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फहुत फाय ऎसा हुआ है कि भै किसी व्मक्तत िे ननभॊत्रण ऩय उसिे घय वास्तु सम्फन्धी सराह दे ने

िे लरए गमा तो वहाॊ घय भें ववयोध बी सहना प ़्ााडा। च्चकपय किस िो रे आमे होि़् अफ िौनसा
िभया तडवाना
ु ु़ है ि़् ” तत्क्ऺण ही भझ
ु े माद आ जाता कि जरूय इस व्मक्तत ने िई वास्तु शा çस्त्रमों
िो आजभामा हैं औय व्माऩि तोड-
ु़ पोडु़ िे फाद बी िोई ऩरयणाभ नहीॊ आमा है । एि अन्म अवसय
ऩय गह
ृ स्वालभ नी एिदभ भ़डि प ़्ााडीॊ व अन्दय आरे- ददवारों भें यखे हुमे तीन टाॊग िे भेढ़ि औय
एिाध अन्म मॊत्रों िो रािय चौि भें जोय से दे भाया। द ु :ख औय ववऺोब िे साथ भैंने हभेशा ही
ननमनत िो स्वीिाय किमा है औय ऩरामन न ियने िे दृढ़ सॊिल्ऩ िे साथ ऩरयक्स्थनतमों िो जीत
रेने िा नन णणम किमा है । भैं मदद असाधायण िौशर िा प्रदशणन नहीॊ िरूॊ तथा उस घय भें द ु :ख,
ननयाशा औय अववश्वास िी बावना िो ज़ड से नहीॊ ननिार पेंिॊ तथा बफना मह सफ किमे वाऩस आ
जाऊॉ तो ननक्श्चत ही शास्त्र िी अवऻा होगी तथा शास्त्रों िे प्रनत अववश्वास िी बावना औय फढ़
जामेगी।
मदद भैं मह अववश्वास ददरा ऩाऊॉ कि भिान भें तोड- पोडु़ ियामे बफना बी िुछ अच्छा किमा जा
सिता है तो शामद भदद लभरें। भैंने ऎसे ही एि भिान भें क्जस िा आिाय 40 & 60 पुट था, भें
उत्क्तय ददशा भें खर
ु ने वारे एि द्वाय िा प्रस्ताव किमा। ऩहरे वारे द्वाय िी चचनाई भें औय नमा
द्वाय फनाने भें दो हजाय िा खचाण आ यहा था। रोहे िा द्वाय मॊ िी मॊ एि स्थान से हटािय दसये
स्थान ऩय रगामा जाना था। भैंने फहुत भ़डिी हुई भाताजी िो अऩनी जेफ से ननिारिय दो हजाय
रूऩमे हाथ भें यख ददमे क्जससे कि द्वाया ननभाणण हो जामे। वे िुछ सभझ ऩातीॊ इससे ऩवण ही भैं
आऻा रेिय वाऩस आ गमा। ियीफ तीन ददन फाद वे भाताजी अऩने ऩुत्र िे साथ भेये िामाणरम आईं
औय भेये ऩैयों भें वे दो हजाय रूऩमे औय ऊऩय से 151 रूऩमे यख िय रौटा ददमे। भुझसे िहा, च्चतीन
ददन से लसय भें ऩाऩ चढ़ा हुआ था , ब्राrााण िा ऩैसा यखना ऩाऩ है । ऩॊडडत जी भेयी फहु बी घय भें
वावऩस रौट आई है । आगे से आऩसे बफना ऩछे िोई िाभ नहीॊ िरूॊगी। ” ियीफ 6भहीने फाद वह
मुवि भेये ऩास ऩुन : रौटा औय अऩनी नमी नौियी िे प्रथभ वेतन भें से 1100 रूऩमे भुझे बें ट किमे।
उस ऩरयवाय िी प्रसन्नता िा िोई ऩायावाय न था। उस वद्ध
ृ ा भाता ने भुझे अऩने िई रयश्तेदायों से
लभरवामा। स्वमॊ ने सदा 151रूऩमे ददमे औय दसयों से अच्छी यालश बें ट ियवाई। िहीॊ बी भेया
प्रनतवाद िायगय नहीॊ हुआ। भैं अफ ति बायतीम जनभानस िे इस भनोववऻान िो सभझ चि ु ा था
कि उनिे भन ति गहये से ऩैठी हुई आस्था ऩय से अववश्वास औय ननयाशा िे झीने ऩदे िो ध्वस्त
ियने भें भझ
ु े अऩने सभस्त िभणफर , िामण-िौशर औय वाि़् चातम
ु ण िा प्रमोग ियना ही होगा। वह
आस्था जफ ऩन
ु : जागेगी तो चभत्क्िाय िे रूऩ भें ही साभने आमेगी।

एि अन्म अवसय ऩय जफ भुझे किसी घय िे द्वाय ऩय ही घय िे वद्ध
ृ िे नतयस्िाय िा साभना
ियना पडा तो प्रथभ सभस्मा तो मह हुई कि घय भें प्रवेश िैसे किमा जामेि़् मदद भेया एि िदभ
उस घय भें पड गमा तफ तो भै सफ िुछ जीत रॊगा , अगय प्रवेश ही नहीॊ हुआ तो भैं तमा िय
रॊगाि़् तत्क्ऺण, भेये भक्स्तष्ि भें एि ववचाय िौंधा औय भैंने गणेश जी िो माद किमा च्चइस घय िे

से शास्त्राथण िी चन ु ौती लभरी। भैंने उसे स्वीिाय िय लरमा औय थये जा साहफ औय उनिे लभत्र िी उऩक्स्थनत भें शास्त्राथण शरू ु किमा। वह तथाि चथत वास्तश ु ास्त्री जल्दी ही भेयी ऩ़ड भें आ गमे तमोंकि वे िेवर रार किताफ िा सहाया रे यहे थे तथा हजायों वषण ऩयु ाने भमभतभ ़् . ने एि ददन भुझे किसी सम्ऩन्न व्मक्तत िे घय जाने िे लरए औय वास्तु सम्फन्धी सराह दे ने िे लरए िहा। भैंने घय जािय उसिा ववश्रेषण ु़ प्रस्तुत किमा। भेये ददल्री छोडने ु़ से ऩहरे ही उस घय से जो वास्तु शास्त्री ऩहरे से जुडे हुमे थे .द्वाय ऩय गणेश जी नहीॊ हैं औय चकॊ ि गणेश जी औय रक्ष्भी जी िो साथ यहने िा ववधान शास्त्रों भें हैं इसलरए भुझे इस फाफत बी शॊिा है । शामद इसीलरए इस द्वाय ऩय ही क्रोध है औय जहॊ ाा क्रोध है वहॊ ाा वववेि नहीॊ है औय जहाॊ वववेि नहीॊ है वहाॊ श्री नहीॊ है । ” भैं ऺभा भाॊगिय वहा से वाऩस चरा आमा। गरी से फाहय जफ भैं अऩनी िाय स्टाटण िय यहा था तो वह गह ृ स्वाभी नॊगे ऩैय ही बागते आमे औय भेयी िाय िे ड्राईवय सीट वारे फॊद होते हुमे दयवाजे िो िसिय ऩ़ ड लरमा। हठात ़् भझ ु े नीचे उतयना पडा औय उनिे आग्रह िो स्वीिाय िय वाऩस उनिे घय जाना पडा। उन्होंने भझ ु से रक्ष्भी औय गणेश िे साथ यहने िी ऩौयाणणि िथा सन ु ने िी िाभना िी। भैं भन ही भन ब़डा प्रसन्न था औय अगरे 10 लभनट भें ही उन्हें गणेश औय रक्ष्भी जी िे साथ.थये जा जो कि फहुत फडे हस्त ये खा ववशेषऻ बी हैं . क्जसे किसी ध ़्यतण औय अऻानी शास्त्री ने िोई भनगढ़ॊ त ववधान फता ददमा। एि अन्म जगह गह ृ स्वाभी ने भझ ु े फतामा कि वास्तु शास्त्री ने अऩने भिान िी प्रनतददन एि ऩरयक्रभा रगाने िो िहा है । भैंने ऩ छा कि च्चतमा वास्तद ु े वता िा भॊत्र मा उनिी ऩरयक्रभा रगाने िे लरए बी िहा है तमाि़् नहीॊ । ऎसा िुछ नहीॊ िहा। ” ऎसे फहुत साये किस्से भुझे ननत्क्म प्रनतददन दे खने िो लभरते हैं। िबी.साथ भस्तम ऩयु ाण भें वणणणत वास्तु ऩरू ु ष िी ओय रे आमा। ऎसे भौिों ऩय वास्तु शास्त्री िी िेवर वास्तु ववद्मा ही िाभ नहीॊ आती फक्ल्ि वातदे वी िी िृऩा से प्रत्क्मुत्क्ऩन्न भनत बी िाभ आती है । आस्था िाअवरॊफन ु़ लरमे हुमे बोरी-बारी जनता िे साथ िुछ अनाडी तथािचथत शा çस्त्रमों ने फडे ऩैभाने ऩय छर िऩट ु़ किमा हैं। आस्था िे फीज िो ऩुन : ऩल्रववत ियने भें अफ फहुत श्रभ ियना ऩडेगा औय जनता िो ु़ ढ़ोंगी टोटिों िे जार से ननिारने िे लरए बी ब़डा ऩरयश्रभ ियना ऩडेगा। भैं सभझता हॉ ऎसी सभझ यखने वारे हजायों प्रलशक्षऺत व्मक्तत एि साथ िाभ ियें गे तफ दे श भें िुछ जागनृ त ऩैदा होगी। एि अन्म अवसय ऩय एि व्मक्तत नतरि िे स्थान ऩय 11 ये खाएॊ फनाते थे। उन्होंने िहा कि एि शास्त्री ने फतामा है कि एि ददन 111 िा नतरि फनाओ तथा एि ददन 11 िा नतरि फनाओ। 111 िा नतरि िा वास्तु िे उद्देश्म से 111 लरखना नहीॊ है फक्ल्ि तीन दॊ ड िा ये खाॊिन एि शास्त्रोतत प्रमोग है ऩय उस व्मक्तत िे लरए भैं तमा िहॊ . सभयाॊङग्ण सत्रधाय मा भत्क्स्मऩयु ाण िा नाभ ति नहीॊ जानते थे। जफ भैंने चन ु ौती दी कि उस . भानसाय.िबी रगता है जैसे जनता िो भखण फनाने भें बी िोई प्रनतस्ऩधाण चर यही है । द:ु ख होता है ऩयन्तु तमा िरूॉि़् इॊडडमन िाउॊ लसर ऑप एस्रोरोक्जिर साॊइसेज िे ददल्री क्स्थत सािेत चैप्टय िे अध्मऺ श्री ु़ एन.ऩी.

वह अऩने ववबाग भें ननभाणण िामो भें बफल्िुर बी वास्तु प्रमोग नहीॊ ियते हैं। याजस्थान ववधानसबा िा जफ नवीन बवन फन यहा था .सी.एन.भालरि द्वाया स्वीिायोक्तत िे तुयन्त फाद ही ऩरयक्स्थनतमाॉ भेये ननमन्त्रण भें आ चि ु ीॊ थीॊ। जमऩुय भें एि प्रलसद्ध रयसोटण भें प्रलसद्ध आचथणि सभाचाय.ऩत्र नपा नुिसान िे भालरि श्री जमलसॊह िोठायी ने एि सेलभनाय आमोक्जत िी क्जसभें तीन वा स्तुशाçस्त्रमों िो अऩना प्रें जेंटेशन दे ना था। भैंने अऩना प्रस्तुतीियण वयाहलभदहय िे लसद्धान्तों िे आधाय ऩय किमा। भेये फाद िे जो वतता थे उन्होंने िुछ अजीफ सी फातें िहीॊ। उनभें एि मह बी थी कि िभीज भें तीन फटन होने से मह पर होता है तथा चाय फटन होने से मह पर होता है । ऎसी फातों से शास्त्रों िा भजाि तो फनता ही हैं . तो भेयी नजय उस ऩय थी। ववधानसबा अध्मऺ औय उनिे सचचव दोनों ने ही भुझे अऩने.फीस हजाय िा ऋण रेना बी सॊबव नहीॊ है । तमा मह ज्मोनतष िे ऩतन िी ऩयािाष्ठा नहीॊ हैंि़् याजस्थान सयिाय िे सचचवारम .याव िे िहने से भैंने फैंि भें िम्प्मटय िे लरए ऋण िे लरए आवेदन किमा। फैंि भैनेजय ने मह िहिय भुझे ऋण दे ने िे लरए भना िय ददमा कि ज्मोनतष िो हभ रोग प्रोडेक्तटव नहीॊ भानते अत: ऋण दे ना सॊबव नहीॊ हैं। इसिा अथण मह बी हुआ कि ज्मोनतष िो याजाओॊ िा सयॊ ऺण तो सभाप्त ही हो गमा। दस.अऩने चेम्फय व अन्म फैठने िे स्थान गुऩचऩ ु रूऩ से फतामे ऩयन्तु अचधिृत तौय ऩय उन्होंने भेयी सराह नहीॊ री तमोंकि उनिी सयिाय िी वास्तु भें िोई रूचच ही नहीॊ थी। ववधानसबा अध्मऺ िे सचचव श्री गुप्ता जी तो अफ इस दनु नमा भें नहीॊ हैं ऩयन्तु उनसे लभराने वारे भेये लशष्म स्रतचयर इॊजीननमय श्री आय . नवीन ववधानसबा बवन औय कितनी ही शासिीम सॊस्थाओॊ ने भुझसे गुऩचऩ ु वास्तु सराह री है । याजस्थान सयिाय िे ववद्मुत ववबाग ने अऩने लसववर इॊजीननमयों िो वास्तु रे ननॊग दे ने िे लरए भुझे िई फाय आभॊबत्रत किमा है । आऩिो मह जानना चादहए कि वे 60 रूऩमे प्रनत रेतचय िे दहसाफ से बग ु तान ियते हैं। मह बी हभें स्वीिाय है ऩयन्तु जो ववबाग अऩने इॊजीननमयों िो प्रलशऺण दे ने िे लरए हभें फुरामे . िो बी इस फात िा द:ु ख है । .भिान िे ठीि ईशान िोण भें द्वाय आने िे फा द मह घटनाएॊ आमी होंगी तो भिान. ु़ ऩये सराहिाय वगण िी बी प्रनतष्ठा चगयती है । उस भौिे ऩय तो रोगों ने उन्हें अच्छे आडे हाथों लरमा ऩयन्तु ऎसा सदा नहीॊ होता है । खासतौय से जफ एि ही व्मक्तत अऩना प्रवचन दे ता है तो जनता िे साभने ऩयीऺण िा िोई वविल्ऩ होता ही नहीॊ हैं। िहना ना होगा कि ज्मोनतष मा वास्तु बायत िा सफसे ब़डा असॊगदठत उद्मोग है औय अप्रलशक्षऺत वास्तुशा çस्त्रमों िी दी गई सराह से मदद िोई नुिसान होता है तो इसिी िाननी जवाफदे ही तम ियना रगबग असॊबव है । भुझे तो उस ददन ब़डा द ु :ख हुआ जफ िे.िासरीवार जो कि उस सभम उस ववधानसबा िे स्रतच यर इॊजीननमय थे.

वी.ऩाठ ियें गे तो अवश्म ही भोटाऩा घटाने िे रौकिि उऩाम सपर हो जामें गे अन्मथा फाय. गुरू हैं. दसयी तयप इस तयह िे िष्ट बी दे ते हैं। हभ सफ जानते हैं कि ऩरयश्रभ ियने से मा िसयत ियने से भोटाऩा िभ होता है अथाणत ़् फह ृ स्ऩनत िे अॊश अचधि हो ने से िसयत ियनी पडती है मह ननष्िषण ननिारा जा सिता है । आधनु नि गरू ु ओॊ ने िसयत िो मोगा फना ददमा है । िसयत िा पैशन उत्क्ऩन्न नहीॊ हुआ फक्ल्ि मोगा िा पैशन हो गमा है । टी . प्रवाचि हैं तथा सन्भागण ऩय चरने िी सराह दे ते हैं। वे ववऻान हैं . ग्रह हैं तथा दे वताओॊ िे भुख्म सराहिाय हैं। वे उऩदे शि हैं . दृष्टा हैं तथा उऩाम फताते हैं क्जनसे भोऺ भागण प्रशस्त हो। मदद गुरू अऩने सम्ऩणण अॊश दे दें तो व्मक्तत भहाऻानी हो जाता है । भैंने फह ृ स्ऩनत िो रेिय जफ ऩयीऺण ियने शुरू किमे तो ब़डे अजीफ ऩैयाभीटसण भैंने तम किमे मथा जफ फह ृ स्ऩनत नीच यालश भें हों तफ व्मक्तत िी चफी िभ होगी मा अचधि होगी। भुझे मह दे खिय ब़डा आश्चमण हुआ कि क्जन çस्त्रमों िी िॊु डलरमों भें फह ृ स्ऩनत नीच यालश भें हैं उनभें भोटाऩा अचधि फढ़ता है । क्जनभें फह ृ स्ऩनत अत्क्मन्त शब ु अॊशों भें हों उनभें बी ऎसा दे खने िो लभर सिता है । जो रोग फह ृ स्ऩनत िे रग A भें जन्भ रेते हैं उनभे बी वसा तत्क्व अचधि लभरेगा औय भोटाऩेाे िो योि नहीॊ ऩामेंगे। क्जन रोगों िी धनु मा भीन यालश है उनिो बी िारान्तय भें मह सभस्मा उत्क्ऩन्न होगी। फह ृ स्ऩनत एि तयप ऻान .ववधानसबा िे चीप आकिणटे तट श्री भाथयु ने एि ददन एि सबा भें भेये ही साभने जफ ववधानसबा िे वास्तु सम्भत होने िा दावा किमा तो भुझसे नहीॊ यहा गमा औय भैंने उनिी अच्छी खफय रेने िे उद्देश्म से प्रेस स्टे टभें ट दे ददमे औय वा स्तु िी िलभमाॉ चगना दी। वास्तु िा प्रमोग तो नहीॊ ही हुआ था उस ऩय तयु ाण मह कि शननवाय िी अभावस्मा िो उद्घाटन ियने जा यहे थे। अॊग्रेजी अखफायों भें भेये लरखे िा गहया असय हुआ। भेये लभत्र गोऩार शभाण ने अऩने अखफाय भहानगय टाइम्स भें बी जोयदाय लरखा। ऩरयणाभ। ववधानसबा बवन िा ववचधवत ़् उद्घाटन टर गमा औय कपय िबी हुआ ही नहीॊ। मह किस्सा िे ज्मोनतष भॊथन भें बी छऩा है । हभ अखफायी िदटॊग्स िो महाॊ स्िेन ियिे दफ ु ाया छाऩ यहे हैं। फह ृ स्ऩनत आशावाद िे प्रतीि हैं .फाय व्मामाभ ु़ ु़ शाराओॊ भें जाना ऩडेगा औय खचे िा भीटय बी फढे गा। भैंने जो फहुत भजेदाय ऩयीऺण किमा वह मह कि जन्भचक्र भें फह ृ स्ऩनत िा गोचय प्रमोाेग ियते हुऎ मह दे खा कि फह ृ स्ऩनत किस बाव ऩय दृक्ष्ट डार यहे हैं तथा वह बाव किस ददशा भें पडता है । . ववऻान व ववद्वत्क्ता दे ते हैं . िे ऩदे ऩय बाॊनत- बाॊनत िी फाराएॊ जफ मोगा प्रस्तुत ियती हैं तो रोगों िो मिीन हो जाता है कि इसे िय रेना चादहए। भहवषण ऩातॊजलर िे भन ऩय तमा फीत यही होगी जफ वे मोगा िे इस ववचचत्र प्रसाय िो दे ख यहे होंगे। अफ मोगा आश्रभ से फाहय ननिर िय फाजाय भें आ गमा है औय दनु नमा िी सफसे अचधि बफिाऊ वस्तुओॊ भें से एि हो गमा है । क्जतने अचधि रूऩमे जरें गे उतनी ही अचधि चफी जरेगी। शयीय िो िष्ट नहीॊ हो इसलरए मॊत्र बी बफि यहे हैं ऩयन्तु फह ृ स्ऩनत दे वता हैं कि िुछ खास िृऩा ही नहीॊ ियते। भैं फहुत ऑथोडॉतस िहराऊॊगा मदद मह प्रस्ताव भैं िरूॊ कि मदद फहृ स्ऩनत िा ऩजा.

ऩयाक्रभ व छोटी मात्राएॊ हैं। तीसये बाव िा ददशाक्रभ ईशानिोण से उत्क्तय िी ओय है । अफ मदद तीसये बाव भें शनन िी शत्रु यालशमाॉ हुई तो वे सफ िष्ट ऩामेंगे जो कि तीसये बाव िी ववषम वस्तु हैं औय मदद तीसये बाव भें शनन दे व िीलभत्र मा उच्चााादद या लशमाॊ हैं तो वे सफ सख ु ऩामेंगे जो कि तीसये बाव से सॊफॊध यखते हैं। भैंने ऎसे भाभरों भें ऩामा है कि ईशान िोण भें मा तो नमे ननभाणण होंगे मा ननभाणण िामो भें सॊशोधन होंगे मा ईशान िोण भें क्स्थत िभयों िे इन्टीरयमय भें ऩरयवतणन आमेगा। अफ मदद तीसये बाव भें शत्रु यालशमों ऩय शनन िी दृक्ष्ट प ़्ााड यही है तो मे सफ ऩरयवतणन फफाणदी िा यास्ता ददखाने वारे होंगे तथा मदद शनन दे व िी दृक्ष्ट शुब प्रबाव डार यही है तो मे सफ ऩरयवतणन उन्ननत िा भागण ददखाने वारे होंगे। भैं अऩने इस ऩयीऺण ऩय एि ददन फहुत ही खश ु हुआ जफ भैंने एि व्म क्तत िे ईशान िोण भें क्स्थत िभये िो तोडने ु़ िे लरए िहा तथा जफ िभया तडवाने ु ु़ िे फाद उसने भुझे अऩनी जन्भऩबत्रिा ददखाई तो उसिे तीसये बाव ऩय शनन िी शत्रु दृक्ष्ट थी तथा उन्होंने रग्न भें आते ही िुछ ददनों भें अऩना िाभ िय ददमा। शनन िी शत्रु दृक्ष्ट औय ु़ ु़ वास्तुशास्त्री िी वक्र दृक्ष्ट िई फाय एि जैसा ही ऩरयणाभ दे ती है । इशाया होते ही फडे. ऎसे ननणणम नहीॊ ियने चादहमें। ऎसा बी होता है कि एि ही बाव ऩय . नवें बाव ऩय व एिादश बाव ऩय दृक्ष्टऩात िय यहे हैं तो इनभें से सातवाॊ बाव ऩत्क्नी से सम्फक्न्धत हैं व उसिी बाव िी ददशा ऩक्श्चभ है । फह ृ स्ऩनत िी अभत ृ दृक्ष्ट है अत : वह सप्तभ बाव ऩय शु ब प्रबाव ु़ ु़ ाु़डारते हुऎ ऩत्क्नी िे जीवन भें शब ु रामेंगे। ऩत्क्नी िा ऩद फढे गा . दावतों भें बी शालभर होंगे व ऩनत िा साननध्म अचधि लभरेगा। क्जन रोगों िे तराि िी क्स्थनतमाॊ हैं उनिे तराि रूि जामेंगे ऩयन्तु क्जनिे तराि सम्फक्न्धत िामणवादहमाॊ सप्तभ बाव ऩय फह ृ स्ऩनत िी दृक्ष्ट से ऩवण ही हो चि ु ी हैं उनिे ऩन ु ववणवाह िे मोग फनें गे। ठीि इसी सभम आऩ ऩामेंगे कि भिान िे ऩक्श्चभ ददशा भें मा तो ननभाणण होंगे मा ननभाण ण ियाने जैसी ऩरयक्स्थनतमाॊ नहीॊ हैं तो ऩक्श्चभ ददशा भें क्स्थत शमन िऺों भें इन्टीरयमय अथाणत आॊतरयि स ”ाााा भें ऩरयवतणन आमेगा। इन िऺों भें यहने वारों िे जीवन स्तय भें ऩरयवतणन आमेगा। उनिे सुख भें ववृ द्ध होगी औय उसिे ऩरयणाभस्वरूऩ उनिे स्वास््म भें सुधाय होगा। मह ऩरयक्स्थनतमाॊ तफ ति यहें गी जफ ति फह ृ स्ऩनत दे वता िी दृक्ष्ट सप्तभ बाव ऩय अथाणत ऩक्श्चभ ददशा ऩय है । मही ऩयीऺण भैंने शनन दे वता िे गोचय भ्रभण िो रेिय बी किमा। भान रीक्जए शनन रग्न भें गोचय िय यहे हैं तो उनिे दृक्ष्ट ऺेत्र भें तीसया बाव आ जामेगा। तीसये बा व िे ववषम छोटे बाई.उदाहयण िे लरए फह ृ स्ऩनत जन्भ चक्र िे तीसये बाव भें भ्रभण िय यहे हैं तथा सातवें बाव ऩय . उसिो सख ु फढे गा . उनिे जेवय ु़ फनेंगे व साथ िे साथ उनिा स्वास््म बी फढे गा। इसिा अथण मह ननिरा कि उनिो बोजन बी अच्छा लभरेगा .फदहन.फडे ननभाणण ध्वस्त हो जाते हैं। भैं तो अफ डयने रगा हॉ कि ियोडोंु़ रूऩमौं िे ननभाणण चगया दे ने वारे वास्तश ु ास्त्री मदद दै वीिृऩा िे बफना ननणणम ियने रगें तथा िेवर फवु द्ध ववरास भें मा प्रनत स्ऩद्धाण भें मा अऩनी ज्मादा चराने िे चतिय भें रोगों िे ियोडोंु़ रूऩमे ध्वस्त ियने रगें तो उनिा ऩाऩ िा ƒाु़ााडा तो फहुत ऩहरे ही बय जामेगा। उनिा ऩतन इसी जीवन भें दे खने िो लभरेगा। अत : जफ ति वास्तु दे वता िो लसद्ध नहीॊ िय रें .

मदद प्रश्नगत बाव भें पडने वारी यालश फह ृ स्ऩनत औय शनन दोनों िे ही अनुिर हों तो अत्क्मचधि शानदाय ऩरयणाभ लभरेंगे। 2. स्वास््म िे भाभरे भें मह हो सिता है कि प्रश्नगत बाव से सॊफॊचधत व्मक्तत िे शल्म चचकित्क्सा हो औय फह ृ स्ऩनत िे प्रबाव भें जल्दी ठीि हो जामें मा जीवन यऺा हो जामे। 4. शनन औय फह ृ स्ऩनत िा सॊमुतत प्रबाव खण्डन व भण्डन िी प्रकक्रमा है औय दोनों प्रकक्रमाएॊ सम्ऩाददत होंगी। मह फात अरग है कि गोचयीम प्रबाव से ऩहरे वह िामणवाही होगी क्जस ग्रह िा गोचय ऩहरे शुरू हो चि ु ा हो। 5. मदद मह सफ ग्रह याहु िे प्रबाव ऺेत्र भें हैं तो दृक्ष्ट भ्रभ यहे गा औय उऩाम फताने वारे मा ियने वारों िो सच्चाााई िा ऩता नहीॊ चरेगा औय फहुत फाद भें एि अन्म िामणवाही मा सॊशोधन िी ु़ आवश्मिता ऩडेगी औय मह तफ होगा जफ प्रश्नगत बाव ऩय याहु िा प्रबाव सभाप्त हो जाए मा याहु िी अन्तदण शा ननिर जाए। .फह ृ स्ऩनत िी दृक्ष्ट आ यही हो औय शनन िी दृक्ष्ट आ यही हो। ऎसे भें उस बाव से सम्फक्न्धत दो- तीन तयह िे ऩरयणाभ आ सिते हैं:- 1. ऎसे उऩाम फतामेंगे क्जनभें धनाजणन तो होगा ऩयन्तु जाति िो ऩरयणाभ िभ लभरें गे औय उसिे भ न भें असॊतोष यहे गा। 7. एन्टीथीलसस औय लसन्थेलसस िहते हैं। क्जन वास्तु शाçस्त्रमों िा फह ृ स्ऩनत फरवान नहीॊ होता वे लसन्थेलसस िी प्रकक्रमा िो अऩने सम्ऩणण स्वरूऩ भें प्रनतऩाददत नहीॊ िय ऩाते परस्वरूऩ उनिे ियामे गमे िामो िे ऩरयणाभ बी ऩ णणता मा सपरता िो प्राप्त नहीॊ होते। मह बफना फह ृ स्ऩनत िी िृऩा िे सॊबव ही नहीॊ है । 6. जहाॊ ति वास्तु शास्त्र िा सॊ फॊध है तो मह हभेशा अच्छा यहता है कि ऩहरे किसी बाव ऩय शनन िी दृक्ष्ट प्रायॊ ब हो जामे तो तोडने ु़ .पोडने ु़ जैसी प्रकक्रमा ऩहरे सॊऩाददत हो जामे औय फाद भें फह ृ स्ऩनत िा गोचय शुरू होते ही ऩुनननणभाणण िी प्रकक्रमा शुरू हो जामे क्जसे हभ शब्दान्तय से सॊश्रेषण बी िह सिते हैं। तिणशास्त्र भें इन प्रकक्रमाओॊ िो थीलसस . मदद प्रश्नगत यालश फह ृ स्ऩनत िे तो अनि ु र हों ऩयन्तु शनन िे प्रनतिर हों तो ऩहरे नि ु सान होगा औय कपय ऩन ु ननणभाणण होगा। 3. मही फात ज्मोनतष िी बववष्मवाणणमों िे सॊदबण भें िही जा सिती है । मदद फह ृ स्ऩनत फरवान हुए तो वे ज्मोनतषी उऩाम ज्मोनतष भें अत्क्मचधि सपर यहें गे औय मदद उनिे फह ृ स्ऩनत फरवान नहीॊ हु ऎ तो वे मा तो सटीि उऩाम फता ऩाने भें सभथण नहीॊ होंगे मा उनिे फतामे हुऎ उऩामों से सटीि ऩरयणाभ नहीॊ आमेंगे। मदद उनिे फह ृ स्ऩनत ऩय ऩाऩ प्रबाव हुए तथा चॊद्रभा दवषत हुए तो ऎसे.

ॊ नमे तयीिे ननिार रेते हैं। ऎठने से तात्क्ऩमण मह है कि जाति िो फीच किसी हवन भें मह ऩता चरता है कि इतना ऩैसा औय दे ना है तथा मजभान सॊिट भें आ जाता है । मा िोई भत्क्ृ मु बम जैसा उत्क्ऩन्न ियिे ऩैसा भॊाागा जाता है । ज्मोनतषी िे लरए सदा ही उचचत है कि वे जाति िो ऩहरे ही फता दें कि उनिे द्वाया किमे गमे िामण भें कितना खचाण आमेगा। फदरते हुए सभम भें जफ रोग दक्षऺणा िा भल्माॊिन ियने भें सभथण नहीॊ यहे हैं तो मही उचचत है कि खचण िा अनुभान ऩहरे ही दे ददमा जाए। इसी सॊदबण भें भैं गुरू चाण्डार मोग िी बी चचाण िय रेना चाहता हॉ । फह ृ स्ऩनत औय याहु जफ साथ होते हैं तो गुरू चाण्डार मोग फनता है । चाण्डार िा अथण ननम्नतय जानत है । चाण्डार िा िामण श्भशान बलभ िे आसऩास ही सीलभत यखा गमा था। िहा गमा कि चाण्डार िी छामा बी ब्रा rााण िो मा गुरू िो अशुद्ध िय दे ती है । भैंने शनन औय याहु िी प्रनतननचध जनता िे फाये भें जफ सवेऺण िय ना शुरू किमा तो ननभ A जानतमों मा भजदय मा श्रलभि वगण मा िई भाभरों भें िृषि वगण से शनन िा सम्फन्ध जोडाु़ जा सिता है ु़ ऩयन्तु याहु िा सम्फन्ध अन्त्क्मज जानतमों से है । मदद ऩुयाना इनतहास ऩढेॊ तो मह वे जानतमाॊ लभरें गी जो कि गाॉव भें प्रवेश से ऩवण ढोर फजाती थीॊ। सम्बवत: सभाज िे ऩतन िी मह ऩयािाष्ठा थी औय इन जानतमों िे गौयव भें बी ववृ द्ध हुई है औय उच्चा जानतमों िी भानलसिता भें बी ऩरयवतणन आमा है । सभाज िी जदटरता अफ थोडीु़ िभ हुई है ऩय इस फात िो ज्मोनतष िे आईने भें दसये ढॊ ग से दे खा जा सिता है । याहु औय फह ृ स्ऩनत िा सम्फ न्ध होने से लशष्म िा गुरू िे प्रनत द्रोह दे खने भें आता है । मदद याहु फरशारी हुए तो लशष्म. गुरू िे िामण िो अऩना फना िय प्रस्तुत ियते हैं मा गुरू िे ही लसद्धाॊतों िा ही खण्डन ियते हैं। फहुत से भाभरों भें लशष्मों िी उऩक्स्थनत भें ही गुरू िा अऩभान होता है औय लशष्म चऩ ु यहते हैं। महाॊ लशष्म ही सफ िुछ हो जाना चाहते हैं औय िारान्तय .भैंने गोचय िो रेिय ियीफ दस से फायह हजाय ऩयीऺण किमे तथा फाद भें भैं इन सफ अनुबवों िो िऺाओॊ भें ऩढ़ाने रगा। भेये ववद्माचथणमों ने बी अऩने अनुबव भुझे फताए। अफ ति भैं नाडी ग्रॊथों मा बग ृ ु ज्मोनतष िे गॊा़्य थों भें मह ऩाता था कि जैसे याहु . शनन औय फह ृ स्ऩनत िे गोचय से ही अचधिाॊश बववष्मवाणणमाॊ िी जा यही हैं ऩयॊ तु उन ग्रॊथों भें वास्तु सॊफॊधी उल्रेख िभ लभरते हैं। हभ िोलशश िय यहे हैं कि हभाये ऎसे अनब ु वों िा सॊिरन एि ही स्थान ऩय िय दें क्जससे असॊख्म जनता िो राब हो। फह ृ स्ऩनत नीच यालश भें होने ऩय मदद अशुब हो जाएॊ अथाणत ़् नवाॊश मा दशाॊश भें बी नीच यालश मा शत्रु यालश भें हों तो जाति भें दृक्ष्ट दोष लभरेगा व उनिी सराह भें ऩववत्रता िे अॊश िभ हो जामेंगे। भुझे एि फाय भेये गुरू ने िहा था कि मदद चन्द्रभा औय याहु अष्टभ भें आ जाएॊ तो जाति तॊत्र से धन माऩन िे चतिय भें पड जाता है । इस मोग िा ऩयीऺण तो भैं ज्मादा नहीॊ िय ऩामा ु़ ऩयन्तु मदद फह ृ स्ऩनत ऩाऩ अॊशों भें चरे जाएॊ मा उन ऩय ऩाऩ प्रबाव फढेॊ तो भैंने मह दे खा है कि ॊ रोग ज्मोनतष से बी धन ऎठने भें नमे.

धोखा-पये फ महाॊ खफ दे खने िो लभरेगा ऩयन्तु याहु औय गुरू मुनत भें मदद गुरू फरवान हुए तो गुरू अत्क्मचधि सभथण लसद्ध होते हैं औय लशष्मों िो ु़ भागणदशणन दे िय उनसे फहुत फडे िामण मा शोध ि यवाने भें सभथण हो जाते हैं। लशष्म बी मदद िोई ऎसा अनुसॊधान ियते हैं क्जनिे अन्तगणत गुरू िे द्वाया ददमे गमे लसद्धान्तों भें ही शोधन सम्बव हो जाए तो वे गुरू िी आऻा रेते हैं मा गुरू िे आशीवाणद से ऎसा ियते हैं। मह सवणश्रेष्ठ क्स्थनत है औय भेया भानना है कि ऎसी क्स्थनत भें उसे गुरू चाण्डार मोग नहीॊ िहा जाना चादहए फक्ल्ि किसी अन्म मोग िा नाभ ददमा जा सिता है ऩयन्तु उस सीभा ये खा िो ऩहचानना फहुत िदठन िामण है जफ गुरू चाण्डार मोग भें याहु िा प्रबाव िभ हो जाता है औय गुरू िा प्रबाव फढ़ने रगता है । याहु अत्क्मन्त शक्ततशारी हैं औय इनिा नैसचगणि फर सवाणचधि है तथा फहुत िभ प्रनतशत भें गुरू िा प्रबाव याहु िे प्रबाव िो िभ िय ऩाता है । इस मोग िा सवाणचधि असय उन भाभरों भेाेाॊ दे खा जा सिता है जफ दो अन्म बावों भें फैठे हुए याहु औय गुरू एि दसये ऩय प्रबाव डारते हैं। गुरू चाण्डार मोग िा एिदभ उल्टा तफ दे खने िो लभरता है जफ गुरू औय याहु एि दसये से सप्तभ बाव भें हो औय गुरू िे साथ िेतु क्स्थत हों। फह ृ स्ऩनत िे प्रबावों िो ऩयािाष्ठा ति ऩहुॉचाने भें िेतु सवणश्रेष्ठ हैं। िेतु त्क्माग चाहते हैं . गुरू से मुनत िे िायण अऩने जीवन भें श्रेष्ठ गुरू मा श्रेष्ठ लशष्म ऩाने िे अचधिाय ददराते हैं। इनिो जीवन भें श्रेम बी लभरता है औय गुरू मा लशष्म उनिो आगे फढ़ाने िे लरए अऩना मो गदान दे ते हैं। इस मोग िा नाभियण िोई फहुत अच्छे ढॊ ग से नहीॊ हुआ है ऩयन्तु गुरू चाण्डार &# . िदाचचत फाद भें वक्ृ त्क्तमों िा त्क्माग बी दे खने िो लभरता है । िेतु बोग-ववरालसता से दय फुवद्ध ववरास मा भानलसि ववरालसता िे ऩऺधय हैं औय गुरू िो .भें गुरू िा नाभ बी नहीॊ रेना चाहते। मदद याहु फहुत शक्ततशारी नहीॊ हुए ऩयन्तु गुरू से मुनत है तो इससे िुछ हीन क्स्थनत नजय भें आती है । इसभें अधीनस्थ अऩने अचधिायी िा भान नहीॊ ियते। गुरू.लशष्म भें वववाद लभरते हैं। शोध साभग्री िी चोयी मा उसिे प्रमोग िे उदाहयण लभरते हैं .