You are on page 1of 1

वास्तु शा

वास्तु शा

‐ 

का उ ेश्य मनु◌ुष्य की सुख समृि

है। हर वास्तु चाहे वह घर हो

अथवा दुकान अथवा फै क्टर्ी अथवा कायार्लय, पर्त्येक संरचना के िनमार्ण म वास्तु
शा

के िनयम का पालन िकया जाना आवश्यक है। यिद कोई भी संरचना वास्तु

सम्मत नह ह तो यह अनेक पर्कार की आिथक, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं, दुःख, 
वैवािहक जीवन म किठनाई, पािरवािरक िववाद आिद को जन्म देता है। वास्तु
शा

म पर्कृ ित के िनयम और िस ांत के अनुसार िकसी भवन का िनमार्ण कहां

होना चािहए या िकस िदशा म क्या बनना चािहये और क्या नह बनना चािहये, 
इसका मागर्दशर्न होता है। क्या करने से भवन के स्वामी के जीवन म सुख-शांित व
समृि

आए इसकी

ाख्या भी वास्तु के िस ांत बखूबी करते ह। वास्तु िस ांत के

आधार पर ऐसा भवन िनमार्ण िकया जा सकता है जो सवर् पर्कार से अनुकूल होने के
साथ-साथ पर्कृ ित से भरपूर लाभ कराये। वास्तु आधािरत िनमार्ण सुख समृि
कारक है। 
‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐‐ 
उ म गावडे 
9901287974 (Whats app) 

का