अष्टक वगग एवं गोचय

साधायणतमा जन्भकारीन चॊद्रभा से ग्रहों की गोचय स्थथतत
दे खकय पलरत की विधध है जैसे गोचयगत शतन जफ चॊद्रभा से
तीसये , छठे एिॊ ग्मायहिें थथान ऩय होंगे तो शतन जातक को
शुबपर दें गे ऩयॊ तु प्रश्न मह उठता है कक शतन एक यालश भें
अढाई िर्ष यहते हैं तो क्मा ऩूये अढाई िर्ष शुबपर दें गेक् साथ
ही मदद िह बाि स्जसभें िह यालश स्थथत है फरहीन है तो बी
बाि सॊफॊधी परों की गण
ु ित्ता िही होगी जैसी तफ कक स्जस
बाि से शतन गोचय कय यहे हैं , फरी है क् अथिा इस प्रकाय
कहें कक मदद सॊफॊधधत बाि भें शुब बफन्दओ
ु ॊ की सॊख्मा कुछ
बी हो फीस मा चारीसक् तो क्मा पर की शुबता िही होगीक् इन्हीॊ कायणों के कायण जो साभान्म
रूऩ से गोचयपर ऩॊचाॊग आदद भें ददमा यहता है , भहान ् विद्िानों के भत के अनुसाय उसको गौण ही
सभझा जामेेे। सक्ष्
ू भ विचाय के लरए अन्म विधधमों भें अष्टक िगष विधध सफसे श्रेष्ठ है । इस रेख भें
मह फताने का प्र मत्न ककमा जामेगा कक गोचयपर की न्मूनाधधक गणना ककस प्रकाय से की जामेक्
ऩहरे चचाष कक जा चुकी है कक सात ग्रह ि आठिाॉ रग्न , इन सबी द्िाया शुब- अशुब बफन्द ु दे ने की
प्रणारी है । मदद सातों ग्रह ि रग्न सबी एक- एक शुब बफन्द ु ककसी बाि को प्रदान कयते हैं तो कुर
लभराकय अधधकतभ आठ शुब बफन्द ु ककसी बाि को प्राप्त हो सकते हैं अथाषत ् कोई अशुब बफन्द ु
(अशुब बफन्द ु को कबी- कबी ये खा से बी दशाषते हैं ) नहीॊ अत : विचायणीम बाि सॊफॊधी अधधकतभ
शुबपर प्राप्त होगा। मदद सात शुब बफन्द ु हैं तो शुबपर अधधकतभ आठ का सातिाॊ बाग होगा।
इसी प्रकाय क्रभ से अनुऩात के अनुसाय शुबता को एक पर प्रा çप्त के थकेर ऩय नाऩ सकते हैं ि
ककतना प्राप्त होगा इसकी गणना कय सकते हैं।
एक अन्म विधध पलरत की है कक जन्भकारीन चॊद्रभा मा रग्न से गोचय का ग्रह उऩचम थथान भें
(3, 6, 10, 11िे) हो अथिा लभत्र ग्रह हो अथिा थियालश भें हो, उच्च का हो एिॊ उसभें चाय से
अधधक शुब ये खामें हों तो शुबपर भें औय बी अधधकता आती है । इसके विऩयीत मदद गोचय का
विचायाधीन ग्रह चॊद्रभा से मा जन्भकारीन रग्न से उऩचम थथान (3, 6, 10, 11िें को छोडकय
ो़ सबी
अन्म आठ थथान ) भें हो तो उस यालश भें शुब बफन्दओ
ु ॊ की अधधकता बी हो तो बी अशुब पर ही
लभरता है । मदद उऩचम थथान भें होकय ग्रह शत्रु ऺेत्री , नीच का अथिा अथतॊगत होिे ि शुब बफन्द ु
बी कभ हों तो अशुब पर की प्रफरता यहे गी। मह ग्रहों का गोचय हुआ स्जसका विचाय जन्भकारीन
चॊद्रभा अथिा जन्भकारीन रग्न से कयना होता है ।
अफ चॊ द्रभा के थिमॊ के गोचय का विचाय कयें । चॊद्रभा मदद उऩचम थथान भें हों (अऩनी जन्भकारीन
स्थथतत से ) शुब ये खा अधधक बी ऩयॊ तु चॊद्रभा थिमॊ कभजोय हो (महाॊ गोचय भें ) तो पर अशुब ही
हो। रेककन इस विधध भें गोचय ग्रह का विचाय ग्रह के यालश भें विचयण के आधाय ऩय कयते हैं ।
प्रथभ गोचय विधध भें जो प्रश्न उठा था कक मदद शतन जैसे ग्रह का गोचय अध्ममन कयना हो जो
एक यालश भें अढाई िर्ष यहते हैं तो क्मा इस ग्रह के पर शुब मा अशुब अढाई िर्ष यहें गेक् मह प्रश्न
इस विधध भें उबयकय साभने आता है । अफ अष्टक िगष आधाय ऩय तीसयी विधध की चचाष कयते हैं।
प्रत्मेक यालश 300 की होती है । प्रत्मेक यालश को आठ बागों भें फाॊटते हैं। प्रत्मेक बाग को
"कक्ष्मा" कहते हैं। जातक-ऩारयजात भें ददए गए इस लसद्धात के अनुसाय प्रत्मेक कक्ष्मा का थिाभी ग्रह
होता है ।

कपय क्रभ भें फह ृ थऩतत. शतन ने महाॊ शुब बफन्द ु प्रदान ककमा है अत : इस सभम फह ृ थऩतत के गोचय को शुबपर प्रदान कयने भें नौकय. जऩ आदद कय फाधाओॊ को ऩाय कय जामें। अन्म ग्रहों का बी गोचय का विचाय इसी विधध से कयते हैं कौन ग्रह ककस विर्म का कायक है मा ककस बाि का थिाभी है उस बाि सॊफॊधी विर्मों के फाये भें पलरत कयने हे तु ग्रह का चमन कयते हैं। विचायणीम ग्रह के ऩथ भें जो ग्रह शुब बफन्द ु प्रदान कयते हैं ि शुब बफन्द ु प्रदान कयने िारे ग्रह से सॊफॊधधत विर्म का (अथाषत ् शुब बफन्द ु दे ने िारे ग्रह ककस सॊफॊध अथिा िथतु को दशाषते हैं ) जातक को राब दे ने भें सहामक होंगे। जैसे उऩयोक्त उदाहयण भें फह ृ थऩतत कॊु ब भें गोचय कयते सभम शतन की कक्ष्मा से गज ु य यहे हैं .कयते ऩुन : गतत ऩ़ड 0 रेगी। इसको मूॊ सभझें कक कोई िाहन साभान्म गतत से स़डक ऩय जा यहा है .फाॊमे से तनकर जामें अथाषत ् ग्रह का उऩचाय दान . रोहे की िथतुएॊ आदद जातक को राब दें गी। कु छ विद्िान यालश के थथान ऩय बाि के आठ बाग कय कक्ष्मा थथावऩत कयने की फात कहते हैं। मदद बाि का आधाय रे तो बाि आयॊ ब सॊधध से बाि भध्म तक चाय बाग . फुध. ि आठ कोष्ठक ऊऩय से नीचे। प्रत्मेक कोष्ठक फाॊमें से दाॊमें एक यालश का द्मोतक है ि ऊऩय से नीचे िारा एक ग्रह का। आठिाॉ कोष्ठक रग्न का है । सही भामने भें मह फह ृ थऩतत का अष्टक िगष है फस ग्रह यखने का क्रभ फदर गमा है । महाॊ ऩय ग्रहों का क्रभ (कक्ष्मा) ग्रहों के िाथतविक ऩरयभ्रभण के आधाय ऩय यखा गमा है । ऩथ् ृ िी से सफसे दयू ि उसके फाद ऩथ् ृ िी से दयू ी के क्रभ भें । जैसा कक ऊऩय चचाष कय चुके हैं कक एक यालश को आठ बाग भेेे फाॊट रेते हैं तो प्रत्मेक ग्रह का बाग30/8 अथाषत ् 3045" हुआ अथाषत ् भेर् भें शतन की कक्ष्मा . हभ धैमष से प्रतीऺा कयते हैं अथिा हभ गततयोध के दाॊमें.चाकय. फुया िक्त तनकर जामेगा मा कपय दामें.जैसे सफसे फाहयी कक्ष्मा का थिाभी ग्रह शतन. चॊद्रभा ि रग्न .आदद। 0 0 0 अफ मह दे खना है कक फह ृ थऩतत का गोचयपर जातक को कैसा होगाक् जून 2009 भें फह ृ थऩतत कॊु ब यालश की ऩहरी कक्ष्मा भें गोच य कय यहे हैं। महाॉ ऩय यालश थिाभी शतन प्रदत्त एक शुब बफन्द ु है अत: फह ृ थऩतत का गोचय उऩमुक् ष त जातक को शुबपर दे गा। इसी प्रकाय फह ृ थऩतत की कक्ष्मा भें कॊु ब यालश को शुब बफन्द ु प्राप्त है अत : फह ृ थऩतत के गोचय की शुबता का क्रभ फह ृ थऩतत को 3045" से 7030" कॊु ब भें गोचय कयते सभम जायी यहे गा। 7030" से 11015" तक भॊगर की कक्ष्मा है िहाॊ बी भॊगर द्िाया प्रदत्त एक शुब बफन्द ु है अत : कॊु ब भें 10030" अॊश तक गोचयगत फह ृ थऩतत शुबपर दें गे। कपय चतुथष कक्ष्मा भें सूमष द्िाया कोई शुब बफन्द ु कॊु ब यालश को प्रदान नहीॊ ककमा गमा है अ त: शुबता का क्रभ अचानक रूक जाएगा ि गतत विऩयीत होती सी नजय आएगी ऩय इसके साथ ऩाॊचिीॊ कक्ष्मा भें कपय शुक्र द्िाया प्रदत्त शुब बफन्द ु है उसके उऩयान्त फध ु द्िाया शुब बफन्द ु है अत : फह ृ थऩतत के 11 15" से 14 तक गोचय कयते सभम शुब बफन्द ु हैं अत 0 0 : फह ृ थऩतत के 11 15" से 0 14 तक गोचय कयते सभम शुबपर की गतत धीभी होगी जो 0 14 ऩाय कयते. साभने अियोध आने ऩय थऩीड कभ कयनी प़डती है मा रूकना बी प़डता है ि उस अियोध को ऩाय कय ऩुन : थऩीड ऩ़ड रेते हैं । महाॊ मह फात बी ध्मान दे ने की है कक कुछ प्रतीऺा कयने से मा तो गततयोध हट जाता है .फाॊमें से ध्मान ि सभझदायी से तनकर जाते हैं। िाथति भें मही स्थथतत ग्रह के साथ है मा तो हभ सहनशीरता से धैमष यखें . यालश भें 0-3045" तक हुई। दस ू यी कक्ष्मा फह ृ थऩतत की है जो 3 45" से 7 3 " तक होगी आदद.इस प्रकाय आठ कक्ष्माओॊ के आठ थिाभी ग्रह हुए। मदद दे खें तो इनका क्रभ ग्रहों के साभान्म ब-ू भण्डर भें ऩरयक्रभा ऩथ ऩय आधारयत है । ऩथ् ृ िी से सफसे दयू शतन कपय फह ृ थऩतत आदद- आदद हैं । ऩथ् ृ िी को कक्ष्मा ऩद्धतत भें जातक से दशाषमा है क्मोंकक ऩथ् ृ िी ऩय प़डने िारे प्रबाि का अध्ममन ककमा जा यहा है । इस गोचय पलरत की विधध का नाभ प्रथतायाष्टक विधध है । आगे फढने से ऩहरे प्रथतायाष्टक िगष फनाने की विधध की चचाष कयते हैं। यालश ि ग्रहों का एक सॊ मुक्त चाटष फनाते हैं। फाॊमें से दाॊमें फायह कोष्टक फनाते हैं . सूम. भॊगर.ष शुक्र. तनम्न जातत /श्रेणी के रोग .

गोचय भें चरने िारे ग्रह के कायकत्ि के अनुसाय होगा। दस ू ये मह पर ग्रह के जीि भूर. केिर भात्र जन्भकुण्डरी भें ग्रहों की स्थथतत के आधाय ऩय ही बफन्द ु तनधाषयण ककमा जाता है । अधधक बफन्द ु बाि को फढाते हैं तो कभ बफन्द ु बाि की शस्क्त कभ कयते हैं। मानाधीशे रगAगे वाहनस्थे रगAााधीशे तद्र ग्रहोंऩेतयाश्मो त्रिशत्संख्मात्रफन्दव: सिमश्चे”ााााता याजश्रीननदाना नये शा। जफ रगAेेश चतथ ु ष भें हो औय चतथ ु ेश रगA भॊ हो औय दोनों भें 33 से अधधक बफन्द ु हो तो व्मस्क्त याजा तल् ु म. कॊु ब से सॊफॊधधत होगा। कॊु ब ऩूणत ष ा का प्रतीक है ि शतन . सॊसाय से अरग विर्मों के प्रतीक बी हैं। अत : आध्मास्त्भक विर्मों भें . फह ृ थऩतत धभष . सत्सॊग भें सभम रगेगा जो ऩण ू त ष ा दे ने िारा होगा। फह ृ थऩतत जीि के कायक हॊ ेै ि शतन थथा तमत्ि के अत : अचर सॊऩस्त्त के सौन्दमषकयण का राबप्रद अिसय होगा। इस प्रकाय तायतम्म से पलरत कयें । भहवर्ष ऩायाशय ने पलरत ज्मोततर् के तनमभों को प्रततऩाददत कयते हुए अष्टक िगष नाभ की विधध का बी िणषन ककमा है । इस विधध भें कल्ऩनाओॊ का कहीॊ कोई थथान नहीॊ है . 8िें आदद) से गुजयें तो शुबपर की कभी होगी ऩयॊ तु मदद शुब थथान जै से ऩॊचभ-निभ से गुजये तो पर की िवृ द्ध होगी। इसके साथ. धन भान ऩाता है । मत्ऩ†चववंशनतभुखाçस्िदशान्तसंख्मा फन्धस्ु स्थता नवभयाशशकत्रफन्दवp मद्मष्टकेन सह ववंशनत वत्सयाणा भन्ते ऩये शयदद वा नयवाहनाढ्म मदद चौथे बाि से निें बाि भें 25 से 30 बफन्द ु हो तो व्मस्क्त ऩारकी भे ेॊसिायी कयता है तथा कुफेय के सभान धनी होता है । ऎसा जीिन के 28 िर् ्ेाü ऩूणष कयने के फाद होता है । दे वाााचामै वाहनस्चे स्वतुगे चत्वारयशत्रफनन्दस ु ंख्मा सभेते भेषागाये रगAगे वासेयशे जातो याजा रऺसंख्मामवनाथ: जफ गुरू चौथे बाि भें उच्चा के हो तथा 40 बफन्द हो तथा सूमष रगA भें हो तो व्मस्क्त याजा होता है तथा फहुत फडी सेना धायण कयता है । . शतन. कॊु ब यालश से गोचय कय यहे हैं ि मह शतन की कक्ष्मा है अत: पर फह ृ थऩतत . तऩ. धनी एिॊ औयों ऩय याज कयने िारा होता है । होयाफन्धुप्राçप्तबाव िमेष्ऻु त्रिशन्भानाधधक्मत्रफन्दऩ ु गेष्ऻु जातस्तेज : श्री फहुत्वं च याज्मं चत्वारयशव्दत्सयादध्र् ू तभेनत मदद रगA चतुथष औय एकादश बाि प्रत्मेक भें 30 से अधधक बफन्दे ू ु हो ता व्मस्क्त 40 िर्ष भें उन्नतत कयता है औय याज्म.साथ उस बाि से बी शुब पर सॊफॊधधत होगा जो कक शुब बफन्द ु दे ने िारे ग्रह से (भर ू जन्भऩबत्रका भें ) गोचय िारे ग्रह का फनता है । जैसे उदाहयण कुण्डरी भें फह ृ थऩतत . ि बाि-भध्म से बाि अॊत तक चाय बाग कय विचाय कयना होता है ऩयॊ तु ितषभान भें व्मािहारयक रूऩ से यालश को आधाय भानकय गणना कयना ज्मादा उऩमक् ु त भाना जाता है । ऎसी बी स्थथतत हो सकती हैं कक जफ गोचय भें कई ग्रह एक ही कक्ष्मा भें आ जाएॊ ि उस कक्ष्मा को शुब बफन्द ु प्राप्त हो। इस स्थथतत भें शुब पर उतना ही उत्तभ होगा स्जतने ग्रह ज्मादा होंगे। अष्टक िगष भें जफ ग्रह गोचयिश ऎसी कक्ष्मा से गुजय यहा है जहाॊ शुब बफन्द ु हैं तो शुबपर . आध्मात्भ.धातु के अनुसाय होगा। मह पर रग्न से (भर ू कुण्डरी से) धगनकय उस बाि के विर्मों से सॊफॊधधत होगा जहाॊ से ग्रह गुजय यहा है । आगे गोचय िारे ग्र ह के शुबपर की गुणित्ता इस ऩय बी आधारयत होगी कक विचायणीम गोचयगत ग्रह कुण्डरी की भूर स्थथतत से कक्ष्मा िारे ग्रह से ककस बाि भें गुजय यहा है जैसे मदद कक्ष्मा ग्रह की भूर स्थथतत से अशुब थथान (6.

ग्मायहिें से कभ फायहिें घय भें औय फायहिें से अधधक तॊत्र भें हों तो िह जातक बोगिान औय अथषिान होता है । परदीवऩका भें अष्टक िगष को रेकय एक फहुत सुॊदय श्रोक लभरता है - शाधधकपरा मे स्मू याशमस्ते शुबप्रदा:। ऩ†चववंशात्ऩयं भध्मं कष्टं तस्भादध: परभH ् स्जन यालशमों भें 30 से अधधक शुब बफन्द ु हों तो शुबपर लभरता है । स्जनभें 25 से 30 बफॊद ु हो तो भध्मभ पर लभरता है । स्जन यालशमों भें 25 से कभ बफन्द ु हो तो अशुब पर लभरता है । भॊत्रेश्िय ने सॊबित: इस श्रोक भें रग्नाष्टक के बफन्दओ ु ॊ को नहीॊ जोडाो़ है । अगय ककसी की जन्भ ऩबत्रका भें रग्नाष्टक के बफन्द ु बी जडे ु ो़ हों तो मह सॊख्मा क्रभश: 35 औय 30 कय रेनी चादहए। भूत्र्मादद व्ममबावान्तं द्दष््वा बावपरानन वै। अधधके शोबनं ववद्माद्वीने दोषं ववननददग शेतH ् एक अन्म श्रोक भें उन्होंने लरखा है कक स्जस बाि भें स्जतने शुब बफन्द ु हो उस बाि का उतना ही सुॊदय पर लभरेगा। मदद रग्न भें अधधक बफन्द ु हो तो सॊद ु यता औय थिाथथ्म. चतुथष औय एकादश तीनों भें 30 से अधधक बफन्द ु हो तो ऎसा जातक फहुत तेजथिी होता है औय 40 िर्ष के फाद याज्माधधकायी होता है । मदद चतथ ु ष औय निभ बाि भें 30 मा अधधक बफन्द ु हो तो ऎसा जातक धनी हो जाता है औय 28 िर्ष की उम्र के फाद ऩारकी लभरती है । ऩारकी का आधुतनक सभीकयण काय से ककमा जा सकता है । रग्न भें उच्चा का सूमष औय चतुथष भें उच्चा का फह ृ थऩतत हो औय चतुथष भें मदद 40 शुब बफन्द ु प़ड जाए तो उसकी सेना कभ से कभ एक राख व्मस्क्तमों की होती है । आधुतनक कार भें इस मोग का सभीकयण ककसी भुख्मभॊत्री से ककमा जा सकता है । ऎसे ही एक मोग लरखा है स्जसभें रग्न भें 40 बफन्द ु हो औय शुक्र औय भॊगर उच्चा यालश भें हो औय कॊु ब भें शतन हो तो ऎसा याजा चक्रिती याजा होता है । मदद कॊु डरी भें याजमोग हो तो रग्न भें स्जतने शुब बफन्द ु हो उतने िर्ष फाद उसका बाग्मोदम होता है । इस मोग का एक अथष मह बी होता है कक प्राम: 45 से अधधक बफन्द ु ककसी बाि भें होते नहीॊ है अत: स्जसको बी याजमोग लभरना है 45 से ऩहरे ही लभर जाना चादहए। ऎसा आभतौय से होता नहीॊ है । बायत के रग्न भें 44 बफन्द ु है तो उसकी अखॊडता . दशभ औय एकादश बाि भें अधधक शुब बफन्द ु हो तो व्मस्क्तगत जीिन आभतौय से सपर भाना जाता है । मदद ककसी बाि भें कोई उच्च यालश का ग्रह है . चतथ ु ष बाि भें विशेर् बफन्द ु हो तो बूलभ-सॊऩस्त्त का राब लभरता है । ऎसा सबी बािों के लरए कहा जा सकता है । मदद चतुथ. मदद द्वितीम बाि भें शुब बफन्द ु हो तो धनाजषन. ऩयॊ तु अष्टक िगष के कभ बफन्द ु हॊ ेै तो उच्चा यालश भें स्थथत िह ग्रह ऩूणष पर नहीॊ दे ऩाएगा। इसके विऩयीत मदद कोई ग्रह नीच का होकय फैठा है .भध्मात्पाधधकं राबे राबात ् ऺीणतये व्ममे मस्म व्ममाधधके रग Aाे बोगवानमगवान ् बवेत मदद द्िाया घय से अधधक ग्माहयिें घय भें हो .ष निभ. ऩयॊ तु उस बाि भें शुब बफन्दओ ु ॊ की सॊख्मा फहुत अधधक है तो िह ग्रह बी अच्छा पर दे जाएगा। जातक ऩारयजात भें एक मोग लभरता है स्जसके अनस ु ाय दशभ से अधधक बफन्द ु एकादश भें हो औय उससे कभ बफन्द ु द्िादश बाि भें हो एिॊ इससे अधधक बफन्द ु रग्न भें हो तो मह उच्चाकोदट का याजमोग है । हभने कई भहान रोगों की जन्भऩबत्रकाओॊ भें इस मोग को सत्म ऩामा है । मदद रग्न औय चतुथष भें फहुत अधधक बफन्द ु हो तथा रग्नेश औय चतुथेश यालश ऩरयितषन कयें तो मह प्रफर याजमोग होता है । मदद रग्न.

वप्रम थथान मा जन्भ थथान से दयू थथानान्तयण तथा कामो भें व्मथष ऩरयश्रभ औय धन की हातन होती है । इसी प्रकाय शतन से रग्नऩमषन्त ये खाओॊ को जोडने ो़ ऩय स्जतनी सॊख्मा आए. गुणनपर भें 27 का बाग दे ने ऩय शेर् तुल्म सॊख्मा. जो शतन प्रदत्त अतनष्टों से सॊफॊधधत होगा। इस दग ु षभ सभम भें थिाथथ्म की हातन एिॊ धन की हातन की विशेर् सॊबािना यहती है । इसी तयह 32+9 कुर = 41िें िर्ष भें बी ऎसी ही विर्भ ऩरयस्थथततमों से रू-फ-रू होना प़डता है । इस विधध से मह प्रमोग ककसी बी जन्भऩबत्र का ऩय ककमा जा सकता है । इसके अततरयक्त लबन्नाष्टक िगष से ये खा तनस्श्चत कय एिॊ बत्रकोण शोधन ि एकाधधऩत्म शोधन के उऩयाॊत यालश गुणन एिॊ ग्रह गुणनपर का मोग कयने ऩय मोग वऩण्ड प्रत्मेक ग्रह का अरग. सॊफॊधों भें कटुता .बा. अस्श्िनी नऺत्र से धगनने ऩय जो नऺत्र आता है उस नऺत्र ऩय ककसी बी ऩाऩ ग्रह का भ्रभण होता है तो कष्टों की प्राçप्त होती है औय धन की हातन होेेती है । सूमष लबन्नाष्टक िगष भें सूमष से निभ बाि की ये खा सॊख्मा को उऩयोक्त विधध से सूमष मोग वऩण्ड से गुणा कय. रग्न से अष्टभ बाि भें प्राप्त ये खाओॊ की सॊख्मा को . विदे श मात्रा. उस बाि तक की सबी ये खाओॊ को जोडो़ रेना चादहए। जोडने ो़ ऩय स्जतनी सॊख्मा आिे.रग्न से शतन ऩमषन्त ये खाएॉ धगनी जाएॊ तो उऩमुक् ष त कुण्डरी के अनुसाय 6+1+3+6+3+4+4+2+1+2 कुर = 32 ये खाएॉ हुई। इस जातक को जन्भ से 32िें िर्ष भें कदठन सभथमाओॊ ि थिाथथ्म हातन के दौय से गुजयना होगा। इसके अततरयक्त शतन से रग्न ऩमषन्त 4+5 कुर = 9 अथाषत ् जन्भ से 9िें िर्ष भें बी कदठन सभथमाओॊ का एक दौय आएगा. लभत्रों ि रयश्तेदायों से ऩयथऩय फैय .सुयक्षऺत है । अलभताब फच्चान के छठे बाि भें 42 शुब बफन्द ु है इसलरए भहान कजाष हुआ औय भहान बुगतान हुआ। चारी चेऩलरन के जो कक भहान कॉभेडी कपल्भकाय था. अस्श्िनी नऺत्र से उतनी सॊख्मा िारे नऺत्र ऩय तथा इस नऺत्र से 5िें तथा 9िें नऺत्र ऩय जफ शतन गोचयिश आते हैं तो जातक को कष्टों को प्रास्प्त होती है । जैसे . नऺत्र ऩय तथा उ . जन्भ से उतनी सॊख्मा के िर्ष भें बी उऩयोक्त अशब ु परों की प्रास्प्त होती है । रग्न से शतन ऩमषन्त औय शतन से रग्नऩमषन्त कुर ये खाओॊ की सॊख्मा तुल्म िर्ो भें बी उऩयोक्त कष्टों के लभरने की ऩूणष सॊबािना यहती है जैसे .बा. शेर् तुल्म सॊख्मा अस्श्िनी नऺत्र से धगनने ऩय जो नऺत्र आता है . ो़ अन्मान्म सभथमाएॉ .बा.शतन का मोग वऩण्ड 67 रग्न से अष्टभ भें ये खा सॊख्मा 2 अत: 6732 =134/27 = शेर् 26 अस्श्िनी से धगनने ऩय उ . उस नऺत्र ऩय जफ शतन आते हैं तो वऩता को अिश्म कष्ट होता है अथिा इस नऺत्र से ऩाॉचिें ि निभ नऺत्र ऩय जफ शतन आते हैं तो जातक के वऩता मा चाचा आदद को अिश्म कष्ट लभरते हैं। मह तछद्र . नऺत्र आता है । तनमभानुसाय उ . जन्भ से उतनी ही सॊख्मा िारे िर्ष भें जातक को थिाथथ्म भें ऩीडा. शतन के मोग वऩण्ड से गुणा कयने ऩय .अरग प्राप्त होता है । शतन के लबन्नाष्टकिगष भें .े तफ इस जातक को विशेर् कष्टों का साभना कयना होगा। एक अन्म विधध के अनुसाय रग्न से शतनऩमषन्त ये खा सॊख्माओॊ को 7 से गुणा कयने ऩय. व्मस्क्त भहान होने रगता है । उऩयोक्त सभथत उदाहयण इततहास प्रलसद्ध व्मस्क्तमों के है । स्जस प्रकाय र्ोडश िगो भें कोई एक ग्रह बी चॊदन िन मा ऩूणष चन्द्र की सॊऻा भें आकय व्मस्क्त अत्मॊत प्रलसद्ध हो जाता है उसी बाॊतत अष्टक िगष प्रणारी भें बी ककसी एक बाि भें बी 35 के आसऩास शुब बफन्द ु हो तो व्मस्क्त की ख्मातत अॊतयाषष््ीम थतय ऩय होने रगती है । अष्टक िगष ऩद्घतत से पलरत कथन कयते सभम जन्भऩबत्रका भें शतन जहाॉ स्थथत हों िहाॉ से अष्टभ अथाषत ् शतन एिॊ अष्टभ बाि से आमु का विचाय ककमा जाता है । अष्टक िगष से पर कथन कयने हे तु शतन का लबन्नाष्टक िगष चक्र रग्न यालश के आधाय ऩय लरखना चादहए। तफ रग्न से शतन स्जस बाि भें हों. गुणनपर भें 27 का बाग दे ने ऩय. के तत ृ ीम बाि भें 36 बफन्द ु यहे है । इसी बाॊतत हे नयी रूसो नाभक कराकाय के तीसये बाि भें 35 शुब बफन्द ु थे। नीर आभषथ्ाॊग के िर् ृ ब रग्न भें 37 शुब बफन्द ु है । चाल्र्स डमूक स्जनका जन्भ 3 अक्टूफय 1935 को हुआ के रग्न भें 35 अष्टक िगष बफन्द ु है । जॉजष भूय नाभ के िैऻातनक के तत ृ ीम बाि भें जो कक प्रततबा का बाि है 34 शुब बफन्द ु थे। प्रलसद्ध रेखक यसैर के िर् ृ ब रग्न भें 37 बफन्द ु हैं। प्रलसद्ध रेखक योभा योराॊ के रग्न भें 39 बफन्द ु औय राब बाि भें 37 बफन्द ु थे। जॉन आईजन हॉिय रेखक के दशभ बाि भें 35 शुब बफन्द ु हैं। इन उदाहयणों से मह फात सभझ भें आती है जैसे ही ककसी बाि भें 35 बफन्द ु के आसऩास शुब हुए. गुणनपर भें 27 का बाग दे ने ऩय जो शेर् फचे . से ऩाॉचिाॊ कृस्त्तका एिॊ निाॉ ऩुनिषसु नऺत्र ऩय जफ शतन गोचय कयें ग.

गुणनपर भें 27 का बाग दे ने ऩय. अस्श्िनी से धगनने ऩय जो नऺत्र आता है उस नऺत्र ऩय तथा उस नऺत्र से 5िें ि 9िें नऺत्र ऩय जफ शतन आते हैं तो कुटुम्फ मा ऩरयिाय ऩय कष्ट आते हैं। ऎसी सभथमाएॉ आती हैं स्जनसे साया ऩरयिाय एक साथ ऩये शान हो जाता है । गुरू लबन्नाष्टक िगष भें गुरू से ऩाॉचिें बाि भें स्जतनी ये खा हों . गोचय भें आएॊ औय गुरू मा शुक्र से दृष्ट नहीॊ हों तो वऩता को अिश्म कष्ट लभरते हैं। चॊद्र से निभ भें जफ शतन गोचय कयें औय ऩाऩ ग्रह से दृष्ट हों तो औय दशा अनुकूर नहीॊ हो तो वऩता को अरयष्ट लभरते हैं। भॊगर लबन्नाष्टक िगष चक्र भें भॊगर से तीसयी यालश भें प्राप्त ये खा सॊख्मा को भॊगर के मोग वऩण्ड से गुणा कय.दशा की स्थथतत होती है । जन्भऩबत्रका भें सूमष से चौथे शतन . अस्श्िनी से धगनने ऩय जो नऺत्र आिे . शुक्र के मोग वऩण्ड से गुणा कयने ऩय. शेर् तुल्म सॊख्मा अस्श्िनी से धगनने ऩय जो नऺत्र आिे उस ऩय तथा उससे 5िें मा 9िें नऺत्र ऩय जफ शतन गोचय कयते हैं तफ ऩत्नी को कष्ट की प्रा çप्त होती है । इस प्रकाय अष्टक िगष भें शतन के गोचय के आधाय ऩय जातक को तथा जातक के सॊफॊधधमों को प्राप्त होने िारे शुबाशुब ऩरयणाभों का ऻान आसानी से ककमा जा सकता है । . शेर् तुल्म सॊख्मा ऩय अस्श्िनी से जो नऺत्र आता है उस नऺत्र ऩय अथिा उस नऺत्र से 5िें मा 9िें नऺत्र ऩय जफ शतन गोचय कयते हैं तो ऩुत्र को कष्ट दे ते हैं। शुक्र लबन्नाष्टक िगष भें शुक्र से सप्तभ थथान भें प्राप्त ये खा सॊख्मा को . उस नऺत्र ऩय तथा उस नऺत्र से 5िें मा 9िें नऺत्र ऩय जफ शतन गोचय कयते हैं तो बाइमों को ऩीडाो़ मा कष्ट होता है । फुध लबन्नाष्टक िगष भें . गुणनपर भें 27 का बाग दे ने से शेर् तुल्म सॊख्मा. फुध के मोग वऩण्ड से गुणाकाय. शेर् तुल्म सॊख्मा . फुध से चतथ ु ष बाि की ये खा सॊख्मा को . उस सॊख्मा को गुरू के मोग वऩण्ड से गुणा कयने ऩय गुणनपर भें 27 का बाग दे ने ऩय . गुणनपर भें 27 का बाग दे ने ऩय .