उत्तर प्रदे श के सभी युवाओं को स्वास्थ्य सेवाएँ

ममलने की मदशा में सुझाव:

कई मशक्षामवदों ने स्कूलों और कॉलेजों में मकशोर एवं मकशोररयों के मलए आयु उपयुक्त यौन मशक्षा प्रदान करने की
जरूरत का समर्थन मकया। सरकार को पूर्थ समियता से इसको स्कूल के पाठ्यिम में शाममल करने हेतु मवचार करना
चामहए। पाठ्यिम सामग्री को अच्छी तरह से सभी आवश्यक यौन और प्रजनन स्वास्थ्य ( SRH) संबंधी जानकारी दे ने के
मलए तैयार मकया जाना चामहए। पाठ्यिम अलग-अलग उम्र, मलंग (ट् ांसजेंडर बच्चे, लड़के एवं लड़मकयां) और कक्षाओं के
मवद्यामर्थयों की जानकारी की जरूरत के अनुसार वैज्ञामनक दृमि से मवकमसत मकया जाना चामहए। यहाँ तक मक 4-6 वर्थ के
बच्चों को भी अच्छे और बुरे 'स्पशथ' के बीच अंतर करना मसखाया जाना चामहए। उमचत रूप से दी गयी उपयुक्त यौन
मशक्षा युवा वगथ को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सम्बंमधत सही जानकारी प्रदान करने के सार् सार् अश्लील वेबसाइट,
पमिकाओं और सामर्यों से ममलने वाली गलत जानकारी के कुप्रभावों को रोकने में और यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सम्बंमधत
गलत धारर्ाओं को दू र करने में भी सहायक होगी। इससे युवाओं को यौन संिमर् रोगों के बारे में जागरूक बनाने और
लड़मकयों को मामसक धमथ के उमचत प्रबंधन में भी मदद ममलेगी।

100% मामसक धमथ स्वच्छता हामसल करने हेतु के मकशोरी सुरक्षा योजना के तहत उत्तर प्रदे श के सरकारी स्कूलों में 6 से
कक्षा 12 में पढ़ने वाली लड़मकयों में बीच प्रमत माह सैमनटरी नैपमकन का मन:शुल्क मवतरर् मकया जा रहा है। यह
प्रशंसनीय योजना वतथमान में केवल सरकारी स्कूलों तक सीममत है। इसको मनजी स्कूलों में भी लागू मकया जाना चामहए
क्ोंमक कक्षा 11 और 12 के स्तर पर ज्यादातर लड़मकयां मनजी स्कूलों में ही अध्ययन कर रही हैं। अंतर-मवभागीय समन्वय
की कमी के कारर् इस योजना को कायाथन्वयन की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है , और लमक्षत आबादी की
केवल एक छोटी संख्या को ही इस कायथिम से लाभान्वन्वत मकया गया है। इसके अलावा लड़मकयों, मशक्षकों और स्कूलों
के मप्रंमसपलों के बीच मकशोरी सुरक्षा योजना के लाभों के बारे में ज्ञान की कमी है; संभवत: स्वास्थ्य कायथकताथ (एएनएम,
आशा, आं गनवाड़ी कायथकताथ) कायथिम में शाममल नही ं मकए गए हैं; और पंचायती राज मवभाग ने मजला स्तर पर मकशोरी
सुरक्षा योजना के महत्व को संज्ञान में ले मलया है ऐसा प्रतीत नही ं होता है। इसमलए कायाथन्वयन कमजोर और दे री से हो
रहा है। कई स्कूलों में साफ पानी, साफ-सफाई और स्वच्छता पैड मनपटान की सुमवधा भी कायाथन्वन्वत नही ं हो रही है।

उत्तर प्रदे श सरकार की एक और अच्छी योजना है मजलों में कम लागत पर सेनेटरी पैड के मनमाथर् के मलए छोटी इकाइयों
की स्र्ापना। यह सही मदशा में एक कदम है, क्ोंमक यह न केवल मामसक धमथ स्वच्छता को बढ़ावा दे ता है (जो लड़मकयों
/ ममहलाओं के स्वास्थ्य के मलए अमत आवश्यक है) बन्वल्क ग्रामीर् ममहलाओं को रोजगार भी प्रदान करता है। इस तरह
की सैमनटरी नैपमकन मवमनमाथर् इकाइयां 42 मजलों में स्र्ामपत की गयी र्ी. परं तु उनमें से कई, कच्चे माल की उमचत
आपूमतथ न हो पाने के कारर् ठप्प हो गयी हैं। इस तरह की लखनऊ में सरोमजनी नगर ब्लॉक में स्र्ामपत दो इकाइयों में
20 ममहलायें कायथरत हैं , और इनकी उत्पादन क्षमता 2000 सैमनटरी नैपमकन प्रमत मदन है। लेमकन कच्चे माल की आपूमतथ
न होने के कारर् मपछले कुछ महीनों से उत्पादन बंद हो गया है। इसमलए सरकार को इन इकाइयों के उमचत संचालन हेतु
अंतर-मवभागीय समन्वय को बढ़ाना चामहए। यह भी मवचारर्ीय है मक इस योजना को मनिःशुल्क सैमनटरर नैपमकन मवतरर्
योजना से जोड़ा जाए मजससे मक इन इकाइयों में बने नैपमकन को लड़मकयों को मनिःशुल्क मवतररत मकया जा सके।

एक अन्य महत्वपूर्थ आवश्यकता है एम.एस.एम. और ट् ांसजेंडर/ मकन्नरों के मलए एचआईवी रोकर्ाम सेवाओं को आसानी
से उपलब्ध कराना। परामशथ और परीक्षर् केन्द्ों (आईसीटीसी) का समय उनकी सुमवधा के अनुसार मनधाथररत होना
चामहए। इस समुदाय के मलए उमचत काउं मसमलंग भी यौन स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्थ घटक होना चामहए। उमचत
परामशथ न केवल उन्हें एचआईवी की रोकर्ाम के बारे में सही जानकारी दे गा , बन्वल्क उनके अंदर आत्म-कलंक और
भेदभाव की भावना को भी दू र करने में सहायक होगा मजससे की वे इन सेवाओं का मबना मकसी रुकावट के लाभ उठा
सकते हैं।

युवावों को पयाथप्त एवं उमचत यौन व प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी मशक्षा और सेवाओं को प्रदान करने के मलए और अमधक
मकशोर अनुकूल स्वास्थ्य क्लीमनक (AFHC) खोले जाने की जरूरत है। वतथमान में उत्तर प्रदे श के 51 मजलों में 1300 के
आसपास AFHC क्लीमनक हैं।

बाल-मववाह लड़मकयों की मशक्षा को अवरोमधत करता है और मातृ और बाल मृत्यु दर में वृन्वि करता है , सार् ही आमर्थक
नुकसान भी। वामर्थक स्वास्थ्य सवेक्षर् 2012-2013 के अनुसार उत्तर प्रदे श में 20-24 साल की 32.6% ममहलाओं की
18 साल की कानूनी उम्र से पहले शादी हो गयी र्ी, और 25-29 वर्थ के 35.5% पुरुर् 21 साल की कानूनी उम्र से पहले
मववामहत हो गए र्े। 2030 तक सतत मवकास लक्ष्ों (SDGs) की प्रान्वप्त के मलए बाल मववाह की समस्या को समाप्त
करना बहुत महत्वपूर्थ और अपररहायथ आवश्यकता है।