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〓〓〓 शश्रीमदद दकक्षिणककाललिकका पपुरश्चरण कविलध 〓〓〓

मकाम ककालिश्री सकाधकक कक सपुकविधकारर पपूणर शश्रीमदद दकक्षिणककाललिकका पपुरश्चरण कविलध पककषित हह । "ककोई भश्री सकाधनका fb पर दकखकर नहश्री
हको सकतश्री। यकद fb पर दकख कर ककोई सकाधनका उक दकवि यका दकविश्री कक कविषिय मक जकान पकाप करनका , उनकक कविषिय मक जकाननका ।
सकाधनका करनक कक ललिए सद्गपुर कका हकोनका परम आविश्यक हह । शकक सकाधनका करनक कक ललिए शककभषिकक , पपूणकारकभषिकक कका भश्री हकोनका
परमकाविश्यक हह । " अतएवि आप ककसश्री ककौलिचकायर कक मकागर दशर न मक हश्री ककोई सकाधनका करक तको उसकका पररणकाम बहह त हश्री लिकाभदकायक
हकोगका । ""जय मकाम ककालिश्री ""! सभश्री कका ममगलि हको !
====〓 कविलध 〓 ===
(1) आचमन=== कनम्न ममत पढ़तक हह ए तश्रीन बकार आचमन करर- ॐ हह आत्मतत्त्विम शकोधयकाकम नमम स्विकाहका।
ॐ हह कविदकातत्त्विम शकोधयकाकम नमम स्विकाहका। ॐ हह कशवितत्त्विम शकोधयकाकम नमम स्विकाहका।
कफिर यह ममत बकोलितक हह ए हकार धको लिर--ॐ हह सविर तत्त्विम शकोधयकाकम नमम स्विकाहका।
(2) पकवितश्रीकरण- बकाएम हकामर मक जलि लिककर दकाकहनश्री मध्यमका, अनकाकमकका दकारका अपनक लसर पर कछिड़कर-
ॐ अपकवित : पकवितकोविका सविकारविस्रकाम गतकोऽकपविका। य: स्मरकतद पपुण्डरश्रीककाक्षिम स बकाहकाभ्यन्तर: शपुकच :॥
ॐ पपुमडरश्रीककाक्षि: पपुनकातपुम, ॐ पपुमडरश्रीककाक्षि: पपुनकातपुम, ॐ पपुमडरश्रीककाक्षि: पपुनकातपुम ।
(3) जलि शपुकद - ततृककोनश्च-वितृतत्वि-चतपुष्ममडलिम कतृत्विका हह आधकारशकयक पतृलरविश्री दकव्यह नमम
पमचपकात कक ऊपर हह ङद ईकत अविगपुमठ, विम इकत धकनपुमपुदका, मम इकत मत्स्य मपुदका.........
कफिर पमचपकात कक ऊपर दकाकहनश्री अमगपुषका कको कहलिकातक हह ए कनम्न ममत कको पढ़र—
“ ॐ गमगकश यमपुनकाष्चहवि गकोदकाविरश्री सरस्वितश्री । नमर दक लसमधपु ककाविकरश्री जलिकहसस्मन सकन्निलधम कपुर ॥
(4) आसन शपुकद – ॐ आसन ममतस्य मकरपतृष ऋकषि सपुतलिम छिन्द कपूमर दकवितका आसनक उपविकसनक कविकनयकोग: - पमचपकात मक सक एक
आचमनश्री जलि छिकोड़र-
आसन कक नश्रीचक दकाकहनश्री अनकाकमकका दकारका -ततृककोनश्च-वितृतत्वि-चतपुष्ममडलिम कतृत्विका ॐ हह आधकारशकयक पतृलरविश्री दकव्यह नमम असनम
स्रकापयकत ।
आसन कको छिपूकर - ॐ पतृथ्विश्री त्वियकाधतृतका लिकोकका दककवि त्यविम कविष्णपुनकाधतृतका। त्विम च धकारयमकाम दककवि पकवितम कपुर चकासनमद॥
बकाएम हकामर जकोड़कर – बकामक गपुरभ्यको नमम , परमगपुरभ्यको नमम , परकात्पर गपुरभ्यको नमम , परमककष गपुरभ्यको नमम ।
दकाकहनक हकामर जकोड़कर – शश्रीगणकशकाय नमम
सकामनक हकामर जकोड़कर लसर मक सटकाकर – मध्यक शश्रीमदद दकक्षिणककाललिकका दकव्यह नमम
(5) स्विसस्तविकाचन=== ॐ स्विसस्त न:इन्दको वितृदशविकाम स्विसस्त नम पपुषिका कविश्विविकदकाम । स्विसस्त नस्तकारयर अररष्टनककमम स्विसस्त नको
बतृहस्पकतदर धकातपु ॥
(6) गपुरध्यकान === (कपूमर मपुदका मक)--
ॐ ब्रहकानन्दम परमसपुखदम ककविलिम जकानमपूकतर, दन्दकातश्रीतम गगनसदृशम तत्विमस्यकाकदलिरयमद।
एकम कनत्यम कविमलिमचलिम सविकारलधसकाकक्षिभपूतम, भकाविकातश्रीतम कतगपुणरकहतम सद्गपुरम त्विम नमकाकम।।
(7) मकानस पपूजन===अपनक गकोद पर बकायह हरकलिश्री पर दकाई म हरकलिश्री कको रखकर कनम्न ममत कको पढ़र-
ॐ लिम पतृथ्विश्री-तत्त्विकात्मकम गन्धम अनपुकल्पयकाकम । ॐ हम आककाश-तत्त्विकात्मकम पपुष्पम अनपुकल्पयकाकम।
ॐ यम विकायपु-तत्त्विकात्मकम धपूपम अनपुकल्पयकाकम। ॐ रम विह्नयकात्मकम दश्रीपम अनपुकल्पयकाकम ।
ॐ विम जलि-तत्त्विकात्मकम नहविकदम अनपुकल्पयकाकम। ॐ सम सविर -तत्त्विकात्मकम सविरपचकारम अनपुकल्पयकाकम।
(8) गपुर पणकाम== दकोनक हकामर जकोड़कर--
ॐअखण्डमण्डलिकाककारम व्यकापम यकन चरकाचरमद । तत्पदम दकशर तम यकन तस्मह शश्रीगपुरविक नमम ॥
न गपुरकोरलधकम तत्त्विम न गपुरकोरलधकम तपम । तत्त्विजकानकात्परम नकासस्त तस्मह शश्रीगपुरविक नमम ॥
मन्निकारम शश्रीजगन्निकारम मद्गपुरम शश्रीजगद्गपुरम । मदकात्मका सविर भपूतकात्मका तस्मह शश्रीगपुरविक नमम ॥
अजकानकतकमरकान्धस्य जकानकाञ्जनशलिकाकयका । चक्षिपुरन्मश्रीललितम यकन तस्मह शश्रीगपुरविक नमम ॥
जकानशककसमकारूढम तत्त्विमकालिकाकविभपूकषितम । भपुककमपुककपदकातका च तस्मह शश्रीगपुरविक नमम ॥
अनककजन्मसमपकाप कमर बन्धकविदकाकहनक । आत्मजकानपदकानकन तस्मह शश्रीगपुरविक नमम ॥
(9) गणकशजश्री कका ध्यकान =
कविघ्नकश्विरकाय विरदकाय सपुरकपयकाय, लिम्बकोदरकाय सकलिकाय जगतद कहतकाय ।
नकागकाननकाय शपुकतयजभपूकषितकाय, गकौरश्रीसपुतकाय गणनकार नमको नमस्तक ॥
(10) मकानस पपूजन===अपनक गकोद पर बकायह हरकलिश्री पर दकाई म हरकलिश्री कको रखकर कनम्न ममत कको पढ़र-
ॐ लिम पतृथ्विश्री-तत्त्विकात्मकम गन्धम अनपुकल्पयकाकम । ॐ हम आककाश-तत्त्विकात्मकम पपुष्पम अनपुकल्पयकाकम।
ॐ यम विकायपु-तत्त्विकात्मकम धपूपम अनपुकल्पयकाकम। ॐ रम विह्नयकात्मकम दश्रीपम अनपुकल्पयकाकम ।
ॐ विम जलि-तत्त्विकात्मकम नहविकदम अनपुकल्पयकाकम। ॐ सम सविर -तत्त्विकात्मकम सविरपचकारम अनपुकल्पयकाकम।
(11) गणकश पणकाम=== पणम्य कशरसका दकविम, गकौरश्रीपपुतम कविनकायकम। भककाविकासम स्मरककन्नित्यमकायपु: ककामकारर लसदयक।।
विक्रतपुण्ड महकाककाय ककोकटसपूयरसमपभ:। कनकविर घ्न कपुरविक दकवि सविर ककायर यकषिपु सविर दका।।
लिम्बकोदर नमस्तपुभ्यम सततम मकोदकमकपयम। कनकविर घ्न कपुरविक दकवि सविर ककायर यकषिपु सविर दका।।
सविर कविघ्नकविनकाशकाय, सविर कल्यकाणहकतविक l पकाविर तश्रीकपयपपुतकाय, शश्रीगणकशकाय नमको नम: ।।
गजकाननम्भपूतगणकाकदसककवितम ककपत्र जम्बपू फिलिचकारभक्षिणमद।
उमकासपुतम शकोक कविनकाशककारकम नमकाकम कविघ्नकश्विरपकादपमकजमद।
(12) ईष्टदकविश्री पणकाम:-
ॐ जयन्तश्री मङ्गलिका ककालिश्री भदककालिश्री कपकाललिनश्री। दगपु कार क्षिमका कशविका धकातश्री स्विकाहका स्विधका नमकोऽस्तपु तक॥
ॐ ककालिश्री महकाककालिश्री ककाललिकक परमकश्विरश्री । सविकारनन्दकरश्री दकविश्री नकारकायकण नमकोऽस्तपुतक ।।
(13) समकल्प===ॐ कविष्णपुकविर ष्णपुकविर ष्णपु: ॐ तत्सतद शश्रीमद्भगवितको महकापपुरषिस्य कविष्णपुरकाजयका पवितर मकानस्य अदशश्रीब्रहणकोऽकह्न
कदतश्रीय परकाधर शश्रीश्विकतविकारकाहकल्पक विहविस्वितमन्विन्तरक, अष्टकाकविमशकततमक कललियपुगक, कललिपरम चरणक जम्बपूदश्रीपक भरतखण्डक भकारतविषिर
भपूपकदकशक------पदकशक------मकासक-----रकाकश सस्रतक भकास्करक----पक्षिक-----कतरकौ----विकासरक अस्य-----गकोतकोत्पन्नि------नकामन:/नकाम्नश्री
अस्य शश्रीमदद दकक्षिणकललिकका समदशर नम पश्रीकतककाम: सविर लसकद पपूणरककाम: “क्रक” मन्तस्य दशसहसकाकद जप ततद दशकामश हकोमम
अनपुकल्पम कविकहतम ततद कदगपुण जप ततद दशकामश तपर णमद अनपुकल्पम कविकहतम ततद कदगपुण जप ततद दशकामश अकभलसमचनमद अनपुकल्पम
कविकहतम ततद कदगपुण जप ततद दशकामश ब्रकाहण भकोजनम अनपुकल्पम कविकहतम ततद कदगपुण जप पमचकामग पपुरश्चरण कमकारहमद कररष्यक।
(14) कपकाट भमजन=== “हह म” मन्त कका १० बकार जप ।
(15) ककाकमनश्री तत्वि=== हदय मर “क्रक” मन्त कका १० बकार जप।
(16) ककाकमनश्री ध्यकान:== लसमहस्कन्ध समकारूढकाम रकविणकारमद चतपुभर पुजकामद, नकानकालिमककार भपूषिकाढकामद रकविस कविभपूकषितकामद ।
शमखचक्र धनपुबकारण कविरकालजत करकाम्बपुजकामद ॥
(17) ककाकमनश्री मकानसपपूजन=== अपनक गकोद पर दकायह हरकलिश्री पर बकाई म हरकलिश्री कको रखकर कनम्न ममत कको पढ़र-----
ॐ लिम पतृथ्विश्री-तत्त्विकात्मकम गन्धम अनपुकल्पयकाकम । ॐ हम आककाश-तत्त्विकात्मकम पपुष्पम अनपुकल्पयकाकम।
ॐ यम विकायपु-तत्त्विकात्मकम धपूपम अनपुकल्पयकाकम। ॐ रम विह्नयकात्मकम दश्रीपम अनपुकल्पयकाकम ।
ॐ विम जलि-तत्त्विकात्मकम नहविकदम अनपुकल्पयकाकम। ॐ सम सविर -तत्त्विकात्मकम सविरपचकारम अनपुकल्पयकाकम।
पपूजन उपरकामत “कम” मन्त कका १० बकार जप ।
(18) जपरहस्य== पफिपुल--- “लिम” मन्त कका १० बकार जप । पकाणकायकाम--- “क्रक” मन्त सक ४/१६/८ ।
=भपुतशपुकद == 1-- ॐ भपूतशमगकाटकासचछिर सपुषिपुम्नकापरकन जश्रीविकशविम परमकशवि पदक यकोजयकामश्री स्विकाहका ।
2--. ॐ यम ललिमगशरश्रीरम शकोषिय शकोषिय स्विकाहका । 3-- ॐ रम समककोचशरश्रीरम दह दह स्विकाहका ।
4.-- ॐ परमकशवि सपुषिम्पु नकापरकन मपूलिशमगकाटमपूलसकोलस ज्विलि ज्विलि पज्विलि पज्विलि सकोऽहम हमस: स्विकाहका।
(19) मकाम ककालिश्री कविच :-
कविचम शकोतपुकमचछिकाकम तकाम च कविदकाम दशकाक्षिरश्रीमद।
नकार त्वितको कह सविर ज भदककाल्यकाश्च सकाम्पतमद॥
==नकारकायण उविकाच==
शतृणपु नकारद विरयकाकम महकाकविदकाम दशकाक्षिरश्रीमद।
पु र भमद॥
गकोपनश्रीयम च कविचम कतषिपु लिकोककषिपु दलि
हह शह क्लिह ककाललिककायह स्विकाहककत चदशकाक्षिरश्रीमद।
दविपु कारसका कह ददकौ रकाजक पपुष्करक सपूयरपविर कण॥
दशलिक्षिजपकनहवि मन्तलसकद: कतृतका पपुरका।
पञ्चलिक्षिजपकनहवि पठनद कविचमपुतममद॥
बभपूवि लसदकविचकोऽप्ययकोध्यकामकाजगकाम स:।
कतृत्स्नकाम कह पतृलरविह लजग्यक कविचस्य पसकादत:॥
==नकारद उविकाच==
पु र भका।
शपुतका दशकाक्षिरश्री कविदका कतषिपु लिकोककषिपु दलि
अधपुनका शकोतपुकमचछिकाकम कविचम ब्रपूकह मक पभको॥
== नकारकायण उविका==
शतृणपु विरयकाकम कविपकदरन्द कविचम परमकाद्भत
पु मद।
नकारकायणकन यदद दतम कतृपयका शपूललिनक पपुरका॥
कतपपुरस्य विधक घकोरक कशविस्य कविजयकाय च।
तदकवि शपूललिनका दतम पपुरका दविपु कारससक मपुनक॥
दविपु कारससका च यदद दतम सपुचन्दकाय महकात्मनक।
अकतगपुहतरम तत्त्विम सविर मन्तकौघकविग्रहमद॥
हह शह क्लिह ककाललिककायह स्विकाहका मक पकातपु मस्तकमद।
क्लिह कपकालिम सदका पकातपु हह हह हश्रीकमकत लिकोचनक॥
हह कतलिकोचनक स्विकाहका नकालसककाम मक सदकावितपु।
क्लिह ककाललिकक रक्षि रक्षि स्विकाहका दन्तम सदकावितपु॥
हह भदककाललिकक स्विकाहका पकातपुमकऽधरयपुग्मकमद।
हह हह क्लिह ककाललिककायह स्विकाहका कण्ठम सदकावितपु॥
हह ककाललिककायह स्विकाहका कणर यग्पु मम सदकावितपु।
क्रक क्रक क्लिह ककाल्यह स्विकाहका स्कन्धम पकातपुसदका मम॥
क्रक भदककाल्यह स्विकाहका मम विक्षि: सदकावितपु।
क्रक ककाललिककायह स्विकाहका मम नकाकभम सदकावितपु॥
हह ककाललिककायह स्विकाहका मम पषम सदकावितपु।
रकबश्रीजकविनकाकशन्यह स्विकाहका हस्तकौ सदकावितपु॥
हह क्लिह मपुण्डमकाललिन्यह स्विकाहका पकादकौ सदकावितपु।
हह चकामपुण्डकायह स्विकाहका सविकारङ्गम मक सदकावितपु॥
पकाचयकाम पकातपु महकाककालिश्री आगन्य्यकाम रक दसन्तकका।
दकक्षिणक पकातपु चकामपुण्डका नहऋरत्यकाम पकातपु ककाललिकका॥
श्यकामका च विकारणक पकातपु विकायव्यकाम पकातपु चसण्डकका।
उतरक कविकटकास्यका च ऐशकान्यकाम सकाट्टहकालसनश्री॥
ऊध्र्वि पकातपु लिकोलिलजहका मकायकादका पकात्विध: सदका।
जलिक स्रलिक चकान्तररक्षिक पकातपु कविश्विपसपू:सदका॥
इकत तक कलरतम वित्ससविर मन्तकौघकविग्रहमद।
सविरषिकाम कविचकानकाम च सकारभपूतम परकात्परमद॥
सपदश्रीपकश्विरको रकाजका सपुचन्दकोऽस्य पसकादत:।
कविचस्य पसकादकन मकान्धकातका पतृलरविश्रीपकत:॥
पचकतका लिकोमशश्चहवि यत: लसदको बभपूवि ह।
यतको कह यकोकगनकाम शकष: सकौभरर: कपप्पलिकायन:॥
यकद स्यकातद लसदकविच: सविर लसदश्रीश्विरको भविकतद।
महकादकानकाकन सविकारकण तपकामलस च व्रतकाकन च॥
कनसश्चतम कविचस्यकास्य कलिकाम नकाहर सन्त षिकोडशश्रीमद॥
इदम कविचमजकात्विका भजकतद कलिह जगत्पसपूमद।
शतलिक्षिपपकोऽकप न मन्त: लसकददकायक:॥
(20) ऋषियकाकदन्यकास;- ॐ अस्य शश्रीमदद दकक्षिणकललिकका मन्तस्य भहरवि ऋकषिम उसष्णक छिन्द: शश्रीमदद दकक्षिणकललिकका दकवितका हह
बश्रीजम हपूम शकक: क्रक ककीलिकमद मम धमकाररर सविकारभश्रीष्ट लसध्यरर जपक कविकनयकोग:(पमचपकात सक रकोड़का जलि सकामनक पकात मक छिकोड़क )===
ॐ भहरवि ऋषियक नम: - कशरसक । ॐ उसष्णक छिन्दसक नम: - मपुखक । ॐ शश्रीमदद दकक्षिणकललिकका दकवितकायह नम: - हदयक।
ॐ हह बश्रीजकाय नम: - गपुहक (कफिर हकार धकोए)। ॐ हह म शकयक नम: - पकादयको । ॐ क्रक ककीलिककाय नम: - नकाभकौ। ॐ कविकनयकोगकाय नम:
- सविकारगक।
(21) करन्यकास === ॐ क्रकाम अमगपुषकाभ्यकाम नम:। ॐ क्रक तजर नश्रीभ्यकाम स्विकाहका । ॐ क्रपूम मध्यमकाभ्यकाम विषिटद ।
ॐ क्रक अनकाकमककाभ्यकाम हह म। ॐ क्रक ककनकषककाभ्यकाम विकौषिटद । ॐ क्र: करतलिकरपतृषकाभ्यकामद असकाय फिटद ।
(22) अमगन्यकास ==== ॐ क्रकाम हृदयकाय नम:। ॐ क्रक कशरसक स्विकाहका। ॐ क्रपूम कशखकायह विषिटद ।
ॐ क्रक कविचकाय हह ।म ॐ क्रक नकततयकाय विकौषिटद । ॐ क्र: असकाय फिटद ।
(23) तत्विन्यकास===ॐ क्रक आत्मतत्विकाय स्विकाहका। [ तत्वि मपुदका बनका कर पहर सक नकाकभ तक स्पशर करक ]
ॐ क्रक कविदकातत्विकाय स्विकाहका। [ तत्वि मपुदका बनका कर नकाकभ सक हृदय तक स्पशर करक ]
ॐ क्रक कशवितत्विकाय स्विकाहका। [ तत्वि मपुदका बनका कर हृदय सक सहससकार तक स्पशर करक ]
(24) व्यकापक न्यकास:- “क्रक” मन्त सक ७ बकार
(25) मकामककालिश्री ध्यकान== शविकारढकाम महकाभश्रीमकाम घकोरदृमष्टर्काम विरपदकामद। हकास्य यपुककाम कतनकतकाम च कपकालि कततृरककाकरकामद।
मपुक ककशश्री लिलिलजहकाम कपबमतश्री रलधरम मपुहह:। चतपुबकारहहयत
पु काम दकविह विरकाभयकरकाम स्मरकतद॥"
(26) मकामककालिश्री मकानस पपूजन=== अपनक गकोद पर दकायह हरकलिश्री पर बकाई म हरकलिश्री कको रखकर कनम्न ममत कको पढ़र--------
ॐ लिम पतृथ्विश्री-तत्त्विकात्मकम गन्धम अनपुकल्पयकाकम । ॐ हम आककाश-तत्त्विकात्मकम पपुष्पम अनपुकल्पयकाकम ।
ॐ यम विकायपु-तत्त्विकात्मकम धपूपम अनपुकल्पयकाकम । ॐ रम विह्नयकात्मकम दश्रीपम अनपुकल्पयकाकम । ।
ॐ विम जलि-तत्त्विकात्मकम नहविकदम अनपुकल्पयकाकम । ॐ शम सविर -तत्त्विकात्मकम सविरपचकारम अनपुकल्पयकाकम ।
(27) इसकक उपरकान्त यकोकन मपुदका दकारका पणकाम करनका चकाकहए.------------------------;
(28) डकाककन्यकाकद ममतको कका न्यकास (तत्विमपुदका दकारका)==मपूलिकाधकार मर डकाम डकाककन्यह नम:। स्विकालधषकान मर रकाम रकाककन्यह नम:। मकणपपुर मर
लिकाम लिकाककन्यह नम:।
अनकाहत मर ककाम ककाककन्यह नम:। कविशपुद मर शकाम शकाककन्यह नम:। आजकाचक्र मर हकाम हकाककन्यह नम:। सहसकार मर यकाम यकाककन्यह नम:।
(29) मन्त कशखका=== श्विकास कको रधकर भकाविनका दकारका कपुलिकपुण्डललिनश्री कको कबलिकपुलि सहसकार मर लिक जकायक एविम उसश्री क्षिण हश्री
मपूलिकाधकार मर लिक आयक।
इस तरह सक बकार बकार करतक करतक सपुषिपुम्नका पर पर कविदपुत ककी तरह दश्रीघकारककार कका तकज लिकक्षित हकोगका।
(30) मन्त चहतन्य=== “ई म क्रक ई”म मन्त कको ७ बकार जपक।
(31) ममतकारर भकाविनका=== दकवितका कका शरश्रीर और मन्त अकभन्नि हह, यहश्री कचमतन करर।
(32) कनमदका भमग=== “ई म क्रक ई”म मन्त कको हदय मर १० बकार जपक ।
(33) कपुलक
पु का== “क्रक हह म सह हह फिटद ” मन्त कको मस्तक पर ७ बकार जपक।
(34) महकासकतपु==“क्रक” मन्त कको कमठ मर ७ बकार जपक।
(35) सकतपु===“ऐम हह म ऐम” मन्त कको हदय मर ७ बकार जपक ।
(36) मपुखशकोधन===“क्रक क्रक क्रक ॐ ॐ ॐ क्रक क्रक क्रक” मन्त कको मपुख मर ७ बकार जपक ।
(37) लजव्हकाशपुकद=== मत्स्यमपुदका सक आचछिकाकदत करकक “हर सकौ:” मन्त कको ७ बकार जपक ।
(38) करशकोधन===“क्रक ई म क्रक करमकालिक असकाय फिटद ” मन्त कको ७ बकार जपक ।
(39) यकोकनमपुदका मपूलिकाधकार सक लिककर ब्रहरमध पयरत अधकोमपुख कतककोण एविम ब्रहरमध सक लिककर मपूलिकाधकार पयरत उध्विर मख
पु कतककोण
अरकारतद
इस पककार कका षिट्ककोण ककी कल्पनका कर बकाद मक ऐम मन्त कका १० बकार जप करक।।
(40) कनविकारण === “ॐ अम क्रक ऐम ऐम क्रक अम ॐ” – १ बकार नकाकभ पदकश मर जपक ।
(41) पकाणतत्वि ===अनपुस्विकारयपुक पत्यकक मकाततृककाविणर सक बश्रीजममतको ककोयपुक करकक जपकरक। अरविका “अम कम चम टम तम पम यम शम” सक
यपुक करकक मन्त कका जप करक।
जहसक -- “अम क्रक । कम क्रक । चम क्रक” ......... जपक।
(42) पकाणयकोग===“हह क्रक हह” – ७ बकार हदय मर जपक।
(43) दश्रीपनश्री:===“ॐ क्रक ॐ” – ७ बकार हदय मर जपक।
(44) अमतृतयकोग=== “ॐ उम हह” – १० बकार हदय मर जपक।
(45) सप्त्चछिदका:==“क्रक क्लिह हह हह म ॐ औम” – १० बकार हदय मर जपक।
(46) मन्तकचमतका===मन्तस्रकान मर मन्त कका कचमतन करक। अरकारतर रकाकत कक परम दशदण्ड(4 घमटक) मर हदय मर, परवितर दशदण्ड मर
कविन्दस्पु रकान(मनश्चक्र कक ऊपर), उसकक बकाद कक दशदण्ड कक बश्रीच कलिकातश्रीत स्रकान मर मन्त कका ध्यकान करक। कदविस कक परम
दशदण्ड कक बश्रीच ब्रहरमध मर मन्त कका ध्यकान करक। कदविस कक कदतश्रीय दशदण्ड मर हदय मर एविम ततृतश्रीय दशदण्ड मर मनश्चक्र मर मन्त
कका कचमतन करक।
(47) उत्ककीलिन === दकवितका ककी गकायतश्री १० बकार जपक।
“ॐ क्रक कललिककायह कविद्महक शमशकान विकालसनयह धश्रीमकह तन्निको घकोरक पचकोदयकातद।”
(48) दृकष्टसकतपु== नकासकाग्र अरविका भपूमध्य मर दृकष्ट रखतक हह ए १० बकार पणवि कका जप करक। पणवि कक अनकालधककारश्री औम मन्त कका
१० बकार जप करक।
(49) जपकारमभ== सहसकार मर गपुर कका ध्यकान, लजव्हकामपूलि मर मन्तविणर कका ध्यकान और हदयमर ईष्टदकवितका कका ध्यकान करकक बकाद मर
सहसकार मर गपुरमपूकतर तकजकोमय, लजव्हकामपूलि मर मन्त तकजकोमय और हदयमर ईष्टदकवितका ककी मपूकतर तकजकोमय, इस तरह सक कचमतन करक।
अनमतर मर तश्रीनक तकजकोमय ककी एकतका करकक, इस तकजकोमय कक पभकावि सक अपनक कको भश्री तकजकोमय और उससक अकभन्नि ककी भकाविनका
करक। इसकक बकाद ककामकलिका कका ध्यकान करकक अपनका शरश्रीर नहह हह अरकारतद ककामकलिका कका रूप कतकविन्द पु हश्री अपनका शरश्रीर कक रूप मर
सकोचकर जप कका आरम्भ कर दक।
(50) पपुन: पकाणकायकाम=== क्रक ममत सक 4/16/8
(51) पपुन: कपुलक
पु का, सकतपु, महकासकतपु, अशकोचभमग कका जप :-
कपुलक
पु का===“क्रक हह म सह हह फिटद ” मन्त कको मस्तक पर ७ बकार जपक।
महकासकतपु=== “क्रक” मन्त कको कमठ मर ७ बकार जपक
सकतपु:===“ऐम हह म ऐम” मन्त कको हदय मर ७ बकार जपक
अशकौचभमग:- “ॐ क्रक ॐ” – ७ बकार हदय मर जपक
(5 २) जपसमपर ण === एक आचमनश्री जलि लिककर कनम्न ममत पढ़कर सकामनक पकात मक जलि छिकोड़ दर -
ॐ गपुहकाकतगपुहगकोप्तश्री त्विम गतृहकाणकास्मत्कतृतम जपमद । लसकदभर वितपु मक दककवि त्वित्पसकादकात्सपुरश्क विरर ॥
(53) ===क्षिमकायकाचनका ===
अपरकाधसहसकाकण कक्रयमतकऽहकनर शम मयका ।
दकासकोऽयकमकत मकाम मत्विका क्षिमस्वि परमकश्विरर ॥१॥
आविकाहनम न जकानकाकम न जकानकाकम कविसजर नमद ।
पपूजकाम चहवि न जकानकाकम क्षिम्यतकाम परमकश्विरर ॥२॥
ममतहश्रीनम कक्रयकाहश्रीनम भककहश्रीनम सपुरश्क विरर ।
यत्पपूलजतम मयका दककवि पररपपूणर तदस्तपु मक ॥३॥
अपरकाधशतम कतृत्विका जगदमबककत चकोचरकतद ।
यकाम गकतर समबकाप्नकोकत न तकाम ब्रहकादयम सपुरकाम ॥४॥
सकापरकाधकोऽसस्म शरणम पकापस्त्विकाम जग
डर् दकानश्रीमनपुकमप्यकोऽहम यरकचछिलस तरका कपुर ॥५॥
अजकानकाकदस्मतृतकभकारन्त्यका यन्न्यपूनमलधकम कतृतमद च ।
तत्सविर क्षिम्यतकाम दककवि पसश्रीद परमकश्विरर ॥६॥
ककामकश्विरर जगन्मकातम ससचचदकानमदकविग्रहक ।
गतृहकाणकाचकारकममकाम पश्रीत्यका पसश्रीद परमकश्विरर ॥७॥
(53) === पणकाम ===
ॐ जयन्तश्री मङ्गलिका ककालिश्री भदककालिश्री कपकाललिनश्री। दगपु कार क्षिमका कशविका धकातश्री स्विकाहका स्विधका नमकोऽस्तपु तक॥
ॐ ककालिश्री महकाककालिश्री ककाललिकक परमकश्विरश्री । सविकारनन्दकरश्री दकविश्री नकारकायकण नमकोऽस्तपुतक ।।
(54) जप कक पश्चकात सकोत, हदय आकद कका पकाठ करनका चकाकहए ।
(55) आसन छिकोडक:== आसन कक नश्रीचक १ आचमनश्री जलि छिकोडकर दकाकहनश्री अनकाकमकका दकारका ३ बकार “शक्रकाय विषिट” कहकर
उसश्री जलि दकारका कतलिक कर तभश्री आसन छिकोड़र। ऐसका नहश्री करनक पर इन्द आपककी सकारश्री पपुण्य कको लिक जकातक हक ।
==== कविशकषि दष्टव्य ===
(१ ) यह कक्रयका पपूणरतम तकामकतक हह । ककसश्री ककौलिचकायर सक शकाककाकभषिकक यका पपूणकारकभषिकक दश्रीक्षिका लिककर हश्री उपरकोक अनपुषकान करर ।
(२ ) पपुरश्चरण ककालि मर लिकालि विस कका एविम लिकालि ऊनश्री आसन कका पयकोग करर । कनयमक कका पकालिन करर ।
(३ ) दकक्षिणककाललिकका पपुरश्चरण मक ९ कदन मक कम सक कम १ लिकाख ममत जप हकोनका अकनविकायर हह।
(४ ) दकक्षिणककाललिकका दकविश्री कक मन्त रकाकत कक समय जप करनक सक शश्रीघ लसकद पदकान करतश्री हह। विक सभश्री सकाधकक कक ललिए
लसकददकायक हह।
9 powerful mantra of Kalika
MahaKali Beeja Mantra - ककालिश्री बश्रीज मन्त
This is mata Mahakali's beej mantra which can be used for chanting.
ककालिश्री बश्रीज मन्त - क्लिह
Kaali Beej Mantra - Klim

Famous Kali Spell For Success - ककालिश्री मन्त


This one is famous and widely used spell of her. This is also used for success in life.
ककालिश्री मन्त - ॐ क्रक ककाललिककायक: नमम
Kaali Spell - Om Krim Kalikaye Namah

Dakshin Kaali Mantra for protection - दकक्षिण ककालिश्री मन्त


The DakshinKali spell is most powerful Kaali mantra for protection from any negative energy and
enemy.
दकक्षिण ककालिश्री मन्त - ॐ क्रक क्रक क्रक हह म हह म हह हह दकक्षिण ककाललिकक क्रक क्रक क्रक हह म हह म हह हह स्विकाहका
Dakshin Kaali Mantra - Om Krim Krim Krim Hum Hum Hrim Hrim Kalike Krim Krim Krim Hum
Hum Hrim Hrim Swaha

Great Bhadrakali mantra for good luck - भदककालिश्री मन्त


The Bhadrakali spell is good one to get boon of good luck from mighty Bhawani.
भदककालिश्री मन्त - हह क्रक क्रक हह म हह म हह हह भदककाल्यक हह क्रक क्रक हह म हह म हह हह स्विकाहका
Bhadrakali Mantra - Hrim Krim Krim Hum Hum Hrim Hrim Bhadrakalye Hrim Krim Krim Hum
Hum Hrim Hrim Swaha
Vedic Mahakali Gayatri - महकाककालिश्री गकायतश्री
For getting grace of Mahakali, this Vedic Gayatri of her should be recited.
महकाककालिश्री गकायतश्री - ॐ महकाककाल्यक च कविध्महक श्मशकानविकालसन्यक च धश्रीमकह, तन्निको ककालिश्री पचकोदयकातद
Mahakali Gayatri Incantation - Om Mahakalye C VidhmaheShmshanwasinye C Dhimahi, Tnno
Kaali Prchodayat

Kali Spell for money - ककालिश्री मम त


This powerful kali mantra can gives money, luck and success in life.
This incantation used to appease mata Kalika.
ककालिश्री मम त - हह शह क्रक परमकश्विरश्री स्विकाहका
Kaali Mantra - Hrim Shrim Krim Parmeshwari Swaahaa

Powerful Kalika Mantra for success - ककालिश्री मम त


This is another chant for getting grace of mata. It can be used for success and protection.
ककालिश्री मम त - हह शह क्रक परमकश्विरश्री ककाललिकक हह शह क्रक स्विकाहका
Kaali Mantra - Hrim Shrim Krim Parmeshwari Kaalike Hrim Shrim Krim Swaahaa

Chamunda Namaskaar Spell - ककालिश्री नमस्ककार मम त


This good spell is commanly used by many people for appeasing her.
ककालिश्री नमस्ककार मम त - ॐ शश्री ककाललिककायक नमम
Kaali Namaskaar Chant - Om Shree Kaalikaye Namah

Sapatsati Kali Shalok - ककालिश्री श्लिकोक


This Bhadrakali shaloka is taken from Durga Sapatsati. This is used for getting glee of her.
ककालिश्री श्लिकोक - ॐ जयमतश्री ममगलिका ककालिश्री भदककालिश्री कपकाललिनश्री, दगपु कार क्षिमका कशविका धकातश्री स्विकाहका स्विधका नमकोस्तपुतक
Kaaliji Shlok - Om Jayanti Mangla Kaali Bhadrakaali Kapalini, Dirga Shama Shiva Dhatri Swaahaa
Swaadhaa Namostute
ॐ हरकाम हररम हक सह सपूयकारय नमम

मनकोविकामक छित फिलि पकानक कक ललिए कनम्न मम त कका उचचकारण करर

ॐ हह हह सपूयकारय सहसककरणकाय मनकोविकामकछित फिलिमद दककह दककह स्विकाहका॥

सपूयर बलिविकान हकगक , तभश्री जश्रीविन मर सभश्री ककाम बनर गक । करर सपूयर मम त क कका जकाप

ॐ जपकाकपुसपुम समककाशम ककाश्यपकयम महकादपुकतम। तमको रर सविर पषिपघ्नम सपूयरमषिविषिहकाम्यहम।

ॐ हकाम हह हक स: सपूयकारय नम:॥

ॐ हह घतृकण सपूयर आकदत्य शह ॐ।

ॐ आकदत्यकाय कविद्महक मकातर ण्डकाय धश्रीमकह तन्निको सपूयर: पचकोदयकातद।

ॐ घतृकणम सपूय्यर : आकदत्य: ॐ हह हह सपूयकारय सहसककरणरकाय मनकोविकामकछित फिलिमद दककह दककह स्विकाहका॥

ॐ ऐकह सपूयज्र्ञ सहसकामशक तकजको रकाशक जगत्पतक, अनपुकमपयकमकाम भतयका, गतृहकाणकाघर य कदविकाकर:।

ॐ हह घतृकण: सयर आकदत्य क्लिह ॐ।

ॐ हह हह सपूयकारय नम:।
Powerful Mantras for Life
By Astrospeak Team — Jul 25, 2017
5-6 minutes

Mantras are powerful combinations of sounds


Mantras are powerful combinations of sounds, letters and words. Mantras give rise to some very
powerful vibrations that can work on the different aspects of the individual and transform them to
perfection. Mantras give good health, wealth and happiness. They lead a man successfully in his
spiritual journey. The Hindu tradition has given us a treasure of mantras for anything and everything.
Whatever be your goal in life, you can achieve it by chanting the right mantra sincerely with faith. Here
are some powerful mantras for achieving different objectives in life.
Success is the essence of every effort in life. Often you might confront some difficulties, challenges
and obstacles in your path. Chanting this Surya mantra can boost up your self-confidence and open the
doors to success.
“Aum Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namah”
How to chant
Chant this mantra early in the morning after bath. Sit facing east in a way seeing the rising sun if
possible and chant six rosaries of this mantra for 41 days. You will see the obstacles clearing and
success coming to you smoothly.

When you fall in love with someone, you can chant the mantra for love to win the heart of the
individual you love. This Kali mantra can also remove the obstacles in the path of your love life and
make you successfully realise your love dreams.
“Om Hreem Kali Kapalini Ghornadini Viswam Vimohya Jagnmohya Sarv Mohya Mohya th: th: th:”
How to chant
Sit in front of Mother Kali picture in your home. Sit on a mat after bath and chant the mantra 108 times
a day for 21 days to see your love coming to you.
Money is very essential for human life. Often you might face financial crunch and its consequences on
your life. When you need money for genuine reasons, chant the following Lakshmi mantra to see your
difficulties disappear like mist and money coming to you in lucky ways.
“Om Shring Hring Kling Tribhuvan Mahalakshmyai Asmaakam Daaridray Naashay Prachur Dhan
Dehi Dehi Kling Hring Shring Om”
How to chant
Use rosary made of crystal beads or lotus stem beads to chant the mantra. Offer lotus flowers to
goddess Lakshmi. Chant the mantra in cycles of 21 X 108 for 21 days to see desired results.

If your love is not coming through and the person is adamant, you can chant the powerful vashikaran
mantra to charm the individual and win them in your favour.

Kamdev mantra for Vashikaran

“Om Kshan Ksham Kshah Sau H H Sah: Thah: Thah: Thah: Thah: Swaha”
How to chant
Chant this mantra 21,000 times in installments every time while preparing food. While chanting the
mantra, keep thinking of the person you love. Regularly eat the food cooked thus and you will find
your love getting attracted towards you.

Guidelines to chant powerful mantras


Mantras are the sound form of divine energies. Therefore they must be chanted with purity of heart and
sincere devotion.
It is highly beneficial to chant mantras in the early morning after taking bath and sitting in front of the
altar on a mat or wooden plank.
Never use mantras for selfish or evil purposes as they can turn against you.