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ज्मोतिष के प्रससद्घ ग्रॊथ परदीपऩका के मोगाध्माम भें तनम्न श्रोक भें ऩॊच भहाऩुरूष मोगों का वर्णन ककमा गमा

है:-

रूचकभद्रकहं सक माऱवा:

सशशका इति ऩंच च कीतिििा:।

स्वभवनोच्चागिेषु चिष्ु टये क्षऺतिसि
ु ादिषु िान ् क्रमशौ विे िH

अथाणि ् ऩॊच भहाऩुरूष मोग रूचक, बद्र, हॊ स, भारव्म औय शश हैं जो क्रभश : भॊगर, फुध, फह
ृ स्ऩति, शक्र
ु औय शतन के जन्भऩत्रिका भें , केन्द्र भें
स्वयासश अथवा उच्चा यासश भें स्स्थि होने ऩय फनिे हैं। प्रस्िुि रेख भें हभ भारव्म मोग का पवस्िि
ृ पववेचन कयें गे। भॊिेश्वय जी के अनुसाय-

ऩुष्टाङगे धतृ िमान्धनी सुिवधू भाग्यान्न्विो वधिनो

माऱव्ये सुखभुवसुवाहनयशा ववद्वान्रसन्नेदद्रय :H

अथाणि ् भारव्म मोग भें जन्भ रेने वारा व्मस्ति आकषणक , काॊतिभान, ऩुष्ट शयीय वारा, धैमव
ण ान, पवद्वान, प्रसन्नचचत्ि यहने वारा, सदै व वपृ ि
को प्राप्ि कयने वारा, पववेकशीर फुपि का धनी होिा है । उसको सभस्ि ऎश्वमण, धन-सॊऩस्त्ि, सॊिान सुख आदद सहज ही प्राप्ि हो जािे हैं। वह
सौबाग्मशारी होिा है, उसे बौतिक सख
ु आसानी से प्राप्ि हो जािे हैं। वाहनों का ऩमाणप्ि सख
ु िथा उसकी कीतिण औय प्रससपि सवणि पैरिी है ।
वह जन्भजाि पवद्वान होिा है, सुफोध भति वारा औय सुखों को आजीवन बोगने वारा होिा है।

ज्मोतिष ग्रॊथ फह
ृ ि ् ऩायाशय होया शास्ि के अनुसाय ऩॊच भहाऩुरूष मोगाध्माम के अन्िगणि तनम्न िीन श्रोक जन्भऩत्रिका भें स्स्थि भा रव्म
भहाऩुरूष मोग के गुर्ावगुर्ों की व्माख्मा दे िे हैं:

समौष्ठ: कृशमध्यश्च चन्द्रकान्न्िरूचच: ऩुमान ्।

सुगन्धौ नातिरक्िाङ्गो न ह्वस्वो नातििीघिकH

समस्वच्छरिो हन्स्िनाि आजानुबाहुधक
ृ ्।

मुखं ववश्वाङग ्ुुऱ िैƒये ववस्िारे िशाङग ्ुुऱमH्

माऱवो माऱवाख्यं च िे शं ऩाति सससन्धुकम ्।

सुखं सप्िति वषािन्िं भुक््वा याति सुराऱयमH्

अथाणि ् भारव्म मोग भें जन्भा व्मस्ति आकषणक होंठ वारा, चन्द्र के सभान काॊति वारा, गौयवर्ण, भध्मभ कद, धवर एवॊ स्वच्छ दॊ िावसरमुति,
हस्स्िगजणनामुति, रॊफी बुजाएॉ, दीघाणमु एवॊ बौतिक-साॊसारयक सुखों को बोगिे हुए जीवन व्मिीि कयिा है ।

शुक्रदे व के पप्रम पवषमों भें कपव , काव्म, गान, गीि-सॊगीि, असबनम करा, रसरि करा, यहस्म, गूढ़, कल्ऩनाप्रवर्िा, उच्चा कोदट का दशणन ,
रेखन, अध्माऩन, सभ्मिा औय सुसॊस्कृति, नम्रिा औय भद
ृ ब
ु ापषिा आदद हैं। अन्म शब्दों भें हभ कह सकिे हैं कक शुक्रदे व इन सभस्ि गुर्ों के
भहानामक हैं। जफ शुक्रदे व ककसी व्मस्ति की कॊु डरी भें भारव्म मोग का तनभाणर् कयिे हैं िो ऎसा व्मस्ति तनस्श्चि रूऩ से ही इन कराओॊ भें
से ककसी करा पवशेष का भभणऻ, ऩॊडडि, तनऩुर् होकय भहान प्रतिष्ठा एवॊ मश अस्जणि कय सभाज भें अऩने सरए एक पवसशष्ट स्थान फना रेिा
है औय भहाऩुरूषों की श्रेर्ी भें चगना जाने रगिा है ।

मदद हभ भारव्म मोग के धायक व्मस्ति की कॊु डसरमों का पवश्रे षर् कयें िो स्वि : अनुभान रगा ऩामेंगे कक भारव्म मोग व्मस्ति को ककस
सीभा िक ऊॉ चाई दे िा है । मद्मपऩ जन्भऩत्रिका भें केवर भाि भारव्म मोग ही श्रेष्ठिा नहीॊ दे िा अपऩिु अन्म ग्रह स्स्थति बी दे खी जा नी
चादहमे ऩयॊ िु कपय बी इस मोग भें उत्ऩन्न व्मस्ति भें शुक्र के पवषमों के प्रति एक भहान आकषणर् यहिा है औय वह इन्हीॊ पवषमों भें से ककसी

प्रेभ काव्म. श्रॊग ृ ाय प्रधान सादहत्म भें ऩरयवतिणि कय ददमा औय काव्म की अनुऩभ एवॊ अद्पविीम यचनाओॊ को जन्भ दे ने भें सपर यहे कीट्स। अल्ऩामु भें ही भहान सादहत्म का सज ृ न भारव्म मोग ने उच्चा के चॊद्र ने अष्टभ बाव (शोध सज ृ न) भें स्स्थि होकय. भारव्म मोग ने भहान सादहत्म की सजणना की ओय भोडकय ो़ . तनस्श्चि रूऩ से उनकी बावऩूर्ण यचनाएॊ भारव्म मोग की ही परश्रुति हैं. रग्न भें .प्रोि भहान यचनाओॊ को जन्भ ददमा। मह सफ भारव्म मोग के कायर् ही सॊबव हु आ कक उनके जन्भ रग्न भें शक्रु . शुक्र स्वयासश भें स्स्थि होकय भारव्म मोग का सज ृ न कय यहे हैं। जफ हभ अॊगे ्यजी सादहत्म का साॊगोऩाॊग अध्ममन कयिे हैं िो ऩािे हैं कक उन्होंने अॊग्रेजी सादहत्म को अभय कृतिमाॉ दे कय सभि ृ औय सम्ऩन्न फना ददमा। उनकी कृतिमों भें भानवीम दृस्ष्टकोर् औय भानव भन की गहयाइमों भें उियकय उन्हें मथाथण रूऩ भें काव्मात्भक यसधाया भें प्रकट कयना पवसशष्ट रूऩ से सभरिा है । अॊगे ्यजी सादहत्म मुगों िक उनका ऋर्ी यहे गा। कभणऺेि भें भारव्म मोग ऎसा सज ृ न कयने भें सऺभ यहा कक दहॊदी सादहत्म की उस्ति फय फस ही होठों ऩय आ जािी है - न्जन खोजा तिन ऩाइयां. स्वगह ृ ी शक्र ु . द्पविीम बाव (वार्ी) ऩय दृस्ष्ट डारकय कयवामा है औय वे भहान ऩुरूष फन गमे। . वह अॊग्रेजी सादहत्म को सभझ गमा। उनकी जन्भऩत्रिका भें िुरा यासश भें . ि र ु ा यासश भें स्स्थि होकय नीच के सम ू ण से मि ु हैं। मद्मपऩ शक्र ु नीच यासश स्स्थि सम ू ण से मि ु हैं ऩयॊ िु िफ बी उनकी काभास्ग्न को . प्रेभ गीि. काव्म यसधाय. फुध से मुि होकय भारव्म मोग फना यहे हैं। महाॉ "एक औय एक ग्मायह" होना बी चरयिाथण हो यहा है । एक ओय जहाॉ शुक्र िुरा यासश भें स्स्थि होकय भहाऩुरूष मोग फना यहे हैं िो दस ू यी ओय फुद्तघभान एवॊ िाककणक फुध का साथ बी सभर जाने से उन्होंने अऩनी वार्ी को भूिण रूऩ भें औय गहयाई से असबव्मति ककमा। भानवीम बावनाओॊ को अॊिभणन िक छू रेना ही इसरमट की पवशेषिा यही है । सॊबवि : मही कायर् यहा कक शुक्र की यहस्मभमी एवॊ बाव प्रवर्िा का सातनध्म ऩाकय इसरमट द्वाया ऩयभ यहस्मवादी सादहत्म का सज ृ न हुआ। उनका काव्म दफ ु ोध एवॊ दरू ु ह िो है ही ऩय यहस्मों से बी बया है । अॊग्रेजी सादहत्म भें सॊद ु यिा की असबव्मस्ति का ऩमाणम भाने जाने वारे जॉन कीट्स अॊग्रेजी काव्म के नवयसों के ससयभौय कहे जािे हैं। स्जन्होंने श्रॊग ृ ाय यस से ओि. ऩद- प्रतिष्ठा प्राप्ि कयािा है । भारव्म मोग भें जन्भा व्मस्ति अति आधुतनक ऩितिमों का अनुसयर् कयिे हुए सॊगीि.एस. प्राचीन पवद्माएॊ. रेखन औय पवषम भें डूफ जाने भें गहयी असबरूचच थी . असबनम आदद के ऺेिों भें ऩायॊ गि होकय प्रससि हो जािा है । अफ कुछ भहाऩुरूषों की कुण्डसरमों भें इस भारव्म मोग के प्रबाव को दे खिे हैं। प्रथभिमा हभ तनम्न िीन कपवमों की कॊु डसरमों का पवश्रेषर् कयें गे स्जन्हे ेे दे श भें ही नहीॊ अपऩिु पवश्व भें ख्माति प्राप्ि है । स्जनकी जन्भ ऩत्रिकाओॊ भें भारव्म मोग उऩस्स्थि था। सवणपवददि है कक पवसरमभ शेतसपऩमय अॊगे ्यजी बाषा के पवद्वा न कपव यहे हैं। उनकी कल्ऩनाशस्ति पवषम को ऩयाकाष्ठा िक रे जाने भें सभथण थी। उनकी कपविाएॊ भन को छूने वारी हैं औय पवशद् बाषा भें आज बी अॊग्रेजी ग्रॊथों भें उऩरब्ध हैं िथा उनको अॊग्रेजी सादहत्म ऩाठ्मक्रभ भें रगबग प्रत्मेक पवश्वपवद्मारम भें सस्म्भसरि ककमा गमा है । इनकी जन्भऩत्रिका के दशभ बाव भें . जो उन्हें भहान कपव फना सकीॊ। आॊग्र सादहत्म के एक अन्म कपव हुए हैं टी.एक भें शुक्र का आशीवाणद ऩाकय स्थापऩि हो जािा है । भहाऩुरूष मोग व्मस्ति के चरयि का तनधाणयर् कयिे हुए ऺेि पवशेष भें श्रेष्ठ िय. गहरे ऩानी ऩैठ अथाणि ् उनकी सादहत्म सज ृ न .इसरमट। इसरमट के फाये भें मह प्रससद्घ है कक जो उन्हें सभझ गमा.

ऩार नहीं ऩावदहं. सभ्मिा. शेष ्ेा ऩष्ृ ठ 52 ऩय भारव्म मोग न केवर करा एवॊ सौंदमण के भहान ऩायखी अपऩिु शक्र ु की बाव प्रवर्िा एवॊ सॊवेदनशीरिा इस कराकाय भें कूट. रोकपप्रमिा एवॊ शुक्र जैसी भहानिा के गुर्ों की झरक उनके दै नॊददन व्मवहाय भें सभरिी यहिी है । शुक्र एवॊ फह ृ स्ऩति दोनों गुरूओॊ के चिथ ु ण बाव भें स्स्थि होने से . चिुथण बाव अथाणि ् जन सभथणन के बाव भें दे वगुरू फह ृ स्ऩति के साथ फैठे हैं औय भारव्म मोग का सज ृ न कय यहे हैं। हभाये दे श के ऩूवण प्रधानभॊिी की ऩत्नी सोतनमा गाॉधी जी के व्मस्तित्व भें कभनीमिा . तनदे शन जैसे गुर्ों का प्रकटीकयर् कयिा है । मह कॊु डरी असबनेिा याजकऩूय की है .कूटकय बयी हुई थी। स्जन्होंने असबनम को नई औय शाश्वि ऊॉचाईमाॉ दी। एक औय उन्होंने पवषम प्रधान कपल्भों का तनभाणर् ककमा िो दस ू यी ओय उनके असबनम भें व्मस्ति के ददर को छू जाने वारी बावनाएॊ बी थीॊ। वे करा प्रवीर् िो थे ही.. शारीनिा. जो बायिीम ससने जगि के एक भहान कराकाय थे . स्जससे इस भहान चचिकाय द्वाया चचिकरा के अनुऩभ .. सुसॊस्कृति. चिुथण बाव भें स्स्थि होकय भारव्म मोग की यचना कय यहे हैं साथ ही शतन से मुि बी हैं जो भारव्म मोग की भहानिा के कायर् करा के साथ न्माम कयने भें बी ऩूर्ि ण मा सपर यहे । शुक्रदे व के भारव्म मोग की प्रशॊसा औय गुर्ानुवाद स्जिने ककए जाएॊ कभ होगें मदद भैं मूॊ कहूॉ कक बाढ़दहं कथा. िो उचचि ही होगा। . नत्ृ म. गान. कभनीम काॊति एवॊ आकषणक व्मस्तित्व एवॊ शुक्र की भहानिा के प्रसॊग भें कयें िो हभायी दृस्ष्ट अनामास ही हभाये दे श की एक नेिा सोतन मा गाॉधी की जन्भऩत्रिका ऩय जािी है । उनकी जन्भऩत्रिका भें िुरा यासश भें स्स्थि होकय शुक्र . मदद हभ शुक्र के भारव्म मोग का पवश्रेषर् उनकी पवनम्रिा. अद्पविीम औय शाश्वि चचिों की यचना की गई। उनकी मोनासऱसा और िी ऱास्ट सऩर जैसी भहान चचिकृतिमाॉ आज बी पवश्व भें प्रससि हैं। भारव्म मोग का एक औय रूऩ दे खें जो शुक्र के असबनम .नम्रिा. सहजिा. साथ ही उसी करा के ऩायखी फनकय उन्होंने उत्िभ तनदे शन की सभसार बी कामभ की जो आज बी कपल्भ उद्मोग भें जानी जािी है । वे ससने जगि भें रॊफे सभम िक छाए यहे । उनकी कॊु डरी भें िुरा यासश भें . उनभें शक्र ु जैसी सीखने की ऺभिा दे खने को सभरिी है । दह न्दी बाषा से ऩूर्ि ण मा अनसबऻ होने ऩय बी उन्होंने उसे सीखकय बायिीम जनभानस भें अऩनी एक जगह फनाई। मद्मपऩ दे श की जनिा का ऩूर्ण सभथणन बी उन्हें प्राप्ि था कक वे प्रधानभॊिी फनें ऩयन्िु उन्हौंने प्रधानभॊिी जैसा ऩद बी अस्वीकाय कय ददमा ककॊ िु इस मोग के प्रबाव भें ऩद नहीॊ होिे हुए बी तनमॊिक की बूसभका तनबा यही हैं। शुक्र की करात्भकिा के सरए हभें सॊसाय के भहान चचिकाय सरमो नादो दा पवन्सी के जन्भ चक्र को ऩढ़ना होगा। उनकी कॊु डरी भें शुक्र दे व सप्िभ बाव भें वष ृ यासश भें स्स्थि होकय भारव्म मोग की यचना कय यहे हैं। सप्िभ बाव करि मा काभ का बी बाव है ऩयॊ िु दशभ से दशभ अथाणि ् सप्िभ बाव बी आजीपवका का है । महाॉ स्स्थि शुक्र ने पवॊसी की काभ बावना को करा भें ऩरयर्ि कय ददमा औय करा को ऩयाकाष्ठा ऩय ऩहुॉचामा .