नमसते

,
मेरा नाम है रोिहत डे सानी. गुजरात के एक तेहसल गाँव मे रहता हूँ मे 22 साल का हूँ
मेरी एक समसया है िजस के बारे मे मे आप की राय माँगता हूँ लेिकन समसया
बताने के िलए मुझे अपनी कहानी बयान करनी होगी. सुिनए .

मेरी फेिमली मे मे हूँ माताजी, िपताजी हे और मुझ से तीन साल बडी दीदी है िजस
का नाम है शािलनी. मै और दीदी एक दज
ू े से बहुत पयार करते हे . भाई बहन से

जयादा हम दोसत हे . हम एक दज
ू े की िनजी बाते जानते हे और मुशकेली मे राय लेते
दे ते हे . सेकस के बारे मे हम काफी खुले िवचार के हे , हालाँिक हम ने आपस मे चुदाई

नहीं की है जब मे छोटा था तब अकसर वो मुजे नहलाती थी. उस वकत मात कुतूहल
से दीदी मेरी लोडी के साथ खेला करती थी. मुजे गुदगुदी होती थी और लोडी कडी हो
जाती थी. जैसे जैसे उमर बढती चली तैसे तैसे हमारी छे ड छाड बढती चली. ये िबना

बनी तब मै सतह साल का था और वो बीस साल की. तब तक मेने उस की चुिचयाँ

दे ख ली थी, भोस दे ख ली थी और उस ने मेरा लंड हाथ मे लेकर मूट मार िलया था.
चुदाई कया है कैसे की जाती है कयूं की जाती है ये सब मुझे उस ने िसखाया था.

कहानी शुर होती है शािलनी की शादी से. िपताजी ने बडी धाम धूम से शादी मनाई.
बारात दो िदन महे मान रही. खाना पीना, गाना बजाना सब दो िदन चला. जीजाजी

शैलेश कुमार उस वकत बाइस साल के थे और बहुत खूबसूरत थे. दीदी भी कुछ कम
नहीं थी. लोग कहते थे की जोडी सुंदर बनी है

बारात मे सोलह साल की एक लडकी थी, पारल, जीजू की छोटी बहन दीदी की ननद.
वे भाई बहन भी एक दज
ू े से बहुत पयार करते थे. पारो पाँच फूट लंबी थी, गोरी थी
और पतली थी. गोल चहे रे पैर काली काली बडी आँखे थी/ बाल काले और लंबे थे.

कमर पतली थी और िनतंब भारी थे. कबूतर की जोडी जैसे छोटे छोटे सतन सीने पर
लगे हुए थे. मेरी तरह वो बचपन से िनकल कर जवानी मे कदम रख रही थी.

कया हुआ, कुछ पता नहीं लेिकन पहले िदन से ही पारो मुझ से नाराज थी. जब भी

मुझ से िमलती तब डोरे िनकालती और हूनह--- कह कर मुँह मुचकोड कर चली जाती
थी. एक बार मुझे अकेले मे िमली और बोली : तू रोिहत हो ना ? पता है ? मेरे भैया
तेरी बहन की फाड के रख दे गे .

ऐसी बािलश बात सुन कर मुझे गुससा आ गया. भला कौन दल
ू हा अपनी दल
ु हन की
िजली तोडे िबना रहता है ? अपने आप पर कंटोल रख कर मैने कहा : तू भी एक
लडकी हो, एक ना एक िदन तेरी भी कोई फाड दे गा .
मुँह लटकाए वो चली गयी .

दीदी ससुराल से तीन िदन बाद आई. मैने मा को उसे कहते सुना : डरने की कोई बात
नहीं है कभी कभी आदमी दे र लगाता है सब ठीक हो जाएगा .

अकेली पा कर मैने उसे पूछा : कयूं री ? साजन से चुदवा के आई हो ना ? कैसा है
जीजू का लंड ? बहुत ददद हुआ था पहली बार ?

दीदी : कुछ नहीं हुआ है रोिहत. वो पारल अपने भैया से छूटती नहीं, रोज हमारे साथ
सोती है तेरे जीजू ने एक बार अलग कमरे मे सोने को कहा तो रोने लगी और
हं गामा मचा िदया.

मै समझ गया, दीदी चुदाये िबना आई थी. पाँच सात िदन बाद वो िफर ससुराल गयी
और एक महीने के बाद आई. अब की बार उसे दे ख कर मेरा िदल डू ब गया. उस के

चहरे पर से नूर उड गया था, कम से कम पाँच िकलो वजन घट गया था, आँखे आस
पास काले धबबे पड गये थे. उस का हाल दे ख कर माताजी रो पडी. दीदी ने मुझे

बताया की वो अब भी कँवारी थी, जीजू ने एक बार भी चोदा नहीं था. मैने पूछा : जीजू
का लंड तो ठीक है ना, खडा होता है या नहीं ?

दीदी : वो तो ठीक है नहाते वकत मैने दे खा है रात को मौका नहीं िमलता.
मै : हनीमून पर चले जाओ ना .

दीदी : तेरे जीजू ने ये भी टाय कर दे खा. वो साथ चलने पर तुली.

मै : सच कहूँ ? तेरी ये ननद को चािहए है एक मोटा तगडा लंड. एक बार चुदवायेगी
तो शांत हो जाए गी.

दीदी : तेरे जीजू भी यही कहते हे . लेिकन वो अभी सोलह साल की है कौन चोदे गा उसे
?
मैने शरारत से कहा : मै चोद लूं ?
दीदी हस कर बोली : तू कया चोदे गा ? तेरी तो नुननी है चोद ने के िलए लंड चािहए.

मैने पाजामा खोल कर मेरा लौडा िदखाया और कहा : ये दे ख. नुननी लगती है तुझे ?
कहे तो अभी खडा कर दं .ू दे खना है ?

दीदी : ना बाबा ना. सलामत रहे तेरा लंड

मै : मान लो की मैने पारल को चोद भी िलया, जीजू को पता चले की मैने उसे चोदा
है तो तेरे पैर खफा नहीं होगे ?

दीदी : ना, वो भी उन से थक गये हे . कहते थे की कोई अचछा आदमी िमल जाय तो
उसे हजद नहीं है पारल की चुदाई मे .

मै : तो, दीदी, मुझे आने दे तेरे घर. टाय करे गे, कामयाब रहे तो सही वरना कुछ नहीं.
दीवाली के िदन आ रहे थे. सकूल मे डे ढ महीने की छुििटयाँ पडी. दीदी ने जीजू से
बात की होगी कयूं की उन का खत आया िपताजी के नाम िजस मे मुझे दीवाली

मनाने अपने शहर मे बुलाया था. मै दीदी के ससुराल चला आया. मुझे िमल कर दीदी
और जीजू बहुत खुश हुए. हर वकत की तरह इस बार भी पारो हूनह --- कर के चली
गयी

जीजू िसिवल कोटद मे नौकरी करते थे और अपने पुरखो के मकान मे रहते थे. मकान
पुराना था लेिकन तीन मजले वाला बडा था. आस पास दस
ू रे मकान जो थे वो भी

पुराने थे लेिकन खाली पडे थे. शहर के बीच होने पर भी जीजू ने काफी पाईवसी पाई
थी.

यहाँ आने के पहले िदन मुझे पता चला की जीजू के फैमीली मे वो और पारो दोनो ही
थे. कई साल पहले जब उन के माता िपता का दे हांत हुआ तब पारो छोटी बचची थी.
उस िदन से जीजू ने पारो को अपनी बेटी की तरह पाला पोसा था. उस िदन से ही
पारो अपने भैया के साथ सोती थी और इतनी लगी हुई थी की दीदी के आने पैर

छूटना नहीं चाहती थी. दीदी की समसया हल कर ने का कोई पलान मैने बनाया नहीं

था. मै सोचता था की कया िकया जाय. इतने मे जीजू हम सब को छोटी सी िटप पर
ले गये और मेरा काम बन गया.

शहर से करीबन तीस माइल दरू गलटे शर नाम की एक जगह है मही सागर नदी
िकनारे एक सदीओ पुराना िशव मंिदर है आसपास नेचारल सेिटं ग है कई लोग
पीकिनक के वासते यहाँ आते हे . आने जाने मे लेिकन सारा िदन लगता है

मैने एक अचछा सा केमेरा खरीदा था जो मै हमेशा साथ रखता था. इस पीकिनक पर
वो खूब काम आया. मैने जीजू और दीदी की कई फोटू खीछी. मै जान बुज कर पारो

की उपेका करता रहा, उस के जानते हुए उस की एक भी फोटू नहीं ली. हालाँिक मैने
उस की चार िपकचर ली थी िजस का उस को पता नहीं चला था.

अचानक मेरी नजर मंिदर की बाहरी दीवारो पर जो िशलप था उस पर पडी. मै दे खता

ही रह गया. वो िशलप था चुदाई करते हुए कपलस का. अलग अलग पोजीशन मे चुदाई
करती हुई पुतिलयाँ इतनी आबेहुब थी की ऐसा लगे की अभी बोल उठे गी. जीजू से
छुपा छुपी मै फटा फट उन िशलप के फोटू खींच ने लगा. इतने मे दीदी आ गयी
चुदाई करते पेमी के िशलप दे ख वो उदास हो गयी

पारो मुझ से कतराती रही. सारा िदन इधर उधर घुमे िफरे और शाम को घर आए
दस
ू रे िदन मैने मेरे दोसत के सटू िडओ मे िफलमस दे दी, डे वेलप और िपंट िनकालने के
िलए तीसरे िदन दीदी और जीजू को कुछ काम के वासते बाहर जाना पडा, सुबह से

गये रात को आने वाले थे. ियूशन कलास की वजह से पारो साथ जा ना सकी. दोपहर
के दो बजे वो कलास से आई. फोटो सटू िडओ रासते मे आता था इस िलए वो िपकचसद
लेते आई. आते ही उस ने पेकेट मेरे तरफ फेका और रसोईघर मे चली गयी चाय
बनाने. मै उस के पीछे पीछे गया. अकडी हुई मेरी ओर पीठ कर के वो खडी थी.
मैने कहा : मेरे िलए भी चाय बनाना.

गुससे मे वो बोली : खुद बना लेना. नौकर नहीं हूँ तुमारी.

मैने पास जा कर उस के कंधे पर हाथ रकखा. तुरंत उस ने िछडक िदया और बोली :
दरू रहो मुझ से. छुओ मत. मुझे ऐसी हरकते पसंद नहीं.

मैने धीरे से कहा : अचछा बाबा, माफ करना. लेिकन ये तो बताओ की तुम मुझ से
इतनी नाराज कयूं हो ? कया िकया है मैने ?

पारो : अपने आप से पूिछए कया नहीं िकया है आप ने.
मे : अचछा बाबा, कया नहीं िकया है मेने?

अब तक वो मुज से मुँह फेरे खडी थी. पलट कर बोली : बडे भोले बनते हो. सारी

दिुनया के फोटू िनकाल ते हो, यहाँ तक की वो मंिदर के पतथरो भी बाकी ना रहे . एक
मे हूँ िजस को तुम टालते रहे हो. मेरी एक भी फोटू नहीं खींची तुमने. आप का
कीमती केमेरा िबगड जाय इतनी बद सूरत हूँ ना मे ?

मे : कौन कहता है की मेने तुमारी तसवीर नहीं खींची ? भला, इतनी सुंदर लडकी पास
हो और फोटू ना िनकाले ऐसा कौन मूखद होगा ?

पारो : मुजे उललू मत बनाईए. िदखाइए मेरी फोटो
मे : पहले चाय पीलाओ.

उस ने दोनो के िलए चाय बनाई. चाय पी कर हम मेरे कमरे मे गये और फोटो दे खने
बैठे. मे पलंग पर बैठा था. वो मेरी बगल मे आ बैठी, थोडी सी दरू. उस ने पतले कपडे
का फॉक पहना था िजस के आरपार अंदर की बा साफ िदखाई दे रही थी. उस के
बदन से मसत खुशबू आ रही थी. सूंघ कर मेरा लौडा जाग ने लगा.

पहले हम ने दीदी और जीजू की फोटू दे खी. बाद मे पारो की चार फोटू िनकली. अपनी
िपकचर दे खने के िलए वो नजदीक सरकी. मेरे कंधे पर हाथ रख वो ऐसे बैठी की

हमारी जांघे एक दज
ू े से सट गयी मै मेरी पीठ पर उस के सतन का दबाव महसूस

करने लगा. बेचारा मेरा लंड, कया करे वो ? खडा हो कर सलामी दे रहा था और लार
टपका रहा था. बडी मुिशकल से मैने उसे छुपाए रकखा.

पारो की चार फोटो मे से तीन सीधी सादी थी िजस मे वो हसती हुई पकडी गयी थी.
बडी पयारी लगती थी. चौथी फोटू मे वो नीचे झुकी हुई थी और पवन से दप
ु िटा सीने

से हट गया था. उस की चुिचयाँ साफ िदखाई दे रही थी. िपकचर दे ख वो शरमा गयी
और बोली : तुम बडे शैतान हो.
मै : पसंद आया मेरा काम ?

मेरी जाँघ पर हाथ रख कर उस ने कहा : जी, पसंद आया.
मै : तो ओर फोटू खींच ने दो गी ?

पारो : हाँ हाँ लेिकन ये बाकी की फोटू िकस की है ?
मै : रहने दे . ये फोटू तेरे दे खने लायक नहीं है

पारो : कया मतलब ? नंगी फोटू है कया ? दे खूं तो मै
इतना कह कर अचानक वो फोटू लेने के िलए झपटी. मैने हाथ हटा िदया. इस छीना
झपटी मे वो िगर पडी मेरी बाहो मे. वो संभल जाए इस से पहले मैने उसे सीने से

लगा िलया. झटपट वो संभल गयी शमद से उस का चहे रा लाल लाल हो गया और उस
ने सर झुका िदया. मेरे पहलू से लेिकन वो हटी नहीं. मैने मेरा हाथ उस की कमर मे
डाल िदया. उं गिलयाँ मलते मलते दबे आवाज से वो बोली : कयूं सताते हो ? िदखाओ
ना.

मेरे पास कोई चारा नहीं था. चुदाई करते हुए िशलप की िपकचसद मै िदखाने लगा.
मुसकराती हुई, दाँतो मे उं गली चबा ती हुई वो दे खती रही.

अंत मे बोली : बस ? यही था ? ये तो कुछ नहीं है भैया के पास एक िकताब है िजस
मे सचचे आदमी और औरतो के फोटू है
मै : तुझे कैसे मालूम ?

पारो : मैने िकताब दे खी है दे खनी ही तुझे ?
मै : हाँ --- हाँ ----जरर.

खडी हो कर वो बोली : चलो मेरे साथ.
अब िदककत कया थी की मेरा लंड पूरा तन गया था. िनकार के बावजूद उस ने मेरे
पाजामा का तंबू बना रकखा था. इस हालत मे मै कैसे चल सकूँ ?

मैने कहा : मै बैठा हूँ तू िकताब ले आ
वो िकताब ले आई और बोली : एक िदन जब मै भैया के कमरे की सफाई कर ररही
टी तब मैने पलंग नीचे ये पाई. मेरे खयाल से भाभी ने भी दे खी है

मे : दीदी दे खे या ना दे खे, कया फकद पडे गा ? तू जो उन के बीच आ रही हो.

पारो : मे उन के बीच नहीं आ रही हूँ दे ख रोिहत, भैया मेरे सवस
द व है कोई मुज से
उनहे छीन ले ये मे बरदासत नहीं करंगी, चाहे वो भाभी हो या ओर कोई.

मै : अरी पगली, दीदी कहाँ जाएगी तेरे भैया को छीन ले कर ? भैया के साथ वो भी
तेरी हो जाएगी. कब तक तू कबाब मे हडडी बनी रहे गी ?
पारो : मै जानती हूँ

मै : कया जानती हो

पारो : ---- की मेरी वजह से भैया वो नहीं कर पाए हे .
मै : वो माइने कया ? मै समझा नहीं.

पारो : खूब समझते हो और भोले बन रहे हो.
मै : मै तो बुदू हूँ मुझे कया पता ?

वो शरमा राही थी िफर भी बोली : मजाक छोडो. दे खो, भैया से मैने िसफद एक चीज
माँगी है

मे : वो कया ?

उस ने नजरे फेर ली और बोली : मैने कहा, एक बार, िसफद एक बार मुझे दे खने दे ---.
मे : कया दे खने दे ?
पाओ : शैतान, जानते हुए भी पूछते हो.

मै : नहीं जानता मै साफ साफ बताओ ना.

पारो : वो, वो जो हर दल
ू हा दल
ु हन करते हे सुहाग रात को
मै : मुझे ये भी नहीं पता. कया करते हे ?

पारो : हाय राम, चु --- चु --- मुझ से नहीं बोला जाता

मै : ओह, ओ, चुदाई की कह रही हो ?

अपना चहे रा छुपा कर िसर िहला कर उस ने हा कही.

मै : तुझे दीदी और जीजू की चुदाई दे खनी है एक बार, इतना ही ?
उस ने मुँह फेर िलया और हाँ बोली.
मै : जीजू ने कया कहा ?

पारो : भाभी ना बोलती है

मै : मै उन को समझा उं गा. लेिकन एक ही बार, जयादा नहीं. और एक बात पूछु ? उन
को चोद ते दे ख कर तुम एकसाइट हो जाओ गी तो कया करोगी ?
पारो : नहीं बता उगी तुझे.