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ताराबल चब pawan2303@gmail.

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पू. फा गु

उ. फा गु

शतिभषा
मृगिशरा

अनुराधा

पू. षाढा

उ. षाढा
न ऽ

वशाखा

पू. भाि

उ. भाि
नी

कृ ितका

आ े षा
रो हणी

पुनवसु

धिन ा
ःवाती
भरणी

ये ा

ौवण

रे वती
आिा

िचऽा
हःत
पुंय

मघा

मूल

ज म अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व

कम मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े

आधान मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये

भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल
संप कर

पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ

पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा

कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा
वप कर

उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर

उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा

रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा
े य

हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित

ौव धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा रो ह मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित हःत िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा

मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव
ू यर

िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह

धिन शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव मृग आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह िचऽा ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत

आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन
साधक

ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग

शत पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन आिा पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग ःवा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा

पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत

वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा
वध

पू.भा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पुन पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा वशा अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा

पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा

अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन
िमऽ

उ.भा रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा पुंय आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन अनु ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा

आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा
अितमैऽ

ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय

रे व मूल पू.षा उ.षा ौव धिन शत पू.भा उ.भा आ े अ भर कृ ित रो ह मृग आिा पुन पुंय ये मघा पू.फा उ.फा हःत िचऽा ःवा वशा अनु