नई जदलंली बृहस्पवतिार, 17 अगस्् 2017

हर जीिन की
एक योजना,
जनभंंीक पतंंकाजरता का सातधां दशक एक उद््ेश्य
स्थापना िर्स ः 1948
और एक मूल्य
है, चाहे िह
वकसी भी उम््,
वलंग अथिा
िशंमीकरयों िो गले लगाने िी बात िहिर पंध
ं ानमंतीं ने घाटी में मरहम लगाने िी नीकत पर आगे बढंने िा संित
े तो कदया है, पर स्थान का हो...
इसिे कलए खुद सरिार िो जरंरी िदम उठाने होंगे और बातचीत िा रासंां खोलना होगा। ...शैरोन एंजल

कशंमीर में नई पहल मनुष्य और पय्ासिरण
लिवस के अवसर पर िाि लकिे के िािीर से को समझा जा सकता है। यह इस स्ती का ही नतीजा है लक नरमपंथी धड़े के मुलखया मीरवाइज उमर िाूक वारा िधानमंिी
की तरह कवि और
्वतंरता बोिते ुए िधानमंिी मोिी ने गािी या गोिी के
बजाय गिे िगाने को कचमीर समथया का हि
लजस तरह बताया है, वह थवागतयो्य है। उनकी
हाि के िौर मं वहां अनेक आतंकवािी मारे गए है और टेरर
िंलडंग पर भी कमोबेश नकेि कसी गई है। िेलकन पूरे कचमीर मं
इस स्ती से रोि और अलवचवास का जो माहौि बना है, वह
की लट्पणी की तारीि करने से यह भी पता ििता है लक घाटी
के िोग शांलत और लथथरता की बहािी का लकस बेसरी से इंतजार
कर रहे हं। कचमीर मं सकारा्मक बििाव अिबिा िाहने भर शब्दो् का वरश्ता
लट्पणी िो वजहं से बेहि अथापूणा है। एक तो िुभाा्यपूणा और खतरनाक है। ऐसी धारणा बन गई है लक सरकार से नहं होगा। यह कंर सरकार पर लनभार करता है लक वह
इसलिए लक उ्हंने यह बात तब कही है,जब कचमीर मं लहंसा, कचमीलरयं को आतंकवालियं का समथाक मानती है। लवगत मं कचमीलरयं को गिे िगाने की नीलत को लकस तरह ्यावहालरक
अशांलत और असमंजस के माहौि को एक साि से भी अलधक प्थरबाजं के लखिाि पैिेट गन का इथतेमाि और अब ूप िेती है। कचमीर मु्िे के समाधान की लिशा मं पहिे किम अंतरंधंवजन
समय हो गया है। आतंकी सरगना बुरहान वानी की मौत के बाि अनु्छेि 35 ए पर ििाां ने िुयोाग से अलवचवास के माहौि को के तौर पर सरकार एक सलमलत गलठत कर सकती है, लजससे
से ही घाटी एक या िूसरी वजह से उबि रही है। िधानमंिी की गहरा ही लकया है। इस पृ्ठभूलम मं िधानमंिी की लट्पणी से समाधान मं मिि लमि सकती है। िूंलक कचमीर मु्िे का चंद्कांत देिताले
इस लट्पणी का मह्व इसलिए भी बढ़ जाता है, ्यंलक कंर ज्ूजरयत, इंसाजनयत और ककमीजरयत की उस नीलत पर आगे समाधान राजनीलतक तरीके से ही होगा, सै्य तरीके से नहं, ऐसे
सरकार ने अभी तक घाटी मं अपने स्त इरािं का ही ्यािातर बढ़ने का संकेत लमिता है, लजसकी जूरत एनडीए के ही पूवा मं सरकार को संवाि शुू करने के बारे मं भी गंभीरता से सोिना
पलरिय लिया है। आतंकवाि के लखिाि सरकार के स्त ुख िधानमंिी अटि लबहारी वाजपेयी ने महसूस की थी। ुलरायत के होगा। तभी िधानमंिी की इस लट्पणी का मह्व होगा। हमारे समाज और समय मं झूठ और आडंबर
जजस तरह फैला है, उसकी अनेकायामी

संंी िा पंंेम और पुरंष िी उमंं
जजिलता के चलते रकनं के उतर देना
मुजककल है। श्दं का इथतेमाल भी दु्कर लग
रहा है। मनु्य का अपने पयाावरण से जरकता
जजस तरह कजठन होता जा रहा है, लगभग वही
जथिजत कजव और श्दं के बीच हो गई है। इन
रकनं को मं अपने आपसे मुखाजतब होने और
जूझने का ऐसा जनमंरण
समझ रहा ूं, जजनके
रत मं ुपहिे पिे पर इन इसकी लवपरीत लथथलत को थवीकार नहं करता। समाज मं उर के मामिे मं मलहिां की पसंि

भा
पजरणाम के बारे मं कुछ
लिनं जब हैरी मेि सेजल कोई अलधक उर की मलहिा अगर कम उर के का स्मान लकया जाएगा, यह सोिना ही नहं कहा जा सकता।
लि्म िि रही है। इसमं पुुि से िेम करती है और उससे शािी करना भोिापन है।
शाहुख खान और िाहती है, तो समाज मं उसकी आिोिना होने समाज की इस सोि को िेखते ुए हमारी यह संवेदनशीलता और
अनु्का शमाा मु्य िगेगी। ऐसी मलहिा लसर उठाकर शायि ही िि धारणा बन गई है लक उरिराज पुुिं को कम जवचार को अपाजहज
भूलमकां मं हं। शाहुख सके। हािांलक भारत मं सलिन तंिुिकर जैसे उर की लथियां अ्छी िग ही सकती हं। वे उनसे बनाने वाली शजततयं ने
ने इस लि्म मं अनु्का के लपता या िािा की उिाहरण भी हं, लजनकी प्नी ंजलि उनसे कुछ िेम कर सकती हं, उनसे शािी कर सकती हं। स्मानजनक शैली मं
भूलमका नहं की है, िेलमका की भूलमका की है। साि बड़ी हं। िेलकन ऐसे उिाहरण अपवाि ही इसमं कुछ भी अथवाभालवक नहं है। इसी सोि बीते जमाने की दजरंदगी
मं सोि रही थी लक पिास से ऊपर के पुुि अब हं। अगर यहां ऐसी लि्म बनाई जाए, लजसमं का अगिा िरण यह है लक िड़लकयं को अपने को अजिक घातक और
भी लि्मं मं नायकं की भूलमका कर पा रहे हं। बड़ी उर की नालयकpा और कम उर नायक हो, से अलधक उर के पुुि से ही शािी करनी जजिल बना जदया है।
अलभनेता की उर अलधक हो, तो हजा नहं है, पर तो बॉ्स ऑलिस मं उसका लपटना तय है। मं िालहए। मलहिा का पलत उससे िो साि बड़ा हो जब रचना्मक
अलभनेलियं की उर कम होनी िालहए। शाहुख लहंिी सीलरयि नहं िेखती। िेलकन ठीक इसी या बीस साि, इससे कोई िकक नहं पड़ता। पलत शजततयां हाजशये पर
की उर लतरेपन है, जबलक अनु्का उ्तीस साि समय पहरेदार जपया की नाम के एक सीलरयि को बड़ा ही होना िालहए, छोटा नहं। बां्िािेश के जनथसहायता का
की है। ्या ऐसी लि्म बनाने के बारे मं सोिा इसलिए लनशाना बनाया है लक उसमं िड़के से िलिात िेखक ुमायूं अहमि (अब लिवगंत) एहसास कर रही हं, सारे दबावं को जजनमं
जा सकता था, लजसमं अलभनेता की उर उ्तीस िड़की बड़ी है। यानी हमारा समाज, हमारी लजस सहजता के साथ अपनी बेटी की उर की
और नालयका की उर लतरेपन हो! पकत हमेशा बडंा ही हो, यह हमारे मानलसकता इसे थवीकार करने के लिए तैयार मलहिा से िूसरी शािी कर थवाभालवक जीवन
आपराजिक, राजनीजतक-सांथकृजतक
कायाकलाप भी शाजमल हं, बदााकत करना
हमने इससे भी उरिराज अलभनेतां को समाज िी पुरंषवचंचसंववादी सोच नहं है। लबता सकते थे, कोई मलहिा अपने बेटे की उर
मुजककल है। हमारी कजवतां मं संवेदनशीलता
कमउर अलभनेलियं के साथ काम करते िेखा है। इस संबंध मं आया एक सवेिण भी हमारी के पलत से शािी कर वैसा जीवन लबताने के बारे
चीनी कम मं अलमताभ बचन की िेलमका त्बू िा उदाहरण है। समाज इस पर मिि करता है। यह सवेिण बताता है लक पुुि मं नहं सोि सकती। हमारा समाज इसकी कहं मानवीयता के षरण और तु्छतां की
गजरमायमय रजत्ठा का तनाव साफ देखा जा
थी और जन:श्द मं लजया खान। जन:श्द के
नायक की उर पंसठ और िेलमका की उर
अमल िरता है, इसकलए किलंमों में िाहे लकसी भी उर के ्यं न हं, वे शािी करने
के लिए िौबीस या उससे कम उर की मलहिां
इजाजत नहं िेता।
पर माि कीलजए, इस सोि मं मेरा लवचवास सकता है। जनराशा-पराभव अिवा आशा-
उ्नीस थी। िलिण भारत की लि्मं मं नायक- भी हम ऐसा ही देखते हैं। को तरजीह िेते हं। और िड़लकयं की पसंि ्या नहं है लक पुुि हर उर मं लिट है, जबलक जवजय जैसी पदावली मं इस तनाव को देखना
नालयका की उर मं बुत ंतर रहता है। जलंगा है? तीस विा तक की मलहिां अपनी उर के या औरतं बीस से तीस साि के बीि ही लिट हं। ठीक नहं होगा।
लि्म मं रजनीकांत की उर लतरेसठ थी और तसंलीमा नसरीन अपने से थोड़ी बड़ी उर के पलत की कामना िूसरी और िीजं की तरह यह भी हमारे समाज नैजतकता की जड़ं ्यजतत के भीतर गहरे
सोनािी लस्हा की उर सिाइस। सोिह से करती हं। िेलकन िािीस की उर मं शािी करने की पुुिविाथववािी धारणा का उिाहरण है। जवकवास मं रहती हं। और िहजनयां-शाखां
अ्ठारह साि की उर मं रीिेवी साठ साि के वािी मलहिां की पसंि बिि जाती है। तब वे यानी पुुि जो िाहे वह कर सकता है, िेलकन सामाजजक-्यवहार, मानवीय-जरकते और
नायकं के साथ लि्मं लकया करती थं। लसनेमा मं लवचवजीत के बेटे िसेनलजत अब भी उर औरतं से िेम करना िाहते हं, उनसे शािी खुि से िो-तीन साि छोटे पलत की कामना मलहिा को इसकी इजाजत नहं है। लसनेमा ने चतुजदाक के घिना-्यापार मं होती हं। भूख,
शाहुख, सिमान और आलमर खान पिास नायक की भूलमका लनभाते हं। जबलक कभी करना िाहते हं। समाज से लसनेमा सीखता है। करती हं। इसका मनोवैञालनक कारण बताया समाज की कई बधमूि धारणा पर िोट की है, गरीबी, लाभ-लोभ, कपि और थपिाा कह
से अलधक की उर के हं। लिर भी बॉिीवुड मं उनके साथ नालयका की भूलमका लनभाने वािी या लसनेमा से समाज सीखता है! संभवतः िोनं जाता है। िेलकन मलहिां की पसंि-नापसंि तो कई नए आइलडया भी लिए हं। लहंिी लसनेमा भी सकते हं बाहर की तमाम जवरूप जथिजतयं के
उनकी िोकलियता थोड़ी भी कम नहं ुई है। अलभनेलियां मां और मौसी की भूलमकां मं खुि एक-िूसरे से सीखते हं। उरिराज पुुिं मं की भिा परवाह कौन करता है? लजस समाज मं इसका अपवाि नहं है। समकािीन लहंिी लसनेमा
माधुरी िीलित को सं्यास िे िेना पड़ता है। िीलत शािी के समय िड़लकयं से उसकी पसंि पूछने का पुुिविाथववािी सोि पर लटके रहना हैरान बीच ही नैजतकता की परख संभव है।
को कब की ढाि िुकी हं। पर िसेनलजत अब िड़लकयं या कम उर मलहिां की िाहत के
लजंटा, जूही िाविा, काजि, रानी मुखजीा- भी कमउर नालयकां के नायक हं। नतीजे भी लिखते हं। इंटरनेट िाइ्ड पोनोारािी की जूरत नहं समझी जाती और िेम को और उिास करता है। हो सकता है, आनेवािे (चंरकांत देवताले का 15 अगथत को जनिन हो गया।)
सबको खो जाना पड़ता है। बावजूि इसके लक भारतीय उपमहावीप के समाज मं मंने यह से भरे ुए हं। ंिाज िगाया जा सकता है लक लववाह मं त्िीि करने वािी साहसी िड़लकयां लिनं मं कभी वह इस मामिे मं भी कोई नया
इन सबकी उर शाहुख खान से कम है। बां्िा िीज खास तौर पर िेखी है। उरिराज पुुि कम यह पोना लकसके लिए है। िेलकन हमारा समाज कई बार मौत के घाट उतार िी जाती हं, उस आइलडया, नई सोि िेकर आए।
हजरयाली और रासंंा

मंजिलें और भी हैं
प््ेमा अय्यर
अफगावनस््ान मे् उलझ गए है् ट््ंप प््थमेश, नस्स और
जनरल िार्स
'नानी' बनकर युवां की
चव के शांलतलिय िेश िाहते हं लक
वव युधरथत अिगालनथतान मं शांलत बहाि
हो। यह िड़ाई से होगा या आपसी
बातिीत से, िेखने की बात है।
ट्प
्ं प्श
् ासन ने अफगावनस्ा् न नीवत पर फैसला लेने मे् देर कर दी है, वजससे
तावलबान और आईएस को अपना दायरा बढ़ाने मे् मौका वमल गया है। जर्री है वक
रथमेश की कहानी, जिसकी सोच
एक नसस ने बदल दी और उसने
िनरल वाडड मं इलाि कराया।

परेशानी दूर करती ूं लििहाि लहंसा थमने की उ्मीि नजर नहं आ रही है।
िूसरी तरि सुरिा हािात बि से बितर होते जा रहे हं।
अब वबना देरी अफगान नीवत पर फैसला वलया जाए और उस पर तुरत ं अमल हो।
रिमेश एक बड़ी आईिी कंपनी मं काम
करता िा। एक जदन अचानक उसकी
अमेलरका को अिगालनथतान मं िालखि ुए 16 साि पनाह िेने वािे िेशं की सूिी मं डाि लिया है, िेलकन
मेरा ज्म एक ऐसे पररवार मं ुआ था, जो रितीय रवकवयुध के समय ्यांमार हो िुके हं। उसके इलतहास के सबसे िंबे युध मं तजबयत खराब हो गई। जदकली के एक बड़े
इससे कोई बड़ा नतीजा लनकिने वािा नहं। िचकर व
छोड़कर बंबई (मुंबई) मं बस गया था। रिर मेरे रपता रि्ली मं कंर सरकार के तालिबान और ह्कानी नेटवकक को ख्म करने मं उसे जैश जैसे आतंकी संगठन नाम बििकर वहां से अपनी अथपताल मं वह इलाज के जलए गया।
मुलारजम बन गए, रजस कारण तीन साल की उर से ही मं रि्ली मं रह रही कोई उ्िेखनीय सििता नहं लमिी। लव्वंसक कारावाई ििाते रहे हं। तालिबान व ह्कानी डॉतिर ने उसे कम से कम दो जदन के जलए
ूं। मेरी मां एक सामा्य गृरहणी थं। बचपन मं मेरा पालन-पोषण पूणणतया इसके लवपरीत अब इथिालमक थटेट (आईएस) के नेटवकक भी सीमा पार करके अिगालनथतान मं खून भतीा होने को कहा। डॉतिर रिमेश की
पारंपररक ढंग से ुआ। बावजूि इसके मंने अपनी उच रिषा, रगरतवािी और कमांडरं ने तालिबान के साथ हाथ लमिा लिया है और खराबा करते रहंगे। रंप के ऐसे सिाहकार भी हं जो पहचान वाले िे, इसजलए उनकी बात को
आधुरनक सं्थानं मं रगने जाने वाले रि्ली के लेडी रीराम कॉलेज से पूरी की। लपछिे कुछ स्ताह मं लजतने भी आ्मघाती हमिे ुए पालकथतान को आतंकवािी िेश घोलित करने के लिए वह गलत नहं मान सकता िा। जलहाजा
घर वालं के इस िैसले के पीछे उनकी आकांषा िायि मेरे रलए कोई हं, उसके लिए तालिबान और आईएस ने लज्मेिारी िी कुलदीप मशलवरा िे रहे हं। िेलकन अमेलरका अपने लहतं की पूलता वह रजजथरेशन काउंिर पर जाकर फॉमा
अरधकारी वर ढूंढने की रही हो। इसी बीच अ्ठारह साल की उर मं भारतीय है। हाि ही मं तालिबान और आईएस ने संयु्त ूप के लिए अभी ऐसा नहं करना िाहता। कई अमेलरकी भरने लगा। फॉमा जमा करने के बाद
से अिगालनथतान के एक गांव मं िजानं िोगं की ह्या तलधार सीनेटर अिगालनथतान मं भारत के साथ सहयोग बढ़ाए
वायुसेना के एक अरधकारी से मेरी िािी हो
गई। मेरी िािी को अभी िो साल भी नहं बीते की है। इस हमिे मं इन िोनं आतंकी संगठनं के बीि जाने के लिए रंप पर िबाव भी बनाए ुए हं। िेखा जाए
थे रक मेरे परत की एक िुघणटना मं मौत हो एक िुिाभ सहयोग पाया गया, जो अिगालनथतान के तो रंप िशासन ने अिगालनथतान नीलत पर िैसिा िेने
गई। परत की मौत के व्त मेरे पेट मं आठ सुरिा बिं के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। अब तक वह अपने सिाहकारं से अिगालनथतान मं मं कािी िेरी कर िी है, लजससे तालिबान और आईएस
महीने का गभण पल रहा था। इस हमिे मं मलहिां व बचं सलहत पिास आम अमेलरका की रणनीलत को िेकर लविार-लवमशा कर रहे को अपनी लव्वंसक कारावाइयं का िायरा बढ़ाने का
शहरी मारे गए। अिगान रा्रपलत अशरि गनी और हं। अमेलरकी लविेश मंिी रेक सलटिरसन का कहना है एक अ्छा मौका लमि गया है। अमेलरकी नीलत की
रजंिगी के इस ििणनाक मोड़ पर मेरा हौसला मु्य कायाकारी अ्िु्िा अ्िु्िा ने इस हमिे की लक रंप पहिे जैसी लथथलत को बनाए रखने के इ्छुक िशा-लिशा को िेकर काबुि लिंलतत है। वहां के िोग
टूट चुका था। परत के िेहांत के एक महीने लनंिा करते ुए इसे जंगी अपराध करार लिया। संयु्त नहं है। रंप की रा्रीय सुरिा टीम अिगालनथतान मं अपने अजीजं के शव उठाते-उठाते थक गए हं। जूरी
बाि मेरी बेटी का ज्म ुआ। समाज के रा्र की एक ताजा लरपोटट के अनुसार, अिगालनथतान और अलधक सैलनक भेजने या हटाने को िेकर बंटी ुई है लक अब लबना िेरी लकए अिगान नीलत पर िैसिा काउंिर पर बैठे ्यजतत ने उसे जनरल वॉडड
रहसाब से मुझे अपनी बेटी की परवररि एक मं इस साि के पहिे तीन महीनं मं 1,662 िोग मारे है। रंप ने खुि थवीकार लकया है लक यह उनके लिए लिया जाए और उस पर तुरंत अमि हो। अमेलरका का मं जाने को कहा। यह सुनते ही वह बोला,
रवधवा मां के तौर-तरीकं के रहसाब से करनी गए, लजनमं िगभग 20 िलतशत की लज्मेिारी आईएस एक बड़ा लनणाय है। आम ्याि यह है लक रंप अिगालनथतान मं कािी कुछ िांव पर िगा है। अ्यथा मं जकसी जनरल वॉडड मं नहं जाने वाला।
थी। मुझे सिेि कपड़े पहनने थे और ृंगार व तालिबान ने कबूि की है। अिगालनथतान मं जमीनी िड़ाई िड़ने के लिए अब ह्कानी और तालिबान और मजबूत हंगे। हो सकता मुझे अपना कमरा चाजहए। मं पैसे देने के
से िूर रहना था। पर मंने अपनी बेटी को िूसरी तरि डोना्ड रंप को अमेलरकी रा्रपलत का और अमेलरकी सैलनक तैनात करने के हक मं नहं हं। है, तालिबान वहां सिा पर लिर कालबज हो जाए, जलए तैयार ूं। काउंिर पर बैठा ्यजतत
रकसी सामा्य मरहला की तरह पाला। मंने पि संभािे छह महीने से भी ्यािा हो गए हंै, िेलकन अमेलरका ने यं तो पालकथतान को आतंकवालियं को लजससे 9/11 जैसी घटना लिर घट सकती है। बोला, अथपताल मं भीड़ ्यादा होने की
मैं चाहती हूं कि सभी लोगं की परवाह नहं की। वजह से कोई कमरा खाली नहं है। मन ही
लोग दूसरे धमंों ं िे सौभा्य से मुझे अपने परत की मृ्यु के मन वह सोचने लगा, जनरल वॉडड और मं।
मुआवजे ्वूप भारतीय वायुसेना के खुली जखडंकी मं जकसी और अथपताल मं चला जाऊंगा,
पंकं त सकहषंणु बने,ं
कंयोंकि यह आज िी
नागररक रिासरनक संगठन मं काम करने
का मौका रमला। हालांरक यह अवसर भी
सबसे व्यस्् हािड्ा स्टेशन
अगर माजलक न जमला तो पर जनरल वॉडड मं नहं ुकूंगा। तभी पीछे
से रिमेश के डॉतिर वहां आए और
एि बडंी जरंरत है। मुरककलं भरी िुुआत लेकर आया। मुझे कई उ्हंने एक नसा से रिमेश को जमलवाया।
ऐसे जूरनयर लोगं के नीचे काम करना पड़ा, भारत मं यातायात के लिए रेिवे सबसे महारा्र के र्नालगरी लजिे के काटिुक गांव मं एक िाइमरी थकूि वह नसा काफी उरदराज िं और बुत
जो कभी मेरे परत को सलाम ठंकते थे। अपनी बेटी की अ्छी परवररि के रलए िमुख जलरया है। पलचिम बंगाि की था। किा िि रही थी। किा मं कोई तीस-पंतीस छाि थे। आज के अ्छे से पेश आ रही िं। वह रिमेश को
मंने नौकरी के अलावा कई िूसरे पाटट टाइम काम भी रकए। मुझे योग आता था राजधानी कोिकाता का हावड़ा रेिवे लहसाब से यह सं्या पयाा्त नहं है, पर लजन लिनं की यह बात है, उसके बेड तक ले गं। रिमेश कुछ
और मं िूसरं को इसका ररिषण भी िेती थी। बेटी की एक अिसर से िािी के थटेशन भारत का सबसे ्यथततम पंतीस छािं की सं्या मामूिी नहं थी। लशिकं की कमी और पढ़ने- बोलता, उससे पहले वह बोलं, बेिा, जचंता
बाि मंने नौकरी छोड़कर पंिन से गुजारा करने का िैसला रकया। रेिवे थटेशन है। आवृलि के मामिे मं लिखने मं ुलि की कमी, कह सकते हं लक पढ़ाई- मत करो। यहां तु्हं जसफफ इसजलए रखा गया
ऐसे ही बीतते व्त के साथ रि्ली मं मेरे घर के आसपास मेरी रजंिगी के संघषण हावड़ा थटेशन से िलतलिन िगभग एक लिखाई का मह्व तब खास नहं समझा जाता था। है, ताजक मंै हर वतत तुम पर ्यान दे सकूं।
के चचे आम हो चुके थे। पांच साल पहले एक पाररवाररक समारोह मं एक हजार रेिगालड़यां गुजरती हं। अ्यापक और छाि मं यं ही गपशप िि रही कमरे मं मं जकतना भी चाूं, हर वतत तो
परररचत ने मेरी रजंिारिली से रभारवत होकर िेहरािून के अपने कॉलेज मं बतौर थी। बातं ही बातं मं अ्यापक ने बचं से पूछा, नहं रह पाऊंगी न। रिमेश एकदम थत्ि
काउंसलर काम करने का र्ताव रखा। बचं की सम्यां अपने अनुभवं से भारत के व्यस््तम रेलिे स्टेशन यलि तु्हं राथते मं एक हीरा लमि जाए, तो तुम िा। नसा बोलं, यहां भी तुम उसी तरह रह
कम कर सकूं, मेरे रलए इससे बेहतर ्या हो सकता था! लेरकन रतहतर की उसका ्या करोगे? सकते हो, जजस तरह जकसी कमरे मं रहते
उर मं मं कोई काम कूं, यह मेरे िामाि को गवारा नहं था। उसने यह भी हािड्ा जंक्शन 974 और वह सब कर सकते हो, जो तु्हारा मन
मं इसे बेिकर कार खरीिूंगा, एक बािक ने कहा।
कहा रक आजकल के बचे बुत तेज हं, वे आपकी बात नहं मानंगे। पर जब हो। हम अपनी पूरी जजंदगी ऐसे ही कमरं मं
मंने िेहरािून मं अपना काम िुू रकया, तो नतीजे बेहि सकारा्मक रहे। मंने
िूसरे ने कहा, मं उसे बेिकर धनवान बन सतंसंग थवयं को बंद करते रहते हं। कभी दुजनया
नई वदल्ली 931 जाउंगा। लकसी ने कहा लक वह उसे बेिकर लविेश
एक िािी या नानी की तरह छारं को समझाना िुू रकया। उ्हं भी समझाया, की चकाचंि वाले कमरे मं, तो कभी
जो रेम-रसंग के चलते आ्मह्या तक की सोच लेते थे। इस तरह कई तरह
यािा करेगा। िौथे बािक का उिर था लक मं उस हीरे के मालिक का
कानपुर से्ट्ल 890 पता िगाकर उसे िौटा िूंगा। सफलता के कमरे मं, तो कभी जरकतं के
की मानरसक उलझनं मं जकड़े युवां की परेिानी को मंने अपने अनुभवं से कमरे मं। लेजकन असल जजंदगी का आनंद
सुलझाया। ऐसे लोगं के अरभभावक मेरे पास आकर मुझसे बचं की सम्या कल्याण
अ्यापक को इस तरह के उिर की उ्मीि नहं थी। सुनकर वह
813 िलकत थे, लिर उ्हंने कहा, मानो खूब पता िगाने पर भी उसका जकसी एक कमरे मं बंद होकर नहं, बजकक
ख्म करने का िॉमूणला पूछते। मं उनसे बस यही कहती रक आपका बचा जंक्शन, मु्ंबई
मालिक न लमिा तो? बािक बोिा, तब मं हीरे को बेिूंगा और इससे खुलकर जीने मं ही है। चाहे कमरा हो या
रक्मत को िोष िे रहा था, जबरक 95 ररतित रक्मत उसके अपने ही हाथं न हो, लेजकन रोशनी हमारे जदल मं होनी
मं है। मंने रजन बचं की काउंरसरलंग की, उनमं से एक रुव कपूर ने मेरे
पटना जंक्शन 771 लमिे पैसे से थकूि खोिूंगा। उसमं पढ़-लिखकर बचे िेश की सेवा
के लिए तैयार हंगे। लशिक बािक का उिर सुनकर ग्गि हो गए चाजहए। जनरल वाडड मं रिमेश पहली बार
ऊपर एक डॉ्यूमंटरी बनाई है, रजसका नाम रिया है कंपस नानी। मं अब विजयिाड्ा खुल कर जजंदगी जी रहा िा।
लोगं के बीच इसी नाम से जानी जाती ूं। आज मेरा 79वां ज्मरिन है और मं जंक्शन
760 और बोिे, बुत खूब, तुम बड़े होकर सिमुि िेशभ्त बनोगे।
चाहती ूं रक सभी लोग िूसरे धमों के ररत सरह्णु बनं, ्यंरक यह आज की लशिक का कहा स्य ुआ और वह बािक बड़ा होकर सिमुि जिंदगी को उसके सम्त ूप मं ्वीकार करो।
एक बड़ी जूरत है। इलाहाबाद 717 िेशभ्त बना। उसका नाम था, गोपाि कृ्ण गोखिे। जिंदगी का जसफफ एक भाग जिंदगी नहं होता।
जंक्शन रोत- walkthroughindia - स्यशरण शमाा