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पीडीएफ़ ई-बक

ु : रचनाकार http://rachanakar.blogspot.com क! "#त%त


&म(ी का पहाड़
(बालउप-यास)

ओम"काश क2यप

BPSN PUBLICATION
G-571, ABHIDHA, GOVINDPURAM
GHAZIABAD, UP-201013

---

सवा45धकार : लेखक

म9
ू य : 175 ;पये

"थम सं#करण : 2009

"काशक : बीपीएसएन पि@लकेशन

जी-571, गोDवंदपरम
ु ,्

गािजयाबाद-201013

आवरण संयोजन : लेखक

कंHयट
ू रJकत
ृ : लेखक

Mishri Ka Pahad (Novel) : by Omprakash Kashyap


Price : Rs. - 175.00

भ&मका

सखद
ु संयोगM के साथ...
इस उप-यास मO का "काशन एक सखद
ु ऐ%तहा&सक संयोग है . उसके बारे मO आप शीR जान
जाएंगे. श;आत
ु अर#तू से िजसने मनTु य को पाUरभाDषत करते हए
ु उसको Dववेकशील "ाणी
क! संWा दJ. उसक! दJ गई पUरभाषा आज तक सव4मा-य है . अर#तु ने यह भी कहा था Xक
बालक का मि#तTक कोरJ सलेट के समान होता है , िजसपर कोई भी इबारत उकेरJ जा सकती
है . उसक! बात को आगे बढ़ाते हए
ु सतरहवीं शता@दJ के महान चेक &शZाशा[ी जॉन अमोस
कॉ&म%नयस(1592-1670) ने कहा था-

‘यह ठ_क है Xक ब`चे का मि#तTक कोरJ सलेट होता है , िजसपर हम मनचाहJ इबारत &लख
सकते हa. लेXकन एक अथ4 मO यह उससे भी बढ़कर है . सलेट क! सीमा होती है . हम उसपर
उसके आकार से अ5धक कोई इबारत &लख हJ नहJं सकते. जबXक मानव-मि#तTक अनंत
Zमतावान होता है . उसपर िजतना चाहे &लखा जा सकता है, bयMXक वह %न#सीम
है ,(डाइडेिbटका मेcना, 1628-32).'

कॉ&मनयस का कहना था Xक ब`चे #वभावतः अ`छे होते हM, इतने Xक उ-हO सfगणM
ु क! खान
ं ु उनके gयिbतhव को %नखारने के &लए &शZा अ%नवाय4 है .
कहा जा सकता है . Xकत
कॉ&म%नयस ने ये Dवचार उस समय और समाज मO gयbत Xकए थे, जहां एक सव4मा-य
मा-यता थी Xक पाप मनTु य के साथ

उसके ज-म से जड़ा


ु है . अतः उसको पाप के गत4 से उबारने के &लए &शZा (धा&म4क) अ%नवाय4
है . इस मा-यता के चलते तhकालJन समाज मO &शZा के नाम पर बल"योग सामा-य बात थी.
‘डाइडेbटा मेcना' िजसका अ&भ"ाय है -संपूण4 &शZण-कला, मO कॉ&म%नयस ने &शZा-पk%त को
लेकर मौ&लक Dवचार "#तत
ु Xकए गए थे. उसका कहना था Xक न केवल अमीर और ताकतवर
वग4 के ब`चM, बि9क गांवM, क#बM, शहरM मO रहने वाले अ&भजाhय और सामा-य, गरJब और
अमीर, झोपnड़यM और अoटा&लकाओं मO रहने वाले सभी लड़के-लड़XकयM को &शZा के &लए
अ%नवाय4तः #कूल जाना चाpहए. ये Dवचार तhकालJन यरोपीय
ू समाज मO qां%तकारJ थे.
‘डाइडेbटा मेcना' को चतpद4
ु क सराहना &मलJ और "ायः सभी यरोपीय
ू भाषाओं मO उसका
अनवाद
ु Xकया गया. यह प#
ु तक वषr तक कई यरोपीय
ू भाषाओं मO बे#टसेलर बनी रहJ. लेXकन
कॉ&म%नयस क! "&सDk केवल इसी प#
ु तक के कारण नहJं है . ब`चM के बीच &शZा को सरल
एवं sाtयः बनाने के &लए उसने स5चu प#
ु तक, ऑरwबस सOस&लयम
ु Dपbचस ् (1658), िजसका
अथ4 है -5चuM क! द%नया
ु , भी तैयार भी क! थी. वह प#
ु तक वा#तव मO एक लघु Wानकोश थी,
िजसमO ब`चM के काम क! जानकारJ 5चuM के साथ "का&शत क! गई थी. ‘ऑरwबस सOस&लयम

Dपbचस'् को Dव2व क! पहलJ स5चu प#
ु तक होने का गौरव "ाHत है . लोक&शZा के "सार हे तु
अम9
ू य योगदान तथा उसके Zेu मO अपने मौ&लक एवं qां%तकारJ "योगM के &लए कॉ&म%नयस
को ‘आध%नक
ु &शZाशा#uा का Dपतामह' कहा जाता है . चेक और #लॉDवया गणराyय अपने इस
महान सपत
ू के ज-मpदवस 28 माच4 को ‘&शZक pदवस' के zप मO मनाते हa.
लोक&शZा के Zेu मO महान योगदान दे ने वाले कॉ&म%नयस का %नजी जीवन बहत ु हJ कTटमय
एवं संघष4पूण4 था. बचपन मO हJ अनाथ हो जाने वाले कॉ&मनयस ने घोर अभावM के बीच
अपनी &शZा परJ
ू क!. तhप2चात वह अ{यापन काय4 मO जट
ु गया. अपने सधारवादJ
ु नजUरये
के कारण उसको परं परावाpदयM के घोर Dवरोध का सामना करना पड़ रहा था. सहसा भीषण
यk
ु %छड़ जाने से उसको जान बचाकर भागना पड़ा. उसक! जवान पhनी और दो छोटे ब`चे
पहले हJ Hलेग क! ब&ल चढ़ चक
ु े थे. अपने हJ दे श मO भगोड़े क! तरह यहां से वहां भागते
कॉ&म%नयस को अपनी जान बचाने के &लए यk
ु से तहस-नहस हो चक!
ु झोपnड़यM, गफाओं
ु यहां
तक Xक वZ
ृ के खोखले तनM मO %छपकर जान बचानी पड़ी. इस बीच वह सधारवाpदयM
ु के
संपक4 मO आया. लेXकन खशहाल
ु िजंदगी उसको तब भी न &मल सक!. 42 वषr तक वह भीषण
अभाव एवं तनाव-भरा जीवन जीता रहा. यहां तक Xक उसक! दसरJ
ू पhनी भी, चार छोटे -छोटे
ब`चM को छोड़कर असमय मौत के मंह
ु मO समा गई. भागदौड़ और संघष4पूण4 िजंदगी के बीच
कॉ&म%नयस ने 154 प#
ु तकO &लखी थीं. मगर उसका घर जहां उसका बेशक!मती प#
ु तकालय
तथा प#
ु तकM क! मल
ू पांडु &लDपयां सर}Zत
ु थीं, उप~DवयM के ग#
ु से क! भO ट चढ़कर राख हो
गए. भारJ Dवरोध तथा उथल-पथल
ु के बीच आ5थ4कzप से Dवप-न, 64 वषय कॉ&म%नयस को
अंततः पोलOड मO शरण लेनी पड़ी, जहां वह मhृ यप
ु य€त &मuM के सहारे जीDवत रह सका. वह
एके2वरवाद मO भरोसा रखता था तथा समाज मO नै%तक गणM
ु क! #थापना के "%त परJ
ू तरह
समDप4त था. DवपरJत पUरि#थ%तयM मO रहकर भी उसने अपनी सजनाh
ृ माकता को कभी भी मंद
नहJं पड़ने pदया.

तो संयोग यह है Xक इन पंिbतयM के &लखे जाने और द%नया


ु क! पहलJ स5चu प#
ु तक के
"काशन के बीच ठ_क साढ़े चार सौ वषr का अंतराल है . यDप यह कोई स5चu प#
ु तक नहJं
है . लेXकन इस उप-यास क! मलभावना
ू कहJं न कहJं कॉ&म%नयस के संदेश से मेल खाती है ,
इस सखद
ु संयोग के कारण उस महान &शZाशा[ी का #मरण इस अवसर पर अhयाव2यक
था.

िजन pदनM इस उप-यास के &लखने क! योजना बनी, उन pदनM है रJ पॉटर के चच‚ हवा मO थे.
जे. के. रो&लंग क! इस प#
ु तक--(ंख
ृ ला को लेकर सबके अलग-अलग Dवचार थे. है रJ पॉटर के
पाठक और "शंसक उसको दरदश4
ू न के ऊपर श@द क! जीत के zप मO उि9ल„खत कर रहे थे.
अपने दावे के पZ मO उनके पास है रJ पॉटर क! Uरकाड4तोड़ wबq! के Uरकाड4 थे. भारत समेत
"ायः सभी ऐ&शयाई दे शM मO इस उप-यास को लेकर एक आलोचनाhमक …िTटकोण बना रहा
था. वह पहला अवसर था जब Xकसी प#
ु तक क! जबरद#त आलोचना हो और वह wबq! के
क!%त4मान भी बनाए. है रJ पॉटर ने भारत मO wबq! के Xकतने क!%त4मान बनाए यह तो Wात
नहJं है , लेXकन अ5धकांश समीZकM और लेखकM ने इस प#
ु तक को आड़े हाथM &लया था.
&सवाय उन बाजार-पोDषत पuकारM-समीZकM के, िज-हMने है रJ पॉटर क! आलोचना को pहंदJ
बे9ट के लेखकM क! कंु ठा माना और उनक! रचनाशीलता पर सवाल खड़े Xकए.

उस समय एक पल के &लए Dवचार आया था Xक है रJ पॉटर क! तरह हJ भारतीय पUरवेश मO


फंतासी का सहारा लेकर एक उप-यास क! रचना क! जाए. कथानायक है रJ क! भां%त
चामhकाUरक और अ%तं~Jय शिbतयM का #वामी हो. उप-यास के कछ
ु आरं &भक अ{याय यह
सोचकर &लखे भी. लेXकन बहत ु ज9दJ लगने लगा Xक है रJ पॉटर, है रJ पॉटर के दे श मO हJ ठ_क
है . वे खा-पीकर इतने अघाए हए
ु लोग हa Xक आगे उ-हO लढ़कना
ु हJ लढ़कना
ु है . भारतीय
परं परा मb
ु ताकाश मO बहत
ु अ5धक उड़ने क! इजाजत भी नहJं दे ती. यहां तो दे वताओं को भी
धरती पर उतरकर कभी माखन चरानाु पड़ता है; तो कभी मया4दा प;षो†म
ु क! भ&मका
ू मO
आना पड़ता है . pहंदJ उप-यास के &लए अपने दे श क! &मoटJ क! गंध से रचा-बसा नायक हJ
ठ_क रहे गा. इस&लए सारे "लोभन छोड़, है रJ पॉटर क! चामhकाUरता को Xकनारे रखकर
टोपीलाल को कथानायक क! िज‡मेदारJ सˆप दJ गई. टोपीलाल ने भी अपनी िज‡मेदारJ को
बाखबी
ू %नभाया. कछ
ु हJ pदनM मO वह कथानायक होने के साथ-साथ कथा"ेरक भी बन गया.
&लखना िजनका #वभाव या मजबरJ
ू है वे जानते हa Xक और जब कोई कथापाu "ेरक बनकर
कहानी का सu
ू अपने हाथM मO थाम ले तो लेखक क! भ&मका
ू कलम थामकर अपने पाuM के
पीछे %घसटते जाने क! हो जाती है . वहJ इस प#
ु तक मO भी हआ
ु .

अब यह उप-यास आपके हाथM मO तो उ5चत होगा Xक आभार-Wापन के बहाने उन सभी को


याद कर &लया जाए िजनके मा{यम से ये लेखक!य आयोजन सफल हो पाते हa. इनमO डॉ.
"काश मन,ु दे वेश, सरंु जन, सभाष
ु चंदर जैसे &मu-pहतैषी तो हa हJ, मेरJ पhनी और पUरवार के
चारM सद#य भी सि‡म&लत हa. इनमO सबसे अ5धक योगदान मेरJ धम4पhनी Dवमलेश क2यप
का है जो घर मO खद
ु को इस&लए अhय5धक gय#त रखती हa, ताXक मझे
ु कंHयट
ू रघसीटJ के
&लए अ5धक से अ5धक समय &मल सके. मa इन सबका आभारJ हंू . चलते-चलते एक संयोग
क! चचा4 और. आज जब मa इस भ&मका
ू को समापन क! ओर ले जा रहा हंू , मेरे बेटे "दJप का
ज-मpदवस भी है . मझे
ु यह दोहराने मO कतई संकोच नहJं है Xक ब`चM के &लए कहा%नयां
&लखना मaने तब आरं भ Xकया था, जब वह छोटा था, उसको सनाने
ु के लोभ मO मa कहा%नयां पर
कहा%नयां रचता जाता था. मेरJ अ5धकांश कहा%नयां जो पाठकM ‰ारा पसंद क! गŠ, "दJप के
कानM से गजरने
ु के बहत
ु बाद श@दM के कलेवर मO ढल सक!ं. अब तो वह यवाव#
ु था मO कदम
रख चका
ु है और "बंधन के Zेu मO उ`च &शZा sहण कर रहा है . उसक! िजWासा अब केवल
ब`चM क! कहा%नयM से तHृ त नहJं होती. पर मa ब`चM के &लए अब भी &लखता हंू . इस&लए Xक
ब`चM के &लए &लखते सहज मa #वयं को िजतना मb ु त एवं आनंदमय अनभव
ु करता हंू , बड़M
के &लए &लखते समय मb ु तता का वह एहसास और आनंद मेरJ पहंु च से दरू , बहत
ु दरू चला
जाता है . शायद इस&लए Xक ब`चM के &लए &लखना, लेखक का बचपन क! ओर लौटना भी है !
hवदJयं व#तु गोDवंदम ् त
ु यमेवः समHयते!

ओम"काश क2यप

ईमेल - opkaashyap@gmail.com

अbटूबर, 15, 2008

गािजयाबाद, उ†र "दे श.

&म(ी का पहाड़
आज से ठ_क चौदह साल पहले टोपीलाल का ज-म हआु . माता-Dपता थे बेहद गरJब. अनपढ़,
ईमानदार और भले. मेहनती और सझबझ
ू ू वाले, मेहनत-मजदरJ
ू करके पेट भरते. भला सोचते,
भला हJ करते. रोजगार क! तलाश मO गांव से शहर तक आए थे. शहर क! सीमा पर एक
होटल बन रहा था. हाथ का हनर
ु काम आया. दोनM को वहJं काम &मल गया. अपने (म-
कौशल से उ-हO मान &मला; और स‡मान भी. pदन बीतने लगे. एक pदन वे काम पर जटे
ु थे.
होटल के कंगरेू क! 5चनाई का काम चल रहा था. तभी औरत के पेट मO दद4 उठने लगा. प%त
ने सहारा pदया. वह उसको इमारत के एकांत #थल पर ले गया. थोड़ी दे र बाद हJ ब`चे क!
XकलकारJ हवा से लोरJ गाने का आsह करने लगी. बेटे को ठ_क-ठाक ज-म दे ने के बाद मां
ने उसके Dपता से पछा
ू - ‘नाम bया रखोगे?'

उस समय प%त के हाथ मO एक टोपी थी. उससे वह माथे पर आए पसीना सखाने


ु के &लए
हवा झल रहे थे. पhनी के एकाएक सवाल करने पर वे जवाब न दे सके. भीतर से छलकती
खशी
ु को हMठM से दबाते हए
ु "2न-भरJ %नगाहM से टोपी pहलाने लगे.

‘समझ गई, दसरM


ू से हटकर है , अ`छा है .'

‘bया?'

‘टोपीलाल, है ना?'

‘हa!' प;ष
ु चˆक पड़ा, बोला-‘त‡
ु हO पसंद है ?'

‘त‡ु हारा pदया हआ


ु नाम भला नापसंद bयM हो.' अबोध &शशु को Hयार से %नहारते हए
ु मां
म#ु करा दJ.

इस "कार बातM-बातM मO ब`चे का नामकरण सं#कार भी संप-न हो गया. उसके ज-म के


समय एक और खास बात हई
ु . वह थी उसके मां को बहत
ु कम "सव पीड़ा. घर से बाहर
"सव का सकशल
ु %नपट जाना Xकसी चमhकार जैसा हJ था. यहJ नहJं "सव का काम
%नपटाकर उसक! मां ने Dपता को वापस काम पर भेज pदया था. उसके बाद तो वे परा
ू काम
समेटकर हJ घर लौटे थे. इस बात क! चचा4 टोले के लोग महJनM तक करते रहे .

टोपीलाल के Dपता राज&म[ी थे. प%त-पhनी दोनM साथ-साथ काम करने जाते. टोपीलाल के
Dपता नहJं चाहते थे Xक उसक! मां काम करे . वह भी मजदरJ
ू . इससे बाक! मजदरM
ू के आगे
उनक! हे ठ_ होगी, ऐसा उनको लगता था. इस&लए जब पहलJ बार उसक! मां ने काम पर साथ
चलने को◌े कहा तो उ-हMने साफ मना कर pदया था.

‘इसमO शम4 कैसी?'

‘मेरJ घरवालJ होकर मजदरM


ू के साथ काम करो, मझे
ु अ`छा नहJं लगेगा.'

‘और जो प%त-पhनी दोनM त‡


ु हारे &लए मजदरJ
ू करते हa, उनपर bया गजरती
ु होगी, कभी सोचा
है ? मझसे
ु परेू pदन घर मO wबना काम के नहJं बैठा जाता. तम
ु यpद अपने साथ काम पर नहJं
रखना चाहते तो मa दसरJ
ू जगह काम क! तलाश कzं.'

‘यह bया बात हई


ु ?'

उस pदन टोपीलाल क! मां क! हJ चलJ. वह काम पर जाने लगी. उसके Dपता नहJं चाहते थे
Xक वह yयादा मेहनत करे . &म[ी होने के कारण वह चाहते थे Xक कोई ह9का-फ9
ु का काम दे
pदया जाए. लेXकन टोपीलाल क! मां wबना मान-गमान
ु के सबके बराबर मेहनत करती. मजदरू
औरतM के साथ Hयार से बोलती-ब%तयाती. जzरत हो तो उनक! मदद भी करती.

बेटे के ज-म के बाद टोपीलाल के Dपता ने सोचा था Xक चलो इसी बहाने वह कछ


ु pदन
आराम कर लेगी. इस&लए बोले-

‘इस हालत मO त‡
ु हारा कड़ी मेहनत करना bया ठ_क होगा?'

‘bयM जब मa पहले जैसी #व#थ हंू तो पहले जैसा काम bयM नहJं कर सकती?'

‘Xफर भी लोग तो यहJ कहO गे Xक मa बहत


ु कठोर हंू . ब`चे के ज-म के तीसरे हJ pदन त‡
ु हO
काम पर जोत pदया.'

‘मa उ-हO बता दं ग


ू ी Xक मa अपनी मज से काम करने आई हंू .'

‘ऐसी िजद Xकस&लए? Xफर हमारे सामने कोई मजबरJ


ू भी नहJं है ◌.े घर का खच4 तो मेरJ
कमाई से चल हJ जाता है .'
‘इस&लए Xक मa मानती हंू Xक जो कर सकता है उसको काम करना हJ चाpहए. wबना मेहनत
के खाने का Xकसी को अ5धकार नहJं है .'

ु नहJं लगता Xक इस हालत मO तम


‘मझे ु Šट और गारे से भरJ परात &सर पर उठा सकती हो?'

‘हां, यह तो मa भी सोचती हंू ; और तम


ु कहोगे तो उठाऊंगी भी नहJं.'

‘Xफर वहां जाकर bया करोगी?' टोपीलाल के Dपता अचरज मO थे.

‘&म[ी5गरJ! त‡
ु हारे साथ इतने pदनM तक काम करते हए
ु मa भी काफ! कछ ु सीख चक!
ु हंू .
Xफर एक ब`चे क! मां हंू , अब तो मझे
ु भी तरbक! पाने का अ5धकार है , bयM?'

उसके बाद वहJ हआ


ु जो टोपीलाल क! मां ने ठाना हआ
ु था. दो pदन के टोपीलाल को जमीन
पर सलाकर
ु वह क-नी और वसलJू लेकर प%त के सामने बैठ गई. मजदUरनO
ू उसक! pह‡मत
दे ख दं ग रह गŠ. बाक! &मि[यM ने मंुह 5चढ़ाया. कहा Xक कछ ं ु
ु दे र क! wuयाहठ है , Xकत
उसको सधे हाथM से Šट पर Šट 5चनते हए
ु दे ख सबक! बोलती बंद हो गई.

टोपीलाल के ज-म के तीसरे हJ pदन दे श क! शायद सबसे पहलJ मpहला राज&म[ी का ज-म
हआ
ु .

एक औरत और राज&म[ी, लोगM ने इसे भी चमhकार हJ माना.

सचमच
ु , चमhकार हJ तो था.

बीच क! एक और घटना pदमाग चाट रहJ है .

होटल का काम परा ू हआ


ु तो टोपीलाल छठा वष4 का पार कर चकाु था. उसी के कमरM मO लोट
लगाते, सीpढ़यM पर धमा-चौकड़ी करते हुए वह बड़ा हो रहा था. हनरमं
ु द हाथM के परस से
होटल क! इमारत चमचमा रहJ थी. बाक! क! कसर wबजलJ के लoटओं
ु ने परJ
ू कर दJ थी, जो
जगह-जगह रं ग-wबरं गी आभा wबखेर रहे थे. जगमगा रहे थे यहां-वहां. आ„खरJ pदन कारJगरM
और मजदरM
ू का pहसाब करने के &लए मा&लक ने सबको जमा Xकया था. होटल परेू शहर मO ◌ं
%नराला था. ठ_क उसके मा&लक क! क9पना के अनzप
ु . स;5च
ु एवं संप-नता का बे&मसाल
नमना
ू . मा&लक उनके काम से "स-न था. मजदरJ
ू के अलावा सबको कछ
ु न कछ
ु भO ट मO दे ने
का इंतजाम भी उसने अपनी ओर से Xकया था. ताXक यादगार बनी रहे .

टोपीलाल का ज-म उसी होटल मO हआु था. वह द%नया


ु का शायद पहला होटल था, िजसमO
प%त-पhनी दोनM ने राज&म[ी क! कमान संभालJ थी. यह बात भी मा&लक क! जानकारJ मO
थी. टोपीलाल के &लए उसने खासतौर पर कपड़े बनवाए थे. मा&लक उसे अपने &लए शभ
ु मान
रहा था.
शाम का समय. मैदान मO डेढ़-दो सौ क! भीड़. पंडाल, कस
ु और मेज को अ#थायी काया4लय के
zप मO सजाया गया था. मजदरM
ू के ब`चे एक ओ◌ेर खेल रहे थे. कछ
ु होटल को हसरत-भरJ
%नगाहM से दे ख रहे थे. उनक! अपनी हJ मेहनत का कमाल, खन
ू -पसीने से खड़ी हई
ु आलJशान
इमारत. हनरमं
ु द हाथM क! कारJगरJ क! बे&मसाल पेशकश. उसको दे खकर कोई भी #वयं पर
गमान
ु कर सकता था. वbत खशी ु का था और शायद दःख ु का, एक-दसरे
ू से wबछोह का भी
था.

यंू तो टोले के अ5धकांश मजदरू -&म[ी आपस मO पUर5चत थे. परं तु जीवन-संघष4 मO हर बार
कछ
ु न कछ
ु पीछे छट
ू जाते. उनक! भरपाई करने नए लोग शा&मल हो जाते. वbत उन सबसे
Dवदा लेने का था, िजनके साथ सख
ु -दख
ु -भरे इतने साल wबताए थे. पसीने क! अदला-बदलJ क!
थी. दख
ु मO आंसू बहाए, सख
ु मO pह#सेदारJ क! थी. वषr से वे साथ-साथ काम करते आए थे.
आगे काम क! तलाश उनमO से न जाने Xकस-Xकस को, कहां-कहां ले जाए. इसके बाद Xफर
कभी &मलने का अवसर &मले भी या नहJं. ऐसी 5चंताएं लोगM को सता रहJ थीं.

ऐसे वbत पर कछ ु लोगM क! आंखO भरJ हई


ु थीं. तो कछ
ु उतनी दे र के &लए दाश4%नक बन चक
ु े
थे. िजंदगी मO &मलना और wबछड़ना
ु तो सhय सनातन है , यह कहकर वे मन को झठ_ ू तस9लJ
दे ने क! को&शश कर रहे थे. कछ
ु यह सोचकर „ख-न थे Xक िजस इमारत को उ-हMने अपने
खन
ू -पसीने और हाथM के हनर
ु से "ाणवंत बनाया, आज के बाद कोई उसमO शायद हJ भीतर
आने दे या कोई उनको पहचाने भी. उनके जीवन क! यहJ uासदJ थी. वे Šट-गारे को जीवन
दे कर उसे इमारत मO ढालते. क-नी और ग%नया
ु लेकर उसका अंग-अंग तराशते. कोरJ &मoटJ
मO "ाण-"%तTठा करते. लेXकन काम परा
ू होते हJ उसमO रहने का अ5धकार खो बैठते थे.

ऐसे लोग होटल क! ओर टकटक! लगाकर दे ख रहे थे. यह सोचकर Xक आगे कभी लौटे तो
दरवाजे पर बड़े-बड़े दरबान खड़े pदखाई दO गे. उन जैसM को वे शायद हJ भीतर आने दO . इस&लए
Dवदाई बेला मO वे अपने हाथM के कमाल को भीगी पलकM से, आ„खरJ बार जी ररकर दे ख
लेना चाहते थे. सहे ज लेना चाहते थे उसके zपाकार, उससे %नमा4ण से जड़ी
ु #म%ृ तयM को.

मजदरJ
ू बांटने का काम "ारं भ हो चका
ु था. मा&लक एक-एक को आवाज दे कर बला
ु रहा था.

‘टोपीलाल!' मनीम
ु क! ओर से आवाज लगी. इसी के साथ ता&लयM क! आवाज गंूज उठ_.
टोपीलाल के Dपता उसे लेकर आगे बढ़O , उससे पहले हJ टोपीलाल #वयं आगे बढ़ गया. एक
पांच-छह साल के ब`चे को भरे Dव2वास के साथ आगे बढ़ते दे ख लोग दं ग रह गए. ता&लयM
का वेग दगना
ु ु हो गया.

‘नाम bया है ?' न-हे टोपीलाल से मा&लक ने पछा


ू .

‘o...o...टोपीलाल!' न-हJ, हकलाती-सी जबान


ु से जवाब &मला.
‘bया टMटJलाल?' मा&लक बचपन मO लौट गया. सबक! हं सी छट
ू गई.

‘नŠ, टोपीलाल...टोपीलाल!' टोपीलाल ने दोहराया.

‘तो टोपी कहां छोड़ आए?' मा&लक ने मजाक Xकया. एक बार Xफर मैदान हं सी से उछलने
लगा.

‘मेरJ जेब मO रखी है .' टोपीलाल ने wबना सकचाए


ु जवाब pदया. कभी उसक! मां ने उसके &लए
एक टोपी &सलJ थी. िजसको वह अbसर अपनी जेब मO रखता था. उसने जेब से टोपी
%नकालकर तhकाल पहन भी लJ. टोपीलाल क! हािजरजवाबी पर एक बार Xफर जोरदार
ता&लयां बजीं. मा&लक भी खशी
ु से नहा उठा. उसने अपने हाथM से टोपीलाल को कपड़े भO ट
Xकए, िजनमO एक रे शम क! टोपी भी थी. मा&लक टोपीलाल को अपने हाथM से टोपी पहना हJ
रहा था Xक अचानक वह परे शान हो उठा.

टोपीलाल वापस जाने लगा. तभी मा&लक क! ओर से आवाज आई--

‘ठहरो, वापस आओ बेटे!' टोपीलाल ;क गया.

‘जरा अपने कपड़M क! जेब तो दे खो. मेरJ घड़ी शायद उसमO 5गर गई है .' मा&लक ने कहा.

मा&लक क! घड़ी क! गमशदगी


ु ु क! खबर &मलते हJ एकाएक हड़कंप मच गया. कम4चाUरयM मO
अफरातफरJ मच गई. एक ने मा&लक को खश
ु करने के &लए दौड़कर टोपीलाल को पकड़
&लया. आनन-फानन मO उसक! तलाशी लJ गई. लेXकन घड़ी वहां नहJं थी. सभी परे शान.
मा&लक अपनी महं गी घड़ी को लेकर 5चं%तत था. उससे भी अ5धक परे शान थे उसके कम4चारJ.
हालांXक वे परे शानी का pदखावा हJ अ5धक कर रहे थे.

‘मaने दे खा, अभी कछ


ु दे र पहले तक तो घड़ी साहब के हाथ मO थी, बड़ी ज9दJ %छपा दJ!' एक
कम4चारJ ने टोपीलाल को डांटा.

टोपीलाल चपचाप
ु खड़ा था. उसके माता-Dपता को काटो तो खन
ू नहJं. दोनM #वयं को
अपमा%नत महसस
ू कर रहे थे. Dवदाई क! बेला मO यह कैसा अपशगन
ु . काम परा
ू होने क! जो
खशी
ु थी, वह गायब हो चक!
ु थी. कम4चाUरयM ने टोपीलाल को पकड़ रखा था.

‘मा&लक इसके पास घड़ी भला कहां से आई? आपके pदए कपड़M के &सवाय इसके पास कछ

और नहJं है .' टोपीलाल के Dपता ने 5गड़5गड़ाकर कहा. उसक! मां भी आगे आकर फUरयाद करने
लगी-

‘मेरा टोपीलाल चोर नहJं है मा&लक.'


‘यह बहत
ु शैतान है , कछ
ु भी कर सकता है .' कम4चाUरयM के बीच से आवाज आई. सबने दे खा
वह wबशंभर था. टोपीलाल के माता-Dपता से ईTया4 करने वाला. Xकसी को उसक! बात पर
भरोसा न हआ
ु , लेXकन दसरे
ू कम4चाUरयM को टोपीलाल को तंग करने का बहाना &मल गया.

मा&लक परे शान था. उसका मड


ू खराब हो चका
ु था. घड़ी महं गी थी. पर मा&लक क! है &सयत
के आगे कछ
ु भी नहJं. वह अपने &लए कभी भी दसरJ
ू घड़ी खरJद सकता था. लेXकन सबके
सामने से घड़ी का अनायास गायब हो जाना उसको परे शान कर रहा था. चोर का पता लगना
भी जzरJ था. आ„खर उसने सारे कम4चाUरयM को एक ओर खड़ा हो जाने का आदे श pदया.
Xफर टोपीलाल को अपने पास बलाया
ु , Hयार से पछा
ू -

‘बता दो बेटे, मझे


ु अ`छ_ तरह से याद है , त‡
ु हO बलाने
ु से पहले घड़ी मेरJ कलाई पर बंधी थी.'

ु नहJं मालम
‘मझे ू .' मा&लक के पछने
ू पर टोपीलाल ने जवाब pदया. चोरJ के इ9जाम से वह
घबरा गया था.

‘मा&लक यह झठ
ू बोलकर चोरJ का इ9जाम दसरM
ू पर डालना चाहता है .' एक कम4चारJ
टोपीलाल पर गरा4
ु या.

ु कैसे कह सकते हो?' wबना „झझके टोपीलाल ने कहा.


‘तम

‘इस&लए Xक घड़ी सबके सामने, अभी-अभी गायब हई


ु है . उस समय केवल तम
ु मा&लक के
पास थे.'

‘मा&लक के पास तो उनके नौकर और कम4चारJ भी हa. उनसे भी तो पता करना चाpहए. चोर
हमारे टोले का नहJं है .'

‘Xफर भी घड़ी क! चोरJ तो हई


ु है .'

‘तो यह तो मा&लक और उसके कम4चारJ जानO.' टोपीलाल ने %नडर होकर कहा.

‘कम4चारJ तो सभी पीछे हa, Xफर उनमO इतनी pह‡मत कहां Xक मा&लक क! घड़ी क! चोरJ कर
सकO.'

टोपीलाल के pदमाग मO बार-बार कछ


ु खटक रहा था. Xक जैसे कछ
ु याद करना चाहता हो.
ं ु Dवचार pदमाग मO pटकने से पहले हJ हवा हो जाता था.
Xकत

मा&लक के आदे श पर टोपीलाल को एक ओर wबठा pदया गया. मजदरJ


ू बांटने का काम ;क
चका
ु था. बाक! मजदरू भी पेशोपेश मO थे. कछ
ु इस बात को लेकर परे शान थे Xक मा&लक का
मड
ू खराब होने के बाद अब ठ_क-ठाक ईनाम नहJं &मल पाएगा. लेXकन एकाध के मन मO
%छपे संदेह क! बात जाने दO तो, उनमO से कोई भी टोपीलाल को चोर मानने को तैयार नहJं था.
सहसा टोपीलाल उठकर खड़ा हो गया. सभी उसक! ओर दे खने लगे. उसने कहा-

‘अगर मa चोर पकड़वा दं ू तो आप मेरJ मां और बापू को जाने दO गे?'

‘हम त‡
ु हO ईनाम भी दO गे.' म&लक ने खश
ु होकर कहा. उस समय टोपीलाल का pदमाग बहत

तेजी से सोच रहा था. उसको लगा Xक घड़ी अगर मा&लक क! कलाई से गायब हई ु तो वह
अव2य हJ खल ु कर 5गरनी चाpहए. पर 5गरकर जाएगी कहां! नीचे! फश4 पर! लेXकन फश4 पर
5गरती तो नजर मO आ जाती! Xफर कहां गई? यकायक उसक! आंखO चमक उठ_ं.

‘मा&लक घड़ी आपके उस नौकर के पास है , िजसक! आंखM के नीचे गहरा काला दाग है .'
टोपीलाल ने रह#य से पदा4 हटाया. इसपर सभी चˆक पड़े.

‘चंदगी...! अभी तक तो वह यहJं था, अचानक कहां चला गया?' टोपीलाल क! बताई पहचान पर
मा&लक के पीछे खड़े एक कम4चारJ के मंह
ु से %नकला. सहसा सबक! आंखO चमक उठ_ं. चंदगी
क! खोज क! जाने लगी.

‘मा&लक प&लस
ु बलाकर
ु इसे पकड़वा दJिजए. यह आपका क!मती समय बरबाद कर रहा है .'
इस बीच पीछे से दसरे
ू कम4चारJ क! आवाज आई.

‘चप ु रहो इतने सारे लोगM के सामने हमारJ घड़ी गायब हईु है. उसका इ9जाम इस ब`चे पर
लगाने पर प&लस ु bया हमारJ बात मानेगी. उ9टे हमारJ हJ हं सी होगी. तमु चंदगी को फौरन

बलाओ
ु .' मा&लक ने डांटा. इस पर कम4चारJ पीछे खडे आपस मO खसर ु -पसर
ु करने लगे.

कछ
ु दे र के बाद चंदगी को खोज &लया गया. वह टोकरJ को साफ करने के &लए उठाकर ले
गया था. वह एक बार पहले भी चोरJ के आरोप मO पकड़ा जा चका
ु था. उस समय तो
मा&लक ने उसपर दया करते हएु छोड़ pदया था. टोपीलाल ने जैसे हJ उससे घड़ी लौटाने को
कहा, उसका चेहरा पीला पड़ गया. मा&लक समेत सभी का {यान उसक! ओर चला गया.
मा&लक ने घरकर
ू उसक! ओर दे खा तो वह घबरा गया और उसके पैरM पर 5गर पड़ा.
5गड़5गड़ाकर माफ! मांगने लगा.

चोरJ का भेद खल
ु चका
ु था. सभी टोपीलाल क! बDk
ु पर है रान थे. घड़ी चंदगी तक कैसे
पहंु ची, और टोपीलाल को उसके बारे मO कैसे पता चला, यह एक रह#य था.

‘वह तो बहत
ु पीछे खड़ा हआ
ु था, मेरे पास आया तक नहJं.' मा&लक है रान था.

‘आया था मा&लक, टोकरJ उठाने के &लए.'

मा&लक को याद आया. चाय के खालJ कप, री कागज वगैरह डालने के &लए एक ड#टwबन
का इंतजाम Xकया गया था. उसी को उठाने के &लए चंदगी आगे आया था.
ु हO कैसे पता चला Xक घड़ी ड#टwबन मO 5गरJ है, और चंदगी के पास है ?' मा&लक ने पछा
‘त‡ ू .

‘मेरे पापा चोर नहJं हa, मa भी चोर नहJं हंू .' टोपीलाल ने भोलेपन से कहा. घड़ी &मल जाने से
टोपीलाल के Dपता क! pह‡मत वापस लौट आई थी. वे आगे आकर बोले-

‘मा&लक मेहनतकश लोग ईमानदार से जीते, अपने पसीने क! कमाई खाते हa. उनमO इतनी
pह‡मत कहां Xक आपक! महं गी घड़ी रख सकO. इतनी महं गी घड़ी को हमारे पास दे खकर कोई
भी चोरJ का इ9जाम लगा लेगा. इस&लए यह काम आप हJ के आद&मयM का हो सकता है ,
इसका हमO Dव2वास था. सबके सामने घड़ी क! चोरJ तो संभव न थी. इसी&लए संभावना यहJ
थी Xक वह अपने आप खलकर
ु 5गर गई हो. यहJ सोचते हए
ु इसे आपके नौकर ‰ारा ड#टwबन
उठाने क! घटना याद आ गई. तब इसको यह अनमान
ु लगाते दे र

न लगी Xक जो कम4चारJ उसे लेकर गया है , घड़ी उसके पास हो सकती है , bयM बेटा?'

टोपीलाल ने ‘हां' के पZ मO अपनी गद4 न pहला दJ.

‘शाबास!' मा&लक के मंह


ु से अनायास %नकला. छह साल क! आयु मO टोपीलाल को &मलJ यह
पहलJ कामयाबी थी. इस घटना के बाद उसके चाहने वाले उसको जासस
ू टोपीलाल के नाम से
पकारने
ु लगे. लोगM ने मान &लया Xक बड़े सोच के &लए उ‘ मO बड़ा होना जzरJ नहJं है .
असाधारण gयिbतhव साधारण वेश मO भी सामने आ सकता है . -

आज जब हम यह कहानी आपको सनाने


ु जा रहे हa तो टोपीलाल चौदह वष4 का हो चका
ु है .
इतने वष4 भी एकाएक नहJं बीते. हालांXक टोपीलाल का "यास रहा Xक हं सते-खेलते समय यंू

हJ उड़ जाए. उड़ता हJ रहे, जैसे नीले आसमान मO पतंग और होलJ के रं ग. उडे जैसे पंछ_.
कलां
ु चे भरे , जैसे जंगल मO pहरन, उछले-खेले जैसे पानी मO गोते खाती नीलमछUरया. तैरे yयM
नpदया मO रं ग-wबरं गी नाव, झील मO ब†खO .

हर रात वह ऐसे हJ रं ग-wबरं गे सपने दे खता. नए-नए अरमान सजाता. लेXकन जब भी वह


अपने हमउ‘ ब`चM को उनके हाथM मO त’ती, बगल मO ब#ता लटकाए दे खता तो उसका मन
बझ
ु -सा जाता. उसे लगता Xक कछ
ु उसके हाथM से Xफसलता जा रहा है , जो उसको Xफर िजंदगी
मO कभी भी नहJं &मलने वाला. इतना सोचते हJ उसका मन बझ
ु -सा जाता. आशा %नराशा मO
ढल जाती.

एक बार उसके Dपता को #कूल के &लए नए कमरे बनाने का काम &मला. pदन मO #कूल के
एक pह#से मO 5चनाई का काम चलता. दसरे
ू मO ब`चे◌े पढ़ाई करते. उस समय टोपीलाल को
न तो पतंग उड़ाने मO मजा आता, न लका
ु -%छपी का खेल खेलने मO . ऊपर से #कूल मO पढ़ रहे
ब`चे जब उसको हे ठ_ नजर से दे खते तो उसपर घड़M पानी पड़ जाता. मन क! सारJ उमंग
धराशायी हो जाती.
यंू तो अपने टोले के सभी ब`चM मO टोपीलाल सबसे तेज और बDkमान
ु माना जाता. लोग,
उसक! तारJफ करते. जो काम दसरे
ू ब`चे नहJं कर पाते थे, उसके &लए टोपीलाल को हJ याद
करते. टोपीलाल उनके Dव2वास क! रZा भी करता. अपने काम से वह हरे क का pदल जीत
ं ु जब वह छोटे -छोटे ब`चM को पढ़ते हए
लेता. Xकत ु दे खता तो उसक! सारJ खशी
ु हवा हो जाती.
मन बझ ु -सा जाता. उस समय उसका न दसरM ू क! मदद करने को मन करता, न खेल-कद ू मO
हJ आनंद आता.

Dपता %नि2चंत थे. उ-हMने जैसे पहले हJ तय कर रखा था-

‘मेरा टोपीलाल बड़ा होकर हम सब राज&मि[यM से आगे जाएगा. उसके हाथM को छते
ू हJ
क-नी-वसलJ
ू नाचने लगO गी. ŠटM मO छअन
ु -भर से जान आ जाएगी. अभी तक द%नया
ु मO सात
अजबे
ू हa. कोई आ2चय4 नहJं अगर आठवां अजबा
ू मेरे बेटे के बड़े होने का इंतजार

कर रहा हो.'

दसरे
ू मजदरM
ू क! तरह टोपीलाल के Dपता के सपने भी छोटे थे. पेट भरने और िजंदगी क!
मामलJ
ू सDवधाओं
ु तक &समटे हए
ु . उनके &लए टोपीलाल के Dपता को पढ़ाई जzरJ नहJं लगती
थी-

‘XकताबM मO आंख वे फोड़O िज-हO द“तरM मO जी-हजरJ


ु ू करनी हो. मेरा बेटा...' Dपता के मंह
ु से
अपनी तारJफ सनकर
ु टोपीलाल का मन मcन हो जाता. पल-भर के &लए सपनM क! ऊंची और
कलंगीदार त#वीर उसके सामने होती. लेXकन #कूल मO जब ब`चM क! कZाएं लग रहJ होतीं,
और माता-Dपता काम पर होते तब उसको सबकछ
ु सना
ू और बेकार लगने लगता. मन होता
Xक उड़कर बाक! ब`चM के बीच पाठशाला मO जा बैठे, श@दM के साथ ब%तयाए, अZरM के साथ
कानाबाती करे .

और इस तरह टोपीलाल का अनमनापन बढ़ता हJ जा रहा था. पतंग उड़ाना, लक


ु ा-%छपी का
खेल खेलना सब पीछे रह गया. उसका क9पनाशील मन जो कभी पंछ_-सा %नब€ध आसमान
मO तैरता, %नम4ल-पावन नदJ-सा हहर-हहर हहराता, pहरन छौनM जैसा कलां
ु चे भरता था, वह उदासी
से %घरने लगा. और तो और दसरM
ू के बताए काम मO भी वह गलती करने लगा.

टोपीलाल wबगड़ता जा रहा है, अbसर यह लोग कहने लगे. मां से कोई बात %छप पाती है , एक
pदन उसक! मां ने पछ
ू हJ &लया. जवाब मO टोपीलाल बोला-

‘मां सब कहते हa Xक मa बहत


ु तेज हंू . लेXकन.'

‘आ„खर बात bया है, बेटा?'T


‘bया तेज-तरा4र होना हJ सबकछ
ु होता है? उस pदन मaने सना
ु , मा#टरजी पढ़ा रहे थे Xक हम
जो जानते हa उसको दसरMू तक पहंु चाना भी हमारा धम4 है . वे बता रहे थे Xक Wान बांटने से
और भी बढ़ता है . परं तु जब Xकसी को Wान समेटना हJ न आए तब?'

मां बहत
ु pदनM से टोपीलाल के हरकतM पर नजर रखे हए ु थी. उसक! बेचैनी क! राई-र†ी खबर
रखती थी. बेटे के pदल क! बात समझते मां को दे र न लगी-

‘मaने तेरे बापू से कहा था तझे


ु #कू ल भेजने को.'

‘सच! Xफर बापू ने bया जवाब pदया था?' टोपीलाल क! बांछे „खल गŠ.

‘उ-हMने जो कहा वह गलत कहां है . हमारा कोई एक pठकाना तो है नहJं!'

‘तो bया हआ
ु मां, जबतक हम यहां हa तब तक तो...'

‘ठ_क है , मa कल मा#टर जी से बात करके दे खग


ंू ी.'

टोपीलाल उछल पड़ा. वह हमेशा हJ अपनी मां क! सझ


ू -बझ
ू का कायल रहा था. कामयाबी क!
परJ
ू -परJ
ू उ‡मीद थी. उस रात उसने सपना दे खा Xक वह भी ”ेस पहनकर #कूल जा रहा है .
प#
ु तकM से ब%तया रहा है . दसरे
ू ब`चM क! तरह उसका नाम भी पाठशाला के रिज#टर पर चढ़
चका
ु है -

‘टोपीलाल, पाठ याद करके लाए?'

‘जी हां!'

‘तो सनाओ
ु ?' कZा अ{यापक का #वर उसके कानM मO पड़ता है , और वह wबना एक भी पल
गंवाए परा
ू पाठ सना
ु दे ता है . अ{यापक चXकत हa. परJ
ू कZा दांतM तले उं गलJ दबाए है .

‘दे खा.' अ{यापक महोदय बाक! कZा को संबो5धत करते हa, ‘तम
ु सब Xकतने आलसी और
कामचोर हो. टोपीलाल से सीखो...एक हJ pदन मO सारा पाठ याद कर pदया. ध-य हa इसके
माता-Dपता.' टोपीलाल ऐसे सपने परेू pदन दे खता रहा. अगले pदन उन सब पर पानी Xफर गया.

‘आधे से yयादा सu %नकल चका


ु है , मा#टरजी ने कहा है Xक इस समय दा„खला नहJं हो
सकता.' मां ने ऐसा बताया, मानो कहते हए
ु मनM बोझ से दबी जा रहJ हो.

‘मां तम
ु उनसे कहतीं Xक मेरा बेटा हो&शयार है , वह बाक! बचे समय मO हJ परJ
ू तैयारJ कर
सकता है ?'

‘उनका कहना था Xक िजस कZा मO तम


ु दा„खला लेना चाहते हो, उसके सभी ब`चे तमसे
ु नौ-
दस साल छोटे हa. वे त‡
ु हारा मजाक उड़ाएंगे.'
‘कोई बात नहJं, मa Xकसी का भी बरा
ु नहJं मानंूगा. अगर कोई मझे
ु टोकेगा तो मa उससे कहंू गा
Xक दे खो मa इस उ‘ मO भी श;आत
ु कर सकता हंू . सीखने क! कोई उ‘ थोड़े हJ होती है .'

‘मaने उनसे सब कहा था. वह एक-एक बात जो हमारे पZ मO जाती हो. लेXकन उ-हMने मेरJ
एक न सनी
ु .' मां का कलेजा फटा जा रहा था. टोपीलाल क! %नराशा &सर उठाने लगी. आंखM
के आगे अंधेरा छा गया.

बात आई-गई हो गई. लेXकन टोपीलाल उदास रहने लगा. उसका खेलना छट
ू गया. वह जगह
भी उसक! आंखM मO गढ़ने लगी. वह रोज सोचता Xक #कूल का काम ज9दJ से ज9दJ परा
ू हो
ताXक वह यहां से कहJं दरू जा सके.

नए कमरM क! 5चनाई का काम तेजी से चल रहा था. Dपं◌्रसीपल साहब चाहते थे Xक काम
समय रहते पराू कर &लया जाए. ताXक अगले साल से आगे क! कZाओं क! पढ़ाई शz ु क!

जा सके. #कूल मO ब`चे बढे ◌ंगे, इसके &लए अ%तUरbत पानी क! भी जzरत होगी. नगर %नगम
क! सHलाई कछ
ु घंटM तक सी&मत थी. बाक! समय हaडपंप से काम चलाया जाता था, परं तु
उसका पानी खारापन &लए हए
ु था.

Dपं◌्रसीपल साहब नलकप


ू लगवाना चाहते थे. लेXकन सम#या थी Xक उसको लगवाया कहां
जाए. इससे पहले भी एक-दो जगह बोUरंग करा चक
ु े थे. लेXकन कहJं का चोहा बहत

नीचे &मलता, तो कहJं पर %नसोत खारापन &लए हए


ु . हaडपंप का खारा पानी होने के कारण
ब`चे अब भी परे शान थे. सं’या बढ़ते हJ सम#या Dवकराल हो जाने वालJ थी. D"ंसीपल साहब
चाहते थे Xक oयबवै
ू ल ऐसी जगह लगवाया जाए जहां पानी का -◌ोत भी अ`छा हो; और उसमO
ं ु धरती के गभ4 मO ऐसे pठकाने का पता लगाना एक भारJ सम#या
भरपरू &मठास भी हो. Xकत
थी.

‘साहब पराने
ु जमाने मO ऐसे लोग थे, िजनके तलवे धरती क! धड़कनM को पढ़ &लया करते थे.
जो चलते-चलते जहां भी ठहर जाते, वहJं मीठ_ जलधार बहा दे ते. ऐसे परोपकारJ लोगM ने हJ
कएं
ु -बाबड़ी बनवाए. उनका मीठा पानी आज भी ज-म-ज-मांतर क! बझाने
ु का साम•य4 रखता
है .'

‘ऐसे लोग अब कहां से लाऊं? D"ंसीपल साहब बोले, ‘बजट पहले हJ बढ़ चका
ु है . एक बोUरंग
खराब हआ
ु तो दसरा
ू बोUरंग कराने क! अनम%त
ु शायद हJ &मल पाए.' परे शानी उनक! पेशानी
पर &लखी थी. कोई अनपढ़ भी उसको बांच सकता था. अ{यापक, मजदरू और कारJगर सभी
गद4 न झकाए
ु खड़े थे. संकट सबके सामने था, लेXकन उससे उबरने का माग4 Xकसी को नहJं
सझ
ू रहा था.
‘सर! आपके pहसाब से बोUरंग करना कहां ठ_क रहे गा?' D"ंसीपल साहब के ठ_क पीछे से आवाज
आई. उ-हMने पलटकर दे खा. एक लड़का पीछे खड़ा उनसे सवाल कर रहा था. उसके चेहरे पर
आhमDव2वास था. आवाज मO वह बल जो जीवन से गहरे जड़ाव
ु के बाद हJ आ पाता है .
उ-हMने पहचानने का "यास Xकया, लेXकन नाकामयाब रहे . बस इतना तय कर पाए Xक वह
उनके #कूल के ब`चM मO से नहJं है .

‘bयM?' एक अनजान बालक को जवाब दे ने मO उ-हO अपनी हे ठ_ महसस


ू हई
ु .

‘बस यंू हJ Xक अगर सभी जगह पर मीठा पानी हो तो बोUरंग करना कहां पर ठ_क रहे गा?'

‘इसमO सोचना...oयबवे
ू ल कोई बीच मैदान मO तो लगवाएगा नहJं, उसे Xकसी कोने मO हJ होना
चाpहए.' D"ंसीपल साहब ने बताया.

‘कौन-सा कोना?' अगले सवाल पर D"ंसीपल साहब %तल&मलाए. परं तु इतने लोगM के बीच जब
वे #वयं कछ
ु न सोच पा रहे हM, तो सम#या के %नदान के &लए एक बालक पर ग#
ु सा pदखाने
का साहस न कर सके. उ-हMने एक ओर संकेत कर pदया.

‘अगर वहां भी खारा पानी %नकले◌े तो?'

ग#
ु से को दबाते हए
ु D"ंसीपल साहब ने दसरे
ू कोने क! ओर संकेत कर pदया.

‘इसके अलावा?'

D"ंसीपल साहब झंुझला पड़े. Xफर भी उ-हMने अगले pठकाने क! ओर इशारा कर pदया.
Dवालय मO सबके सामने, उनसे इतने सारे सवाल-जवाब करने वाला टोपीलाल था. उस समय
उसके माता-Dपता सpहत सभी मजदरू-कारJगर डरे हए
ु थे.

बरसात का मौसम गजरे


ु पखवाड़ा हJ बीता था. जमीन मO अब भी नमी थी. आम क!
गठ&लयां
ु जहां-जहां फOक! गई थीं. वहां-वहां आम के न-हे पौधे नजर आ रहे थे. #कूल के ब`चे
उ-हO उखाड़कर उनसे पपीहा बनाकर खेलते. टोपीलाल को भी पपीहा बजाने मO आनंद आता
था. उस समय टोपीलाल के हाथM मO एक थैला था. थैले मO भरJ हई
ु थी गीलJ &मoटJ.

कछ
ु दे र तक मैदान मO इधर-उधर घूमता हआ ु वह उन पौधM को दे खता रहा. Xफर उनमO से
एक जैसे कई पौधे चने
ु . उ-हO सावधानीपव4
ू क उखाड़कर थैले मO रखी गीलJ &मoटJ मO दबा
&लया. ताXक पौधे मरझाएं
ु नहJं. उन पौधM को उसने बराबर pह#सM मO बांटा और उन #थानM
पर रोप pदया, जहां D"ंसीपल साहब नलकप
ू लगवाना चाहते थे.

लोग तो अपने काम मO लगे रहते. टोपीलाल रोज जाकर अपने पौधM को दे ख आता. चार-पांच
pदनM मO हJ पUरवत4न साफ नजर आने लगा. एक जगह के पौधे परJ
ू तरह सख
ू चक
ु े थे. दसरे

कोने मO वे बचे रहने के &लए संघष4 कर रहे थे. जबXक एक कोने मO लगे पौधे „खले-„खले थे,
मानो वहJं पर उगे हM. यह दे खकर टोपीलाल के चेहरे पर चमक आ गई. अपनी खशी
ु को
दबाए रखना उसके &लए कpठन हो गया. उसने उसी समय D"ंसीपल के कमरे क! ओर दौड़
लगा दJ और उनके दरवाजे पर बैठे चपरासी क! परवाह न करते हए
ु वह सीधा उनके
काया4लय मO घस
ु गया.

‘मaने पता लगा &लया साहब!' D"ंसीपल साहब कछ


ु समझ पाएं, उससे पहले हJ वह बोल उठा.
उस समय उसक! सांस धˆकनी क! तरह चल रहJ थी. एक गं◌व
ं ार-से pदखने वाले लड़के को
दे खकर Dपं◌्रसीपल साहब को ग#
ु सा आया.

‘मaने पता लगा &लया.' टोपीलाल ने अपने श@दM को दोहराया. जैसे इससे अ5धक कछ
ु कहना
उसको आता हJ न हो. तब तक D"ंसीपल साहब उसको पहचान चक
ु े थे.

‘आराम से बताओ, bया कहना चाहते हो.'

‘आप उ†र pदशा मO oयबवै


ू ल लगवाइए, वहां पर मीठा पानी हJ &मलेगा.'

‘यह तम
ु कैसे कह सकते हो?'

‘मa आपको pदखाता हंू , आइए साहब.' कहने के साथ हJ वह पलट गया. जैसे बहत
ु ज9दJ मO
हो. D"ंसीपल साहब और उनके काया4लय मO मौजद ू बाक! सभी लोग उसके पीछे हो &लए.

‘मां ने एक बार एक कहानी सनाई


ु थी. मaने सोचा Xक bयM न उसी को आजमाया जाए. और
अंतर एकदम साफ नजर आ रहा है . आप अपनी आंखM से दे खते हJ मान जाएंगे.' आगे-आगे
चलता हआ
ु टोपीलाल कह रहा था.

अंततः टोपीलाल ‰ारा बताए गए #थान पर हJ बोUरंग कराया गया. Xफर जैसा उसने कहा था,
वहJ हआ
ु . पानी इतना मीठा था, जैसे अमत
ृ . ऊपर से इतना शीतल Xक ज-म-ज-मांतर क!
Hयास बझा
ु सके. सभी "स-न थे. D"ंसीपल साहब क! खशी ु का तो

pठकाना हJ नहJं था.

आ„खर वह pदन भी आया, जब #कूल क! नई wबि9डंग तथा नलकप


ू का उfघाटन था. उस
pदन बाहर से आए अ5धकाUरयM तथा बड़े-बड़े लोगM क! उपि#थ%त मO D"ंसीपल साहब ने कहा
था-

‘पीpढ़यM से कहJ-सनी
ु जाने वालJ हमारJ कहावतO और लोककथाएं यंू हJ नहJं हa. इनमO हमारे
बजगMर
ु ु ् का वषा4◌े◌ं का अनभव
ु और Wान %छपा हआु है . ये हमारे पारं पUरक Wान का अfभत ु
ं ु बड़े दःख
भंडार हa. Xकत ु क! बात है Xक नए को समेटने क! आपाधापी मO हम पराने ु को भलते

जा रहे हa. मa इस लड़के का बहत
ु अहसानमंद हंू . इसने मझे
ु , बि9क हम सब को हमारJ
गल%तयM का एहसास कराया है .

मa यहां उपि#थत अपने अ5धकाUरयM से "ाथ4ना करता हंू Xक %नयमM मO ढJल दे कर भी इसे
#कूल मO दा„खल करने क! अनम%त
ु "दान करO . इस शत4 के साथ Xक आगे जो भी कहानी या
कहावत यह सने
ु , उसपर खलकर
ु "योग करे . उसका परा
ू खच4 यह #कूल उठाएगा.'

उनका भाषण समाHत होते हJ काय4qम-#थल ता&लयM क! गड़गड़ाहट से गंज


ू ने लगा. टोपीलाल
तथा उसके माता-Dपता क! खशी
ु का तो pठकाना हJ नहJं था. उनके साथ काम करने वाले
बाक! मजदरू भी #वयं को गौरवाि-वत अनभव
ु कर रहे थे.

इस तरह टोपीलाल को #कूल मO दा„खला &मल गया.

कहानी हो या पाठ, जो पढ़ने-सनने


ु के बाद उसको भलJ-भां%त गनते
ु हa, उनके &लए रा#ता बनाने
मंिजलO खद
ु आगे आ जाती हa.

यह तो अब क! कहानी हई ु . इससे बाद का pह#सा भी कम मनोरं जक नहJं है . सनने


ु के साथ
गनना
ु Xकतना जzरJ है , यह टोपीलाल ने तभी जाना था.

तो चलो उसी पर आते हa-

टोपीलाल जब कछ ु बड़ा हआु तो टोलJ के ब`चM के साथ खेलने लगा. उस समय बाक! ब`चM
के माता-Dपता क! अपेZा होती थी Xक वह अपने से छोटे ब`चM का खयाल रखे. सड़क पर
वाहनM का जमघट रहता है . ब`चM को उधर जाने से रोके. िजतना वह खद
ु पढ़ चका
ु है , उतना
दसरM
ू को पढ़ाए, जो वह #वयं जानता है , उसके बारे मO बाक! ब`चM को भी बताए.

इससे हालांXक टोपीलाल के अपने मनोरं जन मO खलल पड़ता था. लेXकन जब टोलJ के बड़े
लोग कह रहे हM; और उ-हO उसके माता-Dपता का भी समथ4न "ाHत हो तो वह yयादा कछ
ु कर
हJ नहJं सकता था. वह खद
ु को तो इतना समझदार मानता था Xक शहर के Xकसी भी कोने
मO घमकर
ू ं ु बाक! ब`चM के साथ रहने से वह बंध-सा गया
वापस आ सके. Xकत

था. इससे उसके लका


ु -%छपी के खेल मO भी खलल पड़ा था. उस खेल मO छोटे -बड़े सभी ब`चे
pह#सा लेते. धमाचौकड़ी के बीच, bया पता असावधानी मO कोई ब`चा सड़क के उस पार चला
जाए तो. कोई दघ4
ु टना हो गई तो, सब उसी को दोष दO गे. Xकसी को बराई
ु का मौका टोपीलाल
wबलकल
ु नहJं दे ना चाहता था. ब`चM के मामले मO तो हर5गज नहJं.

टोपीलाल ने मनोरं जन का नया तरJका %नकाला. उसने एक हJ #थान पर बैठकर खेले जाने
वाले खेल खेलना शz
ु कर pदया.
उन pदनM उनका समह ू एक बहमं
ु िजला इमारत को परा
ू मO लगा था.उ-हJं pदनM टोपीलाल को
सड़क पर एक ग†ा &मला. िजसपर एक ओर कछ ु छपा हआ
ु था. शायद Xकसी ब`चे का 5गर
पड़ा हो. टोपीलाल ने वह उठा &लया. ग†ो के एक ओर अलग-अलग रं ग के चौकोर खाने बने
थे. कछ
ु आड़े-%तरछे 5चu, रं ग-wबरं गी धाUरयां.

टोपीलाल कई बार ब`चM को ऐसे हJ ग†ो के चारM कोनM पर बैठे दे ख चका


ु था. गौर से उसको
दे खते, गद4 न झकाए
ु गोpटयM क! चाल चलते हए
ु . इतना तो वह समझता हJ था Xक यह कोई
खेल है . वह ग†ो पर टकटक! गढ़ाए दे र तक खेल को समझने का "यास करता रहा. घंटM
तक, परं तु कछ
ु भी प9ले न पड़ा.

‘wबना मदद के इसको समझना मि2


ु कल है .' टोपीलाल ने माना. लेXकन मदद Xकससे लJ जाए?
िजन ब`चM के साथ वह खेलता था, वे सभी उससे छोटे थे. उनमO से कई तो टोपीलाल को
अपना माग4दश4क मानते. बात-बात पर उसके पास मदद के &लए आते. संभव है Xक ब`चM मO
से कोई इस खेल के बारे मO जानता हो. लेXकन अपने से छोटे ब`चM से पछकर
ू वह अपनी
हे ठ_ नहJं करना चाहता था.

टोपीलाल को पहले हJ इस बात का Zोभ था Xक जो ब`चे #कूल जाते हa, उ-हO उससे अ5धक
Wान है . कछ
ु pदन के &लए #कू ल जाकर उसने दे ख भी &लया था. िजन "2नM का उ†र दे ने मO
वह अटक जाता, उ-हO उससे छोटे ब`चे आसानी से हल कर दे ते थे. वह दसरे
ू ब`चM के बराबर
आने का भरसक "यास करता. रात-pदन पढ़ता, पUर(म करता. परं तु घर मO कभी प#
ु तकM का
टोटा पड़ जाता तो कभी कॉDपयM का. pदन मO ब`चM क! दे खभाल करनी पड़ती, रात मO wबि9डंग
मO घHु प अंधेरा छा जाता. pदये क! रोशनी मO म`छर इतना परे शान करते Xक पढ़ना हो हJ नहJं
पाता था. पढ़ाई मO Dपछड़ा तो पाठशाला से उसका मन भी ऊबने लगा-

ु उनके बराबर आने मO समय लगेगा.' उसने #वयं को समझाने क! को&शश क!.
‘मझे

उस pदन के बाद वह डटकर मेहनत करने लगा. तभी #कूल का %नमा4ण काय4 परा
ू हो जाने के
कारण उसके माता-Dपता समेत परा
ू समह
ू वहां से रवाना होने क! तैयारJ करने लगा. भरे मन
से टोपीलाल को भी #कूल से अलDवदा कहना पड़ा. उसके बाद उनका समह
ू जहां गया, वहां से
पाठशाला काफ! दरू थी.

टोपीलाल को अपने माता-Dपता से भी &शकायत थी. चाहता था उसके माता-Dपता

अपने समह
ू से अलग हो, एक #थान पर pटककर काय4 करO . उसके भDवTय के बारे मO सोचO .
तभी उसको आगे पढ़ने का अवसर &मल सकता है . मां उसक! बात को समझ सकती है , यहJ
सोचकर उसने अपना सझाव
ु मां के साथ रखा-

‘मां, बापू तो बाक! सब &मि[यM से अ`छे कारJगर हa!'


‘हां, हमारे समह
ू के कई &म[ी उनके &सखाए हए
ु हa. वे उ-हO अपना ग;
ु मानते हa.'

ु भी कछ
‘तम ु कम नहJं हो, मां?' टोपीलाल ने अपनी बात मनवाने के उfदे 2य से "शंसा क!.

ु भी तो तेरे Dपता ने हJ &सखाया है!' कहते हए


‘मझे ु उसक! मां म#
ु करा दJ, मानो उसका मंतgय
समझ चक!
ु हो.

‘मां! तम
ु और बापू शहर मO कहJं भी रहकर काम कर सकते हो. दोनM को आसानी से काम
&मल जाएगा. संभव है इससे हमारJ आमदनी भी बढ़ जाए. Xफर हम अपना मकान भी बना
सकते हa.' वह कछ
ु और न समझ बैठे, इस&लए टोपीलाल ने अपना मंतgय साफ कर दे ना हJ
उ5चत समझा-

‘मां, हम लोग यpद एक हJ #थान पर रहO तो मa आसानी से पढ़-&लख सकंू गा.'

‘तू पढ़-&लखकर बड़ा आदमी बने, यह तो मa भी चाहती हंू . लेXकन अलग रहने क! बात, इसके
&लए तेरे बापू शायद हJ तैयार हMगे.'

‘पर वे तो सदा हJ मेरा भला चाहते हa, bयM?'

‘सो तो है . वे कहते हa Xक हमारा एक %नजी पUरवार है, छोटा-सा, िजसमO &सफ4 हम तीनM
शा&मल हa. इसके बाहर हमारा बड़ा पUरवार भी है . उसमO हमारा परा
ू समह
ू आता है , िजसमO
पचास-साठ पUरवार हa. सबके सख
ु -दःख
ु से हमारा वा#ता है . नफा-नकसान
ु सबके साझे हa.'

‘परं तु मां, वे हमारे सगे थोड़े हJ हa!' टोपीलाल ने तक4 करने का "यास Xकया. हालांXक वह
जानता था Xक उसक! मां साधारण ि[यM मO से नहJं है , उसके पास हर तक4 क! काट हो
सकती है . और हआ
ु भी यहJ...

‘केवल सगा होना हJ अपनhव क! कसौटJ नहJं होती. एक दे श, एक शहर, एक गांव, एक ब#ती
और एक जैसा gयवसाय करने वालM मO भी अपनापा होता है . इस समह
ू के साथ हम वषr से
रहते आए हa. सब एक-दसरे
ू क! अ`छाई और बराइयM
ु से भलJ-भां%त पUर5चत हa. सब एक-जैसा
खाते-पहनते हa. संकट मO सब एक-दसरे
ू क! मदद करते हa. इसके अलावा एक बात और है ,
बेटा.' कहते हए
ु मां कछ
ु पल को ;क!, Xफर जैसे %नण4य पर आती हई
ु बोलJ-

‘Xकसी भी अकेले इंसान क! तरbक! का उस समय तक कोई मोल नहJं है , जब तक Xक उसके


अपने लोग, संगी-साथी, भाई-बंधु Dपछड़े हए
ु हM. पड़ोसी भखा
ू हो तो अपना

पेट भरा होने मO कोई बड़Hपन नहJं है . आदमी को सबके भले मO हJ अपना भला दे खना
चाpहए.'
‘लेXकन समह
ू मO तो wबशंभर जैसे लोग भी हa मां, जो बापू से जलते हa.' टोपीलाल ने Xफर तक4
Xकया.

‘ऐसा नहJं बेटा! कहावत है Xक घर मO चार बत4न एक कोने मO पड़े हM, तो कभी न कभी जzर
खड़क उठते हa. त‡
ु हारे wबशंभर काका ऊपर से चाहे जैसे pदखते हM, pदल उनका wबलकल
ु साफ
हa. याद है DपछलJ बार जब तेरे Dपता बीमार पड़े थे?'

उस घटना के बारे मO टोपीलाल को yयादा याद pदलाने क! जzरत नहJं पड़ती. वह उसके
pदमाग मO सवा45धक डरावनी #म%ृ त के zप मO दज4 है . उसके Dपता को तेज बखार
ु चढ़ा था.
गम के pदन थे. बखार
ु का इलाज चल हJ रहा था Xक है जा ऊपर से सवार हो गया. मां उस
समय काम पर, घर से बाहर थी. टोपीलाल घर पर अकेला. Dपता क! wबगड़ती हालत दे खकर
वह पड़ोस मO मदद के &लए पहंु चा. उस समय wबशंवर काका ने भागदौड़ कर पUरवार क! जैसी
मदद क! थी, उसे वह कैसे भल
ू सकता है ! भला
ु पाना संभव हJ नहJं है .

बीती घटना को याद करने के साथ हJ टोपीलाल के चेहरे पर उदासी झलक आई. उसक! मां
ने फौरन ताड़ &लया. टोपीलाल को सीने से लगाकर, पीठ पर Hयार से हाथ Xफराने लगी- ‘घबरा
मत! समह
ू मO त‡
ु हारे जैसे और भी कई ब`चे हa. मa त‡
ु हारे Dपता से बात कzंगी Xक काम क!
तलाश मO ब#ती से दरू न जाया करO . उसके बाद तम
ु सब अ`छ_ तरह पढ़ सकोगे.'

ं ु %नTकष4 उ‡मीद जगाने वाला था.


मां के तकMर ् ने तो टोपीलाल को उलझा pदया था. Xकत
इस&लए उसक! उदासी छं टने लगी. उसी pदन से वह इस "तीZा मO था, जब उसका समह
ू लंबे
समय के &लए Xकसी ऐसे #थान पर pठकाना करे गा, जहां वह अपनी पढ़ाई दबारा
ु आरं भ कर
सके. वह मां से अhय5धक "भाDवत भी था.

‘मां के पास हर सम#या का हल, हर तक4 का जवाब है .' ग†े को हाथ मO थामे टोपीलाल सोच
रहा था.

और वह गलत भी नहJं था.

।।।।।।1

मां क! उन pदनM अ`छे राज&म[ी के zप मO पहचान थी. Xकसी इमारत मO महJन नbकाशी
‰ारा जान डालनी हो तो टोपीलाल क! मां को हJ याद Xकया जाता. और वह सचमच
ु कोरJ
&मoटJ मO "ाण परू दे ती थी. ŠटO उसके #पश4 से बोलने लगतीं, दJवारO छअन
ु -भर से गवलJ हो
तन जातीं, कंगरM
ू मO जान आ जाती, खबसरत
ू ू सपना साकार होने लगता था.

ु हारJ टbकर का राज&म[ी परेू शहर मO भी शायद हJ कोई हो.' टोपीलाल के Dपता मb
‘त‡ ु तकंठ
से उसक! "शंसा करते.
ु आप हJ का तो &सखाया हआ
‘सबकछ ु है .'

ु तो गड़
‘ग; ु हJ रहा, पर तू शbकर बन गई.' खशी
ु से उनका जी उमगाने लगता. टोपीलाल का
मन भी बाग-बाग हो जाता. जहां कहJं मां का िजq होता, वह सांस थामे सनने
ु लगता. मां क!
तारJफ सनना
ु उसको खब
ू भाता. वह सदै व ऐसे अवसर क! "तीZा मO रहता.

िजस समय टोपीलाल अपनी मां के पास पहंु चा, वह सोने क! तैयारJ मO थी. वैसे भी रात हो
चक!
ु थी. pदन-भर क! कड़ी मेहनत के बाद वह बहत ु हJ थक जाती थी. पर टोपीलाल को चैन
कहां! pटमpटमाते pदये क! झीनी रोशनी मO उसने ग†ा मां के सामने रख pदया-

‘इसे तो मaने वषr से नहJं छआ


ु . जाकर अपने Dपता से पछ
ू .'

ु तो त‡
‘मझे ु हJं से सीखना है .' टोपीलाल ने िजद क!.

‘ठ_क है , चल गोpटयां wबछा ले.'

टोपीलाल को बताया गया था Xक यह खेल गोpटयM से खेला जाता है . गोpटयां न होने से वह


%नराश भी था. उसको ग†ा फOकने वाले से &शकायत भी थी Xक यpद उसने इस खेल से
ऊबकर ग†ा फOका है , तो गोpटयM को भी साथ हJ फOक दे ना चाpहए था. ताXक Xकसी के काम
ं ु यह &शकायत yयादा दे र न pटक सक!.
आ सकO. Xकत

‘यह जzर Xकसी ब`चे के थैले से Xफसला होगा.' टोपीलाल ने सोचा था, ‘तब तो वह बालक
बहत
ु परे शान होगा.'

टोपीलाल को बहत
ु दःख
ु पहंु चा था. जैसे उसने अपनी हJ कोई क!मती चीज गमा
ु दJ हो. पर
नया खेल सीखने क! ललक मO वह दःख ु yयादा दे र न pटक सका था.

‘मां, wबना गोpटयM के bया तम


ु इस खेल को नहJं &सखा सकतीं?'

‘&सखा भी सकती हंू .' मां ने उ†र pदया था, ‘लोग तो इसको सांप-सीढ़J का खेल कहते हa. परं तु
असल मO यह है तो जीवन और "क%त ृ का खेल हJ. िज-हO इस खेल मO हम गोpटयां कहते हa,
िजंदगी के खेल मO ये कछ
ु भी हो सकती हa. यहां तक Xक मa और तुम भी. यहां से आगे
समझने के &लए पासे हJ जzरत होगी. उसका काम भी Šट के मामलJ
ू टकड़े
ु से चलाया जा
सकता है .'

मां क! बातM मO गहरा रह#य %छपा था. लेXकन खेल के उhसाह मO डबे
ू टोपीलाल को {यान रहा
केवल Šट के टकड़े
ु से पासा बनाना. वह उसी समय Šट का "बंध कर लेना चाहता था, लेXकन
मां ने टोक pदया-

ु भी सीखने के &लए धैय4 जzरJ है . कल मa काम पर नहJं जा रहJ हंू , घर के


‘कछ
काम से %नपटने के बाद...'

मां क! बात मानने से पहले टोपीलाल ने कहानी क! शत4 जड़ दJ.

‘ठ_क है , एक छोटJ-सी कहानी सनाती


ु हंू . उसे यpद गन
ु लोगे तो कल इस खेल का मम4
समझने मO आसानी होगी.' मां ने सहम%त दJ. टोपीलाल के &लए खेल केवल एक खेल था.
कहानी &सफ4 एक कहानी. इससे yयादा उनका कोई उfदे 2य हो सकता है , उसको मालम
ू हJ
नहJं था. इस&लए कहानी सनने
ु के &लए वह अपनी मां से सट गया.

मां ने कहानी आरं भ कर दJ-

एक राजा के दो बेटे थे. एक अ`छा था, दसरा


ू बरा
ु . एक दसरM
ू के काम आता. दसरा
ू सबके
काम wबगाड़ दे ता. एक लोगM से Hयार करता, दसरा
ू उनको दhु कारता. एक मीठे बोल बोलता,
ममता क! चलती-Xफरती मरत
ू नजर आता, दसरा
ू लोगM के साथ ग#
ु से से पेश आता, उ-हO
डराता. एक सचाई और ईमानदारJ से काम %नकालना चाहता, दसरे
ू का मकसद था, केवल खद

के भले क! सोचना. मनमानी करना...लालच साधना. सच-झठ
ू जैसे भी संभव हो, वह सहज
भाव से कहता-करता. एक सोच-Dवचारकर काम को परा
ू करता. दसरे
ू को Xकसी भी तरह
मंिजल तक पहंु चने क! ज9दJ रहती. उसके &लए हर तरJके को जायज मानता था. पहले को
‘कर भला सो हो भला' क! नी%त मO Dव2वास था. दसरा
ू ‘अंत भला सो सब भला' के चलन को
पानी दे ता था.

माता-Dपता हालांXक अपनी "hयेक संतान को एकसमान Hयार करते हa. लेXकन उन दोनM मO से
एक मां का लाडला था, दसरा
ू अपने Dपता का.

‘मेरे बेटे मO राजा बनने के सारे गण


ु हa.' राजा जो दसरे
ू बेटे को चाहता था, एक pदन रानी को
5चढ़ाने के &लए बोला.

ु हारा बेटा &सफ4 तानाशाह बन सकता है, मेरा बेटा तो आज भी लोगM के pदलM पर राज
‘त‡
करता है .' रानी ने सहज भाव से कहा. लेXकन राजा तो राजा था, गव4-गुमान से फला
ू हआ
ु .
सनते
ु हJ 5चढ़ गया. और 5चढ़ गया सो चढ़ गया-

‘ठ_क है , त‡
ु हारा बेटा करता रहे लोगM के pदलM पर राज, गी का #वामी तो मa अपने बेटे को
हJ बनाऊंगा!' हठ_ले राजा ने अपना %नण4य सनाया
ु .

रानी नहJं जानती थी Xक बात इतनी बढ़ जाएगी...मामलJ


ू झाड़ आसमान जा चढ़े गा. िजसे वह
चाहती थी, वह बड़ा बेटा था. %नयम से राजा का असलJ उ†रा5धकारJ. न चाहते हए ु भी रानी
ने अपनी भल ू के &लए राजा से माफ! मांगी. अपनी गलती का दं ड अपने बड़े बेटे को न दे ने
क! "ाथ4ना क!. आ„खर राजा Dपघला-
‘आज क! हमारJ तकरार तो महज संयोग है . वरना छोटे बेटे को राजगी पर wबठाने का
फैसला तो मa कभी का कर चका
ु हंू . राज ताकत से चलता है . सचाई, ईमानदारJ, और
भलमनसाहत जैसे श@द sंथM मO हJ शोभा दे ते हa. असल मO तो वे राजा को कमजोर बनाते हa.
उसक! मह˜वाकांZाओं क! राह मO रोड़े हa ये सब. लोग िजससे डरते हa, उससे

Hयार भी करते हa. तलसीदास


ु जी ने #वयं रामचं~जी के मख
ु से कहलवाया है -‘भय wबनु होय
न "ी%त.'

‘छोटा Xकसी भी तरह अपनी बात मनवाना जानता है . इस&लए उसमO मझे
ु चqवत स‘ाट के
सभी गण
ु नजर आते हa. मझे
ु परा
ू Dव2वास है , Xक वह परखM
ु क! इस Dवरासत को न केवल
संभालकर रखेगा, बि9क बढ़ाएगा भी.'

रानी को चप
ु हो जाना पड़ा. राजा ने मनमानी क!. कछ
ु हJ pदन बाद उसने छोटे बेटे को
यवराज
ु घोDषत कर pदया. बड़ा बेटा %न‰€ ‰ रहा. रानी को लगा Xक कहJं अ-याय हआ
ु है . Xफर
भी वह चप
ु रहJ.

पUरि#थ%तयां यpद "%तकल


ू हM तो "तीZा करना भी नी%त बन जाता है . और जब राजा
अ-याय करे तो उसका फल परेू राyय को भोगना पड़ता है . आ„खर यहJ हआ
ु भी.

राजा pदल का बरा


ु नहJं था. परं तु उसके pदल मO दबी-%छपी उ`चाकांZाएँ उससे गलत %नण4य
करा लेती थीं. ऐसा हJ उस बार हआ
ु था.

यवराज
ु बनते हJ छोटे बेटे क! मनमा%नयां और अhयाचार और भी बढ़ गए. राyय और राजा
दोनM क! मान-मया4दा को ताक पर रखकर वह राजकाय4 मO ह#तZेप करने लगा. "ारं भ मO तो
राजा को सबकछ
ु भला लगा. लगा Xक यवराज
ु होने के कारण वह राजनी%त मO ;5च pदखा रहा
है . लेXकन बहत
ु ज9दJ छोटे बेटे क! हरकतO उसका जी दखाने
ु लगीं. यवराज
ु को समझाने क!
राजा क! सारJ को&शशO बेकार गŠ.

राजधानी के पा2व4 मO एक नदJ बहती थी. नदJ के दसरे


ू तट पर बसा था एक गांव. छोटा-सा,
वहां के Xकसान मेहनती और भले थे. यवराज
ु अbसर उस गांव से होकर गज
ु रता. एक pदन
वह &शकार से लौटा और सीधे राजभवन मO जा धमका. राजा उस समय राजकाज मO gय#त
था.

‘Dपताजी, मa एक बाग लगवाना चाहता हंू , बहत


ु बड़ा-इतना Xक Xकसी भी राजा के पास वैसा
बाग न हो.' यवराज
ु ने राyय क! कार4 वाहJ मO gयवधान डालते हए
ु कहा.

राजा ने गद4 न उठाई. यवराज


ु क! ओर दे खकर उसने धैयप
4 ूव4क कहा-‘हमारे राyय मO बागM क!
कमी नहJं है . तरह-तरह के, एक से बढ़कर एक बाग हa. जहां वZ
ृ फलM से; लताएं फलM
ू से
लदJ रहती हa. कोयल वहां गाती, मोर नाचते हa. हमारे तालाबM मO कमल-दलM से भरपरू
नीलसरोवर हa. िजनमO रं ग-wबरं गी मछ&लयाँ तैरती रहती हa. Xफर भी तम
ु एक और बाग
लगवाना चाहते हो तो यवराज
ु होने के नाते त‡
ु हO इसका भी अ5धकार है . अ`छ_-सी भ&म

दे खकर वहां बाग लगवा लो.'

‘मa चाहता हंू Xक एक बहतु बड़ा बाग हो. िजसमO &शकार के &लए pहरन, शेर, चीता आpद भी
हM. भ&म
ू मa तय कर चकाु हंू , बस आपक! अनम%त
ु क! जzरत है ?'

‘कैसी अनम%त
ु ?'

‘िजस भ&म
ू पर मa बाग लगाना चाहता हंू , उसके बीच मO एक गांव आता है , हमO

उसको हटाना होगा?' कहते हए


ु यवराज
ु ने गांव का नाम और पता बता pदया. सनते
ु हJ राजा
चˆक पड़ा.

‘उस गांव के लोग तो बहतु भले हa. संकट के समय वहां के %नवा&सयM ने कई बार हमारJ
मदद क! है . हम उ-हO कैसे उजाड़ सकते हa?' राजा ने आहत मन से बेटे को समझाने का
"यास Xकया.

ू के pहसाब से राyय क! सम#त भ&म


‘कानन ू का #वामी राजा होता. इस&लए राजा का
अ5धकार है Xक वह अपनी भ&म
ू के साथ जो जी चाहे करे . Xफर हम Xकसी को उजाड़ कहां रहे
हa. गांव वालM को एक #थान से हटाकर दसरे
ू pठकाने पर बसा pदया जाएगा. इसका खच4 भी
राyय उठाएगा!'

‘यह नहJं हो सकता. गांव वाले िजस #थान पर बसे हa, वह उनका अपना है . मa त‡
ु हO गांव को
उजाड़ने का आदे श नहJं दे सकता.' राजा ने कहा. यवराज
ु पांव पटकता हआ ु वहां से चला गया.
उसके बाद राजा और यवराज
ु मO कई pदनM तक भO ट नहJं हई
ु . धीरे -धीरे pदन बीते गए. बात
आई-गई होने लगी.

एक pदन राजा ने राyय-šमण का %नण4य Xकया. रानी को बताया तो उसने भी साथ चलने क!
इ`छा gयbत क!.

‘हमO याuा से लौटने मO महJनM लग सकते हa. इस बीच राyय क! दे खभाल कौन करे गा?'

‘bयM, यवराज
ु तो है !' राजा ने तhकाल कहा.

‘जाने bयM मेरा मन घबरा रहा है . महाराज, bया ऐसा नहJं हो सकता Xक आप अपने
उ†रा5धकारJ को लेकर Xफर से सोच-Dवचार कर लO?' रानी 5गड़5गड़ाई.
‘यह त‡
ु हारा šम है , Xफर भी तम
ु यpद यहJ चाहती हो तो याuा से लौटने के बाद मa इसपर
अं%तम %नण4य लंूगा.' राजा ने रानी क! बात मान लJ. व#तत
ु ः वह #वयं भी यवराज
ु क!
मनमानी से तंग आ चका
ु था.

महJनM लंबी याuा के बाद राजा और रानी लौटे तो वातावरण कछ


ु बदला-बदला पाया. याuा क!
थकान &मटाने के &लए राजा सीधे राजभवन मO चला गया. अगले pदन राजदरबार मO लौटा तो
वहां सैकड़M फUरयाpदयM को दे खकर चˆक पड़ा. पता चला Xक राजा क! अनपि#
ु थ%त का फायदा
उठाते हए
ु यवराज
ु ने खद
ु को स‘ाट घोDषत कर pदया है . राजा के zप मO सबसे पहले उसने
सेनाप%त को गांव खालJ करने का आदे श pदया. सेनाप%त ने सै-यबल के साथ गांव पर धावा
बोल pदया. चारM ओर uाpह-uाpह मच गई. िजसने भी Dवरोध जताने का "यास Xकया, सै%नकM
ने उसको जेल मO डाल pदया.

‘महाराज, सैकड़M साल से हमारे परखे


ु वहां रहते आए हa. Xफर भी यpद यवराज
ु को उस गांव क!
जमीन इतनी हJ जzरJ थी तो हमO संभलने के &लए समय pदया होता. बदले मO हमO ऐसी
जगह दJ जाती जो उपजाऊ हो, जहां हम सब अपने-अपने पUरवार के साथ

सखपव4
ु ू क रह सकO. परं तु िजस #थान पर हमO बसने का आदे श pदया गया है , वहां क! जमीन
बंजर और ऊबड़-खाबड़ है . पानी का तो नामो%नशां नहJं है .' फUरयाpदयM के म„खया
ु ने कहा.
राजा गद4 न झकाए
ु सनता
ु रहा.

ु ू , ऐसे तो हम भखे
‘हजर ू -Hयासे मर हJ जाएंगे.'

‘bया तमने
ु यवराज
ु को समझाया नहJं था?' राजा ने मंuी क! ओर दे खा. उसको Dव2वास था Xक
मंuी पराना
ु है . "जा का pहत दे खेगा. लेXकन मंuी का तो #वर हJ बदला हआ
ु था, ‘महाराज, मa
तो इस &संहासन का भbत हंू . मेरा काम है , &संहासन पर Dवराजमान महाराज के कामM को
आसान करना. आपके पीछे यवराज
ु इस गी के #वामी थे. उनक! खशी
ु गांव क! जगह पर
बाग लगाने मO थी, तो मेरा भी फज4 था Xक यह काम ज9दJ से ज9दJ परा
ू हो. संद
ु र से संद
ु र
बाग लगाया जाए, िजससे महाराज के मन को शां%त &मले, और उनका नाम हो.'

राजा को ग#
ु सा आया. उसका मन हआ ु Xक मंuी को सलाखM के पीछे डाल pदया जाए. उसने
सेनाप%त क! ओर दे खा. सेनाप%त ने गद4 न झका
ु लJ. राजा समझ गया Xक उसके पीछे यवराज

ने सभी को अपने बस मO कर pदया है . राजा ने यवराज
ु को दरबार मO बलाने
ु का आदे श pदया.
यवराज
ु आया. स†ामद से चरू. झमता
ू हआ
ु .

‘बेटा, कम से कम मेरे लौटने तक तो इंतजार Xकया होता?' राजा ने ममा4हत हो यवराज


ु से
कहा.
‘आप हJ के कारण गांव वालM का &सर सातवO आसमान पर है . मaने उ-हO चार pदन पहले गांव
छोड़ने का आदे श pदया था. पर वे नहJं माने. मa समझ गया Xक wबना बल-"योग के काम
नहJं सधेगा. इस&लए उस समय राजा होने के नाते मaने वहJ Xकया जो मझे
ु ठ_क लगा.'
यवराज
ु के #वर मO न "ायि2च†बोध था, न क;णा का भाव. थी तो &सफ4 %नTठुरता ...मनमानी
करने क! आदत, िजद और गमान
ु . और था अहं कार, जो अWानी के हाथ मO अनायास बड़ी
ताकत आ जाने से पैदा होता है .

‘तम ु कठोर हो, मaने त‡


ु बहत ु हO यवराज
ु बनाकर गलती क! है .'


‘यवराज नहJं, स‘ाट कहO . अब मa हJ यहां का राजा हंू . आप बढ़े
ू हो चक
ु े हa. भलाई इसी मO है
Xक यह &संहासन मझेु सˆपकर आप पजा ू -पाठ मO अपना मन लगाएं...' राजा ने नजर उठाकर
दे खा. उसको लगा Xक &सवाय फUरयाpदयM के दरबार मO एक भी उसके पZ मO नहJं है . वह खद

को अशbत एवं मजबरू महसस
ू करने लगा. बेबसी मO आंखM से आंसू बह %नकले. धीरे -धीरे वह
उठा और बो„झल कदमM से राजमहल क! ओर चल pदया.

छोटे राजकमार
ु ने गी संभाल लJ.

राजा को राजमहल मO नजरबंद कर &लया गया.

और बड़ा राजकमार
ु !

राजा ने जब छोटे बेटे को यवराज


ु बनाने क! घोषणा क! थी, तो बड़े राजकमार
ु के

दो#तM ने उसको खब
ू उकसाया था. कहा था Xक छोटा राजकमार
ु उसके अ5धकार पर क@जा
कर रहा है , Xक वह चाहे तो छोटे राजकमार
ु को रोक सकता है , उसके दो#त उसके साथ हa, Xक
दरबार मO अपनी पैठ भी कम नहJं. Xक उसके एक इशारे पर हजारM लोग मर-&मटने को भी
तैयार हa.'

‘bया सभी दरबारJ अपने साथ हa?' बड़े राजकमार


ु ने पछा
ू था.

‘सब तो नहJं सेनाप%त और मंuी समेत कछ


ु को छोटे राजकमार
ु ने खरJद रखा है . पर घबराने
क! बात नहJं, उनसे भी %नपटा जा सकता है .'

‘%नपटना यानी &संहासन के &लए संघष4, यpद हम उसमO नाकाम रहे तो?'

‘राजगी के &लए संघष4 %छड़ेगा तो बात महाराज तक जाएगी हJ. वे भले हJ आपके छोटे भाई
को यवराज
ु बनाने क! घोषणा कर चक
ु े हM, मगर शा[M मO बड़े बेटे को गी दे ने का Dवधान है .
जनता भी आपके साथ है . ऐसे मO आप यpद संघष4 करO गे तो आपका हक मार पाना संभव नहJं
होगा. कम से कम आधा राyय तो &मलेगा हJ.'
‘राyय का बंटवारा, उसके बाद?'

‘उसके बाद आप "जा पर राyय करO गे.'

‘"जा पर राज!'

‘"जा अगर मझे


ु राजा के zप मO चाहे गी तो खद
ु राजा बना दे गी!'

‘कोई Xकसी को कछ
ु नहJं बनाता, यहां जो बनना है, वह अपने आप बनना पड़ता है, जैसे छोटे
राजकमार
ु ने गी ह5थया लJ.'

ु इस तरह राजा नहJं बनना. "जा को यpद जzरत हई


‘मझे ु , तब जzर सोचंूगा.'

‘तब करते रpहए इंतजार. छोटे राजकमार


ु #वाथ हa, महाराज क! तरह एक pदन आपको भी
कैद कर &लया जाएगा.' दो#तM ने कहा. उनक! आवाज मO gयंcय था. बड़ा राजकमार
ु ु करा
म#
कर रह गया. उसक! म#
ु कान को दो#तM ने कायरता माना. धीरे -धीरे वे उससे दरू हटते गए.

बड़ा राजकमार
ु कछ
ु pदन ि#थ%त पर Dवचार करता रहा. धीरे -धीरे वहां उसका मन ऊबने लगा.
एक pदन मां से अनम%त
ु लेकर वह घर से %नकल गया. खले
ु जंगल मO घूमते, पेड़, पव4त, लता-
ग9
ु मM, प}ZयM, जानवरM, नदJ-तलैया, हवा-धप
ू से ब%तयाते हए
ु उसके pदन बीतने लगे.

उधर छोटे राजकमार


ु के सपने बहत
ु बड़े थे. गी पर सवार होते हJ उसक! मह˜वाकांZाओं को
पंख लग गए. उसने आसपास के छोटे राyयM पर हमला करके उनपर अ5धकार जमा &लया.
छोटJ-छोटJ जीतM से उसक! मह˜वाकांZाएं और भी भड़क उठ_ं. अब उसका इरादा अपने से बड़े
राyय को हड़पने का था. वहां का राजा था नी%तसेन. बDkमान
ु , बहादरु और pदलेर. "जा का
स`चा हमदद4, सख
ु -दःख
ु का खयाल रखने वाला.

मंuी और सेनाप%त दोनM ने समझाया. बलवंत क! ताकत के बारे मO बताया भी. मंuी

ने सलाह दJ Xक उसपर हमला करना आhमघाती हो सकता है . सेनाप%त ने चेताया Xक सै%नकM


मO Dव~ोह भरा है , उ-हO इस समय यk
ु मO ढकेल दे ना उ5चत नहJं. मगर छोटा राजकमार

नी%तसेन के राyय पर हमला करने क! िजद ठाने रहा. उसके आदे श पर सै-य तैयाUरयां होने
लगीं. उनक! सचना
ू नी%तसेन तक जा पहंु ची. खबर &मलते हJ उसने चढ़ाई का आदे श दे pदया.
छोटा राजकमार
ु हड़बड़ा गया. घबराहट मO उसने सेनाप%त को याद Xकया-

‘महाराज इतनी ज9दJ यk


ु %छड़ा तो हमारJ पराजय %नि2चत है ?' सेनाप%त बौखलाया.

‘हार तो दरवाजे पर खड़ी है , यह बताइए Xक उससे %नपटने क! हमारJ तैयाUरयां कैसी हa?' छोटे
राजकमार
ु ने सवाल Xकया.
‘सेना थक! हई
ु है , अपने से बड़ी सेना के हमले क! खबर से हJ उसका मनोबल 5गर चका
ु है .'

ु हारा मतलब है Xक मa हार मान लंू.' छोटा राजकमार


‘त‡ ु झ9लाया.

‘पराजय को सामने दे ख सं5ध कर लेना तो कटनी%त


ू है .' मंuी ने कहा.

‘इससे तो मेरJ सारJ इyजत &म›ी मO &मल जाएगी...' छोटा राजकमार


ु परे शान हो उठा।

‘नी%तसेन जैसे बहादरु योkा के साथ सं5ध होने से तो आपका मान हJ बढ़े गा.' मंuी ने पaतरा
बदला.

‘वह हमारJ सं5ध को मानेगा?'

‘हम उसके आगे अपने खजाने का ‰ार खोल दO गे.' #वाथ मंuी ने सलाह दJ.

मंuी और सेनाप%त के कहने पर छोटा राजकमार


ु समप4ण के &लए तैयार हो गया. बात "जा
तक पहंु ची तो लोग %तल&मला उठे . उ-हO यह अपने मान-स‡मान पर ध@बा लगा. लोग मंह

दबाकर छोटे राजकमार
ु क! आलोचना करने लगे.

उन pदनM बड़ा राजकमार


ु जंगल मO झMपड़ी डालकर रह रहा था. उसक! दाढ़J बढ़ आई थी.
जंगल मO रहते हए
ु उसको वन-वन#प%तयM क! पहचान हो गई. कछ
ु परानी
ु &शZा काम आई.
जड़ी-बटJ
ू दे कर वह लोगM का उपचार करने लगा. इससे आसपास के लोग उसको जानने लगे
थे. जzरत के समय उसके पास सलाह के &लए भी चले आते थे. छोटे राजकमार
ु के समप4ण
क! चचा4 आरं भ हई
ु तो कछ
ु लोग Xफर उसके पास सलाह करने पहंु च.े

‘महाराज आप हJ मदद करO , हमारे राजा तो अपना मान-स‡मान 5गरवी रखने क! तैयारJ कर
हJ चक
ु े हa.'

‘इस समय मa bया कर सकता हंू . नी%तसेन तो सीमा पर आ हJ पहंु चा है . अब या तो यk



होगा; अथवा समप4ण.'

‘जब राजा और सेनाप%त यk


ु से पहले हJ हार मान चक
ु े हM, सेना का मनोबल 5गरा

हआ
ु हो तो यk
ु क! कोई संभावना हJ नहJं बचती. इस ि#थ%त मO तो केवल समप4ण हJ संभव
है .'

‘राजा और सेनाप%त ने हJ तो हार मानी है, पर राyय तो "जा से होता है . bया "जा भी हार
मान चक!
ु है ?' बड़े राजकमार
ु ने पछा
ू . यह सनते
ु हJ वहां मौजद
ू लोगM के बीच स-नाटा gयाप
गया.

‘महाराज "जा तो "जा है , उसका काम लड़ना थोड़े हJ है .' मौजद


ू लोगM मO से एक ने कहा.
‘ठ_क कहते हो. "जा का काम लड़ना नहJं है . लड़ना सेना और सेनाप%त का काम है . लेXकन
वे तो पहले हJ हार मान चक
ु े हa, ऐसे मO "जा bया हाथ पर हाथ रखकर बैठ_ रहे गी? इंतजार
करे गी Xक कोई आए और उसके मान-स‡मान क! रZा करे , उसको इस संकट से बचाए. अगर
समय रहते कोई बचाने के &लए नहJं आया तो bया गद4 न झकाकर
ु चंद कायरM के फैसले को
मान लेगी? अपने #वा&भमान, अपने मान-स‡मान को यंू हJ &मट जाने दे गी? यpद नहJं तो
बताएं Xक "जा का ऐसे मO bया कत4gय है ?' बड़े राजकमार
ु ने सवाल उछाला. लोग कानाफसी

करने लगे. अचानक उनके चेहरे पर तेज gयाप गया.

‘हम समझ गए महाराज. हमारJ गलती यह है Xक हम हमेशा दसरM


ू क! ओर दे खते आए हa.
अब हमO हमारJ भल
ू समझ मO आ गई है . बलवंत क! सेना चाहे िजतनी बड़ी हो. हम उसको
राyय के मान-स‡मान से समझौता नहJं करने दO गे. मर जाएंगे, पर मान नहJं जाने दO गे,
लेXकन...'

‘लेXकन bया?' बड़े राजकमार


ु ने कहा.

‘महाराज यk
ु हो या आंदोलन. उसके &लए कोई ऐसा तो चाpहए हJ जो सबसे आगे रहकर
नेतhृ व क! बागडोर संभाल सके.'

‘उसक! तम
ु Xफq मत करो. इरादे यpद नेक और pदलM मO स`चा जोश हो तो जलस
ु ू मO
उपि#थत हर gयिbत नेता होता है .'

अगले pदन नी%तसेन ने दे खा Xक सामने से हजारM क! तादाद मO भीड़ चलJ आ रहJ है .

‘महाराज हमO तो बताया गया था Xक वह समप4ण क! तैयारJ कर रहा है , यहां तो बड़े हमले क!
तैयारJ लगती है .' साथ खड़े सेनाप%त ने नी%तसेन से कहा.

‘लगता है Xक उसक! मौत हJ उसको मैदान क! ओर खींचकर ला रहJ है . तम


ु सेना को तैयार
रहने का हb
ु म दे दो.' नी%तसेन ने आदे श सनाया।
ु वह #वयं भी यk
ु क! तैयाUरयM मO जट
ु गया.

उस समय तक "जा सामने आ पहंु ची थी. नी%तसेन ने दे खा तो दं ग रह गया. भीड़ मO [ी-


प;ष
ु , बढ़े
ू -ब`चे, बीमार-अपाpहज सब थे. कछ
ु के हाथ मO लाpठयां थीं, कछ
ु के हाथ मO डंड.े कछ

के हाथ मO दरांत, चाकू, कछ
ु अपाpहज ऐसे भी थे, जो बैशाखी के सहारे अपने

शरJर को संभालने का "यास कर रहे थे.

‘यह सब bया है ? bया त‡


ु हारे राजा ने त‡
ु हO लड़ने भेजा है ?' बलवंत ने जनसमह
ू का नेतhृ व कर
रहे यवक
ु से पछा
ू से पछा
ू , जो #वयं बैशाखी के सहारे %घसटता हआ
ु वहां तक पहंु चा था.
‘हमO Xकसी ने नहJं भेजा. अपने राyय क! मान-मया4दा के &लए हम #वयं लड़ने आए हa. हम
जान दO गे पर अपनी आजादJ पर आंच नहJं आने दO गे.'

‘अगर ऐसा है तो अपने राजा को समझाया होता, हम तो अपने राyय मO शां%तपव4


ू क रह रहे थे.
वहJ हमारे Dव;k षœयंu रच रहा था.'

ं ु इस राyय को अपने राyय मO &मलाने का सपना छोड़ दO .'


‘तो आप राजा से %नपटO . Xकत

‘राyय bया राजा से अलग होता है ?'

‘राyय का मान-स‡मान सबसे ऊपर होता है . उसके &लए राजाओं क! ब&ल चढ़ाई जा सकती
है .'

‘महाराज! आप यpद आदे श दO तो हमारे सै%नक इन &भखमंगM को पलक झपकते धल


ू चटा दO .'
नी%तसेन के सेनाप%त ने कहा.

‘नहJं, नी%तसेन इतना मख4


ू नहJं है, जो अपनी क!%त4 को इतनी आसानी से &मट जाने दे . मेरJ
सेना इन %नहhथे लोगM से लड़कर इ-हO मार तो 5गराएगी, मगर इ%तहास इ-हO हJ नायक
मानेगा. ये सब अमर हो जाएंग,े जबXक मa हमेशा हJ खलनायक माना जाऊंगा. इस&लए अपने
सै%नकM से कहो Xक वे ह5थयार नीचे कर लO . हमारJ सेना %नहhथM पर वार नहJं करे गी.'

‘परं तु यहां का राजा जो हमारे Dव;k षœयंu रच रहा था, bया उसको यंू हJ छोड़ दO गे?'

‘हर5गज नहJं! तम
ु अपने आठ-दस सै%नकM को लेकर जाओ और राजा को बंदJ बना लाओ?'

‘&सफ4, आठ-दस!'

‘वे भी yयादा हa, दे खना तलवार उठाने क! जzरत हJ नहJं पड़ेगी.'

यहJ हआ
ु भी. छोटा राजकमार
ु 5गर“तार कर &लया गया. नी%तसेन अपनी सेना सpहत वापस
लौट गया. छोटे राजकमार
ु के 5गर“तार होते हJ "जा ने बजग4
ु ु राजा को आजाद करा &लया.
तब राजा को अपने बड़े बेटे क! सध
ु आई. उसने अपने सै%नक बड़े बेटे क! खोज मO चारM
तरफ फैला pदए. कछ
ु हJ pदनM मO लोगM ने साधु भेष मO एक यवक
ु को दरबार मO "वेश करते
दे खा. कछ
ु ने उसे दे खते हJ पहचान &लया.

‘अरे , ये तो वहJ महाराज हa, इ-हJं क! "ेरणा से तो हम अपने राyय क! इyजत बचाने मO
सफल हए
ु हa.'
राजा को अस&लयत मालम ू हई
ु तो बहत
ु "स-न हआु . अपने gयवहार पर खेद "कट करते हएु
बोला-‘त‡
ु हारJ मां हJ ठ_क कहती थी. मa गलती पर था. अब त‡
ु हJं इस राyय क! बागडोर
संभालो.'

‘आप अब भी गलती पर हa महाराज. राyय का मान-स‡मान "जा के कारण सर}Zत


ु है .
इसी&लए उ5चत होगा Xक राyय क! gयव#था का भार "जा को हJ सˆप pदया जाए.'

‘हमारे पव4
ू ज यहां सैकड़M वष4 से राyय करते आए हa.' राजा gय5थत था.

‘राजा वह जो राyय और "जा के मान-स‡मान क! रZा कर सके. उसके &लए अपने "ाणM क!
आह%तु दे नी पड़े तो भी पीछे न रहे . इस राyय पर हमारा अ5धकार उसी समय खhम हो चका

था, जब छोटे राजकमार
ु ने इसे नी%तसेन को सˆपने का %नण4य &लया था.'

‘bया पUरवार के Xकसी एक सद#य के अपराध का दं ड उसके परेू पUरवार को दे ना -याय है ?'

‘एक राजा क! गलती का दं ड उसक! पीpढ़यM को भोगना हJ पड़ता है .' बड़े राजकमार
ु ने कहा.

राजा ने सोचा. अचानक उसके चेहरे पर तेज छा गया, ‘शायद त‡


ु हJं ठ_क कहते हो. इस राyय
का मान-स‡मान "जा ने बचाया है . इस&लए अपना राजा चनने
ु का अ5धकार "जा को हJ है .
लेXकन जब तक "जा अपना नया राजा नहJं चन
ु लेती, तब तक तो तम
ु इस राजगी को
संभाल लो. मरने से पहले कम से कम मa तो यह दे ख हJ लंू Xक बड़ा बेटा होने के नाते मaने
त‡
ु हO त‡
ु हारा अ5धकार सˆपने मO गलती नहJं क!.'

बड़े राजकमार
ु ने बात मान लJ. अगले हJ pदन से राyय मO नए राजा के चनाव
ु क! तैयाUरयां
होने लगीं.

कहानी लंबी थी. पर टोपीलाल wबना पलक झपके सनता


ु गया. कहानी प◌ू
ू रJ होते हJ मां ने
टोपीलाल क! आंखM मO झांका.

‘अ-याय हड़बड़ी मO रहता है , आपाधापी मO वह गलती कर बैठता है; इस&लए कभी भी अपने
लय तक नहJं पहंु च पाता. जबXक -याय क! याuा लंबी और जीत #थायी होती है . bयM यहJ
कहना चाहती हो ना मां?' टोपीलाल ने मां क! आंखM मO ◌ं झांकते हए
ु कहा.

‘तू ठ_क समझा. अब तू उस खेल का मतलब भी आसानी से समझ जाएगा?' मां ने कहा और
टोपीलाल को अपने सीने से लगा &लया. अब नींद के आगोश मO जाने क! बारJ थी.

उस रात टोपीलाल को गहरJ नींद आई और सहावने


ु सपने भी.

अगले pदन से◌े मां उसको सांप-सीढ़J का खेल &सखाने लगी. पासे और गोpटयM का काम
Šट और पhथर क! pटक&लयM
ु से चलाया गया. काम के दौरान हJ वह Šट के एक छोटे टकड़े

को %घस लाई थी. उसक! लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई एक समान थीं. Xफर क!ल से उसके हर
पहलू पर एक से छह तक क! 5गन%तयां &लख दJ गŠ. टोपीलाल कौतहल
ू से मां को यह सब
करते हए
ु दे खता रहा.

‘मां, अपने बचपन मO bया तम


ु भी ऐसे हJ खेल खेला करती थीं?'

‘कभी-कभी, पर हमारे जमाने मO ये ग†ा-व†ा नहJं था. हम तो बस आंगन मO खnड़या या गेz


से खाने बनाकर खेलने बैठ जाते थे. गोpटयां और पासे तब भी मa हJ बनाया करती थी.'

टोपीलाल को जो &सखाया गया था, वह उसने {यान से sहण Xकया. मां के काम पर चले जाने
के बाद वह अकेला हJ खेलता रहा. अपने दाएं और बाएं हाथ को उसने अलग-अलग टJम
बना pदया. बारJ-बारJ से दोनM हाथM से चाल चलता रहा. अपने इस सोच पर उसको गमान
ु भी
हआ
ु . एक-दो pदनM मO वह खेल मO पारं गत हो गया. अगले कछ
ु pदनM मO उसने बाक! ब`चM को
भी उस खेल मO %नपणु कर pदया. इससे ब`चM को नया खेल &मल गया. वे जमीन पर रे खाएं
खींचकर काम चलाने लगे.

इस बीच एक बात टोपीलाल के pदमाग मO लगातार करकती रहJ. खेल के उhसाह ने◌े भी
उसको मरने नहJं pदया. जब भी वह गोpटयM और ग†ो पर बने 5चuM को दे खता, उसको मां का
कहा याद आ जाता. खेल &सखाने से पहले मां ने कहा था Xक यह "क%त
ृ का खेल है . इसक!
गोpटयां कछ
ु हो सकती हa. अपनी बात को #पTट करने के &लए मां ने एक कहानी भी सनाई

थी. टोपीलाल जानता था मां कोई भी बात यंू हJ तो कहती नहJं.

ु मां से उसी pदन इस खेल का रह#य जान लेना चाpहए था.' यह सोचते हJ टोपीलाल के
‘मझे
मन मO cला%नबोध उमड़ने लगता.

खेल िजतना हJ जzरJ है , खेल क! भावना को समझना. उसके हर पहलू क! बारJक! से जांच
करना. यह सोचते हएु टोपीलाल ने मां क! बातM क! गहराई तक पहंु चने का भरसक "यास
Xकया. मगर बेकार. उस pदन टोपीलाल ने खेल पराू Xकया तो उसका इरादा पbका था.

शाम को जैसे हJ मां घर के काम से %नपटJ, टोपीलाल उसके पास पहंु च गया.

‘मां, यह "क%त
ृ bया होती है ?' उसने बात छे ड़ी.

‘bया तू सचमच
ु इससे अनजान है ?'

‘जानता तो हंू ...' टोपीलाल सकचाया


ु . जैसे उसक! चोरJ पकड़ी गई हो, ‘लेXकन "क%त
ृ का खेल
मेरJ समझ से बाहर है .'
मां म#
ु करा दJ, ‘टोपीलाल, तू मेरे सोच से भी yयादा चतरु है रे ...ठ_क है , खाना खा ले. आज
सोने से पहले हम इस बारे बातचीत करO गे...वह ग†ा तो है, न? उसको साथ रखना.'

Wान आhमा क! जzरत है . मन मO सीखने क! स`ची ललक हो तो मि#तTक उ9लास से भर


जाता है . मां के साथ सोने को चला तो टोपीलाल का मन पर उमंग सवार थी. pदये क!
मDkम रोशनी, सरसM के तेल क! ह9क!-ह9क! ध‘
ू -गंध, झींगरM
ु और %तलचoटM क! बेसरJ

आवाज के बीच मां ने टोपीलाल को अपने सीने से सटा &लया-

‘अब तू कह, bया जानना चाहता है?' मां ने वाhस9य उं डेला.

‘वहJ, जो मेरJ मां चाहती है Xक मझे


ु जानना चाpहए.'

‘हंू , तो सन ु ! हम सबक! िजंद5गयां, इस संसार मO जो कछु भी घटता है या घटने वाला है , वह


सब "क%त ृ के सनातन खेल का pह#सा है . "क%त
ृ Dवराट है. उसको समझने के &लए हमारJ
बDk
ु बहतु छोटJ है . और जब हम उसको समझ नहJं पाते तो उसे तरह-तरह के नाम दे ने
लगते हa. अपनी समझ के अनसार
ु उसक! अलग-अलग gया’या करते हa. कोई उसे Xक#मत
कहता है , कोई भाcय-रे ख. कोई कपाल-गाथा. पर मa इसको खेल कहती हंू. कदरत
ु का खेल.
सांप-सीढ़J का खेल भी उसी क! तरह है , बेटा.'

टोपीलाल ने अपना सारा {यान मां के श@दM पर एकाs कर &लया था. ताXक उसका एक-एक
श@द, श@द का "hयेक भाव, भाव मO अंत%न4pहत उसका #वाभाDवक #फुरण, #वर का उतार-चढ़ाव
सीधे pदमाग मO उतरता चला जाए. पर मां क! िजtवा पर तो उस समय जैसे सर#वती
Dवमान थी. उसक! बातO लगातार जpटल होती जा रहJ थीं-

‘मa कछ
ु समझा नहJं मां?' बात जब &सर के ऊपर से जाने लगी तो टोपीलाल ने टोकना हJ
उ5चत समझा.

ु आसान-सी बात है बेटा. हम जैसा करते हa, वहJ पाते हa. आम का पेड़ लगाओ तो आम
‘बहत
का फल और उसक! शीतल छाया &मलती है . बबल ू बोने से कांटे...और धप
ू . लडो
ू के खेल मO
जो पासा है , उसक! एक-एक चाल मानो हमारे कत4gय हa. हमारे अ`छे -बरेु संक9प. अ`छे कम4
हमO सीढ़J बनकर सहारा दे ते हa. वे हमO सीधे ऊपर ले जाते हa. लय क! ओर, िजसको इस
खेल मO घर बताया गया है .

दसरJ
ू ओर बरेु कम4 हमO पीछे क! ओर खींचते हa, वे हमO नाग क! तरह डंसते हa, नागपाश
बनकर हमारे कदमM क! बेड़ी बन जाते हa. वे हमारे Dवकास को अव;k कर, पतन का कारण
बनते हa. हमO आसमान से धरती पर ला पटकते हa. हमारJ एक चाल, एक गलत कदम हमO
वापस उसी जगह पर ला सकता है , जहां से हमने अपनी याuा आरं भ क! थी. यानी एक गलती
पर उस समय तक का Xकया-धरा सब बराबर.'
‘पर मां पासे पर तो एक से छह तक अंक &लखे होते हa. उनमO से कौन-सा अंक कब आता है ,
यह तो संयोग पर %नभ4र है . इसमO हमारा कौशल, अ`छा या बरा
ु कहां है ?'

‘ठ_क कहते हो तम
ु ? पासे के एक से छह अंक मO से Xकसी एक का आना, संयोग पर %नभ4र है .
वह अंक कहां ले जाएगा, हमO उठाएगा Xक 5गराएगा; यानी उसका फल भी हमारे हाथ मO नहJं
होता. ठ_क ऐसे हJ जैसे अपने Xकसी काय4 के पUरणाम के बारे मO हम

ठ_क-ठ_क कछ
ु भी नहJं बता पाते...'

‘तब तो यह जआ
ु हJ हआ
ु , मां...और जआ
ु खेलना तो बरJ
ु बात है, bयM?' टोपीलाल ने बीच मO
टोका.

ु जैसा हJ समझो. पर यह एकदम जआ


‘जए ु भी नहJं है . संभावनाओं के बीच कहJं न कहJं
ठहराव, कछ
ु न कु छ पbकापन भी होता है . यह पbकापन यानी स%नि2
ु चतता हमारे अनभव

और Dववेक पर %नभ4र करती है . लगातार अयास ‰ारा इसे बढ़ाया भी जा सकता है . अपनी
बDk
ु और अनभव
ु के दम पर आदमी पहले हJ अनमान
ु लगा सकता है , Xक उसके Xकसी काम
का bया फल &मलने वाला है .'

‘सीpढ़यां और सांप, याने पž


ु य और पाप?'

‘हां, इ-हO आसान भाषा मO पž


ु य और पाप भी कह सकते हa. असल मO ये हमारे Dववेक और
अWान के "तीक हa.'

‘मां तमने
ु यह सब कहां से सीखा है ?' टोपीलाल का मन Dव#मय से भरा था.

‘आदमी अगर अपना pदमाग खला


ु रखे तो Wान उसके आसपास हJ wबखरा होता है? जzरत
तो सहJ वbत पर सवŸ†म मोती चनने
ु और सहे जने क! है .' मां ने बताया.

टोपीलाल का रोम-रोम "फि9


ु लत हो उठा। भावावेश मO उसने अपनी बांहO मां के गले मO डाल
दJं. वह pदन-भर क! थक! हई
ु थी. टोपीलाल के मन मO और भी कई सवाल थे. लेXकन उसे
याद आया Xक असंयमी होना उ5चत नहJं. एक साथ yयादा जानने के चbकर मO मां ने अभी-
अभी जो बताया है , उसको भल
ू सकता है .

टोपीलाल मां के बताए एक-एक श@द को आhमसात कर लेना चाहता था. इस&लए नींद का
बहाना करने लगा. मां समझ गई. बराबर क! चारपाई पर टोपीलाल के Dपता क! सांसO बता
रहJ थीं Xक वे गहरJ नींद मO हa. मां ने हाथ बढ़ाकर दJपक बझा
ु pदया.
गहराते अंधेरे के बीच दोनM नींद क! "तीZा करने लगे. पर नींद तो खद
ु पलकM के दरवाजे से
झांक रहJ थी. टोपीलाल को नींद क! आतरता
ु भलJ लगी. उसने खद
ु को उसके हवाले कर
pदया.

अगले pदन टोपीलाल जगा तो उसके मन मO उhसाह था. उमंग थी बीते pदन मां से जो सीखा
था, उसको सभी ब`चM को बता दे ने क!. लेXकन उसको दःख
ु था Xक उसके आसपास जो ब`चे
रहते हa, वे सभी छोटे -छोटे हa. मां क! बड़ी-बड़ी बातO उनके pदमाग मO नहJं आ पाएंगी. Xफर
Xकसको बताया जाए? यह एक ऐसी सम#या थी, िजसका उसके पास कोई समाधान नहJं था.

टोपीलाल यpद चाहता तो अपने टोले के बड़े आद&मयM को भी लडो


ू के खेल के मायने समझा
सकता था. वे गंभीरता से सनते
ु भी. पर वह जानता था Xक काम से छटने

के बाद वे सभी बहत ु थके होते हa. ऐसे मO उनके आगे Wान क! बातO बघारना गलत होगा. हो
सकता है , उ-हO मालमू भी हो. जैसे मां ने अपने अनभव
ु से जाना है , वैसे हJ वे भी जानते हM.
जो मां जानती है , संभवतः उससे भी yयादा.

‘ऊंह! मां से yयादा तो वे हर5गज नहJं जान सकते.' टोपीलाल ने अपनी हJ बात को काटा,
‘उनका अनभ
ु व मां से बड़ा हो सकता है . पर अनभव
ु को सहे जने मO मेरJ मां Xकसी से भी
आगे है . Wान के अनंत महासागर से सहJ मोती चनना
ु और सहे जना, मां ने यंू तो नहJं कहा
था.' सोचते-सोचते टोपीलाल को अपनी मां पर गव4 होने लगा.

उन pदनM टोपीलाल एक और पUरवत4न अपने बीच अनभव


ु कर रहा था. उसको लगता Xक इन
pदनM उसका pदमाग कछ
ु yयादा हJ उड़ने लगा है . बड़ी अजीब-अजीब-सी बातO सोचता है . कई
बार बे &सर-पैर क! भी. कभी लगता है Xक वह आसमान पर उड़ रहा है . प}ZयM क! तरह.
पंख फैलाए. कभी Dवचार आता Xक बादलM के नीले मैदान मO चांद को फटबाल
ु बनाकर खेल
रहा हो.

कभी-कभी सोचता Xक द2ु मन दे श ने उसके शहर पर हमला कर pदया है . उसके Dवमान बम


बरसाने के &लए शहर क! ओर बढ़े चले आ रहे हa. शहरवासी परे शान हa. चीख-5च9ला रहे हa.
तब वह अपनी गले
ु ल %नकालकर %नशाना साधता है .

‘भड़ाक!' गले
ु ल से छटा
ू मामलJ
ू कंचा, एक Dवमान को धराशायी कर दे ता है . Xफर वह दसरा

कंचा गले
ु ल पर चढ़ाता है और...

‘धड़ाम!' दसरा
ू Dवमान भी धरती पर 5गरकर धंू-धंू जलने लगता है . द2ु मन है रान है . वह हमला
तेज कर दे ता है . आसमान मO दज4नM Dवमान एक साथ नजर आते हa. सांय-सांय...शहर क!
ओर बढ़ते हए
ु !
‘ज9दJ से बड़े कंचM का इंतजाम करो...!' वह ब`चM से कहता है .

‘बड़े कंचे तो मलोहरा क! दकान


ु पर &मलO ग?'
े ब`चे घबरा जाते हa.

‘तो जाकर मलोहरा से मांगो...नहJं दे तो लट


ू लो.' लटने
ू क! जzरत नहJं पड़ती. मलोहरा कंचM
क! परJ
ू थैलJ &लए खद
ु हािजर है . उसक! बहादरJ
ु के आगे नतम#तक-

‘ये लो, दे श क! खा%तर परJ


ू दकान
ु हािजर है...इन गले
ु ल पर चढ़ाकर द2ु मन के इन कनकौओं
को धराशायी कर दो, हरामखोर जंगी सेना से टकराने का ’बाब पाले हए
ु हa।' अनपढ़ मलोहरा
अपने दे श के जहाजM को जंगी सेना और द2ु मन दे श के जहाजM को कनकौए कहता है .

वह जोश से भरा हआ ु बड़े कंचे को गले


ु ल पर साधता है . कंचा हवा मO सरसराता हआ
ु आगे
बढ़ता है . उसक! तेज र“तार से आं5धयां उठने लगती हa. द2ु मन के तीन Dवमान उस आंधी मO
फंसकर नीचे 5गर जाते हa. wबजलJ क!-सी तेज र“तार से कंचा एक Dवमान से टकराता है . वह
हवा मO हJ टकड़े
ु -टकड़े
ु wबखर जाता है . पहले Dवमान से टकराने के बाद वहJ कंचा तरंु त
पलटता है और दसरे
ू Dवमान को धल
ू चटा दे ता है . एक हJ वार मO

अपने पांच-पांच DवमानM को जमीन पर लोटता दे ख द2ु मन घबरा जाता है . वह अपने DवमानM
को वापस बलाकर
ु जमीनी हमला शz
ु कर दे ता है .

अब उसके दज4नM टaक दे श को तबाह करने के &लए सीमा पर चढ़े चले आ रहे हa. उनपर लगी
तोपO दनदना रहJ हa. तब वह उछलता है और द2ु मन क! तोपM से छटे
ू गोलM को फटने से
पहले हJ हवा मO पकड़कर वापस द2ु मन-दे श क! तरफ फOक दे ता है , एक के बाद एक...द2ु मन
के गोले उसी क! धरती को तबाह कर रहे हa. उसके पसीने छट
ू रहे हa, वह है रान है Xक उसके
गोले उसी को हताहत कर रहे हa.

टaक &मoटJ के „खलौनM क! तरह टटते


ू जा रहे हa. द2ु मन क! कमर टट
ू चक!
ु है . उसके सै%नकM
के हौसले प#त हa. वे ह5थयार डाल रहे हa. लोगM के चेहरM पर चमक है . "क%त
ृ के कण-कण
से Dवजय का उ9लास Uरस रहा है . कंजस
ू मलोहरा को अपने कंचM के जाने का गम नहJं. वह
खश
ु है . मcन होकर नांच रहा है .

अगले हJ पल वह दे खता है Xक दे श के राT प%त उसको स‡मा%नत कर रहे हa. शहर वाले


उसको अपने कंधM पर उठाए हए
ु हa.

एक बार उसने और भी Dव5चu pदवा#वHन दे खा. उसने दे खा Xक वसंत क! श;आत


ु मO वह
भरे -परेू बाग मO है . %तत&लयां और पश-ु पZी उससे ब%तया रहे हa. उनक! बोलJ वह आसानी से
समझ सकता है . तभी एक हUरयल तोता उसके कंधे पर आकर बैठ जाता है -

‘तोपीलाल-तोपीलाल भख
ू लगी.' तोता कहता है .
‘मेरे साथ घर चलो. मां कल हJ बाजार से हरJ &मचO र ् लाई है , खब
ू खाना.'

‘&मच4 नहJं...आज तो न-हJ अ&मयां खाने का मन है भइया!'

‘अभी से, अ&मयां तो कम से कम दो महJने बाद &मलO गी. bयM दो#तो?' टोपीलाल सामने खड़े
आम के वZ
ृ से "2न करता है . आम का बढ़ा
ू पेड़ गद4 न pहलाता है-

‘मa तो बढ़ाू हो चला हंू . दस-पांच pदन yयादा भी लग सकते हa फल आने मO . जो जवान पेड़
हa, वे तो दो महJने मO फलने हJ लगO गे.'

‘पर मझे
ु तो आज हJ खाने का मन है ...कछ
ु करो न!' तोता खशामद
ु पर उतर आया. उसको
रहम आने लगता है . वह म# ु कराते हएु अपनी जेब मO हाथ डालकर बांसुरJ %नकालता है . बांसरJ

दे ख पेड़-पौधे, पशु-पZी सभी के चेहरे „खल उठते हa. हवा ठहर जाती है . %तत&लयां सांस
रोककर बैठ जाती हa.

अगले हJ पल वह अपनी बांसुरJ मO फूं क मारता है . जैसे-जैसे बांसरJ


ु क! धन
ु आगे बढ़ती है ,
पेड़-पौधM का कायाक9प होने लगता है . लताएं फलM
ू से लद जाती हa. आम क! डा&लयM पर बौर
झलकने लगता है . अमराई-गंध जड़-चेतन को महकाने लगती है . न जाने कहां से भंवरे और
%तत&लयां आकर उनपर मंडराने लगते हa. उसके अगले हJ पल और भी बड़ा चमhकार होता है .
बौर के बीच न-हJ-न-हJ अ&मयां नजर आने लगती हa.

‘ध-यवाद तोपीलाल भइया! मa जानता था Xक एक &सफ4 त‡


ु हJं हो जो यह कर सकते

हो।' कहता हआ
ु तोता फर4 ु से उड़कर आम क! डाल पर जा बैठता है . और चनकर
ु हरJ-हरJ
अ&मयां खाने लगता है .

ऐसी हJ न जाने Xकतनी क9पनाएं, Xकतने सपने, Xकतनी उड़ानO टोपीलाल ने भरJ हa. अकेले-
अकेले. उस समय वह भख
ू -Hयास सब भल
ू जाता है . यहां तक Xक आपा भी wबसरा दे ता है ।

एक बार क! अनोखी बात. वह ऐसे हJ सड़क पर घम


ू रहा था. उन pदनM उनका दल एक
बहमं
ु िजला इमारत के %नमा4ण मO लगा था. मा&लक ज9दJ कर रहा था. इस&लए मां और बापू
ज9दJ हJ काम पर %नकल जाते. टोपीलाल घर मO अकेला रह जाता. उस pदन घर मO मन
नहJं लगा तो वह सड़क पर आ गया. सड़क पर वाहन आ-जा रहे थे. अपनी हJ धन
ु मO म#त.
टोपीलाल सड़क के Xकनारे बने फटपाथ
ु पर आगे बढ़ने लगा. यकायक उसके pदमाग ने उड़ान
भरJ. क9पना ने कमान संभालJ...आंखO wबंब सजाने लगीं.

टोपीलाल को लगा Xक वह #वयं एक साइXकल पर है , मगर उसक! साइXकल कोई ऐसी-वैसी


साइXकल नहJं है . जzरत पड़ने पर वह हवा मO उड़ लेती है . पानी पर फरा4टे भर सकती है . उस
समय वह अपनी साइXकल पर धीरे -धीरे चला जा रहा था. अचानक शोर मचा. साइXकल के
आगे चल रहा  क चरमराया. साइXकल को भी बेर् क लगे◌े. अचानक वह हवा मO उड़ने लगी.
पलक झपकते हJ साइXकल  क के आगे थी.  क के पीछे आ रहJ कार का चालक टोपीलाल
क! तरह फतला
ु नहJं था. उसक! कार  क से टकराई और उसका आगे का pह#सा Dपचक
गया. यह दे ख टोपीलाल के चेहरे पर म#
ु कान तैर गई...

‘ऐ, आंखO बंद करके चल रहा है bया?' Xकसी ने टोपीलाल को टोका तो उसका pदवा#वHन भंग
हआ
ु . उसके सामने एक लड़का बैठा हआ
ु था. जतM
ू पर पॉ&लश करने के &लए छोटJ-सी दकान

सजाए. टोपीलाल को अपनी भल
ू का एहसास हआु . वह एक ओर हट गया.

‘यहां सभी मेहनत करके खाते हa. और तो और मेरJ मां भी काम पर जाती है . बाक! औरतM
क! तरह वह &सफ4 घर नहJं संभालती. इस&लए मझे
ु भी कछ
ु न कछ
ु करना हJ चाpहए.' उस
ब`चे क! ओर दे खते हए
ु टोपीलाल ने सोचा. मगर अगले हJ पल उसको लगा Xक काम करने
से तो उसक! आजादJ %छन जाएगी. Xफर ये सहावने
ु pदवा#वHन...यह आजादJ...!

‘काम के &लए तो अभी मa बहत


ु छोटा हंू . Xफर मझे
ु पढ़ना भी तो है ...!' टोपीलाल ने मन को
समझाया और कछ ु हJ पहले pदमाग मO आए Dवचार को बाहर कर pदया. पर bया वह इस
Dवचार को सचमच
ु बाहर कर पाया था।

मनTु य का pदमाग एक रह#यमय अजायबघर क! तरह होता है . िजसमO कछ


ु चीजO करJने

से सजी होती हa तो ढे र सारJ यu-तu wबखरJ रहती हa. यहां तक Xक उसके संचालक को भी
उनके बारे मO ठ_क से पता नहJं होता.

उस pदन वह बाक! ब`चM के साथ खेल मO मcन था Xक सड़क के उस पार से एक लड़क! को


जाते दे खा. हाथM मO छोटJ-सी पोटलJ उठाए वह बहत ु तेजी से बढ़ती जा रहJ थी, मानो Xकसी
काम को %नकलJ हो और उसमO बहत ु दे र हो चक!
ु हो.

‘आज से पहले तो इसे कभी नहJं दे खा.' टोपीलाल ने मन हJ मन सोचा. उसी समय उसे सड़क
के उस पार से चीखने क! आवाज सनाई
ु दJ. टोपीलाल ने चˆककर उसी ओर दे खा. एक क†ा

लड़क! के हाथ से पोटलJ छ_नकर भागा जा रहा था. टोपीलाल खेल छोड़कर फौरन उठ खड़ा
हआ
ु . हाथ मO पhथर उठाकर वह तेजी से दौड़ा. सड़क पर वाहनM क! भरमार थी. उसने पhथर
से %नशाना साधा. क†ा
ु पोटलJ छोड़कर भाग खड़ा हआ ु . टोपीलाल पोटलJ लेकर लड़क! के पास
पहंु चा. वह रोए जा रहJ थी. उसने लड़क! को समझाने का "यास Xकया.

‘मां ठ_क हJ कहती है . मa कोई भी काम ठ_क से नहJं कर सकती.' लड़क! सबक
ु े जा रहJ थी.

‘कौन हो तम
ु , कहां रहती हो?' टोपीलाल ने सवाल Xकया. जवाब दे ने के बजाय लड़क! ने एक
ओर उं गलJ से इशारा कर pदया.
‘खाना Xकसके &लए ले जा रहJ थीं?'

‘मां के &लए, वहां सड़क Xकनारे गमटJ


ु लगाती है .' लड़क! ने एक ओर इशारा Xकया, Xफर
बताती चलJ गई, ‘मां रोज सवेरे रोटJ बनाकर ले आती थी. पर pदन होते-होते रोpटयां अकड़
जाती हa. उसके कमजोर दांतM से कटती हJ नहJं. इस&लए मaने सोचा Xक मां को गम4 रोpटयां
बनाकर पहंु चा pदया कzंगी. मां कहती थी Xक यह मझसे
ु नहJं होगा. आ„खर वहJ हआ
ु जो मां
ने कहा था. मa कोई काम तरJके से कर हJ नहJं सकती.'

लड़क! Xफर सबकने


ु लगी.

ु हारे Dपता जी bया करते हa?'


‘त‡

‘नहJं हa!'

‘bया, मर गए?' टोपीलाल के मंह


ु से %नकला. परं तु अपनी गलती का एहसास उसको ज9दJ हJ
हो गया. cला%नबोध मO उसने अपनी गद4 न झका
ु लJ.

‘नहJं, मां को छोड़कर कहJं दरू चले गए हa.' लड़क! का #वर सपाट था, िजसने टोपीलाल को
Dव#मय मO डाल pदया.

ु हO भी छोड़ गए?'
‘त‡

‘हां, मa भी मां क! तरह कालJ जो हंू '

‘ओह!' मारे दःख


ु के टोपीलाल का कलेजा फटा जा रहा था. आगे भी श@द मंह
ु से %नकाल पाना
मि2
ु कल हो गया.

‘उठो, त‡
ु हारJ मां को भख
ू लगी होगी. घर से कछ
ु रोpटयां ले लेते हa.' रोpटयM का नाम सनकर

लड़क! के पैरM क! जान वापस आ गई. वापस आकर टोपीलाल अपनी मां के पास पहंु चा.
उससे कछ
ु बातO क!ं. Xफर वापस आकर रोpटयां लJं. च9
ू हे मO आग गमा4 रहJ थी. ज9दJ-ज9दJ
उ-हO गम4 Xकया. लड़क! उसक! ओर चपचाप
ु दे खती रहJ.

‘अरे ! इतनी दे र हो गई. मaने त‡


ु हारा नाम तो पछा
ू हJ नहJं.' दबारा
ु सड़क पर आते हJ
टोपीलाल ने लड़क! से पछा
ू .

‘%नरालJ, यहJ नाम है मेरा. लेXकन &सवाय मां के सब मझे


ु कालJ हJ कहते हa. मेरे रं ग को
दे खते हए
ु उ-हO यहJ नाम ठ_क लगता है .' लड़क! ने बताया.

ु सचमच
‘तम ु %नरालJ हो. आज के बाद मa त‡
ु हO इसी नाम से पकाz
ु ं गा. और सनो
ु , मेरJ मां
बताया करती है आदमी अपनी गल%तयM से भी सीखता है . वह कभी गलत नहJं कहती. एक
pदन तो यह बात सचमच
ु सच भी हो गई.' टोपीलाल ने कहा. लड़क! को खश
ु रखने के &लए
वह उसको बातM मO उलझाए रखना चाहता था.

‘कैसे?' लड़क! जो कछ
ु दे र पहले तक अपने आंसू रोक नहJं पा रहJ थी, अब उसक! बातM का
आनंद लेने लगी थी. टोपीलाल तो यहJ चाहता था. वह आगे बताने लगा-

‘अभी कछ
ु pदन पहले क! बात है ? मां और Dपताजी तो काम पर चले जाते हa. उनके बाद घर
क! सफाई का छोटा-मोटा काम मझी
ु को करना पड़ता है . उस pदन मa झाड़ू लगा रहा था. खेल
का समय हो चका
ु था. ब`चे घर के सामने इंतजार कर रहे थे. कछ
ु ऊबकर घर लौट चक ु े थे.
सभी को ज9दJ थी. मa भी ज9दJ-ज9दJ काम समेट लेना चाहता था.

।।।।।।।2

सहसा पड़ोस से Xकसी के चीखने क! आवाज आई. आवाज साफ नहJं थी. मझे
ु भी खेल को
दे र हो रहJ थी, इस&लए मa अपने काम मO लगा रहा. कछ
ु दे र बाद हJ बराबर के घर से रोने
क! आवाज आने लगी. मaने लोगM को उस ओर दौड़कर जाते हए
ु दे खा. झाड़ू फश4 पर पटककर
मa भी बाहर क! ओर भागा.

मजदरू और कारJगर जहां काम करते हa, वहJं पर अपने &लए छोटJ-छोटJ झिc
ु गयां बना लेते हa.
wबना Xकसी भेदभाव के. मजदरM
ू और 5चनाई &मि[यM क! झिु cगयां बराबर-बराबर बनी होतीं.
हमारJ झcु गी के बराबर मO हJ एक मजदरू क! झcु गी थी. गांव से भागकर धंधे क! तलाश मO
वह शहर पर आया था. जब कोई दसरा
ू काम नहJं &मला तो मजदरJ
ू करने लगा.

मां बताया करती थी Xक उनपर गांव के Xकसी महाजन का कज4 है . उसे उतारने के &लए हJ
प%त और पhनी दोनM मजदरJ
ू करते थे. उनका दो साल का एक बेटा था. pदन मO वह कछ
ु दे र
हमारे साथ खेलता. दोपहर के समय उसे नींद आने लगती तो उसक! मां बीच मO आकर
उसको सला
ु जाती. कछ
ु समय तक हम भी उसक! ओर से %नि2चंत हो जाते थे.

उस pदन उसक! मां उसे सलाकर


ु गई हJ थी. इस&लए मa उसक! ओर से बेXफq होकर अपने
काम मO लगा था. उसक! चीख को अनसना
ु करने के पीछे एक कारण यह भी था. लेXकन...'
टोपीलाल चप
ु हो गया. मानो अपनी गलती पर अफसोस कर रहा हो.

‘आगे bया हआ
ु ?' %नरालJ िजWासु बनी थी, चHु पी उसको खलने लगी.

‘उस pदन उसक! मां ब`चे को सलाने


ु के बाद काम पर चलJ गई थी. वह उसक! ओर से
%नि2चंत थी. लेXकन न जाने कैसे ब`चे क! नींद उचट गई. वह उठकर च9
ू हे के पास चला
गया. राख के नीचे आग दबी थी. ब`चा 5चमटा उठाकर उसी से खेलने लगा. खेल-खेल मO एक
5चंगारJ उछलकर ब`चे के कपड़M पर आ 5गरJ. तDपश लगने से वह रोने लगा. आग क! कछ

5चंगाUरयां उछलकर कपड़M तक भी पहंु ची थीं, िजनसे धआं
ु उठने लगा. उसे दे ख बाहर काम
कर रहे Xकसी मजदरू का माथा ठनका. वह फौरन भीतर भागा. उसने फटाफट जाकर आग
पर काबू Xकया. ब`चा भी काफ! झलस
ु गया था.'

‘इसमO त‡
ु हारा bया दोष है ?' %नरालJ ने पछा
ू . उसे साथ चल रहा टोपीलाल इतना भला लग
रहा था Xक उसपर संदेह करना भी मि2
ु कल लग रहा था.

‘गलती कैसे नहJं थी, उस pदन अगर मa ब`चे क! पहलJ चीख सनते
ु हJ उसके घर चला जाता
तो संभव है Xक उसको झलसने
ु से भी बचा लेता. मेरJ हJ गलती से...'

‘इस&लए मेरJ चीख सनते


ु हJ आज तम
ु फटाफट दौड़कर चले आए.'

‘आदमी अपनी गलती से भी सीखता है , मेरJ मां wबलकल


ु सहJ कहती है ?'

‘आदमी जब गल%तयM से भी सीखता है तो जरा-सी भल


ू होने पर शम4 कैसी?' %नरालJ ने
%नराला तक4 pदया.

‘कभी-कभी गलती सधारने


ु मO बहत
ु दे र हो जाती है .' दःुखी मन से टोपीलाल ने कहा.

‘अ`छा उस ओर मड़
ु जाओ. मेरJ मां वहJं बैठती है .' और टोपीलाल wबना कछ
ु कहे िजधर
%नरालJ ने इशारा Xकया था, उसी ओर मड़
ु गया.

अगर मन साफ हो तो अ`छे &मu राह चलते हए


ु भी &मल जाते हa. काफ! सोचने के बाद उस
pदन %नरालJ इसी नतीजे पर पहंु ची. -

वह गलत थोड़े हJ थी.

टोपीलाल के zप मO %नरालJ को एक अ`छा दो#त &मला; और स`चा हमदद4 भी. उ‘ मO वह


ं ु टोपीलाल से &मलने से पहले वह गमसम
टोपीलाल से एक-दो वष4 कम हJ होगी. Xकत ु ु और
खोई-खोई रहती थी. चेहरे पर पीलापन छाया रहता. टोपीलाल के साथ रहकर उसक! उदासी
छं टने लगी. िजसका असर उसके शरJर पर भी पड़ा. उसपर %नखार आने लगा. एक pदन
टोपीलाल से &मलJ तो बहत
ु "स-न लग रहJ थी. टोपीलाल उसक! ओर दे खता हJ रह गया.

‘मaने एक फैसला Xकया है .'

‘कैसा फैसला?'

ु काम करने लगंू. इससे मa अपनी मां क! और अ5धक मदद कर सकती हंू .'
‘सोचती हंू Xक कछ

टोपीलाल को अ`छा लगा. उस यह सोचकर दःख ु भी हआ


ु Xक उसने #वयं कभी अपने माता-
Dपता क! मदद करने के बारे मO नहJं सोचा. कभी ऐसा कोई Dवचार तक pदमाग मO नहJं आया.
अगर आया भी तो %नकाल बाहर Xकया. %नरालJ अपनी मां क! मदद करना चाहती है , इस&लए
वह उससे अ`छ_ है . जो ब`चे Xकसी भी "कार से दसरM
ू क! मदद करना चाहते हa, वे अ`छे हJ
होते हa.

‘काम bया करोगी?' टोपीलाल के "2न पर %नरालJ ने मंुह लटका &लया. मानो सकचा
ु रहJ हो.


‘तमने जवाब नहJं pदया?' टोपीलाल ने खद
ु को दोहराया.

‘हमारJ ब#ती क! कई लड़Xकयां कबाड़ चनने


ु जाती हa, सोचती हंू मa भी उ-हJं के साथ जाने
लगंू. काम बहत
ु अ`छा नहJं है . आदमी तो आदमी क†ेु भी दतकारे
ु wबना नहJं रहते. लेXकन
यpद मa मां क! मदद करने क! ठान हJ लंू तो कोई भी काम मझे
ु बरा
ु नहJं लगेगा. Xफर धीरे -
धीरे आदत तो पड़ हJ जाती है .' कहकर वह चप
ु हो गई. टोपीलाल क! "%तXqया का इंतजार
करने लगी. टोपीलाल खद
ु सोच मO पड़ा था. %नरालJ इतना गहरा सोच सकती है , उसे कतई
उ‡मीद न थी.

‘कबाड़ बीनने के अलावा bया Xकसी और काम के बारे मO भी सोचा है ?' कछ


ु दे र बाद टोपीलाल
ने पछा
ू .

ु कोई और काम आता कहां है . मां गलत थोड़े हJ कहती है Xक मa &सफ4 घर पर रहकर
‘मझे
रोpटयां तोड़ सकती हंू .'

‘मां के कहे का बरा


ु bयM मानती हो, pदन-भर काम करते-करते वे बहत
ु थक जाती हMगी.'

‘काम तो त‡
ु हारJ मां भी करती हa. 5चनाई का काम तो एक जगह बैठकर सौदा बेचने से कहJं
yयादा मेहनत का है .'

ु सा आने पर तो मां भी नाराज होती है . लेXकन उनके ग#


‘ग# ु से का &शकार Dपताजी को होना
पड़ता है . मझसे
ु तो मां बहत
ु Hयार करती है .' टोपीलाल क! गद4 न अ&भमान से तन गई. मगर
%नरालJ क! उदासी और भी बढ़ गई. टोपीलाल कछ ु समझ न पाया. वह जान न सका Xक
अनजाने हJ उसने %नरालJ के दःख
ु को हरा कर pदया है . तो भी उसको लग रहा था Xक उसने
कछ
ु गलत कहा है .

‘काम तो कोई भी बड़ा या छोटा नहJं होता, लेXकन...' कहते-कहते टोपीलाल चप


ु हो गया.

‘bया तम
ु नहJं चाहते Xक मa कोई काम कzं?' %नरालJ ने पछा
ू .

‘जzर करना चाpहए. यpद मकसद नेक है तो इसमO कछ


ु भी बराई
ु नहJं है . परं तु मेरJ मां कहा
करती है Xक हम ब`चM को बड़े-बड़े सपने दे खने चाpहए. भले हJ वे उस समय हक!कत मO
त@दJल ना हो पाएं.'
‘अगर सच न हो पाएं तो ऐसे सपने दे खने का लाभ हJ bया?' %नरालJ ने बीच हJ मa टोक
pदया. टोपीलाल के पास जवाब एकदम तैयार था.

‘मां तो कहती है Xक सपनM के अंकु राने से हJ भDवTय के फल


ू „खलते हa. इस&लए आदमी को
सपना दे खने मO कभी कंजसी
ू नहJं करनी चाpहए. हम गरJब सहJ, पर सपने दे खने पर पाबंदJ
bयM हो, bयM हम सपना दे खने मO भी मन को मारO ?' टोपीलाल ने तक4 pदया. मां का नाम
जबान
ु पर आते हJ उसका आhमDव2वास जोर मारने लगा, चेहरे क! चमक सवाई हो गई. ऐसा
अbसर होता था. मां का िजq कहJं भी, Xकसी भी zप मO हो, टोपीलाल का रोम-रोम "फि9
ु लत
हो जाता था.

‘&सफ4 सपने! बड़ी अजीब बात है . मेरJ मां तो कहती है Xक आदमी को पांव उतने हJ पसारने
चाpहए िजतनी Xक उसक! चादर हो.'

‘अरे ! यहJ "2न तो मaने अपनी मां से Xकया था, जब उ-हMने बड़े से बड़ा सपना दे खने को कहा
था. तब जानती है उ-हMने bया कहा?'

‘मa कैसे बता सकती हंू !' %नरालJ के चेहरे पर मास&मयत


ू छा गई.

‘तब मां ने कहा था Xक ठ_क है , आदमी को अपने पांव उतने हJ पसारने चाpहए िजतनी Xक
उसक! चादर है . मगर यह सपना तो वह दे ख हJ सकता है Xक आने वाले pदनM मO वह बड़ी
चादर जzर खरJद लेगा...Xफर एक घर होगा, चारपाई होगी, िजसपर pदन-भर क! मेहनत के
बाद वह आराम से सो सकेगा. ब`चM के अ`छे भDवTय के &लए योजनाएं बना सकेगा.'

‘हां, चादर बड़ी करने का सपना दे खना तो कोई गनाह


ु नहJं है.' %नरालJ ने सहम%त जताई.

‘पर मां के सामने मaने इस बात को आसानी #वीकार नहJं Xकया था.'

‘bयM...?'

‘उस समय मेरा मन था कहानी सनने


ु का; और मां के पास हर ि#थ%त को समझाने के &लए
कहानी तैयार रहती है .'

‘तो कहानी सनाई


ु थी, उ-हMने?'

‘हां!' कहते हए ु करा pदया.


ु टोपीलाल म#

‘कहा%नयां तो मझे
ु भी बहत ु अ`छ_ लगती हa. चलो आज का काम यहJं परा
ू करते हंू . वहां पेड़
क! छाया मO बैठते हa. तम
ु मझे
ु वह कहानी सनाओ
ु ?'

न जाने bयM टोपीलाल को %नरालJ का साथ अ`छा लगता था. उनक! जान-पहचान
तो कछ
ु हJ pदनM क! थी, मगर लगता जैसे Xक वह वषr परानी
ु हो. इस&लए जब %नरालJ ने

कहानी सनाने
ु को कहा तो वह खशी
ु -खशी
ु तैयार हो गया. दोनM सड़क Xकनारे खडे जामन
ु के
पेड़ के नीचे जा बैठे.

‘कहा%नयां कहना तो &सफ4 मां को आता है, मa तो उसको बता हJ सकता हंू . उसमO त‡ ु हO वह
आनंद नहJं आएगा, जो मझेु मां के मंह
ु से सनने
ु मO आता है .' टोपीलाल ने बताया. %नरालJ बस
म#
ु कु रा दJ.

टोपीलाल ने सनी
ु -सनाई
ु कहानी आरं भ कर दJ-

एक सेठ के दो लड़के थे. सेठ भला आदमी था. बेटे थे आWाकारJ. उसने आम आदमी का
सादा-सरल जीवन िजया था. मhृ यु करJब आई तो उसने अपने दोनM बेटM को पास बलाकर

कहा, ‘इस छोटे -से गांव मO रहकर मaने अपनी मेहनत और सादे चलन के बाद जो बचाया है ,
उसको दो pह#सM मO बांट pदया है . आधा-आधा धन इन दो हांnडयM मO बंद है . मa चाहता हंू Xक
इनमO से एक-एक को तम ु दोनM मेरे जीते जी संभाल लो, ताXक बाद मO त‡
ु हारे बीच Xकसी भी
"कार का झगड़ा न हो.'

इतना कहकर सेठ ने पलंग के नीचे रखी हांnडयM पर से कपड़ा हटा pदया. वहां एक हJ रं ग
और आकार क! दो हांnडयां रखी थीं. दोनM भाई उनमO से एक-एक उठाकर चलने लगे तो सेठ
ने टोका-

‘मेरJ आ„खरJ बात और सन


ु लो...अगर मन भाए तो अमल करना, नहJं तो wबसरा दे ना.' दोनM
बेटM के ;कने पर सेठ ने कहा-‘मेरे ग;जी
ु कहा करते हa-नंगे पांव चलना, सपने बड़े दे खना.
इन श@दM को मa तो अपने जीवन मO परJ
ू तरह से उतार नहJं पाया. तम
ु अगर उतार सको तो
मa समझंग
ू ा Xक मेरJ ग;द}Zणा
ु मेरे बेटM ने चका
ु दJ.'

दोनM बेटे Dपता के इन श@दM को मन हJ मन दोहराते हए


ु वापस लौट आए. कछ
ु हJ pदनM के
बाद सेठ चल बसा. उसके बाद दोनM अपना-अपना धंधा संभालने लगे.

Dपता के श@दM का दोनM बेटM पर अलग-अलग "भाव पड़ा था. बड़े बेटे ने पांव मO ज%तयां

डालना छोड़ pदया था. Dपता क! बात पर अमल करने के &लए वह हमेशा नंगे पांव रहता. उसी
तरह आता-जाता. शाम ढलते हJ वह wब#तर पर चला जाता. Xफर अगले pदन बांस-भर सरज

ऊपर चढ़ने के बाद हJ आंखO खोलता. धीरे -धीरे उसका धंधा Dपटने लगा. परे शानी और 5चंता
बढ़J तो दे ह क! आब घटने लगी. शरJर pदनMpदन Zीण पड़ने लगा. उधर छोटा बेटा मोटा
पहनता, मोटा हJ खाता. चपचाप
ु अपने काम मO डबा
ू रहता. उसका धंधा बढ़ता हJ जा रहा था.

बड़े क! बीमारJ जब लंबी „खंचने लगी तो उसक! पhनी ने वै को बलवाया


ु . वै ने रोगी क!
नाड़ी क! जांच क!. कछ
ु समझ मO नहJं आया तो पछा
ू -
‘नाड़ी तो ठ_क हJ लगती है , परे शानी bया है ?'

‘मa बहत
ु तकलJफ मO हंू . खाना-पीना कुछ भी अ`छा नहJं लगता. न भख
ू लगती

है , न Hयास. नींद न रात को ढं ग क! आती है , न pदन को?'

‘ऐसी कौन-सी 5चंता खाए जा रहJ है, जहां तक मझे


ु मालम
ू है , मरने से पहले सेठजी तम
ु दोनM
भाइयM के &लए ठ_क-ठाक संपD† छोड़ गए हa.'

‘वह तो ठ_क है पर...' बड़े लड़के ने हामी भरJ. वैजी उसके चेहरे पर नजर गड़ाए हएु थे. यह
दे ख वह आगे बताने लगा, ‘मरने से पहले बाबू जी ने कहा था-नंगे पांव रहना, सपने बड़े
दे खना. मaने उसी pदन से ज%तयां
ू पहनना छोड़ pदया. रोज यह सोचकर सोता हंू Xक आज क!
रात खब ू बड़ा सपना दे खू.ं लेXकन bया कzं...अgवल तो नींद हJ नहJं आती. और जब आती है ,
तो बहत
ु डरावने सपने आते हa. भय से दे ह पसीना-पसीना हो जाती है . नींद बीच हJ मO टट

जाती है , और उसके बाद तो सो भी नहJं पाता. बड़ा बेटा होकर भी मa Dपताजी क! आ„खरJ
इ`छा परJ
ू नहJं कर पा रहा हंू . बस यहJ 5चंता मझे
ु खाए जा रहJ है . इसक! कोई दवा हो तो
आप बताएं.'

अनभवी
ु वै रोग क! थाह तो पा गए, लेXकन कहा कछ
ु नहJं. कहने से पहले वे खद
ु को परख
लेना चाहते थे, ‘बेटा, मa तो सीधा-सादा वै हंू . वषr पहले बड़े वैजी ने जो &सखाया था, उसी
के सहारे लोगM के काया-कTट दरू करने का काम करता हंू . तमने ु जो कहा, उसके बारे मO तो
बड़े वैजी ने मझे
ु कछ
ु नहJं बताया था. पर मa इतना जानता हंू Xक त‡
ु हारे Dपता बहत
ु गणी

इंसान थे। उनक! बात का कोई न कोई सार तो जzर होगा. मझेु Dवणज-gयौपार का जरा-भी
अनभव
ु होता तो कछ
ु उपचार सोचता. हां, को&शश जzर कzंगा. यpद कछ
ु समझ पाया तो
आज से ठ_क पं~हवO pदन हािजर हो जाऊंगा. उस समय तक यpद Xकसी और से सलाह लेना
चाहो तो त‡
ु हारJ मज.'

इतना कहकर वैजी वहां से "#थान कर गए.

बाहर %नकलकर उ-हMने सोचा Xक अब छोटे भाई को भी परख &लया जाए. gयापारJ क! बात
का अथ4 कोई gयापारJ हJ भलJ-भां%त बझ
ू सकता है . सेठ के दो बेटे हa. मरने से पहले उसने
अपने छोटे बेटे से भी वहJ श@द कहे हMगे. वैजी को मालम
ू था Xक छोटा बेटा pदनMpदन
तरbक! कर रहा है . इस बोध के साथ हJ उनके चेहरे पर उhसाह छा गया. मन मO िजWासा
और कौत◌ू
ू हल &लए वे सेठ के छोटे बेटे से &मलने चल pदए.

छोटा बेटा अपनी गी पर हJ Dवराजमान था. वैजी को दे खा तो उठकर खड़ा हो गया.
#वागत Xकया, wबठाया. उस समय वह पांव मO साधारण-सी ज%तयां
ू पहने हएु था. कपड़े भी
#व`छ एवं साधारण थे. चेहरे पर भलJ म#
ु कान थी. मन को खींचने वालJ.
‘सेठजी के जाने के बाद अ`छ_ तरbक! क! है ?' वैजी ने बात आरं भ क!.

‘जी नहJं, मझे


ु उनके जैसा बनने मO तो अभी बहत
ु समय लगेगा.'

‘मaने तो सना
ु है Xक त‡
ु हारा gयापार दरू-दरू तक फैला हआ
ु है ?'

‘सो तो है , पर द%नया
ु बहत
ु बड़ी है . आकाश मO भले हJ मत उड़ो, पर आगे बढ़ने &लए धरती पर
हJ इतने कोने बाक! हa, जहां तक, मझेु लगता है Xक Dपताजी का नाम जाना

हJ चाpहए.'

‘सेठजी तो बहत
ु संतोषी जीव थे.' वैजी ने है रानी जताई.

‘जी हां, ईमानदारJ से कमाना, खब


ू मेहनत करना और अपनी हJ कमाई मO संतोष रखना हमO
उ-हMने हJ &सखाया था.' छोटे बेटे के #वर मO Dवन‘ता थी, आंखM मO आhमDव2वास. वै जी के
चेहरे पर म#
ु कान छा गई. छोटे बेटे को कोई संदेह न हो, इस&लए वे उठकर "#थान कर गए.
इसके बाद वे रोज उसके पास जाते. बातचीत करते और चपचाप
ु वापस लौट आते. हर बार वे
दे खते Xक छोटे बेटे क! कथनी और करनी मO कोई भेद तो नहJं है .

परJ
ू तरह आ2व#त होने के बाद, ठ_क पं~हवO pदन वे बड़े बेटे के पास पहंु च गए. इस बीच
उसके चेहरे का पीलापन और भी बढ़ गया था. दे ह कमजोर होकर चारपाई से जा लगी थी.
उस समय वह चारपाई पर पड़ा था. उसक! पhनी &सरहाने बैठकर पंखा झल रहJ थी. वै जी
के पहंु चते हJ वह रोने लगी. उसे ढाढ़स बधाते
ँ हए
ु वै जी बराबर मO पड़ी चौक! पर बैठ गए.

‘घबराओ मत, इनके उपचार के &लए मaने बड़े वै जी क! पो5थयM को छान मारा. और कदरत

का कUर2मा दे „खए Xक आज से पचास साल पहले ठ_क ऐसा हJ मामला बड़े वै जी के सामने
भी आया था. तब उ-हMने &म(ी पाक ‰ारा रोगी का उपचार Xकया था. तीसरे हJ pदन वह रोगी
दौड़ लगाने लगा था.'

‘&म(ी पाक?' बड़े बेटे क! पhनी ने कहा, ‘इस बारे मO मaने कभी नहJं सना
ु .'


‘सनती कैसे बेटJ. बड़े वै जी तो तेरे ज-म से पं~ह वष4 पहले हJ #वग4 &सधार चक
ु े थे. उनके
बाद न तो Xकसी क! %नगाह मO ऐसा Dव5चu रोग आया, न कोई ऐसे उपचार के बारे मO सोच
हJ पाया. पर एक सम#या है, &म(ी पाक बनाने क! Dव5ध बहत
ु जpटल है , बेटJ!'

‘आप कहO तो वै जी. इस रोग से छटकारा


ु पाने के &लए मa कछ
ु भी करने को तैयार हंू .'

‘बताऊंगा? मaने त‡
ु हारे छोटे भाई को भी बलवाया
ु है . वह बस आता हJ होगा.'
उसी समय सेठ के छोटे बेटे ने "वेश Xकया. तब वैजी ने बताने लगे, ‘&म(ी पाक बनाने के
&लए पर#पर DवपरJत pदशा मO ि#थत दो गांवM के कओं
ु का जल लाना होगा. शत4 यह है Xक
उन कंु ओं से पहले Xकसी ने एक भी बंूद जल न &लया हो. मझे
ु तैयारJ करने मO पं~ह pदन
लगO गे. उससे पहले तम
ु दोनM भाइयM को जल लेकर पहंु चना होगा.'

दोनM भाई जाने लगे तो वै जी ने कहा, ‘एक बात और {यान से सनो
ु , जल लाने के &लए तम

दोनM अलग-अलग pदशा मO "#थान करोगे और जब तक %नवासे कंु ए का जल नहJं &मल
जाता, तब तक आपस मO कोई संपक4 नहJं रखोगे.'

‘मेरJ समझ मO आपक! कोई बात नहJं आ रहJ.' जाने से पहले छोटे भाई ने कहा,

‘लेXकन मेरJ खशी


ु बड़े भइया को #व#थ दे खने मO है . इस&लए जैसा आप चाहते हa, वहJ होगा.'

इसके बाद बड़े भाई ने पव4


ू क! pदशा पकड़ी. छोटा भाई पि2चम क! ओर चल पड़ा. पं~ह pदन
बाद हािजर होने को कहकर वैजी अपने घर क! ओर "#थान कर गए.

ठ_क पं~हवO pदन पहले बड़े भाई ने "वेश Xकया. उसक! हालत और भी wबगड़ चक!
ु थी. चेहरा
धप
ू से काला पड़ चका
ु था. उसके अवसादs#त चेहरे से कोई भी अनमान
ु लगा सकता था Xक
मौत उसके चेहरे पर नाच रहJ है . आते हJ वह धम से चारपाई पर पड़ गया.

‘&म(ी पाक के &लए सारJ सामsी तैयार है ...%नवासे कएं


ु का जल &मला?' वैजी ने "वेश करते
हए
ु पछा
ू .

‘जाने दJिजए. मa जानता हंू Xक अब कछ ु नहJं हो सकता. अब केवल मौत हJ मझे


ु इस बीमारJ
से छटका
ु रा pदला सकती है .' यह सनते
ु हJ उसक! पhनी क! ;लाई फट
ू गई.

‘%नराश bयM होते हो, त‡


ु हारे रोग मO &म(ी पाक रामवाण औष5ध है . खाते हJ चंगे हो जाओगे.
त‡
ु हारा छोटा भाई भी आता हJ होगा. तम
ु फटाफट जल दो ताXक मa &म(ी पाक तैयार कर
सकंू.'

‘कहा नहJं Xक अब कुछ नहJं हो सकता,' बड़े बेटे के #वर मO %छपी %नराशा बोल उठ_. %नवासे
कंु ए का जल लेने के &लए मa पव4
ू pदशा मO परेू सौ कोस तक गया. एक-एक गांव छान मारा.
मगर कहJं भी ऐसा कंु आ नहJं &मला, जो %नवासा हो, िजसके जल को पहले Xकसी ने "योग न
Xकया हो. इस&लए मa मान चुका हंू Xक अब मेरJ मौत पbक! है . वहJ मझे
ु इस लाइलाज
बीमारJ से मिb
ु त pदला सकती है .'

यह सनकर
ु बड़े क! पhनी जोर-जोर से रोने लगी. उसी समय सेठ के छोटे बेटे ने घर मO कदम
रखा. उसके &सर पर घड़ा था. दे ह &सर से पांव तक तर, चेहरे पर थकान के भाव थे, पर
मंिजल तक पहंु चने का उ9लास भी कम नहJं था-‘माफ करना वै जी, मa आ हJ रहा था Xक
एक gयापारJ टकरा गया. pदसावर मO gयापार जमाने क! बात करने लगा. उससे बात करने मO
थोड़ी दे र हो गई. मa %नवासे कंु ए का जल ले आया हंू . कम हो तो 5चंता मत करना. िजतना
कहोगे, और मंगवा दं गू ा.'

ु कहां से ले आए? त‡
‘तम ु हारे बड़े भाई को तो सौ कोस तक एक भी %नवासा कंु आ नहJं &मला.'
वै जी ने है रानी जताई.

इसपर छोटा बेटा म#


ु करा pदया, बोला-‘मa जानता था Xक अगर कंु आ है तो वह %नवासा bयM
होगा. मझसे
ु पहले तो Xकसी न Xकसी ने उससे जल &लया हJ होगा. इस&लए ऐसे कंु ए क!
खोज मO जाना हJ बेकार था.'

‘Xफर तमने
ु bया Xकया?'

‘करना bया था. पं~ह pदनM तक gयापार से अलग रहना भी उ5चत नहJं था, इस&लए

मaने पि2चम pदशा मO जो भी पहला गांव पड़ा, वहJं कंु आ खदवाना


ु ु कर pदया. उसी गांव मO
शz
pटककर अपना काम भी दे खता रहा. आज सबह
ु जैसे हJ पानी %नकला, सबसे पहले आपके
&लए ले आया.'

‘शाबाश बेटा! मa जानता था Xक तम
ु यहJ करोगे.' वै जी बोले. उसके बाद वे बडे बेटे क! ओर
मड़कर
ु कहने लगे, ‘दे खा, भाषा तो एक मा{यम होती है . जzरJ नहJं Xक हम जो कहना चाहते
हa, उसको ठ_क-ठ_क श@दM मO gयbत कर हJ सकO. मन मO %छपी बात को बाहर लाने मO कभी-
कभी भाषा भी पीछे रह जाती है . उस समय श@दM का सीधा अथ4 न लेकर उनके %नpहताथ4 को
पकड़ना पड़ता है . जो &सफ4 श@दM के "कट अथ4 के फेर मO रहते हa, वे अbसर नाकाम जाते हa.
मरने से पहले बड़े सेठजी ने जो तमसे
ु कहा था, उसका अ&भ"ाय...'

‘रहने दJिजए वै जी, मझे


ु अपनी गलती का एहसास हो चका
ु है .' बड़े भाई ने कहा. उसके बाद
वह संभलने लगा. कछ
ु pदनM के बाद उसका gयवसाय भी पटरJ पर आने लगा.

ु समझीं...!' कहानी परJ


‘कछ ू करने के बाद टोपीलाल ने %नरालJ से पछा
ू .

‘और नहJं तो bया धरती पर त‡


ु हJं अकेले समझदार हो.' कहकर %नरालJ हं स दJ, ‘बहत
ु दे र हो
चक!
ु है . अब मa चलंग
ू ी. मां घर पहंु चने हJ वालJ होगी.'

‘मa भी चलता हंू . ब#ती के ब`चे इधर-उधर भटक रहे हMगे. Xकसी को कछु हो गया तो मां
डांटेगी.' टोपीलाल चलने को हआ
ु . तभी पीछे से %नरालJ ने टोक pदया-

ु !'
‘सनो
‘राह चलते को टोकना अ`छा नहJं होता, बात bया है ?' टोपीलाल ने नकलJ ग#
ु से का "दश4न
Xकया.

‘आज के बाद Xकसी से यह मत कहना Xक त‡


ु हO कहानी सनाना
ु नहJं आता. त‡
ु हारJ मां बहतु
बड़ी Xक#सागो हMगी. पर तम
ु भी कछ
ु कम नहJं हो. आगे मां जो भी कहानी सनाए
ु , वह मझेु
जzर सनाना
ु .'

‘कहानी को सनना
ु -कहना िजतना आसान है, उसको गनना
ु उतना हJ कpठन. कभी-कभी तो
कई pदन, बि9क महJनM %नकल जाते हa कहानी क! गहराई तक पैठने मO, Xफर भी उससे पेश
नहJं जाती. हर बार कछ
ु न कछ
ु छट
ू हJ जाता है .'

कहकर टोपीलाल पलटा और तेज कदमM से अपने घर क! ओर चल pदया.

कहानी सनने
ु से मि2
ु कल होता है , कहानी को गनना
ु -bया टोपीलाल ने गलत कहा था?

wबलकल
ु नहJं, टोपीलाल ने जो कहा, वह मां के मंह
ु से कई कहा%नयां सनने
ु और गनने
ु के बाद
हJ कहा था. उसको हमेशा लगता Xक हर कहानी के पीछे एक कहानी होती है .

उस तक तभी पहंु चा जा सकता है , जब कहानी को गनने


ु क! कला भी आती हो. पर आदमी
चाहे Xकतना हJ बDkमान
ु bयM न हो. कहानी को एक बार मO गनना
ु कहां संभव हो पाता है !
यह "Xqया तो हर समय चलती रहती है . कभी मंद होती है, कभी तेज. कभी लगातार सोचने
पर भी कोई पUरणाम नहJं %नकलता तो कभी भीतर से Wान का -◌ोत अचानक फट
ू पड़ता है .

Xकसी कहानी को सनने


ु -गनने
ु के बाद आदमी को लग सकता है Xक वह उसके बारे मO पया4Hत
बातO जान चका
ु है . लेXकन अगलJ बार जब भी वह कहानी से गजरता
ु है , वहJ कहानी उसको
एक झटका दे सकती है , चˆका सकती है . कछ
ु इतना Xक आदमी कह उठे -

‘अरे ! इस बारे मO तो मaने सोचा हJ नहJं था...यह तो एकदम अनठ_


ू बात हई
ु , वाह!'

श@दM को गनना
ु ...खद
ु को उसके अथ4 से परJ
ू तरह परचाना...उसक! पतr को खोलना, उनक!
तह तक जाना बड़ा हJ कpठन, एक चनौती
ु क! तरह होता है . %नरालJ को कहानी सनाने
ु के बाद
टोपीलाल वहां से उठा तो कछ
ु इसी "कार सोच रहा था. जब उसने मां मंह
ु से यह कहानी
सनी
ु थी, तब भी इसने उसको "भाDवत Xकया था. कहानी के बाद बातM-बातM ने मां ने उसके
बारे मO समझाया भी था. उसका "भाव उसके pदलो-pदमाग पर अभी तक था.

आज, %नरालJ को कहानी सनाने


ु के बाद उसको लगा Xक आज से पहले उसने कहानी को सना
ु -
भर था, गन
ु नहJं पाया था.
सेठ क! कहानी का अभी तक उसके &लए यहJ संदेश था Xक आदमी को बड़े से बड़ा सपना
दे खना चाpहए. ऊंची उड़ान भरने का मनोरथ पालना चाpहए. पर आज एक और पत4 खलJ
ु Xक
भाषा केवल एक मा{यम होती है . वह अपने श@दM ‰ारा सीधे-सीधे जो संदेश दे ना चाहती है ,
जzरJ नहJं Xक उसका मकसद वहJ हो. वह एकदम अलग भी हो सकता है .

Xक श@द Hयाज के %छलकM क! भां%त होते हa. कभी हम उनके #वाद का एक अंश जान पाते

हa, कभी उनक! गंध का कोई एक अंश. कभी उनके #वाद और गंध के थोडे-थोड़े अंश से हमारा
पUरचय हो जाता है . Xकसी भी Zण मO हम न Hयाज के #वाद को परJ
ू तरह भोग पाते हa, न
उसक! गंध को. यहJ हमारJ सीमा है . यहJ हमारJ भाषा क! भी सीमा है .उस समय बाक! का
काम हमO अपने अनभव
ु और Dववेक से चलाना पड़ता है .

Xक श@दM का मतलब %नकालना केवल श@दM पर नहJं, उ-हO सनने


ु -पढ़ने वाले पर भी %नभ4र
होता है . Xक श@दM मO %छपा अथ4 तो अधरा
ू होता है. (ोता और पाठक उसको परा
ू करते हa.
अपनी-अपनी तरह से, अपने अनभव
ु और Dववेक के अनसार
ु .

कभी-कभी टोपीलाल को लगता है Xक उसक! मां उसको यंू हJ उलझा दे ती है . कभी सोचता
Xक अनपढ़ मां के pदमाग मO इतनी भारJ-भरकम बातO कहां से आ जाती हa!

‘िजंदगी के अनभव
ु से?' उसे याद आता है , मां ने एक बार यहJ कहा था. तो bया

ऐसा नहJं हो सकता Xक कोई बात पढ़ते या सनते


ु हJ उसके सभी अथ4 सीधे pदमाग मO उतरते
चले जाएं. सोचने-समझने मO एक भी पल गंवाए wबना. गनने
ु क! तो जzरत हJ न पड़े.
Xकतना अ`छा हो अगर उसके पास यह शिbत आ जाए.

टोपीलाल Xफर क9पना मO उड़ने लगा. चलते-चलते उसको लगा Xक उसके पास एक ऐसी
ताकत आ चक!
ु है , िजससे वह एक झटके मO चीजM क! गहराई मO उतर सकता है . पलक
झपकते बड़ी-बड़ी पहे &लयां हल कर सकता है . मां और बापू है रान हa. मां क! "स-नता का तो
pठकाना हJ नहJं है . लोग उसके पास बड़ी-बड़ी पहे &लयां लेकर आते हa. िज-हO वह चटक!
ु बजाते
हल कर दे ता है .

टोपीलाल के पास चीजM को समझने क! जादई


ु ताकत है , चारM ओर यह बात फैल जाती है .
यह Dवचार हJ टोपीलाल के चेहरे को उजास से भर दे ता है .

घर लौटा तो बापू सामने हJ pदख गए. चारपाई पर लेटे हए


ु . मां उस समय काम पर थी. पता
चला Xक तwबयत खराब होने के कारण बापू ने आधे pदन क! छo ु टJ क! है . टोपीलाल के
pदमाग मO DवचारM का तांता लगा था. अपने Dपता से वह कम हJ बोलता था. कछ
ु कहना
होता तो मां के मा{यम से कहलवा दे ता. पर उस समय वह सीधे उ-हJं के पास पहंु च गया-
‘बापू, अनभव
ु bया होता है ?' उसने pदमाग मO चल रहJ उथल-पथल
ु का समाधान चाहते हए

कहा.

‘चल हट! न जाने कहां-कहां अपना pदमाग दौड़ाता रहता है ...!' आशा के DवपरJत बापू ने डपट
pदया. टोपीलाल का मन बझ
ु -सा गया. वह जाने को हआ
ु Xक पीछे से बापू क! आवाज कान मO
पड़ी-

‘छोटJ उ‘ के ब`चM के साथ रहकर तू अभी तक खद


ु को ब`चा हJ समझता है . जबXक तेरJ
उ‘ के लड़के काम-धंधे मO अपने मां-बाप का हाथ बंटाते हa. खालJ pदमाग शैतान का घर. कल
से मेरे साथ चलना, कहJं ह9का-फ9
ु का काम pदलवा दं ग
ू ा.'

िजस बहमं
ु िजला इमारत का %नमा4ण चल रहा था, उसका मा&लक इमारत के चारM ओर पाक4
बनवा रहा था. उसके &लए घास wबछाने और पेड़-पौधे लगाने का काम चल रहा था. टोपीलाल
रोज दे खता Xक मालJ के साथ उसका बेटा भी पौधM क! दे खभाल करने, पानी लगाने के &लए
आता है . उसको काम करते दे खना उसको बरा
ु नहJं लगता.परं तु इस Dवचार के साथ उसका
pदल बैठता चला गया. इस&लए नहJं Xक वह काम से जी चराता
ु था. इस&लए Xक िजंदगी को
लेकर उसका सपना कछ
ु और हJ था.

‘मa तो पढ़ना चाहता हंू बापू!' टोपीलाल ने अनभव


ु Xकया Xक उसक! भाषा मO त9खी थी. इतना
जोर दे कर उसने बापू से कभी बात नहJं क! थी. मां सन
ु लेती तो उसक! खबू खबर लेती.
अपनी भाषा क! गरमी से वह खद
ु हJ घबरा गया; और बापू क! "%तXqया जाने wबना बाहर
%नकल आया.

शाम हो चक!
ु ं ु अंधेरा अभी दरू था. वह सीधा सड़क पर पहंु चा और %न;fदे 2य-सा
थी. Xकत
एक हJ pदशा मO बढ़ने लगा. अपनी हJ धन ु मO. बढ़ता गया, बढ़ता हJ गया. आगे और आगे.
# Jट लाइटO जलJं तो उसको एहसास हआ
ु Xक वह घर से काफ! आगे आ चका
ु है . उसका मन
घबराने लगा.

वापस मड़ते
ु समय टोपीलाल क! %नगाह पाक4 के बीचM-बीच बनी एक म%त4
ू पर पड़ी. उसको
कछ
ु pदन पाठशाला जाने का अवसर &मला था. उस अव5ध मO उसने अZरM को जोड़ना सीखा
था. अपने उसी बोध के सहारे टोपीलाल म%त4
ू के नीचे खदे
ु अZरM को बांचने का "यास करने
लगा.

‘ह..मा..रे ...रा..T ..प%त....डॉ. सव4प9लJ राधाकT


ृ णन!' अपनी इस को&शश पर वह #वयं हJ इतरा
गया. म%त4
ू भgय थी. कछ
ु दे र तक वह अपलक उसको दे खता रहा. Xफर वापस लौट पड़ा। घर
पहंु चा तो मां काम से लौट चक!
ु थी. संभव है , इतनी दे र तक घर से बाहर रहने पर मां उसको
डांटे. इस&लए भीतर कदम रखने से पहले उसके कदम pठठक गए. सहसा उसके कानM मO
Dपता क! आवाज पड़ी. वे उसक! मां से कह रहे थे-

‘लगता है Xक वह नाराज है ...!'

‘ऐसा bयM लगता है त‡


ु हO ?'

‘तwबयत ठ_क न होने के कारण मa परे शान था. उसने मझसे


ु कछ
ु पछा
ू तो मaने डांट pदया.
सच तो यह है Xक मa अपनी कमजोरJ %छपा नहJं पाता. जब भी वह मझसे
ु कोई "2न करता है
तो मझे
ु अपना अनपढ़ होना याद आ जाता है; तब मa आपा खोकर झंुझला पड़ता हंू .'

‘टोपीलाल पढ़ना चाहता है , और आप जानते हa Xक इसमO कोई बराई


ु नहJं है .'


‘बराई कौन कहता है . बि9क मa तो स`चे pदल से चाहता हंू Xक वह पढ़े . वहJ bयM ब#ती के
सारे ब`चे पढ़O . पढ़-&लखकर कामयाब इंसान बनO. पर मa भी bया कzं. टोले के &म[ी और
मजदरू, औरत और मद4 सभी मझपर
ु भरोसा करते हa. हर फैसले के &लए मझे
ु आगे कर दे ते
हa. ऐसे मO मझे
ु वहJ %नण4य लेना पड़ता है, िजसमO परेू टोले का pहत, सभी क! मज हो.

अब जैसे इसी इमारत के ठे के को लो. मaने सोचा था Xक इस बार Xकसी #कूल के %नकट लंबा
काम पकड़ंू गा. जहां हमारे बेटे क! पढ़ाई का पbका इंतजाम हो सके. उससे पहले हJ इस
wबि9डंग का मा&लक ¢र#ताव लेकर आ गया. मaने टोले मO बातचीत क! तो सभी इस काम को
पकड़ने क! िजद करने लगे. दो-तीन वष4 तक लगातार चलने वाले काम को वे लोग छोड़ना हJ
नहJं चाहते थे। मझे
ु मजबरू होकर उ-हJं क! बात माननी पड़ी. ये बातO मa टोपीलाल को कैसे
समझाऊं!'

‘अपना टोपीलाल इतना नासमझ नहJं है ...' बाहर खडे टोपीलाल ने सना
ु , मां कह रहJ थी. उसके

बाद वहां एक पल भी खडे रहना उसको भारJ पड़ने लगा. वह दौड़कर भीतर

गया और बापू क! गोद मO पड़ गया. wबना कछ


ु कहे बापू उसके बालM मO हाथ Xफराने लगे। मां
ने खाना लगाया तो Dपता-पu
ु ने एक हJ थालJ मO साथ-साथ भोजन Xकया.

‘यpद भावना स`ची तथा उसका "वाह ती£ हो तो संवाद के &लए श@दM और वाbयM क!
जzरत नहJं पड़ती; चHु पी क! भी अपनी #वतंu भाषा होती है .' बापू क! गोदJ मO पड़े-पड़े
टोपीलाल को एकदम नया बोध हआ
ु . -

हर नई जानकारJ Wान के अन5गनत दरवाजM को खोल जाती है .

टोपीलाल सोने चला तो एक और एहसास हआ ु . उस रात उसको गहरJ नींद आई. सबह
ु आंख
खलने
ु से पहले उसने सपना दे खा Xक राT प%त महोदय उसको अपने हाथM से प#
ु तक सˆप रहे
हa. उनक! कद-काठ_ हू-ब-हू वैसी हJ थी, जैसी उसने म%त4
ू मO दे खी थी. आंखO खलJं
ु तो सपने के
"भाव से उसका शरJर „खला हआ ु था. चेहरे पर चमक थी, मन मO उमंग. चाल मO म#ती.

वह ज9दJ से ज9दJ %नरालJ से &मलना चाहता था. ताXक उसको अपने सपने के बारे मO बता
सके. बता सके Xक उसके बापू उतने बरेु और लापरवाह नहJं हa, िजतना वह कहता आया है .
Xक बापू के बारे मO वह अब तक जो सोचता था, िजतनी बातO उनके बारे मO बताŠ हa, वे Xकतनी
गलत, Xकतनी झठ
ू हa. इससे अनमान
ु लगाया जा सकता है Xक उसका pदमाग अभी Xकतना
ह9का सोचता है . Xक उसको पढ़ाई क! Xकतनी जzरत है . Xक Xकसी भी बालक के &लए पढ़ाई
Xकतनी जzरJ होती है . Xक प#
ु तकO हJ "ाणीमाu को मनTु यता से परचाती हa.

दे र तक वह सड़क पर टकटक! बांधे दे खता रहा. %नरालJ नहJं आई. उसके pदमाग मO तरह-
तरह के सवाल उठने लगे. वह उठा और उस #थान क! ओर बढ़ गया, जहां %नरालJ क! मां
अपनी गमटJ
ु लगाती थी. वहां जाने के बाद पता चला Xक उसक! मां क! तwबयत ठ_क नहJं.
आज नहJं आ सक!.

बो„झल कदमM से अनमना-सा वह वापस लौट आया. लौटते हए


ु Xफर उसी पाक4 के करJब से
गजरा
ु . म%त4
ू को दे खकर Xफर उसके कदम Xफर pठठक गए. वह एकटक उसी क! ओर दे खने
लगा. इतना डबू गया Xक अपनी सध ु हJ न रहJ. सहसा सामने से एक वाहन आता हआु
pदखाई पड़ा. उससे बचने के &लए वह पीछे हटा हJ था Xक सहसा उससे कोई टकराया. वह
संभल पाए Xक...

साइXकल पर 5चpoठयM, पwuकाओं का बंडल ले जाता हआ


ु डाXकया उससे टकराया था. इसके
साथ हJ उसक! 5चpoठयां धल
ू चाटने लगीं. डाXकया नीचे उतरकर 5चpoठयM को समेटने लगा.
टोपीलाल का कोई दोष नहJं था. Xफर भी खद
ु को बीच रा#ते मO खड़े होने का कसरवार
ु ू मानते
हए
ु वह 5चpoठयM को समेटने मO डाXकया क! मदद करने लगा.

‘bया त‡
ु हO घर पर कोई काम नहJं है, जो सड़क पर %नठ9ले खड़े हए
ु हो?' डाXकया ने कहा,
‘इतनी सारJ डाक बांटनी है . लोग इंतजार कर रहे हMगे.'

टोपीलाल ने डाXकये क! बात पर कोई "%तXqया gयbत नहJं क!. वह चपचाप


ु सड़क पर wबखरे
पड़े पuM को समेटने मO लगा रहा. जब भी कोई नया पu उसके हाथ मO आता तो उसका pदल
मखमलJ एहसास से भर जाता. आंखM मO इं~धनष
ु क! आभा उतर आती. उस काम मO उसे
खब
ू मजा आया.

‘सभी को डाXकये का इंतजार रहता है . मa बड़ा होकर डाXकया हJ बनंूगा.' टोपीलाल के pदमाग
मे◌े◌ं आया. अपने सोच पर वह खद
ु हJ म#
ु करा pदया.
डाXकया को पu बांटने क! ज9दJ थी. पuM को समेटकर वह ज9दJ-ज9दJ मंिजल क! ओर बढ़
गया. टोपीलाल उसको साइXकल पर जाते हए
ु दे खता रहा. Xफर घर जाने क! याद आई तो
पलटा. सहसा जमीन पर 5गरे पेन पर उसक! नजर पड़ी. वह चˆका. उसने डाXकया को अपना
ं ु तब तक वह एक गलJ मO मड़
पेन ले जाने के &लए आवाज भी दJ. Xकत ु चका
ु था. टोपीलाल
ने अनमने भाव से कलम उठा लJ.

‘वह रोज इसी रा#ते से गजरता


ु होगा...कल मझे
ु कलम लौटाने के &लए दबारा
ु यहJं आना
पड़ेगा...' टोपीलाल ने वापस लौटते हए
ु सोचा.

ू कलम हJ तो है , न लौटाऊं तो भी bया है !' अगले हJ पल उसके pदमाग मO आया. मगर


‘मामलJ
अपने इस #वाथ सोच पर उसको आhमcला%न होने लगी.

‘चीजM को उनके म9
ू य के बजाय उनक! उपयो5गता से आंकना चाpहए'-उसके मा#टरजी ने एक
बार कहा था. उनक! बात टोपीलाल को जंची थी. इसी कारण वह उसको आजतक याद है .
तब टोपीलाल ने %नण4य &लया Xक कल वह कलम लौटाने के &लए इस pठकाने पर दबारा

आएगा.

‘कम से कम एक pदन तो यह कलम मेरे पास रहे गी हJ.' टोपीलाल ने सोचा.

इस Dवचार के साथ उसका मन एक अजीब-सी गमा4हट से भर गया. उसके हाथ कलम को


आजमाने के &लए मचल उठे . कागज के अभाव मO कलम को हथेलJ पर चलाकर उसक! जांच
क!. उसको फरा4टेदार ि#थ%त मO चलते दे ख टोपीलाल को कछ
ु तस9लJ हुई. लेXकन मन न
भरा. घर लौटते समय रा#ते मO पड़े एक साफ-सथरेु कागज पर उसक! नजर पड़ी तो उसने
उसको फौरन उठा &लया. टोपीलाल ने कागज पर पेन को आजमाना चाहा. मगर उसके हाथ
pठठक गए-

‘इस संद
ु र कागज को इस तरह खराब करना ठ_क नहJं है .' सोचते हए
ु उसने सड़क Xकनारे पड़ा
कागज का दसरा
ू टकड़ा
ु उठाया. उसपर कलम को रगड़ा दे खा. गोल-मोल रे खाओं ने उसको
Xफर आ2वि#त दJ Xक वह ठ_क है .

अपने pठकाने पर वापस पहंु चने तक टोपीलाल का मन इस सोच से भरा-भरा रहा Xक अब


उसके पास कागज और कलम है . कलम भले हJ एक pदन के &लए हो, मगर कागज

उसका अपना है . रा#ते-भर वह कागज उसे म%त4


ू के हाथ मO लगी प#
ु तकM याद pदलाता रहा.
उसके एहसास ने टोपीलाल को इतना जकड़ा Xक रा#ते मO एक-दो री कागज उसको pदखाई
पड़े तो उसने उ-हO फौरन उठा &लया.
‘हर चीज अपने सदपयोग
ु क! चाहत रखती है .' पं~ह अग#त के pदन भाषण दे ते हुए D"ंसीपल
साहब ने कहा था. उस पाठशाला मO वह कछ
ु हJ महJने पढ़ पाया था. bयMXक इस बीच उसके
Dपता #कूल का काम %नपटा चक
ु े थे. उ-हO अपने टोले के साथ दसरJ
ू जगह काम &मला. नया
#थान #कूल से इतनी दरू था Xक वहां पढ़ने जा हJ नहJं सकता था. पढ़ाई बीच मO छूटने पर
वह Xकतना रोया था, उसको आज भी अ`छ_ तरह याद है .

इस कागज-कलम का कैसे सहJ उपयोग हो? टोपीलाल अपनी बDk


ु को भरसक दौड़ाने लगा.
इसी सोच मO डबा
ू वह अपने pठकाने पर लौटा. बाक! ब`चM को चपचाप ु खेलता हआु दे ख
उसको तस9लJ हई ु . इमारत के &लए बनी पानी क! टं क! के नीचे अपेZाकत
ृ ठं डक रहती थी.
वहां एकांत भी था. वह टं क! के &लए बने #तंभ का सहारा लेकर बैठ गया. कलम हाथ मO
थाम लJ. अयास के &लए पहले पराने
ु कागजM पर सहJ-सहJ अZर बनाने का "यास Xकया.
दो-चार श@द &लखे. श@दM को वाbय मO ढालने का अयास Xकया. इस को&शश मO पराने
ु सभी
कागज समाHत हो गए.

कछ
ु और कागजM क! खोज मO वह दबारा
ु सड़क क! ओर दौड़ पड़ा. Xफर उठाए गए कागजM पर
दे र तक कलम साधने का अयास करता रहा. इस बीच सरज
ू &सर पर तना, गमा4या और
Xफर ठं डा होने लगा.

‘यह कागज अपने सदपयोग


ु क! "तीZा मO है .' साफ कागज को टकटक! बांधकर दे खते समय
टोपीलाल के मन मO कˆधा. लेXकन सदपयोग
ु कैसे हो, इस बारे मO वह कोई %नण4य न कर
सका. दे र तक वह उसी #थान पर बैठा रहा. दो#त उसको &लवाने आए तो उसने उनक! ओर
कोई {यान न pदया. वे सभी खेल मO डब
ू गए.


सहसा एक Dवचार उसके pदमाग मO कˆधा. Xक5चत असमंजस के बीच उसने कागज सामने
फैलाया. मि#तTक को एकाs Xकया. टटे
ू -फटे
ू अZरM के साथ कलम अपने आप आगे बढ़ने
लगी-

‘(ीमान जी!

मेरा नाम टोपीलाल है . मेरे Dपता राज&म[ी हa. वे बड़ी-बड़ी इमारतO बनाते हa. जब तक इमारत
का काम परा
ू होता है , हम आमतौर पर उसमO रहते हa. इमारत तैयार होने के बाद, उसको
मा&लक के हवाले कर हम नए pठकाने क! ओर बढ़ जाते हa. एक और इमारत बनाने के &लए.

मां कभी-कभी मझे


ु एक गरJब बंजारे क! कहानी सनाया
ु करती है . उसके पास कछ
ु भेड़O थीं.
वह बहत
ु हJ ईमानदार था. और मेहनती भी. Xफर भी अपने पUरवार का पेट बड़ी मि2
ु कल से
भर पाता था. वह खेती करना चाहता था. उसका यह सपना कभी फला नहJं.

bयMXक उसको शाप लगा था, कहJं न pटकने का. कछ


ु ऐसी हJ िजंदगी हमारJ भी है .
Dपता जी कहते हa Xक हमारा एक गांव भी है . पर मaने उ-हO कभी गांव जाते नहJं दे खा. बताते
हa Xक वहां एक महाजन के पास हमारJ जमीन 5गरवी पड़ी है . हर साल वह कछ
ु न कछ
ु ;पये
गांव &भजवाते रहते हa, Xफर भी कज4 है Xक पीछा हJ नहJं छोड़ता. मa Dपता जी और मां को
जमीन के बारे मO बातचीत करते हए
ु सनता
ु हंू . जमीन न छड़ा
ु पाने के कारण Dपता जी बहत

दःखी
ु रहते हa.

मेरJ मां भी राज&म[ी है . दे श क! शायद सबसे पहलJ मpहला राज&म[ी. Dपता मानते हa Xक
उनके टोले मO कोई भी काम के मामले मO मां क! बराबरJ नहJं कर सकता. जब भी अ`छे
काम क! जzरत हो, उसके &लए या तो उ-हO खद
ु आगे आना पड़ता है , या Xफर मां को. Dपता
जी मां क! झठ_
ू तारJफ नहJं करते. वह है हJ ऐसी. बि9क इससे भी कहJं yयादा.

%छः %छः! मेरा लेख Xकतना गंदा है . मa इसको सधारना


ु चाहता हंू . पर मेरे पास न कागज हa,
न कलम. यह कागज तो◌े बस भर हJ चका ु . कलम कल इसके मा&लक को सˆप दJ जाएगी.
परसM बापू कह रहे थे Xक वे मझे
ु पढ़ाना चाहते हa. मa उनक! मजबरJ
ू जानता हंू . िजस इमारत
को वे बनाने मO जटे
ु हa, वह दो साल मO परJ
ू होगी. मझे
ु उस pदन का इंतजार है , इस&लए Xक मa
पढ़ना चाहता हंू .

टोपीलाल

इन श@दM को जोड़ने मे◌े◌ं टोपीलाल को करJब एक घंटा लग गया. एक-दो जगह काट-छांट
भी करनी पड़ी. पर अंत मO उसने अपने DवचारM को कागज पर उतार हJ pदया. तhप2चात
उसने कागज को सहे जकर रख &लया. उस कागज का bया हो, वह सोच हJ नहJं पाया. कछ

दे र बाद वह वहां से उठा और घर क! ओर चल pदया. रा#ते मO उसको यह एहसास बना रहा
Xक वह हवा मO तैर रहा है . मन-मयरू नाचता हJ रहा.

रात को सोने चला तो भी बहत


ु "स-न था. मां ने कारण जानना चाहा तो वह म#
ु कु रा pदया.
कागज उसने मोड़कर तXकये के नीचे रख &लया. रात को एक बार आंखO खलJं
ु तो उसको हाथ
से सहलाया. मन हआ
ु Xक दJया जलाकर एक बार Xफर अपनी &लखी इबारत पर नजर डाल
ले-

‘मेहनती लोगM को नींद से जगाना पाप होता है'-मां और Dपताजी क! ओर दे खकर उसके
pदमाग मO आया. उसने अपना इरादा बदल pदया.

अगले pदन जैसे हJ मां और बापू काम के &लए रवाना हए


ु , वह डाXकया क! कलम लौटाने के
&लए %नकल पड़ा. साथ मO उसने वह कागज भी सहे ज &लया, िजसपर Dपछले pदन जतन से
कछ
ु अZर उकेरे थे. रा#ते मO उसने ;क-;ककर कई बार उस पu को पढ़ा. सोचा Xक आगे
bया Xकया जाए. पर बेकार. pदमाग कोई %नण4य ले हJ नहJं पा रहा था.
‘अरे ! आज तू Xफर यहां, कल क! तरह bया आज भी मेरJ डाक को 5गरवाएगा?' साइXकल पर
आते डाXकया ने उसको दे खकर दरू हJ से कहा.

‘आपका पेन!' wबना कछ


ु कहे टोपीलाल ने डाXकया का पेन उसक! ओर बढ़ा pदया.

‘अरे वाह! कल मaने इसे काफ! खोजा था. अब याद आया Xक यह यहJं पर छट
ू गया था।' पेन
ं ु यह पेन तो बहत
दे खकर वह बोला। सहसा उसक! आंखM मO Dव#मय-भाव उभरने लगे, ‘Xकत ु
मामलJ
ू है . मि2
ु कल से तीन-चार ;पये का. माना Xक मझे
ु इसके गम
ु होने पर भी अफसोस
हआ
ु था. मगर तझेु इसके &लए यहां आने क! bया जzरत थी!' टोपीलाल चप।
ु bया कहे , कछ

समझ हJ नहJं पाया।

‘रहता कहां है ?' डाXकया ने खशी


ु और संतोष-भरे श@दM मO पछा
ू . टोपीलाल ने चHु पी को सहे जते
हए
ु अपने pठकाने क! ओर इशारा कर pदया.

‘हंू , अ`छ_ बात है . हालांXक आजकल कछ


ु लोग इसे कतई आव2यक नहJं मानते. पर मझे ु अब
भी यहJ लगता है Xक ईमानदार होना बहत ु अ`छ_ बात है . मेरे पास समय होता तो इसपर
और भी बातO करता. तम
ु जैसे ब`चM से बात करने मO तो मझे
ु बहतु हJ मजा आता है . लेXकन
समय हJ नहJं &मलता. काम हJ ऐसा है . "%तpदन कई Xकलो डाक बांटता हंू . Xफर भी हर pदन
ढे र सारJ डाक आ जाती है . इतनी फस4
ु त भी नहJं Xक Xकसी के साथ जी खोलकर बात कर
सकंू. पर कोई बात नहJं, आज नहJं तो कल, कभी न कभी तो इतना समय जzर &मलेगा, जब
हम दोनM अ`छे दो#तM क! तरह बैठकर दे र तक ब%तया सकOगे. अ`छा, अब मa चलता हंू . दे र
हई
ु तो गरा4
ु ते सरज
ू का कोप चांद पर झेलना पड़ेगा. और आज तो ज9दबाजी मO मa अपनी
टोपी भी घर भल
ू आया हंू ।'

डाXकया को मड़ते
ु दे ख टोपीलाल को अचानक कछ
ु सझा
ू -

‘जरा अपना पेन pदखाएंग?े '

‘अब bया है ? मझे


ु पहले हJ काफ! दे र हो चक!
ु है ।' कहते हए
ु डाXकया ने पेन टोपीलाल क! ओर
बढ़ा pदया। पेन लेकर टोपीलाल सड़क Xकनारे घटनMु के बल बैठ गया। Xफर डाXकया से नजरO
बचाते हए
ु उसने जेब से कागज %नकाला और उसपर झक
ु गया।

‘इन 5चpoठयM मO न जाने Xकतने जzरJ संदेश %छपे हM...इस तरह दे र करना तो अपनी œयटJ

के साथ नाइंसाफ! होगी। मa चलता हंू . पेन त‡
ु हारे &लए जzरJ है तो रख लो।' कहते हए

डाXकया ने हaडल संभाला। पैडल मारने हJ जा रहा था Xक टोपीलाल Xफर सामने आ गया-

‘लJिजए!' कहते हए
ु उसने पेन आगे बढ़ाया। उस समय वह बरJ
ु तरह सकचाया
ु हआ
ु था।
डाXकया ने हाथ बढ़ाया। तhZण उसने अपना बायां हाथ आगे कर उसमO %छपाया हआ
ु कागज
डाXकया को थमा pदया। उस समय उसका pदल जोर-जोर से धड़क रहा था। सांसO घटJ
ु जा
रहJ थीं। पल-पल खड़ा रहना भारJ साधना लग रहJ थी।

‘यह bया है ?' डाXकया ने कागज को हाथ मO लेकर उ9टा-पलटा. Xफर कागज के

पीछे &लखे श@दM को पढ़ा. टटे


ू -फटे
ू अZरM मO वहां &लखा था-‘हमारे राT प%त जी...'

‘bया मa इसे (ीमान ् राT प%त महोदय के नाम त‡


ु हारJ ओर से 5चoठ_ समझं.ू ' डाXकया ने
गद4 न ऊपर उठाई. पर टोपीलाल वहां कहां? वह तो कभी का वहां से भाग छटा
ू था. हालांXक
ऐसा कछ
ु नहJं था। परं तु उसको लगा Xक डाXकया उसको आवाज दे कर रोक रहा है । साइXकल
पर बैठकर उसका पीछा कर रहा है । साइXकल के पैडल क! आवाज उसके कानM मO गंज
ू ती
रहJ। काफ! दे र तक वह भागता हJ रहा। पलटकर दे खने क! pह‡मत हJ न पड़ी.

अWान डर का #वाभाDवक उhपे ्ररक है ...बचपन क! सरलता डर को भी रचनाhमक बनाने का


साम•य4 रखती है ।

सोच से बड़ा #वHन मन मO भचाल


ू लाए wबना नहJं रहता।

टोपीलाल को घर पहंु चने के बाद भी चैन न &मला. तरह-तरह के Dवचार pदमाग मO आने लगे.
चौक-नी %नगाह से वह बार-बार इधर-उधर दे खता. जरा-सी आहट पर चˆक पड़ता. pदल जोर-
जोर से धड़कने लगता. अपनी मख4
ू ता पर कभी हं सी आती, कभी तेज ग#
ु सा...राT प%त के नाम
पर 5चoठ_ और वह भी wबना डाक pटकट, बगैर &लफाफे के? प&लस
ु उसको पकड़ने के &लए
आती हJ होगी. कभी लगता Xक प&लस
ु आ हJ पहंु ची है . वह घबराकर %छपने का pठकाना ढंू ढने
लगता.

ऊपर से पu के अंत मO वह राT प%त जी को ‘नम#ते' &लखना भी {यान न रहा. यह तो


सरासर मख4
ू ता है . अपमान है उनका. राT प%त जी का पu पढ़O गे तो bया सोचO गे. Xक Xकतना
बेशऊर लड़का है . बड़M के साथ gयवहार करना भी नहJं आता. माता-Dपता ने उसे कछ
ु &सखाया
Xक नहJं.

गलती मेरJ, पर बदनामी तो मां और बापू क! हJ होगी. मां को Xकतना बरा


ु लगेगा. और बापू,
हो सकता है मंह
ु से कछ
ु न कहO , पर दःख
ु तो उ-हO भी होगा न! लोग दोष भी उ-हJं को दO गे.
बेचारे गरJब, राज&म[ी जो ठहरे . हाथ के Xकतने हनरमं
ु द है, यह कौन जान पाएगा? परJ
ू द%नया

मO उनक! बदनामी होगी, &सफ4 मेरJ वजह से।

Xफर कागज तो उसने यंू हJ &लख मारा था. यह दे खने के &लए Xक उसको &लखना आता भी
या नहJं. जब &लख रहा था तो कहां सोचा था Xक उसे राT प%त जी को &भजवाएगा हJ. ऐसा
वह सोच भी कैसे सकता है । वह तो जेब मO रखा था. डाXकया को दे खकर न जाने bया सझा

Xक पu उसको थमा pदया. सचमच
ु बहत
ु बड़ी मख4
ू ता क! है उसने.

बावजद
ू इसके इस समय उसको इतना घबराना भी नहJं चाpहए. यह समय घबराने का है भी
नहJं। उसको pह‡मत से काम लेना पड़ेगा। यह भी जzरJ नहJं है Xक डाXकया wबना pटकट के
उस पu को उसके pठकाने तक पहंु चा हJ दे . हो सकता है वह उसको

फाड़ हJ डाले. जब बड़े आद&मयM का पu समय पर नहJं पहंु चा पाता तो एक ब`चे के पu के


&लए उसको कहां फस4
ु त होगी.

अगर वह पu राT प%त जी के हाथM तक पहंु च हJ गया तो. bया वे उसको पढ़O गे? आ„खर bयM
नहJं पढ़O गे. उस pदन भाषण मO "धानाचाय4 जी बता रहे थे Xक इस दे श मO सभी बराबर हa.
कोई भी छोटा या बड़ा नहJं है . तब तो राT प%त जी उस पu को जzर पढ़O गे. हो सकता है
उसका जवाब भी दO .

उनका जवाब आया तो अगले पu मO &लखंूगा Xक अपने टोले मO मa अकेला हJ अनपढ़ नहJं हंू .
बाक! ब`चे भी हa. जो पढ़ना चाहते हa. मेरJ मां तो Xफर भी बहत
ु समझदार हa. पर सभी ब`चे
तो मेरे िजतने भाcयशालJ नहJं हa. उ-हO #कूल क! बेहद जzरत है . पu को पढ़ते-पढ़ते जब वे
उसके अंत मO पहंु चOगे. हो सकता है Xक टोपीलाल नाम को पढ़कर उ-हO हं सी भी आ जाए. जैसे
उस pदन जब मa पहलJ बार पाठशाला गया था तो कZा के सारे ब`चे मेरा नाम सनकर ु हं स
पड़े थे. उस pदन मा#टरजी अगर उ-हO डांटते नहJं तो वे हं सते हJ रहते.

Xफर भी राT प%त जी को पu &लखने से पहले मझे


ु मां से जzर पछ
ू लेना था. वह इतना तो
बता हJ दे तीं Xक इतने बड़े आदमी को नम#ते मO bया &लखना चाpहए. चरण#पश4 या हाथ
जोड़कर "णाम. या इससे भी अ5धक कछ
ु हो सकता है ! bया अब बात करके दे खंू मां से! पर
न जाने वह bया सोचने लगे. हो सकता है Xक Dव2वास हJ न करे Xक मa इतने बड़े आदमी को
5चoठ_ &लख सकता हंू . या बरJ
ु संभावनाएं उसको भी डरा दO .

ऊंह 5चoठ_! न &लफाफा, न डाक pटकट, न परा


ू पता, न मजमन।
ू एक मामलJ
ू कोरे कागज पर
&लखे चंद अZरM को भला कौन 5चoठ_ मानेगा. pदमाग खराब है मेरा.

परेू pदन टोपीलाल बेचैन रहा. उ9टे -सीधे Dवचार pदमाग को लगातार मथते रहे . उस रात उसका
न तो भोजन मO मन लगा, न हJ मां क! कहानी मO. सोने क! को&शश क! तो नींद छमं
ू तर हो
गई. जैसे पलकM पर पहरा बैठा pदया हो Xकसी ने. वह दे र तक करवट बदलकर नींद आने का
इंतजार करता रहा. मां ने कारण जानने क! को&शश क!, परं तु उसने टाल pदया. बस डरे हए

बालक क! तरह मां से 5चपक गया.
ऐसी हJ खींचातानी के बीच कब पलकO भारJ हइं
ु र,् कब नींद ने मेहरबानी क!, वह जान हJ नहJं
पाया. उस रात उसे सपने भी आए तो डरावने से. सबहु होने से पहले हJ नींद अचानक टटू
गई. उसके बाद उसने सोने का "यास Xकया तो नींद आंखM को भलावा
ु दे ◌ेती रहJ. छलावा
बनकर छलती रहJ. ज9दJ सबह
ु हो, करवटO बदलते हए
ु दे र तक वह यहJ सोचता रहा.

छोटा हो या बड़ा, जब कोई %नःकलष


ु मन से Xकसी के बारे गहराई से सोचता है तो वह कभी
न कभी अपने लय को छू हJ लेता है . -

उ‡मीद के DवपरJत आने वालJ सबह


ु ताजगी से भरJ थी.

माता-Dपता के काम पर जाने के बाद टोपीलाल ने ज9दJ-ज9दJ काम %नपटाया. Xफर बाहर आ
गया. उसको Dव2वास था Xक %नरालJ उधर से जzर गजरे
ु गी. Xक &सफ4 उसी से वह अपने pदल
क! बात कह सकता है . उसको मालम
ू था Xक %नरालJ अब दे र से आती है . मां क! बीमारJ के
कारण घर का परा
ू काम उसी को %नपटाना पड़ता है .

।।।।।।3

%नरालJ क! मां अब भी अपनी गमटJ


ु पर जाती. मां के काम पर %नकल जाने के बाद ज9दJ-
ज9दJ घर का काम समेटती. Xफर कबाड़ बीनने का थैला लेकर %नकल जाती. दो-ढाई घंटे तक
सड़कM और ग&लयM क! खाक छानती. रा#ते मO हJ कबाड़ को बेचकर घर लौटती. घर पहंु चकर
ज9दJ-ज9दJ च9
ू हा सलगाती
ु . Xफर छोटJ-छोटJ रोpटयां सOकती, उसके बाद घर का बाक! काम
सहे जती है .

तब तक मां के &लए रोटJ पहंु चाने का समय हो जाता. खाना लेकर सड़क पर पहंु चती. रा#ते
मO टोपीलाल उसे &मल जाता था. दोनM साथ-साथ #कूल तक रोpटयां पहंु चाने जाते. लौटते
समय %नरालJ कछ
ु दे र के &लए टोपीलाल के पास ;कती. दोनM बाक! ब`चM के साथ खेलते,
गपशप करते. दोपहर बाद घर %नरालJ वापस लौट आती. घर का काम समेटने. अपने धंधे के
बारे मO %नरालJ ने मां को कछ
ु नहJं बताया था. और तो और टोपीलाल से भी %छपाकर रखा
था. इस डर से Xक कहJं वह मां से कह न दे .

लगभग एक घंटे क! "तीZा के बाद %नरालJ pदखाई पड़ी. तेज कदमM से चलती हईु . टोपीलाल
को दे खकर उसने म#
ु कराने का "यास Xकया. वह आगे बढ़कर उसके रा#ते मO खड़ा हो गया-

‘आज बहत
ु दे र कर दJ?'

‘हां, लकnड़यां कछ
ु गीलJं थीं. खाना बनाने मO yयादा समय लगा.' टोपीलाल को याद आया.
बीती रात बंूदा-बांदJ हई
ु थी. टोले मO लोग ŠटO खड़ी करके उनके ऊपर पॉ&लथीन डाल लेते थे.
वह कम पड़े तो सीमO ट के खालJ थैले और पराने ु कपड़े सर पर छत का काम दे ते. यह
gयव#था बाUरश के समय धोखा दे ने लगती. उस समय लोग %नमा4णाधीन wबि9डंग मO हJ
pठकाना ढंू ढते. जगह कम पड़े तो एक हJ बरामदे मO पचासM भर जाते. गीलJ लकnड़यां जलते
समय धआं
ु करतीं. मद4 तो घमने
ू के बहाने बाहर %नकल जाते थे. पर औरतM और छोटे ब`चM
के &लए वे Zण बहतु हJ कTटमय होते. उस समय कभी-कभी तो परJ ू रात जागकर काटनी
पड़ जाती थी. रात को याने ब`चे रो पड़O तो बाक! परJ
ू रात बाUरश थमने क! उ‡मीद मO
wबतानी पड़ती.

‘मझ
ु से कह pदया होता, मa चार रोpटयां मां से &संकवा लेता.' टोपीलाल ने %नरालJ का दःख

बांटना चाहा.

‘कहती कब? बाUरश तो रात आई थी. तेरJ म‡मी तो सवेरे हJ काम पर %नकल जाती हa.'
कहकर %नरालJ हं सी.

‘हां, मa भी कभी-कभी एकदम मखr


ू जैसी बात कर दे ता हंू .' टोपीलाल ने अपना माथा ठोकते हए

कहा.

‘मa तो रोज हJ सनती


ु हंू .' %नरालJ ने कहा और अपनी बात पर #वयं हJ हं स दJ, ‘अब रा#ता
छोड़. मां भखी
ू होगी.'

टोपीलाल को अपनी भलू का एहसास हआ ु . वह साथ-साथ चलने लगा. उसके मन मO अजीब-


सी हलचल मची थी. 5चoठ_ के बारे मO %नरालJ को बताए या नहJं, वह इसका फैसला कर हJ
नहJं पा रहा था.

उलझन मO %नरालJ भी थी. &मuता मO अ5धक से अ5धक पारद&श4ता जzरJ है , उसने कहJं सना

था. तभी से उसको लग रहा था Xक अपने काम के बारे मO टोपीलाल से %छपाकर वह गलती
कर रहJ है ,

‘एक बात बताऊं...' रा#ता चलते हए


ु %नरालJ ने कहा, ‘मaने काम पर जाना शz
ु कर pदया है .'

‘सभी को कोई न कोई काम तो करना हJ पड़ता है .' टोपीलाल ने कहा. वह अपने हJ सोच मO
डबा
ू हआ
ु था.

‘मां बता रहJ थी Xक उसको आजकल मेरJ शादJ क! बड़ी 5चंता है .' टोपीलाल क! उदासीनता से
आहत %नरालJ ने उसको दसरा
ू झटका दे ने क! को&शश क!.

‘अभी से...!' %नरालJ का यह "यास कारगर &सk हआ


ु . टोपीलाल एकाएक चˆक पड़ा. pदमाग मO
घमू रहJ बाक! बातO हवा हो गŠ.
‘हम लड़XकयM को तो @याह करना हJ पड़ता है . साल दो साल इधर या उधर. मां कह रहJ थी
Xक उसका कोई भरोसा नहJं, Xकसी pदन आंखO मंद
ु गŠ तो...!'

‘तेने कछ
ु नहJं कहा...मना कर दे ती!'

‘bयM कर दे ती मना! मां ठ_क हJ तो कहती है . सवेरे-सवेरे पीठ पर बोरा डालकर %नकलना.
pदन-भर गलJ-मह9
ु ले के आवारा क†M
ु से उलझना, लोगM क! छ_ंटाकशी सहना, भला कौन
लड़क! चाहे गी. शादJ के बाद कम से कम यह तो करना नहJं पड़ेगा.' %नरालJ ने कहा. वह
सबकछ
ु बताया िजसे अभी तक %छपाए थी. टोपीलाल चप
ु . लगा Xक उसका pदमाग घम
ू रहा
हो. आवेश मO कहे -सने
ु का होश हJ नहJं रहा-

ु सब पागल हो...एकदम पागल. इतनी कम उ‘ मO कोई @याह Xकया जाता है . मa &लखंग


‘तम ू ा,
राT प%त जी को &लखंूगा...!'

टोपीलाल क! बात सनकर


ु %नरालJ हं सने लगी.

‘ये राT प%त कौन हa?' हं सी थमने के बाद %नरालJ ने पछा


ू . उसके चेहरे पर मास&मयत
ू थी.
टोपीलाल को लगा Xक अनायास हJ चचा4 उस ओर मड़
ु गई है , िजस ओर वह लाना चाहता था.
िजसके &लए वह बीती रात से परे शान था. इस&लए अपनी है रानी जताते बोला-

‘अरे ! तू इतनी-सी बात भी नहJं जानती...कभी बड़े पाक4 क! तरफ नहJं गई?'

‘अbसर जाती रहती हंू ...वहां ऐसा bया है?'

‘पाक4 मO जो म%त4
ू लगी है , वह राT प%त जी क! हJ है . वे खद
ु राजधानी मO रहते हa. उनके
हजारM नौकर-चाकर, घोड़ा-गाड़ी, मोटर-बंगला हa.'

‘धत! पागल हआ ु है bया! मेरJ मां तो बताती है Xक म%त4


ू यां उ-हJं क! लगाई जाती हa, जो मर
चकु े होते हa.'

ू , मरे हओं
‘झठ ु क! म%त4
ू यां भला कोई bयM लगवाएगा?'

‘उ-हO याद रखने के &लए. महान लोगM के "%त एहसान जताने का द%नया
ु का यह भी एक
तरJका है .' %नरालJ ने ऐसे कहा, मानो &लखा हआ
ु बांच रहJ हो.

‘Xकसने बताया?'

‘मामा ने, वे बापू के साथ रह चक


ु े थे. Dपछले हJ वष4 उनक! मhृ यु हई
ु है .'

‘तब तो वे बहत
ु बड़े आदमी थे.' कहते समय टोपीलाल का {यान Xफर उस पाक4 क! ओर चला
गया.
‘तो पाक4 मO िजनक! म%त4
ू यां लगी हa, वे सभी मर चक
ु े हa.'

‘मां तो यहJ कहती है .'

‘bया, राT प%त जी मर चक
ु े हa?'

टोपीलाल को एक बार Xफर झटका लगा. pदमाग एकदम भ-ना गया. उ9टे -सीधे Dवचार
भरमाने लगे. जैस-े तैसे उसने राT प%त जी को 5चoठ_ &लखी है , bया वह बेकार हJ चलJ
जाएगी. रात-भर उसने जो सपने दे खे वह bया यंू हJ थे. उसको लगा Xक जैसे उसके पैरM क!
ताकत Xकसी ने सोख लJ हो. उसको खड़ा होना भारJ लगने लगा. लगा Xक Xकसी भी समय
धरती पर जा 5गरे गा.

%नरालJ ने उसको कई बार टोका. माफ! मांगी. बार-बार आ2वासन pदया Xक घर जाते हJ मां
से कह दे गी Xक अभी उसक! शादJ क! ज9दJ न करO . जब तक वह नहJं चाहे गा, मां से शादJ
क! हामी भरे गी हJ नहJं. मगर उसके सभी "यास असफल रहे . टोपीलाल क! चHु पी कायम
रहJ. उसक! उदासी सलामत रहJ.

रोटJ पहंु चाने के बाद वापसी मO भी टोपीलाल का मौन उसके साथ रहा. %नरालJ समझ हJ नहJं
पाई Xक उसको कैसे मनाए. bया करे Xक उसका मौन टटे ू . और जब वह थक गई तो उसने
भी चHु पी साध लJ. pठकाना करJब आते हJ टोपीलाल ने मंुह खोला-

‘मa चलता हंू . अगर तेरJ मां तेरे @याह क! ज9दJ कर रहJ है , तो इसी मO तेरJ भलाई है . इन
बड़े आद&मयM का कोई भरोसा नहJं, कभी भी चल बसते हa. इनसे कोई उ‡मीद रखनी हJ बेकार
है .'

इसके बाद वह wबना कछ


ु कहे , %नरालJ से अलग हो गया. उसका उhसाह मर चका
ु था.

आने वालJ रात टोपीलाल के जीवन क! शायद सबसे उदास रात थी. उसका अपना pदमाग
कोई भी फैसला करने मO असमथ4 था. माथा घम
ू रहा था. झंझावातM के बीच यpद उ‡मीद बची
रहे तो संकट ज9दJ टलता है , आने वाला समय अनकल
ु ू हो जाता है .

अगला pदन आया. उदास-उदास. Xफर कछ


ु और pदन बीते. टोपीलाल के मन मO कोई उ9लास
न था. उस pदन हमेशा क! तरह मां घर के काम मO जट
ु गई थी. रोटJ बनाकर जैसे हJ मां
और बापू काम पर जाने को तैयार हए
ु , टोपीलाल उनके पास पहंु च गया-

‘बाप,ू तम
ु मझे
ु काम pदलवाना चाहते थे?'

‘bयM? ऐसी bया ज9दJ है ?' Dपता को आ2चय4 हआ


ु , ‘कहJं मां ने डांट तो नहJं pदया. पर वह तो
कभी ऐसा नहJं करती.'
‘सभी ब`चे काम करते हa, मझे
ु भी काम करना चाpहए...' कहते समय टोपीलाल के मन मO
%नरालJ क! छDव कˆध रहJ थी. कंधे पर थैला लटकाए, ग&लयM से कबाड़ चनती
ु , क†M
ु और
शैतान ब`चM से खद
ु को बचाती हई
ु .

‘और तेरJ पढ़ाई...तू तो पढ़ना चाहता है न!'

टोपीलाल ने कोई जवाब नहJं pदया. गद4 न झकाए


ु पांव से जमीन करे
ु दता रहा. तब तक मां
रोpटयां बांध चक!
ु थी. वह बाहर आई तो टोपीलाल एक तरफ हो गया.

‘काम के &लए तो परJ


ू िजंदगी पड़ी है, अभी तो तेरे खेलने-खाने के pदन हa.' टोपीलाल न जाने
Xकस सोच मO था. अपने #थान पर अटल. तब उसके Dपता ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,
‘5चंता मत कर. मaने मा&लक को मजदरू और कारJगर बढ़ाने के &लए राजी कर &लया है .
भगवान ने चाहा तो यहां का काम सात-आठ महJने मO परा
ू हो जाएगा. उसके बाद हम ऐसी
जगह काम करO गे, जहां तेरJ पढ़ाई चल सके.'

इस तरह का आ2वासन बापू कई बार पीछे भी दे चक


ु े थे. इतनी बार Xक टोपीलाल को उनक!
बातM पर अDव2वास होने लगा था. Xफर भी बापू का यह आ2वासन उसको भला लगता. इससे
एक उ‡मीद बंधती थी. परं तु उस समय बापू का आ2वासन उसक! खास मदद नहJं कर सका.

वह बो„झल कदमM से धीरे -धीरे बाहर आया और wबि9डंग के उस छोर क! ओर बढ़ गया, जहां
बाक! ब`चे उसके आगमन क! "तीZा कर रहे थे. वहां पहंु चकर उसने लडो
ू का खेल %नकाला
और साथी ब`चM के साथ "क%त
ृ के उस खेल को नए &सरे से समझने क! को&शश करने
लगा. उसने खेल मO खद
ु को लगाए रखने का "यास Xकया, लेXकन मन न लगा. अंततः वह
उठा और एक साफ #थान दे खकर जमीन पर लेट गया.

साथी ब`चM को उसका gयवहार अजीब-सा लगा. वे खेल छोड़कर टोपीलाल के पास जमा होने
लगे.

‘टोपी भइया आपक! तwबयत तो ठ_क है .' एक लड़के ने पास आकर पछा
ू .

‘मेरा भइया जब लेतता है तो मां कहती है Xक उसको बखार


ु है , तोपी भइया को भी बखार
ु है .'
एक और ब`चे ने कहा. पल-भर मO ब`चM के बीच बात फैल गई. उसी समय एक मासम
ू -सी
लड़क! आगे आई. उसके हाथ मO लाल &मच¥ थीं. बाक! ब`चM को पीछे ठे लने का "यास करती
हई
ु , वह 5च9लाई-

‘हटो-हटो, मेरे पास लाल &मच4 हa, मेरJ मां बखार


ु होने पर घर मO लाल &मच4 का धआं
ु करती है .
उपला लाओ, आग जलाओ...लाल &मच4 का धआं
ु संूघते हJ बखार
ु फौरन छू -मंतर हो जाएगा.'
ब`ची क! मास&मयत
ू दे ख टोपीलाल हं स pदया. कछ
ु दे र के &लए उसका सारा तनाव गायब हो
गया. वह ब`चM के Hयार और उनक! बातM मO खो गया. इस बीच वह लड़क! आगे आकर
टोपीलाल पर झक
ु गई-

‘चलो हटो, मझे


ु कछ
ु नहJं हु आ है .'

‘पर अभी-अभी तो त‡
ु हO बखार
ु था.' एक ब`चा बोला.

‘नहJं, मa अब wबलकल
ु ठ_क हंू .' टोपीलाल ने बैठने का "यास Xकया.

‘दे खा, &मच4 का नाम सनते


ु हJ बखार
ु दम
ु दबाकर भाग गया.' हाथ मO &मच4 थामे उस लड़क! ने
कहा.

‘मa इन ढकोसलM पर Dव2वास नहJं करता. मां कहती है Xक टोने-टोटके बकवास होते हa.'

‘ठ_क होने के बाद सब यहJ कहते हa.' लड़क! बोलJ. अ&भमान झलकाते हए
ु . सभी ब`चे हं सने
लगे. उसके बाद टोपीलाल ने लाख भरोसा pदलाने क! को&शश क! Xक उसे बखार
ु वगैरह कछ ु
भी नहJं था. मगर एक ने भी उसक! बात पर भरोसा नहJं Xकया. सभी ब`चे मानते रहे Xक
बखार
ु लाल &मच4 दे खकर भागा है .

‘दJदJ, लाल &मच4 से बखार


ु bयM भाग जाता है ?' एक ब`चे ने आगे आकर पछा
ू . लड़क! इस बारे
मO अनजान थी. वह बगलO झांकने लगे या कोई बहाना बनाए, उससे पहले हJ एक लड़का पीछे
से 5च9लाया-

‘लाल &मच4 खाकर बखार


ु का मंह
ु जल जाता है , उसको पानी तो कोई Dपलाता नहJं, इस&लए
बेचारा नदJ क! ओर दौड़ लगा जाता है, bयM टोपीलाल भइया?'

‘यह तो wब-ना क! मां हJ बता पाएगी.' कहकर टोपीलाल ने उस लड़क! क! ओर इशारा Xकया,
जो &मच4 लेकर आई थी. वह शरमाकर पीछे हट गई.

‘अब तो आप ठ_क हa, च&लए हमारे साथ खे&लए.' कछ


ु ब`चे घेरा तोड़कर आगे आए. %नरालJ से
&मलने का समय हो चका
ु था. मगर टोपीलाल का जी कहJं जाने का न हआ
ु . इस&लए वह
ब`चM के साथ बैठ गया. pदन आpह#ता-आpह#ता बीत रहा था.

तभी बाहर खटका हआु . टोपीलाल का {यान उस ओर चला गया. सामने %नरालJ थी.
टोपीलाल खेल छोड़कर खड़ा हो गया.

‘कब आई त?ू ' टोपीलाल ने सवाल दागा. #वर मO &शकायत भरJ थी. वह जवाब क! "तीZा कर
हJ रहा था Xक %नरालJ ने उसको चˆका pदया-

‘मaने कबाड़ बीनना छोड़ pदया है .'


‘कब से?'

‘आज हJ से. मaने मां को अभी मेरJ शादJ न करने को भी मना &लया है .'

‘तो अब bया करे गी?'

‘तू बता, bया करना चाpहए मझे


ु ?' %नरालJ ने उ9टा "2न दाग pदया. टोपीलाल उसके &लए
तैयार हJ नहJं था. वह बगलO झांकने लगा-

‘मa bया बताऊं? जाकर अपनी मां से पछ


ू .'

‘मां से पछं
ू ू तो bया वह काम करने दे गी. कहे गी Xक अगर इतनी हJ बड़ी बनती है तो @याह
कर ले.'

‘तो कर ले @याह, मेरा pदमाग bयM चाटती है !' टोपीलाल ग#


ु साया. परं तु अगले हJ पल उसको
लगा Xक उससे yयादती हईु है . इतने सारे ब`चM के सामने %नरालJ के साथ उसका ऐसा
gयवहार ठ_क नहJं. मन हJ मन पछताता हआ ु वह आगे बढ़ गया. %नरालJ पीछे -पीछे चलती
गई.

‘तेरJ मां को बढ़ापे


ु मO अकेले काम करते दे ख मझे
ु अ`छा नहJं लगता. तेरJ जगह अगर कोई
लड़का होता तो उ-हO आराम &मलता...' कहकर वह सोचने लगा.

‘तू तो मझसे
ु भी बड़ा है , bया तू अपनी मां को आराम पहंु चाता है. बि9क तू तो घर का उतना
काम भी नहJं करता, िजतना Xक मa कर लेती हंू .' %नरालJ के जी मO आया Xक टोपीलाल को
ं ु वह उसको नाराज नहJं करना चाहती थी. इस&लए चHु पी साधे रहJ.
खरा-खरा जवाब दे . Xकत
कछ
ु दे र प2चात टोपीलाल ने हJ पछा
ू -

ू कभी यह नहJं बताया Xक रहती कहां है?'


‘तने

‘क9लार ब#ती मO, Xकराये क! झcु गी है . पर तू यह सब जानकर bया करे गा?'

‘क9लार ब#ती से तो #कूल बहत


ु दरू है , तेरJ मां को पैदल आने-जाने मO घंटM लग जाते हMगे?'

‘bया करO , जाना तो पड़ेगा हJ.'

‘अगर तू चाहे तो अपनी मां को लेकर यहां रह सकती है . pदन मO मजदरM


ू और कारJगरM को
Hयास लगती है . एक जगह पानी भी लेकर बैठ जाएंगी तो मजदरM
ू क! Hयास बझे
ु गी, बदले मO
मजदरू जो दO गे उससे तम
ु दोनM का काम चल जाएगा. मजदरू लोगM क! अपनी भी छोटJ-छोटJ
जzरतO होती हa, पानी न Dपलाना चाहO तो उनके pहसाब क! छोटJ-मोटJ चीजO भी रख सकती हa.
कम से कम Xकराया बचेगा और आने-जाने क! परे शानी से भी मिb
ु त &मल जाएगी.' टोपीलाल
को लगा Xक उसने बहत
ु बड़ी सलाह दJ है . ग;ता
ु का एहसास उसको दे र तक उ9ला&सत
करता रहा.

ु हारे टोले के लोग इसके &लए राजी हMगे?' %नरालJ ने शंका "कट क!.
‘त‡

‘वे मेरे बापू और मां का कहना नहJं टाल सकते. Xफर तम


ु दोनM के आने पर तो उनको आराम
हJ &मलेगा. िजन चीजM के &लए उ-हO दरू जाना पड़ता है, वे उ-हJं दामM मO wबलकल
ु करJब
&मल जाया करO गी.'

‘मa मां से बात कzंगी? वह मान गई तो...' %नरालJ ने आ2वासन pदया.

‘अगर मना करO तो कल हJ मझे


ु बताना. मa उ-हO जबरद#ती &लवा लाऊंगा.'

‘तू कौन होता है , मेरJ मां के साथ जबरद#ती करने वाला...' %नरालJ ने बनावटJ ग#
ु से के साथ
कहा. टोपीलाल ऐसी "%तXqया के &लए तैयार न था. उसको तhकाल कोई जवाब न सझा
ू . कछ

दे र तक %नरालJ उसके मंह
ु क! ओर दे खती रहJ। Xफर सहसा हं स पड़ी-

‘अरे ! तू तो सचमच
ु बरा
ु मान गया, मa तो बस मजाक कर रहJ थी. अ`छा कल &मलO गे.'
कहकर वह उ9टे पांव भाग गई. उसक! चाल मO उमंग थी. पैरM मO तेजी. लंबे बाल हवा मO
लहरा रहे थे। इतने pदनM बाद पहलJ बार टोपीलाल उसको „खला-„खला दे ख रहा था.

जीवन मO वहJ pदन यादगार बनता है, जब कोई नया और भला काम होता है .

अ`छा सोच बेहतर पUरणाम भी लाता है .

चौथे pदन %नरालJ अपनी मां के साथ टोले का pह#सा बन गŠ. टोपीलाल खश
ु था. उसको
अपनी उपलि@ध पर गव4 था. %नरालJ क! मां ने गमटJ
ु लगाना जारJ रखा. पहले वे #कूल के
ब`चM क! जzरत का सामान रखती थीं, अब मजदरM
ू के काम आने वाले चीजO बेचने लगीं.
टोपीलाल के मजदरM
ू को पानी Dपलाने के सझाव
ु पर उ-हMने {यान तो pदया, मगर अपनी
तरह से. एक मां क! तरह टोपीलाल को समझाया भी था-

‘भगवान ने धरती का तीन-चौथाई pह#सा पानी से भरा है । ऐसे मO Hयासे से पानी क! क!मत
वसलना
ू या वैसी उ‡मीद रखना भयंकर पाप, ई-वर को नाराज करना है .'

यह सोचकर Xक टोपीलाल ने सीख गांठ बांध लJ है , %नरालJ क! मां ने आगे कहा-‘िजंदगी मO


पž
ु य कमाने का अवसर तो कभी &मला नहJं, अब पानी से पैसे कमाने का पाप तो मa हर5गज
अपने &सर नहJं लंूगी. पर तेरJ बात भी टालंग
ू ी नहJं.'

उसने उसी pदन दो नए घडे मंगवा &लए. उन घड़M मO ताजा पानी रखकर अपनी गमटJ
ु के
सहारे रखने लगी. बगैर Xकसी लाभ-कामना के. न चाहते हए
ु इसका उसे gयावसा%यक लाभ
भी हआ
ु . pदन मO Hयासे मजदरू पानी के बहाने उसके पास आते. उस समय सामने दकान
ु के
zप मO फैलJ चीजM को दे खकर उनका मन मचल उठता. इससे उसक! कमाई बढ़ने लगी. अपने
खेल के बीच से फस4
ु त %नकालकर टोपीलाल %नरालJ क!

मां के पास बैठ जाता. दोनM दे र तक बातO करते.

वह [ी पहले हJ कम दयालु न थी. वहां आने के बाद उसक! भलमनसाहत और दयालता



बढ़ती हJ जा रहJ थी. मजदरM
ू के ब`चM से उतना हJ Hयार करती िजतना Xक %नरालJ से.
उनके &लए टॉXफयां, wब#कुट, नान-खटाई वगैरह बांटती हJ रहती.

उसके आने से काम पर जाने वालJ मजदरू औरतM को भी सहारा &मला था. उनके ब`चM को
जब भी कोई सम#या होती तो वे उसी के पास ले आतीं. उसके लंबे अनभव
ु का लाभ उठाने.
बीमार होते तो वह रोग का उपचार बताती. भखे
ू होते तो „खला-Dपलाकर चप
ु करने का "यास
करती. कभी-कभी तो अपनी दकानदारJ
ु का खयाल छोड़कर भी वह उनके ब`चM क! दे खभाल
करती.

wबि9डंग क! चार मंिजलO तैयार हो चक!


ु थीं. तीन मंिजलM का %नमा4ण अभी बाक! था.
टोपीलाल और उसके दो#तM क! चौकड़ी अब तीसरJ मंिजल क! छत पर जमती. चारM तरफ से
खलJ
ु होने के कारण वहां ठं डी हवा बहती. वातावरण ठं डा-सहावना
ु रहता. वहां खड़ा होने पर
शहर का नजारा दरू-दरू तक एकदम साफ नजर आता था.

उस pदन टोपीलाल ब`चM के साथ खेल मO मcन था. तभी नीचे दो आदमी pदखाई पडे. उनमO
से एक खाक! वद¦ मO था. दसरा
ू सफेद कता4
ु -धोती पहने. धप
ू से बचने के &लए उसने एक
सफेद टोपी अपने &सर पर रखी हई
ु थी. खाक! वद¦ वाला आदमी टोपीलाल को पहचाना-सा
लगा. दोनM को नीचे पछताछ
ू करते दे ख टोपीलाल घबराया. उसका pदल जोर से धड़कने लगा.

अगले हJ Zण दोनM को ऊपर आते दे खा. न जाने bयM उन अजनwबयM को दे खकर टोपीलाल
क! %घcगी बंध गई. मन मO डरावने खयाल आने लगे. अजीब-अजीब बातO मन को डराने लगीं.
उ-हJं से घबराया हआ
ु वह खद
ु को %छपाने का "यास करने लगा. पचास-साठ मजदरू, कामगारM
के रहते खदु को %छपाना आसान नहJं था. Xफर भी बदहवास टोपीलाल अपने &लए pठकाने क!
खोज करने लगा. उसी समय एक लड़का तेजी से ऊपर आया-

‘टोपीलाल..टोपीलाल...!'

‘bयM 5च9ला रहा है ?'

‘वे लोग तझे


ु नीचे बला
ु रहे हa.'

‘वे कौन?'
ु bया मालम
‘मझे ू ?'

‘Xकस&लए आए हa?'

‘नहJं पछा
ू !'

‘घनचbकर, कम से कम नाम और पता तो पछा


ू हJ होगा?'

ु नहJं मालम
‘मझे ू . बता रहे हa Xक राजधानी से आए हa.'

‘यह राजधानी bया होती है ?' Xकसी ब`चे ने पछा ं ु राजधानी का िजq %छड़ते हJ टोपीलाल
ू . Xकत
को झटका लगा. राT प%त जी के नाम &लखा हआ
ु पu अचानक याद आ गया. याद आया Xक
उसमO वह नम#कार &लखना तो भल ू हJ गया था. ऊपर से पu wबना डाक pटकट लगाए
डाXकया को भी सˆप pदया था. यह आदमी राT प%त जी के यहां से हJ आया होगा. प&लस
ु भी
साथ होगी. पहचान के &लए डाXकया साथ है . पर %नरालJ तो बता रहJ थी Xक राT प%त जी
मर चक
ु े हa. 5चoठ_ तो उ-हO &मलJ हJ नहJं होगी...Xफर प&लस
ु के आने का कारण?

टोपीलाल के pदमाग मO DवचारM का अंधड़ था. डर था और सघन आतंक भी. उसको कछ


ु सझ

हJ नहJं रहा था. वे लोग सीधे ऊपर हJ आ रहे थे. इसी&लए खद
ु को बचाने का कोई अवसर
भी नहJं था. टोपीलाल के pदल क! धड़कनO बढ़ गŠ. लड़खड़ाते कदमM से वह आने वाले ZणM
क! "तीZा करने लगा.

‘अ`छा होता Xक मa मां से Xकसी तरह भगवान को मनाने का तरJका सीख लेता. इस समय
वह काम आता.' भयभीत टोपीलाल के मन मO कˆधा. तभी सफेद कपड़M वाले आदमी को साथ
&लए डाXकया छत पर पहंु च गया.

‘वो रहा टोपीलाल!' उनके साथ आ रहे लड़के ने इशारा करके बताया. टोपीलाल क! सांस थमने
लगी. भय से दे ह थरथरा उठ_. अब %छपने का भी लाभ न था।

‘साहब, यहJ वह लड़का है , िजसने मेरा मामलJ


ू पेन भी अगले pदन लौटा pदया था. मझे
ु तो
आज हJ पता चला Xक उस पेन को लौटाने के &लए यह यहां से मीलM दरू पैदल चलकर गया
था. इतना ईमानदार और भला लड़का मaने आज तक नहJं दे खा.' डाXकया क! आवाज टोपीलाल
के कानM मO पड़ी. दरू होने के कारण वह उसके श@दM को समझने मO नाकाम रहा. परं तु उसके
चेहरे और हाव-भाव दे ख उसक! बेचैनी घटने लगी. हालांXक pदल मO धकधक!
ु ु अब भी मची हई

थी.

ु राT प%त जी ने भेजा है .' वह आदमी आगे बढ़ता हआ


‘मझे ु बोला. उसके चेहरे पर म#
ु कान थी,
‘उ-हO त‡
ु हJं ने पu &लखा था, न!'
‘जी..वो तो बस यंू हJ. मa भल
ू गया था Xक मेरJ जेब खालJ है . पर आप 5चंता मत क!िजए, मां
से कहकर मa डाक pटकट के पैसे pदलवा दं ग
ू ा.' टोपीलाल ने Xकसी तरह कहा.

‘अरे हां, याद आया, त‡


ु हारा वह पu बैरंग था...' डाXकया के साथ आया आदमी लगातार म#
ु करा
रहा था.

‘पu मO मa नम#ते भी नहJं &लख पाया था. वह मेरा पहला खत था. मेरJ मख4
ू ता थी Xक wबना
यह जाने Xक पu कैसे &लखा जाता है , मaने राT प%त जी को पu &लखा. पर पहलJ बार इतनी
चक
ू तो माफ होनी चाpहए...'

ू कैसी! राT प%त जी तो तमसे


‘चक ु बहत
ु "स-न हa. वे ब`चM से बेहद Hयार करते हa. उ-हMने
हJ मझे
ु त‡ु हारे पास भेजा है .'

‘मेरे पास bयM?' टोपीलाल के मंह


ु से सहसा %नकला. उस आदमी क! बातM मO अजीब-सी क&शश
थी. टोपीलाल ने महसस
ू Xकया Xक वह उसक! ओर „खंचता जा रहा है . लेXकन मन मO समाया
हआ
ु डर अब भी उसके सहज होने मO बाधक बना था.

‘लोग तो कहते हa Xक राT प%त जी मर चक


ु े हa.'

‘%छः! वे हमारे महान राT प%त जी हa. हमारे दे श के गौरव, मान-अ&भमान सबकछ


ु .उनके &लए
ऐसे कवचन
ु नहJं बोलते...'

‘Xफर वे म%त4
ू यां जो पाक4 मO लगी हa, %नरालJ क! मां कहती हa Xक िजनक! वे म%त4
ू यां हa, वे सभी
मर चक
ु े हa.'

ु बहत
‘तम ु भोले हो. साथ मO गलतफहमी का &शकार भी. राT  क! तरह राT प%त भी अमर
होते हa.'

‘Xफर वे म%त4
ू यां?' टोपीलाल का कौतहल
ू जागा.

‘जो म%त4
ू यां तमने
ु दे खीं वे उन महान gयिbतयM क! हMगी, िजनक! इस द%नया
ु मO अब &सफ4
याद हJ बाक! है . मझे
ु त‡
ु हारे पास राT प%त महोदय ने हJ भेजा है . अब कछ
ु pदन मa त‡
ु हारे
साथ हJ रहंू गा.'

‘हमारे साथ, कहां?'

‘यहJं इस इमारत मO, जहां त‡


ु हारे टोले के दसरे
ू लोग रहते हa.'

‘पर मेरJ मां तो काम पर जाती है . घर आते-आते बरJ


ु तरह थक जाती है . आपके &लए खाना
कौन पकाएगा?' टोपीलाल ने पछा
ू . वह जानता था Xक pदन-भर 5चनाई करने वालJ मां घर
आते-आते बरJ
ु तरह टट
ू जाती है . ऊपर से घर का काम भी उसको दे खना पड़ता है . Xकसी
अजनबी के कारण वह मां पर बोझ नहJं बढ़ाना चाहता था.

‘हम ढे र सारJ बातO करO गे. Xफलहाल तो मa कछ


ु फल त‡ ु हारे और इन ब`चM के &लए लाया हंू .
लो अपने हाथM से तम ु इन ब`चM को बांट दो.' कहते हए
ु आदमी ने अपनी पोटलJ खोलJ.
उसमO केले, आम, नींबू आpद तरह-तरह के फल थे. उनमO से कछ
ु फल %नकालकर उसने
टोपीलाल क! ओर बढ़ाए. मगर टोपीलाल अपने #थान पर अडोल खड़ा रहा.

‘घबराओ मत, मa यहां Xकसी पर बोझ बनने नहJं आया हंू . अपना खाना मa खद ु बनाऊंगा. मa
अपना बाक! काम भी खद ु हJ कzंगा. बापू के साथ रहकर मaने यहJ सीखा है Xक आदमी को
अपना काम #वयं हJ करना चाpहए.'

टोपीलाल बापू का नाम पहले भी सनु चका


ु था. एक बार शहर से गजरते
ु हए
ु एक म%त4 ू क!
ओर संकेत करके मां ने बताया भी था Xक यह बापू क! है . इससे अ5धक बापू के बारे उसको
कोई जानकारJ न थी. िजस pदन मां ने म%त4
ू pदखाई थी, उस pदन वह जzर मां से उनके बारे
मO पछना
ू चाहता था. पर Xकसी तरह बात टल गई. उसके बाद उसको भी याद नहJं रहा.

उस आदमी के जोर दे ने पर टोपीलाल ने केले ले &लए. उसके हाथ मO केले आते

हJ ब`चे उनपर टट
ू पड़े. डाXकया जाने लगा तो टोपीलाल ने दौड़कर दो केले उसके हाथM मO
भी थमा pदए. इसपर डाXकया ने उसक! ओर Hयार से दे खा-‘मझे
ु मालम
ू था Xक तू यहJ करे गा.
अ`छे ब`चे हमेशा ख&शयां
ु लटाते
ु हa.'

उसी समय टोपीलाल क! %नगाह %नरालJ पर पड़ी जो दरू खड़ी उसको दे ख रहJ थी. ब`चM को
केले दे ने के बाद वह %नरालJ के पास पहंु चा-

‘मa तो दो केले लंग


ू ी?'

‘सभी ब`चM को एक-एक &मला है , त‡


ु हO दो bयM दं ?ू ' टोपीलाल ने बरजा.


‘तमने डाXकया बाबू को भी तो दो केले pदए हa?'

‘वे बड़े हa. Xफर वे उन केलM को खद


ु तो खाएंगे नहJं, अपने ब`चM को ले जाकर दO गे. अगर मa
एक केला दे ता और ब`चे दो हM तो उनक! मि2
ु कल हो जाती न!'

ु एक केला अपनी मां के &लए चाpहए.'


‘मझे

‘केले &सफ4 ब`चM के &लए हa...'


ु हO मां के &लए केले bयM चाpहए बेटा?' उनक! बात सन
‘त‡ ु रहा आदमी %नरालJ के पास जाकर
बोला. %नरालJ चHु पी साधे रहJ.

‘शरमा मत बेटJ! मेरा नाम ब~J नारायण है . पर ब`चे मझे


ु ब~J काका हJ कहते आए हa. तम

भी वहJ कह सकती हो◌े.' ब~J काका ने कहा. उनके #वर मO Hयार उमड़ता हआ
ु दे ख %नरालJ
Dपघल गई. आंखM मO नमी उतरने लगी.

‘मां ने आज सबह
ु से कछ
ु भी नहJं खाया. रात से हJ उनको बखार
ु है .' %नरालJ ने बताया.

‘अरे ! तो पहले bयM नहJं बताया. बखार


ु मO केले के बजाय सेव ठ_क रहता है . जो मेरे पास हa.
लो ये दोनM सेव त‡
ु हJं रख लो.' कहते हए
ु ब~J काका ने थैले से सेव %नकालकर %नरालJ के
हाथM मO थमा pदए.

ु रहती कहां हो?'


‘तम

‘वहां, नीचे जमीन पर!' ब~J काका के पछने


ू पर %नरालJ ने इशारा Xकया.

‘तो चलो, सबसे पहले त‡


ु हारJ मां से हJ पहचान कर लJ जाए.' ब~J काका ने अपना झोला उठा
&लया. वे नीचे क! ओर चले तो ब`चM का दल भी उनके साथ हो &लया. %नरालJ क! मां के
पास पहंु चकर ब~J काका ने उनक! कलाई पकड़कर बखार ु क! जांच क!. Xफर थैले से
%नकालकर कछ ु गो&लयां %नरालJ को थमा दJं, बोले-

‘इनमO से दो गो&लयां अभी „खला दो. दो घंटे के बाद दो गो&लयां और दे दे ना. शाम तक
बखार
ु उतर जाएगा.' कहकर ब~J काका ने अपना झोला उठा &लया-

‘अब मa नहाकर कछ
ु दे र आराम कzंगा. हम लोग शाम को &मलO गे. तब तक त‡
ु हारा जो भी
मन करे कर सकते हो. अरे हां, कोई ब`चा मझे
ु बताएगा Xक यहां लोग नहाते कहां हa?'

ब~J काका के पछने


ू पर कई लड़के आगे आए. टोपीलाल जान-बझकर
ू पीछे खड़ा रहा. ब~J
काका के %नकल जाने के बाद वह %नरालJ के करJब पहंु चा, बोला-‘अ‡मा को ये गो&लयां खाने
मत दे ना.'

‘bयM?' %नरालJ असमंजस मO थी.

‘मां, कहती है Xक अजनबी से कभी कोई चीज नहJं लेनी चाpहए. bया पता यह आदमी कौन
है ? कहां से आया है ?' टोपीलाल फसफसाया
ु ु . उस समय उसके pदमाग मO ढे र सारJ कशं
ु काएं कˆध
रहJ थीं.

‘उ-हMने बताया तो Xक राT प%त महोदय ने हJ यहां भेजा है .' %नरालJ ने कहा.


‘राT प%त जी यहां bयM भेजOगे? हो सकता है , यह उनका कोई जासस
ू हो.'

‘तो हमO bया करना चाpहए?'

‘मां इस समय एकदम सहJ सलाह दे ती. लेXकन अवसर ऐसा है Xक मa उससे बात भी नहJं
कर सकता.'

‘Xफर?'

Xफर का उ†र टोपीलाल के पास भी नहJं था. वह परे शान था. इस&लए भी Xक वह #वयं कोई
%नण4य नहJं कर पा रहा था. अभी तक उसको अपने pदमाग पर भरोसा रहा था. जzरत के
समय हर बार वह सहJ फैसला करता आया था. उसके कारण अनेक बार लोगM क! "शंसा भी
बटोरJ थी. आज लग रहा था Xक उसक! समझ उसको धोखा दे रहJ है . pदमाग बैठता जा रहा
है . कारण उसक! समझ से बाहर था.

दसरJ
ू परे शानी यह थी Xक वह अपनी मां से भी मदद नहJं ले पा रहा था. उसको लगता था
Xक सम#याएं उसने खड़ी क! हa, इस&लए उनका %नदान भी #वयं उसी को करना होगा. मां और
बापू को वह बीच मO हर5गज नहJं लाएगा.

नेक! सदै व पž
ु य-लाभ दे ती है .

नहाने के बाद ब~J काका जमीन पर चादर wबछाकर लेट गए. करJब एक घंटा आराम करने
के वे बाद उठे . शाम हो चक!
ु थी. मजदरू और कारJगर अपना काम समेटकर वापस लौटने
लगे थे. इमारत मO जगह-जगह च9
ू हे जल रहे थे. छˆकने-बघारने क! आवाजO आ रहJ थीं. भखे

ब`चे मांओं के आगे wबलख रहे थे. वे उ-हO समझा और दलार
ु रहJ थीं. wबि9डंग के कोने-कोने
मO ि#थत च9
ू हM से उठता हआ
ु धआं
ु उन #थानM पर जीवन क! उपि#थ%त का संदेश दे रहा था.

जागने के बाद ब~J काका wबि9डंग का एक चbकर लगा चक


ु े थे. चारM मंिजलM पर घमने
ू के
बाद वे उस कोने मO पहंु च,े जहां ब`चे खेल रहे थे. टोपीलाल भी वहJं था. अपनी उलझन से
%घरा हआ
ु , एकाक!. ब~J काका के कंधे पर एक सती ू चादर थी. व#uा हाथ

से बने
ु कपड़े के थे.

ब`चM के पास बैठकर उ-हMने चादर जमीन पर wबछा लJ. Xफर हाथ फैलाकर, मोहक म#
ु कान
के साथ उ-हO आमंwuत करते हए
ु बोले-

ु मO से कौन-कौन मझसे
‘तम ु दो#ती करना चाहे गा?' यह सनकर
ु ब`चM का खेल से {यान हट
गया. सब चˆककर ब~J काका क! ओर दे खने लगे.
‘िज-हO मझसे
ु दो#ती करनी है , वे इस चादर पर आ जाएं.' उ-हMने दोहराया. मगर इस बार भी
कोई ब`चा उस चादर पर नहJं पहंु चा. उ-हMने ब`चM क! ओर दे खा. वे अपने #थान पर
गमसम
ु ु -से खड़े थे. चेहरे पर डर और आशंका के भाव &लए हएु .

‘कोई बात नहJं, यpद तम


ु मO से कोई भी मझसे
ु दो#ती नहJं करना चाहता तो त‡
ु हारJ मज. पर
मa तो तम
ु सभी को अपना दो#त मान चका
ु हंू .'

‘आप यहां Xकस&लए आए हa?' एक ब`चे ने टोका.

‘आपको हमसे bया काम है ?' दसरे


ू ब`चे ने जोड़ा.

‘हम आपको नहJं जानते...ब#ती मO को◌ेई भी आपको नहJं जानता।' सवालM क! बौछार बढ़ती
हJ जा रहJ थी।

‘बताता हंू , बताता हंू .' अगर एक साथ सारे ब`चे सवाल करने लग जाएंगे तो मेरJ चांद पर बचे-
कचे
ु बाल भी नहJं रहO गे.

‘कैसे?' ब`चM को ब~J काका क! बात मO मजा आया.

‘सीधा-सादा ग„णत है भई. त‡


ु हारा एक सवाल अगर मेरा एक बाल भी ले उड़ा तो सबह
ु तक
मa परJ
ू तरह गंजा हो जाऊंगा.' इसपर कई ब`चे हं स पड़े. ब~J काका को भी भला लगा.

‘आप तो पहले हJ गंजे हa, हमने आपको नहाते हए


ु दे खा था, आपक! चांद पर एक भी बाल नहJं
है ?'

‘अरे ..रे ...! तम


ु सब तो बहु त तेज हो, आते हJ मेरJ कलई खोल दJ.' ब~J काका ने दःखी
ु होने
का नाटक Xकया, ‘इसक! भी एक दद4-भरJ कहानी है . बताओं कौन-कौन सनना ु चाहे गा?

‘मa...!' कई ब`चे एक साथ बोल पड़े। केवल टोपीलाल चHु पी साधे रहा। %तरछ_ नजरM से उसको
दे खते, मन हJ मन म#
ु कराते हए
ु ब~J काका ने कहना आरं भ Xकया-

‘एक बार हमारे बाल बहत


ु बढ़ गए. हम नाई के पास उनक! छं टाई कराने पहंु च.े वह अपनी
दकान
ु बंद करने जा रहा था. हमने उससे कहा, ‘भाई, कल हमO दावत मO जाना है , जरा बालM क!
छं टाई तो कर दो.'

‘कल आइएगा (ीमान. अब तो दकान


ु बंद करने का समय हो चका
ु है .' नाई ने जवाब pदया.

‘हमO ज9दJ है , सबह


ु मंह
ु -अंधेरे हJ %नकलना है . मa परJ
ू मजदरJ
ू दं ग
ू ा. त‡
ु हारJ अपनी

दकान
ु है , थोड़ी दे र बाद बंद कर लेना.' मaने उसको फसलाने
ु क! को&शश क!. लेXकन वह भी
कम नहJं था, बोला-
‘बापू कहते हa Xक हर काम समय पर होना चाpहए. दकान
ु बंद करने का समय सात बजे का
है , मa एक &मनट भी ऊपर नहJं ;कने वाला.'

बापू समय के पाबंद हa. यह बात परा


ू दे श जानता था. इस&लए उससे आगे कछ
ु कहने का
कोई लाभ हJ नहJं था.

‘पर मझे
ु तो मंह
ु -अंधेरे हJ एक जगह जाना है . वहां इस ज9
ु फ! #टाइल मO तो जा नहJं सकता.'
मaने अपनी सम#या रखी. हालांXक मa यह कतई नहJं चाहता था Xक वह मेरे &लए अपना
अनशासन
ु भंग करे .

‘उसका भी इंतजाम है . गम के pदन हa, आप टोपी क! जगह एक खfदर का गीला तौ&लया
&सर पर रख लJिजए. उससे बाल दबे रहO ग,े Xकसी को पता भी नहJं चलेगा.'

मरता bया न करता. मaने अगले pदन खfदर के गीले तौ&लये मO बालM को लपेटा और चल
pदया दावत खाने. घंटे-भर बाद हJ जकाम
ु ने जकड़ &लया. छ_ंकO आने लगीं. पहलJ छ_ंक आई-
‘आ...छ_!' और मa चˆक पड़ा। जी को जोर का धbका लगा।

‘अरे , यह bया हआु ! छ_ंक के साथ बालM क! परJ


ू एक ब#ती धराशायी हो चक!ु थी. दसरJ
ू छ_ंक
आई तो वह दसरे ू मह9
ु ले को ले उड़ी. इसके बाद तो छ_ंकM के आने और केश-कंु जM के उजड़ने
का &सल&सला चलता हJ गया. मaने सोचा Xक गीले तौ&लये से छ_ंक आती है , तो bयM न
तौ&लये को हटा हJ लंू. लेXकन जब तौ&लया हटाकर दे खा तो बालM के मह9
ु ले के मह9
ु ले हवा
हो चक
ु े थे. अब तो wबना तौ&लया रह पाना संभव हJ नहJं था. उधर गम मO सखा
ू तौ&लया
रखने से &सर तपने लगा था. सो तौ&लया Xफर से &भगोना पड़ा. शाम को जब मa घर लौटा तो
बालM क! तीन-चौथाई फसल तबाह हो चक!
ु थी.

मa दौड़ा-दौड़ा Xफर नाई के पास पहंु चा. जाते हJ उसपर चढ़ गया, ‘त‡
ु हारJ बताई गई तरक!ब से
हJ यह हाल हआ ु है . अब बताओ त‡ ु हारा bया हाल कzं?'

‘&सफ4 शXqया
ु अदा क!िजए जनाब! हर महJना नाई क! दकान
ु पर आना पड़ता था. कभी
दकान
ु खलJ
ु &मलती थी, कभी नहJं. बीस ;पये Uरbशे वाले को दे ते थे, दो-तीन घंटे आने-जाने
मO खराब हो जाते थे. ऊपर से नाई का मेहनताना. िजतनी दे र उसके सामने रहो, उतनी दे र
गलत कa ची चल जाने का डर. म“
ु त क! सलाह पर &सफ4 एक शXqया
ु के बदले इन सारJ
परे शा%नयM से मिb
ु त &मल रहJ है . wबना अधेला खच4 Xकए और bया लेना चाहO गे जनाब!'
कहकर नाई महाशय हं स pदए. मa और नाराज होऊं उससे पहले हJ बोले-

‘आप तो बापू के भbत हa...'


‘हंू पर इतना भी नहJं Xक भिbत के नाम पर गंजा बन जाऊं...' मaने रोष "कट Xकया. इसपर
नाई म# ु करा pदया-‘आप तो नाराज हो गए. च&लए छोnड़ए, इसी बात पर मa एक Xक#सा
सनाता
ु हंू . एक बार बापू को जकाम
ु हआ
ु . Xकसी ने उ-हO खfदर का zमाल

थमा pदया. जकाम


ु तेज था. zमाल से रगड़ते-रगड़ते नाक लाल हो गई. शाम को जब घमने

%नकले तो एक पuकार ने बापू से मजाक करते हए
ु पछा
ू -‘बापू, खादJ के मोटे zमाल से अगर
नाक को इसी तरह रगड़ते रहे तो यह दो-चार pदनM मO गायब हो जाएगी.'

‘तब जानते हa बापू ने bया कहा? खैर, आपने सना


ु है तो और यpद नहJं सना
ु है तो भी, मa
आपको बताए दे ता हंू. बापू ने उस पuकार से हं सते हए
ु कहा था, ‘अ`छा हJ है Xक गायब हो
जाए, आए pदन के जकामु से छo
ु टJ तो &मलेगी. न बांस रहे गा, न बांसरJ
ु बजेगी.'

Xक#सा सनाने
ु के बाद नाई मेरJ ओर पलटा, ‘जनाब, आपके तो केवल बालM पर हJ बीती, गांधी
जी तो रोजमरा4 क! मि2
ु कल से बचने के &लए अपनी नाक भी गंवाने को तैयार थे.'

मa बापू के नाम पर लोगM को उपदे श दे ता था. नाई ने मेरा ह5थयार मेरे हJ ऊपर तान pदया
था. मa bया करता. चला आया चपचाप
ु . वह pदन है और आज का pदन. &सर क! ब5गया से
उस pदन जो बहार zठ_, वह आज तक नहJं लौटJ. लाख जतन Xकए, पर यह जंगल कभी
आबाद न हो सका.'

ब~J काका ने बात समाHत क! तो ब`चM के चेहरे „खले हए


ु थे. कई ब`चे उनके करJब „खसक
आए थे.

‘अब आप मO से कोई है जो इस सदाबहार गंजे को अपना दो#त बनाना चाहे गा?' ब~J काका ने
पछा
ू तो कई ब`चे चादर चढ़ गए. वे उ-हO चारM ओर से घेरकर बैठ गए. सहसा ब~J काका क!
%नगाह %नरालJ पर पड़ी. वह सबसे पीछे खड़ी थी. उदास और परे शान. ब~J काका को अनायास
कछ
ु याद आया. वे उठकर %नरालJ के पास पहंु चे और उसके सामने घटनM
ु के बल बैठकर बेहद
Hयार से पछा
ू -

‘बेटJ, त‡
ु हारJ मां का बखार
ु अब कैसा है ?'

जवाब दे ने के बजाय %नरालJ ने अपनी गद4 न झका


ु लJ.

‘%नरालJ क! अ‡मा बहत


ु बीमार है ?' एक ब`चे ने बताया.

यह सनते
ु हJ ब~J काका उठकर खड़े हो गए, ‘मaने जो गो&लयां दJ थीं, उनसे बखार
ु तो उतर
जाना चाpहए था. अगर नहJं उतरा तो जzर कोई वजह है . हो सकता है Xक उ-हO अ#पताल
भी ले जाना पड़े. चलो पहले उ-हJं को चलकर दे खते हa.'
बाक! ब`चे भी ब~J काका के पीछे -पीछे चल पड़े.

%नरालJ क! मां जमीन पर चादर wबछाकर लेटJ हईु थी. दे ह बखार


ु से तप रहJ थी. हालत pदन
क! अपेZा और भी खराब हो चक!ु थी. यह दे ख ब~J काका के चेहरे पर 5चंता क! लक!रO बढ़
गŠ. उ-हMने नाड़ी दे खकर बखार
ु का अनमान
ु लगाया-


‘बखार yयादा है , लेXकन इस हालत मO इ-हO अ#पताल ले जाना भी उ5चत न होगा. अ`छा
होगा Xक पहले पानी Xक पoटJ लगाकर तापमान नीचे लाया जाए.'

ब~J काका ने %नरालJ से एक चौड़े बरतन मO पानी लाने को कहा. Xफर कंधे से अंगोछा उतारा.
उसको पानी मO &भगोया और %नरालJ क! मां के माथे पर रखने लगे. %नरालJ उनके पास हJ
खड़ी थी. कछ
ु दरJ
ू पर टोपीलाल था. अपराधबोध से s&सत. बाक! ब`चे भी वहJं मौजद
ू थे.

‘ब`चो, इनक! Xफq मत करो. कछ


ु दे र मO बखार
ु उतरने लगेगा. तब तक तम
ु सब अपने-अपने
घर जाओ. हम लोग सबह ु &मलO गे. कछु नई बातM के साथ.' ब~J काका के कहने पर कछ
ु ब`चे

जाने लगे. कछ
ु वहJं खडे रहे . माथे पर पानी क! पoटJ रखकर बखार
ु का इलाज करना उनक!
%नगाह मO Xकसी कौतहल
ू से कम न था. उनक! माएं बखार
ु आने पर अbसर पानी से दरू रहने
क! सलाह pदया करती थीं. उनक! %नगाह मO ब~J काका अनठे
ू थे। अनठा
ू था उनका बखार
ु के
उपचार का तरJका।

लगभग तीस &मनट तक माथे पर गीलJ पoटJ रखने के बाद बखार


ु कछ
ु ह9का पड़ा. कमजोर
शरJर मO मामलJू हरकत हईु . ब~J काका के चेहरे पर संतोष झलकने लगा. वे उठकर खड़े हो
गए, ‘बापू का बताया बखार
ु के उपचार का यह तरJका एक बार Xफर कारगर &सk हआ ु . अब
कोई 5चंता क! बात नहJं है . एक घंटे के बाद बखार
ु एकदम उतर जाएगा. तम
ु अगर चाहो तो
इ-हO कछ
ु दध
ू Dपला सकती हो।'

सहसा उ-हO कछ
ु {यान तो आया, पछा
ू -‘बेटJ, त‡
ु हारे पास दध
ू तो होगा?'

%नरालJ गद4 न झक
ु ाए खड़ी रहJ. कोई जवाब न सझा
ू .


‘ग;जी , दध
ू मa अपने घर से ले आता हंू .' टोपीलाल ने उhसाpहत होकर कहा. wबना सहम%त क!
"तीZा Xकए वह तरंु त दौड़ भी गया. पांच-छह &मनट बाद लौटा तो उसके हाथM मO 5गलास था,
दध
ू से भरा हआ
ु .

‘मां ने कहा है Xक क`चा है , उबाल लेना.' टोपीलाल ने दध


ू से भरा 5गलास %नरालJ को थमाते
हए
ु कहा. काफ! दे र बाद उसके चेहरे पर चमक pदखाई पड़ी थी. मानो Xकसी तनाव से बाहर
%नकलने क! को&शश मO कामयाबी नजर आई हो.
%नरालJ ने आग जलाकर दध
ू गम4 Xकया. तब तक ब~J काका अपने झोले से दो गो&लयां और
%नकाल चक
ु े थे. %नरालJ दध
ू गम4 करके लाई तो उ-हMने वे गो&लयां उसक! मां के हाथM मO
थमा दJं.

‘अब इ-हO आराम करने दो. कछ


ु घंटM के बाद ये wबलकल
ु ठ_क हो जाएंगी.' गो&लयां „खलाने के
बाद ब~J काका वहां से चल pदए. जाते-जाते जैसे कछ
ु याद आया हो, वे %नरालJ क! ओर मड़े
ु ,
‘मa बाहर सोने जा रहा हंू . रात मO यpद कोई परे शानी pदखे तो फौरन जगा दे ना.'

%नरालJ और टोपीलाल उ-हO छोड़ने बाहर तक आए. ब`चे धीरे -धीरे अपने घर जाने लगे थे.
भोजन का समय हो चका
ु था. जगह-जगह च9
ू हे जल रहे थे. कहJं दाल बघारJ जा रहJ थी तो
कहJं पर गम4 रोpटयM◌ं से उठती गंध हवा को महका रहJ थी। भख
ू टोपीलाल

को भी सता रहJ थी. पर वह अपनी हJ जगह पर अटल रहा.

‘bया त‡
ु हO भख
ू नहJं है ?' टोपीलाल को अकेला दे ख ब~J काका ने "2न Xकया.

‘मa आपसे अपनी एक भल


ू के &लए माफ! चाहता हंू ?' टोपीलाल का #वर पछतावे से भरा था.

‘भलू ! भला तमने


ु ऐसा bया कर pदया?' ब~J काका ने टोपीलाल के चेहरे पर नजर जमाते हए

पछा
ू .

‘आपक! दJ गई गो&लयां „खलाने को मaने हJ मना Xकया था, िजसके कारण %नरालJ और
उसक! मां के साथ-साथ आपको भी परे शान होना पड़ा.'

‘bया तम
ु नहJं चाहते◌े Xक %नरालJ क! मां ज9दJ ठ_क हो?'

ु चाहता हंू . परं तु उस समय मझे


‘wबलकल ु आपके ऊपर भरोसा हJ नहJं था. मझे
ु लगा Xक आप
सरकार के जासस
ू हa.'

‘मaने तो पहले हJ बता pदया था Xक मझे


ु राT प%त जी ने त‡
ु हारे पास भेजा है .' ब~J काका ने
है रानी "कट क!.

‘जी, मझसे
ु भारJ भल
ू हई
ु है .'

‘भल ं ु आदमी को चाpहए Xक वह भल


ू होना तो #वाभाDवक है , Xकत ू को अपने #वभाव का
pह#सा न बनने दे . जब भी ऐसा होता है, आदमी अपने आप से मंह
ु चराने
ु लगता है .और अपने
आप से मंह
ु चराना
ु , भDवTय क! ओर से मंह
ु फेर लेना भी है .'

टोपीलाल क! आंखO जमीन मO गड़ी थीं.


नकाराhमक सोच और अनाव2यक डर सबसे पहले अपने हJ gयिbतhव पर हमला करते हa. ये
आदमी को बहत
ु पीछे ले जाते हa, उसके Dववेक को खोखला कर दे ते हa।

अपनी भल
ू के &लए तो टोपीलाल ने ब~J काका से माफ! मांग लJ. उ-हMने माफ भी कर pदया
था. पर टोपीलाल के मन को चैन कहां. अभी तक वह अपने ऊपर गव4 करता आया था.
अपनी बDk
ु पर भी उसको गमान
ु था. उसी के कारण उसको लोगM क! शाबाशी &मलती थी.
परं तु अब उसे लग रहा था Xक Dपछले कछ
ु pदनM से उसके pदमाग ने काम करना बंद कर
pदया है . सोचने-समझने क! शिbत समाHत हो चक!
ु है . वह सहJ फैसला कर हJ नहJं पाता.
आदमी को पहचानने मO उससे भलू हो जाती है . ऐसा bयM हआ
ु ? इसका ठ_क-ठ_क कारण तो
वह नहJं जानता. पर कोई भी घटना अकारण तो होती नहJं. टोपीलाल उस कारण को जानना,
उसक! तह तक पहंु चना चाहता था. पर gयथ4, उसका हर "यास %नTफल था.

कहJं घमंड तो इसक! वजह नहJं है ? मां कहती है Xक घमंड अ`छे -खासे आदमी को गœढे मO ले
जाता है . हो सकता है Xक खेल-खेल मO राT प%त महोदय को पu &लखने से

उसके मन मO घमंड समा गया हो. ऐसा उसने कई बार सोचा है . हालांXक उस समय ऐसा
कछ
ु नहJं था. बस कागज-कलम सामने दे खकर उसने कछ
ु श@द कागज पर उकेर pदए थे.
उनका सहJ-सहJ अथ4 भी वह नहJं जानता था. जैसा उस समय मन मO आया वहJ &लख मारा
था.

डाXकया क! मेहरबानी हई
ु जो अनजाने मO &लखा गया उसका पu सहJ pठकाने पर जा लगा.
तb
ु का तीर बन गया. ऐसे संयोग को लेकर गमान
ु कैसा! यह भी संभव है Xक अनजाने डर ने
उसक! सारJ pदमागी ताकत को %नचोड़ &लया हो. संभावनाएं तो अनेक हa, पर अस&लयत तक
पहंु चना...बेहद मि2
ु कल.

इस बीच टोपीलाल ने एक बात और नोट क!. पहले जब वह दसरM


ू के बारे मO सोचता, सबके
भले क! कामना करता, सबसे pहल-&मलकर रहता था-तब उसके pदमाग मO नए-नए Dवचार भी
आते. मि#तTक क9पनाओं क! उड़ान मO रहता था. कोई भी सम#या हो, उसका %नदान तरंु त
सझा
ु दे ता. परं तु अब!

कछ
ु pदनM से तो अनजाना डर उसके pदलो-pदमाग मO पैठा हआ ु है . हर ब`चा उसको अपना
"%त‰ं ‰ी, हर आदमी अपना द2ु मन नजर आता है . संदेह मन से दरू हJ नहJं होता.

टोपीलाल इस मसले पर मां से बात करना चाहता था. परं तु कई pदनM से वह दे ख रहा था Xक
मां और बापू दे र तक काम करते हa. wबि9डंग ज9दJ परJ
ू करने के &लए उ-हO ओवरटाइम
लगाना पड़ता है . मां घर लौटते हJ खाना बनाने मO जट
ु जाती है . बापू बाक! कारJगरM के साथ
बैठकर अगले pदन के काम क! योजना बनाते हa. जzरत हो तो मा&लक से बातचीत करते हa.
ऐसे मO टोपीलाल क! pह‡मत कहां Xक अपनी Xकसी सम#या के &लए मां को परे शान करे ! मन
ह9का करने के &लए उसके पास बैठे, बातचीत करे .

इन pदनM उसक! अजीब हालत है . हमेशा गम


ु -सम
ु बना रहता है . जहां बैठ जाए वहां बैठा हJ
रह जाता है . द%नया
ु -जहान क! सध
ु हJ नहJं रहती. ऊपर से pदमाग है Xक न जाने bया-bया
अलाय-बलाय सोचता, अटकलO लगाता है . बेकार क! बातO , िजनमO जरा-भी तारत‡य नहJं.

इस बीच यpद कछ
ु अ`छा लगता है तो %नरालJ का साथ. टोले के दज4नM ब`चM मO वह उसक!
सबसे गहरJ &मu है . वहJ उसको सवा45धक पसंद भी है . जब तक %नरालJ साथ रहे , तो उसका
मन „खला-„खला रहता है . नहJं तो बझ
ु -सा जाता है . तभी तो उसने %नरालJ को अपनी मां के
साथ टोले मO आकर रहने का कहा था. इसके &लए उसको अपनी मां और बापू दोनM हJ को
मनाना पड़ा था.

िजस pदन %नरालJ और उसक! मां ने ब#ती मO कदम रखा, उस pदन वह बेहद "स-न था.
लगता था Xक बहतु बड़ी जीत हा&सल हई ु है । इन pदनM %नरालJ क! मां बीमार रहती है . उसको
घर का सारा काम करना पड़ता है . टोपीलाल से बातचीत के &लए वह समय हJ नहJं %नकाल
पाती.

‘bया सोच रहा है , टोपी?' बराबर मO लेटJ मां ने टोपीलाल को लगातार करवट बदलते दे खा तो
पछ
ू &लया. इसपर वह चˆक पड़ा. वह माने हए
ु था Xक मां थकान के कारण नींद मO है . पर
आवाज से तो लगा Xक वह उसक! हर एक सांस, हर एक धड़कन और उसक! हर एक
ग%तDव5ध पर नजर जमाए हए
ु है .

ु नहJं, कछ
‘कछ ु भी तो नहJं!' मां से कभी, कछ
ु भी न %छपाने वाले टोपीलाल ने झठ
ू बोला.
इसपर मन मO कहJं कछ
ु कचोट भी हई।

‘लगता है तेरJ तwबयत ठ_क नहJं है . आज शाम हJ से दे ख रहJ हंू Xक तू परे शान है . %नरालJ
क! मां तो ठ_क है न!'

‘हां, ब~J काका ने बखार


ु क! गो&लयां दJ हa. कहा है Xक सबह
ु तक परJ
ू तरह ठ_क हो जाएंगी.'

‘%नरालJ बहत
ु अ`छ_ लड़क! है . बेचारJ को छोटJ-सी उ‘ मO हJ कारण कTट भोगना पड़ रहा है .
लेXकन तू परे शान bयM होता है . सख
ु -दःख
ु तो िजंदगी मO लगे हJ रहते हa.' मां ने Hयार जताया
तो टोपीलाल से न रहा गया. उसका मन पसीज गया. मन क! गांठे अपने आप खलने
ु लगीं.
Xफर तो "ारं भ से अंत तक क! सारJ बातO , सभी गांठO उसने एक-एक कर मां के सामने खोलकर
रख दJं. मां शांत मन से सनती
ु रहJ, गनती
ु रहJ. हौले-हौले तस9लJ भी दे ती रहJ।

टोपीलाल क! बात समाHत हई


ु तब उसने कहा-
‘बेटा, इस द%नया
ु मO बरेु लोग भले हJ yयादा नजर आते हM, पर अ`छे लोग भी कम नहJं हa.
ऐसे लोग &सफ4 अपनी आhमा का कहा मानते हa. कोई और उनके बारे मO bया सोचता है , वे
इस बात क! परवाह हJ नहJं करते. इस&लए इस बात क! 5चंता छोड़ Xक तेरJ गलती से ब~J
काका पर bया "भाव पड़ेगा. वे bया सोचO गे. बरा
ु मानOगे या नादानी समझकर wबसार दO गे.
अपना दे ख, लोगM पर Dव2वास करना सीख. दसरM
ू के साथ वैसा हJ बता4व कर, जैसा तू उनसे
अपने साथ चाहता है .'


‘दसरM के साथ वैसा हJ gयवहार करो, जैसा तम
ु उनसे अपने &लए उ‡मीद रखते हो.' टोपीलाल
को आज एक नया ग;मं
ु u &मला. उसको लगा Xक उसक! आंखM के आगे छाया अंधेरा छं ट
चका
ु है . भावनाएं गंगाजल-सी "वाहमान हa. मि#तTक पनः
ु जाsत हो चका
ु है . वह ह9का
होकर नीलगगन मO उड़ान भरने को Xफर से तैयार है . भावावेश मO वह मां के सीने से लग
गया-

‘मां, अगर तम
ु पढ़-&लख जातीं तो #कूल मO जzर मा#टरनी होतीं.'

‘नहJं रे ! मa औरत हंू . पढ़-&लखकर और चाहे जो भी बनती, पर पहले मa मां हJ होती.'

‘सचमच ु !' कहते हए


ु टोपीलाल मां से 5चपट गया. रात अपनी पींगे बढ़ाए जा रहJ थी. नींद का
pहंडोला सज चका ु था. उसे सपनM क! सैर कराने, दरू तारM के उस पार ले

जाने के &लए.

लंबी से लंबी याuा का आनंद तभी तक है , जब तक Xक पांव जमीन पर होने का एहसास हो.

अगले pदन टोपीलाल क! आंखO मां के साथ हJ खल


ु गŠ. वह उठ बैठा. मां च9
ू हा सलगाने
ु क!
तैयारJ करने लगी. उससे अनम%त
ु लेकर वह अपने तंबुनमा
ु घर से बाहर %नकला. Xफर तेज
कदमM से चलता हआ ु सीधा उस #थान पर पहंु चा, जहां ब~J काका को सोते हए
ु छोड़ा था. टोले
के "ायः सभी मद4 दे र से उठते थे. औरतM को घर का काम %नपटाना होता, वे मंहु -अंधेरे काम
पर जट
ु जातीं. इस&लए इतने सवेरे ब~J काका को अपने #थान से गायब दे खकर वह है रान
रह गया.

wबि9डंग मO हJ जीने क! ओट मO ब~J काका को दे ख वह उनक! ओर बढ़ गया. वे gयायाम कर


रहे थे.

ु ! इतने सवेरे, bया रात को नींद नहJं आई?'


‘तम

‘मa तो बस आपसे &मलने चला आया...!' टोपीलाल ने उ†र pदया.

‘ऐसी भी bया ज9दJ थी?'


‘कल आप बता रहे थे Xक आपको राT प%त जी ने भेजा है? तब तो आप हम ब`चM को पढ़ाने
के &लए आए हMगे?'

‘ठ_क समझे.' ब~J काका ने धोती बांधते हए


ु कहा, ‘मa ब`चM को हJ नहJं, बड़M को भी पढ़ाऊंगा.
सबह
ु क! पारJ मO ब`चे और शाम क! पारJ मO बड़े. हर सHताह मO एक pदन ब`चM और बड़M
को साथ-साथ wबठाकर टे #ट &लया कzंगा...उसमO जो सबसे yयादा अंक लाएगा, उसको
पर#
ु कार भी &मलेगा.' ब~J काका ने बताया.

‘हमारे पास तो कॉपी-कलम-प#


ु तकO कछ
ु भी नहJं हa...' टोपीलाल ने अपनी सम#या बताई.

‘घबराओ मत, उनका इंतजाम हो जाएगा.'

‘सभी ब`चM के &लए...?'

‘हां, सभी ब`चM के &लए।'

‘बड़े तो कमाते हa, न?'

‘उनके &लए भी Xकताब-कॉपी म“


ु त &मला करO गी.'

‘बड़M के &लए भी...Xफर तो बहत


ु ;पयM क! जzरत पड़ेगी.'

‘हमारे &सर पर राT प%त जी का आशीवा4द है . Xफर Xकस बात क! 5चंता.'

‘राT प%त जी के पास bया इतने ;पये हa?'

‘राT प%त जी को ;पये-पैसM क! जzरत नहJं पड़ती...उ-हO तो काम करने वाले

नागUरकM क! जzरत होती है . ऐसे लोग उनसे "ेरणा लेकर अपने आप „खंचे चले आते हa. और
जब कारबां बनता है तो बाक! चीजO भी जट
ु हJ जाती हa.' ब~J काका क! बात टोपीलाल के &सर
के ऊपर से गजर
ु गई. वह उनका मंुह दे खने लगा-

‘चलो, वहां खलJ


ु हवा मO बैठकर बात करते हa, सबह
ु -सबह
ु शरJर को ताजी हवा &मले तो दे ह परेू

pदन „खलJ-„खलJ रहती है .' ब~J काका बोले और wबि9डंग के सामने खडे अशोक के वZ
ृ क!
ओर बढ़ गए. चलते-चलते टोपीलाल का हाथ न जाने कब उनके हाथM मO चला गया, उसको
पता हJ न चला. टोपीलाल को यह एहसास सखद
ु लगा. वह दे र तक उनके #नेpहल #पश4 को
अनभव
ु करता रहा. बैठने के बाद ब~J काका Xफर उसी Dवषय पर लौट आए-

‘मa कह रहा था Xक काम करने वाले नागUरक राT प%त जी से &मलने अपने आप चले आते हa.
असल बात यह है Xक ऊंचे सोच, लंबी दे शसेवा तथा सव4#व समप4ण के बाद हJ कोई gयिbत
राT प%त के आसन तक पहंु च पाता है . ऐसे महाप;ष
ु का जीवन तो आदश4 क! #वयं &मसाल
होता है . इस&लए उनका gयिbतhव लाखM लोगM को "ेरणा दे ता है . उनसे "भाDवत लोग ऐसे
कायr मO खशी
ु -खशी
ु योगदान दे ते हa. मa राT प%त जी का बेहद आभारJ हंू Xक इस काम के
&लए उ-हMने हमारJ सं#था को चना
ु है .'

‘सं#था?'

‘सं#था माने एक मकसद, एक लय, एक अ&भयान और समझो तो एक चनौती


ु भी, िजसको
परा
ू करने के &लए मझ
ु जैसे अनेक लोग, %नः#वाथ4-भाव से एकजट
ु हो जाते हa. ऐसे लोगM क!
5गनती करोड़M मO है . वे परेू दे श मO फैले हए
ु हa.'

‘bया सचमच
ु राT प%त जी को मेरJ wबना pटकट लगी 5चoठ_ &मलJ थी?'

‘हां, उस डाXकया क! मेहरबानी से. त‡


ु हारJ ईमानदारJ से "भाDवत होकर उसने त‡
ु हारे पu पर
अपनी ओर से डाक pटकट 5चपका pदए थे. साथ मO एक छोटJ-सी पच भी &लख छोड़ी थी.
त‡
ु हारे पu और उस पच क! छाया"%तयां मेरे पास भी हa. जानते हो उसमO डाXकया ने त‡
ु हारे
बारे मO bया &लखा है ?'

‘मa भला कैसे जानंग


ू ा?'

‘अभी सनाता
ु हंू ...' कहते हए
ु ब~J काका ने अपनी जॉकेट क! जेब मO हाथ डाला. पच %नकालJ
और पढ़ने लगे, ‘‘सनो ु , उस भले आदमी ने &लखा है -

‘माननीय राT प%त जी! िजस ब`चे ने यह 5चoठ_ मझे


ु सˆपी है , वह बहत
ु हJ भोला है . यह भी
नहJं जानता Xक पu को डाक Dवभाग को सˆपने से पहले उसपर डाक pटकट लगाना आव2यक
होता है . पर वह बालक है बहत ु ईमानदार. दे खने पर यह भी लगता है Xक उसके माता-Dपता
बहत
ु गरJब हa. वे मेरे काय4Zेu के कहJं पास हJ मेहनत-मजदरJ
ू करते हa. लड़के को मaने कई
बार सड़क पर भटकते दे खा है . लगता है माता-Dपता के काम पर चले जाने के बाद वह वbत
wबताने के &लए इधर-उधर %नकल जाता है .

ब`चा ईमानदार है . एक मामलJ


ू कलम को लौटाने के &लए भी वह बहत ु दरू चलकर आया
था. वह दसरM
ू के दःख
ु को समझता है । pदल मO परोपकार क! भावना है . साथ मO पढ़ने क!
ललक भी. ढं ग का मौका &मले तो बहतु आगे तक जा सकता है । ये सब बातO उसके पu से
जाpहर हो जाएंगी. यpद संभव हो तो उस ब`चे क! पढ़ने क! इ`छा परJ
ू करने के &लए सभी
जzरJ उपाय Xकए जाएं.

महोदय! मa जानता हंू Xक दसरे


ू का पu पढ़ना और उसके साथ अपनी और से कछ ु जोड़ना
अपराध है . पर मa भी bया करता! अपनी 5चoठ_ सˆपने से पहले उस ब`चे ने मझे
ु कछ
ु भी
नहJं बताया था. यहां तक Xक अपना नाम भी नहJं. इस&लए ब`चे का मकसद समझने के
&लए मझे
ु उसका पu पढ़ना पड़ा. मa उससे बहत
ु "भाDवत हंू . इस&लए मा-यवर के सामने
अपनी ओर से कुछ %नवेदन करने का साहस जटा
ु पाया हंू ...'

पच पर &लखी इबारत परJ


ू पढ़ने के बाद ब~J काका ने उसको जेब के हवाले Xकया. Xफर
बोले-‘त‡
ु हारJ 5चoठ_ ने राT प%त महोदय को बहत ु "भाDवत Xकया. उ-हो◌े◌ंने तhकाल मझे

याद Xकया और मझे ु यहां पहंु चने क! िज‡मेदारJ सˆप दJ. चलते समय राT प%त जी ने जो
कहा, वह मa कभी नहJं भल
ू पाऊंगा.'

‘ऐसा bया कहा था उ-हMने?' टोपीलाल क! िजWासा बढ़ चक!


ु थी.

‘उ-हMने कहा था-वहां टोपीलाल जैसे गणवान


ु ब`चे और भी हो सकते हa. धल
ू मO %छपे हJरकणM
जैसे. उन सभी को खोजकर, उनक! "%तभा को %नखारने, उ-हO एक अ`छा नागUरक बनाकर
समाज के सामने लाने क! िज‡मेदारJ मa आपको सˆप रहा हंू . यह एक बड़ा दा%यhव है . पर मa
जानता हंू Xक महाhमा गांधी और Dवनोबा भावे के साि--{य मO रहकर आपको ऐसे काय4
साधने का अ`छा-खासा अयास हो चुका है .'

उस दा%यhव-भार से मa खद
ु को ध-य समझने लगा था. Xफर तो wबना पल गंवाए मaने अपना
झोला उठाया और त‡
ु हारे पास चला आया. राT प%त जी ने मझसे
ु कहा है Xक मa तमसे
ु मदद
लंू. आगे िजधर भी कदम उठO , उधर हम दोनM साथ-साथ रहO .'

‘मेरJ मदद! मa आपक! भला bया मदद कर सकता हंू ?' मनोयोग से ब~J काका क! बात सन

रहा टोपीलाल एकाएक चˆक पड़ा.

ु हJं मझे
‘त‡ ु बताओगे Xक यहां Xकतने ब`चे हa जो पढ़ना चाहते हa. उन सबको तम
ु मेरे पास
लाओगे. जो ब`चे पढ़ने से बचते हa, उ-हO तम
ु पढ़ाई-&लखाई क! आव2यकता के बारे मO
बताओगे. जzरत पड़े तो उ-हO मेरे पास भी ला सकते हो, ताXक मa उ-हO पढ़ने के &लए तैयार
कर सकंू. bया तम
ु मझे
ु अपने माता-Dपता से नहJं &मलवाओगे?'

‘मां और बापू से भी...?'

‘यह बताने के &लए Xक उनका बेटा Xकतना समझदार है . मa उनसे यह %नवेदन भी कzंगा Xक
ब`चM और बड़M को &श}Zत बनाना, हम सबक! &मलJ-जलJ
ु िज‡मेदारJ है . इस&लए वे हमारा
साथ दO . टोले के बड़े लोगM को भी अZर-Wान के &लए आगे लाएं. तभी मेरे यहां

आने का उfदे 2य परा


ू हो सकता है .'

टोपीलाल को वे सभी बातO एक सपना, हवाई उड़ान जैसी ऊंची क9पनाज-य और अDव2वसनीय
लग रहJ थीं. मगर जो था, वह उसक! आंखM के सामने था. जो कहा गया था, उसक! {व%न
उसके कानM मO गंज
ू रहJ थी.
‘bया %नरालJ भी मेरे साथ पढ़े गी?'

‘सभी ब`चे एकसाथ पढ़O गे.'

‘उसक! तो मां बीमार रहती है ! वह बेचारJ तो आ हJ नहJं पाएगी!' कहते-कहते टोपीलाल उदास
हो गया.

‘यह 5चंता तम
ु छोड़ दो. %नरालJ क! मां क! हालत यpद ज9द हJ न सधरJ
ु तो हम उ-हO
अ#पताल &भजवा दO गे. जहां डॉbटर और नस4 उनक! दे खभाल करO गे. वहां से कछ
ु हJ pदनM मO
#व#•य होकर वह घर लौट आएंगी। उसके बाद तो %नरालJ के पास समय हJ समय होगा,
bयM?'

‘जी!' टोपीलाल बस यहJ कह सका. उसी समय उसक! मां क! आवाज गंज
ू ी. वह तhकाल खड़ा
हो गया-

‘अरे ! बातM-बातM मO मa यह तो भल
ू हJ गया Xक मां और बापू के काम पर जाने का समय हो
चका
ु है . दोनM मेरा इंतजार कर रहे हMगे...मa ज9दJ हJ आऊंगा.'

टोपीलाल ने घर क! ओर दौड़ लगा दJ. उस दौड़ मO आhमDव2वास था. मन मO थे अन5गनत


सपने और आगे बढ़ने का अटट ू संक9प. ब~J काका उसको जाते हए
ु दे खते रहे . उसके बाद
वे◌े अपने pठकाने क! ओर बढ़ गए. उस समय उनके चेहरे पर अलौXकक म# ु कान थी. pदल मO
Dव2वास और चेहरे पर था अभतपव4
ू ू तेज. खद
ु पर भरोसा और मन मO दसरM
ू के क9याण क!
कामना हो तो ऐसा तेज #वतः आभा&सत होने लगता है .

स`चे कम4योगी का जीवन &म(ी का पहाड़ होता है, जो &मठास रखता है , &मठास बांटता है और
&मठास जीता भी है .

नेक! हजार फसल दे ती है । संद


ु रता और &मठास दोनM हJ मामलM मO &म(ी जैसी कोई &मसाल
नहJं.

ब~J काका ने टोपीलाल से कहा था, पांच साल से ऊपर के ब`चM को बलाकर
ु लाने को. ब#ती
मO ऐसे बी&सयM ब`चे थे. उनमO से कछ
ु से उसक! दो#ती भी थी. ब~J काका के कहने पर एक-
एक के पास टोपीलाल पहंु चा. हर एक को ब~J काका के आगमन क! खबर दJ. उनके आने का
उfदे 2य बताया. कहा भी Xक वे उ-हO wबना फ!स पढ़ना &सखाएंगे. Xक आदमी के &लए Xकतना
जzरJ है पढ़ना. इसके &लए उ-हO #कूल जाने क! भी जzरत नहJं पड़ेगी. जहां हम हa, वहJं
#कूल बन जाएगा.

और कॉपी-Xकताब के &लए तो जरा-भी परे शान न हM. माता-Dपता को एक पाई भी खच4ने क!


जzरत नहJं। ब~J काका ने हर चीज के इंतजाम का आ2वासन pदया है . wबलकल
ु म“
ु त. यह
कोई छोटJ बात नहJं. इस&लए आज शाम को सभी ब`चे दो घंटा पहले खेलना छोड़कर, सीधे
ब~J काका के पास पहंु चO. उ-हMने कहा है Xक वे आज हJ से पढ़ाई आरं भ करना चाहते हa.

ब`चM ने उसक! बात को सना


ु . कछ
ु ने समय पर पहंु च जाने का आ2वासन pदया. कछ
ु ने
अ`छा कहा। कछ
ु ऐसे भी थे िज-हMने उसक! जमकर „ख9लJ उड़ाई. कछ ु ने तो पढ़ाई क!
उपयो5गता पर हJ सवाल खड़े कर pदए. टोपीलाल ने सब सना
ु . मन मO उ‡मीद &लए वह आगे
बढ़ता गया.

उस pदन टोपीलाल ब`चM के अ&भभावकM से भी &मला. ब~J काका एक-एक को समझाने उसके
पास गए तो वह उनके साथ रहा. कहा था Xक ब`चM को पढ़ाएं. Xक जzरJ नहJं है मजदरू का
बेटा मजदरू, &म[ी का बेटा &म[ी हJ बने. वह gयापारJ, अ5धकारJ, डॉbटर, इंजी%नयर या वक!ल
कछ
ु भी बन सकता है . जो िज‡मेदारJ उनके माता-Dपता उनके &लए नहJं उठा पाए, उसे अब वे
अपने ब`चM के &लए उठाएं. उ-हO आगे बढ़ने के &लए "ोhसाpहत करO . उनमO संघष4 क! भावना
जगाएं. ताXक पीpढ़यां बदलO, उनके सं#कार बदलO और &मल-जलकर
ु यग
ु मO बदलाव लाएं.

pदन बीता, पर कड़वे अनभव


ु के साथ. टोपीलाल के जीवन का शायद सबसे कड़वा अनभव
ु .
अपने अनपढ़ होने का रोना रोने वाले माता-Dपता मO से एक ने भी अपने ब`चM को ब~J काका
के पास जाने क! अनम%त
ु नहJं दJ. कछ
ु तो पढ़ाई के नाम से हJ जी चराते
ु pदखे. कछ
ु ने
साफ मना कर pदया. कछ
ु ने हं सकर टाल pदया. कछ
ु ने कह pदया Xक दसरM
ू को मनाओ. वे
तो तैयार हJ हa. जबXक कछ
ु ने उसक! „खंचाई करने का "यास भी Xकया-

-पढ़-&लखकर भी bया करO गे, मेहनत-मजदरJ


ू ...दसरM
ू क! गलामी
ु ! वह तो wबना पढ़े करते हJ
आए हa.

-पढ़े -&लखे बेरोजगार सड़कM पर चHपल चटकाते घमते


ू हa. काम &मल हJ नहJं पाता.इससे तो
अ`छा है Xक बेरोजगार बनकर िजयो. मजदरू बनकर कमा-खाओ.

-जब पढ़-&लखकर भी पसीना हJ बहाना है, तो उसमO अपना समय bयM बरबाद Xकया जाए.

-पेट तो जमीन से भरता है , आसमान क! ओर ताकते रहने से भला Xकसका गजारा


ु हआ
ु है !

ु ु कहते आए हa Xक स§ करो, संतोष धारण करो. उसी का फल मीठा %नकलता है .


-बजग4

एक Dवधवा मजदUरन
ू के एक हJ बेटJ थी. मां pदन-भर Šट और मसाला ढोती. बेटJ घर पर
अकेलJ रहती. टोपीलाल उसके पास भी गया. कहा Xक अपनी बेटJ को पढ़ने के

&लए ब~J काका के पास भेजे. पढ़-&लख जाएगी तो िजंदगी मO काम आएगा. मजदUरन
ू अपना
हJ दखड़ा
ु रोने लगी-
‘बेटा, मa तो चाहती हंू Xक वह थोड़ा-बहत
ु पढ़ ले. लेXकन अगर वह #कूल जाने लगी तो घर का
काम कौन %नपटाएगा. रोटJ-दाल तो चलो मa हJ बना लेती हंू . परं तु झाड़ू-बहार
ु का काम, बकरJ
क! दे खभाल, इतना काम मझ
ु अकेलJ से कैसे सधेगा?'

‘कहJं दरू थोड़े हJ जाना है . Xफर दो घंटे क! बात...मaने कb


ु क! से बात क! है . वह कह रहJ थी
Xक घर का सारा काम वह इसी तरह करती रहे गी, जैसे Xक अब तक करती आई है . आपको
जरा-भी परे शानी नहJं होगी.'

‘चलो मान &लया...कb


ु क! मेरJ अ`छ_ बेटJ है ...वह मेहनती भी है . िजतना हाथ वह अब तक
बंटाती आई, उतना आगे भी बंटाती रहे गी. पर बेटा तम
ु एक बात नहJं समझते. हर लड़क! को
एक न एक pदन पराये घर जाना हJ पड़ता है . वहां कोई हं सी न उड़ाए, इस&लए उसको घर का
काम आना हJ चाpहए. उसे सीखने क! यहJ उ‘ है . चौके-च9
ू हे का काम आ जाए तो अपना
घर आसानी से संभाल लेगी. वरना ससराल
ु मO सब यहJ कहO गे Xक wबना बाप क! बेटJ को मां
से कछ
ु &सखाते न बना.'

ु क! यpद पढ़-&लख जाएगी तो घर और भी िज‡मेदारJ से चला सकेगी.' टोपीलाल ने बात


‘कb
काटJ. अपने से बड़M से वह अ5धक बोलता नहJं था. बात पसंद न हो तो &सफ4 चHु पी साध
लेता. मगर उस समय कb
ु क! क! मां को समझाने के &लए वह एक के बाद एक तक4 pदए
जा रहा था. टोपीलाल को Dव2वास था Xक उसका आ„खरJ तक4 कb
ु क! क! मां को अव2य हJ
%न;†र कर दे गा. मगर कb
ु क! क! मां के तरकश मO अब भी कई तीर बाक! थे, िजनक! काट
टोपीलाल के पास भी नहJं थी-

‘तू अभी नादान है . नहJं जानता Xक बेटJ के @याह के समय मां-बाप को Xकतनी मि2
ु कलO
उठानी पड़ती हa. कb
ु क! का बाप होता तो मझे
ु 5चंता न होती. वह खद
ु संभाल लेता. पर अब
तो इसके हाथ पीले करने क! िज‡मेदारJ मेरJ हJ है . लड़क! अगर पढ़J-&लखी हो तो पढ़ा-&लखा
लड़का भी तलाशना पड़ता है . उसके &लए yयादा दहे ज भी चाpहए. मa Dवधवा मजदरू उतना
दहे ज कहां से जटा
ु पाऊंगी.'

टोपीलाल के पास इसका कोई जवाब न था. %न;†र हो वह वापस लौट आया. उसके बाद
िजसके भी पास वह गया, उसके पास पढ़ाई से बचने के अन5गनत बहाने थे. न था तो &सफ4
पढ़ाई से जड़ने
ु का इरादा. पढ़-&लखकर कछ
ु बनने का संक9प. उसके &लए यह है रान और
परे शान करने वालJ ि#थ%त थी. उसके अब तक के सोच के एकदम उलट.

हाल के वषr मO उसने न जाने Xकतने अरमान अपनी &शZा को लेकर पाले थे. न जाने
Xकतनी बार यह सपना दे खा था Xक एक pदन वह भी #कूल जाने लगेगा. Xक वह पढ़-
&लखकर एक कामयाब इंसान बनेगा. Xक मां और बापू क! तरह केवल मजदरJ
ू या &म[ीगीरJ
हJ नहJं अपनाएगा. वे काम करे गा जो पढ़े -&लखे लोग करते हa. Xक बड़ा होकर

मां-बाप दोनM को सख
ु और स‡मान का जीवन दे सकेगा.

जाने bयM, वह सोच बैठा था Xक ब#ती का "hयेक बालक खशी


ु -खशी
ु पाठशाला जाने क!
सहम%त दे दे गा. उनके माता-Dपता भी पढ़ने से bयM रोकOगे? इससे उनको लाभ हJ होगा. मगर
उस एक pदन मO जो कछ
ु हआ
ु वह उसके सारे अरमानM पर पानी फेरने को काफ! था.

pदन-भर क! दौड़-धपू के बाद जब वह ब~J काका के पास पहंु चा तो बेहद थका हआु था.
पसीना उसके माथे पर था. चेहरा लटका हआ
ु , pदल मO उदासी थी, आंखM मO %नराशा क! #याहJ.
अरमान मरे -मरे थे.

‘अ`छा हआ
ु तम
ु आ गए. मa पढ़ाई आरं भ करने का सोच हJ रहा था. आओ बैठो! आज हम
पहला पाठ सीखने क! को&शश करO गे.' टोपीलाल को अकेला दे ख अनभव
ु -पके ब~J काका को
और कछ
ु पछने
ू क! जzरत हJ नहJं पड़ी, मानो wबना बताए सबकछ
ु समझ गए हM. उनके हाथ
मO प#
ु तक थी. आंखM पर मोटा च2मा. सामने केवल टोपीलाल था और %नरालJ. इसके बावजद

ब~J काका का पढ़ाने का अंदाज ऐसा था, जैसे परJ
ू कZा को पढ़ा रहे हM-

‘ब`चो! मa पहला पाठ शz


ु कzं उससे पहले आपका यह जान लेना जzरJ है Xक जीवन मO
केवल वहJ लोग तरbक! करते हa, िज-हO समय का स‡मान करना आता है , जो उसक!
उपयो5गता को महसस
ू करते हa. उसके साथ-साथ चलते हa. समय स#
ु त लोगM से क-नी
काटकर आगे बढ़ जाता है . वह कभी Xफसœडी लोगM के फेर मO नहJं पड़ता. इस&लए तम
ु आज
यpद कछ
ु बनने का संक9प लेने जा रहे हो, तो एक संक9प यह भी अव2य लेना Xक हम
अपना हर काम तय समय पर परा
ू करO गे. हमारे पास िजतना समय है , उसके "hयेक पल का
सदपयोग
ु करO गे. कभी लापरवाहJ नहJं करO ग,े न कभी आलस हJ pदखाएंगे.'

‘काका, bया यह नहJं हो सकता Xक हम कल से पाठ आरं भ करO . मझे


ु उ‡मीद है Xक कल से
कछ
ु ब`चे जzर आने लगO गे.' टोपीलाल ने बीच मO टोका. इसपर ब~J काका म#
ु करा pदए.

‘जो ब`चे कल आएंगे, उ-हO भी हम पढ़ाएंगे. पर आज आए ब`चM के &लए जो पाठ जzरJ है ,


तम
ु उसी पर {यान दो.' इसके बाद वे एक घंटे तक परेू मनोयोग से पढ़ाते रहे . इस बीच
"2नो†र भी चलता रहा. टोपीलाल और %नरालJ ने जो भी जानना चाहा, ब~J काका ने उसका
#नेहपव4
ू क जवाब pदया. समय कब बीता, उन दोनM को पता भी न चला.

‘ब`चो, आज का पाठ हम यहJं पर समाHत करते हa. कल आप सब इसको दोहरा कर आना.'


कहकर ब~J काका ने उस pदन क! पढ़ाई का समापन Xकया. चलने लगे तो उ-हMने टोपीलाल
और %नरालJ को कछ
ु प#
ु तकO, कॉDपयां और पO &सल वगैरह भO ट क!ं-
‘इ-हO आ„खरJ मत समझना. हो&शयार ब`चM को इस तरह के उपहार पाने क! आदत

डाल लेनी चाpहए.'

टोपीलाल चलने लगा तो ब~J काका ने कंधे पर हाथ रखकर अनरागमय


ु #वर मO कहा-‘Xकसी
अ`छे काम क! श;आत
ु भले हJ एक आदमी ‰ारा हो, मगर लोग उसके साथ &मलते चले जाते
हa. धीरे ◌े-धीरे परा
ू कारवां बन जाता है . जबXक बरेु काम क! श;आत
ु यpद हजार लोग भी करO
तो वह भीड़ एक-एक कर छं टती चलJ जाती है . अंत मO एक या दो बचते हa, िज-हO समाज
अपराधी मानकर 5धbकारता, कानन
ू दं nडत करता है , समझे!'

‘जी...!'

‘bया?'

‘यहJ Xक महान gयिbत के पीछे परा


ू कारवां होता है, जबXक पापी अbसर अकेला पड़ जाता है .'

‘शाबाश! मझे
ु लगता है Xक अब मa राT प%त जी के Dव2वास क! रZा कर सकंू गा।' कहते समय
ब~J काका के चेहरे पर चमक आ गई.

‘मेरे तो कछ
ु भी प9ले नहJं पड़ा...bया कल भी हम दोनM हJ हMगे?' घर लौटते समय %नरालJ ने
पछा
ू .

‘संभव है , लेXकन सदा नहJं...' भरे Dव2वास के साथ टोपीलाल ने कहा, ‘पर हम दोनM तो हMगे
हJ.'

‘हां.' %नरालJ ने #वीक%त


ृ दJ. वह जान चक!
ु थी Xक अ`छे काय4 के "%त भरोसा समाज को
अ`छाई क! तरफ हJ ले जाता है .

उfदे 2य क! पDवuता आhमDव2वास भी जगाती है .

Dवकास अपने◌े साथ कछ


ु Dवक%तयां
ृ लाता है . उनसे बचना इंसान के बDk
ु -कौशल क! कसौटJ
बन जाता है और उनपर नजर रखना समय क! जzरत.

एक सHताह मO हJ टोपीलाल क! उदासी छं ट गई. ब~J काका क! को&शशO रं ग लाने लगी. दस


pदन के भीतर हJ खलJ
ु पाठशाला मO ◌ं आने वाले ब`चM क! सं’या पं~ह से ऊपर पहंु च चक!

थी. और तो और कb ु क! भी पाठशाला आने लगी. उसक! मां खद ु उसको पाठशाला छोड़कर
गई थी-

‘मेरे बढ़ापे
ु का बोझ यह ब`ची bयM सहे . इसे अब आप हJ संभाले ग;
ु जी!'

ब~J काका सुनकर म#


ु कु रा pदए थे।
पाठशाला का समय भी तय हो चका
ु था. ब~J काका सबह
ु चार बजे जाग जाते. gयायाम के
प2चात वे थोड़ा दध
ू लेत.े कछ
ु समय अ{ययन के &लए %नकालते. ब`चM के आने का समय
होता तो ŠटM के च9
ू हे पर „खचड़ी पकाने के &लए रख दे ते. आठ बजे तक सभी Dवाथ
उपि#थत हो जाते. जो नहJं आ पाता, उसको बलाने
ु के &लए वे खद
ु उसके

घर जाते. सवा आठ बजे पढ़ाई आरं भ हो जाती.

इस बीच उनके सामान मO भी वDk ृ हई


ु थी. लकड़ी क! एक बड़ी पेटJ मंगवाई गई थी. उसमO

ब`चM को दे ने वालJ प#
ु तकO तथा अ-य लेखन-सामsी सर}Z
ु त रखी जाती. ठ_क साढे दस बजे
म{याtन होता. उससे पहले हJ पतीलJ मO गमा4गरम „खचड़ी परोसे जाने का इंतजार करने
लगती. अपने Dवा5थ4यM के साथ ब~J काका भी उसका सेवन करते. cयारह बजे पढ़ाई दबारा

आरं भ हो जाती. जो आगे दो घंटM तक चलती. उसके बाद ब`चे घर जाते और ब~J काका
भोजन करने के &लए बढ़ जाते.

ब~J काका को खद
ु खाना बनाते दे ख टोले के लोगM ने हJ आsह Xकया था Xक उनके &लए
खाना बनवा pदया करO गे. इस "#ताव पर ब~J काका एक शत4 पर राजी हएु थे. शत4 के
अनसार
ु जो ब`चे ब~J काका के पास पढ़ने आते थे, उनके घर बारJ-बारJ से आटा और जzरJ
सामsी सवेरे हJ पहंु चा आते. दोपहर को वहां से पका-पकाया भोजन "ाHत हो जाता.

पाठशाला मO शाम क! पारJ बड़M के अZर-Wान के &लए %नधा4Uरत थी. शाम के पांच बजे
5चनाई का काम बंद हो जाता. एक घंटा लोगM को उनके जzरJ कामM से मb
ु त होने के &लए
&मलता. छह बजे "ौढ़ पाठशाला आरं भ होती. Dवाथ जटने
ु लगते.

बड़M क! पाठशाला क! हालत और भी खराब थी। दो सHताह बाद भी मि2


ु कल से पांच-छह
Dवाथ हो पाए थे. ब~J काका इस "ग%त से असंतTु ट थे. परं तु %नराश wबलकल
ु न थे. उनका
pदमाग तेजी से सोच रहा था. और तब अपने "ौढ़ Dवा5थ4यM को आकDष4त करने के &लए ब~J
काका ने एक तरक!ब %नकालJ.

शाम को ठ_क छह बजे जैसे हJ कछ


ु Dवाथ जमा होते, ब~J काका कोई न कोई Xक#सा-
कहानी छे ड़ दे ते. Xक#सा सनाने
ु का उनका ढं ग %नराला था. सनाते
ु समय उनके #वर का
उतार-चढ़ाव {व%न को संगीतमय बना दे ता. उसके आकष4ण से लोग „खंचे चले आते.

कछ
ु pदन बाद ब~J काका ने अनभव
ु Xकया Xक उनके "ौढ़ Dवा5थ4यM मO भी अ`छे -खासे
कलाकार %छपे हa. कोई ढोला सरु से गाता है , तो Xकसी का गला आ9हा पर सधा है . कछ
ु को
दस
ू रM क! हू-ब-हू नकल उतारने मO महारत हा&सल है . जब वे अपना काय4qम "#तत
ु करते तो
ब`चे और बड़े हं सते-हं सते लोट-पोट हो जाते थे.
ब~J काका को तोड़ &मल गया. उनक! %नराशा छं टने लगी. उ-हMने gयव#था मO बदलाव Xकया.
पाठशाला क! श;आत
ु Xकसी भजन, आ9हा या ढोले से होने लगी. जब तक वह समाHत होता,
तब तक पचीस-तीस मजदरू जमा हो जाते. एक परJ
ू कZा क! उपि#थ%त. उसके बाद ब~J
काका उ-हO अZर-Wान कराना शz
ु करते.

कछ
ु pदन यह gयव#था कारगर रहJ. Xफर ब~J काका ने अनभव
ु Xकया Xक कछ
ु लोग
मनोरं जन काय4qम समाHत होते हJ उठ जाते हa. पढ़ाई के काम मO ;5च हJ नहJं लेते. या
मनोरं जन काय4qम को लंबा खींचने का अनरोध
ु करते रहते हa. इससे उनका उfदे 2य परा

नहJं हो पाता. अतः मनोरं जन काय4qम के समय मO सधार


ु Xकया गया. पाठशाला क! दै %नक
श;आत
ु तो उसी से होती. मगर जैसे हJ वह अपने &शखर पर पहंु चने को होता, ब~J काका
उसको बीच हJ मa ;कवा दे ते.

‘अब कछ
ु दे र के &लए हम पढ़ाई पर {यान दO गे. घबराइए मत, यह पढ़ाई भी एक "कार का
खेल हJ है , pदमाग का खेल. अपने pदमाग मO कछ
ु जzरJ चीजO, थोड़ा-सा Wान भर लेने क!
कसरत. जो वbत पर काम आए. हमारJ िजंदगी क! राह को आसान करे , हमO समझाए Xक हम
यpद मनTु य हa तो इसके bया मायने हa...'

‘पर महाराज, गीत के दो-चार बोल और सनने


ु को &मल जाएं तो...गायक ने समां बांध रखा
था, वाह!'

‘दो-चार नहJं परेू आधा घंटे और सनने


ु को &मलेगा. फरमाइश होगी तो वह भी परJ
ू क!
जाएगी. लेXकन Xफलहाल पढ़ाई...केवल पढ़ाई.' ब~J काका …ढ़ #वर मO कहते और प#
ु तक
%नकालकर पढ़ाने को तैयार हो जाते. अनमने भाव से लोगM को भी पढ़ने का नाटक करना
पड़ता.

और नाटक भी अकारथ तो जाता नहJं.

उस pदन ब~J काका ने pदनारं भ मO पढ़ाई क! श;आत


ु क! तो उनके बाल &शTय उखड़े हए
ु थे-

‘हम आपसे नहJं पढ़O गे...आप पZपात करते हa.' टोपीलाल जो दसरे
ू Dवा5थ4यM का अगआ
ु बना
हआ
ु था, बोला.

‘आप हमO %नरा ब`चा समझते हa...!' कb


ु क! ने भी साथ pदया. ब~J काका ने महसस
ू Xकया Xक
परJ
ू कZा टोपीलाल और कb
ु क! के साथ है . कारण उनक! समझ से परे था-

‘ऐसी bया बात है ?'

‘आप हJ सो5चए...हम आपसे bयM नाराज हa?' %नरालJ ने बनावटJ ग#


ु से मO बोलJ.
ू आदमी क! अbल तो वैसे हJ घास चरने चलJ जाती है .' ब~J काका ने कछ
‘बढ़े ु ऐसे कहा Xक
परJ
ू कZा क! हं सी छट
ू गई.

‘आप अपने बड़े Dवा5थ4यM को तो खब


ू कहानी-Xक#से सनाते
ु हa. आ9हा और भजन भी होते
हa...पर ब`चM के पीछे पड़े रहते हa Xक &सफ4 इन XकताबM मO &सर खपाते रहो. यह पZपात नहJं
तो और bया है !' ब~J काका को अपनी गलती का एहसास हआ
ु .

ु मझसे
‘सचमच ु भारJ भलू हई
ु है . मझे
ु ऐसा नहJं करना चाpहए था. आगे से आपके साथ यह
अ-याय नहJं होगा, बि9क हम आज हJ से...' तभी Xकसी ब`चे के रोने का #वर सनाई
ु पड़ा.
ब~J काका कहते-कहते ;क गए. सबका {यान उस ब`चे क! ओर चला गया.

‘अरे ! यह तो सदानंद है ...' एक ब`चे ने पहचाना. साथ हJ कZा मO चHु पी छा गई. ब~J काका
पढ़ाना छोड़कर उस ब`चे क! ओर बढ़ गए.

‘bया हआ
ु बेटे?' उ-हMने सदानंद के सामने बैठ उसके आंसू पˆछते हए
ु कहा.

‘मa भी पढ़ना चाहता हंू . लेXकन काका आने से मना करता है . आज मaने िजद क! तो उसने
खबू Dपटाई क!...'

‘bया नाम है त‡
ु हारे Dपता का.'

‘िजयानंद!' लड़के ने सं}ZHत-सा उ†र pदया.

‘वे त‡
ु हO रोकते bयM हa?' सदानंद चHु पी साधे रहा.


‘ग;जी मa बताऊं...' टोपीलाल उठकर बोला. ब~J काका ने उसक! ओर दे खा. वह बताने लगा-
‘सदानंद के Dपता अ`छे -खासे &म[ी हa. टोले के दसरे
ू &म[ी उनके काम क! तारJफ करते थे.
लेXकन न जाने कब उ-हO शराब क! लत गई. उसके बाद से उनका काम से {यान हटता चला
गया. टोले मO बदनाम भी होने लगे.

अब तो हालत यह है Xक रोज शाम को पीने को न &मले तो वे उखड़ जाते हa. लेXकन शराब
खरJदने के &लए ;पये भी चाpहए. इस&लए शौक को परा
ू करने के &लए उ-हO चोरJ क! लत
और लग गई. Dपछले सHताह उ-हO 5चनाई का लोहा कबाड़ी को बेचते हए
ु पकड़ &लया गया.
इसपर मा&लक ने उ-हO काम पर आने क! पाबंदJ लगा दJ थी.

बापू के कहने पर उ-हO काम पर तो रख &लया गया, लेXकन अब उनपर नजर रखी जाती है .
उनक! मजदरJ
ू भी उ-हO न &मलकर सदानंद क! मां को &मलती है . इससे वे 5चड़5चड़े हो गए
हa. कल रात शराब के &लए ;पये न दे ने पर उ-हMने सदानंद क! अ‡मा क! Dपटाई भी क! थी.'
‘समझ गया...' टोले के लोगM क! शराब क! आदत ब~J काका से %छपी न थी. वे चाहते थे उस
आदत को छड़ाना
ु . उसके &लए काम करना. मगर ब`चM क! पढ़ाई का काम उ-हO अ5धक
मह˜वपण4
ू लगता था. उसके &लए दसरे
ू कायr को टालते जा रहे थे. अब उ-हO लगा Xक उस
pदशा मO भी तhकाल काय4 आरं भ करना होगा. नहJं तो बात हाथ से %नकल भी सकती है .

‘तो तम
ु सचमच
ु पढ़ना चाहते हो बेटे?' उ-हMने सदानंद क! पीठ पर हाथ Xफराते हए
ु कहा.

‘हां, पर मa कb
ु क! के पास हJ बैठू ं गा.'

‘ठ_क है , कb
ु क! त‡
ु हारJ खास दो#त है तो हम त‡
ु हO उसी के पास जगह दO गे. लेXकन हमारJ भी
एक शत4 है . त‡
ु हO यहां रोज आना पड़ेगा?'

‘काका मारे गा तो?'

‘काका को मa समझा दं ग
ू ा. आगे से वे त‡
ु हO कछ
ु भी नहJं कहO गे...' ब~J काका ने आ2वासन
pदया. लड़का शांत हो गया. इसके बाद वे ब`चM क! ओर मड़े
ु , जो मनोयोग से उनक! बातO सन

रहे थे-

‘सदानंद आज से हJ हमारJ कZा मO बैठेगा और उसको कb


ु क! के बराबर मO जगह दJ जाएगी,
bयMXक कb
ु क! उसक! सबसे अ`छ_ दो#त है , bयM कb
ु क!?' कb
ु क! म#
ु करा

दJ. सदानंद क! उदासी भी छं टने लगी. ब`चM मO थोड़ी खसर


ु -पसर
ु हई
ु . कछ
ु दे र बाद ब~J
काका ने आगे का मोचा4 संभाल &लया-

‘ब`चो! अपनी Xकताब, कॉपी बंद कर लो. अब हम एक नया खेल आरं भ करO गे. इसे कहते हa,
खेल-खेल मO कDवता बनाना. मa एक पंिbत दं ग
ू ा. उसमO हर ब`चा अपनी और से एक पंिbत
जोड़ने का "यास करे गा. िजसक! पंिbत पसंद क! जाएगी, वह कDवता मO जड़ती
ु चलJ जाएगी.

कDवता परJ
ू होने पर हम उन सभी ब`चM को पर#
ु कार दO गे, िजनक! पंिbतयM से वह कDवता
बनी है . बोलो ब`चो, bया तम
ु सब इस खेल के &लए तैयार हो? याद रहे Xक सज4नाhमक होना,
मनTु यता का अ%नवाय4 लZण है . जो नए ढं ग से सोचते हa, वहJ नया गढ़ते हa.'

‘हम सभी तैयार हa?' ब`चM का समवेत #वर गंज


ू ा.

‘पंिbतयM को &लखेगा कौन? हाथ उठाकर बताइए!'

‘मa...!' कई आवाजO एक साथ आŠ.

ु क! के दो#त ने आज हJ से कZा मO आना शz


‘कb ु Xकया है , उसका लेख भी संद
ु र है . इस&लए
कDवता को &लखने क! िज‡मेदारJ कb
ु क! %नभाएगी, bयM कb
ु क!?'
‘जी!' कb
ु क! ने कॉपी-कलम संभालJ. ब`चे सावधान होकर बैठ गए.

सावधान होना, चेतना को जगाना और अपनी wबखरJ हई


ु शिbतयM को एकजट
ु कर लेना है .

"ाणीमाu के क9याण क! इ`छा से Xकए गए सजन


ृ से बड़ी कोई साधना नहJं है .

शहर तरbक! पर था. िजन pदनM उस wबि9डंग का %नमा4ण-काय4 आरं भ हआु , उन pदनM उसके
बराबर मO खालJ मैदान था. मजदरM
ू के ब`चे वहां खेलते. धमा-चौकड़ी मचाते. लोग अपने
मवेशी चराने को ले वहां आते. मगर कछ
ु महJनM के बाद उसके आसपास के भखं
ू डM पर
%नमा4ण काय4 होने लगे. मजदरM
ू और &मि[यM क! सं’या बढ़ने लगी.

धीरे -धीरे वहां सौ से अ5धक पUरवारM क! अ#थाई ब#ती बस गई. इतने लोगM को दे ख छोटे
दकानदार
ु , फेरJवाले उस ओर आने के &लए ललचाने लगे. इस बीच एक चालबाज ठे केदार ने
मैदान के &सरे पर दे शी शराब का बेचने का ठे का लेकर वहां दकान
ु खलवा
ु दJ. जहां गरJब
मजदरू अपनी पUर(म क! कमाई का बड़ा pह#सा बरबाद करने लगे.

शराब क! दकान
ु खलने
ु के बाद आसपास के Zेu मO अपराध-दर भी बढ़J थी. ब~J काका ने
प&लस
ु से शराब के ठे के को वहां से हटवाने का अनरोध
ु भी Xकया था. मगर शराब ठे केदार के
ऊंचे संपकr के कारण प&लस
ु उसपर हाथ डालने से कतरा रहJ थी. तब ब~J काका ने अदालत
क! शरण लJ. मगर कानन
ू क! पेचीद5गयM का सहारा लेकर ठे केदार

मकदमे
ु से बच %नकला. दबाव बनाने के &लए अपने पैसे के दम पर उसने कछ
ु भीमकाय गंड
ु े
भी खरJद &लए, जो उसके इशारे पर मरने-मारने के &लए तैयार होकर जाते थे.

ऐसे मO गरJब मजदरM


ू को शराब के चंगल
ु से बचाने का एकमाu रा#ता था Xक उ-हO उससे होने
वाले नकसान
ु के बारे मO बताया जाए. उनमO जागzकता लाई जाए. उ-हO बौDkक zप से इतना
समथ4 बनाया जाए Xक वे अपने भले-बरेु का %नण4य #वयं कर सकO. "ौढ़ &शZा ब~J काका के
इसी "यास का एक pह#सा थी. पर लोग उसमO उतनी ;5च हJ नहJं ले रहे थे.

ब~J काका उनक! मजबरJ


ू भी समझते थे. pदन-भर जी-तोड़ पUर(म के बाद उ-हO आराम क!
जzरत पड़ती. इस&लए खाना खाकर वे सीधे चारपाई क! ओर बढ़ जाते. ठे केदार के आद&मयM
ने मजदरM
ू के pदमाग मO चतराईपव4
ु ू क यह बात wबठानी शz
ु कर दJ थी Xक शराब का नशा
थकान से मिb
ु त pदलाकर, पल-भर मO उ-हO Xफर तरोताजा कर सकता है । मजदरू भी उनके
भलावे
ु मO आते जा रहे थे। ब~J काका जानते थे Xक इसे रोकने के &लए बड़े आंदोलन क!
जzरत है . साथ मO समय क! भी. यह Xकस zप मO संभव हो, वे इसी pदशा मO सोच रहे थे.


‘ग;जी , कDवता क! पहलJ पंिbत bया होगी?' ब~J काका को चप
ु दे ख, टोपीलाल ने टोका.
‘अरे हां, मa तो भल
ू हJ गया, तम
ु बाल-कDवयM के &लए कDवता क! पहलJ पंिbत तो मझी
ु को
दे नी है .' ब~J काका ने कहा, ‘कDवता क! पहलJ पंिbत है ...' ब~J काका एक पल के &लए ;क
गए.

‘bया....?' ब`चM का कौतहल


ू उनका जोश बन गया.

‘कDवता क! पहलJ पंिbत है -गटका


ु खाकर थक
ू O लाला. अब इस कDवता को आप सब &मलकर
आगे बढ़ाइए.

ब`चे सोचने लगे. आपस मO फसफसाने


ु ु क! आवाज भी हई
ु . सहसा टोपीलाल ने जोड़ा-‘मंह
ु है
या Xक गंदा नाला.'

‘इतनी ज9दJ, वाह! तमने


ु तो सचमच
ु कमाल कर pदया...अfभत
ु ! अब इससे आगे क! पंिbत
कौन बनाएगा?' ब~J काका ने हषा4%तरे क मO कहा.

‘जमकर खाया पान मसाला-ठ_क रहे गी ग;जी


ु ? नए-नए आए लड़के सदानंद ने भी उस खेल मO
pह#सेदारJ %नभाते हए
ु कहा.

ु ठ_क...अब बाक! ब`चM मO से कोई इसको आगे बढ़ाए.'


‘wबलकल

‘मंह
ु मO छाला, पेट मO छाला.' एक ब`चे ने जोड़ा िजसे ब~J काका ने हटा pदया-

‘चल सकता है , पर चलताऊ है . कोई ब`चा इससे भी बेहतर जोड़कर pदखाएगा?'

‘जमकर खाया पानमसाला, हआ


ु कa सर Dपटा pदवाला.' इस बार कb
ु क! ने कमाल pदखाया.

‘काले धंधे जैसा काला...' ब`चM मO कDवता गढ़ने क! होड़ जैसी मच गई.

‘पानमसाला...पानमसाला.'


‘धोती-कता4 सने पीक से...'

‘मंह
ु मO गटर %छपाए लाला.'

‘शाबाश ब`चो, तम
ु लोग तो जी%नयस से भी बढ़कर हो.' ब~J काका सचमच
ु उhसाpहत थे.
कDवता गढ़ने का उनका "योग इतना सफल होगा, ब`चे उसमO इस उhसाह से भाग लO गे, इसक!
उ-हMने क9पना भी नहJं क! थी.

‘माथा पीट रहJ लालाइन.'

‘अभी वbत है संभलो लाला.' टोपीलाल क! पंिbत को %नरालJ ने परा


ू Xकया.
‘आई अbल कसम Xफर खाई.' ब~J काका ने कDवता को समापन क! ओर ले जाने के &लए
नई पंिbत सझाई
ु . इसपर कb
ु क! ने झट से जोड़ pदया.

‘अब न छएं
ु गे पान मसाला.'

‘शाबाश! इसके बाद हम अगलJ कDवता से इस खेल को आगे बढ़ाएंगे. उससे पहले कb
ु क! तम

परJ
ू कDवता को कZा को पढ़कर सनाओ◌े
ु ...'

‘जी!' कb
ु क! ने खड़े होते हए
ु कहा और कॉपी से कDवता को सनाने
ु लगी-

गटका
ु खाकर थक
ू O लाला

मंह
ु है या Xफर गंदा नाला

जमकर खाया पान मसाला

हआ
ु कa सर Dपटा pदवाला

काले धंधे जैसा काला

पानमसाला...पानमसाला

धोती-कता4
ु सने पीक से

मंह
ु मO गटर %छपाए लाला

माथा पीट रहJ लालाइन.

अभी वbत है संभलो लाला

आई अbल कसम Xफर खाई

अब न छएं
ु गे पान मसाला.

‘यह परJ
ू कDवता तैयार हई
ु ...अब हम नई कDवता पर काम करO गे. bयM ब`चो, तैयार हो.'

‘जी! ब`चM ने अपना उhसाह pदखाया. सहसा %नरालJ खड़ी होकर एक लड़के क! ओर इशारा
करते हए
ु बोलJ-

ु जी, मaने मलका


‘ग; ू को कई बार पानमसाला खाते हए ु दे खा है . यह अपने Dपताजी क! जेब से
पैसे चराकर
ु पानमसाला खरJदता है .' ब~J काका पहले से हJ उस लड़के को बड़े {यान से दे ख
रहे थे. िजस समय दसरे
ू ब`चे कDवता गढ़ने मO उhसाह pदखा रहे थे, वह

गमसम
ु ु और अपने आप मO डबा
ू हआ
ु था.
‘bयM मलका
ू , bया %नरालJ सच कह रहJ है?'

‘जी!' मलका
ू अपराधी क! भां%त &सर झकाए
ु खड़ा हो गया.

‘तो इस कDवता से तमने


ु कोई सीख लJ?'

‘मa कसम खाता हंू Xक आज के बाद गटका


ु और पानमसाला को हाथ तक नहJं लगाऊंगा.'
मलकाू ने वचन pदया. उस समय उसके चेहरे पर चमक थी. वह उसके पbके इरादे क! ओर
संकेत कर रहJ थी. ब~J काका समेत सभी Dवा5थ4यM के चेहरे „खल उठे .

ु जी, %नरालJ क! अ‡मा पानमसाला बेचती है . टोले के yयादातर ब`चे वहJं से खरJदते हa.'
‘ग;
एक ब`चे ने %नरालJ क! ओर दे खकर &शकायत क!.

‘%नरालJ क! मां हJ bयM, टोले मO तो और भी कई दकानO


ु हa, जहां पानमसाला और गटका
ु बेचे
जाते हa.' सदानंद ने %नरालJ को संकट से उबारने के &लए उसका साथ pदया. कछ
ु पल Dवचार
करने के प2चात ब~J काका ने कहा-

‘जो ब`चे गटका


ु और पानमसाला खाते हa, वे तो दोषी हa हJ. वे दकानदार
ु भी कम दोषी नहJं हa
जो मामलJ
ू लाभ के &लए उनक! wबq! करते हa. दोष उन माता-Dपता का भी है जो ब`चM को
इनसे होने वाले नकसान
ु क! जानकारJ नहJं दे ते या खद
ु भी इन gयसनM के &शकार हa.'

ु जी, मa अपनी मां से कहंू गी Xक गटका


‘ग; ु और पानमसाला अपनी दकान
ु से न बेचO.' %नरालJ
ने परJ
ू कZा को आ2वासन pदया.

‘जैसे तेरJ मां सभी काम तझसे


ु पछकर
ू करती है ?' एक ब`चे ने कटाZ Xकया, %नरालJ सकचा

गई. मगर उसका इरादा और भी …ढ़ हो गया.

‘मां मेरJ बात को कभी नहJं टालती. और यह बात तो मa मनवाकर हJ रहंू गी.' %नरालJ ने जोर
दे कर बोलJ. उसके #वर क! …ढ़ता और आhमDव2वास दे ख सभी दं ग रह गए. खासकर
टोपीलाल. वह कछ
ु दे र तक %नरालJ पर नजर जमाए रहा. Xफर अचानक उसको कछ
ु याद
आया-

‘मगर टोले के बाक! दकानदारM


ु का bया होगा. उन बड़M को कैसे रोका जाएगा, जो खद
ु इन
गंदJ आदतM के &शकार हa.'

‘यह एक गंभीर सम#या है . इस पर हम आगे Dवचार करO गे.' ब~J काका बोले.

ु जी अगलJ कDवता शz
‘ग; ु करO ?' एक लड़के ने कहा. इसपर ब~J काका म#
ु करा pदए-
‘जzर! लेXकन अब समय हो चका
ु है . हम सHताह मO एक pदन बालसभा के &लए तय रखO गे.
अगले सHताह आज हJ के pदन ऐसी हJ बालसभा होगी. उसके &लए मa एक पंिbत दे रहा हंू .
उस पंिbत के आधार पर आपको परJ
ू कDवता &लखनी है . िजस Dवाथ क! कDवता उस
बालसभा मO सबसे अ5धक पसंद क! जाएगी, उसको पर#
ु कार &मलेगा.

पंिbत है -

‘जी...!' ब`चM का #वर गंूजा.

‘नशा करे दद4ु शा घरM क!...!'


‘ग;जी मa इसे आगे बढ़ाऊं?' टोपीलाल ने हाथ उठाकर पछा
ू .

‘अभी नहJं, अगले सHताह, परJ


ू कDवता सनाना
ु .' ब~J काका ने आ2वासन pदया. इसके बाद छo
ु टJ
क! घोषणा कर दJ गई. जाने से पहले उ-हMने सभी ब`चM को अपनी ओर से उपहार दे कर
Dवदा Xकया.

मन मO कछ
ु करने का, गढ़ने का उhसाह हो तो सजन
ृ gयिbत के चUरu क! Dवशेषता बन जाता
है .

सजन
ृ क! मौ&लकता अ%नवच4नीय आनंद क! सिT
ृ ट करती है .

%नरालJ ने उसी रात अपनी मां से गटका


ु और पानमसाला बेचने को मना कर pदया. मां पहले
तो उसक! बात सनती
ु रहJ, Xफर एकाएक उखड़ गई-

‘मa अपने सख ु के &लए थोड़े हJ बेचती हंू . लोग खरJदने आते हa. sाहकM मO कछ ु ब`चे भी होते
हa. मa न दं ू तो वे िजद करते हa, कछ
ु के तो मां-बाप भी इसके &लए पैसे दे ते हa. उन सबक!
खशी
ु के &लए रखना हJ पड़ता है.'

ु कैसी! इससे तो ब`चM का नकसान


‘खशी ु हJ होता है .' %नरालJ ने तक4 Xकया.

‘यह तो उनके मां-बाप को समझाना चाpहए!'

‘कल से तम
ु ऐसे ब`चM को मना कर दे ना.' %नरालJ ने दबाव डाला.

ु दो पैसे बचते हa तो bयM छोड़ंू! और िजनको लत है , वे बाज थोड़े हJ आएंगे. मa नहJं


‘मझे
रखंूगी तो वे दसरJ
ू दकान
ु से खरJदO गे. Xफर ये सब चीजO खाने के &लए हJ तो उनके मां-बाप
उ-हO पैसे दे ते हa.'
ु भी हो, आगे से तम
‘कछ ु यह पाप अपने &सर पर नहJं लोगी.' %नरालJ आदे शाhमक म~ा
ु मO थी.
जैसे Xकसी ब`चे को समझा रहJ हो. उसक! िजद के आगे मां को अंततः झकना
ु हJ पड़ा.
%नरालJ को लगा Xक अब वह कZा मO &सर उठाकर "वेश कर सकेगी.

टोपीलाल समेत सभी ब`चM को "तीZा थी Xक सHताह ज9दJ परा


ू हो. बालसभा का pदन आए.
उ-हO लगता था Xक उस pदन सबकछ
ु उलट-पलट जाता है . ग;जी
ु , ग;जी
ु नहJं रहते. न उस
pदन उनका कहा हआ
ु सवŸपUर होता है. बालसभा मO तो जो भी नया कर दे , गढ़ दे वहJ
मह˜वपण4
ू मान &लया जाता है . ग;
ु जी समेत सब उसक! तारJफ करने लग जाते हa.

टोले मO उस बालसभा क! चचा4 हर ब`चे ने अपनी तरह से, अपनी जबान


ु मO क!. िजसका उन
ब`चM पर गहरा असर पड़ा जो अभी तक पाठशाला जाने से बच रहे थे.

पUरणाम यह हआु Xक अगले pदन से हJ पाठशाला मO नए Dवा5थ4यM का आना आरं भ हो गया.


ब`चM के माता-Dपता पर भी असर पड़ा. वे खद
ु अपने ब`चM को लेकर ब~J काका के पास
आने लगे-

ु जी, हमारJ िजंदगी तो जैसे-तैसे कट गई. अब इस ब`चे का जीवन आपके हाथM मO है .


‘ग;
इसको संवारने क! िज‡मेदारJ अब आपक! है .'

‘लेXकन इसके &लए प#


ु तकO, कॉपी, कलम, ब#ता...आप दे ख हJ रहे हa Xक मa तो अधनंग फक!र
हंू . मेरे पास आमदनी का कोई साधन तो है नहJं.' ब~J काका म#ु कराकर कहते. उस समय
उनका म’ ु य {येय होता ब`चे के माता-Dपता को आजमाना, उसक! &शZा के "%त गंभीरता को
परखना. एक बालसभा इतनी असरकारक हो सकती है , इसक! उ-हMने क9पना भी नहJं क! थी.
उसक! सफलता ने उ-हO उन सब DवचारM पर अमल करने का अवसर pदया था, िजनके बारे मO
वे अभी तक &सफ4 सोचते हJ आए थे.

‘मेरे ब`चे के &लए कॉपी, कलम और XकताबM के ऊपर जो खच4 होगा, उसको मa खद
ु उठाऊंगा.'
ब`चे का Dपता कहता.

‘हम दोनM मेहनत-मजदरJ


ू करO गे, लेXकन इसक! पढ़ाई मO हJला न आने दO गे. आपक! फ!स भी
हम हर महJने &भजवाते रहO गे.' ब`चे क! मां यpद साथ होती तो कछ
ु ऐसा हJ आ2वासन दे ती.

‘&भजवाना कैसा, मa खद
ु दे कर जाऊंगा...!' ब`चे का Dपता बीच मO हJ टोक दे ता.

‘फ!स इतनी आव2यक नहJं है . अपनी ऋkा से पाठशाला के नाम जो भी तम


ु दे ना चाहो, उससे
हमारा काम चल जाएगा. नकद न हो तो दाल-चावल, नमक-आटा कछ
ु भी, जो ब`चM के ना2ते
के काम आ सके.'
िजस सं#था क! ओर से ब~J काका काम कर रहे थे, उसके पास ऐसे काय4qमM के &लए धन
क! पया4Hत gयव#था थी. Xफर भी यह मानते हए ु Xक म“ ु त मO "ाHत व#तु अbसर उपे}Zत
मान लJ जाती है , ब~J काका चाहते थे Xक ब`चM के माता-Dपता उनक! &शZा के &लए कछु न
कछ
ु अव2य खच4 करO . िजससे &शZा के "%त उनक! गंभीरता बनी रहे . सं#था पर कम से कम
आ5थ4क बोझ पड़े. लोग #वावलंबी बनO. इस&लए सHताह या महJने के बाद उनक! पाठशाला मO
पढ़ने वाले ब`चM के अ&भभावक जो भी चीज लाते उसको वह खशी
ु -खशी
ु रख लेते थे.

भO ट मO &मलJ हर व#तु का Uरकाड4 रखा जाता. इसके &लए ब~J काका ने टोपीलाल को एक
कॉपी दJ हई
ु थी. िजसमO व#तु का नाम और उसक! माuा को चढ़ pदया जाता. उस कॉपी मO
%नकालJ गई माuा भी दज4 क! जाती, उसे हर सHताह "ौढ़ &शZा मO आए अ&भभावकM के
सामने "#तत
ु Xकया जाता था.

।।।।।।।।।।।।।।5

अभी तक वे "ायः उपे}Zत हJ होते आए थे. उ-हO लगता था Xक वे &सफ4 सनने


ु -सहने के &लए
बने हa. घर के बाहर उनक! राय Xकसी काम क! नहJं है . इस&लए "ारं भ मO जब

ब~J काका ने चंदे का pहसाब-Xकताब बताना शz


ु Xकया तब उ-हO बहत
ु Dव5चu लगा था-

‘pहसाब-Xकताब के बारे मO हम जानकर bया करO ग?े ' एक pदन ब~J काका चंदे का pहसाब सामने
रख रहे थे, तब एक मजदरू ने सकचाते
ु कहा.

‘आपका पैसा है , उसका pहसाब भी आप हJ को रखना चाpहए.'

‘हम पढ़े -&लखO हM तब ना pहसाब रखO.'

‘इसी&लए तो मa यहां आया हंू ◌ं Xक आप पढ़-&लखO . ताXक िजतना जzरJ है, उतना pहसाब तो
रख लO .' इन बातM का बड़M पर भले हJ कोई "भाव न पड़े. पर ब`चे उनसे खब ू "ेरणा लेते थे.

दसरM
ू को "ेUरत करना भी एक कला है . िजसके &लए Dवचार एवं कम4 दोनM हJ #तर पर (ेTठ
बनना पड़ता है . "ायः महान gयिbतhव हJ यह कर पाते हa. लेXकन "ेरणा लेना भी सबके &लए
संभव नहJं. न यह छोटJ बात है, न ओछ_. bयMXक इसी से Dवचार और कम4 क! परं परा को
Dव#तार &मलता है .

कभी-कभी अ%तसाधारण कहे जाने वाले लोग भी असाधारण zप से "ेUरत कर जाते हa.

वह pदन ब~J काका जीवन मO अDव#मरणीय बन गया. पाठशाला क! छo


ु टJ के बाद वे Dव(ाम
कर रहे थे. तभी सामने से आती एक औरत पर उनक! %नगाह पड़ी. तेज कदमM से से वह
उ-हJं क! ओर बढ़J आ रहJ थी. वे खड़े हो गए. करJब आने पर वह औरत pठठक! और ब~J
काका के सामने घंघ
ू ट %नकालकर खड़ी हो गई. ब~J काका उसको पहचानने का "यास करने
लगे-

ु क! आपक! पाठशाला मO पढ़ने आती है , मa उसी क! मां हंू .'


‘कb

‘हां..हां, बहत
ु समझदार है त‡
ु हारJ बेटJ...!'

‘सब आप हJ का "ताप है . कb
ु क! के Dपता तो रहे नहJं. मa ठहरJ नासमझ जो उसके @याह क!
ज9दJ कर रहJ थी. वह तो भला हो आपका और टोपीलाल का, जो मेरJ आंखO खोल दJं. नहJं
तो अब तक कb
ु क! ससराल
ु मO अपनी Xक#मत को रो रहJ होती. भगवान आप दोनM को लंबी
उ‘ दे ,'

‘नहJं-नहJं, उस मासम ू को इतनी ज9दJ @याह मO लपेट दे ना उ5चत न होगा. पढ़ने मO बहत
ु हJ
हो&शयार है , त‡
ु हारJ बेटJ . मौका &मला तो बहत
ु दरू तक जाएगी.' ब~J काका बीच हJ मO बोल
पड़े, ‘मa अपनी पाठशाला के कछ
ु ब`चM का दा„खला बड़ी पाठशाला मO कराने क! सोच रहा हंू .
कb
ु क! भी उनमO से एक है . मेरJ को&शश होगी Xक इस टोले के ब`चM क! पढ़ाई का सारा खच4
वहां भी सरकार हJ उठाए.'

ु क! के बापू ने बड़े Hयार से उसका नाम कमpदनी


‘कb ु ु रखा था. बहत
ु भला आदमी था वह.
अपनी बेटJ को लेकर उसके ढे र सारे अरमान थे. मेहनती तो इतना था Xक

चौदह-पं~ह घंटे लगातार काम पर डटा रहता. अकेला दो आद&मयM क! बराबरJ कर लेता था.
कभी Xकसी से ऊंचा बोल नहJं बोला, पर न जाने कैसे वह बरेु आद&मयM क! सोहबत मO पड़
गया. जआ
ु और शराब उसक! आदत मO शमार
ु हो गए. उसी ने हमO तबाह Xकया. उसी शौक
के कारण एक pदन उसको जान से हाथ धोना पड़ा.'

कहते-कहते वह हलकने
ु लगी. मानM वषr पराने
ु दद4 को परJ
ू तरह खोल दे ना चाहती हो. ब~J
काका असमंजस थे. समझ हJ नहJं पा रहे थे Xक उसे Xकस तरह तस9लJ दO . कैसे समझाएं.
उनके &लए तो उसके आने का कारण भी पहे लJ बना हआ ु था. मगर कbु क! क! अ‡मा को
होश कहां. वह तो भावावेश मO बस बोले हJ जा रहJ थी. अपने घर, अपने जीवन-संघष4 से जड़ी

बातO -

‘Dपछले महJने मझे


ु कज4 उठाकर भात भरना पड़ा. इसी&लए पाठशाला को कछ
ु दे नहJं पाई.
इस महJने क! कमाई उस कज4 को चकाने
ु मO उठ गई. आप मेरे Dपता समान हa. कb
ु क! को
अपनी ब`ची क! तरह पढ़ा रहे हa. आपका एहसान मa न भी मानंू तो भी पाठशाला का खच4
तो खच4 क! हJ तरह चलेगा. &सफ4 दआ
ु मांगने से तो घर-भंडार भरते नहJं...भात दे कर लौट
रहJ थी तो मेरJ ननद ने थोड़े-से %तल बांध pदए थे. उ-हJं के लœडू बनाकर लाई हंू . आप इ-हO
मेरJ ओर से ना2ते के समय ब`चM मO बांट दे ना. बहत
ु एहसान होगा आपका.'
उसका मंतgय समझते हJ ब~J काका क! आंखO भर आŠ. पहलJ बार उ-हO अपने "यास क!
साथ4कता पर, अपने काय4 ऊंचाई पर गव4 हआ
ु . पहलJ बार हJ जाना Xक गरJबी भले हJ
मेहनतकश को तोड़कर रख दे , वह एहसान से कभी नहJं मरता.

‘पाठशाला का %नयम है Xक ब`चM से &मलने वालJ हर व#तु का Uरकाड4 रखा जाता है . Uरकाड4
रखने का काम टोपीलाल का है . इस समय वह तो यहां है नहJं. इस&लए %नयमानसार
ु त‡
ु हारJ
भO ट कल हJ #वीकार क! जानी चाpहए. लेXकन इस समय मa त‡
ु हO लौटाकर त‡
ु हारJ भावनाओं
क! अवमानना नहJं कर सकता. तम
ु लœडू 5गनकर रख जाओ. कल सबह
ु मa उ-हO Uरकाड4 मO
चढ़वा लंग
ू ा.'

कb
ु क! क! अ‡मा ने लœडू 5गन pदए. वह जाने लगी तो ब~J काका बोले-‘साव4ज%नक जीवन
जीते हए
ु मझे
ु पचास से अ5धक वष4 बीत चक
ु े हa. इस अव5ध मO बापू और Dवनोबा क! #म%ृ त
के अलावा जीवन मO जो कछ
ु अम9
ू य और #मरणीय है , उसमO त‡
ु हारा यह उपहार भी
सि‡म&लत है . यह घटना मa कभी भला
ु नहJं पाऊंगा.' कb
ु क! क! अ‡मा wबना कछ
ु कहे आगे
बढ़ गई. ब~J काका धंुधलJ आंखM से उसको जाते हए
ु दे खते रहे . उसके ओझल होते हJ उनक!
%नगाह सामने पड़े लœडओं
ु पर pटक गई.

%न2छल मन से दJ गई भOट अम9


ू य होती है .

ऐसी भO ट िजसे &मले वह सचमच


ु बहत
ु भाcयशालJ होता है .

उस pदन कb
ु क! क! अ‡मा को जाते दे ख ब~J काका यहJ सोच रहे थे. कb
ु क! के Dपता क!
मौत नशे क! लत के कारण हई ु थी. ब#ती के कई घर नशे के कारण बरबाद हो चक ु े हa. हर
साल लाखM िजंदगा%नयां नशे के कारण उजड़ जाती हa. नशा मनTु य के शरJर को खोखला
करता है , pदमाग को pदवा&लया बनाता है . पUरवारM को तोड़कर रख दे ता है . महाhमा गांधी नशे
के Dव;k थे. जब भी अवसर &मला उ-हMने नशे के Dव;k लोगM को चेताया. उ-हO उससे दरू
रहने क! सलाह दJ.

बापू के DवचारM क! "ासं5गकता तो आज भी है . हर यग


ु मO जब तक असंतोष है , अ-याय है -
तब तक तो वह रहे गी हJ. ब~J काका सोचते जा रहे थे. वे इस pदशा मO कछ
ु करना चाहते थे.
कछ
ु ऐसा जो साथ4क हो. िजसको परा
ू करने से मन को तस9लJ &मले. बालसभा क! कDवता
"%तयो5गता को नशे पर कOp~त करने के पीछे भी उनका यहJ उfदे 2य था.

कDवता का Dवषय जानबझकर


ू नशे को चुना था. उ-हO इस बात क! "तीZा थी Xक बालसभा मO
ब`चे नशे के Dव;k खद
ु को कैसे अ&भgयbत करते हa. उनक! अ&भgयिbत उनक! ब#ती और
उनके अपनM पर Xकतनी असरदार &सk होती है ! कैसे वे उसको उसको और असरदार बना
सकते हa! वे सोच रहे थे Xक ब`चM को अपने अ&भयान से कैसे जोड़ा जाए, ताXक उ-हO यह
अ&भयान अपना-सा, अपने हJ अि#तhव क! लड़ाई जान पड़े. मगर उनक! पढ़ाई का जरा-भी
हजा4 न हो.

सHताहांत मO बालसभा का pदन भी आ गया. कb


ु क! क! मां ‰ारा भO ट Xकए गए लœडू उ-हMने
इस अवसर के &लए संभाल रखे थे. उस pदन सवेरे हJ ब`चM का पहंु चना आरं भ हो गया. ब~J
काका ने उस pदन ब#ता लाने क! छट
ू दJ थी. सो अ5धकांश ब`चे खालJ हाथ थे. कागज-
कलम-ब#ता जैसे पाठशाला के तय उपकरणM से मिb
ु त का #वाभाDवक एहसास उन सभी के
उ9लास का कारण बना हआ
ु था.

ु उ‡मीद है Xक DपछलJ बालसभा मO pदया गया काम आप सभी ने परा


‘मझे ू कर &लया होगा?'
ब~J काका ने श;आत
ु करते हए
ु कहा. इसपर कई ब`चM के चेहरे चमक उठे . कछ
ु तनाव से
ल&लयाने लगे.

‘जो DपछलJ बालसभा मO pदया गया काम Xकसी कारणवश नहJं कर पाए हM, वे परे शान न हM,
आज उ-हO भी अवसर &मलेगा Xक वे आगे क! "%तयो5गता मO खद
ु को साwबत कर सकO.
टोपीलाल, तम
ु हमO बताओ Xक आज क! बालसभा का Dवषय bया है ?'

‘सम#या-प%त4
ू , आपने हमO एक पंिbत दJ थी, िजसपर परJ
ू कDवता &लखकर लानी थी...'


‘तमने कDवता &लखी?'

‘जी हां!' टोपीलाल ने गव4 सpहत बताया.

‘ठ_क है , हम सब त‡
ु हारJ कDवता सनO
ु ग.े लेXकन उससे पहले %नरालJ हमO उस कDवता-पंिbत के
बारे मO याद pदलाएगी, bयM %नरालJ?'

‘जी ग;जी
ु ...पंिbत है -नशा करे दद4
ु शा घरM क!.' %नरालJ ने DपछलJ सभा क! कार4 वाहJ अपनी
कॉपी मO &लख लJ थी.

‘नशा करे दद4ु शा घरM क!...इस पंिbत पर जो ब`चे कDवता &लखकर लाए हa, वे अपने हाथ ऊपर
कर लO .' केवल दो-तीन हाथ हJ ऊपर उठे . इस बीच एक ब`चा &ससकने लगा. ब~J काका चˆक
गए-

‘bया हआ
ु , कौन है ?'

‘सदानंद है ग;जी
ु .' सदानंद के बराबर मO बैठ_ कb
ु क! ने कहा.

‘रो bयM रहा है?'


‘Dपछले सHताह जबसे आपने कDवता क! पंिbत दJ थी, तभी से इसका जी बहत
ु उदास है .
कहता है Xक जैसे कDवता क! पंिbत क! ओर {यान जाता है, उसको अपने घर क! दद4ु शा याद
आ जाती है .'

सभी को मालम
ू था Xक सदानंद के Dपता को शराब क! बरJ
ु लत है . इस कारण उसके घर मO
अbसर झगड़ा रहता है . यह याद आते हJ ब`चM के उ9लास को घनी उदासी ने ढक &लया.
कछ
ु दे र के &लए तो ब~J काका भी %न;†र हो गए. लेXकन उ-हMने ज9दJ हJ खद
ु को संभाल
&लया-

‘सदानंद तो कDवता परJ


ू कर चका
ु है , उसने हाथ उठाया था.' ब~J काका के #वर मO आ2चय4 था.
Xफर पल-भर शांत रहने के बाद बोले-‘धीरज रखो बेटे, यह सम#या &सफ4 तम
ु अकेले क! नहJं
है . कई ब`चM क!, बि9क परेू समाज क! और इस तरह हम सब क! है . हम इसपर खले
ु मन
से Dवचार करO गे. संभव हआ
ु तो उसके %नदान के &लए Xकसी नतीजे पर पहंु चOगे भी. Xफलहाल
जो ब`चे कDवता &लखकर लाए हa, वे तैयार हो जाएं. bयM टोपीलाल, bयM न आज त‡ ु हJं से
श;आत
ु कर लJ जाए?'

‘जी!' टोपीलाल खड़ा हो गया और जेब से कागज %नकालकर सनाने


ु लगा-

छोटे मंह
ु से बात बड़M क!

नशा करे दद4ु शा घरM क!.'

‘शाबाश!' कDवता क! "थम पंिbत सनते


ु हए
ु ब~J काका ने मंह
ु से बरबस %नकल पड़ा. टोपीलाल
कDवता पढ़ता गया-

छोटे मंह
ु से बात बड़M क!

नशा करे दद4ु शा घरM क!

पान, सपारJ
ु , गटका
ु , बीड़ी,

सरा
ु wबगाड़O दशा घरM क!

चरस, अफ!म और गांजे से

हालत ख#ता हई
ु घरM क!

बरतन-भांडे सब wबक जाते

इyजत बंटाधार घरM क!


कDवता समाHत हईु तो ब`चM ने ता&लयां बजाŠ. ब~J काका भी पीछे नहJं रहे . बि9क वे दे र
तक, उhसाह के साथ ता&लयां बजाते रहे . उसके बाद उ-हMने दसरे
ू ब`चे से कDवता सनाने
ु को
कहा. उसक! कDवता भी पसंद क! गई. उसके बाद जो ब`चे कDवता &लखकर लाए थे, सभी क!
कDवताओं को बारJ-बारJ से सना
ु गया. अंत मO ब~J काका ने सदानंद से अपनी कDवता सनाने

को कहा.

सदानंद के खड़े होते हJ ब`चे अपने आप ता&लयां बजाने लगे. इस बार ता&लयM मO पहले से
कहJं yयादा जोश था. बाद मO ग;जी
ु से आWा लेकर सदानंद ने अपनी कDवता शz
ु क!-

न छोटे , न शम4 बड़M क!

नशा करे दद4ु शा घरM क!

सदानंद के इतना कहते हJ परJ


ू कZा ता&लयM क! गड़गड़ाहट से गंूज उठ_.

‘वाह-वाह!' ब~J काका के मंह


ु से %नकला, ‘बहत
ु अ`छे ! आगे पढ़ो बेटा. पढ़ते जाओ...शाबाश!'

सदानंद आगे सनाने


ु लगा-

न छोटे , न शम4 बड़M क!

नशा करे दद4ु शा घरM क!

कंगालJ आ पसरे घर मO

नीयत wबगड़े बड़े-बड़M क!

घर बीमारJ से भर जाए

खशहालJ
ु &मट जाए घरM क!

Uर2तM मO आ जाएं दरारO

इyजत होवे खाक बड़M क!

ब`चे रोते XफरO गलJ मO

औरत भखी
ू मरO घरM क!

कDवता परJ
ू होते हJ ब`चM ने दगने
ु ु जोश के साथ ता&लयां बजाना शz
ु Xकया. उसके बाद तो
दे र तक ता&लयां बजती रहJं. खद
ु ब~J काका भी ता&लयM क! गड़गड़ाहट के बीच. आंखM मO
नमी %छपाए. कहJं खो-से गए. सध
ु लौटJ तो सीधे सदानंद के पास पहंु चकर उसक! पीठ
थपथपाने लगे-
‘वाह...वाह! तमने
ु तो कमाल कर pदया. जब मaने इस काय4qम क! योजना बनाई थी, तो मझे

इसक! कामयाबी पर इतना भरोसा नहJं था. तम
ु सबने मेरJ उ‡मीद से कहJं बढ़कर कर
pदखाया है . अब मझे
ु Dव2वास है Xक मa अपने लय क! ओर आसानी से बढ़ सकता
हंू ...शाबाश, ब`चो शाबाश!'

ब~J काका भाव-Dवtवल थे. इतने Xक अपनी भावनाओं को gयbत करने के &लए उनके पास
श@द भी नहJं थे. कछ
ु दे र तक कZा मO ऐसा हJ माहौल बना रहा. अंत मO ब~J काका ने ब`चM
को संबो5धत Xकया-

‘Dपछले सHताह मaने कहा था Xक अ`छ_ कDवता को पर#


ु कृ त Xकया जाएगा. अ`छ_ कDवता का
फैसला आप सब क! राय से होगा. जरा बताओ तो, यहां पर सनाई
ु गई कDवताओं मO सबसे
अ`छ_ रचना आपको Xकसक! लगी?'

‘सदानंद क!...!' कZा मO गंज


ू ा. उनमO सबसे ऊंची आवाज टोपीलाल क! थी.

‘कDवता तो टोपीलाल क! भी बरJ


ु न थी.' ब~J काका ने म#
ु कराते हए
ु कहा और अपनी %नगाह
टोपीलाल पर जमा दJ.

‘पर सबसे अ`छ_ कDवता का पर#


ु कार तो सदानंद को हJ &मलना चाpहए.' टोपीलाल ने ऊंचे
#वर मO कहा. बाक! ब`चM ने भी उसका साथ pदया.

‘bयM?'

‘सदानंद क! कDवता हJ सव4(ेTठ है .'

‘कैसे?' इस सवाल पर सभी Dवाथ एक-दसरे


ू का मंुह दे खने लगे. ब~J काका ने अनभव
ु Xकया
Xक ब`चM को सबसे अ`छ_ और अ`छ_ के बीच अंतर करने क! समझ तो है , लेXकन वे उसको
श@दM मO gयbत करने मO असमथ4 हa. तब ब`चM क! मि2
ु कल को आसान करते हए
ु उ-हMने
कहा-

‘ब`चो, अ`छ_ कDवता के &लए जzरJ है Xक वह कDव के अपने अनभव


ु से ज-म ले. सदानंद
क! कDवता उसक! %नजी अनभ%तयM
ु ू क! उपज है . उसने अपने जीवन मO जो दे खा-भोगा, उसी
को श@दM मO gयbत Xकया है . इस&लए उसक! कDवता हमारे pदलM को छू लेती है . आज क!
सव4(ेTठ कDवता का स‡मान सदानंद को हJ &मलना चाpहए.' परJ
ू कZा एक बार पनः
ु ता&लयM
से गंज
ू उठ_.

सदानंद को पर#
ु कृ त करने के बाद ब~J काका एक बार Xफर ब`चM क! ओर मड़े
ु और बोले,
‘नशा हमारे जीवन को कैसे बरबाद कर रहा है, इससे हम सभी पUर5चत हa. बि9क उस uासदJ
को अपने जीवन मO साZात भोग रहे हa. नशा यंू तो परेू पUरवार को बरबादJ क! ओर ले जाता
है , परं तु उसका सबसे yयादा &शकार ब`चे हJ होते हa. बहत
ु से ब`चM क! तो &शZा भी परJ

नहJं हो पाती. बीमार हM तो समय पर इलाज से वं5चत रह जाते हa. Hयार के #थान पर
नफरत और उपेZा &मलती है . िजससे उनका Dवकास अधरा
ू रह जाता है .

इन कDवताओं मO भी नशे से होने वालJ बरबाpदयM क! ओर संकेत Xकया गया है . हमO नशे क!
लत से बचना चाpहए. जो लोग नशे के &शकार हa, उ-हO उससे उबारने क! को&शश भी करनी
चाpहए. मझे
ु खशी
ु है Xक %नरालJ के कहने पर उसक! मां ने अपनी गमटJ
ु से गटका
ु और
पानमसाला बेचना बंद कर pदया है . लेXकन ब#ती और उसके आसपास

ऐसे कई दकानदार
ु हa, जो अपने मामलJ
ू लालच के &लए ये सब चीजO बेचते हa. जब तक उनमO
से एक भी दकान
ु बाक! है , समझ लो Xक हमारJ सम#याएं भी खhम नहJं हईु हa. हमO इनके
Dव;k आवाज उठानी चाpहए. जzरत पड़े तो बड़े संघष4 के &लए भी तैयार रहना चाpहए.'

‘सरकार को चाpहए Xक नशे क! चीजM पर पाबंदJ लगाए...' Xकसी ने बीच हJ मO टोका.

ु ठ_क कहते हो. उन सभी व#तओ


‘तम ु ं पर जो नागUरकM के &लए Xकसी भी "कार से
नकसानदे
ु ह हa, रोक लगाना सरकार क! िज‡मेदारJ है . इसके &लए कानन
ू भी हa. लेXकन हमारे
दे श मO लोकतंu है . जनता ‰ारा चनी
ु गई सरकारM क! अनेक मजबUरयां
ू होती हa. उदार काननM

का लाभ उठाते हए
ु कई बार #वाथ gयवसायी बच %नकल जाते हa. इस&लए सरकार से बहत

अ5धक उ‡मीद करना उ5चत न होगा.'

‘हमO चाpहए Xक हम शराब के ठे कM और उन सभी दकानदारM


ु पर धावा बोल दO , जो नशे क!
चीजM क! wबq! करते हa.' एक ब`चे ने जोर दे कर कहा.

‘उस हालत मO वे कानन


ू -gयव#था के नाम पर प&लस
ु क! मदद लेने मO कामयाब हो जाएंगे.
और हम सब जो समाज और कानन
ू के भले क! भावना से आगे बढ़O गे, उनके द2ु मन माने
जाएंगे. झगड़ा yयादा बढ़ा तो खन
ू -खराबा भी हो सकता है . परेू शहर क! शां%त %छन सकती
है . इस&लए हमO कोई और उपाय सोचना होगा. ऐसा उपाय िजससे Xक हम अपनी बात सीधे
आम जनता तक पहंु चा सकO, उन लोगM तक पहंु चा सकO, िज-हO उनक! जzरत है . इस बारे मO
आप मO से Xकसी के पास bया कोई सझाव
ु है ?' ब~J काका ने ब`चM का उhसाहवध4न करने के
&लए पछा
ू .

इस "2न पर ब`चM के बीच चHु पी पसर गई. सभी गंभीर 5चंता मO डबे
ू हए
ु थे. कछ
ु दे र बाद
टोपीलाल खड़ा हो गया तो सारे ब`चे उसी क! ओर दे खने लगे-


‘ग;जी ! आपने कहा है Xक हमO अपनी बात लोगM तक सीधे पहंु चानी चाpहए.'

ु , लोकतंu मO जनता क! ताकत हJ सबसे बड़ी होती है .' ब~J काका बोले.
‘wबलकल
‘तब तो सम„झए रा#ता &मल गया.' टोपीलाल ने उhसाह pदखाया.

‘कैसे?'

‘हम छo
ु टJ के बाद रोज घर-घर, गलJ-गलJ जाकर लोगM को समझाएंगे. उ-हO नशे से होने वाले
नकसान
ु के बारे मO बताएंगे. उससे भी असर नहJं पड़ा तो गलJ-मह9
ु लM मO उस pठकानM पर
धरना दO गे, जहां लोग नशे के &शकार हa. वहां हम तब तक डटे रहO ग,े जब तक Xक नशा करने
वाले उससे दरू जाने का वचन नहJं दे दे ते.' टोपीलाल ने कहा तो कb
ु क! सहम%त मO ता&लयां
बजाने लगी. बाक! ब`चे भी उसका साथ दे ने लगे.

‘यह तमने
ु कहां से जाना.' ब~J काका ने खश
ु होकर पछा
ू .

ू गए, आपने हJ ने तो बताया था Xक Dवदे शी व[M के Dव;k लोगM को एकजट


‘भल ु

करने के &लए महाhमा गांधी ने ऐसा हJ Xकया था.'

‘कछ ू .' ब~J काका ने जैसे यादM मO गोते खाते हए


ु भी नहJं भला ु कहा, ‘पर यह काम आसान
नहJं है .'

‘हम सब आपके साथ हa.' सदानंद ने खडे होकर कहा.

ु परा
‘मझे ू भरोसा है !' ब~J काका बोले, जैसे खद
ु को तैयार कर रहे हM-

‘लोगM को नशे क! लत के "%त जागzक बनाने के &लए इसके अलावा bया कोई और उपाय
भी हो सकता है ?'

कZा मO कछ
ु दे र के &लए स-नाटा छाया रहा. सहसा %नरालJ उठ_ और बोलJ-

‘हम ब`चे टोलJ बना-बनाकर दकानदारM


ु के पास जाएंगे और उनसे "ाथ4ना करO गे Xक वे नशे
क! चीजO सपारJ
ु , बीड़ी, &सगरे ट, गटका
ु , पानमसाला वगैरह न बेचO.'

‘एकदम सहJ सझाव


ु है .'

‘वे हमारJ बात bयM मानने लगे?' एक ब`चे ने आशंका gयbत क!.

‘हां यह भी ठ_क है , लेXकन जब कोई अ`छा काम स`चे मन से Xकया जाता है तो एक न एक


pदन कामयाबी &मल हJ जाती है . हम एक pदन मO यpद दस दकानदारM
ु के पास जाएंगे तो
उनमO से एक-दो हमारJ बात गंभीरता से अव2य सनO
ु गे. धीरे -धीरे यह सं’या बढ़ती हJ जाएगी.'

‘यह तो बहत
ु पUर(म का काम है .'

‘हम मेहनत करने को तैयार हa.' कb


ु क! ने लड़के क! बात बीच हJ मO काट दJ.
‘तब ठ_क है ...इसके &लए Dवा5थ4यM क! चार टो&लयM बनाई जाएंगी. सHताह मO एक pदन,
बालसभा के बाद हम इसी अ&भयान पर चला करO गे. इसके अलावा bया कोई और भी सझाव

है ?' ब~J काका ने ब`चM को उhसाpहत Xकया.

‘िज-हO नशे क! लत है वे इन चीजM का Xकसी न Xकसी तरह जगाड़


ु कर हJ लO गे.इसी&लए हमO
चाpहए Xक कछ
ु ऐसे "यास भी करO , ताXक लोग इनसे अपने आप दरू होते जाएं. इसके बारे मO
मेरा सझाव
ु जरा हटकर है ?' टोपीलाल ने बोला. राT प%त महोदय को पu &लखने के बाद उसका
श@द क! ताकत मO भरोसा बढ़ा था. वह उसको आगे भी आजमाना चाहता था.

‘बताओ बेटा...' ब~J काका ने हौसला बढ़ाया.

‘हम सब अपने माता-Dपता और उन संबं5धयM के नाम जो नशे क! लत के &शकार हa, पu &लखO


और उ-हO उससे होने वाले नकसान
ु के बारे मO बताएं. अगर वे लोग हमO सचमच
ु Hयार करते हa
तो उनपर हमारJ बात का असर जzर होगा?'

‘वाह! कमाल का सझाव


ु है त‡
ु हारा. िज-हO तम
ु सचमच
ु बदलना चाहते हो, उनसे उनके pदल के
करJब जाकर बात करो. महाhमा गांधी ने परेू जीवन यहJ Xकया. अपने अखबार ‘हUरजन' के
मा{यम से उ-हMने दे श क! जनता से सीधे संवाद #थाDपत Xकया था.

और पu तो pदल को नजदJक से छकर


ू संवाद करने का अfभत
ु मा{यम है . इस सझाव
ु पर
हम तhकाल अमल करO गे. bयM ब`चो?' ब~J काका के आवाtन पर अ5धकांश ब`चM ने सहम%त
gयbत क!. इससे उhसाpहत होकर ब~J काका ने आगे कहा-

‘इस सHताह सभी ब`चे अपने माता-Dपता या उन संबं5धयM के नाम पu &लखकर लाएंगे, जो
नशे के &शकार हa. उन पuM को अगलJ बालसभा मO सनाया
ु जाएगा. हां, यpद कोई ब`चा नहJं
चाहता Xक उसके माता-Dपता या सगे-संबंधी क! नशे क! आदत के बारे मO खले
ु मO , सबके
सामने बातचीत हो तो इसका भी {यान रखा जाएगा. उस Dवाथ के पu को कZा मO पढ़ा
जzर जाएगा, लेXकन पu मO pदए गए नाम तथा उससे Dवाथ के Uर2ते को परJ
ू तरह गHु त
रखा जाएगा. यpद संभव हआ ु तो पu को सीधे अथवा डाक के मा{यम से उस gयिbत तक
पहंु चाने क! gयव#था क! जाएगी, िजसके नाम वह &लखा गया है . बोलो मंजूर?'

‘जी!' परJ
ू कZा ने साथ pदया. इसी के साथ उस pदन क! पाठशाला संप-न कर दJ गई. ब`चे
अपने-अपने घर लौटने लगे.

हर बालक ऊजा4 का अज- भंडार है . जो इस सhय को पहचानकर उसका सदपयोग


ु करने मO
सफल रहते हa, इ%तहास महानायक मानकर उनक! पजा
ू करता है.
महानायक अकेला आगे बढ़ता है . लेXकन थोड़े हJ समय मO परा
ू कारवां उसके पीछे होता है ; जो
%नरं तर बढ़ता हJ जाता है .

ब~J काका खश
ु थे, बि9क है रान भी थे. ब`चM को िजस pदशा मO वे लाना चाहते थे, िजस
उfदे 2य के &लए संगpठत करना चाहते थे, उस ओर वे #वयं#फूत4 भाव से बढ़ रहे थे. उनमO
एकता भी थी और उhसाह भी. उनमO भरपरू ऊजा4 थी और काम करने क! ललक भी. उनका
संगठन कमाल का था. िजसमO न कोई लालच था, न राजनी%त क! दरंु गी चाल. न कोई छोटा
था, न बड़ा. सभी अनशा&सत
ु थे; और अपनी Dवचारधारा मO #वतंu भी. इस&लए उनक!
कामयाबी पर भरोसा Xकया जा सकता था. आव2यकता थी उनके सहJ नेतhृ व क!. उनक!
संगpठत ऊजा4 का रचनाhमक उपयोग करने क!.

पाठशाला के कल
ु ब`चM को चार दलM मO बांटा गया था. एक दल का नेता टोपीलाल को
बनाया गया. दसरे
ू का %नरालJ को. कb
ु क! और सदानंद एक हJ टोले मO रहना चाहते थे. ब~J
काका क! इ`छा थी Xक दोनM को #वतंu टो&लयM क! िज‡मेदारJ सˆपी जाए. आ„खर कb
ु क! क!
बात हJ मानी गई. उसके अनरोध
ु पर उसे सदानंद के साथ एक हJ टोलJ मO रखा गया.

चौथे टोले का म„खया


ु अज4न
ु को बनाया गया. वह दसरे
ू टोले का था. उसके माता-Dपता
मजदरJ
ू करते थे. उनका टोला हाल हJ मO शहर के दसरे
ू Zेu से यहां पहंु चा

था और बराबर मO बन रहJ एक और बहमं ु िजला इमारत के %नमा4ण मO लगा था. अज4नु को


टोलJ का म„खया
ु बनाने के पीछे सोच यहJ था Xक ब`चे जब उसके टोले मO जाएं तो अज4न
ु के
कारण वहां के लोग उस आंदोलन से खद
ु को जड़ा
ु हआ
ु समझO.

नशा-मिb
ु त अ&भयान को कारगर बनाने के ब`चM ने 5चu और पो#टर भी बनाए थे. 5चu
बनाने का सझाव
ु %नरालJ का था. उसको 5चu बनाने का शौक था. वह कZा मO , घर पर, जब
भी अवसर &मले, 5चu बनाती हJ रहती. टोपीलाल के आsह पर परेू टोले मO "भात-फेरJ का
काय4qम बनाया गया. उसके &लए कछ
ु भजन &लखे-&लखाए &मल गए. बाक! ब~J काका ने
#वयं &लखे. ढोलक और मजीरे का "बंध ब#ती से हJ हो गया.

भजनM को संगीत क! लय-ताल पर गाने का अयास कराने मO तीन pदन और गजर


ु गए.
टोपीलाल के उhसाह को दे खते हए ु नारे भी गढ़े गए थे. इस सब
ु "भातफेरJ के &लए कछ
काय4वाहJ मO ब`चM ने िजस उ9लास और मनोयोग से pह#सा &लया. उसको दे खकर ब~J काका
भी दं ग रह गए.

अगले सHताह बालसभा के pदन सबह


ु ठ_क छह बजे सभी ब`चे wबि9डंग के दसरे
ू तल पर,
जहां पाठशाला चलाई जाती थी, जमा हए ु . उनके हाथ मO खद
ु के बनाए पो#टर थे, और झंडे भी.
सबसे पहले "ाथ4ना हई
ु . ब~J काका ने ब`चM को गांधी जी के जीवन से संबं5धत अनेक "ेरक
"संग सनाए
ु . उनके जीवन से "ेरणा लेने को कहा. "भात-फेरJ का Dवचार टोपीलाल क! ओर से
आया था. अतः उसका नेतhृ व करने क! िज‡मेदारJ भी उसी को सˆपी गई.

तय समय पर "भात-फेरJ के &लए ब`चM का समह


ू पंिbतबk हो आगे बढ़ा. ढोलक और मजीरे
क! ताल पर भजन गाते हएु ब`चे छोटJ-छोटJ झिc
ु गयM के आगे से होकर गजरने
ु लगे. उनके
#वर ने लोगM को जगाने का काम Xकया. भजन पराू होते हJ नारM क! बारJ आई. "भात-फेरJ
का नेतhृ व कर रहे टोपीलाल ने पहला नारा लगाया-


‘गटका , पानमसाला, बीड़ी...'

‘...मौत क! सीढ़J-मौत क! सीढ़J.' पीछे चल रहे ब`चM ने साथ pदया.


‘गटका , पानमसाला, बीड़ी...'

‘...मौत क! सीढ़J, मौत क! सीढ़J.'

‘Hयार से जो आबाद हए
ु घर...'

‘...नशे ने वे बरबाद Xकए घर.'

‘अगर तरbक! करनी है तो...'

‘...दरू नशे से रहना होगा.'

‘जीवन मO कछ
ु बनना है तो...'

‘...नशे को ‘टा-टा' करना होगा.'

‘फंसा नशे के चंगल


ु मO जो...'

‘...इंसां से है वान बना वो.'


‘गटका , पानमसाला, बीड़ी...'

‘...मौत क! सीढ़J, मौत क! सीढ़J.'

‘नशा जहर है ...'

‘...महाकहर है ...'

‘मौत का खतरा...'

‘...आठ पहर है .'


नारM के बाद Xफर एक भजन गाया जाता. एक घंटे मO "भात फेरJ समेट लJ जाती. उसके बाद
ब`चे घर जाकर ना2ता करते, Xफर पाठशाला आते. शाम का समय लोगM को घर-घर जाकर
समझाने के &लए तय था. टोपीलाल उस समय भी सबसे आगे होगा. ब`चे चार टो&लयM मO
बंट जाते. Xफर वे घर-घर जाकर लोगM को शराब और नशे क! बराइयM
ु के बारे मO समझाते.
कभी ब~J काका उनके साथ होते, कभी नहJं. लेXकन पाठशाला के "ांगण मO बैठे-बैठे, भDवTय
क! योजना बनाते हए
ु भी वे ब`चM के अ&भयान के बारे मO %तल-%तल क! खबर रखते. सम#या
दे खते तो पलक-झपकते वहां पहंु च जाते.

शाम का समय. टोपीलाल अपनी टोलJ का नेतhृ व कर रहा था. अपने हJ टोले मO जागzकता
अ&भयान चलाते हए
ु टोपीलाल के कदम pठठक गए. उसके साथ चल रहे ब`चे भी एक झटके
के साथ ;क गए. सामने उसका अपना घर था. ŠटM को क`चे गारे से खड़ा करके बनाई गई
झोपड़ीनमा
ु चारदJवारJ. िजसमO दो चारपाई लायक जगह थी. छत का काम Hलाि#टक क! प-नी
और %तरपाल से काम चलाया गया था. दरवाजा इतना छोटा था Xक टोपीलाल जैसे ब`चM को
भी गद4 न झकाकर
ु "वेश करना पड़ता था. दसरM
ू के &लए एक-एक Šट करJने से सजाने वाले वे
बे&मसाल कारJगर-मजदरू अपना pठकाने बनाते समय परJ
ू तरह लापरवाह हो जाते थे. यहJ
उनके जीवन क! Dवडंबना थी.

घर मO से मां और बापू क! आवाजO आ रहJ थीं. भीतर घसते


ु हए
ु टोपीलाल „झझक रहा था.
पता नहJं मां और बापू से वे सब बातO कह पाएगा या नहJं, जो उसने दसरे
ू घरM मO कहJ थीं.

ु हारे घर मO तो कोई नशा करता नहJं, Xफर यहां समय खच4 करने क! bया जzरत है . आगे
‘त‡
चलो टोपी.' साथ चल रहे एक ब`चे ने कहा. टोपीलाल को एकाएक कोई जवाब न सझा
ू .
लेXकन अगले हJ पल वह …ढ़ %न2चय के साथ भीतर घसता
ु चला गया. मां उस समय खाना
बनाने क! तैयारJ कर रहJ थी.

‘इतनी ज9दJ आ गए बेटा...लगता है आज के &लए कोई काय4qम नहJं था?' बेटे को सामने
दे ख टोपीलाल क! मां क! आंखM मO चमक आ गई. Dपछले कई pदनM से वह ब#ती मO टोपीलाल
के कारनामM के बारे मO सनती
ु आ रहJ थी. हर खबर उसको सख
ु पहंु चाती. हर बार उसका
सीना गव4 से फल
ू जाता था.

‘हम अपने काम के &सल&सले मO हJ यहां आए हa!'

‘कैसा काम? अरे , तू तो अपने दो#तM को भी साथ लाया है . अ`छा बैठ, मa तम


ु सबके &लए कछ

खाने का "बंध करती हंू .'

‘रहने दो मां, हम आपको नशे क! बराइयM


ु के बारे मO बताने आए हa.' टोपीलाल ने मां और बापू
क! ओर दे खते हुए कहा.
‘तू जानता है Xक तेरे बापू पान को भी हाथ नहJं लगाते, Xफर यहां आने क! bया जzरत थी.
समय हJ तो बेकार हआु .' टोपीलाल क! मां के #वर मO Dव#मय था. बापू चप
ु , गद4 न झकाए
ु मन
हJ मन म#
ु करा रहे थे.

‘हमने◌े हर घर मO जाने का "ण Xकया है मां.' टोपीलाल ने Dवन‘तापव4


ू क कहा.

‘सो तो ठ_क है , लेXकन िजस घर के बारे मO त‡


ु हO अ`छ_ तरह मालम
ू Xक वहां के लोग शराब
या नशे क! दसरJ
ू चीजM के करJब तक नहJं जाते, उस घर मO जाना तो अपना समय बरबाद
करना हJ हआ
ु .'

‘Xफर तो हर दरवाजे से हमO यहJ सनने


ु को &मलेगा Xक इस घर मO कोई नशा नहJं करता. यहां
समय बरबाद करने से अ`छा है आगे बढ़ जाइए. औरतO भले हJ हमO भीतर बलाना
ु चाहO , पर
चलेगी उनके मदr क! हJ. नशाखोर मद4 घर क! औरतM को हमO बाहर हJ बाहर Dवदा करने के
&लए आसानी से तैयार कर लO गे. नतीजा यह होगा Xक हम उन घरM मO जा हJ नहJं पाएंग,े जहां
हमारा जाना जzरJ है . हमारे जाने से जो असर लोगM के pदलोpदमाग पर पड़ना चाpहए, उससे
वे आसानी से बच जाएंगे.' टोपीलाल के तक4 ने उसक! मां को भी %न;†र कर pदया. कछ
ु दे र
बाद वह बोलJ-

‘कहता तो तू एकदम सहJ है बेटा...इतनी बड़ी-बड़ी बातO bया तेरे◌े ग;जी


ु तझे
ु &सखाते हa?'

‘उनका काम तो हमO िज‡मेदारJ सˆपना है , ि#थ%त के अनकल


ु ू बात कैसे करनी है , यह हमO खद

हJ तय करना पड़ता है .' टोपीलाल ने कहा. उसके Dपता जो अभी तक उसपर टकटक! लगाए
थे, उसक! क! मां क! ओर मड़कर
ु बोले-

‘तेरा बेटा है , बातM मO तो इसे कोई हरा हJ नहJं सकता.'

‘माफ करना, हमO अभी और भी कई घरM मO जाना है .' टोपीलाल को तेजी से भागते हएु समय
का बोध था. इसके बाद वह उ-हO नशे क! बराइयM
ु के बारे मO समझाने लगा. काम पराू होने
पर अपने सा5थयM के साथ वह भी बाहर %नकल आया. पीछे से टोपीलाल के कान मO बापू क!
आवाज पड़ी. वे कह रहे थे-

ु अपने बेटे पर गव4 है .'


‘मझे

‘और मझे
ु उसके Dपता पर.' टोपीलाल के कान मO मां का #वर पड़ा. उसने &सर को झटका pदया
और अपने अ&भयान पर आगे बढ़ गया.

योcय संतान को सव4u सराहना &मलती है .

बचपन को सहJ pदशा दो. सफलता उसक! मo


ु ठ_ मO होगी.
टोपीलाल और उसक! टो&लयM ने शहर मO वह कर pदखाया जो बड़े-बड़े उपदे शM, भारJ-भरकम
सरकारJ "यासM ‰ारा संभव हJ नहJं था. सHताहांत मO बालसभा के &लए ब`चM ने इतनी
मा&म4क 5चpoठयां &लखीं Xक ब~J काका दं ग रह गए. करJब तीस ब`चM मO से cयारह ने पu
&लखे. कछ
ु ने छोटे तो कई ने लंबे-लंबे. पuM मO उ-हMने अपने माता-Dपता, चाचा, ताऊ, मामा
और दसरे
ू Uर2तेदारM को, िजनके बारे मO उ-हO मालम
ू था Xक उ-हO नशे क! लत है , संबो5धत
Xकया था.

छह-सात पu तो इतने मा&म4क थे Xक खद


ु को माया-मोह से परे मानने वाले ब~J काका भी
अपने आंसू न रोक सके. उन पuM को उ-हMने बार-बार पढ़ा. कछ
ु को कZा मO भी पढ़वाया
गया. कछ
ु अ%त मा&म4क पuM को परJ
ू कZा के सामने पढ़वाने का साहस ब~J काका भी न कर
सके.

पu मौ&लक और असरकारJ भाषा मO &लखे गए थे. वे सीधे pदल पर असर डालते थे. इस
कारण ब~J काका का मन न हआ ु Xक उ-हO खद
ु से अलग करO . इस&लए उन पuM क!
छाया"%तयां हJ संबं5धत gयिbतयM को भेजी गŠ. ब~J काका को इससे भी संतोष न हआ
ु . वे
उन पuM का रचनाhमक उपयोग करना चाहते थे. चाहते थे Xक उनका "भाव सव4gयापी हो. वे
जन-जन क! आhमा को जाsत करने का काम करO . वे चाहते थे श@द क! ताकत को सजन
ृ से
जोड़ना, उसे आंदोलन का zप दे ना.

कई pदनM तक ब~J काका इसपर Dवचार करते रहे . सोचते रहे Xक कैसे उन पuM को अपने
अ&भयान का pह#सा बनाया जाए! कैसे उनका अ5धकतम उपयोग संभव हो! कैसे उनके
मा{यम से समाज मO नशाबंदJ के पZ मO बहस आरं भ कराई जाए! कैसे ब`चM क! %नजी पीड़ा
को साव4ज%नक पीड़ा और आqोश मO बदला जाए! परं तु bया यह उ5चत होगा? कहJं यह
नै%तकता के Dव;k तो नहJ◌े◌?ं ब~J काका अजीब-सी उलझन मO फंसे थे. वे एक फैसला करते,
अगले हJ पल अचानक उनक! राय बदल जाती.

कई pदनM तक उनके मन मO संघष4 चलता रहा. मन कभी इधर जाता, कभी उधर. काफ! सोच-
Dवचार के प2चात उ-हMने चने
ु हए
ु पuM को #थानीय समाचारपu मO "का&शत कराने का
%न2चय Xकया. इस %नण4य के साथ हJ उनक! आंखM मO चमक आ गई. अंततः ब`चM एवं
उनके अ&भभावकM का नाम-पता %छपाकर उन पuM क! छाया"%तयां, शहर के एक "%तिTठत
दै %नक को सˆपी दJ गईर◌ं
् .

सबसे पहले सदानंद का हJ पu छपा. समाचारपu मO हालांXक उसक! पहचान को सर}Zत


ु रखा
गया था. लेXकन ब~J काका समेत उनके "hयेक Dवाथ और उसके माता-Dपता को मालम
ू था
Xक वह सदानंद का हJ पu है . अपने Dपता को संबो5धत करते
हए
ु उसने &लखा था-

नम#ते बापू!

मa जानता हंू Xक आप मझे


ु बेहद Hयार करते हa. उस Zण भी अव2य हJ करते हMगे, जब
आपने पहलJ बार शराब को हाथ लगाया था. पर यह शायद मेरा दभा4
ु cय हJ था. bयMXक ठ_क
उस समय जब आप शराब का पहला घं◌
ू ंट भरने जा रहे थे, आपको मेरा जरा भी {यान नहJं
रहा. मझे
ु परा
ू Dव2वास है Xक उस समय अगर मेरा चेहरा आपके {यान मO रहा होता, तो आप
शराब के 5गलास को जमीन पर पटककर वापस चले आते. Xफर कभी शराबखाने का मंह
ु न
दे खते.

बापू मa भी आपको बहत


ु चाहता हंू . पर उससे शायद कम िजतना Xक आप मझेु चाहते हa.
आप Dपता हa, जब मa आपका Xकसी भी Zेu मO मकाबला
ु नहJं कर सकता तो Hयार करने मO
भी यह कैसे संभव है ! इस&लए इसमO आपका त%नक भी दोष नहJं, सारा दोष मेरा हJ है Xक मa
अपने भीतर वह काब&लयत नहJं जगा सका, िजससे Xक आपको ठ_क उस समय याद आ
सकंू, जबXक आपको मेरJ जzरत है . मझे
ु Zमा करO Dपता. मa #वयं को आपका नाकाwबल पu

हJ &सk कर सका.

बापू शराब क! लत के पीछे आप शायद भल


ू चक
ु े हa Xक आप Xकतने बड़े राज&म[ी हa. मaने
शहर क! वे इमारतO दे खी हa, िज-हO आपने अपनी हनरमं
ु द उं ग&लयM से तराशा है .मaने उन
बे&मसाल कंगरM
ू को भी दे खा है , जो आपक! कला के #पश4 से &सर उठाए खड़े हa. ऊंची-ऊची
इमारतM के बीच िजनक! धाक है . लोग िजनक! खबसरती
ू ू को दे खकर दं ग रह जाते हa.

मa शहर मO बहत ु अ5धक तो नहJं जा पाता. मगर जब कभी उन इमारतM के करJब से गजरता ु
हंू तो मेरा सीना गव4 से चौड़ा हो जाता है . उसके बाद कई pदनM तक दो#तM के साथ मेरJ
बातचीत का एकमाu Dवषय आपक! बेहतरJन कारJगरJ क! &मसाल वे आलJशान इमारतO हJ
होती हa. मa ब`चा हंू , इस&लए आपक! कारJगरJ को उन श@दM मO तो gयbत नहJं कर पाता,
िजसमO उसे होना चाpहए. पर अपने टटे ू -फटे
ू श@दM मO Xकए गए बयान से हJ मझे
ु जो
गवा4नुभ%त
ू होती है , उसको मa श@दM मO "#तत
ु कर पाने मO असमथ4 हंू . बस सम„झए Xक वे मेरे
जीवन के सवा45धक पDवu एवं आनंददायक Zण होते हa.

बापू अपने इस पu मO मa &सफ4 इतना कहना चाहता हंू Xक आपक! बनाई िजन इमारतM के
िजq से मेरा सीना गव4 से चौड़ा हो जाता है , वे आपने उन pदनM बनाई थीं, जब आप शराब
और नशे क! दसरJ
ू चीजM को हाथ तक नहJं लगाते थे. शराब ने आपसे आपक! बे&मसाल
कारJगरJ को छ_ना है , मझसे
ु मेरे Dपता को. यहां मa मां का िजq जानबझकर
ू नहJं कर रहा हंू .
bयMXक आपने िजस pदन से खद ु को शराब के हवाले Xकया है, वह बेचारJ तो अपनी सधु -बध

हJ खो बैठ_ है . यह भी {यान नहJं रख पाती Xक इसमO bया अ`छा है और bया बरा
ु . लगता
हJ नहJं Xक वह इंसान भी है . बेजान मशीन क! तरह काम मO जटJ
ु रहती है . उसके जीवन क!
सारJ उमंगे, सारा उhसाह और उ‡मीदO गायब हा

चक!
ु हa.

इस सबके पीछे मेरा हJ दोष है . मaने अपने Dपता को खद


ु से %छन जाने pदया. मa अपनी मां
का खयाल नहJं रख पाया. अपनी उसी भल ू का दं ड मa भगत
ु रहा हंू , आप भी और मां भी. मa
आप दोनM का अपराधी हंू बापू. पर मa यह समझ नहJं पा रहा Xक bया कzं. कैसे अपने Dपता
को वापस लाऊं. आप तो मेरे Dपता है, पालक हa, आपने हJ उं गलJ पकड़कर मझे
ु चलना &सखाया
है . अब आप हJ एक बार Xफर मेरा माग4दश4न करO . मझे
ु बताएं Xक मa आपको कैसे समझाऊं?
कैसे मa मां क! खशी
ु को वापस लौटाऊं?

बापू आप जब अपने Dपता होने के धम4 को समझOग,े तभी तो मa एक अ`छा बेटा बन पाऊंगा.
इस&लए मेरे &लए, अपने बेटे और उसक! मां के &लए, शराब को छोड़कर वापस लौट आइए.
आपक! इस लत ने अभी तक िजतना नकसान
ु Xकया है , हम सब &मलकर उसक! भरपाई कर
लO गे बापू...

-आपका इकलौता और नादान बेटा

pदल क! गहराइयM से %नकलJ हर बात असरकारक होती है .

अखबार मO छपने के साथ हJ यह पu परेू शहर मO चचा4 का Dवषय बन गया. ग&लयM मO ,


नb
ु कड़ पर, पान क! दकान
ु और चाय के खोखM पर, बड़े रे #uां और कॉफ! हाउस मO , घरM और
पाकr मO, [ी-प;ष
ु , ब`चे-बढ़े
ू , बDkजीDवयM
ु से लेकर आमआदमी तक, सदानंद के पu पर बहस
होती रहJ.

ब`चM ‰ारा चलाया जा रहा नशा-Dवरोधी काय4qम शहर-भर मO पहले हJ चचा4 का Dवषय बना
हआ
ु था. सदानंद का पu छपते हJ सबका {यान उसी ओर चला गया. बड़े-बड़े अखबारM के
संवाददाता, सामािजक काय4कता4, समाजसेवी, Dव‰ान उस टोले क! ओर आकDष4त होने लगे. इस
हलचल को लंबी उड़ान दे ने वाला अगला पu कb
ु क! का छपा. पu को अपने असलJ नाम से
छपवाने का साहस भी कb
ु क! ने pदखाया था. अपने छोटे -छोटे हाथM से न-हJ कb
ु क! बड़ी-बड़ी
बातO &लखीं-

काका!

मां बताती है Xक जब आप भगवान के पास गए मa &सफ4 दो वष4 क! थी. मेरJ आंखM ने


आपको जzर दे खा होगा, मगर अफसोस मेरे pदमाग पर आपक! जरा-सी भी त#वीर बाक! नहJं
है . मां बताती है Xक आपको नशे क! लत थी. कमाई अ5धक थी नहJं, पर लत तो लत ठहरJ.
नशे के &लए जो भी &मलता उसको खा लेते. चरस, भांग, धतरा
ू , अफ!म कछ
ु भी. शराब &मलती
तो वह भी गoट से गले के नीचे. नतीजा यह हआ
ु Xक आपक! आंतO गल गŠ. एक pदन खन ू
क! उ9टJ हई
ु और आप मां को अकेला छोड़कर चले गए. मेरJ मां अकेलJ रह गई. परJ
ू द%नया

मO अकेलJ. &सर पर Šट-गारा उठाने, लोगM क! गा&लयां सनने
ु , ठोकरO खाने के &लए.

वैसे मां बताती है Xक आप बहतु संकोची थे. इतने संकोची क! मां थालJ मO अगर दो रोटJ
रखकर भल ू जाए तो आप भख ू े हJ उठ जाएं. मां से, अपनी पhनी से तीसरJ रोटJ तक न मांगे.
आपक! मेहनत के भी कई Xक#से मaने मां के मंह
ु से सने
ु हa. वह चाहती थी Xक मेरा एक भाई
भी हो, जो बड़ा होकर काम मO आपका हाथ बंटा सके. जब उसने आपके सामने अपनी इ`छा
"कट क! तो आप म#
ु करा pदए. उसके बाद याद है आपने bया कहा था? मां बताती है Xक
आपने उस समय कहा था-‘अपनी कमpदनी
ु ु तो है ?'

‘वह तो बेटJ ठहरJ. एक न एक pदन ससराल


ु चलJ जाएगी. हमO बढ़ापे
ु का सहारा भी तो
चाpहए.'


‘बढ़ापे के सहारे के &लए त‡
ु हO बेटा हJ bयM चाpहए?'

‘सभी चाहते हa.'

‘बेटा होगा तो तम
ु उसका @याह भी करोगी? बहू भी आएगी, bयM?'

‘हां बेटा होगा तो @याह भी करना हJ होगा. @याह होगा तो बहू आएगी हJ.'

‘और बेटा अगर बहू को लेकर अलग हो गया तो?' आपने कहा था. मां %न;†र. तब आपने मां
को समझाते हए
ु कहा था, ‘बेटJ को कम मत समझ, यह पढ़-&लख गई तो दो पUरवार संवारे गी.
द%नया
ु मO Xकतने आए, Xकतने गए. यहां कौन अमर हआ
ु जो बेटे के बहाने तू अमर होना
चाहती है .'

ु बेटJ के नाम के साथ अमर होने क! कामना रखते हो तो मa बेटे के साथ bयM न रखंू?'
‘तम
तब आपने कहा था-

‘मa तो बस बेटJ के साथ जीना चाहता हंू . Xफर चाहे िजतनी भी सांसO &मलO .' और भगवान ने
आपको &सफ4 इतनी सांसO दJं Xक मझे
ु बड़ा हए ु दो वष4 क! ब`ची के zप मO दे ख सकO.

इस Xक#से को मेरJ मां Xकतनी हJ बार सना


ु चक!
ु है . Xकतने Dपता हa जो अपनी बेpटयM को
इतना मान दे ते हa. मां चाहती थी Xक मa आपको Dपता कहा कzं. वह मझे
ु वहJ &सखाना
चाहती थी. तब आपने कहा था, ‘नहJं Dपता नहJं?'
‘bयM, bया आप इसके Dपता नहJं हa?' मां ने है रान होकर पछा
ू था.

ु शम4 आती है ?'


‘मझे

‘इसमO कैसी शम4?'

‘काका हJ ठ_क रहे गा.'

‘काका हJ bयM?'

‘इस संबोधन मO दो#ताने क! गंज


ु ाइश yयादा है .' मां बेचारJ मान गई. वह कहती है Xक आप
मझे
ु बहतु Hयार करते थे. अपने साथ थालJ मO बैठाकर „खलाते थे. मझे
ु जरा-सा भी कTट हो
तो Dवच&लत हो जाते. पर काका, आज आपको खोकर मझे ु लगता है Xक आपका Hयार नकलJ
था. अगर आप मझे
ु स`ची-म`
ु ची Hयार करते तो नशे के चंगल
ु मO हर5गज न फंसते. एक
Dपता के &लए अपनी संतान के Hयार से बड़ा नशा और bया हा

सकता है .

काका आप हमेशा मां को धोखा दे ते रहे . पर मa आपके झांसे मO आने वालJ नहJं हंू . मa आपक!
अस&लयत को जानती हंू . आपक! चालाक! से पUर5चत हंू . इस&लए आपको भलाना ु चाहती हंू .
नहJं चाहती Xक आपक! यादO मेरJ रातM क! नींद हराम करO . पर bया कzं! भला
ु नहJं पाती.
ब`ची हंू ना. उतनी समथ4 नहJं हई
ु हंू Xक सारा काम अकेलJ हJ कर सकंू.

भल
ू भी जाऊं तो मां नहJं भलने
ू दे ती. रोज रात को चारपाई मO मंुह धंसाए मां को &ससकते
हए
ु दे खती हंू तो आपक! याद आ हJ जाती है. मां क! आदत से तंग आकर कभी-कभी मa कह
दे ती हंू -

‘अब Xकसके &लए रोती है . बढ़J


ू होने को है . बस कछ
ु साल और इंतजार कर...उसके बाद ऊपर
जाकर उनसे जी-भर कर &मलना. मां पलटकर मझे
ु अपनी बांहM मO भर लेती है -

ु अपनी नहJं तेरJ 5चंता है बेटJ.' और मां जब यह कहती है तो मa घबरा जाती हंू . अंधेरा
‘मझे
मन को डराने लगता है . वह हालांXक %छप-%छपकर रोती है . नहJं चाहती Xक उसके दःख ु क!
छाया भी मझपर
ु पड़े. पर मa तो उसका दःख
ु -दद4 उसक! धड़कनM से जान जाती हंू . हवा क!
उस नमी को महससू कर सकती हंू मां क! दे ह को छने
ू के बाद उसमO उतर आती है . यह भी
जानती हंू Xक मां के आंसू हJ आपक! यादM को िजलाए रहते हa. पर मa आपसे नाराज हंू .
सचमचु नाराज हंू .

अपने पu के मा{यम से मa द%नया


ु के सभी Dपताओं से कहना चाहती हंू Xक यpद आप अपनी
बेpटयM को खश
ु दे खना चाहते हa, यpद आप उनको नाराज नहJं करना चाहते, यpद आपको मेरे
आंसू असलJ लगते हa. यpद आपको मेरJ मां बदहालJ, उसके चेहरे पर पड़ी झUर4
ु यM, हथे&लयM मO
पड़ी मोटJ-मोटJ गांठM, कम उ‘ मO हJ सफेद पड़ चक
ु े बालM पर जरा-भी तरस आता है , तो कपया

खद
ु को नशे से दरू र„खए. तभी आप स`चे और अ`छे माता-Dपता बन सकते हa.

&सफ4 अपनी मां क!

कb
ु क!

एक ब`चे के माता-Dपता तो नशे से दरू थे. लेXकन उसके मामा को शराब क! लत थी. उस
ब`चे का &लखा पu तीसरे pदन अखबार क! सख
ु बना-

Hयारे मामा जी!

सादर "णाम,

अगर आप मझे
ु अपना सबसे Hयारा भांजा मानते हa तो आज से हJ शराब पीना छोड़ दJिजए.
आप नहJं जानते Xक आपके कारण मां Xकतनी परे शान रहती है . मामी को Xकतना कTट
उठाना पड़ता है . मां बता रहJ थी Xक आपक! शराब क! गंदJ लत से परे शान

होकर मामी तो आhमहhया हJ करना चाहती थी. यह तो अ`छा हआ ु Xक मां क! नजर उन


गो&लयM पर पड़ गई, िज-हO खाकर उ-हMने आपसे छटकारा
ु पाने क! ठान लJ थीं. बड़ी मि2
ु कल
से मां ने मामी को समझाया, जान दे ने से रोका. पर मां कहती है Xक आप यpद नहJं सधरे
ु तो
मामी कभी भी...

मां बताती है Xक नाना जी जब मरे तब आपके पास सौ बीघा से भी अ5धक जमीन थी. बाग
था, िजसमO हर साल खब
ू फल आते थे. नाना जी उ-हO टोकUरयM मO भरकर अपने सभी
Uर2तेदारM के घर पहंु चा दे त.े वे आपको बहत
ु चाहते थे. उनक! एक हJ अ&भलाषा थी Xक आप
पढ़O . उनक! इ`छा मानकर आप पढ़े भी. बाद मO ऊंची सरकारJ नौकरJ पर भी पहंु च.े उस पद
तक पहंु चे जहां गांव मO आप से पहले कोई नहJं पहंु च पाया था. नाना जी आपपर गव4 करते
थे. कहते थे Xक उनके जैसा भाcयवान Dपता इस धरती पर दसरा
ू नहJं है . लेXकन अनभवी

होकर भी वे अपने भDवTय से Xकतने अनजान थे.

नौकरJ के दौरान हJ आपको नशे क! लत ने घेर &लया. pदन मO भी आप शराब के नशे मO


रहने लगे. नतीजा आपको अपनी नौकरJ से हJ हाथ धोना पड़ा. यह सदमा नानाजी सह न
सके. उ-हO मौत ने जकड़ &लया. आप गांव लौट आए. मां बताती है Xक उस समय गांव मO
सबसे बड़ी जायदाद के मा&लक आप हJ थे. अगर आप तब भी संभल जाते तो आपके पUरवार
क! हालत आज कछ
ु और हJ होती. लेXकन इतनी ठोकरO खाने के बाद भी आप संभले नहJं.
पUरणाम यह हआ
ु Xक जमीन wबकने लगी. पहले बाग wबका. Xफर उपजाऊ खेत. बाद मO
प2ु तैनी हवेलJ का भी नंबर आया. उस समय अगर मामी जी अड़ नहJं जातीं तो आज आप
और मामी जी wबना छत के रह रहे होते.

खैर, आपक! बरबादJ और बदहालJ के Xक#से तो अनंत हa. मa तो &सफ4 यहJ कहना चाहता हंू
Xक यpद आपको मामी से Hयार है , यpद आपके मन मO अपनी बहन यानी मेरJ मां के "%त
जरा-भी स‡मान है , यpद आप अपने ब`चM को हं सता-खेलता और खशहाल
ु दे खना चाहते है ,
यpद आप नहJं चाहते Xक अपनी मां के मरने के बाद आपके ब`चे अनाथM क! भां%त दर-दर
क! ठोकरO खाएं, लोग उनको शराबी का बेटा कहकर दhु कारO , यpद आप नहJं चाहते Xक मेरे
#वगय नानाजी क! आhमा कछ
ु और कTट भोगे, तो HलJज नशे को ‘ना' कह दJिजए. दरू रpहए
उससे. तब आपका यह भांजा आपको इसी तरह Hयार करता रहे गा, िजतना Xक अब तक
करता आया है . नहJं तो आपसे कoटJ करते मझे
ु दे र नहJं लगेगी, हां...!

थोड़े &लखे को बहत


ु समझना. नशा छोड़ते हJ मझे
ु पu अव2य &लखना. मa हर रोज आपक!
डाक का इंतजार कzंगा...

आपका भांजा

कखग

दःख
ु भले हJ Xकसी एक का हो, मगर उसका कारण आमतौर पर साव4ज%नक हJ

होता है .

दःख
ु का साव4ज%नक!करण लोगM को करJब लाता है . उससे %घरा आदमी समाज के साथ
रहना, &मल-बांटकर जीना चाहता है . सखी
ु आदमी खद
ु को बाक! द%नया
ु से ऊपर समझता है ,
आhमकOp~त होकर दसरM
ू से कटने क! को&शश करता है .

एक के बाद एक पu, "भात-फेUरयां, पो#टर, सं{या अ&भयान मO घर-घर जाकर लोगM को नशे से
दरू रहने क! सलाह दे ना, समझाना, मनाना, उनके बीच जागzकता लाने क! को&शश करना-ब`चे
इन काय4qमM मO बढ़-चढ़कर pह#सा ले रहे थे. परेू शहर मO उनक! ग%तDव5धयM क! हJ चचा4 थी.
बुDkजीवी उनका गणगान
ु करते, समाचारपu उनक! "शि#तयM से भरे होते. अखबार के संपादक
के नाम पuM क! %नरं तर बढ़ती सं’या बता रहJ थी Xक उनके "%त लोग Xकतने संवेदनशील हa.
इस दौरान अखबारM क! wबq! भी बढ़J थी. "सार "बंधक है रान थे Xक जो काम वे लाखM-
करोड़M खच4 करके नहJं कर पाए, वह ब`चM क! 5चpoठयM ने कर pदखाया. अब हर कोई उ-हO
छापना चाहता था.

संपादक के नाम &लखी 5चpoठयM मO उन ब`चM के नाम से &लखे सैकड़M पu रोज आते. कोई
चाहता Xक ब`चे उसके घर आकर उसके Dपता को समझाएं. कोई बहन अपने भाई क!
बदचलनी से परे शान थी, वह चाहती थी Xक उसक! ओर से एक पu उसके भाई को भी &लखा
जाए. कछ
ु पाठकM क! "ाथ4ना थी Xक उनक! ब#ती मO भी इसी "कार "भात-फेUरयां %नकालJ
जाएं, ताXक वहां बढ़ रहा नशे का "चलन कम हो सके.

ऐसे हJ पu मO एक द„खयारJ
ु [ी ने संपादक के मा{यम से ब`चM को &लखा-

Hयारे ब`चो!

उ‘ मO तो मa त‡ ु हारJ मां जैसी हंू . आजकल मa भी उसी तकलJफ से गजर ु रहJ हंू िजससे
त‡
ु हारJ मां या बहन गजरु चक!
ु हa या गजर
ु रहJ हa. मगर मे◌ेरे पास त‡ ु हारे जैसा कोई ब`चा
नहJं है . इस&लए त‡
ु हJं से "ाथ4ना करती हंू Xक एक पu इनके नाम भी &लखो. मa तो समझा-
समझाकर हार गई. संभव है त‡ ु हारे श@द इ-हO सहJ रा#ते पर ले आएं. तब शायद त‡
ु हारJ यह
अभागन मां भी नक4 से बाहर आ सके. मa जीते जी त‡
ु हारा एहसान नहJं भल
ू पाऊंगी.
भगवान त‡
ु हO कामयाबी दे .'

एक पu मO तो लड़के का ग#
ु सा हJ फट
ू पड़ा. अपने टटे
ू -फटे
ू श@दM मO उसने &लखा-

‘नशेड़ी को मझसे
ु yयादा कौन जान सकता है . उसके सामने कोई लाख 5गड़5गड़ाए, खशामद

करे , दया क! भीख मांगे, उसपर कोई "भाव नहJं पड़ता. मेरा Dपता रोज नशे मO घर आता है .
पहले मां क! Dपटाई करता है , जो उससे च9
ू हा जलाने के &लए ;पयM क! मांग करती है . Xफर
मझे
ु मारता है , bयMXक मa भख
ू को सह नहJं पाता. ऐसे Dपता के होन

या न होने से कोई लाभ नहJं है . िजस pदन मेरा बस चला, उसी pदन मa उसका खन
ू कर
डालंग
ू ा...'

एक ब`ची ने संपादक के नाम भेजी गई अपनी 5चoठ_ मO अपने दःख


ु का बयान &लखा-

भइया!

मa आपके ग;जी
ु को "णाम करती हंू , जो आपको इतनी अ`छ_-अ`छ_ बातO &सखाते हa. िज-हMने
आपको सच कहने क! pह‡मत दJ है . भगवान करे Xक सच कहने का आपको वैसा कोई दं ड न
&मले, जैसा Xक मa नादान भोगती आ रहJ हंू . मेरे Dपता शराबी हa. रोज रात को पीकर आते हa.
मां और मेरे घर के सभी छोटे -बड़M के साथ मारपीट करते हa.

उन pदनM मa आठ वष4 क! थी. नहJं जानती थी Xक नशे मO आदमी जानवर बन जाता है .


अपना-पराया कछ
ु नहJं सझता
ू उसको. एक बार Dपता जी घर आए तो उनको नशे से
लड़खड़ाता दे खकर मa नादान हं सने लगी. मां Dपताजी के ग#
ु से को जानती थी. वह मझे
ु उनसे
दरू ले जाने को आगे आई. मगर उससे पहले हJ Dपताजी ने ग#
ु से मO कस
ु का Dपछला डंडा
मेरJ टांग मO जोर से दे मारा. इतनी ताकत से Xक मेरJ टांग क! हœडी हJ टट
ू गई. चार वष4 हो
गए. Dपताजी इलाज तो bया कराते, दगना
ु ु पीने लगे हa.

आजकल बहाना है Xक चार वष4 पहले जो गलती क! थी, उसके बोझ से उबरने के &लए पीता
हंू . यह मजाक नहJं तो और bया है . धोखा दे रहे हa वे खद
ु को, मझको
ु , हमारे परेू पUरवार को.
चार साल से लंगड़ाकर चल रहJ हंू . तमु अगर मेरे Dपता को समझाकर सहJ रा#ते पर ला
सको तो इस लंगड़ी बहन पर बहत ु उपकार होगा. नहJं तो मझे ु अपना पता दो, मa भी त‡ ु हारे
अ&भयान मO शा&मल होना चाहती हंू . भरोसा रखो, बोझ नहJं बनंूगी तमपर
ु . जहां तक हो
सकेगा मदद हJ कzंगी. लंगड़े पर लोग ज9दJ तरस खाते हa. हो सकता है मेरे बहाने हJ कोई
आदमी शराब और नशे से दरू चला जाए.

अगर ऐसा हआु तो त‡


ु हारJ यह लंगड़ी बहन जब तक िजएगी, तब तक त‡ ु हारा एहसान
मानेगी. और यpद मर गई तो ऊपर बैठ_-बैठ_ त‡
ु हारJ लंबी उ‘ के &लए "ाथ4ना करे गी.

त‡
ु हारJ एक अभा5गन बहन

पu घनी संवेदना के साथ &लखा गया था. िजसने भी पढ़ा, वहJ आंसुओं क! बाढ़ से %घर गया.
खद
ु को माया-मोह से परे मानने वाले ब~J काका भी भाव-Dवtवल हए
ु wबना न रह सके.
अगले pदन वहJ पu शहर-भर मO चचा4 का Dवषय बना था. [ी-प;षु , ब`चे-बढ़े
ू सब उस लड़क!
के बारे मO सोचकर दःुखी थे.

श@द क! ताकत से ब~J काका का बहत ु पराना


ु पUरचय था. महाhमा गांधी के साि-न{य मO
रहकर वे उसे परख चक
ु े थे. अब वषr बाद Xफर उसी अनभव
ु को साकार

दे ख रहे थे. ब`चM ‰ारा चलाए जा रहे अ&भयान क! सफलता क9पनातीत थी. बावजद
ू इसके
उ-हO लगता था Xक वे अपनी मंिजल से अब भी दरू हa. असलJ पUरणाम आना अभी बाक! है .

उससे अगले हJ pदन एक पu ऐसा छपा, िजसक! उ-हO "तीZा थी. पu पढ़ते हJ ब~J काका के
चेहरे पर चमक आ गई. दे ह "फि9
ु लत हो उठ_. पu मO Xकसी अधेड़ gयिbत क! आhम#वीक%त

थी. उ-हO वह पu अपने जीवन क! अम9
ू य उपलि@ध जान पड़ा. टटJ
ू -फटJ
ू भाषा मO &लखे गए
उस पu को संपादक ने "मखता
ु के साथ "का&शत Xकया था. शीष4क pदया था, मेरे पाप, िजसमO
wबना Xकसी संबोधन के &लखा था-

‘सच कहंू तो अपने जीते जी Xकसी को ई-वर नहJं माना. न #वग4-नक4, पाप-पž
ु य, आhमा-
परमाhमा जैसी बातM पर हJ कभी भरोसा Xकया. हमेशा वहJ Xकया जो मन को भाया, जैसा
इस pदल को ;चा. इसके &लए न कभी माता-Dपता क! परवाह क!, जो मेरे ज-मदाता थे. न
भाई को भाई माना, जो मेरJ हर अ`छ_-बरJ
ु िजद को पानी दे ता था और उसके &लए हर पल
अपनी जान क! बाजी लगाने को तhपर रहता था. न उस पhनी क! हJ बात मानी, िजसके
साथ अिcन को साZी मानकर सHतपpदयां लJ थीं; और सख
ु -दःख
ु मO साथ %नभाने का वचन
pदया था. न कभी ब`चM क! हJ सनी
ु , िजनके लालन-पालन क! िज‡मेदारJ मेरे ऊपर थी.

मन को अ`छा लगा तो जुआ खेला, मन को भाया तो शराब, चरस, अफ!म जैसे नशे क! शरण
मO गया. मन को भाया तो दसरM
ू से लड़ा-झगड़ा, यहां तक क! लोगM के साथ Xफजल
ू मारपीट
भी क!. मेरJ मनमा%नयां अनंत थीं. उ-हJं से दःखी
ु होकर माता-Dपता चल बसे. पहलJ पhनी
घर छोड़कर चलJ गई. उस समय तक भी िजंदगी इतनी चोट खा चक!
ु थी Xक मझे
ु संभल
जाना चाpहए था. लेXकन मेरा अहं तो हमेशा सातवO आसमान पर रहा है . उसी के कारण मa
हमेशा अपने #वाथ4 मO डबा
ू रहा.

मaने िजंदगी मO &सफ4 अपना सख


ु चाहा, केवल अपनी सDवधाओं
ु का खयाल रखा. ब`चM क!
पढ़ाई-&लखाई, शादJ-Dववाह हर ओर से मa अपनी आंख मंूदे रहा. भल
ू गया Xक जवान बेटJ का
असलJ घर उसक! ससराल
ु मO होता है . भल
ू गया Xक बेटM को पढ़ा-&लखाकर िजंदगी क! पटरJ
पर लाना भी Dपता का धम4 है . मेरा अहं कार और #वाथ4-&लHसाएं अंतहJन थीं. बेटJ से पीछा
छटाने
ु के &लए मaने उसे, उससे दगनी
ु ु आयु के आदमी के साथ @याह pदया. इस कदम से
उसक! मां को गहरJ चोट पहंु ची और वह बीमार रहने लगी. सहJ दे खभाल न होने के कारण
लड़के आवारगी पर उतर आए. परखM ु क! सारJ जमीन-जायदाद शराब और जए ु क! भO ट चढ़
गए. गहने-जेवर, बत4न-भांडे कछ
ु भी बाक! नहJं रहा.

हालात यहां तक आ बने Xक सHताह मO तीन pदन फाका रहने लगा. सब कछ


ु लटाने
ु , बरबाद
कर दे ने के बाद मझे
ु अपनी गलती का एहसास हआ
ु . उस समय cला%नबोध मO मa घर से भाग
जाना चाहता था. एक pदन यह ठानकर हJ घर से %नकला था Xक अब वापस कभी नहJं
आऊंगा. रा#ते मO एक दकान
ु पर अखबार मO एक ब`चे का पu पढ़ा.

Xफर उस लड़क! के पu ने तो मेरJ आंखO हJ खोलकर रख दJं. उसे पढ़कर तो मa खद


ु को
अपनी हJ बेटJ का हhयारा मानने लगा हंू .

नशाखोर आदमी कभी नहJं सोचता Xक उसक! बरJ


ु लतM के कारण उसके पUरवार पर bया
बीतती है . उनके जीवन, उनके मान-स‡मान पर Xकतना बरा
ु असर पड़ता है. उस ब`ची ने मझे

आईना pदखाया है . मa उसका बहत ु शqगजार
ु ु हंू . हालांXक मझे
ु अपनी गलती का एहसास तब
हआ
ु , जब मेरा सबकछु लट ु -Dपट चका
ु है . कहJं कोई उ‡मीद बाक! नहJं है . मa उन सब ब`चM से
&मलना चाहता हंू , िज-हMने वे पu &लखे हa. उनमO से हरे क से माफ! मांगना चाहता हंू , bयMXक
मझे
ु लगता है Xक उनक! दद4ु शा के पीछे कहJं न कहJं मेरा भी हाथ है . पर उनसे &मलने क!
pह‡मत नहJं जटा
ु पाया हंू .
कल रात लेटे-लेटे मaने यह फैसला Xकया है Xक अपना बाक! जीवन मO "ायि2चत मO हJ
wबताऊंगा. गांव-गांव जाऊंगा. वहां जाकर हर गलJ-मह9
ु ले-चौपाल पर जाकर अपना Xक#सा
बयान कzंगा. सबके सामने अपने पापM का खलासा
ु कzंगा. उनसे सरे आम माफ! मांगगा
ू . उस
समय लोग यpद मझेु पhथर भी मारO तो सहंू गा. तब शायद मेरा पापबोध कछ ु घटे . ऐसा हआु
तो मa उन ब`चM से माफ! मांगने जzर पहंु चंूगा. संभव है उस समय तक वे बड़े हो चक
ु े हM.
उनके अपने भी बाल-ब`चे हM. तब मa उनके ब`चM के आगे जाकर दं डवत कzंगा. कहंू गा Xक
मa उनके Dपता का बेहद एहसानमंद हंू . उ-हJं के कारण मेरे पापM पर लगाम लगी थी. मेरJ
पाप-कथा सनकर
ु अगर उनमO से एक को भी मेरे ऊपर तरस आया तो मa इसको अपनी
उपलि@ध मानंग
ू ा. तब तक यह धरती, यह आसमान, इस चराचर जगत के सभी "ाणी, चेतन-
अचेतन मझे
ु Zमा करO , मझे
ु इंसा%नयत क! राह pदखाएं.

एक पापी

पuM क! बाढ़ आ चक!


ु थी. उसी बाढ़ के बीच एक पu ब~J काका को भी "ाHत हआ
ु . उस
समय वे कZा मO पढ़ा रहे थे. पu पर भेजने वाले का नाम दे खकर उ-हMने उसको संभालकर
जेब मO रख &लया. पाठशाला से छo
ु टJ के बाद सावधानी से पu को %नकाला, दे खा, उ9टा-प9
ु टा
और आंखM पर काला च2मा लगाकर पढ़ने लगे. Xफर उसमO डबते
ू चले गए.

उस छोटे से पu का एक-एक श@द जैसे जादईु था. मोती-मा„णकM के समान अनमोल.


गंगाजल-सा पDवu. सबह
ु क! ओस जैसा ि#नcध और मनोरम. रोम-रोम को हषा4न,े तन-मन को
पलXकत
ु कर दे ने वाला. पu राT प%त भवन से भेजा गया था. &लखने वाले थे #वयं राT प%त
महोदय. वह उनका %नजी पu था. उनक! अपनी ह#त&लDप मO &लखा हआ
ु .

राT प%त महोदय ने &लखा था-

पy
ू य ब~Jनारायण जी!

दे श के #वाधीनता आंदोलन मO आपके बहम9


ु ू य योगदान के बारे मO प#
ु तकM मO बहत
ु पढ़ चका

हंू . आप इस महान दे श क! महान Dवभ%त
ू हa, इसमO मझे
ु पहले भी कोइ

संदेह नहJं था. लेXकन आपके जीवन क! परानी


ु गाथाएं, #वाधीनता आंदोलन से जड़ी
ु होने के
बावजदू मझे
ु उतनी आtलाpदत नहJं करतीं, िजतनी Xक आपके वत4मान अ&भयान से जड़ी ु हईु
खबरO कर रहJ हa. महाhमा गांधी ने िजस सामािजक #वतंuता क! ओर संकेत Xकया था, आप
अपने समाज को उसी ओर ले जा रहे हa।

मaने तो आपको एक िज‡मेदारJ मामलJ


ू समझकर सˆपी थी. परं तु अपनी %नTठा एवं कम4ठता
से आपने उसको एक महान कh
ृ य मO बदल pदया है . आपका यह "यास आजादJ के आंदोलन
मO हमारे महान #वतंuता सेना%नयM के योगदान से Xकसी भी भां%त कम नहJं है . इस बार आप
gयिbत के सामािजक-मान&सक #वतंuता के &लए संघष4 कर रहे हa, जो उतनी हJ अ%नवाय4 है
िजतनी Xक राजनी%त #वतंuता. अगलJ बार &मलO गे तो pदखाऊंगा Xक आपके अ&भयान से जड़ी

एक-एक खबर को मaने सहे जकर रखा है . आप सचमच
ु बे&मसाल हa. कामना है Xक आपका
माग4 "श#त हो. आपक! सफलताएं लंबी हM.

मa आपक! योcयता, कत4gयपारायणता और आपके संगठन के हर न-हे &सपाहJ और उनक!


भावनाओं को सादर नमन करता हंू ...

संघीय दे श का "थम नागUरक

एक-दो नहJं, द&सयM बार ब~J काका ने उस पu को पढ़ा. हर बार उनका मन अ%नवच4नीय
आनंद से भर उठता. रोम-रोम से आtलाद फटने
ू लगता. लेXकन हर बार उ-हO कछ
ु कचोटता.
लगता Xक उनपर अ%तUरbत बोझ डाला जा रहा है . इसी ऊहापोह के बीच उस पu का उ†र
दे ना जzरJ लगने लगा. लगा Xक इस समय चHु पी साध लेना, सारा (ेय अकेले हड़प जाना
पाप, अमानत मO खयानत जैसा महापाप होगा. खब
ू सोचने-समझने के बाद उ-हMने पuो†र दे ने
का %न2चय Xकया-

माननीय राT प%त महोदय जी,

सादर "णाम! मा-यवर, मa दे श के उन सौभाcयशालJ लोगM मO से हंू िज-हO आपका #नेह और


माग4दश4न सदै व "ाHत हआ
ु ं
है . आपने मेरे इस अXकचन "यास को सराहा, मेरा जीवन ध-य हो
गया. लेXकन मझे
ु Dव2वास है Xक जो (ेय आप मझे
ु दे ना चाह रहे हa, उसका मa अकेला
अ5धकारJ नहJं. आपके संघष4-भरे जीवन से "ेरणा लेकर हJ मa इस रा#ते पर आया था. और
यह भी आपक! हJ "ेरणा और आदे श था, जो मझे
ु यहां आने का अवसर &मला, िजससे मa इन
ब`चM से &मल सका, जो pदखने मO द%नया
ु के सबसे साधारण ब`चM मO से हa. िज-हO न ढं ग क!
&शZा &मल पाई है , न सं#कार. न इनके तन पर परा
ू कपड़ा है, न पेट-भर रोटJ. पर अपनी
भावनाओं, अपने संक9प और अपनी अp‰तीय कत4gयपारायणता के दम पर ये मनTु यता क!
सबसे DवलZण पौध बनने को उhसक
ु हa.

जब मa यहां आ रहा था तब मन के Xकसी कोने मO कामयाबी का (ेय लेने क! लालसा जzर


थी. सोचता था Xक मेरे "यासM के फल#वzप मजदरू ब`चM के जीवन म

यpद कछ
ु बदलाव आया तो उसका (ेय मझे ु हJ &मलेगा. सच कहंू तो मa यहां रे ल का इंजन
बनने का सपना लेकर पहंु चा था, िजसको छोटे -छोटे nड@बेनुमा ब`चM को उनक! मंिजल का
ं ु चमhकार दे „खए, यहां रहने के माu कछ
रा#ता pदखाने क! िज‡मेदारJ सˆपी गई थी. Xकत ु
महJने प2चात ि#थ%त एकदम उलट गई है .
सच यह है Xक अपने स†र वष4 के जीवन मO मa कभी भी इतना अ&भभत ू नहJं हआ ु , िजतना
Xक इन pदनM इन ब`चM के कारनामM को दे खकर हंू. सब मानते हa Xक इ-हO मaने &सखाया है .
लेXकन िजस अनशासन
ु , कत4gय%नTठा, समप4ण एवं सfgयवहार क! सीख ये मझे
ु दे रहे हa, उसके
बारे मेरे और ई-वर के &सवाय और कोई नहJं जानता. इनका संक9प और उhसाह दोनM हJ
वंदनीय हa. भगवान इ-हO बरJ
ु नजर से बचाए.

यpद मa खद ु को आज भी रे ल का इंजन माने रहंू तो ये ब`चे अपनी आंतUरक ऊजा4 से भरपरू


छोटे -छोटे nड@बे हa, जो रे ल के इंजन को उसक! मंिजल क! ओर धXकयाए जा रहे हa. काश!
आप यहां आकर इनक! ऊजा4, इनके कारनामM को अपनी आंखM से दे ख सकO. तब आप जानOगे
Xक द%नया
ु मO आंखM दे खे चमhकार का होना असंभव नहJं है . और यहां जो हो रहा है वह ऐसी
हक!कत है , जो Xकसी भी चमhकार से बढ़कर है .

पu &लखने के बाद ब~J काका ने उसको दो बार पढ़ा और Xफर &सरहाने रख &लया.

मन मO अ`छे Dवचार हM तो नींद भी „खल उठती है .

िजWासा से अ`छा कोई माग4दश4क नहJं है .

िजन pदनM अZर Wान से वं5चत था, उन pदनM भी टोपीलाल के मन मO अखबार के "%त
अजीब-सा आकष4ण था. चाय क! दक
ु ान, ढाबM, बाजार, #टे शन यानी जहां भी वह अखबार
दे खता, pठठक जाता. बड़ी ललक के साथ अखबार और उसे पढ़ने वालM को दे खता. खद
ु को
उस ि#थ%त मO रखकर क9पनाएं करता. सपने सजाता. सपनM मO नए-नए रं ग भरता. अनची-हे
श@दM को मनमाने अथ4 दे कर मन हJ मन खश
ु होता.

िजस पाठशाला मO वह कछ
ु महJने पढ़ा था, वहां छोटा-सा प#
ु तकालय था. कई समाचारपu
%नय&मत आते. टोपीलाल क! मजबरJ
ू थी Xक उन pदनM वह अZर पहचानना और उनको
जोड़ना सीख हJ रहा था. अखबार पढ़ हJ नहJं पाता था. मगर जब भी अवसर &मलता, वह
वहां जाकर घंटM अखबारM और प#
ु तकM को दे खता रहता. राह चलते यpद कोई पराना
ु अखबार
या उसक! कतरन भी pदख जाए तो उसे फौरन सहे ज लेता. घर आकर एकांत मO उसे दे खता.
अZर जोड़ने का "यास करता. न जोड़ पाए तो उसके 5चuM से हJ अपनी िजWासा को बहलाने
का "यास करता था.

पाठशाला मO अखबार आना चाpहए, यह मांग करने वाला टोपीलाल हJ था. उसक! मांग मान
लJ गई. पाठशाला मO %नय&मत zप से दो समाचारपu आने लगे. समय &मलते

हJ टोपीलाल उन समाचारपuM को चाट जाता. उसके अलावा एक-दो ब`चे हJ ऐसे थे, जो
अखबार पढ़ने मO ;5च pदखाते. "का&शत खबरM पर बातचीत करते. उ-हO बहस का मf
ु दा
बनाते थे.
जैसे हJ ब`चM के पuM का छपना आरं भ हआ
ु , टोले मO समाचारपuM क! पाठक-सं’या अनायास
बढ़ने लगी. अखबार आते हJ ब`चे उनपर टट ू पड़ते. कभी-कभी ह9का-फ9 ु का झगड़ा भी हो
जाता. उस ि#थ%त से %नपटने के &लए एक gयव#था क! गई. "%तpदन एक Dवाथ खड़ा
होकर "मख
ु समाचारM का वाचन करता. पाठशाला से संबं5धत समाचारM पर खास {यान pदया
जाता. बाद मO उनपर ह9क!-फ9
ु क! चचा4 होती. ब`चे खलकर
ु pह#सा लेत.े

अखबार मO संपादक ने नाम छपे पuM ने ब`चM का उhसाहवध4न Xकया था. उ-हO श@दM क!
ताकत से परचाया था. ब`चे अखबार को बड़े Hयार से दे खते. उसमO "का&शत श@दM को
सहलाते. मन हJ मन उनसे संवाद करते. बाद मO संपादक के नाम &लखी 5चpoठयM को काट,
सहे जकर रख लेत.े कpटंग न &मलने पर उनक! नकल तैयार करते. अकेले मO, दो#तM के बीच
उसको बार-बार पढ़ते, सराहते, बहस का मf
ु दा बनाते.

पu-लेखकM मO से अ5धकांश अपने Xकसी पUरजन क! नशे क! आदत के कारण परे शान होते.
उसमO दज4 @यौरे से ब`चे उसके लेखक के बारे मO अbसर अनमान
ु लगा लेते. कई बार इसी
को लेकर बहस %छड़ जाती. gयिbत को लेकर मतांतर होते रहते, लेXकन वह अपने हJ टोले का
है , गरJब और जzरतमंद है , इस बात पर न तो कोई बहस होती, न संदेह हJ gयbत Xकया जाता
था.

कछ
ु पu ऐसे भी होते िज-हO सनकर
ु परJ
ू कZा मO स-नाटा gयाप जाता. यहां तक Xक ब~J
काका भी ब`चM को कछ
ु दे र के &लए कZा मO अकेला छोड़ बाहर चले जाते. वहां अपनी नम
आंखM को पMछते. मन को समझाते. तस9लJ दे ते. तब जाकर कZा मO लौटने का साहस बटोर
पाते थे.

ब`चM हJ नहJं, बड़M मO भी अखबार के "%त आकष4ण बढ़ता जा रहा था. शाम होते हJ pदन-भर
क! खबरM को जानने के &लए लोग „खंचे चले आते. दोपहर को भोजन के &लए जैसे हJ बैठते,
Dपछले pदन छपे समाचार पर बहस आरं भ हो जाती. िजसको संबो5धत कर वह पu &लखा गया
होता, उसके बारे मO कयास लगाए जाते. बातचीत होती. लोग उसके सख
ु -दःख
ु मO अपनापा
जताते. उस समय यpद कोई उसी pदन छपे समाचार के बारे मO बताकर सभी को चˆकाता तो
सब उसक! बDk
ु क! दाद दे ने लगते.

कछ
ु pदनM तक ऐसे पuM के आने का qम बना रहा. परं तु अचानक पuM क! भाषा एवं उनका
#वर बदल गया. संपादक के नाम &लखे गए ऐसे पu भारJ तादाद मO छपने लगे, िजनमO ब~J
काका क! आलोचना होती. उनपर ब`चM को wबगाड़ने का आरोप लगाया जाता. उ-हO दे श~ोहJ,
Dवदे श का जासस
ू आpद न जाने bया-bया &लखा जाता.

पuM के बदले हए
ु #वर ने ब`चM को पहले तो है रानी मO डाला. जब ऐसे पuM क!
सं’या बढ़J तो बात 5चंता मO बदलने लगी. अपने अनभव
ु और वDk
ु के आधार पर वे ऐसे पuM
के पीछे %नpहत सhय का अनमान
ु लगाने का "यास करते. लेXकन नाकाम रहते. असफलता
उनक! 5चंता को और भी घना कर दे ती.

एक पाठक ने संपादक को संबो5धत पu मO तो हद हJ कर दJ-

‘िजस ब~J काका नाम के महानभाव


ु क! "शंसा करते हए
ु हमारे समाचारपu और समाजसेवी
रात-pदन नहJं अघाते, उनका अपना अतीत हJ संpदcध है . नहJं तो कोई बता पाएगा Xक ये
सyजन अचानक कहां से "कट हए ु हa. पाठशाला आरं भ करने से पहले ये bया करते थे? रोज-
रोज ब~J काका क! शान मO कसीदे पढ़ने वाले समाचारपu उनके अतीत मO झांकने का "यास
bयM नहJं करते. यpद खोजबीन क! जाए तो मझे
ु उ‡मीद है Xक वहां जzर कछ
ु कालापन
नजर आएगा. वरना कोई आदमी इस तरह क! गमनाम
ु िजंदगी bयM िजएगा.

दरअसल इन महाशय का उfदे 2य नशा-Dवरोध और &शZा के "चार-"सार क! आड़ मO ब`चM


और उनके अ&भभावकM को धम4-पUरवत4न के &लए राजी करना है . इस बात क! भी संभावना है
Xक ये सyजन Xकसी Dवदे शी सं#था के दान के बते
ू धम4-पUरवत4न जैसा %नकT
ृ ट काय4 करने मO
जटे
ु हM. वरना शहर मO दज4नM सरकारJ पाठशालाएं हa, जो खालJ पड़ी रहती हa. उनके &लए
Dवाथ हJ उपल@ध नहJं हa. अगर इन महाशय का उfदे 2य &सफ4 मजदरM
ू के ब`चM को
&श}Zत करना है , जो Xक सचमच
ु एक पDवu काय4 है , तो उ-हO सरकारJ पाठशालाओं मO भत
करना चाpहए. छोटे ब`चM को भखे
ू -Hयासे, सबह
ु -शाम नारे बाजी मO उलझाए रखकर ये उनका
Xकतना भला कर रहO , उसे या तो ये #वयं जान सकते हa या Xफर उनका पैगंबर!'

पu लेखक ने अपना असलJ पता नहJं &लखा था. ब~J काका ने परा
ू पu पढ़ा. Xफर म#
ु करा
pदए. इस पu के "का&शत होने के बाद संपादक के नाम आने वाले पuM का zप हJ बदल
गया. अ5धकांश पu गालJ-गलˆच वालJ भाषा मO आने लगे. कछ
ु मO उ-हO दे श~ोहJ &लखा होता.
कछ
ु मO Dवरोधी दे श का चमचा, जासस
ू आpद. चंूXक ब~J काका के Dपछले जीवन के बारे मO
शहर मO Xकसी को पता नहJं था, इस&लए ऐसे लोग उसके बारे मO मनमानी क9पना करते.
आरोप लगाते. एक gयिbत ने तो शालJनता क! सीमा हJ पार कर दJ थी-

‘बड़ी है रानी क! बात है Xक प&लस


ु और "शासन क! नाक के ठ_क नीचे एक gयिbत, िजसका
अतीत हJ संpदcध है , ख9
ु लम-ख9
ु ला सरकारJ कानन
ू क! „ख9लJ उड़ा रहा है . िजस उ‘ मO
ब`चM को अपना अ5धक से अ5धक समय पढ़ने-&लखने मO लगाना चाpहए, वे जलस
ु ू और
नारे बाजी मO अपना जीवन बरबाद कर रहे हa. Zु~ #वाथ4 के &लए वह मासम
ू ब`चM का
भावनाhमक शोषण कर रहा है . उनक! गरJबी का मजाक कर उ-हO अपने लय से भटका रहा
है . &शZा और समाजक9याण के नाम पर ब`चM का यह शोषण Xकसी को भी gय5थत कर
सकता है .
यह बात भी {यान मO रखनी होगी Xक वह पाठशाला एक %नमा4णाधीन भवन मO wबलकल

अवैध तरJके से चलाई जा रहJ है . इमारत क! ि#थ%त ऐसी है Xक वहां कभी भी बड़ा हादसा हो
सकता है . पर उन महाशय को न तो ब`चM के #वा#•य क! 5चंता है ; और न उनके भDवTय
क!. सोचने क! बात है Xक "शासन bयM उसक! ओर से आंखO मंूदे हए
ु है . इसका कारण तो
यहJ हो सकता है Xक ऊपर से नीचे तक सभी wबके हए
ु हa. और जो आदमी परेू सरकारJ-तंu
को मo
ु ठ_ मO रख सकता है , उसक! पहंु च का अनमान
ु लगा पाना असंभव है . परा
ू मामला
Xकसी बड़े षœयंu क! ओर इशारा कर रहा है, िजसक! गहराई से जांच होनी चाpहए.

दःख
ु क! बात यह है Xक हमारे सरकारJ-तंu को चेतने के &लए हमेशा बड़े हादसM क! "तीZा
रहती है . यानी जो लोग इस उ‡मीद मO चHु पी साधे हए ु हa Xक मामला कानन ू और "शासन का
है , वहJ आव2यक कार4 वाहJ करO गे, उ-हO Xकसी बड़े हादसे के &लए तैयार रहना चाpहए. जो हमारे
आसपास कभी भी हो सकता है . सरकार को अवैध पाठशाला पर तhकाल रोक लगाकर ब~J
काका नाम के श’स को 5गर“तार करके उसके अतीत के बारे मO जानकारJ जमा करनी
चाpहए.'

Dवरोध मO &लखे गए पuM पर भी ब`चM क! नजर जाती. पढ़कर उनका आqोश फट


ू पड़ता-‘हमO
संपादक को &लखना चाpहए Xक वह ऐसे पuM को अखबार मO "का&शत न करे ?'

‘समझ मO नहJं आता Xक ग;जीु इस मामले मO चHु पी bयM साधे हए


ु हa. वे चाहO तो उनसे
अकेले हJ %नपट सकते हa.' अज4न
ु बोला.


‘ग;जी जो भी करO गे, सोच-समझकर हJ करO गे.' टोपीलाल ने उनक! बात काटJ.

‘इन हालात मO wबि9डंग का मा&लक पाठशाला बंद करने को कह सकता है . तब हम कहां


जाएंगे. अब तो आसपास का मैदान भी खालJ नहJं है .'

‘मा&लक तो कह हJ रहा था Xक इस भवन मे◌े◌ं पाठशाला रोक दे नी चाpहए. लेXकन ब~J


काका तक बात पहंु चने से पहले हJ मामला शांत पड़ गया.' टोपीलाल ने रह#य उजागर Xकया.

‘कैसे?' ब`चM का कौतहल


ू जागा.

‘मां बता रहJ थी. कल मा&लक क! ओर से संदेश आया था Xक मजदरू उस पाठशाला को बंद
करO या हटाकर कहJं और ले जाएं. इसपर मजदरM
ू ने भी संगpठत होकर धमक! दे दJ. कहा
Xक वहां उनके ब`चे पढ़ते हa. उनके भDवTय के &लए वे उसको बंद हर5गज न होने दO गे.
पाठशाला कहJं और गई तो वे सब भी साथ-साथ जाएंगे. आजकल शहर मO &म[ी और
मजदरू आसानी से &मलते नहJं. मा&लक भी बीच मO gयवधान नहJं चाहता. इस&लए Xफलहाल
तो वह शांत है .'
‘bया यह बात ब~J काका को मालम
ू है ?'

‘हां, उ-हMने कहा Xक यह तो होना हJ था. यह भी बताया Xक जो हमने सोचा था, वहJ हो रहा
है . वे लोग खद
ु डर रहे हa और हमO डराना चाहते हa. यह समय धैय4 से उनक! बातM को सनने
ु ,
अपने मकसद पर …ढ़ बने रहने का है .'

‘वे Xकन लोगM क! बात कर रहे थे?' कb


ु क! ने जानना चाहा. इसका टोपीलाल के पास कोई
उ†र न था-

‘यह तो उ-हMने नहJं बताया था.'

‘हमO bया करना चाpहए?' अज4न


ु ने कहा. जवाब टोपीलाल के बजाय सदानंद ने pदया, ‘ग;जी
ु ने
कहा है Xक अ&भयान ;कने वाला नहJं है . हमारे &लए तो साफ %नदश
‚ है . हम उ-हJं का आदे श
मानOगे.'

उसी दोपहर ब~J काका पढ़ा रहे थे. तभी प&लस


ु के दो &सपाहJ वहां पहंु च.े वे प&लस
ु अधीZक
क! ओर से आए थे. उ-हO दे खते हJ ब~J काका कZा को छोड़कर आगे बढ़ गए. वे कछ ु पछO
ू ,
उससे पहले हJ दोनो◌े◌ं &सपाpहयM ने उ-हO अ&भवादन करते हए
ु कहा-‘एसपी साहब ने बलाया

है . आज शाम को ठ_क आठ बजे आप थाने पहंु च जाना. कहO तो जीप &भजवा दO .'

‘जीप क! आव2यकता नहJं है ...मa पैदल हJ आ जाऊंगा.' ब~J काका ने कहा और वापस जाकर
पढ़ाने लगे. इस घटना के बाद ब`चM का मन पढ़ाई मO न लगा. उनक! %नगाह मO वे दोनM
&सपाहJ और प&लस
ु सपUरं
ु टOडOट का चेहरा घमता
ू रहा-


‘प&लस आपको bयM बलाने
ु आई थी?' जैसे हJ पढ़ाई का काम परा
ू हआ
ु , %नरालJ ने ब~J काका
से पछा
ू .

‘यह तो शाम हJ को पता लगेगा. Xफq मत करो, सब ठ_क हो जाएगा.' ब~J काका ने समझाने
का "यास Xकया.

‘हम भी आपके साथ जाएंगे?' टोपीलाल ने आsहपव4


ू क कहा.

‘उ-हMने तो केवल मझे


ु बलवाया
ु है ?'

‘इस काम मO हम सब साथ-साथ हa.' ब~J काका ब`चM क! ओर दे खते रहे . पल-भर को वे
%न;†र हो गए. मंुह खोला तो Hयार से गला भरा4ने लगा.

‘ठ_क है , शाम को दे खा जाएगा.' उ-हO लग रहा Xक आने वाले pदन उs घटनाqम से भरे हो
सकते हa. परं तु wबना संघष4 के पUरवत4न के वां%छत लय तक पहंु च पाना असंभव है . उसी
Zण उ-हMने एक बड़ा %नण4य ले &लया.
नेक मकसद मO दमन क! संभावना भी आदमी के हौसले को जवान बना दे ती है . -

ब~J काका पु&लस सपUरं


ु टOडOट से &मलने पहंु चे तो उनके साथ कb
ु क! और टोपीलाल भी थे. वे
केवल टोपीलाल को अपने साथ चलने ले जाने को तैयार थे. Xकत ं ु जब चलने लगे

तो कb
ु क! भी अड़ गई. सपUरटO
ु डOट ने दे खते हJ खड़े होकर ब~J काका का स‡मान Xकया.

उनके साथ आए ब`चM को दे खकर उसक! आंखM मO Xक5चत Dव#मय उमड़ आया. टोपीलाल
और कbु क! ने जब हाथ जोड़कर अ&भवादन Xकया तो प&लसु अ5धकारJ भी "भाDवत हए
ु wबना
न रह सका. दोनM को बैठने के &लए क&स4
ु यां मंगवाई गŠ.

‘मेरे Dवाथ हa. इनसे कछ


ु भी %छपा नहJं है .' ब~J काका बोले। आhमDव2वास से भरJ भाषा.

‘आज तो इन ब`चM क! छo
ु टJ कर दे ते.' प&लस
ु अ5धकारJ ने संबो5धत Xकया.

‘ये मझे
ु अपनी बात आपके सामने रखने मO मदद करO गे.'

‘आप जानते हJ हa Xक हमारे ऊपर Xकतना दबाव रहता है ...!'

‘सरकार क! ओर से हJ...?' ब~J काका ने "2न अधरा


ू छोड़ pदया.


‘प&लस तो िजतना "शासन क! मानती है , उतना हJ मान जनता का भी रखना पड़ता है .'
अ5धकारJ ने बात को घमाने
ु का "यास Xकया, ‘अखबारM मO आजकल जो छप रहा है , उसे तो
आप दे ख हJ रहे हMगे. आपने ब`चM को नशा-Dवरोधी अ&भयान मO लगाकर अनठा
ू काम Xकया
है . इस अ&भयान क! सफलता क! गंज
ू संसद तक पहंु च चक!
ु है . खद
ु मंuी जी आपके "शंसक
हa. कह रहे थे Xक जो काम प&लस
ु और "शासन इतने वषr मO, अपने भारJ-भरकम तामझाम के
बावजद
ू नहJं कर सके, वह आपने इन छोट-छोटे ब`चM के मा{यम से कर pदखाया है .
gयिbतगत zप मO तो मa भी आपका बहत
ु बड़ा "शंसक हंू . लेXकन आप तो जानते हa Xक
प&लस
ु अ5धकारJ को काननू और gयव#था दोनM हJ दे खने पड़ते हa. इस नाते मेरJ कछ
ु और
भी िज‡मेदाUरयां हa.'

‘हमने तो ऐसा कछ
ु नहJं Xकया Xक आप परे शानी मO पड़ जाएं.'

‘आपने जानबझकर
ू तो ऐसा कछ
ु नहJं Xकया...'

‘यानी जो कछ
ु हआ
ु वह अनजाने मO हआ
ु है?'

‘यहJ समझ लJिजए. दरअसल िजस अधबने भवन मO आपका #कूल चल रहा है , वहां ऐसी
ग%तDव5धयM क! अनम%त
ु नहJं दJ जा सकती.'

‘तब तो ये ब`चे %नरZर हJ बने रहO ग?े '


‘उसके &लए सरकारJ पाठशालाएं हa. वहां इन ब`चM का "वेश आसानी से हो जाएगा. आप चाहO
तो मa खद
ु यह िज‡मेदारJ उठाने को तैयार हंू.'

‘पर उससे लाभ bया होगा. िजस जगह इन ब`चM के माता-Dपता काम कर रहे हa, वहां से
सबसे %नकट वालJ पाठशाला भी कम से कम चार Xकलोमीटर क! दरJ
ू पर है . bया आपको
लगता है Xक इतनी दरू ये ब`चे पढ़ाई के &लए जा पाएंग?े और इनके माता-Dपता इ-हO वहां
जाने क! अनम%त
ु दO गे. bयMXक भले हJ गरJब हM, अपने ब`चM क! सरZा
ु क! 5चंता तो उ-हO भी
है .'

‘जब तक नजदJक Xकसी पाठशाला का "बंध नहJं हो जाता तब तक तो इन ब`चM

को वहां जाना हJ होगा.'

‘और ब`चM क! सरZा


ु के &लहाज से इनके अ&भभावक वहां जाने न दO गे, Xफर तो बात जहां क!
तहां रहJ. तब इन ब`चM का bया होगा?'

‘अवै #थल पर पाठशाला चलाने क! अनम%त


ु तो हर5गज नहJं दJ जा सकती. अपनी नहJं
माने तो Dववश होकर हमO बल-"योग करना पड़ेगा.' प&लस
ु अ5धकारJ ने दबंगई pदखानी चाहJ.

‘Xकस कानन
ू के आधार पर आप बल-"योग करO गे. जहां हमारJ पाठशाला है, वहां पाठशाला के
नाम पर न कोई अवैध इमारत है , न पो#टर, न बैनर. खले
ु मO ब`चM को कछ
ु &सखाना भला
कौन से कानन
ू मO अपराध है , जरा बताएंग?े ' ब~J काका ने कहा तो प&लस
ु अ5धकारJ बगलO
झांकने लगा.

‘आप मेरJ मजबरJ


ू को समझने क! को&शश क!िजए?'

‘आप हमारे संक9प को बझने


ू क! को&शश क!िजए. आप जानते हa Xक शहर मO हर वष4 राशन
क! दकान
ु तो बामि2
ु कल एक बढ़ती है , लेXकन उसी अव5ध मO शराब के दज4नM नए ठे कM को
लाइसOस दे pदया जाता है . ब`चM को कॉपी और प#
ु तक भले न &मले, पर गटका
ु और
पानमसाला खरJदने के &लए अब गलJ के नb
ु कड़ तक जाना भी जzरJ नहJं रहा. वह आसपास
हJ टं गा &मल जाता है . यहJ हालत चरस, अफ!म और गांजे क! है . इलाज के &लए दवा खरJदते
समय के&म#ट क! दकान
ु तक जाना पड़ता है . नशे क! चीजO खद
ु अपने sाहक तक चलJ आती
हa.

बाक! नशM क! बात तो अभी छोड़ हJ दO , इस शहर मO &सफ4 शराब से मरने वालM क! सं’या
सात हजार से ऊपर पहंु च चक!
ु है . DवWान ने महामारJ को तो जीत &लया है, पर शराब और
नशे पर %नयंuण रखने क! बात करो◌े तो कानन ू पीछे पड़ जाता है . जबXक दे श मO शराब और
नशे क! लत के कारण हर साल इतनी मौतO होती हa, िजतनी परJ
ू द%नया
ु मO बड़ी से बड़ी
महामारJ के दौरान भी नहJं होतीं. नशा-पीnड़तM के उपचार के &लए सरकार को हर वष4 इतना
खच4 करना पड़ता है Xक माu एक साल क! रकम से दे श के हर गांव मO #कूल खोला जा
सकता है .

इन ब`चM के pदल से %नकलJ आवाज ने इनके अ&भभावकM के pदलM को छआ


ु है . उ-हO यह
एहसास pदलाया है Xक वे अ&भभावक भी हa. यहJ कारण है Xक Dपछले कछ
ु pदनM मO हJ शराब
क! wबq! मO तीस "%तशत 5गरावट आई है . पानमसाला और गटक
ु े क! wबq! भी पचीस
"%तशत तक घट चक! ु है . इससे वे लोग डरे हए
ु हa िजनका नशे का कारोबार है . जो yयादा
धन बंटोरने के &लए Xकसी भी सीमा तक 5गर सकते हa. िजनका कानन ू और इंसा%नयत से
कोई वा#ता नहJं. वहJ लोग अखबारM मO तरह-तरह क! बातO &लखकर मझे
ु बदनाम करना
चाहते हa. अखबारM ‰ारा कछ
ु नहJं कर पाए तो अब आपके मा{यम से दबाव बनाने क!
को&शश कर रहे हa.'

प&लस
ु अ5धकारJ चप
ु था. टोपीलाल और कb
ु क! है रान थे. ब~J काका को इस तरह बात करते
हए
ु उ-हMने पहलJ बार दे खा था. उधर ब~J काका कहे जा रहे थे-

‘एक गलतफहमी और दरू कर दं .ू इस अ&भयान को शz


ु करने मO मेरा योगदान चाहे जो भी
रहा हो, Xफलहाल मa इसका संचालक नहJं हंू . इसको तो ये ब`चे #वयं, #वयं#फूत4 भाव से चला
रहे हa. मa तो माu इनका "शंसक और माग4दश4क हंू . और ब`चM का हJ %नण4य है Xक आने
वालJ गांधी जयंती के pदन ये परेू शहर मO एक शां%त जलस
ु ू %नकालO .'

‘जी!' प&लस
ु अ5धकारJ अपनी कस
ु से उछल पड़ा, ‘सरकार इसक! कतई अनम%त
ु नहJं दे गी.'

‘हमO उसक! परवाह नहJं है . अपने राT Dपता क! जयंती अगर ये ब`चे उनके आदशr पर
चलकर, उनके अधरेू काय4qमM को आगे बढ़ाते हए ु मनाना चाहते हa, तो इ-हO कौन रोक सकता
है . उस जलस
ु ू मO परेू शहर के ब`चे शा&मल हMगे. संभव हआ
ु तो उनके माता-Dपता भी. वे सब
&मलकर नशे के Dव;k आवाज उठाएंगे. और हां, उसी pदन हम मजदरू बि#तयM के आसपास
खलJ
ु शराब क! दकानM
ु के आगे धरना-"दश4न भी करO गे.'

‘इससे तो हालात और yयादा wबगड़ सकते हa. जबXक मa चाहता हंू Xक आप हमारJ मदद करO .'
प&लस
ु सपUरं
ु टOडOट नम4 पड़ने लगा था.

इसपर ब~J काका म#


ु करा pदए, ‘आपने थोड़ी दे र पहले हJ माना है Xक नशे पर रोक लगाना
प&लस
ु और "शासन का काम है . मa कहता हंू Xक यह दे श के हर जागzक नागUरक का काम
है . अपनी जागzकता pदखाते हए
ु इन ब`चM ने थोड़े-से pदनM मO वह कर pदखाया है , जो प&लस

और कानन
ू कई वषMर ् मO नहJं कर पाए थे. दे खा जाए तो ये ब`चे आप हJ क! मदद कर रहे
हa. इस&लए आपका भी कत4gय है Xक उस pदन कोई अनहोनी न होने दO .' इतना कहकर ब~J
काका ने प&लस
ु सपUरटO
ु डOट को नम#कार कहा और उठ गए. प&लस
ु सपUरं
ु टOडOट सpहत सभी
अ5धकारJ उ-हO ठगे से दे खते रहे .

बाहर आकर %नरालJ ब~J काका क! तारJफ मO कछ


ु कहना चाहती थी. मगर टोपीलाल ने चचा4
दसरJ
ू हJ ओर मोड़ दJ-‘ग;जी
ु , हमारे "दश4न मO मजदरू औरतO भी pह#सा ले सकती हa?'

‘wबलकल ु मa तो चाहता हंू Xक उ-हO आगे आना हJ चाpहए. तभी हम परJ


ू तरह कामयाब हो
पाएंगे.'

‘हम लोग जब घरM मO जाते हa तो वहां के मद4 हमO घरते


ू हa. उनका बस चले तो हमO भीतर हJ
न घसने
ु दO . लेXकन औरतO हमO Hयार से wबठाती हa. रसोई मO कछ
ु बन रहा हो तो खाने को भी
दे ती हa. घर के मदr क! नशाखोरJ क! आदत से परे शान औरतO चाहती हa Xक इस अ&भयान मO
उ-हO भी pह#सेदार बनाया जाए.'

‘लेXकन, मaने तो यह यंू हJ, बस आवेश मO, प&लस


ु अ5धकारJ को 5चढ़ाने के &लए कह pदया था.'
ब~J काका असमंजस मO थे.

‘जब कह pदया है तो उसपर अमल भी करना होगा. वरना वे समझOगे Xक हम डर गए.'

‘वे कौन?' ब~J काका ने चˆककर पछा


ू .

‘वहJ, जो हमO रोकना चाहते हa.'

‘bया तम
ु उनके बारे मO जानते हो?'

‘नहJं, पर बापू कह रहे थे Xक शराब के ठे केदारM, गटका


ु और पानमसाला बनाने वालM को बहत

घाटा सहना पड़ रहा है . वे इस को&शश मO हa Xक हमO कैसे रोका जाए.'

ु हारे बापू ने bया तमसे


‘त‡ ु भी कछ
ु कहा था?'

ु भी नहJं, दो-चार pदनM से मa उ-हO परे शान जzर दे ख रहा हंू .' टोपीलाल ने सहज भाव से
‘कछ
बताया.

‘तब?'

‘अगर अब हम पीछे हटे तो वे समझOगे Xक डर गए...' %नरालJ ने जोड़ा.

ु ठ_क हJ कहती हो. यह एक पनीत


‘तम ु कम4 है . मa त‡
ु हO रोकंू गा नहJं. न डरने को हJ कहंू गा.
अब डरने क! बारJ तो असल मO उनक! है . हम सफलता क! डगर पर हa. लेXकन हमO सावधान
रहना होगा. हमारे pदलM को अपने आतंक के साये मO रखने के &लए वे लोग Xकसी भी सीमा
तक जा सकते हa.' ब~J काका ने कहा.
ं ु चेहरा आhमDव2वास से pदपpदपा
उस pदन टोपीलाल घर पहंु चा तो मन थोड़ा उDkcन था. Xकत
रहा था.

लोकक9याण क! भावना सबसे पDवu एहसास है .

महानता उ‘ दे खकर नहJं ज-मती.

प&लस
ु सपUरटO
ु डOट के साथ बात &सफ4 छह जनM के बीच हई
ु थी. बंद कमरे मO. बाद मO
टोपीलाल और %नरालJ के साथ ब~J काका ने उस संवाद को अपनी तरह से आगे बढ़ाया.
उनके gयवहार मO न तो आqोश था, न बदले क! भावना. उससे अगले हJ pदन समाचारपu मO
एक और ब`चे का पu छपा. िजससे परेू शहर क! आhमा को Dवच&लत कर pदया. खासकर
XकशोरM और यवाओं
ु क!.

पu टोपीलाल ने हJ &लखा था-

‘मेरे Dपता नशे क! हर चीज से दरू रहते हa. शराब, बीड़ी, गटका
ु , पान, तंबाकू को वे हाथ तक
नहJं लगाते. इस तरह तो मa द%नया
ु के सबसे भाcयशालJ ब`चM मO से हंू . मेरे माता-Dपता
द%नया
ु के सबसे अ`छे माता-Dपताओं मO से एक. परं तु मेरे हमउ‘ दो#तM मO से अ5धकांश मेरे
िजतने भाcयशालJ नहJं हa. bयMXक उनके माता-Dपता(yयादातर Dपता हJ) Xकसी न Xकसी नशे
क! लत के &शकार हa. इस कारण उ-हO बाक! ब`चM के बीच बेहद

श&म€दा होना पड़ता है .

वे Xकसी से खलJ
ु बातचीत भी नहJं कर पाते. भDवTय को लेकर एक अनजाना-सा डर उनके
pदलो-pदमाग पर हमेशा सवार रहता है . खद
ु से yयादा वे अपनी मां, बहन के &लए &लए
5चं%तत रहते हa. िज-हO उनके Dपता के नशे का उनक! अपेZा अ5धक सामना करना पड़ता है .
जब-तब वे हं सते भी हa, मगर उनक! हं सी महज लोक-pदखावा, एक र#म अदायगी जैसी होती
है .

जैसे Xक मेरा एक दो#त है . बहत


ु भला लड़का. उसक! एक छोटJ बहन भी है . अपने भाई क!
तरह मासमू और भोलJ. Dपता घरM क! पताईु का काम करते हa. pदहाड़ी का काम. रोज
कमाना, रोज का खाना. उनके घर का च9
ू हा तभी जल पाता है , जब उनके Dपता कछ
ु कमाकर
ं ु Dपछले कई महJनM से मa दे ख रहा हंू Xक वे घर आने के बजाय रा#ते या
घर लौटते हa. Xकत
ना&लयM मO पड़े होते हa. नशे क! हालत मO. यpद उनके घरवालM को पता लग जाता है तो जैस-े
तैसे उठाकर ले जाते.

घर जाकर ब`चM क! मां जेब टटोलकर दे खती है . ताXक सबह


ु से बंद च9
ू हे को गमा4 सके. उस
समय मेरा दो#त और उसक! बहन भख
ू से बेहाल हो रहे होते हa. इस&लए उनक! मां अपने
प%त क! जेब ज9दJ-ज9दJ टटोलती. कंपकंपाती उं ग&लयM से, डरते-डरते. यह सोचते हए
ु Xक
कहJं उस जेब को शराब क! दकान
ु पहले हJ खोखलJ न कर चक!
ु हो. यह डर भी बना रहता है
Xक कछ
ु बच जाए तो नशे क! हालत मO बेसध
ु पड़े शराबी क! जेब को टटोलकर नकदJ और
क!मती चीज ले जाने वाले %छछोरे लोग भी कम नहJं हa. ऐसा होता हJ रहता है . उस pदन
उ-हO भखा
ू हJ सोना पड़ता है . कभी-कभार उनक! मजबरू मां घर क! एकाध चीज बेचकर च9
ू हा
जलाने का इंतजाम कर लेती है .

ऐसे हJ जब कई pदन भख
ू मO गजरे
ु तो अपने ब`चM का पेट भरने के &लए वह औरत काम
पर जाने लगी. एक pदन शाम को उसका मद4 घर लौटा तो उसने च9 ू हे तो जलते हए ु पाया.
बस यह दे खते हJ उसका पारा चढ़ गया. wबना कछ
ु सोचे-समझे गा&लयां दे ने लगा. उस pदन
उसने अपनी पhनी को कलटा
ु , वे2या, क%तया
ु और न जाने bया-bया कहा. उस समय दोनM
ब`चे खड़े-खड़े रो रहे थे. औरत अपना माथा पीट रहJ थी. परा
ू मह9
ु ला जानता था Xक औरत
ने pदन-भर मजदरJ
ू क! है . अपने ब`चM का पेट भरने के &लए पसीना बहाया है , पर शराबी को
समझाए कौन?

ऐसी एक नहJं दज4नM घटनाएं हa. मेरे कई अभागे दो#त हa, जो नशे के कारण uासदJ भोग रहे
हa. उनक! िजंदगी नक4 बन चक!
ु है . ऐ◌ेसे हJ कछ
ु ब`चM ने &मलकर इस दो अbटूबर को गांधी
जयंती के pदन एक जल
ु स
ू %नकालने का %नण4य Xकया है . हमारा जलस
ु ू परJ
ू तरह शां%तपण4

होगा. हमारे हाथ मO नारे &लखे पो#टर हMगे. हम मौन रहO गे. यहां तक Xक नारे भी नहJं
लगाएंगे. हमारे हाथ मO झंडे हMगे, डंडे नहJं. जो भी हमारे अ&भयान से, मेरे उन &मuM से
सहानभ%त
ु ू रखता है , िजनका शां%त और अpहंसा मO Dव2वास है , वह आगामी दो अbटूबर को
स`चे, शांत मन से हमारे साथ सि‡म&लत हो सकता है .

हम जब &मलकर आगे बढ़O गे, तभी कछ


ु साथ4क गढ़ सकOगे!

टोपीलाल

इससे पहले के अ5धकांश पu छfम नाम से "का&शत हए ु थे. परं तु इस पu मO टोपीलाल का


नाम गया था. "भातफेरJ के मा{यम से शहर-भर मO टोपीलाल और उसके सा5थयM क! चचा4
थी. पu क! खबर टोपीलाल क! मां तक पहंु ची. उसका मन आशंकाओं से भर गया. उस रात
टोपीलाल घर लौटा तो वह खाना बना रहJ थी. बापू टोले के दसरे
ू &मि[यM के साथ अगले
pदन के काम क! योजना बना रहे थे. टोपीलाल मां के पास च9
ू हे के सामने हJ बैठ गया. वह
उसे म#
ु कराई. पर उस म#
ु कान मO उतनी #वाभाDवकता न थी. टोपीलाल को उपले क! मंदJ
आग मO मां के माथे क! लक!रO साफ pदखाई पड़ गŠ. मां परे शान है, इस बात का अनमान

लगाते हए
ु उसको दे र न लगी. मगर bयM, काफ! को&शश के बाद भी वह इस बारे मO अनमान

लगाने मO नाकाम रहा.
‘तेरJ ग;जी
ु पढ़ाई पर {यान तो दे रहे हa, न!' बात मां ने हJ आगे बढ़ाई.


‘ग;जी , तो हमेशा हJ हमारे भले का सोचते हa.'

‘और जो काम वे तमसे


ु करा रहे हa! मa तो पढ़J-&लखी नहJं. तेरे बापू को अपने काम के
अलावा बहत
ु कम द%नयादारJ
ु आती है. हम अपने घर से सैकड़M मील दरू इस&लए आए हa Xक
िजस इyजत क! रोटJ क! हम उ‡मीद रखते थे, गांव मO जा%तभेद के चलते वह संभव हJ नहJं
थी. शहर मO वषr रहकर भी हम इतने समथ4 नहJं हो पाए हa Xक Xकसी बड़ी मि2
ु कल का
सामना कर सकO. पेट भरने के &लए रोज पसीना बहाना पड़ता है . और तेरे ग;जी
ु , माना Xक
pदल के भले और रसखवाले
ू हa, मगर आजकल क! चालबाज द%नया
ु के आगे वे अकेले...'

‘मां, गांधी जी भी तो अकेले हJ थे.' टोपीलाल ने मां क! बात काटJ. हालांXक ऐसा वह कम हJ
करता था.

‘वो जमाना और था बेटा, तब का आदमी इतना काŠयां नहJं था Xक पीठ पीछे से वार करे ...'

‘तू बेकार हJ परे शान हो रहJ है. ब`चM से कोई bया द2ु मनी %नकालेगा.'

‘तू अभी नादान है . कछ


ु समझता नहJं, कछ
ु pदनM से तरह-तरह क! खबरO &मल रहJ हa. शराब
और नशाखोरJ के Dवरोध मO तम
ु सबने जो काम शz
ु Xकया है , लोग उससे नाराज हa. मजदरू
बि#तयM मO शराब क! दकानO
ु क! wबq! तीन-चौथाई तक आ गई है . यहJ हाल पानमसाला और
गटका
ु बेचने वालM का है . वे लोग इस नकसान
ु को आसानी से सहने वालM मO से नहJं हa. ब~J
काका के बारे मO तो उ-हMने पता कर &लया है . अगर वे इतने रसखवाले
ू न होते तो अब तक
कभी के धर &लए जाते.'

‘यpद तम
ु ब~J काका क! पहंु च के बारे मO जानती हो, तब तो त‡
ु हO %नि2चंत रहना

चाpहए, मां!' टोपीलाल ने तक4 करने क! को&शश क!. पर मां के pदमाग मO तो कछ


ु और हJ
घमड़
ु रहा था-

‘pदन मO कछ
ु आदमी आए थे. तेरे नाम का पता लगाते हए
ु . वे तेरे Dपता से &मले. उ-हMने
धमक! दJ है Xक तझे
ु समझाएं. कहO Xक िजस रा#ते पर तू जा रहा है, वह हममO से Xकसी के
&लए भी ठ_क नहJं है . उ-हMने कहा Xक अगर तू और तेरे दो#त सचमच
ु पढ़ना चाहते हa तो वे
तम
ु सब के &लए शहर के Xकसी भी अ`छे #कूल मO इंतजाम करा सकते हa. तू यpद शहर से
बाहर जाना चाहे तो वे परा
ू खच4 उठाने को तैयार हa. लेXकन इसके &लए तझे
ु जलस
ु ू वगैरह का
चbकर छोड़ना पड़ेगा.'

‘और तम
ु bया चाहती हो, मां.'
‘मेरJ तो यह बहत
ु परानी
ु साध है Xक तू पढ़-&लखकर बड़ा आदमी बने. वे अ`छे #कूल मO
पढ़ाई का खच4 दे ने को तैयार हa. दा„खले मO भी मदद करने का वायदा करके गए हa. मां होने
के नाते यpद मa तेरे सख
ु क! चाह रखती हंू तो इसमO बरा
ु हJ bया है ?'

ु भी बरा
‘कछ ु नहJं है , मां. लेXकन अगर Dपताजी उतने अ`छे न होते, िजतने Xक वे अब हa? यpद
उ-हO भी शराब या जए
ु क! लत होती? यpद अपनी कमाई घर आने से पहले हJ वे शराब या
जए
ु खाने क! भO ट चढ़ाकर घर लौटा करते? यpद तू साधारण [ी क! तरह घर पर प%त का
इंतजार Xकया करती, इस उ‡मीद मO Xक उनके आने पर च9
ू हा चढ़ाएगी और उस समय वे
सबकछ
ु शराब के हवाले कर घर लौटते तो? bया तब भी तू मझे
ु इसी तरह रोकती?'

टोपीलाल के तक4 ने उसक! मां को %न;†र कर pदया.

‘चल पहले रोटJ खा ले...!' वह इतना हJ कह पाई. टोपीलाल रोटJ खाने लगा. खाना खाकर वह
उठा तो मां क! धीमी-सी आवाज आई-

‘अपना खयाल रखना बेटा...मां हंू न, तेरे सख


ु क! 5चंता कभी-कभी कमजोर बना हJ दे ती है !'
कहते-कहते उसक! आंखM मO नमी उतर आई. टोपीलाल का गला भी भारJ हो गया. उसके बाद
अपनी मां पर गव4 करता, भDवTय के बारे मO नए-नए #वHन सजाता हआ
ु वह चारपाई क! ओर
बढ़ गया. कछु दे र बाद काम %नपटाकर मां भी उसके बराबर मO आकर लेट गई. टोपीलाल
ममhव क! चाहत मO उससे सट गया.

"ेम wबना ताकत, wबना अपनM के आशीवा4द के जीवनसंघष4 मO जीत कहां!

भावना स`ची हो तो आवाज दरू तक जाती है. उसका "भाव भी #थायी होता है .

जैसी Xक अपेZा थी टोपीलाल के पu क! अनकल


ु ू "%तXqया हईु . दो अbटूबर के pदन
#वयं#फूत4 भाव से सैकड़M ब`चे उस अ&भयान दल के साथ थे. कतारबk, अनशासन
ु मO बंधे,
एक हJ संक9प मO ढले हए
ु . रं ग-wबरं गे कपड़M मO, मानो तरह-तरह के सगं
ु 5धत फल
ू ,

उ9लास से सजे-संवरे कतारे बांधे खड़े हM. अथवा Xकसी बड़े उfदे 2य के &लए तारे जमीन पर
उतर आए हM. उनके अधरM पर पDवu म#
ु कान थी; जैसे भागीरथी क! पDवu लहरM पर नवअ;ण
क! XकरणO „झल&मला रहJ हM, मन मO आhमDव2वास जैसे सम~
ु अपनी गंभीरता %छपाए रखता
है .

ब`चM के काय4qम क! गंज


ू राजनी%तक ग&लयारM मO छा चक!
ु थी. कई राजनी%तक दल उस
आंदोलन को अपने समथ4न क! घोषणा कर चक
ु े थे. कछ
ु नेताओं ने उस काय4qम से सीधे
जड़ने
ु क! इ`छा भी gयbत क! थी. मगर दरदश
ू ब~J काका ने Dवन‘तापव4
ू क इंकार कर pदया
था. वे नहJं चाहते थे Xक उस काय4qम का राजनीतीकरण हो. &म•या वाद-Dववाद मO फंसकर
वह असमय दम तोड़ जाए. इसपर कछ
ु नेताओं ने अपनी नाराजगी "कट क!. ब~J काका पर
घमंडी होने का आरोप भी लगाया. मगर वे अपने इरादे पर अटल बने रहे .

जलस
ु ू -#थल पर अनशासन
ु क! परJ
ू gयव#था थी. पंिbत मO सबसे आगे था टोपीलाल, &सर पर
पीलJ टोपी पहने. उसके पीछे %नरालJ, तीसरे #थान पर कb
ु क! खड़ी थी. उसके पीछे सदानंद.
पांचवे #थान पर ब~J काका #वयं थे, एक Dवशाल छायादार बरगद क! भां%त. उनके पीछे ब`चM
को दो पंिbतयM मO %नयोिजत Xकया गया था. तीसरJ पंिbत मजदरू औरतM क! थी. अपने
तांबई चेहरे और ठोस इरादM के साथ वे जलस
ु ू मO pह#सा लेने पहंु ची थीं. उनके आंखM मO
Dव2वास-भरJ चमक थी. वे सबसे दायीं ओर ढाल बनकर, पंिbतबk खड़ी थीं. सबके चेहरे पर
एकसमान उ9लास था. ढले थे सब एक हJ अनशासन
ु मO .

जलस
ु ू आगे बढ़े उससे पहले ब~J काका ने ब`चM और बड़M को संबो5धत Xकया-

‘ब`चो और बहनो! यह हमारे इ%तहास का पDवuतम Zण है; और Dव2व-भर मO अनठा


ू भी.
संभवतः पहलJ बार सैकड़M गरJब ब`चे और उनक! ि[यां Xकसी पDवu उfदे 2य के &लए
एकजट ु हए
ु हa. अपने संक9प को मजबत
ू कर, बड़े आंदोलन के &लए आगे आए हa. ब`चे Xकसी
भी दे श का भDवTय हa. इस आधार पर हम कह सकते हa Xक भDवTय अपने वत4मान को
अनशा&सत
ु करने के &लए खदु एकजट
ु हआ
ु है . भटके हए
ु लोगM को राह pदखाने, समाज को
नई pदशा दे ने के &लए यह एकता बहत
ु जzरJ है .

हमारा यह जलस
ु ू नाम पाने के &लए नहJं है . न &सफ4 अखबारM मO नाम छपवाने के &लए है . न
हJ इसके पीछे कोई राजनी%तक ताकत है . आज जो हमारे &लए जzरJ है , वह है समय पर
भोजन, साफ-सथरे
ु कपड़े, &सर पर छत और &शZा. यहां आए बहत ु से ब`चM को ये सब
सDवधाएं
ु &मल सकती थीं. यpद नशे ने उनके पUरवार पर हमला न Xकया होता. नशे ने हमसे
जीवन क! इन ब%नयादJ
ु चीजM को छ_ना है . हमारे अपनM को भटकाया है , इस&लए आज वह
हमारा सबसे बड़ा द2ु मन है . हमO उसको खदे ड़ दे ना है . मिb
ु त पानी है उससे.

हमारे इस "दश4न का मकसद नशे के दTु "भावM के "%त जागzकता पैदा करना है .लोगM को
बताना है Xक नशा उनके तन और मन को Xकस "कार खोखला करता जा रहा है . यह एक
gया5ध है िजसने परेू समाज को sस रखा है . इस&लए हम नशे से नफरत करते हa, नशा पैदा
करने वालJ व#तुओं से नफरत करते हa, उन लोगM से नफरत करते हa जो अपने #वाथ4 के &लए
नशे क! व#तओ
ु ं का gयापार करते हa. लेXकन हम नशाखोरM से नफरत नहJं करते. वे तो हमारे
अपने और खास हa. नशे ने उ-हO हमसे दरू Xकया है . हमारा उfदे 2य उन भटके हओं
ु को सहJ
रा#ते पर लाना है .
यह भी {यान रहे Xक आज का काय4qम हमारे लंबे अ&भयान क! केवल श;आत
ु है . नशे के
Dवरोध क! हमारJ याuा आज से आरं भ होने जा रहJ है . यह बहत
ु लंबी याuा है . इसमO अनेक
पड़ाव आएंगे. बहत
ु -सी परे शा%नयM और संकटM से हमारा सामना होगा. हादसे कदम-कदम पर
ं ु यpद हम डटे रहे तो Dवजय हमारJ हJ होगी.
हमारJ pह‡मत और धैय4 क! परJZा लO गे. Xकत
bयMXक जीत हमेशा सच क! होती है .

&मuो, मa तो बढ़ा
ू हो चका
ु हंू . संभव है Xक इस अ&भयान मO आपक! संपूण4 Dवजय(ी को मa
अपनी आंखM से न दे ख सकंू. मगर आप सभी उस Dवजय pदवस के साZी बनO, इस कामना के
साथ मa आप सब को बधाई दे ना चाहता हंू .

आगे बढ़ने से पहले &सफ4 इतना {यान रहे Xक हम महाhमा गांधी के शां%त सै%नक हa. मन,
वचन और कम4 मO से Xकसी भी "कार क! pहंसा हमारे &लए hयाyय है . इस&लए हम यह
संक9प लेकर आगे बढ़O Xक चाहे जो भी हो, हम शां%त-भंग नहJं होने दO गे. अpहंसा हमारा धम4
है . महाhमा गांधी क!...'

‘जय...!' ब`चM का समवेत #वर गंज


ू ा.

इसके बाद टोपीलाल ने मोचा4 संभाल pदया. अपनी पतलJ लेXकन ओज-भरJ आवाज मO उसने
नारा लगाया-‘महाhमा गांधी क!...'

‘जय...!'

जलस
ु ू आगे बढ़ने हJ वाला था Xक वहां पर प&लस
ु क! गाड़ी ;क!. उसके पीछे दो गाnड़यां और
भी थीं. एक गाड़ी से धड़ाधड़ कई &सपाहJ कदने
ू लगे. तभी ब~J काका क! %नगाह सबसे आगे
चल रहे प&लस
ु अ5धकारJ पर पड़ी. उ-हO पहचानते हए
ु दे र न लगी. वह प&लस
ु सपUरं
ु टOडOट था.
तेज कदमM से चलता हआ
ु वह ब~J काका के %नकट पहंु चा. जलस
ु ू मO मौजदू औरतO और ब`चे
सहम-से गए. परं तु टोपीलाल और उसके सा5थयM के चेहरM पर पहले जैसी …ढ़ता बनी रहJ.

ब~J काका का अ&भवादन करने के उपरांत प&लस


ु सपUरं
ु टOडOट ने कहा-

‘आप है रान हो रहे हMगे मझे


ु यहां दे खकर. दरअसल मa यह कहने आया हंू Xक उस pदन आपने
मेरJ आंखO खोल दJ थीं. मa इस मसले को अभी तक केवल कानन ू क! %नगाह से दे ख रहा था.
इन ब`चM के पDवu उfदे 2य और उनक! भावनाओं को मa उस समय तक

समझ हJ नहJं पाया था. गलत था मa. शायद आप के हJ दश4नM का सफल


ु है जो समय रहते
सfबDkु लौट आई. अब मa परJ
ू तरह से आपके साथ हंू . आप जलस
ु ू लेकर आगे बढ़O . बस जरा
शां%त-gयव#था का {यान रखO . मa और मेरJ परJ
ू कमान आपके साथ है .'
‘ध-यवाद एसपी साहब! मa आपक! भावनाओं का स‡मान करता हंू तथा उ‡मीद करता हंू Xक
हमO आपक! जzरत नहJं पड़ेगी.'

‘मa भी यहJ चाहता हंू .' म#


ु कराते हए
ु प&लस
ु कHतान ने कहा और अपनी गाड़ी पर सवार हो
गया.

ताकत नै%तकता के आगे सदै व नतम#तक होती रहJ है .

नै%तकता मनTु यता के &लए नए मापदं ड भी गढ़ती है .

हाथM मO झंnडयां और पो#टर उठाए ब`चे आगे बढ़ने लगे. मौन, परJ
ू तरह अनशा&सत
ु . संय&मत
और मया4pदत. चेहरे पर आhमDव2वास और मनभावन म#
ु कान &लए. मानो इतने सारे ब`चे
एक साथ साधनारत हM. Xक पDवu जलधाराएं मौन, धीर-गंभीर ग%त से एक-दसरे
ू के समानांतर
बहJ चलJ जा रहJ हM. अनेकानेक को जीवनदान दे ने. परोपकार क! परं परा को आगे बढ़ाती हई
ु .
सींचती हई
ु पDवu धरा को नई उमंगM, रं ग-wबरं गे सपनM और महान संक9पM से.

सबसे आगे था टोपीलाल. उ-नत sीवा, घंघ ु राले बाल, तांबई, पका हआ
ु रं ग. अपने दोनM हाथM से
दं ड रpहत 2वेत-हUरत {वजा को उठाए. दं ड रpहत {वजा क! पUरक9पना ब~J काका ने क! थी.
अpहंसा के &सपाpहयM के हाथM मO दं ड का bया काम. जो अपनी नै%तकता से द%नया
ु जीतने
%नकला है , उसको बल या उसके बाtयः "तीकM का सहारा bयM. उनके पीछे मौजद
ू तीनM
कतारM मO सैकड़M ब`चे और औरते खड़ी थे.

आरं भ मO जलस
ु ू मO pह#सा लेने आई ि[यM क! सं’या कम थी. लेXकन जलस
ु ू आगे बढ़ने के
साथ-साथ मpहला आंदोलनकाUरयM क! सं’या भी बढ़ती चलJ गई. उनक! दे खदे खी कछ
ु प;ष

भी आकर उनमO शा&मल हो गए. िजनमO से एक gयिbत को दे खकर ब~J काका, कb
ु क! और
टोपीलाल सpहत अनेक ब`चे Dव#मय मO डब
ू गए. वह िजयानंद था. सदानंद का Dपता. अपने
Dपता को वहां दे ख सदानंद के चेहरे पर उदासी छा गई. यह दे ख ब~J काका ने उसको संभाला.
कंधा थामकर भरोसा जताया. जलस
ु ू आगे बढ़ा तो िजयानंद भी साथ-साथ बढ़ने लगा.

दोपहर बारह बजे के तय समय पर जब जलस


ु ू अपने पव4
ू %नधा4Uरत पड़ाव-#थल पर पहंु चा, उस
समय तक ि[यM क! कतार ब`चM क! कतार िजतनी हJ लंबी हो चक!
ु थी. उसमO डेढ़ सौ से
अ5धक मpहला आंदोलनकारJ सि‡म&लत थीं. (म और ममता क! "%तम%त4
ू . उhसाpहत, आंखM मO
बदलाव का सलोना सपना सजाए हए
ु . नए Dव2व क! रचना

को समDप4त. प;षM
ु क! सं’या भी पचास से ऊपर थी.

प&लस
ु के &सपाहJ जलस
ु ू को घेरे हए
ु चल रहे थे. उनके चेहरे पर नौकरJ का तनाव कम,
जलसु ू के साथ होने क! अनभ%त
ु ू "बल थी. उनक! भावनाएं जलस ु ू मO सि‡म&लत ब`चM क!
भावनाओं के अनzप
ु थीं, इसी&लए वे भी जलस
ु ू का हJ एक pह#सा नजर आ रहे थे. शायद
पहलJ बार प&लस
ु क! मंशा ब`चM के जलस
ु ू को सुरZाकवच "दान करने क! थी. काननी

ताकत नै%तकता क! सहयोगी बनी थी. लोगM को अपनी कामयाबी का भरोसा भी था.

रा#ते के दोनM और लोग जमा थे. [ी-प;ष
ु , बढे
ू ◌े और ब`चे, धनी और %नध4न, मजदरू और
gयापारJ. सभी है रान थे. मैदान मO इधर-उधर घमने
ू वाले ब`चे, िज-हO आवारा, बदमाश, शैतान
आpद न जाने bया-bया कहा जाता था. जो ग&लयM मO बेकार घमते
ू , समय गजारने
ु के &लए
कबाड़ का धंधा करने लगते थे.

पेट भरने के &लए छोटJ-मोटJ चोरJ-चकारJ से भी उ-हO डर नहJं था. उनके घरM मO नशे क!
uासदJ आम बात थी. अपनी नादानी के कारण जो #वयं भी Xकसी न Xकसी नशे का &शकार
होते आए थे, पहलJ बार वे नशे के Dव;k एकजट
ु हए
ु थे. पहलJ बार उ-हMने उस दानव के
Dव;k मोचा4 खोला था. तमाशबीन दश4कM के बीच चचा4 का यह एक अ`छा मसाला था.

जलस
ु ू को मैदान तक पहंु चने मO करJब डेढ़ घंटा लगा था. वहां #वयंसेवी सं#थाओं क! ओर से
ना2ते क! gयव#था थी. मैदान तक पहंु चते-पहंु चते ब`चे थक चक
ु े थे. हालांXक उनके चेहरे को
दे खकर उसका अनमान
ु लगा पाना कpठन था. ब~J काका ने ना2ते के &लए Dव(ाम क! म~ा

मO आ जाने को कहा. कछ
ु ब`चे वहJं जमीन पर बैठ गए. मैदान मO ब`चM को संबो5धत करने
के &लए एक मंच बनाया गया था. मंच से ब~J काका ‰ारा संबो5धत Xकए जाने का काय4qम
था.

पाक4 मO अब &सफ4 ब`चे नहJं थे. बि9क सैकड़M क! भीड़ जमा थी. जलस
ु ू क! खबर अखबार के
मा{यम से परेू शहर मO फैल चक!
ु थी. इस&लए उसको दे खने के &लए हजारM क! भीड़ उमड़
चक!
ु थी. उhसक
ु लोग सड़क के Xकनारे , चौराहM, घरM और दकानM
ु क! छतM पर खड़े थे. बाजार
मO sाहक कम जलसु ू दे खने आए तमाशबीनM क! सं’या अ5धक थी. ब`चM के पहंु चने से पहले
हJ सैकड़M लोग उस पाक4 मO जमा हो चक
ु े थे. इससे ब~J काका का उhसाpहत होना #वाभाDवक
हJ था.

ब`चM के उhसाहवध4न के &लए एक बार Xफर उ-हMने िज‡मेदारJ संभाल लJ. मंच पर आकर
उ-हMने कहना आरं भ Xकया-

‘दो#तो! मa नशे के Dव;k ब`चM और बड़M मO चेतना तो लाना चाहता था. परं तु सच मा%नए
इतने बड़े और सफल जलस
ु ू क! क9पना मaने सपने मO भी नहJं क! थी. मेरJ पाठशाला मO तो
मo
ु ठ_-भर हJ ब`चे हa, जो एक कमरे मO समा सकते हa. पर आज जो यहां

ु ू उमड़ पड़ा है , उसका (ेय &सफ4 और &सफ4 टोपीलाल और


पर शहर-भर के ब`चM का हजम
उसके सा5थयM को जाता है .
इन ब`चM ने परJ
ू मेहनत और ईमानदारJ के साथ अपनी भावनाओं को आप सब तक
पहंु चाया. आपके pदल को छआु . इसी का सफल ु आज का यह कामयाब "दश4न है .रा#ते मO
हमारे जलस ु ू को हजारM आंखM ने दे खा. हजारM pदल-pदमागM ने हमारे काय4qम के "%त अपनी
आ#था का "दश4न Xकया है . आप सबक! भागीदारJ ने, चाहे वह िजस zप मO भी हो, हमारा
हौसला बढ़ाया है . हमारे मकसद को …ढ़ Xकया है . और इस संघष4 मO जीत के "%त हमारे
Dव2वास को आगे ले जाने का काम Xकया है . इसक! खबर करोड़M लोगM तक पहंु चेगी और
यक!न मा%नए हमO उनका भी आशीवा4द &मलेगा.

आज िजस तरह से लोग हमारे जलस ु ू को दे खने के &लए जमा हए


ु हa, उससे लगता है Xक लोग
हमपर Dव2वास कर रहे हa. वे हमारJ बात से सहमत हa. हमारJ भावनाओं के "%त एकमत हa,
हमसे जड़ना
ु चाहते हa. हमने आज लोगM क! आंखM मO चमक दे खी. %न2चय हJ उनमO कछ

आंखO ऐसी भी हMगी िज-हO नशे क! लत ने धंध
ु लJ बना pदया होगा. लेXकन यpद वे हमO दे खने
के &लए यहां तक आई हa तो हमO यह मान लेना चाpहए Xक वे बदलाव के &लए उhसक
ु हa. वे
अपनी ि#थ%त से, बदनामी और पतन क! पराकाTठा से ऊब चक!
ु हa. यह सब हमारJ एकजटता

का नतीजा है . हमारे उfदे 2य क! पDवuता ने इसको आसान बनाया है .

जलस
ु ू को कामयाब बनाने मO ि[यM का भी योगदान है . वे #वयं#फूत4 भाव से इसमO pह#सा
लेने आई हa. जलस
ु ू मO ि[यM को सि‡म&लत करने का Dवचार भी मेरा नहJं था. यह सझाव
ु भी
टोपीलाल क! ओर से आया. सच कहंू तो आजादJ के बाद के अपने साव4ज%नक आयोजन मO मa
[ी-शिbत को इतने बड़े #तर पर पहलJ बार संगpठत दे ख रहा हंू . हमारे पUरवारM मO कमाना
अब भी प;ष
ु क! िज‡मेदारJ माना जाता है , लेXकन उसका अि#तhव प◌ू
ू रJ तरह अपने पUरवार
अथा4त [ी और ब`चM पर %नभ4र होता है . कोई भी मनTु य भले हJ वह Xकतना हJ संवेदनहJन
bयM न हो, [ी और ब`चM क! उपेZा नहJं कर पाता. घर के मद4 जब नशे के &शकार होते हa
तो उसका सवा45धक नकसान
ु भी इसी वग4 को उठाना पड़ता है . इस&लए अपने pहत के &लए
इन दोनM को संगpठत होना पड़ेगा.

यह कोई राजनी%तक लड़ाई नहJं है . हम इसको राजनी%तक लड़ाई बनाना भी नहJं चाहते. अगर
इसको राजनी%तक लड़ाई बनाया गया तो वोटM के सौदागर कद
ू पड़Oगे. तब इस आंदोलन का
भी वहJ ह( होगा जो दे श क! अ5धकांश राजनी%तक सं#थाओं का होता रहा है . यह एक
सामािजक आंदोलन है , िजसका संघष4 घर क! चारदJवारJ के बीच, चौके-च9
ू हे के सामने होना है .
वहां पर ब`चM और ि[यM क! एकजटता
ु इस आंदोलन को Dवजय क! ओर ले जाएगी.

&मuो! हमारा अगला काय4qम मजदरू बि#तयM के आसपास ि#थत शराब क! पांच

दकानM
ु के आगे धरने-"दश4न का है . गांधी जयंती के कारण सभी दकानO
ु आज बंद हMगी. मगर
हमारा लय अपनी Dवचारधारा को "शासन और आम जनता तक पहंु चाना है , इससे उनके
बंद होने या खले
ु रहने से कोई भी "भाव नहJं पड़ता. मa चाहता हंू Xक इस सांके%तक धरने के
नेतhृ व के &लए मpहलाएं आगे आएं.'

ब~J काका ने बोलना समाHत Xकया तो सभा-#थल ता&लयM क! गड़गड़ाहट से गंज


ू उठा. ि[यM
क! कतार से कछ
ु मpहलाएं आगे आ गŠ. बाक! ब~J काका के इशारे पर ब`चM क! कतारM मO
ब`चM के बीच सि‡म&लत हो गŠ. Xफर परेू दल को पांच pह#सM मO बांट pदया गया.

‘महाhमा गांधी क! जय...!' पीछे से आवाज आई तो टोपीलाल चˆक पड़ा.

‘मां!' कहते हए
ु उसक! %नगाह मpहलाओं क! ओर दौड़ गई. आठ-दस मpहलाओं के बीच अपनी
मां को खड़ा दे ख टोपीलाल क! आंखM मO चमक आ गई-

ु भी!' उसके मंह


‘तम ु से बरबस %नकला. टोपीलाल को आंखM हJ आंखM मO आशीवा4द लटाते
ु हए

उसक! मां ने दबारा
ु नारा लगाया-

‘सhय और अpहंसा क!...!'

‘जय!' टोपीलाल ने अपनी मां के #वर मO #वर &मलाया. उसका साथ सैकड़M आवाजM ने pदया.
जलस
ु ू धरने के &लए आगे बढ़ने हJ जा रहा था Xक एसपी क! गाड़ी Xफर उसका रा#ता रोककर
खड़ी हो गई. आंखM मO 5चंता के भाव &लए वह ब~J काका के पास पहंु चा-

‘माफ क!िजए, यहां से आगे बढ़ने क! अनम%त


ु मa आपको नहJं दे सकता?' प&लस
ु अ5धकारJ ने
जोर दे कर कहा. ब~J काका है रान. कारण उनक! समझ के बाहर था.

‘ऐसा अचानक bया हो गया एसपी साहब?' ब~J काका ने "2न Xकया.

ु अभी-अभी सचना
‘मझे ू &मलJ है Xक उधर कछ
ु गंड
ु े लोग जमा हa. वे जलस
ु ू को नकसान
ु पहंु चा
सकते हa.'

‘आप उनको रोकO, समझाएं Xक वे हमारे शां%तपण4


ू "दश4न मO बाधा न बनO.'

‘हमारJ टकnड़यां
ु उधर जा चक!
ु हa. हालात %नयंuण मO हa. Xफर भी ब`चM और मpहलाओं के
कारण मa कोई खतरा उठाना नहJं चाहता. HलJज, आप हJ मान जाइए.'

‘चाहे कछ
ु भी हो जाए साहब, हम नहJं मानOगे.' तब तक कई मpहलाएं आगे आ चक!
ु थीं.
टोपीलाल और उसके साथी भी उनके इद4-5गद4 जमा हो गए.

‘आप बात समझने क! को&शश क!िजए. उन लोगM का कोई भरोसा नहJं. गंड
ु -मवा&लयM
े के
मा{यम से वे कछ
ु भी कर सकते हa.'
‘तो आप उ-हO 5गर“तार कर लJिजए...' मpहलाओं के बीच से आवाज आई. एसपी के चेहरे पर
बेचारगी छा गई. तब ब~J काका उसको सांhवना दे ने के &लए आगे आए-

‘मa आपक! मि2 ं ु हमारJ भी Dववशता है . हम


ु कल समझता हंू कHतान साहब. Xकत

pहंसा नहJं चाहते. लेXकन उसके डर से अपने बढ़े हए


ु कदम वापस भी नहJं ले सकते.' %नकट

हJ खडे टोपीलाल को तो इसी बात का इंतजार था. उसने जोश के साथ नारा लगाया-

‘महाhमा गांधी क!...!'

‘जय!' उतने हJ जोश मO डबे


ू जलस
ु ू ने साथ %नभाया. उनक! आवाज का दमखम दे ख दशM
pदशाएं गंज
ू ने लगीं.

‘सhय-अpहंसा...!'

‘िजंदाबाद...!'

‘Hयार से जो आबाद हए
ु घर...'

‘...नशे ने वे बरबाद Xकए घर'

‘अगर तरbक! करनी है तो...'

‘...दरू नशे से रहना होगा.'

‘फंसा नशे के चंगल


ु मO जो...'

‘...इंसां से है वान बना वो.'


‘गटका , पानमसाला, बीड़ी...'

‘...मौत क! सीढ़J, मौत क! सीढ़J.'

नारे लगाता हआ
ु जलस
ु ू Xफर आगे बढ़ने लगा. रा#ते मO शराब क! दकान
ु आई तो एक दल
उसके सामने धरना दे ने के &लए बैठ गया. बाक! समह
ू आगे बढ़ा. वहां gय#त सड़क थी.
वाहनM से भरJ हईु . ब~J काका ने ब`चM को एक पंिbत मO चलने का कहा. वाहनM क! भीड़ से
ब`चे सावधानीपव4
ू क गजरने
ु लगे. नारे लगाते, लोगM का {यान आकDष4त करते हए
ु .

दसरJ
ू दकान
ु सड़क के ठ_क पीछे ि#थत मजदरू ब#ती मO थी. वहां तक पहंु चने के &लए जलस ु ू
को क`ची ना&लयM और क!चड़ से होकर गजरना
ु पड़ा. सरकारJ %नदश‚ के कारण दक ु ाने बंद
थीं. दसरा
ू दल "तीकाhमक धरने के &लए वहJं ;क गया. बाक! रहा कारवां आगे बढ़ा. एक
चौराहे और Xफर चौड़े पाक4 को पार करता हआ
ु ु मैदान मO आ गया. जलस
वह खले ु ू िजस
ब#ती से गजरता
ु वहां के ब`चे और मpहलाएं उससे अपने आप जड़ते
ु चले जाते थे. मानो उस
अ&भयान मO कोई पीछे न रहना चाहता हो. सब अपना योगदान स%नि2
ु चत करने को तhपर
हM. इस&लए दो टो&लयां पीछे छट
ू जाने के बावजद
ू आंदोलनकाUरयM क! सं’या मO कोई कमी
नहJं आई थी. जलस
ु ू मO pह#सा ले रहे ब`चM और मpहलाओं का जोश भी पहले हJ भां%त बना
हआ
ु था.

मैदान के एक &सरे पर झिc


ु गयां थीं. शहर के सबसे गरJब लोगM क! गमनाम
ु -सी ब#ती. उसके
दसरे
ू छोर पर क`ची शराब क! दकान
ु . बराबर मO भांग का भी ठे का था. दकान
ु हाल हJ मO
खलJ
ु थी. इस कारण उसके आगे लगा बोड4 एकदम चमचमा रहा था. मानो

जलस
ु ू मO pह#सा ले रहे आंदोलनकाUरयM को चनौती
ु दे रहा हो. तीसरे दल को वहJं धरना दे ने
क! िज‡मेदारJ सˆपकर, ब~J काका आगे बढ़ गए.

अब भी जलस
ु ू मO सौ से ऊपर ि[यां और ब`चे सि‡म&लत थे. पाक4 को पार करने के बाद वे
Xफर एक gय#त सड़क पर आ गए. िजसके दोनM ओर ऊंची-ऊंची इमारतO थीं. आगे एक मोड़
था. उससे पचास कदम आगे हJ दो दकानO
ु थीं. बड़ी-बड़ी और लगभग आमने-सामने. दकानM

क! एक pदशा मO शहर का सबसे बड़ा औो5गक Zेu था. तीन ओर बड़ी-बड़ी मजदरू बि#तयां.
उन दकानM
ु का मा&लक शहर का शराब का सबसे बड़ा ठे केदार था. हर कोई उसक! ताकत और
राजनी%तक पहंु च से पUर5चत था.

प&लस
ु क! मदद से कछ
ु दे र के &लए यातायात को रोक pदया गया था. ब~J काका ब`चM ने
को संभलकर रा#ता पार करने का %नदश
‚ pदया. वे खद
ु जलस
ु ू के बीच मO चल रहे थे. ब`चे
और मpहलाएं सावधानीपव4
ू क सड़क पार कर हJ रहे थे Xक अचानक एक पhथर जलस
ु ू के ऊपर
आकर पड़ा. कोई ब`चM और मpहलाओं पर भी हमला कर सकता है, ब~J काका को इसक!
आशंका बहत
ु कम थी. पhथर 5गरते हJ जलसु ू मO खलबलJ मच गई. ब`चे पंिbत तोड़कर
इधर-उधर जाने लगे. ब`चे इधर-उधर भागने लगे. जलस
ु ू मO आगे चल रहJं %नरालJ और
कb
ु क! ब`चM को रोकने के &लए चीखने लगीं.

‘भा5गए मत. आराम से रा#ता पार क!िजए.' ब~J काका चीखे, ‘हौसला र„खए, यह हमला
कायरतापण4
ू है . वे हमO डरा रहे हa. पर हम डरO गे नहJं. आगे बpढ़ए...धीरे -धीरे आगे बpढ़ए.'
लगातार पhथर 5गरने से चौराहे पर खड़े वाहन चालकM मO भी डर gयाप गया. मजदरू औरतO
ब`चM को सड़क के दसरJ
ू ओर सर}Zत
ु पहंु चाने के काम मO लगी थीं. उनमO से भी कछ
ु को
चोटO आई थीं. मpहलाओं का हJ एक दल घायलM को इलाज के &लए ले जाने मO जट ु गया.

अचानक पhथरM क! र“तार तेज हो गई. इतनी Xक चौराहे पर खड़ा रहना असंभव pदखने
लगा. जलस
ु ू मO शा&मल आधे से अ5धक लोग दसरJ
ू pदशा मO पहंु च हJ चका
ु था. अपनी टोलJ
का नेतhृ व कर रहJ कb
ु क! तेजी से दसरJ
ू pदशा मO जाना चाहती थी. तभी पhथरM क! मार से
घबराया एक #कूटर सवार तेजी से गजरा
ु . ब~J काका क! %नगाह उस ओर गई. वे कb
ु क! क!
ओर भागे.


‘ग;जी ब5चए...आह!' टोपीलाल क! आवाज गंज
ू ी. उसी के साथ ग;जी
ु और कb
ु क! क! चीख
भी. अक#मात परा
ू जलस
ु ू wबखर गया. चीख-पकार
ु मचने लगी.

‘;Xकए मत! चलते रpहए...ब~J काका &सफ4 घायल हएु हa. उ-हMने हJ कहलवाया है -;Xकए मत.
परेू Dव2वास कदम बढ़ाते रpहए. अभी हमारा अ&भयान अभी पराू नहJं हआ
ु है . अभी एक और
मोचा4 बाक! है . उसको फतह करने के &लए हमO ज9दJ से ज9दJ लय तक पहंु चना है . मंिजल
बस दस कदम दरू है .' टोपीलाल 5च9लाया और ग;जी
ु तथा कb
ु क! को संभालने के &लए झक ु
गया. टोपीलाल के आवाtन पर न-हे कम4योगी और मpहलाएं

Xफर आगे बढ़ने लगीं. परJ


ू …ढ़ता के साथ.

उस सनातन संघष4 मO कायरM ने अपनी qरता


ू का पUरचय pदया. कम4यो5गयM ने अपनी
संक9प%नTठा का.

कम4योग और लय&सDk पर#पर पया4य हa.

सफलता कम4योगी के वरण हे तु सदै व उhसक


ु रहती है .

‘हमनO पांचM दकानM


ु के आगे सफलतापव4
ू क धरना pदया. कई दज4न लोग हमारे साथ थे. Xफर
भी हम हार गए!' टोपीलाल ने कहा और अपनी %नगाह ब~J काका के पैरM पर pटका दJ. उस
pदन कb
ु क! को मोटर साइXकल से बचाने के "यास मO ब~J काका #वयं उससे टकरा गए थे.
उसके साथ %घसटते हए ु सड़क पर दरू तक चले गए. तभी सामने से आती एक तेज र“तार
कार उनके पैरM को कचलती
ु हई
ु चलJ गई.

कb
ु क! को भी मामलJ
ू चोटO आŠ थीं. उसको तीसरे pदन अ#पताल से छo
ु टJ दे दJ गई. ब~J
काका को डॉbटरM ने उ-हO ठ_क तो कर &लया, मगर उनके दोनM पैर काटने पड़े थे. इस बात
का अफसोस ब~J काका से yयादा टोपीलाल और उसके सहयो5गयM को था. जब उसको यह
खबर &मलJ तो कई घंटM तक रोता रहा था.

‘हार कैसी, हम परJ


ू तरह कामयाब रहे हa.' ब~J काका ने म#
ु कराने का "यास Xकया.

‘हमारे कारण हJ आपक! यह हालत हईु है ...!' टोपीलाल ने कहा. उसक! आंखO एकदम लाल थीं.
मानो कई रातO उसने जागकर wबताई हM.

‘िजस लय के &लए हमने एकजटता


ु pदखाई है , उसके &लए यह तो बहत ू क!मत है .'
ु मामलJ
‘अब हमारा माग4दश4न कौन करे गा?' सदानंद बोला, उसके #वर मO उदासी थी. इसपर टोपीलाल
ने बात काटJ-‘ग;
ु जी हa, तो!' Xफर ब~J काका क! ओर मड़कर
ु बोला, ‘आगे आप &सफ4 आदे श
pदया करना, सारा काम हम #वयं कर लO गे.'

उसी समय कb ु क! दौड़ती हईु भीतर आई. उसके माथे पर पpoटयां बंधी थीं. दौड़ने के कारण
उसक! सांसे फल
ू रहJ थीं. उसके हाथM मO एक पu था. उसपर छपा नाम-पता दे खते हJ ब~J
काका क! आंखM मO खशी
ु क! लहर दौड़ गई. कछ
ु पल वे उसको टकटक! लगाए दे खते रहे , Xफर
उनक! उं ग&लयां पu को बहत
ु सावधानी से खोलने लगीं.

‘Xकसका पu है , ग;जी
ु ?' सदानंद ने पछा
ू . उ†र दे ने के बजाय ब~J काका म#
ु करा pदए और
अपना {यान पu पर लगा pदया. पu राT प%त आवास से आया था. राT प%त महोदय का
एकदम %नजी पu. &लखा था-

‘परम(kेय ब~Jनारायण जी,

दो अbटूबर को महाhमा गांधी क! ज-म%त5थ पर दे श-भर मO सरकारJ और गैरसरकारJ

#तर पर अनेक काय4qम होते हa. हर वष4 क! तरह इस वष4 भी हुए. दे श के "थम नागUरक क!
है &सयत से मa कछ
ु काय4qमM मO सि‡म&लत भी हआ
ु . मगर मझे
ु िजतनी उhसक ु ता आपके
काय4qम के बारे मO जान लेने क! थी, उतनी Xकसी और क! नहJं. इस&लए Xक उन सब
काय4qमM मO आपका आंदोलन सवा45धक मौ&लक एवं रचनाhमक था. आपको &मलJ सफलता
क! सचना
ू से मेरा pदल गfगद हो गया. मन हआ
ु Xक वहJं जाकर आपको बधाई दं .ू लेXकन
िजस पद पर मझे
ु wबठाया गया है, उसक! िज‡मेदाUरयां मझे
ु वहां आने क! अनम%त
ु नहJं दे
रहJ हa.

बता दं ू Xक आपके अ&भयान क! कामयाबी पर मझे


ु पहले भी परा
ू भरोसा था. bयMXक िजस
समप4ण एवं %नTठा के साथ आप काम को संभालते हa, उसमO नाकामी संभव हJ नहJं है . आपके
आंदोलन क! सफलता जहां मन को "फि9
ु लत कर दे ने वालJ है , वहJं आपके साथ घटJ दघ4
ु टना
क! खबर ने pदल को झकझोर कर रख pदया है . इस बारे मO हालांXक आपने #वयं कछ
ु नहJं
बताया है . यह सच
ू ना मझे
ु अ#पताल के मा{यम से &मलJ है . उ-हO न जाने कैसे मेरJ और
आपक! मैuी क! सचना
ू &मलJ, जो आपके साथ हई
ु दघ4 ु भेजने क! कपा
ु टना क! खबर मझे ृ क!.

िजन लोगM ने आपके साथ यह %घनौनी हरकत क! है, वे बहत ु हJ कायर और %नल4yज Xक#म
के लोग हa. वे खद
ु टट
ू चुके हa. उनका यह कदम उनके डर, हताशा और बौखलाहट का नतीजा
है . आपका ªदय Dवशाल है . जानता हंू Xक उनके "%त आपके मन मO कोई ‰ै ष या Dवकार नहJं
होगा. आप तो माफ भी कर चक ु े हMगे. पर कानन
ू भी अपना काम करे , मेरJ यहJ इ`छा है .
मझे
ु परJ
ू उ‡मीद है Xक #थानीय "शासन उनका पता लगाकर उन सबको सजा जzर
pदलाएगा.

अपने Dपछले पu मO आपने &लखा था Xक आंतUरक ऊजा4 से भरपरू ब`चM ने आपक! इंजन
वालJ जगह ह5थया लJ है . इससे लगता है Xक वे ब`चे DवलZण zप से "%तभाशालJ और
साहसी हa. उनमO दे श के &लए काय4 करने का जyबा है . मa उनक! भावनाओं को नमन करता
हंू . उ‡मीद करता हंू Xक वे इसी "कार लगातार आगे बढ़ते रहO गे. मa उनसे अव2य &मलना
चाहंू गा. आप #वयं भी उनके साथ दश4न दO तो मझे
ु बहतु "स-नता होगी.

अंत मO आपक! अp‰तीय सफलता के &लए आपको एवं आपके सभी बालसहयो5गयो◌े◌ं को
बधाई दे ता हंू और आशा करता हंू Xक हमारJ भO ट बहत
ु ज9दJ होगी.'

संघीय दे श का राT प%त

पu पढ़ने के प2चात ब~J काका ने वह ब`चM क! ओर बढ़ा pदया. टोपीलाल उसे लेकर पढ़ने
लगा. सदानंद समेत बाक! ब`चे भी उसके ऊपर झक
ु गए. तभी प&लस
ु सपUरं
ु टOडOट ने "वेश
Xकया. वह सादा &लबास मO था. उसको दे खकर ब~J काका ने बैठने का "यास Xकया. मगर
घाव ताजे होने के कारण दद4 क! लहर pदमाग को चीर-सा गई. उ-हO कराहकर उसी ि#थ%त मO
रह जाना पड़ा.

‘न...न! आप आराम से लेटे रpहए...मa तो &सफ4 यह बताने आया था Xक िजन लोगM ने आपपर
हमला Xकया था, उन सभी को प&लस
ु 5गर“तार कर चक!
ु है .'

‘वे सब नहJं जानते Xक उ-हMने %नदŸष ब`चM और मpहलाओं पर हमला करके Xकतना बड़ा पाप
Xकया है .' ब~J काका के मंह
ु से कराह %नकलJ.

‘मa आपके &लए एक खशखबरJ


ु भी लाया हंू .' एसपी म#
ु कराया, Xफर "तीZा Xकए wबना हJ
कहता गया, ‘एक आदे श के तहत सरकार ने मजदरू बि#तयM मO चल रहJं, शराब क! सभी
दकानM
ु को तhकाल "भाव से बंद कराने का %न2चय Xकया है ...'

‘ध-यवाद, और भी अ`छा होता यpद सरकार शराब क! दकानM


ु के साथ-साथ तंबाकू और और
नशे क! दसरJ
ू चीजM के %नमा4ण एवं wबq! पर भी लगाम लगाने का काम करे . खैर, दे र से हJ
सहJ आप बहत
ु अ`छ_ खबर लेकर आए हa.'

‘आपके &लए एक खशखबरJ


ु और भी है ...'

‘अ`छा, लगता है आज आप थोक मO खशखबरJ


ु लेकर आए हa.' ब~J काका म#
ु कराए.
‘इन ब`चM के काम से खश
ु होकर सरकार ने टोपीलाल और उसके सा5थयM को पर#
ु कृ त करने
का %नण4य &लया है, इस बारे मO मझे
ु आपसे बातचीत करने का आदे श &मला है .' एसपी ने कहा.
अचानक ब~J काका के चेहरे के भाव बदलने लगे. वहां पर हमे◌ेशा रहने वालJ मदलता
ृ ु गायब
हो गई-

‘इ-हO पर#
ु कार नहJं अ`छ_ &शZा क! जzरत है .' ब~J काका ने दो टक
ू #वर मO कहा, ‘शहर
बढ़ता रहे गा. इमारतO भी ऊंची और ऊंची उठती रहO गी. उनके &लए मजदरू और कारJगरM क!
जzरत भी हमेशा हJ रहे गी. मजदरM
ू के साथ उनका पUरवार भी होगा. इस&लए जzरत ऐसी
सचल पाठशालाओं क! है , जो मजदरM
ू के ब`चM को उनके काय4#थलM पर जाकर &शZा दे सकO.
#वयं सेवी सं#थाओं क! मदद से सरकार यह काम आसानी से कर सकती है ...'

‘आपका सझाव
ु बहत
ु अ`छा है ...मa #वयं सरकार को &लखंूगा...'

‘यहJ इन ब`चM का पर#


ु कार होगा.' ब~J काका ने …ढ़तापव4
ू क कहा.

वहां उपि#थत मpहलाएं एवं ब`चे चˆक पड़े. ब~J काका का …ढ़ %न2चय दे ख एसपी का कछ

और पछने
ू का साहस हJ न हआ ु . उसने ब~J काका से Dवदा लJ. पर#
ु कार न लेने पर ब`चे
और औरतO अभी भी है रान थे. एसपी के जाने के बाद वहां मौजद
ू औरतM मO से एक ने पछा
ू -

‘सरकार ब`चM को ईनाम दे ...इसमO बराई


ु हJ bया है ?'

ब~J काका कछ
ु दे र तक छत क! ओर घरते
ू रहे . Xफर उसी म~ा
ु मO धीर-गंभीर #वर मO बोले-
‘टोपीलाल और उसके सा5थयM ने जो Xकया है , वह बहत
ु हJ मह˜वपण4
ू है. उसका स‡मान हो,
यह मेरे &लए भी स‡मान क! बात है . लेXकन आदमी का लय यpद बड़ा हो

और मंिजल दरू तो उसे रा#ते के छोटे -छोटे "लोभनM और लालच से दरू रहना हJ पड़ता है .
एक कम4योगी के &लए स`चा पर#
ु कार तो उसक! लय-&सDk है . ये मान-स‡मान और
पर#
ु कार तो कालांतर मO उसको भटकाने, मंिजल से दरू ले जाने का काम हJ करते हa.' ब~J
काका ने कहा. Xफर टोपीलाल क! ओर मड़कर
ु बोले-

ु हO बरा
‘त‡ ु तो नहJं लगा ब`चM?'

‘हमारे &लए तो आपका आशीवा4द हJ सबसे बड़ा पर#


ु कार है .' कहते हए
ु टोपीलाल, सदानंद,
कbु क! और %नरालJ अपने ब~J काका के करJब आ गए.

ु सबसे मझे
‘तम ु यहJ उ‡मीद थी...अगर बड़े संक9प साधने हa तो मन को मजबत
ू करना
होगा. सफर मO ऐसे "लोभन बार-बार आएंगे. अगर उनके फेर मO पड़े तो लय तक पहंु च
पाना असंभव हो जाएगा. यह सफलता तो बहत ू है . अभी तो परा
ु मामलJ ू दे श पड़ा है , जहां
त‡
ु हO अपने अ&भयान को आगे बढ़ाना है .'
‘हम तैयार हa, ग;जी
ु !'

‘मa भी यहJ चाहता हंू .' ब~J काका ने खश


ु होकर कहा.

‘पर मa तो कछ
ु और हJ चाहती हंू .' %नरालJ ने जोर दे कर कहा, ‘Xकतने pदन हो गए wबना कोई
Xक#सा-कहानी सने
ु . आप wब#तर पर पड़े-पड़े उपदे श हJ दे ते रहO गे या हमारJ बात पर भी
{यान दO गे.'

ु दद4 हो रहा है , बेटा!' ब~J काका ने कराहने का pदखावा Xकया.


‘बहत

‘तो दद4 क! हJ कहानी सना


ु दJिजए.' इस बार कb
ु क! ने मोचा4 संभाला.

ब~J काका म#
ु करा pदए. ब`चे उनके करJब „खसक आए.

एक नई कहानी का सजन
ृ होने लगा.

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