You are on page 1of 2

ससोहन ललाल दद्विववेदद

ममुक्त जलानकसोष दवदकपददडियला सवे
ससोहन ललाल दद्विववेदद (22 फरवरद, 1906 - 1 मलारर, 1988) दहन्दद कवे प्रदसद्ध कदव हहैं। दद्विववेदद जद दहन्दद कवे रलाषषदय कदव कवे रूप ममें
प्रदतिदष्ठिति हहए। ऊजलार और रवेतिनला सवे भरपपूर ररनलाओओं कवे इस ररदयतिला कसो रलाषषकदव ककी उपलादधि सवे अलओंककति दकयला गयला। महलात्मला गलाओंधिद कवे दररन
सवे प्रभलादवति, दद्विववेदद जद नवे बलालसोपयसोगद ररनलाएएँ भद दलखखीं। 1969 ममें भलारति सरकलार नवे आपकसो पद्दशद उपलादधि प्रदलान कर सम्मलादनति दकयला
थला।
परररय[सओंपलाददति करमें]

जन्म : सन १९०६ ममें फतिवेहपमुर उत्तर प्रदवेर कवे दबन्दककी गलाएँव ममें हहआ।
दरकला : दहन्दद ममें एम.ए. तिथला सओंस्कक ति कला भद अध्ययन दकयला।
कलायरकवेत्र : दद्विववेदद जद दहन्दद कवे रलाषषदय कदव कवे रूप ममें प्रदतिदष्ठिति हहए। रलाषषदयतिला सवे सओंबदन्धिति कदवतिलाएएँ दलखनवे वलालसो ममें आपकला स्थलान मपूधिन्र य
हहै। महलात्मला गलाओंधिद पर आपनवे कई भलाव पपूरर ररनलाएएँ दलखद हहै , जसो दहन्दद जगति ममें अत्यन्ति लसोकदप्रय हहई हहैं। आपनवे गलाओंधिदवलाद कवे भलावतित्व कसो
वलारद दवेनवे कला सलाथरक प्रयलास दकयला हहै तिथला अदहओंसलात्मक कलादन्ति कवे दवदसोह व समुधिलारवलाद कसो अत्यन्ति सरल सबल और सफल ढओंग सवे कलाव्य
बनलाकर 'जन सलादहत्य' बनलानवे कवे दलए उसवे ममरस्परर्शी और मनसोरम बनला ददयला हहै।

आपककी ररनलाएएँ ओजपपूरर एवओं रलाषषदयतिला ककी परररलायक हहै। गलाओंधिदवलाद कसो अदभव्यदक्त दवेनवे कवे दलए आपनवे यमुगलावतिलार, गलाओंधिद, खलादद गदति, गलाएँववों
ममें दकसलान, दलाओंडिदयलात्रला, दत्रपमुरद कलाओंगवेस, बढसो अभय जय जय जय, रलाषषदय दनरलान आदद रदषर सवे लसोकदप्रय ररनलाओओं कला सकजन दकयला हहै,
इसकवे अदतिररक्त आपनवे भलारति दवेर, ध्वज, रलाषष प्रवेम और रलाषष नवेतिलाओओं कवे दवषय ककी उत्तम कसोदटि ककी कदवतिलाएएँ दलखद हहै। आपनवे कई प्रयलार
गदति दलखवे हहैं, जसो प्रलासयमुक्त हसोनवे कवे कलारर सलामपूदहक रूप सवे गलाए जलातिवे हहैं।
प्रममुख ररनलाएएँ : भहैरवद, पपूजलागदति सवेवलागलाम, प्रभलातिद, यमुगलाधिलार, कमु रलाल, रवेतिनला, बलाएँसमुरद, तिथला बचवों कवे दलए दपूधिबतिलासला।

भलारति
भलारति तिपू हहै हमकसो प्यलारला,
तिपू हहै सब दवेरवों सवे न्यलारला।

ममुकमुटि दहमलालय तिवेरला समुन्दर,
धिसोतिला तिवेरवे ररर सममुन्दर।

गओंगला यममुनला ककी हहैं धिलारला,
दजनसवे हहै पदवत्र जग सलारला।

अन्न फपू ल फल जल हहैं प्यलारवे,
तिमुझममें रत्न जवलाहर न्यलारवे!

रलाम कक ष्र सवे अन्तियलारमद,
तिवेरवे सभद पमुत्र हहैं नलामद।

हम सदहैव तिवेरला गमुर गलायमें,
सब दवदधि तिवेरला समुयर बढलाएएँ।