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बायतीम ज्मोततष के नऺत्र भण्डर ऩय ध्रव

ु ताये के सभान दे दीव्मभान है डा. फी. वी. यभन। 8
अगस्त 1912 को जफ इस भहान व्मक्ततत्व ने जन्भ लरमा चन्र भग
ृ लिया नऺत्र भें थे तथा
उदमभान यालि थी कॊु ब। सम
ू य लसदघाॊत एवॊ "फह
ृ द जातक" के दो श्रोकों से उनकी वैददक ववदमा का
िब
ु ायॊ ब हुआ। जीवन भें सॊघषय के कई कदिन दौयों से गज
ु यते हुए डॉ. यभन ने सपरता के उन
सौऩानों को हुआ कक उन्हें "आधतु नक ज्मोततष का वऩताभह" कहना अततश्मोक्तत नहीॊ होगी। "द
एस्रोरोक्जकर भै$गजीन" के भहान सॊऩादक ज्मोततष के प्रतत उनकी आस्था एवॊ तनष्िा की अभय
कृतत है । डॉ. यभन ने भण्
ु डेन ज्मोततष से अद्भत
ु बववष्मवाणिमाॊ की। 28-7-1974 भें सचयराईट नाभक
ऩटना से प्रकालित रयऩोटय इस प्रकाय है -
"1937 की गलभयमों भें ववश्व के दो ही व्मक्तत ववश्व मद्ध
ु के प्रतत सॊिमहीन थे-ववनसन चर्चयर एवॊ "द
एस्रोरोक्जकर भै$गजीन" के भहान सॊऩादक डॉ. फी.वी. यभन"।
सन ् 1947 भें उन्होंने ऩाककस्तान के जन्भ की तथा अप्रैर 1947 को भहात्भा गाॊधी की हत्मा की
बववष्मवािी की। उन्होंने कहा जफ ितन ककय भें 28 अॊि ऩय होंगे तफ बायत के भहान जननेता की
हत्मा होगी। 1943 के लसतम्फय अॊक भें उन्होंने कहा, चन्र अॊतदय िा का दस
ू या बाग 11 अतटूफय, 1944
को िुरू होकय नौ भहीने चरेगा। इसी कार भें दहटरय का अॊत तनक्श्चत है तथा भॊगर की प्रवक्ृ त्त
के कायि उसका अॊत उग्र होगा। 19 अप्रैर, 1945 को दहटरय दवाया आत्भहत्मा के साथ मह
बववष्मवािी पलरत हुई।
सन ् 1984 भें "इॊडडमन काउॊ लसर ऑप एस्रोरोक्जकर साइॊसेज" नाभक सॊस्था का फीजायोऩि उन्होंने
ककमा जो आज वटवऺ
ृ के रूऩ भें सॊऩूिय ववश्व भें अऩनी ज़डें पैरा यही है ।
डॉ. यभन का जन्भ 8 अगस्त, 1912 को सामॊ 7.42 ऩय फैंगरोय के तनकट हुआ। जन्भ के सभम उनकी
6 सार, 4 भहीने एवॊ चाय ददन की भॊगर की बोग्म दिा थी। रग्न क्स्थय यालि भें है , ितन एवॊ चन्र
चौथे बाव भें है , भॊगर, फुध एवॊ िुक्र सातवें बाव भें है । मह सबी क्स्थय यालिमों भें एवॊ एक-दस
ू ये से
केन्र भें है । सूमय एकभात्र ग्रह है जो चय यालि भें है तथा याहु एवॊ केतु दववस्वबाव यालिमों भें है ।
भॊगर, फुध एवॊ िुक्र से एक ग्रह चौथे बाव भें , ितन एवॊ चॊर दसवें बाव भें तथा गरू ु से तीन ग्रह
अथायत भॊगर, फुध एवॊ िुक्र दसवें बाव भें है ।
रग्न से छ: ग्रह केन्र भें है तथा गुरू 10वें बाव भें क्स्थत होकय दस
ू ये बाव को दे खता है ।
महाॊ गुरू छिे बाव भें क्स्थत सूमय ऩय दृक्ष्टऩात कयता है जो उनकी ऩत्नी को उनके ववचायों का
सभथयक एवॊ सहमोर्गनी फनाता है तथा याजरऺिा मोग का तनभायि कयता है ।
वह ववश्व के ज्मोततवषमों के सयताज थे तथा सन ् 1970 भें सॊमत
ु त याष्र सॊघ भें "ये लरवेंस ऑप
एस्रोरोजी इन भॉडनय टाईम्स" ववषम ऩय व्माख्मान ददमा।
कायकाॊि कुण्डरी भें आत्भकायक चन्रभा लसॊह भें है तथा िब
ु ग्रहों से दृष्ट है । अत: मह याजमोग
फनाता है । ग्रहों की केन्र स्थाऩना दवाया सभझा जा सकता है कक ककस प्रकाय "फॊगरौय वेंकटयभन"
एवॊ उनकी ऩत्नी ने दो दिकों तक गयीफी का साभना ककमा ऩयन्तु अऩने आदिो से कबी कोई
सभझौता नहीॊ ककमा। डा. यभन ने स्वमॊ कहा कक उनके दादा दवाया की गई उ”ाावर एवॊ सपर

फध ु रग्न से सप्तभ एवॊ दिभ ् भें क्स्थत है । मह ऎसे िब ु रऺि है क्जसने उन्हें ववदवतजनों से अऩाय सम्भान ददरवामा एवॊ दीघायमु प्रदान की। सूमय से दववततम क्स्थत फुध. गरू ु एवॊ ितन भदु रत हैं.य भॊगर. िक्र ु दीन है . यभन मह सहन नहीॊ कय ऩाए तथा तीखे स्वय भें प्रततयोध कयते हुए कहा कक उन भहािम को उस ववषम ऩय फोरने का अर्धकाय नहीॊ है क्जसकी उन्हें जानकायी नहीॊ है । ऩरयिाभ स्वरूऩ उन्हें कऺा से तनकार ददमा गमा ऩयन्तु फाहय जाने से ऩहरे उन्होंने व्माख्माता को चेतावनी बये स्वय भें कहा कक इस वषय के अॊत तक उन्हें . िुक्र एवॊ भॊगर वेिी मोग का तनभायि कयते हैं। डा. क्जससे उन्हें जीवन भें सुख की प्राçप्त हुई। चतुथेि एवॊ नवभेि िुक्र सप्तभ बाव भें लसॊह यालि भें हैं तथा दिभेि भॊगर से मुतत कयते हुए कहर मोग फनाते है । दिभ भें गुरू एवॊ सप्तभ भें फुध एवॊ िुक्र सयस्वती मोग फनाते हैं। अत: उन्होंने अऩने ऻान से प्रलसदतघ प्राप्त की। दिभ बाव भें वक्ृ श्चक यालि है जो जर यालि है . िुक्र के नऺत्र भें होकय मोगकायक है । िुक्र केतु के नऺत्र भें है जो अष्टभ बाव भें क्स्थत है । इस प्रकाय वेिी मोग िुक्र प्रधान होकय धन धान्म की प्राçप्त कयाता है । गुरू ितन के नऺत्र भें है जो रग्नेि है तथा चन्र के साथ ववयाजभान है । गुरू चन्र से केन्र भें होकय गजकेसयी मोग का तनभायि कयता है । चतुथय एवॊ दिभ बाव के पर उन्हें सदा प्राप्त हुए। रग्न से दिभ गुरू अभर मोग का तनभायि कयते हैं। िुक्र की दिा भें उन्हें अऩाय सम्भान की प्राçप्त हुई। ऩॊचभेि फुध एवॊ षष्िे ि चन्र केन्र भें क्स्थत हो साॊख्म मोग का तनभायि कयते है . िक्र ु ितन से चतथ ु य है . यभन फध ु की दिा भें थे। फध ु ऩॊचभेि एवॊ अष्टभेि होकय सप्तभ भें ववयाजभान है जो भायक है ऩयन्तु वह भायकेि के नऺत्र भें नहीॊ है । अवऩतु चतथ ु ेि एवॊ नवभेि िक्र ु के साथ है जो मोककायक है । फध ु ब्रrाा मोग का तनभायि कयता है । गरू ु िक्र ु से चतथ ु य हो नवभ बाव भें क्स्थत है . भॊगर एवॊ ितन भें चेष्टाफर है । 18-08-1988 तक डा.फुध एवॊ गुरू वगोत्तभ हैं.जीवन की बववष्मवािी ऩय उन्हें जो अटूट ववश्वास था वही उन्हें हय ऺि रडने को प्रेरयत कयता था। इस कुण्डरी की अन्म वविेषाएॊ इस प्रकाय है :. चन्र भर ू त्रत्रकोि यालि है । सम ू . फध ु . जहाॉ गुरू ववयाजभान है तथा दिभेि भॊगर नवाॊि कुण्डरी भें चय यालि भें क्स्थत है । इससे उन्होंने ज्मोततष के प्रसाय के लरए अनेक रम्फी ववदे ि मात्राएॊ की। षष्िे ि का चतुथय बाव भें ितन के साथ मुतत कयना एवॊ गुरू से दृष्ट होना उन्हें कभ आमु भें ही रेखक फनाता है ऩयन्तु कभ आमु भें ही भाता से वॊर्चत कयता है । एक फाय अॊग्रेजी के व्माख्माता ने ज्मोततष के ववषम भें आऩक्त्तजनक दटप्ऩिी की। उन्होंने "स्काउट क्तवनदटन डुयवाड्र" के रेखों का हवारा दे ते हुए कहा कक एक ज्मोततषी आसभान की ओय दे खते हुए कुछ गणित कयते हुए जा यहा था। वह गड्डे भें र्गय गमा तथा जान से हाथ धो फैिा। उन्होंने भजाकक फनामा कक वह स्वमॊ अऩने बववष्म से अनजान था। डा. यभन को ऩरयवाय का असीभ सुख प्राप्त हुआ। भॊगर.

यभन ऩय दफाव डारा कक वह अऩनी फात के लरए ज्मोततष प्रभाि प्रस्तुत कयें । उन्होंने गोचय के ितन की फात दोहया दी। ऩक्ण्डत जी ने कई ऩुस्तकों से ि ्£ाोकों का हवारा दे ते हुए उनकी फात को नकाय ददमा। मह घटना बुरा दी गई। आि भाह ऩpाात 25 वषय का एक मुवक उनके ऩास आमा तथा फधाई दे ते हुए कहा कक उस व्माख्माता के लरए की गई उनकी बववष्मवािी सत्म गई। उनके वऩता की भत्ृ मु डा. यभन को फुरवामा गमा तथा उस व्माख्माता की जन्भकुण्डरी ददखाकय ऩूछा गमा कक वह उस तनष्कषय तक कैसे ऩहुॊचक े ् डा.दब ु ायग्म की कारी छामा से गुजयना होगा। अगरे ददन डा. यभन का इस फात की प्रसन्नता थी कक वह व्मक्तत कपय कबी ज्मोततष का अऩभान नहीॊ कये गा ऩयन्तु खेद था कक ऎसा वततव्म उन्होंने ऩूयी कऺा भें इस प्रकाय ददमा। . यभन को आpमय हुआ। वह ववदवान ऩक्ण्डत उनका कुर ज्मोततषी था तथा मकीकन उनके वततव्म को काटने के लरए वहाॉ ववयाजभान था। उनके अनुसाय आने वारे दो-तीन वषो भें दब ु ायग्म की छामा बी उन्हें नहीॊ छू सकती। उन्होंने डा. यभन का वततव्म क्रोधवि ददमा गमा था। जन्भ ऩत्रत्रका तो उन्होंने दे खी ही नहीॊ थी। वह जन्भ ऩत्रत्रका तनम्न प्रकाय थी। ऩत्रत्रका फरवान थी तथा वह वततव्म जन्भ ऩत्रत्रका ऩय आधारयत नहीॊ था. वह तो ऺणिक क्रोध का ऩरयिाभ था। उस जन्भ ऩत्रत्रका भें ितन नवें बाव भें थे तथा वषय अन्त भें गोचय भें ितन नवें बाव से चन्रभा को ऩाय कयने वारे थे। डा. यभन दवाया ददए गए सभम भें ही हुई। डा. यभन ने अऩने व्माख्माता से इसकी चचाय कयते हुए उन्हें वषय अन्त तक उनके वऩता की भत्ृ मु का सॊकेत ददमा। मह चचाय महाॉ सभाप्त नहीॊ हुई औय व्माख्माता ने उन्हें अगरे ददन कपय फर ु वामा। अगरे ददन उनके घय भें एक ववदवान ऩक्ण्डत को दे खकय डा.