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कुसम


साल भर क बात है , एक दन शाम को हवा खाने जा रहा था क महाशय नवीन से मल ु ाक़ात हो गयी। मेरे परु ाने
दो त ह, बड़े बेतकु लफ़ और मनचले। आगरे म मकान है , अ छे क व ह। उनके क व-समाज म कई बार शर क हो
चकु ा हूँ। ऐसा क वता का उपासक मने नह ं दे खा। पेशा तो वकालत का है ; पर डूबे रहते ह का य- चंतन म, आदमी
ज़ह न ह, मक़ ु दमा सामने आया और उसक तह तक पहुँच गये; इसी लए कभी-कभी मक़ ु दम मल जाते ह, ले कन
कचहर के बाद अदालत या मक़ ु दम क चचा उनके लए न ष ध है । अदालत क चारद वार के अ दर चार-पाँच
घंटे वह वक ल होते ह।

चारद वार के बाहर नकलते ह क व ह- सर से पाँव तक। जब दे खये, क व-म डल जमा है , क व-चचा हो रह है ,
रचनाएँ सन ु रहे ह। म त हो–होकर झम ू रहे ह, और अपनी रचना सन ु ाते समय तो उनपर एक त ल नता-सी छा
जाती है । क ठ वर भी इतना मधरु है क उनके पद बाण क तरह सीधे कलेजे म उतर जाते ह। अ या म म माधय ु
क सिृ ट करना, नगण ु म सगण ु क बहार दखाना उनक रचनाओं क वशेषता है । वह जब लखनऊ आते ह, मझ ु े
पहले सच ू ना दे दया करते ह। आज उ ह अनायास लखनऊ म दे खकर म झ
ु े आ चय हु आ- आप यहाँ कै से ? कु शल
तो है ? मझु े आने क सच ू ना तक न द । बोले- भाईजान, एक जंजाल म फँस गया हूँ। आपको सू चत करने का
समय न था। फर आपके घर को म अपना घर समझता हूँ। इस तक लफ़ ु क या ज़ रत है क आप मेरे लए
कोई वशेष बंध कर। म एक ज़ र मआ ु मले म आपको क ट दे ने आया हूँ। इस व त क सैर तो थ गत क िजए
और चलकर मेर वप -कथा सु नये।
मने घबड़ाकर कहा- आपने तो मझ ु े च ता म डाल दया। आप और वप -कथा। मेरे तो ाण सख ू जाते ह।

‘घर च लए, च शा त हो तो सन
ु ाऊँ !’

‘बाल-ब चे तो अ छ तरह ह ?’

‘हाँ, सब अ छ तरह ह। वैसी कोई बात नह ं है !’

‘तो च लए, रे ाँ म कुछ जलपान तो कर ल िजये।’

‘नह ं भाई, इस व त मझ
ु े जलपान नह ं सझ
ू ता।’

हम दोन घर क ओर चले।

घर पहुँचकर उनका हाथ-मँह
ु धल
ु ाया, शरबत पलाया। इलायची-पान खाकर उ ह ने अपनी वप -कथा सन ु ानी
शु क -
‘कुसमु के ववाह म आप गये ह थे। उसके पहले भी आपने उसे दे खा था। मेरा वचार है क कसी सरल कृ त के
यवु क को आक षत करने के लए िजन गण ु क ज़ रत है , वह सब उसम मौजद ू है । आपका या खयाल है ?’

मने त परता से कहा- म आपसे कह ं यादा कुसम
ु का शंसक हूँ। ऐसी ल जाशील, सघ
ु ड़, सल क़ेदार और
वनो दनी बा लका मने दसू र नह ं दे खी।

महाशय नवीन ने क ण वर म कहा- वह कुसम ु आज अपने प त के नदय यवहार के कारण रो-रोकर ाण दे
रह है । उसका गौना हुआ एक साल हो रहा है , इस बीच म वह तीन बार ससरु ाल गयी, पर उसका प त उससे बोलता

उसका दसू रा ववाह होनेवाला है । कुसम ु का बरु ा हाल हो रहा है । आप शायद उसे दे खकर पहचान भी न सक। रात.व तार म कसी ऊँचे दज क श त म हला से कम नह ं। आपने उसके लेख दे खे ह। मेरा याल है . न मेरे प का उ र दे ता है । न जाने या गाँठ पड़ गयी है क उसने इस बेदद से आँख फेर ल ।ं अब सन ु ता हूँ. नह ं तो शी ह उसके जीवन का अ त हो जायेगा और उसके हाथ हम दोन ाणी भी सधार जायगे। उसक यथा अब नह ं दे खी जाती। नवीनजी क आँख सजल हो गयीं। मझ ु े भी अ य त ोभ हुआ। उ ह तस ल दे ता हुआ बोला. इससे आपको व वास हो गया है क म चतरु सँपेरे क भाँ त िजस दल को चाहूँ. या या बात है ? आ ख़र. प तदे व ठ गये ह गे। म तो क पना ह नह ं कर सकता क कुसम ु -जैसी बा लका से कोई पु ष उदासीन रह सकता है . पर हम अपनी कुसम ु को पाकर स तु ट थे और अपने भा य को ध य मानते थे। उसे कतने लाड़.आप इतने दन इस च ता म पड़े रहे . इस लए मने स दयता से कहा.ए.ह नह ।ं उसक सरू त से बेज़ार है । मने बहुत चाहा क उसे बल ु ाकर दोन म सफ़ाई करा दँ .दन रोने के सवा दस ू रा काम नह ं है । इससे आप हमार परे शानी का अनम ु ान कर सकते ह। िज़ दगी क सार अ भलाषाएँ मट जाती है । हम ई वर ने पु न दया. क त ु प त क ि ट म वह पाँव क धल ू के बराबर भी नह ।ं बार-बार पछ ू ता हूँ.आपको बहुत दरू . उन सभी क पर ा क ँ गा।’ ‘तो आप कदा प सफल न ह गे। वह इतना शीलवान. ऐसा दल हला दे नेवाला प लख क वह लि जत हो जाये और उसक ेम-भावना सचेत हो उठे । म जीवन-पय त आपका आभार रहूँगा।’ नवीनजी क व तो ह ठहरे । इस तजबीज म वा त वकता क अपे ा क व व ह क धानता थी। आप मेरे कई ग प को पढ़कर रो पड़े ह. वह य तम ु से इतना उदासीन है ? इसके जवाब म रोकर यह कहती है . उ ह ं ग प को पढ़कर कतने ह स जन ने वर त होकर पु तक फक द ह। पर इन बात का वह अवसर न था। वह समझते ह क म अपना गला छुड़ाना चाहता हूँ. इतना स न-मख ु है . आप कुसम ु क ओर से ऐसा क णा-जनक. पर उस नदयी ने एक का भी जवाब न दया ! सार च ठयाँ लौटा द ं। मेर समझ म नह ं आता क उस पाषाण. धम नी त सभी वषय म उसके वचार बड़े प र कृत ह। बहस करने म तो वह इतनी पटु है क मझ ु े आ चय होता है । गह ृ बंध म इतनी कु शल क मे रे घर का ाय: सारा बंध उसी के हाथ म था. कभी उसे फूल क छड़ी से भी न छुआ। उसक श ा-द ा म कोई बात उठा न रखी। उसने बी. बहुत कम दे वयाँ वैसे लेख लख सकती ह ! समाज. मझ ु से पहले ह य न कहा ? म आज ह मरु ादाबाद जाऊँगा और उस ल डे क इस बरु तरह खबर लँ ग ू ा क वह भी याद करे गा। बचा तो जबरद ती घसीट लाऊँगा और कुसम ु के पैर म गरा दँ ग ू ा। नवीनजी मेरे आ म व वास पर मस ु कराकर बोले -आप उससे या कहगे ? ‘यह न पू छये ! वशीकरण के िजतने म ह. इतना वन . इतना मधरु -भाषी क आप वहाँ से उसके भ त होकर लौटगे ! वह न य आपके सामने हाथ बाँधे खड़ा रहे गा। आपक सार कठोरता शा त हो जायेगी। आपके लए तो एक ह साधन है । आपके कलम म जाद ू है ! आपने कतने ह यव ु क को स माग पर लगाया है । दय म सोई हुई मानवता को जगाना आपका क य है । म चाहता हूँ. तनू े उससे कुछ कह दया है . ले कन दभ ु ा य को कोई या करे ? द ु खया ने प त के नाम कई प लखे.ू मगर न आता है . उससे दो-चार बात और भी क ह । कुसम ु ने सर न उठाया होगा। आप जानते ह ह. नह ं पास कया.‘मझ ु से तो उ ह ने कभी कोई बात ह नह ं क ।’ मेरा वचार है क पहले ह दन दोन म कुछ मनमट ु ाव हो गया। वह कुसम ु के पास आया होगा। उसने मारे शम के जवाब न दया होगा। संभव है . नचा सकता हूँ। आपको यह मालम ू नह ं क सभी मनु य क व नह ं होते.दय को कैसे पघलाऊँ। म अब खद ु तो उसे कुछ लख नह ं सकता। आप ह कुसम ु क ाण र ा कर. ले कन वचार क ौढ़ता और ान.यार से पाला. और न एक-से भावक ु । िजन ग प को पढ़कर आप रोये ह. वह कतनी शम ल है । बस.

ले कन आप मेर परछा से भी दरू भागते थे। मझ ु े कोई अवसर न मला। आपको याद होगा क जब दोपहर को सारा घर सो जाता था.म जानता था आप इन प को दे खना चाहगे. ले कन आप अनु चत न समझ तो पहले मझ ु े वह प दखा द. पर आपने कभी आँख उठाकर न दे खा। उस व त मेरे मन क या दशा होती थी.ं अँगरे ज़ी खेल ह खेलना जानती हूँ। और भी कतनी ु टयाँ मझ ु म ह गी। म जानती हूँ क म आपके यो य न थी। आपको मझ ु से कह ं अ धक पवती. जो ज म-ज मा तर के लए आपक चेर है . तो उसके पास ह गे। उन प को दे खने से मझ ु े ात हो पायेगा क कन पहलओ ु ं पर लखने क गंज ु ाइश बाक़ है । नवीनजी ने जेब से प का एक पु ल दा नकालकर मेरे सामने रख दया और बोले. उनका बयान सन ु ती है । आपने तो कुछ पछू ा ह नह ।ं मझु े अपनी ख़ता मालम ू हो जाती. आपने अपनी प नी म िजन गण ु को दे खने क कामना क हो. तो आगे के लए सचेत हो जाती। आपके चरण पर गरकर कहती. जो आपके चरण पर पड़ी हुई आपसे मा-दान माँग रह है . वे मझ ु म न हो। बेशक म अँगरे ज़ी नह ं पढ़ . वैसे ह आपक भी लड़क है । आपसे या परदा ! सगु ि धत. या इस ोध को सहन कर सकती है ? मेरा दल बहुत कमजोर है । मझ ु े लाकर आपको तो प चाताप के सवा और कुछ हाथ न आयेगा। इस ोधाि न क एक चनगार मझ ु े भ म कर दे ने के लए काफ है .मझ ु े दावा है क आपक िजतनी सेवा म कर सकती हूँ. उतनी कोई दस ू र ी नह ं कर सकती। आप व वान ह. दं ड अपराध को मलना चा हए.या अरमान थे। मने कतनी बार चाहा क आपसे कुछ पछ ू ू ँ . ले कन म आपको नराश न क ँ गा। म प लखग ूँ ा और यथाशि त उस यव ु कक याय-बु ध को जगाने क चे टा भी क ँ गा. बु धमती ी मलनी चा हए थी. पर एक गणु भी है . उदार ह. या आपके ऊपर मेरा कोई अ धकार नह ं है ? अदालत भी कसी अपराधी को दं ड दे ती है . तो म बड़े हष से अपने को आपके चरण पर सम पत कर दँ ग ू ी. मझ ु े यहाँ आये एक स ताह हो गया. कोस. तो म मरने के लए तैयार हूँ. ु टय को नह ं। फर म तो आपके इशारे पर चलने को तैयार हूँ। आप मेर दलजोई कर. इ छा हो तो मेरे कान भी पकड़े। म इन सभी सजाओं को सहष सह लँ ग ू ी. आपसे अपने अपराध को मा कराऊँ. मझ ु े मादान दो। म शपथपव ू क कहती हूँ. ले कन मेरे दे वता. तो म आपके कमरे म जाती थी और घ ट सर झक ु ाये खड़ी रहती थी. गवा हयां लेती है . अँगरे ज़ी-समाज क र त-नी त से प र चत नह . ले कन यह न ठुरता नह ं सह जाती। म आपके घर एक स ताह रह । परमा मा जानता है क मेरे दल म या. केवल आपका इशारा चाहती हूँ। अगर मरने से आपका च स न हो. गण ु वती. मझ ु े कुछ नह ं मालमू . अगर आपक यह इ छा है क म मर जाऊँ. फर दे खए. जो कुसम ु ने अपने प त के नाम लखे थे . इसका कदा चत ् आप अनम ु ान न कर सकगे। मेर जैसी अभा गनी ि याँ इसका कुछ अ दाज़ कर सकती ह। मने अपनी सहे लय से उनक सोहागरात क कथाएँ सन ु -सन ु कर अपनी क पना म सख ु का जो वग बनाया था उसे आपने कतनी नदयता से न ट कर दया ! म आपसे से पछ ू ती हूँ. आपक ल डी आपके सामने खड़ी दया क भीख माँग रह है । या उसे वार से ठुकरा द िजएगा ? . चकने कागज पर बहुत ह सु दर अ र म लखे उन प को मने पढ़ना शु कया- मेरे वामी. आप मझ ु े झड़क. मनो व ान के पं डत ह. आप य ट हो गये। संभव है . मेर बु ध को ती और मेरे भा य को बलवान कर दे गा। वह वभू त पाकर मेर कायाक प हो जायेगी। वामी ! या आपने सोचा है ? आप यह ोध कस पर कर रहे ह ? वह अबला.क सझ ू ी। और म उस ताव से सहमत हूँ और य य प आपने मेर क णो पादक शि त का अनम ु ान करने म अ यिु त से काम लया है . ले कन आँख पल भर के लए भी नह ं झपक ।ं सार रात करवटे बदलते बीत जाती है । बार-बार सोचती हूँ. मझ ु से ऐसा या अपराध हुआ क उसक आप मझ ु े यह सजा दे रहे ह. इस लए इ ह साथ लेता आया। आप इ ह शौक से पढ़। कुसम ु जैसी लड़क है . गलु ाबी. घड़ ु क. मगर इतना कहे बना नह ं रहा जाता क म झ ु म सौ ऐब ह . तो उस पर कोई-न-कोई अ भयोग लगाती है . म अपनी ु टय को कतनी ज द परू ा कर लेती हूँ। आपका ेम-कटा मेरे प को द त. उसने प तो लौटा ह दये ह और य द क सम ु ु ने उ ह फाड़ नह ं डाला है .

कोई चँ ू भी नह ं सकर सकता। पु ष अपनी दस ू र . जो इस ऋतु म उस व ृ पर कु हाड़ी चलायेगा ! यह वह समय है . तू अपने भ व य क गदन पर कतनी बेदद से छुर फेर रहा है ? यह वह समय है . केवल थ पड़ से दे सकती है . उसके रोने या हँसने क मझ ु े ज़रा भी परवाह न होती। अरे अभागे यवु क ! तझ ु े खबर नह ं. ट से भी नह ं. जब शकार कसी प ी को उसके बसेरे से लाकर पंजरे म ब द कर दे ता है । या वह उसक गदन पर छुर चलाकर उसका मधरु गान सन ु ने क आशा रखता है ? .आपक अपरा धनी कुसम ु यह प पढ़कर मझ ु े रोमांच हो आया। यह बात मेरे लए अस य थी क कोई ी अपने प त क इतनी खश ु ामद करने पर मजबरू हो जाय। पु ष अगर ी से उदासीन रह सकता है . कोई उसका हाथ नह ं पकड़ सकता. जब पु ष को अपने णय-भ डार से ी के माता. तो इस न ठुरता का जवाब इसक दस गन ु ी कठोरता से दे ता। उसक छाती पर मँग ू दलता ? संसार के हँसने क जरा भी च ता न करता। समाज अबलाओं पर इतना जु म दे ख सकता है और चँ ू तक नह ं करता. चौथी शाद कर सकता है . ी से कोई संबध ं न रखकर भी उस पर उसी कठोरता से शासन कर सकता है । वह जानता है क ी कुल-मयादा के बंधन म जकड़ी हुई है . भाई-बहन. तीसर .पता. तो ी उसे य नह ं ठुकरा सकती ? वह द ु ट समझता है क ववाह ने एक ी को उसका गल ु ाम बना दया। वह उस अबला पर िजतना अ याचार चाहे करे . तो उसे कभी इस बद मज़ाजी का साहस न होता। बेचार ी कतनी ववश है । शायद म कुसम ु क जगह होता. जब दय म ेम का वस त आता है और उसम नयी-नयी आशा-कोपल नकलने लगती ह। ऐसा कौन नदयी है . स खयाँ-सहे लयाँ. िजसक म ृ त जीवन म सदै व के लये मठास पैदा कर दे ती है । ी क ेमसध ु ा इतनी ती होती है क वह प त का नेह पाकर अपना जीवन सफल समझती है और इस ेम के आधार पर जीवन के सारे क ट को हँस-खेलकर सह लेती है । यह वह समय है . सभी के ेम क पू त करनी पड़ती है । अगर पु ष म यह साम य नह ं है तो ी क ु धत आ मा को कैसे संतु ट रख सकेगा। प रणाम वह होगा. जो बहुधा होता है । अबला कुढ़-कुढ़कर मर जाती है । यह वह समय है . उसे रो-रोकर मर जाने के सवा और कोई उपाय नह ं है । अगर उसे भय होता क औरत भी उसक ट का जवाब प थर से नह ं.