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||शशिवतताण्डवस्ततोत्रम म||

जटटाटववीगलज्जलप्रवटाहपटाववतस्थलल
गललऽवलम्ब्य लवम्म्बितटात भजभ ङङगतभङङगमटावलकटामङ ।
डमडङडमडङडमडङडमवनन्निन्निटादवडङडमवर्वयत
चकटार चण्डतटाण्डवत तन्निनोतभ न्निन वशिवन वशिवमङ ॥१॥

जटटाकटटाहसम्भ्रमभ्रमवनन्निवलम्पवन्निरर्वरवी_
ववलनोलववीवचवल्लरवीववरटाजमटान्निमरम र्ववन्नि ।
रगद्धगद्धगज्जलल्ललटाटपट्टपटावकल
वकशिनोरचनद्रशिलखरल रवतन प्रवतक्षणत मम ॥२॥

ररटाररल नद्रन्निवनदन्निवीववलटासम्बिनरम्बिभ नररभ


स्फभरवद्दिगनतसनतवतप्रमनोदमटान्निमटान्निसल ।
कक पटाकटटाक्षरनोरणवीवन्निरुद्धदरभ र्वरटापवद
क्ववचवद्दिगम्म्बिरल मन्निनो ववन्निनोदमलतभ वस्तभवन्नि ॥३॥

लतटाभजभ ङङगवपङङगलस्फभरत्फणटामवणप्रभटा
कदम्म्बिकभङङकभमद्रवप्रवलप्तवदग्वरमम ख भ ल।
मदटानरवसनररभ स्फभरत्त्वगत्तभ रवीयमलदरभ ल
मन्निनो ववन्निनोदमदभङ तभ त वम्बिभतर्वभ भतम भतर्वरर ॥४॥

सहस्रलनोचन्निप्रभकत्यशिलषललखशिलखर_
प्रसन्निम रवम लरनोरणवी वम्बिरसम रटाङङवघ्रिपवीठभनम ।
भजभ ङङगरटाजमटालयटा वन्निम्बिद्धजटाटजमटक
वश्रियय वचरटाय जटायतटात चकनोरम्बिनरशि भ लखरन ॥५॥

ललटाटचत्वरज्वलद्धन्निञ्जयस्फभवलङङगभटा_
वन्निपवीतपञ्चसटायकत न्निमवनन्निवलम्पन्निटायकमङ ।
सरभ टामयख
म ललखयटा ववरटाजमटान्निशिलखरत
महटाकपटावलसम्पदलवशिरनोजटटालमस्तभ न्निन ॥६॥

करटालभटालपरट्टकटारगदरगद ङ रगज्ज्वलद
ङ _ङ
रन्निञ्जयटाहहतवीककतप्रचण्डपञ्चसटायकल ।
ररटाररल नद्रन्निवनदन्निवीकभचटाग्रवचत्रपत्रक
प्रकल्पन्नियकवशिवल्पवन्नि वत्रलनोचन्निल रवतमर्वम ॥७॥

न्निववीन्निमलघमण्डलवी वन्निरुदरद ङ रभ र्वरस्फभरतङ_


कभहहवन्निशिवीवथन्निवीतमन प्रम्बिनरम्बिद्धकनररन ।
वन्निवलम्पवन्निरर्वरवीररस्तन्निनोतभ कक वत्तवसनररभ न
कलटावन्निरटान्निम्बिनररभ न वश्रियत जगद्धरभ त ररन ॥८॥
प्रफभल्लन्निवीलपङङकजप्रपञ्चकटावलमप्रभटा_
वलवम्म्बिकण्ठकनदलवीरुवचप्रम्बिद्धकनररमङ ।
स्मरवचच्छिदत परभ वचच्छिदत भववचच्छिदत मखवचच्छिदत
गजवचच्छिदटानरकवचच्छिदत तमनतकवचच्छिदत भजल ॥९॥

अखवर्वसवर्वमङङगलटाकलटाकदम्म्बिमञ्जरवी_
रसप्रवटाहमटाररभ वीववजकम्भणटामरव्रभ तमङ ।
स्मरटानतकत पभरटानतकत भवटानतकत मखटानतकत
गजटानतकटानरकटानतकत तमनतकटानतकत भजल ॥१०॥

जयत्वदभ्रववभ्रमभ्रमदभङ जभ ङङगमश्वसद_ङ
वववन्निगर्वमत्क्रमस्फभरत्करटालभटालहव्यवटाटङ ।
वरवमवद्धवमवद्धवमध्वन्निनमकदङङगतभङङगमङङगल_
ध्ववन्निक्रमप्रववतर्वतप्रचण्डतटाण्डवन वशिवन ॥११॥

स्पकषवद्विवचत्रतल्पयनोभर्वजभ ङङगममौवक्तिकस्रजनोर_ङ
गररष्ठरत्न्निलनोष्ठयनोन सहृभ वद्विपक्षपक्षयनोन ।
तकणटारववनदचक्षषभ नोन प्रजटामहवीमहलनद्रयनोन
समप्रवकवत्तकन कदटा सदटावशिवत भजटाम्यहमङ ॥१२॥

कदटा वन्निवलम्पवन्निरर्वरवीवन्निकभञ्जकनोटरल वसन्निङ


ववमक्ति
भ दमभ र्ववतन सदटा वशिरस्थमञ्जवलत वहन्निङ ।
ववमक्ति
भ लनोललनोचन्निनो ललटामभटाललग्न्निकन
वशिवलवत मनत्रमचभ चरनकदटा सख भ वी भवटाम्यहमङ ॥१३॥

इदमङ वह वन्नित्यमलवमक्ति भ मत्तभ मनोत्तमत स्तवत


पठनस्मरनबवभ नन्निरनो ववशिभवद्धमलवतसतततमङ ।
हरल गरभ मौ सभभ वक्तिमटाशिभ यटावत न्निटानयथटा गवतत
ववमनोहन्नित वह दलवहन्निटात सशि
भ ङङकरस्य वचनतन्निमङ ॥१४॥

पमजटावसटान्निसमयल दशिवक्त्रगवीतत यन
शिम्भपभ जम न्निपरत पठवत प्रदनोषल ।
तस्य वस्थरटात रथगजलनद्रतभरङङगयभक्तिटात
लक्ष्मम सदयव समभ ख भ म प्रददटावत शिम्भनभ ॥१५॥

इतत शश्रीररावण – ककतमम तशिव – तराण्दव स्ततोत्रमम सम्पपणर्णमम


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सरारर्णतशिवतराण्डवस्ततोत्रमम (Shiva Tandav Stotram)


शश्रीगणणेशिराय नमम

जटराटवश्रीगलज्जलप्रवराहपरातवतस्रलणे

गलणेऽवलम्ब्य लतम्म्बितरात भज भ म गमरातलकरामम |


भ ङमगतङ

डमडमडमडमडमडमडमतनननरादवडमडमवर्णयत

चकरार चण्डतराण्डवत तनतोतभ नम तशिवम तशिवमम ||१||

With his neck, consecrated by the flow of water flowing from the thick forest-like locks of hair,
and on the neck, where the lofty snake is hanging like a garland, and the Damaru drum making
the sound of Damat Damat Damat Damat, Lord Shiva did the auspicious dance of Tandava and
may He shower prosperity on us all.

परम पभज्यङ वशिव जवी कक सघन्नि जटटारूप वन्नि सल गतगटा मटातटा कटा उद्गम हनोतटा हय | उन्निकल गलल मम म्बिड़ड़ एवत लम्म्बिल सपर कक मटालटाएत लटक रहम हह | जनो वशिव जवी
डम-डम डमरू म्बिजटा कर प्रचण्ड तटाण्डव करतल हह, वल वशिवजवी हमटारटा कल्यटान्नि करम |

जटराकटराहसम्भ्रमभ्रमतननतलम्पतनरर्णरश्री

तवलतोलवश्रीतचवल्लरश्रीतवरराजमरानमपरर्णतन |

रगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललराटपट्टपरावकणे

तकशितोरचनद्रशिणेखरणे रततम प्रततक्षणत मम ||२||

I have a very deep interest in Lord Shiva, whose head is glorified by the rows of moving waves
of the celestial river Ganga, agitating in the deep well of his hair-locks, and who has the brilliant
fire flaming on the surface of his forehead, and who has the crescent moon as a jewel on his
head. May my love for God Shiva multiply every moment.

मलरवी परम पज्भ यङ भगवटान्नि वशिव जवी मम म्बिहहत गहरवी रूचवी हय | उन्निकटा मस्तक आकटाशिवीय गतगटा द्विटारटा मवहवमत हय, वजसकक म्बिलचयन्नि लहरल उन्निकल वशिशि कक जटटाओ मम
खलम्बिलवी मचटा रहवी हह | उन्निकल मस्तक पर अवग्न्नि कक प्रचण्ड ज्वटालटायम ररक-ररक करकल प्रज्ववलत हनो रहम हह| उन्निकटा मस्तक म्बिटाल चतद्रमटा सल ववभवम षत हय |
वशिवजवी मम मलरटा अन्नित भरटाग प्रवतक्षण म्बिढतटा रहल।

ररराररणेनद्रनततदनश्रीतवलरासम्बिनरभम्बिनरभर

स्फभरतद्दिगनतसनतततप्रमतोदमरानमरानसणे |
ककपराकटराक्षरतोरणश्रीतनरुद्धदभरर्णररापतद

क्वतचतद्दिगम्म्बिरणे (क्वतचतचचदम्म्बिरणे) मनतो तवनतोदमणेतभ वस्तभतन ||३||

May my mind seek happiness in the Lord Shiva, in whose mind all the living beings of the
glorious universe exist, who is the sportive companion of Parvati (daughter of the mountain
king), who controls invincible hardships with the flow of his compassionate look, who is all-
persuasive (the directions are his clothes).

जनो पटावर्वतवी जवी (पवर्वत रटाज कक म्बिलटवी) कल ववलटासमय रमणवीय कटटाक्षक मम परम आन्निवनदत वचत्त रहतल हह, वजन्निकल मस्तक मम सम्पमणर्व सकवष एवत प्रटाणवीगण वटास
करतल हह, तथटा वजन्निकल कक पटा दृवष मटात्र सल भक्तिक कक समस्त ववपवत्तयटात दरम हनो जटातवी हह, ऐसल वदगम्म्बिर (आकटाशि कनो वस सटामटान्नि रटारण करन्निल वटालल) वशिवजवी
कक आरटारन्निटा सल मलरटा वचत्त सवर्वदटा आवनदत रहल।

जटराभभजङमगतपङमगलस्फभरत्फणरामतणप्रभरा

कदम्म्बिकभङमकभमद्रवप्रतलप्ततदग्वरपमभखणे |

मदरानरतसनरभरस्फभरत्त्वगभत्तरश्रीयमणेदभरणे

मनतो तवनतोदमदभतत तम्बिभतर्णभ भपतभतर्णरर ||४||

May I seek wonderful pleasure in Lord Shiva, who is supporter of all life, who with his creeping
snake with reddish brown hood and with the luster of his gem on it spreading out variegated
colors on the beautiful faces of the maidens of directions, who is covered with a glittering upper
garment made of the skin of a huge intoxicated elephant.

मह उन्नि वशिवजवी कक भवक्ति मम आवनदत रहहह जनो सभवी प्रटावणयक कक कल आरटार एवत रक्षक हह, वजन्निकल जटाटटाओ त मम वलपटल सपर कल फण कक मवणयक कल प्रकटाशि पवीलल
वणर्व प्रभटा-समहभ रूपकल सर कल कटावतत सल वदशिटाओ त कनो प्रकटावशित करतल हह और जनो गजचमर्व सल ववभवभ षत हह।

सहस्रलतोचनप्रभकत्यशिणेषलणेखशिणेखर

प्रसपनरपतलरतोरणश्री तवरपसरराङमतघ्रिपश्रीठभपम |

भभजङमगरराजमरालयरा तनम्बिद्धजराटजपटक

तशयय तचरराय जरायतरात चकतोरम्बिनरभशिणेखरम ||५||

May Lord Shiva give us prosperity, who has the moon (relative of the Cakora bird) as his head-
jewel, whose hair is tied by the red snake-garland, whose foot-stool is grayed by the flow of dust
from the flowers from the rows of heads of all the Gods, Indra/Vishnu and others.

वजन्नि वशिव जवी कटा चरण इनद्र-ववष्णभ आवद दलवतटाओ त कल मस्तक कल पभष्पक कल रल म सल रतवजत हह (वजनहल दलवतटागण अपन्निल सर कल पभष्प अपर्वन्नि करतल हह), वजन्निकक
जटटा पर लटाल सपर्व ववरटाजमटान्नि हय, वनो चनद्रशिलखर हमम वचरकटाल कल वलए सम्पदटा दम।
ललराटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फभतलङमगभरा

तनपश्रीतपञ्चसरायकत नमतननतलम्पनरायकमम |

सभररामयपखलणेखयरा तवरराजमरानशिणेखरत

महराकपरातलसम्पदणेतशिरतोजटरालमस्तभ नम ||६||

May we get the wealth of Siddhis from Shiva's locks of hair, which devoured the God of Love
with the sparks of the fire flaming in His forehead, who is bowed by all the celestial leaders, who
is beautiful with a crescent moon

वजन्नि वशिव जवी न्निल इनद्रटावद दलवतटाओ त कटा गवर्व दहन्नि करतल हहए, कटामदलव कनो अपन्निल ववशिटाल मस्तक कक अवग्न्नि ज्वटालटा सल भस्म कर वदयटा, तथटा जनो सवभ दलवक
द्विटारटा पभज्य हह, तथटा चनद्रमटा और गतगटा द्विटारटा सशि
भ नोवभत हह, वल मरभ ल वसद्दिवी प्रदटान्नि करम ।

कररालभरालपरट्टकरारगद्धगद्धगज्ज्वल

द्धनञ्जयराहहतश्रीककतप्रचण्डपञ्चसरायकणे |

ररराररणेनद्रनतनदनश्रीकभचराग्रतचत्रपत्रक

प्रकल्पनयकतशितल्पतन तत्रलतोचनणे रततमर्णम ||७||

My interest is in Lord Shiva, who has three eyes, who has offered the powerful God of Love into
the fire, flaming Dhagad Dhagad on the flat surface of his forehead, and who is the sole expert
artist of drawing decorative lines on the tips of breasts of Parvati ( mother nature), the daughter
of the mountain king.

वजन्निकल मस्तक सल रक-रक करतवी प्रचण्ड ज्वटालटा न्निल कटामदलव कनो भस्म कर वदयटा तथटा जनो वशिव पटावर्वतवी जवी कल स्तन्नि कल अग्र भटाग पर वचत्रकटारवी करन्निल मम
अवत चतभर हय ( यहटाह पटावर्वतवी प्रकक वत हह, तथटा वचत्रकटारवी सकजन्नि हय), उन्नि वशिव जवी मम मलरवी प्रवीवत अटल हनो।

नवश्रीनमणेघमण्डलश्री तनरुद्धदभरर्णरस्फभरतम

कभहहतनशिश्रीतरनश्रीतमम प्रम्बिनरम्बिद्धकनररम |

तनतलम्पतनरर्णरश्रीररस्तनतोतभ ककतत्ततसनरभरम

कलरातनररानम्बिनरभरम तशयत जगद्धभरतररम ||८||

May Lord Shiva give us prosperity, who bears the burden of this universe, who is lovely with the
moon, who is red wearing the skin, who has the celestial river Ganga, whose neck is dark as
midnight of new moon night covered by many layers of clouds.
वजन्निकटा कण्ठ न्निववीन्नि ममघक कक घटटाओ त सल पररपणम र्व आमवस्यटा कक रटावत्र कल सटामटान्नि कटालटा हय, जनो वक गज-चमर्व, गतगटा एवत म्बिटाल-चनद्र द्विटारटा शिनोभटायमटान्नि हह तथटा
जनो वक जगत कटा म्बिनोर रटारण करन्निल वटालल हह, वल वशिव जवी हमल सवभ प्रकटार कक सम्पन्नितटा प्रदटान्नि करम ।

प्रफभल्लनश्रीलपङमकजप्रपञ्चकरातलमप्रभरा

वलतम्म्बिकण्ठकनदलश्रीरुतचप्रम्बिद्धकनररमम |

स्मरतचच्छिदत पभरतचच्छिदत भवतचच्छिदत मखतचच्छिदत

गजतचच्छिदरातरकतचच्छिदत तमनतकतचच्छिदत भजणे ||९||

I pray to Lord Shiva, whose neck is tied with the luster of the temples hanging on the neck with
the glory of the fully bloomed blue lotuses which looked like the blackness (sins) of the universe,
who is the killer of Manmatha, who destroyed Tripuras, who destroyed the bonds of worldly life,
who destroyed the sacrifice, who destroyed the demon Andhaka, the destroyer of the elephants,
and who controlled the God of death, Yama.

वजन्निकटा कण्ठ और कनरटा पमणर्व वखलल हहए न्निवीलकमल कक फय लवी हहई सनभ दर श्यटाम प्रभटा सल ववभभवषत हय, जनो कटामदलव और वत्रपभरटासरभ कल ववन्निटाशिक, सतसटार कल
द:भ खक कल कटाटन्निल वटालल, दक्षयज ववन्निटाशिक, गजटासरभ एवत अनरकटासरभ कल सतहटारक हह तथटा जनो मकत्यभ कनो वशि मम करन्निल वटालल हह, मह उन्नि वशिव जवी कनो भजतटा हह|ह

अखवर्ण(अगवर्ण) सवर्णमङमगलराकलराकदम्म्बिमञ्जरश्री

रसप्रवराहमरारभरश्री तवजकम्भणरामरभव्रतमम |

स्मररानतकत पभररानतकत भवरानतकत मखरानतकत

गजरानतकरानरकरानतकत तमनतकरानतकत भजणे ||१०||

I pray to Lord Shiva, who has bees flying all over because of the sweet honey from the beautiful
bunch of auspicious Kadamba flowers, who is the killer of Manmatha, who destroyed Tripuras,
who destroyed the bonds of worldly life, who destroyed the sacrifice, who destroyed the demon
Andhaka, the killer of the elephants, and who controlled the God of death, Yama.

जनो कल्यटान्निमय, अववन्निटावशि, समस्त कलटाओ त कल रस कटा अस्वटादन्नि करन्निल वटालल हह, जनो कटामदलव कनो भस्म करन्निल वटालल हह, वत्रपरभ टासरभ , गजटासरभ , अनरकटासरभ कल
सहटारत क, दक्षयजववध्वसक त तथटा स्वयत यमरटाज कल वलए भवी यमस्वरूप हह, मह उन्नि वशिव जवी कनो भजतटा हह।ह

जयत्वदभ्रतवभ्रमभ्रमदभजङमगमश्वस

तद्वितनगर्णमत्क्रमस्फभरत्कररालभरालहव्यवराटम |

तरतमतद्धतमतद्धतमध्वननमकदङमगतभङमगमङमगल

ध्वतनक्रमप्रवततर्णत प्रचण्डतराण्डवम तशिवम ||११||


Lord Shiva, whose dance of Tandava is in tune with the series of loud sounds of drum making
Dhimid Dhimid sounds, who has the fire on the great forehead, the fire that is spreading out
because of the breath of the snake wandering in whirling motion in the glorious sky.

अतयतत वलग सल भ्रमण कर रहल सपर कल फमफकटार सल क्रमशि: ललटाट मम म्बिढवी हहई प्रचतण अवग्न्नि कल मध्य मकदगत कक मतगलकटारवी उचच वरम-वरम कक ध्ववन्नि कल
सटाथ तटाण्डव न्निकत्य मम लवीन्नि वशिव जवी सवर्व प्रकटार सशि
भ नोवभत हनो रहल हह।

दृषतद्वितचत्रतल्पयतोभर्णज
भ ङमगममौतक्तिकस्रजतोरम

गररष्ठरत्नलतोष्ठयतोम सभहृतद्विपक्षपक्षयतोम |

तकणरारतवनदचक्षभषतोम प्रजरामहश्रीमहणेनद्रयतोम

समत प्रतव्रततक: कदरा सदरातशिवत भजम्यहम ||१२||

When will I worship Lord Sadasiva (eternally auspicious) God, with equal vision towards the
people and an emperor, and a blade of grass and lotus-like eye, towards both friends and
enemies, towards the valuable gem and some lump of dirt, towards a snake and a garland and
towards varied ways of the world.

कठनोर पत्थर एवत कनोमल शिय्यटा, सपर्व एवत मनोवतयक कक मटालटाओ,त म्बिहहमल्म य रत्न्नि एवत वमट्टवी कल टमकडक, शित्रम एवत वमत्रक, रटाजटाओ त तथटा प्रजटाओ,त वतन्निकक तथटा
कमलक पर सटामटान्नि दृवष रखन्निल वटालल वशिव कनो मह भजतटा हह।ह

कदरा तनतलम्पतनरर्णरश्रीतनकभञ्जकतोटरणे वसनम

तवमभक्तिदभमर्णततम सदरा तशिरम स्रमञ्जतलत वहनम |

तवलतोललतोललतोचनतो ललरामभराललग्नकम

तशिवणेतत मतत्रमभचचरनम कदरा सभखश्री भवराम्यहमम ||१३||

When will I be happy, living in the hallowed place near the celestial river, Ganga, carrying the
folded hands on my head all the time, with my bad thinking washed away, and uttering the
mantra of Lord Shiva and devoted in the God with glorious forehead with vibrating eyes.

कम्बि मह गतगटा जवी कल कच्छिटारगञभ मम वन्निवटास करतटा हहआ, वन्निष्कपट हनो, वसर पर अजत लवी रटारण कर चचत ल न्निलत्रक तथटा ललटाट वटालल वशिव जवी कटा मतत्रनोचचटार करतल
हहए अक्षय सख भ कनो प्रटाप्त करूतगटा।

तनतलम्प नरारनरागरश्री कदम्म्बि ममौलमतल्लकरा-

तनगभम्फतनभर्णक्षरनम रपतषणकरामनतोहरम।

तनतोतभ नतो मनतोमभदत तवनतोतदननींमहतनशित

पररशय परत पदत तदगत जतत्वषरात चयम ॥१४॥


Like ambrosial delightful pollen falling from flower garlands of divine women, the ultimate
abode of beauty - may blissful beauties of Mahadev keep on enhancing our minds, am always in
favor of it.

दलवटातगन्निटाओ त कल वसर मम गतथम ल पष्भ पक कक मटालटाओ त कल रड़तल हहए सगभ तरमय परटाग सल मन्निनोहर, परम शिनोभटा कल रटाम महटादवल जवी कल अतगक कक सतदभ रतटाएत परमटान्नितदयभक्ति
हमटारल मन्नि कक प्रसनन्नितटा कनो सवर्वदटा म्बिढटातवी रहम।

प्रचण्ड वराडवरानल प्रभराशिभभप्रचरारणश्री

महराष्टतसतद्धकरातमनश्री जनरावहहत जल्पनरा

तवमभक्ति वराम लतोचनतो तववराहकरातलकध्वतनम

तशिवणेतत मनत्रभपषगतो जगज्जयराय जरायतरामम ॥१४॥

Lord shiva is fire in the ocean, Animadik (female form of Shiva) ( eight super natural powers)
which burns all the sins. With prosperity in chants sung by devine women during marriage of
Lord Shiva, best of all mantras - Shiv mantra, may we destroy and win over worldy sufferings.

प्रचतड म्बिडवटान्निल कक भटातवत पटापक कनो भस्म करन्निल मम सवी स्वरूवपणवी अवणमटावदक अष महटावसवद्धयक तथटा चतचल न्निलत्रक वटालवी दलवकनयटाओ त सल वशिव वववटाह
समय मम गटान्नि कक गई मतगलध्ववन्नि सम्बि मतत्रक मम परमश्रिलष्ठ वशिव मतत्र सल पमररत, सटातसटाररक दनभ खक कनो न्निष कर ववजय पटाए।त

इदमम तह तनत्यमणेवमभक्तिमभत्तमतोत्तमत स्तवत

पठनस्मरनबभवननरतो तवशिभतद्धमणेततसतततमम |

हरणे गभरमौ सभ
भ तक्तिमराशिभ यरातत नरानयररा गततत

तवमतोहनत तह दणेतहनरात सभशिङमकरस्य तचततनमम ||१६||

Whoever reads, remembers and says this best stotra as it is said here, gets purified for ever, and
obtains devotion in the great Guru Shiva. For this devotion, there is no other way. Just the mere
thought of Lord Shiva indeed removes the delusion.

इस उत्त्मनोत्त्म वशिव तटाण्डव सनोत कनो वन्नित्य पढन्निल यटा श्रिवण करन्निल मटात्र सल प्रटावण पववत्र हनो, परतगरू
भ वशिव मम स्थटावपत हनो जटातटा हय तथटा सभवी प्रकटार कल भ्रमक सल
मक्ति
भ हनो जटातटा हय।

पपजरावसरानसमयणे दशिवक्त्रगश्रीतत

यम शिम्भभपपजनपरत पठतत प्रदतोषणे |

तस्य तस्रररात ररगजणेनद्रतभरङमगयभक्तिरात

लक्ष्मनीं सदयव सभमभतखत प्रददरातत शिम्भभम ||१७||


In the evening, after sunset, at the end of Puja, whoever utters this stotra sung by the one with the
ten heads (Ravana), which is dedicated to the worship of Shiva, Lord Shiva will indeed bless him
with great Lakshmi (prosperity) with all the richness of chariots, elephants and horses.

प्रटात: वशिवपजभ न्नि कल अतत मम इस रटावणकक त वशिवतटाण्डवस्तनोत्र कल गटान्नि सल लक्ष्मवी वस्थर रहतवी हह तथटा भक्ति रथ, गज, घनोडटा आवद सम्पदटा सल सवर्वदटा यभक्ति रहतटा
हय।

इतत शश्रीररावण-ककतमम

तशिव-तराण्डव-स्ततोत्रमम

सम्पपणर्णमम

Thus ends the Shiva-Tandava Stotra written by Mr. Ravana.

इस प्रकटार श्रिवी रटावण द्विटारटा वलवखत वशिव-तटाडत व स्तनोत्र समटाप्त हनोतटा हय।