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ऋषि पाराशर के उपाय

वह
ृ त्त ऩायाशय होयाशास्त्र भें ऋषष ऩायाशय ने फहुत साये उऩाम फताए हैं जजनभें
उन्होंने मह वणणन किमा है कि किस िायण से वह िष्ट आमा है औय उसिी
ननवजृ त्त िा क्मा उऩाम है ि् मह उऩाम ज्मादातय भॊर औय दान ऩूजा-ऩाठ इत्मादद
से सॊफॊधधत है । उन सफ िा सॊक्षऺप्त षववयण इस रेख भें ददमा जा यहा है ।
षवभबन्न शाऩ :
सॊतान नष्ट होने मा सॊतान ना होने िो षवभबन्न तयह िे शाऩ िे ऩरयणाभ ऋषष
ऩायाशयजी ने फतामा है । ऋषष ऩायाशय जी ने उल्रेेेख किमा है कि बगवान शॊिय
ने स्त्वमॊ ऩावणती जी िो मह उऩाम फताए हैं।
1. सऩण िा शाऩ :
फहुत साये मोगों से सऩण शाऩ िा ऩता चरता है । उनभें याहु ऩय अधधि फर ददमा
गमा है । िुर आठ मोग फताए गए हैं। सऩण शाऩ से सॊतान नष्ट होने ऩय मा सॊतान
िा अबाव होने ऩय स्त्वणण िी एि नाग प्रनतभा फनािय षवधधऩव
ू ि
ण ऩज
ू ा िी जाए
जजसभें अनुष्ठान, दशॊेाश हवन, भाजणन, तऩणण, ब्राrेाण बोजन ियािे गोदान, बूभभ
दान, नतर दान, स्त्वणण दान इत्मादद किए जाएॊ तो नागयाज प्रसन्न होिय िुर िी
वषृ ि ियते हैं।
2. षऩत ृ शाऩ :
गतजन्भ भें षऩता िे प्रनत किए गए अऩयाध से जो शाऩ भभरता है तो सॊतान िा
अबाव होता है । इस दोष िा ऩता सम
ू ण से सॊफॊधधत मोगों से चरता है औय सम
ू ण िे
ऩीçेडत होने मा िुषऩत होने ऩय मे मोग आधारयत हैं। ननजचचत है कि भॊगर औय
याहु बी गणना भें आएॊगे। इसी िो षऩत ृ दोष मा षऩतय शाऩ बी िहा गमा है । िुर
भभरािय ग्मायह मोग हैं।
उऩाम : गमा श्राि ियना चादहए तथा जजतने अधधि ब्राrेाणों िो बोजन िया
सिें, ियाएॊ। मदद िन्मा हो तो गाम िा दान औय िन्मा दान ियना चादहए। ऎसे
ियने से िुर िी वषृ ि होगी।
3. भात ृ शाऩ :
ऩॊचभेश औय चॊद्रभा िे सॊफॊधों ऩय आधारयत मह मोग सॊतान िा नष्ट होना मा
सॊतान िा अबाव फताते हैं। इन मोगों भें ननजचचत रूऩ से भॊगर, शनन औय याहु िा
मोगदान भभरेगा। मह दोष िुर 13 भभरािय हॊ ेै। इस जन्भ भें बी मदद िोई भाता
िी अवहे रना िये गा मा ऩीçेडत िये गा तो अगरे जन्भ भें मह दोष दे खने िो
भभरेगा।

ऩत्नी िे हाथ से दस गामों िा दान ियें औय परदाय वऺ ृ ों सदहत बभू भ िा दान ियें तो ननजचचत रूऩ से िुर वषृ ि होती है । 5. भाभा िा शाऩ : गतजन्भ भें मदद भाभा िे प्रनत िोई अऩयाध किमा गमा हो तो उसिे शाऩ से सॊतान िा अबाव इस जन्भ भें दे खने िो भभरता है । मदद ऎसा होता है कि ऩॊचभ बाव भें फुध. गुरू. चान्द्रामण व्रत ियें . फाव़डी. ऩत्नी िा शाऩ : गतजन्भ भें ऩत्नी िे द्वाया मदद शाऩ भभरता है तो इस जन्भ भें सॊतान िा अबाव होता है । मह ग्मायह मोग फताए गए हैं जो सप्तभ बाव औय उस ऩय ऩाऩग्रहों िे प्रबाव से दे खे जाते हैं। उऩाम : िन्मा दान श्रेष्ठ उऩाम फतामा गमा है । मदद िन्मा नहीॊ हो तो स्त्वणण िी रक्ष्भी-नायामण िी भूनतण तथा दस ऎसी गाम जो फछ़डे वारी भाॉ हों तथा शैमा. स्त्वणण औय ऩॊचयत्न तथा अधधितभ ब्राrेाणों िो बोजन ियाएॊ तो शाऩ से ननवजृ त्त होिय िुर िी वषृ ि होती है । 7. प्रेत शाऩ : मह नौ मोग फताए गए हैं जजनभें मे वणणन है कि अगय श्राि िा . भ्रात ृ शाऩ : मदद गतजन्भ भें बाई िे प्रनत िोई अऩयाध किमा गमा हो तो उसिे शाऩ िे िायण इस जन्भ भें सॊतान नष्ट होना मा सॊतान िा अबाव भभरता है । ऩॊचभ बाव.4. वस्त्र इत्मादद ब्राrेाण जोडे िो दे ने से ऩुर होता है औय िुर वषृ ि होती है । 8. ब्रrेा शाऩ : गतजन्भ भें िोई धन मा फर िे भद भें ब्राrेाणों िा अऩभान ियता है तो उसिे शाऩ से इस जन्भ भें सॊतान िा अबाव होता है मा सॊतान नष्ट होती है । मह िुर भभरािय सात मोग हैं। नवभ बाव. िुअॊेा औय फाॊध िो फनवाने से िुर िी वषृ ि होती है । 6. याहु औय ऩाऩ ग्रहों िो रेिय मह मोग दे खने िो भभरते हैं। मोग िा ननणणम तो षवद्वान ज्मोनतष ्ेाेी ही ियें गे ऩयॊ तु उऩाम ननम्न फताए गए हैं। उऩाम : चान्द्रामण व्रत. आबूषण. प्रामजचचत ियिे गोदान. ताराफ. भॊगर औय याहु से मह दोष दे खे जाते हैं। मह दोष िुर भभरािय तेयह हैं। उऩाम : हरयवॊश ऩुयाण िा श्रवण ियें . गुरू. भॊगर औय याहु भभरते हैं औय रग्न भें शनन भभरते हैं। इस मोग भें शनन-फुध िा षवशेष मोगदान होता है । उऩाम : बगवान षवष्णु िी भूनतण िी स्त्थाऩना. िावेयी नदी मा अन्म ऩषवर नददमों िे किनाये शाभरग्राभ िे साभने ऩीऩर वऺ ृ उगाएॊ तथा ऩूजन ियें . दक्षऺणा.

तत ृ ीम बाग भें जन्भ हो तो भाता िी भत्ृ मु. गुरू औय चॊद्र िे दोष ्ेा भें सॊतान गोऩार िा ऩाठ. चाॊदी मा गाम िी दक्षऺणा दें औय इसिे फाद ब्राrेाण बोजन ियाएॊ। इससे गतण िे ग्रह चॊद्रभा एवॊ सूमण िी शाॊनत होती है औय जाति िा िल्माण होता है । िृष्ण चतथ ु ी व्रत िे उऩाम : चतथ ु ी िो छ: बागों भें फाॊटा है । प्रथभ बाग भें जन्भ होने ऩय शुब होता है . चाॊदी िा ऩार तथा नीरभणण दान ियना चादहए। 9. उसे अशब ु भाना गमा है । .अधधिायी अऩने भत ृ षऩतयों िा श्राि नहीॊ ियता तो वह अगरे जन्भ भें अऩुर हो जाता है । इस दोष ्ेा िी ननवजृ त्त िे भरए ननम्न उऩाम हैं। उऩाम : गमा भें षऩण्डदान. व्मनतऩात. ऩरयघ. चॊद्रभा िी चाॊदी िी भूनतण फनवािय स्त्थाऩना ियें औय षोडशोऩचाय मा ऩॊचोऩचाय से ऩूजन ियें कपय इन ग्रहों िी सभभधा से हवन ियें . छठे बाग भें जन्भ हो तो धन िा नाश मा जन्भ रेने वारे स्त्वमॊ िा नाश होता है । उऩाम : इस दोष ्ेा िा ननवायण बगवान भशवजी िी ऩज ू ा से होता है । मथाशजक्त भशव िी स्त्वणण प्रनतभा फनािय भहाभत्ृ मुॊजम भॊर िा जाऩ ियें । इस जऩ िा षवधान थोडा सा तिनीिी औय िदठन होता है । हवन भें सबी ग्रहों िी आहुनतमाॊ उनिे ननभभत्त सभभधा से दी जाती हैं. ग्रह दोष ्ेा : मदद ग्रह दोष ्ेा से सॊतान हानन हो तो फुध औय शुक्र िे दोष भें बगवान शॊिय िा ऩूजन. याहु िे दोष से िन्मा दान. ज़ड. फाद भें स्त्थाषऩत िरश िे जर से भाता-षऩता िा अभबषेि ियामा जाता है । बद्रा इत्मादद भें जन्भ िा दोष : बद्रा. चतुथण बाग भें जन्भ हो तो भाभा िा नाश. गाम. रूद्राभबषेि. ब्रrेाेा िी स्त्वणणभम भनू तण. छार औय ऩॊचाभत ृ डारिय अभबभॊत्ररत ियिे अजग्निोण भें स्त्थाऩना िय दें कपय सूमण िी सोने िी. भाता-षऩता िा बी अभबषेि ियें औय सोने. द्षवतीम बाग भें जन्भ हो तो षऩता िा नाश. मॊर औय औषधध िा सेवन. ऩॊचभ बाग भें जन्भ हो तो िुर िा नाश. ऺम नतधथ. सम ू ण िे दोष से बगवान षवष्णु िी आयाधना. भॊगर औय शनन िे दोष से षडङग्शतरूद्रीम जऩ ियाने से सॊतान प्राçप्त होती है औय िुर िी वषृ ि होती है । अन्म दोषौं िे उऩाम : अभावस्त्मा िा जन्भ : ऋषष ऩायाशय जी िा भानना है कि अभावस्त्मा िे जन्भ से घय भें दरयद्रता आती है अत: अभावस्त्मा िे ददन सॊतान िा जन्भ होने ऩय शाॊनत अवचम ियानी चादहए। इस उऩाम िे अॊतगणत षवधधऩूवि ण िरश स्त्थाऩना ियिे उसभें ऩॊच ऩल्रव. वज्र आदद मोगों भें जन्भ तथा मभघॊट इत्मादद भें जो जाति जन्भ रेता है .

ऩुर औय सहोदय िा अभबषेि ियें । ब्राrेाण बोजन ियाएॊ औय दक्षऺणा दें इससे उस नऺर िी शाॊनत होती है । सॊक्राॊनत जन्भ दोष : ग्रहों िी सॊक्राॊनतमों िे नाभ घोया.उऩाम : मह दम ु ोग जजस ददन हुआ हो. दीऩदान तथा ऩीऩर वऺ ृ िी ऩज ू ा ियिे षवष्णु बगवान िे भॊर िा 108 फाय हवन ियाना चादहए। ऩीऩर िो आमद ु ाणमि भाना गमा है । इसिे ऩचचात ् ब्राrेाण बोज ियाएॊ तो व्मजक्त दोष भुक्त हो जाता है । भाता-षऩता िे नऺर भें जन्भ : मदद भाता-षऩता मा सगे बाई-फदहन िे नऺर भें किसी िा बी जन्भ हो तो उनभें से किसी िो बी भयणतल् ु म िष्ट अवचम होगा। उऩाम : किसी शुब रग्न भें अजग्निोण से ईशान िोण िी तयप जन्भ नऺर िी सुॊदय प्रनतभा फनािय िरश ऩय स्त्थाषऩत ियें कपय रार वस्त्र से ढििय उऩयोक्त नऺरों िे भॊर से ऩूजा-अचणना ियें कपय उसी भॊर से 108 फाय घी औय सभभधा से आहुनत दें तथा िरश िे जर से षऩता. धवाॊऺी. भन्दाकिनी. िष्ट. चॊद्रभा िी प्रनतभा चाॊदी तथा याहु िी प्रनतभा सीसे िी फनाएॊ। इन ग्रहों िे षप्रम षवषमों िा दान ियना चादहए कपय ग्रह िे भरए ननभभत्त सभभधा से हवन ियें ऩयॊ तु नऺर स्त्वाभी िे भरए ऩीऩर िी सभभधा िा इस्त्तेभार ियें । िरश िे जर से जाति िा अभबषेि ियें औय ब्राrेाण िो बोजन ियाएॊ व दान-दक्षऺणा दें । इससे ग्रहणिार भें जन्भ दोष दयू होता है । प्रसव षविाय दोष ्ेा : . भभश्रा औय याऺसी इत्मादद हैं। सूमण िी सॊक्राॊनत भें जन्भ रेने वारा दरयद्र हो जाता है इसभरए शाॊनत ियानी आवचमि है । उऩाम : सॊक्राॊनत भें जन्भ िा अगय दोष ्ेा हो तो नवग्रह िा मऻ ियना चादहए। षवधध-षवधान िे साथ अधधदे व औय प्रत्मधधदे व दे वता िे साथ जजस ग्रह िी सॊक्राॊनत हो उसिी प्रनतभा िो स्त्थाषऩत िय रें कपय ग्रहों िी ऩूजा ियिे व हवन ियिे भहाभत्ृ मुॊजम भॊर िा जऩ ियें । नतर से हवन िय रेने िे फाद भाता-षऩता िा अभबषेि ियें औय मथाशजक्त ब्राrेाणों िो बोजन ियािे. दान-दक्षऺणा दें इससे सॊक्राॊनत जन्भ दोष दयू होता है । ग्रहण िार भें जन्भ िा दोष : जजसिा जन्भ ग्रहणिार भें होता है उसे व्माधध. शॊिय इत्मादद िी ऩज ू ा व अभबषेि भशवजी भॊददय भें धऩ ू . भन्दा. दरयद्रता औय भत्ृ मु िा बम होता है । ग्रहण नऺर िे स्त्वाभी तथा सूमग्र ण हण भें सूमण िी तथा चॊद्रग्रहण भें चॊद्रभा िी भूनतण फनाएॊ। सूमण िी प्रनतभा सोने िी. भहोदयी. वह दम ु ोग जजस ददन आए उसी ददन इसिी शाॊनत ियानी आवचमि है । इस दम ु ोग िे ददन षवष्णु. घी.

मदद ननधाणरयत सभम से िुछ भहीने ऩहरे मा िुछ भहीने फाद प्रसव हो तो इस षविाय से ग्राभ मा याष्र िा अननष्ट होता है । अॊगहीन मा त्रफना भजस्त्तष्ि िा मा अधधि भजस्त्तष्ि वारा जाति जन्भ रे मा अन्म जानवयों िी आिृनत वारा जाति जन्भ रे तो मह षविाय गाॉव िे भरए आऩजत्त राने वारा होता है । िुर भें बी ऩीडा आती है । ऩायाशय ऎसे प्रसव िे भरए अत्मॊत िठोय है औय ना िेवर ऎसी स्त्री फजल्ि ऎसे जानवय िो बी त्माग दे ने िे भरए िहते हैं। इसिे अनतरयक्त 15वें मा 16वें वषण िा गबण प्रसव बी अशुब भाना गमा है औय षवनाश िायि होता है । इस षविाय िी बी शाॊनत िा प्रस्त्ताव किमा गमा है । उऩाम : ब्रrेाेा. षवष्णु. अभबषेि औय ब्राrेाण बोजन ियाना चादहए। इस प्रिाय से शाॊनत ियाने से अननष्ट से यऺा होती है । रीतय जन्भ षविाय : तीन ऩर ु िे फाद िन्मा िा जन्भ हो मा तीन िन्मा िे फाद ऩर ु िा जन्भ हो तो षऩत ृ िुर मा भात ृ िुर भें अननष्ट होता है । उऩाम : जन्भ िा अशौच फीतने िे फाद किसी शुब ददन किसी धान िी ढे यी ऩय चाय िरश िी स्त्थाऩना ियिे ब्रrेाेा. नॊदा नतधथ (1. शॊिय औय इॊद्र िी ऩूजा ियनी चादहए। रूद्र सक् ू त औय शाॊनत सक् ू त िा ऩाठ ियना चादहए कपय हवन ियना चादहए। इससे अननष्ट शाॊत होता है । गण्डान्त षविाय : ऩूणाणनतधथ (5. हवन.6. ििण िी आणखयी आधी घटी औय भसॊह िी प्रायॊ भबि आधी घटी. ग्रह मऻ. नऺर गण्डान्त भें फछ़डे वारी गाम िा दान औय रग्न गण्डान्त भें सोने िा दान ियना चादहए। गण्डान्त िे ऩूवण बाग भें जन्भ हो तो षऩता िे साथ फच्चो िा अभबषेि ियना चादहए औय मदद दस ू ये बाग भें जन्भ हो तो भाता िे साथ फारि िा अभबषेि ियना चादहए। इन उऩामों िे अॊतगणत नतधथ स्त्वाभी. नऺर स्त्वाभी मा रग्न स्त्वाभी िा स्त्वरूऩ फनािय. आचरेषा औय भघा िी सॊधध ऩय औय ज्मेष्ठा औय भूर िी सॊधध ऩय चाय ƒेेाडी भभरािय नऺर गण्डान्त िहराता है । इसी तयह से रग्न गण्डान्त होता है । भीन िी आणखयी आधी घटी औय भेष िी प्रायॊ भबि आधी घटी.11) िे आदद भें दो ƒेेाडी िुर भभरािय चाय नतधथ िो गण्डान्त िहा गमा है । इसी प्रिाय ये वती औय अजचवनी िी सॊधध ऩय. षवष्णु औय रूद्र िा ऩूजन. िरश ऩय ऩूजा ियें औय कपय हवन ियें .15) िे अॊत िी ƒेेाडी.10. वजृ चचि िी आणखयी आधी घटी तथा धनु िी प्रायॊ भबि आधी घटी रग्न गण्डान्त िहराती है । इन गण्डान्तों भें ज्मेष्ठा िे अॊत भें ऩाॊच घटी औय भूर िे आयॊ ब भें आठ घटी भहाअशब ु भाना गमा है । उऩाम : गण्डान्त शाॊनत िे फाद ही षऩता फारि िा भुॊह दे खें। नतधथ गण्डान्त भें फैर िा दान.

वन्दना. दान. ग्रहे षु नण ृ ाॊ षवषभजस्त्थतेष्वषऩ। जऩेच्चा तत्प्रीनतियै : सि ु भणभब:.व अभबषेि इत्मादद ियें । रगबग सबी गण्डान्तों भें गोदान िो एि फहुत सशक्त उऩाम भाना गमा है । ज्मेष्ठा गण्ड शाॊनत भें इन्द्र सूक्त औय भहाभत्ृ मुॊजम िा ऩाठ किमा जाता है । भूर. याहु िी अठायह हजाय औय िेतु िी सरह हजाय फताई है । ऩायाशय जी िो वऺ ृ आमुवद े िा प्रथभ रेखि बी भाना जाता है औय उन्होंने वऺ ृ ों िी औषधध भहत्ता फताते हुए फहुत सायी वनस्त्ऩनतमों ऩय भरखा है ऩयॊ तु उनिो ज्मोनत ."दशाऩहायाष्टि वगणगोचये. फध ु िी नौ हजाय. भॊगर िी दस हजाय. ियोनत शाजन्तॊ व्रतदानवन्दनै:।।" जफ िोई ग्रह अशब ु गोचय िये मा अननष्ट ग्रह िी भहादशा मा अन्तदण शा हो तो उस ग्रह िो प्रसन्न ियने िे भरए व्रत. गुरू िी उन्नीस हजाय. शाॊनत आदद द्वाया उसिे अशुब पर िा ननवायण ियना चादहए। ऋषष ऩायाशय द्वाया फताई गई जऩ सॊख्मा : ऋषष ऩायाशय जी ने सम ू ण िी जऩ सॊख्मा सात हजाय. जऩ. शनन िी तेईस हजाय. आचरेषा औय भघा िो अनत िदठन भानते हुए तीन गामों िा दान फतामा गमा है । ये वती औय अजचवनी भें दो गामों िा दान औय अन्म गण्ड नऺरों िे दोष मा किसी अन्म दष्ु ट दोष भें एि गाम िा दान फतामा गमा है । ज्मेष्ठा नऺर िी िन्मा अऩने ऩनत िे ब़डे बाई िा षवनाश ियती है औय षवशाखा िे चौथे चयण भें उत्ऩन्न िन्मा अऩने दे वय िा नाश ियती है । अत: इनिे षववाह िे सभम तो अवचम ही गोदान ियाना चादहए। आचरेेेषा िे अॊनतभ तीन चयणों भें जन्भ रेने वारी िन्मा मा ऩुर अऩनी सास िे भरए अननष्टिायि होते हैं तथा भूर िे प्रथभ तीन चयणों भें जन्भ रेने वारे जाति अऩने ससुय िो नष्ट ियने वारे होते हैं अत: इनिी शाॊनत अवचम ियानी चादहए। अगय ऩनत से ब़डा बाई ना हो तो मह दोष ्ेा नहीॊ रगता है । ऩायाशय अनतरयक्त रगबग सबी होया ग्रॊथ शास्त्रिायों ने ग्रहों िी शानत िो षवशेष भहत्व ददमा है । परदीषऩिा िे यचनािाय भॊरचे वय जी ने एि स्त्थान ऩय भरखा है कि . चॊद्रभा िी ग्मायह हजाय. शुक्र िी सोरह हजाय. ज्मेष्ठा.