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भूत प्रेत रहस्य

अधिकतर आप सभी ने फिल्मों में देखा होगा भूत प्रेत बड़े ही डरवाने होते है और आम इं सान इनके नाम से भी डरता है
लेफकन क्या वास्तव में भूत प्रेत इतने डरवाने होते है ऐसा धबल्कु ल भी नही है ये सब धसिफ लोगों को डराने के धलए बनाई हुई
कहाधनयां है । बहुत प्रेत आपके सामने आ भी जाये तो आप पहचान नही पाएंगे फक ये भूत है क्योफक वो भी हम सबकी तरह
फदखेंगा इनमे डर वाली कोई बात नही होती । धजस प्रकार इं सान अच्छे बुरे दोनों प्रकार के होते है उसी प्रकार भूत प्रेत भी
अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के होते है । धजसने बुरे कमफ फकये या धजसकी आयु पूर्फ नही हुयी वो भूत बनते है हमारे चारों तरि
हर समय हजारो लाखो की संख्या में ऐसे प्रेत आत्माएं घूमती रहती है । इनकी भी हमारी तरह अलग ही दुधनया है । डर का
सबसे बड़ा कारर् है इनका फदखाई ना देना इं सान इसधलए डरता है । अगर ये फदखाई देने लग जाये सभी को इं सान से बड़ा
फिर कोई भूत नही । ये पल में कही भी आ जा सकते है फकसी का भी भूत वतफमान बता सकते है इन्ही कारर्ों के चलते बहुत
से ऐसे लोग है जो इनसे पीधड़त है और पता भी नही । ये बड़ी चतुराई से अपने आपको देव या देवी बताकर अपनी पूजा
करवाने लगते है धजससे इसकी शधियां बढ़ती है । धजस फकसी के शरीर में इनका आवेश आ जाता है तो सबसे पहले आम
इं सान यही पूछता है कौन हो तुम् तो वो अपने आपको देव या देवी धपतृ बताता है फिर लोग अपने बारे में पूछते है बता मै
कोन हु ये कौन है तो वो उस इं सान का भुत वतफमान सब बता देता है और लोग उसको सही में देव या देवी समझकर उसकी
पूजा करने लग जाते है । ये बात हमेशा याद रखे की मानव शरीर में देव या देवी का प्रवेश कभी नही हो सकता क्योफक ये
सभी पधवत्र और साि जगह पर ही वास् करते है और इं सान का शरीर तो इतना गन्दा है फक एक फदन ना नहाओ तो दुगफन्ि
आने लगती है अंदर मल मूत्र से भरा हुआ शरीर है इसमें कभी भी फदव्य शधि का वास नही हो सकता और दूसरी बात हमारा
शरीर इतना शधिशाली नही है जो देवो के तेज को सहन कर सके । इं सान का शररर एक भूत प्रेत की शधि को ही नही संभाल
सकता तो देवो की शधि तो बड़े दूर की बात है । अगर फकसी भि में ऐसा आवेश आता है तो वो देव या देवी के गर् हो सकते
है । इसधलए जो भी भि है या आम इं सान जो ऐसे हालत में हो उसे उधचत जगह फदखाओ । हमारा शरीर धसिफ हमारी आत्मा
के रहने के धलए बना है और फकसी के धलए नही इसधलये ये सब बातें ध्यान रखे अगर इससे संबंधित फकसी की कोई धजज्ञासा
या प्रसन हो तो वो धनसंकोच कॉमेंट में अपना प्रसन रखे हम उत्तर देने की पूर्फ कोधशस करें गे ।

जय महाकाल जय मााँ महाकाली

अघोर और मफदरापान

जैसा की आप सभी जानते है अघोर एक वाम मागफ है धजसमे मॉस मफदरा के प्रयोग सािना आफद में होता है लेफकन लोगो के
मन में एक प्रसन रहता है फक मफदरा सािना तक तो ठीक है लेफकन सािना के धबना मफदरापान सही है या नही ?? इसी
प्रसन का उत्तर आज आपको देता हं सनातन िमफ ही ऐसा धजसमे फकसी भी प्रयोग धवधि के पीछे कोई ना कोई वैज्ञाधनक
कारर् भी जुड़ा रहता है और इन प्रयोगों को हमारे धसद्ध महात्मो ने िमफ से जोड़ फदया ताफक लोग इनका पालन अच्छे से कर
सके ऐसा ही अघोर मागफ में भी है।

अघोर में सभी तामधसक शधियां होती है धजनको सुबह शाम तामधसक वस्तुओं का भोग चाधहए होता है । अघोर मागी
सािक भी तामधसक प्रवर्तफ का होता है साधत्वक गुर् उसमे बहुत कम मात्रा में होता है इसधलये मफदरापान फकया जाता है ।
दूसरा कारर्

मफदरापान से सािरर् इं सान हो या कोई सािक इसके पीने से उसका मन चेतन से अवचेतन में चला जाता है धजससे ध्यान
की अवस्था आसानी से प्राप्त हो जाती है ध्यान भटकता नही है वीर भाव भी उतपन्न हो जाता है धजससे भय की धस्तधथ भी
पैदा नही होती है ।
लेफकन अधत सबकी बुरी रहती है चाहे वो कु छ भी हो इसमें इनका प्रयोग भी एक धनधित सीमा में ही करना चाधहए ना की
सुबह से शाम तक मफदरापान में ही लगे रहो वो पूर्फतया गलत होता है ।

कलुआ एक शधिशाली रक्षक

स्मशान जहा पर सभी को एक न एक फदन जाना है ।आम इं सान की नजर में स्मशान धसिफ मुदो को जलाने का स्थान है लेफकन
स्मशान की एक अलग ही दुधनया है धजसमे अदृश्य शधियां धनवास करती है । स्मशान बहुत ही पधवत्र जगह है जहााँ पर
अच्छी और बुरी दोनों शधियों का धनवास है भूत प्रेत , महाप्रेत, ब्रह्म राक्षस और भी अनेक प्रकार की श्मशानी शधियां होती
है धजसने एक होता है कलुआ या कच्चा मसान भी कहते है जब बच्चा जन्म लेने के बाद ही मर जाता है तो उसे जलाया नही
जाता वो स्मशान ले जाकर गाड़ फदया जाता है वो ही कलुआ कहलाता है ये वहुत ही शधिशाली होता है । धसद्ध होने पर
सािक की पूर्फ रूप से रक्षा भी करता है ये संसार से पररधचत नही था इसधलये इसमें छल कपट आफद नही होता ये पूर्फ
समपफर् भाव रखता है । पहले के समय बैंक तो होते नही थे तो राजा महाराजा अपना िन जमीन में गाड़ क्र रखते थे उस िन
की रक्षा के धलए अधिकतर कलुये का ही पहरा लगाते थे या क्षेत्रपाल का पहरा । तांधत्रक फक्रयाओं दारा इनको वहा धनयुि
फकया जाता था धजससे उस िन को कोई धनकाल नही सकता था । फिर धजसका िन है वो या उसके वंशज का कोई या फिर
कोई बड़ा तांधत्रक जो उसको हरा दे वही उस िन को प्राप्त कर सकता था ।मतलब सािरर् इं सान को पता चल भी जाता था
िन का तो वो धनकाल नही पाता था भारत में आज भी ऐसे अनेको जगह है जहााँ पर खरबो का िन दबा पड़ा है ऐसे भी जगह
है धजनका लोगो को पता भी यहा िन है लेफकन धनकालना अपनी मौत को बुलाना है । ऐसे गड़े िन की चाह में बहुत से लोगो
ने अपनी जान गवाई है धजसमे बहुत से तांधत्रक भी शाधमल है । बहुत से होते है जो इन सबको नही मानते तंत्र को नही मानते
बहुत से तो भगवान को ही नही मानते लेफकन उनके ना मानने से सत्य बदल नही जायेगा । बहुत से ऐसे मंफदर और धसद्ध
स्थान है जो तंत्र और भगवान के होने का प्रमार् देते है धजनके आगे आज का धवज्ञान भी अपने हाथ खड़े फकये हुए है ।

जय महाकाल जय मााँ महाकाली

नागलोक

इस ब्रह्मांड में अनेको लोक बसे हुए है धजसमे एक है नागलोक ।नागलोक धजसमे सभी प्रकार के नागों का वास होता है हम
सबके बीच हमेशा से चचाफ का धवषय रहा है नागमधर् और इच्छािारी नाग । जब कोई नाग 100 वषफ पूरे कर लेता है तो उसे
नागमधर् प्राप्त हो जाती है और 1000 वषफ पूरे हो जाने पर वो इच्छािारी नाग या नाधगन बन जाता है जो कभी भी फकसी का
रूप िारर् कर सकता है और नागमधर् से उसको शधियां प्राप्त होती है । ये कोई कोरी कल्पना नही है ये अकाट्य सत्य है जो
आज भी अपना अधस्तत्व बनाये हुए है । सास्त्रो में नागलोक पाताल में बताया जाता है जो िरती के नीचे है पाताल लोक में
भी कई लोक बसे हुए है दानवो का वास में पाताल लोक में बताया है ।

आज भी बहुत जगह इच्छािारी नाग नाधगन देखने की बात होती है अब धजसने देख धलया उसके धलए सत्य और धजसने नही
देखा उसके धलए कोरी कल्पना लेफकन कल्पना भी तभी बनती है जब उससे जुडा कु छ ना कु छ होता है । इनकी भी सािनाये
होती है धजनके करने से ये आपकी मनोकामना पूर्फ करते है इनकी सािना आफदकाल में सपेरों के बीच प्रचधलत रही है आज
भी ऐसे सपेरे धमल जाते है जो आसानी से फकसी भी नाग का जहर उतार देते है या नाग को वश में क्र लेते है । असम के तरि
का क्षेत्र में इस प्रकार के नाग अधिक पाए जाते है उसके बाद राजस्थान दूसरा क्षेत्र है । नागमधर् को पाने के धलए शुरू से ही
संघषफ चलता आ रहा है लेफकन हठ दारा प्राप्त करने का भयंकर पररर्ाम भी भुगतना पड़ता है इससे अच्छा सािना धवधि
दारा उसको प्रसन्न करके उससे वरदान स्वरूप मांगे तो अच्छा है । लेफकन जो वस्तु धजसके धलए बनाई है उसी के पास रहे तो
अच्छा है नागमधर् नागों के धलए ही बनाई है लेफकन इं सान अपने स्वाथफ के धलए भयंकर पाप कर जाता है धजसका पररर्ाम
कई जन्मों तक भुगतना पड़ता है । नाग भी देवो की तरह है धजस पर खुश हो जाये उसे सबकु छ दे देते है और धजससे नाराज
हो जाये उससे सबकु छ ले लेते है । ये अपना बदला लेकर ही रहते है चाहे इनको फकतने ही जन्म लेने पड़े इसधलये कभी भी
गलत कायफ ना करे धजससे आपको नकफ भोगना पड़े ।

स्वगफलोक और अप्सरा

आप बचपन से सुनते आ रहे है अच्छे कमफ करोगे तो स्वगफ में जाओगे तो सभी के मन में होता है आधखर स्वगफ लोक कै सा होता
है । स्वगफ लोक वो है जहााँ पर देवता धनवास करते है । पुण्य आत्मा अपने अच्छे कमों दारा इस लोक को प्राप्त होती है । स्वगफ
में सभी प्रकार के भोग धवलास के सािन है फकसी भी और दुुःख नही है आनन्द ही आनन्द है । लोगो के बीच स्वगफ का सबसे
चर्चफत नाम वो है अप्सरा । अप्सरा का कायफ स्वगफ में धवराजमान देवो और पुण्य आत्माओं के धलए नृत्य आफद करके मन
बहलाना है । इनका अनुपम सौंदयफ सभी के मन को मोह लेता है । मुख्य अप्सरा मेनका ,रम्भा, उवफसी है । ये वो अप्सरा है
धजन्होंने अपने सौंदयफ से बड़े बड़े ऋधष मुधनयों की तपस्या भंग कर चुकी है । प्राचीन काल से ही अप्सरा सािना सािको के
बीच प्रचधलत रही है । जो सािक अप्सरा धसद्ध कर लेता है वो कई प्रकार की धसधद्धयो का स्वामी बन जाता है क्योंफक अप्सरा
उसको स्वगफ के कई और रहस्य बता देती है । अप्सरा कोई भी सांसाररक वस्तु आपके धलए ला सकती है इसमें कोई शक नही
है । अप्सरा बहुत जल्दी धसद्ध हो जाती है धबना फकसी हाधन के अगर इनके प्रधत सािक सही भावना और सही कायफ करवाये
तो सािक को कभी फकसी प्रकार की कमी नही होती लेफकन इनकी सािना में सयम रखना सािक को बड़ा मुधश्कल हो जाता
है जब सािना अपने चरम पर पहुचती है तो ये सािक की परीक्षाएं लेती है और ये तो बड़े बड़े ऋधष मुधनयों की सािना भंग
करवा देती है तो सािारर् सािक की तो बात ही क्या है । इसधलए मन एकाग्र करके धसिफ सािना पर ही ध्यान रखना
चाधहए बाफक कोई गलत धवचार मन में ना आने पाए नही तो सारी मेहनत बेकार समझो । अप्सरा को भोग की वस्तुएं ना
समझे जब अप्सरा धसद्ध हो जाती है तो पत्नी,धमत्र,मााँ या प्रेधमका के रूप में िारर् कर सकते है । ये अपना वचन कभी नही
तोड़ती ना ही ये सािक को िोखा देती है । िोखा, झूठ बोलना ये सब इं सान के कायफ है । सभी सािना मागफ पर आगे बढे और
आध्यधत्मक उधन्नधत करे ।

जय महाकाल जय मााँ महाकाली

गुरु और तंत्र सािना

हमारे जीवन में गुरु का बड़ा ही महत्व है चाहे आज की धशक्षा की बात करे या फिर आध्याधत्मक सािना क्षेत्र की सभी में गुरु
की आवश्यकता होती है । गुरु के धबना सिलता धमलने असम्भव है । अगर गुरु के धबना ज्ञान धमलता तो स्कू लों में गुरु नही
होते इं सान अपने आप फकताबे पढ़ कर ज्ञान प्राप्त कर लेता और आज तो वैज्ञाधनक युग है गूगल पर सचफ करते ही सभी
जानकाररयां प्राप्त हो जाती है फिर भी गुरु धबना आगे नही बढ़ पाते यही कारर् है गुरु को भगवान का दजाफ फदया गया है
क्योंफक गुरु ही है जो हमारे इस जीवन को सही लक्ष्य देते है । आम जीवन में भी हमे गुरु िारर् करना ही चाधहए क्योंफक जहा
पर हमें कोई रास्ता नही फदखता वहा पर गुरु ही मागफदशफन करते है । गुरु की आवश्यकता इसधलए ही पड़ी क्योफक इं सान जब
प्रसनो में उलझ जाता है तो भगवान से उत्तर पूछता है भगवान तूने मेरे साथ ऐसा क्यों फकया आपने ऐसा नही करना चाधहए
था लेफकन इन सबका उत्तर भगवान आपको उस समय नही देते धजसके कारर् भि का धवस्वास उठ जाता है उसका उत्तर
आपको समय देता है या गुरु इसधलये ही भगवान धशव ने गुरु की रचना की । इसधलये गुरी को साक्षात् धशव का रूप भी कहा
जाता है ।गुरु मधहमा से हमारे ग्रन्थ भरे पड़े है लेफकन गुरु की पूर्फ व्याख्या वो भी करने में असमथफ है । ये तो थी आम जीवन
में गुरु का महत्व अब आध्याधत्मक क्षेत्र में गुरु का महत्व तो औरभी बढ़ जाता है इं सान बार बार अपने मागफ से भटक जाता है
धसधद्धयो और चमत्कारों के कारर् । आम इं सान तंत्र सािना को क्यों नही मानता क्योफक उसे कभी सिलता धमली ही नही
तो वो इन सबको झूठ ही समझेगा इसमें उसकी भी कोई गलती नही । गलती है तो धसिफ इतनी उसने धबना गुरु के िे सबुक या
फकसी बुक से ऐसे ही सािना उठाकर करने लग गया तो इस प्रकार सािना करने में सिलता के 1% चांस है ।अगर इसमें भी
कोई उग्र सािना करली तो उसके पागल होने की भी संभावना है । शधि को जगाने पर उसे सम्भलना ना आया तो इसके
पररर्ाम घातक होते है धवशेषकर स्मशान सािनाओ में । बुक से सािना उठाकर करने वाला अगर कही अटक गया तो
मागफदशफन कोन करे गा और धवना गुरु के उसे ये नही पता होता सािना करने की सही धवधि क्या है तो सिलता कहा से
धमलेगी । जब हम गुरु िारर् करके सािना करते है तो गुरु की शधियां हमसे जुड़ जाती है और उन सभी धसद्ध महात्मो की
भी जो आपके गुरु परम्परा में आते है जब आपसे इतनी शधियां जुड़ जाती है तो आपको सिलता धमलने से भला कौन रोक
सकता है फिर तो सिलता धनधित ही धमलती है और यही कारर् है गुरुमुखी को सािना एक बार में ही धसद्ध हो जाती है
इसके धवपरीत धवना गुरु वाले को धसधद्ध तो बहुत दूर की बात है कु छ अनुभव भी नही होता फिर दोष देने लगता है तंत्र
सािना को । अगर आपको सािना मागफ पर बड़ना है तो गुरु िारर् करना ही पड़ेगा नही तो बीच में लटक जाओगे ना जीधवत
ही बचोगे ना मृत ।भगवान ने भी अवतार धलया है तो उसे भी गुरु बनाना पड़ा है एक समथफ गुरु ही आपको मोक्ष फदला सकता
है । इसमें कहने को और भी बहुत कु छ है लेफकन अभी इतना ही ।

जय महाकाल जय मााँ महाकाली

साधत्वक और तामधसक धसधद्ध

कलयुग तमो गुनी युग है इसधलए तामधसक शधियां आसानी से धसद्ध हो जाती है साधत्वक की अपेक्षा ।

साधत्वक और तामधसक धसधद्धयो में एक बहुत बड़ा िकफ ये है अगर फकसी सािक के पास साधत्वक धसधद्धया है तो अगर वो िमफ
धवरुद्ध कोई कायफ करता है या उनसे कोई गलत कायफ करवाता है तो कु छ समय पिात ही उसकी धसधद्धया खत्म हो जाती है
धजससे पूरी मेहनत बेकार हो जाती है और वो दोबारा धसद्ध भी नही होती और दूसरी तरि तामधसक धसधद्धया से आप अच्छा
या बुरा फकसी भी प्रकार का कायफ ले सकते है ये आपको छोड़कर नही जायेगी । जैसा की तमो गुनी युग होने के कारर् साधत्वक
शधियों का अपना एक समय है धजसमे वो अपना प्रभाव रखती है लेफकन तामधसक शधियों 24 घण्टे एधक्टव रहती और रात
में तो इनकी शधियां कई गुना बढ़ जाती है । भगवान धशव ने खुद कहा है कलयुग में वैफदक पधतत (साधत्वक)का प्रभाव खत्म
हो जायेगा इसका कारर् है क्योंफक एक तो इं सान में छल कपट होगा वस्तुएं शुद्ध नही बचेगी और तामधसक शधियों का चारो
तरि प्रभाव ज्यादा होगा । उदाहरर् के धलए 1 तरि आप साधत्वक प्रयोग करे और दूसरी तरि तामधसक प्रयोग करे और
अपने आप देखे फकसका प्रभाव ज्यादा होता है आप देखग
ें े साधत्वक प्रयोग का प्रथम बार में आपको कोई प्रभाव ही फदखाई
नही देगा लेफकन तामधसक प्रयोग पूर्फ होते होते ही अपना काम पूर्फ कर देता है यफद प्रयोग धवधिपूवफक फकया जाये । यही
कारर् आज व्रत , कथाये, वैफदक हवन आफद का कोई प्रभाव फदखाई नही पड़ता जैसा की उनके बारे में बताया गया है ये सब
कलयुग का प्रभाव है । ये सब समय समय की बात है सतयुग में साधत्वक शधि ज्यादा प्रभावी थी तो कलयुग में तामधसक
शधि ।

लेफकन ऐसा नही है की आप साधत्वकता को छोड़ दे अगर आप धनरन्तर साधत्वकता का पालन करते है तो आपके धलये ये
कल्यार्कारी होगा लेफकन इसके धलए आपको िमाफनुसार कायफ करना पड़ेगा जो की कलयुग में बड़ा करठन कायफ है ।

जय महाकाल जय मााँ महाकाली

पूरा ब्रह्माण्ड मंत्र की शधि से चल रहा है और लोग बोलते है मन्त्र तंत्र सब अन्िधवश्वास है । नासा ने अपने ररसचफ से पता
फकया ब्रह्माण्ड में ॐ की ध्वधन गूंजती है । इसको प्रत्यक्ष सुना भी जा सकता है लेफकन इसके धलए ध्यान लगाना पड़ेगा बहुत
गहरा । मंत्रो की शधि से ही सभी देव बंिे है जब मन्त्र धसद्ध हो जाते है तो देवो को भी ना चाहते हुए प्रत्यक्ष होना ही पड़ता
है ये मंत्रो की शधि । मन्त्र भी बहुत प्रकार के है वैफदक मन्त्र ,साबर मन्त्र, अघोर मन्त्र आफद ।सबके अपने अपने प्रभाव है ।
वैफदक मन्त्र सतयुग ,त्रेता और द्वापर युग में ज्यादा िलदायी थे लेफकन कलयुग में ये िल नही देते क्योफक एक तो वैफदक मंत्रों
के जानकार नही बचे दूसरा ये इन मंत्रो को भगवान धशव जी कीधलत क्र फदये थे अब आज के युग में लोग ऐसे ही मन्त्र उठा के
जप करने लग जाते है उन्हें ये पता ही नही होता मन्त्र कीधलत है या नही इसका अथफ क्या है जब कोई िल नही धमलता तो
गाली मंत्रो को देते है । अगर मन्त्र सही है और उसके प्रधत श्रद्धा भाव है तो एक ना एक फदन वो धसद्ध होगा ही होगा लेफकन
एक बार प्रयास करके छोड़ देने सिलता नही धमलती सिलता के धलए बार बार प्रयास करना पड़ता है । कलयुग में कहा है
भगवान धशव ने की वैफदक मन्त्र अपना प्रभाव खो देंगे क्योफक वैफदक मंत्रों के धलए शुद्ध मन और शुद्ध वस्तुएं चाधहए जो
कलयुग में नही बचेगी यही कारर् है वैफदक पूजा पाठ सिल नही हो पाती ।कलयुग तमो गुनी युग है इसी कारर् इसमें भुत
प्रेत, यक्षर्ी ,अप्सरा ,स्मशान सािनाये आफद जल्दी धसद्ध हो जाती है । समय के साथ सब बदलता है अगर कोई इं सान कहे
पूर्फ साधत्वक हु तो वो उनका भमफ है भैस का दूि जो पीते है वो तामधसक है जो बाहर होटलों में भोजन करते है वो तामधसक
है जहााँ पर vag और non vag दोनों बनते हो । जहा पर मांसाहार भोजन बनता है वहां साधत्वक भोजन बन ही नही सकता
। यही कारर् भी है व्रत आफद का भी िल नही धमलता है क्योंफक वो पूर्फ होते ही नही तो िल कहा से धमले । मैं ये नही कहता
वैफदकता व्रत आफद सब खत्म हो गया ये अभी भी है लेफकन इनको सही से पूर्फ करने की काधबधलयत इं सान में नही बची ।
हमारे आस पास अनेको परा शधियां होती है इनका अनुभव करने के धलए आपको सािना मागफ पर आना पड़ेगा तभी आप
अपनी जजंदगी में अनेको चमत्कार देखेंगे लेफकन इसके धलए आपको संसार से थोड़ा हटना पड़ेगा । ये जन्म बड़े करठनाई से
धमला है बड़ा दुलफभ जन्म है ये अगर ये धसिफ पैसो के पीछे भागते हुए गवा फदया तो फिर दोबारा ये मौका नही धमलेगा । ये
सभी ररस्ते नाते महामाया की माया है कोई अपना नही कल आपके शरीर की मृत्यु हो जाये कल ही आपको जला आएंगे
उनका जीवन फिर भी चलेगा । इसधलये अभी भी समय है सम्भल जाओ समय को पहचानो धजस यात्रा पर धनकले हो उसे
पहचानो समय धनकला जा रहा है

कड़वा सत्य

सनातन िमफ की रचना खुद भगवान ने की है ये िमफ अनन्त समय से चला आ रहा है जैसे जैसे समय बढ़ता गया बाफक िमफ भी
बनने लगे । बहुत समय से सनातन िमफ को समाप्त करने की जोरो से कोधशस चल रही है लेफकन आजतक कोई इसे समाप्त नही
कर पाया । ना जाने फकतने कष्ट सहन फकये है हमारे पूवफजों ने जो आज हम अपने आपको सनातन िमी कह पा रहे है । लेफकन
आज धहन्दू भटक गया है क्योंफक उन्हें कोई राह फदखाने वाला बचा ही नही । जो िमफ पुजारी है उनको भोग धवलाश और नए
नए करोडो के आश्रम बनाने से िु सफत नही धमलती िमफ की स्थापना क्या खाक करें गे । हमे समझ नही आता उन आश्रमो में
होता क्या है क्योफक िमफ से सम्बंधित कोई बात तो होती नही । आज प्रमुख मठ जो शंकराचायफ जी ने अपने जीवन काल में
स्थाधपत फकये थे ये सोचकर की मेरे धशष्य होगे वो इनका प्रयोग िमफ स्थपना के धलए करे गे लेफकन उन्होंने धसिफ इनको ऐसो
आराम और भोग धवलाश के धलए ही प्रयोग करने लगे इनका खान पान रहन सहन देखो पूरा राजा महाराजो जैसा है तो फिर
भगवा पहनकर लोगो को क्यों िोखा फदया जा रहा है । इन्होंने िमफ को बेच फदया है सािु का सीिा सा अथफ है त्याग । जो
शंकराचायफ जी हुए , महात्मा बुद्ध हुए, महावीर जी हुए वो उनके धशष्य कभी नही हुए उन्होंने इन महान आत्माओं का
व्यापारीकरर् कर फदया । और आज का समय देखो सनातन िमफ में रोज नए नए भगवान जन्म ले रहे है धजसे देखो भगवा
पहनकर अपने आपको भगवान घोधषत कर देता है ऐसा धसिफ सनातन िमफ में ही हो रहा है क्योंफक धहन्दू टू ट चुके है भटक चुके
है अपनी बुधद्ध का थोड़ा सा भी इस्तेमाल नही करते । कु छ संस्था धजन्होंने फकताबे छापी और अपना प्रचार फकया उन
फकताबो में कु छ अलग नही धलखा जो भी धलखा सनातन िमफ के ग्रन्थों से धनकाल कर धलखा है । आज ब्रह्मकु मारी धजसे ॐ
शांधत कहते , रािा स्वामी , ॐ साई राम ये सब संस्था सनातन िमफ के धवरुद्ध कायफ कर रही है और धहन्दू पागलो की तरह
इनके अनुयायी बने जा रहे है । अगर ॐ शांधत से ॐ धनकाल ले रािा स्वामी से रािा धनकाल ले ॐ साई राम से ॐ और राम
धनकाल ले तो इनका कोई अधस्तत्व नही बचता । अगर धसिफ सनातन िर्मफयो का नाम जोड़ लेने से ये इतने प्रधसद्ध हो सकते
है तो सोचो इनका नाम जपने से आपको फकतना िल धमलेगा । आजतक जो भी हमारे वेद ग्रथो में धलखा है उसे कोई भी गलत
साधबत नही कर पाया है इसी से हमारे िमफ की महानता का पता चलता है । हमारे ऋधष मुधनयों ने जो करठन तप करके
अपनी सन्तानो के धलए ज्ञान अर्जफत फकया वो अनमोल है लेफकन उन्हें क्या पता था हमारी सन्ताने ही हमारा मजाक
उड़ाएगी । जो भी इन संस्था से जुड़ा है वो मुझे बताये कोन सा नया ज्ञान प्राप्त फकया है जो सनातन िमफ में नही है । और ये
भगवान बने हुए है वो फकस कारर् आपको सनातन िमफ का त्याग करके अपने साथ शाधमल होने को कह रहे है और ये आपको
कै से मोक्ष फदला सकते है क्योकी मृत्यु तो इन नकली भगवान की भी होनी है तो फिर ये कै से भगवान । भगवान तो तब माने
जब ये अपनी इच्छा से अनन्त समय तक जवान रहे अपनी इच्छा से शरीर का त्याग करे । ऐसा कु छ नही कर सकते , प्रथम
तो ये है जो अपने नाम के आगे जगत गुरु लगाए फिरते है उनको ये भी नही पता जगत गुरु का अथफ क्या होता है धजसने जगत
की रचना की भगवान धशव धसिफ वही जगत गुरु है और कोई जगत गुरु नही हो सकता इनकी कु ण्डली भी जागृत नही है ये भी
सामान्य व्यधि की तरह मूलािार में चक्र में सुप्त कु ण्डलनी के साथ जी रहे है । इतना पाखण्ड िै ला हुआ हुआ है िमफ के नाम
पर की कहना मुधश्कल है और लोग ये सोचते है हमे िमफ से क्या लेना धजस फदन ये िमफ आपके सर से हट गया उस फदन पता
चलेगा इसका महत्व । जब लोग जंगलो में नंगे घूमते थे तब भारतवषफ के लोग घर बना कर रहते थे और आज ये लोग सनातन
िमफ को ज्ञान का पाठ पढ़ाने चले है । ये आज के ऐसे भगवान है 1 अपराधिक मामला दजफ होते ही अपने आपको जेल से नही
धनकाल पाते और अपने आपको भगवान बताते है । ऐसे पाप कर्मफयों की आत्मा अनन्त समय तक भटके गी और जो ऐसे लोगो
के अनुयायी बने है सनातन िमफ का त्याग करके वो इससे भी ज्यादा भटकें गे । जैसे ही आप सनातन िमफ का त्याग करते है
आपके ऊपर से आपके धपतृ, इष्ट, कु लदेव सबकी फकरपा हट जाती है आपके धपतृ प्रेत योधन में चले जाते है धजससे उनकी
आत्मा को बहुत दुुःख पहुचता है । इसधलये कभी भी सनातन िमफ का त्याग मत करना धजसको थोड़ा सी भी संका हो वो
भागवत गीता का पाठ करे आपको सत्य का बोि होगा । ऐसी फकसी भी संस्था के अनुयायी ना बने जो आपको सनातन िमफ
छोड़ने को कहे अरे पागल इं सान जो अपने आपको जगतगुरु बता कर बैठा है उसे तो तेरा नाम भी नही पता तुझे मोक्ष कै से
फदलाएगा । मेरा कायफ आपको सत्य बताना है आगे आपका कायफ फकस राह पर चलना है ।

जय महाकाल

अघोर तंत्र रहस्य

अघोर के बारे में धजससे पूछो वही रटा रटाया जवाब देते है ।अघोर क्या है इसे समझने के धलए सािनाओ की गहराई में
जाना होगा ,अघोर को हम पररभाषा में नही बांि सकते । अघोर वो अवस्था है जब सािक शधियों को पार करते हुए बाल
अवस्था में आ जाये जैसा 1 नन्हा सा बालक होता है । ना कोई दुश्मन ना कोई दोस्त ना ररस्ते जाने ना नाते मतलब महामाया
की माया से पूर्फतय धनकल जाये । सािना की उस चमफ सीमा पर पहुच कर 1 सािक अघोर तत्व को प्राप्त करता है । धसिफ
अघोर मागफ में दीक्षा लेने से कोई अघोरी नही बन जाता । अघोर मागफ में सािक की 3 अवस्थाएं होती है प्रथम औघड़ दूसरी
अघोरी तीसरी और अंधतम परमहंस । परमहंस अवस्था में पहुचकर सािक धशव में धवलीन हो जाता है । 1 समय था जब कोई
अघोर मागी सािक फकसी के घर पहुच जाता था तो समझो साक्षात् धशव उनके घर आ गए हो ऐसा मानते थे और ये सही भी
है अघोरी को पृथ्वी पर धशव का जीवंत रूप मानते है लेफकन आजकल ना अघोर बचा ना अघोरी मोक्ष या जनकल्यार् से कोई
मतलब नही रहा धसिफ ढोंग प्रपंच ही बचा है दीक्षा ली नही अघोरी बन गए । आफदकाल में अघोरी के कहे को ब्रह्या भी नही
बदल सकते थे इतनी शधि है अघोरी मे । आज अघोर के बारे में कु छ गलत अविारर्ाएं िै ली हुई है वो भी बता देते है ।

1. अघोरी पाप पुण्य से अलग हो गया वो कु छ भी करे उसके धलए कोई पाप नही ?? ये आफदकाल में सही था क्योफक अघोर
मागी गुिाओं में भगवान धशव जी की तरह ध्यान समाधि में रहते थे इसधलये उन्हें पाप पुण्य से परे कहा जाता था क्योफक
पाप और पुण्य से बचने के धलए धसिफ 1 ही उपाय है वो है धसिफ ध्यान । अगर मानव, देव या कोई भी फक्रया करता है तो
उसकी प्रधतफक्रया अवस्य होती है या तो वो पाप में जायेगी या पुण्य में लेफकन ध्यान में कमफ फकया ही नही जाता है । लेफकन
लोगो ने इसका गलत लाभ उठाया और प्रकधत के धवरुद्ध कायफ करने लगे ।

2. मॉस मफदरा का सेवन - मॉस मफदरा का सेवन धसिफ सािना में भोग के समय प्रसाद स्वरूप लेना बताया है ऐसा कही नही
धलखा अघोरी मास मफदरा सािरर् लोगो की तरह प्रयोग करे अगर ऐसा करता है तो उसमें और सािरर् इं सान में कोई भेद
नही । कु छ ढोंधगयों ने पररभाषा बनाइ की हमारे साथ तामधसक शधियां रहती है वो सब ये खाती पीती है हम नही । तो
उनके धलए मैं बता दू धजतनी भी इत्र योधनयां या देव है उनका शरीर नही होता वो आपके दारा दी हुई कोई भी वस्तु खा पी
नही सकती और धसिफ इनकी सुगन्ि से तृप्त होते है । इसधलये भोग में थोडी सी वस्तु रखी जाती है ।

3. स्त्री गमन- पराई स्त्री के साथ भोग करने से कु छ नही होता ये कहना गलत है । अघोर में भैरवी सािनाये होती धजसमे स्त्री
को शधि के रूप में देखते है । उस स्त्री का भोग काम वाशना से नही फकया जाता । इसका प्रयोग काम की ऊजाफ को एकधत्रत
करने के धलए करते है धजससे सोई हुई कु ण्डली शधि जागृत हो जाती है तीव्र गधत से लेफकन इसका प्रयोग अब धसिफ काम
वाशना के धलए ही होने लगा है जो पूर्त
फ या गलत है ।

4. अघोरी फकसी भी अवस्था में अपधवत्र नही होता ??

ये भी सही है अघोरी को अपनी सािना आफद में नहाने िोने की जरूरत नही होती क्योफक अघोरी भस्म स्नान करते है लेफकन
ऐसा नही है अघोरी पागलो की तरह रहे नहाये िोये नही स्वच्छ कपड़े नही पहने । अघोरी साधत्वक भोजन भी कर सकता है
। बहुत से कहते है अघोरी गला सड़ा मास भी खा लेता है गन्दा पानी पी लेता है उसके धलए ये सब समान होना चाधहए । तो
मैं आपको ये बता दू ऐसा वही करते है धजनकी सािना में गलती होने से या भय के कारर् सािना बीच में छोड़ दी और उसकी
बुधद्ध धवपधक्षत हो गयी हो मतलब पागल हो गया हो । अगर हम गन्दा पानी गला सड़ा मास खायेंगे तो धनसंदेश बीमार हो
जाएंगे । और भी बहुत सी भ्राधतया है जो लोगो में िै ली हुई है आगे भी हम इस पर चचाफ करें गे ।

जय महाकाल जय मााँ महाकाली

नाथ सम्प्रदाय में अनेको धसद्ध हुए धजन्होंने अपने ज्ञान दारा लोगो को सही मागफ फदखाया । बात उस समय की है जब सभी
आपस में 1 दूसरे के लोक में आ जा सकते थे । इससे प्रकृ धत धनयम भंग होने लगे क्योफक सभी 1 दूसरे के कायफ में हस्तक्षेप करने
लगे । ये देख भगवान धशव ने 7 दारो को कीधलत क्र फदया धजससे ये हुआ ना तो देव अपने लोक से जा सकते थे ना कोई दूसरा
इनके लोक में आ सकता था । इससे एक समस्या का हल तो गया लेफकन दूसरी समस्या खड़ी हो गयी पृथ्वी लोक पर ऋधष
मुधनयों की सािना का िल धमलना बन्द हो गया इष्ट दशफन बन्द हो गए । लेफकन फकसी को कु छ सूझ नही रहा था क्या करे
भगवान धशव के आदेश के धवरुद्ध भी नही जा सकते थे । उस समय नाथ सम्प्रदाय के परम् धसद्ध दादा गुरु मछे न्रनाथ जी ने
अपने तपो बल से देखा की ऐसा क्यों हो रहा ऋधष मुधनयों की सािना देवो तक क्यों नही पहुच रही । 1 फदन दादा गुरु
मछे न्रनाथ जी वन में जा रहे थे तो रास्ते में देखा कु महार मटकी बना रहा है और उसका िुआ
ं आकाश में जा रहा है ये देख
उनके मन में धवचार आया िूम्र मागफ दारा इस समस्या का हल हो सकता है फिर िूम्र मागफ की रचना की धजससे सािना आफद
का िल धमलना शुरू हो गया और यही से नाथ सािु िुना चेतन करने लगे । आज भी देव िूम्र मागफ से ही आते है और यही
कारर् है हम घरों में पूजा पाठ के समय िुप जलाते है ये कोई सुगन्ि के धलए नही जलाई जाती । इसके जलाने से िूम्र मागफ
बन जाता है और फिर इसी के माध्यम से आपकी पूजा पाठ देवो तक पहुचती है । जबतक आप पूजा करे िुप जलती रहनी
चाधहए । हमेशा िुप का इस्तेमाल करे अगरबत्ती का नही धजतने भी वेद पुरार् है सबमे िुप दीप का इस्तेमाल बताया है।
नाथ सम्प्रदाय के मानव पर बहुत उपकार है। िमफ स्थपना में इनका धवशेष स्थान है आज के समय में भी जो सही में नाथ
सम्प्रदाय से है वो पूर्फ रूप से अपने धनयमो का पालन करता है ।
मृत शरीर जलाना अथफपूर्फ

जहंद ू जलाते हैं शरीर को। क्योंफक जब तक शरीर जल न जाए, तब तक आत्मा शरीर के आसपास भटकती है। पुराने घर का
मोह थोड़ा सा पकड़े रखता है।तुम्हारा पुराना घर भी धगर जाए तो भी नया घर बनाने तुम एकदम से न जाओगे। तुम पहले
कोधशश करोगे, फक थोड़ा इं तजाम हो जाए और इसी में थोड़ी सी सुधविा हो जाए, थोड़ा खंभा सम्हाल दें, थोड़ा सहारा लगा
दें। फकसी तरह इसी में गुजारा कर लें। नया बनाना तो बहुत मुधश्कल होगा, बड़ा करठन होगा।

जैसे ही शरीर मरता है, वैसे ही आत्मा शरीर के आसपास वतुल


फ ाकार घूमने लगती है। कोधशश करती है फिर से प्रवेश की। इसी
शरीर में प्रधवष्ट हो जाए। पुराने से पररचय होता है, पहचान होती है। नए में कहां जाएंग,े कहां खोजेंगे? धमलेगा, नहीं
धमलेगा?इसधलए जहंदओं
ु ने इस बात को बहुत सफदयों पूवफ समझ धलया फक शरीर को बचाना ठीक नहीं है। इसधलए जहंदओं
ु ने
कब्रों में शरीर को नहीं रखा। क्योंफक उससे आत्मा की यात्रा में धनरथफक बािा पड़ती है। जब तक शरीर बचा रहेगा थोड़ा
बहुत, तब तक आत्मा वहां चक्कर लगाती रहेगी।

इसधलए जहंदओं
ु के मरघट में तुम उतनी प्रेतात्माएं न पाओगे, धजतनी मुसलमानों या ईसाइयों के मरघट में पाओगे। अगर तुम्हें
प्रेतात्माओं में थोड़ा रस हो, और तुमने कभी थोड़े प्रयोग फकए हों–फकसी ने भी प्रेतात्माओं के संबि
ं में, तो तुम चफकत होओगे;
जहंद ू मरघट करीब-करीब सूना है। कभी मुधश्कल से कोई प्रेतात्मा जहंद ू मरघट पर धमल सकती है। लेफकन मुसलमानों के मरघट
पर तुम्हें प्रेतात्माएं ही प्रेतात्माएं धमल जाएंगी। शायद यही एक कारर् इस बात का भी है, फक ईसाई और मुसलमान दोनों ने
यह स्वीकार कर धलया, फक एक ही जन्म है। क्योंफक मरने के बाद वषों तक आत्मा भटकती रहती है कब्र के आस-पास।

जहंदओं
ु को तत्क्षर् यह स्मरर् हो गया फक जन्मों की अनंत शृंखला है। क्योंफक यहां शरीर उन्होंने जलाया फक आत्मा तत्क्षर्
नए जन्म में प्रवेश कर जाती है। अगर मुसलमान फिर से पैदा होता है, तो उसके एक जन्म में और दूसरे जन्म के बीच में कािी
लंबा िासला होता है। वषों का िासला हो सकता है। इसधलए मुसलमान को धपछले जन्म की याद आना मुधश्कल है।

इसधलए यह चमत्कारी बात है, और वैज्ञाधनक इस पर बड़े हैरान होते हैं फक धजतने लोगों को धपछले जन्म की याद आती है,
वे अधिकतर जहंद ू घरों में ही क्यों पैदा होते हैं? मुसलमान घर में पैदा क्यों नहीं होते? कभी एकाि घटना घटी है। ईसाई घर
में कभी एकाि घटना घटी है। लेफकन जहंदस्ु तान में आए फदन घटना घटती है। क्या कारर् है?कारर् है। क्योंफक धजतना लंबा
समय हो जाएगा, उतनी स्मृधत िुंिली हो जाएगी धपछले जन्म की। जैसे आज से दस साल पहले अगर मैं तुमसे पूछूं, फक आज
से दस साल पहले उन्नीस सौ पैंसठ, एक जनवरी को क्या हुआ? एक जनवरी उन्नीस सौ पैंसठ में हुई, यह पक्का है; तुम भी थे,
यह भी पक्का है। लेफकन क्या तुम याद कर पाओगे एक जनवरी उन्नीस सौ पैंसठ?

तुम कहोगे फक एक जनवरी हुई यह भी ठीक है। मैं भी था यह भी ठीक है। कु छ न कु छ हुआ ही होगा यह भी ठीक है। फदन ऐसे
ही खाली थोड़े ही चला जाएगा! ज्ञानी का फदन भला खाली चला जाए, अज्ञानी का कहीं खाली जा सकता है? कु छ न कु छ
जरूर हुआ होगा। कोई झगड़ा-झांसा, उपरव, प्रेम, क्रोि, घृर्ा–मगर क्या याद आता है?

कु छ भी याद नहीं आता। खाली मालूम पड़ता है एक जनवरी उन्नीस सौ पैंसठ, जैसे हुआ ही नहीं।

धजतना समय व्यतीत होता चला जाता है, उतनी नई स्मृधतयों की पते बनती चली जाती हैं, पुरानी स्मृधत दब जाती है। तो
अगर कोई व्यधि मरे आज, और आज ही नया जन्म ले ले तो शायद संभावना है, फक उसे धपछले जन्म की थोड़ी याद बनी रहे।
क्योंफक िासला धबलकु ल नहीं है। स्मृधत कोई बीच में खड़ी ही नहीं है। कोई दीवाल ही नहीं है।

लेफकन आज मरे , और पचास साल बाद पैदा हो तो स्मृधत मुधश्कल हो जाएगी। पचास साल! क्योंफक भूत-प्रेत भी अनुभव से
गुजरते हैं। उनकी भी स्मृधतयां हैं; वे बीच में खड़ी हो जाएंगी। एक दीवाल बन जाएगी मजबूत।
इसधलए ईसाई, मुसलमान और यहदी; ये तीनों कौमें जो मुदो को जलाती नहीं, गड़ाती हैं; तीनों मानती हैं फक कोई पुनजफन्म
नहीं है, बस एक ही जन्म है। उनके एक जन्म के धसद्धांत के पीछे गहरे से गहरा कारर् यही है, फक कोई भी याद नहीं कर पाता
धपछले जन्मों को।

जहंदओं
ु ने हजारों सालों में लाखों लोगों को जन्म फदया है, धजनकी स्मृधत धबलकु ल प्रगाढ़ है। और उसका कु ल कारर् इतना है
फक जैसे ही हम मुदे को जला देते हैं–घर नष्ट हो गया धबलकु ल। खंडहर भी नहीं बचा फक तुम उसके आसपास चक्कर काटो। वह
राख ही हो गया। अब वहां रहने का कोई कारर् ही नहीं। भागो और कोई नया छप्पर खोजो।

आत्मा भागती है; नए गभफ में प्रवेश करने के धलए उत्सुक होती है। वह भी तृष्र्ा से शुरुआत होती है। इसधलए तो हम कहते
हैं, जो तृष्र्ा के पार हो गया, उसका पुनजफन्म नहीं होता। क्योंफक पुनजफन्म का कोई कारर् न रहा। सब घर कामना से बनाए
जाते हैं। शरीर कामना से बनाया जाता है। कामना ही आिार है शरीर का। जब कोई कामना ही न रही, पाने को कु छ न रहा,
जानने को कु छ न रहा, यात्रा पूरी हो गई, तो नए गभफ में यात्रा नहीं होती। सनातन िमफ में कहा गया है आत्मा अनन्त यात्रा
पर होती है जबतक उसको परमात्मा साक्षात्कार ना हो जाये इसधलए आत्मा अपनी यात्रा को अपने कमफ अनुसार जन्म लेती
है और यात्रा पर चलती रहती है धसिफ मनुष्य जन्म ही वो है धजसमे इस यात्रा को पूर्फ फकया जा सकता है लेफकन मनुष्य
सांसाररक ररस्ते नातों और माया में उलझकर इस जन्म को बबाफद कर देता है यकीन माधनए आज मनुष्य है उनमें से कोई ही
दोबारा मनुष्य जन्म में आये क्योफक पाप बहुत बढ़ गए है और मनुष्य जन्म बड़ा ही दुलफभ है ये इतनी आसानी से नही धमलता
बहुत से लोग धनराश होकर आत्म हत्या कर लेते है आत्म हत्या से बड़ा कोई पाप नही । धसिफ मनुष्य ही कमाता है और कोई
कमाता नही जब भगवान उनको भूखा नही मरने देता तो आपको कै से मरने दे सकता है अगर ऐसा होता तो जो पहाड़ो
गुिाओं में सािु संत रहते है वो कबके मर गए होते ।समय अभी है जो करना है अभी करना है नही तो ऐसे ही दुुःख भोगते
रहोगे ।

जय महाकाल जय मााँ महाकाली