱɪÉÉÆ ¸ÉÒ ¥ÉÀÊ´ÉtÉÆ ¦ÉVÉä** 4.<iÉ:{ÉÚ´ÉÈ <iÉ: {É®Æú |ÉÉhÉ ¤ÉÖÊrù näù½þ vɨÉÉÇÊvÉEòÉ®úiÉ: VÉÉOÉiÉ º´É{xÉ ºÉÖ¹ÉÖÎ{iÉ iÉÖªÉÇ iÉÖªÉÉÇiÉÒiÉɴɺlÉɺÉÖ ¨ÉxɺÉÉ ´ÉÉSÉÉ Eò¨ÉÇhÉÉ ½þºiÉɦªÉÉÆ {ÉnÂù¦ªÉÉÆ =nù®äúhÉ Ê¶É¶xÉÉ ªÉiÉ º¨ÉÞiÉÆ ªÉiÉ EÞòiÉÆ iÉiÉ ºÉ´ÉÈ ¥ÉÀÉ{ÉÇhÉÆ ¦É´ÉiÉÖ º´ÉɽþÉ 4-º´É|ÉEòɶɨÉÚÌiÉ®äúÊEòEòÉ iÉÊuù¨É¶ÉǨÉÚÌiÉ®äúÊEòEòÉ iɪÉÉä ºÉɨɮúºªÉ´É{ÉÖÊ®ú¹ªÉiÉä {É®úÉ-{ÉÉnÖùEòÉ{É®úʶɴÉÉi¨ÉxÉÉä MÉÖ¯û** 4.+ÉxÉxnùÉä ¥ÉÀäÊiÉ ´ªÉVÉÉxÉÉiÉÂ* +ÉxÉxnùÉtä´ÉJÉα´É¨ÉÉÊxÉ ¦ÉÚiÉÉÊxÉ VÉɪÉxiÉä* +ÉxÉxnäùxÉ VÉÉiÉÉÊxÉ VÉÃÒ´ÉÎxiÉ* +ÉxÉxnÆù |ɪÉxiªÉʦɺÉÆʴɶÉxiÉÒÊiÉ* ºÉè¹ÉÉ ¦ÉÉMÉÇ´ÉÒ ´ÉɯûhÉÒÊ´ÉtÉ {É®ú¨Éä ´ªÉÉä¨ÉxÉÂ* ªÉ B´ÉÆ ´Éänù |ÉÊiÉÊiɹ`öÊiÉ +zÉ´ÉÉxÉzÉÉnùÉä ¦É´ÉÊiÉ ¨É½þÉxÉ ¦É´ÉÊiÉ |ÉVɪÉÉ {ɶÉÖʦɥÉÇÀ´ÉSÉǺÉäxÉ ¨É½þÉxÉ EòÒiªÉÉÇ** 4.{ÉÚhÉÉÇ ¸ÉÒ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒ ¦ÉMÉ´ÉiÉÒ ¸ÉÒ®úÉVÉ®úÉVÉä·É®úÒ {ÉÚhÉÉǦÉè®ú´É¦Éè®ú´ÉÒ SÉ ´É]ÖõEòÉ {ÉÚhÉÉÇ ºÉnùÉEòÉʳýEòÉ* {ÉÚhÉÉÇ ¸ÉÒ¤ÉMɳýÉ SÉ vÉÚ©É´ÉnùxÉÉ ¸ÉÒÊUôzɨɺiÉÉΨ¤ÉEòÉ {ÉÚhÉÉǸÉÒMÉÖ¯û{ÉÉnÖùEòɨÉÞiÉ®úºÉÆ ¸ÉÒ{ÉÚhÉÇ{ÉÉjÉÆ ¦ÉVÉä** 4.{ÉÚhÉǨÉiÉ: {ÉÚhÉÇʨÉnÆù {ÉÚhÉÉÇi{ÉÚhÉǨÉÖnùSªÉÖiÉä {ÉÚhÉǺªÉ{ÉÚhÉǨÉÉnùÉªÉ {ÉÚhÉǨÉä´É´ÉʶɹªÉiÉä 4.

एकावलि +Éá ¿Ó ¸ÉÓ EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè: Bá C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ*¿Ó ¸ÉÓ ¼ºJ£áò ¼ºÉÉé: ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ º½þÉè:#Æ ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÓ ¼ºÉÉè: º½þÉè:#Æ ¸ÉÓ |ÉYÉÉxÉÆ ¥ÉÀÉ ¿Ó +½Æþ ¥ÉÀÉκ¨É C±ÉÓ iÉi´É¨É漃 ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +ªÉ¨ÉÉi¨ÉÉ ¥ÉÀÉ ½ÆþºÉ: ʶɴÉ: ºÉÉä½Æþ º´É°ü{ÉÊxÉ°ü{ÉhɽäþiÉ´Éä º´ÉSUô |ÉEòÉ¶É {É®úÉ{É®ú ¨É½þÉ|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ {ÉÚhÉÉǽþxiÉÉi¨ÉEò {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉʱÉÎRÂMÉiÉ {ÉÊ®ú{ÉÚhÉÉÇxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉҨɽþÉ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: º´ÉɽþÉ* 4.+ÉpÈù V´É±ÉÊiÉ VªÉÉäÊiÉ®ú½þ¨Éκ¨É VªÉÉäÊiÉV´ÉDZÉÊiÉ ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É ªÉÉä%½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éκ¨É ¥ÉÀɽþ¨Éκ¨É +½þ¨Éä´ÉɽÆþ ¨ÉÉÆ VÉÖ½þÉä欃 º´ÉɽþÉ** 100 .

{ÉÉ®úɪÉhÉÆ 1. xÉÉlÉ {ÉÉ®úɪÉhÉÆ(xÉ´ÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉ.SÉGò.¨ÉÖpùÉ.ªÉÉäÊMÉxÉÒ.SÉGäò¶ÉÒ ºÉʽþiÉÆ) 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ½Æþ |ÉEòɶÉÉi¨ÉEò =x¨ÉxªÉÉEòɶÉÉxÉxnù xÉÉlÉÉʦÉzÉ Eò15 ºÉ´ÉÉÇxÉxnù¨ÉªÉSÉGäò {É®úÉ{É®ú®ú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÒ Bá ºÉ´ÉǪÉÉäÊxɨÉÖpùÉ|Énù̶ÉiÉiÉÖ¹]õÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒSÉGäò¶ÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éá +Éé +Æ +: ºÉÆ Ê´É¨É¶ÉÉÇi¨ÉEò ºÉ¨ÉÉEòɶÉÉxÉxnù xÉÉlÉÉʦÉzÉ ¼»Éé ¼ºC±ÉÅÓ ¼»ÉÉè: ºÉ´ÉÇʺÉÊrù|ÉnùSÉGäò +ÊiÉú®ú½þºªÉªÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉ ¼ºÉÉè:ºÉ´ÉǤÉÒVÉ ¨ÉÖpùÉ Ê´ÉÊxÉnÇù̶ÉiÉiÉÖ¹]Éõ ÊjÉ{ÉÖ®úɨ¤ÉÉSÉGäò¶ÉÒº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó IÉÆ +ÉxÉxnùÉi¨ÉEò ´ªÉÉ{ÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉʦÉzÉ ¿Ó ¸ÉÓ ºÉÉè: ºÉ´ÉÇ®úÉäMɽþ®úSÉGäò ®ú½þºªÉªÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉ ¼ºJ£åò ºÉ´ÉÇJÉäSÉ®úÒ¨ÉÖpùÉä®ú®úÒEÞòiÉiÉÖ¹]Éõ ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùÉSÉGäò¶ÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ ¨ÉÆ ¸ÉÒYÉÉxÉÉi¨ÉEò-¶ÉCiªÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉʦÉzÉ ¿Ó C±ÉÓ व्िें ºÉ´ÉÇ®úIÉÉEò®úSÉGäò ÊxÉMɦÉǪÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉ GòÉå ºÉ´ÉǨɽþÉRÂóEòÖ ¶ÉɨÉÖpùÉRÂóEòÖ Ê®úiÉiÉÖ¹]õÉ ÊjÉ{ÉÖ®ú¨ÉÉʱÉÊxÉSÉGäò¶ÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ ±ÉÆ ¸ÉÒºÉiªÉÉi¨ÉEò v´ÉxªÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉʦÉzÉ ¼ºÉé ¼ºC±ÉÓ ¼ºÉÉè: ºÉ´ÉÉÇlÉǺÉÉvÉEòSÉGäò EÖò±ÉÉäkÉÒhÉÇ ªÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉ ºÉ:ºÉ´ÉÉæx¨ÉÉÊnùÊxÉ ¨ÉÖpùÉänùÂPÉÉÊ]õiÉ iÉÖ¹]õÉ ÊjÉ{ÉÖ®úɸÉÒ-SÉGäò¶ÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ ´ÉÆ ¸ÉÒ{ÉÚhÉÉÇi¨ÉEò v´ÉÊxɨÉÉjÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉʦÉzÉ ½éþ ¼C±ÉÓ ¼ºÉÉè: ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉnùɪÉEòSÉGäò ºÉ¨|ÉnùÉªÉ ªÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉ ¤±ÉÚÆ ºÉ´ÉÇ´ ɶÉÆEòÊ®ú¨ÉÖpùÉ ºÉ¨ÉÖx¨ÉÒ±ÉxÉiÉÖ¹]Éõ ÊjÉ{ÉÖ®ú´ÉÉʺÉÊxÉSÉGäò¶ÉÒº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 101 .एकावलि 14.

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:{ÉÆ ¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ ®Æú º´É¦ÉÉ´ÉÉi¨ÉEò +xÉɽþiÉÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉʦÉzÉ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉ´ÉǺÉÆIÉÉä¦ÉhÉSÉGäò MÉÖ{iÉiÉ®ú ªÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉ C±ÉÓ ºÉ´ÉÉÇEò̹ÉÊhɨÉÖpùÉäx¨ÉÖÊpùiÉiÉÖ¹]õÉ ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®úSÉGäò¶ÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ ¶ÉÆ-ªÉÆ |ÉÊiɦÉÉi¨ÉEò <xuùÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉʦÉzÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉ´ÉÉǶÉÉ{ÉÊ®ú{ÉÚ®úEòSÉGäò MÉÖ{iɪÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉ pùÓ ºÉ´ÉÇÊ´ÉpùÉÊ´ÉÊhɨÉÖpùÉnù̶ÉiÉiÉÖ¹]Éõ ÊjÉ{ÉÖ®äú¶ÉÒ SÉGäò¶ÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:¹ÉÆ ºÉÆ ½Æþ ³Æý IÉÆ->Æð ºÉÖ¦ÉMÉÉi¨ÉEò ʤÉxuùÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉÉʦÉzÉ +Æ +ÉÆ ºÉÉè: jÉè±ÉÉäCªÉ¨ÉÉä½þxÉSÉGäò |ÉEò]õªÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉ pùÉÆ ºÉ´ÉǺÉÆIÉÉäʦÉÊhɨÉÖpùÉnù̶ÉiÉiÉÖ¹]Éõ ÊjÉ{ÉÖ®úÉ SÉGäò¶ÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 2.+ɨxÉɪɨÉxjÉ ºÉʽþiÉÆ) 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Æ Ê¶É´ÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¥ÉÉÀÒ ¶ÉÊHò Bá C±ÉÓ ºÉÉè: $ xɨÉ: EòɨÉä·ÉÊ®ú <SUôÉEòɨɡò±É|Énäù ºÉ´ÉǺÉi´É ´É¶ÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉÇVÉMÉiIÉÉä¦ÉhÉEòÊ®ú ½ÖþÆ ½ÖþÆ ½ÖþÆ pùÉÆ pùÓ C±ÉÓ ¤±ÉÚÆ ºÉ: ºÉÉè: C±ÉÓ Bá EòɨÉä·É®úÒ ºÉ¨ÉªÉ näù´ÉiÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:EÆò ¶ÉÊHòiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ´Éè¹hÉ´ÉÒ ¶ÉÊHò Bå ¿Ó ºÉ´ÉÇEòɪÉÉÇlÉÇ ºÉÉÊvÉÊxÉ ´ÉXÉä·ÉÊ®ú ´ÉXÉ|Énäù ´ÉXÉ{É\VÉ®ú¨ÉvªÉMÉä ¿Ó ÎC±ÉzÉä Bå GòÉå ÊxÉiªÉ ¨Énùpù´Éä ½ÖþÆ £åò ¿Ó ´ÉXÉÊxÉiªÉɪÉè xɨÉ: ´ÉXÉä·É®úÒºÉ¨ÉªÉ näù´ÉiÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:JÉÆ ºÉnùÉʶɴÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ®úÉèpùÒ ¶ÉÊHò Bå ¦ÉMɦÉÖMÉä ¦ÉÊMÉÊxÉ ¦ÉMÉÉänùÊ®ú ¦ÉMɨÉɱÉä ¦ÉMÉɴɽäþ ¦ÉMÉMÉÖÁä ¦ÉMɪÉÉäÊxÉ ¦ÉMÉÊxÉ{ÉÉÊiÉÊxÉ ºÉ´ÉǦÉMɴɶÉÆEòÊ®ú ¦ÉMÉ°ü{Éä ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉä ¦ÉMɺ´É°ü{Éä ºÉ´ÉÉÇÊhÉ ¦ÉMÉÉÊxÉ ¨Éä ÁÉxÉªÉ ´É®únäù ®äúiÉä ºÉÖ®äúiÉä ¦ÉMÉÎC±ÉzÉä ÎC±ÉzÉpù´Éä C±ÉänùªÉ pùÉ´ÉªÉ +¨ÉÉäPÉä ¦ÉMÉÊ´ÉSSÉä IÉÖ¦É IÉÉä¦ÉªÉ ºÉ´ÉǺÉi´ÉÉxÉ ¦ÉMÉä·ÉÊ®ú Bå ¤±ÉÚÆ VÉå ¤±ÉÚÆ ¦Éå ¤±ÉÚÆ ¨ÉÉå ¤±ÉÚÆ ½åþ ¤±ÉÚÆ ½åþ ÎC±ÉzÉä ºÉ´ÉÉÇÊhÉ ¦ÉMÉÉÊxÉ ¨Éä ´É¶É¨ÉÉxÉªÉ ºjÉÓ ¼¤±Éç ¿Ó ¦ÉMɨÉÉʱÉxÉÒ ºÉ¨ÉªÉ näù´ÉiÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 102 .iÉi´É{ÉÉ®úɪÉhÉÆ(¶ÉÊHò.

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:MÉÆ <Ç·É®úiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ iÉÖªÉÉÇ ¶ÉÊHò C±ÉÓ ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¤±ÉÚÆ EòɨÉä·ÉÊ®ú ¿Ó ºÉ´ÉǺÉi´É ´É¶ÉÆEòÊ®ú ºÉ: ÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®úÊ´É Bå Ê´ÉSSÉä C±ÉÓ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉê xɨÉ: ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ºÉ¨ÉªÉnäù´ÉiÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:PÉÆ ¶ÉÖrùÊ´ÉtÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¥ÉÀ¨ÉªÉÒ ¶ÉÊHò Bå <È +Éè: ¶ÉÖrùÊ´ÉtÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:RÆó ¨ÉɪÉÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®ú´ÉÒ ¶ÉÊHò Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¤ÉɱÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:SÉÆ Eò±ÉÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®ú¦Éè®ú´ÉÒ ¶ÉÊHò ½þºÉEò±É®úbé÷ ½þºÉEò±É®úb÷Ó ½þºÉEò±É®úb÷Éè: uùÉnù¶ÉÉvÉÉÇ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖx nù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:UÆô +Ê´ÉtÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¤ÉɱÉÉ ¶ÉÊHò $ Bå ¿Ó ¸ÉÓ Bá C±ÉÓ ºÉÉè: $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¸ÉÒ¨ÉÉiÉRÂóMÉÒ·ÉÊ®ú ºÉ´ÉÇVÉxɨÉxÉÉä½þÊ®ú ºÉ´ÉǨÉÖJÉ®ú \VÉÊxÉ C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ºÉ´ÉÇ®úÉVɴɶÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉǺjÉÒ{ÉÖ¯û¹É´É¶ÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉÇnùÖ¹]õ¨ÉÞMɴɶÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉǺÉi´É´É¶ÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉDZÉÉäEò´É¶ÉRÂóEòÊ®ú ºÉ´ÉÇVÉxÉÆ ¨Éä ´É¶É¨ÉÉxÉªÉ º´ÉɽþÉ ºÉÉè: C±ÉÓ Bá ¸ÉÓ ¿Ó Bá ®úÉVɨÉÉiÉRÂóMÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:VÉÆ ®úÉMÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¶ÉÉ®únùÉ ¶ÉÊHò $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä ¨É½þɶÉÖEòÉªÉ ÊjɦÉÖ´ÉxÉɱÉRÂóEòÉ®úÉªÉ ®úÉVɨÉnù¨ÉnÇùxÉÉªÉ ¶ÉÒQÉÆ ®úÉVÉÉxÉÆ ¨Éä ´É¶É¨ÉÉxÉªÉ º´ÉɽþÉ ¶ÉÖEò¶ªÉɨɱÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:ZÉÆ EòɱÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ÊºÉrùÉ ¶ÉÊHò $ Bå $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¶ÉÉÆ ¶ÉÉÊ®úEäò ºÉEò±ÉEò±ÉÉEòÉäÊ´Énäù Ê´ÉtÉÆ ¤ÉÉävÉªÉ ¤ÉÉävÉªÉ º´ÉɽþÉ ¶ÉÉÊ®úEòɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 103 .

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:\ÉÆ ÊxɪÉÊiÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ÊjÉ{ÉÖ®úʺÉrùÉ ¶ÉÊHò $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiªÉè ´ÉÓ ´ÉÒhÉɪÉè ¨É¨É ºÉRÂóMÉÒiÉÊ´ÉtÉÆ |ɪÉSUô º´ÉɽþÉ ºÉRÂóMÉÒiɶªÉɨɱÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:]Æõ {ÉÖ¯û¹ÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ {É®ú¨Éä·É®úÒ ¶ÉÊHò ¿Ó ½þºÉÎxiÉ ½þʺÉiÉɱÉÉ{Éä ¨ÉÉiÉÎRÂóMÉ {ÉÊ®úSÉÉÊ®úEäò ¨É¨É ¦ÉªÉÊ´ÉPxÉÉ{ÉnùÉÆ xÉɶÉÆ EÖò¯û EÖò¯û `ö:`ö:`ö:½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ ½þºÉÎxiɶªÉɨɱÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:`Æö |ÉEÞòÊiÉʶɴÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ±ÉʱÉiÉÉ ¶ÉÊHò Bå xɨÉ: =ÎSUô¹]õ SÉÉhb÷É汃 ¨ÉÉiÉÎRÂóMÉ ºÉ´ÉǴɶÉRÂóEòÊ®ú º´ÉɽþÉ ±ÉPÉÖ¶ªÉɨɱÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:bÆ÷ +½ÆþEòÉ®úiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¨ÉÉʱÉxÉÒ ¶ÉÊHò EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÉè¦ÉÉMªÉÊ´ÉtÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:fÆø ¤ÉÖÊrùiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ºÉÖxnù®úÒ ¶ÉÊHò $ ¼±ÉÅÓ ¤ÉMɳýɨÉÖÊJÉ ºÉ´ÉÇnÖù¹]õÉxÉÉÆ ´ÉÉSÉÆ ¨ÉÖJÉÆ {ÉnÆù ºiɨ¦ÉªÉ ÊVɼ´ÉÉÆ EòÒ±ÉªÉ ¤ÉÖËrù Ê´ÉxÉÉ¶ÉªÉ ¼±ÉÅÓ $ º´ÉɽþÉ ¤ÉMɳýɨÉÖJÉÒº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:hÉÆ ¨ÉxÉ:iÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ºÉÖJÉnùÉ ¶ÉÊHò Bá M±ÉÉé Bá xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ´ÉÉiÉÉÇʳý ´ÉÉiÉÉÇʳý ´ÉÉ®úÉʽþ ´ÉÉ®úÉʽþ ´ÉÉ®úɽþ¨ÉÖÊJÉ ´ÉÉ®úɽþ¨ÉÖÊJÉ +xvÉä +ÎxvÉÊxÉ xɨÉ: ¯ûxvÉä ¯ûÎxvÉÊxÉ xɨÉ: Vɨ¦Éä VÉΨ¦ÉÊxÉ xɨÉ: ¨ÉÉä½äþ ¨ÉÉäʽþÊxÉ xɨÉ: ºiɨ¦Éä ºiÉΨ¦ÉÊxÉ xɨÉ: ºÉ´ÉÇnùÖ¹]õ|ÉnÖù¹]õÉxÉÉÆ ºÉ´Éæ¹ÉÉÆ ºÉ´ÉÇ ´ÉÉEÂò ÊSÉkÉ SÉIÉÖ¨ÉÖJÇ ÉMÉÊiÉÊVɼ´ÉÉ ºiɨ¦ÉxÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ¶ÉÒQÉÆ ´É¶ªÉÆ Bá M±ÉÉé `ö:`ö:`ö:`ö: ½ÖþÆ +ºjÉÉªÉ ¡ò]Âõ ´ÉÉ®úɽþÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:iÉÆ ¸ÉÉäjÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¦ÉÖ´ÉxÉÉ ¶ÉÊHò $ ¿Ó ´ÉÆ ´É]ÖõEòÉªÉ +É{ÉnÖùrùÉ®úhÉÉªÉ EÖò¯û EÖò¯û ´ÉÆ ´É]ÖõEòÉªÉ ¿Ó $ ´É]ÖõEò º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 104 .

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:lÉÆ i´ÉHòk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ÊxÉ´ÉÉÇhÉÉ ¶ÉÊHò Bå xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ ¨É½þɨÉɪÉä ºÉEò±É{ɶÉÖ VÉxÉ ¨ÉxɶSÉIÉÖκiÉ®úºEò®úhÉÆ EÖò¯û EÖò¯û ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ ÊiÉ®úºEòÊ®úhÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:nÆù SÉIÉÖ:iÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ½þÊ®úÊ|ɪÉÉ ¶ÉÊHò ½þºÉEò±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ±ÉÉä{ÉɨÉÖpùɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉxɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:vÉÆ ÊVɼ´ÉÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ IÉjɴɱ±É¦ÉÉ ¶ÉÊHò ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:xÉÆ QÉÉhÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ®úÊiÉ ¶ÉÊHò ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ +zÉ{ÉÚhÉæ·ÉÊ®ú ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiɨÉzÉÆ näùʽþ º´ÉɽþÉ +zÉ{ÉÚhÉÉǺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ® úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:{ÉÆ ´ÉÉHòk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¨É½þÒ ¶ÉÊHò +Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éá +Éé +Æ +: EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ ]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ {ÉÆ ¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ ¶ÉÆ ¹ÉÆ ºÉÆ ½Æþ ³Æý IÉÆ <È EòɨÉEò±Éɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþ ÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: ¹hÉ 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:¡Æò {ÉÉÊhÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¶Éɨ¦É´ÉÒ ¶ÉÊHò ½þºÉEò±É-½þºÉEò½þ±ÉºÉEò±É¿Ó iÉÖ®úÒªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:¤ÉÆ {ÉÉnùiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ |ÉÉhÉnùÉ ¶ÉÊHò Bå <È +Éè:EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó ºÉÆ ºÉÞι]õÊxÉiªÉä º´ÉɽþÉ ½Æþ κlÉÊiÉ{ÉÚhÉæ xɨÉ: ®Æú ¨É½þɺÉƽþÉÊ®úÊhÉ EÞò¶Éä SÉhb÷EòÉʳý ¡ò]Âõ ®Æú ¼ºJ£åò ¨É½þÉxÉÉJªÉä +xÉxiɦÉɺEòÊ®ú ¨É½þÉSÉhb÷EòÉʳý ¡ò]Âõ ®Æú ¨É½þ ɺÉƽþÉÊ®úÊhÉ EÞò¶Éä SÉhb÷EòÉʳý ¡ò]Âõ ½Æþ κlÉÊiÉ{ÉÚhÉæ xɨÉ: ºÉÆ ºÉÞι]õÊxÉiªÉä º´ÉɽþÉ ¨É½þÉvÉÉÇ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:¦ÉÆ {ÉɪÉÖiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ VÉÒ´ÉxÉÉ ¶ÉÊHò $ +ÉÆ ¿Ó GòÉå Bʽþ {É®ú¨Éä·ÉÊ®ú º´ÉɽþÉ +·ÉÉ°üføɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 105 .

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:¨ÉÆ ={ɺlÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¨É½þiÉÒ ¶ÉÊHò Bå ʨɸÉɨ¤Éɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:ªÉÆ ¶É¤nùiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ {É®ú¨ÉÉi¨ÉÉ ¶ÉÊHò Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùÊxÉ º´ÉɽþÉ ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:®Æú º{ɶÉÇiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ {ÉÞl´ÉÒ ¶ÉÊHò ¼ºÉÉé: |ÉɺÉÉnù {É®úÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:±ÉÆ °ü{ÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¾þ±±ÉäJÉɶÉÊHò º½þÉè:#Æ {É®úÉ|ÉɺÉÉn ùº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:´ÉÆ ®úºÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¦ÉÉMÉÇ´ÉÒ¶ÉÊHò ºÉÉè: {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:¶ÉÆ MÉxvÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ GòÉäÊvÉxÉÒ ¶ÉÊHò Bå ¿Ó ¸ÉÓ ¼ºJ£åò ¼ºÉÉè: +½þ¨É½Æþ +½þ¨É½Æþ ¼ºÉÉè: ¼ºJ£åò ¸ÉÓ ¿Ó Bå {É®ú¶Éɨ¦É´Éº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®ú ºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:¹ÉÆ +ÉEòɶÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ {ÉÚiÉxÉÉ ¶ÉÊHò ¨ÉJÉ¡ ®úB ¨É½þÉSÉhÉb÷ªÉ+Éäó MÉB¶Éú´É@ >ðv´ÉÉǨxÉɪɺɨɪÉÊ´Étä·É®úÒ ºÉÖxnù®úÒº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:ºÉÆ ´ÉɪÉÖiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒ ¶ÉÊHò £áò ¨É½þÉSÉhb÷ ªÉÉäMÉä·É®úÒ =kÉ®úɨxÉɪɺɨɪÉÊ´Étä·É®úÒ EòÉʳýEòɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:½Æþ ´ÉμxÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ´ÉÉM¦É´ÉÒ ¶ÉÊHò ¼»ÉÉè: ¼»ÉÉè: ¼»ÉÉè: ¼ºJ£åò ºÉÉè: ¦ÉMÉ´ÉiªÉ¨¤Éä ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÓ +PÉÉä®äú +PÉÉä®äú +PÉÉä®ú¨ÉÖJÉÒ UÅôÉÆ UÅôÓ ÊEòÊhÉÊEòhÉÒ Ê´ÉSSÉä ¼»ÉÉé ¼ºJ£åò ½þºÉIɨɱɴɮúªÉÚÆ ºÉ½þIɨɱɴɮúªÉÓ ¸ÉÓ ¼»ÉÉé: º¿Éè:#Ä {ÉζSɨÉɨxÉɪɺɨɪÉÊ´Étä·É®úÒ EÖòÎ\SÉEòÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉÆ-{ÉÚ xɨÉ: 106 .

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:³Æý VɱÉiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ EòɨɮúÉYÉÒ ¶ÉÊHò $ Bá C±zÉä ÎC±ÉzÉ ¨Énùpù´Éä EÖò±Éä ºÉÉè: nùÊIÉhÉɨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉªÉÊ´Étä·É®úÒ ¦ÉÉäÊMÉxÉÒº´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ:IÉÆ {ÉÞl´ÉÒiÉk´Éä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ {É®úÉ ¶ÉÊHò ¼»Éé ¼»ÉÓ ¼»ÉÉè: {ÉÚ´ÉÉǨxÉÉªÉ ºÉ¨ÉªÉÊ´Étä·É®úÒ =x¨ÉÉäÊnùxÉÒ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: ÊxÉiªÉÉ{ÉÉ®úɪÉhÉÆ({ÉIÉuªÉ ºÉʽþiÉÆ) 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Æ Bá ºÉEò±É¿Ó ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉä ¨Énùp´Éä ºÉÉè: +Æ ¶ÉÖC±É EòɨÉä·É®úÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +ÉÆ Bå ¦ÉMɦÉÖMÉä ¦ÉÊMÉÊxÉ ¦ÉMÉÉänùÊ®ú ¦ÉMɨÉɱÉä ¦ÉMÉɴɽäþ ¦ÉMÉMÉÖÁä ¦ÉMɪÉÉäÊxÉ ¦ÉMÉÊxÉ{ÉÉÊiÉÊxÉ ºÉ´ÉǦÉMɴɶÉÆEòÊ®ú ¦ÉMÉ°ü{Éä ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉä ¦ÉMɺ´É°ü{Éä ºÉ´ÉÉÇÊhÉ ¦ÉMÉÉÊxÉ ¨Éä ÁÉxÉªÉ ´É®únäù ®äúiÉä ºÉÖ®äúiÉä ¦ÉMÉÎC±ÉzÉä ÎC±ÉzÉpù´Éä C±ÉänùªÉ pùÉ´ÉªÉ +¨ÉÉäPÉä ¦ÉMÉÊ´ÉSSÉä IÉÖ¦É IÉÉä¦ÉªÉ ºÉ´ÉǺÉi´ÉÉxÉ ¦ÉMÉä·ÉÊ®ú Bå ¤±ÉÚÆ VÉå ¤±ÉÚÆ ¦Éå ¤±ÉÚÆ ¨ÉÉå ¤±ÉÚÆ ½åþ ¤±ÉÚÆ ½åþ ÎC±ÉzÉä ºÉ´ÉÉÇÊhÉ ¦ÉMÉÉÊxÉ ¨Éä ´É¶É¨ÉÉxÉªÉ ºjÉÓ ¼¤±Éç ¿Ó +ÉÆ ¶ÉÖC±É ¦ÉMɨÉÉʱÉxÉÒ ÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: <Æ $ ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉä ¨Énùp´Éä º´ÉɽþÉ <Æ ¶ÉÖC±É ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: <È $ GòÉå §ÉÉå GòÉé UÅôÉé [ÉÉé XÉÉé º´ÉɽþÉ <È ¶ÉÖC±É ¦Éä¯ûhb÷ÉÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: =Æ $ ¿Ó ´ÉμxÉ´ÉÉʺÉxªÉè xɨÉ: =Æ ¶ÉÖC±É ´ÉμxÉ´ÉÉʺÉxÉÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: >Æð ¿Ó ÎC±ÉzÉä Bå GòÉå ÊxÉiªÉ ¨Énùpù´Éä ½ÖþÆ £åò ¿Ó >Æð ¶ÉÖC±É ¨É½þÉ´ÉXÉä·É®úÒ ÊxÉiªÉÉ näù´ÉiÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 107 .

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: @Æñ ¿Ó ʶɴÉnÚùiªÉè xɨÉ: @Æñ ¶ÉÖC±É ʶɴÉnÚùiÉÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: AÆñ $ ¿Ó ½ÖþÆ JÉäù SÉ Uôùä IÉ: ºjÉÓ ½ÖÆ ¿Ó ¡ò]Âõ AÆñ ¶ÉÖC±É i´ÉÊ®iÉÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: ±ÉÞÆ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ±ÉÞÆ ¶ÉÖC±É EÖò±ÉºÉÖxnù®úÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: ±ÉßÆ ½þºÉEò±É®úbé÷ ½þºÉEò±É®úb÷Ó ½þºÉEò±É®úb÷Éè: ±ÉßÆ ¶ÉÖC±É ÊxÉiªÉÉÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: BÆ ¿Ó £åò »ÉÚùÆ GòÉå +ÉÆ C±ÉÓ Bå ¤±ÉÚÆ ÊxÉiªÉ¨Énùpù´Éä ½ÖþÆ £åò ¿Ó BÆ ¶ÉÖC±É xÉÒ±É{ÉiÉÉEòÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ® úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: Bá ¦É¨É®ªÉ ÷+÷Éè =Æð Bá ¶ÉÖC±ÉÊ´ÉVɪÉÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Éá º´ÉÉé +Éá ¶ÉÖC±É ºÉ´ÉǨÉRÂóMɱÉÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Éé $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ V´É±ÉɨÉÉʱÉÊxÉ nä´É näÊ´É ºÉ´ÉÇ ¦Éúiɺɨ½É® EòÉÊ®Eä VÉÉiÉ´Éän漃 V´É±ÉÎxiÉ V´É±É V´É±É |ÉV´É±É |ÉV´É±É ¿ÉÆ ¿Ó ¿ÚÆ ®®®®®®® V´É±ÉɨÉÉʱÉÊxÉ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ +Éé ¶ÉÖC±ÉV´É±ÉɨÉÉʱÉxÉÒ ÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Æ SE Éé +Æ ¶ÉÖC±É ÊSÉjÉþÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 108 .

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Æ SE Éé +Æ EÞò¹hÉ ÊSÉjÉþÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Éé $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ V´É±ÉɨÉÉʱÉÊxÉ nä´É näÊ´É ºÉ´ÉǦÉÚiɺɨ½É®EòÉÊ®Eä VÉÉiÉ´Éän漃 V´É±ÉÎxiÉ V´É±É V´É±É |ÉV´É±É |ÉV´É±É ¿ÉÆ ¿Ó ¿ÚÆ ®®®®®®® V´É±ÉɨÉÉʱÉÊxÉ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ +Éé EÞò¹hÉ V´É±ÉɨÉÉʱÉxÉÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Éá º´ÉÉé +Éá EÞò¹hÉ ºÉ´ÉǨÉRÂóMɱÉÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: Bá ¦É¨É®ªÉ÷+÷Éè =Æ Bá EÞò¹hÉ Ê´ÉVɪÉÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: BÆ ¿Ó £åò »ÉÚùÆ GòÉå +ÉÆ C±ÉÓ Bå ¤±ÉÚÆ ÊxÉiªÉ¨Énùpù´Éä ½ÖþÆ £åò ¿Ó BÆ EÞò¹hÉ xÉÒ±É{ÉiÉÉEòÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: ±ÉßÆ ½þºÉEò±É®úbé÷ ½þºÉEò±É®úb÷Ó ½þºÉEò±É®úb÷Éè: ±ÉßÆ EÞò¹hÉ ÊxÉiªÉÉÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: ±ÉÞÆ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ±ÉÞÆ EÞò¹hÉ EÖò±ÉºÉÖxnù®úÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: AÆñ $ ¿Ó ½ÖþÆ JÉäù SÉ Uôùä IÉ: ºjÉÓ ½ÖÆ ¿Ó ¡ò]Âõ AÆñ EÞò¹hÉ i´ÉÊ®iÉÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: @Æñ ¿Ó ʶɴÉnÚùiªÉè xɨÉ: @Æñ EÞò¹hÉ Ê¶É´ÉnÚùiÉÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: >Æð ¿Ó ÎC±ÉzÉä Bå GòÉå ÊxÉiªÉ ¨Énùpù´Éä ½ÖþÆ £åò ¿Ó >Æð EÞò¹hÉ ¨É½þÉ´ÉXÉä·É®úÒ ÊxÉiªÉÉ näù´ÉiÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 109 .

एकावलि 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: =Æ $ ¿Ó ´ÉμxÉ´ÉÉʺÉxªÉè xɨÉ: =Æ EÞò¹hÉ ´ÉμxÉ´ÉÉʺÉxÉÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: <È $ GòÉå §ÉÉå GòÉé UÅôÉé [ÉÉé XÉÉé º´ÉɽþÉ <È EÞò¹hÉ ¦Éä¯ûhb÷ÉÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: <Æ $ ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉä ¨Énùp´Éä º´ÉɽþÉ <Æ EÞò¹hÉ ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉÉ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +ÉÆ Bå ¦ÉMɦÉÖMÉä ¦ÉÊMÉÊxÉ ¦ÉMÉÉänùÊ®ú ¦ÉMɨÉɱÉä ¦ÉMÉɴɽäþ ¦ÉMÉMÉÖÁä ¦ÉMɪÉÉäÊxÉ ¦ÉMÉÊxÉ{ÉÉÊiÉÊxÉ ºÉ´ÉǦÉMɴɶÉÆEòÊ®ú ¦ÉMÉ°ü{Éä ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉä ¦ÉMɺ´É°ü{Éä ºÉ´ÉÉÇÊhÉ ¦ÉMÉÉÊxÉ ¨Éä ÁÉxÉªÉ ´É®únäù ®äúiÉä ºÉÖ®äúiÉä ¦ÉMÉÎC±ÉzÉä ÎC±ÉzÉpù´Éä C±ÉänùªÉ pùÉ´ÉªÉ +¨ÉÉäPÉä ¦ÉMÉÊ´ÉSSÉä IÉÖ¦É IÉÉä¦ÉªÉ ºÉ´ÉǺÉi´ÉÉxÉ ¦ÉMÉä·ÉÊ®ú Bå ¤±ÉÚÆ VÉå ¤±ÉÚÆ ¦Éå ¤±ÉÚÆ ¨ÉÉå ¤±ÉÚÆ ½åþ ¤±ÉÚÆ ½åþ ÎC±ÉzÉä ºÉ´ÉÉÇÊhÉ ¦ÉMÉÉÊxÉ ¨Éä ´É¶É¨ÉÉxÉªÉ ºjÉÓ ¼¤±Éç ¿Ó +ÉÆ EÞò¹hÉ ¦ÉMɨÉÉʱÉxÉÒ ÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +Æ Bá ºÉEò±É¿Ó ÊxÉiªÉÎC±ÉzÉä ¨Énùp´Éä ºÉÉè: +Æ EÞò¹hÉ EòɨÉä·É®úÒ ÊxÉiªÉÉ º´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +:EòB<Ç±É¿Ó ½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉEò±É¿Ó +:¨É½þÉÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Eò15 (--)+É<ǽÆþºÉ: +: ½þºÉE ±É ½þºÉEò½þ±É ºÉEò±É¿Ó +:¨É½þɺÉ{iÉn¶ÉÒ Eò±ÉÉiÉÒiÉÊxÉiªÉɺ´É°üÊ{ÉhÉÒ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 110 .

एकावलि श्री गणेशाय नम: 15.नालभ द्वद्भया अनेक पुण्य सम्प्राप्त श्रीववद्याषोडशाक्षारर । यदच्ु िारण मारेण पापां सद्य: प्रिरयते।। अथ नालभ ववद्या प्रारां भ: अगसत्य उवाि: हयग्रीव दयालसन्त्धो सववशासर ववशारद । केन प्राप्नोतत तनयतां आत्मज्ञानमिञ्ििां ।। केन सम्प्राप्नुयान ् मोक्षां आनांदरससांभत ृ ां । तन्त्मे ब्रदू ह पराशक्तववषये शासर गोिरे ।। हयग्रीव उवाि : अगसत्य मुतनशादव ि ू शण ृ ु वक्ष्मयालम सादरां । लशवालशवरहसयां ि एतत ् गोप्यां महामुने ।। रहसयमवप तद्वक्ष्मये दे वां साक्षात ् लशवोददतां ।एकान्त्ते रहलस प्राप्त कैिासलशिरे शुभे ।। नानारत्नमये ददव्यमण्डपे तनत्यमांगिे । श्वेतपद्मासनासीनां दे वदे वां सनातनां।। सकच्िदानन्त्दां अद्वैतां उमा प्रोवाि सादरां । नत्वा सतुत्वा तनजैकग्र दृष्ट्या तुष्ट्या वविोककतुां ।। मानसै: उपिारै : तु पज ू तयत्वा यथाववचध: । तनजसवरूपां ववज्ञातांु इच्छाफलित मानसा ।। दे व्यव ु ाि : दे व दे व महादे व सकच्िदानन्त्दववग्रह । यद्गोप्यां तव सववसवां कथयसव मम प्रभो।। लशव उवाि : शण ृ ु दे वी प्रवक्ष्मयालम रहसय यद्विोधुना । गोपनीयां प्रयात्नेन पूणावहांता मयां परां ।। परापरामयां भेदां मन्त्रां रैिो्य दि व ां । नालभववद्यात्मकां ददव्यां षट् त्ररांशत ् तत्त्व ु भ सम्ख्यकां।। मातक व ात्य पराया सह ।ित्वाररम्शत ् सम्ख्यालभ: आख्या नालभ: ृ ा नाथ बािालभ युव ईररता ।। वपक रर बि यग्ु मां कम्बि ु ा त्ररम्बकाभा । बि रर वपक यग्ु मां राजववद्या सतनभा ।। नप ृ तत युग मातक ृ ा नाथ बािा पररता । परयुवतत समेता पातु माां नालभ ववद्या ।। 111 .

सवावङ्गे 112 .नाभ मम श्रीववद्याराजराजेश्वरर महात्ररपुरसुन्त्दरर प्रसाद लसद्ध्यथे जपे ववतनयोग: .इतत दक्षक्षण भज ु योववन्त्दतयत्वा ॐ ऐां ह्रां श्रीां श्री महा त्ररपरु सन्त् ु दयण नम .एकावलि िण्डान्त्त: कच्छत हृल्िेिया साकां हृल्िेिान्त्तरलमलितां िेद्ववगुखणत जप ववद्या तु अङ्ग ववद्या भवतत ज्ञानज्ञातव्योरै ्यां पुसतकेन वदत्यस ।परमै्यां कथयतत मद्र ु या लशव जीवयो:।तत ृ ीयां िक्षुषा ज्ञान रोचिषा तच्िािभ्यताां।। पयवङ्क भूत तेनेशां शक्तां लशव तनषेदष ु ी।सवात्मा त्ररक सववसवां वदन्त्ते परदे वता ।। अथ नालभ ववद्योद्धर: ॐ ऐां ह्रां श्रीां आधार शक्त कमिासनाय नम:.पादयो: ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।स : स : सकि सकिह्रां। श्रीां श्रीां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ कीिकाय नम:.इतत वाम ॐ ऐां ह्रां श्रीां गां गणपतये नम: .इतत आसनां सांपूज्जय ॐ ऐां ह्रां श्रीां ब्रह्मादद अशेष गुर पारम्पयव क्रमेण यावत्सवगुरपादाम्बुजां तावत्प्रण लम इतत मूकध्नव वन्त्दतयत्वा ॐ ऐां ह्रां श्रीां गुां गुरभ्यो नम: .इतत हृदये वन्त्दतयत्वा ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां आत्मा तत्वेन सथूि दे हां पररशोधयालम सवाहा ॐ ऐां ह्रां श्रीां ्िरां ववद्या तत्वेन सूक्ष्मम दे हां पररशोधयालम सवाहा ॐ ऐां ह्रां श्रीां स : लशव तत्वेन कारण दे हां पररशोधयालम सवाहा ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स :सवव तत्वेन महाकारण रयां शरररचश्रतां जीवां पररशोधयालम सवाहा असय श्री नालभववद्या षोडशाक्षारर त्ररपुरसुन्त्दरर ब्रह्मववद्या मन्त्र राज महा मन्त्रसय आनांदभैरव ऋवष: लशरलस ।अमत ृ ववराट गायरी छां द: मुिे।श्री ववद्या राजराजेश्वरर महा त्ररपरु सन्त् ु दरर दे वता हृदये। ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।ऐां ऐां कएईि कएईिह्रां। स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ बीजाय नम:गह् ु ये ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।्िरां ्िरां हसकहि हसकहि ह्रां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ श्तये नम:.

नेररयाय व षट् ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।स : स : सकि सकिह्रां। श्रीां श्रीां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ करति करपष्ृ टाभ्याां फट्.लशिायै वषट् ्िरां हसकहिह्रां अनालमकाभ्याां हुां .असराय फट् श्रीववद्यापराषोडशाक्षारर न्त्यास: कर न्त्यास: हृदयादद न्त्यास: श्रीां स : ्िरां ऐां ह्रां अङ्गुष्ठाभ्याां नम:.नेररयाय व षट् स : ्िरां ऐां ह्रां श्रीां करति करपष्ृ टाभ्याां फट् .लशरसे सवाहा ऐां कएईिह्रां मध्यमाभ्याां वषट् .असराय फट् श्रीववद्याषोडशाक्षारर न्त्यास: कर न्त्यास: हृदयादद न्त्यास: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स : अङ्गुष्ठाभ्याां नम: .कविाय हुां स :सकिह्रां श्रीां कतनकष्टकाभ्याां व षट् .कविाय हुां ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।्िरां ्िरां हसकहि हसकहिह्रां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ कतनकष्टकाभ्याां व षट्.लशरसे सवाहा स :सकिह्रां मध्यमाभ्याां वषट्.हृदयाय नम: ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।्िरां ्िरां हसकहि हसकहिह्रां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ तजवनीभ्याां सवाहा.लशिायै वषट् 113 .एकावलि कर न्त्यास:। हृदयादद न्त्यास: ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।ऐां ऐां कएईि कएईिह्रां। स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ अङ्गष्ु ठाभ्याां नम: .हृदयाय नम: ॐ ह्रां श्रीां तजवनीभ्याां सवाहा .लशिायै वषट् ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।ऐां ऐां कएईि कएईिह्रां।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ अनालमकाभ्याां हुां .हृदयाय नम: ॐ ह्रां श्रीां तजवनीभ्याां सवाहा .लशरसे सवाहा ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।स : स : सकि सकिह्रां। श्रीां श्रीां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ मध्यमाभ्याां वषट्.

इतत मातक ृ ा ध्यानां प्रसन्त्नवदनाांभोजां वराभयकराकन्त्वतां ।िन्त्द्रकोदटप्रतीकशां चिन्त्तयालम गरू ु त्तमां ।। ऐांकाराङ्ककतगलभवतानिलशिाां स ुः ्िरां किाां त्रबभ्रतीम ्। स वणावम्बुजमध्यगाां वरधराां धराधराङ्गोज्जज्जविाम ्।। वन्त्दे साङ्कुशपाशपुसतकधराां स्रग्भालसतोद्योत्कराम ्। ताां बािात्ररपुराां पदरयतनुां षट्िक्रसञ्िाररणीम ्।। 114 .इतत सुन्त्दरर ध्यानां िापां िेक्षुमयां प्रसून ववलशिान ् पाशाङ्कुश पुसतकां। माखण्याक्षस्रजवरां मखणमयीां वीणाां सरोजद्वये पाखणभ्याां अभयां वरां ि दधतीां ब्रह्माददसेव्याां पराां। लसन्त्दरू ारण ववग्रहाां भगवतीां ताां षोडशीां आश्रये .नेररयाय व षट् ह्रां ऐां ्िरां स : श्रीां करति करपष्ृ टाभ्याां फट् .एकावलि ्िरां हसकहिह्रां अनालमकाभ्याां हुां .इतत श्रीगुरध्यानां .इतत परा षोडशी ध्यानां वपकररबि युग्मां कम्बुिा त्ररम्बकाभा । बि रर वपक युग्मां राजववद्या सतनाभा ।। नप ृ तत युग मातक ृ ा नाथ बािा पररता । परयुवतत समेता पातु माां नालभ ववद्या ।। .कविाय हुां ऐां कएईिह्रां श्रीां कतनकष्टकाभ्याां व षट् .इतत षोडशी ध्यानां ताक्ष्मयावरूढा हरर हृद्सरोजे भातत या परम चित्सवरूवपणी पद्मयुग्म मखण पार धाररणी भालसता हृदद सदा ममाांत्रबका .असराय फट् भभ ू व ुव ससवरु ों इतत ददग्बन्त्ध: ध्यानां: जपाकुसुमभासुराां त्ररनयनाां त्ररकोणरय रयान्त्तर तनवालसनीां त्ररपुरसुन्त्दररां सेन्त्दक ु ाां । कराांबुजितुष्टयाां मधुरिाप पाशाङ्कुश प्रसूनशरशोलभनीां िलितवेषभूषाां भजे ।। बािाकवमण्डिाभासाां ितुबावहुां त्ररिोिनाां।पाशाङ्कुशधनुबावणां धारयन्त्तीां लशवाां भजे ।। .इतत नालभववद्या ध्यानां चित्पस ु तकाक्षमािा सध ु ाकिश सांयत ु ाां।पायात ् मातक ृ ा दे वीां मु्ताफि ववभवू षताां ।। .

हसकहिह्रां.हसकहि.ह्रां। स :स :सकि .इतत परा ध्यानां 4-राजवशङ्कयावदद नालभ ववद्याभ्य: सवाववरण दे वताभ्यो नम: पञ्िपूजा: िां पथ्व ृ व्याकत्मकायै गन्त्धां कल्पयालम नमुः हां आकाशाकत्मकायै पुष्पां कल्पयालम नमुः यां वाय्वव्याकत्मकायै धूपां कल्पयालम नमुः रां वह्न्त्याकत्मकायै दरपां कल्पयालम नमुः वां अमत ृ ाकत्मकायै नैवेद्यां कल्पयालम नमुः सां सवावकत्मकायै ताम्बूिादद सवोपिारान ् कल्पयालम नमुः नव (दश) मुद्रा प्रदशवय :द्राां द्ररां ्िरां ब्िूां सुः क्रों ह्सिफ्रें हस ुः ऐां (ऐां or ह्स्रैं ह्स््रां ह्स्र ुः) अथ मन:ु पूवांग: 1.हसकिह्रां।्िरां्िरां.ह्रां।श्रीांश्रीां ।स :्िरांऐां। श्रीां ह्रां ऐां ॐ 3.हसकहि.एकावलि मािा सखृ ण पुसतक पाश हसताां बािाांत्रबकाां श्रीिलिताकुमाररां। कुमारकामेश्वर केिरिोिाां नमालम ग ररां नव वषव दे शीां ।। -इतत बािा ध्यानां अकिङ्क शशाङ्काभा रयक्षा िन्त्द्रकिावती। मुद्रा पुसत िसद्बाहु पातु माां परमा किा ।। .हसकहि.कादद सवानुिोम हृल्िेिा ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरां स :। ऐांऐां.हसकहिह्रां।स :स :सकि.हसकहिह्रां।स :स :सकि.कएईिह्रां।्िरां्िरां.कएईि.ह्रां। ्िरां्िरां.सकिह्रां .कादद हादद सवानुिोम ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।ऐांऐां.कएईि.कएईिह्रां. सकिह्रां।श्रीांश्रीां।स :्िरांऐां।श्रीांह्रांऐांॐ 2.कादद सवानुिोम ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।ऐांऐां.कएईि. सकिह्रां ।श्रीांश्रीां। स : ्िरांऐां ।श्रीांह्रांऐां ॐ 115 .

ह्रां।स :स : सकि.एकावलि 4.कएईिह्रां।श्रीांश्रीां ।स :्िरांऐां ।श्रीांह्रांऐां ॐ 10.ह्रां।श्रीांश्रीां।स :्िरांऐां। श्रीां ह्रां ऐां ॐ 11.सकिह्रां. कादद सवानुिोम वविोम ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। ऐांस :.सकि.हसकहि. हादद कादद सवानुिोम हृल्िेिा ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।ऐांऐां.सकिह्रां.कएईिह्रां.ह्रां।्िरां्िरां.हसकहिह्रां। स :ऐां.हसकहि.हसकहिह्रां.कएईि.ह्रां।्िरां्िरां .सकिह्रां.हसकहिह्रां।स :ऐां.हसकिह्रां।्िरां्िरां.हसकि.हसकि.हसकहिह्रां। स :स : सकि. हादद सवानुिोम हृल्िेिा ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। ऐांऐां.हसकहि.ह्रां।्िरां्िरां. कादद अनुिोम हादद वविोम ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।ऐांस :.हसकहि.हसकहि.ह्रां।श्रीांश्रीां ।स : ्िरां ऐां। श्रीां ह्रां ऐां ॐ ---------------------------------------------------------------------------------------------------9.कएईिह्रां।्िरां्िरां.हसकहिह्रां.कादद हादद सवानुिोम हृल्िेिा ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।ऐांऐां.हादद सवानि ु ोम ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।ऐांऐां.कएईि.ह्रां।श्रीांश्रीां।स : ्िरां ऐां। श्रीां ह्रां ऐां ॐ 7.हसकहि.हसकहिह्रां. सकिह्रां।श्रीांश्रीां। स :्िरांऐां ।श्रीांह्रांऐां ॐ 8.हसकहिह्रां।स :स :सकि. कादद सवानुिोम वविोम हृल्िेिा ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। ऐां स :. हादद कादद सवानुिोम ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।ऐांऐां.ह्रां। ्िरां्िरां.सकिह्रां।्िरां्िरां.हसकहि.हसकिह्रां.सकिह्रां.ह्रां।श्रीां श्रीां ।स : ्िरां ऐां। श्रीां ह्रां ऐां ॐ 5.हसकिह्रां.हसकि.ह्रां। स :ऐां.कएईि.हसकहिह्रां.कएईिह्रां.सकिह्रां। ्िरां्िरां.ह्रां। स :स :सकि.ह्रां।स :स : सकि.सकि.कएईि.हसकि.सकिह्रां ।श्रीांश्रीां।स :्िरांऐां ।श्रीांह्रांऐां ॐ 6.सकि.ह सकिह्रां।श्रीांश्रीां ।स :्िरांऐां।श्रीांह्रांऐांॐ 116 .हसकहि.

कएईिह्रां.हसकहिह्रां। ऐांऐां.हसकहिह्रां.सकिह्रां.हसकहिह्रां.हसकिह्रां.ह्रां। स :ऐां.हसकि.सकिह्रां। ्िरां्िरां.सकि.कएईि.हसकिह्रां।श्रीांश्रीां।स :्िरांऐां।श्रीांह्रांऐां ॐ 14.हसकहिह्रां.ह्रां।श्रीांश्रीां।स : ्िरां ऐां । श्रीां ह्रां ऐां ॐ ---------------------------------------------------------------------------------------------------17. हादद सवानुिोम वविोम ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।ऐांस :.सकि. कादद अनुिोम हादद वविोम हृल्िेिा ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। ऐांस :.हसकहि.सकिह्रां.हसकहिह्रां.हसकि.ह्रां। स :ऐां.हसकि.कएईिह्रां।श्रीांश्रीां।स :्िरांऐां।श्रीांह्रांऐां ॐ 16.सकि.हसकहि.ह्रां। ्िरां्िरां.सकि.ह्रां। ऐांऐां.हसकहि. हादद अनुिोम कादद वविोम हृल्िेिा ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। ऐांस :.हसकहिह्रां। स :ऐां.ह्रां। स :ऐां.हसकि.ह्रां।श्रीां श्रीां।स :्िरांऐां । श्रीां ह्रां ऐां ॐ 19.हसकहि.हसकहि.हसकहि.ह्रां। ्िरां्िरां.कएईि.कएईि.हसकिह्रां।श्रीांश्रीां।स :्िरांऐां ।श्रीांह्रांऐां ॐ 117 .कएईिह्रां।श्रीांश्रीां ।स :्िरांऐां ।श्रीांह्रांऐां ॐ 18. कादद हादद वविोम ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। स :स :.सकिह्रां.ह्रां। ्िरां्िरां.सकिह्रां. हादद अनुिोम कादद वविोम ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। ऐांस :. कादद सववविोम ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। स :स :.हसकिह्रां.कएईिह्रां.ह्रां।श्रीांश्रीां ।स :्िरां ऐां । श्रीां ह्रां ऐां ॐ 13.सकि.सकिह्रां। ्िरां्िरां.हसकहि.सकि.सकि.सकिह्रां।्िरां्िरां .कएईि.सकिह्रां। ्िरां्िरां.हसकहिह्रां। स :ऐां. ह्रां।श्रीांश्रीां।स :्िरांऐां । श्रीां ह्रां ऐां ॐ 15.सकि.ह्रां। ्िरां्िरां. कादद सववविोम हृल्िेिा ॐ ऐांह्रांश्रीां ।ऐां ्िरांस :। स :स :.हसकहिह्रां। ऐांऐां.हसकहि.एकावलि 12. हादद सवानुिोम वविोम हृल्िेिा ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। ऐांस :.

एकावलि 20.ह्रां।्िरां.ह्रां। ऐांऐां.हसकहि.ह्रां। ्िरां्िरां.हसकहिह्रां.कएईिह्रां।श्रीां।ह्रांऐां्िरांस :श्रीां 4.सकिह्रां.ह्रां। ऐांऐां.कएईिह्रां।्िरां. हादद कादद वविोम हृल्िेिा ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।स :स :.ह्रां।स :सकिह्रां. कादद पराषोडशी हृल्िेिा श्रीांस :्िरांऐांह्रां।ॐह्रांश्रीां।स :.ह्रां।श्रीां।ह्रांऐां्िरां स :श्रीां 118 .कएईिह्रां.हसकहिह्रां।ऐां.कएईिह्रां।श्रीांश्रीां ।स :्िरांऐां ।श्रीांह्रांऐां ॐ 24.ह्रां।श्रीांश्रीां ।स :्िरांऐां । श्रीां ह्रां ऐां ॐ 23.सकि.हसकहिह्रां।स :.हसकहिह्रां.हसकहि. कादद षोडशी हृल्िेिा श्रीांह्रां्िरांऐांस :।ॐह्रांश्रीां।ऐां.सकिह्रां।्िरां्िरां.कएईि.सकि.सकिह्रां।श्रीां।स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां 2. कादद षोडशी श्रीांह्रां्िरांऐांस :।ॐह्रांश्रीां।ऐां. कादद पराषोडशी श्रीांस :्िरांऐांह्रां।ॐह्रांश्रीां।स :.सकि.ह्रां।्िरां्िरां.कएईिह्रां.सकिह्रां.हसकहिह्रां। ऐांऐां.ह्रां। ्िरां्िरां.ह्रां।्िरां हसकहिह्रां.हस कि.सकिह्रां।्िरां.सकिह्रां.हसकिह्रां.हसकहिह्रां.ह्रां।श्रीांश्रीां ।स : ्िरां ऐां । श्रीां ह्रां ऐां ॐ राज ववद्या 1.हसकहि.हसकिह्रां.हसकि.ह्रां।श्रीांश्रीां।स : ्िरां ऐां । श्रीां ह्रां ऐां ॐ 21.सकिह्रां।्िरां्िरां.ह्रां।ऐांऐां.ह सकिह्रां।श्रीांश्रीां ।स :्िरांऐां ।श्रीांह्रांऐां ॐ 22.ह्रां।श्रीां।स :ऐां ्िरां ह्रांश्रीां 3.हसकि.सकिह्रां.ह्रां।ऐां.सकि. हादद सववविोम ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।स :स :. हादद कादद वविोम ॐऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :।स :स :.हसकि.हसकहि.हसकहिह्रां।ऐांऐां.हसकहि.सकि.हसकहिह्रां.कएईिह्रां. कादद हादद वविोम हृल्िेिा ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। स :स :. हादद सववविोम हृल्िेिा ॐ ऐांह्रांश्रीां।ऐां ्िरांस :। स :स :.

सकि.हसकहिह्रां।ऐां.ह्रां।श्रीां।स :ऐां ्िरां ह्रांश्रीां 7.कएईि.हसकहि.ह्रां।श्रीांश्रीां। स :ऐां ्िरां ह्रांश्रीां 11.हसकिह्रां।श्रीांश्रीां।स :ऐां ्िरां ह्रांश्रीां 10.सकि. हसकि.ह्रां।स :ऐां .ह्रां।्िरां्िरां.हसकहिह्रां।स : ऐां. हादद षोडशी हृल्िेिा श्रीांह्रां्िरांऐांस :।ॐह्रांश्रीां।ऐां.हसकहिह्रां.ह्रां।ऐां.सकिह्रां.हसकिह्रां।्िरां.ह्रां।स : ऐां.एकावलि 5. हादद अनुिोम कादद वविोम परा षोडशी हृल्िेिा श्रीांस :्िरांऐांह्रां।ॐह्रांश्रीां।ऐांस :.ह्रां।स :सकिह्रां.हसकहि.कएईिह्रां.हसकहिह्रां। स :ऐां.सकि.मातक ृ ा: श्रीांह्रां्िरांऐांस :।ॐह्रांश्रीां। अां आां+क्षां ।स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां 119 .हसकि.हसकहिह्रां।स :.हसकिह्रां.ह्रां।श्रीां।ह्रांऐां्िरां स :श्रीां नप ृ तत ववद्या 9.हसकहिह्रां.कादद अनुिोम हादद वविोम षोडशी श्रीांह्रां्िरांऐांस :।ॐह्रांश्रीां।ऐांस :.हसकहिह्रां.कएईिह्रां।श्रीांश्रीां।ह्रांऐां्िरांस :श्रीां 12.कादद अनुिोम हादद वविोम षोडशी हृल्िेिा श्रीांह्रां्िरांऐांस :।ॐह्रांश्रीां।ऐांस :.ह्रां।्िरां. हादद अनुिोम कादद वविोम परा षोडशी श्रीांस :्िरांऐांह्रां।ॐह्रांश्रीां।ऐांस :.ह्रां।्िरां हसकहिह्रां.सकिह्रां।श्रीां।स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां 6.सकिह्रां.सकिह्रां।्िरां्िरां.हसकिह्रां.सकि. हादद पराषोडशी हृल्िेिा श्रीांस :्िरांऐांह्रां।ॐह्रांश्रीां।स :.ह्रां।श्रीांश्रीां। ह्रांऐां्िरांस :श्रीां (Total: (8*3) + (2*2) + (2*2) + (1*2) + (1*2) = 36) 37. हादद षोडशी श्रीांह्रां्िरांऐांस :।ॐह्रांश्रीां।ऐां.हसकिह्रां.सकिह्रां।्िरां्िरां.सकिह्रां।्िरां.हसकहि.ह्रां।्िरां्िरां.कएईि.हसकहि.सकिह्रां. हादद पराषोडशी श्रीांस :्िरांऐांह्रां।ॐह्रांश्रीां।स :.हसकिह्रां।श्रीां।ह्रांऐां्िरांस :श्रीां 8.

पादयो: ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।स : स : सकि सकिह्रां। श्रीां श्रीां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ कीिकाय नम:.एकावलि 38. बािा: ऐांऐांऐां ्िरां्िरां्िरां स :स :स : ऐां 40.श्री गुर पादक ु ा: श्रीांह्रां्िरांऐांस :।ॐह्रांश्रीां।ह्स : सह :।हसक्षमिवरयूां ।स : ्िरां ऐां।सहक्षमिवरयीां हां स: सोहां हां स: श्रीगर ु दे वताभ्यो नम: सवाहा ( सवगर ु उपदे लशत पादक ु ा मन्त्रां जपेत ्) 39.एतत ् ववद्या द्वयां यथा शक्त जपेत ् (सहस्रां त्ररशतां शतमेव वा) पुनुः ऋष्यादद मानस पूजान्त्तां ववधाय असय श्री नालभ ववद्या षोडशाक्षारर त्ररपुरसुन्त्दरर ब्रह्मववद्या मन्त्र राज महा मन्त्रसय आनांदभैरव ऋवष: लशरलस ।।अमत ृ ववराट गायरी छां द: मुिे ।।श्री ववद्या राजराजेश्वरर महा त्ररपुरसुन्त्दरर दे वता हृदये।। ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।ऐां ऐां कएईि कएईिह्रां। स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ बीजाय नम:गुह्ये ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।्िरां ्िरां हसकहि हसकहि ह्रां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ श्तये नम:. परा : ॐ श्रीां स : श्रीां ॐ ऐां कएईिह्रां ्िरां हसकहिह्रां स : सकिह्रांश्रीां ऐां हसकिह्रां ्िरां हसकहिह्रां स : सकिह्रांश्रीां .नाभ मम श्रीववद्याराजराजेश्वरर महात्ररपुरसुन्त्दरर प्रसाद लसद्ध्यथे जप समपवणे ववतनयोग: सवावङ्गे कर न्त्यास:। हृदयादद न्त्यास: ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।ऐां ऐां कएईि कएईिह्रां। स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ अङ्गुष्ठाभ्याां नम: . नाथ ववद्या.हृदयाय नम: 120 .

नेररयाय व षट् ह्रां ऐां ्िरां स : श्रीां करति करपष्ृ टाभ्याां फट् .हृदयाय नम: ॐ ह्रां श्रीां तजवनीभ्याां सवाहा .लशिायै वषट् ्िरां हसकहिह्रां अनालमकाभ्याां हुां .हृदयाय नम: ॐ ह्रां श्रीां तजवनीभ्याां सवाहा .कविाय हुां ऐां कएईिह्रां श्रीां कतनकष्टकाभ्याां व षट् .कविाय हुां ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।्िरां ्िरां हसकहि हसकहिह्रां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ कतनकष्टकाभ्याां व षट्.लशरसे सवाहा ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।स : स : सकि सकिह्रां। श्रीां श्रीां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ मध्यमाभ्याां वषट्.लशरसे सवाहा स :सकिह्रां मध्यमाभ्याां वषट्.असराय फट् श्रीववद्यापराषोडशाक्षारर न्त्यास: कर न्त्यास: हृदयादद न्त्यास: श्रीां स : ्िरां ऐां ह्रां अङ्गष्ु ठाभ्याां नम:.असराय फट् श्रीववद्याषोडशाक्षारर न्त्यास: कर न्त्यास: हृदयादद न्त्यास: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स : अङ्गुष्ठाभ्याां नम: .कविाय हुां स :सकिह्रां श्रीां कतनकष्टकाभ्याां व षट् .एकावलि ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।्िरां ्िरां हसकहि हसकहिह्रां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ तजवनीभ्याां सवाहा.नेररयाय व षट् ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।स : स : सकि सकिह्रां। श्रीां श्रीां ।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ करति करपष्ृ टाभ्याां फट्.लशिायै वषट् ॐ ऐां ह्रां श्रीां ऐां ्िरां स : ।ऐां ऐां कएईि कएईिह्रां।स : ्िरां ऐां श्रीां ह्रां ऐां ॐ अनालमकाभ्याां हुां .लशिायै वषट् ्िरां हसकहिह्रां अनालमकाभ्याां हुां .नेररयाय व षट् स : ्िरां ऐां ह्रां श्रीां करति करपष्ृ टाभ्याां फट् .लशरसे सवाहा ऐां कएईिह्रां मध्यमाभ्याां वषट् .असराय फट् 121 .

इतत मातक ृ ा ध्यानां प्रसन्त्नवदनाांभोजां वराभयकराकन्त्वतां ।िन्त्द्रकोदटप्रतीकशां चिन्त्तयालम गुरूत्तमां ।। ऐांकाराङ्ककतगलभवतानिलशिाां स ुः ्िरां किाां त्रबभ्रतीम ्। स वणावम्बुजधाररणीां वरधराां धराधराङ्गोज्जज्जविाम ्।। वन्त्दे साङ्कुशपाशपुसतकधराां स्रग्भालसतोद्योत्कराम ्। ताां बािात्ररपुराां पदरयतनुां षट्िक्रसञ्िाररणीम ्।। 122 .इतत परा षोडशी ध्यानां वपकररबि यग्ु मां कम्बुिा त्ररम्बकाभा । बि रर वपक युग्मां राजववद्या सतनाभा ।। नप ृ तत युग मातक ृ ा नाथ बािा पररता । परयुवतत समेता पातु माां नालभ ववद्या ।। .इतत नालभववद्या ध्यानां चित्पुसतकाक्षमािाां सुधाकिश सांयुताां।पायात ् मातक ृ ा दे वीां मु्ताफि ववभूवषताां ।। .इतत सुन्त्दरर ध्यानां िापां िेक्षुमयां प्रसून ववलशिान ् पाशाङ्कुश पुसतकां। माखण्याक्षस्रजवरां मखणमयीां वीणाां सरोजद्वये पाखणभ्याां अभयां वरां ि दधतीां ब्रह्माददसेव्याां पराां। लसन्त्दरू ारण ववग्रहाां भगवतीां ताां षोडशीां आश्रये .इतत श्रीगुर ध्यानां .एकावलि सुवुः भुवुः भूुः ॐ इतत ददकग्वमोगुः: ध्यानां: जपाकुसुमभासरु ाां त्ररनयनाां त्ररकोण रयान्त्तराि वालसनीां त्ररपरु सुन्त्दररां सेन्त्दक ु ाां । कराांबुजितुष्टयाां मधरु िाप पाशाङ्कुश प्रसूनशरशोलभनीां िलितवेषभष ू ाां भजे ।। बािाकवमण्डिाभासाां ितुबावहुां त्ररिोिनाां।पाशाङ्कुशधनुबावणां धारयन्त्तीां लशवाां भजे ।। .इतत षोडशी ध्यानां ताक्ष्मयावरूढा हरर हृद्सरोजे भातत या परम चित्सवरूवपणी पद्मयग्ु म मखण पार धाररणी भालसता हृदद सदा ममाांत्रबका .

इतत परा ध्यानां 4-राजवशङ्कयावदद नालभ ववद्याभ्य: सवाववरण दे वताभ्यो नम: पञ्िपूजा: िां पथ्व ृ व्याकत्मकायै गन्त्धां कल्पयालम नमुः हां आकाशाकत्मकायै पुष्पां कल्पयालम नमुः यां वाय्वव्याकत्मकायै धूपां कल्पयालम नमुः रां वह्न्त्याकत्मकायै दरपां कल्पयालम नमुः वां अमत ृ ाकत्मकायै नैवेद्यां कल्पयालम नमुः सां सवावकत्मकायै ताम्बूिादद सवोपिारान ् कल्पयालम नमुः नव (दश) मुद्रा प्रदशवय : द्राां द्ररां ्िरां ब्िूां सुः क्रों ह्सिफ्रें हस ुः ऐां (ऐां or ह्स्रैं ह्स््रां ह्स्र ुः) िुल्िुक सलििां स पुष्पक्षतां गहृ रत्वा – ‘मदरयां ि सकिां महापद्मवनान्त्तराि काििक्रान्त्तगवत बैन्त्दव लसांहासनाकसथत रयकसरांशत ् कोदट दे वतात्मक परदे वतापवणमसतु सवाहा’ -'इत: पूवं प्राण बुवद्ध दे ह धमावदद कारत: जाग्रत ् सवप्न सुषुप्त्यावसतासु मनसा वािा कमवणा हसताभ्याां पद्भ्याां उदरे ण लशश्ना यत ् समत ृ ां यत ् कृतां तत ् सवं श्रीगर ु ब्रह्मापवणमसतु सवाहा’ .इतत जपां दे व्यै समपवयेत ्। फि श्रुतत: श्रीमत ् पञ्िदशाक्षयाव िक्ष्मयावत्ृ यातु यत्फिां नालभ ववद्या सकृत जपेत ् िभते भश ृ ां श्री महा त्ररपुरसुन्त्दयण नम: लशवां 123 .एकावलि मािा सखृ ण पुसतक पाश हसताां बािाांत्रबकाां श्रीिलिताकुमाररां। कुमारकामेश्वर केिरिोिाां नमालम ग ररां नव वषव दे शीां ।। -इतत बािा ध्यानां अकिङ्क शशाङ्काभा रयक्षा िन्त्द्रकिावती। मुद्रा पुसत िसद्बाहु पातु माां परमा किा ।। .

Added to this are mātṛkā. The various combinations of the kādi and hādi mantras are thirty six in number. Thus this vidyā was revealed by the Lord. During this time the fetus is connected to mother physically for nourishment through ‘nābhi’. We find a series of kādi / hādi in the ṣodaśī meter and Mahā ṣodaśī / Parā ṣodaśī mantras in a certain combinations. Interestingly. The combinations of kādi and hādi are revealed in the dhyāna sloka of this vidyā in a coded language. The fetus existed as a part of the mother.एकावलि 15. Let us try to explore this: The dhyāna runs thus: वपकररबियग्ु मां कम्बुिा त्ररम्बकाभा।बिररवपकयग्ु मां राजववद्या सतनाभा ।। नप ु तत समेता पातु माां नालभ ववद्या।। ृ तत युग मातक ृ ा नाथ बािा पररता ।परयव pika ruru bala yugmaM kambukhā trimbakā bhā Bala ruru pika yugmaM rāja vidyā stanābhā | nṛpati yuga matṛkā nātha bālā parItā Parayuvati sametā pāthu māM Nābhi vidyā || 124 .a. The Guru (Hayagrīva) recounts a similar the prayer by Śrī Uma devi to her Lord Śiva on his true nature and requests him to impart the same. who prayed for Self Knowledge (ātma gyāna) which is unshakeable (acañcala). bālā and parā mantras. rekindles the idea that we are a part of her. guru pādukā. Thus forty mantras as said in this vidyā are indicated by name itself. which has ṣodaśī mantras. This was revealed by Śrī Hayagrīva to sage agastya. In the Pūrva bhāga (prologue). is known as ‘Nābhi Vidyā’. As per kaTapayādi 'n' is zero and 'bha’ is four. thus a total of forty mantras form nābhi vidyā.Nābhi vidyā – a discussion Nābhi vidyā is a rare text of śrīvidyā mantras. reading on the reverse is forty. the number of mantras is given. which is the mid-point (centre) of a body and is also centre for all nādi in our body. so also this vidyā being centre of all mantras and connects us to Universal Mother. gestation period of a fetus in a womb is forty weeks. .

This along with the doubling of hṛllekhā at end of each kūta will be twelve. hādi and a combination of both. Stana means breast. ‘क’ is 1. Thus both variance of this mantra – Ṣodaśī and Parā ṣodaśī are referred. i. repeating the hṛllekhā in the end of each kūta.e. thus pointing to ṣodaśī mantra. ‘2’ to kāmarāja kūta with kāmarāja bīja and ‘3’ to the śakti kūta with śakti bīja. ‘Yuga’ in the second half will refer as above to both these vidyās – kādi and hādi in the same sequence in ṣodaśī mantra. ’yugma’ also will refer to the repetition of hṛllekhā in each kūta’s end. ‘ब’ is 3. युग्म will refer to the vidyā kādi and hādi. ‘ि’ is 2 ‘त्रर’ is 2. Thus a total of (eight in each section-with three sections) twenty four mantras are elucidated. Thus total number of combinations will be thirty six. which is achieved by ‘युग्म’ doubling of hṛllekhā. which are two in number. With reference to this code the following will be the sequence of numbers in this dhyāna. there is a śrī bīja in the end. The third is the reverse of the first hence it will be 3-3-2-2-1-1. 125 . translated numerals will be 1-3-2-2-3-1. ‘र’ is 2. While repeating the first kūta will not have its hṛllekhā. ‘ब’ & ‘ि’ will be 3. Here ‘1’ will refer to the vāgbhava kūta with vāg bīja. Thus three types in ṣodaśī – the kādi. Leaving out the vowels. Translated numerals will be 1-1-2-2-3-3. ‘प’ & ‘क’ will be 1. thus we find laghu ṣodaśī mantra in this vidyā. Kādi = ऐां कएईिह्रां ्िरां हसकहिह्रां स : सकिह्रांश्रीां Hādi = ऐां हसकिह्रां ्िरां हसकहिह्रां स : सकिह्रांश्रीां ‘भ’ will refer to the number 4 and युग्म – double of this – will be eight. This is called Pūrvāṅga vidyā राज (Rāja) and नप ृ तत (nṛpati) both refer to kings.. The same in Parā ṣodaśī structure will be another three.एकावलि Decoding the dhyāna sloka: We can consider the kaTapayādi number count for this. who traditionally are sixteen in number.

The phala śruti (effect) of this chant once. is equal to one lakh japa of Pañcadaśi vidyā. three hundred or at least a hundred.a thousand. Their individual dhyāna slokas are also given. which is a bestower of both bhoga and mokṣa.एकावलि Ṣodaśī = śrī hrīm klīm aim sauh om hrīm śrīm (ka/ha) sauh aim klīm hrīm śrīm Parā ṣodaśī = śrīm sauh klīm aim hrīm om hrīm śrīm (ka/ha) hrīm aim klīm sauh śrīm The last four mantras are explicit.yadā śakti japet vidyām sahasram triśatam śatameva vā’–do japā as much as possible. This is to be inferred here. The clue of this as much as possible (yadā śakti) will be seen in uttara bhāga of Lalitā sahasranāma. will in totality effect the self knowledge which is unshakeable. The combination works out to: (1) kādi sva anulomah (2) kādi sva anulomah hṛllekhā dvayam (3) kādi hādi anulomah (4) kādi hādi anulomah hṛllekhā dvayam (5) hādi sva anulomah (6) hādi sva anulomah hṛllekhā dvayam (7) hādi kādi anulomah (8) hādi kādi anulomah hṛllekhā dvayam (1) kādi sva anuloma vilomah (2) kādi sva anuloma vilomah hṛllekhā dvayam (3) kādi anulomah hādi vilomah (4) kādi anulomah hādi vilomah hṛllekhā dvayam (5) hādi sva anuloma vilomah (6) hādi sva anuloma vilomah hṛllekhā dvayam 126 . In the uttarabhāga (epilogue) we find an instruction to chant as much as possible kādi and hādi vidyās (yadā śakti japet).

एकावलि (7) hādi anulomah kādi vilomah (8) hādi anulomah kādi vilomah hṛllekhā dvayam (1) kādi sva vilomah (2) kādi sva vilomah hṛllekhā dvayam (3) kādi hādi vilomah (4) kādi hādi vilomah hṛllekhā dvayam (5) hādi sva vilomah (6) hādi sva vilomah hṛllekhā dvayam (7) hādi kādi vilomah (8) hādi kādi vilomah hṛllekhā dvayam (1) kādi ṣodaśī (2) kādi ṣodaśī hṛllekhā dvayam (3) kādi Parā ṣodaśī (4) kādi Parā ṣodaśī hṛllekhā dvayam (5) hādi ṣodaśī (6) hādi ṣodaśī hṛllekhā dvayam (7) hādi Parā ṣodaśī (8) hādi Parā ṣodaśī hṛllekhā dvayam (9) kādi anuloma hādi viloma ṣodaśī (10) kādi anuloma hādi viloma ṣodaśī hṛllekhā dvayam (11) hādi anuloma kādi viloma Parā ṣodaśī (12) hādi anuloma kādi viloma Parā ṣodaśī hṛllekhā dvayam (1) Mātṛkā (2) Guru nātha pādukā (3) Bālā (4) Parā 127 .

the root mantra in Śrī vidyopāsanā and fortieth is experience of highest level of bliss in consciousness as indicated by Parā. revealing mantrādhvā. The laghu ṣodaśī. There were many hidden code messages in the nābhividyā pārāyaṇa which were revealed on constant practice. Foremost ṣadadhvās are recognized: The mātṛkā akṣarā said will correspond to varṇādhvā. the basic building blocks of this universe. number of raśmi’s in viśuddhi cakra which corresponds to akāśa tattvā. the thirty six mantras are equivalent to thirty six tattvas (as seen in the pūrva bhaga). The hidden hṛllekhā bījas in the first twenty four will number seventy two.एकावलि On a whole (8*3) + (12) + (4) = 40. The last of yadā śakti japet will now mean immersion in sahaja sthiti of a realized sādhaka. thirty eight is appearance of Śrī guru to a sādhaka. the number of variety in creation. is shared here. the different kūta combinations will show the padādhvā and combinations of all these padās are seen in greatest mantra ṣodaśī. thirty ninth is his mantra upadeśa of Bālā. Another way of looking at this: The first thirty six mantras will correspond to tattvādhvā. The mātṛkākṣarā will show this created prapañca and hence we see bhuvanādhvā. mahā ṣodaśī. and Parā ṣodaśī mantras will make us see kalādhvā. since ākāśa is not ‘seen’ these hṛllekhā are hidden. tattvādhvā. 2. 3. thirty seventh mantra (mātrkākṣarā) will show emergence of this created world – the gross universe by pañcīkaraṇa. Some more hidden treasures: 1. There are twelve more hidden hṛllekhā in the nṛpati vidyā bringing the total of hidden to eight four. the 128 . The first twenty four mantras are having the saubhāgya kādi/hādi ṣodaśī and the kādi / hādi pūrti vidyās inter mixed.

The total number of Parā bīja ‘sauh’ in the chanting is 136. Thus we find a sadhana path in this nābhi vidyā. In the verbal meaning of Pancadasi mantra. In this context if we review all the twenty four pūrvāṅga vidyā we find that central prayer for emergence of knowledge is a constant. the predominance of realization in experience is in third set of eight mantras. Since we cannot see the whole created species this number is hidden. After realization the normal sahaja sthiti is the vidyā dvaya’s yadaa śakti japa. which can be equated to total of last two cakras–viśuddhi and āgynā (72 +64= 136). 4. Thus we find thirty six. the half year time of a lunar calendar. represents both dakṣiṇāyana and uttarāyana. second as a prayer for emergence of knowledge of the world as śivaśakti-maya and third kūta as a prayer for constant remembrance and experience of this bhāva. The same is the case in the raja and nṛpati vidyās too. the number of tattvas being a ground for the realization of this knowledge. next come gross reality in form of mātṛkā akṣarā. removal of dual knowledge (ignorance of the true nature) and continual remembrance of knowledge (true nature) being intermixed in the next eight. 5. they represent the sound. The realization of the upadeśa of the highest bliss is the ‘Parā’. 6. while the removal of māyā is predominant in first eight mantras. Number of vāg bīja ‘aim’ is 180. In this universe the emergence of grace of the divine on the form of Śrī Guru is the next mantra. 129 . first kūta is meant to be a prayer to remove ignorance of duality. These being subtle.एकावलि myriad of creatures created. This again represents soma khaṇda of Pañcadaśi which as a syllable is śakti bīja. which in turn points to the ākāsha tattva and then by pañcīkaraṇa the formation of this ‘seen’ gross universe. His condensed upadeśa is the Bālā mantra.

ʶɮúºÉä.एकावलि 16.{ÉɶÉÖ{ÉiÉɺjÉ ¨ÉxjÉ: ¸ÉÒ MÉhÉà¶ÉÉªÉ xɨÉ: +ºªÉ ¸ÉÒ{ÉɶÉÖ{ÉiÉɺjÉ ¨É½þɨÉxjɺªÉ ´ÉɨÉnäù´É @ñʹÉ: {ÉÎRÂóHò: Uôxnù: ¸ÉÒ{ɶÉÖ{ÉÊiÉnæù´ÉiÉÉ ¶±ÉÓ ¤ÉÒVÉÆ ½ÖþÆ ¶ÉÊHò: ¸ÉÒ{ɶÉÖ{ÉÊiÉ |ÉÒiªÉlÉæ ºÉ´ÉÇ®úIÉÉEò®úÉlÉæ ¨ÉxjÉ VÉ{Éä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: $ $ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ -+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ. $ GòÓ GòÓ GòÓ ½ÚþÆ ½ÚþÆ ¿Ó ¿Ó nùÊIÉhÉäEòÉʱÉEäò GòÓ GòÓ GòÓ ½ÚþÆ ½ÚþÆ ¿Ó ¿Ó º´ÉɽþÉ 4. $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä {ÉɶÉÖ{ÉiÉÉªÉ xɨÉ: * 5.xɨÉ: $ ¶±ÉÓ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ -iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.º´É½þÉ $ {ÉÆ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ -¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.¾þnùªÉɪÉ. $ ¦ÉÚ:¦ÉÖ´É:º´É: iÉiºÉÊ´ÉiÉÖ´ÉÇ®äúhªÉÆ ¦ÉMÉÉænùä´ÉºªÉ vÉÒ¨Éʽþ ÊvɪÉÉä ªÉÉä xÉ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ* 2. $ iÉi{ÉÖ¯û¹ÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¨É½þÉnäù´ÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ¯ûpù: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 3. $ EÞò¹hÉÊ{ÉRÂóMɱÉÉªÉ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ * BiÉÉxÉ ¨ÉxjÉÉxÉ BEòÉnù¶É´ÉÉ®Æú (11) VÉ{ÉäiÉÂ* 130 .´É¹É]Âõ $ ¶ÉÖÆ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ -+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ $ ½ÖþÆ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ -EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ $ ¡ò]Âõ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ -Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ: {É\SÉ´ÉCjÉÆ nù¶É¤ÉɽÖþÆ |ÉÊiÉ´ÉCjÉÆ ÊjɱÉÉäSÉxÉÆ* ¦ÉÒ¹ÉhÉÆ ¦ÉɺEò®Æú ¯ûpÆù Ê{ÉRÂóMɧÉÚ¶¨É¸ÉÖ ¨ÉÚvÉÇxÉÆ** JÉbÂ÷MÉ-JÉä]õEò-xÉÉ®úÉSÉ-vÉxÉÖ:-¶É®ú-Eò¨Éhb÷±ÉÚxÉÂ* ¶ÉËHò ¶ÉÚ±ÉÆ SÉ {É®ú¶ÉÖÆ ¥ÉÀnùhbÆ÷ Eò®úÉOÉEè :** ʤɧÉÉhÉÆ º¡òÊ]õEòÉpù¬É¦ÉÆ xÉÉMÉɦɮúhɦÉÚ¹ÉhÉÆ* ºÉ´ÉÉǺjÉä¶ÉÆ {ɶÉÖ{ÉËiÉ ºÉ´ÉÇ®úIÉÉEò®Æú º¨É®úÉʨÉ** ¨ÉxɺÉÉä{ÉSÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚVªÉ +lÉ ¨ÉxjÉ: $ ¶±ÉÓ {ɶÉÖ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ** (108 ´ÉÉ®Æú VÉÊ{Éi´ÉÉ) $ +ºªÉ ¸ÉҨɽþÉ{ÉɶÉÖ{ÉiÉ ¨É½þɨÉxjɺªÉ {É®ú¥ÉÀ @ñʹÉ: +xÉÖ¹]Öõ{É Uôxnù: ¸ÉÒºÉnùÉÊ¶É´É {É®ú¨ÉÉi¨ÉÉ näù´ÉiÉÉ ¨É¨É ºÉ´ÉÇ ¶ÉÉÎxiÉ uùÉ®úÉ ¸ÉÒ{ɶÉÖ{ÉÊiÉ |ÉÒiªÉlÉæ VÉ{Éä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ:* ¨ÉxjÉ: 1.

एकावलि <Ç·É®ú =´ÉÉSÉ: ´ÉIªÉä {ÉɶÉÖ{ÉiÉɺjÉähÉ ´ÉIªÉä ¶ÉÉxiªÉÉÊnù {ÉÚ´ÉÇ´ÉiÉÂ* {ÉÉnùÉxiÉ: {ÉÚ´ÉÇ ¨ÉɺÉä ¹É]Âõ ¶ÉiÉÆ {ÉÉnùÉÊxÉ Ê½þ** vªÉÉxÉÆ: प्रणवासनमारूढां दरु ाधषं महाबिम ् |पञ्िासयां दशकणं ि प्रततव्रां त्ररिोिनम ् || दां ष््ाकरािमत्युग्रां मु्तनादां सुदज व म ् |कपािमािाभरणां िन्त्द्राधवकृतशेिरम ् || ु य केकराक्षां महानागाभरणां िेलिहाससम ् |सूयक व ोट्ययुताभां ि ववघ्नसङ्घाररमदव कम ् || भुजैदवशलभरत्युग्रैुः भैरवासरैुः समकन्त्वतम ् |िड्गिापमहाशि ू ाभयपाशाांश्ि दक्षक्षणे || िेटबाणकपािाांश्ि वरप्रास ि वामतुः |वपङ्गाभश्मश्रुभ्रूय् ुव तां तथा ववचधलशरोरहम ् || +lÉ +ºjÉ: $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä ¨É½þÉ{ÉɶÉÖ{ÉiÉÉªÉ xɨÉ: +iÉÖ±É-¤É±É-´ÉÒªÉÇ-{É®úÉGò¨ÉÉªÉ ÊjÉ{É\SÉxɪÉxÉÉªÉ xÉÉxÉÉ°ü{ÉÉªÉ xÉÉxÉÉ-|ɽþ®úhÉÉätiÉÉªÉ ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉ®úHòÉªÉ Ê¦ÉzÉÉ\VÉxÉ-SɪÉ-|ÉJªÉÉªÉ ¶¨É¶ÉÉxÉ´ÉäiÉɱÉ-Ê|ɪÉÉªÉ ºÉ´ÉÇ-Ê´ÉPxÉ-ÊxÉEÞòxiÉxÉ-®úiÉÉªÉ ºÉ´ÉÇʺÉÊrù|ÉnùÉªÉ ¦ÉHòÉxÉÖEòΨ{ÉxÉä +ºÉÆJªÉ´ÉCjÉ-¦ÉÖVÉ-{ÉÉnùÉªÉ ÊºÉrùÉªÉ ´ÉäiÉɱÉ-ÊSÉjÉÉʺÉxÉä ¶ÉÉÊEòxÉÒ-IÉÉä¦É-VÉxÉEòÉªÉ ´ªÉÉÊvÉ-ÊxÉOɽþEòÉÊ®úhÉä {ÉÉ{ɦÉ\VÉxÉÉªÉ ºÉÚªÉÇ-ºÉÉä¨ÉÉÎMxÉxÉäjÉÉªÉ Ê´É¹hÉÖEò´ÉSÉÉªÉ JÉbÂ÷MÉ-´ÉXÉ-½þºiÉÉªÉ ªÉ¨Énùhb÷-´É¯ûhÉ{ÉɶÉÉªÉ ¯ûpù¶ÉÚ±ÉÉªÉ V´É±ÉÎVVɼ´ÉÉªÉ ºÉ´ÉÇ®úÉäMÉÊ´ÉpùÉ´ÉhÉÉªÉ Oɽþ -ÊxÉOɽþEòÉÊ®úhÉä nÖù¹]õ-xÉÉMÉ-IɪÉ-EòÉÊ®úhÉä $ EÞò¹hÉÊ{ÉRÂóMɱÉÉªÉ ¡ò]Âõ.ºÉ´ÉÇnùä´É ¡ò]Âõ-¿Ó ¡ò]Âõ-¸ÉÓ ¡ò]Âõ-¿ÚÆ ¡ò]Âõ-»ÉÚÆ ¡ò]Âõ-º´ÉÉ ¡ò]Âõ-±ÉÉÆ ¡ò]Âõ-´Éè®úÉMªÉÉªÉ ¡ò]Âõ-¨ÉɪÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-EòɨÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ131 .xɨÉÉä%ºjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-ʶɴÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-<ǶÉÉxÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-{ÉÖ¯û¹ÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-+PÉÉä®úɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ.¨ÉÖnùÂMÉ®úÉªÉ ¡ò]Âõ-SÉGòÉªÉ ¡ò]Âõ-{ÉnÂù¨ÉÉªÉ ¡ò]ÂõxÉÉMÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-<ǶÉÉxÉÉªÉ ¡ò]Âõ-JÉä]õEòɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-¨ÉÖhb÷ÉªÉ ¡ò]Âõ-¨ÉÖhb÷ɺjÉÉªÉ ¡ò]ÂõEòRÂóEòɱÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-Ê{ÉÎSUôEòɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-IÉÖÊ®úEòɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-¥ÉÀɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ¶ÉCiªÉºjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-MÉhÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-ʺÉrùɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-Ê{ÉʱÉÊ{ÉSUôɺjÉÉªÉ ¡ò]ÂõMÉxvÉ´ÉÉǺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-{ÉÚ´ÉÉǺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-nùÊIÉhÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ.¿ÚEÆ òÉ®úɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-´ÉXÉÉªÉ ¡ò]Âõ-´ÉXɽþºiÉÉªÉ ¡ò]Âõ-+MxɪÉä ¡ò]Âõ-nùhb÷ÉªÉ ¡ò]Âõ-ªÉ¨ÉÉªÉ ¡ò]Âõ-JÉbÂ÷MÉÉªÉ ¡ò]Âõ.xÉè@ñiÉÉªÉ ¡ò]Âõ.ºÉ´ÉÇEòÉ®úhÉ ¡ò]Âõ.´ÉɨÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-{ÉζSɨÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-¨ÉxjÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-¶ÉÉÊEòxªÉºjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-ªÉÉäÊMÉxªÉºjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-nùhb÷ɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ¨É½þÉnùhb÷ɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ.ºÉtÉäVÉÉiÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-¾þnùªÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-¨É½þɺjÉÉªÉ ¡ò]ÂõMɯûb÷ɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-®úÉIɺÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-nùÉxÉ´ÉɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ.IÉÉé xÉÉ®úʺÉÀɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõi´É¹]ÅõɺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-ºÉ´ÉÉǺjÉÉªÉ ¡ò]Âõ-xÉ: ¡ò]Âõ-´É: ¡ò]Âõ-{É: ¡ò]Âõ-¡ò: ¡ò]Âõ-¦É: ¡ò]Âõ-¨É: ¡ò]Âõ¸ÉÒ: ¡ò]Âõ-{Éä: ¡ò]Âõ-¦ÉÚ: ¡ò]Âõ-¦ÉÖ´É: ¡ò]Âõ-º´É: ¡ò]Âõ-¨É½þ: ¡ò]Âõ-VÉxÉ: ¡ò]Âõ-iÉ{É: ¡ò]Âõ-ºÉiªÉÆ ¡ò]Âõ-ºÉ´ÉÇ|ÉÉhÉ ¡ò]Âõ-ºÉ´ÉÇ xÉÉb÷Ò ¡ò]Âõ.{ÉɶÉÉªÉ ¡ò]Âõ-´É¯ûhÉÉªÉ ¡ò]Âõ-v´ÉVÉÉªÉ ¡ò]Âõ-+RÂóEòÖ ¶ÉÉªÉ ¡ò]Âõ-´ÉɪɴÉä ¡ò]Âõ-MÉnùɪÉè ¡ò]Âõ-EÖò¤Éä®úÉªÉ ¡ò]Âõ-ÊjɶÉÚ±ÉÉªÉ ¡ò]Âõ.

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axÉÉ®úɪÉhÉɺjÉ Ê´ÉtÉ ¨ÉxjÉ: ¸ÉÒ ´Éänù ´ªÉɺÉÉªÉ xɨÉ: +ºªÉ ¸ÉÒxÉÉ®úɪÉhÉɺjÉÊ´ÉtÉ ¨É½þɨÉxjɺªÉ {É®ú¥ÉÀ @ñʹÉ: MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉÒxÉÉ®úɪÉhÉɺjÉÉä näù´ÉiÉÉ ¿Ó ¤ÉÒVÉÆ ¸ÉÓ ¶ÉÊHò: $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä EòÒ±ÉEÆò ¸ÉÒ¨ÉzÉÉ®úɪÉhÉ |ÉÒiªÉlÉæ xÉÉ®úɪÉhÉɺjÉ Ê´ÉtɨÉxjÉ VÉ{Éä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: +IÉ®ú xªÉɺÉ: $ $ xɨÉ: {ÉÉnùªÉÉä: $ xÉÆ xɨÉ: VÉÉx´ÉÉà: $ ¨ÉÉá xɨÉ: >ð´ÉÉæ: $ xÉÉÆ xɨÉ: =nù®äú $ ®úÉÆ xɨÉ: ¾þÊnù $ ªÉÆ xɨÉ: =®ú漃 $ hÉÉÆ xɨÉ: ¨ÉÖJÉä $ ªÉÆ xɨÉ: ʶɮúÊºÉ Ê´É±ÉÉä¨É xªÉɺÉ: $ $ xɨÉ: ʶɮú漃 $ xÉÆ xɨÉ: ¨ÉÖJÉä $ ¨ÉÉá xɨÉ: =®ú漃 $ xÉÉÆ xɨÉ: ¾þÊnù $ ®úÉÆ xɨÉ: =nù®äú $ ªÉÆ xɨÉ: >ð´ÉÉæ: $ hÉÉÆ xɨÉ: VÉÉx´ÉÉä: $ ªÉÆ xɨÉ: {ÉÉnùªÉÉä: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: $ xÉÆ -+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.´É¹É]Âõ $ MÉÆ -+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ $ ´ÉÆ -EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ $ iÉå -Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ 133 .xɨÉ: $ ¨ÉÉå -iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.ʶɮúºÉä.एकावलि 16.¾þnùªÉɪÉ.º´É½þÉ $ ¦ÉÆ -¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.

108 ´ÉÉ®ú VÉ{ÉäiÉÂ* +lÉ +ºjÉ: $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä ʴɷɨÉÚiÉǪÉä xÉÉ®úɪÉhÉÉªÉ ¸ÉÒ{ÉÖ¯û¹ÉÉäkɨÉÉªÉ ®úIÉ ®úIÉ ªÉÖ¹¨ÉnÂù oùι]õ |ÉiªÉIÉÆ {É®úÉäIÉÆ ´ÉÉ +VÉÒhÉÈ {ÉSÉªÉ Ê´É¹ÉÚÊSÉEòÉxÉ ½þxÉ ½þxÉ BEòÉʽþEòÉÆ nÂù´ªÉÉʽþEÆò jɪÉÉʽþEòÉÆ SÉÉiÉÖÌlÉEò V´É®Æú xÉÉ¶ÉªÉ xÉÉ¶ÉªÉ SÉiÉÖ®úɶÉÒÊiÉ ´ÉÉiÉÉxÉ +¹]õÉnù¶É IÉªÉ ®úÉäMÉÉxÉ +¹]õÉnù¶É EÖò¹`öÉxÉ ½þxÉ ½þxÉ ºÉ´ÉÇ nùÉä¹ÉÉxÉ ¦É\VÉªÉ ¦É\VÉªÉ iÉiÉ ºÉ´ÉÈ ¶ÉÉä¹ÉªÉ ¶ÉÉä¹ÉªÉ +ÉEò¹ÉÇªÉ +ÉEò¹ÉÇªÉ ¶ÉjÉÚxÉ ¨ÉÉ®úªÉ ¨ÉÉ®úªÉ =SSÉÉ]õªÉ =SSÉÉ]õªÉ Ê´Éuä ù¹ÉªÉ Ê´Éuäù¹ÉªÉ ºiɨ¦ÉªÉ ºiɨ¦ÉªÉ ÊxÉ´ÉÉ®úªÉ ÊxÉ´ÉÉ®úªÉ Ê´ÉPxÉÉxÉ ½þxÉ nù½þ nù½þ ¨ÉlÉ ¨ÉlÉ Ê´Év´ÉÆºÉªÉ Ê´Év´ÉÆºÉªÉ Ê´ÉpùÉ´ÉªÉ Ê´ÉpùÉ´ÉªÉ SÉGÆò MÉÞ½þÒi´ÉÉ ¶ÉÒQÉÆ +ÉMÉSUô SÉGäòhÉ ½þÊxÉi´ÉÉ {É®úÊ´ÉtÉÆ UäônùªÉ UäônùªÉ ¦ÉänùªÉ ¦ÉänùªÉ SÉiÉÖ®úɶÉÒÊiÉ Ê´Éº¡òÉä]õEòÉxÉ ʴɺ¡òÉä]õªÉ ʴɺ¡òÉä]õªÉ +¹ÉÇ ´ÉÉiÉ ¶ÉÚ±É oùι]õ ºÉ{ÉÇ ´ªÉÉQÉ Êuù{Énù SÉiÉÖ¹{Énù +{É®ú ´ÉÉÁä ¦ÉÖ´ªÉxiÉÊ®úIÉä +xªÉäÊ{É EäòÊSÉiÉ uäù¹ÉEòÉxÉ ºÉ´ÉÉÇxÉ ½þxÉ ½þxÉ Ê´ÉtÖiÉ ¨ÉäPÉ xÉnùÒ {É´ÉÇiÉ +]Âõ´ªÉÉxÉ ºÉ´ÉǺlÉÉxÉÉÊxÉ ®úÉÊjÉ ÊnùxÉ {ÉlÉ SÉÉä®úÉxÉ ´É¶ÉªÉ ´É¶ÉªÉ ºÉ´ÉÉæ{Épù´ÉÉxÉ xÉÉ¶ÉªÉ xÉÉ¶ÉªÉ ºÉ´ÉÇ ¶ÉjÉÚxÉ ¨ÉnÇùªÉ ¨ÉnÇùªÉ {É®úºÉèxªÉÆ Ê´ÉnùÉ®úªÉ Ê´ÉnùÉ®úªÉ {É®ú SÉGÆò ÊxÉ´ÉÉ®úªÉ ÊxÉ´ÉÉ®úªÉ nù½þ nù½þ ®úIÉÉÆ EÖò¯û EÖò¯û $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä xÉÉ®úɪÉhÉÉªÉ ¿ÉÆ ¿Ó ¿ÚÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ `ö: `ö: `ö: xɨÉ: (¾þnùªÉÉnùkÉ)** <iªÉºjÉÆ 134 .एकावलि vªÉÉxÉÆ: ºÉiªÉÆ ½äþiÉÖ Ê´É´ÉÌVÉiÉÆ ¸ÉÖÊiÉ Ê¶É®úɨÉÉtÆ VÉMÉiEòÉ®úhÉÆ ´ªÉ{iÉÆ ºlÉÉ´É®ú VÉRÂóMɨÉä Êxɯû{ɨÉÆ SÉèiÉxªÉÆ +xiÉMÉÇiÉÆ* +Éi¨ÉÉxÉÆ ®úÊ´É ´ÉμxÉ SÉxpù ´É{ÉÖ¹ÉÆ iÉÉ®úÉi¨ÉEÆò ºÉxiÉiÉÆ ÊxÉiªÉÉxÉxnùºÉÖJÉɴɽÆþ ºÉÖEÞòÊiÉ ÊxÉ:{ɶªÉÎxiɯûvÉäÎxpùªÉÉ:** +lÉ ¨ÉxjÉ: $ ªÉxjÉ ®úÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¨É½þɪÉxjÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ªÉxjÉ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ -1 $ xÉÉ®úɪÉhÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ ´ÉɺÉÖnùä´ÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ʴɹhÉÖ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ -2 $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä xÉÉ®úɪÉhÉÉªÉ ¸ÉÒ{ÉÖ¯û¹ÉÉäkɨÉÉªÉ xɨÉ: -3 BiÉiÉ jɪÉÆ uùÉnù¶É´ÉÉ®Æú VÉ{ÉäiÉ $ +ºªÉ ¸ÉҺɴÉÇ ¨ÉxjÉÉäiEòÒ±É¨É ¶ÉÉ{É Ê´É¨ÉÉäSÉxÉ ¨É½þɨÉxjɺªÉ ¨ÉÚ±É|ÉEÞòÊiÉ @ñʹÉ: +xÉÖ¹]Öõ{É Uôxnù: ¸ÉÒ ¨É½þÉÊ´ÉtÉ näù´ÉiÉÉ ÊxÉ®úÉEòÉ®ú +ÉvÉÉ®ú ¶ÉÊHò: $ ¿Ó ½þÉé ¤ÉÒVÉÆ $ GòÉå EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ºÉ´ÉÇ ¨ÉxjÉÉäiEòÒ±ÉxÉ ¶ÉÉ{É Ê´É¨ÉÉäSÉxÉ uùÉ®úÉ ¸ÉÒ¨ÉxjÉÉÊvÉ näù´ÉiÉÉ |ÉÒiªÉlÉæ VÉ{Éä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ:* ¨ÉxjÉ: $ ¿Ó ½þÉé C±ÉÓ GòÉå Bá ±ÉÉä¦ÉªÉ ¨ÉÉä½þªÉ =iEòÒ±ÉªÉ º´ÉɽþÉ .

एकावलि B¹ÉÉ Ê´ÉtÉ ¨É½þÉ xÉɨxÉÒ {ÉÖ®úÉ |ÉÉäHòÉ ¶ÉiÉGòiÉÉä* +ºÉÖ®úÉ +xÉäxÉ iÉÉxÉ ÊVÉi´ÉÉ ºÉ´ÉÉÇxÉ ¶SÉ ¤É汃 nùÉxÉ´ÉÉxÉÂ** ªÉ: {ÉÖ¨ÉÉxÉ {É`öÊiÉ ÊxÉiªÉÆ ´Éè¹hÉ´ÉÉä ÊxɪÉiÉÉi¨É´ÉÉxÉÂ* iɺªÉ ºÉ´ÉÉÇ xÉ Ë½þºÉÎxiÉ ªÉjÉ oùι]õ MÉiÉÆ Ê´É¹ÉÆ** +xªÉ oùiÉÆ Ê´É¹ÉÆ SÉè´É xÉ näù½þ ºÉRÂóMɨÉäiÉ wÉÖ´ÉÆ* ºÉRÂóOÉɨÉä vÉÉ®úªÉÊiÉ +RÂóMÉä =i{ÉÉiÉÉÊVÉxÉ ºÉƶɪÉ:** ºÉÉè¦ÉÉMªÉÆ VÉɪÉiÉä iɺªÉ {É®ú¨ÉÆ xÉ +jÉ ºÉƶɪÉ:* tÚiÉä iɺªÉ VɪÉ: iɺªÉ iɺªÉ Ê´ÉPxÉ: iɺªÉ xÉ ¤ÉÉvªÉiÉä** ËEò +jÉ ¤É½ÖþxÉÉäHäòxÉ ºÉ´ÉǺÉÉè¦ÉÉMªÉ ºÉ¨{Énù:* ±É¦ÉiÉä xÉÉjÉ ºÉxnäù½þÉä xÉÉxªÉlÉÉxÉÉÊnùxÉÉä ¦É´ÉäiÉÂ** ¦ÉÚVÉÇ {ÉjÉä ʱÉJÉäiÉ ªÉxjÉÆ MÉÉä®úÉäSÉxÉ ¨ÉªÉäxÉ SÉ* <¨ÉÉÆ Ê´ÉtÉÆ Ê¶É®úÉä ¤Év´ÉÉ ºÉ´ÉÇ®úIÉÉ Eò®úÉäÊiÉ ºÉÉ** {ÉÖ¯û¹ÉºªÉÉlÉ´ÉÉ ºjÉÒhÉÉÆ ½þºiÉä ¤Év´ÉÉ Ê´ÉSÉIÉhÉè:* Ê´Épù´ÉÎxiÉ Ê´ÉPxÉÉÊxÉ xÉ ¦É´ÉÎxiÉ EònùÉSÉxÉ** xÉ ¦ÉªÉÆ iɺªÉ EÖò´ÉÇÎxiÉ MÉMÉxÉä ¦ÉɺEò®úÉnùªÉ:* ¦ÉÚiÉ |ÉiÉ Ê{ɶÉɶSÉɶSÉ OÉÉ¨É OÉÉʽþ¹ÉÖ b÷ÉÊEòxÉÒ** ¶ÉÉÊEòxÉÒ¹ÉÖ ¨É½þÉPÉÉä®úÉ ´ÉäiÉɱÉɶSÉ ¨É½þɤɱÉÉ:* ®úÉIɺÉɶSÉ ¨É½þÉ®úÉèpùÉ nùÉxÉ´ÉÉ ¤ÉʱÉxÉÉäʽþªÉä** +ºÉÖ®úɶSɺÉÖ®úɶSÉè´É +¹]õªÉÉäÊxɹÉÖ näù´ÉiÉÉ:* ºÉ´ÉÇjÉ ºiÉΨ¦ÉiÉÉ: iÉäxÉ ¨ÉxjÉÉäSSÉÉ®úhÉ ¨ÉÉjÉiÉ:** ºÉ´ÉÇ nùÉä¹ÉÉ: |ÉhɶªÉÎxiÉ vɨÉÇ: iÉÉä¹`öÊiÉ ÊxÉiªÉ¶É:** <ÊiÉ ¸ÉÒ ¯ûpù ªÉɨɱÉä xÉÉ®úɪÉhÉɺjÉ Ê´ÉtÉ ºiÉÉäjÉÆ ºÉ¨{ÉÚhÉÈ* 135 .

®úHò´ÉhÉÇ ´ÉÞEò´ÉɽþxÉ IÉÉé +IɪÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ IÉÉå +IɪÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+¹]õɹ]õEò {ÉÚVÉxÉÆ {ÉÚ´ÉÉǹ]õEÆò 4-|ɪÉÉMÉIÉäjÉä ´ÉäþʺÉxÉÒ{ÉÖªÉÉÈ Eòɨɰü{É{ÉÒ`äö ´É]õ´ÉÞIÉä {ÉnÂù¨É¨ÉÖpùɪÉÉÆ ´ªÉÉä¨É¨Éhb÷±Éä ¨Éä¯û ºÉxiÉÉxɴɱªÉÉÆ i´ÉMÉÉvÉÉ®úSÉGòºlÉ +ÉÆ IÉÉÆ ¨ÉRÂóMɱÉɨ¤ÉÉ näù´ÉÒ °üÊ{ÉhÉÓ +ÉÆ IÉÉÆ ¥ÉÀÉhªÉ¨¤ÉÉ ºÉʽþiÉ +Æ IÉÆ ¨ÉRóMɱÉÉxÉxnùxÉÉlÉ °üÊ{ÉhÉÆ +Æ IÉÆ +ʺÉiÉÉRÂóMɦÉè®ú´É º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÊ®ú´ÉÉ®úɹ]õEÆò: 4-½äþ¨É´ÉhÉÇ EòÊ®ú´ÉɽþxÉ IÉÉÆ +IÉÉ䦪ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ IÉÆ +IÉÉ䦪ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ |ÉäiÉ´ÉɽþxÉ IÉÚÆ ®úÉIɺªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ IÉÖÆ ®úÉIɺÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Sɨ{ÉEò´ÉhÉÇ EÖò¤VÉxÉÞ´ÉɽþxÉ IÉßÆ IÉ{ÉhÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ IÉÞÆ IÉ{ÉhÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.´ÉÉ®úÉhɺÉÒIÉäjÉä ¶ÉÉèÎhb÷xÉÒ{ÉÖªÉÉÈ ¨É±ÉªÉÊMÉÊ®ú{ÉÒ`äö ¶±É乨ÉÉEÞòiÉ´ÉÞIÉä ʱÉRÂóMÉ ¨ÉÖpùɪÉÉÆ ´ÉɪÉÖ¨Éhb÷±Éä ¨É½äþxpù´É±ªÉÉÆ ®úHòÊxÉiɨ¤ÉSÉGòºlÉ <È ³ýÉÆ SÉÌSÉEòɨ¤ÉÉnäù´ÉÒ°üÊ{ÉhÉÓ <È ³ýÉÆ ¨Éɽäþ·ÉªÉǨ¤ÉÉ ºÉʽþiÉ <Æ ³Æý SÉÌSÉEòÉxÉxnùxÉÉlÉ°üÊ{ÉhÉÆ <Æ ³Æý ¯û¯û¦Éè®ú´É º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÊ®ú´ÉÉ®úɹ]õEÆò: 4.एकावलि 17.®úHò´ÉhÉÇ ¤É̽þ´ÉɽþxÉ ³ýÉÆ <³ýÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ³ýÉÆ <³ýÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 136 .{ÉÒiÉ´ÉhÉÇ ¶É´É´ÉɽþxÉ IÉ: IÉ{ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ IÉÆ IÉ{ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +ÉMxÉäªÉɹ]õEÆò4.+ÊiÉMÉÉè®ú´ÉhÉÇ @ñIÉ´ÉɽþxÉ IÉÓ @ñIÉEòhªÉȤÉÉ ºÉʽþiÉ ËIÉ @ñIÉEòhÉÉÇxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ EÚò¨ÉÇ´ÉɽþxÉ I±ÉßÆ IɪÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ I±ÉÞÆ IɪÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¤É§ÉÖ´ÉhÉÇ ½þªÉ´ÉɽþxÉ IÉé Ê{ÉRÂóMÉÉIªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ IÉå Ê{ÉRÂóMÉÉIÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

SÉxpù´ÉhÉÇ ¯û¯û´ÉɽþxÉ ³ßýÆ ±ÉÉä±ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ³ÞýÆ ±ÉÉä±ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¶ÉÉähÉ´ÉhÉÇ º´ÉxÉÉlÉ{ɪÉÇRÂóEòºlÉÉ ³éý ±ÉRÂóEòä ·ÉªÉȤÉÉ ºÉʽþiÉ ³åý ±ÉRÂóEòä ·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 4.EÞò¹hÉ´ÉhÉÇ +VÉ´ÉɽþxÉ ½þÉÆ ½ÖþiÉɶÉxªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ½Æþ ½ÖþiÉɶÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.®úHò´ÉhÉÇ º´ÉxÉÉlÉ{ɪÉÇRÂóEòºlÉÉ ²±ÉßÆ ±ÉRÂóEòÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ²±ÉÞÆ ±ÉRÂóEòÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.®úHò´ÉhÉÇ ¨ÉÚʹÉEò´ÉɽþxÉ ³ÚýÆ ±ÉÉ´Éɨ¤ÉÉ ºÉʽþiÉ ³ÖýÆ ±ÉÉ´ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.®úHò´ÉhÉÇ ªÉIÉ´ÉɽþxÉ ³ýÓ ±ÉÒ±ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ Ë³ý ±ÉÒ±ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.®úHò´ÉhÉÇ Êuù´É´ÉɽþxÉ ³ý: Eò±É¶ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ³Æý Eò±É¶ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ªÉɨªÉɹ]õEÆò 4-EòÉè±ÉÉ{ÉÖ®úÒIÉäjÉä Eèò´ÉÌiÉxÉÒ{ÉÖªÉÉÈ {ÉÚhÉÇÊMÉÊ®ú{ÉÒ`äö =bÖ÷¨¤É®ú´ÉÞIÉä ºÉÖ®úʦɨÉÖpùɪÉÉÆ ´ÉμxɨÉhb÷±Éä SÉxpùʶɱÉÉiÉɱɴɱªÉÉÆ ¨ÉÉƺÉxÉÉʦÉSÉGòºlÉ >Æð ½þÉÆ ªÉÉäMÉä·ÉªÉǨ¤ÉÉnäù´ÉÒ °üÊ{ÉhÉÓ >Æð ½þÉÆ EòÉè¨ÉɪÉǨ¤ÉÉ ºÉʽþiÉ =Æ ½Æþ ªÉÉäMÉä·É®úÉxÉxnùxÉÉlÉ°üÊ{ÉhÉÆ =Æ ½Æþ SÉhb÷¦Éè®ú´Éº´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÊ®ú´ÉÉ®úɹ]õEÆò: 4.+ʺÉiÉ´ÉhÉÇ º´ÉxÉÉlÉ{ɪÉÇRÂóEòºlÉÉ ½ßþÆ ´Éb÷´ÉɨÉÖJªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¾Æþ ´Éb÷´ÉɨÉÖJÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ʺÉiÉ´ÉhÉÇ ªÉÖ´ÉiÉÒ´ÉɽþxÉ ¶ÉÚEò®úɺªÉ ½þÓ Ê´É¶ÉɱÉÉIªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ Ë½þ ʴɶÉɱÉÉIÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ʺÉiÉ´ÉhÉÇ JÉ®ú´ÉɽþxÉ ¼±ÉßÆ ¨É½þÉänù®úÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¼±ÉÞÆ ¨É½þÉänù®úÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 137 .®úHò´ÉhÉÇ EòÉä±É´ÉɽþxÉ ³ýÉé ±ÉɱɺÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ³ýÉå ±ÉɱɺÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ʺÉiÉ´ÉhÉÇ ¨ÉÒxÉ´ÉɽþxÉ ¨ÉÒxÉɺªÉ ½ÚþÆ ½ÚþÆEòɪÉȤÉÉ ºÉʽþiÉ ½ÖþÆ ½ÚþÆEòÉ®úÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

EÞò¹hÉ´ÉhÉÇ +¤VɺlÉ ºÉßÆ @ñM´ÉänùÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ºÉÞÆ @ñM´ÉänùÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.EÞò¹hÉ´ÉhÉÇ MÉÞwÉ´ÉɽþxÉ nùÊIÉhÉäÊJÉÎRÂóJÉ®úÒºÉäÊ´ÉiÉ ½þ: ±ÉäʱɽþÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ½þÆ ±ÉäʱɽþÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ÊxÉ@ñiªÉ¹]õEÆò 4-+]Âõ]õ½þɺÉIÉäjÉä EÖòÊ]õxÉÒ{ÉÖªÉÉÈ EÖò±ÉÉxiÉEò{ÉÒ`äö +·ÉilÉ´ÉÞIÉä IÉÉäʦÉhÉÒ¨ÉÖpùɪÉÉÆ ºÉÊ±É±É ¨Éhb÷±Éä ¶Éɨ¤É®ú¦Éänù´É±ªÉÉÆ ºxÉɪÉÖ ¾þnùªÉSÉGòºlÉ AÆñ ºÉÉÆ ½þÊ®úʺÉrùɨ¤ÉÉnäù´ÉÒ°üÊ{ÉhÉÓ Añ ºÉÉÆ ´Éè¹hÉ´ªÉ¨¤ÉÉ ºÉʽþiÉ @Æñ ºÉÆ ½þÊ®úʺÉrùÉxÉxnùxÉÉlÉ°üÊ{ÉhÉÆ GòÉävɦÉè®ú´É º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÊ®ú´ÉÉ®úɹ]õEÆò: 4.+ʺÉiÉ´ÉhÉÇ |ÉäiÉ´ÉɽþxÉ ºÉÉÆ ºÉ´ÉÇYÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ºÉÆ ºÉ´ÉÇYÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+ʺÉiÉ´ÉhÉÇ ÊuùVɶɴÉ{ÉÞ¹`öÉ°üfø ºÉ: Eò±ÉÉvÉ®úÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ºÉÆ Eò±ÉÉvÉ®úÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉɯûhÉɹ]õEÆò 4-VɪÉÎxiÉEòÉIÉäjÉä MÉhb÷EòÒ{ÉÖªÉÉÈ SÉÉè½þÉ®ú{ÉÒ`äö ʴɦÉÒiÉEò´ÉÞIÉä pùÉÊ´ÉhÉÒ¨ÉÖpùɪÉÉÆ {ÉÞl´ÉÒ¨Éhb÷±Éä +¨¤É®úªÉÉäMɴɱªÉÉÆ +κlÉEòh`öSÉGòºlÉ ±ÉßÆ ¹ÉÉÆ ¦ÉÎ]Âõ]õxªÉ¨¤ÉÉnäù´ÉÒ°üÊ{ÉhÉÓ ±ÉßÆ ¹ÉÉÆ 138 .ʺÉiÉ´ÉhÉÇ ¨Éʽþ¹É´ÉɽþxÉ ¨Éʽþ¹ÉɺªÉ ½éþ ¨É½þÒÊiÉRÂóMªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ½åþ ¨É½þÒiÉÖRÂóMÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ʺÉiÉ´ÉhÉÇ Vɨ¤ÉÖEò´ÉɽþxÉ ½þÉé GòÉävÉxÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ½þÉå GòÉävÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+ʺÉiÉ´ÉhÉÇ MÉÉävÉÉ´ÉɽþxÉ ºÉÓ iÉ®ú±ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ËºÉ iÉ®ú±ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.EÞò¹hÉ´ÉhÉÇ =±ÉÚEò´ÉɽþxÉ ºÉÚÆ iÉÉ®úÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ºÉÖÆ iÉÉ®úÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+ʺÉiÉ´ÉhÉÇ ¶É´É´ÉɽþxÉ ºÉé ºÉƽþÉÊ®úhªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ºÉå ºÉƽþÉÊ®úhÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.EÞò¹hÉ´ÉhÉÇ ÊUôzɽþºiɶɴÉÉ°üfø ºÉÉé ºÉÉ®úÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ºÉÉå ºÉÉ®úÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+ʺÉiÉ´ÉhÉÇ Eò¤ÉxvÉ´ÉɽþxÉ iÉÖ®úMÉÉxÉxÉxÉ º±ÉßÆ ½þªÉÉxÉxÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ º±ÉÞÆ ½þªÉÉxÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 4.

º¡òÊ]õEò´ÉhÉÇ Mɯûb÷´ÉɽþxÉ ¹ÉÉÆ iÉɱÉVÉRÂóPÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¹ÉÆ iÉɱÉVÉRÂóPÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.·ÉäiÉ´ÉhÉÇ ´ÉÞ¹ÉnÆù¶ÉÉ°üfø ¹É: ´É®ú|ÉnùÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¹ÉÆ ´É®ú|ÉnùÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉɪɴªÉɹ]õEÆò4-SÉÉÊ®újÉIÉäjÉä ®úVÉxÉÒ{ÉÖªÉÉÈ VÉɱÉxvÉ®ú{ÉÒ`äö Êxɨ¤É´ÉÞIÉä +ÆEÖò¶É¨ÉÖpùɪÉÉÆ +ÎMxɨÉhb÷±Éä EÖòʱɶɦÉänù´É±ªÉÉÆ ¨ÉVVÉɨÉÖJÉSÉGòºlÉ Bá ¶ÉÉÆ ÊEòʱÉÊEò±Éɨ¤ÉÉnäù´ÉÒ°üÊ{ÉhÉÓ Bå ¶ÉÉÆ <xpùÉhªÉ¨¤ÉÉ ºÉʽþiÉ BÆ ¶ÉÆ ÊEòʱÉÊEò±ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ °üÊ{ÉhÉÆ BÆ ¶ÉÆ Eò{ÉɱɦÉè®ú´Éº´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÊ®ú´ÉÉ®úɹ]õEÆò: 4.½äþ¨É´ÉhÉÇ EÞò¹hɨÉÞMÉ´ÉɽþxÉ ¶ÉÓ SÉxpù´ÉiªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ Ë¶É SÉxpù´ÉiÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.º¡òÊ]õEò´ÉhÉÇ xÉGò´ÉɽþxÉ ¹Éé |ÉSÉhb÷ÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¹Éå |ÉSÉhb÷ÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ MÉVÉ´ÉɽþxÉ ¶ÉÚÆ |É{É\SÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¶ÉÖÆ |É{É\SÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 139 .SÉxpù´ÉhÉÇ MÉhb÷´ÉɽþxÉ ¹ÉÓ ®úHòÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ Ë¹É ®úHòÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि ´ÉÉ®úÉÁƤÉÉ ºÉʽþiÉ ±ÉÞÆ ¹ÉÆ ¦ÉÎ]Âõ]õxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ°üÊ{ÉhÉÆ ±ÉÞÆ ¹ÉÆ =x¨ÉkɦÉè®ú´É º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÊ®ú´ÉÉ®úɹ]õEÆò: 4.¶ÉÖC±É´ÉhÉÇ ¨ÉÒxÉ´ÉɽþxÉ ¹ÉÉé EòɱÉEòhªÉȤÉÉ ºÉʽþiÉ ¹ÉÉå EòɱÉEòhÉÉÇxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.SÉxpù´ÉhÉÇ VɱÉè´ÉÞiÇ É iÉÊb÷x¨Éhb÷±É PÉxÉ´ÉɽþxÉ ¹±ÉßÆ ¨ÉäPÉ{ÉÉnùÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¹±ÉÞÆ ¨ÉäPÉ{ÉÉnùÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ ½ÆþºÉ´ÉɽþxÉ ¶ÉÉÆ SÉxpùÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¶ÉÆ SÉxpùÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.·ÉäiÉ´ÉhÉÇ OÉɽþ´ÉɽþxÉ UôjɦÉÞtÖ´ÉiÉÒªÉÖMɺÉʽþiÉ ¹ÉßÆ Eò®úÎRÂóEòhªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¹ÉÞÆ Eò®úÎRÂóEòhÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ʺÉiÉ´ÉhÉÇ SÉGò´ÉɽþxÉ ¹ÉÚÆ Ê´ÉtÖÎVVɼ´ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¹ÉÖÆ Ê´ÉtÖÎVVɼ´ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

MÉÉè®ú´ÉhÉÇ EòÊ{É´ÉɽþxÉ Eò{ªÉɺªÉ ¶ÉßÆ |ɪÉÉÎxiÉEòÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¶ÉÞÆ |ɪÉÉÎxiÉEòÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Ê{ÉRÂóMɱɴÉhÉÇ ¨ÉÞMÉ´ÉɽþxÉ ¶±ÉßÆ Ê{ÉSÉÖ´ÉCjÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¶±ÉÞÆ Ê{ÉSÉÖ´ÉCjÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.{ÉÒiÉ´ÉhÉÇ ®úlÉÉ°üfø ¶É: ±ÉÉä±ÉÖ{ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¶ÉÆ ±ÉÉä±ÉÖ{ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: =kÉ®úɹ]õEÆò4-BEòÉ©ÉIÉäjÉä ʶÉα{ÉxÉÒ{ÉÖªÉÉÈ =b÷¬ÉhÉ{ÉÒ`äö Eò®ú\VÉ´ÉÞIÉä ±ÉäʱɽþÉxɨÉÖpùɪÉÉÆ ´ªÉÉÊ{ÉEòɨÉhb÷±Éä ®úHò´ÉhÉǴɱªÉÉÆ ¶ÉÖC±ÉxÉɺɺªÉÉxÉxÉSÉGòºlÉ +Éé ´ÉÉÆ EòɱɮúÉjªÉ¨¤ÉÉ näù´ÉÒ°üÊ{ÉhÉÓ +Éé ´ÉÉÆ SÉɨÉÖhb÷ɨ¤ÉÉ ºÉʽþiÉ +Éá ´ÉÆ EòɱɮúÉjÉÉxÉxnùxÉÉlÉ °üÊ{ÉhÉÆ +Éá ´ÉÆ ¦ÉÒ¹ÉhɦÉè®ú´Éº´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÊ®ú´ÉÉ®úɹ]õEÆò: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ {ÉÖ¹{ɺlÉ ´ÉÉÆ ´É¨ÉxªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ´ÉÆ ´É¨ÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ =¹]Åõ´ÉɽþxÉ ´ÉÉé Ê´ÉEÞòiÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ´ÉÉå Ê´ÉEÞòiÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 140 .एकावलि 4.{ÉÒiÉ´ÉhÉÇ +ÉJÉÖ´ÉɽþxÉ ´ÉÓ ´ÉɨÉxªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ Ë´É ´ÉɨÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ ºÉ{ÉÇ´ÉɽþxÉ ºÉ{ÉÉǺªÉ ´ÉÚÆ iÉ{ÉxªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ´ÉÖÆ iÉ{ÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.{ÉÒiÉ´ÉhÉÇ ÊºÉÀ´ÉɽþxÉ ´ÉßÆ iÉÉ{ÉxªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ´ÉÞÆ iÉÉ{ÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ ºªÉäxÉ´ÉɽþxÉ ¶Éé Ê{ɶÉÉSªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¶Éå Ê{ɶÉÉSÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¤É§ÉÖ´ÉhÉÇ JÉ®ú´ÉɽþxÉ ¶ÉÉé Ê{ÉʶÉiÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ¶ÉÉå Ê{ÉʶÉiÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.iÉɱɴÉhÉÇ Êuù½ÆþºÉ®úlÉ´ÉɽþxÉ ´±ÉßÆ Ê´ÉEÞòiÉÉxÉxÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ´±ÉÞÆ Ê´ÉEÞòiÉÉxÉxÉÉxÉxnù xÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.MÉÉè®ú´ÉhÉÇ ¦ÉɺɴÉɽþxÉ ´Éé ¤ÉÞ½þiEÖòIªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ´Éå ¤ÉÞ½þiEÖòIÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

IÉÒ®ú´ÉhÉÇ ¶ÉEò]õ½þxÉ ±ÉßÆ ªÉ¨ÉÉÎxiÉEòÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ±ÉÞÆ ªÉ¨ÉÉÎxiÉEòÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½äþ¨É´ÉhÉÇ ´ÉÒxpùÉ°üfø ´É: Ê´É·É°üÊ{ÉhªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ´ÉÆ Ê´É·É°üÊ{ÉhÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: Bä¶ÉÉxªÉɹ]õEÆò4-näù´ÉÒEòÉä]õIÉäjÉä ºÉ]õÒxÉÉ{ÉÖªÉÉÈ näù´ÉÒEòÉä]õ{ÉÒ`äö Eònù¨¤É´ÉÞIÉä ¦ÉäÊEò¨ÉÖpùɪÉÉÆ Ê¶É´É ¨Éhb÷±Éä ±É¨{É]õɴɱªÉÉÆ GòÉävɱɱÉÉ]õSÉGòºlÉ +: ±ÉÉÆ ¦ÉÒ¹ÉhÉɨ¤ÉÉnäù´ÉÒ°üÊ{ÉhÉÓ +: ±ÉÉÆ ¨É½þɱÉI¨ªÉ¨¤ÉÉ ºÉʽþiÉ +Æ ±ÉÆ ¦ÉÒ¹ÉhÉÉxÉxnùxÉÉlÉ °üÊ{ÉhÉÆ +Æ ±ÉÆ ºÉƽþÉ®ú¦Éè®ú´É º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÊ®ú´ÉÉ®úɹ]õEÆò: 4.·ÉäiÉ´ÉhÉÇ +·É´ÉɽþxÉ xÉÉxÉɦÉÚiÉÉ´ÉÞiÉ ±ÉÚÆ nÖùVÉǪÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ±ÉÖÆ nÖùVÉǪÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.EÖòxnù´ÉhÉÇ ¶É´É´ÉɽþxÉ ±ÉÉé |ÉäiÉxÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ±ÉÉå |ÉäiÉxÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.·ÉäiÉ´ÉhÉÇ ´É޹ɴÉɽþxÉ ±ÉÓ VɪÉxiªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ Ë±É VɪÉxiÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.·ÉäiÉ´ÉhÉÇ ´ÉÞ¹ÉÉ°üfø ±É: Ê´ÉVɪÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ±ÉÆ Ê´ÉVɪÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 141 .ʺÉiÉ´ÉhÉÇ |ÉäiÉ´ÉɽþxÉ ±Éé ®äú´ÉiªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ±Éå ®äú´ÉiÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Eò®úɱɴÉhÉÇ ¨Éʽþ¹É´ÉɽþxÉ ±ÉÉÆ ªÉ¨ÉÊVɼ´ÉÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ±ÉÆ ªÉ¨ÉÊVɼ´ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 4.ʺÉiÉ´ÉhÉÇ ¨ÉÉVÉÉÇ®ú´ÉɽþxÉ ±±ÉßÆ Ê´Éb÷ɱªÉƤÉÉ ºÉʽþiÉ ±±ÉÞÆ Ê´Éb÷ɱÉÉxÉxnùxÉÉlÉ º´É°ü{É EòɨÉä·É®úÒ EòɨÉä·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

EòɨÉä·ÉªÉê Ê´ÉnÂù¨É½äþ ´ÉÉMÉҷɪÉê vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ´ÉÉSÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ* 4-EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó C±¿Ó EòɨÉä·É®úÒ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪ ÉÉ欃 xɨÉ: ¨ÉÉäÊnùxÉÒ 4-®úHòɶÉÉäEò|ɺÉÚxÉɦÉÉÆ =bÖ÷®úÉVÉभन्त्ृ म लिनीां ®úHòÉƤɮú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ®úixÉ ¦ÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉÆ* ¶É®úSÉÉ{É-ºÉnÂù´ÉÒhÉÉ {ÉÖºiÉEòvÉ®úÉÆ ®ú½þºªÉxÉɨɺɽþ»ÉMÉÉxÉÊxÉ{ÉÖhÉÉÆ ¦É´É®úÉäMÉÊ´ÉxÉÉʶÉxÉÓ** x´±ÉÓ¤ÉÒVÉ|ÉEòÉʶÉiÉÉÆ ´ÉºÉÖEòÉähÉɤVÉ Êxɱɪɮú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ nùIɾþnùªÉºlÉÉÆ* ºÉÖJÉiÉi´Éº´É°üÊ{ÉhÉÓ iÉÉÆ |ɺÉzÉ´ÉnùxÉÉÆ ºÉnùÉ ¾þÊnù ÊSÉxiɪÉÉ欃 ´ÉÉSÉÉ ¨ÉÉäÊnùxÉÓ ** 4.¨ÉÉäÊnùxªÉè Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¨É½þÉ´ÉÉhªÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ´ÉÉSÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ* 4-SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ x´±ÉÓ ¨ÉÉäÊnùxÉÒ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 142 .´ÉʶÉxªÉè Ê´ÉnÂù¨É½äþ {ÉÖºiÉEò½þºiÉɪÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ´ÉÉSÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ * 4-+Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éá +Éé +Æ +: ¤±ÉÚÈ ´ÉʶÉxÉÒ ´ÉÉMnä ù´ÉiÉÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: EòɨÉä·É®úÒ 4-®úHòɶÉÉäEò|ɺÉÚxÉɦÉÉÆ =bÖ÷®úÉVÉभन्त्ृ म लिनीां ®úHòÉƤɮú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ®úixÉ ¦ÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉÆ* ¶É®úSÉÉ{É-ºÉnÂù´ÉÒhÉÉ {ÉÖºiÉEòvÉ®úÉÆ ®ú½þºªÉxÉɨɺɽþ»ÉMÉÉxÉÊxÉ{ÉÖhÉÉÆ ¦É´É®úÉäMÉÊ´ÉxÉÉʶÉxÉÓ** C±¿Ó¤ÉÒVÉ|ÉEòÉʶÉiÉÉÆ ´ÉºÉÖEòÉähÉɤVÉ Êxɱɪɮú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ nùIÉEòh`öºlÉÉÆ* =¹hÉiÉi´Éº´É°üÊ{ÉhÉÓ iÉÉÆ |ɺÉzÉ´ÉnùxÉÉÆ ºÉnùÉ ¾þÊnù ÊSÉxiɪÉÉ欃 ´ÉÉSÉÉ EòɨÉä·É®úÓ ** 4.एकावलि 18.ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉ ºÉ´ÉÇ®úÉäMɽþ®úSÉGäò ´ÉʶÉxªÉÉÊnù vªÉÉxÉ-{ÉÚVÉxÉÆ ´ÉʶÉxÉÒ 4-®úHòɶÉÉäEò|ɺÉÚxÉɦÉÉÆ =bÖ÷®úÉVÉभन्त्ृ म लिनीां ®úHòÉƤɮú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ®úixÉò¦ÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉÆ* ¶É®úSÉÉ{É-ºÉnÂù´ÉÒhÉÉ {ÉÖºiÉEòvÉ®úÉÆ ®ú½þºªÉxÉɨɺɽþ»ÉMÉÉxÉÊxÉ{ÉÖhÉÉÆ ¦É´É®úÉäMÉÊ´ÉxÉÉʶÉxÉÓ** ¤±ÉÚ¤È ÉÒVÉ|ÉEòÉʶÉiÉÉÆ ´ÉºÉÖEòÉähÉɤVÉ Êxɱɪɮú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ nùIÉÊSɤÉÖEòºlÉÉÆ* ¶ÉÒiÉiÉi´Éº´É°üÊ{ÉhÉÓ iÉÉÆ ºÉÖ|ɺÉzÉ´ÉnùxÉÉÆ ºÉnùÉ ¾þÊnù ÊSÉxiɪÉÉ欃 ´ÉÉSÉÉ ´ÉʶÉxÉÓ ** 4.

+¯ûhÉɪÉè Ê´ÉnÂù¨É½äþ ·ÉäiÉ´ÉhÉÉǪÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ´ÉÉSÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ* 4-iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ V©ÉÓ +¯ûhÉÉ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: VÉʪÉxÉÒ 4-®úHòɶÉÉäEò|ɺÉÚxÉɦÉÉÆ =bÖ÷®úÉVÉभन्त्ृ म लिनीां ®úHòÉƤɮú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ®úixÉ ¦ÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉÆ* ¶É®úSÉÉ{É-ºÉnÂù´ÉÒhÉÉ {ÉÖºiÉEòvÉ®úÉÆ ®ú½þºªÉxÉɨɺɽþ»ÉMÉÉxÉÊxÉ{ÉÖhÉÉÆ ¦É´É®úÉäMÉÊ´ÉxÉÉʶÉxÉÓ** ¼º±´ªÉÚ¤Æ ÉÒVÉ|ÉEòÉʶÉiÉÉÆ ´ÉºÉÖEòÉähÉɤVÉ Êxɱɪɮú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ ´ÉɨɾþnùªÉºlÉÉÆ* ºÉi´ÉMÉÖhÉ°ü{ÉÉÆ iÉÉÆ ºÉÖ|ɺÉzÉ´ÉnùxÉÉÆ ºÉnùÉ ¾þÊnù ÊSÉxiɪÉÉ欃 ´ÉÉSÉÉ VÉʪÉxÉÓ ** 4.ºÉ´Éæ·ÉªÉê Ê´ÉnÂù¨É½äþ ºÉ´ÉÇ´ÉÉMÉÒ¶ªÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ´ÉÉSÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ* 4-ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ Z©ÉÓ ºÉ´Éæ·É®úÒ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 143 .एकावलि ʴɨɱÉÉ 4-®úHòɶÉÉäEò|ɺÉÚxÉɦÉÉÆ =bÖ÷®úÉVÉभन्त्ृ म लिनीां ®úHòÉƤɮú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ®úixÉ ¦ÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉÆ* ¶É®úSÉÉ{É-ºÉnÂù´ÉÒhÉÉ {ÉÖºiÉEòvÉ®úÉÆ ®ú½þºªÉxÉɨɺɽþ»ÉMÉÉxÉÊxÉ{ÉÖhÉÉÆ ¦É´É®úÉäMÉÊ´ÉxÉÉʶÉxÉÓ** ª±ÉÚ¤Æ ÉÒVÉ|ÉEòÉʶÉiÉÉÆ ´ÉºÉÖEòÉähÉɤVÉ Êxɱɪɮú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ nùIÉxÉÉʦɺlÉÉÆ* nÖù:JÉiÉi´Éº´É°üÊ{ÉhÉÓ iÉÉÆ ºÉÖ|ɺÉzÉ´ÉnùxÉÉÆ ºÉnùÉ ¾þÊnù ÊSÉxiɪÉÉ欃 ´ÉÉSÉÉ Ê´É¨É±ÉÉÆ ** 4.VÉʪÉxªÉè Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¨É½þÉ´ÉÉMÉÒ¶ªÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ´ÉÉSÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ* 4-{ÉÆ ¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ ¼º±´ªÉÚÆ VÉʪÉxÉÒ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉ´Éæ·É®úÒ 4-®úHòɶÉÉäEò|ɺÉÚxÉɦÉÉÆ =bÖ÷®úÉVÉभन्त्ृ म लिनीां ®úHòÉƤɮú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ®úixÉ ¦ÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉÆ* ¶É®úSÉÉ{É-ºÉnÂù´ÉÒhÉÉ {ÉÖºiÉEòvÉ®úÉÆ ®ú½þºªÉxÉɨɺɽþ»ÉMÉÉxÉÊxÉ{ÉÖhÉÉÆ ¦É´É®úÉäMÉÊ´ÉxÉÉʶÉxÉÓ** Z©ÉÓ¤ÉÒVÉ|ÉEòÉʶÉiÉÉÆ ´ÉºÉÖEòÉähÉɤVÉ Êxɱɪɮú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ ´ÉɨÉEòh`öºlÉÉÆ* ®úVÉÉäMÉÖhÉ°ü{ÉÉÆ iÉÉÆ ºÉÖ|ɺÉzÉ´ÉnùxÉÉÆ ºÉnùÉ ¾þÊnù ÊSÉxiɪÉÉ欃 ´ÉÉSÉÉ ºÉ´Éæ·É®úÓ ** 4.ʴɨɱÉɪÉè Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¨ÉɱÉÉvÉ®úɪÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ´ÉÉSÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ* 4-]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ ª±ÉÚÊÆ ´É¨É±ÉÉ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +¯ûhÉÉ 4-®úHòɶÉÉäEò|ɺÉÚxÉɦÉÉÆ =bÖ÷®úÉVÉभन्त्ृ म लिनीां ®úHòÉƤɮú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ®úixÉ ¦ÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉÆ* ¶É®úSÉÉ{É-ºÉnÂù´ÉÒhÉÉ {ÉÖºiÉEòvÉ®úÉÆ ®ú½þºªÉxÉɨɺɽþ»ÉMÉÉxÉÊxÉ{ÉÖhÉÉÆ ¦É´É®úÉäMÉÊ´ÉxÉÉʶÉxÉÓ** V©ÉÓ¤ÉÒVÉ|ÉEòÉʶÉiÉÉÆ ´ÉºÉÖEòÉähÉɤVÉ Êxɱɪɮú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ ´ÉɨÉxÉÉʦɺlÉÉÆ* <SUôÉiÉi´Éº´É°üÊ{ÉhÉÓ iÉÉÆ ºÉÖ|ɺÉzÉ´ÉnùxÉÉÆ ºÉnùÉ ¾þÊnù ÊSÉxiɪÉÉ欃 ´ÉÉSÉÉ +¯ûhÉÉÆ** 4.

एकावलि EòÉèʱÉxÉÒ 4-®úHòɶÉÉäEò|ɺÉÚxÉɦÉÉÆ =bÖ÷®úÉVÉभन्त्ृ म लिनीां ®úHòÉƤɮú»ÉMÉɱÉä{ÉÉÆ ®úixÉ ¦ÉÚ¹ÉhɦÉÚʹÉiÉÉÆ* ¶É®úSÉÉ{É-ºÉnÂù´ÉÒhÉÉ {ÉÖºiÉEòvÉ®úÉÆ ®ú½þºªÉxÉɨɺɽþ»ÉMÉÉxÉÊxÉ{ÉÖhÉÉÆ ¦É´É®úÉäMÉÊ´ÉxÉÉʶÉxÉÓ** IÉ ©ªÉÚ¤Æ ÉÒVÉ|ÉEòÉʶÉiÉÉÆ ´ÉºÉÖEòÉähÉɤVÉ Êxɱɪɮú½þºªÉªÉÉäÊMÉxÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉÆ ´ÉɨÉÊSɤÉÖEòºlÉÉÆ* iɨÉÉäMÉÖhÉ°ü{ÉÉÆ iÉÉÆ ºÉÖ|ɺÉzÉ´ÉnùxÉÉÆ ºÉnùÉ ¾þÊnù ÊSÉxiɪÉÉ欃 ´ÉÉSÉÉ EòÉèʱÉxÉÓ ** 4.ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùɪÉè Ê´ÉnÂù¨É½äþ EòɨÉä·ÉªÉê vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉ: ÎC±ÉzÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ * 4-¿Ó ¸ÉÓ ºÉÉè: ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùÉSÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¦ÉÖÊHòʺÉÊrù 4-®úHò´ÉhÉÉÈ SÉxpù®äúJÉÉÆ SÉiÉÖ½ÇþºiÉÉÆ ÊºÉrùÉ\VÉxÉÊSÉxiÉɨÉÊhɶÉÚ±ÉEò{ÉɱÉvÉÉÊ®úhÉÓ * ÊjÉxɪÉxÉÉÆ ¦ÉHäò¹]õnùÉÆ |ɺÉzÉÉÆ näù´ÉÓ ¦ÉÖÊHòʺÉËrù ºÉnùÉ ¾þÊnùÊSÉxiɪÉɨªÉ½Æþ** 4-¦ÉÖÊHòʺÉnÂùvªÉè Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¨É½þÉʺÉnÂùvªÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉ ÊºÉÊrù: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ * 4-¦ÉÖÆ ¦ÉÖÊHòʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉ´ÉÇJÉäSÉ®úÒ¨ÉÖpùÉ 4-ʺÉxnÚù®ú´ÉhÉÉÈ ®úCi´ÉºjÉÉÆ >ðv´ÉǽþºiÉä-JÉbÂ÷MÉÆ-JÉä]õEÆò * +vÉÉä½þºiÉuùªÉä-¨ÉÖpùÉÎRÂóEòiÉÉÆ JÉäSÉ®úÓ ºÉnùÉ%%¸ÉªÉä½Æþ** 4-ºÉ´ÉÇJÉäSɪÉê Ê´ÉnÂù¨É½äþ MÉMÉxÉ´ÉhÉÉǪÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ¨ÉÖpùÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ * 4-¼ºJ£áò ºÉ´ÉÇJÉäSÉ®úÒ¨ÉÖpùÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 144 .EòÉèʱÉxÉÒnäù´ªÉè Ê´ÉnÂù¨É½äþ EÖò³ý¨ÉÉMÉÇMÉɪÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ´ÉÉSÉÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ* 4-¶ÉÆ ¹ÉÆ ºÉÆ ½Æþ ³Æý IÉÆ IÉ ©ªÉÚÆ EòÉèʱÉxÉÒ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉnäù´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: SÉGäò·É®úÒ ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùÉ 4-¶É֧ɴÉhÉÉÈ ·ÉäiɴɺjÉÉÆ ¦ÉÖÊHòʺÉÊrùºÉ¨ÉÎx´ÉiÉÉÆ ÊjÉxɪÉxÉÉÆ {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶É Eò{ÉɱÉɦɪÉvÉÉÊ®úhÉÓ * ®ú½þºªÉªÉÉäÊMÉxªÉÉ´ÉÞiÉÉÆ ºÉ´ÉÇ®úÉäMɽþ®úSÉGäò¶ÉÓ JÉäSÉ®úÒ¨ÉÖpùÉä®ú®úÒEÞòiÉÉÆ ÊjÉ{ÉÖ®úÉʺÉrùɨÉɸɪÉä ** 4.

¾þnùªÉɪÉ.´É¹É]Âõ 4-¿þ¬-é +xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ 4-¿þ¬Éé-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ 4-¿þ¬:-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ {ÉÖxÉ: +RÂóMÉÖ±ÉÒ xªÉɺÉ: 4-¿þ¬Æ ºÉÚªÉÉÇªÉ ¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ xɨÉ: 4-Ë¿þ¬ ¦ÉɺEò®úÉªÉ iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ xɨÉ: 4-¿þ¬ÆÖ ¦ÉÉxÉ´Éä +RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ xɨÉ: 4-¿þ¬å ®ú´ÉªÉä +xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ xɨÉ: 4.¿þ¬Éá Ênù´ÉÉEò®úÉªÉ EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ xɨÉ: {ÉÖxÉ: näù½äþ 4-¿þ¬Æ ºÉÚªÉÉÇªÉ Ê¶É®úºÉä xɨÉ: 4-Ë¿þ¬ ¦ÉɺEò®úÉªÉ ´ÉnùxÉÉªÉ xɨÉ: 4-¿þ¬ÆÖ ¦ÉÉxÉ´Éä ¾þnùªÉÉªÉ xɨÉ: 4-¿þ¬å ®ú´ÉªÉä MÉÖÁÉªÉ xɨÉ: 4.ʶɮúºÉä.º´ÉɽþÉ 4-¿þ¬ÆÚ -¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.xɨÉ: 4-¿þ¬Ó -iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.a¨ÉÉiÉÇhb÷ ¦Éè®ú´É {ÉÚVÉxÉÆ +ºªÉ ¸ÉÒ¨ÉÉiÉÇhb÷ ¦Éè®ú´É ¨É½þɨÉxjɺªÉ ¥ÉÀÉ @ñʹÉ: ÊxÉSÉÞnùÂMÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉÒ¨ÉÉiÉÇhb÷ ¦Éè®ú´ÉÉä näù´ÉiÉÉ ½Æþ ¤ÉÒVÉ¨É Ê¤ÉxnÖù: ¶ÉÊHò: ®Æú EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¸ÉÒ¨ÉÉiÉÇhb÷¦Éè®ú´É |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: 4-¿þ¬ÉÆ-+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.¿þ¬Éá Ênù´ÉÉEò®úÉªÉ {ÉÉnùÉªÉ xɨÉ: 145 .एकावलि 18.

SÉGÆò ¶ÉËHò ºÉ {ÉɶÉÆ ºÉÞÊhɨÉÊiÉ ¯ûÊ´É®úÉIɨÉɱÉÉÆ Eò{ÉɱÉÆ* ½þºiÉɨ¦ÉÉäVÉè nÇùvÉÉxÉÆ ÊjÉxɪÉxÉ Ê´É±ÉºÉuäùnù´ÉCjÉÉʦɮúɨÉÆ ¨ÉÉiÉÇhbÆ÷ ´É±±É¦ÉÉrÈù ¨ÉÊhÉ¨ÉªÉ ¨ÉÖEÖò]Æõ ½þÉ®únùÒ{iÉÆ ¦ÉVÉɨÉ:** º´ÉhÉÉÇ{ÉÉäiÉVÉ{ÉÉÊxɦÉÆ ÊjÉxɪÉxÉÆ ¨ÉÖHòɱɺÉrùÉÊ®úhÉÆ -JÉ]Âõ´ÉÉRÂóMÉÉÊ®ú MÉÖhÉÉÆiÉlÉÉ VÉ{É´É]õÓ {ÉnÂù¨ÉÆ SÉ ¶ÉCiªÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÉè*½þºiÉɤVÉè: nùvÉiÉÆ Eò{ÉɱɨɨɱÉÆ ºÉuù±±É¦ÉÉʱÉÎRÂóMÉiÉÆ ¨ÉÉiÉÇhbÆ÷ ¨ÉÊhɤÉrù ®ú¨ªÉ ¨ÉÖEÖò]Æõ vªÉɪÉäSSÉ ´ÉänùÉxÉxÉÆ** ¨ÉÚ±ÉÆ: Ë`Åö ¿þ¬Éè=Æ Ë`Åö |ÉEò¶É ¶ÉÊHò ºÉʽþiÉ ¨ÉÉiÉÇhb÷¦Éè®ú´É ¸ÉÒ {ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 146 .एकावलि vªÉÉxÉÆ: ½äþ¨Éɨ¦ÉÉäVÉ |É´Éɳý |ÉÊiÉ¨É ÊxÉVÉ ¯ûËSÉ SÉɯû JÉ]Âõ´ÉÉRÂóMÉ {ÉnÂù¨ÉÉè.

एकावलि 19.$ Bå ÀÉé ¸ÉÓ pùÉÆ EÆò OɽþÉÊvÉ®úÉVÉÉªÉ ¦ÉÉè¨ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ ÊEò®úÒÊ]xÉ ®úHò´ÉhÉÇ ®úHò¶ÉÚ±ÉMÉnùÉvÉ®ú ¨Éä¹ÉMɨÉxÉ +´ÉÎxiÉnäù¶Éä -´ÉÉʺɹ]õºÉMÉÉäjÉVÉ VÉɨÉnùMxªÉɹÉÇ VÉMÉiÉÒUôxnùºÉ ®úHòɨ¤É®úvÉ®ú {ÉnÂù¨É®úÉMÉɦɮúhɦÉÚʹÉiÉ ®úHòMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉ ®úHòUôjÉv´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉ Ênù´ªÉ®úlÉÉ°üfø ¨Éä¯ûÆ -|ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉ Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ] ¨Éä¹É´ÉÞζSÉEò®úɶªÉÉÊvÉ{É सप्त वषवदशाभु्त्याचधप +ÊvÉnäù´ÉiÉÉ-¦ÉÚ欃 |ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-ºEòxvɺÉʽþiÉ Sɨ{ÉEòÉ{ÉÖ¹{ÉÉÌSÉiÉ-iÉÖ´ÉÊ®úEòÉJªÉ-+Éb÷EòvÉÉxªÉ 147 .xÉ´ÉOɽþ¨ÉxjÉÉ: 4-VÉ{ÉÉEÖòºÉ֨ɺÉÆMEòɶÉÆ EòɶªÉ{ÉäªÉÆ ¨É½þÉtÖËiÉ* iɨÉÉäË®ú ºÉ´ÉÇ{ÉÉ{ÉPxÉÆ |ÉhÉiÉÉäκ¨É Ênù´ÉÉEò®Æú** 4-¦ÉɺEò®úÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¨É½þtÖÊiÉEò®úÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ºÉÚªÉÇ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4-$ ¿Ó PÉÞÊhÉ:ºÉÚªÉÉÇÊnùiªÉÉå ÊEò®úÒÊ]xÉ ®úHò´ÉhÉÇ {ÉnÂù¨ÉuùªÉEò®ú +¯ûhɺÉÉ®úlªÉ-BEòSÉGòºÉ{iÉÉ·É-®úlÉÉ°üfø EòʱÉRÂóMÉnäù¶Éä-EòɶªÉ{ɺÉMÉÉäjÉVÉ Ê´É·ÉÉʨÉjÉɹÉÇ Êjɹ]Öõ{UôxnºÉù ®úHòÉiÉɨ¤É®úvÉ®ú ¨ÉÉÊhÉCªÉɦɮúhɦÉÚʹÉiÉ ®úHòMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉ ®úHòUôjÉv´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉ Ênù´ªÉ®úlÉÉ°üfø ¨Éä¯ûÆ -|ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉ Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ] ʺÉÀ®úɶªÉÉÊvÉ{É षड्वषवदशाभु्त्याचधप +ÊvÉnäù´ÉiÉÉ-+ÎMxÉ |ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-<Ç·É®úºÉʽþiÉ VÉ{ÉÉEÖòºÉÖ¨É-{ÉnÂù¨ÉÉÌSÉiÉMÉÉävÉÚ¨É-vÉÉxªÉ-MÉÖb÷ÉzÉ-Ê|ÉªÉ +EÇòºÉʨÉrù´ÉxÉiÉÖ¹]õ +κlɺÉƺlÉ Ê{ÉiÉÞEòÉ®úEò +Éi¨ÉiÉk´É ®úHò´ÉÞkɨÉhb÷±Éä-|ÉÉRÂó¨ÉÖJÉ +Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éá +Éé +Æ +:®äúhÉÖEòɺÉʽþiÉ ºÉÚªÉÇOɽþ º´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-nùÊvɶÉRÂóJÉiÉÖ¹ÉÉ®úɦÉÆ IÉÒ®úÉänùÉhÉǴɺɨ¦É´ÉÆ* xÉɨÉÉ欃 ¶ÉʶÉxÉÆ ºÉÉä¨ÉÆ ¶É¨¦ÉÉä¨ÉÇEÖò]õ¦ÉÚ¹ÉhÉÆ 4-{ÉnÂù¨Év´ÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ ½äþ¨É°ü{ÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ºÉÉä¨É: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4-$ ¸ÉÓ C±ÉÓ ½Æþ ®Æú ¶ÉÆ SÉxpùÉªÉ xɨÉ:ÊEò®úÒÊ]xÉ ·ÉäiÉ´ÉhÉÇ {ÉɶÉ{ÉÉÊhÉÊuù¤ÉɽÖþ nù¶ÉÉ·É®úlÉ´ÉɽþxÉ ´ÉxÉɪÉÖnùä¶Éä-+ÊjɺÉMÉÉäjÉVÉ +ÉjÉäªÉɹÉÇ +xÉÖ¹]Öõ{UôxnùºÉ ·ÉäiÉɨ¤É®úvÉ®ú ¨ÉÖHòÉiÉɦɮúhɦÉÚʹÉiÉ ·ÉäiÉMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉ ·ÉäiÉUôjÉv´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉ Ênù´ªÉ®úlÉÉ°üfø ¨Éä¯ûÆ |ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉ Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ] Eò]õEò®úɶªÉÉÊvÉ{É दश वषवदशाभु्त्याचधप +ÊvÉnäù´ÉiÉÉ-´É¯ûhÉ |ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-=¨ÉɺÉʽþiÉ ·ÉäiÉÉäi{ɱÉÉÌSÉiÉ-µÉÒ½þÒvÉÉxªÉ-PÉÞiÉMÉÖb÷{ÉɪɺÉ-Ê|ÉªÉ {ɱÉɶɺÉʨÉrù´ÉxÉiÉÖ¹]õ ®úHòºlÉ ¨ÉÉiÉÞEòÉ®úEò ¨ÉxɺiÉk´É ·ÉäiÉ-SÉiÉÖ®ú¸ÉhɨÉhb÷±Éä-|ÉiªÉRÂó¨ÉÖJÉ ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ +¨ÉÞiÉɪÉÖHò SÉxpùOɽþ º´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ xɨÉ: 4-vÉ®úhÉÒMɦÉǺɨ¦ÉÚiÉÆ Ê´ÉtÖiEòÉÎxiÉ ºÉ¨É|ɦÉÆ*EÖò¨ÉÉ®Æú ¶ÉÊHò½þºiÉÆ SÉ ¨ÉRÂóMɱÉÆ |ÉhɨÉɨªÉ½Æþ** 4-´ÉÒ®úv´ÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ Ê´ÉPxɽþºiÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ¦ÉÉè¨É: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4.

एकावलि ½þʴɹªÉÉzÉ-Ê|ÉªÉ +MɯûºÉʨÉrù´ÉxÉiÉÖ¹]õ ¨ÉVVÉɺÉƺlÉ §ÉÉiÉÞEòÉ®úEò ¤É±ÉiÉk´É ®úHòÊjÉEòÉähɨÉhb÷±Éä-nùÊIÉhɨÉÖJÉ EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó vɨÉÉǪÉÖHò ¦ÉÉè¨ÉOɽþ º´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Ê|ɪÉÉRÂóMÉÖEòʱÉEòɶªÉɨÉÆ °ü{ÉähÉÉ|ÉÊiɨÉÆ ¤ÉÖvÉÆ* ºÉÉ訪ÉÆ ºÉÉ訪ÉMÉÖhÉÉä{ÉäiÉÆ iÉÆ ¤ÉÖvÉÆ |ÉhɨÉɨªÉ½Æþ** 4-MÉVÉv´ÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¶ÉÖEò½þºiÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ¤ÉÖvÉ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4.+ÉjÉäªÉºÉMÉÉäjÉVÉ ¦ÉÉ®úuùÉVÉɹÉÇ ¤ÉÞ½þiÉÒUôxnùºÉ {ÉÒiÉɨ¤É®úvÉ®ú ¨É®úEòiÉɦɮúhɦÉÚʹÉiÉ {ÉÒiÉMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉ {ÉÒiÉUôjÉv´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉ Ênù´ªÉ®úlÉÉ°üfø ¨Éä¯ûÆ |ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉ Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ] ʨÉlÉÖxÉEòxªÉÉ®úɶªÉÉÊvÉ{É सप्तदश वषवदशाभ्ु त्याचधप +ÊvÉnäù´ÉiÉÉ-ʴɹhÉÖ |ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-ʴɹhÉÖ ºÉʽþiÉ nù¨ÉxÉ-EÖòxnù{ÉÖ¹{ÉÉÌSÉiÉ-¨ÉÖnùÂMÉvÉÉxªÉ-{ÉɪɺÉÉzÉÊ|ÉªÉ +{ɨÉÉMÉǺÉʨÉrù´ÉxÉiÉÖ¹]õ i´ÉCºÉƺlÉ ¨ÉÉiÉÖ±ÉEòÉ®úEò ´ÉÉHòi´É {ÉÒiÉ-¤ÉÉhÉÉEòÉ®ú¨Éhb÷±ÉänùÊIÉhɨÉÖJÉ SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ ªÉ¶Éκ´ÉxÉÒªÉÖHò ¤ÉÖvÉOɽþ º´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-näù´ÉÉxÉÉÆ-SÉ-@ñ¹ÉÒhÉÉÆ-SÉ-MÉÖ¯ûÆ EòÉ\SÉxɺÉÊzɦÉÆ* ¤ÉÖÊrù¦ÉÚiÉÆ ÊjɱÉÉäEäò¶ÉÆ iÉÆ xɨÉÉ欃 ¤ÉÞ½þº{ÉËiÉ 4-´É޹ɦÉv´ÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ vÉxÉÖ½ÇþºiÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä MÉÖ¯û: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4-$ ¿Ó ¸ÉÓ ¤±ÉÚÆ Bå M±ÉÉé OɽþÉÊvÉ{ÉiɪÉä ¤ÉÞ½þº{ÉiɪÉä ´ÉÓ `ö: ¸ÉÓ `ö: Bå `ö: º´ÉɽþÉ ÊEò®úÒÊ]xÉ {ÉÒiÉ´ÉhÉÇ nùhb÷´É®únùÉIɺÉÚjÉEò¨Éhb÷±ÉÖvÉ®ú MÉVÉ´ÉɽþxÉ ÊºÉxvÉÖnùä¶Éä +ÉRÂóMÉÒ®úºÉºÉMÉÉäjÉVÉ ´Éʺɹ`öɹÉÇ +ÉxÉÖ¹]Öõ{UôxnùºÉ {ÉÒiÉɨ¤É®úvÉ®ú {ÉÖ¹{É®úÉMÉ®úixÉɦɮúhɦÉÚʹÉiÉ {ÉÒiÉMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉ {ÉÒiÉUôjÉv´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉ Ênù´ªÉ®úlÉÉ°üfø ¨Éä¯ûÆ -|ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉ Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ] vÉxÉÖ¨ÉÔxÉ®úɶªÉÉÊvÉ{É षोडशवषवदशाभु्त्याचधप +ÊvÉnäù´ÉiÉÉ-<xpù |ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-¥ÉÀ ºÉʽþiÉ EÖòxnù{ÉÖ¹{ÉÉÌSÉiÉ-SÉhÉEòvÉÉxªÉ-nùvªÉÉzÉ-Ê|ÉªÉ +·ÉilɺÉʨÉrù´ÉxÉiÉÖ¹]õ ¨ÉÉƺɺÉƺlÉ {ÉÖjÉEòÉ®úEò YÉÉxÉiÉk´É {ÉÒiÉ-nùÒPÉÇSÉiÉÖ®ú¸É¨Éhb÷±Éä=nùRÂó¨ÉÖJÉ ]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ ¶ÉÉRÂóEò®úÒªÉÖHò ¤ÉÞ½þº{ÉÊiÉOɽ þº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-ʽþ¨ÉEÖòxnù¨ÉÞhÉɱÉɦÉÆ nèùiªÉÉxÉÉÆ {É®ú¨ÉÆ MÉÖ¯ûÆ *ºÉ´ÉÇ ¶ÉɺjÉ|É´ÉHòÉ®Æú ¦ÉÉMÉÇ´ÉÆ |ÉhɨÉɨªÉ½Æþ** 4-+·Év´ÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ vÉxÉÖ½ÇþºiÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ¶ÉÖGò: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ** 4.$ ¿ÉÆ GòÉå Bå OɽþxÉÉlÉÉªÉ ¤ÉÖvÉÉªÉ º´ÉɽþÉ ÊEò®úÒÊ]xÉ {ÉÒiÉ´ÉhÉÇ JÉbÂ÷MÉSɨÉÇMÉnùÉ{ÉÉÊhÉ ÊºÉÀ´ÉɽþxÉ ¨ÉMÉvÉnäù¶Éä.Bå Bå Oɽäþ·É®úÉªÉ ¶ÉÖGòÉªÉ xɨÉ: ÊEò®úÒÊ]xÉ ·ÉäiÉ´ÉhÉÇ nhb-´É®ún-ùEòÉ´ªÉºÉÉIɺÉÚjÉEò¨Éhb÷±ÉÖvÉ®ú MÉVÉ´ÉɽþxÉ EòÒ]õEònäù¶Éä-¦ÉÉMÉǴɺÉMÉÉäjÉVÉ ¶ÉÉèxÉEòɹÉÇ {ÉÆÊHòUôxnùºÉ ·ÉäiÉɨ¤É®úvÉ®ú 148 .

एकावलि

´ÉXÉɦɮúhɦÉÚʹÉiÉ ·ÉäiÉMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉ ·ÉäiÉUôjÉv´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉ ÂÊnù´ªÉ®úlÉÉ°üfø ¨Éä¯ûÆ |ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉ Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ] ऋषभ-तुिा®úɶªÉÉÊvÉ{É ववांशततवषवदशाभु्त्याचधप
+ÊvÉnäù´ÉiÉÉ-<xpùÉhÉÒ |ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-<xpùºÉʽþiÉ +®úÊ´ÉxnùÉÌSÉiÉ-¤É¤ÉÇ®úÉJªÉ-®úÉVɨÉɹÉvÉÉxªÉPÉÞiÉÉzÉ-Ê|ÉªÉ +ÉènÖù¨¤É®úºÉʨÉrù´ÉxÉiÉÖ¹]õ ¶ÉÖC±ÉºÉƺlÉ Eò³ýjÉEòÉ®úEò EòɨÉiÉk´É ·ÉäiÉ{É\SÉEòÉähɨÉhb÷±Éä-|ÉÉRÂó¨ÉÖJÉ iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ YÉÉxÉ°ü{ÉɪÉÖHò ¶ÉÖGòOɽþ º´É°üÊ{ÉÊhÉ
¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
4-xÉÒ±ÉÉ\VÉxɺɨÉɦÉɺÉÆ ®úÊ´É{ÉÖjÉÆ ªÉ¨ÉÉOÉVÉÆ*UôɪÉɨÉÉiÉÉÇhb÷ºÉ¨¦ÉÚiÉÆ iÉÆ xɨÉÉ欃 ¶ÉxÉè¶SÉ®Æú**
4-EòÉEòv´ÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ JÉbÂ÷MɽþºiÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ¨Éxnù: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ**
4- $ ¿Ó ¸ÉÓ OɽþSÉGò´ÉÌiÉxÉä ¶ÉxÉè¶SÉ®úÉªÉ C±ÉÓ Bå ºÉÉè: º´ÉɽþÉ ÊEò®úÒÊ]xÉÂ
<xpùxÉұɺɨÉtÖÊiÉ ¶ÉÚ±É-´É®ún-ºÉ¤ÉÉhÉ- ¤ÉÉhÉɺÉxÉ-vÉ®ú MÉÞwÉ´ÉɽþxÉ ºÉÉè®úɹ]Åõnäù¶ÉäEòɶªÉ{ɺÉMÉÉäjÉVÉ ¦ÉÞM´ÉɹÉÇ MÉɪÉjÉÒUôxnùºÉ EÞò¹hÉɨ¤É®úvÉ®ú <xpùxÉÒ±ÉɦɮúhɦÉÚʹÉiÉ
EÞò¹hÉMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉ EÞò¹hÉUôjÉEòÉEòv´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉ Ênù´ªÉ®úlÉÉ°üfø ¨Éä¯ûÆ -|ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉ
Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ] EÖò¨¦É-¨ÉEò®ú ®úɶªÉÉÊvÉ{É ऊनववांशततवषवदशाभु्त्याचधप +ÊvÉnäù´ÉiÉÉ|ÉVÉÉ{ÉÊiÉ
|ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-ªÉ¨ÉºÉʽþiÉ
xÉÒ±ÉÉäi{ɱÉÉÌSÉiÉ-ÊiɱÉvÉÉxªÉ
ÊiɱÉÉzÉ-Ê|ɪÉ
¶É¨ÉÒºÉʨÉrù´ÉxÉiÉÖ¹]õ वसनसाºÉƺlÉ +ɪÉÖ¹EòÉ®ú nÖù:JÉiÉk´É EÞò¹hÉ-vÉxÉÖ¨ÉÇhb÷±Éä-|ÉÉRÂó¨ÉÖJÉ {ÉÆ
¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ ¶ÉÊHòªÉÖHò ¶ÉxÉè¶SÉ®úOɽþ º´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉ
iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
4-+vÉÇEòɪÉÆ ¨É½þÉ´ÉÒªÉÈ SÉxpùÉÊnùiªÉʴɨÉnÇùxÉÆ* ˺ÉʽþEòÉMɦÉǺɨ¦ÉÚiÉÆ iÉÆ ®úɽÖþÆ |ÉhɨÉɨªÉ½Æþ**
4-xÉJÉv´ÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ {ÉnÂù¨É½þºiÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ®ú ɽÖþ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ**
4- $ GòÓ GòÓ ½ÖþÆ ½ÖþÆ ]Æõ ]õRÂóEòvÉÉÊ®úhÉä ®úɽþ´Éä ®Æú ¿Ó ¸ÉÓ ¦Éé º´ÉɽþÉ ÊEò®úÒÊ]xÉ Eò®úɳý´ÉCjÉ JÉbÂ÷MÉ-SɨÉ-ǶÉÚ±É-vÉ®ú ʺɨ½þɺÉxɺlÉ {ÉÚ´ÉÇnùä¶Éä-{ÉÉ]õ±ÉÒºÉMÉÉäjÉVÉ +ÉRÂóMÉÒ®úºÉɹÉÇ
+xÉÖ¹]Öõ{UôxnùºÉ EÞò¹hÉɨ¤É®úvÉ®ú MÉÉä¨ÉävÉEòɦɮúhɦÉÚʹÉiÉ EÞò¹hÉMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉ EÞò¹hÉUôjÉ-v´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉ ÂÊnù´ªÉ®úlÉÉ°üf ø¨Éä¯ûÆ -+|ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉ Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ] κlÉiÉ-®úɶªÉÉÊvÉ{É
अष्टादश
वषवदशाभ्
+ÊvÉnäù´ÉiÉÉ-ºÉ{ÉÇ |ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-EòÉ±É ºÉʽþiÉ
ु त्याचधप
VÉ{ÉÉEÖòºÉÖ¨ÉÉÌSÉiÉ-¨ÉɹÉvÉÉxªÉ-¨ÉɹÉÉzÉ-Ê|ÉªÉ nÚù´ÉÉǺÉʨÉiÉ ½þ´ÉxÉiÉÖ¹]õ ¨ÉVVÉɺÉƺlÉ §ÉÉiÉÞEòÉ®úEò
¤É±ÉiÉk´É EÞò¹hÉ-¶ÉÚ{ÉǨÉhb÷±Éä-nùÊIÉhɨÉÖJÉ ¶ÉÆ ¹ÉÆ ºÉÆ ½Æþ EÞò¹hÉɪÉÖHò ®úɽÖþOɽ þº´É°üÊ{ÉÊhÉ
¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
149

एकावलि

4-{ɱÉɶÉ{ÉÖ¹{ɺÉÆEòɶÉÆ iÉÉ®úÉOɽþ¨ÉºiÉEÆò* ®úÉèpÆù ®úÉèpùÉi¨ÉEÆò PÉÉä®Æú iÉÆ EäòiÉÖÆ |ÉhɨÉɨªÉ½Æþ**
4-+v´Év´ÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ ¶ÉڱɽþºiÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä EäòiÉÖ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ**
4- $ GÚòÆ GÚò®ú°üÊ{ÉhÉä EäòiÉ´Éä Bå ºÉÉè: º´ÉɽþÉ vÉÚ©ÉÉxÉ Êuù¤ÉɽÚþxÉ {ÉɶÉ-vÉ®úÉxÉ MÉÞwÉ´ÉɽþxÉÉä
ÊEò®úÒÊ]õxÉÉä ¨ÉvªÉnäù¶Éä-VÉè¨ÉxÉÒºÉMÉÉäjÉVÉÉxÉÂ
MÉÉèiɨÉɹÉÇxÉ xÉÉxÉÉUôxnùºÉ: ÊSÉjÉɨ¤É®úvÉ®úxÉÂ
´ÉèbÚ÷ªÉÉǦɮúhɦÉÚʹÉiÉxÉ ÊSÉjÉMÉxvÉÉxÉÖ±Éä{ÉxÉÉxÉ EÞò¹hÉÊ{ÉRÂóMɱÉv´ÉVÉ{ÉiÉÉÊEòxÉÉä Ênù´ªÉ®úlÉÉ°üfø¨Éä¯ûÆ
+|ÉnùÊIÉhÉÒEÖò´ÉÉÇhÉxÉ Oɽþ¨Éhb÷±É|Éʴɹ]ÉxÉ κlÉiÉ®úɶªÉÉÊvÉ{ÉÉxÉ सप्त वषवदशाभु्त्याचधपöÉxÉÂ
+ÊvÉnäù´ÉiÉÉ-¥ÉÀ
|ÉiªÉÊvÉnäù´ÉiÉÉ-ÊSÉjÉMÉÖ{iÉ
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Eò®ú´ÉÒ®ú{ÉÖ¹{ÉÉÌSÉiÉÉxÉÂEòhÉÉJªÉEÖò±ÉÖilÉvÉÉxªÉ –ÊSÉjÉÉzÉ-Ê|ɪÉÉxÉ nù¦ÉÉǺÉʨɴÉxÉiÉÖ¹]õÉxÉ वसनसाºÉƺlÉÉxÉÂ
YÉÉxÉɪÉÖEòÉÇ®úEòÉxÉ nÖù:JÉiÉk´ÉÉxÉ EÞò¹hÉ-Ê{ÉRÂóMɱÉv´ÉVɨÉhb÷±Éä-nùÊIÉhɨÉÖJÉÉxÉ IÉÆ vÉÚ©ÉɪÉÖHòÉ
EäòiÉÚ Oɽþº´É°üÊ{ÉÊhÉ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùÊ®ú¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:

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एकावलि

20.¸ÉÒ {É®úÉ ¨ÉxjÉ VÉ{É Ê´ÉÊvÉ:
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´Éè¦É´ÉºªÉ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòÉ ¨É½þɨÉxjɺªÉ ÊSÉpÚù{ÉÉxÉxnù¦Éè®ú´ÉÉªÉ @ñ¹ÉªÉä xɨÉ:: MÉɪÉjªÉÉÊnù
VÉMÉiÉÒ UôxnùɦªÉÉÆ xɨÉ: ¸ÉÒºÉÖxnùªÉÉÇtɶÉÊHò {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɪÉè näù´ÉiÉɪÉè xɨÉ: ºÉ ¤ÉÒVÉɪÉ
xɨÉ: +Éè ¶ÉHòªÉä xɨÉ: +: EòÒ±ÉEòÉªÉ xɨÉ: ¨É¨É ¸ÉÒºÉÖxnùªÉÉÇtɶÉÊHò {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòÉ
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ºÉÉÆ-ºÉÂ-ºÉÉè:-ºÉ´ÉÇYÉ ¶ÉÊHòvÉɨxÉä-+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ- ¾þnùªÉɪÉ- xɨÉ:
ºÉÓ-+Éè-ºÉÉè:-ÊxÉiªÉiÉÞ{iÉ ¶ÉÊHòvÉɨxÉä -iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ- ʶɮúºÉä- º´ÉɽþÉ
ºÉÚ-Æ +:-ºÉÉè:-+xÉÉÊnù¤ÉÉävÉ ¶ÉÊHòvÉɨxÉä -¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè- ´É¹É]Âõ
ºÉé-ºÉÂ-ºÉÉè:-º´ÉiÉxjÉ ¶ÉÊHòvÉɨxÉä -+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ
ºÉÉé-+Éè-ºÉÉè:-ÊxÉiªÉ¨É±ÉÞ{iÉ ¶ÉÊHòvÉɨxÉä -EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ
ºÉ:-+:-ºÉÉè:-+xÉxiÉ ¶ÉÊHòvÉɨxÉä -Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ
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ºÉÉè:- ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉä ´ªÉÉ{ÉEÆò EÖòªÉÉÇiÉÂ
vªÉÉxÉÆ: ¤ÉɱÉÉEòÉǪÉÖiÉ-iÉäVɺÉÉÆ ÊjÉxɪÉxÉÉÆ ®úHòɨ¤É®úÉä±±ÉÉʺÉxÉÓ *
xÉÉxÉɱÉRÂóEòÞ ÊiÉ®úÉVɨÉÉxÉ´É{ÉÖ¹ÉÉÆ ¤ÉɱÉÉäbÖ÷®úÉ]Âõ ¶ÉäJÉ®úÉÆ**
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¸ÉÒSÉGòκlÉiÉ ºÉÖxnù®úÓ ÊjÉVÉMÉiÉɨÉÉvÉÉ®ú ¦ÉÚiÉÉÆ º¨É®äúiÉÂ**

151

एकावलि

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vªÉɪÉä ÊjɱÉÉäEòVÉxÉxÉÓ º´ÉEò®èúnùÇvÉÉxÉÉÆ ¸ÉÒºÉÖxnù®úÓ ¨ÉÊhÉ Ê´É¦ÉÚ¹ÉhÉ ¦ÉÚʹÉiÉÉRÂóMÉÓ**
¦ÉÚ´Éä¶¨É ÊjÉ´ÉÞkÉ ¹ÉÉäb÷¶É xÉÉMÉ ¶ÉGò ÊnùMªÉÖM¨É ´Éº´ÉxÉ±É EòÉähÉMÉ Ê¤ÉxnÖù ¨ÉvªÉä*
˺ɽþɺÉxÉ{ÉÊ®úMÉiÉ iÉÉ®úEò {ÉÒ`ö ¨ÉvªÉä |ÉÉäi¡Öò±±É {ÉnÂù¨É ÊxɱɪÉÉÆ ÊjÉ{ÉÖ®úÉÆ ¦ÉVÉä½Æþ**
ºÉÚªÉÇEòÉäÊ]õ |ÉiÉÒEòɶÉÉÆ SÉiÉÖ¤ÉÉǽÖÆþ ÊjɱÉÉäSÉxÉÉÆ*
¶ÉÉRÂóEòÖ ¶ÉvÉxÉÖ¤ÉÉÇhÉÆ vÉÉ®úªÉxiÉÓ Ê¶É´ÉÉÆ ¦ÉVÉä**
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{ÉRÂóEòVÉ ¨ÉvªÉ ÊxɹÉhhÉÉÆ {ÉRÂóEòä ¯û½þ ±ÉÉäSÉxÉÉÆ {É®úÉÆ ´Éxnäù**
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एकावलि

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+{É®úÉnäù´ÉÒ xÉÉlÉ xÉ´ÉÉi¨É¦Éè®ú´ÉÉä näù´ÉiÉÉ: ®ú½þ®úIɨɱɴɪÉ>Æð - (10)
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{É®úÉ{É®úÉnäù´ÉÒ xÉÉlÉ ®úÊiɶÉäJÉ®ú ¦Éè®ú´ÉÉä näù´ÉiÉÉ: - ®úªÉ±É´É>Æð - (10)
{É®úÉ{É®úÉnäù´ÉÒ näù´ÉiÉÉ: - ºÉÉè: $ +PÉÉä®äú ¿Ó ºÉ: {É®ú¨ÉPÉÉä®äú ¿ÚÆ PÉÉä®ú°ü{Éä ¿Ó PÉÉä®ú¨ÉÖÊJÉ
¦ÉҨɦÉÒ¹ÉÊhÉ ´É¨É´É¨É Ê{É¤É Ê{É¤É ½þÉé ¯û¯û ®ú ®ú $ ¿Ó ¡ò]Âõ -(10)
{É®úÉnäù´ÉÒ xÉÉlÉ ºÉnÂù¦ÉɴɦÉè®ú´ÉÉä näù´ÉiÉÉ: IÉIɽþ>Æð -(10)
{É®úÉnäù´ÉÒ näù´ÉiÉÉ - ºÉÉè: -(108)
iÉiÉ: +vÉÇxÉÉ®úÒ·É®úÉä näù´ÉiÉÉ: ¼ºÉÉé º½þÉè: - (10)
{É®ú¶É¨¦ÉÖxÉÉlÉÉä näù´ÉiÉÉ: - Bå ¿Ó ¸ÉÓ ¼ºJ£åò ¼ºÉÉè: +½Æþ +½Æþ +½Æþ +½Æþ ¼ºÉÉè: ¼ºJ£åò ¸ÉÓ
¿Ó Bå - (10)
{É\SɨÉxjÉ ºÉ¨Éι]õ°üÊ{ÉÊhÉ EòɱɺÉRÂóEò̹ÉÊhÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÆ ºÉÞι]õÊxÉiªÉä º´ÉɽþÉ ½Æþ κlÉÊiÉ{ÉÚhÉæ
xɨÉ: ®Æú ¨É½þɺÉƽþÉÊ®úhÉÒ EÞò¶ÉäSÉhb÷EòÉ汃 ¡ò]Âõ ®Æú ¼ºJ£åò ¨É½þÉxÉÉJªÉä +xÉiɦÉɺEò®úÒ
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ºÉÞκlÉÊxÉiªÉä º´ÉɽþÉ ¼ºJ£åò ¨É½þÉSÉhb÷ªÉÉäMÉä·É®úÒ*
{É®úɺjÉÆ : - $ {É®úɺjÉÉªÉ ¨É½þɺjÉÉÆªÉ {É®ú¨ÉɺjÉÉªÉ ÊxɹEò±ÉɺjÉÉªÉ ÊjÉvÉÉPÉÆ ½þxÉ ½þxÉ nù½þ
nù½þ {ÉSÉ {ÉSÉ näùʽþ näùʽþ {É®Æú {ÉnÆù ¨ÉxjÉɺjÉÉªÉ ½ÖþÆ ¡ò]Âõ - (1)
=kÉ®ú xªÉɺÉ: VÉ{É ºÉ¨É{ÉÇhÉÆ*
ºiÉÉäjÉ:
ªÉÉ%PÉÉä®úÊnùʦɮäúiÉè: {ÉÉ®ú¨{ɪÉÇGò¨ÉMÉiÉè xÉÉÇlÉè:*
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एकावलि 20.aºÉ{iÉ˴ɶÉÊiÉ ®ú½þºªÉ Gò¨É {ÉÚVÉxÉÆ: vªÉÉxÉÆ: +Eò³ýRÂóEò ¶É¶ÉÉRÂóEòɦÉÉ jªÉIÉÉ SÉxpùEò±ÉÉ´ÉiÉÒ* ¨ÉÖpùÉ{ÉÖºiÉEò ºÉnÂù¤ÉɽÖþ: {ÉÉiÉÖ ¨ÉÉÆ {É®ú¨ÉÉ Eò±ÉÉ**1 ¨É½þÒ-¨ÉÚ±É-¨ÉɪÉÉäv´ÉǶÉCiªÉxiÉ-®úixÉ|ɦÉÉ-EòÒhÉÇ-ºÉÉè´ÉhÉÇ-{ÉÒ`öÉÊvÉ°üføÉ* ´É¨ÉxiÉÒ ¤Éʽþ̴ɷɨÉxiɶSÉ-ºÉÆÊ´ÉiÉ {É®úÉnäù´ÉiÉÉ%½Æþ {É®úɨɶÉÇ°ü{ÉÉ**2 º´ÉhÉÇÊxɨÉDZɴÉhÉÇ®úÎ\VÉiÉʨÉnÆù iÉk´ÉɴɱÉÒ|ÉÉä±±ÉºÉ VVÉÉOÉiº´É{xɺÉÖ¹ÉÖÎ{iÉiÉÖªÉÇPÉÊ]õiÉè: {ÉÞl´ªÉÉÊnù¶ÉCiªÉÎxiɨÉè:* +hbè÷:¦ÉÎhb÷iɨÉÉʶÉiÉÉ Ê´ÉVɪÉiÉä{ÉÒ`Æö ʴɺÉMÉÉÇi¨ÉEÆò näù´ÉÒ ºÉ{iÉnù¶ÉÒEò±ÉÉäÊnùiÉ{ÉnÆù ªÉx¨ÉÚÐvxÉÊ´É·ÉÆ ºÉnùÉ**3 ºÉÉè´ÉhÉÇ {ÉÒ`ö¨ÉÉ°üføÉÆ VÉÉOÉiÉÒ¨ÉOÉ{ÉÞ¹`öªÉÉä:* ÊSÉSSÉGò´ÉÌiɨÉʽþ¹ÉÓ ´Éxnäù iÉÉÆ {É®únäù´ÉiÉÉÆ**4 ¥ÉÀäxnÖù¨Éhb÷±ÉÉxÉʴɹ`ö SÉiÉÖnùǶÉÉi¨É jªÉ»ÉɱɪÉÉÆ ÊjÉxɪÉxÉÉÆ PÉxɺÉÉ®úMÉÉè®úÉÆ* EòxªÉɨɪÉÓ Eò®úvÉÞiÉÉMɨɤÉÉävɨÉÖpùɨÉÉtÉÆ {É®úÉÆ ¦ÉVÉiÉSÉxpùEò±ÉÉ´ÉiÉƺÉÉÆ**5 4-+Æ +ÉÆ <Æ <È =Æ >Æð @Æñ AÆñ ±ÉÞÆ ±ÉßÆ BÆ Bá +Éå +Éé +Æ +: ºÉþ´ÉÇ ÊSÉnùÉxÉxnäùSUôÉYÉÉxÉÊGòªÉÉ ¶ÉÊHò°ü{É <ǶÉÉxÉ-iÉi{ÉÖ¯û¹ÉÉPÉÉä®-´ÉɨÉnäù´ÉºÉtÉäVÉÉiÉÉi¨ÉEò-º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-EÆò ºÉÉè:{ÉÞl´ÉÒiÉk´É ÊGòªÉɶÉÊHò°ü{É ºÉtÉäVÉÉiÉÉi¨ÉE òº´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-JÉÆ ºÉÉè:+{iÉk´É YÉÉxɶÉÊHò°ü{É ´ÉɨÉnäù´ÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-MÉÆ ºÉÉè:iÉäVɺiÉk´ÉäUôɶÉÊHò°ü{ÉÉPÉÉä®úÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ{ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-PÉÆ ºÉÉè:´ÉɪÉÖiÉk´ÉÉxÉxnù¶ÉÊHò°ü{ÉiÉi{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-RÆó ºÉÉè:+ÉEòɶÉiÉk´ÉÊSÉSUôÊHò°ü{Éä¶ÉÉxÉÉi¨ÉE òº´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-SÉÆ ºÉÉè:MÉxvÉiÉk´ÉÊGòªÉɶÉÊHò°ü{ɺÉtÉäVÉÉiÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 155 .

एकावलि 4-UÆô ºÉÉè:®úºÉiÉk´ÉYÉÉxɶÉÊHò°ü{É´ÉɨÉnäù´ÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-VÉÆ ºÉÉè:°ü{ÉiÉk´ÉäUôɶÉÊHò°ü{ÉÉPÉÉä®úÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-ZÉÆ ºÉÉè:º{ɶÉÉxÉxnù¶ÉÊHò°ü{ÉiÉi{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-\ÉÆ ºÉÉè:¶É¤nùiÉk´ÉÊSÉSUôÊHò°ü{Éä¶ÉÉxÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-]Æõ ºÉÉè:={ɺlÉiÉk´ÉÊGòªÉɶÉÊHò°ü{ɺÉtÉäVÉÉiÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉɸÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-`Æö ºÉÉè:{ÉɪÉÖiÉk´ÉYÉÉxɶÉÊHò°ü{É´ÉɨÉnäù´ÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-bÆ÷ ºÉÉè:{ÉÉnùiÉk´ÉäUôɶÉÊHò°ü{ÉÉPÉÉä®úÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-fÆø ºÉÉè:{ÉÉÊhÉiÉk´ÉÉxÉxnù¶ÉÊHò°ü{ÉiÉi{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-hÉÆ ºÉÉè:´ÉÉHòk´ÉÊSÉSUôÊHò°ü{Éä¶ÉÉxÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-iÉÆ ºÉÉè:QÉÉhÉiÉk´ÉÊGòªÉɶÉÊHò°ü{ɺÉtÉäVÉÉiÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-lÉÆ ºÉÉè:ÊVɼ´ÉÉiÉk´ÉYÉÉxɶÉÊHò°ü{É´ÉɨÉnäù´ÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-nÆù ºÉÉè:SÉIÉÖºiÉk´ÉäUôɶÉÊHò°ü{ÉÉPÉÉä®úÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉ Æ{ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-vÉÆ ºÉÉè:i´ÉHòi´ÉÉxÉxnù¶ÉÊHò°ü{ÉiÉi{ÉÖ¯û¹ÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-xÉÆ ºÉÉè:¸ÉÉäjÉiÉk´ÉÊSÉSUôÊHò°ü{Éä¶ÉÉxÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-{ÉÆ ºÉÉè:¨ÉxɺiÉk´ÉÊGòªÉɶÉÊHò°ü{ɺÉtÉäVÉÉiÉÉi¨ÉEò º´É|ÉEòɶÉʴɨɶÉÇ ¸ÉÒ{É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 156 .

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º´ÉɽþÉ ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¿ÚÆ-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.´É¹É]Âõ ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¿é-+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¿Éé-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¿:-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ: +ÉnùÉªÉ nùIÉEò®äúhɺ´ÉhÉÇnù´ÉÔ nÖùMvÉÉzÉ{ÉÚhÉÇʨÉiÉ®äúhÉ SÉ ®úixÉ-{ÉÉjÉÆ +zÉ|ÉnùÉxÉ-ÊxÉ®úiÉÉÆ xɴɽäþ¨É´ÉhÉÉ-+¨¤ÉÉÆ ¦ÉVÉä EòxɨÉɱªÉʴɦÉÚ¹ÉhÉÉfø¬ÉÆ iÉ{iɺ´ÉhÉÇÊxɦÉÉÆ ¶É¶ÉÉRÂóEò¨ÉEÖò]õÉÆ ®úxiÉ|ɦÉɦÉɺÉÖ®úÉÆ xÉÉxÉɴɺjÉÊ´É®úÉÊVÉiÉÉÆ ÊjÉxɪÉxÉÉÆ ¦ÉÚ¨ÉÒ®ú¨ÉɦªÉɪÉÖiÉÉÆ nù´ÉÕ ½þÉ]õEò¤¼VÉxÉÆ nùvÉiÉÓ +É{ÉÒxÉ´ÉIɺiÉxÉÓ xÉÞiªÉxiÉÆ Ê¶É´É¨ÉɱÉÉäCªÉ¨ÉÖÊnùiÉÉÆ vªÉɪÉänùzÉ{ÉÚhÉæ·É®úÓ ¨ÉÚ±ÉÆ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ +zÉ{ÉÚhÉæ·ÉÊ®ú ¨É¨ÉɦÉʱɹÉiɨÉzÉÆ näùʽþ º´ÉɽþÉ {ÉÒ`ö{ÉÚVÉÉ: $ MÉÖÆ MÉÖ¯û¦ªÉÉä xɨÉ: $ MÉÆ MÉhÉ{ÉiɪÉä xɨÉ: $ ¨ÉÆ ¨ÉhbÚ÷EòÉÊnù {É®úiÉi´ÉÉxiÉ{ÉÒ`önäù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: {ÉÒ`ö¶ÉÊHò: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ EòÉxiªÉè xɨÉ:.a. (¨ÉvªÉä) ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¾þtɪÉè xɨÉ: {ÉÖÌ´ÉHòvªÉÉxÉ ¨ÉڱɨÉxjÉä +ɴɽþxÉÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÉä{ÉSÉÉ®ú{ÉÚVÉÉ EÖòªÉÉÇiÉÂ* +xÉÖYÉÉ: ºÉÎx´Éx¨ÉªÉä ¨É½þÉnäùÊ´É {É®úɨÉÞiÉ®úºÉÊ|ɪÉä* +xÉÖYÉÉÆ näùʽþ +zÉ{ÉÚhÉæ {ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉSÉÇxÉÉªÉ ¨Éä** 159 .¾þnùªÉɪÉ.xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¿Ó-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ. ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ®ú¨ÉɪÉè xɨÉ:.एकावलि 21.ʶɮúºÉä. ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ |ɦÉɪÉè xɨÉ:.¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¨ÉxÉÉäYÉɪÉè xɨÉ:. +zÉ{ÉÚhÉÉÇ +É´É®úhÉ{ÉÚVÉxÉÆ +ºªÉ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉÇ ¨É½þɨÉxjɺªÉ ¥ÉÀÉ @ñʹÉ: MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉÇ näù´ÉiÉÉ ¿Ó ¤ÉÒVÉÆ ¸ÉÓ ¶ÉÊHò: C±ÉÓ EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉǨ¤ÉÉ |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¿ÉÆ.¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ Ê´ÉtɪÉè xɨÉ:.¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ®ú¨ªÉɪÉè xɨÉ:.¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¨ÉnùxÉÉiÉÖ®úɪÉè xɨÉ:.+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¨ÉnùxÉɪÉè xɨÉ:.

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एकावलि ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ $ $ $ $ $ ¿ÚÆ Ê¶ÉJÉɪÉè ´É¹É]Âõ ʶÉJÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿é Eò´ÉSÉÉªÉ ½ÖþÆ Eò´ÉSɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Éé xÉäjÉjɪÉÉªÉ ´ÉÉè¹É]Âõ xÉäjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿: +ºjÉɪɡò]Âõ +ºjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: M±ÉÉé +zÉÆ ¨ÉÁzÉÆ ¨Éä näùʽþ +zÉÉÊvÉ{ÉiɪÉä ¨É¨É +zÉ|ÉnùÉªÉ º´ÉɽÞé M±ÉÉé {ÉÞl´ªÉè xɨÉ: {ÉÞl´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¸ÉÓ +zÉÆ ¨ÉÁzÉÆ ¨Éä näùʽþ +zÉÉÊvÉ{ÉiɪÉä ¨É¨É +zÉ|ÉnùÉªÉ º´ÉɽþÉ ¸ÉÓ Ê¸ÉªÉè xɨÉ: ¸ÉÒ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ BiÉÉ: iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ +zÉ{ÉÚhÉæ·ÉÊ®ú ¨É¨ÉɦÉʱɹÉiɨÉzÉÆ näùʽþ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉä ¹Éb÷RÂóMÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉǪÉè xɨÉ: SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ SÉiÉÖnù³äý SÉiÉÖlÉÉÇ®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ $ +{É®úÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¿Ó ¦ÉÖ´ÉxÉä·É®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ¸ÉÓ Eò¨É±ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ C±ÉÓ ºÉÖ¦ÉMÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ BiÉÉ: SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ +zÉ{ÉÚhÉæ·ÉÊ®ú ¨É¨ÉɦÉʱɹÉiɨÉzÉÆ näùʽþ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉä +{É®úÉÊnù{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉǪÉè xɨÉ: {É\SɨÉÉ´É®úhÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ +¹]õnù±Éä {É\SɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ +ÉÆ ¥ÉÀ¨ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 161 .

एकावलि ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ <È ¨Éɽäþ·É®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ >Æð EòÉè¨ÉÉ®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ AÆñ ´Éè¹hÉ´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ±ÉßÆ ´ÉÉ®úɽþÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ Bå ¨ÉɽäþxpùÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ +Éé SÉɨÉÖhb÷É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪ ÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ +: ¨É½þɱÉI¨ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ BiÉÉ: {É\SɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ +zÉ{ÉÚhÉæ·ÉÊ®ú ¨É¨ÉɦÉʱɹÉiɨÉzÉÆ näùʽþ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ {É\SɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ {É\SɨÉÉ´É®úhÉä ¨ÉÉiÉÞEòɹ]õEò{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉǪÉè xɨÉ: ¹É¹`öÉ´É®úhÉ: ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ ¹ÉÉàb÷¶Énù±Éä ¹É¹`öÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: +¨ÉÞiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¨ÉÉxÉnùÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: iÉÖι]õ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÖι]õ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: |ÉÒÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ®úÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¿Ò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¸ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: º´ÉvÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: VªÉÉäiºxÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ½äþ¨É´ÉiÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: UôɪÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÚÌhɨÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ÊxÉiªÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 162 .

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एकावलि ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ BiÉÉ: ºÉ{iɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÊiÉ +zÉ{ÉÚhÉæ·ÉÊ®ú ¨É¨ÉɦÉʱɹÉiɨÉzÉÆ näùʽþ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** ¿Ó ¸ÉÓ C±ÉÓ $ ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉä ºÉɪÉÖvÉÊnùC{ÉɱÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉǪÉè xɨÉ: +xÉäxÉ ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉ {ÉÚVÉxÉä ¦ÉMÉ´ÉÉiÉÒ ¸ÉÒ+zÉ{ÉÚhÉÉÇ ºÉÖ|ɺÉzÉ: ºÉÖ|ÉÒiÉ: ´É®únùÉä ¦É´ÉiÉÖ* 164 .

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एकावलि

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168

एकावलि

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$ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉä +¹]õ¨ÉÉiÉÞ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ+·ÉÉ°üføɨ¤ÉɪÉè xɨÉ:

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{É\SɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ:
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´ÉÆ ´É¯ûhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
ªÉÆ ´ÉɪÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
ºÉÆ ºÉÉä¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
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¸ÉÓ Ê´É¹hÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:

169

एकावलि

$ ±ÉÆ ´ÉXÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
$ ®Æú ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
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$ ´ÉÆ {ÉÉ¶É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
$ ªÉÆ v´ÉVÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
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ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ:
$ +ÉÆ ¿Ó GòÉå Bʽþ {É®ú¨Éä·ÉÊ®ú º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ú¸ÉÒ +·ÉÉ°üføɨ¤ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉ
iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú)
$ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä*
¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäiÉÖ¦ªÉÆ {É\SɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ**
${É\SɨÉÉ´É®úhÉä ºÉɪÉÖvÉÊnùC{ÉɱÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ +·ÉÉ°üføɨ¤ÉɪÉè xɨÉ:
+xÉäxÉ {É\SÉÉ´É®úhÉ {ÉÚVÉxÉäxÉ ¦ÉMÉ´ÉÉÊiÉ ¸ÉÒ +·ÉÉ°üføɨ¤ÉÉ ºÉÖ|ɺÉzÉÉ ºÉÖ|ÉÒiÉÉ ´É®únùÉä ¦É´ÉiÉÖ**

170

एकावलि

c.¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú +É´É®úhÉnäù´ÉiÉÉSÉÇxÉÆ
+ºªÉ ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú ¨É½þɨÉxjɺªÉ Eòh´É @ñʹÉ: MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú ú näù´ÉiÉÉ C±ÉÓ
¤ÉÒVÉÆ ½éþ ¶ÉÊHò: ¼ºÉÉè: EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ:
Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ:
¼ºÉÉÆ-+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ- ¾þnùªÉɪÉ- xɨÉ:
¼ºÉÓ-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ- ʶɮúºÉä- º´ÉɽþÉ
¼ºÉÚÆ ¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè- ´É¹É]Âõ
¼ºÉé-+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ
¼ºÉÉé-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ
¼ºÉ:-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ
vªÉÉxÉÆ: nùÉÊb÷¨ÉÒEäòºÉ®ú |ÉJªÉnäù½- ´ÉɺÉÉä ʴɦÉÚ¹ÉhÉÉÆ*
SÉiÉÖ¦ÉÖVÇ ÉÉÆ ÊjÉxɪÉxÉÉÆ |ɺÉzɺ¨Éä®ú´ÉCjÉEòÉÆ**
®úixÉÉʦɹÉäEòºÉΨ¦ÉzÉɨɹ]õ{ÉjÉɤVÉ ¨ÉvªÉMÉä*
ÊjÉEòÉähÉä º´ÉκiÉEòɺÉÒxÉÉÆ Eò¯ûhÉÉxÉxnù¨ÉÎxnù®úÉÆ**
|É´ÉɳýÉIÉ»ÉVÉÆ ®úixÉSɹÉEÆò ®úixÉ{ÉÚÊ®úiÉÆ*
{ÉÖºiÉEÆò SÉ ´É®Æú ½þºiÉè: nùvÉÉxÉÉÆ ºÉ´ÉǨÉRÂóMɱÉÉÆ**
¨ÉÚ±ÉÆ:C±ÉÓ ½éþ ¼ºÉÉè: º½þÉè: ½éþ C±ÉÓ
MÉɪÉjÉÒ ¨ÉxjÉ: $ ºÉ¨{ÉiEòªÉê Ê´ÉnÂù¨É½äþ ºÉÞÊhɽþºiÉɪÉè vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä näù´ÉÒ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉÂ
{ÉÒ`ö{ÉÚVÉÉ: $ MÉÖÆ MÉÖ¯û¦ªÉÉä xɨÉ: $ MÉÆ MÉhÉ{ÉiɪÉä xɨÉ:
$ ¨ÉÆ ¨ÉhbÚ÷EòÉÊnù {É®úiÉi´ÉÉxiÉ{ÉÒ`önäù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ:
{ÉÒ`ö¶ÉÊHò: $ VɪÉɪÉè xɨÉ:, $ Ê´ÉVɪÉɪÉè xɨÉ:,$ +ÊVÉiÉɪÉè xɨÉ:,$ +{É®úÉÊVÉiÉɪÉè
xɨÉ,$ ÊxÉiªÉɪÉè xɨÉ:,$ ʴɱÉÉʺÉxªÉè xɨÉ:,$ nùÉäMwªÉè xɨÉ:,$ +PÉÉä®úɪÉè xɨÉ:,
(¨ÉvªÉä) $ ¨ÉRÂóMɱÉɪÉè xɨÉ:
$ ¿Ó ªÉÉäMÉ {ÉÒ`öÉªÉ xɨÉ:
{ÉÖÌ´ÉHòvªÉÉxÉ ¨ÉڱɨÉxjÉä +ɴɽþxÉÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÉä{ÉSÉÉ®ú{ÉÚVÉÉ EÖòªÉÉÇiÉÂ*
+xÉÖYÉÉÆ: ºÉÎx´Éx¨ÉªÉä {É®ä näùÊ´É {É®úɨÉÞiÉ ®úºÉÊ|ɪÉä*
+xÉÖYÉÉÆ näùʽþ näù´Éäùä榃 {ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉSÉÇxÉÉªÉ ¨Éä**

|ÉlɨÉÉ´É®úhÉ:

$ |ÉlɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɪÉè xɨÉ:
171

एकावलि

$ C±ÉÓ ½éþ ¼ºÉÉè: º½þÉè: ½éþ C±ÉÓ
®úhÉEòÉà±ÉɽþɱÉÉ°üføÉ ºÉ¨{ÉiEò®Òú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú)
$ B¹ÉÉ ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú úSÉGäò |ÉlɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉÒ ºÉÉRÂóNÉÉ ºÉɪÉÖvÉÉ ºÉ¶ÉÊHòEòÉ ºÉ´ÉɽþxÉÉ
ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉ ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ%ºiÉÖ xɨÉ:
$ C±ÉÓ ½éþ ¼ºÉÉè: º½þÉè: ½éþ C±ÉÓ SÉGäò·ÉÊ®
ú ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú)
$ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä*
¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ |ÉlɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ**
$ |ÉlɨÉÉ´É®úhÉä ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú únäù´ªÉè xɨÉ:

ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉ:

$ ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ:
3- ®úÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
3- |ÉÒÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
3- ¨ÉxÉÉä¦É´ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
$ BiÉÉ: ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú úSÉGäò ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ:
ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ ºÉxiÉÖ xɨÉ:
$ C±ÉÓ ½éþ ¼ºÉÉè: º½þÉè: ½éþ C±ÉÓ SÉGäò·ÉÊ®ú ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉʨÉ
xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú)
$ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä*
¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ**
$ ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉä ®úiªÉÉÊnù ¶ÉÊHò jÉªÉ ºÉäÊ´ÉiÉÉ ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú únäù´ªÉè xɨÉ:

iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ:

$ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ:
¼ºÉÉÆ ¾þnùªÉÉªÉ xɨÉ:¾þnùªÉ ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
¼ºÉÓ Ê¶É®úºÉä º´ÉɽþÉ Ê¶É®ú:¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
¼ºÉÚÆ Ê¶ÉJÉɪÉè ´É¹É]Âõ ʶÉJÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
¼ºÉé Eò´ÉSÉÉªÉ ½ÖþÆ Eò´ÉSɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
¼ºÉÉé xÉäjÉjɪÉÉªÉ ´ÉÉè¹É]Âõ xÉäjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
¼ºÉ: +ºjÉɪɡò]Âõ +ºjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:
$ BiÉÉ: ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú úSÉGäò iÉÞiÉҪɴɮúhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ:
ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ:
172

एकावलि $ C±ÉÓ ½éþ ¼ºÉÉè: º½þÉè: ½éþ C±ÉÓ SÉGäò·ÉÊ®ú ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** $iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉä ¹Éb÷RÂóMÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú únäù´ªÉè xɨÉ: SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ: $ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: $ ¥ÉÀÒ¨ÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¨Éɽäþ·É®Òú¨ÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ EòÉè¨ÉÉ®Ò ú¨ÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ´Éè¹hÉ´ÉÒ ¨ÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ´É®úɽþÒ¨ÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¨ÉɽäþxpùÒ¨ÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ SÉɨÉÖhb÷ɨÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¨É½þɱÉI¨ÉÒ ¨ÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ BiÉÉ: ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú úSÉGäò SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ C±ÉÓ ½éþ ¼ºÉÉè: º½þÉè: ½éþ C±ÉÓ SÉGäò·ÉÊ®ú ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** $ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉä +¹]õ¨ÉÉiÉÞ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú únäù´ªÉè xɨÉ: {É\SɨÉÉ´É®úhÉ: $ $ $ $ $ $ $ $ {É\SɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: ±ÉÆ <xpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ®Æú +ÎMxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ]Æõ ªÉ¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: IÉÆ ÊxÉ@ñÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÆ ´É¯ûhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ªÉÆ ´ÉɪÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÆ ºÉÉä¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 173 .

एकावलि $ ½Æþ <ǶÉÉxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ +ÉÆ ¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ Ê´É¹hÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ±ÉÆ ´ÉXÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ®Æú ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ]Æõ nùhb÷ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ IÉÆ JÉbÂ÷MÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ´ÉÆ {ÉÉ¶É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ªÉÆ v´ÉVÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ºÉÆ ¶ÉRÂóJÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ½Æþ ÊjɶÉÚ±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ +ÉÆ {ÉnÂù¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ SÉGò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ BiÉÉ: ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú úSÉGäò {É\SɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ C±ÉÓ ½éþ ¼ºÉÉè: º½þÉè: ½éþ C±ÉÓ SÉGäò·ÉÊ®ú ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ {É\SɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** ${É\SɨÉÉ´É®úhÉä ºÉɪÉÖvÉÊnùC{ÉɱÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú únäù´ªÉè xɨÉ: +xÉäxÉ {É\SÉÉ´É®úhÉ {ÉÚVÉxÉäxÉ ¦ÉMÉ´ÉÉÊiÉ ¸ÉҺɨ{ÉiEò®Òú ú ºÉÖ|ɺÉzÉÉ ºÉÖ|ÉÒiÉÉ ´É®únùÉ ¦É´ÉiÉÖ** 174 .

एकावलि

d.¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ Ê´ÉvÉÉxÉÆ:
+ÉSɨªÉ, ¨ÉÚ±ÉäxÉ |ÉÉhÉɪÉɨÉjɪÉÆ EÞòi´ÉÉ, +ºjɨÉxjÉähÉ nù¶ÉÊnùM¤ÉxvÉxÉÆ EÞòi´ÉÉ ¨ÉÚ±ÉäxÉ
´ªÉÉ{ÉEòjɪÉÆ EÖòªÉÉÇiÉÂ* MÉÖ¯û{ÉÉnÖùEòÉÆ º¨ÉÞi´ÉÉ
+ºªÉ ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ ¨É½þɨÉxjɺªÉ SÉ¨ÉºÉ Eò½þÉä³ýɦªÉÉÆ (½þªÉOÉÒ´ÉÉä)@ñʹɦªÉÉÆ xɨÉ:
+xÉÖ¹]Öõ{É UôxnùºÉä xɨÉ: ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ näù´ÉiÉɪÉè xɨÉ: Bá ¤ÉÒVÉÉªÉ xɨÉ: ºÉÉè: ¶ÉHòªÉä
xɨÉ: C±ÉÓ EòұɱEòÉªÉ xɨÉ: ¨É¨É ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä
Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: ¨ÉÚ±ÉäxÉ Eò®Æú ºÉƶÉÉävªÉ, ÊjÉ: ´ªÉÉ{ÉEÆò EÞòi´ÉÉ
@ñMxªÉɺÉ:
ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ ®ú¨ÉËiÉ ¤ÉÉvɨÉÉxÉÉ ¥É½þÎx¨É¨ÉÉªÉ VɨÉnùÎMxÉ nùkÉÉ -{ÉÉnùÉÊnù VÉÉxÉÖ{ɪÉÇxiÉÆ
+ɺÉÚªÉǺªÉ nÖùʽþiÉÉ iÉiÉÉxÉ ¸É´ÉÉä näù´É乴ɨÉÞiɨÉVÉÖªÉÈ - VÉÉx´ÉÉÊnù xÉÉʦÉ{ɪÉÇxiÉÆ
ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ¦ÉÚxÇ iÉڪɨÉ䦪É: +ÊvɸɴÉ:{ÉÉ\SÉVÉxªÉɪÉÖÇ EÞòʹɹÉÖ - xÉɦªÉÉÊnù ¾þnùªÉ {ɪÉÇxiÉÆ
ºÉÉ {ÉIªÉÉxÉ´ªÉ¨ÉɪÉÖnùÇvÉÉxÉɪÉɨÉä {ɱÉκiÉ VɨÉnùMxɪÉÉä nùvÉÖ: - ¾þnùªÉÉÊnù Eòh`ö {ɪÉÇxiÉÆ
SÉi´ÉÉÊ®ú ´ÉÉEÂò {ÉÊ®úʨÉiÉÉ {ÉnùÉÊxÉ iÉÉÊxÉ Ê´ÉnÖùªÉæ ¥ÉÉÀhÉɪÉä ¨ÉxÉÒʹÉhÉ:*
MÉÖ½þÉ jÉÒÊhÉ ÊxÉʽþiÉÉ xÉRÂóMɪÉÊiÉ iÉÖ®úÒªÉ ´ÉÉSÉÉ ¨É=¹ÉÉä ´ÉnùÎxiÉ**- ¨ÉÖJÉ ¨ÉvªÉä
ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ ®ú¨ÉËiÉ ¤ÉÉvɨÉÉxÉÉ ¥É½þÎx¨É¨ÉÉªÉ VɨÉnùÎMxÉ nùkÉÉ*
+ɺÉÚªÉǺªÉ nÖùʽþiÉÉ iÉiÉÉxÉ ¸É´ÉÉä näù´É乴ɨÉÞiɨÉVÉÖªÉÈ**
- nùÊIÉhɦÉÉMÉä xÉÉʺÉEòÉvÉ:¨ÉvªÉ|Énäù¶ÉÆ +É®ú¦ªÉ >ðv´ÉÉæ¹`ö ¶¨É¸ÉÖ {ɪÉÇxiÉÆ
ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ¦ÉÚxÇ iÉڪɨÉ䦪É: +ÊvɸɴÉ:{ÉÉ\SÉVÉxªÉɪÉÖÇ EÞòʹɹÉÖ *
ºÉÉ {ÉIªÉÉxÉ´ªÉ¨ÉɪÉÖnùÇvÉÉxÉɪÉɨÉä {ɱÉκiÉ VɨÉnùMxɪÉÉä nùvÉÖ:**
-+vÉ®úÉä¹`öÉvÉ: ¨ÉvªÉnäù¶ÉÆ +É®ú¦ªÉ nùÊIÉhÉ ¦ÉÉMÉÉxiÉÆ
ªÉuùÉEÂò ´ÉnùxiªÉÊ´É´ÉäiÉxÉÉÊxÉ ®úɹ]ÅõÒ näù´ÉÉxÉÉÆ ÊxɹɺÉÉnù ¨ÉxpùÉ*
SÉiÉ»É >ðVÉÈ nÖùnÖù½äþ {ɪÉÉÆ漃 C´Éκ´ÉnùºªÉÉ: {É®ú¨ÉÆ VÉMÉɨÉ
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näù´ÉÓ ´ÉÉSɨÉVÉxɪÉxiÉ näù´ÉÉ: iÉÉÆ Ê´É·É°ü{ÉÉ {ɶɴÉÉä ´ÉnùÎxiÉ*
ºÉÉ xÉÉä ¨Éxpäù¹É¨ÉÚVÉÈ nÖù½þÉxÉÉ vÉäxÉÖ´ÉÉÇMMɺ¨ÉÉxÉÖ{ɺÉÖ¹]õiÉèiÉÖ**
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ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ ®ú¨ÉËiÉ ¤ÉÉvɨÉÉxÉÉ ¥É½þÎx¨É¨ÉÉªÉ VɨÉnùÎMxÉ nùkÉÉ*
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175

एकावलि

ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ¦ÉÚxÇ iÉڪɨÉ䦪É: +ÊvɸɴÉ:{ÉÉ\SÉVÉxªÉɪÉÖÇ EÞòʹɹÉÖ *
ºÉÉ {ÉIªÉÉxÉ´ªÉ¨ÉɪÉÖnùÇvÉÉxÉɪÉɨÉä {ɱÉκiÉ VɨÉnùMxɪÉÉä nùvÉÖ:** -ÊSɤÉÖEäò
ªÉuùÉEÂò ´ÉnùxiªÉÊ´É´ÉäiÉxÉÉÊxÉ ®úɹ]ÅõÒ näù´ÉÉxÉÉÆ ÊxɹɺÉÉnù ¨ÉxpùÉ*
SÉiÉ»É >ðVÉÈ nÖùnÖù½äþ{ɪÉÉÆ漃 C´Éκ´ÉnùºªÉÉ: {É®ú¨ÉÆ VÉMÉÉ¨É - xÉäjÉjɪÉä
näù´ÉÓ ´ÉÉSɨÉVÉxɪÉxiÉ näù´ÉÉ: iÉÉÆ Ê´É·É°ü{ÉÉ {ɶɴÉÉä ´ÉnùÎxiÉ*
ºÉÉ xÉÉä ¨Éxpäù¹É¨ÉÚVÉÈ nÖù½þÉxÉÉ vÉäxÉÖ´ÉÉÇMɺ¨ÉÉxÉÖ{ɺÉÖ¹]õiÉèiÉÖ**-MÉhb÷ªÉÉä:
ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ ®ú¨ÉËiÉ ¤ÉÉvɨÉÉxÉÉ ¥É½þÎx¨É¨ÉÉªÉ VɨÉnùÎMxÉ nùkÉÉ*
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ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ¦ÉÚxÇ iÉڪɨÉ䦪É: +ÊvɸɴÉ:{ÉÉ\SÉVÉxªÉɪÉÖÇ EÞòʹɹÉÖ *
ºÉÉ {ÉIªÉÉxÉ´ªÉ¨ÉɪÉÖnùÇvÉÉxÉɪÉɨÉä {ɱÉκiÉ VɨÉnùMxɪÉÉä nùvÉÖ:**´ÉÉ¨É ½þºiÉä
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ºÉÉ xÉÉä ¨Éxpäù¹É¨ÉÚVÉÈ nÖù½þÉxÉÉ vÉäxÉÖ´ÉÉÇMɺ¨ÉÉxÉÖ{ɺÉÖ¹]õiÉèiÉÖ**- nùIÉÉä®úÉè
SÉi´ÉÉÊ®ú ´ÉÉEÂò {ÉÊ®úʨÉiÉÉ {ÉnùÉÊxÉ iÉÉÊxÉ Ê´ÉnÖù¥ÉÇÀhÉÉ ªÉä ¨ÉxÉÒʹÉhÉ:
MÉÖ½þÉ jÉÒÊhÉ ÊxÉʽþiÉÉ xÉäRÂóMɪÉÎxiÉ iÉÖ®úÒªÉ ´ÉÉSÉÉä ¨ÉxÉÖ¹ªÉÉä ´ÉnùÎxiÉ** - {ÉÞ¹`äö
ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ ®ú¨ÉËiÉ ¤ÉÉvɨÉÉxÉÉ ¥É½þÎx¨É¨ÉÉªÉ VɨÉnùÎMxÉ nùkÉÉ*
+ɺÉÚªÉǺªÉ nÖùʽþiÉÉ iÉiÉÉxÉ ¸É´ÉÉä näù´É乴ɨÉÞiɨÉVÉÖªÉÈ**-MÉÖÁÆ
ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ¦ÉÚxÇ iÉڪɨÉ䦪É: +ÊvɸɴÉ:{ÉÉ\SÉVÉxªÉɪÉÖÇ EÞòʹɹÉÖ *
ºÉÉ {ÉIªÉÉxÉ´ªÉ¨ÉɪÉÖnùÇvÉÉxÉɪÉɨÉä {ɱÉκiÉ VɨÉnùMxɪÉÉä nùvÉÖ:**- xÉÉʦÉ
ªÉuùÉEÂò ´ÉnùxiªÉÊ´É´ÉäiÉxÉÉÊxÉ ®úɹ]ÅõÒ näù´ÉÉxÉÉÆ ÊxɹɺÉÉnù ¨ÉxpùÉ*
SÉiÉ»É >ðVÉÈ nÖùnÖù½äþ {ɪÉÉÆ漃 C´Éκ´ÉnùºªÉÉ: {É®ú¨ÉÆ VÉMÉɨÉ** - ¾þnùªÉÆ
näù´ÉÓ ´ÉÉSɨÉVÉxɪÉxiÉ näù´ÉÉ: iÉÉÆ Ê´É·É°ü{ÉÉ {ɶɴÉÉä ´ÉnùÎxiÉ*
ºÉÉ xÉÉä ¨Éxpäù¹É¨ÉÚVÉÈ nÖù½þÉxÉÉ vÉäxÉÖ´ÉÉÇMɺ¨ÉÉxÉÖ{ɺÉÖ¹]õiÉèiÉÖ**-Eòh`Æö
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4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ-{ÉÉnùÉ漃 VÉÉxÉÖ {ɪÉÇxiÉÆ
4-nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:-VÉÉx´ÉÉÊnù xÉÉÊ¦É {ɪÉÇxiÉÆ
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एकावलि

4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ- xÉɦªÉÉÊnù ¾þnùªÉ {ɪÉÇxiÉÆ
4-SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ- ¾þnùªÉÉÊnù Eòh`öÉxiÉÆ
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:- Eòh`öÉÊnù ¨ÉÖJÉÉxiÉÆ
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ- ¨ÉÖJÉÉÊnù ʶɮúÉäxiÉÆ
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ- =kÉ®úÉä¹`ö nùÊIÉhÉ ¦ÉÉMÉä
4-nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:- +vÉ®úÉä¹`ö nùÊIÉhÉ ¦ÉÉMÉä
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ- >ðv´ÉÉæ¹`ö ´ÉÉ¨É ¦ÉÉMÉä
4-SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ- +vÉ®úÉä¹`ö ´ÉÉ¨É ¦ÉÉMÉä
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ->ðv´ÉÇnùxiÉ {ÉRÂóHòÉè ¨ÉvªÉnùxiɨÉÉ®ú¦ªÉ nùÊIÉhɦÉÉMÉä
4-nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:-+vÉÉänùxiÉ {ÉRÂóHòÉè ¨ÉvªÉnùxiɨÉÉ®ú¦ªÉ nùÊIÉhÉ ¦ÉÉMÉä
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ- >ðv´ÉÇnùxiÉ {ÉRÂóHòÉè ¨ÉvªÉnùxiɨÉÉ®ú¦ªÉ ´ÉÉ¨É ¦ÉÉMÉä
4-SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ-+vÉÉänùxiÉ {ÉRÂóHòÉè ¨ÉvªÉnùxiɨÉÉ®ú¦ªÉ ´ÉÉ¨É ¦ÉÉMÉä
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:- xÉɺÉɨÉÚ±Éä
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ- ÊSɤÉÖEäò
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ- nùÊIÉhÉ ½þºiÉä
4-nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:- ´ÉÉ¨É ½þºiÉä
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ- nùIÉÉä®úÉè
4-SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ- ´É¨ÉÉä®úÉè
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ- ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®äú
4-nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:- xÉɦÉÉè
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ- ¾þnùªÉä
4-SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ- Eòh`äö
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ-ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ ®ú¨ÉËiÉ ¤ÉÉvɨÉÉxÉÉ ¥É½þÎx¨É¨ÉÉªÉ VɨÉnùÎMxÉ nùkÉÉ*
+ɺÉÚªÉǺªÉ nÖùʽþiÉÉ iÉiÉÉxÉ ¸É´ÉÉä näù´É乴ɨÉÞiɨÉVÉÖªÉÈ** ÊVɼ´ÉɨÉÚ±Éä
4-nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:-ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ¦ÉÚxÇ iÉڪɨÉ䦪É: +ÊvɸɴÉ:{ÉÉ\SÉVÉxªÉɪÉÖÇ EÞòʹɹÉÖ *
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एकावलि

ºÉÉ {ÉIªÉÉxÉ´ªÉ¨ÉɪÉÖnùÇvÉÉxÉɪÉɨÉä {ɱÉκiÉ VɨÉnùMxɪÉÉä nùvÉÖ:** ÊVɼ´ÉÉ ¨ÉvªÉä
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ-ªÉuùÉEÂò ´ÉnùxiªÉÊ´É´ÉäiÉxÉÉÊxÉ ®úɹ]ÅõÒ näù´ÉÉxÉÉÆ ÊxɹɺÉÉnù ¨ÉxpùÉ*
SÉiÉ»É >ðVÉÈ nÖùnÖù½äþ{ɪÉÉÆ漃 C´Éκ´ÉnùºªÉÉ: {É®ú¨ÉÆ VÉMÉɨÉ- ÊVɼ´ÉÉ nùÊIÉhÉ {ÉÉ·Éæ
4-SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ-näù´ÉÓ ´ÉÉSɨÉVÉxɪÉxiÉ näù´ÉÉ: iÉÉÆ Ê´É·É°ü{ÉÉ {ɶɴÉÉä ´ÉnùÎxiÉ*
ºÉÉ xÉÉä ¨Éxpäù¹É¨ÉÚVÉÈ nÖù½þÉxÉÉ vÉäxÉÖ´ÉÉÇMMɺ¨ÉÉxÉÖ{ɺÉÖ¹]õiÉèiÉÖ**- ÊVɼ´ÉÉ ´ÉÉ¨É {ÉÉ·Éæ
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:*
ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ**
SÉi´ÉÉÊ®ú ´ÉÉEÂò {ÉÊ®úʨÉiÉÉ {ÉnùÉÊxÉ iÉÉÊxÉ Ê´ÉnÖù¥ÉÇÀhÉÉ ªÉä ¨ÉxÉÒʹÉhÉ:MÉÖ½þÉ jÉÒÊhÉ ÊxÉʽþiÉÉ
xÉäRÂóMɪÉÎxiÉ iÉÖ®úÒªÉ ´ÉÉSÉÉä ¨ÉxÉÖ¹ªÉÉä ´ÉnùÎxiÉ -ÊVɼ´ÉÉOÉä
¨ÉxjÉ ´ÉhÉÇ xªÉɺÉ:
4-+Éä >ðv´ÉÇnùIÉÉOÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-¹`öÉ ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-Ê{É ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-vÉÉ ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-xÉÉ ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-xÉ ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-EÖò ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-±ÉÒ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-nù ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-xiÉè: ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-{É ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-Ê®ú ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-´ÉÞ ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-iÉÉ ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-´É ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-{É ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-Ê´É: ´ÉÉ¨É nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-ºÉ ð+vÉÉä ´ÉɨÉÉOÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉ
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एकावलि

4-´ÉÇ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-ºªÉè iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-´ÉÉ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-SÉ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-<Ç iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-¶ÉÉ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-xÉÉ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-SÉÉ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-¯û iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-¨ÉÉ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-欃 iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-½þ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-´ÉÉ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-nù iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
4-ªÉäiÉ iÉqùÊIÉhÉ nùxiÉä +RÂóMÉÖ¹`äöxÉ xªÉºÉäiÉÂ
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4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ-ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ ®ú¨ÉËiÉ ¤ÉÉvɨÉÉxÉÉ ¥É½þÎx¨É¨ÉÉªÉ VɨÉnùÎMxÉ nùkÉÉ*
+ɺÉÚªÉǺªÉ nÖùʽþiÉÉ iÉiÉÉxÉ ¸É´ÉÉä näù´É乴ɨÉÞiɨÉVÉÖªÉÈ** nùÊIÉhÉ ¤ÉɽÖþ
4-nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:-ºÉºÉ{ÉÇ®úÒ¦ÉÚxÇ iÉڪɨÉ䦪É: +ÊvɸɴÉ:{ÉÉ\SÉVÉxªÉɪÉÖÇ EÞòʹɹÉÖ *
ºÉÉ {ÉIªÉÉxÉ´ªÉ¨ÉɪÉÖnùÇvÉÉxÉɪÉɨÉä {ɱÉκiÉ VɨÉnùMxɪÉÉä nùvÉÖ:** ´ÉÉ¨É ¤ÉɽÖþ
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ-ªÉuùÉEÂò ´ÉnùxiªÉÊ´É´ÉäiÉxÉÉÊxÉ ®úɹ]ÅõÒ näù´ÉÉxÉÉÆ ÊxɹɺÉÉnù ¨ÉxpùÉ*
SÉiÉ»É >ðVÉÈ nÖùnÖù½äþ {ɪÉÉÆ漃 C´Éκ´ÉnùºªÉÉ: {É®ú¨ÉÆ VÉMÉɨÉ**- nùÊIÉhÉ {ÉÉ·Éæ
4-SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ-näù´ÉÓ ´ÉÉSɨÉVÉxɪÉxiÉ näù´ÉÉ: iÉÉÆ Ê´É·É°ü{ÉÉ {ɶɴÉÉä ´ÉnùÎxiÉ*
ºÉÉ xÉÉä ¨Éxpäù¹É¨ÉÚVÉÈ nÖù½þÉxÉÉ vÉäxÉÖ´ÉÉÇMɺ¨ÉÉxÉÖ{ɺÉÖ¹]õiÉèiÉÖ**- ´ÉÉ¨É {ÉÉ·Éæ
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:*ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ
´ÉÉnùªÉäiÉÂ**-SÉi´ÉÉÊ®ú ´ÉÉEÂò {ÉÊ®úʨÉiÉÉ {ÉnùÉÊxÉ iÉÉÊxÉ Ê´ÉnÖù¥ÉÇÀhÉÉ ªÉä ¨ÉxÉÒʹÉhÉ:MÉÖ½þÉ jÉÒÊhÉ
ÊxÉʽþiÉÉ xÉäRÂóMɪÉÎxiÉ iÉÖ®úÒªÉ ´ÉÉSÉÉä ¨ÉxÉÖ¹ªÉÉä ´ÉnùÎxiÉ -´ÉCjÉä
{ÉÖxÉ: ¨ÉÚ±É ¨ÉxjÉ xªÉɺÉ:
4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ-nùÊIÉhÉ{É·Éæ
4-nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:-´ÉÉ¨É {ÉÉ·Éæ
4-ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ- nùÊIÉhÉ ¤ÉɽÖþ
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º´ÉɽþÉ 4-ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ -¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.ʶɮúºÉä.¾þnùªÉɪÉ.+Éä¹`ö ¨ÉvªÉä iÉiÉ: ¨ÉÚ±É ¨ÉxjÉähÉ ´ªÉÉ{ÉEòjɪÉÆ EÖòªÉÉÇiÉ Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: 4-Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ-+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.एकावलि 4-SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ-´ÉÉ¨É ¤ÉɽÖþ 4-+Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ.xɨÉ: 4-C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É:-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.´É¹É]Âõ 4-Bå 4C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉÂ-+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ 4-Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ 4-Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ: xÉ´É xÉʳýxÉ ÊxÉ°üføÉ ´É±±É¦ÉÉ{ÉnÂù¨ÉVɺªÉ tÖÊiÉ Ê´ÉEòʺÉiÉ SÉxpùÉäqùɨÉEòÉÎxiÉ |ɺÉzÉÉ* ʴɽþ®úiÉÖ ¨É¨É ÊSÉkÉä ºÉ´ÉǤÉÉävÉ |ÉvÉÉjÉÒ Ê´ÉiÉ®úiÉÖ ºÉÖEòÊ´Éi´ÉÆ ºÉ´ÉDZÉÉäEò|ÉʺÉrÆù** xÉEÖò³ýÒ ´ÉXÉnùxiÉÉ汃 ºÉÉvªÉ ÊVɼ´ÉÉ%ʽþnÆùʶÉÊxÉ* ¦ÉHò´É्तiृ ´ÉVÉxÉxÉÒ ¦ÉÉ´ÉxÉÒªÉÉ ºÉ®úº´ÉiÉÒ** Ê´ÉEòɺɦÉÉÊVÉ ¾þi{ÉnÂù¨ÉäκlÉiÉÉÆ =±±ÉɺÉnùÉʪÉxÉÓ* {É®ú´ÉÉEÂò ºiÉΨ¦ÉxÉÓ ÊxÉiªÉÉÆ º¨É®úÉ欃 xÉEÖò±ÉÓ ºÉnùÉ** +Éä¹`öɦªÉÉÆ Ê{ÉʶÉiÉè:SÉ {ÉÎRÂóHò ÊxÉʶÉiÉè: nùxiÉè: PÉxÉè: ºÉÆ´ÉÞiÉÉ iÉÒIhÉÉ ´ÉXÉ´ÉnùjÉ ºÉ´ÉÇVÉMÉiÉÉÆ ªÉÉ º´ÉÉʨÉxÉÒ ºÉxiÉiÉÆ* ºÉÉ ¨ÉÉÆ SÉɯû Eò®úÉäiÉÖ ´ÉÉnùÊxÉ{ÉÖhÉÆ ºÉ´ÉÇjÉ ºÉÉ ´ÉÉOɺÉÉ ªÉäxÉ ºªÉɽþ¨Éä´É ºÉ´ÉÇVÉMÉiÉÉमत्यथवमग्रेºÉ®ú:** iÉÉIªÉÉÇ°üføÉ ¨ÉʽþiÉ ±ÉʱÉiÉÆ iÉɱÉÖ VÉx¨ÉÉ Ê´É¶ÉRÂóEòÒ SÉ\SÉuùÒhÉÉ Eò±É®ú´É ¶ÉÖEòÒ SÉGò¶ÉRÂóJÉÉ漃 {ÉÉÊhÉ: * ®úÉVÉÉäkÉÖºÆ ÉÉ ¨ÉxÉ漃 xÉEÖòiÉÒ ®úÉVÉiÉÖ ¶ªÉɨɱÉÉ ªÉÉ |ÉiªÉRÂóMÉi´ÉÆ {ÉÊ®úMÉiÉ´ÉiÉÒ |ÉiªÉ½Æþ ¨ÉɨÉEòÒxÉä ** 180 .

Ê´ÉtɪÉè xɨÉ:4.|ÉlɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: 4-Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ ¾þnùªÉÉªÉ xɨÉ:¾þnùªÉ ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ xɨÉ: 4-C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ʶɮúºÉä º´ÉɽþÉ Ê¶É®ú:¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ.|ɦÉɪÉè xɨÉ:4.एकावलि |ÉiªÉɦÉÒ¹]õ ¶É®úiÉ ¶É¶ÉÉRÂóEò¯ûÊSÉʦÉ:nùƹ]ÅõɨɪÉÚJÉÉRÂEòÖ®èú: +YÉÉxÉÉJªÉ ¨É½þÉxvÉEòÉ®ú{É]õ±ÉÒÊxÉ´ÉÉǺɪÉxiÉÒ ¨ÉÖ½Öþ: * ¶ÉÖrùYÉÉxÉ ºÉÖvÉÉ®úºÉpù´É¨ÉªÉÒ¨ÉÚÍiÉ nùvÉÉxÉÉÆ Ê¶É´ÉÉÆ ´ÉÉMÉÒ¶ÉÉ xÉEÖò±ÉÒ Eò®úÉäiÉÖ ¨ÉxÉºÉ ¶ÉÖËrù |ÉEÞò¹]õÉ ¨É¨É ** ¨ÉÚ±ÉÆ:4-Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ {ÉÒ`ö{ÉÚVÉÉ: 4.¤ÉÖnùÂvªÉè xɨÉ:(¨ÉvªÉä)4.Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ iÉÉIªÉÉÇ°üføÉ SÉGò ¶ÉRÂóJÉÉ漃 vÉÞiÉÉ ¸ÉÒ±ÉʱÉiÉɪÉÉ: iÉɱÉÖVÉx¨ÉÉ Mɯûb÷ɺjÉ +IÉÒhÉ xÉEÖò±ÉɺjÉ |ɪÉÉäÊMÉiÉÉ ¸ÉÒ®úÉVɶªÉɨɱÉɪÉÉ |ÉiªÉRÂóMɦÉÚiÉÉ ¸ÉÒxÉEÖò³ýÒ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) |ÉlɨÉÉ´É®úhÉ: 4.xɨÉ: 4-Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Eò´ÉSÉÉªÉ ½ÖþÆ Eò´ÉSɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ-xɨÉ: 181 .|ÉYÉɪÉè xɨÉ:4.¶ÉRÂóJÉÉªÉ xɨÉ: SÉGò®úÉªÉ xɨÉ: +ºÉªÉä xɨÉ: ´É®únùÉªÉ xɨÉ:) +xÉÖYÉÉ: 4-ºÉÎx´Éx¨ÉªÉä {É®äú näùÊ´É {É®úɨÉÞiɯûÊSÉ Ê|ɪÉä* +xÉÖYÉÉÆ xÉEÖò汃 näùʽþ {ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉSÉÇxÉÉªÉ ¨Éä** 4.MÉÖÆ MÉÖ¯û¦ªÉÉä xɨÉ: 4.MÉÆ MÉhÉ{ÉiɪÉä xɨÉ: 4.xɨÉ: 4-ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Ê¶ÉJÉɪÉè ´É¹É]Âõ ʶÉJÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ.vÉÞiªÉè xɨÉ: 4.¨ÉÆ ¨ÉhbÚ÷EòÉÊnù {É®úiÉi´ÉÉxiÉ{ÉÒ`önäù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: {ÉÒ`ö¶ÉÊHò:4-¨ÉävÉɪÉè xɨÉ: 4.º¨ÉÞiªÉè xɨÉ:4.Ê´É·Éä·ÉªÉê xɨÉ: 4-Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¼ºÉÉè: ·ÉäiÉ Eò¨É±ÉÉi¨ÉxÉä ¨ÉÉiÉÞEòɪÉÉäMÉ{ÉÒ`öÉªÉ xɨÉ: {ÉÚ´ÉÉæHòvªÉÉxÉ ¨ÉڱɨÉxjÉä +ɴɽþxÉÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÉä{ÉSÉÉ®ú{ÉÚVÉÉÆ EÖòªÉÉÇiÉÂ* (+ɪÉÖvÉÉ.ÊvɪÉè xɨÉ:4.

¶ÉCiªÉè xɨÉ: ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ |ÉlɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4.Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒxÉEÖò³ýÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) 4.¨ÉiªÉè xɨÉ: ¨ÉÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.|ÉYÉɪÉè xɨÉ: |ÉYÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¸ÉÖiªÉè xɨÉ: ¸ÉÖÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.´ÉÉMÉҷɪÉê xɨÉ: ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 4-Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ xÉäjÉjɪÉÉªÉ ´ÉÉè¹É]Âõ xÉäjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ-xɨÉ: 4-Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ +ºjÉɪɡò]Âõ +ºjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: 4.|ÉlɨÉÉ´É®úhÉä ¹Éb÷RÂóMÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉÉ ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ ´ÉÉMÉҷɪÉê xɨÉ: ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉ: 4.º¨ÉÞiªÉè xɨÉ: º¨ÉÞÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¨ÉävÉɪÉè xɨÉ: ¨ÉävÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.BiÉÉ: ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒSÉGäò ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 4.Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒxÉEÖò³ýÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) 4-+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4-ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉä |ÉYÉÉÊnù ¶ÉÊHò {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ ´ÉÉMÉҷɪÉê xɨÉ: 182 .BiÉÉ: ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒSÉGäò |ÉlɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 4.ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: 4.º´ÉºiªÉè xɨÉ: º´ÉκiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

ªÉÆ ´ÉɪÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¸ÉÓ Ê´É¹hÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 183 .+: ¨É½þɱÉI¨ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+ÉÆ ¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: 4.iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉä ¨ÉÉiÉÞMÉhÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ´ÉÉMÉҷɪÉê xɨÉ: SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ: 4 SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: 4.´ÉÆ ´É¯ûhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.±ÉÆ <xpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+Éé SÉɨÉÖhb÷É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.IÉÆ ÊxÉ@ñÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½Æþ <ǶÉÉxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.<È ¨Éɽäþ·É®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.®Æú +ÎMxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.BiÉÉ: ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒSÉGäò iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 4.Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒxÉEÖò³ýÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) 4-+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4.±ÉßÆ ´ÉÉ®úɽþÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+ÉÆ ¥ÉÉÀÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.AÆñ ´Éè¹hÉ´ÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ: 4.]Æõ ªÉ¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ºÉÆ ºÉÉä¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.>Æð EòÉè¨ÉÉ®úÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Bå ¨ÉɽäþxpùÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

ºÉÆ ¶ÉRÂóJÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.´ÉÆ {ÉÉ¶É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.®Æú ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½Æþ ÊjɶÉÚ±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.]Æõ nùhb÷ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ªÉÆ v´ÉVÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+ÉÆ {ÉnÂù¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.IÉÆ JÉbÂ÷MÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.±ÉÆ ´ÉXÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¸ÉÓ SÉGò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 4.Bå +Éä¹`öÉÊ{ÉvÉÉxÉÉ xÉEÖò±ÉÒ C±ÉÓ nùxiÉè: {ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉ´É{ÉÊ´É: ºÉÉè: ºÉ´ÉǺªÉè ´ÉÉSÉ <ǶÉÉxÉÉ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉɯû ¨ÉÉʨɽþ ´ÉÉnùªÉäiÉ Bå ´Énù´Énù ´ÉÉM´ÉÉÊnùxÉÒ º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®úÒ ¸ÉÒxÉEÖò³ýÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) 4-+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiÉ´ÉiºÉ±Éä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4-SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉä ºÉɪÉÖvÉ nù¶ÉÊnùEÂò{ÉɱÉEò{ÉÊ®ú´ÉÞiÉ ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ´ÉÉMÉҷɪÉê xɨÉ: +xÉäxÉ SÉiÉÖ®úÉ´É®úhÉ {ÉÚVÉxÉäxÉ ¦ÉMÉ´ÉiÉÒ ¸ÉÒxÉEÖò±ÉÒ ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ ºÉÖ|ɺÉzÉÉ ºÉÖ|ÉÒiÉÉ ´É®únùÉ ¦É´ÉiÉÖ** 184 .

¸ÉҺɮúº´ÉiÉÒ ºiÉÉäjÉÆ:(¸ÉÒʺÉrùºÉÉ®úº´ÉiÉ ¨ÉxjÉ ´ÉhÉê: PÉÊ]õiÉÆ)) +ºªÉ ¸ÉÒ ºÉ®úº´ÉiÉÒ ºiÉÉäjÉ ¨ÉxjɺªÉ ¨ÉÉEÇòhbä÷ªÉ @ñʹÉ: ¸ÉÒ ºÉ®úº´ÉiÉÒ näù´ÉiÉÉ ºÉÞMvÉ®úÉ +xÉÖ¹]Öõ{É UôxnùÉÆ漃 ¨É¨É ´ÉÉEÂò ʺÉnÂùvªÉlÉæ ºiÉÉäjÉ {É`öxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: $ ¿ÉÆ-+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.¾þnùªÉɪÉ.´É¹É]Âõ $ ¿é-+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ $ ¿Éé-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ $ ¿:-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ: ¶ÉÖrùÉÆ ¥ÉÀÊ´ÉSÉÉ®úºÉÉ®ú{É®ú¨ÉÉÆ +ÉtÉÆ VÉMÉnÂù´ªÉÉÊ{ÉxÉÓ ´ÉÒhÉÉ{ÉÖºiÉEò vÉÉÊ®úhÉÓ +¦ÉªÉnùÉÆ VÉÉb÷¬ÉxvÉEòÉ®úÉ{ɽþÉÆ* ½þºiÉè: º¡òÉÊ]õEò ¨ÉÉʱÉEòÉÆ Ê´ÉnùvÉiÉÓ {ÉnÂù¨ÉɺÉxÉä ºÉÆκlÉiÉÉÆ ´Éxnäù iÉÉÆ {É®ú¨Éä·É®úÓ ¦ÉMÉ´ÉiÉÓ ¤ÉÖÊrù|ÉnùÉÆ ¶ÉÉ®únùÉÆ** {É\SÉ{ÉÚVÉÉ: ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¾þt¤ÉÒVÉä ¶ÉʶɯûÊSÉEò¨É±ÉÉEò±ÉÉ Ê´Éº{ɹ]õ¶ÉÉä¦Éä ¦É´ªÉä ¦É´ªÉÉxÉÖEÚò±Éä |ɨÉÖÊnùiÉ´ÉnùxÉä Ê´É·É´ÉxtÉÎRÂóQÉ{ÉnÂù¨Éä* {ÉnÂù¨Éä {ÉnÂù¨ÉÉä{Éʴɹ]äõ |ÉhÉiÉ VÉxɨÉxÉɨÉÉänù ºÉÆ{ÉÉnùʪÉjÉÒ £òÉäi¡Öò±±ÉYÉÉxÉEÚò]äõ ½þÊ®ú½þ®únùʪÉiÉä näùÊ´É ºÉƺÉÉ®ºÉÉ®äú**1** Bá Bá Bá VÉÉ{ªÉiÉÖ¹]äõ ʽþ¨É¯ûÊSÉ ¨ÉÖEÖò]äõ ´É±±ÉEòÒ ´ªÉOɽþºiÉä ¨ÉÉiɨÉÉÇiÉxÉǨɺiÉä nù½þ nù½þ VÉb÷iÉÉÆ näùʽþ ¤ÉÖËrù |ɶɺiÉÉÆ* Ê´Étä ´ÉänùÉxiÉMÉÒiÉä ¸ÉÖÊiÉ{ÉÊ®ú{ÉÊ`öiÉä ¨ÉÉäIÉnäù ¨ÉÖÊHò¨ÉÉMÉæ ¨ÉÉMÉÉÇiÉÒiɺ´É°ü{Éä ¦É´É ¨É¨É ´É®únäù ¶ÉÉ®únäù ¶É֧ɽþÉ®äú**2** 185 .xɨÉ: $ ¿Ó-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.एकावलि e.ʶɮúºÉä.º´É½þÉ $ ¿ÚÆ-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.

एकावलि wÉÓ wÉÓ wÉÓ vÉÉ®úhÉÉJªÉä vÉÞÊiÉ-¨ÉÊiÉ-xÉÖÊiÉʦÉxÉÉǨÉʦÉ: EòÒiÉÇxÉÒªÉä ÊxÉiªÉä ÊxÉiªÉä ÊxÉʨÉkÉä ¨ÉÖÊxÉ´É®ú xÉʨÉiÉä xÉÚiÉxÉä ´Éè {ÉÖ®úÉhÉä* {ÉÖhªÉä {ÉÖhªÉ|É´Éɽäþ ½þÊ®ú½þ®úxÉʨÉiÉä {ÉÚhÉÇiÉk´Éä ºÉÖ´ÉhÉæ ¨ÉÉiɨÉÉÇjÉÉvÉÇiÉk´Éä ¨ÉÊiɨÉÊiɨÉÊiÉnäù ¨ÉÉvÉ´Éä |ÉÒÊiÉxÉÉnäù**3** C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÖº´É°ü{Éä nù½þ nù½þ nÖùÊ®úiÉÆ {ÉÖºiÉEò´ªÉOɽþºiÉä ºÉxiÉÖ¹]õÉEòÉ®ú ÊSÉkÉä κ¨ÉiÉ ¨ÉÖJÉ ºÉÖ¦ÉMÉä VÉÞΨ¦ÉhÉÒ ºiɨ¦ÉxÉÒªÉä ¨ÉÉä½äþ ¨ÉÖMvÉ|ɤÉÉävÉä ¨É¨É EÖò¯û EÖò¨ÉÊiÉv´ÉÉxiÉ-Ê´Év´ÉƺɨÉÒb÷¬ä MÉÒ´ÉÉÇhÉÒ ¦ÉÉ®úiÉÒ i´ÉÆ EòʴɵÉiÉ ®úºÉxÉä ʺÉÊrùnäù ʺÉÊrùºÉÉvªÉä**4** ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ¶ÉÊHò¤ÉÒVÉä Eò¨É±É¦É´É-¨ÉÖJÉɨ¦ÉÉäVÉ-¦ÉÚiɺ´É°ü{Éä °ü{Éä°ü{É |ÉEòɶÉä ºÉEò±ÉMÉÖhɨɪÉä ÊxÉMÉÖhÇ Éä ÊxÉÌ´ÉEò±{Éä* xÉ ºlÉÚ±Éä xÉè´É ºÉÚI¨Éä +Ê´ÉÊnùiÉ Ê´É¦É´Éä VÉÉ{ªÉ Ê´ÉYÉÉxÉ iÉk´Éä Ê´É·Éä Ê´É·ÉÉxiÉ®úɱÉä ºÉEò±ÉMÉÖhɨɪÉä ÊxɹEò±Éä ÊxÉiªÉ¶ÉÖrùä**5** ºiÉÉè欃 i´ÉɽÆþ SÉ näù´ÉÒ ¨É¨É JɱÉÖ ®úºÉxÉÉ ¨ÉÉ EònùÉÊSÉiÉ iªÉVÉi´ÉÆ ¨ÉÉ ¨Éä ¤ÉÖÊrù̴ɯûrùÉ ¦É´ÉiÉÖ ¨É¨É xÉÉä {ÉÉiÉÖ ¨ÉÉÆ näù´ÉÒ {ÉɪÉÉiÉÂ* ¨ÉÉ ¨Éä nÖù:JÉÆ EònùÉÊSÉiÉ C´ÉÊSÉiÉ +Ê{É ºÉ¨ÉªÉä {ÉÖºiÉEäòxÉÉEÖò±Éi´ÉÆ ¶ÉɺjÉä ´ÉÉnäù EòÊ´Éi´Éä |ɺɮúiÉÖ ¨É¨É vÉÒ: ¨Éɺi´ÉEÖòh`öÉ EònùÉÊ{É**6** <iªÉäiÉè: ¶±ÉÉäEò¨ÉÖJªÉè: |ÉÊiÉ ÊnùxÉÆ =¹É漃 ºiÉÉè欃 ªÉÉä ¦ÉÊHòxÉ©ÉÉ ºÉÉä ´ÉÉSɺ{ÉiÉä: +Ê{É +Ê´ÉÊnùiÉ Ê´É¦É´ÉÉä ´ÉÉCªÉ ¶É¤nùÉlÉÇ ´ÉäkÉÉ* ºÉ ºªÉÉiÉ <¹]õÉlÉÇ ±ÉɦÉÉiÉ ºÉÖiÉÊ¨É´É ºÉiÉiÉÆ {ÉÉiÉÖ ¨ÉÉÆ ºÉÉ SÉ näù´ÉÒ ºÉÉè¦ÉÉMªÉÆ iɺªÉ ±ÉÉäEäò |ɺɮúiÉÖ EòÊ´ÉiÉÉÊ´ÉPxɨɺiÉÆ |ɪÉÉiÉÖ**7** ÊxÉÊ´ÉPxÉÆ iɺªÉ Ê´ÉtÉ |ɦɴÉÊiÉ ºÉiÉiÉÆ SÉ +¸ÉÖiÉ OÉxlÉ ¤ÉÉävÉ EòÒÌiÉ:jÉè±ÉÉäCªÉ ¨ÉvªÉä ÊxɴɺÉiÉÖ ´ÉnùxÉä ¶ÉÉ®únùÉ iɺªÉ ºÉÉIÉÉiÉÂ* nùÒPÉÉǪÉÖ: ±ÉÉäEò{ÉÚVªÉ: ºÉEò±ÉMÉÖhɨɪÉ: ºÉxiÉiÉÆ ®úÉVɨÉÉxªÉÉä ´ÉÉMnäù´ªÉÉ: ºÉÖ|ɺÉÉnùÉiÉ ÊjÉVÉMÉÊiÉ Ê´ÉVɪÉÒ VÉɪÉiÉä ºÉiºÉ¦ÉɺÉÖ**8** ¥ÉÀSɪÉ-µÉiÉÒ ¨ÉÉèxÉÒ jɪÉÉänù¶ªÉÉÆ ÊxÉ®úÉʨɹÉ: 186 .

$ C±ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ´ÉÉMnäù´ÉiÉɪÉè xɨÉ: <ÊiÉ ºÉxÉiEÖò¨ÉÉ®ú ºÉÆʽþiÉɪÉÉÆ vÉÉ®úhɺɮúº´ÉiÉÒºiÉÉäjÉÆ ºÉ¨{ÉÚhÉǨɺiÉÖ** ¸ÉÒ¶ÉÖ¦ÉÆ ¦É´ÉiÉÖ 187 .एकावलि ºÉÉ®úº´ÉiÉ-ºiÉÉäjÉ {ÉÉ`öÉiÉ ºÉ¨ªÉEÂò <¹]õÉlÉÇ ±ÉɦɴÉÉxÉ **9** {ÉIÉuùªÉÆ jɪÉÉänù¶ªÉÉÆ BEò˴ɶÉÊiÉ ºÉÆJªÉªÉÉ +Ê´ÉÎSUôzÉÆ {É`äötºiÉÖ ºÉ EòÊ´Éi´ÉÆ ±É¦ÉäiÉ wÉÖ´ÉÆ**10** ºÉ-ºÉ´ÉÇ{ÉÉ{ÉÊ´ÉÊxɨÉÖHÇ òÉä ºÉÖ¦ÉMÉÉä ±ÉÉäEòʴɸÉÖiÉ: ´ÉÉÎ\UôiÉÆ ¡ò±É¨ÉÉ{xÉÉäÊiÉ ±ÉÉäEäò%κ¨ÉxÉ xÉÉjÉ ºÉƶɪÉ:**11** ʺÉrùºÉÉ®úº´ÉiÉ ¨ÉxjÉ: ¿Ó Bá wÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: .

+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.xɨÉ: $ ¿Ó Ê´É·ÉɴɺÉÖ-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.एकावलि 22.$ C±ÉÓ ®ú¨ªÉɪÉè xɨÉ:.$ C±ÉÓ ¨ÉnùxÉÉiÉÖ®úɪÉè xɨÉ:.´É¹É]Âõ $ +ÉÆ EòxªÉÉÆ-+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ $ ¿Ó |ɪÉSUô-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ $ GòÉå º´ÉɽþÉ-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ.ʶɮúºÉä. $ C±ÉÓ ®ú¨ÉɪÉè xɨÉ:.º´ÉɽþÉ $ GòÉå ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè. (¨ÉvªÉä) $ C±ÉÓ ¾þtɪÉè xɨÉ: ½þÉä¨Épù´ªÉÆ:1*¨ÉvÉÖ ¶ÉEÇò®úÉ Ê¨ÉʸÉiÉ +ÉVªÉÆ 2* Eò{ÉÚ®Ç ú-®úÉäSÉxÉÉ-EÖòÆ EÖò¨É-±ÉäÊ{ÉiÉ-SÉxnùxÉ ÊºÉHò ¨Éα±ÉEòÉ {ÉÚ´ÉÉæHò vªÉÉxÉ ¨ÉڱɨÉxjÉähÉ +ɴɽþxÉÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÉä{ÉSÉÉ®ú{ÉÚVÉÉ EÖòªÉÉÇi ÉÂ* +xÉÖYÉÉ: MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÉä +¦ÉÒ¹]õEòxªÉÉ¡ò±É|Énù* +xÉÖYÉÉÆ ¨Éä näùʽþ ®úÉVÉxÉ {ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉSÉÇxÉÉªÉ iÉä** 188 .$ C±ÉÓ ¨ÉnùxÉɪÉè xɨÉ:. $ C±ÉÓ ¨ÉxÉÉäYÉɪÉè xɨÉ:.$ C±ÉÓ Ê´ÉtɪÉè xɨÉ:.¸ÉÒ MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ +É´É®úhÉ näù´ÉiÉÉSÉÇxÉÆ +ºªÉ ¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ ¨É½þɨÉxjɺªÉ ¦ÉÉMÉÇ´ÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÉxÉ @ñʹÉ: Ê´É®úÉ]Âõ Uôxnù: ¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ næù´ÉiÉÉ +ÉÆ ¤ÉÒVÉÆ GòÉå ¶ÉÊHò: º´ÉɽþÉ EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ +¦ÉÒ¹]õ EòxªÉÉ-±ÉɦÉÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: $ +ÉÆ MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ.¾þnùªÉɪÉ. $ C±ÉÓ |ɦÉɪÉè xɨÉ:.vªÉɪÉäiÉ <IÉÖ®úºÉÉÎx´ÉiÉä ®úlÉ´É®äú{ÉÖhbÅ÷äIÉÖʦÉ: Eòα{ÉiÉä Eò±½þÉ®ú»ÉMÉÖ{ÉÉkÉ {ÉÉÊhÉEò¨É±Éè: EòxªÉÉVÉxÉè: ºÉäÊ´ÉiÉÆ MÉxvÉ´ÉÉÇÊvÉ{ÉËiÉ |ɺÉzÉ-´ÉnùxÉÆ Ê´É·ÉɴɺÉÖÆ iɱ{ÉMÉÆ EòɨÉɦÉÒÊiÉEò®Æú ¨ÉxÉÉä½þ®úiÉxÉÖÆ EòxªÉÉ{iɪÉä ºÉxiÉiÉÆ ¨ÉÚ±ÉÆ:$ +ÉÆ ¿Ó GòÉå MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÉä ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ EòxªÉÉÆ |ɪÉSUô º´ÉɽþÉ +xÉÖ¹]Öõ{É ¨ÉxjÉ: $ C±ÉÓ ®ú¨ªÉÉÆ Ê´É·ÉɴɺÉÉä EòxªÉÉÆ ºÉ´ÉÉDZÉRÂóEòÉ®úºÉ¨ªÉiÉÉÆ* ¨É¨Éɦ±ÉʹÉiÉÉÆ näùʽþ ´ÉÒhÉÉʨɴɨÉxÉÉä½þ®úÉÆ** {ÉÒ`ö{ÉÚVÉÉ: $ MÉÖÆ MÉÖ¯û¦ªÉÉä xɨÉ: $ MÉÆ MÉhÉ{ÉiɪÉä xɨÉ: $ ¨ÉÆ ¨ÉhbÚ÷EòÉÊnù {É®úiÉi´ÉÉxiÉ{ÉÒ`önäù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: {ÉÒ`ö¶ÉÊHò: $ C±ÉÓ EòÉxiªÉè xɨÉ:.

एकावलि $ +ÉÆ ¿Ó GòÉå MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÉä ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ EòxªÉÉÆ |ɪÉSUô º´ÉɽþÉ ¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (nù¶É´ÉÉ®Æú) |ÉlɨÉÉ´É®úhÉ: $ C±ÉÓ |ÉlɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉÉªÉ xɨÉ: $ +ÉÆ ¿Ó GòÉå MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÉä ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ EòxªÉÉÆ |ɪÉSUô º´ÉɽþÉ ¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ C±ÉÓ B¹É Ê´É·ÉɴɺÉÉä|ÉÇlɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´É: ºÉÉRÂóNÉ ºÉɪÉÖvÉ ºÉ¶ÉÊHòEò ºÉ´ÉɽþxÉ ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉ ºÉxiÉÌ{ÉiÉ ºÉxiÉÖ¹]õ%ºiÉÖ xɨÉ: $ +ÉÆ ¿Ó GòÉå MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÉä ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ EòxªÉÉÆ |ɪÉSUô º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®ú:¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ C±ÉÓ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ |ÉlɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** $ C±ÉÓ |ÉlɨÉÉ´É®úhÉä ¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉÉªÉ xɨÉ: ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉ: $ C±ÉÓ ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: $ +ÉÆ MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ ¾þnùªÉÉªÉ xɨÉ: ¾þnùªÉ ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó Ê´É·ÉɴɺÉÖ Ê¶É®úºÉä º´ÉɽþÉ Ê¶É®ú:¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ GòÉå ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ Ê¶ÉJÉɪÉè ´É¹É]Âõ ʶÉJÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ +ÉÆ EòxªÉÉÆ Eò´ÉSÉÉªÉ ½ÖþÆ Eò´ÉSɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ GòÉå |ɪÉSUô xÉäjÉjɪÉÉªÉ ´ÉÉè¹É]Âõ xÉäjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ º´ÉɽþÉ +ºjÉɪɡò]Âõ +ºjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ BiÉÉ: Ê´É·ÉɴɺÉÉäÌuùiÉÒªÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ +ÉÆ ¿Ó GòÉå MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÉä ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ EòxªÉÉÆ |ɪÉSUô º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®ú:¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ C±ÉÓ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** $ C±ÉÓ ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉä ¹Éb÷RÂóMÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉÉªÉ xɨÉ: 189 .

एकावलि iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ: $ C±ÉÓ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: $ C±ÉÓ >ð´ÉǶÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ¨ÉäxÉEòÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ®ú¨¦ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ |ɨ±ÉÉäSÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ {ÉÖ\VÉEòºlɱÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ÊiɱÉÉäkɨÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ PÉÞiÉÉSÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ºÉÖ°ü{ÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ BiÉÉ: Ê´É·ÉɴɺÉÉäiÉÞiÇ ÉÒªÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ +ÉÆ ¿Ó GòÉå MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÉä ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ EòxªÉÉÆ |ɪÉSUô º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®ú:¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ C±ÉÓ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** $ C±ÉÓ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉä +{ºÉ®úºÉÉä{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉÉªÉ xɨÉ: SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ: $ C±ÉÓ SÉiÉÖlÉÉÇ®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: $ C±ÉÓ ±ÉÆ <xpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ®Æú +ÎMxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ]Æõ ªÉ¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ IÉÆ ÊxÉ@ñÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ´ÉÆ ´É¯ûhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ªÉÆ ´ÉɪÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ºÉÆ ºÉÉä¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ ½Æþ <ǶÉÉxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ C±ÉÓ BiÉÉ: Ê´É·ÉɴɺÉÉäSÉÇiÉÖlÉÉÇ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ +ÉÆ ¿Ó GòÉå MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÉä ¨É¨ÉÉʦɱÉʹÉiÉÉÆ EòxªÉÉÆ |ɪÉSUô º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®ú:¸ÉÒMÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉ Ê´É·ÉɴɺÉÖ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) 190 .

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एकावलि +¹]õÉäkÉ®ú¶ÉiÉÆ: 2-´É®únùÉªÉ xɨÉ:30 2-+¦ÉÒÊiÉ|ÉnùÉªÉ xɨÉ: 2-<ǶɺÉJÉÉªÉ xɨÉ: 2-=x¨ÉkÉÉªÉ xɨÉ: 2-Bä·ÉªÉǨÉnù¨ÉkÉÉªÉ xɨÉ: 2-ºÉÖ®äúxpù{ÉÚÊVÉiÉÉªÉ xɨÉ: 2-ºÉÉè¦ÉÉMªÉ¾þnùªÉÉªÉ xɨÉ: 2-ºÉÉè¦ÉÉMªÉ´ÉvÉÇxÉÉªÉ xɨÉ: 2-ºÉÖJÉnùÉªÉ xɨÉ: 2-Ê´ÉÊ´ÉHòºÉäÊ´ÉxÉä xɨÉ: 2-ºÉÖxnù®úÉªÉ xɨÉ:40 2-ºÉÉèxnùªÉǨÉnù¨ÉkÉÉªÉ xɨÉ: 2-´Éè¸É´ÉhÉEÖò±É´ÉvÉÇxÉÉªÉ xɨÉ: 2-ÊSÉjɺÉäxÉÉxÉÖ¨ÉiÉÉªÉ xɨÉ: 2-ÊSÉjÉÉªÉ xɨÉ: 2-Ê´ÉÊSÉjÉ´Éä¹ÉÉªÉ xɨÉ: 2-®ú\VÉxÉÒªÉÉVÉ ªÉ xɨÉ: 2-Ê´É®úÉVÉä xɨÉ: 2-®úVÉÉäMÉÖhÉÉÎx´ÉiÉÉªÉ xɨÉ: 2-MÉÒiÉʴɶÉÉ®únùÉªÉ xɨÉ: 2-MÉÉxÉ®úiÉÉªÉ xɨÉ:50 2-MÉÒiÉ´ÉÉtÊ´ÉxÉÉänù®úʺÉEòÉªÉ xɨÉ: 2-SÉɯû½þɺÉÉªÉ xɨÉ: 2-SÉɯû´Éä¹ÉÉªÉ xɨÉ: 2-SÉɯû¦ÉɹÉÉªÉ xɨÉ: 2-SÉèjÉ®úlɺÉ\SÉÉ®ú®úʺÉEòÉªÉ xɨÉ: 2-VɪɶÉÒ±ÉÉªÉ xɨÉ: 2-VɱÉGòÒb÷É{É®úɪÉhÉÉªÉ xɨÉ: 2-ZɹÉEäòiÉxɨÉiÉÉxÉÖºÉÉÊ®úhÉä xɨÉ: 2-Êb÷Îhb÷¨É-¨Éqù³ý´ÉÉtPÉÉä¹É®úʺÉEòÉªÉ xɨÉ: $ C±ÉÓ ´Éè¸É´ÉhÉÉªÉ xɨÉ: 2-EÞò¶ÉÉªÉ xɨÉ: 2-Ê{ÉRÂóMɱÉÉªÉ xɨÉ: 2-ÊxÉÊvÉ{ÉÉªÉ xɨÉ: 2-ªÉIÉÉªÉ xɨÉ: 2-Ê´ÉkÉä¶ÉÉªÉ xɨÉ: 2-MÉxvÉ´ÉÇxÉÉlÉÉªÉ xɨÉ: 2-{ÉɪɺÉÉzÉÊ|ɪÉÉªÉ xɨÉ: 2-Eò¨ÉxÉÒªÉ-EòxªÉÉVÉxÉ{ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉªÉ xɨÉ: 2-MÉMÉxÉɸɪÉÉªÉ xɨÉ:10 2-MÉxvÉ´ÉÇ|É´É®úÉªÉ xɨÉ: 2-ÊSÉjɺÉäxÉɺÉJÉÉªÉ xɨÉ: 2-ºÉÖ®úºÉRÂóPÉ-{ÉÖ®ú:ºÉ®úÉªÉ xɨÉ: 2-EòɨÉnùÉªÉ xɨÉ: 2-EòxªÉÉnùÉxÉ ºÉÖnùÒÊIÉiÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉÊhɨÉɱÉÉÊ´É®úÉÊVÉiÉÉªÉ xɨÉ: 2-ºÉÖvɨÉÉÇÊvÉι`öiÉÉªÉ xɨÉ: 2-¶ÉÖrùSÉÉÊ{ÉEò®ú|ɦÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉxnùÉ®ú{ÉÖ¹{ɨÉxÉÉä½þ®úEòÉä¶{ÉɪÉÉªÉ xɨÉ: 2-±ÉʱÉiÉÊ´ÉOɽþÉªÉ xɨÉ:20 2-+|ɨÉäªÉÉªÉ xɨÉ: 2-+ʦɮúɨÉÉªÉ xɨÉ: 2-+xÉRÂóMÉiÉÖ±ªÉÉªÉ xɨÉ: 2-+ɱÉÉä±ÉEÖòxnùÉªÉ xɨÉ: 2-+¤VÉnù±ÉɪÉiÉÉIÉÉªÉ xɨÉ: 2-{ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉvÉ®úÉªÉ xɨÉ: 2-{ÉÒiɴɺjÉ{ÉÊ®ú´ÉÞiÉÉªÉ xɨÉ: 2-EÞòiɨÉxnù½þɺÉÉªÉ xɨÉ: 2-{É®úºÉzÉ´ÉnùxÉÉªÉ xɨÉ: 192 .

एकावलि 2-iɯûhÉÒ iÉɯûhªÉ ®úʺÉEòÉªÉ xɨÉ:60 2-¨ÉvÉÖ{ÉÉxÉÉäÎiºÉHòÉªÉ xɨÉ:90 2-iÉɨ¤ÉÚ±ÉÊ|ɪÉÉªÉ xɨÉ: 2-iÉxjÉÒ´ÉÉt®úiÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉÊxÉxÉÒ¨ÉvªÉMÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉÉxªÉiɨÉÉªÉ xɨÉ: 2-ªÉIÉä·É®úÉªÉ xɨÉ: 2-ªÉIÉ®úÉVɺÉJÉÉªÉ xɨÉ: 2-®úVÉx¨ÉäJɱÉÉªÉ xɨÉ: 2-±ÉÉIÉÉ®úºÉ ºÉ¨ÉÉxÉÉ¦É ´ÉºÉxÉÉªÉ xɨÉ: 2-±ÉÉIÉɯûhÉäIÉhÉÉªÉ xɨÉ: 2-´ÉÉtÊ|ɪÉÉªÉ xɨÉ:100 2-Ê´ÉtÉ´ÉiÉä xɨÉ: 2-±ÉÉèÊEòEòÉªÉ xɨÉ: 2-±ÉÉäEòÊ|ɪÉÉªÉ xɨÉ: 2-´ÉÉÊ®úhÉÒ¨Énùʴɼ´É±ÉÉªÉ xɨÉ: 2-´Éä¹ÉÉfø¬ÉªÉ xɨÉ: 2-ºÉ½þEòÉ®úÒiɯû¨ÉڱɴÉÉʺÉxÉä xɨÉ: 2-½ÆþºÉiɱ{ɨÉvªÉºlÉÉªÉ xɨÉ: 2-½þɽþɽÚþ½Úþ-´ÉvÉÚ ¨ÉÖJªÉ ºÉÖxnù®úÒVÉxɺÉäÊ´ÉiÉÉªÉ xɨÉ:108 2-iɯûhÉÒVÉxɨÉhb÷±É¨ÉvªÉMÉÉªÉ xɨÉ: 2-º´ÉºlÉÉªÉ xɨÉ: 2-º´ÉÉvÉÒxÉEòxªÉÉVÉxÉÉªÉ xɨÉ: 2-nùªÉÉ´ÉiÉä xɨÉ: 2-Ênù´ªÉÊ´ÉOɽþÉªÉ xɨÉ: 2-nÖù:JɽþÒxÉÉªÉ xɨÉ: 2-näù´ÉºjÉÒVÉxÉ|ÉÒÊiÉ´ÉvÉÇxÉÉªÉ xɨÉ: 2-nùÉä¹ÉÉ{ɽþÉªÉ xɨÉ: 2-nùÉä¹ÉɺÉ\SÉÉ®úÉªÉ xɨÉ: 2-nÚù´ÉÉÇnù±ÉÊxɦÉÉRÂóMÉÉªÉ xɨÉ:70 2-vÉxªÉÉªÉ xɨÉ: 2-xÉ´É´Éä¹ÉÉfø¬ÉªÉ xɨÉ: 2-xÉ´ªÉÉªÉ xɨÉ: 2-xÉMxÉÉªÉ xɨÉ: 2-xÉäjÉä xɨÉ: 2-{ÉtʴɶÉÉ®únùÉªÉ xɨÉ: 2-{ÉÉtÉPªÉÇÊ|ɪÉÉªÉ xɨÉ: 2-{ɯû¹ÉäiÉ®úÉªÉ xɨÉ: 2-{ÉÎhb÷iÉÉªÉ xɨÉ: 2-¡ò±ÉnùÉªÉ xɨÉ:80 2-¤É±É´ÉiÉä xɨÉ: 2-¤ÉɱÉ-GòÒb÷É-EòÉèiÉÖÊEòxÉä xɨÉ: 2-¦ÉªÉ½þÒxÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉxnùÉ®úiɯû¨É\VÉ®úÒÊ|ɪÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨Ét{ÉÉxÉ®úiÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉkÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉiÉRÂóMÉVÉ ºÉ¨ÉÉxÉ MɨÉxÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉRÂóMɱÉPÉÉä¹ÉÊ|ɪÉÉªÉ xɨÉ: 2-¨ÉɱªÉɦɮúhÉÊ|ɪÉÉªÉ xɨÉ: 2-MÉxvÉ´ÉÇ®úÉVÉÉªÉ xɨÉ: 2-Ê´É·ÉɴɺɴÉä xɨÉ: 193 .

´É¹É]Âõ IªÉè-+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ xÉÆ-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ ¨É:-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ:VÉ{ÉÉEÖòºÉ֨ɺÉi|ɦÉÉÆ EòʱÉiÉSÉɯû®úixÉɨ¤É®úÉÆ V´É±ÉiÉ ¦ÉÖVÉMɦÉÚ¹ÉhÉÉÆ ¡òhɱɺÉi´ÉÊhÉtÉäÊiɹÉÉÆ* ´É®úɦɪÉEò®úuùªÉÉÆ EòxÉEòEÖò¨¦ÉiÉÖRÂóMɺiÉxÉÓ º¨É®úÉÊ¨É Ê´É¹ÉxÉÉʶÉxÉÓ ¨ÉxÉ漃 xÉÉMɪÉIÉÓ ºÉnùÉ** 194 .ʶɮúºÉä.ʶɮúºÉä.xɨÉ: +Æ-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.¾þnùªÉɪÉ.¸ÉÒxÉÉMÉ®úÉVÉ +É´É®úhÉnäù´ÉiÉÉSÉÇxÉÆ +ºªÉ ¸ÉÒxÉÉMÉ®úÉVɨɽþɨÉxjɺªÉ EòɶªÉ{ÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÉxÉ @ñʹÉ: MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉÒxÉÉMÉ®úÉVÉÉä ´ÉɺÉÖÊEò næù´ÉiÉÉ ¨É¨É ¸ÉÒxÉÉMÉ®úÉVÉ|ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: $-+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.´É¹É]Âõ ¨É½þɤɱÉɪÉ-+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ xÉÉMÉÉÊvÉ{ÉiɪÉä-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ º´ÉɽþÉ-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ: ¡òhÉɹ]õ¶ÉiɶÉäJÉ®Æú pÖùiɺ´ÉhÉÇ{ÉÖ\VÉ|ɦÉÆ ´É®úɦɮúhÉ ¦ÉÚʹÉiÉÆ iÉ®úÊhÉ VÉɱÉiÉÉ©ÉÉƶÉÖEÆò ºÉ-´ÉXÉ-´É®ú ±ÉIÉhÉÆ xɴɺɮúÉäVÉ ®úHäòIÉhÉÆ xɨÉÉÊ¨É Ê¶É®úºÉÉ ºÉÖ®úɺÉÖ®úxɨɺEÞòiÉÆ ´ÉɺÉÖËEò ¨ÉÚ±ÉÆ:$ xɨÉ: EòɨɰüÊ{ÉhÉä ¨É½þɤɱÉÉªÉ xÉÉMÉÉÊvÉ{ÉiɪÉä º´ÉɽþÉ MÉɪÉjÉÒ ¨ÉxjÉ: $ xÉÉMÉ®úÉVÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ =®úMÉ®úÉVÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä xÉÉMÉ |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ xÉÉMɪÉIÉÒ: +ºªÉ ¸ÉÒxÉÉMɪÉÊIɨɽþɨÉxjɺªÉ <ǶÉÉä ¦ÉMÉ´ÉÉxÉ @ñʹÉ: +xÉÖ¹]Öõ{É Uôxnù: ¸ÉÒ+ʽþªÉÊIÉ næù´ÉiÉÉ ¨É¨É ¸ÉÒxÉÉMɪÉIÉÒ|ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: $-+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉÆ.एकावलि 23.¾þnùªÉɪÉ.º´ÉɽþÉ EòɨɰüÊ{ÉhÉä-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.xɨÉ: xɨÉ:-iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.º´ÉɽþÉ Ë½þ-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.

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एकावलि $ ªÉÆ v´ÉVÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ºÉÆ ¶ÉRÂóJÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ½Æþ ÊjɶÉÚ±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ BiÉÉ: xÉÉMÉ®úÉVÉSÉGäò {É\SɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ xɨÉ: EòɨɰüÊ{ÉhÉä ¨É½þɤɱÉÉªÉ xÉÉMÉÉÊvÉ{ÉiɪÉä º´ÉɽþÉ SÉGäò·É®ú:¸ÉÒxÉÉMÉ®úÉVÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:(ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ {É\SɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** ${É\SɨÉÉ´É®úhÉä ºÉɪÉÖvÉÊnùC{ÉɱÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒxÉÉMÉ®úÉVÉÉªÉ xɨÉ: +xÉäxÉ {É\SÉÉ´É®úhÉ {ÉÚVÉxÉäxÉ ¦ÉMÉ´ÉÉxÉ ¸ÉÒxÉÉMÉ®úÉVÉ: ºÉÖ|ɺÉzÉ: ºÉÖ|ÉÒiÉ: ´É®únùÉä ¦É´ÉiÉÖ** 198 .

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एकावलि $ ½Æþ <ǶÉÉxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ +ÉÆ ¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ Ê´É¹hÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ±ÉÆ ´ÉXÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ®Æú ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ]Æõ nùhb÷ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ IÉÆ JÉbÂ÷MÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ´ÉÆ {ÉÉ¶É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ªÉÆ v´ÉVÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ºÉÆ ¶ÉRÂóJÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ½Æþ ÊjɶÉÚ±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ BiÉÉ: ¨É½þɪÉIÉÒSÉGäò SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¨É½þɪÉIªÉè xɨÉ: SÉGäò·É®úÒ ¸ÉҨɽþɪÉIÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉä* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉä iÉÖ¦ªÉÆ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** $SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉä ºÉɪÉÖvÉÊnùC{ÉɱÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉҨɽþɪÉIªÉè xɨÉ: +xÉäxÉ SÉiÉÖ®úÉ´É®úhÉ {ÉÚVÉxÉäxÉ ¦ÉMÉ´ÉiÉÒ ¸ÉÒ ¨É½þɪÉIÉÒ ºÉÖ|ɺÉzÉÉ ºÉÖ|ÉÒiÉÉ ´É®únùÉ ¦É´ÉiÉÖ 204 .

एकावलि ॐ मखणनाद वप्रयाियायै नमुः महा यक्षी अष्टोत्तर शत ॐ माया मय्वयै नमुः ॐ सवव क्षेर वालसन्त्यै नमुः ॐ महा मायायै नमुः ॐ करणा वरणाियायै नमुः ॐ मय ववद्या ववशारदायै नमुः 30 ॐ उमासख्यै नमुः ॐ शापापहायै नमुः ॐ वप्रयसख्यै नमुः ॐ शाप भीरवे नमुः ॐ गजव्रादद नकन्त्दन्त्यै नमुः ॐ शापयत ु दहतङ्कयण नमुः ॐ कािर सहियण नमुः ॐ काल्यै नमुः ॐ काि कण्ठ वप्रयङ्कयण नमुः ॐ शान्त्तायै नमुः ॐ कान्त्तायै नमुः ॐ रामायै नमुः ॐ भ्त वप्रयायै नमुः ॐ सोमायै नमुः ॐ भक्त गम्यायै नमुः 10 ॐ बिायै नमुः ॐ न्तञ्िर तनबहव ण्यै नमुः ॐ कािानि प्रभायै नमुः ॐ स म्यायै नमुः ॐ तपकसवन्त्यै नमुः 40 ॐ स म्यवप्रयायै नमुः ॐ तापसेष्टायै नमुः ॐ साध्व्यै नमुः ॐ कजतशापायै नमुः ॐ साक्षक्षण्यै नमुः ॐ कजतद्रापायै नमुः ॐ यक्ष वल्िभायै नमुः ॐ कैिास वालसन्त्यै नमुः ॐ बाधाग्रह प्रशमन्त्यै नमुः ॐ मािा ज्जवालिन्त्यै नमुः ॐ बािग्रह ववनालशन्त्यै नमुः ॐ माररतादहतायै नमुः ॐ अपसमार हरायै नमुः ॐ साळुवेश वप्रयायै नमुः ॐ घोरायै नमुः 20 ॐ कन्त्यायै नमुः ॐ घोरोष्ठायै नमुः ॐ धन्त्यायै नमुः ॐ घोरदां कष््कायै नमुः ॐ गण्यायै नमुः 50 ॐ कण्ठ-मणये नमुः ॐ ववनोददन्त्यै नमुः ॐ मखणकन्त्धर नकन्त्दन्त्यै नमुः ॐ मान्त्यायै नमुः ॐ हसत मणयॆ नमुः ॐ शन्त् ू ये तरगण ु ायै नमुः ॐ मखणकण्ठ वप्रयङ्कयण नमुः 205 .

एकावलि ॐ गणाधीशायै नमुः ॐ क्षमायै नमुः ॐ तनशाियण नमुः ॐ रमायै नमुः ॐ िड्चगन्त्यै नमुः ॐ समायै नमुः ॐ शलू िन्त्यै नमुः ॐ साम्ने नमुः ॐ वेट्यै नमुः ॐ कामायै नमुः ॐ दष्ु ट लशक्षा वविक्षणायै नमुः ॐ कामादद ककङ्कयण नमुः ॐ कष्ट नालशन्त्यै नमुः 60 ॐ क्षेमङ्कयण नमुः ॐ लशष्टरक्षक्षण्यै नमुः ॐ वप्रयङ्कयण नमुः ॐ सन्त्तान िाभदायै नमुः ॐ करर कुम्भ सम सतन्त्यै नमुः90 ॐ बाधना दारर्य नालशन्त्यै नमुः ॐ सततु त वप्रयायै नमुः ॐ शङ्िादद-तनचध-सङ्घात-रक्षा-लशक्ष- ॐ मत्यै नमुः वविक्षणायै नमुः ॐ भात्यै नमुः ॐ ददव्य भेषज हसताढयायै नमुः ॐ जात्यै नमुः ॐ सेव्य पादायै नमुः ॐ हे त्यै नमुः ॐ कथापहायै नमुः ॐ समत्ृ यै नमुः ॐ सङ्कल्पलसवद्धदायै नमुः ॐ सतस ु त्यै नमुः ॐ भ्त-सङ्कल्पद्रम ु वल्ियण नमुः ॐ गत्यै नमुः ॐ कदिर-फि सन्त्तुष्टायै नमुः70 ॐ जगत्रय वकन्त्दतायै नमुः ॐ दिन त्ररिोिनायै नमुः ॐ धैयव वववचधवन्त्यै नमुः ॐ ववदिर-कृत-दज व ायै नमुः ु न ॐ धत्ृ यै नमुः100 ॐ मदिरिायै नमुः ॐ वचधवन्त्यै नमुः ॐ मदािसायै नमुः ॐ नतव्यै नमुः ॐ ह्रांकार दे वतायै नमुः ॐ रम्यायै नमुः ॐ शङ्कापहायै नमुः ॐ कीतवनीय गुण सत्कथायै नमुः ॐ साङ्कयव नालशन्त्यै नमुः ॐ पदन ववभज्जजाि हारायै नमुः ॐ सङ्कषवणायै नमुः ॐ हरकृतोत्सवायै नमुः ॐ शङ्कुकणावयै नमुः ॐ नमो भगवत्यै महाक्षसत ु ायै नमो ॐ शाङ्कयण नमुः 80 नमुः108 ॐ सांकटापहायै नमुः 206 .

+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉƾþnùªÉɪÉ.´É¹É]Âõ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉé hÉÆ hɦɴɶɮú´É ¥ÉÀiÉäVÉÉä¨ÉªÉɪÉ-+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆ-Eò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÉé ¦ÉÆ ¦É´É¶É®ú´ÉhÉ uùÉnù¶ÉxÉäjÉɪÉ-EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉ:´ÉÆ ´É¶É®ú´ÉhÉ¦É ¥ÉÀ¯ûpùiÉäVÉÉä¨ÉªÉɪÉ-Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ ¨ÉÉiÉÞEòɺlÉÉxÉä¹ÉÖ xªÉɺÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +Æ +¨É®äú·É®úÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +ÉÆ +É®úÉvªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ <Æ <xpù{ÉÖ®úÉäMɨÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ <È <ǶÉ{ÉÖjÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ =Æ =¨ÉÉ{ÉÖjÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ >Æð >ðv´ÉÇ®äúiɺÉä xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ @Æñ @ñhÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ AÆñ Añ®úhÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ±ÉÞÆ ±ÉÞʹɰü{ÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ±ÉßÆ ±Éß½þxiÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ BÆ BEòxÉɪÉEòÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bå Bä·ÉªÉÇ|ÉnùÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +Éå +ÉäVÉκ´ÉxÉä xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +Éé +Éè¦É¨ªÉ®úʽþiÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +Æ +¨¤ÉÖVÉɺÉxÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +: +IÉÒhÉÉªÉ xɨÉ: 207 .ʶɮúºÉä.एकावलि 23.c. ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ SÉiÉÖnÇù¶ÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ +ºªÉ ¸ÉÒºÉMÉÖhɺÉÖ¥ÉÀhªÉ ¨É½þɨÉxjɺªÉ +¨ÉÞiÉÉEò¹ÉÇhÉ nùÊIÉhÉɨÉÚÌiÉ @ñʹÉ: MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉÒ|ɺÉzɺEòxvÉÉä näù´ÉiÉÉ ºÉÉé ¤ÉÒVÉÆ ¿Ó ¶ÉÊHò: ¸ÉÓ EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ +¦ÉÒ¹]õ±ÉɦÉÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÉÆ ¶ÉÆ ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É {É®úÉ´É®úÉªÉ ¥ÉÀ¨ÉªÉÉªÉ Ê´ÉtÉnäù½þɪÉ.xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÓ ®Æú ®ú´ÉhÉ¦É´É¶É ¥ÉÀSɪÉÉÇªÉ -iÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.º´ÉɽþÉ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÚÆ ´ÉÆ ´Éhɦɴɶɮú ºEòxvɺ´ÉÉʨÉEÖò¨ÉÉ®úɪÉ-¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.

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एकावलि $ $ $ $ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ +¹]õ¨ÉÚÌiÉxªÉɺÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÆ ºÉ´ÉDZÉÉäEäò¶ÉÉªÉ xɨÉ: ½Æþ ½þ®úÉi¨ÉVÉÉªÉ xɨÉ: ³Æý ±ÉI¨ÉÒ{ÉiɪÉä xɨÉ: IÉÆ IÉɨÉIÉäjÉÉªÉ xɨÉ: EòÉÌiÉEäòªÉÉªÉ xɨÉ: ±É±ÉÉ]äõ ʴɶÉÉJÉÉªÉ xɨÉ: ¡òɱÉä MÉÖ½þÉªÉ xɨÉ: §ÉÚ¨ÉvªÉä +ºÉÖ®úÉxiÉEòÉªÉ xɨÉ: Eòh`äö ºÉäxÉÉxªÉä xɨÉ: ¾þnùªÉä ¹Éh¨ÉÖJÉÉªÉ xɨÉ: xÉɦÉÉè ¨ÉªÉÚ®ú´ÉɽþxÉÉªÉ xɨÉ: ʱÉRÂóMÉä ¶ÉÊHò{ÉÉhɪÉä xɨÉ: ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®äú ¹Éb÷RÂóMɨÉÚÌiÉ xªÉɺÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÉÆ ¶ÉÆ ºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ ¾þnùªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÓ ®Æú EÖò¨ÉÉ®úÉªÉ Ê¶É®úºÉä º´ÉɽþÉ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÚÆ ´ÉÆ ½þ®úºÉÚxÉ´Éä ʶÉJÉɪÉè ´É¹É]Âõ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉé hÉÆ ºÉÖ®úÉOÉVÉÉªÉ Eò´ÉSÉÉªÉ ½ÖþÆ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÉé ¦ÉÆ ºÉäxÉÉ{ÉiɪÉä xÉäjÉjɪÉÉªÉ ´ÉÉè¹É]Âõ $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉ: ´ÉÆ ºÉÖ®äú·É®úÉªÉ +ºjÉÉªÉ ¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ: ¾þnùªÉ Eò¨É±É¨ÉvªÉä ¦ÉÉÊiÉ ªÉÎSSÉiº´É°ü{ÉÆ ÊxÉÊJɱÉʴɤÉÖvɯûCªÉÆ ºÉÆ»ÉÖÊiÉuùÉxiɦÉÉxÉÖ:* |ÉhɴɨɪɨɴÉätÆ |ÉÉÊhÉhÉÉÆ |ÉÉhÉɺÉƺlÉÆ |ÉEÞòÊiÉ Ê´É±ÉªÉ°ü{ÉÆ xÉÉè欃 iÉiÉ ¹Éh¨ÉÖJÉÉJªÉÆ** ¹Éh¨ÉÖJÉÆ uùÉnù¶É¦ÉÖVÉÆ Êuù¹ÉhhɪÉxÉ {ÉRÂóEòVÉÆ EÖò¨ÉÉ®Æú ºÉÖEÖò¨ÉÉ®úÉRÂóMÉÆ EäòEòÒ´ÉɽþxɨÉɸɪÉä* nùÉÊb÷¨ÉÒ {ÉÖ¹{ɺÉÆEòɶÉÆ MÉÖ\VÉɦÉEÖòRÂóEòÖ ¨ÉÉEÞòiÉÆ ¹É]Âõ´ÉCjɺÉʽþiÉÆ näù´ÉÆ uùÉnù¶ÉÉIÉÆ ºÉÖ¨ÉÉèʱÉxÉÆ** ®úixÉÊ´Épù=¨É¦ÉÚ¹ÉÉfø¬Æ xÉ´É´ÉÒ®úºÉ¨ÉɪÉÖiÉÆ {ÉÉnùxÉÚ{ÉÖ®úºÉ¨ªÉÖHÆò ºÉ´ÉÉǦɮúhɦÉÚʹÉiÉÆ* ºÉ´ÉÇ ±ÉIÉhɺɨªÉÖHÆò EÖò¨ÉÉ®Æú ¶ÉRÂóEò®úÉi¨ÉVÉÆ ¨É½þɴɱ±ÉÒnäù´ÉºÉäxÉɪÉÖHÆò ºÉÖ®úMÉhÉÊ|ɪÉÆ** 209 .

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एकावलि $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè:ʺÉrùÉèPÉMÉÖ¯û¦ªÉÉä xɨÉ: $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ $ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ Bå Bå Bå Bå Bå Bå Bå Bå Bå Bå Bå Bå C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè:EòɶªÉ{É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:+ÊjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:¦É®úuùÉVÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:Ê´É·ÉÉʨÉjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:MÉÉèiÉ¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:VɨÉnùÎMxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:´Éʺɹ`ö ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:¶ÉÖEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:+MɺiªÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:@ñ¦ÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:ÊxÉiÉÉEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:nùkÉÉjÉäªÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè:¨ÉÉxÉ´ÉÉèPÉMÉÖ¯û¦ªÉÉä xɨÉ: $ $ $ $ $ $ $ $ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ Bå Bå Bå Bå Bå Bå Bå Bå C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè:MÉÉä®úIÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:¨ÉiºªÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:¦ÉÉäMÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:Eò±½þÉ]õÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:´ÉÒ®äúxpùÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:¨É±ÉªÉÉSɱÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:¨ÉvªÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉè:ÊMÉ®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: iÉiÉ: {É®ú¨Éäι`ö MÉÖ¯û {É®ú¨ÉMÉÖ¯Ö û ¸ÉÒMÉÖ¯Æû +SÉǪÉäiÉ +xÉÖYÉÉ: ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù ºÉ´ÉÇYÉ ºÉÖ¥ÉÀhªÉ ʶɴÉÉi¨ÉVÉ* +xÉÖYÉÉÆ näùʽþ ¦ÉMÉ´ÉxÉ {ÉÊ®ú´ÉÉ®úÉSÉÇxÉÉªÉ ¨Éä** 213 .

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एकावलि $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¦ÉÚÆ ¦ÉÚ{ÉÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉå ºÉäxÉÉÊxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ MÉÖÆ MÉÖ½þ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ({ÉÉ·ÉÇuùªÉä) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Ë½þ ʽþ®úhªÉ¶ÉÚ±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Ë´É Ê´É¶ÉɱÉÉIÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ ¹É]ÂõEòÉähɺlÉ VɪÉxiÉÉÊnù näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉä VɪÉxiÉÉÊnù{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: (¹ÉbÂ÷nù³äý) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¶ÉÆ ºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ VÉMÉnÂù¦ÉÖ´Éä xɨÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ®Æú EÖò¨ÉÉ®úÉªÉ ´ÉSÉnÂù¦ÉÖ´Éä xɨÉ: EÖò¨ÉÉ®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ´ÉÆ ½þ®úºÉÚxÉ´Éä ʴɷɦÉÖ´Éä xɨÉ: ½þ®úºÉÚxÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ hÉÆ ºÉÖ®úÉOÉVÉÉªÉ ¯ûpù¦ÉÖ´Éä xɨÉ: ºÉÖ®úÉOÉVÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ .iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¦ÉÆ ºÉäxÉÉxªÉä ¥ÉÀ¦ÉÖ´Éä xɨÉ: ºÉäxÉÉxÉÒ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ´ÉÆ ºÉÖ®äú·É®úÉªÉ º´ÉªÉƦÉÖ´Éä xɨÉ: ºÉÖ®äú·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ .iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ ¹ÉbÂ÷nù³ýºlÉ ºÉÖ¥ÉÀhªÉÉÊnù näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉä ºÉÖ¥ÉÀhªÉÉÊnù{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ {É\SɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: (uùÉnù¶Énù³äý) 215 .

एकावलि $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¶ÉÆ ¶ÉÊHò ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¤ÉÉÆ ¤ÉÉhÉ ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ EÞòÆ EÞò{ÉÉhÉ ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ v´ÉÆ v´ÉVÉ ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ MÉÆ MÉnùÉ ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +Æ +¦ÉªÉ ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ SÉÉÆ SÉÉ{É ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ´ÉÆ ´ÉXÉ ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ {ÉÆ {ÉnÂù¨É ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ EÆò Eò]õEò ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ËjÉ ÊjɶÉÚ±É ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ´ÉÆ ´É®únù ¶ÉÊHò¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò {É\SɨÉÉ´É®úhÉ uùÉnù¶Énù³ýºlÉ ºÉÖ¥ÉÀhªÉɪÉÖvÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ {É\SɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ {É\SɨÉÉ´É®úhÉä ºÉÖ¥ÉÀhªÉɪÉÖvÉ {ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¹É¹`öÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: (´ÉÞkÉjɪÉÆ) (|ÉlɨɴɱɪÉä) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¶ÉÆ $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉé ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¸ÉÒMÉÖ½þ½þºiÉÊxÉËvÉ ºÉ´ÉǶÉCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉ´ÉǶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ËHò GòÉÆ GòÓ GÚòÆ $ ¿Ó xɨÉ: ʶɴÉÉªÉ xÉʶɨÉ榃 ½þ®úhɽþ®úhÉ {ÉÉ¶É ¤ÉË±É ÊºÉÀ¶ÉCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ʺÉÀ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ½Æþ Bå ªÉÕ ªÉÚÈ xÉʶɨÉ榃 ºÉEò±ÉVÉMÉiÉ ºÉÞι]õ κlÉÊiÉ ºÉƽþÉ®ú iÉÉä®úÉävÉÉxÉÖOɽþ |ɺÉÉÊnùxªÉè xɨÉÉä xɨÉ: |ɺÉÉÊnùxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºiÉÉÆ <È ®úÓ °Æü xÉʶɨÉ榃 EòɱÉEòɱÉÉxiÉEò EòÉänù¦ÉÉÊnùiªÉ|ÉnùÒ{iÉ´ÉnùxÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: |ÉnùÒ{iÉ´ÉnùxɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 216 .

एकावलि $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ªÉÆ ±ÉÉÆ ±ÉÓ ±ÉÚÆ xÉʶɨÉ榃 SÉ]õ SÉ]õ |ÉSÉ]õ EòɱÉÉÎMxɯûpù°ü{É-{ÉÉnùɤVÉ {ÉÊ®úºÉäÊ´ÉiÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: EòɱÉÉÎMxɯûpù°ü{É{ÉÉnùɤVÉ{ÉÊ®úºÉäÊ´ÉiɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Ë´É ¿Ó ¿ÚÆ ¿é xÉʶɨÉ榃 ¦ÉÚiÉ |ÉäiÉ Ê{ɶÉÉSÉ ¥ÉÀ®úÉIÉºÉ ¤Éb÷¤ÉÉxÉ±É ºÉäÊ´ÉiÉ ¦Éº¨É°ü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¦Éº¨É°ü{ɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ nÂù¨ÉÆ ¿ÉÆ ¿ÚÆ ¿ÚÆ xÉʶɨÉ榃 |ÉSÉhb÷ ¨ÉɯûiÉ ÊIÉ|ÉÉäOÉ tÖEÖò±É ´ÉÒªÉÉænùEò {ÉÉxÉ ®úHòÉIªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ®úHòÉIÉÒ ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ½åþ b÷ÉÆ b÷Ó bÚ÷Æ xÉʶɨÉ榃 BEòÉnù¶É¶Éiɺɽþ»ÉEòÉäÊ]õ EòÉänù¦ÉÉ´ÉnùxÉ |ÉEòÉʶÉEòɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: |ÉEòÉʶÉEòÉ ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊuùiÉҪɴɱɪÉä) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ º´ÉÉÆ GòÉÆ GòÓ GÚòÆ xÉʶɨÉ榃 EòɱÉEÚò]õÉÎMxÉ ¦ÉªÉRÂóEò®ú ¨É½þɯûpù V´ÉɱÉÉ®úÉèpùÓ ´ÉnùxÉ |ÉEòÉʶÉEòɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ®úÉèpùÒ´ÉnùxÉ|ÉEòÉʶÉEòÉ ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Ë¨É ½þÉÆ ½þÓ ½ÚþÆ xÉʶɨÉ榃 +iɱÉÉÊnù ºÉ{iÉ ±ÉÉäEòÉxiÉ xÉÉMÉäxpù ¦ÉªÉRÂóEò®ú V´ÉɱÉɺɽþ»É´ÉnùxÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉ½þ»É´ÉnùxÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ xÉÉÆ ±ÉÉÆ ±ÉÓ ±ÉÚÆ xÉʶɨÉ榃 ºÉ½þ»ÉEòÉäÊ]õ näù´ÉɺjɶɺjÉ ºÉÞι]õEòÉ®úhÉ ¾þι]õ VÉÉiÉ´ÉnùxÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: näù´ÉɺjɶɺjÉ ºÉÞι]õEòÉ®úhÉ ¾þι]õ VÉÉiÉ´ÉnùxÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ lÉÉÆ ¿Ó ¿ÚÆ ¿é xÉʶɨÉ榃 ºÉiªÉ±ÉÉäEòÉxiÉ SÉ®úÉSÉ®úºÉ½þ»ÉEòÉäb÷¬hb÷¦Éº¨É vÉÉ®úhÉ ºÉÖnùä½þɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉÖnùä½þɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ªÉÆ b÷ÉÆ b÷Ó bÚÆ÷ xÉʶɨÉ榃 ¨É½þÉÊ´ÉxvªÉ®úixɺÉÉxÉÖ´ÉÉMÉÉSÉ±É ºEòxnù ºÉèEòiÉ ´ÉXɤÉɽÖþ ¨É½þɤɱÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¨É½þɤɱÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ vÉÓ GòÉÆ GòÓ GÚòÆ xÉʶɨÉ榃 näù´ÉMÉxvÉ´ÉÇ ªÉIÉ ®úÉIÉºÉ ºÉ´ÉÉÇlÉÇ´ÉÒªÉÇ ºÉ´ÉÇVÉÒ´É ¨ÉvÉÖ|ÉɪɦÉÉ´ÉʴɹhªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¦ÉÉ´ÉʴɹhÉÒ ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¨ÉÆ ±ÉÉÆ ±ÉÓ ±ÉÚÆ xÉʶɨÉ榃 ´ÉÉÊ®úÊvɺÉ{iÉVɱÉ{ÉÉxÉvÉÚʳý vÉÚ³ýÒiÉ|ÉSÉhb÷ ¨ÉɯûiÉ ÊIÉ|É´ÉäMÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ÊIÉ|É´ÉäMÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Ë½þ ¿ÉÆ ¿Ó ¿ÚÆ xÉʶɨÉ榃 ºÉ¨ÉºiɨÉxjɪÉxjÉiÉxjÉ Ê´É¹ÉʴɹÉÚSªÉÉʦÉSÉÉ®ú ¶ÉÚxªÉ¥ÉÀ½þiªÉÉÊnù v´ÉÆʺÉxªÉè xɨÉÉä xɨÉ: v´ÉÆʺÉxÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (iÉÞiÉҪɴɱɪÉä) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ iÉÆ EÆò JÉÆ MÉÆ PÉÆ RÆó hÉÆ ¿Ó xÉʶɨÉ榃 ¨ÉÚ±ÉÉvÉÉ®úɨ¤ÉÖVÉÉ°üfø ´É±±É¦ÉÉ´ÉɨÉɪÉè MÉÖ½þɺjÉMÉhÉxÉÉÊlÉxªÉè ¨ÉÚ±É|ÉEÞòiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¨ª±É|ÉEÞòiÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ zÉÉå SÉÆ UÆô VÉÆ ZÉÆ \ÉÆ ¸ÉÓ xÉʶɨÉ榃 º´ÉÉÊvɹ`öÉxÉɨ¤ÉÖVÉÉ°üfø ¥ÉÀÉhÉÒ´ÉÉhÉÒ MÉÖ½þɺjÉ´ÉÉMÉҷɪÉê xɨÉÉä xɨÉ: ´ÉÉMÉÒ·É®úÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ MÉÖÆ ]Æõ `Æö bÆ÷ fÆø hÉÆ Ë¶É C±ÉÓ ºÉÉè: xÉʶɨÉ榃 ¨ÉÊhÉ{ÉÚ®úEòɨ¤ÉÖVÉÉ°üfø 217 .

एकावलि xÉÉ®úɪÉhÉÒEòɱÉÓ MÉÖ½þɺjɱÉI¨ªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ±ÉI¨ÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ½Æþ iÉÆ lÉÆ nÆù vÉÆ xÉÆ ´ÉÆ ºÉÉé C±ÉÓ xÉʶɨÉ榃 +xÉɽþiÉɨ¤ÉÖVÉÉ°üfø ¨É½þÉ®úÉèpùÓ ¤É±ÉÊ´ÉEòÊ®úhÉÓ MÉÖ½þɺjÉ ºÉƽþÉ®ú®úÉèpù¬è xɨÉÉä xɨÉ: ®úÉèpùÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ |ÉÆ {ÉÆ ¡Æò ¤ÉÆ ¦ÉÆ ¨ÉÆ Bå xÉʶɨÉÊ¶É Ê´É¶ÉÖrùÉ®úÉä½þhÉ ¤É±ÉɪÉè ¤É±É|ɨÉÊlÉxÉÒ MÉÖ½þɺjÉ ¨Éɽäþ·ÉªÉê xɨÉÉä xɨÉ: ¨Éɽäþ·É®úÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ SÉÉå ªÉÆ ®Æú ±ÉÆ ´ÉÆ ¶ÉÆ ¹ÉÆ Bå ¿Ó xÉʶɨÉ榃 +ÉYÉÉEò±ÉÉ°üfø ºÉ´ÉǦÉÚiÉnù¨ÉxÉÒ MÉÖ½þɺjÉ MÉÉèªÉê xɨÉÉä xɨÉ: MÉÉè®úÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ nÆù ºÉÆ ½Æþ GÚòÆ ºÉÉÆ Bå xÉʶɨÉ榃 ºÉ½þ»ÉÉ®úɨ¤ÉÖVÉÉ°üføºÉnÂùMÉÖ®úº´É°üÊ{ÉhªÉè <SUôÉYÉÉxÉÊGòªÉɶÉÉxiÉ ¶ÉCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉnÂùMÉÖ®úº´É°üÊ{ÉhÉÒ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ªÉÉiÉ ³Æý IÉÆ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: M±ÉÓ ´Éå xÉʶɨÉÊ¶É Ê¤ÉxnÖùxÉÉnùuùÉnù¶ÉÉxiÉ º´É°üÊ{ÉhªÉè {É®úɶÉCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: {É®úɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ºÉ¨Éι]õ) $ ºÉÉÆ ºÉÓ ºÉÚÆ ºÉè¨É ºÉÉé ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ Bå ºÉÉé V´É±ÉVV´ÉɱÉɪÉèEòÉäÊ]õºÉÚªÉÇ|ÉEòɶÉɪÉè ¨É½þɶÉjÉ֦ɪÉRÂóEòªÉê ±ÉÆ ®Æú nù¶ÉɺªÉ Eò®ú˴ɶÉiªÉè ºÉÉé ¨ÉÖÆ {É®úɶÉCiªÉè ½ÖþÆ ¡ò]Âõ º´ÉɽþÉ ¶ÉCiªÉɪÉÖvÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò ¹É¹`öÉ´É®úhÉ ´ÉÞkÉjɪɺlÉ ºÉÖ ¥ÉÀhªÉ¶ÉCiªÉɪÉÖvÉÉÊnù näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ ¹É¹`öÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¹É¹`öÉ´É®úhÉä ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¶ÉCiªÉɪÉÖvÉÉÊnù{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: $ $ $ $ $ $ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: (¦ÉÚ{ÉÖ®ú |ÉlɨɮäúJÉɪÉÉÆ) ¶ÉÆ ¶ÉEÖòÊxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ®åú ®äú´ÉÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ÉÚÆ {ÉÚiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¨ÉÆ ¨É½þÉ{ÉÚiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ËxÉ ÊxɶÉÒÊlÉÊxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 218 .

एकावलि $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¨ÉÉÆ ¨ÉÉʱÉÊxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¶ÉÓ ¶ÉÒiɱÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¶ÉÖÆ ¶ÉÖrùÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (¦ÉÚ{ÉÖ®ú ÊuùiÉҪɮäúJÉɪÉÉÆ) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +ÉÆ ¥ÉÉÀÒ¨ÉÉiÉÞ ºÉʽþiÉ +Æ +ʺÉiÉÉRÂóMɦÉè®ú´É ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ <È ¨Éɽäþ·É®úÒ¨ÉÉiÉÞ ºÉʽþiÉ <Æ ¯û¯û¦Éè®ú´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ >Æð EòÉè¨ÉÉ®úÒ¨ÉÉiÉÞ ºÉʽþiÉ =Æ SÉhb÷¦Éè®ú´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ AÆñ ´Éè¹hÉ´ÉÒ¨ÉÉiÉÞ ºÉʽþiÉ @Æñ GòÉävɦÉè®ú´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ±ÉßÆ ´ÉÉ®úɽþÒ¨ÉÉiÉÞ ºÉʽþiÉ ±ÉÞÆ =x¨ÉkɦÉè®ú´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ Bå <xpùÉhÉÒ¨ÉÉiÉÞ ºÉʽþiÉ BÆ Eò{ÉɱɦÉè®ú´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +Éé SÉɨÉÖhb÷ɨÉÉiÉÞ ºÉʽþiÉ +Éá ¦ÉÒ¹ÉhɦÉè®ú´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +: ¨É½þɱÉI¨ÉÒ¨ÉÉiÉÞ ºÉʽþiÉ +Æ ºÉƽþÉ®ú¦Éè®ú´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (¦ÉÚ{ÉÖ®ú iÉÞiÉҪɮäúJÉɪÉÉÆ) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ±ÉÆ ´ÉXɽþºiÉ ºÉÖ®ú{ÉÊiÉ Bä®úÉ´ÉiÉ´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMɺÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù <xp ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ®Æú ¶ÉÊHò½þºiÉ iÉäVÉÉä%ÊvÉ{ÉÊiÉ +VÉ´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMɺÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù +ÎMxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ]Æõ nùhb÷½þºiÉ |ÉäiÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ ¨Éʽþ¹É´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMÉ ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù ªÉ¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ IÉÆ JÉbÂ÷MɽþºiÉ ®úIÉÉäÊvÉ{ÉÊiÉ xÉ®ú´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMÉ ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù ÊxÉ@ñÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ´ÉÆ {ÉɶɽþºiÉ VɱÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ ¨ÉEò®ú´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMÉ ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù ´É¯ûhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ªÉÆ v´ÉVɽþºiÉ |ÉÉhÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ ¯û¯û´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMÉ ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù ´ÉɪÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ºÉÆ ¶ÉRÂóJɽþºiÉ xÉIÉjÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ +·É´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMÉ ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù ºÉÉä¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ½Æþ ÊjɶÉڱɽþºiÉ Ê´ÉtÉÊvÉ{ÉÊiÉ @ñ¹É¦É´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMÉ ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù <ǶÉÉxɸÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +ÉÆ {ÉnÂù¨É½þºiÉ ±ÉÉäEòÉÊvÉ{ÉÊiÉ ½ÆþºÉ´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMÉ ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù ¥ÉÀ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 219 .

एकावलि $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ ¸ÉÓ SÉGò½þºiÉ xÉÉMÉÉÊvÉ{ÉÊiÉ Mɯûb÷´ÉɽþxÉ ºÉÉRÂóMÉ ºÉ{ÉÊ®ú´ÉÉ®ú ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉ{ÉɹÉÇnù +xÉxiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉ ¦ÉÚ{ÉÖ®úºlÉ ¶ÉEÖòxªÉÉt¹]õ +ʺÉiÉÉRóMÉ¥Éɼ¨ªÉÉt¹]õ nù¶ÉÊnùC{ÉɨÉÉÊnù näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖv ÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉä ¶ÉEÖòxªÉÉt¹]õ +ʺÉiÉÉRóMÉ¥Éɼ¨ªÉÉt¹]õ nù¶ÉÊnùC{ÉɨÉÉÊnù {ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ½Æþ ÊnùMSÉGäò +¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: (¦ÉÚ{ÉÖ®ú |ÉlɨɮäúJÉɪÉÉÆ) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: +ÊhɨÉÉʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¨Éʽþ¨ÉÉʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: MÉÊ®ú¨ÉÉʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ±ÉÊPɨÉÉʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: |ÉÉÎ{iÉʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: |ÉÉEòɨªÉʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: <ÇʶÉi´ÉʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉʶÉi´ÉʺÉÊrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (¦ÉÚ{ÉÖ®ú ÊuùiÉҪɮäúJÉɪÉÉÆ) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: Ê´É´ÉäEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´Éè®úÉMªÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¶É¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: vÉ¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ={É®úÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ÊiÉÊlÉIÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 220 .

एकावलि $ $ $ $ $ $ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ Bå Bå Bå Bå Bå Bå C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ¸ÉrùÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉ¨ÉÉnùÉxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¨ÉÖ¨ÉÖIÉÖiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¸É´ÉhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¨ÉxÉxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ÊxÉÊnùvªÉɺÉxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (¦ÉÚ{ÉÖ®ú iÉÞiÉҪɮäúJÉɪÉÉÆ) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ´ÉÒ®ú¤ÉɽÖþ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÒ®úEäòºÉÊ®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÒ®ú¨É½äþxpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÒ®ú¨É½äþ¶É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÒ®ú{ÉÖ®úxvÉ®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÒ®úÉIÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÒ®ú¨ÉÉiÉÉÇhb÷ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÒ®úÉxiÉEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÒ®úvÉÒ®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò +¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉ ¦ÉÚ{ÉÖ®úºlÉ +ÊhɨÉÉt¹]õ Ê´É´ÉäEòÉÊnùuùÉnù¶É ´ÉÒ®ú¤Éɼ´ÉÉÊnùxÉ´É näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ÊnùMSÉGòÉÊvÉι`öiÉ ÊSÉnùÎMxɺ´É°ü{É +{ÉÊ®úÎSUôzÉ{É®ú¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ +¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¸ÉÓ ¿Ó C±ÉÓ +¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉä +ÊhɨÉÉt¹]õ Ê´É´ÉäEòÉÊnùuùÉnù¶É ´ÉÒ®ú¤Éɼ´ÉÉÊnùxÉ´É{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: 221 .

एकावलि $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå (|ÉlɨɴɱɪÉä) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÆ ®Æú iÉÆ MÉÖhÉSÉGäò xɴɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: (´ÉÞkÉjɪÉÆ) C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉi´ÉMÉÖhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ®úVÉÉäMÉÖhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: iɨÉÉäMÉÖhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¨ÉɪÉÉMÉÖhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊuùiÉҪɴɱɪÉä) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: {É®úÉ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: {ɶªÉxiÉÒ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¨ÉvªÉ¨ÉÉ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉèJÉ®úÒ´ÉÉMnäù´ÉiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (iÉÞiÉҪɴɱɪÉä) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ¦ÉÚiÉ{É\SÉEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: MÉÖhÉ{É\SÉEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: YÉÉxÉäÎxpùªÉ{É\SÉEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: Eò¨ÉæÎxpùªÉ{É\SÉEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò xɴɨÉÉ´É®úhÉ ÊjɴɱɪɺlÉ SÉiÉÖMÉÖhÇ É SÉiÉÖ ¶¶É¤nù <ÎxpùªÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÆ ®Æú iÉÆ MÉÖhÉSÉGòÉÊvÉι`öiÉ MÉÖhÉÉiÉÒiɺ´É°ü{É ÊxɺjÉèMÉÖhªÉ{É®ú¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ xɴɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: xɴɨÉÉ´É®úhÉä SÉiÉÖMÉÖhÇ É SÉiÉÖ¶¶É¤nù <ÎxpùªÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiɸÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: 222 .

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एकावलि $ $ $ $ $ $ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ Bå Bå Bå Bå Bå Bå C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ¦ÉÚ±ÉÉäEò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +ÎMxɨÉhb÷±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +xiÉ®úÒIÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÚªÉǨÉhb÷±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: º´ÉMÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉä¨É¨Éhb÷±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò BEòÉnù¶ÉÉ´É®úhÉ ¹ÉbÂ÷nù±ÉºlÉ ºÉ´ÉÇYÉÉÊnù ¹ÉbÂ÷ ¨Éhb÷±ÉjÉªÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉ´ÉÇYÉSÉGòÉÊvÉι`öiÉ ¦ÉÚ¨Éɺ´É°ü{É ºÉ´Éê·ÉªÉÇ|Énù{É®ú¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè:+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ BEòÉnù¶ÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: BEòÉnù¶ÉÉ´É®úhÉä ºÉ´ÉÇYÉÉÊnù ¹ÉbÂ÷ ¨Éhb÷±ÉjɪÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: Bå ´ÉÉM¦É´ÉSÉGäò uùÉnù¶ÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: (¹É]ÂõEòÉähÉä) $ $ $ $ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ Bå Bå Bå Bå C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: |ÉYÉÉxÉÆ ¥ÉÀÉ @ñM´Éänù¨ÉªÉ ¨É½þÉ´ÉÉCªÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-{ÉÚ.iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +½Æþ ¥ÉÀÉκ¨É ªÉVÉÖ´Éænù¨ÉªÉ ¨É½þÉ´ÉÉCªÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: iÉk´É¨É漃 ºÉɨɴÉänù¨ÉªÉ ¨É½þÉ´ÉÉCªÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: +ªÉ¨ÉÉi¨ÉÉ ¥ÉÀÉ +lÉ´ÉÇ´Éänù¨ÉªÉ ¨É½þÉ´ÉÉCªÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ $ $ $ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ Bå Bå Bå Bå C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ʶÉIÉÉ ¶ÉɺjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: Eò±{É ¶ÉɺjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ªÉÉEò®úhÉ ¶ÉɺjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: Uôxnù ¶ÉɺjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 224 .

एकावलि $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: VªÉÉäÊiÉ: ¶ÉɺjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ÊxÉ@ñÊiÉ ¶ÉɺjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ $ $ $ $ $ ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¿Ó ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ ¸ÉÓ Bå Bå Bå Bå Bå Bå C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: ºÉÉè: $ ¿Ó xɨÉ: ʶɴÉÉªÉ ¶Éè´É nù¶ÉÇxÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¸ÉÓ xɨÉÉä xÉÉ®úɪÉhÉÉªÉ ´Éè¹hÉ´É nù¶ÉÇxÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: ¸ÉÓ ¿Ó ¸ÉÓ ¶ÉÉHò nù¶ÉÇxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ MÉÆ NÉhÉ{ÉiɪÉä xɨÉ: MÉÉhÉ{ÉiªÉ nù¶ÉÇxÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¿Ó PÉÞÊhÉ:ºÉÚªÉÉÇÊnùiªÉÉå ºÉÉè®únù¶ÉÇxÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¦ÉÆ ¦Éè®ú´ÉÉªÉ xɨÉ: Eò{ÉÉʱÉEò nù¶ÉÇxÉ ¸ÉÒ{ÉÉ-xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: {É®ú¶ÉÒ±ÉÉ {ÉÒ`ö ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: VɪÉÎxiÉ {ÉÒ`ö ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶ÉÖrùÊSÉkÉ {ÉÒ`ö ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: {ÉÚhÉÇÊMÉÊ®ú {ÉÒ`ö ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: {ÉÚhÉÇ¤É±É {ÉÒ`ö ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ´ÉxÉÊMÉÊ®ú {ÉÒ`ö ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò uùÉnù¶ÉÉ´É®úhÉ ¹É]ÂõEòÉähɺlÉ ¨É½þÉ´ÉÉCªÉSÉiÉÖ¹]õªÉ ¹ÉbÂ÷¶ÉɺjÉ ¹ÉbÂ÷nù¶ÉÇxÉ ¹ÉbÂ÷{ÉÒ`ö näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: Bå ´ÉÉM¦É´ÉSÉGòÉÊvÉι`öiÉ ´ÉÉSÉɨÉMÉÉäSÉ®úº´É°ü{É {É®ú¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè:+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ uùÉnù¶ÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè:uùÉnù¶ÉÉ´É®úhÉä ¨É½þÉ´ÉÉCªÉSÉiÉÖ¹]õªÉ ¹ÉbÂ÷¶ÉɺjÉ ¹ÉbÂ÷nù¶ÉÇxÉ ¹ÉbÂ÷{ÉÒ`ö{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: C±ÉÓ ¶ÉÊHòSÉGäò jɪÉÉänù¶ÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: (ÊjÉEòÉähÉä) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: +Æ +EòÉ®úÉi¨ÉEò <SUôɶÉÊHòº´É°ü{É ´ÉÉhÉÒ ºÉ¨ÉäiÉ ¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ 225 .

एकावलि {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: =Æ =EòÉ®úÉi¨ÉEò YÉÉxɶÉÊHòº´É°ü{É ±ÉI¨ÉÒ ºÉ¨ÉäiÉ Ê´É¹hÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¨ÉÆ ¨ÉEòÉ®úÉi¨ÉEò ÊGòªÉɶÉÊHòº´É°ü{É ¯ûpùÉÊhÉ ºÉ¨ÉäiÉ ¯ûpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: $ +ÉåEòÉ®úÉi¨ÉEò{É®úɶÉÊHòº´É°ü{ɨÉɪÉÉÊ´Éʶɹ`öEòÉ®úhÉà·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉʨÉiÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ºÉiÉ º´É°ü{É Ê´ÉtɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ÊSÉiÉ º´É°ü{É Ê´ÉtɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: +ÉxÉxnù º´É°ü{É Ê´ÉtɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: BiÉÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò jɪÉÉänù¶ÉÉ´É®úhÉ ÊjÉEòÉähɺlÉ ÊjɨÉÚÌiÉ ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù ¶ÉÊHò näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶ÉÊHòSÉGòÉÊvÉι`öiÉ Ê´Étɺ´É°ü{É {É®ú¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè:+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ jɪÉÉä¶ÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè:jɪÉÉänù¶ÉÉ´É®úhÉä ÊjɨÉÚÌiÉ ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù ¶ÉÊHò{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: {É®ú¥ÉÀSÉGäò SÉiÉÖnùǶÉÉ´É®úhÉ näù´ÉÉªÉ xɨÉ: (ʤÉxnùÉè) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: B¹É ºÉÖ¥ÉÀhªÉSÉGäò SÉiÉÖnùǶÉÉ´É®úhÉ Ê¤ÉxnÖùºlÉ näù´É: ºÉÉRÂóNÉ ºÉɪÉÖvÉ ºÉ¶ÉÊHòEò ºÉ´ÉɽþxÉ ºÉ´ÉÉæ{É´ÉÉ®èú: ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉ ºÉxiÉÌ{ÉiÉ%ºiÉÖ xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: {É®ú¥ÉÀSÉGòÉÊvÉι`öiÉ {É®ú¥ÉÀ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: ¶É®ú´ÉhÉ¦É´É ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: SÉGäò·É®ú: ºÉÖ¥ÉÀhªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè:+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ 226 .

एकावलि SÉiÉÖnùǶÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ* $ ¿Ó ¸ÉÓ Bå C±ÉÓ ºÉÉè: SÉiÉÖnÇù¶ÉÉ´É®úhÉä ¸ÉÒºÉÖ¥ÉÀhªÉÉªÉ xɨÉ: +xÉäxÉ SÉiÉÖnùǶÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉäxÉ ¦ÉMÉ´ÉÉxÉ ¸ÉÒ ºÉÖ¥ÉÀhªÉ ºÉÖ|ÉÒiÉ: ºÉÖ|ɺÉzÉ: ´É®únùÉä ¦É´ÉiÉÖ* 227 .

xɨÉ: 4 C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ÊxÉiªÉiÉÞÎ{iɶÉÊHòvÉɨxÉä ʴɹh´ÉÉi¨ÉxÉä ¸ÉÓ ®úÓ ¿ÓiÉVÉÇxÉÒ¦ªÉÉÆ.º´ÉɽþÉ 4 ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦Éɪɺ´ÉɽþÉ +xÉÉÊnù¤ÉÉävɶÉÊHòvÉɨxÉä ¯ûpùÉi¨ÉxÉä ¸ÉÚÆ °Æü ¿Ú-Æ ¨ÉvªÉ¨ÉɦªÉÉÆ-ʶÉJÉɪÉè.´É¹É]Âõ 4 Bå ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ º´ÉiÉxjɶÉÊHòvÉɨxÉä <Ç·É®úÉi¨ÉxÉä ¸Éé ®éú ¿é -+xÉÉʨÉEòɦªÉÉÆEò´ÉSÉɪÉ-½ÖþÆ 4 C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ÊxÉiªÉ¨É±ÉÖ{iɶÉÊHòvÉɨxÉä ºÉnùÉʶɴÉÉi¨ÉxÉä ¸ÉÉé ®úÉé ¿Éé -EòÊxÉι`öEòɦªÉÉÆ-xÉäjÉjɪÉɪÉ-´ÉÉè¹É]Âõ 4 Bå ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ +xÉxiɶÉÊHòvÉɨxÉä ºÉ´ÉÉÇi¨ÉxÉä ¸É: ®ú: ¿: Eò®úiɱÉEò®ú{ÉÞ¹`öɦªÉÉÆ-+ºjÉɪÉ-¡ò]Âõ vªÉÉxÉÆ: ´Éènäù½þÒºÉʽþiÉÆ ºÉÖ®úpÖù¨ÉiɱÉä ½èþ¨Éä¨É½þɨÉhb÷{Éä ¨ÉvªÉä{ÉÖ¹{ÉEò¨ÉɺÉxÉä ´ÉÒ®úɺÉxÉäºÉÆκlÉiÉÆ +OÉä´ÉÉSɪÉÊiÉ|ɦÉ\VÉxɺÉÖiÉä iÉi´ÉÆ ¨ÉÖÊxÉʦÉ:{É®Æ ´ªÉÉJªÉxiÉÆ ¦É®úiÉÉÊnùʦÉ:{ÉÊ®ú´ÉÞiÉÆ ®úɨÉÆ -¦ÉVÉä ¶ªÉɨɱÉÆ ´ÉɨÉä¦ÉÚʨɺÉÖiÉÉ{ÉÖ®úºiÉÖ½þxÉÖ¨ÉÉxÉ {ɶSÉÉiÉ ºÉÖʨÉjÉɺÉÖiÉ: ¶ÉjÉÖPxÉÉä ¦É®úiɶSÉ {ÉÉ·ÉÇnù³ýªÉÉä´ÉÉǪ´ÉÉÊnùEòÉähÉä¹ÉÖ SÉ ºÉÖOÉҴɶSÉ Ê´É¦ÉÒ¹ÉhɶSÉ ªÉÖ´É®úÉ]ÂõiÉÉ®úɺÉÖiÉÉäVÉɨ¤É´ÉÉxÉ ¨ÉvªÉä xÉұɺɮúÉäVÉEò¨É±É¯ûËSÉ ®úɨÉÆ-¦ÉVÉä-¶ªÉɨɱÉÆ ÊºÉÀɺÉxÉä ºÉ¨ÉɺÉÒxÉÆ Ênù´ªÉÆ ¸ÉÒSÉGò®úÉVÉEäò ʤÉxuùÉEòÉ®ú¨É½þÉiÉÉIªÉǺÉƺlÉÆ ®úɨÉÆ Ê´ÉÊSÉxiɪÉä ´ÉɨÉÉRÂóEòä ®úɨɦÉpùºªÉ ºÉÆκlÉiÉÉÆ {ÉnÂù¨ÉvÉÉÊ®úhÉÓ ºÉÒiÉÉÆ vªÉɪÉä ¨É½þɱÉI¨ÉÓ º{ÉÞ¶ÉxiÉÆ ´ÉɨÉ{ÉÉÊhÉxÉÉ YÉÉxɨÉÖpùÉ nùÊIÉhÉäxÉ ´É½þxiÉÆ {ÉÉÊhÉxÉÉ ºÉnùÉ ®úɨÉÆ vªÉɪÉä VÉ{Éäx¨ÉxjÉÆ ¥ÉÀÉi¨ÉèCªÉ |ÉnùɪÉEÆò 228 .ʶɮúºÉä.एकावलि 24.¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù +É´É®úhÉnäù´ÉiÉÉSÉÇxÉÆ +ºªÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù¨É½þɨÉxjɺªÉ +vÉÇxÉÉ®úÒ·É®úÉä @ñʹÉ: MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¸ÉÒÊ´ÉtÉ ®úɨÉSÉxpùÉänùä´ÉiÉÉ ®úÉÆ ¤ÉÒVÉÆ º´ÉɽþÉ ¶ÉÊHò: ¸ÉÓ EòÒ±ÉEÆò ¨É¨É ¸ÉÒÊ´ÉtÉ®úɨÉSÉxpù |ɺÉÉnùʺÉnÂùvªÉlÉæ {ÉÚVÉxÉä Ê´ÉÊxɪÉÉäMÉ: Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉÉ: 4 Bå ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ ºÉ´ÉÇYɶÉÊHòvÉɨxÉä ¥ÉÀÉi¨ÉxÉä ¸ÉÉÆ ®úÉÆ ¿ÉÆ -+RÂóMÉÖ¹`öɦªÉÉƾþnùªÉɪÉ.

एकावलि ¨ÉÚ±ÉÆ:Bå ºÉÉè:ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ MÉɪÉjÉÒ ¨ÉxjÉ: $ nùɶɮúlÉÉªÉ Ê´ÉnÂù¨É½äþ ºÉÒiÉɴɱ±É¦ÉÉªÉ vÉÒ¨Éʽþ iÉzÉÉä ®úɨÉ: |ÉSÉÉänùªÉÉiÉ {ÉÒ`ö{ÉÚVÉÉ: $ MÉÖÆ MÉÖ¯û¦ªÉÉä xɨÉ: $ MÉÆ MÉhÉ{ÉiɪÉä xɨÉ: $ ¨ÉÆ ¨ÉhbÚ÷EòÉÊnù {É®úiÉi´ÉÉxiÉ{ÉÒ`önäù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: {ÉÒ`ö¶ÉÊHò: $ ʴɨɱÉɪÉè xɨÉ:.ºÉÒiÉÉÆ Ê´Énäù½þiÉxɪÉÉÆ ®úɨɺÉÖxnù®úÓ* ½þxÉÖ¨ÉiÉÉ ºÉ¨ÉÉʸÉiÉÉÆ ¦ÉÚʨɺÉÖiÉÉÆ ¶É®úhÉÆ ¦ÉVÉä.$ ºÉiªÉɪÉè xɨÉ:.(¨ÉvªÉä) $ +xÉÖOɽþɪÉè xɨÉ: $ xɨÉÉä ¦ÉMÉ´ÉiÉä ºÉ´ÉǦÉÚiÉÉi¨ÉxÉä ´ÉɺÉÖnùä´ÉÉªÉ ºÉ´ÉÉÇi¨ÉEòÉªÉ ªÉÉäMÉ {ÉÒ`öÉi¨ÉxÉä xɨÉ: {ÉÖÌ´ÉHòvªÉÉxÉ ¨ÉڱɨÉxjÉä +ɴɽþxÉÉÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÉä{ÉSÉÉ®ú{ÉÚVÉÉÆ EÖòªÉÉÇiÉÂ* +xÉÖYÉÉ: ®úɨÉSÉxpù ¨É½äþ¹´ÉÉºÉ ¦ÉÖÊHò¨ÉÖÊHò|ÉnùɪÉEò* i´ÉnùÉ´É®úhÉ {ÉÚVÉɪÉè nùi´ÉÉ%xÉÖYÉÉÆ EÞò{ÉÉÆ EÖò¯û** ±ÉªÉÉRÂóMÉÆ: ¨ÉvªÉä:4-Bå ºÉÉè:ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ 4-+É{ÉnùɨÉ{ɽþiÉÉÇ®Æú nùÉiÉÉ®Æú ºÉ´ÉǺɨ{ÉnùÉÆ*±ÉÉäEòÉʦɮúɨÉÆ ¸ÉÒ®úɨÉÆ ¦ÉÚªÉÉä¦ÉÚªÉÉä xɨÉɨªÉ½Æþ* ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ-iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ®úɨɺªÉ ´ÉÉ¨É ¦ÉÉMÉä: 4.$ |ɼ´ªÉè xɨÉ:. $ =iEò̹ÉhªÉè xɨÉ:. $ ªÉÉäMÉɪÉè xɨÉ:.$ <ǶÉɪÉè xɨÉ:.$ ÊGòªÉɪÉè xɨÉ.$ YÉÉxÉɪÉè xɨÉ:.¸ÉÓ ºÉÒiÉɪÉè º´ÉɽþÉ ¸ÉÒºÉÒiÉÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ®úɨɺªÉ nùÊIÉhÉä¦ÉÉMÉä:4-±ÉI¨ÉhÉÉªÉ xɨɺiɺ¨Éè ¶Éä¹ÉÉ´ÉiÉ®úÉªÉ ¨É½þÉi¨ÉxÉä* ®úÉ´ÉhɺÉÖiɺɨ½þjÉæ ¸ÉÒ®úɨɺÉʽþiÉÉªÉ SÉ** ±ÉÆ ±ÉI¨ÉhÉÉªÉ º´ÉɽþÉ UôjÉvÉÞiÉ-¸ÉÒ±ÉI¨ÉhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) 229 .

एकावलि ®úɨɺªÉ ´ÉÉ¨É {ÉÉ·Éæ: 4.¶ÉÆ ¶É®äú¦ªÉ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:(ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ®úɨɺªÉ ´ÉɨɦÉÉMÉä:4.¶ÉÉÆ ¶ÉÉRÂóMÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:(ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ®úɨɺªÉ nùÊIÉhÉä {ÉÉ·Éæ:4.iÉÚÆ iÉÚhÉÒ®úɦªÉ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:(ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ®úɨɺªÉ {ÉÚ´Éæ¦ÉÉMÉä:4.¶ÉÆ ¶ÉjÉÖPxÉÉªÉ º´ÉɽþÉ SÉɨɮúvÉÞiÉ ¸ÉÒ¶ÉjÉÖPxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚ -iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) |ÉlɨÉÉ´É®úhÉ: $ ¹É]ÂõEòÉähÉà |ÉlɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: 4 Bå ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ ºÉ´ÉÇYɶÉÊHòvÉɨxÉä ¥ÉÀÉi¨ÉxÉä ¸ÉÉÆ ®úÉÆ ¿ÉÆ ¾þnùªÉÉªÉ xɨÉ:¾þnùªÉ ¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4 C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ÊxÉiªÉiÉÞÎ{iɶÉÊHòvÉɨxÉä ʴɹh´ÉÉi¨ÉxÉä ¸ÉÓ ®úÓ ¿Ó ʶɮúºÉä º´ÉɽþÉ Ê¶É®ú:¶ÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4 ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦Éɪɺ´ÉɽþÉ +xÉÉÊnù¤ÉÉävɶÉÊHòvÉɨxÉä ¯ûpùÉi¨ÉxÉä ¸ÉÚÆ °Æü ¿ÚÆ Ê¶ÉJÉɪÉè ´É¹É]Âõ ʶÉJÉɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4 Bå ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ º´ÉiÉxjɶÉÊHòvÉɨxÉä <Ç·É®úÉi¨ÉxÉä ¸Éé ®éú ¿é Eò´ÉSÉÉªÉ ½ÖþÆ Eò´ÉSɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4 C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ÊxÉiªÉ¨É±ÉÖ{iɶÉÊHòvÉɨxÉä ºÉnùÉʶɴÉÉi¨ÉxÉä ¸ÉÉé ®úÉé ¿Éé xÉäjÉjɪÉÉªÉ ´ÉÉè¹É]Âõ xÉäjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4 Bå ºÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ +xÉxiɶÉÊHòvÉɨxÉä ºÉ´ÉÉÇi¨ÉxÉä ¸É: ®ú: ¿: +ºjÉÉªÉ ¡ò]Âõ +ºjɶÉÊHò ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4 BiÉÉ: ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùºªÉSÉGäò |ÉlɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 230 .¿ÉÆ ¿Ó ¿ÚÆ ½þÊ®ú ¨ÉEÇò]õ ¨ÉEÇò]õÉªÉ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ¨ÉɯûÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ:(ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ®úɨɺªÉ nùÊIÉhÉä{ÉÞ¹`äö:4-¦É®úiÉÉªÉ xɨɺiɺ¨Éè ºÉÉ®úYÉÉªÉ ¨É½þÉi¨ÉxÉä* iÉÉ{ɺÉɪÉÉÊiɶÉÉxiÉÉªÉ ¶ÉjÉÖPxɺÉʽþiÉÉªÉ SÉ**-¦ÉÆ ¦É®úiÉÉªÉ º´ÉɽþÉ SÉɨɮúvÉÞiÉ ¸ÉҦɮúiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ®úɨɺªÉ ´ÉɨÉä{ÉÞ¹`äö:4-¶ÉjÉÖPxÉÉªÉªÉ xɨɺiɺ¨Éè ºÉ´ÉÇYÉÉªÉ ¨É½þÉi¨ÉxÉä* ±É´ÉhÉɺÉÖ®úºÉ¨½þjÉæ ¦É®úiɺÉʽþiÉÉªÉ SÉ**4.

एकावलि 4-Bå ºÉÉè:ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ¶ÉRÂóJɨÉÖpùÉÆ |Énù¶ÉÇªÉ 4 +¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ |ÉlɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4 |ÉlɨÉÉ´É®úhÉä ¹Éb÷RÂóMÉ{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùÉªÉ xɨÉ:(ªÉÉäÊxɨÉÖpùªÉÉ |ÉhɨÉäiÉÂ) ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉ: 4 |ÉlɨÉɹ]õnù³ý¨ÉÚ±Éä ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: 4-+ÉÆ +Éi¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-ËxÉ ÊxÉ´ÉÞÊkÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-+Æ +xiÉ®úÉi¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-|ÉÆ |ÉÊiɹ`öÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-{ÉÆ {É®úÉi¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-Ë´É Ê´ÉtÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-IÉÉÆ IÉÉÎxiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-YÉÉÆ YÉÉxÉÉi¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.´ÉÉÆ ´ÉɺÉÖnùä´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¸ÉÓ ¸ÉÒ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-ºÉÆ ºÉRÂóEò¹ÉÇhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 231 .BiÉÉ: ®úɨÉSÉxpùºªÉSÉGäò ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 4-Bå ºÉÉè:ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) SÉGò¨ÉÖpùÉÆ |Énù¶ÉÇªÉ 4-+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4-ÊuùiÉÒªÉÉ´É®úhÉä +Éi¨É SÉiÉÖ¹]õªÉ ¶ÉÊHò SÉiÉÖ¹]õªÉ {ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùÉªÉ xɨÉ: (ªÉÉäÊxɨÉÖpùªÉÉ |ÉhɨÉäiÉÂ) iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ: 4-|ÉlɨÉɹ]õnù³ý¨ÉvªÉä iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: 4.

¶ÉÆ ¶ÉjÉÖPxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.एकावलि 4-¶ÉÉÆ ¶ÉÉÎxiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-|ÉÆ |ÉtÖ¨xÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-®Æú ®úÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-+Æ +Êxɯûrù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-|ÉÓ |ÉÒÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: $ BiÉÉ: ®úɨÉSÉxpùºªÉSÉGäò iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 4-Bå ºÉÉè:ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) MÉnùɨÉÖpùÉÆ |Énù¶ÉÇªÉ 4-+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4.¦ÉÆ ¦É®úiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+Æ +RÂóMÉnù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.iÉÞiÉÒªÉÉ´É®úhÉä ºÉ¶ÉÊHòEò´ÉɺÉÖnùä´ÉÉÊnù{ÉÊ®ú´ÉÉÊ®úiÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùÉªÉ xɨÉ: (ªÉÉäÊxɨÉÖpùªÉÉ |ÉhɨÉäiÉÂ) SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ: 4-|ÉlɨÉɹ]õnù³ýÉOÉä SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: 4.ºÉÖÆ ºÉÖOÉÒ´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.½Æþ ½þxÉÖ¨ÉiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4-ºÉÖOÉÒ´É: ºÉÚªÉÇiÉxɪÉ: ºÉ´ÉÇ´ÉÉxÉ®ú{ÉÖRÂóMÉ´É:* ¤É±É´ÉÉxÉ ®úÉPɴɺÉJÉÉ ´É¶ÉÒ®úÉVªÉÆ |ɪÉSUôiÉÖ** .Ë´É Ê´É¦ÉÒ¹ÉhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.VÉÉÆ VÉɨ¤É´ÉiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.BiÉÉ: ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùºªÉSÉGäò SÉiÉÖlÉÉÇ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 4-Bå ºÉÉè:ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) {ÉnÂù¨É ¨ÉÖpùÉÆ |Énù¶ÉÇªÉ 232 .±ÉÆ ±ÉI¨ÉhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

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एकावलि 4.{ÉÆ {ÉnÂù¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.BiÉÉ: ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùºªÉSÉGäò ºÉ{iɨÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 4-Bå ºÉÉè:ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) Mɯûb÷ ¨ÉÖpùÉÆ |Énù¶ÉÇªÉ 4-+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4-ºÉ{iɨÉÉ´É®úhÉä xɱÉÉÊnù{ÉÊ®ú´ÉÞiÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùÉªÉªÉ xɨÉ:(ªÉÉäÊxɨÉÖpùªÉÉ |ÉhɨÉäiÉÂ) +¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉ: 44444444444444444444- uùÉËjɶÉqù³äý +¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: wÉÖÆ wÉÖ´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: vÉÆ vɨÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÉå ºÉÉä¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +Æ +nÂù¦ªÉ: ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +Æ +ÊxÉ±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +Æ +xÉ±É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: |ÉÆ |ÉiªÉÖ¹É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: |ÉÆ |ɦÉÉºÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÓ ´ÉÒ®ú¦Épù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¶ÉÆ ¶É¨¦ÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ËMÉ ÊMÉ®úÒ¶É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +Æ +VÉèEò{Énù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: +Æ +ʽþ¤ÉÖvÇ xªÉ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: Ë{É Ê{ÉxÉÉEòÒ¶É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¦ÉÖÆ ¦ÉÖ´ÉxÉÉvÉÒ·É®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: EÆò Eò{ÉÉ汃 ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: Ënù ÊnùC{ÉÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºlÉÉÆ ºlÉÉhÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ¦ÉÆ ¦ÉMÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 235 .

एकावलि 4.Ë¨É Ê¨ÉjÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.¦ÉÉÆ ¦ÉÉxÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.BiÉÉ: ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùºªÉSÉGäò +¹]õ¨ÉÉ´É®úhɺlÉ näù´ÉiÉÉ: ºÉÉRÂóNÉÉ: ºÉɪÉÖvÉÉ: ºÉ¶ÉÊHòEòÉ: ºÉ´ÉɽþxÉÉ: ºÉ´ÉÉæ{ÉSÉÉ®èú:ºÉ¨{ÉÚÊVÉiÉÉ: ºÉxiÉÌ{ÉiÉÉ: ºÉxiÉÖ¹]õÉ: ºÉxiÉÖ xɨÉ: 4-Bå ºÉÉè:ºÉEò±É¿Ó ®úÉÆ ®úɨÉÉªÉ C±ÉÓ ½þºÉEò½þ±É¿Ó C±ÉÓ ®úPÉÖxÉxnùxÉÉªÉ ºÉÉè:EòB<Ç±É¿Ó Bå ½ÖþÆ VÉÉxÉEòҴɱ±É¦ÉÉªÉ º´ÉɽþÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: (ÊjÉ´ÉÉ®Æú) ¸ÉÒ´ÉiºÉ ¨ÉÖpùÉÆ |Énù¶ÉÇªÉ 4-+¦ÉÒ¹]õ ʺÉËrù ¨Éä näùʽþ ¶É®úhÉÉMÉiɴɺiɱÉ* ¦ÉCiªÉÉ ºÉ¨É{ÉǪÉäkÉÖ¦ªÉÆ +¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉÉSÉÇxÉÆ** 4-+¹]õ¨ÉÉ´É®úhÉä wÉÖ´ÉÉÊnù{ÉÊ®ú´ÉÞiÉ ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpùÉªÉªÉ xɨÉ:(ªÉÉäÊxɨÉÖpùªÉÉ |ÉhɨÉäiÉÂ) xɴɨÉÉ´É®úhÉ: 44444444- |ÉlɨɦÉÚMÉÞ½äþ xɴɨÉÉ´É®úhÉ näù´ÉiÉɦªÉÉä xɨÉ: ±ÉÆ <xpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ®Æú +ÎMxÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ]Æõ ªÉ¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: IÉÆ ÊxÉ@ñÊiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ´ÉÆ ´É¯ûhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ªÉÆ ´ÉɪÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: ºÉÆ ºÉÉä¨É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 236 .MÉÆ MɦɺiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.+Æ +¯ûhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.vÉÉÆ vÉÉiÉÞ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.®Æú ®úÊ´É ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.´Éå ´ÉänùÉRÂóMÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ºÉÚÆ ºÉÚªÉÇ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.˽þ ʽþ®úhªÉ®äúiÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Ënù Ênù´ÉÉEò®ú ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.ªÉÆ ªÉ¨É¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.<Æ <xpù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.Ë´É Ê´É¹hÉÖ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 iÉ{ÉǪÉÉ欃 xɨÉ: 4.

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एकावलि ¸ÉÒ®úɨÉSÉxpù +¹]õÉäkÉ®ú¶ÉiÉÆ: $ ¸ÉÒ®úɨÉÉªÉ xɨÉ: $ ®úÉ´ÉhɺÉƽþÉ®úEÞòiɨÉÉxÉÖ¹ÉÊ´ÉOɽþÉªÉ xɨÉ: $ EòÉèºÉ±ªÉɺÉÖEÞòiɵÉiÉ¡ò±ÉÉªÉ xɨÉ: $ nù¶É®úlÉÉi¨ÉVÉÉªÉ xɨÉ: $ ±ÉI¨ÉhÉÉÌSÉiÉ{ÉÉnùɤVÉÉªÉ xɨÉ: $ ºÉ´ÉDZÉÉäEòÊ|ɪÉRÂóEò®úÉªÉ xɨÉ: $ ºÉÉEäòiÉ´ÉÉʺÉ-xÉäjÉɤVÉ-ºÉÆ|ÉÒhÉxÉÊnù´ÉÉEò®úÉªÉ xɨÉ: $ Ê´É·ÉÉʨÉjÉÊ|ɪÉɪÉxɨÉ: $ ¶ÉÉxiÉÉªÉ xɨÉ: $ iÉÉ]õEòÉv´ÉÉxiɦÉɺEò®úÉªÉ xɨÉ: $ ºÉÖ¤ÉɽÖþ®úÉIɺÉÊ®ú{É´Éä xɨÉ: $ EòÉèʶÉEòÉv´É®ú{ÉɱÉEòÉªÉ xɨÉ: $ +½þ±ªÉÉ{ÉÉ{ɺÉƽþjÉæ xɨÉ: $ VÉxÉEäòxpùÊ|ɪÉÉÊiÉlɪÉä xɨÉ: $ {ÉÖ®úÉÊ®úSÉÉ{Énù³ýxÉÉªÉ xɨÉ: $ ´ÉÒ®ú±ÉI¨ÉҺɨÉɸɪÉÉªÉ xɨÉ: $ ºÉÒiÉÉ´É®úhɨÉɱªÉÉfø¬ÉªÉ xɨÉ: $ VÉɨÉnùMxªÉ¨ÉnùÉ{ɽþÉªÉ xɨÉ: $ ´Éènùä½þÒEÞòiɶÉÞRÂóMÉÉ®úÉªÉ xɨÉ: $ Ê{ÉiÉÞ|ÉÒÊiÉÊ´É´ÉrÇùxÉÉªÉ xɨÉ: $ iÉÉiÉÉYÉÉäiºÉÞ¹]õ½þºlɺlÉ®úÉVªÉÉªÉ xɨÉ: $ ºÉiªÉ|ÉÊiɸɴÉÉªÉ xɨÉ: $ iɨɺÉÉiÉÒ®úºÉÆ´ÉÉʺÉxÉä xɨÉ: $ MÉÖ½þÉxÉÖOɽþiÉi{É®úÉªÉ xɨÉ: $ ºÉÖ¨ÉxjɺÉäÊ´ÉiÉ{ÉÉnùÉªÉ xɨÉ: $ ¦É®úuùÉVÉÊ|ɪÉÉÊiÉlɪÉä xɨÉ: $ ÊSÉjÉEÚò]õÊ|ɪɺlÉÉxÉÉªÉ xɨÉ: $ {ÉÉnÖùEòÉxªÉºiɦÉڦɮúÉªÉ xɨÉ: $ +xÉÖºÉÚªÉÉRÂóMÉ®úÉMÉÉRÂóEò-ºÉÒiÉɺÉÉʽþiªÉ¶ÉÉäʦÉiÉÉªÉ xɨÉ: $ nùhb÷EòÉ®úhªÉºÉ\SÉÉÊ®úhÉä xɨÉ: $ Ê´É®úÉvɺ´ÉMÉÇnùɪÉEòÉªÉ xɨÉ: $ ®úIÉ:EÖò±ÉÉxiÉEòÉªÉ xɨÉ: $ ºÉ´ÉǨÉÖÊxɺÉRÂóPɨÉÖnùɴɽþÉªÉ xɨÉ: $ |ÉÊiÉYÉÉiÉɶɮú´ÉvÉÉªÉ xɨÉ: $ ¶É®ú¦ÉRÂóMÉMÉÊiÉ|ÉnùÉªÉ xɨÉ: $ +MɺiªÉÉÌ{ÉiÉ-¤ÉÉhÉÉκÉ-JÉbÂ÷MÉiÉÚhÉÒ®ú¨ÉÎhb÷iÉÉªÉ xɨÉ: $ |ÉÉ{ÉiÉ{É\SÉ´É]õÒ´ÉɺÉÉªÉ xɨÉ: $ MÉÞnùÂwÉ®úÉVɺɽþɪɴÉiÉä xɨÉ: $ EòÉʨɶÉÚ{ÉÇhÉJÉÉ-EòhÉÇxÉɺÉSUäônùÊxɪÉɨÉEòÉªÉ xɨÉ: $ JÉ®úÉÊnù®úÉIɺɵÉÉiÉ-JÉhb÷xÉÉÊ´ÉiɺÉVVÉxÉɪÉxɨÉ:40 $ ºÉÒiÉɺÉÆζ±É¹]õEòɪÉɦÉÉÊVÉiÉÊ´ÉtÖtÖiÉɨ¤ÉÖnùÉªÉ xɨÉ: $ ¨ÉÉ®úÒSɽþxjÉä xɨÉ: $ ¨ÉɪÉÉfø¬ÉªÉ xɨÉ: $ VÉ]õɪÉÖ:-¨ÉÉäIÉnùɪÉEòÉªÉ xɨÉ: $ Eò¤ÉxvɤÉɽÖþ±É´ÉxÉÉªÉ xɨÉ: $ ¶É¤É®úÒ|ÉÉÌlÉiÉÉlɪÉä xɨÉ: $ ½þxÉÖ¨ÉuùÎxnùiÉ{ÉÉnùÉªÉ xɨÉ: $ ºÉÖOÉҴɺÉÖ¾þnäù%´ªÉªÉÉªÉ xɨÉ: $ nèùiªÉEòRÂóEòɳýÊ´ÉIÉäÊ{ÉhÉä xɨÉ: $ ºÉ{iɺÉɱÉ|ɦÉänùEòÉªÉ xɨÉ: $ BEäò¹ÉÖ½þiÉ´ÉÉʱÉxÉä xɨÉ: $ iÉÉ®úɺÉƺiÉÖiɺÉnÂùMÉÖhÉÉªÉ xɨÉ: $ Eò{ÉÒxpùEÞòiɺÉÖOÉÒ´ÉÉªÉ xɨÉ: $ ºÉ´ÉÇ´ÉÉxÉ®ú{ÉÚÊVÉiÉÉªÉ xɨÉ: 239 .

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we find they are named as Vāgbhava. The first as such is the vāgbhava kūṭa. rudrāṇī. Iśvara and Sadaśiva. Rudra. In addition we find a reference with uddhāra as the first mantra of the trailokya Mohana kavaca. All have five syllables each. īśvarī and Māheśvarī. Śrī Tattva cintamani (tenth chapter) and Śrī Vidyārṇava (seventh chapter quoting Tantrasāra’s Śrī krama).Pañca kūṭā pañcami Vidyā The vidyā of pañcami is found widely in the tantric texts of Mahātripurasundari. annihilation. sustenance. This Vidyā is praised as one of the best among all mantras pertaining to Mahā Tripurasundari. in tune with the Tripura and Śrī vidyā concept. concealment and grace and the five Devi’s: Kameśvarī. The kāmarāja is divided into three parts as ādhya. boon of bliss (sukhadā) and removal of pain (dukhanāśinī). Madhya and anytya kūṭa. The five aspects of this vidyā are eternal (nityā). ṇārāyanī. Although there are five parts are sīn. release from bondage (muktidā). their śaktis. The same uddhāra are also sīn in the saubhāgya ratnākara paddhati’s last chapter. The five aspects of: elements – space. pure (śuddhā). which also refers to tantra sāra srī krama. The last is the śakti kūṭa. 245 . water and earth. the other being Śrī vidyā pañcadaśakṣarī. fire. Acts: creation. making a total of twenty five syllables. There are five parts (कूट) found in this mantra with five syllables in each part. Vishnu. and also in the beginning of a stotra called tripurā satvarāja.एकावलि 25.brahmānī. Lords – Brahma. air. kāmarāja and śakti kūṭās. This vidyā is found with the uddhāra in the Kuloddhīsha gandharva tantra (third Chapter).

एकावलि Vajreśvarī.कचथता पञ्िमी ववद्या रैिोय सुभगोदया गन्धवण तन्र तत ृ ीय पटि: कामां ववष्णुयत ु ां (क) शक्तां (ए) माया (ई)शक्रश्ि(ि) पाववती/ पश्िात ् दे वी महा माया(ह्रां) बीजमुद्धरे त ् 246 . Bhagamālinī. turīyā and nityā are exhibited explicitly by these kūṭas. रैिोक्यमोहनकवि) उधारः कामां ववष्णुयुतां(क) दे वी शक्तां(ए)मायाां(ई) इन्त्द्र(ि) एव ि/महा माया (ह्रां)ततुः पश्िात ् वाग्भवां बीजमुद्धरे त ् / ववयद्(ह) िन्त्द्र (स)ततुः पश्िात ् क–ि ((क. The following is the uddhāra from the above said various texts:श्री तत्त्व थिन्तामणण वाग्भव कूट : समरो(क) योतन(ए) माया(ई) क्षक्षतत(ि) रथ किा (ई)िाकञ्ित लशरो महादे व(ह्) वकह्न(र्) वववरचित तनुुः शून्त्य (ँ)घदटत: (ह्+र्+ई+ँ=ह्रां) कामराजसय प्रथम कूट : शांभुःु (ह) सोम(स) रवव(क) महर(ि) भगवती बीजां (ह्रां) कामराजसय द्ववतीय कूट : कन्त्दपावरर(ह) रवव(क) ईश(ह) शक्र(ि) मुददतां बीजां भवान्त्याुः(ह्रां) .ि) नकुिर(ह्) वकह्न (र्)ि -माया(ई) सवरे ण सांयु्तुः नाद त्रबन्त्द ु किाकन्त्वतुः (ँ) (ह्+र्+ई+ँ=ह्रां)/प्रथमां कामराजसय कूटां दि ु वभां ववयद्ववष्णुयुतां(ह) कामो(क) हां सुः(ह) शक्र(ि) ततुः परम ् / महा माया (ह्रां)ततुः पश्िात ् सवप्नावतीतत कथ्वयते /मादनां(क) लशवबीजां(ह) ि वायुबीजां(य) ततुः परम ् /इन्त्द्रबीजां(ि) ततुः पश्िात ् महा मायाां(ह्रां) समुद्धरे त ् /लशवबीजां(ह) ततुः कामां(क) इन्त्द्रां (ि) दे वीां(स) तनयोजयेत ् / महामायाां(ह्रां) ततुः पश्िात ् शक्त कूटां समुद्धरे त ् /वाग्भवां प्रथमां कूटां शक्त कूटां ञ्ि पञ्िमां/मध्य कूट रयां दे वी कामराजां मनोहरां .सवप्नावती कामराजसय तत ृ ीय कूट : काम(क) शांभु(ह) समीरण(य) इन्त्द्र(ि) चगररजा बीजां(ह्रां) – मधुमती .एतत ् बीजां त्ररकूट घदटतां कामराजालभधां शक्त कूट : शांभु(ह) मन्त्मथ(क) शक्र(ि) सोम(स) सदहतां दे वीां(ह्रां) क्रमेणोद्धरे त ् तन्रसार श्रीक्रम (श्रीद्वद्भयाणणवतन्र.

प्रथमां कामराजसयकूटां रैिो्यपकू जतां मध्य कूटां प्रवक्ष्मयालम कामराजसयमध्यमां /अततगुह्यतरां दे वी तव सनेहात ् वक्ष्मयालम केविां ववयद्ववष्णुयुतां (ह)दे वी मादनां(क) तदनन्त्तरां /तदधो हां सुः(ह) बीजां तु इन्त्द्र(ि) बीजां समुद्धरे त ् ववष्णोुः पदां (ह्) वकह्नयुतां(र्) माया बीजां(ई) समुद्धरे त ्(ँ) (ह्+र्+ई+ँ=ह्रां) मध्य कूटां इदां प्रो्तां महा स भाग्य दायकां /तुररयां तु प्रवक्ष्मयालम शण व ां ु भ ृ ु दे वी सुदि काम बीजां(क) महे शानी लशव बीजां(ह) ततुः परम ्/तदधो वायु बीजां(य) इन्त्द्रबीजां(ि) तनयोजयेत ् ववयद्वकह्न (ह्)+(र्)समायु्तां ितुथस व वर(ई)भूवषतां/अद्धेन्त्द ु त्रबन्त्दस ु ांयु्तां ितुथक व ू टमुत्तमां (ँ) (ह्+र्+ई+ँ=ह्रां) शक्त कूटां प्रवक्ष्मयालम शण ु वभां /यच्ुत्वा साधकाुः सवे िभन्त्ते ृ ु दे वी सुदि मुक्तमुत्तमाां प्राण बीजां(ह) समुद्धृत्य काम बीजां(क) समुद्धरे त ् /इन्त्द्रबीजां(ि) ततो दे वी(स) क्रमेण ववतनयोजयेत ् सान्त्तां (ह्)वकह्न समायु्तां(र्) ितुथस व वर(ई) सांयत ु ां /नाद त्रबन्त्द ु किायु्तां शक्त कूटां समुद्धरे त ्(ँ) (ह्+र्+ई+ँ=ह्रां) त्ररपरु ा सतवराज ब्रह्माण्ड (क)आधार शक्तश्ि (ए)किा समर (ई)पुरन्त्दराुः (ि)/एताुः सांयोज्जय पुरतुः ईश्वररां (ह्रां)योजयेकच्छवे िन्त्द्र बीजां (स) लशवाददसथां(before the said syllable ह) तनयोजयेत ्/ मादनां(क) शक्र बीजसथां (ि) योजयेत्भुवनेश्वररां (ह्रां)/लशव बीज(ह) मादनसथां(क) शक्रषकष्ट(ह) समकन्त्वतां/सप्तमां तच्ि शक्रसथां (ि)माया बीजां समुद्धरे त ् (ह्रां)/तुङ्गाक्षरां (क) लशवाददसथां (ह) मरददन्त्द्र (य-ि) समकन्त्वतां/धरन्त्धरासत ु ा बीजां (ह्रां)एकरावप तनयोजयेत ् /बक तुररय बीजाधुः(ह) क्रोधीशां 247 .एकावलि लशवबीजां समद्ध ु ृत्य(ह) शक्तबीजां (स)तदनन्त्तरां /तदधां काम बीजां(क) तु भू(ि)व्योमातनि(ह्)+(र्) सांयत व वरसांयु्तां(ई) अद्धेन्त्दत्रु बन्त्दभ ु ां /ितुथस ु ूवषतां (ँ) (ह्+र्+ई+ँ=ह्रां) .

an exact camouflage. will become realized when alive (jīvan mukta) In accordance to the five acts (pañca kṛtyā) the five kūṭas are:1.. (The same bījā is in the vīravali mantra for īśvarā) (य ). which represent the substratum of creation (adhārā) and the creative movement (īkṣanā). parakāya pravesha – entering into other’s body. This bīja also points to the vāyu tattva and hence the associated service of dhūpa.concealment This kūṭa is also called madhumatī 248 .कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां हकिसह्रां (1) (4 .एकावलि (क)ि तनयोजयेत ् /वपनाकेशां (ि)िन्त्द्र सांसथां (स)आकाशां(ह्) र्त (र्)सांकसथतां / ितुथव (ई)सवर सांयु्तां नाद त्रबन्त्द ु समकन्त्वतां (ँ)(ह्+र्+ई+ँ=ह्रां) / सववमेकर सांयोज्जय पञ्िपञ्िाक्षरर भवेत ् / The following is the mantra got from decoding uddhara all of the above said tantra. snakes and demigods. The tirodhāna kūṭa (concealment) called kāmarāja antya has the unique bīja of īśvarāLalitha sahasranāma says tirodhānakarī. The samhāra kūṭa (annihilation) called kāmarāja madhya has only the shiva aksharās ह and क respectively. which can be meditated as the female of of Lord Vishnu. driving away of lion. assuming willed forms.कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहएिह्रां हकिसह्रां is another reading ) The benefits of chanting this mantra is said to be multiple.īshvarī. This kūṭa is also called svapnavatī 4. The stithi kūṭa (sustenance) called the ādya kāmarāja has the Devi akṣara (स). 2. The Śrī sṛṣti kūṭa (creative) called vāgbhava has the Para Shiva and kāmakalā bījās which are ए and ई respectively. 4 . which is smoke. Chanting thousand times on special days or in cremation ground will yield all desired results. tiger. moving in th sky (air). becomes equal to Shiva. the powers to locate treasures and make medicinal pills. viz. kavaca and stotrā. all the eight siddhis from anima. 3.

एकावलि 5. The anugraha kūṭa (Grace) called śakti kūṭa has the śakti bījā in the end (स). Interestingly the Śrī vidyārnava tantra and Śrī Tattva cintamani speaks about variations of the said pañcami vidyā. iccha. thus inferring the sustenance. six ‘I(ई) ’. On an analysis of the bījā distribution we are surprised to find :. concealment and grace. one ‘E’(ए ) and one ‘ya’. ten ha. This can be interpreted as the sixty four arts (catuṣṣaṣti kalās).‘bindu(M).ईएकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां हकिसह्रां (5) 4 . ‘ra’ vahni. Now with the above two variations in the śakti kūṭa. The unique ‘E’ is the paraśiva tattva. annihilation. la and hrIm bījās. the rays (raśmis) of āgynā cakrā extolling the importance and depth of this vidyā.(4) Now one more variation.‘la’ . adding the entire mantra as a unit (samaṣti) we get the grand total of sixty four. two sa .कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां सहकिह्रां (2)s Then we find a variation in the vāgbhava kūṭa as सकहिह्रां. ānanda. the new pañcami vidyā will be: 4 . resulting in the five ‘ka’ – śakti tattvas viz.सकहिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां सहकिह्रां . The mantra is now seen as: 4 . The second variation said is on the śakti kuta which will begin with ‘sa’.ईएकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां सहकिह्रां (6) 249 . gyāna and kriyā śakti. sixty four yoginis (catuṣṣaṣti yogini). two ‘sa’. the first pañcami vidyāas vāgbhava kūṭa will beign with ई and ए. ‘sa’ jala and ‘la’ pṛthvi .सकहिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां हकिसह्रां (3) 4 . Thus we find a holistic approach on the creative descent.‘nada’. The total vowels are thirty five and total consonants are twenty eight. On further break up we can find eighteen ‘a’. cit. the lone “ī” can be taken as the īkṣaṇa for sṛṣti. ‘ya’ vāyu. ka. with the above two variations in śakti kūṭa will be: 4 . one each of ī(ई) and E (ए ). five ‘ka’-‘’ra’ . Thus making the total to sixty three.Five ha. totaling to twenty five. The five ‘hrim’ will point to the creative descent into the panca bhuta world shown by ‘ha’ākāshā.

Summarizing the whole evolution of the thirty six pañcami vidyā bhedās below for understanding 4 .सकहिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहयिह्रां सकिह्रां (10) 4 .एकावलि 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां सहकिह्रां (8) On a whole we find eight variations of the said pañcami vidyā.कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां हकिसह्रां (1) 250 .एईकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहयिह्रां सकिह्रां (12) Thus on a whole we are able to visualize twelve variations of the pañcami vidyā.ईएकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहयिह्रां सकिह्रां (11) 4 . Including these two in the above twelve (eight + four) variations will result in thirty six variations of Pañcami vidyā. Again another variation is found as: . on a whole keeping the total to twenty five syllables.एईकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां हकिसह्रां (7) 4 . This is now seen as 4 .make the Madhya kūṭa of the first pañcami vidyā as the regular kāmarāja kūṭa and the śakti kūṭa as the regular śakti kūṭa . This will result in addition of a syllable in the middle kūṭa and removal of a syllable in the last kūṭa. The tantra now points to two more variations of the fourth kūṭa (antya kāmarāja kūṭa) of the first pañcami vidyā as: कहहिह्रां and कहसिह्रां.कएईिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहयिह्रां सकिह्रां (9) Adding the variation of the vāgbhava kūṭa which are seen above will reveal the following vidyā4 .

एकावलि 4 .कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां सहकिह्रां (2) 4 .कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहसिह्रां सहकिह्रां (26) 251 .सकहिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहयिह्रां सकिह्रां (10) 4 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहहिह्रां सकिह्रां (23) 4 .सकहिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहहिह्रां हकिसह्रां (15) 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहहिह्रां सकिह्रां (24) 4 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहयिह्रां सकिह्रां (11) 4 .(16) 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहयिह्रां सकिह्रां (12) 4 .कएईिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहयिह्रां सकिह्रां (9) 4 .सकहिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहहिह्रां सकिह्रां (22) 4 .सकहिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां सहकिह्रां .कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहहिह्रां हकिसह्रां (13) 4 .सकहिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहहिह्रां सहकिह्रां .एईकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां हकिसह्रां (7) 4 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां हकिसह्रां (5) 4 .कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहसिह्रां हकिसह्रां (25) 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां सहकिह्रां (8) 4 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहहिह्रां हकिसह्रां (17) 4 .कएईिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहहिह्रां सकिह्रां (21) 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहहिह्रां सहकिह्रां (20) 4 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहहिह्रां सहकिह्रां (18) 4 .(4) 4 .कएईिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहहिह्रां सहकिह्रां (14) 4 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां सहकिह्रां (6) 4 .सकहिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां हकिसह्रां (3) 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहहिह्रां हकिसह्रां (19) 4 .

सकहिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहसिह्रां सकिह्रां (34) 4 .सकहिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहसिह्रां सहकिह्रां .कएईिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहसिह्रां सकिह्रां (33) 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहसिह्रां हकिसह्रां (31) 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहसिह्रां सकिह्रां (36) श्रीपञ्िमी द्वद्भया जप द्वधानं: असय श्रीपञ्िमी ववद्या महामन्त्रसय आनन्त्दभैरव ऋवषुः अनष्ु टुप ् छन्त्दुः पञ्िकूटा पञ्िमी ववद्या श्रीमहात्ररपुरसुन्त्दरर दे वता /श्रीमद्वाग्भवकूटां बीजां /शक्त कूटां शक्तुः कामराज कूटां कीिकां कर षडङ्ग न्त्यास :- ऐां सववज्ञायै हृदयाय नमुः ्िरां तनत्यतप्ृ तायै लशरसे सवाहा स ुः अनाददबोधायै लशिायै वषट् ऐां सवतन्त्रायै कविाय हुां ्िरां तनत्यमिप्ु तायै नेररयाय व षट् स ुः अनन्त्तायै असराय फट् 252 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां कहसिह्रां सकिह्रां (35) 4 .सकहिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहसिह्रां हकिसह्रां (27) 4 .एकावलि 4 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहसिह्रां हकिसह्रां (29) 4 .ईएकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहसिह्रां सहकिह्रां (30) 4 .एईकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां कहसिह्रां सहकिह्रां (32) 4 .(28) 4 .

Apart from regular rituals and mantrās. there are explicit 253 references to twelve aspirant .a.Avastha Cathushtaya a. which is frequently quoted by all commentators.इतत लशवां---- 26.्िरां-हसकिह्रां हकहिह्रां कहयिह्रां-हकिसह्रां-हां ह्रां श्रीां जपान्त्ते सतुवीत :- सेवे लसन्त्दरू सांदोह सन्त् ु दर सवाङ्गभासरु ाां करणापूणव पीयष ु कटाक्षाां कुिनातयकाां या तनत्या परमा शक्तजवगच्िैतन्त्यरूवपणीां ताां नमालम महादे वीां पञ्िमीां मातरू ृ वपणीां यसयाुः सवं समुत्पन्त्नां यसयामद्यावपततष्ठतत ियमेष्यमतत यसयाां ताां पञ्िमीां प्रणमाम्यहां ---. From Jñānārṇava tantrā One of the oldest Tantra of Śrī Kulā is Jñānārṇava tantrā .एकावलि ध्यानां र्ताांभोतनचधमध्यसथ कल्पतरूद्यानान्त्तरे मण्डपे ध्यायेत ् रत्नमयां तदन्त्तुः अरणां तेजोलभरामां महत ् तकसमन ् चिन्त्तय श्रीत्ररपुरसुन्त्दररां वेधो हरर रय्वम्बकैुः वन्त्द्याां अङ्कुशपाश-िापववलशिान ् दोलभवमुवदा त्रबभ्रतीां िां इत्यादद पञ्िपूजा श्रीां ह्रां हां -कएईिह्रां.

अगसत्य उपालसता ववद्या. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या.हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 24.सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 22. awareness and discrimination of mind inputs (उत्पकत्त जागरो बोध व्यावकृ त्तुःमनसा सदा). wakened state. शङ्कर उपालसता ववद्या.कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 18. काम उपालसता ववद्या= कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 14. कुबेर उपालसता ववद्या. is sātvic in nature(सत्व गुण). नकन्त्द उपालसता ववद्या. the śaṅkara’s vidyāa has four parts (ितुष्कूट) and Viṣṇu’s vidyā has six parts (षट् कूट).कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 17. इन्त्द्र उपालसता ववद्या. मनु उपालसता ववद्या.हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 21. िन्त्द्र उपालसता ववद्या .कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 16. Each is unique in nature. The following mantras are elucidated from above said tantrā -13. In the next chapter we find the most secret ṣoḍaśī mantra. considering these bijas as also as parts (कूट). सूयव उपालसता ववद्या.सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 23.Creation. The first type of ṣoḍaśī(प्रथम षोडशी) is called jāgrat (जाग्रत ्) pure efflugence of śakti (केविां शक्तरूवपणी). the ten vidyā are have three parts (त्ररकूट).हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां Of the above twelve vidyā. This is revaled as addition of the hṛllekhā and śrī bija in front of the above said vidyā. Thus these mantras are seen as 254 .हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 19. śaṅkara’s vidyā from four to six parts (षट् कूट) and viṣṇu’s vidyā from six to eight parts (अष्ट कूट).एकावलि methodology of Śrī vidyā upāsanā. will make the first ten vidyā from three to five parts (पञ्ि कूट). has four aspects (किा). दव ू ावस उपालसता ववद्या.कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 15.हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 20. ववष्णु उपालसता ववद्या.

अगसत्य उपालसता ववद्या. ववष्णु उपालसता ववद्या. काम उपालसता ववद्या. is tāmasic in nature(तमो गुण). मनु उपालसता ववद्या.ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7. दव ू ावस उपालसता ववद्या. Thus these mantras are seen as 1. इन्त्द्र उपालसता ववद्या.ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. दव ू ावस उपालसता ववद्या.ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. काम उपालसता ववद्या. शङ्कर उपालसता ववद्या. इन्त्द्र उपालसता ववद्या.ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 12. सूयव उपालसता ववद्या. śaṅkara’s vidyā of five parts (पञ्ि कूट)and viṣṇu’s vidyā of seven parts(सप्त कूट).ॐ कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 255 .ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2.which are . िोपामुद्रा उपालसता ववद्या. immobilization like a faint and deep sleep (मरणां ववसमतृ तमच् ूव छाव तनद्रा).ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3. has four aspects (किा).ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8.ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9. िन्त्द्र उपालसता ववद्या .ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10. मनु उपालसता ववद्या. अगसत्य उपालसता ववद्या.ॐ कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. कुबेर उपालसता ववद्या.ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां The second type of ṣoḍaśī(द्ववतीय षोडशी ) is called suṣupti (सुषुकप्त ) pure efflugence of ṣiva (लशवरूवपणी ).ॐ कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4. thus making the first ten vidyā as consisting of four parts (ितुष्कूट) .ह्रां श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11.Death like state.ॐ कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3.ॐ कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. forgetfulness of diversity.ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4. This is revaled as addition of the pranava before the above said vidyā.एकावलि 1. नकन्त्द उपालसता ववद्या.

In above two vidyā suṣupti is denoted by addition of pranava and Jāgrat by addition of hṛllekhā and śrī bijas So as seen in the elucidation.ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7. िोपामद्र ु ा उपालसता ववद्या. is rājasic in nature(रजो गुण).which are. remembering things again and again (अलभिाषो भ्रमकश्िन्त्ता ववषयेषु पुनुः समतृ तुः ).एकावलि 6.ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4.ॐ हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8. confusion.ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. सूयव उपालसता ववद्या. इन्त्द्र उपालसता ववद्या. दव ू ावस उपालसता ववद्या.ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5.ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8. अगसत्य उपालसता ववद्या. शङ्कर उपालसता ववद्या.ॐ हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9.ॐ सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. कुबेर उपालसता ववद्या.ॐ हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकि- हसकहि-सकिह्रां 12. this is revealed as addition of the pranava. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या. िन्त्द्र उपालसता ववद्या . thus making the first ten vidyās as consisting of six parts (षट् कूट).ॐ ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. deep thought analysis . मनु उपालसता ववद्या. कुबेर उपालसता ववद्या. नकन्त्द उपालसता ववद्या. ववष्णु उपालसता ववद्या.ॐ ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3.ॐ ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 256 .ॐ हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7.ॐ हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां The third type of ṣoḍaśī(तत ृ ीय षोडशी ) is called svapna (सवप्न) which is seen at the end of suṣupti and beginning of jāgarat (सष ु प्ु त्यन्त्ते जागराद सवप्नावसथा) is of nature of both ṣiva and śakti (लशव शक्तमयी). hṛllekhā and śrī bijā in said order before the above said vidyāsince the above says suṣuptyante jāgradādau.desires fulfillment.ॐ सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10. काम उपालसता ववद्या. śaṅkara’s vidyā of seven parts (सप्त कूट) and viṣṇu’s vidyā of nine parts (नव कूट). Thus these mantras are seen as 1. has four aspects (किा). सय ू व उपालसता ववद्या.

has aspects (किा) which are attached detachment.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 2. we have ten bijā added to the said variations. considering the kūṭā as bijā . ववष्णु उपालसता ववद्या-ॐह्रांश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां The most highly venerated ṣoḍaśī(महा षोडशी ) is called turīyā (तुररया) which is seen at the end of jāgarat and beginning of suṣupti (सष ु प्ु त्यद जागरान्त्ते भावाभाव ववतनम् ुव ता ) is of the exalated moving state of both ṣiva and śakti (सफुरत्तमार िक्षणा). will make the first ten vidyā into sixteen syllable (षोडशाक्षरर). Now. This is revaled as addition of the śrī. kamakalā. अगसत्य उपालसता ववद्या.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 3. vāgbhava and parā bijā on the above said third ṣoḍaśī variation.एकावलि 9. So. काम उपालसता ववद्या.ॐ ह्रां श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. śaṅkara’s vidyā to seventeen syllable (सप्तदशाक्षरर) and viṣṇu’s vidyā to nineteen syllables ( एकोनववांशत्यक्षरर ) Thus these mantras are seen as 1. unstained mind(वैराग्यां मुमुक्षुत्वां शमादद ववमिां मनुः). नकन्त्द उपालसता ववद्या. yearning for the highest experiential knowledge.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 257 . hṛllekhā. transcends gunā (गुणातीता). मनु उपालसता ववद्या. along with a reverse of the said five bijas in the end. िन्त्द्र उपालसता ववद्या .ॐ ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10.ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 12. शङ्कर उपालसता ववद्या.

4. िन्त्द्र उपालसता ववद्या . शङ्कर उपालसता ववद्या. दव ू ावस उपालसता ववद्या.4.ॐ ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 258 .श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 8.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 12.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 11.ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां . िोपामुद्रा उपालसता ववद्या.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 6. कुबेर उपालसता ववद्या.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुःॐ ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 10. मनु उपालसता ववद्या.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुःॐ ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 9. suṣupti. ववष्णु उपालसता ववद्या. काम उपालसता ववद्या .श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 2.एकावलि 4.ॐ कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां . svapna and turyā from above-1.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 7.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुःॐह्रांश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां The following is a compilation of all the ṣoḍaśī variations of an individual upasaka in the order of jāgrat.ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां .श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 5. नकन्त्द उपालसता ववद्या. इन्त्द्र उपालसता ववद्या. सूयव उपालसता ववद्या.ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां – ॐ कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां .

िन्त्द्र उपालसता ववद्या -4-ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां – ॐ सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां .श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 8.ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां– ॐ हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां.4.ॐ ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां ॐ ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 9. इन्त्द्र उपालसता ववद्या-4. अगसत्य उपालसता ववद्या-.4.ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां – ॐ हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां .4.ॐ ह्रां श्रीां 259 .ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां– ॐ हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां-ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां .ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां – ॐ कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां.ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां – ॐ कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां .ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर– ॐ कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर-ॐ ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 6.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 5. सूयव उपालसता ववद्या-4.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 4.ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां .एकावलि 3. दव ू ावस उपालसता ववद्या-– 4.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 7. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या.ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां .ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां . कुबेर उपालसता ववद्या.

ववष्णु उपालसता ववद्या 4-ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां – ॐ हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां -ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां.Jāgrat. From Svacchanda Svacchanda saṅgraha (in śrī vidyārṇava tantra) saṅgraha is seen by reference only in commentaries of tantras like Setu bandha / varivasya rahasyA by Śrī Bhaskararaya in the context of explaining Japa krama’s six voids (Shat śūnyā).श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐह्रांश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां b.एकावलि सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां. Svapna.श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 10.ॐ ह्रां श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां .श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां ॐ सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 11. नकन्त्द उपालसता ववद्या -4. .ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां -श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां 12. The four aspects of the first three avasthā are linked to 260 . this text is mentioned where there are explicit references to the twelve aspirant methodologies of the Śrī Vidya upāsanā and the four avasthā . suṣupti and tutrīya. शङ्कर उपालसता ववद्या -4-ह्रांश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां – ॐ हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां. In compilations like śrī vidyārṇava.ह्रां श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां– ॐ सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां .

काम उपालसता ववद्या: कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां-स भाग्य दातयनी 2. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां-महा पाप घ शमनी सव सवरूप ववमलशवनी 7.एकावलि four mantras. The following are the mantras envisaged by the twelve aspirants. मनु उपालसता ववद्या: कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां-राज्जयादद दातयनी 3. दव ू ावस उपालसता ववद्या: कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर-शरु नाशकरर 6. नकन्त्द उपालसता ववद्या: सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां . 261 . सय ू व उपालसता ववद्या: हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां-महा तेजुः प्रदातयनी 8. कुबेर उपालसता ववद्या: हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां- तनचधदा-अखिि लसवद्धदा 9. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां-जगद्वश्य शोवषखण ववधातयनी 5. Thus one hundred and forty four mantras are elucidated for the three avasthā. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां-अमत ृ ाख्या 10. with their results of continual sādhanā:1. the ṣankara’s vidyā is having four parts (ितुष्कूट)and viṣṇu’s vidyā has six parts (षट् कूट). अगसत्य उपालसता ववद्या: कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां-समद्र ु महास भाग्य जननी सूयावदद सतांलभनी 4. ववष्णु उपालसता ववद्या: हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां -सकिापकन्त्नवाररणी Of the above twelve vidyās the ten vidyās are having three parts (त्ररकूट). शङ्कर उपालसता ववद्या: हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां -लशवरूपववववद्धवनी 12.लशवसाकन्त्नध्यकाररखण 11.

दव ू ावस उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. is sātvic in nature(सत्व गुण). इन्त्द्र उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिह्रां ह्रां हसकहिह्रां ह्रां सिकह्रां 5. िोपामद्र ु ा उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां ह्रां हसकहिह्रां ह्रां सकिह्रां 262 . इन्त्द्र उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. These are revealed as additions of the hṛllekhā in front of the above said vidyās. दव ू ावस उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिहरर ह्रां हसकहिहरर ह्रां सकिहरर 6.. . सूयव उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8. मनु उपालसता ववद्या: ह्रां कहएईिह्रां ह्रां हकएईिह्रां ह्रां सकएईिह्रां 3. काम उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिह्रां ह्रां हसकहिह्रां ह्रां सकिह्रां 2. काम उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2.Creation. also Śrī bija addition similarly to reveal the four aspects in this avasthā. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7. कुबेर उपालसता ववद्या: ह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9. has four aspects (किा). नकन्त्द उपालसता ववद्या: ह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. अगसत्य उपालसता ववद्या:ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4. wakened state. मनु उपालसता ववद्या: ह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3.एकावलि The Jāgrat (जाग्रत ् ) avasthA is pure efflugence of śakti (केविां शक्तरूवपणी ). अगसत्य उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिह्रां ह्रां हसकहिह्रां ह्रां सहसकिह्रां 4. and in front of each kuta. उत्पकत्त mantras are: 1. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : ह्रां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10. ववष्णु उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां जाग्रत ् mantras are: 1. awareness and discrimination of mind inputs (उत्पकत्त जागरो बोध व्यवकृ त्तुःमनसा सदा). शङ्कर उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 12.

इन्त्द्र उपालसता ववद्या: श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. सय ू व उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां ह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8. 11. कुबेर उपालसता ववद्या: श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7. ववष्णु उपालसता ववद्या: श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां मन: व्यवकृ त्त mantras are: 263 . नकन्त्द उपालसता ववद्या: ह्रां सएईिह्रां ह्रां सहकहिह्रां ह्रां सकिह्रां 11. शङ्कर उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां ह्रां हसकहिह्रां ह्रां सकिह्रां ह्रां 12. कुबेर उपालसता ववद्या: ह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां ह्रां हसकएईिह्रां 9. मनु उपालसता ववद्या: श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3. नकन्त्द उपालसता ववद्या: श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां शङ्कर उपालसता ववद्या: श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 12. सूयव उपालसता ववद्या: श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8. दव ू ावस उपालसता ववद्या: श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. अगसत्य उपालसता ववद्या: श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4.एकावलि 7. ववष्णु उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां ह्रां हसकहिह्रां ह्रां सकिह्रां ह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां सएईिह्रां ह्रां सहकहिह्रां ह्रां सकिह्रां बोध mantras are: 1. काम उपालसता ववद्या: श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : ह्रां सहकएईिह्रां ह्रां सहकहएईिह्रां ह्रां सहकएईिह्रां 10. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10.

मनु उपालसता ववद्या: श्रीां कहएईिह्रां श्रीां हकएईिह्रां श्रीां सकएईिह्रां 3. remembering things again and again (अलभिाषो भ्रमकश्िन्त्ता ववषयेषु पुनुः समतृ तुः) are revealed as addition of hṛllekhā and śrī bijas in front of each vidya and each kuta and the reverse of these bijas in similar manner.which are. is rājasic in nature (रजो गुण).desires fulfillment. दव ू ावस उपालसता ववद्या: श्रीां कएईिहरर श्रीां हसकहिहरर श्रीां सकिहरर 6. काम उपालसता ववद्या: श्रीां कएईिह्रां श्रीां हसकहिह्रां श्रीां सकिह्रां 2. has four aspects (किा). अलभिाष mantras are: 1. deep thought analysis. अगसत्य उपालसता ववद्या: श्रीां कएईिह्रां श्रीां हसकहिह्रां श्रीां सहसकिह्रां 4. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. दव ू ावस उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6.एकावलि 1. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : श्रीां सहकएईिह्रां श्रीां सहकहएईिह्रां श्रीां सहकएईिह्रां 10. सय ू व उपालसता ववद्या: श्रीां हसकिह्रां श्रीां हकहिह्रां श्रीां सहकिह्रां 8. शङ्कर उपालसता ववद्या:श्रीां हसकिह्रां श्रीां हसकहिह्रां श्रीां सकिह्रां श्रीां 12. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 264 . ववष्णु उपालसता ववद्या:श्रीां हसकिह्रां श्रीां हसकहिह्रां श्रीां सकिह्रां श्रीां हसकिहसकहिसकिह्रां सएईिह्रां श्रीां सहकहिह्रां श्रीां सकिह्रां Svapna avasthA (सवप्न) is of nature of both ṣiva and śakti (लशव शक्तमयी). इन्त्द्र उपालसता ववद्या: श्रीां कएईिह्रां श्रीां हसकहिह्रां श्रीां सिकह्रां 5. नकन्त्द उपालसता ववद्या: श्रीां सएईिह्रां श्रीां सहकहिह्रां श्रीां सकिह्रां 11. काम उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. कुबेर उपालसता ववद्या: श्रीां हसकएईिह्रां श्रीां हसकहएईिह्रां श्रीां हसकएईिह्रां 9. अगसत्य उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: श्रीां हसकिह्रां श्रीां हसकहिह्रां श्रीां सकिह्रां 7. confusion. मनु उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3.

सूयव उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकिह्रां . िन्त्द्र उपालसता ववद्या : ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां .ह्रां श्रीां हकएईिह्रां. नकन्त्द उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां सएईिह्रां . दव ू ावस उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कएईिहरर.ह्रां श्रीां सकएईिह्रां 3.ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां 9. कुबेर उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9.ह्रां श्रीां सिकह्रां 5.ह्रां श्रीां हसकिहसकहिसकिह्रां 265 .ह्रां श्रीां 11.ह्रां श्रीां सहकहिह्रां . अगसत्य उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कएईिह्रां -ह्रां श्रीां हसकहिह्रां -ह्रां श्रीां सहसकिह्रां 4.ह्रां श्रीां हकहिह्रां . इन्त्द्र उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कएईिह्रां .ह्रां श्रीां हसकहिह्रां .ह्रां श्रीां हसकहिह्रां . सय ू व उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8.ह्रां श्रीां सहकहएईिह्रां . मनु उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कहएईिह्रां.ह्रां श्रीां हसकहएईिह्रां .ह्रां श्रीां सकिहरर 6. काम उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां कएईिह्रां -ह्रां श्रीां हसकहिह्रां -ह्रां श्रीां सकिह्रां 2.एकावलि 7. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकिह्रां .ह्रां श्रीां हसकहिह्रां . शङ्कर उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकिह्रां . नकन्त्द उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. शङ्कर उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 12. ववष्णु उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां भ्रम mantras are: 1. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10.ह्रां श्रीां सकिह्रां सकिह्रां .ह्रां श्रीां सहकिह्रां 8.ह्रां श्रीां हसकहिहरर.ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां 10. कुबेर उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां .ह्रां श्रीां सकिह्रां 7.

श्रीां ह्रां सकएईिह्रां 3.श्रीां ह्रां सकिह्रां 2.ह्रां श्रीां सकिह्रां चिन्त्ता mantras are: 1. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकिह्रां . दव ू ावस उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. नकन्त्द उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. काम उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. मनु उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3. काम उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कएईिह्रां -श्रीां ह्रां हसकहिह्रां. कुबेर उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9. अगसत्य उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कएईिह्रां . िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7.एकावलि 12.श्रीां ह्रां हसकहिह्रां . दव ू ावस उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कएईिहरर .ह्रां श्रीां हसकहिह्रां .श्रीां ह्रां सकिहरर 6.श्रीां ह्रां सहसकिह्रां 4.श्रीां ह्रां हकएईिह्रां .श्रीां ह्रां सिकह्रां 5. मनु उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कहएईिह्रां .ह्रां श्रीां सकिह्रां .ह्रां श्रीां सएईिह्रां . ववष्णु उपालसता ववद्या: ह्रां श्रीां हसकिह्रां . सय ू व उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. अगसत्य उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4.श्रीां ह्रां हसकहिहरर .श्रीां ह्रां हसकहिह्रां .श्रीां ह्रां हसकहिह्रां . शङ्कर उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 12.ह्रां श्रीां सहकहिह्रां . िन्त्द्र उपालसता ववद्या : श्रीां ह्रां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां कएईिह्रां . ववष्णु उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां ववषय समतृ तुः mantras are: 1.श्रीां ह्रां सकिह्रां 266 .

एकावलि 7.श्रीां ह्रां सहकहएईिह्रां .श्रीां ह्रां सहकिह्रां 8. सय ू व उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकिह्रां . hrllekhā and śrī bijās in this order before the above said vidyās.श्रीां ह्रां सकिह्रां .श्रीां ह्रां सकिह्रां Shushupti avasthA (सुषुकप्त) is pure efflugence of ṣiva (लशवरूवपणी). शङ्कर उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकिह्रां . मनु उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3. िोपामद्र ु ा उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7. has four aspects (किा). दव ू ावस उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. ववष्णु उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकिह्रां .श्रीां ह्रां हसकहिह्रां .श्रीां ह्रां सकिह्रां 11. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : श्रीां ह्रां सहकएईिह्रां . मरण mantras are: 1. The mantras is revealed as addition of the pranava. with variation in these bijas as hṛllekhā. नकन्त्द उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां सएईिह्रां .श्रीां ह्रां सहकहिह्रां .श्रीां ह्रां हसकएईिह्रां 9. कुबेर उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां हसकएईिह्रां .श्रीां ह्रां सहकएईिह्रां 10.श्रीां ह्रां हकहिह्रां . सूयव उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 267 . forgetfulness of diversity.Death like state. अगसत्य उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4.श्रीां ह्रां हसकहिह्रां . praṇava and śrī.श्रीां ह्रां सकिह्रां .श्रीां ह्रां हसकहएईिह्रां . is tāmasic in nature (तमो गुण).श्रीां ह्रां सएईिह्रां . काम उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. immobilization like a faint and deep sleep (मरणां ववसमतृ तमच् ूव छाव तनद्रा).श्रीां ह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 12. praṇava śrī and hṛllekhā and śrī praṇava and hṛllekhā.श्रीां ह्रां सहकहिह्रां . इन्त्द्र उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5.which are .

ववष्णु उपालसता ववद्या:ॐह्रांश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां ववसमतृ त mantras are: 1.एकावलि 8. कुबेर उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : ॐ ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10. मनु उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3. सूयव उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8. दव ू ावस उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. कुबेर उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : ह्रां ॐ श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10. नकन्त्द उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. अगसत्य उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां 268 कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां . मनु उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7. नकन्त्द उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. ववष्णु उपालसता ववद्या:ह्रांॐश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां मूच्छाव mantras are: 1. काम उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. काम उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. शङ्कर उपालसता ववद्या: ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 12. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. अगसत्य उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4. शङ्कर उपालसता ववद्या: ह्रां ॐ श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 12.

दव ू ावस उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. ववष्णु उपालसता ववद्या:ॐश्रीांह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां तनद्रा mantras are: 1. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7.एकावलि 4. नकन्त्द उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. ववष्णु उपालसता ववद्या: श्रीांॐह्रांहसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां Thus One hundred and forty four mantras are revealed. हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां नकन्त्द उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां शङ्कर उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 12. दव ू ावस उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर 6. कुबेर उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : श्रीां ॐ ह्रां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां 10. 11. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां 7. 269 . िन्त्द्र उपालसता ववद्या : ॐ श्रीां ह्रां 10. मनु उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3. कुबेर उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां 9. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. अगसत्य उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4. सय ू व उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8. काम उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. सय ू व उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां 8. शङ्कर उपालसता ववद्या: श्रीां ॐ ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां 12. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: ॐ श्रीां ह्रां 5.

एकावलि Consolidating the three avasthA mantras with four aspects (144) with respect to upasakas will be seen as below: 1. काम उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रां कएईिह्रां- ह्रां हसकहिह्रां .श्रीां ह्रां हसकहिह्रां.ह्रां श्रीां सहसकिह्रां/ श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां/ श्रीां ह्रां कएईिह्रां .श्रीां ह्रां हकएईिह्रां- श्रीां ह्रां सकएईिह्रां/ ॐ ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां/ह्रां ॐ श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां/ ॐ श्रीां ह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां/ श्रीां ॐ ह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां 3.श्रीां ह्रां सहसकिह्रां/ ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां/ ह्रां ॐ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां/ ॐ श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां/ श्रीां ॐ ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां 4.ह्रां श्रीां हसकहिह्रां .ह्रां सकिह्रां/ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीां कएईिह्रांश्रीां हसकहिह्रां -श्रीां सकिह्रां/ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रां श्रीां कएईिह्रां-ह्रां श्रीां हसकहिह्रां -ह्रां श्रीां सकिह्रां/ श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीां ह्रां कएईिह्रां-श्रीां ह्रां हसकहिह्रां -श्रीां ह्रां सकिह्रां/ ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रां ॐ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ ॐ श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीां ॐ ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 2. अगसत्य उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां/ ह्रां कएईिह्रांह्रां हसकहिह्रां – ह्रां सहसकिह्रां/ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां/ श्रीां कएईिह्रां- श्रीां हसकहिह्रां- श्रीां सहसकिह्रां/ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां/ ह्रां श्रीां कएईिह्रां . मनु उपालसता ववद्या: ह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां/ ह्रां कहएईिह्रांह्रां हकएईिह्रां-ह्रां सकएईिह्रां/ श्रीां हकएईिह्रां सकएईिह्रां/ श्रीां कहएईिह्रां- श्रीां हकएईिह्रांह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां श्रीां सकएईिह्रां/ ह्रां कहएईिह्रां - ह्रां श्रीां सकएईिह्रां/ श्रीां हकएईिह्रां- ह्रां श्रीां कहएईिह्रां श्रीां सकएईिह्रां/ श्रीां ह्रां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां/ श्रीां ह्रां कहएईिह्रां. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां/ ह्रां कएईिह्रां -ह्रां हसकहिह्रां -ह्रां सिकह्रां/ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां/ श्रीां कएईिह्रांश्रीां हसकहिह्रां-श्रीां सिकह्रां/ ह्रां श्रीां 270 कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां/ ह्रां श्रीां .

श्रीां हसकहिहरर.श्रीां सकिहरर/ ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर/ ह्रां श्रीां कएईिहरर -ह्रां श्रीां हसकहिहरर.ह्रांश्रीांसहकिह्रां/श्रीांह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां/श्रीांह्रांहसकिह्रां- श्रीांह्रां हकहिह्रां-श्रीांह्रां सहकिह्रां/ ॐह्रांश्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां/ ह्रांॐश्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां/ ॐश्रीांह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां/ श्रीांॐह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां 8.ह्रां हसकिह्रां- श्रीां हकहिह्रां-श्रीां सहकिह्रां/ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां/ह्रांश्रीांहसकिह्रां ह्रांश्रीांहकहिह्रां.एकावलि कएईिह्रां -ह्रां श्रीां हसकहिह्रां -ह्रां श्रीां सिकह्रां/ श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां/ श्रीां ह्रां कएईिह्रां-श्रीां ह्रां हसकहिह्रां -श्रीां ह्रां सिकह्रां/ ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां/ ह्रां ॐ श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां/ ॐ श्रीां ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां/ श्रीां ॐ ह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां 5. दव ू ावस उपालसता ववद्या: ह्रां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर/ ह्रां कएईिहरर ह्रां हसकहिहरर-ह्रां सकिहरर/ श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर/ श्रीां कएईिहरर. सूयव उपालसता ववद्या: हकहिह्रां -ह्रां ह्रां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां/ह्रां सहकिह्रां/श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां/श्रीां हसकिह्रां. िोपामद्र ु ा उपालसता ववद्या: ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रां हसकिह्रां.ह्रां हसकहएईिह्रां.ह्रां हसकएईिह्रां/ श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां/ श्रीांहसकएईिह्रां-श्रीां हसकहएईिह्रां-श्रीां हसकएईिह्रां 271 / ह्रांश्रीां .ह्रां श्रीां सकिहरर/ श्रीां ह्रां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर/श्रीां ह्रां कएईिहरर-श्रीां ह्रां हसकहिहरर-श्रीां ह्रां सकिहरर/ॐह्रांश्रीां हसकहिहरर कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर/ सकिहरर/ ॐश्रीांह्रां कएईिहरर हसकहिहरर कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर ह्रांॐश्रीां कएईिहरर सकिहरर/ श्रीांॐह्रां 6.ह्रां हसकहिह्रां -ह्रां सकिह्रां/ श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/श्रीां ह्रां श्रीां श्रीां हसकहिह्रां-श्रीां सकिह्रां/ हसकिह्रां- ह्रांश्रीांहसकहिह्रां- सकिह्रां/श्रीांह्रां हसकिह्रां ह्रांश्रीां सकिह्रां/ हसकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीांह्रां हसकिह्रां-श्रीांह्रां हसकहिह्रां-श्रीांह्रां हसकिह्रां- हसकिह्रां - सकिह्रां/ ह्रांश्रीां हसकहिह्रां- ॐह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रांॐश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ ॐश्रीांह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीांॐह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 7. कुबेर उपालसता ववद्या: ह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां/ ह्रां हसकएईिह्रां.

िन्त्द्र उपालसता ववद्या : ह्रां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां/ सहकएईिह्रां-ह्रां सहकहएईिह्रां-ह्रां सहकएईिह्रां/ सहकएईिह्रां/ श्रीां ह्रांश्रीांसहकएईिह्रां सहकएईिह्रां –श्रीां सहकहएईिह्रां ह्रांश्रीां सहकहएईिह्रां- श्रीांसहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां/ ह्रांश्रीां सहकएईिह्रां –श्रीां ह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां / ह्रांश्रीांसहकएईिह्रां- / श्रीांह्रांसहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां/श्रीांह्रांसहकएईिह्रां-श्रीांह्रां सहकहएईिह्रां-श्रीांह्रां सहकएईिह्रां/ॐह्रांश्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां/ह्रांॐश्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां/ 10. ॐश्रीांह्रांसहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां/श्रीांॐह्रांसहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां नकन्त्द उपालसता ववद्या: ह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रां सएईिह्रां ह्रां सहकहिह्रां ह्रां सकिह्रां/ श्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीां सएईिह्रां- श्रीां सहकहिह्रां.एकावलि हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां ह्रांश्रीां हसकहएईिह्रां- हसकएईिह्रां/ ह्रांश्रीां ह्रांश्रीां हसकएईिह्रां/श्रीांह्रां हसकएईिह्रां हसकएईिह्रां - हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां/श्रीांह्रां हसकएईिह्रां-श्रीांह्रां हसकहएईिह्रां.श्रीांह्रां हसकएईिह्रां/ ॐह्रांश्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां/ हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां/ ॐश्रीांह्रां ह्रांॐश्रीां हसकएईिह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां/ श्रीांॐह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां 9.श्रीां सकिह्रां/ ह्रांश्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रांश्रीां सएईिह्रांह्रांश्रीां सहकहिह्रां- ह्रांश्रीां सकिह्रां/ श्रीांह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीांह्रांसएईिह्रां.श्रीांह्रां सकिह्रां/ ॐह्रांश्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रांॐश्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ ॐश्रीांह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीांॐह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां 11. शङ्कर उपालसता हसकिहसकहिसकिह्रां/ ह्रां ववद्या: ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिह्रां-ह्रां हसकहिह्रां-ह्रां सकिह्रां-ह्रां हसकि हसकहि सकिह्रां/ श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां/ श्रीां हसकिह्रां-श्रीां हसकहिह्रां -श्रीां सकिह्रां-श्रीां हसकिहसकहिसकिह्रां/ श्रीांहसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकि हसकहिसकिह्रां/ ह्रां श्रीां श्रीां हसकहिह्रां-ह्रां श्रीां सकिह्रां-ह्रां श्रीां हसकि ह्रां हसकिह्रां-ह्रां हसकहिसकिह्रां/ श्रीां ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकि हसकहिसकिह्रां/ श्रीां ह्रां हसकिह्रां-श्रीां ह्रां 272 .श्रीांह्रां सहकहिह्रां.

श्रीां सएईिह्रां. 273 .श्रीां ह्रां सकिह्रां.श्रीां हसकहिह्रां .ह्रां हसकहिह्रां.ह्रां श्रीां सहकहिह्रां. kāmakalā. hṛllekhā. श्रीां ह्रां सकिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां/ हसकिहसकहिसकिह्रां/ ह्रांॐश्रीां हसकिहसकहिसकिह्रां/ ॐश्रीांह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां/ हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां ववष्णु उपालसता ववद्या: सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रां सएईिह्रां- ह्रां सहकहिह्रां- ॐह्रांश्रीां ह्रां श्रीांॐह्रां हसकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिह्रां.ह्रां सकिह्रां. This is revaled as addition of the śrī.ह्रां श्रीां हसकहिह्रां.श्रीां ह्रां सहकहिह्रां.श्रीां सकिह्रां. unstained mind(वैराग्यां मम ु ुक्षुत्वां शमादद ववमिां मनुः).ह्रां श्रीां सएईिह्रां.ह्रां श्रीां सकिह्रां.श्रीां सकिह्रां/ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रां श्रीां हसकिह्रां.ह्रां श्रीां सकिह्रां/ श्रीां ह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीां ह्रां हसकिह्रां- श्रीां ह्रां हसकहिह्रां.which are.श्रीां ह्रां सकिह्रां/ ॐह्रांश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ ह्रांॐश्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ ॐश्रीांह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीांॐह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ The most highly venerated ṣoḍaśī(षोडशी ) is called turīyā (तुररया) is of the exalated moving state of both ṣiva and śakti (सफुरत्तमार िक्षणा).श्रीां सहकहिह्रां. transcends gunās(गुणातीता).एकावलि हसकहिह्रां - श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां ह्रां सकिह्रां- सकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां 12. yearning for the highest experiential knowledge. vāgbhava and parā bijās in the above said variation with a reverse of the said five bijas in the end called mahā ṣoḍaśī.attached detachment. with a reversal of five bijas and kutas is called as parā ṣoḍaśī. has aspects (किा). with straight & reversal of both kutas and eight bijas is called gupta ṣoḍaśī and with a different set of bijas called pūrṇa ṣoḍaśī.ह्रां ह्रां सकिह्रां/ श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां/ श्रीां हसकिह्रां.श्रीां ह्रां सएईिह्रां.

सहसकिह्रां हसकहिह्रां कएईिह्रां -ह्रांऐां्िरांस :श्रीां/ सहसकिह्रां सहसकिह्रां श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां- हसकहिह्रां कएईिह्रां कएईिह्रां हसकहिह्रां श्रीांह्रां ॐ-स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां/ ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस -कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां -सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 4. इन्त्द्र उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सिकह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीांह्रांऐां्िरांस :श्रीांहसकहिह्रां श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां-सिकह्रां श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां-कएईिह्रां कएईिह्रां श्रीांह्रां ॐ-स :ऐां्िरां हसकहिह्रां हसकहिह्रां ह्रांश्रीां- कएईिह्रां- सिकह्रां-सिकह्रां ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस - कएईिह्रांहसकहिह्रांसिकह्रां-सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 5. मनु उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां स ुः ऐां हकएईिह्रां कहएईिह्रां ्िरां ह्रां -ह्रांऐां्िरांस :श्रीां/ श्रीां/श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां- सकएईिह्रां श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां- कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां सकएईिह्रां हकएईिह्रां कहएईिह्रां श्रीांह्रां ॐ-स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां/ ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस . अगसत्य उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सहसकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां/श्रीांस :्िरांऐह् ां रां-ॐह्रांश्रीां. काम उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीांह्रांऐां्िरांस :श्रीांहसकहिह्रां श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां-सकिह्रां श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां-कएईिह्रां कएईिह्रां श्रीांह्रां ॐ-स :ऐां्िरां हसकहिह्रां हसकहिह्रां ह्रांश्रीां- कएईिह्रां- सकिह्रां-सकिह्रां ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस - कएईिह्रांहसकहिह्रांसकिह्रां-सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 2.एकावलि Thus these mantras are seen as in four types with respect to each upasaka:1. दव ू ावस उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां.कहएईिह्रां हकएईिह्रां सकएईिह्रां -सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 3.श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां-सकिहरर हसकहिहरर 274 .

सूयव उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां- श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां- सहकिह्रां हकहिह्रां हसकिह्रां- ह्रांऐां्िरांस :श्रीां.ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस .हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां सहकिह्रां हकहिह्रां हसकिह्रां श्रीांह्रां ॐ-स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां- ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस - हसकिह्रां हकहिह्रां सहकिह्रां-सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 8.श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां.ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस .श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां-सकिह्रां हसकहिह्रां हसकिह्रांह्रांऐां्िरांस :श्रीां.श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां. िोपामुद्रा उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां.हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां-सकिह्रां हसकहिह्रां हसकिह्रां-श्रीांह्रां ॐ-स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां- ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस - हसकिह्रांहसकहिह्रांसकिह्रां-सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 7. िन्त्द्र उपालसता ववद्या : श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां स ुः ऐां्िरांह्रांश्रीां-श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां-सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां-ह्रां ऐां ्िरांस : श्रीां- श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां- सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां श्रीांह्रां ॐस :ऐां्िरां ह्रांश्रीां.सहकएईिह्रां सहकहएईिह्रां सहकएईिह्रां सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 275 .हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रांसरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 9.ॐ्िरांह्रांश्रीांऐां्िरांस -कएईिहररहसकहिहररसकिहरर-सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 6. कुबेर उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रांश्रीां-श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां-हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां-ह्रां ऐां ्िरांस : श्रीां - श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां- हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां हसकएईिह्रां हसकहएईिह्रां हसकएईिह्रां श्रीांह्रां ॐस :ऐां्िरां ह्रांश्रीां.एकावलि कएईिहरर-ह्रांऐां्िरांस :श्रीां- श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां-कएईिहरर हसकहिहरर सकिहरर-सकिहरर हसकहिहरर कएईिहरर श्रीांह्रां ॐ-स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां.

हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां.श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीांसहकहिह्रांसएईिह्रां श्रीांह्रां सहकहिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां ॐ-स :ऐां्िरां ह्रांश्रीां- सएईिह्रांसहकहिह्रांसकिह्रां-सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां सएईिह्रां - सकिह्रां-सकिह्रां ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस - 11.श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां- सकिह्रां सहकहिह्रां सएईिह्रां श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां- सकिह्रां हसकिह्रां हसकहिह्रां हसकहिह्रां हसकिह्रां-ह्रांऐां्िरांस :श्रीां- सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां. ववष्णु उपालसता ववद्या: श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां.हसकिहसकहिसकिह्रां -सकिह्रां हसकहिह्रां हसकिह्रां-श्रीां ह्रां ॐ.हसकिहसकहिसकिह्रां . नकन्त्द उपालसता ववद्या:श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐह्रांश्रीां सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां- श्रीांस :्िरांऐांह्रां-ॐह्रांश्रीां-सकिह्रां ह्रांऐां्िरांस :श्रीां.सकिह्रां सहकहिह्रां सएईिह्रां -सकिह्रां हसकहिह्रां हसकिह्रां-श्रीांह्रां ॐस :ऐां्िरां ह्रांश्रीां- ॐ्िरांह्रांश्रीां-ऐां्िरांस -हसकिह्रांहसकहिह्रांसकिह्रां- सएईिह्रां सहकहिह्रां सकिह्रां सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां 276 . शङ्कर उपालसता ववद्या:श्रीां ह्रां ्िरां ऐां स ुः ॐ ह्रां श्रीां हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां हसकिहसकहिसकिह्रां स ुः ऐां ्िरां ह्रां श्रीां/ श्रीां स :्िरां ऐां ह्रां-ॐ ह्रां श्रीांहसकिहसकहिसकिह्रां सकिह्रां हसकहिह्रां हसकिह्रां-ह्रांऐां्िरांस :श्रीां/ श्रीांह्रां्िरांऐांस :-ॐह्रांश्रीां.एकावलि 10.स : ऐां ्िरां ह्रां श्रीां/ ॐ ्िरां ह्रां श्रीां – ऐां्िरांस हसकिहसकहिसकिह्रां -सरीां ऐां क्रों क्रीां ईं हुां – हसकिह्रां हसकहिह्रां सकिह्रां 12.

EòɨÉEò±ÉÉ vªÉÉxÉ ªÉVÉxÉÆ Ê¶É®ú漃 ÊjÉEòÉähÉ MÉÖ°üxÉ vªÉɪÉäiÉ ªÉlÉÉ- 6 1 5 3 7 2 4 1 4-ºÉÖ|ɤÉÉävÉèEòxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 2 4-®úHòɨ¤ÉÉ {ÉÉnù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 3 4-¶ÉÖC±Éɨ¤ÉÉ {ÉÉnù ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4 4-ÊxɹEò±ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 5 4-ºÉEò±ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 6 4-xÉ´ÉÉi¨ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 7 4-+GÚò®úÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: xÉɦÉÉè ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù º´É°ü{É vªÉÉxÉÆ ªÉlÉÉ (3 1 2) 277 .a.एकावलि 27.

<È xɨÉ: §ÉÚ¨ÉvªÉä 4.<È ºÉ´ÉÉÇxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: EòɨÉEò±ÉÉ @ñ¹ªÉÉÊnù xªÉɺÉ: |ÉÉhÉɪÉÉ¨É '<Ç" EòÉ®äúhÉ 36 ´ÉÉ®Æú EÞòi´ÉÉ +ºªÉ ¸ÉÒEòɨÉEò±ÉÉi¨ÉEòɪÉÉ:|Élɨɺ¡Öò®úhɺªÉ {É®ú¨ÉÉxÉxnù¦Éè®ú´É @ñʹÉ: +¨ÉÞiÉÊ´É®úÉ]Âõ MÉɪÉjÉÒ Uôxnù: ¶ÉÊHò¦Éè®ú´ÉÒ ¸ÉÒ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ {É®úɦÉ]Âõ]õÉÊ®úEòÉ näù´ÉiÉÉ Eò®ú¹Éb÷RÂóMÉ xªÉɺÉ: +É-<Ç->ð-Bå-+Éé-+: vªÉÉxÉÆ: |ÉEòɶɨÉvªÉκlÉiÉÊSÉiº´É°ü{ÉÉÆ ´É®úɦɪÉä ºÉxnùvÉiÉÓ ÊjÉxÉäjÉÉÆ* ʺÉxnÚù®ú´ÉhÉÉÈ +ÊiÉEòÉä¨É±ÉÉRÂóMÉÓ ¨ÉɪÉɨɪÉÓ iÉi´É¨ÉªÉÓ xɨÉÉʨÉ** {É\SÉ{ÉÚVÉÉ** ʶɮú漃 ÊjÉJÉhb÷ɨÉÖpùÉÆ Ê´ÉxªÉºªÉÉ {É\SÉnù¶ÉÉIÉ®úÓ BEò-BEò-+IÉ®±ÉÒxÉÆ ¦ÉÉ´ªÉ ªÉlÉÉ Eò B <Ç ±É ¿Ó ½þ ºÉ Eò ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó B <Ç ±É ¿Ó ½þ ºÉ Eò ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó <Ç ±É ¿Ó ½þ ºÉ Eò ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó ±É ¿Ó ½þ ºÉ Eò ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó ¿Ó ½þ ºÉ Eò ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó ½þ ºÉ Eò ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó ºÉ Eò ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó Eò ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó ½þ ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó ºÉ Eò ±É ¿Ó 278 .<È ºÉEò±ÉºÉÎSSÉnùÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: ¾þnùªÉä 4.4 ÊSÉnùÉxÉxnù {É®ú´ÉºÉΨ´Énäù xɨÉ: 3.<È xɨÉ: ¾þnùªÉä 4.एकावलि 1.4 +ÉxÉxnùÉxÉxnù {É®ú´ÉºÉΨ´Énäù xɨÉ: {ÉÖxÉ: xÉɦÉÉè 4.<È ÊxɹEò±ÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: MÉÖÁä 4.<È xɨÉ: ¨ÉÖJÉä 4.4 ºÉnùÉxÉxnù {É®ú´ÉºÉΨ´Énäù xɨÉ: 2.

¿Ó ºÉ´ÉǴɶÉÒEò®úhÉ {ÉɶÉ: ({ÉɶɨÉÖpùÉ) 4.एकावलि Eò ±É ¿Ó ±É ¿Ó ¿Ó ®úÓ <È iÉnùÒEòÉ®Æú º´Énäù½äþ ´ªÉÉ{ÉEÆò vªÉÉi´ÉÉ ¨ÉÖJÉä: Eò B <Ç ±É ¿Ó ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù{É®ú¨ÉºÉΨ´ÉnÂù <ÇEòÉ®úºªÉ ½þÉvÉÇ Eò±ÉÉxÉÉlÉ >ðv´ÉÇ Ê¤ÉxuùÉi¨ÉxÉä ¸ÉÒ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®ú ºÉÖxnùªÉÉÇ: Eäò¶ÉÉÊnù +´ÉªÉ´É ºÉʽþiÉ ´ÉCjÉÉªÉ xɨÉ: ºiÉxÉuùªÉä:½þºÉEò½þ±É¿Ó ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù{É®ú¨ÉºÉΨ´ÉnÂù <ÇEòÉ®úºªÉ ½þÉvÉÇ Eò±ÉÉxÉÉlÉ +vÉÉäʤÉxnÖùªÉÖMɱÉÉi¨ÉxÉä ¸ÉÒ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®ú ºÉÖxnùªÉÉÇ: ¤ÉɽÖþ SÉiÉÖ¹]õªÉÊnù +´ÉªÉ´É ºÉʽþiÉ ºiÉxÉuùªÉÉªÉ xɨÉ: ªÉÉäxÉÉè: ºÉEò±É¿Ó ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù{É®ú¨ÉºÉΨ´ÉnÂù <ÇEòÉ®úºªÉ ºÉ{É®úÉvÉÇEò±ÉÉi¨ÉxÉä ¸ÉÒ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉÉÇ: {ÉÉnùÉÊnù +´ÉªÉ´É ºÉʽþiÉ ªÉÉäxɪÉä xɨÉ: ºÉ´ÉÉÇRÂóMÉä:Eò 15 ºÉÎSSÉnùÉxÉxnù{É®ú¨ÉºÉΨ´ÉnÂù <ÇEòÉ®úºªÉ ºÉ¨ÉºiÉEò±ÉÉi¨ÉxÉä ¸ÉÒ ¨É½þÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉÉÇ: ºÉ´ÉÉǴɪÉ䦪ÉÉä xɨÉ: º´ÉÉi¨ÉÉxÉÆ ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒ °ü{ÉÆ EòɨÉä·É®úÉRÂóMɺɨºlÉÆ vªÉɪÉäiÉ iÉiÉ: +ɪÉÖvɨÉÖpùÉ: |Énù¶ÉǪÉäiÉ 4.½Æþ º½þÉè: ʴɨɶÉÉǨ¤ÉÉ ®úHò SÉ®úhÉ ¸ÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 279 .+Æ ¼ºÉÉé |ÉEòɶÉÉxÉxnùxÉÉlÉ ¶ÉÖC±É SÉ®úhɸÉÒ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: 4.lÉÆ ºÉ´ÉǺɨ¨ÉÉä½þxÉ vÉxÉÖ: (vÉxÉÖ¨ÉÖpÇ ùÉ) 4.GòÉå ºÉ´ÉǺiɨ¦ÉxÉ +ÆMEÖò¶É: (+RÂóEòÖ ¶É ¨ÉÖpùÉ) {ÉÖxÉ: ʶɮú漃 ¸ÉÒMÉÖ¯ûÆ vªÉɪÉäiÉ 4.pùÉÆ pùÓ C±ÉÓ ¤±ÉÚÆ ºÉ: ºÉ´ÉÇVɨ¦ÉxÉ䦪ÉÉä ¤ÉÉhÉ䦪É: (¤ÉÉhÉ ¨ÉÖpùÉ) 4.

एकावलि 4.EòɨÉä·É®ú EòɨÉä·É®úÒ +¹]õÉkä É®ú ¶ÉiÉÆ ( EòɨÉEò±ÉÉʴɱÉɺÉÉxiÉMÉÇiÉÆ) 444444444444- ºÉEò±É-¦ÉÖ´ÉxÉ-=nùªÉ¨ÉªÉ-±ÉÒ±ÉÉ-Ê´ÉxÉÉänùxÉÉätÖHòÉªÉ xɨÉÉà xɨÉ: ºÉEò±É-¦ÉÖ´ÉxÉ-κlÉÊiɨɪÉ-±ÉÒ±ÉÉ-Ê´ÉxÉÉänùxÉÉätÖHòÉªÉ xɨÉÉà xɨÉ: ºÉEò±É-¦ÉÖ´ÉxÉ-±ÉªÉ¨ÉªÉ-±ÉÒ±ÉÉ-Ê´ÉxÉÉänùxÉÉätÖHòÉªÉ xɨÉÉà xɨÉ: +xiɱÉÔxÉ-ʴɨɶÉÉÇªÉ xɨÉÉä xɨÉ: |ÉEòɶɨÉÉjÉ-iÉxÉ´Éä xɨÉÉä xɨÉ: ¦ÉÉÊ´É-SÉ®úÉSÉ®ú¤ÉÒVÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ʶɴɰü{É-ÊxɨÉDZÉÉnù¶ÉÉǪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ÊxÉVɺÉÖJɨɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ÊxÉiªÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: Êxɯû{ɨÉÉEòÉ®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: 10 +ÉtɪÉè ¶ÉCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉ¨ÉÉMÉ¨É ¤ÉÒVÉÉRÂóEÖò®ú°ü{É-º¡ÖòÊ]õiÉ-ʶɴɶÉÊHò¦ªÉÉÆ xɨÉÉä xɨÉ: 280 .+Æ ½Æþ ¼ºÉÉé º½þÉè: |ÉEòÉ¶É Ê´É¨É¶ÉÉÇi¨ÉEò ¶ÉÖC±É®úHò SÉ®úhÉuùªÉÉä{ÉäiÉ {É®ú¨ÉʶɴÉ(+¨ÉÖEòÉ) xÉxnùxÉÉlÉ {É®úɶÉÊHò(+¨ÉÖEòÉ)+¨¤ÉÉ ½ÆþºÉ: ʶɴÉ: ºÉÉä½Æþ ¸ÉÒÊxÉ´ÉÉÇhÉ{ÉÉnÖùEòÉÆ {ÉÚVɪÉÉ欃 xɨÉ: (¸ÉÒ{ÉÖ®úMÉiɺªÉ MÉÖ®úÉä: B´É ¶ÉCiªÉÉ: xÉɨÉÆ ÊxÉ´ÉÉÇhÉ{ÉÉnÖùEòɪÉÆ ªÉÉäVɪÉäiÉÂ) b.

एकावलि 44444444444444444444444444444444- +hb÷iÉ®ú°ü{É +xÉÖkÉ®ú ʴɨɶÉÇʱÉÊ{ɱÉIªÉ Ê´ÉOɽþɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: {É®úºªÉè ¶ÉCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: {É®úʶɴÉ-®úÊ´ÉEò®ÊxÉEò®-ʴɶÉnù-ʴɨɶÉÇ-nù{ÉÇhÉ|ÉÊiÉ¡òʱÉiÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: |ÉÊiÉ-¯ûÊSɯûÊSÉ®.ÊSÉkɨɪÉ-EÖòb÷¬-ÊxÉ´ÉʺÉiÉ-¨É½þÉʤÉxnù´Éä xɨÉÉä xɨÉ: ÊSÉkɨɪÉ-ºÉ´ªÉHò-+½þRÂóEòÉ®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: +½þhÉÇ-ºÉ¨É®úºÉÉEòÉ®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¦ÉÖ´ÉxɨÉhb÷±ÉEò¤É³ýÒEÞòiÉ-Ê{Éhb÷°ü{É-ʶɴɶÉÊHòʨÉlÉÖxÉɦªÉÉÆ xɨÉÉä xɨÉ: ºÉRÂóEòÖ SÉi|ɺɮúÉÊ´ÉÊ´ÉHò-ʶɴɶÉÊHò¦ªÉÉÆ xɨÉÉä xɨÉ: 20 ´ÉÉMÉlÉÇ-ºÉÞι]õ½äþiÉ´Éä xɨÉÉä xɨÉ: ʶɴɶÉÊHò-{É®úº{É®úÉxÉÖ|Éʴɹ]õ-ʴɺ{ɹ]-ʺÉiɶÉÉähÉ-ʤÉxnÖùªÉÖMɳýɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ÊSÉnùÊSÉÊx¨É¸É-ʤÉxnÖùÊ´ÉOɽþ-®úÊ´É°ü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: Eò¨ÉxÉÒªÉiɪÉÉ-EòɨÉEò±ÉÉJªÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: Ê´ÉtÉÎi¨ÉEòɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: näù´ªÉÉÎi¨ÉEòɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: SÉGò Gò¨ÉÉÎi¨ÉEòɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: º¡ÖòÊ]õiÉ +¯ûhÉʤÉxnÖù ´ªÉHòÉEòÉ®úÉªÉ xÉÉnùÉªÉ xɨÉÉä xɨÉ: MÉMÉxÉ-ºÉ¨ÉÒ®úhÉ-nù½þxÉ-=nùEò-¦ÉÚʨÉ-ºÉ¨¦ÉÚiÉ-´ªÉHò-®ú´ÉÉªÉ xɨÉÉä xɨÉ: {É\SɦÉÚiÉ-Ê´ÉEÞòiÉ-+h´ÉÉÊn-+hb÷{ɪÉÇxiÉ-VÉMÉÊuù¶Én-¶ÉÖC±ÉʤÉxnù´Éä xɨÉÉä xɨÉ:30 Ê´ÉtÉ´ÉänùEò¦ÉänùʴɽþÒxÉ-näù´ÉiÉÉÊ´ÉtÉÎi¨ÉEòɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: Ê´ÉtÉ´ÉänùEò¦ÉänùʴɽþÒxÉ-Ê´ÉtÉnäù´ÉiÉÉÎi¨ÉEòɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ´ÉÉMÉlÉǦÉänù-º´É°ü{É-ʶɴɶÉÊHò¦ªÉÉÆ xɨÉÉä xɨÉ: ÊjɤÉÒVÉ°ü{É-ºÉÞι]õκlÉÊiɱɪɦÉänùEÞòiÉÂ-ʶɴÉɦªÉÉÆ xɨÉÉä xɨÉ: ¨ÉÉiÉÞ-¨ÉÉxÉ-¨ÉäªÉÉi¨É-EòÉ®úhÉEòɨÉEò±ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ʤÉxnÖùjɪÉÉʦÉzÉ ¤ÉÒVÉjɪɰü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ®úHò-¶ÉÖC±É-ʨɸÉ-ʤÉxnÖùjɪªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ´ÉÉM¦É´É-EòɨɮúÉVÉ-¶ÉÊHòEÚò]õjɪªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉÉä¨ÉºÉÚªÉÉÇÎMxɨÉhb÷±ÉjɪªÉè xɨÉÉä xɨÉ: EòɨÉ{ÉÚhÉÇVÉEòÉ®úÉJªÉ{ÉÒ`öjɪªÉè xɨÉÉä xɨÉ: 40 º´ÉªÉ¨¦ÉÚ-¤ÉÉhÉ-<iÉ®ú-ʱÉRÂóMÉjɪªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¥ÉÀʴɹh´ÉҶɨÉÚÌiÉjɪªÉè xɨÉÉä xɨÉ: +-Eò-lÉÉÊnù ¨ÉÉiÉÞEòÉ-jɪªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ÊjÉiɪÉ{ÉÖªÉê xɨÉÉä xɨÉ: 281 .

+Ψ¤ÉEòÉ-{ɶªÉxiªÉÖnù¦ÉÚiÉ-+xÉÖkÉ®úÉƶÉSÉGò°ü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: <SUôÉ-YÉÉxÉ-ÊGòªÉÉ-¶ÉÉxiÉɴɪɴÉÉi¨É-=kÉ®úSÉGò°ü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ´ªÉHòÉ´ªÉHò-uùªÉÉi¨É +½Æ-º´É°üÊ{ÉhªÉè xɨÉÉä xɨÉ: BEònù¶ÉÉi¨É-{ɶªÉxiÉÒ-°üÊ{ÉhªÉè EòɨÉEò±ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: |ÉEòɶɺ´É¦ÉÉ´É-+EòÉ®ú±ÉIªÉÉlÉÇ-{É®ú¨ÉʶɴÉÉªÉ xɨÉÉä xɨÉ: ʴɨɶÉǺ´É¦ÉÉ´É-½þEòÉ®ú±ÉIªÉÉlÉÇ-ÊSÉSUôCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ʤÉxnÖùjÉªÉ iÉk´Éº´É°ü{É ´ÉhÉǨɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: 70 ½Æþ +Æ +½Æþ ¤ÉÒVÉjɪÉ-iÉäVÉÉäʤÉxuùÉi¨É-+{É®úÉEòɨÉEò±ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉi´É°ü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ®úVÉÉä°ü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: iɨÉÉä°ü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ÊjÉMÉÖhɺ´É°üÊ{ÉhªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¨ÉÉjÉä xɨÉÉä xɨÉ: 282 .एकावलि 44444444444444444444444444444444- iÉÖ®úÒªÉ{ÉÒ`öɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¶É¤nùº{ɶÉÇ°ü{É®úºÉMÉxvÉÉi¨É¦ÉÚiɺÉÚI¨ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ÊSÉSUô¶ÉÊHò¦ÉÉèÊiÉEòÉʦɨÉiÉ-{É\SÉnù¶ÉÉIÉ®ú°ü{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: EòɨÉä·ÉªÉÉÇÊnù ¹ÉÉäb÷¶ÉÒ{ɪÉÇxiÉ ÊiÉÊlÉÊxÉiªÉÉEòÉ®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ʶɴɶÉÊHòºÉ¨É®úºÉÉEòÉ®ú ¸ÉÒÊ´ÉtɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: +V´ªÉ\VÉxÉ ºÉ¨Éι]õ¦Éänù ʴɦÉÉÊ´ÉiÉÉEòÉ®ú ¸ÉÒÊ´ÉtɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: 50 ¹É]Âõ-ËjɶÉiÉÂ-iÉk´ÉɪÉè ¸ÉÒÊ´ÉtɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¹É]Âõ-ËjɶÉiÉÂ-iÉk´ÉÉiÉÒªÉè ¸ÉÒÊ´ÉtɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: Eäò´É±ÉɪÉè-¸ÉÒÊ´ÉtɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: Ê´ÉtɪÉè-ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉê xɨÉÉä xɨÉ: ºÉÚI¨ÉɪÉè-ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉê xɨÉÉä xɨÉ: näù´ªÉè-ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉê xɨÉÉä xɨÉ: +iªÉxiÉɦÉänùÉi¨ÉÊ´ÉtÉ´ÉätɪÉè-ÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnùªÉê xɨÉÉä xɨÉ: +ºÉÉxiÉÉä½þ°ü{ÉɪÉè-¨É½äþ¶ªÉè xɨÉÉä xɨÉ: {ɶªÉÎxiɨÉvªÉ¨ÉÉ´ÉèJɪÉÉÇÊn-º{ɹ]õ¨ÉÉiÉÞEòÉi¨É¸ÉÒSÉGòÉEòÉ®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉÚI¨ÉiÉäVÉÉäʤÉxuùÉi¨É-{É®úÉ´ÉÉOÉÚ{É-{É®úɶÉCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: 60 ºlÉÚ±É-BEò{É\SÉnù¶ÉÉIÉ®ú´ÉèJÉ®úÒ°ü{É-{É®úɶÉCiªÉè xɨÉÉä xɨÉ: {É®úɨɪÉ-¸ÉÒSÉGò¨ÉvªÉʤÉxnù´Éä xɨÉÉä xɨÉ: ¨ÉvªÉʤÉxnÚùSUÚôxÉ-ÊjÉEòÉähÉÉEòÉ®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ´ÉɨÉÉ-VªÉä¹`öÉ-®úÉèpùÒ.

एकावलि 44444444444444444444444444444444- ÊjÉEòÉähÉ°üÊ{ÉhªÉè xɨÉÉä xɨÉ: BEòºªÉè xɨÉÉä xɨÉ: {É®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ´ÉɨÉÉÊnù´ªÉι]õ¨ÉÉiÉÞºÉÞ¹]õ¬Éi¨É {ɶªÉxiÉÒ -´ÉÉOÉÚÊ{ÉhªÉè xɨÉÉä xɨÉ:80 xɴɪÉÉäxªÉÉi¨ÉEòSÉGòºlÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ºÉÚI¨ÉºlÉÚ±ÉÉEÞòÊiÉ ¨ÉvªÉ¨ÉÉ-´ÉÉOÉÚ{ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: xÉ´ÉxÉÉnù¨ÉªÉEòÉ®úhɺÉÚI¨É ¨ÉvªÉ¨ÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: xÉ´É´ÉMÉÉÇi¨ÉEòɪÉǺlÉÚ±É ¨ÉvªÉ¨ÉÉ´ÉÉSÉä xɨÉÉä xɨÉ: ¦ÉÚiÉʱÉ{ªÉÉJªÉÉiÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: VÉxÉEòVÉxªÉiÉÉnùÉi¨É-ºÉÚI¨ÉºlÉڱɨÉvªÉ¨ÉÉ°üÊ{ÉhªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¶É ¹É ºÉ {É ´ÉMÉǨɪÉ-´ÉºÉÖEòÉähÉÊxɱɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¨ÉvªÉʤÉxnÖù xÉ´ÉEòÉähÉÊSÉqùÒ{ÉUôɪÉÉÊ´ÉiÉiÉnù¶ÉÉ®úuùªÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: iÉ ]õ ´ÉMÉÇ-ʴɱɺÉxÉ-+xiÉnÇù¶ÉÉ®úɱɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: SÉ Eò ´ÉMÉÇ-ʴɺiÉÉ®ú-¤ÉʽþnÇù¶ÉÉ®úÉxiÉ®úMÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ:90 SÉGòSÉiÉÖ¹Eò|ɦÉÉ-ºÉ¨ÉäiɨÉx´É¸ÉºlÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: nù¶ÉÉ®úuùªÉ-{ÉÊ®úhÉɨÉ-SÉiÉÖnùǶÉÉ®úSÉGòɱɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: +ÉÊnù´ÉhÉÇSÉiÉÖnùǶɨɪÉ-SÉiÉÖnùǶÉÉ®úÊxɱɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: EòÉt¹]õ´ÉMÉÉæ{ÉÊSÉiÉ-+¹]õnù³ýɤVÉÉxiɺlÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: º´É®úMÉhɺɨÉÖÊnùiÉ-nÂù´ªÉ¹]õnù³ýɨ¦ÉÉä¯û½þÊxɱɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ®úHò¶ÉÖC±ÉʨɸÉʤÉxnÖùjɪɨɪÉ-+ÎMxÉ-ºÉÉä¨É-ºÉÚªÉÇ iÉäVÉÉäÊ´ÉEÞòiÉ´ÉÞkÉjɪÉɱɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: {ɶªÉxiªÉÉÊnù-ÊjɨÉÉiÉÞEòÉʴɸÉÉxiÉ-¦ÉÚʤɨ¤ÉjɪÉɱɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: {ÉÉnùɨ¤ÉÖVÉ-|ɺɮú{ÉnùÊ´ÉIÉä{ÉGò¨É-+É´É®úhÉnäù´ÉäiÉÉ´ÉÞiÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: {ÉÉnùɨ¤ÉÖVÉ-|ɺɮúGò¨ÉÉänùªÉÉi¨É-MÉÖ¯û{ÉÎRÂóHòGò¨ÉÉÎx´ÉiÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¤Éèxnù´Éä-EòɨÉä·É®úÉRÂóEòÊxɱɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: 100 ¸ÉҨɽþÉÊjÉ{ÉÖ®úºÉÖxnù®úÒnäù´ªÉè xɨÉÉä xɨÉ: {ÉɶÉÉRÂóEòÖ ¶ÉÉÎ\SÉiÉEò®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: <IÉÖSÉÉ{É-|ɺÉÚxÉÉÎ\SÉiÉEò®úɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¤ÉɱÉɯûhÉɯûhÉÉRÂóMªÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¶ÉʶÉ-¦ÉÉxÉÖ-EÞò¶ÉÉxÉÖ-±ÉÉäSÉxÉjɪÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: SÉxpùEò±ÉÉ-Eòα{ÉiÉÉäkÉƺÉ-¨ÉEÖò]õɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: ¸ÉÒ{ÉÖhªÉÉxÉxnù¨ÉÖxÉÒxpùºiÉÖiÉɪÉè xɨÉÉä xɨÉ: EòɨÉEò±ÉÉʴɱÉÉʺÉxªÉè xɨÉÉä xɨÉ: 108 283 .

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