हमारा प्यारा भारत इं डिया और डहं दुस्तान के नाम से भी जाना जाता है !

हमारा भारत इतना प्राचीन है इसका अं दाजा हुम हड़प्पा और मोहनजोदरो की
प्राचीन यु ग से लगा सकते है ! हड़प्पा और मोहनजोदरो की प्राचीन यु ग की
शु रुवात हमारे भारत दे श से ही हुई है ! हड़प्पा और मोहनजोदरो भारत की
एक बहुत प्राचीन सभ्यता मानी जाती है ! भारत में सबसे पहले अयो का उदय
हुआ था!

दु डनया का सबसे प्राचीन वेद का उदय भारत में ही हुआ था! श्रीकृष और
श्रीराम ने भारत की ही भूम में ही अवतार डलया था! श्रीकृष और श्रीराम जै से
और भी बहुत से महान लोगो ने भारत में जन्म डलया था! श्रीकृष और श्रीराम ने
भारत में अवतार लेकर इसकी भूम को पडवत्र कर डदया है

In The Field Of Science….

गु प्त राजवं श या गुप्त वंश प्राचीन भारत के प्रमु ख राजवंशों में से एक था। इसे भारत का एक
स्वर्ण युग माना जाता. यह भारतीय इडतहास की अवडि में से एक था डजसमें कई वै ज्ञाडनक
खोजों को गुप्ता डवद्वानों द्वारा आगे रखा गया था। Scholars of this period include
Varahamihira and Aryabhata, who is believed to be the first to come up with the concept of
zero, postulated the theory that the Earth moves round the Sun, and studied solar and lunar
eclipses. Kalidasa, who was a great playwright, who wrote plays such as Shakuntala, and
marked the highest point of Sanskrit literature is also said to have belonged to this period.
The Sushruta Samhita, which is a Sanskrit text on all of the major concepts of ayurvedic
medicine with innovative chapters on surgery, dates to the Gupta period.

Doctors also invented several medical instruments, and even performed operations. The
Indian numerals which were the first positional base 10 numeral systems in the world
originated from Gupta India.. Aryabhata, a noted mathematician-astronomer of the Gupta
period proposed that the earth is round and rotates about its own axis. He also discovered that
the Moon and planets shine by reflected sunlight. Instead of the prevailing cosmogony in

इन उपायों में से मानव ने नृत्य को अरािना का प्रमुख सािन बनाया। प्राचीनता : भारतीय कला का इडतहास अत्यं त प्राचीन है । भारतीय डचत्रकारी के प्रारं डभक उदाहरर् प्रागैडतहाडसक काल के हैं .डजनके डनराकरर् हे तु इन्ोंने डकसी अदृश्य दै डवक शम्भि का अनुमान लगाया होगा तथा उसे प्रसन्न करने हे तु अनेकों उपायों का सहारा डलया. मानव इडतहास डजतना ही पुराना है । इसका का प्राचीनतम ग्रंथ भरत मुडन का नाट्यशास्त्र है । लेडकन इसके उिेख वेदों में भी डमलते हैं . जब मानव गुफाओं की दीवारों पर डचत्रकारी डकया करता था। भीमबेर्का की गुफाओं में की गई डचत्रकारी ५५०० ई. he explained eclipses in terms of shadows cast by and falling on Earth.पू . डजससे पता चलता है डक प्रागैडतहाडसक काल में नृ त्य की खोज हो चुकी थी। इस काल में मानव जंगलों में स्वतं त्र डवचरता था। िीरे -िीरे उसने समूह में पानी के स्रोतों और डशकार बहुल क्षेत्र में डर्क कर रहना आरं भ डकया. जो इससे पुराने समय के बताए गए हैं .[43] In the field of Games शतरं ज छठी शताब्दी के आसपास भारत से मध्य-पूवण व यूरोप में फैला.डजसकी पूडतण के बाद वह हषोिास के साथ उछल कूद कर आग के चारों ओर नृत्य डकया करते थे। ये मानव डवपदाओं से भयभीत हो जाते थे . जो चार म्भखलाडड़यों वाले चतुरंग नामक युद्ध खेल के रूप में डवकडसत हुआ और यह भारतीय महाकाव्य महाभारत में उम्भिम्भखत एक युद्ध व्यूह रचना का संस्कृत नाम है । भारत में ही मासणल आर्ण की शुरुवात हुई! भारत में मासणल आर्ण की शुरुवात वोडदिमणन ने डकया था! वोडदिमणन ने बाद में जाकर चीन वालो को भी मासणल आर्ण डसखाया था नृत्य का इडतहास. हाथी आडद के डचत्र बनाना सीख डलया था। अनामिकता : प्राचीन डशम्भियों और स्थापडतयों ने अपना नाम और पररचय अडिकां शतः गुप्त रखा क्ोंडक सृजनकताण के बजाय सृजन का महत्व डदया जाता था। इस कारर् अडिकां श कलाकृडतयााँ 'अनाम' हैं । . भालू. चीन. मध्य एडशया. भारत. पाडकस्तान और स्थानों पर पाये गए मोहरे . जहां यह शीघ्र ही लोकडप्रय हो गया। ऐसा कोई डवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है डक शतरं ज छट्ठी शताब्दी के पूवण आिुनुक खेल के समान डकसी रूप में डवद्यमान था। रूस.उस समय उसकी सवणप्रथम समस्या भोजन की होती थी.which eclipses were caused by pseudo-planetary nodes Rahu and Ketu. जो बहुिा पासों और कभी-कभी 100 या अडिक चौखानों वाले पट्ट का प्रयोग कराते थे। शतरं ज उन प्रारम्भिक खे लों में से एक है . अब पहले के कुछ डमलते -जु लते पट्ट खेलों के माने जाते हैं . से भी ज्यादा पुरानी है । ७वी ं शताब्दी में अजंता और एलोरा गुफाओं की डचत्रकारी भारतीय डचत्रकारी का सवोत्तम उदाहरर् हैं । प्रागडतहाडसक काल में भारतीयों ने जंगली जानवरों बारहडसंघा.

डजसकी समीक्षा करने वाले डवद्वानों ने यह डसद्ध डकया है डक यह नृत्य की भावभंडगमा से युि है । भारतीय नृत्य कला के इडतहास में.प्रथम मूल्यवान उपलम्भब्ध है जो आज भी डदिी के रािरीय संग्रहालय में रखी हुई है । हड़प्पा की खुदाई में भी एक काले पत्थर की नृत्यरत मूडतण प्राप्त हुई है डजसके संबंि में पुरातत्वेत्ता माशणल ने नतणकी होने का दावा डकया है । .इडतहास की दृडि में सबसे पहले उपलब्ध साक्ष्य गुफाओं में प्राप्त आडदमानव के उकेरे डचत्रों तथा हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाईयों में प्राप्त मूडतण या.उत्खनन से प्राप्त यह नृत्यां गना की मूडतण .हैं . डजनमें एक कां से की बनी तन्वंगी की मूडतण है .

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