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HINDI MOTIVATIONAL STORIES

प्रेरणादायिक य दिं ी क ायििािं
motivationalstoriesinhindi.in

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सींत ने ककसान से कहा .बोले हुए शब्द वापस नह ीं आते एक बार एक ककसान ने अपने पडोसी को भला बरु ा कह ददया.तम ु आसानी से इन्हें अपने मख ु से ननकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नह ीं ले सकते. तब सींत ने उससे कहा कक ठीक ऐसा ह तम् ु हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है . ” तुम खूब सारे पींख इकठ्ठा कर लो . पर human nature कुछ ऐसा होता है की कुछ भी कर ल क्जये इींसान कह ीं ना कह ीं hurt हो ह जाता है . . इस कहानी से क्या सीख ममलती है:  कुछ कड़वा बोलने से पहले ये याद रखें कक भला-बरु ा कहने के बाद कुछ भी कर के अपने शब्द वापस नह ीं मलए जा सकते. ” अब जाओ और उन पींखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ” ककसान वापस गया पर तब तक सारे पींख हवा से इधर-उधर उड़ चक ु े थे. तब सींत ने कहा . पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक सींत के पास गया. और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो . और माींगनी भी चादहए.उसने सींत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पछ ू ा. आप उस व्यक्क्त से जाकर क्षमा ज़रूर माींग सकते हैं. और ककसान खाल हाथ सींत के पास पहुींचा.” ककसान ने ऐसा ह ककया और किर सींत के पास पहुींच गया. हााँ.

सक ु रात ने पछ ू ा . किर सक ु रात ने नौजवान से उनके साथ नद की तरि बढ़ने को कहा. किर सक ु रात ने उसका सर पानी से बाहर ननकाल ददया और बाहर ननकलते ह जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हााँिते-हााँिते तेजी से साींस लेना.और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुाँच गया. सिलता का रहस्य एक बार एक नौजवान लड़के ने सक ु रात से पछ ू ा कक सिलता का रहस्य क्या है ? सक ु रात ने उस लड़के से कहा कक तुम कल मझ ु े नद के ककनारे ममलो. इससे अच्छा तो है की चप ु रहा जाए. जब आप ककसी को बरु ा कहते हैं तो वह उसे कष्ट पहुींचाने के मलए होता है पर बाद में वो आप ह को अधधक कष्ट दे ता है . लड़का बाहर ननकलने के मलए सींघर्ष करने लगा . लेककन सक ु रात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नह ीं पड़ने लगा.” जब तुम वहााँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?” लड़के ने उत्तर ददया. तभी अचानक सक ु रात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो ददया.”साींस लेना” . खुद को कष्ट दे ने से क्या लाभ.वो ममले.

जार को थोडा दहलाने पर ये कींकड़ पत्थरों के बीच settle हो गए. क्ज़न्दगी के पत्थर. बड़े-बड़े पत्थर आपके जीवन की ज़रूर चीजें हैंआपकी family.सक ु रात ने कहा. . तभी professor ने एक sand box ननकाला और उसमे भर रे त को जार में डालने लगे. ” मैं चाहता हूाँ कक आप इस बात को समझें कक ये जार आपकी life को represent करता है . किर उन्होंने students से पछ ू ा कक क्या जार भर गया है ? और सभी ने कहा “हााँ ”. ” हााँ” किर professor ने समझाना शरू ु ककया. कींकड़ और रे त Philosophy के एक professor ने कुछ चीजों के साथ class में प्रवेश ककया.आपका partner. जब class शरू ु हुई तो उन्होंने एक बड़ा सा खाल शीशे का जार मलया और उसमे पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े भरने लगे.” यह सिलता का रहस्य है . एक बार किर उन्होंने छात्रों से पछ ू ा कक क्या जार भर गया है ? और सभी ने हााँ में उत्तर ददया.आपकी health. तब प्रोफेसर ने छोटे -छोटे कींकडों से भरा एक box मलया और उन्हें जार में भरने लगे. आपके बच्चे – ऐसी चीजें कक अगर आपकी बाकी सार चीजें खो भी जाएाँ और मसिष ये रहे तो भी आपकी क्ज़न्दगी पर् ू ष रहे गी. जब तुम सिलता को उतनी ह बरु तरह से चाहोगे क्जतना की तुम साींस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे ममल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नह ीं है . रे त ने बची-खुची जगह भी भर द . और एक बार किर उन्होंने पछ ू ा कक क्या जार भर गया है ? और सभी ने एक साथ उत्तर ददया .

क्जन्हें गुरु ममल गया उनका जीवन एक खेल है और जो लोग गरु ु द्वारा बताये गए मागष पर चलने लगते हैं. और ये रे त बाकी सभी छोट -मोट चीजों को दशाषती है . बाकी चीजें बस रे त हैं.कुछ अन्य कहते हैं कक जीवन एक खेल है और कुछ जीवन को एक उत्सव की सींज्ञा दे ते हैं | इनमें कौन सह है ?’गुरु जी ने तत्काल बड़े ह धैयप ष व ष उत्तर ू क ददया-‘पत्र ु .ये कींकड़ कुछ अन्य चीजें हैं जो matter करती हैं. यह आपकी life के साथ होता है.कुछ लोग कहते हैं कक जीवन एक सींघर्ष है.बच्चों के साथ खेमलए. घर साफ करने के मलए. अगर आप जार को पहले रे त से भर दें गे तो कींकडों और पत्थरों के मलए कोई जगह नह ीं बचेगी. आपका घर. अपने partner के साथ dance कीक्जये.क्जन्हें गुरु नह ीं ममला उनके मलए जीवन एक सींघर्ष है . हमेशा वक़्त होगा.” गरु ु -दक्षक्षर्ा एक बार एक मशष्य ने ववनम्रतापव ष अपने गुरु जी से पछ ू क ू ा-‘गुरु जी.तुम्हें इसी सन्दभष में एक कहानी सन ु ाता हूाँ| ध्यान से सन ु ोगे तो स्वयीं ह अपने प्रश्न का उत्तर पा सकोगे |’ . उन चीजों पर ध्यान द क्जये जो आपकी happiness के मलए ज़रूर हैं.मात्र वे ह जीवन को एक उत्सव का नाम दे ने का साहस जुटा पाते हैं |’यह उत्तर सन ु ने के बाद भी मशष्य परू तरह से सींतुष्ट न था| गुरु जी को इसका आभास हो गया |वे कहने लगे‘लो. काम पर जाने के मलए. अगर आप अपनी सारा समय और उजाष छोट - छोट चीजों में लगा दें गे तो आपके पास कभी उन चीजों के मलए time नह ीं होगा जो आपके मलए important हैं.party दे ने के मलए.जैसे कक आपकी job. पर पहले पत्थरों पर ध्यान द क्जये – ऐसी चीजें जो सचमच ु matter करती हैं . अपनी priorities set कीक्जये. इत्यादद.

उनसे क्या चादहए |गुरु जी पहले तो मींद-मींद मस् ु कराये और किर बड़े स्नेहपव ष कहने लगे-‘मझ ू क ु े तम ु से गरु ु दक्षक्षर्ा में एक थैला भर के सख ू ी पक्त्तयाीं चादहए.उन्होंने जो कहानी सन ु ाई. उन्हें यह बताया कक वह उनकी मदद नह ीं कर सकता क्योंकक उसने सख ू ी पक्त्तयों का ईंधन के रूप में पहले ह उपयोग कर मलया था | अब. वे तीनों.उनके आश्चयष का दठकाना न रहा | वे सोच में पड़ गये कक आखखर जींगल से कौन सख ू ी पक्त्तयाीं उठा कर ले गया होगा? इतने में ह उन्हें दरू से आता हुआ कोई ककसान ददखाई ददया |वे उसके पास पहुाँच कर.ला सकोगे?’ वे तीनों मन ह मन बहुत प्रसन्न हुए क्योंकक उन्हें लगा कक वे बड़ी आसानी से अपने गरु ु जी की इच्छा परू कर सकेंगे |सख ू ी पक्त्तयााँ तो जींगल में सवषत्र बबखर ह रहती हैं| वे उत्साहपव ष एक ह स्वर में बोले-‘जी गरु ू क ु जी.ले आये गरु ु दक्षक्षर्ा ?’तीनों ने सर झक ु ा मलया |गरू ु जी द्वारा दोबारा पछ ू े जाने पर . कुछ पैसे कमाने के मलए सख ू ी पक्त्तयों के दोने बनाकर बेच ददए थे लेककन उस व्यापार ने उदारता ददखाते हुए उन्हें एक बढ ू मााँ का पता बताया जो सख ू ी पक्त्तयाीं एकबत्रत ककया करती थी|पर भाग्य ने यहााँ पर भी उनका साथ नह ीं ददया क्योंकक वह बढ ू मााँ तो उन पक्त्तयों को अलग-अलग करके कई प्रकार की ओर्धधयााँ बनाया करती थी |अब ननराश होकर वे तीनों खाल हाथ ह गुरुकुल लौट गये |गुरु जी ने उन्हें दे खते ह स्नेहपव ष पछ ू क ू ा‘पत्र ु ो. पास में ह बसे एक गााँव की ओर इस आशा से बढ़ने लगे थे कक हो सकता है वहााँ उस गााँव में उनकी कोई सहायता कर सके |वहााँ पहुाँच कर उन्होंने जब एक व्यापार को दे खा तो बड़ी उम्मीद से उससे एक थैला भर सख ू ी पक्त्तयाीं दे ने के मलए प्राथषना करने लगे लेककन उन्हें किर से एकबार ननराशा ह हाथ आई क्योंकक उस व्यापार ने तो.वह इस प्रकार थी-एक बार की बात है कक ककसी गरु ु कुल में तीन मशष्यों नें अपना अध्ययन सम्पर् ू ष करने पर अपने गुरु जी से यह बताने के मलए ववनती की कक उन्हें गुरुदाक्षक्षर्ा में . जैसी आपकी आज्ञा |’ अब वे तीनों मशष्य चलते-चलते एक समीपस्थ जींगल में पहुाँच चक ु े थे |लेककन यह दे खकर कक वहााँ पर तो सख ू ी पक्त्तयााँ केवल एक मट्ठ ु ी भर ह थीीं . उससे ववनम्रतापव ष याचना करने लगे कक वह उन्हें केवल एक थैला भर सख ू क ू ी पक्त्तयाीं दे दे |अब उस ककसान ने उनसे क्षमायाचना करते हुए. पहले ह .

वचन और कमष.‘गुरुदे व.स्वस्थ एवीं शाींत प्रनतयोधगता में ह भाग लें और अपने ननष्पादन तथा ननमाषर् को ऊींचाई के मशखर पर ले जाने का अथक प्रयास करें |’अब मशष्य परू तरह से सींतुष्ट था | अींततः. सद्भावना.मैं यह कहना चाहती हूाँ कक यदद हम मन. ककसी भी वस्तु या व्यक्क्त को छोटा और महत्त्वह न मान कर उसका नतरस्कार कर सकते हैं?चीींट से लेकर हाथी तक और सई ु से लेकर तलवार तकसभी का अपना-अपना महत्त्व होता है |’गरु ु जी भी तरु ीं त ह बोले-‘हााँ.सहानभ ु नू त एवीं सदहष्र्ुता का ववस्तार होता रहे और हमारा जीवन सींघर्ष के बजाय उत्सव बन सके | दस ू रे . वस्तत ु ः इसी ओर है न कक जब सवषत्र सल ु भ सख ू ी पक्त्तयाीं भी ननरथषक या बेकार नह ीं होती हैं तो किर हम कैसे.अब मझ ु े अच्छी तरह से ज्ञात हो गया है कक आप क्या कहना चाहते हैं |आप का सींकेत.यदद जीवन को एक खेल ह माना जाए तो बेहतर यह होगा कक हम ननववषक्षेप. पत्र ु .अचानक बड़े उत्साह से बोला-‘गुरु जी.इन तीनों ह स्तरों पर इस कहानी का मक ू याींकन करें .हम आपकी इच्छा परू नह ीं कर पाये |हमने सोचा था कक सख ू ी पक्त्तयाीं तो जींगल में सवषत्र बबखर ह रहती होंगी लेककन बड़े ह आश्चयष की बात है कक लोग उनका भी ककतनी तरह से उपयोग करते हैं |’गरु ु जी किर पहले ह की तरह मस् ष बोले-‘ननराश क्यों होते हो ?प्रसन्न हो जाओ और यह ज्ञान कक ु कराते हुए प्रेमपव ू क सख ू ी पक्त्तयाीं भी व्यथष नह ीं हुआ करतीीं बक्कक उनके भी अनेक उपयोग हुआ करते हैं.हमारे जीवन का सबसे बड़ा ‘उत्सव’परु ु र्ाथष ह होता है -ऐसा ववद्वानों का मत है | . तो भी यह कहानी खर ह उतरे गी |सब के प्रनत पव ू ाषग्रह से मक् ु त मन वाला व्यक्क्त अपने वचनों से कभी भी ककसी को आहत करने का दःु साहस नह ीं करता और उसकी यह ऊजाष उसके परु ु र्ाथष के मागष की समस्त बाधाओीं को हर लेती है |वस्तत ु ः.उनमें से एक मशर् ्य कहने लगा. मझ ु े गरु ु दक्षक्षर्ा के रूप में दे दो |’तीनों मशष्य गरु ु जी को प्रर्ाम करके खश ु ी-खश ु ी अपने-अपने घर की ओर चले गये | वह मशष्य जो गुरु जी की कहानी एकाग्रधचत्त हो कर सन ु रहा था.मेरे कहने का भी यह तात्पयष है कक हम जब भी ककसी से ममलें तो उसे यथायोग्य मान दे ने का भरसक प्रयास करें ताकक आपस में स्नेह.

” तुम सह हो. अगर मैं इसे मैं इसी तरह एक घींटे तक उठाये रहूाँ तो क्या होगा ?” . ‘अच्छा . ” पर मेरा सवाल है : यदद मैं इस ग्लास को थोड़ी दे र तक इसी तरह उठा कर पकडे रहूाँ तो क्या होगा ?” ‘कुछ नह ’ ीं …छात्रों ने कहा.100gm…125gm’…छात्रों ने उत्तर ददया. ” जब तक मैं इसका वज़न ना कर लाँ ू मझ ु े इसका सह वज़न नह ीं बता सकता”. ” आपके दहसाब से glass का वज़न ककतना होगा?” ’50gm…. प्रोफेसर ने कहा. अच्छा अगर मैं इसे इसी तरह परू े ददन उठाये रहूाँ तो का होगा?” . ‘आपका हाथ ददष होने लगेगा’. उन्होंने उसे ऊपर उठा कर सभी students को ददखाया और पछ ू ा . एक छात्र ने कहा. प्रोफेसर ने पछ ू ा.ग्लास को नीचे रख द क्जये एक प्रोफेसर ने अपने हाथ में पानी से भरा एक glass पकड़ते हुए class शरू ु की .

इन्हें कुछ दे र तक अपने ददमाग में रखखये और लगेगा की सब कुछ ठीक है .” आपका हाथ सन् ु न हो सकता है . और आप कुछ नह ीं कर पायेंगे. और बाकी सभी हीं स पड़े… “बहुत अच्छा . उत्तर आया . किर प्रोफेसर ने पछ ू ा ” अब ददष से ननजात पाने के मलए मैं क्या करूाँ?” ” ग्लास को नीचे रख द क्जये! एक छात्र ने कहा.. आपके muscle में भार तनाव आ सकता है .उनके बारे में ज्यदा दे र सोधचये और आपको पीड़ा होने लगेगी. लकवा मार सकता है और पक्का आपको hospital जाना पड़ सकता है ”…. Life की problems भी कुछ इसी तरह होती हैं.ककसी छात्र ने कहा.और इन्हें और भी दे र तक अपने ददमाग में रखखये और ये आपको paralyze करने लगें गी. पर क्या इस दौरान glass का वज़न बदला?” प्रोफेसर ने पछ ू ा.”नह ” ीं ” तब भला हाथ में ददष और माींशपेमशयों में तनाव क्यों आया?” Students अचरज में पड़ गए. . ” बबलकुल सह !” प्रोफेसर ने कहा.

उसने पास खड़े महावत से पछ ू ा कक भला ये हाथी ककस प्रकार इतनी शाींनत से खड़े हैं और भागने का प्रयास नह कर रहे हैं ? तब महावत ने कहा. ” इन हाधथयों को छोटे पर से ह इन रक्स्सयों से बााँधा जाता है .और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है . पर उससे भी ज्यादा ज़रूर है ददन के अींत में सोने जाने से पहले उन्हें नीचे रखना. आप stressed नह ीं रहें गे. उसने दे खा कक हाधथयों के अगले पैर में एक रस्सी बींधी हुई है . आप हर रोज़ मजबत ू ी और ताजगी के साथ उठें गे और सामने आने वाल ककसी भी चन ु ौती का सामना कर सकेंगे.अपने जीवन में आने वाल चन ु ानतयों और समस्याओीं के बारे में सोचना ज़रूर है . आप हाथी नह ीं इींसान हैं ! एक आदमी कह ीं से गुजर रहा था. पर ककसी वजह से वो ऐसा नह ीं कर रहे थे. तभी उसने सड़क के ककनारे बींधे हाधथयों को दे खा.इस तरह से. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारर् उन्हें धीरे -धीरे यकीन होता जाता है कक वो इन रक्स्सयों को नह ीं तोड़ सकते. उस समय इनके पास इतनी शक्क्त नह ीं होती की इस बींधन को तोड़ सकें. और अचानक रुक गया.” . उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे ववशालकाय जीव लोहे की जींजीरों की जगह बस एक छोट सी रस्सी से बींधे हुए हैं!!! ये स्पष्ठ था कक हाथी जब चाहते तब अपने बींधन तोड़ कर कह ीं भी जा सकते थे. इसमलए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ह नह ीं करते.

याद रखखये असिलता जीवन का एक दहस्सा है . अब हर रोज़ वो आदमी उसे दे खने लगा . और एक ददन उसने notice ककया कक उस कोकून में एक छोटा सा छे द बन गया है. नततल बबना ककसी और सींघर्ष के आसानी से बाहर ननकल आई. इसमलए उस आदमी ने ननश्चय ककया कक वो उस नततल की मदद करे गा. नततल का सींघर्ष एक बार एक आदमी को अपने garden में टहलते हुए ककसी टहनी से लटकता हुआ एक नततल का कोकून ददखाई पड़ा. आप हाथी नह ीं इींसान हैं.आदमी आश्चयष में पड़ गया कक ये ताकतवर जानवर मसिष इसमलए अपना बींधन नह ीं तोड़ सकते क्योंकक वो इस बात में यकीन करते हैं!! इन हाधथयों की तरह ह हममें से ककतने लोग मसिष पहले ममल असिलता के कारर् ये मान बैठते हैं कक अब हमसे ये काम हो ह नह ीं सकता और अपनी ह बनायीीं हुई मानमसक जींजीरों में जकड़े-जकड़े परू ा जीवन गज ु ार दे ते हैं. उस ददन वो वह ीँ बैठ गया और घींटो उसे दे खता रहा. उसने दे खा की नततल उस खोल से बाहर ननकलने की बहुत कोमशश कर रह है .और पींख सख ू े हुए थे. और किर वो बबलकुल शाींत हो गयी मानो उसने हार मान ल हो. यदद आप भी ऐसे ककसी बींधन में बींधें हैं जो आपको अपने सपने सच करने से रोक रहा है तो उसे तोड़ डामलए….और ननरीं तर प्रयास करने से ह सिलता ममलती है .. उसने एक कैंची उठायी और कोकून की opening को इतना बड़ा कर ददया की वो नततल आसानी से बाहर ननकल सके. और यह हुआ. पर बहुत दे र तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छे द से नह ीं ननकल पायी . . पर उसका शर र सज ू ा हुआ था.

बबना पररश्रम और सींघर्ष के हम कभी उतने मजबत ू नह ीं बन सकते क्जतना हमार क्षमता है . वो आदमी अपनी दया और जकदबाजी में ये नह ीं समझ पाया की दरअसल कोकून से ननकलने की प्रकिया को प्रकृनत ने इतना कदठन इसमलए बनाया है ताकक ऐसा करने से नततल के शर र में मौजद ू तरल उसके पींखों में पहुच सके और वो छे द से बाहर ननकलते ह उड़ सके.ksa vkSj fopkjksa dks tkuus ds fy.facebook. वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में सींघर्ष ह वो चीज होती क्जसकी हमें सचमच ु आवश्यकता होती है . gekjs Qslcqd ist dks t:j Like djsaA https://www.d vkSj lQyrk fd dgkfu.sls gh uohu izsj. इसके उलट बेचार नततल कभी उड़ ह नह ीं पाई और उसे अपनी बाकी की क्ज़न्दगी इधर-उधर नघसटते हुए बीतानी पड़ी.वो आदमी नततल को ये सोच कर दे खता रहा कक वो ककसी भी वक़्त अपने पींख िैला कर उड़ने लगेगी. यदद हम बबना ककसी struggle के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपींग के सामान हो जायेंगे. . पर ऐसा कुछ भी नह ीं हुआ.kknkf.com/hindimotivationalstories . इसमलए जीवन में आने वाले कदठन पलों को सकारात्मक दृक्ष्टकोर् से दे खखये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायींगे जो आपकी क्ज़न्दगी की उड़ान को possible बना पायेंगे.