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पाठ 8

िद गण की धातुए और कृ धातु के वतर्मान काल (ल लकार) के रूप, संिध के कुछ


िनयम, सं कृत के तीन ोक, एक पतर्.

8.1 िकर्. िद -गण की धातुएँ: धातुओं के चौथे गण का नाम िद (चमकना) धातु


के नाम पर िदवािदगण (िद -गण) है। पु (पोषण करना) धातु िद गण की है।
इस गण की धातुओं के अंग बनाने के िलए धातु के साथ य जोड़ा जाता है। इस
कार पु से पु य बन जाता है। ल लकार के रूप बनाने के िलए भू-गण के ही
अन्त्य त्यय लगते ह और उसके ही िनयम लागू होते ह (दे िखए अनु भाग 5.2)।
पु धातु के ल लकार के रूप नीचे िदए गए ह-
एकवचन ि वचन बहु वचन
थम पुरुष (स:) पु यित (तौ) पु यत: (ते ) पु यिन्त
मध्यम पुरुष (त्व ) पु यिस (युवां) पु यथ: (यूयं) पु यथ
उ म पुरुष (अहं) पु यािम (आवां) पु याव: (वयं) पु याम:
िद -गण की कुछ धातुएँ नीचे दी गई ह। अिनयिमत धातुएँ तारांिकत ह:
नृ नाचना (नृत्यित) तृ तृ होना (तृ यित)
न न होना (न यित) पु पु होना (पु यित)
मु मोिहत होना (मु ित) ि यार करना (ि ित)
िस िसध्द होना (िसध्यित) तु स होना (तु यित)
लु लोभ करना (लु यित) *श शांत होना (शा यित)
कु कर्ोध करना (कु यित) * थक जाना ( ा यित)
उपयुर् धातुओं के ल लकार के रूप का अ यास आगे िदए गए नृ के रूप
की तरह सवर्नाम कतार्ओं के साथ कीिजए:
स: नृ त्यित, तौ नृ त्यत:, ते नृत्यिन्त; त्वं नृत्यिस, युवां नृ त्यथ:, यूयं नृत्यथ;
अहं नृ त्यािम, आवां नृ त्याव:, वयं नृ त्याम:।
8.2 प. नीचे िदए गए वाक्य को बोलकर पिढ़ए और िहन्दी म अनु वाद कीिजए:
1. दु ग्धे न अ माकं शरीरािण पु यिन्त। 2. फलै: अिप अ माकं शरीरािण पु यिन्त।
3. अ माकं माता अ म यं दु ग्धं यच्छित। 4. सा कदािप अ म यं न कु यित। 5.
स ा: बािलका: नृत्यिन्त। 6. कर्ोध:1 कर्ोधे न न शा यित। 7. अकर्ोधे न एव कर्ोध:
शा यित। 8. एत बुध्द य वचन 2। 9. उ मे न काय िसध्यित। 10. ते बालका:
अतीव कर्ीडिन्त, अत: ते ा यिन्त। 11. :3 उत्सव: अि त। 12. जना:4 मिन्दरं
गच्छिन्त। 13. पापे न मनु य: न यित। 14. पुण्यं मनु यं रक्षित। 15. पापं दु :खाय

संधान सं कृत- वेश


पाठ-8 44
भवित। 16. पुण्यं सुखाय भवित। 17. मनु य: धने न कदािप न तृ यित। 18. छातर्ाणा
उ मे न अध्यापका: तु यिन्त।
(श दाथर्:ऱ 1. गु सा, 2. कहना है, 3. कल (आने वाला), 4. लोग)

8.3 िकर्. कृ (करना) त -गण की धातु है। इस गण के रूप हम बाद म सीखगे। पर


क्य िक कृ धातु का योग बहु त अिधक होता है इसिलए हम इस धातु के ल
लकार के रूप यहाँ दे रहे ह:
एकवचन ि वचन बहु वचन
थम पुरुष करोित कुरुत: कुवर्िन्त
मध्यम पुरुष करोिष कुरुथ: कुरुथ
उ म पुरुष करोिम कुवर्: कुमर्:
8.4 प. नीचे के वाक्य को बोलकर पिढ़ए और उनका िंहदी म अनु वाद कीिजए:
1. अह अधु ना भोजनं करोिम। 2. त्वम िंक करोिष? 3. अह अ तै: बालकै:
सह कर्ीडािम। 4. स: वभावेन शान्त:। 5. स: कर्ोधं न करोित। 6. त य ाता सदा कर्ोधं
करोित। 7. सा अधु ना िंक करोित? 8. सा भोजनं पचित। 9. यूय अ िंक कुरुथ? 10.
वय अ तािभ: बािलकािभ: सह मिन्दरं गच्छाम:। 11. वयं यदा पापं कुमर्: तदा दु :ख
अनु भवाम:। 12. मनु या: यदा पुण्यं कुवर्िन्त तदा सुख अनु भविन्त। 13. अहमिप यदा
पुण्यं करोिम तदा सुख अनु भवािम। 14. यदा पापं करोिम तदा दु :ख अनु भवािम। 15.
युवा अधु ना िंक कुरुथ? 16. आवा अधु ना पाठं पठाव:।
8.5 संिध. तीन कार की संिधयाँ. सं कृत म जब दो ध्विनयाँ आपस म िमलती ह तो
उनम कुछ पिरवतर्न हो जाता है इसे संिध कहते ह। संिध का शाि दक अथर् जोड़ना
है। इसके िनयम का थोड़ा-सा पिरचय आप इससे पूवर् पा चुके ह। जब संिध म
िमलनेवाली दोन ध्विनयाँ वर होती ह तो हम उसे वर संिध कहते ह। जब संिध म
िमलने वाली एक या दोन ध्विनयाँ यंजन होती है तो उसे यंजन संिध कहते ह और
जब संिध म िवसगर् के साथ अन्य ध्विन िमलती है तो उसे िवसगर् संिध कहा जाता है।
अब हम वर संिध का एक िनयम और िवसगर् संिध के दो िनयम सीखगे:
(क) वर संिध. जब ए, ऐ, ओ, औ को छोड़कर िकसी व या दीघर् वर के बाद
वही व या दीघर् वर आए तो दोन के थान पर एक दीघर् वर हो जाता
है। इसे सवणर् दीघर् संिध कहते ह, जैसे:
न + अि त = नाि त (अ + अ = आ)
कुतर् + अिप = कुतर्ािप (अ + अ = आ)
मम + आत्मा = ममात्मा (अ + आ = आ)
अि त + ई र: = अ ती र: (इ + ई = ई)
कदा + अिप = कदािप (आ + अ = आ)
संधान सं कृत- वेश
पाठ-8 45
(ख) िवसगर् संिध. i) यिद िवसगर् से पहले अ हो और उसके बाद कोई घोष
यंजन हो तो िवसगर् के थान पर ओ हो जाता है, जैसेःऱ
बालक: + गच्छित = बालको गच्छित
स : + भवित = स ो भवित।
िट पणी:ऱ घोष वणर्. पाँच वग के अिन्तम तीन यंजन, ग, घ, ङ, ज, झ ञ, ड
ढ ण, द ध न, ब भ म, य, र, ल, व और ह घोष यंजन ह, शेष यंजन अघोष ह।
सब वर भी घोष ह।
ii) जब िवसगर् से पहले अ हो और बाद म भी अ हो तो अ: के थान पर ओ हो
जाता है तथा बाद वाले अ का लोप हो जाता है, और उसके थान पर
अवगर्ह (ऽ) िच का योग होता है, जैसे:
क: + अतर् = कोऽतर्
मनु य: + अि त = मनु योऽि त
iii) िवसगर् संिध के ये दो िनयम स: और एष: पर लागू नहीं होते। जब इन दो
सवर्नाम के बाद अ के िसवाय कोई भी वर या यंजन हो तो िवसगर् का लोप
हो जाता है।
स: + िशक्षक: = स िशक्षक:
एष: + मनु य: = एष मनु य:, िकन्तु
स: + अतर् = सोऽतर्
8.6 अ. नीचे िदए गए श द म संिध कीिजए-
1. कदा + अिप 6. बालक: + गच्छित
2. स : + अि म 7. क य + अय
3. िक + अिप 8. तव + अपमान:
4. मम + अिप 9. छातर्: + अि त
5. न + अि त 10. पिरिचत: + दे श:

िट पणी: 1. श द के िनमार्ण म, समास म और िकर्याओं के साथ उपसग के योग


म संिध आव यक है, दू सरे थल पर इसका योग वैकि पक है; जैसे: िव ा +
आलय: = िव ालय:, भो + अ + ित = भवित आिद म संिध आव यक है िकन्तु
बालक: गच्छित और बालको गच्छित दोन ही रूप ठीक ह। अिधकांश सं कृत
गर्ंन्थ म संिध के िनयम का सवर्तर् पालन िकया जाता है। इसके कारण सं कृत के
नए छातर् को कुछ किठनाई होती है। हम इन पाठ म संिध का योग छातर् की
सुिवधा की दृि से करगे। आप वयं सं कृत के वाक्य िलखते हु ए संिध का योग
न भी कर तो कोई हािन नहीं।
2. संिधऱ सं कृत याकरण म बालक से बालकाना , भू से भवित आिद
संधान सं कृत- वेश
पाठ-8 46
रूप पािणिन के याकरण के िनयम के अनु सार िसध्द िकए जाते ह। इन श द के
िनमार्ण म होने वाली संिध आंतिरक संिध कहलाती है और वह अिनवायर् होती है।
दो श द के बीच होने वाली संिध- कुतर्ािप, बालको गच्छित आिद बा संिध
कहलाती है और वह वैकि पक होती है।
8.7 प. आइए, अब हम सं कृत के कुछ और ोक पढ़।
क. उ मे न1 िह िसध्यिन्त2 कायार्िण न मनोरथै:3।
न िह सु य4 िंसह य5 िवशिन्त6 मुखे मृगा:7॥
ख. िव ा िववादाय8, धनं मदाय9, शि : परे षां10 पिरपीडनाय11।
खल य12, साधो:13 िवपरीतमे त 14 ानाय, दानाय च रक्षणाय15॥
ग. अधमा:16 धनिमच्छिन्त17 धनं मानं च मध्यमा:18।
उ मा:19 मानिमच्छिन्त मानो िह महतां20 धन ॥
(श दाथर्:ऱ 1. पिर म से, 2. िसध्द होते ह, 3. इच्छा मातर् से, 4. सोए हु ए, 5. शेर के,
6. िव होते ह, 7. हिरण, जानवर, 8. बहस के िलए, झगडे क़े िलए, 9. घमंड या गवर् के
िलए, 10. दूसर के, 11. दु ख दे ने के िलए, 12. धूतर् यि के, 13. स न यि के, 14.
िवपरीत -उलटे होते ह, 15. रक्षा के िलए, 16. नीच लोग, 17. धन चाहते ह, 18. मध्यम
कोिट के लोग, 19. उ म कोिट के लोग, 20. महापुरुष का)।

8.8 प. यहाँ िवदे श म रहने वाले िमतर् को िलखा गया एक साधारण पतर् दे रहे ह।
उसका िमतर् पतर् म अपने पिरवार का िववरण दे ता है जो भारत के िकसी गाँव म
रहता है।
िमतर्ाय पतर्
ि य िमतर्,
नम ते! अह एत पतर्ं वगर्ामा िलखािम। पतर्ेण सह मम गर्ाम य िचतर्
अि त। अह अतर् वसािम। मम पिरवार: अतर् अि त।
मम िपता कृषक:1 अि त। त य क्षेतर् 2 अित िवशालं न अि त। स: ात: क्षेतर्ं
गच्छित। सायं गृह आगच्छित। मम िपता अित उ मं करोित। त य ौ वृषभौ3
त:। तौ क्षेतर्ं कृषत:4। अ माक एका गौ:5 अिप अि त। सा अ म यं दु ग्धं यच्छित।
वयं सव त या: दु ग्धं िपबाम:।
मम माता गृहा बिह:6 काय न करोित। सा गृहे ित ित। सा अ म यं सव य:
भोजनं पचित।
गर्ामं पिरत: िवशाला: वृक्षा: सिन्त। अतर् एक: िव ालय: अिप अि त। अहं ात:
िव ालयं गच्छािम। ततर् अहं पठािम, िमतर्ै: च सह कर्ीडािम। मम भिगनी अिप मया
सह िव ालयं गच्छित। मम ाता नगर य महािव ालये7 पठित।

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पाठ-8 47
अ माकं गर्ाम: नगरा दू रे अि त। मम ाता बसयानेन8 महािव ालयं गच्छित।
वयमिप यदा-कदा बसयानेन नगरं गच्छाम:।
कृषक य जीवनं किठन अि त। िकन्तु वयं स ा: म:।
अधुना पतर्ं समा ं करोिम।
तव िमतर्
रमे श:
(श दाथर्:ऱ 1. िकसान, 2. खेत, 3. बैल, 4. कृ -कृषित-खेती करना, हल चलाना, 5.
गाय, 6. बाहर, 7. कालेज म, 8. बस से, यान -गाड़ी।)

8.9 प. नीचे िदए गए वाक्य का सं कृत म अनु वाद कीिजए:


1. हमारे अध्यापक (एक व.) िव ालय के िलए पु तक ला रहे ह। 2. म बाग से
आ रहा हू ँ। 3. ये िचतर् तु हारे िलए ह। 4. म ये फूल उन लड़िकय को दे रहा हू ँ। 5.
वह िकसके साथ शहर जा रहा है? 6. वह वहाँ हमारे साथ जा रहा है। 7. हमारे
अध्यापक हमारे ऊपर कर्ोध नहीं करते। 8. आप (सब) अब क्या कर रहे ह? 9. हम
उनके साथ (पुं.) मंिदर जा रहे ह। 10. कर्ोध से मनु य का नाश हो जाता है।
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अ यास के उ र
8.2 1. दू ध से हमारे शरीर पु होते ह। 2. फल से भी हमारे शरीर पु होते ह। 3.
हमारी माता हम दू ध दे ती है। 4. वह कभी भी हमारे ऊपर कर्ोध नहीं करती। 5. स
लड़िकयाँ नाच रही ह। 6. कर्ोध कर्ोध से शांत नहीं होता। 7. केवल अकर्ोध (कर्ोध न
करने) से ही कर्ोध शांत होता है। 8. यह बुध्द का कथन है। 9. पिर म से कायर् िसध्द
होता है। 10. वे लड़के बहु त अिधक खेलते ह, इसिलए वे थक जाते ह। 11. कल यहाँ
उत्सव है 12. लोग मंिदर जाते ह। 13. पाप से मनु य का नाश हो जाता है। 14. पुण्य
मनु य की रक्षा करता है। 15. पाप से दु ख होता है। 16. पुण्य से सुख िमलता है। 17.
मनु य धन से कभी तृ नहीं होता। 18. िव ािर्थय के पिर म से अध्यापक स होते ह।
8.4 1. म इस समय भोजन कर रहा हू ँ। 2. तुम आज क्या कर रहे हो? 3. आज म उन
लड़क के साथ खेल रहा हू ँ। 4. वह वभाव से शांत है। 5. वह कर्ोध नहीं करता। 6.
उसका भाई हमे शा कर्ोध करता है। 7. वह इस समय क्या कर रही है? 8. वह खाना पका
रही है। 9. आप लोग आज क्या कर रहे ह? 10. हम लोग आज उन लड़िकय के साथ
मंिदर जा रहे ह। 11. हम जब पाप करते ह तब दु :ख का अनु भव करते ह। 12. लोग जब
पुण्य करते ह तब उन्ह सुख िमलता है। 13. म भी जब पुण्य (अच्छे काम) करता हू ँ तो
मुझे सुख का अनु भव होता है। 14. जब म पाप करता हू ँ तो दु :ख का अनु भव होता है ।
15. तुम दोन अब क्या कर रहे हो? 16. हम दोन अब पाठ पढ़ रहे ह।
8.6 1. कदािप, 2. स ोऽि म, 3. िकमिप, 4. ममािप, 5. नाि त, 6. बालको गच्छित,
7. क याय , 8. तवापमान:, 9. छातर्ोऽि त, 10. पिरिचतो दे श:।
संधान सं कृत- वेश
पाठ-8 48
8.7 क. हमारे सभी काम पिर म से पूरे होते ह केवल इच्छा करने से कोई काम नहीं
होता। सोए हु ए शेर के मुख म जानवर वयं िव नहीं होते। (इसके िलए उसे य
करना पड़ता है।)
ख. दु मनु य के िलए िव ा िववाद या झगड़े के िलए, धन घमंड के िलए और शि
दू सर को क दे ने के िलए होती है इसके िवपरीत स न यि के िलए िव ा ान के
िलए, धन दान दे ने के िलए और शि असहाय लोग की रक्षा के िलए होती है।
ग. नीच मनु य धन पाना चाहते ह, मध्यम कोिट के मनु य धन और मान दोन पाना चाहते
ह तथा उ म कोिट के लोग मान पाना चाहते ह। िन य से मान ही महापुरुष का धन है।
8.8 िमतर् का पतर्
ि य िमतर्,
नम ते! म यह पतर् अपने गाँव से िलख रहा हू ँ। पतर् के साथ मे रे गाँव का िचतर् है। म यहाँ
रहता हू ँ। मे रा पिरवार यहाँ है।
मे रे िपता जी िकसान ह। उनका खेत बहु त बड़ा नहीं है । वे सुबह खेत पर जाते ह। शाम
को घर आते ह। मे रे िपताजी बहु त मे हनत करते ह। उनके पास दो बैल ह। वे खेत म हल
चलाते ह। हमारे पास एक गाय भी है। वह हम दू ध दे ती है। हम सब उसका दू ध पीते ह।
मे री माताजी घर से बाहर काम नहीं करती। वह घर म रहती है। वह हम सब के िलए
भोजन बनाती है।
गाँव के चार ओर बड़े -बड़े पेड़ ह। यहाँ एक िव ालय भी है। म सुबह िव ालय जाता हू ँ।
वहाँ म पढ़ता हू ँ और िमतर् के साथ खेलता हू ँ। मे री बिहन भी मे रे साथ िव ालय जाती है।
मे रा भाई शहर के कॉलेज म पढ़ता है।
हमारा गाँव शहर से दू र है। मे रा भाई बस से कॉलेज जाता है। हम भी कभी-कभी बस से
शहर जाते ह।
िकसान का जीवन बहु त कठोर होता है। परन्तु हम स ह।
अब पतर् समा करता हू ँ।
तु हारा िमतर्
रमे श
8.9 1. अ माक िशक्षक: िव ालयाय पु तकािन आनयित। 2. अहं वािटकाया:
आगच्छािम। 3. एतािन िचतर्ािण तु यं सिन्त। 4. अह एतािन पु पािण ता य: बािलका य:
यच्छािम। 5. स: केन सह नगरं गच्छित? 6. स: अ मािभ: सह ततर् गच्छित। 7. अ माकं
िशक्षक: अ म यं न कु यित। 8. यूय अधुना िंक कुरुथ? 9. वयं तै: सह मिन्दरं गच्छाम:।
10. कर्ोधेन मनु य: न यित।
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संधान सं कृत- वेश